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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मेधावी विद्यार्थियों का किया सम्मान

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समर्पण, अनुशासन और निरंतर परिश्रम से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

राज्य एवं जिला स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों से किया आत्मीय संवाद, उज्ज्वल भविष्य के लिए दी शुभकामनाएं

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज सक्ती जिला कार्यालय में आयोजित मेधावी विद्यार्थी सम्मान समारोह में राज्य एवं जिला स्तर पर बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं का सम्मान किया। मुख्यमंत्री साय ने विद्यार्थियों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं तथा उन्हें जीवन में निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

मुख्यमंत्री साय ने विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद करते हुए उनके भविष्य के लक्ष्य, करियर की योजनाओं और रुचियों की जानकारी ली। विद्यार्थियों ने कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, चार्टर्ड अकाउंटेंट, डॉक्टर सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाने की इच्छा व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने उनके आत्मविश्वास और ऊँचे सपनों की सराहना करते हुए कहा कि समर्पण, अनुशासन, निरंतर अध्ययन और कठिन परिश्रम ही सफलता की वास्तविक कुंजी हैं। उन्होंने कहा कि जो विद्यार्थी बड़े लक्ष्य निर्धारित करते हैं और पूरी निष्ठा से उन्हें प्राप्त करने का प्रयास करते हैं, सफलता स्वयं उनके कदम चूमती है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक संसाधनों और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है। हमारा प्रयास है कि छत्तीसगढ़ का प्रत्येक विद्यार्थी अपनी प्रतिभा के अनुरूप आगे बढ़े और राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाए। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों, सामाजिक संवेदनशीलता और राष्ट्रसेवा की भावना को भी अपने जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज सम्मानित हुए विद्यार्थी केवल अपने परिवार का ही नहीं, बल्कि पूरे जिले और प्रदेश का गौरव हैं। उनकी सफलता अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बनेगी और उत्कृष्टता की नई संस्कृति को आगे बढ़ाएगी।

इस अवसर पर प्रभारी मंत्री गुरु खुशवंत साहब, सांसद कमलेश जांगड़े सहित अन्य जनप्रतिनिधि, कलेक्टर अमृत विकास तोपनो, पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर सहित अन्य अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

प्रदेश में मानसून के दस्तक के साथ ही खेती-किसानी में तेजी

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राज्य में 4.77 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में लक्ष्य का 10 प्रतिशत बोनी पूर्ण

इस खरीफ सीजन में 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का है लक्ष्य

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश: किसानों को उनकी मांग के अनुरूप सुगमता से मिले खाद-बीज

किसानों को 7.28 लाख मीट्रिक टन खाद और 3.09 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरित

प्रदेश में अब तक 96.4 मि.मी. औसत वर्षा दर्जः राज्य की औसत वार्षिक वर्षा 1246.3 मिमी

रायपुर- प्रदेश में मानसून के दस्तक के साथ ही खेती किसानी का कार्य तेजी के साथ शुरू हो गया है। राज्य में अब तक 4.77 लाख हेक्टेयर क्षेत्रों में लक्ष्य का 10 प्रतिशत बोनी हो चुकी है। इस खरीफ सीजन में 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किसानों को खेती-किसानी में सहुलियतें प्रदान करने के लिए सभी आवश्यक सहयोग करने संबंधित अधिकारियों निर्देशित किए गए हैं। उन्होंने किसानों को उनकी मांग के अनुसार सुगमता के साथ प्रमाणित खाद-बीज का वितरण करने को कहा हैं। खाद-बीज वितरण व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही पर कड़ी कार्यवाही करने के भी निर्देश दिए हैं। साथ ही सोसायटियों में पर्याप्त खाद-बीज का भण्डारण कर सतत निगरानी करने को कहा है। कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा इन पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है। 

प्रदेश के किसानों को अब तक 7.28 लाख मीट्रिक टन खाद और 3.09 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का वितरण किया जा चुका है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में मानसून की बौछारों के साथ शुरू हुए खेती-किसानी में बोनी का रकबा भी निरंतर बढ़ते जा रहा है। राज्य में अब तक 7.28 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न फसलों जैसे धान, मक्का, कोदो, कुटकी, अरहर, मूंग, मूंगफली, रामतिल आदि की बोनी हो चुकी है, जो लक्ष्य का 10 प्रतिशत है। इस खरीफ सीजन में राज्य सरकार ने 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य रखा है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि 02 जुलाई 2026 की स्थिति में प्रदेश में अब तक 96.4 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई है, जबकि प्रदेश की औसत वार्षिक वर्षा 1246.3 मिमी है।  

अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष खरीफ 2026 के लिए बीज निगम द्वारा प्रदेश में 4.95 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरण का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से 4.30 लाख क्विंटल बीज का भंडारण कर अब तक 3.09 लाख क्विंटल बीज का वितरण किसानों को किया जा चुका है, जो मांग का 62 प्रतिशत है। गत वर्ष इसी अवधि में 2.67 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का वितरण किया गया था। इसी प्रकार प्रदेश में इस खरीफ सीजन में 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उक्त लक्ष्य के विरूद्ध 13.16 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का सहकारी एवं निजी क्षेत्रों में भंडारण किया गया है। उक्त भंडारण के विरूद्ध 7.28 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किसानों को किया जा चुका है, जो लक्ष्य का 47 प्रतिशत है।   

अधिकारियों बताया कि राज्य सरकार किसानों को खेती-किसानी में सहूलियते हो इस उद्देश्य से किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से अल्प कालीन कृषि ऋण उपलब्ध करा रहे है। खरीफ सीजन 2026 के लिए 30 जून की स्थिति में 5525 करोड़ रूपए का ऋण वितरण किया है, जबकि गत वर्ष इसी अवधि में 4517 करोड़ रूपए का ऋण वितरण किया गया था। इस वर्ष किसानों को 8800 करोड़ रूपए ऋण वितरण का लक्ष्य रखा गया है।

बेंगलुरु डे-केयर सेंटर में बच्चों के साथ कथित दुर्व्यवहार से देश स्तब्ध, पुलिस जांच में जुटी

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बेंगलुरु- बेंगलुरु के एक डे-केयर सेंटर में छोटे बच्चों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला सामने आने के बाद पूरे देश में चिंता और आक्रोश का माहौल है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और डे-केयर सेंटर के संचालन व कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, डे-केयर सेंटर में मासूम बच्चों के साथ कथित रूप से अमानवीय व्यवहार किए जाने के आरोप लगे हैं। घटना सामने आने के बाद अभिभावकों में भारी नाराजगी है और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

इस मामले ने देशभर में डे-केयर और चाइल्डकेयर केंद्रों की निगरानी तथा सुरक्षा मानकों को और सख्त बनाने की मांग तेज कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे संस्थानों में नियमित निरीक्षण, प्रशिक्षित स्टाफ और प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक है ताकि बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो।

पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और जांच के आधार पर दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

भारत-जापान साझेदारी को नई मजबूती, 2036 तक 10 ट्रिलियन येन निवेश का लक्ष्य

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नई दिल्ली- भारत और जापान के बीच आर्थिक एवं रणनीतिक साझेदारी को नई गति मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत का लक्ष्य वर्ष 2036 तक जापान से 10 ट्रिलियन येन (लगभग 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक) का निवेश आकर्षित करना है। साथ ही, भारत में कार्यरत जापानी कंपनियों की संख्या को भी दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है।

दोनों देशों के बीच कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ऊर्जा, धातु उद्योग और रक्षा सहयोग सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इन समझौतों का उद्देश्य तकनीकी सहयोग बढ़ाना, निवेश को प्रोत्साहित करना और दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को और मजबूत बनाना है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और जापान की साझेदारी केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नवाचार, आधुनिक तकनीक, सतत विकास और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन समझौतों से भारत में निवेश, रोजगार सृजन, अत्याधुनिक तकनीक के विकास और विनिर्माण क्षेत्र को नई गति मिलेगी, जिससे 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को हासिल करने में भी मदद मिलेगी।

शराब के लिए पैसे मांग रहा था बेटा, मां-भाई ने गला दबाकर की हत्या… आत्महत्या दिखाने फंदे पर लटकाया शव

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 धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले से रिश्तों को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। शराब पीने के लिए पैसे मांगने और आए दिन घर में विवाद करने से परेशान मां और छोटे भाई ने मिलकर युवक की हत्या कर दी। वारदात को छिपाने के लिए आरोपियों ने इसे आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पूरे मामले का खुलासा कर दिया। पुलिस ने आरोपी मां और भाई को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।


शराब के पैसे को लेकर हुआ विवाद

मामला Kurud थाना क्षेत्र के बिरेझर चौकी अंतर्गत ग्राम गोजी का है। पुलिस के मुताबिक 23 वर्षीय नरसिंग साहू 29 जून को शराब पीने के लिए अपनी मां कमला बाई और छोटे भाई नरेश साहू से पैसे मांग रहा था। पैसे नहीं देने पर उसने दोनों के साथ गाली-गलौज शुरू कर दी और मारपीट पर उतारू हो गया।

गुस्से में मां-भाई ने ले ली जान

बताया जा रहा है कि युवक की हरकतों से परेशान मां और छोटे भाई ने गुस्से में आकर रस्सी से उसका गला दबा दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

हत्या को आत्महत्या दिखाने की साजिश

वारदात के बाद दोनों आरोपियों ने हत्या को आत्महत्या साबित करने की कोशिश की। पहले युवक को अधमरा समझकर कीटनाशक पिलाया गया, फिर शव को फांसी के फंदे पर लटका दिया गया। इसके बाद घर के अंदर संदिग्ध हालत में शव मिलने की बात गांव में फैलाई गई और पुलिस को सूचना दी गई।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोला राज

शुरुआत में पुलिस इसे आत्महत्या मानकर जांच कर रही थी। पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। रिपोर्ट आने पर डॉक्टरों ने बताया कि मौत फांसी से नहीं, बल्कि गला दबाने से हुई है। इसके बाद मामला हत्या में बदल गया।

पूछताछ में कबूला जुर्म

मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस ने मृतक की मां और छोटे भाई को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पहले दोनों पुलिस को गुमराह करते रहे, लेकिन सख्ती से पूछताछ में उन्होंने हत्या करना स्वीकार कर लिया। फिलहाल दोनों आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।

नकटी बुलडोजर एक्शन पर भड़के सांसद बृजमोहन, बोले- रात में कार्रवाई करने वाले अफसरों पर हो कार्रवाई

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 रायपुर। राजधानी रायपुर के माना क्षेत्र स्थित नकटी गांव में विधायक कॉलोनी निर्माण के लिए की गई बेदखली कार्रवाई को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। अब इस मामले में रायपुर के सांसद Brijmohan Agrawal ने प्रशासनिक कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि रात के अंधेरे में लोगों के घरों तक पहुंचकर तोड़फोड़ करना पूरी तरह अनुचित है और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।


सांसद ने कहा कि उन्होंने पहले ही संबंधित पक्षों से चर्चा कर स्पष्ट किया था कि बरसात के मौसम में लोगों के मकानों को नहीं तोड़ा जाना चाहिए। इसके बावजूद प्रशासन द्वारा कार्रवाई किया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया है, उनकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

बृजमोहन अग्रवाल ने दोहराया कि नकटी गांव के निवासियों को बेदखल करने के बजाय उनकी समस्याओं का मानवीय समाधान निकाला जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे पहले भी इस मुद्दे पर अपनी राय रख चुके हैं और आज भी उसी रुख पर कायम हैं। जनता से जुड़े मुद्दों पर वे हमेशा उचित मंच पर अपनी बात रखते रहेंगे।

गौरतलब है कि माना क्षेत्र के नकटी गांव में प्रस्तावित विधायक कॉलोनी निर्माण के लिए प्रशासन ने सोमवार को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करते हुए करीब 80 मकानों को ध्वस्त कर दिया। बताया जा रहा है कि इनमें Pradhan Mantri Awas Yojana और Indira Awaas Yojana के तहत बने कई मकान भी शामिल हैं। कार्रवाई से पहले रविवार देर रात से पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।

सोमवार सुबह जब प्रशासनिक टीम जेसीबी मशीनों के साथ गांव पहुंची तो बड़ी संख्या में ग्रामीण अपने घरों को बचाने के लिए मशीनों के सामने खड़े हो गए। इस दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच धक्का-मुक्की और तीखी नोकझोंक भी हुई। विरोध के बावजूद प्रशासन ने कार्रवाई जारी रखी, जिससे प्रभावित परिवारों में भारी आक्रोश फैल गया।

कार्रवाई के बाद ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि सांसद ने दो दिन पहले मुलाकात के दौरान आश्वासन दिया था कि बारिश के दौरान किसी के मकान नहीं तोड़े जाएंगे और प्रशासन व ग्रामीणों के बीच समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। लेकिन आश्वासन के बावजूद बुलडोजर चलने से लोगों में गहरा असंतोष है।

यह संस्करण अखबार में प्रकाशित होने लायक ज्यादा संतुलित और प्रोफेशनल टोन में है।

इस चेहरे को ध्यान से देखिए… PHE विभाग का कर्मचारी… GPF की रकम निकालने मांगे ₹10 हजार, ACB ने रंगे हाथों दबोचा

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 दुर्ग। छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है। इसी कड़ी में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने दुर्ग में बड़ी ट्रैप कार्रवाई करते हुए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग के सहायक ग्रेड-2 शिव कुमार ठाकुर को ₹10,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।


जानकारी के मुताबिक, आरोपी कर्मचारी ने GPF (भविष्य निधि) की राशि निकालने की प्रक्रिया पूरी कराने के बदले शिकायतकर्ता से ₹10 हजार रिश्वत की मांग की थी।

चपरासी की शिकायत पर बिछाया गया जाल

मामले में विभाग के चपरासी नंद कुमार कामड़े ने ACB से शिकायत की थी। शिकायत का सत्यापन करने के बाद ACB ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप कार्रवाई की। जैसे ही आरोपी ने रिश्वत की रकम स्वीकार की, टीम ने उसे मौके पर ही रंगे हाथ पकड़ लिया।

PHE विभाग में मचा हड़कंप

कार्रवाई के बाद PHE विभाग में हड़कंप मच गया। ACB की टीम आरोपी से पूछताछ कर रही है। उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ ऐसी कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी।

कबीरधाम के गंडईखुर्द से वीबी-जी राम जी योजना का हुआ राज्य स्तरीय शुभारंभ

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रायपुर : ग्रामीण परिवारों को रोजगार और आजीविका की नई गारंटी देने वाली विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण(वीबी-जी राम जी) योजना का राज्य स्तरीय शुभारंभ आज कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत गंडईखुर्द से किया गया।


कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  विजय शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। राष्ट्रीय स्तर पर योजना का शुभारंभ केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आंध्र प्रदेश के तिरुपति से किया। इस दौरान वे वर्चुअल माध्यम से ग्राम पंचायत गंडईखुर्द में आयोजित राज्य स्तरीय शुभारंभ समारोह से भी जुड़े रहे। 

     केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आज से विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबी-जीरामजी) योजना लागू हो रही है। इस योजना का उद्देश्य है कि देश का कोई भी गरीब काम के अभाव में बेरोजगार न रहे। उन्होंने इस महत्वपूर्ण पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि योजना से जहां ग्रामीण मजदूरों को 125 दिनों का रोजगार मिलेगा, वहीं गांवों में विकास कार्यों को भी नई गति मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर बदलेगी। चौहान ने कहा कि मजदूरों के पसीने का सम्मान हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता है। गरीबों की सेवा ही हमारे लिए भगवान की सेवा है। 

उपमुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  विजय शर्मा ने कहा कि आज पूरे देश में विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (वीबी-जीरामजी) योजना का शुभारंभ हो रहा है और छत्तीसगढ़ में इसका राज्य स्तरीय शुभारंभ ग्राम पंचायत गंडईखुर्द से किया गया है। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश में योजना के तहत पहले कार्य के रूप में ग्राम पंचायत गंडईखुर्द में शेड निर्माण के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की। उन्होंने कहा कि यह केवल रोजगार उपलब्ध कराने की योजना नहीं, बल्कि विकसित गांव से विकसित भारत के निर्माण का अभियान है। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए प्रत्येक गांव और पंचायत का समग्र विकास आवश्यक है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के लिए 3,300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जिससे विभिन्न विकास कार्य किए जाएंगे और रोजगार की कोई कमी नहीं रहेगी।

       उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने बताया कि योजना के तहत 318 प्रकार के कार्यों को शामिल किया गया है। इनमें जल संरक्षण से जुड़े 107, ग्रामीण अधोसंरचना के 90, आजीविका संवर्धन के 86 तथा आपदा प्रबंधन से संबंधित 35 प्रकार के कार्य शामिल हैं। उन्होंने कहा कि अब जॉब कार्ड के स्थान पर जीआरजी कार्ड जारी किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जॉब कार्ड में केवाईसी कराने में छत्तीसगढ़ देश में अग्रणी राज्यों में है। उन्होंने कहा कि योजना के अंतर्गत डबरी, चेकडैम, बोल्डर चेकडैम, रिचार्ज पिट, वर्षा जल संचयन, नहर लाइनिंग, ग्रामीण सड़क (धरसा), मुरमीकरण जैसे कार्य कर जल स्तर बढ़ाने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया जाएगा। प्रत्येक पंचायत को स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कार्ययोजना तैयार कर अटल डिजिटल सेवा केंद्र, मुक्तिधाम में शेड, ग्रामीण अधोसंरचना सहित प्राथमिकता वाले कार्य शुरू करने होंगे।

        उप मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना के तहत बाउंड्री वॉल, किचन शेड, शौचालय, सामुदायिक पशु शेड, सोलर एवं स्ट्रीट लाइट, ग्रामीण चौपाल, हाईमास्ट लाइट, स्व-सहायता समूहों के लिए वर्क शेड, कोल्ड स्टोरेज, खाद एवं खाद्यान्न गोदाम, सामुदायिक आटा चक्की, कृषि प्रसंस्करण केंद्र और हैंडलूम प्रोसेसिंग केंद्र जैसे कार्य भी किए जा सकेंगे। इससे रोजगार के साथ-साथ ग्रामीण आजीविका को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का संकल्प तभी साकार होगा, जब गांव आत्मनिर्भर और समृद्ध बनेंगे। इसी उद्देश्य से गांवों को ए, बी और सी श्रेणी में विभाजित कर योजनाबद्ध विकास किया जाएगा। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में पिछले ढाई वर्षों में 11 लाख आवासों का निर्माण पूरा किया गया है, जो ग्रामीण विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों से अपील की कि वे व्यापक सोच के साथ अपने गांवों की विकास कार्ययोजना तैयार करें, ताकि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।

        पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने कहा कि आज का दिन प्रदेश के लिए ऐतिहासिक है और सभी लोग इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने हैं। इस योजना के तहत मनरेगा में अब ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों का रोजगार मिलेगा तथा अकुशल श्रमिकों की दैनिक मजदूरी 261 रुपये से बढ़ाकर 300 रुपये प्रतिदिन कर दी गई है। 

       कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्री विशेष पटेल, छत्तीसगढ़ कृषक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष श्री सुरेश चंद्रवंशी, पुलिस जवाबदेही प्राधिकरण सदस्य श्री भगत पटेल, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री ईश्वरी साहू, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री कैलाश चंद्रवंशी, जिला पंचायत सदस्य श्री राम कुमार भट्ट सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

गंडईखुर्द को मिली पहली सौगात, शेड निर्माण प्रस्ताव को स्वीकृति

      उपमुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा ने वीबी-जी राम जी योजना के तहत प्रदेश के पहले विकास कार्य के रूप में ग्राम पंचायत गंडईखुर्द में शेड निर्माण के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की। उन्होंने कहा कि योजना की शुरुआत विकास कार्यों के साथ हो रही है। इस स्वीकृति के साथ ही गंडईखुर्द वीबी-जी राम जी योजना के अंतर्गत प्रदेश की पहली ग्राम पंचायत बन गई, जहां विकास कार्य का प्रस्ताव स्वीकृत हुआ। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इसी प्रकार प्रत्येक पंचायत की आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों को प्राथमिकता देते हुए योजना का लाभ गांव-गांव तक पहुंचाया जाएगा।

मानव श्रृंखला में शामिल हुए उप मुख्यमंत्री, जनप्रतिनिधि और ग्रामीण

         कार्यक्रम के दौरान वीबी-जी राम जी योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं जनजागरूकता के उद्देश्य से उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा, जनप्रतिनिधिगण, अधिकारी, कर्मचारी, स्व-सहायता समूह की महिलाएं, युवा तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने मानव श्रृंखला बनाकर योजना का संदेश दिया। इस दौरान सभी ने ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन, आजीविका संवर्धन तथा विकसित भारत के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया। मानव श्रृंखला के माध्यम से ग्रामीणों को योजना के उद्देश्यों, लाभों एवं इसमें जनभागीदारी के महत्व से भी अवगत कराया गया।

पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने वृहद स्तर पर हुआ पौधरोपण

      पर्यावरण संरक्षण और भावी पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं संतुलित पर्यावरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ग्राम पंचायत गंडईखुर्द में ष्एक पेड़ मां के नामष् अभियान के तहत वृहद स्तर पर पौधरोपण किया गया। उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, पंडरिया विधायक श्रीमती भावना बोहरा सहित जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं ग्रामीणों ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की जनकल्याणकारी सोच और वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में सुकमा ने रचा नया कीर्तिमान

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आयुष्मान आरोग्य मंदिर उप स्वास्थ्य केंद्र सुकमा-01 को मिला राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन (एनक्वास) प्रमाणपत्र

जिले के 17 स्वास्थ्य केंद्र अब राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर खरे

रायपुर-  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सशक्त नेतृत्व और वन एवं जलवायु परिवर्तन तथा सुकमा जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में सुदूर और नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार सुधार हो रहा है। शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से विकासखंड सुकमा के आयुष्मान आरोग्य मंदिर उप स्वास्थ्य केंद्र सुकमा-01 को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्वास) प्रमाणपत्र प्राप्त हुआ है। इसके साथ ही जिले के 17 स्वास्थ्य केंद्र अब राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणपत्र हासिल कर चुके हैं।

93.04 प्रतिशत अंक के साथ हासिल की राष्ट्रीय उपलब्धि

कलेक्टर अमित कुमार के नेतृत्व में स्वास्थ्य केंद्र ने भारत सरकार के राष्ट्रीय मूल्यांकन में 93.04 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। यह उपलब्धि स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी मणीन्द्र कुर्रे, ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक रेणूका सूना तथा माड़वी हिड़मा सहित पूरी स्वास्थ्य टीम की मेहनत, समर्पण और बेहतर कार्यप्रणाली का परिणाम है।

कड़े मानकों पर खरा उतरने के बाद मिला एनक्वास प्रमाणपत्र

एनक्वास (National Quality Assurance Standards) प्रमाणपत्र भारत सरकार द्वारा केवल उन स्वास्थ्य संस्थानों को दिया जाता है, जो गुणवत्ता के सभी निर्धारित मानकों पर खरे उतरते हैं। इसमें मरीजों की संतुष्टि, स्वच्छता, सुरक्षित मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं, मानसिक स्वास्थ्य, संचारी एवं गैर-संचारी रोगों की देखभाल, प्रयोगशाला सेवाएं तथा स्वास्थ्य प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं का मूल्यांकन किया जाता है।

7,417 ग्रामीणों को मिल रही बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं

आयुष्मान आरोग्य मंदिर उप स्वास्थ्य केंद्र सुकमा-01 आधुनिक प्रसव कक्ष, सुसज्जित प्रयोगशाला और प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों से लैस है। यह केंद्र लगभग 7,417 ग्रामीणों को गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहा है।

शासकीय योजनाओं से बदल रही सुकमा की तस्वीर

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप अंतिम व्यक्ति तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने और प्रभारी मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में जिले में स्वास्थ्य अधोसंरचना को लगातार मजबूत किया जा रहा है। आयुष्मान भारत और अन्य स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल रहा है।

अन्य जिलों के लिए बना प्रेरणादायक मॉडल

सुकमा की यह उपलब्धि बताती है कि मजबूत प्रशासनिक इच्छाशक्ति, जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और स्वास्थ्य कर्मियों की समर्पित सेवा से दूरस्थ एवं चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। आज सुकमा का यह मॉडल प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के अन्य आकांक्षी जिलों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है।

मानवता, सेवा और संवेदना का जीवंत केंद्र है सोठी आश्रम : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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मुख्यमंत्री साय ने भारतीय कुष्ठ निवारक संघ आश्रम में सेवा, स्वास्थ्य एवं पुनर्वास कार्यों का किया अवलोकन

सिद्धि विनायक मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज जांजगीर-चांपा जिले के एक दिवसीय प्रवास के दौरान सोठी स्थित भारतीय कुष्ठ निवारक संघ आश्रम पहुँचे। आश्रम आगमन पर संस्था के पदाधिकारियों एवं आश्रमवासियों ने उनका आत्मीय स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने आश्रम प्रमुख सुधीर देव से संस्था की सेवा गतिविधियों, चिकित्सा सुविधाओं तथा पुनर्वास कार्यों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की तथा आश्रम द्वारा किए जा रहे सेवा कार्यों की सराहना की।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारतीय कुष्ठ निवारक संघ आश्रम केवल एक सेवा संस्थान नहीं, बल्कि मानवता, करुणा और समर्पण का जीवंत केंद्र है। यहाँ वर्षों से समाज के उपेक्षित और जरूरतमंद लोगों की गरिमा के साथ सेवा की जा रही है, जो भारतीय संस्कृति के 'नर सेवा ही नारायण सेवा' के आदर्श को साकार करती है। उन्होंने कहा कि ऐसे संस्थान समाज में संवेदनशीलता, सेवा और मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करने का प्रेरणादायी कार्य कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने आश्रम परिसर स्थित सिद्धि विनायक मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना एवं आरती कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। उन्होंने संस्था के संस्थापक स्वर्गीय सदाशिव गोविंद कात्रे के छायाचित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर श्रद्धासुमन अर्पित किए तथा उनके सेवा भाव को नमन किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने आश्रम के लिए नई एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने कहा कि यह एम्बुलेंस आश्रमवासियों एवं जरूरतमंद मरीजों को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

मुख्यमंत्री साय ने आश्रम परिसर का भ्रमण कर सेवा, स्वास्थ्य एवं पुनर्वास से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों का अवलोकन किया। उन्होंने आश्रमवासियों से आत्मीय भेंट कर उनका कुशलक्षेम जाना तथा उन्हें उपहार भी भेंट किए। इस दौरान उन्होंने गौशाला में गौमाता की पूजा-अर्चना कर हरा चारा अर्पित किया और गौसेवा का संदेश दिया।

मुख्यमंत्री ने आश्रम परिसर स्थित संत गुरु घासीदास चिकित्सालय का निरीक्षण कर ओपीडी, पैथोलॉजी लैब, बिलिंग कक्ष, एक्स-रे कक्ष, आईसीयू तथा ऑपरेशन थियेटर सहित विभिन्न इकाइयों में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने चिकित्सालय में उपचाररत मरीजों के लिए उपलब्ध व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की तथा गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित करने पर बल दिया।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने धनवंतरी जनकल्याण समिति सोसायटी, रायपुर द्वारा संचालित निःशुल्क कैंसर स्क्रीनिंग इनिशिएटिव वाहन का भी अवलोकन किया। उन्होंने वाहन के माध्यम से ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में पहुँचाई जा रही कैंसर जांच सेवाओं की जानकारी लेते हुए कहा कि समय पर जांच और उपचार गंभीर बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम है तथा ऐसी पहल जनस्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब,सांसद कमलेश देवी जांगड़े, विधायक जगदलपुर किरण सिंह देव, छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह, छत्तीसगढ़ राज्य हथकरघा विकास एवं विपणन सहकारी संघ के अध्यक्ष भोजराज देवांगन, आश्रम के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर शासकीय कर्मचारियों को बड़ी राहत

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वित्त मंत्री ओपी चौधरी की पहल से अब अल्पावधि ऋण सुविधा उपलब्ध

ई-कोष से जुड़ी डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से कर्मचारियों को मिलेगा त्वरित, पारदर्शी एवं सुरक्षित ऋण

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार वित्त मंत्री ओपी चौधरी की पहल पर छत्तीसगढ़ शासन ने राज्य के शासकीय कर्मचारियों के लिए अल्पावधि ऋण (Short Term Credit) की सुविधा प्रारंभ की है। इस व्यवस्था का उद्देश्य कर्मचारियों को आकस्मिक वित्तीय आवश्यकताओं के समय त्वरित, सरल एवं पारदर्शी ऋण उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें असुविधाजनक अथवा अनौपचारिक वित्तीय स्रोतों पर निर्भर न रहना पड़े।

यह सुविधा राज्य शासन की ई-कोष (e-Kosh) प्रणाली से एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से संचालित होगी। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी, जिससे कर्मचारियों को अनावश्यक कागजी कार्रवाई और कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि हमारी सरकार शासकीय कर्मचारियों के कल्याण और उनकी आर्थिक सुरक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आवश्यकता के समय कर्मचारियों को त्वरित, सरल और पारदर्शी वित्तीय सहायता उपलब्ध हो, इसी उद्देश्य से अल्पावधि ऋण सुविधा प्रारंभ की गई है। डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से यह सुविधा सुरक्षित, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध होगी। हमारी सरकार सुशासन, पारदर्शिता और तकनीक आधारित प्रशासनिक सुधारों के माध्यम से कर्मचारियों के हितों को निरंतर सुदृढ़ कर रही है।

वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार कर्मचारियों के हितों के संरक्षण और उनके आर्थिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। यह अल्पावधि ऋण सुविधा कर्मचारियों को आवश्यकता के समय त्वरित वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएगी तथा उन्हें सम्मानजनक एवं सुविधाजनक वित्तीय विकल्प प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था पूर्णतः डिजिटल, पारदर्शी एवं सुरक्षित है। कर्मचारी ई-कोष के एम्प्लॉयी कॉर्नर (Employee Corner) के माध्यम से निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए इस सुविधा का लाभ प्राप्त कर सकेंगे। ऋण से संबंधित सभी शर्तें, ब्याज दर, ईएमआई, शुल्क तथा की फैक्ट स्टेटमेंट (Key Fact Statement-KFS) जैसी आवश्यक जानकारियां पहले से उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि कर्मचारी पूरी जानकारी के आधार पर निर्णय ले सकें।

नई व्यवस्था के तहत कर्मचारी अपनी पात्रता के अनुसार अल्पावधि ऋण के लिए आवेदन कर सकेंगे। आवेदन के उपरांत ई-केवाईसी, डिजिटल प्रमाणीकरण तथा सहमति (Consent) की प्रक्रिया पूर्ण होने पर ऋण स्वीकृति एवं वितरण की प्रक्रिया त्वरित रूप से पूरी की जाएगी। ऋण की मासिक किस्तों का भुगतान वेतन से निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा।

वित्त विभाग द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया (Standard Operating Procedure-SOP) के अनुसार पूरी व्यवस्था में डेटा सुरक्षा, गोपनीयता एवं डिजिटल प्रमाणीकरण के उच्च मानकों का पालन किया जाएगा। कर्मचारियों की व्यक्तिगत जानकारी का उपयोग केवल उनकी सहमति से किया जाएगा तथा सभी लेन-देन सुरक्षित डिजिटल माध्यम से संपन्न होंगे।

इस पहल से कर्मचारियों को आकस्मिक चिकित्सा, शिक्षा, पारिवारिक अथवा अन्य आवश्यक जरूरतों के लिए समय पर वित्तीय सहायता उपलब्ध हो सकेगी। इससे उनकी आर्थिक सुरक्षा सुदृढ़ होगी तथा औपचारिक वित्तीय सेवाओं तक उनकी पहुंच और अधिक सुगम बनेगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में वित्त विभाग की यह पहल कर्मचारी हितैषी शासन, सुशासन और डिजिटल प्रशासन को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना से राजनांदगांव का साहू परिवार बना ऊर्जा आत्मनिर्भर

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3-3 किलोवाट के दो सोलर रूफटॉप प्लांट से बिजली बिल हुआ शून्य, अतिरिक्त आय का भी खुला रास्ता

रायपुर- प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना प्रदेश में ऊर्जा आत्मनिर्भरता और हरित ऊर्जा को नई गति दे रही है। राजनांदगांव जिले के ग्राम गठुला का साहू परिवार इस योजना का लाभ लेकर न केवल अपना बिजली बिल शून्य करने में सफल हुआ है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा अपनाने की प्रेरक मिसाल भी बन गया है।

ग्राम गठुला में टीकम होटल का संचालन करने वाले अंकालु राम साहू और उनके पुत्र कुंदन साहू ने अपने घर पर 3-3 किलोवाट क्षमता के दो सोलर रूफटॉप प्लांट स्थापित किए। होटल व्यवसाय के कारण प्रतिमाह 4 से 5 हजार रुपये तक का बिजली बिल आता था, जिसे कम करने के लिए उन्होंने सौर ऊर्जा को अपनाया।

साहू परिवार ने योजना के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर पंजीकृत वेंडर के माध्यम से सोलर प्लांट स्थापित कराया। दोनों प्लांटों की कुल लागत लगभग 4 लाख रुपये रही, जिसमें केंद्र एवं राज्य शासन से कुल 2 लाख 16 हजार रुपये की सब्सिडी सीधे बैंक खाते में प्राप्त हुई। इससे उनकी लागत में उल्लेखनीय कमी आई।

सोलर प्लांट शुरू होने के बाद परिवार का बिजली बिल लगभग शून्य हो गया है। नेट मीटरिंग व्यवस्था के तहत अतिरिक्त उत्पादित बिजली ग्रिड में भेजी जा रही है, जिससे भविष्य में अतिरिक्त आय की भी संभावना बनी है। अब साहू परिवार केवल बिजली का उपभोक्ता नहीं, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादक भी बन गया है।

साहू परिवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना आम नागरिकों के लिए आर्थिक बचत, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी माध्यम है।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत सोलर रूफटॉप प्लांट लगाने पर केंद्र एवं राज्य शासन द्वारा आकर्षक सब्सिडी के साथ राष्ट्रीयकृत बैंकों के माध्यम से रियायती ब्याज दर पर ऋण सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे अधिक से अधिक परिवार स्वच्छ एवं सस्ती ऊर्जा से जुड़ रहे हैं।

डीएमएफ से बदली खनन प्रभावित गांवों की तस्वीर, 181 लाख की सड़क ने विकास को दी रफ्तार

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मुढ़ापार-धतूरा-कोरबी-खम्हरिया मार्ग का 4.40 किमी नवीनीकरण

डीएमएफ से 180.93 लाख रुपये की लागत से हुआ निर्माण

शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिला बड़ा संबल

रायपुर- खनन प्रभावित क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) निधि का प्रभावी उपयोग प्रदेश में बदलाव की नई मिसाल बन रहा है। कोरबा जिले में डीएमएफ से निर्मित मुढ़ापार-धतूरा-कोरबी-खम्हरि या सड़क ने वर्षों पुरानी आवागमन की समस्या दूर कर हजारों ग्रामीणों के जीवन को आसान बना दिया है।

कलेक्टर कुणाल दुदावत की सुनियोजित कार्ययोजना के तहत डीएमएफ मद से 180.93 लाख रुपये की लागत से 4.40 किलोमीटर लंबी सड़क का नवीनीकरण एवं सुदृढ़ीकरण किया गया। 15 अप्रैल 2026 को निर्माण कार्य पूरा होने के बाद अब क्षेत्र के ग्रामीणों को वर्षभर सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल रही है।

पहले बरसात के दौरान सड़क कीचड़ और जलभराव से भर जाती थी, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई, मरीजों का उपचार, किसानों की उपज का परिवहन और ग्रामीणों की दैनिक गतिविधियां प्रभावित होती थीं। अब बेहतर सड़क संपर्क से स्कूल, अस्पताल और बाजार तक पहुंच आसान होने के साथ किसानों को अपनी उपज समय पर बाजार तक पहुंचाने में भी सुविधा मिल रही है।

यह सड़क केवल आवागमन का माध्यम नहीं बनी, बल्कि खनन प्रभावित गांवों के सामाजिक और आर्थिक विकास की नई आधारशिला साबित हुई है। बेहतर संपर्क से शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और अन्य आवश्यक सेवाओं तक ग्रामीणों की पहुंच बढ़ी है, जिससे क्षेत्र में विकास की नई गति दिखाई दे रही है।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और डीएमएफ के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्षों पुरानी समस्या के समाधान से उनके जीवन में बड़ा सकारात्मक बदलाव आया है। यह परियोजना इस बात का उदाहरण है कि डीएमएफ निधि का योजनाबद्ध और जनहितकारी उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर अवैध खनिज उत्खनन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई

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राजनांदगांव, बालोद, बलरामपुर और सरगुजा में ताबड़तोड़ अभियान, वाहन जब्त और लाखों रुपये का अर्थदंड

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर प्रदेश में अवैध खनिज उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण के विरुद्ध खनिज विभाग द्वारा सख्त और सतत अभियान चलाया जा रहा है। शासन की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत विभिन्न जिलों में संयुक्त कार्रवाई करते हुए अवैध रेत, पत्थर, मिट्टी एवं गिट्टी के उत्खनन और परिवहन में संलिप्त वाहनों को जब्त किया गया है तथा नियमानुसार अर्थदंड एवं वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। शासन का उद्देश्य प्रदेश के खनिज संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित करना तथा अवैध उत्खनन में संलिप्त लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करना है।

इसी क्रम में राजनांदगांव जिले में वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान अब तक अवैध रेत उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण के 52 प्रकरणों में कार्रवाई करते हुए 18 लाख 95 हजार 600 रुपये का अर्थदंड वसूला गया है। इनमें अवैध उत्खनन के 9, परिवहन के 41 तथा भंडारण के 2 प्रकरण शामिल हैं। वहीं डोंगरगढ़ तहसील के ग्राम आसरा में आकस्मिक निरीक्षण के दौरान नदी में रेत उत्खनन प्रतिबंधित पाया गया तथा मौके पर कोई अवैध गतिविधि नहीं मिली।

बालोद जिले के ग्राम कसही में अवैध पत्थर उत्खनन करते पाए जाने पर एक चेन माउंटेन (पीसी-130-7) मशीन को जब्त कर सील किया गया। संबंधित पक्ष वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका, जिसके बाद खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत कार्रवाई प्रारंभ की गई है।

बलरामपुर जिले में खनिज विभाग ने राजपुर क्षेत्र के ग्राम नरसिंहपुर और बसंतपुर में कार्रवाई करते हुए अवैध रेत परिवहन में संलिप्त एक टिपर जब्त किया। वहीं बसंतपुर स्थित फ्लाई ऐश ब्रिक्स इकाई में अवैध रूप से भंडारित लगभग 90 घनमीटर रेत भी जब्त कर संचालक को नोटिस जारी किया गया।

सरगुजा जिले में शिकायतों के आधार पर विभिन्न स्थानों पर कार्रवाई करते हुए अवैध मिट्टी, मुरूम, रेत एवं गिट्टी के उत्खनन और परिवहन में प्रयुक्त जेसीबी, ट्रैक्टर और टिपर सहित छह वाहनों को जब्त किया गया। सभी मामलों में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 तथा संशोधित छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम, 2015 के तहत कार्रवाई की जा रही है। संशोधित नियमों के अनुसार अब शमन शुल्क न्यूनतम 25 हजार रुपये अथवा 2 हजार रुपये प्रति टन, जो अधिक होगा, के आधार पर वसूला जाएगा। इसके अतिरिक्त खनिज का बाजार मूल्य भी वसूला जाएगा।

खनिज विभाग ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार प्रदेश में अवैध खनिज गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए नियमित गश्त, आकस्मिक निरीक्षण और संयुक्त प्रवर्तन अभियान आगे भी लगातार जारी रहेंगे।

कम लागत, दोगुना फायदा: जशपुर के किसान ने गेहूं की खेती से बढ़ाई आमदनी

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल से कृषि विभाग के मार्गदर्शन का किसानों को मिल रहा लाभ

खरीफ के साथ रबी फसल अपनाकर किसान बन रहे आत्मनिर्भर, बढ़ रही आय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में किसानों की आय बढ़ाने और खेती को लाभकारी बनाने के लिए कृषि विभाग द्वारा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। किसानों को खरीफ के साथ-साथ रबी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे वे उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकें।

जशपुर जिले के मनोरा विकासखंड के ग्राम सोगड़ा निवासी किसान कीना राम इस पहल का सफल उदाहरण हैं। सीमित कृषि भूमि होने के बावजूद उन्होंने खरीफ के साथ रबी सीजन में गेहूं की खेती अपनाकर अपनी आय में वृद्धि की है।

किसान कीना राम ने बताया कि कृषि विभाग के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के मार्गदर्शन में उन्होंने रबी फसल की खेती शुरू की। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएसएम) योजना के तहत उन्हें एक एकड़ भूमि के लिए उन्नत किस्म का गेहूं बीज अनुदान पर उपलब्ध कराया गया।

उन्होंने खेत की अच्छी तैयारी कर पर्याप्त मात्रा में गोबर की खाद का उपयोग किया तथा समय-समय पर सिंचाई और खरपतवार प्रबंधन किया। इसका परिणाम यह रहा कि फसल में कीट एवं रोगों का प्रकोप बहुत कम रहा और गेहूं का अच्छा उत्पादन प्राप्त हुआ।

कीना राम ने बताया कि उनके पास कुल 0.800 हेक्टेयर कृषि भूमि है। पहले वे केवल खरीफ सीजन में धान की खेती करते थे और रबी सीजन में खेत खाली छोड़ देते थे। इससे उन्हें गेहूं बाजार से खरीदना पड़ता था। अब रबी में गेहूं की खेती करने से परिवार के लिए गुणवत्तापूर्ण अनाज उपलब्ध होने के साथ अतिरिक्त उत्पादन बेचकर आय भी प्राप्त हो रही है।

उन्होंने बताया कि धान के बाद गेहूं की खेती से खाली समय और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग हो रहा है, खेती की लाभप्रदता बढ़ी है तथा रबी में पड़ती भूमि भी समाप्त हो गई है। इससे परिवार की खाद्य आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है।

किसान कीना राम ने अन्य किसानों से भी खरीफ के साथ रबी सीजन में गेहूं, दलहन एवं तिलहन फसलों की खेती अपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि कम लागत और कम समय में बेहतर आमदनी प्राप्त करने के लिए रबी फसल एक बेहतर विकल्प है। साथ ही उन्होंने कृषि विभाग एवं छत्तीसगढ़ शासन का मार्गदर्शन और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।

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