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जुमे की नमाज के दौरान मस्जिद में जोरदार धमाका, 10 लोगों की मौत, 20 घायल

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अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद से लगातार खौफनाक खबरें सामने आ रही है। वहीं अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में जुमे की नमाज के वक्त एक मस्जिद में धमाका हुआ, जिसमें 10 लोगों की मौत हो गई है। जबकि 20 अन्य घायल हो गए हैं। इनमें से कुछ की स्थिति गंभीर बताई जा रही है। तालिबान प्रवक्ता मोहम्मद नफी टाकोर ने कहा कि रमजान के चलते बड़ी तादाद में लोग मस्जिद में नमाज पढ़ने गए थे। सुरक्षा बलों ने इलाके को घेर लिया है और जांच की जा रही है।

तालिबान प्रवक्ता मोहम्मद नफी टाकोर ने बताया कि 'मुस्लिमों के पवित्र महीने रमजान के आखिरी शुक्रवार को नमाज अदा करने के लिए सैकड़ों लोग एकत्र हुए थे और खलीफा आगा गुल जान मस्जिद खचाखच भरी हुई थी। उन्होंने कहा कि हताहतों की संख्या में और बढ़ोतरी होने की आशंका है, क्योंकि काफी लोगों की हालत गंभीर है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक धमाका इतना जोरदार था कि आस-पास के इलाके में भी इसका असर महसूस किया गया। धमाके की जिम्मेदारी अभी तक किसी ने नहीं ली है। बीते कुछ समय से अफगानिस्तान में लगातार धमाके हो रहे हैं। गुरुवार को ही मजार-ए-शरीफ इलाके में हुए 2 विस्फोटों में 9 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी। जबकि 13 घायल हो गए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहां एक और घायल शख्स की मौत हो गई। इसके बाद मृतकों की संख्या 10 तक जा पहुंची। आतंकियों ने मिनी बस को निशाना बनाया था।

ISIS-K यानी आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट खुरासान ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। पुलिस के प्रवक्ता मोहम्मद आसिफ वजीरी ने बताया कि हमलावर के निशाने पर शिया समुदाय के लोग थे। आतंकवादी संगठन हमारे लोगों के बीच डर फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। मजार-ए-शरीफ को अफगानिस्तान के ट्रेड के लिहाज से अहम शहर माना जाता है। ये बाख प्रॉविंस की राजधानी है। शिया बहुल ये इलाका हमेशा आंतकियों के निशाने पर रहता है।

पिछले हफ्ते भी मजार-ए-शरीफ शहर की शिया मस्जिद में फिदायीन हमला हुआ था। इसमें 20 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी। 66 लोग घायल हुए थे। हाल के दिनों में तालिबान ने अफगानिस्तान के कई हिस्सों पर नियंत्रण खोया है। इनमें बाख प्रॉविंस भी शामिल है। यहां इस्लामिक स्टेट का कब्जा होता जा रहा है।

बता दें कि मजार-ए-शरीफ में शिया समुदाय की कई मस्जिदें हैं, जहां पहले भी हमले होते रहे हैं। बीते दिनों कुंदुज प्रांत के इमाम साहिब जिले की मस्जिद में हुए विस्फोट में 33 लोगों की मौत हो गई थी। जबकि 43 घायल हुए थे। धमाके के वक्त ज्यादातर लोग मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए इकट्ठा हुए थे। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने भी इस हमले की निंदा की थी।

नमाज के दौरान धमाके में 100 मारे गए

इससे पहले ही अफगानिस्तान के कुंदुज में जुमे की नमाज के दौरान जोरदार धमाका हुआ था। इसमें 100 लोगों की मौत हो गई और कई घायल हुए थे। यह धमाका हजारा शिया मस्जिद को निशाना बनाकर किया गया। कुंदुज में संस्कृति और सूचना के निदेशक मतिउल्लाह रोहानी ने बताया कि यह आत्मघाती हमला था। अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार बनने के बाद ये देश में सबसे बड़ा हमला था।

लगातार हो रहे हमले

इससे पहले अफगान शहर कुंदुज में एक शिया मस्जिद में उपासकों पर आत्मघाती बम हमले में कम से कम 55 लोगों की मौत हो गई थी। बता दें कि अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ने जगह-जगह कई हमले किए हैं। 2017 में इसी तरह के एक हमले में 30 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। तालिबान द्वारा अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद क्षेत्र में इस तरह की घटनाएं आम हो गई हैं। 

जब से अफगानिस्तान पर तालिबान ने कब्जा किया है, तब से लगातार हिंसा से जुड़ी खबरें सामने आ रही है। बीते साल अगस्त में अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद आतंकी घटनाओं बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। ज्यादातर मामलों में आतंकियों के निशाने पर शिया बहुल इलाके ही रहते हैं। दूसरी तरफ देश में लगातार आर्थिक संकट भी गहराता जा रहा है। तालिबान हुकूमत का आरोप है कि अफगानिस्तान में ISIA का खुरासान ग्रुप हमले कर रहा है। हालांकि जो कुछ भी हो, लेकिन तालिबान के कब्जे के बाद से आए दिन अफगानिस्तान से हमले और धामके की खबरें सामने आ रही है।

जेल तोड़कर भागने की कोशिश, गोलीबारी में 7 कैदियों की मौत, 12 घायल

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भारत के पड़ोसी देश म्यांमार के एक जेल से कैदियों ने भागने की कोशिश की। इस दौरान गोलीबारी में 7 कैदी मारे गए। वहीं 12 घायल हो गए। भागने की साजिश रचने वाला कैदी भी मारा गया है। म्यांमार के जेल विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि सागाइंग क्षेत्र के कलाय जेल में करीब 50 कैदियों ने तीन सुरक्षा गार्ड को बंधक बनाकर भागने की कोशिश की, जहां जेल विभाग की ओर से हुई फायरिंग में 7 कैदी मारे गए। जबकि 12 लोग घायल हो गए। इस जेल में लगभग 1 हजार कैदी हैं। उन्होंने कहा कि गोलीबारी में मरने वालों में जेल से भागने की साजिश वाला एक कैदी भी शामिल है।

इधर, म्यांमार की सेना पर आरोप है कि वे हवाई और जमीनी हमले करके बड़े पैमाने पर आम नागरिकों को निशाना बना रही है। युद्ध क्षेत्र में करीब तीन महीने रहने वाले एक राहत कर्मी ने इस संबंध में जानकारी दी है। एक मानवीय सहायता संगठन के निदेशक ने बताया कि सेना के विमान और हेलिकॉप्टर्स पूर्वी म्यांमार के इलाकों में लगातार हमले कर रहे हैं। निदेशक ने कहा कि वहां लगातार हमले हो रहे हैं, जहां नागरिकों को चिकित्सीय और खाद्य सहायता मुहैया कराई जा रही है, वे और उनके स्वयंसेवी संघर्ष में फंस गए थे।

देश की सेना पर आरोप 

उन्होंने बताया कि जमीन पर भी सैनिक अंधाधुंध गोलाबारी कर रहे हैं, जिससे हजारों लोग अपने घरों को छोड़कर जा चुके हैं। ये द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से म्यांमार में सबसे भयानक लड़ाई मानी जा रही है। म्यांमार की सेना ने बीते साल लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित आंग सान सू ची की सरकार को बेदखल कर सत्ता पर फिर से कब्जा जमा लिया था। सरकारी अखबार में 24 फरवरी को प्रकाशित एक रिपोर्ट में म्यांमार सेना ने कारेन्त्री प्रांत की राजधानी लोइकाव के समीप आतंकवादी समूहों का सफाया करने के लिए हवाई हमले और भारी गोलाबारी करने की बात स्वीकार की थी। वहां हो रहे लगातार हिंसक झड़प को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र के कुछ विशेषज्ञों ने इसे गृहयुद्ध के रूप में परिभाषित किया है। बता दें कि दुनियाभर में भ्रष्टाचार पर नजर रखने वाली संस्था ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडेक्स ने 2021 के लिए अपनी रिपोर्ट जारी की है, जिसमें 140वें नंबर पर पाकिस्तान के साथ ही म्यांमार का नाम भी शामिल है।

3 साल के बच्चे ने खेलते वक्त गलती से अपनी मां को मारी गोली, मौके पर ही मौत

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अमेरिका के शिकागो में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां उपनगरीय इलाके में एक 3 साल के बच्चे ने बंदूक से खेलते वक्त गलती से अपनी मां को गोली मार दी, जिससे महिला की मौके पर ही मौत हो गई। US पुलिस ने बताया कि बच्चे ने मां की गर्दन पर पीछे की ओर से गोली मारी। घटना शिकागो के मिडवेस्टर्न शहर के डोल्टन की एक सुपरमार्केट की पार्किंग में हुई। 

घटना के बारे में पुलिस ने बताया कि 3 साल का बच्चा कार की पिछली सीट पर बैठा हुआ था। जबकि आगे की दोनों सीटों पर उसके माता-पिता बैठे थे। इस दौरान बच्चे के हाथ में उसके पिता की पिस्तौल आ गई। बच्चा पिस्तौल से खेलने लगा और उसका ट्रिगर खींच लिया। इसके बाद उसने पीछे से अपनी मां की गर्दन पर गोली चला दी। बच्चे की मां डेजाह बेनेट की उम्र सिर्फ 22 साल थी।

पुलिस ने बच्चे के पिता को किया गिरफ्तार

पुलिस ने बताया कि महिला को गोली लगने के बाद उसे शिकागो के एक अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। घटना के बाद स्थानीय पुलिस ने बच्चे के पिता को गिरफ्तार कर लिया है। फिलहाल पुलिस जांच कर रही है किउनके पास बंदूक रखने का लाइसेंस था या नहीं, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। 

हर साल होती है 350 लोगों की मौत

एवरीटाउन फॉर गन की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में हर साल सैकड़ों बच्चे अलमारी और नाइटस्टैंड दराज में असुरक्षित भरी हुई बंदूकों के साथ छोड़ दिए जाते हैं, जिसके बाद बच्चे गलती से शूट भी कर लेते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका में नाबालिगों की ओर से अनजाने में की गई गोलीबारी की वजह से हर साल औसतन 350 लोगों की मौत हो जाती है, जो एक बड़ा आंकड़ा है। अगर कोई अपने पास गन रखता है तो उसे बच्चों की पहुंच से दूर रखना चाहिए, ताकि ऐसी घटनाओं से बचा जा सकें।

सेना का हेलीकॉप्टर क्रैश, 8 सैनिकों की मौत, खराब मौसम के कारण हुआ हादसा

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यूरोप के पूर्वी रोमानिया में काला सागर के पास एक सैन्य हेलीकॉप्टर और लड़ाकू जेट दुर्घटनाग्रस्त का शिकार हो गया, जिसमें 8 सैनिकों की मौत हो गई। रोमान‍िया के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि IAR 330-प्यूमा हेलीकॉप्टर हवाई क्षेत्र से 11 किलोमीटर दूर गुरा डोब्रोगेई के क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें सवार सभी 8 लोग मारे गए।  इस दौरान हेल‍ीकॉप्‍टर फाइटर जेट की तलाश कर रहा था। कुछ ही समय बाद फाइटर जेट का नियंत्रण टावर से रेडियो संपर्क टूट गया और वह रडार से गायब हो गया। 

मंत्रालय के प्रवक्ता जनरल कॉन्स्टेंटिन स्पानू ने को बताया कि पायलट ने प्रतिकूल मौसम की स्थिति की सूचना दी थी और उसे बेस पर लौटने का आदेश दिया गया था। उन्‍होंने कहा कि संभावित कारणों पर चर्चा करना जल्दबाजी होगी। निश्चित रूप से प्रतिकूल मौसम की स्थिति थी, लेकिन हम अभी टिप्पणी नहीं कर सकते। मंत्रालय ने बताया कि दुर्घटना के बाद सभी IAR 330-प्यूमा और मिग लांसआर विमानों को रोक दिया जाएगा। जबकि दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है।

उन्‍होंने कहा कि सैन्य और पीड़ितों के लिए धार्मिक स्मरणोत्सव समारोह सभी रोमानियाई सैन्य इकाइयों में आयोजित किए गए। राष्ट्रपति क्लॉस इओहानिस ने बुधवार देर रात एक बयान में दुर्घटना पीड़ितों के शोकग्रस्त परिवारों के लिए अपने विचार भेजे। उन्‍होंने इसे रोमान‍िया व‍िमानन के लिए एक दुखद रात बताया। ऐसी घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं। आज से 12 साल पहले जुलाई 2010 में AN-2 विमान एक पैराशूट ट्रेनिंग उड़ान मिशन पर टेक-ऑफ के तुरंत बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में 12 लोग मारे गए थे और दो घायल हो गए थे। बाद में उसी महीने मध्य रोमानिया में हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने से छह इजरायली सैनिकों और एक रोमानियाई सैन‍िक की मौत हो गई थी। मिग 21 लांसआर की दुर्घटनाएं कभी-कभार होती हैं।

पहले से ही तैनात 900 कर्मियों को जोड़ा

2018 में रोमानियाई वायु सेना के मिग 21 लांसआर के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद एक पायलट की मौत हो गई थी। रोमानियाई वायु सेना अभी भी एयर पुलिसिंग के मिशन के लिए सोवियत युग के मिग पर निर्भर है। हालांकि यह अपने विमान का आधुनिकीकरण कर रही है। संयुक्त राज्य अमेरिका ने हाल के हफ्तों में स्ट्राइकर बख्तरबंद वाहनों और कुछ 1,000 सैनिकों के एक स्क्वाड्रन को काला सागर के पास एक रोमानियाई बेस पर भेजा है, जिससे देश में पहले से ही तैनात 900 कर्मियों को जोड़ा गया है।

8 दिसंबर को हेलीकॉप्टर हादसे में 14 लोगों की मौत

बता दें कि सेना के विमान हादसे बढ़ते जा रहे हैं। 8 दिसंबर को भारतीय सेना का एक हेलीकॉप्टर तमिलनाडु के कुन्नूर में हादसे का शिकार हो गया था। इस हादसे में 14 लोगों की मौत हो गई थी, जिसमें देश के पहले सीडीएस बिपिन रावत और उनकी पत्नी भी शामिल थीं। एक महीने के भीतर वायुसेना का दूसरा विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ है। 

फाइटर जेट मिग-21 विमान

बता दें कि किसी जमाने में फाइटर जेट मिग-21 विमान भारतीय वायुसेना की रीढ़ माने जाते थे। अब इसके चार स्क्वॉड्रन बचे हुए हैं। इनकी देखभाल और अपग्रेड भले ही किया गया हो, लेकिन ये विमान न तो जंग के लिए और न ही उड़ान के लिए फिट हैं। बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद मिग-21 बाइसन विमान ने पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों के छक्के छुड़ा दिए थे। हालांकि, लगातार दुर्घटनाग्रस्त हो रहे मिग-21 विमानों के कारण कई पायलट्स जान भी गंवा चुके हैं, अब इन विमानों जल्द से जल्द हटाने का वक्त आ गया है।

लगातार हादसे का शिकार हो रहे मिग-21 विमान

मिग-21 बाइसन लड़ाकू विमान मिग-21 का एक अपग्रेडेड वर्जन है, जिससे अगले 3 से 4 साल तक इसका उपयोग किया जा सकता है। इस वर्जन का इस्तेमाल केवल भारतीय वायुसेना ही करती है। बाकी दूसरे देश इसके अलग-अलग वैरियंट का प्रयोग करते हैं। सितंबर, 2018 तक वायु सेना के पास तकरीबन 120 मिग-21 विमान थे। हालांकि भारतीय वायुसेना के मिग-21 विमान बड़ी संख्‍या में हादसों का शिकार हो चुके हैं।

परीक्षा में अच्छे नंबर देने के बदले छात्राओं का शोषण करता था प्रोफेसर, इस तरह हुआ मामले का खुलासा

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गुरु को भगवान का दर्जा दिया जाता है। क्योंकि गुरु ही बच्चों को जीवन की राह बताते हैं। इसलिए गुरु और शिष्य के रिश्ते को पवित्र माना जाता है। लेकिन कई शिक्षक ऐसे होते हैं, जो इस पवित्र रिश्ते को बदनाम और कलंकित करते हैं। ऐसा ही एक मामला अफ्रीकी देश मोरक्को में सामने आया है, जहां एक यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर को अपनी ही छात्राओं से संबंध बनाने के आरोप में जेल भेजा गया है। आरोप है कि प्रोफेसर एग्जाम में अच्छे नंबर देने के बदले में लड़कियों को अपना शिकार बनाता था।  

जानकारी के मुताबिक ये मामला मोरक्को की हसन यूनिवर्सिटी का है, जहां इकोनॉमिक्स डिपार्टमेंट का एक प्रोफेसर काफी लंबे समय से छात्राओं के साथ ऐसा कर रहा था। वो उन्हें अच्छे नंबरों का झांसा देता था और बदले में उनसे संबंध बनाता था। उसने ऐसे कई छात्राओं के साथ किया। यूनविर्सिटी की एक छात्रा ने इस प्रोफेसर की छात्राओं के साथ हुई चैट को लीक कर दिया। सोशल मीडिया पर इन चैट्स के लीक होने के बाद हड़कंप मच गया।

कोर्ट ने प्रोफेसर को भेजा जेल

मामले का पता चलते ही यूनिवर्सिटी प्रशासन ने आरोपी प्रोफेसर के खिलाफ केस दर्ज कराया। मामला कोर्ट तक पहुंच गया। इन सबके बीच जब शहर में ये बात फैली तो लोग भी कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए सड़कों पर उतर गए। आखिर में अदालत ने इस प्रोफेसर को अभद्र व्यवहार, यौन उत्पीड़न और हिंसा का दोषी मानते हुए उसे जेल भेज दिया।

सवालों के घेरे में अन्य प्रोफेसर  

वहीं इस मामले का खुलासा होते ही कुछ छात्राएं आगे आईं और उन्होंने यूनिवर्सिटी में मौजूद ऐसे 4 अन्य प्रोफेसर के भी नाम लिए हैं, जो एग्जाम  में अच्छे नंबर देने के नाम पर छात्राओं के साथ संबंध बनाते हैं। पुलिस ने अन्य चार प्रोफेसर के खिलाफ भी केस दर्ज किया है। इन 4 प्रोफेसर को भी जल्द ही कोर्ट में पेश होना होगा। मामले की जांच की जा रही है। 

'राय' तूफान ने मचाई भारी तबाही, 208 से ज्यादा लोगों की मौत, कई लापता

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फिलीपींस में कुदरत ने जमकर कहर बरपाया है। दरअसल, यहां के मध्य हिस्से में आए शक्तिशाली तूफान की चपेट में आने से मरने वालों की संख्या बढ़कर 208 हो गई है। जबकि कई लोग अभी भी लापता है। नेशनल पुलिस ने कहा कि इस साल फिलीपींस में आए सबसे तेज तूफान से मरने वालों की संख्या बढ़कर 208 हो गई है। टाइफून राय ने द्वीपसमूह के दक्षिणी और मध्य क्षेत्रों में तबाही मचाने के बाद कम से कम 239 लोग घायल हो गए और 52 लापता हो गए हैं। बताया जा रहा है कि यह हाल के सालों में देश में आए सबसे घातक तूफानों में से एक है।

फिलीपींस में गुरुवार को एक सुपर टाइफून राय की वजह से सैकड़ों लोग बेघर हो गए हैं। तूफान के देश में टकराने के बाद 3 लाख से ज्यादा लोग अपने घरों और समुद्र तट के किनारे के रिसॉर्ट से भागने को मजबूर हो गए। फिलीपीन रेड क्रॉस ने तटीय क्षेत्रों में जान माल के काफी नुकसान की सूचना दी है। रेड क्रॉस के अध्यक्ष रिचर्ड गॉर्डन ने कहा कि घरों, अस्पतालों, स्कूल और सामुदायिक भवनों को काफी नुकसान पहुंचा है।

राय तूफान ने मचाई भारी तबाही 

जानकारी के मुताबिक राय तूफान ने घर और अस्पताओं की छतों को तोड़ दिया। कई पेड़ उखड़ गए। कंक्रीट के बिजली के खंभों को गिरा दिया। लकड़ी के घरों को टुकड़े-टुकड़े कर दिया और कई गांवों में बाढ़ आ गई। प्रांतीय गवर्नर आर्थर याप ने अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर कहा कि बोहोल द्वीप जो अपने समुद्र तटों के लिए जाना जाता है, जहां काफी नुकसान हुआ है। चॉकलेट हिल्स वाले इलाकों में 74 लोग मारे गए हैं। 195 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही तेज हवा की वजह से सिरगाओ, दीनागट और मिंडानाओ द्वीपों पर भी भीषण तबाही हुई है। 

हैयान के साथ की जा रही तुलना 

बता दें कि इस तूफान की तुलना 2013 में सुपर टाइफून हैयान के साथ की जा रही है। हैयान देश में रिकॉर्ड पर सबसे घातक चक्रवात था, जिसमें 7 हजार 300 से ज्यादा लोग मारे गए या लापता हो गए थे। फिलहाल कई क्षेत्रों में कोई संचार नहीं है। कई इलाकों में बिजली भी ठप है। राहत और बचाव कार्य जारी। हजारों सैन्य, पुलिस, तटरक्षक बल और दमकल कर्मियों को तैनात किया गया है।

उप गवर्नर ने दी जानकारी

उप गवर्नर नीलो देमेरे ने DZMM रेडियो नेटवर्क को बताया कि उनके प्रांत में आपात निवास की छत भी क्षतिग्रस्त हो गई है। उन्होंने कहा कि 'हम मौजूदा समय में मरम्मत का काम कर रहे हैं, क्योंकि राहत शिविर भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं। वहां रहने का कोई स्थान नहीं है, चर्च, जिम, स्कूल, बाजार और यहां तक कि विधायिका का भवन भी क्षतिग्रस्त हो गया है।'

'राय' तूफान का तांडव, 31 से ज्यादा लोगों की गई जान, हजारों हुए बेघर

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फिलीपींस में कुदरत ने जमकर कहर बरपाया है। दरअसल, यहां के मध्य हिस्से में आए शक्तिशाली तूफान की चपेट में आने से 31 से ज्यादा लोगों की मौत हो हुई है। साथ ही पूरे प्रांत की संचार और बिजली व्यवस्था ध्वस्त हो गई है। प्रभावित प्रांत की गवर्नर ने कहा कि उनका द्विपीय सूबा 'जमींदोज' हो गया है। जानकारी के मुताबिक 'राय' नामक तूफान शुक्रवार रात को फिलीपींस के दक्षिण और मध्य प्रांत में तबाही मचाकर दक्षिण चीन सागर की ओर बढ़ गया है। इस तूफान के रास्ते में रहने वाले 3 लाख से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया था। अधिकारियों ने बताया कि तूफान आने से पहले की गई तैयारी से कई लोगों की जिंदगी बचाई गई।

जानकारी के मुताबिक राय तूफान के दौरान हवाएं 195 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली और अधिकतम गति 270 किलोमीटर प्रति घंटे तक रही। यह हाल के सालों में आए शक्तिशाली तूफानों में एक है, जिसने आपदा संभावित दक्षिण पूर्वी एशियाई द्विपीय देश में तबाही मचाई है। यह तूफान गुरुवार को फिलीपींस के दक्षिण पूर्वी तट से भी टकराया था, लेकिन घटना के 2 दिन बाद भी नुकसान की जानकारी नहीं मिल सकी है क्योंकि पूरे सूबे में बिजली और मोबाइल फोन सेवा बाधित है।

100,000+ people in the Philippines fled their homes as a super typhoon made landfall, stranding thousands in chest-deep flood waters.

Typhoon Rai is a cat. 5 storm. Philippines gets 20 big storms per year, but experts say they are getting more extreme due to the climate crisis. pic.twitter.com/egENvydbUC

— AJ+ (@ajplus) December 16, 2021

दीनागत द्वीप फिलीपींस के पहले प्रांतों में है, जो तूफान से प्रभावित हुआ। अधिकारियों के मुताबिक ये शनिवार को भी शेष हिस्सों से कटा रहा, क्योंकि वहां की बिजली और संचार व्यवस्था ठप हो गई है। हालांकि गवर्नर अर्लेनी बाग ओ प्रांत की आधिकारिक वेबसाइट पर बयान पोस्ट करने में सफल रहीं। उन्होंने बताया कि करीब 1.80 लाख आबादी वाला उनका प्रांत 'जमींदोज' हो गया है। उन्होंने खाना, पानी, अस्थायी निवास, ईंधन, स्वच्छता किट और दवाओं की आपूर्ति करने का अनुरोध किया है। उन्होंने बताया कि राजधानी में अब तक कुछ लोगों के हताहत होने की जानकारी है। जबकि बाकी इलाकों की संचार व्यवस्था ठप होने की वजह से जानकारी नहीं है।

गवर्नर बाग ओ ने कहा कि 'हम बच सकते हैं, लेकिन आने वाले दिन हमारे लिए पहले जैसे नहीं हो सकते क्योंकि प्रांत के पास सीमित क्षमता हैं।' उन्होंने बताया कि दीनागत के कुछ अस्पताल क्षतिग्रस्त होने की वजह से बंद हैं। 'हमारे कई वाणिज्य और मालवाहक पोत दोबारा समुद्री यात्रा के योग्य नहीं है, जिससे प्रभावी तरीके से हम देश के बाकी हिस्सों से कट गए हैं।' किसी तरह पड़ोसी सूबे पहुंचे उप गवर्नर नीलो देमेरे ने DZMM रेडियो नेटवर्क को बताया कि उनके प्रांत में 6 लोगों की मौत हुई है।

Cebu is currently being devastated by Typhoon #OdettePH. I can't describe my feeling so scary outside. This is just inside but you can feel the wrath already. Cebu is home of millions Filipinos. Please pray for the Philippines. We need God during this time. Only miracle can save. pic.twitter.com/Z3DBHGrPOh

— Daddy Z (@ZPalmarez) December 16, 2021

वहीं दीनागत में लगभग 95 प्रतिशत घरों की छत उड़ गई है। यहां तक आपात निवास की छत भी क्षतिग्रस्त हो गई है। उन्होंने कहा कि 'हम मौजूदा समय में मरम्मत का काम कर रहे हैं, क्योंकि राहत शिविर भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं। वहां रहने का कोई स्थान नहीं है, चर्च, जिम, स्कूल, बाजार और यहां तक कि विधायिका का भवन भी क्षतिग्रस्त हो गया है।' 

इमारत की चौथी मंजिल पर लगी भीषण आग, 27 लोगों की मौत

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जापान के ओसाका में एक बड़ा और दर्दनाक हादसा हुआ है। दरअसल, यहां एक बिल्डिंग में आग लगने से 27 लोगों की मौत हो गई है। जानकारी के मुताबिक ओसाका शहर में शुक्रवार को मानसिक स्वास्थ्य क्लिनिक की एक व्यवसायिक इमारत में  अचानक आग लग गई, जिसकी चपेट में आने से 27 लोगों की मौत हो गई है। वहीं 70 से ज्यादा दमकल गाड़ियों की मदद से आग पर काबू पा लिया गया है। बताया जा रहा है कि संकरी जगह पर ये इमारत है और आग पर काबू पाने में दमकल कर्मचारियों का काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

ओसाका  में स्थिति इस इमारत की चौथी मंजिल पर मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं और सामान्य चिकित्सा देखभाल प्रदान करने वाला एक क्लिनिक था। चौथी मंजिल का इंटीरियर, दरवाजे और खिलड़कियां जलकर खाक हो गई। ओसाका पुलिस के एक प्रवक्ता ने मीडिया को बताया कि अधिकारी आग के कारणों की जांच कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ओसाका अग्निशमन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि आग में घायल हुए 28 लोगों में से 27 में जीवन के कोई लक्षण नहीं दिखे। जापान में सिर्फ एक डॉक्टर ही आधिकारिक तौर पर किसी मृत व्यक्ति को प्रमाणित कर सकता है।

ओसाका अग्निशमन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि आग लगने का पता चौथी मंजिल पर सुबह लगा। दोपहर तक 70 दमकल गाड़ियां घटनास्थल पर मौजूद रही। उन्होंने बताया कि पश्चिमी जापान के शहर में किताशिन्ची रेलवे स्टेशन के पास एक व्यस्त कारोबारी इलाके में लगी आग पर आधे घंटे के बाद काबू पा लिया गया था। जबकि आग लगने के बाद इमारत का अधिकांश बाहरी हिस्सा बरकरार था। एक प्रत्यक्षदर्शी महिला ने मीडिया को बताया कि आग के कारण काफी गहरा धुंआ था और तेज गंध आ रही थी।

बताया जा रहा है कि आग की वजह से कई लोग चौथी मंजिल पर फंस गए थे। ओसाका एक प्रमुख आर्थिक केंद्र है और टोक्यो क्षेत्र के बाद जापान का दूसरा सबसे बड़ा महानगर है। बताया जाता है कि जापान में बिल्डिंग निर्माण के सख्त मानक हैं ताकि आग जैसी कोई दूसरी आपदा के दौरान कम से कम नुकसान हो। फिलहाल बिल्डिंग में आग कैसे लगी और इतनी संख्या लोग कैसे मारे गए इन कारणों की जांच जारी है। मामले की जांच जारी है।


इमरजेंसी लैंडिंग के दौरान विमान क्रैश, 9 लोगों की हुई मौत

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डोमिनिकन गणराज्य की राजधानी सेंटो डोमिंगो में एक बड़ा और दर्दनाक हादसा हुआ है। दरअसल, यहां बुधवार को लास अमेरिका एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग के दौरान एक प्राइवेट विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। प्लेन के ऑपरेटर हेलिडोसा एविएशन ग्रुप के मुताबिक इस हादसे में 9 लोगों की मौत हो गई है। उन्होंने बताया कि घटना में 7 यात्रियों और एक दो क्रू मेंबर की मौत हुई है। मरने वाले यात्रियों में 6 विदेशी नागरिक थे और एक डोमिनिकन था। हालांकि अब तक मरने वाले यात्रियों के नाम की पहचान नहीं हो पाई है।


फ्लाइटराडार 24 के मुताबिक विमान क्रैश के समय डोमिनिकन गणराज्य में ला इसाबेला अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से फ्लोरिडा के रास्ते में था और टेकऑफ के ठीक 15 मिनट बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हालांकि अब तक दुर्घटना के कारण का पता नहीं चल पाया है।

CDS समेत 14 लोगों की हुई है मौत

बता दें कि 8 दिसंबर को भारत के पहले CDS बिपिन रावत और उनकी पत्नी समेत 14 सैन्य अधिकारी हेलीकॉप्टर हादसे का शिकार हुए थे। इस हादसे में CDS रावत और उनकी पत्नी समेत 13 अधिकारियों की उसी दिन मौत हो गई थी। वहीं हादसे में बचे एक मात्र ग्रुप कैप्टन वरूण सिंह ने बुधवार को बेंगलुरु के एक अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस तरह इस हादसे के शिकार हुए सभी लोगों की मौत हो चुकी है।

बिना आरोप सिद्ध हुए तालिबान ने ली 72 लोगों की जान, UN ने की कड़ी निंदा

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अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद से लगातार खौफनाक खबरें सामने आ रही है। इसी बीच अफगानिस्तान में बिना आरोप साबित हुए 72 लोगों की हत्या करने का मामला सामने आया है। इसे लेकर संयुक्त राष्ट्र यानी UN ने तालिबान के कब्जे के बाद अफगानिस्तान में हुई गैर-न्यायिक हत्याओं की निंदा की। संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि इस साल अगस्त महीने में तालिबान के अफगानिस्तान की सत्ता में काबिज होने के बाद से 100 से ज्यादा गैर-न्यायिक  हत्याओं को अंजाम दिया गया, जिसमें से ज्यादातर गैर-न्यायिक हत्याएं खुद तालिबान ने अंजाम दिया है। 

संयुक्त राष्ट्र की उप अधिकार प्रमुख नादा अल-नासिफ ने कहा कि तालिबान की ओर से 15 अगस्त के बाद अफगानिस्तान में सभी के लिए 'आम माफी' देने की आधिकारिक घोषणा के बाद ऐसी हत्याओं की लगातार मिल रही रिपोर्ट से बेहद चिंतित हैं।  उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद को बताया कि 'अगस्त और नवंबर के बीच हमें अफगान के नेशनल सिक्योरिटी फोर्सेज और सरकार से जुड़े अन्य लोगों की 100 से ज्यादा हत्याओं के आरोप की रिपोर्ट मिली।'

कई सदस्यों का यही हश्र

उन्होंने बताया कि इनमें कम से कम 72 हत्याओं के लिए तालिबान को जिम्मेदार ठहराया गया है। उन्होंने कहा कि इन हत्याओं में कई लोगों के शवों को सर्वाजनिक तौर पर प्रदर्शित किया गया था, जिससे आबादी के एक बड़े वर्ग के बीच भय बढ़ गया है। नादा अल-नासिफ जो संयुक्त राष्ट्र के अधिकार प्रमुख मिशेल बाचेलेट की ओर से परिषद में  ये जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि जिहादी इस्लामिक स्टेट खोरासन ग्रुप जो कि तालिबान को अपना दुश्मन मानता है, उसके भी कई सदस्यों का यही हश्र किया गया था।

लगातार सामने आ रहे हिंसा से जुड़े मामले

उन्होंने बताया कि अकेल नंगरहार प्रांत में इस्लामिक स्टेट खोरासन ग्रुप के सदस्य होने के संदेह में कम से कम 50 गैर-न्यायिक हत्याओं को अंजाम दिया गया। उन्होंने क्रूर तरीके से हत्याओं की ओर इशार करते हुए कहा कि इसमें फांसी सहित सिर कलम करना और लाशों को सर्वाजनिक प्रदर्शन करना शामिल है।  बता दें कि जब से अफगानिस्तान पर तालिबान ने कब्जा किया है, तब से लगातार हिंसा से जुड़ी खबरें सामने आ रही है।

24 घंटे में एक ही शख्स ने लगवाए टीके के 10 डोज, स्वास्थ्य मंत्रालय ने दिए जांच के आदेश

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कोरोना से बचाव के लिए फिलहाल वैक्सीन ही संजीवनी है। इसलिए सरकारें लोगों से वैक्सीन लगवाने की अपील कर रही है। इसी बीच न्यूजीलैंड से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। दरअसल, यहां एक शख्स ने 24 घंटे के अंदर कोरोना वैक्सीन की 10 खुराक लगवा ली है। मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय ने जांच के आदेश दिए हैं। किसी व्‍यक्ति द्वारा वैक्सीन के इतने सारे डोज लेने का शायद ये पहला मामला है।

जानकारी के मुताबिक इस शख्स ने एक दिन में अलग-अलग टीकाकरण केंद्रों पर जाकर वैक्सीन लगवाई। न्यूजीलैंड में स्वास्थ्य मंत्रालय के टीकाकरण कार्यक्रम के समूह प्रबंधक एस्ट्रिड कोर्ननीफ का कहना है कि वे इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं और इस स्थिति को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने आगे कहा कि अगर कोई भी ऐसे शख्स को जानते हैं जिसने टीके की ज्यादा खुराक ली है तो उन्हें जल्द डॉक्टर से सलाह लेने को कहा जाए। वहीं इस मामले को लेकर केंद्र की चिकित्सा निदेशक निक्की टर्नर का कहना है कि एक दिन में इतनी खुराक लेने का डेटा उनके पास मौजूद नहीं है। उन्होंने ये भी कहा कि वे जानते हैं वैक्सीन की कई डोज लेने का नुकसान बहुत ज्यादा है।

दुष्प्रभाव का करना पड़ सकता है सामना: निक्की टर्नर

निक्की टर्नर ने कहा कि उनके पास इस बात की जानकारी नहीं है कि किसी शख्स के ज्यादा खुराक लेने के बाद किस प्रकार के दुष्प्रभाव का सामना करना पड़ सकता है। बता दें कि एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि लोग दूसरे के पहचान पत्र का इस्तेमाल कर कई बार कोविड-19 टीकाकरण करा लेते हैं।

पैसे लेकर लगवाए इतने सारे टीके 

इस व्यक्ति ने एक दिन में ही कई वैक्‍सीन सेंटर्स का दौरा किया और ढेर सारे टीके लगवाए। इसके लिए उसने दूसरे लोगों के पहचान पत्रों का उपयोग किया। आशंका है कि इन लोगों ने उसे टीके लगवाने के लिए पैसे भी दिए थे। एस्ट्रिड कोर्ननीफ ने आगे कहा कि ये स्थिति बहुत खतरनाक है क्‍योंकि जिन लोगों के नाम पर व्‍यक्ति ने टीके लगवाए उनकी गिनती वैक्‍सीनेशन करा चुके लोगों में होगी। जबकि असलियत में उनका वैक्‍सीनेशन नहीं हुआ है। ये उनकी सेहत को बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है। 

एक साथ इतने डोज लगवाना खतरनाक!

वहीं ऑकलैंड यूनिवर्सिटी की वैक्‍सीनोलॉजिस्‍ट हेलन पेटियो‍सि‍स-हैरिस ने कहा है कि अगर किसी भी स्‍टडी में इस तरह ढेर सारे वैक्‍सीन लेने से होने वाले असर का डेटा शामिल नहीं किया गया है। ऐसे में यह बता पाना बहुत मुश्किल है कि एक दिन में 10 डोज लेने वाले व्‍यक्ति पर इसका असर क्‍या होगा, लेकिन यह तय है कि ऐसा करना सुरक्षित नहीं है। 

सेना का हेलीकॉप्टर क्रैश, 14 सैनिकों की मौत

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आजरबैजान में मंगलवार को प्रशिक्षण उड़ान के दौरान एक सैन्य हेलीकॉप्टर हादसे का शिकार हो गया, जिसमें 14 लोगों की मौत हो गई। जबकि 2 अन्य घायल हो गए।  अधिकारियों ने बताया कि देश के काकेशस क्षेत्र के पूर्व में एक ट्रेनिंग फ्लाइट प्रशिक्षण के दौरान क्रैश हो गया है। इस घटना में 14 लोगों की मौत हो गई। पूर्व सोवियत गणराज्य के फ्रंटियर गार्ड ने एक बयान में कहा कि 'राज्य सीमा सेवा के हेलीकॉप्टर दुर्घटना की वजह से 14 लोगों की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए हैं।' उन्होंने कहा कि सभी पीड़ित सैन्यकर्मी थे।

इससे पहले मंगलवार को देश की सीमा सेवा और अभियोजक जनरल ने एक संयुक्त बयान में कहा कि अजरबैजान की राज्य सीमा सेवा से संबंधित एक सैन्य हेलीकॉप्टर ट्रेनिंग फ्लाइट का संचालन करते हुए खैजी क्षेत्र के गाराखेबाट हवाई क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। उन्होंने कहा कि हेलीकॉप्टर किस वजह से क्रैश हुआ है, इसकी जांच की जा रही है। ये घटना ऐसे समय पर हुई है, जब दो हफ्ते पहले ही अजरबैजान और पड़ोसी आर्मेनिया के बीच अपनी साझा सीमा पर सबसे खराब लड़ाई हुई। फिलहाल यह पता नहीं चल पाया कि किस वजह से यह दुर्घटना हुई। दो सरकारी एजेंसियां घटना की जांच कर रही हैं। आजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव और उनकी पत्नी मेखरिबान अलीयेवा ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। 

बीते साल हुआ भयंकर युद्ध

ये लड़ाई पिछले साल नागोर्नो-कराबाख क्षेत्र में युद्ध के बाद हुई है. पिछले साल छह हफ्ते चले युद्ध में 6500 से ज्यादा लोगों की जान चली गई। ये युद्ध नवंबर 2020 में जाकर खत्म हुआ था। रूस ने अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच युद्धविराम करवाया। इस सौदे ने आर्मेनिया को उस क्षेत्र को सौंप दिया, जिसे उसने दशकों तक नियंत्रित किया था।

 दोनों पक्षों के बीच तनाव

16 नवंबर को हुई लड़ाई में 6 आर्मेनियाई और 7 अजरबैजानी सैनिक मारे गए। इससे दोनों पक्षों के बीच तनाव खासा बढ़ गया था। उसी दिन रूस के रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु ने एक संघर्ष विराम पर बातचीत की थी। अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच तनाव मई से ही तनाव बढ़ा हुआ है। आर्मेनिया ने कहा कि अजरबैजान की सेना ने दोनों देशों द्वारा साझा की गई झील की घेराबंदी करने के लिए दक्षिणी सीमा पार कर ली। 

मिलिट्री अस्पताल के पास हुआ हमला, 19 लोगों की मौत, 50 से ज्यादा घायल

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अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद से लगातार खौफनाक खबरें सामने आ रही है। वहीं अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में मंगलवार को मिलिट्री अस्पताल के पास फिदायीन हमला हुआ। इसमें 19 लोगों की मौत हो गई। जबकि 50 से ज्यादा घायल हैं। घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने बताया कि काबुल में सरदार मोहम्मद दाऊद खान मिलिट्री हॉस्पिटल के पास गोलियों की आवाज भी सुनी गई। यह अफगानिस्तान का सबसे बड़ा मिलिट्री हॉस्पिटल है। 

इस्लामिक अमीरात के डिप्टी प्रवक्ता बिलाल करीमी ने बताया कि काबुल के 10वें जिले में 400 बिस्तरों वाले हॉस्पिटल के एंट्री गेट पर दो ब्लास्ट हुए। उन्होंने कहा कि घटनास्थल पर सुरक्षाबलों को भेज दिया गया है। घायलों को इलाज के लिए पास के अस्पताल में भेजा गया है। 

इन धमाकों की जिम्मेदारी अभी तक किसी आतंकी संगठन ने नहीं ली है। मीडिया रिपोर्ट्स में ऐसा बताया जा रहा है कि ISIL से जुड़े कई हथियारबंद लोग अस्पताल में घुस गए, जिसके बाद सुरक्षाकर्मियों से उनकी भिड़ंत हुई।

नमाज के दौरान धमाके में 100 मारे गए

कुछ दिनों पहले ही अफगानिस्तान के कुंदुज में जुमे की नमाज के दौरान जोरदार धमाका हुआ था। इसमें 100 लोगों की मौत हो गई और कई घायल हुए थे। यह धमाका हजारा शिया मस्जिद को निशाना बनाकर किया गया। कुंदुज में संस्कृति और सूचना के निदेशक मतिउल्लाह रोहानी ने बताया कि यह आत्मघाती हमला था। अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार बनने के बाद यह देश में सबसे बड़ा हमला था।

लगातार हो रहे हमले

इससे पहले अफगान शहर कुंदुज में एक शिया मस्जिद में उपासकों पर आत्मघाती बम हमले में कम से कम 55 लोगों की मौत हो गई थी। बता दें कि अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ने जगह-जगह कई हमले किए हैं। 2017 में इसी तरह के एक हमले में 30 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। तालिबान द्वारा अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद क्षेत्र में इस तरह की घटनाएं आम हो गई हैं। बता दें कि जब से अफगानिस्तान पर तालिबान ने कब्जा किया है, तब से लगातार हिंसा से जुड़ी खबरें सामने आ रही है।


शादी पर म्यूजिक बजाने की खौफनाक सजा, 13 लोगों को उतारा गया मौत के घाट

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अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद से लगातार खौफनाक खबरें सामने आ रही है। वहीं हाल ही में फिर एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक तालिबान के लड़ाकों ने एक शादी में म्यूजिक बजाने पर 13 लोगों को मौत के घाट उतार दिया है। 

ताजा मामला अफगानिस्तान के नेंगरहार प्रांत का है। इस बात की जानकारी अफगानिस्तान के पूर्व उप राष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने अपने सोशल मीडिया के जरिए दी है। अमरुल्लाह सालेह ने ट्विटर पर लिखा कि 'तालिबान लड़ाकों ने नेंगरहार में एक शादी की पार्टी में म्यूजिक बजाने पर 13 लोगों की हत्या कर दी। हम निंदा करके अपना क्रोध व्यक्त नहीं कर सकते। 25 साल तक पाकिस्तान ने उन्हें अफगान संस्कृति को खत्म करने और हमारी धरती पर कब्जा करके ISI के कट्टर शासन की स्थापना के लिए ट्रेनिंग दी। जो अब अपना काम कर रहे हैं। तालिबान का क्रूर शासन लंबे समय तक नहीं चलने वाला। दुर्भाग्य से इस शासन के अंत तक अफगानिस्तान के लोगों को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।'

तालिबान ने लगाया था संगीत पर प्रतिबंध

बता दें कि साल 1996 से 2001 के बीच जब अफगानिस्तान पर तालिबान का शासन था तो उन्होंने संगीत पर प्रतिबंध लगाया हुआ था। हालांकि नई सरकार ने अभी तक इस तरह का कोई आदेश जारी नहीं किया है। अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा हो चुका है। तालिबान के कब्जे के बाद अफगानिस्तान के हालात को लेकर पूरी दुनिया में चिंता का माहौल है। 

लगातार सामने आ रहे हिंसा से जुड़े मामले

वहीं 15 अगस्त से लेकर 30 अगस्त तक चले पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान लगभग डेढ़ लाख लोगों को देश से बाहर निकाला गया.। फिलहाल अफगानिस्तान से ज्यादातर देशों की एम्बेसी जा चुकी है, जिसमें भारत भी शामिल है। अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद लोगों को सबसे ज्यादा डर तालिबान के निरंकुश और अराजक शासन का है। लोगों को डर है कि एक बार फिर देश में तालिबान शरिया कानून लगाने की कोशिश कर सकता है। बता दें कि जब से अफगानिस्तान पर तालिबान ने कब्जा किया है, तब से लगातार हिंसा से जुड़ी खबरें सामने आ रही है।

हैलोवीन पार्टी के बीच गोलीबारी, एक की मौत, 9 लोग घायल

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अमेरिका के टेक्सास में हैलोवीन पार्टी के जश्न के बीच जमकर गोलीबारी हुई। इस दौरान गोली लगने से एक व्यक्ति की मौत हो गई है। जबकि 9 अन्य लोग घायल हुए हैं। घटना टेक्सास के पूर्वी हिस्से की है। टेक्सास के टेक्सारकाना पुलिस ने कहा कि संदिग्ध बंदूकधारी की पहचान 21 साल के केउन्टे मकलॉरी के तौर पर हुई है। वह टेक्सारकाना का रहने वाला है। पुलिस ने बताया कि उन्होंने मकलॉरी के खिलाफ हमला करने का मामला दर्ज कर लिया है।

पुलिस ने बताया कि घटना देर रात शनिवार को इवेंट सेंटर में हुई है। घटना के दौरान वहां करीब 200 लोग मौजूद थे, जिसमें से 9 लोग घायल हुए हैं। घायलों को  इलाज के लिए पास के दो अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद उन्हें अस्पताल तक एंबुलेंस, पुलिस वैन या निजी वाहनों से ले जाया गया, जहां डॉक्टर ने 20 साल के एक युवक को मृत घोषित कर दिया। मृतक का नाम अभी नहीं बताया गया है। पुलिस ने बताया कि जो लोग घायल हुए हैं, उनकी जान को कोई खतरा नहीं है।

आरोपी की तलाश में जुटी पुलिस

जेल रिकॉर्ड में मकलॉरी के लिए किसी वकील को लेकर कोई तैयारी नहीं की गई है। पुलिस ने बताया कि गोलीबारी करने के बाद मकलॉरी वहां से भाग गया। फिर उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है। इसके लिए उसके परिवार और दोस्तों से संपर्क किया जा रहा है। हालांकि अभी तक आरोपी के बारे में कुछ पता नहीं चला है। जानकारी के मुताबिक गोलीबारी के बाद अचानक भगदड़ मच गई, जिसके बाद पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर हालात को नियंत्रित किया।

4 दिन पहले हुई थी ऐसी ही घटना

बता दें कि अमेरिका में गोलीबारी की घटनाएं बहुत आम हो गई है। करीब चार दिन पहले ही बोइस के एक मॉल में गोलीबारी की घटना हुई थी, जिसमें संदिग्ध हमलावर की मौत हो गई थी। हमले में 2 अन्य लोगों की भी मौत हुई थी और चार लोग घायल हो गए थे। एडा काउंटी कोरोनर ने संदिग्ध हमलावर की पहचान बोइस के जैकब बर्गक्विस्ट के तौर पर की थी। कोरोनर डॉटी ओवेन्स ने बताया कि बर्गक्विस्ट की मौत अस्पताल में हुई और उसकी मौत का कारण अभी पता नहीं चल पाया है।

मस्जिद के अंदर गोलीबारी, नमाज पढ़ने आए 18 नमाजियों की मौत, 4 घायल

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नाइजीरिया के उत्तरी हिस्से में सुबह की नमाज के दौरान एक मस्जिद पर बंदूकधारियों ने हमला कर दिया, जिसमें 18 नमाज पढ़ने आए नमाजियों की मौत हो गई। ये हमला देश के नाइजर के माशेगू स्थानीय सरकारी क्षेत्र के माजकुका गांव में हुआ। स्थानीय अधिकारियों और पुलिस के मुताबिक हमलावरों के जातीय फुलानी खानाबदोश चरवाहा समुदाय से होने का संदेह हैं, जो घटना के बाद मौके से फरार हो गए।

बता दें कि इस साल जातीय हिंसा में अब तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। जातीय हिंसा की ये घटनाएं देश में पानी और जमीन के मुद्दे को लेकर दशकों से चल रहे संघर्ष का नतीजा हैं। संघर्ष का शिकार बने फुलानी समुदाय के कुछ लोगों ने स्थानीय होसा कृषक समुदाय के लोगों के खिलाफ हथियार उठा लिए हैं। माशेगू स्थानीय सरकारी क्षेत्र के अध्यक्ष अल्हासन इसाह ने 'एपी' से कहा कि 'हमलावरों ने मस्जिद को चारों ओर से घेर लिया और गोलीबारी करने लगे।' उन्होंने बताया कि हमले में चार अन्य लोग भी घायल हुए हैं।

लगातार बढ़ रहे हमले

नाइजीरिया के पुलिस आयुक्त ने सोमवार को बताया कि हमला ग्रामीणों और फुलानी चरवाहा समुदाय के बीच संघर्ष से जुड़ा है। नाइजीरिया पर हुए इस हमले से पता चलता है कि देश की सुरक्षा स्थिति कितनी खराब हो गई है। नाइजीरिया के उत्तरपश्चिमी और मध्य क्षेत्र के अधिकतर राज्यों का यही हाल है। खासतौर पर उत्तरपश्चिमी क्षेत्र में हिंसा में काफी बढ़ोतरी देखी गई है। हिंसा से प्रभावित अधिकतर समुदाय के लोग दुर्गम स्थानों पर रहते हैं। इन लोगों के लिए माजाकुका जैसे इलाकों में आना मुश्किल है, जो राज्य की राजधानी से करीब 270 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

40 लोगों की हुई थी मौत

बंदूकधारियों की संख्या अक्सर समुदायों की सुरक्षा करने वाले कर्मियों से ज्यादा होती है, जिसके चलते बंदूकधारी आराम में अपराध को अंजाम तक पहुंचा देते हैं। घटना की सूचना मिलने के बाद जब तक पुलिस आती है, उससे पहले ही अपराधी फरार हो जाते हैं। इससे करीब एक हफ्ते पहले उत्तरपश्चिमी सोकोतो राज्य में हमलावरों ने एक ग्रामीण इलाके पर हमला कर दिया था। इस दौरान बंदूकधारी वहां 12 घंटे तक मौजूद भी रहे। इस घटना में 40 लोगों की मौत हो गई थी। इससे भी बड़ी संख्या में लोगों को यहां से भागना पड़ा था। लगातार हो रही हिंसा से वहां के लोग डरे हुए हैं।

शॉपिंग मॉल में फायरिंग, 2 लोगों की मौत, पुलिस अधिकारी समेत 4 घायल

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अमेरिका के इडाहो के एक शॉपिंग मॉल में फायरिंग हो गई, जिसमें गोली लगने से दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि चार लोग घायल  बताए जा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक मॉल में एक संदिग्ध शख्स ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी। हालांकि पुलिस ने संदिग्ध को हिरासत में ले लिया है। पुलिस ने बताया कि इडाहो के बोइस के मॉल में हुई गोलीबारी में दो लोगों की मौत हो गई है। जबकि एक बोइस पुलिस अधिकारी समेत चार अन्य घायल हो गए हैं। 

फाइल फोटो

बोइस पुलिस प्रमुख ने कहा कि  पीड़ितों के परिवारों को सूचित किया जा रहा है। पुलिस प्रमुख ने बताया कि फिलहाल उन्हें फायरिंग के पीछे का कारण नहीं पता चला है। इस मामलें में FBI और ATF दोनों जांच में मदद कर रहे हैं। वहीं गोलीबारी के बाद प्रशासन ने मॉल की ओर जाने वाले रास्तों को बंद कर दिया है।

पुलिस ने मदद के लिए दिया धन्यवाद

पुलिस ने कहा कि अधिकारी मॉल में हर शॉप को खाली करवा रहे हैं। उन्होंने लोगों को कहा कि पुलिस घटना के बारे में जल्द से जल्द जानकारी उपलब्ध कराएगी।  वहीं बोइस के मेयर लॉरेन मैक्लीन ने पीड़ितों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की और मॉल में उन लोगों को धन्यवाद दिया जो शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के अंदर लोगों की सहायता के लिए आए थे।

पुलिस अधिकारियों ने दी जानकारी

अधिकारियों ने बताया कि पुलिस अधिकारियों की संदिग्ध हमलावर के साथ मुठभेड़ भी हुई। पुलिस ने मामले से जुड़ी अन्य कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी और बताया कि जांच जारी है। मामले में कई लोगों से पूछताछ की जा रही है। बोइस टाउन स्क्वायर मॉल अमेरिका के राज्य इडाहो के सबसे बड़े शहर बोइस में स्थित है। गोलीबारी के वक्त घटनास्थल पर चैरी गेपिन नाम की महिला भी थीं। उन्होंने बताया कि वह करीब एक घंटे से अपनी एक दोस्त के साथ थीं, तभी वहां अफरातफरी मच गई।

प्रत्यक्षदर्शी ने दी जानकारी

चैरी ने बताया कि वहां जितने भी लोग थे, सभी ने तुरंत भागने की कोशिश की। वो भी पार्किंग वाले एरिया तक भागने लगी। लेकिन बंदूकधारी की गाड़ी पार्किंग में थी और वो वहां तक आ भी गया था। पर उसी जगह लोगों की भीड़ जमा हो गई थी, जिसके बाद पुलिस ने सभी को वहां से जाने के लिए कहा।

वाशिंगटन डीसी में चाकूबाजी की तीन घटनाएं

वहीं अमेरिका के वाशिंगटन डीसी में तीन अलग-अलग स्थानों पर चाकूबाजी की घटनाएं हुई हैं, जिसमें तीन लोग घायल हो गए हैं। मामले की जांच शुरू कर दी गई है। अभी ये पता नहीं चला है कि ये तीनों घटनाएं एक दूसरे से जुड़ी हैं या नहीं। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई। जिसके बाद घटना में घायल हुए लोगों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। मामले में पुलिस ज्यादा जानकारी आने का इंतजार कर रही है।

अच्छी सैलरी और बोनस के बाद भी अगस्त में 43 लाख लोगों ने छोड़ी नौकरी, जानिए क्या है वजह

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संयुक्त राष्ट्र अमेरिका में लोग रिकॉर्ड संख्या में नौकरी छोड़ रहे हैं। अमेरिकी श्रम विभाग के जॉब ओपनिंग और लेबर टर्नओवर सर्वे के मुताबिक अगस्त में नौकरी छोड़ने वाले अमेरिकियों की संख्या बढ़कर 43 लाख हो गई। ये अमेरिका में काम करने वाले सभी कर्मचारियों का 2.9 प्रतिशत है, जिससे पता चलता है कि रिकॉर्ड स्तर पर लोगों ने इस्तीफा दिया है। इससे पहले अप्रैल में 40 लाख और मई में 36 लाख लोगों ने नौकरी छोड़ी थी। 

इस बीच अगस्त में अमेरिका में नई नौकरियों की संख्या थोड़ी गिरकर 10.4 लाख हो गई, लेकिन ऐसा जुलाई से ही देखने को मिल रहा है। अमेरिका में बड़े स्तर पर लोगों के नौकरी छोड़ने से पता चलता है कि ये नौकरी की संभावनाओं को लेकर कितना आश्वस्त महसूस करते हैं। आंकड़ों की गहराई से जांच करने पर ये भी पता चला कि लोग कोरोना वायरस के डेल्टा वैरिएंट को लेकर भी डरे हुए हैं।

सबसे ज्यादा ये सेक्टर हुए प्रभावित 

इससे सबसे ज्यादा रिटेल, हॉस्पिटैलिटी, ट्रांसपोर्टेशन, पेशेवर और बिजनेस सर्विस से जुड़े सेक्टर प्रभावित हुए हैं। आवास और खाद्य सेवा से जुड़े वो काम जहां ग्राहकों से आमना-सामना होता है, इस क्षेत्र में 892,000 लोगों में अगस्त में कोविड के बढ़ते मामलों के बीच नौकरी छोड़ी है। इससे पिछले महीने ये संख्या 157,000 थी। नौकरी छोड़ने वाले लोगों और खाली पदों की बढ़ती संख्या देश के आर्थिक सुधार में रोड़ा बनती दिख रही है। नौकरी छोड़ने की ये दर बीते दो दशक में सबसे ज्यादा बताई जा रही है।

अच्छा बोनस के बाद भी नौकरी छोड़ रहे लोग

कोरोना वायरस की पहली लहर में 2.2 करोड़ लोगों की नौकरी चली गई थी। क्योंकि लॉकडाउन के कारण कई काम धंधे ठप हो गए। बावजूद इसके अब करीब 50 लाख नौकरियां खाली पड़ी हैं और इन पर लोगों की भर्ती नहीं हो पा रही। छोटा व्यवस्याय करने वाले करीब 51 फीसदी लोगों का कहना है कि इन्होंने सितंबर में अपने यहां नौकरी निकाली थीं, लेकिन इन पदों को भरा नहीं जा सका। लोगों को आकर्षित करने के लिए कंपनियां अच्छा बोनस और ज्यादा वेतन दे रही हैं। करीब 42 फीसदी छोटे व्यवसायियों का कहना है कि इन्होंने भी बीते महीने सैलरी में इजाफा किया है।

नौकरी छोड़ने की वजह 

नौकरी छोड़ने के पीछे कई वजहें हैं। कोरोना से संक्रमित होने का डर, बच्चों की देखभाल के विकल्पों की कमी और अमेरिकी सरकार द्वारा प्रोत्साहन राशि के तौर पर दी जा रही मदद। राष्ट्रपति जो बाइडेन की सरकार महामारी से उभरने के लिए लोगों को सहायता दे रही है, जिसके कारण वह अपनी तनावपूर्ण नौकरी छोड़ पा रहे हैं। 1.16 करोड़ से ज्यादा लोग और उनके परिवार सरकार के सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम पर निर्भर हैं। इन्हें बोरजगारी का लाभ मिलता है। सरकार ने लाखों लोगों को कोविड रिलीफ चेक, किराया अधिस्थन और छात्र ऋण माफी भी दी है। इसके कारण उन्हें घर का खर्च चलाने में दिक्कत नहीं आ रही। इसीलिए लोग नौकरी छोड़ रहे हैं।

काबुल एयरपोर्ट के पास एक के बाद एक दो धमाके, अमेरिकी सैनिकों सहित 100 से ज्यादा लोगों की मौत

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अफगानिस्तान में काबुल एयरपोर्ट के पास एक के बाद एक दो धमाके हुए, जिसमें अब तक 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। एक के बाद एक हुए हमलों में 13 अमेरिकी सैनिकों की जान चली गई है। जबकि 80 से ज्यादा अफगानी नागरिकों की मौत हुई है। काबुल प्रशासन के मुताबिक हमले में 150 से ज्यादा लोग बुरी तरह घायल हुए हैं, हमले की जिम्मेदारी ISIS खोरासान ने ली है। ISIS खोरासान के आतंकियों ने दावा किया है कि उन्होंने ही अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाया है। काबुल में अमेरिका बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहा है। एयरपोर्ट के बाहर हजारों लोगों की भीड़ इकठ्ठा है और इसी भीड़ का फायदा उठाकर ISIS खोरासान के आतंकियों ने आत्मघाटी हमला कर दिया। 


आतंकी आगे भी ऐसे किसी भी हमले को अंजाम न दे सकें इसलिए अमेरिका ने एयरपोर्ट के आस-पास अपने जंगी बेड़े को मजबूत कर दिया है। अत्याधुनिक लड़ाकू विमान F-15 और अपाचे हेलिकॉप्टर को सुरक्षा मिशन पर लगाया गया है। साथ ही आतंकियों की उनकी मांद से ढूंढ निकालने के लिए रीपर ड्रोन को डिप्लॉय किया गया है। क्योंकि पेंटागन को आशंका है कि ISIS खोरासान फिर से हमले की फिराक में है।

कमांडर जनरल ने दी जानकारी

सेंट्रल कमांड के कमांडर जनरल केनेथ मैकेनजी ने कहा 'हमें लगता है कि आतंकी फिर से हमले कर सकते हैं इसीलिए हम हर वो कोशिश कर रहे हैं जिससे ऐसे हमलों से निपटा जा सके। इसमें तालिबान से संपर्क भी शामिल है जो वास्तव में हवाई क्षेत्र के चारों ओर बाहरी सुरक्षा घेरा प्रदान कर रहे हैं।' तालिबान और पाकिस्तान ने भी धमाके में हुए लोगों की मौत की घटना पर दुख जताते हुए आतंकी हमले की निंदा की है। हालांकि इस धमाके के बाद ब्लेम गेम भी शुरू हो गया है। रेडियो पाकिस्तान से बात करते हुए तालिबान प्रवक्ता जबीउल्ला मुजाहिद ने एयरपोर्ट पर उस जगह धमाके का दावा किया है, जिसकी सुरक्षा अमेरिकी सैनिकों के पास है।

अमेरिकी रक्षा विभाग का दावा 

अमेरिकी रक्षा विभाग ने दावा किया है कि आतंकी संगठन IS कार बम से हमला कर सकता है जिसका खतरा काफी ज्यादा है। आतंकी हमारे विमान को भी निशाना बनाने की फिराक में हैं। इटली ने तो और डराने वाला दावा किया है। इटली के रक्षा सूत्रों का दावा है कि काबुल एयरपोर्ट से उड़ान के बाद इटली के सैनिक विमान पर फायरिंग भी की गई। आने वाले कुछ घंटे इसलिए भी खतरनाक हैं क्योंकि क्योंकि दो दिन पहले ही ब्रिटेन ने जी-7 की बैठक में अमेरिका को हमले के खतरे से आगाह किया था। गुरुवार को भी ब्रिटेन की तरफ से हमले का खतरा बढ़ने की आशंका से पहले ही आगाह किया गया। काबुल एयरपोर्ट के गेट के बाहर हमले का अलर्ट है इसलिए अमेरिकी नागरिक एयरपोर्ट की तरफ नहीं आने की सलाह है। सरकार की तरफ से अगले आदेश तक एयरपोर्ट की तरफ ना आएं। अलर्ट के बावजूद हमले को नहीं टाला जा सका और 100 से ज्यादा बेगुनाह लोग आतंक की भेंट चढ़ गए।

जानिए क्या है खोरासान गुट 

ईरान, तुर्कमेनिस्तान, अफगानिस्तान की सीमा पर खोरासान नाम के इलाके में 2012 में लड़ाकों ने एक गुट बनाया था। 2014 में इस गुट का ISIS के प्रति झुकाव हुआ और वो इस्लामिक स्टेट की मुहिम में शामिल हो गए।  ISIS के करीब 20 मॉड्यूल हैं, जिसमें सबसे खतरनाक  ISIS-K यानी खोरासान गुट है। दक्षिण एशिया में खोरासान का नेटवर्क सबसे मजबूत है। ISIS का खोरासान मॉड्यूल इस वक्त सबसे ज्यादा सक्रिय है। ये संगठन तालिबान छोड़ने वाले लड़ाकों की भर्ती करता है। तालिबान छोड़कर आए लड़ाकों को कमांडर बनाता है। उज्बेक, ताजिक, वीगर और चेचेन्या से युवाओं की भर्ती करता है। खोरासान गुट अफगानिस्तान में नया ठिकाना बनाने की कोशिश में है। ISIS-K गुट का अल कायदा से गठजोड़ है, इस गुट में अल कायदा से ट्रेनिंग ले चुके लड़ाके भी शामिल हैं।

अमेरिका में भी गूंजा 'छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया', देखिए तस्वीरें

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अमेरिका के शिकागो में इंडियन कम्युनिटी आउटरीच के तत्वावधान में आयोजित भारत दिवस परेड 2021 में नाचा (NACHA-North America Chhattisgarh Association) ने छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करते हुए मिनी रायपुर की झांकी  के माध्यम से  छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति को प्रदर्शित किया। झांकी में राष्ट्रध्वज तिरंगे के साथ 'छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया' और 'भारत माता की जय' की गूंज ने सात समुंदर पार छत्तीसगढ़ को जीवंत बना दिया। मुख्यमंत्री बघेल ने छत्तीसगढ़ की संस्कृति को अंतर्राष्ट्रीय प्लेटफार्म देने के लिए नाचा को धन्यवाद देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की झांकी अमेरिका में देख के मन गर्व से भर उठा। उन्होंने छत्तीसगढ़ की सांस्कृति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले के जाने के लिए नाचा शिकागो चैप्टर के कार्यकारी सदस्यों दीपाली सरावगी,  तिजेंद्र साहू,  सोनू जोशी,  शशि साहू, नमिता कैस्था,  शंकर फतवानी,  गीता खेतपाल,  अभिजीत जोशी, गणेश कर को धन्यवाद दिया है।


झांकी में प्रतीक के रूप में बनाए गए घड़ी चौक और आई लव रायपुर थीम ने मानो छत्तीसगढ़ और शिकागो की दूरियों को मिटा दिया। नाचा की सदस्य महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा और छत्तीसगढ़िया गहने गले मे कटली मोहर, कान में खुटी, हाथ और भुजा में नागमोरी बहुटा, पहुंची और कलाई में आईठी, चुरि, माथे पर बिंदी लगाकर छत्तीसगढ़ महतारी के प्रति अपनी अपार श्रद्धा और प्रेम को व्यक्त करते हुए अपनी संस्कृति को सहेजने का संदेश पूरी दुनिया को दिया। उन्होंने छत्तीसगढ़ी लोकगीत मउंहा झरे रे मउंहा झरे रे..डोंगरी के तीर, लगे हे साल छींद, लाली परसा बन म फुल और लोक नृत्य करते हुए छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की छटा से अमेरिका को परिचय कराया।


गौरतलब है कि शिकागो में भारतीय समुदाय द्वारा अपने-अपने राज्य और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए यह कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें अलग-अलग राज्यों की झाकियां आकर्षण का केंद्र बिंदू थी। भारत के 75वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अमेरिका से  भारत की अमूल्य संस्कृति को पूरी दुनिया तक पहुंचाया जा रहा है। NACHA के कार्यकारी अध्यक्ष गणेश कर ने बताया कि छत्तीसगढ़ के लोग सात समंदर पार रह रहे हैं, लेकिन उनका दिल अपने मातृभूमि के लिए धड़कता है।


रोड शो को सफल बनाने के लिए सभी सदस्यों के कड़ी मेहनत की है। नाचा पिछले 4 सालों से उत्तरी अमेरिका में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व कर रहा है। इसी कड़ी में भारतीय समुदाय द्वारा 75वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अगस्त के महीने भर राष्ट्रीय भक्ति से ओतप्रोत इवेंट आयोजित किए जा रहे हैं।

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