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पर्यटन के जरिए नई पहचान गढ़ेगा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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छत्तीसगढ़ की वास्तविक सुंदरता और सांस्कृतिक समृद्धि को दुनिया के सामने लाना हमारा उद्देश्य: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में निवेश से युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बनेंगे : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल से पर्यटन एवं हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में निवेश को मिल रही नई गति

500 करोड़ रुपये से अधिक निवेश के साथ छत्तीसगढ़ के पर्यटन क्षेत्र में नई संभावनाएं: हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में निवेश को लेकर इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड ने दिखाई रुचि

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ अब देश के पर्यटन मानचित्र पर अपनी नई पहचान गढ़ने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। पर्यटन को उद्योग का दर्जा मिलने, निवेश अनुकूल नीतियों और राज्य सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण प्रदेश में पर्यटन एवं हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में निवेश की संभावनाएं लगातार मजबूत हो रही हैं। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज अपने निवास कार्यालय में पर्यटन को बढ़ावा देने, पर्यटक सुविधाओं के विकास एवं विस्तार तथा हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में निवेश को लेकर आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में शामिल हुए। बैठक में देश की प्रतिष्ठित इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड के प्रतिनिधियों सहित शासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बैठक में कहा कि छत्तीसगढ़ उत्तर से दक्षिण तक नैसर्गिक विरासत की अमूल्य धरा है, जहां नदियां, पहाड़, घने जंगल, जलप्रपात, समृद्ध आदिवासी संस्कृति और जनजातीय परंपराएं छत्तीसगढ़ को विशिष्ट पहचान प्रदान करती हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य दुनिया को छत्तीसगढ़ की वास्तविक सुंदरता, सांस्कृतिक समृद्धि और प्राकृतिक विविधता से परिचित कराना है। उन्होंने कहा कि पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिए जाने से हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में निवेश की संभावनाएं तेजी से बढ़ी हैं और पर्यटकों के लिए बेहतर ठहराव, परिवहन तथा आधुनिक सुविधाओं के विकास के माध्यम से छत्तीसगढ़ को आकर्षक पर्यटन गंतव्य बनाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य में लगातार निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो रहे हैं और इसी क्रम में इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड द्वारा छत्तीसगढ़ में निवेश की इच्छा जताई गई है, जो प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के निवेश से पर्यटन अधोसंरचना मजबूत होगी और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर निर्मित होंगे।

बैठक के दौरान इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के समक्ष अपने निवेश प्रस्ताव के महत्वपूर्ण बिंदु साझा किए और बताया कि कंपनी छत्तीसगढ़ में हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में लगभग 500 करोड़ रुपये से अधिक निवेश की योजना पर कार्य कर रही है, जिसे शीघ्र आगे बढ़ाया जाएगा। कंपनी के प्रतिनिधियों ने कहा कि इस निवेश से प्रदेश में पर्यटन अधोसंरचना मजबूत होगी और रोजगार के नए अवसरों का सृजन होगा।

वित्त मंत्री ओ पी चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार ने निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया है तथा सभी आवश्यक अनुमतियों की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया गया है।

बैठक में यह भी बताया गया कि  पर्यटन को उद्योग का दर्जा मिलने के बाद हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में निवेश के रास्ते व्यापक रूप से खुले हैं। राज्य सरकार पर्यटन क्षेत्र को आधुनिक अधोसंरचना, उच्चस्तरीय सुविधाओं और निवेश प्रोत्साहन नीतियों के माध्यम से विकसित करने की दिशा में विशेष पहल कर रही है। प्रदेश की बेहतर मानसूनी परिस्थितियां, समृद्ध प्राकृतिक संपदा और निवेश अनुकूल नीति पर्यटन विकास के लिए मजबूत आधार तैयार कर रही हैं।

बैठक में उद्योग विभाग के अधिकारियों ने निवेश प्रोत्साहन नीति तथा उपलब्ध इंसेंटिव्स की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यदि कोई निवेशक 500 करोड़ रुपये से अधिक निवेश करता है अथवा 1000 से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराता है, तो उसे ‘बी-स्पोक पॉलिसी’ के तहत अतिरिक्त प्रोत्साहन एवं विशेष लाभ प्रदान किए जाएंगे। साथ ही पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए आधारभूत संरचना, सड़क संपर्क, आवासीय सुविधाओं तथा पर्यटक सेवाओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। 

बैठक में छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा, मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, वित्त सचिव डॉ. रोहित यादव, निवेश आयुक्त ऋतु सेन, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, उद्योग सचिव रजत कुमार, पर्यटन विभाग सचिव डॉ. एस. भारतीदासन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

कृषि विश्वविद्यालय में अगले तीन दिनों तक बिखरेगी आमों की बहार

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राज्यपाल रमेन डेका 29 मई को  आम महोत्सव का शुभांरभ करेंगे

शुभारंभ समारोह में मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री, सांसद एवं विधायक भी होंगे शामिल

रायपुर- इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर में कल से अगले तीन दिनों तक आमों की बहार रहेगी और समूचा माहौल आममय रहेगा। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर तथा संचालनालय उद्यानिकी एवं प्रक्षेत्र वानिकी, छत्तीसगढ़ शासन तथा प्रकृति की ओर सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में 29 से 31 मई, 2026 तक तीन दिवसीय राष्ट्रीय आम महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। कृषि महाविद्यालय परिसर में आयोजित राष्ट्रीय आम महोत्सव का शुभांरभ राज्यपाल रमेन डेका कल 29 मई को अपरान्ह 4 बजे करेंगे। उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय करेंगे। कृषि मंत्री रामविचार नेताम तथा रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल अति विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे। रायपुर ग्रामीण विधायक मोतीलाल साहू, धरसींवा विधायक अनुज शर्मा, छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के अध्यक्ष चन्द्रहास चन्द्राकर, छत्तीसगढ़ राज्य कृषक कल्याण परिषद के अध्यक्ष सुरेश चंन्द्रवंशी तथा इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. गिरीश चंदेल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। राष्ट्रीय आम महोत्सव में आम की 250 से अधिक किस्मों का प्रदर्शन किया जायेगा। यहां आम की उन्नत किस्मों के पौधे तथा फल विक्रय हेतु आमजनों के लिए उपलब्ध रहेंगे।

आम की देशी-विदेशी 250 से अधिक किस्में देखने को मिलेंगी 

राष्ट्रीय आम महोत्सव में 29 से 31 मई, 2026 तक विभिन्न श्रेणियों में प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा जिसमें किसानों द्वारा उत्पादित आम की व्यावसायिक किस्मों के अंतर्गत दशहरी, लंगडा, बाम्बे ग्रीन, चैसा, मालदा, हिमसागर, सुन्दरजा, केसर, अलफान्सो, तोतापरी, नीलम, बैगनफल्ली, पैरी, सिन्दूरी, फज़ली आदि किस्मों की प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। संकर किस्मों की प्रतियोगिता के अंतर्गत मल्लिका, आम्रपाली, पूसा अरूणिमा, अम्बिका, रत्ना, सिंधु, अर्का पुनीत किस्मों को शामिल किया गया है। विशिष्ट किस्मों की प्रतियोगिता के अंतर्गत हाथीझुल, नूरजहां, लड्डु, गुलाब खास किस्मों के उत्पादक भाग ले सकते हैं। एक्जोटिक (आयातित किस्म) की प्रतियोगिता में मियाजाकी, टाॅमी एटकिन्स एवं गोल्डन नगेट्स किस्मों को शमिल किया गया है। 

राष्ट्रीय आम महोत्सव में आम पर केंद्रित विभिन्न प्रतियोगिताएं होंगी आयोजित

आम महोत्सव में आम की विभिन्न किस्मों की प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही है जिसमें छत्तीसगढ़ एवं देश के विभिन्न राज्यों के आम उत्पादक शामिल होंगे। यहां छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए आम उत्पादक किसान उनके द्वारा उत्पादित आमों की विभिन्न किस्मों का प्रदर्शन करेंगे। इस अवसर पर आम से बने विभिन्न व्यंजनों की प्रतियोगिताएं भी आयोजित हैं। आम की सजावट प्रतियोगिता भी आयोजित की जा रही है जिसमें विद्यालयीन एवं महाविद्यालयीन विद्यार्थी, महिलाएं तथा अन्य सामान्यजन भी पंजीयन कर भागीदारी कर सकते है। इस महोत्सव में पंजीयन एवं प्रवेश पूर्णतया निःशुल्क है। राष्ट्रीय आम महोत्सव में संस्थागत एवं व्यक्तिगत प्रतियोगी भी सहभागी हो सकते हैं। आम महोत्सव के दौरान आम पर केंद्रित मैंगो क्विज़ मैंगो, फैंसी ड्रेस आदि प्रतियोगिताएं भी अयोजित की जाएगी। इसके अलावा प्रतिदिन सांस्कृतिक संध्या का भी आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर आम से निर्मित उत्पादों की प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जाएगा जिसमें प्रतिभागी आम से निर्मित उत्पाद - नेक्टर/आर.टी.एस., शर्बत, पना, आम के अचार, आम की चटनी, आम पापड़, आमरस, जैम एवं मिठाई आदि व्यंजनों के साथ प्रतियोगिता में भाग ले सकते हैं। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय आम महोत्सव में प्रतिभागियों हेतु आम आधारित माॅडल एवं बोनसाई, आम आधरित सजावट प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर प्रकृति की ओर सोसायटी की ओर से आम की ग्यारह गुठलियाँ लाने वाले व्यक्तियों को एक उन्नत किस्म के आम का पौधा दिया जाएगा। प्रसिद्ध शेफ आकांक्षा राॅय आम के व्यंजन बनाना भी सिखाएंगी।

आम उत्पादन, प्रसंस्करण तथा समस्या समाधान पर तकनीकी सत्र भी आयोजित होंगेआम उत्पादन, प्रसंस्करण तथा समस्या समाधान पर तकनीकी सत्र भी आयोजित होंगे

आयोजन के प्रथम दिवस 29 मई को प्रातः 9 बजे से 12 बजे तक प्रविष्टियों का पंजीयन किया जाएगा। इसके पश्चात सामान्यजनों के लिए प्रदर्शनी अवलोकनार्थ तीनों दिन सायः 9 बजे तक खुली रहेगी। प्रदर्शनी में आम की विभिन्न किस्मों के फल, आम के विभिन्न उत्पाद एवं आम के पौधे भी विक्रय के लिए उपलब्ध रहेंगे। द्वितीय दिवस 30 मई को आम उगाने वाले कृषकों एवं जिज्ञासुओं के लिए 12 बजे से 4 बजे तक ‘‘आम उत्पादन समस्या एवं समाधान’’ विषय पर तकनीकी मार्गदर्शन एवं परिचर्चा का आयोजन किया गया है, जिसमें छत्तीसगढ़ में उच्च गुणवत्ता के आम की विभिन्न किस्मों का उत्पादन, आम के विभिन्न उत्पाद एवं उनके विपणन के साथ ही आम उत्पादन हेतु छत्तीसगढ़ शासन की योजनाओं की भी जानकारी प्रदान की जायेगी, जिससे नयी पीढ़ी के लोग आम उत्पादन की ओर आकृष्ट हो सकें । आम उत्पादन को पर्यावरण के संरक्षण के साथ एक स्वास्थ्यवर्धक व्यवसाय के रूप में अपनाने की जानकारी आम लोगों को प्रदान की जा जाएगी। तृतीय दिवस 31 मई को आम उत्पादक कृषकों एवं उद्यमियों की सफलता की कहानी उन्हीं की जुबानी 12 से 4 बजे तक आयोजित होगा। 

राष्ट्रीय आम महोत्सव के अंतिम दिन प्रदर्शनी के अवलोकन के साथ ही प्रतिभागियों के लिए पुरस्कार वितरण एवं सम्मान समारोह का आयोजन भी किया जायेगा। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय फल ‘‘आम’’ जो कि आम जनता का प्रिय फल है उसकी समस्त सामान्य एवं खास किस्मों, विशिष्ट उत्पादों एवं भविष्य में अधिक उत्पादन के लिए रोजगार के साधनों की जानकारी नागरिकों, महिलाओं, विद्यार्थियों, नव उद्यमियों एवं कृषकों को प्रदान करना है। राष्ट्रीय आम महोत्सव के अवसर पर आयोजित प्रतियोगिता में प्रतिभागी न्यूनतम 5 से 10 आम प्रति किस्म के साथ भाग ले सकते हैं। आम से बने विभिन्न व्यंजनों की प्रतियोगिता में न्यूनतम 250 ग्राम आम के उत्पाद के साथ पंजीयन कर इस प्रतियोगिता में शामिल हो सकते हैं। इस आयोजन में पंजीयन एवं प्रवेश निःशुल्क है अतः इस अवसर का लाभ प्राप्त करने हेतु सहभागी बनें।

बशीर बद्र साहब की यादें और महासमुंद से जुड़ा आत्मीय साहित्यिक सफर: एक भावपूर्ण संस्मरण

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उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो,

न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए।

--बशीर बद्र

महासमुंद से बशीर बद्र साहब की बहुत सी यादें जुड़ी हुई है। एक कार्यक्रम  के सिलसिले में वे रायपुर आए हुए थे और रायपुर में शायर शौक जालंधरी के मेहमान थे। मैं प्रसिद्ध  व्यंग्यकार लतीफ़ घोंघी के साथ  आकाशवाणी की एक रिकार्डिंग में  गया हुआ था तब बशीर बद्र साहब के रायपुर में होने की खबर मिली  तो हमने तय किया कि किसी भी हालत में उन्हें महासमुंद लेकर चलना है।शौक जालंधरी साहब ने बहुत सी अड़चनें लगाईं लेकिन हम बशीर बद्र साहब से मिलने और उन्हें महासमुंद लाने में कामयाब रहे। दूसरे दिन जनपद पंचायत  के सभागार में एक आत्मीय गोष्ठी में बद्र साहब ने अपनी बहुत सी रचनाएं सुनाई। उनके साथ शौक जालंधरी और शाद भंडारवी भी आए थे। महासमुंद का प्रतिनिधित्व करते हुए उनके सामने शरद श्रीवास्तव और मुझे भी अपनी  रचनाएं पढ़ने का मौका मिला। महासमुंद  के आत्मीय वातावरण से वे बहुत प्रभावित हुए थे। मेरे एक शे'र कल शहर जब बंद था तो बाप से परिचय हुआ , वर्ना सोए में गया और जागते लौटा नहीं  पर उन्होंने खुलकर  मेरी सराहना की थी इसके 34साल बाद जब 2021-22 मेरा पहला स्वतंत्र ग़ज़ल संग्रह प्रकाशित हुआ तो उनकी सराहना के कारण ही मैंने  संग्रह का शीर्षक बाप से परिचय हुआ रखा जिसका जिक्र मैंने संग्रह की भूमिका में भी किया है।

दूसरे सत्र में एक संगीत गोष्ठी ग़ज़ल गायिका साधना रहाटगांवकर के निवास में हुई जिसमें उन्होंने बशीर बद्र साहब की ही रचनाओं को स्वरबद्ध किया हुआ था। अपनी रचनाओं की सांगितिक  प्रस्तुति सुनते हुए बशीर बद्र साहब भावुक होकर रो पड़े थे। विदा होते  हुए उन्होंने वादा किया कि अब वे जब भी छत्तीसगढ़ आयेंगे तो महासमुंद ज़रूर आयेंगे,यह मेरे लिए घर जैसा ही हो गया है। दरअसल उन दिनों वे मेरठ में अपने घर जला दिए जाने की घटना से काफी विचलित थे तथा कुछ समय पहले ही भोपाल शिफ्ट हुए थे। महासमुंद में लतीफ़ घोंघी,ईश्वर शर्मा,साधना रहाटगांवकर,हुकुम शर्मा ,मनोहर शर्मा,व्ही जी रहाटगांवकर,एनबी लोणारे देवी चंद श्रीश्रीमाल  ,शरद श्रीवास्तव  जैसे साहित्य,संगीत और पत्रकारिता के बड़े-बड़े  लोगों को महासमुंद  कला संगम के बैनर तले अनेक उत्कृष्ट आयोजन की जानकारी और घरेलू माहौल में लगातार कार्यक्रम की सूचना ने उन्हें चकित भी किया और भावुक भी। सौभाग्य से दो-तीन साल बाद मेरी उनसे मुलाकात भोपाल में उनके निवास में भी हुई। महासमुंद से अपने रिश्तों को उन्होंने याद रखा हुआ था। मेरे जैसे छोटे साहित्यकार को भी उन्होंने पूरा सम्मान देते हुए स्वयं शरबत बनाकर पिलाया। अपना एक संग्रह उपहार स्वरूप दिया और मिडिल ईस्ट में एक मुशायरे में मिली हुई एक शाल भी लाकर दिखाई जिसमें सोने के तारों से उनका ही एक शे'र बहुत सफाई से काढ़ा गया था। दो -तीन साल बाद एक बार फिर  वे डॉ  रमेश के बुलावे पर नीरज जी के साथ महासमुंद आए। इस समय भी उन्होंने महासमुंद से जुड़ी अपनी यादों को हमारे साथ साझा किया। कुछ वर्षों बाद दुर्भाग्य हूं वे स्मृति लोप के शिकार हो गए जिससे बहुत चाहने के बाद भी हम उन्हें महासमुंद नहीं ला पाए लेकिन अपनी शानदार ग़ज़लों, यादगार अश'आर और अनूठी प्रस्तुति के कारण बद्र साहब हमारी यादों में हमेशा बने रहेंगे। उनका ही एक शे'र है-

मुसाफ़िर  हैं हम भी, मुसाफ़िर हो तुम भी,

किसी मोड़ पर फिर मुलाकात  होगी।

अपनी ग़ज़लों और यादगार अश'आर में बशीर बद्र साहब हमेशा जिन्दा रहेंगे और निश्चित ही हर मोड़ पर और बार-बार उनकी रचनाओं के कारण उनसे मुलाकात होती रहेगी। उनकी स्मृतियों को नमन करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि।

अशोक शर्मा

शायर, साहित्यकार महासमुंद

काज़ीपेट रेल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट से 200 आधुनिक इंटरसिटी ट्रेनों का निर्माण, सस्ती और हरित यात्रा को मिलेगा बढ़ावा

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काज़ीपेट रेलवे मैन्युफैक्चरिंग यूनिट, जो भारतीय रेलवे की एक बहुउद्देशीय रेल रोलिंग स्टॉक निर्माण इकाई है, अपने पूर्ण होने के अंतिम चरण में है। प्रारंभिक चरण में इस इकाई से अगले 5 वर्षों में 200 इंटरसिटी ट्रेनों का निर्माण किया जाएगा।

इस परियोजना की समीक्षा केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू  ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ की।

इंटरसिटी ट्रेनों का उपयोग

ये ट्रेनें देशभर में छोटी दूरी की यात्रा के लिए चलाई जाएंगी। ये लगभग 300 किलोमीटर की दूरी तय करेंगी और बीच-बीच में कई स्टेशनों पर रुकेंगी। इनका उद्देश्य छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए यात्रा करने वाले नागरिकों को सस्ती और सुविधाजनक रेल सेवा उपलब्ध कराना है।

आधुनिक सुविधाओं से लैस ट्रेनें

इन इंटरसिटी ट्रेनों में कई आधुनिक सुविधाएं होंगी, जैसे:

  • ऑटोमैटिक दरवाजे

  • बेहतर वेंटिलेशन प्रणाली

  • सुरक्षित कोच डिज़ाइन

  • 20 कोच की संरचना

  • प्रत्येक कोच में दो शौचालय

इसके अलावा इनमें आधुनिक झटका-रहित कपलर और बोगियाँ होंगी। इन ट्रेनों की अधिकतम गति 130 किलोमीटर प्रति घंटा होगी।

ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण अनुकूलता

इन ट्रेनों में रीजेनेरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम होगा, जिससे ब्रेक लगाने पर उत्पन्न ऊर्जा वापस विद्युत ग्रिड में भेजी जाएगी। इससे ऊर्जा की बचत होगी और कार्बन उत्सर्जन भी कम होगा।

हरित परिवहन को बढ़ावा

रेलवे द्वारा इस बड़े बेड़े की शुरुआत से देश में हरित और स्वच्छ परिवहन क्षमता बढ़ेगी और सड़क यातायात पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है। यह परियोजना देश में किफायती और पर्यावरण-अनुकूल इंटरसिटी यात्रा के नए युग की शुरुआत मानी जा रही है।

पंचायती राज मंत्रालय की पहल: महिला प्रतिनिधियों के लिए कानूनी सुरक्षा पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन

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पंचायती राज मंत्रालय द्वारा 25 से 27 मई 2026 तक नई दिल्ली में तीन दिवसीय प्रशिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम (ToT) का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम “हिंसा से मुक्ति: महिलाओं की सुरक्षा के लिए कानूनी प्रावधानों पर निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की क्षमता निर्माण” विषय पर आधारित था।

यह कार्यक्रम मंत्रालय की निरभय रहो पहल के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसे निर्भया फंड के माध्यम से लागू किया जा रहा है। इसमें महिला एवं बाल विकास मंत्रालय तथा राष्ट्रीय विधि विद्यालय, भारत विश्वविद्यालय का सहयोग भी रहा।

कार्यक्रम का उद्देश्य

इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों और पंचायत प्रतिनिधियों की क्षमता को मजबूत करना था, ताकि वे:

  • महिलाओं की सुरक्षा और कानूनी अधिकारों को बेहतर समझ सकें

  • लैंगिक संवेदनशीलता विकसित कर सकें

  • संस्थागत प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत कर सकें

  • ग्रामीण स्तर पर सुरक्षा और सहयोग प्रणाली को बेहतर बना सकें

प्रमुख प्रतिभागी

इस कार्यक्रम में लगभग 50 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें शामिल थे:

  • राज्य ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (SIRD&PR) के प्रतिनिधि

  • राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (NIRD&PR) के प्रतिनिधि

  • पिरामल फाउंडेशन

  • ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया फाउंडेशन (TRIF)

उद्घाटन सत्र को सचिव विवेक भारद्वाज और महानिदेशक सुरेंद्रकुमार बागड़े ने संबोधित किया।

‘निरभय रहो’ पहल

सचिव ने बताया कि इस पहल के तहत तीन प्रमुख घटक लागू किए जा रहे हैं:

  • निरभय नेत्री: महिला प्रतिनिधियों का प्रशिक्षण और कानूनी जागरूकता

  • निरभय चेतना: पुरुष प्रतिनिधियों में लैंगिक समानता की जागरूकता

  • निरभय दृष्टि: ग्राम पंचायतों में सीसीटीवी जैसे तकनीकी सुरक्षा उपाय

इस कार्यक्रम का लक्ष्य देशभर में लगभग 14.5 लाख महिला और 17.5 लाख पुरुष पंचायत प्रतिनिधियों तक पहुंच बनाना है।

विशेषज्ञों के विचार

सायराम भट ने अपने संबोधन में कहा कि कानूनी साक्षरता और लैंगिक संवेदनशीलता को जमीनी स्तर पर मजबूत करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि महिलाओं के लिए न्याय और सुरक्षा व्यवस्था को सुलभ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

प्रशिक्षण की विशेषताएँ

तीन दिवसीय कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे:

  • लैंगिक हिंसा और घरेलू हिंसा

  • बाल विवाह और साइबर सुरक्षा

  • पीड़ित सहायता प्रणाली और कानूनी उपचार

  • सामुदायिक भागीदारी और फर्स्ट रिस्पॉन्डर तंत्र

प्रशिक्षण में व्याख्यान, केस स्टडी, समूह चर्चा, मूट कोर्ट और रोल प्ले जैसी गतिविधियों के माध्यम से व्यावहारिक ज्ञान दिया गया।

निष्कर्ष

कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों से फीडबैक लिया गया और इस पहल को राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में विस्तार देने पर चर्चा हुई। यह पहल ग्रामीण भारत में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

भलस्वा डंपसाइट का निरीक्षण: मनोहर लाल खट्टर ने की कचरा निस्तारण कार्यों की समीक्षा, सितंबर तक पूर्ण सफाई के निर्देश

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दिल्ली के भलस्वा डंपसाइट पर चल रहे पुराने कचरे के निस्तारण कार्य की समीक्षा के लिए केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने आज स्थल का दौरा किया। यह उनकी दूसरी ऑन-साइट निरीक्षण यात्रा थी, जिसमें उन्होंने नगरपालिका निगम दिल्ली (MCD) द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रगति का जायजा लिया।

DRAP पहल के तहत भलस्वा डंपसाइट का पुनर्विकास

यह डंपसाइट “डंपसाइट रेमेडिएशन एंड एक्शन प्लान (DRAP)” के तहत अपनाया गया है, जो आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के अंतर्गत चलाया जा रहा एक राष्ट्रीय अभियान है। इसका उद्देश्य देशभर के प्रमुख कचरा स्थलों का वैज्ञानिक तरीके से पुनर्विकास कर “लक्ष्य शून्य डंपसाइट” प्राप्त करना है।

 मनोहर लाल ने 15 सितंबर 2025 को इस डंपसाइट को औपचारिक रूप से अपनाने की घोषणा की थी और 17 सितंबर 2025 को “स्वच्छता ही सेवा” अभियान के तहत इसका स्थल निरीक्षण भी किया गया था।

कचरा निस्तारण में प्रगति

अधिकारियों ने बताया कि जून 2022 में यहां लगभग 73 लाख मीट्रिक टन पुराना कचरा मौजूद था। जुलाई 2022 से बायोमाइनिंग कार्य लगातार जारी है और प्रतिदिन लगभग 15 हजार मीट्रिक टन कचरे का प्रसंस्करण किया जा रहा है।

26 मई 2026 तक यहां बचे हुए पुराने और नए कचरे की मात्रा घटकर लगभग 23.17 लाख मीट्रिक टन रह गई है। अब तक लगभग 43 एकड़ भूमि पुनः प्राप्त की जा चुकी है, जबकि कुल साइट का क्षेत्रफल लगभग 70 एकड़ है।

पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “स्वच्छ भारत अभियान” के विजन के अनुरूप यहां वैज्ञानिक तरीकों से कचरा निस्तारण किया जा रहा है। साथ ही आसपास के क्षेत्रों में पर्यावरण सुरक्षा और नागरिक सुविधाओं में सुधार पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

मंत्री के निर्देश

निरीक्षण के दौरान मंत्री ने बायोमाइनिंग, पर्यावरण सुरक्षा, आग से बचाव, लीचेट प्रबंधन और आगे की कार्ययोजना की समीक्षा की।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि:

  • परियोजना को शीघ्र पूरा किया जाए

  • सितंबर तक डंपसाइट का पूर्ण पुनर्विकास सुनिश्चित किया जाए

  • प्रतिदिन उत्पन्न नए कचरे का तुरंत निस्तारण हो

  • भविष्य में कोई नया पुराना कचरा जमा न होने दिया जाए

  • पुनः प्राप्त भूमि का उपयोग जनहित और सामुदायिक कार्यों के लिए किया जाए

इस निरीक्षण में एमसीडी के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे और उन्होंने चल रहे कार्यों की विस्तृत जानकारी मंत्री को दी।

भारत में एआई शिक्षा सुधार की बड़ी पहल: उद्योग के साथ मिलकर पाठ्यक्रम को नया रूप देने की तैयारी

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भारत सरकार उद्योग जगत के साथ मिलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पाठ्यक्रम में व्यापक सुधार की दिशा में कार्य कर रही है, ताकि छात्रों को उभरती तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप बेहतर रूप से तैयार किया जा सके। इस संबंध में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नई दिल्ली में एआई पाठ्यक्रम टास्कफोर्स के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की।

मौजूदा पाठ्यक्रम का अध्ययन

टास्कफोर्स ने देश के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में चल रहे बी.टेक (कंप्यूटर साइंस एवं संबंधित शाखाओं) के पाठ्यक्रम का आधारभूत अध्ययन किया। यह अध्ययन उद्योग विशेषज्ञों और नैसकॉम के सहयोग से किया गया।

अध्ययन में पाया गया कि भारत में एआई से जुड़े विषयों का विस्तार हुआ है, लेकिन अभी भी शिक्षण पद्धति, बुनियादी ढांचे और व्यावहारिक प्रशिक्षण में महत्वपूर्ण अंतर मौजूद हैं। विशेष रूप से जनरेटिव एआई, मशीन लर्निंग ऑपरेशंस (MLOps) और फाउंडेशन मॉडल विकास जैसे क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता बताई गई।

प्रमुख फोकस क्षेत्र

टास्कफोर्स ने पाठ्यक्रम सुधार के लिए निम्न प्रमुख बिंदुओं पर जोर दिया:

  • व्यावहारिक आधारित शिक्षण: पहले सेमेस्टर से ही वास्तविक उद्योग उपयोग मामलों पर आधारित शिक्षा

  • क्रेडिट-आधारित एकीकरण: एआई पाठ्यक्रम को औपचारिक शैक्षणिक क्रेडिट प्रणाली में शामिल करना

  • व्यावहारिक प्रशिक्षण में वृद्धि: 25–30% से बढ़ाकर 40–75% तक व्यावहारिक अनुभव

  • उद्योग-एकीकृत शिक्षण: कैपस्टोन प्रोजेक्ट और एआई समाधान विकास पर जोर

  • जिम्मेदार एआई: सभी सेमेस्टर में एआई गवर्नेंस और नैतिकता का समावेश

  • मल्टीपल एंट्री-एग्जिट सिस्टम: प्रमाणपत्र, डिप्लोमा और उन्नत डिप्लोमा की सुविधा

शिक्षक विकास पर जोर

बैठक में यह भी माना गया कि पाठ्यक्रम सुधार के साथ-साथ शिक्षकों का प्रशिक्षण भी आवश्यक है। इसके लिए निम्न सुझाव दिए गए:

  • ट्रेन-द-ट्रेनर कार्यक्रम

  • मानकीकृत मूल्यांकन ढांचा

  • आधुनिक प्रयोगशालाओं की स्थापना

  • उद्योग विशेषज्ञों को सहायक शिक्षक के रूप में शामिल करना

साझा एआई अवसंरचना

एक राष्ट्रीय स्तर के साझा एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण का भी प्रस्ताव रखा गया, जिसमें सरकार, उद्योग और शैक्षणिक संस्थान मिलकर काम करेंगे। इससे सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को GPU कंप्यूटिंग, सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म और अन्य आधुनिक तकनीकों तक समान पहुंच मिल सकेगी।

भविष्य की कार्ययोजना

बैठक में निम्नलिखित अगले कदमों पर सहमति बनी:

  • राष्ट्रीय स्तर पर संसाधनों और आवश्यकताओं का आकलन

  • एआईसीटीई के साथ समन्वय कर नए पाठ्यक्रम को लागू करना

  • उद्योग-आधारित शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम

  • गैर-तकनीकी विषयों में एआई जागरूकता के लिए अलग कार्ययोजना

यह पहल भारत में एआई शिक्षा को वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

युवा संगम चरण-VI: हरियाणा के विद्यार्थियों का त्रिपुरा दौरा, सांस्कृतिक और शैक्षणिक आदान-प्रदान को मिला बढ़ावा

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त्रिपुरा के राज्यपाल इंद्र सेना रेड्डी नल्लू ने 26 मई 2026 को अगरतला स्थित लोक भवन में हरियाणा के छात्रों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। यह प्रतिनिधिमंडल ‘युवा संगम चरण-VI’ कार्यक्रम के तहत त्रिपुरा के दौरे पर आया हुआ था।

छात्रों का स्वागत और अनुभव

यह प्रतिनिधिमंडल, जिसका नेतृत्व राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कुरुक्षेत्र ने किया, सबसे पहले राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, अगरतला पहुंचा, जहां उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया।

राज्यपाल से मुलाकात के दौरान छात्रों ने त्रिपुरा की प्रशासनिक व्यवस्था, शासन की प्रमुख पहल और विकास प्राथमिकताओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। इस बातचीत से उन्हें राज्य की सांस्कृतिक विविधता और संस्थागत ढांचे को समझने का अवसर मिला।

सांस्कृतिक और शैक्षणिक भ्रमण

कार्यक्रम के तहत छात्रों ने त्रिपुरा के कई ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक स्थलों का दौरा किया। उन्होंने राज्य की समृद्ध परंपराओं, विरासत और विकास यात्रा को नजदीक से जाना।

इसके अलावा, छात्रों ने त्रिपुरा के प्रसिद्ध मंदिरों का भी दर्शन किया, जहां उन्हें राज्य की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का अनुभव हुआ।

‘युवा संगम’ पहल

Yuva Sangam Phase VI की शुरुआत उच्च शिक्षा विभाग, शिक्षा मंत्रालय द्वारा की गई है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक सद्भाव और भावनात्मक एकीकरण को बढ़ावा देना है।

यह कार्यक्रम 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच युवाओं के आदान-प्रदान के माध्यम से भारत की विविधता, नवाचार और राष्ट्र निर्माण की भावना को मजबूत करने पर केंद्रित है।

सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम की 30वीं वर्षगांठ: भारतीय वायुसेना की गौरवशाली परंपरा और अद्भुत हवाई कौशल का उत्सव

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भारतीय वायु सेना की प्रतिष्ठित एरोबैटिक टीम सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम (Suryakiran Aerobatic Team) ने 26 मई 2026 को एयर फ़ोर्स स्टेशन बिदर में अपनी 30वीं वर्षगांठ मनाई। यह अवसर टीम के तीन दशकों की उस गौरवशाली यात्रा को समर्पित था, जिसमें उसने सटीक हवाई करतबों और उत्कृष्ट उड़ान कौशल के माध्यम से देश का गौरव बढ़ाया है।

इस समारोह में वायु सेना प्रमुख ए. पी. सिंह और एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, ट्रेनिंग कमांड  एस. श्रीनिवास उपस्थित रहे। विशेष आकर्षण के रूप में दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने टीम के साथ स्मारक हवाई प्रदर्शन में उड़ान भी भरी।

इस अवसर पर “हॉलो डायमंड” (Hollow Diamond) संरचना में एक विशेष गठन उड़ान भरी गई, जिसे टीम के उन वीर सदस्यों की स्मृति में समर्पित किया गया जिन्होंने इस गौरवशाली यात्रा के दौरान अपने प्राणों की आहुति दी। यह श्रद्धांजलि टीम की एकता, साहस और अटूट भावना को दर्शाती है।

वर्ष 1996 में बिदर में स्थापित यह टीम अब तक भारत और विदेशों में 800 से अधिक हवाई प्रदर्शन कर चुकी है। यह टीम हॉक Mk-132 विमान उड़ाती है, जो अपनी लाल-सफेद रंग योजना के लिए प्रसिद्ध है।

“सदा सर्वोत्तम” (Always the Best) के आदर्श वाक्य के साथ सूर्यकिरण टीम आज भी नई पीढ़ी को प्रेरित कर रही है और भारतीय वायु सेना की उत्कृष्टता, अनुशासन और गौरव का प्रतीक बनी हुई है।


आईएनएस सुदर्शिनी का ऐतिहासिक अटलांटिक पार अभियान: लोकायण-26 के तहत एंटीगुआ आगमन, समुद्री सहयोग और कूटनीति को बढ़ावा

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भारतीय नौसेना का प्रशिक्षण पोत INS सुदर्शिनी 27 मई 2026 को एंटीगुआ पहुंचा, जहां उसने अपने ऐतिहासिक अटलांटिक महासागर पार अभियान को सफलतापूर्वक पूरा किया। यह यात्रा चल रहे लोकायण-26 अभियान का हिस्सा है। जहाज का स्वागत भारत के मानद महावाणिज्य दूतविजय तेवानी  तथा एंटीगुआ एवं बारबुडा रक्षा बल के रक्षा प्रमुख ब्रिगेडियर टेलबर्ट बेंजामिन ने किया।

ऐतिहासिक अटलांटिक पार यात्रा

INS सुदर्शिनी ने यह पहली बार अटलांटिक महासागर की यात्रा की है। इससे पहले वर्ष 2007 में INS तरंगिणी ने यह उपलब्धि हासिल की थी। केप वर्डे के मिंडेलो से एंटीगुआ तक का यह चरण इस अभियान का सबसे लंबा भाग रहा, जो 19 दिनों तक चला।

इस दौरान जहाज ने पूरी तरह पालों के सहारे यात्रा की और पारंपरिक समुद्री नौवहन कौशल का प्रदर्शन किया। यात्रा के दौरान चालक दल को भारी समुद्री लहरों और तेज हवाओं जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, जिसे उन्होंने अनुशासन, सतर्कता और कुशल संचालन से सफलतापूर्वक पूरा किया।

दस हजार समुद्री मील का मील का पत्थर

इस अभियान के दौरान जहाज ने 20 जनवरी 2026 को कोच्चि से रवाना होने के बाद कुल 10,000 समुद्री मील की दूरी भी पूरी कर ली।

समुद्री कूटनीति और सांस्कृतिक सहयोग

भारतीय नौसेना  का यह अभियान समुद्री सहयोग को बढ़ावा देने, अंतरराष्ट्रीय मित्रता को सुदृढ़ करने और भारत की समृद्ध समुद्री परंपराओं को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। यह अभियान “वसुधैव कुटुम्बकम्” अर्थात “संपूर्ण विश्व एक परिवार है” की भावना को भी दर्शाता है।

आगे की यात्रा

एंटीगुआ में प्रवास के दौरान जहाज का दल पेशेवर संवाद, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सामुदायिक गतिविधियों में भाग लेगा। इसके बाद यह पोत अमेरिका के नॉरफोक की ओर रवाना होगा, जहां यह आगामी SAIL 250 कार्यक्रमों में भाग लेगा।

यह अभियान पश्चिम एशिया, भूमध्यसागर, यूरोप और अफ्रीका में सफल बंदरगाह यात्राओं के बाद अब कैरेबियन और अमेरिकी चरण में आगे बढ़ रहा है।

पीयूष गोयल की कनाडा यात्रा: भारत-कनाडा आर्थिक साझेदारी को नई गति, निवेश और तकनीकी सहयोग पर जोर

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भारत और कनाडा के बीच आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 28 मई 2026 को कनाडा की तीन दिवसीय सफल और ऐतिहासिक यात्रा संपन्न की। इस यात्रा के दौरान टोरंटो में उच्च स्तरीय बैठकों, अकादमिक संस्थानों, नवाचार केंद्रों, सरकारी प्रतिनिधियों, उद्योग जगत, निवेशकों और भारतीय समुदाय के साथ कई महत्वपूर्ण संवाद हुए।

शिक्षा और नीति संवाद

मंत्री ने टोरंटो विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित Munk School of Global Affairs and Public Policy में छात्रों, शोधकर्ताओं और शिक्षकों को संबोधित किया। उन्होंने भारत की तेज आर्थिक प्रगति, सुधारों और वैश्विक नेतृत्व पर प्रकाश डाला और भारत-कनाडा संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया।

नवाचार और तकनीकी सहयोग

उन्होंने Ontario Centre of Innovation का दौरा किया और स्टार्टअप, एआई और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत का स्टार्टअप और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र दुनिया में तेजी से उभर रहा है और कनाडा इसके साथ साझेदारी कर सकता है।

उद्योग और निवेश चर्चा

मंत्री ने कनाडा-भारत व्यापार गलियारे से जुड़े उद्योग प्रतिनिधियों से मुलाकात की और व्यापार एवं निवेश को बढ़ाने पर चर्चा की। इसके अलावा उन्होंने ओंटारियो के प्रीमियर डग फोर्ड  से मुलाकात कर विनिर्माण, स्वच्छ ऊर्जा, बुनियादी ढांचा और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर बातचीत की।

प्रमुख वित्तीय संस्थानों से बैठक

गोयल ने Ontario Teachers' Pension Plan और CPP Investments के साथ बैठक की, जिसमें भारत में दीर्घकालिक निवेश अवसरों पर चर्चा हुई।

भारत-कनाडा आर्थिक लक्ष्य

उन्होंने कहा कि भारत और कनाडा के बीच वर्तमान में लगभग 8.5 अरब अमेरिकी डॉलर का व्यापार है, जिसे 2030 तक 50 अरब डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। दोनों देश CEPA (व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता) वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

प्रवासी भारतीयों से संवाद

यात्रा के अंत में उन्होंने कनाडा-भारत फाउंडेशन और भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों से बातचीत की और भारत-कनाडा संबंधों को मजबूत करने में उनके योगदान की सराहना की।

यह यात्रा भारत-कनाडा आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने और वैश्विक निवेश व सहयोग के नए अवसर खोलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।


भारत और दक्षिण कोरिया ने CEPA अपग्रेड वार्ता में प्रगति पर चर्चा, डिजिटल ट्रेड और निवेश सहयोग पर जोर

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नई दिल्ली- India-Korea Comprehensive Economic Partnership Agreement (IK CEPA) के उन्नयन को लेकर 12वें दौर की वार्ता 25 से 27 मई 2026 के बीच नई दिल्ली में आयोजित की गई। यह वार्ता 20 अप्रैल 2026 को हस्ताक्षरित संयुक्त घोषणा के बाद हुई, जिसमें दोनों देशों ने CEPA अपग्रेड वार्ता को तेज करने पर सहमति जताई थी।

यह वार्ता भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय और कोरिया के व्यापार, उद्योग एवं ऊर्जा मंत्रालय के बीच हुई। भारतीय पक्ष का नेतृत्व कपिल चौधरी ने किया, जबकि कोरियाई पक्ष का नेतृत्व Park Geun-oh ने किया।

प्रमुख चर्चा बिंदु

वार्ता के दौरान दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विचार-विमर्श किया, जिनमें शामिल हैं:

  • वस्तु व्यापार (Trade in Goods)

  • सेवाओं का व्यापार (Trade in Services)

  • मूल नियम (Rules of Origin)

  • निवेश (Investment)

  • स्वच्छता एवं फाइटोसैनिटरी मानक (SPS)

दोनों पक्षों ने डिजिटल व्यापार, सप्लाई चेन सहयोग और रणनीतिक औद्योगिक सहयोग के लिए अलग-अलग उप-समूह बनाने पर भी सहमति जताई।

व्यापार घाटे पर चर्चा

भारत और कोरिया ने स्वीकार किया कि वर्ष 2010 में CEPA लागू होने के बाद भारत का व्यापार घाटा बढ़ा है। इस मुद्दे को CEPA ढांचे के भीतर संतुलित समाधान के साथ हल करने पर सहमति बनी।

रणनीतिक साझेदारी को मजबूती

दोनों देशों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति के दृष्टिकोण के अनुरूप “फ्यूचरिस्टिक पार्टनरशिप” को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

समयबद्ध निष्कर्ष का लक्ष्य

भारत और कोरिया ने CEPA अपग्रेड वार्ता को समयबद्ध तरीके से पूरा करने और एक आधुनिक, संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी समझौता तैयार करने का लक्ष्य दोहराया, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार और सहयोग को नई दिशा मिल सके।

कोयला मंत्रालय के रोडशो में कोयला गैसीफिकेशन को लेकर बड़े निवेश और ऊर्जा आत्मनिर्भरता पर जोर

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नई दिल्ली- कोयला मंत्रालय ने नई दिल्ली में “सरफेस कोल/लिग्नाइट गैसीफिकेशन परियोजनाओं के संवर्धन” योजना पर एक सफल रोडशो का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में नीति निर्माताओं, राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों, उद्योग जगत के नेताओं, तकनीकी प्रदाताओं, निवेशकों और वित्तीय संस्थानों की बड़ी भागीदारी देखी गई।

कार्यक्रम में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि राज्य मंत्री सतिश चंद्र दुबे  विशिष्ट अतिथि रहे। साथ ही मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

कोयला गैसीफिकेशन को बताया रणनीतिक मिशन

केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत आत्मनिर्भर और भविष्य-उन्मुख ऊर्जा प्रणाली की ओर तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि कोयला गैसीफिकेशन केवल एक ऊर्जा परियोजना नहीं, बल्कि एक रणनीतिक राष्ट्रीय मिशन है।

उन्होंने बताया कि सरकार ने इस क्षेत्र के लिए ₹8,500 करोड़ की प्रोत्साहन योजना शुरू की है और हाल ही में ₹37,500 करोड़ की अतिरिक्त वित्तीय सहायता को मंजूरी दी गई है। इससे लगभग ₹2.5 लाख करोड़ तक के निवेश आकर्षित होने की उम्मीद है।

आयात पर निर्भरता कम करने पर जोर

मंत्री ने कहा कि कोयला गैसीफिकेशन से भारत की LNG, मेथनॉल, अमोनिया और उर्वरकों जैसे महत्वपूर्ण उत्पादों के आयात पर निर्भरता कम होगी। इससे किसानों, उद्योगों और उपभोक्ताओं को वैश्विक मूल्य अस्थिरता से सुरक्षा मिलेगी।

उन्होंने कहा कि यह तकनीक उर्वरक, पेट्रोकेमिकल्स, हाइड्रोजन और उन्नत निर्माण जैसे क्षेत्रों में नए अवसर पैदा करेगी और देश को स्वच्छ कोयला तकनीक में वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जाएगी।

रोजगार और औद्योगिक विकास को बढ़ावा

राज्य मंत्री सतिश चंद्र दुबे ने कहा कि यह योजना देश की ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगी। उन्होंने बताया कि यह पहल विशेष रूप से कोयला-समृद्ध और पिछड़े क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करेगी और औद्योगिक विकास को गति देगी।

भारत को वैश्विक ऊर्जा हब बनाने की दिशा

कोयला सचिव विक्रम देव दत्त ने कहा कि भारत अपने प्राकृतिक संसाधनों का अधिकतम और समझदारीपूर्ण उपयोग कर रहा है। उन्होंने कहा कि कोयला गैसीफिकेशन के जरिए भारत सिंथेटिक गैस, अमोनिया, यूरिया, हाइड्रोजन और स्टील उत्पादन जैसे क्षेत्रों में आयात निर्भरता को कम कर सकता है।

उन्होंने यह भी बताया कि यह योजना लगभग 25 परियोजनाओं के माध्यम से करीब 50,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित कर सकती है।

भविष्य की ऊर्जा रणनीति पर फोकस

कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव और भू-राजनीतिक अस्थिरता को देखते हुए भारत को अपनी घरेलू क्षमताओं को मजबूत करना आवश्यक है। रोडशो में उद्योग जगत और निवेशकों के साथ तकनीकी, वित्तीय और नीति संबंधी मुद्दों पर विस्तृत चर्चा भी हुई।

मंत्रालय ने कहा कि कोयला गैसीफिकेशन को “आत्मनिर्भर भारत” और “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में विकसित किया जाएगा।


खरीफ सम्मेलन-2026 में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रखी कृषि विकास की रूपरेखा

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नई दिल्ली- केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज नई दिल्ली स्थित पूसा परिसर में आयोजित खरीफ सम्मेलन-2026 को संबोधित करते हुए कहा कि देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, किसानों की आय बढ़ाना और नागरिकों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार लगातार कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कार्य कर रही है।

दो दिवसीय राष्ट्रीय खरीफ अभियान-2026 सम्मेलन का आयोजन 28 और 29 मई को NASC कॉम्प्लेक्स, पूसा, नई दिल्ली में किया जा रहा है। सम्मेलन में देशभर के कृषि मंत्री, वैज्ञानिक, वरिष्ठ अधिकारी, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।

‘टीम एग्रीकल्चर’ का साझा मंच

चौहान ने कहा कि खरीफ सम्मेलन ने पूरे ‘टीम एग्रीकल्चर’ को एक मंच पर लाने का कार्य किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि टीम एग्रीकल्चर में केवल केंद्र सरकार ही नहीं, बल्कि राज्य सरकारें, वैज्ञानिक, किसान उत्पादक संगठन (FPO), और कृषि क्षेत्र से जुड़े सभी हितधारक शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि कृषि राज्य का विषय है और राज्यों की सक्रिय भागीदारी से बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं, जबकि केंद्र सरकार सहयोगी और साझेदार की भूमिका निभाती है।

क्षेत्रीय कृषि सम्मेलनों पर जोर

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश की भौगोलिक और जलवायु विविधता को देखते हुए सरकार ने राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन के साथ-साथ क्षेत्रीय सम्मेलनों की शुरुआत की है। जयपुर, लखनऊ और भुवनेश्वर में क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किए जा चुके हैं, जबकि उत्तर-पूर्व और दक्षिण भारत में भी जल्द सम्मेलन आयोजित होंगे।

उन्होंने कहा कि राज्यों की समस्याओं और आवश्यकताओं पर छोटे समूहों में अधिक प्रभावी और विस्तृत चर्चा संभव हो पाती है। भविष्य में आठ कृषि-जलवायु क्षेत्रों के आधार पर क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित करने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है।

खाद्यान्न उत्पादन में रिकॉर्ड उपलब्धि

चौहान ने कहा कि किसानों की मेहनत, वैज्ञानिक अनुसंधान और केंद्र व राज्यों के सहयोग से भारत ने वर्ष 2025-26 में खाद्यान्न उत्पादन के सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।

उन्होंने बताया कि:

  • कुल खाद्यान्न उत्पादन 376.563 मिलियन टन तक पहुंच गया है।

  • चावल उत्पादन 154.024 मिलियन टन रहा और भारत ने चीन को पीछे छोड़ते हुए विश्व में पहला स्थान हासिल किया।

  • गेहूं उत्पादन 120.657 मिलियन टन और मक्का उत्पादन 55.092 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।

तेलहन उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। कुल तेलहन उत्पादन 43.059 मिलियन टन अनुमानित है। मूंगफली उत्पादन 13.074 मिलियन टन और सरसों उत्पादन 13.768 मिलियन टन तक पहुंच गया है।

प्राकृतिक खेती और जलवायु परिवर्तन पर फोकस

कृषि मंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन कृषि क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। बढ़ते तापमान, अनियमित वर्षा और लंबे सूखे जैसी परिस्थितियों को देखते हुए टिकाऊ और सुरक्षित कृषि पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।

उन्होंने बताया कि सम्मेलन में प्राकृतिक खेती, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, संतुलित उर्वरक उपयोग, डिजिटल कृषि, किसान क्रेडिट कार्ड, कृषि अवसंरचना कोष और पीएम-आशा योजना जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

छोटे किसानों की आय बढ़ाने पर जोर

चौहान ने कहा कि भारत में अधिकांश किसानों के पास छोटी जोत है, इसलिए सीमित भूमि से अधिक आय सुनिश्चित करने के लिए एकीकृत खेती मॉडल को बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पर्याप्त कृषि ऋण, निवेश और आधुनिक तकनीकों की मदद से किसान बेहतर खेती कर सकेंगे।

उन्होंने बताया कि सम्मेलन में ‘खेत बचाओ अभियान’ पर भी व्यापक चर्चा होगी और केंद्र व राज्य मिलकर खरीफ सीजन के लिए संयुक्त कृषि रोडमैप तैयार करेंगे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सिक्किम पुलिस को प्रदान किया ‘प्रेसिडेंट्स पुलिस कलर’

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गंगटोक- भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज गंगटोक में आयोजित एक समारोह में सिक्किम पुलिस को ‘प्रेसिडेंट ऑफ इंडियाज़ पुलिस कलर’ से सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्होंने सिक्किम पुलिस के सभी वर्तमान और पूर्व अधिकारियों एवं जवानों को बधाई दी।

राष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 1897 में स्थापना के बाद से सिक्किम पुलिस ने राज्य में शांति, सुरक्षा और न्याय व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि भारतीय पुलिस व्यवस्था पर लंबे औपनिवेशिक शासन की छाप रही है, जहां पुलिस का उद्देश्य जनता की सेवा करने के बजाय उन पर नियंत्रण रखना था। उन्होंने जोर देकर कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए इस औपनिवेशिक मानसिकता को पूरी तरह समाप्त करना आवश्यक है।

राष्ट्रपति ने कहा कि पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है। आम नागरिक बिना भय के अपनी शिकायत दर्ज करा सकें, इसके लिए पुलिस तंत्र को अधिक जनहितैषी बनाया जाना चाहिए। साथ ही महिलाओं, बच्चों और समाज के कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने पर भी उन्होंने बल दिया।

उन्होंने कहा कि पुलिस को केवल कानून लागू करने वाली संस्था नहीं, बल्कि जनता की सहयोगी और मार्गदर्शक बनना चाहिए। इससे जनता और पुलिस के बीच विश्वास मजबूत होगा तथा समाज में सुरक्षा और कानून के प्रति सम्मान की भावना बढ़ेगी।

राष्ट्रपति ने सिक्किम पुलिस की सराहना करते हुए कहा कि उसने राज्य में शांति और सौहार्द बनाए रखने में उल्लेखनीय योगदान दिया है। अपने पेशेवर व्यवहार और नागरिकों के प्रति मित्रवत रवैये के कारण सिक्किम पुलिस ने लोगों का सम्मान और विश्वास अर्जित किया है।


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