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भारत अगली औद्योगिक क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जो जैव प्रौद्योगिकी और AI से संचालित होगी: डॉ. जितेंद्र सिंह

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डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि भारत अगली औद्योगिक क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि अगली औद्योगिक क्रांति जैव प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से संचालित होगी, जबकि पिछली औद्योगिक क्रांति IT आधारित थी और भारत उसमें देर से शामिल हुआ था।

एक मीडिया कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत अब दुनिया के उन शुरुआती देशों में शामिल है, जिनके पास समर्पित जैव प्रौद्योगिकी नीति ‘BioE3’ है। इसके अलावा भारत के पास राष्ट्रीय क्वांटम मिशन और इंडिया AI मिशन भी हैं तथा अंतरिक्ष और अन्य उभरते क्षेत्रों में देश ने तेजी से प्रगति की है।

उन्होंने बताया कि भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था, जो पहले लगभग नगण्य थी, अब करीब 9 अरब अमेरिकी डॉलर की हो गई है और अगले 8 से 9 वर्षों में 40–45 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

मीडिया कॉन्क्लेव में प्रौद्योगिकी डेवलपर्स, उद्योग जगत के नेताओं और अन्य हितधारकों के साथ संवाद करते हुए मंत्री ने भारत के वैश्विक विनिर्माण और प्रौद्योगिकी केंद्र के रूप में उभरने, तकनीकी बदलाव की तेज गति, नवाचार, निजी क्षेत्र की भागीदारी और उभरते क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों पर चर्चा की। उन्होंने डिजिटल अप्लायंस अवॉर्ड्स के विजेताओं को भी बधाई दी।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की तकनीकी यात्रा में बड़ा बदलाव आया है और आज देश कई क्षेत्रों में वैश्विक मानकों के अनुरूप काम कर रहा है। अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने चंद्रयान मिशन द्वारा चंद्रमा पर जल अणुओं के प्रमाण का पता लगाने को वैश्विक वैज्ञानिक ज्ञान में भारत के योगदान का उदाहरण बताया।

उन्होंने कहा कि भारत में कभी प्रतिभा या वैज्ञानिक क्षमता की कमी नहीं रही, बल्कि आवश्यकता ऐसे सक्षम नीतिगत वातावरण की थी, जो इन क्षमताओं को वास्तविक उपलब्धियों में बदल सके।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पारंपरिक विनिर्माण के साथ-साथ जैव प्रौद्योगिकी, सर्कुलर इकोनॉमी, रीसाइक्लिंग और अन्य तकनीक-आधारित क्षेत्रों की ओर बढ़ रही है। उनके अनुसार औद्योगिक परिवर्तन का अगला चरण मुख्य रूप से AI और जैव प्रौद्योगिकी से संचालित होने की संभावना है।

उन्होंने कहा कि भारत इस बदलाव का पहले से ही हिस्सा है और उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जिनके पास समर्पित जैव प्रौद्योगिकी नीति है। सरकार की BioE3 पहल—Biotechnology for Economy, Employment and Environment का उद्देश्य देश में जैव प्रौद्योगिकी के मजबूत इकोसिस्टम का निर्माण करना है। जैव प्रौद्योगिकी का प्रभाव चिकित्सा विज्ञान, कृषि और खाद्य उत्पादन पर बढ़ेगा तथा इससे आर्थिक विकास और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोले जाने का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि इस निर्णय ने यह साबित किया है कि सक्षम नीतिगत ढांचा देश की क्षमताओं को किस तरह सामने ला सकता है। उन्होंने कहा कि भारतीय अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था अब करीब 9 अरब डॉलर की है और तेजी से विस्तार कर रही है।

उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप्स के उभरने को इस बदलाव का उदाहरण बताया। कई भारतीय कंपनियों ने अपने रॉकेट विकसित किए हैं और कुछ ने कुछ ही वर्षों में यूनिकॉर्न का दर्जा हासिल किया है। उन्होंने कहा कि भारत में प्रतिभा और क्षमता पहले से मौजूद थी, अब उस क्षमता का इस्तेमाल करने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जा रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार उन क्षेत्रों में भी निजी क्षेत्र को तेजी से शामिल कर रही है, जो पहले मुख्य रूप से सरकारी क्षेत्र तक सीमित थे। परमाणु क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इससे नए अवसर पैदा होंगे, लेकिन उद्योग जगत को भी उभरते क्षेत्रों के लिए आवश्यक क्षमताएं विकसित करने के लिए तैयार रहना होगा।

उन्होंने कहा कि 2047 के भारत के विजन से जुड़े अवसरों का लाभ उठाने के लिए देश के पास सीमित समय है। वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए प्रत्येक क्षेत्र को विकसित होना होगा और निजी क्षेत्र को नए क्षेत्रों में भागीदारी के लिए तैयार रहना होगा। सरकार इस बदलाव के लिए आवश्यक अनुकूल वातावरण तैयार कर रही है।

मंत्री ने कहा कि तकनीक शिक्षा और अवसरों तक पहुंच को भी बदल रही है, खासकर महानगरों से बाहर रहने वाले युवाओं के लिए। उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के एक छात्र के साथ अपनी बातचीत का उल्लेख किया, जिसने डिजिटल लर्निंग संसाधनों की मदद से IIT-JEE परीक्षा उत्तीर्ण की। उन्होंने कहा कि तकनीक ने शिक्षा के ऐसे अवसरों तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाया है, जो पहले कई लोगों के लिए कठिन थे।

उन्होंने कहा कि भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम भी यह दर्शाता है कि नवाचार अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। छोटे शहरों से भी बड़ी संख्या में युवा उद्यमी सामने आ रहे हैं। तकनीक तक पहुंच और उसका प्रभावी उपयोग युवा भारतीयों के लिए नए अवसर पैदा कर रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने पुराने कानूनों और प्रक्रियाओं को समाप्त करने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि करीब 2,000 अप्रचलित कानूनों को हटाया गया है, जिनमें ऐसे प्रावधान भी शामिल थे जो सामाजिक और प्रशासनिक बदलावों के बावजूद पुराने दौर से चले आ रहे थे।

उन्होंने अविवाहित बेटियों के लिए पारिवारिक पेंशन अधिकार, महिला सरकारी कर्मचारियों के नामांकन अधिकार और 10 वर्ष की सेवा पूरी करने से पहले मृत्यु होने वाले कर्मचारियों के परिवारों से जुड़े पेंशन प्रावधानों में किए गए सुधारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बड़ी संख्या में दस्तावेजों के लिए राजपत्रित अधिकारी से सत्यापन की अनिवार्यता समाप्त करने के फैसले को भी याद किया और कहा कि यह नागरिकों तथा युवाओं के प्रति बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि 2047 के भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को केवल अनुकरण करने वाले राष्ट्र की भूमिका से आगे बढ़ना होगा और ऐसी क्षमताओं एवं नवाचारों को विकसित करना होगा, जिन्हें दूसरे देश भी अपनाना चाहें। इसके लिए सरकार और उद्योग के बीच बेहतर सहयोग आवश्यक है।

उन्होंने सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बीच व्यापक साझेदारी का आह्वान करते हुए कहा कि दोनों पक्षों के बीच पहले मौजूद संदेह को आपसी सीख और सहयोग से बदलना होगा। सरकार और उद्योग को एक-दूसरे से सीखते हुए प्रभावी कार्यप्रणालियों को अपनाना और बेहतर तालमेल के साथ काम करना होगा।

मंत्री ने कहा कि भारत के बड़े विकासात्मक, तकनीकी और आर्थिक लक्ष्यों को हासिल करने के लिए “पूरी सरकार के साथ पूरा राष्ट्र” (Whole of Government + Whole of Nation) का दृष्टिकोण आवश्यक होगा।

असम के बाढ़ प्रभावितों की सहायता के लिए छत्तीसगढ़ सरकार देगी 5 करोड़ रुपये

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने असम के मुख्यमंत्री श्री हिमंत बिस्वा सरमा से दूरभाष पर की चर्चा

संकट की इस घड़ी में असम के भाई-बहनों के साथ पूरी एकजुटता से खड़ा है छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री साय

रायपुर- असम में बाढ़ से उत्पन्न गंभीर परिस्थितियों के बीच मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मानवीय संवेदना और अंतरराज्यीय सहयोग की भावना के साथ बाढ़ प्रभावित लोगों की सहायता के लिए छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से 5 करोड़ रुपये की सहायता राशि प्रदान करने का निर्णय लिया है। यह राशि असम में चल रहे राहत एवं पुनर्वास कार्यों में सहयोग के लिए प्रदान की जाएगी।

मुख्यमंत्री साय ने आज असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से दूरभाष पर चर्चा कर राज्य में बाढ़ से उत्पन्न परिस्थितियों की जानकारी ली। उन्होंने बाढ़ के कारण प्रभावित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि प्राकृतिक आपदा की इस कठिन घड़ी में छत्तीसगढ़ की जनता असम के अपने भाई-बहनों के साथ पूरी एकजुटता से खड़ी है।

प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी के तहत 1.25 करोड़ से अधिक घर स्वीकृत, 1 करोड़ से ज्यादा मकान लाभार्थियों को सौंपे गए

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी (PMAY-U) ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। योजना के तहत PMAY-U और PMAY-U 2.0 में 1.25 करोड़ से अधिक मकान स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिनमें से 1 करोड़ से अधिक मकान बनकर तैयार होकर लाभार्थियों को सौंपे जा चुके हैं। सरकार अब PMAY-U 2.0 के कार्यान्वयन को और तेज कर पात्र शहरी परिवारों को किफायती आवास उपलब्ध कराने पर जोर दे रही है।

इसी क्रम में PMAY-U 2.0 के तहत केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति (CSMC) की 8वीं बैठक 6 अगस्त 2026 को नई दिल्ली स्थित संकल्प भवन में आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) के सचिव सतेंद्र सिंह ने की। बैठक में योजना की प्रगति की समीक्षा के साथ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त अतिरिक्त आवास प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।

बैठक में आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के परिवारों के लिए 2.09 लाख से अधिक मकानों को मंजूरी दी गई।

इनमें करीब 1.42 लाख मकान लाभार्थी आधारित निर्माण (BLC) श्रेणी के तहत स्वीकृत किए गए हैं। इस श्रेणी में लाभार्थियों को अपनी जमीन पर पक्का मकान बनाने के लिए ₹2.5 लाख तक की वित्तीय सहायता दी जाती है। वहीं, 67,045 मकान किफायती आवास साझेदारी (AHP) श्रेणी के तहत स्वीकृत हुए हैं। इसके अंतर्गत सार्वजनिक और निजी एजेंसियां राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर किफायती आवास परियोजनाएं विकसित करती हैं।

नवीनतम स्वीकृतियों के साथ PMAY-U 2.0 के तहत स्वीकृत मकानों की कुल संख्या 18.38 लाख से अधिक हो गई है। इनमें 14.40 लाख BLC, 2.48 लाख AHP, 1.36 लाख ब्याज सब्सिडी योजना (ISS) के लाभार्थियों के लिए और 13,046 किफायती किराये के आवास (ARH) के तहत स्वीकृत किए गए हैं।

बैठक के दौरान आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव ने योजना की व्यापक समीक्षा की। इसमें राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में कार्यान्वयन की गति, स्वीकृत मकानों का समय पर निर्माण और पूर्णता, जियो-टैगिंग, धनराशि का उपयोग, लाभार्थियों का सत्यापन, मकानों की वास्तविक स्थिति तथा PMAY-U और PMAY-U 2.0 की समग्र प्रगति का आकलन किया गया।

सचिव ने योजना के तेजी से क्रियान्वयन, समय पर धनराशि जारी करने, प्रभावी निगरानी और सभी हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समिति नियमित रूप से बैठक कर योजना की प्रगति की समीक्षा करेगी, समय पर स्वीकृतियां सुनिश्चित करेगी और कार्यान्वयन से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करेगी।

PMAY-U 2.0 केवल आवास उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शहरी परिवारों के सामाजिक समावेशन, बेहतर जीवन स्तर और आर्थिक सुरक्षा को भी बढ़ावा दे रही है। योजना में महिलाओं, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), अल्पसंख्यकों, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों और अन्य वंचित वर्गों की आवासीय जरूरतों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

CSMC की 8वीं बैठक में स्वीकृत 2.09 लाख मकानों में से 2.03 लाख मकान महिलाओं के नाम आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा 16,662 मकान वरिष्ठ नागरिकों, 21,954 मकान SC लाभार्थियों, 14,252 मकान ST लाभार्थियों और 75,511 मकान OBC लाभार्थियों के लिए स्वीकृत किए गए हैं।

PMAY-U और PMAY-U 2.0 के तहत अब तक स्वीकृत 1.25 करोड़ मकानों में से 1 करोड़ मकान महिलाओं के नाम यानी परिवार की महिला मुखिया के नाम या संयुक्त स्वामित्व में आवंटित किए गए हैं। यह प्रधानमंत्री के ‘नारी शक्ति’ पर जोर के अनुरूप महिलाओं की संपत्ति में हिस्सेदारी और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

PMAY-U की शुरुआत जून 2015 में ‘सभी के लिए आवास’ के लक्ष्य के साथ की गई थी। अब PMAY-U 2.0 इसी लक्ष्य को आगे बढ़ाते हुए शहरी भारत के अतिरिक्त 1 करोड़ पात्र EWS/LIG/MIG परिवारों की आवास जरूरतों को पूरा करने पर केंद्रित है, जिनकी वार्षिक आय ₹9 लाख तक है।

PMAY-U 2.0 के विभिन्न घटकों के माध्यम से लाभार्थियों को अपना घर बनाने, किफायती आवास परियोजनाओं में घर प्राप्त करने, होम लोन पर ब्याज सब्सिडी का लाभ लेने और गुणवत्तापूर्ण किराये का आवास प्राप्त करने के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने दुनिया को भारत की सैन्य शक्ति और नागरिकों की सुरक्षा के संकल्प का संदेश दिया: राजनाथ सिंह

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नई दिल्ली- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने भारतीय सशस्त्र बलों के अद्वितीय शौर्य और पराक्रम को प्रदर्शित किया तथा पूरी दुनिया को यह संदेश दिया कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और हमारी महिलाओं के सिंदूर की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।

रक्षा मंत्री 9 अगस्त 2026 को दिल्ली कैंट स्थित बेस अस्पताल में आयोजित ‘सिंदूर महारक्तदान यात्रा’ रक्तदान शिविर को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने भारतीय रक्षा बलों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने पाकिस्तान में स्थित आतंकवादियों और उनके आकाओं का सफाया किया तथा भारत की ओर बुरी नजर से देखने वालों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़े।

‘सिंदूर महारक्तदान यात्रा’ की तुलना ऑपरेशन सिंदूर से करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि जहां ऑपरेशन सिंदूर ने साहस और शौर्य का परिचय दिया, वहीं यह विशाल रक्तदान शिविर करुणा और मानव सेवा का प्रतीक है। शिविर में महाराष्ट्र के लगभग 1,000 पहलवानों और खिलाड़ियों ने रक्तदान कर निस्वार्थ सेवा और सशस्त्र बलों के प्रति एकजुटता की भावना का प्रदर्शन किया।

रक्तदाताओं का आभार व्यक्त करते हुए रक्षा मंत्री ने विश्वास जताया कि आज दान किया गया रक्त भविष्य में जरूरतमंद सैनिकों और उनके परिवारों के लिए महत्वपूर्ण भंडार के रूप में काम आएगा। उन्होंने रक्तदान को ‘जीवनदान’ और ‘महादान’ बताते हुए कहा कि विज्ञान और चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति के बावजूद मानव रक्त का अभी तक कोई कृत्रिम विकल्प विकसित नहीं किया जा सका है। रक्त केवल मानव शरीर द्वारा ही बनाया जा सकता है और एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को रक्तदान कर सकता है। इसलिए रक्तदान मानव सेवा और परोपकार के सबसे महान कार्यों में से एक है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रत्येक रक्तदाता और रक्त प्राप्त करने वाला व्यक्ति अपने-अपने तरीके से राष्ट्र की सेवा कर रहा है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से रक्तदान को अपनी जीवनशैली और सामाजिक संस्कृति का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि जब भारत वर्ष 2047 में स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब हमारा लक्ष्य केवल विकसित अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं होना चाहिए। हमें एक ऐसे संवेदनशील समाज की भी कल्पना करनी चाहिए, जहां लोग स्वस्थ और सुरक्षित हों तथा जरूरत के समय रक्त जैसी जीवनरक्षक सामग्री आसानी से उपलब्ध हो।

युवाओं से फिटनेस को प्राथमिकता देने का आह्वान करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि स्वस्थ और फिट व्यक्ति समाज के लिए अधिक उपयोगी होता है और रक्तदान जैसे नेक कार्यों में बेहतर योगदान दे सकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ‘खेलो इंडिया’ और ‘फिट इंडिया’ जैसी पहलों के माध्यम से विशेष रूप से युवाओं को फिटनेस को जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

महाराष्ट्र की वीरता और करुणा की समृद्ध परंपरा का उल्लेख करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत आज भी पीढ़ियों को प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि शारीरिक शक्ति का वास्तविक उद्देश्य दूसरों की रक्षा करना और राष्ट्र की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। छत्रपति शिवाजी महाराज की भूमि से आए खिलाड़ियों और पहलवानों का यह योगदान राष्ट्र के लिए एक महान सेवा के रूप में याद रखा जाएगा।

कार्यक्रम में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रताप राव जाधव, महाराष्ट्र सरकार के उद्योग मंत्री उदय रविंद्र सामंत, सांसद डॉ. श्रीकांत लता एकनाथ शिंदे, थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, सशस्त्र सेना चिकित्सा सेवा (AFMS) के महानिदेशक सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन, एडजुटेंट जनरल लेफ्टिनेंट जनरल वी.पी.एस. कौशिक, बेस अस्पताल दिल्ली कैंट के कमांडेंट मेजर जनरल विशाल चौधरी सहित वरिष्ठ सैन्य एवं नागरिक अधिकारी उपस्थित रहे।

सशस्त्र सेना चिकित्सा सेवा (AFMS) के लिए पर्याप्त रक्त भंडार बनाए रखना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि सैन्य अस्पताल नियमित स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ ऑपरेशनल, ट्रॉमा और आपातकालीन परिस्थितियों में भी चिकित्सा सहायता प्रदान करते हैं। लगभग 500 स्वैच्छिक रक्तदाताओं की भागीदारी ने ‘सेवा परमो धर्म’ की भावना को मजबूत किया और यह संदेश दिया कि प्रत्येक पात्र नागरिक नियमित स्वैच्छिक रक्तदान के माध्यम से जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

विश्व आदिवासी दिवस पर गरियाबंद में भव्य आयोजन, AAP सांसद संजय सिंह होंगे शामिल

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गरियाबंद- विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आज 9 अगस्त को गरियाबंद में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम में आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह के शामिल होने की खबर है।

कार्यक्रम के दौरान आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा, अधिकारों और योगदान को रेखांकित किया जाएगा। साथ ही, समाज के विकास, शिक्षा, रोजगार और जनहित से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम को लेकर स्थानीय स्तर पर उत्साह देखा जा रहा है। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और आदिवासी समाज के लोगों की मौजूदगी रहने की संभावना है।

UPI को लेकर बड़ा अपडेट: ग्राहकों के लिए भुगतान रहेगा मुफ्त, व्यापारियों पर लग सकता है मामूली शुल्क

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भारत में डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लेकर एक अहम अपडेट सामने आया है। UPI के जरिए भुगतान करने वाले आम ग्राहकों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, यानी नागरिकों के लिए UPI पेमेंट पहले की तरह मुफ्त रहने की संभावना है। वहीं, कुछ मामलों में व्यापारियों से मामूली शुल्क लिए जाने पर चर्चा चल रही है।

UPI देश में डिजिटल लेनदेन का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन चुका है और करोड़ों लोग रोजमर्रा के भुगतान के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में ग्राहकों पर किसी तरह का अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाने से डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

व्यापारियों से संभावित शुल्क को लेकर अंतिम व्यवस्था और नियमों का स्पष्ट होना अभी बाकी है।

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने अंडमान-निकोबार में ‘हर घर तिरंगा अभियान’ का किया शुभारंभ

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उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज अगस्त क्रांति दिवस के अवसर पर, 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन की स्मृति में, श्री विजय पुरम स्थित फ्लैग प्वाइंट पर राष्ट्रीय ध्वज फहराकर ‘हर घर तिरंगा अभियान’ का शुभारंभ किया।

डीबीआरएआईटी सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह एवं ‘वंदे मातरम्’ पर आधारित तिरंगा कॉन्सर्ट को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि इस अभियान के शुभारंभ के लिए इन ऐतिहासिक द्वीपों से अधिक उपयुक्त स्थान कोई और नहीं हो सकता। ये द्वीप भारत के स्वतंत्रता संग्राम और तिरंगे के इतिहास से गहराई से जुड़े हुए हैं।

महान तमिल कवि सुब्रमण्यम भारती के अमर शब्दों को याद करते हुए सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि भारती द्वारा ‘मणि कोडी’ की स्तुति भारतीय आत्मा के शाश्वत साहस और भारत माता के ध्वज की महिमा को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि हर घर तिरंगा अभियान इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए प्रत्येक नागरिक को एक राष्ट्रीय ध्वज, एक मातृभूमि और एक साझा नियति के सूत्र में जोड़ता है।

‘काला पानी’ की कठोर यातनाएँ सहने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों को याद करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह भारत का केवल एक भौगोलिक हिस्सा नहीं, बल्कि बलिदान की पवित्र भूमि है। उन्होंने वीर विनायक दामोदर सावरकर और सेल्युलर जेल में यातनाएँ सहने वाले अनगिनत देशभक्तों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि उनका साहस, राष्ट्रभक्ति और बलिदान आज भी पीढ़ियों को प्रेरणा देता है।

उपराष्ट्रपति ने महात्मा गांधी द्वारा 8 अगस्त 1942 को दिए गए ऐतिहासिक “करो या मरो” के आह्वान को याद करते हुए कहा कि इस आह्वान ने लाखों भारतीयों को जागृत किया और स्वतंत्रता संग्राम को निर्णायक गति प्रदान की। उन्होंने तिरंगे के इतिहास में इन द्वीपों के विशेष स्थान का भी उल्लेख किया। उन्होंने याद दिलाया कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने 30 दिसंबर 1943 को यहीं भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराया था, जो भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक ऐतिहासिक क्षण था।

हर घर तिरंगा अभियान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया यह अभियान अब एक राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन का रूप ले चुका है। उन्होंने प्रत्येक नागरिक से तिरंगे को गर्व के साथ अपने घर पर फहराने तथा इसके माध्यम से राष्ट्रभक्ति, एकता और सामूहिक जिम्मेदारी के मूल्यों को आत्मसात करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “भारत एक है और हमेशा एक रहेगा।”

उपराष्ट्रपति ने अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह को ‘विविधता में एकता’ और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का जीवंत उदाहरण बताया। उन्होंने द्वीपों की समृद्ध जनजातीय विरासत के साथ-साथ कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और बुनियादी ढाँचे के क्षेत्र में हुई हालिया प्रगति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ग्रेट निकोबार द्वीप विकास परियोजना भारत की समुद्री क्षमताओं, कनेक्टिविटी और आर्थिक अवसरों को और मजबूत करेगी तथा विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखेगी।

भारत की शांति और उदारता की परंपरा के साथ राष्ट्रीय शक्ति की आवश्यकता पर जोर देते हुए राधाकृष्णन ने कहा, “भारत हमेशा उदार रहा है, लेकिन हमारी उदारता को कभी भी हमारी कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। हमें अपने राष्ट्रीय हितों और संप्रभुता की रक्षा के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए।” उन्होंने नागरिकों से तिरंगे को साहस, एकता और आशा की प्रेरणा के रूप में अपनाने तथा स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत को आगे बढ़ाते हुए एक मजबूत और विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।


उपराष्ट्रपति ने एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में भी भाग लिया और ‘हर घर तिरंगा’ प्रदर्शनी का दौरा किया, जिसमें अभियान की भावना तथा राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति के संदेश को प्रदर्शित किया गया।

इस अवसर पर अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल एडमिरल डी. के. जोशी (सेवानिवृत्त), मुख्य सचिव चंचल यादव, विजय पुरम नगर परिषद की अध्यक्ष एम. वसंथा तथा जिला परिषद के अध्यक्ष पी. उम्मर सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।


अलर्ट: कभी भी खुल सकते हैं मिनीमाता बांगो बांध के गेट, नदी किनारे के गांव और उद्योग रहें सावधान

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 कोरबा : लगातार हो रही बारिश के कारण मिनीमाता बांगो जलाशय का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। बांध में जलभराव 89.55% तक पहुंच चुका है। पानी की आवक को देखते हुए हसदेव नदी में कभी भी पानी छोड़ने के लिए गेट खोले जा सकते हैं।


जल संसाधन विभाग की अपील और चेतावनी:

निचले इलाकों से संपत्ति हटाएं: हसदेव नदी के तटीय और बाढ़ संभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोग, खनिज खदान ठेकेदार और औद्योगिक इकाइयां अपनी चल-अचल संपत्तियों व उपकरणों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दें।

विभाग नहीं होगा जिम्मेदार: कार्यपालन अभियंता एस.के. भारती के अनुसार, अचानक आने वाली बाढ़ से होने वाले किसी भी नुकसान के लिए जल संसाधन विभाग जिम्मेदार नहीं होगा।

मुनादी के निर्देश: बाढ़ प्रभावित संभावित गांवों में मुनादी (ढोल बजाकर चेतावनी) कराने के निर्देश दे दिए गए हैं।

 प्रभावित होने वाले प्रमुख गांव:

बांगो, चर्रा, पोड़ी उपरोड़ा, कोनकोना, लेपरा, टुनियाकछार, पाथा, गाड़ाघाट, छिनमेर, कछार, कलमीपारा, सिलियारीपारा, जूनापारा, तिलाईडांड, डुगुपारा, टुंगुमांडा, छिर्रापारा, मछलीबाटा, कोरियाघाट, धनगांव, डोंगाघाट, नरमदा, औराकछार, सोनगुड़ा, जेलगांव, झाबू, नवागांव, तिलसाभाटा, लोतलोता, स्याहीमुड़ी, कोडा, हथमार, झोरा और सिरकीकला आदि।

कामिका एकादशी 2026: आज रखा जा रहा है कामिका एकादशी का व्रत, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और खास मंत्र

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 Kamika Ekadashi 2026: सावन मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली पावन कामिका एकादशी आज, 9 अगस्त 2026 को पूरे श्रद्धा-भाव के साथ मनाई जा रही है। सनातन परंपरा में इस एकादशी का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से जगत के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा करने से जाने-अनजाने में हुए समस्त पापों का क्षय होता है और साधक को मोक्ष की प्राप्ति होती है।


पूजन सामग्री और आवश्यक तैयारी

पूजा शुरू करने से पहले लड्डू गोपाल जी या भगवान विष्णु की प्रतिमा, पीले वस्त्र, पीले फूल, केला, पेड़ा, रोली, चंदन, कपूर, धूप, दीप, पंचामृत और तांबे का कलश व्यवस्थित कर लें। ध्यान रखें कि पूजा के लिए केवल साबुत (बिना टूटे) चावल का ही प्रयोग करें। इसके अतिरिक्त, तुलसी के पत्ते एक दिन पूर्व (दशमी) के ही रखे होने चाहिए।

कामिका एकादशी की संपूर्ण पूजा विधि

प्रातः स्नान व संकल्प: एकादशी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और संभव हो तो पीले रंग के वस्त्र धारण करें। हाथ में जल, पुष्प और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें।

प्रतिमा स्थापना: पूजा स्थल को स्वच्छ करके लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं और भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित करें।

अभिषेक व श्रृंगार: प्रभु को पंचामृत एवं गंगाजल से स्नान कराएं, वस्त्र पहनाएं और फिर पीले चंदन व रोली से तिलक लगाएं। तत्पश्चात पीले पुष्प, धूप, दीप और फल अर्पित करें।

भोग व आरती: भगवान को अर्पित किए जाने वाले पंचामृत और मिष्ठान में तुलसी पत्र अवश्य शामिल करें, क्योंकि इसके बिना श्री हरि भोग स्वीकार नहीं करते। अंत में घी का दीपक जलाकर कामिका एकादशी की कथा सुनें और आरती उतारें।

सिद्धिदायक मंत्र एवं तुलसी अर्पण नियम

पूजा के दौरान ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का निरंतर जाप करें। इसके साथ ही महाविष्णु ध्यान मंत्र का पाठ करें:

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्।

लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम् वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥

तुलसी पत्र अर्पित करते समय इस मंत्र का उच्चारण करें:

तुलसि श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी। धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमनःप्रिया॥

तुलसी पूजन का विशेष नियम: एकादशी तिथि के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना सख्त वर्जित होता है। इसलिए पूजा के लिए तुलसी दल एक दिन पूर्व यानी दशमी तिथि को ही तोड़कर सुरक्षित रख लेना चाहिए।

व्रत के नियम और पारण की सही विधि

आहार पर नियंत्रण: एकादशी के दिन चावल, लहसुन, प्याज और किसी भी प्रकार के तामसिक भोजन का सेवन न करें। व्रती केवल दूध, फल और फलाहार पर ही रहें।

रात्रि जागरण: एकादशी की रात भगवान विष्णु के नाम का भजन-कीर्तन या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।

पारण विधि: व्रत का पारण अगले दिन यानी द्वादशी तिथि को सूर्योदय के बाद शुभ मुहूर्त में करें। स्वयं पारण करने से पहले किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराएं अथवा दान-दक्षिणा दें।

 

सनातन के अपमान पर छत्तीसगढ़ सरकार सख्त: पन्नालाल गिरफ्तार, सीएम बोले- 'बख्शे नहीं जाएंगे आरोपी'

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 रायपुर। सनातन धर्म और भगवान शिव को लेकर की गई कथित अभद्र टिप्पणी के मामले में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले किसी भी तरह के बयान या टिप्पणी को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे मामलों में कानून के तहत सख्त कार्रवाई होगी।


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि पन्नालाल द्वारा सनातन धर्म के आराध्य भगवान शिव और शिवलिंग को लेकर बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी। इस मामले में शिकायत मिलते ही पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। अब प्रकरण में कानून के अनुसार आगे की जांच और वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

धार्मिक संगठनों में था आक्रोश

उल्लेखनीय है कि भगवान शिव और शिवलिंग पर की गई टिप्पणी के बाद मामला गरमा गया था। टिप्पणी से विभिन्न धार्मिक संगठनों और समाज के लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली, जिसके बाद पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराकर सख्त कार्रवाई की मांग की गई थी। मुख्यमंत्री के बयान के बाद यह साफ हो गया है कि राज्य सरकार धार्मिक आस्था और देवी-देवताओं के अपमान को लेकर बेहद गंभीर है।

" शिवालय नगरी आरंग" पर बना गीत सोशल मीडिया में वायरल, कलाकारों की हो रही सराहना

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 आरंग। शिवालयों और प्राचीन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध नगरी आरंग के गौरव को समर्पित गीत इन दिनों सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। इस गीत की परिकल्पना पीपला फाउंडेशन के संयोजक महेन्द्र पटेल ने की है। गीत को छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध गायक विवेक शर्मा और आरंग अंचल के लोकप्रिय गायक गंगा साहू ने अपनी आवाज दी है।


गीत के बोल कांशी जैइसे नगरी मोर आरिंग दीपक सारथी ने लिखे हैं, जबकि संगीत देवेंद्र साहू का है। वीडियो की कैमरा और एडिटिंग विरु साहू ने की है। कोरियोग्राफी मास्टर उत्तम साहू की रही और रिकॉर्डिंग आरंग स्थित महामाया स्टूडियो में की गई।गीत में आरंग के प्राचीन शिवालयों और शिवलिंगों को खूबसूरती से दर्शाया गया है।



कलाकारों की इस पहल का उद्देश्य नगर के गौरवशाली इतिहास और धार्मिक पहचान को जन-जन तक पहुंचाना है।सोशल मीडिया पर रिलीज होते ही गीत को दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है।

कई सामाजिक संगठनों और नगरवासियों ने शिवालयों पर आधारित इस गीत की मुक्त कंठ से सराहना की है। लोगों का कहना है कि ऐसे प्रयासों से नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और विरासत से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

चरौदा में मना "ग्रीन डे", बच्चों में दिखा गजब उत्साह, ग्रीन फैशन शो रहा आकर्षण का केंद्र

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 आरंग। पर्यावरण संरक्षण और "हरियर छत्तीसगढ़" का संदेश देने शनिवार को शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चरौदा में "ग्रीन डे" बड़े धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में बच्चों के साथ-साथ शिक्षक-शिक्षिकाओं ने भी बढ़-चढ़कर सहभागिता निभाई।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय किसान नेता पारसनाथ साहू रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था प्रधान के.के. परमाल ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में सुप्रसिद्ध कवि प्रहलाद विशाल वैष्णव, ग्राम पंचायत के पंच प्रेमलाल साहू और कन्हैया धीवर उपस्थित रहे।


कार्यक्रम का शुभारंभ राजकीय गीत गायन से हुआ। इसके पश्चात बच्चों ने पर्यावरण संरक्षण पर आधारित नारा, गीत और फूल-पत्तों की प्रदर्शनी प्रतियोगिता में उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण "हरा परिधान में फैशन शो" रहा। हरे रंग की वेशभूषा में सजे बच्चों और शिक्षकों ने मंच पर उत्साह के साथ कैटवॉक कर बच्चों से खूब तालियां बटोरीं।प्रतियोगिताओं में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को अतिथियों द्वारा कापी ,पेन देकर सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि पारसनाथ साहू ने सभी प्रतिभागियों को नगद 500 रूपए ,कवि प्रहलाद विशाल वैष्णव ने पेन तथा पंच प्रेमलाल साहू ने सभी बच्चों को चॉकलेट वितरित कर प्रोत्साहित किया।

कार्यक्रम का सफल संचालन नवाचारी शिक्षक महेन्द्र कुमार पटेल ने किया। इस अवसर पर पारसनाथ साहू ने कहा कि ऐसे आयोजन से बच्चों में प्रकृति प्रेम और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है। उन्होंने सभी से अपील की कि प्रत्येक व्यक्ति कम से कम एक पेड़ अवश्य लगाए।इस अवसर पर संस्था प्रधान के.के. परमाल, वरिष्ठ शिक्षक महेन्द्र कुमार पटेल, सूर्यकांत चंद्राकर, दीनदयाल धीवर, डिलेश्वर प्रसाद साहू, सुशील कुमार आवडे, जितेन्द्र यदु, शिक्षिका संगीता पाटले, पायल शुक्ला सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे। सभी ने इस आयोजन की मुक्त कंठ से सराहना की।

नाबालिग से हैवानियत: रात में घर में घुसा आरोपी, कोर्ट ने सुनाई 5 साल की सजा

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 कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में नाबालिग पीड़िता को रात में घर से उठाकर ले जाने और दुष्कर्म करने के मामले में अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया है। अपर सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) सीमा प्रताप चंद्रा की अदालत ने आरोपी जगदीश साहनी उर्फ टिल्ली (19) को बीएनएस (BNS) और पॉक्सो (POCSO) एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत सजा सुनाई है। मामले में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक सुनील कुमार मिश्रा ने पैरवी की।


रात 3 बजे घर में घुसा था आरोपी

अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना बालको थाना क्षेत्र की है। 10 अगस्त 2025 की रात पीड़िता अपने माता-पिता और भाई के साथ घर में सो रही थी। रात करीब 3 बजे आरोपी जगदीश साहनी चुपके से घर में घुसा और पीड़िता के साथ मारपीट करने लगा। जब पीड़िता ने विरोध करते हुए मदद के लिए आवाज लगाई, तो आरोपी ने उसका गला दबा दिया, जिससे वह बेहोश हो गई।

होश आया तो डैम के पास थी पीड़िता

आरोपी बेहोशी की हालत में पीड़िता को उठाकर घर के पीछे स्थित डैम के पास ले गया। जब पीड़िता को होश आया, तो आरोपी ने उसके साथ जबरदस्ती की। पीड़िता ने भागने का प्रयास किया, लेकिन आरोपी ने उसे पकड़कर जमीन पर घसीटा और मारपीट की, जिससे उसके चेहरे, आंख, कान और पैरों में गंभीर चोटें आईं। सुबह होने पर आरोपी पीड़िता को वहीं छोड़कर फरार हो गया। पीड़िता किसी तरह अपने घर पहुंची और परिजनों को पूरी घटना की जानकारी दी।

पुलिस ने दर्ज की थी एफआईआर

परिजनों को जानकारी मिलने के बाद पीड़िता ने बालकोनगर थाना में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने बीएनएस (BNS) की विभिन्न धाराओं के साथ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। विवेचना पूरी होने के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में चालान पेश किया गया।

न्यायालय ने सुनाई सजा और जुर्माना

सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी माना।

धारावार सजा: न्यायालय ने बीएनएस (BNS) की धारा 137(2), 74, 76, 64(1) और पॉक्सो एक्ट की धारा 8 के तहत पांच-पांच वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा धारा 331(2) बीएनएस के तहत 3 वर्ष तथा धारा 115(2) के तहत 1 वर्ष के कारावास की सजा दी गई।

अर्थदंड: अदालत ने सभी धाराओं में 500-500 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड जमा न करने पर आरोपी को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अदालत के आदेशानुसार सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।

CG NEWS : शादी से इनकार पर युवती की आपत्तिजनक तस्वीरें वायरल करने वाला प्रेमी गिरफ्तार

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 तखतपुर (बिलासपुर) : शादी का प्रस्ताव ठुकराने से नाराज युवक द्वारा अपनी पूर्व प्रेमिका की निजी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़िता की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए तखतपुर थाना पुलिस ने आरोपी को कर्नाटक के बेंगलुरु से गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहाँ से उसे जेल भेज दिया गया है।


वीडियो कॉल का किया दुरुपयोग

पुलिस के अनुसार, आरोपी सुनील चतुर्वेदी का युवती के साथ प्रेम संबंध था। हाल ही में जब युवती ने शादी करने से इनकार कर दिया, तो आरोपी ने रंजिश रखते हुए पूर्व में वीडियो कॉल के दौरान ली गई आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर अपलोड कर दिए। घटना के बाद आरोपी फरार हो गया था।

साइबर सेल की मदद से मिली लोकेशन

तस्वीरें वायरल होने के बाद पीड़िता ने तखतपुर थाने में मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आईटी एक्ट (IT Act) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। थाना प्रभारी अवनीश पासवान के नेतृत्व में गठित तीन सदस्यीय पुलिस टीम ने साइबर सेल की मदद से आरोपी की लोकेशन ट्रैक की, जो कर्नाटक के बेंगलुरु में मिली।

न्यायिक रिमांड पर भेजा गया जेल

पुलिस टीम ने बेंगलुरु में दबिश देकर आरोपी सुनील चतुर्वेदी को हिरासत में लिया और तखतपुर लाया। आरोपी को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहाँ से न्यायालय के आदेश पर उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। पुलिस मामले की आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।

CSIR एकीकृत कौशल पहल के फेज-III के प्रथम वर्ष की समीक्षा के लिए समन्वयकों की बैठक पुणे में आयोजित

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पुणे- CSIR एकीकृत कौशल पहल (CSIR Integrated Skill Initiative) के फेज-III (2025–30) के प्रथम वर्ष की निगरानी समिति की समन्वयक सम्मेलन-सह-बैठक (Coordinators' Conclave-cum-Meeting) का सफल आयोजन 6–7 अगस्त 2026 को पुणे स्थित CSIR-राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला (CSIR-NCL) में किया गया। इस दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन CSIR-मानव संसाधन विकास केंद्र (CSIR-HRDC), गाजियाबाद ने CSIR-NCL, पुणे के सहयोग से किया।

इस सम्मेलन का उद्देश्य फेज-III के प्रथम वर्ष में हासिल प्रगति की व्यापक समीक्षा करना, विभिन्न CSIR प्रयोगशालाओं के बीच ज्ञान और अनुभवों का आदान-प्रदान करना तथा कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आपसी सहयोग को मजबूत करना था।

कार्यक्रम की शुरुआत उद्घाटन सत्र से हुई, जिसमें अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत तथा पारंपरिक दीप प्रज्वलन किया गया। CSIR-NCL के वैज्ञानिक-जी डॉ. राजेश जी. गोन्नाडे ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए सहयोग, नवाचार और कौशल विकास के महत्व पर प्रकाश डाला।

इसके बाद CSIR-HRDC के वैज्ञानिक-जी एवं स्किल नोडल प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर डॉ. विनय कुमार ने सम्मेलन के उद्देश्यों की जानकारी दी और वर्ष 2025–26 के दौरान CSIR एकीकृत कौशल पहल के तहत हासिल महत्वपूर्ण प्रगति का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि यह पहल देशभर में एक मजबूत कौशल विकास तंत्र तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, जिसका उद्देश्य उद्योग की जरूरतों के अनुरूप प्रतिभाओं को तैयार करना और तकनीक-आधारित कार्यबल का निर्माण करना है।

CSIR-सेंट्रल प्लानिंग डायरेक्टोरेट (CPD) के वैज्ञानिक-एफ डॉ. अभिषेक कुमार ने पहल की प्रमुख उपलब्धियों और वर्ष के दौरान किए गए नीतिगत हस्तक्षेपों पर प्रकाश डाला। वहीं, CSIR-HRDC, गाजियाबाद के प्रमुख डॉ. टी. एस. राणा ने कौशल विकास के लिए डिजिटल तकनीक, व्यावहारिक प्रशिक्षण और नवाचार-आधारित समाधानों में CSIR की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

इंस्टीट्यूट ऑफ पेस्टिसाइड फॉर्मुलेशन टेक्नोलॉजी (IPFT), गुरुग्राम के निदेशक एवं निगरानी समिति के अध्यक्ष डॉ. मोहना कृष्ण रेड्डी मुदियम ने कहा कि कौशल विकास राष्ट्र निर्माण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने CSIR एकीकृत कौशल पहल को मजबूत, भविष्य के लिए तैयार और उद्योग-केंद्रित कौशल विकास व्यवस्था बनाने के लिए पांच प्रमुख प्राथमिकता स्तंभों की रूपरेखा प्रस्तुत की।

वहीं, CSIR-NCL, पुणे के निदेशक डॉ. आशीष लेले ने कहा कि देशभर में फैली CSIR की प्रयोगशालाओं और वैज्ञानिक विशेषज्ञता के व्यापक नेटवर्क के माध्यम से CSIR, Skill India Mission में महत्वपूर्ण योगदान देने की अनूठी स्थिति में है। उन्होंने भारत को कुशल प्रतिभाओं के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने में इस पहल की भूमिका पर जोर दिया।

37 CSIR प्रयोगशालाओं की प्रगति की समीक्षा

सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण वर्ष 2025–26 के दौरान फेज-III के तहत हुई प्रगति की व्यापक समीक्षा रहा। पहले दिन CSIR की सभी 37 भाग लेने वाली प्रयोगशालाओं के स्किल नोडल कोऑर्डिनेटर्स ने अपनी वार्षिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की।

इन प्रस्तुतियों में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों, प्रशिक्षुओं तक पहुंच, नवाचार आधारित पहलों, सामने आई चुनौतियों और भविष्य की कार्ययोजनाओं की जानकारी दी गई। इससे निगरानी समिति को विभिन्न प्रयोगशालाओं में कार्यक्रम के क्रियान्वयन की स्थिति का व्यापक मूल्यांकन करने के साथ-साथ कौशल विकास से जुड़े सफल मॉडलों और बेहतर कार्यप्रणालियों को साझा करने का अवसर मिला।

निगरानी समिति ने दिन के अंत में विस्तृत समीक्षा और चर्चा की। समिति ने अब तक हुई प्रगति की सराहना करते हुए कार्यक्रम की गुणवत्ता, प्रभावशीलता, पहुंच और दीर्घकालिक प्रभाव को और बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

उद्योग और कौशल विकास पर तकनीकी सत्र

सम्मेलन के दूसरे दिन दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। Life Sciences Sector Skill Development Council (LSSSDC) के उपाध्यक्ष श्री अंशुल सक्सेना ने CSIR और LSSSDC के बीच सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने उद्योग-अकादमिक साझेदारी को मजबूत करने, रोजगार क्षमता बढ़ाने और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकास कार्यक्रम तैयार करने पर जोर दिया।

इसके बाद CSIR-CPD के वैज्ञानिक-एफ डॉ. अभिषेक कुमार ने परियोजना योजना और बजट प्रबंधन पर तकनीकी सत्र लिया। इसमें प्रभावी योजना निर्माण, वित्तीय संसाधनों के बेहतर उपयोग, निगरानी और कौशल विकास कार्यक्रमों के कुशल क्रियान्वयन जैसे विषयों पर चर्चा की गई।

भविष्य की रणनीति पर जोर

कार्यक्रम का समापन समापन सत्र के साथ हुआ, जिसमें स्किल नोडल अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किए और पहल को और मजबूत बनाने के लिए सुझाव दिए।

दो दिवसीय सम्मेलन ने CSIR की विभिन्न प्रयोगशालाओं के बीच समन्वय और सहयोग को मजबूत करने, फेज-III के प्रथम वर्ष की उपलब्धियों की व्यापक समीक्षा करने तथा कार्यक्रम की पहुंच, गुणवत्ता और प्रभाव को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण रणनीतियां तय करने में अहम भूमिका निभाई।

बैठक से सामने आए सुझाव और सिफारिशें CSIR एकीकृत कौशल पहल के प्रभावी क्रियान्वयन को और मजबूत करने में सहायक होंगी। साथ ही, यह पहल देश के लिए उच्च कौशलयुक्त वैज्ञानिक और तकनीकी कार्यबल तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

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