Media24Media.com

Responsive Ad Slot

Latest

latest
lockdown news

महासमुंद की खबरें

महासमुंद की खबर

रायगढ़ की ख़बरें

raigarh news

दुर्ग की ख़बरें

durg news

जम्मू कश्मीर की ख़बरें

jammu and kashmir news

VIDEO

Videos
top news


 

भूपेश सरकार में हुआ संवैधानिक अधिकारों का हनन, जीएसटी इंस्पेक्टर पदोन्नति में घोटाला : डॉ. विजयशंकर मिश्रा

No comments Document Thumbnail

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. विजयशंकर मिश्रा ने कांग्रेस की पिछली भूपेश सरकार के कार्यकाल में युवाओं के हकों पर डाका डालने और अपनों को उपकृत करने के एक और सनसनीखेज मामले के खुलासे के मद्देनजर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि भूपेश सरकार के संरक्षण में राज्य के प्रतिभावान युवाओं और कर्मचारियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया।


भाजपा प्रदेश प्रवक्ता डॉ. मिश्रा ने बुधवार को यहाँ एकात्म परिसर स्थित भाजपा कार्यालय में पत्रकार वार्ता में बताया कि छत्तीसगढ़ वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा वर्ष 2022 में आयोजित सीमित प्रतियोगिता परीक्षा में जाँच के दौरान भारी धांधली, फर्जीवाड़ा और प्रणालीगत भ्रष्टाचार पाया गया है। इसके बाद शासन द्वारा इस परीक्षा को तत्काल प्रभाव से शून्य घोषित कर पूरी चयन प्रक्रिया को निरस्त कर दिया गया है। डॉ. मिश्रा ने बताया कि 26 जून 2022 को लिपिक वर्ग से वाणिज्यिक कर निरीक्षक (टैक्स इंस्पेक्टर) के पदों के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी। जाँच समिति की रिपोर्ट (3 जुलाई 2026) ने यह साफ कर दिया है कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल म़े किस प्रकार नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं!

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता डॉ. मिश्रा ने बताया कि परीक्षा से पहले आरक्षण रोस्टर का पालन ही नहीं किया गया, जिससे वंचित और पिछड़े वर्गों के संवैधानिक अधिकारों पर सीधी चोट पहुँचाई गयी। इसी तरह परीक्षा केंद्रों में उपस्थिति पंजी का संधारण ही नहीं किया गया ताकि मनचाहे लोगों की बैकडेट में एंट्री कराई जा सके। जाँच में पाया गया कि कई चयनित अभ्यर्थियों ने एक समान उत्तर लिखे थे। इतना ही नहीं, कॉपियों में कोडिंग व्यवस्था को जानबूझकर खत्म किया गया ताकि मनपसंद अभ्यर्थियों की पहचान उजागर रहे।

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता डॉ. मिश्रा ने कहा कि अपनों को फायदा पहुँचाने के लिए चयन समिति के अध्यक्ष, सदस्यों और परीक्षा नियंत्रक ने खुद नियम विरुद्ध पुनर्मूल्यांकन कर चहेतों के अंक बढ़ाए। खरीदी गई कॉपियों और इस्तेमाल/शेष कॉपियों के आँकड़ों में भारी विसंगतियाँ पाई गईं, जो सीधे तौर पर फर्जी कॉपियाँ जमा करने की ओर इशारा करती हैं।

मेधावी कर्मचारियों के साथ धोखा, सभी गलत नियुक्तियाँ रद्द

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता डॉ. मिश्रा ने स्पष्ट किया कि जाँच में यह साबित हो चुका है कि भूपेश सरकार के कार्यकाल में हुई यह परीक्षा पूरी तरह दूषित और फर्जीवाड़े पर आधारित थी। अनियमितताएँ इतनी व्यापक थीं कि इसमें से ईमानदार और धांधली करने वालों को अलग करना सम्भव नहीं था। शासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए 26 जून 2022 की परीक्षा एवं 1 जुलाई 2022 के तहत दिए गए सभी नियुक्ति आदेशों को तत्काल निरस्त कर दिया है। फर्जी तरीके से टैक्स इंस्पेक्टर बने सभी कर्मचारियों को उनके मूल पदों पर वापस भेज (प्रत्यावर्तित कर) दिया गया है।

जनता और युवाओं के मन में उठते सवाल

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता डॉ. मिश्रा ने कहा कि युवाओं और कर्मचारियों की मेहनत पर पानी फेरने वाली भूपेश सरकार को इस धांधली का जवाब देना ही होगा। क्या कांग्रेस सरकार का मकसद केवल अपनों को पिछले दरवाजे से लाभ पहुँचाना था? डॉ. मिश्रा ने कहा कि भूपेश बघेल सरकार का यह कृत्य न केवल प्रशासनिक मर्यादाओं का हनन था, बल्कि राज्य के परिश्रमी कर्मचारियों और युवाओं के विश्वास पर कुठाराघात था। अब सच सामने आ चुका है और धांधली के बल पर पाई गई नियुक्तियों को खारिज कर न्याय स्थापित किया गया है।

कचरा प्रबंधन के लिए विकसित हुआ राष्ट्रीय LCA फ्रेमवर्क, ULBs को मिलेगा कम कार्बन वाले विकल्प चुनने में वैज्ञानिक आधार

No comments Document Thumbnail

PSA प्रो. अजय कुमार सूद ने परियोजना के परिणामों की समीक्षा की, GHG Calculator App से कचरा प्रबंधन तकनीकों के उत्सर्जन का आकलन होगा

नई दिल्ली- देश में ठोस कचरा प्रबंधन (Solid Waste Management) को अधिक वैज्ञानिक, टिकाऊ और कम कार्बन वाला बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (PSA) प्रो. अजय कुमार सूद ने 16 सितंबर 2026 को ‘Development of LCA Framework for Solid Waste Management (SWM) Technologies in India’ परियोजना के परिणामों और सिफारिशों की समीक्षा की। इस दौरान परियोजना के तहत विकसित Life Cycle Assessment (LCA) Framework और GHG Calculator Web Application को प्रस्तुत किया गया।

यह परियोजना प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय के सहयोग से वर्ष 2024 में शुरू की गई थी। इसे IISc बेंगलुरु, IIT मद्रास और IIT (BHU) वाराणसी के विशेषज्ञों ने संयुक्त रूप से पूरा किया है। इसका उद्देश्य भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप ऐसा राष्ट्रीय LCA फ्रेमवर्क विकसित करना है, जिसकी मदद से शहरी स्थानीय निकाय (ULBs) विभिन्न ठोस कचरा प्रबंधन तकनीकों की तुलना कर सकें और कम कार्बन उत्सर्जन वाले विकल्पों का चयन कर सकें।

कचरा प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया का होगा आकलन

परियोजना के तहत विकसित GHG Calculator App शहरी स्थानीय निकायों के लिए तैयार किया गया है। यह मौजूदा ठोस कचरा प्रबंधन व्यवस्था से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का विश्लेषण करने में मदद करेगा।

एप में एनेरोबिक डाइजेशन, इंसीनरेशन/वेस्ट-टू-एनर्जी, कंपोस्टिंग, रीसाइक्लिंग और लैंडफिलिंग जैसी प्रमुख कचरा प्रबंधन प्रक्रियाओं को शामिल किया गया है। इसके माध्यम से विभिन्न तकनीकों और संचालन परिदृश्यों के आधार पर उत्सर्जन का आकलन किया जा सकेगा।

मीथेन से लेकर ब्लैक कार्बन तक की जानकारी

GHG Calculator App के जरिए ULBs को नेट उत्सर्जन, उत्सर्जन से बचाव, लॉजिस्टिक उत्सर्जन और कार्बन फुटप्रिंट जैसी महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकेगी। इसके अलावा मीथेन, कार्बन डाइऑक्साइड, NOx और ब्लैक कार्बन जैसे विभिन्न प्रदूषकों एवं ग्रीनहाउस गैसों से संबंधित आंकड़ों का भी आकलन किया जा सकेगा।

यह टूल अलग-अलग कचरा प्रबंधन परिदृश्यों की तुलना करने और ऐसे विकल्पों की पहचान करने में मदद करेगा, जिनसे कम GHG उत्सर्जन और कम कार्बन फुटप्रिंट हासिल किया जा सके।

छह शहरों के केस स्टडी से तैयार हुआ फ्रेमवर्क

परियोजना के तहत बेंगलुरु, मैसूरु, तुमकुरु, चेन्नई, दिल्ली और वाराणसी के केस स्टडी के आधार पर विभिन्न कचरा प्रबंधन तकनीकों का LCA अध्ययन किया गया। इसमें बायोमाइनिंग, एनेरोबिक डाइजेशन, वेस्ट-टू-एनर्जी और लैंडफिलिंग जैसी तकनीकों का विस्तृत मूल्यांकन किया गया।

बैठक में परियोजना टीम ने GHG Calculator App का प्रदर्शन भी किया और बताया कि शहरी स्थानीय निकाय किस तरह अलग-अलग तकनीकों एवं संचालन परिस्थितियों से जुड़े उत्सर्जन का आकलन कर सकते हैं।

नई परियोजनाओं और DPR में भी उपयोगी होगा ऐप

GHG Calculator App का उपयोग केवल मौजूदा कचरा प्रबंधन व्यवस्था के मूल्यांकन तक सीमित नहीं रहेगा। इसका इस्तेमाल नई परियोजनाओं के पर्यावरणीय आकलन, विभिन्न सलाहकारों द्वारा तैयार Detailed Project Reports (DPRs) और निविदाओं में आवश्यक पर्यावरणीय प्रदर्शन संबंधी आंकड़े उपलब्ध कराने में भी किया जा सकता है।

इससे ULBs को परियोजना की योजना तैयार करने से लेकर विभिन्न तकनीकों की तुलना और पर्यावरणीय प्रभाव के आकलन तक एक वैज्ञानिक आधार मिल सकेगा।

स्मार्ट और कम उत्सर्जन वाले कचरा प्रबंधन की ओर कदम

प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद ने परियोजना के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि LCA फ्रेमवर्क और विकसित एप्लिकेशन शहरी स्थानीय निकायों को विज्ञान आधारित निर्णय लेने में मदद कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इन उपकरणों के माध्यम से देशभर में स्मार्ट, लचीली और कम उत्सर्जन वाली ठोस कचरा प्रबंधन प्रणालियों की दिशा में बदलाव को समर्थन मिल सकता है।

वैज्ञानिक सचिव डॉ. पारविंदर मैनी ने परियोजना को स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के उद्देश्यों के अनुरूप बताया। उन्होंने देशभर में इस तरह के समाधानों को व्यापक स्तर पर लागू करने के लिए संस्थागत व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

जलवायु-अनुकूल कचरा प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय रोडमैप

परियोजना में मौजूदा और भविष्य की ठोस कचरा प्रबंधन प्रणालियों की दक्षता बढ़ाने के लिए कई रणनीतिक सिफारिशें भी दी गई हैं। इसके साथ ही भारत में जलवायु-अनुकूल और कम उत्सर्जन वाले कचरा प्रबंधन की ओर संक्रमण के लिए एक राष्ट्रीय रोडमैप भी प्रस्तावित किया गया है।

यह पहल भारत सरकार के Waste to Wealth Mission और Swachh Bharat Mission-Urban जैसे राष्ट्रीय अभियानों के उद्देश्यों के अनुरूप है। इसका उद्देश्य तकनीकी विकल्पों के चयन को अधिक वैज्ञानिक बनाते हुए देश के शहरी क्षेत्रों में कचरा प्रबंधन से जुड़े पर्यावरणीय प्रभाव और कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद करना है।

बैठक के दौरान ‘Development of LCA Framework for Solid Waste Management (SWM) Technologies in India’ नामक रिपोर्ट भी जारी की गई।

जी20 ऊर्जा बैठक में भारत ने रखा सुरक्षित और किफायती ऊर्जा का पक्ष

No comments Document Thumbnail

मनोहर लाल ने कहा- विकास के लिए सुरक्षित, सस्ती और भरोसेमंद ऊर्जा जरूरी; महत्वपूर्ण खनिजों की मजबूत आपूर्ति शृंखला पर दिया जोर

ह्यूस्टन- केंद्रीय विद्युत एवं आवासन और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने अमेरिका के ह्यूस्टन में आयोजित जी20 ऊर्जा प्रचुरता मंत्रिस्तरीय बैठक में भारत का नेतृत्व करते हुए सुरक्षित, किफायती और विश्वसनीय ऊर्जा व्यवस्था को वैश्विक विकास की बुनियाद बताया। अमेरिका की जी20 अध्यक्षता में 14 से 16 सितंबर तक आयोजित बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, नियामक दक्षता और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखला जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।

बैठक के दौरान मनोहर लाल ने कहा कि ऊर्जा की सुरक्षित और किफायती उपलब्धता विशेष रूप से विकासशील देशों के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने वैश्विक ऊर्जा चुनौतियों से निपटने के लिए देशों के बीच सहयोग बढ़ाने तथा अलग-अलग देशों की परिस्थितियों और विकास प्राथमिकताओं का सम्मान करने पर जोर दिया।

552 गीगावाट पहुंची भारत की बिजली उत्पादन क्षमता

केंद्रीय मंत्री ने वैश्विक मंच पर भारत के ऊर्जा क्षेत्र में हुए बदलावों और उपलब्धियों को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि भारत की स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता बढ़कर 552 गीगावाट हो गई है। इसमें आधे से अधिक क्षमता गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से आती है।

उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसे ऊर्जा तंत्र का निर्माण कर रहा है, जो लचीला, भविष्य के लिए तैयार, डिजिटल, विकेंद्रीकृत और उपभोक्ता-केंद्रित हो। उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) के कई प्रमुख लक्ष्यों को समय से पहले हासिल किया है। भारत ने वर्ष 2070 तक नेट-जीरो का लक्ष्य भी निर्धारित किया है।

निवेश और परियोजनाओं के लिए आसान हुई मंजूरी प्रक्रिया

मनोहर लाल ने ऊर्जा क्षेत्र में नियामक सुधारों और निवेश को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी भी दी। उन्होंने नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम, PARIVESH और पीएम गति शक्ति जैसी पहलों का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि इन पहलों से बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए मंजूरी प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित और पूर्वानुमेय बनाने में मदद मिली है। साथ ही, प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने और ऊर्जा क्षेत्र में निजी एवं अन्य भागीदारों की भागीदारी तथा निवेश को सुगम बनाने के लिए भी कई सुधार किए गए हैं।

महत्वपूर्ण खनिजों पर भारत का जोर

बैठक में महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखला का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल बुनियादी ढांचे और उभरती प्रौद्योगिकियों के दौर में महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षित और विविधीकृत आपूर्ति अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने भारत के राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन का उल्लेख करते हुए बताया कि यह मिशन खनिजों की पूरी मूल

रूस से तेल खरीद पर 100% टैरिफ की धमकी, भारत ने कहा- ऊर्जा सुरक्षा से समझौता नहीं

No comments Document Thumbnail

 नई दिल्ली। रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की संभावित अमेरिकी कार्रवाई के बीच भारत ने अपना रुख स्पष्ट किया है। अमेरिकी कांग्रेस में रूस और ईरान पर प्रतिबंधों से जुड़ा विधेयक पारित होने के बाद विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने घटनाक्रम का संज्ञान लिया है और आगे की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।




विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। 140 करोड़ लोगों की ऊर्जा जरूरतों से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। मंत्रालय के मुताबिक, देश अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अलग-अलग स्रोतों से आयात जारी रखेगा।

बदलते बाजार के हिसाब से होंगे फैसले

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ऊर्जा आयात से जुड़े फैसले अंतरराष्ट्रीय बाजार की बदलती परिस्थितियों को ध्यान में रखकर लिए जाएंगे। भारत किसी एक देश या स्रोत पर निर्भर रहने के बजाय ऊर्जा आपूर्ति के विभिन्न विकल्पों पर आगे बढ़ेगा।

मंत्रालय ने कहा कि अमेरिकी प्रतिबंधों के संभावित प्रभाव को लेकर भारत और अमेरिका के बीच हाल के महीनों में उच्चस्तरीय बातचीत हुई है। यह मुद्दा अमेरिकी अधिकारियों के साथ विभिन्न स्तरों पर उठाया गया है।

वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर को लेकर भी चिंता

भारत ने कहा है कि अमेरिकी प्रतिबंधों की संभावित व्यवस्था का असर केवल द्विपक्षीय व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है। भारत ने इस पहलू को अमेरिकी पक्ष के सामने भी रखा है।

संभावित 100 फीसदी टैरिफ के मद्देनजर भारत ने अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का संकेत दिया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, सरकार इस मामले में व्यापार और उद्योग जगत के साथ करीबी समन्वय करेगी और संभावित प्रभावों से निपटने के लिए आगे की रणनीति पर काम करेगी।

अभी अगले कदम पर स्थिति स्पष्ट नहीं

भारत सरकार ने फिलहाल अमेरिकी कानून के संभावित आर्थिक प्रभाव का कोई अंतिम आकलन सार्वजनिक नहीं किया है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि सरकार पूरे घटनाक्रम पर नजर रख रही है। हालांकि, भारत ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि अमेरिकी कानून लागू होने की स्थिति में वह कौन-से विशिष्ट कदम उठाएगा।

भारत का मौजूदा रुख मुख्य रूप से दो बातों पर केंद्रित है—ऊर्जा सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा और देश के व्यापारिक एवं आर्थिक हितों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

PM मोदी का 76वां जन्मदिन आज, देशभर में सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 17 सितंबर को अपना 76वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस मौके पर भारतीय जनता पार्टी देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर रही है। भाजपा ने प्रधानमंत्री के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन को चिह्नित करते हुए ‘सेवा संकल्प अभियान’ शुरू किया है। यह अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा। इसके तहत सेवा कार्य, स्वच्छता अभियान, रक्तदान शिविर और जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।


काशी और वडनगर से शुरू होगी बाइक यात्रा

प्रधानमंत्री मोदी के जन्मस्थान गुजरात के वडनगर और उनके संसदीय क्षेत्र वाराणसी से दो बाइक यात्राएं शुरू की जा रही हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, वडनगर से वाराणसी और वाराणसी से वडनगर जाने वाली यात्राएं एक साथ शुरू होकर अक्टूबर में पूरी होंगी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह वडनगर से और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह वाराणसी से यात्रा को रवाना करेंगे।

इन यात्राओं के जरिए 10 राज्यों के 193 जिलों और करीब 1,159 गांवों तक पहुंचने की योजना है। अभियान में युवाओं की भागीदारी भी रखी गई है।

काशी में विशेष आयोजन

वाराणसी में प्रधानमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर में धार्मिक कार्यक्रमों के साथ-साथ रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में प्रधानमंत्री के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई गई है। कार्यक्रम में एनडीए से जुड़े नेता और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल होने वाले हैं।

गुजरात में भी होंगे कई कार्यक्रम

प्रधानमंत्री के जन्मस्थान वडनगर समेत गुजरात के कई हिस्सों में जन्मदिन के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। राज्य में दीप प्रज्ज्वलन समेत कई सामाजिक और सेवा गतिविधियां रखी गई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, गुजरात के अलग-अलग स्थानों पर बड़ी संख्या में दीये जलाने की तैयारी की गई है।

उज्जैन में दीपोत्सव की तैयारी

मध्य प्रदेश के उज्जैन में भी प्रधानमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। राज्य में भाजपा की ओर से जन्मदिन के साथ सेवा संकल्प अभियान से जुड़े कार्यक्रमों की शुरुआत की जा रही है।

दिल्ली में SEMICON India 2026 का उद्घाटन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज नई दिल्ली के यशोभूमि में SEMICON India 2026 का उद्घाटन करेंगे। तीन दिवसीय यह आयोजन 17 से 19 सितंबर तक चलेगा। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, कार्यक्रम में 52 देशों के प्रतिनिधियों और 600 से अधिक कंपनियों की भागीदारी है। प्रधानमंत्री उद्घाटन अवसर पर संबोधित भी करेंगे।

इस साल SEMICON India का विषय ‘Silicon to Systems: Building the Ecosystem’ है। आयोजन में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र से जुड़े उद्योग, निवेशक, शोधकर्ता, स्टार्टअप और नीति-निर्माता हिस्सा ले रहे हैं।

अरब सागर में भारत-पाकिस्तान के युद्धपोत टकराए

No comments Document Thumbnail

भारतीय नौसेना के कोलकाता-क्लास डेस्ट्रॉयर से टकराया PNS हुनैन, भारत ने पाकिस्तानी उच्चायोग के अधिकारी को किया तलब


नई दिल्ली। अरब सागर के अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में मंगलवार शाम भारतीय और पाकिस्तानी नौसेना के दो जहाजों के बीच टक्कर हो गई। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान नौसेना का जहाज PNS हुनैन तेज रफ्तार से आगे बढ़ते हुए भारतीय नौसेना के एक फ्रंटलाइन कोलकाता-क्लास गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर के बेहद करीब पहुंच गया, जिसके बाद दोनों जहाजों की टक्कर हुई।

घटना के समय भारतीय युद्धपोत नियमित निगरानी मिशन पर था। भारतीय पक्ष के अनुसार, PNS हुनैन का भारतीय युद्धपोत के बेहद करीब आना असुरक्षित और गैर-पेशेवर तरीके से संचालन का मामला था।

भारतीय युद्धपोत को बड़ा नुकसान नहीं

टक्कर के बावजूद भारतीय नौसेना के युद्धपोत को किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। वहीं, PNS हुनैन को गंभीर क्षति पहुंचने की बात सामने आई है और घटना के बाद वह वापस बंदरगाह लौट गया।

घटना को लेकर भारत ने राजनयिक स्तर पर भी आपत्ति दर्ज कराई है। नई दिल्ली में पाकिस्तान उच्चायोग के चार्ज द अफेयर्स को विदेश मंत्रालय ने तलब कर घटना पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। भारत ने इस्लामाबाद स्थित अपने चार्ज द अफेयर्स को भी पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के समक्ष समान विरोध दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।

1991 के समझौते के अनुच्छेद 10 का हवाला

भारत ने इस घटना के संदर्भ में अप्रैल 1991 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए समझौते के अनुच्छेद 10 का हवाला दिया है। भारत का कहना है कि इस प्रावधान के तहत दोनों देशों की सैन्य गतिविधियों के दौरान अग्रिम सूचना और आवश्यक सावधानी से जुड़े नियमों का पालन किया जाना चाहिए।

नई दिल्ली ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज का संचालन इन प्रावधानों के अनुरूप नहीं था।

कोलकाता-क्लास और PNS हुनैन में बड़ा अंतर

भारतीय नौसेना का कोलकाता-क्लास डेस्ट्रॉयर आधुनिक स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल युद्धपोत है। इसका विस्थापन करीब 7,400 टन, लंबाई लगभग 163 मीटर और चौड़ाई करीब 17.4 मीटर है। इसमें आधुनिक रडार और सेंसर के साथ लंबी दूरी की मिसाइल, वायु रक्षा और पनडुब्बी रोधी हथियार प्रणालियां मौजूद हैं। जहाज करीब 300 कर्मियों को ले जा सकता है और दो हेलिकॉप्टर संचालित करने में सक्षम है।

इसके मुकाबले PNS हुनैन यारमूक-क्लास बैच-2 का ऑफशोर पेट्रोल वेसल है। इसे वर्ष 2024 में पाकिस्तानी नौसेना में शामिल किया गया था। इसका विस्थापन करीब 2,600 टन, लंबाई लगभग 98 मीटर और चौड़ाई करीब 14.5 मीटर है। यह मुख्य रूप से समुद्री गश्त, निगरानी, समुद्री सुरक्षा और सीमित लड़ाकू अभियानों के लिए तैयार किया गया है।

अलग-अलग भूमिका के लिए बनाए गए हैं दोनों जहाज

कोलकाता-क्लास युद्धपोत का डिजाइन मुख्य रूप से उच्च-तीव्रता वाले नौसैनिक अभियानों के लिए किया गया है, जबकि PNS हुनैन जैसी ऑफशोर पेट्रोल पोत श्रेणी की प्राथमिक भूमिका समुद्री निगरानी और सुरक्षा है। ऐसे में दोनों जहाजों का आकार, विस्थापन, हथियार क्षमता और परिचालन भूमिका एक-दूसरे से काफी अलग है।

घटना से समुद्री संचालन पर उठे सवाल

अरब सागर के अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में हुई इस टक्कर ने नौसैनिक जहाजों के सुरक्षित संचालन और समुद्री नियमों के पालन को लेकर सवाल खड़े किए हैं। खासकर दो देशों के युद्धपोतों की मौजूदगी वाले क्षेत्र में दूरी बनाए रखने, संचार और सुरक्षित नौवहन प्रक्रियाओं का पालन महत्वपूर्ण माना जाता है।

भारत ने घटना पर औपचारिक राजनयिक विरोध दर्ज करा दिया है। फिलहाल पाकिस्तान की ओर से इस घटना पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं हुई है। दोनों देशों के बीच सैन्य गतिविधियों से जुड़े समझौतों के मद्देनजर यह मामला अब राजनयिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण हो गया है।

नवा रायपुर में राज्य निर्वाचन आयुक्तों के 32वें अखिल भारतीय सम्मेलन का राज्यपाल रामेन डेका ने किया शुभारंभ

No comments Document Thumbnail

Chhattisgarh Local Body Election Year Book- 2026 का किया विमोचन

रायपुर- छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह ने बताया कि हर वर्ष अलग-अलग राज्यों में होने वाले राज्य निर्वाचन आयुक्तगणों के सम्मेलन के क्रम में 32वां सम्मेलन इस वर्ष 16-17 सितम्बर को छत्तीसगढ़ की राजधानी नवा रायपुर अटल नगर में हो रहा है। इस सम्मेलन का आयोजन छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा किया जा रहा है।

सम्मेलन का शुभारंभ आज माननीय राज्यपाल द्वारा किया गया। सम्मेलन के शुभारंभ अवसर पर मेजबान छत्तीसगढ़ के निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह, राज्य निर्वाचन आयुक्तगण की स्थाई समिति के अध्यक्ष विजय देव एवं संयोजक सुधांशु पांडे तथा प्रदेश के मुख्य सचिव विकासशील उपस्थित रहे। शुभारंभ सहारोह के इस विशेष अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका ने छत्तीसगढ़ स्थानीय निकाय निर्वाचन वार्षिकी 2026 Year Book के प्रथम संस्करण का विमोचन भी किया।

उद्घाटन उपरांत आज सम्मेलन में देशभर से विभिन्न राज्यों के पधारे राज्य निर्वाचन आयुक्तगण ने स्थानीय लोकतंत्र विशेषकर त्रिस्तरीय पंचायतों व नगरीय निकायों को और अधिक सशक्त, पारदर्शी, समावेशी, विश्वसनीय एवं सहभागी बनाने हेतु निर्वाचन के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया एवं कॉन्फ्रेंस में अलग-अलग राज्यों के राज्य निर्वाचन आयुक्तगण और विषय-विशेषज्ञों के द्वारा प्रस्तुतीकरण दिया ।

सम्मेलन के दौरान राज्य निर्वाचन आयुक्तगण द्वारा स्थानीय निकाय निर्वाचन के संचालन में सामने आने वाली चुनौतियों, अनुभवों और नवाचारों को साझा करने के क्रम में छत्तीसगढ़ राज्य द्वारा "राज्य गठन उपरांत नक्सल प्रभावित बस्तर में पिछले 25 वर्षों में स्थानीय लोकतंत्र की प्रगति" विषय पर छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह के निर्देशन में तैयार प्रस्तुति आयोग की सचिव  शिखा राजपूत तिवारी द्वारा प्रस्तुत की गई।

बस्तर में स्थानीय लोकतंत्र की यात्रा को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। भौगोलिक दुर्गमता, विस्तृत वन क्षेत्र, सीमित संचार सुविधाओं तथा लंबे समय तक वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित बस्तर संभाग की परिस्थितियों के बीच स्थानीय निर्वाचन कराना एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक एवं लोकतांत्रिक चुनौती रहा है। छत्तीसगढ़ में स्थानीय निकायों के निर्वाचन के अनुभवों को साझा करते हुए बताया गया कि प्रशासन, पुलिस, सुरक्षा बल, निर्वाचन कर्मियों तथा स्थानीय समुदाय के समन्वित प्रयासों से लोकतांत्रिक प्रक्रिया को निरंतर सुदृढ़ किया गया है। वर्ष 2025 में नगरीय निकायों एवं त्रिस्तरीय पंचायतों के निर्वाचन एक साथ राज्यभर में, बस्तर संभाग सहित, शांतिपूर्वक एवं सफलतापूर्वक संपन्न कराने तथा पुनर्मतदान की आवश्यकता न पड़ने का उल्लेख किया गया।

मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान एवं केरलम की ओर से सूचना प्रोद्योगिकी के उपयोग के संबंध में 'EVM sharing tracking policy and it's challenges and EMS SOFTWARE' 'Panchayat Delimitation 2026: Transforming Delimitation through Technology A New Era of Paperless Delimitation', 'Digitalising Elections in India', 'Re-engineering elections in the Digital Era: The Kerala Story' विषयों पर प्रस्तुतियां दी गई।

सम्मेलन में लोकतांत्रिक निर्वाचन विषय से जुड़े प्रिंसटन यूनिवर्सिटी न्यू जर्सी अमेरिका के अंतर्राष्ट्रीय स्तर के विषय विशेषज्ञ ने भी हिस्सा लिया और उन्होंने भारत के राज्यों में होने वाले स्थानीय निर्वाचनों का तुलनात्मक एवं समेकित अध्ययन का सार प्रस्तुतीकरण के माध्यम से प्रस्तुत किया। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, हैदराबाद एवं भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड, बेंगलूरु के ईलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन के विषय विशेषज्ञ ने भी सम्मेलन में अपने संस्थानों की अद्यतन जानकारी प्रस्तुत करते हुए बताया कि निर्वाचन में उपयोग होने वाली इलेक्ट्रानिक वोति वोटिंग मशीन हर प्रकार से सुरक्षित है और इसमें लगातार नवाचार करते हुए राज्य निर्वाचन आयोगों के अनुकूल इसका विकास एवं उत्पादन किया जा रहा है।

झीरम घाटी हत्याकांड के दोषियों को मृत्युदंड न्याय की जीत : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

No comments Document Thumbnail

मुख्यमंत्री ने कहा - झीरम घाटी हत्याकांड छत्तीसगढ़ के इतिहास का पीड़ादायक अध्याय, इसकी कटु स्मृतियां लंबे समय तक देती रहेंगी पीड़ा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लौह संकल्प और दृढ़ नेतृत्व में सशस्त्र माओवाद के चंगुल से मुक्त हुआ छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री साय

मुख्यमंत्री साय ने कहा - दशकों से माओवादी हिंसा झेल रहा बस्तर आज शांति, विश्वास और विकास के नए युग की ओर बढ़ रहा

आतंक को बौद्धिक एवं वैचारिक समर्थन देने वालों के लिए भी आत्मचिंतन का अवसर : मुख्यमंत्री साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने झीरम घाटी हत्याकांड मामले में दोषी पाए गए सभी दस माओवादियों को जगदलपुर एनआईए कोर्ट द्वारा मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने को न्याय की जीत बताया है।

मुख्यमंत्री साय ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर लिखा है कि झीरम घाटी में हुआ बर्बर हत्याकांड छत्तीसगढ़ के इतिहास का वह पीड़ादायक अध्याय है, जिसकी कटु स्मृतियां हमें लंबे समय तक पीड़ा देती रहेंगी। इस जघन्य कम्युनिस्ट हिंसा में हमने प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं, सुरक्षाकर्मियों और आम नागरिकों को भी खोया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मामले में दोषी पाए गए सभी दस माओवादियों को जगदलपुर एनआईए कोर्ट द्वारा दी गई मृत्युदंड की सजा न्याय की जीत है। एनआईए ने जिस तरह इस जांच को अंजाम तक पहुंचाया, उसकी भी सराहना होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी के लौह संकल्प और उनके दृढ़ नेतृत्व में हमने सशस्त्र माओवाद के चंगुल से प्रदेश को मुक्त कराया है। दशकों से माओवादी हिंसा झेल रहा बस्तर आज शांति, विश्वास और विकास के नए युग की ओर आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अवसर विशेषकर जनजाति समाज की लाश पर राजनीति करने वालों और आतंक को बौद्धिक एवं वैचारिक समर्थन देने वालों के लिए आत्मचिंतन का भी अवसर है। दिमागी नक्सल भी यह जान लें कि निहित स्वार्थ के कारण किसी भी आतंक को प्रश्रय और आसरा देने का परिणाम सबके लिए विनाशकारी ही होता है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र और संविधान के विरुद्ध लड़ने वाले आतंक का भस्मासुर किसी विचार या क्षेत्र की सरहद को नहीं मानता है। यह समझकर उन्हें अपनी हरकतों से बाज आना चाहिए।

मुख्यमंत्री साय ने झीरम घाटी के क्रूर हमले में प्राण गंवाने वाले सभी दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि  दी है।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का अहम फैसला: मामूली विभागीय सजा पर निलंबन अवधि का पूरा वेतन देने का आदेश

No comments Document Thumbnail

बिलासपुर- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि किसी कर्मचारी को विभागीय जांच के बाद केवल मामूली विभागीय सजा दी जाती है और उसे सेवा में बहाल कर दिया जाता है, तो निलंबन की अवधि के लिए उसके पूरे वेतन का भुगतान किया जाना चाहिए।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निलंबन अपने आप में कोई सजा नहीं है, बल्कि विभागीय जांच पूरी होने तक की एक अस्थायी प्रशासनिक कार्रवाई है। ऐसे में यदि जांच के बाद कर्मचारी के खिलाफ केवल मामूली दंड लगाया गया है, तो निलंबन अवधि के वेतन को रोकना उचित नहीं माना जा सकता।

रायपुर में पदस्थ महिला ASI से जुड़ा था मामला

यह मामला रायपुर में पदस्थ एक महिला सहायक उपनिरीक्षक (ASI) से संबंधित था। विभागीय कार्रवाई के चलते उन्हें कुछ समय के लिए निलंबित किया गया था। बाद में विभागीय जांच पूरी होने के बाद उन्हें सेवा में वापस बहाल कर दिया गया और उनके खिलाफ केवल मामूली विभागीय दंड लगाया गया।

मामले में निलंबन अवधि के दौरान रोके गए वेतन को लेकर विवाद सामने आया। इसी मुद्दे पर न्यायालय के समक्ष मामला पहुंचा, जहां कोर्ट ने कर्मचारी के निलंबन और बाद में दी गई विभागीय सजा के बीच के संबंध को देखते हुए वेतन भुगतान के अधिकार पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की।

कोर्ट ने क्या कहा?

हाईकोर्ट के फैसले का मुख्य आधार यह है कि निलंबन को अंतिम दंड नहीं माना जा सकता। यदि विभागीय जांच का परिणाम गंभीर सजा के रूप में सामने नहीं आता और कर्मचारी को मामूली दंड के साथ सेवा में बहाल कर दिया जाता है, तो निलंबन की पूरी अवधि के वेतन को रोकने का पर्याप्त आधार नहीं बनता। ऐसे मामले में कर्मचारी को 100 प्रतिशत वेतन दिए जाने का अधिकार है।

इस फैसले को सरकारी कर्मचारियों से जुड़े सेवा मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह निलंबन अवधि के दौरान वेतन और विभागीय कार्रवाई के बीच संबंध को स्पष्ट करता है।

नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध प्रकाशित न्यायिक समाचार के आधार पर तैयार की गई है; किसी मामले में अंतिम कानूनी प्रभाव संबंधित आदेश/निर्णय के मूल पाठ पर निर्भर करता है।

रायपुर में महिला को सड़क पर जलाने का मामला, इलाज के दौरान मौत

No comments Document Thumbnail

रायपुर- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक महिला को सड़क पर आग के हवाले किए जाने का मामला सामने आया है। घटना के बाद महिला को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है।

जानकारी के मुताबिक, महिला को माना एयरबेस के पास आग के हवाले किया गया था। आग में झुलसने के बाद उसकी हालत बेहद गंभीर बताई गई और उसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। हालांकि, बाद में उसने दम तोड़ दिया।

पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की और घटनास्थल के आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज समेत अन्य साक्ष्यों की जांच की। जांच के बाद पुलिस ने मामले में एक आरोपी को हिरासत में लिया है। सामने आई जानकारी के अनुसार आरोपी की पहचान विरू धीवर के रूप में हुई है।

पुलिस अब घटना के पीछे की वजह, आरोपी और महिला के बीच संबंध तथा वारदात से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक, मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

इस घटना ने इलाके में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। पुलिस मामले की सभी कड़ियों को जोड़ने में जुटी है और जांच पूरी होने के बाद घटना से जुड़े अन्य तथ्यों का खुलासा होने की उम्मीद है।

छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा पर तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई

No comments Document Thumbnail

79 किलो संदिग्ध नारकोटिक्स और 1.47 किलो पैंगोलिन स्केल बरामद, 8 गिरफ्तार

धमतरी/गरियाबंद- छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सीमा से लगे इलाकों में नारकोटिक्स और वन्यजीव तस्करी के खिलाफ सुरक्षा एवं वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई में बड़ी सफलता मिली है। तीन दिनों में चलाए गए अलग-अलग ऑपरेशनों में करीब 79 किलो संदिग्ध नारकोटिक पदार्थ और 1.47 किलो पैंगोलिन स्केल जब्त किए गए हैं। इस मामले में कुल 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

जानकारी के मुताबिक, कार्रवाई उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR), डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI), मलकानगिरी और सुकमा वन विभाग के समन्वय से की गई। पहली कार्रवाई 10 सितंबर को हुई, जब वन जांच चौकी पर संदिग्ध बाइक की गतिविधि सामने आई। इसके बाद करीब 31 किलो संदिग्ध नारकोटिक पदार्थ बरामद किया गया।

इसके बाद 11 सितंबर को ओडिशा के नबरंगपुर क्षेत्र में फॉलो-अप कार्रवाई की गई, जहां करीब 48 किलो संदिग्ध नारकोटिक पदार्थ और एक स्कूटी जब्त की गई। आगे मिले सुरागों के आधार पर मलकानगिरी के गोविंदपल्ली इलाके में वन्यजीव तस्करी के खिलाफ कार्रवाई की गई, जहां 1.47 किलो पैंगोलिन स्केल, तीन मोटरसाइकिल और पांच मोबाइल फोन बरामद किए गए।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इन गतिविधियों के पीछे कोई अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क सक्रिय है। अधिकारियों के अनुसार, नारकोटिक्स और वन्यजीव उत्पादों के बीच संभावित बार्टर नेटवर्क की आशंका की भी जांच की जा रही है। मामले में आगे की जांच जारी है।

कोसोवो के पूर्व राष्ट्रपति हाशिम थाची को 25 साल की सजा, युद्ध अपराधों में दोषी करार

No comments Document Thumbnail

द हेग- कोसोवो के पूर्व राष्ट्रपति हाशिम थाची को हेग स्थित कोसोवो स्पेशलिस्ट चैंबर्स ने 1998-99 के कोसोवो युद्ध से जुड़े युद्ध अपराधों के मामले में दोषी करार देते हुए 25 साल जेल की सजा सुनाई है। अदालत ने उन्हें हत्या, यातना, क्रूर व्यवहार और गैरकानूनी/मनमाने तरीके से लोगों को हिरासत में रखने से जुड़े चार युद्ध अपराधों में दोषी पाया। 

किन अपराधों में दोषी ठहराया गया?

अदालत के फैसले के मुताबिक, थाची ने उस समय कोसोवो लिबरेशन आर्मी (KLA) के वरिष्ठ कमांडर के रूप में काम करते हुए ऐसे अपराधों में व्यक्तिगत आपराधिक जिम्मेदारी निभाई, जिनका निशाना KLA के विरोधी माने जाने वाले लोग थे। Reuters के अनुसार, अदालत ने 96 लोगों की हत्या, 385 लोगों की गैरकानूनी हिरासत, 303 लोगों पर यातना और 49 लोगों के साथ क्रूर व्यवहार से जुड़े मामलों में उन्हें दोषी पाया।

हालांकि अदालत ने उनके खिलाफ लगाए गए मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोपों पर पर्याप्त सबूत नहीं पाए और उन आरोपों में उन्हें दोषी नहीं ठहराया।

मामला 1998-99 के कोसोवो युद्ध से जुड़ा

यह मामला 1998-99 के कोसोवो युद्ध से जुड़ा है, जब कोसोवो में अल्बानियाई अलगाववादी KLA और तत्कालीन यूगोस्लाव/सर्बियाई बलों के बीच संघर्ष हुआ था। थाची उस दौरान KLA के प्रमुख नेताओं में शामिल थे।

कोसोवो स्पेशलिस्ट चैंबर्स के अनुसार, अभियोग में मार्च 1998 से सितंबर 1999 के बीच कोसोवो के कई इलाकों तथा उत्तरी अल्बानिया के कुछ स्थानों पर कथित अपराधों का जिक्र था। 

कैसे चला मुकदमा?

थाची और तीन अन्य पूर्व KLA नेताओं—कादरी वेसेली, रेक्सहेप सेलिमी और जाकुप क्रास्नीकी—को नवंबर 2020 में हिरासत में लेकर हेग लाया गया था। मुख्य मुकदमे की सुनवाई अप्रैल 2023 में शुरू हुई। अभियोजन पक्ष ने अप्रैल 2025 में अपना पक्ष पूरा किया, जबकि सबूतों की कार्यवाही दिसंबर 2025 में समाप्त हुई। मामले में बड़ी संख्या में गवाहों और दस्तावेजों को अदालत के सामने पेश किया गया।

हाशिम थाची कौन हैं?

हाशिम थाची कोसोवो की राजनीति के प्रमुख नेताओं में रहे हैं। वह प्रधानमंत्री और बाद में राष्ट्रपति के पद पर रह चुके हैं। 2020 में उन्होंने राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दिया था और युद्ध अपराधों के आरोपों का सामना करने के लिए हेग गए थे। उन्होंने मुकदमे के दौरान आरोपों से इनकार किया। 

फैसले पर कोसोवो में प्रतिक्रिया

फैसले के बाद कोसोवो में थाची के समर्थकों की ओर से विरोध प्रदर्शन की खबरें सामने आई हैं। थाची को कोसोवो में कई लोग स्वतंत्रता संघर्ष के प्रमुख नेताओं में से एक के रूप में देखते हैं। फैसले के बाद प्रिस्टिना में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई।

अदालत ने हालांकि यह स्पष्ट किया कि उसका फैसला KLA या कोसोवो की स्वतंत्रता के राजनीतिक उद्देश्य की वैधता पर फैसला नहीं है, बल्कि विशेष रूप से आरोपित युद्ध अपराधों से संबंधित है। 

आगे क्या होगा?

थाची के पास इस फैसले के खिलाफ अपील करने का अधिकार है। इसलिए 25 साल की सजा सुनाया जाना ट्रायल-लेवल का फैसला है और मामला आगे अपीलीय प्रक्रिया में जा सकता है।

एक नजर में:

  • नाम: हाशिम थाची

  • पद: कोसोवो के पूर्व राष्ट्रपति

  • अदालत: कोसोवो स्पेशलिस्ट चैंबर्स, द हेग

  • सजा: 25 साल की जेल

  • मामला: 1998-99 कोसोवो युद्ध

  • दोष: हत्या, यातना, क्रूर व्यवहार और गैरकानूनी हिरासत

  •  फैसला: 16 सितंबर 2026

  • अगला कदम: अपील का अधिकार मौजूद है। 

गाजा में इमारत ढहने से 19 लोगों की मौत, 25 घायल

No comments Document Thumbnail

गाजा सिटी- गाजा सिटी में बुधवार तड़के युद्ध से क्षतिग्रस्त एक बहुमंजिला इमारत अचानक ढह गई। इमारत में विस्थापित परिवारों ने शरण ले रखी थी। एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक कम-से-कम 19 लोगों की मौत हुई है, जबकि 25 लोग घायल हुए हैं। मृतकों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। 

इमारत पहले संघर्ष के दौरान क्षतिग्रस्त हो चुकी थी। रिपोर्टों के अनुसार, करीब 100 लोग, जिनमें बड़ी संख्या में विस्थापित लोग और लगभग 50 बच्चे शामिल थे, इस इमारत में रह रहे थे। इमारत के कमजोर ढांचे के बावजूद लोगों के पास सुरक्षित आवास के विकल्प बेहद सीमित थे। 

राहत और बचाव अभियान जारी

इमारत गिरने के बाद स्थानीय बचाव दल मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुट गए। बचाव कार्य भारी उपकरणों और मशीनरी की कमी के कारण मुश्किल हो रहा है। Reuters की रिपोर्ट में बताया गया कि कई जगहों पर बचावकर्मियों को सीमित संसाधनों के साथ मलबा हटाना पड़ रहा है।

अधिकारियों को आशंका है कि मलबे के नीचे अभी और लोग फंसे हो सकते हैं। इसलिए मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है। 

गाजा में बड़ी समस्या

यह घटना गाजा में युद्ध के दौरान क्षतिग्रस्त इमारतों में रहने वाले लोगों के लिए बढ़ते खतरे को सामने लाती है। Reuters के अनुसार, गाजा में करीब 2,000 क्षतिग्रस्त इमारतों में अभी भी लोग रह रहे हैं, जबकि लगभग 400 इमारतों को ढहने के जोखिम वाली इमारतों के रूप में बताया गया है। 

अरब सागर में भारत-पाकिस्तान की नौसेनाओं के जहाज टकराए, भारत ने पाकिस्तान के राजनयिक को किया तलब

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- भारत और पाकिस्तान के बीच समुद्री क्षेत्र में तनाव बढ़ाने वाली एक घटना सामने आई है। 15 सितंबर की शाम उत्तर अरब सागर में भारतीय नौसेना के एक जहाज और पाकिस्तान नौसेना के एक पोत के बीच टक्कर हो गई। घटना अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुई। इसके बाद भारत ने पाकिस्तान के Charge d’Affaires को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया।

क्या हुआ?

भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, भारतीय नौसेना का जहाज उत्तर अरब सागर में routine surveillance mission पर था। इसी दौरान पाकिस्तान नौसेना का एक जहाज तेज गति से भारतीय पोत के करीब आया और manoeuvring के दौरान दोनों जहाजों के बीच टक्कर हो गई।

भारतीय पक्ष ने पाकिस्तानी नौसैनिक इकाई के इस व्यवहार को “unacceptable and unprofessional” बताया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, टक्कर से भारतीय जहाज को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ और वह अपना मिशन जारी रखने में सक्षम रहा।

पाकिस्तान के किस जहाज से हुई टक्कर?

मीडिया रिपोर्टों में पाकिस्तानी पोत की पहचान PNS Hunain के तौर पर की गई है। रिपोर्टों के अनुसार यह पाकिस्तान नौसेना का Yarmook-class offshore patrol vessel है।

कुछ रिपोर्टों में बताया गया है कि टक्कर के बाद PNS Hunain को नुकसान हुआ और वह अपने बंदरगाह की ओर रवाना हुआ।

भारत ने क्या कार्रवाई की?

घटना के बाद भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने नई दिल्ली में पाकिस्तान के Charge d’Affaires को तलब किया और औपचारिक रूप से कड़ा विरोध दर्ज कराया।

MEA के अनुसार, पाकिस्तान के राजनयिक से कहा गया कि संबंधित पाकिस्तानी अधिकारियों तक यह संदेश पहुंचाया जाए कि समुद्र में सभी सैन्य इकाइयां उचित सावधानी बरतें और दोनों देशों के बीच लागू समझौतों का सम्मान करें, ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

1991 के समझौते का भी दिया गया हवाला

भारत ने इस घटना के संदर्भ में अप्रैल 1991 में हुए India-Pakistan Agreement on Advance Notice on Military Exercises, Manoeuvres and Troops Movements का हवाला दिया है।

MEA के मुताबिक, पाकिस्तानी नौसैनिक पोत का आचरण इस समझौते के Article 10 के सीधे contravention में था। भारत ने इसी आधार पर पाकिस्तान के सामने औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई है।

क्या यह सैन्य हमला था?

फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक और विश्वसनीय रिपोर्टों में इस घटना को जानबूझकर किया गया सैन्य हमला घोषित नहीं किया गया है। भारत ने इसे पाकिस्तानी नौसैनिक इकाई के unsafe और unprofessional conduct से जुड़ी collision बताया है।

वहीं, घटना को लेकर पाकिस्तान की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। इसलिए टक्कर की पूरी परिस्थितियों और दोनों पक्षों के दावों का स्वतंत्र आकलन आगे की जानकारी पर निर्भर करेगा।

क्यों अहम है यह घटना?

भारत और पाकिस्तान के बीच पहले से संवेदनशील संबंधों के बीच दोनों देशों की नौसेनाओं के जहाजों का अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में इस तरह टकराना सुरक्षा और कूटनीति, दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

हालांकि, अभी तक उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी बड़े नुकसान या व्यापक सैन्य कार्रवाई की सूचना नहीं है। फिलहाल भारत की प्रतिक्रिया राजनयिक विरोध, सावधानी बरतने की मांग और द्विपक्षीय समझौतों के पालन पर केंद्रित है।

बड़ी बात

उत्तर अरब सागर में भारतीय और पाकिस्तानी नौसेना के जहाजों की टक्कर के बाद भारत ने पाकिस्तान के शीर्ष राजनयिक को तलब किया है। भारत ने पाकिस्तानी नौसैनिक इकाई के व्यवहार को “अस्वीकार्य और गैर-पेशेवर” बताते हुए 1991 के द्विपक्षीय समझौते का हवाला दिया है। फिलहाल घटना में किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है और पाकिस्तान की विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

सोने की नाव, चांदी का पतवार और इंद्रावती तट पर पूजा, बस्तर में दिखी अनोखी लोकपरंपरा

No comments Document Thumbnail

 जगदलपुर। बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और प्रकृति से जुड़ी लोक आस्था की अनूठी झलक ग्राम पंचायत घाट कवाली में देखने को मिली। जिला मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव में नवाखाई यानी ‘नया खानी’ तिहार की तैयारियां शुरू हो गई हैं। पर्व से पहले ग्रामीणों ने पुरखों से चली आ रही परंपरा के अनुसार इंद्रावती नदी के तट पर विशेष पूजा-अनुष्ठान किया।


ग्रामीणों ने इंद्रावती नदी को जीवनदायिनी मानते हुए जल की देवी जलनी आया की विधि-विधान से पूजा की। इस दौरान प्रतीकात्मक रूप से सोने की नाव और चांदी का पतवार अर्पित किया गया। ग्रामीणों ने जलनी आया से गांव में सुख-समृद्धि, अच्छी फसल, उत्तम स्वास्थ्य और नवाखाई तिहार के निर्विघ्न आयोजन की कामना की।


जलनी आया की अनुमति के बाद मनाया जाएगा तिहार

घाट कवाली के ग्रामीणों की मान्यता है कि इंद्रावती नदी और जलनी आया गांव के जीवन का आधार हैं। किसी भी शुभ कार्य से पहले जलनी आया की अनुमति और आशीर्वाद लेना आवश्यक माना जाता है। इसी परंपरा के तहत नदी किनारे विशेष सेवा-अर्जी का आयोजन किया गया।

पूजा में गांव के बैगा, सिरहा, पुजारी और मांझी समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन के बीच विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद माटी पुजारी और गांव के बुजुर्गों ने सभी ग्रामीणों के कल्याण, भरपूर अन्न-धन और खुशहाली की कामना की।

नई फसल के स्वागत का पर्व है नवाखाई

बस्तर में नवाखाई तिहार का कृषि और लोकजीवन से गहरा संबंध है। नई फसल के घर आने की खुशी में मनाए जाने वाले इस पर्व में खेतों से प्राप्त नई फसल, विशेषकर धान, को सबसे पहले देवी-देवताओं और पूर्वजों को अर्पित करने की परंपरा है। इसके बाद ही ग्रामीण नई फसल का सेवन करते हैं।

घाट कवाली में भी इसी परंपरा के तहत पहले जलनी आया से अनुमति ली गई। पूजा-अनुष्ठान के बाद अब ग्रामीण बुधवार को नवाखाई तिहार मनाने की तैयारी में जुट गए हैं।

आसपास के गांवों से भी पहुंचे ग्रामीण

पारंपरिक घाटजात्रा में घाट कवाली के माटी पुजारी मंगतू कश्यप, ग्राम पटेल लच्छू कश्यप, ग्राम सिरहा सीताराम और श्यामसुंदर कश्यप सहित कुलधर कश्यप, गिरधर कश्यप, लखेश्वर कश्यप, जुगल बघेल, सोनधर निषाद, सोनसाय मौर्य और संपत कश्यप समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

इसके अलावा करंजी, भाटपाल, मरलेंगा, केसापुर, सुरीभाटा और किंजोली गांवों से भी ग्रामीण आयोजन में शामिल हुए। इंद्रावती नदी के तट पर हुए इस पारंपरिक अनुष्ठान में बस्तर की उस सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली, जिसमें प्रकृति, कृषि और लोक आस्था का गहरा जुड़ाव है।

© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.