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सौतेली मां की डंडे से पीट-पीटकर हत्या, आरोपी बेटा गिरफ्तार

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 बाराद्वार (जांजगीर-चांपा): ग्राम दुरपा में सौतेली मां की बेरहमी से हत्या करने वाले आरोपी बेटे को बाराद्वार पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी की पहचान अनिल कुमार सिदार (38 वर्ष), निवासी दुरपा के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है।


क्या है पूरा मामला?

पुलिस के अनुसार घटना शाम लगभग 6:45 बजे की है। मृतका कौशिल्या सिदार (55 वर्ष) का अपने सौतेले बेटे अनिल कुमार सिदार के साथ विवाद हुआ था। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ा कि आरोपी ने लकड़ी की बेड़ी से अपनी सौतेली मां पर जानलेवा हमला कर दिया। गंभीर चोटें आने के कारण महिला की मौके पर ही मौत हो गई।

घटना की सूचना मिलते ही बाराद्वार पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर पंचनामा तैयार किया और परिजनों व गवाहों के बयान दर्ज किए।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हुआ खुलासा

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतका के सिर पर गंभीर चोट, शरीर की हड्डियों में कई फ्रैक्चर और आंतरिक रक्तस्राव की पुष्टि हुई है। अत्यधिक रक्तस्राव और शॉक के कारण श्वास व हृदय गति रुकने से महिला की मौत होना पाया गया। रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) के तहत हत्या का अपराध दर्ज किया।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई, आरोपी जेल भेजा गया

मामला दर्ज होते ही पुलिस टीम ने दबिश देकर आरोपी अनिल कुमार सिदार को हिरासत में लिया। कड़ी पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। आरोपी की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त हथियार भी बरामद कर लिया गया है। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी को अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।

तिरंगा यात्रा के दूसरे दिवस माँ दंतेश्वरी की पूजा-अर्चना कर उप मुख्यमंत्री एवं वन मंत्री ने किया यात्रा का शुभारंभ

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उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा—बस्तर की जनता, समाज प्रमुखों, जनप्रतिनिधियों और पत्रकारों के सहयोग से नक्सलवाद का हुआ खात्मा

रायपुर- तिरंगा यात्रा के दूसरे दिवस उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा एवं वन मंत्री केदार कश्यप ने माँ दंतेश्वरी मंदिर पहुंचकर विधिवत पूजा-अर्चना की। इसके पश्चात दंतेवाड़ा बस स्टैंड में आयोजित तिरंगा यात्रा कार्यक्रम को संबोधित किया।

जिले के 211 वीर बलिदानी जवानों को उप मुख्यमंत्री ने किया नमन

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि दंतेवाड़ा जिले के 211 सर्वोच्च बलिदानी वीर जवानों को नमन करते हुए कहा कि बस्तर की जनता, समाज प्रमुखों, जनप्रतिनिधियों और पत्रकारों के अमूल्य सहयोग से आज नक्सलवाद का खात्मा संभव हुआ है। उन्होंने कहा कि तिरंगा यात्रा उन क्षेत्रों से गुजर रही है, जहां कभी नक्सल आतंक के कारण पहुंचना भी मुश्किल था। आज उन्हीं क्षेत्रों में पूरे गौरव और उत्साह के साथ तिरंगा लहराया जा रहा है।

वन मंत्री केदार कश्यप ने की हर घर तिरंगा लगाने की अपील

वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि तिरंगा देश की आन, बान और शान का प्रतीक है। उन्होंने तिरंगा यात्रा को सफल बनाने के लिए आमजनों से अपने घरों में तिरंगा लगाने तथा स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रभक्ति की भावना के साथ हर घर तिरंगा अभियान में सहभागिता निभाने की अपील की।

सांसद महेश कश्यप ने बताया ऐतिहासिक गर्व का क्षण

बस्तर सांसद महेश कश्यप ने तिरंगा यात्रा को ऐतिहासिक गर्व का क्षण बताते हुए कहा कि यह यात्रा उन क्षेत्रों से गुजर रही है, जहां कभी वीर जवानों ने देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया था और नक्सल आतंक के चलते जहां किसी का पहुंचना संभव नहीं था। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सफल मार्गदर्शन में नक्सलवाद का खात्मा हुआ है और इन क्षेत्रों में विकास तथा राष्ट्रभक्ति का नया वातावरण बना है।

इस दौरान विधायक चैतराम अटामी, जिला पंचायत अध्यक्ष नंदलाल मुड़ामी, छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य ओजस्वी मंडावी, नगर पालिका अध्यक्ष पायल गुप्ता, जनपद पंचायत अध्यक्ष सुनीता भास्कर, सहित जनप्रतिनिधि  बस्तर आईजी बद्रीनाथ मीणा, डीआईजी कमलोचन कश्यप, कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव, पुलिस अधीक्षक चंद्रमोहन सिंह, डीएफओ रामकृष्ण रंगनाथ वाय एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।



विश्व हाथी दिवस 2026: विशाखापत्तनम में राष्ट्रीय समारोह, हाथी संरक्षण के लिए कई महत्वपूर्ण पहल जारी

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विशाखापत्तनम- विश्व हाथी दिवस 2026 के अवसर पर आज विशाखापत्तनम में राष्ट्रीय स्तर के समारोह का आयोजन किया गया। समारोह की अध्यक्षता केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने की। आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री कोनिडेला पवन कल्याण समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।

कार्यक्रम में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव  तन्मय कुमार, महानिदेशक (वन) एवं विशेष सचिव सुशील कुमार अवस्थी, अपर महानिदेशक (वन्यजीव) रमेश पांडे सहित मंत्रालय, आंध्र प्रदेश वन विभाग, भारतीय रेल, विभिन्न राज्यों के वन विभागों, वैज्ञानिक संस्थानों और अन्य संबंधित पक्षों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

आधुनिक तकनीक और पारंपरिक ज्ञान से हाथी संरक्षण पर जोर

समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत हाथियों के लिए एक टिकाऊ भविष्य सुनिश्चित करने की दिशा में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इसके लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रिमोट सेंसिंग और जियोस्पेशियल मैपिंग जैसी आधुनिक तकनीकों को पारंपरिक ज्ञान के साथ जोड़ा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि मानव–हाथी संघर्ष (Human-Elephant Conflict) को कम करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों के बीच समन्वय, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण आवश्यक है। साथ ही, संरक्षण प्रयासों में स्थानीय समुदायों के कल्याण को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

सिंह ने कहा कि हाथी संरक्षण भारत के लिए केवल एक नीतिगत प्राथमिकता नहीं, बल्कि देश की सभ्यतागत विरासत और पारिस्थितिक जिम्मेदारी का हिस्सा है। उन्होंने बताया कि भारत में वर्तमान में 33 हाथी रिजर्व और वैज्ञानिक रूप से चिन्हित 150 हाथी गलियारे (Elephant Corridors) हैं। भारत में दुनिया की लगभग 60 प्रतिशत जंगली एशियाई हाथी आबादी पाई जाती है।

उन्होंने कहा कि मानव–हाथी संघर्ष एक जटिल समस्या है और इसके समाधान के लिए विभिन्न हितधारकों को साथ लाकर, जमीनी स्तर पर सत्यापित वैज्ञानिक आंकड़ों का उपयोग करना जरूरी है।

‘Conflict to Coexistence’ होगा आंध्र प्रदेश का मंत्र

मुख्य वक्तव्य देते हुए आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने कहा कि मानव–हाथी संघर्ष के मामलों से निपटने के लिए राज्य सरकार का मंत्र ‘Conflict to Coexistence’ यानी ‘संघर्ष से सह-अस्तित्व की ओर’ है।

उन्होंने कहा कि मानव–हाथी संघर्ष राज्यों की प्रशासनिक सीमाओं तक सीमित समस्या नहीं है, बल्कि इसे साझा जिम्मेदारी के रूप में देखा जाना चाहिए।

पवन कल्याण ने आंध्र प्रदेश सरकार की H.A.N.U.M.A.N. (Healing And Nurturing Units for Monitoring, Aid and Nursing of Wildlife) पहल की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि राज्य में वन्यजीव संरक्षण के लिए आधुनिक तकनीक के उपयोग के साथ स्थानीय समुदायों को जोड़ा जा रहा है और वन विभाग के अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

‘गज गौरव पुरस्कार 2026’ प्रदान किए गए

विश्व हाथी दिवस समारोह के दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने हाथी संरक्षण और प्रबंधन के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को ‘गज गौरव पुरस्कार 2026’ प्रदान किए।

‘30 Giant Steps’ का विमोचन

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण ‘30 Giant Steps’ का विमोचन रहा। इसमें वर्ष 2020 से 2026 के बीच प्रोजेक्ट एलिफेंट के तहत हासिल की गई 30 प्रमुख उपलब्धियों, महत्वपूर्ण पड़ावों और संरक्षण पहलों को रेखांकित किया गया है।

प्रोजेक्ट एलिफेंट की शुरुआत वर्ष 1992 में केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में हुई थी। तीन दशकों से अधिक समय से यह योजना हाथियों, उनके आवास और गलियारों के संरक्षण, मानव–हाथी संघर्ष को कम करने तथा बंदी हाथियों के कल्याण की दिशा में काम कर रही है।

दक्षिण भारत के लिए क्षेत्रीय कार्ययोजना जारी

समारोह में ‘Regional Action Plan for Comprehensive Understanding and Management of Human–Elephant Conflict in Southern India’ भी जारी की गई। यह कार्ययोजना कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में मानव–हाथी संघर्ष के व्यापक और समन्वित प्रबंधन पर केंद्रित है।

प्रोजेक्ट एलिफेंट के तहत दक्षिणी हाथी क्षेत्र वाले राज्यों, वैज्ञानिक संस्थानों और विशेषज्ञों के परामर्श से तैयार इस योजना में 500 करोड़ रुपये के भारत सरकार के सहयोग का प्रावधान है।

योजना में हाथी आवासों की कनेक्टिविटी, गलियारों का संरक्षण, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, संघर्ष कम करने के लिए बुनियादी ढांचा, आवास पुनर्स्थापन, सामुदायिक भागीदारी, अनुसंधान एवं निगरानी, त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र, क्षमता निर्माण तथा राज्यों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया है।

हाथी संरक्षण पर विशेष प्रकाशन जारी

समारोह में Journal of Wildlife Science का विशेष अंक भी जारी किया गया, जो भारत में हाथी संरक्षण के तीन दशकों को समर्पित है। इसमें पिछले तीन दशकों में हाथी संरक्षण से संबंधित वैज्ञानिक ज्ञान और अनुसंधान को संकलित किया गया है।

इसके अलावा ‘Asian Elephants in Central India Before 1947’ नामक मोनोग्राफ भी जारी किया गया। इसमें वर्ष 1947 से पहले मध्य भारत में हाथियों के वितरण, स्थिति और मानव–हाथी संबंधों का ऐतिहासिक विवरण प्रस्तुत किया गया है।

प्रोजेक्ट एलिफेंट की 23वीं संचालन समिति की बैठक

विशाखापत्तनम में प्रोजेक्ट एलिफेंट की 23वीं संचालन समिति की बैठक भी आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने की।

बैठक में हाथी संरक्षण एवं प्रबंधन से जुड़े मौजूदा मुद्दों पर चर्चा की गई। इस दौरान ‘The Trumpet’ के Volume VI Issue 01, Nilgiri Elephant Reserve के लिए Model Elephant Conservation Plan, ‘Captive Elephant Husbandry: Science, Welfare and Practice’ तथा मानव–हाथी संघर्ष अध्ययन के दूसरे चरण से जुड़ी पहलें जारी की गईं।

मानव–हाथी संघर्ष पर राष्ट्रीय कार्यशाला

विश्व हाथी दिवस समारोह के तहत ‘Human–Elephant Conflict: Varying Scenarios Across India’ विषय पर कार्यशाला भी आयोजित की गई। इसमें हाथी बहुल राज्यों के नियामक प्राधिकरणों, वैज्ञानिक संस्थानों और मैदानी एजेंसियों ने हिस्सा लिया।

कार्यशाला में मानव–हाथी संघर्ष की स्थिति, रुझानों और विभिन्न क्षेत्रों में इसके अलग-अलग स्वरूपों की वैज्ञानिक आंकड़ों और मैदानी अनुभवों के आधार पर समीक्षा की गई। चर्चा में विद्युत करंट से हाथियों की मौत रोकने, रेलवे से होने वाली हाथी मृत्यु को कम करने, पशु चिकित्सा हस्तक्षेप, आवास एवं गलियारा प्रबंधन और एकीकृत लैंडस्केप दृष्टिकोण जैसे विषयों पर जोर दिया गया।

21,450 स्कूलों के 20 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा

विश्व हाथी दिवस के अवसर पर प्रोजेक्ट एलिफेंट और National Museum of Natural History के समन्वय से देशभर में व्यापक जन-जागरूकता अभियान भी चलाया गया।

इस अभियान में 21,450 स्कूलों के 20 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। बच्चों को हाथियों के पारिस्थितिक और सांस्कृतिक महत्व तथा उनके आवासों के संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए चित्रकला एवं मुखौटा निर्माण प्रतियोगिताएं, रैलियां, नुक्कड़ नाटक, जागरूकता कार्यक्रम और शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किए गए।

देशभर के विद्यार्थियों ने हाथियों के संरक्षण और सुरक्षा की शपथ लेते हुए स्वयं को वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण के युवा दूत के रूप में आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

हाथियों के सुरक्षित भविष्य के लिए भारत की प्रतिबद्धता

विशाखापत्तनम में आयोजित विश्व हाथी दिवस 2026 समारोह ने हाथियों के संरक्षण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को फिर दोहराया। विज्ञान और तकनीक के उपयोग, हाथी आवास एवं गलियारों के संरक्षण, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों के माध्यम से भारत का लक्ष्य हाथियों की स्वस्थ आबादी और मजबूत वन परिदृश्य को सुरक्षित रखना है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए देश की इस राष्ट्रीय धरोहर प्रजाति का भविष्य सुरक्षित रह सके।

डॉ. पद्मा गुरमेट को लद्दाख यूटी स्टेट अवॉर्ड-2025 से किया गया सम्मानित

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लेह- नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोवा-रिग्पा, लेह के निदेशक डॉ. पद्मा गुरमेट को वर्ष 2025 के लिए यूटी लद्दाख स्टेट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान लद्दाख में सोवा-रिग्पा चिकित्सा पद्धति के संरक्षण, प्रचार-प्रसार और विकास में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया।

यह पुरस्कार यूटी स्टेट अवॉर्ड समारोह के दौरान लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने प्रदान किया। समारोह में वर्ष 2022 से 2025 के लिए विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान और अनुकरणीय सेवाओं के लिए कुल 36 विशिष्ट व्यक्तियों को सम्मानित किया गया।

समारोह को संबोधित करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि इन पुरस्कारों का उद्देश्य ऐसे व्यक्तियों के समर्पण, उत्कृष्टता और सेवा को सम्मानित करना है, जिन्होंने समाज पर महत्वपूर्ण सकारात्मक प्रभाव डाला है। उन्होंने युवा पीढ़ी को उत्कृष्टता की ओर आगे बढ़ने तथा केंद्र शासित प्रदेश के कल्याण और विकास में सकारात्मक योगदान देने के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

डॉ. पद्मा गुरमेट का यह सम्मान नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोवा-रिग्पा के लिए गौरव का विषय है। यह सम्मान लद्दाख की समृद्ध पारंपरिक ज्ञान एवं चिकित्सा प्रणाली सोवा-रिग्पा के संरक्षण, संवर्धन और विकास के लिए उनके लंबे समय से किए जा रहे प्रयासों की महत्वपूर्ण पहचान है।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोवा-रिग्पा, लेह के फैकल्टी, कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने डॉ. पद्मा गुरमेट को इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए हार्दिक बधाई दी। उन्होंने सोवा-रिग्पा के विकास और विस्तार के लिए उनके निरंतर समर्पित प्रयासों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रदान किए संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप और पुरस्कार

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नई दिल्ली- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज नई दिल्ली में वर्ष 2024 और 2025 के लिए संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप एवं पुरस्कार देश के प्रख्यात कलाकारों को प्रदान किए। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने सम्मानित कलाकारों को बधाई देते हुए कहा कि वे भारतीय कला, संस्कृति और परंपरा के संवाहक हैं तथा देश की सामूहिक स्मृति के संरक्षक और भविष्य की सांस्कृतिक दृष्टि के निर्माता हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि आज सम्मानित किए गए कलाकार मिलकर भारत का एक ऐसा सांस्कृतिक मानचित्र प्रस्तुत करते हैं, जो इस मिट्टी से जुड़ी कहानियों और गीतों से बुना गया है। इसमें देश के विभिन्न क्षेत्रों के नृत्य, लोक उत्सव, भाषाएं और बोलियां शामिल हैं, जिन्हें पीढ़ियों ने अपनी कला और परंपराओं के माध्यम से जीवंत रखा है।

उन्होंने कहा कि भारत में संगीत की असंख्य परंपराएं, विभिन्न नृत्य शैलियां और लोक रंगमंच के अनेक रूप मौजूद हैं। भारतीय संस्कृति की जड़ें प्रकृति से गहराई से जुड़ी हुई हैं। देश की विविध पाक परंपराओं, पहनावे, नृत्य और संगीत में प्रकृति की स्पष्ट झलक दिखाई देती है। कलाकार पक्षियों की चहचहाहट, झरनों की कल-कल, पेड़-पौधों, बादलों और नदियों से प्रेरणा लेकर अपनी कला को अभिव्यक्त करते हैं।

गुरु-शिष्य परंपरा का महत्वपूर्ण योगदान

राष्ट्रपति ने भारतीय कला परंपराओं के संरक्षण में गुरु-शिष्य परंपरा की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि कला के क्षेत्र में गुरु सबसे महत्वपूर्ण पुस्तक के समान होते हैं, जिनसे ज्ञान और अनुभव एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचता है।

उन्होंने चिंता व्यक्त की कि तेजी से बदलते समय में देश की कई लोक कलाएं विलुप्त होने के खतरे का सामना कर रही हैं। ऐसे में केवल इन कलाओं का दस्तावेजीकरण करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें जीवंत बनाए रखने के लिए विशेष प्रयास किए जाने चाहिए।

राष्ट्रपति ने संगीत नाटक अकादमी द्वारा संचालित ‘कला-दीक्षा’ कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने वरिष्ठ कलाकारों से आग्रह किया कि वे अगली पीढ़ी के कलाकारों को तैयार करने और पारंपरिक कलाओं के ज्ञान को आगे बढ़ाने के लिए व्यवस्थित प्रयास करें।

लोक और जनजातीय कलाएं भारत की सांस्कृतिक पहचान की आधारशिला

राष्ट्रपति ने कहा कि प्रकृति मानव जीवन को कला के मूल्यों और संवेदनाओं से समृद्ध करने का सबसे स्वाभाविक प्रशिक्षण स्थल है। लोक एवं जनजातीय कलाएं जीवन के प्रति सहज उत्साह और प्रकृति के साथ गहरे जुड़ाव को दर्शाती हैं। इन कलाओं में समुदाय की स्मृतियां और सामूहिक चेतना स्वतः अभिव्यक्त होती हैं। यही कारण है कि लोक कलाएं भारत की सांस्कृतिक पहचान की महत्वपूर्ण आधारशिला हैं।

उन्होंने कहा कि सम्मानित कलाकार भारतीय परंपराओं के वाहक होने के साथ-साथ देश की सामूहिक सांस्कृतिक स्मृति के संरक्षक भी हैं। उनकी कला वर्तमान पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ती है और आने वाली पीढ़ियों के लिए नई सांस्कृतिक दिशा तैयार करती है।

भारत की सॉफ्ट पावर का महत्वपूर्ण केंद्र है संगीत नाटक अकादमी

राष्ट्रपति ने कहा कि संगीत नाटक अकादमी भारत की सॉफ्ट पावर का एक महत्वपूर्ण केंद्र मानी जाती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अकादमी आने वाले समय में भी भारतीय कला और संस्कृति की ऊर्जा को पूरी दुनिया तक पहुंचाने तथा समृद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहेगी।

राष्ट्रपति ने संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप और पुरस्कार प्राप्त करने वाले सभी कलाकारों को शुभकामनाएं दीं और भारतीय कला एवं संस्कृति के संरक्षण तथा संवर्धन में उनके योगदान की सराहना की।


सुबह 6 बजे पहुंचे अफसर, बाहर पुलिस बल: राजनांदगांव में नाहटा और भंसाली समूह पर ED की बड़ी कार्रवाई

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 राजनांदगांव : प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने गुरुवार तड़के राजनांदगांव शहर में एक साथ कई ठिकानों पर छापेमारी की कार्रवाई की। भोपाल और रायपुर से पहुंची ED की संयुक्त टीमों ने शहर और आसपास के तीन प्रमुख परिसरों में एक साथ दबिश देकर जांच शुरू की।


कार्रवाई के मुख्य दायरों में सत्यम विहार कॉलोनी स्थित नाहटा ग्रुप से जुड़े प्रतिष्ठान और कामठी लाइन स्थित 'भंसाली किराए भंडार' शामिल हैं।

तड़के 6 बजे पहुंची जांच टीम

सूत्रों के अनुसार, ED के वरिष्ठ अधिकारी सुरक्षा बलों के साथ सुबह करीब 6 बजे राजनांदगांव पहुंचे और तुरंत परिसरों को अपने कब्जे में ले लिया। जांच के दौरान अधिकारियों द्वारा वित्तीय लेन-देन, खाते-बही और अन्य अहम दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने और सुरक्षा के मद्देनजर सभी संबंधित स्थानों के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

DMF मामले से जुड़ रहे तार

माना जा रहा है कि यह कार्रवाई जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) मद में हुई कथित अनियमितताओं और वित्तीय धांधली की जांच के सिलसिले में की गई है। हालांकि, जांच एजेंसी की ओर से अब तक छापेमारी के मुख्य कारणों या जांच के विस्तृत दायरे को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

अक्टूबर 2025 में भी हुई थी कार्रवाई

उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी अक्टूबर 2025 में नाहटा और भंसाली समूह से जुड़े इन ठिकानों पर ED ने छापेमारी की थी। एक बार फिर हुई इस बड़ी कार्रवाई से स्थानीय व्यापारिक गलियारों में हड़कंप का माहौल है। फिलहाल सभी स्थानों पर जांच जारी है, और ED के आधिकारिक बयान के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

CG NEWS : गर्लफ्रेंड के घर युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत: शराब पार्टी के बाद विवाद, CPR भी नहीं बचा सकी जान

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 दुर्ग (छत्तीसगढ़)। दुर्ग क्षेत्र में एक युवक की अपनी प्रेमिका के घर पर संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। मृतक की पहचान 28 वर्षीय सिद्धांत दान के रूप में हुई है। सोमवार रात प्रेमिका के घर चल रही शराब पार्टी के दौरान हुए विवाद के बाद यह घटना घटी।


शराब पार्टी के दौरान हुआ था विवाद

पुलिस से मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, सिद्धांत अपनी गर्लफ्रेंड अंजलीना तंवर के घर पहुंचा था। उस समय घर में अंजलीना के अलावा उसकी सहेली निमिषा (निवासी रायगढ़), निमिषा का बॉयफ्रेंड गौरव और बोरसी निवासी ग्रेसी भी मौजूद थे। सभी लोग एक साथ बैठकर शराब का सेवन कर रहे थे। इसी दौरान किसी बात को लेकर सिद्धांत और अंजलीना के बीच बहस शुरू हो गई।

जांच में सामने आया है कि नशे की हालत में सिद्धांत द्वारा अपशब्द कहे जाने पर अंजलीना ने उसे थप्पड़ मार दिया था। इससे नाराज होकर सिद्धांत मकान की छत पर चला गया।

छत पर मिला अचेत, अस्पताल में डॉक्टरों ने घोषित किया मृत

कुछ समय बाद जब अंजलीना उसे देखने ऊपर पहुंची, तो सिद्धांत छत पर अचेत अवस्था में पड़ा था। अंजलीना ने उसे होश में लाने का प्रयास किया और CPR (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) भी दिया, लेकिन शरीर में कोई हलचल नहीं हुई। इसके बाद अन्य साथियों की मदद से उसे तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

घटना की जानकारी मंगलवार सुबह करीब 5 बजे पुलिस को दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने आवश्यक कागजी कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है।

पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में विवाद की बात सामने आई है, लेकिन मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही होगा। घटना के समय मौके पर मौजूद अंजलीना, निमिषा, गौरव और ग्रेसी के बयान दर्ज किए जा रहे हैं ताकि पूरे घटनाक्रम की कड़ी जोड़ी जा सके।

बघेल के बयान पर भड़के अरुण साव, बोले– 'लोकतंत्र में ऐसी भाषा स्वीकार्य नहीं'

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 रायपुर। हरेली तिहार के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा प्रधानमंत्री पर की गई टिप्पणी से छत्तीसगढ़ का राजनीतिक पारा चढ़ गया है। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने बघेल के बयान को लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विपरीत बताते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है।


उपमुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री जिस प्रकार की भाषा का प्रयोग कर रहे हैं, वह लोकतंत्र में कतई स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कांग्रेस पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए झारखंड में छात्रों पर हुई कार्रवाई का मुद्दा उठाया और कहा कि कांग्रेस को इस विषय पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस देश में भ्रम और अराजकता का माहौल पैदा करने का प्रयास कर रही है। साव ने स्पष्ट किया कि छात्रों के भविष्य से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर राजनीति करने के बजाय कांग्रेस को जिम्मेदारी से काम लेना चाहिए।

ED की कार्रवाई पर कांग्रेस को घेरा

कांग्रेस नेताओं द्वारा पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल की गिरफ्तारी के विरोध में किए जा रहे प्रदर्शन पर भी उपमुख्यमंत्री ने हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि ED की जांच में 3,000 करोड़ रुपये से अधिक के कथित भ्रष्टाचार का मामला उजागर हुआ है। साव ने कहा कि कांग्रेस जिस प्रकार इस कार्रवाई का विरोध कर रही है, उससे साफ प्रतीत होता है कि पार्टी भ्रष्टाचार के आरोपियों के संरक्षण में खड़ी है।

स्काईवॉक परियोजना को लेकर हमला

रायपुर के अधूरे स्काईवॉक को पूरा करने की योजना पर बात करते हुए अरुण साव ने इसके अटकाव के लिए पिछली कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में यह जनहित परियोजना लंबे समय तक अधर में लटकी रही, जिसे अब वर्तमान सरकार पूरा करने के लिए संकल्पबद्ध है।

निर्दोष आदिवासियों के मामलों की समीक्षा का आश्वासन

नक्सली मामलों में निर्दोष आदिवासियों की रिहाई की कांग्रेस की मांग पर साव ने कहा कि सरकार ऐसे सभी मामलों की सूक्ष्मता से समीक्षा कर रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि सरकार अपने वादों के प्रति प्रतिबद्ध है और उचित जांच के बाद नियमानुसार आवश्यक निर्णय लिया जाएगा।

गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निर्माण कार्यों पर ध्यान

लोक निर्माण विभाग (PWD) के कामकाज की चर्चा करते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता समयबद्ध और उच्च गुणवत्तायुक्त निर्माण कार्य सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि मानसून के दौरान टेंडर प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं, ताकि मौसम साफ होते ही सड़कों के निर्माण, मरम्मत और भवनों के कार्य में तेजी लाई जा सके। साव ने कहा कि राज्य में अधोसंरचना विकास को लगातार गति दी जा रही है।

जमीन आवंटन पर भड़का आक्रोश, नेशनल हाईवे पर 15 अगस्त को चक्काजाम का ऐलान

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 रायपुर. जिले के आरंग तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत रसनी में 22 हेक्टेयर (लगभग 54 एकड़) शासकीय भूमि को औद्योगिक प्रयोजन के लिए जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र विभाग को सौंपने की प्रशासनिक तैयारी चल रही है। इस फैसले के सामने आते ही पूरे गांव में विरोध का माहौल बन गया है और मामला काफी गंभीर हो गया है।


​ मामले की पूरी वजह

यह विवाद तब शुरू हुआ जब तहसीलदार आरंग ने खसरा नंबर 15, 16, 17, 33, 36, 37, 38, 50, 54, 57, 58, 248 और 250 से जुड़ी शासकीय भूमि पर ग्राम पंचायत रसनी से अभिमत मांगा। इस पर ग्राम पंचायत के सरपंच और ग्रामीणों ने एकमत होकर ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित किया और उद्योग विभाग को जमीन देने के फैसले को पूरी तरह से खारिज कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन जबरन उनकी आरक्षित जमीन छीनना चाहता है।

​ जमीन का उपयोग और विरोध

जिला पंचायत रायपुर के सदस्य वतन अंगनाथ चंद्राकर ने आरंग थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपकर इस आवंटन प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस 22 हेक्टेयर जमीन को उद्योग लगाने के लिए दिया जा रहा है, वह असल में गांव के सार्वजनिक कार्यों के लिए तय की गई है। इस जमीन का उपयोग खेल मैदान, धान खरीदी केंद्र, ग्रामीणों के लिए आबादी भूमि, चारागाह और वृक्षारोपण जैसे बेहद जरूरी कामों के लिए होना है। इसे उद्योग विभाग को देना ग्रामीणों के अधिकारों का सीधा हनन है।

​ ग्रामीणों की चेतावनी और चक्काजाम का ऐलान

वतन चंद्राकर द्वारा थाना प्रभारी को दिए गए पत्र में चेतावनी दी गई है कि यदि 15 अगस्त से पहले जमीन आवंटन की प्रक्रिया निरस्त नहीं की गई, तो समस्त ग्रामीण स्वतंत्रता दिवस का बहिष्कार करेंगे। साथ ही 15 अगस्त की सुबह 9 बजे से नेशनल हाईवे पर अनिश्चितकालीन चक्काजाम शुरू कर दिया जाएगा। इस दौरान यदि कानून-व्यवस्था बिगड़ती है या कोई अप्रिय घटना होती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और स्थानीय प्रशासन की होगी। खबर लिखे जाने तक इस मामले में प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है।

तिहरे हत्याकांड के 5 दोषियों को आजीवन कारावास, कोर्ट परिसर में फूटा परिजनों का गुस्सा

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 धमतरी (छत्तीसगढ़)। बहुचर्चित भोयना तिहरे हत्याकांड में बुधवार को अदालत ने अपना बड़ा फैसला सुनाया। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश मोहन सिंह कोर्राम की अदालत ने मामले में सुनवाई करते हुए सभी 5 वयस्क दोषियों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है। कोर्ट के इस फैसले के बाद मृतकों के परिजनों का आक्रोश भड़क उठा और उन्होंने परिसर में ही आरोपियों पर चप्पलें बरसा दीं।


परिजनों का छलका दर्द: आरोपियों पर बरसाईं चप्पलें

फैसले के तुरंत बाद जब पुलिसकर्मी दोषियों को अदालत कक्ष से बाहर ला रहे थे, तब मृतकों के परिजन रोते-बिलखते हुए उन पर टूट पड़े। "हमारा घर उजाड़कर तुम्हें क्या मिला?" कहते हुए परिजनों ने आरोपियों पर चप्पलों से हमला कर दिया। स्थिति को बिगड़ता देख पुलिसकर्मियों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोषियों को सुरक्षा घेरे में लिया और पुलिस वाहन में बैठाकर मौके से रवाना किया।

मामूली विवाद में गई थी 3 लोगों की जान

यह सनसनीखेज वारदात 11 अगस्त 2025 की रात ग्राम भोयना स्थित अन्नपूर्णा ढाबा के पास हुई थी। मामूली बात पर शुरू हुए विवाद के बाद हुए खूनी हमले में रायपुर निवासी आलोक सिंह ठाकुर, नितिन टांडी और सुरेश हियाल की बेदर्दी से हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने मामले की तफ्तीश करते हुए कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिनमें से 3 नाबालिग थे। सुनवाई पूरी होने पर अदालत ने 5 वयस्क आरोपियों को हत्या, बलवा, मारपीट और अवैध हथियार रखने का दोषी पाया। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।

"डेढ़ साल की बेटी आज भी चॉकलेट लाने का इंतजार करती है"

अभियोजन पक्ष की ओर से दोषियों के लिए फांसी (मृत्युदंड) की मांग की गई थी, लेकिन फांसी की सजा न मिलने से परिजन बेहद आहत नज़र आए। मृतक नितिन की पत्नी ने कहा कि उनके दो छोटे-छोटे बच्चे हैं और उन्हें उम्मीद थी कि हत्यारों को फांसी की सजा मिलेगी।

वहीं मृतक सुरेश की पत्नी अंजू भावुक होकर रो पड़ीं। उन्होंने कहा, "मेरी डेढ़ साल की बेटी आज भी टकटकी लगाए दरवाजे की तरफ देखती है। उसे लगता है कि उसके पापा अभी चॉकलेट लेकर वापस आएंगे।"

हाईकोर्ट में अपील करेंगे परिजन

निचली अदालत के फैसले से असंतुष्ट परिजनों ने साफ किया है कि न्याय की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। परिजनों का कहना है कि वे दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा (फांसी) दिलाने के लिए उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) में फैसले के खिलाफ अपील करेंगे।

केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने की तैयारी, लोकसभा से बिल पास; अब राज्यसभा की बारी

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नई दिल्ली- केरल के नाम को बदलकर ‘केरलम’ करने की प्रक्रिया अब एक महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है। Kerala (Alteration of Name) Bill, 2026 को लोकसभा ने 11 अगस्त 2026 को पारित कर दिया। अब यह विधेयक राज्यसभा में विचार और पारित होने के लिए रखा जा रहा है। विधेयक के कानून बनने के बाद संविधान की प्रथम अनुसूची में राज्य का नाम ‘Kerala’ से बदलकर ‘Keralam’ किया जाएगा।

क्यों बदला जा रहा है केरल का नाम?

‘केरलम’ नाम मलयालम भाषा में राज्य के प्रचलित नाम से जुड़ा है। केरल विधानसभा ने 24 जून 2024 को राज्य का नाम ‘Kerala’ से ‘Keralam’ करने के लिए प्रस्ताव पारित किया था। इसके बाद राज्य सरकार ने केंद्र से संविधान में आवश्यक संशोधन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का अनुरोध किया।

केंद्र सरकार की ओर से फरवरी 2026 में इस नाम परिवर्तन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। इसके बाद संवैधानिक प्रक्रिया के तहत विधेयक को संसद में लाने का रास्ता साफ हुआ।

लोकसभा से पारित हुआ बिल

Kerala (Alteration of Name) Bill, 2026 को लोकसभा ने 11 अगस्त को पारित किया। रिपोर्टों के मुताबिक, उस दिन सदन में विपक्ष के विरोध और हंगामे के बीच विधेयक पारित हुआ और इस पर विस्तृत बहस नहीं हो सकी।

अब विधेयक की अगली मंजिल राज्यसभा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा इसे राज्यसभा में विचार और पारित करने के लिए पेश किए जाने का कार्यक्रम है।

क्या ‘केरलम’ नाम तुरंत लागू हो जाएगा?

नहीं। केवल लोकसभा से बिल पास होने के बाद नाम आधिकारिक रूप से नहीं बदलता। इसे संसद के दोनों सदनों से पारित होना और इसके बाद संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है।

संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत किसी राज्य के नाम में परिवर्तन के लिए संसद द्वारा कानून बनाया जाता है। इसी प्रक्रिया के तहत ‘Kerala (Alteration of Name) Bill, 2026’ लाया गया है।

इसलिए फिलहाल खबर को ‘केरल का नाम बदलकर केरलम करने की प्रक्रिया’ के रूप में देखना अधिक सही है, न कि यह कहना कि राज्य का नाम आधिकारिक तौर पर बदल चुका है।

‘केरल’ से ‘केरलम’ क्यों महत्वपूर्ण है?

‘केरलम’ मलयालम में राज्य के स्थानीय नाम को दर्शाता है। नाम परिवर्तन के समर्थकों का तर्क है कि आधिकारिक नाम को स्थानीय भाषाई पहचान के अनुरूप किया जाना चाहिए।

केरल विधानसभा द्वारा 2024 में पारित प्रस्ताव भी इसी मांग पर आधारित था। केंद्र सरकार के दस्तावेजों में भी यह दर्ज है कि राज्य सरकार ने संविधान की प्रथम अनुसूची में नाम बदलने का अनुरोध किया था।

आगे क्या होगा?

अब सबसे महत्वपूर्ण चरण राज्यसभा में विधेयक का पारित होना है। यदि राज्यसभा भी इसे मंजूरी देती है और आगे की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होती है, तभी ‘Kerala’ की जगह ‘Keralam’ आधिकारिक नाम के रूप में लागू होगा।

नाम परिवर्तन के बाद सरकारी दस्तावेजों, संवैधानिक संदर्भों और विभिन्न आधिकारिक रिकॉर्ड में आवश्यक बदलाव किए जाने की प्रक्रिया भी शुरू होगी।

क्या बदलेगा?

नाम परिवर्तन लागू होने के बाद मुख्य रूप से—

  • राज्य का आधिकारिक नाम Kerala से Keralam होगा।

  • संविधान की प्रथम अनुसूची में आवश्यक संशोधन किया जाएगा।

  • केंद्र और राज्य सरकार के आधिकारिक दस्तावेजों में नाम को अपडेट किया जाएगा।

  • सरकारी रिकॉर्ड, वेबसाइटों और अन्य आधिकारिक संदर्भों में चरणबद्ध तरीके से बदलाव किए जा सकते हैं।

एक नजर में पूरी खबर

राज्य: केरल
प्रस्तावित नया नाम: केरलम (Keralam)
राज्य विधानसभा का प्रस्ताव: 24 जून 2024
केंद्र की मंजूरी: फरवरी 2026
लोकसभा से बिल पास: 11 अगस्त 2026
अगला चरण: राज्यसभा में विचार और पारित होना

निष्कर्ष

केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने की प्रक्रिया अब संसद के महत्वपूर्ण चरण में पहुंच चुकी है। लोकसभा से विधेयक पारित होने के बाद अब राज्यसभा की मंजूरी महत्वपूर्ण होगी। यदि संसद की प्रक्रिया पूरी होती है, तो केरल को आधिकारिक रूप से ‘केरलम’ नाम मिल सकता है।

यह बदलाव केवल नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि राज्य की भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को आधिकारिक स्वरूप देने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।

साइबर ठगी पर केंद्र सरकार का बड़ा एक्शन: 3,718 फर्जी ऐप्स ब्लॉक, 15.75 लाख से ज्यादा SIM और 5.77 लाख IMEI पर कार्रवाई

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नई दिल्ली- देश में बढ़ते साइबर अपराध और डिजिटल ठगी के खिलाफ केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने साइबर फ्रॉड से जुड़े 3,718 फर्जी और संदिग्ध मोबाइल ऐप्स को ब्लॉक कर दिया है। इसके साथ ही देशभर में 15.75 लाख से अधिक संदिग्ध SIM कार्ड और 5.77 लाख मोबाइल डिवाइस के IMEI नंबर भी ब्लॉक किए गए हैं।

सरकार की इस कार्रवाई का उद्देश्य साइबर अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे डिजिटल नेटवर्क को कमजोर करना और आम लोगों को ऑनलाइन ठगी से बचाना है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, इन कदमों के जरिए ₹11,158 करोड़ से अधिक की संभावित साइबर ठगी को रोकने में मदद मिली है।

3,718 संदिग्ध ऐप्स पर लगा प्रतिबंध

डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराधी भी ठगी के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। फर्जी लोन ऐप, निवेश के नाम पर ठगी, फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और अन्य संदिग्ध ऐप्स के माध्यम से लोगों से पैसे ऐंठने की शिकायतें सामने आती रही हैं।

इन्हीं शिकायतों और विभिन्न पुलिस रिपोर्टों के आधार पर केंद्र सरकार ने 3,718 फर्जी या संदिग्ध मोबाइल ऐप्स को ब्लॉक किया है। रिपोर्ट के अनुसार, इन ऐप्स को साइबर अपराध से जुड़े इनपुट और शिकायतों के आधार पर कार्रवाई के दायरे में लाया गया।

15.75 लाख से ज्यादा SIM कार्ड ब्लॉक

साइबर अपराधियों के लिए मोबाइल नंबर एक महत्वपूर्ण माध्यम होते हैं। फर्जी पहचान या गलत दस्तावेजों के आधार पर जारी SIM कार्ड का इस्तेमाल OTP फ्रॉड, बैंकिंग ठगी, फर्जी कॉल और अन्य साइबर अपराधों में किया जा सकता है।

सरकार ने ऐसे संदिग्ध मोबाइल कनेक्शनों पर भी बड़ी कार्रवाई की है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 15.75 लाख से अधिक SIM कार्ड ब्लॉक किए गए हैं। इससे साइबर अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे मोबाइल नंबरों के नेटवर्क को रोकने में मदद मिलने की उम्मीद है।

5.77 लाख IMEI नंबर भी किए गए ब्लॉक

सिर्फ SIM कार्ड पर कार्रवाई करने के साथ सरकार ने मोबाइल डिवाइस के स्तर पर भी कदम उठाया है। रिपोर्ट के मुताबिक 5.77 लाख IMEI नंबरों को ब्लॉक किया गया है।

IMEI यानी International Mobile Equipment Identity एक विशिष्ट नंबर होता है, जो मोबाइल डिवाइस की पहचान में मदद करता है। किसी डिवाइस का IMEI ब्लॉक होने के बाद उस डिवाइस को मोबाइल नेटवर्क पर इस्तेमाल करना मुश्किल हो जाता है।

इस तरह सरकार ने साइबर अपराध के खिलाफ ऐप, SIM और मोबाइल डिवाइस—तीनों स्तरों पर कार्रवाई की है।

₹11,158 करोड़ से ज्यादा की संभावित ठगी रोकी गई

सरकार की इस कार्रवाई का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसका आर्थिक प्रभाव है। रिपोर्टों के अनुसार, विभिन्न साइबर सुरक्षा उपायों और कार्रवाई के चलते ₹11,158 करोड़ से अधिक की संभावित ठगी को रोका जा सका।

यह आंकड़ा बताता है कि साइबर अपराध अब केवल व्यक्तिगत स्तर की समस्या नहीं है, बल्कि यह देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था और वित्तीय सुरक्षा के लिए भी बड़ी चुनौती बन चुका है।

साइबर अपराधियों के डिजिटल नेटवर्क पर शिकंजा

साइबर ठगी करने वाले अपराधी अक्सर एक साथ कई डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करते हैं। फर्जी मोबाइल नंबर से कॉल करना, संदिग्ध ऐप डाउनलोड करवाना, लिंक भेजना, OTP हासिल करना और बैंक खातों से रकम निकालना जैसे तरीके साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल किए जाते हैं।

ऐसे में केवल किसी एक नंबर या ऐप को ब्लॉक करना पर्याप्त नहीं होता। सरकार द्वारा SIM कार्ड और IMEI नंबरों पर भी कार्रवाई किए जाने से अपराधियों के पूरे डिजिटल नेटवर्क को बाधित करने की कोशिश की जा रही है।

‘मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल’ से पीड़ितों को राहत की कोशिश

साइबर ठगी के मामलों में कार्रवाई के साथ-साथ ठगी गई रकम को वापस दिलाने पर भी सरकार का ध्यान है। रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2026 से ‘मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल’ शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य साइबर ठगी के पीड़ितों की रकम की रिकवरी में मदद करना है।

यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि साइबर फ्रॉड के बाद पीड़ित के लिए केवल अपराधी को पकड़ना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि ठगी गई राशि को वापस पाना भी बड़ी चुनौती होती है।

आम लोगों के लिए क्या है संदेश?

सरकार की कार्रवाई के बावजूद साइबर ठगी से बचने के लिए आम नागरिकों को भी सतर्क रहना जरूरी है। किसी अनजान व्यक्ति को OTP, PIN, पासवर्ड या बैंकिंग जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने या अनजान ऐप डाउनलोड करने से भी बचना चाहिए।

निवेश, लोन, नौकरी, KYC अपडेट या किसी सरकारी योजना के नाम पर आने वाले संदिग्ध संदेशों और कॉल की पहले पुष्टि करना जरूरी है।

सरकार की कार्रवाई के प्रमुख आंकड़े

                     कार्रवाईसंख्या
  • ब्लॉक किए गए फर्जी/संदिग्ध ऐप्स
  • 3,718
  • ब्लॉक किए गए SIM कार्ड
  • 15.75 लाख+
  • ब्लॉक किए गए IMEI नंबर
  • 5.77 लाख
  • संभावित साइबर ठगी से बचाई गई राशि
  • ₹11,158 करोड़+

निष्कर्ष

डिजिटल लेन-देन और ऑनलाइन सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के बीच साइबर अपराध भी तेजी से चुनौती बन रहा है। ऐसे समय में केंद्र सरकार द्वारा 3,718 ऐप्स, 15.75 लाख से अधिक SIM कार्ड और 5.77 लाख IMEI नंबरों पर कार्रवाई साइबर अपराध के डिजिटल ढांचे पर बड़े स्तर की कार्रवाई को दर्शाती है।

अब चुनौती यह है कि साइबर अपराधियों के नए तरीकों पर लगातार नजर रखी जाए और आम लोगों को भी डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाए। सरकार की कार्रवाई के साथ नागरिकों की सतर्कता ही ऑनलाइन ठगी के खिलाफ सबसे मजबूत सुरक्षा बन सकती है।

छत्तीसगढ़ में हिरासत में मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, CBI करेगी जांच; परिजनों को ₹25 लाख अंतरिम मुआवजे का आदेश

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नई दिल्ली/छत्तीसगढ़- छत्तीसगढ़ में 34 वर्षीय व्यक्ति की कथित हिरासत में हुई मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बड़ा हस्तक्षेप करते हुए जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने का आदेश दिया। सर्वोच्च अदालत ने मामले में राज्य पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि मौत के बाद FIR दर्ज करने में करीब दो साल की देरी हुई। कोर्ट ने मृतक के परिवार को राहत देते हुए छत्तीसगढ़ सरकार को ₹25 लाख का अंतरिम मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है।

क्या है पूरा मामला?

मामला छत्तीसगढ़ में एक 34 वर्षीय व्यक्ति की पुलिस हिरासत के दौरान हुई मौत से जुड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने व्यक्ति को 18 जनवरी 2024 को उसकी किराना दुकान के बाहर कथित रूप से शराब बिक्री के आरोप में हिरासत में लिया था। इसके बाद उसकी मौत हो गई। मामले में मृतक के परिवार की ओर से हिरासत के दौरान उसके साथ हिंसा किए जाने के आरोप लगाए गए थे।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पहले हाई कोर्ट में भी सुनवाई हुई थी। रिपोर्टों के मुताबिक, हाई कोर्ट के सामने यह तथ्य आया कि मृतक परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था और उसकी मौत असामान्य परिस्थितियों में हुई थी। राज्य की ओर से इन निष्कर्षों पर विवाद नहीं किया गया।

FIR दर्ज करने में दो साल की देरी पर सुप्रीम कोर्ट नाराज

सुप्रीम कोर्ट ने मामले में सबसे गंभीर सवाल FIR दर्ज करने में हुई देरी को लेकर उठाया। अदालत ने इस बात पर सवाल किया कि हिरासत में मौत जैसी गंभीर घटना के बावजूद राज्य पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करने में लगभग दो साल का समय क्यों लिया।

सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी ने पुलिस कार्रवाई और जांच की निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अदालत ने इसी पृष्ठभूमि में मामले की जांच राज्य पुलिस से हटाकर CBI को सौंपने का फैसला किया।

CBI अब करेगी पूरे मामले की जांच

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब मामले की जांच CBI करेगी। रिपोर्टों के अनुसार, CBI को नियमित आपराधिक मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाने और वरिष्ठ अधिकारी के माध्यम से जांच कराने का निर्देश दिया गया है।

मामले की प्रगति पर CBI को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रिपोर्ट भी प्रस्तुत करनी होगी। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में अगली महत्वपूर्ण रिपोर्टिंग/सुनवाई 13 अक्टूबर को होनी है।

CBI जांच का उद्देश्य हिरासत में मौत से जुड़े पूरे घटनाक्रम, पुलिस की भूमिका, हिरासत के दौरान कथित हिंसा तथा FIR दर्ज करने में हुई देरी जैसे पहलुओं की निष्पक्ष जांच करना होगा।

परिवार को ₹25 लाख की अंतरिम राहत

सुप्रीम कोर्ट ने मृतक के परिवार को आर्थिक राहत देते हुए छत्तीसगढ़ सरकार को ₹25 लाख का अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह फिलहाल अंतरिम राहत है और मामले की सुनवाई के दौरान अंतिम मुआवजे की राशि पर आगे निर्णय लिया जा सकता है।

यह राहत विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अदालत के समक्ष यह बात सामने आई कि मृतक परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था। उसकी मृत्यु के बाद परिवार को आर्थिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

हिरासत में मौत के मामलों में जवाबदेही का सवाल

सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश केवल एक मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि पुलिस हिरासत में नागरिकों के अधिकारों और राज्य की जवाबदेही से जुड़े व्यापक सवालों को भी सामने लाता है।

किसी व्यक्ति की हिरासत के दौरान मौत होने पर जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होना बेहद जरूरी है। ऐसे मामलों में परिवार को समय पर न्याय मिलना और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होना कानून के शासन में जनता के विश्वास के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

इस मामले में FIR दर्ज करने में हुई कथित लंबी देरी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा गंभीरता से लिया जाना भी इसी जवाबदेही के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।

अब आगे क्या होगा?

CBI अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार मामले की जांच आगे बढ़ाएगी। जांच में हिरासत से जुड़े रिकॉर्ड, पुलिस की कार्रवाई, मेडिकल एवं अन्य उपलब्ध साक्ष्यों तथा उस दौरान हुई घटनाओं की जांच की जा सकती है।

जांच पूरी होने के बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि हिरासत के दौरान वास्तव में क्या हुआ और किन परिस्थितियों में व्यक्ति की मौत हुई। यदि जांच में किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति की आपराधिक भूमिका सामने आती है, तो उसके आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के प्रमुख बिंदु

  • 34 वर्षीय व्यक्ति की कथित हिरासत में मौत के मामले की जांच अब CBI करेगी।

  • राज्य पुलिस द्वारा FIR दर्ज करने में करीब दो साल की देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए।

  • छत्तीसगढ़ सरकार को मृतक के परिवार को ₹25 लाख अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश।

  • अंतिम मुआवजे की राशि पर बाद में निर्णय लिया जा सकता है।

  • CBI को मामले की निष्पक्ष जांच कर आगे की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।

  • मामले की जांच अब राज्य पुलिस के बजाय केंद्रीय एजेंसी की निगरानी में आगे बढ़ेगी।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ के इस हिरासत में मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट का CBI जांच का आदेश और ₹25 लाख अंतरिम मुआवजे का निर्देश पीड़ित परिवार के लिए महत्वपूर्ण न्यायिक राहत है। साथ ही, FIR दर्ज करने में हुई देरी पर अदालत की नाराजगी पुलिस व्यवस्था में जवाबदेही और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

अब सभी की नजर CBI की जांच पर रहेगी। जांच से सामने आने वाले तथ्य यह तय करने में अहम होंगे कि हिरासत में हुई मौत के लिए जिम्मेदारी किसकी थी और क्या इस मामले में किसी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जरूरत है।

जीजामगांव के नवीन आईटीआई में शुरू हुआ ‘मैकेनिक इलेक्ट्रिक व्हीकल’ ट्रेड; युवाओं के लिए रोजगार के खुलेंगे नए द्वार

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बदलती तकनीक और हरित परिवहन की जरूरतों के अनुरूप युवाओं को मिलेगा आधुनिक एवं उद्योग-आधारित प्रशिक्षण

ऑनलाइन प्रवेश पंजीयन प्रक्रिया शुरू

रायपुर- छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में युवाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। नवीन शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था (आईटीआई), जीजामगांव में सत्र 2026-27 से पहली बार मैकेनिक इलेक्ट्रिक व्हीकल ट्रेड का प्रथम बैच प्रारंभ किया गया है। यह इस संस्था का भी पहला प्रशिक्षण सत्र होगा। इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में हो रहे तकनीकी बदलावों को देखते हुए यह ट्रेड युवाओं के लिए करियर की दृष्टि से बेहद अहम साबित होगा।

दो वर्षीय पाठ्यक्रम और आधुनिक प्रशिक्षण

मैकेनिक इलेक्ट्रिक व्हीकल दो वर्षीय पाठ्यक्रम है। इसमें प्रशिक्षणार्थियों को इलेक्ट्रिक वाहन तकनीक के साथ-साथ बैटरी प्रबंधन प्रणाली (BMS), मोटर कंट्रोल, चार्जिंग सिस्टम, वाहन सर्विसिंग और फॉल्ट डायग्नोसिस जैसी आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक एवं उद्योग-आधारित प्रशिक्षण दिया जाएगा। वर्तमान में यह ट्रेड छत्तीसगढ़ के चुनिंदा 5 शासकीय आईटीआई संस्थानों में ही संचालित है, जिससे जीजामगांव आईटीआई में इसकी शुरुआत जिले के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

रोजगार व स्वरोजगार के बेहतर अवसर

ई-व्हीकल के बढ़ते चलन से अधिकृत सर्विस सेंटरों, ई-व्हीकल निर्माण कंपनियों, चार्जिंग स्टेशनों और बैटरी से संबंधित सेवा इकाइयों में प्रशिक्षित तकनीशियनों की मांग तेजी से बढ़ेगी। इसके अलावा, प्रशिक्षित युवा खुद का सर्विस सेंटर या तकनीकी सेवा शुरू कर स्वरोजगार भी स्थापित कर सकेंगे।

क्षेत्र का तेजी से हो रहा विकास

जीजामगांव क्षेत्र में फॉरेस्ट पार्क, फूड पार्क सहित विभिन्न विकास एवं आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। हाल ही में कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने नवीन आईटीआई भवन के लिए चिह्नित भूमि का निरीक्षण भी किया था। जिला धमतरी की नोडल संस्था शासकीय आईटीआई कुरूद के प्राचार्य योगेश देवांगन ने विद्यार्थियों एवं अभिभावकों से अपील की है कि वे इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में बढ़ती संभावनाओं का लाभ उठाने के लिए इस नवीन ट्रेड में प्रवेश लें।

प्रवेश प्रक्रिया और अन्य सौगातें

आईटीआई में प्रवेश के लिए ऑनलाइन पंजीयन एवं चॉइस फिलिंग की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इच्छुक अभ्यर्थी निर्धारित तिथि तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, जिसके बाद मेरिट के आधार पर प्रवेश दिया जाएगा। अधिक जानकारी के लिए शासकीय आईटीआई कुरूद से संपर्क किया जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष 23 सितंबर को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ग्राम करेली बड़ी में आयोजित समारोह में जिले के लिए 83 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की घोषणा की थी, जिसमें जीजामगांव में नवीन आईटीआई की स्थापना भी शामिल थी।


बस्तर तिरंगा यात्रा में शामिल होंगे उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप

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 रायपुर : स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बस्तर अंचल में राष्ट्रभक्ति, शांति और विकास का संदेश लेकर ‘बस्तर तिरंगा यात्रा 2026’ का आयोजन किया जा रहा है। 13 अगस्त को सुकमा जिले में होने वाली इस तिरंगा यात्रा में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन एवं जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप भी शामिल होंगे।


राष्ट्रभक्ति, राष्ट्रीय एकता और गौरव की भावना को जन-जन तक पहुंचाना है

मोटरसाइकिलों के माध्यम से आयोजित यह यात्रा बस्तर के उन गांवों और क्षेत्रों तक पहुंचेगी, जो कभी नक्सल हिंसा से प्रभावित थे और अब शांति, सुरक्षा और विकास की नई राह पर आगे बढ़ रहे हैं। ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत इस यात्रा का उद्देश्य राष्ट्रभक्ति, राष्ट्रीय एकता और गौरव की भावना को जन-जन तक पहुंचाना है।

सुकमा के दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचेगी यात्रा

13 अगस्त को तिरंगा यात्रा चिंगावरम, सुकमा, एर्राबोर, मनीकोंटा, दोरनापाल, पोलमपल्ली, बुर्कापाल, मिनपा-टाड़मेटला, चिंतलनार, जगरगुंडा, सिलगेर और टेकलगुड़ेम होते हुए आवापल्ली और बीजापुर पहुंचेगी। बीजापुर में रात्रि विश्राम किया जाएगा।

बस्तर अब विश्वास, शांति और विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है

यात्रा का उद्देश्य बस्तर की बदलती तस्वीर को देश-दुनिया के सामने लाना, युवाओं को राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से जोड़ना और नक्सल हिंसा में शहीद हुए वीर जवानों एवं नागरिकों के सर्वाेच्च बलिदान को नमन करना है। यात्रा के माध्यम से यह संदेश दिया जाएगा कि बस्तर अब विश्वास, शांति और विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। साथ ही तिरंगे और संविधान के प्रति सम्मान का संदेश भी दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाया जाएगा।

महिला बाइकर्स भी होंगी शामिल

बस्तर तिरंगा यात्रा में महिला बाइकर्स की विशेष भागीदारी रहेगी। प्रत्येक जिले से बड़ी संख्या में बाइक राइडर शामिल होंगे। महिला बाइकर्स तिरंगा लेकर यात्रा का हिस्सा बनेंगी। यात्रा में स्थानीय युवा, स्वयंसेवी संगठन, महिला समूह, एनसीसी, एनएसएस, नेहरू युवा केंद्र, स्काउट-गाइड और जनप्रतिनिधि भी भाग लेंगे।

‘एक पेड़ शहीदों के नाम’ अभियान के तहत होगा पौधरोपण

यात्रा के दौरान प्रत्येक शहीद स्थल पर ‘एक पेड़ शहीदों के नाम’ अभियान के तहत जितने लोग शहीद हुए हैं, उतने ही पौधे लगाए जाएंगे। इसके अलावा युवाओं, विद्यार्थियों और खेल प्रतिभाओं से संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। नशामुक्ति और साइबर सुरक्षा के प्रति भी लोगों को जागरूक किया जाएगा।

 

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