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आत्मसमर्पित 95 नक्सलियों को 1.40 करोड़ रुपये से अधिक की प्रोत्साहन राशि

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल से पुनर्वास को मिल रही गति

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल और वन एवं जलवायु मंत्री तथा बीजापुर जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप के निर्देशों के अनुरूप छत्तीसगढ़ सरकार की नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत एवं पुनर्वास नीति 2025 के तहत बीजापुर जिले के 95 आत्मसमर्पित नक्सलियों को 1 करोड़ 40 लाख 86 हजार 700 रुपये की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की गई है।

बीजापुर कलेक्टर विश्वदीप ने नीति के प्रावधानों के अनुसार शस्त्रों के साथ आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को प्रोत्साहन राशि प्रदान करने के लिए राशि के आहरण और वितरण की स्वीकृति दी है।

यह प्रोत्साहन राशि आत्मसमर्पित नक्सलियों को मुख्यधारा से जोड़ने, उन्हें नया जीवन शुरू करने और सम्मानजनक आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से दी जा रही है। राज्य सरकार की पुनर्वास नीति नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति, विकास और सामाजिक पुनर्वास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और प्रभावी पहल है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार का उद्देश्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। पुनर्वास नीति के माध्यम से आत्मसमर्पित नक्सलियों को समाज में सम्मानजनक पुनर्स्थापना का अवसर मिल रहा है, जिससे बस्तर अंचल में शांति और विकास को नई गति मिल रही है।

एसईसीएल की दीपका ओपनकास्ट परियोजना बनी भारत के कोयला क्षेत्र की नई पहचान, उत्पादन, लाभ और सतत विकास में स्थापित किए नए मानक

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रायपुर- साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की दीपका ओपनकास्ट (OCP) परियोजना आज भारत के कोयला खनन क्षेत्र में हुए उल्लेखनीय परिवर्तन का सशक्त उदाहरण बनकर उभरी है। वर्ष 1992 में मात्र 10 लाख टन कोयला उत्पादन करने वाली यह परियोजना आज देश की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक खदानों में शामिल है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में परियोजना ने 37.5 मिलियन टन (एमटी) का रिकॉर्ड कोयला उत्पादन तथा 39.43 मिलियन टन कोयला प्रेषण (डिस्पैच) कर नया कीर्तिमान स्थापित किया।

हाल ही में परियोजना को 40 मिलियन टन प्रतिवर्ष (MTPA) की पर्यावरणीय स्वीकृति (Environmental Clearance) प्राप्त हुई है। साथ ही 60 MTPA तक क्षमता विस्तार के स्पष्ट रोडमैप के साथ दीपका परियोजना उत्पादन, दक्षता और पर्यावरणीय संतुलन का उत्कृष्ट उदाहरण बन चुकी है।

वित्तीय वर्ष 2026-27 की शानदार शुरुआत

पिछले वर्ष के रिकॉर्ड प्रदर्शन के बाद दीपका परियोजना ने चालू वित्तीय वर्ष की भी मजबूत शुरुआत की है।

25 जुलाई 2026 तक परियोजना ने 12.66 मिलियन टन कोयला उत्पादन कर निर्धारित लक्ष्य का 104 प्रतिशत हासिल किया। पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में उत्पादन में 30.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो खदान की बेहतर उत्पादकता और मशीनों के प्रभावी उपयोग को दर्शाती है।

इसी अवधि में 13.87 मिलियन टन कोयले का डिस्पैच किया गया, जो निर्धारित लक्ष्य का 109 प्रतिशत है। इससे देश के ताप विद्युत संयंत्रों और औद्योगिक उपभोक्ताओं को निर्बाध कोयला आपूर्ति सुनिश्चित हुई।

उत्पादन के साथ लाभप्रदता में भी उल्लेखनीय वृद्धि

दीपका परियोजना केवल उत्पादन ही नहीं बल्कि वित्तीय प्रदर्शन में भी अग्रणी रही है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में परियोजना ने 3,230.91 करोड़ रुपये का लाभ अर्जित किया, जिससे यह SECL के सबसे अधिक लाभ देने वाले परियोजनाओं में शामिल हो गई।

बेहतर लागत प्रबंधन और परिचालन दक्षता के कारण प्रति टन लाभ बढ़कर 827 रुपये पहुंच गया। इससे यह साबित हुआ कि बड़े पैमाने पर उत्पादन के साथ लागत नियंत्रण भी प्रभावी ढंग से संभव है।

भविष्य की उत्पादन क्षमता के लिए मजबूत आधार

दीर्घकालीन उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास कार्यों को प्राथमिकता दी गई है।

मालगांव का सफल अधिग्रहण होने के बाद अब हरदी बाजार क्षेत्र में पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (R&R) का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। परियोजना प्रभावित परिवारों के लिए आधुनिक पुनर्वास नगर विकसित किया जा रहा है, जहां सड़क, विद्यालय, स्वास्थ्य सुविधाएं, सामुदायिक भवन और अन्य नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

इस पारदर्शी और सहभागी मॉडल से खनन के लिए भूमि उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्थानीय समुदाय का विश्वास भी मजबूत हुआ है।

बेहतर आधारभूत संरचना से तेज हुआ कोयला परिवहन

दीपका परियोजना के पास कोयला परिवहन की अत्याधुनिक व्यवस्था उपलब्ध है।

परियोजना में एमजीआर (MGR) आधारित साइलो, फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी (FMC) साइलो, रेलवे लोडिंग प्रणाली तथा सड़क परिवहन का एकीकृत नेटवर्क विकसित किया गया है।

इस व्यवस्था के माध्यम से एनटीपीसी सीपत सहित पश्चिमी एवं मध्य भारत के कई ताप विद्युत संयंत्रों तक समय पर कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।

आधुनिक तकनीक से बढ़ी उत्पादकता

दीपका परियोजना ने आधुनिक तकनीकों को अपनाकर उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की है।

परियोजना में 42 घनमीटर क्षमता वाले इलेक्ट्रिक रोप शोवेल, उच्च क्षमता के सरफेस माइनर, इन-पिट बेल्ट कन्वेयर, आधुनिक साइलो लोडिंग प्रणाली, ड्रोन आधारित निगरानी तथा डिजिटल माइन मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जा रहा है।

इन तकनीकों से खदान की योजना, निगरानी और मशीनों की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

पर्यावरण संरक्षण के साथ जिम्मेदार खनन

दीपका परियोजना ने यह सिद्ध किया है कि अधिक उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ संभव हैं।

परियोजना में Continuous Ambient Air Quality Monitoring System (CAAQMS), फॉग कैनन आधारित धूल नियंत्रण, व्हील वॉशिंग सिस्टम, वृहद वृक्षारोपण अभियान, इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग तथा प्लास्टिक अपशिष्ट पुनर्चक्रण जैसी अनेक पर्यावरणीय पहलें लागू की गई हैं।

डिजिटल पर्यावरण निगरानी प्रणाली के माध्यम से नियामकीय अनुपालन और पारदर्शिता भी सुनिश्चित की जा रही है।

40 MTPA से आगे 60 MTPA की ओर बढ़ता कदम

हाल ही में प्राप्त 40 MTPA पर्यावरणीय स्वीकृति दीपका परियोजना के विकास की अंतिम मंजिल नहीं बल्कि अगले विस्तार चरण की शुरुआत है।

भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास, आधुनिक आधारभूत संरचना और उन्नत तकनीक के सहारे परियोजना अब 60 MTPA उत्पादन क्षमता हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।

दीपका ओपनकास्ट परियोजना आज वैज्ञानिक खनन, तकनीकी नवाचार, वित्तीय अनुशासन और पर्यावरणीय जिम्मेदारी का उत्कृष्ट उदाहरण बन चुकी है। SECL की यह प्रमुख परियोजना उत्पादन, लाभप्रदता, परिचालन दक्षता और सतत विकास के नए मानक स्थापित करते हुए देश की ऊर्जा सुरक्षा को लगातार मजबूत कर रही है।

खेल अधोसंरचना की मजबूती और खेलों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के लिए 100 करोड़ का प्रावधान

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छत्तीसगढ़ में हॉकी लीग के आयोजन की तैयारी, छत्तीसगढ़ क्रीड़ा प्रोत्साहन योजना के लिए 57 करोड़ का बजट

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने प्रेस-कॉन्फ्रेंस में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के कार्यों की दी जानकारी

रायपुर- उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने आज प्रेस-कॉन्फ्रेंस में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के कार्यों, गतिविधियों, उपलब्धियों तथा आगामी कार्ययोजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेस-कॉन्फ्रेंस में बताया कि छत्तीसगढ़ में खेलों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने, खेल अधोसंरचना की मजबूती, महिला खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने तथा खेल प्रतिभाओं की पहचान के लिए चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। वहीं छत्तीसगढ़ क्रीड़ा प्रोत्साहन योजना के तहत 57 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान रखा गया है। खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार और उप संचालक रश्मि ठाकुर भी प्रेस-कॉन्फ्रेंस में मौजूद थीं।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने प्रेस-कॉन्फ्रेंस में बताया कि राज्य में हॉकी लीग के आयोजन की तैयारी चल रही है। राज्य के खेल अकादमियों में उच्च स्तरीय प्रशिक्षण मुहैया कराने 14 प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण के लिए पटियाला भेजा गया है। उन्होंने बताया कि खेल गतिविधियों के सुचारू संचालन के लिए राज्य शासन ने 6 नए जिलों गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, मोहला-मानपुर-अंबागढ़-चौकी, सारंगढ़-बिलाईगढ़, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर और सक्ती में खेल अधिकारी के पदों का सृजन किया गया है। विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 44 प्रशिक्षकों, 4 जिला खेल अधिकारियों, 23 सहायक ग्रेड-3 और 8 वार्डन्स की भर्ती प्रक्रियाधीन है।

साव ने बताया कि राज्य में ज्यादा से ज्यादा बच्चे एवं युवा खेल के मैदानों में पहुंचे, इसके लिए सरकार सक्रियता और गंभीरता से काम कर रही है। छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण के समय केवल 4 करोड़ रुपए के बजट वाले खेल एवं युवा कल्याण विभाग का बजट चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में 304 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। दूरस्थ आदिवासी वनांचलों को खेल की मुख्य धारा से जोड़ने की अभिनव पहल करते हुए पिछले दो वर्षों से बस्तर ओलंपिक के आयोजन के साथ ही इस साल से सरगुजा ओलंपिक भी राज्य में शुरु किया गया है। देश के पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की शानदार मेजबानी ने छत्तीसगढ़ को देश के खेल मानचित्र में प्रतिष्ठित किया है।


मुस्कुराता बस्तर कार्यशाला में बच्चों की कला ने बिखेरे रंग

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कार्टून और कैरिकेचर के माध्यम से बस्तर की सकारात्मक पहचान को मिलेगी नई दिशा

रायपुर- बस्तर की समृद्ध संस्कृति, प्राकृतिक सुंदरता और सकारात्मक पहचान को कला के माध्यम से नई पहचान देने के उद्देश्य से जगदलपुर में आयोजित ‘मुस्कुराता बस्तर’ कार्टून कैनवास कार्यशाला में स्कूली बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बच्चों ने अपनी कल्पनाओं को कैनवास पर उतारकर रचनात्मक प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।

विशेषज्ञों ने सिखाईं कार्टून और कैरिकेचर की तकनीकें

कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों से आए वरिष्ठ कार्टूनिस्टों और कला विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को कार्टून और कैरिकेचर बनाने की बुनियादी तकनीकें सिखाईं। उन्होंने बताया कि किसी भी चित्र की अच्छी शुरुआत सही सर्किल बनाने से होती है। इसके साथ ही रफ स्केच, आउटलाइन, रंगों के चयन और चेहरे के भावों को प्रभावी ढंग से चित्रित करने के तरीके भी बच्चों को सरल भाषा में समझाए गए।

प्रशिक्षण से बढ़ा बच्चों का आत्मविश्वास

स्वामी आत्मानंद स्कूल के छात्र वंश साहू ने बताया कि इस प्रशिक्षण से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और कला के प्रति उनकी रुचि और मजबूत हुई है।

चरणबद्ध मार्गदर्शन से आसान हुई चित्रकला

सेजेस शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक-2 की छात्राएं भारती पांडे और पूनम ध्रुव ने कहा कि पहले उन्हें चित्र बनाने की सही शुरुआत की जानकारी नहीं थी, लेकिन विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से अब वे आसानी से कार्टून और कैरिकेचर बना पा रही हैं।

कल्पनाशीलता को मिली नई दिशा

सेजेस नानगुर की छात्राएं अंजलि नाग और नैना मरकाम तथा सेजेस जगदलपुर की छात्रा अक्षिता बाजपेई ने बताया कि वरिष्ठ कलाकारों का मार्गदर्शन उनकी कल्पनाशीलता को नई दिशा देगा और कला के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा देगा।

बस्तर की सकारात्मक छवि को मिलेगा नया मंच

यह कार्यशाला बच्चों की प्रतिभा को निखारने के साथ-साथ कला के माध्यम से बस्तर की शांतिपूर्ण, रचनात्मक और मुस्कुराती हुई पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई। इससे बस्तर की सकारात्मक छवि को व्यापक मंच मिलने की उम्मीद है।


हाथीदांत तस्करी पर वन विभाग की बड़ी कार्रवाई

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वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत तीन आरोपी गिरफ्तार, न्यायिक हिरासत में भेजे गए

रायपुर- वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशन में संगठित वन अपराध और वन्यजीव तस्करी पर रोक लगाने के लिए वन विभाग लगातार सख्त कार्रवाई कर रहा है। इसी अभियान के तहत बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में हाथीदांत तस्करी के मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।

वन मंडलाधिकारी आलोक वाजपेयी के मार्गदर्शन में 3 अगस्त 2026 को मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (मध्य क्षेत्र, भोपाल), राज्य उड़न दस्ता रायपुर और वनमंडल बलरामपुर की संयुक्त टीम ने रामानुजगंज स्थित एक धर्मशाला में छापेमारी की।

धर्मशाला के कमरे से तीन हाथीदांत (जबड़े) बरामद

संयुक्त टीम ने आमंत्रण धर्मशाला के कमरा नंबर 205 की तलाशी ली। जांच के दौरान एक बैग से हाथी के जबड़े के तीन हाथीदांत बरामद किए गए। मौके पर तीन संदिग्ध व्यक्ति भी मौजूद थे, जिन्हें तुरंत हिरासत में ले लिया गया।

गिरफ्तार आरोपियों में झारखंड के पलामू जिले के संतोष कुमार विश्वकर्मा (42 वर्ष) तथा बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के अजय कुमार गुप्ता (49 वर्ष) और सतेन्द्र कुमार (50 वर्ष) शामिल हैं।

वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई

आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। भारतीय जंगली हाथी अनुसूची-1 के तहत संरक्षित वन्य प्राणी है, इसलिए इस मामले को गंभीर वन अपराध माना गया है।

वन विभाग ने जब्त किए गए हाथीदांत को अपने कब्जे में लेकर सभी आरोपियों को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, रामानुजगंज की अदालत में प्रस्तुत किया। अदालत ने तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।

वन्यजीव तस्करी पर सख्त निगरानी

वन परिक्षेत्राधिकारी, रामानुजगंज ने बताया कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और तस्करी से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीव तस्करी में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मछली बीज उत्पादन से किसान रयतु राम ने लिखी सफलता की नई कहानी

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बस्तर के किसान ने दो माह में अर्जित किए 30 हजार रूपए, मत्स्यपालन से बढ़ी आय और आत्मनिर्भरता

शासकीय योजनाओं से मिली सहायता और नई पहचान, अब व्यवसाय विस्तार की तैयारी

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों को प्रोत्साहित करने के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाकर प्रदेश के किसान नवाचारों के माध्यम से अपनी आय में वृद्धि कर रहे हैं। इसी कड़ी में बस्तर जिले के ग्राम पंचायत सिवनी (हिरलाभाटा) निवासी प्रगतिशील किसान रयतु राम ने मछली बीज (स्पॉन) उत्पादन अपनाकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है। कम समय में बेहतर आय अर्जित कर उन्होंने यह साबित किया है कि आधुनिक तकनीक और विभागीय मार्गदर्शन के साथ मत्स्यपालन किसानों के लिए लाभकारी आजीविका का सशक्त माध्यम बन सकता है।

एक एकड़ तालाब से दो माह में मिली 30 हजार रूपए की आय

रयतु राम ने अपनी कुल 5 एकड़ कृषि भूमि में से लगभग एक एकड़ क्षेत्र में बने तालाब में इस वर्ष मछली बीज उत्पादन का कार्य शुरू किया। उन्होंने बताया कि इस सीजन में तालाब में लगभग 30 पैकेट स्पॉन डाले गए। अब तक वे लगभग 60 किलोग्राम मछली बीज 500 रूपए प्रति किलोग्राम की दर से बेच चुके हैं, जिससे उन्हें 30 हजार रूपए की आय प्राप्त हुई है। तालाब में अभी भी 40 से 50 किलोग्राम मछली बीज उपलब्ध है, जिसकी बिक्री से उन्हें 20 से 25 हजार रूपए अतिरिक्त आय मिलने की उम्मीद है।

संघर्ष के बाद मिली सफलता

रयतु राम ने बताया कि शुरुआती दौर में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। तालाब में तिलापिया जैसी अवांछित मछलियों की मौजूदगी, बोरवेल की सुविधा का अभाव और तकनीकी जानकारी की कमी के कारण अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। लेकिन इस बार उन्होंने तालाब की वैज्ञानिक ढंग से सफाई की, समय पर दाना-पानी की व्यवस्था की तथा मत्स्यपालन विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन का पालन किया। इसके परिणामस्वरूप उन्हें मछली बीज उत्पादन में उल्लेखनीय सफलता मिली।

अब व्यवसाय विस्तार की तैयारी

इस सीजन की सफलता से उत्साहित रयतु राम अब अपने खेत में एक नया तालाब तैयार कर मछली बीज उत्पादन का विस्तार करने की योजना बना रहे हैं। उनका कहना है कि यदि बाजार में बीज की मांग और विभागीय सहयोग इसी प्रकार मिलता रहा, तो वे इस व्यवसाय को बड़े स्तर पर विकसित करेंगे। इससे उनकी आय में और वृद्धि होगी तथा आसपास के किसानों को भी गांव में ही गुणवत्तापूर्ण मछली बीज आसानी से उपलब्ध हो सकेगा।

अन्य मत्स्यपालकों के लिए भी बनी प्रेरणा

मत्स्यपालन विभाग की स्पॉन संवर्धन योजना के अंतर्गत रयतु राम के गांव के मनकी बघेल, दयमती बघेल और जग्गु मौर्य भी लाभान्वित होकर मछली बीज उत्पादन के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। इन किसानों की सफलता से क्षेत्र में मत्स्यपालन के प्रति रुचि बढ़ी है और यह गतिविधि ग्रामीणों के लिए आय संवर्धन का प्रभावी माध्यम बनती जा रही है।

भारत-उज़्बेकिस्तान के संबंध ऐतिहासिक और सभ्यतागत विरासत पर आधारित: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला

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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच सदियों पुराने ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंध हैं, जो दोनों देशों की स्थायी मित्रता की मजबूत नींव हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बढ़ता राजनीतिक विश्वास, व्यापार एवं निवेश में विस्तार तथा लोगों के बीच बढ़ते संपर्क आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय साझेदारी को और अधिक सशक्त बनाएंगे।


बिरला ने ये विचार उज़्बेकिस्तान के विदेश मंत्री महामहिम बख्तियोर सईदोव से संसद भवन में हुई मुलाकात के दौरान व्यक्त किए। दोनों नेताओं के बीच भारत–उज़्बेकिस्तान संबंधों, संसदीय सहयोग, व्यापार एवं निवेश, शिक्षा, संस्कृति तथा क्षेत्रीय और वैश्विक महत्व के विभिन्न मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई।

भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं की सराहना

बिरला ने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहां की संसदीय व्यवस्था देश की विविधता और जनता की आकांक्षाओं का प्रभावी प्रतिनिधित्व करती है। उन्होंने बताया कि 543 सदस्यीय लोकसभा देशभर के करोड़ों नागरिकों की आवाज़ का प्रतिनिधित्व करती है तथा भारत की बहुदलीय व्यवस्था सभी विचारों को समान अवसर प्रदान करती है।

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि संसद वर्ष में तीन सत्रों में कार्य करती है और वर्तमान मानसून सत्र में राष्ट्रीय महत्व के अनेक विषयों पर गंभीर चर्चा जारी है।

भारत की विकास यात्रा और युवाओं की भूमिका

लोकसभा अध्यक्ष ने भारत की आधारभूत संरचना, डिजिटल नवाचार, प्रौद्योगिकी, कनेक्टिविटी, निवेश और व्यापार के क्षेत्र में हुई उल्लेखनीय प्रगति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय युवा वैश्विक स्तर पर नेतृत्वकारी भूमिका निभा रहे हैं तथा विश्व की प्रमुख विश्वविद्यालयों और संस्थानों के साथ सहयोग लगातार बढ़ रहा है।

उन्होंने मार्च 2026 में गठित भारत–उज़्बेकिस्तान संसदीय मैत्री समूह का उल्लेख करते हुए विश्वास जताया कि यह पहल दोनों देशों के बीच संसदीय संवाद को नई गति देगी और आर्थिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक तथा जन-से-जन संबंधों को और मजबूत करेगी।

आईपीयू सम्मेलन की यादें साझा कीं

बिरला ने अप्रैल 2025 में ताशकंद में आयोजित अंतर-संसदीय संघ (IPU) की 150वीं महासभा में अपनी भागीदारी को याद करते हुए बताया कि इस दौरान उनकी मुलाकात उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्ज़ियोयेव, सीनेट की अध्यक्ष तंजिला नरबायेवा तथा विधानसभा अध्यक्ष नुरिद्दीन इस्माइलोव से हुई थी। उन्होंने कहा कि इन उच्चस्तरीय मुलाकातों ने दोनों देशों के संसदीय सहयोग को नई दिशा प्रदान की है।

उज़्बेकिस्तान ने भारत के साथ साझेदारी मजबूत करने की जताई प्रतिबद्धता

उज़्बेकिस्तान के विदेश मंत्री बख्तियोर सईदोव ने भारत के साथ राजनीतिक, आर्थिक और संसदीय सहयोग को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं की सराहना करते हुए कहा कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के संसदीय अनुभव से उज़्बेकिस्तान को महत्वपूर्ण सीख मिल सकती है।

उन्होंने व्यापार, निवेश, संयुक्त परियोजनाओं और उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए साझा दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया और कहा कि दोनों देशों के बीच संसदीय सहयोग व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।

स्मृति प्रकाशन भेंट किया

इस अवसर पर विदेश मंत्री बख्तियोर सईदोव ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को उज़्बेकिस्तान द्वारा आयोजित आईपीयू की 150वीं महासभा पर आधारित एक विशेष स्मारक प्रकाशन भी भेंट किया।

माँ के दूध से स्वस्थ जीवन की मजबूत शुरुआत, प्रदेशभर में विश्व स्तनपान सप्ताह की शुरुआत

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जन्म के पहले घंटे में स्तनपान और पहले छह माह तक केवल मां का दूध पिलाने पर विशेष जोर, स्वास्थ्य संस्थानों में जागरूकता गतिविधियां जारी

रायपुर- हर नवजात को जीवन की स्वस्थ और सुरक्षित शुरुआत मिले, इसी उद्देश्य के साथ प्रदेशभर में विश्व स्तनपान सप्ताह की शुरुआत हो गई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा सप्ताहभर अस्पतालों, सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों तथा समुदाय स्तर पर विविध जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। अभियान के माध्यम से माताओं, गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को स्तनपान के महत्व तथा उसके वैज्ञानिक लाभों की जानकारी दी जा रही है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि शिशु के जन्म के पहले घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करना और पहले छह माह तक केवल मां का दूध पिलाना उसके स्वस्थ विकास की सबसे मजबूत नींव है। मां का पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलोस्ट्रम) शिशु के लिए प्राकृतिक सुरक्षा कवच की तरह कार्य करता है। यह संक्रमण से बचाने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने तथा कुपोषण के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। छह माह तक केवल स्तनपान कराने के बाद शिशु को उम्र के अनुरूप ऊपरी आहार के साथ दो वर्ष या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखने की सलाह दी जाती है।

स्तनपान केवल शिशु के लिए ही नहीं, बल्कि मां के स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। इससे प्रसव के बाद मां के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार होता है, कुछ गंभीर बीमारियों का खतरा कम होता है तथा मां और शिशु के बीच भावनात्मक संबंध भी अधिक मजबूत बनता है।

विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान स्वास्थ्य संस्थानों में गर्भवती एवं धात्री माताओं की काउंसलिंग, समूह चर्चा, स्वास्थ्य शिक्षा सत्र, प्रश्नोत्तर कार्यक्रम तथा स्तनपान संबंधी व्यवहारिक मार्गदर्शन दिया जा रहा है। चिकित्सक, स्टाफ नर्स, एएनएम, मितानिन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और अन्य स्वास्थ्यकर्मी माताओं को सही स्तनपान तकनीक, नवजात की देखभाल तथा स्तनपान से जुड़े सामान्य भ्रमों के वैज्ञानिक समाधान भी बता रहे हैं।

स्तनपान को केवल मां की जिम्मेदारी न मानकर पूरे परिवार की साझा जिम्मेदारी समझें। परिवार का सहयोग, सकारात्मक वातावरण और सही जानकारी ही प्रत्येक नवजात को स्वस्थ जीवन की बेहतर शुरुआत दे सकती है। जनभागीदारी और जागरूकता के माध्यम से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में और अधिक सुधार लाया जा सकता है तथा कुपोषण मुक्त और स्वस्थ समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया जा सकता है।

महानदी के तट पर आस्था का महाकुंभ: बनारस की तर्ज पर गूंजे वैदिक मंत्र

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20 करोड़ से दिव्य बनेगा रुद्रेश्वर धाम

​रायपुर- सावन के पहले सोमवार की संध्या धमतरी की चित्रोत्पला महानदी का तट केवल एक जलधारा नहीं, बल्कि भक्ति, संस्कृति और अध्यात्म का सजीव संगम बन गया। काशी की तर्ज पर जब 108 दीपों की स्वर्णिम आभा के बीच पहली बार भव्य ‘महानदी गंगा आरती’ का शुभारंभ हुआ, तो शंखनाद, वैदिक मंत्रों और घंटियों की गूंज से पूरा रुद्री घाट अलौकिक आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। धमतरी युवा ब्रिगेड और रुद्रेश्वर महादेव परिवार के इस ऐतिहासिक प्रयास ने नगर की सांस्कृतिक चेतना को नई दिशा दी है। अब जनआस्था का यह पावन पर्व सावन के प्रत्येक सोमवार को महानदी के तट पर सजने जा रहा है।

भक्ति के इस आध्यात्मिक वातावरण के बीच धमतरी के लिए एक और बड़ी खुशखबरी की शुरुआत हुई है। प्रदेश सरकार के संस्कृति एवं पर्यटन विभाग ने प्राचीन रुद्रेश्वर महादेव मंदिर परिसर के कायाकल्प के लिए 20 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने का संकल्प लिया है। इस परियोजना के माध्यम से रुद्रेश्वर धाम को एक ऐसे आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल धार्मिक-सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा, जो छत्तीसगढ़ की धरोहर को राष्ट्रीय पहचान दिलाएगा।

​तीन चरणों में बदलेगा रुद्रेश्वर धाम का स्वरूप

यह मास्टर प्लान प्राचीन स्थापत्य कला और आधुनिक जनसुविधाओं का बेहतरीन संतुलन प्रस्तुत करता है। मंदिर की पारंपरिक भारतीय स्थापत्य शैली को संरक्षित रखते हुए भव्य मुख्य प्रवेश द्वार, आकर्षक शिखर, तोरण, दीप स्तंभ और विशाल नंदी प्रतिमा का निर्माण किया जाएगा।श्रद्धालुओं के लिए चौड़े पैदल मार्ग, विश्राम गृह, प्रसाद व स्मृति केंद्र, फूड कोर्ट, सुरक्षित घाट और डिजिटल सूचना प्रणाली की व्यवस्था होगी। परिसर में स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ एआई (AI) आधारित हेल्थ कियोस्क भी स्थापित किए जाएंगे। इसी तरह परिसर में उद्यान, सांस्कृतिक मंडप, रिवर फ्रंट कॉटेज, ओपन एयर स्टेज और भविष्य की 'मैरीन ड्राइव' की तर्ज पर एक सुरम्य तट विकसित किया जाएगा।पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सौर ऊर्जा पार्किंग, ईवी (EV) चार्जिंग स्टेशन, वर्षा जल संचयन और वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन लागू किया जाएगा।

विधायकओंकार साहू, महापौर जगदीश रामू रोहरा, कलेक्टर और पूर्व विधायक रंजना साहू सहित कई गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति में शुरू हुआ यह आयोजन धमतरी के सामाजिक और आर्थिक विकास के नए युग का प्रतीक है। महानदी गंगा आरती की अविरल धारा और रुद्रेश्वर धाम का समग्र विकास मिलकर न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देंगे, बल्कि स्थानीय व्यापार, रोजगार और जनसहभागिता को भी एक नया आयाम देंगे।

​छत्तीसगढ़ में UCC की तैयारी: समान नागरिक संहिता पर जनता से मांगे गए सुझाव,15 अक्टूबर तक दे सकेंगे राय

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रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश में 'समान नागरिक संहिता' (UCC) लागू करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। धर्म आधारित व्यक्तिगत कानूनों के बजाय सभी नागरिकों को संविधान के एक ही दायरे में लाने के उद्देश्य से गठित विशेष समिति ने अब आम जनता और विभिन्न संगठनों से उनके सुझाव और अभिमत आमंत्रित किए हैं। राज्य के नागरिक यह बता सकते हैं कि राज्य में आने वाला नया कानून कैसा होना चाहिए।

समिति का स्वरूप और सदस्य

उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित यह समिति छत्तीसगढ़ में UCC की आवश्यकता, उसकी रूपरेखा तथा व्यक्तिगत सिविल मामलों से जुड़े मौजूदा कानूनों का व्यापक अध्ययन और समीक्षा कर रही है। इस समिति में सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा के ​शत्रुघ्न सिंह और एम. के. राऊत,वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार और सेवानिवृत्त प्राचार्या ज्योति रानी सिंह सदस्य के रूप में शामिल  हैं।

​​समिति के मुख्य कार्य एवं दायित्व

यह समिति राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) के कार्यान्वयन से जुड़े सभी विधिक, सामाजिक और प्रशासनिक पहलुओं का गहन अध्ययन कर रही है। इसके प्रमुख दायित्वों में छत्तीसगढ़ की वर्तमान विधिक स्थिति का विश्लेषण करने के साथ-साथ विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और गोद लेने (दत्तक ग्रहण) जैसे संवेदनशील विषयों पर व्यावहारिक सुझाव तैयार करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, समिति अन्य राज्यों में लागू UCC व्यवस्थाओं का विस्तृत अध्ययन करेगी तथा आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों और विभिन्न हितधारकों से प्राप्त सुझावों व अभिमतों को भी ड्राफ्ट में शामिल करेगी। इन समस्त अध्ययनों और सुझावों के आधार पर एक समग्र ड्राफ्ट तैयार कर राज्य सरकार को प्रस्तुत करना और आवश्यक विधायी व प्रशासनिक अनुशंसाएं देना समिति का मुख्य उद्देश्य है।  

देश का 5वां राज्य बनेगा छत्तीसगढ़

​UCC लागू करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना था। इसके अलावा गोवा, गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में भी इसे लागू किया जा चुका है। इस क्रम में छत्तीसगढ़ UCC को अपनाने वाला देश का 5वां राज्य बनने जा रहा है।  

सुझाव भेजने के माध्यम

समिति ने शासकीय व गैर-शासकीय संगठनों, सामाजिक समूहों, धार्मिक संस्थाओं, समुदायों और राजनीतिक दलों सहित सभी नागरिकों से 15 अक्टूबर 2026 तक अपने विचार और राय अनिवार्य रूप से जमा करने की अपील की है। नागरिक निम्नलिखित माध्यमों से अपने सुझाव भेज सकते हैं:  

ई-मेल: ucc-chhattisgarh@cg.gov.in

वेब पोर्टल: https://ucc.cgstate.gov.in/

 डाक पता: कार्यालय समान नागरिक संहिता समिति, न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइन, कमरा नंबर-202, रायपुर, छत्तीसगढ़ - 492001

साय कैबिनेट की बैठक कल, कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर लगेगी मुहर

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 रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की महत्वपूर्ण बैठक बुधवार, 5 अगस्त 2026 को सुबह 11:30 बजे से मंत्रालय (महानदी भवन) स्थित कैबिनेट हॉल में आयोजित की जाएगी।


सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में प्रदेश से जुड़े 3 से 4 अहम प्रस्तावों पर चर्चा होगी और उन्हें मंजूरी मिल सकती है।

बैठक का प्रमुख आकर्षण अंतरराष्ट्रीय वेटलिफ्टर ज्ञानेश्वरी यादव को ‘आउट ऑफ टर्न प्रमोशन’ देकर उप पुलिस अधीक्षक (DSP) बनाने का प्रस्ताव है, जिस पर कैबिनेट की अंतिम मुहर लगने की पूरी संभावना है। इसके अलावा, राज्य के विकास और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कई अन्य प्रस्तावों को भी मंजूरी दी जा सकती है।

सुकमा में सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी: जंगल से नक्सलियों के हथियारों और गोला-बारूद का डंप बरामद

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 सुकमा (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता हाथ लगी है। भेज्जी थाना क्षेत्र के बोधराजपाड़र के जंगलों में चलाए गए संयुक्त सर्च ऑपरेशन के दौरान जवानों ने नक्सलियों द्वारा जमीन में छिपाकर रखा गया हथियारों और गोला-बारूद का डंप बरामद किया है। मौके से एक रायफल और दर्जनों जिंदा कारतूस जब्त कर वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।


मुख्य बिंदु 

  • बरामदगी: एक .315 बोर बोल्ट एक्शन रायफल, 7.62×39 मिमी के 47 जिंदा कारतूस, 7.62×51 मिमी के 2 जिंदा कारतूस और एक एल्यूमिनियम कंटेनर।

  • संयुक्त टीम: भेज्जी थाना पुलिस और सीआरपीएफ (CRPF) की 50वीं बटालियन की कार्रवाई।

  • नेतृत्व: एसपी मयंक गुर्जर के निर्देशन और एएसपी (ऑप्स) रोहित शाह के मार्गदर्शन में चला अभियान।

खुफिया इनपुट पर हुई कार्रवाई

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, सुरक्षा बलों को गुप्त सूचना मिली थी कि नक्सलियों ने बोधराजपाड़र के जंगलों में हथियार और गोला-बारूद छिपाकर रखे हैं। सूचना को गंभीरता से लेते हुए 3 अगस्त को भेज्जी थाना पुलिस और सीआरपीएफ 50वीं बटालियन की संयुक्त टीम को सर्च ऑपरेशन के लिए रवाना किया गया। सघन तलाशी के दौरान जवानों ने जमीन में दबाकर रखा गया डंप ढूंढ निकाला।

अभियान रहेगा जारी

पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सुकमा जिले में नक्सलियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। सुरक्षा बल नक्सलियों के ठिकानों, डंप और गतिविधियों पर पैनी नजर बनाए हुए हैं और आगे भी इस तरह के सर्च ऑपरेशन चलाए जाते रहेंगे।

प्रमुख बदलाव जो किए गए हैं:

  • हेडलाइन एवं सब-हेडलाइन: खबर को अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए स्पष्ट शीर्षक दिया गया है।
  • स्थान-रेखा (Dateline): समाचार के प्रारंभ में सुकमा (छत्तीसगढ़) जोड़ा गया है, जो अखबारों का मानक प्रारूप है।
  • हाइलाइट्स (Highlights) बॉक्स: पाठकों के लिए एक ही नज़र में मुख्य जानकारी (क्या बरामद हुआ, कौन सी टीम शामिल थी) समझना आसान बना दिया गया है।
  • पैराग्राफ फ्लो: वाक्यों को अखबार की सम्पादकीय शैली (Editorial Style) के अनुरूप व्यवस्थित किया गया है।

शराब पीकर बस चलाना पड़ा भारी: चालक को 3 दिन की जेल, ₹15 हजार का जुर्माना

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 दुर्ग। शराब के नशे में यात्रियों से भरी बस चला रहे एक चालक पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) दुर्ग की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी चालक जितेंद्र देवांगन को दोषी ठहराते हुए 3 दिन के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही उस पर 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। दुर्ग जिले में यह पहला मामला है, जब ड्रिंक एंड ड्राइव के आरोपी बस चालक को जेल भेजा गया है।


जांच में हुई शराब पीने की पुष्टि

जानकारी के अनुसार, बस में बड़ी संख्या में यात्री सवार थे। चेकिंग के दौरान पुलिस को चालक जितेंद्र देवांगन के व्यवहार पर संदेह हुआ। जब ब्रीथ एनालाइजर से उसकी जांच की गई, तो शराब पीने की पुष्टि हुई। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नशे की हालत में सार्वजनिक यात्री वाहन चलाना अत्यंत गंभीर लापरवाही है, जिससे बस यात्रियों के साथ-साथ सड़क पर चल रहे अन्य लोगों की जान भी खतरे में पड़ सकती थी।

एमवी एक्ट के तहत दर्ज हुआ मामला

ट्रैफिक पुलिस ने चालक के खिलाफ मोटर यान अधिनियम (Motor Vehicles Act) की धारा 184 (लापरवाही से वाहन चलाना) और धारा 185 (नशे की हालत में वाहन चलाना) के तहत मामला दर्ज किया। इसके बाद जांच रिपोर्ट और साक्ष्यों के साथ प्रकरण सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से अदालत ने यह सख्त फैसला सुनाया।

कड़ा संदेश देने की कोशिश: पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस फैसले से शराब पीकर वाहन चलाने वालों और यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले चालकों के बीच एक सख्त और कड़ा संदेश जाएगा।

झारखंड में भर्ती परीक्षा विवाद को लेकर छात्रों का आंदोलन तेज, पारदर्शी जांच और परीक्षा रद्द करने की मांग

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झारखंड में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। राजधानी रांची सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों से आए हजारों अभ्यर्थी कई दिनों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव रहा है, जिससे योग्य अभ्यर्थियों के भविष्य पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है।

प्रदर्शन कर रहे छात्रों की प्रमुख मांग है कि 14वीं JPSC संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा को रद्द कर दोबारा आयोजित किया जाए। साथ ही, परीक्षा प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितताओं की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से निष्पक्ष जांच कराई जाए। छात्रों का कहना है कि केवल इस परीक्षा ही नहीं, बल्कि राज्य की अन्य भर्ती परीक्षाओं में भी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक सुधार आवश्यक हैं।

इस मुद्दे ने अब राजनीतिक स्वरूप भी ले लिया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसदों और नेताओं ने भी कथित परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन करते हुए CBI जांच की मांग की है। वहीं, विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की ओर से भी छात्रों के आंदोलन को समर्थन मिलने लगा है।

विश्लेषकों का मानना है कि यह आंदोलन केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता की व्यापक मांग का प्रतीक बनता जा रहा है। यदि सरकार और संबंधित आयोग समय रहते प्रभावी कदम उठाते हैं, तो इससे युवाओं का भर्ती प्रणाली पर विश्वास मजबूत हो सकता है। वहीं, लंबा गतिरोध राज्य में प्रशासनिक और राजनीतिक चुनौतियों को भी बढ़ा सकता है।

भारतीय कंपनियों के मजबूत तिमाही नतीजों से निवेशकों का भरोसा बढ़ा

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वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारत की कई प्रमुख कंपनियों ने वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल–जून तिमाही में उम्मीद से बेहतर वित्तीय प्रदर्शन किया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज़, हिंदुस्तान यूनिलीवर, इंडिगो, महिंद्रा एंड महिंद्रा और मारुति सुज़ुकी जैसी अग्रणी कंपनियों के मजबूत तिमाही नतीजों ने भारतीय कॉरपोरेट क्षेत्र की मजबूती को दर्शाया है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियों की बेहतर आय और मजबूत कारोबारी प्रदर्शन ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया है। इसके परिणामस्वरूप शेयर बाजार में सकारात्मक माहौल बना हुआ है और आने वाले समय में निवेश गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना जताई जा रही है।

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