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सीएम हेल्पलाइन की शिकायत का त्वरित समाधान,सोलर पंप चालू होने से लौटी खेतों की रौनक

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य शासन द्वारा जनसमस्याओं के त्वरित समाधान और किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा रहा है। इसी कड़ी में सीएम हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जा रहा है।

कोरबा के विकासखंड पोड़ी-उपरोड़ा अंतर्गत ग्राम अरसियां निवासी कृषक राम के खेत में सौर सुजला योजना के तहत स्थापित सोलर पंप अचानक तकनीकी खराबी के कारण बंद हो गया था। पंप के बंद होने से सिंचाई कार्य प्रभावित होने लगा और खेती-किसानी में परेशानी उत्पन्न हो गई। अपनी समस्या के समाधान के लिए राम ने सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत प्राप्त होते ही क्रेडा के अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई की। तकनीकी दल को मौके पर भेजा गया, जहां सोलर पंप का निरीक्षण कर आवश्यक सुधार एवं मरम्मत कार्य कर इसे पुनः चालू कर दिया गया।

सोलर पंप के पुनः सुचारु रूप से संचालित होने के बाद राम के खेतों में सिंचाई कार्य फिर से शुरू हो गया। समय पर सिंचाई की सुविधा मिलने से उनकी कृषि गतिविधियां सामान्य हो गईं और फसल की देखभाल में आने वाली कठिनाइयां दूर हो गईं। अपनी समस्या का त्वरित समाधान होने पर कृषक राम ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, जिला प्रशासन तथा क्रेडा के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से उनकी समस्या का शीघ्र समाधान हुआ, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिली।

क्रेडा के अधिकारियों ने बताया कि सौर सुजला योजना के अंतर्गत स्थापित सभी सोलर पंपों के संचालन एवं रखरखाव को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। किसानों से प्राप्त तकनीकी शिकायतों का तत्काल निराकरण सुनिश्चित किया जाता है, ताकि उन्हें सिंचाई कार्य में किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। शासन की जनहितकारी योजनाओं के साथ-साथ संवेदनशील प्रशासन और त्वरित कार्रवाई से आम नागरिकों की समस्याओं का प्रभावी समाधान संभव हो रहा है तथा किसानों का शासन के प्रति विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है।

‘मन की बात’ में बार-बार छत्तीसगढ़ का उल्लेख प्रदेशवासियों के लिए गौरव की बात : मुख्यमंत्री साय

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मुख्यमंत्री साय ने फाफाडीह में युवाओं और आमजनों के साथ सुनी ‘मन की बात’ की 136वीं कड़ी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘कैच द रेन’ अभियान के तहत कोरबा में जल संरक्षण के उत्कृष्ट प्रयासों की सराहना की

जल संचयन को जन-अभियान बनाने का किया आह्वान

मुख्यमंत्री ने कारगिल विजय दिवस पर वीर शहीदों को दी श्रद्धांजलि

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के फाफाडीह स्थित दया भवन में युवा साथियों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 136वीं कड़ी का श्रवण किया।

कार्यक्रम के उपरांत मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ‘मन की बात’ कार्यक्रम देशवासियों के साथ संवाद का एक ऐसा सशक्त मंच बन गया है, जो समाज के बीच हो रहे सकारात्मक और प्रेरणादायी कार्यों को राष्ट्रीय पहचान दिलाता है। देशभर के लोगों को प्रत्येक माह इस कार्यक्रम की उत्सुकता से प्रतीक्षा रहती है। प्रधानमंत्री इस कार्यक्रम के माध्यम से ऐसे व्यक्तियों, संस्थाओं, नवाचारों और जन-अभियानों को सामने लाते हैं, जो बिना किसी प्रसिद्धि या व्यक्तिगत अपेक्षा के समाज और राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

छत्तीसगढ़ के नवाचारों को लगातार मिल रही राष्ट्रीय पहचान

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पिछले कुछ महीनों में ‘मन की बात’ कार्यक्रम में लगातार छत्तीसगढ़ की उपलब्धियों, सांस्कृतिक विरासत और नवाचारों का उल्लेख किया जाना प्रत्येक प्रदेशवासी के लिए गर्व की बात है। प्रधानमंत्री ने इससे पहले मल्हार की समृद्ध पुरातात्विक विरासत, बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे अभिनव आयोजनों का उल्लेख कर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक शक्ति, जनजातीय परंपराओं और युवा प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच प्रदान किया था।

उन्होंने कहा कि आज के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री द्वारा कोरबा में जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण की दिशा में किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों का उल्लेख किया गया। यह छत्तीसगढ़ के लिए एक और गौरवपूर्ण उपलब्धि है। प्रधानमंत्री द्वारा प्रदेश की उपलब्धियों का राष्ट्रीय मंच पर उल्लेख किए जाने से न केवल छत्तीसगढ़वासियों का उत्साह बढ़ता है, बल्कि राज्य के नवाचारों और जनभागीदारी आधारित विकास मॉडल को देशभर में नई पहचान भी मिलती है।

कोरबा के जल संरक्षण प्रयासों की प्रधानमंत्री ने की सराहना

‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘कैच द रेन’ अभियान के अंतर्गत देशभर में वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, पुराने जल स्रोतों के पुनर्जीवन और वृक्षारोपण के लिए किए जा रहे प्रयासों की चर्चा की। उन्होंने छत्तीसगढ़ के कोरबा में जल संरक्षण की दिशा में किए जा रहे कार्यों को उत्साहजनक बताते हुए उनकी सराहना की।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कोरबा में वैज्ञानिक पद्धति से जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण के लिए भू-स्थानिक मैपिंग, शैलो एक्विफर मैनेजमेंट, रिचार्ज वेल तथा अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य वर्षा जल को अधिकतम मात्रा में संरक्षित करना, भूजल स्तर में सुधार लाना और क्षेत्र में जल उपलब्धता को दीर्घकालिक रूप से सुनिश्चित करना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने ‘कैच द रेन’ अभियान के माध्यम से बारिश की प्रत्येक बूंद को सहेजने का जो संदेश दिया है, वह वर्तमान और भविष्य दोनों की आवश्यकता है। जल केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि मानव जीवन, कृषि, पर्यावरण और भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का आधार है।

जल संरक्षण को जनभागीदारी का व्यापक अभियान बनाएगी राज्य सरकार

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, तालाबों और अन्य परंपरागत जल स्रोतों के संरक्षण तथा वृक्षारोपण की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। सरकार का प्रयास है कि जल संरक्षण के कार्य केवल सरकारी योजनाओं और विभागीय गतिविधियों तक सीमित न रहें, बल्कि प्रत्येक नागरिक की भागीदारी से एक व्यापक जन-अभियान का स्वरूप लें।

कारगिल विजय दिवस पर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने ‘मन की बात’ की शुरुआत कारगिल विजय दिवस पर देश के वीर जवानों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए की। कारगिल विजय दिवस भारतीय सेना के अदम्य साहस, अप्रतिम शौर्य, दृढ़ संकल्प और सर्वोच्च बलिदान का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कारगिल युद्ध में मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों की शौर्यगाथा सदैव देशवासियों को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करती रहेगी। 

‘हर घर तिरंगा’ अभियान में उत्साह से सहभागिता की अपील

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने आगामी स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को पूरे उत्साह और गौरव के साथ आगे बढ़ाने का आह्वान किया है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे अपने घरों और प्रतिष्ठानों पर पूरे सम्मान के साथ तिरंगा फहराएं तथा राष्ट्र की एकता, अखंडता और गौरव के इस उत्सव में सहभागी बनें।

स्थानीय उत्पादों और स्वदेशी परंपराओं को बढ़ावा देने का संदेश
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यक्रम में ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया।  मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के जनजातीय हस्तशिल्प, कोसा, हथकरघा वस्त्र, बेलमेटल, बांस शिल्प, माटी कला और वन उत्पादों में अपार संभावनाएं हैं। इन्हें अपनाना स्थानीय कारीगरों के श्रम और सृजनशीलता का सम्मान है।

मिट्टी की गणेश प्रतिमाएं अपनाने का आह्वान

मुख्यमंत्री साय ने आगामी गणेशोत्सव के संदर्भ में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा देश की मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाओं को अपनाने की अपील का उल्लेख करते हुए कहा कि पर्यावरण-अनुकूल उत्सव हमारी संस्कृति और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने कहा कि स्थानीय मिट्टी से निर्मित गणेश प्रतिमाओं की स्थापना से स्थानीय कुम्हारों और शिल्पकारों को रोजगार मिलता है, स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहन मिलता है और जल स्रोतों को रासायनिक प्रदूषण से बचाने में सहायता मिलती है। मिट्टी से बनी प्रतिमाओं का उपयोग परंपरा, पर्यावरण और स्थानीय अर्थव्यवस्था - तीनों के हित में है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण और हरित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए वृक्षारोपण को जनभागीदारी के माध्यम से आगे बढ़ा रही है। उन्होंने प्रदेशवासियों से ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान में सक्रिय सहभागिता करने का आह्वान किया।

युवा शक्ति की उपलब्धियां देश का गौरव

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री ने खेल, विज्ञान, अंतरिक्ष और नवाचार के क्षेत्र में भारतीय युवाओं की उपलब्धियों की सराहना की। निजी क्षेत्र द्वारा विकसित रॉकेट के सफल प्रक्षेपण, अंतरराष्ट्रीय विज्ञान ओलंपियाड में भारतीय विद्यार्थियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन और खेल जगत में प्राप्त उपलब्धियां नए भारत की युवा शक्ति, प्रतिभा और आत्मविश्वास को दर्शाती हैं।

उन्होंने कहा कि भारत का युवा आज विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, खेल और नवाचार के क्षेत्र में विश्व पटल पर देश का नाम रोशन कर रहा है। राज्य सरकार भी छत्तीसगढ़ के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास, खेल सुविधाएं और नवाचार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं के सपनों को अवसरों से जोड़ना विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है। राष्ट्र की युवा शक्ति ही आने वाले समय में भारत को विश्व की अग्रणी शक्ति बनाएगी।

 इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर, राज्य गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष राजीव लोचन महाराज सहित बड़ी संख्या में युवा, जनप्रतिनिधि, आम नागरिक और गणमान्यजन उपस्थित थे।

भारतीय नौसेना का सेल ट्रेनिंग पोत आईएनएस सुदर्शिनी अमेरिका से पुर्तगाल के लिए रवाना, वैश्विक मंच पर दिखाई भारत की समुद्री शक्ति

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नई दिल्ली- भारतीय नौसेना का सेल ट्रेनिंग पोत आईएनएस सुदर्शिनी 25 जुलाई 2026 को अमेरिका के बोस्टन बंदरगाह से लोकायन-26 (Lokayan 26) अभियान के तहत अपनी अगली यात्रा के लिए रवाना हो गया। अमेरिका प्रवास के दौरान पोत ने प्रतिष्ठित SAIL 250 समारोह और इंटरनेशनल नेवल रिव्यू 250 में भाग लेकर भारत की समृद्ध समुद्री विरासत और नौसैनिक परंपराओं का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।

आईएनएस सुदर्शिनी ने अमेरिका के नॉरफ़ॉक, बाल्टीमोर, न्यूयॉर्क और बोस्टन में आयोजित SAIL 250 कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी की। इस दौरान पोत पर अनेक गणमान्य अतिथियों, भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों और विभिन्न देशों की नौसेनाओं के प्रतिनिधिमंडलों का स्वागत किया गया।

इन आयोजनों के माध्यम से भारतीय नौसेना ने समुद्री सहयोग, पेशेवर आदान-प्रदान और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। कार्यक्रमों ने भारत की समुद्री कूटनीति और वैश्विक साझेदारी को नई मजबूती प्रदान की।

अब आईएनएस सुदर्शिनी पोंटा डेलगाडा (अज़ोरेस, पुर्तगाल) के लिए रवाना हो चुका है। अपनी इस यात्रा के दौरान यह पोत विश्व मंच पर भारत की समुद्री क्षमता, पेशेवर उत्कृष्टता और सद्भावना का प्रतीक बनकर आगे बढ़ रहा है।


प्रकृति के साथ संतुलन और जल संरक्षण भविष्य की सुरक्षा के लिए आवश्यक – राज्यपाल डेका

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राज्यपाल ने पर्यावरण संरक्षण एवं आपदा प्रबंधन’अभियान का किया शुभारंभ

रायपुर- राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि मनुष्य, पेड़-पौधों और पशु-पक्षियों के बीच संतुलन बनाए रखना पर्यावरण संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक है। जलवायु परिवर्तन, बढ़ता तापमान, जल संकट और प्रदूषण आज गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। आने वाले समय में छत्तीसगढ़ को भी जल संकट का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए हमें अभी से जल संरक्षण के लिए प्रभावी प्रयास करने होंगे।

पर्यावरण संरक्षण और आपदा प्रबंधन के प्रति जन-जागरूकता का देगा संदेश

राज्यपाल डेका ने आज प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा  पर्यावरण संरक्षण एवं आपदा प्रबंधन’के लिए आयोजित राष्ट्रीय अभियान का शुभारंभ करते हुए उक्त विचार व्यक्त किए। उन्होंने अभियान में शामिल ब्रह्माकुमारी बहनों एवं भाइयों को  झंडी दिखाकर रवाना किया। यह अभियान 26 जुलाई से 9 अगस्त 2026 तक रायपुर से जबलपुर की यात्रा करते हुए छत्तीसगढ़ एवं मध्य प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण और आपदा प्रबंधन के प्रति जन-जागरूकता का संदेश देगा।

वृक्षारोपण, जल संरक्षण, प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली के लिए प्रेरित करना

राज्यपाल ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान की यह पहल केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि जन-जागृति का अभियान है। इसके माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को वृक्षारोपण, जल संरक्षण, प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।  

घने वन, जीवनदायिनी नदियां और समृद्ध जैव-विविधता हमारी अमूल्य धरोहर

 डेका ने कहा कि प्रकृति हमारी मां के समान है और उसका संरक्षण करना हम सभी का दायित्व है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के निवासी सौभाग्यशाली हैं। यह प्राकृतिक संपदा से समृद्ध प्रदेश है। यहां के घने वन, जीवनदायिनी नदियां और समृद्ध जैव-विविधता हमारी अमूल्य धरोहर हैं। प्रदेश की जनजातीय संस्कृति भी सदियों से प्रकृति के साथ सामंजस्य और सह-अस्तित्व का संदेश देती आई है। बदलते समय में जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय चुनौतियों से छत्तीसगढ़ भी अछूता नहीं है। इसलिए यहां की हरियाली और प्राकृतिक जल स्रोतों को संरक्षित करना आवश्यक है।

पर्यावरण प्रदूषण कम करने और इको फ्रेंडली तथा नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को प्रोत्साहन

राज्यपाल ने जल संरक्षण पर विशेष जोर देते हुए कहा कि पानी की उपलब्धता भविष्य की एक बड़ी चुनौती है। जल का विवेकपूर्ण उपयोग करने के साथ वर्षा जल संचयन और परंपरागत जल स्रोतों के संरक्षण को प्राथमिकता देनी होगी। पर्यावरण प्रदूषण कम करने के लिए इको फ्रेंडली व्यवस्थाओं तथा नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को भी बढ़ावा देना होगा।

सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग कम करना

राज्यपाल ने माइक्रोप्लास्टिक के बढ़ते दुष्प्रभावों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बन रहा है। माइक्रोप्लास्टिक का प्रभाव मां के दूध तक में दिखाई देना भविष्य की पीढ़ियों के स्वास्थ्य की दृष्टि से चिंताजनक है। उन्होंने सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग कम करने और पर्यावरण संरक्षण के अभियान से समाज एवं समुदाय के प्रत्येक वर्ग को जोड़ने पर जोर दिया।

आपदा प्रबंधन से उनके प्रभाव को काफी हद तक कम करना

 राज्यपाल डेका ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं को पूरी तरह रोक पाना संभव नहीं है, लेकिन बेहतर तैयारी, जागरूकता और प्रभावी आपदा प्रबंधन से उनके प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। धरती का बढ़ता तापमान, अनियमित मौसम और प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती घटनाएं हमें प्रकृति के प्रति अपने व्यवहार पर पुनर्विचार करने का संकेत दे रही हैं।

सकारात्मक विचार और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना

डेका ने कहा कि यह अभियान विज्ञान और अध्यात्म के समन्वय का भी संदेश देता है। राजयोग के माध्यम से सकारात्मक विचार और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित होती है। भौतिक प्रगति के साथ नैतिक एवं आध्यात्मिक चेतना भी आवश्यक है।

प्रत्येक व्यक्ति कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए

राज्यपाल ने सभी नागरिकों से पानी की एक-एक बूंद बचाने, सिंगल यूज प्लास्टिक का त्याग करने और वृक्षारोपण को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए और उसकी संतान की तरह देखभाल करे। आज पर्यावरण संरक्षण की दिशा में किया गया प्रत्येक छोटा प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और खुशहाल भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

 इस अवसर पर ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के पदाधिकारी, ब्रह्माकुमारी बहनें एवं भाई तथा अभियान से जुड़े सदस्य उपस्थित थे।


कारगिल विजय दिवस: वीरता, बलिदान और राष्ट्रगौरव का अमर प्रतीक

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नई दिल्ली- आज पूरा देश 27वां कारगिल विजय दिवस गर्व और श्रद्धा के साथ मना रहा है। यह दिन उन वीर सैनिकों के अदम्य साहस, अद्वितीय शौर्य और सर्वोच्च बलिदान को नमन करने का अवसर है, जिन्होंने 1999 के कारगिल युद्ध में दुर्गम पहाड़ियों पर दुश्मन को परास्त कर भारत की विजय सुनिश्चित की। इस अवसर पर देशभर में शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई और उनकी वीरगाथाओं को याद किया गया।

कारगिल युद्ध भारतीय सैन्य इतिहास के सबसे गौरवशाली अध्यायों में से एक माना जाता है। ऑपरेशन विजय के तहत भारतीय सेना ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और विपरीत मौसम के बावजूद अद्भुत साहस का परिचय देते हुए नियंत्रण रेखा (LoC) पर रणनीतिक चोटियों को दुश्मन के कब्जे से मुक्त कराया। इस ऐतिहासिक विजय ने दुनिया को भारतीय सैनिकों की वीरता और अटूट संकल्प का परिचय कराया।

कारगिल विजय दिवस केवल एक सैन्य जीत का उत्सव नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान की भावना का प्रतीक है। इस युद्ध में कैप्टन विक्रम बत्रा, कैप्टन मनोज कुमार पांडेय सहित अनेक वीर जवानों ने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उनका अद्वितीय साहस आज भी देश के युवाओं को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करता है।

इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने कहा कि कारगिल के वीर सैनिकों का साहस और राष्ट्र के प्रति उनका समर्पण सदैव देशवासियों को प्रेरित करता रहेगा। वहीं रक्षा मंत्री ने द्रास स्थित कारगिल युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए भारतीय सशस्त्र बलों की क्षमता और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

आज का दिन हर भारतीय को यह संदेश देता है कि राष्ट्र की सुरक्षा, एकता और अखंडता सर्वोपरि है। कारगिल के अमर शहीदों का बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा और भारत उनके ऋण को कभी नहीं भूल पाएगा।

'कैच द रेन' अभियान में छत्तीसगढ़ का राजनांदगांव बना मिसाल, मिशन जल रक्षा से जल संरक्षण को मिली नई दिशा

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नई दिल्ली/राजनांदगांव- मानसून के आगमन के साथ देशभर में 'कैच द रेन' अभियान तेज़ी पकड़ रहा है। इस अभियान के तहत विभिन्न जिले वर्षा जल के संरक्षण और भूजल स्रोतों को मजबूत बनाने के लिए व्यापक प्रयास कर रहे हैं। इन्हीं में छत्तीसगढ़ का राजनांदगांव जिला अपनी अभिनव 'मिशन जल रक्षा' पहल के कारण देशभर में एक मिसाल बनकर उभरा है। वैज्ञानिक तकनीकों, जनभागीदारी और प्रभावी जल प्रबंधन के माध्यम से जिले ने यह सुनिश्चित किया है कि बारिश की हर बूंद को संरक्षित कर भूजल भंडार तक पहुंचाया जाए।

राजनांदगांव ने मानसून शुरू होने से पहले ही जल संरक्षण की व्यापक तैयारी कर ली थी। मिशन जल रक्षा के तहत ऐसा वैज्ञानिक और सामुदायिक ढांचा विकसित किया गया है, जिससे वर्षा जल बहकर व्यर्थ न जाए, बल्कि उसे धरती के भीतर पहुंचाकर भूजल स्तर को बढ़ाया जा सके।

इस अभियान में जीआईएस मैपिंग (GIS Mapping), रिमोट सेंसिंग, एक्वीफर मैपिंग, डिजिटल एलिवेशन मॉडल (DEM) और रिज-टू-वैली प्लानिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर भूजल पुनर्भरण के लिए उपयुक्त स्थानों की पहचान की गई। इसके साथ ही बंद पड़े बोरवेलों को रिचार्ज शाफ्ट में बदला गया तथा मिनी परकोलेशन टैंक और डीप इंजेक्शन वेल जैसी संरचनाएं विकसित की गईं, जिससे कठोर चट्टानी क्षेत्रों में भी वर्षा जल गहरे भूजल स्रोतों तक पहुंच सके।

मिशन जल रक्षा की सबसे बड़ी सफलता यह रही कि यह केवल सरकारी योजना न रहकर जन आंदोलन बन गया। किसान, महिलाएं, युवा, ग्राम पंचायतें और स्थानीय समुदाय जल बजट, जागरूकता अभियान और व्यवहार परिवर्तन कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से शामिल हुए। जनभागीदारी के कारण जल संरक्षण को व्यापक सामाजिक समर्थन मिला।

कृषि क्षेत्र में भी इस पहल का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला। गर्मी के मौसम में होने वाली लगभग 70 प्रतिशत धान की खेती को कम पानी वाली फसलों की ओर स्थानांतरित किया गया, जिससे भूजल पर दबाव कम हुआ और कृषि अधिक टिकाऊ बनी।

मिशन के परिणाम भी बेहद उत्साहजनक रहे हैं। जिले की 662 ग्राम पंचायतों में 60 हजार से अधिक जल संरक्षण एवं भूजल पुनर्भरण संरचनाएं बनाई गई हैं। 500 से अधिक बंद पड़े बोरवेल रिचार्ज शाफ्ट में परिवर्तित किए गए हैं। 600 से अधिक इंजेक्शन वेल को 1,700 से अधिक मिनी परकोलेशन टैंकों से जोड़ा गया है तथा 2,500 से अधिक जलाशयों का जियो-टैगिंग किया गया है।

इन प्रयासों से 51 लाख से अधिक मानव-दिवस रोजगार सृजित हुए हैं और जिले में औसतन 2.04 मीटर भूजल स्तर की वृद्धि दर्ज की गई है। इससे सिंचाई और पेयजल सुरक्षा दोनों को मजबूत आधार मिला है।

'कैच द रेन' अभियान के तहत राजनांदगांव यह साबित कर रहा है कि वैज्ञानिक योजना, समय पर तैयारी और जनभागीदारी के माध्यम से मानसून को स्थायी जल सुरक्षा के अवसर में बदला जा सकता है। मिशन जल रक्षा यह संदेश देता है कि वर्षा जल संरक्षण केवल मौसमी गतिविधि नहीं, बल्कि जल स्रोतों की सुरक्षा, जलवायु अनुकूलन और जल-सुरक्षित भविष्य की दिशा में एक सतत संकल्प है।

राजनांदगांव अब बारिश का इंतजार नहीं करता, बल्कि बारिश की हर बूंद को सहेजने के लिए पूरी तरह तैयार है।


ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को दिखाई भारत की ताकत, पाकिस्तान से बातचीत केवल पीओके पर होगी: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

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द्रास (लद्दाख)- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 27वें कारगिल विजय दिवस के अवसर पर द्रास स्थित कारगिल युद्ध स्मारक में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' की सफलता इस बात का प्रमाण है कि भारत पाकिस्तान की हर दुस्साहसपूर्ण हरकत का उसकी कल्पना से कहीं अधिक कठोर जवाब देने में सक्षम है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पाकिस्तान के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत तभी होगी, जब उसका विषय केवल पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) की वापसी होगा।

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की संप्रभुता के खिलाफ होने वाली हर साजिश का जवाब भारतीय सशस्त्र बल उसी दृढ़ता और साहस से देंगे, जैसा उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आतंकवादियों और उनके संरक्षकों के खिलाफ दिया।

उन्होंने पाकिस्तान पर आतंकवाद को राज्य नीति का हिस्सा बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि वहां सेना और आतंकवादी संगठनों के बीच का अंतर लगभग समाप्त हो चुका है। पाकिस्तान की सेना न केवल आतंकवादी संगठनों को संरक्षण देती है, बल्कि उनके साथ मिलकर काम भी करती है। इसी कारण भारत अब आतंकवादियों और उन्हें संरक्षण देने वाली सरकारों को अलग-अलग नहीं मानता।

भारत और पाकिस्तान की राहें अब पूरी तरह अलग

राजनाथ सिंह ने कहा कि कारगिल युद्ध के 27 वर्षों बाद भारत और पाकिस्तान की दिशा पूरी तरह बदल चुकी है। उन्होंने कहा कि जहां भारत नवाचार, स्टार्टअप, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष मिशनों और डिजिटल तकनीक में नई ऊंचाइयां छू रहा है, वहीं पाकिस्तान घुसपैठ, आतंकवाद, आत्मघाती हमलावरों और कट्टरपंथ को बढ़ावा देने में लगा हुआ है।

उन्होंने कहा कि भारत दुनिया को सॉफ्टवेयर और यूपीआई जैसी आधुनिक तकनीक दे रहा है, जबकि पाकिस्तान आतंकवाद और हवाला नेटवर्क को बढ़ावा दे रहा है। यदि पाकिस्तान भारत की प्रगति में बाधा डालने का प्रयास करेगा, तो भारतीय सशस्त्र बल उसे करारा जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

सेना को खुली छूट, हर खतरे का मिलेगा जवाब

रक्षा मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने सशस्त्र बलों को हर खतरे का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी राजनीतिक स्वतंत्रता दी है। उन्होंने विश्वास जताया कि जब तक भारतीय सैनिक देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं, तब तक कोई भी दुश्मन भारत की ओर बुरी नजर डालने का साहस नहीं कर सकता।

कारगिल के वीरों को श्रद्धांजलि

राजनाथ सिंह ने 1999 के कारगिल युद्ध में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने परमवीर चक्र विजेता कैप्टन विक्रम बत्रा और कैप्टन मनोज कुमार पांडेय सहित सभी शहीदों को याद करते हुए कहा कि उनका बलिदान देश के युवाओं को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।

उन्होंने कहा कि कारगिल विजय दिवस केवल विजय का प्रतीक नहीं, बल्कि त्याग, सेवा और राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करने वाला दिन है।

हर भारतीय में होना चाहिए सैनिक जैसा जज़्बा

रक्षा मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सेना की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का भी कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि हर भारतीय में सैनिक जैसा अनुशासन, साहस और राष्ट्रप्रेम होना चाहिए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर पूरा देश एकजुट होकर राष्ट्र की रक्षा के लिए खड़ा हो सके।

2047 का विकसित भारत होगा सुरक्षित और आत्मनिर्भर

उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 का सपना केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रणनीतिक शक्ति, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक समरसता का भी संकल्प है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कारगिल के वीरों जैसी निष्ठा और समर्पण की आवश्यकता है।

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर विशेष जोर

राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत रक्षा उत्पादन में तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है। उन्होंने बताया कि पहले भारत अपनी 65-70 प्रतिशत रक्षा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर था, जबकि आज लगभग 65 प्रतिशत रक्षा उपकरण देश में ही बनाए जा रहे हैं।

उन्होंने आकाश-तीर एयर डिफेंस सिस्टम, आकाश मिसाइल, आईएनएस विक्रांत, तेजस, प्रचंड, ध्रुव, अर्जुन टैंक, पिनाका, अस्त्र मिसाइल और आधुनिक ड्रोन व काउंटर-ड्रोन प्रणालियों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये भारतीय सेनाओं की ताकत को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कैप्टन विक्रम बत्रा के प्रसिद्ध नारे "ये दिल मांगे मोर" का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत और अधिक आधुनिक हथियार, लड़ाकू विमान, पनडुब्बियां और मिसाइलें स्वदेश में ही विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

शहीदों को दी श्रद्धांजलि

कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री ने कारगिल युद्ध स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी तथा दो मिनट का मौन रखा। उन्होंने 'शौर्य विजय यात्रा' का समापन भी किया, जिसका शुभारंभ उन्होंने 14 जुलाई को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक से किया था। इस अवसर पर वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, कारगिल युद्ध के वीर सैनिक, वीर नारियां, शहीदों के परिजन और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।


मन की बात: कारगिल के शौर्य से लेकर 'वोकल फॉर लोकल' तक, पीएम मोदी ने देशवासियों को दिया कई अहम संदेश

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के नवीनतम संस्करण में देशवासियों को संबोधित करते हुए कारगिल विजय दिवस, आत्मनिर्भर भारत, जल संरक्षण, पर्यावरण, खेल, विज्ञान, अंतरिक्ष, हस्तशिल्प और 'वोकल फॉर लोकल' जैसे अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा किए।


प्रधानमंत्री ने सबसे पहले कारगिल विजय दिवस पर शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि कारगिल की दुर्गम चोटियों पर भारतीय सैनिकों ने अदम्य साहस और पराक्रम का परिचय देते हुए मातृभूमि की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने बताया कि इस वर्ष 'शौर्य विजय यात्रा' के माध्यम से देश की युवा पीढ़ी तक वीर सैनिकों की गाथा पहुंचाई जा रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत लगातार अपनी रक्षा क्षमता को मजबूत कर रहा है। उन्होंने स्वदेशी युद्धपोत INS महेंद्रगिरि, पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट और कुशा मिसाइल के सफल परीक्षण का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आत्मनिर्भर भारत की बढ़ती ताकत का प्रमाण है।

जल संरक्षण पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने 'कैच द रेन' अभियान को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि देशभर में तालाबों के पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और वृक्षारोपण जैसे कार्यों में लोगों की व्यापक भागीदारी देखने को मिल रही है।

खेलों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने पी.वी. सिंधु के जापान ओपन खिताब और भारतीय महिला क्रिकेट टीम की ऐतिहासिक लॉर्ड्स टेस्ट जीत पर खिलाड़ियों को बधाई दी। उन्होंने भारतीय खिलाड़ियों के बेहतर प्रदर्शन की कामना भी की।

विज्ञान और अंतरिक्ष के क्षेत्र में उपलब्धियों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने निजी क्षेत्र द्वारा विकसित भारत के पहले रॉकेट 'विक्रम-1' की सफल लॉन्चिंग और अंतरराष्ट्रीय विज्ञान ओलंपियाड में भारतीय छात्रों के शानदार प्रदर्शन की सराहना की।

प्रधानमंत्री ने जम्मू-कश्मीर की पारंपरिक 'वागु' चटाई, उत्तर प्रदेश की महिलाओं द्वारा तैयार हर्बल चाय, तथा 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान का भी उल्लेख किया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय उत्पादों को अपनाने के लिए देशवासियों से आगे आने की अपील की।

उन्होंने गणेश उत्सव पर स्वदेशी मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाएं स्थापित करने, प्लास्टिक मुक्त भारत के लिए 'रिड्यूस, रीयूज और रीसायकल' अपनाने तथा 'वोकल फॉर लोकल' अभियान को मजबूत करने का संदेश दिया।

प्रधानमंत्री ने आगामी राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर लोगों से खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पाद खरीदने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इससे देश के बुनकरों और कारीगरों को आर्थिक मजबूती मिलेगी।

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को श्रद्धांजलि दी, गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं दीं और आगामी 'हर घर तिरंगा' अभियान में पूरे उत्साह से भाग लेने का आह्वान किया।

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने संभाला शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार, योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की

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केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने आज आधिकारिक रूप से शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभाला। उन्होंने कर्तव्य भवन में पदभार ग्रहण किया। जोशी के पास शिक्षा मंत्रालय के साथ-साथ उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का भी प्रभार है।

कार्यभार संभालने के बाद जोशी ने मंत्रालय की एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में उन्होंने विभिन्न सरकारी योजनाओं तथा मंत्रालय की अन्य प्रमुख पहलों के क्रियान्वयन की समीक्षा की। इस बैठक में केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी भी उपस्थित रहे।

बैठक में उच्च शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. विनीत जोशी, स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव टी. के. अनिल कुमार, तथा शिक्षा मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।



CM साय ने 'मन की बात' का 136वां एपिसोड सुना; बोले- 'यह राष्ट्रसेवा के संकल्प को दृढ़ करने वाला संवाद'

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 136वें एपिसोड का रायपुर स्थित दया भवन में श्रवण किया।


कार्यक्रम के पश्चात मुख्यमंत्री साय ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रेरणादायी संवाद का सहभागी बनना राष्ट्रसेवा के संकल्प को और अधिक दृढ़ करने वाला अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि एक दशक से अधिक समय में ‘मन की बात’ केवल एक रेडियो कार्यक्रम बनकर नहीं रहा, बल्कि यह जनभागीदारी के एक राष्ट्रीय अभियान के रूप में स्थापित हो चुका है। यह देश के कोने-कोने में हो रहे सकारात्मक प्रयासों, अनाम नायकों और प्रेरक नवाचारों को राष्ट्रीय पहचान देकर प्रत्येक नागरिक को राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बना है।

कोरबा के अमृत सरोवर और 'हर घर तिरंगा' का जिक्र

मुख्यमंत्री ने बताया कि आज के एपिसोड में प्रधानमंत्री मोदी ने छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में अमृत सरोवर योजना के तहत तालाबों के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों का विशेष उल्लेख किया। अनेक प्रेरक उदाहरणों के माध्यम से प्रधानमंत्री ने जनसहभागिता की शक्ति को रेखांकित किया है। इसके साथ ही उन्होंने आगामी स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को जन-जन का उत्सव बनाने का भी आह्वान किया।

सीएम साय ने कहा कि प्रधानमंत्री का यह सतत संवाद हमें विश्वास दिलाता है कि विकसित भारत का मार्ग जागरूक नागरिकों के सामूहिक संकल्प, कर्तव्यबोध और जनशक्ति से ही प्रशस्त होगा।

प्रमुख जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता रहे मौजूद

रायपुर स्थित दया भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक पुरंदर मिश्रा, अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री साय ने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के त्यागपत्र को सार्वजनिक जीवन में नैतिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता का बताया उदाहरण

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री  धर्मेंद्र प्रधान के त्यागपत्र पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि  धर्मेंद्र प्रधान ने अपने सार्वजनिक जीवन के प्रत्येक दायित्व का निर्वहन सदैव निष्ठा, ईमानदारी और पूर्ण समर्पण के साथ किया है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में उनकी कार्यशैली, संगठनात्मक क्षमता और राष्ट्रहित के प्रति समर्पण सभी के लिए प्रेरणास्रोत रहे हैं।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीते 12 वर्षों के दौरान केंद्रीय मंत्री के रूप में  धर्मेंद्र प्रधान ने विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विशेष रूप से केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन, शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार, तकनीकी एवं उच्च शिक्षा के विस्तार तथा विद्यार्थियों के लिए नए अवसरों के सृजन में उनका योगदान अत्यंत उल्लेखनीय रहा है।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए अपने पद से त्यागपत्र देने का उनका निर्णय सार्वजनिक जीवन में नैतिक मूल्यों, मर्यादा और सिद्धांतों के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता का परिचायक है। यह निर्णय सार्वजनिक जीवन में उत्तरदायित्व और नैतिक आचरण का एक प्रेरक उदाहरण भी है।

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने श्री धर्मेंद्र प्रधान के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि राष्ट्रसेवा के उनके सतत प्रयास आगे भी देश के विकास और जनकल्याण को नई दिशा देते रहेंगे।

'पीएम मोदी की उम्मीदों पर खरा उतरूँगा, पूरी जिम्मेदारी से निभाऊँगा कर्तव्य'

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 नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार संभालने के बाद शनिवार को देश को आश्वस्त किया कि वे इस नई भूमिका को पूरी विनम्रता, ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ निभाएंगे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद जोशी को यह नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।


पदभार ग्रहण करने के बाद प्रह्लाद जोशी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा, "प्रधानमंत्री जी ने मुझ पर विश्वास जताते हुए इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। उनके मार्गदर्शन और नेतृत्व में, मैं पूरी निष्ठा के साथ काम करूँगा और इस विभाग में उनकी सभी अपेक्षाओं को पूरा करने का भरसक प्रयास करूँगा।"

NEP के क्रियान्वयन और धर्मेंद्र प्रधान के योगदान की सराहना

नवनियुक्त शिक्षा मंत्री ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के सफल क्रियान्वयन का श्रेय पूर्व मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को दिया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के पिछले 12 वर्षों के कार्यकाल में शिक्षा के क्षेत्र में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल हुई हैं। बीते 4-5 वर्षों में देश की शिक्षा व्यवस्था में जो परिवर्तन और प्रगति हुई है, उसमें धर्मेंद्र प्रधान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

छात्र प्रदर्शनों के बीच धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा

गौरतलब है कि NEET परीक्षा पत्र लीक मामले को लेकर देशभर में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। शनिवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर अपना त्यागपत्र साझा करते हुए उन्होंने लिखा कि देश की एकता और छात्रों का हित उनके लिए सर्वोपरि है।

उन्होंने पत्र में स्पष्ट किया, "जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में उत्पन्न स्थितियों का राष्ट्र-विरोधी ताकतों द्वारा दुरुपयोग न हो और छात्रों का भविष्य कानूनी उलझनों में न फँसे, इसी उद्देश्य से मैंने माननीय प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंपा है।"

छत्तीसगढ़: आकाशीय बिजली गिरने से 7 साल की बच्ची की मौत, दो घायल

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 सरगुजा: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के लखनपुर ब्लॉक स्थित ग्राम बिनिया में शनिवार शाम एक दर्दनाक हादसा हो गया। खेत में धान की रोपाई कर रहे परिवार पर अचानक आकाशीय बिजली गिर गई। इस हादसे में 7 वर्षीय बच्ची प्रीति ठाकुर की मौके पर ही झुलसने से मौत हो गई, जबकि उसकी 9 वर्षीय बहन और एक युवक घायल हो गए।


जानकारी के अनुसार, ग्राम बिनिया निवासी प्रीति ठाकुर अपने पिता शिक्षा प्रसाद ठाकुर, मां पुनीता ठाकुर, बहन रूमा ठाकुर, रवि ठाकुर, वृक्षा प्रसाद ठाकुर और व्रत कुंवर ठाकुर के साथ खेत में काम कर रही थी। शाम करीब 4:30 बजे अचानक मौसम बदला और तेज बारिश के साथ गाज गिर गई, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

अस्पताल में बच्ची को मृत घोषित किया, दो का इलाज जारी

घटना के तुरंत बाद परिजनों और ग्रामीणों ने सभी घायलों को अरगोती अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने जांच के बाद 7 साल की प्रीति को मृत घोषित कर दिया। वहीं, बिजली के तेज झटके से बेहोश हुई उसकी बहन रूमा ठाकुर (9 वर्ष) और रवि ठाकुर को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के अनुसार, दोनों घायलों की स्थिति में अब सुधार है।

घटना की सूचना मिलने पर स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पीड़ित परिवार को प्रशासनिक सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी है।

कोरिया जिले में भी गाज गिरने से 7 महिलाएं झुलसीं

इसी दौरान प्रदेश के कोरिया जिले से भी आकाशीय बिजली गिरने की खबर आई है। यहाँ खेत में धान की रोपाई कर रहीं 7 महिलाएं गाज की चपेट में आकर झुलस गईं। ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए सभी को नजदीकी अस्पताल पहुँचाया, जहाँ उनका इलाज चल रहा है।

NEET पेपर लीक: 'बिहार बंद' में प्रदर्शन के बाद तेज प्रताप यादव गिरफ्तार

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 पटना। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) धांधली और पेपर लीक मामले के विरोध में आयोजित राज्यव्यापी बिहार बंद के दौरान जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) के प्रमुख और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।


प्राप्त जानकारी के अनुसार, तेज प्रताप यादव पटना के रामगुलाम चौक पर धरना दे रहे छात्र संगठनों के प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान क्षेत्र में काफी हंगामा और तोड़फोड़ हुई, जिसमें पुलिस वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया गया। इसके बाद पुलिस ने उन्हें पटना के सेंट्रल मॉल के पास से हिरासत में लिया और देर रात थाने में पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया।

'छात्रों के अधिकारों के लिए लड़ाई जारी रहेगी'

प्रदर्शन के दौरान मीडिया से बातचीत में तेज प्रताप यादव ने कहा, "हम छात्रों के भविष्य और उनके अधिकारों के लिए मजबूती से खड़े हैं। युवाओं और छात्रों के न्याय की इस लड़ाई में हम पीछे नहीं हटेंगे।"

राज्यभर में बंद का प्रभाव

नीट पेपर लीक और प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई कार्रवाई के विरोध में बुलाए गए इस बंद का बिहार में मिला-जुला असर देखा गया:

पटना: कई प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प और पथराव की घटनाएं हुईं।

अन्य जिले: नालंदा, नवादा, जहानाबाद और रोहतास जैसे जिलों में बंद का आंशिक असर ही देखने को मिला।

डीआरआई की बड़ी कार्रवाई: देशभर में 27 किलोग्राम से अधिक तस्करी का सोना जब्त, 12 आरोपी गिरफ्तार

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नई दिल्ली- संगठित स्वर्ण तस्करी सिंडिकेट्स के खिलाफ जारी अभियान के तहत राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने देशभर में खुफिया सूचना के आधार पर कई समन्वित अभियान चलाकर 27 किलोग्राम से अधिक विदेशी मूल का तस्करी का सोना जब्त किया है। इन कार्रवाइयों में 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

डीआरआई की जांच में तस्करों द्वारा सोना छिपाने के लिए अपनाए जा रहे अत्याधुनिक और नए तरीकों का खुलासा हुआ है। इनमें विमान के शौचालय की छत, वाहनों और बर्तनों में विशेष रूप से बनाए गए गुप्त खांचे तथा शरीर के भीतर सोना छिपाना शामिल है। इससे संगठित तस्करी गिरोहों के लगातार बदलते तौर-तरीकों का पता चलता है।

मुंबई एयरपोर्ट पर विमान के शौचालय से 12 किलोग्राम सोना बरामद

23-24 जुलाई 2026 को डीआरआई अधिकारियों ने खुफिया सूचना के आधार पर अदीस अबाबा से मुंबई पहुंचे तीन यात्रियों को रोका। विमान की गहन तलाशी के दौरान उसके पिछले शौचालय (Rear Lavatory) की छत के पैनलों में छिपाए गए विदेशी मूल के छह सोने के बिस्कुट, जिनका कुल वजन लगभग 12 किलोग्राम था, बरामद किए गए।

जांच में सामने आया कि यात्रियों ने सोना विमान में छिपाया था ताकि बाद में हवाई अड्डे के कुछ कर्मचारियों की मदद से उसे बाहर निकाला जा सके। डीआरआई ने सोना जब्त कर तीनों यात्रियों को गिरफ्तार कर लिया।

ब्रह्मपुत्र मेल में महिला यात्री से 5 किलोग्राम सोना जब्त

23 जुलाई 2026 को उत्तर प्रदेश में डीआरआई अधिकारियों ने ब्रह्मपुत्र मेल में यात्रा कर रही एक महिला यात्री को पकड़ा। तलाशी के दौरान उसकी कमर पर बंधी बेल्ट और हैंडबैग से 42 विदेशी मूल के सोने के बिस्कुट, जिनका कुल वजन लगभग 5 किलोग्राम था, बरामद किए गए।

पूछताछ में महिला ने स्वीकार किया कि यह सोना बांग्लादेश के रास्ते भारत में तस्करी कर लाया गया था। सोना जब्त कर महिला को गिरफ्तार कर लिया गया।

मुंबई एयरपोर्ट पर गोल्ड डस्ट तस्करी गिरोह का भंडाफोड़

22-23 जुलाई 2026 को मुंबई एयरपोर्ट पर डीआरआई ने एक अन्य खुफिया अभियान में ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया, जो मोम (Wax) के रूप में गोल्ड डस्ट को विमान के शौचालय में छिपाता था। बाद में विमान की सफाई करने वाले कुछ कर्मचारी उसे निकालकर गिरोह तक पहुंचाते थे।

इस कार्रवाई में 3.7 किलोग्राम गोल्ड डस्ट जब्त किया गया तथा पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों में कैरियर, विमान सफाई कर्मचारी, हैंडलर और सोना प्राप्त करने वाला व्यक्ति शामिल हैं।

कोलकाता रेलवे स्टेशन पर बर्तनों में छिपाया गया 4.6 किलोग्राम सोना बरामद

19-20 जुलाई 2026 को डीआरआई अधिकारियों ने कोलकाता रेलवे स्टेशन पर एक यात्री को रोककर उसके सामान की जांच की। तलाशी में विशेष रूप से तैयार किए गए बर्तनों के भीतर छिपाया गया लगभग 4.6 किलोग्राम विदेशी मूल का सोना बरामद हुआ।

जांच में पता चला कि यह सोना म्यांमार के रास्ते भारत में तस्करी कर लाया गया था। सोना जब्त कर यात्री को गिरफ्तार कर लिया गया।

कोच्चि और गुवाहाटी में भी कार्रवाई

इसी सप्ताह डीआरआई ने दो अन्य अलग-अलग अभियानों में लगभग 2 किलोग्राम विदेशी मूल का सोना जब्त किया।

  • कोच्चि हवाई अड्डे पर दुबई से आए एक यात्री के शरीर के भीतर छिपाया गया सोना बरामद किया गया।

  • गुवाहाटी में एक कार के विशेष रूप से तैयार किए गए गुप्त खांचे से सोने के बिस्कुट जब्त किए गए।

इन दोनों मामलों में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया।

तस्करी के बदलते तौर-तरीकों पर डीआरआई की पैनी नजर

डीआरआई का कहना है कि हालिया कार्रवाइयों से यह स्पष्ट है कि संगठित तस्करी गिरोह लगातार नए और जटिल तरीके अपनाकर सोने की तस्करी का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, खुफिया सूचना आधारित अभियानों और सतर्क निगरानी के माध्यम से ऐसे नेटवर्क का लगातार भंडाफोड़ किया जा रहा है।

डीआरआई ने स्पष्ट किया है कि देश में सोने की तस्करी पर अंकुश लगाने और संगठित तस्करी सिंडिकेट्स के खिलाफ कार्रवाई आगे भी इसी तरह जारी रहेगी।

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