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बाबा गुरू घासीदास जी के बताए मार्ग पर काम कर रही हमारी सरकार - मुख्यमंत्री साय

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय गिरौदपुरी में संत समागम एवं गुरुदर्शन मेले में  हुए शामिल

गुरूदर्शन व पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की खुशहाली व समृद्धि का लिया आशीर्वाद

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय रविवार को बाबा गुरु घासीदास जी की जन्मभूमि एवं तपोभूमि गिरौदपुरी धाम में आयोजित  संत समागम एवं गुरुदर्शन मेला में शामिल हुए। उन्होंने पूज्य गुरुगद्दी का दर्शन एवं पूजा - अर्चना कर प्रदेशवासियों की खुशहाली और समृद्धि के लिये कामना की।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने  कहा कि बाबा गुरू घासीदास के मनखे- मनखे  एक समान का सन्देश, मानव को मानव से जोड़ने वाला और सद्भाव व समरसता बढ़ाने वाला है। बाबा गुरु घासीदास जी के बताए मार्ग पर हमारी सरकार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार के द्वारा गिरौदपुरी का सतत् विकास किया जा रहा है। विशाल जैतखाम निर्माण से लेकर अनेक सुविधाओं का विस्तार यहां किया गया है। उन्होंने जिला प्रशासन द्वारा किये गए जनसुविधा विस्तार कार्य की सराहना की और कहा कि वेबसाईट और मोबाइल एप्प से भी मेले में उपलब्ध सुविधा की जानकारी श्रद्धालु ले सकते हैं। उन्होंने इस दौरान वहां चस्पा किये गए क्यूआर कोड को अपने मोबाइल से स्कैन  कर जानकारी ली।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर मुख्य मंदिर का प्रसाद श्रद्धालुओं को वितरित किया। मुख्यमंत्री के हाथों स्थानीय श्रद्धालु एवं स्व सहायता समूह की महिलाएं प्रसाद ग्रहण कर उत्साहित हुए। गौरतलब है कि गिरौदपुरी में तीन दिवसीय संत समागम एवं गुरू दर्शन मेला 22 फ़रवरी से प्रारंभ होकर 24 फरवरी 2026 तक चलेगा। प्रदेश सहित देश एवं विदेश से भी सतनाम पंथ के अनुयायी यहां मेले में आए हुए हैं। 

इस अवसर पर धर्मगुरू गुरु बालदास साहेब, सांसद कमलेश जांगड़े, राजिम विधायक रोहित साहु, जिला पंचायत अध्यक्ष रायपुर नवीन अग्रवाल, पुलिस महानिरीक्षक अमरेश मिश्रा, कलेक्टर दीपक सोनी, पुलिस अधीक्षक भावना गुप्ता,डीएफओ गणवीर धम्मशील, पूर्व सांसद गुहा राम अजगले, पूर्व विधायक डॉ सनम जांगड़े सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि वरिष्ठ अधिकारी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

भारत के मुख्य न्यायाधीश ने छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी की गौरवशाली विरासत को चिह्नित करते हुए ई-स्मारिका का डिजिटल विमोचन किया

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रायपुर/छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा आज दिनांक 22 फरवरी, 2026 को होटल बेबीलॉन कैपिटल, रायपुर में भारत के मुख्य न्यायमूर्ति माननीय न्यायमूर्ति सूर्यकांत के सम्मान में एक गरिमामय अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया।

उपरोक्त समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उच्चतम न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति पमिदिघनतम नरसिम्हा तथा माननीय न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में एवं विशेष अतिथि के रूप में माननीय न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा मुख्य न्यायमूर्ति छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की गरिमामयी उपस्थिति रही।

भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने आज छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी की ई-स्मारिका का डिजिटल विमोचन किया। "नर्चरिंग द फ्यूचर ऑफ द ज्यूडिशियरी" शीर्षक वाली यह डिजिटल प्रकाशन 2003 में अपनी स्थापना के बाद से अकादमी की उत्कृष्टता की यात्रा का स्मरण कराती है।

अपने स्वागत भाषण में माननीय न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा मुख्य न्यायाधीश भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत का हार्दिक अभिनंदन करते हुए कहा कि संवैधानिक मूल्यों तथा न्यायिक निष्पक्षता के प्रति गहन प्रतिबद्धता संपूर्ण न्यायिक समुदाय को प्रेरित करती है। माननीय न्यायाधीश की उपस्थिति छत्तीसगढ़ की न्यायपालिका के लिए गौरव और प्रेरणा के स्रोत हैं। उन्होंने कहा कि हम आज एक ऐतिहासिक पल के साक्षी हैं- ई-स्मारिका के जो छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी की परिवर्तनकारी यात्रा को सुंदर रूप में प्रस्तुत करती है। यह अकादमी राज्य में न्यायिक उत्कृष्टता की आधारशिला है। साधारण प्रारंभ से आधुनिक विधिक प्रशिक्षण के सशक्त केंद्र के रूप में विकसित होने तक की इसकी यात्रा एक सक्षम और सुदृढ़ न्यायपालिका के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यह ई-स्मारिका मात्र एक डिजिटल दस्तावेज नहीं बल्कि न्यायिक शिक्षा के प्रति हमारे समर्पण आधारभूत संरचना के विकास तथा डिजिटल युग के अनुरूप हमारे अनुकूलन का सजीव दस्तावेज है।

माननीय न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा मुख्य न्यायाधीश छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने माननीय न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा तथा माननीय न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा का भी हार्दिक स्वागत करते हुए कहा कि उनका व्यक्तित्व विधि के शासन के प्रति समर्पण का प्रतीक है। माननीय न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा का उच्च न्यायालय से जुड़ाव स्थानीय न्यायाधीशगण और अधिवक्ता समुदाय को निरंतर प्रेरित करता है।

अपने संबोधन में भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि सम्मान के अवसर सामूहिक गौरव के क्षण होते हैं- ये संस्थाओं को एक-दूसरे को गहराई से समझने का अवसर प्रदान करते हैं। ये केवल कृतज्ञता ही नहीं, बल्कि आत्मचिंतन के भी अवसर होते हैं। उन्होंने बल देकर कहा कि प्रत्येक न्यायाधीश को अपने दायित्व में एक संरक्षक के रूप में दृढ़ रहना चाहिए- सिद्धांतों में अडिग आचरण में संतुलित और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा में तत्पर। साथ ही उन्होंने यह भी सावधान किया कि न्यायालय स्वयं को समाज से पृथक नहीं कर सकते। जो न्यायालय स्वयं को सीमित कर लेता है वह अप्रासंगिक होने का जोखिम उठाता है। उच्च न्यायालय को दंतेवाड़ा, बस्तर, सरगुजा और राज्य के प्रत्येक जिले तक अपनी दृष्टि और संवेदनशीलता का विस्तार करना चाहिए जहाँ न्याय की अपेक्षा है।

भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश ने छत्तीसगढ़ के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि यह राज्य भारत की विविधता का लघु रूप है। "छत्तीसगढ़" नाम का पारंपरिक अर्थ "छत्तीस किलों की भूमि" माना जाता है। उन्होंने  कहा कि ये किले केवल रक्षा संरचनाएँ नहीं थे बल्कि शासन प्रशासन और सामुदायिक जीवन के केंद्र थे। वे केवल सैन्य शक्ति से नहीं बल्कि जिन मूल्यों की रक्षा करते थे उनसे सुदृढ़ बने रहे। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि संवैधानिक न्यायालयों को लोकतंत्र के आधुनिक किलों के रूप में देखा जा सकता है। वे भूभाग की नहीं, अधिकारों की रक्षा करते हैं; वे सीमाओं की नहीं, बल्कि सत्ता की संवैधानिक मर्यादाओं की रक्षा करते हैं।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, भारत की सबसे युवा संवैधानिक संस्थाओं में से एक है, जब अपेक्षाकृत युवा उच्च न्यायालय अपने कार्य का विस्तार करता है और अपनी संस्थागत उपस्थिति को सुदृढ़ बनाता है तो  वह पदानुक्रम नहीं बल्कि संवैधानिक परिवार के भीतर भाईचारे की भावना को दर्शाता है। यद्यपि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय आयु में युवा है, किंतु उसने अपने उच्च मानदंड और परंपराएँ स्थापित कर ली हैं।

माननीय मुख्य न्यायाधीश ने आगे कहा कि न्यायिक अकादमी केवल प्रशिक्षण संस्था नहीं है, बल्कि वह स्थान है जहाँ न्यायपालिका की भावी शक्ति का निर्माण होता है। एक युवा उच्च न्यायालय में अकादमी संवैधानिक मूल्यों और संस्थागत संस्कृति को प्रारंभिक स्तर पर स्थापित करने में आधारभूत भूमिका निभाती है। अपने संबोधन के समापन में उन्होंने राज्य के भौगोलिक और आधारभूत चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि दूरी या दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण न्याय से वंचित नहीं किया जा सकता। राज्य के प्रत्येक भाग में संस्थागत उपस्थिति और संवेदनशीलता बनाए रखते हुए न्यायपालिका यह सुनिश्चित कर सकती है कि न्याय प्रत्येक नागरिक तक पहुँचे, चाहे वह किसी भी क्षेत्र में निवास करता हो।

उपरोक्त अभिनंदन एवं विमोचन कार्यक्रम का शुभारम्भ माननीय न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा मुख्य न्यायमूर्ति छत्तीसगढ, बिलासपुर के स्वागत भाषण से हुआ तथा समापन माननीय न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल, न्यायमूर्ति छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उपरोक्त कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के समस्त माननीय न्यायमूर्तिगण, माननीय न्यायमूर्ति पी. सैम कोशी, न्यायमूर्ति तेलंगाना उच्च न्यायालय, विधि विभाग के प्रमुख सचिव, रजिस्ट्रार जनरल, रजिस्ट्री के अधिकारीगण, रायपुर जिला के न्यायाधीशगण एवं उच्च न्यायालय के कर्मचारीगण की उपस्थिति रही।

सशक्त समाज निर्माण में शिक्षा और संगठन की भूमिका अहम : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज बलौदा बाजार जिले के ग्राम चांपा में आयोजित छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज के दो दिवसीय 80वें महाअधिवेशन में शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत में उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी एवं समाज सुधारक डॉ. खूबचंद बघेल की पुण्य तिथि पर दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की तथा समाज की विभूतियों को पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री का गजमाला पहनाकर आत्मीय स्वागत किया गया।

मुख्यमंत्री साय ने मनवा कुर्मी समाज को परिश्रमी, संगठित और उन्नत कृषक परंपरा वाला समाज बताते हुए कहा कि समाज का योगदान राज्य की प्रगति में महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने 80वें महाअधिवेशन की बधाई देते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में मेल-मिलाप, समन्वय और सकारात्मक निर्णयों को बढ़ावा देते हैं, जिसका लाभ पूरे प्रदेश और देश को मिलता है। उन्होंने कहा कि राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा के गृह ग्राम चांपा में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होना उनके लिए सौभाग्य की बात है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शिक्षा सशक्त समाज निर्माण का सबसे मजबूत आधार है। उन्होंने समाज द्वारा बेटा-बेटी दोनों को शिक्षा से जोड़ने के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षित समाज ही आत्मनिर्भर और प्रगतिशील समाज बनता है। उन्होंने महिला स्वरोजगार को बढ़ावा देने, युवाओं में नशामुक्ति के प्रति जागरूकता और सामाजिक सुधार के प्रयासों को भी सराहनीय बताया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी को पूरा करने में पूरी प्रतिबद्धता से कार्य किया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 18 लाख प्रधानमंत्री आवास पूर्ण किए गए हैं। इस वर्ष समर्थन मूल्य पर 25 लाख 24 हजार किसानों से 141 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान खरीदा गया है तथा होली से पूर्व किसानों को लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की अंतर राशि प्रदान की जाएगी। महतारी वंदन योजना के तहत 70 लाख महिलाओं को अब तक 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी जा चुकी है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर क्षेत्र में अब विकास की नई तस्वीर दिखाई दे रही है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृहमंत्री के संकल्प के अनुरूप मार्च 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में सरकार दृढ़ता से काम कर रही है। नियद नेल्लार योजना के माध्यम से लगभग 400 गांवों में विकास कार्यों को गति दी गई है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ग्राम नरदहा में सामुदायिक भवन निर्माण हेतु 50 लाख रुपये तथा बलौदा बाजार में सामुदायिक भवन के लिए 25 लाख रुपये की राशि प्रदान करने की घोषणा की।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य में पिछले दो वर्षों में उल्लेखनीय विकास हुआ है और किसानों, महिलाओं तथा युवाओं के लिए अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं प्रभावी रूप से लागू की गई हैं।

अधिवेशन में समाज के केंद्रीय अध्यक्ष खोड़स राम वर्मा ने समाज द्वारा लिए गए सामाजिक सुधार के महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी दी। कार्यक्रम में राजिम विधायक रोहित साहू सहित बड़ी संख्या में समाज के पदाधिकारी, महिलाएं, युवा और स्वजातीय बंधु उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत का किया आत्मीय स्वागत

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत के छत्तीसगढ़ आगमन पर पुष्प गुच्छ भेंटकर उनका आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने माननीय मुख्य न्यायाधीश को छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा के प्रतीक स्वरूप राजकीय गमछा, विश्वविख्यात बस्तर दशहरा पर आधारित कॉफी टेबल बुक तथा बेल मेटल से निर्मित भगवान श्रीराम एवं माता शबरी की आकर्षक प्रतिकृति भेंट की। 

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर भारत के सर्वोच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीश न्यायमूर्ति पी. नरसिम्हा एवं न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा तथा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा का स्वागत एवं अभिनंदन किया।

उल्लेखनीय है कि भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (Hidayatullah National Law University) के दीक्षांत समारोह में सम्मिलित होने हेतु छत्तीसगढ़ प्रवास पर आए हैं।

भारत और ब्राज़ील के बीच डाक क्षेत्र में सहयोग हेतु समझौता ज्ञापन (MoU)

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भारत और ब्राज़ील ने डाक क्षेत्र में सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए, जो डाक सेवाओं, डिजिटल परिवर्तन और समावेशी सेवा वितरण में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया और फ्रेडरिको डी सिक्वेरा फिल्हो डाक क्षेत्र सहयोग पर MoU पर हस्ताक्षर के बाद दस्तावेजों का आदान-प्रदान करते हुए।

इस MoU पर भारत सरकार के संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया और ब्राज़ील के संचार मंत्री महामहिम फ्रेडरिको डी सिक्वेरा फिल्हो ने हस्ताक्षर किए। यह समझौता ब्राज़ील के राष्ट्रपति महामहिम लुईज़ इनासियो लूला दा सिल्वा के भारत राज्य दौरे के दौरान संपन्न हुआ।

यह समझौता भारतीय डाक विभाग और ब्राज़ील के संचार मंत्रालय के बीच सहयोग के लिए एक व्यापक ढांचा स्थापित करता है, जिसका उद्देश्य डाक क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी और ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है।

MoU के तहत निम्नलिखित क्षेत्रों में सहयोग किया जाएगा:

  • डाक क्षेत्र की नीतियों और संचालन में सर्वोत्तम प्रथाओं और विशेषज्ञता का आदान-प्रदान

  • सार्वभौमिक सेवा और संबोधित प्रणाली को मजबूत करना

  • डिजिटल परिवर्तन, ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स और डाक वित्तीय सेवाओं में सहयोग

  • क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण और तकनीकी आदान-प्रदान

  • आपसी हित के संयुक्त पहल और रणनीतिक परियोजनाएं

  • यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन (UPU) सहित बहुपक्षीय मंचों में बेहतर समन्वय

  • समावेशी और सतत विकास के लिए दक्षिण–दक्षिण सहयोग को बढ़ावा देना

इस साझेदारी को अधिकारियों और विशेषज्ञों के आदान-प्रदान, संयुक्त कार्यशालाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन तथा संरचित सूचना साझा करने के माध्यम से लागू किया जाएगा।

यह MoU डाक प्रणालियों के आधुनिकीकरण और उनके नेटवर्क को आर्थिक विकास, वित्तीय समावेशन और अंतिम छोर तक सेवा वितरण के इंजन के रूप में उपयोग करने के लिए भारत और ब्राज़ील की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

भारत अपने बड़े पैमाने पर डाक परिवर्तन के अनुभव साझा करेगा, जिसमें डिजिटल सेवाएं, ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स और नागरिक-केंद्रित सार्वजनिक सेवा वितरण शामिल हैं। यह समझौता तेजी से विकसित हो रहे बाजार परिवेश में डाक ऑपरेटरों की वित्तीय स्थिरता और परिचालन दक्षता को मजबूत करने के प्रयासों में भी सहायक होगा।

यह MoU प्रारंभिक रूप से पांच वर्षों के लिए प्रभावी रहेगा, जिसमें स्वचालित नवीनीकरण का प्रावधान होगा, और इसे दोनों देशों के कानूनों और नियमों के अनुसार लागू किया जाएगा।

यह सहयोग भारत–ब्राज़ील रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करता है तथा ग्लोबल साउथ के प्रमुख साझेदारों के रूप में दोनों देशों के बीच गहरे जुड़ाव में योगदान देता है।

भारत और ब्राज़ील के अधिकारी डाक सहयोग पर द्विपक्षीय बैठक करते हुए, जिसकी अध्यक्षता ज्योतिरादित्य सिंधिया और फ्रेडरिको डी सिक्वेरा फिल्हो ने की



भारत निर्वाचन आयोग और राज्य निर्वाचन आयुक्तों का राष्ट्रीय गोलमेज सम्मेलन 2026

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भारत निर्वाचन आयोग (ECI) मंगलवार, यानी 24 फरवरी 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में भारत निर्वाचन आयोग और राज्य निर्वाचन आयुक्तों (SECs) की राष्ट्रीय गोलमेज सम्मेलन का आयोजन करेगा। यह गोलमेज सम्मेलन 27 वर्षों के अंतराल के बाद आयोजित किया जा रहा है। इससे पहले ऐसा सम्मेलन 1999 में आयोजित किया गया था।

गोलमेज सम्मेलन की अध्यक्षता मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार करेंगे, जिसमें निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी भी उपस्थित रहेंगे।

सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के राज्य निर्वाचन आयुक्त अपने कानूनी और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ भाग लेंगे। साथ ही, सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEOs) भी इस सम्मेलन में शामिल होंगे।

गोलमेज सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य निर्वाचन प्रक्रियाओं और लॉजिस्टिक्स के संदर्भ में ECI और SECs के बीच कार्यात्मक समन्वय (सिनर्जी) को बढ़ावा देना है, ताकि उनके-अपने कानूनी ढांचे के भीतर बेहतर सहयोग हो सके। चर्चाओं से विचारों के रचनात्मक आदान-प्रदान और सहकारी संघवाद की भावना को मजबूत करने की उम्मीद है।

दिनभर चलने वाले सम्मेलन में तकनीक साझा करने, ईवीएम (EVM) और मतदाता सूचियों से संबंधित विषयों पर चर्चा होगी, साथ ही निर्वाचन प्रक्रियाओं को मजबूत करने पर भी विचार किया जाएगा।

आयोग के वरिष्ठ अधिकारी हाल ही में लॉन्च किए गए ECINET डिजिटल प्लेटफॉर्म सहित प्रमुख तकनीकी और परिचालन पहलों पर प्रस्तुतियाँ देंगे, जो निर्वाचन सेवाओं को सरल बनाने की अपनी परिवर्तनकारी क्षमता दर्शाएगा।

प्रस्तुतियों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVMs) की मजबूती, पारदर्शिता और सुरक्षा उपायों पर भी प्रकाश डाला जाएगा।

इसके अलावा, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के संदर्भ में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के अनुसार मतदाता पात्रता पर तुलनात्मक प्रस्तुति दी जाएगी, ताकि विभिन्न क्षेत्रों में मतदाता सूची तैयार करने से जुड़े कानूनी ढांचों पर सूचित चर्चा हो सके।

राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) संबंधित राज्यों के कानूनों के तहत 73वें और 74वें संविधान संशोधनों के सशक्त प्रावधानों के अनुसार गठित किए जाते हैं।
अनुच्छेद 243K और 243ZA के तहत, SECs को पंचायतों और नगर निकायों के चुनावों के लिए मतदाता सूची तैयार करने और चुनाव कराने की देखरेख, निर्देशन और नियंत्रण का अधिकार प्राप्त है।


नया रायपुर में वायरल वीडियो से हड़कंप, छात्र-छात्राओं पर लगे आरोप

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी क्षेत्र नया रायपुर से एक विवादित मामला सामने आया है, जहां विदेशी मूल के कुछ छात्र-छात्राओं की कथित आपत्तिजनक हरकतों को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। बताया जा रहा है कि सेक्टर-30 स्थित एक रिहायशी परिसर की पार्किंग में कुछ युवक-युवतियों द्वारा अश्लील गतिविधियां करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद इलाके में हलचल बढ़ गई।


स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं से क्षेत्र का माहौल प्रभावित हो रहा है। जानकारी के अनुसार, संबंधित छात्र-छात्राएं अफ्रीकी मूल के बताए जा रहे हैं और नया रायपुर स्थित निजी विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत हैं। हालांकि उनकी राष्ट्रीयता और पहचान की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

आरोप है कि जब कुछ स्थानीय लोगों ने उन्हें ऐसी हरकतों से मना किया तो विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई। वहीं, कुछ निवासियों ने सोशल मीडिया पर अवैध गतिविधियों से जुड़े होने के आरोप भी लगाए हैं, लेकिन इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

पूरा मामला राखी थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है। पुलिस ने वायरल वीडियो और मिली शिकायतों के आधार पर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि वीडियो की सत्यता, स्थान और संबंधित व्यक्तियों की पहचान की जांच की जा रही है। यदि कानून व्यवस्था भंग करने या आपत्तिजनक कृत्य की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यक्ति—चाहे वह स्थानीय हो या विदेशी—द्वारा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल क्षेत्र में स्थिति सामान्य बनाए रखने के लिए पुलिस सतर्क है।

 

मुख्यमंत्री साय को मिलीं जन-जन की शुभकामनाएं, जन्मदिन पर मुख्यमंत्री निवास बना उल्लास का केंद्र

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के जन्मदिन पर राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास देर रात तक उल्लास और स्नेह के वातावरण से भरा रहा। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, उद्योगपतियों,समाजसेवियों और मीडिया प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को जन्मदिन की शुभकामनाएँ दीं। मुख्यमंत्री को जन्मदिवस के अवसर पर फलों से तौला गया।


मुख्यमंत्री साय ने सभी आगंतुकों से आत्मीयता से मुलाकात की और स्नेह, सम्मान और शुभकामनाओं के लिए कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आप सभी के प्रेम और सहयोग से मैं अभिभूत हूँ। छत्तीसगढ़ के उज्ज्वल भविष्य के लिए हम सभी को मिलकर कार्य करना है। आपका निरंतर समर्थन और आशीर्वाद इसी तरह बना रहे, यही मेरी कामना है।


प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने दी शुभकामनाएं

मुख्यमंत्री निवास में मंत्रीगण,विधायकों और जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री श्री साय को बधाई दी। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह,खाद्य मंत्री श्री दयालदास बघेल,वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन, वन मंत्री श्री केदार कश्यप,महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने मुख्यमंत्री को शुभकामनाएं दीं।


इसके साथ ही विधायकगण धरमलाल कौशिक, अजय चंद्राकर, पुरंदर मिश्रा, मोतीलाल साहू, गुरु खुशवंत साहेब, दीपेश साहू और ललित चन्द्राकर सहित विभिन्न आयोग एवं मंडल के अध्यक्षों, सदस्यों ने भी मुख्यमंत्री से भेंट कर जन्मदिन की बधाई दी।

प्रदेशभर से उमड़ा शुभकामनाओं का सैलाब

मुख्यमंत्री साय को प्रदेश के उद्योगपतियों,व्यापारी संगठनों, खेल जगत के प्रतिनिधियों,समाजिक संगठन, दिव्यांग संगठन,अल्पसंख्यक समाज, समाजसेवियों, शिक्षाविदों और मीडिया जगत के वरिष्ठ जनों ने भी शुभकामनाएँ दीं।

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर सभी का आभार व्यक्त करते हुए प्रदेश के सर्वांगीण विकास और समृद्धि के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को आत्मनिर्भर और विकसित प्रदेश बनाने के लिए सरकार प्रत्येक वर्ग के हित में कार्य कर रही है, और यह प्रयास निरंतर जारी रहेगा।

मुख्यमंत्री ने प्रोजेक्ट धड़कन और जिंदगी मुस्कुराएगी के बच्चों संग बांटी खुशियां

जिला प्रशासन रायपुर एवं स्वास्थ्य विभाग की पहल प्रोजेक्ट धड़कन के तहत हृदय रोग की सर्जरी के बाद बच्चे पारुल, नमन शर्मा और हिमांशु ध्रुव और प्रोजेक्ट जिंदगी मुस्कुराएगी के तहत नाक की सर्जरी के बाद नन्ही प्रेमिन साहू ने भी अपने प्रिय मुख्यमंत्री से मिलकर उन्हें जन्मदिवस की बधाई दी। मुख्यमंत्री बड़ी ही आत्मीयता से इन बच्चों से मिले और उन्हें दुलारते हुए नन्हे नमन शर्मा को अपनी गोद में उठा लिया। मुख्यमंत्री ने छोटी सी उम्र में गंभीर बीमारियों का मुकाबला कर रहे बहादुर बच्चों का खूब हौसला बढ़ाया और बच्चों को गिफ्ट में प्रेरक किताबें भेंट की।

प्रोजेक्ट दिव्य धुन और कला केंद्र के बच्चों ने बांधा समां

मुख्यमंत्री के जन्मदिवस पर प्रोजेक्ट दिव्य धुन के तहत शासकीय दृष्टि एवं श्रवण बाधित विद्यालय मठपुरैना के बच्चों के बच्चों ने गीतों की मधुर प्रस्तुति दी। बच्चों ने बार बार दिन ये आए, अंगना म भारत माता के चिरैया सहित जसजीत, करमा और देवार गीत से समां बांध दिया। मुख्यमंत्री श्री साय बहुत प्रेम से बच्चों से मिले और उनकी कला को सराहा। उन्होंने बच्चों को ट्रैक सूट, लोवर टीशर्ट और प्रोत्साहन राशि भेंट की।

कला केंद्र रायपुर के बच्चे भी अपने चहेते मुख्यमंत्री को जन्मदिन की बधाई देने पहुंचे। कक्षा आठवीं के विद्यार्थी नन्हे आदित्य शर्मा ने अपने द्वारा बनाया मुख्यमंत्री का स्केच उन्हें भेंट किया। वायलिन वादक बच्चे आरीव झा और अमायरा अग्रवाल, तबला वादक योगेश सिंह सहित सभी बच्चों को मुख्यमंत्री ने खूब दुलारा और उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

जन्मदिन की बधाई देने सामाजिक संगठनों और नागरिकों का लगा तांता

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को उनके जन्मदिवस पर बधाई देने बड़ी संख्या में सामाजिक संगठन और नागरिकगण पहुंचे। महिला अधिवक्ताओं ने पगड़ी पहनाकर मुख्यमंत्री का सम्मान किया। सिख समाज ने मुख्यमंत्री को पवित्र कृपाण भेंटकर उन्हें जन्मदिवस की शुभकामनाएं दीं। शदाणी दरबार रायपुर द्वारा मुख्यमंत्री को पवित्र सरोपा भेंट किया गया।

छत्तीसगढ़ रामनामी राम राम भजन संस्था के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को रामनामी मुकुट और शॉल भेंट कर उनका अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री को प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्विद्यालय की बहनों तथा रायपुर प्रेस क्लब, राज्य प्रशासनिक सेवा संघ और छत्तीसगढ़ किसान मोर्चा के सदस्यों ने भी जन्मदिन की बधाई की। हमर चिन्हारी साहित्य समिति के सदस्यों ने मुख्यमंत्री को उनका एक पोट्रेट भेंट किया।

माँ का आशीर्वाद और अपार जनस्नेह : बगिया में आत्मीयता के साथ मना मुख्यमंत्री का जन्मदिन

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का 62वाँ जन्मदिवस उनके गृहग्राम बगिया में अत्यंत उत्साह, आत्मीयता और पारिवारिक स्नेह के वातावरण में धूमधाम से मनाया गया। मुख्यमंत्री साय ने अपने गृहग्राम बगिया स्थित अपने घर पहुंचते ही सबसे पहले अपनी माता जसमनी देवी के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।


मुख्यमंत्री साय के जन्मदिवस पर उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं देने वालों का दिनभर तांता लगा रहा।जनप्रतिनिधियों, अधिकारी-कर्मचारियों तथा बड़ी संख्या में पहुंचे ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री को जन्मदिवस की शुभकामनाएं देते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु जीवन की कामना की। मुख्यमंत्री  साय ने इस अवसर पर सभी के स्नेह, शुभकामनाओं और आत्मीय स्वागत के लिए हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनस्नेह ही उनकी सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने अपने जन्मदिवस को विशेष और यादगार बनाने के लिए सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।


इस विशेष अवसर पर बगिया स्थित श्री राम सदन में सत्यनारायण व्रत कथा श्रवण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उनकी माताजी जसमनी देवी, धर्मपत्नी कौशल्या साय तथा परिवार के अन्य सदस्यों ने पूरे श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ व्रत कथा का श्रवण किया तथा ईश्वर से प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के आगमन से पूर्व ही उनके गृहग्राम बगिया स्थित गृहनिवास में उनसे मिलने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी।जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं आम नागरिकों में मुख्यमंत्री से भेंट करने और उन्हें शुभकामनाएं देने को लेकर विशेष उत्साह और उत्सुकता देखने को मिली।

इस अवसर पर विधायक गोमती साय एवं रायमुनी भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, जिला पंचायत सदस्य कृष्ण कुमार राय सहित जिला पंचायत एवं जनपद पंचायत के सदस्यगण, पंचायत प्रतिनिधि, नगरीय निकायों के प्रतिनिधिगण, जनप्रतिनिधि, कमिश्नर नरेंद्र दुग्गा, आईजी दीपक कुमार झा, कलेक्टर श्री रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उम्मेद सिंह तथा अन्य अधिकारियों एवं गणमान्य नागरिकों ने मुख्यमंत्री से भेंट कर उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

क्रिकेट में जिले का नाम रोशन कर चुकी छात्राओं को मुख्यमंत्री ने प्रदान की क्रिकेट किट

क्रिकेट की दुनिया में जिले का नाम रोशन करने वाली शासकीय प्री-मैट्रिक कन्या छात्रावास, इचकेला की प्रतिभाशाली छात्राओं को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रोत्साहित करते हुए 15 क्रिकेट किट प्रदान किया। छात्रावास की इन छात्राओं ने अपने उत्कृष्ट खेल प्रदर्शन के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर भी जिले को गौरवान्वित किया है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी छात्राओं को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आप इसी लगन, अनुशासन और मेहनत के साथ निरंतर आगे बढ़ती रहें तथा अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से राज्य और देश का नाम रोशन करें।

पारंपरिक परिधान में आए पहाड़ी कोरवा समाज के लोगों ने मुख्यमंत्री को दी जन्मदिवस की बधाई

बगीचा से आए विशेष पिछड़ी जनजाति समुदाय पहाड़ी कोरवा समाज के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से सौजन्य भेंट कर उन्हें जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर पहाड़ी कोरवा समाज के सदस्य अपने पारम्परिक वेशभूषा एवं तीर-धनुष के साथ उपस्थित हुए, जिससे उनकी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा की झलक दिखाई दी।मुख्यमंत्री श्री साय ने उनसे आत्मीय संवाद करते हुए उनके क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों की जानकारी ली। इस पर पहाड़ी कोरवा समाज के प्रतिनिधियों ने बताया कि वर्तमान में उनके क्षेत्रों में तेजी से विकास कार्य संचालित हो रहे हैं तथा प्रधानमंत्री जनमन योजना के माध्यम से उनके गांवों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार हुआ है। उन्होंने कहा कि इस योजना से उनके जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन आ रहा है और उनके क्षेत्रों की तस्वीर बदल रही है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उनकी बातों को गंभीरता से सुना और आश्वस्त किया कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के सर्वांगीण विकास के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रतिबद्ध है।

भारत के पहले क्वांटम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विश्वविद्यालय परिसर की स्थापना हेतु NIELIT और आंध्र प्रदेश सरकार के बीच MoU

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इंडिया AI इम्पैक्ट समिट के दौरान, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अधीन राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (NIELIT) ने 20 फरवरी 2026 को आंध्र प्रदेश सरकार के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।

इस समझौते के तहत अमरावती में भारत का पहला समर्पित क्वांटम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विश्वविद्यालय परिसर स्थापित किया जाएगा।

यह सहयोग भारत के डीप-टेक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और आंध्र प्रदेश क्वांटम मिशन के माध्यम से वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्वांटम नवाचार केंद्र विकसित करने के राज्य के दृष्टिकोण के अनुरूप है।
अमरावती, राज्य की महत्वाकांक्षी क्वांटम वैली पहल का केंद्र बनने के लिए तैयार है।

समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर

MoU पर हस्ताक्षर निम्न गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में किए गए:

  • एन. चंद्रबाबू नायडू, मुख्यमंत्री, आंध्र प्रदेश

  • एस. कृष्णन, सचिव, MeitY

  • डॉ. एम. एम. त्रिपाठी, महानिदेशक, NIELIT

  • सी. वी. श्रीधर, मिशन निदेशक, APSQM, अमरावती क्वांटम वैली

प्रमुख वक्तव्य

🔹 डॉ. एम. एम. त्रिपाठी, महानिदेशक, NIELIT

उन्होंने कहा कि यह साझेदारी भारत की डीप-टेक यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
अमरावती में NIELIT का क्वांटम और AI परिसर क्वांटम तकनीकों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में अनुसंधान, शिक्षा और नवाचार का राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र बनेगा।

🔹 सी. वी. श्रीधर, मिशन निदेशक, APSQM

उन्होंने कहा कि NIELIT क्वांटम-AI विश्वविद्यालय, क्वांटम विज्ञान, AI और उद्योग-आधारित कौशल विकास को एकीकृत करके वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करेगा।

प्रस्तावित विश्वविद्यालय परिसर की प्रमुख विशेषताएं

प्रमुख अध्ययन एवं अनुसंधान क्षेत्र

  • क्वांटम कंप्यूटिंग और क्वांटम एल्गोरिदम

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग

  • क्वांटम संचार और साइबर सुरक्षा

  • क्वांटम हार्डवेयर और सिस्टम इंजीनियरिंग

  • हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग

  • AI–क्वांटम समन्वय अनुसंधान

शैक्षणिक और अनुसंधान ढांचा

परिसर में निम्न सुविधाएं होंगी:

  • स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी कार्यक्रम

  • उन्नत अनुसंधान प्रयोगशालाएं

  • उद्योग से जुड़े उत्कृष्टता केंद्र (CoEs)

  • डीप-टेक इनक्यूबेशन और उद्यमिता समर्थन

  • वैश्विक शैक्षणिक और R&D सहयोग

पहल का महत्व

यह पहल भारत की क्वांटम तकनीक और AI क्षमताओं को उल्लेखनीय रूप से मजबूत करेगी और देश को अगली पीढ़ी के नवाचार और डीप-टेक शिक्षा में वैश्विक अग्रणी बनाने में मदद करेगी।

NIELIT के बारे में

राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (NIELIT), MeitY के अधीन एक स्वायत्त वैज्ञानिक संस्था है, जो शिक्षा, कौशल विकास, प्रशिक्षण, अनुसंधान और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देती है।

NIELIT के पास देशभर में 56 केंद्र, 750+ मान्यता प्राप्त संस्थान और 9000+ प्रशिक्षण केंद्र हैं और इसने लाखों छात्रों को उभरती तकनीकों में प्रशिक्षित और प्रमाणित किया है।

NIELIT को शिक्षा मंत्रालय द्वारा डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया गया है, जिसका मुख्य परिसर रोपड़ (पंजाब) में और अन्य परिसर आइजोल, अगरतला, औरंगाबाद, कालीकट, गोरखपुर, इम्फाल, ईटानगर, अजमेर, कोहिमा, पटना और श्रीनगर में स्थित हैं।


वॉयस तकनीकों पर नीति रिपोर्ट और डेवलपर्स टूलकिट का लॉन्च – डिजिटल समावेशन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

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भारत में वॉयस तकनीकें डिजिटल समावेशन की आधारशिला बनती जा रही हैं, जो लाखों लोगों को सार्वजनिक सेवाओं, जानकारी और डिजिटल अर्थव्यवस्था तक पहुंच प्रदान कर रही हैं। इसी संदर्भ में 20 फरवरी 2026 को इंडिया AI समिट एक्सपो 2026 में वॉयस तकनीकों पर नीति रिपोर्ट और डेवलपर्स टूलकिट लॉन्च किया गया

यह पहल खुले, समावेशी और जिम्मेदार वॉयस तकनीकों के लिए नीति और व्यवहारिक ढांचा प्रदान करने के उद्देश्य से की गई है।

रिपोर्ट और टूलकिट के विकास में सहयोग

यह नीति रिपोर्ट और डेवलपर्स टूलकिट निम्न संस्थाओं द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किए गए:

  • ARTPARK @ IISc

  • Digital Futures Lab

  • Trilegal

इस कार्य को डिजिटल इंडिया भाषिणी (BHASHINI) डिवीजन और FAIR Forward – AI for All पहल (GIZ और जर्मन संघीय आर्थिक सहयोग मंत्रालय द्वारा वित्तपोषित) का समर्थन प्राप्त हुआ।

भारत में वॉयस तकनीकों का महत्व

भाषाई विविधता वाले देश भारत में वॉयस तकनीकें डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (Digital Public Infrastructure) का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जो भाषण आधारित अनुप्रयोगों के माध्यम से डिजिटल पहुंच की बाधाओं को कम करती हैं।

हालांकि, वॉयस तकनीकों के विकास और उपयोग से जुड़े मुद्दे भी सामने आते हैं, जैसे:

  • डेटा शासन

  • समावेशन

  • गुणवत्ता

  • खुलापन

  • जिम्मेदार उपयोग

इन चुनौतियों से निपटने के लिए नीति, तकनीकी अभ्यास और पारिस्थितिकी तंत्र के बीच समन्वय आवश्यक है।

नीति रिपोर्ट की प्रमुख सिफारिशें

नीति रिपोर्ट भारत में जिम्मेदार और खुले स्पीच सिस्टम के विकास में आने वाली बाधाओं का विश्लेषण करती है और निम्न सुझाव देती है:

  • मूलभूत भाषण डेटा सेट को डिजिटल सार्वजनिक संपत्ति (Digital Public Goods) के रूप में मान्यता देना

  • मॉडल की पारदर्शिता और प्रतिनिधित्व में सुधार

  • टिकाऊ सार्वजनिक अवसंरचना में निवेश

  • दुरुपयोग रोकने के लिए सुरक्षा उपायों का समावेश

  • नवाचार को सक्षम बनाना

डेवलपर्स टूलकिट की विशेषताएं

डेवलपर्स टूलकिट भारतीय भाषाओं के वॉयस डेटा और अनुप्रयोगों पर काम करने वाले डेवलपर्स की चुनौतियों को उजागर करता है, जैसे:

  • डेटा प्रतिनिधित्व में असमानता

  • गुणवत्ता आश्वासन की कमजोर प्रणालियां

  • सीमित मूल्यांकन अभ्यास

  • खंडित शासन ढांचे

यह टूलकिट AI विकास जीवनचक्र आधारित समावेशी और मजबूत स्पीच AI सिस्टम बनाने के लिए व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।

प्रमुख वक्तव्य

अमिताभ नाग, CEO, डिजिटल इंडिया भाषिणी

उन्होंने कहा कि भारत के वॉयस-फर्स्ट डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र की दिशा में बढ़ते कदमों के साथ मजबूत नीति और कार्यान्वयन ढांचे की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि वॉयस तकनीकें भारत में भाषा, साक्षरता और डिजिटल विभाजन को पाटने का माध्यम हैं और इसे डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का आधार बनाना चाहिए।

डॉ. एरियाने हिल्डेब्रांट, जर्मन BMZ

उन्होंने कहा कि वॉयस AI स्थानीय भाषाओं और बोलियों में काम करने पर स्वास्थ्य, शिक्षा, सार्वजनिक सेवाओं और आर्थिक भागीदारी के लिए द्वार खोल सकती है।

साझेदार संस्थाओं के बारे में

  • डिजिटल इंडिया भाषिणी: AI आधारित बहुभाषी भाषा अनुवाद और वॉयस समाधान मंच

  • GIZ और FAIR Forward: वैश्विक स्तर पर समावेशी AI को बढ़ावा देने की पहल

  • ARTPARK @ IISc: AI और रोबोटिक्स स्टार्टअप इनक्यूबेशन कार्यक्रम

  • Digital Futures Lab: तकनीक और समाज के अध्ययन पर अनुसंधान संस्था

  • Trilegal: प्रमुख भारतीय लॉ फर्म

  • Nasscom AI: भारत के AI पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने वाली प्रमुख संस्था


भारत के अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने हेतु IFSCA और IICA के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर

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भारत के अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा पारिस्थितिकी तंत्र (IFSC) को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी (IFSCA) और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स (IICA) ने गिफ्ट सिटी, गुजरात स्थित IFSCA परिसर में एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।

यह MoU 20 फरवरी 2026 को ज्ञानेश्वर कुमार सिंह, महानिदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, IICA और के. राजारामन, अध्यक्ष, IFSCA द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों और विशिष्ट गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में हस्ताक्षरित किया गया।

IFSCA और IICA की भूमिका

भारत के अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र के एकीकृत नियामक के रूप में IFSCA, कंपनियों अधिनियम, 2013 के व्यापक कानूनी ढांचे के तहत संचालित वित्तीय संस्थानों के बढ़ते पारिस्थितिकी तंत्र की निगरानी करता है, जिसमें IFSC में कार्यरत संस्थाओं को विशेष नियामकीय छूट भी प्राप्त है।

कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के अधीन एक प्रमुख थिंक टैंक के रूप में IICA, कॉर्पोरेट गवर्नेंस ढांचे को आगे बढ़ाने, नियामकीय क्षमता निर्माण और नीति परामर्श सेवाओं के लिए संस्थागत सहयोग प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

समझौता ज्ञापन का उद्देश्य

इस MoU के माध्यम से IFSCA और IICA के बीच क्षमता निर्माण, नीति अनुसंधान और ज्ञान साझेदारी के क्षेत्रों में सहयोग के लिए एक संरचित ढांचा स्थापित किया गया है, ताकि GIFT-IFSC में नियामकीय प्रभावशीलता और कॉर्पोरेट गवर्नेंस मानकों को मजबूत किया जा सके।

प्रशिक्षण और नीति सहयोग

IICA, IFSCA और IFSC में पंजीकृत संस्थाओं को प्रशिक्षण और नीति समर्थन प्रदान करेगा ताकि वे विकसित हो रहे नियामकीय मानकों और वैश्विक गवर्नेंस प्रथाओं का पालन कर सकें।

IICA, IFSCA अधिकारियों के लिए ऑनलाइन प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम, इंडक्शन और विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगा, जिनमें निम्नलिखित विषय शामिल होंगे:

  • कॉर्पोरेट और संबद्ध कानून

  • कॉर्पोरेट गवर्नेंस

  • पर्यावरण, सामाजिक और गवर्नेंस (ESG)

  • सीमा-पार लेनदेन और पुनर्गठन

प्रमुख वक्तव्य

ज्ञानेश्वर कुमार सिंह ने कहा कि IICA, IFSCA के साथ निकट सहयोग की अपेक्षा करता है ताकि एक मानकीकृत कॉर्पोरेट गवर्नेंस पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जा सके। उन्होंने बताया कि सहयोग के तत्काल प्रमुख क्षेत्र होंगे:

  • अनुकूलित क्षमता निर्माण कार्यक्रमों का शुभारंभ

  • इंडक्शन और नेतृत्व विकास पहल

  • नीति अनुसंधान और परामर्श समर्थन

के. राजारामन ने IICA की पहल की सराहना करते हुए सहयोग को क्रियान्वित करने के लिए तत्काल कार्य योजना का उल्लेख किया। उन्होंने GIFT सिटी में प्रतिवर्ष संयुक्त कॉर्पोरेट गवर्नेंस कार्यक्रमों और IFSC क्षेत्राधिकार में स्थापित होने वाली कंपनियों के लिए विशेष पाठ्यक्रमों की आवश्यकता पर जोर दिया।


राष्ट्रीय CSR शिखर सम्मेलन 2026 में उपराष्ट्रपति का संबोधन

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज भारत मंडपम, नई दिल्ली में टाइम्स ऑफ इंडिया समूह द्वारा आयोजित राष्ट्रीय CSR शिखर सम्मेलन 2026 को संबोधित किया।

उपराष्ट्रपति ने इस सम्मेलन के आयोजन के लिए टाइम्स ऑफ इंडिया समूह की सराहना करते हुए कहा कि जब संस्थान, नेतृत्व और विचार एक साथ आते हैं, तो समाज और राष्ट्र सामूहिक रूप से आगे बढ़ते हैं। उन्होंने इस परिवर्तनशील दौर में सहयोग की महत्ता पर जोर दिया।

भारत की प्रगति और आर्थिक विकास

उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले दशक में भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत दुनिया की 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है और जल्द ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है।

उन्होंने बताया कि संरचनात्मक सुधार, समावेशी विकास, डिजिटल कनेक्टिविटी, वित्तीय समावेशन और बुनियादी ढांचे के विकास से 25 करोड़ से अधिक लोग अत्यधिक गरीबी से बाहर आए हैं और देशभर में आकांक्षाएं बढ़ी हैं।

CSR की भूमिका

उन्होंने कहा कि विकास के अगले चरण के लिए सरकार, उद्योग और नागरिक समाज के बीच गहरी साझेदारी आवश्यक है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) अब केवल एक सहायक गतिविधि नहीं, बल्कि राष्ट्रीय प्रगति का केंद्रीय तत्व है।

उन्होंने CSR को वह क्षेत्र बताया जहां उद्यमिता और संवेदना का मिलन होता है, जहां बैलेंस शीट मानव कहानियों से जुड़ती है और विकास उद्देश्य प्राप्त करता है।

आत्मनिर्भर और विकसित भारत की दृष्टि

उपराष्ट्रपति ने आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत @2047 के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि विकास व्यापक, समावेशी और टिकाऊ होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि CSR:

  • सार्वजनिक शिक्षा को मजबूत कर सकता है

  • दूरदराज क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बना सकता है

  • उद्योग-संगत कौशल विकास को बढ़ावा दे सकता है

  • महिला उद्यमिता को समर्थन दे सकता है

  • नवीकरणीय ऊर्जा और जलवायु लचीलापन बढ़ाकर हरित संक्रमण को तेज कर सकता है

जिम्मेदार पूंजीवाद और राष्ट्र निर्माण

उपराष्ट्रपति ने कहा कि CSR केवल कानूनी अनुपालन नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता है।
उन्होंने कहा कि ईमानदार करदाता देशभक्त नागरिकों में शामिल हैं और जब कॉर्पोरेट भारत समाज, युवाओं, नवाचार और स्थिरता में निवेश करता है, तो वह सामाजिक पूंजी का निर्माण करता है और दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित करता है।

उन्होंने कहा कि भारत अब तकनीक अपनाने वाला देश नहीं, बल्कि नवाचार करने वाला देश बन रहा है और उसे दुनिया के लिए नवाचार करने का लक्ष्य रखना चाहिए।

नीतिगत सुधार और सहयोग

उन्होंने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, डिजिटल गवर्नेंस और जीएसटी जैसे सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे प्रणाली में विश्वास और पारदर्शिता बढ़ी है।
हालांकि, उन्होंने कहा कि केवल नीतियां राष्ट्र को नहीं बदल सकतीं; सरकार, उद्योग और नागरिक समाज के समन्वय से ही परिवर्तन संभव है।

लाभ और उद्देश्य का संतुलन

उपराष्ट्रपति ने जिम्मेदार पूंजीवाद पर जोर देते हुए कहा कि लाभ और उद्देश्य दोनों साथ-साथ चलने चाहिए।
उन्होंने कहा कि वैध लाभ समाज कल्याण की प्रतिबद्धता के साथ अर्जित होना चाहिए और नवाचार, समावेशन, विकास और स्थिरता एक-दूसरे को मजबूत करें।

मीडिया और लोकतंत्र

उपराष्ट्रपति ने मीडिया से विकास से जुड़ी सकारात्मक कहानियों को अधिक स्थान देने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में लोगों को केंद्र में रखा जाना चाहिए और प्रगति की सकारात्मक कहानियों से लोगों का विश्वास मजबूत होता है।

उन्होंने चुनावी प्रक्रियाओं के महत्व और “एक राष्ट्र, एक चुनाव” की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे मजबूत निर्णय लेने और दीर्घकालिक नीतिगत फोकस संभव होगा।


बच्चों के चेहरों की मुस्कान बना मुख्यमंत्री साय के जन्मदिन का सबसे बड़ा उपहार

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने 62वें जन्मदिवस को जशपुर के बगिया स्थित बालक आश्रम के बच्चों के बीच जिस आत्मीयता और स्नेह के साथ मनाया, उसने इस दिन को बच्चों के जीवन की एक अविस्मरणीय स्मृति बना दिया। जैसे ही मुख्यमंत्री आश्रम परिसर पहुँचे, बच्चों के चेहरों पर खुशी की चमक दौड़ गई। वे दौड़कर उनके पास आए और कुछ ही क्षणों में पूरा वातावरण एक पारिवारिक मिलन जैसा हो गया। उस पल मुख्यमंत्री किसी पद पर आसीन व्यक्ति नहीं, बल्कि बच्चों के अपने स्नेही अभिभावक की तरह उनके बीच दिखाई दे रहे थे।


मुख्यमंत्री साय ने बच्चों के साथ केक काटा और उनके साथ बैठकर बातें कीं। उन्होंने बच्चों के नाम पूछे, पढ़ाई के बारे में जाना, उनके सपनों को सुना और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। जब मुख्यमंत्री बच्चों से बात कर रहे थे, तब उनके चेहरे पर झलकता स्नेह और अपनत्व बच्चों के मन में गहरा विश्वास जगा रहा था। बच्चे भी पूरी सहजता से उनसे बातें करते हुए खुशी से चहकते रहे।


आश्रम परिसर में उस समय जो दृश्य था, वह एक परिवार के बीच मनाए जा रहे उत्सव जैसा महसूस हो रहा था। मुख्यमंत्री साय ने बच्चों को अपने हाथों से केक और चॉकलेट खिलाया। उन्होंने बच्चों के सिर पर हाथ फेरते हुए आशीर्वाद दिया और कहा कि वे मन लगाकर पढ़ाई करें, बड़े सपने देखें और जीवन में आगे बढ़कर अपने परिवार तथा प्रदेश का नाम रोशन करें। उन्होंने कहा कि आप सब बच्चों की मुस्कान मेरे जन्मदिन का सबसे बड़ा उपहार है। उनके इन स्नेहपूर्ण शब्दों ने बच्चों के मन को छू लिया। बच्चों की आँखों में चमक और चेहरे पर मुस्कान इस बात की गवाही दे रही थी कि यह पल उनके लिए कितना खास बन गया है।


मुख्यमंत्री के रूप में स्नेही अभिभावक को अपने बीच पाकर बच्चों ने जिस खुशी और अपनत्व का अनुभव किया, वह लंबे समय तक उनकी स्मृतियों में रहेगा।

उल्लेखनीय है कि बालक आश्रम बगिया में कक्षा पहली से पाँचवीं तक के छात्र अध्ययनरत हैं, जिनमें अधिकांश बच्चे आदिवासी समुदाय से हैं। मुख्यमंत्री का उनके बीच पहुँचकर जन्मदिन मनाना बच्चों के लिए गर्व और प्रेरणा का विशेष क्षण बन गया।

इस अवसर पर विधायक गोमती साय, कमिश्नर नरेंद्र दुग्गा, आईजी दीपक कुमार झा, कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उम्मेद सिंह सहित स्थानीय जनप्रतिनिधिगण, अधिकारीगण तथा आश्रम के शिक्षक एवं स्टाफ उपस्थित थे।

62वें जन्मदिवस पर मुख्यमंत्री साय ने श्री जगन्नाथ मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने 62वें जन्मदिवस के अवसर पर जशपुर जिले के दोकड़ा स्थित ऐतिहासिक एवं प्राचीन श्री जगन्नाथ मंदिर पहुँचकर भगवान श्री जगन्नाथ, भाई बलभद्र एवं बहन सुभद्रा की विधि-विधानपूर्वक पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर उनकी धर्मपत्नी कौशल्या साय तथा परिवार के अन्य सदस्य भी उपस्थित थे।


मुख्यमंत्री साय ने मंदिर परिसर में परिक्रमा कर भगवान से आशीर्वाद प्राप्त किया तथा प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और कल्याण की मंगलकामना की। उन्होंने प्रदेश में शांति, खुशहाली और निरंतर प्रगति के लिए विशेष प्रार्थना करते हुए कहा कि जनकल्याण ही शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और प्रदेश के विकास के लिए सरकार निरंतर प्रतिबद्ध है।

इस अवसर पर विधायक गोमती साय, कमिश्नर नरेंद्र दुग्गा, आईजी दीपक कुमार झा, कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उम्मेद सिंह सहित स्थानीय जनप्रतिनिधिगण, अधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

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