Media24Media.com

Responsive Ad Slot

Latest

latest
lockdown news

महासमुंद की खबरें

महासमुंद की खबर

रायगढ़ की ख़बरें

raigarh news

दुर्ग की ख़बरें

durg news

जम्मू कश्मीर की ख़बरें

jammu and kashmir news

VIDEO

Videos
top news


 

गरबा में भागीदारी को लेकर छत्तीसगढ़ में सियासी बहस तेज, वक्फ बोर्ड की अपील के बाद राजनीतिक बयानबाजी

No comments Document Thumbnail

रायपुर- शारदीय नवरात्रि के दौरान छत्तीसगढ़ में गरबा और डांडिया आयोजनों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। विवाद मुख्य रूप से गरबा आयोजनों में मुस्लिम युवाओं की भागीदारी, प्रवेश की अनुमति, धार्मिक परंपराओं के पालन और आयोजनों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सामने आया है।

छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने मुस्लिम युवाओं से अपील की है कि यदि वे गरबा आयोजन में शामिल होते हैं तो आयोजन की धार्मिक परंपराओं और आस्था का सम्मान करें तथा आयोजन समिति से अनुमति लेकर ही प्रवेश करें। उनके बयान के अनुसार, गरबा को केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम के बजाय धार्मिक आस्था से जुड़ा आयोजन मानते हुए उसकी परंपराओं का पालन किया जाना चाहिए।

वहीं, इस मुद्दे पर राज्य की राजनीति में भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने डॉ. सलीम राज के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि गरबा मां की आराधना से जुड़ा आयोजन है और जिन लोगों की इसमें आस्था नहीं है, उन्हें पंडाल में नहीं जाना चाहिए।

गरबा आयोजनों में प्रवेश और सुरक्षा को लेकर बजरंग दल की ओर से भी प्रशासन के समक्ष अलग-अलग मांगें रखे जाने की रिपोर्ट है। संगठन ने आयोजनों में प्रवेश व्यवस्था, पहचान और सुरक्षा से संबंधित दिशा-निर्देशों की मांग की है। इस वजह से रायपुर समेत प्रदेश के अन्य हिस्सों में गरबा आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम न रहकर धार्मिक परंपरा, सुरक्षा और सामाजिक भागीदारी से जुड़े मुद्दों की चर्चा का केंद्र बन गए हैं।

इस बहस का दूसरा पक्ष भी सामने आया है। सितंबर में रायपुर दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने गरबा और डांडिया आयोजनों में मुस्लिमों के प्रवेश पर रोक लगाने की मांगों का विरोध किया था। उन्होंने संविधान में सभी धर्मों को समान अधिकार मिलने और अलग-अलग समुदायों के लोगों के एक-दूसरे के त्योहारों में शामिल होने की बात कही थी।

इस तरह छत्तीसगढ़ में गरबा को लेकर मौजूदा बहस के केंद्र में दो अलग-अलग दृष्टिकोण दिखाई दे रहे हैं। एक पक्ष गरबा की धार्मिक प्रकृति और परंपराओं के सम्मान पर जोर दे रहा है, जबकि दूसरा पक्ष धार्मिक आयोजनों में विभिन्न समुदायों की भागीदारी और संवैधानिक समानता का मुद्दा उठा रहा है। फिलहाल यह बहस राजनीतिक बयानों और सामाजिक प्रतिक्रियाओं के स्तर पर जारी है।

गौरतलब है कि गरबा आयोजनों में प्रवेश के नियम अंततः संबंधित आयोजन समितियों और स्थानीय प्रशासन की व्यवस्था पर भी निर्भर करते हैं। अलग-अलग आयोजनों के नियम एक जैसे हों, यह जरूरी नहीं है। इसलिए किसी एक संगठन या व्यक्ति के बयान को पूरे प्रदेश में लागू नियम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

सरकारी योजनाओं के नाम पर APK फाइल भेजकर ठगी, कबीरधाम पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार

No comments Document Thumbnail

कबीरधाम- सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर मोबाइल पर APK फाइल भेजकर साइबर ठगी करने वाले एक आरोपी को कबीरधाम पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी पर लोगों को सरकारी योजना से जुड़ी फाइल या आवेदन के नाम पर संदिग्ध APK फाइल डाउनलोड करवाने और उसके जरिए साइबर ठगी करने का आरोप है।

पुलिस के अनुसार, साइबर ठगी के इस तरीके में लोगों को पहले किसी सरकारी योजना, सब्सिडी, आर्थिक सहायता या अन्य लाभ का झांसा दिया जाता है। इसके बाद मोबाइल पर एक APK फाइल भेजकर उसे इंस्टॉल करने के लिए कहा जाता है। जैसे ही व्यक्ति संदिग्ध एप को मोबाइल में इंस्टॉल करता है, उसके मोबाइल की संवेदनशील जानकारी साइबर अपराधियों के हाथ लगने का खतरा बढ़ जाता है।

सरकारी योजना का नाम लेकर भेजी जा रही थी फाइल

जांच में पुलिस को पता चला कि आरोपी कथित तौर पर सरकारी योजनाओं का नाम और उससे जुड़े लाभ का लालच देकर लोगों को अपने जाल में फंसाता था। इसके बाद उन्हें मोबाइल पर APK फाइल भेजी जाती थी।

आम तौर पर एंड्रॉयड मोबाइल में APK किसी एप्लीकेशन की इंस्टॉलेशन फाइल होती है। साइबर अपराधी इसी तकनीक का इस्तेमाल कर फर्जी एप लोगों के मोबाइल में इंस्टॉल करवाने की कोशिश करते हैं। ऐसे एप के जरिए मोबाइल में मौजूद संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाने या वित्तीय धोखाधड़ी करने की कोशिश की जा सकती है।

पुलिस ने जांच के बाद आरोपी को पकड़ा

शिकायत मिलने के बाद कबीरधाम पुलिस की साइबर टीम ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने मोबाइल नंबर, डिजिटल साक्ष्यों और अन्य तकनीकी जानकारी के आधार पर संदिग्ध व्यक्ति की पहचान की। जांच के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस ने आरोपी के कब्जे से साइबर अपराध से जुड़े कुछ डिजिटल उपकरण और अन्य सामग्री जब्त किए जाने की जानकारी दी है। मामले में आरोपी से पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि उसने कितने लोगों को इस तरह से निशाना बनाया और ठगी से कितनी रकम हासिल की।

लोगों को सतर्क रहने की अपील

कबीरधाम पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी सरकारी योजना का लाभ दिलाने के नाम पर WhatsApp, SMS या सोशल मीडिया के माध्यम से भेजी गई APK फाइल को डाउनलोड या इंस्टॉल न करें।

पुलिस ने विशेष रूप से कहा है कि किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में संदिग्ध एप इंस्टॉल करने से बचें। बैंकिंग जानकारी, OTP, UPI PIN, ATM या डेबिट कार्ड से संबंधित जानकारी और अन्य व्यक्तिगत विवरण किसी के साथ साझा नहीं करना चाहिए।

APK फाइल से रहें सावधान

साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक, सरकारी विभाग आमतौर पर योजनाओं की जानकारी के लिए अपने आधिकारिक पोर्टल और अधिकृत माध्यमों का इस्तेमाल करते हैं। इसलिए यदि किसी व्यक्ति को किसी योजना के नाम पर कोई संदिग्ध लिंक या APK फाइल भेजी जाती है, तो उसे खोलने या इंस्टॉल करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करना जरूरी है।

यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार होता है तो उसे तत्काल 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करनी चाहिए और संबंधित बैंक को भी तुरंत इसकी जानकारी देनी चाहिए। समय पर शिकायत करने से ठगी की रकम को फ्रीज कराने की संभावना बढ़ सकती है।


जनपद पंचायत कर्मचारी शासकीय सेवक नहीं, सरकारी पेंशन का वैधानिक अधिकार भी नहीं: हाईकोर्ट

No comments Document Thumbnail

बिलासपुर- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जनपद पंचायतों से सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन से जुड़ी याचिकाओं पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जनपद पंचायत के कर्मचारी राज्य सरकार के शासकीय सेवक नहीं हैं और मौजूदा नियमों के तहत उन्हें सरकारी कर्मचारियों के समान पेंशन पाने का स्वतः कोई वैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है। 

जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकलपीठ ने सेवानिवृत्त जनपद पंचायत कर्मचारियों की ओर से दायर 21 से अधिक संबंधित याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता पेंशन पाने के लिए ऐसा कोई वैधानिक प्रावधान नहीं दिखा सके, जिसके आधार पर उन्हें राज्य के नियमित कर्मचारियों के समान पेंशन का लाभ दिया जा सके। 

लंबे समय तक सेवा के बाद पेंशन की मांग

मामले में विभिन्न जिलों के जनपद पंचायतों से सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्होंने लंबे समय तक जनपद पंचायतों में सेवा की है और सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें पेंशन का लाभ मिलना चाहिए।

उन्होंने संबंधित अधिकारियों द्वारा उनकी पेंशन संबंधी मांग को खारिज किए जाने के आदेश को चुनौती दी और सरकारी कर्मचारियों की तरह मासिक पेंशन दिए जाने की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी दलील दी गई कि कुछ अन्य जनपद पंचायतों के कर्मचारियों को पेंशन का भुगतान किया जा रहा है, इसलिए उन्हें भी समान लाभ मिलना चाहिए। 

हाईकोर्ट ने कहा—पंचायत संस्थाएं स्वायत्त निकाय

अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान जनपद पंचायतों की कानूनी स्थिति और उनके कर्मचारियों की सेवा शर्तों पर विचार किया। कोर्ट ने कहा कि पंचायत संस्थाएं स्वायत्त निकाय हैं और उनके कर्मचारियों की सेवा शर्तें अलग नियमों से निर्धारित होती हैं।

अदालत के अनुसार, केवल इसलिए कि पंचायत कर्मचारी सार्वजनिक कार्य करते हैं, उन्हें राज्य सरकार का कर्मचारी या शासकीय सेवक नहीं माना जा सकता। उनके वेतन और सेवा संबंधी मामलों का संचालन पंचायतों पर लागू अलग नियमों के तहत होता है। 

पेंशन के लिए स्पष्ट वैधानिक प्रावधान जरूरी

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पेंशन का लाभ तभी कानूनी अधिकार के रूप में दावा किया जा सकता है, जब उसके लिए संबंधित सेवा नियमों या कानून में प्रावधान मौजूद हो। अदालत ने माना कि जनपद पंचायत कर्मचारियों के मामले में ऐसा कोई वैधानिक पेंशन प्रावधान याचिकाकर्ता स्थापित नहीं कर सके।

राज्य की ओर से अदालत में यह भी बताया गया कि संबंधित कर्मचारियों की सेवा शर्तों में प्रोविडेंट फंड से जुड़े प्रावधान लागू थे और वे राज्य की नियमित सिविल सेवा के कर्मचारियों पर लागू छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1976 के दायरे में नहीं आते। 

दूसरे पंचायत कर्मचारियों को पेंशन मिलने की दलील भी नहीं मानी

याचिकाकर्ताओं ने यह दलील भी दी थी कि कुछ अन्य जनपद पंचायतों के सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन का भुगतान किया जा रहा है, इसलिए उन्हें भी समानता के आधार पर पेंशन मिलनी चाहिए।

इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी अन्य स्थान पर नियमों के विपरीत या विवादित तरीके से कोई लाभ दिया गया है, तो वह दूसरे कर्मचारियों के लिए स्वतः कानूनी अधिकार पैदा नहीं करता। यानी किसी गलत या विवादित भुगतान को आधार बनाकर समान लाभ की मांग नहीं की जा सकती। 

कुछ जनपद पंचायतों में पेंशन भुगतान की जांच

मामले में यह तथ्य भी सामने आया कि कुछ जनपद पंचायतों में सेवानिवृत्त कर्मचारियों को स्थानीय स्तर पर गठित निधि या निर्णयों के आधार पर पेंशन का भुगतान किया जा रहा था। राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि इन भुगतानों की वैधानिकता की जांच के लिए संबंधित अधिकारियों को 27 अगस्त और 31 अगस्त 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे। 

कोर्ट ने याचिकाएं की खारिज

सभी पक्षों की दलीलों और संबंधित नियमों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता पेंशन प्राप्त करने का कोई स्पष्ट वैधानिक अधिकार स्थापित नहीं कर पाए हैं। इसके आधार पर अदालत ने पेंशन की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया।

इस फैसले से यह स्पष्ट हुआ है कि जनपद पंचायतों में सेवा करने मात्र से कर्मचारी राज्य सरकार के नियमित शासकीय सेवक नहीं बन जाते और उन्हें सरकारी कर्मचारियों के लिए लागू पेंशन व्यवस्था का लाभ स्वतः नहीं मिल सकता। 

मामला: Urmila Panigrahi बनाम State of Chhattisgarh एवं अन्य तथा संबंधित याचिकाएं
याचिका: WPS No. 11820/2025 एवं अन्य संबंधित मामले
पीठ: जस्टिस बिभु दत्ता गुरु
फैसला: 5 अक्टूबर 2026


महासमुंद: बेलसोंडा ग्राम पंचायत में लाखों के गबन का आरोप; सरपंच और सचिव के खिलाफ एसडीएम से शिकायत

No comments Document Thumbnail

महासमुंद:- जनपद पंचायत महासमुंद अंतर्गत ग्राम पंचायत बेलसोंडा में शासकीय राशि के कथित दुरुपयोग और गंभीर वित्तीय अनियमितताओं को लेकर ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों ने विहित अधिकारी (पंचायत) सह अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), महासमुंद के समक्ष एक विस्तृत शिकायत प्रस्तुत कर सरपंच प्रीति त्रिभुवन धीवर और सचिव नेहा उपाध्याय के खिलाफ धारा 40 के तहत पद से हटाने व निलंबन की मांग की है।

16 माह के कार्यकाल में लाखों की अनियमितता का आरोप

शिकायतकर्ताओं—पोखन लाल चन्द्राकर, लक्ष्मीकांत चन्द्राकर, झम्मन धीवर, लीलाधर धीवर, तेजेश्वर चन्द्राकर और भामिनी चन्द्राकर—का आरोप है कि पंचायत के 2025–30 के कार्यकाल के शुरुआती 16 महीनों में छत्तीसगढ़ पंचायती राज अधिनियम और वित्तीय नियमों को ताक पर रखकर पंचायत निधि का आहरण किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि सूचना का अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त दस्तावेजों से कई गड़बड़ियां उजागर हुई हैं।

शिकायत में उठाए गए मुख्य बिंदु:

 * बिना बिल-वाउचर भुगतान: शिकायत में आरोप लगाया गया है कि लगभग 11.59 लाख रुपये का भुगतान बिना बिल अथवा वाउचर के कर दिया गया।

 * दोहरा भुगतान एवं फर्जी बिलिंग: एक ही बिल पर 2.04 लाख रुपये का दोहरा भुगतान करने तथा अन्य फर्मों के बिल लगाकर राशि आहरण करने का दावा किया गया है।

 * परिजनों व पंचों के नाम पर भुगतान: शिकायतकर्ताओं के अनुसार, सरपंच पति, पुत्र से जुड़ी फर्म, पंचायत कर्मी और वार्ड पंचों के नाम पर विभिन्न कार्यों व कमीशन के मद में नियमों के विरुद्ध लाखों रुपये का आहरण किया गया।

 * पदभार ग्रहण से पूर्व का भुगतान: दस्तावेजों का हवाला देते हुए आरोप लगाया गया है कि सरपंच द्वारा 7 मार्च 2025 को शपथ लेने से पूर्व की तिथियों का फर्जी हाजिरी पत्रक बनाकर जनवरी 2026 में मजदूरी राशि निकाली गई।

 * अवैध मुरम उत्खनन: ग्रामीणों का आरोप है कि बिना खनिज विभाग की अनुमति और बिना माप पुस्तिका (MB) प्रविष्टि के 94 हाईवा और 332 ट्रैक्टर (लगभग 86,000 घन फीट) मुरम का अवैध उत्खनन कर 3.54 लाख रुपये का वित्तीय गबन किया गया।

 * स्वच्छता और पेयजल मद में विसंगतियां: गांव में सफाई व्यवस्था बदहाल होने के बावजूद 15 माह में स्वच्छता के नाम पर लगभग 14.66 लाख रुपये निकालने का आरोप है।

कार्यालय सील करने और एफआईआर दर्ज करने की मांग

शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका को देखते हुए पंचायत भवन को सील कर सभी रिकॉर्ड तुरंत जब्त किए जाएं। साथ ही शासकीय धन के दुरुपयोग के मामले में संबंधितों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर लगभग 17.60 लाख रुपये की वसूली की जाए।

इस शिकायत की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, पंचायत मंत्री, आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW/ACB) और जिला कलेक्टर सहित अन्य उच्चाधिकारियों को भी प्रेषित की गई है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समयसीमा में निष्पक्ष जांच नहीं की गई तो वे उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को विवश होंगे।













बालोद एसिड अटैक मामले में आरोपियों के खिलाफ फूटा छात्रों का आक्रोश, कोर्ट ले जाते समय जमकर विरोध

No comments Document Thumbnail

आरोपियों को पैदल कोर्ट ले गई पुलिस, छात्रों ने स्याही और जला हुआ ऑयल फेंका; फांसी की मांग को लेकर की नारेबाजी

बालोद- जिले में 22 वर्षीय छात्रा पर हुए एसिड अटैक की घटना के बाद लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। मंगलवार को मामले में गिरफ्तार दोनों आरोपियों को पुलिस कड़ी सुरक्षा के बीच न्यायालय में पेश करने पहुंची, जहां बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं और स्थानीय लोगों ने आरोपियों के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया।

पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश करने से पहले उनका मुंडन कराया गया और इसके बाद उन्हें दल्लीराजहरा चौक से पैदल कोर्ट तक ले जाया गया। जैसे ही आरोपी घड़ी चौक के पास पहुंचे, वहां मौजूद छात्रों और लोगों ने उनके खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। प्रदर्शनकारियों ने आरोपियों को कड़ी सजा देने और फांसी देने की मांग की।

छात्रों ने फेंकी स्याही और जला हुआ ऑयल

कोर्ट ले जाने के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई, जब आक्रोशित छात्रों और लोगों ने आरोपियों पर स्याही और जला हुआ ऑयल फेंक दिया। कुछ लोगों ने आरोपियों के साथ मारपीट करने की कोशिश भी की, जिसके बाद पुलिस ने तत्काल सुरक्षा घेरा बनाकर भीड़ को पीछे हटाया।

स्थिति को देखते हुए पुलिस ने कोर्ट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी थी। बड़ी संख्या में पुलिस जवानों की तैनाती की गई थी, ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति को रोका जा सके।

लाइब्रेरी से लौट रही छात्रा पर हुआ था हमला

पुलिस के मुताबिक, घटना 5 अक्टूबर 2026 को बालोद शहर की सिंचाई कॉलोनी क्षेत्र में हुई थी। छात्रा लाइब्रेरी से अपने घर लौट रही थी, तभी उस पर एसिड फेंक दिया गया। हमले में छात्रा गंभीर रूप से घायल हुई, जिसके बाद उसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया और बाद में रायपुर के डीकेएस अस्पताल रेफर किया गया।

पुलिस ने मामले की जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान यश कुमार सोनकर और करण कुंजाम के रूप में हुई है। पुलिस का दावा है कि घटना के पीछे युवती से जुड़ा कथित प्रेम प्रसंग, शादी से इनकार और दूसरे युवक से बातचीत को लेकर पैदा हुआ विवाद था।

पुलिस ने आठ घंटे में आरोपियों तक पहुंचने का दावा किया

पुलिस के मुताबिक, घटना के बाद जांच टीम ने तत्काल सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों की जांच शुरू की। पूछताछ के आधार पर पुलिस पहले एक आरोपी तक पहुंची और उसकी निशानदेही पर दूसरे आरोपी को भी गिरफ्तार किया गया।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से घटना में इस्तेमाल किए गए एसिड और वारदात के समय पहने गए कपड़े जब्त करने की बात कही है। साथ ही पुलिस टीम ने घटनास्थल पर ले जाकर घटना का रिक्रिएशन भी कराया।

कोर्ट परिसर में भारी पुलिस बल तैनात

आरोपियों के खिलाफ छात्रों और स्थानीय लोगों के आक्रोश को देखते हुए न्यायालय परिसर को सुरक्षा घेरे में रखा गया। पुलिस ने दोनों आरोपियों को भीड़ से सुरक्षित रखते हुए न्यायालय में पेश किया।

कोर्ट की कार्रवाई के बाद जब आरोपियों को बाहर निकाला गया तो सुरक्षा के मद्देनजर उन्हें हेलमेट पहनाकर पुलिस वाहन तक ले जाया गया। पुलिस को आशंका थी कि आक्रोशित भीड़ आरोपियों पर हमला कर सकती है। इसके बाद दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया।

अधिवक्ताओं ने भी जताया आक्रोश

मामले को लेकर बालोद जिला अधिवक्ता संघ की ओर से भी कड़ा रुख सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार, अधिवक्ता संघ ने आरोपियों की पैरवी नहीं करने की बात कही है। मामले को लेकर अधिवक्ताओं की बैठक भी प्रस्तावित बताई गई है।

एसिड की बिक्री और निगरानी पर भी उठे सवाल

घटना के बाद एसिड की बिक्री और उसके इस्तेमाल पर निगरानी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिस की जांच में आरोपियों द्वारा पहले से एसिड हासिल करने और कथित तौर पर वारदात की योजना बनाने की बात सामने आने के बाद यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि ऐसे खतरनाक रसायनों की बिक्री और उपलब्धता पर निगरानी किस तरह की जा रही है।

फिलहाल पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है। न्यायालय में आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया जारी है।


राज्य सरकार की सख्त कार्रवाई: ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट

No comments Document Thumbnail

शासकीय हेलीकॉप्टर का बीमा दावा चार साल से अधिक समय तक लंबित रखने के मामले में विमानन संचालनालय ने की कार्रवाई

राज्य सरकार ने कहा—सार्वजनिक संपत्ति और जनता के पैसे से जुड़े दावों में अनावश्यक देरी स्वीकार्य नहीं

कंपनी को कारण बताओ नोटिस, लिखित जवाब और व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर देने के बाद जारी हुआ तर्कसंगत आदेश

रायपुर- छत्तीसगढ़ शासन ने शासकीय हेलीकॉप्टर के बीमा दावे के निराकरण में चार साल से अधिक समय तक हुई देरी के मामले में कड़ा कदम उठाते हुए द ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (OICL) को तीन वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया है। विमानन संचालनालय ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए कंपनी के विरुद्ध यह कार्रवाई की है।

मामला मई 2022 में रायपुर एयरपोर्ट पर दुर्घटनाग्रस्त हुए राज्य शासन के हेलीकॉप्टर से संबंधित है। राज्य शासन द्वारा हेलीकॉप्टर का बीमा ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी से कराया गया था और निर्धारित बीमा प्रीमियम का पूर्ण भुगतान किया गया था। दुर्घटना के बाद राज्य शासन की ओर से बीमा दावा प्रस्तुत किया गया, लेकिन कंपनी द्वारा इस दावे को चार वर्ष से अधिक समय तक लंबित रखा गया और अंततः अगस्त 2026 में इसे अस्वीकार कर दिया गया।

विमानन संचालनालय ने पूरे प्रकरण के परीक्षण में पाया कि सार्वजनिक संपत्ति से जुड़े बीमा दावे के निराकरण में अत्यधिक विलंब हुआ और राज्य शासन के प्रकरण के निपटारे में कंपनी का रवैया असंगत रहा। शासन ने इसे सार्वजनिक धन और शासकीय हित से जुड़ा गंभीर विषय मानते हुए कार्रवाई की है।

अधिकारियों के अनुसार शासकीय हेलीकॉप्टर सार्वजनिक संपत्ति है, जिसकी खरीदी और बीमा में जनता का पैसा लगा है। ऐसी स्थिति में बीमा दावे को वर्षों तक लंबित रखने का आर्थिक प्रभाव अंततः सार्वजनिक संसाधनों पर पड़ता है। शासन का स्पष्ट मत है कि सरकार के साथ कार्य करने वाली प्रत्येक सेवा प्रदाता संस्था को अपनी संविदात्मक जिम्मेदारियों और प्रतिबद्धताओं का समयबद्ध रूप से पालन करना होगा।

कार्रवाई से पहले कंपनी को दिया गया पूरा अवसर

राज्य शासन ने इस मामले में प्राकृतिक न्याय और निर्धारित प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित किया। ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। कंपनी ने अपना लिखित जवाब प्रस्तुत किया और उसे व्यक्तिगत सुनवाई का भी अवसर दिया गया। कंपनी का पक्ष सुनने और उपलब्ध तथ्यों एवं अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद विमानन संचालनालय ने कारणों सहित आदेश पारित करते हुए कंपनी को तीन वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट करने का निर्णय लिया।

अधिकारियों ने कहा कि शासन के साथ काम करने वाले प्रत्येक सेवा प्रदाता के लिए अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन आवश्यक है। सार्वजनिक दावों के निपटारे में अनावश्यक विलंब को सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया मानकर नहीं छोड़ा जा सकता, क्योंकि इससे न केवल शासन के वित्तीय हित प्रभावित होते हैं, बल्कि सेवा व्यवस्था के प्रति विश्वास भी कमजोर होता है।

बीमा राशि की वसूली के लिए आगे भी कार्रवाई जारी रखेगा राज्य

कंपनी को ब्लैकलिस्ट किए जाने के साथ ही बीमा दावे का मामला समाप्त नहीं हुआ है। राज्य शासन अपने दावे की राशि प्राप्त करने के लिए आवश्यक कार्रवाई आगे भी जारी रखेगा। अधिकारियों ने कहा कि सार्वजनिक धन की सुरक्षा शासन की जिम्मेदारी है और राज्य को देय राशि की वसूली के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

राज्य शासन की इस कार्रवाई से यह स्पष्ट किया गया है कि सार्वजनिक संपत्ति, शासकीय धन और राज्य के वित्तीय हितों से जुड़े मामलों में जवाबदेही सर्वोपरि है। शासन के साथ कार्य करने वाली संस्थाओं से समयबद्ध, पारदर्शी और उत्तरदायी सेवा की अपेक्षा की जाती है तथा सार्वजनिक हित प्रभावित होने की स्थिति में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

नर्सिंग होम सील करने के मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, नगर निगम आयुक्त की कार्रवाई रद्द

No comments Document Thumbnail

मामला Dr. Shyama Agrawal v. State of Chhattisgarh, WPC No. 5701/2022 है। 

दुर्ग- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नर्सिंग होम को सील करने के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि नगर निगम आयुक्त के पास नर्सिंग होम को सील करने की वैधानिक शक्ति नहीं है। कोर्ट ने दुर्ग नगर निगम द्वारा जारी नोटिस और उसके आधार पर की गई सीलिंग की कार्रवाई को रद्द कर दिया है।

यह मामला दुर्ग स्थित अग्रवाल नर्सिंग होम से संबंधित है। नर्सिंग होम की संचालक डॉ. श्यामा अग्रवाल ने नगर निगम आयुक्त द्वारा जारी नोटिस और नर्सिंग होम को सील किए जाने की कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। मामले की सुनवाई जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकल पीठ ने की। 

15 दिसंबर 2022 को जारी हुआ था नोटिस

मामले के अनुसार, 15 दिसंबर 2022 को दुर्ग नगर निगम के आयुक्त की ओर से नर्सिंग होम को नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद नर्सिंग होम को सील कर दिया गया। नगर निगम की कार्रवाई के पीछे कथित अनियमितताओं, नर्सिंग होम अधिनियम के प्रावधानों के पालन में कमी तथा बायो-मेडिकल वेस्ट के प्रबंधन और निस्तारण से जुड़े नियमों के उल्लंघन का हवाला दिया गया था। 

नर्सिंग होम संचालक की ओर से हाईकोर्ट में दलील दी गई कि नगर निगम आयुक्त को नर्सिंग होम का लाइसेंस जारी करने, उसका नियमन करने, लाइसेंस निलंबित या रद्द करने अथवा नर्सिंग होम को सील करने का अधिकार ही नहीं है। इसलिए नगर निगम की कार्रवाई को अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया गया। 

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ राज्य उपचारगृह तथा रोगोपचार संबंधी स्थापनाएं अनुज्ञापन अधिनियम, 2010 और उससे जुड़े नियमों का परीक्षण किया। कोर्ट ने कहा कि नर्सिंग होम के लाइसेंस को निलंबित या रद्द करने की कार्रवाई के लिए कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है।

अदालत के अनुसार, संबंधित कानून की धारा 9 के तहत कार्रवाई करने से पहले सक्षम प्राधिकारी को प्रस्तावित कार्रवाई के आधार और कारण बताते हुए 30 दिन का नोटिस देना होता है। संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने और सुनवाई का अवसर भी दिया जाना जरूरी है। इसके बाद ही सक्षम प्राधिकारी कारणों सहित आदेश पारित कर सकता है। 

नगर निगम आयुक्त के पास नहीं थी वैधानिक शक्ति

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संबंधित कानून और नियमों में नगर निगम या उसके आयुक्त को नर्सिंग होम का लाइसेंस जारी करने, उसका नियमन करने अथवा लाइसेंस रद्द करने की शक्ति नहीं दी गई है। इसी तरह नर्सिंग होम को सील करने की भी नगर निगम आयुक्त को वैधानिक शक्ति प्राप्त नहीं है।

अदालत ने यह भी नोट किया कि नर्सिंग होम कानून के तहत जिला कलेक्टर को सक्षम पर्यवेक्षण प्राधिकारी माना गया है। सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से भी यह स्वीकार किया गया था कि संबंधित कानून के तहत जिला कलेक्टर सक्षम प्राधिकारी हैं।

आरोप सही पाए जाने पर भी नियमानुसार कार्रवाई जरूरी

हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि नर्सिंग होम को बायो-मेडिकल वेस्ट प्रबंधन और अन्य वैधानिक लाइसेंस संबंधी नियमों का पालन करना होगा। यदि किसी तरह का उल्लंघन पाया जाता है तो सक्षम प्राधिकारी कानून में निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई कर सकता है।

यानी अदालत ने नर्सिंग होम को नियमों से छूट नहीं दी है, बल्कि यह कहा है कि कार्रवाई वही अधिकारी कर सकता है जिसे कानून ने उसका अधिकार दिया है और उसे निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा। 

हाईकोर्ट ने नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई की रद्द

सभी पक्षों की दलीलें और संबंधित कानूनी प्रावधानों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने 15 दिसंबर 2022 के नोटिस को निरस्त कर दिया। इसके साथ ही उस नोटिस के आधार पर नर्सिंग होम को सील करने की कार्रवाई भी रद्द कर दी गई।

मामले में अदालत ने यह स्वतंत्रता भी बरकरार रखी कि यदि नर्सिंग होम की ओर से किसी वैधानिक प्रावधान या बायो-मेडिकल वेस्ट प्रबंधन संबंधी नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो सक्षम प्राधिकारी कानून के अनुसार उचित कार्रवाई कर सकता है। 

मामला: Dr. Shyama Agrawal vs. State of Chhattisgarh & Others
याचिका: WPC No. 5701 of 2022
निर्णय: 22 सितंबर 2026
पीठ: जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट। 


ग्राम पंचायत में सरपंच के खिलाफ पंचों ने खोला मोर्चा, अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया में अनियमितता का आरोप

No comments Document Thumbnail

पंचों ने एसडीएम से शिकायत कर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की

ग्राम पंचायत सिंघपुर में सरपंच के खिलाफ पंचों ने गंभीर आरोप लगाते हुए प्रशासन से शिकायत की है। पंचों द्वारा दिए गए शिकायत पत्र में सरपंच पर पंचायत की बैठकों में मनमानी करने, पंचों की सहमति के बिना प्रस्ताव तैयार कराने तथा पंचायत के कार्यों में पारदर्शिता नहीं बरतने जैसे आरोप लगाए गए हैं।

शिकायत पत्र के अनुसार, पंचों का आरोप है कि सरपंच द्वारा उनकी जानकारी और सहमति के बिना पंचों के हस्ताक्षर लिए जाते हैं तथा पंचायत बैठकों में प्रस्तावों को मनमाने तरीके से दर्ज किया जाता है। आरोप है कि कई मामलों में पंचों पर प्रस्तावों को मंजूरी देने के लिए दबाव भी बनाया गया।

पंचों ने यह भी आरोप लगाया है कि पंचायत के कार्यों एवं राशि के उपयोग को लेकर उन्हें पर्याप्त जानकारी नहीं दी जाती। शिकायत में पंचायत के कामकाज की जांच कराने और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल करने की मांग की गई है।

अविश्वास प्रस्ताव को लेकर भी उठे सवाल

शिकायत में पंचों ने सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया का भी उल्लेख किया है। पंचों के मुताबिक, सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की गई थी। इसके बाद प्रस्ताव पर आगे की प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की जानी थी।

पंचों का आरोप है कि 6 अक्टूबर 2026 को निर्धारित प्रक्रिया के दौरान वे संबंधित स्थान पर पहुंचे, लेकिन प्रक्रिया को लेकर उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। शिकायत में कहा गया है कि निर्धारित समय तक संबंधित अधिकारी के नहीं पहुंचने पर पंचों को परेशानी का सामना करना पड़ा और बाद में अधिकारियों से फोन पर संपर्क किया गया।

पंचों ने पूरे मामले में निष्पक्ष जांच कर अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया नियमानुसार पूरी कराने तथा पंचायत के कामकाज की जांच कराने की मांग की है।


BREAKING NEWS- राहुल-प्रियंका गांधी के खिलाफ FIR

No comments Document Thumbnail

दिल्ली में INDIA ब्लॉक के प्रदर्शन के बाद बड़ा एक्शन

दिल्ली पुलिस ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत अन्य विपक्षी नेताओं और समर्थकों के खिलाफ FIR दर्ज की है।

यह FIR 6 अक्टूबर को दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ हुए INDIA ब्लॉक के विरोध प्रदर्शन के दौरान आकाशवाणी भवन परिसर में कथित तौर पर बिना अनुमति प्रवेश करने के मामले में दर्ज की गई है। 

 क्या हुआ था?

INDIA ब्लॉक के कई सांसदों ने संसद भवन से निर्वाचन सदन (Election Commission Headquarters) की ओर मार्च निकाला था। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे और चुनावी प्रक्रिया तथा Special Intensive Revision (SIR) को लेकर सवाल उठा रहे थे। 

पुलिस ने मार्च को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की। इसके बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कुछ नेता आकाशवाणी भवन परिसर में पहुंच गए, जहां उन्होंने कई घंटे तक धरना जारी रखा। 

पुलिस ने क्या कार्रवाई की?

दिल्ली पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों से परिसर खाली करने को कहा गया, लेकिन वे वहां से नहीं हटे। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।

रिपोर्टों के मुताबिक, इस प्रदर्शन के दौरान करीब 260 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें कई सांसद भी शामिल थे। बाद में नेताओं को रिहा कर दिया गया।

FIR किस आधार पर?

पुलिस के मुताबिक FIR आकाशवाणी भवन के कर्मचारियों की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, उनके समर्थक और साथ मौजूद अन्य सांसद बिना अनुमति परिसर में दाखिल हुए और वहां से हटने से इनकार किया। 

कांग्रेस बनाम सरकार/चुनाव आयोग

कांग्रेस और INDIA ब्लॉक का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची में अनियमितताओं को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष ने इसे "Vote Chori" के मुद्दे से जोड़ते हुए CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है।

दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है और पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने को कार्रवाई का आधार बताया है। 

अब मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के खिलाफ FIR के बाद यह मामला सिर्फ एक प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच बढ़ते राजनीतिक टकराव का नया मुद्दा बन गया है।

➡️ FIR दर्ज हो चुकी है।
➡️ पुलिस की जांच आगे जारी रहेगी।
➡️ मामले में दर्ज आरोपों और आगे की कानूनी कार्रवाई पर अब नजर रहेगी।



BREAKING NEWS-RBI का बड़ा फैसला

No comments Document Thumbnail

RBI ने Repo Rate बढ़ाकर 5.50% किया

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने महंगाई और बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच Repo Rate में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50% कर दिया है।

यह करीब 4 साल बाद RBI की पहली Repo Rate बढ़ोतरी है।

आम लोगों पर क्या असर होगा?

Repo Rate बढ़ने से बैंकों के लिए RBI से पैसा लेना महंगा हो सकता है। इसका असर आगे चलकर Home Loan, Personal Loan और अन्य floating-rate loans की EMI पर पड़ सकता है।

यानी आने वाले समय में कुछ कर्ज महंगे होने और EMI बढ़ने का दबाव बन सकता है।

RBI ने दर क्यों बढ़ाई?

RBI का मुख्य फोकस महंगाई को नियंत्रित रखने और बढ़ती लागत एवं ऊंचे कच्चे तेल के दामों से पैदा होने वाले महंगाई दबाव को संभालने पर है।

Repo Rate: 5.50%
बढ़ोतरी: 25 bps
फैसला: RBI Monetary Policy Committee

आम आदमी के लिए सबसे बड़ी चिंता: Loan की EMI बढ़ सकती है, जबकि FD और बचत पर ब्याज दरों में बदलाव का असर बैंक अपनी नीतियों के अनुसार तय करेंगे।

विज्ञान जगत की बड़ी खबर: Francis Halzen को 2026 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार

No comments Document Thumbnail

अमेरिकी विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञानी फ्रांसिस हाल्ज़ेन (Francis Halzen) को वर्ष 2026 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार दिया गया है। रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने उन्हें IceCube Neutrino Observatory में निर्णायक योगदान और खगोलीय स्रोतों से आने वाले उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो की खोज के लिए यह सम्मान दिया है। 

आखिर न्यूट्रिनो क्या हैं?

न्यूट्रिनो बेहद सूक्ष्म और लगभग बिना द्रव्यमान वाले विद्युत-तटस्थ कण हैं, जो पदार्थ के साथ बहुत कम प्रतिक्रिया करते हैं। हर सेकंड अरबों न्यूट्रिनो हमारे शरीर से होकर गुजरते हैं, लेकिन हमें उनका पता तक नहीं चलता।

यही वजह है कि वैज्ञानिकों के लिए इन्हें पकड़ना बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है।

दक्षिणी ध्रुव की बर्फ में बना अनोखा प्रयोग

फ्रांसिस हाल्ज़ेन ने 1980 के दशक में यह विचार विकसित किया कि दक्षिणी ध्रुव की विशाल और पारदर्शी बर्फ की परतों का इस्तेमाल न्यूट्रिनो को पकड़ने के लिए किया जा सकता है।

जब कोई उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो बर्फ में मौजूद परमाणु के नाभिक से टकराता है, तो बेहद हल्की नीली रोशनी पैदा हो सकती है। बर्फ के अंदर लगाए गए हजारों सेंसर इस रोशनी को रिकॉर्ड करते हैं। इसी विचार से आगे चलकर IceCube Neutrino Observatory का निर्माण हुआ। 

ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने में मदद

IceCube ने वैज्ञानिकों को ऐसे उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो का अध्ययन करने में मदद की है, जो हमारी आकाशगंगा के बाहर मौजूद अत्यंत शक्तिशाली खगोलीय स्रोतों से आते हैं।

इन कणों के जरिए वैज्ञानिक ब्लैक होल जैसे अत्यधिक ऊर्जावान ब्रह्मांडीय क्षेत्रों के बारे में नई जानकारी हासिल कर सकते हैं। 

Francis Halzen कौन हैं?

फ्रांसिस हाल्ज़ेन का जन्म 1944 में बेल्जियम में हुआ था। वह लंबे समय से अमेरिका की University of Wisconsin–Madison में भौतिकी के प्रोफेसर रहे हैं और IceCube परियोजना के प्रमुख वैज्ञानिकों में शामिल हैं। 

क्यों महत्वपूर्ण है यह पुरस्कार?

हाल्ज़ेन के काम ने खगोल विज्ञान को देखने का एक नया तरीका उपलब्ध कराया है। अब वैज्ञानिक केवल प्रकाश, रेडियो तरंगों या गुरुत्वाकर्षण तरंगों के माध्यम से ही नहीं, बल्कि न्यूट्रिनो के जरिए भी ब्रह्मांड की दूर-दराज की घटनाओं का अध्ययन कर सकते हैं।

यानी दक्षिणी ध्रुव की बर्फ में छिपे इन बेहद मुश्किल कणों ने ब्रह्मांड के उन रहस्यों तक पहुंचने का रास्ता खोला है, जिन्हें पारंपरिक तरीकों से समझना बेहद कठिन था।


भारतीय महिला क्रिकेट में बड़ा बदलाव

No comments Document Thumbnail

हरमनप्रीत कौर ने भारतीय महिला क्रिकेट टीम की तीनों प्रारूपों की कप्तानी छोड़ दी है। 6 अक्टूबर 2026 को उन्होंने तत्काल प्रभाव से कप्तानी से हटने का फैसला किया। हालांकि, वह खिलाड़ी के रूप में भारतीय टीम का हिस्सा बनी रहेंगी। उनकी जगह स्मृति मंधाना को टीम का नया ऑल-फॉर्मेट कप्तान बनाया गया है।

एक दशक लंबी कप्तानी का सफर

हरमनप्रीत कौर की नेतृत्व यात्रा की शुरुआत 2012 में हुई। उस समय मिताली राज और झूलन गोस्वामी के चोटिल होने के कारण उन्हें पाकिस्तान के खिलाफ महिला टी20 एशिया कप फाइनल में भारत की कप्तानी करने का मौका मिला। हरमनप्रीत ने टीम को 18 रन से जीत दिलाई और भारत ने खिताब अपने नाम किया।

इसके बाद 2016 में वह भारत की नियमित टी20 कप्तान बनीं, जबकि मिताली राज के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास के बाद 2022 में उन्होंने वनडे और टेस्ट टीम की पूर्णकालिक कप्तानी भी संभाल ली।

2017 विश्व कप — 171 रनों की ऐतिहासिक पारी

हरमनप्रीत के करियर का सबसे यादगार शुरुआती अध्याय 2017 महिला विश्व कप में लिखा गया। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल में उन्होंने 115 गेंदों पर नाबाद 171 रन की तूफानी पारी खेली और भारत को फाइनल में पहुंचाया।

हालांकि फाइनल में भारत इंग्लैंड से हार गया, लेकिन हरमनप्रीत की उस पारी ने भारतीय महिला क्रिकेट को देशभर में नई पहचान दिलाई।

2020 टी20 विश्व कप और 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स

हरमनप्रीत की कप्तानी में भारत ने 2020 महिला टी20 विश्व कप के फाइनल तक का सफर तय किया। इसके बाद 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय टीम ने रजत पदक जीता।

2023 — एशियन गेम्स में ऐतिहासिक स्वर्ण

2023 में हरमनप्रीत की कप्तानी में भारत ने पहली बार एशियन गेम्स में महिला क्रिकेट का स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद 2026 में भी भारत ने एशियन गेम्स का स्वर्ण बरकरार रखा—कप्तान के रूप में हरमनप्रीत का यह अंतिम बड़ा अभियान रहा।

2025 — वह पल जिसका इंतजार था

हरमनप्रीत कौर की कप्तानी का सबसे बड़ा अध्याय 2025 महिला वनडे विश्व कप में लिखा गया।

भारत ने पहली बार महिला क्रिकेट विश्व कप का खिताब अपने नाम किया। सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हरमनप्रीत ने 89 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली और जेमिमा रोड्रिग्स के साथ 167 रन की निर्णायक साझेदारी की।

इसके बाद फाइनल में भारत ने दक्षिण अफ्रीका को 52 रन से हराकर पहली बार महिला वनडे विश्व कप ट्रॉफी जीती।

इसके साथ हरमनप्रीत भारत की पहली महिला कप्तान बनीं जिन्होंने वनडे विश्व कप जिताया। वह कपिल देव और एमएस धोनी के बाद भारत की तीसरी महिला/पुरुष कप्तान बनीं जिन्होंने 50 ओवर का विश्व कप जीता।

कप्तानी के आखिरी पड़ाव पर भी इतिहास

2026 में हरमनप्रीत ने कई व्यक्तिगत रिकॉर्ड बनाए। वह 200 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाली दुनिया की पहली क्रिकेटर बनीं और 150 से ज्यादा टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में कप्तानी करने वाली पहली खिलाड़ी भी बनीं।

उन्होंने भारत को 2026 एशियन गेम्स में लगातार दूसरा स्वर्ण पदक भी दिलाया। इसके बाद 6 अक्टूबर 2026 को उन्होंने तीनों प्रारूपों की कप्तानी छोड़ने का फैसला किया।

अब स्मृति मंधाना के हाथों में कमान

हरमनप्रीत के बाद स्मृति मंधाना को भारतीय महिला टीम का नया ऑल-फॉर्मेट कप्तान बनाया गया है।

स्मृति 2013 से भारतीय टीम का हिस्सा हैं और इससे पहले वह 18 टी20 अंतरराष्ट्रीय और 4 वनडे मैचों में भारत की कप्तानी कर चुकी हैं। फ्रेंचाइजी क्रिकेट में भी उनके पास कप्तानी का अनुभव है—उन्होंने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को 2024 और 2026 में महिला प्रीमियर लीग का खिताब दिलाया।

अब स्मृति के सामने चुनौती होगी कि वह हरमनप्रीत की विरासत को आगे बढ़ाते हुए भारतीय महिला क्रिकेट टीम को नई ऊंचाइयों तक ले जाएं।

हरमनप्रीत का संदेश

कप्तानी छोड़ने के बाद हरमनप्रीत ने साफ किया कि उनका भारतीय क्रिकेट से सफर खत्म नहीं हुआ है। वह खिलाड़ी के रूप में टीम के साथ बनी रहेंगी और नई कप्तान तथा युवा खिलाड़ियों का समर्थन करती रहेंगी।

एक दशक से ज्यादा समय तक भारतीय महिला क्रिकेट का नेतृत्व करने के बाद अब कप्तानी की जिम्मेदारी स्मृति मंधाना के कंधों पर है।

कप्तानी खत्म हुई है, लेकिन हरमनप्रीत कौर की भारत के लिए कहानी अभी बाकी है।

रूस-यूक्रेन युद्ध से बड़ी खबर

No comments Document Thumbnail

रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर एक बार फिर हवाई हमला किया है। बुधवार तड़के हुए हमलों के दौरान राजधानी के कई इलाकों में धमाकों की आवाज़ सुनाई दी। कीव के मेयर विताली क्लिट्स्को के अनुसार, हमलों में शहर की कई इमारतों और गोदामों को नुकसान पहुंचा है।

रूस के हमले के साथ ही यूक्रेन के दक्षिण-पूर्वी शहर द्निप्रो में भी हवाई हमला हुआ, जहां एक औद्योगिक परिसर को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है।

यह हमला ऐसे समय हुआ है जब रूस और यूक्रेन के बीच हवाई हमलों का सिलसिला लगातार जारी है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने इससे पहले दावा किया था कि यूक्रेन की खुफिया जानकारी के अनुसार रूस एक बड़े हमले की तैयारी कर रहा है।

युद्ध के लगातार बढ़ते हवाई हमलों ने यूक्रेन की वायु सुरक्षा और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ा दिया है।

रक्षा क्षेत्र से बड़ी खबर-एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित होंगे भारतीय वायुसेना के नए प्रमुख

No comments Document Thumbnail

केंद्र सरकार ने वर्तमान उप वायुसेना प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को भारतीय वायुसेना का 29वां प्रमुख नियुक्त किया है। वह 31 अक्टूबर 2026 को एयर चीफ मार्शल के पद पर कार्यभार संभालेंगे और मौजूदा वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह का स्थान लेंगे।

लगभग चार दशक के सैन्य करियर वाले एयर मार्शल दीक्षित के पास 3,500 घंटे से अधिक की उड़ान का अनुभव है। वह मिराज-2000, मिग, जगुआर और तेजस जैसे कई प्रमुख विमानों को उड़ा चुके हैं और ऑपरेशन सफेद सागर, ऑपरेशन रक्षक तथा ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों से जुड़े रहे हैं।

सामूहिक भागीदारी से विकसित भारत का संकल्प होगा पूरा, बनेगा स्वर्णिम भारत

No comments Document Thumbnail

लेखक - ओम प्रकाश डहरिया

सहायक जनसंपर्क अधिकारी 

रायपुर- सेवा जब संकल्प बनती है, संकल्प जब समर्पण में बदलता है और समर्पण जब राष्ट्र निर्माण का आधार बनता है, तब एक ऐसी यात्रा प्रारंभ होती है, जो केवल किसी व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे देश की आकांक्षाओं और भविष्य की यात्रा बन जाती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में सेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने का अवसर इसी भाव को अभिव्यक्त करता है। जनसेवा, सुशासन और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए तय की गई इस यात्रा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने तथा विकसित भारत के संकल्प को जन-जन से जोड़ने के उद्देश्य से देशभर में ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाया जा रहा है। इसी अभियान की एक प्रेरक पहल ‘सेवा ज्योति कलश यात्रा’ है, जो गांव, जिला और राज्य स्तर पर सेवा, समर्पण, निष्ठा और राष्ट्र संकल्प की भावना को आगे बढ़ा रही है।

7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी ने शासन की जिम्मेदारी संभाली थी। वहां से प्रारंभ हुई उनकी शासन और जनसेवा की यात्रा ने 7 अक्टूबर 2026 को 25 वर्ष का महत्वपूर्ण पड़ाव पूरा किया है। इन ढाई दशकों में शासन के केंद्र में गरीब, किसान, महिला, युवा और वंचित वर्ग को रखते हुए विकास को जनभागीदारी से जोड़ने का प्रयास प्रमुखता से सामने आया है। प्रधानमंत्री के रूप में ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ का मंत्र इसी सोच को व्यापक स्वरूप देता है। आज विकसित भारत-2047 का संकल्प इसी जनभागीदारी को राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति मानकर आगे बढ़ने का आह्वान करता है।

‘सेवा ज्योति कलश यात्रा’ अपने आप में भारतीय संस्कृति और राष्ट्रभावना का सुंदर संगम है। ज्योति हमारी परंपरा में प्रकाश, ज्ञान, आशा और सकारात्मक ऊर्जा की प्रतीक है, जबकि कलश मंगल, पवित्रता और शुभ संकल्प का प्रतीक माना जाता है। जब यही ज्योति और कलश सेवा के भाव से जुड़ते हैं, तब वे राष्ट्र निर्माण के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता का संदेश देते हैं। यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के सेवा काल के प्रति आभार व्यक्त करने के साथ प्रत्येक नागरिक को यह स्मरण कराने का अवसर भी है कि विकसित भारत का लक्ष्य केवल सरकार का लक्ष्य नहीं, बल्कि प्रत्येक भारतीय का साझा संकल्प है।

भारत जब वर्ष 2047 में स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूर्ण करेगा, तब हमारा देश कैसा होगा, इसका निर्धारण आज लिए जा रहे संकल्पों और किए जा रहे प्रयासों से होगा। विकसित भारत का अर्थ केवल बड़ी अर्थव्यवस्था, आधुनिक शहर, बेहतर सड़कें, उद्योग अथवा अत्याधुनिक तकनीक तक सीमित नहीं है। विकसित भारत वह होगा, जहां किसान समृद्ध हो, महिलाएं आत्मनिर्भर हों, युवाओं के सपनों को अवसर मिले, गरीबों को आगे बढ़ने की शक्ति मिले, बच्चों को बेहतर शिक्षा और पोषण मिले तथा समाज का अंतिम व्यक्ति भी विकास की मुख्यधारा में सम्मान के साथ सहभागी बने।

यही कारण है कि सेवा संकल्प अभियान का वास्तविक महत्व जनभागीदारी में निहित है। गांव से शहर तक जब नागरिक सेवा के किसी छोटे से कार्य को भी अपने कर्तव्य से जोड़ते हैं, तो वही छोटा प्रयास राष्ट्र निर्माण की बड़ी शक्ति बन जाता है। स्वच्छता के लिए श्रमदान, पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधरोपण, जरूरतमंदों की सहायता, रक्तदान, जल संरक्षण, बेटियों की शिक्षा, माताओं और बच्चों के सुपोषण के लिए जागरूकता अथवा स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना—ऐसे अनेक कार्य विकसित भारत की बुनियाद को मजबूत कर सकते हैं। राष्ट्र की प्रगति केवल नीतियों से नहीं, बल्कि नागरिकों की जिम्मेदार भागीदारी से गति प्राप्त करती है।

‘सेवा ज्योति कलश यात्रा’ इसी चेतना को गांव-गांव और जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बन रही है। यह यात्रा हमें बताती है कि सेवा किसी पद की मोहताज नहीं होती। समाज का प्रत्येक नागरिक अपनी क्षमता के अनुरूप सेवा कर सकता है। किसान खेत में उत्पादन बढ़ाकर, शिक्षक बच्चों को बेहतर शिक्षा देकर, युवा नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से, महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर और आम नागरिक अपने सामाजिक दायित्वों का निर्वहन कर राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के सेवा काल के प्रति आभार व्यक्त करने का सबसे सार्थक माध्यम यही हो सकता है कि सेवा के भाव को केवल एक आयोजन तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उसे जीवन का संस्कार बनाया जाए। सेवा संकल्प अभियान हमें अतीत की यात्रा का स्मरण कराने के साथ भविष्य की जिम्मेदारी भी सौंपता है। यह कृतज्ञता के साथ कर्तव्य का, उपलब्धियों के साथ आकांक्षाओं का और सेवा के साथ राष्ट्र संकल्प का अभियान है।

आज जब भारत आत्मविश्वास के साथ वर्ष 2047 की ओर आगे बढ़ रहा है, तब सेवा की यह ज्योति हर गांव, हर घर और हर मन में प्रज्ज्वलित होना आवश्यक है। करोड़ों नागरिकों के छोटे-छोटे प्रयास जब एक साझा राष्ट्रीय उद्देश्य से जुड़ेंगे, तभी विकसित भारत का विराट संकल्प साकार होगा। आइए, सेवा को संस्कार, समर्पण को शक्ति और राष्ट्रहित को सर्वोच्च कर्तव्य मानकर आगे बढ़ें। सेवा की ज्योति से संकल्प का प्रकाश फैलाएं और जनभागीदारी की शक्ति से विकसित भारत-2047 के स्वप्न को सिद्धि तक पहुंचाएं। तभी विकसित भारत का संकल्प पूरा होगा तभी  वास्तव में भारत स्वर्णिम भारत  बनेगा।
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.