Media24Media.com

Responsive Ad Slot

Latest

latest
lockdown news

महासमुंद की खबरें

महासमुंद की खबर

रायगढ़ की ख़बरें

raigarh news

दुर्ग की ख़बरें

durg news

जम्मू कश्मीर की ख़बरें

jammu and kashmir news

VIDEO

Videos
top news


 

भारत में महिला-नेतृत्व विकास- सशक्तिकरण से नेतृत्व तक

No comments Document Thumbnail

सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर और निर्णयकारी भूमिका में स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही 

रायपुर- भारत में महिला सशक्तिकरण का उद्देश्य महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से स्वतंत्र, शिक्षित और समान अधिकार संपन्न बनाना है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, मुद्रा योजना और महिला आरक्षण जैसे प्रयासों से निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी भागीदारी बढ़ी है। हालांकि, पितृसत्तात्मक सोच और सुरक्षा चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं, लेकिन शिक्षा व कानूनी सुधारों से बदलाव आ रहा है।

भारत में महिलाओं के सशक्तिकरण की सोच अब एक व्यापक और जीवन-चक्र आधारित दृष्टिकोण में विकसित हो चुकी है, जहाँ जन्म से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और नेतृत्व तक महिलाओं की आवश्यकताओं को समग्र रूप से संबोधित किया जा रहा है। भारत सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाएँ अब केवल कल्याण तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि वे महिलाओं को आत्मनिर्भर और निर्णयकारी भूमिका में स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही हैं। यह बदलाव “वेलफेयर” से “एम्पावरमेंट” और अब “वूमेन-लेड डेवलपमेंट” की ओर भारत की विकास यात्रा को दर्शाता है।

स्वास्थ्य एवं पोषण के क्षेत्र में मिशन पोषण 2.0, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान जैसी पहलों ने महत्वपूर्ण सुधार सुनिश्चित किए हैं। वर्ष 2017 से फरवरी 2026 तक प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के अंतर्गत लगभग 4.27 करोड़ महिलाओं को 20,101 करोड़ रूपये की सशर्त सहायता प्रदान की गई है। वहीं, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत 7.26 करोड़ से अधिक गर्भवती महिलाओं की निःशुल्क जांच की गई है। देशभर में 14.03 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से 8.97 करोड़ से अधिक लाभार्थियों तक पोषण सेवाएँ पहुँच रही हैं, जबकि मिशन इंद्रधनुष के प्रभाव से बाल मृत्यु दर 48 से घटकर 28 और नवजात मृत्यु दर 28 से घटकर 17 हो गई है।

“पोषण भी पढ़ाई भी” कार्यक्रम के तहत 8.55 लाख कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया गया है तथा सक्षम आंगनवाड़ी योजना के माध्यम से 1.03 लाख केंद्रों को उन्नत किया जा चुका है। वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में प्रधानमंत्री जन धन योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना और स्टैंड-अप इंडिया योजना ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाई है। 

प्रधानमंत्री जन धन योजना के अंतर्गत 57.93 करोड़ खातों में से 32.29 करोड़ खाते महिलाओं के नाम हैं, जो वित्तीय समावेशन की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत वितरित कुल ऋणों में लगभग 68 प्रतिशत महिलाओं को दिए गए हैं, जिनकी कुल राशि 14.72 लाख करोड़ रूपये से अधिक है। स्टैंड-अप इंडिया योजना के तहत स्वीकृत ऋणों में 83 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएँ हैं, जिनकी राशि 47,704 करोड़ रूपये से अधिक है। 

दीनदयाल अंत्योदय योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत 10.05 करोड़ महिलाएँ स्वयं सहायता समूहों से जुड़ चुकी हैं, जबकि “लखपति दीदी” पहल के माध्यम से 3.07 करोड़ महिलाएँ आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अग्रसर हुई हैं। “नमो ड्रोन दीदी योजना” के तहत 1,094 ड्रोन वितरित कर महिलाओं को आधुनिक तकनीक से भी जोड़ा जा रहा है।

दैनिक जीवन में गरिमा सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, स्वच्छ भारत मिशन और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं ने व्यापक बदलाव लाया है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत 2.90 करोड़ से अधिक घर महिलाओं के नाम आवंटित किए गए हैं, जिससे उनके सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को बल मिला है। उज्ज्वला योजना के तहत 10.5 करोड़ से अधिक गैस कनेक्शन प्रदान किए गए हैं, जिससे महिलाओं को धुएँ से मुक्ति और स्वास्थ्य लाभ मिला है। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत 12.11 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण हुआ है, जिससे महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। जल जीवन मिशन के माध्यम से 15.83 करोड़ से अधिक घरों तक नल जल की सुविधा पहुँचाई गई है, जिससे महिलाओं के दैनिक श्रम में उल्लेखनीय कमी आई है।

शिक्षा एवं कौशल विकास के क्षेत्र में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, सुकन्या समृद्धि योजना और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय जैसी पहलों ने सकारात्मक परिवर्तन सुनिश्चित किया है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के परिणामस्वरूप जन्म के समय लिंगानुपात 918 से बढ़कर 929 हो गया है। सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत 4.6 करोड़ से अधिक खाते खोले गए हैं, जिनमें 3.40 लाख करोड़ रूपये से अधिक की राशि जमा है। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के 5,316 स्कूलों में 7.58 लाख से अधिक छात्राएँ अध्ययनरत हैं। उच्च शिक्षा में महिलाओं का सकल नामांकन अनुपात 30.2 प्रतिशत तक पहुँच गया है, जबकि पीएचडी में महिलाओं के नामांकन में 135.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। । AICTE प्रगति योजना के तहत 35,998 छात्राएँ लाभान्वित हुई हैं तथा विज्ञान ज्योति योजना से 80,000 से अधिक छात्राओं को प्रोत्साहन मिला है।

महिलाओं की सुरक्षा और संरक्षा के लिए मिशन शक्ति के अंतर्गत “सम्बल” और “समर्थ्य” दो स्तंभों पर कार्य किया जा रहा है। वन स्टॉप सेंटरों की संख्या 926 तक पहुँच चुकी है, जहाँ 13.90 लाख से अधिक महिलाओं को सहायता प्रदान की गई है। महिला हेल्पलाइन (181 और 112) के माध्यम से 99.09 लाख महिलाओं को सहयोग मिला है। SHe-Box पोर्टल से 1.63 लाख कार्यस्थल जुड़े हैं, जिससे कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। वहीं “समर्थ्य” घटक के अंतर्गत 416 शक्ति सदन और 531 सखी निवास संचालित किए जा रहे हैं, जो महिलाओं को सुरक्षित आश्रय और पुनर्वास प्रदान कर रहे हैं।
]
अंततः भारत में महिला सशक्तिकरण अब केवल योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का आधार बन चुका है। महिलाएँ आज न केवल अपने परिवार और समाज की धुरी हैं, बल्कि वे देश की आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी प्रगति की दिशा तय करने में भी अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। यही “Women-Led Development” का वास्तविक स्वरूप है, जहाँ नारी शक्ति ही राष्ट्र शक्ति का आधार बनती है।

INS सुनयना मालदीव के माले पहुंचा, समुद्री सहयोग को मिला नया आयाम

No comments Document Thumbnail

माले- भारतीय नौसेना का पोत INS सुनयना, भारतीय महासागर जहाज (IOS) SAGAR पहल के तहत तैनाती पर, 6 अप्रैल 2026 को मालदीव की राजधानी माले पहुंचा। यह इस ऑपरेशनल तैनाती का पहला पोर्ट कॉल है। जहाज का मालदीव नेशनल डिफेंस फोर्स (MNDF) द्वारा गर्मजोशी से स्वागत किया गया, जो दोनों देशों के बीच मजबूत समुद्री साझेदारी और क्षेत्रीय संबंधों को दर्शाता है।

विशेष बात यह है कि इस पोत पर MNDF के दो कर्मी भी बहुराष्ट्रीय दल का हिस्सा हैं, जो सहयोग और साझेदारी की भावना को और मजबूत करता है।

माले पहुंचने से पहले यात्रा के दौरान अंतरराष्ट्रीय दल ने सीमैनशिप, छोटे हथियारों की फायरिंग और डैमेज कंट्रोल ड्रिल्स का गहन प्रशिक्षण लिया। यह प्रशिक्षण सामूहिक तैयारी, ऑपरेशनल तालमेल और समुद्री सहयोग को बढ़ावा देने पर केंद्रित रहा।

माले पहुंचने पर भारत के उच्चायुक्त जी. बालासुब्रमण्यम ने जहाज का दौरा किया और बहुराष्ट्रीय दल से बातचीत की। इस दौरान कई पेशेवर और सामाजिक कार्यक्रमों के साथ खेल गतिविधियों का भी आयोजन किया जाएगा, जिससे आपसी सहयोग और संबंधों को और मजबूत किया जा सके।

पोत के प्रस्थान के समय MNDF कोस्ट गार्ड के साथ एक Passage Exercise (PASSEX) भी आयोजित किया जाएगा।

IOS SAGAR पहल के तहत यह जहाज 16 मित्र देशों के अंतरराष्ट्रीय दल के साथ दक्षिण-पूर्वी हिंद महासागर क्षेत्र में तैनात है। यह भारत की Neighbourhood First नीति और MAHASAGAR (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) विजन को मजबूत करता है।

INS सुनयना को 2 अप्रैल 2026 को मुंबई से रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ द्वारा हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया था। यह पहल “One Ocean, One Mission” की भावना को आगे बढ़ाते हुए भारत और उसके समुद्री पड़ोसी देशों के बीच संबंधों को और सुदृढ़ करती है।



IGNOU के 39वें दीक्षांत समारोह में 3.2 लाख विद्यार्थियों को मिली डिग्री, उपराष्ट्रपति ने किया संबोधन

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) के 39वें दीक्षांत समारोह में आज 3.2 लाख से अधिक विद्यार्थियों को डिग्री, डिप्लोमा और प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

उपराष्ट्रपति ने IGNOU की सराहना करते हुए इसे भारत की ओपन और डिस्टेंस लर्निंग प्रणाली का मजबूत स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने देशभर में उच्च शिक्षा की पहुंच को व्यापक बनाया है। वर्तमान में IGNOU में 14 लाख से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिनमें 56% महिलाएं और 58% ग्रामीण एवं वंचित वर्ग से हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों को आजीवन सीखने की भावना अपनाने, नैतिक मूल्यों को बनाए रखने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।

कोविड-19 महामारी का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि IGNOU ने अपनी डिजिटल शिक्षा प्रणाली के माध्यम से इस चुनौती का सफलतापूर्वक सामना किया। SWAYAM और e-GyanKosh जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए पढ़ाई बिना बाधा जारी रही।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) की सराहना करते हुए उन्होंने बताया कि IGNOU ने चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम और मल्टीपल एग्जिट ऑप्शन शुरू किए हैं, जिससे शिक्षा अधिक लचीली और छात्र-केंद्रित बनी है।

उपराष्ट्रपति ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी नई तकनीकों को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जैसे कंप्यूटर के आगमन से रोजगार के नए अवसर पैदा हुए, वैसे ही AI भी शिक्षा और विकास में नई संभावनाएं खोलेगा। हालांकि, उन्होंने इन तकनीकों के जिम्मेदार उपयोग पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसके नैतिक मूल्य हैं और आधुनिक विकास को परंपराओं के साथ संतुलित करना आवश्यक है।

कार्यक्रम के अंत में उपराष्ट्रपति ने डिजिलॉकर के माध्यम से प्रमाण पत्र जारी किए और IGNOU एलुमनाई पोर्टल का शुभारंभ किया, जिसमें 50 लाख से अधिक पंजीकरण हैं। साथ ही देशभर के क्षेत्रीय केंद्रों में SWAYAM प्रभा स्टूडियो का भी उद्घाटन किया गया।

इस अवसर पर दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू, IGNOU की कुलपति प्रो. उमा कंजीलाल सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि सभी के सामूहिक प्रयासों से ही 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।


​आरंग की गौरवगाथा पर आधारित डॉक्युमेंट्री फिल्म डिजिटल मीडिया पर हुई वायरल, मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों ने की सराहना

No comments Document Thumbnail

आरंग- ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी आरंग की समृद्ध विरासत और गौरवशाली इतिहास अब डिजिटल पर्दे पर जीवंत हो उठा है। स्वयंसेवी संस्था 'पीपला वेलफेयर फाउंडेशन' द्वारा आरंग की गौरवगाथा पर केंद्रित एक विशेष डॉक्युमेंट्री फिल्म का निर्माण किया गया है, जो इन दिनों विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो रही है। दर्शक इसे आरंग की धरोहर को समझने के लिए एक सशक्त माध्यम मान रहे हैं।

​ महोत्सव के दौरान मिली सराहना 

फाउंडेशन के सदस्यों ने बताया कि इस डॉक्युमेंट्री का विशेष फिल्मांकन 'राजा मोरध्वज आरंग महोत्सव-2026' के उपलक्ष्य में किया गया था। महोत्सव के दौरान प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब और मंत्रिमंडल के अन्य सदस्यों ने इस लघु फिल्म को देखा और इसकी गुणवत्ता व शोध की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। शासन-प्रशासन के स्तर पर मिली इस सराहना ने स्थानीय कलाकारों और संस्था के उत्साह को दोगुना कर दिया है।

​ अनुभवी टीम का मिला साथ 

इस डॉक्युमेंट्री की सबसे बड़ी विशेषता इसकी प्रभावी पटकथा और दमदार आवाज है। फिल्म की पटकथा पीपला वेलफेयर फाउंडेशन के संरक्षक और वरिष्ठ पत्रकार आनंदराम 'पत्रकारश्री' ने तैयार की है। डॉक्युमेंट्री को अपनी गंभीर और प्रभावशाली आवाज से आकाशवाणी व दूरदर्शन के वरिष्ठ उद्घोषक शशांक खरे ने सजाया है, जो दर्शकों को इतिहास के पन्नों से जोड़े रखती है।

​ तकनीकी पक्ष और टीम वर्क 

संयोजक महेंद्र कुमार पटेल की परिकल्पना पर आधारित इस फिल्म का बेहतरीन फिल्मांकन प्रतीक टोंड्रे द्वारा किया गया है, वहीं टिंकू चेलक ने आधुनिक वीडियो एडिटिंग के जरिए इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर का स्वरूप दिया है। संस्था के अध्यक्ष दूजेराम धीवर के कुशल संयोजन और प्रस्तुति के चलते यह प्रोजेक्ट समय पर और उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण हो सका।

वीडियो की मुख्य विशेषताएं: 

 ऐतिहासिक साक्ष्य: फिल्म में आरंग के प्राचीन मंदिरों, राजा मोरध्वज की कथा और पुरातात्विक महत्व के स्थलों को खूबसूरती से दर्शाया गया है।

​ सिनेमैटोग्राफी: ड्रोन शॉट्स और क्लोज-अप एंगल्स के माध्यम से आरंग की वास्तुकला को बारीकी से उकेरा गया है।

​ सांस्कृतिक धरोहर: यह फिल्म न केवल एक वीडियो है, बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए आरंग के इतिहास का एक डिजिटल दस्तावेज भी है।

​सोशल मीडिया पर इस फिल्म को मिल रहे हजारों व्यूज और शेयर यह दर्शाते हैं कि लोग अपनी जड़ों और क्षेत्रीय इतिहास को जानने के लिए कितने उत्सुक हैं। पीपला वेलफेयर फाउंडेशन की इस पहल को नगरवासियों ने आरंग के गौरव को विश्व पटल पर लाने वाला एक ऐतिहासिक कदम बताया है।

स्वदेशी तकनीक की जीत: भारत का PFBR रिएक्टर हुआ सफल

No comments Document Thumbnail

भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में, 500 मेगावाट (MWe) प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने 6 अप्रैल 2026 को रात 08:25 बजे सफलतापूर्वक पहली क्रिटिकलिटी (नियंत्रित विखंडन श्रृंखला अभिक्रिया की शुरुआत) हासिल की। यह देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और स्वदेशी परमाणु तकनीक को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

यह उपलब्धि डॉ. अजीत कुमार मोहंती (सचिव, परमाणु ऊर्जा विभाग एवं अध्यक्ष, परमाणु ऊर्जा आयोग), श्रीकुमार जी. पिल्लई (निदेशक, IGCAR), अल्लू अनंत (CMD-इन-चार्ज, BHAVINI) और  के.वी. सुरेश कुमार (पूर्व CMD, BHAVINI) की उपस्थिति में हासिल की गई। यह सभी मानकों को पूरा करने के बाद संभव हुआ, जिन्हें परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) ने कठोर सुरक्षा समीक्षा के बाद मंजूरी दी थी।

PFBR का डिजाइन और तकनीकी विकास पूरी तरह से इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR) द्वारा किया गया, जो परमाणु ऊर्जा विभाग का एक अनुसंधान केंद्र है। इसका निर्माण और संचालन भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (BHAVINI) द्वारा किया गया।

फास्ट ब्रीडर रिएक्टर भारत की दीर्घकालिक परमाणु रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। पारंपरिक रिएक्टरों के विपरीत, PFBR में यूरेनियम-प्लूटोनियम मिश्रित ऑक्साइड (MOX) ईंधन का उपयोग होता है। इसके कोर के चारों ओर यूरेनियम-238 की परत होती है, जो तेज न्यूट्रॉन की मदद से प्लूटोनियम-239 में परिवर्तित हो जाती है। इससे रिएक्टर जितना ईंधन उपयोग करता है, उससे अधिक उत्पन्न करने में सक्षम होता है।

इस रिएक्टर को भविष्य में थोरियम-232 के उपयोग के लिए भी डिजाइन किया गया है, जो परिवर्तित होकर यूरेनियम-233 बनेगा और भारत के परमाणु कार्यक्रम के तीसरे चरण को ऊर्जा प्रदान करेगा।

यह क्षमता देश के सीमित यूरेनियम संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करती है और भविष्य में थोरियम आधारित ऊर्जा उत्पादन का मार्ग प्रशस्त करती है।

पहली क्रिटिकलिटी हासिल करने के साथ ही भारत अपने तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को साकार करने के और करीब पहुंच गया है। फास्ट ब्रीडर तकनीक वर्तमान रिएक्टरों और भविष्य के थोरियम आधारित रिएक्टरों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी का काम करती है।

यह उपलब्धि भारत की स्वदेशी डिजाइन, इंजीनियरिंग और निर्माण क्षमता को दर्शाती है। इस रिएक्टर में उन्नत सुरक्षा प्रणाली, उच्च तापमान तरल सोडियम कूलिंग तकनीक और क्लोज्ड फ्यूल साइकिल का उपयोग किया गया है, जिससे परमाणु सामग्री का पुनर्चक्रण संभव होता है और अपशिष्ट कम होता है।

यह परियोजना वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, तकनीशियनों और उद्योग सहयोगियों के समर्पण का परिणाम है, जिन्होंने स्वदेशी तकनीकों और उपकरणों के माध्यम से इसका निर्माण किया। यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में देश की बढ़ती तकनीकी क्षमता को भी दर्शाता है।

ऊर्जा उत्पादन के अलावा, यह कार्यक्रम परमाणु ईंधन चक्र, उन्नत सामग्री, रिएक्टर भौतिकी और बड़े पैमाने की इंजीनियरिंग में देश की रणनीतिक क्षमता को मजबूत करता है।

जैसे-जैसे भारत स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है, फास्ट ब्रीडर रिएक्टर विश्वसनीय, कम-कार्बन और उच्च दक्षता वाली ऊर्जा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

पहली क्रिटिकलिटी की यह उपलब्धि न केवल एक तकनीकी मील का पत्थर है, बल्कि “विकसित भारत” के लिए एक सतत और आत्मनिर्भर ऊर्जा भविष्य की दिशा में बड़ा कदम भी है।


लोणार में योग महोत्सव 2026: 5000 लोगों ने रचा इतिहास, त्रिकोणासन बना रिकॉर्ड

No comments Document Thumbnail

आयुष मंत्रालय के अंतर्गत मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (MDNIY) ने महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के लोणार स्थित छत्रपति श्री शिवाजी महाराज उद्यान में आज योग महोत्सव–2026 का आयोजन किया। यह कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हुआ, क्योंकि इसने त्रिकोणासन करने वाले सबसे बड़े समूह के रूप में एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में स्थान प्राप्त किया।

लगभग 5,000 प्रतिभागियों ने सुबह एकत्र होकर कॉमन योग प्रोटोकॉल (CYP) का अभ्यास किया, जिससे ऐतिहासिक नगर लोणार सामूहिक स्वास्थ्य और ऊर्जा का केंद्र बन गया। इस बड़े स्तर की भागीदारी ने यह दर्शाया कि योग आज विश्वभर में एकता, स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देने का सशक्त माध्यम बन चुका है।

आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने इस आयोजन को “अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (IDY) 2026 के 75-दिवसीय काउंटडाउन की मजबूत शुरुआत” बताया। उन्होंने कहा कि भू-वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण लोणार में यह आयोजन वैश्विक स्तर पर समग्र स्वास्थ्य और संतुलन के प्रति जागरूकता का प्रतीक है। उन्होंने योग के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक संतुलन को मजबूत करता है।

रिकॉर्ड बनाने वाले त्रिकोणासन प्रदर्शन पर प्रकाश डालते हुए मंत्री जाधव ने कहा कि यह उपलब्धि योग की सामूहिकता और साझा स्वास्थ्य की भावना को दर्शाती है। उन्होंने आयुष आहार के महत्व पर भी जोर दिया और बाजरा, रागी, नारियल तेल तथा औषधीय मसालों जैसे पारंपरिक खाद्य पदार्थों को रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में उपयोगी बताया।

आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव मोनालिसा दास ने कहा कि योग भारत का विश्व को दिया गया एक अनमोल उपहार है, जो मन, शरीर और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करता है।

कार्यक्रम में MDNIY के निदेशक प्रो. (डॉ.) काशीनाथ समगांडी के नेतृत्व में कॉमन योग प्रोटोकॉल का लाइव प्रदर्शन हुआ, जिसमें योगासन, प्राणायाम और ध्यान शामिल थे, जिससे प्रतिभागियों को योग के व्यापक लाभों का अनुभव हुआ।

योग महोत्सव–2026 में आयुष मंत्रालय की कई प्रमुख पहलों को भी प्रदर्शित किया गया, जैसे:

  • “योग फॉर एयर ट्रैवल” प्रोटोकॉल

  • “गैर-संचारी रोगों के लिए 10 योग प्रोटोकॉल”

  • योग 365 अभियान (दैनिक जीवन में योग को शामिल करने हेतु)

इसके साथ ही 1800-315-7008 टोल-फ्री हेल्पलाइन की जानकारी दी गई, जो 14 दिनों तक मुफ्त योग मार्गदर्शन प्रदान करती है।

यह कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (IDY) 2026 के 12वें संस्करण के लिए 75-दिवसीय काउंटडाउन की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक रहा। इसमें आयुष मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, जिला प्रशासन के प्रतिनिधि और अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

पिछले 11 वर्षों में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस विश्व का सबसे बड़ा स्वास्थ्य आंदोलन बन चुका है, जिसमें हर वर्ष अंतरराष्ट्रीय भागीदारी बढ़ रही है। आने वाला 12वां संस्करण गैर-संचारी रोगों, वृद्धजन स्वास्थ्य और योग के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के समन्वय पर केंद्रित होगा।

आयुष मंत्रालय ने जन भागीदारी के माध्यम से योग को जन आंदोलन बनाने और IDY 2026 से पहले देश-विदेश में अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।


नौकरी दिलाने के नाम पर 22.70 लाख की ठगी, कृषि मंत्री का बहनोई बनकर ठगा

No comments Document Thumbnail

 रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर बड़ी ठगी का मामला सामने आया है। आरोपी ने खुद को प्रदेश के कृषि मंत्री रामविचार नेताम का बहनोई बताकर चार लोगों से कुल 22 लाख 70 हजार रुपए की ठगी कर ली। मामले में सिटी कोतवाली थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।


क्या है पूरा मामला?

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, रामभांठा निवासी समारू राम टंडन (51) अप्रैल 2025 में रायपुर गया था। जयस्तंभ चौक के पास उसकी मुलाकात महासमुंद जिले के ग्राम भद्ररसी निवासी राम ठाकुर (60) और उसकी पत्नी सोहद्रा बाई ठाकुर (55) से हुई। बातचीत के दौरान आरोपी ने खुद को कृषि मंत्री का बहनोई बताते हुए मंत्रालय में मजबूत पकड़ होने का दावा किया।

नौकरी का झांसा देकर ठगी

आरोपी ने मंत्रालय में डेटा एंट्री ऑपरेटर की नौकरी दिलाने का लालच दिया। इस पर समारू ने अपने बेटे का बायोडाटा आरोपी को भेजा। बाद में आरोपी ने नौकरी लगवाने के लिए 5 लाख रुपए की मांग की।

समारू ने अपने परिचितों—पिंटू लहरे, राजेश साहू और सुशील चौहान—को भी इसकी जानकारी दी। सभी ने अपने-अपने बच्चों की नौकरी के लिए बायोडाटा आरोपी को सौंप दिया।

कैश और ऑनलाइन ली रकम

कुछ दिनों बाद आरोपी रायगढ़ पहुंचा, जहां समारू ने अपने बेटे की नौकरी के लिए 4 लाख रुपए नकद दिए। इसके अलावा बाकी रकम ऑनलाइन (Paytm) के माध्यम से ट्रांसफर की गई। कुल मिलाकर आरोपियों को 9 लाख 92 हजार 500 रुपए ऑनलाइन भेजे गए।

फर्जी अपॉइंटमेंट लेटर देकर गुमराह

पैसे लेने के बाद आरोपी ने सभी पीड़ितों को अपने घर बुलाकर फर्जी नियुक्ति पत्र सौंप दिया। इसके बाद जॉइनिंग के नाम पर लगातार टालमटोल करता रहा। काफी समय बीतने के बावजूद नौकरी नहीं मिलने पर पीड़ितों को ठगी का अहसास हुआ।

पुलिस जांच में जुटी

पीड़ित की शिकायत पर सिटी कोतवाली थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आरोपी दंपती की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

बस्तर 2.0 की शुरुआत: मुख्यमंत्री साय ने पीएम मोदी को दिया आमंत्रण, विकास का ब्लूप्रिंट सौंपा

No comments Document Thumbnail

बस्तर के लिए 360° प्लान-टूरिज्म, स्टार्टअप, इंफ्रा और इनोवेशन पर फोकस

पीएम का बस्तर दौरा बनेगा टर्निंग पॉइंट, बड़े प्रोजेक्ट्स की सौगात

नई दिल्ली- छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर बस्तर के भविष्य की एक नई तस्वीर पेश की। इस मुलाकात में मुख्यमंत्री ने न केवल नक्सलवाद के अंत के बाद प्रदेश में आई शांति के लिए प्रधानमंत्री का आभार जताया, बल्कि बस्तर के समग्र विकास का एक विस्तृत और दूरदर्शी ब्लूप्रिंट भी सौंपा। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री को मानसून के बाद बस्तर आने का आमंत्रण दिया, जहां उनकी मौजूदगी में कई बड़ी परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण प्रस्तावित है।

उन्होंने बताया कि बस्तर समेत पूरे राज्य में नक्सलवाद समाप्त हो चुका है और अब शांति स्थापित है। शिक्षा व स्वास्थ्य सुधार के तहत नए एजुकेशन सिटी, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज बनाए जा रहे हैं, जबकि इंद्रावती नदी पर बैराज, रेल लाइन और एयरपोर्ट विस्तार से कनेक्टिविटी मजबूत हो रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस ब्लूप्रिंट के जरिए बस्तर में अब विकास, रोजगार और बेहतर सुविधाओं का नया दौर शुरू होगा।

मुख्यमंत्री ने अपने विकास दस्तावेज़ में उल्लेख किया कि एक दशक पहले प्रधानमंत्री द्वारा बस्तर के लिए देखा गया शांति और विकास का सपना अब जमीन पर साकार हो रहा है। नक्सलवाद खत्म होने के बाद अब लोगों में डर नहीं, बल्कि उम्मीद और विकास की नई चमक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन से बस्तर को नई दिशा और गति मिलेगी, जिससे क्षेत्र में विश्वास और उत्साह बढ़ेगा।

मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तुत विकास ब्लूप्रिंट ‘सैचुरेशन, कनेक्ट, फैसिलिटेट, एम्पावर और एंगेज’ रणनीति पर आधारित है। इसके तहत बस्तर में बुनियादी सुविधाओं को तेजी से विस्तार देने का लक्ष्य रखा गया है। सड़कों के व्यापक जाल के माध्यम से दूर-दराज के गांवों को जोड़ा जाएगा। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अधूरे कार्यों को 2027 तक पूरा करने के साथ-साथ नई 228 सड़कों और 267 पुलों का निर्माण प्रस्तावित है। इसके अलावा 61 नई परियोजनाओं के लिए विशेष केंद्रीय सहायता की मांग भी की गई है।

ऊर्जा और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में भी बड़े बदलाव की योजना है। हर घर तक बिजली पहुंचाने के कार्य तेज होंगे। शिक्षा के क्षेत्र में 45 पोटा केबिन स्कूलों को स्थायी भवनों में बदला जाएगा। युवाओं के लिए 15 स्टेडियम और 2 मल्टीपर्पज हॉल बनाए जाएंगे, जबकि स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का विस्तार और डॉक्टरों के लिए ट्रांजिट हॉस्टल बनाए जा रहे हैं।

कृषि और सिंचाई के क्षेत्र में इंद्रावती नदी पर दो बड़े प्रोजेक्ट देउरगांव और मटनार में स्वीकृत किए गए हैं, जिनसे 31,840 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। यह परियोजनाएं बस्तर की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगी।

आजीविका और आय बढ़ाने के लिए सरकार ने तीन वर्षीय योजना तैयार की है, जिसका लक्ष्य 2029 तक 85% परिवारों की मासिक आय 15,000 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये करना है। ‘नियद नेल्ला नार 2.0’ योजना के तहत अब अधिक जिलों को जोड़ा जा रहा है, जिससे विकास का लाभ व्यापक स्तर पर पहुंचेगा। 10 जिलों में शुरू की गई यह योजना अब 7 जिलों और 3 नए जिलों (गरियाबंद, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई) तक विस्तारित हो रही है।

‘अंजोर विजन 2047’ और ‘विकसित भारत@2047’ के तहत स्टार्टअप नीति भी लागू की गई है, जिसमें 2030 तक 5,000 स्टार्टअप तैयार करने का लक्ष्य है।

पर्यटन के क्षेत्र में बस्तर की पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की दिशा में भी तेजी से काम हो रहा है। चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी नेशनल पार्क, एडवेंचर टूरिज्म, कैनोपी वॉक और ग्लास ब्रिज जैसी परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं। बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजन क्षेत्र को नई पहचान दे रहे हैं। वहीं, एक लाख से अधिक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिनमें से 40 हजार को रोजगार भी मिल चुका है।नक्सलवाद से मुक्त बस्तर के विकास के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज प्रधानमंत्री के सामने जो कार्ययोजना प्रस्तुत की, उसमें ‘बस्तर मुन्ने’ (अग्रणी बस्तर) कार्यक्रम एक अहम पहल है। इस कार्यक्रम के तहत हर ग्राम पंचायत में शिविर लगाए जाएंगे, जहाँ अधिकारियों की मौजूदगी में लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे दिया जाएगा, जरूरी दस्तावेज वहीं बनाए जाएंगे और उनकी समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया जाएगा। इसका उद्देश्य है कि हर व्यक्ति तक सरकार की योजनाएँ आसानी से पहुँचें और बस्तर तेजी से विकास की राह पर आगे बढ़े।

प्रधानमंत्री के प्रस्तावित दौरे के दौरान जिन प्रमुख परियोजनाओं के शिलान्यास और लोकार्पण की योजना है, उनमें रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन, जगदलपुर एयरपोर्ट का विस्तार, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, दंतेवाड़ा में मेडिकल कॉलेज, जगरगुंडा और ओरछा में एजुकेशन सिटी जैसी महत्वपूर्ण पहल शामिल हैं। ये परियोजनाएं बस्तर को शिक्षा, स्वास्थ्य और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगी।

हाई-प्रोफाइल जुआ अड्डे पर पुलिस का छापा, मर्सिडीज कार समेत ₹6.34 लाख नगद जब्त, दो आरोपी गिरफ्तार

No comments Document Thumbnail

 रायपुर। रायपुर ग्रामीण पुलिस ने अवैध जुआ के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए अभनपुर थाना क्षेत्र में संचालित एक हाई-प्रोफाइल जुआ अड्डे का भंडाफोड़ किया है। खेतों के बीच चल रहे इस जुआ अड्डे पर पुलिस ने दबिश देकर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया, जबकि अन्य कई आरोपी मौके से फरार हो गए।


पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुखबिर से सूचना मिली थी कि रायपुर और धमतरी जिले की सीमा पर स्थित ग्राम टोकरो के पास कुछ लोग बड़े पैमाने पर जुआ खेल रहे हैं। सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर डीएसपी नवा रायपुर के नेतृत्व में अभनपुर थाना पुलिस ने टीम गठित कर मौके पर छापा मारा।

पुलिस को देखते ही जुआ खेल रहे लोगों में भगदड़ मच गई और वे अंधेरे का फायदा उठाकर भागने लगे। पुलिस ने त्वरित घेराबंदी कर दो आरोपियों को पकड़ लिया।

गिरफ्तार आरोपी

राहुल सिंह (34 वर्ष), निवासी सेक्टर-10, भिलाई
रितेश कुमार (36 वर्ष), निवासी आनंद विहार, तेलीबांधा, रायपुर

जब्त सामग्री

नगद राशि – ₹6,34,000
मर्सिडीज कार (क्रमांक CG 07 CU 9944)
दो आईफोन
ताश की गड्डी

पुलिस के अनुसार, जब्त की गई कुल सामग्री की अनुमानित कीमत करीब 42.14 लाख रुपये है।

फरार आरोपियों की पहचान कर उनकी तलाश जारी है। गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

भिलाई प्लांट में भीषण हादसा: टरबाइन में आग, जान बचाकर भागे कर्मचारी

No comments Document Thumbnail

 भिलाई। Steel Authority of India Limited के अंतर्गत आने वाले भिलाई इस्पात संयंत्र में मंगलवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब पावर प्लांट के टरबाइन सेक्शन में अचानक आग लग गई। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में धुआं फैल गया और कर्मचारियों में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।


जानकारी के अनुसार, यह हादसा प्लांट के पीबीएस-2 यूनिट में सुबह करीब 10 बजे हुआ। टरबाइन में आग भड़कते ही वहां मौजूद कर्मचारी अपनी जान बचाने के लिए तुरंत बाहर की ओर भागे। स्थिति को देखते हुए संयंत्र परिसर में कुछ देर के लिए भगदड़ जैसे हालात बन गए।

घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और आग बुझाने का काम शुरू किया गया। राहत एवं बचाव कार्य में बाधा न आए, इसके लिए आसपास के रास्तों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया।

प्राथमिक जानकारी के मुताबिक, हादसे में किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है, जो एक राहत की बात है। हालांकि एहतियात के तौर पर पूरे क्षेत्र को खाली करा लिया गया और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

मौके पर प्रशासन और संयंत्र प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद हैं। आग लगने के कारणों का फिलहाल पता नहीं चल सका है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

यह घटना एक बार फिर औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करती है।

छत्तीसगढ़ में RTE पर सख्ती: निजी स्कूलों को चेतावनी, दाखिला न देने पर मान्यता होगी रद्द

No comments Document Thumbnail

 रायपुर : छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अधिकार को लेकर सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि आरटीई के तहत गरीब और वंचित बच्चों को प्रवेश देने से इनकार करने वाले निजी स्कूलों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।


 RTE के तहत अनिवार्य 25% आरक्षण

सरकार ने दोहराया है कि Right to Education Act 2009 के तहत निजी स्कूलों की प्रारंभिक कक्षाओं में 25% सीटें आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित करना अनिवार्य है। इस नियम का पालन न करने पर स्कूलों की मान्यता तक रद्द की जा सकती है।

 लाखों बच्चों को मिल रहा लाभ

राज्य के 6,862 निजी स्कूलों में वर्तमान में 3.63 लाख से अधिक बच्चे RTE के तहत पढ़ाई कर रहे हैं। वहीं इस साल कक्षा पहली में करीब 22 हजार सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया जारी है।

 पारदर्शी प्रतिपूर्ति व्यवस्था

सरकार निजी स्कूलों को प्रति छात्र के हिसाब से प्रतिपूर्ति राशि देती है—

कक्षा 1 से 5: ₹7,000 प्रति वर्ष
कक्षा 6 से 8: ₹11,400 प्रति वर्ष

यह राशि स्कूल की फीस या निर्धारित खर्च के आधार पर तय होती है और अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर मानी जा रही है।

 नियम तोड़ने पर कड़ी कार्रवाई

शिक्षा विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि-

RTE के तहत प्रवेश से इनकार
प्रवेश प्रक्रिया में बाधा
भ्रामक जानकारी फैलाना

इन सभी मामलों में संबंधित स्कूलों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसमें मान्यता रद्द करना भी शामिल है।

CG NEWS : महादेव के बाद ‘सांई सट्टा ऐप’ का भंडाफोड़, IPL शुरू होते ही सक्रिय हुआ हाईटेक रैकेट

No comments Document Thumbnail

 राजनांदगांव। आईपीएल सीजन शुरू होते ही ऑनलाइन सट्टेबाजी का नेटवर्क फिर सक्रिय हो गया है। महादेव सट्टा ऐप मामले के बाद अब राजनांदगांव पुलिस ने ‘सांई सट्टा ऐप’ के जरिए चल रहे एक हाईटेक सट्टा रैकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने सोमवार को एक फार्महाउस में छापेमारी कर इस अवैध कारोबार का खुलासा करते हुए 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया, जबकि 2 आरोपी फरार हैं।


कोड वर्ड में चलता था सट्टा

पुलिस को मिली गोपनीय सूचना के आधार पर कार्रवाई की गई। जांच में सामने आया कि आरोपी ‘सांई ऐप’ के जरिए आईपीएल मैचों में हर बॉल और हर ओवर पर लाखों रुपये का दांव लगा रहे थे। सट्टे का पूरा हिसाब कोड वर्ड में लिखा जाता था और नेटवर्क मोबाइल, लैपटॉप व अन्य डिजिटल उपकरणों के माध्यम से संचालित किया जा रहा था।

मौके से भारी सामग्री जब्त

छापेमारी के दौरान पुलिस ने 2 लैपटॉप, 1 टैबलेट, 7 मोबाइल फोन, 1 मोटरसाइकिल, 3 चार्जर और 1,000 रुपये नकद बरामद किए। सट्टा-पट्टी में करीब 9 लाख 20 हजार रुपये के लेन-देन का हिसाब मिला है। जब्त सामग्री की कुल अनुमानित कीमत लगभग 5 लाख 50 हजार रुपये आंकी गई है।

ये आरोपी हुए गिरफ्तार

कार्रवाई में वीरू प्रजापति, रूपेश पाण्डे, आयुष मेश्राम, मोहित देवांगन और लक्की देवांगन को गिरफ्तार किया गया है।
वहीं, मूलचंद देवांगन और नागपुर निवासी सादिक खान फरार बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश जारी है।

कड़े कानून के तहत मामला दर्ज

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम 2022 की धारा 6, 7 और 8, भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) व 112 (संगठित अपराध) तथा आईटी एक्ट की धारा 66(डी) के तहत मामला दर्ज किया है। गिरफ्तार आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।

निगरानी बढ़ाई गई

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आईपीएल के दौरान ऑनलाइन सट्टा रैकेट तेजी से सक्रिय हो जाते हैं। इसे देखते हुए जिले में विशेष निगरानी रखी जा रही है और ऐसे अवैध नेटवर्क के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी रहेगी।

मैरिज हॉल में चल रहा था गंदा खेल! छापे में 80 युवक-युवतियां संदिग्ध हालत में पकड़े गए

No comments Document Thumbnail

 रोहतास (बिहार)। जिले के दावथ थाना क्षेत्र में स्थित मालियाबाग के एक निजी मैरिज हॉल में प्रशासन की छापेमारी से हड़कंप मच गया। संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए करीब 75 से अधिक युवक-युवतियों को संदिग्ध और आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ा है।


यह कार्रवाई शुक्रवार को बिक्रमगंज के एसडीएम प्रभात कुमार के नेतृत्व में की गई। जैसे ही टीम मौके पर पहुंची, वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया और कई युवक-युवतियां भागने लगे, लेकिन पुलिस ने घेराबंदी कर उन्हें पकड़ लिया।

पहले से मिल रही थी सूचना

प्रशासन को लगातार शिकायत मिल रही थी कि मैरिज हॉल की आड़ में अवैध गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। बताया जा रहा है कि संचालक द्वारा प्रेमी-प्रेमिकाओं और अन्य लोगों को कुछ समय के लिए कमरे उपलब्ध कराए जाते थे। इसी आधार पर टीम ने योजनाबद्ध तरीके से छापा मारा।

महिलाओं की संख्या भी ज्यादा

पुलिस के अनुसार पकड़े गए लोगों में 40 से अधिक युवतियां शामिल हैं, जिनमें कई शादीशुदा महिलाएं भी बताई जा रही हैं। मौके से कुछ संदिग्ध सामान भी बरामद किया गया है, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।

जांच जारी, सख्त कार्रवाई के संकेत

एसडीएम प्रभात कुमार ने बताया कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति इस तरह की अवैध गतिविधियों में संलिप्त पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, एसडीपीओ सिंधु शेखर सिंह ने कहा कि अनैतिक गतिविधियों की सूचना के आधार पर यह कार्रवाई की गई है और मामले की जांच जारी है।

कर्मचारी भी हिरासत में

छापेमारी के दौरान स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल बुलाना पड़ा। पुलिस ने मैरिज हॉल के कुछ कर्मचारियों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।

इस घटना के सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चा का माहौल है। लोगों का कहना है कि जहां सामाजिक और पारिवारिक कार्यक्रम होने चाहिए, वहां इस तरह की गतिविधियां चिंताजनक हैं।

भारत में विमानन सुरक्षा को मिलेगा नया बल, BCAS और RRU के बीच समझौता

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- भारत में विमानन सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) और राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (RRU) ने एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत देश में पहली बार फुल बॉडी स्कैनर (FBS) और अन्य सुरक्षा उपकरणों के परीक्षण व प्रमाणन के लिए स्वदेशी टेस्टिंग सेंटर स्थापित किया जाएगा।

✈️ क्या है इस समझौते की खासियत?

इस MoU के तहत:

  • एयरपोर्ट सुरक्षा उपकरणों का टेस्टिंग, मूल्यांकन और प्रमाणन भारत में ही होगा

  • फुल बॉडी स्कैनर सहित अन्य उपकरणों की वैज्ञानिक जांच की जाएगी

  • OEM कंपनियों द्वारा दिए गए उपकरणों की स्वतंत्र जांच रिपोर्ट तैयार होगी

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम

नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरापु ने कहा कि यह पहल:

  • “आत्मनिर्भर भारत और आत्म-सुरक्षित भारत” की दिशा में अहम कदम है

  • भारत को वैश्विक एविएशन सिक्योरिटी हब बनाने में मदद करेगी

उन्होंने जोर दिया कि अब भारत को विदेशी प्रमाणन पर निर्भर रहने के बजाय अपने मानक विकसित करने चाहिए।

🏫 RRU की भूमिका

राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (RRU):

  • अत्याधुनिक टेस्टिंग लैब स्थापित करेगा

  • वैश्विक मानकों के अनुसार उपकरणों का परीक्षण करेगा

  • प्रशिक्षण, रिसर्च और क्षमता निर्माण कार्यक्रम चलाएगा

🔬 रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा

यह साझेदारी:

  • नई सुरक्षा तकनीकों पर शोध को बढ़ावा देगी

  • टेस्टिंग और प्रमाणन प्रक्रियाओं को बेहतर बनाएगी

  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी मजबूत करेगी

📊 तेजी से बढ़ता एविएशन सेक्टर

मंत्री ने बताया कि:

  • 2014 में 74 एयरपोर्ट → अब 165

  • हर घंटे 250–300 फ्लाइट मूवमेंट

  • 40–45 हजार यात्री प्रति घंटा

  • कार्गो में 50% वृद्धि

इस तेजी से बढ़ते क्षेत्र में उच्च स्तर की सुरक्षा बेहद जरूरी है।

🔚 निष्कर्ष

BCAS और RRU के बीच यह समझौता भारत के विमानन सुरक्षा ढांचे को और मजबूत करेगा। यह पहल न केवल सुरक्षा मानकों को ऊंचा करेगी, बल्कि भारत को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भी बनाएगी।

भारत-यूके सहयोग से EV चार्जिंग में बड़ी पहल, उन्नत तकनीक से बनेगा स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली: भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के तहत टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (TDB) ने Scharge Pvt Limited के साथ “Powering EV Charging Innovation” परियोजना के लिए समझौता किया है। यह परियोजना भारत-यूके संयुक्त अनुसंधान कार्यक्रम के तहत चलाई जा रही है, जिसमें ब्रिटेन की Albright Product Design Limited भी भागीदार है।

⚡ EV चार्जिंग में नई तकनीक

इस परियोजना का उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के लिए अगली पीढ़ी की चार्जिंग प्रणाली विकसित करना है, खासकर:

  • कमर्शियल फ्लीट

  • डिपो ऑपरेशन्स

के लिए।

इसमें Scharge द्वारा विकसित स्मार्ट चार्ज कंट्रोलर और यूके पार्टनर की पेटेंटेड ऑटोमैटेड केबल मैनेजमेंट सिस्टम को जोड़ा जाएगा।

🚗 क्या है खास?

नई तकनीक में:

  • मोटराइज्ड ओवरहेड केबल मैनेजमेंट सिस्टम

  • कम मैन्युअल काम

  • केबल की कम टूट-फूट

  • बेहतर सुरक्षा और सुविधा

जैसी विशेषताएं शामिल हैं।

यह सिस्टम मौजूदा AC Type-2 EV चार्जर्स के साथ भी काम करेगा।

🏭 डिपो में काम होगा आसान

इस समाधान से:

  • चार्जिंग समय कम होगा

  • उपकरण सुरक्षित रहेंगे

  • कार्य प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी

साथ ही केबल डैमेज और अन्य जोखिमों को भी कम किया जा सकेगा।

स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा

Scharge Pvt Limited इस परियोजना के जरिए:

  • भारत में EV तकनीक को मजबूत करेगा

  • स्मार्ट चार्जिंग सिस्टम विकसित करेगा

  • टिकाऊ और बड़े स्तर पर उपयोगी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करेगा

क्या बोले अधिकारी?

TDB के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा कि भारत-यूके जैसे सहयोगी कार्यक्रम नई और उपयोगी तकनीकों के विकास में अहम भूमिका निभाते हैं। EV चार्जिंग में नवाचार, देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने के लिए जरूरी है।

निष्कर्ष

यह परियोजना भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को नई गति देगी। उन्नत तकनीक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए देश में सुरक्षित, स्मार्ट और भविष्य के लिए तैयार EV चार्जिंग सिस्टम विकसित किया जाएगा।

© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.