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जग्गी हत्याकांड में बड़ा झटका: अमित जोगी को जेल जाना तय, 3 हफ्ते में सरेंडर का आदेश

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 बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में 23 साल बाद एक बार फिर बड़ा कानूनी मोड़ आया है। बिलासपुर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच (चीफ जस्टिस की बेंच) ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी को तीन सप्ताह के अंदर सरेंडर करने का निर्देश दिया है।


क्या है पूरा मामला?

4 जून 2003 को नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेता और कोषाध्यक्ष रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस समय यह घटना पूरे राज्य में सनसनी का विषय बन गई थी। जग्गी पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के बेहद करीबी माने जाते थे और राजनीति के साथ-साथ कारोबार से भी जुड़े हुए थे।

निचली अदालत का फैसला

हत्या के मामले में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था। 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने 28 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अमित जोगी को उस समय सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था।

अब हाईकोर्ट का आदेश

रामावतार जग्गी के पुत्र सतीश जग्गी ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी थी। मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची, जहां से इसे पुनः सुनवाई के लिए हाईकोर्ट भेज दिया गया। अब हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अमित जोगी को तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का स्पष्ट आदेश जारी किया है।

अमित जोगी को बड़ा झटका

यह फैसला अमित जोगी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब अमित जोगी को तीन हफ्तों के अंदर अदालत के सामने आत्मसमर्पण करना होगा।

इस मामले में अभय गोयल, याहया ढेबर, वीके पांडे, फिरोज सिद्दीकी, राकेश चंद्र त्रिवेदी, अवनीश सिंह लल्लन, सूर्यकांत तिवारी समेत कई अन्य आरोपियों को पहले ही दोषी ठहराया जा चुका है और उन्हें उम्रकैद की सजा हो चुकी है। रामावतार जग्गी मूल रूप से कारोबारी थे। जब विद्याचरण शुक्ल कांग्रेस छोड़कर एनसीपी में आए, तब जग्गी भी उनके साथ पार्टी में शामिल हो गए और छत्तीसगढ़ में एनसीपी के कोषाध्यक्ष बने। उनकी हत्या ने उस समय राज्य की राजनीति को काफी प्रभावित किया था। हाईकोर्ट के इस ताजा आदेश से अब मामले में नया कानूनी मोड़ आ गया है और आगे की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

छत्तीसगढ़ में मौसम का अलर्ट: कई जिलों में ऑरेंज-येलो चेतावनी, तेज आंधी-बारिश का खतरा

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। मौसम विभाग ने राज्य के कई जिलों के लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। गरज-चमक के साथ तेज आंधी और बारिश की संभावना जताई गई है।


मौसम विभाग के अनुसार सूरजपुर, कोरिया, पेंड्रा, कोरबा, मुंगेली, बिलासपुर, बालोद, राजनांदगांव और बेमेतरा जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन क्षेत्रों में तेज आंधी, बिजली गिरने और मध्यम से भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।

वहीं चांपा, बलौदा बाजार, रायपुर, दुर्ग और धमतरी जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। इन इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है।

मौसम विभाग ने नागरिकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने को कहा गया है। किसानों को भी फसल और मवेशियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक इंतजाम करने की हिदायत दी गई है।

क्या करें और क्या न करें

खराब मौसम के दौरान घर से बाहर निकलने से बचें।
बिजली कड़कने के समय खुले मैदान में न रहें।
पेड़ों और कमजोर ढांचों से दूरी बनाए रखें।
मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का सीमित उपयोग करें।

‘कुछ मिनट दूर था समुद्री हमला’: नेवी चीफ का बड़ा खुलासा, ऑपरेशन सिंदूर पर पहली बार खुलकर बोले

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 नई दिल्ली। भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि मई 2025 में चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत, पाकिस्तान पर समुद्र के रास्ते सीधा हमला करने के बेहद करीब पहुंच गया था। उन्होंने कहा कि नौसेना की तैयारियां पूरी थीं और हमला करने में “महज कुछ मिनट” बाकी थे।


नौसेना अलंकरण समारोह में अधिकारियों को संबोधित करते हुए एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय नौसेना ने पूरे ऑपरेशन के दौरान आक्रामक रुख बनाए रखा। उन्होंने बताया कि स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि समुद्र से हमला लगभग तय था, लेकिन पाकिस्तान की ओर से सैन्य कार्रवाई रोकने के अनुरोध के बाद इसे टाल दिया गया।

आतंकी हमले के बाद शुरू हुआ ऑपरेशन

गौरतलब है कि ऑपरेशन सिंदूर 7 मई 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद शुरू किया गया था, जिसमें 26 नागरिकों की मौत हुई थी। इस हमले के जवाब में भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया।

100 से ज्यादा आतंकी ढेर, कई दिन चला तनाव

इस सैन्य कार्रवाई में 100 से अधिक आतंकियों के मारे जाने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच कई दिनों तक तनावपूर्ण हालात बने रहे और 10 मई को दोनों देशों के बीच शत्रुता समाप्त करने की घोषणा की गई।

नौसेना की भूमिका पर जताया गर्व

एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि इस ऑपरेशन के दौरान भारतीय नौसेना की त्वरित और निर्णायक कार्रवाई ने देश के आत्मविश्वास को मजबूत किया। उन्होंने यह भी बताया कि पश्चिमी तट पर एक ऐतिहासिक 17 घंटे की समुद्री यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नौसेना की क्षमताओं का प्रदर्शन किया गया।

पाकिस्तानी नौसेना पर बना दबाव

नेवी चीफ के अनुसार, ऑपरेशन के दौरान भारतीय नौसेना के आक्रामक रुख के चलते पाकिस्तानी नौसेना अपने बंदरगाहों और मकरान तट के पास सीमित रहने को मजबूर हो गई थी।

फिलहाल, इस खुलासे के बाद ऑपरेशन सिंदूर को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं और भारतीय नौसेना की रणनीतिक क्षमता पर एक बार फिर ध्यान केंद्रित हो गया है।

बिलासपुर में खूनी तांडव: बुजुर्ग महिला की आंख निकालकर हत्या, 7 को तलवार से काटा

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 बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में एक सनसनीखेज और बेहद क्रूर वारदात सामने आई है। रतनपुर थाना क्षेत्र के पेंडरवा गांव में बुजुर्ग महिला की बेरहमी से हत्या कर दी गई, जबकि हमले में 7 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत नाजुक बताई जा रही है।


प्राथमिक जानकारी के अनुसार घटना की वजह अवैध संबंध का शक बताया जा रहा है। आरोपियों को संदेह था कि उनकी पत्नी का शेख सलीम नामक युवक के साथ संबंध है। इसी शक के चलते तीन आरोपी तलवार लेकर सलीम के घर पहुंचे, लेकिन वह घर पर मौजूद नहीं था।

घर में घुसकर परिजनों पर हमला

सलीम के नहीं मिलने पर आरोपियों ने घर में मौजूद अन्य लोगों पर हमला कर दिया। जो भी सामने आया, उस पर तलवार से वार किया गया। हमले में एक बुजुर्ग महिला की गला रेतकर हत्या कर दी गई और उसकी आंख निकाल ली गई, जिससे इलाके में दहशत फैल गई है।

घायल छात्रा ने सुनाई आपबीती

हमले में घायल एक छात्रा ने बताया कि आरोपियों ने लोगों पर इस तरह हमला किया जैसे जानवरों को काटा जाता है। उसने बताया कि उसकी दादी की हत्या कर दी गई, भाई का चेहरा गंभीर रूप से घायल हुआ है और चाची पर भी हमला किया गया।

आरोपियों ने किया सरेंडर

वारदात को अंजाम देने के बाद तीनों आरोपी खुद ही थाने पहुंचकर पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया। पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर आगे की जांच शुरू कर दी है।

पुलिस मामले की जांच कर रही है और पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है। इलाके में तनाव की स्थिति को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है।

‘रामायण’ का भव्य टीज़र रिलीज़: रणबीर कपूर के ‘भगवान राम’ लुक ने बढ़ाई उत्सुकता, यश का ‘रावण’ अवतार भी चर्चा में

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 रायपुर/मुंबई निर्देशक नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म रामायण का टीज़र वैश्विक स्तर पर रिलीज़ होते ही चर्चा का केंद्र बन गया है। टीज़र की सबसे बड़ी खासियत रणबीर कपूर का ‘भगवान राम’ के रूप में पहला लुक है, जिसने दर्शकों की उत्सुकता को काफी बढ़ा दिया है।


फिल्म की टैगलाइन—“Before the Hero, there was Ram”—कहानी के मूल भाव को दर्शाती है, जो भगवान राम के आदर्शों और त्याग को रेखांकित करती है।


टीज़र में साई पल्लवी माता सीता के शांत और दिव्य स्वरूप में नजर आ रही हैं, वहीं यश रावण के शक्तिशाली और रौद्र अवतार में दिखाई दिए हैं। रवि दुबे लक्ष्मण के किरदार में नजर आए, जिनमें वीरता और समर्पण की झलक देखने को मिलती है।

निर्देशक नितेश तिवारी ने कहा कि ‘रामायण’ केवल अच्छाई और बुराई की कहानी नहीं, बल्कि इंसानी फैसलों और उनके परिणामों को दर्शाने वाली भावनात्मक यात्रा है। उन्होंने बताया कि फिल्म में राम के मानवीय पक्ष को ईमानदारी से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।

वहीं रणबीर कपूर ने कहा कि यह भूमिका उनके लिए एक सीखने का अवसर है। उन्होंने कहा कि वे इस किरदार के माध्यम से भगवान राम के आदर्शों को समझने की कोशिश कर रहे हैं।

फिल्म के निर्माता नमित मल्होत्रा के अनुसार, राम की कहानी की असली शक्ति उनके त्याग और कर्तव्यनिष्ठा में है, जो आज भी प्रासंगिक है।

यह फिल्म दो भागों में रिलीज़ की जाएगी और इसमें आधुनिक तकनीक व भव्य विजुअल्स के जरिए हजारों साल पुरानी कथा को नए अंदाज़ में प्रस्तुत किया जाएगा।

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के रक्षा निर्यात ने बनाया नया रिकॉर्ड, ₹38,424 करोड़ तक पहुंचा आंकड़ा

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नई दिल्ली- भारत के रक्षा निर्यात ने वित्त वर्ष 2025-26 में एक नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए ₹38,424 करोड़ का आंकड़ा छू लिया है। यह पिछले वित्त वर्ष 2024-25 के ₹23,622 करोड़ के मुकाबले ₹14,802 करोड़ (62.66%) की बड़ी वृद्धि दर्शाता है।

इस उपलब्धि में रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों (DPSUs) और निजी क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कुल निर्यात में DPSUs की हिस्सेदारी 54.84% जबकि निजी क्षेत्र की भागीदारी 45.16% रही। मूल्य के हिसाब से DPSUs ने ₹21,071 करोड़ और निजी कंपनियों ने ₹17,353 करोड़ के निर्यात में योगदान दिया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए रक्षा उत्पादन विभाग, भारतीय निर्यातकों और सभी हितधारकों की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत रक्षा निर्यात के क्षेत्र में एक प्रभावशाली सफलता की कहानी लिख रहा है और देश वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

गौरतलब है कि DPSUs के निर्यात में पिछले वर्ष की तुलना में 151% की भारी वृद्धि दर्ज की गई, जबकि निजी क्षेत्र ने 14% की वृद्धि हासिल की। पिछले वित्त वर्ष में निजी क्षेत्र का योगदान ₹15,233 करोड़ और DPSUs का ₹8,389 करोड़ था।

पिछले पांच वर्षों में रक्षा निर्यात में लगभग तीन गुना वृद्धि दर्ज की गई है, जो इस क्षेत्र की तेजी से बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।

भारत के रक्षा उत्पादों को वैश्विक स्तर पर बढ़ती स्वीकार्यता मिल रही है और देश अब 80 से अधिक देशों को रक्षा उपकरणों का निर्यात कर रहा है। इसके साथ ही निर्यातकों की संख्या भी बढ़कर 128 से 145 हो गई है, जो 13.3% की वृद्धि को दर्शाता है।

सरकार द्वारा ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देने और रक्षा निर्यातकों को सुविधाएं प्रदान करने के प्रयासों ने इस क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया है। रक्षा उत्पादन विभाग ने निर्यात प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए ऑनलाइन पोर्टल को उन्नत किया है और स्वीकृति प्रक्रियाओं को भी आसान बनाया है।

हनुमान जन्मोत्सव पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी देशवासियों को शुभकामनाएं

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज हनुमान जयंती के पावन अवसर पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। इस शुभ अवसर पर उन्होंने भगवान हनुमान से सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और ऊर्जा का संचार करने की प्रार्थना की।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि यह पावन पर्व हर किसी के जीवन में नई ऊर्जा और स्फूर्ति लेकर आए। उन्होंने कामना की कि पवनपुत्र हनुमान जी सभी को बल, बुद्धि और विद्या का भरपूर आशीर्वाद दें, जिससे देश का सामर्थ्य और अधिक मजबूत हो।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर भी अपनी शुभकामनाएं साझा करते हुए लिखा:

“सभी देशवासियों को हनुमान जन्मोत्सव की अनंत शुभकामनाएं। यह पावन अवसर हर किसी के जीवन में नई ऊर्जा और स्फूर्ति लेकर आए। मेरी कामना है कि पवनपुत्र हनुमान जी सभी को बल, बुद्धि और विद्या का भरपूर आशीर्वाद दें, जिससे देश का सामर्थ्य और बढ़े। जय बजरंगबली!”

हनुमान जयंती के अवसर पर देशभर में भक्तजन पूजा-अर्चना कर रहे हैं और मंदिरों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

सभी समाजों के सहयोग से ही विकसित छत्तीसगढ़ का सपना होगा साकार – मुख्यमंत्री साय

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रायगढ़ में उत्कल दिवस एवं वार्षिकोत्सव स्नेह सम्मेलन में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज रायगढ़ के बाबा प्रियदर्शी राम ऑडिटोरियम, पंजरी प्लांट में उत्कल सांस्कृतिक सेवा समिति द्वारा आयोजित ‘उत्कल दिवस एवं वार्षिकोत्सव स्नेह सम्मेलन’ में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्यमंत्री साय द्वारा भगवान जगन्नाथ स्वामी की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं ‘वंदे उत्कल जननी’ के मधुर गायन के साथ हुआ।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को आत्मीयतापूर्वक संबोधित करते हुए  कहा कि वे यहां अतिथि के रूप में नहीं, बल्कि अपने परिवार के बीच आए हैं। उन्होंने कहा कि रायगढ़ की जनता ने उन्हें 20 वर्षों तक सांसद के रूप में अपना भरपूर आशीर्वाद दिया है और वही स्नेह एवं अपनापन उन्हें आज भी प्राप्त हो रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने ओडिशा और छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दोनों राज्यों के बीच ‘रोटी-बेटी’ का अटूट रिश्ता है। उन्होंने कहा कि जशपुर के कुनकुरी से लेकर छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती क्षेत्रों तक बड़ी संख्या में लोग उड़िया भाषा बोलते हैं। देवभोग-गरियाबंद क्षेत्र में आज भी महाप्रसाद के रूप में भात मिलता है और छत्तीसगढ़ के कोने-कोने में रथ यात्रा का आयोजन होता है। 

मुख्यमंत्री साय ने समाज की  पत्रिका ‘सुविधा’ का विमोचन किया, जिसमें समाज के रीति-रिवाज, उपलब्धियां एवं संपर्क विवरण संकलित किए गए हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जगन्नाथ रथ यात्रा के आयोजन हेतु 5 लाख रुपये की राशि प्रदान करने की घोषणा की। 

मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन में राज्य सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी के अनुरूप छत्तीसगढ़ में ऐतिहासिक कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति दी गई है, जिनमें से 8 लाख आवास रिकॉर्ड समय में पूर्ण किए जा चुके हैं। किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की जा रही है तथा लगभग 70 लाख महिलाओं को महतारी वंदन योजना का लाभ मिल रहा है, जिससे प्रदेश खुशहाली की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा रामलला दर्शन योजना प्रारंभ की गई है, जिसके अंतर्गत अब तक लगभग 42 हजार श्रद्धालु अयोध्या पहुंचकर भगवान रामलला के दर्शन कर चुके हैं। इस योजना के माध्यम से आम नागरिकों को सुगम एवं व्यवस्थित रूप से तीर्थ दर्शन का अवसर प्राप्त हो रहा है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना को भी पुनः प्रारंभ किया गया है, जिसके अंतर्गत विभिन्न धार्मिक स्थलों के दर्शन हेतु श्रद्धालुओं को सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि धर्मांतरण कराने वालों के विरुद्ध कठोर कानून पारित किया गया है, जिसमें कड़ी सजा एवं जुर्माने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि इससे अवैध धर्मांतरण पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित होगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह एवं जवानों के अदम्य साहस से नक्सलवाद के प्रभाव को समाप्त करने में सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि अब ‘नियद नेल्लानार’ के तहत बस्तर में सड़कों, बिजली, शिक्षा एवं स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं तेजी से पहुंचाई जा रही हैं, जिससे क्षेत्र में विकास की नई धारा प्रवाहित हो रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दो वर्षों में विभिन्न विभागों में 20 से 25 हजार भर्तियां की गई हैं। चयन मंडल का गठन कर पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जा रही है, जिससे युवाओं को बिना किसी भेदभाव के अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि पीएससी गड़बड़ी की उच्च स्तरीय जांच कराई गई है तथा ई-ऑफिस प्रणाली के माध्यम से प्रशासन में पारदर्शिता लाते हुए भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ को विकसित राज्य बनाने के लिए सभी समाजों का सहयोग आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राज्य वन एवं खनिज संपदा से समृद्ध है और वन उत्पादों के वैल्यू एडिशन के माध्यम से स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ावा दिया जा रहा है।उन्होंने आगे कहा कि राज्य सरकार द्वारा बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना-2026 प्रारंभ की गई है। इस योजना के तहत बकाया बिजली बिलों के भुगतान हेतु आसान किस्तों का विकल्प उपलब्ध कराया गया है तथा सरचार्ज में राहत या छूट दी जा रही है। 

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने उत्कल समाज की 8 प्रतिभाओं को उनकी विशेष उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया।कार्यक्रम के समापन पर मुख्यमंत्री को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। 

इस अवसर पर झारसुगुड़ा विधायक टंकाधर त्रिपाठी, रायपुर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा, नगर निगम महापौर जीवर्धन चौहान सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

NATO पर ट्रंप का बड़ा हमला: ‘कागज़ी शेर’ कहकर अमेरिका के बाहर निकलने के संकेत

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 वॉशिंगटन/नई दिल्ली : पश्चिमी सैन्य गठबंधन नाटो (NATO) के भविष्य पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गठबंधन को लेकर तीखी नाराज़गी जताते हुए संकेत दिया है कि अमेरिका इससे अलग होने पर गंभीरता से विचार कर सकता है।


ब्रिटिश अख़बार टेलीग्राफ को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि वे कभी भी NATO से प्रभावित नहीं रहे और इसे “कागज़ी शेर” मानते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान से जुड़े मौजूदा तनाव के दौरान सहयोगी देशों ने अमेरिका का साथ नहीं दिया।

होर्मुज जलडमरूमध्य विवाद बना वजह

ट्रंप की नाराज़गी की मुख्य वजह होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर सहयोगी देशों का रुख बताया जा रहा है। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है, जहां से दुनिया के लगभग 30 प्रतिशत तेल का परिवहन होता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच इस जलडमरूमध्य में बाधा उत्पन्न हुई, जिसके बाद अमेरिका ने NATO देशों से इसे खुलवाने के लिए सैन्य सहयोग मांगा। हालांकि, कई यूरोपीय देशों ने युद्धपोत भेजने से इनकार कर दिया।

ट्रंप का NATO पर सीधा हमला

ट्रंप ने कहा,- “मैं NATO से कभी संतुष्ट नहीं था। मैं हमेशा से जानता था कि यह सिर्फ कागज़ी शेर है, और यह बात व्लादिमीर पुतिन भी जानते हैं।”

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अब अमेरिका के लिए इस रक्षा गठबंधन में बने रहना मुश्किल हो सकता है।

सहयोगी देशों को दी चेतावनी

ट्रंप ने ब्रिटेन समेत अन्य सहयोगी देशों पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए खुद आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो देश ईरान के खिलाफ कार्रवाई में शामिल नहीं हुए, उन्हें अमेरिका पर निर्भर रहने के बजाय खुद कदम उठाने चाहिए।

ट्रंप ने कहा,
“आपको खुद के लिए लड़ना सीखना होगा। अमेरिका अब हमेशा आपकी मदद के लिए मौजूद नहीं रहेगा, ठीक वैसे ही जैसे आप हमारी मदद के लिए मौजूद नहीं थे।”

वैश्विक राजनीति पर पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका NATO से अलग होता है, तो इसका सीधा असर यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था और वैश्विक शक्ति संतुलन पर पड़ेगा। इससे रूस जैसे देशों को रणनीतिक बढ़त मिल सकती है और अंतरराष्ट्रीय गठबंधनों की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।

पारसनाथ बने किसान-मजदूर महासंघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष,किसानो में हर्ष की लहर

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आरंग- राष्ट्रीय किसान नेता और समाजसेवी पारसनाथ साहू को किसान मजदूर महासंघ मध्यप्रदेश की संस्था द्वारा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनोनीत किया गया है। उन्होंने बताया यह  संस्था किसान मजदूर महासंघ मध्यप्रदेश द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर संचालित  है।जिसके राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकुमार  कक्का ने उनकी सक्रियता और कार्य प्रणाली को देखते हुए नियुक्ति पत्र भेजकर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मनोनीत किये है। ज्ञात हो कि पारसनाथ साहू काफी लंबे समय से मजदूरों और किसानों की समस्याओं, अनाज का उचित लाभकारी समर्थन मूल्य पर खरीदी की कानूनी गारंटी दिलाने, प्रदेश मे धान खरीदी में होने वाली अव्यवस्थाओं और समस्याओं सहित सिंचाई,बिजली,पानी, खाद बीज इत्यादि की उपलब्धता सुनिश्चित कराने लगातार प्रयासरत हैं।

वहीं पारसनाथ को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाये जाने पर क्षेत्र व प्रदेश के किसानों में हर्ष की लहर है। उन्होंने कहा है अब किसानों और मजदूरों की मांग व समस्यायों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता से रखते हुए उसके समाधान का प्रयास किया जाएगा। वहीं उनके राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनने पर अंचल के किसान नेता गोविन्द चन्द्राकर, श्रवण चन्द्राकर, झनकराम आवडे, घनाराम साहू, तेजराम विद्रोही, लक्ष्मी पटेल, दीपक चौहान,लल्लू सिंह,जुगनू चन्द्राकर, दूजेराम धीवर, योगेश, ईश्वरी साहू सहित सामाजिक संगठन पीपला वेलफेयर फाउंडेशन ने हर्ष व्यक्त करते हुए बधाई दिए हैं।

दूध बेचने से लेकर पहला करियर गोल्ड जीतने तकः जम्मू-कश्मीर के हमाम हुसैन की प्रेरणादायक कहानी

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28 वर्षीय पहलवान परिवार का गुजारा चलाने के लिए घर-घर दूध पहुंचाते हुए भी कुश्ती का अभ्यास करते रहे

मिट्टी के अखाड़े में अभ्यास के लिए 20 किमी और मैट ट्रेनिंग के लिए जम्मू तक 40 किमी का सफर तय करते हैं

रायपुर-   जब जम्मू-कश्मीर के हमाम हुसैन कुश्ती का अभ्यास नहीं कर रहे होते, तो वे अपने बड़े भाई के साथ घर-घर जाकर दूध पहुंचाने का काम करते हैं। जम्मू के जोरावर गांव के रहने वाले 28 वर्षीय हमाम के लिए जिंदगी और खेल हमेशा साथ-साथ चले हैं। पांच साल पहले पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके और उनके बड़े भाई के कंधों पर आ गई। दोनों ने मिलकर दूध बेचकर घर चलाया और इसी के साथ हमाम ने अपने कुश्ती के सपने को जिंदा रखा।

यह संघर्ष आखिरकार खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स- 2026 में रंग लाया, जहां हमाम ने पुरुषों के 79 किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग में हिमाचल प्रदेश के मोहित कुमार को हराकर स्वर्ण पदक जीता। यह उनके 14 साल के कुश्ती करियर का पहला राष्ट्रीय स्तर का स्वर्ण पदक है।

हमाम ने साई मीडिया से कहा, “मेरे बड़े भाई भी पहलवान थे और राज्य स्तर पर खेल चुके हैं। पिता के निधन के बाद सारी जिम्मेदारी हम पर आ गई। मेरे भाई को कुश्ती छोड़नी पड़ी और उन्होंने दूध बेचना शुरू कर दिया। मैं भी उनके साथ दूध देने जाता था क्योंकि परिवार चलाना जरूरी था।लेकिन मेरे भाई ने मुझे हमेशा कुश्ती जारी रखने के लिए प्रेरित किया और मुझे दंगलों में लेकर जाते थे।”

हमाम ने बताया कि उनके पिता की छोड़ी हुई भैंसें ही परिवार की आजीविका का साधन बनीं। एक बच्चे के पिता हमाम ने कहा, “मेरे भाई ने दूध बेचकर घर चलाया और मैं उनकी मदद करता था। लेकिन जब मैंने मिट्टी के अखाड़े में कदम रखा, तो इस खेल से मुझे लगाव हो गया।”

सीमित संसाधनों के बावजूद हमाम ने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी। वे अपने गांव से करीब 20 किलोमीटर दूर मिट्टी के अखाड़े में अभ्यास करते हैं और मैट पर ट्रेनिंग के लिए लगभग 40 किलोमीटर दूर जम्मू तक का सफर तय करते हैं। वह भी अपने काम की जिम्मेदारियों के साथ। उन्होंने कहा, “साई सेंटर जम्मू में है और हम निचले इलाके में रहते हैं, इसलिए वहां नियमित रूप से जाना मुश्किल होता है। हम आमतौर पर प्रतियोगिताओं के दौरान ही वहां जाते हैं, वरना गांव के अखाड़ों में ही अभ्यास करते हैं।”

हमाम आगे कहते हैं, “मेरे पास कोई व्यक्तिगत कोच नहीं है। अखाड़े में सीनियर पहलवान हमें मार्गदर्शन देते हैं। जब हम मैट पर अभ्यास करते हैं, तब वहां कोच होते हैं। गांवों में हमें शहरों जैसी सुविधाएं नहीं मिलतीं। अगर बेहतर सुविधाएं मिलें, तो हमारे क्षेत्र के पहलवान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक पदक जीत सकते हैंl हमाम के लिए यह स्वर्ण पदक सिर्फ एक जीत नहीं, बल्कि वर्षों के संघर्ष और समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने अंत में कहा, “यहां आकर बहुत अच्छा लगा। यहां की सुविधाएं बहुत अच्छी थीं। हम एक पिछड़े इलाके से आते हैं, जहां कुश्ती के लिए ज्यादा समर्थन नहीं है, इसलिए हमें दूर-दूर तक जाना पड़ता है। यह पहली बार है जब हमारे लिए इस तरह की प्रतियोगिता आयोजित की गई है। अगर ऐसे और आयोजन होते रहें, तो हम और पदक जीत सकते हैं।”

जनवरी 2026 में रेस-वॉक शुरू करने वाली शिलांग की युवा एथलीट बेथलीन माकरी ने खुद पर यकीन रखते हुए खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में जीता कांस्य पदक

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रायपुर- पिछले साल 29 दिसंबर को शिलांग के साई के स्पोर्ट्स ट्रेनिंग सेंटर में बेथलीन ग्रेस माकरी के कोच ने अचानक इस युवा एथलीट में एक रेस-वॉक एथलीट बनने की काबिलियत देखी। मजे की बात यह है कि बेथलीन खुद इस इवेंट के बारे में लगभग कुछ भी नहीं जानती थी और इसकी तकनीकी बारीकियों की तो बात ही छोड़ दें।

पिछले साल तक, मेघालय की यह युवा एथलीट एक मिडिल और लॉन्ग-डिस्टेंस रनर के तौर पर मुकाबला कर रही थीं। लेकिन 2026 की शुरुआत में, उसे अपना खेल बदलने के लिए कहा गया जिसने उसकी शारीरिक और मानसिक, दोनों तरह की ताकत की परीक्षा ली।

खासी ट्राइब से आने वाली बेथलीन के लिए यह बदलाव बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। उनके लिए शुरुआती कुछ सप्ताह बहुत कठिन थे, जब वह रेस-वॉक की अनजान तकनीक के साथ तालमेल बिठाने की कोशिश कर रही थीं और शरीर में तेज दर्द से जूझ रही थीं। इसके चलते कई रातें बिना नींद के बीतीं और मन में आत्म-संदेह भी पैदा होने लगा।

हालांकि, उनके कोच और परिवार के सहयोग ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी। तीन भाई-बहनों में सबसे छोटी और इकलौती बेटी होने के नाते, बेथलीन ने इस चुनौती को स्वीकार किया और खेल की तकनीकी बारीकियों को सीखने में खुद को पूरी तरह समर्पित कर दिया। इसके बाद उन्होंने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के पहले एडिशन में भाग लेने के लिए जगदलपुर का रुख किया।

उन्होंने साई मीडिया से कहा, '' पहले दो हफ्ते वाकई बहुत मुश्किल थे, खासकर मेरे शरीर के लिए। रेस-वॉक की तकनीकी बारीकियां मध्यम या लंबी दूरी की दौड़ से बिल्कुल अलग होती हैं, इसलिए मुझे इसे समझने में समय लगा। इसके बाद कई रातों तक नींद नहीं आई, घबराहट के पल आए और आखिरकार मुझे खुद पर शक होने लगा कि क्या मेरा फैसला सही था।'' 

लेकिन बुधवार को उन संघर्षों का भरपूर फल मिला। बेथलीन ने महिलाओं की रेस-वॉक स्पर्धा में 1:05:18 का समय निकालकर कांस्य पदक जीता। वह झारखंड की नेहा ज़ालक्सो (1:04:02) और ओडिशा की एलीश एक्का (1:04:59) के बाद तीसरे स्थान पर रहीं।

पदक जीतने के कुछ ही पलों बाद इस एथलीट ने इसका श्रेय अपने कोच और परिवार को दिया। उन्होंने कहा, ''मेरे कोच और मेरे परिवार ने मेरा पूरा साथ दिया, और मुझे इसे जारी रखने के लिए लगातार प्रेरित करते रहे। मैंने भी इसे आज़माने का सोचा, और आज मैं यहां हूं। मेरे पास अभी भी सुधार की गुंजाइश है, लेकिन यह ठीक वैसी ही शुरुआत थी जिसकी मुझे ज़रूरत थी।'' 

उन्होंने आगे कहा, '' खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में मिला कांस्य पदक मेरी कड़ी मेहनत, मेरे विश्वास और मेरे कोचों व परिवार के समर्थन का प्रमाण है और यह इस खेल में आगे बढ़ने के लिए मेरे आत्मविश्वास को बढ़ाने का काम करता है।“

शिलांग कॉलेज में बीए की दूसरे वर्ष की छात्रा बेथलीन को इस बात पर बेहद गर्व है कि वह मेघालय की एकमात्र ऐसी 'रेस वॉकर' हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीता है।

उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, '' मेघालय से कोई रेस वॉकर नहीं है और मेरा मानना है कि मेरा 'खेलो इंडिया' पदक युवाओं को इस खेल को पेशेवर तौर पर अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगा। मुझे भी अब यह खेल पसंद आने लगा है।''

आरंग में हर्षोल्लास से मनाया जाएगा हनुमान जन्मोत्सव, जगह-जगह होगा भोग भंडारे का आयोजन

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आरंग- मंदिरों की नगरी आरंग के हर गली मोहल्ले में स्थापित है पवन पुत्र हनुमान। जहां प्रतिदिन श्रद्धालु आते जाते मत्था टेककर कामना करते हैं। खासकर शनिवार और मंगलवार को भक्तगण यहां पहुंचकर सुंदर काण्ड और हनुमान चालीसा का जाप करते हैं। वहीं आज हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर नगर सहित अंचल के गांव-गांव में जगह-जगह भोग भंडारा, हनुमान चालीसा, सुंदर काण्ड पाठ, भजन कीर्तन किया जा रहा है। प्रातः से ही साधक हनुमान मंदिरो में पहुंचकर पूजा आराधना में जुट जाएंगे।

यह नगर में सबसे अधिक हनुमान जी का मंदिर है। जिनमें महामाया पारा में विराजमान उत्तरमुखी नारायणबन हनुमान, जगन्नाथ मंदिर में स्थापित दक्षिणमुखी हनुमान, गुप्ता पारा में स्थापित हनुमान, बागेश्वर मंदिर के सामने स्थापित हनुमान, पुराने सब्जी बाजार में स्थित रेणुक देव हनुमान, बरगुडी पारा का हनुमान, बस स्टैण्ड में स्थापित प्राचीन हनुमान मंदिर व प्रतिमाएं प्रमुख हैं। यही कारण है इस नगर में प्रतिवर्ष हनुमान जन्मोत्सव को बहुत ही हर्षोल्लास से मनाया जाता है।भक्त इस दिन प्रायः सभी हनुमान जी की प्रतिमाओ में सिंदूर का लेप कर विशेष रूप से पूजा अर्चना करते हैं। सुंदर काण्ड और हनुमान चालीसा का पाठ और भजन कीर्तन करते हैं। बहुत हर्षोल्लास से हनुमान जन्मोत्सव को मनाते है।


जगदलपुर में केंद्रीय मंत्री रक्षा खडसे ने महिला स्व-सहायता समूहों और बस्तर की पारंपरिक कला को सराहा

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केंद्रीय युवा मामले एवं खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे ने आज जगदलपुर में ‘छत्तीस कला’ ब्रांड के अंतर्गत प्रगति महिला स्व-सहायता समूह के ग्रोथ सेंटर और स्टॉल का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने स्थानीय उत्पादों का अवलोकन किया और स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिला उद्यमियों से संवाद किया।

इस दौरे ने छत्तीसगढ़ में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और सामुदायिक विकास की दिशा में हो रही उल्लेखनीय प्रगति को उजागर किया। रक्षा खडसे ने कहा कि स्व-सहायता समूह महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक परिवर्तन के प्रेरक के रूप में भी उभर रहे हैं।

उन्होंने राज्य की महिला-केंद्रित योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘महतारी वंदन योजना’ जैसी पहल महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है। इसके साथ ही ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से उत्पादों की बिक्री, रेडी-टू-ईट खाद्य पदार्थों का निर्माण और ‘लखपति दीदी योजना’ जैसी पहलों से आजीविका के नए अवसर और बाजार तक पहुंच बढ़ रही है।

मंत्री ने कहा कि ये प्रयास न केवल आय सृजन में सहायक हैं, बल्कि पोषण सुरक्षा, रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने इसे ‘नारी शक्ति’ के नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में एक मजबूत कदम बताया।

बस्तर जिले के चिलकुटी गांव के दौरे के दौरान रक्षा खडसे ने क्षेत्र की समृद्ध कला और सांस्कृतिक विरासत का भी अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने पारंपरिक ‘ढोकरा कला’ (लॉस्ट-वैक्स तकनीक) को करीब से देखा, जो बस्तर की जनजातीय कला का एक प्रमुख और विशिष्ट रूप है।

उन्होंने इस कला के संरक्षण के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह केवल एक कला नहीं, बल्कि स्थानीय जनजातीय समुदायों की जीवित सांस्कृतिक धरोहर और विरासत का प्रतीक है। साथ ही, यह पारंपरिक कला स्थानीय लोगों के लिए स्थायी आजीविका का महत्वपूर्ण साधन भी है।

कार्यक्रम के दौरान रक्षा खडसे ने महिला उद्यमियों और कारीगरों से संवाद किया, उनके कार्यों की सराहना की और उन्हें अपने प्रयासों को और आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया।

इस अवसर पर जिला कलेक्टर आकाश छिकारा (IAS), पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा (IPS), जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रतीक जैन (IAS) और एसडीएम गगन शर्मा उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ में महिला-नेतृत्व वाले स्व-सहायता समूहों और पारंपरिक जनजातीय कलाओं के माध्यम से हो रहा परिवर्तन महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण विकास और समावेशी आर्थिक वृद्धि का एक प्रेरक मॉडल बनकर उभर रहा है।


वैज्ञानिकों ने अंगूर में बीजरहितता के आनुवंशिक रहस्यों का किया खुलासा

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वैज्ञानिकों ने अंगूर में बीजरहित (Seedless) होने के पीछे छिपे महत्वपूर्ण आनुवंशिक और विकासात्मक तंत्रों का खुलासा किया है। बीजरहित अंगूर, अपने पतले छिलके, मीठे स्वाद और बेहतर बनावट के कारण उपभोक्ताओं और अंगूर उद्योग में अत्यधिक पसंद किए जाते हैं, जिससे यह गुण प्रजनन कार्यक्रमों में अत्यंत महत्वपूर्ण बन गया है।

अंगूर विश्व की प्रमुख बागवानी फसलों में से एक है, जिसका बड़ा हिस्सा ताजे फल या किशमिश जैसे प्रसंस्कृत उत्पादों के रूप में उपयोग होता है। हालांकि बीजरहित अंगूर की मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इसके पीछे के जैविक तंत्र अभी तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं थे।

यह शोध पुणे स्थित आघारकर अनुसंधान संस्थान (ARI), जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्थान है, तथा सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय के सहयोग से किया गया। इस अध्ययन में पराग (पोलन) की निष्क्रियता से बीजरहित अंगूर बनने की आणविक और जीनोमिक प्रक्रियाओं पर नई जानकारी प्राप्त हुई है, जिससे बेहतर गुणवत्ता और अधिक उत्पादन वाली नई किस्में विकसित करने में मदद मिलेगी।

यह अध्ययन हाल ही में ‘BMC Plant Biology’ में प्रकाशित हुआ है, जिसमें संस्थान द्वारा विकसित उच्च उत्पादक अंगूर किस्म ARI-516 से प्राप्त एक बीजरहित म्यूटेंट का विश्लेषण किया गया।

डॉ. रवींद्र पाटिल के नेतृत्व में शोध टीम ने बीज वाले अंगूर (ARI-516) और उसके बीजरहित म्यूटेंट के बीच तुलनात्मक अध्ययन किया। सूक्ष्म परीक्षण में पाया गया कि बीजरहित म्यूटेंट में पराग कणों का आकार असामान्य था, उनकी जीवित रहने की क्षमता बहुत कम थी और वे अंकुरित नहीं हो पाते थे, जिससे पराग की निष्क्रियता बीजरहितता का मुख्य कारण सामने आई।

इसके अलावा, मादा प्रजनन संरचनाएं (मैक्रोगैमेटोफाइट्स) भी सामान्य किस्म की तुलना में छोटी पाई गईं, जिससे निषेचन प्रक्रिया बाधित होती है और अंततः बीजरहित फल बनते हैं।

आणविक स्तर पर, वैज्ञानिकों ने ट्रांसक्रिप्टोमिक विश्लेषण (RNA सीक्वेंसिंग) किया, जिससे पता चला कि पराग विकास, कोशिका विभाजन और हार्मोन सिग्नलिंग से जुड़े कई जीन बीजरहित म्यूटेंट में कम सक्रिय थे। साथ ही, जीनोम सीक्वेंसिंग में कई ‘इन्सर्शन-डिलीशन’ (InDel) म्यूटेशन पाए गए, जो पराग निर्माण और उसके कार्य को प्रभावित करते हैं।

वैज्ञानिकों के अनुसार, यह बीजरहितता ‘पार्थेनोकार्पी’ नामक प्रक्रिया के कारण होती है, जिसमें निषेचन के बिना ही फल का विकास होता है। यह प्रक्रिया पराग निर्माण और प्रजनन में दोष के कारण उत्पन्न होती है।

यह अध्ययन आधुनिक जीनोमिक तकनीकों का उपयोग करते हुए अंगूर में पार्थेनोकार्पिक बीजरहितता को समझने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इससे जुड़े जीनों की पहचान भविष्य में अंगूर की उन्नत बीजरहित किस्मों के विकास में सहायक होगी, जिससे उत्पादन, गुणवत्ता और अनुकूलन क्षमता में सुधार होगा और बागवानी क्षेत्र को लाभ मिलेगा।

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