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‘विष्णु भैया’ का घर बना बहनों का मायका, मुख्यमंत्री निवास में उल्लास से मना तीजा-पोरा तिहार

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रायपुर :  नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास आज तीजा-पोरा तिहार के अवसर पर छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति, पारिवारिक आत्मीयता और मातृशक्ति के उल्लास का साक्षी बना। प्रदेश के विभिन्न अंचलों से बड़ी संख्या में पहुंचीं माताओं, बहनों और बेटियों के स्वागत में मुख्यमंत्री निवास को छत्तीसगढ़ी गांव और मायके की तरह सजाया गया था। पारंपरिक बैलगाड़ी, नंदिया-बइला, लोक शिल्प और ग्रामीण परिवेश की सजावट के बीच फुगड़ी, रस्साकशी, कुर्सी दौड़, मेहंदी और झूलों ने पूरे परिसर को उत्सव के रंग में रंग दिया। लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों के बीच माताओं-बहनों ने पूरे उत्साह के साथ तीजा-पोरा की खुशियां साझा कीं।


मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने माताओं-बहनों का आत्मीय स्वागत करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में तीजा पर बेटियों और बहनों के मायके आने की सुंदर परंपरा है। आज प्रदेशभर से आप सभी बहनें मेरे घर आई हैं, इसलिए मुख्यमंत्री निवास आज आप सभी का मायका है। अपने भाई के घर आपका आना मेरे लिए सौभाग्य और आनंद की बात है। मुख्यमंत्री के इस आत्मीय संबोधन के साथ पूरा परिसर तालियों से गूंज उठा।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि तीजा-पोरा हमारी माटी, परिवार, रिश्तों, खेती-किसानी, पशुधन और लोकजीवन से जुड़ा जीवंत उत्सव है। हरेली से शुरू होने वाली छत्तीसगढ़ के तीज-त्योहारों की सुंदर श्रृंखला हमारे सामाजिक और पारिवारिक जीवन को आत्मीयता के सूत्र में बांधती है। हमारी लोक परंपराएं पीढ़ियों को अपनी जड़ों और संस्कारों से जोड़ने का काम करती हैं।

शिव-पार्वती की पूजा कर मांगी प्रदेश की सुख-समृद्धि

कार्यक्रम के आरंभ में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा-अर्चना की और प्रदेश की माताओं-बहनों सहित सभी नागरिकों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।


मुख्यमंत्री ने कहा कि तीजा का पर्व माता पार्वती की तपस्या, समर्पण और अटूट आस्था से जुड़ा हुआ है। माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया था। हमारी माताएं और बहनें आज भी इस महान परंपरा को श्रद्धा के साथ आगे बढ़ा रही हैं। उन्होंने भगवान शिव और माता पार्वती से प्रदेश की माताओं-बहनों के सुख, समृद्धि और अखंड सौभाग्य के साथ छत्तीसगढ़ के निरंतर विकास और खुशहाली की प्रार्थना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पोरा का पर्व हमारी कृषि संस्कृति और पशुधन के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता का प्रतीक है। छत्तीसगढ़ की संस्कृति में खेती-किसानी केवल आजीविका का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन पद्धति का अभिन्न हिस्सा है। तीजा और पोरा का यह संगम हमारी लोकसंस्कृति की उसी आत्मीयता और व्यापकता को अभिव्यक्त करता है।

सुपोषित छत्तीसगढ़ के लिए ‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ अभियान

तीजा-पोरा के अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशव्यापी ‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ अभियान का शुभारंभ किया और अभियान के लोगो का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुनगा पोषक तत्वों और आवश्यक मिनरल्स से भरपूर है। इसकी पत्तियां और फलियां पोषण की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी हैं। विशेषकर महिलाओं और बच्चों के आहार में इसका उपयोग बेहतर पोषण में सहायक हो सकता है।


उन्होंने प्रदेशवासियों से अभियान में सक्रिय भागीदारी का आह्वान करते हुए कहा कि अपने घरों और आसपास मुनगा लगाएं और इसके पोषण गुणों को जन-जन तक पहुंचाएं। घर-घर मुनगा लगाने की यह पहल जनभागीदारी के माध्यम से सुपोषित छत्तीसगढ़ के संकल्प को और मजबूत करेगी।

राष्ट्रीय पोषण माह का शुभारंभ, सुपोषण रथ करेगा जागरूक

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर प्रदेश में राष्ट्रीय पोषण माह का शुभारंभ किया। उन्होंने राष्ट्रीय पोषण माह 2026 के पोस्टर का विमोचन किया और उपस्थित माताओं-बहनों को सुपोषण की शपथ दिलाई। मुख्यमंत्री ने सुपोषण रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना भी किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 9 सितंबर से 8 अक्टूबर तक प्रदेशभर में पोषण माह आयोजित किया जा रहा है। इस दौरान महिलाओं, बच्चों और परिवारों को संतुलित एवं पौष्टिक आहार के प्रति जागरूक करने के लिए विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। सुपोषण रथ भी अलग-अलग क्षेत्रों में पहुंचकर पोषण संबंधी जानकारी लोगों तक पहुंचाएगा।

उन्होंने कहा कि स्वस्थ मां और सुपोषित बच्चा स्वस्थ समाज की मजबूत नींव हैं। केंद्र और राज्य सरकार महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण तथा बेहतर भविष्य के लिए लगातार कार्य कर रही हैं। योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और जनभागीदारी से पोषण के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव को और गति दी जा रही है।

नन्हे बच्चों को खीर खिलाकर कराया अन्नप्राशन

कार्यक्रम में आत्मीयता का एक विशेष दृश्य उस समय देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री श्री साय ने नन्हे बच्चों को अपने हाथों से खीर खिलाकर उनका अन्नप्राशन कराया। उन्होंने बच्चों को स्नेह और आशीर्वाद देते हुए उनके स्वस्थ, खुशहाल और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

तीजा-पोरा के पारिवारिक उत्सव के बीच अन्नप्राशन संस्कार और पोषण से जुड़ी गतिविधियों ने कार्यक्रम को सुपोषण के संदेश से भी जोड़ा। मुख्यमंत्री ने बच्चों की माताओं से भी आत्मीय संवाद किया और बच्चों के स्वास्थ्य तथा पोषण की जानकारी ली।

महतारी वंदन से माताओं-बहनों को मिल रहा आर्थिक संबल

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महिला सशक्तिकरण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की 68 लाख से अधिक माताओं-बहनों को हर महीने एक हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। अब तक 31 किस्तों के माध्यम से 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि माताओं-बहनों के बैंक खातों में सीधे अंतरित की जा चुकी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में प्रवास के दौरान माताओं-बहनों से मिलने पर इस योजना से उनके जीवन में आए बदलाव की अनेक प्रेरक कहानियां सामने आती हैं। कोई बहन महतारी वंदन की राशि को बेटी के भविष्य के लिए सुकन्या समृद्धि योजना में जमा कर रही है, तो कोई सिलाई मशीन खरीदकर आजीविका का साधन तैयार कर रही है। अनेक माताएं-बहनें सब्जी-भाजी, किराना दुकान और छोटे व्यवसायों में इस राशि का उपयोग कर परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना रही हैं।

उन्होंने कहा कि माताओं-बहनों के हाथ में अपनी राशि होने से उनमें आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ी है। सरकार का प्रयास है कि महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि आजीविका, कौशल, स्वामित्व और उद्यमिता के अवसर भी उपलब्ध हों।

लखपति दीदी से ड्रोन दीदी तक - बदल रही मातृशक्ति की तस्वीर

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश की महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। छत्तीसगढ़ में 13 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं, जबकि निर्धारित लक्ष्य 8 लाख महिलाओं का था। यह उपलब्धि माताओं-बहनों की मेहनत, आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की इच्छाशक्ति का परिणाम है।

उन्होंने कहा कि महिलाएं अब पारंपरिक भूमिकाओं से आगे बढ़कर अनेक नए क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रही हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बन रहे घरों के लिए निर्माण सामग्री की आपूर्ति से जुड़कर महिलाएं ‘डीलर दीदी’ बन रही हैं। निर्माण क्षेत्र में प्रशिक्षण प्राप्त कर महिलाएं ‘रानी मिस्त्री’ के रूप में काम कर रही हैं। खेती में आधुनिक तकनीक अपनाते हुए ‘ड्रोन दीदी’ खेतों में उर्वरक और दवाइयों का छिड़काव कर आय के नए अवसर तैयार कर रही हैं। कई ड्रोन दीदियां एक दिन में 20 से 25 एकड़ खेतों में छिड़काव कर लगभग सात हजार रुपए तक की आय अर्जित कर रही हैं।

मुख्यमंत्री ने सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम दानसरा की माताओं-बहनों का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां महिलाओं ने महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि को एकत्र कर भगवान श्रीराम का मंदिर बनाने का प्रेरणादायी संकल्प लिया है। उन्होंने इसे मातृशक्ति की आस्था, सामूहिकता और दृढ़ संकल्प का सुंदर उदाहरण बताया।

महिलाओं के नाम संपत्ति को प्रोत्साहन, स्वामित्व से बढ़ रहा आत्मविश्वास

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ उन्हें संपत्ति में स्वामित्व देने की दिशा में भी राज्य सरकार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। महिलाओं के नाम संपत्ति की रजिस्ट्री कराने पर पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत तथा स्टांप शुल्क में एक प्रतिशत की छूट दी जा रही है। इससे महिलाओं के नाम पर संपत्ति के पंजीयन को प्रोत्साहन मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण का वास्तविक अर्थ महिलाओं को अवसर, सम्मान, आर्थिक स्वतंत्रता और निर्णय में भागीदारी देना है। सरकार इसी व्यापक सोच के साथ माताओं-बहनों के जीवन में स्थायी और सकारात्मक बदलाव लाने के लिए कार्य कर रही है।

हर जरूरतमंद परिवार के सिर पर पक्की छत का संकल्प

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में प्रतिदिन 1,600 से अधिक आवासों का निर्माण हो रहा है। पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश में 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुए हैं और इनमें से साढ़े 11 लाख से अधिक आवास पूर्ण किए जा चुके हैं।

उन्होंने कहा कि केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान प्रदेश के लिए 3 लाख 65 हजार नए प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति प्रदान की है। हमारा संकल्प है कि प्रदेश का कोई भी जरूरतमंद परिवार पक्के मकान से वंचित न रहे। केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार मिलकर हर जरूरतमंद परिवार के पक्के घर के सपने को तेजी से साकार कर रही है।

मुख्यमंत्री निवास में साकार हुआ छत्तीसगढ़ी गांव का परिवेश

तीजा-पोरा तिहार के लिए मुख्यमंत्री निवास को छत्तीसगढ़ी गांव की थीम पर विशेष रूप से सजाया गया था। बैलगाड़ी, नंदिया-बइला, पारंपरिक खिलौनों और ग्रामीण परिवेश के बीच प्रदेश की लोकसंस्कृति की जीवंत झलक दिखाई दी। लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने पूरे परिसर में छत्तीसगढ़ी संस्कृति के रंग बिखेर दिए।

माताओं-बहनों ने फुगड़ी, रस्साकशी और कुर्सी दौड़ में उत्साह से भाग लिया। मेहंदी लगवाने और झूला झूलने के साथ उन्होंने तीजा के मायके वाले उल्लास का आनंद लिया। मुख्यमंत्री निवास का पूरा वातावरण ऐसा था मानो प्रदेश के अलग-अलग अंचलों की लोक परंपराएं एक ही आंगन में साकार हो उठी हों।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज मुख्यमंत्री निवास वास्तव में माताओं-बहनों के मायके में बदल गया है। हमारी कामना है कि प्रदेश की हर माता और बहन के सपनों को नई उड़ान मिले, उनके परिवारों में सुख-समृद्धि बनी रहे और मातृशक्ति की भागीदारी से छत्तीसगढ़ विकास के पथ पर निरंतर आगे बढ़ता रहे।

तीजा हमारी समृद्ध परंपराओं और मातृशक्ति का पर्व : मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े

महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने प्रदेश की माताओं-बहनों को तीजा-पोरा तिहार की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि तीजा हमारी समृद्ध परंपराओं और मातृशक्ति से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार महिलाओं के कल्याण, सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना की 31 किस्तें जारी की जा चुकी हैं। यह योजना माताओं-बहनों को आर्थिक संबल देने के साथ उनमें आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की भावना को मजबूत कर रही है। महिला एवं बाल विकास विभाग महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण तथा समग्र विकास के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम कर रहा है।

मंत्री राजवाड़े ने ‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ अभियान को पोषण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताते हुए माताओं-बहनों से अपने घरों और आसपास मूनगा लगाने तथा इसे नियमित आहार में शामिल करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में मंत्री  गजेंद्र यादव, मंत्री  दयाल दास बघेल, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू, बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा, छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष शालिनी राजपूत, राज्य सभा सांसद लक्ष्मी वर्मा, महापौर मीनल चौबे, वीणा सिंह, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव सुश्री शहला निगार, विभिन्न संस्थाओं की पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में माताएं-बहनें उपस्थित थीं।

देशभर में बारिश का अलर्ट: कई राज्यों में मानसून सक्रिय, मध्य प्रदेश में भारी बारिश की चेतावनी

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नई दिल्ली- देश के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय बना हुआ है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने कई राज्यों में बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है। मध्य प्रदेश में कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

वहीं गुजरात, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना समेत कई राज्यों में बारिश के साथ तेज हवाएं चलने का अनुमान है। मौसम विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सतर्क रहने और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है।

लगातार बारिश के चलते कुछ इलाकों में जलभराव और यातायात प्रभावित होने की स्थिति बन सकती है। मौसम विभाग ने आगामी दिनों में भी कई क्षेत्रों में मौसम के सक्रिय रहने का अनुमान जताया है।

महाराष्ट्र सड़क हादसे में छत्तीसगढ़ के 8 लोगों की मौत, मृतकों में बच्चे भी शामिल

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जताया शोक, मृतकों के परिवारों के लिए राहत की घोषणा

रायपुर- महाराष्ट्र में हुए भीषण सड़क हादसे में छत्तीसगढ़ के 8 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों में बच्चे भी शामिल हैं। हादसे की खबर सामने आने के बाद छत्तीसगढ़ में शोक की लहर है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई है। उन्होंने पीड़ित परिवारों को राहत देने की घोषणा की है। राज्य सरकार की ओर से प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

हादसे के कारणों और मृतकों से जुड़ी अन्य जानकारी जुटाई जा रही है। प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों से संपर्क कर आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है।

मोदी–शी जिनपिंग मुलाकात: संबंधों में नई गर्माहट की उम्मीद, द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर होगी चर्चा

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नई दिल्ली- भारत और चीन के बीच संबंधों को लेकर शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता प्रस्तावित है। दोनों नेताओं की मुलाकात को दोनों देशों के संबंधों में नई दिशा तय करने के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

बैठक के दौरान भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय संबंधों, आर्थिक सहयोग, व्यापार, सीमा से जुड़े मुद्दों और आपसी हितों पर चर्चा होने की संभावना है। लंबे समय से तनावपूर्ण रहे संबंधों के बीच दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की बातचीत को सकारात्मक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार इस बात पर जोर देते रहे हैं कि भारत और चीन के बीच स्थिर एवं शांतिपूर्ण संबंध न केवल दोनों देशों के हित में हैं, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक शांति एवं स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।

वहीं, चीन की ओर से भी भारत के साथ संवाद और सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया है। ऐसे में मोदी और शी जिनपिंग की प्रस्तावित मुलाकात से दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली और व्यावहारिक सहयोग को आगे बढ़ाने की उम्मीद जताई जा रही है।

विशेषज्ञों की नजर इस बैठक के संभावित परिणामों पर रहेगी, क्योंकि भारत और चीन दोनों ही वैश्विक अर्थव्यवस्था और भू-राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका रखते हैं।

BRICS Summit: दिल्ली घोषणा पर बनी सहमति, Global South की मजबूत आवाज की पैरवी

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नई दिल्ली- भारत की मेजबानी में नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों ने ‘दिल्ली घोषणा’ (Delhi Declaration) को अपनाते हुए वैश्विक सहयोग, शांति और बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया। सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में Global South को केवल नियमों का पालन करने वाला नहीं, बल्कि वैश्विक नियमों के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने वाला पक्ष बनना होगा।

घोषणा में मौजूदा वैश्विक संघर्षों को लेकर चिंता जताई गई और सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने तथा ऐसी कार्रवाइयों से बचने का आह्वान किया गया, जिससे तनाव और बढ़ सकता है। BRICS देशों ने अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर, देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान के साथ नागरिकों एवं नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर भी जोर दिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता को प्रमुखता से उठाते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सहित अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में अधिक प्रतिनिधित्व और समान भागीदारी की वकालत की। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक व्यवस्था में विकासशील देशों की आवाज को उनकी आबादी और आर्थिक योगदान के अनुरूप स्थान मिलना चाहिए।

BRICS देशों ने वैश्विक व्यापार को सुचारु बनाए रखने, आर्थिक सहयोग बढ़ाने और बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया। भारत की अध्यक्षता में आयोजित यह सम्मेलन ऐसे समय हुआ है, जब दुनिया कई भू-राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों से गुजर रही है। ऐसे में दिल्ली घोषणा को BRICS देशों के बीच सहमति और सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

सीएम हाउस में तीजा-पोरा की धूम, सीएम साय बोले- ‘लखपति बन रही हैं हमारी बहनें’

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में आज तीजा-पोरा पर्व पूरे उत्साह और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री निवास में विशेष तीजा-पोरा उत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के साथ महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव सहित प्रदेशभर से बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं।


तीजा-पोरा छत्तीसगढ़ के प्रमुख पारंपरिक पर्वों में से एक है। मुख्यमंत्री निवास में आयोजित कार्यक्रम में लोकगीत, पारंपरिक नृत्य, झूले और छत्तीसगढ़ी व्यंजनों ने उत्सव का माहौल और खास बना दिया।


‘महतारी वंदन और लखपति दीदी योजना से महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर’

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रदेश की महिलाएं तेजी से आत्मनिर्भर बन रही हैं और ‘लखपति दीदी’ बन रही हैं। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना और लखपति दीदी योजना के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का काम किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने तीजा पर्व की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस दिन बहनों को अपने मायके की याद आती होगी। उन्होंने कहा कि आज वे अपने भाई के घर आई हैं और यह पर्व पारिवारिक स्नेह और आपसी जुड़ाव का प्रतीक है।

बड़ी संख्या में महिलाएं हुईं शामिल

मुख्यमंत्री निवास में आयोजित तीजा-पोरा उत्सव में शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, रायपुर महापौर मीनल चौबे सहित बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की पत्नी वीणा सिंह और उनकी बहू भी कार्यक्रम में मौजूद रहीं।

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की पारंपरिक संस्कृति और लोक परंपराओं की झलक देखने को मिली। महिलाओं ने पारंपरिक गीतों और नृत्य के साथ उत्सव का आनंद लिया।

वीडियो वायरल होते ही पुलिस का एक्शन, महिला ने मांगी माफी; बोली- मनोरंजन के लिए बनाया था

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 कोरबा। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने मामले में कार्रवाई की है। कोरबा सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी ने बताया कि वीडियो वायरल होने की जानकारी मिलते ही पुलिस ने धारा 126 और 135(3) बीएनएसएस के तहत कार्रवाई की।


पुलिस कार्रवाई के बाद संबंधित महिला ने वीडियो जारी कर अपने कृत्य के लिए माफी मांगी। महिला ने सफाई देते हुए कहा कि उसने वीडियो किसी गलत उद्देश्य से नहीं, बल्कि केवल मनोरंजन के लिए बनाया था।

पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए वायरल वीडियो के आधार पर कार्रवाई की है। मामले में आगे की जांच की जा रही है।

थाना परिसर में बनाई Reel, सोशल मीडिया पर हुई वायरल

बताया गया कि युवती करीब एक सप्ताह पहले किसी मामले में शिकायत करने के लिए कोतवाली पहुंची थी। हालांकि उसने शिकायत दर्ज नहीं कराई। इसी दौरान उसने थाना परिसर में वीडियो बनाया और बाद में उसे Instagram Reel के तौर पर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया।


वीडियो में थाना परिसर का बैकग्राउंड और ‘आज जेल होई, कल बेल होई…’ गाना नजर आने के बाद यह सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद लोगों के बीच इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।


निर्माण श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा पर मंथन, मुंबई में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन BOCW शुरू

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 रायपुर : भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकारों (BOCW) के कल्याण, सामाजिक सुरक्षा और श्रमिक हितों को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से मुंबई में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन ('National Conference on BOCW') का शुभारंभ हुआ। 11 और 12 सितंबर 2026 तक आयोजित इस सम्मेलन में देशभर के निर्माण श्रमिकों के सुरक्षित, सम्मानजनक और समृद्ध भविष्य पर विस्तृत चर्चा की जा रही है।


इस राष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया, केंद्रीय राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे, मध्यप्रदेश के श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल और छत्तीसगढ़ के श्रम सचिव हिम शिखर गुप्ता सहित विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी और प्रतिनिधि शामिल हुए।

सम्मेलन में छत्तीसगढ़ राज्य का प्रतिनिधित्व भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह तथा मंडल सचिव  गिरीश रामटेके ने किया। सम्मेलन के दौरान विभिन्न राज्यों ने श्रमिक हित में लागू की गई कल्याणकारी योजनाओं, श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों और नए नवाचारों के अनुभवों को साझा किया।

साथ ही निर्माण श्रमिकों तक सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का अधिकतम लाभ पहुंचाने और उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए भविष्य की रणनीतियों पर रणनीति तैयार की जा रही है। यह आयोजन देश के निर्माण श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और सुलभ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

डिजिटल एडिक्शन आज किसी भी अन्य एडिक्शन से अधिक खतरनाक - राज्यपाल

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 रायपुर : राज्यपाल रमेन डेका आज आईसीएफएआई विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। समारोह में वर्ष 2025 एवं वर्ष 2026 शैक्षणिक सत्र के विद्यार्थियों को विभिन्न संकायों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पदक प्रदान किए गए, जिनमें 19 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल तथा 16 विद्यार्थियों को सिल्वर मेडल से सम्मानित किया गया शामिल हैं। स्नातकोत्तर एवं स्नातक स्तर पर कुल 504 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गई.


’विद्यार्थियों को तकनीक का सदुपयोग करते हुए इसके दुष्प्रभावों से बचने सलाह’

राज्यपाल डेका ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आप इंटरनेट युग के विद्यार्थी हैं, जबकि हम उस दौर के विद्यार्थी हैं, जब शिक्षा चाक ,पेंसिल पुस्तकों और गुरुओं के माध्यम से प्राप्त करते थे। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आज बहुत जरूरी है, लेकिन इसका उपयोग उतना ही होना चाहिए, जितना मानव समाज के हित में आवश्यक है। आज डिजिटल एडिक्शन किसी भी अन्य एडिक्शन से अधिक खतरनाक हो गया है। विद्यार्थियों को तकनीक का सदुपयोग करते हुए इसके दुष्प्रभावों से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यूक्लियर एनर्जी, क्लाइमेट चेंज और माइक्रो प्लास्टिक आज दुनिया के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। 21वीं सदी में विकास के साथ उसके दूसरे पहलुओं पर भी ध्यान देना होगा और सतत विकास को प्राथमिकता देनी होगी।

’विद्यार्थियों पढ़ाई और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रहें’

राज्यपाल ने विद्यार्थियों को भगवत गीता के कर्मयोग का संदेश देते हुए कहा कि कर्म ही जीवन है। हमें इस बात की चिंता किए बिना कि दूसरे हमारे बारे में क्या सोचते हैं, अपने कर्म, पढ़ाई और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आपका ज्ञान कोई आपसे नहीं छीन सकता। अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनें और सही रास्ते पर आगे बढ़ें।

’विद्यार्थियों को अपने जीवन का रोडमैप तैयार कर योजनाबद्ध ढंग से सफलता की ओर आगे बढ़ना चाहिए’

डेका ने कहा कि विद्यार्थियों ने ज्ञान और डिग्री इसलिए हासिल की है कि उसका उपयोग मानव समाज के हित में हो। विज्ञान, तकनीक और इनोवेशन का उद्देश्य मानव जीवन को बेहतर बनाना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में लौह अयस्क प्रचुर मात्रा में है और यह देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। अब छत्तीसगढ़ को एजुकेशन हब के रूप में विकसित करने की दिशा में भी प्रयास करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत, आत्मनिर्भर भारत और 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को प्राप्त करने में समाज के प्रत्येक वर्ग की भूमिका महत्वपूर्ण है। विद्यार्थियों को अपने जीवन का रोडमैप तैयार कर योजनाबद्ध ढंग से सफलता की ओर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से नशे से दूर रहने तथा मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहते हुए राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की अपील की।

समारोह में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के सदस्य एवं डिफेंस साइंटिस्ट डॉ. वी. सतीश रेड्डी तथा विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रोफेसर आर.पी. कौशिक ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। स्वागत भाषण विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ. शिव दयाल पांडे ने दिया और विश्वविद्यालय का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की शासी परिषद एवं कार्य परिषद के सदस्य, अधिष्ठाता, प्राध्यापक, छात्र-छात्राएं एवं उनके पालक उपस्थित थे।

CG NEWS : बारिश से बचने पेड़ के नीचे खड़े थे दो युवक, आकाशीय बिजली गिरी; एक की मौत, दूसरा गंभीर

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 दुर्ग। छत्तीसगढ़ में मानसून की सक्रियता के बीच दुर्ग जिले में शुक्रवार को आकाशीय बिजली गिरने से एक युवक की मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से झुलस गया। हादसा खैरागढ़-दुर्ग मुख्य मार्ग पर बोरी थाना क्षेत्र की लिटिया चौकी अंतर्गत ग्राम मोहंदी के पास हुआ।


जानकारी के अनुसार, शुक्रवार दोपहर क्षेत्र में तेज बारिश हो रही थी। इसी दौरान सड़क से गुजर रहे दो युवक बारिश से बचने के लिए एक पेड़ के नीचे खड़े हो गए। कुछ देर बाद तेज गर्जना के साथ आकाशीय बिजली गिरी, जिसकी चपेट में दोनों युवक आ गए। हादसे में एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से झुलस गया।

घटना की सूचना मिलते ही लिटिया चौकी पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने मृतक के शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। वहीं घायल युवक को गंभीर हालत में उपचार के लिए दुर्ग अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका इलाज जारी है।

हादसे के बाद इलाके में शोक का माहौल है। मानसून के दौरान आकाशीय बिजली की घटनाओं को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से बारिश के समय सतर्क रहने और खुले स्थानों व पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की अपील की है।

स्कूल जाने निकली दूसरी कक्षा की छात्रा को बस ने कुचला, मौके पर मौत

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 कोरिया। सोनहत थाना क्षेत्र के धनपुर बस्ती में शनिवार सुबह दर्दनाक सड़क हादसे में दूसरी कक्षा की सात वर्षीय छात्रा की मौत हो गई। बच्ची स्कूल जाने के लिए बस में सवार होने निकली थी, इसी दौरान वह स्कूल बस की चपेट में आ गई। गंभीर रूप से घायल छात्रा ने अस्पताल ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया।


जानकारी के अनुसार धनपुर बस्ती निवासी प्रिंसि सोनहत स्थित भारत इंग्लिश मीडियम स्कूल में कक्षा दूसरी की छात्रा थी। शनिवार सुबह करीब 7:30 बजे वह स्कूल जाने के लिए बस में बैठने निकली थी। इसी दौरान वह बस की चपेट में आ गई। हादसे में बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई।

घटना के बाद परिजन और स्थानीय लोग उसे तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सोनहत ले जाने के लिए रवाना हुए, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।

बताया जा रहा है कि हादसे में शामिल बस स्कूल संस्था की ही थी। घटना के बाद स्कूल बसों की सुरक्षा व्यवस्था और हादसे के दौरान संभावित लापरवाही को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

सूचना मिलते ही सोनहत पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस हादसे के कारणों के साथ ही घटना के दौरान बरती गई संभावित लापरवाही की भी जांच कर रही है।

मासूम की मौत की खबर से परिवार में मातम पसरा है। वहीं धनपुर बस्ती में भी शोक का माहौल है।

शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा और निर्माण हटाने का तहसीलदार ने दिया आदेश

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सात दिन में स्वयं कब्जा हटाने का अल्टीमेटम, नहीं हटाया तो पुलिस बल की मदद से होगी कार्रवाई

सरायपाली- पुराना टैक्सी स्टैंड के पास स्थित शासकीय भूमि पर किए गए कथित अवैध अतिक्रमण और निर्माण के मामले में तहसीलदार सरायपाली ने कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 248 के तहत जारी आदेश में शासकीय भूमि से अनधिकृत कब्जा एवं निर्माण हटाने के निर्देश दिए गए हैं। मामला लोक निर्माण विभाग के उप अभियंता भुजरंग साय पैकरा से संबंधित है।

यह प्रकरण उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़, बिलासपुर में दायर डब्ल्यूपीसी क्रमांक 3818/2026 से जुड़ा हुआ है। उच्च न्यायालय द्वारा 23 जुलाई 2026 को पारित आदेश के पालन में जिला कलेक्टर के माध्यम से प्राप्त निर्देशों के आधार पर तहसील कार्यालय द्वारा 3 सितंबर 2026 को मौके का निरीक्षण कराया गया। निरीक्षण के दौरान पंचनामा तैयार कर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया।

जांच के दौरान सरायपाली स्थित खसरा नंबर 777 की कुल 7.453 हेक्टेयर भूमि राजस्व अभिलेखों में शासकीय आबादी मद के रूप में दर्ज पाई गई। यह भूमि राष्ट्रीय राजमार्ग तथा लोक निर्माण विभाग के कार्यालय भवन से संबंधित क्षेत्र में स्थित है। हल्का पटवारी की रिपोर्ट के अनुसार, उप अभियंता भुजरंग साय पैकरा द्वारा परिवार सहित वर्ष 2009 से उक्त शासकीय भूमि पर निवास किया जा रहा है।

मौके के निरीक्षण में पुराने कार्यालय भवन के समीप लगभग 798 वर्गफीट क्षेत्र में अनधिकृत निर्माण पाए जाने की बात सामने आई। जांच रिपोर्ट के अनुसार वहां डीपीसी कॉलम, दीवार सहित अन्य निर्माण किए गए थे। इसके अलावा करीब दो फीट अतिरिक्त क्षेत्र में एस्बेस्टस शेड का विस्तार भी पाया गया। डीपीसी के ऊपर लगभग सात फीट ऊंची दीवार का निर्माण किए जाने का भी उल्लेख जांच प्रतिवेदन में किया गया है।

तहसीलदार द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि सुनवाई के दौरान अनावेदक द्वारा अपने पक्ष में कोई ठोस दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया। उपलब्ध अभिलेखों एवं जांच प्रतिवेदन के आधार पर खसरा नंबर 777 की शासकीय भूमि के 798 वर्गफीट क्षेत्र में किए गए नवीन अनधिकृत अतिक्रमण एवं अवैध निर्माण को हटाने के निर्देश दिए गए हैं।

आदेश के तहत भुजरंग साय पैकरा को सात दिनों के भीतर, यानी 17 सितंबर 2026 तक, निर्माण सामग्री सहित अवैध निर्माण स्वयं हटाने का अल्टीमेटम दिया गया है। निर्धारित अवधि में अतिक्रमण नहीं हटाए जाने की स्थिति में राजस्व अमले एवं पुलिस बल की सहायता से अतिक्रमण हटाकर शासकीय भूमि को कब्जामुक्त कराने की कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई में होने वाला पूरा खर्च एवं इसकी जिम्मेदारी अनावेदक की होगी।

तहसीलदार ने राजस्व निरीक्षक, हल्का पटवारी, मालजमादार एवं थाना प्रभारी सरायपाली को आदेश का पालन सुनिश्चित कराने तथा कार्रवाई का पालन प्रतिवेदन तत्काल तहसील कार्यालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।



यह आदेश 11 सितंबर 2026 को तहसीलदार सरायपाली द्वारा जारी किया गया है।


छत्तीसगढ़ में आज भारी बारिश का अलर्ट, अगले 5 दिनों तक ऐसा रहेगा मौसम

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 CG Weather : छत्तीसगढ़ में मानसून की सक्रियता के चलते अगले पांच दिनों तक प्रदेश में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने 12 और 13 सितंबर को कई इलाकों में बारिश के साथ गरज-चमक और वज्रपात की चेतावनी जारी की है। इस दौरान कुछ स्थानों पर भारी बारिश भी हो सकती है। 14 से 16 सितंबर तक भी प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है।


12 सितंबर: बारिश के साथ भारी वर्षा और वज्रपात का अलर्ट

मौसम विभाग के अनुसार 12 सितंबर को प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इस दौरान एक-दो स्थानों पर भारी वर्षा होने की संभावना है। कई इलाकों में गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने का भी खतरा है। मौसम विभाग ने इस दिन यलो अलर्ट जारी किया है।

13 सितंबर: गरज-चमक के साथ बारिश

13 सितंबर को भी प्रदेश के अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। कुछ इलाकों में गरज-चमक के साथ वज्रपात हो सकता है। मौसम विभाग ने इस दिन भी यलो अलर्ट जारी किया है।

14 सितंबर: जारी रहेगा बारिश का सिलसिला

14 सितंबर को प्रदेश के अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है। हालांकि, इस दिन मौसम विभाग ने किसी तरह की विशेष चेतावनी जारी नहीं की है।

15 और 16 सितंबर: कुछ हिस्सों में बारिश के आसार

15 सितंबर को प्रदेश के कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। वहीं 16 सितंबर को भी राज्य के कुछ हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। दोनों दिनों के लिए मौसम विभाग ने कोई विशेष चेतावनी जारी नहीं की है।

गरज-चमक के दौरान सावधानी की अपील

मौसम विभाग ने लोगों से गरज-चमक और वज्रपात के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। लोगों को खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों के आसपास जाने से बचने की सलाह दी गई है।

सरकारी स्कूलों में पढ़ाई और उपस्थिति की गुणवत्ता बढ़ी, निजी स्कूलों में भी ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य करने की मांग

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महासमुंद- पोला पर्व के दौरान क्षेत्र के कई निजी स्कूलों में समय से पहले छुट्टी दिए जाने का मामला सामने आने के बाद सरकारी और निजी स्कूलों की व्यवस्थाओं को लेकर बहस तेज हो गई है। सरकारी स्कूलों में पढ़ाई, शिक्षक उपस्थिति और विद्यालय संचालन की व्यवस्था को बेहतर बताते हुए चेतना विकास मूल्य शिक्षा संचालित अभिभावक विद्यालय, कोकड़ी के शिक्षक गेंदलाल कोकडिया ने निजी स्कूलों में भी ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था लागू करने की मांग की है।

कोकडिया का कहना है कि पोला पर्व के दौरान क्षेत्र के अनेक निजी स्कूलों में निर्धारित समय से पहले छुट्टी कर दी गई, जबकि सरकारी स्कूल पूरे निर्धारित समय तक संचालित होते रहे। उनके अनुसार, ऐसे उदाहरणों से सरकारी और निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली में अंतर स्पष्ट होता है।

‘ऑनलाइन उपस्थिति से सरकारी स्कूलों में बढ़ी जवाबदेही’

गेंदलाल कोकडिया के मुताबिक सरकारी स्कूलों में वीएसके ऐप के माध्यम से ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था लागू होने के बाद शिक्षकों की उपस्थिति और विद्यालय संचालन में जवाबदेही बढ़ी है। उनका दावा है कि ऑनलाइन उपस्थिति के कारण शिक्षक निर्धारित समय पर विद्यालय पहुंचने और पूरे समय उपस्थित रहने के प्रति अधिक गंभीर हुए हैं।

उन्होंने सरकार से मांग की है कि इसी तरह की ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था निजी स्कूलों में भी अनिवार्य की जाए, ताकि सभी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति और विद्यालय के संचालन की नियमित निगरानी हो सके।

‘एक देश, एक शिक्षा व्यवस्था लागू हो’

कोकडिया ने ‘एक देश, एक शिक्षा’ की तर्ज पर देशभर में समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था लागू करने की बात कही। उनका कहना है कि सरकारी स्कूलों में प्रशिक्षित शिक्षक, शिक्षण सामग्री, निशुल्क गणवेश, मध्याह्न भोजन सहित विद्यार्थियों के लिए कई सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

उन्होंने सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों की तुलना में बेहतर बताते हुए कहा कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था में विद्यार्थियों और अभिभावकों को कई सुविधाएं बिना शुल्क उपलब्ध होती हैं।

निजी स्कूलों में सुरक्षा मानकों पर भी उठाए सवाल

गेंदलाल कोकडिया ने निजी स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ निजी स्कूल सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर पर्याप्त गंभीरता नहीं दिखाते। उनके अनुसार, कई बार स्कूली बच्चों को वाहनों में क्षमता से अधिक संख्या में ले जाने की स्थिति देखने को मिलती है।

उन्होंने अभिभावकों से भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर जागरूक रहने की अपील की। उनका कहना है कि एक ही दोपहिया वाहन पर चार-पांच बच्चों को बैठाकर स्कूल लाना गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकता है।

फीस और परिवहन खर्च को लेकर भी उठाया मुद्दा

कोकडिया ने निजी स्कूलों में पढ़ाई और परिवहन पर होने वाले खर्च का मुद्दा भी उठाया। उनके अनुसार, निजी स्कूलों में पढ़ाई की फीस करीब 6 हजार रुपये से लेकर 3 लाख रुपये तक और वाहन शुल्क करीब 8 हजार से 50 हजार रुपये तक हो सकता है। इसके विपरीत सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ कई मूलभूत सुविधाएं निशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं।

उन्होंने सरकार से मांग की कि निजी स्कूलों में ऑनलाइन उपस्थिति, विद्यालय समय के पालन और सुरक्षा मानकों की नियमित निगरानी की जाए तथा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाए।

हालांकि, निजी स्कूलों से जुड़े इन आरोपों और दावों पर संबंधित स्कूल प्रबंधन या शिक्षा विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।

5-डे बैंकिंग की मांग को लेकर बैंक कर्मचारी हड़ताल पर, छत्तीसगढ़ में भी असर

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 रायपुर। देशभर में बैंक अधिकारी और कर्मचारी शुक्रवार को एक दिवसीय हड़ताल पर रहे। इसका असर छत्तीसगढ़ में भी देखने को मिला। रायपुर, जगदलपुर समेत प्रदेश के कई स्थानों पर बैंक कर्मचारियों ने कामकाज से दूरी बनाकर प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने 5-डे बैंकिंग लागू करने और पीएलआई (परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव) में समानता समेत विभिन्न मांगें उठाईं।


रायपुर में मोतीबाग चौक स्थित पीएनबी परिसर में बड़ी संख्या में बैंक अधिकारी-कर्मचारी जुटे और मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किया। वहीं जगदलपुर में भी बैंक कर्मचारियों ने हड़ताल में शामिल होकर बैंकिंग कार्यों का बहिष्कार किया।

लंबे समय से 5-डे बैंकिंग की मांग

बैंक कर्मचारियों का कहना है कि पांच दिन काम और दो दिन अवकाश की व्यवस्था उनकी लंबे समय से लंबित मांग है। उनका तर्क है कि कई अन्य वित्तीय संस्थानों में पांच दिवसीय कार्य व्यवस्था लागू है। ऐसे में बैंकिंग क्षेत्र में भी इसे लागू किया जाना चाहिए। कर्मचारियों के मुताबिक इससे कार्यक्षमता के साथ वर्क-लाइफ बैलेंस बेहतर होगा।

करीब 28 बैंकों के कर्मचारियों के शामिल होने का दावा

हड़ताल में सरकारी और निजी क्षेत्र के करीब 28 बैंकों के अधिकारी-कर्मचारियों के शामिल होने का दावा किया गया है। कर्मचारियों ने ग्राहकों से अपील की कि हड़ताल के दौरान जरूरी बैंकिंग कार्यों के लिए एटीएम, यूपीआई और नेट बैंकिंग जैसी डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल करें।

मांगें नहीं मानी तो सितंबर में तीन दिन की हड़ताल

बैंक कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि मौजूदा हड़ताल के बाद भी उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो 28, 29 और 30 सितंबर को तीन दिवसीय हड़ताल की जाएगी। इसके बाद भी मांगों का समाधान नहीं होने पर अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने की चेतावनी दी गई है।

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