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अंकित शर्मा हत्याकांड: ताहिर हुसैन समेत 5 दोषियों को उम्रकैद, दिल्ली की अदालत का बड़ा फैसला

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नई दिल्ली- वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान हुए इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई।

इस महीने की शुरुआत में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने ताहिर हुसैन और चार अन्य आरोपियों को दोषी करार दिया था। अदालत ने ताहिर हुसैन को हत्या, अपहरण, घातक हथियारों के साथ दंगा, गैरकानूनी जमावड़ा, विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने सहित कई गंभीर धाराओं में दोषी ठहराया। हालांकि, उन्हें आपराधिक साजिश रचने और विद्रोह के लिए उकसाने के आरोपों से बरी कर दिया गया।

अदालत ने जावेद, अनस, नाजिम और कासिम को भी इस मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई, जबकि मुकदमे का सामना कर रहे छह अन्य आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।

सजा पर सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने ताहिर हुसैन के लिए फांसी की सजा की मांग की थी। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि अंकित शर्मा की निर्मम और सुनियोजित हत्या की गई थी तथा उनके शरीर पर 51 गंभीर चोटों के निशान पाए गए थे। पुलिस ने इसे "दुर्लभ से दुर्लभतम (Rarest of Rare)" श्रेणी का मामला बताया था, लेकिन अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

यह मामला 25 फरवरी 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों से जुड़ा है। अंकित शर्मा के पिता रविंदर कुमार की शिकायत के आधार पर दयालपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। शिकायत के अनुसार, अंकित शर्मा 25 फरवरी को घर लौटने के बाद दोबारा किसी काम से बाहर गए थे, लेकिन वापस नहीं आए। बाद में उनका शव चांदबाग पुलिया के पास एक नाले से बरामद हुआ।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अंकित शर्मा के शरीर पर 51 एंटी-मॉर्टम (मृत्यु से पहले लगी) चोटें दर्ज की गई थीं, जो धारदार हथियारों और कुंद वस्तुओं से किए गए हमले की ओर संकेत करती थीं। जांच के बाद पुलिस ने ताहिर हुसैन और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था, जबकि 24 मार्च 2023 को अदालत ने आरोप तय कर मुकदमे की सुनवाई शुरू की थी।

इस फैसले के साथ वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े सबसे चर्चित मामलों में से एक का महत्वपूर्ण न्यायिक निष्कर्ष सामने आया है।

सुरक्षा के दृष्टि से केन्द्रीय जेल रायपुर में मुलाकात व्यवस्था में अस्थाई परिवर्तन

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रायपुर- केन्द्रीय जेल रायपुर में विगत माह बंदियों से मुलाकात के दौरान कुछ परिजनों द्वारा दैनिक उपयोग की सामग्रियों में प्रतिबंधित वस्तुएँ छिपाकर जेल परिसर के भीतर पहुँचाने का प्रयास किया गया था। जेल शासन के सघन तलाशी एवं सतर्क सुरक्षा व्यवस्था के कारण ऐसे सभी प्रयास विफल कर दिए गए तथा संबंधित प्रतिबंधित सामग्री जप्त कर आवश्यक कार्यवाही की गई।

अधीखक केन्द्रीय जेल रायपुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार जेल की सुरक्षा एवं अनुशासन को दृष्टिगत रखते हुए और सुरक्षा को अधिक सुदृढ़ बनाए रखने के उद्देश्य से जेल प्रशासन द्वारा एहतियातन बंदियों के दैनिक उपयोग की कुछ चयनित सामग्रियों को जेल केन्टीन से क्रय कर बंदियों को उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। अन्य सभी स्वीकृत सामग्री पूर्ववत् नियमानुसार बंदियों के परिजन स्वयं उपलब्ध करा सकते हैं।

यह व्यवस्था पूर्णतः अस्थायी है तथा इसका उद्देश्य केवल प्रतिबंधित सामग्री की जेल में संभावित प्रवेश पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाना है। जेल केन्टीन में उपलब्ध कराई जा रही सभी सामग्रियाँ गुणवत्तापूर्ण हैं तथा उनकी दरें सामान्य बाजार दरों से कम निर्धारित की गई हैं, जिससे बंदियों के परिजनों पर किसी प्रकार का अतिरिक्त आर्थिक भार न पड़े।

5 लाख मीट्रिक टन चावल के शीघ्र उठाव की पहल, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय मंत्री से पर्याप्त रेलवे रैक उपलब्ध कराने का किया आग्रह

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नई दिल्ली- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गुरुवार को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात कर छत्तीसगढ़ से 5 लाख मीट्रिक टन चावल के शीघ्र उठाव तथा हर महीने पर्याप्त रेलवे रैक उपलब्ध कराने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इससे चावल के परिवहन में तेजी आएगी, गोदामों में नई फसल के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध होगी और किसानों से धान खरीदी की प्रक्रिया और अधिक सुचारु रूप से संचालित हो सकेगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ को केंद्रीय पूल के लिए 73 लाख टन चावल उपलब्ध कराने का लक्ष्य मिला है। चावल के समयबद्ध उठाव को सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने राज्य को हर महीने कम से कम 250 रेलवे रैक उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने मुख्यमंत्री के आग्रह पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए आवश्यक सहयोग का आश्वासन दिया। मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह भी उपस्थित थे।

कटघोरा में अटलजी की कांस्य प्रतिमा मानकों के अनुरूप नहीं होने पर उप अभियंता तत्काल प्रभाव से निलंबित

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रायपुर- नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने कोरबा जिले के कटघोरा नगर पालिका में अटल परिसर में स्थापित कांस्य प्रतिमा के मानकों के अनुरूप नहीं होने पर उप अभियंता चन्द्र प्रकाश जायसवाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। नगरीय प्रशासन विभाग ने संचालनालय से आज उनके निलंबन का आदेश जारी किया है।

कटघोरा में अटल परिसर में स्थापित भारतरत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा से संबंधित शिकायतों पर नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के बिलासपुर क्षेत्रीय कार्यालय के संयुक्त संचालक द्वारा प्रस्तुत जाँच प्रतिवेदन के आधार पर निलंबन की यह कार्रवाई की गई है। जांच प्रतिवेदन में प्रतिमा निर्माण कार्य प्राक्कलन के प्रावधानों के विपरीत होना, विभिन्न भागों से परत उखड़ने, सतत् क्षतिग्रस्त होने तथा कांस्य प्रतिमा मानकों के अनुरूप नहीं होने के कारण निर्माण प्रक्रिया में पदस्थापना के दौरान की गई अनियमितता में उप अभियंता चन्द्र प्रकाश जायसवाल उत्तरदायी पाये गये हैं। उनके इस कृत्य के पदीय कर्तव्यों के विपरीत होने के कारण तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।

निलंबन अवधि में जायसवाल का मुख्यालय संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय कार्यालय, नगरीय प्रशासन एवं विकास, दुर्ग नियत किया गया है। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।

भरपूर खाद-बीज, मजबूत योजनाएं और आधुनिक खेती से समृद्धि की राह पर छत्तीसगढ़ का किसान

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उर्वरकों का 98 प्रतिशत भंडारण, किसानों को डीबीटी से हजारों करोड़ की सहायता, उद्यानिकी, पशुपालन और मत्स्य क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति

कृषि मंत्री रामविचार नेताम और कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने विभागीय उपलब्धियों पर दी विस्तृत जानकारी

रायपुर- छत्तीसगढ़ में कृषि को अधिक लाभकारी, तकनीक आधारित और किसान केंद्रित बनाने की दिशा में राज्य सरकार लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज एवं उर्वरकों की उपलब्धता, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से आर्थिक सहायता, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, कृषि यंत्रीकरण, प्राकृतिक खेती, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन तथा कृषि अधोसंरचना के विकास के माध्यम से प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को नई गति मिल रही है।

कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी, पशुधन विकास, मत्स्य पालन एवं उद्यानिकी मंत्री रामविचार नेताम तथा कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने आज संयुक्त रूप से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विभागीय उपलब्धियों एवं आगामी कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी दी। इस मौके पर कृषि विभाग के संचालक राहुल देव, पशुधन विकास विभाग के चंद्रकांत वर्मा, छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के एमडी अजय अग्रवाल, उद्यानिकी विभाग संचालक लोकेश चंद्राकर, मत्सय विभाग के संचालक एनएस नाग, छत्तीसगढ़ राज्य मण्डी बोर्ड के एमडी  महेन्द्र सवन्नी, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल, महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के कुलपति के डॉ. विनित सक्सेना उपस्थित थे।  

कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी, पशुधन विकास, मत्स्य पालन एवं उद्यानिकी मंत्री रामविचार नेताम तथा कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने आज संयुक्त रूप से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विभागीय उपलब्धियों एवं आगामी कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी दी।

मंत्री नेताम ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता किसानों की आय में वृद्धि, खेती की लागत में कमी तथा कृषि को आधुनिक और टिकाऊ बनाना है। राज्य में कृषि एवं उससे जुड़े सभी क्षेत्रों में योजनाबद्ध तरीके से कार्य किए जा रहे हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम अब दिखाई देने लगे हैं।

प्रदेश में पर्याप्त खाद और बीज की उपलब्धता

प्रेसवार्ता में कृषि उत्पादन आयुक्त परदेशी ने बताया कि खरीफ सीजन 2026 के लिए अप्रैल से सितंबर तक 15.55 लाख मीट्रिक टन रासायनिक उर्वरकों का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके विरुद्ध 30 जुलाई 2026 तक 15.16 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का भंडारण किया जा चुका है, जो लक्ष्य का लगभग 98 प्रतिशत है। किसानों द्वारा अब तक 10.23 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का उठाव किया जा चुका है तथा लगभग 4.93 लाख मीट्रिक टन उर्वरक शेष उपलब्ध है।

यूरिया का लक्ष्य से अधिक 102 प्रतिशत भंडारण किया गया है, जबकि डीएपी, एनपीके, एमओपी एवं एसएसपी सहित सभी प्रमुख उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। विभाग द्वारा कालाबाजारी, जमाखोरी तथा अवैध भंडारण पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। 30 जुलाई तक 5,466 निरीक्षण किए गए, जिनमें अनेक मामलों में एफआईआर, लाइसेंस निलंबन, निरस्तीकरण तथा उर्वरक जब्ती जैसी कार्रवाई की गई।

प्रदेश में खरीफ 2026 के लिए लगभग 4.95 लाख क्विंटल बीज की मांग के विरुद्ध 4.85 लाख क्विंटल प्रमाणित बीजों का भंडारण किया गया है, जो लगभग 98 प्रतिशत उपलब्धता को दर्शाता है।

कृषक उन्नति योजना से किसानों को मिली बड़ी आर्थिक ताकत

कृषि उत्पादन आयुक्त परदेशी ने बताया कि राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी कृषक उन्नति योजना के तहत किसानों को डीबीटी के माध्यम से सीधे बैंक खातों में सहायता राशि उपलब्ध कराई जा रही है। खरीफ 2023 से खरीफ 2025 तक लगभग 25.52 लाख किसानों को 35,892.90 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई है। फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए धान के स्थान पर अन्य फसल लेने वाले किसानों को प्रति एकड़ मिलने वाली प्रोत्साहन राशि 11 हजार रुपये से बढ़ाकर 15 हजार रुपये कर दी गई है।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से लाखों किसानों को लाभ

कृषि उत्पादन आयुक्त परदेशी ने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत प्रदेश के 24.63 लाख किसानों को 23वीं किस्त के रूप में 493 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता प्रदान की गई। अब तक किसानों को 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि उपलब्ध कराई जा चुकी है। एग्रीस्टैक और ई-केवाईसी के माध्यम से योजना को और अधिक पारदर्शी बनाया गया है।

बढ़ रहा है कृषि का रकबा, 83 प्रतिशत बोनी पूर्ण

इस वर्ष खरीफ में 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य रखा गया है, जिसके विरुद्ध अब तक लगभग 83 प्रतिशत क्षेत्र में बोनी पूरी हो चुकी है। प्रदेश में औसत वर्षा भी सामान्य से अधिक दर्ज की गई है, जिससे खरीफ फसलों की स्थिति संतोषजनक बनी हुई है।

आधुनिक खेती को मिल रहा बढ़ावा

कृषि उत्पादन आयुक्त परदेशी ने बताया कि राज्य में कृषि यंत्रीकरण के तहत अब तक 7,745 किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराए गए हैं तथा 568 फार्म मशीनरी बैंक स्थापित किए गए हैं, जिससे छोटे एवं सीमांत किसानों को भी आधुनिक उपकरणों का लाभ मिल रहा है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत 49,983 किसानों को लाभान्वित करते हुए लगभग 41,967 हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई का विस्तार किया गया है तथा 147 करोड़ रुपये से अधिक का अनुदान प्रदान किया गया है। 
प्राकृतिक खेती को भी विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। वर्ष 2025-26 में 57 हजार से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ा गया है।

दलहन-तिलहन उत्पादन पर विशेष जोर

मंत्री राम विचार नेताम प्रेसवार्ता में बताया कि प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा), राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन, आत्मनिर्भर दलहन मिशन तथा नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल-ऑयलसीड्स जैसी योजनाओं के माध्यम से दलहन एवं तिलहन उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। किसानों को प्रमाणित बीज, प्रशिक्षण, फसल प्रदर्शन तथा अनुदान आधारित सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

एग्रीस्टैक से डिजिटल कृषि को नई पहचान

प्रदेश के 19,389 ग्रामों का जियो-रेफरेंसिंग पूरा किया जा चुका है तथा 36 लाख से अधिक किसानों का डिजिटल पंजीयन किया गया है। एग्रीस्टैक के माध्यम से पीएम-किसान, पीएम-आशा और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना सहित विभिन्न योजनाओं को एकीकृत किया जा रहा है, जिससे किसानों को पारदर्शी एवं समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं।

उद्यानिकी में लगातार बढ़ रहा क्षेत्र और उत्पादन

बीते ढाई वर्षों में उद्यानिकी फसलों का कुल रकबा 8.42 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 8.91 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है। फल, सब्जी, मसाला, पुष्प एवं औषधीय फसलों के क्षेत्र और उत्पादन में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। ऑयल पाम के क्षेत्र में लगभग 50 प्रतिशत तथा बांस रोपण में 79 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्रदेश में हाईटेक नर्सरियों, टिश्यू कल्चर लैब, ग्रीन हाउस, शेडनेट हाउस, पैक हाउस तथा कोल्ड स्टोरेज जैसी अधोसंरचनाओं का तेजी से विस्तार किया गया है। आगामी वर्षों में बलरामपुर एवं जशपुर में इंटीग्रेटेड पैक हाउस तथा नवा रायपुर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे।

पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में नई उपलब्धियांपशुधन विकास विभाग के बजट में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्रदेश में दूध, अंडा एवं मांस उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। राज्य सरकार, छत्तीसगढ़ सहकारी दुग्ध महासंघ और एनडीडीबी के बीच हुए समझौते के बाद दुग्ध उत्पादकों को अब प्रत्येक दस दिन में भुगतान सुनिश्चित किया जा रहा है। दूध संकलन दर भी बढ़ाई गई है तथा नई दुग्ध समितियों, चिलिंग सेंटर और डेयरी अधोसंरचना का विस्तार किया गया है। मोबाइल वेटेरिनरी यूनिटों के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों में पशु चिकित्सा सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। गौधाम योजना, गौशालाओं के अनुदान में वृद्धि तथा नए गौ-अभ्यारण्यों की स्थापना भी सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल है।

छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी मत्स्य उत्पादक राज्यों में शामिल

मंत्री नेताम ने बताया कि मत्स्य पालन विभाग ने ढाई वर्षों में जलक्षेत्र विकास, मत्स्य उत्पादन, केज कल्चर, बायोफ्लॉक, तालाब निर्माण और झींगा पालन जैसी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया है। राज्य का मत्स्य उत्पादन लगभग 23 प्रतिशत बढ़कर 9.59 लाख टन पहुंच गया है। प्रदेश आज देश के अग्रणी मत्स्य उत्पादक राज्यों में शामिल हो चुका है।

कृषि विपणन और अधोसंरचना को गति

कृषि उत्पादन आयुक्त परदेशी ने बताया कि राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) से प्रदेश की 21 मंडियां जुड़ चुकी हैं। ई-ट्रेडिंग के माध्यम से अंतरराज्यीय व्यापार को बढ़ावा मिला है। कृषि अवसंरचना निधि (एआईएफ) के अंतर्गत प्रदेश ने 1,900 करोड़ रुपये के लक्ष्य के विरुद्ध 3,026 करोड़ रुपये की उपलब्धि हासिल कर उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। प्रदेश की मंडियों एवं उपमंडियों में किसानों की सुविधा के लिए 885 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न अधोसंरचना विकास कार्य स्वीकृत एवं निर्मित किए गए हैं।

राज्य बीज एवं जैविक प्रमाणीकरण संस्था द्वारा बीज उत्पादन की संपूर्ण प्रक्रिया को ऑनलाइन साथी (ै।ज्भ्प्) पोर्टल से जोड़ा गया है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं महिला कृषकों को बीज प्रमाणीकरण शुल्क पर शत-प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है, जिससे वर्ष 2025-26 में 7,510 किसानों को लाभ मिला। रायपुर स्थित बीज परीक्षण प्रयोगशाला को एनएबीएल मान्यता प्राप्त हुई है, जो छत्तीसगढ़ एवं मध्यप्रदेश की पहली एनएबीएल मान्यता प्राप्त शासकीय बीज परीक्षण प्रयोगशाला है। वर्ष 2025-26 में यहां 15 हजार बीज नमूनों का सफल परीक्षण किया गया।

प्रेसवार्ता के अंत में मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय दोगुनी करने, कृषि को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने तथा आधुनिक तकनीक और पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से कृषि क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण बीज, पर्याप्त उर्वरक, डिजिटल सेवाओं, आधुनिक तकनीक और प्रभावी योजनाओं के समन्वित क्रियान्वयन से छत्तीसगढ़ कृषि विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है।

बस्तर के 461 पूर्व नक्सल प्रभावित गांवों तक बिजली पहुंचाने की पहल, केंद्र से विशेष सहायता का आग्रह

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मुख्यमंत्री साय ने केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री से की मुलाकात

नई दिल्ली- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम से मुलाकात कर धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना के तहत बस्तर संभाग के 7 जिलों के 461 दूरस्थ और पूर्व नक्सल प्रभावित गांवों तक ग्रिड बिजली पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार से 435 करोड़ रुपये की विशेष वित्तीय सहायता का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में विस्तृत प्रस्ताव सौंपते हुए कहा कि जिन गांवों में वर्षों तक नक्सल हिंसा के कारण विकास नहीं पहुंच सका, वहां अब बिजली जैसी बुनियादी सुविधा पहुंचाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस परियोजना की कुल लागत 973 करोड़ रुपये है। इसमें केंद्र सरकार से तीन वित्तीय वर्षों में सहायता मांगी गई है।

वर्ष 2026-27 में 85 करोड़ रुपये, 2027-28 में 250 करोड़ रुपये और 2028-29 में 100 करोड़ रुपये, यानी कुल 435 करोड़ रुपये केंद्र से अपेक्षित हैं, जबकि शेष राशि राज्य सरकार वहन करेगी।

मुख्यमंत्री साय ने केंद्रीय मंत्री से अनुरोध किया कि संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत इस प्रस्ताव को विशेष प्रकरण मानते हुए शीघ्र स्वीकृति प्रदान की जाए, ताकि बस्तर के दूर-दराज़ गांव भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ सकें। उन्होंने कहा कि बिजली पहुंचने से आदिवासी परिवारों के जीवन में बड़ा बदलाव आएगा और शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार तथा छोटे उद्योगों को नई गति मिलेगी।

केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम ने मुख्यमंत्री को आश्वस्त किया कि धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना के तहत प्रस्ताव प्राप्त होते ही उस पर तत्काल स्वीकृति की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के लिए धनराशि की कोई बाधा नहीं आने दी जाएगी और केंद्र सरकार बस्तर के विकास के लिए पूरा सहयोग करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर अब विकास, विश्वास और नई संभावनाओं की पहचान बन रहा है। इन 461 गांवों तक बिजली पहुंचना उसी परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

भारतीय रेलवे ने रचा इतिहास: पहली बार वंदे भारत एक्सप्रेस से जीवित डोनर का हृदय पहुंचाया, सफल हुआ जीवनरक्षक मिशन

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नई दिल्ली- भारतीय रेलवे ने स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए देश में पहली बार जीवित डोनर (Live Donor) का हृदय ट्रेन के माध्यम से सफलतापूर्वक पहुंचाया। जीवनरक्षक अंग को सूरत से अहमदाबाद तक ट्रेन संख्या 20901 मुंबई सेंट्रल–गांधीनगर कैपिटल वंदे भारत एक्सप्रेस से सुरक्षित और समय पर पहुंचाया गया, जिससे यू.एन. मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी एंड रिसर्च सेंटर, अहमदाबाद में सफल प्रत्यारोपण (ट्रांसप्लांट) संभव हो सका।

यह ऐतिहासिक मिशन वंदे भारत एक्सप्रेस की तेज गति, समयबद्धता और विश्वसनीयता का उत्कृष्ट उदाहरण है। साथ ही, इसने आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं और अंग प्रत्यारोपण जैसे संवेदनशील कार्यों में भारतीय रेलवे की बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित किया।

अंग प्रत्यारोपण समय के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील प्रक्रिया होती है। इसलिए इस मिशन के लिए भारतीय रेलवे, रेलवे सुरक्षा बल (RPF), गुजरात राज्य पुलिस तथा चिकित्सा टीमों के बीच अत्यंत सूक्ष्म योजना और प्रभावी समन्वय स्थापित किया गया। प्रत्येक चरण का सावधानीपूर्वक प्रबंधन किया गया ताकि निर्धारित समय-सीमा के भीतर हृदय सुरक्षित रूप से अस्पताल पहुंच सके।

मिशन की सफलता के लिए अहमदाबाद रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 से यू.एन. मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी एंड रिसर्च सेंटर तक विशेष ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। रेलवे सुरक्षा बल और गुजरात पुलिस ने निर्बाध यातायात सुनिश्चित किया, जिससे हृदय को बिना किसी देरी के अस्पताल पहुंचाया जा सका और प्रत्यारोपण प्रक्रिया समय पर शुरू हो सकी।

इस अवसर पर अहमदाबाद मंडल के मंडल रेल प्रबंधक (DRM) वेद प्रकाश ने कहा कि यह भारतीय रेलवे के लिए गर्व और संतोष का क्षण है। उन्होंने कहा कि वंदे भारत एक्सप्रेस के माध्यम से सूरत से अहमदाबाद तक जीवित डोनर का हृदय पहुंचाना यह दर्शाता है कि भारतीय रेलवे केवल यात्री और माल परिवहन तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज की जीवनरक्षक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भी पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रहा है।

उन्होंने कहा कि ऐसे मिशनों में हर मिनट अमूल्य होता है, और भारतीय रेलवे, आरपीएफ, गुजरात पुलिस तथा चिकित्सा टीमों के उत्कृष्ट समन्वय ने इस मिशन को सफल बनाया। किसी मानव जीवन को बचाने में योगदान देना रेलवे की सबसे बड़ी सेवा और जिम्मेदारी है।

भारतीय रेलवे ने कहा कि यह उपलब्धि वंदे भारत एक्सप्रेस की उच्च गति, परिचालन विश्वसनीयता और समयपालन को भी सिद्ध करती है। साथ ही यह दर्शाती है कि आधुनिक रेल अवसंरचना देश की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

भारतीय रेलवे ने इस मिशन की सफलता में योगदान देने वाले रेलवे सुरक्षा बल, गुजरात पुलिस, चिकित्सकों, अंग प्रत्यारोपण समन्वयकों और रेलवे अधिकारियों सहित सभी हितधारकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

यह ऐतिहासिक उपलब्धि भारतीय रेलवे की सुरक्षित, विश्वसनीय और कुशल परिवहन सेवाओं के प्रति प्रतिबद्धता के साथ-साथ मानवता और स्वास्थ्य सेवा के प्रति उसके समर्पण का भी सशक्त उदाहरण है।

भारत की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से 101 करोड़ लोग जुड़े, आबादी के 68% से अधिक को मिला लाभ : डॉ. मनसुख मांडविया

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नई दिल्ली- केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि भारत की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का दायरा अब लगभग 101 करोड़ लोगों तक पहुंच चुका है, जो देश की 68 प्रतिशत से अधिक आबादी को कवर करता है। उन्होंने बताया कि इस उपलब्धि को अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने पिछले सप्ताह हैदराबाद में आयोजित ब्रिक्स श्रम मंत्रियों की बैठक में भी रेखांकित किया, जो भारत की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली को वैश्विक स्तर पर मिली मान्यता का प्रमाण है।

डॉ. मांडविया नई दिल्ली में आयोजित चौथे ग्लोबल इंडस्ट्रियल रिलेशंस समिट को संबोधित कर रहे थे। इस दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ एम्प्लॉयर्स (AIOE) ने फिक्की (FICCI) और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के सहयोग से किया।

उन्होंने कहा कि सरकार, उद्योग, नियोक्ता, श्रमिक और ट्रेड यूनियनों के बीच निरंतर समन्वय ही स्वस्थ औद्योगिक संबंधों की आधारशिला है। आर्थिक विकास और रोजगार सृजन को साथ लेकर चलने के लिए सभी पक्षों की साझेदारी आवश्यक है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि औद्योगीकरण राष्ट्रीय विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है क्योंकि इससे रोजगार के अवसर बढ़ते हैं। उन्होंने विशेष रूप से महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और सहकारी मॉडल की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि ये पहल आजीविका के नए अवसर पैदा करने, अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि ऐसा संतुलित विकास मॉडल आवश्यक है जो एक ओर श्रमिकों के कल्याण और सामाजिक सुरक्षा को सुनिश्चित करे तथा दूसरी ओर उद्योगों के लिए 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को भी बढ़ावा दे।

डॉ. मांडविया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्थिर कर व्यवस्था, बढ़ती बचत, बढ़ी हुई क्रय शक्ति और विनिर्माण क्षेत्र के विस्तार के कारण आर्थिक विकास और रोजगार सृजन का सकारात्मक चक्र विकसित हुआ है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में जीडीपी में प्रत्येक 1 प्रतिशत वृद्धि के साथ रोजगार में 1.11 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है, जबकि लगभग 12 वर्ष पहले रोजगार वृद्धि का यह अनुपात केवल 0.008 प्रतिशत था।

उन्होंने कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) में प्रस्तावित सुधारों की जानकारी देते हुए कहा कि भविष्य में केवल ईएसआईसी अस्पताल ही नहीं, बल्कि बेहतर निजी अस्पतालों को भी ईएसआईसी से संबद्ध स्वास्थ्य सुविधाओं के रूप में मान्यता दी जा सकती है। इसके अलावा कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की सभी दावों की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल की जा रही है तथा एकल यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) के माध्यम से खातों का स्वतः स्थानांतरण सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही, यूपीआई के माध्यम से पीएफ निकासी की सुविधा पर भी विचार किया जा रहा है।

इस अवसर पर भारत में ILO की दक्षिण एशिया निदेशक सुश्री मिचिको मियामोटो ने भारत को सामाजिक सुरक्षा के विस्तार पर बधाई देते हुए कहा कि ILO के आकलन के अनुसार भारत अब एक अरब से अधिक लोगों को कम से कम एक सामाजिक सुरक्षा लाभ उपलब्ध कराने वाला देश बन गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह उपलब्धि भारत की आर्थिक प्रगति को और गति देगी।

सम्मेलन के दौरान केंद्रीय मंत्री डॉ. मांडविया एवं अन्य गणमान्य अतिथियों ने दो दिवसीय सम्मेलन की स्मारिका का भी विमोचन किया।

थल सेनाध्यक्ष ने स्वदेशी ‘एक्सट्रीम वेदर ग्रेड (XWG) डीजल’ लॉन्च किया, -42°C तक करेगा प्रभावी कार्य

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नई दिल्ली- भारतीय सेना के थल सेनाध्यक्ष (COAS) जनरल धीरज सेठ ने आज नई दिल्ली में स्वदेशी रूप से विकसित एक्सट्रीम वेदर ग्रेड (XWG) डीजल का शुभारंभ किया। भारतीय सेना और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के संयुक्त प्रयास से विकसित यह विशेष ईंधन अत्यधिक ठंडे और दुर्गम क्षेत्रों में लड़ाकू एवं लॉजिस्टिक वाहनों की गतिशीलता, सुरक्षा और परिचालन क्षमता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाएगा। यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

सामान्य डीजल अत्यधिक कम तापमान में गाढ़ा हो जाता है और ईंधन फिल्टर को जाम कर देता है, जिससे ऊंचाई वाले बर्फीले क्षेत्रों में वाहनों का संचालन प्रभावित होता है। एक्सट्रीम वेदर ग्रेड (XWG) डीजल इस समस्या का समाधान करता है और माइनस 42 डिग्री सेल्सियस तक भी प्रभावी ढंग से कार्य करता है।

यह ईंधन BS-VI मानकों तथा IS 1460:2025 विनिर्देशों के अनुरूप है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे भारतीय सेना के मौजूदा वाहन बेड़े में बिना किसी इंजन संशोधन या पुनः अनुमोदन (Re-homologation) के सीधे उपयोग किया जा सकता है।

इस अवसर पर जनरल धीरज सेठ ने कहा कि XWG डीजल एक गेम-चेंजर स्वदेशी नवाचार है, जो अत्यधिक प्रतिकूल मौसम में सेना की गतिशीलता, परिचालन तत्परता और मिशन की विश्वसनीयता को नई मजबूती देगा। उन्होंने कहा कि इस ईंधन के उपयोग से कड़ाके की सर्दियों में वाहनों को चालू रखने के लिए अपनाए जाने वाले अतिरिक्त उपायों की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी, जिससे सैनिकों की सुरक्षा और मनोबल दोनों में वृद्धि होगी।

उन्होंने इस तकनीक को मात्र एक वर्ष में विकसित करने के लिए भारतीय सेना की टीम और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की सराहना की तथा विश्वास जताया कि भविष्य में भी इस तरह के सहयोग से विभिन्न परिचालन आवश्यकताओं के अनुरूप विशेष ईंधनों का विकास होगा।

सैन्य उपयोग के अलावा, XWG डीजल का लाभ ऊंचाई वाले और अत्यधिक ठंड वाले क्षेत्रों में रहने वाले आम नागरिकों को भी मिलेगा। इससे कठिन मौसम में संचालित वाहनों और उपकरणों की विश्वसनीयता, सुरक्षा और कार्यक्षमता में सुधार होगा।

यह स्वदेशी तकनीक भारत की रक्षा क्षमता को सशक्त बनाने के साथ-साथ कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में नागरिक एवं सैन्य दोनों क्षेत्रों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होगी।

एपीडा ने कर्नाटक के नीलम और तोतापुरी आमों की पहली हवाई खेप मालदीव भेजी, किसानों को मिला 50% से अधिक लाभ

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नई दिल्ली- वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने कर्नाटक से नीलम और तोतापुरी आमों की पहली हवाई खेप सफलतापूर्वक मालदीव भेजकर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। 30 जुलाई 2026 को रवाना की गई यह खेप कर्नाटक की देर से पकने वाली आम की किस्मों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान दिलाने की दिशा में एक अहम कदम है।

इस खेप को एपीडा के अध्यक्ष अभिषेक देव (आईएएस) ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने निर्यातक, किसान उत्पादक कंपनी (FPC), किसानों और इस पहल से जुड़े सभी हितधारकों के संयुक्त प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास भारतीय आमों के लिए नए वैश्विक बाजार खोलने, देर से पकने वाली किस्मों के निर्यात को बढ़ावा देने और किसानों की आय में सतत वृद्धि सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

यह निर्यात खेप एक मीट्रिक टन नीलम और तोतापुरी आमों की थी, जिसे कर्नाटक के कोलार जिले के केजीएफ तालुक स्थित एम/एस प्रकृतिमाया फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड से जुड़े किसानों से सीधे खरीदा गया। इस खेप का निर्यात एम/एस अहल्या देवी वेंचर्स की निदेशक अश्विनी ए. द्वारा किया गया, जो एक नवपंजीकृत महिला उद्यमी एवं निर्यातक हैं। यह भारत के कृषि निर्यात क्षेत्र में महिला उद्यमियों की बढ़ती भागीदारी को भी दर्शाता है।

नीलम आम अपने मीठे, रसीले गूदे, सुगंध और डेजर्ट, स्मूदी तथा पेय पदार्थों में उपयोग के लिए प्रसिद्ध है। वहीं तोतापुरी आम अपनी विशिष्ट आकृति, मीठे-खट्टे स्वाद और ताजा सेवन के साथ-साथ प्रसंस्करण के लिए उपयुक्त होने के कारण लोकप्रिय है। जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के अंत तक उपलब्ध रहने वाली ये किस्में भारत के आम निर्यात सीजन को आगे बढ़ाने और वैश्विक मांग को पूरा करने का अवसर प्रदान करती हैं।

यह हवाई निर्यात कर्नाटक के बागवानी क्षेत्र की बढ़ती निर्यात क्षमता को दर्शाता है। साथ ही यह भी साबित करता है कि किसान उत्पादक कंपनियां (FPC) संगठित संग्रहण, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और निर्यातोन्मुख आपूर्ति श्रृंखला के माध्यम से किसानों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

इस पहल के माध्यम से किसान उत्पादक कंपनी से जुड़े किसानों को पारंपरिक बाजारों की तुलना में 50 प्रतिशत से अधिक अतिरिक्त लाभ प्राप्त हुआ। यह उपलब्धि प्रत्यक्ष खरीद, निर्यात बाजारों से जुड़ाव और संगठित विपणन व्यवस्था के महत्व को रेखांकित करती है तथा किसानों को निर्यातोन्मुख खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती है।

यह निर्यात कर्नाटक के आम निर्यात क्षेत्र के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत है और इससे किसान उत्पादक संगठन (FPO), किसान उत्पादक कंपनियां (FPC), निर्यातक तथा कृषि उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रीमियम बागवानी उत्पादों के निर्यात के लिए नई प्रेरणा मिलेगी।

एपीडा राज्य सरकारों, निर्यातकों, किसान उत्पादक संगठनों, किसान उत्पादक कंपनियों और अन्य हितधारकों के साथ मिलकर निर्यात अवसंरचना को मजबूत करने, वैश्विक बाजारों तक पहुंच आसान बनाने तथा भारत के उच्च गुणवत्ता वाले फलों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। ऐसे प्रयास भारत के कृषि निर्यात में विविधता लाने के साथ-साथ किसानों और बागवानी क्षेत्र के लिए स्थायी आर्थिक अवसर भी सृजित कर रहे हैं।


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अटल इनोवेशन मिशन के जमीनी नवप्रवर्तकों से की मुलाकात, नवाचार को विकसित भारत की आधारशिला बताया

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नई दिल्ली- भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (31 जुलाई 2026) राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में अटल इनोवेशन मिशन (AIM) के जमीनी स्तर के नवप्रवर्तकों (Grassroots Innovators) के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने नवप्रवर्तकों द्वारा आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन किया, उनके नवाचारों को देखा तथा उनसे संवाद भी किया।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत अपनी विशाल क्षमता और नवाचार की भावना के बल पर जमीनी नवाचारों का वैश्विक केंद्र बनने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि स्थानीय अनुभव, वैज्ञानिक सोच, व्यक्तिगत रचनात्मकता और सामाजिक उत्तरदायित्व का समन्वय ही जमीनी नवाचारों को समाज की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप बनाता है।

उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि देशभर के नवप्रवर्तक स्थानीय समस्याओं के ऐसे समाधान विकसित कर रहे हैं, जिनका महत्व राष्ट्रीय स्तर तक है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी में प्रस्तुत नवाचार कचरे से संपदा (Waste to Wealth), ऊर्जा संरक्षण, महिलाओं एवं दिव्यांगजनों की सुविधा, पर्यावरण संरक्षण, कृषि तथा कला संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि सिर्फ विचारों से सामाजिक परिवर्तन नहीं आता, बल्कि उन्हें आगे बढ़ाने के लिए उचित मार्गदर्शन, संसाधन और मंच की आवश्यकता होती है। उन्होंने बताया कि अटल कम्युनिटी इनोवेशन सेंटर जमीनी नवप्रवर्तकों को तकनीकी सहायता, मार्गदर्शन और उनके नवाचारों को टिकाऊ उद्यमों में बदलने के अवसर उपलब्ध करा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि "विकसित भारत" का सपना तभी साकार होगा, जब प्रत्येक नागरिक नवाचार की सोच के साथ समस्याओं के समाधान खोजने का प्रयास करेगा। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि देश के विभिन्न संस्थान और नागरिक इस साझा उद्देश्य के लिए मिलकर कार्य कर रहे हैं, जिससे नवाचार की संस्कृति लगातार मजबूत हो रही है।

राष्ट्रपति ने कहा कि सीमित संसाधनों, अनिश्चितताओं और अनेक चुनौतियों के बावजूद कई नवप्रवर्तकों ने अपने प्रयास जारी रखे। उन्होंने उनके समर्पण और सकारात्मक परिवर्तन लाने की भावना की सराहना की तथा उन्हें अपने नवाचारों को लगातार बेहतर बनाने, अनुसंधान संस्थानों, उद्योग जगत और अन्य नवप्रवर्तकों के साथ सहयोग बढ़ाने तथा अपने नवाचारों को व्यापक स्तर तक पहुँचाने का आह्वान किया।

राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे नवाचारों का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुँचेगा और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

राजस्व मामलों में देरी बर्दाश्त नहीं, समय पर निपटाएं नामांतरण और बंटवारा- मंत्री टंक राम वर्मा

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रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने कलेक्टोरेट सभाकक्ष धमतरी में कल आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों को विभिन्न निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, स्वामित्व कार्ड और भूमि डायवर्सन जैसे जनहित से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आम जनता को छोटे-छोटे कामों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें, यह प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे सरकारी योजनाओं का लाभ

बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री वर्मा ने कहा कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब उनका सीधा लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक समय पर पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों को संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कार्य करने का आह्वान किया। इस अवसर पर मंत्री वर्मा ने 5 हितग्राहियों को स्वामित्व कार्ड तथा 5 हितग्राहियों को जाति प्रमाण पत्र का वितरण भी किया।

मानसून और संभावित बाढ़ आपदा से निपटने की तैयारी तेज़

मानसून के मौसम को ध्यान में रखते हुए मंत्री ने संभावित बाढ़ और आपदा प्रबंधन की तैयारियों का बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि बाढ़ संभावित संवेदनशील क्षेत्रों की चौबीसों घंटे निगरानी की जाए। राहत एवं बचाव दलों को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रखा जाए। किसी भी आपात स्थिति में जन-धन की सुरक्षा के लिए संसाधन और त्वरित राहत व्यवस्था सुनिश्चित हो।

बैठक के दौरान मंत्री टंक राम वर्मा ने विभिन्न विभागीय कार्यों की प्रगति पर भी विस्तृत दिशा-निर्देश दिये। उन्होंने स्कूल शिक्षा विभाग को निर्देशित किया कि नए शैक्षणिक सत्र में विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकें, गणवेश और साइकिल का वितरण समय पर हर हाल में सुनिश्चित किया जाए, ताकि उनकी पढ़ाई में कोई बाधा न आए। वहीं, कृषि विभाग को निर्देश देते हुए कहा कि मानसून और बोआई के इस मौसम में किसानों को खाद एवं बीज की उपलब्धता में किसी भी तरह की कमी का सामना न करना पड़े। इसके साथ ही, स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा करते हुए मंत्री वर्मा ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा आयुष्मान भारत योजना का अधिकतम लाभ आम जनता तक प्राथमिकता के आधार पर पहुंचाने पर विशेष जोर दिया।

धमतरी में बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य सेवाओं का हो रहा विस्तार

समीक्षा के दौरान कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने जिले में चल रही विकास परियोजनाओं की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि जिले में 200 बिस्तरीय मातृ-शिशु अस्पताल, नेत्र एवं ट्रॉमा सेंटर के साथ-साथ कुरूद में 100 बिस्तरीय अस्पताल व नर्सिंग कॉलेज का निर्माण प्रगति पर है। इसी तरह सड़क, ऑडिटोरियम, इनडोर स्टेडियम, नालंदा परिसर, रेलवे, औद्योगिक पार्क और पर्यटन विकास के कार्यों को आगामी दो वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने में प्रत्येक अधिकारी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। बैठक में पुलिस अधीक्षक, वनमंडलाधिकारी, जिला पंचायत सीईओ सहित जिले के सभी प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ के दूरस्थ क्षेत्रों को मिलेगी मजबूत डिजिटल पहचान, 2,305 नए मोबाइल टावरों के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केंद्र से मांगी मंजूरी

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज नई दिल्ली स्थित संचार भवन में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से मुलाकात कर छत्तीसगढ़ में डिजिटल एवं दूरसंचार कनेक्टिविटी के विस्तार से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की। मुख्यमंत्री साय ने विशेष रूप से प्रदेश के दूरस्थ, जनजातीय, सीमावर्ती एवं दुर्गम क्षेत्रों में निर्बाध मोबाइल और इंटरनेट सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल भारत निधि (डीबीएन) योजना के अंतर्गत प्रस्तावित 2,305 नए मोबाइल टावरों को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने का आग्रह किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया के संकल्प को छत्तीसगढ़ के अंतिम गांव और अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। भौगोलिक दृष्टि से कठिन और दूरस्थ क्षेत्रों में मजबूत डिजिटल कनेक्टिविटी आज केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास की बुनियादी आवश्यकता बन चुकी है। मोबाइल नेटवर्क और हाई-स्पीड इंटरनेट की उपलब्धता से इन क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन सेवाओं और शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं तक सहज पहुंच मिल सकेगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश के अनेक दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में भौगोलिक परिस्थितियों के कारण संचार नेटवर्क का विस्तार चुनौतीपूर्ण रहा है। ऐसे क्षेत्रों में 2,305 नए मोबाइल टावरों की स्थापना डिजिटल समावेशन की दिशा में बड़ा परिवर्तन लाएगी। उन्होंने कहा कि इससे उन गांवों और बसाहटों तक भी विश्वसनीय मोबाइल एवं इंटरनेट नेटवर्क पहुंचेगा, जो अब तक पर्याप्त संचार सुविधाओं से वंचित रहे हैं।

’577 अतिरिक्त टावरों की स्वीकृति से दुर्गम क्षेत्रों में बढ़ेगी कनेक्टिविटी’

मुख्यमंत्री साय ने नक्सल प्रभावित रहे एवं दुर्गम क्षेत्रों के लिए 577 अतिरिक्त मोबाइल टावरों की स्वीकृति प्रदान किए जाने पर केंद्र सरकार तथा केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का यह निर्णय विशेष रूप से बस्तर सहित कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले क्षेत्रों को डिजिटल मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन क्षेत्रों में आज शांति और विकास का नया वातावरण बन रहा है, वहां मजबूत संचार नेटवर्क विकास की गति को और तेज करेगा। बेहतर कनेक्टिविटी से नागरिकों और प्रशासन के बीच संवाद मजबूत होगा, आपातकालीन परिस्थितियों में संपर्क सुगम होगा और शासन की ऑनलाइन सेवाओं का लाभ लोगों को अपने गांव के निकट ही प्राप्त हो सकेगा।

’489 स्थानों के लिए बीएसएनएल को एनओसी जारी

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार स्वीकृत मोबाइल टावरों की स्थापना से जुड़ी प्रक्रियाओं को सर्वाेच्च प्राथमिकता के साथ पूरा कर रही है। कुल 577 स्थानों में से अब तक 489 स्थानों के लिए बीएसएनएल को भूमि संबंधी अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) जारी किए जा चुके हैं। शेष 88 स्थानों के लिए भी आवश्यक प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा रही है और शीघ्र ही स्वीकृति प्रदान कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि जिन स्थानों पर आवश्यक अनुमति और भूमि संबंधी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां बीएसएनएल द्वारा मोबाइल टावरों की स्थापना का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। राज्य शासन संबंधित विभागों और जिला प्रशासन के माध्यम से आवश्यक समन्वय सुनिश्चित कर रहा है, ताकि टावरों की स्थापना में किसी प्रकार का अनावश्यक विलंब न हो।

’डिजिटल कनेक्टिविटी बनेगी शिक्षा और स्वास्थ्य की नई ताकत’

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में मोबाइल एवं इंटरनेट नेटवर्क के विस्तार का सबसे बड़ा लाभ विद्यार्थियों, युवाओं, महिलाओं, किसानों और ग्रामीण परिवारों को मिलेगा। इंटरनेट कनेक्टिविटी मजबूत होने से विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन अध्ययन सामग्री और डिजिटल शिक्षा के अवसर बढ़ेंगे। इसी प्रकार टेलीमेडिसिन और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिक विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं से अधिक आसानी से जुड़ सकेंगे। उन्होंने कहा कि मजबूत नेटवर्क से बैंकिंग सेवाओं, डिजिटल भुगतान और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण जैसी व्यवस्थाएं भी अधिक प्रभावी होंगी। ग्रामीण नागरिकों को विभिन्न प्रमाण-पत्रों, आवेदनों और अन्य ऑनलाइन शासकीय सेवाओं के लिए अनावश्यक रूप से दूर नहीं जाना पड़ेगा। इस प्रकार डिजिटल कनेक्टिविटी शासन को नागरिकों के और करीब लाने का माध्यम बनेगी।

शांति के साथ विकास और अब डिजिटल सशक्तिकरण की ओर बढ़ रहा बस्तर’

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर सहित प्रदेश के दूरस्थ अंचलों में विकास की नई संभावनाएं आकार ले रही हैं। सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ अब डिजिटल कनेक्टिविटी को भी समान प्राथमिकता दी जा रही है। वर्षों तक भौगोलिक कठिनाइयों और अन्य चुनौतियों के कारण संचार सुविधाओं से वंचित रहे गांवों को मोबाइल और इंटरनेट नेटवर्क से जोड़ना वहां के सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि बेहतर डिजिटल कनेक्टिविटी से स्थानीय युवाओं को ऑनलाइन शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के नए अवसरों की जानकारी मिलेगी। ग्रामीण उद्यमियों और स्व-सहायता समूहों के लिए डिजिटल बाजारों तक पहुंच आसान होगी तथा किसानों को मौसम, कृषि तकनीक और बाजार से जुड़ी सूचनाएं समय पर मिल सकेंगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ तेजी से डिजिटल परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि तकनीक का लाभ केवल शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि सुदूर वनांचल और जनजातीय क्षेत्रों के प्रत्येक नागरिक तक पहुंचे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि डिजिटल भारत निधि के अंतर्गत प्रस्तावित 2,305 मोबाइल टावरों को स्वीकृति मिलने से प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार को बड़ी गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल से जशपुर को सड़क विकास की बड़ी सौगात

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ग्रामीण अधोसंरचना को सुदृढ़ बनाने की दिशा में जशपुर जिले को एक और महत्वपूर्ण सौगात मिली है। राज्य शासन ने वर्ष 2025-26 के बजट प्रावधान के अंतर्गत जिले के चार प्रमुख ग्रामीण संपर्क मार्गों के निर्माण के लिए कुल 8 करोड़ 44 लाख 68 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है। इन सड़कों के निर्माण से दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी तथा आवागमन के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि एवं व्यापारिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। शासन के इस निर्णय से क्षेत्रवासियों में उत्साह और खुशी का माहौल है।


राज्य शासन द्वारा जारी स्वीकृति के अनुसार बुलडेगा से रेचवाघाट पहुंच मार्ग (1.20 किलोमीटर) के निर्माण के लिए 1 करोड़ 23 लाख 77 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस सड़क के निर्माण से ग्रामीणों को वर्षभर सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिलेगी तथा दैनिक आवागमन में आने वाली परेशानियां दूर होंगी।

इसी प्रकार खुंटापानी से सलियामुड़ा पहुंच मार्ग (3 किलोमीटर) के निर्माण के लिए 3 करोड़ 46 लाख 67 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। यह मार्ग कई गांवों के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। सड़क बनने से विद्यार्थियों को विद्यालय, मरीजों को स्वास्थ्य संस्थानों तथा किसानों को कृषि उपज के परिवहन में बेहतर सुविधा मिलेगी।

कोसमभावना से बनगांव पहुंच मार्ग (1.20 किलोमीटर) के निर्माण, जिसमें पुल-पुलिया का निर्माण भी शामिल है, के लिए 1 करोड़ 43 लाख 84 हजार रुपये की स्वीकृति दी गई है। इस परियोजना से विशेषकर बरसात के दौरान आवागमन बाधित होने की समस्या का स्थायी समाधान होगा और ग्रामीणों को पूरे वर्ष सुरक्षित आवागमन का लाभ मिलेगा।

इसके अतिरिक्त बुलडेगा मेन रोड से सुकबासुपारा होते हुए भिंजपुर पहुंच मार्ग (2.50 किलोमीटर) के निर्माण के लिए 2 करोड़ 30 लाख 40 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इस सड़क के निर्माण से क्षेत्र के अनेक गांवों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी और ग्रामीणों को बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी।

इन सभी परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद संबंधित क्षेत्रों में सड़क संपर्क व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी। किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में आसानी होगी, विद्यार्थियों और मरीजों का आवागमन सुगम होगा तथा स्थानीय व्यापार और सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण विकास को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए लगातार जनहितकारी निर्णय ले रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि इन सड़क निर्माण कार्यों से क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी और ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा।

‘बस्तर विजन’ रोडमैप को लेकर PM मोदी से मिले CM विष्णुदेव साय, कई विकास कार्यों पर हुई चर्चा

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज संसद भवन में प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी से सौजन्य भेंट कर छत्तीसगढ़ के समग्र विकास, बस्तर के कायाकल्प तथा राज्य की महत्वपूर्ण अधोसंरचना एवं औद्योगिक परियोजनाओं के संबंध में विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के समक्ष बदलते छत्तीसगढ़ और विशेष रूप से बस्तर के विकास का रोडमैप प्रस्तुत करते हुए राज्य की तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार से सहयोग का आग्रह किया।


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सुरक्षा, विश्वास और विकास की समन्वित रणनीति के परिणामस्वरूप बस्तर आज व्यापक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। दशकों तक नक्सल हिंसा और विकास संबंधी चुनौतियों का सामना करने वाला यह क्षेत्र अब शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, रेल, बिजली, हवाई संपर्क, आजीविका, खेल और पर्यटन के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य इस परिवर्तन को स्थायी बनाते हुए बस्तर को विकास की मुख्यधारा से पूरी तरह जोड़ना है।


मुख्यमंत्री साय ने राजनांदगांव में ₹10,500 करोड़ की यूरिया परियोजना के लिए शीघ्र मंजूरी का किया अनुरोध

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजनांदगांव में प्रस्तावित लगभग ₹10,500 करोड़ की गैस आधारित यूरिया परियोजना को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि परियोजना के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध करा दी गई है तथा राज्य सरकार के स्तर की आवश्यक स्वीकृतियां भी पूरी की जा चुकी हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना के स्थापित होने से छत्तीसगढ़ सहित आसपास के क्षेत्रों के किसानों के लिए उर्वरक की उपलब्धता और बेहतर होगी। इसके साथ ही प्रदेश में औद्योगिक निवेश, प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार तथा सहायक आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।

461 गांवों को स्थायी विद्युत ग्रिड से जोड़ने के लिए मांगी विशेष सहायता

मुख्यमंत्री  साय ने बस्तर सहित संवेदनशील क्षेत्रों के ऐसे 461 गांवों का विषय भी प्रधानमंत्री के समक्ष रखा, जहां पूर्व में सुरक्षा एवं भौगोलिक कारणों से विद्युत ग्रिड पहुंचाना संभव नहीं हो पाया था और वर्तमान में ऑफ-ग्रिड माध्यम से बिजली उपलब्ध कराई जा रही है।
उन्होंने इन गांवों को स्थायी विद्युत ग्रिड से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार से विशेष सहयोग का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थायी विद्युत आपूर्ति से इन क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार, आजीविका और लघु उद्यमों के विस्तार को गति मिलेगी तथा दूरस्थ अंचलों में विकास की प्रक्रिया और मजबूत होगी।

रायपुर अथवा बस्तर में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद की स्थापना का किया अनुरोध

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी से रायपुर अथवा बस्तर में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (AIIA) की स्थापना के प्रस्ताव पर सकारात्मक पहल का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर और अन्य जनजातीय क्षेत्रों में औषधीय वनस्पतियों एवं पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान की समृद्ध विरासत है। राष्ट्रीय स्तर के आयुर्वेद संस्थान की स्थापना से चिकित्सा, अनुसंधान, शिक्षा और औषधीय वनस्पतियों पर आधारित स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए नई संभावनाएं विकसित होंगी।

5,542 गांवों तक पहुंच रहा विकास, लगभग 39 लाख लोगों को लाभ

मुख्यमंत्री  साय ने प्रधानमंत्री के समक्ष ‘बस्तर विजन’ की विस्तृत जानकारी रखते हुए बताया कि ‘नियद नेल्ला नार 2.0’ और ‘बस्त मुन्ने’ के माध्यम से बस्तर संभाग के 5,542 गांवों में शासन की योजनाओं और सेवाओं का व्यापक क्रियान्वयन किया जा रहा है जिससे लगभग 39 लाख लोग लाभान्वित हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राशन, आयुष्मान भारत, जनधन खाते, वनाधिकार, प्रधानमंत्री आवास सहित केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। दूरस्थ और पूर्व में अत्यधिक संवेदनशील रहे गांवों में प्रशासन की पहुंच बढ़ने से शासन के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है।

421 बंद स्कूल फिर खुले, ओरछा और जगरगुंडा में बनेंगी एजुकेशन सिटी

मुख्यमंत्री  साय ने प्रधानमंत्री को बस्तर में शिक्षा के क्षेत्र में आए परिवर्तन की जानकारी देते हुए बताया कि पूर्व में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में वर्षों से बंद पड़े 421 स्कूलों को पुनः प्रारंभ किया गया है। जिन गांवों में कभी बच्चों के लिए नियमित शिक्षा तक पहुंच बड़ी चुनौती थी, वहां अब स्कूलों में फिर से पढ़ाई शुरू हुई है।

उन्होंने बताया कि दंतेवाड़ा की तर्ज पर ओरछा और जगरगुंडा में नई एजुकेशन सिटी विकसित करने की दिशा में भी राज्य सरकार कार्य कर रही है। इसका उद्देश्य दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आवासीय सुविधाएं और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।

‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान’ में 34 लाख से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच

मुख्यमंत्री श्री साय ने स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की जानकारी देते हुए बताया कि ‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान’ के अंतर्गत अब तक 34 लाख से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है और आवश्यकता के अनुरूप उन्हें चिकित्सा सेवाओं से जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि बस्तर में चिकित्सा अधोसंरचना का लगातार विस्तार किया जा रहा है। जगदलपुर में सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के साथ गीदम में मेडिकल कॉलेज के माध्यम से क्षेत्र में चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है। राज्य सरकार नए मेडिकल कॉलेजों और आधुनिक स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रही है।

सड़क, रेल, बिजली और हवाई संपर्क से बदल रही बस्तर की तस्वीर

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर के स्थायी विकास के लिए कनेक्टिविटी सबसे महत्वपूर्ण आधार है। इसी दृष्टि से सड़क, रेल, बिजली और हवाई संपर्क का तेजी से विस्तार किया जा रहा है।
उन्होंने प्रधानमंत्री को बताया कि लगभग ₹3,513 करोड़ की लागत से जगदलपुर-रावघाट रेललाइन परियोजना पर कार्य आगे बढ़ रहा है। इस रेल संपर्क से बस्तर के आर्थिक और सामाजिक विकास को नई गति मिलेगी। जगदलपुर से नियमित हवाई सेवाओं के विस्तार की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की जा रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेस-वे के अंतिम चरण की प्रगति तथा इंद्रावती नदी पर प्रस्तावित बैराज परियोजना की जानकारी भी प्रधानमंत्री को दी। उन्होंने कहा कि बैराज परियोजना से लगभग 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे क्षेत्र के किसानों और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ मिलेगा।

बस्तर दशहरा को वैश्विक पर्यटन ब्रांड बनाने की दिशा में प्रयास

मुख्यमंत्री श्री साय ने बस्तर की अनूठी जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और पर्यटन संभावनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि बस्तर दशहरा को वैश्विक पर्यटन ब्रांड के रूप में स्थापित करने की दिशा में योजनाबद्ध प्रयास किए जा रहे हैं। चित्रकोट और तीरथगढ़ जैसे विश्वस्तरीय प्राकृतिक पर्यटन स्थलों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और प्रमुखता से स्थापित करने के लिए अधोसंरचना एवं सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि बस्तर का विकास उसकी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान और प्रकृति के संरक्षण के साथ किया जा रहा है, ताकि विकास का लाभ स्थानीय समुदायों तक पहुंचे और रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर सृजित हों।

बस्तर ओलंपिक में 4 लाख से अधिक युवाओं की भागीदारी ने दिया बदलाव का संदेश

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि बस्तर ओलंपिक में 4 लाख से अधिक युवाओं की भागीदारी ने पूरे क्षेत्र में नई ऊर्जा और सकारात्मक वातावरण तैयार किया है। खेलों के माध्यम से युवाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच मिला है और शांति, विश्वास तथा सामाजिक सहभागिता को भी मजबूती मिली है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज बस्तर की नई पहचान खेल, संस्कृति, शिक्षा, पर्यटन, उद्यमिता और विकास से निर्मित हो रही है।

छत्तीसगढ़ को मिले लगभग ₹8 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव

मुख्यमंत्री  साय ने प्रधानमंत्री को राज्य में तेजी से बदल रहे औद्योगिक परिदृश्य की जानकारी भी दी। उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास नीति 2024-30 लागू होने के बाद छत्तीसगढ़ को लगभग ₹8 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनमें अनेक परियोजनाओं पर क्रियान्वयन की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है।

उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास को परंपरागत क्षेत्रों से आगे बढ़ाकर भविष्य की अर्थव्यवस्था से जुड़े क्षेत्रों की ओर ले जाया जा रहा है। राज्य में पहली बार एआई डेटा सेंटर पार्क, सेमीकंडक्टर, हाइपरस्केल डेटा सेंटर, ग्लोबल बीपीओ, गारमेंट, चॉकलेट मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तथा इंट्राऑक्यूलर लेंस निर्माण जैसे नए क्षेत्रों में निवेश आ रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन निवेशों से राज्य की अर्थव्यवस्था में विविधता आने के साथ युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार और कौशल विकास के अवसर भी निर्मित होंगे।

निवेश अनुकूल वातावरण में छत्तीसगढ़ की राष्ट्रीय पहचान

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि निवेशकों के लिए पारदर्शी, सरल और भरोसेमंद व्यवस्था विकसित करने के प्रयासों के परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है। नीति आयोग के इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स में नियामकीय सुगमता और संस्थागत वातावरण के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को देश में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है।

उन्होंने ‘छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट-2026’ की जानकारी देते हुए कहा कि राज्य ने उद्योगों और उद्यमियों के लिए जोखिम आधारित नियामकीय व्यवस्था, सेल्फ सर्टिफिकेशन और समयबद्ध अनुमतियों को कानूनी आधार प्रदान किया है। इससे निवेशकों को निश्चितता, पारदर्शिता और जवाबदेही पर आधारित व्यवस्था मिल रही है।

10.42 लाख महिलाएं बनीं लखपति दीदी, अब 14 लाख और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री साय ने महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में प्रदेश की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ ने निर्धारित लक्ष्य से आगे बढ़कर 10.42 लाख महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाया है। अब अगले चरण में 14 लाख और महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य पर राज्य सरकार काम कर रही है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने वर्ष 2027 में रायपुर में प्रस्तावित ‘लखपति दीदी सम्मेलन’ की जानकारी देते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को इसमें मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने का आमंत्रण दिया।

₹500 करोड़ के राज्य एआई मिशन से तकनीक आधारित सुशासन की ओर छत्तीसगढ़

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ₹500 करोड़ के राज्य एआई मिशन के माध्यम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सुशासन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। शासन की सेवाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और नागरिक केंद्रित बनाने के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और प्रशासन सहित विभिन्न क्षेत्रों में एआई के उपयोग की संभावनाओं पर कार्य किया जा रहा है।

वित्तीय अनुशासन के साथ जनकल्याण, राजस्व वृद्धि में छत्तीसगढ़ का मजबूत प्रदर्शन

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी को राज्य की सुदृढ़ होती वित्तीय स्थिति और राजस्व वृद्धि से भी अवगत कराया। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ ने वित्तीय अनुशासन और जनकल्याण के बीच प्रभावी संतुलन स्थापित करते हुए राजकोषीय एवं राजस्व घाटे में उल्लेखनीय कमी दर्ज की है। राज्य में जीएसटी राजस्व में 18 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, वहीं खनिज राजस्व में भी रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। खनिज क्षेत्र में नई संभावनाओं का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि देश के पहले टिन ब्लॉक और लिथियम ब्लॉक की नीलामी कर छत्तीसगढ़ ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।

तकनीक और पारदर्शिता से नागरिक-केंद्रित सुशासन को नई गति

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार तकनीक आधारित, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित सुशासन की दिशा में निरंतर सुधार कर रही है। सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से 36 विभागों की 528 सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराया गया है, जिससे नागरिकों को सरकारी सेवाओं के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम हुई है और लाखों आवेदनों का समयबद्ध निराकरण संभव हुआ है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से नागरिकों की शिकायतों के त्वरित समाधान और प्रभावी निगरानी की व्यवस्था भी विकसित की गई है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राजस्व प्रशासन में व्यापक डिजिटल सुधार करते हुए रजिस्ट्री के साथ स्वतः नामांतरण की व्यवस्था लागू की गई है। आधार और वीडियो केवाईसी के माध्यम से घर बैठे रजिस्ट्री की सुविधा ने पूरी प्रक्रिया को अधिक सरल और सुविधाजनक बनाया है। उन्होंने कहा कि इन सुधारों का मूल उद्देश्य शासन को नागरिकों के और निकट लाना तथा सरकारी सेवाओं को अधिक सहज, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्र सरकार के निरंतर सहयोग से छत्तीसगढ़ में विकास की गति तेज हुई है। प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत’ के संकल्प के अनुरूप राज्य सरकार ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के निर्माण के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है।मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि बस्तर के समग्र कायाकल्प से लेकर कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा और औद्योगिक विकास से जुड़े राज्य के इन महत्वपूर्ण प्रस्तावों को केंद्र सरकार का सकारात्मक सहयोग मिलेगा। 

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प है कि विकास की यह यात्रा छत्तीसगढ़ के अंतिम गांव और अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे तथा कभी चुनौतियों के लिए पहचाने जाने वाले छत्तीसगढ़ को शांति, समृद्धि और संभावनाओं के नए मॉडल के रूप में स्थापित किया जाए।

 

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