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DSP कल्पना वर्मा निलंबित, विभाग ने जारी किया आदेश

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन ने दंतेवाड़ा जिले में पदस्थ डीएसपी कल्पना वर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस संबंध में गृह (पुलिस) विभाग द्वारा आधिकारिक आदेश जारी किया गया है।


जारी आदेश के अनुसार, शिकायत की प्राथमिक जांच में डीएसपी कल्पना वर्मा के खिलाफ गंभीर आरोप सामने आए हैं। जांच में वित्तीय लेनदेन, दिए गए कथनों तथा व्हाट्सएप चैट में तथ्यों के बीच विरोधाभास पाया गया है। साथ ही, कर्तव्य के दौरान अवैध आर्थिक लाभ प्राप्त करने, पद के दुरुपयोग और अनुपातहीन संपत्ति अर्जित करने के आरोप भी सामने आए हैं।


इन कृत्यों को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 का उल्लंघन माना गया है। इसी आधार पर शासन ने उन्हें निलंबित करने का निर्णय लिया।

निलंबन अवधि के निर्देश

  • निलंबन अवधि में डीएसपी कल्पना वर्मा का मुख्यालय पुलिस मुख्यालय, नवा रायपुर निर्धारित किया गया है
  • उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा

1475 पेज की जांच रिपोर्ट में गंभीर खुलासे

गौरतलब है कि डीएसपी कल्पना वर्मा और रायपुर के कारोबारी दीपक टंडन से जुड़े विवाद की जांच के दौरान कई गंभीर तथ्य सामने आए थे। शासन के निर्देश पर एडिशनल एसपी स्तर पर जांच कराई गई थी, जिसकी करीब 1475 पेज की रिपोर्ट शासन को सौंपी गई।

जांच रिपोर्ट में डीएसपी वर्मा और दीपक टंडन के बीच हुई व्हाट्सएप चैट का भी उल्लेख है, जिसमें पुलिस विभाग से जुड़ी संवेदनशील और खुफिया जानकारियां साझा किए जाने की बात सामने आई। इसे खुफिया जानकारी लीक करने जैसे गंभीर अपराध की श्रेणी में माना गया है।

इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए शासन ने कार्रवाई करते हुए डीएसपी कल्पना वर्मा को निलंबित कर दिया है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से शिक्षा को रोजगारोन्मुख, नवाचारपरक और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा रहा है-उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा

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राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन पर मंथन, रायपुर में हुई उच्च स्तरीय एकदिवसीय कार्यशाला

रायपुर- राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन से जुड़ी चुनौतियों एवं संभावनाओं पर विमर्श के उद्देश्य से उच्च शिक्षा विभाग द्वारा न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइंस रायपुर में एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।    

कार्यशाला में उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को केवल कागज़ों तक सीमित न रखकर प्रत्येक विद्यार्थी तक पहुँचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का कुलपति,कुलसचिव,महाविद्यालय के प्राचार्य एवं प्राध्यापक स्वयं अध्ययन करें।उन्होंने राज्य स्तर पर संचालित समितियों द्वारा नियमित समीक्षा, जिला क्लस्टर व्यवस्था, टास्क फोर्स की बैठकें तथा विश्वविद्यालय स्तर पर प्रभावी निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को पाठ्यक्रम में समावेशित कर विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति, विरासत और मूल्यों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। स्थानीय लोक कला और शिल्प कला को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा।भारतीय ज्ञान परंपरा पर विद्यार्थियों के बीच ऑनलाइन प्रतियोगिता आयोजित कर उनमें जागरूकता बढ़ाई जाएगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से शिक्षा को रोजगारोन्मुख, नवाचारपरक और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा रहा है। मंत्री वर्मा ने भविष्य में इस प्रकार की विस्तृत एवं बहुदिवसीय कार्यशालाओं के आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यशाला में विशेष अतिथि के रूप में भारतीय शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के अध्यक्ष अतुल कोठारी, राष्ट्रीय सह संयोजक, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के डॉ. ओम प्रकाश शर्मा, निदेशक आईआईटी भिलाई डॉ. राजीव प्रकाश, शिक्षाविद दिलीप केशरवानी, डॉ. नारायण गवांडकर सहित विभिन्न महाविद्यालयों के प्राध्यापक उपस्थित रहे।

इस अवसर पर उच्च शिक्षा आयुक्त डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों और इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर प्रकाश डाला।मुख्य वक्ता अतुल कोठारी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भारतीय ज्ञान परंपरा को पाठ्यक्रम में सम्मिलित करने, क्रेडिट सिस्टम, मल्टीपल एंट्री एवं एग्जिट सिस्टम तथा टास्क फोर्स के गठन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी। वहीं डॉ. राजीव प्रकाश ने नीति के व्यावहारिक क्रियान्वयन से जुड़े अनुभव साझा किए। इसी तरह ओम प्रकाश शर्मा ने राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन पर प्रकाश डाला।

कार्यशाला के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया। जिसमें प्रतिभागियों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का समाधान विशेषज्ञों द्वारा किया गया।

प्रधानमंत्री आवास केवल मकान नहीं, बल्कि गरीब परिवारों के सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की नींव हैं – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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छत्तीसगढ़ ने प्रधानमंत्री आवास योजना में रचा राष्ट्रीय कीर्तिमान: चालू वित्तीय वर्ष 2025–26 में मात्र 10 माह 4 दिवस की अवधि में छत्तीसगढ़ में देश में सर्वाधिक 5 लाख प्रधानमंत्री आवासों का निर्माण पूर्ण

रायपुर- प्रधानमंत्री आवास योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ ने एक बार फिर सुशासन, दृढ़ इच्छाशक्ति और परिणामोन्मुख प्रशासन का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट की पहली ही बैठक  में 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया था।  निर्णय के परिपालन में राज्य के सभी जिलों के सतत, संगठित एवं अथक प्रयासों के परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ ने प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत एक नया राष्ट्रीय कीर्तिमान स्थापित किया है।चालू वित्तीय वर्ष 2025–26 में मात्र 10 माह 4 दिवस की अवधि में छत्तीसगढ़ में देश में सर्वाधिक 5 लाख प्रधानमंत्री आवासों का निर्माण पूर्ण किया गया है। यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है क्योंकि योजना के प्रारंभ से अब तक पहली बार छत्तीसगढ़ ने किसी एक वित्तीय वर्ष में 5 लाख आवासों के निर्माण का रिकॉर्ड कायम किया है। मानसून अवधि सहित औसतन प्रतिदिन 1,600 से अधिक आवासों का निर्माण कर राज्य ने समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और लक्ष्यबद्ध कार्य निष्पादन की नई मिसाल कायम की है।

प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत जिलों की सक्रिय भागीदारी और स्वस्थ प्रतिस्पर्धात्मक कार्य संस्कृति इस उपलब्धि का मजबूत आधार बनी है। इस क्रम में बिलासपुर जिले में 29 हजार 235, महासमुंद में 27 हजार 224, बलरामपुर में 27 हजार 12, कोरबा में 26 हजार 839 तथा रायगढ़ जिले में 26 हजार 707 आवासों का निर्माण पूर्ण कर इन जिलों ने राज्य की समग्र उपलब्धि में अग्रणी भूमिका निभाई है।इसके अतिरिक्त मस्तूरी, आरंग, डभरा, बिल्हा, पाली एवं जैजैपुर जनपद पंचायतों द्वारा भी 7,500 से अधिक प्रधानमंत्री आवासों का निर्माण कर उल्लेखनीय योगदान दिया गया है। 

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आवास निर्माण के साथ-साथ आजीविका सृजन को भी समान प्राथमिकता दी गई है। महिला स्व-सहायता समूहों से जुड़ी हजारों महिलाओं ने सीएलएफ बैंक से ऋण लेकर निर्माण सामग्री आपूर्ति का कार्य प्रारंभ किया है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है। इस पहल के परिणामस्वरूप 8,000 से अधिक महिलाएँ ‘लखपति दीदी’ के रूप में आत्मनिर्भर बनकर उभरी हैं, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को कौशल से जोड़ने के उद्देश्य से राजमिस्त्री प्रशिक्षण भी प्रदान किया जा रहा है। चालू वित्तीय वर्ष में अब तक जिलों में स्थित आरसेटी के माध्यम से 6,000 से अधिक हितग्राहियों को प्रशिक्षण दिया गया है, जिनमें 960 से अधिक महिलाएँ तथा 292 से अधिक आत्मसमर्पित नक्सली शामिल हैं। यह पहल कौशल विकास के साथ-साथ सामाजिक पुनर्वास और मुख्यधारा से जुड़ाव का प्रभावी माध्यम बन रही है।

आवास हितग्राहियों की निजी भूमि पर महात्मा गांधी नरेगा के अंतर्गत आजीविका संवर्धन हेतु विभिन्न कार्य स्वीकृत किए गए हैं, जिनके तहत वर्तमान में प्रदेश में 10,000 से अधिक आजीविका डबरियों का निर्माण प्रगतिरत है। 

इस प्रकार छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से न केवल आवासों का तीव्र गति से निर्माण सुनिश्चित किया जा रहा है, बल्कि इनके साथ-साथ स्थायी आजीविका के अवसर भी सृजित किए जा रहे हैं, जो राज्य के समावेशी, संतुलित एवं सतत विकास को सुदृढ़ आधार प्रदान कर रहे हैं।

"प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत चालू  वित्तीय वर्ष 2025 -26 में मात्र 10 माह की अवधि में छत्तीसगढ़ में 5 लाख आवासों का निर्माण पूर्ण होना, जो देश में सर्वाधिक है, छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है। मैंने प्रथम कैबिनेट बैठक में 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति का निर्णय इसलिए लिया, ताकि राज्य का कोई भी गरीब और जरूरतमंद परिवार पक्के घर से वंचित न रहे। यह उपलब्धि राज्य सरकार की स्पष्ट नीति, प्रशासनिक समन्वय और जमीनी स्तर पर कार्यरत अधिकारियों-कर्मचारियों की मेहनत का परिणाम है। मेरे लिए प्रधानमंत्री आवास केवल एक मकान नहीं, बल्कि गरीब परिवारों के सम्मान, सुरक्षा और बेहतर भविष्य का आधार हैं, और इनके माध्यम से आजीविका के अवसर सृजित कर हम छत्तीसगढ़ को समावेशी और सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं।"- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

"प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ द्वारा 5 लाख आवासों का निर्माण पूर्ण करना राज्य की प्रशासनिक क्षमता, मजबूत निगरानी व्यवस्था और जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन का स्पष्ट प्रमाण है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार ने गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का घर देने के लक्ष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। आवास निर्माण के साथ-साथ आजीविका, कौशल प्रशिक्षण और महिला सशक्तिकरण को जोड़कर योजना को समग्र विकास का माध्यम बनाया गया है। यह राष्ट्रीय कीर्तिमान छत्तीसगढ़ की सुशासन पर आधारित विकास नीति की सफलता को दर्शाता है। - उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा

बस्तर ओलंपिक बना छत्तीसगढ़ की नई पहचान, प्रधानमंत्री मोदी ने सदन में किया उल्लेख

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नई दिल्ली/रायपुर- छत्तीसगढ़ का 'बस्तर ओलंपिक' अब राज्य की नई पहचान बन चुका है, जिसका उल्लेख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज संसद में किया। उन्होंने इसे नक्सलवाद के खिलाफ ऐतिहासिक कदम बताते हुए बस्तर के युवाओं की प्रतिभा को राष्ट्रीय मंच पर उभरने का प्रतीक कहा। 

 पीएम मोदी का सदन में उल्लेख 

राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने कहा- "बस्तर ओलंपिक ने नक्सल प्रभावित क्षेत्र को खेलों की धरती बना दिया है। यह लाखों आदिवासी युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ रहा है।" उन्होंने बस्तर को "भय से भविष्य की ओर" बदलते क्षेत्र के रूप में चित्रित किया, जहां 3.91 लाख खिलाड़ियों ने भाग लिया। 




देखिए VIDEO : PM मोदी ने क्या कुछ कहा सदन में



बस्तर ओलंपिक की सफलता 

2025-26 सत्र में आयोजित इस मेगा इवेंट में एथलेटिक्स, कबड्डी, खो-खो समेत 11 खेल हुए।  गृह मंत्री अमित शाह ने पूर्व समापन में इसे "नक्सलवाद के अंतिम कील" कहा था, जो 2026 तक नक्सल मुक्त बस्तर का संकेत देता है।  अब सरगुजा ओलंपिक भी शुरू हो चुका है। राज्य सरकार की पहल 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे युवा सशक्तिकरण का मॉडल बताया। बस्तर ओलंपिक ने 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स' की राष्ट्रीय मान्यता भी पाई।  यह आयोजन विकास, शांति और खेल को जोड़ते हुए छत्तीसगढ़ को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है।

आगामी विधानसभा चुनावों के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षकों को निर्वाचन आयोग की ब्रीफिंग

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भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने आज असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी विधानसभा आम चुनावों के लिए तैनात किए जाने वाले सामान्य, पुलिस और व्यय पर्यवेक्षकों की ब्रीफिंग बैठकें आयोजित कीं।

इन बैठकों में कुल 1,444 अधिकारी शामिल हुए, जिनमें 714 सामान्य पर्यवेक्षक, 233 पुलिस पर्यवेक्षक और 497 व्यय पर्यवेक्षक हैं। यह ब्रीफिंग बैठकें 5 और 6 फरवरी 2026 को नई दिल्ली स्थित IIIDEM में तीन चरणों में आयोजित की जा रही हैं।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी ने केंद्रीय पर्यवेक्षकों को संबोधित किया।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि पर्यवेक्षक निर्वाचन आयोग के “प्रकाश स्तंभ” हैं और उन्हें स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि 824 विधानसभा क्षेत्रों में होने वाले चुनावों के दौरान पर्यवेक्षकों की उपस्थिति से पूरी चुनावी मशीनरी में ऊर्जा आएगी।

निर्वाचन आयुक्त डॉ. एस.एस. संधू ने पर्यवेक्षकों से कहा कि वे क्षेत्र में तैनात चुनाव अधिकारियों के लिए मित्र, मार्गदर्शक और दार्शनिक की भूमिका निभाएं। उनकी तैनाती का व्यापक प्रचार हो तथा वे आम मतदाताओं के लिए सुलभ रहें, ताकि शिकायतों का त्वरित समाधान हो और किसी भी प्रकार के पक्षपात की धारणा न बने।

निर्वाचन आयुक्त डॉ. विवेक जोशी ने निर्देश दिया कि आयोग के सभी निर्देशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने मतदाताओं की सुविधा के लिए मतदाता सूचना पर्चियों (VIS) का समय पर वितरण सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया।

बैठक के दौरान पर्यवेक्षकों के साथ शंका-समाधान सत्र भी आयोजित किया गया। आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें निर्वाचन नामावलियों की तैयारी, चुनाव संचालन, आईटी एप्लीकेशनों, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और मीडिया प्रबंधन से संबंधित पहलुओं पर जानकारी दी।

केंद्रीय पर्यवेक्षकों को आयोग की आंख और कान बताते हुए उन्हें सभी चुनावी कानूनों, नियमों और दिशा-निर्देशों से भली-भांति परिचित रहने तथा उनके निष्पक्ष अनुपालन को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही, उन्हें राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और मतदाताओं के लिए हमेशा सुलभ रहने को कहा गया।

पर्यवेक्षकों को मतदान केंद्रों का दौरा कर आश्वस्त न्यूनतम सुविधाओं (AMFs) सहित मतदाताओं की सुविधा से जुड़ी हालिया पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन की भी जिम्मेदारी सौंपी गई।

उल्लेखनीय है कि भारत निर्वाचन आयोग संविधान के अनुच्छेद 324 और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 20बी के तहत प्रदत्त शक्तियों के अंतर्गत केंद्रीय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति करता है, ताकि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित किए जा सकें।

परीक्षा पे चर्चा बनी जन आंदोलन, विकसित भारत की शिक्षा यात्रा में निर्णायक बदलाव

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज एक लेख साझा किया, जिसमें बताया गया है कि ‘परीक्षा पे चर्चा’ किस तरह एक जन आंदोलन बन चुकी है और यह भारत की शिक्षा यात्रा में एक निर्णायक बदलाव का प्रतीक है, जो विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में मार्ग प्रशस्त कर रही है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के एक्स (X) पर किए गए एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO India) ने कहा कि इस लेख में यह स्पष्ट किया गया है कि परीक्षा पे चर्चा केवल एक संवाद कार्यक्रम नहीं रह गई है, बल्कि यह देशव्यापी जन आंदोलन का रूप ले चुकी है, जिसने शिक्षा को लेकर सोच और दृष्टिकोण में सकारात्मक परिवर्तन लाया है।

लेख में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की विशेषताओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह नीति बाल-केंद्रित दृष्टिकोण, भारतीय ज्ञान परंपरा पर जोर और मातृभाषा में शिक्षा को बढ़ावा देकर विद्यार्थियों को 21वीं सदी की चुनौतियों के लिए तैयार करती है।

प्रधानमंत्री ने इस पहल को शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव बताते हुए कहा कि परीक्षा पे चर्चा छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों को तनावमुक्त और सकारात्मक माहौल में जोड़ने का सशक्त माध्यम बन रही है। यह पहल न केवल छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ा रही है, बल्कि शिक्षा को आनंदमय और उद्देश्यपूर्ण बनाने में भी योगदान दे रही है।

यह पहल भारत को एक शिक्षित, सशक्त और विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में एक अहम कदम के रूप में देखी जा रही है।

पुलिस कंट्रोल रूम में हाई वोल्टेज ड्रामा, प्रेमी को कॉलर पकड़कर घसीटते लाई युवती

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 मध्य प्रदेश के उज्जैन में पुलिस कंट्रोल रूम उस समय हाई वोल्टेज ड्रामे का गवाह बन गया, जब एक युवती अपने प्रेमी को कॉलर पकड़कर घसीटते हुए सीधे कंट्रोल रूम ले आई। अचानक हुए इस घटनाक्रम से वहां मौजूद पुलिसकर्मी और आम लोग हैरान रह गए।


बताया जा रहा है कि युवती युवक को धक्का देते हुए सीधे एडिशनल एसपी आलोक शर्मा के केबिन तक पहुंच गई, जिससे कुछ देर के लिए कंट्रोल रूम में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। युवती वहां जोर-जोर से अपनी बात रखने लगी और पुलिस से न्याय की गुहार लगाई।

पांच साल के रिश्ते में धोखे का आरोप

युवती का आरोप है कि वह युवक के साथ पिछले पांच साल से रिलेशनशिप में थी, लेकिन अब युवक उसे धोखा दे रहा है। युवती के मुताबिक, युवक पिछले कुछ समय से किसी दूसरी लड़की के संपर्क में है और इसी वजह से वह उसे नजरअंदाज कर रहा है। लंबे समय तक साथ रहने के बाद इस तरह का व्यवहार होने से वह मानसिक रूप से परेशान है।

युवक के भाई पर धमकी देने का आरोप

मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। युवती ने युवक के भाई पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उसका कहना है कि युवक का भाई पेशे से वकील है और उसे जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। युवती ने दावा किया कि प्रभावशाली लोगों से संबंध होने का हवाला देकर उसे डराया जा रहा है।

सुरक्षा की मांग

युवती ने पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष जांच और अपनी सुरक्षा की मांग की है। पुलिस ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए दोनों पक्षों की बात सुनी और शिकायत के आधार पर आगे की कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

UPSC का बड़ा झटका! अब IAS-IPS अफसर दोबारा नहीं दे पाएंगे सिविल सेवा परीक्षा

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 UPSC New Rules: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा (CSE) 2026 के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नई अधिसूचना के तहत आयोग ने पहले से चयनित ग्रुप-A और ग्रुप-B सेवाओं में कार्यरत अधिकारियों के लिए सख्त प्रावधान लागू किए हैं। इस फैसले का सीधा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ेगा, जो सेवा में रहते हुए बार-बार UPSC परीक्षा में शामिल होते हैं।


UPSC के नए नियमों के अनुसार, यदि कोई उम्मीदवार पहले से IPS अधिकारी है और CSE 2026 की परीक्षा देता है, तो वह दोबारा IPS सेवा को अपनी प्राथमिकता में शामिल नहीं कर सकेगा। हालांकि, आयोग ने कुछ मामलों में छूट भी दी है। जो उम्मीदवार CSE 2025 या उससे पहले किसी सेवा में चयनित हुए हैं, उन्हें बिना इस्तीफा दिए अधिकतम दो अवसर दिए जाएंगे। ऐसे अभ्यर्थी केवल CSE 2026 और CSE 2027 में ही परीक्षा दे सकेंगे।

इसके अलावा, कार्यरत IAS और IFS अधिकारियों को अब सिविल सेवा परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं होगी। हालांकि, जिन उम्मीदवारों का अंतिम परिणाम अभी लंबित है, उन्हें प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा में शामिल होने की छूट दी जाएगी। लेकिन परिणाम घोषित होने के बाद यदि वे चयनित पाए जाते हैं, तो आगे की परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

ग्लोबल टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित होगा मयाली - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के तहत जशपुर को मिली पर्यटन विकास की बड़ी सौगात

होम-स्टे, रिसोर्ट, पाथवे, लैंडस्केपिंग सहित आधुनिक पर्यटक सुविधाओं का होगा विकास

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज भारत सरकार की स्वदेश दर्शन योजना 2.0 की उप-योजना सीबीडीडी के अंतर्गत स्वीकृत मयाली-बगीचा विकास परियोजना का मयाली नेचर कैंप में विधिवत भूमिपूजन किया। लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से क्रियान्वित इस परियोजना के तहत मयाली, विश्व प्रसिद्ध मधेश्वर पर्वत (विश्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग) तथा बगीचा स्थित कैलाश गुफा क्षेत्र में विभिन्न पर्यटन सुविधाओं का विकास किया जाएगा।

यह परियोजना क्षेत्र की प्राकृतिक, सांस्कृतिक एवं जनजातीय विरासत के संरक्षण के साथ-साथ समुदाय आधारित पर्यटन को सशक्त बनाएगी। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और जशपुर जिले को एक प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में नई पहचान मिलेगी।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने क्षेत्रवासियों को बधाई देते हुए कहा कि मयाली-बगीचा विकास परियोजना जशपुर जिले के पर्यटन विकास के लिए एक ऐतिहासिक पहल है। आज मयाली के विकास की मजबूत नींव रखी गई है। मयाली अब पर्यटन मानचित्र पर तेजी से उभर रहा है और आने वाले समय में यह एक वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मयाली की पहचान सदियों से मधेश्वर महादेव से जुड़ी रही है, जिसे विश्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग माना जाता है। इस विकास परियोजना के माध्यम से मधेश्वर पर्वत के धार्मिक एवं पर्यटन महत्व को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी। परियोजना के अंतर्गत मयाली डेम के समीप पर्यटक रिसोर्ट एवं स्किल डेवलपमेंट सेंटर का निर्माण किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि मयाली को एक समग्र इको-टूरिज्म और एडवेंचर डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां के जंगल, झरने, पहाड़ और समृद्ध आदिवासी संस्कृति को देश-दुनिया के पर्यटकों तक पहुंचाया जाएगा। पर्यटन से होने वाली आय का सीधा लाभ स्थानीय लोगों को मिलेगा।मुख्यमंत्री साय ने कहा इसी उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा होम-स्टे नीति लागू की गई है, जिससे ग्रामीण परिवार पर्यटन गतिविधियों से सीधे जुड़कर आय अर्जित कर सकेंगे और पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति को नजदीक से जानने का अवसर मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना क्षेत्र के युवाओं के लिए नए अवसर लेकर आई है। स्किल डेवलपमेंट सेंटर में टूर गाइड, होटल सेवा, एडवेंचर स्पोर्ट्स, हस्तशिल्प एवं डिजिटल बुकिंग से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे न केवल पर्यटन बल्कि जशपुर की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधताओं को भी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी।

विकास कार्यों से बदलेगी मयाली की तस्वीर, उभरेगा नया पर्यटन केंद्र

मयाली क्षेत्र को प्राकृतिक, धार्मिक एवं ग्रामीण पर्यटन के समग्र गंतव्य के रूप में विकसित किया जाएगा। परियोजना के अंतर्गत 5 पर्यटक कॉटेज, कॉन्फ्रेंस एवं कन्वेंशन हॉल, स्किल डेवलपमेंट सेंटर, भव्य प्रवेश द्वार, बाउंड्री वॉल, आधुनिक टॉयलेट सुविधा, लैंडस्केपिंग एवं पाथवे का निर्माण किया जाएगा। इन सुविधाओं से पर्यटकों के ठहराव एवं विभिन्न आयोजनों की बेहतर व्यवस्था होगी और रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

धार्मिक पर्यटन को सशक्त करने के लिए शिव मंदिर क्षेत्र में प्रवेश द्वार, टॉयलेट सुविधा, लैंडस्केपिंग एवं पाथवे का विकास किया जाएगा। वहीं बगीचा स्थित कैलाश गुफा परिसर में प्रवेश द्वार, पिकनिक स्पॉट, रेस्टिंग शेड, घाट विकास, पाथवे तथा सीढ़ियों एवं रेलिंग का जीर्णाेद्धार किया जाएगा, जिससे पर्यटकों को सुरक्षित एवं सुविधाजनक अनुभव मिलेगा।

यह समस्त कार्य भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा संचालित स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के अंतर्गत स्वीकृत मयाली-बगीचा विकास परियोजना के माध्यम से किए जाएंगे। परियोजना के पूर्ण होने से पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती तथा क्षेत्र की सांस्कृतिक-प्राकृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की संभावना है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय की धर्मपत्नी कौशल्या साय, सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं पत्थलगांव विधायक गोमती साय, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष नीलू शर्मा, विभिन्न बोर्ड-निगमों के अध्यक्ष, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

प्रदेश में खुलेंगे 4 नए उप पंजीयक कार्यालय

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भखारा, लवन, सकरी और राजकिशोर नगर में उप पंजीयक कार्यालयों को मिली प्रशासकीय स्वीकृति

रायपुर- प्रदेश में आम नागरिकों को रजिस्ट्री एवं पंजीयन से जुड़ी सेवाएं सहज, सुलभ और समयबद्ध रूप से उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। रजिस्ट्रीकरण अधिनियम–1908 के प्रावधानों के तहत भखारा (जिला धमतरी), लवन (तहसील मुख्यालय, जिला बलौदाबाजार-भाटापारा), सकरी एवं राजकिशोर नगर (बिलासपुर) में चार नवीन उप पंजीयक कार्यालय खोलने के लिए प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार धमतरी जिला के भखारा में नवीन उप पंजीयक कार्यालय खोलने हेतु प्रशासकीय स्वीकृत दी गई है। इसी प्रकार जिला पंजीयक बलौदाबाजार-भाटापारा के अंतर्गत तहसील मुख्यालय लवन और बिलासपुर जिले के राजकिशोर नगर एवं सकरी में उप पंजीयक कार्यालय खोलने  प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान किया गया है।

इन नए उप पंजीयक कार्यालयों के खुलने से संबंधित क्षेत्रों के नागरिकों को रजिस्ट्री कार्य के लिए दूरस्थ जिला मुख्यालयों तक नहीं जाना पड़ेगा। इससे समय और धन की बचत होगी, भीड़ कम होगी तथा पंजीयन प्रक्रिया अधिक सुगम और पारदर्शी बनेगी। साथ ही स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और प्रशासनिक कार्यों में गति आने की भी संभावना है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य है कि शासन की सेवाएं आम नागरिकों तक उनके निकटतम स्तर पर उपलब्ध हों। नए उप पंजीयक कार्यालयों की स्वीकृति से लोगों को पंजीयन संबंधी कार्यों में बड़ी राहत मिलेगी। यह निर्णय सुशासन की दिशा में एक और सशक्त कदम है, जिससे नागरिकों का समय बचेगा और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी।

वित्त एवं वाणिज्य कर पंजीयन मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि राज्य हमारी सरकार नागरिक सुविधाओं के विस्तार को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।चार नए उप पंजीयक कार्यालयों की स्वीकृति इसी सोच का परिणाम है। नए उप पंजीयक कार्यालय खुलने से पंजीयन व्यवस्था मजबूत होगी और लोगों को उनके क्षेत्र में ही गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिल सकेंगी, जिससे प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और त्वरित होगी। उन्होंने बताया कि पंजीयन विभाग द्वारा 10 नए क्रांतिकारी सुधार लागू किए गए हैं, जिनका लाभ इन क्षेत्रों के नागरिकों को भी मिलेगा। इनमें ऑटो डीड जनरेशन, आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन, घर बैठे रजिस्ट्री, स्वतः नामांतरण, ऑनलाइन भारमुक्त प्रमाणपत्र, एकीकृत कैशलेस भुगतान, व्हाट्सएप आधारित सेवाएं, डिजीलॉकर एकीकरण, डिजी-डॉक सेवा तथा खसरा नंबर के माध्यम से ऑनलाइन सर्च एवं रजिस्ट्री डाउनलोड की सुविधा शामिल है।

राज्य सरकार के इस निर्णय को जनहित में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे पंजीयन व्यवस्था अधिक विकेंद्रीकृत और प्रभावी बन सकेगी।

भारत सरकार ने समुद्री शैवाल (सीवीड) खेती को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाए, अंडमान-निकोबार को ब्लू इकोनॉमी हब बनाने की दिशा में पहल

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भारत सरकार अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह को ब्लू इकोनॉमी के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से समुद्री शैवाल (सीवीड) खेती और समुद्री मत्स्य पालन को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित कर रही है। इस दिशा में वैज्ञानिक तथा संस्थागत स्तर पर कई महत्त्वपूर्ण पहल की जा रही हैं।

परिषद् वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान (CSIR) के अंतर्गत केंद्रीय नमक एवं समुद्री रसायन अनुसंधान संस्थान (CSMCRI) द्वारा “अंडमान तट पर व्यावसायिक समुद्री शैवाल की पूर्व-व्यवहार्यता अध्ययन एवं पायलट स्तर पर खेती” परियोजना को लागू किया गया है। इस परियोजना के तहत समुद्री शैवाल खेती के लिए 25 विभिन्न स्थानों का विस्तृत अध्ययन किया गया, जिससे सर्वाधिक अनुकूल पर्यावरणीय परिस्थितियों और पोषक तत्वों वाले क्षेत्रों की पहचान की जा सके।

इस अध्ययन के अंतर्गत Gracilaria edulis, Gracilaria debilis, Gracilaria salicornia तथा Kappaphycus alvarezii प्रजातियों का परीक्षण फ्लोटिंग बांस राफ्ट, ट्यूब नेट, नेट बैग और मोनो-लाइन जैसी तकनीकों से किया गया। इसके परिणामस्वरूप हाठी टापू (दक्षिण अंडमान), मायाबंदर (मध्य अंडमान) और दिगलीपुर (उत्तर अंडमान) में Gracilaria edulis और Kappaphycus alvarezii के साथ व्यावसायिक समुद्री शैवाल खेती सफलतापूर्वक स्थापित की गई है।

इसके अतिरिक्त, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत स्वायत्त संस्थान राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान (NIOT) ने अंडमान सागर में पहली बार खुले समुद्र में समुद्री मत्स्य पालन और गहरे पानी में समुद्री शैवाल खेती की परियोजना प्रारंभ की है। साथ ही, CSIR द्वारा शुरू किए गए “सीवीड मिशन” का उद्देश्य समुद्री शैवाल खेती को लाभकारी, पर्यावरण-अनुकूल, टिकाऊ और बड़े पैमाने पर अपनाने योग्य बनाना है।

सीवीड मिशन के अंतर्गत तमिलनाडु में 800 से अधिक स्वयं सहायता समूहों (SHGs) ने Kappaphycus की खेती को आजीविका के रूप में अपनाया है। इस शोध एवं विकास के परिणामस्वरूप एक नया समुद्री शैवाल उद्योग विकसित हुआ है, जिससे रोजगार के नए अवसर और अतिरिक्त आय के स्रोत सृजित हुए हैं। समुद्री शैवाल आधारित तकनीकों को 12 कंपनियों को व्यावसायीकरण के लिए हस्तांतरित किया गया है। अब तक लगभग 5,000 मछुआरों को तमिलनाडु, गुजरात और आंध्र प्रदेश में विभिन्न योजनाओं के तहत प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

सरकार ने महिलाओं के नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों को विशेष रूप से प्रोत्साहित करने के लिए लक्षित वित्तीय और संस्थागत सहायता उपलब्ध कराई है। राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB) के माध्यम से प्रशिक्षण, प्रदर्शन, मूल्य संवर्धन, स्थानीय प्रसंस्करण और विपणन के लिए सहायता दी जा रही है। मत्स्य विभाग (DoF) द्वारा बीज/रोपण सामग्री के आयात और उत्पादन से संबंधित तकनीकी दिशानिर्देश भी जारी किए गए हैं, जिनमें मछुआर परिवारों और महिला SHGs को प्राथमिक लाभार्थी के रूप में मान्यता दी गई है।

सरकार ने वर्ष 2030 तक समुद्री शैवाल उत्पादन को 11.2 लाख टन तक पहुँचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसे मुख्यतः प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत लागू किया जा रहा है। इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए ₹194.09 करोड़ का निवेश किया गया है, जिसमें तमिलनाडु में बहुउद्देशीय सीवीड पार्क और दमन एवं दीव में सीवीड ब्रूड बैंक की स्थापना शामिल है। इसके तहत 46,095 सीवीड राफ्ट और 65,330 मोनो-लाइन ट्यूब नेट की स्वीकृति दी जा चुकी है।

केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (CMFRI), मंडपम केंद्र को समुद्री शैवाल खेती के लिए उत्कृष्टता केंद्र और नाभिकीय प्रजनन केंद्र (Nucleus Breeding Centre) के नोडल संस्थान के रूप में नामित किया गया है। इससे 20,000 से अधिक किसानों को लाभ और 5,000 से अधिक रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है। पिछले पाँच वर्षों में CMFRI द्वारा 5,268 राफ्ट और 112 मोनो-लाइन ट्यूब नेट स्थापित किए गए तथा 14,000 से अधिक हितधारकों के लिए 169 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।

यह जानकारी पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने 5 फरवरी 2026 को राज्यसभा में दी।

NE-RACE पोर्टल से सिक्किम सहित उत्तर-पूर्व के किसानों को राष्ट्रीय बाजार से सीधा लाभ

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 उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के किसानों को राष्ट्रीय बाजार से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू किया गया नॉर्थ ईस्टर्न रीजन एग्री-कमोडिटी ई-कनेक्ट (NE-RACE) पोर्टल पूरी तरह से क्रियाशील है और किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs), स्वयं सहायता समूहों (SHGs) एवं सहकारी संस्थाओं को देशभर के खरीदारों से जोड़ने में अहम भूमिका निभा रहा है।

23 जनवरी 2026 तक इस पोर्टल पर 6,807 विक्रेता/किसान/किसान उत्पादक कंपनियां और 735 खरीदार पंजीकृत हो चुके हैं, जबकि 1,797 कृषि-उत्पाद सूचीबद्ध किए गए हैं। पोर्टल के माध्यम से अब तक कुल ₹895.56 लाख का कारोबार संभव हुआ है।

NE-RACE प्लेटफॉर्म से सिक्किम सहित उत्तर-पूर्वी राज्यों के किसानों को विशेष लाभ मिला है। इस पोर्टल के जरिए सिक्किम के किसानों ने सीधे राष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बनाते हुए 130 मीट्रिक टन कृषि-उत्पाद, जिसकी कीमत ₹54.40 लाख है, की बिक्री की है।

सिक्किम में किसानों को जोड़ने और उन्हें संचालन संबंधी सहायता देने के लिए NE-RACE के अंतर्गत बहुभाषी हेल्पडेस्क और हेल्पलाइन सेवाओं का उपयोग किया जा रहा है। 23 जनवरी 2026 तक 251 किसान सिक्किम से इस पोर्टल पर पंजीकृत किए जा चुके हैं।

राज्य में अब तक पांच आउटरीच एवं ऑनबोर्डिंग कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इसके अलावा, किसानों और खरीदारों के बीच संपर्क को और मजबूत करने के लिए अंतरराष्ट्रीय खरीदार-विक्रेता बैठकों जैसे उपाय भी अपनाए जा रहे हैं।

NE-RACE प्लेटफॉर्म खरीदार-विक्रेता मिलान (मैचमेकिंग) के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स से जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध कराता है। इसके लिए बहुभाषी हेल्पडेस्क, फील्ड-स्तरीय सहयोग और राज्य समन्वयकों की व्यवस्था की गई है, जो किसानों को पंजीकरण, समस्याओं के समाधान और संवाद में सहायता प्रदान करते हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य सिक्किम के किसानों की डिजिटल बाजार तक पहुंच को मजबूत करना और उनकी बाजार तैयारी को बेहतर बनाना है।

यह जानकारी केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

न्यूयॉर्क में सामाजिक विकास आयोग के इतर भारत–ग्वाटेमाला वार्ता, द्विपक्षीय सहयोग को नई मजबूती

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न्यूयॉर्क में आयोजित सामाजिक विकास आयोग (Commission for Social Development) की बैठक के इतर केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने ग्वाटेमाला की सामाजिक विकास उप-मंत्री महामहिम क्लाउडिया टेरेसा वालेंज़ुएला लोपेज़ से मुलाकात की। इस अवसर पर दोनों देशों के बीच गर्मजोशीपूर्ण और पारस्परिक लाभकारी साझेदारी को और सशक्त करने की भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया गया।

बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने महिला-नेतृत्व वाले और समावेशी विकास के लिए भारत के “समग्र सरकार दृष्टिकोण” (Whole-of-Government Approach) पर प्रकाश डाला। उन्होंने सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, कौशल विकास, डिजिटल सशक्तिकरण तथा महिलाओं की आर्थिक भागीदारी से जुड़ी प्रमुख पहलों की जानकारी साझा की।

सावित्री ठाकुर ने स्वयं सहायता समूह (SHG), प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT), पीएम-पोषण स्कूल भोजन योजना और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे प्रमुख कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए इन क्षेत्रों में भारत के अनुभव और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने की इच्छा जताई। उन्होंने यह भी कहा कि ग्वाटेमाला का ‘शक्ति-सैट’ (ShakthiSAT) वैश्विक STEM पहल में शामिल होना, विशेष रूप से बालिकाओं के लिए, अत्यंत उत्साहजनक है।

दोनों पक्षों ने लैंगिक समानता, गरीबी उन्मूलन, समावेशी विकास और संयुक्त राष्ट्र में बहुपक्षीय सहयोग के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। साथ ही सामाजिक विकास, महिला सशक्तिकरण और आदिवासी समुदायों के कल्याण जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और विस्तार देने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

इसके अतिरिक्त, केंद्रीय मंत्री ने भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों से भी संवाद किया। इस दौरान उन्होंने पंखुड़ी पोर्टल की जानकारी साझा की और प्रवासी भारतीयों से आग्रह किया कि वे आंगनवाड़ी केंद्रों और बाल देखभाल गृहों के समर्थन सहित, स्वैच्छिक और परोपकारी योगदान के माध्यम से भारत के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं।

यह मुलाकात भारत और ग्वाटेमाला के बीच सामाजिक विकास और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने माउंट अकोंकागुआ के लिए संयुक्त पर्वतारोहण अभियान को दिखाई हरी झंडी

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 05 फरवरी 2026 को साउथ ब्लॉक, नई दिल्ली से अर्जेंटीना के माउंट अकोंकागुआ के लिए एक संयुक्त पर्वतारोहण अभियान को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। 6,961 मीटर ऊँचा माउंट अकोंकागुआ दक्षिण अमेरिका की सबसे ऊँची चोटी है और एशिया के बाहर विश्व की सबसे ऊँची पर्वत चोटी मानी जाती है। यह संयुक्त अभियान उत्तरकाशी स्थित नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (NIM) और पहलगाम स्थित जवाहर पर्वतारोहण एवं शीतकालीन खेल संस्थान (JIM&WS) द्वारा किया जा रहा है।

रक्षा मंत्री ने इस अभियान के लिए कर्मियों को साहस, दृढ़ संकल्प और आत्मबल के साथ तैयार करने के लिए NIM और JIM&WS की सराहना की। उन्होंने दल को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि इस दुर्गम शिखर पर चढ़ाई केवल शारीरिक सहनशक्ति की परीक्षा नहीं है, बल्कि यह नेतृत्व क्षमता, टीमवर्क और मानसिक दृढ़ता की भी कसौटी है, जो भारत के श्रेष्ठ पर्वतारोहियों की पहचान है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अभियान दल दक्षिण अमेरिका की सर्वोच्च चोटी पर सफलतापूर्वक चढ़ाई कर देश का नाम रोशन करेगा।

छह सदस्यीय इस अभियान दल में अनुभवी और प्रशिक्षित प्रशिक्षक शामिल हैं—कर्नल हेम चंद्र सिंह, कैप्टन जी. संतोष कुमार, दीप बहादुर साही, विनोद गुसाईं, नायब सूबेदार भूपिंदर सिंह और हवलदार रमेश कुमार। यह अभियान 06 फरवरी 2026 से प्रारंभ होगा और इसके महीने के अंत तक संपन्न होने की संभावना है।

माउंट अकोंकागुआ पर प्राप्त अनुभव, ज्ञान और आत्मविश्वास का सीधा लाभ देशभर के युवाओं, सशस्त्र बलों के कर्मियों और साहसिक गतिविधियों में रुचि रखने वालों के प्रशिक्षण को अधिक सुरक्षित, सशक्त और प्रभावी बनाने में मिलेगा। यह अभियान वैश्विक स्तर पर साहसिक गतिविधियों और पर्वतारोहण के क्षेत्र में भारत की बढ़ती उपस्थिति का भी प्रतीक है।

श्रीलंका में पवित्र देवनीमोरी अवशेषों का भव्य प्रदर्शन, भारत–श्रीलंका के आध्यात्मिक संबंध और सुदृढ़

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भगवान बुद्ध के पवित्र देवनीमोरी अवशेषों का श्रीलंका में आगमन और उनका सार्वजनिक प्रदर्शन आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षण है। यह आयोजन भारत और श्रीलंका के बीच साझा बौद्ध विरासत पर आधारित गहरे और ऐतिहासिक संबंधों को और सुदृढ़ करता है।

पवित्र अवशेष भारतीय वायुसेना के विशेष विमान से श्रीलंका लाए गए, जहाँ उन्हें भारत–श्रीलंका के स्थापित प्रोटोकॉल के अनुरूप पूर्ण राजकीय सम्मान प्रदान किया गया। इस अवसर पर गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत और गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल अवशेषों के साथ उपस्थित रहा। प्रतिनिधिमंडल में वरिष्ठ बौद्ध भिक्षु, सरकारी अधिकारी और अन्य विशिष्ट गणमान्य व्यक्ति भी शामिल थे।

यह प्रदर्शनी माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अप्रैल 2025 में श्रीलंका की राजकीय यात्रा के दौरान की गई घोषणा के अनुरूप आयोजित की गई है, जो भारत की श्रीलंका के साथ आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को और गहरा करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री ने अनुराधापुरा में सेक्रेड सिटी कॉम्प्लेक्स परियोजना के विकास के लिए अनुदान सहायता की भी घोषणा की थी, जो वर्ष 2020 में बौद्ध संबंधों को बढ़ावा देने के लिए घोषित 15 मिलियन अमेरिकी डॉलर के अनुदान के अतिरिक्त है।

पवित्र देवनीमोरी अवशेषों की प्रदर्शनी का उद्घाटन 4 फरवरी 2026 को कोलंबो स्थित प्रतिष्ठित गंगारामया मंदिर में श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुर कुमार दिसानायके द्वारा किया गया। इस अवसर पर भारतीय पक्ष से गुजरात के राज्यपाल और उपमुख्यमंत्री भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में गंगारामया मंदिर के मुख्य महंत वेनेरेबल डॉ. किरिंदे असाजी थेरो की गरिमामयी उपस्थिति रही।

इस समारोह में श्रीलंका सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री भी शामिल हुए, जिनमें बौद्ध शासन, धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्य मंत्री डॉ. हिनिदुमा सुनील सेनेवी, स्वास्थ्य एवं जनसंचार मंत्री डॉ. नलिंदा जयतिस्सा, तथा सार्वजनिक प्रशासन, प्रांतीय परिषद और स्थानीय सरकार मंत्री प्रो. ए.एच.एम.एच. अबयरत्ना प्रमुख थे।

प्रदर्शनी के अंतर्गत गंगारामया मंदिर परिसर में दो विशेष प्रदर्शनियाँ—“अनअर्थिंग द सेक्रेड पिप्रहवा” और “सेक्रेड रेलिक एंड कल्चरल एंगेजमेंट ऑफ कंटेम्पररी इंडिया”—का भी उद्घाटन किया गया।

पवित्र अवशेषों का पारंपरिक धार्मिक विधियों के साथ स्वागत कर उन्हें गंगारामया मंदिर में स्थापित किया गया। यह प्रदर्शनी 5 फरवरी 2026 से आम जनता के दर्शन के लिए खुली रहेगी, जिससे श्रीलंका सहित विश्वभर के श्रद्धालु भगवान बुद्ध को नमन कर सकेंगे। अवशेषों का आगमन श्रीलंका के 78वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हुआ, जिससे इस आयोजन का महत्व और भी बढ़ गया।

उल्लेखनीय है कि यह भारत के बाहर देवनीमोरी अवशेषों का पहला सार्वजनिक दर्शन है। इससे पहले भारत ने वर्ष 2012 में कपिलवस्तु अवशेषों और 2018 में सारनाथ अवशेषों की प्रदर्शनी श्रीलंका में आयोजित की थी।

पवित्र देवनीमोरी अवशेषों की यह प्रदर्शनी भगवान बुद्ध के शाश्वत संदेश—करुणा, शांति और अहिंसा—का जीवंत प्रतीक है और भारत–श्रीलंका के बीच गहरे सभ्यतागत संबंधों को प्रतिबिंबित करते हुए दोनों देशों के सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और जन-जन के संपर्क को और मजबूत करती है।


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