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मुख्यमंत्री ने कुदरगढ़ी माता मंदिर में पूजा-अर्चना कर की प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज चैत्र नवरात्रि की तृतीया तिथि के पावन अवसर पर कुदरगढ़ी माता के दर्शन करने सूरजपुर जिले स्थित कुदरगढ़ी माता मंदिर पहुंचे। कुदरगढ़ महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर उन्होंने मंदिर के नीचे प्रांगण स्थल पर ही हिंगुलाज माता एवं झगरा खाड़ देवता की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और  खुशहाली की कामना की।

मुख्यमंत्री ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार चंदन लगाकर एवं चुनरी चढ़ाकर श्रद्धापूर्वक माता का नमन किया। इस दौरान स्थानीय बैगा राम कुमार बंछोर ने पूजा-अर्चना संपन्न कराई। उनके परिवार की लगभग 10 पीढ़ियां कुदरगढ़ी माता की सेवा में निरंतर लगी हुई हैं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने उपस्थित श्रद्धालुओं का अभिवादन किया और सभी को कुदरगढ़ महोत्सव की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान कृषि मंत्री रामविचार नेताम, वन विकास निगम एवं कुदरगढ़ी मंदिर मां बागेश्वरी लोक न्यास ट्रस्ट के अध्यक्ष रामसेवक पैंकरा सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारीगण उपस्थित रहे।

उल्लेखनीय है कि जनश्रुतियों के अनुसार कुदरगढ़ी माता मंदिर की मान्यता है कि यहां श्रद्धापूर्वक मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। इसी कारणवश जिले सहित प्रदेश एवं अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर माता के दर्शन कर आशीर्वाद लेते हैं।


किसानों से किया हर एक वादा पूरा कर रही है हमारी सरकार : मुख्यमंत्री साय

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मुख्यमंत्री ने दो दिवसीय राज्य स्तरीय तिलहन किसान मेले का किया शुभारंभ

आधुनिक कृषि तकनीक अपनाने और तिलहन उत्पादन बढ़ाने के उपायों पर विशेष जोर

"एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत मुख्यमंत्री ने लगाया साल का पौधा

दलहन-तिलहन के उत्पादन को बढ़ावा देने वाले प्रयासों से किसानों को मिल रहा है लाभ

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज सरगुजा जिले के अंबिकापुर स्थित राजमोहिनी देवी कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र में दो दिवसीय राज्य स्तरीय तिलहन किसान मेले का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण कर किसानों को दी जा रही आधुनिक कृषि तकनीकों और तिलहन उत्पादन बढ़ाने के उपायों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने विश्व वानिकी दिवस के अवसर पर महाविद्यालय परिसर में “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत साल का पौधा रोपित किया और पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पौधारोपण करने की अपील की।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है, जहां लगभग 80 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार किसानों से धान की खरीदी 21 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से 3100 रुपये में कर रही है तथा अंतर की राशि का भुगतान भी एकमुश्त किया जा रहा है। साय ने कहा कि पिछले 2 वर्षों से हमारी सरकार किसानों से किया हर एक वादा पूरा कर रही है। उन्होंने किसानों से संवाद कर होली के पूर्व धान के अंतर की राशि का भुगतान तथा योजनाओं का लाभ मिलने की जानकारी भी ली। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर हो चुका है, लेकिन तिलहन उत्पादन में अभी भी कमी है। वर्तमान में देश अपनी आवश्यकता का लगभग 57 प्रतिशत ही तिलहन उत्पादन कर पा रहा है, शेष 43 प्रतिशत आयात करना पड़ता है। इस कमी को दूर करने के लिए तिलहन विकास परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे वैज्ञानिकों के सुझावों को अपनाकर तिलहन उत्पादन बढ़ाएं। उन्होंने जानकारी दी कि कृषक उन्नति योजना की तर्ज पर तिलहन फसलों के लिए प्रति एकड़ 11 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि देने की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और मत्स्य पालन जैसे सहायक व्यवसायों को अपनाकर आय बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि जीएसटी में सुधार के बाद कृषि यंत्रों की कीमतों में कमी आई है, जिससे किसानों को लाभ मिल रहा है।

कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान का उल्लेख करते हुए कहा कि देश को खाद्य तेल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना आवश्यक है। उन्होंने किसानों से दलहन एवं तिलहन फसलों का उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया। 

कार्यक्रम में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने तिलहन विकास कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि किसानों को विश्वविद्यालय के माध्यम से उन्नत बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। राज्य में संचालित 28 कृषि महाविद्यालयों, 27 कृषि विज्ञान केंद्रों एवं अनुसंधान संस्थानों के जरिए हर वर्ष लगभग 50 हजार किसानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

इस अवसर पर मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, सांसद चिंतामणि महाराज, विधायक प्रबोध मिंज, विधायक रामकुमार टोप्पो, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर, महापौर मंजूषा भगत, जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष राम किशुन सिंह, सभापति हरविंदर सिंह, राम लखन पैंकरा, संभाग आयुक्त नरेंद्र कुमार दुग्गा, जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

पीपला की जलदान मुहिम की नया रायपुर में हो रही है सराहना

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जगह-जगह जलपात्र रखकर किया जा रहा है जलदान के लिए आग्रह

आरंग- विगत चार वर्षों से गर्मी में स्वयंसेवी संस्था पीपला वेलफेयर फाउंडेशन गौ माता के लिए जगह-जगह जलपात्र रखकर लोगों से जलदान की अपील करते हैं।इसी कड़ी में इस वर्ष भी फाऊंडेशन के सदस्यों द्वारा आरंग, महासमुंद, तुमगांव, अभनपुर,नया रायपुर, रायपुर, मंदिरहसौद, धरसीवां, तिल्दा सहित ग्रामीण क्षेत्रों में जलपात्र रखा जा रहा है। जिससे कि मूक पशुओं को गर्मी में पानी के लिए भटकना न पड़े।

फाऊंडेशन के संयोजक महेन्द्र कुमार पटेल ने बताया इस मुहिम के तहत् इस वर्ष भी शनिवार को नया रायपुर के सेक्टर 29 एवं 27 में 21 जलपात्र रखकर लोगों को जलदान का आग्रह किया गया। फाउंडेशन की इस पहल को नया रायपुर वासियों ने स्वागत करते हुए मुक्त कंठ से सराहा और गर्मी में सहर्ष जलपात्र में जल भरने का भरोसा दिलाया।नया रायपुर में इस मुहिम को आगे बढ़ाने में मंत्रालय के सहायक अनुभाग अधिकारी लोकेश्वर साहू अहम् भूमिका निभा रहे हैं। वहीं लोकेश्वर  साहू ने बताया कि इस धर्माथ कार्य के लिए सेक्टर वासियों द्वारा स्वेच्छा से सहयोग  प्रदान कर रहें है। मानवीय संवेदना का यह कार्य आगे चलकर एक वृहत रूप ले सकता है।


मुख्यमंत्री ने नवरात्रि की पावन बेला पर मां महामाया की धरा से सरगुजा ओलंपिक का किया शुभारंभ

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3 लाख 49 हजार खिलाड़ियों की स्वस्फूर्त सहभागिता खेल के प्रति उनके प्रेम और समर्पण को दिखाता है : मुख्यमंत्री साय

बस्तर एवं सरगुजा ओलंपिक के वार्षिक आयोजन हेतु बजट में 10 करोड़ रुपए की राशि का प्रावधान

सरगुजा ओलंपिक में बेटियों की बड़ी संख्या में भागीदारी देखना सुखद, बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करें युवा : गीता फोगाट

सरगुजा के पंडरापाठ में 20 करोड़ रुपए की लागत से बनेगी आर्चरी अकादमी

खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने शासन की अनूठी पहल से जुड़ रहे है लोग

रायपुर- नवरात्रि के पावन बेला में मां महामाया की धरा से यह शुभ शुरुआत हुई है। मां महामाया के आशीर्वाद पिछले दो वर्षों से बस्तर ओलंपिक का आयोजन हो रहा है और आज सरगुजा अंचल के साथियों को ओलंपिक के जरिए अपनी हुनर दिखाने का अवसर मिला है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज सरगुजा जिले के अंबिकापुर स्थित पी जी कॉलेज ग्राउंड में सरगुजा ओलंपिक का शुभारंभ किया और कार्यक्रम का शुभारंभ कर अंचल वासियों को शुभकामनाएं दी। साय को इस दौरान संभाग के सभी जिलों से पहुँचे खिलाड़ियों ने मार्च पास्ट का सलामी दी। मुख्यमंत्री ने मुख्य मंच से सभी खिलाड़ियों का अभिवादन स्वीकारा और खिलाड़ियों की हौसला अफजाई की। 

मुख्यमंत्री साय ने मां महामाया का स्मरण करते हुए प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि बस्तर ओलंपिक की सफलता के बाद अब सरगुजा में भी इस आयोजन की शुरुआत की गई है, जिससे यहां के युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। उन्होंने बताया कि बस्तर ओलंपिक में पहले वर्ष 1.65 लाख और इस वर्ष 3.91 लाख प्रतिभागियों ने भाग लिया, जबकि सरगुजा ओलंपिक में इस बार लगभग 3.49 लाख खिलाड़ियों ने पंजीयन कराया है। इनमें से 2000 से अधिक खिलाड़ी संभाग स्तरीय तीन दिवसीय प्रतियोगिता में भाग ले रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि 3 लाख 49 हजार खिलाड़ियों की स्वस्फूर्त सहभागिता खेल के प्रति उनके प्रेम और समर्पण को दिखाता है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए बजट में बस्तर एवं सरगुजा ओलंपिक के वार्षिक आयोजन हेतु 10 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि ओलंपिक में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को 21 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी, जबकि स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक विजेताओं को क्रमशः 3 करोड़, 2 करोड़ और 1 करोड़ रुपए दिए जाएंगे।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में नक्सलवाद उन्मूलन के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि बस्तर क्षेत्र अब तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा है। नक्सल मुक्ति का संकल्प हमारे जवानों के अदम्य साहस से पूरा होने की कगार पर है। मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर ओलंपिक में आत्म समर्पित नक्सलियों की टीम ने जोआ बाट के नाम से हिस्सा लिया, जिसमें लगभग 700 आत्म समर्पित नक्सली शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने बताया कि खेलों के माध्यम से युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है और बस्तर व सरगुजा अंचल खेल अधोसंरचनाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरगुजा के पंडरापाठ में 20 करोड़ रुपए की लागत से आर्चरी अकादमी स्थापित की जा रही है, जिससे क्षेत्र के युवा खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने प्रदेश के युवा एथलीट अनिमेष कुजूर का उल्लेख करते हुए उनकी उपलब्धियों की सराहना की और कहा कि छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। प्रदेश सरकार खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है। उन्होंने जानकारी दी कि पहली बार खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स का आयोजन छत्तीसगढ़ में होगा, जिसका शुभारंभ 25 मार्च को केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया करेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री साय ने हाल ही में छत्तीसगढ़ विधानसभा में पारित हुए धर्म स्वातंत्र्य विधेयक तथा कर्मचारी चयन मंडल के स्थापना के संबंध में भी जानकारी दी। शुभारंभ सत्र के अंत में मुख्यमंत्री सह अतिथियों ने सरगुजा ओलंपिक का मशाल प्रज्ज्वलित किया और सफल आयोजन के लिए बधाई दी। 

कार्यक्रम में राष्ट्रमंडल खेलों की स्वर्ण पदक विजेता गीता फोगाट ने भी खिलाड़ियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सरगुजा ओलंपिक में बड़ी संख्या में बेटियों की भागीदारी देखना सुखद है। उन्होंने युवाओं को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करने का संदेश दिया, साथ ही नशे और गलत आदतों से दूर रहने की अपील की।

पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने बताया कि सरगुजा ओलंपिक में 6 जिलों से कुल 3.49 लाख प्रतिभागियों ने पंजीयन कराया है, जिनमें 1.59 लाख पुरुष और 1.89 लाख महिलाएं शामिल हैं। तीन दिवसीय इस आयोजन में 11 से अधिक खेल विधाओं में प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं।

कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने इसे सरगुजा वासियों के लिए बड़ी सौगात बताते हुए कहा कि इस मंच से स्थानीय प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी।

इस अवसर पर मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, सांसद चिंतामणि महाराज, विधायक प्रबोध मिंज, विधायक रामकुमार टोप्पो, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर, महापौर मंजूषा भगत, जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष राम किशुन सिंह, सभापति हरविंदर सिंह, राम लखन पैंकरा खेल विभाग के सचिव यशवंत कुमार, संभाग आयुक्त नरेंद्र कुमार दुग्गा, जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

विशेष लेख-सीएम विष्णु देव साय बस्तर में देंगे राज्य की सबसे बड़े ‘हेरिटेज मैराथन’ की सौगात

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‘बस्तर दौड़ेगा, देश जुड़ेगा’ की थीम पर 22 मार्च को होगा राज्य का सबसे बड़ा स्पोर्ट्स इवेंट

फिटनेस और विरासत का उत्सव- बस्तर को ग्लोबल टूरिज्म मैप पर लाने की बड़ी तैयारी

बस्तर को देश का प्रमुख टूरिज्म और स्पोर्ट्स डेस्टिनेशन बनाना हमारा संकल्प- साय

रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार राज्य में खेल, पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ‘बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026’ का आयोजन रविवार 22 मार्च को करने जा रही है। यह राज्य का अब तक का सबसे बड़ा रनिंग इवेंट होगा, जिसकी शुरुआत जगदलपुर के ऐतिहासिक लालबाग मैदान से होगी और समापन विश्वप्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात पर होगा। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर इस रूट पर दौड़ते हुए प्रतिभागियों को बस्तर की अद्भुत वादियों और सांस्कृतिक पहचान का अनूठा अनुभव मिलेगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस आयोजन को छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय बताते हुए कहा कि बस्तर हेरिटेज मैराथन केवल खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि राज्य की समृद्ध परंपरा, प्राकृतिक संपदा और जनभागीदारी का उत्सव है। उन्होंने कहा कि ‘बस्तर दौड़ेगा, देश जुड़ेगा’ के संदेश के साथ यह आयोजन न केवल फिटनेस को बढ़ावा देगा, बल्कि बस्तर को राष्ट्रीय और अंतरर्राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और अधिक मजबूती से स्थापित करेगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य ऐसे आयोजनों के माध्यम से स्थानीय युवाओं को अवसर देना, रोजगार सृजन को बढ़ावा देना और क्षेत्रीय विकास को गति देना है।

मैराथन में 42 किलोमीटर (फुल मैराथन), 21 किलोमीटर (हाफ मैराथन), 10 किलोमीटर और 5 किलोमीटर (फन रन) की श्रेणियां रखी गई हैं, ताकि हर आयु वर्ग और फिटनेस स्तर के लोग इसमें भाग ले सकें। प्रतिभागियों के लिए कुल 25 लाख रुपये की आकर्षक पुरस्कार राशि निर्धारित की गई है। पंजीकरण शुल्क मात्र 299 रुपये रखा गया है, जबकि बस्तर संभाग के सातों जिलों के प्रतिभागियों के लिए यह पूरी तरह निःशुल्क है, जिससे स्थानीय स्तर पर अधिकतम लोगों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

प्रतिभागियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मैराथन मार्ग पर व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। पूरे रूट पर नियमित अंतराल पर रिफ्रेशमेंट पॉइंट्स (आरपीएन) स्थापित किए जाएंगे, जहां एनर्जी ड्रिंक्स और पानी की उपलब्धता रहेगी। इसके अलावा मेडिकल सपोर्ट, इमरजेंसी सेवाएं और सुव्यवस्थित रूट मैनेजमेंट भी सुनिश्चित किया गया है ताकि प्रतिभागियों को सुरक्षित और सुगम अनुभव मिल सके। इस आयोजन को और यादगार बनाने के लिए प्रत्येक प्रतिभागी को फिनिशर मेडल, ई-सर्टिफिकेट और प्रोफेशनल रनिंग फोटोग्राफ्स प्रदान किए जाएंगे। साथ ही जुम्बा सेशन और लाइव डीजे जैसे आकर्षक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, जिससे प्रतिभागियों में उत्साह और ऊर्जा बनी रहे।

‘रन फॉर नेचर, रन फॉर कल्चर’ (प्रकृति के लिए दौड़ो, संस्कृति के लिए दौड़ो) की थीम पर आधारित यह मैराथन बस्तर की प्राकृतिक धरोहर और जनजातीय संस्कृति को देशभर के सामने प्रस्तुत करने का एक सशक्त माध्यम बनेगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने देशभर के खिलाड़ियों, फिटनेस प्रेमियों और पर्यटकों से इस ऐतिहासिक आयोजन में भाग लेने की अपील करते हुए कहा कि यह अवसर न केवल दौड़ने का है, बल्कि बस्तर को करीब से जानने और उसकी विरासत को महसूस करने का भी है। इच्छुक प्रतिभागी https://www.bastarheritage. run/registration लिंक के माध्यम से या आधिकारिक पोस्टर में दिए गए क्यूआर कोड को स्कैन कर अपना पंजीकरण करा सकते हैं। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आयोजन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘फिट इंडिया’, ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ और देश में पर्यटन को बढ़ावा देने के विजन से प्रेरित है। प्रधानमंत्री ने हमेशा भारत की सांस्कृतिक विविधता और स्थानीय विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने पर जोर दिया है। बस्तर हेरिटेज मैराथन उसी सोच को आगे बढ़ाने का एक प्रयास है, जहां खेल, संस्कृति और प्रकृति एक साथ जुड़ते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार बस्तर को देश के प्रमुख पर्यटन और स्पोर्ट्स डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस तरह के आयोजनों से न केवल युवाओं में फिटनेस के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। बस्तर के कारीगरों, कलाकारों और छोटे-छोटे व्यवसायों को भी इसकाप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री साय ने देशभर के खिलाड़ियों, फिटनेस प्रेमियों और पर्यटकों से इस ऐतिहासिक आयोजन में भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि वह देश के हर कोने से युवाओं और नागरिकों को आमंत्रित करते हैं कि वे बस्तर आएं, यहां की प्रकृति, संस्कृति और ऊर्जा को महसूस करें और इस ऐतिहासिक मैराथन का हिस्सा बनें।

महतारी वंदन योजना : आर्थिक संबल से आत्मविश्वास तक, सशक्त हो रही छत्तीसगढ़ की महिलाएं

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 डॉ. दानेश्वरी संभाकर, उप संचालक जनसंपर्क


रायपुर : किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति तब मानी जाती है जब उसकी महिलाएं सशक्त, आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जीने लगें। छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना इसी दिशा में एक ऐतिहासिक और संवेदनशील पहल बनकर उभरी है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में यह योजना आज लाखों महिलाओं के जीवन में आत्मविश्वास, आर्थिक संबल और नई उम्मीदों का संचार कर रही है।

महतारी वंदन योजना केवल हर माह मिलने वाली 1000 रुपये की आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के सपनों को पंख देने, उनके आत्मसम्मान को मजबूत करने और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने का सशक्त माध्यम बन गई है। प्रदेश के गांव-गांव से ऐसी प्रेरक कहानियां सामने आ रही हैं, जो बताती हैं कि छोटे-छोटे आर्थिक सहयोग से भी बड़े सामाजिक बदलाव संभव हैं।

आर्थिक संबल से आत्मविश्वास तक, सशक्त हो रही छत्तीसगढ़ की महिलाएं

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर बस्तर में आयोजित वृहद महतारी वंदन कार्यक्रम के दौरान कई महिलाओं ने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय से वर्चुअल संवाद कर अपने जीवन में आए बदलाव साझा किए। गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के ग्राम खोडरी की अनीता साहू ने बताया कि पहले आर्थिक कठिनाइयों के कारण परिवार चलाना मुश्किल था, लेकिन योजना से मिली राशि से उन्होंने सिलाई मशीन खरीदी और “अनीता सिलाई सेंटर” शुरू किया। आज वे सिलाई, खेती और मजदूरी के माध्यम से अपने परिवार को बेहतर जीवन दे रही हैं। उनका यह सफर संघर्ष से आत्मनिर्भरता तक की प्रेरक कहानी बन गया है।

मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले की श्रीमती मिथलेश चतुर्वेदी ने भी अपने जीवन का भावुक अनुभव साझा किया। पति के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। ऐसे कठिन समय में महतारी वंदन योजना ने उन्हें आर्थिक संबल दिया और उन्होंने ई-रिक्शा खरीदकर आजीविका का नया रास्ता चुना। आज वे आत्मसम्मान के साथ अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं और समाज में आत्मनिर्भर महिला की पहचान बना चुकी हैं।

कोरिया जिले की ग्राम डुमरिया निवासी श्रीमती बाबी राजवाड़े बताती हैं कि खेती-किसानी में मिलने वाली मासिक राशि उनके लिए बड़ी मदद साबित हो रही है। बीज, खाद और अन्य कृषि जरूरतों को पूरा करना अब पहले की तुलना में आसान हो गया है। वहीं ग्राम आमापारा की श्रीमती सुंदरी पैकरा इस राशि का उपयोग अपने बच्चों की पढ़ाई में कर रही हैं, जिससे उनके बच्चों के भविष्य को नई दिशा मिल रही है।

भरतपुर विकासखंड के ग्राम चांटी की सविता सिंह की कहानी इस योजना की सार्थकता को और मजबूत करती है। उन्होंने महतारी वंदन योजना की राशि को बचाकर सिलाई मशीन खरीदी और सिलाई कार्य शुरू किया। आज वे गांव में कपड़ों की सिलाई कर नियमित आय अर्जित कर रही हैं और अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का खर्च स्वयं उठा रही हैं। उनकी सफलता ने गांव की अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी है।

महतारी वंदन योजना का व्यापक प्रभाव प्रदेश के हर जिले में दिखाई दे रहा है। लगभग 69 लाख विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपये की सहायता सीधे उनके बैंक खातों में दी जा रही है और अब तक 25 किस्तों के माध्यम से 16 हजार 237 करोड़ रुपये से अधिक की राशि डीबीटी के जरिए प्रदान की जा चुकी है। यह नियमित आर्थिक सहयोग महिलाओं के जीवन में स्थिरता और आत्मविश्वास ला रहा है।

इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह महिलाओं को केवल सहायता नहीं देती, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा देती है। महिलाएं इस राशि से छोटे-छोटे व्यवसाय शुरू कर रही हैं, बच्चों की पढ़ाई में निवेश कर रही हैं, खेती-किसानी को मजबूत बना रही हैं और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। इससे परिवार, समाज और राज्य—तीनों स्तरों पर सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है।

महिलाओं का कहना है कि पहले छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी उन्हें दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब महतारी वंदन योजना ने उन्हें आत्मसम्मान के साथ जीने की ताकत दी है। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना उनके जीवन में नई उम्मीद और नया आत्मविश्वास लेकर आई है।

आज महतारी वंदन योजना छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण का मजबूत स्तंभ बन चुकी है। यह योजना न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है, बल्कि उन्हें समाज में सम्मान, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता के साथ आगे बढ़ने का अवसर भी दे रही है।

निश्चित रूप से महतारी वंदन योजना छत्तीसगढ़ की महिलाओं के लिए आत्मसम्मान, सशक्तिकरण और उज्ज्वल भविष्य की नई सुबह साबित हो रही है, जो आने वाले समय में प्रदेश के समग्र विकास की मजबूत आधारशिला बनेगी।

 

महासमुंद : फिर मिला कैश ही कैश, चेकिंग में 47.50 लाख जब्त, 4 आरोपी गिरफ्तार

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 महासमुंद। महासमुंद जिले में पुलिस की सख्त चेकिंग के दौरान बड़ी मात्रा में अवैध नकदी बरामद हुई है। अलग-अलग थाना क्षेत्रों में कार्रवाई करते हुए कुल 47 लाख 50 हजार रुपए जब्त किए गए हैं और चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।


पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, बसना थाना क्षेत्र के पालसपाली के पास मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई की गई। यहां एक टोयोटा कार से 32 लाख 50 हजार रुपए की अवैध नकदी जब्त की गई। इस मामले में आशु बंसल और महेंद्र चौहान को गिरफ्तार किया गया है।

वहीं बलौदा थाना क्षेत्र के सिरपुर इलाके में चेकिंग के दौरान पुलिस ने 15 लाख रुपए नकद बरामद किए। यहां से केशव अग्रवाल और नरेश अग्रवाल को गिरफ्तार किया गया।

चारों आरोपियों के खिलाफ धारा 106 के तहत कार्रवाई करते हुए मामला आयकर विभाग को सौंपा जा रहा है, ताकि राशि के स्रोत की जांच की जा सके।

एक सप्ताह में 1.47 करोड़ की जब्ती

गौरतलब है कि महासमुंद पुलिस ने पिछले एक सप्ताह में लगातार कार्रवाई करते हुए कुल 1 करोड़ 47 लाख रुपए की अवैध राशि जब्त कर बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस द्वारा आगे भी सघन चेकिंग अभियान जारी रखने की बात कही गई है।

सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ विधानसभा बजट सत्र, मुख्यमंत्री ने जताया आभार

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के सफल समापन पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मंत्रीगण और विधायकगण ने विधानसभा स्थित उनके कार्यालय में भेंट कर बधाई दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों की सराहना करते हुए सत्र की सफलता के लिए आभार व्यक्त किया।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सभी के समन्वय और सहयोग से यह सत्र सार्थक और परिणामकारी रहा। उन्होंने विधानसभा को लोकतंत्र का पावन मंदिर बताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों को सशक्त बनाना ही इसका मूल उद्देश्य है।

585 आत्मसमर्पित नक्सलियों ने देखा सदन

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि बजट सत्र के दौरान लगभग 585 आत्मसमर्पित नक्सलियों ने सदन की कार्यवाही का अवलोकन किया, जो एक प्रेरणादायक पहल है। इससे यह संदेश गया है कि राज्य सरकार भटके युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए गंभीरता से प्रयासरत है।

15 बैठकें, कई अहम विधेयक पारित

मुख्यमंत्री के अनुसार सत्र में कुल 15 बैठकें आयोजित हुईं। इस दौरान राज्यपाल के अभिभाषण पर कृतज्ञता प्रस्ताव पारित किया गया और वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट भी पारित हुआ। साथ ही कई महत्वपूर्ण विधेयक सदन से पारित किए गए, जिनमें—

छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026
छत्तीसगढ़ नगर एवं ग्राम निवेश (संशोधन) विधेयक-2026
छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल (संशोधन) विधेयक-2026
भर्ती परीक्षाओं में नकल रोकने संबंधी विधेयक
छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल विधेयक

शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये विधेयक पारदर्शिता, सुशासन और युवाओं के भविष्य को मजबूत करने में मील का पत्थर साबित होंगे।

लोकतंत्र की मजबूती का प्रमाण

उन्होंने कहा कि सत्र के दौरान सदस्यों ने विभिन्न जनहित के मुद्दों पर गंभीर चर्चा की, प्रश्न पूछे और अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं को प्रभावी ढंग से उठाया, जो लोकतंत्र की मजबूती को दर्शाता है।

अध्यक्ष के स्वास्थ्य लाभ पर जताई खुशी

मुख्यमंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि अस्वस्थ होने के बावजूद उन्होंने डिजिटल माध्यम से सदन की कार्यवाही पर लगातार नजर रखी।

सभी का जताया आभार

मुख्यमंत्री साय ने नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप, मंत्रिपरिषद के सदस्यों, सभी विधायकों, विधानसभा सचिव दिनेश शर्मा, सुरक्षा कर्मियों और अधिकारियों-कर्मचारियों को सफल संचालन के लिए धन्यवाद दिया।

उन्होंने मीडिया प्रतिनिधियों की भूमिका की भी सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने सदन की कार्यवाही और जनहित के मुद्दों को जनता तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

अंत में मुख्यमंत्री ने आगामी चैत्र नवरात्रि के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए राज्य में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

जगदलपुर में पहली बार ‘बस्तर राइडर्स मीट 2026’ 4 अप्रैल को, बाइक प्रेमियों का जुटेगा महाकुंभ

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 जगदलपुर। जगदलपुर में 4 अप्रैल 2026 को पहली बार भव्य ‘बस्तर राइडर्स मीट 2026’ का आयोजन किया जाएगा। इस अनूठे कार्यक्रम का आयोजन ‘गरुड़ा – द राइडर्स क्लब’ द्वारा किया जा रहा है, जिसमें देशभर से बाइक राइडर्स और राइडिंग के शौकीन शामिल होंगे।


आयोजन का उद्देश्य बस्तर की समृद्ध संस्कृति, पारंपरिक खानपान, वेशभूषा और प्राकृतिक सौंदर्य को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है। साथ ही, प्रतिभागियों को बस्तर के प्रमुख पर्यटन स्थलों से भी रूबरू कराया जाएगा।

कार्यक्रम के दौरान बाइक शो और प्रदर्शनी आयोजित होगी, जिसमें विभिन्न ब्रांड की आकर्षक मोटरसाइकिलों का प्रदर्शन किया जाएगा। राइडिंग शो में कुशल राइडर्स द्वारा रोमांचक स्टंट और लाइव परफॉर्मेंस भी देखने को मिलेंगे।

प्रतियोगिताएं और आकर्षण

आयोजन में सर्वश्रेष्ठ मॉडिफाइड बाइक, सर्वश्रेष्ठ विंटेज बाइक और सर्वश्रेष्ठ सुपरबाइक के लिए पुरस्कार दिए जाएंगे। इसके साथ ही ‘बस्तर टैलेंट शोकेस’ के जरिए स्थानीय कलाकारों, संगीतकारों और प्रतिभाओं को मंच मिलेगा।

फूड फेस्ट और जागरूकता पहल

कार्यक्रम में सांस्कृतिक फूड फेस्टिवल भी आकर्षण का केंद्र रहेगा, जहां बस्तर के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लिया जा सकेगा। इसके अलावा राइडर्स द्वारा यातायात सुरक्षा नियमों के प्रति लोगों को जागरूक करने की पहल भी की जाएगी।

यह आयोजन न केवल बाइक प्रेमियों के लिए बड़ा मंच साबित होगा, बल्कि बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को देशभर में प्रदर्शित करने का भी महत्वपूर्ण अवसर बनेगा।

आयोजकों ने राइडर्स, मीडिया प्रतिनिधियों और आम नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है। इच्छुक प्रतिभागी पंजीकरण के लिए 6263437809 और 7240839494 पर संपर्क कर सकते हैं।

“राइड विद प्राइड, राइड फॉर बस्तर” के संदेश के साथ यह आयोजन बस्तर की पहचान को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का प्रयास करेगा।

छत्तीसगढ़ में बदला मौसम, कई इलाकों में बारिश-ओलावृष्टि, IMD का ऑरेंज अलर्ट जारी

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 रायपुर : प्रदेश के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में तेज आंधी के साथ हुई ओलावृष्टि ने लोगों को चौंका दिया। अचानक बदले मौसम के कारण कई क्षेत्रों में सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।


भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने स्थिति को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार, अगले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई इलाकों में तेज अंधड़, बिजली गिरने और ओले गिरने की संभावना बनी हुई है।

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस बदलाव के पीछे एक साथ सक्रिय तीन प्रमुख मौसम प्रणाली जिम्मेदार हैं, जिनसे वातावरण में नमी और अस्थिरता बढ़ गई है।

प्रशासन और मौसम विभाग ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। खुले स्थानों पर न जाने, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने की अपील की गई है।

वहीं किसानों को भी सतर्क रहने और फसलों को संभावित नुकसान से बचाने के लिए जरूरी कदम उठाने की सलाह दी गई है।


अधिकारियों ने नागरिकों से मौसम अपडेट पर नजर बनाए रखने और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

रेलवे स्टेशन बनेगा हाईटेक: AI निगरानी, QR एंट्री और स्मार्ट भीड़ प्रबंधन की शुरुआत

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 रायपुर। रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिकी एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेल भवन में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ व्यापक समीक्षा बैठक की। बैठक में स्टेशन पहुंच, यात्री सुविधाओं के उन्नयन और सुरक्षा उपायों की प्रगति का आकलन किया गया।


इस दौरान प्रवेश नियंत्रण, भीड़ प्रबंधन, तकनीक आधारित निगरानी और स्टेशन परिसर में सुगम आवागमन जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा हुई। तय किया गया कि इन सुधारों को सबसे पहले नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर लागू किया जाएगा, जिसके बाद अन्य स्टेशनों पर विस्तार किया जाएगा।

AI कैमरों से 24×7 निगरानी

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर एआई आधारित निगरानी प्रणाली लागू की जाएगी। इसके तहत स्टेशन के हर हिस्से—प्लेटफॉर्म, प्रवेश-निकास, कॉनकोर्स और संवेदनशील क्षेत्रों—में कैमरे लगाए जाएंगे।

एक आधुनिक कंट्रोल रूम स्थापित होगा, जहां एआई तकनीक के जरिए संदिग्ध गतिविधियों की रियल टाइम जानकारी मिलेगी। मंत्री ने कैमरों को “आंखें” और एआई को “दिमाग” बताते हुए बेहतर रोशनी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

टिकट धारकों को ही मिलेगा प्रवेश

रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की तैनाती बढ़ाई जाएगी ताकि केवल वैध टिकट वाले यात्रियों को ही स्टेशन में प्रवेश मिल सके। मैनुअल चेकिंग के बजाय निगरानी आधारित सिस्टम को प्राथमिकता दी जाएगी।

कर्मचारियों के लिए कलर-कोडेड ड्रेस

स्टेशन पर कार्यरत सभी कर्मचारियों के लिए रंग-आधारित पहचान प्रणाली लागू होगी। रेलवे कर्मचारी फ्लोरोसेंट जैकेट पहनेंगे, जबकि विक्रेता, ठेका कर्मचारी और अन्य स्टाफ अलग रंग की जैकेट में होंगे।

सभी को अनिवार्य पहचान पत्र जारी किए जाएंगे, जिससे सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

QR कोड से एंट्री का ट्रायल

दिवाली और छठ पर्व के दौरान भीड़ को देखते हुए नई दिल्ली स्टेशन पर QR कोड आधारित एंट्री सिस्टम का ट्रायल किया जाएगा। इससे आरक्षित, अनारक्षित और सीजन टिकट धारकों की अलग-अलग एंट्री को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकेगा।

RailOne ऐप और भारत टैक्सी का एकीकरण

यात्रियों की अंतिम मील कनेक्टिविटी सुधारने के लिए RailOne ऐप को भारत टैक्सी के साथ जोड़ा जाएगा।

यह प्लेटफॉर्म सहकारी मॉडल पर आधारित देश का पहला राइड-हेलिंग सिस्टम है, जिससे स्टेशन के बाहर की अव्यवस्था कम होगी और यात्रियों को भरोसेमंद परिवहन सुविधा मिलेगी।

76 स्टेशनों पर प्रतीक्षा क्षेत्र विकसित

अनारक्षित यात्रियों के लिए स्टेशन के बाहर अलग प्रतीक्षा क्षेत्र बनाए जा रहे हैं। इससे प्लेटफॉर्म पर भीड़ कम होगी और यात्रियों को चरणबद्ध तरीके से प्रवेश दिया जा सकेगा।

साथ ही, सभी स्टेशनों पर स्पष्ट साइनेज और बेहतर ट्रेन सूचना प्रणाली विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं।

ये पहल भारतीय रेलवे को अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और यात्री-अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। तकनीक और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए यात्रियों को स्टेशन से लेकर अंतिम गंतव्य तक सहज और बेहतर अनुभव देने का लक्ष्य रखा गया है।

योग महोत्सव 2026 में लॉन्च हुआ 5 मिनट का इन-फ्लाइट योग प्रोटोकॉल

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35,000 फीट की ऊंचाई पर, समय जैसे धीमा हो जाता है—लेकिन शरीर भी उसी तरह धीमा पड़ने लगता है। लंबे समय तक एक सीमित सीट पर बैठने से अनुभवी यात्रियों को भी जकड़न, थकान और मानसिक तनाव महसूस हो सकता है। इस आधुनिक यात्रा चुनौती का समाधान प्रस्तुत करते हुए एक सरल लेकिन प्रभावशाली पहल सामने आई है—एयर ट्रैवल के लिए योग (Yoga for Air Travel), जो 5 मिनट का एक सुविचारित इन-फ्लाइट वेलनेस प्रोटोकॉल है।

इस पहल की शुरुआत योग महोत्सव 2026 के दौरान प्रतापराव जाधव” द्वारा की गई। यह नवाचार योग के शाश्वत ज्ञान को विमान के भीतर लाता है, जिससे आपकी सीट को ही पुनःऊर्जा प्राप्त करने का स्थान बनाया जा सके। इसे मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान द्वारा विकसित किया गया है, जो आधुनिक यात्रियों के लिए तेज़, सुरक्षित और प्रभावी तरीका प्रदान करता है।

इस पहल के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए प्रतापराव जाधव ने कहा, “योग निवारक स्वास्थ्य और समग्र कल्याण का एक शक्तिशाली माध्यम है। यह इन-फ्लाइट योग प्रोटोकॉल हर परिस्थिति में योग को सुलभ बनाने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है—even 35,000 फीट की ऊंचाई पर भी—ताकि लोग यात्रा के दौरान सक्रिय, शांत और संतुलित रह सकें।”

इन-फ्लाइट योग क्यों महत्वपूर्ण है

हवाई यात्रा, विशेषकर लंबी दूरी की उड़ानों में, लंबे समय तक निष्क्रिय रहने की स्थिति पैदा करती है। इससे मांसपेशियों में जकड़न, खराब रक्त संचार, थकान, जेट लैग और कुछ मामलों में डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT) जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। यात्रा से जुड़े तनाव और केबिन प्रेशर में बदलाव के साथ, एक सरल स्वास्थ्य उपाय की आवश्यकता स्पष्ट हो जाती है।

यह 5 मिनट का योग प्रोटोकॉल हल्के व्यायाम, सचेत श्वास और छोटे ध्यान अभ्यासों के माध्यम से शरीर और मन में संतुलन स्थापित करने में मदद करता है।

इसकी वैज्ञानिक और निवारक महत्ता पर जोर देते हुए वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा, “दैनिक जीवन में—सीमित परिस्थितियों जैसे उड़ानों में—योग को शामिल करने से रक्त संचार बेहतर होता है, तनाव कम होता है और समग्र स्वास्थ्य में सुधार आता है।”

आपकी सीट पर वेलनेस रूटीन

यह प्रोटोकॉल बेहद सरल है और बिना किसी उपकरण के सीट पर बैठे-बैठे किया जा सकता है:

  • सेंटरिंग (15 सेकंड): खुद को स्थिर करने के लिए कुछ क्षणों का मौन या ध्यान

  • हल्की जोड़ गतियां (45 सेकंड): कंधों का घुमाव, टखनों की स्ट्रेचिंग आदि

  • बैठे हुए योगासन: ताड़ासन (Palm Tree Pose), सीटेड कैट-काउ, स्पाइनल ट्विस्ट आदि

  • प्राणायाम: गहरी सांस, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, शीतली

  • ध्यान (30 सेकंड): मन को शांत करने के लिए छोटा ध्यान

इस पहल पर मोनालिसा दाश ने कहा, “यह दिखाता है कि योग को रोजमर्रा की परिस्थितियों में आसानी से शामिल किया जा सकता है और इससे एक स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा मिलता है।”

छोटा अभ्यास, बड़ा प्रभाव

सिर्फ 5 मिनट में यह अभ्यास:

  • रक्त संचार बेहतर करता है

  • मांसपेशियों की जकड़न और थकान कम करता है

  • तनाव और चिंता घटाता है

  • पाचन और हाइड्रेशन में मदद करता है

  • जेट लैग को नियंत्रित करने में सहायक होता है

सबसे महत्वपूर्ण बात, यह यात्रियों को उड़ान के दौरान भी अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिए सक्षम बनाता है।

कहीं भी, कभी भी वेलनेस

योग की सबसे बड़ी खूबसूरती इसकी अनुकूलता है। चाहे आप घर पर हों, ऑफिस में या आसमान में—योग हर जगह संभव है। यह प्रोटोकॉल याद दिलाता है कि स्वस्थ रहने के लिए अतिरिक्त समय या जगह की जरूरत नहीं—बस एक सही इरादा चाहिए।

अगली बार जब आप उड़ान भरें, तो कुछ मिनट अपने लिए निकालें—रुकें, सांस लें और खुद से जुड़ें।

अच्छी यात्रा करें। आराम से सांस लें। संतुलित रहें। 

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने वृंदावन में रामकृष्ण मिशन के ऑन्कोलॉजी ब्लॉक का उद्घाटन किया

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द्रौपदी मुर्मु ने आज (20 मार्च 2026) “रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम, वृंदावन” में नंद किशोर सोमानी ऑन्कोलॉजी ब्लॉक का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि रामकृष्ण मिशन आध्यात्मिक चेतना और मानवीय सेवा के संगम का एक सशक्त प्रतीक है। रामकृष्ण परमहंस की गहन भक्ति ने एक शक्तिशाली धारा को जन्म दिया, जिसे उनके प्रमुख शिष्य स्वामी विवेकानंद ने मानव कल्याण के लिए संस्थागत रूप दिया। रामकृष्ण मिशन ने निरंतर यह संदेश दिया है कि प्रेम, सेवा और करुणा ही ईश्वर की प्राप्ति का सर्वोच्च मार्ग हैं। इस मिशन ने यह भी दिखाया है कि निस्वार्थ सेवा और करुणा ही सच्ची आध्यात्मिकता की वास्तविक अभिव्यक्ति हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि कैंसर सबसे गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। समय पर बीमारी का पता लगना और उच्च गुणवत्ता वाला उपचार किसी मरीज का जीवन बचाने में निर्णायक साबित हो सकता है। हालांकि, कई परिवारों के लिए इस बीमारी का इलाज आर्थिक कारणों से कठिन या असंभव लगता है। ऐसे समय में सेवा भावना से प्रेरित संस्थान सामाजिक कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। जागरूकता अभियानों और समय पर जांच की सुविधाओं के माध्यम से कैंसर की रोकथाम और प्रारंभिक उपचार पर विशेष जोर दिया जा रहा है। एक मजबूत और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण तभी संभव है जब उसके नागरिक स्वस्थ हों।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत अपने स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने और प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवा पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। आयुष्मान भारत जैसी ऐतिहासिक योजनाओं के माध्यम से लाखों नागरिकों को सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस योजना के अंतर्गत कैंसर उपचार को भी शामिल किया गया है, जिससे गरीब और जरूरतमंद मरीजों को लाभ मिल रहा है।

राष्ट्रपति ने कहा कि सेवा भावना से प्रेरित चिकित्सा संस्थान समाज में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे केवल बीमारियों का इलाज ही नहीं करते, बल्कि मरीजों और उनके परिवारों के जीवन में आशा, विश्वास और सम्मान भी स्थापित करते हैं। उन्होंने कहा कि रामकृष्ण मिशन ने यह सिद्ध किया है कि आधुनिक विज्ञान और मानवीय करुणा का संगम मानव कल्याण के लिए अद्भुत कार्य कर सकता है। उन्होंने रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम से जुड़े सभी हितधारकों की सराहना की और विश्वास व्यक्त किया कि उनका योगदान आने वाले वर्षों में लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण सिद्ध होगा।



छत्तीसगढ़ में दुर्ग, बलरामपुर के बाद अब यहां अफीम की खेती का भंडाफोड़

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 रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में नशे के अवैध कारोबार का एक और मामला सामने आया है। तमनार क्षेत्र के आमाघाट में पुलिस ने छापेमारी कर करीब डेढ़ एकड़ में फैली अफीम की अवैध खेती को नष्ट कर दिया। इस कार्रवाई में झारखंड निवासी एक आरोपी को हिरासत में लिया गया है।


पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने जमीन को तरबूज और ककड़ी की खेती के नाम पर किराए पर लिया था, जबकि खेत के बीचों-बीच गुपचुप तरीके से अफीम की फसल उगाई जा रही थी, ताकि किसी को शक न हो।

मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मौके पर दबिश दी और पूरे खेत को नष्ट कर दिया। इस दौरान झारखंड निवासी मार्शल सांगां को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में पिछले 15 दिनों के भीतर अफीम की खेती का यह चौथा मामला सामने आया है, जिससे पुलिस और प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।

साय सरकार का बड़ा फैसला: प्रॉपर्टी रजिस्ट्री अब होगी सस्ती

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ विधानसभा ने छत्तीसगढ़ उपकर (संशोधन) विधेयक, 2026 को आज ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस विधेयक के पारित होने से अचल संपत्ति की रजिस्ट्री पर बाजार मूल्य के आधार पर लगाया जाने वाला 0.60 प्रतिशत उपकर समाप्त हो गया है। वाणिज्यिक कर मंत्री  ओ पी चौधरी ने बताया कि इस निर्णय से प्रदेश के आम नागरिकों, किसानों, मध्यमवर्गीय परिवारों तथा संपत्ति के क्रय-विक्रय से जुड़े लाखों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।


           छत्तीसगढ़ उपकर समाप्त होने से अब संपत्ति पंजीयन की लागत में कमी आएगी। उदाहरण के तौर पर एक करोड़ रुपये के बाजार मूल्य की संपत्ति पर नागरिकों को लगभग 60 हजार रुपये की सीधी बचत होगी, इससे जमीन-मकान की रजिस्ट्री अधिक सुलभ, सरल और कम खर्चीली बनेगी। इस अवसर पर विधानसभा में विधेयक प्रस्तुत करते हुए मंत्री  चौधरी  ने कहा कि यह विधेयक केवल एक विधिक संशोधन नहीं, बल्कि राज्य सरकार की जनहित, लोककल्याण और कर-व्यवस्था में न्यायपूर्ण सुधार के प्रति प्रतिबद्धता का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार का स्पष्ट मत है कि शासन का उद्देश्य केवल राजस्व अर्जित करना नहीं, बल्कि जनता के जीवन को सरल, सुलभ और सम्मानजनक बनाना है।

          वाणिज्यिक कर मंत्री चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार ने सितंबर 2025 में जीएसटी 2.0 के माध्यम से आम जनता के उपयोग की वस्तुओं एवं सेवाओं पर व्यापक कर रियायतें प्रदान कीं, जिससे आम नागरिकों की निर्वाह लागत में कमी आई। इसी क्रम में पंजीयन विभाग में भी अनेक ऐतिहासिक, व्यावहारिक और जनहितकारी सुधार किए गए हैं, जिनका उद्देश्य आम जनता पर आर्थिक बोझ कम करना और सेवाओं को सरल बनाना है। उन्होंने बताया कि स्वतः नामांतरण व्यवस्था आम जनता के लिए अत्यंत राहतकारी सिद्ध हुई है। पंजीयन के बाद तत्काल नामांतरण होने से पक्षकारों को आर्थिक बचत के साथ-साथ महीनों चलने वाली नामांतरण प्रक्रिया से मुक्ति मिली है। मई 2025 से अब तक लगभग डेढ़ लाख दस्तावेजों का स्वतः नामांतरण सफलतापूर्वक किया जा चुका है।

          पंजीयन प्रणाली को अधिक सुदृढ़ और पारदर्शी बनाने के लिए सुगम मोबाइल ऐप विकसित किया गया है, जो संपत्ति की सही भौगोलिक स्थिति सुनिश्चित करने में सहायक है। साथ ही, फर्जी व्यक्ति द्वारा पहचान छुपाकर पंजीयन न कराया जा सके, इसके लिए पंजीयन कार्यालयों में आधार आधारित सत्यापन की व्यवस्था भी लागू की गई है। नागरिकों की सुविधा के लिए विभाग द्वारा पंजीयन कार्यालयों को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के वीजा ऑफिस की तर्ज पर सर्वसुविधायुक्त बनाया जा रहा है। इसके अंतर्गत नागरिकों को वातानुकूलित प्रतीक्षालय, स्वच्छ पेयजल, साफ-सुथरे शौचालय, निःशुल्क वाई-फाई तथा क्यू-आधारित त्वरित पंजीयन जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। वर्तमान में 10 पंजीयन कार्यालयों को पीपीपी मोड पर स्मार्ट पंजीयन कार्यालय के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसके बाद अन्य कार्यालयों को भी चरणबद्ध रूप से स्मार्ट कार्यालय बनाया जाएगा।

         चौधरी ने बताया कि सरकार ने पंजीयन शुल्क निर्धारण की व्यवस्था में सुधार किया है। पहले संपत्ति के पंजीयन में गाइडलाइन मूल्य एवं बाजार मूल्य से जो अधिक होता था, उसी पर शुल्क लिया जाता था। अब इस व्यवस्था को बदलते हुए पंजीयन शुल्क को आपसी लेनदेन की कीमत के बजाय गाइडलाइन मूल्य से जोड़ा गया है, इससे बड़ी संख्या में परिवारों को राहत मिली है। उदाहरण स्वरूप यदि किसी संपत्ति का गाइडलाइन मूल्य 10 लाख रुपये है, लेकिन दस्तावेज में बैंक ऋण आदि के कारण 25 लाख रुपये अंकित हैं, तो अब शुल्क केवल 10 लाख रुपये पर ही लगेगा। इस निर्णय से राज्य सरकार ने लगभग 170 करोड़ रुपये के राजस्व का त्याग किया है।

         चौधरी ने बताया कि पहले परिवारजनों के मध्य दान, बंटवारा और हक-त्याग जैसी रजिस्ट्रियों पर बाजार मूल्य का 0.8 प्रतिशत पंजीयन शुल्क लिया जाता था, जिसे सरकार ने घटाकर मात्र 500 रुपये कर दिया है, चाहे संपत्ति का मूल्य कितना भी हो। उदाहरण के तौर पर, एक करोड़ रुपये की संपत्ति के दान पर पहले 80 हजार रुपये शुल्क लगता था, जो अब केवल 500 रुपये रह गया है, इससे सामान्य परिवारों और किसानों को व्यापक राहत मिली है।

गाइडलाइन मूल्य निर्धारण में भी व्यापक जनहितकारी सुधार किए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में छोटी भूमि पर भी अत्यधिक मूल्यांकन की स्थिति को समाप्त करते हुए वर्गमीटर आधारित मूल्यांकन व्यवस्था खत्म कर दी गई है और अब मूल्यांकन हेक्टेयर दर से किया जा रहा है, इससे आम जनता को 300 से 400 करोड़ रुपये तक के लाभ का अनुमान है।

          मंत्री  चौधरी ने बताया किसरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि पर लागू ढाई गुना मूल्यांकन, शहरों और गाँवों में कई प्रकार के अतिरिक्त मूल्यांकन तथा भूमि पर लगे वृक्षों के अलग मूल्यांकन जैसे प्रावधानों को भी समाप्त किया है, इससे जनता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ कम हुआ है और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिला है। शहरी मध्यमवर्गीय परिवारों को राहत देते हुए अब फ्लैट का मूल्यांकन सुपर बिल्ट-अप एरिया के बजाय केवल बिल्ट-अप एरिया के आधार पर किए जाने का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही बाउंड्री वॉल, प्लिंथ आदि जैसे कारणों से होने वाले अनावश्यक अतिरिक्त मूल्यांकन को भी समाप्त किया गया है।

         चौधरी ने बताया कि किसानों के हित में भी सरकार ने महत्त्वपूर्ण कदम उठाए हैं। पहले दो-फसली भूमि, नकदी फसल, मछली पालन हेतु तालाब जैसी स्थितियों में अतिरिक्त मूल्यांकन कर आर्थिक भार बढ़ा दिया जाता था। अब इन सभी प्रावधानों को समाप्त कर कृषि भूमि के लेनदेन को अधिक सहज, न्यायसंगत और किफायती बनाया गया है। मंत्री ने सदन को अवगत कराया कि छत्तीसगढ़ उपकर अधिनियम, 1982 के अंतर्गत स्थावर संपत्ति के अंतरण पर उपकर का प्रावधान किया गया था। वर्ष 2023 में तत्कालीन सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ रोजगार मिशन एवं राजीव गांधी मितान क्लब योजना के वित्तपोषण हेतु स्टांप शुल्क के अतिरिक्त 12 प्रतिशत की दर से उपकर अधिरोपित किया गया था। इसके कारण नागरिकों को संपत्ति के पंजीयन पर बाजार मूल्य का लगभग 0.60 प्रतिशत अतिरिक्त भार वहन करना पड़ रहा था।

           वाणिज्यिक कर मंत्री  चौधरी ने कहा कि वर्तमान में राजीव गांधी मितान क्लब योजना संचालित नहीं है तथा रोजगार संबंधी योजनाओं का वित्तपोषण अब राज्य के सामान्य बजट से किया जा रहा है। ऐसे में जिस उद्देश्य से यह उपकर लगाया गया था, वह अब प्रासंगिक नहीं रह गया है। इसी सोच के अनुरूप जनता को राहत प्रदान करने के लिए इस अनावश्यक उपकर को समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।

        मंत्री ने बताया कि वर्ष 2024-25 में राज्य सरकार को उपकर से लगभग 148 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था तथा वर्तमान वित्तीय वर्ष में अब तक लगभग 150 करोड़ रुपये का उपकर प्राप्त हो चुका है। उपकर समाप्त होने से सरकार को राजस्व की हानि अवश्य होगी, किंतु इसका सीधा लाभ आम जनता को मिलेगा और यही सरकार की नीतियों का मूल केंद्र है।

         उन्होंने आगे कहा कि इस संशोधन के माध्यम से छत्तीसगढ़ उपकर अधिनियम, 1982 की धारा 8, धारा 9 तथा अनुसूची में वर्णित उपकर संबंधी प्रावधानों को हटाने का प्रस्ताव किया गया है। अचल संपत्ति के अंतरण विलेखों के पंजीयन पर लगाया जाने वाला उपकर अब पूर्णतः समाप्त कर दिया जाएगा।

         शासन के इस निर्णय और पंजीयन विभाग में किए गए सुधारों से प्रदेश की जनता को अनेक प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होंगे। संपत्ति के पंजीयन पर देय शुल्क में कमी आएगी, जमीन-मकान की रजिस्ट्री अधिक किफायती होगी, मध्यमवर्गीय एवं निम्न आय वर्गीय परिवारों को राहत मिलेगी, दस्तावेजों के पंजीयन में वृद्धि होगी, किसानों और परिवारों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा तथा संपत्ति का बाजार मूल्य और आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।

        मंत्री चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार सदैव इस सिद्धांत पर चली है कि छत्तीसगढ़ की जनता पर अनावश्यक कर का बोझ नहीं होना चाहिए। यह निर्णय और सुधारों की यह श्रृंखला उन लाखों नागरिकों को राहत देने वाली है, जो अपनी जीवन भर की कमाई से जमीन खरीदते हैं, घर बनाते हैं। परिवार में संपत्ति का बंटवारा करते हैं अथवा अपने बच्चों के भविष्य के लिए संपत्ति का हस्तांतरण करते हैं। यह केवल कर में कमी नहीं, बल्कि जनता के परिश्रम, सपनों और अधिकारों के प्रति संवेदनशील शासन का परिचायक है। उन्होंने कहा कि विष्णु देव की सरकार आने के बाद पंजीयन विभाग में किए जाने वाले जनहितैषी सुधारों के कारण पंजीयन शुल्क में होने वाले रियायतों से प्रतिवर्ष 460 करोड़ का सीधा लाभ आमजनता को होगा।

अचल संपत्ति रजिस्ट्री पर उपकर समाप्त, आम नागरिकों को बड़ी राहत - मुख्यमंत्री  

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ उपकर (संशोधन) विधेयक, 2026 के माध्यम से अचल संपत्ति की रजिस्ट्री पर लगाए गए 0.60 प्रतिशत उपकर को समाप्त करना हमारी सरकार का जनहित में लिया गया एक महत्वपूर्ण निर्णय है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि आम नागरिक, किसान और मध्यमवर्गीय परिवारों पर किसी भी प्रकार का अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े। राज्य में सुशासन, पारदर्शिता और जनकल्याण को केंद्र में रखते हुए हम लगातार कर व्यवस्था को सरल, न्यायसंगत और नागरिक-अनुकूल बना रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय केवल कर में राहत नहीं, बल्कि उन लाखों परिवारों के सपनों को सम्मान देने की दिशा में एक सार्थक पहल है, जो अपनी मेहनत की कमाई से घर और जमीन खरीदते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि इस कदम से संपत्ति के पंजीयन में वृद्धि होगी, आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को नई ऊर्जा प्राप्त होगी।

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