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शिक्षक महेन्द्र राज्य शिक्षक पुरस्कार 2025 से सम्मानित, आरंग का बढ़ाया गौरव

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 आरंग। 5 सितंबर शिक्षक दिवस के अवसर पर आरंग विकासखंड के सक्रिय और नवाचारी शिक्षक महेन्द्र कुमार पटेल को राज्य शिक्षक पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया गया।


राजभवन में आयोजित गरिमामय समारोह में महामहिम राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव एवं उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा द्वारा उन्हें सम्मानित कर बधाई एवं शुभकामनाएं दी गईं।यह सम्मान उन्हें शिक्षा में नवाचार, शिक्षा दान केंद्र संचालन व कैरियर गाइडेंस के माध्यम से उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने, समाज सेवा में उल्लेखनीय योगदान, राष्ट्रीय महत्व के कार्यों में सहभागिता, शाला में भौतिक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा आरंग की पुरातात्विक धरोहरों के संकलन एवं संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका के लिए प्रदान किया गया।उल्लेखनीय है कि महेन्द्र कुमार पटेल आरंग विकासखंड के प्रथम शिक्षक हैं, जिन्हें राज्य शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।इस अवसर पर शिक्षक पटेल ने कहा कि "डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन पेशे से नहीं, बल्कि स्वभाव से शिक्षक थे। हमें भी स्वभाव से शिक्षक बनकर समाज के लिए कार्य करना चाहिए। सही मायने में शिक्षक वही है जो बच्चों की शैक्षिक योग्यता बढ़ाने के साथ-साथ समाज को भी सही दिशा दे।"

उनकी इस उपलब्धि से शिक्षा जगत में हर्ष की लहर है। जिला शिक्षा अधिकारी रायपुर दिनेश नायर, जिला मिशन समन्वयक समग्र शिक्षा अरुण शर्मा, विकासखंड शिक्षा अधिकारी दिनेश शर्मा, बीआरसीसी सुरेन्द्र सिंह चंद्रसेन, संकुल समन्वयक (भिलाई) जितेन्द्र शुक्ला, समस्त शाला स्टाफ चरौदा, अंचल के शिक्षक-शिक्षिकाओं सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों ने हर्ष व्यक्त करते हुए शिक्षक पटेल को बधाई दी है।

शिक्षक नई पीढ़ी के निर्माता, विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में शिक्षा की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण : मुख्यमंत्री साय

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रायपुर :  राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शिक्षक दिवस के अवसर पर आज लोकभवन के छत्तीसगढ़ मण्डपम् में आयोजित राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षक-शिक्षिकाओं को सम्मानित कर उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। समारोह में वर्ष 2025-26 के लिए प्रदेश के 63 उत्कृष्ट शिक्षकों को राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। चार उत्कृष्ट शिक्षकों को राज्य शिक्षक सम्मान स्मृति पुरस्कार प्रदान किए गए। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने वर्ष 2026-27 के राज्य शिक्षक सम्मान के लिए चयनित 64 शिक्षकों के नामों की घोषणा भी की।


समारोह के मुख्य अतिथि राज्यपाल रमेन डेका ने शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में शिक्षा और शिक्षक की भूमिका भी व्यापक हो रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस दौर में शिक्षकों और विद्यार्थियों का नई तकनीकों से परिचित होना आवश्यक है, लेकिन उससे भी अधिक जरूरी तकनीक का विवेकपूर्ण, जिम्मेदार और मानवीय मूल्यों के अनुरूप उपयोग है। उन्होंने कहा कि AI हमारा सहायक बने, हमारा नियंत्रक नहीं। शिक्षक विद्यार्थियों को तकनीक का उपयोग ज्ञान अर्जित करने, नवाचार करने और अपने व्यक्तित्व को निखारने के लिए प्रेरित करें।


राज्यपाल डेका ने कहा कि आज गूगल और डिजिटल तकनीक के माध्यम से हमारे पास सूचनाओं का विशाल संसार उपलब्ध है। इसके बावजूद हमें यह ध्यान रखना होगा कि तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता स्वतंत्र चिंतन और बौद्धिक विकास को प्रभावित न करे। दुनिया के अनेक देशों में विद्यार्थियों द्वारा स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के उपयोग को लेकर गंभीर विचार-विमर्श हो रहा है। तकनीक हमें जानकारी उपलब्ध करा सकती है, लेकिन संस्कार, संवेदना, अनुशासन, प्रेरणा और जीवन की सही दिशा गुरु से ही मिलती है। इसलिए बदलते समय में शिक्षक की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।


उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने देश की शिक्षा व्यवस्था को अधिक व्यावहारिक, कौशल आधारित, बहुभाषी और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार तैयार किया है। आने वाले समय में शिक्षा के स्वरूप में व्यापक बदलाव देखने को मिलेंगे। ऐसे में शिक्षकों को निरंतर अपने ज्ञान और कौशल को अद्यतन करना होगा। साथ ही विद्यार्थियों की रुचि और प्रतिभा को पहचानकर उन्हें सही विषय और करियर चुनने में मार्गदर्शन देना होगा। विद्यार्थियों की काउंसलिंग भी शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका का हिस्सा है।

राज्यपाल ने कहा कि शिक्षण केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि एक महान और गरिमामय दायित्व है। शिक्षक अपने ज्ञान के साथ-साथ अपने आचरण से भी विद्यार्थियों को शिक्षित करते हैं। बच्चे अपने शिक्षकों को आदर्श के रूप में देखते हैं, इसलिए शिक्षकों को अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा, संवेदनशीलता और समर्पण के साथ निर्वहन करना चाहिए। प्रत्येक विद्यार्थी कैसे आगे बढ़े, उसकी प्रतिभा कैसे निखरे और उसका भविष्य कैसे बेहतर बने, यह शिक्षक की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

अपने विद्यार्थी जीवन की स्मृतियां साझा करते हुए राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि शिक्षक दिवस उन्हें प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक की अपनी यात्रा की याद दिलाता है। पहले शिक्षक और विद्यार्थी के बीच आदर, आत्मीयता और विश्वास का अत्यंत गहरा संबंध होता था। सीमित संसाधनों के बावजूद शिक्षक पूरी सेवा भावना और समर्पण के साथ विद्यार्थियों का भविष्य संवारते थे। यही समर्पण और आत्मीयता शिक्षक-विद्यार्थी संबंध की वास्तविक शक्ति है।

उन्होंने कहा कि शिक्षक और विद्यार्थी का संबंध केवल कक्षा तक सीमित नहीं होता। शिक्षक विद्यार्थी के व्यक्तित्व, सोच और भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शिक्षक अपने विद्यार्थियों की रुचि, क्षमता और विशेष प्रतिभा को पहचानें तथा उन्हें जीवन में सही दिशा चुनने के लिए प्रेरित करें।

राज्यपाल डेका ने शासकीय सेवा में स्थानांतरण को सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताते हुए कहा कि जहां भी दायित्व मिले, उसे सहजता से स्वीकार कर पूरी जिम्मेदारी और समर्पण के साथ कार्य करना चाहिए। उन्होंने सम्मानित सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं को बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश के शिक्षक अपने ज्ञान, अनुभव और समर्पण से छत्तीसगढ़ की नई पीढ़ी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे।

शिक्षा का उद्देश्य सक्षम नागरिक और श्रेष्ठ समाज का निर्माण : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

समारोह की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने शिक्षक दिवस पर सभी गुरुजनों को शुभकामनाएं दीं और राज्य स्तरीय सम्मान प्राप्त करने वाले शिक्षक-शिक्षिकाओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सम्मान शिक्षकों के समर्पण, कठिन परिश्रम, नवाचार और विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण के लिए किए गए उत्कृष्ट कार्यों का सम्मान है। शिक्षक वास्तव में राष्ट्र और नई पीढ़ी के निर्माता हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने महान शिक्षाविद् एवं पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का पुण्य स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि भारत की शिक्षा परंपरा अत्यंत समृद्ध और गौरवशाली रही है। हमारे यहां शिक्षा का उद्देश्य कभी केवल डिग्री या नौकरी प्राप्त करना नहीं रहा, बल्कि व्यक्ति को ज्ञानवान, संस्कारवान, सक्षम और जिम्मेदार नागरिक बनाना रहा है। ऐसी शिक्षा ही व्यक्ति को समाज और राष्ट्र के विकास में सार्थक योगदान देने के लिए तैयार करती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और प्रत्येक बच्चे तक बेहतर शैक्षणिक अवसर पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। पिछले ढाई वर्षों में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। युक्तियुक्तकरण के बाद प्रदेश में अब एक भी स्कूल शिक्षकविहीन नहीं है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को लागू करते हुए शिक्षा को संस्कार, कौशल और रोजगार से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की भौगोलिक, सामाजिक और भाषायी विविधता को ध्यान में रखते हुए शिक्षा व्यवस्था में स्थानीय आवश्यकताओं को भी महत्व दिया जा रहा है। बस्तर अंचल में बच्चों को उनकी स्थानीय बोली के माध्यम से प्रारंभिक शिक्षा देने की पहल की गई है। इससे बच्चों के लिए सीखने की प्रक्रिया अधिक सहज और प्रभावी बन रही है। शासकीय विद्यालयों में पैरेंट्स-टीचर मीट को बढ़ावा देकर अभिभावकों को भी बच्चों की शिक्षा और विद्यालय की गतिविधियों से सक्रिय रूप से जोड़ा जा रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश के 341 विद्यालयों का चयन पीएम श्री योजना के अंतर्गत किया गया है। इन विद्यालयों को आधुनिक सुविधाओं, बेहतर शैक्षणिक वातावरण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके साथ ही स्वामी विवेकानंद के नाम पर 150 विद्यालय प्रारंभ किए जा रहे हैं। शिक्षकों की लंबे समय से लंबित पदोन्नतियों को भी सरकार ने प्राथमिकता के साथ पूरा किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर जैसे दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के समान अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से ओरछा और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही हैं। इन प्रयासों से दूरस्थ अंचलों के बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और आगे बढ़ने के नए अवसर मिलेंगे।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के साथ विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का हमारा लक्ष्य है और इस लक्ष्य को प्राप्त करने में शिक्षा विभाग तथा हमारे शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। आज जिन बच्चों को शिक्षक ज्ञान, संस्कार और कौशल दे रहे हैं, वही आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ और देश के विकास का नेतृत्व करेंगे। इसलिए एक शिक्षक का योगदान केवल एक विद्यार्थी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका प्रभाव आने वाली पीढ़ियों और पूरे समाज पर पड़ता है।

AI आधारित स्मार्ट स्कूलों के माध्यम से नवाचार को बढ़ावा : स्कूल शिक्षा मंत्री

समारोह के विशिष्ट अतिथि स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राज्य सरकार शिक्षा में आधुनिक तकनीक और नवाचार के उपयोग को निरंतर बढ़ावा दे रही है। प्रदेश में AI आधारित स्मार्ट स्कूल विकसित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही विद्यार्थियों में अच्छे संस्कार, रचनात्मकता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए विविध गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा में नवाचार के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को अग्रणी राज्यों में शामिल करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

स्कूल शिक्षा मंत्री श्री यादव ने इस अवसर पर आगामी वर्ष 2026-27 के राज्य शिक्षक सम्मान के लिए चयनित 64 शिक्षक-शिक्षिकाओं के नामों की घोषणा की और उन्हें शुभकामनाएं दीं।

चार शिक्षकों को राज्य शिक्षक सम्मान स्मृति पुरस्कार

राज्य स्तरीय समारोह में चार उत्कृष्ट शिक्षकों को विशिष्ट राज्य शिक्षक सम्मान स्मृति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के श्री राजेश कुमार प्रजापति को डॉ. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी स्मृति पुरस्कार, कोरबा जिले के श्री कामता प्रसाद जायसवाल को डॉ. बलदेव प्रसाद मिश्र स्मृति पुरस्कार, दुर्ग जिले की श्रीमती प्रज्ञा सिंह को डॉ. मुकुटधर पाण्डेय स्मृति पुरस्कार तथा सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की श्रीमती प्रियंका गोस्वामी को श्री गजानन माधव मुक्तिबोध स्मृति पुरस्कार प्रदान किया गया।

इसके साथ ही प्रधान पाठक, व्याख्याता, व्याख्याता एल.बी., शिक्षक एल.बी., सहायक शिक्षक तथा सहायक शिक्षक एल.बी. संवर्ग के कुल 63 उत्कृष्ट शिक्षकों को राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सम्मानित शिक्षकों के योगदान और नवाचारी प्रयासों की सराहना करते हुए अतिथियों ने उनसे प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने में निरंतर योगदान देने का आह्वान किया।

समारोह में स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने स्वागत उद्बोधन दिया। संचालक लोक शिक्षण श्री ऋतुराज रघुवंशी ने आभार प्रदर्शन किया।

इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, स्कूल शिक्षा विभाग के विशेष सचिव संतोष देवांगन सहित विभागीय अधिकारी, प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।

झीरम घाटी नक्सली हमला : कांग्रेस की टॉप लीडरशिप पर हमले का 13 साल बाद फैसला, 10 आरोपी दोषी

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 जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में 13 साल बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। जगदलपुर स्थित NIA की विशेष अदालत ने मामले में सुनवाई का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। मामले में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ अभियोजन चला था, लेकिन सुनवाई के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई। अब अदालत ने शेष 10 आरोपियों को दोषी माना है। दोषियों की सजा का ऐलान 16 सितंबर को किया जाएगा।


101 गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर फैसला

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने 101 गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए। दोनों पक्षों की अंतिम बहस 10 अगस्त को पूरी हो गई थी, जिसके बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। पहले 31 अगस्त को फैसला आने की संभावना थी, लेकिन बाद में अदालत ने निर्णय के लिए 5 सितंबर की तारीख तय की।

25 मई 2013 को झीरम घाटी में हुआ था हमला

25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा सुकमा से जगदलपुर लौट रही थी। इसी दौरान दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी में माओवादियों ने काफिले को निशाना बनाते हुए घात लगाकर हमला किया था। पहाड़ी और घने जंगल वाले इलाके में पहले रास्ता बाधित कर वाहनों को रोका गया और इसके बाद माओवादियों ने काफिले पर गोलीबारी शुरू कर दी।

NIA के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, यह हमला 25 मई 2013 को शाम करीब 4:15 बजे NH-221 पर झीरम घाटी के पहाड़ी क्षेत्र में हुआ था। हमले में 27 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 38 लोग घायल हुए थे। मृतकों में 10 पुलिसकर्मी भी शामिल थे। हमले के दौरान सुरक्षा बलों के हथियार और अन्य सामान भी लूटे गए थे।

कांग्रेस के कई बड़े नेताओं की हुई थी मौत

झीरम हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, पूर्व मंत्री एवं सलवा जुडूम के प्रमुख चेहरों में शामिल महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल और कांग्रेस नेता उदय मुदलियार समेत कई नेता और कार्यकर्ता मारे गए थे।

ये 10 आरोपी दोषी करार

अदालत ने जिन 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है, उनमें प्रमिला मोडियम उर्फ ज्योति (40), चैतु लेकाम उर्फ मुन्ना, सुमित्रा उर्फ सुमित्रा पुनेम मोडियम, मुक्का मंडावी, कोसा कवासी उर्फ कोसराम, आयता मरकाम, मड़कमि देवा, जोगा मड़कमि, बंजामी सन्ना उर्फ चमरू उर्फ डेंगा और महादेव नाग शामिल हैं।

आरोपियों की ओर से मामले में अधिवक्ता अरविंद चौधरी ने पैरवी की।

भूपेश बघेल ने NIA जांच पर उठाए थे सवाल

फैसले से पहले पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल लगातार झीरम मामले की NIA जांच को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। उनका आरोप रहा है कि हमले के पीछे के कथित षड्यंत्रकारियों तक पहुंचने के लिए जांच में पर्याप्त प्रयास नहीं किए गए।

बघेल का कहना था कि दरभा थाने में दर्ज FIR में नामजद लोगों से पूछताछ नहीं की गई और अदालत के निर्देश के बावजूद गुडसा उसेंडी का बयान दर्ज नहीं किया गया। उन्होंने यह भी कहा था कि जांच पूरी नहीं होने की स्थिति में अदालत उपलब्ध जांच और साक्ष्यों के आधार पर ही निर्णय करेगी।

SIT जांच को लेकर भी हुआ था विवाद

भूपेश बघेल के मुताबिक, मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री के साथ बैठक में झीरम मामले की जांच राज्य सरकार को सौंपने की मांग की थी। इसके बाद राज्य सरकार की ओर से गठित SIT को लेकर NIA और राज्य सरकार के बीच कानूनी विवाद भी हुआ और मामला अदालत तक पहुंचा।

फिलहाल NIA की विशेष अदालत के फैसले के बाद मामले में दोषी करार दिए गए 10 आरोपियों की सजा पर 16 सितंबर को सुनवाई होगी।

अंबेडकर प्रतिमा से कथित छेड़छाड़, बिलासपुर में भड़का आक्रोश

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 बिलासपुर। शहर के अंबेडकर चौक पर डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ किए जाने का मामला सामने आया है। घटना की जानकारी मिलते ही बौद्ध समाज समेत विभिन्न समाजों के लोगों में आक्रोश फैल गया। बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंचे और घटना का विरोध करते हुए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।


जानकारी के अनुसार, किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के सिर पर पानी की बोतल या अन्य वस्तु बांधे जाने की बात सामने आई है। इसके अलावा प्रतिमा के कुछ हिस्सों पर मिट्टी लगाए जाने और गले में कपड़ा बांधे जाने की भी जानकारी मिली है। घटना सामने आने के बाद लोग बड़ी संख्या में अंबेडकर चौक पर एकत्र होने लगे।

सर्व समाज ने जताई नाराजगी

मौके पर पहुंचे लोगों ने घटना को लेकर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा संविधान, समानता और सामाजिक न्याय का प्रतीक है। प्रतिमा के साथ इस तरह की कथित हरकत से लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं।

बौद्ध समाज और सर्व समाज के लोगों ने प्रशासन से मामले की गंभीरता से जांच कराने और घटना के पीछे जिम्मेदार व्यक्ति या व्यक्तियों की पहचान करने की मांग की है। लोगों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई किए जाने की भी मांग उठाई।

जांच के बाद सामने आएगी स्थिति

फिलहाल घटना को लेकर क्षेत्र में नाराजगी बनी हुई है। प्रशासन और पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि प्रतिमा के साथ कथित छेड़छाड़ किसने और किन परिस्थितियों में की। मामले में प्रशासन की अगली कार्रवाई और जांच के निष्कर्षों पर लोगों की नजर बनी हुई है।

बस्तर संभाग में खुलेंगे 29 नए धान उपार्जन केंद्र

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 रायपुर, 5 सितंबर 2026। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने बस्तर संभाग के किसानों को बड़ी राहत दी है। सहकारिता मंत्री केदार कश्यप की पहल पर खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 और आगामी खरीफ विपणन वर्षों के लिए संभाग में 29 नए धान उपार्जन केंद्र खोलने की अनुमति दी गई है।


नए केंद्र खुलने से बस्तर संभाग के दूरस्थ, वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों को धान बेचने के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। इससे किसानों के समय, श्रम और परिवहन खर्च में कमी आएगी। साथ ही मौजूदा उपार्जन केंद्रों पर भीड़ कम होगी और धान खरीदी व्यवस्था अधिक सुगम होगी।

सातों जिलों में खुलेंगे नए केंद्र

अनुमति प्राप्त 29 केंद्रों में बस्तर में 11, कांकेर में 6, कोंडागांव में 6, बीजापुर में 1, सुकमा में 2, दंतेवाड़ा में 1 और नारायणपुर में 2 केंद्र शामिल हैं।

बस्तर: बाकेल, चिउरगांव, काकरवाड़ा, धुरागांव, बागमोहलई, सतोषा, कुड़कानार, नंदपुरा, सौतपुर सहित 11 स्थानों पर केंद्र खोले जाएंगे।

कांकेर: आतुरगांव, कढ़ईखोदरा, करैगांव, कारेगांव, नवागांव (गोडरी) और लक्ष्मीपुर पीवी-73 में नए केंद्र स्थापित होंगे।

कोंडागांव: इंगरा, भाटगांव, चलका, चिंगनार, सालेभाट और बड़गांव में धान उपार्जन केंद्र खोले जाएंगे।

बीजापुर: उसूर विकासखंड के तिम्मापुर में केंद्र खुलेगा।
सुकमा: बड़ेसेट्टी और बुड़दी में केंद्र स्थापित होंगे।
दंतेवाड़ा: गीदम विकासखंड के समलूर में नया केंद्र खुलेगा।
नारायणपुर: हलामीमुंजमेटा और तारागांव में नए केंद्र शुरू किए जाएंगे।

केंद्रों पर मिलेंगी जरूरी सुविधाएं

नए धान उपार्जन केंद्रों में किसानों के बायोमेट्रिक सत्यापन के लिए फिंगरप्रिंट और आईरिस उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अलावा कंप्यूटर, प्रिंटर, यूपीएस, जनरेटर, इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीन और नमी मापक यंत्र की व्यवस्था होगी।

केंद्रों पर इंटरनेट कनेक्टिविटी, बिजली, पर्याप्त प्रकाश, पेयजल और पहुंच मार्ग जैसी सुविधाएं भी सुनिश्चित की जाएंगी। धान के सुरक्षित भंडारण के लिए पर्याप्त जगह, पॉलीथिन कवर और जल निकासी की व्यवस्था की जाएगी।

खरीदी से पहले पूरी करनी होगी तैयारी

सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने अधिकारियों को धान खरीदी शुरू होने से पहले सभी नए केंद्रों की तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं। केंद्रों के लिए ऊंची और समतल भूमि का चयन करने के साथ ही किसानों की सुविधा से जुड़ी सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा गया है।

मंत्री ने कहा कि बस्तर की भौगोलिक परिस्थितियों और दूरस्थ गांवों के किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उपार्जन केंद्रों का विस्तार किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य है कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले और उन्हें धान बेचने के लिए अनावश्यक दूरी तय न करनी पड़े।

हजारों किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

29 नए उपार्जन केंद्र शुरू होने से बस्तर संभाग के हजारों किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। किसानों को अपने गांव या आसपास के क्षेत्र में ही समर्थन मूल्य पर धान बेचने की सुविधा मिलेगी। इससे धान परिवहन आसान होगा और खरीदी प्रक्रिया में भी तेजी आएगी।

तेज रफ्तार बाइक पेड़ से टकराई, दो नाबालिगों की मौत

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 कोरबा। जिले के दीपका थाना क्षेत्र के ग्राम लिटियाखार में शुक्रवार शाम तेज रफ्तार मोटरसाइकिल अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पेड़ से जा टकराई। हादसे में बाइक सवार दो नाबालिग युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार दोनों बिना हेलमेट के बाइक पर सवार थे।


पुलिस के मुताबिक, करण चौहान (16) बाइक चला रहा था, जबकि राजा नेटी (14) पीछे बैठा था। दोनों लिटियाखार की ओर लौट रहे थे। इसी दौरान एक मोड़ पर तेज रफ्तार बाइक अचानक अनियंत्रित हो गई और सड़क किनारे पेड़ से टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों को गंभीर चोटें आईं और उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

हादसे के बाद मौके पर जुटी भीड़

दुर्घटना के बाद आसपास के राहगीर मौके पर पहुंचे और दीपका पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम घटनास्थल पर पहुंची और दोनों के परिजनों को हादसे की जानकारी दी। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त बाइक को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।

प्रारंभिक जांच में दोनों के बिना हेलमेट बाइक चलाने और तेज रफ्तार को हादसे की वजह माना जा रहा है। हालांकि, दुर्घटना के वास्तविक कारणों की पुलिस जांच कर रही है।


देर रात होने के कारण दोनों शवों को अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया। शनिवार को पंचनामा कार्रवाई के बाद शवों का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

हादसे की खबर से गांव में मातम पसरा है। दोनों नाबालिगों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि नाबालिगों को वाहन न दें और बाइक चलाते समय हेलमेट समेत सभी यातायात नियमों का पालन करें।

13 साल बाद फैसला: झीरम घाटी नक्सली हमले में NIA कोर्ट आज सुनाएगी निर्णय

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 रायपुर / जगदलपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित और देश के सबसे बड़े नक्सली हमलों में से एक झीरम घाटी कांड में आज, 5 सितंबर को जगदलपुर स्थित विशेष NIA (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) अदालत अपना महत्वपूर्ण फैसला सुना सकती है। करीब 13 साल तक चली लंबी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद आ रहे इस फैसले पर पीड़ित परिवारों, राजनीतिक हलकों और पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हुई हैं।


2013 का वो खूनी मंजर: परिवर्तन यात्रा पर घात लगाकर हमला

25 मई 2013 को बस्तर की झीरम घाटी में कांग्रेस की 'परिवर्तन यात्रा' का काफिला गुजर रहा था। तभी घात लगाकर बैठे सैकड़ों नक्सलियों ने अंधाधुंध गोलीबारी और आईईडी विस्फोट कर काफिले को घेर लिया। इस जघन्य हमले में:

  • कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल
  • पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल
  • 'सलवा जुडूम' के संस्थापक व पूर्व मंत्री महेंद्र कर्मा
  • पूर्व विधायक उदय मुदलियार
  • समेत 29 लोगों की निर्मम हत्या कर दी गई थी।

11 आरोपी नक्सलियों पर चला ट्रायल

मामले की जांच एनआईए ने की, जिसमें कुल 11 नक्सलियों को आरोपी बनाकर उनके खिलाफ अदालत में मुकदमा चलाया गया। ट्रायल के दौरान इनमें से एक आरोपी की मृत्यु हो चुकी है। अब शेष आरोपियों पर आए साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर अदालत अपना फैसला सुनाएगी।

साजिश और जांच पर उठते रहे राजनीतिक सवाल

झीरम कांड की जांच शुरुआती दौर से ही विवादों और राजनीतिक बयानों के घेरे में रही। हमले के पीछे किसी गहरी राजनीतिक साजिश की आशंका जताई जाती रही, जिसको लेकर विभिन्न दलों के बीच जमकर आरोप-प्रत्यारोप हुए।

आज आने वाले फैसले से यह साफ हो जाएगा कि अभियोजन पक्ष अदालत के समक्ष अपने आरोपों और सबूतों को कितना पुख्ता साबित कर पाया है।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महा-महोत्सव में शामिल हुए मुख्यमंत्री, भक्तों के साथ किया हरे कृष्ण महामंत्र का घोष

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय राजधानी रायपुर के टाटीबंध स्थित इस्कॉन रायपुर के श्री राधा रासबिहारी जी मंदिर में आयोजित श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महा-महोत्सव में शामिल हुए। भक्तिमय वातावरण के बीच मुख्यमंत्री साय ने भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना एवं शंख अभिषेक किया और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगलमय जीवन की कामना की।


मुख्यमंत्री साय ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों और उपस्थित श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का संपूर्ण जीवन मानव समाज को धर्म, कर्तव्य और लोककल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। श्रीमद्भगवद्गीता के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण ने कर्मयोग का जो संदेश दिया, वह आज भी मानवता को जीवन की चुनौतियों के बीच अपने कर्तव्य पथ पर दृढ़तापूर्वक आगे बढ़ने की दिशा दिखाता है।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जन्माष्टमी केवल भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य का उत्सव नहीं, बल्कि उनके जीवन-दर्शन और आदर्शों को आत्मसात करने का भी अवसर है। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने जीवन के माध्यम से अन्याय के विरुद्ध खड़े होने, धर्म की रक्षा करने और समाज के कमजोर वर्ग के साथ खड़े रहने का संदेश दिया। उनके विचार युगों-युगों से भारतीय समाज को प्रेरित करते आ रहे हैं।

इस अवसर पर मंदिर परिसर ‘हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे’ के महामंत्र से गुंजायमान रहा। मुख्यमंत्री साय ने भी भक्तवृंद के साथ हरे कृष्ण महामंत्र का घोष किया और वृंदावन बिहारीलाल के प्राकट्य उत्सव पर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर में बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं के उत्साह और भक्तिभाव से पूरा वातावरण कृष्णमय हो गया।

छत्तीसगढ़ की धार्मिक विरासत हमारी अमूल्य धरोहर

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती प्राचीन काल से ही धर्म, अध्यात्म और संस्कृति की पुण्यभूमि रही है। यह माता कौशल्या का मायका और प्रभु श्रीराम का ननिहाल है। हमारे गांवों, नगरों, मंदिरों, तीर्थों और लोक परंपराओं में हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत जीवंत है। इस गौरवशाली धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को सहेजना, उसका संवर्धन करना तथा नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भोरमदेव, गंधेश्वर महादेव, मधेश्वर महादेव और कुलेश्वर महादेव जैसे प्रसिद्ध शिवधाम हैं, वहीं मां बमलेश्वरी, रतनपुर की मां महामाया, माता दंतेश्वरी और मां चंद्रहासिनी जैसे शक्तिपीठ एवं आस्था केंद्र प्रदेश की आध्यात्मिक पहचान को समृद्ध करते हैं। राज्य सरकार इन धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने और उन्हें भव्य स्वरूप देने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के भोरमदेव मंदिर क्षेत्र को प्रसाद योजना के अंतर्गत लगभग 150 करोड़ रुपए की लागत से विकसित किया जा रहा है। इसके माध्यम से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी सृजित होंगे।

हर श्रद्धालु को तीर्थ दर्शन का अवसर देने का प्रयास

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आस्था हमारे समाज की बड़ी शक्ति है। आर्थिक अथवा अन्य कारणों से कोई श्रद्धालु तीर्थ दर्शन की अपनी अभिलाषा से वंचित न रहे, इस भावना के साथ राज्य सरकार विभिन्न योजनाओं का संचालन कर रही है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर में रामलला के विराजमान होने के बाद छत्तीसगढ़ के लोगों में अपने आराध्य के दर्शन को लेकर अपार उत्साह है। राज्य सरकार की श्रीरामलला दर्शन योजना के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालुओं को अयोध्याधाम की यात्रा कराई जा रही है। अब तक 50 हजार से अधिक श्रद्धालु इस योजना के माध्यम से प्रभु श्रीरामलला के दर्शन कर चुके हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इसी प्रकार मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के अंतर्गत प्रदेश के वृद्धजनों को देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों के दर्शन का अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है। जीवन के इस पड़ाव पर तीर्थ दर्शन की उनकी अभिलाषा पूरी होते देखना सरकार के लिए भी संतोष का विषय है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के विकास से हमारी विरासत का संरक्षण तो होता ही है, साथ ही स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है। धार्मिक स्थलों पर सुविधाओं के विस्तार से पर्यटन बढ़ता है और स्थानीय युवाओं, स्व-सहायता समूहों, छोटे व्यवसायियों तथा कारीगरों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर निर्मित होते हैं। सरकार का प्रयास है कि छत्तीसगढ़ के प्रमुख आस्था केंद्र राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाएं।

भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जा रहा महा-महोत्सव

उल्लेखनीय है कि इस्कॉन रायपुर के 26वें वर्ष में प्रवेश के उपलक्ष्य में 03 से 05 सितम्बर तक श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महा-महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। महोत्सव के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की आराधना, भजन-कीर्तन और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु महोत्सव में शामिल होकर भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी के दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं।

इस अवसर पर राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, विधायक पुरन्दर मिश्रा, इस्कॉन रायपुर के पदाधिकारीगण, संतजन एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

 

शनि-मंगल का दुर्लभ केंद्र योग, इन 4 राशियों की चमक सकती है किस्मत!

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 ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की चाल और उनके बीच बनने वाले संबंध का विशेष महत्व माना जाता है। इस समय मंगल मिथुन राशि में और शनि मीन राशि में विराजमान हैं। दोनों ग्रहों के बीच 90 डिग्री का कोण बन रहा है, जिसे ज्योतिष में केंद्र संबंध कहा जाता है। मंगल को ऊर्जा, साहस और आक्रामकता का कारक माना जाता है, जबकि शनि अनुशासन, धैर्य और कर्म से जुड़े ग्रह हैं।


मंगल और शनि का यह संबंध सामान्य तौर पर तनाव और रुकावट से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, कुंडली में इन दोनों ग्रहों की स्थिति मजबूत होने पर जातकों को सकारात्मक परिणाम भी मिल सकते हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस ग्रह स्थिति का प्रभाव चार राशियों के लिए विशेष रूप से लाभकारी हो सकता है।

मेष राशि: जल्दबाजी पर लगेगा अंकुश

मेष राशि के जातकों के लिए मंगल-शनि का यह प्रभाव उत्साह और जल्दबाजी को नियंत्रित करने वाला साबित हो सकता है। आमतौर पर तुरंत निर्णय लेने की प्रवृत्ति नुकसान पहुंचा सकती है, लेकिन शनि का प्रभाव ऊर्जा को अनुशासन में बदलने में मदद कर सकता है। इससे जातक अपने लक्ष्य पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकते हैं और गलतियों से बचने का प्रयास करेंगे। इस प्रभाव का लाभ तत्काल मिलने के बजाय लंबे समय में अधिक दिखाई दे सकता है।

वृश्चिक राशि: अटके काम पूरे होने के योग

वृश्चिक राशि वालों के लिए यह ग्रह स्थिति इच्छाशक्ति और दृढ़ता बढ़ाने वाली हो सकती है। लंबे समय से अटका कोई काम पूरा करने के लिए जातक अधिक मेहनत और निरंतर प्रयास कर सकते हैं। प्रॉपर्टी, जमीन और निर्माण से जुड़े मामलों में भी लाभ के योग बन सकते हैं। कठिन परिस्थितियों में पीछे हटने के बजाय लक्ष्य हासिल करने की कोशिश मजबूत होगी।

मकर राशि: मेहनत दिला सकती है बड़ी सफलता

मकर राशि के जातकों के लिए मंगल और शनि का संबंध सहनशक्ति और कार्यक्षमता बढ़ाने वाला माना जा रहा है। विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखने और चुनौतियों का सामना करने की क्षमता बढ़ सकती है। करियर में प्रतिस्पर्धा बढ़ने के बावजूद मेहनत और अनुशासन आपको आगे ले जा सकते हैं। लगातार प्रयास करते रहने पर बड़ी सफलता हासिल करने के अवसर मिल सकते हैं।

कुंभ राशि: कठिन फैसलों में मिलेगा फायदा

कुंभ राशि वालों के लिए यह ग्रह स्थिति तकनीकी समझ, रिसर्च और कठिन निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत कर सकती है। कार्यक्षेत्र में ऐसी परिस्थितियां बन सकती हैं, जहां सोच-समझकर फैसला लेना जरूरी होगा। ऐसे समय में आपकी विश्लेषण क्षमता और दृढ़ता काम आ सकती है। व्यापार में लिया गया कोई बड़ा फैसला भविष्य में लाभ दे सकता है। हालांकि, जोखिम उठाने से पहले परिस्थितियों का अच्छी तरह आकलन करना जरूरी होगा।

नोट: यह लेख ज्योतिषीय मान्यताओं और सामान्य राशिफल पर आधारित है। इसे निश्चित भविष्यवाणी के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।

दिल्ली में भारी बारिश से हाहाकार, सड़कों से IGI एयरपोर्ट तक जलभराव; उड़ानों पर भी पड़ा असर

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नई दिल्ली- राजधानी दिल्ली में शुक्रवार को हुई तेज बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। कई इलाकों में सड़कों पर पानी भर गया, जिसके चलते यातायात व्यवस्था चरमरा गई। कनॉट प्लेस, लाजपत नगर, अकबर रोड और इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट (IGI) के आसपास जलभराव की स्थिति देखने को मिली।

भारी बारिश से सड़कें बनीं तालाब

तेज बारिश के बाद दिल्ली के कई प्रमुख इलाकों में सड़कों पर पानी जमा हो गया। कनॉट प्लेस जैसे व्यस्त इलाके में भी वाहन पानी के बीच से गुजरते नजर आए। एयरपोर्ट के आसपास भी जलभराव के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

बारिश के कारण दिल्ली-एनसीआर के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात की रफ्तार धीमी पड़ गई और यात्रियों को लंबे जाम का सामना करना पड़ा।

IGI एयरपोर्ट पर भी बारिश का असर

भारी बारिश का असर देश के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में शामिल IGI एयरपोर्ट पर भी देखने को मिला। एयरपोर्ट के टर्मिनल क्षेत्र और पहुंच मार्गों पर पानी जमा हो गया। कुछ यात्रियों को पानी के बीच से अपना सामान लेकर आगे बढ़ते देखा गया।

बारिश और जलभराव के चलते उड़ान संचालन भी प्रभावित हुआ। रिपोर्टों के अनुसार कम से कम 9 उड़ानों को जयपुर, लखनऊ और अहमदाबाद की ओर डायवर्ट किया गया, जबकि बड़ी संख्या में उड़ानों में देरी की सूचना सामने आई।

मौसम विभाग का अलर्ट

भारी बारिश को देखते हुए मौसम विभाग ने दिल्ली के लिए रेड अलर्ट जारी किया था। तेज बारिश के साथ आंधी, बिजली गिरने और तेज हवाओं की भी चेतावनी दी गई।

मौसम विभाग ने शनिवार के लिए दिल्ली में येलो अलर्ट जारी करते हुए बारिश और गरज-चमक की संभावना जताई है। ऐसे में लोगों को मौसम और यातायात संबंधी अपडेट देखकर ही घर से निकलने की सलाह दी गई है।

यात्रियों और वाहन चालकों को परेशानी

जलभराव के कारण सड़क पर वाहनों की रफ्तार धीमी हो गई। एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को भी अतिरिक्त समय लेकर निकलने की जरूरत पड़ी। एयरलाइंस ने यात्रियों को अपनी उड़ान की स्थिति पहले से जांचने और खराब मौसम के कारण संभावित देरी को ध्यान में रखने की सलाह दी।

एयरपोर्ट प्रशासन के अनुसार, पहुंच मार्ग और फोरकोर्ट में जमा पानी को कुछ समय बाद साफ कर दिया गया।

लोगों से सावधानी बरतने की अपील

दिल्ली में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना को देखते हुए लोगों से निचले इलाकों, जलभराव वाली सड़कों और बिजली के तारों के आसपास जाने से बचने की अपील की गई है।

भारी बारिश ने एक बार फिर राजधानी की जल निकासी व्यवस्था और ट्रैफिक प्रबंधन के सामने चुनौती खड़ी कर दी है। फिलहाल प्रशासन और संबंधित एजेंसियां जलभराव वाले क्षेत्रों में स्थिति सामान्य करने में जुटी हैं।

दीये से शिक्षा की मशाल तक महेन्द्र पटेल

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शिक्षा, नवाचार, पर्यावरण और जनजागरण में योगदान; 5 सितंबर को राज्यपाल शिक्षक सम्मान

आरंग- कभी गांव में बिजली और सड़क के अभाव में दीये की रोशनी में पढ़ने वाले शिक्षक महेन्द्र कुमार पटेल ने संघर्षों को संकल्प में बदलकर शिक्षा, पर्यावरण, जनजागरूकता, सामाजिक सेवा और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण में अपनी अलग पहचान बनाई है। उनके बहुआयामी योगदान के लिए 5 सितंबर को राज्यपाल शिक्षक सम्मान से सम्मानित किया जाएगा।

9 जुलाई 1976 को महासमुंद जिले के ग्राम लाफिन कला के किसान परिवार में जन्मे पटेल ने मिडिल की पढ़ाई के लिए तीन किलोमीटर पैदल चलकर शिक्षा हासिल की। नवमी से बारहवीं तक बहन के घर रहकर पढ़ाई की। स्व-अध्ययन के बल पर डी.एड., स्नातक तथा हिन्दी, राजनीति और संस्कृत में स्नातकोत्तर शिक्षा पूरी की।

पत्थर की बेंच से पक्का भवन तक 

11 दिसंबर 1998 को बेलसोंडा के स्टेशनपारा स्थित शासकीय नवीन प्राथमिक शाला से शिक्षकीय जीवन शुरू किया। संसाधनों के अभाव में पत्थरों को बेंच बनाकर पढ़ाने से शुरू हुआ सफर जनसहयोग से पक्के भवन और आधा एकड़ भूमि तक पहुंचा। पारधी समुदाय के घर-घर जाकर बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के प्रयास से विद्यालय की दर्ज संख्या बढ़ी। पांचवीं बोर्ड परीक्षा में सभी 11 विद्यार्थी प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए।

वर्ष 2005 से शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चरौदा में कार्यरत पटेल ने जनसहभागिता से करीब 70 लाख रुपये के विकास कार्य, पांच एकड़ मैदान का समतलीकरण, 81 फीट ऊंचे स्तंभ पर ध्वजारोहण, प्रार्थना शेड, सांस्कृतिक मंच, पुस्तकालय, किचन शेड और अहाता सहित अनेक सुविधाओं के विकास में योगदान दिया। स्वव्यय से कंप्यूटर, संगीत सामग्री और स्मार्ट टीवी उपलब्ध कराने के साथ जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा में भी सहयोग किया।

नवाचार के लिए मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण 

शिक्षण में हिन्दी, संस्कृत और अंग्रेजी पद्यों का लयबद्ध पठन तथा तकनीक और संगीत का प्रयोग उनका प्रमुख नवाचार रहा। अंग्रेजी के टेंस स्ट्रक्चर को गीत के माध्यम से सिखाने की पद्धति को शिक्षा विभाग के दिशा कार्यक्रम में भी अपनाया गया।

शिक्षादान और कैरियर मार्गदर्शन 

पिछले चार वर्षों से ‘शिक्षा दान केंद्र’ के माध्यम से कक्षा 9वीं-10वीं के सैकड़ों विद्यार्थियों को निःशुल्क कोचिंग और कैरियर मार्गदर्शन दे रहे हैं। स्वच्छता, पर्यावरण, मतदाता व यातायात जागरूकता जैसे अभियानों के लिए करीब 30 गीत और छह लघु फिल्मों का निर्माण-निर्देशन किया। उनके लगाए करीब 300 पौधे आज वृक्ष बन चुके हैं।

राजा मोरध्वज महोत्सव  आयोजन में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका 

आरंग की ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक विरासत के संरक्षण में भी उनका योगदान रहा है। शोध, लेखन, राष्ट्रीय संगोष्ठियों में सहभागिता, ऐतिहासिक पत्रिका के संकलन तथा राजा मोरध्वज महोत्सव की शुरुआत में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण सहित राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर 30 से अधिक सम्मान प्राप्त कर चुके महेन्द्र पटेल की यात्रा बताती है कि मजबूत संकल्प अभावों को भी अवसर में बदल सकता है। दीये की रोशनी में शुरू हुआ सफर आज हजारों बच्चों के भविष्य की मशाल बन चुका है।


शिक्षक दिवस पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गुरुजनों के नाम लिखा आत्मीय पत्र

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रदेश के गुरुजनों के नाम आत्मीय पत्र लिखकर उन्हें सादर नमन किया है। 


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पत्र में अपने विद्यार्थी जीवन की स्मृतियों को साझा करते हुए बचपन के संघर्ष, उस दौर में शिक्षा प्राप्त करने की कठिनाइयों और आज शिक्षा के क्षेत्र में आए व्यापक बदलाव का भावपूर्ण उल्लेख किया है। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया है कि वे प्रत्येक बच्चे के भीतर छिपी संभावनाओं को पहचानें और विशेष रूप से उन बच्चों का हाथ थामें, जो अभाव, संकोच अथवा किसी अन्य कारण से पीछे छूट रहे हैं।


मुख्यमंत्री साय ने लिखा है  कि आज मुख्यमंत्री के दायित्व का निर्वहन करते हुए जब उन्हें प्रदेश के बच्चों के भविष्य और उनकी शिक्षा से जुड़े निर्णय लेने का अवसर मिलता है, तब अपने बचपन और विद्यार्थी जीवन के वे दिन और अधिक याद आते हैं। जीवन कितना भी आगे बढ़ जाए, अपने शिक्षकों के प्रति आदर और कृतज्ञता का भाव कभी कम नहीं होता।

बगिया के छोटे से स्कूल से शुरू हुआ शिक्षा का सफर

मुख्यमंत्री साय ने पत्र में अपने बचपन को याद करते हुए बताया है कि उनका जन्म जशपुर जिले के बगिया गाँव के एक साधारण किसान परिवार में हुआ और गाँव के स्कूल से ही उनकी शिक्षा की शुरुआत हुई। जीवन ने बहुत छोटी उम्र में उनकी कठिन परीक्षा ली। जब वे लगभग दस वर्ष के थे और चौथी कक्षा में पढ़ रहे थे, तभी पिता का साया सिर से उठ गया। परिवार, खेती और छोटे भाइयों की चिंता कम उम्र में ही उनके जीवन का हिस्सा बन गई।

गाँव में पाँचवीं तक पढ़ने के बाद आगे की शिक्षा के लिए उन्हें कुनकुरी जाना पड़ा। वहाँ लोयोला उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में एक छोटे से कमरे में रहकर पढ़ाई की। आगे भी पढ़ने की इच्छा थी, लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों के कारण शिक्षा का क्रम जारी नहीं रख सके। उन्होंने खेती की जिम्मेदारी संभाली और अपने छोटे भाइयों की पढ़ाई को आगे बढ़ाया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय गाँव के एक बच्चे के लिए शिक्षा तक पहुँचना आज जितना सहज नहीं था। विद्यालय दूर होते थे, आवागमन के साधन सीमित थे, पढ़ाई के संसाधनों का अभाव था और आर्थिक कठिनाइयाँ भी कई बच्चों के सपनों की राह में बाधा बन जाती थीं।

स्लेट-तख्ती से स्मार्ट क्लास तक:मुख्यमंत्री ने याद किया शिक्षा का बदलता दौर

मुख्यमंत्री साय ने अपने विद्यार्थी जीवन और वर्तमान शिक्षा व्यवस्था की तुलना करते हुए कहा कि आज पीछे मुड़कर देखने पर यह सुखद अनुभूति होती है कि शिक्षा की दुनिया कितनी बदल गई है। जिस समय उनकी पीढ़ी ने स्लेट, तख्ती और चॉक से पढ़ाई शुरू की थी, आज उसी छत्तीसगढ़ के बच्चे स्मार्ट क्लास में पढ़ रहे हैं। डिजिटल माध्यमों से दुनिया भर के ज्ञान तक उनकी पहुँच बनी है और वे विज्ञान एवं आधुनिक तकनीक से जुड़ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि कभी दूरस्थ अंचलों में विद्यालय तक पहुँचना भी बच्चों के लिए चुनौती हुआ करता था, वहीं आज इन क्षेत्रों में बेहतर विद्यालय, आधुनिक शैक्षणिक संसाधन और नए अवसर बच्चों के द्वार तक पहुँच रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा में आए इस व्यापक परिवर्तन के बावजूद एक बात तब भी सत्य थी और आज भी उतनी ही सत्य है- शिक्षा का सबसे महत्वपूर्ण आधार शिक्षक ही है।

तकनीक जानकारी दे सकती है, लेकिन शिक्षक ही बच्चे के भीतर आत्मविश्वास जगाता है

मुख्यमंत्री साय ने गुरुजनों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि तकनीक बच्चों को जानकारी दे सकती है, पुस्तकें उन्हें ज्ञान दे सकती हैं और आधुनिक संसाधन सीखने की राह आसान कर सकते हैं, लेकिन किसी बच्चे के भीतर आत्मविश्वास जगाने, उसके संस्कार गढ़ने, उसकी प्रतिभा पहचानने और उसे एक अच्छा मनुष्य बनाने का सामर्थ्य एक संवेदनशील शिक्षक में ही होता है।

उन्होंने कहा कि उनके अपने जीवन में भी गुरुजनों से मिली सीख ने कठिन परिस्थितियों में आगे बढ़ने का साहस दिया। यही कारण है कि वे शिक्षक को केवल पाठ पढ़ाने वाला नहीं, बल्कि जीवन की दिशा दिखाने वाला पथ-प्रदर्शक मानते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि जिन अभावों और कठिनाइयों के कारण कभी किसी बच्चे की पढ़ाई रुक जाती थी, वे आज किसी बच्चे के सपनों के रास्ते में बाधा न बनें। कोई बच्चा केवल इसलिए पीछे न रह जाए कि उसका जन्म किसी छोटे गाँव, वनांचल अथवा दूरस्थ क्षेत्र में हुआ है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इसी सोच के साथ राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप छत्तीसगढ़ में शिक्षा को अधिक सहज, आधुनिक, व्यावहारिक और बच्चों की प्रतिभा के अनुकूल बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। मातृभाषा और स्थानीय भाषाओं में सीखने के अवसर बढ़ाए जा रहे हैं। कौशल और व्यावहारिक ज्ञान को शिक्षा से जोड़ा जा रहा है तथा डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट क्लास और आधुनिक शैक्षणिक संसाधनों का विस्तार हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बस्तर का उल्लेख करते हुए कहा कि उन क्षेत्रों में भी विद्यालयों की घंटियाँ फिर सुनाई दे रही हैं, जहाँ परिस्थितियों के कारण वर्षों तक स्कूल बंद रहे थे। यह बदलाव केवल भवन, तकनीक और सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके केंद्र में प्रत्येक बच्चे को आगे बढ़ने का समान अवसर देने का संकल्प है।

मुख्यमंत्री ने कहा  कि हम ऐसा छत्तीसगढ़ बनाना चाहते हैं, जहाँ किसी बच्चे की परिस्थितियाँ उसके सपनों की सीमा तय न करें।

हर बच्चे में छिपी हैं अनगिनत संभावनाएँ

मुख्यमंत्री साय ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि इस संकल्प को धरातल पर उतारने की सबसे बड़ी शक्ति प्रदेश के शिक्षक हैं। शिक्षक के सामने कक्षा में बैठा हर बच्चा अपने भीतर अनगिनत संभावनाएँ लेकर आता है। कोई भविष्य का वैज्ञानिक हो सकता है, कोई खिलाड़ी, डॉक्टर, किसान, शिक्षक, कलाकार या जनसेवक।

उन्होंने कहा कि कई बार बच्चे को स्वयं अपनी क्षमता का पता नहीं होता, लेकिन शिक्षक की पारखी दृष्टि उसकी प्रतिभा पहचान लेती है। शिक्षक द्वारा कहा गया प्रोत्साहन का एक वाक्य भी किसी बच्चे को जीवन भर आगे बढ़ने की शक्ति दे सकता है।

मुख्यमंत्री का गुरुजनों से विशेष आग्रह:पीछे छूट रहे बच्चे का हाथ थामिए

मुख्यमंत्री साय ने शिक्षक दिवस पर गुरुजनों से अत्यंत आत्मीय आग्रह करते हुए कहा कि हर बच्चे के भीतर छिपी संभावना को पहचानिए। विशेषकर उस बच्चे का हाथ अवश्य थामिए, जो अभाव में है, संकोच में है या किसी कारण पीछे छूट रहा है। हो सकता है आपका थोड़ा-सा विश्वास उसके पूरे जीवन की दिशा बदल दे।

उन्होंने कहा कि एक शिक्षक का विश्वास किसी बच्चे के लिए जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा बन सकता है। इसलिए शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि बच्चे के व्यक्तित्व, आत्मविश्वास, संस्कार और उसकी क्षमताओं को विकसित करना भी है।

मुख्यमंत्री  साय ने अपने पत्र में अत्यंत भावपूर्ण ढंग से गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि शिक्षक दिवस पर वे मुख्यमंत्री के रूप में ही नहीं, बल्कि कभी गाँव के एक छोटे से स्कूल में पढ़ने वाले उस विद्यार्थी के रूप में भी सभी गुरुजनों के प्रति कृतज्ञ हैं, जिसने अपने शिक्षकों से मिले संस्कार और सीख को जीवन की पूँजी माना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि समय बदल गया है, स्कूल बदल रहे हैं और पढ़ाने तथा सीखने के साधन भी बदल रहे हैं। आने वाले समय में आधुनिक तकनीक इन्हें और अधिक बदलेगी, लेकिन गुरु और शिष्य के बीच विश्वास, स्नेह और संस्कार का जो संबंध भारतीय परंपरा की आत्मा है, उसका महत्व कभी कम नहीं होगा।

हर स्कूल बने सपनों का द्वार, हर कक्षा संभावनाओं का संसार

मुख्यमंत्री साय ने प्रदेश के शिक्षकों से आह्वान किया कि हम सब मिलकर ऐसा छत्तीसगढ़ गढ़ें, जहाँ हर स्कूल सपनों का द्वार बने, हर कक्षा संभावनाओं का संसार बने और हर शिक्षक अपने विद्यार्थी के जीवन में आशा का दीप जलाए।

उन्होंने कहा कि शिक्षकों के ज्ञान से बच्चों का भविष्य उज्ज्वल हो, उनके संस्कारों से समाज समृद्ध हो और उनके मार्गदर्शन से छत्तीसगढ़ की नई पीढ़ी आत्मविश्वास के साथ विकसित भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाए, यही उनकी कामना है।

मुख्यमंत्री  साय ने शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रदेश के सभी गुरुजनों को सादर नमन करते हुए उनके स्वस्थ, सुखी और यशस्वी जीवन की कामना की तथा सभी शिक्षकों और उनके परिवारों को हार्दिक शुभकामनाएँ दी हैं।

उफनती नदी में चट्टान पर फंसे ग्रामीण का डीडीआरएफ टीम ने किया सुरक्षित रेस्क्यू

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 रायपुर : उफनती नदियों में फंसे लोगों और ग्रामीणों के सुरक्षित रेस्क्यू के कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहाँ प्रशासन, सेना और एसडीआरएफ (SDERF/SdRF) की टीमों ने जान जोखिम में डालकर लोगों की जान बचाई। सूरजपुर जिले के ओड़गी थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम माढर में जिला प्रशासन और डीडीआरएफ (डिस्ट्रिक्ट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स) की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक व्यक्ति की जान बचा ली। मछली पकड़ने के दौरान उफनती नदी के तेज बहाव में बहकर चट्टान पर फंसे ग्रामीण को घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।


’मछली पकड़ने के दौरान बहाव की चपेट में आया ग्रामीण’

जानकारी के अनुसार, सूरजपुर जिले के ओड़गी के ग्राम माढर निवासी अशोक सोनपाकर नदी में मछली पकड़ने गए थे। इसी दौरान नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया और वे तेज बहाव की चपेट में आ गए। खुद को संभालते हुए वे नदी के बीचों-बीच स्थित एक चट्टान पर जाकर फंस गए। घटना की जानकारी मिलते ही भैयाथान एसडीएम ने तत्काल जिला प्रशासन को सूचित किया।

’विपरीत परिस्थितियों में चलाया गया रेस्क्यू ऑपरेशन’

सूचना मिलते ही जिला सेनानी संजय गुप्ता के निर्देश पर डीडीआरएफ की संयुक्त टीम तुरंत मौके पर पहुंची। उफनती नदी और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद बचाव दल ने सूझबूझ और समन्वय के साथ जोखिम भरा रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया और अशोक सोनपाकर को सुरक्षित बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।

’बचाव टीम की महत्वपूर्ण भूमिका’

इस सफल रेस्क्यू अभियान में डीडीआरएफ संयुक्त टीम प्रभारी हवलदार बीरबल गुप्ता, आनंद चौबे, धनश्य नेताम, हंसलाल, देवनारायण, त्रिनेत्र सिंह, शिवनारायण सिंह, सिद्धू सिंह, रिकेश कुमार एवं विदेश सिंह की सराहनीय भूमिका रही।

’प्रशासन की नागरिकों से अपील’

सफल रेस्क्यू के बाद जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि लगातार हो रही भारी बारिश के कारण नदी-नालों का जलस्तर बढ़ा हुआ है। ऐसे में जल स्रोतों और तेज बहाव वाले क्षेत्रों के समीप जाने से बचें, सुरक्षा निर्देशों का कड़ाई से पालन करें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रशासनिक अमले को सूचित करें।

नक्सलमुक्त क्षेत्रों में शिक्षा की नई भोर

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 धनंजय राठौर - संयुक्त संचालक, जनसंपर्क

रायपुर : छत्तीसगढ़ के पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में दो दशकों के लंबे इंतजार के बाद स्कूलों में घंटियां बजने लगी हैं, जो इस शिक्षक दिवस पर बस्तर और उसके आस-पास के क्षेत्रों के लिए एक ऐतिहासिक और भावुक बदलाव का प्रतीक है। जहाँ कभी बारूद की गंध और बंदूक की आवाजें हुआ करती थीं, वहाँ अब बच्चे राष्ट्रगान गा रहे हैं।


5 सितंबर को देशभर में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर ‘शिक्षक दिवस’ की धूमधाम रहेगी। इस पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ का बस्तर और अन्य दूरस्थ अंचल एक नई उम्मीद के साथ मुस्कुरा रहा है। कभी बंदूक के साए और नक्सली खौफ के कारण दशक भर से बंद पड़े स्कूल आज फिर से गुलजार हो चुके हैं। दूर-दराज के गांवों में जब वर्षों बाद फिर से स्कूल की घंटी बजती है, तो वह केवल पढ़ाई की शुरुआत नहीं होती, बल्कि उस क्षेत्र में लौटते लोकतंत्र, शांति और सुरक्षा की गूंज होती है।


बंद पड़े स्कूल फिर से हुए संचालित

छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास, सुरक्षा और जन कल्याणकारी नीतियों (‘नियद नेल्ला नार’ जैसी योजनाओं) के प्रभाव से दक्षिण बस्तर के सुदूर नक्सल प्रभावित इलाकों में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिल रहा है। बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा और नारायणपुर जैसे जिलों में लगभग दो से ढाई दशकों से बंद पड़े 600 से अधिक प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों को जिला प्रशासन और पुलिस बल के सहयोग से दोबारा खोल दिया गया है। जो इमारतें कभी नक्सलियों द्वारा ध्वस्त कर दी गई थीं या सुरक्षा बलों के कैंप के लिए इस्तेमाल होती थीं, उन्हें फिर से संवारकर बाल-सुलभ रूप दिया गया है।


शिक्षकों का अदम्य साहस और समर्पण

नक्सलमुक्त होते क्षेत्रों में शिक्षा की लौ जलाने का वास्तविक श्रेय उन स्थानीय शिक्षकों को जाता है, जिन्होंने विपरीत और भयावह परिस्थितियों के बावजूद अपना कर्तव्य नहीं छोड़ा।

• स्थानीय भाषा में अध्यापन: दूरस्थ वनांचल में नियुक्त शिक्षक न केवल बच्चों को बुनियादी अक्षर ज्ञान दे रहे हैं, बल्कि गोंडी, हलबी और डोरली जैसी स्थानीय बोलियों में संवाद कर बच्चों का स्कूल से जुड़ाव मजबूत कर रहे हैं।
• समुदाय से संवाद: शिक्षकों ने ग्रामीणों और नक्सलियों के डर से सहमे अभिभावकों के बीच जाकर उनका विश्वास जीता, जिससे आज सैकड़ों बच्चे वापस ब्लैकबोर्ड और किताबों से जुड़ चुके हैं।

तकनीक और नवाचार से जुड़ रहा बस्तर का बचपन

बस्तर संभाग के बीजापुर (जैसे पीड़िया, गंपूर, तमोड़ी गांव) और सुकमा के कई अंदरूनी इलाकों में सालों से बंद पड़े स्कूलों को दोबारा खोला गया है। नक्सलियों द्वारा जिन पक्के स्कूल भवनों को आईईडी से उड़ा दिया गया था, वहाँ ग्रामीणों ने प्रशासन के साथ मिलकर अस्थायी बांस और तिरपाल की झोपड़ियां (छप्पर) तैयार की हैं ताकि बच्चों की पढ़ाई न रुके। स्थानीय भाषाओं (जैसे गोंडी, हल्बी) की चुनौती से निपटने और बच्चों में विश्वास जगाने के लिए स्थानीय शिक्षित युवाओं को शिक्षा दूत के रूप में नियुक्त किया गया है, जो इस शिक्षक दिवस के असली नायक हैं। पुनः संचालित हो रहे स्कूलों में अब केवल पुरानी लीक पर पढ़ाई नहीं हो रही है। राज्य शासन द्वारा इन स्कूलों में आधुनिक सुविधाएं सुनिश्चित की जा रही हैं:

• स्मार्ट क्लासेस और टैबलेट: कई वनांचल स्कूलों में डिजिटल कंटेंट और टैबलेट के माध्यम से बच्चों को पढ़ाया जा रहा है।

• खेलकूद और न्योता भोजन: स्कूलों में मध्याह्न भोजन (न्योता भोजन) के साथ-साथ खेल सामग्री उपलब्ध कराई गई है, जिससे बच्चों की उपस्थिति में भारी उछाल आया है।

• सुरक्षित माहौल: नियद नेल्ला नार (आपका अच्छा गांव) योजना के तहत कैंपों के आसपास सुरक्षा का दायरा बढ़ने से शिक्षक बिना किसी खौफ के रोजाना स्कूल पहुंच रहे हैं।

शिक्षक दिवस पर संदेश

छत्तीसगढ़ में इस बार का शिक्षक दिवस उन शिक्षकों को समर्पित है जो राज्य के सबसे कठिन और दुर्गम क्षेत्रों में 'शिक्षादूत' बनकर कार्य कर रहे हैं। बंदूक की आवाज को दबाकर जब कलम और किताब की ताकत आगे बढ़ती है, तो समाज की नई तस्वीर बनती है। छत्तीसगढ़ के नक्सलमुक्त इलाकों मं। गूंजती स्कूलों की घंटी इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि शिक्षा ही बदलाव और शांति की सबसे मजबूत नींव है।

टेक्सटाइल उद्योग को मिलेगी नई रफ्तार! CM साय ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह से की मुलाकात

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 नई दिल्ली। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह से मुलाकात की। इस दौरान दोनों के बीच छत्तीसगढ़ में टेक्सटाइल उद्योग के विस्तार और इससे रोजगार के अवसर बढ़ाने को लेकर चर्चा हुई।


मुख्यमंत्री ने राज्य में कोसा सहित हथकरघा और पारंपरिक वस्त्रों की समृद्ध विरासत का उल्लेख करते हुए इनके उत्पादन और बाजार को बढ़ाने के विषय पर केंद्रीय मंत्री से चर्चा की। साथ ही छोटे और स्थानीय उद्योगों को टेक्सटाइल क्षेत्र से जोड़ने, निवेश को बढ़ावा देने और कारीगरों व युवाओं के लिए रोजगार के अवसर तैयार करने से जुड़े विषय भी चर्चा में रहे।

मुलाकात के दौरान छत्तीसगढ़ में टेक्सटाइल क्षेत्र में निवेश और उद्योगों के विस्तार की संभावनाओं को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय के विषय पर भी चर्चा हुई।

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