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गाजियाबाद की सोसायटी में लिफ्ट के अंदर पेशाब करने का वीडियो वायरल, बदबू की शिकायत के बाद खुला मामला

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गाजियाबाद- उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के इंदिरापुरम इलाके की एक हाईराइज सोसायटी से सामने आए CCTV वीडियो ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। शिप्रा कृष्णा विस्टा सोसायटी, अहिंसा खंड-1 के F-2 टावर की लिफ्ट में एक युवक कथित तौर पर पेशाब करता हुआ CCTV कैमरे में दिखाई दे रहा है। मामला तब सामने आया जब सोसायटी के निवासियों ने लिफ्ट से तेज दुर्गंध आने की शिकायत की। इसके बाद लिफ्ट की CCTV फुटेज खंगाली गई, जिसमें कथित घटना दिखाई दी।

बदबू की शिकायत से सामने आया पूरा मामला

रिपोर्टों के मुताबिक, सोसायटी के कुछ निवासियों को लिफ्ट के अंदर लगातार दुर्गंध महसूस हो रही थी। इसकी शिकायत Apartment Owners’ Association (AOA) और मेंटेनेंस टीम से की गई। इसके बाद यह पता लगाने के लिए लिफ्ट में लगे CCTV कैमरे की रिकॉर्डिंग देखी गई कि दुर्गंध की वजह क्या है।

फुटेज में एक युवक लिफ्ट के अंदर कथित तौर पर पेशाब करता दिखाई देता है। रिपोर्टों के अनुसार, वह लिफ्ट के कंट्रोल पैनल की दिशा में पेशाब करता नजर आया। इस दौरान लिफ्ट अलग-अलग मंजिलों पर रुकती और उसके दरवाजे खुलते दिखाई देते हैं, लेकिन युवक कथित तौर पर अपनी हरकत जारी रखता है।

दरवाजा खुलने पर भी नहीं रुका

CCTV फुटेज के बारे में प्रकाशित रिपोर्टों में बताया गया है कि लिफ्ट कई मंजिलों पर रुकी। एक मौके पर एक अन्य व्यक्ति लिफ्ट में प्रवेश करने के लिए आगे बढ़ता दिखाई देता है, लेकिन अंदर की स्थिति देखकर वह पीछे हट जाता है।

इसके बाद युवक कुछ समय तक लिफ्ट में ही रहता है और फिर अपने फ्लोर पर उतरकर वहां से चला जाता है। वीडियो सामने आने के बाद यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया।

साझा सुविधा के इस्तेमाल पर उठे सवाल

लिफ्ट किसी एक व्यक्ति की निजी जगह नहीं होती। हाईराइज सोसायटी में इसका इस्तेमाल रोजाना बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं, घरेलू कर्मचारियों और दूसरे निवासियों द्वारा किया जाता है। ऐसे में साझा सुविधा के अंदर इस तरह की हरकत से सिर्फ साफ-सफाई का सवाल नहीं उठता, बल्कि अन्य निवासियों के लिए असुविधा और स्वास्थ्य संबंधी चिंता भी पैदा हो सकती है।

घटना के बाद सोसायटी के लोगों ने साझा सुविधाओं के जिम्मेदार इस्तेमाल और नागरिक अनुशासन को लेकर नाराजगी जताई है।

Hygiene और Maintenance भी बड़ा मुद्दा

लिफ्ट के अंदर पेशाब किए जाने की स्थिति में केवल फर्श ही नहीं, बल्कि आसपास के हिस्सों और विशेष रूप से कंट्रोल पैनल जैसे स्थानों की भी उचित सफाई और सैनिटाइजेशन जरूरी हो जाता है।

ऐसी घटनाएं सोसायटी की मेंटेनेंस टीम के सामने भी चुनौती पैदा करती हैं, क्योंकि लिफ्ट जैसी बंद और रोजाना इस्तेमाल होने वाली जगह में स्वच्छता बनाए रखना सामुदायिक स्वास्थ्य के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

क्या आरोपी के खिलाफ कार्रवाई हुई?

इस मामले में उपलब्ध रिपोर्टों में आरोपी की पहचान सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं की गई है। हालांकि, अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार आरोपी को सोसायटी स्तर पर जुर्माना लगाने के बाद छोड़ दिया गया। वहीं कुछ अन्य रिपोर्टों में कहा गया है कि पुलिस कार्रवाई या आगे की कानूनी स्थिति की स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए इस मामले में अंतिम कानूनी कार्रवाई को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों के बीच अंतर है।

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल

CCTV फुटेज सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद लोगों ने इस घटना पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दीं। कई यूजर्स ने इसे साझा सार्वजनिक सुविधाओं के प्रति जिम्मेदारी और नागरिक व्यवहार से जोड़कर देखा।

हालांकि, वायरल CCTV वीडियो के आधार पर किसी व्यक्ति की पहचान, मानसिक स्थिति या नशे की हालत को लेकर सोशल मीडिया पर किए जा रहे अनुमानों को तथ्य नहीं माना जा सकता। कुछ रिपोर्टों ने भी स्पष्ट किया है कि उसके नशे में होने की कोई पुष्टि नहीं हुई है।

घटना से क्या सीख मिलती है?

यह घटना केवल एक वायरल वीडियो का मामला नहीं है, बल्कि साझा सार्वजनिक सुविधाओं के प्रति जिम्मेदारी का भी सवाल उठाती है।

सोसायटी में रहने वाले लोगों के लिए जरूरी है कि:

  • लिफ्ट, पार्किंग, लॉबी और अन्य कॉमन एरिया को निजी जगह की तरह इस्तेमाल न करें।

  • किसी भी तरह की गंदगी या नुकसान होने पर तुरंत मेंटेनेंस टीम को सूचित करें।

  • CCTV फुटेज का इस्तेमाल केवल उचित शिकायत और जांच के लिए किया जाए।

  • किसी व्यक्ति की पहचान उजागर करने या वीडियो को अनावश्यक रूप से फैलाने से बचें।

  • बच्चों और युवाओं को सार्वजनिक एवं साझा स्थानों के प्रति जिम्मेदार व्यवहार के बारे में जागरूक किया जाए।

बड़ा सवाल: वायरल वीडियो से आगे क्या?

इस घटना ने सोशल मीडिया पर भले ही कुछ समय के लिए लोगों का ध्यान खींचा हो, लेकिन इसका वास्तविक महत्व इस बात में है कि हाउसिंग सोसायटियों में साझा सुविधाओं की निगरानी, सफाई और नागरिक अनुशासन को कैसे बेहतर बनाया जाए।

CCTV का उद्देश्य सुरक्षा और घटनाओं की जांच में मदद करना है। वहीं, ऐसी घटनाओं के वीडियो का अनियंत्रित प्रसार किसी व्यक्ति की निजता और प्रतिष्ठा से जुड़े अलग सवाल भी पैदा कर सकता है। इसलिए किसी वायरल वीडियो को शेयर करने से पहले उसकी जरूरत और उसके संभावित प्रभाव पर विचार करना जरूरी है।

फिलहाल गाजियाबाद की इस घटना में CCTV फुटेज के आधार पर सामने आया कथित व्यवहार ही चर्चा का केंद्र है। आरोपी की पहचान और आगे की कार्रवाई से जुड़ी जानकारी को आधिकारिक पुष्टि के साथ ही अंतिम तथ्य माना जाना चाहिए।

यश दयाल का छत्तीसगढ़ से यू-टर्न, उत्तर प्रदेश के साथ जारी रहेगा सफर; रणजी कैंप में मिली जगह

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लखनऊ- भारतीय तेज गेंदबाज यश दयाल को लेकर घरेलू क्रिकेट से बड़ी खबर सामने आई है। कुछ समय पहले उत्तर प्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ की ओर से खेलने की तैयारी कर रहे यश दयाल ने अपना फैसला बदल लिया है। अब वह उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (UPCA) के साथ बने रहेंगे और आगामी रणजी ट्रॉफी 2026-27 के लिए उत्तर प्रदेश के संभावित खिलाड़ियों के कैंप में शामिल हो गए हैं।

छत्तीसगढ़ जाने की तैयारी क्यों हुई थी?

यश दयाल ने इस साल UPCA से NOC यानी No Objection Certificate के लिए आवेदन किया था। उनका इरादा 2026-27 घरेलू सीजन में छत्तीसगढ़ की तरफ से खेलने का था। जुलाई में रिपोर्ट सामने आई थी कि वह छत्तीसगढ़ के प्री-सीजन कैंप से भी जुड़ चुके हैं।

हालांकि, बाद में उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ की ओर से उन्हें दोबारा राज्य की टीम के लिए खेलने का अवसर देने का भरोसा मिला। इसके बाद दयाल ने छत्तीसगढ़ जाने का फैसला बदल दिया और उत्तर प्रदेश के साथ बने रहने का निर्णय लिया। UPCA के CEO अंकित चटर्जी के अनुसार, दयाल ने UPT20 लीग के दौरान भी उत्तर प्रदेश के लिए खेलने की इच्छा जताई थी।

16 महीने बाद प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में वापसी की तैयारी

यश दयाल ने अपना आखिरी प्रतिस्पर्धी मुकाबला IPL 2025 फाइनल में खेला था। इसके बाद वह करीब 16 महीने तक प्रतिस्पर्धी क्रिकेट से दूर रहे। अब उन्हें उत्तर प्रदेश के रणजी कैंप में शामिल किया गया है।

UPCA के CEO के मुताबिक, दयाल ने हालिया ट्रायल और अभ्यास मैचों में अच्छा प्रदर्शन किया है और इसी आधार पर उन्हें रणजी कैंप में शामिल किया गया है। उत्तर प्रदेश का रणजी कैंप 25 सितंबर से लखनऊ के भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी इकाना क्रिकेट स्टेडियम में शुरू होने वाला है।

हालांकि, कैंप में शामिल होना अंतिम रणजी टीम में चयन की गारंटी नहीं है। अंतिम फैसला चयन प्रक्रिया और प्रदर्शन के आधार पर होगा।

घरेलू क्रिकेट में दयाल का रिकॉर्ड

उत्तर प्रदेश के लिए यश दयाल का घरेलू क्रिकेट रिकॉर्ड भी मजबूत रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक उन्होंने 27 प्रथम श्रेणी मैचों में 84 विकेट लिए हैं। लिस्ट-ए क्रिकेट में उनके नाम 23 मैचों में 36 विकेट हैं, जबकि टी20 क्रिकेट में उन्होंने 71 मैचों में 66 विकेट हासिल किए हैं।

IPL में भी दयाल ने अपनी पहचान बनाई है। वह Royal Challengers Bengaluru (RCB) का हिस्सा रहे हैं और 2025 में टीम की IPL खिताबी जीत के दौरान गेंदबाजी आक्रमण का हिस्सा थे। उस सीजन में उन्होंने 13 विकेट लिए थे।

कानूनी मामलों के बीच क्रिकेट में वापसी

यश दयाल की क्रिकेट में वापसी ऐसे समय हो रही है जब वह दो अलग-अलग कानूनी मामलों का सामना कर रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, एक मामला गाजियाबाद में दर्ज है और दूसरा मामला जयपुर में POCSO कानून के तहत दर्ज किया गया है। इन मामलों में लगाए गए आरोप अभी न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं और मामले कानूनी प्रक्रिया में हैं। दयाल की ओर से आरोपों का खंडन किया गया है।

इसी कानूनी और विवादित पृष्ठभूमि के कारण उनका क्रिकेट से जुड़ा भविष्य पिछले कुछ समय से चर्चा में रहा है। अब UPCA द्वारा उन्हें चयन के लिए उपलब्ध मानना उनके घरेलू क्रिकेट करियर में एक नया चरण है।

रणजी ट्रॉफी 2026-27 पर नजर

रणजी ट्रॉफी का 2026-27 सीजन 11 अक्टूबर 2026 से शुरू होना है। उत्तर प्रदेश की टीम का शुरुआती मुकाबला बिहार के खिलाफ राजगीर इंटरनेशनल स्टेडियम में निर्धारित है। ऐसे में आने वाले दिनों में रणजी कैंप में दयाल के प्रदर्शन और अंतिम टीम में उनके चयन पर नजर रहेगी।

छत्तीसगढ़ के लिए क्या मायने रखता है?

यश दयाल का छत्तीसगढ़ के लिए खेलने का विकल्प सामने आने के बाद राज्य के घरेलू क्रिकेट ढांचे में भी उनके संभावित जुड़ाव को लेकर चर्चा हुई थी। जुलाई में उनके छत्तीसगढ़ के प्री-सीजन कैंप से जुड़ने की रिपोर्ट भी सामने आई थी। अब उनके उत्तर प्रदेश में बने रहने के फैसले से वह संभावित बदलाव फिलहाल आगे नहीं बढ़ा है।

अब आगे क्या?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि लंबे अंतराल के बाद यश दयाल प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में किस तरह वापसी करते हैं। फिलहाल वह उत्तर प्रदेश के रणजी कैंप में हैं और चयन के लिए उपलब्ध हैं। उनके प्रदर्शन के आधार पर ही यह तय होगा कि उन्हें 2026-27 रणजी ट्रॉफी के लिए उत्तर प्रदेश की अंतिम टीम में जगह मिलती है या नहीं।


1980s AI Photo Trend पर दिल्ली पुलिस की चेतावनी: ‘नॉस्टैल्जिया’ के पीछे छिपा हो सकता है साइबर खतरा

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नई दिल्ली- सोशल मीडिया पर इन दिनों 1980s AI Photo Trend तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। Instagram और X समेत कई प्लेटफॉर्म पर लोग अपनी सामान्य तस्वीरों को AI की मदद से 1980 के दशक के रेट्रो अंदाज में बदलकर शेयर कर रहे हैं। बड़े हेयरस्टाइल, पुराने दौर के कपड़े, विंटेज कैमरा इफेक्ट, फिल्म ग्रेन और स्टूडियो लाइटिंग वाली ये तस्वीरें लोगों को खूब आकर्षित कर रही हैं। 

लेकिन इसी ट्रेंड के बीच दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया यूजर्स को सावधानी बरतने की सलाह दी है। पुलिस का कहना है कि किसी भी अनजान AI टूल या संदिग्ध लिंक पर अपनी निजी तस्वीर अपलोड करना भविष्य में साइबर अपराध का कारण बन सकता है। दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पोस्ट में चेताया कि जो चीज देखने में सिर्फ मनोरंजन या नॉस्टैल्जिया लगती है, वह जोखिम भी पैदा कर सकती है। 

क्या है 1980s AI Photo Trend?

इस ट्रेंड में यूजर अपनी वर्तमान फोटो किसी AI इमेज टूल में अपलोड करता है और एक निर्देश यानी prompt देकर उसे 1980 के दशक के अंदाज में बदलने को कहता है। AI चेहरे की पहचान योग्य विशेषताओं को बनाए रखते हुए कपड़े, हेयरस्टाइल, बैकग्राउंड, रोशनी और तस्वीर की टेक्सचर को पुराने दौर जैसा बना देता है।

यही वजह है कि कुछ ही सेकंड में तैयार होने वाली तस्वीरें बेहद वास्तविक दिखाई देती हैं। इस तकनीक ने फोटो एडिटिंग को आसान बना दिया है और बिना किसी विशेष डिजाइनिंग स्किल के लोग अपनी तस्वीरों को अलग-अलग दौर और स्टाइल में बदल पा रहे हैं।

दिल्ली पुलिस ने क्यों जारी की चेतावनी?

दिल्ली पुलिस ने खास तौर पर अनजान AI टूल्स और random links से सावधान रहने को कहा है। पुलिस के अनुसार, इंटरनेट पर अपलोड की गई तस्वीरों का दुरुपयोग फर्जी प्रोफाइल बनाने, धोखाधड़ी, ब्लैकमेल या अन्य साइबर अपराधों में किया जा सकता है। 

खास खतरा तब बढ़ सकता है जब कोई व्यक्ति बिना जांचे किसी वेबसाइट या सोशल मीडिया लिंक पर क्लिक कर अपनी फोटो अपलोड कर दे। कुछ फर्जी वेबसाइटें लोकप्रिय AI filters या viral photo trends के नाम पर यूजर्स को आकर्षित कर सकती हैं।

सिर्फ चेहरा ही नहीं, तस्वीर के साथ और क्या जा सकता है?

किसी फोटो में केवल चेहरा ही महत्वपूर्ण जानकारी नहीं होता। तस्वीर के बैकग्राउंड में घर का नंबर, वाहन का registration number, सड़क या दुकान का नाम, ऑफिस, स्कूल या अन्य पहचान योग्य स्थान दिखाई दे सकते हैं।

इसके अलावा, मूल फोटो से जुड़ी कुछ तकनीकी जानकारी या metadata भी मौजूद हो सकती है, हालांकि यह इस बात पर निर्भर करता है कि फोटो किस डिवाइस और प्लेटफॉर्म से ली या अपलोड की गई है। इसलिए हाई-क्वालिटी निजी तस्वीरें किसी भी अनजान सेवा को देना सोच-समझकर ही किया जाना चाहिए।

Fake Profile और Blackmail का खतरा

AI की मदद से किसी व्यक्ति की तस्वीर को बदलना और उसे नए संदर्भ में इस्तेमाल करना पहले की तुलना में आसान हो गया है। दिल्ली पुलिस ने इसी वजह से fake profiles, blackmail और cyber fraud जैसे संभावित खतरों की ओर ध्यान दिलाया है। 

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर AI फोटो टूल असुरक्षित है। पुलिस की चेतावनी मुख्य रूप से अनजान या अविश्वसनीय प्लेटफॉर्म पर निजी तस्वीरें अपलोड करने और संदिग्ध लिंक खोलने के जोखिम को लेकर है। 

 Scam का एक और तरीका—Fake AI Filter Links

साइबर अपराधी लोकप्रिय trends का फायदा उठाकर लोगों को फर्जी लिंक भेज सकते हैं। उदाहरण के लिए, किसी यूजर को “अपनी 1980s फोटो बनाएं” या “viral AI filter” जैसे संदेश के साथ लिंक भेजा जा सकता है।

ऐसे लिंक पर क्लिक करने के बाद यूजर को किसी संदिग्ध वेबसाइट पर ले जाया जा सकता है या कोई अनजान ऐप/APK डाउनलोड करने के लिए कहा जा सकता है। अलग-अलग साइबर सुरक्षा चेतावनियों में ऐसे संदिग्ध लिंक और अनजान फाइलों से बचने की सलाह दी गई है। 

अगर AI Photo Trend आजमाना है तो इन बातों का रखें ध्यान

1. अनजान AI वेबसाइट पर फोटो अपलोड न करें।
किसी भी टूल का इस्तेमाल करने से पहले उसकी विश्वसनीयता और privacy policy जांचें।

2. Random links से AI filter इस्तेमाल न करें।
सोशल मीडिया, WhatsApp या SMS पर आए संदिग्ध लिंक से बचें।

3. फोटो का background साफ रखें।
घर का नंबर, वाहन नंबर, पहचान संबंधी दस्तावेज या अन्य निजी जानकारी दिखाई दे तो उसे crop या blur कर दें।

4. संवेदनशील तस्वीरें कभी अपलोड न करें।
Identity documents, निजी रिकॉर्ड या अत्यधिक निजी तस्वीरों को AI tools में डालने से बचें।

5. दूसरे लोगों की तस्वीर बिना अनुमति के अपलोड न करें।
खासकर बच्चों की तस्वीरों के मामले में अतिरिक्त सावधानी जरूरी है।

6. App या APK डाउनलोड करने से पहले स्रोत जांचें।
किसी viral trend के नाम पर मिलने वाली अनजान file या application को install न करें।

साइबर फ्रॉड हो जाए तो क्या करें?

दिल्ली पुलिस ने साइबर अपराध का शिकार होने वाले लोगों को राष्ट्रीय साइबर फ्रॉड हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करने और सरकारी cybercrime reporting system का इस्तेमाल करने की सलाह दी है। ऐसे मामलों में समय पर शिकायत करना महत्वपूर्ण हो सकता है।

AI का इस्तेमाल करें, लेकिन Digital Safety के साथ

1980s AI Photo Trend यह दिखाता है कि AI अब केवल तकनीकी प्रयोग नहीं रहा, बल्कि सोशल मीडिया की रोजमर्रा की संस्कृति का हिस्सा बन चुका है। रचनात्मकता और मनोरंजन के लिए AI का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन किसी भी वायरल ट्रेंड में शामिल होने से पहले यह समझना जरूरी है कि हम किस प्लेटफॉर्म पर क्या डेटा साझा कर रहे हैं।

दिल्ली पुलिस की चेतावनी का मुख्य संदेश यही है कि ट्रेंड कुछ समय के लिए वायरल हो सकता है, लेकिन डिजिटल दुनिया में साझा की गई व्यक्तिगत तस्वीर का नियंत्रण हमेशा पूरी तरह आपके हाथ में नहीं रहता। इसलिए किसी भी AI tool का इस्तेमाल करने से पहले उसकी विश्वसनीयता, privacy settings और data-handling practices को समझना डिजिटल सुरक्षा का अहम हिस्सा है।


परंपरागत गौपालन को आधुनिक तकनीक का साथ, राजनाथ ने खड़ा किया सफल डेयरी व्यवसाय

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कृत्रिम गर्भाधान से अपने डेयरी फार्म में तैयार कर रहे उन्नत नस्ल की बछिया, बाहर से गाय खरीदने की जरूरत हुई कम

40 से 50 गायों से रोजाना 300 से 350 लीटर दूध का उत्पादन, डेयरी बनी परिवार की मजबूत आजीविका

पशु चिकित्सा विभाग के मार्गदर्शन से नस्ल सुधार और बेहतर पशु प्रबंधन को मिला बढ़ावा

रायपुर- पीढ़ियों से चले आ रहे गौपालन को आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पशुपालन पद्धतियों से जोड़कर लुण्ड्रा विकासखंड के ग्राम पंचायत दोरना निवासी राजनाथ यादव ने इसे सफल डेयरी व्यवसाय का रूप दिया है। पशु चिकित्सा विभाग के मार्गदर्शन में कृत्रिम गर्भाधान, नस्ल सुधार और बेहतर पशु प्रबंधन को अपनाकर उन्होंने अपने डेयरी व्यवसाय को विस्तार दिया है। आज उनकी डेयरी में 40 से 50 गायों से प्रतिदिन करीब 300 से 350 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है और यह परिवार के लिए नियमित एवं मजबूत आजीविका का साधन बनी है।


कृत्रिम गर्भाधान से अपने फार्म में तैयार कर रहे उन्नत नस्ल की बछिया

राजनाथ यादव बताते हैं कि उनके परिवार में उनके पिता के समय से ही गौपालन किया जाता रहा है। पहले परिवार स्थानीय नस्ल की गाय और भैंस पालता था। समय के साथ उन्होंने पशुपालन में आधुनिक तकनीकों को अपनाने का निर्णय लिया और एचएफ नस्ल की गायें खरीदीं। इसके बाद पशु चिकित्सा विभाग के सहयोग से उन्नत नस्ल के सीमन से कृत्रिम गर्भाधान कराना शुरू किया।

इसका परिणाम यह हुआ कि अब उनके डेयरी फार्म में ही बेहतर नस्ल की बछिया तैयार हो रही हैं। इससे उन्हें डेयरी के विस्तार के लिए बार-बार बाहर से गाय खरीदने की आवश्यकता कम हुई है।

नस्ल सुधार से बढ़ा दुग्ध उत्पादन, सालाना 10 से 12 लाख रुपये तक मुनाफा

राजनाथ बताते हैं कि उन्नत नस्ल की बछिया तैयार होने और पशुओं के बेहतर प्रबंधन से उनकी डेयरी की क्षमता बढ़ी है। वर्तमान में उनके पास लगभग 40 से 50 गायें हैं, जिनसे प्रतिदिन 300 से 350 लीटर तक दूध का उत्पादन हो रहा है। इससे परिवार को नियमित आमदनी मिल रही है। राजनाथ के अनुसार डेयरी व्यवसाय से उन्हें सालाना लगभग 10 से 12 लाख रुपये तक का मुनाफा हो रहा है।

पशु चिकित्सा विभाग का मार्गदर्शन बना डेयरी विकास का आधार

राजनाथ बताते हैं कि पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारी-कर्मचारी समय-समय पर उनके पशुओं की देखरेख के लिए पहुंचते हैं। पशुओं के स्वास्थ्य, नस्ल सुधार और कृत्रिम गर्भाधान से संबंधित आवश्यक जानकारी और तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जाता है। विभागीय सहयोग से बेहतर नस्ल की बछिया तैयार करने और डेयरी व्यवसाय को आगे बढ़ाने में उन्हें मदद मिली है।

उन्नत किसान के रूप में सम्मान से बढ़ा उत्साह

राजनाथ को उन्नत किसान के रूप में सम्मान भी मिला है, जिससे उनका उत्साह और बढ़ा है। उन्होंने कहा कि पशुधन विकास और डेयरी गतिविधियों को मिल रहे प्रोत्साहन से पशुपालकों के लिए आजीविका के नए अवसर तैयार हो रहे हैं। उन्होंने पशुधन विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही पशु चिकित्सा विभाग द्वारा समय-समय पर दिए जा रहे मार्गदर्शन और सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।

परंपरा से व्यवसाय तक का सफर

सेवा संकल्प अभियान के तहत राजनाथ यादव की ‘सेवा की कहानी’ बताती है कि परंपरागत गौपालन में आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पशुपालन पद्धतियों को अपनाकर आजीविका को नया स्वरूप दिया जा सकता है। उन्नत नस्ल, कृत्रिम गर्भाधान, बेहतर पशु प्रबंधन और विभागीय मार्गदर्शन के सहारे राजनाथ ने गौपालन को अपने परिवार के लिए व्यवस्थित और लाभकारी डेयरी व्यवसाय में बदल दिया है।

जमुई की घटना: सिर्फ एक अपराध नहीं, समाज और सिस्टम के लिए बड़ा सबक

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जमुई, बिहार: बिहार के जमुई में 19 सितंबर की शाम दो नाबालिग छात्रों के साथ कथित बदसलूकी, मारपीट और लड़की के साथ यौन उत्पीड़न का वीडियो सामने आने के बाद पूरे देश में चर्चा तेज हो गई है। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की, कई आरोपियों की पहचान की और गिरफ्तारियां की गईं। राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए बिहार के DGP से कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है।

लेकिन यह मामला केवल आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। इसने महिला और बाल सुरक्षा, पुलिस की जवाबदेही, सोशल मीडिया की भूमिका, भीड़ की मानसिकता और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

घटना में क्या हुआ?

उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 19 सितंबर की शाम जमुई क्षेत्र में दसवीं कक्षा के एक नाबालिग छात्र और छात्रा को रास्ते में कुछ युवकों ने रोक लिया। दोनों को कथित तौर पर घेरा गया, छात्र के साथ मारपीट की गई और छात्रा के साथ बदसलूकी की गई।

घटना का वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर सामने आया। रिपोर्टों के मुताबिक वीडियो में कई लोग मौके पर दिखाई दे रहे हैं और छात्रा लोगों से उसे जाने देने की अपील करती नजर आती है। पुलिस ने वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू की।

पुलिस के अनुसार मामले में POCSO Act और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया गया। जांच के लिए SIT गठित किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।

पुलिस कार्रवाई और मुख्य आरोपी पर कार्रवाई

घटना का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी की कार्रवाई तेज की। शुरुआती रिपोर्टों में तीन गिरफ्तारियों की जानकारी सामने आई, जबकि बाद की रिपोर्ट में मुख्य आरोपी समेत पांच आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी गई।

मुख्य आरोपी नंदन यादव को पकड़ने के दौरान पुलिस के साथ मुठभेड़ की भी रिपोर्ट सामने आई। पुलिस के अनुसार आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने का प्रयास किया और पुलिस पर हमला किया, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसके पैर में गोली लगी। इस घटनाक्रम की स्वतंत्र कानूनी जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए।

घटना के बाद सोशल मीडिया बना दूसरा मुद्दा

इस मामले का सबसे चिंताजनक पहलू यह भी है कि नाबालिग पीड़िता से संबंधित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हुआ।

पुलिस ने कथित तौर पर पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले लगभग 120 सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

यहां समाज के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण संदेश है:

किसी अपराध का वीडियो शेयर करना न्याय दिलाने का तरीका नहीं है।

वीडियो शेयर करने से पीड़ित की पहचान उजागर हो सकती है, मानसिक आघात बढ़ सकता है और उसके परिवार को सामाजिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है।

POCSO Act की धारा 23 बच्चे की पहचान—नाम, पता, फोटो, परिवार, स्कूल या ऐसी किसी जानकारी के प्रकाशन पर रोक लगाती है जिससे बच्चे की पहचान उजागर हो सकती है।

इसलिए ऐसे मामलों में वीडियो को डाउनलोड करके दोबारा पोस्ट करना, WhatsApp ग्रुप में भेजना या सोशल मीडिया पर वायरल करना मदद नहीं, बल्कि पीड़ित की निजता के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

सबसे बड़ा सवाल: अगर वीडियो वायरल नहीं होता तो?

इस घटना से पुलिस की preventive policing और स्थानीय निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठे हैं।

रिपोर्टों के अनुसार घटना के समय पुलिस को तत्काल इसकी जानकारी नहीं मिली और वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने पीड़ितों की पहचान कर कार्रवाई शुरू की। पुलिस अधिकारियों ने क्षेत्र में पेट्रोलिंग व्यवस्था की समीक्षा की बात भी कही है।

यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है—पीड़ित या परिवार की शिकायत न आना, पुलिस की जिम्मेदारी को पूरी तरह समाप्त नहीं करता, खासकर जब मामला सार्वजनिक स्थान पर नाबालिगों के साथ कथित गंभीर अपराध से जुड़ा हो।

POCSO Act की धारा 19 के तहत किसी व्यक्ति को किसी POCSO अपराध की जानकारी होने या आशंका होने पर पुलिस/विशेष किशोर पुलिस इकाई को सूचना देना अनिवार्य है। कानून पुलिस को ऐसी सूचना पर बिना अनावश्यक देरी कार्रवाई करने का दायित्व भी देता है।

समाज को इस घटना से क्या सीखना चाहिए?

1. अपराध देखकर चुप रहना समाधान नहीं

अगर कोई व्यक्ति किसी लड़की या बच्चे के साथ सार्वजनिक स्थान पर हिंसा या यौन दुर्व्यवहार होते देखता है, तो उसे सुरक्षित तरीके से पुलिस या आपातकालीन सेवा को सूचना देनी चाहिए।

भीड़ बनाकर तमाशा देखना या वीडियो बनाना समस्या को और गंभीर कर सकता है।

2. पीड़ित को दोष देना बंद करना होगा

किसी लड़की का किसी लड़के के साथ होना, किसी स्थान पर जाना या देर से घर लौटना किसी भी व्यक्ति को उसके साथ दुर्व्यवहार करने का अधिकार नहीं देता।

अपराध की जिम्मेदारी अपराध करने वाले व्यक्ति की होती है।

3. सोशल मीडिया पर संवेदनशीलता जरूरी है

आज मोबाइल कैमरा अपराध का सबूत जुटाने में मदद कर सकता है, लेकिन वही कैमरा पीड़ित की पहचान सार्वजनिक करके उसकी जिंदगी और मुश्किल बना सकता है।

वीडियो पुलिस को दें, सोशल मीडिया को नहीं।

4. युवाओं में कानून और सहमति की समझ जरूरी

स्कूल और कॉलेज स्तर पर बच्चों को केवल परीक्षा की तैयारी नहीं, बल्कि सहमति, व्यक्तिगत सीमाएं, साइबर सुरक्षा, लैंगिक सम्मान और कानूनी जिम्मेदारियों के बारे में भी शिक्षित किया जाना चाहिए।

क्या कानून में बदलाव की जरूरत है?

जमुई की घटना के आधार पर केवल “सजा और कठोर कर दी जाए” कहना पर्याप्त समाधान नहीं है। भारत में पहले से ही POCSO Act बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के लिए व्यापक कानूनी ढांचा देता है और इसमें अनिवार्य रिपोर्टिंग, विशेष अदालत, बच्चे के अनुकूल प्रक्रिया तथा बंद कमरे में सुनवाई जैसी व्यवस्थाएं हैं।

इसलिए ज्यादा महत्वपूर्ण सवाल है कि मौजूदा कानून जमीन पर कितनी तेजी और प्रभावी ढंग से लागू हो रहा है।

फिर भी कुछ क्षेत्रों में सुधार पर विचार किया जा सकता है:

 1. Sensitive areas में mandatory safety audit

स्कूल, कोचिंग सेंटर और छात्र-छात्राओं के नियमित आवागमन वाले सुनसान रास्तों की पुलिस द्वारा नियमित सुरक्षा समीक्षा हो।

 2. POCSO मामलों के लिए तेज response system

नाबालिग से जुड़े गंभीर मामलों में सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, महिला हेल्पलाइन, बाल संरक्षण इकाई और मेडिकल सहायता के बीच एकीकृत response mechanism मजबूत किया जाए।

3. सोशल मीडिया पर victim-identification रोकने की बेहतर व्यवस्था

प्लेटफॉर्म और पुलिस के बीच ऐसा त्वरित तंत्र होना चाहिए जिससे नाबालिग पीड़ित की पहचान वाले वीडियो को तेजी से हटाया जा सके और मूल uploader/resharer की पहचान की जा सके।

 4. Police accountability को measurable बनाया जाए

सिर्फ घटना के बाद गिरफ्तारी ही सफलता का पैमाना नहीं होना चाहिए। यह भी देखा जाए कि सूचना मिलने के बाद पुलिस ने कितने समय में response दिया, FIR कब दर्ज हुई, पीड़ित को सुरक्षा कब मिली और जांच कितनी जल्दी आगे बढ़ी।

5. Victim support को कानून का केंद्र बनाया जाए

कानूनी कार्रवाई के साथ पीड़ित बच्चे और परिवार को counselling, legal aid, privacy protection और आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराना जरूरी है। राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी इस मामले में पीड़ितों की सुरक्षा, कानूनी सहायता और मनोवैज्ञानिक परामर्श की जरूरत पर जोर दिया है।

राजनीति से ऊपर उठकर देखने की जरूरत

ऐसी घटनाओं के बाद मामला अक्सर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में बदल जाता है। अलग-अलग नेताओं ने घटना पर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं दी हैं। लेकिन किसी भी पक्ष के राजनीतिक बयान को घटना की जांच के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

मुख्य सवाल बहुत सीधा है:

क्या पीड़ित को न्याय मिला? क्या आरोपी कानून के अनुसार दंडित होंगे? और क्या ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए व्यवस्था में ठोस सुधार होगा?

इन सवालों का जवाब जांच और अदालत की प्रक्रिया से आना चाहिए।

निष्कर्ष: जमुई सिर्फ एक खबर नहीं, एक चेतावनी है

जमुई की घटना समाज के सामने कई स्तरों पर एक गंभीर चुनौती रखती है।

एक तरफ अपराध करने वालों की जवाबदेही जरूरी है, दूसरी तरफ पुलिस की preventive व्यवस्था मजबूत करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसके साथ समाज को यह समझना होगा कि किसी लड़की या बच्चे की गरिमा मनोरंजन, भीड़ के तमाशे या सोशल मीडिया कंटेंट का विषय नहीं है।

कानून मौजूद हैं। POCSO बच्चों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट प्रावधान देता है और BNS में भी महिलाओं तथा यौन अपराधों से संबंधित प्रावधान मौजूद हैं।

अब असली चुनौती है—इन कानूनों का समय पर, निष्पक्ष और संवेदनशील तरीके से पालन।

किसी भी सभ्य समाज की पहचान केवल इस बात से नहीं होती कि अपराधी को कितनी सजा मिली; बल्कि इससे भी होती है कि अपराध होने से पहले व्यवस्था ने कितनी सुरक्षा दी, अपराध के बाद पीड़ित को कितना सहारा मिला और समाज ने पीड़ित के साथ कैसा व्यवहार किया।

जमुई की घटना से सबसे बड़ा सबक यही है—अपराध को रोकना केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, लेकिन अपराध होने पर कानून लागू करना निश्चित रूप से राज्य व्यवस्था की जिम्मेदारी है। समाज की जिम्मेदारी है कि वह तमाशबीन नहीं, संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बने।

छत्तीसगढ़ की ‘राम-नामी’ डॉक्यूमेंट्री को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, रामनामी संस्कृति को मिली राष्ट्रीय पहचान

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रायपुर- छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। रामनामी समुदाय की परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘राम-नामी’ को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री (Best Documentary) का प्रतिष्ठित सम्मान मिला है। यह पुरस्कार वर्ष 2024 के लिए घोषित राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का हिस्सा है।

रामनामी समुदाय की परंपरा पर आधारित है फिल्म

‘राम-नामी’ डॉक्यूमेंट्री छत्तीसगढ़ के रामनामी समुदाय के जीवन, आस्था, परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को केंद्र में रखती है। रामनामी समुदाय अपनी विशिष्ट धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं के लिए जाना जाता है। फिल्म के जरिए इस समुदाय की परंपरा और विरासत को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया गया है।

फिल्म के निर्देशक भारतबाला गणपति हैं। पुरस्कार मिलने के बाद छत्तीसगढ़ में फिल्म की टीम को बधाई देने का सिलसिला जारी है।

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में बड़ी उपलब्धि

72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में ‘राम-नामी’ को Best Documentary का पुरस्कार दिया गया। वहीं ‘Bhangaar’ को Best Non-Feature Film का सम्मान मिला। इस संस्करण में ‘Article 370’ को Best Feature Film चुना गया, जबकि कार्तिक आर्यन और ममूटी को Best Actor और यामी गौतम को Best Actress का पुरस्कार मिला।

मुख्यमंत्री और मंत्रियों ने दी बधाई

डॉक्यूमेंट्री को राष्ट्रीय सम्मान मिलने पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय बताया। उन्होंने रामनामी समुदाय की परंपरा को प्रदेश की लोक-संस्कृति की महत्वपूर्ण धरोहर बताया और फिल्म के निर्देशक तथा पूरी टीम को बधाई दी।

वहीं, छत्तीसगढ़ के संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल और वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने भी फिल्म की पूरी टीम को शुभकामनाएं दीं। मंत्रियों ने कहा कि इस उपलब्धि से रामनामी समाज की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को राष्ट्रीय मंच पर नई पहचान मिली है।

छत्तीसगढ़ की लोक-संस्कृति के लिए क्यों खास है यह सम्मान?

‘राम-नामी’ को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलने का महत्व केवल फिल्म के पुरस्कार तक सीमित नहीं है। डॉक्यूमेंट्री के जरिए छत्तीसगढ़ की एक विशिष्ट लोक-सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा को देशभर के दर्शकों तक पहुंचने का अवसर मिला है।

यह सम्मान राज्य की उन लोक परंपराओं की ओर भी ध्यान आकर्षित करता है, जिन्हें अक्सर मुख्यधारा के सिनेमा और मीडिया में सीमित जगह मिलती है।

 एक नजर में

  • फिल्म: ‘राम-नामी’

  • विषय: छत्तीसगढ़ के रामनामी समुदाय की संस्कृति और परंपरा

  • पुरस्कार: Best Documentary

  • पुरस्कार: 72वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार

  • पुरस्कार वर्ष: 2024 की फिल्मों के लिए

  • निर्देशक: भारतबाला गणपति

  • राज्य: छत्तीसगढ़

संक्षेप में: ‘राम-नामी’ को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री का सम्मान मिलना छत्तीसगढ़ के रामनामी समुदाय की सांस्कृतिक परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर मिली महत्वपूर्ण पहचान है।

रायपुर के भाठागांव में सब्जी बाजार हटाने पर बवाल, निगम टीम से झड़प

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रायपुर- राजधानी रायपुर के भाठागांव इलाके में सब्जी बाजार की शिफ्टिंग को लेकर बुधवार को विवाद बढ़ गया। नगर निगम की टीम सड़क किनारे संचालित सब्जी बाजार को हटाने और उसे दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए पहुंची थी। कार्रवाई के दौरान स्थानीय सब्जी विक्रेताओं और निगम कर्मचारियों के बीच कहासुनी हुई, जो बाद में हाथापाई में बदल गई।

बाजार हटाने की कार्रवाई के दौरान शुरू हुआ विवाद

रिपोर्टों के मुताबिक, भाठागांव मुख्य मार्ग पर सड़क किनारे लंबे समय से सब्जी की दुकानें लग रही थीं। निगम के अनुसार, इससे यातायात व्यवस्था प्रभावित होने की शिकायतें सामने आ रही थीं। इसी के बाद निगम की टीम बाजार को हटाने और विक्रेताओं को व्यवस्थित स्थान पर शिफ्ट करने की कार्रवाई के लिए पहुंची।

बताया गया है कि निगम की टीम जब कार्रवाई के लिए पहुंची तो कुछ विक्रेताओं ने इसका विरोध किया। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हुई और देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

विवाद के बाद मारपीट, कई कर्मचारी घायल

हंगामे के दौरान हुई झड़प में करीब 4 से 5 नगर निगम कर्मचारियों के घायल होने की जानकारी कई स्थानीय रिपोर्टों में सामने आई है। वहीं, विवाद को शांत कराने और बीच-बचाव की कोशिश कर रहे एक पुलिस जवान के भी घायल होने की सूचना है। घायलों की चोटों की गंभीरता को लेकर अभी विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

हालांकि, कुछ रिपोर्टों में घायलों की संख्या अलग बताई गई है। इसलिए पुलिस की जांच और आधिकारिक मेडिकल/केस रिकॉर्ड आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

मौके पर पहुंची पुलिस, इलाके में तनाव

घटना की सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। कुछ समय के लिए इलाके में तनाव और अफरा-तफरी का माहौल रहा। स्थिति को देखते हुए पुलिस बल की मौजूदगी बढ़ाई गई।

घटना के बाद नगर निगम की टीम पुरानी बस्ती थाने पहुंची और लिखित शिकायत देने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अब पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।

वीडियो और CCTV से होगी जांच

पुलिस घटना से जुड़े वीडियो और आसपास लगे CCTV कैमरों के फुटेज की जांच कर रही है। इसका उद्देश्य झड़प के दौरान मौजूद लोगों की पहचान करना और यह पता लगाना है कि विवाद किस तरह बढ़ा और मारपीट में किन लोगों की भूमिका रही।

विवाद के पीछे सिर्फ बाजार हटाना ही मुद्दा नहीं

रिपोर्टों के अनुसार, विवाद का एक अहम पहलू बाजार की शिफ्टिंग और नई जगह पर दुकानदारों को मिलने वाली जगह भी है। विक्रेताओं की ओर से नई मंडी में जगह के आकार और आवंटन की प्रक्रिया को लेकर आपत्ति जताए जाने की बात सामने आई है। दूसरी ओर, निगम का तर्क सड़क किनारे बाजार से यातायात प्रभावित होने और बाजार को व्यवस्थित स्थान पर ले जाने से जुड़ा बताया गया है।

अब पुलिस जांच पर नजर

फिलहाल मामले में दोनों पक्षों के दावों और घटनाक्रम की पुलिस जांच जारी है। शिकायत, CCTV फुटेज, उपलब्ध वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। किस व्यक्ति की क्या भूमिका रही, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

संक्षेप में: भाठागांव में सब्जी बाजार को दूसरी जगह शिफ्ट करने की नगर निगम की कार्रवाई के दौरान विवाद हुआ, जो बाद में झड़प में बदल गया। कई निगम कर्मचारियों और एक पुलिस जवान के घायल होने की सूचना है। निगम की शिकायत के बाद पुलिस CCTV और वीडियो के आधार पर मामले की जांच कर रही है।

छत्तीसगढ़ में बढ़ेगी हवाई कनेक्टिविटी, Modified UDAN के तहत केंद्र-राज्य में MoU

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। Modified UDAN Scheme के अगले चरण के तहत केंद्र सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार के बीच महत्वपूर्ण MoU (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर हुए हैं। यह समझौता देश के 21 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ हुए समझौतों का हिस्सा है।

छोटे शहरों और दूरदराज के इलाकों पर फोकस

नई व्यवस्था में राज्य सरकारों की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण होगी। राज्य ऐसे एयरस्ट्रिप और एयरोड्रोम की पहचान कर सकेंगे, जहां हवाई सेवाओं की जरूरत और संभावनाएं अधिक हैं। इसके जरिए कम सेवा वाले और हवाई संपर्क से वंचित क्षेत्रों को क्षेत्रीय विमानन नेटवर्क से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा।

छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से विमानन सचिव मुकेश बंसल ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे प्रदेश की हवाई कनेक्टिविटी के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।

हवाई पट्टियों के साथ हेली-कनेक्टिविटी पर भी जोर

Modified UDAN के तहत देशभर में 100 नए एयरपोर्ट विकसित करने और दूरदराज के क्षेत्रों में 200 आधुनिक हेलीपैड/हेलीपोर्ट विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। योजना का उद्देश्य छोटे शहरों और दूरस्थ क्षेत्रों तक हवाई पहुंच को बेहतर बनाना है।

लंबे समय तक उड़ानों को बनाए रखने पर जोर

नई योजना में क्षेत्रीय उड़ानों को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने के लिए Viability Gap Funding (VGF) की अवधि को तीन साल से बढ़ाकर पांच साल किया गया है। साथ ही, नए चरण में राज्य सरकारों द्वारा चिन्हित परियोजनाओं को प्राथमिकता देने और एयरपोर्ट विकास की प्रक्रिया को तेज करने की व्यवस्था की गई है।

छत्तीसगढ़ को क्या फायदा हो सकता है?

बेहतर हवाई संपर्क से प्रदेश के पर्यटन, व्यापार, निवेश और रोजगार को बढ़ावा मिलने की संभावना है। दूरदराज के क्षेत्रों में हवाई और हेलीकॉप्टर सेवाओं के विस्तार से आपातकालीन चिकित्सा, राहत एवं आपदा प्रबंधन जैसी सेवाओं तक पहुंच भी बेहतर हो सकती है।

खास बात: Modified UDAN को केंद्र सरकार ने FY 2026-27 से FY 2035-36 तक 10 वर्षों के लिए लागू किया है और इसके लिए ₹28,840 करोड़ का कुल प्रावधान किया गया है।

संक्षेप में: केंद्र और छत्तीसगढ़ के बीच हुआ यह MoU प्रदेश में क्षेत्रीय विमानन के विस्तार का आधार तैयार करता है। अब आगे किन एयरस्ट्रिप, एयरपोर्ट और दूरदराज के क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाती है, इस पर नजर रहेगी।

UN में अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत की कोशिश, कूटनीतिक हल की उम्मीद

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New York- संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने और युद्ध समाप्त करने को लेकर कूटनीतिक बातचीत की कोशिश तेज हुई है। दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच मध्यस्थों के जरिए कई घंटों तक बातचीत हुई। अमेरिकी विशेष दूत Steve Witkoff ने बताया कि बातचीत मध्यस्थों के माध्यम से हुई और आगे भी संपर्क जारी रहने की उम्मीद है।

Trump ने बातचीत को बताया सकारात्मक

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक “बहुत अच्छी” और सकारात्मक रही। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले समय में दोनों पक्षों के बीच और बातचीत हो सकती है तथा किसी संभावित समझौते की दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश जारी है। 

हालांकि, UN में अपने संबोधन के दौरान Trump ने ईरान के खिलाफ कड़ा रुख भी अपनाया और कहा कि अमेरिका के सामने आगे की कार्रवाई या समझौते के बीच चुनाव का सवाल है। इससे बातचीत के साथ-साथ दोनों देशों के बीच तनाव बने रहने का संकेत भी मिलता है।

ईरान की ओर से भी बातचीत के संकेत

ईरानी अधिकारियों ने भी कूटनीतिक समाधान की संभावना के संकेत दिए हैं। Reuters के अनुसार, ईरान ने संकेत दिया है कि यदि अमेरिकी सैन्य दबाव और आर्थिक प्रतिबंधों में राहत मिलती है, तो Strait of Hormuz को दोबारा खोलने जैसे मुद्दों पर बातचीत हो सकती है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। 

तेल बाजार पर असर

अमेरिका-ईरान बातचीत की खबरों का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी दिखाई दिया। बातचीत से तनाव कम होने की उम्मीद बढ़ने के बाद Brent और WTI crude prices में गिरावट दर्ज की गई और Brent कुछ समय के लिए $100 प्रति बैरल के स्तर से नीचे आया। हालांकि, बाजार में आगे की स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। 

क्यों महत्वपूर्ण है?

अमेरिका और ईरान के बीच किसी समझौते की दिशा में प्रगति होने पर मध्य पूर्व की सुरक्षा, Strait of Hormuz से तेल परिवहन और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल बातचीत शुरुआती चरण में है और दोनों पक्षों के रुख में महत्वपूर्ण अंतर बने हुए हैं।

संक्षेप में: UN महासभा के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थों के जरिए बातचीत फिर शुरू हुई है। अमेरिकी पक्ष ने बातचीत को सकारात्मक बताया है, जबकि ईरान ने भी कूटनीतिक रास्ते के संकेत दिए हैं। अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या ये बातचीत किसी ठोस समझौते की दिशा में आगे बढ़ती है।

28 से 30 सितंबर तक बैंक हड़ताल, ग्राहकों पर पड़ सकता है असर

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नई दिल्ली- देशभर के बैंक ग्राहकों के लिए सितंबर के आखिरी दिनों में बैंकिंग सेवाओं को लेकर महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने 28 से 30 सितंबर 2026 तक तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल का आह्वान किया है। यूनियनों की प्रमुख मांग बैंकों में पांच-दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करना है।


लगातार पांच दिनों तक शाखाओं में असर की संभावना

हड़ताल से ठीक पहले 26 सितंबर शनिवार और 27 सितंबर रविवार है। ऐसे में 28–30 सितंबर की हड़ताल के साथ मिलकर कुछ ग्राहकों को लगातार पांच दिनों तक शाखा-आधारित बैंकिंग सेवाओं में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर बैंक की हर शाखा पांचों दिन पूरी तरह बंद रहेगी।

किन सेवाओं पर पड़ सकता है असर?

हड़ताल के दौरान ब्रांच में होने वाले काम, चेक क्लियरेंस और कुछ अन्य ऑफलाइन बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। वहीं, बैंकिंग संस्थानों ने डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल की सलाह दी है। ATM, UPI, इंटरनेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग जैसी डिजिटल सेवाएं उपलब्ध रहने की उम्मीद है, हालांकि किसी सेवा की उपलब्धता बैंक के अनुसार अलग हो सकती है।

ग्राहकों के लिए बैंक की सलाह

SBI समेत कई बैंकों ने ग्राहकों को सलाह दी है कि जरूरी बैंकिंग कार्य हड़ताल शुरू होने से पहले निपटा लें। सरकार ने भी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों से सेवाओं में व्यवधान कम करने के लिए आवश्यक कदम उठाने की अपील की है।

खास बात यह है कि 30 सितंबर को बैंकों का half-yearly closing भी होता है, इसलिए इस अवधि में बैंकिंग और वित्तीय गतिविधियों पर अतिरिक्त दबाव रह सकता है।

क्या करें: अगर आपको नकद निकासी, चेक, बैंक शाखा से जुड़ा कोई जरूरी काम या अन्य ऑफलाइन लेनदेन करना है, तो उसे 28 सितंबर से पहले पूरा करना बेहतर रहेगा। साथ ही, जरूरत के लिए डिजिटल बैंकिंग विकल्पों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

‘The Paradise’ की रिलीज़ से पहले बढ़ी चर्चा

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मुंबई- साउथ सुपरस्टार नानी की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘The Paradise’ अपनी रिलीज़ से पहले ही चर्चा में बनी हुई है। फिल्म 24 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज़ होने जा रही है और रिलीज़ से पहले इसके सेंसर सर्टिफिकेट और हिंसा से जुड़े दृश्यों को लेकर काफी चर्चा हो रही है।



फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच खास उत्सुकता है, क्योंकि ‘The Paradise’ में नानी को एक अलग और दमदार अंदाज में देखा जाने वाला है। फिल्म की कहानी, एक्शन और विजुअल ट्रीटमेंट को लेकर भी सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा देखने को मिल रही है।

सेंसर सर्टिफिकेट और हिंसा पर चर्चा

रिलीज़ से पहले फिल्म के सर्टिफिकेशन और कुछ हिंसक दृश्यों को लेकर सवाल और चर्चाएं सामने आई हैं। फिल्म में एक्शन और हिंसा की मात्रा को लेकर दर्शकों की दिलचस्पी बढ़ी हुई है। हालांकि, फिल्म के अंतिम कंटेंट और सेंसर से जुड़ी जानकारी को लेकर आधिकारिक तौर पर सामने आई बातों को ही आधार माना जाना चाहिए।

नानी के फैंस में उत्साह

‘The Paradise’ को लेकर नानी के फैंस के बीच खासा उत्साह है। फिल्म की रिलीज़ के साथ अब दर्शकों की नजर इस बात पर है कि कहानी, एक्शन और नानी का किरदार बड़े पर्दे पर किस तरह सामने आता है।

फिल्म 24 सितंबर को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली है। रिलीज़ से पहले सेंसर और हिंसा से जुड़े मुद्दों की चर्चा ने फिल्म को लेकर लोगों की जिज्ञासा और बढ़ा दी है।

चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की रिपोर्ट

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10 महीनों में 14 बार दर्ज हुई आपत्ति, मतदाता सूची और एसआईआर प्रक्रिया को लेकर उठे सवाल

नई दिल्ली- देश की चुनावी व्यवस्था से जुड़ी एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। द इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग के दो चुनाव आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—ने पिछले करीब 10 महीनों में कम-से-कम 14 बार आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर औपचारिक रूप से आपत्ति दर्ज की।

रिपोर्ट के अनुसार, इन आपत्तियों का संबंध मुख्य रूप से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाताओं के नाम जोड़ने-हटाने और मतदाता डेटा के डिजिटल प्रबंधन से है।

मामला क्या है?

चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ दो चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी हैं।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, संधू और जोशी ने कई मौकों पर यह आपत्ति दर्ज की कि आयोग के नाम पर कुछ फैसले या आदेश उनकी जानकारी अथवा मंजूरी के बिना लिए गए।

रिपोर्ट के अनुसार, चार आपत्तियां एक ही दिन दर्ज की गई थीं। दोनों आयुक्तों की आपत्तियां चुनावी प्रक्रिया के बेहद महत्वपूर्ण हिस्सों से जुड़ी थीं।

एसआईआर बना विवाद का मुख्य केंद्र

इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा एसआईआर यानी Special Intensive Revision है।

एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण करना है। इसमें मतदाता रिकॉर्ड की जांच की जाती है और पात्रता से संबंधित रिकॉर्ड को अपडेट किया जाता है।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, बिहार से शुरू हुई यह प्रक्रिया बाद में देश के कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों तक पहुंची और इसके दौरान 13 करोड़ से अधिक नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए गए। यह संख्या व्यापक मतदाता रिकॉर्ड की प्रारंभिक छंटाई से संबंधित है; इसे अंतिम रूप से मताधिकार खो चुके लोगों की संख्या के रूप में नहीं पढ़ना चाहिए।

फॉर्म-6 में बदलाव पर आपत्ति

रिपोर्ट के मुताबिक, फॉर्म-6 में किए गए बदलाव को लेकर भी दोनों चुनाव आयुक्तों ने सवाल उठाए।

फॉर्म-6 का इस्तेमाल नए मतदाता के रूप में नाम दर्ज कराने के लिए किया जाता है।

रिपोर्ट के अनुसार, नए फॉर्म में आवेदक से यह जानकारी मांगी गई कि उसका, उसके माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली एसआईआर की मतदाता सूची में था या नहीं।

सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कथित तौर पर इस बदलाव की वैधानिक प्रक्रिया पर आपत्ति जताई। संधू ने बाद में इसे “अनधिकृत और गैरकानूनी” बताते हुए हटाने की मांग की।

मतदाता डेटा के केंद्रीकरण पर भी सवाल

दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों में मतदाता सूची के डिजिटल सिस्टम का मुद्दा भी सामने आया।

रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग के डिजिटल सिस्टम ईसीआईनेट (ECINet) में मतदाता डेटा के प्रबंधन और राज्य स्तर के अधिकारियों की पहुंच को लेकर सवाल उठाए गए।

आयुक्तों ने कथित तौर पर चिंता जताई कि मतदाता सूची के डेटाबेस का संचालन धीरे-धीरे केंद्र स्तर पर अधिक केंद्रीकृत हो रहा है और इससे स्थानीय स्तर पर मतदाता सूची संभालने वाले अधिकारियों की भूमिका प्रभावित हो सकती है।

गोवा में 97 मतदाताओं का मामला

रिपोर्ट में गोवा का एक उदाहरण भी दिया गया है।

इसके अनुसार, 97 मतदाताओं के मामलों में स्थानीय चुनाव अधिकारियों ने दस्तावेजों की जांच के बाद उन्हें पात्र पाया, लेकिन संबंधित डिजिटल सिस्टम में उनके नाम बहाल करने की प्रक्रिया समय पर उपलब्ध नहीं हो सकी।

नतीजतन, ये 97 पात्र मतदाता अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सके।

यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे सवाल उठता है कि यदि जमीनी स्तर का अधिकारी किसी व्यक्ति को पात्र मानता है, तो डिजिटल प्रणाली में उस निर्णय को दर्ज और लागू करने की प्रक्रिया कितनी प्रभावी है।

चुनाव आयोग ने क्या कहा?

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने आंतरिक मतभेद या विभाजन की धारणा को खारिज किया।

डेक्कन क्रॉनिकल की रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग से जुड़े सूत्रों ने कहा कि एसआईआर सहित आयोग के सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं और दोनों चुनाव आयुक्तों तथा मुख्य चुनाव आयुक्त की मंजूरी से लिए गए हैं।

इसलिए इस खबर को समझते समय दोनों पक्षों को अलग-अलग देखना जरूरी है:

रिपोर्ट का दावा:
दो चुनाव आयुक्तों ने कई फैसलों पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज कीं।

चुनाव आयोग का पक्ष:
आयोग के सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

इसका संवैधानिक महत्व क्या है?

चुनाव आयोग भारत की संवैधानिक संस्था है और इसका आधार संविधान का अनुच्छेद 324 है।

चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त शामिल होते हैं। 2023 के कानून के तहत आयोग के कामकाज में जहां तक संभव हो सर्वसम्मति से निर्णय लेने का प्रावधान है। यदि सदस्यों के बीच मतभेद हो तो कानून के अनुसार बहुमत से निर्णय लिया जा सकता है।

इसी वजह से दो चुनाव आयुक्तों द्वारा बार-बार लिखित आपत्ति दर्ज किए जाने की रिपोर्ट को चुनावी प्रशासन की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

निष्कर्ष

चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेद की यह रिपोर्ट इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विवाद सीधे मतदाता सूची, नए मतदाताओं के पंजीकरण और चुनावी डेटा के प्रबंधन जैसे मूल चुनावी कार्यों से जुड़ा है। फिलहाल सार्वजनिक चर्चा में एक तरफ इंडियन एक्सप्रेस की जांच रिपोर्ट है, जबकि दूसरी तरफ चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों का यह कहना है कि उसके फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

नवविवाहिता ने चूहा मार दवा खाई, इलाज के दौरान मौत; मायके पक्ष ने ससुराल पर लगाया प्रताड़ना का आरोप

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 सरगुजा। मैनपाट थाना क्षेत्र में 20 वर्षीय नवविवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। मृतका की पहचान सूरजपुर निवासी वर्षा यादव के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि वर्षा ने चूहा मारने की दवा खा ली थी। गंभीर हालत में उसे अंबिकापुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां मंगलवार सुबह इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।


1 मई को हुई थी शादी

जानकारी के मुताबिक, सूरजपुर के वार्ड क्रमांक-13, प्रगतिनगर निवासी वर्षा यादव की शादी 1 मई 2026 को मैनपाट के लुरैना निवासी अजय यादव से हुई थी। शादी के कुछ महीनों बाद ही उसकी तबीयत बिगड़ने और मौत की यह घटना सामने आई है।

पिता को भेजा था मैसेज- 'जीना नहीं चाहती'

परिजनों के अनुसार, 18 सितंबर को दोपहर करीब 12 बजे वर्षा ने अपने पिता उमेश यादव को वॉट्सऐप पर मैसेज भेजकर कहा था कि वह जीना नहीं चाहती। इसके कुछ देर बाद उसके पति अजय यादव ने परिजनों को फोन कर वर्षा की तबीयत खराब होने की जानकारी दी। उसे इलाज के लिए अंबिकापुर के मिशन अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत गंभीर होने पर आईसीयू में इलाज चल रहा था। मंगलवार सुबह इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

मायके पक्ष ने लगाए मारपीट और प्रताड़ना के आरोप

वर्षा के मायके वालों ने ससुराल पक्ष पर प्रताड़ना और मारपीट के गंभीर आरोप लगाए हैं। पिता उमेश यादव का कहना है कि 15 सितंबर को भी उनकी बेटी ने फोन कर मारपीट किए जाने की बात कही थी। परिजनों का आरोप है कि 19 सितंबर को भी वर्षा ने ससुराल में उसके साथ ठीक व्यवहार नहीं होने की बात कही थी।

परिजनों के मुताबिक, वर्षा एमएससी की पढ़ाई करना चाहती थी। मायके पक्ष ने प्रताड़ना के पीछे पैसों के लेन-देन का मामला होने की आशंका भी जताई है। हालांकि, इन आरोपों की अभी पुलिस जांच कर रही है।

पुलिस और प्रशासन ने दर्ज किए बयान

घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस और नायब तहसीलदार लखेश्वर सिदार मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने परिजनों के बयान दर्ज किए हैं। नायब तहसीलदार के अनुसार, मायके पक्ष ने मारपीट और पैसों के लेन-देन से जुड़े आरोप लगाए हैं।

पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर ही मौत के कारणों और लगाए गए आरोपों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

रायपुर के गोलबाजार गणपति का भव्य स्वर्ण श्रृंगार, 750 ग्राम सोने का मुकुट; कीमत 1 करोड़ से ज्यादा

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 रायपुर। राजधानी का ऐतिहासिक गोलबाजार गणेशोत्सव इस वर्ष भी श्रद्धा और आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। श्री बजरंग नवयुवक मित्र मंडल गणेशोत्सव समिति की ओर से भगवान गणपति का विशेष स्वर्ण श्रृंगार किया गया है। गणेश प्रतिमा को 750 ग्राम सोने और रत्नों से जड़ा मुकुट पहनाया गया है। समिति के अनुसार, मुकुट की वर्तमान बाजार कीमत 1 करोड़ रुपये से अधिक है।


स्वर्ण मुकुट से सजे भगवान गणपति के दर्शन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाता है। देर रात तक पंडाल में भक्तों की भीड़ बनी रहती है। समिति के मुताबिक, दर्शन का क्रम सुबह करीब 4 बजे तक चलता है। पंडाल में आयोजित भजन और अन्य धार्मिक कार्यक्रम भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।

117 साल पुरानी है गणेशोत्सव की परंपरा

समिति के अनुसार, गोलबाजार में सार्वजनिक गणेशोत्सव की परंपरा को इस वर्ष 117 वर्ष पूरे हो रहे हैं। आयोजन से व्यापारी परिवारों की चौथी पीढ़ी जुड़ी हुई है। समिति से जुड़े भाजपा नेता केदार गुप्ता भी करीब 37 वर्षों से गणेशोत्सव के आयोजन और व्यवस्थाओं में सक्रिय हैं।

गोलबाजार गणपति के स्वर्ण मुकुट की परंपरा वर्ष 2018 से चली आ रही है। समिति का कहना है कि श्रद्धालुओं के सहयोग और उनकी आस्था को देखते हुए भविष्य में रिद्धि-सिद्धि के लिए भी स्वर्ण मुकुट तैयार कराने की योजना है।

मनोकामना पूरी होने पर चढ़ाई 2 किलो चांदी

समिति के मुताबिक, पिछले वर्ष एक श्रद्धालु ने मनोकामना पूरी होने के बाद भगवान गणपति को 2 किलो चांदी अर्पित की थी। समिति इसे श्रद्धालुओं की आस्था और भगवान गणपति के प्रति उनकी श्रद्धा का प्रतीक मानती है।

गणपति के साथ बालाजी, लक्ष्मी और पद्मावती के दर्शन

गोलबाजार के पंडाल में भगवान गणपति के साथ भगवान बालाजी, माता लक्ष्मी और मां पद्मावती की प्रतिमाएं भी स्थापित की गई हैं। इनके दर्शन के लिए रायपुर के अलावा आसपास के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

समिति के सदस्यों के अनुसार, सार्वजनिक गणेशोत्सव का उद्देश्य धार्मिक आयोजन के साथ समाज को एकजुट करना भी है। इसी उद्देश्य के साथ इस वर्ष भी पारंपरिक आयोजन के साथ आधुनिक व्यवस्थाओं को शामिल किया गया है। आयोजन में नई पीढ़ी के युवा भी सक्रिय रूप से भागीदारी निभा रहे हैं।

SIR पर EC का बड़ा स्पष्टीकरण, अंदरूनी मतभेद की खबरें खारिज; कहा- सभी फैसले सर्वसम्मति से

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 नई दिल्ली। स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेद की खबरों पर आयोग ने स्पष्टीकरण जारी किया है। आयोग के आधिकारिक सूत्रों ने इन खबरों को खारिज करते हुए कहा कि SIR समेत सभी रणनीतिक और प्रशासनिक फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी की सहमति से लिए गए हैं।


आयोग के सूत्रों के मुताबिक, SIR से जुड़े फैसलों समेत निर्वाचन आयोग के सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग ने कहा कि प्रत्येक फैसले पर मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों की लिखित मंजूरी और सहमति रही है।

किस रिपोर्ट के बाद आया आयोग का स्पष्टीकरण?

आयोग का यह बयान The Indian Express की 23 सितंबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट के बाद आया। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों को लेकर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराईं।

रिपोर्ट के अनुसार, इन आपत्तियों में SIR, नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और जोड़ने, फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता सूची से जुड़े मामलों में अपील तथा चुनावी डेटा तक पहुंच जैसे मुद्दे शामिल थे।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ फैसलों और आदेशों के संबंध में सवाल उठाया था कि क्या उन्हें उनकी जानकारी और मंजूरी के बिना जारी किया गया। इन आपत्तियों की प्रतियां CEC ज्ञानेश कुमार को भी भेजे जाने की बात रिपोर्ट में कही गई है।

चुनाव आयोग के भीतर फैसले लेने की व्यवस्था क्या है?

निर्वाचन आयोग तीन सदस्यीय संवैधानिक संस्था है, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्त होते हैं। आयोग की मौजूदा संरचना में ज्ञानेश कुमार CEC हैं, जबकि सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी चुनाव आयुक्त हैं।

2023 के कानून के तहत आयोग के कामकाज को जहां तक संभव हो, सर्वसम्मति से संचालित किए जाने का प्रावधान है। मतभेद की स्थिति में बहुमत के आधार पर निर्णय लेने की व्यवस्था भी है।

रिपोर्ट में किन मुद्दों का जिक्र?

The Indian Express की रिपोर्ट में फॉर्म-6 में कथित बदलाव, मतदाता सूची के डेटा के केंद्रीकरण और कुछ मामलों में मतदाता नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया को लेकर दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में गोवा में 97 मतदाताओं से जुड़ी एक प्रक्रिया का भी जिक्र किया गया है, जहां स्थानीय स्तर पर पात्र पाए गए मतदाताओं से संबंधित फैसलों को सॉफ्टवेयर में दर्ज करने में समस्या आने की बात कही गई।

हालांकि, चुनाव आयोग के सूत्रों ने इन रिपोर्टों से अलग अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि आयोग के सभी फैसले तीनों सदस्यों की सहमति से ही लिए गए हैं।

विपक्षी दलों ने उठाए सवाल

रिपोर्ट सामने आने के बाद कांग्रेस, समाजवादी पार्टी समेत कई विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर सवाल उठाए। कांग्रेस ने CEC ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए, जबकि सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मामले को गंभीर बताते हुए चुनाव आयोग की स्वतंत्र कार्यप्रणाली को लेकर चिंता जताई।

वहीं, अन्य विपक्षी नेताओं ने भी SIR की प्रक्रिया और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर सवाल उठाए हैं। ये राजनीतिक दलों के आरोप और प्रतिक्रियाएं हैं; चुनाव आयोग ने अपने आधिकारिक सूत्रों के माध्यम से आंतरिक मतभेद की खबरों को खारिज करते हुए सभी फैसलों को सर्वसम्मति से लिया जाना बताया है।

फिलहाल SIR को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस जारी है। आयोग के स्पष्टीकरण और सामने आई मीडिया रिपोर्टों में दावों को लेकर अलग-अलग पक्ष सामने आए हैं।

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