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छत्तीसगढ़ में फिर बदलेगा मौसम, 5 दिन जमकर बरसेंगे बादल; कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

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 CG Weather Today : छत्तीसगढ़ में सितंबर की शुरुआत बारिश के साथ होने के आसार हैं। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में 30 अगस्त से मानसून की गतिविधियां तेज हो सकती हैं। अगले पांच दिनों के दौरान राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। बंगाल की खाड़ी में बन रहे निम्न दबाव क्षेत्र का असर प्रदेश के मौसम पर पड़ने की संभावना जताई गई है।


मौसम विभाग के मुताबिक पिछले 24 घंटे के दौरान प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। अब मानसून के और सक्रिय होने के संकेत मिल रहे हैं। 30 अगस्त से 3 सितंबर तक कई इलाकों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। मानसून सीजन में अब तक प्रदेश में सामान्य से करीब चार फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है।

रायपुर में आज बादल छाए रहने के आसार

राजधानी रायपुर में 30 अगस्त को आसमान सामान्यतः मेघमय रहने की संभावना है। इस दौरान गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। मौसम विभाग ने रायपुर में अधिकतम तापमान 27 डिग्री और न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान जताया है।

कई जिलों में बारिश और आकाशीय बिजली का अलर्ट

मौसम विभाग ने रविवार को प्रदेश के कई जिलों में बारिश की संभावना जताई है। कोंडागांव, कांकेर, धमतरी, बालोद, राजनांदगांव, गरियाबंद, महासमुंद, रायपुर, बलौदाबाजार, बिलासपुर, कोरबा, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, दुर्ग, बेमेतरा, कबीरधाम, मुंगेली और कोरिया में बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया गया है।

इसके अलावा प्रदेश के कई हिस्सों में आकाशीय बिजली गिरने, तेज हवाएं चलने और बारिश की संभावना जताई गई है। इनमें सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, बस्तर, नारायणपुर, कोंडागांव, कांकेर, बालोद, राजनांदगांव, महासमुंद, रायपुर, बलौदाबाजार, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, बिलासपुर, कोरबा, जशपुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, दुर्ग, बेमेतरा, कबीरधाम, मुंगेली, सरगुजा, सूरजपुर, कोरिया और बलरामपुर जिले शामिल हैं।

शंकरगढ़ में सबसे ज्यादा 6 सेमी बारिश

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार 29 अगस्त को शंकरगढ़ में सबसे ज्यादा 6 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा ओडगी में 4 सेंटीमीटर, करतला में 3 सेंटीमीटर बारिश हुई।

वहीं छुरा, लटोरी, सूरजपुर, डोंगरगांव, कुसमी और छाल में 2-2 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई। महासमुंद, पोंडी बचरा, कोरबा, भैसमा, मरीं बंगला देवरी, लाल बहादुर नगर, सोनहत, माना-रायपुर-एपी, राजपुर और बैकुंठपुर में 1-1 सेंटीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई।

बिलासपुर में बाढ़ और बिजली व्यवस्था पर हाईकोर्ट सख्त, CSPDCL और नगर निगम से मांगा नया शपथपत्र

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बिलासपुर- शहर में बारिश के दौरान जलभराव, बाढ़ प्रबंधन और बिजली आपूर्ति की समस्याओं को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) के प्रबंध निदेशक और बिलासपुर नगर निगम के आयुक्त को नया शपथपत्र दाखिल कर अब तक किए गए कामों की वास्तविक प्रगति और मौजूदा स्थिति बताने का निर्देश दिया है।

यह मामला कोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लेकर शुरू की गई सुओ-मोटो जनहित याचिका से जुड़ा है। कोर्ट ने इससे पहले भी शहर में बारिश के कारण होने वाले जलभराव और बिजली आपूर्ति बाधित होने की समस्या पर अधिकारियों से जवाब मांगा था।

कोर्ट ने कहा—सिर्फ योजना नहीं, जमीन पर दिखे काम

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने 25 अगस्त को मामले की सुनवाई के दौरान अधिकारियों द्वारा अब तक किए गए कार्यों और प्रस्तावित योजनाओं का संज्ञान लिया।

कोर्ट ने साफ किया कि केवल योजनाएं बनाना या कार्रवाई का आश्वासन देना पर्याप्त नहीं है। योजनाओं का जमीनी स्तर पर प्रभाव दिखाई देना चाहिए, ताकि बिलासपुर के लोगों को बारिश, जलभराव और बिजली से जुड़ी परेशानियों से वास्तविक राहत मिल सके।

इसी उद्देश्य से कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से प्रगति की निगरानी करने और ताजा शपथपत्र में ठोस प्रगति का विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

बिजली व्यवस्था मजबूत करने के लिए कई बड़े कदम

सुनवाई के दौरान CSPDCL की ओर से बताया गया कि बिलासपुर की बिजली व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई स्तरों पर काम शुरू किया गया है।

इनमें क्षतिग्रस्त सीमेंट के बिजली खंभों को लोहे के खंभों से बदलना, बिजली लाइनों से जुड़े खतरनाक विज्ञापन होर्डिंग्स की पहचान करना और आपात स्थिति में बिजली बहाल करने के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराना शामिल है।

इसके अलावा बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए एक Extra High Voltage (EHV) सब-स्टेशन और दो 33/11 KV सब-स्टेशन स्थापित करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। इनमें लोकांडी क्षेत्र में EHV सब-स्टेशन तथा सलावली नाला और मंगला रिवर व्यू क्षेत्र में 33/11 KV सब-स्टेशन प्रस्तावित हैं।

अधिकारियों का कहना है कि नए सब-स्टेशन बनने से मौजूदा नेटवर्क पर दबाव कम होगा और बिजली आपूर्ति को अधिक स्थिर बनाने में मदद मिलेगी।

जलभराव से निपटने नगर निगम ने बनाया Flood Control Cell

बिलासपुर नगर निगम ने मानसून के दौरान जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति से निपटने के लिए Flood Control Cell का गठन किया है। यह सेल विकास भवन, नेहरू चौक में स्थापित किया गया है और इसमें अधिकारियों की शिफ्टवार ड्यूटी तथा शिकायतों की निगरानी की व्यवस्था की गई है।

नगर निगम के अनुसार, आपात स्थिति के लिए राहत शिविरों की पहचान, आपातकालीन रोशनी और पेयजल की व्यवस्था, नालियों एवं सीवर की सफाई, बचाव दलों की तैनाती तथा JCB, पंप और अन्य मशीनरी की उपलब्धता सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई है।

इसके अलावा भारी बारिश के दौरान अधिकारियों को लगातार फील्ड में निगरानी रखने और जलभराव वाले क्षेत्रों में तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

 सभी आठ जोन में नालों की सफाई

नगर निगम ने बताया कि मानसून से पहले बिलासपुर के सभी आठ नगर निगम जोन में बड़े और छोटे नालों की सफाई एवं डी-सिल्टिंग का काम कराया गया है।

इसके लिए निगम के पास 14 वाहन उपलब्ध हैं, जिनका उपयोग गाद, कचरा और अन्य सामग्री हटाने के साथ-साथ जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने में किया जा रहा है।

नगर निगम ने कोर्ट को यह भी बताया कि बारिश और जलभराव से जुड़ी किसी भी आपात स्थिति में अन्य विभागों के साथ समन्वय कर मानव संसाधन, वाहन और मशीनरी उपलब्ध कराई जाएगी।

बिजली शिकायतों के त्वरित समाधान पर जोर

बिजली व्यवस्था को लेकर कोर्ट की निगरानी का एक अहम हिस्सा शिकायतों के त्वरित निराकरण से जुड़ा है।

CSPDCL ने बताया कि बिजली आपूर्ति बाधित होने की शिकायतों को जल्द दर्ज करने और निर्धारित समय में उनका समाधान करने के लिए कॉल सेंटर व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही आपातकालीन कार्यों के लिए अतिरिक्त मानवबल और ठेकेदारों की सेवाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।

इसका उद्देश्य बारिश या तेज आंधी के दौरान बिजली के खंभे, तार या अन्य उपकरण क्षतिग्रस्त होने पर कम से कम समय में बिजली बहाल करना है।

खराब मौसम और बिजली हादसों पर भी कोर्ट की नजर

बिलासपुर में बिजली और बारिश से जुड़ी समस्याओं पर हाईकोर्ट पहले भी लगातार निगरानी करता रहा है। जुलाई में कोर्ट ने बिजली आपूर्ति व्यवस्था, जलभराव और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर अधिकारियों से विस्तृत जानकारी मांगी थी।

एक पूर्व सुनवाई में कोर्ट के सामने यह भी आया था कि बड़ी संख्या में खराब सर्विस वायर को बदलने की जरूरत थी और अधिकारियों से लंबित मामलों की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया था।

अब कोर्ट को देनी होगी जमीनी प्रगति की रिपोर्ट

हाईकोर्ट का मौजूदा निर्देश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अब अधिकारियों को केवल भविष्य की योजनाएं बताने के बजाय अब तक किए गए काम और उनकी वास्तविक प्रगति का ब्यौरा देना होगा।

कोर्ट ने ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव, CSPDCL के प्रबंध निदेशक और बिलासपुर नगर निगम आयुक्त को अपने-अपने स्तर पर चल रहे कार्यों की निगरानी करने और ताजा शपथपत्र में प्रगति दर्ज करने का निर्देश दिया है।

क्यों अहम है यह मामला?

बिलासपुर में बारिश के दौरान सड़कों पर जलभराव और बिजली आपूर्ति में व्यवधान सीधे तौर पर आम लोगों की सुरक्षा और रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं। ऐसे में हाईकोर्ट की निगरानी से उम्मीद है कि जल निकासी, बिजली नेटवर्क, आपातकालीन प्रतिक्रिया और शिकायत निवारण की व्यवस्थाओं को केवल कागजों तक सीमित न रखकर जमीन पर प्रभावी बनाया जाएगा।

हाईकोर्ट का संदेश स्पष्ट है—बिलासपुर की जनता को राहत देने के लिए योजनाओं और दावों से आगे बढ़कर उनके परिणाम जमीन पर दिखाई देने चाहिए।

छत्तीसगढ़ की खेल प्रतिभाओं को तलाशने, तराशने और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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रायपुर- हॉकी के महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद की जयंती और राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर में आयोजित राज्य खेल अलंकरण समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेश के खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों का सम्मान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। सरकार का उद्देश्य इन प्रतिभाओं को पहचानना, उन्हें बेहतर प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराना तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए मंच उपलब्ध कराना है।

126 खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों को राज्य खेल अलंकरण

पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री साय ने वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के लिए कुल 126 उत्कृष्ट खिलाड़ियों एवं प्रशिक्षकों को राज्य खेल अलंकरण से सम्मानित किया।

इसके अलावा 540 अन्य खिलाड़ियों को भी नगद प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। इस तरह समारोह में कुल 666 खिलाड़ियों एवं प्रशिक्षकों को सम्मानित करते हुए लगभग 1 करोड़ 74 लाख 19 हजार रुपये की पुरस्कार एवं प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई।

मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि मैदान पर खिलाड़ी का परिश्रम, अनुशासन और संघर्ष केवल उसकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं होता, बल्कि उसकी सफलता से पूरे छत्तीसगढ़ और देश का गौरव बढ़ता है।

खिलाड़ियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने पर भी जोर

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता केवल खिलाड़ियों को पुरस्कार देने तक सीमित नहीं है। खिलाड़ियों के भविष्य को सुरक्षित और बेहतर बनाना भी सरकार की जिम्मेदारी है।

इसी दिशा में राज्य सरकार ने पिछले तीन वर्षों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को राज्य खेल अलंकरण से सम्मानित किया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के 156 उत्कृष्ट खिलाड़ियों की सूची हाल ही में जारी की गई है, जिससे उनके लिए शासकीय सेवा में नियुक्ति का रास्ता खुला है।

सरकार के इस कदम से खिलाड़ियों को खेलों में बेहतर प्रदर्शन करने के साथ-साथ भविष्य को लेकर भी सुरक्षा और भरोसा मिलने की उम्मीद है। इससे युवाओं के बीच खेल को एक बेहतर करियर विकल्प के रूप में अपनाने का विश्वास मजबूत होगा।

बस्तर और जनजातीय क्षेत्रों की प्रतिभाओं पर विशेष फोकस

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। जरूरत है कि इन प्रतिभाओं को समय रहते पहचाना जाए और उन्हें उचित प्रशिक्षण, संसाधन और प्रतिस्पर्धा का अवसर दिया जाए।

इसी सोच के साथ राज्य सरकार द्वारा बस्तर ओलंपिक का आयोजन किया जा रहा है। इसके साथ ही सरगुजा ओलंपिक के माध्यम से भी स्थानीय युवाओं को अपनी खेल प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर दिया गया है।

छत्तीसगढ़ में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का आयोजन भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा है। इन आयोजनों के जरिए ग्रामीण, आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों के खिलाड़ियों को बड़े स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच मिल रहा है।

मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन पर 100 करोड़ रुपये

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य सरकार खेलों के विकास के लिए पांच प्रमुख मिशनों पर काम कर रही है। इनमें मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन भी शामिल है, जिसके लिए 100 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है।

इस मिशन का उद्देश्य केवल खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन करना नहीं है, बल्कि खिलाड़ियों के लिए एक ऐसी पूरी व्यवस्था तैयार करना है जिसमें—

  • प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान हो,

  • उन्हें बेहतर और आधुनिक प्रशिक्षण मिले,

  • आवश्यक खेल संसाधन उपलब्ध हों,

  • खेल अधोसंरचना मजबूत हो,

  • अनुभवी प्रशिक्षकों का सहयोग मिले,

  • और खिलाड़ियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंचने का अवसर मिले।

मुख्यमंत्री के अनुसार सरकार की कोशिश है कि प्रतिभाशाली खिलाड़ी केवल संसाधनों या अवसरों की कमी के कारण पीछे न रह जाएं।

मजबूत हो रही खेल अधोसंरचना

राज्य सरकार खेलों के लिए बेहतर अधोसंरचना विकसित करने पर भी जोर दे रही है। खासतौर पर जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों में मौजूद युवाओं को आधुनिक सुविधाएं और प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।

सरकार का मानना है कि यदि स्थानीय स्तर पर ही खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं और प्रशिक्षण मिल जाएं तो छत्तीसगढ़ से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी बड़ी संख्या में तैयार किए जा सकते हैं।

छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी बड़े मंचों पर बना रहे पहचान

छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी लगातार राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। समारोह में उपमुख्यमंत्री एवं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने बिलासपुर खेल अकादमी की गीता यादव और मधु सिदार के एशिया कप के लिए भारतीय टीम में चयन का उल्लेख करते हुए इसे प्रदेश के लिए गौरव का विषय बताया।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है और सरकार खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

सरकार का लक्ष्य—हर प्रतिभा को मिले अवसर

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ में खेलों को केवल मनोरंजन या प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे युवाओं के करियर और भविष्य निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम बनाया जाएगा।

सरकार की कोशिश है कि प्रदेश के गांवों, आदिवासी अंचलों और दूरदराज के क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें उचित प्रशिक्षण और सुविधाएं दी जाएं। इसके बाद उन्हें जिला, संभाग और राज्य स्तर से आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया जाए।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ सरकार की खेल नीति का फोकस अब केवल खिलाड़ियों को सम्मानित करने पर नहीं, बल्कि प्रतिभा की खोज से लेकर प्रशिक्षण, संसाधन, रोजगार और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच की पूरी व्यवस्था तैयार करने पर दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन, बस्तर ओलंपिक, सरगुजा ओलंपिक और खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स जैसी पहलों के जरिए सरकार प्रदेश के युवाओं में खेल संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

मुख्यमंत्री का संदेश साफ है—छत्तीसगढ़ की कोई भी प्रतिभा केवल अवसर और संसाधनों की कमी के कारण पीछे नहीं रहेगी।

पीएम मोदी का उज्बेकिस्तान दौरा, भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों को नई मजबूती देने पर जोर

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान के चार दिवसीय दौरे पर हैं। शनिवार को ताशकंद पहुंचने पर उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। पीएम मोदी का उज्बेकिस्तान दौरा 29 और 30 अगस्त को है, जिसके बाद वे किर्गिस्तान जाएंगे और वहां शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।

ताशकंद में पीएम मोदी और राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के बीच व्यापार, ऊर्जा, सुरक्षा, डिजिटल कनेक्टिविटी और रणनीतिक सहयोग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हो रही है। भारत का लक्ष्य मध्य एशिया के साथ अपने रणनीतिक और आर्थिक रिश्तों को और मजबूत करना है।

दिल्ली में फायर सेफ्टी नियम हुए सख्त

इसी बीच राजधानी दिल्ली में फायर सेफ्टी को लेकर नए नियम लागू किए गए हैं। दिल्ली सरकार ने Fire Service Rules में बदलाव करते हुए इमारतों की सुरक्षा के लिए कई नए प्रावधान जोड़े हैं। इनमें फायर इंजन के लिए कम से कम 6 मीटर का रास्ता, फायर लिफ्ट, सुरक्षित निकासी व्यवस्था, फायर और स्मोक बैरियर तथा अन्य सुरक्षा उपायों पर जोर दिया गया है।

सरकार का कहना है कि नए नियमों का उद्देश्य इमारतों में आग लगने की स्थिति में लोगों की सुरक्षा बढ़ाना और फायर सर्विस की पहुंच को बेहतर बनाना है।

आगे की नजर SCO समिट पर

पीएम मोदी के अगले चरण के दौरे में किर्गिस्तान में SCO शिखर सम्मेलन शामिल है। सम्मेलन में आतंकवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा, कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। पीएम मोदी ने SCO के मंच से आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ सहयोग बढ़ाने की बात कही है।

प्रधानमंत्री मोदी का मध्य एशिया दौरा भारत की रणनीतिक कूटनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है, वहीं दिल्ली में नए फायर सेफ्टी नियम राजधानी की इमारतों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम हैं।

Janmashtami 2026: कब है जन्माष्टमी? जानें मथुरा-वृंदावन में कब मनेगा जन्मोत्सव, पूजा का शुभ मुहूर्त और व्रत पारण का समय

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 Janmashtami 2026:  भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व जन्माष्टमी इस साल 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व पर भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा की जाती है। रात में निशीथ काल के दौरान भगवान के जन्म का उत्सव मनाया जाता है।


जन्माष्टमी को लेकर देशभर के मंदिरों में विशेष तैयारियां की जाती हैं। मंदिरों को सजाया जाता है और भगवान श्रीकृष्ण की आकर्षक झांकियां निकाली जाती हैं। इसके अलावा भजन-कीर्तन, अभिषेक और विशेष आरती का आयोजन होता है। हालांकि, मथुरा और वृंदावन में जन्माष्टमी का उत्सव सबसे खास माना जाता है, क्योंकि मथुरा को भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि और वृंदावन को उनकी बाल लीलाओं की भूमि माना जाता है।

जन्माष्टमी 2026 कब है?

इस साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 4 सितंबर की रात 2:25 बजे से शुरू होकर 5 सितंबर की रात 12:13 बजे तक रहेगी।

वहीं भगवान श्रीकृष्ण के जन्म से जुड़े रोहिणी नक्षत्र का आरंभ 4 सितंबर की रात 12:29 बजे होगा और यह 5 सितंबर की रात 11:04 बजे तक रहेगा। ऐसे में इस बार जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग विशेष महत्व रखता है।

जन्माष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त

जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के लिए निशीथ काल को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। पंचांग के अनुसार 4 सितंबर की रात 11:56 बजे से 5 सितंबर की रात 12:41 बजे तक निशीथ पूजा का समय रहेगा।

इस दौरान करीब 45 मिनट का विशेष पूजा मुहूर्त रहेगा। इसी समय भक्त भगवान श्रीकृष्ण का पंचामृत से अभिषेक कर जन्मोत्सव मनाएंगे। इसके बाद भगवान को नए वस्त्र पहनाकर भोग लगाया जाएगा और आरती की जाएगी।

मथुरा में कब होगा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव?

भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में 4 सितंबर की रात जन्माष्टमी का मुख्य उत्सव मनाया जाएगा। जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिरों में विशेष सजावट और झांकियां तैयार की जाती हैं।

मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक और आरती होती है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिरों में पहुंचकर भगवान के जन्मोत्सव के साक्षी बनते हैं।

वृंदावन में कब मनेगी जन्माष्टमी?

मथुरा के साथ वृंदावन में भी 4 सितंबर को जन्माष्टमी का मुख्य पर्व मनाया जाएगा। यहां के प्रमुख मंदिरों में रात के समय विशेष पूजा, अभिषेक और जन्मोत्सव का आयोजन होगा।

वहीं 5 सितंबर को नंदोत्सव मनाया जाएगा। ब्रज क्षेत्र में नंदोत्सव का विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि भगवान कृष्ण के जन्म की खुशी में नंद बाबा के घर उत्सव मनाया गया था।

वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में भी जन्माष्टमी के अवसर पर विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं। जन्माष्टमी की रात महाभिषेक के बाद विशेष दर्शन और मंगला आरती का आयोजन किया जाता है। स्थानीय कार्यक्रम के अनुसार विशेष दर्शन रात करीब 2 बजे से शुरू होकर सुबह तक चल सकते हैं।

जन्माष्टमी का व्रत कब खोलें?

जन्माष्टमी के व्रत को लेकर अलग-अलग संप्रदायों और क्षेत्रों में अलग परंपराएं हैं। धर्मशास्त्रीय गणना के अनुसार वृंदावन के पंचांग में 5 सितंबर को सूर्योदय के बाद, अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र की समाप्ति के बाद व्रत पारण का समय बताया गया है।

हालांकि, कई स्थानों पर भक्त निशीथ काल में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव और पूजा के बाद भी व्रत खोलते हैं। इसलिए व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को अपने स्थानीय पंचांग और धार्मिक परंपरा के अनुसार पारण करना चाहिए।

जन्माष्टमी पर क्या करें?

जन्माष्टमी के दिन भक्त सुबह स्नान करके भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा का संकल्प लेते हैं। कई श्रद्धालु पूरे दिन निर्जला या फलाहार व्रत रखते हैं और रात में निशीथ काल में भगवान की पूजा करते हैं।

मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण का पंचामृत से अभिषेक किया जाता है। इसके बाद उन्हें नए वस्त्र और आभूषण पहनाकर पालने में विराजमान किया जाता है। भगवान को माखन-मिश्री, फल और अन्य सात्विक भोग अर्पित किए जाते हैं। जन्म के समय शंख बजाकर आरती की जाती है।

जन्माष्टमी पर क्यों खास है रोहिणी नक्षत्र?

धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के संयोग में हुआ था। यही वजह है कि जन्माष्टमी की गणना में रोहिणी नक्षत्र को भी विशेष महत्व दिया जाता है।

इस वर्ष रोहिणी नक्षत्र 4 सितंबर की रात 12:29 बजे से 5 सितंबर की रात 11:04 बजे तक रहने की जानकारी पंचांग में दी गई है। ऐसे में जन्माष्टमी के दिन रोहिणी नक्षत्र का संयोग इस पर्व को धार्मिक दृष्टि से और भी महत्वपूर्ण बनाता है।

जन्माष्टमी 2026 की प्रमुख तारीखें और समय

जन्माष्टमी: 4 सितंबर 2026, शुक्रवार
अष्टमी तिथि: 4 सितंबर रात 2:25 बजे से 5 सितंबर रात 12:13 बजे तक
रोहिणी नक्षत्र: 4 सितंबर रात 12:29 बजे से 5 सितंबर रात 11:04 बजे तक
निशीथ पूजा: 4 सितंबर रात 11:56 बजे से 5 सितंबर रात 12:41 बजे तक
मथुरा में जन्मोत्सव: 4 सितंबर की मध्यरात्रि
नंदोत्सव: 5 सितंबर 2026
व्रत पारण: स्थानीय पंचांग और परंपरा के अनुसार, सामान्यतः 5 सितंबर को सूर्योदय के बाद

जहां कभी बंदूक थी, वहां बंधा रिश्तों का धागा… ,बस्तर में राखी ने बदली 'दुश्मनी' की परिभाषा

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 रायपुर :  कलाई आगे बढ़ी तो कुछ पल के लिए जैसे समय ठहर गया। सामने सुरक्षा बल का जवान था और हाथ में राखी लिए खड़ी थी वह महिला, जिसकी जिंदगी के करीब 25 साल जंगल, नक्सली संगठन और संघर्ष के बीच बीते थे। कभी जिस वर्दी को देखकर मन में टकराव और अविश्वास पैदा होता था, उसी वर्दी की कलाई पर इस बार उसने राखी बांधी। जवान ने भी बहन का रिश्ता स्वीकार किया, शगुन दिया और मिठाई खिलाई।


भानुप्रतापपुर के सुरक्षा बल कैंप में रक्षाबंधन का यह दृश्य बस्तर की बदलती तस्वीर की कहानी कह रहा था। यह सिर्फ राखी बांधने का कार्यक्रम नहीं था। यह उस दूरी को पाटने की कोशिश थी, जो वर्षों के हिंसक संघर्ष ने समाज और सुरक्षा बलों के बीच पैदा कर दी थी।

हाथ में हथियार नहीं, राखी थी

करीब 25 वर्षों तक नक्सली संगठन का हिस्सा रहीं मीना और अन्य पूर्व नक्सली महिलाओं के लिए यह पल सामान्य नहीं था। जंगल की जिंदगी में हथियार और संघर्ष उनका अतीत रहे हैं। लेकिन अब वही हाथ एक नए रिश्ते की शुरुआत कर रहे थे।

सुरक्षा बल के कैंप में पहुंचीं पूर्व नक्सली महिलाओं ने जवानों की कलाई पर राखी बांधी। जवानों ने भी उन्हें बहन के रूप में स्वीकार किया। शगुन दिया, मिठाई खिलाई और इस रिश्ते को सम्मान दिया।

यह तस्वीर इसलिए भी खास थी क्योंकि बस्तर में कई सालों तक सुरक्षा बल और नक्सली आमने-सामने रहे हैं। गोलियों और बारूदी सुरंगों के बीच बने इस तनाव के बीच एक राखी ने संवाद और विश्वास की एक नई जगह बनाई।

महिला पुलिसकर्मियों ने भी बढ़ाया हाथ

इस आयोजन में महिला पुलिसकर्मियों ने भी हिस्सा लिया। कभी नक्सल हिंसा के खिलाफ अभियानों और सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा रहे सुरक्षा बल के जवान और पूर्व नक्सली महिलाएं इस दिन किसी संघर्ष के दो पक्ष नहीं, बल्कि एक-दूसरे के भाई-बहन नजर आए।

रक्षाबंधन के इस छोटे से आयोजन में संदेश बड़ा था—अगर हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटे लोगों को समाज में स्वीकार्यता मिले और सुरक्षा बलों के साथ विश्वास का रिश्ता बने, तो नक्सल प्रभावित इलाकों में स्थायी शांति की राह और मजबूत हो सकती है।

एसपी बोले—रिश्ते सामान्य होंगे

कांकेर एसपी श्री निखिल राखेचा ने इस पहल को नक्सल समस्या के समाधान की दिशा में एक अनूठा प्रयास बताया।

उन्होंने कहा, यह एक अनूठा प्रयास है कि नक्सलवाद की जो समस्या थी, उसके समाधान की दिशा में हम जो कदम बढ़ा रहे हैं, उसका यह प्रतीक स्वरूप रक्षाबंधन है। इस रिश्ते के धागे से रिश्ते सामान्य होंगे।

एसपी ने कहा कि ऐसे प्रयास केवल त्योहार मनाने तक सीमित नहीं हैं। इनका उद्देश्य समाज में विश्वास बहाली को मजबूत करना और मुख्यधारा से जुड़ने की प्रक्रिया को गति देना भी है।

मीना के लिए राखी का मतलब सिर्फ त्योहार नहीं

करीब ढाई दशक तक नक्सली संगठन का हिस्सा रहना किसी भी व्यक्ति की जिंदगी पर गहरी छाप छोड़ता है। जंगल की जिंदगी, संगठन की सोच और संघर्ष के बीच बीते वर्षों के बाद मुख्यधारा में लौटना आसान नहीं होता। ऐसे में राखी का यह धागा मीना और उनके साथ आई महिलाओं के लिए एक नए सामाजिक रिश्ते की शुरुआत जैसा था।

जिस समाज और सुरक्षा व्यवस्था से कभी दूरी रही, उसी समाज के प्रतिनिधि जवान की कलाई पर राखी बांधना यह संकेत भी है कि अतीत की कड़वाहट को पीछे छोड़कर नई जिंदगी की ओर बढ़ने की कोशिश जारी है।

बस्तर में बदल रही है कहानी

बस्तर की कहानी लंबे समय तक नक्सली हिंसा, मुठभेड़, शहीद जवानों और भय के इर्द-गिर्द लिखी जाती रही। गांवों में बंदूक की मौजूदगी ने सामान्य जीवन को प्रभावित किया। विकास की राह भी हिंसा के साए में आगे बढ़ती रही। लेकिन अब इसी बस्तर से कहानी के कुछ नए अध्याय सामने आ रहे हैं।

हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटते लोग, गांवों में पहुंचती विकास की योजनाएं, बनती सड़कें, खुलते स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ सामाजिक विश्वास बहाली के प्रयास भी बदलाव का हिस्सा बन रहे हैं। भानुप्रतापपुर का यह रक्षाबंधन उसी बदलाव की मानवीय तस्वीर है।

एक राखी, कई संदेश

राखी का धागा छोटा है, लेकिन इस आयोजन का संदेश बड़ा है। यह संदेश उन लोगों के लिए है जो कभी हिंसा के रास्ते पर चले गए थे कि वापसी का रास्ता खुला है। यह समाज के लिए संदेश है कि मुख्यधारा में लौटने वालों को स्वीकार करना जरूरी है। और यह सुरक्षा बलों के लिए भी एक मानवीय पहल है कि कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाने के साथ विश्वास का रिश्ता भी बनाया जा सकता है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्र में रक्षाबंधन का यह आयोजन इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि यहां राखी सिर्फ कलाई पर नहीं बंधी—यह भरोसे पर बंधी।

जहां कभी डर था, वहां अब भरोसे की कोशिश

छत्तीसगढ़ सरकार के नक्सल मुक्त बस्तर के संकल्प और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शांति, विकास और विश्वास के साथ आगे बढ़ते बस्तर की यह तस्वीर बताती है कि किसी भी संघर्ष का अंत केवल बंदूक से नहीं होता। स्थायी शांति के लिए लोगों के बीच भरोसा लौटना भी उतना ही जरूरी है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की दृढ़ इच्छाशक्ति और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के संकल्प के साथ नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे प्रयासों के बीच यह पहल बस्तर के बदलते सामाजिक माहौल की एक भावुक तस्वीर पेश करती है।

कैंप में राखी बंधने के बाद शायद सबसे बड़ा बदलाव यही था कि कुछ देर के लिए वहां किसी ने यह नहीं देखा कि सामने वाला कल कौन था।

देखा तो सिर्फ इतना गया कि आज वह सामने खड़ा व्यक्ति कौन है—एक भाई, एक बहन और एक ऐसे समाज का हिस्सा, जो अपने अतीत से आगे बढ़कर शांति की ओर जाना चाहता है।

बस्तर में कभी बंदूक रिश्तों के बीच खड़ी थी। इस रक्षाबंधन में उसी जगह एक धागा खड़ा था—रिश्तों का, भरोसे का और नए बस्तर का।

UCC विरोध पर कांग्रेस को संतोष पांडेय की दो टूक, ‘भ्रम फैलाने की कोशिश नहीं होगी कामयाब’

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस की ओर से UCC के विरोध में प्रदर्शन की चेतावनी के बाद भाजपा सांसद संतोष पांडेय ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस लोगों के बीच भ्रम फैलाने और उन्हें भड़काने की कोशिश कर रही है। सांसद ने कहा कि कांग्रेस किसी भी मुद्दे को लेकर सामने आए, जनता उसका जवाब देगी।


मीडिया से चर्चा के दौरान संतोष पांडेय ने कहा कि भाजपा प्रदेश में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कांग्रेस पर प्रदेश में दिल्ली जैसी स्थिति पैदा करने और समय-समय पर अराजकता फैलाने का प्रयास करने का आरोप लगाया।

UCC पर बोले- सभी वर्गों के हित में काम कर रही सरकार

UCC को लेकर सांसद ने कहा कि भाजपा सरकार सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखकर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि देश में आदिवासी समाज को भी महत्वपूर्ण प्रतिनिधित्व मिला है। संतोष पांडेय ने कहा, “हमारे यहां आदिवासी मुख्यमंत्री और महिला आदिवासी राष्ट्रपति हैं।”

'सेवा संकल्प अभियान' पर भी कांग्रेस को घेरा

'सेवा संकल्प अभियान' को लेकर कांग्रेस की ओर से की गई टिप्पणी पर भी सांसद ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकारों की उपलब्धियों पर सवाल उठाने से पहले कांग्रेस को यह देखना चाहिए कि कई चुनौतियों के बावजूद महाराष्ट्र और बिहार में भाजपा की सरकारें क्यों बनीं।

उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों को जनता का समर्थन मिल रहा है। सांसद ने कहा कि कांग्रेस किसी भी मुद्दे को लेकर सामने आए, वह अपने राजनीतिक उद्देश्य में सफल नहीं होगी।

महादेव सट्टा ऐप पर बोले- लगातार हो रही कार्रवाई

महादेव सट्टा ऐप मामले पर संतोष पांडेय ने कहा कि इस मामले में लगातार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने सबसे पहले लोकसभा में महादेव सट्टा ऐप का मुद्दा उठाया था।

उन्होंने पिछली कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उसके कार्यकाल में युवाओं को सट्टे और शराब के नशे की ओर धकेला गया। वहीं, भाजपा सरकार युवाओं को रोजगार से जोड़ने और उन्हें बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए काम कर रही है।

सांसद ने कहा कि सरकार का उद्देश्य युवाओं को रोजगार और बेहतर अवसर देना है। उन्होंने कांग्रेस के विरोध प्रदर्शनों को लेकर कहा कि जनता अब उसकी राजनीति और मुद्दों को समझ चुकी है और आने वाले समय में जनता ही इसका जवाब देगी।

IFS अधिकारी विवेक आचार्य को मिली नई जिम्मेदारी, वन विकास निगम के कार्यकारी संचालक बनाए गए

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रायपुर। राज्य शासन ने 2006 बैच के भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी विवेक आचार्य की नई पदस्थापना की है। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के प्रबंध संचालक पद से हटाए जाने के बाद अब उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम लिमिटेड के कार्यकारी संचालक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनकी यह पदस्थापना अस्थायी रूप से की गई है।


इस संबंध में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने 29 अगस्त 2026 को नवा रायपुर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) से आदेश जारी किया है। यह आदेश सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा 18 अगस्त 2026 को जारी उस आदेश के बाद आया है, जिसमें विवेक आचार्य की सेवाएं वन विभाग को वापस की गई थीं।

शासन के आदेश के मुताबिक, GAD के निर्देशों के परिपालन में वन विभाग ने विवेक आचार्य की नई पदस्थापना की है। अब वे छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम लिमिटेड में कार्यकारी संचालक के रूप में कार्य करेंगे।

विवेक आचार्य 2006 बैच के IFS अधिकारी हैं। इससे पहले वे छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के प्रबंध संचालक के पद पर कार्यरत थे। नई पदस्थापना के बाद अब उन्हें वन विकास निगम की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

CG NEWS : दिनदहाड़े ज्वेलरी शॉप में चोरी, ग्राहक बनकर आए तीन लोगों ने 2.22 लाख की चेन उड़ाई

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 धमतरी। शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र में दिनदहाड़े ज्वेलरी शॉप से सोने की चेन चोरी होने का मामला सामने आया है। ग्राहक बनकर दुकान में पहुंचे दो महिलाओं समेत तीन लोगों ने ज्वेलर को आभूषण दिखाने में उलझाया और मौका मिलते ही करीब 2 लाख 22 हजार रुपए कीमत की 17 ग्राम सोने की चेन पार कर दी।


 चोरी की पूरी वारदात दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर आरोपियों की तलाश तेज कर दी है।

आभूषण दिखाने के बहाने दुकानदार को उलझाया

जानकारी के मुताबिक घटना मकई चौक स्थित शनि मंदिर के पास संचालित आमंत्रण ज्वेलर्स की है। दो महिलाओं समेत तीन लोग ग्राहक बनकर ज्वेलरी शॉप में पहुंचे। उन्होंने दुकानदार से सोने-चांदी के अलग-अलग आभूषण दिखाने को कहा। ज्वेलर उन्हें आभूषण दिखाने में व्यस्त हो गया। इसी दौरान आरोपियों ने कथित तौर पर 17 ग्राम वजन की सोने की चेन पर हाथ साफ कर दिया।

कुछ देर बाद तीनों दुकान से बाहर निकल गए। उनके जाने के बाद जब दुकानदार ने आभूषणों की जांच की तो सोने की चेन गायब मिली। इसके बाद उसने तत्काल घटना की सूचना पुलिस को दी।

CCTV में कैद हुई चोरी की वारदात

चोरी की सूचना मिलने के बाद दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। फुटेज में तीनों संदिग्ध दुकान के अंदर आभूषण देखते नजर आ रहे हैं। इसी दौरान मौका पाकर चेन चोरी करने और दुकान से बाहर निकलने की गतिविधियां भी कैमरे में रिकॉर्ड हुई हैं। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज को जांच में शामिल कर लिया है।

आरोपियों की तलाश में जुटी पुलिस

ज्वेलर की शिकायत पर कोतवाली पुलिस ने चोरी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर संदिग्धों की पहचान करने के साथ उनके आने-जाने के रास्तों और अन्य संभावित सुरागों की जांच कर रही है। पुलिस को उम्मीद है कि सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों की मदद से आरोपियों तक जल्द पहुंचा जा सकेगा।

जिला अस्पताल की अटल आरोग्य लैब में ड्यूटी के दौरान रील, वीडियो वायरल होने पर जांच के निर्देश

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 दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिला अस्पताल की अटल आरोग्य लैब में ड्यूटी के दौरान महिला टेक्नीशियंस द्वारा रील बनाए जाने का मामला सामने आया है। रील का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने मामले का संज्ञान लिया है। वीडियो में लैब के अंदर ब्लड सैंपल और जांच से जुड़ी गतिविधियों के बीच रील बनाए जाने का दृश्य दिखाई दे रहा है।


मामले को गंभीरता से लेते हुए सिविल सर्जन डॉ. आशीषन मिंज ने जांच के निर्देश दिए हैं। वहीं, अटल आरोग्य लैब के प्रभारी जेपी मेश्राम को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।

वीडियो कब और किन परिस्थितियों में बना, होगी जांच

स्वास्थ्य विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि वीडियो कब और किन परिस्थितियों में बनाया गया। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि रील बनाने के दौरान लैब के नियमित कामकाज पर कोई असर पड़ा या नहीं।

अस्पताल प्रबंधन इस बात की भी पड़ताल कर रहा है कि वीडियो में मरीजों के ब्लड सैंपल अथवा उनकी जांच से संबंधित कोई संवेदनशील जानकारी दिखाई दे रही है या नहीं।

जिला अस्पताल की जांच व्यवस्था का अहम हिस्सा है लैब

अटल आरोग्य लैब जिला अस्पताल की जांच व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां इलाज के लिए आने वाले मरीजों के विभिन्न सैंपल लेकर जांच की जाती है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार लैब में करीब 134 प्रकार की जांच नि:शुल्क की जाती हैं। लैब का संचालन HLL कंपनी के माध्यम से किया जा रहा है।

वायरल वीडियो में लैब के अंदर जांच प्रक्रिया और सैंपल से संबंधित गतिविधियां भी दिखाई दे रही हैं। इसी वजह से विभाग ने मामले की विस्तृत पड़ताल शुरू की है।

एचआईवी रिपोर्ट को लेकर पहले भी उठे थे सवाल

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले इसी लैब की जांच रिपोर्ट को लेकर विवाद सामने आया था। जिला अस्पताल में भर्ती 24 वर्षीय युवक की एचआईवी जांच रिपोर्ट पहली बार पॉजिटिव आई थी। युवक ने रिपोर्ट पर सवाल उठाए, जिसके बाद दोबारा जांच कराई गई। दूसरी जांच में रिपोर्ट निगेटिव आई।

रिपोर्ट में अंतर सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने लैब से संबंधित जानकारी मांगी थी। साथ ही जांच में इस्तेमाल होने वाली मशीनों की जांच और उनका सही तरीके से कैलिब्रेशन कराने के निर्देश दिए गए थे।

अब ड्यूटी के दौरान रील बनाए जाने का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग दोनों मामलों को ध्यान में रखते हुए लैब की कार्यप्रणाली और व्यवस्थाओं की भी पड़ताल कर रहा है। फिलहाल नोटिस का जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

रातभर हंगामे के बाद बिलासपुर में धारा 144, भारी पुलिस बल तैनात

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 बिलासपुर। सोशल मीडिया पर किए गए कथित विवादित कमेंट को लेकर शुक्रवार रात बिलासपुर में दो पक्ष आमने-सामने आ गए। देखते ही देखते विवाद ने हिंसक रूप ले लिया और इलाके में तनाव की स्थिति बन गई। घटना के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र में धारा 144 लागू कर दी है। एहतियात के तौर पर क्षेत्र में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।


बताया जा रहा है कि विवाद की शुरुआत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट पर किए गए कथित विवादित कमेंट को लेकर हुई। इसके बाद दोनों पक्षों के लोग आमने-सामने आ गए और नारेबाजी शुरू हो गई। स्थिति बिगड़ने की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को नियंत्रित करने का प्रयास किया।

कलेक्टर-एसएसपी समेत वरिष्ठ अधिकारी मौके पर

घटना की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर संजय अग्रवाल और एसएसपी रजनेश सिंह समेत पुलिस एवं प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने क्षेत्र का जायजा लिया और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक निर्देश दिए।


विधायक सुशांत शुक्ला सहित स्थानीय नागरिक भी थाने पहुंचे। पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने दोनों पक्षों के लोगों से चर्चा की और युवकों को समझाइश देकर माहौल शांत कराने का प्रयास किया।

हथियार लेकर चलने और भीड़ जुटाने पर रोक

जिला प्रशासन के आदेश के अनुसार सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र में सार्वजनिक स्थानों पर तलवार, चाकू, लाठी, भाला सहित अन्य हथियार लेकर चलने पर प्रतिबंध लगाया गया है।

हालांकि शासकीय ड्यूटी में तैनात कर्मचारियों, लाठी के सहारे चलने वाले वृद्ध एवं दिव्यांग व्यक्तियों और धार्मिक परंपरा के तहत कृपाण रखने वाले लोगों को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है।

इसके अलावा बिना अनुमति सभा, रैली, जुलूस, धरना, प्रदर्शन और हड़ताल आयोजित करने पर भी रोक रहेगी। क्षेत्र में एक स्थान पर चार या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध लगाया गया है। परिवार के सदस्यों के सामान्य आवागमन को इससे बाहर रखा गया है। किसी भी आयोजन के लिए संबंधित एसडीएम से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

तोड़फोड़ और सड़क जाम पर भी प्रतिबंध

प्रशासन ने सरकारी या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, तोड़फोड़ करने, सड़क जाम करने और लोगों में भय या दहशत पैदा करने वाली गतिविधियों पर भी रोक लगाई है। आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ BNS की धारा 223 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल पुलिस और प्रशासन की निगरानी में क्षेत्र की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। एहतियात के तौर पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान नहीं देने की अपील की है।

न्यायधानी में आधी रात हंगामा: दो पक्ष भिड़े, जमकर चले ईंट-पत्थर; पुलिस पर भी हमला

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 बिलासपुर। न्यायधानी बिलासपुर में सोशल मीडिया पर कमेंट को लेकर दो पक्षों के बीच शुरू हुआ विवाद देर रात हिंसक झड़प में बदल गया। मारपीट और गाली-गलौज के बाद दोनों पक्षों की ओर से जमकर ईंट-पत्थर चले। स्थिति को नियंत्रित करने पहुंची पुलिस पर भी पथराव किया गया। घटना में तारबाहर थाना प्रभारी (TI) रविशंकर तिवारी समेत कई पुलिसकर्मियों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। वहीं, कुछ युवकों को भी चोटें आई हैं। मामला सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के खपरगंज इलाके का है।


विवाद के बाद दोनों पक्षों में पथराव

बताया जा रहा है कि सोशल मीडिया पर किए गए कमेंट को लेकर दो पक्षों के युवकों के बीच विवाद हुआ था। इसी दौरान एक पक्ष के युवक द्वारा दूसरे पक्ष के युवक के साथ मारपीट किए जाने के बाद मामला और बिगड़ गया। देखते ही देखते दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और एक-दूसरे पर पथराव शुरू कर दिया। इस दौरान इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

पुलिस पर भी हुआ पथराव

घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। इसी दौरान भीड़ की ओर से पुलिस पर भी पथराव किया गया। पथराव में तारबाहर TI रविशंकर तिवारी के सिर में चोट आई है। इसके अलावा कुछ अन्य पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी सूचना है। वहीं, तीन युवकों के चाकूबाजी में घायल होने की जानकारी सामने आई है।

भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया और कई बार युवकों को मौके से खदेड़ा। स्थिति को काबू में करने के लिए आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए।

कलेक्टर-एसएसपी ने संभाला मोर्चा

घटना के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बन गई। दोनों पक्षों की ओर से नारेबाजी भी की गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर संजय अग्रवाल और एसएसपी रजनेश सिंह समेत पुलिस एवं प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।

विधायक सुशांत शुक्ला समेत स्थानीय लोग भी मौके पर पहुंचे। पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने लोगों के साथ बैठक कर युवकों को समझाइश दी। देर रात तक इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।

फिलहाल पुलिस और प्रशासन की टीम पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए खपरगंज और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है।

दर्दनाक सड़क हादसा: तेज रफ्तार बाइक दीवार से टकराई, दो युवकों की मौत; एक गंभीर

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रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में देर रात तेज रफ्तार बाइक अनियंत्रित होकर दीवार से जा टकराई। हादसे में बाइक सवार दो युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि तीसरा युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। दुर्घटना घरघोड़ा थाना क्षेत्र में भेंगारी से टीआरएन कंपनी जाने वाले मार्ग पर हुई।


तेज रफ्तार के चलते अनियंत्रित हुई बाइक

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, हादसा शुक्रवार रात करीब 8 बजे हुआ। बाइक पर तीन युवक सवार थे और वे भेंगारी की ओर से टीआरएन कंपनी की तरफ जा रहे थे। इसी दौरान बाइक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे स्थित टीआरएन कंपनी की दीवार से जा टकराई।

टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक सवार दो युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई।

घायल युवक अस्पताल में भर्ती

हादसे की सूचना मिलते ही घरघोड़ा पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घायल युवक को तत्काल अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका उपचार जारी है। उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है।

मृतकों की पहचान की कोशिश जारी

पुलिस के अनुसार, हादसे में मृत दोनों युवकों और घायल युवक की पहचान अभी नहीं हो सकी है। पुलिस उनकी पहचान के लिए आवश्यक जानकारी जुटा रही है और परिजनों से संपर्क करने का प्रयास कर रही है।

पुलिस ने हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में बाइक की तेज रफ्तार को दुर्घटना की संभावित वजह माना जा रहा है। हालांकि, हादसे की वास्तविक परिस्थितियां जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगी।

महासमुंद में गांजा तस्करी का भंडाफोड़, बाप-बेटे गिरफ्तार; 5.24 लाख का माल जब्त

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 महासमुंद। ओडिशा से मध्य प्रदेश अवैध गांजा लेकर जा रहे दो तस्करों को कोमाखान पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से करीब 8.920 किलो गांजा, एक बाइक और दो मोबाइल फोन समेत कुल 5 लाख 24 हजार रुपये का सामान जब्त किया है। गिरफ्तार आरोपी रिश्ते में बाप-बेटे हैं और मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के रहने वाले हैं।


पुलिस के अनुसार, जिले में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी पर रोक लगाने के लिए लगातार चेकिंग और निगरानी अभियान चलाया जा रहा है। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि एक स्प्लेंडर बाइक पर सवार दो व्यक्ति ओडिशा से छत्तीसगढ़ के रास्ते गांजा लेकर मध्य प्रदेश की ओर जा रहे हैं।

सूचना मिलते ही कोमाखान पुलिस ने ग्राम घोयनाबाहरा नाके के पास नाकाबंदी की। कुछ देर बाद संदिग्ध बाइक क्रमांक MP 50 JE 7254 वहां पहुंची, जिसे पुलिस टीम ने रोककर तलाशी ली। तलाशी के दौरान आरोपियों के बैग से गांजा बरामद हुआ।

टिटलागढ़ से गांजा खरीदकर बालाघाट ले जा रहे थे

पूछताछ में आरोपियों की पहचान अर्जुन पटले (52) और उसके बेटे हिमांशु पटले (19) के रूप में हुई। दोनों वार्ड क्रमांक 14, ग्राम कोसमी, जिला बालाघाट, मध्य प्रदेश के निवासी हैं।

पुलिस के मुताबिक, दोनों आरोपी ओडिशा के टिटलागढ़ से गांजा खरीदकर उसे मध्य प्रदेश के बालाघाट में खपाने की तैयारी में थे। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज किया है।

5.24 लाख रुपये का सामान जब्त

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से—

8.920 किलो गांजा — कीमत करीब ₹4.46 लाख
स्प्लेंडर बाइक — कीमत ₹60 हजार
2 मोबाइल फोन — कीमत ₹18 हजार

सहित कुल ₹5 लाख 24 हजार रुपये का सामान जब्त किया है।

कोमाखान पुलिस मामले में आरोपियों से पूछताछ कर गांजा तस्करी से जुड़े अन्य लोगों और नेटवर्क के संबंध में जानकारी जुटा रही है।

नेपाल आपदा: छत्तीसगढ़ के 9 नागरिकों की स्थिति सामने आई, 2 अब भी लापता, मुख्यमंत्री के निर्देश पर सरकार ने बढ़ाई निगरानी

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रायपुर। नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से बने गंभीर हालात के बीच छत्तीसगढ़ सरकार ने वहां मौजूद प्रदेश के नागरिकों की सुरक्षा को लेकर निगरानी और राहत प्रयास तेज कर दिए हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर राज्य सरकार नेपाल में फंसे या लापता नागरिकों की लगातार जानकारी जुटा रही है।


अब तक सामने आई जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ से जुड़े 9 नागरिकों की स्थिति स्पष्ट हुई है। इनमें दो नागरिकों के परिजनों से संपर्क स्थापित हो चुका है। रायपुर के पांच नागरिक सुरक्षित हैं और वापस लौटने के लिए रवाना हो चुके हैं। वहीं, बिलासपुर की प्रियंका चौधरी और सरगुजा की डॉ. मीना गुप्ता के लापता होने की सूचना है। दोनों की तलाश के लिए संबंधित एजेंसियों से समन्वय किया जा रहा है।

मोनिका यादव के परिजनों से संपर्क

रायपुर के महादेव घाट निवासी मोनिका यादव 22 अगस्त को नेपाल गई थीं। नेपाल में बाढ़ के बाद उनसे संपर्क टूटने की सूचना सामने आई थी। प्रशासन के अनुसार, अब उनके परिजनों से संपर्क स्थापित हो गया है। उनकी स्थिति के संबंध में संबंधित स्तर पर जानकारी जुटाई जा रही है।

कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गईं मंजू की भी जानकारी मिली

बिलासपुर निवासी 65 वर्षीय मंजू राय चौधरी कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नेपाल गई थीं। प्रशासन के अनुसार, उनके परिजनों से भी संपर्क स्थापित हो गया है। उपलब्ध जानकारी का सत्यापन करने के साथ आवश्यक समन्वय किया जा रहा है।

प्रियंका और डॉ. मीना अब भी लापता

बिलासपुर निवासी 39 वर्षीय प्रियंका चौधरी के नेपाल में लापता होने की सूचना है। वे फिनलैंड की नागरिक हैं। परिजनों से मिली जानकारी के आधार पर प्रशासन संबंधित एजेंसियों के संपर्क में है और उनकी सुरक्षित तलाश के प्रयास जारी हैं।

वहीं, सरगुजा निवासी डॉ. मीना गुप्ता, जो यूनाइटेड किंगडम की नागरिक हैं, भी नेपाल में लापता बताई जा रही हैं। उनका अंतिम ज्ञात स्थान रसुवागढ़ी इमिग्रेशन कार्यालय, नेपाल-चीन सीमा बताया गया है। उनकी स्थिति की जानकारी जुटाने के लिए संबंधित अधिकारियों से लगातार संपर्क किया जा रहा है।

रायपुर के पांच नागरिक सुरक्षित

रायपुर के माना क्षेत्र के दिनेश ओझा, प्रेम सिंह जगत, नारायण सेन, यतेंद्र प्रकाशी और दिनेश सिंह ठाकुर के सुरक्षित होने की पुष्टि हुई है। सभी पांचों नागरिक 21 अगस्त को नेपाल गए थे और अब रायपुर लौटने के लिए रवाना हो चुके हैं।

नेपाल प्रशासन और केंद्रीय एजेंसियों से समन्वय

राज्य सरकार नेपाल में मौजूद छत्तीसगढ़ के नागरिकों की जानकारी जुटाने के साथ उनके परिजनों को भी आवश्यक सहयोग उपलब्ध करा रही है। जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के माध्यम से सूचनाओं का लगातार आदान-प्रदान किया जा रहा है। नेपाल प्रशासन और केंद्रीय एजेंसियों के साथ भी समन्वय बनाए रखा गया है।

सरकार ने अपील की है कि नेपाल गए छत्तीसगढ़ के किसी नागरिक के संबंध में कोई जानकारी मिलने पर तत्काल प्रशासन को सूचित करें। सरकार ने कहा है कि संकट की इस घड़ी में प्रभावित नागरिकों और उनके परिवारों की मदद के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।

हेल्पलाइन नंबर

टोल फ्री हेल्पलाइन: 1070
कंट्रोल रूम: 0771-2223471

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