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तीज के रंग में रंगा रायपुर प्रेस क्लब, लक्ष्मी राजवाड़े ने रैंप वॉक कर बढ़ाया महिला पत्रकारों का उत्साह

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 रायपुर : रायपुर प्रेस क्लब में रविवार को आयोजित महिला पत्रकारों का तीज महोत्सव पारंपरिक उल्लास, उमंग और आत्मीयता के रंगों से सराबोर रहा। कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने शामिल होकर महिला पत्रकारों का उत्साह बढ़ाया और तीज की खुशियों में सहभागी बनीं। उन्होंने महिला पत्रकारों के साथ विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लेने के साथ पारंपरिक छत्तीसगढ़ी अंदाज में रैंप वॉक भी किया। उनका सहज, आत्मीय और सादगीपूर्ण अंदाज आयोजन के प्रमुख आकर्षणों में रहा।


तीज महोत्सव में राज्यसभा सदस्य लक्ष्मी वर्मा और विधायक भावना बोहरा भी विशेष रूप से शामिल हुईं। भावना बोहरा ने महिला पत्रकारों के साथ रैंप वॉक कर कार्यक्रम की रौनक बढ़ाई, वहीं लक्ष्मी वर्मा ने भी रैंप पर अपनी प्रस्तुति देकर महिला पत्रकारों के साथ तीज की खुशियां साझा कीं। जनप्रतिनिधियों की इस आत्मीय सहभागिता से महिला पत्रकारों का उत्साह और बढ़ा।

पारंपरिक परिधानों में दिखा सादगी और आत्मविश्वास

महोत्सव का सबसे खास आकर्षण रैंप वॉक रहा। महिला पत्रकारों ने पारंपरिक परिधानों में सादगी, सौंदर्य और आत्मविश्वास के साथ रैंप पर अपनी प्रस्तुति दी। वहीं लक्ष्मी राजवाड़े का सिर पर पल्लू लेकर पारंपरिक छत्तीसगढ़ी अंदाज में रैंप पर उतरना विशेष रूप से सराहा गया। इस दौरान पूरे परिसर में उत्साह और तालियों की गूंज सुनाई दी।

खेल-प्रतियोगिताओं और मनोरंजन ने बढ़ाई महोत्सव की रौनक

तीज महोत्सव के दौरान महिला पत्रकारों के लिए विभिन्न मनोरंजक खेल और प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। महिला पत्रकारों ने उत्साहपूर्वक इनमें हिस्सा लिया और हंसी-मजाक तथा मस्ती के बीच आयोजन का आनंद लिया। प्रतियोगिताओं के दौरान प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया गया और उनकी प्रस्तुतियों का मूल्यांकन किया गया।

महिला पत्रकारों के योगदान की लक्ष्मी राजवाड़े ने की सराहना

महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि तीज छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और महिलाओं के उल्लास से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। रायपुर प्रेस क्लब द्वारा महिला पत्रकारों के लिए तीज महोत्सव का आयोजन सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि महिलाएं पत्रकारिता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाते हुए समाज की आवाज को मजबूती से सामने रखने का कार्य कर रही हैं। ऐसे आयोजन उन्हें व्यस्त कार्यदायित्वों के बीच आपसी संवाद, आत्मीयता और उत्सव का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने सभी महिला पत्रकारों को तीज पर्व की शुभकामनाएं दीं।

राज्यसभा सदस्य लक्ष्मी वर्मा ने तीज को महिलाओं की खुशियों, आत्मीयता और सांस्कृतिक परंपराओं का पर्व बताते हुए महिला पत्रकारों को शुभकामनाएं दीं। विधायक श्रीमती भावना बोहरा ने कहा कि महिला पत्रकार समाज के महत्वपूर्ण मुद्दों को सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। ऐसे आयोजन महिलाओं को साथ मिलकर खुशियां साझा करने और आपसी सहभागिता को मजबूत करने का अवसर देते हैं।

महिला पत्रकारों को दिए गए रिटर्न गिफ्ट

कार्यक्रम के समापन पर सभी महिला पत्रकारों को रिटर्न गिफ्ट प्रदान किए गए। उपहार पाकर महिला पत्रकारों में खासा उत्साह देखने को मिला। तीज के पारंपरिक रंग, रैंप वॉक की आकर्षक प्रस्तुतियां, खेल-प्रतियोगिताएं और आत्मीय मेलजोल ने पूरे प्रेस क्लब परिसर को उत्सव के माहौल में बदल दिया।

कार्यक्रम में रायपुर प्रेस क्लब अध्यक्ष मोहन तिवारी, महासचिव गौरव शर्मा, उपाध्यक्ष दिलीप साहू, कोषाध्यक्ष दिनेश यदु, संयुक्त सचिव निवेदिता साहू एवं भूपेश जांगड़े सहित आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाने वाली अमृता शर्मा, प्रियंका कौशल, मीनल शर्मा, आकांक्षा दुबे, विनीता मंडल, सोनल भारद्वाज, सुजाता साहा, अंबिका मिश्रा सहित बड़ी संख्या में महिला पत्रकार एवं प्रेस क्लब सदस्य उपस्थित रहे।

CG NEWS : पुरानी रंजिश में युवक की चाकू मारकर हत्या, नाबालिग ने थाने में किया सरेंडर

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 धमतरी। जिले के अर्जुनी थाना क्षेत्र के कंडेल गांव में पुरानी रंजिश को लेकर हुए विवाद में एक युवक की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, विवाद के दौरान एक नाबालिग ने युवक पर चाकू से हमला कर दिया। गले में गंभीर चोट लगने से युवक की मौके पर ही मौत हो गई।


घटना के बाद नाबालिग आरोपी अर्जुनी थाने पहुंचा और पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस पूरे घटनाक्रम, विवाद के कारण और हत्या में आरोपी की भूमिका की जांच कर रही है।

खाना खाने के बाद टहलने निकला था युवक

परिजनों के मुताबिक, मृतक खाना खाने के बाद गोठान मैदान की ओर टहलने के लिए निकला था। इसी दौरान उसका विवाद हुआ और उस पर चाकू से हमला किए जाने की जानकारी सामने आई। गंभीर चोट लगने के कारण उसकी मौत हो गई।

आरोपी की उम्र और कद को लेकर परिजनों ने जताया संदेह

मृतक के परिजनों ने पुलिस के सामने आरोपी की कम उम्र और कद को लेकर संदेह जताते हुए मामले की गहराई से जांच की मांग की है। परिजनों का कहना है कि घटना की परिस्थितियों और आरोपी की पहचान से जुड़े सभी पहलुओं की जांच होनी चाहिए।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद स्थिति होगी स्पष्ट

फिलहाल अर्जुनी पुलिस मामले की जांच में जुटी है। पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के लोगों से जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के आधार पर हत्या के कारणों और पूरे घटनाक्रम की स्थिति और स्पष्ट होगी।

नदी के बहाव से ओडिशा भेज रहे थे सागौन के लट्ठे, अंतरराज्यीय तस्करी गिरोह का पर्दाफाश

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 गरियाबंद। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन विभाग ने स्मार्ट सर्विलांस और मानसून पेट्रोलिंग के जरिए अंतरराज्यीय सागौन तस्करी गिरोह का पर्दाफाश किया है। वन विभाग और गरियाबंद पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए तीन तस्करों को गिरफ्तार किया है। जांच में तस्करी के ओडिशा कनेक्शन का भी खुलासा हुआ है।


लट्ठों को बांधकर बनाई थी लकड़ी की बेड़ी

जानकारी के अनुसार, तस्करों ने उदंती नदी के किनारे सागौन के पेड़ों की अवैध कटाई की थी। काटे गए सागौन के लट्ठों को रस्सियों के सहारे आपस में बांधकर बेड़ी का रूप दिया गया था, ताकि नदी के बहाव के साथ उन्हें ओडिशा तक पहुंचाया जा सके।

स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम में संदिग्ध गतिविधियां कैद होने के बाद वन विभाग ने तकनीकी निगरानी और मैदानी सूचना तंत्र के आधार पर कार्रवाई शुरू की। मानसून के दौरान नदी और आसपास के जंगलों में पेट्रोलिंग बढ़ाई गई थी। इसी दौरान तस्करी से जुड़े लोगों की गतिविधियों का पता चला और संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया।

ओडिशा से भी एक आरोपी गिरफ्तार

जांच के दौरान तस्करी नेटवर्क के अंतरराज्यीय कनेक्शन की जानकारी सामने आई। वन विभाग की टीम ने नेटवर्क से जुड़े एक आरोपी को ओडिशा से गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के मुताबिक, मामले में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

पूरे नेटवर्क की कड़ियां खंगाल रही टीम

फिलहाल वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम अंतरराज्यीय लकड़ी तस्करी नेटवर्क की कड़ियों को खंगाल रही है। अवैध कटाई में शामिल अन्य आरोपियों और तस्करी के पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

जन्माष्टमी पर उमड़ा जनसैलाब, पुलिस की सख्ती से शांतिपूर्ण रहा गोविंदा उत्सव

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 डोंगरगढ़। कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर डोंगरगढ़ में आयोजित गोविंदा उत्सव इस बार अपनी सुरक्षा व्यवस्था और जीरो-इंसिडेंट आयोजन को लेकर चर्चा में रहा। करीब 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं की मौजूदगी और देर रात तक चले कार्यक्रम के बावजूद कोई अप्रिय घटना सामने नहीं आई। पुलिस की सख्त और पूर्व नियोजित व्यवस्था के चलते उत्सव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।


पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा के निर्देश पर पुलिस ने इस बार घटना के बाद कार्रवाई के बजाय घटना से पहले रोकथाम की रणनीति अपनाई। आयोजन से करीब एक सप्ताह पहले ही सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन की तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। आयोजन समिति, डीजे और साउंड संचालकों सहित अन्य संबंधित लोगों के साथ बैठक कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

प्रमुख मार्गों पर तैनात रहा पुलिस बल

गोविंदा उत्सव के दौरान प्रमुख चौक-चौराहों, शोभायात्रा मार्ग और कार्यक्रम स्थलों पर पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिस की अलग-अलग टीमें लगातार भीड़ के बीच सक्रिय रहीं और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी गई।

भीड़ के बीच तलाशी और निगरानी के दौरान पुलिस ने दो बड़े बोरों में कड़े जब्त किए। इसके अलावा कई धारदार हथियार भी बरामद किए गए। पुलिस की इस कार्रवाई का उद्देश्य उत्सव के दौरान किसी भी तरह के विवाद या हिंसक घटना की आशंका को पहले ही रोकना था।

अवैध शराब पर भी कसा शिकंजा

उत्सव से पहले पुलिस ने अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ भी अभियान चलाया। लगातार निगरानी और कार्रवाई के चलते उत्सव के दौरान अवैध शराब की बिक्री पर प्रभावी अंकुश रहा। पुलिस की सख्ती से शराब के कारण होने वाले विवाद और हुड़दंग की आशंका भी कम रही।

300 से अधिक पुलिसकर्मियों की रही तैनाती

पूरे आयोजन की सुरक्षा व्यवस्था के लिए 300 से अधिक पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी। भीड़ नियंत्रण, यातायात व्यवस्था, संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की अलग-अलग टीमें तैनात रहीं।

पुलिस की प्रिवेंटिव पुलिसिंग और व्यापक सुरक्षा व्यवस्था के चलते डोंगरगढ़ का गोविंदा उत्सव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बावजूद किसी अप्रिय घटना का नहीं होना पुलिस की सुरक्षा रणनीति की बड़ी सफलता माना जा रहा है।

अजा एकादशी आज: ऐसे करें भगवान विष्णु की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त

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 हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना गया है। यह तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होती है। साल में 24 एकादशी आती हैं, जिनमें भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अजा एकादशी भी प्रमुख मानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखने और भगवान विष्णु की आराधना करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।


पंचांग के अनुसार इस वर्ष अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर 2026, सोमवार को रखा जा रहा है। मान्यता है कि विधि-विधान से अजा एकादशी का व्रत करने से अश्वमेध यज्ञ और एक हजार गौदान के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।

अजा एकादशी पर ऐसे करें पूजा

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • हाथ में गंगाजल लेकर व्रत का संकल्प लें।
  • घर के मंदिर की साफ-सफाई कर गंगाजल से शुद्ध करें।
  • भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • भगवान विष्णु को पीले वस्त्र, पीले फूल और तुलसी दल अर्पित करें।
  • चंदन, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित कर भोग लगाएं।
  • भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  • अजा एकादशी की कथा का पाठ करें।
  • अंत में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें।
  • परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और मंगल की कामना करें।

पूजा के शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार अजा एकादशी के दिन पूजा के लिए कई शुभ समय बताए गए हैं। प्रातः संध्या का समय सुबह 6:10 से 7:16 बजे तक रहेगा। वहीं अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजे से 12:49 बजे तक रहेगा। शाम की पूजा के लिए विजय मुहूर्त शाम 4 बजे से 4:51 बजे तक रहेगा। इसके अलावा अमृत काल दोपहर 3:59 बजे से शाम 5:29 बजे तक बताया गया है।

एकादशी माता की आरती

ॐ जय एकादशी, जय एकादशी, जय एकादशी माता।
विष्णु पूजा व्रत को धारण कर, शक्ति मुक्ति पाता॥

ॐ जय एकादशी...॥

तेरे नाम गिनाऊं देवी, भक्ति प्रदान करनी।
गण गौरव की देनी माता, शास्त्रों में वरनी॥

ॐ जय एकादशी...॥

मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना, विश्वतारनी जन्मी।
शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा, मुक्तिदाता बन आई॥

ॐ जय एकादशी...॥

पौष के कृष्णपक्ष की सफला नामक है।
शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा, आनंद अधिक रहै॥

ॐ जय एकादशी...॥

नाम षटतिला माघ मास में कृष्णपक्ष आवै।
शुक्लपक्ष में जया कहावै, विजय सदा पावै॥

ॐ जय एकादशी...॥

विजया फागुन कृष्णपक्ष में, शुक्ला आमलकी।
पापमोचनी कृष्ण पक्ष में, चैत्र महाबलि की॥

ॐ जय एकादशी...॥

चैत्र शुक्ल में नाम कामदा, धन देने वाली।
नाम वरूथिनी कृष्णपक्ष में, वैशाख माह वाली॥

ॐ जय एकादशी...॥

शुक्ल पक्ष में होय मोहिनी, अपरा ज्येष्ठ कृष्णपक्षी।
नाम निर्जला सब सुख करनी, शुक्लपक्ष रखी॥

ॐ जय एकादशी...॥

योगिनी नाम आषाढ़ में जानो, कृष्णपक्ष करनी।
देवशयनी नाम कहायो, शुक्लपक्ष धरनी॥

ॐ जय एकादशी...॥

कामिका श्रावण मास में आवै, कृष्णपक्ष कहिए।
श्रावण शुक्ला होय पवित्रा, आनंद से रहिए॥

ॐ जय एकादशी...॥

अजा भाद्रपद कृष्णपक्ष की, परिवर्तिनी शुक्ला।
इंदिरा आश्विन कृष्णपक्ष में, व्रत से भवसागर निकला॥

ॐ जय एकादशी...॥

पापांकुशा है शुक्ल पक्ष में, आप हरनहारी।
रमा मास कार्तिक में आवै, सुखदायक भारी॥

ॐ जय एकादशी...॥

देवोत्थानी शुक्लपक्ष की, दुखनाशक मैया।
पावन मास में करूं विनती, पार करो नैया॥

ॐ जय एकादशी...॥

परमा कृष्णपक्ष में होती, जन मंगल करनी।
शुक्ल मास में होय पद्मिनी, दुख-दरिद्र हरनी॥

ॐ जय एकादशी...॥

जो कोई आरती एकादशी की, भक्ति सहित गावै।
जन गुरुदिता स्वर्ग का वासा, निश्चय वह पावै॥

ॐ जय एकादशी...॥

खेत बना आय का केंद्र, नवाचार ने बदली खेती की तस्वीर

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युवा किसान अंकित लकड़ा ने मछली पालन, मुर्गी पालन और बागवानी को जोड़कर तैयार किया एकीकृत कृषि मॉडल

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से मिली 8 लाख रुपये की अनुदान सहायता, दो तालाबों में मछली पालन के साथ 1,000 से 1,200 मुर्गियों का कर रहे पालन

रायपुर- खेती में बदलाव केवल नई तकनीक से नहीं, बल्कि नई सोच से भी आता है। जशपुर जिले के ग्राम रतबा के युवा किसान अंकित लकड़ा ने इस बात को अपनी मेहनत और नवाचार से साबित किया है। कभी केवल बारिश के भरोसे धान की खेती करने वाले अंकित ने आज अपने खेत को मछली पालन, मुर्गी पालन, बागवानी और बहुफसली खेती से जोड़कर आय के कई स्रोत तैयार कर लिए हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में किसानों को कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों से जोड़कर उनकी आय के अवसर बढ़ाने के लिए संचालित योजनाओं का लाभ अंकित को भी मिला है। योजनाओं से मिली सहायता और अपनी मेहनत के बल पर उन्होंने पारंपरिक खेती को आधुनिक और बहुआयामी कृषि मॉडल में बदलने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

धान की खेती से शुरू हुआ सफर, अब खेत में कई गतिविधियां

अंकित लकड़ा बताते हैं कि पहले वे मुख्य रूप से बरसात के मौसम में धान की खेती करते थे। खेती से होने वाली आय को बढ़ाने के लिए उन्होंने कृषि और मत्स्य विभाग से जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने अपने खेत में दो तालाब तैयार कराए और मछली पालन शुरू किया।

तालाब बनने के बाद उनके खेत की तस्वीर ही बदल गई। तालाब के पानी का उपयोग गर्मी के मौसम में सिंचाई के लिए होने लगा। इससे वे अब वर्षा ऋतु के अलावा गर्मी में भी खेती कर पा रहे हैं। साथ ही खेत में आम और लीची सहित विभिन्न फलदार पौधे लगाए गए हैं, जिससे आने वाले समय में बागवानी भी उनकी अतिरिक्त आय का माध्यम बनेगी।

एक ही संसाधन से मछली और मुर्गी पालन का नवाचार

अंकित ने अपने दोनों तालाबों के ऊपर मुर्गी पालन के लिए शेड तैयार किया है। शेड की क्षमता करीब 1,000 से 1,200 मुर्गियों की है। उन्होंने मुर्गी पालन और मछली पालन को आपस में जोड़कर संसाधनों का बेहतर उपयोग करने का तरीका अपनाया है।

मुर्गियों से निकलने वाला अपशिष्ट तालाब में पहुंचकर मछलियों के लिए प्राकृतिक आहार के रूप में उपयोगी होता है। इससे मछली पालन में बाहरी आहार पर होने वाला खर्च कम करने में मदद मिलती है। इस तरह एक ही स्थान पर संचालित दो गतिविधियां एक-दूसरे को सहारा देती हैं और किसान को अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध कराती हैं।

तालाब की मेड़ पर फलदार पौधे, दोहरा लाभ

अंकित ने तालाब की मेड़ों पर आम सहित अन्य फलदार पौधे भी लगाए हैं। तालाब के पानी से इन पौधों की सिंचाई की जाती है। उनका कहना है कि मेड़ पर पेड़ लगाने से मिट्टी को मजबूती मिलती है और मेड़ के कटाव को रोकने में भी मदद मिलती है। वहीं आम और लीची जैसे फलदार पौधे भविष्य में अतिरिक्त आमदनी का जरिया बनेंगे।

इस प्रकार अंकित ने खेत के प्रत्येक हिस्से का उपयोग उत्पादन और आय बढ़ाने के लिए किया है। तालाब उनके लिए केवल मछली पालन का साधन नहीं, बल्कि सिंचाई, बागवानी और मुर्गी पालन से जुड़ी गतिविधियों का आधार बन गया है।

8 लाख रुपये की अनुदान सहायता से मिला नवाचार को विस्तार

अंकित को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मत्स्य पालन के लिए शासकीय सहायता मिली। मत्स्य विभाग से उन्हें करीब 8 लाख रुपये की अनुदान राशि प्राप्त हुई। इसके साथ पॉन्ड लाइनर, पॉलीथिन, बोर, मोटर और मछली आहार जैसी आवश्यक सामग्री की सुविधा भी मिली।

शासकीय योजना से मिली सहायता ने उनके लिए मछली पालन को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने का रास्ता आसान किया। अंकित बताते हैं कि विभागीय अधिकारियों से मिली जानकारी और मार्गदर्शन से उन्हें आधुनिक तरीके से मत्स्य पालन करने में काफी मदद मिली।

बहुफसली खेती से बढ़े आमदनी के अवसर

अंकित अब अपने खेत को केवल एक फसल तक सीमित नहीं रखते। मछली पालन और मुर्गी पालन के साथ वे अलग-अलग मौसम में विभिन्न फसलों की खेती और बागवानी कर रहे हैं। तालाब के पानी की उपलब्धता ने उन्हें गर्मी में भी खेती करने का अवसर दिया है।

इस बहुआयामी मॉडल से उन्हें सालभर अपने खेत से उत्पादन प्राप्त करने और आय के अलग-अलग स्रोत विकसित करने का अवसर मिल रहा है। उनके खेत में कृषि के साथ पशु एवं मत्स्य आधारित गतिविधियों का समन्वय ग्रामीण क्षेत्रों में एकीकृत कृषि प्रणाली की उपयोगिता को भी दर्शाता है।

युवाओं के लिए खेती बना रहे हैं आकर्षक विकल्प

अंकित लकड़ा की कहानी उन ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो खेती को केवल पारंपरिक तरीके से करने के बजाय इसे आधुनिक व्यवसाय के रूप में अपनाना चाहते हैं। उनका अनुभव बताता है कि उपलब्ध भूमि और पानी जैसे संसाधनों का बेहतर नियोजन, शासकीय योजनाओं की जानकारी और मेहनत के साथ खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।

अंकित की पहल यह संदेश देती है कि खेती में नवाचार, योजनाओं का सही उपयोग और विभिन्न कृषि गतिविधियों का समन्वय किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में प्रभावी कदम साबित हो सकता है। उनका खेत अब सिर्फ फसल उत्पादन की जगह नहीं, बल्कि ग्रामीण उद्यमिता और आत्मनिर्भरता की एक प्रेरक मिसाल बन गया है।

लोकधुनों और लोकनृत्यों से सजा ‘लोकरंग पर्व’, भरथरी गाथा ने बांधा समां

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तीन दिवसीय आयोजन में छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकपरंपराओं का जीवंत प्रदर्शन, नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने का संदेश

रायपुर- छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, लोकगायन और लोकनृत्य की विविध परंपराओं को संरक्षित करने और कलाकारों को मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा आयोजित तीन दिवसीय ‘लोकरंग पर्व’ का रविवार को रायपुर स्थित मुक्ताकाशी मंच, महंत घासीदास संग्रहालय परिसर में भव्य शुभारंभ हुआ। 6 से 8 सितंबर तक चलने वाले इस आयोजन में प्रदेश की पारंपरिक लोकविधाओं की विविध रंगत देखने को मिल रही है।

कार्यक्रम के पहले दिन मुक्ताकाशी मंच पर छत्तीसगढ़ी लोकधुनों और पारंपरिक लोकगाथाओं ने ऐसा समां बांधा कि दर्शक लोकसंस्कृति की जीवंत दुनिया से जुड़ते नजर आए। आयोजन की शुरुआत भरथरी गाथा की प्रस्तुति से हुई। इसके बाद कलाकारों ने पंडवानी, देवार गीत और भरथरी गाथा सहित विभिन्न लोकविधाओं की प्रभावशाली प्रस्तुतियां दीं।

लोककलाओं की विविधता ने मोहा मन

लोकरंग पर्व में छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोकविधाओं से जुड़े कलाकारों को अपनी कला प्रस्तुत करने का अवसर दिया जा रहा है। आयोजन में भरथरी गाथा, देवार गीत, करमा नृत्य, सरहुल, लोरिक-चंदा, ददरिया, पंडवानी और पंथी जैसी विविध लोककलाओं की प्रस्तुतियां शामिल हैं।

पहले दिन दुर्गा साहू ने पंडवानी, पूनम तिवारी ने देवार गीत तथा अरुणिमा शर्मा ने भरथरी गाथा की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। कलाकारों की प्रस्तुतियों में छत्तीसगढ़ की लोकजीवन की संवेदना, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की झलक दिखाई दी।

स्थानीय कलाकारों को मंच देना आयोजन का प्रमुख उद्देश्य

कार्यक्रम के संचालक एवं संस्कृति एवं पुरातत्व संचालक डॉ. संजय कन्नौजे ने कहा कि स्थानीय मंचों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोकविधाओं से जुड़े कलाकारों को प्रोत्साहन मिलता है और उन्हें अपनी कला के प्रदर्शन का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन प्रदेश की ‘सुघर’ संस्कृति, लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को जन-जन तक पहुंचाने के साथ युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की लोककलाएं केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि इनमें प्रदेश के इतिहास, सामाजिक जीवन, लोकविश्वास और सामुदायिक परंपराओं की गहरी छाप दिखाई देती है। ऐसे आयोजनों के जरिए इन परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

कला-संस्कृति प्रेमियों की रही मौजूदगी

लोकरंग पर्व के शुभारंभ अवसर पर संस्कृति एवं पुरातत्व संचालक डॉ. संजय कन्नौजे, उपसंचालक उमेश मिश्रा, छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध कवि मीर अली मीर, बॉलीवुड अभिनेत्री श्वेता पड्डा , वरिष्ठ पत्रकार एवं छायाकार दीपेंद्र दीवान, साहित्यकार विजय मिश्रा सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं कला-संस्कृति प्रेमी उपस्थित रहे।

8 सितंबर तक जारी रहेगा लोकसंस्कृति का उत्सव

तीन दिवसीय लोकरंग पर्व 8 सितंबर तक चलेगा। आगामी दिनों में भी छत्तीसगढ़ की विभिन्न लोकविधाओं से जुड़े कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। आयोजन के माध्यम से रायपुरवासियों को प्रदेश की पारंपरिक लोककलाओं, लोकसंगीत, लोकगाथाओं और लोकनृत्यों की विविधता को करीब से देखने और सुनने का अवसर मिल रहा है।

मुक्ताकाशी मंच पर सजी यह सांस्कृतिक संध्या छत्तीसगढ़ की उस लोकपरंपरा की तस्वीर प्रस्तुत कर रही है, जिसमें माटी की महक, लोकजीवन की सहजता और पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत एक साथ दिखाई देती है।

छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता की सुगबुगाहट तेज़: दुर्ग संभाग से शुरू होगा जन-संवाद

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8 और 9 सितंबर को बैठकों का दौर

​रायपुर- छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code - UCC) लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने अपनी तैयारियां तेज कर दी गई है। प्रदेश में UCC का प्रारूप (ड्राफ्ट) तैयार करने के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति अब सीधे ज़मीन पर उतरकर सामाजिक और प्रशासनिक समन्वय साधने में जुट गई है। इसी रणनीति के तहत दुर्ग संभाग के सभी जिलों के प्रमुखों, प्रबुद्ध जनों और जनप्रतिनिधियों के साथ आगामी 8 और 9 सितंबर को एक वृहद समूह चर्चा और परिचयात्मक बैठक आयोजित करने जा रही है।

ज्ञात हो कि समान नागरिक संहिता  के दूरगामी प्रभावों और प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए यह संवाद प्रक्रिया शुरू की जा रही है। दो दिनों तक चलने वाले इस मंथन में दुर्ग संभाग के अलग-अलग जिलों को केंद्रित करते हुए बैठकें होंगी। आगामी ​8 सितंबर को दुर्ग में दोपहर 12 बजे से आयोजित इस बैठक में दुर्ग, बालोद और बेमेतरा जिले के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसी तरह ​9 सितंबर को राजनांदगांव में दोपहर 12 बजे से होने वाली बैठक में राजनांदगांव, कबीरधाम, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले का प्रतिनिधित्व रहेगा।

हर वर्ग की आवाज़ को ड्राफ्ट में मिलेगी जगह

कानून का खाका तैयार करने में समाज के हर तबके की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए समिति ने एक व्यापक रूपरेखा तैयार की है। इन बैठकों में राजनीतिक दलों, सामाजिक व धार्मिक संगठनों, शिक्षाविदों, पद्म श्री सम्मान से अलंकृत हस्तियों, निगम-मंडल व आयोगों के प्रतिनिधियों तथा प्रतिष्ठित व विशिष्ट नागरिकों को खासतौर पर आमंत्रित किया गया है। इस कवायद का मुख्य उद्देश्य एक ऐसा समावेशी ड्राफ्ट तैयार करना है, जो विधिक और सामाजिक दोनों पैमानों पर राज्य के हर नागरिक के हितों का संरक्षण कर सके।

बिहार में बाढ़ का संकट गहराया, 11 जिलों में 19.57 लाख लोग प्रभावित; पटना में गंगा ने तोड़ा पुराना रिकॉर्ड

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पटना- बिहार में लगातार बढ़ रहे नदी के जलस्तर ने बाढ़ की स्थिति को और गंभीर कर दिया है। राज्य के 11 जिलों में करीब 19.57 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर अपने पिछले उच्चतम बाढ़ स्तर (HFL) से ऊपर पहुंच गया है, जिसके बाद निचले और डाउनस्ट्रीम इलाकों में प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है।

रविवार सुबह 6 बजे गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 50.57 मीटर दर्ज किया गया, जो 21 अगस्त 2016 को दर्ज किए गए पिछले उच्चतम बाढ़ स्तर 50.52 मीटर से 5 सेंटीमीटर अधिक है। अधिकारियों के मुताबिक, अगले एक से तीन दिनों में हथीदह और उसके बाद के गेज स्टेशनों पर भी जलस्तर बढ़ने का खतरा है।

11 जिलों के 330 पंचायतों पर असर

बाढ़ का असर पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार और अररिया समेत 11 जिलों की 330 ग्राम पंचायतों में बताया गया है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों, तटबंधों, निचले क्षेत्रों और नदी के जलस्तर पर लगातार निगरानी के निर्देश दिए हैं।

कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर

गंगा के अलावा गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन, बागमती और घाघरा समेत कई नदियां अलग-अलग स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। हथीदह में गंगा का जलस्तर और बढ़ने की आशंका को देखते हुए बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, भागलपुर और कटिहार में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

NDRF-SDRF की टीमें और 1,345 नावें तैनात

बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद और संभावित निकासी के लिए प्रशासन ने बड़े स्तर पर राहत-बचाव संसाधन लगाए हैं। NDRF की 10 और SDRF की 27 टीमें अलग-अलग जिलों में तैनात हैं। इसके अलावा प्रभावित क्षेत्रों में आवाजाही और लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए 1,345 नावें लगाई गई हैं।

110 सामुदायिक रसोई चल रहीं

बाढ़ प्रभावित लोगों तक भोजन पहुंचाने के लिए विभिन्न जिलों में 110 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं। प्रशासन ने लोगों से नदी और बाढ़ के पानी के पास जाने से बचने तथा स्थानीय प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है।

ट्रेनों पर भी असर

बाढ़ और बढ़ते जलस्तर का असर रेल सेवाओं पर भी पड़ा है। पटना-गया रेलखंड पर पानी का स्तर बढ़ने के कारण कुछ ट्रेनों को रद्द और कुछ को डायवर्ट किया गया है। प्रशासन और संबंधित विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना, राहत सामग्री उपलब्ध कराना और तटबंधों व संवेदनशील इलाकों की लगातार निगरानी करना है। आने वाले दिनों में जलस्तर में संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

सत्य निकेतन में बिल्डिंग हादसे के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन तेज, मलबे से 6 लोगों को सुरक्षित निकाला गया

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नई दिल्ली के साउथ-वेस्ट इलाके के सत्य निकेतन में बहुमंजिला इमारत गिरने के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। हादसे के बाद मौके पर पहुंची रेस्क्यू टीमों ने मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए अभियान तेज कर दिया है।

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान अब तक 6 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। बचाव दल मलबे के अन्य हिस्सों की भी बारीकी से जांच कर रहे हैं, ताकि किसी और व्यक्ति के फंसे होने की स्थिति में उसे जल्द से जल्द बाहर निकाला जा सके।

घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल है। पुलिस, दमकल विभाग और अन्य राहत एजेंसियां मौके पर मौजूद हैं और लगातार बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। प्रशासन की ओर से भी हालात पर नजर रखी जा रही है।

फिलहाल प्राथमिकता मलबे में संभावित रूप से फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। हादसे की वजह को लेकर जांच की जा रही है।

IIT मंडी में विवादित पोस्टर से मचा हड़कंप, जाति संबंधी सामग्री सामने आने के बाद जांच शुरू

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मंडी- हिमाचल प्रदेश स्थित IIT मंडी में जाति से संबंधित विवादित पोस्टर सामने आने के बाद संस्थान में हलचल बढ़ गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए संस्थान की ओर से इसकी जांच शुरू कर दी गई है।

बताया जा रहा है कि परिसर में कुछ ऐसे पोस्टर सामने आए हैं, जिनमें जाति से जुड़ी आपत्तिजनक और विवादित सामग्री लिखी गई थी। पोस्टर सामने आने के बाद छात्रों और संस्थान के बीच इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई।

संस्थान प्रशासन ने मामले का संज्ञान लेते हुए पोस्टर लगाने वाले लोगों की पहचान और पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी है। साथ ही यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि पोस्टर कब और किस उद्देश्य से लगाए गए थे।

मामले को लेकर संस्थान प्रशासन की ओर से आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर किए जाने की संभावना है। फिलहाल जांच जारी है और प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।

जाति से जुड़े इस विवाद ने एक बार फिर शिक्षण संस्थानों में समानता, सम्मान और संवेदनशीलता से जुड़े मुद्दों को चर्चा में ला दिया है।

भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों की बड़ी निकासी, सितंबर के पहले सप्ताह में निकाले ₹7,443 करोड़

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नई दिल्ली- भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की बिकवाली एक बार फिर बढ़ गई है। सितंबर के पहले सप्ताह में फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) ने भारतीय इक्विटी बाजार से करीब ₹7,443 करोड़ की निकासी की है। नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़ों के अनुसार, 4 सितंबर तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों में शुद्ध बिकवाल रहे।

यह निकासी ऐसे समय हुई है जब इससे पहले जुलाई और अगस्त में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में लगातार निवेश किया था। अगस्त में FPIs ने ₹29,600 करोड़ से अधिक और जुलाई में करीब ₹20,200 करोड़ का निवेश किया था।

क्यों कर रहे हैं विदेशी निवेशक बिकवाली?

जानकारों के मुताबिक, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में इजाफा और मजबूत अमेरिकी डॉलर ने विदेशी निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया है। इन वैश्विक परिस्थितियों के चलते उभरते बाजारों में निवेश को लेकर सतर्कता बढ़ी है।

विदेशी निवेशकों की हालिया बिकवाली के बावजूद भारतीय बाजार में अगस्त के दौरान विदेशी निवेश का मजबूत रुझान देखने को मिला था। हालांकि, सितंबर की शुरुआत में एक बार फिर बिकवाली लौटने से बाजार के निवेशकों की चिंता बढ़ी है।

2026 में अब तक बड़ी निकासी

सितंबर की ताजा निकासी के बाद 2026 में भारतीय इक्विटी से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की कुल निकासी करीब ₹2.32 लाख करोड़ तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा पूरे 2025 में हुई करीब ₹1.66 लाख करोड़ की निकासी से भी अधिक है।

बाजार विशेषज्ञों की नजर अब आने वाले दिनों में विदेशी निवेशकों के रुख और वैश्विक बाजारों की चाल पर रहेगी।

दिल्ली के सत्य निकेतन में बड़ा हादसा, PG की इमारत भरभराकर गिरी; एक की मौत, कई के दबे होने की आशंका

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नई दिल्ली- राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को बड़ा हादसा हो गया। यहां एक बहुमंजिला इमारत अचानक भरभराकर ढह गई। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है।

जानकारी के मुताबिक, इमारत का इस्तेमाल पेइंग गेस्ट (PG) आवास के तौर पर किया जा रहा था। हादसे की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग और बचाव दल की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। मलबे को हटाकर अंदर फंसे लोगों की तलाश की जा रही है।

अब तक एक व्यक्ति की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई लोगों को बाहर निकालने की कोशिश जारी है। कुछ घायलों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है। बचाव एजेंसियां मलबे में किसी अन्य व्यक्ति के फंसे होने की संभावना को देखते हुए सावधानी से रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं।

हादसे के कारणों का अभी स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। प्रशासन की ओर से पूरे मामले की जांच की जा रही है। मौके पर राहत-बचाव कार्य जारी है और अधिकारियों की नजर स्थिति पर बनी हुई है।

मिस्र के एयर शो में भारतीय वायुसेना की सारंग टीम दिखाएगी दमदार हवाई करतब

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नई दिल्ली- भारतीय वायुसेना (IAF) की प्रसिद्ध सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम मिस्र पहुंच गई है। टीम 8 से 10 सितंबर 2026 तक एल अलामीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर आयोजित होने वाले दूसरे एल अलामीन इंटरनेशनल एयर शो में हिस्सा लेगी।

सारंग टीम दुनिया की एकमात्र पांच हेलीकॉप्टरों वाली डिस्प्ले टीम है। एयर शो के दौरान टीम अपने सटीक गठन, बेहतरीन तालमेल और शानदार उड़ान कौशल का प्रदर्शन करेगी। भारतीय वायुसेना की यह भागीदारी भारत और मिस्र के बीच बढ़ते रक्षा एवं राजनयिक संबंधों को भी दर्शाती है।

स्वदेशी ध्रुव हेलीकॉप्टर से होगा प्रदर्शन

सारंग टीम स्वदेश में डिजाइन और निर्मित एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH) ध्रुव से अपने हवाई करतब पेश करेगी। टीम क्लोज-प्रॉक्सिमिटी फ्लाइंग, कठिन फॉर्मेशन मूवमेंट और सिंक्रोनाइज्ड एरियल सीक्वेंस के लिए दुनियाभर में जानी जाती है। इसका प्रदर्शन भारतीय वायुसेना के पायलटों के कौशल और अनुशासन के साथ-साथ देश की स्वदेशी एयरोस्पेस क्षमता को भी प्रदर्शित करेगा।

‘डॉल्फिन लीप’ के साथ नया ‘स्पॉट स्टॉल टर्न’

एयर शो में सारंग टीम अपने प्रसिद्ध ‘डॉल्फिन लीप’ हवाई करतब का प्रदर्शन करेगी। इसके अलावा टीम पहली बार ‘स्पॉट स्टॉल टर्न’ नामक नए मैनोवर को भी पेश करेगी। इन प्रदर्शनों के जरिए दर्शकों को ध्रुव हेलीकॉप्टर की गति, चपलता और बहुमुखी क्षमता देखने का अवसर मिलेगा।

एल अलामीन इंटरनेशनल एयर शो में दुनिया की प्रमुख वायु सेनाओं के साथ-साथ एयरोस्पेस, रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ और पेशेवर हिस्सा ले रहे हैं। मिस्र के आसमान में सारंग टीम का प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय टीमों के साथ सहयोग बढ़ाने और भारत-मिस्र रक्षा संबंधों को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


देशभर में 8 नए हाईकोर्ट चीफ जस्टिस की नियुक्ति, केंद्र सरकार ने जारी की अधिसूचना

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नई दिल्ली- केंद्र सरकार ने देश के विभिन्न हाईकोर्ट में 8 नए मुख्य न्यायाधीशों (Chief Justices) की नियुक्ति को लेकर 5 सितंबर को आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी। इन नियुक्तियों के साथ देश की न्यायपालिका के कई प्रमुख हाईकोर्ट में नेतृत्व स्तर पर महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहा है।

केंद्र सरकार की अधिसूचना के बाद संबंधित हाईकोर्ट में नए मुख्य न्यायाधीशों के कार्यभार संभालने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इन नियुक्तियों को न्यायिक प्रशासन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नए मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति के साथ संबंधित हाईकोर्ट में न्यायिक कार्यों के संचालन और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

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