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महाशिवरात्रि 2026: 300 साल बाद बना 8 योग का संयोग, जानें पूजा मुहूर्त और उपाय

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 Mahashivratri 2026 Shubh Muhurt: महाशिवरात्रि हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में से एक है, जिसे भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह का प्रतीक माना जाता है। इस वर्ष 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सच्ची श्रद्धा से की गई पूजा हर कष्ट को दूर कर मनोकामनाएँ पूर्ण करती है।


इस बार महाशिवरात्रि पर दुर्लभ 8 शुभ योगों का संयोग बन रहा है, जिससे इसका आध्यात्मिक महत्व और अधिक बढ़ गया है।

पूजा का शुभ मुहूर्त

  • चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 15 फरवरी 2026, शाम 5:04 बजे
  • चतुर्दशी तिथि समाप्त: 16 फरवरी 2026, शाम 5:34 बजे

शिव पूजा में आवश्यक सामग्री

भगवान शिव की पूजा कुछ विशेष वस्तुओं के बिना अधूरी मानी जाती है —

  • जल या गंगाजल
  • बेलपत्र
  • अक्षत (चावल)

मान्यता है कि शिवलिंग पर एक लोटा जल अर्पित करने से भी भगवान शिव प्रसन्न होकर भक्तों की बाधाएँ दूर करते हैं।

महाशिवरात्रि के खास उपाय

1. गंगाजल अर्पित करें

शुद्ध मन से शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाने से भोग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है तथा मानसिक शांति मिलती है।

2. दूध से अभिषेक

गाय का दूध चढ़ाने से परिवार में सुख-शांति और आर्थिक स्थिरता बनी रहती है।

3. रुद्राक्ष अर्पित कर धारण करें

पूजा के बाद रुद्राक्ष को लाल या सफेद धागे में गले या बाजू में धारण करने से भगवान शिव की कृपा बनी रहती है।

महाशिवरात्रि केवल व्रत और पूजा का दिन नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का अवसर है। श्रद्धा से किया गया छोटा सा अभिषेक भी जीवन में बड़े परिवर्तन ला सकता है।

AIIMS नौकरी का सपना दिखाकर दरिंदगी- 6 लाख ऐंठे, वीडियो बनाकर किया ब्लैकमेल

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 रायपुर। राजधानी रायपुर में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी, दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग का गंभीर मामला सामने आया है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान रायपुर में नौकरी लगवाने का झांसा देकर एक 25 वर्षीय युवती से करीब 6 लाख रुपये ऐंठने और दुष्कर्म करने के आरोप में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया है।


आमानाका थाना पुलिस के अनुसार आरोपी रितेश चंद्राकर (26), निवासी पांडातराई (कवर्धा), को तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर सूचना के आधार पर गिरफ्तार किया गया है।

सोशल मीडिया से दोस्ती, भरोसे का फायदा

पुलिस जानकारी के मुताबिक करीब दो साल पहले आरोपी ने सोशल मीडिया के माध्यम से युवती से संपर्क किया। उसने खुद को एम्स रायपुर में कार्यरत बताते हुए अधिकारियों से अच्छी पहुंच होने का दावा किया और युवती को नौकरी दिलाने का भरोसा दिलाया।

भरोसा जीतने के बाद उसने अलग-अलग किस्तों में करीब 6 लाख रुपये लिए। युवती ने यह रकम कर्ज लेकर जुटाई थी। विश्वास दिलाने के लिए आरोपी ने फर्जी ज्वाइनिंग लेटर भी दिया।

फर्जी दस्तावेज का खुलासा, फिर ब्लैकमेल

जब युवती ज्वाइनिंग के लिए एम्स पहुंची तो दस्तावेज फर्जी निकले और ठगी का पता चला। इसके बाद आरोपी ने आमनाका स्थित एक होटल में युवती को बुलाकर दुष्कर्म किया और उसका आपत्तिजनक वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने लगा।

कई धाराओं में मामला दर्ज

शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपी को कवर्धा से गिरफ्तार कर लिया है। उसके खिलाफ

  • ठगी
  • दुष्कर्म
  • आईटी एक्ट

की धाराओं में कार्रवाई की जा रही है। पुलिस जल्द मामले का विस्तृत खुलासा करेगी।

नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय हुए शामिल

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज जशपुर प्रवास के दौरान दुलदुला विकास खंड के ग्राम सिरीमकेला स्थित श्री नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर के पावन प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में सम्मिलित हुए। उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर देवाधिदेव महादेव से समस्त छत्तीसगढ़वासियों के सुख, समृद्धि और कल्याण की मंगलकामना की। महाशिवरात्रि के पावन पर्व के एक दिन पूर्व आयोजित इस आध्यात्मिक आयोजन को उन्होंने श्रद्धा, आस्था और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बताया।


मुख्यमंत्री साय ने ग्राम सिरीमकेला में सामुदायिक भवन निर्माण की घोषणा करते हुए कहा कि इससे स्थानीय नागरिकों को सामाजिक, सांस्कृतिक एवं पारिवारिक आयोजनों के लिए सुदृढ़ आधार मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि कल हम सब महाशिवरात्रि का पावन पर्व मनाएंगे और इस अवसर पर आप सभी को हार्दिक बधाई देता हूं। उन्होंने कहा कि सिरीमकेला में भक्तों और अपने परिवारजनों के बीच आकर उन्हें आध्यात्मिक शांति और आनंद की अनुभूति हो रही है। भक्ति और श्रद्धा के इस अनूठे आयोजन में उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सनातन परंपरा को पुनर्स्थापित करते हुए अयोध्या धाम दर्शन योजना एवं मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के माध्यम से हजारों श्रद्धालुओं को धार्मिक यात्राएँ करा रही है। श्रवण कुमार के पदचिन्हों पर चलने का प्रयास करते हुए अब तक प्रदेश के 42 हजार से अधिक तीर्थ यात्रियों को श्रीरामलला के दर्शन कराए जा चुके हैं।

उन्होंने कहा कि 500 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद अयोध्या धाम में श्री रामलला का भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ है और हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर आज ध्वज लहरा रहा है। प्रत्येक राम भक्त की आस्था 500 वर्षों तक प्रज्वलित रही — यह एक ऐसा यज्ञ था जिसकी लौ कभी नहीं डगमगाई। हम सब निमित्त मात्र हैं, जो अपने भांचा राम के दर्शन उनके भव्य मंदिर में कर रहे हैं और श्रद्धालुओं को करा पा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज नीलकंठेश्वर महादेव का दर्शन पाकर वे स्वयं को अत्यंत सौभाग्यशाली महसूस कर रहे हैं। दशहरा पर्व के दिन नीलकंठ के दर्शन को अत्यंत शुभ माना जाता है और आज प्राण-प्रतिष्ठा के उपरांत यहाँ निरंतर दर्शन लाभ मिलना हम सबके लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि जशपुर में मधेश्वर महादेव स्थित हैं, जिसे लोक मान्यता के अनुसार एशिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग कहा जाता है। सनातन परंपरा में भक्ति का विशेष महत्व है और राज्य सरकार भक्तों का सम्मान करती है। सावन माह में भोरमदेव मंदिर में कांवड़ियों पर पुष्पवर्षा कर हर वर्ष आस्था प्रकट की जाती है।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहे जाने वाले राजिम त्रिवेणी संगम में इन दिनों राजिम कुंभ कल्प का भव्य आयोजन हो रहा है, जहाँ आस्था और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भगवान कुलेश्वरनाथ महादेव के दर्शन अवश्य करें। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के संरक्षण के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है। राजिम कुंभ कल्प की प्रतिष्ठा को पुनर्स्थापित किया गया है, ऐतिहासिक बस्तर दशहरा की पहचान देश-विदेश तक है तथा छत्तीसगढ़ के पाँच शक्ति पीठों के विकास के लिए कार्य योजना बनाकर सतत कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता और प्रकृति संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर उन्होंने कहा कि महाशिवरात्रि के इस पावन कालखंड में नीलकंठेश्वर महादेव की कृपा हम सभी पर बनी रहे, प्रदेश में सुख-शांति, समृद्धि और विकास की नई धाराएँ प्रवाहित हों तथा छत्तीसगढ़ आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक वैभव के साथ निरंतर प्रगति पथ पर अग्रसर रहे — यही उनकी हार्दिक कामना है।

इस अवसर पर सरगुजा आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं पत्थलगांव विधायक गोमती साय, महासमुंद विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा, पूर्व राज्यसभा सांसद रणविजय सिंह जुदेव, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जुदेव, नगर पालिका उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जुदेव, जनपद पंचायत अध्यक्ष सुशीला साय, कृष्णा राय, पवन साय, भरत सिंह, अरविन्द प्रसाद साय, कपिल देव साय, सरगुजा आईजी दीपक कुमार झा, कलेक्टर रोहित व्यास, एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह, वनमंडलाधिकारी शशि कुमार तथा महादेव मंदिर समिति के सदस्यगण बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

नई दिल्ली में कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा पर राष्ट्रीय सम्मेलन (SHe-Box) का आयोजन

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नई दिल्ली- हिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा आज विज्ञान भवन, नई दिल्ली में कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा (SHe-Box) विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी, राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर, संसद सदस्य सुधांशु त्रिवेदी, रेखा शर्मा, लवली आनंद और शोभनाबेन महेंद्रसिंह बारैया सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

सम्मेलन में केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, आंतरिक समितियों (IC) और स्थानीय समितियों (LC) के अध्यक्ष व सदस्य, नोडल अधिकारी, अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि, उद्योग जगत के नेता और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

कार्यक्रम की शुरुआत महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव अनिल मलिक के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने कहा कि SHe-Box पोर्टल के माध्यम से देशभर में 1.5 लाख से अधिक कार्यस्थलों को जोड़ा गया है और प्रत्येक जिले में स्थानीय समितियों की स्थापना से महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक राष्ट्रीय ढांचा तैयार किया गया है।

महिलाओं की सुरक्षा और समानता पर जोर

अपने मुख्य संबोधन में केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा केवल कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि न्याय और समानता के प्रति देश की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि

  • 1.48 लाख से अधिक संस्थान SHe-Box पोर्टल पर पंजीकृत हैं

  • 60,000 से अधिक आंतरिक समितियां सक्रिय हैं

  • महिला श्रम भागीदारी दर पिछले छह वर्षों में 23% से बढ़कर 42% हो गई है

उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 की परिकल्पना तभी साकार होगी जब हर महिला बिना डर के कार्य कर सके और नेतृत्व कर सके।

महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर जानकारी

राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने कहा कि कार्यस्थल की सुरक्षा महिलाओं का मौलिक अधिकार है। उन्होंने बताया कि

  • मुद्रा ऋण का 70% महिलाओं को दिया गया है

  • पीएम स्वनिधि योजना के 44% लाभार्थी महिलाएं हैं

  • 10 करोड़ से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं

उन्होंने कहा कि लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि हर महिला सुरक्षित और सम्मानित महसूस करे।

नई पहल और घोषणाएं

सम्मेलन के दौरान मंत्री ने

  • SHe-Box का नया लोगो

  • PoSH स्वैच्छिक अनुपालन चेकलिस्ट

  • मिशन शक्ति ऐप के साथ SHe-Box का एकीकरण

  • कर्मयोगी भारत PoSH प्रशिक्षण लिंक
    का शुभारंभ किया।

साथ ही राष्ट्रीय कार्यस्थल सुरक्षा प्रतिज्ञा भी दिलाई गई।

विशेष चर्चा और पैनल सत्र

सम्मेलन में “अनुपालन को मजबूत करने और सुरक्षित कार्यस्थल संस्कृति बनाने” पर पैनल चर्चा आयोजित की गई, जिसमें मंत्रालय, संसद, सुप्रीम कोर्ट, UN Women और विश्व बैंक के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

इस चर्चा में संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों में महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

व्यापक सहभागिता

इस सम्मेलन में लगभग 1,500 प्रतिनिधियों ने प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया, जबकि 40,000 से अधिक लोग लाइव वेबकास्ट के माध्यम से जुड़े।

सम्मेलन का उद्देश्य महिलाओं के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक कार्यस्थल सुनिश्चित करना, PoSH कानून के प्रति जागरूकता बढ़ाना और SHe-Box के उपयोग को बढ़ावा देना है।


बेंगलुरु में अंतरराष्ट्रीय बांध सुरक्षा सम्मेलन (ICDS 2026) का आयोजन, वैश्विक विशेषज्ञों की भागीदारी

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बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) के जे.एन. टाटा ऑडिटोरियम में 13–14 फरवरी 2026 को अंतरराष्ट्रीय बांध सुरक्षा सम्मेलन (ICDS 2026) का आयोजन किया जा रहा है। यह सम्मेलन बांध पुनर्वास और सुधार परियोजना (DRIP) फेज-II और फेज-III के तहत आयोजित किया गया है।

सम्मेलन का आयोजन जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनर्जीवन विभाग (जल शक्ति मंत्रालय) और कर्नाटक सरकार के जल संसाधन विभाग द्वारा केंद्रीय जल आयोग (CWC), IISc बेंगलुरु और विश्व बैंक के सहयोग से किया गया है।

सम्मेलन का उद्घाटन कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने किया, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने की। उद्घाटन सत्र में केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी, विश्व बैंक के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष जोहान्स ज़ुट, ICOLD के अध्यक्ष डी.के. शर्मा सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि पुराने बांधों, जलवायु जोखिम और सतत विकास की चुनौतियों को देखते हुए बांध सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण विषय है, जिसके लिए विज्ञान आधारित और सहयोगात्मक प्रयास जरूरी हैं। उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने बांध सुरक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता बताते हुए पारदर्शी नीतियों और सामूहिक कार्रवाई का आह्वान किया।

सम्मेलन में DAMCHAT नामक एआई आधारित प्लेटफॉर्म और जल शक्ति डेटा प्रबंधन प्लेटफॉर्म का शुभारंभ किया गया। साथ ही बांध डिजाइन और जल संसाधन प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण दिशानिर्देश और प्रकाशन जारी किए गए।

ICDS 2026 में 12 देशों के 750 से अधिक प्रतिनिधि, इंजीनियर, नीति निर्माता और उद्योग विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। सम्मेलन में बांध सुरक्षा नियम, संरचनात्मक निगरानी, पुनर्वास तकनीक, जलाशय प्रबंधन, जोखिम आधारित निर्णय प्रणाली और बाढ़ नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जा रही है।

यह सम्मेलन भारत की बांध सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करने, जलवायु सहनशीलता बढ़ाने और आधुनिक जल अवसंरचना विकास के प्रति देश की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।


देहरादून में स्वामी राम हिमालयन यूनिवर्सिटी के 8वें दीक्षांत समारोह को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने संबोधित किया

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केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज देहरादून स्थित स्वामी राम हिमालयन यूनिवर्सिटी के 8वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए छात्रों को उनकी शैक्षणिक यात्रा पूरी करने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह वर्षों की मेहनत और समर्पण का परिणाम है और यह सेवा व जिम्मेदारी के नए चरण की शुरुआत भी है।

मंत्री नड्डा ने छात्रों से चिकित्सा पेशे के उच्चतम आदर्शों को अपनाने, निरंतर उत्कृष्टता के लिए प्रयास करने और मानवता की सेवा में अपने ज्ञान और कौशल को समर्पित करने का आह्वान किया।

उन्होंने पिछले 11 वर्षों में भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में हुई बड़ी प्रगति का उल्लेख करते हुए बताया कि देश में AIIMS की संख्या 6 से बढ़कर 23 हो गई है। उन्होंने बताया कि संस्थागत प्रसव दर लगभग 89% तक पहुँच गई है, मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है, और भारत ने वैश्विक औसत से तेज़ी से पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में कमी दर्ज की है।

केंद्रीय मंत्री ने कोविड-19 टीकाकरण अभियान, आयुष्मान भारत योजना, आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च में कमी, टीबी और मलेरिया नियंत्रण, तथा 1.82 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की स्थापना जैसी उपलब्धियों को भी रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि भारत की स्वास्थ्य प्रणाली की असली ताकत समर्पित और संवेदनशील चिकित्सा पेशेवरों में निहित है।



भारत की क्वांटम साइबर सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम

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क्वांटम कंप्यूटिंग से उत्पन्न होने वाले नए साइबर खतरों से निपटने के लिए भारत की साइबर सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। दूरसंचार विभाग (DoT) के तहत भारत सरकार की प्रमुख दूरसंचार अनुसंधान एवं विकास संस्था सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (C-DOT) ने Synergy Quantum India Private Limited के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह कंपनी हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों क्षेत्रों में पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी समाधान प्रदान करती है।

इस समझौते का उद्देश्य एक स्वचालित टूल विकसित करना है, जो उपकरणों में उपयोग होने वाले क्रिप्टोग्राफिक एल्गोरिदम की पहचान करेगा, उन्हें वर्गीकृत करेगा और क्वांटम-संवेदनशील एल्गोरिदम की रिपोर्ट तैयार करेगा। यह टूल किसी डिवाइस को स्कैन करके उसके सुरक्षा तंत्र और एल्गोरिदम का पता लगाएगा, क्वांटम-सुरक्षित और क्वांटम-संवेदनशील एल्गोरिदम के बीच अंतर करेगा और विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगा ताकि भविष्य में क्वांटम-सुरक्षित सुरक्षा प्रणाली में संक्रमण की योजना बनाई जा सके।

इस समाधान के तीन मुख्य मॉड्यूल होंगे:

  1. वेब एप्लिकेशन: नेटवर्क ट्रैफिक, कमजोरियों और क्वांटम जोखिमों का बाहरी स्कैनिंग।

  2. सिक्योरिटी स्कैनर एजेंट: डिवाइस के अंदर लाइब्रेरी और एंडपॉइंट सुरक्षा का आंतरिक स्कैन।

  3. कंट्रोल सॉफ्टवेयर: एजेंट इंस्टॉलेशन, स्कैन संचालन और सभी कमजोरियों की रिपोर्ट तैयार करना।

यह सहयोग रक्षा, दूरसंचार, बैंकिंग और सरकारी क्षेत्रों सहित महत्वपूर्ण नेटवर्क और उपकरणों में क्रिप्टोग्राफिक कमजोरियों का प्रारंभिक पता लगाने में मदद करेगा और संस्थानों को पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी की ओर संक्रमण में सहायता करेगा।

यह साझेदारी “आत्मनिर्भर भारत” पहल के अनुरूप स्वदेशी अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देगी और भारत को क्वांटम सुरक्षा तकनीक में वैश्विक अग्रणी बनाने में मदद करेगी।

C-DOT के सीईओ डॉ. राजकुमार उपाध्याय ने कहा कि क्वांटम कंप्यूटिंग के विकास के साथ पारंपरिक क्रिप्टोग्राफी प्रणालियों को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है और यह सहयोग भारत के डिजिटल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए स्वदेशी समाधान विकसित करने की प्रतिबद्धता दर्शाता है।

Synergy Quantum के सह-संस्थापक और सीईओ जय ओबेरॉय ने कहा कि यह साझेदारी भारत की क्वांटम-सुरक्षित सुरक्षा यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और यह टूल सरकारी और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा क्षेत्रों को क्वांटम जोखिमों का आकलन करने और उन्हें कम करने में सक्षम बनाएगा।

समझौता हस्ताक्षर समारोह में C-DOT और Synergy Quantum के वरिष्ठ अधिकारी और प्रतिनिधि उपस्थित थे।

C-DOT के बारे में:

C-DOT भारत सरकार के संचार मंत्रालय के अंतर्गत एक प्रमुख दूरसंचार अनुसंधान एवं विकास संस्था है, जिसने क्वांटम-सुरक्षित तकनीकों और क्वांटम की वितरण (QKD) प्रणालियों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

Synergy Quantum के बारे में:

Synergy Quantum एक संप्रभु क्वांटम सुरक्षा कंपनी है, जो राष्ट्रों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा संचालकों को क्वांटम युग में सुरक्षित डिजिटल प्रणालियाँ बनाए रखने में सक्षम बनाती है।


डाक विभाग ने ‘भारत की कठपुतलियाँ’ विषय पर 8 स्मारक डाक टिकट जारी किए, देश की समृद्ध लोक कला परंपरा को मिला सम्मान

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नई दिल्ली- डाक विभाग ने 13 फरवरी 2026 को नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में “पपेट्स ऑफ इंडिया (भारत की कठपुतलियाँ)” विषय पर 8 स्मारक डाक टिकटों का विशेष सेट जारी किया। इन टिकटों का औपचारिक विमोचन डाक विभाग की सचिव सुश्री वंदिता कौल ने प्रतिष्ठित अतिथियों, कलाकारों और सांस्कृतिक जगत के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में किया।

इस अवसर पर सचिव (डाक) ने कहा कि डाक टिकट किसी भी राष्ट्र की विरासत के छोटे राजदूत होते हैं। उन्होंने कहा कि यह विशेष अंक भारत की समृद्ध और विविध कठपुतली परंपराओं का सम्मान करता है, जिन्होंने पीढ़ियों से लोककथाओं, मूल्यों और सांस्कृतिक स्मृति को जीवित रखा है।

भारत की प्राचीन कठपुतली परंपरा

कठपुतली कला भारत की सबसे प्राचीन और जीवंत कहानी कहने की परंपराओं में से एक है। सदियों से कठपुतली कलाकार संगीत, कथावाचन और दृश्य कला के माध्यम से महाकाव्य, लोककथाएं, नैतिक शिक्षाएं और सामाजिक संदेश प्रस्तुत करते रहे हैं।

भारत में कठपुतली कला को मुख्य रूप से चार प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है:

  • डोरी वाली कठपुतलियाँ (String Puppets)

  • दस्ताने वाली कठपुतलियाँ (Glove Puppets)

  • छड़ी कठपुतलियाँ (Rod Puppets)

  • छाया कठपुतलियाँ (Shadow Puppets)

यह कला पारिवारिक परंपरा के रूप में पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होती रही है।

देश के विभिन्न राज्यों की कठपुतली कला को दर्शाते टिकट

इस स्मारक श्रृंखला में भारत के विभिन्न राज्यों की पारंपरिक कठपुतली कला को दर्शाया गया है, जिनमें शामिल हैं:

  • कठपुतली – राजस्थान

  • यक्षगान सूत्रदा गोम्बेयट्टा – कर्नाटक

  • डांगर पुतुल – पश्चिम बंगाल

  • काठी कुंधेई – ओडिशा

  • बेनीर पुतुल – पश्चिम बंगाल

  • पावकथकली – केरल

  • रावणछाया – ओडिशा

  • टोलु बोम्मलट्टा – आंध्र प्रदेश

प्रत्येक टिकट संबंधित क्षेत्र की विशिष्ट पोशाक, शैली और प्रस्तुति कला को दर्शाता है।

डिज़ाइन और फिलेटेलिक उत्पाद

डाक टिकटों, प्रथम दिवस आवरण (FDC), ब्रोशर, मिनिएचर शीट और विशेष कैंसलेशन का डिज़ाइन संखा समंता द्वारा किया गया है। इन टिकटों के लिए कलात्मक संदर्भ और सामग्री संगीत नाटक अकादमी, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, दरिचा फाउंडेशन और प्रसिद्ध कठपुतली कलाकार दादी पुदुमजी द्वारा प्रदान की गई।

  • टिकट मूल्य: 500 पैसे (8 टिकटों का सेट)

  • ये टिकट और अन्य फिलेटेलिक उत्पाद देशभर के फिलेटेलिक ब्यूरो और epostoffice.gov.in पर उपलब्ध हैं।


केंद्रीय आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने जे.जे. अस्पताल में उन्नत यूनानी शोध केंद्र का उद्घाटन किया, यूनानी दिवस 2026 समारोह में हुए शामिल

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मुंबई- केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने मुंबई के जे.जे. अस्पताल परिसर में क्षेत्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (RRIUM) के नवीनीकरण किए गए को-लोकेशन सेंटर का उद्घाटन किया। इसके साथ ही उन्होंने यूनानी दिवस 2026 समारोह और “यूनानी चिकित्सा में नवाचार और प्रमाण आधारित अभ्यास” विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन की अध्यक्षता भी की। यह दो दिवसीय कार्यक्रम आयुष मंत्रालय के तहत केंद्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान परिषद (CCRUM) द्वारा आयोजित किया गया है।


3.84 करोड़ रुपये की लागत से हुआ उन्नयन

1984 में स्थापित RRIUM को-लोकेशन सेंटर को लगभग 3.84 करोड़ रुपये की लागत से उन्नत किया गया है, जिससे नैदानिक सेवाओं, शोध सुविधाओं और रोगी देखभाल को बेहतर बनाया जा सके। यह उन्नयन जे.जे. अस्पताल परिसर में यूनानी चिकित्सा को मजबूत करने और आधुनिक चिकित्सा प्रणाली के साथ साक्ष्य-आधारित अनुसंधान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया है।

प्रधानमंत्री मोदी के विजन को बताया प्रेरणा

उद्घाटन समारोह में प्रतापराव जाधव ने कहा कि जे.जे. अस्पताल में यूनानी शोध केंद्र का उन्नयन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस संकल्प को दर्शाता है, जिसमें पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को आधुनिक और रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य ढांचे का महत्वपूर्ण स्तंभ बनाने का लक्ष्य है।

उन्होंने कहा कि यूनानी और आधुनिक चिकित्सा को एक ही छत के नीचे लाकर मरीजों को सुरक्षित, प्रभावी और समग्र उपचार उपलब्ध कराया जाएगा, जो वैज्ञानिक अनुसंधान और प्रमाणों पर आधारित होगा।

नवाचार और वैज्ञानिक प्रमाण पर जोर

राष्ट्रीय सम्मेलन के विषय पर बोलते हुए मंत्री ने कहा कि नवाचार और प्रमाण यूनानी चिकित्सा के भविष्य के दो प्रमुख स्तंभ हैं। उन्होंने शोधकर्ताओं से जीनोमिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक डायग्नोस्टिक्स जैसी तकनीकों का उपयोग कर यूनानी अवधारणाओं और उपचारों की वैज्ञानिक समझ को गहरा करने का आह्वान किया।

महाराष्ट्र की भूमिका महत्वपूर्ण

महाराष्ट्र सरकार के सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल ने यूनानी दिवस के आयोजन और उन्नत सुविधा के उद्घाटन की सराहना करते हुए इसे आम लोगों के लिए किफायती और जन-केंद्रित स्वास्थ्य सेवा की दिशा में बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि यूनानी चिकित्सा विशेष रूप से गरीब और वंचित वर्गों के लिए प्रभावी और सस्ती उपचार प्रणाली प्रदान करती है।

यूनानी चिकित्सा में पिछले दशक में उल्लेखनीय प्रगति

आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि पिछले दशक में यूनानी चिकित्सा में अनुसंधान, रोगी देखभाल और संस्थागत विकास के क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि मंत्रालय विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के साथ मिलकर यूनानी चिकित्सा के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक स्थापित करने पर काम कर रहा है।

भारतीय चिकित्सा प्रणालियों की ‘एकता में विविधता’

राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयोग (NCISM) की अध्यक्ष डॉ. मनीषा वी. कोठेकर ने कहा कि यूनानी, आयुर्वेद, सिद्ध और सोवा-रिग्पा चिकित्सा प्रणालियाँ “एकता में विविधता” की भावना का प्रतीक हैं, जो समाज के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए कार्य करती हैं।

महत्वपूर्ण पहल और समझौते

कार्यक्रम के दौरान यूनानी चिकित्सा पर वीडियो टीज़र, CCRUM प्रकाशनों का विमोचन, सहयोगी वेब पोर्टल और मोबाइल ऐप लॉन्च, एक अंतरराष्ट्रीय और आठ राष्ट्रीय समझौता ज्ञापनों (MoUs) का आदान-प्रदान तथा मानव स्वभाव (मिज़ाज-ए-इंसान) के आकलन के लिए प्रश्नावली जारी की गई। RRIUM मुंबई की जैव रसायन और पैथोलॉजी प्रयोगशाला को NABL प्रमाणन भी प्राप्त हुआ।


NH-160A हाईवे परियोजना को मंजूरी, 3,320 करोड़ रुपये की लागत से महाराष्ट्र में सड़क नेटवर्क को बड़ी मजबूती

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने महाराष्ट्र में घोटी–त्र्यंबकेश्वर (मोखाडा)–जवाहर–मनोऱ–पालघर खंड (NH-160A) के पुनर्वास और उन्नयन परियोजना को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना की कुल लंबाई 154.635 किलोमीटर है और इसकी कुल पूंजीगत लागत 3,320.38 करोड़ रुपये है।

यह परियोजना इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) मोड पर लागू की जाएगी।

नासिक और मुंबई क्षेत्र को मिलेगा वैकल्पिक मार्ग

नासिक के पश्चिमी क्षेत्र, विशेषकर अंबाड और सतपुर औद्योगिक क्षेत्रों में बड़ी संख्या में उद्योग इकाइयाँ हैं, जिससे भारी मालवाहक यातायात उत्पन्न होता है। वर्तमान में यह यातायात नासिक शहर से होकर गुजरता है, जिससे शहरी सड़कों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है।

NH-160A के उन्नयन से औद्योगिक क्षेत्रों को त्र्यंबकेश्वर के माध्यम से वैकल्पिक मार्ग मिलेगा, जिससे नासिक शहर में यातायात जाम में कमी आएगी।

4-लेन हाईवे और बेहतर कनेक्टिविटी

  • वर्ष 2028 के बाद इस कॉरिडोर पर यातायात 10,000 PCU प्रतिदिन से अधिक होने का अनुमान है, जिससे इसे 4-लेन हाईवे में विकसित किया जाएगा।

  • त्र्यंबकेश्वर से पालघर और मनोऱ तक का मार्ग दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, NH-48 और पश्चिमी तटीय क्षेत्रों को जोड़ेगा।

  • शहरी क्षेत्रों में यातायात को सुगम बनाने के लिए मनोऱ–पालघर खंड को 4-लेन किया जाएगा।

PM गति शक्ति योजना के तहत विकास

यह परियोजना पीएम गति शक्ति सिद्धांतों के अनुरूप प्रस्तावित है और महाराष्ट्र में:

  • 6 आर्थिक नोड्स

  • 7 सामाजिक नोड्स

  • 8 लॉजिस्टिक्स नोड्स
    को जोड़ेगी।
    इससे देश के लॉजिस्टिक परफॉर्मेंस इंडेक्स (LPI) में भी सुधार होगा।

आर्थिक विकास और रोजगार को बढ़ावा

इस परियोजना से:

  • यात्रा समय में कमी आएगी

  • वाहन परिचालन लागत घटेगी

  • आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विकास होगा

  • क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा

परियोजना से लगभग:

  • 19.98 लाख व्यक्ति-दिन का प्रत्यक्ष रोजगार

  • 24.86 लाख व्यक्ति-दिन का अप्रत्यक्ष रोजगार
    उत्पन्न होने का अनुमान है।

परियोजना का विवरण

  • परियोजना नाम: घोटी–त्र्यंबकेश्वर–जवाहर–मनोऱ–पालघर (NH-160A) उन्नयन

  • कुल लंबाई: 154.635 किमी

  • कुल लागत: ₹3,320.38 करोड़

  • मोड: EPC

  • प्रमुख एक्सप्रेसवे कनेक्शन: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, समृद्धि महामार्ग

  • प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग: NH-848, NH-48

  • प्रमुख शहर: त्र्यंबकेश्वर, जवाहर, मनोऱ, पालघर, मुंबई, नासिक


स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 को मंजूरी, 10,000 करोड़ रुपये का कोष— भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को बड़ी मजबूती

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम को बड़ा बढ़ावा देने के लिए स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 (Startup India FoF 2.0) की स्थापना को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत 10,000 करोड़ रुपये का कोष स्थापित किया जाएगा, जिसका उद्देश्य देश के स्टार्टअप्स के लिए वेंचर कैपिटल जुटाना और नवाचार आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देना है।


यह योजना स्टार्टअप इंडिया पहल के तहत शुरू की गई है और भारत के स्टार्टअप सफर के अगले चरण को गति देने के लिए तैयार की गई है। इसका उद्देश्य दीर्घकालिक घरेलू पूंजी जुटाना, वेंचर कैपिटल इकोसिस्टम को मजबूत करना और देशभर में नवाचार को प्रोत्साहित करना है।

भारत का स्टार्टअप सफर: अभूतपूर्व वृद्धि

2016 में स्टार्टअप इंडिया की शुरुआत के बाद से भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम में ऐतिहासिक परिवर्तन देखने को मिला है। जहां पहले देश में 500 से भी कम स्टार्टअप थे, वहीं आज DPIIT से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या 2 लाख से अधिक हो चुकी है। वर्ष 2025 में स्टार्टअप पंजीकरण का अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड दर्ज किया गया।

फंड ऑफ फंड्स 1.0 की सफलता पर आधारित नई योजना

स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0, फंड ऑफ फंड्स फॉर स्टार्टअप्स 1.0 (FFS 1.0) की सफलता पर आधारित है, जिसे 2016 में शुरू किया गया था।

FFS 1.0 के तहत 10,000 करोड़ रुपये की पूरी राशि 145 वैकल्पिक निवेश कोष (AIFs) को दी गई, जिन्होंने 1,370 से अधिक स्टार्टअप्स में 25,500 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया। इन निवेशों से कृषि, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, ऑटोमोबाइल, क्लीन टेक, ई-कॉमर्स, फिनटेक, हेल्थकेयर, स्पेस टेक और बायोटेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों को लाभ मिला।

स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 की प्रमुख विशेषताएं

नई योजना को भारतीय नवाचार को अगले स्तर पर ले जाने के लिए तैयार किया गया है। इसके तहत:

  • डीप टेक और टेक्नोलॉजी आधारित नवाचार को प्राथमिकता दी जाएगी।

  • प्रारंभिक चरण के स्टार्टअप्स और नए उद्यमियों को वित्तीय सुरक्षा मिलेगी।

  • देशभर में निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि नवाचार सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित न रहे।

  • उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में पूंजी की कमी को दूर किया जाएगा।

  • घरेलू वेंचर कैपिटल फंड्स, खासकर छोटे फंड्स को मजबूत किया जाएगा।

भारत की अर्थव्यवस्था और रोजगार पर बड़ा प्रभाव

Startup India FoF 2.0 से भारत की नवाचार आधारित विकास रणनीति को मजबूती मिलेगी। यह योजना वैश्विक प्रतिस्पर्धी तकनीक, उत्पाद और समाधान बनाने वाले स्टार्टअप्स को समर्थन देगी, जिससे:

  • भारत की आर्थिक मजबूती बढ़ेगी

  • विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ावा मिलेगा

  • उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार सृजित होंगे

  • भारत को वैश्विक नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी

यह योजना विकसित भारत @2047 के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप है और उद्यमियों को सशक्त बनाने, नवाचार को बढ़ावा देने और भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम की पूरी क्षमता को खोलने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।




नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय हुए शामिल

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सामुदायिक भवन निर्माण की घोषणा

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज जशपुर प्रवास के दौरान दुलदुला विकास खंड के ग्राम सिरीमकेला स्थित श्री नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर के पावन प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में सम्मिलित हुए। उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर देवाधिदेव महादेव से समस्त छत्तीसगढ़वासियों के सुख, समृद्धि और कल्याण की मंगलकामना की। महाशिवरात्रि के पावन पर्व के एक दिन पूर्व आयोजित इस आध्यात्मिक आयोजन को उन्होंने श्रद्धा, आस्था और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बताया। 

मुख्यमंत्री साय ने ग्राम सिरीमकेला में सामुदायिक भवन निर्माण की घोषणा करते हुए कहा कि इससे स्थानीय नागरिकों को सामाजिक, सांस्कृतिक एवं पारिवारिक आयोजनों के लिए सुदृढ़ आधार मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि कल हम सब महाशिवरात्रि का पावन पर्व मनाएंगे और इस अवसर पर आप सभी को हार्दिक बधाई देता हूं। उन्होंने कहा कि सिरीमकेला में भक्तों और अपने परिवारजनों के बीच आकर उन्हें आध्यात्मिक शांति और आनंद की अनुभूति हो रही है। भक्ति और श्रद्धा के इस अनूठे आयोजन में उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सनातन परंपरा को पुनर्स्थापित करते हुए अयोध्या धाम दर्शन योजना एवं मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के माध्यम से हजारों श्रद्धालुओं को धार्मिक यात्राएँ करा रही है। श्रवण कुमार के पदचिन्हों पर चलने का प्रयास करते हुए अब तक प्रदेश के 42 हजार से अधिक तीर्थ यात्रियों को श्रीरामलला के दर्शन कराए जा चुके हैं। 

उन्होंने कहा कि 500 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद अयोध्या धाम में श्री रामलला का भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ है और हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर आज ध्वज लहरा रहा है। प्रत्येक राम भक्त की आस्था 500 वर्षों तक प्रज्वलित रही — यह एक ऐसा यज्ञ था जिसकी लौ कभी नहीं डगमगाई। हम सब निमित्त मात्र हैं, जो अपने भांचा राम के दर्शन उनके भव्य मंदिर में कर रहे हैं और श्रद्धालुओं को करा पा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज नीलकंठेश्वर महादेव का दर्शन पाकर वे स्वयं को अत्यंत सौभाग्यशाली महसूस कर रहे हैं। दशहरा पर्व के दिन नीलकंठ के दर्शन को अत्यंत शुभ माना जाता है और आज प्राण-प्रतिष्ठा के उपरांत यहाँ निरंतर दर्शन लाभ मिलना हम सबके लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि जशपुर में मधेश्वर महादेव स्थित हैं, जिसे लोक मान्यता के अनुसार एशिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग कहा जाता है। सनातन परंपरा में भक्ति का विशेष महत्व है और राज्य सरकार भक्तों का सम्मान करती है। सावन माह में भोरमदेव मंदिर में कांवड़ियों पर पुष्पवर्षा कर हर वर्ष आस्था प्रकट की जाती है।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहे जाने वाले राजिम त्रिवेणी संगम में इन दिनों राजिम कुंभ कल्प का भव्य आयोजन हो रहा है, जहाँ आस्था और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भगवान कुलेश्वरनाथ महादेव के दर्शन अवश्य करें। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के संरक्षण के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है। राजिम कुंभ कल्प की प्रतिष्ठा को पुनर्स्थापित किया गया है, ऐतिहासिक बस्तर दशहरा की पहचान देश-विदेश तक है तथा छत्तीसगढ़ के पाँच शक्ति पीठों के विकास के लिए कार्य योजना बनाकर सतत कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता और प्रकृति संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं। 

कार्यक्रम के समापन अवसर पर उन्होंने कहा कि महाशिवरात्रि के इस पावन कालखंड में नीलकंठेश्वर महादेव की कृपा हम सभी पर बनी रहे, प्रदेश में सुख-शांति, समृद्धि और विकास की नई धाराएँ प्रवाहित हों तथा छत्तीसगढ़ आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक वैभव के साथ निरंतर प्रगति पथ पर अग्रसर रहे — यही उनकी हार्दिक कामना है।

इस अवसर पर सरगुजा आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं पत्थलगांव विधायक श्रीमती गोमती साय, महासमुंद विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा, पूर्व राज्यसभा सांसद रणविजय सिंह जुदेव, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जुदेव, नगर पालिका उपाध्यक्ष यश प्रताप सिंह जुदेव, जनपद पंचायत अध्यक्ष सुशीला साय, कृष्णा राय, पवन साय, भरत सिंह,अरविन्द प्रसाद साय, कपिल देव साय, सरगुजा आईजी दीपक कुमार झा, कलेक्टर रोहित व्यास, एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह, वनमंडलाधिकारी शशि कुमार तथा महादेव मंदिर समिति के सदस्यगण बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

जंगल में छिपा था मौत का सामान: कांकेर सीमा पर हथियार-IED का भारी जखीरा बरामद

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 कांकेर। जिले में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। कांकेर–नारायणपुर सीमावर्ती क्षेत्र में सर्चिंग अभियान के दौरान नक्सलियों द्वारा डंप की गई भारी मात्रा में हथियार, विस्फोटक और माओवादी साहित्य बरामद किया गया। इस कार्रवाई से क्षेत्र में संभावित बड़ी नक्सली घटना टल गई है।


आईजी पी. सुन्दराज के निर्देशन तथा एसपी कांकेर निखिल राखेचा के मार्गदर्शन में पुलिस और सुरक्षा बलों का नक्सल उन्मूलन अभियान लगातार जारी है। इस अभियान में बीएसएफ डीआईजी ओम प्रकाश और प्रभारी राघवेंद्र सिंह सहित 94वीं वाहिनी बीएसएफ का भी सहयोग रहा।

13 फरवरी को डीआरजी और बीएसएफ की संयुक्त टीम ने थाना छोटेबेठिया क्षेत्र के ग्राम बीनागुंडा के पास जंगल में छिपाकर रखी गई नक्सली सामग्री बरामद की। बरामद सामान में शामिल हैं—

  • बीजीएल लांचर — 2
  • 12 बोर बंदूक — 2
  • एयरगन — 1
  • डायरेक्शनल आईईडी — 3
  • टिफिन आईईडी (लगभग 5 किग्रा) — 1
  • बीजीएल बम — 30
  • 12 बोर राउंड — 26
  • बारूद (प्लास्टिक पैकेट में, लगभग 2 किग्रा)
  • मल्टीमीटर — 1
  • पटाखा — 12 पैकेट
  • बिजली वायर — 2 बंडल
  • पोच — 2
  • स्प्लिंटर — 1 पैकेट

बरामद सामग्री को जब्त कर थाना छोटेबेठिया में वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। सुरक्षा बलों की सतत निगरानी और सक्रिय अभियान के कारण क्षेत्र में शांति एवं सुरक्षा बनाए रखने में मदद मिल रही है।

इंफ्रास्ट्रक्चर सुपर बूस्ट: नई लाइनों, हाईवे, सुरंग और मेट्रो विस्तार को हरी झंडी

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 केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रशासन, अवसंरचना, नगरीय विकास, नवाचार और संपर्क के मोर्चे पर कई दूरगामी फैसलों को मंजूरी दी है। इन निर्णयों का स्पष्ट संदेश है कि शासन की कार्यशैली को सेवा-भाव से जोड़ते हुए देश को तेज विकास पथ पर आगे बढ़ाया जाए।


सबसे प्रतीकात्मक निर्णय है ऐतिहासिक नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक से सरकारी कार्यालयों का नए परिसरों—सेवातीर्थ और कर्तव्य भवन—में स्थानांतरण। करीब एक सदी से सत्ता संचालन के केंद्र रहे ये भवन अब “युगे-युगीन भारत” राष्ट्रीय संग्रहालय का हिस्सा बनेंगे। सरकार का कहना है कि औपनिवेशिक काल के इन भवनों को विरासत के रूप में संरक्षित रखते हुए प्रशासन को आधुनिक, तकनीक-समर्थ और पर्यावरण-अनुकूल परिसरों में ले जाना समय की मांग है। इससे कार्यकुशलता बढ़ेगी, डिजिटल शासन को गति मिलेगी और कर्मचारियों को बेहतर कार्य-परिवेश मिलेगा। संग्रहालय के रूप में विकसित होने पर ये परिसर भारत की सभ्यता, स्वतंत्रता संघर्ष और लोकतांत्रिक विकास की कहानी आने वाली पीढ़ियों को बताएंगे।

रेल क्षेत्र: 18,509 करोड़ की मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाएं

रेलवे में तीन बड़ी मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी मिली है—कसारा-मनमाड, दिल्ली-अंबाला और बल्लारी-होसापेट खंड। करीब 389 किमी अतिरिक्त नेटवर्क तैयार होगा और निर्माण के दौरान 265 लाख मानव-दिवस का रोजगार सृजित होगा। अतिरिक्त लाइनों से यात्री और मालगाड़ियों की आवाजाही सुगम होगी, समयपालन सुधरेगा और रसद लागत घटेगी। कोयला, इस्पात, अनाज और उर्वरक की ढुलाई तेज होने से उद्योग और कृषि दोनों को लाभ मिलेगा।

 सड़क अवसंरचना: कई राज्यों में मेगा प्रोजेक्ट

महाराष्ट्र में घोटी-त्र्यंबक-मोखाडा-जव्हार-मनोर-पालघर मार्ग (154 किमी+) के उन्नयन पर 3,320 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इससे औद्योगिक क्षेत्रों को द्रुतमार्गों और तटीय पट्टी से बेहतर संपर्क मिलेगा तथा आदिवासी क्षेत्रों में विकास को गति मिलेगी।

गुजरात में राष्ट्रीय राजमार्ग-56 के दो खंडों को चार लेन बनाने के लिए 4,583 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं, जिससे आदिवासी जिलों की पहुंच बढ़ेगी और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी जैसे पर्यटन केंद्र तक आवागमन आसान होगा।

तेलंगाना में हैदराबाद-पणजी आर्थिक गलियारे पर राष्ट्रीय राजमार्ग-167 को चार लेन बनाने के लिए 3,175 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है, जिससे यातायात दबाव घटेगा और माल ढुलाई तेज होगी।

 ब्रह्मपुत्र के नीचे देश की पहली सड़क-रेल सुरंग

असम में ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे 33.7 किमी लंबी सड़क-सह-रेल सुरंग को स्वीकृति मिली है, जिसकी लागत 18,662 करोड़ रुपये आंकी गई है। यह गोहपुर और नुमालीगढ़ को जोड़ेगी। पूर्वोत्तर के लिए यह परियोजना रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

 नोएडा मेट्रो विस्तार

दिल्ली-एनसीआर में नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन की सेक्टर-142 से बोटैनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन तक 11.56 किमी विस्तार को मंजूरी मिली है। आठ नए स्टेशन बनेंगे और नोएडा-ग्रेटर नोएडा का सक्रिय मेट्रो नेटवर्क 61 किमी से अधिक हो जाएगा। इससे आईटी पार्क, शिक्षण संस्थान, अस्पताल और व्यावसायिक केंद्र सीधे जुड़ेंगे तथा जाम और प्रदूषण में कमी आएगी।

 स्टार्टअप और नवाचार को बढ़ावा

स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 के लिए 10,000 करोड़ रुपये के कोष को मंजूरी दी गई है। इससे विशेष रूप से डीप-टेक और उन्नत विनिर्माण क्षेत्रों में निवेश बढ़ेगा, शुरुआती चरण के उद्यमियों को सहायता मिलेगी और बड़े शहरों से बाहर भी स्टार्टअप पारिस्थितिकी मजबूत होगी।

 1 लाख करोड़ का नगरीय चुनौती कोष

नगरीय विकास के लिए 1 लाख करोड़ रुपये के “अर्बन चैलेंज फंड” की घोषणा भी अहम है। यह मॉडल नगर निकायों को बाजार से संसाधन जुटाने, सुधार लागू करने और परिणाम-आधारित परियोजनाओं पर जोर देने के लिए प्रोत्साहित करेगा। पानी, स्वच्छता, पुनर्विकास और जलवायु-अनुकूल बुनियादी ढांचे पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। छोटे शहरों को पहली बार बाजार से ऋण लेने में मदद हेतु गारंटी व्यवस्था भी होगी।

 समग्र संकेत: ढांचा और सोच दोनों में बदला

इन फैसलों से स्पष्ट है कि विकास का अगला चरण केवल खर्च बढ़ाने से नहीं, बल्कि शासन की संरचना और कार्य-दृष्टि बदलने से आएगा। नए प्रशासनिक परिसरों की ओर कदम “सत्ता से सेवा” की अवधारणा को मजबूत करता है, जबकि रेल, सड़क और मेट्रो परियोजनाएं आधुनिक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा—संपर्क—को सुदृढ़ करती हैं। स्टार्टअप और शहरी कोष यह संकेत देते हैं कि सरकार निजी पूंजी और स्थानीय निकायों को विकास का साझेदार बनाना चाहती है।

प्रेम की मन्नतों का रहस्यमयी धाम: महिलाओं का प्रवेश वर्जित, तस्वीर चढ़ाकर मिलते हैं बिछड़े प्रेमी

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 बस्तर। छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचल में आस्था और परंपराओं का संसार जितना रहस्यमयी है, उतना ही अनोखा भी। इसी अनोखेपन की मिसाल है मुकड़ी मावली माता मंदिर, जहां प्रेमी अपनी प्रेमिका की तस्वीर और मन्नत का पत्र चढ़ाकर बिछड़े प्यार को मिलाने की प्रार्थना करते हैं। हैरानी की बात यह है कि यहां केवल पुरुषों को ही प्रवेश की अनुमति है, जबकि लड़कियों और महिलाओं का प्रवेश पूरी तरह वर्जित है।


यह मंदिर बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा जिले में छिंदनार से बारसूर जाने वाले मार्ग से कुछ दूरी भीतर स्थित है। अलग परंपराओं और मान्यताओं के कारण यह मंदिर अब दूर-दराज के इलाकों में भी चर्चा का विषय बन चुका है।

 प्रेमिका की तस्वीर लेकर पहुंचते हैं प्रेमी

स्थानीय परंपरा के अनुसार, प्रेमी अपनी प्रेमिका के साथ मंदिर नहीं आते, बल्कि उसकी तस्वीर, कोई वस्तु या मन्नत पत्र लेकर देवी के चरणों में अर्पित करते हैं। तस्वीर और पत्र को पत्थर के नीचे दबा दिया जाता है, जिसकी सुरक्षा मंदिर के पुजारी करते हैं और किसी को छूने नहीं देते।

मान्यता है कि मुकड़ी मावली माता सच्चे प्रेम को मिलाने वाली देवी हैं। भक्तों का विश्वास है कि यहां मांगी गई मन्नत से अधूरी प्रेम कहानी पूरी होती है और बिछड़े प्रेमियों का मिलन संभव होता है।

 दूर-दूर से पहुंचते हैं श्रद्धालु

ग्रामीणों के अनुसार, देवी की स्थापना कब हुई, इसका कोई स्पष्ट इतिहास नहीं है। यह परंपरा पूर्वजों के समय से चली आ रही है। आसपास के गांवों के साथ-साथ दूर-दराज से भी युवक यहां पहुंचते हैं और अपनी मुराद लेकर लौटते हैं। मंदिर परिसर में रखी गई तस्वीरें और मन्नत पत्र इस आस्था की गवाही देते हैं।

 रहस्य और आस्था का अनोखा संगम

ग्रामीण बताते हैं कि मुकड़ी मावली माता प्रेम की पीड़ा को समझती हैं और सच्चे मन से मांगी गई मुराद को खाली नहीं लौटातीं। यही कारण है कि यहां आने वाले अधिकतर लोग अपनी पहचान गुप्त रखते हैं और बिना किसी शोर-शराबे के पूजा-अर्चना कर लौट जाते हैं।

वैलेंटाइन डे पर बढ़ती है भीड़

प्रेम का प्रतीक माने जाने वाले इस मंदिर में खासकर वैलेंटाइन डे के आसपास श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। लोग अपनी प्रेम कहानी के सुखद अंत की कामना लेकर यहां पहुंचते हैं।

स्थानीय मान्यताओं और अनोखी परंपराओं के कारण यह मंदिर आस्था के साथ-साथ जिज्ञासा का भी केंद्र बन गया है, जहां प्रेम, विश्वास और रहस्य एक साथ दिखाई देते हैं।

यदि चाहें तो मैं इसके लिए फ्रंट-पेज बैनर हेडलाइन, वायरल सोशल मीडिया कैप्शन या टीवी न्यूज़ स्टाइल स्क्रिप्ट भी बना सकता हूँ।

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