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एशियन गेम्स 2026 की आधिकारिक शुरुआत आज, जापान में भारत की बड़ी चुनौती

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नई दिल्ली- एशिया के सबसे बड़े बहु-खेल आयोजनों में से एक 20वें एशियन गेम्स 2026 की आज जापान के आइची-नागोया में आधिकारिक शुरुआत हो रही है। प्रतियोगिता 19 सितंबर से 4 अक्टूबर 2026 तक चलेगी। हालांकि क्रिकेट, फुटबॉल और कुछ अन्य खेलों की प्रतियोगिताएं उद्घाटन समारोह से पहले ही शुरू हो चुकी हैं।

भारत की 503 खिलाड़ियों की मजबूत टीम

इस बार भारत ने एशियन गेम्स के लिए 503 खिलाड़ियों का दल भेजा है। इसमें 269 पुरुष और 234 महिला खिलाड़ी शामिल हैं।

भारतीय दल करीब 36 खेलों में हिस्सा लेगा। इनमें एथलेटिक्स, शूटिंग, बॉक्सिंग, कुश्ती, बैडमिंटन, हॉकी, तीरंदाजी, क्रिकेट, कबड्डी और कई अन्य खेल शामिल हैं।

भारत का यह दल पिछले एशियन गेम्स के मुकाबले छोटा है, लेकिन टीम में कई अनुभवी और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी शामिल हैं।

आज होगा भव्य Opening Ceremony

आज जापान के नागोया स्थित Paloma Mizuho Stadium में एशियन गेम्स का उद्घाटन समारोह आयोजित किया जाएगा।

भारतीय समय के अनुसार उद्घाटन समारोह दोपहर करीब 2:30 बजे शुरू होने की जानकारी दी गई है। जापान भारतीय समय से लगभग साढ़े तीन घंटे आगे है।

इस समारोह के साथ एशियन गेम्स 2026 की आधिकारिक शुरुआत मानी जाएगी।

मनु भाकर और ताजिंदरपाल सिंह तूर बने भारत के ध्वजवाहक

उद्घाटन समारोह में भारत के लिए मनु भाकर और ताजिंदरपाल सिंह तूर को ध्वजवाहक चुना गया था।

मनु भाकर दो बार की ओलंपिक पदक विजेता हैं, जबकि ताजिंदरपाल सिंह तूर एशियन गेम्स में दो बार स्वर्ण पदक जीत चुके हैं।

हालांकि आज सुबह ताजिंदरपाल तूर की जगह कबड्डी खिलाड़ी पवन सहरावत को पुरुष ध्वजवाहक बनाए जाने की जानकारी सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक तूर की आधिकारिक किट समय पर नहीं पहुंच पाई, जिसके कारण अंतिम समय में बदलाव करना पड़ा।

भारत का अभियान पहले ही शुरू हो चुका है

एक महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत की प्रतियोगिताएं आधिकारिक उद्घाटन समारोह से पहले ही शुरू हो चुकी हैं।

भारत का अभियान 17 सितंबर को टेकबॉल से शुरू हुआ था। महिला क्रिकेट टीम ने भी प्रतियोगिता में अपना मुकाबला खेल लिया है।

महिला क्रिकेट में भारत ने जापान को 8 विकेट से हराकर सेमीफाइनल में जगह बना ली है। भारत की जीत में गेंदबाज श्रीचरणी ने चार विकेट लिए, जबकि शेफाली वर्मा ने 15 गेंदों पर नाबाद 40 रन बनाए।

भारत की नजरें कई खेलों में पदकों पर

इस बार भारतीय खिलाड़ियों से कई खेलों में मजबूत प्रदर्शन की उम्मीद है।

खास तौर पर नजरें रहेंगी:

  • तीरंदाजी

  • बॉक्सिंग

  • एथलेटिक्स

  • बैडमिंटन

  •  शूटिंग

  •  कुश्ती

  •  हॉकी

  •  कबड्डी

  •  क्रिकेट

इसके अलावा सर्फिंग, MMA और ई-स्पोर्ट्स जैसे क्षेत्रों में भी भारतीय खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं।

पिछले एशियन गेम्स में भारत का प्रदर्शन

पिछले एशियन गेम्स में भारत ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया था और 100 से ज्यादा पदक जीतने वाला देश बना था।

2022 में आयोजित हांगझोउ एशियन गेम्स में भारत ने 107 पदक जीते थे—जिसमें 28 स्वर्ण, 38 रजत और 41 कांस्य शामिल थे। इस प्रदर्शन के बाद इस बार भी भारतीय खिलाड़ियों पर काफी उम्मीदें हैं।

कब तक चलेंगे एशियन गेम्स?

एशियन गेम्स 2026:

19 सितंबर – 4 अक्टूबर 2026
आइची-नागोया, जापान

एशिया के अलग-अलग देशों के खिलाड़ी कई खेलों में पदकों के लिए मुकाबला करेंगे।

भारत के लिए क्यों खास है यह आयोजन?

एशियन गेम्स भारत के खिलाड़ियों के लिए सिर्फ पदक जीतने का मंच नहीं है, बल्कि बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों से पहले अपनी क्षमता परखने का भी महत्वपूर्ण अवसर है।

इस बार भारत की 503 खिलाड़ियों की टीम कई अलग-अलग खेलों में चुनौती पेश कर रही है। इसलिए अगले दो हफ्तों तक भारतीय खेल प्रेमियों की नजरें आइची-नागोया पर रहेंगी।

एक बात साफ है—एशियन गेम्स की आधिकारिक शुरुआत आज हो रही है, लेकिन भारत की पदक की दौड़ पहले ही शुरू हो चुकी है 

अमेरिका का बड़ा फैसला: रूस पर नए प्रतिबंध, भारत पर 100% टैरिफ का खतरा

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 को रूस और ईरान से जुड़े एक बड़े प्रतिबंध कानून पर हस्ताक्षर कर उसे कानून बना दिया। इस कानून का आधिकारिक नाम “Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026” है।

इस कानून का मुख्य उद्देश्य रूस की तेल और गैस से होने वाली कमाई पर दबाव बढ़ाना है, ताकि यूक्रेन युद्ध के बीच रूस की आर्थिक क्षमता को कमजोर किया जा सके। कानून में रूस के ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों तथा प्रतिबंधों से बचने में इस्तेमाल होने वाले जहाजों के नेटवर्क पर भी कार्रवाई का प्रावधान है।

सबसे बड़ी बात क्या है?

नए कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को उन देशों से अमेरिका आने वाले सामान पर 100% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने की शक्ति दी गई है, जो रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदते हैं।

भारत और चीन रूस के प्रमुख तेल खरीदारों में शामिल हैं। इसलिए दोनों देश इस नए अमेरिकी कानून के संभावित दायरे में आ सकते हैं।

लेकिन एक जरूरी clarification

इसका मतलब यह नहीं है कि आज से भारत पर 100% टैरिफ लग गया है।

अभी कानून ने राष्ट्रपति ट्रंप को 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार दिया है। भारत के लिए कोई निश्चित 100% दर घोषित नहीं की गई है और कानून में भारत को नाम लेकर तत्काल 100% टैरिफ लगाने की घोषणा नहीं हुई है। अंतिम फैसला अमेरिकी प्रशासन के हाथ में है।

भारत का नाम क्यों आ रहा है?

भारत पिछले कुछ वर्षों में रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता रहा है।

रूस से मिलने वाला तेल भारत के लिए महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उपलब्धता और कीमत के आधार पर भारतीय रिफाइनरियां अलग-अलग देशों से कच्चा तेल खरीदती हैं।

रिपोर्टों के अनुसार भारत और चीन रूस के सबसे बड़े तेल खरीदारों में शामिल हैं। इसी वजह से नए अमेरिकी कानून की चर्चा में दोनों देशों का नाम प्रमुखता से सामने आया है।

अमेरिका रूस पर इतना दबाव क्यों बना रहा है?

इसके पीछे मुख्य कारण रूस-यूक्रेन युद्ध है।

अमेरिका और उसके सहयोगी रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिकी नीति का तर्क है कि रूस की ऊर्जा बिक्री से होने वाली आय उसके युद्ध प्रयासों के लिए आर्थिक संसाधन उपलब्ध कराती है।

नया कानून रूस के:

  •  तेल और गैस क्षेत्र

  •  बैंकों और वित्तीय संस्थाओं

  •  रक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों और संस्थाओं

  •  तथाकथित “shadow fleet” यानी प्रतिबंधों से बचकर रूसी तेल ले जाने वाले जहाजों

  •  कुछ रूसी अधिकारियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों

पर प्रतिबंधों को मजबूत करता है।

“Shadow Fleet” क्या है?

Shadow fleet से आशय ऐसे जहाजों के नेटवर्क से है जिनका इस्तेमाल रूसी तेल को अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और निगरानी से बचाकर बेचने या ले जाने के लिए किया जाता है।

नए कानून में ऐसे नेटवर्क से जुड़े जहाजों के मालिकों, ऑपरेटरों, मैनेजरों और अन्य संबंधित पक्षों को निशाना बनाने के प्रावधान हैं।

100% टैरिफ का मतलब क्या है?

मान लीजिए कोई भारतीय कंपनी अमेरिका में ₹100 के बराबर मूल्य का कोई उत्पाद निर्यात करती है और उस उत्पाद पर 100% टैरिफ लगाया जाता है।

सरल उदाहरण में:

उत्पाद की कीमत = ₹100
100% टैरिफ = ₹100
कुल शुल्क = ₹100

इससे अमेरिकी बाजार में उस उत्पाद की लागत काफी बढ़ सकती है।

ध्यान रहे कि वास्तविक व्यापार में टैरिफ का असर उत्पाद, मौजूदा शुल्क, कंपनियों की कीमत नीति और अन्य नियमों पर निर्भर करेगा। इसलिए 100% टैरिफ को सीधे यह मानना सही नहीं होगा कि हर भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में बिल्कुल दोगुना महंगा हो जाएगा।

भारत पर क्या असर पड़ सकता है?

अगर अमेरिका भारत पर इस कानून के तहत ऊंचा टैरिफ लगाता है, तो सबसे बड़ा असर भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात पर पड़ सकता है।

संभावित रूप से प्रभावित क्षेत्रों में अमेरिका को निर्यात करने वाले विभिन्न उद्योग शामिल हो सकते हैं, जैसे:

  • फार्मास्यूटिकल्स
  •  टेक्सटाइल और कपड़े
  •  जेम्स एवं ज्वेलरी
  •  इंजीनियरिंग सामान
  •  कुछ सेवा एवं तकनीकी क्षेत्र
  •  अन्य manufactured goods

हालांकि किसी विशेष क्षेत्र पर कितना असर पड़ेगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिकी प्रशासन वास्तव में कौन-सा टैरिफ लगाता है और किन उत्पादों को उसके दायरे में रखा जाता है।

 भारत के लिए रूस का तेल क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और उसकी ऊर्जा जरूरतें बहुत बड़ी हैं।

रूस से सस्ता या प्रतिस्पर्धी कीमत पर उपलब्ध कच्चा तेल भारतीय रिफाइनरियों के लिए आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है।

अगर भारत रूसी तेल खरीदना काफी कम करता है, तो उसे दूसरे स्रोतों से तेल खरीदना पड़ सकता है। इससे:

रूसी तेल खरीद ↓ → दूसरे देशों से तेल खरीद ↑ → आयात लागत में बदलाव → पेट्रोलियम उत्पादों की लागत पर संभावित प्रभाव

लेकिन इसका अंतिम प्रभाव कई चीजों पर निर्भर करेगा, खासकर उस समय अंतरराष्ट्रीय तेल कीमत, उपलब्ध आपूर्ति और भारत को मिलने वाली छूट पर।

चीन भी क्यों निशाने पर है?

चीन भी रूस का बहुत बड़ा ऊर्जा खरीदार है।

नए कानून में रूस के बड़े तेल और गैस खरीदारों पर टैरिफ लगाने की व्यवस्था होने के कारण चीन भी संभावित रूप से प्रभावित हो सकता है। Reuters के अनुसार कानून में भारत और चीन जैसे देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान चर्चा का प्रमुख हिस्सा रहा है।

क्या भारत पर तुरंत 100% टैरिफ लगेगा?

नहीं कहा जा सकता।

यही इस खबर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।

कानून अमेरिकी प्रशासन को व्यापक अधिकार देता है, लेकिन:

कानून पास होना ≠ भारत पर तत्काल 100% टैरिफ लगना

अमेरिकी प्रशासन को यह तय करना होगा कि कौन-से देश कानून के दायरे में आते हैं और उन पर कितनी दर लागू की जाती है। कुछ प्रावधानों में छूट की व्यवस्था भी है।

रिपोर्टों के अनुसार कानून के तहत रूस से प्राकृतिक गैस खरीदने वाले कुछ देशों के लिए एक विशेष exemption भी उपलब्ध हो सकती है, यदि उनकी खरीद रूस के कुल गैस निर्यात के 15% से कम हो और वे आयात घटाने के महत्वपूर्ण कदम उठा रहे हों।

आगे क्या होगा?

अब सबसे महत्वपूर्ण चीज होगी अमेरिकी प्रशासन का अगला फैसला।

आने वाले समय में मुख्य सवाल होंगे:

  1. क्या भारत को औपचारिक रूप से टैरिफ के दायरे में रखा जाता है?
  2.  अगर रखा जाता है तो टैरिफ कितना होगा?
  3.  भारत की रूसी तेल खरीद में क्या बदलाव आता है?
  4. भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता पर इसका क्या असर पड़ता है?
  5.  रूस-भारत ऊर्जा व्यापार किस तरह आगे बढ़ता है?

भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात

फिलहाल इसे “भारत पर 100% टैरिफ लग गया” कहना गलत होगा। सही बात यह है कि “अमेरिकी कानून ने भारत जैसे बड़े रूसी तेल खरीदारों पर 100% तक टैरिफ लगाने का रास्ता खोल दिया है।”

लाफिन कला के ग्रामीण बने प्रेरणा, बारिश में कीचड़ से बदहाल रहता था पुराना गौठान, अब 20 हजार स्क्वायर फीट में ढला सीमेंट का फर्श

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सरकारी बजट की आस छोड़ ग्रामीणों ने खुद 15 लाख की लागत से बना दी कांक्रीट की गौठान,  साढ़े छह लाख से ज्यादा हो चुके खर्च; मंदिर निर्माण के लिए भी जुटा चुके हैं 50 लाख का चंदा


महासमुंद। कहते हैं कि अगर नीयत साफ हो और इरादे मजबूत हों, तो सरकारी व्यवस्था की ढिलाई भी गांव के विकास की राह नहीं रोक सकती। महासमुंद जिले के ग्राम लाफिन कला के ग्रामीणों ने इसे सच कर दिखाया है। सालों से बारिश के दिनों में कीचड़ से सराबोर रहने वाले गौठान और गोवंशों की दुर्दशा से दुखी होकर ग्रामीणों ने अब किसी सरकारी अनुदान या बजट की राह ताकना पूरी तरह छोड़ दिया है।


ग्राम विकास समिति ने खुद पहल करते हुए करीब 15 लाख रुपये के बजट से 20 हजार स्क्वायर फीट के विशाल गौठान को पूरी तरह कांक्रीट करने का बीड़ा उठाया है। इस जनसहयोग वाले प्रोजेक्ट में अब तक साढ़े 6 लाख रुपये से अधिक की राशि खर्च कर कांक्रीट ढलाई का बड़ा हिस्सा पूरा भी कर लिया गया है। इस अनोखी पहल से न केवल पशुओं को कीचड़ से राहत मिली है, बल्कि गोबर उठाने और गौठान की साफ-सफाई में भी बड़ी आसानी हो रही है।


ग्राम विकास समिति के अध्यक्ष रामकुमार साहू ने बताया कि गांव का गौठान सालों से खुले मैदान में संचालित हो रहा था। हर मानसून में यहां गहरा कीचड़ जम जाता था। स्थिति इतनी भयावह हो जाती थी कि बेजुबान गोवंशों को बैठने तक की जगह नहीं मिलती थी और उन्हें घंटों कीचड़ में ही खड़े रहना पड़ता था। मवेशियों की इस तड़प को देखकर ग्राम समिति ने एक आपात बैठक बुलाई और ग्रामीणों के सामने गौठान के पक्कीकरण की योजना रखी। गांव के हर परिवार ने इसमें सहमति जताई और ग्राम विकास समिति की राशि से कांक्रीट ढलाई का काम शुरू किया गया।

कांक्रीट गौठान के 3 बड़े फायदे

1. कीचड़ से शत-प्रतिशत मुक्ति: फर्श सीमेंटेड होने से अब बारिश का पानी आसानी से बह जाता है और मवेशी आराम से सूखी और साफ जगह पर बैठ सकते हैं।
2. संक्रमण और बीमारियों पर लगाम: कीचड़ और जलभराव न होने से गोवंशों में पैर की सड़ांध, खुरपका और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा लगभग खत्म हो गया है।
3. जैविक खाद प्रबंधन में आसानी: समतल कांक्रीट धरातल होने से अब गोबर और गौमूत्र का संग्रहण बेहद आसान और त्वरित हो गया है।

चंदे से बना चुके हैं 50 लाख का भव्य मंदिर

लाफिन कला के ग्रामीणों के लिए जनसहयोग से गांव की सूरत बदलना कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी ग्रामीणों ने सामाजिक समरसता और एकजुटता की मिसाल पेश करते हुए करीब 50 लाख रुपये का चंदा आपस में इकट्ठा किया था। इस राशि से गांव में श्रीराम जानकी मंदिर का भव्य निर्माण कराया गया और गांव के बीचों-बीच स्थित तालाब के मध्य में दर्शनीय शिवलिंग आकार के शिव मंदिर की स्थापना की गई। सरकारी तंत्र पर निर्भर रहने के बजाय अपनी समस्याओं का समाधान खुद तलाशने की ग्रामीणों की इस सोच की पूरे इलाके में सराहना हो रही है।

भारी उमस के बाद छत्तीसगढ़ में बदला मौसम, 20 से 24 सितंबर तक भारी बारिश का अलर्ट

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ दिनों से कमजोर पड़े मानसून के कारण गर्मी और उमस ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी थी। अब प्रदेश के मौसम में एक बार फिर बदलाव के संकेत हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने छत्तीसगढ़ में 19 सितंबर से बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी की संभावना जताई है। वहीं 20 से 24 सितंबर के बीच प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।


19 सितंबर से गरज-चमक के साथ बारिश के आसार

मौसम विभाग के अनुसार 19 सितंबर को छत्तीसगढ़ में कई स्थानों पर बारिश हो सकती है। इस दौरान गरज-चमक और आकाशीय बिजली की स्थिति भी बन सकती है। हालांकि 19 सितंबर के लिए प्रदेश में भारी बारिश की चेतावनी नहीं है।

इसके बाद मौसम ज्यादा सक्रिय होने की संभावना है। IMD के अलर्ट के मुताबिक 20 और 21 सितंबर को छत्तीसगढ़ में भारी बारिश के साथ गरज-चमक की स्थिति बन सकती है। 22, 23 और 24 सितंबर को भी प्रदेश में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।

बंगाल की खाड़ी में बन रहा मौसम सिस्टम

मौसम में इस बदलाव की प्रमुख वजह बंगाल की खाड़ी और आसपास विकसित हो रही मौसमी प्रणाली को माना जा रहा है। IMD के 17 सितंबर के विस्तारित पूर्वानुमान में 19 सितंबर के आसपास अंडमान सागर और आसपास के क्षेत्र में कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना जताई गई थी।

मौसम विभाग के अनुसार यह सिस्टम आगे पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ सकता है। इसके प्रभाव से मध्य और आसपास के क्षेत्रों में नमी बढ़ने तथा बारिश की गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है।

रायपुर में भी बदलेगा मौसम का मिजाज

राजधानी रायपुर में भी 19 सितंबर को मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। बादल छाए रहने के साथ कुछ स्थानों पर बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। ऐसे में पिछले कुछ दिनों से उमस और गर्मी झेल रहे लोगों को बारिश से राहत मिलने की उम्मीद है।

हालांकि बारिश के साथ बिजली गिरने और गरज-चमक की स्थिति को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत होगी।

पिछले दिनों कमजोर रहा मानसून

प्रदेश में हाल के दिनों में बारिश की गतिविधियां अपेक्षाकृत कमजोर रही थीं। इसके चलते कई इलाकों में तापमान बढ़ा और उमस से लोग परेशान रहे। अब नए मौसम सिस्टम के सक्रिय होने से बारिश का दौर फिर तेज होने की संभावना है।

IMD के राज्यवार वर्षा आंकड़ों के अनुसार 18 सितंबर तक प्रदेश में बारिश से जुड़े आंकड़े दर्ज किए गए हैं और आने वाले दिनों में मौसम की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।

बिजली और तेज बारिश के दौरान बरतें सावधानी

मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए गरज-चमक के दौरान लोगों को खुले मैदान में जाने से बचना चाहिए। पेड़, बिजली के खंभे या अन्य ऊंची संरचनाओं के नीचे खड़े होने से भी बचने की सलाह दी जाती है।

किसानों को भी मौसम के पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए कृषि संबंधी गतिविधियों की योजना बनाने की सलाह दी जाती है।

कुल मिलाकर, 19 सितंबर से छत्तीसगढ़ में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं और 20 से 24 सितंबर के बीच प्रदेश के कुछ हिस्सों में भारी बारिश का दौर देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग के ताजा अपडेट के अनुसार 20 से 24 सितंबर तक छत्तीसगढ़ के लिए भारी बारिश की चेतावनी जारी है।

KBC 18 में बिलासपुर की कपिला तनेजा ने सुनाई दर्दनाक आपबीती, जीते ₹7.5 लाख

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बिलासपुर- लोकप्रिय क्विज शो ‘कौन बनेगा करोड़पति 18’ (KBC 18) के हालिया एपिसोड में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर की कपिला तनेजा हॉट सीट पर पहुंचीं। शो में उन्होंने न सिर्फ अपने ज्ञान के दम पर ₹7.5 लाख की राशि जीती, बल्कि अपनी जिंदगी के बेहद कठिन दौर से जुड़ी आपबीती भी साझा की। कपिला की कहानी सामने आने के बाद यह एपिसोड चर्चा में है।

अमिताभ बच्चन के सामने साझा किया अपना संघर्ष

शो के दौरान होस्ट अमिताभ बच्चन ने कपिला के चेहरे और गर्दन पर मौजूद निशानों के बारे में पूछा। इसके जवाब में कपिला ने वर्ष 2002 में हुई एक गंभीर घटना का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके ससुराल वालों ने दहेज को लेकर उन्हें प्रताड़ित किया और उन्हें आग के हवाले करने की कोशिश की।

कपिला ने बताया कि उनकी शादी परिवार की इच्छा के खिलाफ हुई थी और इसके बाद ससुराल पक्ष की ओर से दहेज की मांग और कथित घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ा। उन्होंने इस घटना को ‘अग्निकांड’ के रूप में याद किया।

24 साल से बेटी से दूर रहने की बात

कपिला ने शो में अपनी बेटी से लंबे समय से अलग रहने की बात भी साझा की। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने बताया कि वह करीब 24 वर्षों से अपनी बेटी से नहीं मिल पाई हैं।

उन्होंने कहा कि वह अपनी बेटी के लिए हर दिन प्रार्थना करती हैं। इस दौरान उन्होंने अमिताभ बच्चन से अपनी बेटी के लिए कुछ शब्द कहने का अनुरोध भी किया।

KBC में ₹7.5 लाख जीते

कपिला ने KBC के सवालों का जवाब देते हुए खेल में ₹7.5 लाख की राशि तक का सफर तय किया। इसके अलावा, ‘सुपर संदूक’ से मिली राशि को लाइफलाइन के लिए इस्तेमाल नहीं करने के कारण उन्हें ₹90,000 का अतिरिक्त बोनस भी मिला।

इसके बाद वह 12वें सवाल पर पहुंचीं। सवाल पश्चिम एशिया के उस शहर से जुड़ा था जिसे 1930 के दशक में ब्रिटिश भारत से अलग किया गया था। विकल्पों में मोसुल, बसरा, जेद्दा और अदन शामिल थे।

कपिला जवाब को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं थीं, इसलिए उन्होंने खेल छोड़ने का फैसला किया और ₹7.5 लाख की राशि लेकर वापस लौट गईं। खेल छोड़ने के बाद उन्होंने अनुमान के तौर पर ‘मोसुल’ जवाब बताया, जबकि सही उत्तर ‘अदन’ था।

जीती हुई रकम से क्या करेंगी कपिला?

कपिला ने बताया कि वह जीती हुई रकम का इस्तेमाल कानों की सर्जरी कराने के लिए करना चाहती हैं। इसके साथ ही उन्होंने अविवाहित माताओं के लिए एक घर खोलने की इच्छा भी व्यक्त की, जिन्हें समाज में कई तरह की परेशानियों और भेदभाव का सामना करना पड़ता है।

रिपोर्टों के अनुसार कपिला वर्तमान में होम ट्यूटर के रूप में काम करती हैं और अपना काफी समय घर पर बिताती हैं।

KBC के मंच पर सामने आई संघर्ष की कहानी

कपिला तनेजा की KBC यात्रा में जहां एक ओर उन्होंने अपने ज्ञान के दम पर ₹7.5 लाख जीते, वहीं दूसरी ओर उन्होंने अपने जीवन के कठिन अनुभवों को सार्वजनिक रूप से साझा किया। उनके संघर्ष, बेटी से लंबे समय से अलगाव और भविष्य को बेहतर बनाने की योजनाओं ने इस एपिसोड को चर्चा में ला दिया है।

कौशल, रोजगार, स्टार्टअप और आधुनिक शिक्षा पर सरकार का जोर, 18 हजार से अधिक युवाओं को मिला प्रशिक्षण

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 धनंजय राठौर - संयुक्त संचालक, जनसम्पर्क (रायपुर)

रायपुर : युवाओं को विकास के केंद्र में रखते हुए छत्तीसगढ़ की  विष्णु देव साय की सरकार कौशल विकास, रोजगार, उच्च शिक्षा, उद्यमिता और खेल क्षेत्र में अवसरों का विस्तार कर रही है। पिछले करीब तीन वर्षों में जब से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सत्ता संभाली है, युवाओं को सक्षम, रोजगारपरक और आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई योजनाएं और पहल शुरू की हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य शिक्षा और प्रशिक्षण को रोजगार से जोड़ते हुए राज्य की युवा आबादी को विकास की नई ताकत में बदलना है। लक्ष्य केवल युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उन्हें कुशल, आत्मनिर्भर, नवाचारी और भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए तैयार मानव संसाधन के रूप में विकसित करना है।


18 हज़ार 330 युवाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत राज्य के 26 जिलों में करीब 18 हज़ार 330 युवाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है। इस पर लगभग 29 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। वहीं, 35 हजार और युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। राज्य सरकार ने युवाओं के कौशल विकास के लिए 75 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया है, ताकि प्रशिक्षण को उद्योगों और बाजार की बदलती जरूरतों के अनुसार बनाया जा सके।

युवा को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल, अवसर और पारदर्शी व्यवस्था

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा, “युवा छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी ताकत और भविष्य की उम्मीद हैं। हमारा प्रयास है कि हर युवा को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल, अवसर और पारदर्शी व्यवस्था उपलब्ध हो। युवा सशक्तीकरण विकसित छत्तीसगढ़ के हमारे विजन का केंद्र है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप है।”

पारदर्शी भर्ती पर फोकस

युवा केंद्रित एजेंडे में रोजगार के साथ सरकारी भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता को भी प्राथमिकता दी गई है। राज्य में करीब 9 हजार रिक्त सरकारी पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। इसके अलावा क्लास-3 और क्लास-4 के पदों पर भर्ती को एकीकृत, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए नए छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल का गठन किया गया है।

युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सरकार द्वारा निःशुल्क कोचिंग की व्यवस्था

सरकार ने युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर अवसर देने के लिए CG-ACE पहल शुरू की है। इसके तहत NEET, CLAT, JEE, UPSC, CGPSC, बैंकिंग, SSC और रेलवे जैसी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निःशुल्क कोचिंग की व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए 33 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

उच्च शिक्षा के बुनियादी ढांचे का विस्तार

युवा विकास की रणनीति में विष्णु देव साय सरकार ने उच्च शिक्षा को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया है। उच्च शिक्षा के बजट में करीब 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वर्ष 2025-26 में इसे बढ़ाकर 1,822.75 करोड़ रुपये किया गया है। राज्य के पांच सरकारी कॉलेजों को उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इनमें जशपुर, रायपुर, दुर्ग, बलौदाबाजार और रायगढ़ के कॉलेज शामिल हैं। इसी तरह, आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की तर्ज पर कवर्धा, जशपुर, रायगढ़ और जगदलपुर में छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (CGIT) विकसित किए गए हैं। आने वाले समय में रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग में भी इनके विस्तार की योजना है।

नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल वेसल परियोजना के दूसरे युद्धपोत की ‘स्टील कटिंग’ से निर्माण प्रक्रिया आगे बढ़ी

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कोच्चि- भारतीय नौसेना की नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल वेसल (NGMV) परियोजना के तहत दूसरे युद्धपोत के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। दूसरे NGMV की ‘स्टील कटिंग’ समारोह 17 सितंबर 2026 को कोच्चि स्थित कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) में आयोजित की गई।

समारोह में रियर एडमिरल कपिल मेहता, असिस्टेंट कंट्रोलर ऑफ वॉरशिप प्रोडक्शन एंड एक्विजिशन, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर भारतीय नौसेना और कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

मार्च 2023 में हुआ था निर्माण अनुबंध

नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल वेसल के निर्माण के लिए भारतीय नौसेना और कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के बीच मार्च 2023 में अनुबंध किया गया था।

NGMV को अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों और सेंसर से लैस करने की योजना है। इन आधुनिक प्रणालियों से युद्धपोतों की युद्धक क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि होने की उम्मीद है।

इन जहाजों का निर्माण भारतीय नौसेना को एक ‘Future Ready and Combat Ready Force’ के रूप में और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ेगी नौसैनिक क्षमता

NGMV परियोजना के तहत तैयार किए जा रहे युद्धपोत जटिल समुद्री परिस्थितियों में प्रभावी ढंग से संचालन के लिए डिजाइन किए जा रहे हैं।

इन जहाजों का निर्माण हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region) में भारत की समुद्री सुरक्षा और नौसैनिक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे भारतीय नौसेना की भविष्य की परिचालन आवश्यकताओं को पूरा करने में भी मदद मिलेगी।

आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया को बढ़ावा

NGMV परियोजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि युद्धपोत की भूमिका निर्धारित करने वाले प्रमुख उपकरण और प्रणालियां स्वदेशी रूप से विकसित और निर्मित की गई हैं।

यह भारत की बढ़ती रक्षा विनिर्माण क्षमता और स्वदेशी तकनीकी दक्षता को दर्शाता है। साथ ही यह परियोजना केंद्र सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘मेक इन इंडिया’ और ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ जैसी पहलों के अनुरूप है।

स्वदेशी उपकरणों और प्रणालियों के अधिक इस्तेमाल से भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ देश में विकसित तकनीकों को वैश्विक स्तर पर ले जाने की दिशा में भी अवसर पैदा होंगे।

आधुनिक और मजबूत नौसेना की दिशा में कदम

दूसरे NGMV की ‘स्टील कटिंग’ भारतीय नौसेना के लिए आधुनिक युद्धपोतों के निर्माण की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। अत्याधुनिक हथियारों, सेंसर और स्वदेशी तकनीकों से लैस इन युद्धपोतों के निर्माण से भारतीय नौसेना की भविष्य की युद्धक और समुद्री संचालन क्षमता को और मजबूत करने का लक्ष्य है।

SCO की 25वीं बैठक दुशांबे में आयोजित, भारत ने व्यापार और आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर दिया जोर

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दुशांबे/नई दिल्ली- शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के सदस्य देशों के विदेश आर्थिक एवं विदेश व्यापार गतिविधियों के लिए जिम्मेदार मंत्रियों की 25वीं बैठक 17 सितंबर 2026 को ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में आयोजित की गई।

बैठक में SCO सदस्य देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक क्षेत्रों में जारी सहयोग की समीक्षा की गई। साथ ही, SCO के ढांचे के तहत व्यापार एवं आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने के उपायों पर सदस्य देशों ने विचार-विमर्श किया।

भारत ने SCO की आर्थिक क्षमता को वास्तविक परिणामों में बदलने पर दिया जोर

बैठक में भारत की ओर से यशवीर सिंह ने भाग लिया। उन्होंने SCO की व्यापक आर्थिक क्षमता को रेखांकित करते हुए कहा कि इस क्षमता को ठोस परिणामों में बदलने के लिए SCO देशों के बीच व्यापार बढ़ाना, व्यापार लागत कम करना, आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक मजबूत और लचीला बनाना तथा बेहतर कनेक्टिविटी विकसित करना आवश्यक है।

भारत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बिश्केक में आयोजित SCO शिखर सम्मेलन में व्यक्त दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए सुरक्षा (Security), कनेक्टिविटी (Connectivity) और अवसर (Opportunity) के तीन प्रमुख स्तंभों पर जोर दिया।

भारत के अनुसार इन तीनों स्तंभों का आर्थिक विकास से भी गहरा संबंध है। इनके माध्यम से आपूर्ति श्रृंखलाओं की मजबूती, भरोसेमंद एवं प्रभावी कनेक्टिविटी तथा कारोबारियों के लिए बाजार तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं।

व्यापार को आसान बनाने और डिजिटल तकनीक पर जोर

भारत ने व्यापार सुविधा और डिजिटल तकनीक के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इनके माध्यम से अंतरराष्ट्रीय व्यापार में लगने वाली लागत और समय दोनों को कम किया जा सकता है।

भारत ने सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सरल बनाने, पेपरलेस ट्रेड को बढ़ावा देने और दस्तावेजों के इलेक्ट्रॉनिक आदान-प्रदान की आवश्यकता पर जोर दिया।

इसके साथ ही भारत ने मजबूत मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी विकसित करने और माल के परिवहन में लगने वाले ट्रांजिट समय को कम करने की आवश्यकता भी बताई।

रणनीतिक क्षेत्रों में आपूर्ति श्रृंखला सहयोग बढ़ाने की अपील

भारत ने SCO सदस्य देशों के बीच रणनीतिक और उभरते क्षेत्रों में आपूर्ति श्रृंखलाओं को विविध और मजबूत बनाने के लिए अधिक सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।

इन क्षेत्रों में कृषि, महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals), फार्मास्यूटिकल्स, विनिर्माण और इलेक्ट्रॉनिक्स प्रमुख रूप से शामिल हैं।

भारत ने ऊर्जा सुरक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में भी SCO देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं को रेखांकित किया।

MSME और स्टार्टअप के लिए डिजिटल भुगतान को बढ़ावा

भारत ने छोटे व्यवसायों को क्षेत्रीय और वैश्विक व्यापार में अधिक प्रभावी ढंग से भाग लेने में सक्षम बनाने पर भी जोर दिया।

इस संदर्भ में भारत ने डिजिटल भुगतान, सीमा-पार भुगतान (Cross-Border Payments) और आसानी से उपलब्ध ट्रेड फाइनेंस की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। खासतौर पर MSME और स्टार्टअप के लिए इन सुविधाओं को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

भारत ने SCO देशों की वैश्विक वैल्यू चेन में भागीदारी बढ़ाने का भी आह्वान किया।

साथ ही भारत ने WTO को केंद्र में रखते हुए खुले, समावेशी और नियम-आधारित बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

मंत्रियों ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों को मंजूरी दी

बैठक के दौरान मंत्रियों ने ‘SCO सदस्य देशों के विदेश आर्थिक एवं विदेश व्यापार गतिविधियों के लिए जिम्मेदार मंत्रियों का वक्तव्य’ अपनाया।

इसके अलावा मंत्रियों ने 2026–2030 की कार्ययोजना पर भी सहमति व्यक्त की। यह कार्ययोजना SCO सदस्य देशों के बहुपक्षीय व्यापार एवं आर्थिक सहयोग कार्यक्रम को लागू करने से संबंधित है। इसे आगे SCO सदस्य देशों के सरकार प्रमुखों (प्रधानमंत्रियों) की परिषद से अनुमोदन के लिए रखा जाएगा।

बैठक में SCO सदस्य देशों की रचनात्मक अर्थव्यवस्था (Creative Economy) के विकास के लिए विशेष कार्य समूह से संबंधित नियमों को भी मंजूरी दी गई।

SCO बिजनेस काउंसिल और आर्थिक विश्लेषण केंद्रों की गतिविधियों पर चर्चा

मंत्रियों ने SCO बिजनेस काउंसिल के प्रतिनिधि द्वारा परिषद की गतिविधियों से संबंधित दी गई जानकारी का संज्ञान लिया।

इसके साथ ही ताजिकिस्तान की ओर से SCO Consortium of Economic Analytical Centres के कार्यों के संबंध में दी गई जानकारी को भी बैठक में संज्ञान में लिया गया।

2027 की मंत्रीस्तरीय बैठक उज्बेकिस्तान में

बैठक में यह भी बताया गया कि SCO की अगली मंत्रीस्तरीय बैठक वर्ष 2027 में उज्बेकिस्तान गणराज्य में आयोजित की जाएगी।

बैठक में व्यापार, डिजिटल कनेक्टिविटी, आपूर्ति श्रृंखला, ऊर्जा, MSME और वैश्विक व्यापार व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर SCO देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में विचार-विमर्श किया गया।

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग विशेष अभियान 6.0 के तहत स्वच्छता, लंबित कार्यों के निपटारे और ई-वेस्ट प्रबंधन पर करेगा विशेष जोर

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नई दिल्ली- प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (DARPG) द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप कृषि एवं किसान कल्याण विभाग विशेष अभियान 6.0 के तहत स्वच्छता और लंबित कार्यों के निपटारे को लेकर व्यापक अभियान चलाने जा रहा है। यह अभियान 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक चलेगा।


विशेष अभियान 6.0 का मुख्य उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता को संस्थागत रूप देना, लंबित कार्यों और मामलों का निपटारा करना, आम नागरिकों के सरकारी कार्यालयों से जुड़ने के अनुभव को बेहतर बनाना तथा सरकारी कार्यालयों से निकलने वाले ई-वेस्ट का नियमों के अनुरूप संग्रह, पृथक्करण और निपटान सुनिश्चित करना है।

विशेष अभियान 5.0 में व्यापक स्तर पर चला था स्वच्छता अभियान

विशेष अभियान 5.0 के दौरान कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने अपने मुख्यालय के साथ-साथ देशभर में स्थित अधीनस्थ एवं संबद्ध कार्यालयों, सार्वजनिक उपक्रमों और अन्य संस्थानों में व्यापक स्वच्छता अभियान चलाया था।

इस दौरान कई संगठनों द्वारा पौधारोपण, सार्वजनिक स्थानों की सफाई और स्वच्छता संबंधी गतिविधियां भी आयोजित की गईं।

विभाग का एक प्रमुख फोकस किसानों और आम नागरिकों की शिकायतों के त्वरित एवं प्रभावी निपटारे पर रहा। नागरिकों और किसानों को मंत्रालय से संबंधित शिकायतें दर्ज कराने के लिए CPGRAMS की सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा विभाग ने अपनी प्रमुख योजनाओं, जैसे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) से संबंधित शिकायतों के समाधान के लिए समर्पित पोर्टल भी विकसित किए हैं।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने इन पोर्टलों पर प्राप्त किसानों की शिकायतों के निपटारे की गुणवत्ता की समीक्षा की। वहीं, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव ने 2 से 31 अक्टूबर 2025 के कार्यान्वयन चरण के दौरान निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अधिकारियों का मार्गदर्शन किया।

लोक शिकायतों और विशेष अभियान पर कार्यशाला

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा 9 अक्टूबर 2025 को प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (DARPG) के सहयोग से लोक शिकायत और विशेष अभियान 5.0 विषय पर एक कार्यशाला आयोजित की गई।

कार्यशाला को कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव तथा DARPG के सचिव ने संबोधित किया। इस दौरान विशेष अभियान के उद्देश्यों, लोक शिकायतों के प्रभावी निपटारे और स्वच्छता संबंधी गतिविधियों पर चर्चा की गई।

ई-वेस्ट से किसानों के लिए बनाए गए मॉडल

विशेष अभियान 5.0 में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सभी संबद्ध और अधीनस्थ कार्यालयों ने सक्रिय भागीदारी की। अभियान का एक प्रमुख फोकस ई-वेस्ट का निपटारा रहा।

इसी दिशा में फार्म मशीनरी ट्रेनिंग एंड टेस्टिंग इंस्टीट्यूट्स ने बेकार इलेक्ट्रॉनिक सामग्री यानी ई-वेस्ट का रचनात्मक उपयोग करते हुए किसानों से संबंधित कृषि उपकरणों और मशीनरी के कई मॉडल तैयार किए।

इनमें ड्रोन, ट्रैक्टर, कल्टीवेटर सहित विभिन्न कृषि उपकरणों के मॉडल शामिल थे। इन मॉडलों की एक प्रदर्शनी भी कार्यशाला के दौरान लगाई गई।

इस पहल को ‘वेस्ट टू वेल्थ’ श्रेणी के तहत विभाग की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों (Best Practices) में शामिल किया गया। DARPG के सचिव ने भी अधिकारियों के इन प्रयासों की सराहना की।

किसानों की शिकायतों के समाधान के लिए मजबूत व्यवस्था

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के पास किसानों की शिकायतों के समाधान के लिए एक व्यापक शिकायत निवारण प्रणाली मौजूद है।

CPGRAMS के अलावा ‘कृषि रक्षक पोर्टल’ (Krishi Rakshak Portal) किसानों के लिए एक ऐसा वन-स्टॉप प्लेटफॉर्म है, जहां प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) से संबंधित शिकायतों के समाधान की सुविधा उपलब्ध है।

सोशल मीडिया के जरिए भी लोगों तक पहुंच

विशेष अभियान 5.0 के दौरान कृषि एवं किसान कल्याण विभाग तथा उसके संबद्ध, अधीनस्थ और क्षेत्रीय कार्यालयों द्वारा विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अभियान से जुड़ी गतिविधियों और उपलब्धियों को व्यापक रूप से साझा किया गया।

इस दौरान विभाग की ओर से 6 PIB नोट्स जारी किए गए और 274 से अधिक सोशल मीडिया पोस्ट/ट्वीट किए गए। इनका प्रसार Twitter, LinkedIn, Instagram और Facebook सहित विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से किया गया।

विशेष अभियान 5.0 की प्रमुख उपलब्धियां

विशेष अभियान 5.0 के दौरान विभाग ने निर्धारित लक्ष्यों के मुकाबले कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं।

  1. क्रमांक
  1.    गतिविधि
  1. लक्ष्य
  1. उपलब्धि
  1. 1
  1. स्वच्छता अभियान स्थलों की संख्या
  1. 1,133
  1. 1,133
  1. 2
  1. सांसदों से संबंधित लंबित संदर्भ
  1. 32
  1. 31
  1. 3
  1. लंबित लोक शिकायतें
  1. 1,77,336
  1. 1,77,336
  1. 4
  1. रिकॉर्ड प्रबंधन – समीक्षा की गई भौतिक फाइलें
  1. 31,722
  1. 31,722
  1. 5
  1. रिकॉर्ड प्रबंधन – नष्ट/हटाई गई भौतिक फाइलें
  1. 10,597
  1. 10,597
  1. 6
  1. खाली कराई गई जगह
  1. 18,042 वर्ग फुट
  1. 7
  1. राजस्व प्राप्ति
  1. ₹40,38,150

विशेष अभियान 6.0 के लिए विभाग तैयार

विशेष अभियान 5.0 से मिले अनुभवों और उपलब्धियों के आधार पर कृषि एवं किसान कल्याण विभाग अब विशेष अभियान 6.0 को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।

2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले इस अभियान में सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता, लंबित मामलों के निपटारे, रिकॉर्ड प्रबंधन, ई-वेस्ट के उचित निपटान और नागरिकों एवं किसानों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

विभाग का उद्देश्य सरकारी कामकाज में स्वच्छता, पारदर्शिता, जवाबदेही और जन-केंद्रित सेवाओं को और मजबूत करना है।

बागबाहरा लूटकांड का खुलासा, 24 घंटे में 4 आरोपी गिरफ्तार; 4 नाबालिग भी पकड़े गए

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बागबाहरा- जिले के बागबाहरा क्षेत्र में राहगीर से मोबाइल फोन और नकदी लूटने के मामले का पुलिस ने तेजी से खुलासा किया है। घटना के बाद सक्रिय हुई पुलिस टीम ने महज 24 घंटे के भीतर मामले में शामिल 4 वयस्क आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। वहीं, पुलिस ने 4 नाबालिगों को भी पकड़ा है।


राहगीर को बनाया था निशाना

पुलिस के अनुसार, बागबाहरा क्षेत्र में एक राहगीर को आरोपियों ने अपना निशाना बनाया था। आरोपियों ने उसके साथ लूट की वारदात को अंजाम देते हुए मोबाइल फोन और नकदी लूट ली और मौके से फरार हो गए।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। पीड़ित की शिकायत के आधार पर संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू की गई।

24 घंटे में पुलिस ने सुलझाया मामला

घटना के बाद पुलिस टीम ने आसपास के इलाकों में पूछताछ करने के साथ ही उपलब्ध सुरागों के आधार पर आरोपियों की पहचान करने का प्रयास किया। पुलिस की जांच आगे बढ़ने पर मामले में शामिल आरोपियों तक पहुंच बनाई गई।

पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 4 वयस्क आरोपियों को गिरफ्तार किया। इसके साथ ही वारदात में शामिल 4 नाबालिगों को भी पकड़ा गया है।

आरोपियों से पूछताछ जारी

गिरफ्तार आरोपियों से पुलिस द्वारा पूछताछ की जा रही है। पूछताछ के दौरान पुलिस लूट की घटना में आरोपियों की भूमिका, वारदात में इस्तेमाल किए गए साधनों और लूटे गए सामान के संबंध में जानकारी जुटा रही है।

पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपियों का किसी अन्य आपराधिक घटना से संबंध है या नहीं।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई

बागबाहरा लूटकांड का 24 घंटे के भीतर खुलासा पुलिस की त्वरित कार्रवाई को दर्शाता है। मामले में 4 वयस्क आरोपियों की गिरफ्तारी और 4 नाबालिगों को पकड़े जाने के बाद पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटी हुई है।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि या आपराधिक घटना की जानकारी तत्काल पुलिस को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

सांकरा में गांजा तस्करी पर बड़ी कार्रवाई, 37.300 किलो गांजा जब्त; 7 आरोपी गिरफ्तार

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सांकरा- जिले में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। सांकरा पुलिस और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए बड़ी मात्रा में गांजा बरामद किया है। पुलिस ने 37 किलो 300 ग्राम गांजा जब्त किया है। मामले में 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस के अनुसार, जिले में मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध परिवहन पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। इसी दौरान टीम को गांजा तस्करी से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी मिली। सूचना के आधार पर पुलिस और ANTF की टीम ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए संदिग्ध वाहनों की जांच शुरू की।

जांच के दौरान टीम ने दो कारों को रोककर तलाशी ली। तलाशी में कारों से बड़ी मात्रा में गांजा बरामद हुआ। पुलिस ने गांजे को जब्त करने के साथ दोनों वाहनों को भी अपने कब्जे में ले लिया।

7 आरोपी गिरफ्तार

मामले में पुलिस ने कुल 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों से पूछताछ कर गांजे की सप्लाई, परिवहन और इसके पीछे जुड़े अन्य लोगों के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि गांजा कहां से लाया गया था और इसे कहां पहुंचाया जाना था।

दो वाहन भी जब्त

गांजा परिवहन में इस्तेमाल की जा रही दो कारों को भी पुलिस ने जब्त किया है। जब्त वाहनों और बरामद मादक पदार्थ को मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य के तौर पर रखा गया है।

आगे की जांच जारी

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ NDPS एक्ट के तहत कार्रवाई की है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर तस्करी के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि जिले में अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।

पुलिस की इस कार्रवाई को जिले में गांजा तस्करी के खिलाफ महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है। मामले में आगे की जांच के बाद तस्करी से जुड़े अन्य तथ्यों का खुलासा होने की उम्मीद है।

नए दौर की अर्थव्यवस्था के लिए तैयार हो रहा छत्तीसगढ़, भविष्य के उद्योगों पर हमारा फोकस: मुख्यमंत्री

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में लघु उद्योग भारती द्वारा आयोजित तीन दिवसीय ‘इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर-2026’ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने देश के विभिन्न राज्यों से आए उद्यमियों, निवेशकों और औद्योगिक प्रतिनिधियों का छत्तीसगढ़ की धरती पर स्वागत करते हुए उन्हें प्रदेश की विकास यात्रा में सहभागी बनने और यहां उपलब्ध निवेश की व्यापक संभावनाओं का लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ आज अपनी पारंपरिक औद्योगिक ताकत के साथ नई अर्थव्यवस्था और उभरते उद्योगों की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। खनिज, ऊर्जा, वन संपदा, पर्याप्त मानव संसाधन और देश के मध्य में अनुकूल भौगोलिक स्थिति हमारी स्वाभाविक ताकत है। राज्य सरकार इन खूबियों को आधुनिक तकनीक, बेहतर अधोसंरचना और निवेशक हितैषी नीतियों से जोड़कर छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख औद्योगिक एवं निवेश गंतव्यों में स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है।


उन्होंने कहा कि हमारी सरकार की भूमिका केवल उद्योगों के लिए नियामक की नहीं है। हम सरकार को उद्योग और निवेश की राह आसान करने वाले सहयोगी और ‘एक्सीलरेटर’ के रूप में विकसित कर रहे हैं। हमारा प्रयास है कि निवेश का प्रस्ताव आने से लेकर उद्योग के धरातल पर स्थापित होने तक हर चरण में निवेशकों को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध व्यवस्था मिले। मुख्यमंत्री ने लघु उद्योग भारती द्वारा राष्ट्रीय स्तर के इस महत्वपूर्ण औद्योगिक आयोजन के लिए रायपुर का चयन किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग हमारी अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला हैं। बड़े उद्योगों के साथ एमएसएमई का विस्तार होने से स्थानीय स्तर पर उद्यमिता बढ़ती है, रोजगार के अवसर पैदा होते हैं और आर्थिक गतिविधियों का लाभ समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लघु उद्योग भारती देशभर के 750 से अधिक जिलों में उद्यमियों को संगठित कर उद्योग और उद्यमिता को आगे बढ़ाने का कार्य कर रही है। छत्तीसगढ़ के 25 जिलों में भी 1200 से अधिक लघु एवं मध्यम उद्योग संगठन से जुड़े हैं। 18 से 20 सितम्बर तक आयोजित इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर में देशभर के 300 से अधिक एमएसएमई उद्यमियों की भागीदारी इस आयोजन के महत्व को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि यह औद्योगिक मेला केवल उत्पादों और तकनीकों की प्रदर्शनी नहीं है। यह उद्यमियों के बीच संवाद, अनुभव, नवाचार और तकनीकी ज्ञान के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मंच है। इसके माध्यम से नए व्यावसायिक संबंध बनेंगे, नई संभावनाओं पर चर्चा होगी और युवाओं को उद्योग तथा उद्यमिता की दुनिया को करीब से समझने का अवसर मिलेगा।

’नई औद्योगिक नीति से निवेश को मिली नई गति’

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने उद्योग जगत, निवेशकों और विभिन्न हितधारकों से व्यापक विचार-विमर्श के बाद औद्योगिक विकास नीति 2024-30 लागू की है। इस नीति का उद्देश्य केवल निवेश आकर्षित करना नहीं, बल्कि ऐसा औद्योगिक इकोसिस्टम तैयार करना है, जिसमें निवेश, उत्पादन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था एक साथ आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि नई औद्योगिक नीति में प्रक्रियाओं के सरलीकरण, निवेशकों को प्रोत्साहन, नए एवं उभरते सेक्टरों को बढ़ावा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार सृजन को विशेष प्राथमिकता दी गई है। नीति लागू होने के बाद प्रदेश को बड़े पैमाने पर निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं और प्रसन्नता की बात है कि अनेक परियोजनाओं पर धरातल पर काम भी प्रारंभ हो चुका है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ अब केवल कोयला, स्टील और सीमेंट जैसे पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं है। राज्य सरकार प्रदेश के औद्योगिक आधार को विविधता देने के लिए आईटी, सेमीकंडक्टर, फार्मा, टेक्सटाइल, ग्रीन एनर्जी सहित विभिन्न नए और भविष्य की अर्थव्यवस्था से जुड़े क्षेत्रों को प्रोत्साहित कर रही है। प्रदेश में लगभग 1100 करोड़ रुपए की सेमीकंडक्टर परियोजना पर कार्य प्रारंभ होना इस बदलते औद्योगिक परिदृश्य का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि नवा रायपुर को आधुनिक टेक्नोलॉजी हब के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। यहां आधुनिक अधोसंरचना के साथ नए उद्योगों और तकनीक आधारित कंपनियों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जा रहा है। राज्य में टेक्नोलॉजी हब और इंडस्ट्री एक्सीलेंस हब विकसित करने की दिशा में भी सरकार आगे बढ़ रही है।

’निवेशकों के लिए प्रक्रियाएं सरल, सरकार बनेगी सहभागी’

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसी भी राज्य में उद्योग तभी तेजी से आगे बढ़ सकते हैं, जब निवेशकों को नीतिगत स्थिरता के साथ सरल और पारदर्शी प्रक्रियाएं मिलें। इसी सोच के साथ राज्य सरकार ने सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से उद्योग स्थापना से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान बनाने की दिशा में काम किया है, ताकि निवेशकों को विभिन्न कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें। उन्होंने कहा कि उद्योगों को समय पर आवश्यक भूमि, अधोसंरचना और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार चाहती है कि उद्यमी अपना समय और ऊर्जा प्रक्रियागत जटिलताओं में लगाने के बजाय उत्पादन, नवाचार, विस्तार और रोजगार सृजन में लगाएं।

’खनिज, ऊर्जा और वन संपदा छत्तीसगढ़ की बड़ी ताकत’

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से देश के सबसे समृद्ध राज्यों में शामिल है। कोयला, लौह अयस्क और बॉक्साइट सहित अनेक महत्वपूर्ण खनिज यहां प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। इन संसाधनों का प्रदेश के भीतर अधिक से अधिक मूल्य संवर्धन हमारी औद्योगिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का 44 प्रतिशत से अधिक भू-भाग वनाच्छादित है। प्रदेश में इमली, महुआ, चिरौंजी, हर्रा-बहेड़ा सहित अनेक प्रकार की लघु वनोपज और औषधीय संसाधन उपलब्ध हैं। इनका वैज्ञानिक प्रसंस्करण और वैल्यू एडिशन कर वनांचल में उद्योग एवं रोजगार की नई संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं। इससे स्थानीय समुदायों और जनजातीय परिवारों की आय बढ़ाने के भी नए रास्ते खुलेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र छत्तीसगढ़ की औद्योगिक क्षमता का एक और मजबूत आधार है। प्रदेश में लगभग 30 हजार मेगावाट विद्युत उत्पादन की क्षमता है। ऊर्जा क्षेत्र में नए निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो रहे हैं और आने वाले वर्षों में उत्पादन क्षमता को और बढ़ाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। पर्याप्त बिजली, जल संसाधन, मानव संसाधन, प्राकृतिक संपदा और देश के मध्य में स्थित होने का भौगोलिक लाभ छत्तीसगढ़ को उद्योगों के लिए स्वाभाविक रूप से अनुकूल बनाता है।

’स्थानीय युवाओं के रोजगार से जुड़ेगा औद्योगिक विकास’

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि औद्योगिक विकास का वास्तविक लाभ तभी है, जब उससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ें। इसीलिए नई औद्योगिक नीति में स्थानीय रोजगार को विशेष महत्व दिया गया है। अधिक संख्या में स्थानीय युवाओं को रोजगार देने वाले उद्योगों के लिए विशेष प्रोत्साहन के प्रावधान किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य ऐसा औद्योगिक विकास है, जिसमें प्रदेश का युवा केवल रोजगार तलाशने वाला न रहे, बल्कि अपने कौशल, नवाचार और उद्यमशीलता के बल पर रोजगार देने वाला भी बने। एमएसएमई और स्टार्टअप इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। सरकार युवाओं को कौशल, तकनीक, बाजार और उद्यमिता के अवसरों से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

’बस्तर में पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए व्यापक संभावनाएं’

मुख्यमंत्री साय ने बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध जनजातीय संस्कृति और पर्यटन संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में उद्योगों के साथ पर्यटन क्षेत्र में भी निवेश की व्यापक संभावनाएं हैं। राज्य सरकार पर्यटन को रोजगार और स्थानीय आर्थिक विकास के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में आगे बढ़ा रही है।

उन्होंने कहा कि बस्तर के जलप्रपात, घने वन, प्राकृतिक स्थल और विशिष्ट जनजातीय संस्कृति देश-दुनिया के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। होम-स्टे जैसी पहलों के माध्यम से पर्यटन को सीधे स्थानीय परिवारों की आजीविका से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने देशभर से आए उद्यमियों से आग्रह किया कि वे औद्योगिक मेले के साथ छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों को भी देखें और प्रदेश में उपलब्ध निवेश की विविध संभावनाओं को करीब से समझें।

उद्योगों की लंबी उड़ान के लिए तैयार है छत्तीसगढ़: उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव

उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि लघु उद्योग भारती द्वारा आयोजित इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर का 14वां संस्करण छत्तीसगढ़ की औद्योगिक विकास यात्रा के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश उद्योगों के क्षेत्र में नई और लंबी उड़ान के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन देश के अलग-अलग हिस्सों से आए उद्यमियों को एक-दूसरे के उत्पाद, तकनीक, नवाचार और अनुभव को समझने तथा नई व्यावसायिक संभावनाएं तलाशने का अवसर देगा। उद्योगों के विस्तार से प्रदेश में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। उन्होंने उद्यमियों से छत्तीसगढ़ की औद्योगिक संभावनाओं के साथ प्रदेश के पर्यटन और तीर्थ स्थलों को भी देखने का आग्रह किया।

निवेश प्रस्ताव अब धरातल पर ले रहे आकार: उद्योग मंत्री श्री लखन लाल देवांगन

उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में लागू नई औद्योगिक नीति में निवेशकों को आकर्षित करने और उद्योग स्थापना की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए अनेक प्रावधान किए गए हैं। सरकार के प्रयासों से प्रदेश में निवेश प्रस्ताव आने के साथ उनका क्रियान्वयन भी धरातल पर दिखाई देने लगा है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में छोटे और बड़े नए उद्योग स्थापित हो रहे हैं, जिनसे रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। लघु उद्योगों को प्रोत्साहन, उद्यमियों की समस्याओं के समाधान और नए निवेश को आकर्षित करने के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है। अलग-अलग सेक्टरों में संवाद और कार्यशालाओं के माध्यम से उद्यमियों को राज्य की नीतियों तथा उपलब्ध अवसरों से जोड़ा जा रहा है।
लघु उद्योग भारती के श्री प्रकाश चंद्र गुप्त ने कहा कि संगठन पिछले 32 वर्षों से देश के सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को संगठित करने तथा उनकी समस्याओं और आवश्यकताओं को केंद्र एवं राज्य सरकारों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत में लघु और विकेंद्रीकृत उद्योगों की समृद्ध परंपरा रही है। वर्तमान समय में इन्हें आधुनिक बाजार, नई तकनीक और मजबूत व्यावसायिक नेटवर्क से जोड़ने की आवश्यकता है। इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर इसी उद्देश्य से उद्यमियों को साझा मंच उपलब्ध करा रहा है। तीन दिवसीय आयोजन में उद्यमियों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन के साथ नए व्यावसायिक संपर्क बनाने, नवाचार साझा करने और भविष्य की औद्योगिक संभावनाओं पर संवाद करने का अवसर मिलेगा।

’मुख्यमंत्री ने स्टॉलों का किया अवलोकन, उद्यमियों से जाना उनके नवाचारों के बारे में’

इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर-2026 में देश और प्रदेश की विभिन्न औद्योगिक इकाइयों द्वारा बड़ी संख्या में स्टॉल लगाए गए हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने मेले के विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया और प्रदर्शित उत्पादों, तकनीकों एवं नवाचारों की जानकारी ली। प्रदर्शनी में पारंपरिक आयुर्वेदिक औषधियों एवं उपचार पद्धतियों से लेकर आधुनिक मशीनरी, आईटी और नवीन तकनीक आधारित औद्योगिक उत्पादों का प्रदर्शन किया गया है। मुख्यमंत्री ने उद्यमियों और औद्योगिक प्रतिनिधियों से आत्मीय संवाद कर उनकी व्यावसायिक गतिविधियों, नवीन तकनीकों और औद्योगिक अनुभवों की जानकारी ली। उन्होंने उद्यमियों से छत्तीसगढ़ में उपलब्ध निवेश अवसरों और उद्योगों के लिए विकसित किए जा रहे अनुकूल वातावरण पर भी चर्चा की।

मुख्यमंत्री साय ने आयोजन को देशभर के उद्यमियों के बीच संवाद और सहयोग का महत्वपूर्ण सेतु बताते हुए लघु उद्योग भारती के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने आयोजन की तैयारियों और औद्योगिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले पदाधिकारियों, सदस्यों एवं प्रतिनिधियों को सम्मानित भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ अपने संसाधनों, सामर्थ्य और नई संभावनाओं के साथ औद्योगिक विकास के नए दौर में प्रवेश कर रहा है।

राज्य सरकार सूक्ष्म, लघु, मध्यम और बड़े सभी प्रकार के उद्योगों के लिए सहयोगी वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने देशभर के उद्यमियों का आह्वान किया कि वे छत्तीसगढ़ आएं, यहां की संभावनाओं को समझें, निवेश करें और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सहभागी बनें। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार  आर. कृष्णा दास, छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम के अध्यक्ष श्री राजीव अग्रवाल, छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण के अध्यक्ष श्री भूपेंद्र सवन्नी, लघु उद्योग भारती के पदाधिकारी तथा देशभर से आए उद्यमी एवं औद्योगिक प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

हार्ट अटैक के उपचार में लगने वाला महंगा इंजेक्शन भी सरकारी अस्पताल में निशुल्क

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रायपुर : हार्ट अटैक और गंभीर हृदय रोगों के उपचार में इस्तेमाल होने वाली कई महंगी एवं जीवनरक्षक दवाएं और इंजेक्शन अब सरकारी अस्पताल में मरीजों को निःशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर स्थित एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट (एसीआई) के कार्डियोलॉजी विभाग में मरीजों को उपचार के दौरान आवश्यकतानुसार इन दवाओं की सुविधा मिल रही है।


स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल के मार्गदर्शन एवं स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से उपलब्ध कराई जा रही इस सुविधा से गरीब एवं जरूरतमंद मरीजों और उनके परिजनों को महंगे उपचार के आर्थिक बोझ से राहत मिल रही है।

एसीआई के कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. (प्रो.) स्मित श्रीवास्तव के अनुसार, अस्पताल में उपलब्ध हृदय रोग के उपचार संबंधी दवाओं में टिकैग्रिलोर 90 मिलीग्राम की गोली, टेनेक्टेप्लेस (टीएनके-टीपीए) इंजेक्शन, व्यामाडा गोली, एज़ेटिमाइब गोली, मावाकैम्टेन गोली, सरोग्लिटाज़ार गोली, इवोलोकुमैब (रिपाथा) इंजेक्शन, सेमाग्लूटाइड गोली तथा न्यूमोकोकल वैक्सीन इंजेक्शन शामिल हैं।

बाजार में महंगी, अस्पताल में निःशुल्क

डॉ. स्मित के अनुसार, इनमें से कई दवाओं की बाजार कीमत सामान्य दवाओं की तुलना में काफी अधिक है। उदाहरण के लिए, टिकैग्रिलोर 90 मिलीग्राम, इवोलोकुमैब, टेनेक्टेप्लेस (बाज़ार मूल्य लगभग 35 से 40 हज़ार), मावाकैम्टेन (बाज़ार मूल्य लगभग 21 से 22 हज़ार) और अन्य विशेष दवाओं की कीमतें भी ब्रांड, डोज और पैक-साइज के अनुसार अलग-अलग होती हैं। इन दवाओं का अस्पताल में चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार निःशुल्क उपलब्ध होना मरीजों के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक राहत है।

हार्ट अटैक के उपचार में इस्तेमाल होने वाली महंगी दवाएं भी उपलब्ध

गंभीर हृदय रोगियों, विशेषकर हार्ट अटैक जैसी आपातकालीन परिस्थितियों में चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार उपयोग होने वाले रिकॉम्बिनेंट टिश्यू प्लास्मिनोजेन एक्टिवेटर (TNK-t-PA) यानी टेनेक्टेप्लेस के 20 मिलीग्राम, 30 मिलीग्राम और 40 मिलीग्राम इंजेक्शन अस्पताल में उपलब्ध हैं। इसके साथ ही स्ट्रेप्टोकाइनेज 15 लाख IU इंजेक्शन भी उपलब्ध है। 

 ये दवाएं विशेष परिस्थितियों में रक्त के थक्के को घोलने के लिए चिकित्सकीय निगरानी में उपयोग की जाती हैं। हार्ट अटैक के मरीजों में समय पर आवश्यक दवा उपलब्ध होना उपचार प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अस्पताल में ऐसी दवाओं की उपलब्धता से आपातकालीन उपचार के दौरान दवा के लिए बाहरी निर्भरता नहीं के बराबर रहती है। 

इसके साथ एंजियोग्राफी में उपयोग होने वाला नॉन-आयोनिक कॉन्ट्रास्ट मीडिया- ऑम्निपेक और विजिपेक भी अस्पताल की आपूर्ति में उपलब्ध है। इनके अलावा अस्पताल की आपूर्ति में एनोक्सापारिन 60 मिलीग्राम इंजेक्शन, हेपरिन, ह्यूमन एल्ब्यूमिन 20 प्रतिशत, नाइट्रोग्लिसरीन, निकोरैंडिल, आइसोप्रेनालिन, लिडोकेन, इमिपेनम-सिलास्टिन, पाइपरैसिलिन-टैजोबैक्टम, लाइनज़ोलिड, टीकोप्लानिन, सेवोफ्लुरेन सहित अन्य आवश्यक दवाएं भी उपलब्ध हैं।

इससे गंभीर हृदय रोगियों को उपचार के दौरान आवश्यक दवाओं के लिए बाहर से खरीदारी करने की आवश्यकता नहीं होती है और परिवार पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ भी कम होता है।

महंगी दवाओं की खरीदी से परिवारों को राहत

 पंडित नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी के अनुसार अस्पताल में उपलब्ध इन दवाओं में कई ऐसी हैं जिनकी बाजार कीमत काफी अधिक है। गंभीर बीमारी के दौरान इन दवाओं और इंजेक्शनों की निजी तौर पर खरीद मरीज के परिवार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल सकती है। ऐसे में सरकारी अस्पताल में इनकी निःशुल्क उपलब्धता मरीजों के लिए बड़ी राहत है।

अम्बेडकर अस्पताल अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर के अनुसार, एसीआई के कार्डियोलॉजी विभाग में गंभीर हृदय रोगियों के उपचार में उपयोग होने वाली महत्वपूर्ण एवं महंगी दवाएं और इंजेक्शन अस्पताल की व्यवस्था के तहत निःशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं। विशेष रूप से हार्ट अटैक, गंभीर संक्रमण, रक्त के थक्के तथा अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में आवश्यक दवाओं की अस्पताल में उपलब्धता से मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिलती है और परिजनों को बाहर से महंगी दवाएं खरीदने की जरूरत नहीं होती है।

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग द्वारा सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने और मरीजों को बेहतर एवं सुलभ उपचार उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। एसीआई के कार्डियोलॉजी विभाग में महंगी, आधुनिक एवं जीवनरक्षक दवाओं की निःशुल्क उपलब्धता छत्तीसगढ़ जैसे तेजी से विकसित होते राज्य में नागरिकों के स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है जिसका लाभ गंभीर हृदय रोगियों को मिल रहा है।

छत्तीसगढ़ इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत प्रदेश की दीर्घकालिक अधोसंरचना विकास की बनेगी समग्र कार्ययोजना

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 रायपुर : प्रदेश में अधोसंरचना विकास को गति देने और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप मजबूत एवं एकीकृत अधोसंरचना तैयार करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन के संबंध में आज मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। लोक निर्माण विभाग को मिशन का नोडल विभाग बनाया गया है।


बैठक में मिशन के तहत प्रदेश के सड़क, ऊर्जा, ट्रांसमिशन, जल, सिंचाई, संचार, फाइबर नेटवर्क तथा अन्य आवश्यक अधोसंरचना के समग्र विकास के लिए दीर्घकालिक रणनीति और कार्ययोजना तैयार करने पर चर्चा हुई।

मुख्य सचिव विकासशील ने प्रदेश के रोड नेटवर्क के लिए आगामी 20 वर्षों का मास्टर प्लान तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मास्टर प्लान में वर्तमान अधोसंरचना की स्थिति, भविष्य की जरूरतों, कनेक्टिविटी की आवश्यकताओं और संभावित विकास क्षेत्रों का समग्र आकलन किया जाए। इसके आधार पर चरणबद्ध तरीके से परियोजनाओं की प्राथमिकता तय कर उनके क्रियान्वयन की कार्ययोजना तैयार की जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी के साथ ऊर्जा, जल, सिंचाई, संचार एवं डिजिटल कनेक्टिविटी सहित सभी प्रमुख अधोसंरचना घटकों को एकीकृत दृष्टिकोण के साथ देखा जाए। प्रत्येक क्षेत्र की आवश्यकता का आकलन कर यह निर्धारित किया जाए कि आने वाले वर्षों में किस प्रकार की अधोसंरचना और किन क्षेत्रों में विकसित की जानी है।

इंटरमॉडल ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स हब की संभावनाओं का होगा अध्ययन

मुख्य सचिव ने प्रदेश में इंटरमॉडल ट्रांसपोर्ट एवं लॉजिस्टिक्स हब विकसित करने की संभावनाओं का अध्ययन करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सड़क एवं रेल सहित विभिन्न परिवहन माध्यमों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी विकसित करने तथा माल परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक परियोजनाओं को चिन्हित करने को कहा। उन्होंने अधोसंरचना परियोजनाओं के लिए नए फंडिंग मैकेनिज्म की संभावनाओं का भी अध्ययन करने के निर्देश दिए। निजी एवं सार्वजनिक निवेश सहित विभिन्न वित्तीय विकल्पों का परीक्षण कर परियोजनाओं के लिए उपयुक्त वित्तीय व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया।

दीर्घकालिक योजना के साथ बनेगा वार्षिक एक्शन प्लान

मुख्य सचिव ने कहा कि 20 वर्षीय मास्टर प्लान के साथ वार्षिक एक्शन प्लान भी तैयार किया जाए। इसमें प्रत्येक वर्ष प्रस्तावित कार्यों, उनकी प्राथमिकता, आवश्यक संसाधनों और समय-सीमा का स्पष्ट निर्धारण हो। उन्होंने परियोजनाओं की प्रॉपर प्लानिंग एवं मैपिंग के साथ उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने देश के अन्य राज्यों में विकसित की जा रही आधुनिक अधोसंरचना परियोजनाओं का अध्ययन करने के लिए अधिकारियों के एक्सपोजर विजिट आयोजित करने को भी कहा, इससे वहां अपनाई जा रही बेहतर तकनीकों एवं कार्यप्रणालियों को छत्तीसगढ़ की आवश्यकताओं के अनुरूप अपनाया जा सके। मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए मिशन के कार्यों को समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।

बैठक में मुख्यमंत्री एवं वाणिज्यिक कर, लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद, नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण के सीईओ चंदन कुमार सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

 

सेवा-संकल्प अभियान : महतारी वंदन से सशक्त हो रही छत्तीसगढ़ की नारी शक्ति, आत्मनिर्भरता को मिल रही नई उड़ान

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आर्थिक सशक्तिकरण से विकसित भारत के संकल्प को मिल रही मजबूती


रायपुर : महतारी वंदन योजना महिलाओं के लिए आर्थिक संबल और आत्मविश्वास का महत्वपूर्ण आधार बन रही है। योजना के माध्यम से महिलाओं को मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता उन्हें अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ परिवार की जरूरतों में सहयोग करने और आर्थिक निर्णयों में अधिक आत्मविश्वास के साथ भागीदारी का अवसर दे रही है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महिला नेतृत्व वाले विकास को विकसित भारत 2047 की यात्रा का महत्वपूर्ण आधार बताया है। उनका विजन है कि महिलाएं केवल विकास की लाभार्थी न रहें, बल्कि विकास की नेतृत्वकर्ता और भागीदार बनें। वित्तीय समावेशन, उद्यमिता, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, स्वच्छता और शासन सहित विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भूमिका इसी सोच को आगे बढ़ाती है।

इसी व्यापक सोच का जमीनी प्रभाव गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के ग्राम सारबहरा की कविता चक्रधारी के जीवन में भी दिखाई देता है। श्रीमती कविता महतारी वंदन योजना की हितग्राही हैं। उन्होंने बताया कि योजना की 31वीं किस्त की राशि उनके बैंक खाते में प्राप्त हो गई है। उनके लिए यह राशि रोजमर्रा की छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने में उपयोगी साबित हो रही है।

तीज-त्योहार से पहले खाते में राशि आने से बढ़ी खुशी

कविता चक्रधारी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि तीज-त्योहार के समय घर-परिवार की कई छोटी-छोटी जरूरतें सामने आती हैं। ऐसे समय में महतारी वंदन योजना की राशि खाते में पहुंचना उनके लिए विशेष रूप से मददगार है। त्योहार से पहले राशि मिलने से उनकी खुशी और भी बढ़ गई है। उन्होंने बताया कि इस सहायता से आवश्यक घरेलू खर्चों को पूरा करने में सुविधा होती है और परिवार की जरूरतों में भी सहयोग मिल पाता है।

आर्थिक सहायता से बढ़ रहा महिलाओं का आत्मविश्वास

कविता ने कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। नियमित आर्थिक सहायता मिलने से महिलाओं में अपनी आवश्यकताओं को लेकर स्वयं निर्णय लेने का आत्मविश्वास बढ़ रहा है। छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भरता कम होने से महिलाओं में आत्मनिर्भरता की भावना मजबूत हो रही है।

उन्होंने कहा कि आर्थिक सशक्तिकरण केवल किसी एक परिवार की स्थिति को बेहतर नहीं करता, बल्कि इसका सकारात्मक प्रभाव पूरे परिवार पर पड़ता है। जब महिला अपने खर्च और आवश्यकताओं को लेकर निर्णय लेने में सक्षम होती है, तो परिवार के आर्थिक प्रबंधन में भी उसकी भूमिका मजबूत होती है।

कविता जैसी महिलाओं के अनुभव बताते हैं कि योजनाओं का वास्तविक महत्व तब सामने आता है, जब उनका लाभ सीधे परिवारों के जीवन में दिखाई देता है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से मिलने वाली नियमित सहायता महिलाओं के लिए आर्थिक सहयोग के साथ-साथ आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता को मजबूत करने का माध्यम बन रही है।

महिला सशक्तिकरण से विकसित भारत की ओर

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन में नारी शक्ति को विकसित भारत की निर्माण यात्रा का महत्वपूर्ण आधार माना गया है। महिला नेतृत्व वाले विकास की यह अवधारणा महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के साथ उन्हें विकास की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनाने पर केंद्रित है।

छत्तीसगढ़ में महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा सकता है। योजना से जुड़ी श्रीमती कविता चक्रधारी की कहानी यह दर्शाती है कि आर्थिक सहायता मिलने से महिलाओं के दैनिक जीवन में सुविधा के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति जताया आभार

महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त की राशि प्राप्त होने पर कविता चक्रधारी ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति हृदय से धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए संचालित ऐसी योजनाओं से उन्हें नियमित आर्थिक सहयोग मिल रहा है, जिससे वे अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने में अधिक सक्षम हो रही हैं।

कविता के चेहरे की खुशी और उनके शब्दों में व्यक्त संतोष सेवा संकल्प अभियान की उस भावना को सामने लाता है, जिसमें जनसेवा, जनभागीदारी और योजनाओं के जमीनी प्रभाव को केंद्र में रखा गया है। महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण केवल उनके जीवन में बदलाव नहीं लाता, बल्कि मजबूत परिवार, आत्मनिर्भर समाज और विकसित भारत की नींव को भी मजबूत करता है।

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