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रायपुर रेलवे स्टेशन पर गांजा तस्करी का भंडाफोड़, दो आरोपी गिरफ्तार

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 रायपुर। रायपुर रेलवे स्टेशन पर आज शुक्रवार को सूखे नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने गांजा तस्करी के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। प्लेटफॉर्म नंबर 7 से पकड़े गए आरोपियों के पास से 18 किलो गांजा बरामद किया गया, जिसकी कीमत 2 लाख 88 हजार रुपये आंकी गई है।


पुलिस के मुताबिक, गुढ़ियारी थाना पुलिस को रेलवे स्टेशन पर गांजा तस्करों की मौजूदगी की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और दो संदिग्धों को पकड़ लिया। तलाशी के दौरान उनके कब्जे से बड़ी मात्रा में गांजा बरामद हुआ।

गिरफ्तार आरोपी राघवेंद्र सिंह और झम्मन सिंह उत्तर प्रदेश के निवासी बताए जा रहे हैं। दोनों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि गांजा किस राज्य से लाया गया था और इसे कहां खपाने की तैयारी थी।

रेडियो की विश्वसनीयता और एआई की गति मिलकर जनसेवा को बनायेंगे अधिक सशक्त : मुख्यमंत्री साय

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मुख्यमंत्री विश्व रेडियो दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में हुए शामिल

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के एक निजी होटल में विश्व रेडियो दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने वंदे मातरम के नए गायन संस्करण का पेन ड्राइव लॉन्च किया। 

मुख्यमंत्री साय ने सभी को विश्व रेडियो दिवस की हार्दिक बधाई देते हुए आकाशवाणी रायपुर और यूनेस्को को इस खास आयोजन के लिए शुभकामनाएं दी।मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष का विषय ‘रेडियो और एआई’ अत्यंत सामयिक और उपयोगी है। सूचना क्रांति के इस युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग सभी क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में एआई के माध्यम से रेडियो को और अधिक जनोपयोगी बनाने पर गंभीर चिंतन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सही समय पर सही जानकारी नागरिकों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और इसमें रेडियो की भूमिका शुरू से ही अत्यंत प्रभावी रही है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आकाशवाणी देश का सबसे भरोसेमंद समाचार प्रसारक है। निजी चैनलों के बीच तेज़ी से खबरें देने की प्रतिस्पर्धा के बावजूद आकाशवाणी ने अपनी विश्वसनीय, संतुलित और जनहितकारी सूचना परंपरा को बनाए रखा है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में यह सूचना, शिक्षा और स्वस्थ मनोरंजन का सशक्त माध्यम है। उन्होंने रेडियो से जुड़ी अपनी स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि जब दूरस्थ गांवों तक किसी अन्य माध्यम की पहुंच नहीं थी, तब रेडियो ही देश-दुनिया से जुड़ने का एकमात्र माध्यम था। किसानों और ग्रामीण अंचलों के लिए आकाशवाणी आज भी विशेष भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘मन की बात’ जैसे लोकप्रिय कार्यक्रम के लिए रेडियो का चयन इसकी व्यापक पहुंच और प्रभाव को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आकाशवाणी के छह स्टेशन संचालित हैं तथा रायपुर से विविध भारती सेवा प्रसारित हो रही है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘रेडियो और एआई’ संचार के क्षेत्र में नई क्रांति ला सकता है। एआई की मदद से कंटेंट को अधिक प्रभावी, सटीक और त्वरित बनाया जा सकता है। आपातकालीन सूचनाएं, मौसम पूर्वानुमान, कृषि सलाह और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी अधिक तेजी और सटीकता से प्रसारित की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ डिजिटल भविष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है। नवा रायपुर में देश का पहला एआई डेटा सेंटर पार्क स्थापित किया जा रहा है, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और तकनीकी सुरक्षा के क्षेत्र में नए अवसर सृजित होंगे। नई औद्योगिक नीति के माध्यम से नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है और डिजिटल तकनीक के जरिए अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आकाशवाणी के माध्यम से छत्तीसगढ़ी, गोंडी और हल्बी भाषाओं में प्रसारण से स्थानीय जुड़ाव मजबूत हुआ है और श्रोताओं की रुचि में वृद्धि हुई है। 

अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि रेडियो की विश्वसनीयता और एआई की गति मिलकर जनसेवा को और अधिक सशक्त बनाएंगी और विकसित भारत के लिए विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प सभी के सहयोग से अवश्य साकार होगा।

कार्यक्रम में यूनेस्को के रीजनल एडवाइजर ऑफ कम्युनिकेशन एंड इनफॉर्मेशन हज़्ज़ाज़ मा'अली ने सभी को विश्व रेडियो दिवस की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि रेडियो पूरी दुनिया में सबसे अधिक पहुंच रखता है और सबसे अधिक भरोसे वाला माध्यम है। रेडियो ने कठिन समय में भी अपनी विश्वसनीयता बनाए रखते हुए दुनिया को सही सूचनाएं प्रदान की। सुश्री अली ने कहा कि एआई के माध्यम से रेडियो को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है और इस दिशा में ठोस प्रयास किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि आकाशवाणी रायपुर छत्तीसगढ़ी और हिंदी भाषा में पूरे प्रदेश विशेषकर आदिवासी बहुल क्षेत्रों तक अपनी सेवाएं दे रहा है। सुश्री अली ने कहा कि यूनेस्को रेडियो के विस्तार के लिए आकाशवाणी के साथ मिलकर नवाचार और तकनीकी पहलुओं पर लगातार सहयोग करेगा। 

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा, आकाशवाणी के महानिदेशक राजीव कुमार जैन, उप महानिदेशक व्ही. राजेश्वर, जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे।

वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास की सुरक्षा और सह-अस्तित्व के सिद्धांतों के अनुरूप हो सभी गतिविधियों का संचालन : मुख्यमंत्री साय

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ राज्य वन्य जीव बोर्ड की बैठक संपन्न

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ राज्य वन्यजीव बोर्ड की 16वीं बैठक आयोजित हुई। बैठक में बोर्ड की 15वीं बैठक के पालन प्रतिवेदन तथा नवीन एजेंडों पर चर्चा उपरांत प्रस्तावों को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड के निर्णय हेतु प्रेषित करने पर सहमति बनी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वन्यजीव हमारी प्रकृति की अमूल्य धरोहर हैं और उनके संरक्षण–संवर्धन के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए सतत निगरानी, अवैध गतिविधियों पर रोक तथा उनकी सुरक्षा के लिए जनभागीदारी को बढ़ावा देने पर जोर दिया। साथ ही, वनों के आसपास रहने वाले ग्रामीणों में जागरूकता बढ़ाने और युवाओं की सक्रिय भूमिका सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई। मुख्यमंत्री ने न्यूनतम हस्तक्षेप के सिद्धांत को अपनाते हुए अत्यावश्यक कार्यों को ही वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में बिना किसी छेड़छाड़ के पूर्ण करने पर बल दिया। उन्होंने सह-अस्तित्व के सिद्धांतों के अनुरूप सभी गतिविधियों के संचालन की बात कही।

बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति (Standing Committee of State Board for Wildlife) के गठन को मंजूरी दी गई। स्थायी समिति का गठन वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री की अध्यक्षता में किया जाएगा, जिसमें 11 अन्य सदस्य शामिल होंगे। उल्लेखनीय है कि वन्य प्राणियों की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में होने वाले कार्यों के प्रस्तावों पर राज्य वन्यजीव बोर्ड का अभिमत अनिवार्य होता है। बोर्ड की बैठकों के बीच अधिक अंतराल के कारण प्रस्तावों की स्वीकृति में विलंब की स्थिति बनती है। स्थायी समिति के गठन से वैधानिक मंजूरियों के त्वरित निपटान तथा वन्यजीव प्रबंधन से संबंधित मुद्दों के शीघ्र निराकरण में सहायता मिलेगी।

बैठक में उदंती–सीतानदी टाइगर रिजर्व अंतर्गत बरबांधा जलाशय में बांध एवं नहरों के जीर्णोद्धार एवं नवीन कार्य, पीएम जनमन योजना के अंतर्गत कबीरधाम जिले के कवर्धा वनमंडल में पंडरीपानी मेन रोड से सौरु तक मार्ग मजबूतीकरण, गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में ऑप्टिकल फाइबर बिछाने से संबंधित 6 प्रस्ताव, सेमरसोत अभ्यारण्य में ऑप्टिकल फाइबर बिछाने, उदंती–सीतानदी टाइगर रिजर्व में सीआरपीएफ कैंप की स्थापना तथा उदंती–सीतानदी टाइगर रिजर्व में ऑप्टिकल फाइबर बिछाने के प्रस्तावों का अनुमोदन कर उन्हें राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्वीकृति हेतु प्रेषित करने पर सहमति दी गई।

कार्यक्रम में वन मंत्री केदार कश्यप, विधायक धर्मजीत सिंह, मुख्य सचिव विकास शील, अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख व्ही. श्रीनिवास राव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव)अरुण कुमार पाण्डेय सहित बोर्ड के अन्य सदस्य एवं अधिकारीगण उपस्थित रहे।

सहकारी आंदोलन एवं समाजवाद के अग्रणी- भूषणलाल

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अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त काशी विश्वविद्यालय कांशी (बनारस) के उपकुलपति सर्वपल्ल्ली डॉ. राधाकृष्णन के सानिध्य में सन् 1944 में वकालत की शिक्षा उपरांत स्व. भूषणलाल चन्द्रनाहू किसान आंदोलन और सहकारी आंदोलन में रचनात्मक कार्य प्रारंभ किये। सन् 1946 में धान के दाम में शोषण के विरूद्ध अविभाजित जिला रायपुर (जिला धमतरी, गरियाबंद, बलौदाबाजार, महासमुन्द) क्षेत्र के 90 किसानों को संगठित कर 115000 रु. (एक लाख पंद्रह हजार रुपये) एकत्र कर महासमुन्द में व्यावसायिक कंपनी बनाकर चांवल मिल की स्थापना किये। स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेता ठा. प्यारेलाल सिंह (सी.पी. एण्ड बरार प्रदेश के प्रथम नेताप्रतिपक्ष) के प्रेरणा से चांवल मिल को सहकारी आंदोलन से संबद्ध कर दिया गया। यह देश का प्रथम सहकारी चांवल मिल था। किसान सहकारी चांवल मिल महासमुन्द का अनुकरण कर मध्यप्रदेश शासन के द्वारा छत्तीसगढ़ के सभी विकासखण्डों में सहकारी चांवल मिल की स्थापना किया गया।

सन् 1956 में अजजा बाहुल्य ग्राम बनपचरी (महासमुन्द) में स्वयं के व्यय से प्राथमिक शाला संचालित करवाये। सन् 1965-66 के गंभीर सूखा अकाल में भूखमरी से राहत के लिए स्वयं के व्यय से ग्राम बनपचरी में तालाब का निर्माण करवाये। सन् 1974 में सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ में सूखा अकाल के समय म.प्र. शासन के द्वारा किसानों से जबरन धान की लेव्ही की वसूली के विरूद्ध आरंग जिला रायपुर में व्यापक किसान आंदोलन के प्रथम जत्था का नेतृत्त्व करते हुए जेल गये। सन् 1975 के आपत्तकाल में मीसा के तहत समाजवादी नेता स्व. मधुलिमये के साथ रायपुर जेल में बंद थे। देश के प्रथम आम चुनाव सन् 1952 में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी थे। तत्पश्चात चुनाव नहीं लड़ने और संगठन में ही कार्य करने का सार्वजनिक घोषणा के प्रण के पालन में सन् 1977 के विधानसभा चुनाव में महासमुन्द से जनता पार्टी के प्रत्याशी के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिये। वहीं अनेको राज (क्षेत्र) में बिखरे हुए चन्द्रनाहू कुर्मी समाज को सन् 1964-65 में एकीकृत कर संगठित किये। उन्हें छत्तीसगढ़ चन्द्रनाहू कुर्मी समाज का निर्विरोध प्रथम अध्यक्ष निर्वाचित किया गया। उन्होंने स्वयं के व्यय से डंगनिया रायपुर में छात्रावास के लिए भूमि खरीदी किये और चन्द्रनाहू कुर्मी समाज के सहयोग से छात्रावास का निर्माण किये। छात्रावास में सभी जाति के कमजोर वर्ग के छात्र लाभांवित हो रहे है। इसके अतिरिक्त उन्होंने अजजा/अजा एवं अन्य सभी वर्ग के विद्यार्थियों को आर्थिक मदद कर उच्च शिक्षा दिलवाये। शिक्षा और सहकारिता एवं समाजवाद के प्रति निःस्वार्थ जनसेवक का जन्म 13 फरवरी 1919 ग्राम फरफौद (आरंग) में किसान अर्जुन प्रसाद कुर्मी के घर में जन्म हुआ। प्राथमिक शिक्षा फरफौद, माध्यमिक शिक्षा मिशन स्कूल महासमुन्द में और उच्चतर शिक्षा सेंट पॉल स्कूल रायपुर एवं मारिस कालेज नागपुर एवं कांशी विश्वविद्यालय में हुई थी। उनके जन्म दिवस 13 फरवरी 2025 को किसान सहकारी चांवल मिल महासमुन्द में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में सर्वहिन्दु समाज महासमुन्द के श्री देवेन्द्र दुबे एवं छ.ग. जनादेश के संपादक के.पी. साहू और नई दुनिया के ब्यूरो चिफ आशुतोष शर्मा के द्वारा दीप प्रज्वलीत किया गया। कार्यक्रम में किसान मिल के संचालकगण ललित चन्द्रनाहू, पंकज साहू (पूर्व पार्षद), योगेश चन्द्रनाहू मन्नू लाल पटेल, योगेन्द्र चन्द्राकर, बलदाऊ चन्द्राकर, मलकित मक्कड़, अभयराम भास्कर, मोहन साहू उपस्थित थे।

निति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने “ट्रेड वॉच क्वार्टरली” Q2 FY 25-26 का नवीनतम संस्करण जारी किया

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निति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने 13 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर 2025) के लिए “Trade Watch Quarterly” का नवीनतम संस्करण जारी किया। इस अवसर पर निति आयोग के सदस्य अरविंद वर्मानी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

इस प्रकाशन में वैश्विक और घरेलू व्यापार रुझानों का विस्तृत विश्लेषण किया गया है। जबकि वैश्विक व्यापार वृद्धि धीमी रही, सेवाओं का प्रदर्शन माल से बेहतर रहा और विकासशील क्षेत्रों ने प्रमुख भूमिका निभाई। इस तिमाही के विशेष अनुभाग में भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स व्यापार पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जिसमें मोबाइल फोन, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिक्स और कंपोनेंट्स में भारत के निर्यात और वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मूल्य श्रृंखलाओं में भागीदारी का अध्ययन किया गया है।

विश्लेषण में यह पाया गया कि Q2 FY26 में भारत के व्यापार का प्रदर्शन निर्यात-प्रेरित रहा, जिससे वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद व्यापार विस्तार बना रहा। सेवाओं और वस्तुओं के निर्यात में ~8.5% की वृद्धि हुई। विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार में वृद्धि, ई-कॉमर्स के बढ़ते महत्व और भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में तेज़ी विशेष रूप से उजागर हुई।

इलेक्ट्रॉनिक्स अब भारत के निर्यात कार्ट में दूसरा सबसे बड़ा उत्पाद बन गया है। मोबाइल फोन निर्यात में तेज़ वृद्धि और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स व संचार उपकरणों में मजबूती के कारण भारत ने वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मांग में उल्लेखनीय हिस्सेदारी बनाई है। अब भारत घटक निर्माण और उच्च मूल्य संवर्धन की ओर अग्रसर है, जिसे इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स निर्माण योजना के तहत ₹40,000 करोड़ के आवंटन से मजबूती दी जा रही है।

सुमन बेरी ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स आधुनिक विनिर्माण मूल्य श्रृंखलाओं का केंद्र है और इसका निर्यात संतुलन और तकनीकी संप्रभुता पर महत्वपूर्ण प्रभाव है। जबकि भारत ने अंतिम असेंबली में पैमाना हासिल कर लिया है, स्थायी प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए संरचनात्मक लागत कम करना, घरेलू घटक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना और वैश्विक उत्पादन नेटवर्क में भारतीय फर्मों को शामिल करना आवश्यक है।

अरविंद वर्मानी ने भी टीम की तारीफ़ करते हुए कहा कि वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में गहन एकीकरण, विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स में, भारत के निर्यात गति को बनाए रखने, उत्पादकता बढ़ाने और गुणवत्तापूर्ण रोजगार सृजित करने के लिए महत्वपूर्ण होगा।

यह प्रकाशन नीति निर्माताओं, उद्योग, शोधकर्ताओं और शैक्षणिक संस्थानों के लिए डेटा-आधारित विश्लेषण और नीति अंतर्दृष्टि प्रदान करता है, जिससे वैश्विक परिदृश्य में भारत की व्यापार प्रतिस्पर्धात्मकता को सुदृढ़ किया जा सके।

सोनिपत स्टार्टअप समिट 4.0 में युवाओं और नवाचार पर जोर, राज्य मंत्री रक्ष खड़से ने किया संबोधन

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युवा मामले और खेल राज्य मंत्री रक्ष खड़से (Raksha Khads)ने IIT दिल्ली टेक्नोपार्क में आयोजित सोनिपत स्टार्टअप समिट 4.0 में भाग लिया और नवाचार-प्रधान विकास और युवाओं द्वारा संचालित औद्योगिक परिवर्तन के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

अपने संबोधन में मंत्री खड़से ने कहा कि भारत, दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में, अनुसंधान, पूंजी निवेश और वैश्विक विस्तार द्वारा संचालित एक महत्वपूर्ण डीप-टेक चरण में प्रवेश कर रहा है। “इंडस्ट्री एक्सेलेरेशन एडिशन” थीम के तहत आयोजित इस समिट में स्टार्टअप, MSME, शोधकर्ता, कॉर्पोरेट और सरकारी प्रतिनिधि एक मंच पर आए ताकि टेक्नोलॉजी-आधारित उद्यम विकास को तेजी से बढ़ाया जा सके।

मंत्री खड़से ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दृष्टि का उल्लेख करते हुए कहा कि स्टार्टअप इंडिया, डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसी पहलों के माध्यम से एक आधुनिक, नवाचार-प्रधान और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार तैयार हो रहा है, जो विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से जुड़ा है।

समिट ने रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, हरित ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण, रक्षा प्रौद्योगिकी और कृषि-प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्र में स्टार्टअप को लॉन्चपैड प्रदान किया। विशेष रूप से हरियाणा एनसीआर औद्योगिक गलियारे में टीयर II और टीयर III क्षेत्रों के स्टार्टअप को राष्ट्रीय और वैश्विक बाजारों से जोड़ने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

उन्होंने बताया कि अटल इनोवेशन मिशन (NITI Aayog), स्टार्टअप इंडिया और सार्वजनिक-निजी सहयोग प्लेटफार्म स्टार्टअप को 50 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता, इंक्यूबेशन सुविधाएँ, मेंटरशिप और बाजार से जोड़ने की सुविधा प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संधान और विकास, डीप-टेक नवाचार, सेमीकंडक्टर निर्माण, स्टार्टअप और MSME के लिए क्रेडिट गारंटी और हरित विकास पहल के लिए 2026 के केंद्रीय बजट ने भी समर्थन बढ़ाया है।

समिट ने सार्वजनिक-निजी साझेदारी का मजबूत मॉडल पेश किया, जहां युवा उद्यमियों को बौद्धिक संपदा, फंडिंग मार्ग, नियामक ढांचे और उत्पाद-बाजार संरेखण पर मार्गदर्शन मिला।

मंत्री खड़से ने खेल विज्ञान और विनिर्माण नवाचार के संबंधित क्षेत्रों जैसे कि स्पोर्ट्स एनालिटिक्स, वियरेबल तकनीक, बायोमैकेनिक्स, रिकवरी साइंस और AI-आधारित प्रदर्शन निगरानी पर भी प्रकाश डाला, जो भारत में खेल-केंद्रित स्टार्टअप के लिए नए अवसर खोल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भारत के युवा नवप्रवर्तनकर्ता केवल स्टार्टअप नहीं बना रहे, बल्कि औद्योगिक क्षमता मजबूत करने, तकनीकी स्वतंत्रता बढ़ाने और विकसित भारत के लक्ष्य में योगदान भी कर रहे हैं।

कार्यक्रम में अशोक कुमार (कुलपति, स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी हरियाणा), डॉ. बिपिन कुमार (सहायक प्रोफेसर, IIT दिल्ली), टी. के. सुन्दरमूर्ति (पूर्व मिशन डायरेक्टर, ISRO), शोभित माथुर (कुलपति, ऋषिउड यूनिवर्सिटी), प्रो. सैमुअल राज (SRM यूनिवर्सिटी), प्रो. अंबिका प्रसाद शाह (IIT जम्मू) सहित कई विद्वान और उद्योग प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

मंत्री खड़से ने आलोक पांडे, CEO, AIC IIT दिल्ली के योगदान और नवाचार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने में उनके नेतृत्व की सराहना की।

सोनिपत स्टार्टअप समिट 4.0 भारत की तेजी से विकसित हो रही नवाचार पारिस्थितिकी और युवाओं की रचनात्मकता, ऊर्जा और उद्यमिता के माध्यम से वैश्विक स्तर पर विस्तार की महत्वाकांक्षा का प्रतीक है।


BRICS शेर्पा और सू-शेर्पा के लिए नई दिल्ली में भारतीय सांस्कृतिक संध्या का आयोजन

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विदेश मंत्रालय (MEA) ने वस्त्र मंत्रालय के तहत विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) कार्यालय के सहयोग से 10 फरवरी 2026 को राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय (NCM & HKA), नई दिल्ली में BRICS शेर्पा और सू-शेर्पा के लिए विशेष सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया। यह कार्यक्रम भारत की अध्यक्षता में 9–10 फरवरी 2026 को सफलतापूर्वक संपन्न पहले BRICS शेर्पा और सू-शेर्पा बैठक के बाद आयोजित किया गया। इस अवसर का उद्देश्य भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक शिल्प और जीवंत परंपराओं जैसे कला, संगीत और व्यंजनों को प्रस्तुत करना था।

ब्राज़ील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, सऊदी अरब, UAE, ईरान और इंडोनेशिया के शेर्पा इसमें शामिल हुए। कार्यक्रम में BRICS सदस्य और साझेदार देशों के राजदूत और लगभग 30 विदेशी प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

भारत के BRICS शेर्पा, सचिव (आर्थिक संबंध) ने कार्यक्रम की मेजबानी की, जबकि संयुक्त सचिव (बहुपक्षीय आर्थिक संबंध), भारत के BRICS सू-शेर्पा ने इसका समर्थन किया। भारतीय पक्ष में स्वास्थ्य मंत्रालय, DPIIT और राजस्व विभाग के सचिव और MEA तथा राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय के 30 अधिकारियों की टीम भी शामिल थी।

प्रतिनिधियों को संग्रहालय की दीर्घाओं का मार्गदर्शित दौरा कराया गया, जहां उन्हें भारत के विविध शिल्प, लोक कला और पारंपरिक प्रथाओं से परिचित कराया गया।

कार्यक्रम की विशेष झलक के रूप में संग्रहालय के कारीगरों द्वारा ब्लैक पॉटरी, चम्बा रुमाल, कलमकारी, लैक ब्रेसलेट और पपियेर माशे के स्टॉल लगाए गए। इन स्टॉलों में भारत के विभिन्न क्षेत्रों के पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पाद प्रदर्शित किए गए, जिनमें विदेशी प्रतिनिधियों ने गहरी रुचि दिखाई।

प्रतिनिधियों ने भारत के पारंपरिक कला और शिल्प को संरक्षित करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कारीगरों को प्रोत्साहित करने के प्रयासों की सराहना की।



कौशल विकास को लेकर केंद्र और राजस्थान सरकार की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक, युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने पर जोर

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कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE), भारत सरकार ने आज राजस्थान सरकार के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की, जिसमें राज्य में चल रही कौशल विकास पहलों की प्रगति की समीक्षा और रोजगार परिणामों को मजबूत करने के लिए आगे की रणनीति पर चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने की। बैठक में राजस्थान सरकार के उद्योग एवं वाणिज्य, युवा मामले एवं खेल तथा कौशल, रोजगार एवं उद्यमिता मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ भी उपस्थित रहे।

राजस्थान देश के कौशल विकास पारिस्थितिकी तंत्र में प्रमुख भागीदार बनकर उभरा है, जहां 1,537 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) कार्यरत हैं। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) 4.0 के तहत राज्य में 3.14 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है, जिनमें से 2.50 लाख से अधिक प्रमाणित हो चुके हैं। राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना (NAPS) के तहत 1.04 लाख से अधिक अप्रेंटिस प्रशिक्षित किए गए हैं और 24.98 करोड़ रुपये का डीबीटी भुगतान किया गया है।

बैठक में राजस्थान में दो स्किल इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (SIIC) स्थापित करने और PM-SETU योजना के तहत ITI के उन्नयन पर चर्चा हुई। PM-SETU योजना के तहत अगले पांच वर्षों में 60,000 करोड़ रुपये के निवेश से 1,000 ITI और 5 राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों (NSTI) को उन्नत करने तथा 20 लाख युवाओं को आधुनिक ट्रेड में प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है।

जयंत चौधरी ने कहा कि राजस्थान की संस्थागत क्षमता और बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण प्रणाली इसे कौशल परिवर्तन में अग्रणी बनाती है। उन्होंने उद्योग साझेदारी बढ़ाने और रोजगार परिणामों को मजबूत करने पर जोर दिया। वहीं कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने राज्य में कौशल सुधारों को तेज करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

बैठक में भरतपुर में राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान स्थापित करने और जयपुर व जोधपुर के NSTI के उन्नयन पर भी चर्चा हुई। इसके साथ ही जयपुर और भरतपुर में स्किल इंडिया इंटरनेशनल सेंटर स्थापित कर विदेशों में रोजगार के अवसर बढ़ाने की योजना पर विचार किया गया।

बैठक के अंत में दोनों सरकारों ने लंबित स्वीकृतियों को शीघ्र पूरा करने, निगरानी प्रणाली मजबूत करने और उद्योग सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की, ताकि राजस्थान के युवाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके।

ठोस पदार्थों में ऊष्मा (हीट) परिवहन को लेकर बड़ी वैज्ञानिक खोज, थर्मल तकनीक में नए युग की शुरुआत

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एक बड़ी वैज्ञानिक सफलता में, शोधकर्ताओं ने ठोस पदार्थों में ऊष्मा के परिवहन का एक असामान्य तंत्र खोजा है, जो यह समझ बदल देता है कि स्थानीय अव्यवस्था (डिसऑर्डर) वाले क्रिस्टलीय पदार्थों में गर्मी कैसे प्रवाहित होती है। इस खोज से अगली पीढ़ी की थर्मोइलेक्ट्रिक और थर्मल मैनेजमेंट तकनीकों में महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।


आमतौर पर ठोस पदार्थों में गर्मी का परिवहन फोनॉन नामक कणों द्वारा होता है, जो क्रिस्टल जालिका में चलते हुए आपस में टकराते और बिखरते हैं। दशकों से यही “फोनॉन गैस” मॉडल सामग्री डिजाइन का आधार रहा है।

लेकिन जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र (JNCASR), बेंगलुरु, जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के तहत एक स्वायत्त संस्थान है, के वैज्ञानिकों ने एक दुर्लभ परिवर्तन का प्रदर्शन किया है। इसमें फोनॉन कणों की तरह व्यवहार करना बंद कर देते हैं और तरंग (वेव) जैसी सुसंगतता के माध्यम से ऊष्मा का परिवहन करते हैं, जहां वे स्थानीय कंपन अवस्थाओं के बीच टनलिंग करते हैं।

यह परिवर्तन एक नए अध्ययन किए गए पदार्थ Tl₂AgI₃ (शून्य-आयामी अकार्बनिक धातु हैलाइड) में देखा गया।

यह शोध प्रो. कनिष्क बिस्वास (न्यू केमिस्ट्री यूनिट, JNCASR) के नेतृत्व में किया गया और प्रतिष्ठित पत्रिका Proceedings of the National Academy of Sciences (PNAS), USA में प्रकाशित हुआ। इस पदार्थ की लैटिस थर्मल कंडक्टिविटी बहुत कम (लगभग 0.18 W/m·K) पाई गई। आश्चर्यजनक रूप से, सामान्य क्रिस्टलों के विपरीत तापमान बढ़ने पर इसकी ऊष्मा चालकता घटने के बजाय लगभग स्थिर हो गई, जो पारंपरिक फोनॉन मॉडल के टूटने का संकेत है।

इस खोज के पीछे Tl₂AgI₃ की अनूठी क्रिस्टल संरचना है, जो निरंतर त्रि-आयामी नेटवर्क के बजाय क्लस्टर जैसे बिल्डिंग ब्लॉक्स से बनी है। नोबेल पुरस्कार विजेता लिनस पॉलिंग के तीसरे नियम से प्रेरित होकर वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया कि मजबूत कैशन-कैशन प्रतिकर्षण स्थानीय रूप से लैटिस को अस्थिर कर सकता है।

प्रयोगों में सिल्वर परमाणुओं में मजबूत स्थानीय विकृतियाँ पाई गईं, जिससे बंधन अत्यधिक अनहार्मोनिक हो गए। इससे फोनॉन बिखराव इतना बढ़ गया कि पारंपरिक कण-जैसा ऊष्मा परिवहन ढह गया और ऊष्मा तरंग-जैसी सुसंगतता के माध्यम से प्रवाहित होने लगी।

प्रो. कनिष्क बिस्वास ने कहा,

“Tl₂AgI₃ एक दुर्लभ पदार्थ है जो एक साथ क्रिस्टल और ग्लास दोनों जैसा व्यवहार करता है। इसमें लंबी दूरी की क्रिस्टलीय संरचना होती है, लेकिन ऊष्मा का परिवहन ग्लास जैसा होता है।”

शोध में सिंक्रोट्रॉन एक्स-रे, थर्मल ट्रांसपोर्ट प्रयोग, रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी और उन्नत सैद्धांतिक गणनाओं का उपयोग किया गया। वैज्ञानिकों ने यह भी पाया कि तापमान बढ़ने पर लगभग 175 K पर तरंग-जैसा ऊष्मा परिवहन कण-जैसे परिवहन पर हावी हो जाता है।

यह अध्ययन फोनॉन लोकलाइजेशन और वेव-कोहेरेंस के माध्यम से ऊष्मा परिवहन का पहला स्पष्ट प्रायोगिक प्रमाण है, जो पहले केवल सैद्धांतिक था।

लेखक – डॉ. रिद्धिमोय पाठक (बाएँ) और प्रो. कनिष्क बिस्वास (दाएँ)

यह खोज थर्मल मैनेजमेंट और ऊर्जा सामग्री डिजाइन के लिए नई रणनीति प्रस्तुत करती है—जहां रासायनिक नियमों और स्थानीय लैटिस अस्थिरता का उपयोग करके ऊष्मा प्रवाह को नियंत्रित किया जा सकता है।

यह शोध भारत की मूलभूत सामग्री विज्ञान में बढ़ती वैश्विक नेतृत्व भूमिका को भी दर्शाता है।


वैज्ञानिकों ने सौर विस्फोटों (CME) की उत्पत्ति समझने में बड़ी सफलता हासिल की, अंतरिक्ष मौसम पूर्वानुमान में मदद मिलेगी

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वैज्ञानिकों ने सूर्य पर होने वाले विस्फोटक सौर उद्गारों (Solar Eruptions) की उत्पत्ति को समझने में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। ये विस्फोट, जिन्हें कोरोनल मास इजेक्शन (CME) कहा जाता है, पृथ्वी पर भू-चुंबकीय तूफान पैदा कर सकते हैं, जो उपग्रहों को नुकसान पहुँचा सकते हैं, बिजली ग्रिड को बाधित कर सकते हैं और अंतरिक्ष यात्रियों के लिए खतरा बन सकते हैं।

सौर विस्फोटों की भविष्यवाणी करना अंतरिक्ष मौसम विज्ञान की एक बड़ी चुनौती रही है। इसी दिशा में एक नई शोध अध्ययन में आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेज (ARIES), जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST), भारत सरकार के तहत एक स्वायत्त संस्थान है, और उनके सहयोगियों ने इन विस्फोटों को नियंत्रित करने वाले दो प्रमुख कारकों की पहचान की है।

शोधकर्ताओं ने मैग्नेटोहाइड्रोडायनामिक (MHD) सिमुलेशन मॉडल का उपयोग किया, जो प्लाज्मा जैसे विद्युत-चालक तरल पदार्थों और चुंबकीय क्षेत्रों के बीच अंतःक्रिया का अध्ययन करते हैं। अध्ययन में पाया गया कि सूर्य का वैश्विक चुंबकीय क्षेत्र एक तरह से “चुंबकीय पिंजरे” की तरह काम करता है, जो विस्फोट को रोकता है, जबकि चुंबकीय ट्विस्ट (हेलिसिटी) का तेज़ निर्माण इस पिंजरे को तोड़ने की कुंजी है।

यह शोध ARIES के पीएचडी छात्र नितिन वशिष्ठ और वैज्ञानिक डॉ. वैभव पंत के नेतृत्व में किया गया। उन्होंने “ब्रेकआउट मॉडल” का उपयोग करके सौर विस्फोटों की शुरुआत का सिमुलेशन किया। सिमुलेशन से पता चला कि मजबूत वैश्विक चुंबकीय क्षेत्र होने पर CME को सूर्य के गुरुत्वाकर्षण से बाहर निकलना कठिन हो जाता है। जब पृष्ठभूमि चुंबकीय क्षेत्र कमजोर था, तो विस्फोट सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में फैल गया।

इसके अलावा, शोधकर्ताओं ने पाया कि जब पृष्ठभूमि चुंबकीय क्षेत्र की ताकत को थोड़ा बढ़ाया गया, तो विस्फोट विफल हो गया और संरचना वापस सूर्य की सतह पर गिर गई। यह खोज सौर चक्र 24 की एक पहेली को समझाने में मदद करती है, जो सौर चक्र 23 की तुलना में कमजोर था, लेकिन फिर भी अधिक CME उत्पन्न हुए थे। कमजोर चुंबकीय क्षेत्र के कारण विस्फोट के लिए आवश्यक सीमा कम हो गई थी।

अध्ययन का दूसरा प्रमुख परिणाम अंतरिक्ष मौसम पूर्वानुमान के लिए एक नया संकेतक प्रदान करता है। वैज्ञानिकों ने यह जांचा कि जब ऊर्जा और चुंबकीय ट्विस्ट (हेलिसिटी) सूर्य के कोरोना में इंजेक्ट की जाती है, तो इसका क्या प्रभाव पड़ता है। उन्होंने पाया कि केवल हेलिसिटी की मात्रा ही नहीं, बल्कि उसके बनने की गति भी महत्वपूर्ण है।

शोध में “एब्सोल्यूट नेट करंट हेलिसिटी (ANCH)” नामक एक पैरामीटर का अध्ययन किया गया, साथ ही चुंबकीय ऊर्जा और टोटल अनसाइन्ड करंट हेलिसिटी (TUCH) जैसे अन्य पैरामीटर भी देखे गए। वैज्ञानिकों ने पाया कि ANCH की वृद्धि दर विस्फोट की भविष्यवाणी करने का सबसे विश्वसनीय संकेतक है।

धीमी गति से बढ़ने वाली ANCH से “विफल विस्फोट” हुआ, जबकि तेज़ी से बढ़ने वाली ANCH से सफल CME उत्पन्न हुए। कुछ मामलों में, सबसे तेज़ हेलिसिटी इंजेक्शन से एक ही क्षेत्र में कई विस्फोट भी हुए।

शोधकर्ताओं ने कहा कि इन निष्कर्षों से यह संकेत मिलता है कि एब्सोल्यूट नेट करंट हेलिसिटी की समय दर विभिन्न विस्फोट परिदृश्यों को समझने और भविष्यवाणी करने के लिए सबसे प्रभावी संकेतक हो सकती है।

डॉ. वैभव पंत ने कहा कि ये सिमुलेशन सूर्य के लिए एक “वर्चुअल लैबोरेटरी” की तरह हैं, जो विशाल सौर विस्फोटों के मूल भौतिकी सिद्धांतों को समझने में मदद करते हैं। उन्होंने कहा कि अगला कदम इन निष्कर्षों को वास्तविक अंतरिक्ष मौसम पूर्वानुमान उपकरणों में बदलना है, ताकि महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा की जा सके।


केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने BIRAC–RDI फंड के तहत पहली राष्ट्रीय कॉल की घोषणा की, जैव प्रौद्योगिकी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम

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केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज BIRAC–RDI फंड के तहत पहली राष्ट्रीय कॉल की घोषणा की, जो सरकार के ₹1 लाख करोड़ के अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) पहल के तहत उच्च प्रभाव वाली जैव प्रौद्योगिकी नवाचारों को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि यह पहल विज्ञान आधारित विकास के प्रति भारत के दृष्टिकोण में निर्णायक बदलाव को दर्शाती है और यह संकेत देती है कि भारत अब उभरती तकनीकों में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

डॉ. सिंह ने कहा कि पिछले दशक में भारत जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नीति संकोच से नीति तेज़ी की ओर बढ़ा है। उन्होंने बताया कि 2014 में लगभग 50 बायोटेक स्टार्टअप से बढ़कर आज 11,000 से अधिक हो गए हैं, जो इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर विस्तार को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि जैव प्रौद्योगिकी अगली औद्योगिक क्रांति का प्रमुख चालक बनेगी और भारत पहले ही अंतरिक्ष जैव प्रौद्योगिकी जैसे उभरते क्षेत्रों में प्रवेश कर चुका है।

बीआईआरएसी के प्रबंध निदेशक डॉ. जितेंद्र कुमार ने बताया कि BIRAC–RDI फंड के तहत अगले पांच वर्षों में ₹2,000 करोड़ का निवेश किया जाएगा। भारत की जैव-अर्थव्यवस्था 2012 में 28 अरब डॉलर से बढ़कर 2024 में 165.7 अरब डॉलर हो गई है, जिसका लक्ष्य 2030 तक 300 अरब डॉलर और 2047 तक 1 ट्रिलियन डॉलर करना है।

इस फंड के तहत स्टार्टअप, एसएमई और उद्योग भागीदार 31 मार्च 2026 तक आवेदन कर सकते हैं।



VB-G RAM G अधिनियम 2025: ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों के रोजगार की गारंटी, ग्राम पंचायत को मिलेगी मुख्य भूमिका

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VB-G RAM G अधिनियम, 2025 का उद्देश्य ग्रामीण विकास ढांचे को विकसित भारत @2047 के राष्ट्रीय विज़न के अनुरूप बनाना है। इस अधिनियम के तहत ग्रामीण परिवारों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के वैधानिक रोजगार की गारंटी दी जाएगी, जिससे आजीविका सुरक्षा को मजबूत किया जा सके।

इस योजना में विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं (Viksit Gram Panchayat Plans) के माध्यम से समग्र योजना निर्माण, विभिन्न सरकारी विभागों के बीच समन्वय (convergence), और डिजिटल एवं भू-स्थानिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।

पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका इस अधिनियम में स्पष्ट रूप से निर्धारित की गई है:

  • जिला पंचायत जिला स्तर पर योजना निर्माण, निगरानी और समन्वय करेगी।

  • ब्लॉक स्तर की पंचायत ब्लॉक स्तर की योजना तैयार करेगी और ग्राम पंचायतों को सहयोग देगी।

  • ग्राम पंचायत योजना निर्माण, कार्यान्वयन, कार्य आवंटन, रिकॉर्ड रखरखाव और सामाजिक ऑडिट की मुख्य जिम्मेदार संस्था होगी।

ग्राम पंचायत को ग्रामीण परिवारों का पंजीकरण, रोजगार कार्ड जारी करना, कार्य आवेदन प्रक्रिया, तकनीकी मानकों का पालन, डिजिटल रिकॉर्ड, और ग्राम सभा के समक्ष दस्तावेज प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी दी गई है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

यह अधिनियम महात्मा गांधी नरेगा के अनुभवों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है और ग्राम पंचायत को योजना के क्रियान्वयन का मुख्य आधार बनाया गया है।


प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के तहत 2024-25 में ₹630 करोड़ का फंड आवंटन, मांग आधारित प्रणाली से मिलती है सहायता

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खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) केंद्रीय क्षेत्र की अम्ब्रेला योजना प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना (PMKSY) का क्रियान्वयन कर रहा है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए PMKSY के तहत ₹630 करोड़ का फंड आवंटन किया गया था।

PMKSY के अंतर्गत घटक योजनाएं निम्नलिखित हैं:

(i) एकीकृत कोल्ड चेन और मूल्य संवर्धन अवसंरचना (Integrated Cold Chain & Value Addition Infrastructure – ICC&VAI)
(ii) कृषि-प्रसंस्करण क्लस्टरों के लिए अवसंरचना (Infrastructure for Agro-processing Clusters – APC)
(iii) खाद्य प्रसंस्करण एवं संरक्षण क्षमता का सृजन/विस्तार (Creation/Expansion of Food Processing & Preservation Capacities – CEFPPC)
(iv) खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता आश्वासन अवसंरचना (Food Safety and Quality Assurance Infrastructure – FSQAI)
(v) मानव संसाधन और संस्थान (अनुसंधान एवं विकास)
(vi) ऑपरेशन ग्रीन्स (Operation Greens – OG)
(vii) मेगा फूड पार्क (01.04.2021 से बंद)
(viii) बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज का सृजन (01.04.2021 से बंद)

PMKSY के तहत पात्र संस्थाओं जैसे सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियों, एकल स्वामित्व फर्म, साझेदारी फर्म, एलएलपी, सहकारी समितियां, एफपीओ/एफपीसी/एसएचजी आदि को खाद्य प्रसंस्करण/संरक्षण/परीक्षण/विश्लेषण अवसंरचना स्थापित करने और खाद्य प्रसंस्करण एवं संबद्ध क्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों के लिए अनुदान सहायता (ग्रांट-इन-एड) प्रतिपूर्ति आधार पर प्रदान की जाती है। यह योजना हिमाचल प्रदेश सहित पूरे देश में लागू है।

PMKSY एक मांग आधारित योजना है और इसके तहत आवेदन एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EoI) के माध्यम से पूरे देश से आमंत्रित किए जाते हैं, जिसमें हिमाचल प्रदेश भी शामिल है। इस योजना के तहत किसी भी घटक योजना में राज्यों के अनुसार धन आवंटित/स्वीकृत/जारी नहीं किया जाता। प्राप्त प्रस्तावों की पात्रता की जांच की जाती है और योजना दिशानिर्देशों के अनुसार तय मानदंडों के आधार पर मूल्यांकन किया जाता है। उपलब्ध निधि के आधार पर मेरिट के अनुसार पात्र प्रस्तावों को स्वीकृति दी जाती है।

यह जानकारी खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रवनीत सिंह ने आज राज्यसभा में लिखित उत्तर में दी।


भारतीय वायु सेना और रॉयल थाई वायु सेना ने हिंद महासागर क्षेत्र में इन-सिटू अभ्यास किया

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भारतीय वायु सेना (IAF) ने 09 से 12 फरवरी 2026 तक हिंद महासागर क्षेत्र में रॉयल थाई वायु सेना (RTAF) के साथ एक इन-सिटू अभ्यास आयोजित किया, जिससे दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग मजबूत हुआ और आपसी समझ में वृद्धि हुई।

दोनों देशों के बीच यह द्विपक्षीय अभ्यास हवाई युद्ध प्रशिक्षण अभ्यास के रूप में आयोजित किया गया, जिसमें भारतीय वायु सेना के Su-30MKI बहु-भूमिका लड़ाकू विमान और रॉयल थाई वायु सेना के SAAB Gripen जेट विमान शामिल थे। समुद्री क्षेत्र में भारतीय वायु सेना के विमानों के विस्तारित परिचालन को IL-78 मिड-एयर रिफ्यूलिंग टैंकरों द्वारा सुनिश्चित किया गया। यह अभ्यास भारतीय वायु सेना के एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AWACS) विमानों और थाई वायु सेना के ग्राउंड कंट्रोल इंटरसेप्शन (GCI) तत्वों की उन्नत निगरानी और कमांड क्षमताओं के तहत आयोजित किया गया।

अभ्यास में भाग लेने वाली भारतीय वायु सेना की इकाइयाँ अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के एयरबेस से संचालित हुईं, जबकि थाई Gripen विमान थाईलैंड के एयरबेस से संचालित हुए। यह अभ्यास हिंद महासागर क्षेत्र में एक मित्र विदेशी देश के साथ भारतीय वायु सेना की परिचालन क्षमता और अंतर-संचालन (इंटरऑपरेबिलिटी) को प्रदर्शित करने के लिए डिजाइन किया गया था। इस अभ्यास ने दोनों वायु सेनाओं को परिचालन अनुभव प्रदान किया और सर्वोत्तम प्रक्रियाओं के आदान-प्रदान का अवसर दिया।

यह अभ्यास भारत और थाईलैंड के बीच गहरे होते “एक्ट ईस्ट” साझेदारी को दर्शाता है, जो अब एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र में भी विस्तारित हो रही है।


2025 में स्पैम टेलीमार्केटिंग के खिलाफ TRAI की कड़ी कार्रवाई, 21 लाख से अधिक संसाधन डिस्कनेक्ट

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भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने वर्ष 2025 के लिए अनचाही वाणिज्यिक संचार (UCC) के प्रवर्तन और डू नॉट डिस्टर्ब (DND) पारिस्थितिकी तंत्र के तहत उपभोक्ता सहभागिता पर अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें स्पैम टेलीमार्केटिंग के खिलाफ नियामक कार्रवाई में उल्लेखनीय वृद्धि को रेखांकित किया गया है।

वर्ष 2025 के दौरान, UCC मानदंडों का उल्लंघन करने वाले 7,31,120 अपंजीकृत टेलीमार्केटर्स (UTMs) को नोटिस जारी किए गए। प्रगतिशील प्रवर्तन उपायों के तहत, 4,73,075 संस्थाओं पर एक महीने के लिए संचार प्रतिबंध लगाया गया, जबकि 89,936 बार-बार उल्लंघन करने वालों पर छह महीने का संचार प्रतिबंध लगाया गया। इसके अतिरिक्त, निरंतर अनुपालन न करने पर 1,84,482 दूरसंचार संसाधनों को डिस्कनेक्ट किया गया।

अगस्त 2024 से अब तक कुल मिलाकर 21.05 लाख से अधिक दूरसंचार संसाधनों को डिस्कनेक्ट किया जा चुका है, जो स्पैम नेटवर्क पर अंकुश लगाने और दूरसंचार पारिस्थितिकी तंत्र में अनुपालन को मजबूत करने के लिए किए जा रहे प्रयासों को दर्शाता है।

प्रवर्तन कार्रवाई के साथ-साथ, उपभोक्ताओं को स्पैम की रिपोर्ट करने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु निरंतर प्रयास किए गए। वर्ष 2025 में सभी चैनलों के माध्यम से 31.09 लाख UCC शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें से 17.06 लाख शिकायतें (आधे से अधिक) DND ऐप के माध्यम से दर्ज की गईं, जो अनचाही संचार की रिपोर्टिंग में बढ़ी हुई उपभोक्ता भागीदारी को दर्शाता है।

इस पर टिप्पणी करते हुए, TRAI के अध्यक्ष अनिल कुमार लाहोटी ने कहा:

“2025 में TRAI के प्रवर्तन प्रयास इस सिद्धांत पर आधारित हैं कि उपभोक्ताओं को अनचाही वाणिज्यिक संचार पर नियंत्रण में स्पष्ट सुधार महसूस होना चाहिए। DND पारिस्थितिकी तंत्र के माध्यम से बढ़ी हुई उपभोक्ता सहभागिता ने उल्लंघनों की तेजी से पहचान और लगातार उल्लंघन करने वालों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई संभव की है।”

मासिक आंकड़ों से पता चलता है कि वर्ष भर अपंजीकृत टेलीमार्केटर्स के खिलाफ शिकायतें कुल मामलों का बड़ा हिस्सा रहीं, जो पंजीकृत टेलीमार्केटर्स के खिलाफ शिकायतों से कहीं अधिक थीं। यह प्रवृत्ति नियामक ढांचे से बाहर संचालित होने वाली अनधिकृत और गैर-अनुपालन संस्थाओं को लक्षित करने पर TRAI के फोकस को मजबूत करती है।

TRAI ने दो-स्तरीय रणनीति अपनाई है, जिसके तहत पंजीकृत संस्थाओं के माध्यम से वैध और सहमति-आधारित वाणिज्यिक संचार को सक्षम किया जाता है, जबकि DLT (ब्लॉकचेन)-आधारित पंजीकरण, AI आधारित स्पैम पहचान, निर्धारित नंबर श्रृंखला का अनिवार्य उपयोग, मजबूत शिकायत तंत्र और गैर-अनुपालन प्रेषकों को डिस्कनेक्ट करने जैसे नियामक, तकनीकी और प्रवर्तन उपायों के माध्यम से अपंजीकृत संस्थाओं से आने वाले अनचाही संचार पर अंकुश लगाया जाता है।

DND पारिस्थितिकी तंत्र में अपनाने की दर में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। DND ऐप इंस्टॉलेशन में वर्ष-दर-वर्ष 84.43% की वृद्धि दर्ज की गई और 2025 में कुल इंस्टॉलेशन 28.08 लाख तक पहुंच गए, जबकि 2024 में यह संख्या 15.22 लाख थी।

उपभोक्ता रिपोर्टिंग में वृद्धि और मजबूत प्रवर्तन तंत्र के संयोजन से उल्लंघनकर्ताओं की तेजी से पहचान और निर्णायक नियामक कार्रवाई संभव हुई है।

प्राधिकरण उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा, पारदर्शिता सुनिश्चित करने और अनचाही वाणिज्यिक संचार में संलग्न संस्थाओं के लिए गैर-अनुपालन के परिणामों को कड़ा करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है, साथ ही हितधारकों के सहयोग से DND ढांचे को और बेहतर बनाने के प्रयास जारी रखेगा।

TRAI के बारे में:

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) TRAI अधिनियम, 1997 के तहत स्थापित एक स्वतंत्र वैधानिक निकाय है। TRAI भारत में दूरसंचार, प्रसारण और केबल टीवी सेवा क्षेत्रों का विनियमन करता है। इसका उद्देश्य सभी उपयोगकर्ताओं के लिए निष्पक्ष नियम, पारदर्शी प्रक्रियाएं और बेहतर सेवा गुणवत्ता सुनिश्चित करना है।


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