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छत्तीसगढ़ महतारी और भगवान धनवंतरि की वंदना से सारंगढ़ में योग दिवस का शंखनाद

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 ​रायपुर : ​अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर सारंगढ़ के कृषि उपज मंडी परिसर में जिला स्तरीय वृहद योग कार्यक्रम का गरिमामय आयोजन किया गया। इस वर्ष "योगा 365 डेज एम्ब्रेस योगा" और "बढ़ते उम्र के स्वास्थ्य के लिए योग" की थीम पर आधारित इस शिविर में प्रदेश के राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक गरिमा के साथ भगवान श्री धनवंतरि और छत्तीसगढ़ महतारी के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया गया।


​इस आयोजन में प्रशासनिक और राजनीतिक अमला एक मंच पर नजर आया। मुख्य अतिथि  टंकराम वर्मा के साथ कलेक्टर, एसपी, जिला पंचायत अध्यक्ष, पूर्व विधायक केराबाई मनहर, बरमकेला जनपद अध्यक्ष सहित अनेक स्थानीय जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, पत्रकारों और स्कूली बच्चों समेत लगभग 1,000 नागरिकों ने एक साथ बैठकर योग की विभिन्न विधाओं व प्राणायाम का अभ्यास किया।


​पीएम मोदी के संदेश का वाचन और हस्ताक्षर अभियान

​कार्यक्रम के दौरान राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'स्वस्थ राष्ट्र' बनाने के संदेश का वाचन किया। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय को बधाई देते हुए जीवन में नियमित योग अपनाने का संकल्प दिलाया। इस अवसर पर योग के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से एक विशेष हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया, जिसमें मंत्री, कलेक्टर, एसपी सहित जनप्रतिनिधियों और जागरूक नागरिकों ने अपने हस्ताक्षर किए।

​योग और नृत्य का अद्भुत संगम

​इस जिला स्तरीय योग दिवस का मुख्य आकर्षण बच्चों द्वारा नृत्य शैली में किया गया योग प्रदर्शन रहा। मुख्य सत्र के बाद, योग शिक्षिका (व्यायाम शिक्षिका) ममता साहू के मार्गदर्शन में सिम्मी योगा एंड फिटनेस सेंटर, योगाचार्य सुभाष पटेल की टीम और सरिया की योगिनी अकादमी के बच्चों ने 'श्रीरामचंद्र' सहित अन्य भक्ति गीतों पर सामूहिक योग मुद्राओं का विहंगम प्रदर्शन किया। इसके साथ ही, साक्षी पटेल ने एकल गीत पर योग की अत्यंत कठिन मुद्राओं को सहजता से प्रस्तुत कर मुख्य अतिथि और उपस्थित जनसमुदाय की खूब वाहवाही बटोरी।

​अनुशासित भागीदारी और प्रेरक पल

​आयोजन को सफल बनाने में भारत स्काउट, जूनियर रेडक्रॉस और एनएसएस (NSS) के सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई। स्कूल और कॉलेज के इन छात्र-छात्राओं की अनुशासित और ऊर्जावान भागीदारी ने योग के संदेश को समाज के हर वर्ग तक पहुँचाया।

​कार्यक्रम में एक भावुक और प्रेरक पल तब देखने को मिला जब मंच से हजार से अधिक नागरिकों को योग का अभ्यास करा रहीं मुख्य योग शिक्षिका ममता साहू के माता-पिता और रिश्तेदार भी इस शिविर में शामिल हुए। अपनी बेटी के इस बेहतरीन नेतृत्व और राज्य स्तर पर मिल रहे सम्मान को देखकर उनके माता-पिता भावविभोर हो उठे। यह अनूठा आयोजन सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के नागरिकों को स्वास्थ्य और एकजुटता का एक अमूल्य संदेश दे गया।

मौसम भवन में मनाया गया 12वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस, ‘स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग’ थीम पर दिया गया जोर

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नई दिल्ली- पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) और भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आज मौसम भवन, नई दिल्ली में 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन किया। “स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग” (Yoga for Healthy Aging) थीम पर आयोजित इस कार्यक्रम में मंत्रालय और विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा योग के माध्यम से समग्र स्वास्थ्य और कल्याण का संदेश दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के योग दिवस संबोधन के लाइव प्रसारण के साथ हुई। इसके बाद विशेषज्ञ योग प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में कॉमन योग प्रोटोकॉल का अभ्यास कराया गया, जिसमें विभिन्न योगासन और प्राणायाम तकनीकों का प्रदर्शन एवं अभ्यास शामिल था।

इस अवसर पर भारत मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने अपने संबोधन में योग को केवल परंपरा नहीं, बल्कि दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि योग को नियमित दिनचर्या में शामिल कर हम स्वस्थ और खुशहाल जीवन जी सकते हैं। उन्होंने कहा कि स्वस्थ व्यक्ति से स्वस्थ समाज और स्वस्थ समाज से स्वस्थ राष्ट्र तथा विश्व का निर्माण संभव है।

वहीं, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्रीनिवास राव गंगी रेड्डी ने योग के वैज्ञानिक और दार्शनिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में अत्यधिक जानकारी और निरंतर विचलनों के बीच मनुष्य को सजगता (माइंडफुलनेस) और स्पष्ट सोच की आवश्यकता है। योग व्यक्ति को आत्मबोध, मानसिक स्पष्टता और भावनात्मक संतुलन प्रदान करता है, जिससे कार्यक्षमता और पारस्परिक संबंधों में सुधार होता है।

श्रीनिवास राव गंगी रेड्डी ने भक्ति योग, ज्ञान योग, कर्म योग और राजयोग जैसे पारंपरिक योग मार्गों का उल्लेख करते हुए जीवन में संतुलन और अनुशासन अपनाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के समापन पर मंत्रालय और आईएमडी के अधिकारियों ने योग प्रशिक्षकों को सम्मानित किया तथा स्वास्थ्य और कल्याण के क्षेत्र में उनके योगदान की सराहना की।

यह आयोजन पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और भारत मौसम विज्ञान विभाग की उस प्रतिबद्धता का प्रतीक रहा, जिसके तहत योग की प्राचीन परंपरा को अपनाकर एक स्वस्थ, एकाग्र और अधिक उत्पादक कार्यस्थल के निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है।

कोलकाता से प्रधानमंत्री का योग दिवस संदेश: योग को जीवनशैली बनाने का आह्वान, ‘योग 365’ पहल की सराहना

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कोलकाता- अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर कोलकाता में आयोजित भव्य कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योग को मानवता को जोड़ने वाली शक्ति बताते हुए इसे केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि जीवनशैली का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि 21 जून आज विश्व का सबसे बड़ा सामूहिक उत्सव बन चुका है और भारत से लेकर दुनिया के विभिन्न देशों तक योग की अद्भुत तस्वीरें देखने को मिल रही हैं।


प्रधानमंत्री ने कहा कि हिमालय से हिंद महासागर तक, पूर्व में बंगाल से पश्चिम में सौराष्ट्र तक पूरा देश योग की ऊर्जा से ओतप्रोत दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा, “योग सबको जोड़ता है, योग सबको साथ लाता है।” इस अवसर पर उन्होंने देशवासियों और विश्व समुदाय को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने कोलकाता में चलाए गए स्वच्छता अभियान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि योग दिवस से पहले शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए नागरिकों ने जिस तरह श्रमदान और जनभागीदारी दिखाई है, वह पूरे देश के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है।

बंगाल की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने भगवान रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद, महर्षि अरविंद और लाहिड़ी महाशय जैसे महान संतों और योगियों को याद किया। उन्होंने कहा कि इसी धरती से योग और आध्यात्मिक चेतना का संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचा। गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर और महर्षि अरविंद के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने योग को मानवीय एकता और जीवन के समग्र विकास का आधार बताया।

इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की थीम ‘Yoga for Healthy Ageing’ पर विशेष जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि योग व्यक्ति को उम्र बढ़ने के बावजूद स्वस्थ, ऊर्जावान और सक्रिय बनाए रखने में मदद करता है। उन्होंने कहा कि योग के माध्यम से व्यक्ति शारीरिक लचीलेपन, मानसिक संतुलन और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से बचाव की दिशा में निरंतर प्रगति कर सकता है।

प्रधानमंत्री ने भगवद्गीता के श्लोक “युक्त आहार विहारस्य...” का उल्लेख करते हुए कहा कि संतुलित भोजन, संतुलित दिनचर्या, उचित कर्म और पर्याप्त विश्राम ही योग का मूल आधार हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवन की भागदौड़ और असंतुलन के बीच योग लोगों को संतुलित और स्वस्थ जीवन जीने की कला सिखाता है।

उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि मानसिक शांति और विश्व शांति का भी मार्ग प्रशस्त करता है। योग व्यक्ति को सही और गलत के बीच अंतर समझने की क्षमता देता है, जिससे समाज और विश्व में सकारात्मक बदलाव संभव होता है।

प्रधानमंत्री ने लोगों से संकल्प लेने का आग्रह किया कि वे योग को केवल एक दिवस या कार्यक्रम तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपने जीवन, परिवार और आने वाली पीढ़ियों का अभिन्न हिस्सा बनाएं।

उन्होंने बताया कि इस दिशा में केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई ‘योग 365’ पहल के तहत 100 दिवसीय ऑनलाइन योग कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें 130 देशों के 30 लाख से अधिक लोगों ने भाग लेकर अभूतपूर्व जनभागीदारी का परिचय दिया।

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वस्थ समाज ही सक्षम, समृद्ध और आत्मविश्वासी राष्ट्र का निर्माण करता है। उन्होंने सभी के सुख और निरोगी जीवन की कामना करते हुए “सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः” का संदेश दिया और एक बार फिर अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की शुभकामनाएं दीं।

‘योग दुनिया का सबसे बड़ा कम्युनिटी सेलिब्रेशन, इसे जिंदगी का हिस्सा बनाएं’ - पीएम मोदी

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 International Yoga Day 2026: 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री Narendra Modi ने रविवार को Kolkata के ऐतिहासिक Red Road पर आयोजित मुख्य कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान हजारों लोगों ने प्रधानमंत्री के साथ सामूहिक योगाभ्यास किया।


कॉमन योग प्रोटोकॉल सेशन में भाग लेते हुए पीएम मोदी ने देश और दुनिया को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि “योग आज दुनिया का सबसे बड़ा कम्युनिटी सेलिब्रेशन बन चुका है, जो अलग-अलग देशों और संस्कृतियों के लोगों को एक साथ जोड़ रहा है।”

इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 की थीम “हेल्दी एजिंग के लिए योग” रखी गई है, जिसका उद्देश्य शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन, भावनात्मक मजबूती और स्वस्थ उम्र बढ़ने में योग की भूमिका को बढ़ावा देना है।

2015 में हुई थी अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुरुआत

प्रधानमंत्री ने बताया कि 2015 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly) ने भारत के प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया था। इसके बाद से पीएम मोदी नई दिल्ली, चंडीगढ़, लखनऊ, मैसूर, न्यूयॉर्क, श्रीनगर और विशाखापत्तनम समेत कई शहरों से योग दिवस समारोह का नेतृत्व कर चुके हैं।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस वर्ष दुनिया भर में करीब 2,500 स्थानों पर योग दिवस कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिसमें 210 से अधिक भारतीय मिशन और पोस्ट हिस्सा ले रहे हैं।

योग दुनिया का सबसे बड़ा सामूहिक उत्सव बना

पीएम मोदी ने कहा कि 21 जून, जो वर्ष का सबसे लंबा दिन माना जाता है, अब योग दिवस के कारण दुनिया भर में एक बड़े सामूहिक उत्सव के रूप में पहचाना जाने लगा है।

उन्होंने कहा, “योग लोगों को एक-दूसरे से जोड़ता है। यह केवल भारत की परंपरा नहीं, बल्कि पूरी मानवता के कल्याण का माध्यम बन चुका है।”

योग से जीवन बेहतर होता है

प्रधानमंत्री ने कोलकाता के नागरिकों को ‘स्वच्छता से स्वागत’ अभियान को सफल बनाने के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य, सकारात्मक ऊर्जा और बेहतर जीवनशैली का आधार है।

पीएम मोदी ने कहा, “योग किसी एक आयु वर्ग तक सीमित नहीं है। यह मानव जीवन को ऊर्जा, संतुलन और आत्मविश्वास प्रदान करता है।”

योग को जीवनशैली का हिस्सा बनाएं

‘हेल्दी एजिंग’ पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि बढ़ती उम्र कभी भी इंसान की क्षमता को सीमित नहीं करनी चाहिए।

उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि 40 साल की उम्र में हम 20 साल की उम्र से ज्यादा लचीले हों और 50 साल की उम्र में 30 साल की उम्र से ज्यादा ऊर्जावान हों।”

पीएम मोदी ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि योग को केवल एक दिन या विशेष अवसर तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाएं।

ड्रोन दीदी अभियान से कृषि क्षेत्र में तकनीक और मातृशक्ति का होगा सशक्त संगम : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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ड्रोन पायलट प्रशिक्षण हेतु महिला कृषकों का दल जशपुर से रायपुर रवाना

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दिखाई हरी झंडी, दी शुभकामनाएं

रायपुर- कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने तथा महिला किसानों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत ‘ड्रोन दीदी अभियान’ अंतर्गत महिला कृषकों का 5 सदस्यीय दल ड्रोन पायलट प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए रायपुर रवाना हुआ। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज कुनकुरी स्थित कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र परिसर से दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया तथा सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कृषि क्षेत्र में तकनीक का समावेश समय की आवश्यकता है और ड्रोन तकनीक खेती-किसानी को अधिक वैज्ञानिक, प्रभावी और लाभकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि ‘ड्रोन दीदी अभियान’ केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण, आधुनिक कृषि और ग्रामीण आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी मातृशक्ति आज हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परिचय दे रही है। कृषि क्षेत्र में भी महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण प्राप्त कर महिलाएं न केवल स्वयं आत्मनिर्भर बनेंगी, बल्कि अपने गांवों और क्षेत्रों के अन्य किसानों को भी नई तकनीकों से जोड़ने में अग्रणी भूमिका निभाएंगी।

खेती को मिलेगा आधुनिक तकनीक का लाभ

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ड्रोन तकनीक के माध्यम से फसलों पर उर्वरक एवं कीटनाशकों का छिड़काव कम समय में अधिक सटीकता और प्रभावशीलता के साथ किया जा सकता है। इससे समय, श्रम और लागत की बचत होने के साथ-साथ कृषि उत्पादन की गुणवत्ता और उत्पादकता में भी वृद्धि होती है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कृषि को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। ड्रोन जैसी नवीन तकनीकों के उपयोग से खेती अधिक सुविधाजनक, टिकाऊ और लाभकारी बन रही है।

महिलाओं को मिलेगा तकनीकी प्रशिक्षण और स्वरोजगार का अवसर

ड्रोन दीदी अभियान के अंतर्गत महिला किसानों को ड्रोन संचालन, रखरखाव, सुरक्षा मानकों तथा कृषि कार्यों में ड्रोन के उपयोग संबंधी व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद ये महिलाएं ड्रोन पायलट के रूप में कार्य करने के साथ-साथ अन्य किसानों को भी तकनीक आधारित कृषि पद्धतियों के उपयोग के लिए प्रेरित करेंगी।

इस पहल से महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीक आधारित कृषि सेवाओं का विस्तार होगा। प्रशिक्षित महिलाएं कृषि कार्यों में ड्रोन सेवाएं उपलब्ध कराकर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के बिना ग्रामीण विकास और विकसित कृषि व्यवस्था की कल्पना अधूरी है। ड्रोन दीदी अभियान महिला सशक्तिकरण, आधुनिक कृषि और ग्रामीण आजीविका संवर्धन के क्षेत्र में एक प्रेरणादायी मॉडल के रूप में उभर रहा है।

उल्लेखनीय है कि ‘ड्रोन दीदी अभियान’ का उद्देश्य महिलाओं को तकनीकी रूप से दक्ष बनाकर उन्हें कृषि क्षेत्र में नई पहचान दिलाना है। यह पहल ‘तकनीक से सशक्त महिला, समृद्ध किसान और विकसित कृषि’ के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा और मुख्यमंत्री के सलाहकार आर. कृष्णा दास ने किया सीएम हेल्पलाइन 1076 एवं सेवा सेतु की कार्यप्रणाली का विस्तृत अवलोकन

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सुशासन, पारदर्शिता और जनसुविधा की दिशा में बताया महत्वपूर्ण पहल

कहा -  तकनीक के माध्यम से शासन को नागरिकों के और निकट ला रही है राज्य सरकार

रायपुर- मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा एवं मुख्यमंत्री के सलाहकार आर. कृष्णा दास ने आज सीएम हेल्पलाइन 1076 तथा सेवा सेतु की कार्यप्रणाली का विस्तृत अवलोकन किया। इस दौरान सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव राहुल भगत, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव एवं जनसंपर्क आयुक्त रजत बंसल, सुशासन एवं अभिसरण विभाग के संयुक्त सचिव मयंक अग्रवाल,सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे। अधिकारियों ने दोनों डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से नागरिकों को उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं, शिकायत निवारण व्यवस्था तथा तकनीक आधारित जनसुविधाओं की विस्तार से जानकारी दी।

मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रशासन को अधिक संवेदनशील, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए तकनीक का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। सीएम हेल्पलाइन 1076 और सेवा सेतु इसी सोच के सशक्त उदाहरण हैं, जो शासन और नागरिकों के बीच संवाद तथा सेवाओं की उपलब्धता को सरल और प्रभावी बना रहे हैं।

अवलोकन के दौरान मुख्यमंत्री के सलाहकार आर. कृष्णा दास ने स्वयं सीएम हेल्पलाइन पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया का प्रत्यक्ष अनुभव लिया तथा सेंटर की कार्यप्रणाली, शिकायत पंजीयन की प्रक्रिया और समाधान की व्यवस्था का जायजा लिया।  उन्होंने कहा कि नागरिकों की समस्याओं को गंभीरता से सुनने और उनके समाधान के लिए विकसित यह व्यवस्था शासन की संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव राहुल भगत ने बताया कि सीएम हेल्पलाइन 1076 आम नागरिकों को अपनी समस्याएं और शिकायतें सीधे शासन तक पहुंचाने का सुलभ माध्यम उपलब्ध करा रही है। हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त शिकायतों के समयबद्ध निराकरण के लिए एक सुव्यवस्थित व्यवस्था विकसित की गई है, जिससे शिकायतों की निगरानी, समीक्षा और समाधान की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संचालित की जा रही है। शिकायत दर्ज होने से लेकर उसके समाधान तक प्रत्येक चरण को तकनीक आधारित प्रणाली से जोड़ा गया है, जिससे जवाबदेही सुनिश्चित हो रही है।

सुशासन एवं अभिसरण विभाग के संयुक्त सचिव मयंक अग्रवाल ने बताया कि सीएम हेल्पलाइन केवल शिकायत दर्ज करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह नागरिकों की समस्याओं के त्वरित और प्रभावी समाधान का सशक्त मंच बनकर उभर रही है। शिकायतों के निराकरण के लिए बहुस्तरीय व्यवस्था बनाई गई है, जिससे विभिन्न स्तरों पर जिम्मेदारी तय होती है और समस्या के समाधान की निरंतर निगरानी की जाती है। उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था का उद्देश्य नागरिकों को राहत प्रदान करना और शासन के प्रति उनका विश्वास मजबूत करना है।

अधिकारियों ने सेवा सेतु की जानकारी देते हुए बताया कि यह राज्य सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है, जिसका उद्देश्य विभिन्न शासकीय सेवाओं को नागरिकों तक डिजिटल माध्यम से पहुंचाना है। इसके माध्यम से नागरिक अनेक आवश्यक प्रमाण-पत्रों एवं सेवाओं के लिए घर बैठे आवेदन कर सकते हैं। सेवा सेतु के जरिए शासकीय प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जा रहा है, जिससे लोगों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

अधिकारियों ने जानकारी दी कि सेवा सेतु के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं में लगातार विस्तार किया जा रहा है। नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विभिन्न सेवाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा रहा है तथा उन्हें मोबाइल और अन्य ऑनलाइन माध्यमों से भी सुलभ बनाया जा रहा है। इससे ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को भी शासन की सेवाओं का लाभ आसानी से मिल रहा है। भविष्य में और अधिक सेवाओं को इस प्लेटफॉर्म से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा एवं मुख्यमंत्री के सलाहकार आर. कृष्णा दास ने सीएम हेल्पलाइन 1076 तथा सेवा सेतु की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि ये पहल मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सुशासन आधारित विकास दृष्टि को साकार कर रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और तकनीक के उपयोग से नागरिकों का शासन पर विश्वास और मजबूत होगा। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि नागरिक सेवाओं के डिजिटलीकरण और शिकायतों के प्रभावी निराकरण की दिशा में किया जा रहा यह कार्य विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

जैविक खेती, आधुनिक तकनीक और बेहतर बाजार व्यवस्था से बढ़ेगी किसानों की आय : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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कुनकुरी में जैविक किसान मेला एवं प्राकृतिक खेती कार्यशाला में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

औषधीय एवं सुगंधित फसलों के विपणन हेतु हुआ महत्वपूर्ण अनुबंध, किसानों को मिलेगा बेहतर बाजार

रायपुर- किसानों की समृद्धि ही विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ की आधारशिला है। आधुनिक कृषि तकनीकों, बेहतर फसल चयन, प्राकृतिक एवं जैविक खेती तथा सुदृढ़ बाजार व्यवस्था के माध्यम से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। कृषि केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसानों को समृद्ध बनाए बिना विकास का लक्ष्य पूर्ण नहीं हो सकता। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज जशपुर जिले के कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, कुनकुरी में आयोजित जैविक किसान मेला एवं खेत बचाओ अभियान अंतर्गत प्राकृतिक एवं जैविक खेती कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह बात कही। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से भूमि की उर्वरता तथा मानव स्वास्थ्य दोनों प्रभावित होते हैं। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक एवं जैविक खेती को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि पूर्व में गोबर खाद, ढैंचा एवं अन्य हरी खादों के उपयोग से खेती अधिक टिकाऊ और भूमि अधिक उपजाऊ रहती थी। आज आवश्यकता है कि परंपरागत ज्ञान और आधुनिक तकनीक का समन्वय कर कृषि को अधिक लाभकारी बनाया जाए।

उन्होंने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों और उर्वरकों के आयात पर निर्भरता को देखते हुए नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसे विकल्प किसानों के लिए उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं। इनके उपयोग से उत्पादन लागत कम होती है और मिट्टी की गुणवत्ता भी संरक्षित रहती है।

किसानों को मिला आधुनिक तकनीकों से जुड़ने का अवसर

कार्यक्रम में किसानों को प्राकृतिक खेती, जैविक कृषि, आधुनिक कृषि यंत्रों, ड्रोन तकनीक, पशुपालन, मत्स्य पालन एवं उन्नत कृषि पद्धतियों की जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री ने विभिन्न कृषि प्रदर्शनों का अवलोकन कर विशेषज्ञों से जानकारी प्राप्त की तथा किसानों से संवाद भी किया।

कार्यक्रम में ड्रोन के माध्यम से खेतों में दवा छिड़काव का लाइव प्रदर्शन आकर्षण का केंद्र रहा। किसानों ने आधुनिक कृषि तकनीकों को प्रत्यक्ष रूप से देखा और उनके उपयोग से होने वाले लाभों की जानकारी प्राप्त की। साथ ही कृषि नवाचारों, जैविक खेती, पशुपालन एवं मत्स्य पालन से संबंधित जीवंत प्रदर्शनी भी आयोजित की गई।

उत्कृष्ट किसानों का हुआ सम्मान

कार्यक्रम में आयोजित किसान प्रतियोगिता के अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सम्मानित किया। ग्राम खोंगा (मनोरा) के किसान महेश सिंह को जैविक खेती के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया। ग्राम लाखाझार के किसान सुखराम को 33 किलोग्राम वजन के कटहल उत्पादन तथा ठेठेटांगर के किसान विजय भूषण को ढाई किलोग्राम वजन के आम उत्पादन के लिए सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने स्वामित्व योजना के तहत कृषक गुप्तेश्वर को भूमि पट्टा भी प्रदान किया।

औषधीय एवं सुगंधित फसलों को मिलेगा बेहतर बाजार

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री की उपस्थिति में जिला प्रशासन जशपुर एवं सेमिना एग्रो प्राइवेट लिमिटेड के बीच औषधीय एवं सुगंधित फसलों के विपणन के लिए महत्वपूर्ण अनुबंध किया गया। इस पहल से जिले के किसानों को अपने उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध होगा तथा मूल्य संवर्धन और विपणन की नई संभावनाएं विकसित होंगी। इससे किसानों की आय में वृद्धि के साथ स्थानीय कृषि अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

किसानों की खुशहाली सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को लाभकारी बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीद रही है तथा 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदी की व्यवस्था लागू की गई है। सरकार बनने के तुरंत बाद किसानों को दो वर्षों का लंबित बोनस प्रदान किया गया तथा शून्य प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है।

बगिया दाबयुक्त सिंचाई योजना से बदलेगी खेती की तस्वीरमुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत चयनित देश की 100 प्रमुख परियोजनाओं में छत्तीसगढ़ की एकमात्र बगिया दाबयुक्त सिंचाई योजना शामिल है। लगभग 119 करोड़ रुपये की लागत वाली इस योजना से 14 गांवों के लगभग 5 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलेगी। पाइपलाइन के माध्यम से खेतों तक पानी पहुंचाने वाली इस योजना से भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता भी नहीं होगी।

उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के लिए देश के चयनित 100 जिलों में छत्तीसगढ़ के केवल तीन जिले—दंतेवाड़ा, कोरबा और जशपुर—शामिल किए गए हैं, जिससे जिले के कृषि विकास को नई गति मिलेगी।

सुशासन और डिजिटल सेवाओं से ग्रामीणों को मिल रही सुविधा

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में सुशासन को और अधिक मजबूत बनाने के लिए गुड गवर्नेंस एवं अभिसरण विभाग का गठन किया गया है। अधिकांश शासकीय कार्य अब ई-ऑफिस प्रणाली के माध्यम से संचालित हो रहे हैं तथा भ्रष्टाचार के मामलों में दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जा रही है।

उन्होंने बताया कि ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के माध्यम से 400 से अधिक नागरिक सेवाएं उपलब्ध हैं, जिनका लाभ लोग घर बैठे प्राप्त कर रहे हैं। प्रदेश की 6 हजार ग्राम पंचायतों में अटल डिजिटल सेवा केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं, जहां ग्रामीणों को बैंकिंग एवं डिजिटल सेवाएं उपलब्ध होंगी।

मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 की जानकारी देते हुए कहा कि अब नागरिक अपनी शिकायतें और समस्याएं सीधे दर्ज करा सकते हैं। 24×7 संचालित इस व्यवस्था से 42 विभागों के 8 हजार से अधिक अधिकारी जुड़े हैं और प्रत्येक शिकायत के समयबद्ध निराकरण की निगरानी की जा रही है।

कार्यक्रम में पत्थलगांव विधायक एवं सरगुजा आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष गोमती साय, जशपुर विधायक रायमुनी भगत, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल रामप्रताप सिंह, छत्तीसगढ़ राज्य अंत्यावसायी सहकारी वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष सुरेन्द्र कुमार बेसरा, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव,  नगर पालिका जशपुर के उपाध्यक्ष यशप्रतापसिंह जूदेव सहित बड़ी संख्या में किसान, जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

जशपुर वनमण्डल ने रचा इतिहास, गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ नाम

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एक दिन में 2 लाख से अधिक सीडबॉल प्रसार कर बनाया विश्व रिकॉर्ड

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति में जशपुर वनमण्डल को मिला आधिकारिक प्रमाण-पत्र

रायपुर- पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी के क्षेत्र में जशपुर वनमण्डल ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए एक ही दिन में 2 लाख से अधिक सीडबॉल के प्रसार एवं रोपण का कार्य संपादित कर गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया है। इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की राज्य प्रमुख सोनल राजेश शर्मा ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति में जशपुर वनमण्डल को आधिकारिक प्रमाण-पत्र प्रदान किया। वनमण्डल की ओर से यह प्रमाण-पत्र वनमण्डलाधिकारी शशि कुमार ने प्राप्त किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जशपुर वनमण्डल, वन विभाग तथा अभियान से जुड़े सभी नागरिकों को बधाई देते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी दायित्व नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जशपुर में संचालित “बीज गोला बनाबो, जशपुर के जंगल ला बढ़ाबो” अभियान जनभागीदारी और प्रकृति संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जब शासन, प्रशासन और समाज किसी सकारात्मक उद्देश्य के लिए एकजुट होकर कार्य करते हैं, तब असंभव प्रतीत होने वाले लक्ष्य भी सहजता से प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि न केवल जशपुर, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है तथा पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगी।

जशपुर वनमण्डल द्वारा संचालित महत्वाकांक्षी अभियान “बीज गोला बनाबो, जशपुर के जंगल ला बढ़ाबो” के तहत जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर सीडबॉल प्रसार कार्यक्रम आयोजित किया गया। अभियान का उद्देश्य प्राकृतिक वनस्पतियों के संरक्षण, जैव विविधता के संवर्धन और हरित आवरण में वृद्धि के माध्यम से पर्यावरणीय संतुलन को सुदृढ़ करना है।

अभियान की सबसे बड़ी विशेषता इसमें देखने को मिली व्यापक जनसहभागिता रही। स्थानीय ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों, विद्यार्थियों, महिला स्व-सहायता समूहों, सामाजिक संगठनों, वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों तथा आम नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई। हजारों लोगों के सहयोग से यह अभियान एक जनआंदोलन के रूप में विकसित हुआ और एक ही दिन में 2 लाख से अधिक सीडबॉल के प्रसार का नया कीर्तिमान स्थापित किया गया।

इस उपलब्धि ने जशपुर जिले को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। साथ ही यह सिद्ध किया है कि सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में बड़े और सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।

इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया ‘जश लर्न’ का जिला स्तरीय शुभारंभ

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अब फोन आधारित शिक्षण से पूरे जिले के बच्चों को मिलेगा गणित सीखने का अवसर

फरसाबहार में मिली सफलता के बाद जिले के सभी विकासखंडों में होगा विस्तार

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज जशपुर जिले में निज निवास बगिया से जशपुर जिले की अभिनव शैक्षणिक पहल ‘जश लर्न’ का जिला स्तरीय शुभारंभ किया। फरसाबहार विकासखंड में सफल पायलट प्रोजेक्ट के रूप में संचालित इस कार्यक्रम को अब जिले के सभी विकासखंडों तक विस्तारित किया जाएगा। इस पहल के माध्यम से प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों की आधारभूत गणितीय दक्षताओं को सुदृढ़ बनाने के साथ-साथ शिक्षक, पालक और विद्यार्थियों की सहभागिता से सीखने की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि शिक्षा किसी भी समाज और राष्ट्र के विकास की सबसे मजबूत आधारशिला होती है। आधुनिक तकनीक और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने का यह प्रयास अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि जब शिक्षक, पालक और विद्यार्थी एक साथ मिलकर कार्य करते हैं, तब शिक्षा के परिणाम अधिक सकारात्मक और स्थायी होते हैं।

मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि ‘जश लर्न’ कार्यक्रम बच्चों की गणितीय समझ विकसित करने, उनमें आत्मविश्वास बढ़ाने तथा सीखने के स्तर में गुणात्मक सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मुख्यमंत्री ने बच्चों से किया संवाद, पूछा— क्या-क्या सीखे हो?

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री साय ने ‘जश लर्न’ कार्यक्रम से लाभान्वित विद्यार्थियों वंदना यादव, नव्यता यादव, आयुषी तिर्की एवं कुसुम डडसेना से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने बच्चों से पूछा कि इस कार्यक्रम से उन्हें क्या सीखने को मिला और पढ़ाई में किस प्रकार लाभ हुआ।

ग्राम झारमुंडा की कक्षा पांचवीं की छात्रा नव्यता यादव ने बताया कि अब उसे 20 तक पहाड़े याद हो गए हैं और जोड़, घटाव, गुणा एवं भाग जैसे गणितीय प्रश्न आसानी से हल कर लेती है। धनपुर की छात्रा वंदना यादव ने बताया कि नियमित फोन आधारित मार्गदर्शन और अभ्यास से गणित के प्रति उसका आत्मविश्वास बढ़ा है। पहले गणित कठिन लगता था, लेकिन अब पढ़ाई में आनंद आने लगा है।

बच्चों के अनुभव सुनकर मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा में तकनीक, शिक्षक और अभिभावकों की संयुक्त सहभागिता से सीखने के बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे नवाचार बच्चों की शैक्षणिक नींव मजबूत करने के साथ-साथ उनमें आत्मविश्वास का भी विकास करते हैं।

डाइट के प्रशिक्षु छात्र-शिक्षकों को किया सम्मानित

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ‘जश लर्न’ कार्यक्रम से जुड़े डाइट जशपुर के प्रथम वर्ष के उन प्रशिक्षु छात्र-शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया, जिन्होंने मोबाइल आधारित शिक्षण के माध्यम से बच्चों की गणितीय दक्षता बढ़ाने में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

मुख्यमंत्री ने उनके प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल शिक्षा क्षेत्र में नवाचार का उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां भावी शिक्षक समाज के बच्चों के सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं।

फरसाबहार में मिले उत्साहजनक परिणाम

जिला प्रशासन जशपुर द्वारा यूथ इम्पैक्ट संस्था के सहयोग से फरसाबहार विकासखंड में ‘जश लर्न’ कार्यक्रम पायलट प्रोजेक्ट के रूप में प्रारंभ किया गया था। इसके अंतर्गत कक्षा तीसरी एवं चौथी के चयनित विद्यार्थियों को डाइट जशपुर के छात्र-अध्यापकों द्वारा नियमित रूप से मोबाइल फोन के माध्यम से शैक्षणिक सहयोग प्रदान किया गया।

बच्चों की गणितीय दक्षताओं का आकलन कर उन्हें जोड़, घटाव, गुणा एवं भाग जैसी मूलभूत अवधारणाओं में चरणबद्ध तरीके से मार्गदर्शन दिया गया। कार्यक्रम में अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई, जिससे घर पर भी बच्चों की पढ़ाई निरंतर जारी रही।

डाइट जशपुर की प्रशिक्षु छात्रा सृष्टि ने बताया कि अप्रैल 2026 से शुरू हुए इस पायलट प्रोजेक्ट के माध्यम से गणित में कमजोर बच्चों को उनके अभिभावकों की उपस्थिति में नियमित फोन कॉल कर मूलभूत गणितीय कौशल सिखाए गए। इससे बच्चों को विद्यालय के अतिरिक्त घर पर भी सीखने का अवसर मिला।

260 विद्यार्थियों को मिला लाभ, 75 प्रतिशत बच्चों ने हासिल की दक्षतापायलट प्रोजेक्ट के अंतर्गत डाइट जशपुर के 90 प्रशिक्षु छात्र-शिक्षकों ने फरसाबहार विकासखंड के 260 विद्यार्थियों को मोबाइल आधारित शिक्षण सहायता प्रदान की। कार्यक्रम के परिणाम अत्यंत सकारात्मक रहे और लगभग 75 प्रतिशत विद्यार्थियों ने जोड़, गुणा, भाग एवं अन्य मूलभूत गणितीय संक्रियाओं में दक्षता प्राप्त की। बच्चों की सीखने की गति, गणितीय समझ तथा आत्मविश्वास में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया।

अब जिले के सभी विकासखंडों में पहुंचेगा ‘जश लर्न’

पायलट प्रोजेक्ट की सफलता को देखते हुए जिला प्रशासन ने ‘जश लर्न’ कार्यक्रम को जशपुर जिले के सभी विकासखंडों में लागू करने का निर्णय लिया है। इसके लिए सभी सीएसी को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा ताकि कार्यक्रम का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।

“साथ मिलकर सीखें, आगे बढ़ें” की भावना पर आधारित यह पहल जशपुर जिले में शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक और नवाचारपूर्ण मॉडल के रूप में उभर रही है। कार्यक्रम के विस्तार से जिले के हजारों विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा तथा उनकी आधारभूत शैक्षणिक दक्षताओं को मजबूत कर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लक्ष्य को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, कलेक्टर रोहित व्यास सहित शिक्षा विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, डाइट जशपुर के प्रशिक्षु विद्यार्थी, पालकगण तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए बड़ा कदम: ‘निर्भय चेतना’ अभियान की शुरुआत, देशभर में प्रशिक्षित होंगे 17.5 लाख जनप्रतिनिधि

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नई दिल्ली- महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और समान भागीदारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पंचायती राज मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए ‘निर्भय चेतना’ कार्यक्रम की शुरुआत की है। 17 से 19 जून 2026 तक नई दिल्ली में आयोजित तीन दिवसीय ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स (ToT) कार्यक्रम के साथ इस राष्ट्रीय अभियान का शुभारंभ किया गया।

यह पहल निर्भया फंड परियोजना के तहत शुरू की गई है और इसे दुनिया का अपनी तरह का सबसे बड़ा अभियान माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य पुरुष जनप्रतिनिधियों को महिलाओं से जुड़े मुद्दों, लैंगिक समानता और महिला सुरक्षा के प्रति संवेदनशील बनाना है।

17.5 लाख पुरुष जनप्रतिनिधियों तक पहुंचेगा अभियान

कार्यक्रम के तहत देशभर में राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर 28,500 मास्टर ट्रेनर्स तैयार किए जाएंगे, जो आगे चलकर 17.5 लाख से अधिक पुरुष निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को प्रशिक्षण देंगे। इसका उद्देश्य पंचायत स्तर पर महिलाओं के अधिकारों, नेतृत्व, सुरक्षा और सम्मान को लेकर सकारात्मक सोच विकसित करना है।

छह राज्यों से शामिल हुए मास्टर ट्रेनर्स

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के पहले चरण में असम, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और उत्तराखंड के लगभग 40 मास्टर ट्रेनर्स ने भाग लिया। ये प्रशिक्षक आगे अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी इस अभियान को विस्तार देंगे।

‘विकसित भारत’ के लिए महिलाओं की भागीदारी जरूरी

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और समान भागीदारी के बिना विकसित भारत का सपना पूरा नहीं हो सकता। उन्होंने पंचायतों को सामाजिक परिवर्तन का सबसे मजबूत माध्यम बताते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर सोच और व्यवहार में बदलाव लाने में पंचायतों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

वहीं, मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव सुशील कुमार लोहानी ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से महिलाओं के अधिकारों और सम्मान के प्रति जवाबदेह नेतृत्व विकसित करने का आह्वान किया।

प्रशिक्षण में क्या सिखाया गया?

तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में विशेषज्ञ सत्र, समूह चर्चा, केस स्टडी और अनुभव आधारित शिक्षण गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को लैंगिक समानता, सकारात्मक पुरुषत्व (Positive Masculinity), सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती देने और महिला सशक्तिकरण जैसे विषयों पर प्रशिक्षित किया गया।

‘निर्भय रहो’ पहल का हिस्सा है ‘निर्भय चेतना’

‘निर्भय चेतना’ केंद्र सरकार की ‘निर्भय रहो’ पहल का एक प्रमुख हिस्सा है, जिसमें तीन महत्वपूर्ण घटक शामिल हैं:

  • निर्भय नेत्री – महिला जनप्रतिनिधियों के लिए नेतृत्व और कानूनी जागरूकता प्रशिक्षण।

  • निर्भय चेतना – पुरुष जनप्रतिनिधियों को महिलाओं की सुरक्षा और लैंगिक समानता के प्रति संवेदनशील बनाना।

  • निर्भय दृष्टि – ग्रामीण क्षेत्रों में रणनीतिक स्थानों पर CCTV कैमरे लगाकर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना।

मुख्य बातें

▪️ महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए ‘निर्भय चेतना’ अभियान शुरू।
▪️ देशभर में 17.5 लाख पुरुष जनप्रतिनिधियों को दिया जाएगा प्रशिक्षण।
▪️ 28,500 मास्टर ट्रेनर्स तैयार करने का लक्ष्य।
▪️ पहले चरण में 6 राज्यों के 40 प्रशिक्षकों ने लिया हिस्सा।
▪️ पंचायतों को बनाया जाएगा लैंगिक समानता और महिला सुरक्षा का केंद्र।


MIFF 2026 में ‘एलिस इन वंडरलैंड’ की खास स्क्रीनिंग ने जगाई पुरानी यादें

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मुंबई में आयोजित 19वें मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (MIFF) 2026 में दर्शकों को एक अनोखा और यादगार अनुभव मिला, जब विश्व प्रसिद्ध एनिमेटेड क्लासिक फिल्म ‘Alice in Wonderland’ की विशेष स्क्रीनिंग आयोजित की गई। इस खास प्रस्तुति ने दर्शकों को कल्पना, रोमांच और बचपन की यादों की जादुई दुनिया में पहुंचा दिया।

बड़े पर्दे पर फिर जीवंत हुई वंडरलैंड की दुनिया

प्रसिद्ध लेखक लुईस कैरोल के चर्चित उपन्यास Alice’s Adventures in Wonderland पर आधारित इस फिल्म का निर्देशन विल्फ्रेड जैक्सन, क्लाइड जेरोनिमी और हैमिल्टन लुस्के ने किया था। यह फिल्म एनीमेशन जगत की सबसे प्रतिष्ठित और कालजयी कृतियों में गिनी जाती है।

फिल्म में छोटी बच्ची एलिस की कहानी दिखाई गई है, जो एक रहस्यमयी और कल्पनाशील दुनिया में प्रवेश करती है। वहां उसकी मुलाकात बात करने वाले फूलों, शरारती चेशायर कैट, हमेशा देर से आने वाले व्हाइट रैबिट और गुस्सैल क्वीन ऑफ हार्ट्स जैसे अनोखे किरदारों से होती है।

संगीत और रंगों का अद्भुत संगम

फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसका मनमोहक संगीत और रंगीन दृश्य हैं। The Unbirthday Song और Golden Afternoon जैसे लोकप्रिय गीत आज भी दर्शकों के बीच बेहद पसंद किए जाते हैं। संगीत और एनीमेशन का यह मेल फिल्म को एक जादुई अनुभव में बदल देता है।

सात दशक बाद भी बरकरार है जादू

अपनी मूल रिलीज़ के 70 वर्षों से अधिक समय बाद भी ‘Alice in Wonderland’ दुनियाभर के दर्शकों को आकर्षित कर रही है। कल्पना, जिज्ञासा और सपनों की शक्ति को दर्शाने वाली यह फिल्म बच्चों और बड़ों दोनों के दिलों में खास जगह रखती है।

MIFF 2026 की शान बनी क्लासिक फिल्म

ऑस्कर विजेता शॉर्ट फिल्मों की स्क्रीनिंग और अंतरराष्ट्रीय फिल्मकारों की मास्टरक्लास जैसी गतिविधियों के बीच Alice in Wonderland की प्रस्तुति ने MIFF 2026 के कार्यक्रम को और भी खास बना दिया। यह स्क्रीनिंग दर्शकों को याद दिलाती है कि बेहतरीन कहानियां और शानदार एनीमेशन समय की सीमाओं से परे होते हैं।

मुख्य बातें

  • MIFF 2026 में ‘Alice in Wonderland’ की विशेष स्क्रीनिंग।

  • दर्शकों को बड़े पर्दे पर क्लासिक एनीमेशन देखने का अवसर।

  • लुईस कैरोल के प्रसिद्ध उपन्यास पर आधारित है फिल्म।

  • 70 साल बाद भी दुनियाभर में बरकरार है फिल्म का आकर्षण।

  • MIFF 2026 के सबसे खास आकर्षणों में शामिल रही स्क्रीनिंग।


मध्य प्रदेश में ‘हाउसिंग फॉर ऑल’ को बड़ी ताकत: 80 हजार से अधिक परिवारों को मिला पीएम आवास योजना का लाभ

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मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना–शहरी (PMAY-U) के तहत आज एक ऐतिहासिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इंदौर जिले के सांवेर में आयोजित इस कार्यक्रम में केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में 80 हजार से अधिक परिवारों को आवासीय लाभ प्रदान किए गए।

कार्यक्रम में राज्य के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।

42 हजार से अधिक परिवारों को स्वीकृति पत्र

प्रधानमंत्री आवास योजना–शहरी 2.0 के तहत 42 हजार से अधिक पात्र हितग्राहियों को आवास स्वीकृति पत्र वितरित किए गए। इसके लिए सरकार द्वारा लगभग 1,050 करोड़ रुपये की सब्सिडी प्रदान की जा रही है। वहीं, राज्य के विभिन्न जिलों में 38 हजार परिवारों ने अपने नए पक्के मकानों में गृह प्रवेश किया।

‘हर घर सम्मान, सुरक्षा और उम्मीद का प्रतीक’

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने लाभार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि नया घर केवल चार दीवारें नहीं, बल्कि परिवारों के लिए सम्मान, सुरक्षा और बेहतर भविष्य की उम्मीद का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ‘सबके लिए आवास’ के संकल्प को पूरा करने के लिए लगातार काम कर रही है।

आवास योजना के क्रियान्वयन में अग्रणी है मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश प्रधानमंत्री आवास योजना के सफल क्रियान्वयन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। PMAY-U और PMAY-U 2.0 के तहत राज्य में अब तक 10.39 लाख से अधिक आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं, जबकि 9.08 लाख आवासों का निर्माण पूरा हो चुका है।

महिलाओं को भी मिल रहा सशक्तिकरण

योजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि मकान का स्वामित्व महिला सदस्य के नाम या संयुक्त स्वामित्व में दिया जाता है। इससे महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिल रहा है।

1 करोड़ परिवारों के आवासीय सपनों को मिलेगा सहारा

PMAY-U 2.0 के तहत केंद्र सरकार देशभर के 1 करोड़ अतिरिक्त EWS, LIG और MIG परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराने के लिए वित्तीय सहायता दे रही है। पात्र परिवारों को शहरी क्षेत्रों में घर बनाने, खरीदने या किराए पर लेने के लिए ₹2.5 लाख तक की सहायता प्रदान की जा रही है।

मुख्य बातें

  • मध्य प्रदेश में 80 हजार से अधिक परिवारों को PMAY-U का लाभ।

  • 42 हजार से अधिक हितग्राहियों को आवास स्वीकृति पत्र वितरित।

  • ₹1,050 करोड़ की सब्सिडी का प्रावधान।

  • 38 हजार परिवारों ने नए पक्के घरों में किया गृह प्रवेश।

  • राज्य में अब तक 10.39 लाख आवास स्वीकृत, 9.08 लाख पूर्ण।

  • महिलाओं के नाम या संयुक्त स्वामित्व में दिए जा रहे घर।


कोल्हापुर में अमित शाह का संबोधन: सांस्कृतिक पुनर्जागरण और विकास के नए युग की शुरुआत

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केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज महाराष्ट्र के कोल्हापुर में आयोजित ‘धन्यवाद सभा’ को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया। इस अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।


अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने कई ऐसे कार्य पूरे किए हैं जिन्हें कभी असंभव माना जाता था। उन्होंने कहा कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम का पुनर्विकास तथा सोमनाथ मंदिर का स्वर्ण अलंकरण भारत की सांस्कृतिक विरासत के पुनर्जागरण के प्रतीक हैं।

अंबाबाई महालक्ष्मी मंदिर कॉरिडोर को मिली नई गति

अमित शाह ने कहा कि अब कोल्हापुर स्थित माता अंबाबाई महालक्ष्मी मंदिर कॉरिडोर के निर्माण कार्य की शुरुआत भी इसी सांस्कृतिक पुनर्जागरण का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि “विकास भी, विरासत भी” के मंत्र के साथ देशभर में धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों का विकास किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा लगभग 1,500 करोड़ रुपये की लागत से अंबाबाई महालक्ष्मी मंदिर और उसके आसपास के क्षेत्र का व्यापक पुनर्विकास किया जा रहा है। यह परियोजना 28 हजार वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में विकसित की जाएगी।

आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होगा मंदिर परिसर

परियोजना के तहत मंदिर परिसर में AI आधारित सुरक्षा प्रणाली, LED लाइटिंग, हेरिटेज वॉक, लाइट एंड साउंड शो, बहुउद्देश्यीय सभागार, अन्नछत्र, पुलिस स्टेशन और श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। साथ ही आसपास स्थित 41 छोटे-बड़े प्राचीन मंदिरों के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

मोदी सरकार के 12 वर्षों की उपलब्धियां गिनाईं

अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देश के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने का नया रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में ये 12 वर्ष विकास, सांस्कृतिक जागरण, राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा के रूप में याद किए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने ग्रामीण विकास, शहरी विकास, कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने, सेमीकंडक्टर, क्वांटम इंजीनियरिंग, डेटा सेंटर और नई तकनीकों के क्षेत्र में भारत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का काम किया है। साथ ही चंद्रयान-3 की सफलता और चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर ‘शिव शक्ति पॉइंट’ की स्थापना को भारत के गौरव का प्रतीक बताया।

मुख्य बातें

  • कोल्हापुर में अमित शाह ने ‘धन्यवाद सभा’ को किया संबोधित।

  • अंबाबाई महालक्ष्मी मंदिर कॉरिडोर परियोजना को बताया सांस्कृतिक पुनर्जागरण का हिस्सा।

  • ₹1,500 करोड़ की लागत से होगा मंदिर और आसपास के क्षेत्र का विकास।

  • मंदिर परिसर में आधुनिक सुविधाओं और हेरिटेज संरक्षण पर विशेष जोर।

  • मोदी सरकार के 12 वर्षों की उपलब्धियों और सांस्कृतिक विरासत संरक्षण का उल्लेख।


16 दवाओं पर केंद्र सरकार का बड़ा प्रहार, तुरंत लगा बैन

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 नई दिल्ली। Ministry of Health and Family Welfare ने बड़ा फैसला लेते हुए 16 फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन (FDC) दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इस संबंध में मंत्रालय ने Supreme Court of India के निर्देशों के बाद अधिसूचना जारी की है।


सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हुई कार्रवाई
यह फैसला सुप्रीम Court के उस निर्देश के बाद लिया गया, जिसमें देशभर में उपलब्ध FDC दवाओं की वैज्ञानिक समीक्षा करने को कहा गया था। इसके बाद ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (DTAB) ने विशेषज्ञ समिति गठित कर दवाओं की जांच कराई।

वैज्ञानिक जांच में दवाएं पाई गईं जोखिमपूर्ण
मंत्रालय के अनुसार विशेषज्ञ समिति की जांच में इन 16 दवाओं का चिकित्सीय औचित्य नहीं मिला। रिपोर्ट में कहा गया कि इन दवाओं से होने वाले संभावित खतरे, इनके फायदे से कहीं अधिक हैं।

त्वचा रोग, दर्द और एंटीबायोटिक दवाएं भी शामिल
प्रतिबंधित दवाओं की सूची में त्वचा रोगों के इलाज, दर्द निवारक, ऐंठनरोधी और एंटीबायोटिक आधारित कई दवाएं शामिल हैं, जिनके इस्तेमाल पर अब रोक लगा दी गई है।

सुरक्षित दवाओं की उपलब्धता पर सरकार का फोकस
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि यह कदम जनता को सुरक्षित, प्रभावी और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित दवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में उठाया गया है। इससे पहले भी कई FDC दवाओं पर कार्रवाई की जा चुकी है।

राज्यों को दिए सख्त निर्देश
देशभर में इस आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। सभी राज्य औषधि नियंत्रकों, नियामक एजेंसियों और प्रवर्तन अधिकारियों को सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

दवा कंपनियों को चेतावनी
मंत्रालय ने दवा निर्माताओं, आयातकों और वितरकों को कानून का पालन करने और जरूरी सुधारात्मक कदम उठाने की सलाह दी है।

मरीजों की सुरक्षा के लिए बड़ा कदम
सरकार का कहना है कि यह फैसला मरीजों की सुरक्षा और साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

वैज्ञानिक खेती की ओर बढ़े किसान, नैनो उर्वरकों से बढ़ी पैदावार

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन में कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों और नवाचारों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे किसानों को कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के अवसर मिल रहे हैं। किसानों को वैज्ञानिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है तथा नैनो डीएपी और नैनो यूरिया जैसे आधुनिक उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। संतुलित पोषण, कम लागत और बेहतर कृषि उत्पादकता की दिशा में यह पहल किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध हो रही है।


कोरबा जिले के ग्राम खैरभवना निवासी कृषक रमेश सिंह कंवर इसकी सफलता का एक प्रेरणादायक उदाहरण हैं। लंबे समय से खेती-किसानी से जुड़े श्री कंवर अपनी लगभग डेढ़ एकड़ कृषि भूमि में धान की खेती करते हैं। खरीफ सीजन की तैयारियों के तहत वे आज सहकारी समिति कनबेरी पहुंचे, जहां उन्होंने अन्य कृषि आदान सामग्री के साथ नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया भी प्राप्त किया।

कंवर बताते हैं कि वे पिछले दो वर्षों से नैनो उर्वरकों का उपयोग कर रहे हैं। प्रारंभ में उन्होंने परीक्षण के तौर पर इसका प्रयोग किया था, लेकिन सकारात्मक परिणाम मिलने के बाद अब वे प्रत्येक वर्ष नैनो डीएपी और नैनो यूरिया का उपयोग कर रहे हैं। उनका कहना है कि नैनो उर्वरकों के उपयोग से फसलों की वृद्धि बेहतर हुई है, हरियाली बढ़ी है तथा उत्पादन में भी सुधार देखने को मिला है।

इसके साथ ही पारंपरिक उर्वरकों की तुलना में कम मात्रा में अधिक प्रभाव मिलने से उनकी लागत में कमी आई है और आर्थिक लाभ भी बढ़ा है। उन्होंने बताया कि नैनो उर्वरकों के उपयोग से पौधों को आवश्यक पोषक तत्व अधिक प्रभावी ढंग से प्राप्त होते हैं, जिससे फसल का समुचित विकास होता है। इससे उर्वरकों की बर्बादी कम होती है, मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है तथा पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

कंवर ने जिले के किसानों से अपील करते हुए कहा कि केवल पारंपरिक उर्वरकों पर निर्भर रहने के बजाय आधुनिक कृषि तकनीकों और नैनो उर्वरकों को अपनाएं। इससे फसलों को बेहतर पोषण मिलता है, उत्पादन में वृद्धि होती है तथा खेती की लागत कम होकर किसानों की आय बढ़ाने में सहायता मिलती है।

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