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बस्तर तिरंगा यात्रा में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा होंगे शामिल

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नक्सल प्रभाव से बाहर आए गांवों तक पहुंचेगी बाइक रैली

महिला बाइकर्स भी होंगी सहभागी, शहीद स्थलों पर श्रद्धांजलि के साथ स्मृति के लिए मिट्टी का होगा संग्रहण

रायपुर- स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बस्तर अंचल में राष्ट्रभक्ति, शांति और विकास का संदेश लेकर ‘बस्तर तिरंगा यात्रा 2026’ का आयोजन किया जा रहा है। 12 से 15 अगस्त तक प्रस्तावित इस तिरंगा यात्रा में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा भी शामिल होंगे। मोटरसाइकिलों के माध्यम से आयोजित होने वाली यह यात्रा बस्तर के उन क्षेत्रों और ग्रामों तक पहुंचेगी, जो कभी नक्सल हिंसा से प्रभावित रहे हैं और अब शांति, सुरक्षा एवं विकास की नई राह पर आगे बढ़ रहे हैं। हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत राष्ट्रभक्ति, राष्ट्रीय एकता एवं गौरव की भावना को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से भव्य तिरंगा यात्रा का आयोजन किया जा रहा है।

बस्तर अब विश्वास, शांति और विकास की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है

यात्रा का उद्देश्य बस्तर की बदलती तस्वीर को देश-दुनिया के सामने रखना, युवाओं को राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ना तथा नक्सल हिंसा में शहीद हुए वीर जवानों और नागरिकों के सर्वाेच्च बलिदान को नमन करना है। यात्रा के माध्यम से यह संदेश दिया जाएगा कि बस्तर अब अमन, विश्वास, शांति और विकास की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस यात्रा माध्यम से अब तिरंगा बस्तर के कोने कोने तक फहराया जायेगा और भारत का संविधान भी राज्य के कोने कोने में लागू होने का संदेश सभी को दिया जाएगा।

शहीद स्थलों पर श्रद्धांजलि, शहीद परिवारों का सम्मान

तिरंगा यात्रा के दौरान उन स्थानों पर विशेष रूप से श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जहां बड़े नक्सली हमले हुए अथवा व्यापक जनहानि हुई थी। प्रत्येक शहीद स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ दो मिनट का मौन रखा जाएगा तथा शहीद परिवारों का सम्मान किया जाएगा। 

आने वाली पीढ़ियां इन वीर शहीदों के त्याग और बलिदान से प्रेरणा ले सकें

इस यात्रा की एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में शहीदों की शहादत वाले स्थानों की मिट्टी को श्रद्धापूर्वक संग्रहित एवं संरक्षित किया जाएगा। इस पवित्र मिट्टी को भविष्य में शहीदों के लिए निर्मित किए जाने वाले संग्रहालय में सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां इन वीर शहीदों के त्याग और बलिदान से प्रेरणा ले सकें। यह पहल शहीदों की स्मृति को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने का भावनात्मक और ऐतिहासिक माध्यम बनेगी।

महिला बाइकर्स की विशेष भागीदारी

बस्तर तिरंगा यात्रा में वुमन बाइकर्स रैली  की विशेष भागीदारी रहेगी। प्रत्येक जिले से बड़ी संख्या में बाइक राइडर शामिल होंगे और महिला बाइकर्स भी तिरंगा हाथ में लेकर इस यात्रा का हिस्सा बनेंगी। यात्रा में स्थानीय युवा, स्वयंसेवी संगठन, महिला समूह, एनसीसी, एनएसएस, नेहरू युवा केंद्र, स्काउट-गाइड और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भी सहभागिता रहेगी। 

तीन दिनों में बस्तर के दुर्गम इलाकों तक पहुंचेगी तिरंगा यात्रा

बस्तर तिरंगा यात्रा 12 अगस्त को यात्रा नारायणपुर से प्रारंभ होकर धौड़ाई, कन्हारगांव, कोड़ेनार, बोदली, सातधार, बारसूर और गीदम होते हुए दंतेवाड़ा पहुंचेगी, जहां रात्रि विश्राम होगा। 13 अगस्त को यात्रा दंतेवाड़ा से कुआकोंडा, भुसारास घाटी, चिंगावरम, सुकमा, एर्राबोर, मनीकोंटा, दोरनापाल, पोलमपल्ली, बुर्कापाल, मिनपा-टाड़मेटला, चिंतलनार, जगरगुंडा, सिलगेर, टेकलगुड़ेम और आवापल्ली होते हुए बीजापुर पहुंचेगी। बीजापुर में रात्रि विश्राम होगा। 14 अगस्त को यात्रा बीजापुर से आवापल्ली, उसूर, गलगम, नंबी और ताड़पाला होते हुए कुर्रेगुट्टालु पहाड़ी पहुंचेगी, जहां यात्रा के अंतिम पड़ाव पर कभी माओवादियों का गढ़ माने जाने वाले कुर्रेगुट्टालु की पहाड़ी पर तिरंगा फहराया जाएगा।

‘एक पेड़ शहीदों के नाम’ से होंगे पौधरोपण

इस यात्रा के प्रत्येक घटना स्थल पर ‘एक पेड़ शहीदों के नाम’ अभियान के तहत स्थल पर जितने लोग शहीद हुए हैं उतने ही पौधों का पौधरोपण किया जाएगा। इसके साथ ही युवाओं, विद्यार्थियों और खेल प्रतिभाओं से संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। नशामुक्ति एवं साइबर सुरक्षा के प्रति भी जागरूकता का संदेश दिया जाएगा। 

बस्तर की संस्कृति और विकास की झलक भी दिखेगी

तिरंगा यात्रा के दौरान सांस्कृतिक संध्याओं में बस्तर के पारंपरिक लोकनृत्य, देशभक्ति गीत और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। साथ ही सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, डिजिटल सेवाओं और विभिन्न शासकीय योजनाओं पर आधारित विकास प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। पुनर्वासित युवाओं की सफलता की कहानियों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। 

बस्तर की वादियों में होगी शांति की दौड़

प्रत्येक जिला मुख्यालय में बस्तर की वादियों के मध्य बस्तर शांति दौड़ का भी आयोजन किया जाएगा। विशाल तिरंगा मार्च, राष्ट्रगान, शहीद सम्मान एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा। 

तिरंगा यात्रा बनेगी नए बस्तर की पहचान

 ‘बस्तर तिरंगा यात्रा 2026’ केवल एक बाइक रैली नहीं, बल्कि शहादत को नमन, युवाओं को प्रेरित करने, सामाजिक एकता मजबूत करने और बस्तर की नई पहचान को देश के सामने रखने का अभियान है। तिरंगे के साथ बस्तर के गांवों और उन स्थानों तक पहुंचने वाली यह यात्रा उन इलाकों में विश्वास का संदेश लेकर जाएगी, जहां कभी हिंसा और भय का साया था।

छत्तीसगढ़ को ‘GeM सस्टेनेबल प्रोक्योरमेंट अवार्ड’, शासकीय खरीदी दोगुनी होकर ₹3,935 करोड़ पहुंची

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गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस से राज्य की खरीदी में एक वर्ष में 113 प्रतिशत की वृद्धि, सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को मिले ₹1,800 करोड़ के ऑर्डर

प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया से वर्ष 2025-26 में राज्य को ₹130 करोड़ की बचत

रायपुर- छत्तीसगढ़ को गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) के 10वें स्थापना दिवस समारोह में ‘GeM सस्टेनेबल प्रोक्योरमेंट अवार्ड’ से सम्मानित किया गया है। नई दिल्ली में आयोजित समारोह में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की गरिमामयी उपस्थिति में यह सम्मान प्रदान किया गया। GeM के एक दशक पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित समारोह की थीम ‘GeM 10: A Decade of Exponential Possibilities’ रही।

राज्य सरकारों के लिए निर्धारित ‘प्रीमियर अवार्ड्स – स्टेट गवर्नमेंट फेलिसिटेशन’ श्रेणी के अंतर्गत छत्तीसगढ़ को यह पुरस्कार GeM के प्रभावी उपयोग तथा इसके माध्यम से शासकीय खरीदी के मूल्य और मात्रा में उल्लेखनीय वृद्धि के लिए प्रदान किया गया है।

खुली प्रतिस्पर्धा से ₹130 करोड़ की बचत

GeM प्लेटफॉर्म पर पारदर्शी एवं प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया के कारण वित्तीय वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ शासन को ₹130 करोड़ की बचत हुई है। यह बचत विभागों द्वारा खरीदी के लिए अनुमानित लागत और खुली प्रतिस्पर्धी बोली के बाद प्राप्त वास्तविक बाजार मूल्य के अंतर से हुई है।

GeM की खुली बोली प्रक्रिया, मानकीकृत विनिर्देश और प्रत्येक लेन-देन का डिजिटल एवं ऑडिट योग्य रिकॉर्ड शासकीय खरीदी में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करता है। पिछले तीन वित्तीय वर्षों में प्रतिस्पर्धी खरीदी के माध्यम से राज्य शासन को कुल ₹235 करोड़ की बचत हुई है।

खरीदी प्रक्रिया के प्रत्येक चरण में निर्धारित जांच और निगरानी व्यवस्था लागू है। साथ ही निविदा की शर्तों एवं तकनीकी विनिर्देशों की नियमित समीक्षा की जाती है, जिससे खरीदी की गुणवत्ता सुनिश्चित होने के साथ बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप वस्तुओं और सेवाओं की उपलब्धता बनी रहे।

GeM से खरीदी में 113 प्रतिशत की वृद्धि

छत्तीसगढ़ में GeM के माध्यम से शासकीय खरीदी वित्तीय वर्ष 2025-26 में बढ़कर ₹3,935 करोड़ पहुंच गई। यह पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 113 प्रतिशत की वृद्धि है।

राज्य शासन द्वारा विभागों, निगमों और स्थानीय निकायों की खरीदी को एक साझा एवं पारदर्शी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने के सुनियोजित प्रयासों से यह वृद्धि संभव हुई है। इससे अधिकाधिक शासकीय खरीदी खुली प्रतिस्पर्धा के दायरे में आई है और प्रत्येक लेन-देन में प्रतिस्पर्धी दर निर्धारण तथा पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है।

सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को ₹1,800 करोड़ के ऑर्डर

GeM के व्यापक उपयोग से शासकीय खरीदी में छोटे उद्यमियों की भागीदारी भी तेजी से बढ़ी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (MSEs) से खरीदी 61 प्रतिशत बढ़कर ₹1,800 करोड़ हो गई। यह निर्धारित 25 प्रतिशत MSE खरीद लक्ष्य से काफी अधिक है।

राज्य के प्राथमिकता वाले उद्यमी वर्गों की भागीदारी में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। महिला उद्यमियों से खरीदी में 97 प्रतिशत और अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के उद्यमियों से खरीदी में 108 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं स्टार्टअप से खरीदी में सर्वाधिक 178 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

GeM ने उद्यमियों के लिए खोले शासकीय बाजार के द्वार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि GeM ने छत्तीसगढ़ के उद्यमियों को बिना किसी मध्यस्थ के सीधे शासकीय मांग और बाजार से जुड़ने का सशक्त माध्यम उपलब्ध कराया है। महिला उद्यमियों, अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के उद्यमियों और स्टार्टअप की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि इस पारदर्शी व्यवस्था की सफलता को दर्शाती है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि खुला और पारदर्शी डिजिटल मार्केटप्लेस प्रत्येक उद्यमी को समान अवसर प्रदान करता है।  हमारी सरकार का प्रयास है कि इस व्यवस्था का लाभ प्रदेश के अधिक से अधिक सूक्ष्म एवं लघु उद्यमियों, महिला उद्यमियों, अनुसूचित जाति-जनजाति के उद्यमियों और स्टार्टअप तक पहुंचे। हम पारदर्शी शासकीय खरीदी के साथ स्थानीय उद्यमिता को सशक्त बनाकर विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहे हैं।

बजाज फाइनेंस कर्मचारी पर 10 लाख की ठगी का आरोप, लोन बंद कराने के नाम पर की धोखाधड़ी, केस दर्ज

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 कोरबा। जिले में लोन बंद कराने और किस्त जमा करने के नाम पर लाखों रुपये की धोखाधड़ी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बजाज फाइनेंस कंपनी के एक कर्मचारी पर आरोप है कि उसने ग्राहकों से रकम लेकर उसे कंपनी के खाते में जमा कराने के बजाय अपने निजी बैंक खाते में ट्रांसफर करा लिया। जिले में अब तक ऐसे तीन मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें पीड़ितों से करीब 10 लाख रुपये की ठगी की गई है। पुलिस ने अलग-अलग शिकायतों के आधार पर आरोपी कर्मचारी के खिलाफ केस दर्ज कर जांच व तलाश शुरू कर दी है।


केस 1: लोन बंद कराने के नाम पर 2 लाख ठगे

मामले में पहली शिकायत बालको क्षेत्र की एक महिला ने दर्ज कराई है। महिला के अनुसार, बजाज फाइनेंस कर्मचारी शशांक सिंह ने लोन की किस्त और खाता पूरी तरह बंद कराने का झांसा देकर उससे करीब दो लाख रुपये अपने निजी खाते में ट्रांसफर करवा लिए। रकम लेने के बावजूद आरोपी ने यह पैसा संबंधित लोन खाते में जमा नहीं कराया। शिकायत पर बालको थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अमानत में खयानत (धोखाधड़ी) का मामला दर्ज किया है।

केस 2: जूस सेंटर संचालक को 5 लाख का चूना

दूसरा मामला बजरंग चौक, राताखार का है। पीड़ित संदीप सिंह, जो दीनदयाल मार्केट (पावर हाउस रोड) में जूस सेंटर चलाते हैं, ने बताया कि उन्होंने जुलाई 2025 में बजाज फाइनेंस से ₹5,49,856 का लोन लिया था। इसकी मासिक किस्त 14,164 रुपये तय थी। आरोप है कि शशांक सिंह ने खुद को कंपनी का अधिकृत कर्मचारी बताते हुए संदीप को झांसा दिया कि एकमुश्त राशि देने पर उनका लोन अकाउंट बंद करा दिया जाएगा।

भरोसा करके संदीप ने अगस्त 2025 में 3 लाख रुपये के दो चेक और 2 लाख रुपये नकद, यानी कुल 5 लाख रुपये आरोपी को दे दिए। आरोपी ने चेक अपने खाते में क्लियर करा लिए, लेकिन लोन अकाउंट बंद नहीं कराया।

केस 3: सीएसईबी चौकी में दर्ज हुआ तीसरा मामला

थगी का तीसरा मामला सीएसईबी पुलिस चौकी क्षेत्र में सामने आया है। पुलिस के अनुसार, तीनों मामलों को मिलाकर अब तक करीब 10 लाख रुपये की ठगी की शिकायत दर्ज हो चुकी है।

फर्जी दस्तावेज से दूसरे लोन लेने का भी आरोप

पीड़ितों ने गंभीर आरोप लगाया है कि लोन प्रक्रिया के दौरान आरोपी शशांक सिंह ने उनके आधार कार्ड और अन्य जरूरी दस्तावेज लिए थे। आरोप है कि इन्हीं दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल (मिसयूज) कर आरोपी ने अन्य वित्तीय कंपनियों से पीड़ितों के नाम पर फर्जी तरीके से लोन ले लिए और उन पैसों या खरीदे गए सामान को खुद रख लिया।

RPF कार्यालय के सामने कपल का खुलेआम रोमांस, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल

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 रायगढ़। रायगढ़ रेलवे स्टेशन के बाहर एक कपल के खुलेआम रोमांस करने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में दोनों एक-दूसरे को गले लगाकर काफी देर तक किस करते हुए नजर आ रहे हैं। इस पूरी घटना की खास बात यह रही कि जिस स्थान पर कपल यह हरकत कर रहा था, उसके ठीक सामने रेलवे सुरक्षा बल (RPF) का कार्यालय भी स्थित है।


जानकारी के अनुसार, घटना वाले दिन सोमवार को रेलवे स्टेशन के बाहर यात्रियों की काफी भीड़भाड़ थी। ट्रेनों की आवाजाही के दौरान बड़ी संख्या में यात्री और स्थानीय लोग वहां मौजूद थे। इसी दौरान कपल काफी देर तक एक-दूसरे के गले लगकर खड़ा रहा और सार्वजनिक स्थान पर ही किस करता रहा। इस दृश्य को देखकर आसपास मौजूद लोगों में चर्चा शुरू हो गई, जिसके बाद वहीं खड़े किसी व्यक्ति ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया।

वीडियो वायरल होने के बाद मामला RPF तक पहुंचा। RPF थाना प्रभारी कुलदीप कुमार ने बताया कि वीडियो में दिखाई दे रहा कपल घटना के वक्त शराब के नशे में धुत था। उन्होंने कहा कि जब दोनों सार्वजनिक स्थान पर इस तरह की हरकत कर रहे थे, उसी समय RPF को इसकी सूचना दी जानी चाहिए थी।

थाना प्रभारी ने आगे बताया कि कपल कुछ देर बाद अपने आप ही वहां से चला गया। फिलहाल इस मामले में कोई औपचारिक केस दर्ज नहीं किया गया है। हालांकि, स्टेशन जैसे व्यस्त और सार्वजनिक स्थान पर हुई इस घटना की पूरे शहर में काफी चर्चा हो रही है।

‘भारत GI’ के जरिए कारीगरों और उत्पादकों को मिलेगा बड़ा बाजार

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भारत की समृद्ध भौगोलिक संकेतक (GI) उत्पाद विरासत की आर्थिक क्षमता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने 5 अगस्त 2026 को वाणिज्य भवन, नई दिल्ली में एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इस MoU पर MSME मंत्रालय के निदेशक मोहम्मद सालिक परवेज और DPIIT के IPR प्रभाग के निदेशक करण थापर ने दोनों संगठनों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए।

भारत में भौगोलिक संकेतकों के पंजीकरण और कानूनी संरक्षण के लिए GI अधिनियम, 1999 के तहत DPIIT नोडल विभाग है। वहीं, MSME मंत्रालय देशभर में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों, पारंपरिक उद्योगों और कारीगरों के विकास, वित्तीय सुदृढ़ता तथा समग्र प्रगति को दिशा देने वाला नोडल मंत्रालय है। दोनों पक्षों ने माना कि GI का कानूनी पंजीकरण क्षेत्रीय पहचान की रक्षा करता है, लेकिन इन उत्पादों के आर्थिक मूल्य को अधिकतम करने के लिए स्थानीय शिल्प और उत्पादों को व्यापक स्तर पर व्यावसायिक रूप से सक्षम तथा निर्यात के लिए तैयार उद्यमों में बदलने हेतु समन्वित प्रयास आवश्यक हैं।

इस MoU के माध्यम से भारतीय GI उत्पादों के व्यावसायीकरण, गुणवत्ता मानकीकरण और बाजार पहुंच को तेज करने के लिए एक सहयोगात्मक ढांचा स्थापित किया गया है। इससे स्थानीय कारीगरों, बुनकरों और उत्पादकों की आजीविका को बेहतर बनाने के साथ-साथ देश में ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ODOP) पारिस्थितिकी तंत्र को भी मजबूत करने में मदद मिलेगी।

संयुक्त पहलों के तहत दोनों संगठन अपनी योजनाओं और कार्यक्रमों में ODOP को शामिल करने की दिशा में काम करेंगे। इसके अलावा, GI उत्पादक समूहों और अधिकृत उपयोगकर्ताओं को समर्पित “भारत GI” बैनर के तहत ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) और सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पर जोड़ने में सहयोग किया जाएगा। घरेलू और वैश्विक स्तर पर GI उत्पादों के विपणन के लिए राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों, खरीदार-विक्रेता बैठकों और प्रदर्शनियों में विशेष GI मंडप (GI Pavilions) भी संयुक्त रूप से प्रायोजित किए जाएंगे।

यह MoU उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के बौद्धिक संपदा संरक्षण संबंधी दायित्वों और MSME मंत्रालय के उद्यम विकास संबंधी दायित्वों को एक साथ जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस सहयोग से क्षमता निर्माण, डिजिटल सशक्तीकरण और कारीगरों, बुनकरों तथा उत्पादक समूहों के लिए बेहतर बाजार पहुंच के माध्यम से भारत के GI पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की उम्मीद है।

यह पहल GI उत्पादों को प्रीमियम घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने में भी मदद करेगी तथा ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में योगदान देगी।

कृषि छात्रों के लिए बड़ी सौगात: 6,000 से अधिक विद्यार्थियों को 21.35 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति जारी

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मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को पूसा स्थित आईसीएआर-आईएआरआई में राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (NSP) के माध्यम से देशभर के कृषि विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति एवं फेलोशिप की राशि जारी की। इस पहल के तहत 6,000 से अधिक विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से कुल 21.35 करोड़ रुपये की राशि सीधे उनके खातों में जारी की गई। इस नई व्यवस्था की शुरुआत के साथ अब कृषि विद्यार्थियों को हर महीने DBT के माध्यम से छात्रवृत्ति की राशि प्राप्त होगी, जिससे अनावश्यक कठिनाइयों और देरी से राहत मिलेगी। इस पहल का उद्देश्य छात्रवृत्ति वितरण की प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित बनाना तथा विद्यार्थियों को समय पर और बिना किसी परेशानी के आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है।

इस अवसर पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि छात्रवृत्ति केवल आर्थिक सहायता का माध्यम नहीं है, बल्कि यह कृषि शिक्षा को मजबूत, अधिक व्यावहारिक और रोजगार एवं अन्य अवसरों से बेहतर ढंग से जोड़ने का भी साधन है। उन्होंने कहा कि DBT प्रणाली लागू होने से विद्यार्थियों को समय पर सहायता मिलेगी और पारंपरिक व्यवस्था में होने वाली देरी की समस्या समाप्त होगी।

विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कृषि शिक्षा में व्यावहारिक प्रशिक्षण के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल कक्षा में पढ़ाई से अच्छे किसान, वैज्ञानिक या कृषि उद्यमी तैयार नहीं किए जा सकते। विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने और कक्षा से बाहर कृषि की वास्तविक परिस्थितियों को समझने के पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से सुझाव और विचार साझा करने की भी अपील की, ताकि शिक्षा एवं प्रशिक्षण व्यवस्था को लगातार बेहतर बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि कृषि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं होना चाहिए, बल्कि युवाओं को व्यावहारिक कौशल, आत्मविश्वास और कृषि क्षेत्र की आवश्यकताओं की समझ से भी सशक्त बनाना चाहिए, ताकि वे कृषि क्षेत्र में प्रभावी योगदान दे सकें।

चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में सरकार कृषि क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा, पोषण सुरक्षा और किसानों की आय सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के वैज्ञानिकों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि वैज्ञानिकों के अनुसंधान और किसानों की मेहनत ने देश के खाद्यान्न भंडार को मजबूत किया है तथा भारत की कृषि प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

उन्होंने युवाओं से अपने करियर के निर्माण के साथ-साथ बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और देश के लिए कुछ सार्थक करने का आह्वान किया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कृषि विद्यार्थियों को केवल रोजगार पाने तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें नवाचार, स्टार्ट-अप और अनुसंधान के क्षेत्र में भी नेतृत्वकारी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने युवा पीढ़ी को कृषि को व्यापक अवसरों वाले क्षेत्र के रूप में देखने तथा उभरती चुनौतियों के समाधान के लिए नए विचार और समाधान विकसित करने में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक प्रगति, उद्यमिता और नवाचार को आगे बढ़ाने में युवा कृषि पेशेवरों और विद्यार्थियों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि NSP-DBT प्रणाली छात्रवृत्ति वितरण को अधिक पारदर्शी, तेज और सुगम बनाएगी। इस प्रणाली से विद्यार्थियों को समय पर आर्थिक सहायता मिल सकेगी, जिससे वे छात्रवृत्ति जारी होने को लेकर किसी अनिश्चितता से प्रभावित हुए बिना अपनी पढ़ाई पर अधिक प्रभावी ढंग से ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। केंद्रीय मंत्री ने ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया, जो विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक क्षमताओं और कृषि क्षेत्र की बदलती आवश्यकताओं की समझ से भी लैस करे।

चौहान ने देशभर के ICAR संस्थानों में अध्ययनरत कृषि विद्यार्थियों से ‘हरियाली अमावस्या’ के अवसर पर पौधारोपण गतिविधियों में भाग लेने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि हरित पहल कृषि और पर्यावरण दोनों के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी का हिस्सा हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को पौधारोपण कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लेने और पर्यावरण के प्रति जागरूकता एवं जिम्मेदारी को मजबूत करने में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, ICAR के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट, ICAR के सचिव ज्ञानेंद्र त्रिपाठी, उप महानिदेशक डॉ. यशपाल सिंह मलिक तथा IARI के निदेशक डॉ. सी. श्रीनिवास राव उपस्थित रहे। ICAR और IARI के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी कार्यक्रम में शामिल हुए। वहीं, देशभर से हजारों विद्यार्थियों ने ऑनलाइन माध्यम से भी कार्यक्रम में भाग लिया।

CG NEWS : रेलवे स्टेशन परिसर से मोटरसाइकिल पार, सीसीटीवी में कैद हुई चोरी की वारदात

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 कोरबा। औद्योगिक नगरी कोरबा के रेलवे स्टेशन परिसर से एक मोटरसाइकिल चोरी होने का मामला सामने आया है। चोरी की यह पूरी वारदात स्टेशन में लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरे में कैद हो गई है, जिसमें एक अज्ञात संदिग्ध व्यक्ति बाइक लेकर रफूचक्कर होता दिखाई दे रहा है।


सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस

जानकारी के अनुसार, वाहन मालिक को जैसे ही बाइक गायब होने का पता चला, उन्होंने तत्काल कोतवाली थाना पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने अज्ञात चोर के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस स्टेशन परिसर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की बारीकी से जांच कर रही है, ताकि संदिग्ध की पहचान की जा सके।

आसपास के इलाकों में घेराबंदी

पुलिस की टीम रेलवे स्टेशन से बाहर जाने वाले सभी रास्तों और आसपास के क्षेत्रों में भी बाइक व संदिग्ध की पतासाजी में जुटी है। पुलिस यह सुराग लगाने का प्रयास कर रही है कि शातिर चोर वारदात को अंजाम देने के बाद किस दिशा की ओर भागा है।

वाहन चालकों में बढ़ी चिंता

सुरक्षित माने जाने वाले रेलवे स्टेशन परिसर से दिनदहाड़े/अचानक वाहन चोरी की घटना से वहां गाड़ी पार्क करने वाले आम यात्रियों और स्थानीय लोगों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। कोतवाली पुलिस का कहना है कि फुटेज के आधार पर आरोपी की पहचान लगभग की जा रही है और जल्द ही उसे गिरफ्तार कर चोरी की मोटरसाइकिल बरामद कर ली जाएगी।

युवाओं को राहत: शिक्षक भर्ती से टकराव के बाद SI मुख्य परीक्षा की तिथियां बदलीं, अब 2 से 4 नवंबर तक होंगे इम्तिहान

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 रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) ने सूबेदार, उप निरीक्षक (SI) संवर्ग और प्लाटून कमांडर (मुख्य) भर्ती परीक्षा-2024 की तिथियों में संशोधन कर दिया है। अब यह मुख्य परीक्षा 24, 25 और 26 अक्टूबर के स्थान पर 02, 03 और 04 नवंबर 2026 को आयोजित की जाएगी।


शिक्षक भर्ती परीक्षा से हो रहा था टकराव

गृह (पुलिस) विभाग के अंतर्गत इस परीक्षा के प्रारंभिक परिणाम 04 अगस्त 2026 को जारी किए गए थे, जिसके बाद मुख्य परीक्षा 24 से 26 अक्टूबर के बीच प्रस्तावित थी। हालांकि, 25 अक्टूबर को शिक्षक भर्ती परीक्षा भी तय होने के कारण दोनों परीक्षाओं की तिथियां आपस में टकरा रही थीं। इससे एक साथ दोनों परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के सामने किसी एक परीक्षा से वंचित होने की स्थिति बन गई थी।


मुख्यमंत्री के निर्देश पर मिली बड़ी राहत

अभ्यर्थियों की इस व्यावहारिक समस्या की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने युवाओं के हित में संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को तत्काल तिथियों में बदलाव के निर्देश दिए। इसके बाद लोक सेवा आयोग ने नया परीक्षा कार्यक्रम जारी कर दिया है, जिससे हजारों अभ्यर्थियों ने राहत की सांस ली है।

कोलंबिया में 7.4 तीव्रता का भूकंप, 130 से ज्यादा मौतें, कई लोग मलबे में दबे

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 दक्षिण अमेरिकी देश कोलंबिया में भूकंप की शक्ल में मौत का महा-तांडव आया है। सोमवार को 7.4 की तीव्रता से आए इस भूकंप में 100 से ज्यादा लोगों की जान चली गई। देर रात मरने वालों का आंकड़ा 130 था। वहीं, इस बात की आशंका है कि बड़ी संख्या में लोग मलबे के नीचे दबे हो सकते हैं। इस खतरनाक भूकंप में हजारों इमारतें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। सबसे ज्यादा नुकसान पश्चिमी कोलंबिया में हुआ है। 



इसके अलावा भूकंप के झटके पड़ोसी देश इक्वाडोर में भी महसूस किए गए। अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण (यूएसजीएस) और कोलंबिया की संबंधित एजेंसी के अनुसार, भूकंप का केंद्र सैन जोस डेल पालमार में 107 किलोमीटर की गहराई में था।

चोको की गवर्नर नूबिया कॉर्डोबा ने सोशल मीडिया पर कहाकि क्षेत्रीय राजधानी में लोग घायल हुए हैं और इमारतों को भारी नुकसान पहुंचा है। हालांकि उन्होंने इसके बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी। यह भूकंप जून के आखिर में वेनेजुएला में लगातार आए 7.2 और 7.5 तीव्रता वाले भूकंपों के बाद आया है। वेनेजुएला में आए भूकंप में सैकड़ों इमारतें नष्ट हो गई थीं और पांच हजार से अधिक लोगों की जान गई थी।
छोटे भूकंप हैं आम बात

हालांकि मध्य और पश्चिमी कोलंबिया में टेम्ब्लोरेस नाम के छोटे भूकंप आम बात हैं। हालांकि 6.0 मैग्नीट्यूड से ऊपर के भूकंप दुर्लभ हैं। अर्मेनिया शहर के पास 6.2 मैग्नीट्यूड का एक भूकंप 1,100 से अधिक लोगों की मौत का कारण बना। आपदा के बाद, कोलंबिया के नवनियुक्त राष्ट्रपति अबेलार्डो दे ला एस्प्रियेला ने सोमवार को कहाकि उन्होंने भूकंप के बाद सैन जोस डेल पालमार में आपात स्थिति के जवाब की जिम्मेदारी संभाल ली है। उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए कहाकि आप अकेले नहीं हैं। सरकार आपके साथ है और कार्रवाई हो रही है।
गिर गया गिरजाघर का टावर

मनीजालेस शहर में एक गिरजाघर का टावर ढहकर उसके मुख्य प्रार्थना कक्ष पर जा गिरा। मनीजालेस के मेयर जॉर्ज एडुआर्दो रोजास ने कहा कि भूकंप के कारण शहर में दो लोगों की मौत हुई है। उन्होंने लोगों से भूकंप के बाद आने वाले झटकों के खतरे को देखते हुए घरों से बाहर रहने की अपील की। स्थानीय मीडिया संस्थानों द्वारा साझा किए गए वीडियो में पेरेइरा, कैली और क्विब्दो शहरों में कई मकान क्षतिग्रस्त दिखे हैं।

कोलंबिया के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति अबेलार्डो दे ला एस्प्रिएला ने कहा कि देश में आए भूकंप के बाद सैन जोस डेल पालमार में पैदा हुए आपात हालात से निपटने के लिए उन्होंने व्यक्तिगत रूप से सरकार की कार्रवाई की कमान संभाल ली है। उन्होंने कहा कि सरकार प्रभावित क्षेत्रों में राहत के लिए काम कर रही है। इससे पहले जून के आखिर में वेनेजुएला में 7.2 और 7.5 तीव्रता के भूकंप में सैकड़ों इमारतें नष्ट हो गई थी और 5,000 से अधिक लोगों की जान गई थी।

रायपुर में Christian Forum अध्यक्ष अरुण पन्नालाल गिरफ्तार, सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़ा मामला गरमाया

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रायपुर- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर छत्तीसगढ़ क्रिश्चियन फोरम के अध्यक्ष अरुण पन्नालाल की गिरफ्तारी के बाद मामला चर्चा में है। पुलिस ने 75 वर्षीय पन्नालाल को कथित तौर पर ऐसी सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर गिरफ्तार किया, जिसे लेकर धार्मिक भावनाएं आहत होने की शिकायत सामने आई थी।

सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर शुरू हुआ विवाद

मामला सोशल मीडिया पर भगवान शिव से संबंधित एक कथित टिप्पणी से जुड़ा बताया जा रहा है। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पोस्ट में आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और इसके बाद अरुण पन्नालाल को गिरफ्तार किया गया।

गिरफ्तारी के बाद बढ़ी हलचल

गिरफ्तारी की खबर सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। रिपोर्टों के मुताबिक, पन्नालाल की गिरफ्तारी के विरोध में कुछ ईसाई संगठनों और नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं ने उनकी रिहाई की मांग उठाई है। वहीं, दूसरी ओर शिकायतकर्ताओं की ओर से सोशल मीडिया पोस्ट को धार्मिक भावनाओं के लिए आपत्तिजनक बताते हुए कार्रवाई का समर्थन किया गया है।

मामले में पुलिस ने सोशल मीडिया पोस्ट की प्रकृति और उससे जुड़े आरोपों के आधार पर कार्रवाई की है। फिलहाल यह मामला जांच के दायरे में है और पोस्ट के संदर्भ, उसकी मंशा तथा उससे जुड़े अन्य तथ्यों की जांच की जा रही है। ऐसे मामलों में पुलिस की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।

धार्मिक भावनाओं से जुड़े मामलों में बढ़ी संवेदनशीलता

सोशल मीडिया पर धार्मिक विषयों से जुड़ी टिप्पणियां अक्सर तेजी से फैलती हैं और उनसे विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है। रायपुर का यह मामला भी इसी वजह से चर्चा में आया है। एक ओर शिकायतकर्ता पक्ष धार्मिक भावनाओं के सम्मान और आपत्तिजनक सामग्री पर कार्रवाई की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर पन्नालाल के समर्थन में आवाजें उठ रही हैं।

मामले से जुड़े विभिन्न पक्षों के दावों के बीच फिलहाल पुलिस की जांच और अदालत की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही मानी जाएगी।

मामले पर बनी हुई है नजर

रायपुर में हुई इस गिरफ्तारी ने सोशल मीडिया पोस्ट, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धार्मिक भावनाओं के सम्मान से जुड़े सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है। आने वाले दिनों में पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान मामले से जुड़े और तथ्य सामने आने की संभावना है।

संसद ने Bankers’ Books Evidence Bill, 2026 को दी मंजूरी, डिजिटल बैंकिंग रिकॉर्ड को कानूनी साक्ष्य के रूप में मिलेगी मान्यता

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नई दिल्ली: डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते इस्तेमाल के बीच भारतीय बैंकिंग व्यवस्था और कानूनी प्रक्रिया को आधुनिक बनाने की दिशा में संसद ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। Bankers’ Books Evidence Bill, 2026 को संसद की मंजूरी मिल गई है। राज्यसभा ने सोमवार को विधेयक को पारित किया, जबकि लोकसभा इसे पहले ही मंजूरी दे चुकी थी। इसके साथ ही बैंकिंग रिकॉर्ड से जुड़े मौजूदा कानूनी ढांचे को आधुनिक स्वरूप देने का रास्ता साफ हो गया है।

1891 के पुराने कानून की जगह लेगा नया कानून

यह विधेयक ब्रिटिश काल के Bankers’ Books Evidence Act, 1891 को बदलने के उद्देश्य से लाया गया है। करीब 135 वर्ष पुराने कानून में बैंकिंग रिकॉर्ड की परिभाषा मुख्य रूप से पारंपरिक दस्तावेजों और खाताबही के संदर्भ में थी। नए कानून में बैंकिंग व्यवस्था में आए तकनीकी बदलावों को ध्यान में रखते हुए डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को भी स्पष्ट कानूनी आधार दिया गया है। 

डिजिटल बैंकिंग रिकॉर्ड को मिलेगा कानूनी आधार

नए कानून का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि बैंक द्वारा इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल, वर्चुअल अथवा क्लाउड आधारित माध्यमों में रखे गए रिकॉर्ड को भी बैंकिंग रिकॉर्ड के दायरे में शामिल किया जा सकेगा।

इसका मतलब है कि ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल लेनदेन और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से तैयार होने वाले बैंक रिकॉर्ड को अदालतों में साक्ष्य के तौर पर प्रस्तुत करने की प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट और आधुनिक कानूनी आधार मिलेगा।

बैंकिंग व्यवस्था में तकनीक के अनुरूप बदलाव

आज बैंकिंग क्षेत्र में अधिकांश लेनदेन डिजिटल माध्यमों से होते हैं। ग्राहक ऑनलाइन बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और इलेक्ट्रॉनिक स्टेटमेंट जैसी सुविधाओं का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में बैंकिंग रिकॉर्ड से संबंधित कानून को भी आधुनिक तकनीक के अनुरूप बनाना जरूरी हो गया था।

नया विधेयक इसी आवश्यकता को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे डिजिटल रिकॉर्ड की कानूनी स्वीकार्यता को लेकर स्पष्टता बढ़ेगी और न्यायिक प्रक्रिया में ऐसे रिकॉर्ड के इस्तेमाल के लिए अधिक व्यवस्थित व्यवस्था उपलब्ध होगी।

अदालतों में साक्ष्य पेश करने की प्रक्रिया होगी आसान

नए कानूनी ढांचे से बैंकिंग से जुड़े मामलों में डिजिटल रिकॉर्ड को साक्ष्य के तौर पर पेश करने की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है। बैंकिंग लेनदेन, खातों और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड से संबंधित मामलों में इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

विधेयक का उद्देश्य बैंक रिकॉर्ड की प्रमाणिकता और विश्वसनीयता बनाए रखते हुए डिजिटल रिकॉर्ड के लिए उपयुक्त प्रमाणन व्यवस्था उपलब्ध कराना भी है। इससे अदालतों में बैंकिंग रिकॉर्ड की जांच और स्वीकार्यता की प्रक्रिया को आधुनिक डिजिटल व्यवस्था के अनुरूप बनाने में मदद मिलेगी। 

डिजिटल रिकॉर्ड की सुरक्षा और विश्वसनीयता पर जोर

डिजिटल रिकॉर्ड को कानूनी साक्ष्य के रूप में स्वीकार करने के साथ उसकी प्रामाणिकता, सटीकता और डेटा की अखंडता सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है। इसी वजह से इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड से संबंधित प्रमाणन और रिकॉर्ड की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के प्रावधानों पर भी जोर दिया गया है।

संसदीय समिति ने भी डिजिटल रिकॉर्ड की प्रामाणिकता और उसके साथ छेड़छाड़ रोकने के उपायों की आवश्यकता पर विशेष ध्यान दिया था। समिति ने इलेक्ट्रॉनिक एवं डिजिटल रिकॉर्ड से जुड़े प्रमाणपत्र की आवश्यकताओं को मजबूत करने की सिफारिश की थी।

बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव

नया कानून बैंकिंग क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैंक अब बड़ी मात्रा में डेटा डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों में सुरक्षित रखते हैं। ऐसे में पारंपरिक कागजी रिकॉर्ड पर आधारित पुराने कानूनी प्रावधानों को आधुनिक डिजिटल बैंकिंग व्यवस्था के अनुरूप बदलना आवश्यक था।

यह बदलाव बैंकिंग रिकॉर्ड से संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं को अधिक तकनीक-अनुकूल बनाने और डिजिटल बैंकिंग व्यवस्था के साथ कानून के तालमेल को बेहतर करने में मदद कर सकता है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह विधेयक?

Bankers’ Books Evidence Bill, 2026 को केवल बैंकिंग कानून में बदलाव के रूप में नहीं देखा जा रहा है। यह भारत की तेजी से डिजिटल होती वित्तीय व्यवस्था के अनुरूप कानूनी ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

इससे:

  • डिजिटल बैंकिंग रिकॉर्ड को स्पष्ट कानूनी आधार मिलेगा।

  • इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की अदालतों में स्वीकार्यता को मजबूती मिलेगी।

  • बैंकिंग मामलों में साक्ष्य प्रस्तुत करने की प्रक्रिया अधिक आधुनिक होगी।

  • पुराने कागजी रिकॉर्ड आधारित कानूनी व्यवस्था को डिजिटल युग के अनुरूप बनाया जाएगा।

  • बैंकिंग और न्यायिक व्यवस्था के बीच तकनीकी तालमेल बेहतर होगा।

डिजिटल इंडिया की दिशा में एक और कदम

भारत में डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बैंकिंग का तेजी से विस्तार हुआ है। ऐसे समय में बैंकिंग रिकॉर्ड से जुड़े कानून का भी डिजिटल युग के अनुरूप होना जरूरी है। Bankers’ Books Evidence Bill, 2026 इसी बदलाव को कानूनी रूप देने की दिशा में उठाया गया कदम है।

संसद से दोनों सदनों की मंजूरी मिलने के बाद अब यह विधेयक देश की बैंकिंग और न्यायिक व्यवस्था में डिजिटल रिकॉर्ड के उपयोग को अधिक स्पष्ट और आधुनिक कानूनी आधार देने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

झारखंड में छात्र आंदोलन तेज, JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ हजारों युवाओं का प्रदर्शन

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झारखंड में छात्र आंदोलन ने पकड़ा जोर, JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ हजारों अभ्यर्थियों का विधानसभा मार्च

रांची: झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों और अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। JPSC और JSSC से जुड़ी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर बड़ी संख्या में छात्र सोमवार, 10 अगस्त को रांची में सड़क पर उतरे और झारखंड विधानसभा की ओर मार्च किया।

प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी लंबे समय से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। सोमवार को प्रस्तावित विधानसभा घेराव के मद्देनजर प्रशासन ने विधानसभा परिसर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। कई स्थानों पर बैरिकेडिंग और सुरक्षा घेरा बनाया गया था, ताकि प्रदर्शनकारियों को प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने से रोका जा सके।

बैरिकेडिंग के बावजूद विधानसभा की ओर बढ़े छात्र

सोमवार को हजारों छात्र और सरकारी नौकरी के अभ्यर्थी विधानसभा की ओर बढ़े। प्रदर्शनकारियों ने रास्ते में लगाए गए बैरिकेड्स को पार करने की कोशिश की। कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारी पुलिस बैरिकेडिंग को पार कर आगे बढ़ने में सफल रहे, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति पैदा हो गई।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वॉटर कैनन और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया। कुछ रिपोर्टों में पुलिस द्वारा आंसू गैस के गोले छोड़े जाने की भी जानकारी सामने आई है। कार्रवाई के दौरान प्रदर्शन स्थल पर अफरा-तफरी की स्थिति देखने को मिली।

क्या हैं छात्रों की प्रमुख मांगें?

प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थी भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठा रहे हैं। छात्रों की प्रमुख मांगों में कथित पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई शामिल है। आंदोलनकारी छात्रों की ओर से कुछ मामलों में CBI जांच की मांग भी उठाई जा रही है।

छात्रों का कहना है कि सरकारी नौकरी की तैयारी में युवा वर्षों तक मेहनत और आर्थिक संसाधन लगाते हैं। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता उनके भविष्य पर सीधा असर डालती है। इसी वजह से अभ्यर्थी भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शी और निष्पक्ष व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।

कई दिनों से जारी है आंदोलन

JPSC-JSSC से जुड़े मुद्दों को लेकर छात्रों का आंदोलन कई दिनों से जारी है। सोमवार का विधानसभा मार्च इस आंदोलन का एक बड़ा चरण माना जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, छात्र लगातार कई दिनों से धरना और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और सरकार के साथ बातचीत के बावजूद कुछ प्रमुख मांगों पर सहमति नहीं बन पाई है।

प्रदर्शन के दौरान कई छात्रों ने हाथों में तिरंगा लेकर मार्च किया और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की। आंदोलन का मुख्य केंद्र रांची बना हुआ है, जहां बड़ी संख्या में अभ्यर्थी जुटे हैं।

प्रशासन ने बढ़ाई सुरक्षा

विधानसभा मार्च को देखते हुए रांची में प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी। विधानसभा के आसपास कई स्तरों पर बैरिकेडिंग की गई और संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई गई। प्रदर्शनकारियों को विधानसभा परिसर से दूर रखने के लिए सुरक्षा बलों ने लगातार निगरानी रखी।

हालांकि, बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के एकत्र होने और बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। पुलिस कार्रवाई के बाद भी छात्रों का प्रदर्शन जारी रहा और वे अपनी मांगों पर कायम रहे।

युवाओं में बढ़ रहा आक्रोश

सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का मुद्दा झारखंड के युवाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण बन गया है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में विश्वास बनाए रखने के लिए पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए।

छात्रों का आंदोलन अब केवल परीक्षा से जुड़े मुद्दों तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि यह भर्ती प्रक्रिया में जवाबदेही, पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य से जुड़े व्यापक सवालों को भी सामने ला रहा है।

फिलहाल रांची में छात्र आंदोलन को लेकर स्थिति पर प्रशासन और अभ्यर्थियों की अगली रणनीति पर नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में सरकार की ओर से छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाया जाता है, यह आंदोलन की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होगा।

नशीली दवाओं की अवैध तस्करी पर DRI की बड़ी कार्रवाई

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नशीली दवाओं और मन:प्रभावी पदार्थों के अवैध निर्माण तथा अंतरराष्ट्रीय तस्करी के खिलाफ लगातार जारी कार्रवाई के तहत राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने एक संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। यह नेटवर्क ट्रामाडोल हाइड्रोक्लोराइड की गोलियों का गुप्त रूप से निर्माण, छिपाने और अफ्रीकी देशों में अवैध निर्यात करने में शामिल था।

एक सप्ताह तक चले खुफिया-आधारित अभियान में 1 लाख ट्रामाडोल हाइड्रोक्लोराइड टैबलेट, 1 लाख टैपेंटाडोल टैबलेट, मन:प्रभावी पदार्थों के गुप्त निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीनरी एवं कच्चा माल जब्त किया गया। कार्रवाई में सिंडिकेट के तीन प्रमुख सदस्यों को गिरफ्तार किया गया।

2 अगस्त 2026 को खुफिया सूचना के आधार पर DRI अधिकारियों ने मुंबई एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स में नाइजीरिया भेजे जा रहे एक निर्यात कंसाइनमेंट को रोका। दस्तावेजों में इस खेप को 300 मिलीग्राम प्रेगाबालिन कैप्सूल बताया गया था। हालांकि, विस्तृत जांच में इसके भीतर छिपाकर रखी गई 1 लाख ट्रामाडोल हाइड्रोक्लोराइड टैबलेट (250 मिलीग्राम), जिनका वजन लगभग 25 किलोग्राम, और 1 लाख टैपेंटाडोल टैबलेट (200 मिलीग्राम), जिनका वजन लगभग 20 किलोग्राम था, बरामद की गईं।

DRI की त्वरित जांच में एक सुव्यवस्थित आपूर्ति श्रृंखला का खुलासा हुआ, जो कई स्तरों पर संचालित हो रही थी। ट्रामाडोल की गोलियों का महाराष्ट्र के अंबरनाथ स्थित एक कारखाने में गुप्त रूप से निर्माण किया जाता था। उनकी पहचान छिपाने के लिए उन्हें सादे कार्टन में पैक किया जाता था। इसके बाद खेप को मुंबई एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स के पास स्थित एक गोदाम में ले जाया जाता था, जहां उन्हें दोबारा सफेद बोरियों में पैक कर नाइजीरिया अवैध रूप से भेजने की तैयारी की जाती थी।

सप्ताहभर में की गई कई समन्वित अनुवर्ती कार्रवाइयों के दौरान DRI अधिकारियों ने निर्यातक, निर्माता, आपूर्तिकर्ता, परिवहनकर्ता और भंडारण गोदाम से जुड़े विभिन्न स्थानों पर तलाशी ली। निर्माण इकाई में की गई तलाशी के दौरान टैबलेट बनाने वाली मशीनरी के साथ-साथ बड़ी मात्रा में कच्चा माल भी जब्त किया गया, जिसका इस्तेमाल मन:प्रभावी पदार्थों के गुप्त निर्माण में किया जाना था।

इस अभियान में तीन प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें IEC धारक/निर्यातक, आपूर्तिकर्ता-सह-समन्वयक और ट्रामाडोल टैबलेट का गुप्त निर्माता शामिल हैं।

ट्रामाडोल और टैपेंटाडोल पर कड़े नियंत्रण

ट्रामाडोल और टैपेंटाडोल सिंथेटिक ओपिओइड दर्द निवारक दवाएं हैं, जिनका उपयोग चिकित्सकीय निगरानी में मध्यम से गंभीर दर्द के उपचार के लिए किया जाता है। इनके दुरुपयोग और निर्भरता के जोखिम को देखते हुए दोनों दवाएं कड़े नियामकीय नियंत्रण के अधीन हैं।

ट्रामाडोल को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985 के तहत मन:प्रभावी पदार्थ के रूप में अधिसूचित किया गया है। वहीं, टैपेंटाडोल वर्तमान में NDPS अधिनियम की अनुसूची में शामिल नहीं है, लेकिन यह ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स अधिनियम और उसके तहत बनाए गए नियमों के अंतर्गत कड़ाई से नियंत्रित है।

इन दवाओं का अवैध निर्माण, डायवर्जन और तस्करी सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है और अक्सर संगठित अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क से जुड़ी होती है।

इस कार्रवाई के माध्यम से DRI ने मन:प्रभावी पदार्थों के अवैध निर्माण, भंडारण, छिपाने और उन्हें विदेश भेजने के प्रयास में शामिल एक संगठित नेटवर्क को प्रभावी रूप से ध्वस्त कर दिया है।

15 अगस्त 2026 को देश मनाएगा 80वां स्वतंत्रता दिवस

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15 अगस्त 2026 को देश अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस समारोह का नेतृत्व करेंगे। 10 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने बताया कि वर्ष 2026 ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने का भी अवसर है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लाखों लोगों को प्रेरित करने वाले राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को पहली बार लाल किले की प्राचीर से गाकर इसकी गौरवशाली विरासत को श्रद्धांजलि दी जाएगी।

प्रधानमंत्री के लाल किले पहुंचने पर ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया जाएगा। इसके बाद प्रधानमंत्री राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे और राष्ट्र को अपना परंपरागत संबोधन देंगे। इस वर्ष के समारोह में युवा शक्ति को भी विशेष रूप से रेखांकित किया जाएगा और 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में देश के युवाओं के योगदान को सम्मानित किया जाएगा।

वंदे मातरम् के 150 वर्ष

लाल किले की फूलों से होने वाली सजावट में ‘वंदे मातरम्’ की थीम दिखाई देगी। ज्ञानपथ पर प्राचीर के सामने NCC और MY Bharat के कुल 2,500 छात्र-छात्रा कैडेट एवं स्वयंसेवक ‘वंदे मातरम्’ की आकृति बनाएंगे। भारतीय वायुसेना का एक Mi-17 हेलीकॉप्टर ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में बैनर लेकर लाल किले पर मौजूद लोगों के ऊपर पुष्पवर्षा करेगा।

सैन्य बैंड प्रस्तुतियां

स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देशवासियों को एकजुट और प्रेरित करने वाले राष्ट्रीय गीत को श्रद्धांजलि देने के लिए 8 अगस्त 2026 से देशभर में विभिन्न बैंड प्रस्तुतियों का आयोजन किया जा रहा है।

सेना, नौसेना, वायुसेना, भारतीय तटरक्षक बल, NCC, CRPF, ITBP, CISF, SSB, BSF, Integrated Defence Staff, RPF और असम राइफल्स के बैंड देशभर के 343 प्रमुख स्थानों पर प्रस्तुतियां देंगे। ये कार्यक्रम 15 अगस्त 2026 तक जारी रहेंगे। नागरिकों में देशभक्ति की भावना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इन कार्यक्रमों में आम जनता के लिए प्रवेश खुला रहेगा।

युवा शक्ति: विकसित भारत @2047 की यात्रा का नेतृत्व

स्वतंत्रता दिवस समारोह 2026 में विभिन्न क्षेत्रों में युवाओं की उपलब्धियों को विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा। वर्ष 2026 के अंतरराष्ट्रीय भौतिकी, रसायन, जीव विज्ञान और गणित ओलंपियाड में पदक जीतने वाले 19 छात्र-छात्राओं की उपलब्धियां विज्ञान के क्षेत्र में युवा शक्ति की सफलता का उदाहरण हैं। इन्हें समारोह में आमंत्रित किया गया है और वे लाल किले की प्राचीर पर बैठेंगे।

पृष्ठभूमि में लगाए गए विजुअल्स के माध्यम से परमाणु और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की प्रगति को प्रदर्शित किया जाएगा। गार्ड ऑफ ऑनर क्षेत्र में फूलों की सजावट के माध्यम से विकसित भारत @2047 की भारत की यात्रा को दर्शाया जाएगा।

विशेष अतिथि

विकसित भारत की यात्रा में योगदान देने वाले विभिन्न क्षेत्रों के लगभग 5,000 उपलब्धि हासिल करने वाले लोगों को समारोह में विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। इनमें शामिल हैं:

  • राष्ट्रीय नवाचार कार्यक्रमों के युवा नवोन्मेषक

  • प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के उत्कृष्ट इंटर्न

  • विभिन्न योजनाओं से सहायता प्राप्त उत्कृष्ट स्टार्टअप

  • PM कौशल विकास योजना के उत्कृष्ट प्रशिक्षित युवा

  • Startup India Seed Fund से समर्थित उत्कृष्ट स्टार्टअप

  • उत्कृष्ट MY Bharat स्वयंसेवक

  • NAMASTE, PM AJAY और SEED योजनाओं के लाभार्थी

  • विभिन्न क्विज एवं प्रतियोगिताओं में चयनित दिल्ली सरकार के स्कूलों के विद्यार्थी

उद्यमियों, नवोन्मेषकों और जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले लोगों के विकसित भारत @2047 में योगदान को सम्मानित करने के लिए निम्नलिखित वर्गों से भी विशेष अतिथियों को आमंत्रित किया गया है:

  • अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के स्वयंसेवक

  • PM Mudra Yojana की महिला उद्यमी

  • PMAY (U) के उत्कृष्ट लाभार्थी

  • विभिन्न क्षेत्रों के नवोन्मेषक एवं वैज्ञानिक

  • दिल्ली में Bharat Taxi के सारथी/कैब चालक/टैक्सी चालक

  • PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana के लाभार्थी

  • PM Vishwakarma योजना के कारीगर

  • प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन (PM-SYM) योजना के उत्कृष्ट लाभार्थी

  • प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PM-MKSSY) के उत्कृष्ट किसान

विशेष अतिथियों में ऐसे मौन योद्धा भी शामिल हैं, जो दूसरों की सफलता में सहायता के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। स्वतंत्रता दिवस पर उनके योगदान को भी सम्मानित किया जाएगा। इनमें शामिल हैं:

  • PM SVANidhi के स्ट्रीट वेंडर

  • स्वच्छ भारत मिशन के शहरी स्वच्छता कर्मचारी

  • उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले दिल्ली मेट्रो कर्मचारी

  • कर्तव्य पथ/सेंट्रल विस्टा के उत्कृष्ट कर्मचारी

  • दिल्ली के सरकारी अस्पतालों के नर्सिंग ऑर्डरली (वार्ड अटेंडेंट) और अन्य कर्मचारी

विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से दिल्ली में रहने वाले 1,500 से अधिक लोगों को भी पारंपरिक परिधानों में समारोह देखने के लिए आमंत्रित किया गया है। वे लाल किले पर भारत की विविधता का जीवंत स्वरूप प्रस्तुत करेंगे।

प्रतियोगिताओं के माध्यम से बच्चों की भागीदारी

स्वतंत्रता दिवस से पहले रक्षा मंत्रालय ने MyGov के सहयोग से विभिन्न क्विज और प्रतियोगिताओं का आयोजन किया। इनमें ‘2047 तक विकसित भारत के निर्माण में AI की भूमिका’ विषय पर निबंध प्रतियोगिता, ‘भारत 1947 बनाम भारत 2047’ विषय पर चित्रकला प्रतियोगिता तथा कई ऑनलाइन क्विज शामिल हैं।

इनमें भारतीय संविधान—मौलिक अधिकार, कर्तव्य, प्रमुख अनुच्छेद एवं संविधान निर्माता; भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में महिलाओं की भूमिका—रानी लक्ष्मीबाई से सरोजिनी नायडू तक; आधुनिक भारत के प्रमुख पड़ाव—तकनीकी प्रगति एवं अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की उपलब्धियां; तथा परमाणु प्रौद्योगिकी में भारत की सफलता जैसे विषय शामिल हैं।

इन प्रतियोगिताओं के लगभग 600 विजेता भी स्वतंत्रता दिवस समारोह का हिस्सा बनेंगे।

अन्य मंत्रालयों/विभागों, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस द्वारा भी नागरिकों को राष्ट्रीय पर्व से जोड़ने के लिए विभिन्न ऑनलाइन और ऑफलाइन क्विज एवं गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है।

जनसुविधाओं की विशेष व्यवस्था

  • क्लॉक रूम: आगामी समारोह के लिए छह स्थानों पर 25 क्लॉक रूम बनाए गए हैं।

  • हेल्पडेस्क पर स्वयंसेवक: 200 स्वयंसेवक—MY Bharat के 100 और NCC के 100—पुलिसकर्मियों के साथ आगंतुकों की सहायता करेंगे।

  • व्हीलचेयर सुविधा: जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए मेट्रो स्टेशनों और पार्किंग क्षेत्रों में NCC कैडेट 20 व्हीलचेयर के साथ मौजूद रहेंगे।

  • मेट्रो सेवा: 15 अगस्त को लोगों की सुविधा के लिए मेट्रो सेवा सुबह 4 बजे से शुरू होगी। सभी आमंत्रितों को मेट्रो सेवा निःशुल्क उपलब्ध होगी। ई-निमंत्रण के साथ मेट्रो QR कोड दिए जाएंगे।

  • पार्किंग सुविधा: वैध पार्किंग पास/लेबल वाले आगंतुकों के लिए परेड ग्राउंड में पार्किंग की सुविधा होगी।

  • पैदल यात्रियों के लिए रैंप: ऊपरी सुभाष मार्ग से निचले सुभाष मार्ग तक सुगम आवागमन के लिए रैंप और सीढ़ियां बनाई गई हैं।

  • Google एवं Mappls Maps: मुख्य समारोह के दिन यातायात प्रतिबंधों की जानकारी Google और Mappls Maps पर उपलब्ध होगी।

  • रेन पोंचो: मौसम की अनिश्चित परिस्थितियों को देखते हुए माधव दास पार्क और 15 अगस्त पार्क में सभी आमंत्रितों को तथा प्राचीर पर मौजूद गणमान्य अतिथियों को रेन पोंचो उपलब्ध कराए जाएंगे।

निमंत्रण पत्र: जनसेवा और कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्धता

प्रधानमंत्री ने ‘सेवा तीर्थ’ को राष्ट्र को समर्पित करते हुए कहा था कि ‘सेवा तीर्थ’ कर्तव्य, करुणा और राष्ट्र प्रथम की भावना का सशक्त प्रतीक है। यह आने वाली पीढ़ियों को निस्वार्थ सेवा और देशवासियों के कल्याण के लिए समर्पण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देगा।

इसी भावना के साथ इस वर्ष के मुख्य समारोह के निमंत्रण पत्र पर ‘सेवा तीर्थ’ को प्रदर्शित किया गया है, ताकि प्रत्येक नागरिक के कल्याण के लिए समर्पण के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा मिले। निमंत्रण पत्र पर बना धर्म चक्र धर्मपूर्ण कर्तव्य, निरंतर सेवा और निस्वार्थ कर्म की शाश्वत गति का प्रतीक है।

स्वच्छता अभियान

कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्धता की भावना के साथ इस वर्ष समारोह के बाद लाल किले पर स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा। इसमें NCC कैडेट और MY Bharat स्वयंसेवक भाग लेंगे।

इस अभियान का उद्देश्य दर्शकों के लौटने के बाद उसी दिन व्यवस्थित तरीके से प्लॉगिंग और कचरे को हटाना है। इसके माध्यम से स्वच्छ भारत अभियान का संदेश दिया जाएगा। अभियान के बाद लाल किला देशभर से आने वाले पर्यटकों के लिए स्वच्छ रूप में उपलब्ध रहेगा।

प्रवेश कक्षों के नाम

VIP संस्कृति को समाप्त करने और जल संरक्षण के महत्व को रेखांकित करने के उद्देश्य से गणतंत्र दिवस 2026 में बैठने के कक्षों के नाम भारत की नदियों पर रखे गए थे। स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए इन बैठने के कक्षों के नाम भारत की प्रमुख झीलों के नाम पर रखे गए हैं।

जल निकासी की व्यवस्था

स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान संभावित बारिश को देखते हुए जलभराव रोकने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। लाल किले और आसपास के क्षेत्रों में जल निकासी एवं सीवेज व्यवस्था की पूरी तरह सफाई की जा रही है, ताकि बारिश की स्थिति में पानी का सुचारु निकास सुनिश्चित किया जा सके।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हाथ में तिरंगा थामकर किया भव्य तिरंगा यात्रा का नेतृत्व

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मुख्यमंत्री ने कहा - 140 करोड़ भारतीयों को एक सूत्र में बांधता है तिरंगा

हजारों कदमों के साथ गूंजा ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ का संकल्प

तिरंगे के रंग में रंगा रायपुर, राष्ट्रध्वज के तले एकजुट हुआ जनसैलाब

छत्तीसगढ़ के वीर सपूतों की शौर्यगाथा का किया स्मरण, शहीद वीर नारायण सिंह और गुण्डाधुर को किया नमन

रायपुर- हाथों में लहराता तिरंगा, भारत माता के जयघोष, देशभक्ति के गीत और राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत हजारों नागरिकों का उत्साह - राजधानी रायपुर आज पूरी तरह तिरंगे के रंग में रंगी नजर आई। बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम से सुभाष स्टेडियम तक निकली भव्य तिरंगा यात्रा में हजारों नागरिक राष्ट्रध्वज के तले एकजुट हुए। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्वयं हाथ में तिरंगा थामकर जनसैलाब के साथ कदम से कदम मिलाया। यात्रा में युवाओं, महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों, पूर्व सैनिकों और विभिन्न सामाजिक वर्गों के लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा था। स्कूली विद्यार्थियों द्वारा हाथों में थामा गया लगभग एक किलोमीटर लंबा तिरंगा पूरे आयोजन का विशेष आकर्षण रहा।

तिरंगा यात्रा के शुभारंभ से लेकर समापन तक राजधानी में राष्ट्रभक्ति का अद्भुत वातावरण दिखाई दिया। हजारों हाथों में एक साथ लहराते राष्ट्रीय ध्वज और भारत माता के जयघोष ने पूरे यात्रा मार्ग को राष्ट्रप्रेम की भावना से भर दिया। मुख्यमंत्री साय भी नागरिकों के बीच तिरंगा लेकर आगे बढ़े। इस दौरान नागरिकों में मुख्यमंत्री के साथ चलने और राष्ट्रध्वज के सम्मान में आयोजित इस यात्रा का हिस्सा बनने को लेकर विशेष उत्साह दिखाई दिया।

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर कहा कि तिरंगा हमारी आन, बान और शान है। यह केवल हमारा राष्ट्रीय ध्वज नहीं, बल्कि भारत की एकता, अखंडता, स्वाभिमान और असंख्य बलिदानों का प्रतीक है। तिरंगे में देश के 140 करोड़ भारतीयों को एक सूत्र में बांधने की अद्भुत शक्ति है। अलग-अलग भाषाओं, संस्कृतियों, परंपराओं और क्षेत्रों की विविधता के बावजूद तिरंगा हम सभी को भारतीय होने के एक साझा गौरव से जोड़ता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब तिरंगा लहराता है तो प्रत्येक भारतीय के मन में स्वाभाविक रूप से राष्ट्र के प्रति गौरव और सम्मान का भाव जागृत होता है। हमारा राष्ट्रीय ध्वज स्वतंत्रता आंदोलन के संघर्ष, स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और एक सशक्त राष्ट्र के रूप में भारत की यात्रा का साक्षी है। तिरंगा हमें अपने अधिकारों के साथ राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का भी स्मरण कराता है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर ‘हर घर तिरंगा’ अभियान आज एक व्यापक जनअभियान का स्वरूप ले चुका है। इस अभियान ने तिरंगे को घर-घर तक पहुंचाने के साथ राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय गौरव की भावना को और मजबूत किया है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने घरों में पूरे सम्मान और गौरव के साथ तिरंगा फहराने तथा तिरंगा यात्राओं से जुड़कर राष्ट्रीय एकता के इस उत्सव को और भव्य बनाने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज हम जिस स्वतंत्र भारत में गर्व और सम्मान के साथ जीवन जी रहे हैं, वह स्वतंत्रता हमें सहज रूप से प्राप्त नहीं हुई है। इसके पीछे लाखों देशवासियों का संघर्ष, त्याग, तपस्या और बलिदान जुड़ा हुआ है। देश के असंख्य वीर सपूतों ने मातृभूमि को पराधीनता की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में देश के हर क्षेत्र और समाज के लोगों ने अपना योगदान दिया। किसी ने अपना जीवन समर्पित किया, किसी ने अपना घर-परिवार छोड़ा और अनेक वीरों ने मातृभूमि के लिए हंसते-हंसते अपने प्राणों की आहुति दे दी। इन बलिदानों के कारण ही आज हम स्वतंत्रता और लोकतंत्र के गौरव का अनुभव कर पा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की नई पीढ़ी स्वतंत्र भारत में जन्मी और आगे बढ़ रही है। इसलिए उसे यह जानना आवश्यक है कि आजादी कितनी अनमोल है और इसके लिए हमारे पूर्वजों ने कितना बड़ा संघर्ष किया। स्वतंत्रता सेनानियों की गौरवगाथाओं से परिचित होकर ही नई पीढ़ी स्वतंत्रता के वास्तविक मूल्य को समझ सकेगी।

उन्होंने कहा कि तिरंगा हमें उन सभी ज्ञात-अज्ञात सेनानियों के बलिदान का स्मरण कराता है, जिन्होंने राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व अर्पित कर दिया। स्वतंत्रता की इस गौरवशाली विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। इससे युवाओं के भीतर राष्ट्र के प्रति कर्तव्य, समर्पण, सेवा और ‘राष्ट्र प्रथम’ का भाव और अधिक मजबूत होगा।

छत्तीसगढ़ के वीर सपूतों ने स्वतंत्रता संग्राम में लिखी शौर्यगाथा

मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम के महानायकों का स्मरण करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती भी वीरों, जननायकों और बलिदानियों की धरती रही है। देश की स्वतंत्रता के लिए हुए संघर्ष में छत्तीसगढ़ के अनेक वीर सपूतों ने अदम्य साहस और स्वाभिमान का परिचय दिया।

मुख्यमंत्री ने शहीद वीर नारायण सिंह का स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने कठिन परिस्थितियों में गरीबों और जरूरतमंदों के हित में आवाज उठाई और अंग्रेजी हुकूमत के अन्याय के विरुद्ध संघर्ष किया। उनका जीवन हमें बताता है कि राष्ट्रप्रेम के साथ जनसेवा और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने का साहस भी सच्ची देशभक्ति का स्वरूप है।

मुख्यमंत्री साय ने बस्तर के महान जननायक गुण्डाधुर की शौर्यगाथा को याद करते हुए कहा कि उन्होंने विदेशी शासन के विरुद्ध जनजातीय समाज को संगठित कर संघर्ष का बिगुल फूंका। बस्तर की धरती ने सदैव अपने स्वाभिमान, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया है। गुण्डाधुर का साहस और नेतृत्व आज भी छत्तीसगढ़वासियों के लिए गौरव और प्रेरणा का विषय है।

उन्होंने कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह, गुण्डाधुर सहित छत्तीसगढ़ के अनेक ज्ञात-अज्ञात सेनानियों का संघर्ष हमारे गौरवशाली इतिहास का अभिन्न हिस्सा है। इन महानायकों की शौर्यगाथा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और उनके आदर्शों से युवाओं को परिचित कराना हमारा दायित्व है।

बदलते बस्तर में शांति और विकास के साथ लहराएगा तिरंगा

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर आज हिंसा और भय के लंबे दौर को पीछे छोड़कर शांति, विश्वास और विकास की नई दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। डबल इंजन सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस और क्षेत्रवासियों के सहयोग से नक्सलवाद के विरुद्ध लड़ाई निर्णायक दौर में पहुंची है।

उन्होंने कहा कि बस्तर के जिन क्षेत्रों में कभी नक्सली हिंसा के कारण भय का वातावरण था, वहां अब विकास की नई रोशनी पहुंच रही है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ लोगों का शासन और लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है। बस्तर के लोगों की आकांक्षाओं और सपनों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलते बस्तर की पहचान अब हिंसा से नहीं, बल्कि शांति, विकास, विश्वास और नई संभावनाओं से बन रही है। इस वर्ष बस्तर में भी स्वतंत्रता दिवस का पावन पर्व पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाएगा तथा तिरंगा यात्राएं निकाली जाएंगी। बस्तर के गांवों और दूरस्थ अंचलों में भी तिरंगा पूरे गौरव के साथ लहराएगा।

एक किलोमीटर लंबे तिरंगे के साथ आगे बढ़ी नई पीढ़ी

तिरंगा यात्रा में स्कूली छात्र-छात्राओं का उत्साह विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। विद्यार्थियों ने लगभग एक किलोमीटर लंबे तिरंगे को अपने हाथों में थामकर अनुशासित पंक्तियों में यात्रा की। सड़क पर दूर तक फैला विशाल तिरंगा राजधानी में राष्ट्रीय एकता और गौरव की अनुपम छटा बिखेरता दिखाई दिया। यात्रा में युवाओं, महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों, पूर्व सैनिकों और समाज के विभिन्न वर्गों के नागरिकों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। 

पुष्पवर्षा से स्वागत, भारत माता के जयघोष से गूंजा रायपुर

तिरंगा यात्रा को लेकर राजधानी के नागरिकों में भी विशेष उत्साह दिखाई दिया। यात्रा के मार्ग में जगह-जगह लोगों ने इसका आत्मीय स्वागत किया। कई स्थानों पर नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर यात्रा में शामिल लोगों का अभिनंदन किया। लोग अपने घरों और प्रतिष्ठानों से तिरंगा लहराकर राष्ट्रध्वज के प्रति सम्मान व्यक्त करते नजर आए।

यात्रा जैसे-जैसे आगे बढ़ी, इसके साथ नागरिकों का उत्साह भी बढ़ता गया। देशभक्ति के गीतों और ‘भारत माता की जय’, ‘वंदे मातरम्’ तथा ‘झंडा ऊंचा रहे हमारा’ के उद्घोष से पूरा वातावरण राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत हो गया। युवाओं के हाथों में लहराते तिरंगे और स्कूली बच्चों के उत्साह ने पूरे आयोजन को यादगार बना दिया।

बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम से सुभाष स्टेडियम तक चारों ओर तिरंगा ही तिरंगा दिखाई दे रहा था। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूरी राजधानी ने तीन रंगों की चादर ओढ़ ली हो। हजारों हाथों में एक साथ लहराते तिरंगे और राष्ट्रभक्ति से भरे जयघोष के बीच पूरा रायपुर एक स्वर में यही संदेश देता नजर आया - भारत एक है, भारत श्रेष्ठ है और राष्ट्र सर्वोपरि है।

तिरंगा स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक : उप मुख्यमंत्री अरुण साव

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि देश स्वतंत्रता दिवस का पावन पर्व मनाने जा रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘हर घर तिरंगा’ तथा ‘तिरंगा यात्रा’ के माध्यम से राष्ट्रभक्ति की भावना को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया है। यह उन स्वतंत्रता सेनानियों और राष्ट्रनायकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है, जिनके त्याग और बलिदान के कारण देश को स्वतंत्रता मिली।

उन्होंने कहा कि रायपुर के कोने-कोने से बड़ी संख्या में युवा तिरंगा यात्रा में शामिल होने पहुंचे हैं। यह उत्साह बताता है कि देश की नई पीढ़ी के हृदय में राष्ट्रप्रेम की भावना कितनी मजबूत है। जिस तिरंगे ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशवासियों को एकजुट किया था, आज उसी तिरंगे के सम्मान में पूरा रायपुर एक साथ खड़ा दिखाई दे रहा है।

तिरंगा यात्रा राष्ट्रभक्ति की सामूहिक अभिव्यक्ति : उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि तिरंगा हमारी राष्ट्रीय अस्मिता, गौरव और एकता का प्रतीक है। तिरंगा यात्रा केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि देश के प्रति सम्मान और राष्ट्रभक्ति की सामूहिक अभिव्यक्ति है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘हर घर तिरंगा’ अभियान ने देशभर में राष्ट्रीय गौरव और राष्ट्रभक्ति की भावना को नई ऊर्जा प्रदान की है। जब प्रत्येक घर पर तिरंगा लहराता है तो वह केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति प्रत्येक नागरिक के सम्मान, गौरव और संकल्प की अभिव्यक्ति बन जाता है।

उप मुख्यमंत्री शर्मा ने प्रदेशवासियों से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने घरों में पूरे सम्मान के साथ तिरंगा फहराने और ‘हर घर तिरंगा’ अभियान से उत्साहपूर्वक जुड़ने का आह्वान किया।

तिरंगा यात्रा में कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े, वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी, सांसद  रूप कुमारी चौधरी, विधायक राजेश मूणत, सुनील सोनी, अनुज शर्मा, इंद्र कुमार साहू, मोतीलाल साहू, पुरंदर मिश्रा, महापौर  मीनल चौबे, निगम-मंडल-आयोगों के अध्यक्षगण सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी, पूर्व सैनिक, विद्यार्थी और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

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