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महतारी वंदन योजना से माताओं और बहनों के जीवन में आया आत्मविश्वास और आर्थिक स्वावलंबन : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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महिलाओं को मिल रहा योजनाओं का सीधा लाभ

महिला सशक्तिकरण, रोजगार, पर्यटन, उद्योग और सुशासन के विजन को मुख्यमंत्री ने किया साझा

बस्तर में शांति, विकास और रोजगार का नया अध्याय शुरू

इमर्जिंग छत्तीसगढ़–सशक्त नारी, समृद्ध प्रदेश कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय  हुए शामिल

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज राजधानी रायपुर में आयोजित 'इमर्जिंग छत्तीसगढ़–सशक्त नारी, समृद्ध प्रदेश' कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने महिला सशक्तिकरण, बस्तर के विकास, रोजगार, उद्योग, पर्यटन, सुशासन और सामाजिक सुधारों पर राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को विस्तार से रखा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ केवल एक राज्य नहीं, बल्कि हम सभी के लिए छत्तीसगढ़ महतारी है। यह माता कौशल्या की पावन जन्मभूमि और भगवान श्रीराम का ननिहाल है। भारतीय संस्कृति में नारी को सर्वोच्च सम्मान देने की परंपरा रही है। उन्होंने वेदों का उल्लेख करते हुए कहा कि "यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता" अर्थात जहां नारी का सम्मान होता है, वहीं देवताओं का वास होता है।

महतारी वंदन योजना से महिलाओं के चेहरे पर लौटी मुस्कान

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश की लगभग 68 लाख 50 हजार विवाहित महिलाओं को महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रतिमाह एक हजार रुपये सीधे उनके बैंक खातों में दिए जा रहे हैं। अब तक 29 किश्तों के माध्यम से लगभग 18 हजार 800 करोड़ रुपये महिलाओं के खातों में अंतरित किए जा चुके हैं।

उन्होंने कहा कि जब वे गांवों का दौरा करते हैं तो माताओं और बहनों के चेहरों पर इस योजना से आया आत्मविश्वास और संतोष स्पष्ट दिखाई देता है। बातचीत के दौरान माताएं और बहनें बताती हैं कि किसी ने अपनी बेटी के भविष्य के लिए सुकन्या समृद्धि योजना में निवेश किया है, किसी ने सिलाई मशीन खरीदकर रोजगार शुरू किया है तो किसी ने किराना या सब्जी की दुकान खोलकर आय बढ़ाई है। इससे माताएं और बहनें  आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं और परिवार की निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी भी बढ़ी है।

दानसरा गांव की माताओं और बहनों ने महतारी वंदन की राशि से शुरू किया राम मंदिर निर्माण

मुख्यमंत्री साय ने बताया कि सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के दानसरा गांव की माताओं और बहनों ने महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि को एकत्र कर भगवान श्रीराम के मंदिर के निर्माण का कार्य प्रारंभ किया है। उन्होंने कहा कि यह इस योजना का सबसे प्रेरक उदाहरण है कि महिलाएं इस राशि का उपयोग समाज और संस्कृति के संरक्षण के लिए भी कर रही हैं।

30 लाख से अधिक महिलाएं स्व-सहायता समूहों से जुड़ीं

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 2 लाख 86 हजार महिला स्व-सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनसे लगभग 30 लाख महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इन्हें रेडी-टू-ईट कार्यक्रम से जोड़ा जा रहा है तथा ऋण एवं अन्य आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर स्वरोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है।

बस्तर में नक्सलवाद से विकास की ओर ऐतिहासिक परिवर्तन

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि चार-पांच दशकों तक नक्सल हिंसा से प्रभावित रहा बस्तर अब तेजी से विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस और स्थानीय जनता के सहयोग से बस्तर में शांति स्थापित हुई है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा कैंप स्थापित करने के साथ-साथ विकास की योजनाओं को भी समानांतर रूप से आगे बढ़ाया गया। पहले सुरक्षा शिविरों के पांच किलोमीटर दायरे तक योजनाओं का लाभ पहुंचता था, जिसे अब बढ़ाकर दस किलोमीटर तक किया गया है।

'नियद नेल्ला नार' से 500 से अधिक गांवों तक पहुंची सरकार

मुख्यमंत्री ने बताया कि नियद नेल्ला नार योजना के अंतर्गत अब 500 से अधिक गांवों को जोड़ा जा चुका है। लगभग 17 विभागों की 40 से अधिक योजनाओं का लाभ इन गांवों तक पहुंचाया जा रहा है। यहां लोगों को राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

36 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के अंतर्गत लगभग 36 लाख लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया तथा गंभीर रोगियों को बेहतर उपचार के लिए बड़े अस्पतालों में रेफर किया गया। वहीं बस्तर मुन्ने योजना के माध्यम से अधिकारी स्वयं दूरस्थ गांवों में पहुंचकर लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान कर रहे हैं।

सिंचाई, कृषि और पर्यटन से आत्मनिर्भर बनेगा बस्तर

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में इंद्रावती नदी पर देउरगांव एवं मटनार सिंचाई परियोजनाएं प्रस्तावित हैं, जिनसे लगभग 80 हजार एकड़ भूमि सिंचित होगी।

उन्होंने कहा कि चित्रकोट जलप्रपात, कुटुमसर गुफाएं, अबूझमाड़ के विशाल वन तथा धुड़मारास जैसे गांव बस्तर को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित कर रहे हैं। नई औद्योगिक नीति में होम-स्टे को भी शामिल किया गया है, जिसके तहत पांच कमरों तक के होम-स्टे निर्माण के लिए ऋण और सब्सिडी उपलब्ध कराई जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इमली, महुआ, हर्रा, बहेड़ा, सीताफल और औषधीय वनोपजों का मूल्य संवर्धन कर स्थानीय लोगों की आय बढ़ाई जा रही है। नेतानार जैसे गांवों में सेवा डेरा के माध्यम से महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई, पैकेजिंग तथा अन्य आजीविका आधारित प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं। आईआईटी की टीम भी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकास का कार्य कर रही है।

धर्मांतरण के विरुद्ध कड़ा कानून लागू

मुख्यमंत्री ने कहा कि धर्मांतरण समाज के लिए गंभीर चुनौती है। विभिन्न राज्यों के कानूनों का अध्ययन कर छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 2026 लागू किया गया है। इसके तहत धर्म परिवर्तन करने और करवाने वाले दोनों को निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। प्रलोभन, दबाव अथवा छलपूर्वक धर्मांतरण करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

समान नागरिक संहिता की दिशा में भी तेजी से कार्य

उन्होंने बताया कि समान नागरिक संहिता के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है तथा राज्य सरकार का प्रयास है कि आगामी शीतकालीन विधानसभा सत्र तक इस दिशा में ठोस प्रगति हो।

पीएससी घोटाले की जांच और रोजगार पर सरकार की प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार के कार्यकाल में हुए पीएससी घोटाले की सीबीआई जांच जारी है तथा दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि वर्तमान सरकार ने विभिन्न विभागों में युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया है तथा शीघ्र ही 5 हजार शिक्षकों की भर्ती भी की जाएगी।

उन्होंने कहा कि सभी युवाओं को सरकारी नौकरी देना संभव नहीं है, इसलिए नई औद्योगिक नीति के माध्यम से निजी निवेश और उद्योगों को बढ़ावा देकर बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित किया जा रहा है। पिछले डेढ़ वर्षों में राज्य को 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनसे लाखों युवाओं को रोजगार मिलने की संभावना है।

महिलाओं ने साझा किए अपने अनुभव

कार्यक्रम में बलौदाबाजार जिले की मीना देवांगन ने महतारी वंदन योजना के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि योजना से प्राप्त राशि से उन्होंने चूड़ी का व्यवसाय शुरू किया है। वहीं श्रीमती सरोज ने कहा कि वे इस राशि से अपने बच्चे की स्कूल फीस का भुगतान कर रही हैं। दोनों महिलाओं ने कहा कि इस योजना ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

सफलता की कहानी-आधुनिक सूकरपालन से स्वरोजगार: 400 से अधिक सूकरों के साथ ग्रेसी ने लिखी सफलता की नई इबारत

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बीएससी एग्रीकल्चर ग्रेजुएट युवती ने सरकारी सहायता से स्वरोजगार को बनाया सफलता की मिसाल

नेशनल लाइव स्टॉक मिशन से मिली 30 लाख रुपये की सब्सिडी, आधुनिक फार्म में 400 से अधिक सूकर

रायपुर- सूकर पालन ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में एक तेजी से उभरता हुआ और अत्यधिक लाभदायक स्वरोजगार है। कम लागत, उच्च प्रजनन क्षमता और मांस की लगातार बढ़ती मांग के कारण, यह लाखों युवाओं और किसानों के लिए स्थायी आय का एक प्रमुख साधन बन गया है। सूअर अन्य पशुओं की तुलना में बहुत तेजी से बढ़ते हैं। मादा सूअर एक बार में 8 से 12 बच्चों (पिगलेट्स) को जन्म देती है, जो 45 से 60 दिनों में बेचने लायक हो जाते हैं। छत्तीसगढ़ में कई युवा अपनी पारंपरिक या सामान्य नौकरियां छोड़कर आधुनिक तरीके से सूकर पालन कर सालाना लाखों-करोड़ों रुपये कमा रहे हैं। 

बस्तर के युवाओं में अब पारंपरिक रोजगार से आगे बढ़कर आधुनिक कृषि एवं पशुपालन आधारित उद्यमों की नई सोच विकसित हो रही है। इसी सोच को साकार करते हुए बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड के किंजोली गांव की रहने वाली बीएससी एग्रीकल्चर स्नातक ग्रेसी दुग्गा ने पशु चिकित्सा विभाग के सहयोग से एक करोड़ रुपये से अधिक लागत की आधुनिक सूकरपालन परियोजना स्थापित कर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है। आज उनका फार्म न केवल सफल व्यावसायिक मॉडल बन चुका है, बल्कि पूरे बस्तर क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा का केंद्र भी बन गया है।

नौकरी के बजाय स्वरोजगार का चुना रास्ता

ग्रेसी दुग्गा ने वर्ष 2023 में उत्तराखंड के देहरादून से बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई पूरी की। उच्च शिक्षा के लिए आगे बढ़ने के बजाय उन्होंने व्यावहारिक ज्ञान का उपयोग करते हुए कृषि एवं पशुपालन के क्षेत्र में उद्यम स्थापित करने का निर्णय लिया। उन्होंने पारंपरिक व्यवसायों के बजाय सूकरपालन को चुना, क्योंकि बस्तर क्षेत्र में इसकी मांग लगातार बढ़ रही थी, जबकि व्यावसायिक स्तर पर इस क्षेत्र में बहुत कम लोग कार्य कर रहे थे। भारत सरकार सूकर पालन को बढ़ावा देने के लिए नेशनल लाइवस्टॉक मिशन जैसी योजनाएं चला रही है। इसके तहत, फार्म खोलने के लिए 15 लाख से 30 लाख तक की परियोजना पर 50% तक की सब्सिडी प्रदान की जाती है।

एक करोड़ बारह लाख रुपए की परियोजना को मिला सरकारी सहयोग

बड़े स्तर पर आधुनिक सूकरपालन इकाई स्थापित करने के लिए ग्रेसी को तकनीकी मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता की आवश्यकता थी। पशु चिकित्सा सेवाओं के संयुक्त संचालक कार्यालय ने उन्हें परियोजना तैयार करने से लेकर विभिन्न तकनीकी पहलुओं तक हर स्तर पर सहयोग प्रदान किया। विभाग के मार्गदर्शन में 1 करोड़ 12 लाख 10 हजार रूपए की आधुनिक परियोजना तैयार की गई, जिसे केंद्र सरकार की नेशनल लाइव स्टॉक मिशन योजना के अंतर्गत स्वीकृति मिली।

अनुसूचित जनजाति वर्ग से पहली बार आवेदन करने पर ग्रेसी को योजना के तहत 30 लाख रुपये की सब्सिडी प्रदान की गई। ग्रेसी का कहना है कि यदि यह सरकारी अनुदान नहीं मिलता तो वे केवल 20 से 25 सूकरों के साथ छोटे स्तर पर व्यवसाय शुरू कर पातीं, लेकिन शासन की सहायता ने उन्हें आधुनिक अधोसंरचना के साथ बड़े स्तर पर फार्म स्थापित करने का अवसर दिया।

आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक प्रबंधन से मिली सफलता

पशुपालन विभाग के चिकित्सकों और कृषि वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में फार्म में तमिलनाडु से उन्नत नस्ल के सूकर लाए गए। सभी पशुओं के टीकाकरण, पोषण और स्वास्थ्य प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया। मई 2025 में फार्म की शुरुआत 110 प्रजनन योग्य सूकरों से हुई थी, जिनमें 100 मादा और 10 नर शामिल थे। शुरुआती चरण में छोटे बच्चों को तैयार करने और प्रजनन योग्य बनाने में लगभग एक वर्ष का समय लगा। वैज्ञानिक प्रबंधन और बेहतर देखभाल के परिणामस्वरूप जून 2026 तक फार्म में 202 वयस्क प्रजनन योग्य सूकर तथा लगभग 206 पिगलेट तैयार हो चुके हैं। वर्तमान में फार्म में कुल 400 से अधिक सूकर मौजूद हैं, जो इस परियोजना की उल्लेखनीय सफलता को दर्शाते हैं।

पहली बिक्री में ही लगभग चार लाख रुपये की आय

ग्रेसी दुग्गा के आधुनिक फार्म से अब उन्नत नस्ल के पिगलेट्स की व्यावसायिक बिक्री भी शुरू हो चुकी है। उनके फार्म से रायपुर सहित स्थानीय बाजारों में सूकरों की नियमित आपूर्ति की जा रही है। हाल ही में उन्होंने 65 पिगलेट्स को 6 हजार रूपए प्रति पिगलेट की दर से बेचकर 3 लाख 90 हजार रुपए की आय अर्जित की है। इससे यह स्पष्ट होता है कि आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर सूकरपालन लाभकारी व्यवसाय के रूप में तेजी से उभर रहा है।

बस्तर के युवाओं के लिए बनी प्रेरणा
ग्रेसी दुग्गा की सफलता इस बात का उदाहरण है कि यदि युवाओं को सही मार्गदर्शन, तकनीकी सहयोग और समय पर सरकारी योजनाओं का लाभ मिले तो वे ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़े स्तर पर सफल उद्यम स्थापित कर सकते हैं। पशु चिकित्सा विभाग के सहयोग, शासन की वित्तीय सहायता और अपनी मेहनत के बल पर ग्रेसी ने न केवल स्वयं को आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि बस्तर के शिक्षित युवाओं को कृषि एवं पशुपालन आधारित स्टार्टअप शुरू करने के लिए भी नई प्रेरणा दी है।

विशेष लेख-सीड बॉल अभियान- हरियाली बढ़ाने का सरल और प्रभावी माध्यम

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जनभागीदारी से साकार हो रहा हरित छत्तीसगढ़ का संकल्प

सीड बॉल पर्यावरण को हरा-भरा बनाने और वनीकरण (रिफॉरेस्टेशन) का एक बेहद सरल, किफायती और अत्यधिक प्रभावी माध्यम है। इसमें बीजों को मिट्टी और जैविक खाद के मिश्रण से छोटी-छोटी गोलियों के रूप में सुरक्षित कर दिया जाता है, जिससे वे बिना मेहनत के दुर्गम स्थानों पर भी उग जाते हैं। सीड बॉल- बीज, मिट्टी (मुख्य रूप से चिकनी मिट्टी) और जैविक खाद (गोबर या वर्मीकम्पोस्ट) का एक छोटा और सूखा गोला होता है। बीजों को इस प्राकृतिक आवरण में लपेटकर सुखा लिया जाता है। मानसून की पहली अच्छी बारिश के बाद जब मिट्टी में पर्याप्त नमी हो, तब सीड बॉल्स का उपयोग करना सबसे अच्छा होता है। इन्हें यात्रा करते समय या खाली जगहों पर पैदल चलते हुए मिट्टी पर बिखेर दें। पानी के संपर्क में आते ही ये पौधे के रूप में विकसित होना शुरू हो जाती हैं।

बारिश का मौसम पौधारोपण और वनों के विस्तार के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है। इसी उद्देश्य से वन विभाग द्वारा सीड बॉल (बीज गोला) अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान जनभागीदारी के माध्यम से ऐसे क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने का प्रभावी प्रयास है, जहाँ पौधारोपण करना कठिन होता है।

क्या है सीड बॉल?

सीड बॉल मिट्टी, गोबर या जैविक खाद और विभिन्न वृक्षों के बीजों से तैयार किया गया छोटा गोलाकार गोला होता है। इसे जंगलों, पहाड़ियों, खाली भूमि और दुर्गम क्षेत्रों में फेंक दिया जाता है। वर्षा का पानी मिलने पर बीज अंकुरित होकर पौधों का रूप ले लेते हैं।

वन विभाग का हरित अभियान

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सशक्त नेतृत्व और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार छत्तीसगढ़ वन विभाग द्वारा एक पेड़ मां के नाम, वन महोत्सव तथा युवा फॉर नेचर जैसे अभियानों के साथ सीड बॉल कार्यक्रम को भी व्यापक स्तर पर संचालित किया जा रहा है। स्कूलों, महाविद्यालयों, स्वयंसेवी संस्थाओं, महिला स्व-सहायता समूहों और स्थानीय ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी से हजारों-लाखों सीड बॉल तैयार कर जंगलों और खाली भूमि में डाली जा रही हैं।

जैव विविधता संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका

सीड बॉल में महुआ, इमली, हर्रा, बहेड़ा, जामुन, करंज, नीम, बरगद, पीपल, आम, जामुन, शाल, बीजा, चार, खमार सहित स्थानीय प्रजातियों के बीजों का उपयोग किया जाता है। इससे प्राकृतिक वनों का विस्तार होता है, वन्यजीवों को भोजन और आश्रय मिलता है तथा जैव विविधता का संरक्षण भी सुनिश्चित होता है।

पर्यावरण संरक्षण का सशक्त माध्यम

सीड बॉल अभियान से हरित आवरण बढ़ने के साथ-साथ जल संरक्षण, मिट्टी के क्षरण या कटाव में कमी, कार्बन अवशोषण तथा जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने में भी सहायता मिलती है। यह कम लागत में अधिक क्षेत्र को हरित बनाने का प्रभावी उपाय है।

जनभागीदारी से बनेगा हरित भविष्य

वन विभाग का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता विकसित करना भी है। जब बच्चे, युवा, महिलाएं और ग्रामीण इस अभियान से जुड़ते हैं, तो हर व्यक्ति प्रकृति संरक्षण का सहभागी बनता है।

हर नागरिक निभाए अपनी जिम्मेदारी

यदि प्रत्येक नागरिक वर्षा ऋतु में कुछ सीड बॉल तैयार कर उपयुक्त स्थानों पर डाले या पौधारोपण में भागीदारी करे, तो आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ का हरित क्षेत्र और अधिक समृद्ध होगा। सीड बॉल अभियान प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी निभाने का एक सरल, सुलभ और प्रभावी माध्यम है।

राज्यपाल से प्रशिक्षु डिप्टी कलेक्टरों ने की सौजन्य मुलाकात

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सेवा भाव, संवेदनशीलता और तार्किक निर्णय से निभाएं दायित्व -डेका

रायपुर- राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि प्रशासनिक सेवा केवल एक पद नहीं, बल्कि आम जनता की सेवा का महत्वपूर्ण अवसर है। इस अवसर का पूरी निष्ठा, संवेदनशीलता और ईमानदारी से निर्वहन करना प्रत्येक अधिकारी का दायित्व है। उन्होंने कहा कि जहां चुनौतियां होती हैं, वहीं नए अवसर भी मौजूद होते हैं। इसलिए प्रत्येक परिस्थिति का सकारात्मक दृष्टिकोण से सामना करते हुए जनता के हित में निर्णय लिए जाने चाहिए।

राज्यपाल आज लोकभवन में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के वर्ष 2025 बैच के प्रशिक्षु डिप्टी कलेक्टरों से चर्चा कर रहे थे। ये अधिकारी वर्तमान में छत्तीसगढ़ प्रशासनिक अकादमी, निमोरा में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। प्रशिक्षणार्थी अधिकारियों ने अकादमी के महानिदेशक टी.सी. महावर के नेतृत्व में राज्यपाल से सौजन्य भेंट की।

राज्यपाल ने कहा कि प्रशासनिक निर्णय में मानवीय संवेदनाओं का भी समावेश होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक कार्य में ह्यूमन टच होना आवश्यक है, ताकि शासन की योजनाओं और निर्णयों का लाभ वास्तविक रूप से आम नागरिकों तक पहुंच सके। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को जनता से नियमित संवाद करना चाहिए, क्षेत्र का सतत भ्रमण करना चाहिए और लोगों की समस्याओं को प्रत्यक्ष रूप से समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो कार्य संभव हो, उसे प्राथमिकता के साथ पूरा करें और यदि किसी कारणवश कोई कार्य संभव नहीं है तो उसकी स्पष्ट और पारदर्शी जानकारी संबंधित व्यक्ति को अवश्य दें। इससे प्रशासन के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत होता है।

राज्यपाल ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों के लिए तार्किक सोच और विवेकपूर्ण निष्कर्ष अत्यंत आवश्यक हैं। तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष निर्णय लेना ही एक सक्षम अधिकारी की पहचान है। उन्होंने कहा कि जनता को न्याय दिलाना लोक सेवक का प्रथम कर्तव्य है और प्रत्येक अधिकारी को इस भावना के साथ कार्य करना चाहिए।

उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि वे युवा हैं और उनके कंधों पर भविष्य के प्रशासन की बड़ी जिम्मेदारी है। उन्हें अपने कार्यों के माध्यम से सुशासन, पारदर्शिता और जनविश्वास को मजबूत करना होगा। राज्यपाल ने कहा कि आप सभी सौभाग्यशाली हैं कि आपको छत्तीसगढ़ जैसे शांत, समृद्ध और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्य में सेवा करने का अवसर मिला है। यहां के लोगों में सेवा, सहयोग और आत्मीयता की भावना अत्यंत प्रबल है। इस विश्वास और अपनत्व को बनाए रखते हुए जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना ही एक सफल प्रशासनिक अधिकारी की पहचान होगी।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ प्रशासनिक अकादमी की प्रशिक्षण निदेशक मेनका प्रधान एवं प्रशिक्षु अधिकारी उपस्थित थे।

'कांकेयर' ब्रांड बना ग्रामीण महिलाओं की पहचान,शुद्ध जैविक उत्पादों की लगातार बढ़ रही मांग

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रायपुर- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत महिला स्वसहायता समूहों द्वारा तैयार ‘कांकेयर’ ब्रांड तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। यह ब्रांड कांकेर की हजारों महिलाओं की मेहनत, आत्मनिर्भरता और गुणवत्तापूर्ण प्राकृतिक उत्पादों का प्रतीक बन चुका है।

‘कांकेयर’ ब्रांड के तहत सरसों तेल, अरहर दाल, छिंद गुड़, शहद, रागी, कोदो, मक्का, आम का अचार सहित विभिन्न जैविक एवं प्राकृतिक उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। दण्डकारण्य क्षेत्र की प्राकृतिक परिस्थितियों में उगाए गए ये उत्पाद पूरी तरह शुद्ध, प्राकृतिक और उच्च गुणवत्ता वाले होते हैं। ये उत्पाद स्वसहायता समूहों द्वारा पारंपरिक एवं जैविक पद्धति से तैयार किए जाते हैं, जिनमें रासायनिक उर्वरकों का उपयोग नहीं होता है। एफएसएसएआई (FSSAI) से पंजीकृत होने के कारण उत्पादों की गुणवत्ता और शुद्धता का पूरा ध्यान रखा जाता है।

वर्तमान में ‘कांकेयर’ उत्पादों का सी-मार्ट और कांकेश्वरी एफपीसी के माध्यम से स्थानीय बाजारों में वितरण और बिक्री सुनिश्चित की जा रही है। जिला पंचायत परिसर में स्थापित पैकेजिंग इकाई से इनकी थोक खरीदी की जा सकती है। वेबसाइट Kancare.Shop के माध्यम से इन्हें ऑनलाइन ऑर्डर कर घर बैठे शुद्ध एवं प्राकृतिक उत्पाद प्राप्त कर सकते हैं। 

कांकेर जिला पंचायत के अधिकारियों ने बताया कि अब तक 'कांकेयर’ ब्रांड के 92 किलोग्राम अरहर दाल , 5.5 किलोग्राम शहद, 5 किलोग्राम छिंद गुड़, 9 किलोग्राम रागी आटा तथा 6 किलोग्राम मक्का आटा की बिक्री हो चुकी है। ‘कांकेयर’ ब्रांड आज केवल एक उत्पाद नहीं, बल्कि कांकेर जिले की ग्रामीण महिलाओं के सशक्तीकरण, आत्मनिर्भरता और गुणवत्तापूर्ण जैविक उत्पादन की नई पहचान बनकर उभर रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल:स्वस्थ माताएं, स्वस्थ बच्चे और कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ के लिए बनेगी समन्वित रणनीति

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यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से सभी संबंधित विभाग मिलकर तैयार करेंगे प्रभावी कार्ययोजना

स्वस्थ माताएं और स्वस्थ बच्चे ही विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत नींव - मुख्यमंत्री साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज मंत्रालय महानदी भवन में भारत में यूनिसेफ की प्रतिनिधि सिंथिया मैककैफ्रे ने शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, कुपोषण उन्मूलन तथा बच्चों के समग्र विकास को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा बच्चों के पोषण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है और इन क्षेत्रों में स्थायी सुधार के लिए सभी विभागों के समन्वित प्रयास आवश्यक हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि स्वस्थ माताएं और स्वस्थ बच्चे ही विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत नींव हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, महिला एवं बाल विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा आदिम जाति विकास विभाग सहित सभी संबंधित विभाग यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से एक समन्वित और परिणामोन्मुख कार्ययोजना तैयार करें, जिससे शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर और कुपोषण में कमी लाई जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि योजनाओं का प्रभाव तभी बढ़ेगा, जब विभिन्न विभाग साझा लक्ष्य और समन्वित कार्यप्रणाली के साथ काम करेंगे। उन्होंने अधिकारियों से ऐसी मल्टी-सेक्टोरल रणनीति तैयार करने को कहा, जिससे स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंचे और बच्चों के पोषण स्तर में गुणात्मक सुधार सुनिश्चित हो।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सिंथिया मैककैफ्रे का शॉल एवं छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक 'नंदी' भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। वहीं मैककैफ्रे ने भारत में यूनिसेफ के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भारतीय डाक विभाग द्वारा जारी विशेष स्मारक डाक टिकट मुख्यमंत्री को भेंट किया।

यूनिसेफ की भारत प्रतिनिधि सिंथिया मैककैफ्रे ने मुख्यमंत्री का "जय जोहार" कहकर अभिवादन किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध संस्कृति और सरल-सहज लोगों का प्रदेश है। उन्होंने बताया कि यूनिसेफ लंबे समय से राज्य सरकार के साथ मिलकर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण और बाल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार और यूनिसेफ के संयुक्त प्रयासों से प्रदेश के बच्चों का भविष्य अधिक सुरक्षित, स्वस्थ और समृद्ध बनेगा।

बैठक में मंत्रिमंडल के सदस्य, मुख्य सचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, छत्तीसगढ़ में यूनिसेफ की प्रमुख सीमा कुमार, अनिल गुलाटी तथा डॉ. बाल पारितोष दास उपस्थित थे।

भारत ने इंटरनेशनल ओलंपियाड 2026 में रचा इतिहास, 12 गोल्ड और 7 सिल्वर मेडल जीतकर दुनिया में लहराया तिरंगा

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नई दिल्ली- भारत के युवा वैज्ञानिकों और गणितज्ञों ने वर्ष 2026 के अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए देश का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया है। राष्ट्रीय ओलंपियाड कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षित भारतीय छात्रों ने 12 स्वर्ण (Gold) और 7 रजत (Silver) पदक जीतकर अब तक की सबसे शानदार उपलब्धियों में से एक हासिल की। खास बात यह रही कि अंतरराष्ट्रीय भौतिकी (Physics) और रसायन विज्ञान (Chemistry) ओलंपियाड में भारतीय टीम ने सभी स्वर्ण पदक जीतकर संयुक्त रूप से विश्व में पहला स्थान प्राप्त किया।

इस ऐतिहासिक सफलता पर परमाणु ऊर्जा विभाग (Department of Atomic Energy-DAE) ने छात्रों, शिक्षकों और मार्गदर्शकों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि भारत की 'युवा शक्ति' और देश में वैज्ञानिक प्रतिभाओं को निखारने के लिए वर्षों से किए जा रहे सतत प्रयासों का परिणाम है।

चार अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड में शानदार प्रदर्शन

वर्ष 2026 के अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड में भारतीय टीम का प्रदर्शन इस प्रकार रहा—

  • अंतरराष्ट्रीय भौतिकी ओलंपियाड (IPhO) – सभी 5 स्वर्ण पदक, संयुक्त रूप से विश्व में प्रथम स्थान।

  • अंतरराष्ट्रीय रसायन विज्ञान ओलंपियाड (IChO) – सभी 4 स्वर्ण पदक, संयुक्त रूप से विश्व में प्रथम स्थान।

  • अंतरराष्ट्रीय जीवविज्ञान ओलंपियाड (IBO) – 1 स्वर्ण और 3 रजत पदक।

  • अंतरराष्ट्रीय गणित ओलंपियाड (IMO) – 2 स्वर्ण और 4 रजत पदक।

इस तरह भारत ने कुल 12 गोल्ड और 7 सिल्वर पदक जीतकर वैश्विक मंच पर अपनी वैज्ञानिक और गणितीय प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।

DAE अध्यक्ष ने दी बधाई

परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव एवं परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष डॉ. अजीत कुमार मोहंती ने छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड में भारतीय विद्यार्थियों का उत्कृष्ट प्रदर्शन पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि यह सफलता छात्रों की कड़ी मेहनत, शिक्षकों और मार्गदर्शकों के समर्पण तथा दशकों में विकसित मजबूत संस्थागत व्यवस्था का परिणाम है।

HBCSE की अहम भूमिका

इस उपलब्धि के पीछे होमी भाभा विज्ञान शिक्षा केंद्र (HBCSE) की महत्वपूर्ण भूमिका रही। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) के इस राष्ट्रीय केंद्र को परमाणु ऊर्जा विभाग का सहयोग प्राप्त है। HBCSE देशभर से प्रतिभाशाली छात्रों का चयन कर उन्हें चरणबद्ध प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी कराता है।

HBCSE के निदेशक प्रो. अर्नब भट्टाचार्य ने कहा कि विभाग के निरंतर सहयोग के कारण भारत का ओलंपियाड कार्यक्रम विश्व के सबसे सम्मानित कार्यक्रमों में शामिल हो चुका है। उन्होंने कहा कि छात्रों की यह सफलता विज्ञान और गणित में उत्कृष्टता की संस्कृति को और मजबूत करेगी।

दशकों की मेहनत का परिणाम

परमाणु ऊर्जा विभाग का कहना है कि उसका योगदान केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है। विभाग ने HBCSE और TIFR के माध्यम से वैज्ञानिकों, शिक्षकों और विशेषज्ञों का एक मजबूत राष्ट्रीय नेटवर्क तैयार किया है, जिसने वर्षों से देश की प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है।

DAE ने सभी पदक विजेता छात्रों, टीम लीडर्स, मेंटर्स, वैज्ञानिक पर्यवेक्षकों, शिक्षकों और सहयोगी संस्थानों को बधाई देते हुए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST), अंतरिक्ष विभाग (DOS) और शिक्षा मंत्रालय के सहयोग की भी सराहना की।

भारत के वैज्ञानिक भविष्य की नई उड़ान

विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 की यह ऐतिहासिक सफलता इस बात का प्रमाण है कि भारत वैज्ञानिक शिक्षा और प्रतिभा विकास के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह उपलब्धि न केवल देश के युवाओं को प्रेरित करेगी, बल्कि भारत को वैश्विक ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार की महाशक्ति बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

मानसून का प्रकोप: आज देश के 18 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, छत्तीसगढ़ भी शामिल, रहें सावधान

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 नई दिल्ली / रायपुर : देशभर में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और कई हिस्सों में इसका कड़ा असर देखने को मिल रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, अगले 3 से 4 दिनों तक देश के बड़े हिस्से में बारिश का यह दौर यूं ही जारी रहेगा। आज (22 जुलाई) देश के 18 राज्यों में अति-भारी बारिश (मूसलाधार बारिश) की चेतावनी जारी की गई है।


मौसम विभाग ने सतर्क करते हुए बताया कि बारिश के साथ-साथ 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। इसके चलते पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन (लैंडस्लाइड) तथा मैदानी व निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ जैसे हालात पैदा हो सकते हैं।

इन राज्यों के लिए जारी हुआ रेड/ऑरेंज अलर्ट

मौसम विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, आज जिन राज्यों में भारी बारिश को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी गई है, उनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • मध्य व पूर्वी भारत: छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा।
  • उत्तर व उत्तर-पश्चिम भारत: दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर।
  • पश्चिम व दक्षिण भारत: गुजरात, महाराष्ट्र, केरल और तेलंगाना।
  • पूर्वोत्तर भारत: असम, मेघालय सहित अन्य पूर्वोत्तर राज्य।

मौसम विभाग ने आम जनता को बिना वजह जलभराव वाले क्षेत्रों और पहाड़ी रास्तों पर यात्रा न करने की सलाह दी है।

CG NEWS ; शराबी बेटे की प्रताड़ना से तंग पिता बना कातिल, डंडे और कुल्हाड़ी से मार डाला

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 बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में रिश्तों को शर्मसार करने वाली एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। तखतपुर थाना क्षेत्र के ग्राम कुशमुली में एक पिता ने अपने ही बेटे की डंडे और कुल्हाड़ी से वार कर नृशंस हत्या कर दी। प्रारंभिक जांच के अनुसार, मृतक की रोजाना की शराबखोरी, मारपीट और प्रताड़ना से तंग आकर पिता ने गुस्से में यह खौफनाक कदम उठाया।


शराब के नशे में शुरू किया विवाद

पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, मृतक विजेंद्र श्रीवास गंभीर रूप से शराब पीने का आदी था। वह आए दिन नशे की हालत में घर पहुंचकर परिजनों से गाली-गलौज और मारपीट किया करता था। बीती रात भी विजेंद्र अत्यधिक शराब पीकर घर लौटा और परिजनों से उलझ पड़ा। रोज-रोज के मानसिक और शारीरिक तनाव से परेशान पिता मोहित राम श्रीवास का धैर्य टूट गया।

कुल्हाड़ी और डंडे से ताबड़तोड़ हमला

विवाद बढ़ने पर आपा खो चुके पिता ने घर में रखे डंडे और कुल्हाड़ी से विजेंद्र पर जानलेवा हमला कर दिया। सिर और शरीर पर गंभीर चोटें लगने के कारण विजेंद्र की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद से गांव में सन्नाटा और दहशत का माहौल है।

आरोपी पिता गिरफ्तार, जांच जारी

घटना की सूचना मिलते ही तखतपुर पुलिस दल-बल के साथ मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव का पंचनामा तैयार कर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। आरोपी पिता मोहित राम श्रीवास को हिरासत में ले लिया गया है और उससे पूछताछ की जा रही है। तखतपुर थाना प्रभारी ने बताया कि आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

CG Cabinet Meeting: कल होगी साय कैबिनेट की अहम बैठक, कई बड़े फैसलों पर लग सकती है मुहर

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 CG Cabinet Meeting ; छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में बुधवार (22 जुलाई) को राज्य मंत्रिमंडल की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी। यह बैठक सुबह 11:30 बजे नया रायपुर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) के मंत्रिपरिषद कक्ष में होगी, जिसमें जनहित और विकास से जुड़े कई अहम प्रस्तावों पर चर्चा के बाद निर्णय लिए जाने की संभावना है।


गौरतलब है कि इससे पूर्व 8 जुलाई को साय कैबिनेट की बैठक हुई थी, जिसमें राज्य के औद्योगिक, सामाजिक और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के लिए कई ऐतिहासिक फैसले लिए गए थे।

पिछली कैबिनेट बैठक के मुख्य निर्णय (8 जुलाई):

  • बिजली भुगतान के लिए DDM व्यवस्था: छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी द्वारा केंद्रीय विद्युत उपक्रमों (CPSUs) से खरीदी जा रही बिजली के भुगतान की सुरक्षा के लिए पुराने त्रिपक्षीय अनुबंध की जगह आरबीआई (RBI) के नियमानुसार 'डायरेक्ट डेबिट मैंडेट' (DDM) लागू करने की मंजूरी दी गई।

  • बस्तर फाइटर्स नियमों में संशोधन: छत्तीसगढ़ पुलिस विशेष कार्यपालिक बल (बस्तर फाइटर्स) आरक्षक भर्ती एवं सेवा शर्तें नियम, 2026 में महत्वपूर्ण संशोधन को स्वीकृति प्रदान की गई।

  • निजी विश्वविद्यालय अधिनियम में बदलाव: राज्य में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए 'छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक, 2026' के प्रारूप को हरी झंडी दी गई।

  • वाणिज्यिक कर अधिकरण होगा समाप्त: राज्य में जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण (GSTAT) के गठन के बाद अब 'छत्तीसगढ़ वाणिज्यिक कर अधिकरण' को समाप्त करने का निर्णय लिया गया है। अब लंबित मामलों का हस्तांतरण राजस्व मंडल को किया जाएगा।

  • जीएसटी और औद्योगिक नीतियों में सुधार:

    • GST संशोधन विधेयक 2026: कर प्रणाली को सरल बनाने और निर्यातकों के लिए रिफंड प्रक्रिया में तेजी लाने का प्रावधान।

    • औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन संशोधन: राज्य में निवेशकों को बेहतर सुविधाएं और अनुकूल माहौल देने के उद्देश्य से नीति में संशोधन।

  • ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक लाएगा छत्तीसगढ़: राज्य में कारोबार को सुगम, डिजिटल और समयबद्ध बनाने के लिए 'छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक, 2026' के प्रारूप को मंजूरी दी गई। ऐसा कानून बनाने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बनेगा।

  • नवा रायपुर में वन टाइम सेटलमेंट (OTS): नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण (NRDA) द्वारा आबंटित भूखंडों व परिसरों पर देय ब्याज व अधिभार में राहत देने के लिए OTS योजना-2026 को मंजूरी दी गई।

  • आदर्श किरायेदारी कानून लागू करने की तैयारी: 'छत्तीसगढ़ भाड़ा नियंत्रण (संशोधन) विधेयक, 2026' के तहत मकान मालिकों और किरायेदारों के अधिकारों को स्पष्ट करते हुए खाली मकानों को किराये पर देने को बढ़ावा दिया जाएगा।

  • राजनांदगांव को सौगात: राजनांदगांव में 2,000 सीट की क्षमता वाले अत्याधुनिक ऑडिटोरियम निर्माण के लिए आवश्यक शासकीय भूमि के आबंटन को स्वीकृति दी गई।

  • पर्यावरण संरक्षण संकल्प: 'जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) संशोधन अधिनियम, 2024' को राज्य में लागू करने के लिए विधानसभा में संकल्प प्रस्तुत करने का अनुमोदन किया गया।

छत्तीसगढ़ में मानसून का असंतुलन: कहीं 'इंद्रदेव' मेहरबान, तो कहीं पानी को तरसे किसान, देखें आपके जिले का हाल

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ में मानसून का दौर जारी है। राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष (राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से अब तक प्रदेश में औसतन 356.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो इस अवधि की सामान्य औसत वर्षा (408.7 मिमी) का 87.1 प्रतिशत है। इस तरह प्रदेश में अब तक सामान्य से लगभग 13% कम बारिश हुई है।


बीते 24 घंटों में राज्य में औसतन 21.7 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई, जिसमें गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला 69.4 मिमी बारिश के साथ शीर्ष पर रहा।


सारंगढ़-बिलाईगढ़ में सर्वाधिक बारिश

चालू मानसून सत्र में सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला वर्षा के मामले में प्रदेश में पहले स्थान पर है। यहाँ अब तक 576.7 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो जिले की सामान्य औसत वर्षा का 181.4% है।

अतिरिक्त बारिश वाले प्रमुख जिले:

  • जांजगीर-चांपा: 512.0 मिमी (120.4%)
  • बलौदाबाजार: 453.4 मिमी (119.7%)
  • बिलासपुर: 440.5 मिमी (114.1%)
  • महासमुंद: 427.3 मिमी (112.4%)
  • रायपुर: 395.7 मिमी (112.6%)
  • मुंगेली: 417.7 मिमी (110.4%)
  • बलरामपुर: 391.8 मिमी (160.0%)

इसके अलावा गरियाबंद (435.7 मिमी), सक्ती (419.8 मिमी), कोरबा (409.7 मिमी), दुर्ग (357.7 मिमी), कोरिया (356.0 मिमी), रायगढ़ (353.3 मिमी), बालोद (347.7 मिमी), मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (337.0 मिमी) तथा सूरजपुर (313.0 मिमी) में भी स्थिति बेहतर है।

बस्तर संभाग और दक्षिण छत्तीसगढ़ में अब भी पानी की कमी

प्रदेश के मैदानी और मध्य हिस्सों में मानसून की स्थिति बेहतर है, लेकिन बस्तर संभाग और दक्षिण छत्तीसगढ़ के जिलों में अब भी औसत से काफी कम वर्षा दर्ज की गई है।

सबसे कम बारिश वाले जिले:

मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी: 203.3 मिमी (सामान्य का महज 40.4%)

  • सुकमा: 304.5 मिमी (45.8%)
  • बीजापुर: 359.7 मिमी (49.3%)
  • कांकेर: 261.2 मिमी (50.8%)
  • कोंडागांव: 263.8 मिमी (56.5%)
  • बस्तर: 298.0 मिमी (60.7%)
  • सरगुजा: 185.8 मिमी (65.9%)

अन्य जिलों का हाल

  • दंतेवाड़ा: 438.9 मिमी (86.2%)
  • नारायणपुर: 384.8 मिमी (79.4%)
  • धमतरी: 349.2 मिमी (81.8%)
  • राजनांदगांव: 303.3 मिमी (81.2%)
  • जशपुर: 301.4 मिमी (78.3%)
  • खैरागढ़-छुईखदान-गंडई: 274.2 मिमी (89.9%)
  • बेमेतरा: 253.1 मिमी (80.7%)
  • कबीरधाम: 240.6 मिमी (80.1%)

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग स्थिति पर लगातार नज़र बनाए हुए है।

पिकनिक पार्टी में विवाद के बाद किन्नर की हत्या: सड़क किनारे मिली लाश, इलाके में फैला तनाव

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 बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में एक किन्नर की संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। सकरी थाना क्षेत्र के जॉकी गांव में पिकनिक मनाने के दौरान हुए विवाद के बाद किन्नर तन्नू खान की कथित तौर पर गला दबाकर हत्या कर दी गई और शव को सड़क किनारे फेंक दिया गया। पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए कई संदिग्धों को हिरासत में लिया है।


पिकनिक पर हुआ था विवाद

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, तन्नू खान अपने साथियों के साथ जॉकी गांव में पिकनिक मनाने गई थी। इसी दौरान किसी बात को लेकर उसका साथी किन्नर रिया से विवाद हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि दोनों के बीच कहासुनी इतनी बढ़ गई कि मामला हाथापाई तक पहुंच गया। इसी बीच तन्नू खान की गला दबाकर हत्या कर दी गई और आरोपी वारदात के बाद मौके से फरार हो गए।

गले पर दबाव के निशान, नाक से बह रहा था खून

सूचना मिलते ही सकरी थाना पुलिस दल-बल के साथ मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सिम्स (SIMS) अस्पताल भेजा। पुलिस के मुताबिक, मृतका के नाक से खून निकल रहा था और गले पर दबाव के स्पष्ट निशान पाए गए हैं। प्राथमिक जांच में मामला हत्या का प्रतीत हो रहा है; हालांकि मौत के सटीक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा।

किन्नर समुदाय में भारी आक्रोश

वारदात की खबर फैलते ही बिलासपुर और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में किन्नर समुदाय के लोग सिम्स अस्पताल पहुंच गए। घटना पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए उन्होंने पुलिस प्रशासन से दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी और कड़ी से कड़ी सजा की मांग की है।

पुलिस का बयान:

"घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए गए हैं और कई संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ जारी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और तकनीकी जांच के आधार पर अग्रिम कानूनी कार्रवाई की जाएगी।"

— सकरी थाना पुलिस

खरीफ फसलों के बीमा के लिए 31 जुलाई तक अंतिम मौका, 10 फसलें अधिसूचित

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 गरियाबंद। खरीफ मौसम 2026 के लिए 'प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना' के तहत किसान 31 जुलाई तक अपनी फसलों का बीमा करा सकते हैं। कलेक्टर की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्तरीय पर्यवेक्षण समिति की बैठक में अधिकारियों को इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।


छत्तीसगढ़ शासन द्वारा गरियाबंद जिले के लिए धान (सिंचित व असिंचित), मक्का, उड़द, मूंग, अरहर, मूंगफली, कोदो, कुटकी और रागी सहित कुल 10 फसलों को अधिसूचित किया गया है। योजना का लाभ ऋणी एवं अऋणी किसान, भू-धारक, बटाईदार तथा वनपट्टाधारी किसान उठा सकते हैं। जिले में बीमा कार्य संपादित करने के लिए बजाज अलायंज जनरल इंश्योरेंस कंपनी को अनुबंधित किया गया है।

किस फसल पर कितना प्रीमियम?

कृषि विभाग के अनुसार अनाज, दलहन और तिलहन फसलों के लिए कुल बीमित राशि का 2 प्रतिशत तथा लघुधान्य (मिलेट्स) फसलों के लिए 1 प्रतिशत प्रीमियम तय किया गया है:

फसल का नाम,बीमित राशि (प्रति हेक्टेयर),निर्धारित प्रीमियम

 

फसल का नामबीमित राशि (प्रति हेक्टेयर)निर्धारित प्रीमियम
धान (सिंचित)₹66,000₹1,320
धान (असिंचित)₹49,500₹990
मूंगफली₹51,700₹1,034
मक्का₹50,600₹1,012
अरहर₹46,200₹1,012
उड़द / मूंग₹27,500₹550
कुटकी₹20,900₹209
कोदो₹19,800₹198
रागी₹18,700₹187

आवेदन प्रक्रिया व दस्तावेज

अऋणी किसान अपने आधार कार्ड, बैंक पासबुक, बी-1, पी-2 और फसल बुवाई प्रमाण पत्र के साथ नजदीकी जन सेवा केंद्र (CSC), संबंधित बैंक शाखा या लोक सेवा केंद्र में जाकर आवेदन कर सकते हैं।

छत्तीसगढ़ में UCC की तैयारी तेज: 24 जुलाई को होगी विशेषज्ञ समिति की पहली बैठक

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने कदम तेजी से बढ़ाने शुरू कर दिए हैं। प्रदेश में UCC का कानूनी प्रारूप (ड्राफ्ट) तैयार करने के लिए गठित विशेषज्ञ समिति की पहली औपचारिक बैठक 24 जुलाई को दोपहर 12 बजे आयोजित की जाएगी। यह बैठक मुख्य सचिव विकास शील के कक्ष में होगी।


सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त जस्टिस की अध्यक्षता में बनी है कमिटी

इस हाई-लेवल समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त जस्टिस रंजना देसाई कर रही हैं। समिति के अन्य प्रमुख सदस्यों में शामिल हैं:

  • शत्रुघ्न सिंह (पूर्व IAS अधिकारी, उत्तराखंड)
  • एम. के. रावत (पूर्व IAS अधिकारी, छत्तीसगढ़)
  • मोहन पवार (वरिष्ठ अधिवक्ता)
  • ज्योति रानी सिंह (सेवानिवृत्त प्राचार्य)

बैठक का मुख्य एजेंडा

कानूनी ढांचे का अध्ययन: समिति राज्य में मौजूदा नागरिक कानूनों और UCC लागू करने की व्यावहारिक संभावनाओं का विस्तार से विश्लेषण करेगी।

प्रमुख मुद्दों का समावेशन: ड्राफ्ट तैयार करते समय विवाह, तलाक, भरण-पोषण (मंथली मेंटेनेंस), उत्तराधिकार, संपत्ति अधिकार और गोद लेने (दत्तक ग्रहण) जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

सरकार को सौंपेगी रिपोर्ट: व्यापक अध्ययन और विचार-विमर्श के बाद समिति अपनी विस्तृत सिफारिशें एवं ड्राफ्ट राज्य सरकार को सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे का विधायी कदम उठाया जाएगा।

इस बैठक को छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में एक पहला और बेहद महत्वपूर्ण औपचारिक कदम माना जा रहा है।

छत्तीसगढ़ में मानसून सक्रिय: आज कई जिलों में बारिश के आसार, मौसम विभाग का 'बिजली गिरने' का अलर्ट

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में एक बार फिर झमाझम बारिश का दौर शुरू हो गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के रायपुर केंद्र द्वारा जारी पूर्वानुमान के अनुसार, आज प्रदेश के अधिकांश जिलों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।


मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि कुछ स्थानों पर तेज बारिश के साथ गरज-चमक और वज्रपात (बिजली गिरने) की स्थिति बन सकती है। खराब मौसम को देखते हुए विभाग ने नागरिकों को सतर्क रहने और बेवजह यात्रा न करने की सलाह दी है।

बीते 24 घंटों में बदला मौसम, तापमान में आई गिरावट

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ के अधिकांश हिस्सों में मध्यम दर्ज की गई बारिश ने मौसम को सुहावना बना दिया है। रायपुर और सरगुजा संभाग के कुछ इलाकों में भारी बारिश रिकॉर्ड की गई, जिससे तापमान में भी गिरावट आई है।

कम बारिश से चिंता, पर आगे उम्मीद:

चालू मानसून सीजन में अब तक प्रदेश में सामान्य से 24 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियों में तेजी आएगी, जिससे इस कमी की भरपाई हो सकती है।

अगले 5 दिनों का पूर्वानुमान

मौसम केंद्र रायपुर के अनुसार, प्रदेश में 21 से 26 जुलाई तक मानसून पूरी तरह सक्रिय रहेगा।

बारिश की संभावना: अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश।

राहत: रुक-रुक कर होने वाली बारिश से लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिलेगी।

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