Media24Media.com

Responsive Ad Slot

Latest

latest
lockdown news

महासमुंद की खबरें

महासमुंद की खबर

रायगढ़ की ख़बरें

raigarh news

दुर्ग की ख़बरें

durg news

जम्मू कश्मीर की ख़बरें

jammu and kashmir news

VIDEO

Videos
top news


 

जनता से जुड़ी सभी सेवाएं को लोक सेवा गारंटी अधिनियम के दायरे में होना चाहिए

No comments Document Thumbnail

मुख्य सचिव ने लोक सेवा गारंटी की सेवाओं के क्रियान्वन की समीक्षा की

रायपुर- मुख्य सचिव विकासशील ने आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में छत्तीसगढ़ शासन के समस्त विभागांे के भारसाधक सचिव की बैठक लेकर विभागों के अंतर्गत छत्तीसगढ़ लोक सेवा गांरटी अधिनियम के अंतर्गत विभागीय सेवाओं के क्रियान्वन समीक्षा की। मुख्य सचिव ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिये है कि उनके विभाग के अंतर्गत ऐसी सभी सेवाएं जो सीधे जनता से जुड़ी है, उन सभी सेवाओं को लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत अधिसूचित की जाये तथा अधिसूचित सेवाओं को ऑनलाईन किया जाये। समय सीमा में सेवाओं का लाभ हितग्राही को दिया जाए। समय सीमा में सेवाएं यदि नहीं दी जाती हैं तो संबधित  अधिकारी को उत्तरदायी ठहराया जायेगा और उसके विरूद्ध नियमानुसार कार्यवाई की जायेगी। उन्होंने कहा कि लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत उत्कृष्ट सेवा कार्य करने वाले अधिकारियों को प्रोत्साहित किया जायेगा। 

मुख्य सचिव ने बैठक में कहा कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत जनता से जुड़ी सभी शासकीय सेवाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर सेवाएं प्रदान करना हैं। मुख्य सचिव ने प्रत्येक विभाग के अंतर्गत लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत आने वाली सेवाओं की वर्तमान स्थिति की विस्तार से समीक्षा की । मुख्य सचिव ने अधिकारियों के कहा कि वे अपने विभाग के अंतर्गत और सेवाएं जो अधिनियम के अंतर्गत लायी जा सकती है, उन्हे चिन्हित कर अधिसूचित कर ली जाएं और सुशासन एवं अभिसरण विभाग को इसकी सूची उपलब्ध की जाएं। बैठक में बताया गया की छत्तीसगढ़ शासन द्वारा लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत लोक सेवा की प्रभावी क्रियान्वन को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जा रही हैं। मुख्य सचिव ने प्रस्तुतिकरण के जरिए विभिन्न  विभागों के अधिकारियो को विभागीय सेवओं को लोक सेवा गारंटी अधिनियम में लाने के लिए मार्ग दर्शन दिया। 

सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव राहुल भगत ने प्रस्तुतिकरण के जरिए विभिन्न विभागों की लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत आने वाली सेवाओं की विस्तार से जानकारी दी गई।राहुल भगत ने बताया की छत्तीसगढ़ शासन के सुशासन विभाग द्वारा विभिन्न राज्यों में जाकर लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत अधिसूचित सेवाओं का अध्ययन किया गया है। छत्तीसगढ़ राज्य के परिपेक्ष में प्रदाय की जा रहीं समान्तर सेवाओं एवं संबंधित विभागों की सेवाओं की सांकेतिक रूप से मैपिंग की गई है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से कहा कि वे अपने विभाग की और सेवाओं को चिन्हित कर अधिनियम के अंतर्गत अधिसूचित करने  हेतु प्रस्तावित करें।

बैठक में गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, पंचायत एवं ग्रामीण विकास की प्रमुख सचिव निहारिका बारिक, आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव  शहला निगार, खनिज विभाग एवं मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद, वित्त एवं वाणिज्यिक कर विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल, ऊर्जा एवं जनसंपर्क के सचिव रोहित यादव, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग एवं मुख्यमंत्री के सचिव बसवराजू एस., वाणिज्यिक कर (आबकारी)  आर. शंगीता, समाज कल्याण विभाग के सचिव भुवनेश यादव, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार, गामोउद्योग के सचिव श्यामलाल धावड़े सहित वन एवं जलवायु परिवर्तन, लोक निर्माण, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण, सामान्य प्रशासन, स्कूल शिक्षा, लोक स्वास्थ एवं परिवार कल्याण, परिवहन, वाणिज्यिक एवं उद्योग, आवास एवं पर्यावरण, लोक स्वास्थ यांत्रिकी, श्रम, जल संसाधन, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन सहित अन्य विभागों के अधिकारी शामिल हुए। 


निजी क्षेत्र को R&D में आगे आना होगा: डॉ. जितेंद्र सिंह का आह्वान

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने निजी क्षेत्र से अनुसंधान एवं विकास (R&D) गतिविधियों में अपनी भागीदारी तेज करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए उद्योगों की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है।

नीति आयोग द्वारा R&D प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर आधारित दो रिपोर्ट जारी करने के अवसर पर बोलते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि सरकार ने अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को निजी क्षेत्र के लिए खोलने तथा RDI फंड जैसी व्यवस्थाएं बनाने सहित कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। अब उद्योगों को भी निवेश बढ़ाकर और साझेदारी के माध्यम से इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि शोध तभी फल-फूल सकता है, जब उसमें अनावश्यक बाधाएं, देरी और व्यवधान न हों। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नीतियों का मूल्यांकन केवल उनके डिजाइन से नहीं, बल्कि शोधकर्ताओं के वास्तविक अनुभव के आधार पर होना चाहिए।

डॉ. सिंह ने कहा कि भारत में प्रतिभा की कमी नहीं है और देश के वैज्ञानिकों को वैश्विक स्तर पर पहचान मिल रही है, लेकिन संस्थागत और प्रक्रियागत जटिलताएं अभी भी प्रगति में बाधा बन रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आज का शोध बहु-विषयक (interdisciplinary) हो गया है, जिसमें उद्योग, वित्त और वैश्विक सहयोग की अहम भूमिका है।

उन्होंने निजी क्षेत्र की सीमित भागीदारी पर चिंता जताते हुए कहा कि केवल सरकारी समर्थन से दीर्घकालिक नवाचार संभव नहीं है। उन्होंने कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के तहत R&D में निवेश बढ़ाने और वैज्ञानिक कार्यों के लिए मजबूत सहयोग संस्कृति विकसित करने की आवश्यकता बताई।

डॉ. सिंह ने ‘वन नेशन, वन सब्सक्रिप्शन’ जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ज्ञान तक आसान पहुंच शोध को गति देती है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अनुमोदन, फंडिंग और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में छोटे-छोटे सुधार भी शोध उत्पादकता पर बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं।

नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने कहा कि R&D प्रक्रियाओं को आसान बनाने की पहल वैज्ञानिक समुदाय की लंबे समय से चली आ रही मांगों पर आधारित है। उन्होंने पूरे शोध चक्र में समन्वय बढ़ाने और अनावश्यक देरी को कम करने पर जोर दिया।

नीति आयोग के सदस्य वी. के. सारस्वत ने कहा कि भारत का शोध पारिस्थितिकी तंत्र एक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, जहां फंडिंग में देरी और प्रशासनिक बाधाएं अभी भी चुनौती बनी हुई हैं। उन्होंने अधिक स्वायत्तता और उद्योग-शोध के बेहतर संबंधों की आवश्यकता बताई।

प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. ए.के. सूद ने कहा कि R&D को आसान बनाना एक सतत प्रक्रिया है और इसमें अभी भी कई सुधार की आवश्यकता है, जैसे फंडिंग सफलता दर, भर्ती और बुनियादी ढांचे से जुड़ी चुनौतियां।

नीति आयोग की रिपोर्टों में शोध प्रणाली में अधिक पारदर्शिता, लचीलापन और स्पष्टता लाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है, ताकि वैज्ञानिक अपने कार्य को बेहतर तरीके से योजना बनाकर आगे बढ़ा सकें।

अंत में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत के शोध पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए सरकार के साथ-साथ उद्योग, संस्थान और समाज की संयुक्त भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा, “विज्ञान आज इतना महत्वपूर्ण विषय है कि इसे केवल वैज्ञानिकों तक सीमित नहीं रखा जा सकता,” और सभी हितधारकों से इसमें सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

वैज्ञानिकों की बड़ी खोज: छोटे अणुओं से उन्नत स्मार्ट मैटेरियल विकसित करने का नया तरीका

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- भारतीय वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल करते हुए यह समझ विकसित की है कि छोटे ऑर्गेनिक अणुओं (मॉलिक्यूल्स) को कैसे नियंत्रित कर उन्नत कार्यात्मक मैटेरियल तैयार किए जा सकते हैं। यह खोज भविष्य में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, ट्यून करने योग्य ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, स्मार्ट मैटेरियल और बायोइलेक्ट्रॉनिक इंटरफेस के विकास में मददगार साबित हो सकती है।

बेंगलुरु स्थित सेंटर फॉर नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज (CeNS) और जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च (JNCASR) के वैज्ञानिकों की संयुक्त टीम ने इस दिशा में काम किया। दोनों संस्थान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST), भारत सरकार के अंतर्गत स्वायत्त संस्थाएं हैं।

शोध में वैज्ञानिकों ने नैफ्थलीन डाइइमाइड (NDI) नामक एक विशेष अणु का अध्ययन किया, जो एम्फीफिलिक (जल और वसा दोनों के साथ प्रतिक्रिया करने वाला) होता है। यह अणु पानी में स्वयं को एक व्यवस्थित संरचना में बदलने की क्षमता रखता है, जिसे ‘सुप्रामॉलिक्यूलर सेल्फ-असेंबली’ कहा जाता है।

अध्ययन में पाया गया कि सामान्य तापमान पर ये अणु मिलकर छोटे-छोटे गोलाकार नैनोस्ट्रक्चर (नैनोडिस्क) बनाते हैं। इन नैनोडिस्क में एक विशेष ऑप्टिकल गुण (काइरोऑप्टिकल एक्टिविटी) होता है, जिससे वे प्रकाश के साथ खास तरीके से प्रतिक्रिया करते हैं।

जब तापमान बढ़ाया जाता है, तो ये नैनोडिस्क अपनी संरचना बदलकर दो-आयामी नैनोशीट्स में परिवर्तित हो जाते हैं, और उनकी यह विशेष ऑप्टिकल क्षमता समाप्त हो जाती है। इससे यह स्पष्ट होता है कि केवल तापमान के बदलाव से ही मैटेरियल के संरचनात्मक और ऑप्टिकल गुणों को बदला जा सकता है।

शोध में यह भी पाया गया कि नैनोडिस्क की विद्युत चालकता (इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी) अधिक होती है, जबकि नैनोशीट्स में बदलने पर यह लगभग सात गुना तक कम हो जाती है। इसका मतलब है कि इस मैटेरियल के विद्युत गुणों को भी नियंत्रित किया जा सकता है, जो छोटे ऑर्गेनिक अणुओं में बहुत दुर्लभ माना जाता है।

यह तकनीक ऐसे स्मार्ट और अनुकूलनशील (adaptive) मैटेरियल विकसित करने का रास्ता खोलती है, जो अपने परिवेश के अनुसार खुद को बदल सकते हैं।

यह शोध हाल ही में ACS Applied Nano Materials जर्नल में प्रकाशित हुआ है। इस अध्ययन का नेतृत्व डॉ. गौतम घोष (CeNS) ने किया, उनके साथ शोध छात्र सौरव मोयरा (CeNS) और सहयोगी तारक नाथ दास (JNCASR) शामिल रहे।

यह खोज अगली पीढ़ी के सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्ट तकनीकों के विकास में नई संभावनाएं प्रदान करती है।

वैज्ञानिकों ने विकसित किया दिमाग की तरह काम करने वाला ‘न्यूरोमॉर्फिक सेंसर’, नमी के अनुसार करेगा प्रतिक्रिया

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- भारतीय वैज्ञानिकों ने एक ऐसा अत्याधुनिक ‘न्यूरोमॉर्फिक सेंसर’ विकसित किया है, जो मानव मस्तिष्क की तरह पर्यावरणीय बदलाव—विशेष रूप से नमी (ह्यूमिडिटी)—के प्रति प्रतिक्रिया दे सकता है। यह सेंसर एक ही डिवाइस में जानकारी को महसूस (sensing), प्रोसेस (processing) और संग्रहित (storage) करने में सक्षम है, जिससे पारंपरिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की तुलना में ऊर्जा खपत और डेटा प्रोसेसिंग की जरूरत काफी कम हो सकती है।

आज के समय में बढ़ती ऊर्जा खपत और डेटा प्रोसेसिंग की चुनौतियों के कारण न्यूरोमॉर्फिक इलेक्ट्रॉनिक्स का महत्व तेजी से बढ़ रहा है, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एज कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में।

जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च (JNCASR), जो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्थान है, के शोधकर्ताओं ने यह अनोखा सेंसर विकसित किया है। यह सेंसर 1D सुप्रामॉलिक्यूलर नैनोफाइबर्स पर आधारित है और एक ही प्लेटफॉर्म पर सेंसिंग तथा ‘सिनैप्स’ जैसी सूचना प्रोसेसिंग को एकीकृत करता है।

इस शोध की प्रेरणा मेंढक—विशेष रूप से क्रिकेट फ्रॉग—के व्यवहार से ली गई है, जो नमी और प्रकाश के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होता है। इसी तरह यह सेंसर भी नमी के स्तर में बदलाव के अनुसार प्रतिक्रिया देता है और पहले के संकेतों को “याद” भी रख सकता है।

शोधकर्ताओं तेजस्विनी एस. राव और सुकन्या बरुआह ने विशेष नैनोफाइबर्स विकसित कर इस डिवाइस को तैयार किया। इसे एक नियंत्रित नमी वाले वातावरण में परीक्षण किया गया, जहां विभिन्न स्तरों की नमी पर इसके व्यवहार का अध्ययन किया गया। सेंसर ने ‘सिनैप्टिक’ प्रतिक्रियाएं जैसे फेसीलिटेशन, डिप्रेशन और मेटाप्लास्टिसिटी प्रदर्शित कीं, जो मानव मस्तिष्क की कार्यप्रणाली से मेल खाती हैं।

इस सेंसर की खास बात यह है कि यह नमी के बदलाव को महसूस करने के साथ-साथ उसी समय उसे प्रोसेस और स्टोर भी कर सकता है। यह विशेषता इसे पारंपरिक सेंसर से अलग बनाती है, जहां ये तीनों कार्य अलग-अलग घटकों में होते हैं।

शोधकर्ताओं के अनुसार, “यह पहली बार है जब किसी न्यूरोमॉर्फिक डिवाइस में नमी को मुख्य संकेत के रूप में इस्तेमाल कर सिनैप्टिक व्यवहार को प्रदर्शित किया गया है।”

भविष्य में यह तकनीक स्मार्ट पर्यावरण निगरानी प्रणालियों, हेल्थकेयर डिवाइसेस, पहनने योग्य सेंसर (wearables) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित एज कंप्यूटिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यह नवाचार ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण के अनुकूल अगली पीढ़ी की तकनीकों के विकास में भी मददगार साबित होगा।

सड़क सुरक्षा पर जोर: हर्ष मल्होत्रा ने कहा—यह सिर्फ अभियान नहीं, राष्ट्रीय आंदोलन

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- सड़क परिवहन एवं राजमार्ग तथा कॉरपोरेट मामलों के राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि देशभर में जिम्मेदार सड़क उपयोग की संस्कृति विकसित करने के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय आंदोलन का हिस्सा हैं।

उन्होंने यह बात PHD चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) द्वारा आयोजित ‘उत्तराखंड एडवेंचर राइड’ के तीसरे संस्करण को हरी झंडी दिखाते हुए कही। इस दौरान उन्होंने सड़क सुरक्षा को मजबूत करने और जिम्मेदार ड्राइविंग व्यवहार को बढ़ावा देने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

मंत्री मल्होत्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के मार्गदर्शन में भारत ने सड़क अवसंरचना के विस्तार और आधुनिकीकरण में उल्लेखनीय प्रगति की है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करना अंततः नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने PHDCCI की सराहना करते हुए कहा कि ‘उत्तराखंड एडवेंचर राइड’ जैसे कार्यक्रम रोमांचक पर्यटन और जन-जागरूकता का प्रभावी संयोजन हैं, जो समाज के विभिन्न वर्गों तक सड़क सुरक्षा का संदेश पहुंचाते हैं।

मंत्री ने बताया कि भारत में हर साल लगभग 1.8 लाख लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में होती है, जिनमें करीब 45% मामले दोपहिया वाहनों से जुड़े होते हैं। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से अपील की कि वे सड़क सुरक्षा के दूत बनें और जिम्मेदार व्यवहार का उदाहरण प्रस्तुत करें।

सरकार की रणनीति पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने ‘4E’ मॉडल—इंजीनियरिंग, प्रवर्तन (Enforcement), शिक्षा और आपातकालीन देखभाल—को सड़क सुरक्षा का आधार बताया। उन्होंने दुर्घटना-प्रवण क्षेत्रों (ब्लैक स्पॉट्स) में सुधार, मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम 2019 के तहत सख्त नियमों और बेहतर आपातकालीन सेवाओं का उल्लेख किया।

उन्होंने ‘पीएम राहत योजना’ और ‘राह-वीर योजना’ जैसी पहलों का भी जिक्र किया, जो दुर्घटना पीड़ितों को समय पर सहायता प्रदान करने को प्रोत्साहित करती हैं।

मंत्री मल्होत्रा ने युवाओं की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि जागरूकता कार्यक्रमों और संवाद के माध्यम से उनमें जिम्मेदार ड्राइविंग की आदत विकसित की जा रही है।

उन्होंने लोगों से हेलमेट न पहनना, तेज गति से वाहन चलाना, ड्राइविंग के दौरान मोबाइल का उपयोग करना और नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने जैसी खतरनाक आदतों से बचने की अपील की।

सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा:
“हेलमेट विकल्प नहीं, सुरक्षा है।”
“गति शक्ति नहीं, जोखिम है।”
“जीवन अनमोल है—सुरक्षा से बढ़कर कोई कॉल नहीं।”

उन्होंने बताया कि AI आधारित ट्रैफिक मॉनिटरिंग, इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम (ITS) और FASTag जैसी तकनीकों से सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाया जा रहा है, लेकिन इसके साथ जिम्मेदार मानव व्यवहार भी उतना ही जरूरी है।

इस कार्यक्रम में सशस्त्र बलों, सरकारी विभागों, कॉरपोरेट और मोटरसाइकिल समुदाय के 40 राइडर्स ने भाग लिया। मंत्री ने इसे सामूहिक प्रयास का प्रतीक बताते हुए सराहा।

अंत में, मंत्री मल्होत्रा ने सभी नागरिकों से यातायात नियमों का पालन करने, जिम्मेदार ड्राइविंग अपनाने और समाज में जागरूकता फैलाने का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा एक साझा जिम्मेदारी है, जिसे सरकार, संस्थाओं और नागरिकों को मिलकर निभाना होगा।

भूटान दौरे पर पहुंचे केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल, ऊर्जा सहयोग को मिलेगी नई गति

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली/थिम्फू- केंद्रीय ऊर्जा तथा आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल चार दिवसीय भूटान दौरे पर आज पहुंचे। उनका यह दौरा भारत-भूटान के बीच मजबूत होते द्विपक्षीय संबंधों को और गहराई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

भारत और भूटान के बीच लंबे समय से आपसी विश्वास, समझ और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग पर आधारित उत्कृष्ट संबंध रहे हैं। यह दौरा विशेष रूप से ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

दौरे के दौरान मनोहर लाल ने भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों नेताओं ने स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

इसके अलावा, उन्होंने भूटान सरकार के ऊर्जा एवं प्राकृतिक संसाधन मंत्री ल्योंपो जेम त्शेरिंग के साथ भी बैठक की। इस दौरान जलविद्युत क्षेत्र में चल रहे सहयोग को मजबूत करने, नवीकरणीय ऊर्जा के नए अवसरों और क्षेत्रीय बिजली व्यापार को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई।

ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग के दायरे को विस्तारित करते हुए, भारत और भूटान ने एक सशक्त द्विपक्षीय संस्थागत ढांचा स्थापित किया है। यह तंत्र दोनों देशों के बीच चल रही और भविष्य की परियोजनाओं की नियमित समीक्षा और समन्वय सुनिश्चित करेगा। सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में गैर-जल ऊर्जा, सीमा-पार ट्रांसमिशन, परियोजना वित्तपोषण, क्षमता निर्माण और संस्थागत साझेदारी शामिल हैं।

इस अवसर पर दोनों देशों के बीच दो महत्वपूर्ण समझौते भी हुए—

  1. पुनात्सांगछू-II जलविद्युत परियोजना का टैरिफ प्रोटोकॉल:

    1020 मेगावाट की इस परियोजना का संयुक्त उद्घाटन 11 नवंबर 2025 को भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्येल वांगचुक द्वारा किया गया था। 19 सितंबर 2025 से इस परियोजना से अतिरिक्त बिजली का भारत को निर्यात शुरू हो चुका है।

  2. रिएक्टिव एनर्जी अकाउंटिंग की कार्यप्रणाली:

    यह तकनीकी ढांचा ग्रिड स्थिरता बढ़ाने, बिजली विनिमय की दक्षता सुधारने और दोनों देशों के बीच ऊर्जा व्यापार को सुगम बनाने में मदद करेगा।

इस दौरे के दौरान हुई चर्चाएं और समझौते भारत-भूटान संबंधों को नई दिशा देने के साथ-साथ दोनों देशों की समृद्धि और विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

जल संरक्षण में मिसाल बने आंध्र प्रदेश के गांव: सामुदायिक प्रयासों से बदली तस्वीर

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली/आंध्र प्रदेश- आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले के मुरुगुम्मी, मरेल्ला और थंगेला जैसे गांव जल संरक्षण के क्षेत्र में मिसाल बनकर उभरे हैं। भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा चलाए जा रहे ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तहत इन गांवों में सामुदायिक भागीदारी से वर्षा जल संरक्षण के प्रभावी उपाय अपनाए गए, जिससे जल संकट की समस्या में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

पहले इन गांवों में अनियमित वर्षा, गिरते भूजल स्तर और बार-बार बोरवेल फेल होने जैसी समस्याओं के कारण पानी की भारी कमी थी, जिससे खेती और आजीविका पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता था। लेकिन ग्राम सभाओं, घर-घर जागरूकता अभियान, कला जत्था, कार्यशालाओं और फील्ड डेमो के माध्यम से लोगों को जागरूक किया गया। किसानों, महिलाओं, युवाओं और स्थानीय संस्थाओं ने मिलकर जल बजटिंग, फसल योजना और भूजल साझा करने जैसी पहल अपनाई, जिससे सामुदायिक स्वामित्व की भावना मजबूत हुई।

इन गांवों ने ‘रिज-टू-वैली’ (ऊंचाई से निचले क्षेत्रों तक) दृष्टिकोण अपनाते हुए वर्षा जल संग्रहण और संरक्षण के कई उपाय किए। इनमें परकोलेशन टैंक, खेत तालाब, स्टैगर्ड ट्रेंच, छतों पर वर्षा जल संचयन प्रणाली और सामुदायिक तालाबों का पुनर्जीवन शामिल है।

मुख्य उपलब्धियां:

  • मुरुगुम्मी: 71 जल संरचनाओं का निर्माण, लगभग 8.11 लाख घन मीटर जल भंडारण क्षमता, 264.5 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा।

  • मरेल्ला: 53 जल संरचनाएं, लगभग 10.04 लाख घन मीटर क्षमता, 220.5 हेक्टेयर क्षेत्र में कृषि सुदृढ़; साथ ही तालाबों के पुनर्निर्माण से 5.95 लाख घन मीटर अतिरिक्त भंडारण।

  • थंगेला: 71 संरचनाएं, लगभग 5.89 लाख घन मीटर क्षमता, 185.3 हेक्टेयर भूमि को लाभ; पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन से 3.98 लाख घन मीटर अतिरिक्त जल संग्रह।

प्रभाव:

  • करीब 5,900 लोगों को घरेलू और कृषि उपयोग के लिए बेहतर जल उपलब्धता

  • कृषि उत्पादकता में वृद्धि और किसानों की आय में सुधार

  • डेयरी गतिविधियों में बढ़ोतरी से अतिरिक्त आय के अवसर

  • मिट्टी की नमी में सुधार, जिससे स्थिर और टिकाऊ खेती संभव

  • रोजगार के बेहतर अवसरों के कारण पलायन में कमी

सम्मान:

मुरुगुम्मी गांव को 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कार 2024 में दूसरा सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत पुरस्कार मिला। मरेल्ला को शीर्ष 30 गांवों में स्थान मिला, जबकि थंगेला को राष्ट्रीय स्तर पर नामांकन प्राप्त हुआ।

निष्कर्ष:

इन गांवों का परिवर्तन ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान की सफलता का प्रतीक है। यह पहल दिखाती है कि सामुदायिक भागीदारी और सही रणनीति के माध्यम से जल संसाधनों का टिकाऊ प्रबंधन संभव है। यह मॉडल देश के अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणादायक और अपनाने योग्य है।

डिजिटल ज्ञान तक आसान पहुंच: प्रकाशन विभाग की पत्रिकाएं और ई-बुक्स WAVES प्लेटफॉर्म पर मुफ्त उपलब्ध

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- डिजिटल ज्ञान तक आम जनता की पहुंच को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, प्रकाशन विभाग ने अपनी प्रमुख पत्रिकाएं— योजना, कुरुक्षेत्र, आजकल और बाल भारती— तथा साप्ताहिक रोजगार समाचार को प्रसार भारती के WAVES ओटीटी प्लेटफॉर्म पर निःशुल्क उपलब्ध करा दिया है। इससे देशभर के पाठकों को समृद्ध और विश्वसनीय सामग्री तक सीधी पहुंच मिलेगी।

यह पहल देश के हर वर्ग तक जानकारीपूर्ण, विश्वसनीय और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध सामग्री पहुंचाने के उद्देश्य से की गई है। जहां मासिक पत्रिकाएं सामाजिक-आर्थिक मुद्दों, ग्रामीण विकास, साहित्य और बच्चों की शिक्षा पर गहन विश्लेषण प्रस्तुत करती हैं, वहीं रोजगार समाचार नौकरी के इच्छुक युवाओं के लिए रोजगार अवसरों, भर्ती सूचनाओं, करियर मार्गदर्शन और कौशल विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है।

पत्रिकाओं के अलावा, WAVES प्लेटफॉर्म पर विभिन्न विषयों की 227 ई-बुक्स भी निःशुल्क उपलब्ध कराई गई हैं। इनमें प्रतिष्ठित भारत ईयर बुक भी शामिल है, जो देश के शासन, अर्थव्यवस्था और विकास योजनाओं का विस्तृत और प्रामाणिक विवरण प्रस्तुत करती है।

प्रकाशन विभाग ने अपने डिजिटल विस्तार को आगे बढ़ाते हुए अप्रैल के अंत तक लगभग 300 अतिरिक्त ई-बुक्स भी उपलब्ध कराने की योजना बनाई है। ये पुस्तकें नाममात्र कीमत पर उपलब्ध होंगी, जिससे ज्ञान का प्रसार सुलभ और किफायती बना रहेगा।

पाठकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए, WAVES प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रकाशन विभाग की प्रिंटेड किताबें भी खरीदी जा सकती हैं। यह सुविधा ONDC (ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स) के तहत CSC ग्रामीण ई-स्टोर के माध्यम से उपलब्ध कराई गई है, जिससे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में भी किताबों की सहज उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। वर्तमान में 524 प्रिंटेड पुस्तकें खरीद के लिए उपलब्ध हैं।

यह पहल डिजिटल माध्यमों के जरिए ज्ञान के प्रसार को बढ़ावा देने और पाठकों की बदलती जरूरतों को पूरा करने के प्रति प्रकाशन विभाग की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। मुफ्त डिजिटल सामग्री, किफायती ई-बुक्स और प्रिंटेड पुस्तकों की उपलब्धता के साथ एक समावेशी और व्यापक पाठन प्रणाली विकसित करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।

जनता से अपील की गई है कि वे WAVES ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध इन संसाधनों का लाभ उठाएं और ज्ञान की इस पहल का हिस्सा बनें।

सीआरपीएफ शौर्य दिवस पर शहीदों को अमित शाह ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सीआरपीएफ (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) के शौर्य दिवस के अवसर पर वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके अदम्य साहस एवं बलिदान को नमन किया।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने संदेश में अमित शाह ने कहा कि सीआरपीएफ के बहादुर जवानों ने देश की सुरक्षा और सम्मान के लिए जो सर्वोच्च बलिदान दिया है, वह हमेशा देशवासियों को प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने कहा, “सीआरपीएफ शौर्य दिवस पर हमारे वीर जवानों के अदम्य साहस और बलिदान को नमन। 1965 में आज ही के दिन रण ऑफ कच्छ के सरदार पोस्ट पर सीआरपीएफ के निर्भीक जवानों ने दुश्मनों के हमलों को विफल करते हुए एक अटूट दीवार की तरह खड़े रहकर भारत के इतिहास में वीरता का स्वर्णिम अध्याय लिखा था।”

गृह मंत्री ने आगे कहा कि यह दिन उन शहीदों की याद दिलाता है, जिन्होंने राष्ट्र की सुरक्षा और सम्मान की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। उनका यह बलिदान सदैव देश के लिए प्रेरणा स्रोत बना रहेगा।

सीआरपीएफ शौर्य दिवस हर वर्ष 9 अप्रैल को मनाया जाता है, जो 1965 में रण ऑफ कच्छ के सरदार पोस्ट पर हुए ऐतिहासिक युद्ध में सीआरपीएफ जवानों की वीरता और पराक्रम की स्मृति में समर्पित है। इस दिन देशभर में शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है और उनके योगदान को याद किया जाता है।

इस अवसर पर पूरे देश ने वीर जवानों के साहस, समर्पण और देशभक्ति को सलाम करते हुए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।


साइबर धोखाधड़ी और वित्तीय अपराधों से निपटने के लिए FIU-IND और I4C के बीच समझौता

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- भारत में साइबर धोखाधड़ी और वित्तीय अपराधों के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट-इंडिया (FIU-IND) और इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने सूचना साझा करने और समन्वय बढ़ाने के लिए एक व्यापक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।

इस समझौते पर FIU-IND के निदेशक अमित मोहन गोविल और I4C के मुख्य कार्यकारी अधिकारी  राजेश कुमार ने हस्ताक्षर किए। यह समझौता साइबर धोखाधड़ी और वित्तीय अपराधों से निपटने में दोनों एजेंसियों के बीच सहयोग और खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान के नए दौर की शुरुआत का प्रतीक है।

यह पहल ऐसे समय में की गई है जब भारत का डिजिटल भुगतान तंत्र तेजी से विकसित हुआ है, जिसके साथ नागरिकों को साइबर अपराधों से सुरक्षित रखने की आवश्यकता भी बढ़ गई है। यह MoU दोनों एजेंसियों को परिचालन संबंधी जानकारी विकसित करने, जांच एजेंसियों को सहयोग देने, वित्तीय अपराधों की रोकथाम, डिजिटल लेनदेन की सुरक्षा और संपत्ति की रिकवरी में मदद करेगा।

समझौते का उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर पर धोखाधड़ी पहचान प्रणाली को मजबूत करने के लिए प्रभावी फीडबैक तंत्र स्थापित करना है। साथ ही, वित्तीय संस्थानों के लिए दिशा-निर्देश और ‘रेड फ्लैग’ संकेतकों का विकास और प्रसार भी किया जाएगा, जिससे साइबर धोखाधड़ी की रोकथाम को और सुदृढ़ किया जा सके।

यह कदम साइबर अपराधों के खिलाफ ‘पूरे सरकार’ (Whole of Government) दृष्टिकोण को अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

FIU-IND के बारे में:

फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट-इंडिया देश की केंद्रीय एजेंसी है, जो संदिग्ध वित्तीय लेनदेन से जुड़ी जानकारी प्राप्त, विश्लेषित और साझा करती है तथा मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ कार्रवाई का समन्वय करती है।

I4C के बारे में:

इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) गृह मंत्रालय के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण इकाई है, जो कानून प्रवर्तन एजेंसियों को साइबर अपराध से निपटने के लिए एक समन्वित ढांचा और प्लेटफॉर्म प्रदान करती है। I4C ने नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP), साइबर-पुलिस और सस्पेक्ट रजिस्ट्री जैसे प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं, जो विभिन्न एजेंसियों, बैंकों और वित्तीय संस्थानों के बीच रियल-टाइम जानकारी साझा करने में सहायक हैं।

उच्च शिक्षा विभाग ने ‘साधना सप्ताह 2026’ के तहत भारतीय ज्ञान प्रणाली पर आयोजित किया इंटरैक्टिव सत्र

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- उच्च शिक्षा विभाग ने 2 से 8 अप्रैल 2026 तक मनाए गए ‘साधना सप्ताह 2026’ के अंतर्गत भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) पर एक सफल इंटरैक्टिव सत्र का आयोजन किया। यह सप्ताह क्षमता निर्माण आयोग (CBC) के स्थापना दिवस और ‘मिशन कर्मयोगी’ के पांच वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में मनाया गया, जो नागरिक-केंद्रित शासन की दिशा में भारत की एक महत्वपूर्ण पहल है।

कार्यक्रम की शुरुआत उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव (प्रशासन) सैयद एकराम रिजवी के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने मिशन कर्मयोगी के तहत क्षमता निर्माण आयोग की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आयोग विभिन्न ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के माध्यम से ज्ञान, कौशल और क्षमता विकास को बढ़ावा दे रहा है।

इस सत्र का उद्देश्य समकालीन शिक्षा, अनुसंधान और शासन में भारतीय ज्ञान प्रणाली की प्रासंगिकता पर सार्थक चर्चा और संरचित सह-अधिगम (peer learning) को बढ़ावा देना था। इसमें इस बात पर जोर दिया गया कि भारत की समृद्ध बौद्धिक परंपराएं आधुनिक समस्या-समाधान, नवाचार और नीति-निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण IIT हैदराबाद के बायोमेडिकल इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मोहन राघवन का संबोधन रहा। उन्होंने अपने अंतःविषय (interdisciplinary) कार्य के अनुभव साझा किए, जिसमें तकनीक, विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपराओं का समन्वय शामिल है।

डॉ. राघवन ने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) की बाजार संभावनाएं भले ही व्यापक हों, लेकिन इसकी वास्तविक शक्ति उच्च शिक्षा में परिवर्तनकारी भूमिका निभाने में है। उन्होंने जोर दिया कि IKS को एक अलग विषय के रूप में नहीं, बल्कि एक बहुविषयक ढांचे के रूप में देखा जाना चाहिए, जो विज्ञान, इंजीनियरिंग, मानविकी और प्रबंधन जैसे क्षेत्रों को समृद्ध कर सकता है।

उन्होंने बताया कि IKS को उच्च शिक्षा में शामिल करने से रटने की पद्धति से आगे बढ़कर एक समग्र शिक्षा मॉडल विकसित किया जा सकता है, जिसमें ज्ञान, उसके अनुप्रयोग और मूल्यों (धर्म) का संतुलन हो। यह दृष्टिकोण वर्तमान शैक्षिक सुधारों के अनुरूप है, जो अनुसंधान, नवाचार और आलोचनात्मक सोच को बढ़ावा देता है।

कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों के साथ प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें भारतीय ज्ञान प्रणाली की प्रासंगिकता और उसे शासन में शामिल करने की आवश्यकता पर चर्चा हुई।

इस सत्र में शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इस पहल के माध्यम से विभाग ने मिशन कर्मयोगी के तहत ज्ञान-आधारित, अनुकूलनशील और मानवीय शासन प्रणाली के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

मुख्यमंत्री साय की अध्यक्षता में 15 अप्रैल को मंत्रिपरिषद की बैठक

No comments Document Thumbnail

 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में 15 अप्रैल 2026 को पूर्वान्ह 11:30 बजे से मंत्रिपरिषद की बैठक आयोजित हैं। यह बैठक मंत्रालय महानदी भवन में मंत्रिपरिषद कक्ष एम-5/20 में होगी।


AI से बदलेगा छत्तीसगढ़ का भविष्य: 2 लाख शिक्षकों को मिलेगा हाईटेक प्रशिक्षण

No comments Document Thumbnail

 रायपुर : छत्तीसगढ़ में शिक्षा को भविष्य की तकनीकों से जोड़ते हुए, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित नवाचारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत हुई है।



मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में गूगल फॉर एजुकेशन इंडिया के प्रमुख संजय जैन एवं गूगल इंडिया के पब्लिक पॉलिसी प्रमुख राकेश रंजन ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री साय ने अतिथियों का पारंपरिक सम्मान करते हुए उन्हें शॉल एवं बस्तर कला की प्रतिकृति भेंट की। ।

गूगल फॉर एजुकेशन इंडिया के प्रमुख संजय जैन ने रायपुर जिला प्रशासन और गूगल के मध्य हुए लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) की जानकारी साझा करते हुए बताया कि रायपुर जिले में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में “AI सक्षम शिक्षा अभियान” की शुरुआत की गई है। इस अभियान के माध्यम से स्कूल शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित नवाचारों को बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि “सक्षम शिक्षक अभियान” के तहत राज्य में शिक्षकों को आधुनिक डिजिटल टूल्स और AI आधारित शिक्षण पद्धतियों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस पहल के प्रथम चरण की शुरुआत रायपुर से की जाएगी, जिसके बाद इसे राज्य के सभी जिलों में विस्तार दिया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि इस कार्यक्रम के अंतर्गत 2 लाख से अधिक शिक्षकों को AI प्रमाणन प्रदान करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए गूगल फॉर एजुकेशन अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म को निःशुल्क उपलब्ध कराने की योजना बना रहा है, जिससे शिक्षकों को तकनीकी रूप से सशक्त किया जा सके।

कार्यक्रम के तहत प्रारंभिक चरण में 200 शिक्षकों की सहभागिता से विशेष कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा, जिनमें गूगल फॉर एजुकेशन टूल्स का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही, कक्षा शिक्षण में AI के प्रभावी उपयोग और विद्यार्थियों के सीखने के परिणामों को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तकनीक-सक्षम और नवाचार आधारित बनाने के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों को शिक्षा से जोड़ना केवल एक पहल नहीं, बल्कि प्रदेश के विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। इससे न केवल शिक्षण पद्धतियों में गुणवत्ता आएगी, बल्कि विद्यार्थियों के भीतर नए युग के कौशल विकसित होंगे, जो उन्हें आने वाले समय की चुनौतियों के लिए तैयार करेंगे।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि “AI सक्षम शिक्षा अभियान” जैसे कार्यक्रम शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों के लिए परिवर्तनकारी सिद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को AI आधारित प्रशिक्षण और डिजिटल संसाधनों से सशक्त कर कक्षा शिक्षण को अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है - छत्तीसगढ़ को एक ऐसे ज्ञान-आधारित और तकनीकी रूप से सशक्त राज्य के रूप में स्थापित करना, जहाँ हर विद्यार्थी को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और अवसरों से भरपूर शिक्षा उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और डिजिटल इंडिया के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर एक सशक्त, आधुनिक और तकनीक-सक्षम शिक्षा व्यवस्था का निर्माण करना है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सचिव मुकेश बंसल, रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

एक साथ 10 मिसाइलें दागकर भारत ने दिखाया दम, कई देशों की बढ़ी चिंता

No comments Document Thumbnail

 नई दिल्ली: भारत अपनी सामरिक क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ा रहा है। देश में एक नई पीढ़ी की इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) विकसित करने पर काम चल रहा है, जो मौजूदा अग्नि-5 मिसाइल से अधिक उन्नत और प्रभावी मानी जा रही है।


सूत्रों के अनुसार, इस नई मिसाइल की रेंज 10,000 किलोमीटर से अधिक हो सकती है, जो भारत की वैश्विक स्ट्राइक क्षमता को और मजबूत करेगी। इसके साथ ही इसमें एक साथ कई वॉरहेड ले जाने की क्षमता (MIRV) विकसित किए जाने की संभावना है, जिससे एक ही मिसाइल से कई लक्ष्यों को साधा जा सकेगा।

एडवांस तकनीक पर फोकस

इस मिसाइल में MARV (मैनुवरेबल री-एंट्री व्हीकल) तकनीक के इस्तेमाल की योजना है। इस तकनीक के जरिए मिसाइल वायुमंडल में दोबारा प्रवेश करते समय अपना रास्ता बदल सकती है, जिससे दुश्मन के रडार और मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए इसे ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है।

इसके अलावा, मिसाइल में डिकॉय (नकली लक्ष्य) छोड़ने की क्षमता भी हो सकती है, जिससे दुश्मन की रक्षा प्रणाली भ्रमित हो सकती है।

हल्के और आधुनिक मटेरियल का उपयोग

रिपोर्ट्स के मुताबिक, नई मिसाइल को हल्का बनाने के लिए एडवांस कंपोजिट मटेरियल का उपयोग किया जा रहा है। इससे वजन कम होगा, ईंधन की बचत होगी और मारक क्षमता (रेंज) में वृद्धि संभव होगी।

वैश्विक सिस्टम को चुनौती

विशेषज्ञों का मानना है कि यह नई तकनीक अमेरिका, रूस और चीन जैसे देशों की उन्नत मिसाइल रक्षा प्रणालियों के लिए चुनौती बन सकती है, हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि या विस्तृत तकनीकी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।

रणनीतिक महत्व

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की मिसाइल के विकास से भारत की “डिटरेंस” क्षमता मजबूत होगी। लंबी दूरी से सटीक हमला, मल्टीपल वॉरहेड और एंटी-मिसाइल डिफेंस को चकमा देने की क्षमता इसे रणनीतिक रूप से अहम बनाती है।

थाने में रिश्वतखोरी का VIDEO वायरल, ASI और कॉन्स्टेबल सस्पेंड

No comments Document Thumbnail

 राजनांदगांव: छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले से पुलिस विभाग को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है। डोंगरगढ़ थाना परिसर के भीतर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक कॉन्स्टेबल पैसे लेते नजर आ रहा है।


वीडियो सामने आने के बाद एसपी अंकिता शर्मा ने तुरंत कार्रवाई करते हुए एएसआई रोहित खूंटे और कॉन्स्टेबल लक्ष्मी शंकर कंवर को निलंबित कर दिया है।

वीडियो में क्या दिखा

वायरल वीडियो में कॉन्स्टेबल 100-100 रुपये के नोट लेते हुए उन्हें अपनी जेब में रखते दिखाई दे रहा है। वहीं एएसआई मोबाइल फोन में एक महिला की तस्वीर को जूम कर देखते नजर आ रहा है। वीडियो में चालान, जमानत और “मामला निपटाने” को लेकर बातचीत भी सुनाई दे रही है।

क्या कार्रवाई हुई

पुलिस के अनुसार, एएसआई पर वर्दी में न रहने और विभाग की छवि खराब करने का आरोप है, जबकि कॉन्स्टेबल पर रिश्वत लेने के गंभीर आरोप लगे हैं। दोनों को सस्पेंड कर रक्षित केंद्र में लाइन अटैच किया गया है।

जांच जारी

हालांकि, वीडियो की पूरी सच्चाई और पृष्ठभूमि अभी स्पष्ट नहीं है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, यह वीडियो हाल के दिनों का बताया जा रहा है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और विभागीय स्तर पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.