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खनिज उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा छत्तीसगढ़, अन्वेषण से एडवांस मैन्युफैक्चरिंग तक विकसित होगी पूरी वैल्यू चेन - मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ में उपलब्ध समृद्ध खनिज संपदा और क्रिटिकल मिनरल्स की व्यापक संभावनाएं प्रदेश को विकास के नए क्षितिज पर ले जाने की क्षमता रखती हैं। हमारा लक्ष्य केवल धरती से खनिज निकालना नहीं, बल्कि अन्वेषण से उत्खनन, प्रसंस्करण से मूल्य संवर्धन और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग से रिसाइक्लिंग तक पूरी मिनरल वैल्यू चेन छत्तीसगढ़ में विकसित करना है। इससे प्रदेश में निवेश बढ़ेगा, नए उद्योग स्थापित होंगे और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज नवा रायपुर स्थित मेफेयर लेक रिजॉर्ट में भारत सरकार के खान मंत्रालय द्वारा आयोजित क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की नीलामी की आठवीं किश्त के रोड शो को संबोधित करते हुए यह बात कही।


मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल्स आने वाले समय में देश की आर्थिक प्रगति, तकनीकी आत्मनिर्भरता और सामरिक सुरक्षा के प्रमुख आधार होंगे। आज के तेजी से बदलते वैश्विक और तकनीकी परिदृश्य में इन खनिजों का महत्व बहुत आगे बढ़ चुका है। रक्षा उद्योग से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, डिजिटल टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रॉनिक्स और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग तक आधुनिक अर्थव्यवस्था के लगभग हर उभरते क्षेत्र के लिए इन खनिजों की विश्वसनीय उपलब्धता आवश्यक है।


मुख्यमंत्री साय ने ई-रेत संगवारी पोर्टल और टिन पोर्टल का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम (सीएमडीसी) द्वारा इंडियन ओवरसीज बैंक तथा पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के साथ महत्वपूर्ण एमओयू भी किए गए।

विकसित भारत के लिए क्रिटिकल मिनरल्स में आत्मनिर्भरता आवश्यक

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी से दुनिया की प्रमुख आर्थिक और तकनीकी शक्तियों में अपनी जगह बना रहा है। मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत और नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन के माध्यम से देश में क्रिटिकल मिनरल्स के अन्वेषण, प्रसंस्करण और इनसे जुड़े उन्नत उद्योगों के विकास को नई गति मिली है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में दुनिया के सभी प्रमुख देश अपने रणनीतिक संसाधनों और उनकी सप्लाई चेन को सुरक्षित करने में जुटे हैं। ऐसे समय में भारत के लिए क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल्स की उपलब्धता में आत्मनिर्भर होना आर्थिक आवश्यकता के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

रक्षा से एआई तक - नई अर्थव्यवस्था की आधारशिला हैं क्रिटिकल मिनरल्स

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का रक्षा उद्योग तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ा है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय रक्षा क्षमताओं और स्वदेशी तकनीक की प्रभावशीलता को दुनिया ने देखा। आधुनिक रक्षा उपकरणों के निर्माण में अनेक स्ट्रेटेजिक मिनरल्स की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए एक मजबूत और आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग के लिए इनकी सुरक्षित और निरंतर आपूर्ति जरूरी है।

उन्होंने कहा कि इसी प्रकार एआई, सेमीकंडक्टर, बैटरी, क्लीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, डिजिटल प्रौद्योगिकी और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग के लिए लिथियम, ग्रेफाइट, रेयर अर्थ एलिमेंट्स, वैनेडियम, निकेल और क्रोमियम जैसे खनिज अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। भविष्य की अर्थव्यवस्था में इनकी भूमिका लगातार बढ़ने वाली है।

क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ के पास बड़ी संभावनाएं

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख खनिज संपन्न राज्यों में है और अब क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में भी प्रदेश नई पहचान बनाने की ओर अग्रसर है। कटघोरा और बस्तर में लिथियम एवं दुर्लभ मृदा तत्व, बलरामपुर में ग्रेफाइट, वैनेडियम एवं गैलियम, बालोद में फास्फोराइट तथा महासमुंद में निकेल, क्रोमियम और ग्लाकोनाइट की संभावनाएं मौजूद हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल्स की नीलामी की आठवीं किश्त में देश के 7 राज्यों के 20 खनिज ब्लॉक्स शामिल हैं, जिनमें छत्तीसगढ़ के 5 ब्लॉक्स हैं।

मुख्यमंत्री ने निवेशकों से इन ब्लॉक्स की नीलामी में सक्रिय भागीदारी का आह्वान करते हुए कहा कि यह केवल खनिज ब्लॉक हासिल करने का अवसर नहीं है। यह अन्वेषण, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, नवाचार और नए उद्योगों के माध्यम से छत्तीसगढ़ तथा देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने का अवसर है। ये क्रिटिकल मिनरल ब्लॉक्स विकसित भारत के निर्माण की महत्वपूर्ण धुरी बन सकते हैं।

पूरी मिनरल वैल्यू चेन छत्तीसगढ़ में विकसित करने पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की सोच खनिज उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है। हमारा प्रयास है कि खनिज आधारित उद्योगों की पूरी वैल्यू चेन प्रदेश में विकसित हो। अन्वेषण और उत्खनन के बाद खनिज बाहर भेजने के बजाय उनका प्रसंस्करण, वैल्यू एडिशन और उनसे संबंधित एडवांस मैन्युफैक्चरिंग प्रदेश में हो, ताकि प्राकृतिक संसाधनों का अधिकतम आर्थिक लाभ छत्तीसगढ़ और यहां के लोगों को मिले।

उन्होंने कहा कि नवा रायपुर में एआई आधारित डेटा सेंटर पार्क और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर तथा राजनांदगांव में इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। ऐसे आधुनिक उद्योगों में क्रिटिकल मिनरल्स की आवश्यकता होगी। खनिज संसाधनों की निकट उपलब्धता प्रदेश को इन उद्योगों के लिए स्वाभाविक प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त प्रदान करेगी।

नई औद्योगिक नीति और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से निवेश को प्रोत्साहन

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार नए जमाने के उद्योगों को छत्तीसगढ़ की ओर आकर्षित करने के लिए निवेश अनुकूल वातावरण तैयार कर रही है। नई औद्योगिक नीति में उभरते और भविष्य की अर्थव्यवस्था से जुड़े क्षेत्रों के लिए अनेक प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम के माध्यम से कम एवं मध्यम जोखिम वाले उद्योगों के लिए आवश्यक औपचारिकताओं को सरल किया गया है। वन क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 से विभिन्न अनुमतियों और एनओसी की प्रक्रिया भी सुगम हुई है।

उन्होंने कहा कि पूंजी निवेश सहायता, स्टांप शुल्क एवं विद्युत शुल्क में छूट, ब्याज अनुदान और रोजगार आधारित प्रोत्साहन सहित विभिन्न सुविधाएं निवेशकों को उपलब्ध कराई जा रही हैं। राज्य में खनिज संपदा, ऊर्जा, भूमि, कनेक्टिविटी और औद्योगिक अधोसंरचना की उपलब्धता क्रिटिकल मिनरल आधारित उद्योगों के लिए मजबूत इकोसिस्टम तैयार करती है।

खनिज राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य निर्माण के समय छत्तीसगढ़ का खनिज राजस्व लगभग 400 करोड़ रुपए था। ढाई वर्ष पहले यह लगभग 12 हजार करोड़ रुपए था, जो अब बढ़कर 16 हजार करोड़ रुपए से अधिक हो गया है।

उन्होंने कहा कि खनिज संपदा से प्राप्त राजस्व का उपयोग प्रदेश के विकास और जनकल्याण में किया जा रहा है। जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) के माध्यम से खनन प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ स्थानीय लोगों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए विभिन्न कार्य किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री साय ने उद्योग जगत और निवेशकों से छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा में भागीदार बनने का आह्वान करते हुए कहा कि आज पूरा देश छत्तीसगढ़ की ओर देख रहा है। प्रदेश प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है और तेजी से औद्योगिक एवं आर्थिक विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह रोड शो छत्तीसगढ़ में निवेश, तकनीकी सहयोग और नई साझेदारियों के लिए मजबूत आधार तैयार करेगा तथा प्रदेश को देश की क्रिटिकल मिनरल वैल्यू चेन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।

क्रिटिकल मिनरल्स में आत्मनिर्भरता देश की रणनीतिक आवश्यकता : केंद्रीय राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे

केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल्स में आत्मनिर्भरता भारत की आर्थिक और रणनीतिक शक्ति के लिए अत्यंत आवश्यक है। लंबे समय तक देश अनेक महत्वपूर्ण खनिजों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहा, लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के साथ इस दिशा में तेजी से काम हुआ है।

उन्होंने कहा कि क्रिटिकल मिनरल्स का उपयोग वाहनों, इनवर्टर और ई-रिक्शा से लेकर जहाजों तथा आधुनिक रक्षा उपकरणों तक में होता है। उन्होंने निवेशकों, युवाओं और स्टार्टअप्स से इस क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का लक्ष्य केवल खनिजों का दोहन नहीं, बल्कि सतत और जिम्मेदार खनन को बढ़ावा देना है, जिसमें पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों के हितों का विशेष ध्यान रखा जाए।

खनन के साथ सुनियोजित और टिकाऊ विकास भी जरूरी : केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू

केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि क्रिटिकल मिनरल्स की बढ़ती वैश्विक मांग के बीच छत्तीसगढ़ के पास अपनी समृद्ध खनिज संपदा और मजबूत औद्योगिक आधार के बल पर नई संभावनाओं को साकार करने का बड़ा अवसर है।

उन्होंने कहा कि खनिज ब्लॉक्स की नीलामी की सफलता केवल उनके आवंटन से नहीं मापी जानी चाहिए। इसका वास्तविक प्रभाव अन्वेषण, निवेश, प्रोसेसिंग सुविधाओं की स्थापना, तकनीकी विकास, वैल्यू एडिशन और रोजगार सृजन के रूप में दिखाई देना चाहिए। खनन और औद्योगिक निवेश के साथ आवास, परिवहन, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी नागरिक सुविधाओं का सुनियोजित विकास भी जरूरी है। इसके लिए सरकार और उद्योग जगत के बीच मजबूत साझेदारी आवश्यक है।

निवेशकों को हर स्तर पर मिलेगा हैंडहोल्डिंग सपोर्ट : मुख्य सचिव विकास शील

मुख्य सचिव विकास शील ने कहा कि राज्य सरकार खनिज क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के साथ पूरी वैल्यू चेन विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बेहतर बनाने के लिए 43 सेवाओं को रिस्क रेटेड अप्रोच के तहत अधिसूचित किया गया है। लो और मीडियम रिस्क गतिविधियों के लिए सेल्फ डिक्लेरेशन तथा हाई रिस्क गतिविधियों के लिए आवश्यक अनुमति की व्यवस्था की जा रही है।

उन्होंने कहा कि औद्योगिक परियोजनाओं की समयबद्ध स्थापना के लिए रणनीतिक परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग, श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और भूमि अधिग्रहण प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। खनन क्षेत्र में सर्वे, एनफोर्समेंट, परिवहन, रॉयल्टी भुगतान और नीलामी प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाया जा रहा है तथा भविष्य में ट्रांसपोर्ट सिस्टम को और अधिक तेज तथा पेपरलेस बनाने का लक्ष्य है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण, वन, भूमि अधिग्रहण एवं अन्य आवश्यक स्वीकृतियों में निवेशकों को सक्रिय हैंडहोल्डिंग सपोर्ट दे रही है। अब खनिज ब्लॉक्स की नीलामी लैंड शेड्यूलिंग के बाद की जा रही है, जिससे निवेशकों को भूमि, वन क्षेत्र एवं संबंधित प्रक्रियाओं की स्पष्ट जानकारी पहले ही उपलब्ध हो सके।

मुख्य सचिव ने निवेशकों से केवल खदानों में निवेश तक सीमित न रहते हुए पूरी मिनरल वैल्यू चेन और डाउनस्ट्रीम उद्योगों में निवेश करने का आग्रह किया। उन्होंने स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाने वाले नए बिजनेस मॉडल विकसित करने पर भी जोर दिया।

देश में अब तक 56 क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की सफल नीलामी

भारत सरकार के खान मंत्रालय के सचिव श्री केशव चंद्र ने कहा कि भारत के वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों की ओर तेजी से आगे बढ़ने के साथ क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल्स की विश्वसनीय आपूर्ति सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। ये खनिज इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, नवीकरणीय ऊर्जा, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, रक्षा, एयरोस्पेस और उर्वरक सहित अनेक उन्नत उद्योगों के लिए जरूरी हैं।

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार को क्रिटिकल एवं स्ट्रेटेजिक मिनरल ब्लॉक्स की नीलामी का अधिकार मिलने के बाद अब तक 88 ब्लॉक्स की नीलामी प्रक्रिया शुरू की गई है, जिनमें 56 ब्लॉक्स की सफलतापूर्वक नीलामी हो चुकी है।

उन्होंने छत्तीसगढ़ की खनिज संभावनाओं की सराहना करते हुए कहा कि भारत के पहले लिथियम युक्त खनिज ब्लॉक की नीलामी छत्तीसगढ़ के कटघोरा लिथियम एवं रेयर अर्थ एलिमेंट ब्लॉक से हुई। आठवीं किश्त में 7 राज्यों के 20 खनिज ब्लॉक्स में से 5 छत्तीसगढ़ में हैं।

उन्होंने बताया कि नीलामी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और निवेशक अनुकूल बनाने के लिए माइलस्टोन आधारित अनुपालन, समयबद्ध स्वीकृतियों, यूनिफाइड माइनिंग पोर्टल और बीमा सिक्योरिटी बॉन्ड जैसे अनेक सुधार किए गए हैं। उन्होंने निवेशकों से इन अवसरों का लाभ उठाते हुए भारत के सुरक्षित और आत्मनिर्भर क्रिटिकल मिनरल इकोसिस्टम के निर्माण में भागीदार बनने का आग्रह किया।

वैज्ञानिक अन्वेषण और पारदर्शी व्यवस्था पर राज्य का विशेष जोर : खनिज सचिव  पी. दयानंद

खनिज विभाग के सचिव  पी. दयानंद ने कहा कि राज्य सरकार खनिज संपदा के सतत उपयोग, वैज्ञानिक अन्वेषण, पारदर्शी नीलामी और निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण सहित विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से वैज्ञानिक सर्वेक्षण, भू-आंकड़ों के संकलन और मैपिंग को मजबूत कर रही है। ऑनलाइन एवं पारदर्शी व्यवस्थाओं का विस्तार किया जा रहा है, ताकि संभावित खनिज क्षेत्रों को तेजी से उत्पादनशील खदानों में परिवर्तित किया जा सके। सरकार का लक्ष्य खनिज उत्खनन के साथ खनिज आधारित उद्योग, स्थानीय रोजगार, तकनीकी विकास और मूल्य संवर्धन को भी गति देना है।

ढाई वर्षों में 40 एक्सप्लोरेशन प्रोजेक्ट, 2,800 किलोमीटर से अधिक जियोलॉजिकल सर्वे

खनिज विभाग के संचालक एवं सीएमडीसी के प्रबंध संचालक रजत बंसल ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर प्रदेश में सतत खनन पद्धतियों के साथ खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक अन्वेषण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। पिछले वित्तीय वर्ष में प्रदेश को लगभग 16 हजार 700 करोड़ रुपए का खनिज राजस्व प्राप्त हुआ, जो निर्धारित लक्ष्य का करीब 98 प्रतिशत है। खनिज राजस्व में वर्ष-दर-वर्ष लगभग 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में राज्य में 40 एक्सप्लोरेशन प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं और 2,800 किलोमीटर से अधिक जियोलॉजिकल सर्वे पूरा किया गया है। प्रदेश में अब तक 65 खनिज ब्लॉक्स की नीलामी की गई है, जिनसे लगभग 4 लाख करोड़ रुपए के संभावित राजस्व की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में लिथियम, ग्रेफाइट, वैनेडियम, गैलियम, गोल्ड, टंगस्टन, निकेल, क्रोमियम, कॉपर, लेड-जिंक और डायमंड सहित विभिन्न महत्वपूर्ण खनिजों की व्यापक संभावनाएं हैं। कटघोरा में लिथियम, बलरामपुर में ग्रेफाइट-वैनेडियम-गैलियम तथा बस्तर के टिन बेल्ट सहित विभिन्न क्षेत्रों में अन्वेषण एवं नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

खनिज ऑनलाइन 2.0, डीएमएफ 2.0 और ई-नीलामी जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं के माध्यम से खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत की गई है। खदानों और माइनर मिनरल्स की निगरानी के लिए ड्रोन सर्वे का भी उपयोग किया जा रहा है।

ई-रेत संगवारी से पीएम आवास हितग्राहियों को सुविधा, टिन पोर्टल से आदिवासी परिवारों को मिलेगा उचित मूल्य

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री साय ने ई-रेत संगवारी पोर्टल का शुभारंभ किया। इसके माध्यम से प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को रियायती दर पर रेत उपलब्ध कराने की व्यवस्था को अधिक सुगम और पारदर्शी बनाया जाएगा।

इसी प्रकार दंतेवाड़ा क्षेत्र में टिन से जुड़े आदिवासी समुदायों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने और व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से टिन पोर्टल शुरू किया गया है। इन डिजिटल पहलों से खनिज प्रशासन में तकनीक के उपयोग के साथ आम नागरिकों को सीधे लाभ पहुंचाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ा है।

सीएमडीसी के दो महत्वपूर्ण एमओयू, कौशल विकास और वित्तीय सहयोग को मिलेगी गति

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम और इंडियन ओवरसीज बैंक के बीच एमओयू किया गया। इसके साथ ही कोरन्डम कटिंग एवं पॉलिशिंग के प्रशिक्षण के लिए सीएमडीसी और पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के बीच भी एमओयू हुआ। इन समझौतों से खनिज क्षेत्र में वित्तीय सहयोग, कौशल विकास, मूल्य संवर्धन और निवेश की संभावनाओं को नई गति मिलेगी।

इस अवसर पर माइनर मिनरल्स पर प्रकाशित पुस्तक का विमोचन किया गया तथा तीन लाइमस्टोन माइनिंग लीज ब्लॉक्स के लिए एनआईटी जारी करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई गई।

कार्यक्रम में केंद्रीय खान मंत्रालय के संयुक्त सचिव संदीप बसंत कदम सहित केंद्र एवं राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, खनिज क्षेत्र से जुड़े निवेशक, उद्योग प्रतिनिधि, विशेषज्ञ और विभिन्न स्टेकहोल्डर्स उपस्थित थे।

CG NEWS : शराब के नशे में घर पहुंचा भतीजा, मौसी ने डांटा तो लाठी-डंडे से पीटकर कर दी हत्या

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 कोरबा। जिले के बांकी मोंगरा थाना क्षेत्र के ग्राम पुरैना में रिश्तों को शर्मसार करने वाली हत्या की वारदात सामने आई है। शराब के नशे में घर पहुंचे युवक को उसकी मौसी ने डांट-फटकार लगाई तो वह आगबबूला हो गया। आरोपी ने घर में रखी लकड़ी और डंडे से मौसी के सिर पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल महिला की इलाज के दौरान घर पर ही मौत हो गई। पुलिस ने आरोपी भतीजे को गिरफ्तार कर लिया है।


जानकारी के अनुसार, ग्राम पुरैना निवासी तीरथराम यादव (45) रविवार शाम शराब के नशे में घर पहुंचा था। इस दौरान उसकी मौसी मोहन कुंवर बाई (55) भी घर पर मौजूद थीं। बताया जा रहा है कि रोजाना शराब पीकर आने और देर रात तक इधर-उधर घूमने को लेकर मौसी ने उसे डांट-फटकार लगाई।

मौसी की बात से नाराज तीरथराम ने अपना आपा खो दिया और घर में रखी आग जलाने वाली लकड़ी व डंडे से मोहन कुंवर बाई के सिर पर कई वार कर दिए। हमले में महिला गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़ी। चीख-पुकार सुनकर परिवार के अन्य सदस्य और आसपास के लोग मौके पर पहुंचे।

परिजन घायल महिला को तत्काल सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उनकी हालत गंभीर होने पर हायर सेंटर रेफर कर दिया। हालांकि, परिजन उन्हें हायर सेंटर ले जाने के बजाय वापस घर ले आए। कुछ देर बाद महिला ने घर पर ही दम तोड़ दिया।

घटना की सूचना मिलते ही बांकी मोंगरा पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पंचनामा कार्रवाई की। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की। मामले में हत्या का अपराध दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पटले ने बताया कि पुरैना गांव में मोहन कुंवर बाई की हत्या उनके भतीजे तीरथराम यादव ने की है। आरोपी घटना के समय शराब के नशे में था। सामान्य विवाद के बाद उसने लकड़ी से महिला पर हमला किया, जिससे उसकी मौत हो गई। आरोपी को गिरफ्तार कर मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

पिकअप और ट्रक में भीषण भिड़ंत, 2 श्रद्धालुओं की मौत; 17 घायल, कई गंभीर

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 सारंगढ़। छत्तीसगढ़ के सारंगढ़ जिले में सोमवार को दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। चंद्रपुर स्थित मां चंद्रहासिनी मंदिर से दर्शन कर लौट रहे श्रद्धालुओं से भरी पिकअप की ट्रक से जोरदार टक्कर हो गई। हादसे में दो श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 17 लोग घायल हुए हैं। घायलों में पांच से अधिक की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें बेहतर इलाज के लिए अन्य अस्पताल रेफर किया गया है।


मंदिर से दर्शन कर लौट रहे थे श्रद्धालु

जानकारी के मुताबिक, श्रद्धालु चंद्रपुर स्थित मां चंद्रहासिनी मंदिर में दर्शन करने के बाद पिकअप वाहन से अपने गांव लौट रहे थे। इसी दौरान रास्ते में पिकअप की सामने से आ रहे ट्रक से जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि पिकअप में सवार कई लोग घायल हो गए।

हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया।

दो श्रद्धालुओं की मौत

हादसे में उमेश दीवान (14) और भुवनेश्वरी दीवान (40) की मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू कराया। दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया की जा रही है।

17 घायल, कई की हालत गंभीर

हादसे में कुल 17 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। इनमें पांच से अधिक घायलों को गंभीर चोटें आने के कारण बेहतर उपचार के लिए रेफर किया गया है। अन्य घायलों का स्थानीय अस्पताल में इलाज जारी है।

हादसे की वजह तलाश रही पुलिस

घटना की सूचना मिलने के बाद सिटी कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त वाहनों का निरीक्षण किया और हादसे से जुड़े तथ्यों की जांच शुरू कर दी है।

पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि पिकअप और ट्रक के बीच टक्कर किन परिस्थितियों में हुई। मामले में आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

प्रकृति, रोमांच और लबालब जलराशि का अद्भुत संगम : पर्यटकों की पहली पसंद बना धमतरी

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 विष्णु प्रसाद वर्मा, सहायक संचालक

रायपुर : छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले ने राज्य के पर्यटन मानचित्र पर अपनी एक विशिष्ट और अमिट पहचान बनाई है। धमतरी जिले में पर्यटन की अपार संभावनाएं है। यहां रविशंकर सागर जलाशय गंगरेल बांध सहित एशिया का एकमात्र सायफन सिस्टम वाला माडमसिल्ली, सिहावा का श्रृंगऋषि पर्वत, कर्णेश्वर महादेव, सप्तऋषि, नरहरा जलप्रपात, जबर्रा हिल्स और वनों से आच्छादित नगरी विकासखण्ड लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर लेती है।


कयाकिंग, बोटिंग तथा अन्य एडवेंचर गतिविधियों ने युवाओं और साहसिक खेल प्रेमियों के लिए खास आकर्षण

मानसून के इस सुहावने मौसम और आगामी त्यौहारों के सीजन में गंगरेल जलाशय, रुद्री डैम, माडमसिल्ली और नरहरा जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों पर सैलानियों का भारी तांता लगा हुआ है। शांत जलतरंगें, हरियाली से ढकी सुरम्य पहाड़ियां और कल-कल बहते झरनों का मनोहारी वातावरण देश-प्रदेश से आने वाले पर्यटकों को सुकून के अविस्मरणीय पल बिताने का न्योता दे रहा है। विशेष रूप से गंगरेल और रुद्री डैम में शुरू की गई कयाकिंग, बोटिंग तथा अन्य एडवेंचर वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियों ने युवाओं और साहसिक खेल प्रेमियों को खासा आकर्षित किया है। धमतरी अब महज एक पड़ाव न होकर राज्य का एक प्रमुख टूरिज्म हब बनकर उभर चुका है, जहां प्रकृति का अनुपम सौंदर्य और रोमांचक जलक्रीड़ाएं सैलानियों को एक यादगार अनुभव दे रही हैं।


​प्रमुख आकर्षण केंद्र और प्राकृतिक विविधता

​धमतरी जिला छत्तीसगढ़ में प्रकृति, रोमांच और जल पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है। चारों ओर से घने जंगलों, पहाड़ियों और विशाल जलाशयों से घिरे होने के कारण यह सैलानियों को बेहद आकर्षित करता है। जिले के प्रमुख पर्यटन केंद्रों की बात करें तो 'मिनी गोवा' के नाम से प्रसिद्ध गंगरेल जलाशय अपनी विशाल जलराशि, शानदार सूर्यास्त, वॉटर बोटिंग और एडवेंचर स्पोर्ट्स के लिए पर्यटकों की पहली पसंद बना हुआ है। इसके निकट ही रुद्री डैम जलक्रीड़ाओं, कयाकिंग और पारिवारिक पिकनिक के लिए अत्यंत शांत, सुरक्षित व मनोरम स्थल के रूप में सप्ताहांत में पर्यटकों से गुलजार रहता है। इसके साथ ही, एशिया के पहले 'साइफन डैम' के रूप में विख्यात माडमसिल्ली बांध अपनी अनूठी स्थापत्य कला और प्राकृतिक शांत वातावरण का अद्भुत अनुभव प्रदान करता है, जबकि घने जंगलों, पहाड़ियों और कलकल करते पानी के बीच स्थित नरहरा जलप्रपात प्रकृति प्रेमियों और ट्रेकर्स के लिए एक आदर्श व सुकून भरा गंतव्य साबित हो रहा है।


​धमतरी जिला में समृद्ध जल संपदा

​ ​ पर्यटन में आई इस अभूतपूर्व उछाल के पीछे इस वर्ष जलाशयों में पर्याप्त और भरपूर जल भराव भी एक मुख्य कारण है। रविशंकर सागर (गंगरेल) जलाशय का कुल जल भराव 90.72% है, जहाँ वर्तमान जलस्तर 347.95 मीटर (1141.62 फीट) दर्ज किया गया है और यहाँ 3548 क्यूसेक की आवक बनी हुई है। इसी प्रकार मुरूमसिल्ली जलाशय 98.82% जलभराव के साथ अपनी कुल क्षमता के बिल्कुल करीब है और इसका जलस्तर 376.22 मीटर (1234.37 फीट) है। दुधावा जलाशय में जल भराव 82.37% (जलस्तर 423.88 मीटर) तथा सोंढूर जलाशय में जल भराव 68.90% (जलस्तर 468.52 मीटर) दर्ज किया गया है, जो इस क्षेत्र की समृद्ध जल संपदा को दर्शाता है।

प्राकृतिक वातावरण और पर्यटन भी बेहद मनोरम


​धमतरी और महानदी जलाशय परियोजना के अंतर्गत आने वाले ये सभी प्रमुख बांध पर्याप्त जलराशि से समृद्ध हैं, जिससे न केवल क्षेत्र में सिंचाई और पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित हुई है, बल्कि आसपास का प्राकृतिक वातावरण और पर्यटन भी बेहद मनोरम हो उठा है।

स्थानीय युवाओं के लिए गाइड, बोटिंग संचालन, खान-पान और हस्तशिल्प के क्षेत्र में स्वरोजगार व आजीविका के नए द्वार खुले

​ पर्यटकों की लगातार बढ़ती संख्या और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन द्वारा सभी पर्यटन स्थलों पर चाक-चौबंद व्यवस्थाएं की गई हैं। वाटर स्पोर्ट्स के दौरान पर्यटकों के लिए लाइफ जैकेट पहनना और प्रशिक्षित गाइडों की मौजूदगी को अनिवार्य किया गया है, ताकि हर सैलानी पूरी तरह सुरक्षित रहे। इसके साथ ही, पर्यटकों की सुविधा के लिए आधारभूत संरचनाओं का विकास करते हुए सुव्यवस्थित पार्किंग, सुंदर उद्यानों, विश्राम स्थलों, स्वच्छ पेयजल और नियमित साफ-सफाई के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। इन पर्यटन गतिविधियों के निरंतर विस्तार से स्थानीय युवाओं के लिए गाइड, बोटिंग संचालन, खान-पान और हस्तशिल्प के क्षेत्र में स्वरोजगार व आजीविका के नए द्वार खुले हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नया संबल मिल रहा है।

प्रकृति का अनुपम वैभव, साहसिक जलक्रीड़ाएं और जन-सुविधाओं का अनूठा समन्वय

​धमतरी जिले में पर्यटन की अपार संभावनाओं को देखते हुए,पर्यटकों को प्राकृतिक सौंदर्य के साथ सुरक्षित, स्वच्छ और यादगार अनुभव प्रदान किया जा रहा है। इन प्रयासों से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है। धमतरी अब छत्तीसगढ़ के पर्यटन मानचित्र पर केवल एक सामान्य पड़ाव या गंतव्य मात्र नहीं रह गया है, बल्कि एक प्रमुख और जीवंत टूरिज्म हब के रूप में अपनी सशक्त पहचान स्थापित कर चुका है, जहां प्रकृति का अनुपम वैभव, साहसिक जलक्रीड़ाएं और जन-सुविधाओं का अनूठा समन्वय पर्यटकों को बार-बार यहां आने के लिए आकर्षित कर रहा है।

नारायणपुर में सुरक्षा बलों की बड़ी कार्रवाई, नक्सलियों का हथियार और विस्फोटक डंप बरामद

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 नारायणपुर। जिले के अदनार क्षेत्र में पुलिस और BSF की संयुक्त टीम को सर्च ऑपरेशन के दौरान बड़ी सफलता मिली है। जंगल में तलाशी अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने नक्सलियों द्वारा पूर्व में छिपाकर रखे गए हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री का डंप बरामद किया है।


सुरक्षा बलों ने मौके से 10 राइफल, 2 बैरल ग्रेनेड लॉन्चर, 13 जिंदा BGL शेल, 16 कारतूस और करीब 2 किलो विस्फोटक पदार्थ बरामद किया है। बरामद सामग्री को सुरक्षा मानकों के तहत जब्त कर लिया गया है।

29 अगस्त को चलाया गया सर्च अभियान

पुलिस के मुताबिक, 29 अगस्त को अदनार क्षेत्र के जंगलों में सर्चिंग और एरिया डॉमिनेशन अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान पुलिस और 129वीं वाहिनी BSF की संयुक्त टीम ग्राम अदनार के उत्तर-पश्चिम दिशा में जंगल की तलाशी ले रही थी।

सर्चिंग के दौरान जवानों को एक स्थान पर कुछ संदिग्ध गतिविधि के संकेत मिले। इलाके की बारीकी से तलाशी लेने पर वहां नक्सलियों द्वारा पूर्व में छिपाकर रखा गया हथियार और विस्फोटक सामग्री का डंप मिला।

ये हथियार और सामग्री हुई बरामद

303 राइफल – 1
315 राइफल – 4
12 बोर राइफल – 5
बैरल ग्रेनेड लॉन्चर – 2
टेलिस्कोपिक साइट – 1
जिंदा BGL शेल – 13
12 बोर कारतूस – 16
विस्फोटक पदार्थ – करीब 2 किलो
पुराने नक्सली डंप की तलाश जारी

सुरक्षा बलों के अनुसार, बरामद हथियार और अन्य सामग्री नक्सलियों ने पहले किसी स्थान पर छिपाकर रखी थी। सर्चिंग के दौरान डंप का पता चलने के बाद सभी सामग्री को सुरक्षित तरीके से जब्त किया गया।

पुलिस के मुताबिक, नारायणपुर जिले में नक्सल गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए लगातार अंदरूनी और संवेदनशील क्षेत्रों में एरिया डॉमिनेशन एवं सर्च ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं। अभियान का उद्देश्य जंगलों में पहले से छिपाकर रखे गए हथियारों, विस्फोटकों और अन्य नक्सली संसाधनों को खोजकर निष्क्रिय करना है।

बरामद हथियारों और विस्फोटक सामग्री के संबंध में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। अभियान के दौरान सामने आने वाले अन्य तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

नेपाल–तिब्बत में कुदरत का कहर: ग्लेशियर टूटने से भीषण बाढ़, 900+ मौतें और हजारों लापता

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26 अगस्त 2026 को नेपाल–चीन (तिब्बत) सीमा के हिमालयी क्षेत्र में अचानक ग्लेशियर/बर्फ और चट्टानों के बड़े हिस्से के टूटने से भारी मात्रा में पानी, बर्फ, मलबा और पत्थर नीचे की ओर तेजी से बह निकले।

इससे नेपाल के कई इलाकों में अचानक फ्लैश फ्लड यानी बेहद तेज बाढ़ आ गई। पानी के साथ आया मलबा इतना शक्तिशाली था कि घर, सड़कें, पुल और जलविद्युत परियोजनाओं के हिस्से तक बह गए। 

सबसे ज्यादा असर कहाँ हुआ?

नेपाल में रसुवा, नुवाकोट और त्रिशूली नदी के आसपास के इलाकों में भारी तबाही हुई। चीन की तरफ तिब्बत के Gyirong County और सीमा क्षेत्र भी बुरी तरह प्रभावित हुए।

त्रिशूली नदी के आसपास कई Hydropower Projects स्थित हैं। बाढ़ और मलबा इन परियोजनाओं की सुरंगों तक पहुंच गया, जिसके कारण बड़ी संख्या में कर्मचारी अंदर फंस गए या लापता हो गए। 

कितनी बड़ी है तबाही?

31 अगस्त की उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, नेपाल में आधिकारिक रूप से 794 मौतों की पुष्टि हुई है और 2,500 से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।

तिब्बत में 16 लोगों की मौत और 546 लोगों के लापता होने की जानकारी है। =

हालांकि कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में नेपाल और तिब्बत के आंकड़ों को मिलाकर 900 से अधिक मौतें और 4,700 से ज्यादा लोग लापता बताए गए हैं। इसका कारण अलग-अलग समय पर जारी किए गए अपडेट और अलग-अलग सरकारी आंकड़ों का इस्तेमाल है। इसलिए अंतिम आंकड़ा अभी तय नहीं माना जा सकता। 

अभी सबसे बड़ी चिंता:

  • हजारों लोग अभी भी लापता हैं।
  • इनमें विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
  • कई लोग जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे होने की आशंका है।
  • खराब मौसम के कारण हेलीकॉप्टर और जमीन से बचाव अभियान कई बार बाधित हुआ है। 

सुरंगों में फंसे लोगों को बचाने की कोशिश

इस हादसे का सबसे मुश्किल हिस्सा Hydropower Project की सुरंगों में फंसे लोगों को बचाना है।

बाढ़ का पानी, कीचड़ और पत्थर सुरंगों के रास्तों में भर गए हैं। कई स्थानों पर बचाव दल के लिए अंदर तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया है।

नेपाल के साथ भारत और चीन के विशेषज्ञ भी सुरंगों से लोगों को निकालने में मदद कर रहे हैं। कुछ जगहों पर सुरंग में पाइप डालकर हवा पहुंचाने की कोशिश की गई है। 

नेपाल की ओर से सैकड़ों जलविद्युत कर्मचारियों के लापता होने की सूचना है।

भारत की भूमिका क्या है?

भारत ने नेपाल के बचाव अभियान में विशेषज्ञ सहायता भेजी है।

भारतीय विशेषज्ञों की टीम विशेष रूप से सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने में सहायता कर रही है। चीन ने भी अपनी विशेष Tunnel Rescue Team भेजी है।

इसके अलावा भारत की नदियों में भी कुछ शव मिलने की सूचना मिली है, जिनके नेपाल की बाढ़ में बहकर आने की आशंका जताई गई है।

एक और खतरा: नई झील बन गई

बाढ़ के बाद स्थिति और गंभीर इसलिए हो गई क्योंकि भूस्खलन के कारण नदी का रास्ता कुछ जगहों पर बंद हो गया और पानी जमा होकर नई झील जैसी स्थिति बन गई।

ऐसी स्थिति में यदि प्राकृतिक बांध अचानक टूट जाए तो उसके पीछे जमा पानी एक और अचानक बाढ़ की लहर पैदा कर सकता है।

इसी वजह से कुछ इलाकों में बचावकर्मियों और स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों पर हटाया गया। 

खराब मौसम ने बढ़ाई मुश्किल

बचाव अभियान के दौरान लगातार बारिश और नदी का बढ़ता जलस्तर बड़ी समस्या बन रहा है।

कई जगहों पर:

  • हेलीकॉप्टर उड़ाना मुश्किल

  • सड़कें और पुल टूटे

  • मोबाइल/संचार व्यवस्था प्रभावित

  • कीचड़ और मलबे से रास्ते बंद

  • नदी का जलस्तर तेजी से बदल रहा है

  • सुरंगों में प्रवेश बेहद जोखिमपूर्ण है

इस कारण बचाव दल को बहुत सावधानी से काम करना पड़ रहा है।

क्या यह जलवायु परिवर्तन से जुड़ा है?

विशेषज्ञों और अधिकारियों ने ग्लेशियरों की अस्थिरता और बढ़ते तापमान को इस तरह की घटनाओं के बढ़ते खतरे से जोड़ा है।

हिमालय में तापमान बढ़ने से ग्लेशियर और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फ तथा चट्टानों की स्थिरता प्रभावित हो सकती है। इससे ग्लेशियर टूटने, भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।

हालांकि इस विशेष घटना के सटीक वैज्ञानिक कारणों की जांच अभी जारी है, इसलिए इसे केवल एक कारण से जोड़ना जल्दबाजी होगी।

विदेशी नागरिक भी लापता

इस हादसे में कई विदेशी नागरिकों के भी लापता होने की खबर है।

तिब्बत की तरफ अधिकारियों ने 23 देशों के 261 विदेशी नागरिकों के लापता होने की जानकारी दी थी। इनमें नेपाल और भारत के नागरिकों के साथ अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य देशों के लोग भी शामिल हैं। 

नेपाल में भी कई विदेशी पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के संपर्क में नहीं होने की खबरें आई हैं।

बचाव अभियान में कौन-कौन लगा है?

बचाव अभियान में मुख्य रूप से:

  • नेपाल सेना और सुरक्षा बल
  • चीन की रेस्क्यू टीमें
  • भारत की विशेषज्ञ टीम
  • अंतरराष्ट्रीय राहत एजेंसियां और रेड क्रॉस

शामिल हैं।

नेपाल में हजारों सुरक्षाकर्मी और स्वयंसेवक खोज एवं राहत अभियान में लगे हैं। चीन ने भी बड़ी संख्या में बचावकर्मियों, ड्रोन, उपकरण और राहत सामग्री को लगाया है।

आर्थिक नुकसान कितना?

तबाही इतनी व्यापक है कि नेपाल को कई अरब डॉलर के पुनर्निर्माण खर्च का सामना करना पड़ सकता है।

घर, सड़क, पुल, बिजली परियोजनाएं, पर्यटन क्षेत्र और स्थानीय व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। कुछ आकलनों में नुकसान को नेपाल की अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से के बराबर बताया गया है, लेकिन अंतिम आधिकारिक नुकसान का आकलन अभी बाकी है। 

अभी सबसे बड़ी प्राथमिकता क्या है?

फिलहाल सरकार और बचाव एजेंसियों की प्राथमिकता है:

1. जीवित लोगों को ढूंढना
2. सुरंगों में फंसे कर्मचारियों को निकालना
3. लापता लोगों की पहचान करना
4. शवों को बरामद कर पहचान कराना
5. प्रभावित लोगों को भोजन, पानी और चिकित्सा देना
6. नए भूस्खलन और बाढ़ से लोगों को बचाना
7. क्षतिग्रस्त सड़कों और संचार व्यवस्था को बहाल करना

सबसे महत्वपूर्ण बात

यह सिर्फ एक सामान्य बाढ़ नहीं थी। ग्लेशियर/चट्टान के टूटने से पानी और मलबे की अचानक आई बेहद शक्तिशाली लहर ने कुछ ही समय में हिमालयी घाटियों और नदी किनारे के क्षेत्रों को तबाह कर दिया।

और सबसे चिंताजनक बात यह है कि मृतकों की संख्या से भी कहीं ज्यादा लोग अभी लापता हैं। इसलिए आने वाले दिनों में मृतकों का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका है। बचाव अभियान अभी जारी है।

नोट: अलग-अलग रिपोर्टों में मृतकों और लापता लोगों के आंकड़ों में अंतर है क्योंकि नेपाल और चीन की एजेंसियां अलग-अलग समय पर आंकड़े अपडेट कर रही हैं। ऊपर मैंने 31 अगस्त 2026 तक उपलब्ध ताजा आंकड़ों और इस अंतर को ध्यान में रखकर जानकारी दी है।

चलती स्लीपर बस में नाबालिग से गैंगरेप! ड्राइवर-कंडक्टर ने सुनसान सफर में की दरिंदगी, दोनों गिरफ्तार

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 नई दिल्ली। दिल्ली के कश्मीरी गेट इलाके से नाबालिग छात्रा के साथ गैंगरेप का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि नोएडा जाने के लिए बस में बैठी 16 वर्षीय छात्रा को ड्राइवर और कंडक्टर ने अपना शिकार बनाया। वारदात के बाद दोनों आरोपी छात्रा को सड़क किनारे उतारकर फरार हो गए।


पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। वारदात में इस्तेमाल स्लीपर बस भी जब्त कर ली गई है।

बारिश और अंधेरे में बस में बैठी थी छात्रा

पुलिस के मुताबिक, छात्रा अपने परिवार से नाराज होकर घर से निकली थी और नोएडा सेक्टर-63 में रहने वाले अपने रिश्तेदार के पास जा रही थी। भारी बारिश और अंधेरे के कारण वह रास्ते में परी चौक के पास उतर गई।

इसी दौरान उसे एक स्लीपर बस दिखाई दी। छात्रा ने बस को रुकने का इशारा किया। बस में उस समय ड्राइवर और कंडक्टर के अलावा कोई यात्री नहीं था। आरोप है कि दोनों ने छात्रा से कहा कि वे नोएडा सेक्टर-63 की ओर जा रहे हैं और उसे बस में बैठा लिया।

स्लीपर बस के पर्दों के पीछे वारदात

आरोप है कि बस में बैठाने के बाद दोनों ने छात्रा के साथ अश्लील हरकतें शुरू कर दीं और बारी-बारी से उसके साथ दुष्कर्म किया। स्लीपर बस में लगे पर्दों के कारण बाहर से किसी को वारदात की जानकारी नहीं हो सकी।

घटना के बाद आरोपी छात्रा को कश्मीरी गेट बस अड्डे के पास रिंग रोड पर उतारकर फरार हो गए।

थाने पहुंचकर बताई पूरी आपबीती

घटना के बाद छात्रा कश्मीरी गेट थाने पहुंची और पुलिस को अपने साथ हुई घटना की जानकारी दी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

जांच के दौरान पुलिस ने दोनों आरोपियों को तिमारपुर इलाके की बस पार्किंग से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बस को भी कब्जे में ले लिया है। दोनों आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

ICC का बड़ा फैसला: श्रीलंका से छीनी गई महिला चैंपियंस ट्रॉफी-2027 की मेजबानी, भारत को मिल सकता है मौका

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 नई दिल्ली। इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने श्रीलंका को बड़ा झटका देते हुए महिला चैंपियंस ट्रॉफी-2027 की मेजबानी वापस ले ली है। यह टूर्नामेंट पहली बार आयोजित होने जा रहा है और इसकी मेजबानी पहले श्रीलंका को सौंपी गई थी। हालांकि, श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड और सरकार के बीच जारी विवाद तथा क्रिकेट प्रशासन में कथित सरकारी दखल के चलते आईसीसी ने यह फैसला लिया है।


महिला चैंपियंस ट्रॉफी का आयोजन 14 से 18 फरवरी 2027 के बीच प्रस्तावित है। टूर्नामेंट में छह टीमें हिस्सा लेंगी। हालांकि, श्रीलंका से मेजबानी वापस लिए जाने के बाद अब यह टूर्नामेंट किस देश में आयोजित होगा, इसकी आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है।

सरकारी दखल बना वजह

ESPNcricinfo की रिपोर्ट के अनुसार, श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड में लंबे समय से जारी सरकारी और राजनीतिक हस्तक्षेप आईसीसी के लिए चिंता का विषय रहा है। आईसीसी के नियमों के मुताबिक सदस्य देशों के क्रिकेट बोर्ड को सरकार के हस्तक्षेप से स्वतंत्र होकर काम करना होता है।

रिपोर्ट के मुताबिक आईसीसी ने श्रीलंका को क्रिकेट प्रशासन में आवश्यक सुधार करने के लिए कई बार कहा था। अपेक्षित सुधार नहीं होने के बाद आईसीसी ने मेजबानी वापस लेने का फैसला किया।

अक्टूबर में नए मेजबान का ऐलान संभव

श्रीलंका क्रिकेट के अधिकारी प्रकाश शैफ्टर ने भी पुष्टि की है कि महिला चैंपियंस ट्रॉफी अब श्रीलंका में आयोजित नहीं होगी। हालांकि, टूर्नामेंट के नए आयोजन स्थल को लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

आईसीसी की अक्टूबर में होने वाली बोर्ड बैठक में नए मेजबान देश की घोषणा किए जाने की संभावना है। इस टूर्नामेंट की मेजबानी के लिए भारत का नाम भी संभावित दावेदारों में बताया जा रहा है।

श्रीलंका की टीम के सामने भी क्वालीफिकेशन का संकट

महिला चैंपियंस ट्रॉफी में मेजबान देश के अलावा निर्धारित मानदंडों के अनुसार शीर्ष रैंकिंग वाली टीमों को जगह मिलने की बात कही गई है। श्रीलंका की महिला टीम फिलहाल आईसीसी रैंकिंग में छठे स्थान पर है।

ऐसे में मेजबानी गंवाने के बाद टीम के सीधे क्वालीफाई करने को लेकर भी स्थिति महत्वपूर्ण हो गई है। हालांकि, अंतिम क्वालीफिकेशन व्यवस्था और टीमों की सूची आईसीसी की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।

तीन साल में दूसरी बार छीनी गई मेजबानी

श्रीलंका से तीन साल के भीतर दूसरी बार किसी बड़े आईसीसी टूर्नामेंट की मेजबानी वापस ली गई है। इससे पहले 2023 में श्रीलंका से 2024 पुरुष अंडर-19 विश्व कप की मेजबानी भी वापस लेकर दक्षिण अफ्रीका को सौंप दी गई थी। उस समय भी क्रिकेट प्रशासन में सरकारी हस्तक्षेप को लेकर आईसीसी और श्रीलंका के बीच विवाद सामने आया था।

विश्व पर्यटन दिवस पुरस्कार-2026: छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड देगा 10 श्रेणियों में सम्मान, जानें कैसे कर सकते है आवेदन

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने और उत्कृष्ट कार्य करने वाले उद्यमियों, संस्थाओं एवं व्यक्तियों को प्रोत्साहित करने के लिए छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा ‘विश्व पर्यटन दिवस पुरस्कार-2026’ प्रदान किए जाएंगे। पुरस्कार योजना के तहत पर्यटन क्षेत्र से जुड़े होटल, पंजीकृत टूर ऑपरेटर, जिले, पर्यटन स्टार्टअप, रिसॉर्ट, पर्यटक सूचना केंद्र, होमस्टे, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, इको-टूरिज्म साइट और एडवेंचर टूरिज्म संचालकों को सम्मानित किया जाएगा।


इस वर्ष पुरस्कार 10 श्रेणियों में दिए जाएंगे। प्रत्येक श्रेणी के विजेता को 11 हजार रुपए की पुरस्कार राशि और मेमेंटो प्रदान किया जाएगा। पुरस्कार के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 15 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है।

इन 10 श्रेणियों में मिलेगा पुरस्कार

  1. सर्वश्रेष्ठ होटल
  2. सर्वश्रेष्ठ पंजीकृत टूर ऑपरेटर
  3. सर्वश्रेष्ठ जिला टूरिज्म प्रमोशन अवॉर्ड
  4. सर्वश्रेष्ठ पर्यटन स्टार्टअप/उद्यमिता पुरस्कार
  5. CTB Star Performer- सर्वश्रेष्ठ रिसॉर्ट
  6. CTB Star Performer- सर्वश्रेष्ठ पर्यटक सूचना केंद्र
  7. सर्वश्रेष्ठ होमस्टे
  8. सर्वश्रेष्ठ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर
  9. सर्वश्रेष्ठ इको-टूरिज्म साइट अवॉर्ड
  10. सर्वश्रेष्ठ एडवेंचर टूरिज्म अवॉर्ड

उत्कृष्ट सेवाओं और नवाचार को मिलेगा सम्मान

सर्वश्रेष्ठ होटल का चयन आतिथ्य सेवाओं, सुविधाओं, वित्तीय प्रदर्शन, वार्षिक कारोबार, आयोजित कार्यक्रमों, पर्यटन प्रचार, CSR गतिविधियों और रोजगार सृजन जैसे मानकों के आधार पर किया जाएगा। वहीं पंजीकृत टूर ऑपरेटरों के लिए पर्यटन पैकेज, परिवहन, आवास, दर्शनीय स्थलों की यात्रा, प्रचार-प्रसार, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भागीदारी तथा डिजिटल माध्यमों के उपयोग को मूल्यांकन का आधार बनाया जाएगा।

पर्यटन विकास में बेहतर काम करने वाले जिले होंगे सम्मानित

सर्वश्रेष्ठ जिला टूरिज्म प्रमोशन अवॉर्ड के लिए उन जिलों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिन्होंने पर्यटन स्थलों के विकास, गंतव्य प्रबंधन और घरेलू व विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के लिए बेहतर कार्य किया है। स्वच्छता, कचरा प्रबंधन, हरित उपाय, स्थानीय संस्कृति, ग्रामीण जीवनशैली, प्रकृति आधारित गतिविधियों और पर्यटन के माध्यम से रोजगार सृजन जैसे पहलुओं को भी मूल्यांकन में शामिल किया जाएगा।

स्टार्टअप और होमस्टे को भी मिलेगा मंच

पर्यटन क्षेत्र में नए विचारों, तकनीक और व्यावसायिक मॉडल के जरिए नवाचार करने वाले स्टार्टअप एवं उद्यमियों को पर्यटन स्टार्टअप/उद्यमिता पुरस्कार दिया जाएगा। इसी तरह सर्वश्रेष्ठ होमस्टे के चयन में बुकिंग, राजस्व, पर्यटकों की संख्या, सुविधाओं, ग्राहक समीक्षा और स्थानीय समुदाय को पर्यटन से जोड़ने के प्रयासों को महत्व दिया जाएगा।

डिजिटल प्रचार और इको-टूरिज्म पर जोर

सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर श्रेणी में छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों को रील्स, वीडियो और अन्य डिजिटल कंटेंट के माध्यम से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित करने वाले कंटेंट क्रिएटर्स को सम्मानित किया जाएगा।

वहीं इको-टूरिज्म श्रेणी में नवीकरणीय ऊर्जा, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी जैसी गतिविधियों को प्राथमिकता दी जाएगी। एडवेंचर टूरिज्म श्रेणी में कैंपिंग और अन्य साहसिक गतिविधियों के सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण संचालन तथा नए पर्यटन अनुभव विकसित करने वाले संचालकों का चयन किया जाएगा।

15 सितंबर तक भेज सकते हैं आवेदन

इच्छुक व्यक्ति, संस्थाएं और पात्र पर्यटन हितधारक अपनी प्रविष्टियां it@visitcg.in पर ई-मेल के माध्यम से भेज सकते हैं। आवेदन पत्र छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की वेबसाइट पर उपलब्ध है। आवेदन की अंतिम तिथि 15 सितंबर 2026 है।

प्राप्त आवेदनों का मूल्यांकन निर्धारित पात्रता एवं मानदंडों के आधार पर संबंधित निर्णायक समिति द्वारा किया जाएगा। पुरस्कारों का उद्देश्य पर्यटन क्षेत्र में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, नवाचार, बेहतर सेवाओं, सतत पर्यटन और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देना है।

अब धमाकों की नहीं, रेडियो की गूंज

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दूरस्थ वनांचल छिंदनार के लोगों ने सुनी प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’

ग्रामीणों ने उत्साह से सुना प्रधानमंत्री का संदेश, मंत्री, सांसद और विधायक भी रहे मौजूद

रायपुर- नक्सलवाद की समाप्ति के बाद बदलते बस्तर की नई तस्वीर रोज सामने आ रही है। आज दंतेवाड़ा के सुदूर वनांचल छिंदनार में भी एक नया नजारा देखने को मिला। पूरे देश के साथ वहां के लोगों ने भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ का प्रसारण सुना। छिंदनारवासियों के लिए यह पहला मौका था, जब पूरा गांव प्रधानमंत्री को सुनने के लिए जुटा था। प्रधानमंत्री को रेडियो पर सुनने को लेकर ग्रामीणों में विशेष उत्साह था। उन्होंने बेहद तल्लीनता से प्रधानमंत्री की बातें सुनीं। 

छिंदनार में आज बिलकुल अलग तरह का माहौल था। प्रधानमंत्री की ‘मन की बात’ को लेकर लोग खासे उत्साहित थे। गांव के कई लोगों ने आज पहली बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सुना। वन एवं पर्यावरण मंत्री केदार कश्यप, बस्तर के सांसद महेश कश्यप और दंतेवाड़ा के विधायक चैतराम अटामी ने भी ग्रामीणों के साथ ‘मन की बात’ का प्रसारण सुना। बस्तर के दूरस्थ वनांचल में आज एक नई तस्वीर दिख रही थी। कुछ महीनों पहले तक रोज धमाकों की आवाज के बीच दहशत में जीने वाले छिंदनार के लोग आज चैन से रेडियो सुन रहे थे।  

‘मन की बात’ सुनने के बाद ग्रामीणों ने कहा कि प्रधानमंत्री का यह कार्यक्रम देश को एक सूत्र में बांधता है। इसके माध्यम से वे देश के विभिन्न भागों में बदलाव लाने वाले सकारात्मक कार्यों और नवाचारों को पूरे देश के सामने रखते हैं। इससे अन्य लोग भी अच्छे कार्यों के लिए प्रेरित होते हैं। प्रधानमंत्री का यह कार्यक्रम समाज और देश के विकास के लिए जनभागीदारी की भावना को बढ़ाता है। यह कार्यक्रम नागरिकों की नई सोच, नई पहलों, अनूठी कोशिशों और नवाचारों से पूरे देश को वाकिफ कराता है और उसे पहचान दिलाता है। प्रधानमंत्री के इस कार्यक्रम से लोगों को छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश की संस्कृति, विरासत और सकारात्मक कार्यों की जानकारी मिलती है।

छिंदनार में ‘मन की बात’ के लिए लोगों का जुटना बस्तर में तेजी से आ रहे बदलावों की झलक मात्र है। पूरे बस्तर के चहुंमुखी विकास के लिए कल्याणकारी योजनाओं को हर नागरिक तक पहुंचाने के साथ ही सड़कों, मोबाइल कनेक्टीविटी, स्कूलों, अस्पतालों एवं अन्य बुनियादी जरूरतों की व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है। सरकार बस्तर के दूरस्थ और दुर्गम गांवों तक पहुंचकर नक्सलवाद के कारण दशकों तक ठप्प पड़े विकास कार्यों, बुनियादी जरूरतों और नागरिक सुविधाओं को दुरूस्त करने के लिए सक्रियता और गंभीरता से काम कर रही है।


छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड देगा ‘विश्व पर्यटन दिवस पुरस्कार-2026’, 10 श्रेणियों में होगा सम्मान

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में पर्यटन को बढ़ावा देने और पर्यटन क्षेत्र में बेहतर काम करने वाले उद्यमियों, संस्थाओं और व्यक्तियों को प्रोत्साहित करने के लिए छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड लगातार दूसरे वर्ष ‘विश्व पर्यटन दिवस पुरस्कार-2026’ प्रदान करने जा रहा है। इस बार पर्यटन क्षेत्र की पूरी श्रृंखला को ध्यान में रखते हुए 10 अलग-अलग श्रेणियों में पुरस्कार दिए जाएंगे।

प्रत्येक श्रेणी में एक विजेता का चयन किया जाएगा। विजेताओं को ₹11 हजार की पुरस्कार राशि और मेमेंटो प्रदान किया जाएगा। पुरस्कार के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 15 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। इच्छुक व्यक्ति और संस्थाएं अपनी प्रविष्टियां it@visitcg.in पर ई-मेल के माध्यम से भेज सकते हैं।

इन 10 श्रेणियों में मिलेगा पुरस्कार

छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड ने पर्यटन से जुड़े अलग-अलग क्षेत्रों को पुरस्कार योजना में शामिल किया है। इनमें—

  1. सर्वश्रेष्ठ होटल

  2. सर्वश्रेष्ठ पंजीकृत टूर ऑपरेटर

  3. सर्वश्रेष्ठ जिला टूरिज्म प्रमोशन अवॉर्ड

  4. सर्वश्रेष्ठ पर्यटन स्टार्टअप/उद्यमिता पुरस्कार

  5. CTB Star Performer – सर्वश्रेष्ठ रिसॉर्ट

  6. CTB Star Performer – पर्यटक सूचना केंद्र

  7. सर्वश्रेष्ठ होमस्टे

  8. सर्वश्रेष्ठ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर

  9. सर्वश्रेष्ठ इको टूरिज्म साइट अवॉर्ड

  10. सर्वश्रेष्ठ एडवेंचर टूरिज्म अवॉर्ड शामिल हैं।

पर्यटन के साथ पर्यावरण और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी फोकस

इस पुरस्कार की खासियत यह है कि इसमें सिर्फ पर्यटन स्थलों या होटल कारोबार को ही नहीं, बल्कि होमस्टे, डिजिटल प्रचार, इको-टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म, पर्यटन स्टार्टअप और जिला स्तर पर पर्यटन विकास जैसे क्षेत्रों को भी सम्मान के दायरे में रखा गया है।

इको-टूरिज्म श्रेणी में नवीकरणीय ऊर्जा, जल संरक्षण, कचरा प्रबंधन, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी जैसे पहलुओं को प्राथमिकता दी जाएगी। वहीं स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के अवसर पैदा करने वाली पहलों को भी महत्व मिलेगा।

सोशल मीडिया के जरिए छत्तीसगढ़ पर्यटन की ब्रांडिंग करने वालों को भी मौका

सोशल मीडिया की बढ़ती भूमिका को देखते हुए सर्वश्रेष्ठ सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर की श्रेणी भी रखी गई है। छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों पर आधारित रील्स, वीडियो और अन्य डिजिटल कंटेंट के माध्यम से राज्य की प्राकृतिक सुंदरता, संस्कृति, जनजातीय जीवन, ऐतिहासिक स्थलों और वन्यजीवों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने वाले कंटेंट क्रिएटर्स को सम्मानित किया जाएगा।

होमस्टे से गांवों की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने वालों का सम्मान

सर्वश्रेष्ठ होमस्टे श्रेणी में बुकिंग, घरेलू पर्यटकों की संख्या, राजस्व और वार्षिक वृद्धि के साथ पर्यटकों को मिलने वाली सुविधाओं का मूल्यांकन किया जाएगा। स्थानीय उत्पादों और व्यंजनों को बढ़ावा देने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के अवसर पैदा करने वाले होमस्टे को भी विशेष महत्व दिया जाएगा।

एडवेंचर टूरिज्म को भी मिलेगा प्रोत्साहन

छत्तीसगढ़ में कैंपिंग और अन्य साहसिक गतिविधियों का संचालन करने वाले श्रेष्ठ संचालक को सर्वश्रेष्ठ एडवेंचर टूरिज्म अवॉर्ड दिया जाएगा। इसमें पर्यटकों की संख्या, गंतव्य प्रबंधन, राजस्व, नए एडवेंचर प्रोडक्ट और पर्यटकों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण अनुभव उपलब्ध कराने जैसे मानकों को देखा जाएगा।

15 सितंबर तक कर सकते हैं आवेदन

पुरस्कार के लिए आवेदन पत्र छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की वेबसाइट पर उपलब्ध है। पात्र व्यक्ति, संस्थाएं और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े हितधारक अपनी प्रविष्टियां 15 सितंबर 2026 तक ई-मेल के जरिए भेज सकते हैं। प्राप्त आवेदनों का मूल्यांकन निर्धारित पात्रता और मूल्यांकन मानदंडों के आधार पर राज्य पर्यटन विभाग/निर्णायक समिति द्वारा किया जाएगा।

पर्यटन को नई पहचान देने की पहल

‘विश्व पर्यटन दिवस पुरस्कार-2026’ के जरिए छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड का उद्देश्य पर्यटन क्षेत्र में उत्कृष्टता, नवाचार, सतत पर्यटन, बेहतर सेवाओं, डिजिटल प्रचार, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को बढ़ावा देना है। इससे राज्य के पर्यटन से जुड़े विभिन्न हितधारकों को अपने काम को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का अवसर मिलेगा।

जोक नदी के पुराने पुल पर कार-बाइक में भीषण टक्कर, एक की मौत; बाइक सवार युवक लापता

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 पिथौरा/महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में रविवार को एक भीषण सड़क हादसा हो गया। सांकरा थाना क्षेत्र में जोक नदी के पुराने पुल पर कार और बाइक के बीच जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर के बाद दोनों वाहन पुल से नीचे नदी में जा गिरे। हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि बाइक सवार युवक गहरे पानी में लापता बताया जा रहा है। उसकी तलाश के लिए रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है।


कार में सवार थे चार लोग

जानकारी के मुताबिक, रविवार को कार में चार लोग सवार होकर जोक नदी पार कर रहे थे। इसी दौरान पुराने पुल पर सामने से आ रही बाइक से कार की जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों वाहन पुल से नीचे नदी में जा गिरे।

हादसे के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने तत्काल राहत-बचाव का प्रयास शुरू किया। स्थानीय लोगों ने कार में सवार तीन लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जबकि एक व्यक्ति की मौत हो गई।

बाइक सवार युवक की तलाश जारी

हादसे के दौरान बाइक सवार युवक नदी के गहरे पानी में जा गिरा और लापता हो गया। घटना की सूचना मिलते ही सांकरा पुलिस मौके पर पहुंची और राहत-बचाव कार्य शुरू कराया। लापता युवक की तलाश के लिए रेस्क्यू टीम द्वारा नदी में अभियान चलाया जा रहा है।

घायलों को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया है। पुलिस ने हादसे की परिस्थितियों की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल लापता युवक की तलाश जारी है और हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है।

विष्णु भैया की पहल से बदली तस्वीर, तालाब बना महिलाओं की तरक्की का आधार

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार महिलाओं को आजीविका के विभिन्न साधनों से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। शासन की योजनाओं और विभागीय सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं अब पारंपरिक गतिविधियों के साथ-साथ मछली पालन जैसे लाभकारी व्यवसाय को अपनाकर अपनी आय बढ़ा रही हैं।


जशपुर जिले के मनोरा और दुलदुला विकासखंड की महिला स्व-सहायता समूहों ने शासकीय तालाबों को अपनी आजीविका का आधार बनाकर आर्थिक आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल पेश की है। शासकीय तालाबों के दीर्घकालीन पट्टे, विभागीय तकनीकी मार्गदर्शन और समूह की महिलाओं की मेहनत ने मछली पालन को उनके लिए आय का मजबूत जरिया बना दिया है।

भभरी में तालाब बना समृद्धि का माध्यम

जशपुर जिले के विकासखंड मनोरा के ग्राम भभरी में कमल महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं पिछले तीन वर्षों से ग्राम पंचायत के 0.700 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले शासकीय तालाब में 10 वर्षीय पट्टे के माध्यम से मछली पालन कर रही हैं। समूह की महिलाओं ने सामूहिक प्रयास और विभागीय मार्गदर्शन से मछली पालन को सफल आजीविका गतिविधि के रूप में विकसित किया है।

समूह द्वारा प्रतिवर्ष लगभग 3 क्विंटल मछली का उत्पादन किया जा रहा है, जिससे करीब 6 लाख रुपये का वार्षिक विक्रय प्राप्त हो रहा है। इस आय से महिलाओं की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है। अब वे घरेलू जरूरतों के साथ बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक खर्चों को भी बेहतर ढंग से पूरा कर पा रही हैं।

सिमड़ा की महिलाओं ने लिखी आत्मनिर्भरता की नई कहानी

दुलदुला विकासखंड के ग्राम सिमड़ा में दीप महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं भी पिछले तीन वर्षों से 0.800 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले शासकीय तालाब में मछली पालन कर रही हैं। समूह ने संगठित प्रयासों और निरंतर मेहनत से इस गतिविधि को आय के प्रभावी साधन में बदल दिया है।

समूह द्वारा प्रतिवर्ष लगभग 3.30 क्विंटल मछली का उत्पादन किया जा रहा है, जिससे लगभग 6.93 लाख रुपये का वार्षिक विक्रय प्राप्त हो रहा है। इससे समूह की महिलाओं की आय में वृद्धि हुई है और वे आर्थिक रूप से पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुई हैं।

शासकीय योजनाओं ने खोले आत्मनिर्भरता के नए रास्ते

महिला स्व-सहायता समूहों को शासकीय तालाबों का पट्टा उपलब्ध कराने, तकनीकी मार्गदर्शन देने और आजीविका गतिविधियों से जोड़ने की पहल ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक मजबूती का आधार बन रही है। मछली पालन से प्राप्त आय ने महिलाओं को परिवार की आर्थिक जरूरतों में अधिक प्रभावी भूमिका निभाने का अवसर दिया है।

समूह की महिलाओं का कहना है कि पहले आय के सीमित साधनों के कारण परिवार का खर्च चलाना चुनौतीपूर्ण था। मछली पालन शुरू करने के बाद नियमित आय का माध्यम मिला और अब वे स्वयं अपनी आजीविका गतिविधियों का संचालन करने के साथ आर्थिक निर्णयों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

अन्य महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा

कमल महिला स्व-सहायता समूह और दीप महिला स्व-सहायता समूह की सफलता यह साबित करती है कि शासन की योजनाओं का प्रभावी लाभ, सामूहिक प्रयास और सही मार्गदर्शन मिलकर ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। आज इन समूहों की महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ गांव की स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने में भी योगदान दे रही हैं।

नारी के सम्मान, सुरक्षा और स्वावलंबन से ही बनेगा समृद्ध छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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 रायपुर :  जब नारी शक्ति आगे बढ़ती है तो उसके साथ परिवार, समाज और पूरा देश आगे बढ़ता है। महिलाओं को सम्मान, सुरक्षा, समान अवसर और आर्थिक स्वावलंबन प्रदान करना हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। हमारी सरकार का संकल्प है कि छत्तीसगढ़ की हर बेटी को अपने सपने पूरे करने का अवसर मिले और हर महिला आत्मविश्वास एवं आत्मसम्मान के साथ आगे बढ़े।


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजधानी रायपुर स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय परिसर के अटल बिहारी वाजपेयी सभागृह में छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग द्वारा आयोजित ‘नारी शक्ति सम्मान समारोह’ को संबोधित करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर चिकित्सा, शिक्षा, खेल, साइबर सुरक्षा, पत्रकारिता, कला एवं संस्कृति, कृषि, महिला उद्यमिता, सामाजिक सेवा और महिला सुरक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिलाओं को सम्मानित किया। उन्होंने नारी शक्ति सम्मान समारोह पर आधारित ब्रोशर का विमोचन किया।


सम्मानित महिलाएं हमारी बेटियों के लिए प्रेरणा

मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने सम्मानित महिलाओं को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इन महिलाओं ने अपने परिश्रम, प्रतिभा, साहस और संकल्प से अलग-अलग क्षेत्रों में विशिष्ट पहचान बनाई है। उनकी उपलब्धियां केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं हैं, बल्कि उन हजारों बेटियों के लिए प्रेरणा हैं, जो अपने सपनों को साकार करने के लिए आगे बढ़ रही हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसी महिलाओं का सम्मान वास्तव में उस नारी शक्ति का सम्मान है, जो परिवार को संस्कार देती है, समाज को दिशा देती है और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। छत्तीसगढ़ की महिलाएं आज खेती-किसानी से लेकर उद्यमिता, शिक्षा, खेल, सामाजिक सेवा और आधुनिक तकनीक तक हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को सदैव सर्वोच्च स्थान दिया गया है। हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि जहां नारी का सम्मान होता है, वहां देवताओं का वास होता है। लक्ष्मी-नारायण, उमा-महेश्वर, सिया-राम और राधा-कृष्ण जैसे संबोधन हमारी उस सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक हैं, जिसमें नारी को शक्ति, करुणा, सृजन और संस्कार का आधार माना गया है। राज्य सरकार इसी भावना को योजनाओं और नीतियों के माध्यम से धरातल पर उतार रही है।

महिला आयोग न्याय के साथ जागरूकता का भी बने सशक्त माध्यम

मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की नवनियुक्त अध्यक्ष डॉ. ममता साहू को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उन्हें अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील जिम्मेदारी मिली है। उनका सामाजिक एवं सार्वजनिक जीवन का अनुभव, कानून की समझ और उच्च शिक्षा इस दायित्व के निर्वहन में उपयोगी सिद्ध होगी।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि डॉ. ममता साहू के नेतृत्व में राज्य महिला आयोग प्रदेश की माताओं-बहनों को न्याय दिलाने, उनके अधिकारों की रक्षा करने और पीड़ित महिलाओं तक कानूनी सहायता पहुंचाने में प्रभावी भूमिका निभाएगा।

उन्होंने कहा कि महिला आयोग की भूमिका केवल शिकायतों के निराकरण तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। आयोग गांवों, कस्बों, जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचे तथा महिलाओं को उनके कानूनी और संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करे। महिलाओं को यह भरोसा होना चाहिए कि किसी भी कठिन परिस्थिति में शासन और उसकी संस्थाएं संवेदनशीलता के साथ उनके साथ खड़ी हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नारी शक्ति को मिले नए अवसर

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में नारी शक्ति को नई पहचान, सम्मान और आगे बढ़ने के अभूतपूर्व अवसर मिले हैं। ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान ने बेटियों के प्रति सामाजिक सोच में सकारात्मक बदलाव लाने का काम किया है। महिलाओं की भागीदारी और प्रतिनिधित्व बढ़ाने की दिशा में भी ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि आज देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू का आसीन होना पूरे देश की नारी शक्ति के लिए गौरव और प्रेरणा का विषय है। प्रधानमंत्री श्री मोदी की सोच है कि विकसित भारत की यात्रा महिलाओं के नेतृत्व और उनकी सक्रिय भागीदारी के बिना पूरी नहीं हो सकती। छत्तीसगढ़ सरकार भी इसी संकल्प के साथ प्रदेश की मातृशक्ति को विकास की मुख्यधारा में और अधिक मजबूती से जोड़ रही है।

महतारी वंदन योजना ने बढ़ाया बहनों का आत्मविश्वास

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं का आर्थिक स्वावलंबन उनके सशक्तिकरण की सबसे मजबूत नींव है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की 68 लाख से अधिक महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। योजना की 31 किस्तें महिलाओं के खातों में अंतरित की जा चुकी हैं।

उन्होंने कहा कि यह राशि केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और अपने निर्णय स्वयं लेने की क्षमता को मजबूत करने का माध्यम बनी है। गांवों की महिलाएं इस राशि का उपयोग अपनी छोटी-छोटी आवश्यकताओं, बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य तथा स्वरोजगार से जुड़ी गतिविधियों में कर रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्षाबंधन जैसे महत्वपूर्ण पर्व को ध्यान में रखते हुए सरकार ने बहनों के खातों में सहायता राशि समय से पहले अंतरित की। प्रदेश की माताओं-बहनों की खुशियां और उनकी आवश्यकताएं सरकार की प्राथमिकता हैं।

13.85 लाख से अधिक लखपति दीदियां बनीं आत्मनिर्भरता की पहचान

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश की महिलाएं आज स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। सिलाई-कढ़ाई, कृषि एवं वनोपज आधारित गतिविधियों, लघु उद्योग और स्वरोजगार के साथ महिलाएं अब ड्रोन संचालन जैसे आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में भी आगे बढ़ रही हैं।

प्रदेश में 13 लाख 85 हजार से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। यह केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि लाखों परिवारों के जीवन में आए सकारात्मक आर्थिक परिवर्तन का प्रमाण है। सरकार का प्रयास है कि अधिक से अधिक महिलाओं को कौशल, पूंजी, बाजार और तकनीक से जोड़कर उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराए जाएं।

‘महतारी गौरव वर्ष’ मातृशक्ति के योगदान को समर्पित

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2026 को ‘महतारी गौरव वर्ष’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। यह वर्ष छत्तीसगढ़ की मातृशक्ति के योगदान को सम्मान देने के साथ उनके लिए नए अवसरों के सृजन का भी वर्ष है।

उन्होंने कहा कि बेटियों की शिक्षा से लेकर महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन तक सरकार व्यापक स्तर पर कार्य कर रही है। सरस्वती साइकिल योजना के माध्यम से बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित किया जा रहा है। ‘मेरी बेटी, मेरा अभिमान’ पहल के तहत प्रदेश में 6 हजार 671 बालिका शौचालयों के निर्माण की स्वीकृति दी गई है, ताकि बेटियों को विद्यालयों में बेहतर और सुविधाजनक वातावरण मिल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला स्व-सहायता समूहों को प्रशिक्षण, बैठक और आर्थिक गतिविधियों के लिए बेहतर स्थान उपलब्ध कराने हेतु प्रदेश में 481 महतारी सदनों का निर्माण किया जा रहा है। हाल ही में जशपुर प्रवास के दौरान तीन महतारी सदनों का लोकार्पण भी किया गया है। रेडी-टू-ईट कार्यक्रम का संचालन भी महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से किया जा रहा है, जिससे महिलाओं के लिए आजीविका के नए अवसर सृजित हो रहे हैं।

महिलाओं के नाम संपत्ति से मजबूत हो रहा आर्थिक आधार

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महिलाओं के आर्थिक अधिकार को मजबूत बनाने के उद्देश्य से उनके नाम पर संपत्ति पंजीयन को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। महिलाओं के नाम जमीन और संपत्ति होने से उनका आर्थिक आधार मजबूत होता है तथा परिवार में उनकी भागीदारी और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है।

उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में दी जा रही रियायतों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं और बड़ी संख्या में संपत्तियों का पंजीयन महिलाओं के नाम पर हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नारी सशक्तिकरण केवल योजनाओं तक सीमित विषय नहीं है। इसके लिए समाज की सोच और व्यवस्था दोनों में सकारात्मक परिवर्तन जरूरी है। हमारी बेटियों को अच्छी शिक्षा मिले, युवतियों को रोजगार और उद्यमिता के अवसर मिलें, महिलाओं को सुरक्षा और सम्मान मिले तथा आवश्यकता पड़ने पर त्वरित न्याय मिले - सरकार इसी समग्र दृष्टिकोण के साथ कार्य कर रही है।

उन्होंने कहा कि जब एक बेटी पढ़ती है तो एक पीढ़ी शिक्षित होती है और जब एक महिला आत्मनिर्भर बनती है तो पूरा परिवार आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ता है। नारी शक्ति के सम्मान, सुरक्षा और स्वावलंबन से ही समृद्ध एवं विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार किया जा सकता है।

केंद्रीय राज्य मंत्री  तोखन साहू ने कहा कि महिला आयोग पीड़ित और जरूरतमंद महिलाओं के लिए आशा, विश्वास और न्याय का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने आयोग की नवनियुक्त अध्यक्ष डॉ. ममता साहू को बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में आयोग महिलाओं के अधिकारों के संरक्षण और उनके उत्थान के लिए प्रभावी कार्य करेगा।
उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति में मातृशक्ति को विशेष स्थान प्राप्त है। नारी के सम्मान और सशक्तिकरण के बिना समाज के समग्र विकास की कल्पना नहीं की जा सकती।

उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने कहा कि प्रत्येक माता-पिता का सपना होता है कि उनके बच्चे जीवन में ऊंचा मुकाम हासिल करें। आज यह सुखद अवसर है कि महिला आयोग की नवनियुक्त अध्यक्ष डॉ. ममता साहू के पिता श्री कृपाराम साहू भी अपनी पुत्री को महत्वपूर्ण दायित्व संभालते हुए देख रहे हैं।उन्होंने डॉ. ममता साहू को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में महिला आयोग प्रदेश की माताओं-बहनों के सशक्तिकरण और पीड़ित महिलाओं को त्वरित न्याय दिलाने के लिए संवेदनशीलता एवं प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेगा।

उप मुख्यमंत्री साव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश नारी शक्ति के सम्मान और सशक्तिकरण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के बिना न परिवार की प्रगति संभव है और न ही समाज एवं राष्ट्र का समग्र विकास। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ भी सशक्त, खुशहाल और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर रजत उत्सव दिवस मनाया जा रहा है। यह प्रदेश में महिलाओं के अधिकारों और सम्मान की रक्षा की दिशा में आयोग की लंबी यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश की महिलाएं तेजी से आत्मनिर्भर और सशक्त बन रही हैं। महतारी वंदन योजना सहित विभिन्न योजनाओं ने महिलाओं के आत्मविश्वास और स्वाभिमान को नई मजबूती दी है।

कार्यक्रम में राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा, संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल, राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा, विधायक पुरंदर मिश्रा, विधायक  मोतीलाल साहू, रायपुर महापौर मीनल चौबे, अंबिकापुर नगर निगम की महापौर मंजूषा भगत, छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू, विभिन्न निगम-मंडल एवं आयोगों के अध्यक्षगण, संतजन सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी तथा विभिन्न क्षेत्रों की प्रबुद्ध महिलाएं उपस्थित थीं।

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