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अफवाहों पर ध्यान न दें, जिले में पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता : कलेक्टर

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 धमतरी : जिले में पेट्रोल पंपों पर इन दिनों बढ़ती भीड़ एवं कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा ईंधन एवं घरेलू गैस की कमी संबंधी अफवाह फैलाए जाने की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी अबिनाश मिश्रा ने जिले के सभी अनुविभागीय दण्डाधिकारियों (एसडीएम) को अपने-अपने क्षेत्र के पेट्रोल पंपों पर आवश्यकतानुसार कार्यपालिक दण्डाधिकारी एवं फूड इंस्पेक्टर की ड्यूटी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।


 कलेक्टर  मिश्रा ने स्पष्ट किया है कि जिले में पेट्रोल एवं डीजल का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है तथा आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह सुचारू रूप से संचालित हो रही है। इसी प्रकार एलपीजी (घरेलू गैस) की भी जिले में किसी प्रकार की कमी अथवा शॉर्टेज नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों द्वारा फैलायी जा रही भ्रामक सूचनाओं के कारण अनावश्यक रूप से पेट्रोल पंपों पर भीड़ एकत्र हो रही है, जिससे आम नागरिकों को असुविधा हो रही है।

 उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि पेट्रोल पंपों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए तथा किसी भी प्रकार की कालाबाजारी, जमाखोरी अथवा अव्यवस्था पाए जाने पर तत्काल नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही पुलिस एवं प्रशासनिक अमले को भी स्थिति पर सतत नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आमजन को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

 कलेक्टर  मिश्रा ने जिलेवासियों से अपील की है कि वे किसी भी अपुष्ट सूचना अथवा अफवाह पर ध्यान न दें और आवश्यकता के अनुरूप ही ईंधन एवं गैस क्रय करें। प्रशासन पूरी तरह सतर्क है तथा जिले में आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता बनाए रखने के लिए हरसंभव कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अफवाह फैलाने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अवैध रेत उत्खनन पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, 5 हाईवा वाहन जब्त

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 रायपुर : राज्य में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन के विरुद्ध लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में जांजगीर-चांपा जिले में राजस्व एवं खनिज विभाग की संयुक्त टीम ने केवा, भादा और नवापारा घाट क्षेत्रों में विशेष जांच अभियान चलाकर अवैध गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई की।


   संयुक्त जांच के दौरान अवैध रूप से रेत परिवहन करते पाए जाने पर 5 हाईवा वाहनों को जब्त किया गया। सभी जब्त वाहनों को अग्रिम कार्रवाई हेतु पुलिस लाइन जांजगीर में सुरक्षित रखा गया है।

    कार्रवाई के दौरान शांति व्यवस्था भंग करने पर वाहन चालक जोहन कुमार और संतोष मिरी के विरुद्ध भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की संबंधित धाराओं के तहत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई भी की गई।

    जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध आगे भी इसी प्रकार निरंतर और सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

महासमुंद में बिजली गिरने से बड़ा हादसा, बेटे की मौत, पिता जिंदगी की जंग लड़ रहा

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 महासमुंद। तुमगांव थाना क्षेत्र में आज शुक्रवार को आकाशीय बिजली गिरने से बड़ा हादसा हो गया। घटना की चपेट में आने से बेटे की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि पिता गंभीर रूप से झुलस गए। घायल पिता का अस्पताल में इलाज जारी है। घटना के बाद इलाके में शोक का माहौल है।


बताया जा रहा है कि मौसम खराब होने के दौरान दोनों खेत की ओर गए हुए थे, तभी अचानक तेज गरज-चमक के बीच आकाशीय बिजली गिर गई। सूचना मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और घायल को अस्पताल पहुंचाया गया।

इधर, छत्तीसगढ़ में मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। रायपुर में शुक्रवार सुबह गरज-चमक के साथ तेज बारिश हुई। पिछले 24 घंटे के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई है।

मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में गरज-चमक, तेज हवाएं और हल्की बारिश की संभावना जताई है। वहीं 17 मई से मध्य छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में हीटवेव चलने की चेतावनी भी जारी की गई है। विभाग के अनुसार अगले पांच दिनों में अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है।

प्रदेश में सबसे अधिक अधिकतम तापमान राजनांदगांव में 44 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान पेन्ड्रा रोड में 22.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

छत्तीसगढ़ में हाथियों का आतंक जारी, 53 हाथी चार झुंडों में घूम रहे, किसानों की फसलें तबाह

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। अलग-अलग क्षेत्रों में 53 हाथी चार झुंडों में विचरण कर रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। ताजा मामला कुदमुरा रेंज का है, जहां धरमजयगढ़ वन मंडल से पहुंचे दो दंतैल हाथियों ने गीतकुंवारी गांव में किसानों की खड़ी धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया।


जानकारी के मुताबिक, कटघोरा वन मंडल के जटगा रेंज स्थित मेउड़ पहाड़ पर 48 हाथियों का बड़ा दल डेरा जमाए हुए है। बताया जा रहा है कि हर साल गर्मी के मौसम में हाथियों का झुंड करीब ढाई से तीन महीने तक इस इलाके में रहता है। इस बार मार्च महीने से हाथियों का दल कटोरीमोती के पास कुकरीचकहर से मेउड़ पहाड़ क्षेत्र में सक्रिय है।

करीब 5 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फैले मेउड़ पहाड़ में हाथियों के लिए भोजन और पानी की पर्याप्त उपलब्धता है। हालांकि भोजन की तलाश में हाथी अक्सर पहाड़ से नीचे उतरकर गांवों की ओर रुख कर लेते हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में खतरा बढ़ जाता है।

गुरुवार रात धरमजयगढ़ वन मंडल से आए दो दंतैल हाथी गीतकुंवारी गांव में घुस गए। हाथियों ने कई एकड़ में लगी धान की फसल रौंद दी। ग्रामीणों ने शोर मचाकर और मशाल जलाकर हाथियों को भगाने की कोशिश की, लेकिन तब तक फसलों को भारी नुकसान पहुंच चुका था।

ग्रामीणों का कहना है कि फसल कटाई के लिए तैयार थी, लेकिन हाथियों के हमले से पूरी मेहनत बर्बाद हो गई। लगातार हाथियों की आवाजाही से कुदमुरा, जटगा और पसान क्षेत्र के लोग भय के साये में जी रहे हैं। रात होते ही ग्रामीण घरों में दुबकने को मजबूर हैं और खेतों की रखवाली करना मुश्किल हो गया है।

वन विभाग की टीम गांवों में मुनादी कर लोगों को सतर्क कर रही है। साथ ही हाथी मित्र दल भी लगातार निगरानी में जुटा हुआ है। विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि हाथी दिखाई देने पर तुरंत सूचना दें, अकेले हाथियों के पास न जाएं और उन्हें छेड़ने की कोशिश न करें।
वन विभाग के अनुसार फसल नुकसान का सर्वे कर मुआवजा प्रकरण तैयार किया जा रहा है। वहीं मेउड़ पहाड़ पर मौजूद 48 हाथियों के दल की ड्रोन कैमरे से निगरानी की जा रही है, ताकि उन्हें रिहायशी इलाकों में आने से रोका जा सके।
जिले में लगातार बढ़ रही हाथी-मानव संघर्ष की घटनाओं ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है।

21 जून को दोबारा होगी NEET-UG परीक्षा, NTA ने जारी की नई तारीख

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 नई दिल्ली। मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 को लेकर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने बड़ी घोषणा की है। एनटीए ने शुक्रवार को बताया कि NEET-UG 2026 की पुनः परीक्षा अब रविवार, 21 जून 2026 को आयोजित की जाएगी।


एनटीए ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट जारी करते हुए कहा कि भारत सरकार की मंजूरी के बाद दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया है। एजेंसी ने परीक्षार्थियों और अभिभावकों से अपील की है कि वे केवल NTA के आधिकारिक माध्यमों पर जारी जानकारी पर ही भरोसा करें।

शिक्षा मंत्री के आवास पर हुई उच्चस्तरीय बैठक

आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, NEET-UG की दोबारा परीक्षा की तैयारियों की समीक्षा को लेकर गुरुवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के आवास पर उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में परीक्षा आयोजन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
इस बैठक में सचिव (उच्च शिक्षा) विनीत जोशी, सचिव (स्कूल शिक्षा) संजय कुमार, NTA के महानिदेशक अभिषेक सिंह, CBSE चेयरपर्सन राहुल सिंह, केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) और नवोदय विद्यालय समिति (NVS) के आयुक्त समेत कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

पेपर लीक के बाद रद्द हुई थी परीक्षा

गौरतलब है कि NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई को आयोजित की गई थी, जिसमें करीब 22.79 लाख अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था। हालांकि पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी थी। इसके बाद NTA ने दोबारा परीक्षा की तारीख जल्द घोषित करने की बात कही थी।
एनटीए ने स्पष्ट किया है कि दोबारा परीक्षा के लिए उम्मीदवारों को नए सिरे से रजिस्ट्रेशन कराने की आवश्यकता नहीं होगी और न ही कोई अतिरिक्त शुल्क लिया जाएगा।

पेपर लीक मामले में CBI की जांच जारी

NEET-UG पेपर लीक मामले की जांच फिलहाल सीबीआई कर रही है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने गुरुवार को इस मामले में गिरफ्तार किए गए पांच आरोपियों को हिरासत में लिया, वहीं दो अन्य संदिग्धों को भी पकड़ा गया है।
अधिकारियों के अनुसार, जांच एजेंसी NTA के भीतर संभावित मिलीभगत की भी जांच कर रही है। सीबीआई का कहना है कि इस मामले में सरकारी कर्मचारियों की संलिप्तता से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
NTA देशभर के MBBS, BDS और अन्य अंडरग्रेजुएट मेडिकल कोर्स में प्रवेश के लिए NEET-UG परीक्षा आयोजित करती है। यह परीक्षा इस वर्ष देश के 551 शहरों और विदेश के 14 शहरों में पेन-एंड-पेपर मोड में आयोजित की गई थी।

छत्तीसगढ़ में पेट्रोल-डीजल खत्म होने की अफवाह से बढ़ी हलचल, सरकार ने कहा- पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में पेट्रोल और डीजल की कमी को लेकर फैली अफवाहों के बाद कई जिलों में पेट्रोल पंपों पर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। हालांकि राज्य सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि प्रदेश में ईंधन का पर्याप्त भंडार मौजूद है और घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है।


खाद्य सचिव रीना बाबासाहेब कंगाले ने बताया कि प्रदेश में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। ऑयल कंपनियों और राज्य शासन के समन्वय से सभी पेट्रोल पंपों तक लगातार सप्लाई पहुंचाई जा रही है। उन्होंने लोगों से अपील की कि अफवाहों पर ध्यान न दें और पैनिक में आकर जरूरत से ज्यादा ईंधन की खरीदारी न करें।

खाद्य विभाग के अनुसार वर्तमान में प्रदेश में 45,474 किलोलीटर पेट्रोल और 84,654 किलोलीटर डीजल का स्टॉक उपलब्ध है। वहीं प्रतिदिन पेट्रोल की खपत करीब 3,635 किलोलीटर और डीजल की आवश्यकता लगभग 5,873 किलोलीटर है। विभाग का कहना है कि ऑयल डिपो तक नियमित रूप से आपूर्ति पहुंच रही है तथा वितरण व्यवस्था की लगातार निगरानी की जा रही है।

प्रदेश में कुल 2516 पेट्रोल-डीजल पंप संचालित हैं। इनमें रायपुर के 326 पंपों में से 35 और बिलासपुर के 156 पंपों में से 13 पंप फिलहाल अस्थायी रूप से ड्राई आउट बताए गए हैं। खाद्य विभाग के मुताबिक इन पंपों तक तेजी से स्टॉक पहुंचाने का काम जारी है।

पिछले दो दिनों में कुछ पेट्रोल पंपों पर ईंधन खत्म होने की खबरों के बाद लोगों में अचानक घबराहट बढ़ गई थी। बड़ी संख्या में लोगों द्वारा जरूरत से अधिक पेट्रोल-डीजल खरीदे जाने के कारण कुछ स्थानों पर कृत्रिम कमी जैसी स्थिति बन गई।
खाद्य सचिव ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में किसी प्रकार की वास्तविक कमी नहीं है। यह स्थिति केवल अचानक बढ़ी मांग के कारण बनी है। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि किसी भी अफवाह या भ्रम में आकर ईंधन का अनावश्यक भंडारण न करें। शासन और ऑयल कंपनियां मिलकर सभी पेट्रोल पंपों पर नियमित सप्लाई सुनिश्चित कर रही हैं।

महंगाई की मार: पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े, कई शहरों में ₹3.29 तक महंगा हुआ ईंधन

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 नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल का असर अब देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी दिखाई देने लगा है। सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दामों में ₹3.29 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी कर दी है। इसके साथ ही कई महानगरों में सीएनजी की कीमतों में भी इजाफा किया गया है।


राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत ₹94.77 से बढ़कर ₹97.77 प्रति लीटर हो गई है, जबकि डीजल ₹87.67 से बढ़कर ₹90.67 प्रति लीटर पहुंच गया है। वहीं, सीएनजी की कीमत में ₹2 प्रति किलो की वृद्धि के बाद यह ₹79.09 प्रति किलो हो गई है।

कोलकाता में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी

देश के प्रमुख महानगरों में कोलकाता में पेट्रोल की कीमतों में सबसे ज्यादा ₹3.29 प्रति लीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके बाद वहां पेट्रोल ₹108.74 प्रति लीटर पहुंच गया है। मुंबई में पेट्रोल ₹3.14 महंगा होकर ₹106.68 प्रति लीटर हो गया, जबकि चेन्नई में ₹2.83 की बढ़ोतरी के बाद कीमत ₹103.67 प्रति लीटर हो गई है।

डीजल के दाम में भी उछाल

डीजल की कीमतों में भी ₹3 से अधिक की वृद्धि की गई है। कोलकाता में डीजल ₹3.11 बढ़कर ₹95.13 प्रति लीटर पहुंच गया है। मुंबई में डीजल ₹93.14 प्रति लीटर और चेन्नई में ₹95.25 प्रति लीटर हो गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पेट्रोल-डीजल महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा असर सब्जियों, राशन, दूध और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर पड़ेगा। इससे आने वाले दिनों में महंगाई और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

तेल कंपनियों पर बढ़ा दबाव

बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होने से सरकारी तेल कंपनियों का मार्जिन प्रभावित हुआ है। कंपनियों को हर महीने करीब ₹30 हजार करोड़ का नुकसान उठाना पड़ रहा था, जिसके बाद कीमतों में बढ़ोतरी का फैसला लिया गया।

अप्रैल में बढ़ी थोक महंगाई

हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल महीने में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में तेजी के चलते थोक महंगाई दर कई वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंच गई। पेट्रोल की महंगाई दर 32.4 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो पिछले महीने 2.50 प्रतिशत थी। वहीं, हाई-स्पीड डीजल की महंगाई दर 3.62 प्रतिशत से बढ़कर 25.19 प्रतिशत हो गई।

कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी जारी है। ईरान-अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के बाद कच्चा तेल करीब 50 प्रतिशत तक महंगा हो चुका है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, जिसमें खाड़ी देशों की बड़ी हिस्सेदारी है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट में बाधा के कारण वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हुई है। ऐसे में यदि हालात जल्द सामान्य नहीं हुए, तो आने वाले समय में ईंधन की कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

 
 
 

जहां कभी एम्बुलेंस पहुंचना भी सपना था, वहां अब डॉक्टर दे रहे दस्तक : बस्तर के जंगलों तक पहुंची स्वास्थ्य क्रांति

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दिल्ली में बस्तर विकास मॉडल पर मंथन : केंद्रीय गृहमंत्रीअमित शाह से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अहम मुलाकात

पुराने सुरक्षा शिविर अब बन रहे जन सुविधा केंद्र

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात कर बस्तर में तेजी से बदल रहे हालात और विकास कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। इस दौरान उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा उपस्थित थे।

बैठक में विशेष रूप से बस्तर में चल रहे ‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान’ पर चर्चा हुई।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को बताया कि जिन इलाकों में कभी एम्बुलेंस पहुंचना भी मुश्किल माना जाता था, वहां अब डॉक्टर, दवाइयां और स्वास्थ्य टीमें नियमित रूप से पहुंच रही हैं। दूरस्थ गांवों में पैदल जाकर लोगों की जांच की जा रही है और गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान कर निःशुल्क इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। मात्र एक महीने में 21.86 लाख से ज्यादा लोगों की स्वास्थ्य जांच हो चुकी है और उनके डिजिटल स्वास्थ्य प्रोफाइल तैयार कर लिए गए हैं। हजारों मरीजों को समय पर उपचार और उच्च अस्पतालों में रेफर किया गया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर में अब पुराने सुरक्षा शिविर केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गए हैं। इन्हें धीरे-धीरे “जन सुविधा केंद्र” के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां गांव के लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जरूरी सुविधाएं एक ही स्थान पर मिल रही हैं। इन केंद्रों के जरिए दूरस्थ  क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पहली बार कई बुनियादी सेवाएं आसानी से उपलब्ध हो रही हैं। ग्रामीण अब इलाज, बैंक खाते, दस्तावेज और सरकारी योजनाओं की जानकारी के लिए दूर-दूर तक भटकने को मजबूर नहीं हैं।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान की शुरुआत 13 अप्रैल 2026 से सुकमा से हुई है। इस अभियान में 36 लाख लोगों को लक्षित किया गया है। इसके अलावा बस्तर मुन्ने ( अग्रणी बस्तर) अभियान के जरिए 31 महत्वपूर्ण योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का काम तेजी से चल रहा है। जगदलपुर में नया सुपर स्पेशलिटी अस्पताल शुरू हो गया है, जहां अब बस्तर के लोगों को महंगे इलाज के लिए रायपुर या बिलासपुर नहीं जाना पड़ेगा। डायल-112 की नेक्स्ट जेन सेवा का विस्तार और पुराने सुरक्षा शिविरों को “जन सुविधा केंद्र” में बदलने की योजना भी बस्तर के स्थायी विकास की दिशा में अहम कदम हैं। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि जो इलाके कभी नक्सल प्रभाव के कारण मुख्यधारा से कटे हुए थे, वहां आज सरकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंच रहा है। हाल ही में सुकमा के एक अत्यंत दुर्गम गांव से गंभीर मरीज को सैकड़ों किलोमीटर दूर अस्पताल पहुंचाकर उपचार दिलाना इस बदलाव का बड़ा उदाहरण बना है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को बस्तर के लिए तैयार विकास रोडमैप की जानकारी दी। इसमें सड़क, शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास और निवेश को बढ़ावा देने पर विशेष फोकस रखा गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन से बस्तर में तेजी से सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बस्तर में हो रहे विकास कार्यों और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की सराहना की। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर यह सुनिश्चित कर रही है कि विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

उल्लेखनीय है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का 18 और 19 मई को बस्तर प्रवास  संभावित है।

फूल और मिठाई देकर नर्सों का सम्मान

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महासमुंद- नर्स डे के अवसर पर मां डिजिटल एक्स-रे एवं पैथोलॉजी सर्विसेस व माँ मेडिकल स्टोर के संचालक ललित कुमार चक्रधारी ने जिला अस्पताल तथा बागबाहरा सीएचसी के सभी अलग-अलग वार्ड सर्जिकल वार्ड, मेडिसिन वार्ड, डेलीवरी वार्ड, चाइल्ड वार्ड, इमर्जेंसी वार्डों में जाकर वहां उपस्थित सभी नर्सों का सम्मान गुलाब और मिठाई देकर किया। ललित कुमार चक्रधारी ने कहा कि अस्पताल में जो स्टाफ नर्स रहते हैं उनका मरीजों की देखभाल में बड़ा योगदान रहता है। डॉक्टर के इलाज के  बाद नर्स का सबसे बड़ा दायित्व रहता है। ऑपरेशन थिएटर से लेकर मरीज के अस्पताल से डिस्चार्ज तक वह मरीज का समय-समय पर ड्रेसिंग दवाइयां एवं उनके भोजन व्यवस्था को ध्यान में रखकर बेहतर सेवा प्रदान करती हैं। नर्स की सेवा अतुलनीय है।



भूपेंद्र यादव ने गिर में ‘लायन’ स्पीशीज स्पॉटलाइट इवेंट का उद्घाटन किया; भारत करेगा IBCA समिट 2026 की मेजबानी नई दिल्ली में

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केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने आज गुजरात के सासन गिर में ‘लायन’ स्पीशीज स्पॉटलाइट इवेंट का उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस (IBCA) समिट 2026 के प्री-सम्मिट स्पीशीज इवेंट्स की श्रृंखला के अंतर्गत आयोजित किया गया।

इस अवसर की अध्यक्षता गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने वर्चुअल माध्यम से की। कार्यक्रम में गुजरात के वन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया, राज्य के वन राज्य मंत्री प्रवीण माली सहित आईबीसीए, केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “वसुधैव कुटुम्बकम्” के विजन के लिए आभार व्यक्त किया, जिसके कारण आईबीसीए की स्थापना एक वैश्विक बिग कैट संरक्षण पहल के रूप में संभव हुई। उन्होंने कहा कि इस दृष्टिकोण ने दुनिया भर में बिग कैट संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाई है।

उन्होंने गिर क्षेत्र में एशियाटिक शेर के संरक्षण में समुदाय की भागीदारी को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया और कहा कि गिर इस बात का उदाहरण है कि आर्थिक विकास और वन्यजीव संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं। उन्होंने बताया कि बर्दा वन्यजीव अभयारण्य को भी एशियाटिक शेरों के प्राकृतिक विस्तार क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया कि भारत 1–2 जून 2026 को नई दिल्ली में पहली बार IBCA समिट 2026 की मेजबानी करेगा। उन्होंने कहा कि “Save Big Cats, Save Humanity, Save Ecosystem” थीम के साथ यह सम्मेलन वैश्विक स्तर पर संरक्षण सहयोग को मजबूत करेगा।

उन्होंने कहा कि सासन गिर भारत की जैव विविधता और संरक्षण प्रतिबद्धता का जीवंत प्रतीक है। गिर का शेर केवल गुजरात की पहचान नहीं, बल्कि पूरे देश की शान, साहस और प्राकृतिक विरासत का प्रतीक है।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में एशियाटिक शेर जनसंख्या आकलन, जूनागढ़ में राष्ट्रीय वन्यजीव रेफरल सेंटर और बर्दा वन्यजीव अभयारण्य के विकास जैसे कदम मिशन मोड में आगे बढ़ाए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि 2025 में ग्रेटर गिर क्षेत्र में शेरों की संख्या बढ़कर लगभग 891 हो गई है, जो 2020 की तुलना में 32 प्रतिशत वृद्धि दर्शाती है। एशियाटिक शेर को CITES के Appendix-I और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के Schedule-I के तहत सर्वोच्च कानूनी संरक्षण प्राप्त है। ‘प्रोजेक्ट लायन’ के तहत दीर्घकालिक संरक्षण के लिए व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं।

कार्यक्रम में ‘लायन कंजर्वेशन ब्रोशर’ का भी विमोचन किया गया तथा बिग कैट संरक्षण पर आधारित प्रस्तुतियाँ और फिल्में प्रदर्शित की गईं।


आईआईएम समन्वय फोरम बैठक में ‘विकसित भारत @ 2047’ पर मंथन, संस्थागत सहयोग और नवाचार पर जोर

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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, जो आईआईएम समन्वय फोरम के अध्यक्ष भी हैं, ने आज भारतीय प्रबंधन संस्थानों (IIMs) के समन्वय फोरम की बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक उच्च शिक्षा विभाग, शिक्षा मंत्रालय (MoE) द्वारा भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद के सहयोग से आईआईएम अहमदाबाद परिसर में आयोजित की गई।

इस बैठक में आईआईएम के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष, विभिन्न आईआईएम के निदेशक तथा उच्च शिक्षा विभाग और गुजरात एवं उत्तर प्रदेश राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य आईआईएम के बीच सहयोग को मजबूत करना और साझा हितों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना था।

मंत्री प्रधान ने कहा कि बैठक में “विकसित भारत @ 2047” के निर्माण में आईआईएम की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई, जिसमें छात्र कल्याण, संस्थागत समन्वय, शैक्षणिक उत्कृष्टता, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर विशेष जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि भारत के आईआईएम राष्ट्र निर्माण और आर्थिक परिवर्तन के मजबूत आधार बन चुके हैं और नेतृत्व एवं प्रबंधन शिक्षा में वैश्विक मानक स्थापित कर रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत कर, वैश्विक चुनौतियों के अनुसार ढलकर और मूल्य-आधारित शिक्षा को बढ़ावा देकर आईआईएम राष्ट्रीय संपत्ति के रूप में विकसित हो सकते हैं और भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

उच्च शिक्षा विभाग के सचिव विनीत जोशी ने आईआईएम समन्वय फोरम की भूमिका को संस्थानों के बीच सहयोग और समन्वय को मजबूत करने में महत्वपूर्ण बताया।

बैठक में जिन प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई उनमें “विकसित भारत” लक्ष्यों में आईआईएम का योगदान, भविष्य की आवश्यकताओं के अनुसार यूजी प्रवेश परीक्षाओं का समन्वय, एमबीए प्रवेश के लिए एसओपी और छात्रों के इंटर-आईआईएम माइग्रेशन एवं फीस रिफंड नीति, युवा फैकल्टी को एक्सपोजर देने के लिए सेकंडमेंट नीति, तथा फैकल्टी और नॉन-फैकल्टी के लिए आरक्षण रोस्टर लागू करना शामिल था।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘कलाम एंड कवच 3.0’ में आत्मनिर्भरता और संयुक्तता पर दिया जोर

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा— “किसी भी राष्ट्र की शक्ति इस बात पर निर्भर करेगी कि उसकी सेना, प्रयोगशालाएं और उद्योग कितनी तेजी से एक साथ सोच और काम कर सकते हैं,” उन्होंने आत्मनिर्भरता और जॉइंटनेस के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि उभरती सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए रणनीतिक स्वायत्तता आवश्यक है। वे 14 मई 2026 को नई दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर में आयोजित रक्षा रणनीतिक संवाद “कलाम एंड कवच 3.0” के दौरान वीडियो संदेश के माध्यम से नीति निर्माताओं, सैन्य नेतृत्व, रक्षा उद्योग, राजनयिकों, स्टार्टअप्स, अकादमिक जगत और रणनीतिक विशेषज्ञों को संबोधित कर रहे थे।

रक्षा मंत्री ने कहा कि आने वाले समय का युद्धक्षेत्र उन लोगों का साथ देगा जो विचार, प्रोटोटाइप और उसके वास्तविक उपयोग के बीच के समय को कम कर सकेंगे। उन्होंने वर्तमान भू-राजनीतिक तनावों, चल रहे संघर्षों, साइबर खतरों, आपूर्ति-श्रृंखला की कमजोरियों और हाइब्रिड युद्ध के नए स्वरूपों को देखते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा को पुराने सिद्धांतों पर आधारित नहीं रखा जा सकता।

उन्होंने आत्मनिर्भरता को केवल आर्थिक लक्ष्य नहीं बल्कि रणनीतिक आवश्यकता बताया और कहा कि जो देश महत्वपूर्ण रक्षा क्षमताओं के लिए दूसरों पर अत्यधिक निर्भर रहता है, वह संकट के समय असुरक्षित हो जाता है। उन्होंने कहा कि प्रमुख प्रणालियों को देश के अपने पारिस्थितिकी तंत्र में ही विकसित, उत्पादित, मेंटेन और अपग्रेड करना होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक युद्ध अब साइलो में काम नहीं करता, बल्कि भूमि, समुद्र, वायु, साइबर और अंतरिक्ष—इन सभी क्षेत्रों में समन्वय की आवश्यकता है, साथ ही प्रयोगशालाओं, उद्योगों, स्टार्टअप्स, नीति-निर्माताओं और सैन्य संस्थानों के बीच मजबूत सहयोग जरूरी है।

उद्घाटन संबोधन में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने “कलाम एंड कवच” को एक ऐसा मंच बताया जहाँ विचार राष्ट्रीय उद्देश्य के साथ मिलते हैं। उन्होंने कहा कि “कलाम” ज्ञान, विज्ञान और नवाचार का प्रतीक है, जबकि “कवच” सुरक्षा और राष्ट्र रक्षा का प्रतिनिधित्व करता है।

उन्होंने बदलते युद्ध परिदृश्य का उल्लेख करते हुए कहा कि आज के खतरे पारंपरिक सीमाओं से आगे बढ़ चुके हैं और पूर्वानुमान आधारित तैयारी आवश्यक है। उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा प्रस्तुत JAI (Jointness, Aatmanirbharta & Innovation) की अवधारणा को भारत की भविष्य की सुरक्षा संरचना का आधार बताया।

उन्होंने हालिया ऑपरेशनल उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए “ऑपरेशन सिंदूर” को भारत की क्षमताओं का उदाहरण बताया और कहा कि यह आत्मनिर्भर प्रणालियों, तेज प्रतिक्रिया और संयुक्त सैन्य समन्वय का प्रतीक है।

उन्होंने बताया कि पिछले दशक में भारत का रक्षा निर्यात ₹686 करोड़ से बढ़कर ₹38,424 करोड़ तक पहुंच गया है, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा उत्पादन ₹1.54 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। सरकार का लक्ष्य 2029-30 तक ₹50,000 करोड़ रक्षा निर्यात और ₹3 लाख करोड़ रक्षा उत्पादन हासिल करना है।

एयर मार्शल अशुतोष दीक्षित ने अपने विशेष संबोधन में स्वदेशी नवाचार को भारत की रणनीतिक भविष्य सुरक्षा का आधार बताया।

“कलाम एंड कवच 3.0” में AI आधारित युद्ध, स्वायत्त प्रणाली, हाइपरसोनिक तकनीक, क्वांटम C4ISR, रक्षा उत्पादन विस्तार और रणनीतिक साझेदारियों जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। कार्यक्रम में रक्षा मंत्रालय, सशस्त्र बलों, वैज्ञानिकों, उद्योग जगत, स्टार्टअप्स और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों की भागीदारी रही।

एनसीबी की राष्ट्रीय कार्यशाला में आईएस 456:2025 (ड्राफ्ट) पर मंथन, कंक्रीट स्थायित्व और गुणवत्ता आश्वासन पर विशेषज्ञों की चर्चा

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राष्ट्रीय सीमेंट एवं भवन सामग्री परिषद (एनसीबी) ने 9 मई 2026 को नई दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर में “आईएस 456:2025 (ड्राफ्ट) के अनुसार कंक्रीट के स्थायित्व डिज़ाइन और गुणवत्ता आश्वासन” विषय पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में निर्माण उद्योग, शैक्षणिक जगत, अनुसंधान संस्थानों और भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के विशेषज्ञों ने भाग लिया और स्थायित्व-आधारित कंक्रीट डिज़ाइन तथा प्रस्तावित संशोधनों पर चर्चा की।

कार्यशाला का एक प्रमुख आकर्षण उन्नत कंक्रीट प्रौद्योगिकी (एडवांस्ड कंक्रीट टेक्नोलॉजी - एसीटी) पर छह माह के ऑनलाइन प्रमाणन कार्यक्रम का शुभारंभ रहा, जिसे भारत सरकार के कौशल विकास मिशन के अनुरूप तैयार किया गया है। एनसीबी के प्रमुख (सीसीई) डॉ. बृजेश सिंह ने बताया कि यह 25-सप्ताह का हाइब्रिड कार्यक्रम है, जिसमें सप्ताहांत ऑनलाइन कक्षाएँ और एनसीबी बल्लभगढ़ में चार दिवसीय ऑन-साइट मॉड्यूल शामिल है। इसमें मिक्स डिज़ाइन, स्थायित्व, गुणवत्ता आश्वासन/नियंत्रण प्रणाली, आरएमसी संचालन और उन्नत सतत कंक्रीट जैसे विषय शामिल होंगे।

समापन पैनल चर्चा “क्या हम आईएस 456:2025 को लागू करने के लिए तैयार हैं?” में उद्योग की तैयारी, कार्यान्वयन चुनौतियों और क्षमता निर्माण की आवश्यकता पर विचार-विमर्श किया गया। इस सत्र का संचालन एनसीबी के संयुक्त निदेशक ई. अमित त्रिवेदी ने किया, जबकि विशेषज्ञों ने प्रदर्शन-आधारित मानकों और मजबूत गुणवत्ता आश्वासन प्रथाओं पर जोर दिया। एनसीबी के प्रमुख (सीआईएस)जी. जे. नायडू ने कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद प्रस्ताव दिया।

कार्यक्रम का उद्घाटन सीएसआईआर-सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रो. प्रदीप कुमार रामानर्चला ने मुख्य अतिथि के रूप में किया। भारतीय मानक ब्यूरो के उप महानिदेशक (मानकीकरण) ई. संजय पंत विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि एनसीबी के महानिदेशक डॉ. एल. पी. सिंह भी कार्यक्रम में शामिल रहे।

तकनीकी सत्रों में एनसीबी के संयुक्त निदेशक ई. पी. एन. ओझा, आईआईटी मद्रास के प्रो. मनु संतानम, एनसीबी के पूर्व संयुक्त निदेशक ई. वी. वी. अरोड़ा तथा टंडन कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन प्रो. महेश टंडन ने कंक्रीट स्थायित्व डिज़ाइन, निर्माण सामग्री, गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली और ड्राफ्ट कोड के अनुरूप प्रीस्ट्रेस्ड कंक्रीट प्रावधानों पर अपने विचार साझा किए।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की नई पुस्तक ‘अपनापन’ का ऐलान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 35 वर्षों के अनुभवों का वर्णन

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केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपनी नई पुस्तक ‘अपनापन’ की घोषणा की है, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने 35 वर्षों के संबंधों, अनुभवों और कार्यशैली को व्यक्तिगत दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया है।

यह पुस्तक 26 मई 2026 को सुबह 10:30 बजे एनएएससी कॉम्प्लेक्स, नई दिल्ली में औपचारिक रूप से लॉन्च की जाएगी। इस अवसर पर पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू तथा पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा उपस्थित रहेंगे।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ‘अपनापन’ केवल घटनाओं का संग्रह नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के व्यक्तित्व, नेतृत्व शैली, संवेदनशीलता, अनुशासन, कार्यनिष्ठा और राष्ट्र निर्माण के दृष्टिकोण का एक आत्मीय दस्तावेज है। उन्होंने बताया कि उनकी और नरेंद्र मोदी की पहचान 1991 की एकता यात्रा से शुरू हुई थी, जो समय के साथ संगठनात्मक कार्य, शासन और सार्वजनिक जीवन की साझी यात्रा में बदल गई।

उन्होंने कहा कि दुनिया नरेंद्र मोदी को एक निर्णायक और प्रभावशाली नेता के रूप में देखती है, लेकिन उन्होंने उन्हें एक कर्मयोगी, राष्ट्रहित के प्रति समर्पित और संवेदनशील व्यक्ति के रूप में करीब से देखा है। चौहान के अनुसार, प्रधानमंत्री देर रात तक काम करने के बावजूद हर नए दिन समान ऊर्जा और स्पष्टता के साथ देशसेवा में जुट जाते हैं।

एकता यात्रा को याद करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जहाँ कुछ लोग इसे केवल राजनीतिक अभियान मानते थे, वहीं नरेंद्र मोदी ने इसे राष्ट्रीय चेतना का आंदोलन बना दिया। उनका उद्देश्य केवल श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराना नहीं था, बल्कि युवाओं में राष्ट्रभक्ति और समर्पण की भावना जगाना था।

उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की संगठन क्षमता, चुनावी रणनीति, जमीनी स्तर तक विचार पहुँचाने की क्षमता और कार्यकर्ताओं से जुड़ाव को उनकी प्रमुख विशेषताओं में बताया। चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने यह भी देखा कि जटिल और लंबे समय से लंबित समस्याओं का समाधान संवाद, स्पष्टता और दृढ़ संकल्प से कैसे किया जा सकता है।

कोविड-19 महामारी के कठिन दौर का उल्लेख करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उस समय प्रधानमंत्री मोदी ने धैर्य, दूरदृष्टि और संतुलित निर्णय क्षमता का परिचय दिया, जिससे देश को दिशा और विश्वास मिला।

उन्होंने कहा कि ‘अपनापन’ विशेष रूप से युवाओं को प्रेरित करेगी और यह संदेश देगी कि राष्ट्र परिवर्तन के लिए केवल बड़ा पद नहीं, बल्कि महान संकल्प, अनुशासन, सेवा भावना और लोगों से आत्मीय जुड़ाव आवश्यक है।

’मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026’ : ’आम उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत, आसान हुआ पुराने बिजली बिलों का भुगतान’

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 धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक

सुनील त्रिपाठी, सहायक संचालक
रायपुर : छत्तीसगढ़ सरकार की मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 बीपीएल, घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं के लिए एक राहत पहल है। इसके तहत पुराने बकाये पर सरचार्ज में छूट मिल रही है। बकाया बिजली बिल पर लगने वाला पूरा सरचार्ज (ब्याज) माफ या मूल बकाया राशि एकमुश्त या किस्तों में जमा करने की सुविधा। यह योजना बीपीएल, सामान्य घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं को लंबे समय से लंबित बिजली बिलों के बोझ से मुक्ति दिलाने के लिए लाई गई है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेशवासियों को आर्थिक राहत प्रदान करने और उनकी दैनिक जीवन से जुड़ी समस्याओं का व्यावहारिक समाधान देने के लिए लगातार जनहितकारी निर्णय ले रही है। इसी कड़ी में शुरू की गई मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत का बड़ा माध्यम बनकर उभरी है। यह योजना विशेष रूप से उन परिवारों के लिए उपयोगी है जो पुराने बकाया बिजली बिल और बढ़ते सरचार्ज के कारण आर्थिक दबाव में थे।

’क्या है मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026’

मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 राज्य सरकार की एक विशेष पहल है, जिसका उद्देश्य उपभोक्ताओं के पुराने और लंबित बिजली बिलों का सरल समाधान उपलब्ध कराना है। योजना के तहत बकाया बिजली बिलों पर लगने वाले सरचार्ज को पूरी तरह माफ किया जा रहा है। इसके साथ ही उपभोक्ताओं को शेष राशि का भुगतान एकमुश्त या आसान किस्तों में करने की सुविधा भी दी गई है। पात्र श्रेणियों के उपभोक्ताओं को मूल बकाया राशि पर भी विशेष छूट का लाभ मिल रहा है।

’28 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को मिल चुकी है राहत’

राज्य शासन के अनुसार इस योजना के माध्यम से अब तक प्रदेश के 28 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को 757 करोड़ रुपए से अधिक के सरचार्ज माफ होंगे। यह आंकड़ा दर्शाता है कि योजना न केवल व्यापक स्तर पर लागू की गई है, बल्कि लाखों परिवारों के लिए वास्तविक आर्थिक सहायता का माध्यम भी बनी है।

’किन उपभोक्ताओं को मिलेगा लाभ’

इस योजना का लाभ मुख्य रूप से बीपीएल परिवारों, सामान्य घरेलू उपभोक्ताओं और कृषि उपभोक्ताओं को दिया जा रहा है। ऐसे उपभोक्ता जिनके बिजली बिल लंबे समय से बकाया हैं और जो एकमुश्त भुगतान करने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं, वे इस योजना के माध्यम से अपने बकाया का समाधान कर सकते हैं।

योजना से होने वाले प्रमुख फायदे

सरचार्ज की पूरी माफी, पुराने बकाया बिलों पर लगने वाला सरचार्ज अक्सर मूल राशि से भी अधिक हो जाता है। इस योजना के तहत सरचार्ज की पूर्ण माफी से उपभोक्ताओं को तत्काल बड़ी राहत मिलती है।

’आसान किस्तों में भुगतान’

बड़ी राशि एक साथ जमा करने की बाध्यता समाप्त हो जाती है। उपभोक्ता अपनी सुविधा और आर्थिक क्षमता के अनुसार किस्तों में भुगतान कर सकते हैं। घरेलू बजट पर कम दबाव और सरचार्ज माफी और किस्त सुविधा से परिवारों को अपने मासिक खर्चों का बेहतर प्रबंधन करने में मदद मिलती है।

’बिजली विच्छेदन का खतरा कम’

बकाया राशि के कारण बिजली कटने की आशंका रहती है। योजना का लाभ लेने से उपभोक्ता नियमित भुगतान व्यवस्था में लौट सकते हैं। इससे किसानों को सीधा लाभ हो रहा है। कृषि उपभोक्ताओं को बकाया बिजली बिल के बोझ से राहत मिलती है, जिससे सिंचाई और खेती का कार्य निर्बाध रूप से जारी रह सकता है।

’मानसिक तनाव से राहत’

लंबित बिलों की चिंता से मुक्ति मिलने पर परिवार आर्थिक रूप से अधिक सुरक्षित महसूस करते हैं। जो उपभोक्ता लंबे समय से भुगतान नहीं कर पा रहे थे, उन्हें फिर से नियमित भुगतान प्रणाली से जुड़ने का अवसर मिलता है।

’योजना का लाभ कैसे प्राप्त करें’

योजना का लाभ लेने के लिए उपभोक्ता अपने नजदीकी बिजली कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त टोल फ्री नंबर 1912 पर जानकारी प्राप्त की जा सकती है। विस्तृत जानकारी और आवश्यक दिशा-निर्देशों के लिए छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड की आधिकारिक वेबसाइट का उपयोग किया जा सकता है।

’योजना की अवधि’

मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 1 जनवरी 2026 से 31 दिसंबर 2026 तक प्रभावशील रहेगी। राज्य सरकार ने उपभोक्ताओं से समय रहते योजना का लाभ लेने की अपील की है।

’जनहित और सुशासन का प्रभावी उदाहरण’

मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 राज्य सरकार की संवेदनशील और जनोन्मुखी सोच का उदाहरण है। यह योजना केवल बकाया बिलों के समाधान तक सीमित नहीं है, बल्कि लाखों परिवारों को आर्थिक राहत, मानसिक संतोष और बेहतर वित्तीय प्रबंधन का अवसर भी प्रदान करती है।

मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 उन उपभोक्ताओं के लिए अत्यंत लाभकारी है जो पुराने बिजली बिलों के बोझ से परेशान हैं। सरचार्ज माफी, मूल राशि पर छूट और आसान किस्तों जैसी सुविधाएं इसे एक प्रभावी और जनहितकारी योजना बनाती हैं। यह योजना आम नागरिकों को राहत देने के साथ-साथ उन्हें नियमित भुगतान व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। प्रदेशवासियों के लिए यह एक सुनहरा अवसर है कि वे इस योजना का लाभ उठाकर अपने लंबित बिजली बिलों का समाधान करें और आर्थिक राहत प्राप्त करें।

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