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PM आवास घोटाला: अधूरे मकानों पर गृह प्रवेश, मैनपुर जनपद की CEO हटाईं गईं

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 गरियाबंद। गरियाबंद जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत सामने आई गंभीर अनियमितताओं के बाद प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया है। मैनपुर जनपद पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) सुश्री स्वेता वर्मा को पद से हटा दिया गया है। जिला पंचायत गरियाबंद के सीईओ प्रखर चंद्राकर ने आदेश जारी कर उन्हें जनपद सीईओ के दायित्व से मुक्त कर दिया है।


यह कार्रवाई प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत अधूरे आवासों को कागजों में पूर्ण दर्शाने और गलत जानकारी प्रस्तुत किए जाने के आरोपों के बाद की गई है। जांच में पाया गया कि बड़ी संख्या में ऐसे आवास, जिनका निर्माण अधूरा था, उन्हें योजना की प्रगति दिखाने के लिए पूर्ण बताया गया।


जानकारी के अनुसार कई मकानों में न तो छत की ढलाई हुई थी और न ही निर्माण कार्य अंतिम चरण तक पहुंचा था, इसके बावजूद उन्हें पूर्ण आवास घोषित कर 1 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों सामूहिक गृह प्रवेश कार्यक्रम में शामिल कर दिया गया।

जांच में यह भी सामने आया कि आवास पोर्टल पर ऑनलाइन एंट्री की तकनीकी व्यवस्था का दुरुपयोग कर अधूरे मकानों को पूरा दिखाया गया। कुछ मामलों में तो मकानों की नींव तक नहीं रखी गई थी, लेकिन सहायक सचिव और आवास मित्रों द्वारा मनरेगा मद से मजदूरी की राशि निकाल ली गई। इससे वास्तविक हितग्राहियों को नुकसान हुआ और उनके आवासों का निर्माण अधर में लटक गया।

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने गृह प्रवेश कार्यक्रम की सूची का जमीनी सत्यापन किया। मैनपुर जनपद सदस्य परमेश्वर जैन ने आरोप लगाया कि उनके क्षेत्र की सरईपानी पंचायत में गोवर्धन नागेश, कन्हल राम और गजेंद्र के आवास अधूरे थे, फिर भी उन्हें पूर्ण दिखाया गया। इसी तरह उसरी जोर पंचायत में दुर्गा टांडिया तथा गुढ़ियारी पंचायत में सुखचंद का आवास भी अधूरा पाया गया।

परमेश्वर जैन के अनुसार सामूहिक गृह प्रवेश सूची में शामिल 40 से अधिक आवासों में से लगभग आधे अधूरे थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई मामलों में मनरेगा की मजदूरी राशि गलत तरीके से अन्य व्यक्तियों के नाम पर निकाल ली गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने इसे बड़ी प्रशासनिक चूक मानते हुए जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू की। प्रारंभिक जांच में जनपद पंचायत स्तर पर लापरवाही और निगरानी में कमी सामने आने के बाद जनपद सीईओ सुश्री स्वेता वर्मा के खिलाफ कार्रवाई की गई।

जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर ने स्पष्ट कहा है कि प्रधानमंत्री आवास योजना जैसे महत्वपूर्ण और जनहित से जुड़े कार्यक्रम में किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

विकसित छत्तीसगढ़ का रोडमैप है छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विधानसभा के शीतकालीन सत्र में छत्तीसगढ अंजोर विजन 2047 पर चर्चा करते हुए कहा कि यह विजन प्रदेश को वर्ष 2047 तक विकसित छत्तीसगढ़ बनाने का स्पष्ट रोडमैप है। उन्होंने कहा कि यह दस्तावेज आने वाले वर्षाे में राज्य के विकास की दिशा तय करेगा। उन्होंने इस मौके पर विकसित छत्तीसगढ के निर्माण में सहभागी बनने के लिए सभी सदस्यों से आव्हान किया। उन्होंने इस अवसर को ऐतिहासिक बताते हुए राज्य के अतीत, वर्तमान उपलब्धियों और भविष्य की दिशा पर प्रकाश डाला।

भारत आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था 

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दिन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि 14 दिसंबर 2000 को राजकुमार कॉलेज के जशपुर हॉल में छत्तीसगढ़ विधानसभा की पहली बैठक आयोजित हुई थी। यह जशपुर हॉल स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव द्वारा अपने सांसद निधि से निर्मित कराया गया था। उन्होंने इस स्मृति का उल्लेख करते हुए प्रदेश की लोकतांत्रिक यात्रा को नमन किया। मुख्यमंत्री साय ने विज़न डॉक्यूमेंट के निर्माण के लिए वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी को बधाई देते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में यह दस्तावेज तैयार हुआ है, जो आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ के विकास की दिशा तय करेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2014 में पहली बार प्रधानमंत्री बनने के बाद वे अब तीसरी बार देश का नेतृत्व कर रहे हैं और उनके प्रयासों से भारत आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है।

विकसित छत्तीसगढ़ की यात्रा के लिए हमने कुछ महत्वपूर्ण चरण

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने 2047 तक विकसित भारत बनाने का जो लक्ष्य रखा है। उनके अनुरूप हमने भी विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का लक्ष्य तय किया है। विकसित छत्तीसगढ़ की यात्रा के लिए हमने कुछ महत्वपूर्ण चरण बनाये हैं। हमने लक्ष्यों को पूरा करने के लिए समय अवधि तय की है। जैसे वर्ष 2030 तक हम निकटवर्ती लक्ष्य हासिल करेंगे। इसी तरह साल 2035 तक मध्यवर्ती और 2047 तक दीर्घकालिक लक्ष्य हासिल करेंगे।

अंजोर विजन में 13 क्षेत्रों को किया गया चिन्हांकित

छत्तीसगढ़ अंजोर विजन डाक्यूमेंट जनभागीदारी का एक बेहतरीन उदाहरण है। इसे तैयार करने के लिए हमने किसान, युवा, महिला, उद्यमी, कारोबारी समेत समाज के हर वर्ग से सुझाव मांगे। मुझे स्वयं उनसे प्रत्यक्ष बातचीत करने का मौका मिला। इस अंजोर विजन में हमने शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, अधोसंरचना जैसे 13 क्षेत्रों को चिन्हांकित कर इनके विकास के लिए 10 मिशन गठित करने का निर्णय लिया। हम ग्रामीण विकास के साथ.साथ अर्बन प्लानिंग के बेहतरीन मॉडल खड़े कर रहे हैं। नवा रायपुर भविष्य का सबसे तेजी से बढ़ने वाला शहर है। यह शहर मेडिकलए एजुकेशन, टेक्सटाइल, आईटी और एआई का ग्लोबल हब बनने जा रहा है। हम ग्रामीण विकास के साथ.साथ अर्बन प्लानिंग के बेहतरीन मॉडल खड़े कर रहे हैं। नवा रायपुर भविष्य का सबसे तेजी से बढ़ने वाला शहर है। यह शहर मेडिकल, एजुकेशन, टेक्सटाइल, आईटी और एआई का ग्लोबल हब बनने जा रहा है। 

गरीबों, किसानों और वंचित वर्गों के सर्वांगीण विकास के लिए अनेक योजनाएं

 मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बीते वर्षों में गरीबों, किसानों और वंचित वर्गों के लिए अनेक योजनाएं चलाई गईं और राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए सतत प्रयास किए गए। उन्होंने बताया कि सरकार की पहली ही कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 18 लाख आवासों को स्वीकृति दी गई। महिला सशक्तीकरण के लिए महतारी वंदन योजना एक ऐतिहासिक पहल बनी। लगभग 70 लाख माताओं-बहनों को प्रतिमाह 1000 रुपये की सहायता दी जा रही है। डीबीटी के माध्यम से अब तक 22 किस्तों में 14 हजार 306 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज और वनोपज संग्राहकों के हित में तेंदूपत्ता पारिश्रमिक 4000 से बढ़ाकर 5500 रुपये किया गया है। 13 लाख परिवारों को इसका लाभ मिल रहा है। चरणपादुका योजना पुनः प्रारंभ की गई है तथा 73 लाख गरीब परिवारों को मुफ्त राशन दिया जा रहा है।

इको-टूरिज्म, बस्तर पंडुम तथा बस्तर ओलंपिक से बनी बस्तर की पहचानबस्तर में बस्तर ओलंपिक एवं बस्तर पांडुम जैसे कार्यकमों के माध्यम से बस्तर की आम जनता तक पहुंच रहे है।इस साल बस्तर पांडुम में इस बार 3 गुना लोगों के हिस्सा लेने का अनुमान है। जो हमारी सरकार की सफलता को दिखाती है। आइए इस ऐतिहासिक दिन में हम सभी संकल्प ले की प्रदेश की विकसित छत्तीसगढ़ की परिकल्पना को पूरा करे।  इको-टूरिज्म, बस्तर पंडुम तथा बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन नई पहचान बना रहे हैं।  

  8 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त 

 साय ने कहा कि मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यापार और उद्योग के लिए नई औद्योगिक नीति लागू की गई है। अब तक 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। लॉजिस्टिक पार्क, एयर कार्गाे सुविधा और औद्योगिक पार्क स्थापित किए गए हैं। स्थानीय रोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है। हमारी सरकार 2 साल में 10 हजार से ज्यादा बेटी बेटा को सरकारी नौकरी दिया गया है। ऊर्जा क्षेत्र में साढ़े तीन लाख करोड़ का निवेश हुआ है।

आत्मसमर्पण करने वाले और गिरफ्तार हुए माओवादी का पुनर्वास 

प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी जी की दूरदृष्टि एवं केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह जी के संकल्प के साथ हमारे बहादुर जवानों के अदम्य साहस से माओवाद अब अंतिम पड़ाव पर है। हम मार्च 2026 तक माओवाद की समाप्ति की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। आत्मसमर्पण करने वाले और गिरफ्तार हुए माओवादी का पुनर्वास किया जा रहा है। सुरक्षा के साथ-साथ विकास के जरिए बस्तर को मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि नियद नेल्ला नार योजना के तहत सुदूर गांवों में राशन, आधार, आयुष्मान कार्ड, आवास, बिजली और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई गई हैं। बस्तर में स्कूल पुनः शुरू हुए हैं और इको-टूरिज्म, बस्तर पंडुम तथा बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन नई पहचान बना रहे हैं। 

छत्तीसगढ़ खनिज और वन संपदा से समृद्ध राज्य   

मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले दो वर्षों में 10 हजार से अधिक बेटियों और बेटों को सरकारी नौकरियां प्रदान की गई हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज और वन संपदा से समृद्ध राज्य है। मुख्यमंत्री ने सदन और प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि सभी मिलकर विकसित छत्तीसगढ़ की परिकल्पना को साकार करने का संकल्प लें।    

पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में डबल सब्सिडी 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हम सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत घरों पर सोलर रूफटॉप लगाने पर केंद्र और राज्य की डबल सब्सिडी प्रदान कर रहे हैं। ऊर्जा क्षेत्र में साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये का निवेश हुआ है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा सब्सिडी दी जा रही है। सौर ऊर्जा के एक किलोवॉट क्षमता के प्लांट के लिए केन्द्र सरकार द्वारा 30 हजार रूपए और राज्य सरकार द्वारा 15 हजार रूपए इस प्रकार कुल 45 हजार रूपए की सब्सिडी दी जा रही है। 

वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी के द्वारा प्रस्तुत विज़न 2047 की चर्चा में भाग लेने वालों में उप मुख्यमंत्री अरूण साव, विजय शर्मा, मंत्री रामविचार नेताम, विधायक अजय चन्द्राकर, धरमलाल कौशिक, राजेश मूणत, धरमजीत सिंह, सुनील सोनी, भावना बोहरा, लता उसेंडी, अनुज शर्मा, सुशांत शुक्ला तथा किरण देव शामिल रहे।

छत्तीसगढ़ में आवास एवं पर्यावरण विभाग की दो वर्षों की उपलब्धियां और विकास पहल

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रायपुर- प्रदेश के आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने छत्तीसगढ संवाद ऑडिटोरियम में प्रेसवार्ता को सम्बोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी के नेतृत्व में आवास एवं पर्यावरण विभाग ने विगत दो वर्षों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। लोगों को किफायती आवास की उपलब्धता, बेहतर रहवासी सुविधा, आजीविका के साधनों के विकास के साथ ही पर्यावरण अनुकूल ईज आफ लिविंग का ध्यान रखते हुए इन दो सालों में काम किया गया है। विभाग द्वारा किये गये दो सालों से नागरिक जीवन बेहतर हुआ है और राज्य की उज्ज्वल भविष्य की ठोस नींव रख दी गई है।

मंत्री चौधरी ने बताया कि दो साल पहले छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा था। 3200 से अधिक आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियों का विक्रय नहीं हो सका था। 735 करोड रूपए का बकाया था। मंडल को ऋण मुक्त करने के लिए यह राशि राज्य शासन द्वारा उपलब्ध कराई गई। वर्तमान में मंडल पर कोई ऋण नहीं है। जिन संपत्तियों का विक्रय लंबे समय से नहीं हुआ था, उनके विक्रय के लिए सरकार द्वारा एकमुश्त निपटान योजना ओटीएस-2 आरंभ की गई। इसके माध्यम से इन संपत्तियों पर 30 प्रतिशत तक की छूट उपलब्ध करायी गई। इस योजना को सफलता मिली और 9 महीनों में ही 1251 संपत्तियों का विक्रय हुआ और इस योजना के माध्यम से 190 करोड रुपए का राजस्व अर्जित किया गया। यह राशि आगामी परियोजनाओं में व्यय की जाएगी, ताकि अधिकतम हितग्राहियों को किफायती आवास एवं व्यावसायिक संपत्ति का लाभ मिल सके। उन्होंने बताया कि भविष्य में अविक्रित स्टॉक से बचने के लिए नई निर्माण नीति लागू की गई है। अब मांग आधारित निर्माण को प्राथमिकता दी जाएगी। बाजार की वास्तविक आवश्यकता के अनुसार परियोजनाएं शुरू होंगी। इससे वित्तीय जोखिम कम होगा। 

नई नीति के अनुसार 60 प्रतिशत या प्रथम 3 माह में 30 प्रतिशत पंजीयन अनिवार्य किया गया है। इसके पश्चात ही निर्माण कार्य प्रारंभ होगा। यह व्यवस्था परियोजनाओं की व्यवहार्यता सुनिश्चित करेगी। नागरिकों की मांग को प्रत्यक्ष रूप से महत्व मिलेगा।

चौधरी ने कहा कि आवंटियों की सुविधा के लिए ऑनलाइन पोर्टल को और सुदृढ किया गया है। प्रक्रियाएं सरल और समयबद्ध हुई हैं। नागरिकों को कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। एआई आधारित चैटबॉट के माध्यम से 24×7 जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। मानव हस्तक्षेप की आवश्यकता कम हुई है। पारदर्शिता और सुविधा दोनों में वृद्धि हुई है।

मंत्री चौधरी ने रायपुर विकास प्राधिकरण की उपलब्धियों के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 193 करोड रूपए की लागत से प्राधिकरण द्वारा पीएम यूनिटी मॉल का निर्माण किया जा रहा है। इसके साथ ही टिकरापारा में 168 फ्लैट का निर्माण प्रस्तावित है। जिसके लिए निविदा आमंत्रित की गई है। जनवरी से प्राधिकरण द्वारा ऑनलाईन प्रणाली की शुरूआत की गई है।

उन्होंने कहा कि नवा रायपुर अटल नगर के विकास के लिए बीते 2 सालों में ऐतिहासिक निर्णय हुए हैं। नवा रायपुर अटल नगर देश का पहला ऋण मुक्त ग्रीनफील्ड शहर बना है। यह उपलब्धि राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय मानी जा रही है। प्राधिकरण द्वारा 1,345 करोड़ के संपूर्ण ऋण का भुगतान किया गया। यह ऋण पूर्ववर्ती विकास परियोजनाओं से संबंधित था। अनुशासित वित्तीय प्रबंधन से यह संभव हो सका। किसी नए ऋण का बोझ नहीं डाला गया। ऋण चुकता होने के साथ 5,030 करोड मूल्य की भूमि और संपत्ति गिरवी-मुक्त हुई। अब ये परिसंपत्तियां पूरी तरह स्वतंत्र हैं। इससे निवेश और विकास प्रस्तावों को गति मिलेगी।

नवा रायपुर में औद्योगिक एवं व्यावसायिक गतिविधि बढ़ाने के लिए भी उल्लेखनीय पहल की गई है। 132 एकड क्षेत्र में टेक्सटाइल पार्क विकसित किया जा रहा है। टेक्सटाइल पार्क में लगभग 2,000 करोड के निवेश का अनुमान है। यह निवेश राज्य की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को सशक्त करेगा। एमएसएमई और बड़े उद्योगों को अवसर मिलेंगे। निर्यात क्षमता में वृद्धि होगी। इस परियोजना से 12,000 से अधिक रोजगार सृजित होने की संभावना है। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार दोनों शामिल होंगे। स्थानीय युवाओं को अवसर मिलेंगे तथा क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।

सेमीकंडक्टर और आईटी क्षेत्र में 1,800 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। यह पहल उन्नत 5जी और 6 जी तकनीक को ध्यान में रखकर की गई है। इससे राज्य को तकनीकी मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी। डिजिटल इकोसिस्टम मजबूत होगा। आईटी क्षेत्र से लगभग 10,000 नए रोजगार सृजित होने की संभावना है। उच्च कौशल आधारित रोजगार उपलब्ध होंगे। स्टार्टअप और तकनीकी कंपनियों को बढ़ावा मिलेगा।

चौधरी ने कहा कि नवा रायपुर टेक-हब के रूप में उभरेगा। नवा रायपुर को कॉन्फ्रेंस कैपिटल के रूप में विकसित किया जा रहा है। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों को आकर्षित करने की योजना है। एमआईसीई टूरिज्म को बढावा मिलेगा। सेवा और पर्यटन क्षेत्र को नई गति मिलेगी।

चौधरी ने बताया कि शहर को वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और खुले स्थल उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इवेंट आधारित अर्थव्यवस्था को बढावा मिलेगा। स्थानीय सेवाओं में रोजगार बढ़ेगा। 400 करोड की लागत से इनलैंड मरीना परियोजना विकसित की जा रही है। यह पर्यटन और शहरी सौंदर्य दोनों को बढ़ाएगी। मनोरंजन के नए अवसर सृजित होंगे। ग्रीन और ब्लू इंफ्रास्ट्रक्चर को जोड़ा गया है।

120 करोड की लागत से आर्ट ऑफ लिविंग सेंटर विकसित किया जाएगा। यह आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र बनेगा। वेलनेस टूरिज्म को प्रोत्साहन मिलेगा। शहर की सामाजिक पहचान मजबूत होगी। 230 करोड की लागत से साइंस सिटी विकसित की जा रही है। इससे शिक्षा और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। छात्रों और युवाओं को विज्ञान से जोड़ने का उद्देश्य है। भविष्य उन्मुख सोच को प्रोत्साहन मिलेगा।

नवा रायपुर को मेडिकल हब बनाने के उद्देश्य से मेडी सिटी विकसित की जा रही है। यहां उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी। क्षेत्रीय स्वास्थ्य सुविधाओं पर दबाव कम होगा। मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा। मेडी सिटी में 300 बिस्तरों वाला हॉस्पिटलबॉम्बे हॉस्पिटल ट्रस्ट द्वारा विकसित किया जा रहा है। एजु सिटी के अंतर्गत NIFT और NIELIT को भूमि आवंटन की प्रक्रिया प्रगति पर है। डिजाइन और आईटी शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। उच्च शिक्षा संस्थानों का क्लस्टर विकसित होगा। देश विदेश के नामी शैक्षणिक संस्थानों के आने से नवा रायपुर ज्ञान केंद्र के रूप में उभरेगा।

मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि नगर तथा ग्राम निवेश विभाग द्वारा भी बीते दो साल में उल्लेखनीय कार्य किये गये हैं। नियमों को अधिक सरल, व्यावहारिक और किफायती बनाने के उद्देशेय से राज्य में पहली बार किफायती जन आवास नियम, 2025 लागू किया गया है। इससे आवास निर्माण को प्रोत्साहन मिलेगा। नागरिकों और डेवलपर्स दोनों को लाभ होगा। अब कृषि भूमि में भी किफायती आवास स्वीकार किया गया है। प्रक्रिया सरल और समयबद्ध हुई है। कालोनाइजर्स द्वारा सामुदायिक खुले स्थान की अनिवार्यता 10 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत की गई है। इससे परियोजनाओं की लागत में कमी आएगी। किफायती आवास अधिक व्यवहार्य बनेंगे। फिर भी आवश्यक खुले स्थान सुरक्षित रहेंगे।

इसके अतिरिक्त केंद्रीय रिफार्म के अंतर्गत छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम 1984 में भी संशोधन किये गये है। औद्योगिक क्षेत्रों में न्यूनतम पहुँच मार्ग की चौड़ाई कम की गई है। अब 7.5 से 9 मीटर चौड़ाई स्वीकार्य है। पहले यह 12 मीटर होनी अनिवार्य थी। इससे भूमि का बेहतर उपयोग संभव होगा। औद्योगिक क्षेत्रों में ग्राउंड कवरेज 60 प्रतिशत से बढाकर 70 प्रतिशत किया गया है। उद्योगों को अधिक निर्माण क्षेत्र मिलेगा। उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी। इससे औद्योगिक विस्तार आसान होगा।

छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा उद्योगों द्वारा पर्यावरणीय उत्सर्जनों के निगरानी हेतुरियल टाइम सिस्टम लागू किया गया है। ऑनलाइन के माध्यम से निरंतर निगरानी हो रही है, जिससे पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ी है। उत्सर्जन सीमा से अधिक होने पर तुरंत अलर्ट जारी होता है। तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई संभव होती है। नियमों के पालन में सख्ती आई है। स्वचालित नोटिस प्रणाली लागू की गई है। इससे प्रशासनिक प्रक्रिया तेज हुई है तथा मानव हस्तक्षेप पर निर्भरता कम हुई है। कॉमन हज़ार्डस, अपशिष्ट उपचार, भंडारण और निपटान सुविधा विकसित की गई है, यह औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन का वैज्ञानिक समाधान है। नियामक व्यवस्था अधिक प्रभावी बनी है। इससे पर्यावरणीय जोखिम कम होंगेतथा उद्योगों को सुरक्षित विकल्प मिलेगा। कॉमन हजारडस वेस्ट अप्रैल 2025 से पूर्णतः क्रियाशील हो जाएगी। इसकी लैंडफिल क्षमता 60,000 मीट्रिक टन प्रतिवर्ष है। जिससे दीर्घकालिक अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण मानकों का पालन सुनिश्चित होगा।

उन्होंने बताया कि आवास एवं पर्यावरण विभाग द्वारा किए गए सुधार वित्तीय अनुशासन को दर्शाते हैं। ऋण मुक्त संस्थान इसकी स्पष्ट मिसाल हैं। विकास को जिम्मेदारी से जोड़ा गया है। संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग हुआ है। नागरिक केंद्रित सुधारों को सभी योजनाओं में प्राथमिकता दी गई है। डिजिटल सेवाओं से सुविधा और पारदर्शिता बढ़ी है। सेवा वितरण में समय और लागत दोनों की बचत हुई है। नागरिकों का भरोसा मजबूत हुआ है। औद्योगिक निवेश और रोजगार सृजन पर समान रूप से ध्यान दिया गया है। युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर अवसर बढ़े हैं। राज्य की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ हो रही है। नवा रायपुर विकास का केंद्र बन रहा है। पर्यावरण संरक्षण को विकास का अभिन्न अंग बनाया गया है। तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली लागू की गई है। सतत विकास की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। प्राकृ तिक संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो रही है। नवा रायपुर अटल नगर इन सभी प्रयासों का जीवंत उदाहरण बनकर उभरा है। ऋण मुक्त, निवेश अनुकूल और भविष्य तैयार शहर के रूप में इसकी पहचान बनी है।

आवास एवं पर्यावरण विभाग की उपलब्धियाँ छत्तीसगढ़ को वित्तीय रूप से सक्षम, निवेश-अनुकूल, पर्यावरण-संवेदनशील और नागरिक केंद्रित राज्य के रूप में स्थापित करती हैं। विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में विभाग द्वारा की गई पहल अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और इसके लिए दीर्घकालीन विकास की ठोस नींव तैयार हुई है। इस अवसर पर अनुराग सिंह देव, अध्यक्ष, छत्तीसगढ गृह निर्माण मंडल, नन्द कुमार साहू, अध्यक्ष, रायपुर विकास प्राधिकरण, विधायक रायमुनी भगत, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विजय दिवस पर शहीदों को किया नमन

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विजय दिवस (16 दिसंबर) के अवसर पर राष्ट्र के वीर शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विजय दिवस भारतीय सेना के शौर्य, साहस और अदम्य पराक्रम का गौरवपूर्ण प्रतीक है, जो देशवासियों के हृदय में गर्व और कृतज्ञता का भाव जाग्रत करता है।

मुख्यमंत्री साय ने 1971 के ऐतिहासिक युद्ध का स्मरण करते हुए कहा कि हमारे वीर जवानों ने असाधारण साहस, त्याग और बलिदान का परिचय देकर देश की अखंडता और संप्रभुता की रक्षा की। उनके पराक्रम से न केवल भारत की सैन्य शक्ति विश्व मंच पर स्थापित हुई, बल्कि मानवीय मूल्यों और राष्ट्रधर्म की मिसाल भी प्रस्तुत हुई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीदों का बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्रभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण की अमर प्रेरणा है। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे देशभक्ति, अनुशासन और एकता के मूल्यों को आत्मसात करते हुए राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय सहभागिता निभाएं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शहीदों के आदर्शों पर चलना, राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना और देश सेवा के लिए सदैव तत्पर रहना ही विजय दिवस पर उन्हें सच्ची और स्थायी श्रद्धांजलि है।

मुख्यमंत्री से सतनाम पंथ के पदाधिकारियों ने की सौजन्य मुलाकात

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज विधानसभा स्थित उनके कार्यालय कक्ष में विधायक सम्पत अग्रवाल के नेतृत्व में सतनाम पंथ के पदाधिकारियों ने सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री साय को 28 दिसम्बर को परम् पूज्य गुरुघासी दास बाबा की जयंती महोत्सव के अवसर पर महासमुन्द जिले के ग्राम साजापाली में आयोजित कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए आमंत्रित किया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सतनाम पंथ के पदाधिकारियों का स्वागत करते हुए आमंत्रण के लिए धन्यवाद दिया तथा पूज्य बाबा गुरुघासी दास के सामाजिक और आध्यात्मिक संदेशों को समाज के लिए प्रेरणादायी बताया।

इस अवसर पर लखनमुनि महाराज, अभय घृतलहरे सहित सतनाम पंथ के अन्य प्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।

सही पेंशन सही पेंशनधारी को सही समय पर: SPARSH डिजिटल पेंशन प्लेटफ़ॉर्म

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परिचय:

सिस्टम फॉर पेंशन एडमिनिस्ट्रेशन - रक्षा (SPARSH), एक फ्लैगशिप डिजिटल इंडिया पहल, देश का पहला एंड-टू-एंड डिजिटल पेंशन प्लेटफ़ॉर्म बन गया है। इसे डिफेंस अकाउंट्स डिपार्टमेंट (DAD) द्वारा PCDA (Pensions), प्रयागराज के माध्यम से संचालित किया जाता है। नवंबर 2025 तक SPARSH ने भारत और नेपाल में 31.69 लाख रक्षा पेंशनधारियों को ऑनबोर्ड किया है। यह पहले 45,000 से अधिक एजेंसियों द्वारा संचालित विखंडित प्रणाली की जगह एक संगठित, पारदर्शी और जवाबदेह डिजिटल ढांचे के रूप में कार्य करता है।

मुख्य उपलब्धियाँ:

  1. 94.3% लेगेसी विसंगति मामलों का समाधान:

    • पिछले सिस्टम से माइग्रेट किए गए 6.43 लाख विसंगति मामलों में से 6.07 लाख को पेंशनधारियों के हक को प्रभावित किए बिना सामान्यीकृत किया गया।

  2. वरिष्ठ और गैर-तकनीकी पेंशनधारियों के लिए व्यापक आउटरीच:

    • देशभर में 284 SPARSH आउटरीच प्रोग्राम और 194 रक्षा पेंशन समाधान आयोजन आयोजित किए गए।

    • इन कार्यक्रमों में 8,000 से अधिक शिकायतों का तत्काल समाधान किया गया।

  3. पारदर्शिता और शिकायत निवारण में सुधार:

    • पेंशनधारी अब ऑनलाइन पूरी पेंशन जानकारी देख सकते हैं और आसानी से सुधार के लिए आवेदन कर सकते हैं।

    • औसत शिकायत निवारण समय अप्रैल 2025 में 56 दिन से घटकर नवंबर 2025 में 17 दिन हो गया।

    • DAD ने 73% संतुष्टि स्कोर प्राप्त किया, जो सभी मंत्रालयों/विभागों में 5वें स्थान पर है।

  4. DLC 4.0 अभियान:

    • 1–30 नवंबर 2025 के दौरान, डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट (DLC) 4.0 अभियान के तहत DAD ने 202 कार्यालय, 4.63 लाख कॉमन सर्विस सेंटर्स, 15 बैंक और 27 नोडल अधिकारियों के माध्यम से अभियान चलाया।

    • 30 नवंबर 2025 तक 20.94 लाख DLCs जारी किए गए - जो सभी विभागों में सबसे अधिक हैं।

  5. भुगतान और OROP-III:

    • FY 2024–25 में रक्षा पेंशन बजट ₹1,57,681 करोड़ SPARSH के माध्यम से रियल-टाइम भुगतान किया गया।

    • OROP-III, जुलाई 2024 में लागू, ने 20.17 लाख लाभार्थियों को सिर्फ 15 दिनों में ₹1,224.76 करोड़ का त्वरित वितरण सुनिश्चित किया।

निष्कर्ष:

SPARSH भारत की सबसे बड़ी एकीकृत पेंशन प्रणाली और रक्षा कर्मियों के लिए एकमात्र पूर्णत: डिजिटल पेंशन समाधान है। यह सरकार की पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के प्रति सम्मान, देखभाल और समय पर समर्थन सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

जल जीवन मिशन (JJM) – हर घर जल: ग्रामीण परिवारों के लिए नल कनेक्शन की उपलब्धता और निगरानी

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परिचय

अगस्त 2019 से, भारत सरकार जल जीवन मिशन (JJM) – हर घर जल को राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ साझेदारी में लागू कर रही है, जिसका उद्देश्य देश के प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक नल कनेक्शन द्वारा पीने के पानी की सुविधा पहुँचाना है। “पीने का पानी” एक राज्य विषय है, इसलिए योजना, अनुमोदन, क्रियान्वयन, संचालन और रख-रखाव की जिम्मेदारी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की होती है। भारत सरकार तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करके राज्यों का समर्थन करती है।

योजना का संचालन और मार्गदर्शन

राज्यों को JJM के प्रभावी योजना और क्रियान्वयन में मदद करने के लिए विस्तृत ऑपरेशनल गाइडलाइन साझा की गई हैं, जो योजना, निष्पादन, गुणवत्ता आश्वासन, निगरानी और बनाए रखी जाने वाली बुनियादी संरचना के सभी पहलुओं को कवर करती हैं।

भारत सरकार समय-समय पर समीक्षा बैठकों और बहु-आयामी टीमों के दौरे के माध्यम से राज्यों के साथ मिशन के क्रियान्वयन की समीक्षा करती है और सुधार के क्षेत्रों को उजागर करती है।

प्रौद्योगिकी का उपयोग

  • JJM में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए तकनीक का उपयोग किया जाता है।

  • भौतिक और वित्तीय प्रगति JJM–IMIS (Integrated Management Information System) पर रिपोर्ट की जाती है।

  • सभी नल कनेक्शन परिवार के मुखिया के आधार कार्ड से लिंक किए जाते हैं।

  • निर्माण कार्य के तहत बनाए गए संपत्तियों की जियो-टैगिंग की व्यवस्था की गई है।

गुणवत्ता नियंत्रण और तृतीय पक्ष निरीक्षण

  • भुगतान से पहले तीसरे पक्ष के निरीक्षण और प्रमाणन को अनिवार्य किया गया है।

  • राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को तीसरे पक्ष निरीक्षण एजेंसियों (TPIAs) को सूचीबद्ध करने का अधिकार है, जो कार्य की गुणवत्ता, निर्माण सामग्री और मशीनरी की गुणवत्ता की जांच करें।

निगरानी और सुधारात्मक कदम

  • अप्रैल 2025 से, राज्यों द्वारा हर महीने चार योजनाओं का यादृच्छिक निरीक्षण किया जा रहा है।

  • राष्ट्रीय WASH विशेषज्ञों (NWEs) के लिए निगरानी ढांचे को मजबूत किया गया है, जिसमें गुणवत्ता के मानक और TPI के ToR को संशोधित किया गया है।

  • IMIS के माध्यम से IT निगरानी का विस्तार किया गया है, जिससे जिला और ग्राम पंचायत स्तर के अधिकारियों को भी निगरानी की सुविधा मिली है।

  • राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को JJM में रिपोर्ट की गई अनियमितताओं (गुणवत्ता या वित्तीय) के प्रति नियमित रूप से सचेत किया जाता है और शून्य सहिष्णुता अपनाने के लिए निर्देशित किया गया है।

  • 32 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा रिपोर्ट किए गए अनुसार, कुल 17,036 शिकायतें मिलीं, जिनमें वित्तीय अनियमितताएँ और कार्य की खराब गुणवत्ता शामिल हैं।

  • राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा कुल 621 विभागीय अधिकारियों, 969 ठेकेदारों और 153 TPIAs के खिलाफ कार्रवाई की गई।

स्रोत: यह जानकारी जल शक्ति राज्य मंत्री वी. सोमन्ना ने आज राज्य सभा में लिखित उत्तर में दी।

गाजियाबाद और नोएडा में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक

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पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने आज गाजियाबाद और नोएडा के कार्ययोजनाओं की विस्तृत समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय बैठक की। यह NCR में शहर-विशेष कार्ययोजनाओं की श्रृंखला की पहली समीक्षा थी, जो आने वाले दिनों में राज्य-स्तरीय समीक्षा में समापन करेगी। यह समीक्षा पूर्व निर्धारित प्रारूप में की जा रही है, जैसा कि मंत्री ने 03.12.2025 को आयोजित पूर्व समीक्षा बैठक में निर्देशित किया था, ताकि प्रगति का आकलन किया जा सके और स्थल पर क्रियान्वयन को मजबूत किया जा सके।

समीक्षा के मुख्य बिंदु

दोनों शहरों के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रस्तुतियाँ दीं, जिनमें किए गए कार्यों की जानकारी शामिल थी। कार्ययोजनाओं की समीक्षा निम्नलिखित प्रमुख मानकों के आधार पर की गई:

  • वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम का उपयोग;

  • औद्योगिक इकाइयों द्वारा निर्धारित प्रदूषण मानकों का पालन;

  • वाणिज्यिक इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) फ्लीट की स्थिति और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धता;

  • सार्वजनिक परिवहन और पार्किंग सुविधाओं को सुदृढ़ करना;

  • निर्माण और विध्वंस (C&D) अपशिष्ट तथा नगर निगम ठोस अपशिष्ट (MSW)/पूर्व अपशिष्ट प्रबंधन के लिए आधारभूत संरचना बढ़ाना;

  • धूल नियंत्रण के लिए सड़कों की पूरी पक्की/टाइलिंग;

  • मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीन (MRSM) और एंटी-स्मॉग गन/वाटर स्प्रिंकलर का उपयोग;

  • पथ और खुले क्षेत्रों का हरियालीकरण;

  • जन भागीदारी पहलें, जैसे IEC गतिविधियाँ और ऐप-आधारित शिकायत निवारण तंत्र।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) से अपडेट

मंत्री ने CPCB से ऑनलाइन लगातार उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (OCEMS) की स्थापना की स्थिति पर जानकारी ली और औद्योगिक इकाइयों के निरीक्षण तथा हैंडहोल्डिंग समर्थन की समीक्षा की। उन्होंने OCEMS स्थापना के 31.12.2025 की समय सीमा का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया और अमान्य इकाइयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा। CPCB और SPCB को परि-शहरी क्षेत्रों में प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों का निरीक्षण और आवश्यक सुधारात्मक उपाय करने के लिए निर्देशित किया गया।

अन्य प्रमुख निर्देश और सुझाव

  • मंत्री ने Delhi-NCR में शहर कार्ययोजनाओं के लिए प्रयुक्त मानकों को और परिष्कृत करने और पूरे NCR के लिए प्रगति का आकलन करने का निर्देश CAQM को दिया।

  • राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के मानकों को अपग्रेड करने और बेहतर प्रदर्शन करने वाले शहरों को निधि आवंटन में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया।

  • जन प्रतिनिधियों और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया, ताकि प्रदूषण नियंत्रण एक सच्ची जन भागीदारी आंदोलन बन सके।

  • नगर पालिका को वन विभाग के साथ मिलकर गर्मी-प्रतिरोधी, कम जल-संवेदनशील स्थानीय पौधों और घासों की रोपाई करने का सुझाव दिया।

  • विभिन्न सरकारी और नगर पालिका एजेंसियों के समन्वय से एकीकृत अपशिष्ट प्रबंधन योजना बनाने का निर्देश दिया, ताकि संसाधनों की दोहराव और सिलो दृष्टिकोण से बचा जा सके।

  • शहरी खुली जगहों के हरियालीकरण और बेहतर शहरी योजना के लिए SOP तैयार करने का अनुरोध CAQM से किया।

यातायात और सार्वजनिक परिवहन

  • दिल्ली-NCR में लोकप्रिय मार्गों और भारी यातायात गलियारों की पहचान कर, इन प्रमुख मार्गों पर पूर्ण सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने का सुझाव दिया।

  • नगर पालिका की कार्ययोजनाएँ वर्तमान चुनौतियों के साथ-साथ भविष्य के लिए तैयार होनी चाहिए, जिसमें बढ़ती MSW और C&D अपशिष्ट के प्रबंधन के लिए स्थानों की पूर्व पहचान शामिल हो।

बैठक में उपस्थित वरिष्ठ अधिकारी

  • CAQM के अध्यक्ष

  • MoRTH के सचिव

  • पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी

  • उत्तर प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPSPCB) के प्रतिनिधि

  • गाजियाबाद के DM और नगर आयुक्त

  • नोएडा प्राधिकरण के CEO

पूर्व सैनिकों के पुनर्वास और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए DGR की योजनाएँ और लाभ

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वित्त वर्ष 2024–25 के लिए संकलित आंकड़ों के अनुसार, कुल 28,31,109 पूर्व सैनिक (Ex-Servicemen, ESM) हैं। निदेशालय सामान्य पुनर्वास (DGR) पूर्व सैनिकों के लिए विभिन्न पुनर्वास और पुनर्स्थापन योजना संचालित करता है, जिनका विवरण निम्नलिखित है।

DGR द्वारा संचालित योजनाएँ

  1. DGR प्रायोजित सुरक्षा एजेंसी योजना:

    DGR, पूर्व सैनिकों द्वारा संचालित निजी सुरक्षा एजेंसियों और राज्य ESM कॉर्पोरेशनों को सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइज (CPSEs) और निजी क्षेत्र की कंपनियों/उद्योगों को सुरक्षा गार्ड उपलब्ध कराने के लिए प्रायोजित करता है।

  2. DGR तकनीकी सेवा योजना:

    DGR, पूर्व सैनिकों को तकनीकी सेवाओं के लिए सरकारी प्रतिष्ठानों/कंप्लेक्स में नियुक्त करता है।

  3. ESM कोयला लोडिंग और परिवहन योजना (केवल अधिकारियों के लिए):

    यह योजना कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) और DGR के बीच MoU के आधार पर संचालित होती है। वर्तमान में यह योजना CIL द्वारा 2013 के MoU से एकतरफा वापसी के कारण सुबज्यूडी है।

  4. कोयला टिपर अटैचमेंट योजना (JCOs/OR के लिए):

    यह योजना ESM कोयला लोडिंग और परिवहन योजना से जुड़ी है।

  5. विधवाओं और विकलांग सैनिकों के लिए टिपर अटैचमेंट योजना:

    65 वर्ष तक की विधवाओं और 50% या अधिक विकलांगता वाले सैनिकों के लिए यह योजना उपलब्ध है।

  6. LPG/रिटेल आउटलेट (पेट्रोल/डीज़ल) वितरण के लिए DGR पात्रता प्रमाण पत्र जारी करना:

    ESM, युद्ध विधवाएँ, युद्ध में मृत या घायल सैनिकों के आश्रित, और शांति में युद्ध से संबंधित कारणों से विकलांग पूर्व सैनिक पात्र हैं।

  7. COCO रिटेल आउटलेट प्रबंधन:

    इच्छुक ESM (अधिकारी और JCOs) को COCO आउटलेट के लिए प्रायोजित किया जाता है, यदि उन्होंने किसी अन्य सरकारी/ DGR लाभ का उपयोग नहीं किया है।

  8. CNG स्टेशन प्रबंधन (NCR/पुणे में):

    इच्छुक ESM को IGL (नई दिल्ली एवं NCR) और MNGL (पुणे/नासिक) की आवश्यकता पर नामांकित किया जाता है।

  9. मदर डेयरी मिल्क बूथ और फलों एवं सब्ज़ियों (SAFAL) की दुकानें (NCR में):

    ESM को 60 वर्ष तक Milk/SAFAL बूथ चलाने के लिए नामांकित किया जाता है। वे इन आउटलेट्स के संचालन से अपने जीवनयापन और उद्यमिता कौशल को बढ़ाते हैं।

  10. प्रधान मंत्री भारतीय जनऔषधि योजना (PMBJP) में पूर्व सैनिकों का समावेशन:

    PMBJP के तहत देशभर में जेनेरिक मेडिसिन फार्मेसियाँ स्थापित की जाती हैं। यह योजना जून 2023 में DGR द्वारा लॉन्च की गई।

  11. पुनर्वास प्रशिक्षण/कौशल विकास कोर्स:

    DGR का प्रशिक्षण निदेशालय भारतीय सशस्त्र बलों के सेवानिवृत्त/सेवानिवृत्त होने वाले कर्मियों के लिए प्रशिक्षण/कौशल विकास कोर्स आयोजित करता है।

    • अधिकारी: 60% कोर्स फीस MoD/DGR द्वारा और 40% व्यक्तिगत अधिकारी द्वारा। विधवाएँ भी पात्र हैं।

    • JCOs/OR & समकक्ष: 100% कोर्स फीस MoD/DGR द्वारा। विधवाएँ भी पात्र हैं।

लाभार्थी विवरण

  • कुल 67,316 पूर्व सैनिक DGR की रोजगार/स्वरोजगार योजनाओं से लाभान्वित हुए।

  • FY 2024–25 में कुल 11,589 सेवानिवृत्त और रिटायर्ड अधिकारी/JCOs/OR को DGR की कौशल विकास योजनाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के तहत प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

स्वास्थ्य सुविधाएँ (ECHS)

  • पूर्व सैनिक अनुदानित स्वास्थ्य योजना (ECHS) ने 2024–25 में पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा देखभाल प्रदान की।

  • 427 पॉलिक्लिनिक भारत भर में और नेपाल में 6 पॉलिक्लिनिक के माध्यम से सेवा दी गई।

  • ECHS के तहत स्वास्थ्य सुविधाएँ उन पाँच जिलों में भी बढ़ाई गई, जहां पॉलिक्लिनिक नहीं थे।

  • सरकार ने 21 नई ECHS पॉलिक्लिनिक भारतभर में स्वीकृत कीं; जिनमें से पाँच नए जिलों के लिए हैं।


ASI ने प्रोजेक्ट मौसाम पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की

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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने प्रोजेक्ट मौसाम के अंतर्गत “इंडियन ओशन क्षेत्र में समुद्री नेटवर्क के संगम पर द्वीप” शीर्षक से एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। यह राष्ट्रीय कार्यशाला नवंबर 2025 में नई दिल्ली में आयोजित की गई थी, और इसका उद्देश्य प्रोजेक्ट मौसाम के थीमैटिक फ्रेमवर्क दस्तावेज़ को अंतिम रूप देने के लिए अंतरविषयक इनपुट और दृष्टिकोण एकत्रित करना था। यह दस्तावेज़ परियोजना के लक्ष्य, उद्देश्य, दायरा और गतिविधियों के साथ-साथ भविष्य के लिए रोडमैप का विवरण प्रस्तुत करता है।

कार्यशाला के आयोजन के लिए ASI के आवंटित बजट से ₹30 लाख की राशि स्वीकृत की गई थी, और इसका लगभग ₹25,70,182/- व्यय हुआ।

प्रोजेक्ट मौसाम में संयुक्त अंतरराष्ट्रीय नामांकन, अनुसंधान और प्रलेखन, तथा साझेदार देशों के बीच क्षमता निर्माण शामिल है।

यह जानकारी आज लोकसभा में संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने एक लिखित उत्तर में दी।

धान खरीदी अव्यवस्था पर कांग्रेस का काम रोको प्रस्ताव, सरकार को घेरा

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 CG Assembly Winter Session 2025: छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र के आज दूसरे दिन धान खरीदी में अव्यवस्था को लेकर सदन में तीखा टकराव देखने को मिला। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने धान खरीदी की बदहाल व्यवस्था को लेकर काम रोको प्रस्ताव पेश किया। कांग्रेस ने सभी कार्य स्थगित कर इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की मांग की।


नेता प्रतिपक्ष ने सदन में आरोप लगाया कि किसानों को समय पर टोकन नहीं मिल रहे हैं, पंजीयन प्रक्रिया जटिल बना दी गई है और कई जगहों पर खरीदी लगभग ठप है। उन्होंने कहा कि सूखत के नाम पर अतिरिक्त कटौती की जा रही है और बोरे निर्धारित वजन से कम हैं। धान का उठाव नहीं होने से किसान गंभीर परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

डॉ. महंत ने कहा कि पंजीयन में जानबूझकर जटिलताएं पैदा की गई हैं। गिरदावरी में भारी त्रुटियां हुई हैं और अब तक करीब 5 प्रतिशत किसानों का पंजीयन नहीं हो पाया है। वन अधिकार पट्टा धारक किसानों का भी पंजीयन नहीं किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को टोकन नहीं मिलने से वे मानसिक दबाव में हैं और कुछ मामलों में आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं।

विपक्ष द्वारा लाए गए स्थगन प्रस्ताव को आसंदी ने स्वीकार कर लिया, जिसके बाद धान खरीदी पर चर्चा की अनुमति दी गई। चर्चा की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने की। उन्होंने कहा कि सरकार धान खरीदना ही नहीं चाहती। किसानों का रकबा लगातार घट रहा है। नेटवर्क और टावर की कमी के कारण कई इलाकों में इंटरनेट नहीं चल पा रहा है, जिससे पोर्टल बार-बार बंद हो रहा है।

भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि किसान पूरे प्रदेश में भटक रहे हैं। उन्होंने महासमुंद जिले की एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि एक किसान ने अत्यधिक दबाव में आकर आत्मघाती कदम उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार धान खरीदी व्यवस्था को चौपट कर इसे निजी हाथों में सौंपना चाहती है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार में किसान धान नहीं बेच पा रहे हैं। लाखों किसान अपनी उपज बेचने से वंचित हैं और लाखों क्विंटल धान सहकारी समितियों में सड़ रहा है। धान का समय पर उठाव नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि एक माह में 35 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई है, लेकिन अव्यवस्था के लिए पूरी सरकार जिम्मेदार है। साथ ही उन्होंने एफसीआई द्वारा पिछले वर्ष का चावल नहीं खरीदे जाने का मुद्दा भी उठाया।

मनरेगा की जगह नया कानून लाने की तैयारी, G RAM G नाम से नया बिल तैयार, जानें क्या होगा फायदा

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 MGNREGA Replacement Plan : मोदी सरकार ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। केंद्र सरकार मनरेगा की जगह एक नया कानून लाने पर विचार कर रही है। इस प्रस्तावित विधेयक का नाम “विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) 2025” रखा गया है, जिसे संक्षेप में VB-G RAM G कहा जाएगा।


सूत्रों के अनुसार, नए कानून के तहत ग्रामीण परिवारों को हर वर्ष 125 दिन के रोजगार की गारंटी देने का प्रावधान किया गया है। यह योजना उन ग्रामीण परिवारों के लिए होगी, जिनके वयस्क सदस्य बिना किसी विशेष कौशल के शारीरिक श्रम करने के लिए तैयार हैं।

सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के अनुरूप ग्रामीण भारत को सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाना है। नया मिशन सशक्तिकरण, समावेशी विकास, विभिन्न योजनाओं के बेहतर तालमेल और हर पात्र परिवार तक लाभ पहुंचाने पर केंद्रित रहेगा।

सरकारी पक्ष का तर्क है कि बीते 20 वर्षों में मनरेगा ने ग्रामीण रोजगार उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाई है, लेकिन गांवों में आए सामाजिक-आर्थिक बदलावों को देखते हुए रोजगार गारंटी कानून को और अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत है।

हालांकि, विपक्ष ने मनरेगा को समाप्त कर नया कानून लाने की योजना पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। विपक्ष का कहना है कि मनरेगा गरीबों की जीवनरेखा है और इसे कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस नए विधेयक पर जल्द ही लोकसभा में विस्तृत चर्चा की जाएगी। उल्लेखनीय है कि इससे पहले 12 दिसंबर को यह खबर सामने आई थी कि केंद्रीय कैबिनेट ने मनरेगा का नाम बदलकर “पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना” रखने को मंजूरी दी है।

MoSPI द्वारा गृह सर्वेक्षणों और शिक्षा सर्वेक्षणों में निष्पक्ष और डिजिटल कवरेज सुनिश्चित

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गृह सर्वेक्षणों में निष्पक्ष कवरेज सुनिश्चित करने के लिए, जो सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा किए जा रहे हैं, नमूना चयन संभाव्यता-आधारित वैज्ञानिक चयन विधियों के माध्यम से किया जाता है। यह नमूना सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में फैला होता है और इसमें ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र दोनों शामिल होते हैं, जिससे कवरेज की समानता और पूर्णता सुनिश्चित होती है।

MoSPI ने लगातार दो गृह उपभोग व्यय सर्वेक्षण (HCES) आयोजित किए—2022-23 (अगस्त 2022–जुलाई 2023) और 2023-24 (अगस्त 2023–जुलाई 2024)। इन सर्वेक्षणों के विस्तृत निष्कर्ष क्रमशः जुलाई 2024 और जनवरी 2025 में जारी किए गए।

MoSPI ने अप्रैल–जून 2025 के दौरान शिक्षा पर व्यापक मॉड्यूलर सर्वेक्षण (CMS) आयोजित किया, जो स्कूल शिक्षा विभाग (DoSEL), शिक्षा मंत्रालय के अनुरोध पर किया गया था। इस सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य गृहस्थी द्वारा स्कूल शिक्षा पर किए गए व्यय का अनुमान तैयार करना है। इसके अलावा, यह सर्वेक्षण उन छात्रों के लिए निजी कोचिंग या ट्यूशन पर किए गए व्यय का अनुमान भी तैयार करता है, जो वर्तमान में स्कूल शिक्षा में नामांकित हैं। इस सर्वेक्षण की रिपोर्ट अगस्त 2025 में जारी की गई।

MoSPI विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करता है, जिसमें नई तकनीकों का समेकन और मौजूदा तकनीकों का उन्नयन शामिल है, ताकि यह आकलन किया जा सके कि ये तकनीकें सर्वेक्षणों में कितनी प्रासंगिक और उपयोगी हैं। इसके अलावा, MoSPI शहरी फ्रेम सर्वेक्षण (UFS) पाँच वर्षीय चरणों में करता है, ताकि संघनित शहरी भौगोलिक इकाइयों का फ्रेम तैयार और बनाए रखा जा सके, जो शहरी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षणों के लिए सैंपलिंग फ्रेम के रूप में काम करता है।

2017-22 चरण से, UFS डिजिटल मोड में किया जा रहा है, जिसमें Geo ICT उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है। इसमें मोबाइल, डेस्कटॉप और वेब आधारित GIS समाधान शामिल हैं, जिन्हें Bhuvan प्लेटफ़ॉर्म पर विकसित किया गया है, और यह राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग केंद्र (NRSC) के सहयोग से तैयार किया गया है।

यह जानकारी आज राज्यसभा में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री, योजना मंत्रालय के स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री और संस्कृति मंत्रालय के राज्य मंत्री श्री राव इंदरजीत सिंह द्वारा दी गई।

नक्सल विरोधी अभियान में IED ब्लास्ट, कोबरा के दो जवान घायल

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान आईईडी विस्फोट की घटना सामने आई है। थाना फरसेगढ़ क्षेत्र के पिल्लूर–कांडलापरती इलाके में हुए इस विस्फोट में कोबरा बटालियन के दो जवान मामूली रूप से घायल हो गए।


जानकारी के अनुसार, डीआरजी, एसटीएफ और कोबरा बटालियन की संयुक्त टीम नक्सल विरोधी सर्च ऑपरेशन पर रवाना हुई थी। अभियान के दौरान जैसे ही टीम पिल्लूर–कांडलापरती क्षेत्र में पहुंची, नक्सलियों द्वारा पहले से लगाए गए आईईडी में विस्फोट हो गया।

विस्फोट की चपेट में आने से कोबरा बटालियन के दो जवान घायल हो गए। घटना के तुरंत बाद दोनों को प्राथमिक उपचार दिया गया और बेहतर इलाज के लिए रायपुर रेफर किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक दोनों जवान खतरे से बाहर हैं और उनकी हालत स्थिर बनी हुई है।

घटना के बाद सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया है। नक्सलियों की मौजूदगी और उनके मूवमेंट को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। सुरक्षा बल क्षेत्र में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं।

केरल के ग्रामीण स्थानीय निकायों को XV वित्त आयोग के तहत ₹260.20 करोड़ जारी

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केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025–26 के लिए केरल की ग्रामीण स्थानीय निकायों को पंद्रहवें वित्त आयोग (XV FC) के अंतर्गत ₹260.20 करोड़ की राशि जारी की है। यह राशि अनटाइड ग्रांट की पहली किस्त है और राज्य के सभी 14 जिला पंचायतों, 152 ब्लॉक पंचायतों तथा 9,414 ग्राम पंचायतों को कवर करती है।

ग्रामीण स्थानीय निकायों/पंचायती राज संस्थाओं (RLBs/PRIs) के लिए पंद्रहवें वित्त आयोग की अनुदान राशि जारी करने की सिफारिश पंचायती राज मंत्रालय तथा जल शक्ति मंत्रालय (पेयजल एवं स्वच्छता विभाग) द्वारा की जाती है, जिसके बाद वित्त मंत्रालय इसे एक वित्तीय वर्ष में दो किश्तों में जारी करता है।

अनटाइड ग्रांट का उपयोग ग्रामीण स्थानीय निकायों/पंचायती राज संस्थाओं द्वारा संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 29 विषयों के अंतर्गत स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार किया जा सकता है, हालांकि इसका उपयोग वेतन और अन्य स्थापना व्यय के लिए नहीं किया जा सकता।

वहीं, टाइड ग्रांट का उपयोग मूलभूत सेवाओं के लिए किया जाता है, जिनमें शामिल हैं—
(क) स्वच्छता एवं खुले में शौच मुक्त (ODF) स्थिति का रखरखाव, जिसमें घरेलू कचरे, मानव अपशिष्ट तथा फीकल स्लज का प्रबंधन एवं उपचार शामिल है, तथा
(ख) पेयजल आपूर्ति, वर्षा जल संचयन एवं जल पुनर्चक्रण से संबंधित कार्य।

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