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10 साल से बिस्तर पर जिंदगी गुजार रहे शशिकांत ने मुख्यमंत्री से लगाई इलाज की गुहार, कहा—इलाज कराइए या इच्छा मृत्यु की अनुमति दीजिए

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धमतरी- धमतरी जिले के शशिकांत भरत ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से अपने इलाज के लिए मदद की गुहार लगाई है। करीब 10 वर्षों से बिस्तर पर जीवन गुजार रहे शशिकांत ने सरकार से दिल्ली के वसंत कुंज स्थित ESIC अस्पताल में बेहतर इलाज की व्यवस्था कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि उनकी एकमात्र इच्छा है कि उनका समुचित इलाज हो और वे अपने पैरों पर खड़े होकर सामान्य जीवन जी सकें।

शशिकांत के मुताबिक वे धमतरी के भटगांव ITI में कंप्यूटर प्रशिक्षण की पढ़ाई कर रहे थे। 11 नवंबर 2016 को जेठोनी त्योहार की छुट्टी के दौरान वे अपने गांव देवपुर लौट रहे थे। रास्ते में दुकली (गचकन्हार) गांव के पास उनके साथ एक हादसा हुआ, जिसके बाद उनका पूरा शरीर लकवाग्रस्त हो गया। चिकित्सकों के अनुसार उन्हें सर्वाइकल स्पाइन इंजरी की गंभीर समस्या हुई है। हादसे के बाद से वह लगातार बिस्तर पर हैं और रोजमर्रा के कामों के लिए भी अपने माता-पिता पर निर्भर हैं।

शशिकांत ने बताया कि वह अपने माता-पिता के इकलौते बेटे हैं। पिछले 10 वर्षों से बीमारी और शारीरिक पीड़ा के बीच जीवन बिताना उनके लिए बेहद कठिन हो गया है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि उन्हें उचित उपचार उपलब्ध कराया जाए, ताकि उनके जीवन में उम्मीद की नई किरण आ सके।

उन्होंने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री से अपनी समस्या रखने के लिए कई बार प्रयास किया। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री से मुलाकात के लिए वे करीब पांच बार प्रयास कर चुके हैं। एक बार सुशासन तिहार के दौरान धमतरी में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में भी पहुंचे थे, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री निवास जाकर भी कई बार मिलने का प्रयास किया, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के कारण उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली।

शशिकांत के मुताबिक 11 जनवरी 2023 को सिहावा विधानसभा क्षेत्र में आयोजित भेंट-मुलाकात कार्यक्रम के दौरान उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के समक्ष भी अपनी समस्या रखी थी। इसके बाद 10 अगस्त 2026 को सिहावा विधानसभा क्षेत्र में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान उन्हें अपनी बात सीधे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सामने रखने का अवसर मिला। शशिकांत ने बताया कि मुख्यमंत्री ने उनकी समस्या सुनी, उनका आवेदन लिया और हरसंभव मदद का भरोसा दिया।

अब शशिकांत ने कलेक्टर अविनाश मिश्रा, विधायक अंबिका मरकाम और छत्तीसगढ़ के नागरिकों से भी अपील की है कि उनकी मांग को मुख्यमंत्री तक पहुंचाने और इलाज की व्यवस्था कराने में सहयोग करें।

शशिकांत ने अपने वीडियो को अपने चैनल पर साझा करने वाले पत्रकार का भी आभार जताया। उन्होंने कहा कि पत्रकार के माध्यम से उनकी आवाज सरकार तक पहुंच सकी। उन्होंने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से भावुक अपील करते हुए कहा कि उन्हें बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जाए और यदि इलाज संभव नहीं है तो इच्छा मृत्यु की अनुमति दिलाने में मदद की जाए।

https://youtu.be/ERH5go9ywuc

शशिकांत की अपील अब सरकार और प्रशासन से यही है कि उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए मामले में तत्काल मानवीय आधार पर हस्तक्षेप कर विशेषज्ञ चिकित्सा उपचार की व्यवस्था की जाए, ताकि पिछले एक दशक से बिस्तर पर जिंदगी गुजार रहे इस युवक को बेहतर जीवन की उम्मीद मिल सके।

नोट: यह वीडियो शशिकांत भरत द्वारा साझा की गई जानकारी और उनकी अपील पर आधारित है।

इंदौर संभाग में जनजातीय कल्याण योजनाओं की जमीनी हकीकत परखी, MoTA सचिव ने अधिकारियों को दिए समयबद्ध क्रियान्वयन के निर्देश

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इंदौर- जनजातीय कार्य मंत्रालय (MoTA) की सचिव रंजना चोपड़ा ने अतिरिक्त सचिव मनीष ठाकुर के साथ मध्य प्रदेश के इंदौर संभाग का व्यापक क्षेत्रीय दौरा कर जनजातीय कल्याण योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने जनजातीय लाभार्थियों, विद्यार्थियों, महिला बुनकरों और स्थानीय उद्यमियों से सीधे संवाद कर योजनाओं के प्रभाव और चुनौतियों की जानकारी ली।

दौरे की शुरुआत एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS), मोरोद (PVTG), इंदौर से हुई। सचिव ने कक्षा 6वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों और शिक्षकों से बातचीत की तथा विद्यालय में संचालित डिजिटल स्मार्ट कक्षाओं का अवलोकन किया। विद्यार्थियों ने इंजीनियर, उद्यमी और विभिन्न क्षेत्रों में पेशेवर बनने की अपनी आकांक्षाएं साझा कीं। सचिव ने जनजातीय बच्चों, विशेषकर विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा उपलब्ध कराने के प्रयासों की सराहना की।

इसके बाद टीम ने महेश्वर, खरगोन स्थित बुनकर सुविधा केंद्र का दौरा किया। यहां राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से जुड़े सहायता समूह के माध्यम से जनजातीय महिलाएं प्रसिद्ध महेश्वरी साड़ियों का निर्माण कर रही हैं। केंद्र पर प्रतिदिन करीब 1,000 से 2,000 साड़ियों का उत्पादन किया जाता है। TRIFED, स्वयं सहायता समूहों और जिला पंचायतों के सहयोग से इन उत्पादों को बाजार तक पहुंचाया जा रहा है। सचिव ने महिला बुनकरों से बातचीत कर उनके कार्य, आय और बाजार से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी ली।

सचिव ने आदि सेवा केंद्र, केरियाखेड़ी का भी निरीक्षण किया। यह केंद्र जनजातीय समुदाय के लिए एकल-खिड़की सुविधा केंद्र के रूप में कार्य कर रहा है, जहां राशन कार्ड से लेकर विभिन्न सरकारी योजनाओं में पंजीयन और अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए सहायता उपलब्ध कराई जाती है। केंद्र पर आयोजित जन सुनवाई और शिकायत निवारण की व्यवस्था की भी जानकारी ली गई।

दौरे के दौरान खरगोन जिले में एक जनजातीय होमस्टे का भी निरीक्षण किया गया। इसे स्थानीय जनजातीय परिवार द्वारा संचालित किया जा रहा है। सचिव ने ग्रामीण पर्यटन के माध्यम से जनजातीय परिवारों के लिए पैदा हो रहे रोजगार और आय के अवसरों को समझा। होमस्टे संचालकों को प्रशिक्षण, हैंडहोल्डिंग और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए निरंतर सहयोग दिए जाने की जानकारी भी साझा की गई।

इसके बाद सचिव ने इंदौर स्थित सिकल सेल रोग के Center of Competence का दौरा किया और जनजातीय आबादी में सिकल सेल रोग के उन्मूलन के लिए चल रही स्क्रीनिंग, काउंसलिंग और उपचार सुविधाओं की समीक्षा की।

दौरे के अंत में इंदौर संभागायुक्त कार्यालय में योजनाओं की प्रगति समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता रंजना चोपड़ा ने की। इसमें संबंधित विभागों के अधिकारी, राज्य जनजातीय कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा संभाग के अन्य जिलों के कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।

समीक्षा के दौरान सचिव ने कलेक्टरों को MoTA की सभी योजनाओं का जमीनी स्तर पर शीघ्र संतृप्तिकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों के बीच समयबद्ध समन्वय के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाए कि सरकार की योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र जनजातीय परिवार और बस्ती तक पहुंचे।

पूरे दौरे ने जनजातीय कल्याण योजनाओं की अंतिम छोर तक पहुंच, संस्थागत ढांचे को मजबूत करने तथा शिक्षा, कौशल, उद्यमिता और ग्रामीण पर्यटन के माध्यम से जनजातीय समुदायों के लिए टिकाऊ आजीविका के अवसर बढ़ाने के प्रति मंत्रालय की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

“स्थानीय से वैश्विक: डिजिटल कॉमर्स के माध्यम से निर्यात-तैयार MSMEs को सशक्त बनाना”

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भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) के अधीन MSME विकास एवं सुविधा कार्यालय, चेन्नई ने IIT मद्रास के उद्यमिता प्रकोष्ठ के सहयोग से 18 अगस्त को IIT मद्रास, चेन्नई में “स्थानीय से वैश्विक: डिजिटल कॉमर्स के माध्यम से निर्यात-तैयार MSMEs को सक्षम बनाना” विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया।

संगोष्ठी में MSMEs, उद्यमियों, विद्यार्थियों, नीति-निर्माताओं, वित्तीय संस्थानों, निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े हितधारकों तथा डिजिटल कॉमर्स विशेषज्ञों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य MSMEs को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँच बनाने के लिए व्यावहारिक मार्गों पर चर्चा करना था।

उद्घाटन सत्र में तमिलनाडु सरकार के MSME विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रवीण यादव ने विशेष संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि डिजिटल कॉमर्स भौगोलिक सीमाओं को पार करते हुए MSMEs की वैश्विक बाजारों तक पहुँच को बदल रहा है। उन्होंने MSMEs की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को तेज करने के लिए केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय तथा सक्षम वातावरण बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

IIT मद्रास के IC&SR के डीन प्रो. मनु संथानम ने अपने विशेष संबोधन में नवाचार तथा अकादमिक संस्थानों और उद्योग के बीच सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ऐसे सहयोग से MSMEs नए उत्पादों और प्रौद्योगिकियों का विकास कर अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ा सकते हैं।

हंसराज वर्मा, महानिदेशक, Council of State Industrial Development & Investment Corporation of India, ने भी विशेष संबोधन दिया। उन्होंने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत करने के लिए गुणवत्ता को बुनियादी तत्व बताया और MSMEs की बाजार पहुँच बढ़ाने में डिजिटलीकरण के महत्व को रेखांकित किया।

धयालन, निदेशक एवं प्रमुख, MSME DFO चेन्नई ने मुख्य वक्तव्य दिया और विशिष्ट अतिथियों को सम्मानित किया। रेशमा राजीवन, उप निदेशक, MSME DFO चेन्नई ने स्वागत भाषण दिया और संगोष्ठी की पृष्ठभूमि प्रस्तुत की। उन्होंने MSMEs को घरेलू बाजारों से आगे बढ़ाकर वैश्विक अवसरों से जोड़ने के लिए आवश्यक सहयोग पर जोर दिया।

संगोष्ठी में अंतरराष्ट्रीय व्यापार के बदलते स्वरूप तथा MSMEs को भौगोलिक सीमाओं से परे ग्राहकों तक पहुँचाने में डिजिटल कॉमर्स, प्रौद्योगिकी, नवाचार और बाजार संपर्क की बढ़ती भूमिका पर विशेष ध्यान दिया गया।

तकनीकी सत्रों में DGFT, EXIM Bank, ECGC, IIT मद्रास तथा निर्यात और ई-कॉमर्स परामर्श क्षेत्र के विशेषज्ञों और अधिकारियों ने भाग लिया। उन्होंने MSMEs को निर्यात प्रक्रियाओं, व्यापार वित्त, निर्यात जोखिम प्रबंधन, बाजार की पहचान, अंतरराष्ट्रीय भुगतान, अनुपालन, डिजिटल ऑनबोर्डिंग तथा वैश्विक बाजार तक पहुँच के लिए ई-कॉमर्स का लाभ उठाने के अवसरों के बारे में व्यावहारिक जानकारी दी।

चर्चाएँ सरकार द्वारा MSMEs की बाजार पहुँच मजबूत करने के निरंतर प्रयासों के संदर्भ में विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहीं। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय की Procurement & Marketing Support (PMS) Scheme में क्षमता निर्माण के अंतर्गत राष्ट्रीय कार्यशालाओं/संगोष्ठियों को एक समर्पित घटक के रूप में शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य MSMEs को बाजार पहुँच, पैकेजिंग, आयात-निर्यात प्रक्रियाओं, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म तथा बाजार विस्तार से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण विकासों के बारे में जागरूक करना और शिक्षित करना है।

चेन्नई में आयोजित यह राष्ट्रीय संगोष्ठी इसी घटक के तहत आयोजित की गई, जिसके माध्यम से MSMEs को डिजिटल कॉमर्स और निर्यात के लिए तैयार होने से संबंधित विशेषज्ञों तथा व्यावहारिक जानकारी तक सीधे पहुँच प्रदान की गई।

संगोष्ठी ने विद्यार्थियों और उभरते उद्यमियों को डिजिटल कॉमर्स, उद्यमिता और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उभरते अवसरों को समझने के लिए भी एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया।

कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें विशिष्ट अतिथियों, वक्ताओं, विशेषज्ञों, पैनलिस्टों, भाग लेने वाले MSMEs, विद्यार्थियों, सहयोगी संस्थानों तथा आयोजन टीम के योगदान के लिए आभार व्यक्त किया गया।

यह पहल MSMEs की बाजार पहुँच, डिजिटल अपनाने, निर्यात तैयारी और हैंडहोल्डिंग सहायता को मजबूत करने के लिए MSME मंत्रालय की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है और भारतीय उद्यमों को “स्थानीय से वैश्विक” बनाने के दृष्टिकोण में योगदान देती है।

CG NEWS : सरपंच के खिलाफ पंचों का मोर्चा, अविश्वास प्रस्ताव की सूचना, भ्रष्टाचार के लगाए आरोप

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 मुंगेली/लोरमी। जिले के लोरमी क्षेत्र की ग्राम पंचायत डिंडौरी में सरपंच के खिलाफ पंचों की नाराजगी खुलकर सामने आई है। ग्राम पंचायत की सरपंच ललिता मार्को के खिलाफ पंचों ने एकजुट होकर अविश्वास प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) लोरमी को लिखित सूचना दी है। पंचों ने सरपंच और उनके पति पर पंचायत के कामकाज में कथित अनियमितता, वित्तीय गड़बड़ी और दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।


सरपंच पति के हस्तक्षेप का आरोप

पंचों द्वारा एसडीएम को सौंपे गए ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि निर्वाचित सरपंच होने के बावजूद उनके पति पंचायत के कामकाज में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। पंचों का दावा है कि पंचायत से संबंधित कुछ दस्तावेजों में सरपंच के बजाय उनके पति के हस्ताक्षर किए जाते हैं। इसे लेकर पंचों ने पंचायत संचालन की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।

विकास कार्यों में अनियमितता का आरोप

पंचों ने आरोप लगाया है कि पंचायत क्षेत्र में विभिन्न विकास कार्यों के नाम पर राशि का आहरण किया गया, लेकिन कई कार्य अधूरे हैं या मौके पर अपेक्षित काम दिखाई नहीं देता। पंचों के मुताबिक, पंचायत के आय-व्यय और विकास कार्यों से संबंधित जानकारी मांगने पर उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया।

ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि पंचायत के कामकाज पर सवाल उठाने या जानकारी मांगने पर पंचों के साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया जाता है। विरोध करने पर धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया गया है। पंचों का कहना है कि इन कारणों से लंबे समय से असंतोष बना हुआ था, जो अब अविश्वास प्रस्ताव की मांग के रूप में सामने आया है।

निष्पक्ष जांच की मांग

पंचों ने एसडीएम से मामले की निष्पक्ष जांच कराने के साथ पंचायत के वित्तीय लेन-देन और विकास कार्यों की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पंचायत के रिकॉर्ड और मौके पर किए गए कार्यों की जांच से कथित अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

प्रशासन की कार्रवाई पर नजर

अविश्वास प्रस्ताव की लिखित सूचना एसडीएम कार्यालय में सौंपे जाने के बाद अब आगे की प्रक्रिया प्रशासनिक स्तर पर तय होगी। संबंधित नियमों के तहत आवश्यक कार्रवाई और बैठक की तारीख निर्धारित होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि सरपंच के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव किस दिशा में आगे बढ़ता है।

फिलहाल ग्राम पंचायत डिंडौरी का मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। पंचों की ओर से लगाए गए आरोपों की वास्तविकता प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। अब सभी की नजरें एसडीएम लोरमी की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।

बच्चों की पसंदीदा मैंगो आइस कैंडी अमानक घोषित: बस्तर में हड़कंप, तत्काल प्रभाव से बिक्री व भंडारण पर लगा बैन

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 बस्तर। जिले में बच्चों के बीच लोकप्रिय 'भीम का मैंगो आइस कैंडी' को खाद्य सुरक्षा विभाग ने जांच में असुरक्षित पाते हुए इसके विक्रय, वितरण और भंडारण पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला की रिपोर्ट में उत्पाद के अमानक मिलने के बाद प्रशासन ने यह कड़ी कार्रवाई की है।


कारोबारियों को सख्त निर्देश: बाजार से पूरा स्टॉक वापस मंगाकर करें नष्ट

खाद्य सुरक्षा अधिकारी पूनम कुंजाम के अनुसार, लैब जांच में 'भीम का मैंगो आइस कैंडी' के साथ-साथ 'वीबा एगलेस मयोनीज' भी अमानक पाई गई है। विभाग ने सभी थोक व चिल्हर व्यापारियों को दोनों उत्पादों की बिक्री तुरंत रोकने और मौजूद स्टॉक को वापस मंगाकर नियमानुसार नष्ट करने के आदेश दिए हैं। उल्लंघन पाए जाने पर संबंधितों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

नागरिकों से अपील: टोल-फ्री नंबर पर दर्ज कराएं शिकायत

खाद्य सुरक्षा विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे इन उत्पादों का सेवन या बिक्री न करें। यदि कहीं इनके अवैध भंडारण या बिक्री की जानकारी मिलती है, तो तत्काल विभाग के टोल-फ्री नंबर पर शिकायत दर्ज कराएं।

CG NEWS : साइबर ठगी की रकम अब नहीं अटकेगी, 15 दिन में पीड़ितों को पैसा लौटाने के निर्देश

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 बिलासपुर। साइबर ठगी के मामलों में पीड़ितों को राहत देने के लिए बिलासपुर रेंज पुलिस ने बैंक खातों में होल्ड ठगी की रकम वापस कराने की प्रक्रिया तेज करने का फैसला किया है। पुलिस महानिरीक्षक (IG) राम गोपाल गर्ग ने 15 दिन से अधिक पुराने बैंक होल्ड मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने के निर्देश दिए हैं।


आईजी ने अधिकारियों से कहा कि कानूनी प्रक्रिया पूरी कर ठगी की रकम जल्द से जल्द पीड़ितों के खातों में वापस कराई जाए। इसके लिए धारा 106 के तहत कोर्ट से आदेश प्राप्त करने की प्रक्रिया में भी तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।

साइबर मामलों की समीक्षा बैठक में दिए निर्देश

आईजी कार्यालय में मंगलवार को बिलासपुर रेंज के साइबर थानों, साइबर सेल और संबंधित अधिकारियों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में नेशनल साइबर अपराध पोर्टल पर दर्ज शिकायतों, एफआईआर और लंबित मामलों की बिंदुवार समीक्षा की गई।

आईजी राम गोपाल गर्ग ने अधिकारियों को लंबित मामलों का बिना अनावश्यक देरी के निराकरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध से जुड़े मामलों में पुलिस की कार्रवाई तेज, पारदर्शी और तकनीक आधारित होनी चाहिए, ताकि पीड़ितों को समय पर राहत मिल सके।

उन्होंने बैंक खातों में होल्ड ठगी की रकम से जुड़े पुराने मामलों को प्राथमिकता से निपटाने और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर राशि पीड़ितों को वापस कराने पर विशेष जोर दिया।

पुलिस के इस कदम से साइबर ठगी के मामलों में पीड़ितों को राहत मिलने और लंबित बैंक होल्ड मामलों के जल्द निराकरण की उम्मीद है।

Muchukunda temple Dhamtari: सुर-असुर संग्राम की धरती अब बनेगी पर्यटन का नया ठिकाना, मुचुकुंद ऋषि की तपोस्थली का होगा कायाकल्प

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 Muchukunda temple Dhamtari: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के नगरी (सिहावा) क्षेत्र में स्थित मांदागिरी पर्वत जल्द ही राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल हो सकता है। मेचका गांव के पास मेखलाकार पहाड़ी पर स्थित मुचुकुंद ऋषि की पौराणिक तपोस्थली धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्राकृतिक सुंदरता और ट्रेकिंग के लिए भी पर्यटकों को आकर्षित कर रही है। जिला प्रशासन अब इस स्थल को विकसित करने की दिशा में योजना तैयार कर रहा है।


आध्यात्मिक और प्राकृतिक विरासत का संगम

मांदागिरी पर्वत को सिहावा-नगरी अंचल की आध्यात्मिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। यहां मुचुकुंद ऋषि की तपोस्थली श्रद्धा, अध्यात्म और प्रकृति के अनूठे संगम के रूप में प्रसिद्ध है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मुचुकुंद महाराज इक्ष्वाकु वंश के राजा मांधाता के पुत्र थे। मान्यता है कि सुर-असुर संग्राम के बाद उन्होंने इसी क्षेत्र में तपस्या की थी। यह स्थल सिहावा क्षेत्र की सप्तऋषि तपोभूमि से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं को भी समृद्ध करता है।

पहाड़ से दिखता है सोंढूर जलाशय का विहंगम दृश्य

मांदागिरी पर्वत पर सुंदर तालाब, प्राचीन प्रतिमाएं और माता सीता सहित विभिन्न देवी-देवताओं के मंदिर मौजूद हैं। पहाड़ी की ऊंचाई से सोंढूर जलाशय और आसपास के वनांचल का मनमोहक दृश्य दिखाई देता है।

प्राकृतिक वातावरण और पहाड़ी रास्तों के कारण यह क्षेत्र ट्रेकिंग और एडवेंचर गतिविधियों के शौकीनों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन रहा है।

पर्यटन विकास पर प्रशासन का फोकस

धमतरी कलेक्टर के अनुसार, मांदागिरी की आध्यात्मिक और प्राकृतिक संभावनाओं को देखते हुए इसके विकास की योजना बनाई जा रही है। पर्यटन स्थल पर पहुंच मार्ग, स्वच्छता, पेयजल और सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं को बेहतर करने पर जोर दिया जाएगा।

इसके साथ ही स्थल को धार्मिक पर्यटन के साथ इको-टूरिज्म और ट्रेकिंग/एडवेंचर स्पॉट के रूप में विकसित करने की तैयारी है।

स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार

मांदागिरी को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किए जाने से आसपास के ग्रामीण और स्थानीय समुदाय की पर्यटन गतिविधियों में भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

नगरी से करीब 27 किलोमीटर दूर स्थित मांदागिरी आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के प्रमुख धार्मिक और इको-टूरिज्म स्थलों में अपनी पहचान बना सकता है।

शिक्षा विकास का मूलमंत्र, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ नई पीढ़ी को आधुनिक तकनीक से जोड़ रही राज्य सरकार : मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : शिक्षा किसी भी समाज और राज्य के विकास का मूल आधार है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा बच्चों को आगे बढ़ने का अवसर देती है और रोजगार उनके सपनों को साकार करने का मजबूत आधार बनता है। छत्तीसगढ़ सरकार उत्कृष्ट शिक्षा, आधुनिक तकनीक और रोजगार के नए अवसरों के माध्यम से प्रदेश के बच्चों और युवाओं का भविष्य संवारने के लिए प्रतिबद्ध है। गांवों से लेकर सुदूर वनांचलों तक बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ ही उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं और भविष्य की तकनीक के लिए तैयार किया जा रहा है।मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने राजधानी रायपुर के जोरा स्थित एक निजी होटल में आयोजित ‘स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप 2026’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही।


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने टॉपर बेटियों को सम्मानित कर उन्हें स्कॉलरशिप प्रदान की और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि इन बेटियों की उपलब्धि उनके परिवार और विद्यालय के साथ पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। कठिन परिश्रम, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के बल पर हमारी बेटियां हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं।


कार्यक्रम में कक्षा बारहवीं की परीक्षा में पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली बेमेतरा की ओमनी वर्मा को मुख्यमंत्री  साय ने एक लाख रुपए का चेक और सम्मान पत्र प्रदान किया। उनके विद्यालय स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम कन्या विद्यालय, बेमेतरा को भी एक लाख रुपए की राशि का चेक प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विशिष्टजनों का सम्मान किया तथा बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने पर केंद्रित पुस्तक ‘मेधा’ का विमोचन भी किया।

गांव के मिट्टी के स्कूल से आधुनिक शिक्षण संस्थानों तक छत्तीसगढ़ ने तय की लंबी यात्रा

मुख्यमंत्री  साय ने प्रतिभावान विद्यार्थियों से संवाद करते हुए अपने विद्यार्थी जीवन की स्मृतियां साझा कीं। उन्होंने कहा कि होनहार बेटियों के बीच आकर उन्हें अपने बचपन के दिन याद आ रहे हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गृहग्राम बगिया की प्राथमिक शाला में हुई। पांचवीं बोर्ड की परीक्षा देने के लिए उन्हें अपने गांव से कुछ दूर दूसरे गांव जाना पड़ा था। उस समय गांव के स्कूल का भवन मिट्टी का था और उसकी मरम्मत में गांव के लोग मिलकर सहयोग करते थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने राज्य निर्माण के 25 वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। आज प्रदेश में स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक संस्थानों का व्यापक नेटवर्क विकसित हुआ है। प्रत्येक विकासखंड में महाविद्यालय उपलब्ध हैं। आईआईटी, आईआईएम और एम्स जैसे राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थान आज छत्तीसगढ़ में संचालित हैं। इससे प्रदेश के बच्चों को अपने राज्य में ही उच्च गुणवत्ता की शिक्षा के बेहतर अवसर मिल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि बस्तर में शांति की स्थापना के साथ शिक्षा का नया अध्याय भी शुरू हो रहा है। जगरगुंडा और ओरछा जैसे क्षेत्रों में एजुकेशन सिटी की शुरुआत की जा रही है। जिन इलाकों में कभी परिस्थितियों के कारण शिक्षा तक पहुंच चुनौतीपूर्ण थी, वहां अब बच्चों के लिए बेहतर शैक्षणिक अधोसंरचना और अवसर विकसित किए जा रहे हैं।

34 नालंदा परिसर से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को मिलेगा बेहतर वातावरण

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास केवल शैक्षणिक संस्थान स्थापित करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को उनकी प्रतिभा के अनुरूप आगे बढ़ने के लिए आवश्यक सुविधाएं और वातावरण उपलब्ध कराना भी है। प्रदेश में 34 स्थानों पर नालंदा परिसर विकसित किए जा रहे हैं, जहां युवाओं को शांत और सुविधायुक्त वातावरण में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर मिलेगा।

उन्होंने बताया कि देश की राजधानी नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ के जनजातीय युवाओं के लिए 200 बिस्तरों वाला ट्राइबल यूथ हॉस्टल संचालित किया जा रहा है। यहां विद्यार्थियों को आवश्यक सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस वर्ष यहां रहकर तैयारी करने वाले 13 विद्यार्थियों ने संघ लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण की है। यह उपलब्धि बताती है कि सही अवसर और सुविधाएं मिलने पर छत्तीसगढ़ के युवा देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में भी अपनी प्रतिभा सिद्ध कर सकते हैं।

एआई मिशन से भविष्य की तकनीक के लिए तैयार होगी नई पीढ़ी

मुख्यमंत्री ने कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में शिक्षा को आधुनिक तकनीक से जोड़ना समय की आवश्यकता है। राज्य के विद्यार्थी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहित नई तकनीकों से परिचित हों और भविष्य की संभावनाओं का लाभ उठा सकें, इसके लिए छत्तीसगढ़ एआई मिशन शुरू किया जा रहा है। राज्य सरकार ने इसके लिए 500 करोड़ रुपए का बजटीय प्रावधान किया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों और युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाकर उन्हें भविष्य के रोजगार और नवाचार के अवसरों के लिए तैयार करना है।

बस्तर में शांति के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास का नया दौर

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नक्सलवाद लंबे समय तक छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर के विकास में बड़ी बाधा रहा। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ सुरक्षा बलों के जवानों ने अदम्य साहस का परिचय दिया है। इसके परिणामस्वरूप बस्तर में शांति और विश्वास का वातावरण मजबूत हुआ है तथा विकास की गति तेज हुई है।

उन्होंने कहा कि इस स्वतंत्रता दिवस पर बस्तर के 92 गांवों में पहली बार तिरंगा फहराया गया। यह बदलते बस्तर की नई तस्वीर है। नक्सलवाद से प्रभावित रहे क्षेत्रों में अब शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, राशन और अन्य बुनियादी सुविधाएं तेजी से पहुंच रही हैं। मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत 34 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया है और लगभग 40 हजार लोगों का उपचार किया गया है। बस्तर मुन्ने और नियद नेल्लानार जैसी पहलों के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों तक शासकीय योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है। एक लाख से अधिक लोगों के राशन कार्ड भी बनाए गए हैं।

बस्तर में पर्यटन बनेगा रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था का नया आधार

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। चित्रकोट जलप्रपात, कुटुमसर गुफा सहित अनेक प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थल देश-दुनिया के पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। बस्तर के धुड़मारास गांव को संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन द्वारा दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांवों की सूची में शामिल किया जाना पूरे प्रदेश के लिए गौरव की बात है।

उन्होंने कहा कि धुड़मारास में विदेशी पर्यटक होमस्टे में रहकर स्थानीय जनजातीय जीवन, संस्कृति, खान-पान और परंपराओं को करीब से जान रहे हैं। राज्य सरकार बस्तर सहित प्रदेश के पर्यटन क्षेत्रों में होमस्टे को प्रोत्साहित कर रही है और इसके लिए ऋण एवं सब्सिडी की सुविधा दी जा रही है। पर्यटन को रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था का मजबूत माध्यम बनाने के उद्देश्य से नई औद्योगिक नीति में भी पर्यटन को शामिल किया गया है।

निवेश के साथ स्थानीय युवाओं के लिए बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शिक्षा के साथ युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार के अवसर तैयार करना राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है। छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति 2024-30 को देश-विदेश में सकारात्मक प्रतिसाद मिल रहा है। नई नीति के अंतर्गत अब तक लगभग 8 लाख करोड़ रुपए के निवेश के एमओयू हुए हैं और इन निवेश प्रस्तावों का प्रभाव धरातल पर भी दिखाई देने लगा है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ऐसी औद्योगिक इकाइयों को विशेष प्रोत्साहन दे रही है, जो स्थानीय युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध कराएंगी। एक हजार स्थानीय युवाओं को रोजगार देने वाले उद्यमियों के लिए बीस्पोक नीति के अंतर्गत विशेष इंसेंटिव का प्रावधान किया गया है। बारिश के मौसम के बाद प्रदेश में रोजगार मेलों का आयोजन भी किया जाएगा, जिनके माध्यम से युवाओं को विभिन्न उद्योगों में उपलब्ध रोजगार के अवसरों से सीधे जोड़ा जाएगा।

मुख्यमंत्री  साय ने स्वर्ण शारदा स्कॉलरशिप से सम्मानित सभी छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि वे बड़े सपने देखें, अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहें और निरंतर मेहनत करें। राज्य सरकार उनके सपनों को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा, तकनीक और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।

इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेंद्र यादव, सांसद रूपकुमारी चौधरी, राज्य गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष राजीव लोचन जी महाराज, गोयल ग्रुप एंड कंपनीज के चेयरमैन श्री सुरेश गोयल,  राजीव गोयल, श्री दिनेश गोयल,  रविकांत मित्तल सहित जनप्रतिनिधिगण, शिक्षाविद्, विद्यार्थी, अभिभावक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ में आदिवासी विद्यार्थियों के लिए AI और रोबोटिक्स शिक्षा को बढ़ावा, स्कूलों-कॉलेजों में शुरू होंगे विशेष लर्निंग मॉड्यूल

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रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार आदिवासी विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीकों से जोड़ने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स और डिजिटल तकनीक आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इसके तहत राज्य के सरकारी स्कूलों, ओपन स्कूलों और कॉलेजों में विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तर के अनुरूप AI-सक्षम लर्निंग मॉड्यूल शुरू करने की योजना है। 

विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीकों से जोड़ा जाएगा

प्रस्तावित लर्निंग मॉड्यूल विद्यार्थियों की कक्षा और शैक्षणिक स्तर के अनुसार तैयार किए जाएंगे। शुरुआत AI और डिजिटल तकनीक की बुनियादी जानकारी से होगी और आगे चलकर विद्यार्थियों को उन्नत तकनीकी अनुप्रयोगों से परिचित कराया जाएगा।

इस पहल का उद्देश्य आदिवासी और दूरदराज के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक की शिक्षा तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराना और उन्हें भविष्य की नौकरियों तथा उभरते उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना है। 

AI और रोबोटिक्स लैब स्थापित करने की तैयारी

इस तकनीकी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आधुनिक AI और रोबोटिक्स लैब स्थापित करने की भी योजना बनाई गई है। इससे विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं, बल्कि तकनीक के व्यावहारिक उपयोग और प्रयोग का अवसर भी मिल सकेगा।

राज्य की व्यापक AI रणनीति में शैक्षणिक संस्थानों में AI एवं रोबोटिक्स क्लब, डिजिटल लैब और स्मार्ट क्लासरूम विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। 

कॉलेज विद्यार्थियों के लिए विशेष AI कोर्स

कॉलेजों में अध्ययनरत आदिवासी विद्यार्थियों के लिए विशेष और गहन AI पाठ्यक्रम शुरू करने की संभावनाओं पर भी काम किया जा रहा है। ये पाठ्यक्रम नियमित पढ़ाई के साथ किए जा सकेंगे, जिससे विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के साथ तकनीकी कौशल विकसित करने का अवसर मिलेगा। 

शिक्षकों के प्रशिक्षण पर भी जोर

AI शिक्षा को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए शिक्षकों को भी नई तकनीकों के अनुरूप प्रशिक्षित करने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य ऐसा शैक्षणिक वातावरण तैयार करना है, जिसमें विद्यार्थी AI, कोडिंग, रोबोटिक्स और अन्य डिजिटल तकनीकों को व्यावहारिक रूप से समझ सकें।

प्रायस स्कूलों को भी मिलेगा लाभ

यह पहल प्रायस आवासीय विद्यालयों के मॉडल को पारंपरिक प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी से आगे बढ़ाकर विद्यार्थियों को भविष्य के तकनीकी क्षेत्रों के लिए तैयार करने की व्यापक योजना का हिस्सा है। राज्य में पहले से ही इन विद्यालयों में IIT और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों द्वारा पढ़ाई कराई जा रही है। अब उभरती तकनीकों जैसे AI, क्वांटम कंप्यूटिंग और सेमीकंडक्टर्स से विद्यार्थियों को परिचित कराने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

डिजिटल डिवाइड कम करने की दिशा में कदम

सरकार का यह प्रयास विशेष रूप से आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी शिक्षा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। AI और रोबोटिक्स जैसी तकनीकों तक शुरुआती स्तर पर पहुंच मिलने से विद्यार्थियों में तकनीकी दक्षता, नवाचार और रोजगार की नई संभावनाएं विकसित हो सकती हैं।

कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ में AI और रोबोटिक्स शिक्षा का विस्तार आदिवासी युवाओं को भविष्य की तकनीकी अर्थव्यवस्था के लिए तैयार करने और डिजिटल डिवाइड कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

रायपुर में सीरियल रेप और हत्या का आरोपी गिरफ्तार: साइकिल से महिलाओं का पीछा करता था, जांच में दो घटनाओं का कनेक्शन सामने आया

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रायपुर- राजधानी रायपुर में महिला से दुष्कर्म और हत्या के मामले की जांच कर रही पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी कथित तौर पर साइकिल से महिलाओं का पीछा करता था और जुलाई तथा अगस्त में हुई दो अलग-अलग घटनाओं में उसकी संलिप्तता सामने आई है।

21 जुलाई को महिला की हत्या का आरोप

पुलिस के मुताबिक, 21 जुलाई को 20 वर्ष की उम्र की एक महिला का आरोपी ने साइकिल से पीछा किया। आरोप है कि उसने न्यू स्वागतम विहार के पास पानी से भरे एक प्लॉट में महिला पर हमला किया, उसके साथ दुष्कर्म किया और फिर उसकी हत्या कर दी। घटना के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता से जांच शुरू की और आरोपी की तलाश में कई स्तरों पर सुराग जुटाए।

5 अगस्त की दूसरी घटना से जुड़ा कनेक्शन

जांच के दौरान पुलिस को 5 अगस्त को हुई एक अन्य घटना के बारे में जानकारी मिली। इस मामले में भी लगभग उसी उम्र की एक महिला का कथित रूप से साइकिल सवार व्यक्ति ने पीछा किया और उस पर हमला किया।

हालांकि, इस घटना में महिला ने शोर मचाकर मदद के लिए आवाज लगाई, जिसके बाद आरोपी मौके से भाग गया। पुलिस ने दोनों घटनाओं में समान पैटर्न को देखते हुए जांच आगे बढ़ाई। 

जांच में सामने आया समान पैटर्न

पुलिस जांच में दोनों मामलों के बीच समानताएँ सामने आने के बाद आरोपी तक पहुंचने की कोशिश तेज की गई। महिलाओं का पीछा करना और साइकिल का इस्तेमाल करना जांच में महत्वपूर्ण कड़ी बना। इसी आधार पर पुलिस ने संदिग्ध की पहचान और उसकी गतिविधियों की पड़ताल शुरू की।

जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। हालांकि, मामले में सामने आए आरोपों और अन्य तथ्यों की पुष्टि कानूनी जांच एवं आगे की विवेचना के माध्यम से की जाएगी। 

पुलिस जांच जारी

आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस दोनों मामलों से जुड़े साक्ष्यों, घटनास्थल और अन्य परिस्थितियों की जांच कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी की अन्य आपराधिक घटनाओं में कोई भूमिका रही है या नहीं।

इस घटना के बाद शहर में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ी है। पुलिस का फोकस मामले की विस्तृत जांच करने, उपलब्ध साक्ष्यों को जुटाने और आरोपों की पुष्टि के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई पर है।

नोट: आरोपी पर लगाए गए आरोप पुलिस जांच के आधार पर हैं। अदालत में दोष सिद्ध होने तक आरोपी को कानूनन निर्दोष माना जाता है।

छत्तीसगढ़ राज्य भूवैज्ञानिक प्रोग्रामिंग बोर्ड (SGPB) की 26वीं बैठक संपन्न

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45 अन्वेषण परियोजनाओं को दिया गया अंतिम रूप

रायपुर- छत्तीसगढ़ की राजधानी में राज्य भूवैज्ञानिक प्रोग्रामिंग बोर्ड (SGPB) की 26वीं बैठक खनिज साधन विभाग के सचिव पी. दयानंद की अध्यक्षता में रायपुर स्थित पुराना सर्किट हाउस में भूवैज्ञानिक प्रोग्रामिंग बोर्ड (SGPB) की 26वीं बैठक आयोजित की गई। बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के अन्वेषण कार्यों की समीक्षा की गई और आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए खनिज खोज कार्यक्रमों व प्राथमिकताओं को अंतिम रूप दिया गया। इस दौरान विशेष सचिव एवं संचालक भौमिकी-खनिकर्म रजत बंसल और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI)  के उप महानिदेशक अमित धरवाड़कर सहित प्रमुख केंद्रीय, राज्य एजेंसियों व निजी उद्योग जगत के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

45 अन्वेषण परियोजनाओं पर मुहर

राज्य में कुल 45 नई व जारी अन्वेषण परियोजनाओं को अंतिम रूप दिया गया है। इनमें 35 क्रिटिकल व स्ट्रेटेजिक खनिज ब्लॉक, 4 डीप-सीटेड (गहन स्तर) खनिज ब्लॉक तथा 6 बल्क मिनरल परियोजनाएं शामिल हैं।

GSI की प्रमुख भूमिका महत्वपूर्ण है, इनमें से 25 अन्वेषण परियोजनाओं का संचालन भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (रायपुर इकाई) द्वारा किया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान 2,590 मिलियन टन चूना पत्थर तथा 32.26 मिलियन टन लौह अयस्क के संसाधनों की पहचान व स्थापना की गई। उन्होंने आगे बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 की चार अन्वेषण परियोजनाएं चालू वित्तीय वर्ष में भी जारी रहेंगी। इसके अतिरिक्त, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए संचालनालय, भौमिकी एवं खनिकर्म द्वारा राज्य में 11 अन्वेषण प्रस्तावों को अंतिम रूप दिया गया है। इनमें 1 ग्रेफाइट, 2 चूना पत्थर, 4 लौह अयस्क, 2 ग्लॉकोनाइट, 1 आरईई एवं रेयर मेटल्स तथा 1 बॉक्साइट एवं एल्युमिनस लेटराइट युक्त महत्वपूर्ण एवं सामरिक खनिज ब्लॉक शामिल हैं।

रिकॉर्ड राजस्व संग्रहण 

सचिव पी. दयानंद ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य को खनन रॉयल्टी एवं राजस्व से लगभग 16,738 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। उन्होंने यह भी बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में स्वीकृत एनपीईए की 9 अन्वेषण परियोजनाएं चालू वर्ष में भी जारी रहेंगी। इससे राज्य में महत्वपूर्ण एवं सामरिक खनिजों के अन्वेषण को निरंतर गति मिलने के साथ-साथ राज्य के खनिज संसाधन आधार को और मजबूत करने में सहायता मिलेगी।  विशेष सचिव रजत बंसल ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025 26 के दौरान संचालनालय, भौमिकी एवं खनिकर्म, छत्तीसगढ द्वारा 2,590 मिलियन टन चूना पत्थर संसाधन तथा 32.26 मिलियन टन लौह अयस्क संसाधन स्थापित किए गए हैं। उन्होंने इसे राज्य में खनिज अन्वेषण गतिविधियों की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

रणनीतिक एवं दुर्लभ खनिजों पर जोर

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए स्वीकृत प्रस्तावों में लिथियम, ग्रेफाइट, टिन-टैंटलम-नियोबियम, आरईई (REE) एवं रेयर मेटल्स, ग्लॉकोनाइट और बॉक्साइट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के ब्लॉकों को शामिल किया गया है।

बैठक में दक्षिण बस्तर क्षेत्र में खनिज अन्वेषण को तेज करने तथा अधिक गहराई में मौजूद (Deep-seated) खनिजों के सटीक आकलन के लिए उन्नत तकनीकों को अपनाने का आग्रह किया गया।

पांच जिलों के खनिज संसाधन मानचित्र खनिज साधन विभाग को सौंपे 

इस अवसर पर GSI द्वारा छत्तीसगढ़ के पांच जिलों के खनिज संसाधन मानचित्र खनिज साधन विभाग को सौंपे गए। बैठक में खनिज खोज की संभावनाओं को बढ़ाने, विभिन्न केंद्रीय व राज्य एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और राज्य में खनिज-आधारित उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुसार एक मजबूत रोडमैप तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया।

बैठक में प्रमुख भूवैज्ञानिक एवं खनिज क्षेत्र से संबंधित केंद्रीय एवं राज्य स्तरीय संस्थाओं और शासकीय एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, भारतीय खान ब्यूरो, परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय, मिनरल एक्सप्लोरेशन एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड, राष्ट्रीय खनिज विकास निगम, सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ माइनिंग एंड फ्यूल रिसर्च, केंद्रीय भूजल बोर्ड, सीएमपीडीआईएल, एमओआईएल, हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड तथा छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन शामिल थे। इसके अतिरिक्त सीजीसीओएसटी, अधिसूचित निजी अन्वेषण एजेंसियों तथा उद्योग जगत से जिंदल स्टील, अल्ट्राटेक सीमेंट, मां कुदरगढ़ी स्टील प्राइवेट लिमिटेड, डेक्कन गोल्ड एवं माइकी साउथ माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधियों तथा डीजीएम की एमसीटीए टीम ने भी बैठक में भाग लिया।

छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा पर बाघ का आतंक: हमले में ग्रामीण की मौत, वन विभाग ने बढ़ाई निगरानी

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कांकेर- छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा से लगे इलाकों में बाघ की मौजूदगी ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। महाराष्ट्र के सीमावर्ती क्षेत्र में बाघ के हमले में एक ग्रामीण की मौत के बाद छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र दोनों राज्यों के वन विभाग अलर्ट हो गए हैं। 

घटना के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों में वन विभाग की टीमों ने गश्त और निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों की नजर बाघ की गतिविधियों और उसके संभावित मूवमेंट पर बनी हुई है। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त कर्मचारियों को तैनात किया गया है, जबकि बाघ की लोकेशन पर नजर रखने के लिए कैमरा ट्रैप और ड्रोन के इस्तेमाल की भी तैयारी की जा रही है।

पखांजूर क्षेत्र में भी मिले बाघ के पदचिह्न

कांकेर जिले के पखांजूर क्षेत्र के पीवी-19 गांव के आसपास बाघ के पदचिह्न मिलने की पुष्टि हुई है। इसी इलाके में एक गाय के शिकार की जानकारी भी सामने आई है। सड़क किनारे बाघ दिखाई देने का वीडियो सामने आने के बाद ग्रामीणों में दहशत और बढ़ गई है।

बताया गया है कि महाराष्ट्र के सीमावर्ती दोढाडा गांव में जंगल की ओर गए ग्रामीण हरीलाल वड्डडे पर बाघ ने हमला किया, जिसमें उनकी मौत हो गई। घटना के बाद आसपास के गांवों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। 

ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह

वन विभाग ने जंगल और उससे लगे इलाकों में रहने वाले लोगों से अकेले जंगल में नहीं जाने की अपील की है। विशेष रूप से सुबह और शाम के समय जंगल, झाड़ियों और सुनसान इलाकों में जाने से बचने की सलाह दी गई है।

अधिकारियों ने लोगों से कहा है कि यदि बाघ दिखाई दे तो उसके करीब जाने, उसका पीछा करने या वीडियो बनाने की कोशिश न करें। बाघ की सूचना तत्काल वन विभाग को दें, ताकि प्रशिक्षित टीम मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित कर सके।

वन विभाग की बढ़ी सक्रियता

ग्रामीण की मौत और छत्तीसगढ़ की सीमा में बाघ के पदचिह्न मिलने के बाद दोनों राज्यों के वन अमले ने संयुक्त रूप से निगरानी बढ़ा दी है। फिलहाल प्राथमिकता ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और बाघ की गतिविधियों पर लगातार नजर रखने की है। 

वन विभाग की अपील: ग्रामीण सावधानी बरतें, जंगल की ओर अकेले न जाएं और बाघ की किसी भी गतिविधि की जानकारी तुरंत संबंधित वन अधिकारियों को दें।

छत्तीसगढ़ में महिला IAS अधिकारियों को बड़ी जिम्मेदारी: 12 जिलों की कमान महिला कलेक्टरों के हाथ

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रशासनिक फेरबदल के बाद महिला IAS अधिकारियों पर भरोसा जताते हुए राज्य के 33 में से 12 जिलों की कमान महिला कलेक्टरों को सौंपी है। यह कदम राज्य के जिला प्रशासन में महिला नेतृत्व की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।


इन 12 जिलों में महिला कलेक्टर

  • कोंडागांव — नूपुर राशि पन्ना

  • बेमेतरा — प्रतिष्ठा ममगई

  • नारायणपुर — नम्रता जैन

  • बालोद — दिव्या मिश्रा

  • सूरजपुर — रेना जमील

  • सक्ती — जयश्री जैन

  • कबीरधाम — तुलिका प्रजापति

  • मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी — तनुजा सलाम

  • सारंगढ़-बिलाईगढ़ — पद्मिनी भोई साहू

  • बलरामपुर-रामानुजगंज — चंदन संजय त्रिपाठी

  • मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर — संतंन देवी जांगड़े

  • कोरिया — रोक्तिमा यादव 

हालिया प्रशासनिक फेरबदल में 2016 बैच की IAS अधिकारी जयश्री जैन को सक्ती का कलेक्टर बनाया गया है। वहीं तुलिका प्रजापति को मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी से स्थानांतरित कर कबीरधाम की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि तनुजा सलाम को मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी का कलेक्टर बनाया गया है।

प्रशासनिक नेतृत्व में मजबूत होती महिला भागीदारी

कलेक्टर जिले में सरकार की योजनाओं और नीतियों को जमीन पर लागू करने की महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। विकास कार्यों की निगरानी, राजस्व प्रशासन, कानून-व्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य और जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में उनकी अहम भूमिका रहती है।

ऐसे महत्वपूर्ण पदों पर 12 महिला IAS अधिकारियों की नियुक्ति को प्रशासनिक नेतृत्व में महिला भागीदारी को बढ़ावा देने वाले महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। यह नियुक्तियां अधिकारियों की प्रशासनिक क्षमता और नेतृत्व कौशल पर सरकार के भरोसे को भी दर्शाती हैं। 

कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में 12 जिलों की कमान महिला अधिकारियों के हाथों में होना राज्य के प्रशासनिक ढांचे में महिला नेतृत्व की मजबूत मौजूदगी को रेखांकित करता है। 

उत्तर प्रदेश में बाढ़ का संकट: 13 जिलों के 173 गांव प्रभावित, 4,845 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया

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लखनऊ- उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश और बढ़ते जलस्तर के बीच बाढ़ की स्थिति पर प्रशासन की कड़ी नजर बनी हुई है। राज्य के 13 जिलों के 173 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार करीब 84,362 लोग और 13,058 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ है। हालांकि, राज्य सरकार के अनुसार मौजूदा स्थिति नियंत्रण में है और राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। 

4,845 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया

बाढ़ प्रभावित इलाकों से अब तक 4,845 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। राज्य में 1,263 बाढ़ राहत केंद्र तैयार किए गए हैं, जिनमें से 41 फिलहाल संचालित हैं और इनमें 1,045 लोग रह रहे हैं। 

राज्य राहत आयुक्त हृषिकेश भास्कर यशोद ने बाढ़ की स्थिति और जारी राहत-बचाव कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने जिला प्रशासन को जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को राहत शिविरों अथवा अन्य सुरक्षित स्थानों पर तत्काल पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। 

इन 13 जिलों में बाढ़ का असर

बाढ़ से प्रभावित जिलों में बदायूं, बहराइच, बलिया, बाराबंकी, बिजनौर, फर्रुखाबाद, गौतम बुद्ध नगर, गोंडा, कासगंज, लखीमपुर खीरी, मुजफ्फरनगर, सीतापुर और उन्नाव शामिल हैं।

प्रशासन को प्रभावित परिवारों के लिए पर्याप्त भोजन, चिकित्सा सुविधाएं और आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध रखने तथा नदियों के जलस्तर की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। 

NDRF समेत बड़ी संख्या में राहत बल तैनात

बाढ़ से निपटने के लिए राज्य में 1,589 बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं। राहत और बचाव कार्यों के लिए 428 नाव एवं मोटरबोट और 1,101 स्थानीय गोताखोर तैनात किए गए हैं। इसके अलावा NDRF की 16 टीमें भी राज्य में तैनात हैं। कई जिलों में SDRF और PAC के जवान भी राहत कार्यों में लगाए गए हैं।

राहत सामग्री के तहत अब तक प्रभावित लोगों को 15,238 खाद्यान्न पैकेट और 30,316 भोजन के पैकेट वितरित किए जा चुके हैं।

मौसम और नदियों के जलस्तर पर लगातार निगरानी

प्रशासन नदियों के जलस्तर और संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार नजर रख रहा है। राज्य राहत आयुक्त कार्यालय का नियंत्रण कक्ष प्रभावित जिलों के साथ लगातार संपर्क में है। नागरिकों की शिकायतों और सूचनाओं के लिए 1070 हेल्पलाइन के माध्यम से भी जानकारी प्राप्त की जा रही है। 

राज्य सरकार के अनुसार, 1 से 18 अगस्त के बीच मौसम संबंधी चेतावनियों के लिए 140.52 करोड़ SMS लोगों को भेजे गए हैं। बाढ़ से बचाव और आपदा सुरक्षा से जुड़ी जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से भी साझा की जा रही है।

फिलहाल प्रशासन का फोकस प्रभावित लोगों को सुरक्षित रखना, राहत सामग्री उपलब्ध कराना और नदियों के जलस्तर की लगातार निगरानी करना है।

अरुणाचल सीमा विवाद पर किरेन रिजिजू का बड़ा बयान: 60 किमी चीनी घुसपैठ के दावे को बताया गलत

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नई दिल्ली- अरुणाचल प्रदेश में चीन की कथित घुसपैठ को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने 60 किलोमीटर अंदर तक चीनी सैनिकों के प्रवेश के दावे को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह दावा गलत है और सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो या सूचनाएँ साझा करना भ्रम पैदा कर सकता है।

रिजिजू ने कहा कि भारत-चीन सीमा के कुछ हिस्सों में वास्तविक समस्या है, लेकिन इसका प्रमुख कारण सीमा का जमीन पर पूरी तरह स्पष्ट रूप से सीमांकन (demarcation) न होना है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच अरुणाचल प्रदेश में सीमा को लेकर अलग-अलग धारणाएँ हैं, जिसके कारण कुछ क्षेत्रों में स्थिति को लेकर भ्रम बना रहता है।

60 किलोमीटर घुसपैठ के दावे पर सफाई

रिजिजू ने स्पष्ट किया कि यह कहना सही नहीं है कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश में 60 किलोमीटर अंदर तक प्रवेश कर लिया है या किसी भारतीय गांव पर कब्जा कर लिया है। उनके अनुसार, कुछ क्षेत्रों में सीमा स्पष्ट रूप से निर्धारित नहीं होने के कारण दोनों पक्ष संबंधित भू-भाग पर अलग-अलग दावे करते हैं। 

उन्होंने यह भी कहा कि सीमा क्षेत्र के गांवों में रहने वाले लोगों की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। स्थानीय लोगों द्वारा सीमा और पारंपरिक भूमि को लेकर उठाई गई चिंताएँ वास्तविक हैं और सरकार इन्हें गंभीरता से लेती है।

चीन की गतिविधियों पर भी नजर

रिजिजू ने माना कि अरुणाचल प्रदेश के कुछ सीमावर्ती इलाकों में चीनी गतिविधियों में वृद्धि हुई है। हालांकि, उन्होंने इसे 60 किलोमीटर की नई सैन्य घुसपैठ के रूप में पेश किए जाने से असहमति जताई। उन्होंने कहा कि सीमा की स्थिति को लेकर गलत सूचनाएँ फैलाने से देश में अनावश्यक भ्रम पैदा हो सकता है और सुरक्षा बलों का मनोबल प्रभावित हो सकता है। 

रिपोर्टों के अनुसार, यह बयान अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले और लॉन्गजू क्षेत्र के आसपास चीनी गतिविधियों को लेकर उठी चिंताओं के बीच आया है। 

सीमा पर बुनियादी ढांचे को लेकर भी चर्चा

रिजिजू ने भारत और चीन के सीमा क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चीन ने भारत की तुलना में सीमा क्षेत्रों में सड़क और अन्य बुनियादी ढांचे का निर्माण पहले शुरू कर दिया था। उन्होंने बताया कि 2014 के बाद भारत ने भी सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क और अन्य आधारभूत ढांचे के विकास को तेज किया है। 

सरकार का संदेश

केंद्रीय मंत्री के बयान का मुख्य संदेश यह है कि 60 किलोमीटर चीनी घुसपैठ या भारतीय गांव पर कब्जे की खबरों को सही नहीं माना जाना चाहिए, जबकि सीमा के कुछ हिस्सों में सीमांकन से जुड़ी वास्तविक चुनौतियाँ मौजूद हैं। सरकार स्थानीय लोगों की चिंताओं को गंभीरता से लेने और सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा एवं बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर जोर दे रही है। 

महत्वपूर्ण: 60 किमी घुसपैठ का दावा फिलहाल मंत्री के बयान के अनुसार गलत बताया गया है; इसे तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।

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