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अटल परिसर से विकास का नया अध्याय: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बिलासपुर में 26 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों का किया लोकार्पण और शिलान्यास

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छत्तीसगढ़ के निर्माता भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा का अनावरण

अटल जी की प्रतिमा उनके व्यक्तित्व और विचारों को सहेजने की प्रेरक पहल — मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज बिलासपुर प्रवास के दौरान अरपा रिवर व्यू के समीप नवनिर्मित ‘अटल परिसर’ में भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रतिमा का अनावरण कर उन्हें नमन किया।मुख्यमंत्री साय ने शहर के समग्र विकास को नई दिशा देते हुए 26 करोड़ 93 लाख रुपये से अधिक लागत के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। 

मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि आधुनिक भारत के स्वप्न दृष्टा, प्रखर वक्ता, संवेदनशील कवि और छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माता थे। उन्होंने कहा कि अटल जी के नेतृत्व में 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ का गठन हुआ, जिसने प्रदेश को विकास की नई दिशा और पहचान प्रदान की।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अटल जी की प्रतिमा उनके ऐतिहासिक व्यक्तित्व, विचारों और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को सहेजने की एक सार्थक पहल है। उन्होंने कहा कि यह परिसर आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देगा और समाज में राष्ट्र निर्माण की भावना को और मजबूत करेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा सभी नगरीय निकायों में ‘अटल परिसर’ के निर्माण का निर्णय लिया गया है, ताकि अटल जी के विचारों और आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाया जा सके। उन्होंने कहा कि 25 दिसंबर को प्रदेश के 115 नगरीय निकायों में अटल परिसरों का लोकार्पण किया जा चुका है और यह अभियान निरंतर आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बिलासपुर के सर्वांगीण विकास के लिए राज्य सरकार पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है और आज किए गए 26 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्य शहर की अधोसंरचना को सुदृढ़ करेंगे तथा नागरिक सुविधाओं को नई गति देंगे। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के माध्यम से शहर को आधुनिक और सुविधायुक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन में वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में उत्पन्न संकट के बावजूद भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मजबूती से खड़ा है। उन्होंने कहा कि देश की सुदृढ़ विदेश नीति और प्रभावी समन्वय के कारण आपूर्ति व्यवस्था सुचारु है तथा आम नागरिकों को किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अफवाहों से दूर रहें और जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभाएं।

मुख्यमंत्री साय द्वारा इस अवसर पर लगभग 12.43 करोड़ रुपये की लागत से पूर्ण हुए विभिन्न निर्माण कार्यों का लोकार्पण किया गया। इनमें अटल परिसर निर्माण, मराठी कन्या शाला भवन में प्रथम तल निर्माण, इमलीपारा में व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स तथा रक्षित आरक्षी केंद्र का निर्माण प्रमुख रूप से शामिल हैं, जो शहरी विकास और नागरिक सुविधाओं को मजबूत करने में सहायक सिद्ध होंगे।

इसके साथ ही मुख्यमंत्री साय ने लगभग 14.50 करोड़ रुपये की लागत के नए विकास कार्यों का भूमिपूजन भी किया। इनमें अरपा क्षेत्र में सड़क, नाला एवं पिचिंग कार्य, जरहाभाठा क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण एवं नवीनीकरण तथा उसलापुर में भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा एवं चबूतरा निर्माण जैसे कार्य शामिल हैं, जो शहर के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के साथ-साथ सांस्कृतिक पहचान को भी सशक्त करेंगे।

कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि अटल परिसर का निर्माण प्रदेश के लिए गौरव का विषय है और यह मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के दूरदर्शी नेतृत्व का परिणाम है। उन्होंने कहा कि अटल जी के योगदान को शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता और उनके आदर्श आज भी देश को दिशा दे रहे हैं। 

इस अवसर पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, विधायक अमर अग्रवाल, धरमलाल कौशिक, धर्मजीत सिंह, सुशांत शुक्ला सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ‘डिजिटल डोर सुविधा’ का किया शुभारंभ

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डिजिटल हुआ जशपुर: घर बैठे क्यूआर कोड से भरें टैक्स

रायपुर- छत्तीसगढ़ के जशपुर नगर पालिका क्षेत्र में अब टैक्स भुगतान के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शनिवार को एचडीएफसी बैंक की ‘डिजिटल डोर सुविधा’ का शुभारंभ किया, जिसके तहत नागरिक घर बैठे क्यूआर कोड स्कैन कर जल कर, संपत्ति कर और दुकान कर का भुगतान कर सकेंगे।

इस नई व्यवस्था के तहत एचडीएफसी बैंक ने नगर पालिका जशपुर के लिए विशेष क्यूआर कोड तैयार किया है। प्रत्येक घर के लिए अलग-अलग क्यूआर कोड जनरेट किया गया है, जिसे घर-घर चस्पा किया जा रहा है। इस क्यूआर कोड में मकान मालिक का नाम, मकान नंबर, मोबाइल नंबर और बकाया कर की पूरी जानकारी उपलब्ध रहेगी। नागरिक क्यूआर कोड स्कैन कर डी.डी.एन नंबर, मोबाइल नंबर या प्रॉपर्टी आईडी के माध्यम से अपनी देय राशि देख सकेंगे और यूटीआई, डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग के जरिए सुरक्षित भुगतान कर पाएंगे। भुगतान के बाद उन्हें तुरंत डिजिटल रसीद भी प्राप्त होगी।

नगर पालिका जशपुर में लागू प्रॉपर्टी टैक्स इंफॉर्मेशन सिस्टम एक आधुनिक आईसीटी आधारित व्यवस्था है, जो राजस्व संग्रहण को पारदर्शी, सरल और कुशल बनाती है। इस प्रणाली के तहत वर्तमान में लगभग 4600 हाउसहोल्ड को शामिल किया गया है, जिसमें आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियां शामिल हैं।

इस पहल से जहां नागरिकों को समय और श्रम की बचत होगी, वहीं नगर पालिका के कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता भी बढ़ेगी। डिजिटल भुगतान प्रणाली से राजस्व संग्रहण में तेजी आएगी और नगरीय प्रशासन और अधिक सशक्त होगा।

इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, नगर पालिका उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जूदेव, कृष्णा राय, कलेक्टर रोहित व्यास, नगर पालिका अधिकारी योगेश्वर उपाध्याय, एचडीएफसी बैंक के रीजनल मैनेजर सराफत अली और शाखा प्रबंधक दीपक दास सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे।

इचकेला की बेटियों ने क्रिकेट में रचा इतिहास

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मुख्यमंत्री साय ने किया सम्मानित, किट देकर बढ़ाया हौसला

रायपुर- सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखने वाली जशपुर जिले के इचकेला की बेटियों ने क्रिकेट के मैदान में ऐसा प्रदर्शन किया कि आज वे जिले ही नहीं, पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन गई हैं। उनकी इसी उपलब्धि पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शनिवार को जशपुर नगर के मल्टीपरपज इंडोर बास्केटबॉल स्टेडियम में उनसे मुलाकात कर उन्हें क्रिकेट किट प्रदान की और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

ग्राम इचकेला के शासकीय प्री-मैट्रिक कन्या छात्रावास की 16 बालिका खिलाड़ियों ने क्रिकेट में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए जिले को राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है। मुख्यमंत्री ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी मेहनत, अनुशासन और लगन ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है और वे आगे भी इसी तरह राज्य और देश का नाम रोशन करती रहें।

इचकेला एमसीसी एक क्रिकेट अकादमी के रूप में उभरकर सामने आई है, जहां से वर्तमान में 40 बालिकाएं नियमित रूप से क्रिकेट का प्रशिक्षण ले रही हैं। इनमें से 17 खिलाड़ी अंडर-17 और अंडर-19 वर्ग में राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में छत्तीसगढ़ टीम का प्रतिनिधित्व कर रही हैं और बोर्ड मैचों में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं।

वर्ष 2025 में सरगुजा संभाग ने 25 वर्षों बाद राज्य स्तरीय अंडर-17 क्रिकेट प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल किया। इस ऐतिहासिक जीत में इचकेला एमसीसी की भूमिका निर्णायक रही। विजेता टीम के 11 खिलाड़ियों में से 9 खिलाड़ी इसी अकादमी की थीं। वहीं अंडर-19 वर्ग में भी सरगुजा संभाग ने रजत पदक जीता, जिसमें 11 में से 8 खिलाड़ी इचकेला एमसीसी से थीं। रायगढ़ में आयोजित वर्ष 2025 के इंटर-स्टेट क्रिकेट टूर्नामेंट में देशभर की टीमों के बीच इचकेला की बेटियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान हासिल किया। अब तक इस समूह की 11 खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेकर जिले और राज्य का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। इन उपलब्धियों के पीछे कोच संतोष शंकर सोनी और पंडरी बाई का समर्पण और मार्गदर्शन प्रमुख रहा है।इचकेला की बेटियों की सफलता इस बात का सबूत है कि अगर मन में जुनून हो और सही मार्गदर्शन मिले तो संसाधनों की कमी भी सफलता के रास्ते में बाधा नहीं बनती।

पूर्व डिप्टी CM प्यारेलाल कंवर परिवार हत्याकांड में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 2 की उम्रकैद बरकरार, 3 बरी

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 रायपुर/बिलासपुर। चर्चित ट्रिपल मर्डर केस में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए दो आरोपियों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है, जबकि तीन आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। यह मामला अविभाजित मध्यप्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री प्यारेलाल कंवर के परिवार से जुड़ा है।


करीब पांच साल बाद आए इस फैसले में हाईकोर्ट ने निचली अदालत के निर्णय में आंशिक संशोधन किया। इससे पहले ट्रायल कोर्ट ने सभी पांच आरोपियों को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हालांकि, साक्ष्यों के पुनर्मूल्यांकन के बाद हाईकोर्ट ने हरभजन सिंह कंवर, उसकी पत्नी धनकुंवर और सुरेंद्र कुमार कंवर को दोषमुक्त कर दिया। वहीं परमेश्वर और रामप्रसाद की सजा को यथावत रखा गया है।

जमीन विवाद से जुड़ा था मामला

यह सनसनीखेज वारदात वर्ष 2021 में कोरबा जिले के उरगा थाना क्षेत्र स्थित भैंसा गांव में हुई थी। जमीन विवाद के चलते परिवार के भीतर ही खूनी साजिश रची गई थी। आरोपियों ने घर में घुसकर प्यारेलाल कंवर के छोटे बेटे हरीश कंवर, उनकी पत्नी और चार वर्षीय बेटी की धारदार हथियार से हत्या कर दी थी। हमले में तीनों के सिर, गर्दन और चेहरे पर ताबड़तोड़ वार किए गए थे।

जांच में सामने आई पारिवारिक रंजिश

घटना के बाद पुलिस जांच में पारिवारिक रंजिश का खुलासा हुआ। आरोपियों में मृतक का बड़ा भाई, अन्य रिश्तेदार और उनके सहयोगी शामिल पाए गए। पुलिस ने एक महिला समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था। तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने सभी को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की गई थी।

कौन थे प्यारेलाल कंवर

प्यारेलाल कंवर अविभाजित मध्यप्रदेश के प्रमुख आदिवासी नेताओं में गिने जाते थे। उन्होंने लंबे समय तक रामपुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया और वर्ष 1997-98 में तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में उपमुख्यमंत्री पद संभाला था। उनके बेटे हरीश कंवर को क्षेत्र में उनका राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जाता था।

लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ को और अधिक सुदृढ़, विश्वसनीय और जनोन्मुखी बनाएं- राज्यपाल डेका

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छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट यूनियन प्रादेशिक पत्रकार सम्मेलन और सम्मान समारोह में शामिल हुए राज्यपाल

रायपुर- राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि लोकतंत्र में व्यवस्थापिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बाद पत्रकारिता को चतुर्थ स्तंभ माना गया है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि एक मिशन और साधना है। समाज का दर्पण कहलाने वाली पत्रकारिता ने सदैव जनता और सत्ता के बीच संपर्क-सेतु की भूमिका निभाई है और लोगों को जागरूक किया है। इसलिए इसे लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है। 

राज्यपाल डेका आज भिलाई सेक्टर 4 स्थित एस.एन.जी. ऑडिटोरियम में आयोजित छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट यूनियन के प्रादेशिक पत्रकार सम्मेलन और सम्मान समारोह को मुख्य अतिथि की आंसदी से सम्बोधित कर रहे थे। इससे पूर्व उन्होंने उत्कृष्ट कार्य करने वाले पत्रकारों को सम्मानित किया। राज्यपाल डेका ने इस अवसर पर महिला पत्रकारों को उनकी उत्कृष्ट लेखनी के लिए सम्मानित किया, जिसमें शगुफ्ता शीरीन, अनुभूति भाखरे, कोमल धनेसर, साक्षी सोनी शामिल है। इसी प्रकार समाज सेवी महिलाओं साधना चतुर्वेदी, अंजना श्रीवास्तव, लता बौद्ध, दीप्ति सिंग, सुनीता जैन को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।

राज्यपाल डेका ने वर्तमान चुनौतियों का जिक्र करते हुए अवगत कराया कि आज पत्रकारिता एक कठिन दौर से गुजर रही है। सोशल मीडिया के विस्फोट ने सूचना के प्रवाह को लोकतांत्रिक तो बनाया है, लेकिन साथ ही विश्वास का गंभीर संकट भी खड़ा किया है। फेसबुक, व्हाट्सएप और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स पर हर व्यक्ति ‘पत्रकार‘ बन चुका है और सत्यापन से पहले ही समाचार वायरल हो जाते हैं। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि ‘फेक न्यूज‘ और ‘डीपफेक‘ ने सच और झूठ के बीच की रेखा धुंधली कर दी है। इन सबके बीच आज भी प्रिंट मीडिया ने अपनी विश्वसनीयता को कायम रखा है। राज्यपाल डेका ने कहा कि इन चुनौतियों का सामना करने के लिए पत्रकारिता को अपने मूल आदर्शों की ओर लौटना होगा।

एक स्वस्थ पत्रकारिता ही एक स्वस्थ लोकतंत्र की नींव है। उन्होंने इस चौथे स्तंभ को और अधिक सुदृढ़, विश्वसनीय और जनोन्मुखी बनाने का आह्वान किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष ईश्वर दुबे, सचिव सतीश बौद्ध एवं अन्य पदाधिकारी और राजाराम त्रिपाठी, प्रो. संजय त्रिवेदी, वरिष्ठ पत्रकार गिरीश पंकज सहित बड़ी संख्या में छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट यूनियन के पत्रकार उपस्थित थे।


खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 :- वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में अरुणाचल पुरुष और असम महिला वर्ग में ओवरऑल चैम्पियन

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छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों ने भी लहराया परचम, रिशिका कश्यप ने रजत और लकी बाबू मरकाम ने जीता कांस्य

रायपुर- इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के अंतर्गत वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता समापन के साथ ही चैम्पियनशिप टीम के परिणाम भी घोषित किए गए, जिसमें पुरुष वर्ग में अरुणाचल प्रदेश ने ओवरऑल चैम्पियन बनने का गौरव हासिल किया। वहीं मिजोरम फर्स्ट रनरअप और असम सेकंड रनरअप रहा। महिला वर्ग में असम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ओवरऑल चैम्पियन का खिताब अपने नाम किया, जबकि ओडिशा फर्स्ट रनरअप और छत्तीसगढ़ सेकंड रनरअप रहा।

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के अंतर्गत वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिताओं का आज शानदार समापन हो गया। पूरे आयोजन के दौरान देशभर से आए खिलाड़ियों ने ताकत, तकनीक और आत्मविश्वास का बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए दर्शकों को रोमांचित किया। समापन समारोह के अवसर पर छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप और रायपुर महापौर मीनल चौबे विशेष रूप से उपस्थित रहीं। उन्होंने खिलाड़ियों से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया तथा विजेताओं को मेडल पहनाकर सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना भी की।

प्रतियोगिता के प्रमुख मुकाबलों की बात करें तो पुरुष 110 किलोग्राम भार वर्ग में अरुणाचल प्रदेश के साम्बो लापुंग ने 299 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। मिजोरम के डेविड लालजाव्मडिका ने 270 किलोग्राम के साथ रजत और छत्तीसगढ़ के लकी बाबू मरकाम ने 261 किलोग्राम वजन उठाकर कांस्य पदक जीता। लकी बाबू का यह प्रदर्शन घरेलू दर्शकों के लिए गर्व का क्षण रहा।

वहीं पुरुष 110+ किलोग्राम वर्ग में मिजोरम के डेविड जोह्मिंगमाविया ने 290 किलोग्राम के साथ स्वर्ण पदक जीता। आंध्र प्रदेश के गुगुलोथु राजा शेखर (255 किग्रा) को रजत और असम के मनाश प्रतिम सोनवाल (223 किग्रा) वजन उठाकर कांस्य पदक जीता। इस वर्ग में खिलाड़ियों के बीच जबरदस्त प्रतिस्पर्धा देखने को मिली।

महिला वर्ग में भी मुकाबले बेहद रोमांचक रहे। 86 किलोग्राम वर्ग में महाराष्ट्र की साक्षी बंडु बुरकुले ने 150 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक हासिल किया। छत्तीसगढ़ की रिशिका कश्यप ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 121 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक जीता और अपने मेडल का श्रेय अपने कोच को दिया। वहीं असम की बिटुपुना देओरी ने कांस्य पदक अपने नाम किया। एक अन्य महिला वर्ग के 86 किग्रा से अधिक के वर्ग में मिजोरम की जोसांगजुआली ने 140 किलोग्राम के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि असम की पिंकी बोरो और मध्यप्रदेश की गुंजन उइके ने क्रमशः रजत और कांस्य पदक हासिल किया।

छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों ने भी इस प्रतियोगिता में दमदार उपस्थिति दर्ज कराई। लकी बाबू मरकाम ने अपने प्रदर्शन के बाद कहा कि ट्राइबल गेम्स 2026 का आयोजन छत्तीसगढ़ में होना प्रदेश के ग्रामीण और आदिवासी युवाओं के लिए बड़ा अवसर है। इससे उन्हें बड़े मंच को देखने और आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।

पूरे आयोजन के दौरान तकनीकी व्यवस्थाएं सुव्यवस्थित रहीं और प्रतियोगिताएं पारदर्शी तरीके से संपन्न हुईं। दर्शकों का उत्साह भी खिलाड़ियों के प्रदर्शन में ऊर्जा भरता रहा। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 की वेटलिफ्टिंग स्पर्धाओं ने यह साबित कर दिया कि देश के जनजातीय अंचलों में अपार खेल प्रतिभाएं मौजूद हैं, जिन्हें सही मंच और अवसर मिलने पर वे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाने में सक्षम हैं।

पेट की चर्बी सामान्य मोटापे से अधिक खतरनाक: डॉ. जितेंद्र सिंह

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केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि पेट के आसपास जमा होने वाली चर्बी (एब्डॉमिनल या सेंट्रल ओबेसिटी) सामान्य मोटापे से कहीं अधिक खतरनाक होती है। उन्होंने बताया कि भारतीय संदर्भ में कई बार दुबले-पतले दिखने वाले लोगों में भी अंदरूनी चर्बी (विसरल फैट) अधिक होती है, जो गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है।



डॉ. सिंह ने “Advances in Obesity and Lipid Management in CVD” नामक कार्डियोलॉजी की एक पुस्तक के विमोचन के दौरान यह बात कही। उन्होंने कहा कि सेंट्रल ओबेसिटी डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, फैटी लिवर और लिपिड संबंधी विकारों का बड़ा कारण है, भले ही व्यक्ति बाहर से मोटा न दिखे।

भारतीयों में अधिक जोखिम

मंत्री ने कहा कि भारतीयों में पेट की चर्बी का प्रतिशत अधिक होता है, जो हृदय और मेटाबोलिक बीमारियों का स्वतंत्र जोखिम कारक है। इसलिए समय पर जांच और सही इलाज जरूरी है।

बढ़ती जीवनशैली बीमारियाँ चिंता का विषय

उन्होंने कहा कि बदलती जीवनशैली, खान-पान की आदतें और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण युवाओं में भी डायबिटीज और हृदय रोग तेजी से बढ़ रहे हैं।

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संतुलित जीवनशैली पर जोर

डॉ. सिंह ने लोगों से संतुलित जीवनशैली अपनाने, पर्याप्त नींद लेने और वैज्ञानिक तरीके से फिटनेस बनाए रखने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि बिना तैयारी के अत्यधिक व्यायाम भी स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

आधुनिक उपचार और नई तकनीक

इस पुस्तक में आधुनिक उपचार पद्धतियों जैसे GLP-1 दवाएं (Semaglutide, Tirzepatide), स्टैटिन्स, PCSK9 inhibitors और AI आधारित चिकित्सा निर्णय प्रणाली को शामिल किया गया है, जो हृदय रोगों के इलाज में मददगार होंगी।

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जागरूकता और रोकथाम जरूरी

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि मोटापा और लिपिड असंतुलन आज बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन चुके हैं। उन्होंने 2050 तक भारत में मोटापे के बढ़ते खतरे को देखते हुए जागरूकता, समय पर जांच और रोकथाम पर जोर दिया।


पश्चिम एशिया की स्थिति के बीच भारत सरकार सतर्क, ऊर्जा आपूर्ति और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित

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पश्चिम एशिया में जारी तनावपूर्ण स्थिति के बीच भारत सरकार लगातार निगरानी रखते हुए ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री संचालन और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए व्यापक कदम उठा रही है। 29 मार्च 2026 तक की स्थिति के अनुसार सरकार ने कई महत्वपूर्ण उपाय किए हैं।

ऊर्जा आपूर्ति बनी स्थिर

हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने के बावजूद देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता बनी हुई है। सभी रिफाइनरियां उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं और भंडार पर्याप्त है। सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर ₹10 प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी घटाई है और निर्यात पर शुल्क लगाकर घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित की है।

कुछ राज्यों में अफवाहों के कारण घबराहट में खरीदारी देखी गई, लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी पेट्रोल पंपों पर पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की गई है।

गैस और एलपीजी आपूर्ति पर विशेष ध्यान

सीएनजी और घरेलू पाइप्ड गैस (PNG) को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि औद्योगिक आपूर्ति सीमित रूप से जारी है। एलपीजी की आपूर्ति सामान्य बनी हुई है और एक दिन में 55 लाख से अधिक सिलेंडर वितरित किए गए।

सरकार ने वाणिज्यिक एलपीजी आवंटन को बढ़ाकर 70% तक कर दिया है, जिससे होटल, ढाबा, उद्योग और अन्य क्षेत्रों को राहत मिलेगी।

राज्यों को सख्त निर्देश

राज्य सरकारों को जमाखोरी और कालाबाजारी पर कड़ी कार्रवाई करने, दैनिक प्रेस ब्रीफिंग जारी करने और अफवाहों पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। देशभर में हजारों छापेमारी कर कई सिलेंडर जब्त किए गए हैं।

समुद्री सुरक्षा और संचालन सामान्य

सरकार के अनुसार सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और बंदरगाह संचालन सामान्य रूप से जारी है। दो एलपीजी जहाज सुरक्षित रूप से भारत की ओर बढ़ रहे हैं। अब तक 900 से अधिक भारतीय नाविकों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है।

विदेशों में भारतीयों की सुरक्षा

विदेश मंत्रालय पश्चिम एशिया की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। भारतीय दूतावास 24×7 हेल्पलाइन के माध्यम से सहायता प्रदान कर रहे हैं। 28 फरवरी से अब तक करीब 5.24 लाख भारतीय स्वदेश लौट चुके हैं।

सरकार विभिन्न देशों से वैकल्पिक मार्गों के जरिए नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित कर रही है।

सरकार की अपील

सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे घबराहट में खरीदारी न करें, ऊर्जा की बचत करें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।


राहगीरों के लिए पीपला फाउंडेशन ने बनाया 'धूप से बचाने वाला आशियाना'

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 आरंग । ​आरंग में समाज सेवा के लिए मशहूर पीपला वेलफेयर फाउंडेशन ने एक बार फिर नेक काम किया है। संस्था के सदस्यों ने आरंग-राजिम मार्ग पर रेलवे फाटक के पास एक अस्थाई शेड (आशियाना) बनाया है।


​ क्यों पड़ी इसकी जरूरत?

​ लंबा इंतजार: इस फाटक पर हर घंटे 4-5 बार ट्रेनें गुजरती हैं। कई बार दो ट्रेनों की पासिंग के कारण फाटक 15-20 मिनट तक बंद रहता है। ​छांव का अभाव: आसपास कोई घर या प्रतीक्षालय नहीं है, जिससे राहगीरों को चिलचिलाती धूप में खड़ा होना पड़ता है। ​ पानी की समस्या: यहाँ पीने के पानी की भी कोई सुविधा उपलब्ध नहीं थी।


​ संस्था की अनूठी पहल

​फाउंडेशन के संयोजक महेन्द्र कुमार पटेल ने बताया कि संस्था पिछले 4 वर्षों से यहाँ बांस और बल्ली की मदद से अस्थाई शेड बना रही है। इसके साथ ही, भविष्य में स्थायी छांव के लिए संस्था ने आसपास छायादार पौधे भी लगाए हैं और उनकी देखरेख कर रही है।

​हर तरफ हो रही है तारीफ

​इस नेक काम को देख रहे सीआरपीएफ (CRPF) के सहायक कमांडेंट अजय कुमार सिंह ने संस्था की खूब प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि आज के समय में मानवीय संवेदनाओं को समझने वाले लोग बहुत कम मिलते हैं।

​ इनका रहा विशेष सहयोग:

इस आशियाने के निर्माण में संजय मेश्राम, महेन्द्र पटेल, कोमल लाखोटी और राहुल पटेल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुनी ‘मन की बात’ की 132वीं कड़ी

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जल संरक्षण में छत्तीसगढ़ बना देश के लिए मिसाल: कोरिया जिले के जल संरक्षण मॉडल की प्रधानमंत्री ने की सराहना

मन की बात में छत्तीसगढ़ के जल संवर्धन प्रयासों को मिली राष्ट्रीय पहचान, अब इसे जन आंदोलन बनाना हमारा संकल्प - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मुख्यमंत्री निवास में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 132वीं कड़ी सुनी और इसे राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरणादायी बताया। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम देश के कोने-कोने में हो रहे सकारात्मक नवाचारों और जनभागीदारी को राष्ट्रीय मंच प्रदान कर समाज में नई ऊर्जा और प्रेरणा का संचार करता है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कोरिया जिले के किसानों के जल संरक्षण प्रयासों की सराहना छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत गर्व और प्रेरणा का विषय है। यह दर्शाता है कि प्रदेश में जमीनी स्तर पर हो रहे कार्य अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहे हैं।

उन्होंने कहा कि ‘आवा पानी झोंकी’ जैसे अभिनव मॉडल के माध्यम से किसानों ने अपने खेतों में रिचार्ज तालाब और सोख्ता गड्ढों का निर्माण कर वर्षा जल को सहेजने का सराहनीय कार्य किया है। यह जनभागीदारी आधारित पहल आज भूजल स्तर में सुधार की एक सशक्त मिसाल बन चुकी है और अन्य क्षेत्रों के लिए भी मार्गदर्शक बन रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल संरक्षण अब एक जन आंदोलन का रूप ले चुका है और छत्तीसगढ़ में भी इसे जनभागीदारी से जोड़ते हुए व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों से जल संरक्षण को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने और इसमें सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री द्वारा मत्स्य उत्पादन में आत्मनिर्भरता, फिटनेस को बढ़ावा, शुगर इंटेक में कमी और खेलों के लिए अनुकूल वातावरण निर्माण जैसे विषयों पर दिए गए संदेश अत्यंत उपयोगी और प्रेरणादायी हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने, युवाओं को खेलों से जोड़ने और स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित करने के लिए योजनाबद्ध प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और युवाओं के लिए नए अवसर सृजित होंगे।

मुख्यमंत्री साय ने पश्चिमी एशिया में उत्पन्न परिस्थितियों के संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि देश हर चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है और केंद्र तथा राज्य सरकारें समन्वय के साथ कार्य कर रही हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों को आश्वस्त किया कि छत्तीसगढ़ में पेट्रोलियम उत्पादों, रसोई गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं की पर्याप्त उपलब्धता है तथा आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह सुचारु और सामान्य है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे अफवाहों से दूर रहें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास करें।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जनभागीदारी की शक्ति के साथ जल संरक्षण को और मजबूत कर छत्तीसगढ़ को सुरक्षित, समृद्ध और जल-संपन्न भविष्य की ओर ले जाने के लिए राज्य सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है तथा प्रदेश निरंतर नवाचार, सहभागिता और सुशासन के माध्यम से विकास की नई दिशा तय कर रहा है।

इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा, छत्तीसगढ़ नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार कृष्णा दास सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

भारतीय नौसेना ने कोच्चि में IONS समुद्री अभ्यास (IMEX) TTX 2026 का आयोजन किया

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भारतीय नौसेना ने 27 मार्च 2026 को मारिटाइम वॉरफेयर सेंटर, साउदर्न नेवल कमांड, कोच्चि में IONS Maritime Exercise (IMEX) TTX 2026 का आयोजन किया। इस उच्चस्तरीय कार्यक्रम में इंडियन ओशन नेवल सिम्पोजियम (IONS) के सदस्य नौसेनाओं के प्रतिनिधि, अंतरराष्ट्रीय अधिकारी IOS SAGAR के अधिकारी और भारतीय नौसेना के अधिकारी शामिल हुए, जिन्होंने भारतीय महासागर क्षेत्र (IOR) में उभरती गैर-पारंपरिक समुद्री सुरक्षा चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया।

इस अभ्यास में बांग्लादेश, फ्रांस, इंडोनेशिया, केन्या, मालदीव, मॉरिशस, म्यांमार, सेशेल्स, सिंगापुर, श्रीलंका, तंज़ानिया और टिमोर-लेस्ते की भागीदारी रही। इस विविध बहुराष्ट्रीय प्रतिनिधित्व से क्षेत्र में आपसी विश्वास बढ़ाने और सहयोगी समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता झलकती है। भारत ने IONS अध्यक्षता 2026–2028 के लिए सोलह साल बाद पद संभाला है, और IMEX TTX 2026 क्षेत्रीय समुद्री नेतृत्व को मजबूत करने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ।

उन्नत सिमुलेटेड वातावरण में आयोजित इस अभ्यास ने IOR में जटिल समुद्री सुरक्षा चुनौतियों को संबोधित किया, जो वैश्विक व्यापार, ऊर्जा प्रवाह और कनेक्टिविटी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है। प्रमुख उद्देश्य शामिल थे:

  • भाग लेने वाली नौसेनाओं के बीच संचालनात्मक दृष्टिकोण और प्रतिबंधों की साझा समझ को बढ़ाना,

  • सूचना साझा करने और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं जैसे समन्वय तंत्रों की समीक्षा करना,

  • IONS ढांचे के निरंतर सुधार का समर्थन करना, जिसमें समुद्री सुरक्षा दिशा-निर्देशों का व्यावहारिक अनुप्रयोग के माध्यम से सत्यापन शामिल है।

लाइव तैनाती के प्रतिबंधों के बिना बहु-दृश्य परिदृश्यों का सिमुलेशन करके, अभ्यास ने प्रतिभागियों को पेशेवर आदान-प्रदान के नए अवसरों का पता लगाने और आपसी विश्वास को गहरा करने का अवसर प्रदान किया। IMEX TTX 2026 ने IONS की भूमिका को एक महत्वपूर्ण सहयोगात्मक मंच के रूप में दोहराया, जो रचनात्मक संवाद, सामूहिक जिम्मेदारी और क्षेत्रीय समाधान के माध्यम से समुद्री चुनौतियों का सामना करता है।

अभ्यास से प्राप्त जानकारियाँ IONS ढांचे को और मजबूत बनाने में सहायक होंगी, जिससे भारतीय महासागर क्षेत्र में एक सुसंगत, उत्तरदायी और स्थिर समुद्री डोमेन सुनिश्चित किया जा सके।


प्रधानमंत्री मोदी ने ‘मन की बात’ में साझा की देश के युवाओं, खेलों और जल-संरक्षण की प्रेरक कहानियाँ

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मार्च माह के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में देशवासियों को संबोधित करते हुए विश्व की चुनौतियों, युवाओं की सहभागिता, खेलों में उपलब्धियों, जल-संरक्षण और सौर ऊर्जा क्रांति से जुड़ी प्रेरक कहानियों पर प्रकाश डाला।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान विश्व परिस्थितियाँ कोरोना संकट के बाद भी शांति और स्थिरता के लिए चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं। पड़ोसी देशों में युद्ध और संघर्ष से पेट्रोल और डीज़ल जैसी आवश्यकताओं पर असर पड़ रहा है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे अफवाहों से बचें और केवल सरकारी सूचना पर भरोसा करें।

युवाओं की सक्रिय भागीदारी और शिक्षा में नवाचार

प्रधानमंत्री ने ज्ञान भारतम सर्वे का जिक्र करते हुए कहा कि देश भर के नागरिक प्राचीन पांडुलिपियों की जानकारी साझा कर रहे हैं। इस पहल में अरुणाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्थान और लद्दाख से हजारों पांडुलिपियाँ ऐप के माध्यम से साझा की गई हैं।

युवा संगठन MY Bharat के माध्यम से देश के युवाओं को नीति निर्माण और बजट प्रक्रिया में जोड़ने का प्रयास हो रहा है। लगभग 12 लाख युवाओं ने इस बजट क्विज़ में भाग लिया। प्रधानमंत्री ने युवाओं के विचारों की सराहना की, जो किसान कल्याण, महिला नेतृत्व, हरित भारत, खेल प्रतिभा और कौशल विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में योगदान दे रहे हैं।

खेलों में उपलब्धियाँ और नई प्रेरणाएँ

प्रधानमंत्री ने जम्मू-कश्मीर की क्रिकेट टीम की रणजी ट्रॉफी जीत और अन्य खेल उपलब्धियों की भी सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से गोलवीर सिंह (उत्तर प्रदेश) और अनाहत सिंह (स्क्वैश) की अंतरराष्ट्रीय सफलताओं का उल्लेख किया। उन्होंने योग और फिटनेस पर भी ध्यान देने का आग्रह किया।

जल-संरक्षण और पर्यावरणीय प्रयास

प्रधानमंत्री ने ‘जल संचय अभियान’ और ‘अमृत सरोवर अभियान’ के तहत देश भर में किए गए जल संरक्षण प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने त्रिपुरा के वांगमुन गाँव, छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले, और तेलंगाना के मुढ़िगुंटा गाँव के उदाहरण साझा किए, जहाँ समुदाय ने मिलकर जल संकट कम किया।

मछली पालन और महिला उद्यमिता में सफलता

प्रधानमंत्री ने ओडिशा की सुझाता भुयान, लक्षद्वीप की हव्वा गुलजार, कर्नाटक के शिवलिंग सतप्पा जैसे उद्यमियों के उदाहरण प्रस्तुत किए, जिन्होंने मछली पालन और सौर ऊर्जा में नवाचार करके परिवार और समाज की सेवा की।

सौर ऊर्जा क्रांति और स्वावलंबन

प्रधानमंत्री ने ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ के तहत देशभर में सौर ऊर्जा के बढ़ते उपयोग और इससे लोगों के जीवन में आए सकारात्मक बदलावों का जिक्र किया। उन्होंने गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पूर्वोत्तर के उदाहरण साझा किए, जहाँ लोगों ने सौर पंप और सोलर पैनल अपनाकर अपने जीवन और व्यवसाय को बेहतर बनाया।

प्रधानमंत्री मोदी ने अंत में कहा कि ‘मन की बात’ अब केवल कार्यक्रम नहीं, बल्कि देशवासियों के बीच साझा संवाद बन गया है। उन्होंने सभी से प्रेरक कहानियाँ साझा करने का आग्रह किया और देशवासियों को स्वस्थ, खुशहाल और सतर्क रहने की शुभकामनाएँ दीं।


प्रधानमंत्री मोदी ने माधवपुर मेले के लिए दी शुभकामनाएँ, बताया संस्कृति में इसका महत्व

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प्रधान मंत्री, नरेंद्र मोदी ने गुजरात के पोर्बंदर में चल रहे माधवपुर मेला के लिए शुभकामनाएँ दी हैं। मोदी ने कहा कि यह जीवंत उत्सव हमारी शानदार संस्कृति को उजागर करता है और साथ ही गुजरात और पूर्वोत्तर के बीच शाश्वत सांस्कृतिक संबंध को भी मजबूत करता है।

“यह त्योहार विविध परंपराओं को एक साथ लाता है, जो ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की सच्ची भावना को दर्शाता है। मैं लोगों से इस मेले में आने का आग्रह करता हूँ!” मोदी ने कहा।

प्रधान मंत्री ने अप्रैल 2022 के मन की बात कार्यक्रम में माधवपुर मेले के महत्व और हमारी संस्कृति में इसकी भूमिका के बारे में भी बात की थी।

प्रधान मंत्री ने X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट किया:

“गुजरात के पोर्बंदर में चल रहे माधवपुर मेले के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ।
यह जीवंत उत्सव हमारी शानदार संस्कृति को उजागर करता है और साथ ही गुजरात और पूर्वोत्तर के बीच शाश्वत सांस्कृतिक संबंध को भी मजबूत करता है।
यह त्योहार विविध परंपराओं को एक साथ लाता है, जो ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की सच्ची भावना को दर्शाता है। मैं लोगों से इस मेले में आने का आग्रह करता हूँ!”

“अप्रैल 2022 के #मनकीबात कार्यक्रम में मैंने माधवपुर मेले के महत्व और हमारी संस्कृति में इसकी भूमिका के बारे में बात की थी। कृपया इसे सुनें…”



जेल के अंदर मेहमाननवाजी! कैदी को मोबाइल-घर का खाना, 2 प्रहरी निलंबित

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 अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर स्थित सेंट्रल जेल में कैदियों को नियमों के विपरीत VIP सुविधाएं दिए जाने का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। वायरल वीडियो के जरिए उजागर हुए इस मामले ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


जानकारी के अनुसार, एक कैदी को गंभीर बीमारी के आधार पर जेल के अस्पताल वार्ड में भर्ती कराया गया था। इसके लिए डॉक्टर द्वारा प्रमाण पत्र भी जारी किया गया था, लेकिन जांच में सामने आया कि इस व्यवस्था का दुरुपयोग किया जा रहा था। कैदी को अस्पताल में रखने के नाम पर उसे कई तरह की अतिरिक्त सुविधाएं दी जा रही थीं, जो सामान्य कैदियों को उपलब्ध नहीं होतीं।

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कैदी के परिजनों को अटेंडेंट के रूप में जेल वार्ड में रहने की अनुमति दे दी गई थी। इसके अलावा उन्हें मोबाइल फोन, घर का बना खाना और मिनरल वाटर तक अंदर ले जाने की छूट मिली हुई थी, जो जेल नियमों के खिलाफ है।

मामले की जानकारी मिलने पर जेल अधीक्षक अक्षय सिंह राजपूत ने स्वयं निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कई अनियमितताएं सामने आईं। बताया जा रहा है कि उस समय वार्ड का ताला भी खुला मिला, जो सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक मानी जा रही है।

जांच के बाद कैदी को दी जा रही सभी विशेष सुविधाएं तत्काल प्रभाव से बंद कर दी गई हैं। वहीं ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले दो जेल प्रहरियों को निलंबित कर दिया गया है। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि मामले में आगे और भी कार्रवाई की जा सकती है।

इस घटना के सामने आने के बाद एक बार फिर जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। इससे पहले भी विभिन्न जेलों में कैदियों को विशेष सुविधाएं मिलने के आरोप सामने आते रहे हैं।

राज खुलने के डर में बहन बनी कातिल, प्रेमी संग मिलकर 11 साल की बहन की हत्या

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 बाराबंकी (उत्तर प्रदेश)। रिश्तों को झकझोर देने वाली एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है, जहां एक युवती ने अपने प्रेम संबंध को छिपाने के लिए अपनी ही 11 वर्षीय छोटी बहन की हत्या कर दी। इस घटना से पूरे इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल है।


मामला मोहम्मदपुर खाला थाना क्षेत्र के बसारी गांव का है। प्रारंभिक तौर पर यह मामला संदिग्ध मौत का प्रतीत हो रहा था, लेकिन पुलिस जांच में यह एक सुनियोजित हत्या निकली। चौंकाने वाली बात यह रही कि इस जघन्य अपराध में मृतका की बड़ी बहन और उसका प्रेमी ही शामिल पाए गए।

पुलिस के अनुसार, 18 वर्षीय काजल का प्रेम संबंध पड़ोसी गांव के 20 वर्षीय शिवम के साथ था। दोनों की पहचान करीब दो महीने पहले फेसबुक के माध्यम से हुई थी। परिजनों को जब इस संबंध की जानकारी मिली तो उन्होंने काजल को समझाइश दी और उसका मोबाइल भी तोड़ दिया, लेकिन इसके बावजूद दोनों चोरी-छिपे संपर्क में बने रहे।

घटना के दिन 11 वर्षीय अनुष्का अन्य बच्चों के साथ खेत में मेंथा की रोपाई करने गई थी। इसी दौरान काजल और शिवम पास के खेत में मिल रहे थे। तभी अनुष्का वहां पहुंच गई और उसने दोनों को आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया।

अनुष्का ने घर जाकर पिता को सब कुछ बताने की बात कही, जिससे घबराकर काजल और शिवम ने मिलकर उसका गला दबा दिया और उसकी हत्या कर दी। वारदात के बाद आरोपियों ने बचने के लिए बच्ची के लापता होने का नाटक किया और पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की।

जांच के दौरान पुलिस को काजल के बयान में विरोधाभास मिला। कड़ाई से पूछताछ करने पर उसने और उसके प्रेमी ने अपना अपराध कबूल कर लिया। पुलिस ने 24 घंटे के भीतर मामले का खुलासा करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।

इस घटना ने पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया है। लोग अब भी इस बात पर विश्वास नहीं कर पा रहे हैं कि एक बहन अपने ही रिश्ते को बचाने के लिए इतना बड़ा अपराध कर सकती है।

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