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डीआरआई की बड़ी कार्रवाई: देशभर में 27 किलोग्राम से अधिक तस्करी का सोना जब्त, 12 आरोपी गिरफ्तार

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नई दिल्ली- संगठित स्वर्ण तस्करी सिंडिकेट्स के खिलाफ जारी अभियान के तहत राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने देशभर में खुफिया सूचना के आधार पर कई समन्वित अभियान चलाकर 27 किलोग्राम से अधिक विदेशी मूल का तस्करी का सोना जब्त किया है। इन कार्रवाइयों में 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

डीआरआई की जांच में तस्करों द्वारा सोना छिपाने के लिए अपनाए जा रहे अत्याधुनिक और नए तरीकों का खुलासा हुआ है। इनमें विमान के शौचालय की छत, वाहनों और बर्तनों में विशेष रूप से बनाए गए गुप्त खांचे तथा शरीर के भीतर सोना छिपाना शामिल है। इससे संगठित तस्करी गिरोहों के लगातार बदलते तौर-तरीकों का पता चलता है।

मुंबई एयरपोर्ट पर विमान के शौचालय से 12 किलोग्राम सोना बरामद

23-24 जुलाई 2026 को डीआरआई अधिकारियों ने खुफिया सूचना के आधार पर अदीस अबाबा से मुंबई पहुंचे तीन यात्रियों को रोका। विमान की गहन तलाशी के दौरान उसके पिछले शौचालय (Rear Lavatory) की छत के पैनलों में छिपाए गए विदेशी मूल के छह सोने के बिस्कुट, जिनका कुल वजन लगभग 12 किलोग्राम था, बरामद किए गए।

जांच में सामने आया कि यात्रियों ने सोना विमान में छिपाया था ताकि बाद में हवाई अड्डे के कुछ कर्मचारियों की मदद से उसे बाहर निकाला जा सके। डीआरआई ने सोना जब्त कर तीनों यात्रियों को गिरफ्तार कर लिया।

ब्रह्मपुत्र मेल में महिला यात्री से 5 किलोग्राम सोना जब्त

23 जुलाई 2026 को उत्तर प्रदेश में डीआरआई अधिकारियों ने ब्रह्मपुत्र मेल में यात्रा कर रही एक महिला यात्री को पकड़ा। तलाशी के दौरान उसकी कमर पर बंधी बेल्ट और हैंडबैग से 42 विदेशी मूल के सोने के बिस्कुट, जिनका कुल वजन लगभग 5 किलोग्राम था, बरामद किए गए।

पूछताछ में महिला ने स्वीकार किया कि यह सोना बांग्लादेश के रास्ते भारत में तस्करी कर लाया गया था। सोना जब्त कर महिला को गिरफ्तार कर लिया गया।

मुंबई एयरपोर्ट पर गोल्ड डस्ट तस्करी गिरोह का भंडाफोड़

22-23 जुलाई 2026 को मुंबई एयरपोर्ट पर डीआरआई ने एक अन्य खुफिया अभियान में ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया, जो मोम (Wax) के रूप में गोल्ड डस्ट को विमान के शौचालय में छिपाता था। बाद में विमान की सफाई करने वाले कुछ कर्मचारी उसे निकालकर गिरोह तक पहुंचाते थे।

इस कार्रवाई में 3.7 किलोग्राम गोल्ड डस्ट जब्त किया गया तथा पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों में कैरियर, विमान सफाई कर्मचारी, हैंडलर और सोना प्राप्त करने वाला व्यक्ति शामिल हैं।

कोलकाता रेलवे स्टेशन पर बर्तनों में छिपाया गया 4.6 किलोग्राम सोना बरामद

19-20 जुलाई 2026 को डीआरआई अधिकारियों ने कोलकाता रेलवे स्टेशन पर एक यात्री को रोककर उसके सामान की जांच की। तलाशी में विशेष रूप से तैयार किए गए बर्तनों के भीतर छिपाया गया लगभग 4.6 किलोग्राम विदेशी मूल का सोना बरामद हुआ।

जांच में पता चला कि यह सोना म्यांमार के रास्ते भारत में तस्करी कर लाया गया था। सोना जब्त कर यात्री को गिरफ्तार कर लिया गया।

कोच्चि और गुवाहाटी में भी कार्रवाई

इसी सप्ताह डीआरआई ने दो अन्य अलग-अलग अभियानों में लगभग 2 किलोग्राम विदेशी मूल का सोना जब्त किया।

  • कोच्चि हवाई अड्डे पर दुबई से आए एक यात्री के शरीर के भीतर छिपाया गया सोना बरामद किया गया।

  • गुवाहाटी में एक कार के विशेष रूप से तैयार किए गए गुप्त खांचे से सोने के बिस्कुट जब्त किए गए।

इन दोनों मामलों में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया।

तस्करी के बदलते तौर-तरीकों पर डीआरआई की पैनी नजर

डीआरआई का कहना है कि हालिया कार्रवाइयों से यह स्पष्ट है कि संगठित तस्करी गिरोह लगातार नए और जटिल तरीके अपनाकर सोने की तस्करी का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, खुफिया सूचना आधारित अभियानों और सतर्क निगरानी के माध्यम से ऐसे नेटवर्क का लगातार भंडाफोड़ किया जा रहा है।

डीआरआई ने स्पष्ट किया है कि देश में सोने की तस्करी पर अंकुश लगाने और संगठित तस्करी सिंडिकेट्स के खिलाफ कार्रवाई आगे भी इसी तरह जारी रहेगी।

शासकीय भूमि पर कथित अतिक्रमण हटाने पीडब्ल्यूडी ने तहसीलदार से की कानूनी कार्रवाई की मांग

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सरायपाली- लोक निर्माण विभाग (राष्ट्रीय राजमार्ग) उपसंभाग क्रमांक-1, रायपुर ने सरायपाली स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग के पुराने कार्यालय भवन एवं उससे संबंधित शासकीय भूमि पर कथित अनाधिकृत अतिक्रमण के मामले में तहसीलदार, सरायपाली को पत्र प्रेषित कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।

20 जुलाई 2026 को जारी पत्र में अनुविभागीय अधिकारी ने उल्लेख किया है कि उपअभियंता भुजरंग साय पैकरा द्वारा पुराने कार्यालय भवन एवं शासकीय भूमि पर कथित अनाधिकृत कब्जा, अवैध निर्माण तथा शासकीय सेवा आचरण नियमों के उल्लंघन से संबंधित मामला विभाग के संज्ञान में है।

पत्र के अनुसार, इस विषय में पूर्व में मुख्य अभियंता, कार्यपालन अभियंता एवं अनुविभागीय अधिकारी स्तर से कई बार पत्राचार किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, तहसीलदार न्यायालय, सरायपाली द्वारा भी मामले में आदेश पारित किया गया था। विभागीय निर्देशों के तहत संबंधित अधिकारी को पुराने कार्यालय भवन एवं शासकीय भूमि को खाली कर विभाग को अनुपालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे।

विभाग का कहना है कि दो बार लिखित निर्देश जारी किए जाने के बावजूद न तो संबंधित शासकीय भवन एवं भूमि को खाली कराया गया और न ही विभाग को कोई अनुपालन प्रतिवेदन उपलब्ध कराया गया। पत्र में कहा गया है कि बार-बार निर्देशों के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से यह प्रतीत होता है कि शासकीय संपत्ति को खाली करने के निर्देशों का पालन नहीं किया गया है।

इसी परिप्रेक्ष्य में अनुविभागीय अधिकारी ने तहसीलदार, सरायपाली को पत्र भेजकर न्यायालय द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया अपनाते हुए शासकीय भवन एवं भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।

विभाग ने अपने पत्र में कहा है कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए शासकीय संपत्ति को रिक्त कराने के लिए विधिसम्मत कार्रवाई आवश्यक है। साथ ही तहसीलदार से अनुरोध किया गया है कि वे अपने स्तर पर आवश्यक कानूनी कदम उठाकर शासकीय भूमि एवं भवन को अतिक्रमण से मुक्त कराने की प्रक्रिया सुनिश्चित करें।

हालांकि, इस मामले में संबंधित अधिकारी भुजरंग साय पैकरा की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले में प्रशासनिक कार्रवाई तहसीलदार स्तर पर होने वाली आगामी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन: स्वच्छ, हरित और आत्मनिर्भर रेल परिवहन की ओर ऐतिहासिक कदम

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17 जुलाई 2026 को दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के निकट जींद और सोनीपत के बीच भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। अब तक यह ट्रेन 1,200 किलोमीटर से अधिक की सफल यात्रा पूरी कर चुकी है और इस दौरान 3,200 लीटर से अधिक डीज़ल की बचत हुई है।

हाइड्रोजन ट्रेन कैसे काम करती है?

हाइड्रोजन ट्रेन में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच होने वाली रासायनिक अभिक्रिया के माध्यम से ट्रेन के भीतर ही बिजली उत्पन्न की जाती है। यही बिजली ट्रेन को संचालित करती है। इस प्रक्रिया में केवल जलवाष्प (Water Vapour) निकलती है, जबकि धुआँ या कार्बन उत्सर्जन बिल्कुल नहीं होता। इस कारण हाइड्रोजन ट्रेन वर्तमान समय की सबसे स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल रेल प्रणालियों में से एक मानी जाती है।

पूर्णतः स्वदेशी तकनीक पर आधारित परियोजना

यह परियोजना भारतीय रेल के नेतृत्व में विकसित एक पूर्णतः स्वदेशी (Indigenous) पहल है। 10 कोचों वाली इस ट्रेन में दो हाइड्रोजन ड्राइविंग पावर कार लगाए गए हैं, जो संयुक्त रूप से 2,400 किलोवाट शक्ति प्रदान करते हैं। ट्रेन में ऊर्जा भंडारण के लिए लिथियम आयरन फॉस्फेट (LiFePO₄) बैटरियाँ तथा हाइड्रोजन सिलेंडरों का उपयोग किया गया है।

भारत की पहली समर्पित हाइड्रोजन भंडारण सुविधा

जींद में भारतीय रेल की पहली समर्पित हाइड्रोजन स्टोरेज सुविधा स्थापित की गई है। इसमें 500 बार तक के दबाव पर ग्रीन हाइड्रोजन का भंडारण किया जाता है तथा 350 बार के दबाव पर ईंधन उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा की कुल भंडारण क्षमता लगभग 3,000 किलोग्राम हाइड्रोजन है।

उच्चतम सुरक्षा मानकों से सुसज्जित

हाइड्रोजन ट्रेन में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इसमें गैस रिसाव, तापमान, आग और धुएँ का पता लगाने के लिए अनेक स्वतंत्र सुरक्षा प्रणालियाँ स्थापित की गई हैं। इसके साथ ही स्वचालित शट-ऑफ सिस्टम, निरंतर वेंटिलेशन, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों का पालन तथा सभी आवश्यक तकनीकी परीक्षण एवं प्रमाणीकरण सुनिश्चित किए गए हैं।

जींद–सोनीपत खंड पर सफल संचालन के बाद अब दिल्ली मार्ग पर भी परीक्षण जल्द प्रारंभ किया जाएगा।

हरित भविष्य की ओर भारत का कदम

भारत की हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि स्वदेशी हाइड्रोजन रेल इकोसिस्टम की स्थापना की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह परियोजना शून्य-उत्सर्जन (Zero Emission) रेल परिवहन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है तथा भविष्य में स्वच्छ, टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल रेल सेवाओं के विस्तार का मार्ग प्रशस्त करती है।

यह उपलब्धि भारत को हरित परिवहन (Green Mobility) और स्वच्छ ऊर्जा आधारित रेल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में एक मजबूत आधार प्रदान करती है।

कैच द रेन अभियान (4 जुलाई–4 अगस्त 2026): नंद्याल जिले में वर्षा जल संरक्षण की दिशा में व्यापक पहल

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कैच द रेन अभियान (4 जुलाई–4 अगस्त 2026) आंध्र प्रदेश के नंद्याल जिले में “जहाँ वर्षा हो, वहीं वर्षा जल को संजोएँ (Catch the Rain, Where it Falls, When it Falls)” के सिद्धांत पर प्रभावी रूप से संचालित किया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य प्रत्येक बूंद वर्षा जल का संरक्षण करना है। इसके अंतर्गत पारंपरिक जलाशयों का पुनर्जीवन, फीडर एवं सप्लाई चैनलों की गाद निकासी (डी-सिल्टिंग), टैंक प्रणालियों का पुनर्स्थापन तथा अतिरिक्त जल भंडारण क्षमता का निर्माण किया जा रहा है। विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों, वैज्ञानिक योजना और जनभागीदारी के माध्यम से जिला वर्षा जल संरक्षण अवसंरचना को सुदृढ़ बना रहा है तथा मानसूनी जल के संग्रहण एवं भंडारण की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि कर रहा है।

वैज्ञानिक योजना एवं जनभागीदारी आधारित क्रियान्वयन

जिले की सभी 489 ग्राम पंचायतों में फील्ड सर्वे, प्राथमिकता वाले जलाशयों, फीडर चैनलों एवं जलग्रहण क्षेत्रों का मानचित्रण तथा संबंधित विभागों द्वारा तकनीकी मूल्यांकन के आधार पर वैज्ञानिक योजना तैयार की गई। स्थानीय समुदायों एवं ग्राम के वरिष्ठ नागरिकों से परामर्श लेकर स्थानीय आवश्यकताओं एवं पारंपरिक ज्ञान के अनुरूप कार्यों की पहचान की गई। प्रस्तावित कार्यों को पारदर्शिता एवं सामुदायिक सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए ग्राम सभा के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

इस वैज्ञानिक एवं सहभागी योजना प्रक्रिया के आधार पर जिले में 2,103 जल संरक्षण कार्यों की पहचान, स्वीकृति एवं शत-प्रतिशत (100%) ग्राउंडिंग सुनिश्चित की गई। इन कार्यों की रणनीतिक योजना वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण तथा जल भंडारण क्षमता को अधिकतम करने के उद्देश्य से तैयार की गई है, जिससे कैच द रेन अभियान के लक्ष्यों को प्रभावी रूप से साकार किया जा सके।

बड़े पैमाने पर जल संरक्षण कार्य

अभियान के अंतर्गत 2,691 किलोमीटर लंबे फीडर एवं सप्लाई चैनलों की गाद निकासी एवं पुनर्स्थापन किया गया, जिससे वर्षा जल का टैंकों एवं जलाशयों तक सुचारु प्रवाह सुनिश्चित हुआ।

इसके अतिरिक्त, 251 लघु सिंचाई टैंकों के पुनर्स्थापन का कार्य किया गया, जिनमें से 225 कार्य पूर्ण हो चुके हैं, जबकि शेष कार्य प्रगति पर हैं।

जिले में 22,221 फार्म पॉन्ड, 2,221 चेक डैम तथा 202 परकोलेशन टैंक के नेटवर्क को भी सुदृढ़ किया गया है। इन संरचनाओं से वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण तथा जल उपलब्धता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इससे जल संरक्षण प्रणाली की समग्र दक्षता बढ़ी है और जिले की प्रत्येक संभव वर्षा बूंद को संचित करने की क्षमता और मजबूत हुई है।

अतिरिक्त जल भंडारण क्षमता का सृजन

इन सभी कार्यों से उत्पन्न अतिरिक्त जल भंडारण क्षमता का आकलन संबंधित इंजीनियरिंग विभागों द्वारा तैयार तकनीकी अनुमानों के आधार पर किया गया।

फीडर चैनलों एवं जल संरक्षण संरचनाओं के पुनर्स्थापन से 3.27 टीएमसी टैंक भंडारण क्षमता की पुनर्बहाली का अनुमान है, जबकि नई जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण से 0.03 टीएमसी अतिरिक्त जल भंडारण क्षमता का सृजन हुआ है।

टैंकों एवं अन्य जल निकायों की मानसूनी जल संग्रहण क्षमता में वृद्धि के माध्यम से ये वैज्ञानिक रूप से नियोजित हस्तक्षेप भूजल पुनर्भरण को मजबूत करते हैं तथा कृषि, आजीविका और स्थानीय समुदायों के लिए जल उपलब्धता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

सतत जल सुरक्षा की दिशा में

कैच द रेन अभियान के अंतर्गत नंद्याल जिले में 2,691 किलोमीटर फीडर एवं सप्लाई चैनलों की गाद निकासी, 251 लघु सिंचाई टैंकों का पुनर्स्थापन, 2,103 जल संरक्षण कार्यों का क्रियान्वयन तथा हजारों वर्षा जल संचयन संरचनाओं का पुनर्जीवन जल संरक्षण प्रयासों को नई गति प्रदान कर रहा है।

वैज्ञानिक योजना, तकनीकी मूल्यांकन तथा सक्रिय जनभागीदारी पर आधारित यह समन्वित पहल जिले की वर्षा जल संग्रहण, भंडारण एवं भूजल पुनर्भरण क्षमता को सुदृढ़ करते हुए दीर्घकालिक जल सुरक्षा एवं जलवायु लचीलापन (Climate Resilience) को मजबूत बना रही है।

नंद्याल जिले का यह एकीकृत मॉडल दर्शाता है कि विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से "जहाँ वर्षा हो, वहीं वर्षा जल को संजोएँ" की अवधारणा को सफलतापूर्वक लागू करते हुए सतत जल संरक्षण एवं जल सुरक्षा के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की जा रही हैं।

'छात्रों का भविष्य सर्वोपरि'... धर्मेंद्र प्रधान ने मंत्री पद से दिया इस्तीफा, अगले साल से 'नीट' में बड़ा बदलाव

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नई दिल्ली- नीट-यूजी परीक्षा में हुई धांधली और देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है। धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया पर दो पन्नों का एक भावुक पत्र साझा कर अपने इस फैसले की जानकारी दी और कहा कि वे नहीं चाहते कि राजनीतिक गतिरोध के कारण देश के छात्रों का भविष्य खराब हो।

इस्तीफे की 3 सबसे बड़ी वजहें

* छात्रों को कानूनी पेचीदगियों से बचाना: प्रधान ने लिखा कि वे नहीं चाहते कि देश का कोई भी विद्यार्थी कानूनी विवादों और अदालती चक्करों में उलझे। उनका मकसद है कि छात्र अपनी पढ़ाई और करियर पर ध्यान दें।

* देश विरोधी ताकतों को रोकने का संकल्प: पत्र के अनुसार, जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में जो हालात बने हैं, उसका देश विरोधी ताकतें फायदा न उठा सकें, इसलिए उन्होंने पद छोड़ना सही समझा।

* आहत महसूस करना: उन्होंने स्पष्ट किया कि पिछले 10 दिनों के घटनाक्रम से वे बेहद दुखी हैं और यह उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है।


धर्मेंद्र प्रधान के पत्र की मुख्य बातें

* 4 दशकों का नाता: उन्होंने कहा कि वे पिछले 40 से अधिक वर्षों से छात्र राजनीति, शिक्षकों और शिक्षा सुधारों के लिए समर्पित रहे हैं।

* CBI जांच और बड़ा फैसला: उन्होंने माना कि 3 मई को हुई नीट-यूजी परीक्षा में अनियमितताएं हुई थीं, जिसकी जांच तुरंत सीबीआई को सौंपी गई। साथ ही ऐलान किया कि अगले साल से नीट परीक्षा पूरी तरह CBT (कंप्यूटर आधारित परीक्षा) मोड में होगी।

* परीक्षा माफिया पर वार: प्रधान ने कहा कि परीक्षा माफिया के कारण किसी भी मेधावी छात्र का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। हालांकि, उन्होंने कुछ लोगों पर छात्रों को गुमराह करने का आरोप भी लगाया।

* पीएम का आभार: उन्होंने मार्गदर्शन और निरंतर सहयोग के लिए प्रधानमंत्री मोदी और कैबिनेट के सभी सहयोगियों का धन्यवाद किया।

आगे क्या?

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि राष्ट्रसेवा उनके जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। वे आने वाले समय में प्रभु श्रीजगन्नाथ जी के आशीर्वाद से ओडिशा की जनता और देश के युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए खुद को समर्पित रखेंगे।

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बाढ़ में फंसे 170 लोगों को भारतीय तटरक्षक बल ने सुरक्षित बचाया, दमन, दादरा एवं नगर हवेली और दक्षिण गुजरात में चलाया बड़ा रेस्क्यू अभियान

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नई दिल्ली- भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) ने नागरिक प्रशासन के साथ मिलकर दमन, दादरा एवं नगर हवेली और दक्षिण गुजरात के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे 170 लोगों को सुरक्षित बचाया। 22 जुलाई 2026 की मध्यरात्रि से अब तक लगातार बारिश, भीषण बाढ़ और खराब मौसम के बीच 11 सफल रेस्क्यू अभियान चलाए गए।

रेस्क्यू अभियान की शुरुआत 22/23 जुलाई की रात सिलवासा के खानवेल क्षेत्र से पांच लोगों को सुरक्षित निकालने के साथ हुई। इसके बाद कडैया तटीय क्षेत्र में बाढ़ के कारण नदी किनारे फंसे तीन मछुआरों को बचाया गया।

सबसे बड़े अभियानों में से एक में वेलस्पन इंडस्ट्रियल एरिया से 60 लोगों को सुरक्षित निकाला गया, जहां बाढ़ के कारण सड़क संपर्क पूरी तरह टूट चुका था।

इसके अलावा बाढ़ के पानी में फंसी एक बस से सात लोगों को, डोंगरी क्षेत्र से 10 लोगों को, वलसाड-पारडी क्षेत्र से हेलीकॉप्टर की मदद से चार लोगों को तथा रिलायंस इंडस्ट्रीज क्षेत्र से आठ लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

एक अन्य महत्वपूर्ण अभियान में आवध सोसाइटी से 10 लोगों को बचाया गया, जिनमें नौ माह की गर्भवती महिला और सांस लेने में तकलीफ से जूझ रही एक महिला भी शामिल थीं। दोनों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई।

24 जुलाई को भारतीय तटरक्षक बल के दो हेलीकॉप्टरों ने नवसारी जिले के मेंदर गांव से 33 लोगों को एयरलिफ्ट किया। इनमें एक गंभीर सीने के दर्द से पीड़ित व्यक्ति भी शामिल था, जिसे तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई।

लगातार मूसलाधार बारिश, तेज बहाव और बेहद कठिन परिस्थितियों के बावजूद भारतीय तटरक्षक बल के जवान बिना रुके राहत एवं बचाव कार्य में जुटे रहे। इस अभियान के जरिए तटरक्षक बल ने अपने आदर्श वाक्य "वयम् रक्षामः" (हम रक्षा करते हैं) को एक बार फिर चरितार्थ किया।

भारतीय तटरक्षक बल ने कहा है कि वह नागरिक प्रशासन के साथ मिलकर पूरी सतर्कता के साथ राहत कार्य जारी रखे हुए है और बाढ़ से उत्पन्न किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण पर सख्ती: केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने हरियाणा सरकार के साथ की समीक्षा बैठक, सर्दियों से पहले तेज़ कार्रवाई के निर्देश

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नई दिल्ली- केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने आज हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता सुधार के लिए चल रहे प्रयासों की व्यापक समीक्षा की। बैठक में हरियाणा के पर्यावरण एवं वन मंत्री राव नरबीर सिंह भी मौजूद रहे।

बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सर्दियों के मौसम से पहले उपलब्ध समय का पूरा उपयोग मिशन मोड में प्रदूषण नियंत्रण उपायों को लागू करने के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने समयबद्ध कार्रवाई, बेहतर समन्वय और सख्त निगरानी पर विशेष जोर दिया।

सड़कों की धूल और सफाई पर विशेष ध्यान

भूपेंद्र यादव ने सड़कों के दोनों ओर हरियाली विकसित करने, गड्ढों की शीघ्र मरम्मत, फुटपाथ निर्माण और नियमित गहरी सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने कहा कि सितंबर तक सभी मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों (MRSM) की तैनाती पूरी कर उन्हें जियो-टैग किया जाए, ताकि सफाई कार्य की रियल-टाइम निगरानी हो सके।

इलेक्ट्रिक वाहनों को मिलेगा बढ़ावा

मंत्री ने एनसीआर के हरियाणा नगर निगम क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया। साथ ही सात नगर निगम क्षेत्रों में ईवी चार्जिंग स्टेशनों की तेज़ स्थापना के लिए हरियाणा सरकार की सराहना की।

पुराने वाहनों पर सख्ती

बैठक में एंड-ऑफ-लाइफ (EoL) वाहनों को एनसीआर से बाहर स्थानांतरित करने के लिए एनओसी प्रक्रिया तेज़ करने और पुराने प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को हटाकर इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने पर बल दिया गया।

'No PUCC, No Fuel' अभियान होगा सख्त

मंत्री ने सभी पेट्रोल पंपों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरे लगाने के निर्देश दिए, ताकि 'No PUCC, No Fuel' अभियान को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके। साथ ही ट्रैफिक जाम वाले क्षेत्रों की पहचान कर त्वरित समाधान के निर्देश भी दिए।

उद्योगों और कचरा प्रबंधन पर भी जोर

औद्योगिक इकाइयों में ऑनलाइन उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (OCEMS) और एयर पॉल्यूशन कंट्रोल डिवाइस (APCDs) जल्द स्थापित करने के निर्देश दिए गए। निर्माण एवं विध्वंस (C&D) कचरे के प्रबंधन, पुराने कचरे के निस्तारण और नगर निगम के ठोस कचरे के 100% संग्रहण पर भी जोर दिया गया।

पराली जलाने पर रोक के लिए विशेष योजना

भूपेंद्र यादव ने पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए क्रॉप रेजिड्यू मैनेजमेंट (CRM) मशीनों की उपलब्धता बढ़ाने, किसानों को प्रशिक्षण देने और व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने जिला प्रशासन से उद्योगों की फसल अवशेष उपयोग क्षमता का सर्वे कराने और मांग-आपूर्ति का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करने को भी कहा।

बैठक के अंत में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि "वायु प्रदूषण की चुनौती का समाधान तभी संभव है, जब सरकार और समाज मिलकर 'Whole of Government' और 'Whole of Society' दृष्टिकोण अपनाएं।" वहीं मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सभी संबंधित अधिकारियों को तय समय सीमा में आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।

छत्तीसगढ़ को मिलेगी पहली राजकीय तितली: 31 अगस्त तक जनता करेगी ऑनलाइन मतदान, जैव विविधता संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा

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रायपुर- छत्तीसगढ़ जल्द ही अपनी पहली राजकीय तितली (State Butterfly) घोषित करने जा रहा है। राज्य सरकार ने इस अनूठी पहल के तहत प्रदेशवासियों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ऑनलाइन जनमत संग्रह (Public Voting) शुरू किया है। नागरिक 31 अगस्त तक अपनी पसंद की तितली के पक्ष में मतदान कर सकेंगे।

इस अभियान का उद्देश्य केवल राज्य की राजकीय तितली का चयन करना ही नहीं, बल्कि लोगों में जैव विविधता संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और तितलियों के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी है। तितलियां स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र की पहचान मानी जाती हैं और परागण (Pollination) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

वन विभाग का मानना है कि इस पहल से प्रकृति संरक्षण के प्रति लोगों की भागीदारी बढ़ेगी और प्रदेश की समृद्ध प्राकृतिक विरासत को नई पहचान मिलेगी। राज्य सरकार ने सभी नागरिकों, विद्यार्थियों और प्रकृति प्रेमियों से अधिक से अधिक संख्या में मतदान कर इस अभियान का हिस्सा बनने की अपील की है।

राजकीय तितली की घोषणा के बाद यह प्रजाति छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक बनेगी और वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण से जुड़े जनजागरूकता अभियानों में भी विशेष स्थान पाएगी।

आप निम्नलिखित तीन तितलियों में से अपनी पसंदीदा तितली को वोट दे सकते हैं:

1. ऑरेंज ओकलीफ

2. कॉमन बैंडेड पीकॉक

3. स्पॉट स्वॉर्डटेल

🗳️ वोट करने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें:

https://forms.gle/7Mqa1kBLx4dnFA6b7

आपका एक वोट छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक विरासत को नई पहचान देगा। कृपया स्वयं मतदान करें तथा इस संदेश को अपने परिवार, मित्रों और समूहों में अधिक से अधिक साझा करें।

“आपकी पसंद—छत्तीसगढ़ की राजकीय तितली!” 🦋🌿

आज देवशयनी एकादशी: चातुर्मास का शुभारंभ, भगवान विष्णु की आराधना में लीन हुए श्रद्धालु

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नई दिल्ली- आज देशभर में श्रद्धा और आस्था के साथ देवशयनी एकादशी का पर्व मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में इस एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं और इसी के साथ चार माह तक चलने वाले चातुर्मास का शुभारंभ होता है।

मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। भक्त भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना कर व्रत रख रहे हैं तथा सुख-समृद्धि और परिवार के कल्याण की कामना कर रहे हैं। कई स्थानों पर विशेष भजन-कीर्तन, धार्मिक अनुष्ठान और सत्संग का आयोजन भी किया जा रहा है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी से विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है। इसके बाद भगवान विष्णु के देवउठनी एकादशी पर जागृत होने के साथ ही शुभ एवं मांगलिक कार्यों की पुनः शुरुआत होती है।

धर्माचार्यों ने श्रद्धालुओं से विधि-विधान के साथ व्रत और पूजा करने तथा जरूरतमंदों की सहायता एवं दान-पुण्य करने का भी आह्वान किया है।

देशभर में भारी बारिश का अलर्ट: कई राज्यों में मूसलाधार वर्षा की चेतावनी, लोगों से सतर्क रहने की अपील

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नई दिल्ली- भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश के कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। गुजरात, दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मध्य प्रदेश, ओडिशा और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में अगले 24 घंटों के दौरान तेज बारिश, आंधी और बिजली गिरने की संभावना जताई गई है।

मौसम विभाग ने लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने, जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है। पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन और नदियों के जलस्तर में वृद्धि की आशंका को देखते हुए विशेष सतर्कता बरतने की अपील की गई है।

प्रशासन ने संबंधित जिलों में आपदा प्रबंधन टीमों को अलर्ट पर रखा है। नागरिकों से मौसम की ताज़ा जानकारी पर नज़र रखने और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने का आग्रह किया गया है।

बिहार बंद आज: शिक्षा सुधार और पेपर लीक के विरोध में छात्रों का बड़ा आंदोलन, सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम

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पटना- ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और अन्य छात्र संगठनों के आह्वान पर आज बिहार बंद का आयोजन किया गया है। आंदोलनकारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

बंद को देखते हुए पटना समेत कई जिलों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और ट्रैफिक संबंधी सलाह का पालन करने की अपील की है। 

प्रदर्शन के चलते कई स्थानों पर यातायात प्रभावित होने की आशंका है। प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सत्य साई ग्राम के सेवा मॉडल को बताया जनकल्याण का प्रेरक उदाहरण

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शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर हुई सार्थक चर्चा, छत्तीसगढ़ में सेवाओं के विस्तार पर दिया जोर

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज कर्नाटक के सत्य साई ग्राम, मुद्देनहल्ली का दौरा कर शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण एवं मानवीय मूल्यों पर आधारित समग्र सेवा मॉडल का अवलोकन किया। उन्होंने वन वर्ल्ड वन फैमिली मिशन के संस्थापक सद्गुरु मधुसूदन साई से भेंट कर छत्तीसगढ़ में जनकल्याणकारी सेवाओं के विस्तार, विशेष रूप से निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण और मूल्य आधारित शिक्षा के क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का आधार केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि स्वस्थ, शिक्षित और संस्कारित समाज है। राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण को सुशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में रखते हुए अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण सेवाएं पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि समाजसेवी संस्थाओं के अनुभव, नवाचार और सेवा भावना से जनकल्याण के प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। श्री सत्य साई संजीवनी अस्पताल, रायपुर द्वारा पूर्णतः निःशुल्क बाल हृदय शल्य चिकित्सा (पीडियाट्रिक कार्डियक सर्जरी) के माध्यम से हजारों बच्चों को नया जीवन देने के कार्य की मुख्यमंत्री ने विशेष सराहना की। उन्होंने इसे मानवता और सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए अस्पताल के विस्तार, मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल की स्थापना तथा भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं के व्यापक विस्तार की संभावनाओं पर चर्चा की।

मुख्यमंत्री साय मूल्य आधारित शिक्षा पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। सम्मेलन में विश्व के लगभग 25 देशों से आए 100 से अधिक शिक्षकों एवं शिक्षाविदों ने भाग लिया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आधुनिक शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, सेवा, करुणा, नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व का भी आधार होनी चाहिए। मूल्य आधारित शिक्षा ही संवेदनशील नागरिकों और सशक्त राष्ट्र का निर्माण करती है।

मुख्यमंत्री ने सत्य साई अन्नपूर्णा ट्रस्ट द्वारा संचालित साईश्योर न्यूट्रास्यूटिकल्स इकाई का भी अवलोकन किया। साईश्योर मल्टी-न्यूट्रिएंट हेल्थ मिक्स के माध्यम से देश के 25 राज्यों एवं 4 केंद्रशासित प्रदेशों में लगभग एक करोड़ बच्चों तक पोषण सहायता पहुंचाई जा रही है। मुख्यमंत्री ने इस पहल की सराहना करते हुए छत्तीसगढ़ के विद्यालयों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों में ऐसे नवाचारों के माध्यम से बच्चों के पोषण स्तर को और बेहतर बनाने की संभावनाओं पर चर्चा की। छत्तीसगढ़ के लगभग 300 युवाओं को यहां नर्सिंग शिक्षा एवं प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ-साथ सेवा भाव से प्रेरित दक्ष स्वास्थ्य मानव संसाधन तैयार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि छत्तीसगढ़ सरकार और वन वर्ल्ड वन फैमिली मिशन के बीच सहयोग से स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण के क्षेत्रों में नई संभावनाएं विकसित होंगी तथा समाज के गरीब, वंचित और जरूरतमंद वर्गों तक गुणवत्तापूर्ण सेवाओं का दायरा और अधिक व्यापक होगा। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे सभी प्रयासों का स्वागत करती है, जो सेवा, संवेदना और सुशासन के माध्यम से जनजीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य करते हैं।

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने जेलों में निर्माणाधीन कार्यों की प्रगति की समीक्षा की

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कार्यपालन अभियंताओं, जेल अधीक्षकों और ठेकेदारों को बेहतर समन्वय बनाकर कार्यों में तेजी लाने के दिए निर्देश

गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखने कहा

रायपुर- लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल ने प्रदेश के विभिन्न जेलों में निर्माणाधीन कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने पीडब्लूडी मुख्यालय ‘निर्माण भवन’ में आज आयोजित बैठक में जिलों के कार्यपालन अभियंताओं, जेल अधीक्षकों और ठेकेदारों को बेहतर समन्वय बनाकर कार्यों में तेजी लाते हुए उन्हें जल्द पूर्ण करने के निर्देश दिए। जेल एवं सुधारात्मक सेवाओं के महानिदेशक हिमांशु गुप्ता और लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता वी.के. भतपहरी भी बैठक में शामिल हुए। लोक निर्माण विभाग के विभिन्न संभागों के कार्यपालन अभियंता, ठेकेदार और जेल अधीक्षक वीडियो कॉन्फ्रेंस से बैठक में जुड़े।

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने बैठक में प्रदेश की विभिन्न जेलों में निर्माणाधीन बैरकों, बाउंड्रीवॉल्स, शौचालयों और वॉच टॉवर्स के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने विभागीय अधिकारियों के साथ ही सभी जेलों के अधीक्षकों से निर्माण कार्यों की गति और गुणवत्ता की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को कार्यस्थलों का नियमित दौरा कर कार्यों की कड़ाई से मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। उन्होंने ठेकेदारों को भी निर्माण सामग्री और निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करते हुए कार्यों में तेजी लाने और उन्हें समय पर पूरा करने को कहा।

बंसल ने कार्यपालन अभियंताओं और जेल अधीक्षकों को सुरक्षा मानकों का ध्यान रखते हुए जेल परिसर के भीतर निर्माण सामग्रियों के परिवहन की समुचित व्यवस्था के निर्देश दिए। उन्होंने जेल अधीक्षकों को श्रमिकों को रोज काम के लिए पर्याप्त समय देने को कहा। जेल एवं सुधारात्मक सेवाओं के महानिदेशक हिमांशु गुप्ता ने बैठक में कहा कि जेलों में क्षमता से अधिक कैदी रह रहे हैं। नए बैरकों के निर्माण और मौजूदा सुविधाओं के विस्तार से राहत मिलेगी। उन्होंने लोक निर्माण विभाग के मैदानी अधिकारियों, जेल अधीक्षकों और ठेकेदारों को तेज गति से काम कर कार्यों को निर्धारित समय में पूर्ण करने को कहा।

इन कार्यों की हुई समीक्षा

लोक निर्माण विभाग के सचिव ने बैठक में रायपुर केन्द्रीय जेल में पार्किंग शेड, पाठशाला शेड, मुलाकातियों-परिजनों के लिए शेड व शौचालय निर्माण कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने बिलासपुर के नगोई में 1500 आवास क्षमता के विशेष जेल, जिला जेल धमतरी और गरियाबंद में बाउंड्रीवॉल, जिला जेल जांजगीर, रामानुजगंज, सूरजपुर, कांकेर, संजारी-बालोद तथा उप जेल सारंगढ़ में बैरक निर्माण कार्यों की भी समीक्षा की। विभागीय सचिव ने कवर्धा उप जेल में मुख्य दीवार की ऊंचाई बढ़ाने के कार्य, केन्द्रीय जेल अंबिकापुर और जगदलपुर में कैदियों के लिए बैरक एवं शौचालय निर्माण, जिला जेल दंतेवाड़ा में शौचालय निर्माण, जिला जेल सुकमा की मुख्य दीवारों के चारों ओर कंसर्टीना वायर फेंसिंग तथा वॉच टॉवर निर्माण एवं उप जेल बीजापुर में वॉच टॉवर निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा कर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

जगदलपुर केंद्रीय जेल में गूंजी शहनाई, दुष्कर्म के आरोपी प्रेमी-प्रेमिका ने मंडप में लिए सात फेरे

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 जगदलपुर : बस्तर जिले की केंद्रीय जेल परिसर में एक अनोखा विवाह संपन्न हुआ, जो इस समय पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। अदालत के विशेष निर्देश पर दुष्कर्म के मामले में जेल में बंद एक युवक ने अपनी प्रेमिका के साथ जेल के भीतर बने मंडप में वैदिक रीतियों के अनुसार सात फेरे लिए।


क्या है पूरा मामला?

जानकारी के मुताबिक, राजूर गांव निवासी सुरेश सेठिया और मनमती कश्यप के बीच लंबे समय से प्रेम संबंध था। दोनों अलग-अलग जातियों से ताल्लुक रखते हैं, जिसके चलते युवती के परिजन इस रिश्ते का विरोध कर रहे थे। परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने सुरेश के खिलाफ दुष्कर्म (Rape) की धाराओं में मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

कोर्ट में युवती ने ली प्रेमी की तरफदारी

सुरेश के जेल जाने के बाद मामले में नया मोड़ तब आया, जब युवती ने खुद अदालत के समक्ष उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज कराया। युवती ने कोर्ट को स्पष्ट किया कि वह सुरेश से अपनी मर्जी से प्रेम करती है और उसी के साथ अपना जीवन बिताना चाहती है। इसके साथ ही उसने अदालत से विवाह की अनुमति देने का अनुरोध किया।

जेल प्रशासन की निगरानी में हुआ विवाह

युवती के बयान और परिस्थितियों की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने पुलिस और जेल प्रशासन को विवाह कराने के निर्देश जारी किए। आदेश मिलते ही केंद्रीय जेल परिसर में पहली बार विवाह मंडप सजाया गया। कड़े प्रशासनिक पहरे और कानूनी औपचारिकताओं के बीच दोनों ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाई और जीवनसाथी के रूप में स्वीकार किया।

प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण का अनूठा संगम है नंदनवन जंगल सफारी

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 धनंजय राठौर - संयुक्त संचालक, जनसंपर्क

अशोक कुमार चंद्रवंशी -सहायक जनसंपर्क अधिकारी


नंदनवन जंगल सफारी नवाँ रायपुर में पर्यटकों के लिए कई प्रकार की रोमांचक सफारी राइड्स उपलब्ध हैं, जिनमें शाकाहारी सफारी, टाइगर सफारी, भालू सफारी और लायन सफारी प्रमुख हैं। इसके अलावा यहाँ एक छोटा चिड़ियाघर (नंदनवन जू) भी है।


छत्तीसगढ़ की राजधानी नवा रायपुर (अटल नगर) के सेक्टर-39 में स्थित नंदनवन जंगल सफारी राज्य के प्रमुख पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण केंद्रों में शामिल है। 320.15 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला यह विशाल परिसर प्रकृति प्रेमियों, वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। यहां वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ पर्यटकों को प्राकृतिक वातावरण में वन्यजीवों को देखने और उनके बारे में जानने का अवसर मिलता है।


मिनी जू से जंगल सफारी तक का सफर

 
नंदनवन की शुरुआत वर्ष 1979 में रायपुर में ‘नंदनवन मिनी जू’ के रूप में हुई थी। यह वन्यजीवों के रेस्क्यू और राहत केंद्र के रूप में विकसित किया गया था। वर्ष 2008 में केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) ने इसे आधिकारिक रूप से ‘मिनी जू’ की मान्यता दी।
 
इसके बाद नवा रायपुर में आधुनिक और विशाल जंगल सफारी विकसित करने के लिए वर्ष 2012 से 2015 के बीच 320.15 हेक्टेयर भूमि आवंटित की गई। 1 नवंबर 2016 को छत्तीसगढ़ राज्य के 16वें स्थापना दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने नंदनवन जंगल सफारी का उद्घाटन किया।
 

वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण शिक्षा पर विशेष जोर

 
नंदनवन जंगल सफारी का मुख्य उद्देश्य वन्यजीवों का संरक्षण, दुर्लभ प्रजातियों का संरक्षण एवं प्रजनन और लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। यहां वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप सुरक्षित और तनावमुक्त आवास उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है।
 
विद्यार्थियों और पर्यटकों को वन्यजीवों तथा जैव विविधता के महत्व की जानकारी देने के लिए यहां विभिन्न पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
 

पांच प्रमुख सफारी जोन हैं आकर्षण का केंद्र

 
नंदनवन जंगल सफारी को वन्यजीवों की सुरक्षा और पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग जोन में विकसित किया गया है।
 

शाकाहारी सफारी

 
30.89 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले इस जोन में चीतल, सांभर, नीलगाय और काला हिरण जैसे वन्यजीव प्राकृतिक वातावरण में विचरण करते हैं।

भालू सफारी

 
20.03 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित भालू सफारी पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। यहां भालुओं को प्राकृतिक वातावरण में देखने का अवसर मिलता है।

बाघ सफारी

 
20.04 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली बाघ सफारी में पर्यटक देश के राष्ट्रीय पशु बाघ को करीब से देखने का रोमांचक अनुभव प्राप्त करते हैं।
 

सिंह सफारी

 
20.01 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित सिंह सफारी में एशियाई शेरों का संरक्षण किया जा रहा है।

 

जू जोन

 
50 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले जू जोन में विभिन्न प्रजातियों के पक्षी, सरीसृप और अन्य वन्यजीव आकर्षण का केंद्र हैं।
 

दुर्लभ और विशेष वन्यजीवों का भी संरक्षण

 
नंदनवन जंगल सफारी में विभिन्न चिड़ियाघरों के साथ पशु विनिमय कार्यक्रम के माध्यम से कई दुर्लभ और विशेष वन्यजीवों को लाया गया है। यहां सफेद बाघ, दरियाई घोड़ा, घड़ियाल और क्लोन जंगली भैंसा ‘दीपाशा’ जैसे वन्यजीव पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण हैं।
 

देश-विदेश से पहुंचते हैं पर्यटक

 
वनमंडलाधिकारी  थेजस शेखर ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप की मंशानुरूप नंदनवन जंगल सफारी पर्यटकों के बीच लगातार लोकप्रिय हो रहा है। गौरतलब है कि वर्ष 2018-19 में ही देश-विदेश से 1 लाख 74 हजार 611, वर्ष 2019-20 में 1 लाख 60 हजार 767 ,वर्ष 2020-21 में 1 लाख 60 हजार 32, वर्ष 2021-22 में 1 लाख 73 हजार 72, वर्ष 2022-23 में 2 लाख 77 हजार 881, वर्ष 2023-24 में 2 लाख 62 हजार 486, वर्ष 2024-25 में 2 लाख 70 हजार 942, वर्ष 2025-26 में 3 लाख 24 हजार 785, से अधिक पर्यटकों ने जंगल सफारी का भ्रमण किया। यह आंकड़ा इसकी बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है।
 

जैव विविधता संरक्षण के प्रति जागरूकता का केंद्र

 
नंदनवन जंगल सफारी में अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस, विश्व बाघ दिवस और वन्यजीव सप्ताह जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन आयोजनों के माध्यम से लोगों, विद्यार्थियों और पर्यटकों को वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाता है।
 

रायपुर से आसान पहुंच

 
नंदनवन जंगल सफारी नवा रायपुर (अटल नगर) के सेक्टर-39 में स्थित है। यह स्वामी विवेकानंद अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे, रायपुर से लगभग 15 किलोमीटर और रायपुर रेलवे स्टेशन से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जंगल सफारी प्रत्येक सोमवार को बंद रहती है।
 

वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण शिक्षा का ऐसा अनूठा केंद्र

 
 
      नंदनवन जंगल सफारी आज छत्तीसगढ़ में पर्यटन, वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण शिक्षा का ऐसा अनूठा केंद्र बन चुका है, जहां प्रकृति के करीब पहुंचकर वन्यजीवों को देखने के साथ-साथ उनके संरक्षण का संदेश भी मिलता है l
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