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राज्यपाल डेका ने विद्यार्थियों से किया संवाद, दिए सफलता के मंत्र

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 रायपुर : राज्यपाल रमेन डेका से आज लोक भवन में सैनिक स्कूल अंबिकापुर के विद्यार्थियों ने भेंट की और संवाद किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने विद्यार्थियों को सफलता के लिए अनुशासन, आत्मनियंत्रण और कठोर परिश्रम को जीवन का आधार बनाने की प्रेरणा दी।


’सफलता का आधारभूत बिंदु अनुशासन है सैनिक स्कूल’

राज्यपाल डेका ने कहा कि विद्यार्थी सौभाग्यशाली हैं कि उन्हें सैनिक स्कूल जैसी उत्कृष्ट शैक्षणिक संस्था में अध्ययन करने का अवसर मिला है। सैनिक स्कूल में विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ अनुशासन, समय की पाबंदी तथा शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य का महत्व भी सिखाया जाता है। उन्होंने कहा कि सफलता का आधारभूत बिंदु अनुशासन है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पढ़ाई, नौकरी और करियर को लेकर तनाव एक बड़ी चुनौती है। तनाव का सामना करने के लिए हमें जो प्राप्त है, उसमें संतुष्ट रहना सीखना होगा। अपनी क्षमताओं को पहचानकर उसी के अनुरूप कार्य करना चाहिए। मन को नियंत्रित रखते हुए अपनी योग्यता और ऊर्जा को सही दिशा में लगाएंगे तो सफलता अवश्य मिलेगी।

’लक्ष्य को निर्धारित करें और उसे प्राप्त करने के लिए पूरी लगन एवं मेहनत से प्रयास करें’

राज्यपाल ने कहा कि कठोर परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है। योग्यता के साथ यदि निरंतर मेहनत की जाए तो सफलता प्राप्त करने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने लक्ष्य को निर्धारित करें और उसे प्राप्त करने के लिए पूरी लगन एवं मेहनत से प्रयास करें। गुरुजनों और पालकों की बातों को गंभीरता से सुनें, लेकिन निर्णय लेते समय अपने तर्क और बुद्धि का भी प्रयोग करें।

उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी ‘थिंकिंग प्रोसेस’ को हमेशा सक्रिय रखने की सलाह दी। संवाद के दौरान विद्यार्थियों ने राज्यपाल से उनके जीवन, करियर और सार्वजनिक जीवन से संबंधित अनेक प्रश्न पूछे। राज्यपाल ने विद्यार्थियों के प्रश्नों का सहजता से उत्तर देते हुए उन्हें अपने संवैधानिक पद के दायित्वों की जानकारी दी तथा अपने सार्वजनिक जीवन की यात्रा के अनुभव भी साझा किए। सैनिक स्कूल के विद्यार्थियों को लोक भवन का भ्रमण भी कराया गया। इस अवसर पर सैनिक स्कूल अंबिकापुर के शिक्षकगण भी उपस्थित थे।a

रायपुर में 650 किलो संदिग्ध पनीर जब्त, खाद्य विभाग ने लिया सैंपल

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 रायपुर। राजधानी रायपुर में संदिग्ध पनीर की सूचना पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने कार्रवाई की। टीम ने जोरा मॉल के सामने खड़े एक पिकअप वाहन की जांच की। वाहन में ओडिशा भेजने के लिए रखा करीब 650 किलो संदिग्ध पनीर मिला। गुणवत्ता पर संदेह होने के बाद विभाग की टीम ने पनीर का नमूना जांच के लिए लिया है।


खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के नोडल अधिकारी डोमेंद्र ध्रुव ने बताया कि संदिग्ध पनीर की सूचना मिलने के बाद टीम मौके पर पहुंची थी। जांच के दौरान पिकअप वाहन में रखे पनीर की गुणवत्ता संदिग्ध पाए जाने पर उसका सैंपल लिया गया।

नमूना जांच के लिए भेजा

जांच में पनीर की सामग्री बिरगांव निवासी अंशु बंसल के नाम से संबंधित पाई गई। नमूना लेने के बाद शेष पनीर को नियमानुसार संबंधित व्यक्ति की अभिरक्षा में सीज कर सुरक्षित रखा गया है।

विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, पनीर के नमूने की जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि पनीर खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप है या नहीं।

सतनामी समाज को साधने की कवायद? गुरु बालदास के बेटे ढाल दास ने थामा कांग्रेस का हाथ

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव भले ही करीब दो साल दूर हों, लेकिन राजनीतिक गतिविधियां अभी से तेज होने लगी हैं। इसी बीच सतनामी समाज से जुड़े परिवार के वरिष्ठ सदस्य और मंत्री खुशवंत साहब के बड़े भाई ढाल दास कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मौजूदगी में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की।


कांग्रेस में शामिल होने के बाद भूपेश बघेल ने ढाल दास का स्वागत करते हुए कहा कि उनके पार्टी में आने से कांग्रेस को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी अपने सिद्धांतों और विचारधारा के साथ आगे बढ़ेगी।

सतनामी समाज के बीच राजनीतिक महत्व

ढाल दास के कांग्रेस में शामिल होने को छत्तीसगढ़ की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है। उनके पिता गुरु बालदास सतनामी समाज के प्रमुख धर्मगुरुओं में माने जाते हैं। वहीं उनके छोटे भाई खुशवंत साहब प्रदेश की भाजपा सरकार में मंत्री हैं।

सतनामी समाज की सामाजिक और राजनीतिक भूमिका को देखते हुए ढाल दास का कांग्रेस में जाना राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। प्रदेश में अनुसूचित जाति वर्ग की आबादी करीब 14 प्रतिशत है और इसका बड़ा हिस्सा मैदानी क्षेत्रों में निवास करता है।

कई विधानसभा सीटों पर प्रभाव

छत्तीसगढ़ में कुल 90 विधानसभा सीटें हैं। राजनीतिक विश्लेषण में सतनामी समाज को करीब 20 विधानसभा सीटों पर प्रभावशाली माना जाता है। यही वजह है कि प्रदेश के प्रमुख राजनीतिक दल इस समाज के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश करते रहे हैं।

सतनामी समाज बाबा गुरु घासीदास की शिक्षाओं और परंपरा से गहराई से जुड़ा है। ऐसे में समाज से जुड़े प्रभावशाली लोगों की राजनीतिक सक्रियता का असर चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है।

आने वाले चुनाव में कितना पड़ेगा असर?

ढाल दास के कांग्रेस में शामिल होने से पार्टी को सतनामी समाज के बीच कितना राजनीतिक लाभ मिलेगा, इसका आकलन आने वाले समय में होगा। हालांकि, चुनाव से पहले इस घटनाक्रम ने प्रदेश की सियासत में चर्चाओं को जरूर तेज कर दिया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले दिनों में कांग्रेस और भाजपा सतनामी समाज को लेकर अपनी रणनीति किस तरह आगे बढ़ाते हैं।

स्पा सेंटर की आड़ में देह व्यापार का आरोप, रायपुर में संचालक-मैनेजर गिरफ्तार

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युवतियों ने लगाए जबरन देह व्यापार कराने के आरोप, पीटा एक्ट के तहत मामला दर्ज


रायपुर। राजधानी के देवेंद्र नगर थाना क्षेत्र स्थित इशवा लग्जरी स्पा सेंटर में कथित देह व्यापार के मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए संचालक और मैनेजर को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने 10 सितंबर को स्पा सेंटर में दबिश दी थी। कार्रवाई के दौरान कुछ आपत्तिजनक सामग्री बरामद होने का भी दावा किया गया है।

नियमित जांच के दौरान मिली संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी

पुलिस के मुताबिक, क्षेत्र में नियमित जांच के दौरान स्पा सेंटर में संदिग्ध गतिविधियां संचालित होने की जानकारी मिली थी। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने सेंटर में दबिश देकर जांच की। इस दौरान वहां मौजूद लोगों से पूछताछ की गई और कुछ आपत्तिजनक सामग्री मिलने की बात सामने आई।

पुलिस जांच में सामने आया कि स्पा सेंटर के संचालक हरविंदर सिंह ग्रोवर, निवासी टिकरापारा और मैनेजर मुकेश कुमार वर्मा, निवासी भिलाई-3 पर दूसरे राज्यों से युवतियों को बुलाकर कथित रूप से देह व्यापार कराने का आरोप है।

युवतियों ने लगाए जबरन देह व्यापार के आरोप

छापेमारी के बाद पुलिस ने स्पा सेंटर में काम करने वाली युवतियों से भी पूछताछ की। पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान युवतियों ने संचालक और मैनेजर पर जबरन देह व्यापार कराने के आरोप लगाए।

पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि स्पा सेंटर की गतिविधियों से और कौन-कौन लोग जुड़े थे और दूसरे राज्यों से युवतियों को यहां किस माध्यम से लाया जाता था।

पीटा एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज

देवेंद्र नगर थाना पुलिस ने मामले में अपराध क्रमांक 152/2026 दर्ज किया है। दोनों आरोपियों के खिलाफ अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम, 1956 की धारा 4, 5 और 7 के तहत अपराध दर्ज किया गया है।

फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

महासमुंद में 190 की शराब 200 में बेची, आबकारी अधिकारी निलंबित

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में शराब की ओवररेटिंग और अवैध शराब निर्माण के मामलों में आबकारी विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। महासमुंद में निर्धारित कीमत से अधिक दाम पर शराब बेचने का मामला सामने आने पर दुकान प्रभारी और वृत्त प्रभारी को निलंबित किया गया है। वहीं कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर में अवैध शराब निर्माण से जुड़ी सामग्री की बड़ी बरामदगी के बाद दो आबकारी अधिकारियों पर निलंबन की कार्रवाई की गई है। इसके अलावा महासमुंद मामले में दो सहायक जिला आबकारी अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।


20 रुपये ज्यादा वसूलने पर कार्रवाई

महासमुंद जिले की तुमा डबरी (बेमचा) कंपोजिट मदिरा दुकान में 7 सितंबर को राज्य स्तरीय उड़नदस्ते ने आकस्मिक जांच की। छद्म ग्राहक के माध्यम से कराए गए परीक्षण में बैगपाइपर व्हिस्की के एक पाव की निर्धारित कीमत 190 रुपये के बजाय 200 रुपये वसूलते पाया गया।

जांच में दो अलग-अलग विक्रेताओं द्वारा दो पाव शराब के लिए निर्धारित 380 रुपये के बजाय 400 रुपये लिए जाने की पुष्टि हुई। इस तरह ग्राहकों से कुल 20 रुपये अधिक वसूले गए। मामले में दोनों विक्रेताओं के खिलाफ छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम की धारा 39(ग) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया।

विभाग ने मामले को क्षेत्रीय निगरानी में गंभीर चूक मानते हुए मदिरा दुकान प्रभारी और वृत्त प्रभारी नितेश सिंह बैस को निलंबित कर दिया।

कांकेर में हजारों बोतल और ढक्कन बरामद

दूसरी कार्रवाई उत्तर बस्तर कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर थाना क्षेत्र में हुई। ग्राम बसंत नगर (नारायणपुर) स्थित एक बंद किराए के मकान में पुलिस की कार्रवाई के दौरान अवैध शराब निर्माण से संबंधित बड़ी मात्रा में सामग्री बरामद की गई।

बरामद सामग्री में 4,409 खाली शराब की बोतल-पौवा, 3,380 ढक्कन, 105 पत्ते स्टीकर और होलोग्राम शामिल हैं। इसके अलावा जम्मू स्पेशल व्हिस्की के 30 भरे हुए पौवे भी मिले, जिनमें करीब 5.400 लीटर शराब थी।

विभाग के अनुसार विभिन्न ब्रांडों के स्टीकर और होलोग्राम की कीमत करीब 59,645 रुपये, जबकि खाली बोतल-पौवों की कीमत करीब 22,045 रुपये है।

दो आबकारी अधिकारियों पर भी कार्रवाई

अवैध शराब निर्माण से जुड़ी यह सामग्री आबकारी उप निरीक्षक एवं भानुप्रतापपुर वृत्त प्रभारी रानू मरकाम के क्षेत्राधिकार में बरामद हुई। विभाग ने इसे कर्तव्य में लापरवाही और प्रभावी निगरानी के अभाव का मामला मानते हुए उन्हें तत्काल निलंबित कर दिया।

इसी मामले में जिला आबकारी अधिकारी कार्यालय के प्रभारी सहायक जिला आबकारी अधिकारी मधुकर श्याम हरित के खिलाफ भी प्रथम दृष्टया गंभीर लापरवाही और पर्यवेक्षण में कमी पाए जाने पर निलंबन की कार्रवाई की गई है।

दो अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस

महासमुंद में ओवररेटिंग के मामले में विभाग ने उच्च स्तर पर भी जवाबदेही तय की है। सहायक जिला आबकारी अधिकारी दीपक ठाकुर और अजय कुमार पाण्डेय को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। दोनों अधिकारियों से सात दिन के भीतर जवाब मांगा गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर उनके खिलाफ एकपक्षीय कार्रवाई की जा सकती है।

राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने सपरिवार देखी फिल्म ‘हनुमान अंश’

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित जोरा मॉल के सिनेमाघर में सपरिवार फिल्म ‘हनुमान अंश’ देखी। इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह भी सपरिवार उपस्थित रहे। मंत्रिपरिषद के सदस्य तथा विभिन्न निगम-मंडल-आयोगों के अध्यक्षों ने भी फिल्म देखी।


फिल्म देखने के बाद मुख्यमंत्री साय ने ‘हनुमान अंश’ को छत्तीसगढ़ में टैक्स फ्री करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और संत परंपरा से समाज को परिचित कराने वाली ऐसी प्रेरणादायी फिल्में अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचनी चाहिए। फिल्म को टैक्स फ्री किए जाने से प्रदेश के अधिकाधिक दर्शकों, विशेषकर युवाओं को भारत की समृद्ध संत परंपरा और उसके जीवन मूल्यों को जानने का अवसर मिलेगा।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारत की संत परंपरा ने सदैव समाज को सत्य, सेवा, करुणा, प्रेम और आध्यात्मिकता का मार्ग दिखाया है। संतों ने अपने जीवन और आचरण के माध्यम से समाज को मानवता और लोककल्याण का संदेश दिया है। नीम करौली बाबा का जीवन भी इसी महान परंपरा का प्रेरणादायी उदाहरण है। उनका जीवन हमें यह सीख देता है कि मानव सेवा ही ईश्वर की सच्ची सेवा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नीम करौली बाबा ने अत्यंत सरल शब्दों और सहज जीवन के माध्यम से प्रेम, सेवा और भक्ति का संदेश दिया। उनके विचारों में मानवता और सभी के प्रति समान भाव सर्वोपरि रहा। उनका यह संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है और समाज को सकारात्मक दिशा देने की सामर्थ्य रखता है।

मुख्यमंत्री साय ने फिल्म के निर्माताओं, निर्देशक, कलाकारों एवं पूरी टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज तक विचार, संस्कार और प्रेरणा पहुंचाने का भी प्रभावी माध्यम है। भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और संत परंपरा पर आधारित सकारात्मक फिल्में नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, परंपराओं और मानवीय मूल्यों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक शक्ति उसकी हजारों वर्षों पुरानी परंपराओं और जीवन मूल्यों में निहित है। सेवा, करुणा, सद्भाव और मानव कल्याण जैसे मूल्यों को आगे बढ़ाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। ‘हनुमान अंश’ जैसी फिल्में इन मूल्यों को सरल और प्रभावी रूप में समाज तक पहुंचाने का सराहनीय प्रयास हैं।

उल्लेखनीय है कि फिल्म ‘हनुमान अंश’ नीम करौली बाबा के जीवन, आध्यात्मिक यात्रा और उनके सेवा एवं भक्ति के संदेश पर आधारित है।

इस अवसर पर मंत्रिपरिषद के सदस्य, विभिन्न निगम-मंडल-आयोगों के अध्यक्षगण सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

BRICS समिट के लिए दिल्ली पहुंचे पुतिन, आज PM मोदी से होगी मुलाकात

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तीन दिवसीय भारत दौरे पर रूसी राष्ट्रपति, BRICS बिजनेस फोरम को करेंगे संबोधित; INNOPROM प्रदर्शनी का भी करेंगे दौरा


नई दिल्ली। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तीन दिवसीय भारत दौरे पर देर रात दिल्ली पहुंचे। वह 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। पुतिन के भारत पहुंचने से पहले रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंतुरोव भी दिल्ली पहुंच चुके हैं।

रूसी राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन के अधिकारी यूरी उशाकोव के मुताबिक, पुतिन शुक्रवार को BRICS बिजनेस फोरम के पूर्ण सत्र को संबोधित करेंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठक होगी। दोनों नेता भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय संबंधों, व्यापार और रणनीतिक साझेदारी से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं।

पालम एयरपोर्ट पर हुआ स्वागत

रूसी राष्ट्रपति के दिल्ली पहुंचने पर पालम एयरपोर्ट पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पुतिन के भारत आगमन का स्वागत करते हुए कहा कि भारत और रूस के बीच लंबे समय से बहुआयामी संबंध हैं। दोनों देशों के बीच संबंध ‘विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी’ पर आधारित हैं।

PM मोदी से द्विपक्षीय मुलाकात

पुतिन आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इसके अलावा दोनों नेता भारत और रूस के उद्योग एवं व्यापार मंत्रालयों की ओर से आयोजित INNOPROM India Exhibition का दौरा भी करेंगे।

BRICS शिखर सम्मेलन का मुख्य कार्यक्रम 12 सितंबर से शुरू होगा। इसमें सदस्य देशों के नेता भारत की अध्यक्षता में प्रस्तावित विभिन्न पहलों और संगठन की रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा करेंगे।

राजनीति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर होगी चर्चा

शिखर सम्मेलन में राजनीति एवं सुरक्षा, अर्थव्यवस्था एवं वित्त तथा सांस्कृतिक एवं मानवीय सहयोग के क्षेत्रों में BRICS साझेदारी को मजबूत करने पर विचार किया जाएगा। इसके साथ ही नेता मौजूदा अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।

पुतिन समिट से इतर दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी समेत कई देशों के नेताओं से द्विपक्षीय मुलाकात भी करेंगे।

13 सितंबर को होगी Expanded BRICS बैठक

13 सितंबर को Expanded BRICS बैठक प्रस्तावित है। इसमें सदस्य देशों और पार्टनर देशों के प्रतिनिधिमंडल प्रमुखों के साथ आमंत्रित देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख भी शामिल होंगे। सम्मेलन में हुई प्रमुख चर्चाओं और सहमतियों को अंतिम दस्तावेज में शामिल किए जाने की उम्मीद है।

शी जिनफिंग भी होंगे BRICS समिट में शामिल

चीन के राष्ट्रपति शी जिनफिंग भी BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत पहुंचेंगे। उनके दौरे को भारत-चीन संबंधों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शी जिनफिंग के साथ द्विपक्षीय बातचीत प्रस्तावित है।

दोनों नेताओं की मुलाकात ऐसे समय में होगी, जब भारत और चीन के बीच व्यापार, निवेश और सीमा से जुड़े मुद्दे लगातार चर्चा में हैं। दोनों देशों के बीच हाल के वर्षों में उच्चस्तरीय बातचीत का दौर भी जारी रहा है।

पुतिन से लेकर पेजेश्कियान तक, कई नेताओं से मिलेंगे मोदी

BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और अन्य वैश्विक नेताओं के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। इन बैठकों में द्विपक्षीय संबंधों के साथ क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है।

भारत की BRICS अध्यक्षता में होने वाला यह शिखर सम्मेलन वैश्विक दक्षिण की प्राथमिकताओं, आर्थिक सहयोग और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

चक्रधर समारोह में सजेगी सुर, ताल और संस्कृति की दस दिवसीय महफिल

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कविता कृष्णमूर्ति, अनुज शर्मा, भारती बंधु और इंडियन आइडल फेम कलाकारों समेत देश-प्रदेश की नामचीन प्रतिभाएं बिखेरेंगी संस्कृति के रंग

शास्त्रीय नृत्य, पंडवानी, लोकसंगीत, कबीर भजन, गजल और वाद्य वादन से गुलजार होगा रायगढ़

रायपुर- महाराजा चक्रधर सिंह की कला-साधना और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को समर्पित 41वें अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह-2026 में इस बार कला और संस्कृति के विविध रंग एक साथ देखने को मिलेंगे। रायगढ़ के रामलीला मैदान में 14 से 23 सितम्बर तक आयोजित होने वाले इस दस दिवसीय सांस्कृतिक महाकुंभ में स्थानीय प्रतिभाओं से लेकर देश-प्रदेश के सुप्रसिद्ध कलाकार अपनी कला का जादू बिखेरेंगे। प्रतिदिन शाम 6 बजे से शुरू होने वाली सांस्कृतिक संध्याओं में शास्त्रीय नृत्य, छत्तीसगढ़ी लोककला, पंडवानी, लोकसंगीत, कबीर भजन, गजल और वाद्य प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय कला एवं संस्कृति की समृद्ध परंपरा जीवंत होगी।

संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल एवं जनसहयोग से जिला प्रशासन द्वारा आयोजित इस प्रतिष्ठित समारोह में पद्मश्री सम्मानित कलाकारों के साथ इंडियन आइडल फेम कलाकार भी अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगे। समारोह की खासियत यह होगी कि हर शाम कला की एक अलग विधा और अलग रंग दर्शकों के सामने आएगा। दस दिनों तक रायगढ़ का रामलीला मैदान सुर, ताल, नृत्य और लोक परंपराओं के अनूठे संगम का साक्षी बनेगा।

गणेश वंदना से होगा शुभारंभ, पंडवानी और लोकसंगीत से सजेगी पहली शाम

समारोह का शुभारंभ 14 सितम्बर को वेदमणि सिंह ठाकुर के शिष्यों द्वारा गणेश वंदना की प्रस्तुति से होगा। इसके बाद पद्मश्री सम्मानित अनुज शर्मा लोक कला एवं संगीत की प्रस्तुति देंगे। वहीं पद्मश्री सम्मानित डॉ. उषा बारले अपनी पंडवानी प्रस्तुति से पहली सांस्कृतिक संध्या को यादगार बनाएंगी। लोकधुनों, लोकगाथाओं और पंडवानी की सशक्त परंपरा से समारोह का आगाज होगा।

15 सितम्बर को तबला, कुचिपुड़ी और राजस्थानी लोककला का संगम

15 सितम्बर की शाम में निशित गंगानी का तबला वादन, टी. लक्ष्मी रेड्डी की कुचिपुड़ी प्रस्तुति, स्टार्क सोसाइटी बाड़मेर की राजस्थानी फोक प्रस्तुति और तरुणा साहू एवं समूह की पंडवानी प्रस्तुति होगी। इसके साथ माधवरस बैंड द्वारा भजन गायन की प्रस्तुति सांस्कृतिक संध्या को भक्तिरस से सराबोर करेगी।

16 सितम्बर को कथक और छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य की छटा

16 सितम्बर को छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और शास्त्रीय नृत्य की विविधता मंच पर दिखाई देगी। मौमाला नायक कथक की प्रस्तुति देंगी। भूपेन्द्र साहू एवं समूह छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य प्रस्तुत करेंगे। डॉ. यास्मीन सिंह एवं समूह तथा विभूति शर्मा द्वारा कथक की प्रस्तुतियां होंगी, जबकि पायल साहू एवं समूह लोककला के रंग बिखेरेंगे।

17 सितम्बर को भरतनाट्यम, ओडिसी और कथक की त्रिवेणी

17 सितम्बर की शाम लोककला एवं संगीत के साथ शास्त्रीय नृत्य की अनेक विधाओं का संगम देखने को मिलेगा। बादल-बस्तर अकादमी ऑफ डांस, आर्ट्स एवं लिटरेचर द्वारा लोक कला एवं संगीत की प्रस्तुति होगी। मधुमिता रॉय मिश्रा कथक और जान्हवी बेहरा ओडिसी नृत्य प्रस्तुत करेंगी। शिवरंजनी हरीश एवं कलार्पणा नृत्य समूह पद्म भूषण शोभना के शिष्यगण भरतनाट्यम की प्रस्तुति देंगे। शिव शक्ति कला संस्थान द्वारा कथक की प्रस्तुति भी होगी।

18 सितम्बर को मणिपुरी, कुचिपुड़ी और कबीर भजनों की सुरमयी शाम

18 सितम्बर को डॉ. मंजू इलंगबम मणिपुरी नृत्य प्रस्तुत करेंगी। पद्मश्री सम्मानित भारती बंधु कबीर भजनों से आध्यात्मिक वातावरण निर्मित करेंगे। श्वेता नायक एवं समूह कुचिपुड़ी तथा अनुराग शर्मा लोकसंगीत की प्रस्तुति देंगे।

काव्य और ओडिसी से सजेगी 19 सितम्बर की शाम

19 सितम्बर कला और साहित्य के प्रेमियों के लिए खास होगी। गौरी शंकर दाश और रीला होता ओडिसी नृत्य की प्रस्तुतियां देंगी। वहीं पद्मश्री सम्मानित सुरेन्द्र शर्मा एवं अन्य कलाकार काव्य संध्या के माध्यम से हास्य और साहित्य का रंग भरेंगे। नृत्य और काव्य का यह संगम समारोह की शाम को विशिष्ट बनाएगा।

20 सितम्बर को गोटीपुआ, गायन और कथक का अनूठा संगम

20 सितम्बर को बी. साहू एवं समूह गोटीपुआ नृत्य प्रस्तुत करेंगे। इंडियन आइडल फेम अमित साना अपनी गायन प्रस्तुति से संगीत प्रेमियों का मनोरंजन करेंगे। वहीं पद्मश्री सम्मानित रामलाल बरेठ के निर्देशन में भूपेन्द्र बरेठ एवं समूह कथक नृत्य प्रस्तुत करेंगे। लोकनृत्य, लोकप्रिय गायन और शास्त्रीय नृत्य का यह संगम दर्शकों के लिए खास आकर्षण रहेगा।

21 सितम्बर को कथक, संतूर-पखावज-तबला और नृत्य नाटिका

21 सितम्बर की शाम बनारस घराने के कथक से लेकर वाद्य संगीत तक विविध प्रस्तुतियों से सजेगी। रूद्रशंकर सिन्हा बनारस घराने का कथक प्रस्तुत करेंगे। सोनू गुप्ता एवं समूह लोकगीत, वांसती वैष्णव एवं समूह कथक प्रस्तुत करेंगे। त्रिवेणी संगम द्वारा संतूर, पखावज और तबला वादन होगा। संस्कार कला संघ नृत्य नाटिका तथा नृत्यांजलि बनारस घराने के कथक की प्रस्तुति देगी।

22 सितम्बर को कथकली, ओडिसी, सितार और सूफियाना अंदाज

समारोह की 22 सितम्बर की शाम शास्त्रीय नृत्य, वाद्य संगीत और सूफियाना अंदाज के नाम रहेगी। गुरु कोट्टक्कल नंदकुमारन नायर कथकली, दीक्षा रथ ओडिसी नृत्य और प्रो. डॉ. लवली शर्मा सितार वादन प्रस्तुत करेंगी। पुनरिक साहू-लहरंगगा लोक संगीत की प्रस्तुति देंगे, जबकि रायगढ़ के राकेश शर्मा सूफी गायन और गजल से शाम को सुरमयी बनाएंगे।

कविता कृष्णमूर्ति और जान कुमार सानू के सुरों से होगा भव्य समापन

दस दिवसीय समारोह का 23 सितम्बर को भव्य समापन होगा। अंतिम शाम देश की सुप्रसिद्ध और पद्मश्री सम्मानित गायिका कविता कृष्णमूर्ति अपनी सुरमयी प्रस्तुति देंगी। उनके साथ जान कुमार सानू भी गायन की प्रस्तुति देंगे। देश के लोकप्रिय कलाकारों के सुरों से सजी यह शाम 41वें चक्रधर समारोह की यादों को लंबे समय तक दर्शकों के दिलों में संजोए रखेगी।

रायगढ़ बनेगा कला और संस्कृति का केंद्र

41वां चक्रधर समारोह केवल सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन नहीं, बल्कि महाराजा चक्रधर सिंह की कला-साधना, संगीत और नृत्य के प्रति उनके समर्पण तथा छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण मंच है। स्थानीय कलाकारों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कलाकारों के साथ एक ही मंच पर प्रस्तुति का अवसर मिलना समारोह की विशेष उपलब्धि है।

14 से 23 सितम्बर तक रायगढ़ में होने वाला यह सांस्कृतिक आयोजन कला प्रेमियों के लिए दस दिनों तक उत्सव का माहौल बनाएगा। शास्त्रीय नृत्य की विविध विधाओं से लेकर छत्तीसगढ़ी लोकधुनों, पंडवानी, भजन, गजल और लोकप्रिय गायन तक चक्रधर समारोह में भारतीय संस्कृति की विविधता और समृद्धि का ऐसा रंगारंग संसार देखने को मिलेगा, जो रायगढ़ को दस दिनों तक कला और संस्कृति की राजधानी में बदल देगा।

रायपुर के पास तेंदुए की दहशत, 5 बकरियों का किया शिकार; खेत में बैठा रहा तेंदुआ

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वन विभाग की टीम मौके पर, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी; तेंदुए को ट्रैंक्विलाइज कर सुरक्षित पकड़ने की तैयारी

रायपुर- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के आसपास एक बार फिर तेंदुए की मौजूदगी से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। रायपुर के पास एक खेत में घुसे तेंदुए ने 5 बकरियों का शिकार कर दिया। बकरियों के शिकार के बाद तेंदुआ खेत में ही बैठा रहा, जिसके चलते आसपास के इलाके में लोगों की आवाजाही को लेकर चिंता बढ़ गई है।

खेत में घुसकर बकरियों का किया शिकार

जानकारी के मुताबिक, तेंदुआ खेत में पहुंचा और वहां मौजूद बकरियों को अपना शिकार बनाया। इस घटना के बाद ग्रामीणों में भय का माहौल बन गया। तेंदुए के खेत में ही मौजूद होने की जानकारी मिलते ही आसपास के लोगों को सतर्क किया गया और मौके से दूर रहने की अपील की गई।

वन विभाग ने शुरू किया रेस्क्यू ऑपरेशन

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग सक्रिय हो गया। रायपुर से विशेष रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची और तेंदुए को सुरक्षित पकड़ने के लिए ऑपरेशन शुरू किया गया है।

वन विभाग की टीम तेंदुए को ट्रैंक्विलाइज यानी बेहोश कर सुरक्षित तरीके से पकड़ने की तैयारी कर रही है। इसके बाद तेंदुए को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील

तेंदुए की मौजूदगी को देखते हुए वन विभाग और प्रशासन ने लोगों से घटनास्थल के आसपास नहीं जाने और सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की है। रेस्क्यू टीम के ऑपरेशन के दौरान भी लोगों को मौके से दूर रहने की सलाह दी गई है, ताकि तेंदुआ घबराकर किसी व्यक्ति पर हमला न करे।

वन्यजीव और इंसानी बस्तियों के बीच बढ़ता संपर्क

रायपुर के आसपास तेंदुए की इस तरह मौजूदगी एक बार फिर वन्यजीवों के प्राकृतिक क्षेत्र और मानव बस्तियों के बीच बढ़ते संपर्क की ओर ध्यान खींचती है। ग्रामीण इलाकों में पशुओं पर वन्यजीवों के हमले से स्थानीय लोगों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ जाती है।

फिलहाल वन विभाग का मुख्य उद्देश्य तेंदुए को बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित रेस्क्यू करना है। टीम की निगरानी में पूरा ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

लोगों के लिए जरूरी अपील

  • तेंदुए को देखने या उसका वीडियो बनाने के लिए उसके करीब न जाएं।

  • खेत या झाड़ियों वाले इलाकों में अकेले जाने से बचें।

  • बच्चों और पालतू पशुओं को सुरक्षित स्थान पर रखें।

  • रेस्क्यू टीम के काम में बाधा न डालें।

  • तेंदुआ नजर आने पर तुरंत वन विभाग या स्थानीय प्रशासन को सूचना दें।

फिलहाल इलाके में तेंदुए को सुरक्षित पकड़ने के लिए वन विभाग की टीम तैनात है और ट्रैंक्विलाइजेशन की तैयारी की जा रही है।

62 साल की उम्र में 10वीं पास कर कौशल्या देवी ने रचा मिसाल, महासमुंद की मां ने साबित किया—पढ़ाई की कोई उम्र नहीं

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पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते छूट गई थी पढ़ाई, फिर दोबारा शुरू की पढ़ाई; तीनों बच्चे सरकारी सेवा में, मां की उपलब्धि पर परिवार में खुशी

महासमुंद- उम्र को अक्सर लोग नई शुरुआत में सबसे बड़ी बाधा मान लेते हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ के महासमुंद की कौशल्या देवी बंसल ने इस सोच को गलत साबित कर दिया है। उन्होंने 62 वर्ष की उम्र में कक्षा 10वीं की परीक्षा पास कर न सिर्फ अपनी अधूरी पढ़ाई पूरी की, बल्कि उन लोगों के लिए भी प्रेरणा बन गईं जो किसी कारणवश शिक्षा बीच में छोड़ देते हैं।


अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के मौके पर सामने आई कौशल्या देवी की कहानी यह संदेश देती है कि सीखने और आगे बढ़ने की कोई उम्र नहीं होती। पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण उनकी पढ़ाई कम उम्र में ही छूट गई थी। हालांकि, मन में पढ़ाई पूरी करने की इच्छा बनी रही। इसी इच्छा और दृढ़ संकल्प के साथ उन्होंने बाद के वर्षों में दोबारा पढ़ाई शुरू की और आखिरकार 10वीं की परीक्षा सफलतापूर्वक पास कर ली।

परिवार की जिम्मेदारियों के बीच छूटी थी पढ़ाई

कौशल्या देवी ने जीवन के शुरुआती दौर में पारिवारिक जिम्मेदारियों को प्राथमिकता दी। इसी वजह से उनकी औपचारिक शिक्षा आगे नहीं बढ़ सकी। समय बीतता गया, परिवार और बच्चों की जिम्मेदारियां बढ़ती गईं, लेकिन पढ़ाई पूरी करने की इच्छा उनके मन में बनी रही।

बाद में उन्होंने उम्र की परवाह किए बिना दोबारा पढ़ाई की ओर कदम बढ़ाया। उनके लिए यह सिर्फ एक परीक्षा पास करना नहीं था, बल्कि वर्षों से अधूरे रह गए एक सपने को पूरा करना था।

तीनों बच्चे सरकारी सेवा में

कौशल्या देवी की उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उनके तीनों बच्चे सरकारी सेवा में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, उनका एक बेटा कमिश्नर, दूसरा बेटा पुलिस अधीक्षक (SP) और बेटी ज्वॉइंट कलेक्टर के पद पर कार्यरत हैं।

बच्चों की सफलता के बाद भी कौशल्या देवी ने खुद के अधूरे सपने को पीछे नहीं छोड़ा। उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी करने का फैसला किया और परिवार के सहयोग से इसे मुकाम तक पहुंचाया।

62 की उम्र में परीक्षा पास करना बना प्रेरणा

10वीं की परीक्षा पास करना किसी भी विद्यार्थी के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि होती है, लेकिन 62 वर्ष की उम्र में इसे हासिल करना कौशल्या देवी के लिए विशेष मायने रखता है। उन्होंने यह दिखाया कि यदि मन में दृढ़ इच्छा और लक्ष्य हासिल करने का संकल्प हो तो उम्र रास्ते की दीवार नहीं बन सकती।

उनकी कहानी उन महिलाओं और बुजुर्गों के लिए खास संदेश देती है, जो किसी कारण से अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए। कौशल्या देवी ने साबित किया कि अधूरा सपना कभी भी पूरा किया जा सकता है, बस शुरुआत करने का साहस चाहिए।

समाज के लिए बड़ा संदेश

कौशल्या देवी बंसल की कहानी केवल 10वीं पास करने की कहानी नहीं है। यह आत्मविश्वास, दृढ़ इच्छाशक्ति और आजीवन सीखने की भावना की कहानी है।

आज जब शिक्षा और कौशल को लेकर लगातार जागरूकता बढ़ रही है, ऐसे में 62 वर्षीय कौशल्या देवी का यह कदम समाज के लिए सकारात्मक उदाहरण बनकर सामने आया है। उनकी सफलता बताती है कि शिक्षा केवल नौकरी पाने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और आत्मसम्मान बढ़ाने का भी जरिया है।

कौशल्या देवी की कहानी का संदेश

“उम्र चाहे कितनी भी हो, अगर सीखने की इच्छा जिंदा है तो नई शुरुआत हमेशा संभव है।”

महासमुंद की कौशल्या देवी बंसल ने 62 साल की उम्र में 10वीं पास कर यह साबित कर दिया कि सपनों को पूरा करने की कोई तय उम्र नहीं होती।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: बर्खास्त कर्मचारी को देनी होगी विभागीय जांच की पूरी जानकारी

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RTI के तहत अपनी ही विभागीय जांच से जुड़े दस्तावेज मांगना कर्मचारी का अधिकार, सूचना रोकने की दलील को कोर्ट ने किया खारिज

बिलासपुर- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सूचना के अधिकार (RTI) को लेकर एक अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि किसी कर्मचारी को उसके खिलाफ हुई विभागीय जांच और बर्खास्तगी का आधार बने दस्तावेज उपलब्ध कराए जा सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि जब कर्मचारी अपनी ही विभागीय जांच से संबंधित रिकॉर्ड अपने बचाव के लिए मांग रहा हो और उसमें किसी तीसरे व्यक्ति की निजता का सवाल न हो, तो केवल RTI की छूट का हवाला देकर सूचना रोकी नहीं जा सकती।

क्या है पूरा मामला?

मामला जांजगीर स्थित फैमिली कोर्ट में चालक के पद पर कार्यरत एक कर्मचारी से जुड़ा है। कर्मचारी के खिलाफ कथित कदाचार के आरोपों को लेकर दो विभागीय जांच शुरू की गई थीं। जांच में उसके खिलाफ सात आरोप लगाए गए और बाद में विभागीय कार्रवाई के तहत उसकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं।

बर्खास्तगी के बाद कर्मचारी ने अपने खिलाफ हुई विभागीय जांच से जुड़े दस्तावेज और रिकॉर्ड RTI के माध्यम से मांगे। हालांकि, संबंधित अधिकारियों की ओर से सूचना देने से इनकार किया गया और RTI कानून में मौजूद कुछ अपवादों का हवाला दिया गया।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

हाईकोर्ट ने अधिकारियों की इस दलील को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने माना कि कर्मचारी जिस सूचना की मांग कर रहा है, वह उसकी अपनी विभागीय जांच से संबंधित है और उसके बचाव के लिए उपयोगी हो सकती है।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि मांगी गई जानकारी में किसी तीसरे पक्ष की निजता प्रभावित नहीं होती है, तो केवल RTI Act की धारा 8(1)(c) या 8(1)(j) का हवाला देकर ऐसी सूचना से इनकार नहीं किया जा सकता।

फैमिली कोर्ट को दस्तावेज उपलब्ध कराने का निर्देश

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जांजगीर-चांपा फैमिली कोर्ट को निर्देश दिया कि पूर्व कर्मचारी को उसकी विभागीय जांच से संबंधित मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं। यह आदेश 31 अगस्त 2026 को पारित किया गया था।

क्यों अहम है यह फैसला?

यह फैसला सरकारी और सार्वजनिक संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विभागीय जांच का सामना करने वाले कर्मचारी के लिए संबंधित दस्तावेज उसके बचाव का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकते हैं। हाईकोर्ट के इस फैसले से यह संदेश गया है कि RTI कानून की छूट का इस्तेमाल कर्मचारी को उसकी अपनी विभागीय कार्रवाई से जुड़े रिकॉर्ड से वंचित करने के लिए नहीं किया जा सकता, जब तक कोई वैध गोपनीयता या अन्य कानूनी अपवाद लागू न हो।

छत्तीसगढ़ में बढ़ा स्वाइन फ्लू का खतरा, एक दिन में 46 नए मरीज मिले

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प्रदेश में संक्रमितों का आंकड़ा 298 पहुंचा, रायपुर में सबसे ज्यादा 19 नए मामले; 113 मरीज एक्टिव

रायपुर- छत्तीसगढ़ में स्वाइन फ्लू (H1N1) के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में एक दिन में 46 नए मरीजों की पुष्टि हुई है। इसके साथ ही 1 जनवरी से 8 सितंबर 2026 तक राज्य में स्वाइन फ्लू के कुल 298 मामले सामने आ चुके हैं।

रायपुर में सबसे ज्यादा मामले

राजधानी रायपुर संक्रमण के मामले में सबसे आगे है। यहां एक दिन में 19 नए मरीज मिले हैं। इसके साथ ही जिले में इस साल अब तक स्वाइन फ्लू के कुल 127 मामले दर्ज हो चुके हैं, जो प्रदेश के सभी जिलों में सबसे ज्यादा हैं।

कई जिलों में मिले नए मरीज

ताजा आंकड़ों के अनुसार दुर्ग में 4, बिलासपुर और कोरबा में 3-3, जबकि बलौदाबाजार, बस्तर, महासमुंद और राजनांदगांव में 2-2 नए मरीज मिले हैं। इसके अलावा जांजगीर-चांपा, कोंडागांव, मुंगेली और सरगुजा में भी नए मामले सामने आए हैं। पांच संक्रमित मरीज दूसरे राज्यों से संबंधित हैं।

113 मरीज अभी एक्टिव

प्रदेश में फिलहाल 113 एक्टिव मरीज हैं। इनमें 81 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि 32 मरीज होम आइसोलेशन में इलाज करा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग लगातार संक्रमित मरीजों की निगरानी कर रहा है।

लक्षण दिखने पर रहें सतर्क

स्वाइन फ्लू एक H1N1 इन्फ्लूएंजा वायरस से होने वाला संक्रमण है। इसके सामान्य लक्षणों में बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द और कमजोरी शामिल हैं। सांस लेने में परेशानी या लक्षण गंभीर होने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

स्वास्थ्य विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक इस साल अब तक छत्तीसगढ़ में स्वाइन फ्लू से किसी मौत की सूचना नहीं है। हालांकि बढ़ते मामलों को देखते हुए निगरानी और सतर्कता बनाए रखना जरूरी है।

छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला: युवाओं के लिए ₹500 करोड़ का स्टार्टअप मिशन, सरकारी कर्मचारियों की आयु सीमा 45 साल

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रोजगार, कौशल विकास और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए साय कैबिनेट की बड़ी पहल; 33 जिलों में बनेंगे उद्यमिता विकास केंद्र

रायपुर- छत्तीसगढ़ में युवाओं, रोजगार और सरकारी कर्मचारियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों पर राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में ‘मुख्यमंत्री स्टार्टअप एवं NIPUN मिशन’ को मंजूरी दी गई है। इस मिशन के लिए अगले पांच वर्षों में ₹500 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

सरकार के मुताबिक इस मिशन का उद्देश्य प्रदेश में रोजगार, कौशल विकास, उद्यमिता और नवाचार के नए अवसर पैदा करना है। इसके तहत युवाओं को पारंपरिक नौकरी की तलाश तक सीमित रखने के बजाय उन्हें अपना व्यवसाय और रोजगार पैदा करने वाले उद्यम शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

33 जिलों में बनेंगे उद्यमिता विकास केंद्र

‘मुख्यमंत्री स्टार्टअप एवं NIPUN मिशन’ के तहत प्रदेश के सभी 33 जिलों में उद्यमिता विकास केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही 100 उभरती तकनीक प्रयोगशालाएं और 5 इंडस्ट्री एक्सीलेंस सेंटर विकसित करने की योजना है।

इन केंद्रों के माध्यम से युवाओं को नई तकनीकों, कौशल प्रशिक्षण, स्टार्टअप और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप रोजगार से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा। मिशन के तहत NIPUN Job Engine भी विकसित किया जाएगा, ताकि प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को रोजगार के अवसरों से बेहतर तरीके से जोड़ा जा सके।

सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत, आयु सीमा 45 साल

कैबिनेट ने सरकारी कर्मचारियों के लिए भी महत्वपूर्ण फैसला लिया है। राज्य सरकार ने अन्य सरकारी सेवाओं और उच्च पदों के लिए आवेदन करने वाले पात्र कर्मचारियों की अधिकतम आयु सीमा 38 वर्ष से बढ़ाकर 45 वर्ष करने को मंजूरी दी है।

यह लाभ स्थायी और अस्थायी राज्य सरकारी कर्मचारियों के साथ-साथ निगम-मंडल, स्वायत्त संस्थाओं, संविदाकर्मियों और नगर सैनिकों जैसे संबंधित वर्गों पर लागू होगा। इस बदलाव से ऐसे कर्मचारियों को दूसरी सरकारी सेवाओं या उच्च पदों के लिए आवेदन करने का अतिरिक्त अवसर मिलेगा। सरकार ने कहा है कि संशोधित आयु सीमा को लागू करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश अलग से जारी किए जाएंगे।

स्टार्टअप और रोजगार पर सरकार का फोकस

सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ में ऐसा माहौल तैयार करना है, जहां युवा केवल नौकरी तलाशने वाले न रहें, बल्कि उद्यमी बनकर नए रोजगार के अवसर भी पैदा करें। राज्य की मौजूदा स्टार्टअप नीति में भी नवाचार, सीड फंडिंग, इनक्यूबेशन और तकनीक आधारित उद्यमों को प्रोत्साहन देने की व्यवस्था है।

सरकार के इन फैसलों को प्रदेश में युवा रोजगार, स्टार्टअप इकोसिस्टम और कौशल विकास को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। खास तौर पर ₹500 करोड़ के मिशन और सरकारी सेवाओं में आयु सीमा बढ़ाने से युवाओं तथा कार्यरत कर्मचारियों—दोनों वर्गों को राहत मिलने की उम्मीद है।

सात साल बाद भारत आएंगे शी जिनपिंग, मोदी से मुलाकात पर दुनिया की नजर

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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए नई दिल्ली पहुंचेंगे चीन के राष्ट्रपति, भारत-चीन संबंधों में नई शुरुआत की उम्मीद

नई दिल्ली - चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत दौरे पर आ रहे हैं। वह 12–13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब भारत और चीन के बीच पिछले कुछ वर्षों से सीमा विवाद, सुरक्षा और व्यापार को लेकर तनाव बना रहा है।

मोदी-शी मुलाकात पर टिकी नजर

ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक होने की संभावना है। दोनों नेताओं की बातचीत भारत-चीन संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, यह 2020 के गलवान संघर्ष के बाद दोनों नेताओं के बीच भारत में पहली औपचारिक द्विपक्षीय बातचीत होगी।

इस बैठक में सीमा पर शांति, व्यापार, निवेश, तकनीक, सुरक्षा और दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठ सकते हैं।

सीमा विवाद अभी भी सबसे बड़ी चुनौती

भारत और चीन के रिश्तों में सुधार के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन सीमा विवाद अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के संबंधों में भारी तनाव पैदा हुआ था।

हाल के वर्षों में दोनों पक्षों ने सीमा पर तनाव कम करने और संवाद बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसके बावजूद सीमा पर भरोसे की कमी और सुरक्षा संबंधी चिंताएं अभी भी भारत-चीन संबंधों के सामने बड़ी चुनौती हैं।

व्यापार और निवेश पर भी होगी चर्चा

भारत और चीन के बीच आर्थिक संबंध भी आसान नहीं रहे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार काफी बड़ा है, लेकिन भारत लंबे समय से व्यापार घाटे और चीनी कंपनियों से जुड़े सुरक्षा जोखिमों को लेकर चिंता जताता रहा है।

शी जिनपिंग की यात्रा के दौरान दोनों देश व्यापार और निवेश को बढ़ाने के रास्तों पर चर्चा कर सकते हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स, सौर ऊर्जा, विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं भी महत्वपूर्ण हो सकती हैं। हालांकि, सुरक्षा और तकनीकी संवेदनशीलता को लेकर भारत का रुख सावधानी भरा रहने की संभावना है।

ब्रिक्स के मंच पर भारत-चीन संबंध

शी जिनपिंग की भारत यात्रा सिर्फ द्विपक्षीय रिश्तों तक सीमित नहीं है। भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और नई दिल्ली में होने वाला सम्मेलन वैश्विक राजनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।

मध्य पूर्व में जारी युद्ध, ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक व्यापार, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और विकासशील देशों की भूमिका जैसे मुद्दों पर ब्रिक्स देशों के बीच चर्चा होगी। ऐसे समय में भारत और चीन का साथ मिलकर काम करना संगठन की एकजुटता के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत के लिए क्या मायने रखती है यह यात्रा?

शी जिनपिंग की सात साल बाद भारत यात्रा को कूटनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत के लिए चुनौती यह है कि वह चीन के साथ संवाद और आर्थिक सहयोग बढ़ाते हुए अपनी सीमा सुरक्षा और रणनीतिक हितों से कोई समझौता न करे।

वहीं, चीन के लिए भारत के साथ बेहतर संबंध क्षेत्रीय स्थिरता और ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मोदी-शी बातचीत से कुछ क्षेत्रों में तनाव कम करने का रास्ता खुल सकता है, लेकिन वर्षों से चली आ रही अविश्वास की स्थिति को तुरंत खत्म करना आसान नहीं होगा।


मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव, 100 डॉलर के पार पहुंचा कच्चा तेल

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ईरान-अमेरिका संघर्ष से वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल, भारत समेत तेल आयातक देशों की बढ़ी चिंता

नई दिल्ली- मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब सीधे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दिखाई देने लगा है। ईरान और अमेरिका के बीच लगातार बढ़ रहे संघर्ष तथा प्रमुख समुद्री तेल मार्गों पर हमलों की आशंका के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड करीब 102 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था।

होर्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ी चिंता

मौजूदा संकट में सबसे ज्यादा नजर होर्मुज जलडमरूमध्य पर है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल है और युद्ध से पहले वैश्विक तेल एवं गैस आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता था।

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते हमलों के कारण इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। बुधवार को होर्मुज जलडमरूमध्य से केवल सात जहाजों के गुजरने की जानकारी सामने आई, जो पिछले दिनों के औसत से काफी कम है।

कच्चे तेल की कीमतों में करीब 30 फीसदी उछाल

बाजार में जारी तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत अगस्त की शुरुआत के निचले स्तर से करीब 30 फीसदी बढ़ चुकी है। निवेशकों को डर है कि अगर संघर्ष लंबे समय तक जारी रहा तो खाड़ी क्षेत्र से तेल की आपूर्ति और निर्यात पर और दबाव पड़ सकता है। इससे वैश्विक बाजार में तेल की कमी बढ़ने और कीमतों के और ऊपर जाने का खतरा है।

भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?

तेल की बढ़ती कीमत भारत के लिए खास तौर पर चिंता का विषय है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर भारत के तेल आयात बिल पर पड़ सकता है। इसके अलावा महंगा कच्चा तेल रुपये की विनिमय दर, परिवहन लागत और महंगाई पर भी दबाव बढ़ा सकता है।

अगर तेल की कीमत लंबे समय तक 100 डॉलर से ऊपर बनी रहती है, तो इसका असर पेट्रोल-डीजल से लेकर माल ढुलाई, विमानन और उत्पादन लागत तक दिखाई दे सकता है।

सिर्फ होर्मुज ही नहीं, लाल सागर में भी बढ़ा खतरा

ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता सिर्फ होर्मुज तक सीमित नहीं है। लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में भी सुरक्षा स्थिति खराब हुई है। ईरान समर्थित हूती समूह की गतिविधियां बढ़ने से इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर भी दबाव बढ़ा है।

इसका मतलब है कि मध्य पूर्व से दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक तेल पहुंचाने वाले एक से अधिक प्रमुख समुद्री मार्ग जोखिम में हैं।

दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर

अगर कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर से ऊपर लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसका असर सिर्फ तेल बाजार तक सीमित नहीं रहेगा।

महंगे तेल से:

  •  परिवहन और माल ढुलाई महंगी हो सकती है

  •  विमानन क्षेत्र की लागत बढ़ सकती है

  •  उद्योगों की उत्पादन लागत बढ़ सकती है

  •  वैश्विक महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है

  •  तेल आयात करने वाले देशों की मुद्राओं पर दबाव पड़ सकता है

  •  वैश्विक आर्थिक विकास की रफ्तार प्रभावित हो सकती है

तेल की बढ़ती कीमतों ने पहले ही वैश्विक बाजारों में महंगाई को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

भारत ऊर्जा सुरक्षा पर दे रहा जोर

बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के विकल्पों पर भी जोर दे रहा है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, भारत आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने के लिए जैव ईंधन और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के इस्तेमाल को बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है।

आगे क्या होगा?

अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि ईरान-अमेरिका संघर्ष कितना लंबा चलता है और होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल की आवाजाही कब सामान्य होती है।

अगर संघर्ष और बढ़ता है तथा खाड़ी क्षेत्र से तेल की आपूर्ति और कम होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं, यदि तनाव कम होता है और समुद्री मार्गों पर आवाजाही सामान्य होती है, तो बाजार में कीमतों का दबाव कुछ कम हो सकता है।


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