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खेत बना आय का केंद्र, नवाचार ने बदली खेती की तस्वीर

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युवा किसान अंकित लकड़ा ने मछली पालन, मुर्गी पालन और बागवानी को जोड़कर तैयार किया एकीकृत कृषि मॉडल

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से मिली 8 लाख रुपये की अनुदान सहायता, दो तालाबों में मछली पालन के साथ 1,000 से 1,200 मुर्गियों का कर रहे पालन

रायपुर- खेती में बदलाव केवल नई तकनीक से नहीं, बल्कि नई सोच से भी आता है। जशपुर जिले के ग्राम रतबा के युवा किसान अंकित लकड़ा ने इस बात को अपनी मेहनत और नवाचार से साबित किया है। कभी केवल बारिश के भरोसे धान की खेती करने वाले अंकित ने आज अपने खेत को मछली पालन, मुर्गी पालन, बागवानी और बहुफसली खेती से जोड़कर आय के कई स्रोत तैयार कर लिए हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में किसानों को कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों से जोड़कर उनकी आय के अवसर बढ़ाने के लिए संचालित योजनाओं का लाभ अंकित को भी मिला है। योजनाओं से मिली सहायता और अपनी मेहनत के बल पर उन्होंने पारंपरिक खेती को आधुनिक और बहुआयामी कृषि मॉडल में बदलने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

धान की खेती से शुरू हुआ सफर, अब खेत में कई गतिविधियां

अंकित लकड़ा बताते हैं कि पहले वे मुख्य रूप से बरसात के मौसम में धान की खेती करते थे। खेती से होने वाली आय को बढ़ाने के लिए उन्होंने कृषि और मत्स्य विभाग से जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने अपने खेत में दो तालाब तैयार कराए और मछली पालन शुरू किया।

तालाब बनने के बाद उनके खेत की तस्वीर ही बदल गई। तालाब के पानी का उपयोग गर्मी के मौसम में सिंचाई के लिए होने लगा। इससे वे अब वर्षा ऋतु के अलावा गर्मी में भी खेती कर पा रहे हैं। साथ ही खेत में आम और लीची सहित विभिन्न फलदार पौधे लगाए गए हैं, जिससे आने वाले समय में बागवानी भी उनकी अतिरिक्त आय का माध्यम बनेगी।

एक ही संसाधन से मछली और मुर्गी पालन का नवाचार

अंकित ने अपने दोनों तालाबों के ऊपर मुर्गी पालन के लिए शेड तैयार किया है। शेड की क्षमता करीब 1,000 से 1,200 मुर्गियों की है। उन्होंने मुर्गी पालन और मछली पालन को आपस में जोड़कर संसाधनों का बेहतर उपयोग करने का तरीका अपनाया है।

मुर्गियों से निकलने वाला अपशिष्ट तालाब में पहुंचकर मछलियों के लिए प्राकृतिक आहार के रूप में उपयोगी होता है। इससे मछली पालन में बाहरी आहार पर होने वाला खर्च कम करने में मदद मिलती है। इस तरह एक ही स्थान पर संचालित दो गतिविधियां एक-दूसरे को सहारा देती हैं और किसान को अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध कराती हैं।

तालाब की मेड़ पर फलदार पौधे, दोहरा लाभ

अंकित ने तालाब की मेड़ों पर आम सहित अन्य फलदार पौधे भी लगाए हैं। तालाब के पानी से इन पौधों की सिंचाई की जाती है। उनका कहना है कि मेड़ पर पेड़ लगाने से मिट्टी को मजबूती मिलती है और मेड़ के कटाव को रोकने में भी मदद मिलती है। वहीं आम और लीची जैसे फलदार पौधे भविष्य में अतिरिक्त आमदनी का जरिया बनेंगे।

इस प्रकार अंकित ने खेत के प्रत्येक हिस्से का उपयोग उत्पादन और आय बढ़ाने के लिए किया है। तालाब उनके लिए केवल मछली पालन का साधन नहीं, बल्कि सिंचाई, बागवानी और मुर्गी पालन से जुड़ी गतिविधियों का आधार बन गया है।

8 लाख रुपये की अनुदान सहायता से मिला नवाचार को विस्तार

अंकित को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मत्स्य पालन के लिए शासकीय सहायता मिली। मत्स्य विभाग से उन्हें करीब 8 लाख रुपये की अनुदान राशि प्राप्त हुई। इसके साथ पॉन्ड लाइनर, पॉलीथिन, बोर, मोटर और मछली आहार जैसी आवश्यक सामग्री की सुविधा भी मिली।

शासकीय योजना से मिली सहायता ने उनके लिए मछली पालन को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने का रास्ता आसान किया। अंकित बताते हैं कि विभागीय अधिकारियों से मिली जानकारी और मार्गदर्शन से उन्हें आधुनिक तरीके से मत्स्य पालन करने में काफी मदद मिली।

बहुफसली खेती से बढ़े आमदनी के अवसर

अंकित अब अपने खेत को केवल एक फसल तक सीमित नहीं रखते। मछली पालन और मुर्गी पालन के साथ वे अलग-अलग मौसम में विभिन्न फसलों की खेती और बागवानी कर रहे हैं। तालाब के पानी की उपलब्धता ने उन्हें गर्मी में भी खेती करने का अवसर दिया है।

इस बहुआयामी मॉडल से उन्हें सालभर अपने खेत से उत्पादन प्राप्त करने और आय के अलग-अलग स्रोत विकसित करने का अवसर मिल रहा है। उनके खेत में कृषि के साथ पशु एवं मत्स्य आधारित गतिविधियों का समन्वय ग्रामीण क्षेत्रों में एकीकृत कृषि प्रणाली की उपयोगिता को भी दर्शाता है।

युवाओं के लिए खेती बना रहे हैं आकर्षक विकल्प

अंकित लकड़ा की कहानी उन ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो खेती को केवल पारंपरिक तरीके से करने के बजाय इसे आधुनिक व्यवसाय के रूप में अपनाना चाहते हैं। उनका अनुभव बताता है कि उपलब्ध भूमि और पानी जैसे संसाधनों का बेहतर नियोजन, शासकीय योजनाओं की जानकारी और मेहनत के साथ खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।

अंकित की पहल यह संदेश देती है कि खेती में नवाचार, योजनाओं का सही उपयोग और विभिन्न कृषि गतिविधियों का समन्वय किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में प्रभावी कदम साबित हो सकता है। उनका खेत अब सिर्फ फसल उत्पादन की जगह नहीं, बल्कि ग्रामीण उद्यमिता और आत्मनिर्भरता की एक प्रेरक मिसाल बन गया है।

लोकधुनों और लोकनृत्यों से सजा ‘लोकरंग पर्व’, भरथरी गाथा ने बांधा समां

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तीन दिवसीय आयोजन में छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकपरंपराओं का जीवंत प्रदर्शन, नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ने का संदेश

रायपुर- छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, लोकगायन और लोकनृत्य की विविध परंपराओं को संरक्षित करने और कलाकारों को मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा आयोजित तीन दिवसीय ‘लोकरंग पर्व’ का रविवार को रायपुर स्थित मुक्ताकाशी मंच, महंत घासीदास संग्रहालय परिसर में भव्य शुभारंभ हुआ। 6 से 8 सितंबर तक चलने वाले इस आयोजन में प्रदेश की पारंपरिक लोकविधाओं की विविध रंगत देखने को मिल रही है।

कार्यक्रम के पहले दिन मुक्ताकाशी मंच पर छत्तीसगढ़ी लोकधुनों और पारंपरिक लोकगाथाओं ने ऐसा समां बांधा कि दर्शक लोकसंस्कृति की जीवंत दुनिया से जुड़ते नजर आए। आयोजन की शुरुआत भरथरी गाथा की प्रस्तुति से हुई। इसके बाद कलाकारों ने पंडवानी, देवार गीत और भरथरी गाथा सहित विभिन्न लोकविधाओं की प्रभावशाली प्रस्तुतियां दीं।

लोककलाओं की विविधता ने मोहा मन

लोकरंग पर्व में छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोकविधाओं से जुड़े कलाकारों को अपनी कला प्रस्तुत करने का अवसर दिया जा रहा है। आयोजन में भरथरी गाथा, देवार गीत, करमा नृत्य, सरहुल, लोरिक-चंदा, ददरिया, पंडवानी और पंथी जैसी विविध लोककलाओं की प्रस्तुतियां शामिल हैं।

पहले दिन दुर्गा साहू ने पंडवानी, पूनम तिवारी ने देवार गीत तथा अरुणिमा शर्मा ने भरथरी गाथा की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। कलाकारों की प्रस्तुतियों में छत्तीसगढ़ की लोकजीवन की संवेदना, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की झलक दिखाई दी।

स्थानीय कलाकारों को मंच देना आयोजन का प्रमुख उद्देश्य

कार्यक्रम के संचालक एवं संस्कृति एवं पुरातत्व संचालक डॉ. संजय कन्नौजे ने कहा कि स्थानीय मंचों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोकविधाओं से जुड़े कलाकारों को प्रोत्साहन मिलता है और उन्हें अपनी कला के प्रदर्शन का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन प्रदेश की ‘सुघर’ संस्कृति, लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को जन-जन तक पहुंचाने के साथ युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की लोककलाएं केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि इनमें प्रदेश के इतिहास, सामाजिक जीवन, लोकविश्वास और सामुदायिक परंपराओं की गहरी छाप दिखाई देती है। ऐसे आयोजनों के जरिए इन परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

कला-संस्कृति प्रेमियों की रही मौजूदगी

लोकरंग पर्व के शुभारंभ अवसर पर संस्कृति एवं पुरातत्व संचालक डॉ. संजय कन्नौजे, उपसंचालक उमेश मिश्रा, छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध कवि मीर अली मीर, बॉलीवुड अभिनेत्री श्वेता पड्डा , वरिष्ठ पत्रकार एवं छायाकार दीपेंद्र दीवान, साहित्यकार विजय मिश्रा सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं कला-संस्कृति प्रेमी उपस्थित रहे।

8 सितंबर तक जारी रहेगा लोकसंस्कृति का उत्सव

तीन दिवसीय लोकरंग पर्व 8 सितंबर तक चलेगा। आगामी दिनों में भी छत्तीसगढ़ की विभिन्न लोकविधाओं से जुड़े कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। आयोजन के माध्यम से रायपुरवासियों को प्रदेश की पारंपरिक लोककलाओं, लोकसंगीत, लोकगाथाओं और लोकनृत्यों की विविधता को करीब से देखने और सुनने का अवसर मिल रहा है।

मुक्ताकाशी मंच पर सजी यह सांस्कृतिक संध्या छत्तीसगढ़ की उस लोकपरंपरा की तस्वीर प्रस्तुत कर रही है, जिसमें माटी की महक, लोकजीवन की सहजता और पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत एक साथ दिखाई देती है।

छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता की सुगबुगाहट तेज़: दुर्ग संभाग से शुरू होगा जन-संवाद

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8 और 9 सितंबर को बैठकों का दौर

​रायपुर- छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code - UCC) लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने अपनी तैयारियां तेज कर दी गई है। प्रदेश में UCC का प्रारूप (ड्राफ्ट) तैयार करने के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति अब सीधे ज़मीन पर उतरकर सामाजिक और प्रशासनिक समन्वय साधने में जुट गई है। इसी रणनीति के तहत दुर्ग संभाग के सभी जिलों के प्रमुखों, प्रबुद्ध जनों और जनप्रतिनिधियों के साथ आगामी 8 और 9 सितंबर को एक वृहद समूह चर्चा और परिचयात्मक बैठक आयोजित करने जा रही है।

ज्ञात हो कि समान नागरिक संहिता  के दूरगामी प्रभावों और प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए यह संवाद प्रक्रिया शुरू की जा रही है। दो दिनों तक चलने वाले इस मंथन में दुर्ग संभाग के अलग-अलग जिलों को केंद्रित करते हुए बैठकें होंगी। आगामी ​8 सितंबर को दुर्ग में दोपहर 12 बजे से आयोजित इस बैठक में दुर्ग, बालोद और बेमेतरा जिले के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसी तरह ​9 सितंबर को राजनांदगांव में दोपहर 12 बजे से होने वाली बैठक में राजनांदगांव, कबीरधाम, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले का प्रतिनिधित्व रहेगा।

हर वर्ग की आवाज़ को ड्राफ्ट में मिलेगी जगह

कानून का खाका तैयार करने में समाज के हर तबके की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए समिति ने एक व्यापक रूपरेखा तैयार की है। इन बैठकों में राजनीतिक दलों, सामाजिक व धार्मिक संगठनों, शिक्षाविदों, पद्म श्री सम्मान से अलंकृत हस्तियों, निगम-मंडल व आयोगों के प्रतिनिधियों तथा प्रतिष्ठित व विशिष्ट नागरिकों को खासतौर पर आमंत्रित किया गया है। इस कवायद का मुख्य उद्देश्य एक ऐसा समावेशी ड्राफ्ट तैयार करना है, जो विधिक और सामाजिक दोनों पैमानों पर राज्य के हर नागरिक के हितों का संरक्षण कर सके।

बिहार में बाढ़ का संकट गहराया, 11 जिलों में 19.57 लाख लोग प्रभावित; पटना में गंगा ने तोड़ा पुराना रिकॉर्ड

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पटना- बिहार में लगातार बढ़ रहे नदी के जलस्तर ने बाढ़ की स्थिति को और गंभीर कर दिया है। राज्य के 11 जिलों में करीब 19.57 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर अपने पिछले उच्चतम बाढ़ स्तर (HFL) से ऊपर पहुंच गया है, जिसके बाद निचले और डाउनस्ट्रीम इलाकों में प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है।

रविवार सुबह 6 बजे गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 50.57 मीटर दर्ज किया गया, जो 21 अगस्त 2016 को दर्ज किए गए पिछले उच्चतम बाढ़ स्तर 50.52 मीटर से 5 सेंटीमीटर अधिक है। अधिकारियों के मुताबिक, अगले एक से तीन दिनों में हथीदह और उसके बाद के गेज स्टेशनों पर भी जलस्तर बढ़ने का खतरा है।

11 जिलों के 330 पंचायतों पर असर

बाढ़ का असर पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार और अररिया समेत 11 जिलों की 330 ग्राम पंचायतों में बताया गया है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों, तटबंधों, निचले क्षेत्रों और नदी के जलस्तर पर लगातार निगरानी के निर्देश दिए हैं।

कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर

गंगा के अलावा गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन, बागमती और घाघरा समेत कई नदियां अलग-अलग स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। हथीदह में गंगा का जलस्तर और बढ़ने की आशंका को देखते हुए बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, भागलपुर और कटिहार में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

NDRF-SDRF की टीमें और 1,345 नावें तैनात

बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद और संभावित निकासी के लिए प्रशासन ने बड़े स्तर पर राहत-बचाव संसाधन लगाए हैं। NDRF की 10 और SDRF की 27 टीमें अलग-अलग जिलों में तैनात हैं। इसके अलावा प्रभावित क्षेत्रों में आवाजाही और लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए 1,345 नावें लगाई गई हैं।

110 सामुदायिक रसोई चल रहीं

बाढ़ प्रभावित लोगों तक भोजन पहुंचाने के लिए विभिन्न जिलों में 110 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं। प्रशासन ने लोगों से नदी और बाढ़ के पानी के पास जाने से बचने तथा स्थानीय प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है।

ट्रेनों पर भी असर

बाढ़ और बढ़ते जलस्तर का असर रेल सेवाओं पर भी पड़ा है। पटना-गया रेलखंड पर पानी का स्तर बढ़ने के कारण कुछ ट्रेनों को रद्द और कुछ को डायवर्ट किया गया है। प्रशासन और संबंधित विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना, राहत सामग्री उपलब्ध कराना और तटबंधों व संवेदनशील इलाकों की लगातार निगरानी करना है। आने वाले दिनों में जलस्तर में संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

सत्य निकेतन में बिल्डिंग हादसे के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन तेज, मलबे से 6 लोगों को सुरक्षित निकाला गया

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नई दिल्ली के साउथ-वेस्ट इलाके के सत्य निकेतन में बहुमंजिला इमारत गिरने के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। हादसे के बाद मौके पर पहुंची रेस्क्यू टीमों ने मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए अभियान तेज कर दिया है।

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान अब तक 6 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। बचाव दल मलबे के अन्य हिस्सों की भी बारीकी से जांच कर रहे हैं, ताकि किसी और व्यक्ति के फंसे होने की स्थिति में उसे जल्द से जल्द बाहर निकाला जा सके।

घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल है। पुलिस, दमकल विभाग और अन्य राहत एजेंसियां मौके पर मौजूद हैं और लगातार बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। प्रशासन की ओर से भी हालात पर नजर रखी जा रही है।

फिलहाल प्राथमिकता मलबे में संभावित रूप से फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। हादसे की वजह को लेकर जांच की जा रही है।

IIT मंडी में विवादित पोस्टर से मचा हड़कंप, जाति संबंधी सामग्री सामने आने के बाद जांच शुरू

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मंडी- हिमाचल प्रदेश स्थित IIT मंडी में जाति से संबंधित विवादित पोस्टर सामने आने के बाद संस्थान में हलचल बढ़ गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए संस्थान की ओर से इसकी जांच शुरू कर दी गई है।

बताया जा रहा है कि परिसर में कुछ ऐसे पोस्टर सामने आए हैं, जिनमें जाति से जुड़ी आपत्तिजनक और विवादित सामग्री लिखी गई थी। पोस्टर सामने आने के बाद छात्रों और संस्थान के बीच इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई।

संस्थान प्रशासन ने मामले का संज्ञान लेते हुए पोस्टर लगाने वाले लोगों की पहचान और पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी है। साथ ही यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि पोस्टर कब और किस उद्देश्य से लगाए गए थे।

मामले को लेकर संस्थान प्रशासन की ओर से आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर किए जाने की संभावना है। फिलहाल जांच जारी है और प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है।

जाति से जुड़े इस विवाद ने एक बार फिर शिक्षण संस्थानों में समानता, सम्मान और संवेदनशीलता से जुड़े मुद्दों को चर्चा में ला दिया है।

भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों की बड़ी निकासी, सितंबर के पहले सप्ताह में निकाले ₹7,443 करोड़

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नई दिल्ली- भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की बिकवाली एक बार फिर बढ़ गई है। सितंबर के पहले सप्ताह में फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) ने भारतीय इक्विटी बाजार से करीब ₹7,443 करोड़ की निकासी की है। नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़ों के अनुसार, 4 सितंबर तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों में शुद्ध बिकवाल रहे।

यह निकासी ऐसे समय हुई है जब इससे पहले जुलाई और अगस्त में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में लगातार निवेश किया था। अगस्त में FPIs ने ₹29,600 करोड़ से अधिक और जुलाई में करीब ₹20,200 करोड़ का निवेश किया था।

क्यों कर रहे हैं विदेशी निवेशक बिकवाली?

जानकारों के मुताबिक, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में इजाफा और मजबूत अमेरिकी डॉलर ने विदेशी निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया है। इन वैश्विक परिस्थितियों के चलते उभरते बाजारों में निवेश को लेकर सतर्कता बढ़ी है।

विदेशी निवेशकों की हालिया बिकवाली के बावजूद भारतीय बाजार में अगस्त के दौरान विदेशी निवेश का मजबूत रुझान देखने को मिला था। हालांकि, सितंबर की शुरुआत में एक बार फिर बिकवाली लौटने से बाजार के निवेशकों की चिंता बढ़ी है।

2026 में अब तक बड़ी निकासी

सितंबर की ताजा निकासी के बाद 2026 में भारतीय इक्विटी से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की कुल निकासी करीब ₹2.32 लाख करोड़ तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा पूरे 2025 में हुई करीब ₹1.66 लाख करोड़ की निकासी से भी अधिक है।

बाजार विशेषज्ञों की नजर अब आने वाले दिनों में विदेशी निवेशकों के रुख और वैश्विक बाजारों की चाल पर रहेगी।

दिल्ली के सत्य निकेतन में बड़ा हादसा, PG की इमारत भरभराकर गिरी; एक की मौत, कई के दबे होने की आशंका

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नई दिल्ली- राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को बड़ा हादसा हो गया। यहां एक बहुमंजिला इमारत अचानक भरभराकर ढह गई। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है।

जानकारी के मुताबिक, इमारत का इस्तेमाल पेइंग गेस्ट (PG) आवास के तौर पर किया जा रहा था। हादसे की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग और बचाव दल की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। मलबे को हटाकर अंदर फंसे लोगों की तलाश की जा रही है।

अब तक एक व्यक्ति की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई लोगों को बाहर निकालने की कोशिश जारी है। कुछ घायलों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है। बचाव एजेंसियां मलबे में किसी अन्य व्यक्ति के फंसे होने की संभावना को देखते हुए सावधानी से रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं।

हादसे के कारणों का अभी स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। प्रशासन की ओर से पूरे मामले की जांच की जा रही है। मौके पर राहत-बचाव कार्य जारी है और अधिकारियों की नजर स्थिति पर बनी हुई है।

मिस्र के एयर शो में भारतीय वायुसेना की सारंग टीम दिखाएगी दमदार हवाई करतब

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नई दिल्ली- भारतीय वायुसेना (IAF) की प्रसिद्ध सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम मिस्र पहुंच गई है। टीम 8 से 10 सितंबर 2026 तक एल अलामीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर आयोजित होने वाले दूसरे एल अलामीन इंटरनेशनल एयर शो में हिस्सा लेगी।

सारंग टीम दुनिया की एकमात्र पांच हेलीकॉप्टरों वाली डिस्प्ले टीम है। एयर शो के दौरान टीम अपने सटीक गठन, बेहतरीन तालमेल और शानदार उड़ान कौशल का प्रदर्शन करेगी। भारतीय वायुसेना की यह भागीदारी भारत और मिस्र के बीच बढ़ते रक्षा एवं राजनयिक संबंधों को भी दर्शाती है।

स्वदेशी ध्रुव हेलीकॉप्टर से होगा प्रदर्शन

सारंग टीम स्वदेश में डिजाइन और निर्मित एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH) ध्रुव से अपने हवाई करतब पेश करेगी। टीम क्लोज-प्रॉक्सिमिटी फ्लाइंग, कठिन फॉर्मेशन मूवमेंट और सिंक्रोनाइज्ड एरियल सीक्वेंस के लिए दुनियाभर में जानी जाती है। इसका प्रदर्शन भारतीय वायुसेना के पायलटों के कौशल और अनुशासन के साथ-साथ देश की स्वदेशी एयरोस्पेस क्षमता को भी प्रदर्शित करेगा।

‘डॉल्फिन लीप’ के साथ नया ‘स्पॉट स्टॉल टर्न’

एयर शो में सारंग टीम अपने प्रसिद्ध ‘डॉल्फिन लीप’ हवाई करतब का प्रदर्शन करेगी। इसके अलावा टीम पहली बार ‘स्पॉट स्टॉल टर्न’ नामक नए मैनोवर को भी पेश करेगी। इन प्रदर्शनों के जरिए दर्शकों को ध्रुव हेलीकॉप्टर की गति, चपलता और बहुमुखी क्षमता देखने का अवसर मिलेगा।

एल अलामीन इंटरनेशनल एयर शो में दुनिया की प्रमुख वायु सेनाओं के साथ-साथ एयरोस्पेस, रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ और पेशेवर हिस्सा ले रहे हैं। मिस्र के आसमान में सारंग टीम का प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय टीमों के साथ सहयोग बढ़ाने और भारत-मिस्र रक्षा संबंधों को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


देशभर में 8 नए हाईकोर्ट चीफ जस्टिस की नियुक्ति, केंद्र सरकार ने जारी की अधिसूचना

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नई दिल्ली- केंद्र सरकार ने देश के विभिन्न हाईकोर्ट में 8 नए मुख्य न्यायाधीशों (Chief Justices) की नियुक्ति को लेकर 5 सितंबर को आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी। इन नियुक्तियों के साथ देश की न्यायपालिका के कई प्रमुख हाईकोर्ट में नेतृत्व स्तर पर महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहा है।

केंद्र सरकार की अधिसूचना के बाद संबंधित हाईकोर्ट में नए मुख्य न्यायाधीशों के कार्यभार संभालने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इन नियुक्तियों को न्यायिक प्रशासन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नए मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति के साथ संबंधित हाईकोर्ट में न्यायिक कार्यों के संचालन और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

झीरम घाटी हमला: 13 साल बाद 10 आरोपी दोषी, NIA की विशेष अदालत का बड़ा फैसला; 16 सितंबर को सजा पर फैसला

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जगदलपुर- छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में करीब 13 साल बाद अदालत का बड़ा फैसला आया है। जगदलपुर स्थित राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने 2013 के इस बहुचर्चित मामले में सुनवाई का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। अदालत अब दोषियों को दी जाने वाली सजा के बिंदु पर 16 सितंबर 2026 को फैसला सुनाएगी।

25 मई 2013 को बस्तर के दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर माओवादियों ने घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं समेत 29 लोगों की मौत हुई थी। घटना में बड़ी संख्या में लोग घायल भी हुए थे। यह हमला छत्तीसगढ़ के राजनीतिक इतिहास की सबसे भयावह घटनाओं में शामिल है।

क्या हुआ था झीरम घाटी में?

25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा बस्तर क्षेत्र से गुजर रही थी। यात्रा के दौरान कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का काफिला झीरम घाटी के पास पहुंचा, जहां पहले से घात लगाए माओवादियों ने काफिले को निशाना बनाया।

जांच के अनुसार, हमले में बड़ी संख्या में माओवादी शामिल थे। पहले विस्फोट और उसके बाद लगातार गोलीबारी से काफिले में अफरा-तफरी मच गई। हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, वरिष्ठ आदिवासी नेता महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल और पूर्व विधायक उदय मुदलियार समेत कई प्रमुख लोगों की मौत हुई।

महेंद्र कर्मा को माओवादियों का प्रमुख निशाना माना गया था। वह नक्सल विरोधी अभियान और सलवा जुडूम से जुड़े रहे थे। यही वजह थी कि झीरम घाटी हमले को केवल एक सामान्य माओवादी हमला नहीं, बल्कि राजनीतिक नेतृत्व को निशाना बनाने वाली बड़ी घटना के रूप में भी देखा गया।

13 साल चली कानूनी प्रक्रिया

हमले के बाद मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA को सौंपी गई। NIA ने सितंबर 2014 में पहली चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद सितंबर 2015 में पूरक चार्जशीट भी दाखिल की गई। मामले की सुनवाई लंबे समय तक चली और अदालत में 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए।

रिपोर्टों के अनुसार, मामले में गिरफ्तार किए गए 11 आरोपियों में से एक की सुनवाई के दौरान मौत हो गई। इसके बाद अदालत में 10 आरोपियों के खिलाफ ट्रायल जारी रहा। इस मामले में सुनवाई की प्रक्रिया एक दशक से अधिक समय तक चली और सैकड़ों सुनवाई हुईं।

कौन-कौन दोषी करार दिए गए?

NIA की विशेष अदालत ने जिन 10 आरोपियों को दोषी ठहराया है, उनमें प्रमिला मोडियम, चैतू लेकाम उर्फ मुन्ना, सुमित्रा उर्फ पुनेम मोडियम, मुक्का मंडावी, कवासी कोसा, आयता मरकाम, मड़कम देवा, जोगा मड़कम, बंजामी सन्ना उर्फ चमरा और महादेव नाग के नाम शामिल हैं। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, दोषियों में महिलाएं भी शामिल हैं।

अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए गवाहों, दस्तावेजी और फोरेंसिक साक्ष्यों पर विचार करने के बाद आरोपियों को दोषी माना।

16 सितंबर को तय होगी सजा

अदालत ने फिलहाल दोषसिद्धि का फैसला सुनाया है, लेकिन सजा की अवधि अभी तय नहीं हुई है। विशेष अदालत ने सजा के बिंदु पर फैसला सुनाने के लिए 16 सितंबर 2026 की तारीख तय की है।

इसका मतलब है कि 5 सितंबर को अदालत ने आरोपियों को दोषी माना है, जबकि उन्हें कितनी सजा दी जाएगी, इसका फैसला 16 सितंबर को होगा।

बचाव पक्ष ने हाईकोर्ट जाने की बात कही

दोषसिद्धि के बाद बचाव पक्ष ने फैसले पर असहमति जताई है। बचाव पक्ष के वकील अरविंद चौधरी के अनुसार, अदालत के आदेश की पूरी प्रति मिलने और उसका अध्ययन करने के बाद आगे की कानूनी रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने हाईकोर्ट में फैसले को चुनौती देने की बात कही है।

झीरम घाटी हमला क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

झीरम घाटी हमला केवल एक नक्सली हिंसा की घटना नहीं थी, बल्कि इसने छत्तीसगढ़ की राजनीति को गहरे स्तर पर प्रभावित किया। एक ही हमले में कांग्रेस के कई शीर्ष नेताओं की मौत ने प्रदेश के राजनीतिक नेतृत्व में बड़ा खालीपन पैदा कर दिया था।

हमले के बाद सुरक्षा व्यवस्था, राजनीतिक साजिश और घटना की व्यापक जांच को लेकर भी लंबे समय तक सवाल उठते रहे। कांग्रेस की ओर से समय-समय पर घटना के पीछे कथित राजनीतिक साजिश और सुरक्षा चूक की जांच की मांग की जाती रही है। दूसरी ओर, NIA की जांच और अदालत में चले मुकदमे का केंद्र आरोपियों की कथित आपराधिक भूमिका और हमले में उनकी भागीदारी रहा।

13 साल बाद आया फैसला, अब सजा का इंतजार

झीरम घाटी हमले के 13 साल बाद 10 आरोपियों को दोषी ठहराया जाना इस मामले की कानूनी प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। हालांकि, पीड़ित परिवारों और राजनीतिक दलों की नजर अब 16 सितंबर 2026 पर है, जब अदालत दोषियों की सजा पर फैसला सुनाएगी।

इस फैसले के साथ झीरम घाटी हत्याकांड का एक महत्वपूर्ण कानूनी अध्याय आगे बढ़ा है, लेकिन घटना से जुड़े कई राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी सवाल अब भी सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा बने हुए हैं।

झीरम घाटी कांड: एक नजर में

  • घटना: झीरम घाटी नक्सली हमला

  • तारीख: 25 मई 2013

  • स्थान: दरभा क्षेत्र, बस्तर, छत्तीसगढ़

  • निशाना: कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा का काफिला

  • मृतक: 29 लोग

  • प्रमुख मृतकों में: महेंद्र कर्मा, नंद कुमार पटेल, दिनेश पटेल, विद्याचरण शुक्ल और उदय मुदलियार

  • जांच एजेंसी: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA)

  • दोषी करार: 10 आरोपी

  • फैसला: 5 सितंबर 2026

  • सजा पर फैसला: 16 सितंबर 2026

रेलवे ट्रैक पर बैठे युवक को मालगाड़ी ने कुचला, दोनों पैर कटे

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 कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में शनिवार देर रात दर्दनाक हादसा हो गया। सीएसईबी चौकी क्षेत्र के ढोढ़ीपारा के पास रेलवे ट्रैक पर बैठे 22 वर्षीय युवक को मालगाड़ी ने अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में युवक के दोनों पैर कट गए। गंभीर रूप से घायल युवक रातभर रेलवे ट्रैक के पास पड़ा रहा। रविवार सुबह राहगीरों की नजर उस पर पड़ी, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।


सूचना मिलते ही सीएसईबी चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और घायल युवक को 108 एंबुलेंस की मदद से अस्पताल पहुंचाया। युवक की हालत गंभीर बताई जा रही है।

ढेगूनाला का रहने वाला है युवक

घायल की पहचान 22 वर्षीय रितेश सारथी, निवासी ढेगूनाला के रूप में हुई है। हादसे की सूचना मिलने के बाद उसके परिजन भी मौके पर पहुंचे। पुलिस की मौजूदगी में रितेश को एंबुलेंस से अस्पताल भेजा गया, जहां उसका उपचार जारी है।

रेलवे ट्रैक पर बैठा था रितेश

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार रितेश रेलवे ट्रैक पर बैठा हुआ था। इसी दौरान वहां से मालगाड़ी गुजरी और वह उसकी चपेट में आ गया। हादसा इतना गंभीर था कि उसके दोनों पैर कट गए। पुलिस को युवक के पास से एक मोबाइल फोन भी मिला है।

रातभर ट्रैक के पास पड़ा रहा घायल

हादसे के बाद रितेश गंभीर हालत में रातभर रेलवे ट्रैक के पास पड़ा रहा। देर रात किसी की नजर उस पर नहीं पड़ी। रविवार सुबह स्थानीय लोगों ने उसे घायल अवस्था में देखा और पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पुलिस ने तत्काल मौके पर पहुंचकर एंबुलेंस की मदद से उसे अस्पताल पहुंचाया।

युवक ट्रैक पर क्यों गया, जांच में जुटी पुलिस

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि रितेश देर रात रेलवे ट्रैक पर किस वजह से पहुंचा था। प्रारंभिक जांच में पुलिस अलग-अलग पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की जांच कर रही है। युवक के ट्रैक पर पहुंचने की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं हुई है।

परिजनों से भी पूछताछ

सीएसईबी चौकी प्रभारी राजेश तिवारी के मुताबिक, घायल युवक को उपचार के लिए अस्पताल भेज दिया गया है। पुलिस घटना की परिस्थितियों की जांच कर रही है। मामले से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटाने के लिए युवक के परिजनों से भी पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि हादसे से पहले युवक किन परिस्थितियों में रेलवे ट्रैक तक पहुंचा।

ज्वालामुखी का कहर! 15 किमी ऊंचाई तक पहुंची राख, सैकड़ों उड़ानें प्रभावित

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 जकार्ता। इंडोनेशिया में अनाक क्राकाटोआ ज्वालामुखी में रविवार तड़के जोरदार विस्फोट हुआ। विस्फोट के बाद निकली राख के विशाल गुबार हवा के साथ पश्चिमी इंडोनेशिया के कई हिस्सों तक फैल गए। राख के कारण राजधानी जकार्ता के सुकर्णो-हट्टा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उड़ान संचालन प्रभावित हुआ। कुल 209 उड़ानें प्रभावित होने से करीब 22,800 यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।


अनाक क्राकाटोआ जावा और सुमात्रा द्वीपों के बीच सुंडा जलडमरूमध्य में स्थित है। शनिवार से ही ज्वालामुखी की गतिविधियों में तेजी देखी जा रही थी। रविवार सुबह करीब 3:53 बजे लगभग 30 सेकंड तक विस्फोट हुआ। इसके बाद राख के दो बड़े गुबार बने।

50 हजार फीट तक पहुंचा राख का गुबार

विस्फोट के बाद बने पहले राख के गुबार की ऊंचाई करीब 20 हजार फीट यानी 6 किलोमीटर तक पहुंची। यह उत्तर-पूर्व दिशा में बढ़ा, जिससे जकार्ता, बैंटन और पश्चिमी जावा के इलाके प्रभावित हुए।

वहीं, दूसरा राख का गुबार करीब 50 हजार फीट यानी 15 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंच गया। यह पश्चिम और उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ा। इसके चलते बैंटन, लामपुंग, बेंगकुलु, दक्षिणी सुंडा जलडमरूमध्य और सुमात्रा के पश्चिम में हिंद महासागर के कुछ हिस्सों में राख फैलने की जानकारी सामने आई।

एयरपोर्ट पर कई उड़ानें रद्द और री-शेड्यूल

राख के कारण सुकर्णो-हट्टा एयरपोर्ट पर उड़ानें पहले सुबह 5:30 बजे तक रोकने की घोषणा की गई थी। बाद में स्थिति को देखते हुए उड़ान संचालन पर रोक सुबह 9:30 बजे तक बढ़ा दी गई। एयरपोर्ट पर रात के समय खड़े करीब 170 विमान वहीं रुके रहे।

कई यात्रियों ने टिकट का पैसा वापस मांगा और चेक-इन किया हुआ सामान भी वापस लिया। सिंगापुर जाने वाली अंतरराष्ट्रीय उड़ानें सबसे ज्यादा प्रभावित रहीं। इसके अलावा हांगकांग, सिडनी, एम्स्टर्डम, सियोल, दोहा और कुआलालंपुर की उड़ानों को रद्द, विलंबित या री-शेड्यूल किया गया। लामपुंग, बाली, सुराबाया और मकासर की कुछ घरेलू उड़ानें भी प्रभावित हुईं।

लोगों और पर्यटकों को सतर्क रहने की सलाह

अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल किसी की मौत या घायल होने की सूचना नहीं है। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने का आदेश भी जारी नहीं किया गया है। हालांकि, प्रशासन ने लोगों और पर्यटकों को सक्रिय क्रेटर से कम से कम 3 किलोमीटर दूर रहने की सलाह दी है।

राख प्रभावित इलाकों में लोगों को मास्क पहनने, आंखों की सुरक्षा करने और अनावश्यक रूप से घर से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी गई है। पानी के स्रोतों को ढककर रखने और वाहन चलाते समय सावधानी बरतने को कहा गया है। राख के कारण कुछ लोगों को आंखों में जलन की शिकायत भी हुई है। कई स्कूलों ने गतिविधियां रद्द कर दीं, जबकि मछुआरों ने समुद्र में जाना रोक दिया।

2018 की सुनामी की यादें ताजा

अधिकारियों ने फिलहाल तत्काल सुनामी का खतरा नहीं बताया है। हालांकि, अनाक क्राकाटोआ का इतिहास बेहद गंभीर रहा है। 2018 में इसी ज्वालामुखी के विस्फोट के बाद आई सुनामी में कम से कम 430 लोगों की मौत हुई थी।

फिलहाल इंडोनेशिया की ज्वालामुखी, आपदा प्रबंधन और मौसम एजेंसियां ज्वालामुखी की गतिविधियों तथा राख के फैलाव पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

कांग्रेस में बड़ा संगठनात्मक फेरबदल: भूपेश बघेल को असम की कमान, सुखदेव भगत बने छत्तीसगढ़ प्रभारी

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रायपुर- कांग्रेस ने अपने संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए कई राज्यों के प्रभारी बदल दिए हैं। पार्टी के इस महत्वपूर्ण बदलाव में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेश बघेल को असम का AICC महासचिव प्रभारी बनाया गया है। वहीं, सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़ कांग्रेस का नया प्रभारी नियुक्त किया गया है।

कांग्रेस के इस फैसले को आगामी चुनावों और राज्यों में संगठन को मजबूत करने की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी ने पंजाब, गुजरात, असम, छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में नेतृत्व की जिम्मेदारियों में बदलाव किया है।

भूपेश बघेल को मिली असम की जिम्मेदारी

भूपेश बघेल अब असम में कांग्रेस संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी संभालेंगे। इससे पहले वे पंजाब कांग्रेस के प्रभारी की भूमिका में थे। कांग्रेस ने पंजाब में उनकी जगह सचिन पायलट को नया प्रभारी बनाया है।

असम में बघेल की नियुक्ति को पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके पास संगठन और चुनावी राजनीति का लंबा अनुभव है। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार के नेतृत्व के साथ-साथ प्रदेश कांग्रेस संगठन में भी वे महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं।

सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़ की कमान

कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ के लिए सुखदेव भगत को नया प्रभारी नियुक्त किया है। वे अब प्रदेश में पार्टी संगठन और केंद्रीय नेतृत्व के बीच समन्वय की जिम्मेदारी संभालेंगे।

सुखदेव भगत की नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब छत्तीसगढ़ में कांग्रेस विपक्ष की भूमिका में है। ऐसे में नए प्रभारी के सामने संगठन को मजबूत करना, कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए पार्टी को तैयार करना बड़ी जिम्मेदारी होगी।

सचिन पायलट को पंजाब, सुरजेवाला को गुजरात का प्रभार

कांग्रेस के संगठनात्मक बदलाव में सचिन पायलट को पंजाब का प्रभारी बनाया गया है। पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह नियुक्ति काफी अहम मानी जा रही है। वहीं रणदीप सिंह सुरजेवाला को गुजरात का प्रभारी बनाया गया है। वे कर्नाटक की जिम्मेदारी भी संभालते रहेंगे।

पार्टी ने महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश समेत कुछ अन्य राज्यों में भी प्रभारी स्तर पर बदलाव किए हैं।

छत्तीसगढ़ कांग्रेस के लिए क्यों अहम है बदलाव?

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के नए प्रभारी के सामने संगठन को जमीनी स्तर पर और मजबूत करने की चुनौती होगी। प्रदेश में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच बेहतर तालमेल, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना और आगामी चुनावों के लिए मजबूत रणनीति तैयार करना नए प्रभारी की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल हो सकता है।

कांग्रेस का यह व्यापक फेरबदल ऐसे समय हुआ है, जब पार्टी कई राज्यों में अपने संगठन को चुनावी लिहाज से अधिक सक्रिय और मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। ऐसे में छत्तीसगढ़ में सुखदेव भगत और असम में भूपेश बघेल की नई जिम्मेदारियां पार्टी की आगामी रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

कुल मिलाकर, कांग्रेस का यह संगठनात्मक फेरबदल पार्टी की आगामी चुनावी तैयारियों और राज्यों में संगठन को नई दिशा देने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।

राष्ट्रपति ने सारंगढ़- बिलाईगढ़ की शिक्षिका सुनीता यादव को प्रदान किया राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान

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 रायपुर : शिक्षक दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ से वर्ष छत्तीसगढ़ से राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान के लिए चयनित होने वाली सुनीता यादव एकमात्र शिक्षिका हैं l सारंगढ़- बिलाईगढ़ जिले के लिए आज गौरव का ऐतिहासिक क्षण रहा। जिले के बरमकेला विकासखंड के शासकीय प्राथमिक विद्यालय खिचरी की शिक्षिका सुनीता यादव को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान समारोह में भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान से सम्मानित किया।


देशभर के चयनित स्कूली शिक्षकों को यह सम्मान शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान, नवाचार और विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव के लिए प्रदान किया गया। विज्ञान भवन में आयोजित गरिमामय समारोह में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने सुनीता यादव को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। समारोह में राष्ट्रीय स्तर पर चयनित शिक्षकों के अनुकरणीय कार्यों पर आधारित लघु वृत्तचित्र भी प्रदर्शित किए गए।


खेल-खेल में शिक्षा तथा नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियों को अपनाया

सुनीता यादव ने सीमित संसाधनों वाले ग्रामीण एवं वनांचल क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय में शिक्षा को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि साहित्य, तकनीक, रचनात्मकता और अनुभव आधारित गतिविधियों को शिक्षण का माध्यम बनाया। कक्षा के अंतिम पायदान पर रहने वाले बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए उन्होंने निरंतर प्रयास किए और बच्चों में सीखने की रुचि विकसित करने के लिए खेल-खेल में शिक्षा तथा नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियों को अपनाया।

शिक्षा के साथ रोजगारमूलक जानकारी और डिजिटल साक्षरता को जोड़ने की पहल

शिक्षिका सुनीता यादव बच्चों को कठिन विषयों को सहज ढंग से समझाने के लिए स्वयं और विद्यार्थियों के अभिनय वाली लघु फिल्में तैयार कर उनका उपयोग शिक्षण में करती हैं। इसके साथ ही वे दीक्षा एप, स्टोरीवीवर, ऑडियो बुक, पॉडकास्ट, ब्लॉगिंग और स्मार्ट क्लास जैसी तकनीकी माध्यमों का उपयोग कर बच्चों के सीखने के अनुभव को अधिक रोचक और प्रभावी बनाती हैं। उनके प्रयासों में शिक्षा के साथ रोजगारमूलक जानकारी और डिजिटल साक्षरता को जोड़ने की पहल भी शामिल है।

आदिवासी बच्चों के लिए निशुल्क समर कैंप चलाकर अध्यापन की

सुनीता की संवेदनशीलता केवल कक्षा तक सीमित नहीं है। बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए वे अपने व्यय से विद्यार्थियों को नियमित दूध उपलब्ध कराती हैं तथा अधिक से अधिक न्योता भोजन कराने के लिए समुदाय को प्रेरित करती हैं। शिक्षा से वंचित और कमजोर वर्ग के बच्चों तक पहुंच बनाने के लिए उन्होंने बिलासपुर जिले के शासकीय प्राथमिक विद्यालय तिलकडीह में आदिवासी बच्चों के लिए निशुल्क समर कैंप चलाकर अध्यापन भी किया।

विद्यार्थियों में सामाजिक एवं पर्यावरणीय संवेदनशीलता विकसित करने का प्रयास

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के परिप्रेक्ष्य में सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के प्राथमिक विद्यालयों में आए बदलाव और उसके प्रभावों पर शोध पत्र तैयार करने वाली वे जिले की पहली महिला शिक्षिका हैं। शिक्षा के साथ सामाजिक सरोकारों में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रही है। प्रकृति संरक्षण के लिए सीड बॉल तैयार करने और देश की सुरक्षा में योगदान देने वाले सैनिकों के लिए राखी निर्माण जैसे कार्यों के माध्यम से उन्होंने विद्यार्थियों में सामाजिक एवं पर्यावरणीय संवेदनशीलता विकसित करने का प्रयास किया है।

प्राथमिक शिक्षा में उनके नवाचारी योगदान को मिली राष्ट्रीय पहचान

सुनीता की शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान को पहले भी विभिन्न स्तरों पर सम्मान मिला है। वर्ष 2024 में उन्हें राज्य शिक्षक सम्मान से सम्मानित किया गया, जबकि वर्ष 2025 में साहित्य के क्षेत्र में पंडित मुकुटधर पांडे स्मृति अलंकरण से नवाजा गया। राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान के लिए उनका चयन इन निरंतर प्रयासों और प्राथमिक शिक्षा में उनके नवाचारी योगदान को मिली राष्ट्रीय पहचान है। उपलब्ध विवरणों के अनुसार उनके शिक्षण में साहित्य, तकनीक और संवेदनशीलता का विशिष्ट समन्वय दिखाई देता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिला संवाद का अवसर

राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान समारोह से एक दिन पहले देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान के लिए चयनित शिक्षकों को अपने आवास पर आमंत्रित कर बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर शिक्षिका सुनीता यादव ने प्रधानमंत्री के साथ अपने शिक्षण कार्य, नवाचारों और ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी साझा की। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने उनके नियमित अध्यापन कार्य के साथ शिक्षा में नवाचार, तकनीक और रचनात्मक माध्यमों के उपयोग की सराहना की। ग्रामीण क्षेत्र के छोटे से विद्यालय में बच्चों के लिए लघु फिल्मों के माध्यम से शिक्षण, ऑडियो बुक और पॉडकास्ट जैसे माध्यमों का उपयोग तथा स्मार्ट क्लास के संचालन जैसे प्रयासों ने उनके विद्यालय को नवाचार आधारित शिक्षा का उदाहरण बनाया है।


सारंगढ़-बिलाईगढ़ के लिए गौरव का क्षण

शिक्षिका सुनीता यादव को राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान मिलने पर जिले के प्रभारी मंत्री  टंक राम वर्मा , कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू और पुलिस अधीक्षक  सुनील शर्मा ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि जिले की शिक्षिका का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होना पूरे सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के लिए गौरव की बात है। उनके नवाचारपूर्ण कार्य जिले के अन्य शिक्षकों को भी नई सोच के साथ शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करेंगे।

जिले के प्रभारी मंत्री ने भी सुनीता यादव को राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान प्राप्त करने पर बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और वनांचल क्षेत्र में रहकर बच्चों की शिक्षा को नवाचार, तकनीक और संवेदनशीलता से जोड़ने का उनका प्रयास सराहनीय है। यह उपलब्धि न केवल सुनीता यादव बल्कि पूरे सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले और छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है।

मेहनत, नवाचार और संवेदना की यात्रा

सांकरा, जिला महासमुंद में शिक्षक परिवार में जन्मीं सुनीता यादव छात्र जीवन से ही मेधावी रही हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा सांकरा में हुई। उन्होंने कला महाविद्यालय पिथौरा से स्नातक तथा पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की। पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय बिलासपुर से बी.एड. की उपाधि प्राप्त करने के बाद उन्होंने शिक्षण को अपने कर्मक्षेत्र के रूप में चुना।

बरमकेला के व्यवसायी  नंदकुमार यादव से विवाह के बाद भी उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सक्रियता और रचनात्मकता को निरंतर आगे बढ़ाया। उनकी पुत्री सृजना यादव गुरु घासीदास विश्वविद्यालय में पत्रकारिता एवं जनसंचार की छात्रा हैं।
आज राष्ट्रपति के हाथों मिला राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान सुनीता यादव की उस निरंतर यात्रा की राष्ट्रीय पहचान है, जिसमें एक छोटे से ग्रामीण विद्यालय की कक्षा को उन्होंने नवाचार, साहित्य, तकनीक और संवेदनशीलता से जोड़कर बच्चों के लिए सीखने का जीवंत मंच बनाया।

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