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विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत नींव है गुणवत्तापूर्ण शिक्षा : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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 रायपुर  :  शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक लाना नहीं, बल्कि बच्चों में नैतिक मूल्यों, वैज्ञानिक सोच, सामाजिक संवेदनशीलता और राष्ट्रभावना का विकास करना है। शिक्षा संस्कारित समाज, सशक्त राष्ट्र और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की सबसे मजबूत आधारशिला है।


राज्य सरकार का संकल्प है कि प्रदेश का कोई भी बच्चा संसाधनों या अवसरों के अभाव में अपने सपनों से वंचित न रहे। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक अधोसंरचना, तकनीकी संसाधन और समान अवसर उपलब्ध कराकर प्रदेश की नई पीढ़ी को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज दुर्ग जिले के पाटन विकासखंड स्थित स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, जामगांव (एम) में आयोजित राज्य स्तरीय शाला प्रवेशोत्सव 2026-27 को संबोधित करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शाला प्रवेशोत्सव कार्यक्रम के प्रारंभ में विद्यालय में पहली बार प्रवेश लेने वाले नन्हे बच्चों का तिलक लगाकर एवं मुंह मीठा कराकर आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने बच्चों को स्नेह पूर्वक आशीर्वाद देते हुए कहा कि वे मन लगाकर अध्ययन करें, बड़े सपने देखें और अपने ज्ञान, प्रतिभा एवं संस्कारों से परिवार, समाज, प्रदेश और देश का नाम रोशन करें। उन्होंने कहा कि बच्चों की मुस्कान और उनकी आंखों में बसे सपने ही विकसित छत्तीसगढ़ के उज्ज्वल भविष्य की नींव हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कक्षा पहली, छठवीं एवं नवमी के चयनित विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्य-पुस्तकें, गणवेश एवं स्कूल बैग वितरित किए। साथ ही कक्षा नवमी की छात्राओं को साइकिल प्रदान कर उन्हें उच्च शिक्षा के लिए निरंतर आगे बढ़ने का संदेश दिया।

मुख्यमंत्री  साय ने राष्ट्रीय साधन सह प्रवीण्य छात्रवृत्ति परीक्षा 2025-26 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित करते हुए कहा कि प्रतिभा किसी क्षेत्र या परिस्थिति की मोहताज नहीं होती, आवश्यकता केवल सही अवसर और उचित मार्गदर्शन की होती है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था को केवल बेहतर बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप आधुनिक और समावेशी बना रही है। प्रदेश के विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, समय पर निःशुल्क पुस्तक एवं गणवेश वितरण, अतिरिक्त पौष्टिक आहार, नियमित पालक-शिक्षक बैठक, न्योता भोज और भारतीय संस्कृति पर आधारित विभिन्न नवाचारों के माध्यम से बच्चों के सर्वांगीण विकास का वातावरण तैयार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने युक्तियुक्तकरण के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था में ऐतिहासिक सुधार किए हैं। आज प्रदेश का कोई भी विद्यालय शिक्षक विहीन नहीं है। दूरस्थ एवं वनांचल क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। बस्तर के जगरगुंडा जैसे क्षेत्रों में एजुकेशन हब विकसित किए जा रहे हैं, ताकि वहां के बच्चों को भी बड़े शहरों जैसी शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में वर्तमान में 15 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं, 24 नालंदा परिसर विकसित किए जा चुके हैं तथा दिल्ली में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए 200 सीटों की छात्रावास सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

मुख्यमंत्री साय ने दुर्ग जिले के लिए शिक्षा एवं खेल अधोसंरचना से जुड़ी चार महत्वपूर्ण घोषणाएं की। उन्होंने शिक्षा विभाग के संयुक्त संचालक, जिला शिक्षा अधिकारी एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालयों के स्थान पर आधुनिक कम्पोजिट कार्यालय भवन के निर्माण की घोषणा की। इसके साथ ही दुर्ग शहर में सर्वसुविधायुक्त आधुनिक ऑडिटोरियम, खेल प्रतिभाओं के लिए फुटबॉल मैदान सह एथलेटिक्स ट्रैक तथा नीट एवं जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए 100-100 सीटर छात्र एवं छात्रा छात्रावास स्थापित किए जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इन निर्णयों से शिक्षा और खेल दोनों क्षेत्रों में प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के लिए बेहतर वातावरण मिलेगा।

मुख्यमंत्री  साय ने विद्यालय की खगोल विज्ञान प्रयोगशाला का अवलोकन किया और विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए अंतरिक्ष विज्ञान एवं खगोल से जुड़े मॉडलों की सराहना की। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक सोच और नवाचार ही भविष्य के भारत की पहचान होंगे और राज्य सरकार बच्चों में विज्ञान एवं तकनीक के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय एवं स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेंद्र यादव ने विद्यालय परिसर में 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान के अंतर्गत कटहल, सिंदूरी एवं मौलश्री के पौधे रोपित कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने स्कूली बच्चों के साथ न्योता भोज में भी सहभागिता की और आत्मीय संवाद करते हुए उनके अध्ययन, रुचियों और भविष्य की आकांक्षाओं के बारे में जानकारी ली।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय साधन सह प्रावीण्य छात्रवृत्ति परीक्षा में राज्य स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों का सम्मान भी किया गया। मुख्यमंत्री श्री साय ने राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली कु. पायल रजनी, सातवां स्थान प्राप्त करने वाले नैतिक आमटे तथा दसवां स्थान प्राप्त करने वाली कु. श्रद्धा इंदौरिया को सम्मानित कर उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेन्द्र यादव ने कहा कि राज्य सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विद्यालयों में चरणबद्ध रूप से कंप्यूटर शिक्षा का विस्तार कर रही है। बालिकाओं के लिए आठ हजार से अधिक नए शौचालयों का निर्माण, भाषा एवं गणितीय दक्षता बढ़ाने के विशेष अभियान तथा भारतीय संस्कृति एवं महापुरुषों के जीवन से विद्यार्थियों को जोड़ने जैसे नवाचार शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि आगामी वर्षों में निजी विद्यालयों की तर्ज पर शैक्षणिक सत्र प्रारंभ होने के पहले ही दिन सभी विद्यार्थियों को पुस्तकें एवं गणवेश उपलब्ध हो सकें।

इस अवसर पर दुर्ग ग्रामीण विधायक  ललित चंद्राकर, साजा विधायक  ईश्वर साहू, छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष  राकेश पाण्डेय, तेलघानी विकास बोर्ड के अध्यक्ष  जितेन्द्र साहू, स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, दुर्ग संभाग आयुक्त श्री सत्यनारायण राठौर, पुलिस महानिरीक्षक श्री अभिषेक शांडिल्य, समग्र शिक्षा आयुक्त श्रीमती किरण कौशल, कलेक्टर  अभिजीत सिंह सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी, अभिभावक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ - मंदिरों में चोरी करने वाले अंतर-जिला गिरोह का पर्दाफाश, महिला समेत दो आरोपी गिरफ्तार

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 मुंगेली। छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में मंदिरों को निशाना बनाने वाले एक शातिर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। लालपुर थाना क्षेत्र के दो प्रमुख मंदिरों में हुई चोरी के मामले में पुलिस ने एक महिला सहित दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से करीब 1.75 लाख रुपये मूल्य के देवी-देवताओं के सोने-चांदी के आभूषण बरामद किए गए हैं। पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह के दो अन्य सदस्य पहले से ही जेल में बंद हैं।


महामाया मंदिरों को बनाया था निशाना

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, लालपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम कंतेली और कोदवाबानी स्थित महामाया मंदिरों में बीते दिनों चोरी की बड़ी वारदात हुई थी। शातिर चोरों ने मंदिरों के ताले तोड़कर गर्भगृह में स्थापित देवी-देवताओं के कीमती सोने-चांदी के आभूषण और अन्य सामग्रियां पार कर दी थीं। घटना के बाद पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर तफ्तीश शुरू की थी।

सीसीटीवी और तकनीकी साक्ष्यों से मिली सफलता

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) भोजराम पटेल के निर्देशन में साइबर सेल और लालपुर थाना पुलिस की एक संयुक्त टीम का गठन किया गया था। टीम ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले, तकनीकी साक्ष्यों (साइबर डेटा) का विश्लेषण किया और मुखबिरों को सक्रिय किया। पुख्ता इनपुट के आधार पर पुलिस ने घेराबंदी कर आरोपी अश्वनी आहिरे और चंपा बाई गोस्वामी को धर दबोचा।

पड़ोसी जिले कबीरधाम में भी की थी वारदात

पुलिस कस्टडी में हुई कड़ी पूछताछ में दोनों आरोपियों ने मुंगेली के अलावा पड़ोसी कबीरधाम (कवर्धा) जिले के सिल्हाटी स्थित महादेव मंदिर में भी चोरी की वारदात को अंजाम देने की बात स्वीकार की है। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह गिरोह अंतर-जिला स्तर पर सक्रिय रहकर धार्मिक स्थलों को निशाना बना रहा था।

दो साथी पहले से हैं जेल में, जांच जारी

लालपुर पुलिस ने बताया कि इस गिरोह से जुड़े दो अन्य आरोपियों को पूर्व में ही गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेजा जा चुका है। वहीं, ताजा कार्रवाई में पकड़े गए दोनों आरोपियों को भी स्थानीय न्यायालय में पेश कर रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरोह के नेटवर्क और इनसे जुड़े अन्य संदिग्धों को लेकर जांच अभी जारी है, जिससे आने वाले दिनों में कुछ और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।

छत्तीसगढ़ में बड़ा पुलिस फेरबदल: भारी संख्या में ASP और DSP अफसरों के तबादले, देखें किसे कहां मिली जिम्मेदारी

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 Police Transfer : छत्तीसगढ़ सरकार ने पुलिस महकमे में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षकों (ASP) और उप पुलिस अधीक्षकों (DSP) के बड़े पैमाने पर तबादले (Police Transfer) कर दिए हैं। गृह विभाग द्वारा जारी इस नवीन सूची के बाद पुलिस विभाग में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है।


शासन की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, राज्य में कानून-व्यवस्था को और अधिक चुस्त-दुरुस्त व प्रभावी बनाने के उद्देश्य से इन अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। विभिन्न जिलों में लंबे समय से जमे या मैदानी आवश्यकताओं के मद्देनजर अफसरों की नई पदस्थापना की गई है।

प्रशासनिक कसावट की कवायद

माना जा रहा है कि सरकार का यह फैसला कानून-व्यवस्था की स्थिति को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और पुलिसिंग में नई ऊर्जा फूंकने की दिशा में एक अहम कदम है। स्थानांतरण सूची में शामिल सभी अधिकारियों को जल्द से जल्द अपने वर्तमान पदभार से मुक्त होकर नए तैनाती स्थलों पर कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं। (Police Transfer)









 


मोबाइल पर बात करना पड़ा भारी: मालगाड़ी की चपेट में आने से युवक का पैर कटा, हालत नाजुक

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 कोरबा। पवन टॉकीज फाटक के पास रविवार रात मोबाइल फोन का इस्तेमाल एक 22 वर्षीय युवक के लिए काल बन गया। कान में मोबाइल लगाए रेलवे ट्रैक पार कर रहा युवक तेज रफ्तार मालगाड़ी की चपेट में आ गया। इस हृदयविदारक हादसे में युवक का एक पैर कटकर धड़ से अलग हो गया। गंभीर रूप से घायल युवक को तत्काल मेडिकल कॉलेज अस्पताल में दाखिल कराया गया है, जहां वह जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है।


लोको पायलट की चेतावनी रही बेअसर

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बरमपुर निवासी रोशन पटेल (22) रविवार रात पटरी पार करते समय फोन पर बातचीत में पूरी तरह मशगूल था। इसी दौरान आ रही मालगाड़ी के लोको पायलट ने युवक को देख लिया था। चालक ने दुर्घटना टालने के लिए काफी दूर से ही लगातार हॉर्न बजाया और चिल्लाकर आवाज भी दी, लेकिन मोबाइल में खोए होने के कारण रोशन को न तो हॉर्न सुनाई दिया और न ही चालक की चेतावनी। पलक झपकते ही वह ट्रेन की चपेट में आ गया।

तड़पता रहा युवक, 108 एंबुलेंस ने पहुंचाया अस्पताल

ट्रेन की तेज आवाज और चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे। पटरी पर युवक लहुलुहान हालत में तड़प रहा था और उसका पैर कटकर दूर जा गिरा था। स्थानीय लोगों ने बिना वक्त गंवाए 108 संजीवनी एक्सप्रेस को सूचित किया। मौके पर पहुंची एंबुलेंस से घायल को फौरन अस्पताल भिजवाया गया। डॉक्टरों के मुताबिक अत्यधिक खून बह जाने के कारण युवक की स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है।

पुलिस ने मोबाइल किया जब्त, जांच शुरू

घटना की भनक लगते ही कोतवाली पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के जवान मौके पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल से युवक का मोबाइल फोन जब्त कर लिया है, जो हादसे के वक्त भी चालू स्थिति में था। शुरुआती जांच में पुलिस इसे पूरी तरह से लापरवाही का मामला मान रही है। पुलिस ने पीड़ित के परिजनों को हादसे की सूचना दे दी है और मामले की विस्तृत विवेचना की जा रही है।

भारत में पहली डेंगू वैक्सीन को मंजूरी: 4 से 60 साल के लोगों को मिलेगा 'क्यूडेंगा' का सुरक्षा कवच

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 नई दिल्ली: मानसून की दस्तक के साथ ही देश में मच्छरों से होने वाली बीमारियों, खासकर डेंगू का खतरा तेजी से बढ़ने लगता है। इस जानलेवा बीमारी के बढ़ते जोखिम के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र से एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। भारतीय दवा नियामक ने जापान की प्रमुख दवा कंपनी 'टाकेडा फार्मास्युटिकल' की डेंगू वैक्सीन QDENGA (क्यूडेंगा) को मंजूरी दे दी है। यह भारत में स्वीकृत होने वाली पहली डेंगू वैक्सीन है।


चारों वेरिएंट्स से मिलेगी सुरक्षा, टेस्ट की जरूरत नहीं

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 'क्यूडेंगा' एक टेट्रावैलेंट लाइव-अटेन्यूएटेड वैक्सीन है। इसका सीधा मतलब यह है कि यह डेंगू वायरस के चारों प्रकारों (सीरोटाइप) से सुरक्षा प्रदान करने में सक्षम है। इस वैक्सीन में वायरस के बेहद कमजोर रूप का इस्तेमाल किया गया है, जो शरीर को बिना बीमार किए उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) को मजबूत बनाता है।

इस वैक्सीन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे लगवाने से पहले व्यक्ति को यह जांच कराने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं होगी कि उसे भूतकाल में कभी डेंगू हुआ था या नहीं। यह वैक्सीन 4 से 60 वर्ष तक की आयु के लोगों को दी जा सकेगी।

भारत में तेजी से बढ़े हैं मामले

यह मंजूरी ऐसे समय में आई है जब पिछले दो दशकों के भीतर भारत में डेंगू के मामलों में लगभग 11 गुना की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2024 में देश में डेंगू के 32,000 से अधिक मामले सामने आए थे, जबकि इससे पहले साल 2023 में 18,391 मामले रिपोर्ट किए गए थे। गंभीर स्थिति में डेंगू आंतरिक रक्तस्राव (इंटरनल ब्लीडिंग) का कारण बनता है, जो मरीजों के लिए जानलेवा साबित होता रहा है।

बायोलॉजिकल-ई के साथ साझेदारी: भारत में होगा बंपर उत्पादन

भारत की विशाल आबादी तक इस वैक्सीन को पहुंचाने और वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए टाकेडा ने भारतीय वैक्सीन निर्माता कंपनी बायोलॉजिकल-ई के साथ साझेदारी की है।

इस समझौते के तहत:

सालाना उत्पादन: बायोलॉजिकल-ई भारत में हर साल लगभग 5 करोड़ (50 मिलियन) डोज तैयार करने की क्षमता विकसित करेगी।

वैश्विक लक्ष्य: इस साझेदारी की मदद से टाकेडा दशक के अंत तक दुनिया भर में हर साल 10 करोड़ (100 मिलियन) डोज बनाने के अपने लक्ष्य को हासिल कर सकेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहली वैक्सीन की मंजूरी से भारत में हर साल जुलाई से अक्तूबर के बीच अस्पतालों पर बढ़ने वाला दबाव काफी कम होगा और डेंगू की रोकथाम के क्षेत्र में एक नया अध्याय शुरू होगा।

धमतरी मॉडल बना देश के लिए प्रेरणा

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 धनंजय राठौर संयुक्त संचालक

शशिरत्न पाराशर उप संचालक



रायपुर : छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा रायपुर सहित विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में एक विशेष योजना चलाई जा रही है। इसके तहत, अनुपयोगी पड़ी घरों की बाड़ी में महिलाओं को सिंदूरी, सतावर और अश्वगंधा जैसे औषधीय पौधे निरूशुल्क दिए जा रहे हैं, जिससे उन्हें घर पर ही नियमित आय मिल रही है। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले की महिलाओं द्वारा अनुपयोगी भूमि और यहाँ तक कि बेकार नाले के पानी का उपयोग कर औषधीय पौधे उगाने की कई प्रेरक पहलें देखने को मिली हैं। इन प्रयासों से न केवल बंजर जमीन हरी-भरी हो रही है, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भरता और बेहतर स्वास्थ्य का लाभ भी मिल रहा है।



“जहां कभी अनुपयोगी भूमि थी, वहां आज औषधीय पौधों की हरियाली लहरा रही है। जहां महिलाएं केवल पारंपरिक खेती तक सीमित थीं, वहीं आज वे लाखों रुपये की आय अर्जित कर आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रही हैं।” यह केवल एक जिले की सफलता की कहानी नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण, प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग और कृषि नवाचार का ऐसा मॉडल है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। छत्तीसगढ़ का धमतरी जिला आज औषधीय एवं सुगंधीय फसलों के कृषिकरण का राष्ट्रीय मॉडल बनकर उभरा है। यहां कृषि, आजीविका, पर्यावरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का ऐसा समन्वय देखने को मिलता है, जो विकसित भारत और आत्मनिर्भर गांवों की अवधारणा को साकार करता है।

परंपरागत खेती से नवाचार की ओर

धमतरी कृषि प्रधान जिला है। यहां की अधिकांश आबादी धान आधारित खेती पर निर्भर रही है। हालांकि धान उत्पादन जिले की पहचान है, लेकिन सीमित आय, प्राकृतिक जोखिम और अनुपयोगी भूमि की चुनौती लंबे समय से बनी हुई थी। महानदी के किनारे की रेतीली भूमि, कटाव प्रभावित क्षेत्र और ग्राम पंचायतों की अनुपयोगी जमीन आर्थिक दृष्टि से पर्याप्त उपयोग में नहीं आ पा रही थी। ऐसे समय में जिला प्रशासन ने इन चुनौतियों को अवसर में बदलने का निर्णय लिया। सोच स्पष्ट थीकृयदि अनुपयोगी भूमि पर ऐसी फसलें उगाई जाएं जिनकी बाजार में स्थायी मांग हो, जिनमें लागत कम और लाभ अधिक हो, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में व्यापक परिवर्तन लाया जा सकता है।

दूरदर्शी नेतृत्व और समन्वित प्रयास

वर्ष 2025 में कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) तथा राज्य औषधीय पादप बोर्ड के सहयोग से औषधीय एवं सुगंधीय फसलों के कृषिकरण की अभिनव पहल प्रारंभ की। इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसे केवल कृषि कार्यक्रम नहीं माना गया, बल्कि महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका का व्यापक मिशन बनाया गया। योजना के प्रारंभिक चरण में जिले का विस्तृत सर्वेक्षण कराया गया। अनुपयोगी भूमि, रेतीले क्षेत्र और कम उत्पादक भूमि की पहचान कर वहां औषधीय खेती की संभावनाओं का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया गया।

खस, ब्राह्मी, बच, लेमनग्रास की गुणवत्तायुक्त पौध सामग्री उपलब्ध


महिला स्व-सहायता समूहों को इस अभियान का केंद्र बनाया गया। राज्य औषधीय पादप बोर्ड के सहयोग से खस, ब्राह्मी, बच, लेमनग्रास, पामारोजा और पचौली जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की गुणवत्तायुक्त पौध सामग्री उपलब्ध कराई गई। महिलाओं को विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और नियमित फील्ड सपोर्ट दिया गया। सबसे महत्वपूर्ण व्यवस्था रहीकृशत-प्रतिशत बाय-बैक, जिससे किसानों और महिलाओं को अपने उत्पाद के विपणन की चिंता नहीं रही।

150 एकड़ से शुरू हुआ परिवर्तन

प्रथम चरण में लगभग 150 एकड़ क्षेत्र में 200 महिला स्व-सहायता समूह सदस्यों को जोड़ा गया। लगभग 80 एकड़ में खस, 20 एकड़ में ब्राह्मी, 10 एकड़ में बच तथा 40 एकड़ में लेमनग्रास, पामारोजा और पचौली का रोपण किया गया। कुछ ही समय में परिणाम सामने आने लगे। जो भूमि पहले अनुपयोगी मानी जाती थी, वहीं से प्रति एकड़ लगभग एक लाख रुपये तक की आय प्राप्त होने लगी। महिलाओं ने इस आय का उपयोग बच्चों की शिक्षा, परिवार की जरूरतों, कृषि उपकरणों की खरीद और छोटे व्यवसाय शुरू करने में किया। इससे उनकी आर्थिक स्थिति के साथ-साथ सामाजिक आत्मविश्वास में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

बदलती जिंदगी, बदलती सोच

आदर्श महिला कृषक समूह कंडेल सत्या ढीमर बताती हैं कि पहले उनकी पूरी निर्भरता धान की खेती पर थी। औषधीय खेती के बारे में जानकारी नहीं थी, लेकिन प्रशिक्षण, पौध सामग्री और खरीद की सुनिश्चित व्यवस्था ने उनका भरोसा बढ़ाया। आज उनकी आय कई गुना बढ़ चुकी है। समूह पूना साहू ,श्रीमती कुंती ढीमर कहती हैं कि इस योजना ने केवल आय ही नहीं बढ़ाई, बल्कि महिलाओं को निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी दिया है। अब वे बैंकिंग, समूह प्रबंधन और उद्यमिता में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं तथा अन्य महिलाओं को भी इस दिशा में प्रेरित कर रही हैं।

किसान श्री अशोक नेताम बताते हैं कि कम पानी वाली भूमि में लेमनग्रास और खस जैसी फसलें उम्मीद से कहीं अधिक सफल साबित हुई हैं। अब जिले के अनेक किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ औषधीय खेती को भी अपनाने लगे हैं।

लखपति दीदी’ अभियान को मिली नई गति

छत्तीसगढ़ सरकार की प्राथमिकताओं में महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को विशेष महत्व दिया गया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार महिला स्व-सहायता समूहों को स्वरोजगार, मूल्य संवर्धन और बाजार से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। राज्य में ‘लखपति दीदी’ अभियान को गति देने के लिए कृषि, वनोपज, पशुपालन और ग्रामीण उद्यमिता को एकीकृत किया जा रहा है।

धमतरी का औषधीय खेती मॉडल इसी सोच का प्रभावी उदाहरण है। इस पहल ने महिलाओं को केवल खेती तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें उद्यमी बनने का अवसर प्रदान किया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का स्पष्ट विजन है कि छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थानीय संसाधनों पर आधारित, टिकाऊ और आत्मनिर्भर बनाया जाए। औषधीय एवं सुगंधीय फसलों का विस्तार इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

केवल खेती नहीं, संपूर्ण मूल्य श्रृंखला का विकास

धमतरी मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें केवल उत्पादन पर नहीं, बल्कि संपूर्ण वैल्यू चेन विकसित करने पर जोर दिया गया है। कुरूद विकासखंड के कोटगांव और पचपेड़ी में औषधीय पौधों की नर्सरी विकसित की जा रही है, ताकि स्थानीय स्तर पर गुणवत्तायुक्त पौध सामग्री उपलब्ध हो सके। इसके साथ ही भविष्य में औषधीय उत्पादों के प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग), आवश्यक तेल (म्ेेमदजपंस व्पस) निष्कर्षण, पैकेजिंग और मूल्य संवर्धन की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। यदि स्थानीय स्तर पर छोटे-छोटे प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित होते हैं, तो इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, परिवहन लागत घटेगी और किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य मिलेगा। यह ग्रामीण औद्योगिकीकरण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल होगी।

राष्ट्रीय पहचान बना धमतरी मॉडल

धमतरी के इस नवाचार को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली। 9 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में आयोजित महाकुंभ-2025 में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और कृषि जागरण के संयुक्त मंच पर जिले को औषधीय एवं सुगंधीय पौधों के कृषिकरण में उत्कृष्ट कार्य के लिए राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया गया। इसके बाद हैदराबाद, बिहार, मध्यप्रदेश सहित अनेक राज्यों के किसान, अधिकारी, स्वयंसेवी संस्थाएं और विभिन्न संगठन धमतरी पहुंचकर इस मॉडल का अध्ययन करने लगे। आज धमतरी का मॉडल देश के अनेक जिलों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुका है।

500 एकड़ विस्तार की नई उड़ान

प्रथम चरण की सफलता के बाद अब लक्ष्य इस पहल को 500 एकड़ तक विस्तारित करने का है। इसके माध्यम से 500 से अधिक महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। राज्य औषधीय पादप बोर्ड, कृषि विभाग, उद्यानिकी विभाग, बिहान तथा अन्य विभागों के समन्वय से चारों विकासखंडों में प्रशिक्षण, कार्यशालाएं और तकनीकी सहायता प्रदान की जा रही है, ताकि अधिकाधिक किसान और महिला समूह इस अभियान से जुड़ सकें।

पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य सुरक्षा का माध्यम

औषधीय खेती का महत्व केवल आर्थिक दृष्टि से नहीं है। ब्राह्मी, बच, लेमनग्रास और अन्य औषधीय पौधे स्वास्थ्य परंपरा को भी मजबूत करते हैं। इन फसलों से भूमि संरक्षण, हरित आवरण में वृद्धि, जैव विविधता का संवर्धन तथा जलवायु परिवर्तन के प्रति कृषि की अनुकूलन क्षमता भी बढ़ती है। आज जब पूरी दुनिया टिकाऊ कृषि (ैनेजंपदंइसम ।हतपबनसजनतम), प्राकृतिक खेती और जैव विविधता संरक्षण की बात कर रही है, तब धमतरी का यह मॉडल इन सभी उद्देश्यों को व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करता है।

विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में प्रेरक पहल

धमतरी की यह सफलता बताती है कि जब दूरदर्शी नेतृत्व, प्रभावी प्रशासन, वैज्ञानिक तकनीक, महिला शक्ति और स्थानीय संसाधनों का समन्वय होता है, तब विकास की नई संभावनाएं जन्म लेती हैं। यह मॉडल केवल औषधीय खेती का नहीं, बल्कि ग्रामीण नवाचार, महिला उद्यमिता, आत्मनिर्भरता और समावेशी विकास का जीवंत उदाहरण है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार किसानों की आय बढ़ाने, महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने, मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहित करने और स्थानीय संसाधनों पर आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था विकसित करने के लिए सतत कार्य कर रही है। धमतरी का औषधीय खेती मॉडल इन प्रयासों का उत्कृष्ट प्रतिफल है।

आज धमतरी जिला ने यह सिद्ध कर दिया है कि विकास केवल बड़े उद्योगों से नहीं, बल्कि गांव की महिलाओं के हाथों में नई संभावनाएं सौंपकर भी संभव है। औषधीय खेती की यह हरियाली केवल खेतों तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह आत्मनिर्भर गांवों, सशक्त महिलाओं, समृद्ध किसानों और विकसित छत्तीसगढ़ की नई पहचान बन चुकी है। आने वाले वर्षों में यह मॉडल निश्चित रूप से देश के अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगा।

CG NEWS : प्रेमी की सड़क हादसे में मौत से टूटी प्रेमिका, सदमे में लगाई फांसी

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सूरजपुर (छत्तीसगढ़)। जिले के करंजी चौकी क्षेत्र के राई गांव से एक बेहद हृदयविदारक मामला सामने आया है। एक सड़क दुर्घटना में प्रेमी की असमय मौत का सदमा उसकी प्रेमिका सहन नहीं कर सकी। प्रेमी की मौत के अगले ही दिन युवती ने फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। इस दोहरे हादसे से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है।


शादी के देख रहे थे सपने, नियति को कुछ और था मंजूर

पुलिस के अनुसार, राई गांव निवासी युवती सुनीता पैकरा क्षेत्र के ही एक युवक वीरपाल से बेहद प्यार करती थी। दोनों भविष्य में विवाह कर साथ जीवन बिताने के सपने देख रहे थे। लेकिन बीते दिनों एक भीषण सड़क हादसे में वीरपाल की मौत हो गई। इस आकस्मिक घटना ने सुनीता को पूरी तरह झकझोर कर रख दिया।

गुमसुम रहने के बाद उठाया आत्मघाती कदम

परिजनों ने पुलिस को बताया कि वीरपाल की मौत की खबर सुनने के बाद से ही सुनीता गहरी उदासी और मानसिक तनाव में चली गई थी। उसने लोगों से बातचीत करना बंद कर दिया था। घटना वाले दिन जब घर पर कोई नहीं था, तब उसने सूने मकान में फांसी लगा ली। जब परिजन घर लौटे तो उनके होश उड़ गए।

पुलिस जांच में जुटी

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची। सूरजपुर एसडीओपी अभिषेक पैकरा ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। परिजनों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं और पुलिस मर्ग कायम कर सभी पहलुओं से मामले की बारीकी से जांच कर रही है।

छत्तीसगढ़ में महिला का अपहरण कर सामूहिक दुष्कर्म, पार्क के पास मिली बेसुध

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 बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में महिला अस्मिता को तार-तार करने वाला एक बेहद शर्मनाक मामला सामने आया है। कांकेर जिले की रहने वाली एक महिला का अपहरण कर तीन अज्ञात दरिंदों ने सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) की वारदात को अंजाम दिया। वारदात के बाद आरोपी पीड़िता को बालोद-दल्लीराजहरा मुख्य मार्ग पर स्थित पर्यावरण पार्क के पास बेसुध हालत में छोड़कर फरार हो गए।


डायल-112 की मदद से पहुंचाया अस्पताल

राहगीरों की सूचना पर पहुंची डायल-112 की टीम ने बेसुध महिला को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका उपचार जारी है। होश में आने के बाद पीड़िता ने पुलिस को आपबीती सुनाई। महिला के बयानों के आधार पर बालोद थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म की संगीन धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। शुरुआती जांच और पीड़िता के बयान के अनुसार, वारदात को अंजाम देने वाले आरोपी ट्रक चालक बताए जा रहे हैं।

बारीकी से हो रही जांच: एडिशनल एसपी

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन मुस्तैद हो गया है। एडिशनल एसपी मोनिका ठाकुर ने बताया कि पीड़िता कांकेर जिले की निवासी है। उसके बयान दर्ज कर लिए गए हैं और पुलिस पूरे मामले की हर पहलू से बारीकी से जांच कर रही है। घटना में तीन आरोपी शामिल हैं, जिनकी पहचान और धरपकड़ के लिए पुलिस टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। पुलिस का दावा है कि आरोपियों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में 'राम-नामी' को सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री का सम्मान, छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को मिला राष्ट्रीय गौरव : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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रामनामी समाज की अनूठी परंपरा हमारी लोक संस्कृति की अमूल्य धरोहर : मुख्यमंत्री साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में छत्तीसगढ़ के अद्वितीय रामनामी समुदाय की समृद्ध विरासत पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म 'राम-नामी' को 'सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री' का राष्ट्रीय सम्मान मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय बताया है।

मुख्यमंत्री साय ने फिल्म के निर्देशक भरतबाला गणपति तथा पूरी टीम को इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि यह सम्मान छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर मिली महत्वपूर्ण पहचान है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रामनामी समाज की अनूठी परंपरा श्रद्धा, समर्पण और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का जीवंत प्रतीक है। इस विरासत को प्रभावी ढंग से देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का कार्य इस डॉक्यूमेंट्री ने किया है।

मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि यह सम्मान छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं, जनजातीय एवं लोक समुदायों की सांस्कृतिक विरासत तथा प्रदेश की विविध सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

सिम्स की लेडी डॉक्टर गिरफ्तार: मुर्दों को सांप से कटवाकर रचती थी फर्जी खेल, बिलासपुर का बड़ा मुआवजा घोटाला उजागर!

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 बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में कथित फर्जी स्नेक बाइट (सर्पदंश) मुआवजा घोटाले में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए सिम्स (SIMS) की पूर्व पदस्थ महिला डॉक्टर, डॉ. प्रियंका सोनी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी डॉक्टर पर दो अलग-अलग मामलों में दुर्भावनापूर्ण तरीके से मौत का कारण सर्पदंश दर्शाते हुए फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करने का गंभीर आरोप है।


इस फर्जी रिपोर्ट के आधार पर शासन से मिलने वाली मुआवजा राशि को हड़पने का प्रयास किया जा रहा था। पुलिस ने आरोपी डॉक्टर को न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत के तहत जेल भेज दिया गया है।

संदिग्ध मौत और तहसीलदार की शिकायत से खुला राज

पुलिस प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, तहसील कार्यालय के नायब नाजीर की लिखित शिकायत के बाद पुलिस ने निसार खान और लता सूर्यवंशी नामक दो व्यक्तियों की संदिग्ध मौत के मामलों की विस्तृत जांच शुरू की थी। इन दोनों शवों का पोस्टमार्टम डॉ. प्रियंका सोनी द्वारा किया गया था, जिन्होंने अपनी रिपोर्ट में मौत की वजह सांप का काटना (Snake Bite) बताया था। हालांकि, जांच टीम को जब इन रिपोर्ट्स पर गहरा संदेह हुआ, तो उन्होंने वैज्ञानिक व दस्तावेजी साक्ष्यों को खंगाला। जांच में रिपोर्ट पूरी तरह फर्जी पाए जाने के बाद पुलिस ने डॉक्टर के खिलाफ तत्काल कानूनी कदम उठाया।

वकील और परिजनों समेत तीन आरोपी पहले ही जा चुके हैं जेल

इस रैकेट का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने बताया कि मामले में केवल डॉक्टर ही शामिल नहीं थीं। इससे पहले पुलिस ने मृतकों के परिजनों और एक स्थानीय वकील सहित तीन अन्य आरोपियों को भी धरदबोचा है। पुलिस के मुताबिक, सरकारी मुआवजा राशि को अवैध रूप से प्राप्त करने के लिए फर्जी दस्तावेज और रिपोर्ट तैयार करने वाले इस पूरे संगठित नेटवर्क (सिंडिकेट) की कड़ियों को आपस में जोड़ा जा रहा है।

15 अन्य संदिग्ध मामलों पर टिकी जांच की सुई, कई और डॉक्टर रडार पर

बिलासपुर पुलिस के अनुसार, जिले में सर्पदंश से मौत दिखाकर सरकारी मुआवजा ऐंठने के लगभग 15 अन्य संदिग्ध मामलों की गहनता से जांच की जा रही है। इस जांच के दायरे में सिम्स (SIMS) के कुछ अन्य सेवारत और पूर्व डॉक्टर भी शामिल हैं, जो पुलिस के रडार पर हैं। अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि जैसे-जैसे पुख्ता साक्ष्य सामने आएंगे, इस घोटाले में शामिल अन्य चेहरों के खिलाफ भी सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप 2026: स्पेन फिर बना वर्ल्ड चैंपियन, फेरान टॉरेस के गोल से अर्जेंटीना को दी शिकस्त

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 न्यूयॉर्क-न्यू जर्सी: स्पेन ने एक्स्ट्रा टाइम में मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर 2026 का फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप अपने नाम कर लिया है। न्यूयॉर्क-न्यू जर्सी स्टेडियम में खेले गए इस ऐतिहासिक और रोमांचक फ़ाइनल मुक़ाबले में स्पेन के सब्स्टिट्यूट खिलाड़ी फेरान टॉरेस ने 106वें मिनट में निर्णायक गोल दागकर अपनी टीम को खिताबी जीत दिलाई।


निर्धारित 90 मिनट के कड़े मुकाबले तक दोनों ही टीमें कोई गोल नहीं कर सकी थीं। आखिरकार एक्स्ट्रा टाइम में टॉरेस ने गतिरोध तोड़ा और स्पेन को चैंपियन बना दिया।

स्पेन ने रचा इतिहास, बनाए कई रिकॉर्ड

इस जीत के साथ स्पेन ने पुरुषों का अपना दूसरा फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप ख़िताब जीता है। इससे पहले स्पेन ने साल 2010 में यह ट्रॉफ़ी जीती थी।

  • ऐतिहासिक उपलब्धि: इस खिताबी जीत के साथ स्पेन एक ही समय में पुरुषों और महिलाओं के सॉकर (फुटबॉल) में वर्ल्ड कप जीतने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है।

  • सब्स्टिट्यूट का कमाल: फेरान टॉरेस फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप फ़ाइनल में गोल करने वाले दुनिया के केवल पांचवें सब्स्टिट्यूट खिलाड़ी बन गए हैं। उनसे पहले जर्मनी के मारियो गोट्ज़े ने 2014 के फ़ाइनल में अर्जेंटीना के ख़िलाफ़ ही विनिंग गोल किया था।

  • बार्सिलोना कनेक्शन: टॉरेस वर्ल्ड कप फ़ाइनल में गोल करने वाले बार्सिलोना क्लब के दूसरे खिलाड़ी भी बने। उनसे पहले 2010 में स्पेन के आंद्रेस इनिएस्ता ने एक्स्ट्रा टाइम में विनिंग गोल दागा था।

अर्जेंटीना का दबदबा खत्म, मेसी युग का अंत!

इस हार के साथ ही टूर्नामेंट में अर्जेंटीना का दबदबा खत्म हो गया। अर्जेंटीना की टीम 1962 में ब्राज़ील के बाद लगातार दूसरी बार चैंपियन बनने का रिकॉर्ड बनाने की कोशिश कर रही थी। इस हार ने अर्जेंटीना और दिग्गज फुटबॉलर लियोनेल मेसी के एक शानदार और सुनहरे दौर के अंत का संकेत दे दिया है। मेसी ने ही अपनी कप्तानी और शानदार प्रदर्शन के दम पर टीम को 2022 फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप और 2021 व 2024 में कोपा अमरीका का ख़िताब जिताया था।

उतार-चढ़ाव भरा रहा स्पेन का सफर

स्पेन के ख़िताब तक पहुँचने का सफ़र बेहद दिलचस्प रहा। टीम की शुरुआत केप वर्डे के साथ गोल-रहित ड्रॉ से हुई थी, जो एक चौंकाने वाला परिणाम था। हालांकि, इसके बाद स्पेन ने ज़बरदस्त वापसी की:

  • ग्रुप स्टेज: सऊदी अरब को 4-0 और उरुग्वे को 1-0 से हराकर ग्रुप एच में शीर्ष स्थान हासिल किया।

  • राउंड ऑफ़ 32: ऑस्ट्रिया को 3-0 से हराया।

  • राउंड ऑफ़ 16: पुर्तगाल को 1-0 से मात दी।

  • क्वार्टर फ़ाइनल: बेल्जियम को 2-1 से शिकस्त दी।

  • सेमीफ़ाइनल: फ़्रांस को 2-0 से हराकर फ़ाइनल का टिकट पक्का किया।

अब तक का सबसे बड़ा वर्ल्ड कप

यह मैच इतिहास के सबसे बड़े फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप का 104वां और आख़िरी मुक़ाबला था। पहली बार 48 टीमों वाले इस मेगा टूर्नामेंट का आयोजन संयुक्त रूप से अमरीका, कनाडा और मैक्सिको में किया गया था।

रक्षाबंधन पर बिखरेगा हरियाली का संदेश

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रायगढ़ में स्व-सहायता समूह की दीदियों ने तैयार कीं अनोखी बीज राखियां

भाई की कलाई पर प्यार, धरती मां को उपहार की थीम पर बिहान की अभिनव पहल

रायपुर- रक्षाबंधन पर केवल भाई-बहन का प्रेम ही नहीं, बल्कि प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण का संदेश भी दिया जा सकता है। पेड़ों को राखी बांधकर उन्हें अपनी रक्षा का वचन देना और मिट्टी से बने इको-फ्रेंडली पौधे वाली राखियों का इस्तेमाल पर्यावरण को हरा-भरा रखने में मदद करता है।

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में स्व-सहायता समूहों की दीदियां इस बार रक्षाबंधन के पर्व को प्रकृति संरक्षण से जोड़ने की एक अनूठी मिसाल पेश कर रही हैं। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में जिला पंचायत रायगढ़ और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के सहयोग से जिले भर में पर्यावरण-अनुकूल बीज राखियां तैयार की जा रही हैं।

फेंकने पर अंकुरित होंगे देसी बीज

इन राखियों की सबसे विशेष बात यह है कि इन्हें धान, मक्का, भुट्टा, सेमी, करेला और बरबटी जैसे विभिन्न देसी बीजों से बेहद आकर्षक ढंग से बनाया जा रहा है। यदि त्योहार के बाद यह राखी मिट्टी में मिल जाती है या बाहर फेंक दी जाती है, तो इसमें लगे बीज अंकुरित होकर पौधे का रूप ले लेंगे। इससे भाई-बहन के अटूट प्रेम के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।

गांव-गांव में दिख रहा उत्साह

जिले के सभी सातों विकासखंडों में इस अभियान को लेकर महिलाओं में भारी उत्साह है। धरमजयगढ़ के ग्राम दुलियामुड़ा-कोयलार में कृष्णा स्व-सहायता समूह की सक्रिय महिला कविता राठिया ने आकर्षक बीज राखियां तैयार कर मिसाल पेश की है। रायगढ़ के बैसपाली, जुनवानी, लोइंग, गोपालपुर, संबलपुरी, लैलूंगा, तमनार के लिबरा गांव (जननी समूह), घरघोड़ा के बड़ेगुमड़ा (गायत्री समूह) और पुसौर के पुटकापुरी क्लस्टर सहित जिले भर की कृषि सखियां और महिलाएं इस कार्य में जुटी हुई हैं।

सातों विकासखंडों से चुनी जाएगी सर्वश्रेष्ठ बीज राखी

रायगढ़ जिले के सभी सातों विकासखंडों में इस रचनात्मकता और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए कल यानी 20 जुलाई को जिले के सभी सात विकासखंडों से एक-एक सर्वश्रेष्ठ बीज राखी का चयन किया जाएगा। चयन का आधार राखी की आकर्षक डिज़ाइन, देसी बीजों का उपयोग और पर्यावरण संरक्षण का संदेश जैसी खूबियों को बनाया जाएगा।

जिले के शीर्ष अधिकारियों को राखी बांधेंगी विजेता दीदियां

प्रतियोगिता में चुनी जाने वाली सातों विकासखंडों की विजेता दीदियों को 27 जुलाई को एक विशेष गरिमामय समारोह में सम्मानित किया जाएगा। इस अवसर पर ये दीदियां स्वयं कलेक्टर सहित जिले के शीर्ष अधिकारियों को अपने हाथों से बनाई हुई बीज राखी बांधेंगी। बिहान की दीदियों द्वारा शुरू किया गया यह अभियान अब केवल एक प्रतियोगिता न रहकर प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का एक बड़ा जनआंदोलन बनता जा रहा है।


साय सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत त्वरित कार्रवाई,दिवंगत आरक्षक के परिवार से 19 लाख की वसूली मामले में थाना प्रभारी गिरफ्तार

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एक करोड़ के बीमा दावे में कथित हेराफेरी का मामला

धमकी देकर आधी राशि मांगने का आरोप

रायपुर- छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के खिलाफ राज्य सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत नारायणपुर में एक गंभीर मामले में त्वरित कार्रवाई की गई है। सड़क दुर्घटना में दिवंगत डीएसएफ आरक्षक स्व.धनेश्वर नुरेटी की पत्नी को मिले एक करोड़ रुपये के दुर्घटना बीमा दावे में कथित अनियमितता और अवैध वसूली के आरोपों पर पुलिस ने तत्कालीन थाना प्रभारी सुरेश चंद्र यादव को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। मामले में एक अधिवक्ता पर भी गंभीर आरोप लगे हैं, जिसकी तलाश जारी है।

पुलिस के अनुसार डीएसएफ आरक्षक स्व.धनेश्वर नुरेटी की सड़क दुर्घटना में मृत्यु के बाद उनकी पत्नी के बैंक खाते में भारतीय स्टेट बैंक के वेतन पैकेज के अंतर्गत एक करोड़ रुपये की दुर्घटना बीमा राशि प्राप्त हुई थी। आरोप है कि तत्कालीन थाना प्रभारी सुरेश चंद्र यादव और अधिवक्ता कृष्ण कुमार वर्मा ने बीमा राशि दिलाने के नाम पर मृतक के परिजनों से 19 लाख रुपये ले लिए।

इतना ही नहीं आरोपियों ने कथित रूप से शेष बीमा राशि में भी 50 प्रतिशत हिस्सेदारी की मांग की। परिजनों द्वारा इसका विरोध करने पर उन्हें कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराने, कानूनी कार्रवाई में फंसाने और लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की धमकी दी गई। आरोपियों की लगातार अतिरिक्त रकम की मांग से परेशान होकर मृतक आरक्षक के परिजनों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय, नारायणपुर में शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत मिलते ही पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर थाना कोतवाली नारायणपुर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318, 308 एवं अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया। इसके बाद आरोपी सुरेश चंद्र यादव को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। वहीं सह-आरोपी अधिवक्ता कृष्ण कुमार वर्मा की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है। प्रकरण में आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है।

वास्तव में आरोपियों के विरुद्ध यह कार्रवाई भ्रष्टाचार और कदाचार के विरुद्ध छत्तीसगढ़ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का प्रमाण है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि कानून का पालन कराने वाले तंत्र में यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अवैध वसूली, भ्रष्टाचार अथवा किसी भी प्रकार की अनियमितता में संलिप्त पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध बिना किसी भेदभाव के कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।आम नागरिकों का विश्वास बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

डिफॉल्ट सर्विस चार्ज वसूलने पर सीसीपीए का बड़ा एक्शन, देशभर के 41 रेस्तरां के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेकर की कार्रवाई

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केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन तथा अनुचित व्यापारिक गतिविधियों के तहत ग्राहकों के बिल में डिफॉल्ट रूप से सर्विस चार्ज जोड़ने के मामले में देशभर के 41 रेस्तरां के खिलाफ स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए कार्रवाई शुरू की है।

यह कार्रवाई राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (National Consumer Helpline-NCH) पर प्राप्त शिकायतों के आधार पर की गई। शिकायतों के साथ प्रस्तुत बिलों से यह स्पष्ट हुआ कि संबंधित रेस्तरां उपभोक्ताओं की स्पष्ट सहमति के बिना उनके बिल में स्वतः सर्विस चार्ज जोड़ रहे थे।

जांच के दौरान सीसीपीए ने पाया कि यह प्रथा 4 जुलाई 2022 को जारी होटलों एवं रेस्तरां में सर्विस चार्ज वसूली संबंधी अनुचित व्यापारिक गतिविधियों की रोकथाम और उपभोक्ता हित संरक्षण दिशानिर्देशों का उल्लंघन है। साथ ही यह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(47) के तहत अनुचित व्यापारिक गतिविधि (Unfair Trade Practice) की श्रेणी में आती है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखी गाइडलाइन की वैधता

28 मार्च 2025 को दिल्ली उच्च न्यायालय ने नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया बनाम भारत संघ मामले में सीसीपीए की सर्विस चार्ज संबंधी गाइडलाइन को वैध ठहराते हुए कहा कि अनिवार्य रूप से सर्विस चार्ज वसूलना कानून के विरुद्ध है।

न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी होटल एवं रेस्तरां इन दिशानिर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य हैं तथा सीसीपीए कानून के अनुसार इनके अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।

सीसीपीए की गाइडलाइन के प्रमुख प्रावधान

  • कोई भी होटल या रेस्तरां भोजन के बिल में स्वतः या डिफॉल्ट रूप से सर्विस चार्ज नहीं जोड़ सकता।

  • किसी अन्य नाम से भी सर्विस चार्ज की वसूली नहीं की जा सकती।

  • उपभोक्ता को सर्विस चार्ज देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। यह पूरी तरह स्वैच्छिक एवं वैकल्पिक है।

  • सर्विस चार्ज नहीं देने पर किसी भी उपभोक्ता को सेवा देने से इनकार नहीं किया जा सकता।

  • भोजन के बिल में सर्विस चार्ज जोड़कर उस पर जीएसटी नहीं लगाया जा सकता।

सीसीपीए की कार्रवाई

एक मामले में चायोस (Sunshine Teahouse Pvt. Ltd.) पर उपभोक्ता के बिल में डिफॉल्ट सर्विस चार्ज जोड़ने के लिए 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। साथ ही कंपनी को उपभोक्ता से वसूला गया सर्विस चार्ज वापस करने का निर्देश दिया गया है।

प्राधिकरण ने कंपनी को अपने सभी आउटलेट्स के सॉफ्टवेयर आधारित बिलिंग सिस्टम में संशोधन करने का भी निर्देश दिया है, ताकि भविष्य में किसी भी उपभोक्ता के बिल में स्वतः सर्विस चार्ज या इसी प्रकार का कोई शुल्क न जोड़ा जाए।

सीसीपीए ने निम्नलिखित रेस्तरां के खिलाफ भी अंतिम आदेश जारी किए हैं—

  • कैफे ब्लू बॉटल, पटना

  • चाइना गेट रेस्टोरेंट प्राइवेट लिमिटेड

  • फिएस्टा बारबेक्यू नेशन

  • फू अहमदाबाद रेस्टोरेंट

  • एल'ओपेरा फ्रेंच बेकरी प्राइवेट लिमिटेड

  • ज़ोरो – द लग्जरी नाइट क्लब

  • चायोस (Sunshine Teahouse Pvt. Ltd.)

अन्य रेस्तरां के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों की जांच एवं कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।

उपभोक्ता कहां करें शिकायत?

यदि किसी रेस्तरां द्वारा आपकी सहमति के बिना बिल में सर्विस चार्ज जोड़ा जाता है, तो इसकी शिकायत राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH) पर टोल-फ्री नंबर 1915 या एनसीएच प्लेटफॉर्म के माध्यम से दर्ज कराई जा सकती है।

सीसीपीए ने कहा है कि वह सर्विस चार्ज से संबंधित शिकायतों पर लगातार नजर रखे हुए है और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 तथा संबंधित दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। प्राधिकरण का उद्देश्य उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करना तथा आतिथ्य क्षेत्र में पारदर्शी, निष्पक्ष और उपभोक्ता हितैषी व्यावसायिक व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

37वें अंतरराष्ट्रीय जीवविज्ञान ओलंपियाड 2026 में भारत का शानदार प्रदर्शन, चारों छात्रों ने जीते पदक

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12 से 19 जुलाई 2026 के दौरान विलनियस, लिथुआनिया में आयोजित 37वें अंतरराष्ट्रीय जीवविज्ञान ओलंपियाड (International Biology Olympiad-IBO 2026) में भारत ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए चारों प्रतिभागी छात्रों ने पदक अपने नाम किए। भारतीय दल ने 1 स्वर्ण और 3 रजत पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया।

पदक विजेता

  • भाव्या गुणवाल (महेंद्रगढ़, हरियाणा) – स्वर्ण पदक

  • सौमिल मैती (हावड़ा, पश्चिम बंगाल) – रजत पदक

  • निशित कलानी (पाली, राजस्थान) – रजत पदक

  • अनमोल कुमार (मानसा, पंजाब) – रजत पदक

भारतीय दल के साथ टीम लीडर के रूप में प्रो. रेखा वरताक (सेवानिवृत्त, एचबीसीएसई-टीआईएफआर, मुंबई) और डॉ. अनुपमा रोनाड (एचबीसीएसई-टीआईएफआर) मौजूद थीं। वैज्ञानिक पर्यवेक्षक (Scientific Observers) के रूप में डॉ. रंजीतसिंह देवकर (एम.एस. विश्वविद्यालय, बड़ौदा) तथा डॉ. सिद्धेश घाग (यूएम-डीएई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन बेसिक साइंसेज, मुंबई) ने दल का मार्गदर्शन किया।

इस वर्ष आयोजित ओलंपियाड में 78 देशों के 307 विद्यार्थियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता में कुल 31 स्वर्ण, 61 रजत तथा 91 कांस्य पदक प्रदान किए गए।

चुनौतीपूर्ण रही प्रतियोगिता

आईबीओ-2026 की परीक्षाओं का आयोजन विलनियस विश्वविद्यालय के लाइफ साइंसेज सेंटर द्वारा किया गया, जिसमें माध्यमिक स्तर के जीवविज्ञान ज्ञान को उच्च स्तर पर परखा गया।

कुल छह घंटे की प्रयोगात्मक परीक्षा में प्रतिभागियों को चार विशिष्ट क्षेत्रों में जटिल वैज्ञानिक प्रयोग करने पड़े—

  • आणविक जीवविज्ञान एवं जैव रसायन (Molecular Biology & Biochemistry) में प्लास्मिड पर प्रतिबंध एंजाइम (Restriction Digestion), एगारोज़ जेल विश्लेषण तथा एंजाइम परीक्षण।

  • पशु शरीर क्रिया विज्ञान (Animal Physiology) में एस्पिरिन की फार्माकोकाइनेटिक्स का अध्ययन तथा विशेष मोबाइल एप एवं लाइट बॉक्स कलोरीमीटर की सहायता से रक्त नमूनों का विश्लेषण।

  • पशु आकारिकी एवं वर्गीकरण (Animal Morphology & Systematics) में कीट नमूनों का वर्गीकरण तथा मुखांगों (Mouth Parts) का सूक्ष्म विच्छेदन।

  • पादप कम्प्यूटेशनल जीवविज्ञान (Plant Computational Biology) में ImageJ सॉफ्टवेयर की सहायता से पौधों की जड़ों की लंबाई का विश्लेषण, विभिन्न पौध प्रजातियों का उच्च-आयामी मैक्रोफीनोटाइप अध्ययन तथा जटिल ट्रांसक्रिप्टोम विश्लेषण।

सैद्धांतिक परीक्षा भी रही अत्यंत कठिन

प्रयोगात्मक परीक्षा के अतिरिक्त प्रतिभागियों को दो चरणों में आयोजित छह घंटे की सैद्धांतिक परीक्षा भी देनी पड़ी। इसमें 100 अत्यंत चुनौतीपूर्ण प्रश्न शामिल थे, जो वास्तविक वैज्ञानिक अनुसंधान एवं क्षेत्रीय अध्ययनों पर आधारित थे।

प्रश्नों के माध्यम से विद्यार्थियों की केवल तथ्यात्मक जानकारी ही नहीं, बल्कि समस्या-समाधान क्षमता का भी मूल्यांकन किया गया। परीक्षा में कोशिका एवं आणविक जीवविज्ञान, पादप एवं प्राणी विज्ञान, आनुवंशिकी एवं विकासवाद, पारिस्थितिकी, प्राणी व्यवहार विज्ञान तथा जैव वर्गिकी जैसे विषय शामिल थे।

भारतीय दल को बधाई

भारत के सभी पदक विजेता छात्रों तथा पूरे भारतीय प्रतिनिधिमंडल को इस उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई।

देशभर के शिक्षकों, मार्गदर्शकों तथा एचबीसीएसई (HBCSE) की जीवविज्ञान ओलंपियाड इकाई ने प्रशिक्षण शिविरों एवं प्रस्थान-पूर्व ओरिएंटेशन कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साथ ही राष्ट्रीय संचालन समिति, शिक्षक संगठनों तथा भारत सरकार की वित्तपोषण एजेंसियों के सतत सहयोग के लिए भी आभार व्यक्त किया गया।

भारत का शानदार रिकॉर्ड

यह अंतरराष्ट्रीय जीवविज्ञान ओलंपियाड में भारत की 26वीं भागीदारी थी।

अब तक इस प्रतियोगिता में भारत के 104 छात्र भाग ले चुके हैं, जिनमें—

  • 17 स्वर्ण पदक

  • 69 रजत पदक

  • 17 कांस्य पदक

  • 1 सम्मानजनक उल्लेख (Honourable Mention)

प्राप्त हुए हैं।

पिछले 10 वर्षों में भारत का प्रदर्शन विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा है। इस अवधि में भारतीय प्रतिभागियों की स्वर्ण पदक सफलता दर 25 प्रतिशत तथा रजत पदक सफलता दर 68 प्रतिशत रही है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बढ़ती वैज्ञानिक प्रतिभा और उत्कृष्ट प्रशिक्षण व्यवस्था का प्रमाण है।

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