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कर्रेगुट्टा पर पहुंची बस्तर तिरंगा यात्रा, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने फहराया तिरंगा

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मेरे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण दिन -  शर्मा

बस्तर में नक्सलवाद समाप्ति के बाद जन मन के भय और भ्रम को दूर करने के लिए 3 दिन की तिरंगा यात्रा पर निकले उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा

कर्रेगुट्टा पर विजय के प्रतीक के रूप में तिरंगा लहराकर यात्रा का हुआ समापन

यात्रा के अंतिम दिन यात्रा बीजापुर से निकल पहुंची आवापल्ली, गलगम, उसूर, नम्बी, ताड़पाला, कर्रेगुट्टा

रायपुर- बस्तर तिरंगा यात्रा के तीसरे दिन उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, सांसद महेश कश्यप एक बार फिर उसी जोश के साथ शुरुआत की। बीजापुर से निकल कर आवापल्ली, गलगम, उसूर, नम्बी, ताड़पाला होते हुए अपनी 600 किमी की यात्रा का समापन कर्रेगुट्टा की पहाड़ी पर झंडा फहराकर किया। मंत्री द्वय ने 3 दिनों में नारायणपुर, कोंडागांव, सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर इन 5 जिलों में लगभग 600 किमी की  तिरंगा यात्रा बाइक से पूर्ण की।

यात्रा के अंतिम दिन करेगुट्टा की पहाड़ी पर जवानों से मिलकर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा व केबिनेट मंत्री केदार कश्यप ने शहीदों की याद में वृक्षारोपण किया उसके बाद स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या में ध्वजारोहण किया । आज वह सपना पूरा हुआ जो हमने देखा था। आज बस्तर की जनता जीत गई, यहां के लोग जीत गए, एर्राबोर की कट्टम ज्योति जीत गई शहीद जवानों का अदम्य पराक्रम जीत गया और नक्सली हार गए। बस्तर की धरती पर नक्सलवाद के सफाए का संकल्प साकार हो रहा है। यह उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर झंडा फहराकर यह बातें जवानों से कही।

उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा की यह मेरे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण दिन है मैं नक्सलियों के सबसे सुरक्षित गढ़ रहे स्थान में आप के सानिध्य में झंडा फहरा रहा हु।  लोग कहते है मंत्री जी सैनिकों का मनोबल बढ़ाने कैम्प जाते है। वास्तविकता यह है कि  मै तो आप से ऊर्जा प्राप्त करने आता हूं। उन्होंने कहा कि जवानों किं हिम्मत को सम्मानित करते हुए केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के 141 पुलिस जवानों को विशिष्ठ सेवा व सरहनीय सेवा पदक से सम्मानित किया है।

बस्तर के लोगों के मन में भय पहले ही खत्म हो गया था बचा हुआ बस्तर तिरंगा यात्रा ने खत्म कर दिया है। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या में आज देश के कोने कोने में तिरंगा फहर रहा है। तिरंगे के साथ बाबा साहब द्वारा लिखा संविधान भी बस्तर के हर कोने में लागू हो रहा है। बस्तर में अभी बहुत से काम करने बचे हैं, बस्तर का विकास कर आ है पर यह होगा बस्तर की लय पर, बस्तर आगे बढ़े यही हमारी कामना है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बस्तर को सबसे समृद्ध स्थान बनाएंगे।

वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा की हमने कभी सोचा नहीं था कि कभी हम ऐसे इस  कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर आ सकेंगे, पर आज पहाड़ी में बिना किसी डर के खड़े हैं, यह हमारा सौभाग्य है। बस्तर तिरंगा यात्रा जिस मार्ग से होकर गुजरी है उस मार्ग पर दिन में लोग आने से डरते थे आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन से ही संभव हो पाया है। 

सांसद महेश कश्यप ने कहा कि तिरंगे का संदेश लेकर सुकमा में 600 किमी की यात्रा करना अपने आप में ऐतिहासिक अवसर है। आजादी के 79 वर्ष बाद पहली बार इन क्षेत्रों में तिरंगा पूरे सम्मान और शान के साथ लहरा रहा है। तिरंगा शांति, बलिदान, हरियाली के साथ पराक्रम का भी संदेश देता है।

मंत्री द्वय एवं सांसद ने आवापल्ली, गलगम, उसूर, नम्बी, ताड़पाला, कर्रेगुट्टा पहाड़ी सभी जगह हुई घटनाओं में शहीदों की याद में पौधारोपण किया और शहीदों के शहादत की मिट्टी को संग्रहीत किया। शहीदों के परिजनों एवं ग्रामीणों से मुलाकात की। कर्रेगुट्टा के रास्ते में सभी बड़े से लेकर बच्चों ने सभी ने यात्रा का आत्मीय स्वागत किया, बच्चों ने भारत माता की जय, तिरंगे की जय के गगनचुंबी नारों से पूरा माहौल राष्ट्रभक्ति से ओत प्रोत कर दिया।

इस अवसर पर चैतराम अटामी और पूर्व विधायक महेश गागड़ा एवं बड़ी संख्या में युवा भी उपस्थित रहे

देर रात मंत्री पहुंचे टेकलगुडेम

यात्रा के दूसरे दिन देर शाम 9 बजे उप मुख्यमंत्री शर्मा और वन मंत्री  कश्यप कभी घोर नक्सल पीड़ित इलाके माने जाने वाले टेकलगुडेम पहुंचे थे, जहां आश्चर्य यह था कि वहां कुख्यात नक्सलवादी रहे हिड़मा के ग्राम पूवर्ती से भी लोग उनका स्वागत करने पहुंचे थे। सभी का प्यार देखकर वे बहुत खुश हुए। सभी ने तिरंगा हाथ में लेकर बस्तर तिरंगा यात्रा का अभिवादन किया। इसी तरह भारी बारिश के बाद भी सिलगेर, ताड़मेटला, तर्रेम, जगरगुंडा के ग्रामीण देर शाम तक उनके स्वागत के लिए मार्ग में पहुंच रहे थे। इन सुदूर क्षेत्रों में उप मुख्यमंत्री, वन मंत्री एवं सांसद को देखने कर लोगों का उत्साह देखने को मिल रहा था, पूरी यात्रा सभी से मिलते हुए शुक्रवार रात में वापस बीजापुर पहुंचे।

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ पुलिस के 152 अधिकारी और जवान होंगे सम्मानित

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रायपुर- स्वतंत्रता दिवस के मौके पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पुलिस पदकों की घोषणा की है। इस बार छत्तीसगढ़ पुलिस के 152 अधिकारी और जवान अलग-अलग श्रेणियों में सम्मानित होंगे। इनमें 141 को वीरता पदक, 10 को सराहनीय सेवा पदक और 1 अधिकारी को विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक दिया जाएगा।

स्वतंत्रता दिवस 2026 से पहले छत्तीसगढ़ पुलिस के लिए बड़ी उपलब्धि सामने आई है. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 141 वीरता पदकों की घोषणा की है, जो देश में सबसे ज्यादा हैं। डीआईजी एमएल कोटवानी को विशिष्ट सेवाओं के लिए राष्ट्रपति पदक मिलेगा, जबकि गायत्री सिंह, दीपमाला कश्यप, अर्चना झा, डीएसपी सविता परिहार, सहित 10 अधिकारियों को राष्ट्रपति का सराहनीय सेवा पदक से सम्मानित किया गया है इन सभी अधिकारियों को 26 जनवरी 2027 को पदक मिलेगा। सूची संलग्न हैः-

स्वतंत्रता दिवस 2026 पर छत्तीसगढ़ पुलिस के पदक विजेताओं की सूची

भारत सरकार, गृह मंत्रालय, नई दिल्ली से प्राप्त जानकारी के अनुसार स्वतंत्रता दिवस 2026 के अवसर पर महामहिम राष्ट्रपति द्वारा छत्तीसगढ़ पुलिस के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को राष्ट्रपति का वीरता पदक, विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक एवं सराहनीय सेवाओं के लिए पदक से सम्मानित किए जाने की घोषणा की गई है।

1. राष्ट्रपति का वीरता पदक

वरिष्ठ अधिकारी एवं पुलिस अधिकारी

  1. रॉबिनसन गुड़िया — अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, नारायणपुर; वर्तमान में DCP रायपुर

  2.  विनय कुमार — उप पुलिस अधीक्षक, नारायणपुर; वर्तमान में SDOP बेरला, जिला बेमेतरा

  3. सोहन लाल — उप पुलिस अधीक्षक, STF

  4.  महंथ कुमार — उप पुलिस अधीक्षक, STF

  5. उप निरीक्षक हरिशंकर प्रसाद ध्रुव — नारायणपुर

  6. प्लाटून कमांडर भूपेंद्र बघेल — STF

  7. सहायक प्लाटून कमांडर गजराज सिंह राठावत — STF

  8. सउनि राजूराम नेताम — नारायणपुर

  9. प्रधान आरक्षक 129 लछमन कुमार — नारायणपुर

  10. प्रधान आरक्षक 564 हरि दुग्गा — नारायणपुर

  11. प्रधान आरक्षक 615 चंदन सिंह भोयर — नारायणपुर

  12. प्रधान आरक्षक 471 उजियार सिंह नुरेटी — नारायणपुर

  13. प्रधान आरक्षक 77 सुकनाथ नुरेटी — नारायणपुर

  14. प्रधान आरक्षक 424 लोमसिंह ध्रुव — नारायणपुर

  15. आरक्षक 313 रामचन्द्र यादव — नारायणपुर

  16. आरक्षक 781 देवप्रसाद दरो — नारायणपुर

  17. आरक्षक 872 बज्जूराम कचलाम — नारायणपुर

  18. बस्तर फाइटर आरक्षक 1046 पीताम्बर दास वैष्णव — नारायणपुर

  19. बस्तर फाइटर आरक्षक 1255 कु. रामबाई पोर्टाई — नारायणपुर

  20. आरक्षक 494 टंकेश पोते — नारायणपुर

  21. आरक्षक 512 धर्मेन्द्र ध्रुव — नारायणपुर

  22. आरक्षक 745 रामधर कुमेटी — नारायणपुर

  23. बस्तर फाइटर आरक्षक 1161 जितेन्द्र कुमार समरथ — नारायणपुर

  24. बस्तर फाइटर आरक्षक 1086 राजेश कुमार — नारायणपुर

  25. आरक्षक 239 अमर पोर्टाई — नारायणपुर

  26. बस्तर फाइटर आरक्षक 1231 कु. ललिता कोर्राम — नारायणपुर

  27. बस्तर फाइटर आरक्षक 1106 सुखदेव वटदा — नारायणपुर

  28. आरक्षक 361 जयसिंह सलाम — नारायणपुर

  29. आरक्षक 668 कोसा राम मरकाम — STF

  30.  स्मृतिक राजनाला — अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, दंतेवाड़ा; वर्तमान में DCP क्राइम, रायपुर

  31. कंपनी कमांडर यादराम बघेल — STF

  32.  प्रशांत देवांगन — उप पुलिस अधीक्षक, नारायणपुर

  33.  राहुल कुमार उईके — उप पुलिस अधीक्षक, दंतेवाड़ा

  34.  लक्ष्मण सिंह पोर्टाई — उप पुलिस अधीक्षक, नारायणपुर; SDOP केसलूर, जिला बस्तर

  35. सउनि नेहरू राम भगत — दंतेवाड़ा

  36. DSF आरक्षक 1497 पिंकी कावड़े — नारायणपुर

  37. आरक्षक 126 मनीष सलाम — नारायणपुर

  38. आरक्षक 1040 जगबंधु जैन — कांकेर

  39. DSF आरक्षक 1395 तीरथ नाग — नारायणपुर

  40. बस्तर फाइटर आरक्षक 1085 कुमार कोवाची — नारायणपुर

  41. बस्तर फाइटर आरक्षक 1096 लालसू राम उसेंडी

  42. आरक्षक 817 अमलूराम मरकाम — नारायणपुर

  43. आरक्षक 718 हीरासिंह धनेवलिया — नारायणपुर

  44. स्व. आरक्षक 876 नितेश एक्का — STF

  45. सउनि सम्पत टांडिया — कांकेर

  46. बस्तर फाइटर स्व. आरक्षक 2295 रमेश कुमार कोरटी — कांकेर

सुकमा जिले के पदक विजेता

  1. प्रधान आरक्षक 973 सोढ़ी रामा — सुकमा

  2. प्रधान आरक्षक 419 सोढ़ी अजय — सुकमा

  3. आरक्षक 2311 बोड्डू लक्ष्मैया — सुकमा

  4. आरक्षक 2264 कट्टम मुत्ता — सुकमा

  5. आरक्षक 2321 सेमल रमेश — सुकमा

  6. आरक्षक 2159 कुहराम रामबाबू — सुकमा

  7. आरक्षक 2353 माड़वी कोसा — सुकमा

  8. आरक्षक 1515 पंडा रोहित — सुकमा

  9. आरक्षक 1656 वेट्टी छोटेलाल — सुकमा

  10. आरक्षक 1617 सोयम जोगा — सुकमा

  11. आरक्षक 1454 करतम लिंगा — सुकमा

  12. आरक्षक 1277 जयसिंह नाग — सुकमा

  13. आरक्षक 204 राजेन्द्र नाग — सुकमा

  14. आरक्षक 456 रामधर कश्यप — सुकमा

  15. आरक्षक 478 माड़वी गंगा — सुकमा

  16. आरक्षक 1088 नुरूम दुल्ला — सुकमा

  17. आरक्षक 251 कवती रामा — सुकमा

  18. आरक्षक 1121 मौसम चंद्रा — सुकमा

  19. नव आरक्षक 399 मड़काम गंगा — सुकमा

  20. आरक्षक 1677 सोढ़ी नरेश — सुकमा

  21. नव आरक्षक 493 मुचाकी देवा — सुकमा

  22. आरक्षक 397 माड़वी मुकेश — सुकमा

  23. आरक्षक 759 मड़काम भीमा — सुकमा

  24. आरक्षक 993 कुंजाम पोदिया — सुकमा

  25. आरक्षक 240 वेट्टी देवा — सुकमा

  26. आरक्षक 1506 सोयम राजू — सुकमा

  27. DSF आरक्षक 2166 सोयम राजू — सुकमा

  28. DSF आरक्षक 2116 माड़वी रमेश — सुकमा

  29. नव आरक्षक 341 सोयम रमेश — सुकमा

  30. आरक्षक 1576 माड़वी कन्ना — सुकमा

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एवं कांकेर के पदक विजेता

  1.  सुन्दरराज पी. — भा.पु.से., पुलिस महानिरीक्षक, बस्तर; वर्तमान में NIA, नई दिल्ली

  2.  इंदिरा कल्याण एलिसेला — भा.पु.से., उप पुलिस महानिरीक्षक, छसबल सरगुजा रेंज

  3.  संदीप पटेल — भा.पु.से., अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक; वर्तमान में पुलिस अधीक्षक, नारायणपुर

  4. डॉ. प्रशांत शुक्ला — अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, कांकेर; वर्तमान में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण, रायपुर

  5.  रवि कुमार कुजूर — अनुविभागीय अधिकारी पुलिस, पखांजूर, कांकेर

  6. उप निरीक्षक रामचन्द्र साहू — कांकेर

  7. उप निरीक्षक संतोष मिश्रा — कांकेर

  8. आरक्षक 454 सुयमकान्त श्रीमाली — कांकेर

  9. आरक्षक 515 श्रीनाथ मतलाम — कांकेर

  10. बस्तर फाइटर आरक्षक 2068 पवन देव साहू — कांकेर

  11. बस्तर फाइटर आरक्षक 2266 रोहित कुमार यादव — कांकेर

  12. DSF आरक्षक 2362 तिजऊ राम मरकाम — कांकेर

  13. आरक्षक 467 अर्जुन ताती — कांकेर

  14. आरक्षक 510 कमलेश मरकाम — कांकेर

  15. आरक्षक 1270 दिनेश कांगे — कांकेर

  16. बस्तर फाइटर आरक्षक 2004 गिरधर शोरी — कांकेर

  17. बस्तर फाइटर आरक्षक 2008 विवेकानंद नेताम — कांकेर

  18. बस्तर फाइटर आरक्षक 2010 ओमेश मंडावी — कांकेर

  19. बस्तर फाइटर आरक्षक 2243 रविन्द्र कुमार साहू — कांकेर

  20. बस्तर फाइटर आरक्षक 2013 तरुण कुमार — कांकेर

  21. बस्तर फाइटर आरक्षक 2001 नन्द कुमार — कांकेर

  22. बस्तर फाइटर आरक्षक 2239 निरंजन मरकाम — कांकेर

  23. बस्तर फाइटर आरक्षक 2181 प्रवीण कोरटी — कांकेर

  24. बस्तर फाइटर आरक्षक 2088 प्रमोद कुमार — कांकेर

  25. बस्तर फाइटर आरक्षक 2133 सोनुराम भास्कर — कांकेर

  26. आरक्षक 933 आत्माराम ध्रुव — कांकेर

  27. बस्तर फाइटर आरक्षक 2252 महेन्द्र कुमार भुआर्य — कांकेर

  28. बस्तर फाइटर आरक्षक 2206 नवल राम मंडावी — कांकेर

  29. बस्तर फाइटर आरक्षक 2242 कामेश्वर कावड़े — कांकेर

  30. बस्तर फाइटर आरक्षक 2079 गुलशन कोर्राम — कांकेर

  31. बस्तर फाइटर आरक्षक 2007 विकास कुमार नेताम — कांकेर

  32. बस्तर फाइटर आरक्षक 2011 पूनम चंद्र — कांकेर

  33. DSF आरक्षक 2305 प्यारे लाल तारम — कांकेर

  34. बस्तर फाइटर आरक्षक 2207 विनय कुमार दुग्गा — कांकेर

  35. बस्तर फाइटर आरक्षक 2244 निलेश कुमार टांडिया — कांकेर

  36. आरक्षक 1161 कृष्णा नेताम — कांकेर

  37. आरक्षक 167 वेदांत कश्यप — कांकेर

  38. आरक्षक 1001 युगल किशोर — कांकेर

  39. आरक्षक 1005 देउ राम — कांकेर

  40. आरक्षक 935 तुलसी राम — कांकेर

  41. आरक्षक 1396 कुमेश कुमार — कांकेर

  42. आरक्षक 1301 नोमेश कुमार नायक — कांकेर

  43. आरक्षक 466 फगनू राम कावड़े — कांकेर

  44. आरक्षक 1365 शोभीराम दुग्गा — कांकेर

  45. बस्तर फाइटर आरक्षक 2226 विश्वनाथ सिन्हा — कांकेर

  46. बस्तर फाइटर आरक्षक 2235 धीरज बंजारे — कांकेर

  47. बस्तर फाइटर आरक्षक 2251 अमरेश पाल — कांकेर

  48. DSF आरक्षक 2329 अर्जुन दरो — कांकेर

  49. DSF आरक्षक 2360 लक्ष्मण नेताम — कांकेर

  50. DSF आरक्षक 2347 भुनेश्वर मरकाम — कांकेर

  51. DSF आरक्षक 2392 सोनुराम कोमरे — कांकेर

  52. बस्तर फाइटर आरक्षक 2012 मंजीत जुरी — कांकेर

  53. बस्तर फाइटर आरक्षक 2085 सुमन कड़िलया — कांकेर

  54. बस्तर फाइटर आरक्षक 2148 संजय नेताम — कांकेर

  55. बस्तर फाइटर आरक्षक 2188 भरत कुमार — कांकेर

  56. बस्तर फाइटर आरक्षक 2216 प्रमोद कुमार — कांकेर

  57. बस्तर फाइटर आरक्षक 2039 अमन मंडावी — कांकेर

  58. बस्तर फाइटर आरक्षक 2023 अमीर कुमार मरकाम — कांकेर

  59. बस्तर फाइटर आरक्षक 2115 अजय कुमार — कांकेर

  60. बस्तर फाइटर आरक्षक 2138 राहुल कुमार सलाम — कांकेर

  61. बस्तर फाइटर आरक्षक 2163 राकेश रावटे — कांकेर

  62. बस्तर फाइटर आरक्षक 2106 विश्वनाथ मंडावी — कांकेर

  63. बस्तर फाइटर आरक्षक 2275 सतीश कुमार यादव — कांकेर

  64. आरक्षक 471 उमेश बेदड़ा — कांकेर

विशिष्ट सेवाओं के लिए राष्ट्रपति पदक

  1.  मोती लाल कोटवानी — पुलिस उप महानिरीक्षक (विशेष शाखा), पुलिस मुख्यालय, रायपुर।

सराहनीय सेवाओं के लिए पदक

  1.  ओम प्रकाश शर्मा — पुलिस अधीक्षक, माननीय मुख्यमंत्री सुरक्षा, रायपुर

  2.  गायत्री सिंह — सहायक पुलिस महानिरीक्षक (ANTF), पुलिस मुख्यालय, नवा रायपुर

  3. डॉ. अर्चना झा — पुलिस उपायुक्त, यातायात एवं प्रोटोकॉल, कमिश्नरेट, रायपुर

  4.  दीपमाला कश्यप — पुलिस उपायुक्त, जोन उत्तर, कमिश्नरेट, रायपुर

  5.  रमा पटेल — उप सेनानी, 4वीं वाहिनी छसबल, माना-रायपुर

  6. ब्रजेश कुमार तिवारी — सहायक सेनानी, 6वीं वाहिनी छसबल, रायगढ़

  7. सविता सिंह परिहार — उप पुलिस अधीक्षक, विशेष शाखा, भिलाई

  8. पिनाकी भट्टाचार्य — निरीक्षक (अ), प्रथम वाहिनी छसबल, भिलाई

  9. राकेश कुमार सिंह — कंपनी कमांडर, STF बघेरा, दुर्ग

  10. नेहरू लाल — प्लाटून कमांडर, STF बघेरा, दुर्ग

पुलिस महानिदेशक ने दी बधाई

पुलिस महानिदेशक द्वारा सभी पदक विजेता अधिकारियों एवं कर्मचारियों तथा उनके परिजनों को हार्दिक शुभकामनाएं दी गई हैं। यह सम्मान छत्तीसगढ़ पुलिस के साहस, समर्पण और उत्कृष्ट सेवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर मिली महत्वपूर्ण पहचान है।

भारत की पारंपरिक चिकित्सा विरासत के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

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राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा विरासत संस्थान (NIIMH), हैदराबाद ने केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS), आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के तहत सेवाधि म्यूजियम एंड इंडोलॉजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (SEMIRI), कुमारनल्लूर, कोट्टायम, केरल के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस सहयोग का उद्देश्य SEMIRI में संरक्षित चिकित्सा पांडुलिपियों का व्यवस्थित डिजिटलीकरण और विस्तृत विवरणात्मक कैटलॉग तैयार करना है।

SEMIRI के पास 30,000 से अधिक पांडुलिपियों का विशाल संग्रह है, जिसमें मंदिर से संबंधित अभिलेख भी शामिल हैं। इस संग्रह में आयुर्वेद और भारतीय पारंपरिक ज्ञान से जुड़ी कई दुर्लभ एवं ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण पांडुलिपियां मौजूद हैं।

इन पांडुलिपियों में चिकित्सा विचारों के विकास, उपचार पद्धतियों, औषधीय द्रव्यों, निदान संबंधी अवधारणाओं और भारतीय ज्ञान परंपरा की विद्वत परंपराओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध है।

MoU के तहत CCRAS-NIIMH तकनीकी एवं शोध विशेषज्ञता उपलब्ध कराएगा। सैकड़ों चिकित्सा पांडुलिपियों का उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा, जिससे इन ऐतिहासिक दस्तावेजों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी और नाजुक पांडुलिपियों को बार-बार संभालने की आवश्यकता भी कम होगी।

तैयार होगा विस्तृत विवरणात्मक कैटलॉग

इस पहल के तहत पांडुलिपियों का एक व्यापक Descriptive Catalogue भी तैयार किया जाएगा। इसमें उपलब्ध जानकारी के आधार पर शीर्षक, लेखक, विषय, लिपि, भाषा, सामग्री, आकार, फोलियो विवरण, स्थिति, स्रोत एवं अन्य महत्वपूर्ण विवरण दर्ज किए जाएंगे।

यह कार्य AYUSH Manuscripts Advanced Repository के निर्धारित प्रारूप के अनुसार किया जाएगा। इससे शोधकर्ताओं और विद्वानों को संबंधित पांडुलिपियों की पहचान करने तथा भविष्य के शोध के लिए प्राथमिक स्रोतों तक पहुंच बनाने में सुविधा होगी।

यह पहल ज्ञान भारतम मिशन और भारत सरकार द्वारा देश की पांडुलिपि विरासत के संरक्षण, डिजिटलीकरण एवं व्यापक प्रसार के प्रयासों के अनुरूप है। चिकित्सा संबंधी पांडुलिपियां भारत की बौद्धिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिनमें पीढ़ियों से संरक्षित पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान समाहित है।

CCRAS के महानिदेशक प्रो. वैद्य रबिनारायण आचार्य ने कहा कि चिकित्सा पांडुलिपियों का संरक्षण केवल अभिलेखीय कार्य नहीं, बल्कि भारत की बौद्धिक विरासत को सुरक्षित रखने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि व्यवस्थित डिजिटलीकरण और वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण से दुर्लभ चिकित्सा ज्ञान भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और सुलभ रहेगा।

वहीं, SEMIRI के अध्यक्ष डॉ. सी.एस. उन्नी ने कुमारनल्लूर और कोट्टायम क्षेत्र की समृद्ध विरासत को सामने लाने में इस सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। CCRAS-NIIMH के प्रमुख डॉ. गोली पेंचला प्रसाद ने आयुर्वेदिक पांडुलिपियों के संरक्षण और अध्ययन से जुड़ी चुनौतियों एवं आगे की रणनीति पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर SEMIRI के क्यूरेटर डॉ. एस. राजेंदु, CCRAS के रिसर्च ऑफिसर (आयुर्वेद) डॉ. संतोष एस. माने, डॉ. राकेश नारायणन सहित कई अधिकारी और विशेषज्ञ मौजूद रहे।

CCRAS-NIIMH की विशेषज्ञ टीम ने संस्थान की Collection, Digitization and Cataloguing of AYUSH Manuscripts and Rare Books परियोजना के तहत पांडुलिपियों का मौके पर ही व्यवस्थित डिजिटलीकरण भी शुरू कर दिया है।

यह सहयोग भारत की पारंपरिक चिकित्सा एवं पांडुलिपि विरासत को डिजिटल, संरक्षित और शोध के लिए अधिक सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे भविष्य में शोधकर्ताओं, इतिहासकारों, शिक्षाविदों और आयुर्वेद एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के विशेषज्ञों को महत्वपूर्ण प्राथमिक स्रोत उपलब्ध हो सकेंगे।


राज्यपाल डेका ने 12 वर्षीय छात्र मास्टर दिव्यांश की पुस्तक ‘थॉट्स अबाउट गॉड‘ का किया विमोचन

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रायपुर- राज्यपाल रमेन डेका ने आज रायपुर के 12 वर्षीय छात्र मास्टर दिव्यांश सुल्तानिया द्वारा लिखित पुस्तक ‘थॉट्स अबाउट गॉड’ का विमोचन किया। उन्होंने दिव्यांश के रचनात्मक प्रयास की सराहना करते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

दिव्यांश ने अपने दादा की प्रेरणा से इस पुस्तक की रचना की है। पुस्तक में एक युवा छात्र के दृष्टिकोण से ईश्वर और आध्यात्मिकता से जुड़े विचारों, सवालों और उसकी अपनी समझ को सहज रूप में प्रस्तुत किया गया है। कम उम्र में गंभीर और विचारपरक विषय पर पुस्तक लिखने के दिव्यांश के प्रयास को राज्यपाल ने सराहनीय बताया।

इस अवसर पर राज्यपाल ने मास्टर दिव्यांश की दूसरी पुस्तक ‘फ्रॉम पॉकेट मनी टू पोर्टफोलियो’ के कवर को भी लॉन्च किया। यह पुस्तक बच्चों और युवाओं में कम उम्र से ही पैसे की बचत, निवेश और वित्तीय जागरूकता विकसित करने के उद्देश्य से छात्र द्वारा लिखी जा रही है। इसमें गुल्लक के माध्यम से बचत की आदत विकसित करने और बचाई गई राशि के उचित निवेश के विचार को सरल एवं व्यावहारिक तरीके से प्रस्तुत किया जाएगा।

राज्यपाल ने कहा कि बच्चों में पढ़ने, लिखने और नए विषयों पर विचार करने की आदत विकसित करना उनके व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने दिव्यांश को अपनी जिज्ञासा, रचनात्मकता और सीखने की ललक को निरंतर आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर दिव्यांश के पिता सुधीर सुल्तानिया, माता सरिता सुल्तानिया सहित अन्य परिजन उपस्थित थे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ‘अमृत उद्यान समर एनुअल्स एडिशन 2026’ का किया शुभारंभ

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज 14 अगस्त 2026 को ‘अमृत उद्यान समर एनुअल्स एडिशन, 2026’ का शुभारंभ किया।

अमृत उद्यान आम जनता के लिए 16 अगस्त से 15 सितंबर 2026 तक खुला रहेगा। इस दौरान उद्यान सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक खुला रहेगा और अंतिम प्रवेश शाम 5 बजे तक होगा। रखरखाव के कारण उद्यान प्रत्येक सोमवार बंद रहेगा।

प्रवेश से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी:

  • प्रवेश और निकास गेट नंबर 35 से होगा, जो नॉर्थ एवेन्यू रोड के पास स्थित है।

  • आगंतुकों के लिए प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क रहेगा।

  • यात्रा से पहले ऑनलाइन स्लॉट बुक करना अनिवार्य होगा।

  • स्लॉट की बुकिंग संबंधित दिन से एक दिन पहले सुबह 10 बजे बंद हो जाएगी।

  • मौके पर टिकट/स्लॉट बुकिंग की सुविधा उपलब्ध नहीं होगी।

आगंतुकों की सुविधा के लिए रास्ते में पीने का पानी, फर्स्ट एड पोस्ट, रेन शेल्टर और रेस्ट रूम की व्यवस्था की जाएगी।

इसके अलावा सेंट्रल सेक्रेटेरिएट मेट्रो स्टेशन से अमृत उद्यान के प्रवेश द्वार तक शटल बस सेवा भी उपलब्ध रहेगी। ‘SHUTTLE SERVICE FOR AMRIT UDYAN’ नाम वाली यह बस सुबह 9:30 बजे से शाम 6 बजे तक हर 30 मिनट के अंतराल पर चलेगी।

ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग: visit.rashtrapatibhavan.gov.in

54 एकड़ शासकीय जमीन पर तकरार ,ग्रामीणों के आगे झुका प्रशासन,10 दिन के लिए टला 'चक्काजाम

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 आरंग : ग्राम पंचायत रसनी की 54 एकड़ (22 हेक्टेयर) बहुउद्देश्यीय शासकीय भूमि को जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र को सौंपने के विरोध में ग्रामीणों द्वारा 15 अगस्त को नेशनल हाईवे पर किए जाने वाले अनिश्चितकालीन चक्काजाम को फिलहाल 10 दिनों के लिए टाल दिया गया है। स्वतंत्रता दिवस के राष्ट्रीय पर्व के सम्मान और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ हुई सकारात्मक वार्ता के बाद ग्रामीणों ने आंदोलन स्थगित करने का फैसला लिया है।


​मामले को सुलझाने के लिए आरंग एसडीएम अभिलाषा पैकरा के नेतृत्व में एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई थी, जिसमें पुलिस, उद्योग विभाग के अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच विस्तृत चर्चा हुई। बैठक के दौरान ग्रामीणों ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए चेतावनी दी है कि यदि अगले 10 दिनों के भीतर शासन-प्रशासन की ओर से कोई ठोस और सकारात्मक पहल नहीं की गई, तो रसनी के ग्रामीण एक बार फिर नेशनल हाईवे पर उतरकर बेमियादी चक्काजाम करने के लिए मजबूर होंगे।

​इस प्रशासनिक वार्ता में एसडीएम अभिलाषा पैकरा के साथ सीएसपी लंबोदर पटेल, आरंग तहसीलदार बाबूलाल कुर्रे, थाना प्रभारी हरीश साहू, उद्योग विभाग के प्रतिनिधि, रायपुर जिला पंचायत सदस्य वतन अंगनाथ चंद्राकर,उपसरपंच पारसमणि चन्द्राकर,सूरज शर्मा,गोपाल चन्द्राकर,मोहित चन्द्राकर,होरी चन्द्राकर,खुबचंद चन्द्राकर,समीर चन्द्राकर,भरत चन्द्राकर सहित ग्राम पंचायत रसनी के स्थानीय प्रतिनिधि प्रमुख रूप से मौजूद रहे। फिलहाल प्रशासन के आश्वासन पर ग्रामीणों ने अपना रुख नरम किया है, लेकिन 10 दिन की समयसीमा बीतने के बाद आंदोलन दोबारा तेज होने के आसार है।

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने विभाजन के पीड़ितों को दी विनम्र श्रद्धांजलि

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर वर्ष 1947 में देश के विभाजन के दौरान हिंसा और विस्थापन की त्रासदी झेलने वाले लाखों निर्दाेष नागरिकों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।


’विभाजन देश के इतिहास की एक अत्यंत पीड़ादायक त्रासदी’

वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि 1947 का विभाजन भारत के इतिहास का एक अत्यंत दुखद अध्याय था। इस दौरान असंख्य लोगों ने अपनों को खोया और लाखों परिवारों को अपना घर-बार छोड़कर बेघर होना पड़ा। यह वेदना देश की सामूहिक स्मृति में दर्ज है। उन्होंने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस उन सभी निर्दाेष लोगों के त्याग, असीम संघर्ष और पीड़ा को याद करने का अवसर है, जिन्होंने उस भयावह दौर का सामना किया।


’राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता पर बल’

वित्त मंत्री ने आगे कहा कि यह दिवस हमें सामाजिक एकता, आपसी सद्भाव और भाईचारे की डोर को और मजबूत करने की प्रेरणा देता है। हमें इस त्रासदी से सीख लेते हुए समाज में प्रेम, सौहार्द और राष्ट्रीय एकता की भावना को बढ़ावा देना चाहिए। एक एकजुट, समरस और संगठित समाज ही एक सशक्त एवं विकसित भारत के निर्माण की असली आधारशिला है।

वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने विभाजन की विभीषिका में अपनी जान गंवाने वाले सभी निर्दाेष नागरिकों को श्रद्धापूर्वक नमन किया।

उप मुख्यमंत्री साव के नेतृत्व में 14 गांवों में निकली भव्य तिरंगा यात्रा, गूंजा देशभक्ति का जयघोष

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 रायपुर : उप मुख्यमंत्री अरुण साव के नेतृत्व में लोरमी क्षेत्र के कई गांवों में मोटर साइकिल से तिरंगा यात्रा निकाली। गांवों की सड़कों और चौक-चौराहों से गुजरती यात्रा में देशभक्ति का गजब का उत्साह दिखाई दिया। भारत माता की जय और वंदे मातरम् के जयघोष से गांव गूंज उठे।


उप मुख्यमंत्री साव ने लोरमी के पुराना बस स्टैंड तहसील चौक झंझपुरी से अनेक गांव होते हुए दाऊकापा तक तिरंगा यात्रा निकाली, जो ग्राम डोंगरिया, उरईकछार, अखरार, सारिसताल, धनियाडोली, अमलडीही, गोड़खाम्ही और बोड़तराकला होते हुए आगे बढ़ी। गांवों की गलियों और ग्रामीण रास्तों पर लहराते तिरंगे ने देशभक्ति का संदेश दिया। ग्रामीणों ने उत्साह के साथ यात्रा का स्वागत किया।


यात्रा हरदी, खेकतरा और खैरवार होते हुए दाऊकापा पहुंची। जगह-जगह तिरंगे के प्रति सम्मान और देशप्रेम का भाव दिखाई दिया। तिरंगे की शान में बढ़ता हर कदम देश की एकता और अखंडता का संदेश दे रहा था।

दाऊकापा में तिरंगा यात्रा का समापन हुआ। इस दौरान देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीर स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया। विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में हर नागरिक की भागीदारी का संकल्प लिया।

लोरमी में गूंजा विजयी विश्व तिरंगा प्यारा

उप मुख्यमंत्री साव के नेतृत्व में लोरमी में भी मातृभूमि के प्रेम से सराबोर तिरंगा यात्रा निकली। मानस मंच से शुरू हुई यात्रा नगर के मुंगेली चौक, हटरी चौक, नया बस स्टैंड, गुरुद्वारा चौक, पुराना बस स्टैंड से होकर गुजरी। इस दौरान भारत माता की जय और वंदे मातरम् के जयघोष से पूरा नगर गूंज उठा। नगरवासियों ने उत्साह के साथ यात्रा में सहभागिता की। हर ओर तिरंगे के प्रति सम्मान और देश के प्रति गर्व का भाव दिखाई दिया।

वीर शहीदों के सपनों का भारत बनाने का लिया संकल्प

साव ने कहा कि तिरंगा यात्रा वीर शहीदों को नमन करने और उनके बलिदान को याद करने का अवसर है। यह भारत माता के सम्मान और घर-घर देशभक्ति का संदेश पहुंचाने का संकल्प है। वीर शहीदों के सपनों को साकार करने की जिम्मेदारी हम सभी की है। आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण में हर नागरिक को योगदान देना है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। हमें भी कदम से कदम मिलाकर राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभानी है। एक नागरिक एक कदम आगे बढ़ाएगा, तो देश 140 करोड़ कदम आगे बढ़ेगा।

तिरंगा यात्रा में लोरमी नगर पालिका के अध्यक्ष सुजीत वर्मा, जनपद अध्यक्ष वर्षा सिंह, जिला पंचायत सदस्य रत्ना काटले, अनिता साहू, धनीराम यादव औरज्योतिनंदन दुबे सहित पार्षदगण, एल्डरमैन, स्थानीय जनप्रतिनिधि और ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए।

“बड़े सपने देखें और कड़ी मेहनत से उन्हें साकार करें” मुख्यमंत्री साय ने सरगुजा के मेधावी विद्यार्थियों से की मुलाकात

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 रायपुर । मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज शाम उनके निवास कार्यालय में सरगुजा जिले के ग्रामीण अंचलों से शैक्षणिक भ्रमण पर आए मेधावी छात्र-छात्राओं ने सौजन्य मुलाकात की। अंबिकापुर क्षेत्र के सात शासकीय विद्यालयों के लगभग 50 विद्यार्थियों से मुख्यमंत्री साय ने आत्मीय संवाद किया और उनके अनुभव, रुचियों तथा भविष्य के सपनों के बारे में जाना। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें जीवन में बड़ा लक्ष्य निर्धारित करने और उसे हासिल करने के लिए पूरी लगन, अनुशासन और परिश्रम के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।


मुख्यमंत्री साय ने विद्यार्थियों से कहा कि विद्यार्थी जीवन भविष्य की मजबूत नींव तैयार करने का सबसे महत्वपूर्ण समय है। इस दौर में देखा गया सपना और उसे पूरा करने के लिए किया गया परिश्रम जीवन की दिशा तय करता है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को हमेशा बड़े सपने देखने चाहिए और उन सपनों को साकार करने के लिए पूरे मनोयोग से प्रयास करना चाहिए। कठिन परिश्रम, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण से जीवन में कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सफलता का अर्थ केवल डॉक्टर या इंजीनियर बनना नहीं है। आज युवाओं के लिए शिक्षा, विज्ञान, अनुसंधान, खेल, तकनीक, प्रशासन, उद्यमिता सहित प्रत्येक क्षेत्र में अपार संभावनाएं मौजूद हैं। प्रत्येक विद्यार्थी की अपनी प्रतिभा और रुचि होती है। आवश्यकता इस बात की है कि वह अपनी क्षमता को पहचाने, सही लक्ष्य चुने और पूरी प्रतिबद्धता के साथ उसे हासिल करने में जुट जाए। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रदेश की विभिन्न प्रतिभाओं और उपलब्धि हासिल करने वाले व्यक्तित्वों के प्रेरक प्रसंग भी सुनाए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर विस्तार हुआ है। आज छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्तर के अनेक प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थान स्थापित हैं, जहां प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि ग्रामीण और दूरस्थ अंचलों के विद्यार्थियों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, मार्गदर्शन और आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध हों। ऐसे शैक्षणिक भ्रमण बच्चों के मन में नई जिज्ञासा पैदा करने के साथ उनके सपनों को नया विस्तार देते हैं।

मुख्यमंत्री साय ने ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए आयोजित इस शैक्षणिक भ्रमण की सराहना की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अंचल के बच्चों को प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों से परिचित कराने और उन्हें भविष्य की संभावनाओं के प्रति जागरूक करने की यह पहल सराहनीय है। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए मन लगाकर पढ़ाई करने और अपने माता-पिता, विद्यालय तथा प्रदेश का नाम रोशन करने के लिए प्रेरित किया।

केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विद्यार्थी जीवन व्यक्ति के संपूर्ण जीवन की नींव होता है। जिस प्रकार किसी मजबूत भवन के लिए उसकी नींव मजबूत होना आवश्यक है, उसी प्रकार उज्ज्वल भविष्य के लिए विद्यार्थी जीवन में अनुशासन, परिश्रम और समय का सदुपयोग आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से इस महत्वपूर्ण समय का उपयोग अपने लक्ष्य को पहचानने, ज्ञान अर्जित करने और व्यक्तित्व निर्माण में करने का आह्वान किया।

शैक्षणिक भ्रमण में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कनकालों, बकिरमा, सुखरी, रामपुर, मेंड्राकला एवं करजी तथा शासकीय सेजेस केशवपुर के छात्र-छात्राएं शामिल हुए।

भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने नवा रायपुर स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपल आईटी), ट्राइबल म्यूजियम और छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग कार्यालय सहित विभिन्न प्रमुख संस्थानों एवं स्थलों का अवलोकन किया। विद्यार्थियों ने इन संस्थानों की शैक्षणिक गतिविधियों, अध्ययन के अवसरों और भविष्य की संभावनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। राजधानी और नवा रायपुर के प्रमुख संस्थानों को नजदीक से देखने का अनुभव विद्यार्थियों के लिए उत्साहवर्धक रहा।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्वविजय सिंह तोमर, जिला पंचायत सदस्य पायल सिंह तोमर सहित शिक्षकगण और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

राष्ट्र, समाज और सनातन संस्कृति के प्रति दिलीप सिंह जूदेव जी का समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में श्रद्धेय स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव जी की पुण्यतिथि पर उनके छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धापूर्वक नमन किया और राष्ट्र एवं समाज के प्रति उनके योगदान का स्मरण किया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि श्रद्धेय दिलीप सिंह जूदेव जी का संपूर्ण जीवन राष्ट्र, समाज और सनातन संस्कृति के प्रति समर्पित रहा। जनजातीय समाज के हितों की रक्षा, उनके स्वाभिमान और सामाजिक जागरण के लिए उन्होंने आजीवन कार्य किया। समाज के अंतिम व्यक्ति के प्रति उनकी संवेदनशीलता और जनसेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने उन्हें जन-जन के हृदय में विशिष्ट स्थान दिलाया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जूदेव जी का छत्तीसगढ़ की माटी और यहां के लोगों से गहरा आत्मीय जुड़ाव था। विशेष रूप से जनजातीय अंचलों में उन्होंने समाज को संगठित करने, लोगों में आत्मविश्वास जगाने और उनकी आवाज को मजबूती देने का महत्वपूर्ण कार्य किया। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जूदेव जी का जीवन राष्ट्रसेवा, सामाजिक सरोकार और अपनी संस्कृति एवं परंपराओं के प्रति अटूट निष्ठा का प्रेरक उदाहरण है। उनके विचार और आदर्श आने वाली पीढ़ियों को समाज एवं राष्ट्र के लिए समर्पित भाव से कार्य करने की प्रेरणा देते रहेंगे।

इस अवसर पर प्रबल प्रताप सिंह जूदेव, राज्य महिला आयोग की सदस्य प्रियंवदा सिंह जूदेव, प्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी तथा छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा उपस्थित थे।

जनगणना 2027: केंद्र सरकार ने 'जनसंख्या गणना' के लिए जारी की 40 प्रश्नों की अधिसूचना

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 नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने आगामी राष्ट्रीय जनगणना 2027 के दूसरे चरण यानी 'जनसंख्या गणना' (Population Enumeration) के लिए 40 प्रश्नों की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। भारत के महारजिस्ट्रार मृत्युंजय कुमार नारायण द्वारा जारी सरकारी आदेश के अनुसार, इस बार की जनगणना में सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी कई नए व महत्वपूर्ण प्रश्नों को शामिल किया गया है।


जाति और कोविड टीकाकरण पर रहेंगे खास सवाल

नवीनतम प्रश्नावली के तहत नागरिकों से उनकी जाति तथा कोविड-19 टीकाकरण के स्थान से जुड़े विवरण मांगे जाएंगे। जनगणना कर्मचारी प्रत्येक परिवार से यह जानकारी लेंगे कि वे अनुसूचित जाति (SC) या अनुसूचित जनजाति (ST) से संबंध रखते हैं या नहीं, और उनकी विशिष्ट जाति कौन सी है। इसके अलावा, महामारी के बाद स्वास्थ्य डेटाबेस को मजबूत करने के उद्देश्य से कोविड टीकाकरण का स्थान और उससे जुड़े विवरण भी दर्ज किए जाएंगे।



बर्फबारी वाले क्षेत्रों में 1 सितंबर से शुरुआत
सर्दियों में भारी बर्फबारी और विषम मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए गैर-समकालिक क्षेत्रों में जनसंख्या गिनती की प्रक्रिया 1 से 30 सितंबर के बीच पूरी की जाएगी। 

इनमें निम्नलिखित क्षेत्र शामिल हैं:

  • लद्दाख
  • जम्मू-कश्मीर के बर्फबारी वाले क्षेत्र
  • हिमाचल प्रदेश के उच्च पर्वतीय इलाके
  • उत्तराखंड के दुर्गम क्षेत्र

मुख्य बिंदु:

  • कुल प्रश्न: जनसंख्या गणना चरण के लिए 40 सवाल तय।
  • पहला चरण: जनवरी में मकान सूचीकरण (House Listing) के लिए 33 सवाल अधिसूचित किए गए थे।
  • उद्देश्य: देश के नागरिकों का सटीक सामाजिक, आर्थिक, स्वास्थ्य और जनसांख्यिकी डेटाबेस तैयार करना।

सामाजिक-आर्थिक स्थिति का विस्तृत ब्यौरा

गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले भारत के रजिस्ट्रार जनरल (RGI) कार्यालय द्वारा जारी 'हाउसहोल्ड शेड्यूल' में रहन-सहन, पेयजल, बिजली, शौचालय, वाहन, व्यवसाय और अन्य व्यक्तिगत जानकारियों से जुड़े प्रश्न भी शामिल किए गए हैं, जिससे देश की भावी योजनाओं के निर्माण में मदद मिलेगी।

CG NEWS : मिठाई का लालच देकर नाबालिगों से छेड़छाड़, आरोपी गिरफ्तार

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 कवर्धा। कबीरधाम जिले के उड़ियाकला गांव में नाबालिग बच्चियों के साथ छेड़छाड़ का गंभीर मामला प्रकाश में आया है। महिला थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।


मिठाई का लालच देकर की हरकत

पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना 9 अगस्त की शाम की है। आरोपी जागेश्वर साहू (39 वर्ष), निवासी उड़ियाकला, ने दो सगी नाबालिग बहनों और उनकी पड़ोस की एक अन्य बच्ची को मिठाई का लालच देकर अपने साथ ले जाने का प्रयास किया। आरोप है कि इस दौरान उसने बच्चियों के साथ अश्लील हरकतें कीं। बच्चियों द्वारा शोर मचाने और विरोध करने पर आरोपी मौके से फरार हो गया।

बीएनएस और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज

घटना की जानकारी मिलने के बाद परिजनों ने 11 अगस्त को कबीरधाम महिला थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं और पॉक्सो (POCSO) एक्ट की धारा 8 के तहत मामला पंजीकृत किया। पीड़ितों के बयान दर्ज कर उनका मेडिकल परीक्षण कराया गया।

न्यायिक हिरासत में भेजा गया जेल

जांच में मिले साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने 12 अगस्त को आरोपी जागेश्वर साहू को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नाबालिगों के प्रति अपराधों में किसी भी प्रकार की कोताही नहीं बरती जाएगी।

इंटर्न्स की समस्याओं पर चिकित्सा शिक्षा विभाग की बैठक, स्टाइपेंड बढ़ाने की माँग पर विचार का आश्वासन

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इंटर्न्स एवं आयुक्त, चिकित्सा शिक्षा के मध्य  मांगों को लेकर सकारात्मक चर्चा

रायपुर- आयुक्त चिकित्सा शिक्षा रितेश अग्रवाल की अध्यक्षता में आईएमए प्रतिनिधियों और विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न्स के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य इंटर्न्स की समस्याओं पर चर्चा कर उनका समाधान निकालना था।

स्टाइपेंड बढ़ाने की माँग

बैठक के दौरान इंटर्न्स ने अपनी प्रमुख माँग रखते हुए स्टाइपेंड बढ़ाने की बात कही। इस पर विभाग की ओर से आश्वासन दिया गया कि छात्र हित में सरकार द्वारा हरसंभव कदम उठाए जा रहे हैं और इंटर्न्स की स्टाइपेंड संबंधी माँग पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

हॉस्टल निर्माण को मंजूरी

बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि चालू वित्तीय वर्ष के बजट में प्रायः सभी मेडिकल कॉलेजों में छात्र-छात्राओं के लिए हॉस्टल स्वीकृत किए गए हैं, जो छात्रों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है।

स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित न करने की अपील

बैठक के अंत में सभी उपस्थित सदस्यों से अपील की गई कि स्वास्थ्य सेवाएँ सीधे तौर पर जनहित से जुड़ी होती हैं, इसलिए यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी परिस्थिति में सेवाएँ प्रभावित न हों।

बैठक में IMA-MSN Chhattisgarh  के संयोजक शाहदिल ख़ुसरू ने कहा कि आज की यह बैठक समस्या के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक पहल साबित हुई है। दोनों पक्षों ने सकारात्मक वातावरण में चर्चा को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की और बैठक का समापन भी सकारात्मक माहौल में हुआ। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि प्रशासन और इंटर्न्स, दोनों की ओर से इसी प्रकार संवाद और सहयोग की भावना बनी रहेगी तथा इस समस्या का जल्द ही संतोषजनक समाधान निकलेगा।

बैठक में पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर (PT. JNM Raipur), छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान, बिलासपुर (CIMS Bilaspur), शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, राजनांदगांव (GMC Rajnandgaon), शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, कांकेर (GMC Kanker) एवं शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, अंबिकापुर (GMC Ambikapur) के इंटर्न्स उपस्थित रहे।

CGMSC पर लगा 1 लाख का जुर्माना निरस्त,सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश को पलटा

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रायपुर- छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (CGMSC) की कार्य शैली और नियम आधारित टेंडर प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट ने अपनी मुहर लगा दी है। अदालत ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस फैसले को  रद्द कर दिया है, जिसमें CGMSC पर 1 लाख का जुर्माना (हर्जाना) लगाया गया था। इस फैसले से साफ हो गया है कि कंपनी की टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह साफ-सुथरी और नियमों के हिसाब से थी।

पूरा मामला यह था कि टेंडर से जुड़े एक मामले में एक ठेकेदार ने हाईकोर्ट में शिकायत की थी, जिसके बाद हाईकोर्ट ने CGMSC पर 1 लाख का जुर्माना लगा दिया था। इसके खिलाफ CGMSC सुप्रीम कोर्ट गया। सुप्रीम कोर्ट ने अपनी सुनवाई में पाया कि निगम की तरफ से कोई गलती नहीं हुई थी।

अदालत ने माना कि ठेकेदार ने फॉर्म में जो अपनी ऑफिशियल ईमेल आईडी दी थी, उसी पर समय रहते सारी जरूरी जानकारियां और मैसेज भेजे गए थे। ठेकेदार ने खुद तय समय में जवाब नहीं दिया, इसलिए नियमों के तहत ही उसे टेंडर से बाहर किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि पूरे मामले में CGMSC का काम बिल्कुल सही था और उस पर लगा 1 लाख का जुर्माना ग़लत है। इस फैसले से साबित हो गया है कि CGMSC अपने सभी टेंडर और खरीदारी में पूरी ईमानदारी और नियमों का पालन करता है। निगम ने कहा है कि वह आगे भी राज्य की स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए ऐसे ही पूरी ईमानदारी के साथ काम करता रहेगा।

विभाजन विभीषिका दिवस: बंटवारे के ज़ख्मों को याद कर भावुक हुए PM मोदी, बोले.....

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 नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 अगस्त को 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' (Partition Horrors Remembrance Day) के अवसर पर 1947 के विभाजन से प्रभावित लोगों के अदम्य साहस, संघर्ष और जिजीविषा को नमन करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। पीएम मोदी ने कहा कि देश के विभाजन ने लाखों परिवारों को रातों-रात बेघर कर दिया और असहनीय दर्द दिया, लेकिन प्रभावित लोगों ने विपरीत से विपरीत परिस्थितियों में भी शून्य से नई शुरुआत कर देश के निर्माण में अतुलनीय योगदान दिया।


इसी के साथ प्रधानमंत्री ने देशवासियों से राष्ट्रीय एकता, भाईचारे और सद्भाव के संकल्प को मजबूत करते हुए 'विकसित भारत' के निर्माण में जुटने का आह्वान किया।

'इतिहास का वह दौर, जिसने तहस-नहस कर दी थीं अनगिनत जिंदगियां'
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के जरिए अपने विचार साझा किए। उन्होंने लिखा:

"आज हम 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' मना रहे हैं। हम उन सभी लोगों के साहस को नमन करते हैं, जो 1947 के विभाजन से प्रभावित हुए थे। यह हमारे इतिहास का वह दर्दनाक दौर था, जिसने अनगिनत जिंदगियां तहस-नहस कर दीं। परिवार उजड़ गए, अपनों को खो दिया और लोगों ने असीम वेदना सही।"

पीएम ने आगे लिखा कि इतने बड़े संकट के बावजूद लोगों ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने मुश्किलों को अपनी ताकत बनाया, शून्य से अपनी जिंदगी फिर से शुरू की और देश की तरक्की में बड़ा योगदान दिया।

इंसानी जज्बे की मिसाल और एकता का संकल्प

पीएम मोदी ने कहा कि विभाजन पीड़ित लोगों की जीवन-यात्राएं इंसानी जज्बे और जिजीविषा की अद्भुत ताकत की याद दिलाती हैं। उन्होंने अपील की कि यह दिन हमें आपसी सद्भाव और भाईचारे को बनाए रखने का संदेश देता है, ताकि देश फिर कभी ऐसे काले दौर से न गुजरे और हम सब एकजुट होकर 'विकसित भारत' के लक्ष्य की ओर बढ़ें।

आजादी के जश्न के साथ जुड़ा विभाजन का दर्द

उल्लेखनीय है कि भारत को 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश हुकूमत से आजादी मिली थी। स्वतंत्रता दिवस हर देशवासी के लिए गर्व और उल्लास का अवसर है, लेकिन आजादी की इस सुबह के साथ बंटवारे का गहरा और कभी न भरने वाला दर्द भी जुड़ा हुआ था। देश के विभाजन के दौरान हुई हिंसा में लाखों लोगों ने अपनी जान गंवाई और करोड़ों लोग विस्थापित हुए।

इसी ऐतिहासिक त्रासदी और शहीदों व पीड़ितों के बलिदान को याद करने के लिए हर साल 14 अगस्त को 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' के रूप में मनाया जाता है।

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