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रायपुर में 7-8 अक्टूबर को बड़ा राज्य स्तरीय रोजगार मेला, हजारों युवाओं को नौकरी का मौका

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छत्तीसगढ़ के बेरोजगार और नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर है। राजधानी रायपुर में 7 और 8 अक्टूबर 2026 को दो दिवसीय राज्य स्तरीय रोजगार मेले का आयोजन किया जा रहा है। यह मेला बूढ़ापारा स्थित सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित होगा। आयोजन कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग द्वारा किया जा रहा है।

हजारों पदों पर नौकरी का अवसर

रोजगार मेले में तकनीकी और गैर-तकनीकी दोनों क्षेत्रों में बड़ी संख्या में रिक्तियां उपलब्ध कराई गई हैं।

शुरुआती जानकारी में 8 हजार से अधिक पदों पर रोजगार के अवसर बताए गए थे। वहीं, बाद की रिपोर्टों के अनुसार अब तक 85 कंपनियों और प्लेसमेंट एजेंसियों से 11,500 से अधिक रिक्त पदों की जानकारी विभाग को मिल चुकी है। अन्य कंपनियों से भी संपर्क जारी है, इसलिए उपलब्ध अवसरों की संख्या आगे और बढ़ सकती है। 

10वीं पास से MBA और इंजीनियरिंग तक मौका

इस रोजगार मेले की खास बात यह है कि इसमें केवल उच्च शिक्षित युवाओं के लिए ही नहीं, बल्कि अलग-अलग शैक्षणिक योग्यता रखने वाले उम्मीदवारों के लिए अवसर उपलब्ध हैं।

इनमें शामिल हैं—

🔹 10वीं पास
🔹 12वीं पास
🔹 ITI
🔹 डिप्लोमा
🔹 इंजीनियरिंग
🔹 सामान्य स्नातक
🔹 कृषि स्नातक
🔹 MBA
🔹 MCA
🔹 अन्य स्नातकोत्तर योग्यता वाले उम्मीदवार

अर्थात उम्मीदवार अपनी शैक्षणिक योग्यता और कौशल के अनुसार अलग-अलग कंपनियों में उपलब्ध पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं। 

किन पदों पर मिल सकती है नौकरी?

रोजगार मेले में तकनीकी क्षेत्र के साथ-साथ ऑफिस, बैंकिंग, सेल्स, स्वास्थ्य, सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में भी अवसर उपलब्ध हैं।

तकनीकी पदों में—

➡️ मशीन ऑपरेटर
➡️ असेंबली ऑपरेटर
➡️ फिटर
➡️ वेल्डर
➡️ इलेक्ट्रिशियन
➡️ इलेक्ट्रिक मीटर टेक्नीशियन
➡️ मेंटेनेंस इलेक्ट्रिशियन
➡️ मैकेनिकल इंजीनियर
➡️ क्वालिटी इंस्पेक्टर

ऑफिस एवं सर्विस सेक्टर में—

➡️ कंप्यूटर ऑपरेटर
➡️ कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव
➡️ टेलीकॉलर
➡️ रिलेशनशिप मैनेजर
➡️ सेल्स एग्जीक्यूटिव
➡️ सेल्स ऑफिसर

इसके अलावा बैंकिंग, फाइनेंस और HR से जुड़े पद भी उपलब्ध हैं।

स्वास्थ्य और अन्य क्षेत्रों में भी अवसर

स्वास्थ्य एवं देखभाल के क्षेत्र में नर्सिंग स्टाफ और केयरटेकर जैसे पदों की रिक्तियां हैं।

वहीं सुरक्षा क्षेत्र में—

➡️ सिक्योरिटी गार्ड
➡️ सिक्योरिटी सुपरवाइजर

और परिवहन/लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में—

➡️ ड्राइवर
➡️ डिलीवरी कर्मचारी
➡️ बाइक राइडर
➡️ पिकर-पैकर

जैसे पदों पर भी अवसर उपलब्ध हैं।

कौन-कौन सी कंपनियां शामिल होंगी?

रोजगार मेले में स्थानीय कंपनियों के साथ कई राष्ट्रीय स्तर की निजी कंपनियों और प्लेसमेंट एजेंसियों की भागीदारी बताई गई है।

रिपोर्टों में Quess Corp, Randstad India, Rajasthan Textile Mills–Sutlej Textiles, Vardhman Textiles, Genus Power Infrastructure और Airtel Payments Bank सहित कई कंपनियों के नाम सामने आए हैं।

इसके अलावा Instacart, Spandana Sphoorty Financial, Svatantra Microfin, NIIT, AISECT, Shanta Techno, Rajat Equipments और First Fly Corporate जैसी संस्थाएं भी रिक्तियां उपलब्ध करा रही हैं। 

ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कैसे करें?

इच्छुक उम्मीदवार छत्तीसगढ़ के ई-रोजगार पोर्टल पर जाकर उपलब्ध रिक्तियों की जानकारी देख सकते हैं और अपनी योग्यता के अनुसार आवेदन कर सकते हैं।

आधिकारिक पोर्टल: erojgar.cg.gov.in

पोर्टल पर उम्मीदवार अलग-अलग कंपनियों की रिक्तियां देखकर यह भी तय कर सकते हैं कि उनकी योग्यता के अनुसार कौन-सा पद उपयुक्त है। रिपोर्ट के अनुसार 7 अक्टूबर तक पंजीयन की सुविधा उपलब्ध है। 

चयनित युवाओं को मिलेगा Offer Letter

इस रोजगार मेले की एक खास बात यह है कि चयनित उम्मीदवारों को कार्यक्रम के दौरान ऑफर लेटर देने की तैयारी की गई है।

रिपोर्ट के अनुसार 8 अक्टूबर को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब चयनित युवाओं को ऑफर लेटर वितरित करेंगे। 

रोजगार मेले का उद्देश्य

सरकार का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को उनकी शैक्षणिक योग्यता, तकनीकी प्रशिक्षण और कौशल के अनुसार निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।

इस आयोजन के माध्यम से युवाओं और कंपनियों को एक ही स्थान पर लाने की कोशिश की जा रही है, जिससे उम्मीदवार सीधे कंपनियों से बातचीत कर सकें और उपलब्ध नौकरियों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें।

युवाओं के लिए जरूरी जानकारी

📅 तारीख: 7 और 8 अक्टूबर 2026
📍 स्थान: सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम, बूढ़ापारा, रायपुर
🏢 आयोजन: कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग
💼 अवसर: 8,000+ से लेकर नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार 11,500+ रिक्तियां
🎓 योग्यता: 10वीं से लेकर ITI, डिप्लोमा, ग्रेजुएशन, इंजीनियरिंग, MBA/MCA और अन्य योग्यताएं
📝 पंजीयन: ई-रोजगार पोर्टल के माध्यम से
📄 चयन: कंपनियों द्वारा भर्ती/चयन प्रक्रिया
🎁 विशेष: चयनित उम्मीदवारों को ऑफर लेटर देने की तैयारी

 युवाओं के लिए जरूरी सलाह

मेले में जाने से पहले उम्मीदवार अपनी शैक्षणिक प्रमाण-पत्र, आधार कार्ड/पहचान पत्र, रिज्यूमे (CV), पासपोर्ट साइज फोटो और अनुभव प्रमाण-पत्र, यदि लागू हो, साथ रखें। साथ ही ई-रोजगार पोर्टल पर अपनी योग्यता के अनुसार उपलब्ध रिक्तियों को पहले से देख लेना बेहतर रहेगा।

यह रोजगार मेला छत्तीसगढ़ के उन युवाओं के लिए खास अवसर है जो निजी क्षेत्र में नौकरी की तलाश कर रहे हैं।

कनाडा के क्यूबेक में बड़ा राजनीतिक उलटफेर: अलगाववादी Parti Québécois की जीत, लेकिन बहुमत से दूर

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कनाडा के क्यूबेक प्रांत में हुए विधानसभा चुनाव में बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिला है। स्वतंत्रता समर्थक (separatist/sovereigntist) Parti Québécois (PQ) ने चुनाव में सबसे अधिक सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की है। हालांकि पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला, इसलिए उसे अल्पमत सरकार के रूप में काम करना होगा।

PQ ने कितनी सीटें जीतीं?

क्यूबेक की 127 सदस्यीय National Assembly में सरकार बनाने के लिए कम से कम 64 सीटों की जरूरत होती है।

Parti Québécois ने करीब 59 सीटें जीतीं—यानी बहुमत के आंकड़े से लगभग 5 सीट कम। इसलिए पार्टी सरकार तो बनाएगी, लेकिन उसे कई महत्वपूर्ण विधेयकों और विश्वास मतों पर विपक्षी दलों का समर्थन हासिल करना पड़ सकता है।

कौन होंगे क्यूबेक के नए Premier?

PQ के नेता Paul St-Pierre Plamondon क्यूबेक के अगले Premier बनने जा रहे हैं।

यह Parti Québécois के लिए लंबे समय बाद बड़ी वापसी है। पार्टी पिछले एक दशक से अधिक समय से सत्ता से बाहर थी और 2022 के चुनाव में उसे केवल कुछ ही सीटें मिली थीं। 2026 में पार्टी ने जोरदार वापसी करते हुए सबसे अधिक सीटें हासिल कीं।

क्यूबेक को कनाडा से अलग करने का मुद्दा फिर चर्चा में

इस चुनाव का सबसे महत्वपूर्ण पहलू क्यूबेक की स्वतंत्रता का मुद्दा है।

Parti Québécois लंबे समय से क्यूबेक को कनाडा से अलग एक स्वतंत्र देश बनाने की समर्थक पार्टी रही है। पार्टी नेता Paul St-Pierre Plamondon ने भविष्य में क्यूबेक की स्वतंत्रता पर एक और जनमत-संग्रह (referendum) कराने का वादा किया है।

हालांकि उन्होंने संकेत दिया है कि इस जनमत-संग्रह को तुरंत नहीं कराया जाएगा और इसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के बाद कराने की योजना है।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि क्यूबेक तुरंत कनाडा से अलग हो जाएगा

यह बात समझना बहुत जरूरी है।

PQ की चुनावी जीत = क्यूबेक का कनाडा से अलग होना नहीं है।

पहले पार्टी को सरकार चलानी होगी। उसके बाद यदि स्वतंत्रता पर जनमत-संग्रह कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो उसके लिए अलग राजनीतिक और कानूनी प्रक्रिया होगी।

क्यूबेक में इससे पहले 1980 और 1995 में स्वतंत्रता पर जनमत-संग्रह हो चुके हैं और दोनों में अलगाव के पक्ष को बहुमत नहीं मिला था। मौजूदा समय में भी क्यूबेक की स्वतंत्रता के समर्थन का स्तर लगभग 30% के आसपास बताया गया है।

सबसे बड़ा राजनीतिक उलटफेर: CAQ को भारी नुकसान

इस चुनाव में मौजूदा Coalition Avenir Québec (CAQ) को बड़ा झटका लगा है।

CAQ पिछले करीब 8 वर्षों से क्यूबेक की सत्ता में थी, लेकिन इस चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा। रिपोर्टों के अनुसार CAQ अपनी पिछली मजबूत स्थिति से लगभग पूरी तरह बाहर हो गई और उसके नेताओं को भी हार का सामना करना पड़ा।

यह परिणाम क्यूबेक की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।

विपक्ष की भूमिका अब बेहद महत्वपूर्ण

क्योंकि PQ के पास 64 सीटों का बहुमत नहीं है, इसलिए उसकी सरकार को कई मामलों में विपक्षी दलों का सहयोग लेना पड़ेगा।

इसका मतलब है कि:

  • PQ हर कानून को अकेले पास नहीं करा पाएगी।

  • महत्वपूर्ण विधेयकों के लिए विपक्षी सांसदों का समर्थन जरूरी हो सकता है।

  • सरकार के अस्तित्व से जुड़े confidence votes में भी विपक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

  • स्वतंत्रता के मुद्दे पर PQ को राजनीतिक समर्थन जुटाने में चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।

यानी PQ चुनाव जीत गई है, लेकिन बहुमत के बिना सरकार चलाना उसके लिए एक अलग राजनीतिक चुनौती होगी।

कनाडा की संघीय सरकार की प्रतिक्रिया

कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney ने PQ की जीत के बाद Paul St-Pierre Plamondon के साथ काम करने की इच्छा जताई है।

केंद्र सरकार के लिए यह परिणाम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि क्यूबेक कनाडा का एक महत्वपूर्ण प्रांत है और वहां स्वतंत्रता का मुद्दा फिर से राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।

Carney सरकार ने क्यूबेक के साथ आर्थिक मुद्दों, रोजगार, आवास और अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव जैसी चुनौतियों पर सहयोग करने पर जोर दिया है।

चुनाव का बड़ा संदेश क्या है?

क्यूबेक के चुनाव परिणाम से फिलहाल तीन बड़ी बातें सामने आती हैं:

1️⃣ Parti Québécois की जोरदार राजनीतिक वापसी
लंबे समय से सत्ता से बाहर रहने के बाद PQ फिर सरकार बनाने जा रही है।

2️⃣ स्वतंत्रता का मुद्दा फिर चर्चा में
PQ के सत्ता में आने से क्यूबेक की स्वतंत्रता पर संभावित तीसरे referendum की चर्चा तेज हो गई है।

3️⃣ लेकिन जनता ने PQ को पूर्ण बहुमत नहीं दिया
127 सीटों वाली विधानसभा में 64 सीटों के लिए जरूरी बहुमत हासिल नहीं हुआ। इसलिए PQ को विपक्षी दलों के साथ काम करना पड़ेगा।

 सबसे जरूरी बात

क्यूबेक अभी कनाडा से अलग नहीं हुआ है। चुनाव में अलगाववादी पार्टी की जीत हुई है, लेकिन स्वतंत्रता के लिए कोई तत्काल अलगाव नहीं हुआ है। भविष्य में referendum कराया भी जाता है तो वह एक अलग राजनीतिक और संवैधानिक प्रक्रिया होगी।

सुकमा से बड़ी खबर: ईसाई समुदाय के लिए दफन भूमि पर ग्राम सभा के फैसले से विवाद

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छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित और आदिवासी बहुल सुकमा जिले के पुनपल्ली गांव में ग्राम सभा के एक फैसले को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। यहां विशेष ग्राम सभा में ईसाई समुदाय और धर्मांतरित लोगों के शव दफनाने, चर्च निर्माण तथा प्रार्थना एवं धार्मिक सभाओं के लिए ग्राम सभा की सामुदायिक जमीन उपलब्ध नहीं कराने संबंधी प्रस्ताव पारित किया गया है। यह फैसला अब धार्मिक स्वतंत्रता, आदिवासी परंपराओं और ग्राम सभा के अधिकारों को लेकर बहस का विषय बन गया है। 

2 अक्टूबर को हुई विशेष ग्राम सभा

रिपोर्टों के अनुसार, कोंटा जनपद पंचायत के अंतर्गत पुनपल्ली ग्राम पंचायत में 2 अक्टूबर को विशेष ग्राम सभा आयोजित की गई थी। बैठक में गांव की पारंपरिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक व्यवस्था, सामुदायिक हित और धार्मिक गतिविधियों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।

ग्राम सभा ने कुल 12 प्रस्ताव पारित किए। इनमें से एक प्रस्ताव में ईसाई और धर्मांतरित लोगों के लिए ग्राम सभा की जमीन पर शव दफनाने, चर्च बनाने, प्रार्थना सभा तथा अन्य धार्मिक गतिविधियों के लिए भूमि उपलब्ध नहीं कराने की बात कही गई है।

पादरियों और ईसाई धर्म प्रचारकों के प्रवेश पर भी रोक

ग्राम पंचायत की ओर से लगाए गए सूचना-पट्ट में यह भी कहा गया है कि पादरी और ईसाई धर्म प्रचारक धर्मांतरण, प्रार्थना सभा या अन्य धार्मिक गतिविधियों के लिए गांव में प्रवेश नहीं कर सकेंगे।

ग्राम पंचायत के प्रतिनिधियों का कहना है कि इन फैसलों का उद्देश्य गांव की पारंपरिक व्यवस्था, सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक एकता और सामुदायिक हितों की रक्षा करना है। 

फैसले के लिए PESA कानून का हवाला

ग्राम सभा ने अपने निर्णय के समर्थन में संविधान के अनुच्छेद 244(1), पांचवीं अनुसूची, पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम यानी PESA Act, 1996 और छत्तीसगढ़ के PESA कानून में किए गए संशोधनों का हवाला दिया है।

पुनपल्ली अनुसूचित क्षेत्र में आता है। PESA के तहत अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को स्थानीय परंपराओं, सामुदायिक संसाधनों और पारंपरिक व्यवस्थाओं से जुड़े कुछ विशेष अधिकार दिए गए हैं। 

हालांकि, PESA के तहत ग्राम सभा के अधिकारों की सीमा और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े संवैधानिक अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर कानूनी सवाल भी उठ रहे हैं।

 ईसाई समुदाय के सामने क्या समस्या?

इस फैसले को लेकर चिंता इसलिए भी जताई जा रही है क्योंकि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार के लिए उपयुक्त स्थान की आवश्यकता होती है।

कुछ रिपोर्टों में स्थानीय ईसाई परिवारों की चिंता का उल्लेख किया गया है कि यदि ग्राम सभा की जमीन पर दफनाने की अनुमति नहीं होगी, तो उन्हें अंतिम संस्कार के लिए दूसरे गांव या दूर के स्थानों पर जाना पड़ सकता है।

यही वजह है कि मामला अब केवल जमीन आवंटन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता, अंतिम संस्कार के अधिकार और स्थानीय समुदाय के अधिकारों से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा बन गया है।

ग्राम सभा का पक्ष क्या है?

ग्राम सभा से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि निर्णय किसी विशेष समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि गांव की पारंपरिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक व्यवस्था को बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।

जनपद पंचायत सदस्य मड़कम भीमा के अनुसार, ग्राम सभा ने स्थानीय परंपरा, सामाजिक एकता और सामुदायिक हितों को ध्यान में रखते हुए प्रस्ताव पारित किए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विवाद की स्थिति में कानूनी और संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। 

 दूसरी ओर उठ रहे संवैधानिक सवाल

इस फैसले को लेकर अधिकार कार्यकर्ताओं और कानूनी जानकारों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या ग्राम सभा के स्थानीय अधिकार किसी नागरिक के धार्मिक अधिकारों को इस तरह सीमित कर सकते हैं?

भारत का संविधान नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है। इसलिए इस मामले में एक तरफ आदिवासी क्षेत्रों में ग्राम सभा के विशेष अधिकार और पारंपरिक व्यवस्था, जबकि दूसरी तरफ नागरिकों के संवैधानिक और धार्मिक अधिकार हैं।

इन दोनों के बीच कानूनी सीमा और इस प्रस्ताव की वैधता पर आगे बहस और प्रशासनिक/न्यायिक जांच की संभावना बनी हुई है। 

प्रशासन की भूमिका पर नजर

फिलहाल इस पूरे मामले में जिला प्रशासन की ओर से विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए यह स्पष्ट होना बाकी है कि ग्राम सभा के प्रस्ताव को प्रशासन किस रूप में देखता है और क्या आगे कोई प्रशासनिक या कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

पुनपल्ली का मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह एक साथ कई संवेदनशील मुद्दों को सामने लाता है—

🔹 आदिवासी परंपरा और सांस्कृतिक पहचान
🔹 ग्राम सभा के अधिकार और PESA कानून
🔹 धार्मिक स्वतंत्रता
🔹 अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकार
🔹 सामुदायिक जमीन का उपयोग
🔹 धर्मांतरण को लेकर स्थानीय विवाद
🔹 कानून और संविधान के बीच अधिकारों का संतुलन

फिलहाल स्थिति

पुनपल्ली ग्राम सभा ने प्रस्ताव पारित किया है, लेकिन इस प्रस्ताव की कानूनी स्थिति और इसे लागू करने की सीमा को लेकर सवाल बने हुए हैं। मामले में प्रशासन की आगे की भूमिका और यदि मामला न्यायिक स्तर तक जाता है तो अदालत की व्याख्या महत्वपूर्ण होगी।

इसलिए फिलहाल इसे “ग्राम सभा का प्रस्ताव” कहना अधिक सटीक है, न कि पूरे सुकमा जिले में लागू सरकारी आदेश।


दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष का बड़ा प्रदर्शन

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नई दिल्ली- मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और वोटर लिस्ट में बदलाव को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच विवाद अब सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। मंगलवार को INDIA गठबंधन के सांसदों ने संसद से चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च निकाला। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है।

विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

पूरा विवाद SIR यानी Special Intensive Revision से जुड़ा है। इसका मतलब है कि चुनाव आयोग मतदाता सूची की दोबारा गहन जांच करता है।

इस प्रक्रिया में यह पता लगाने की कोशिश की जाती है कि—

  • मतदाता सूची में दर्ज नाम सही हैं या नहीं।

  • किसी व्यक्ति का नाम एक से अधिक जगह तो नहीं है।

  • मृत लोगों के नाम अभी भी सूची में तो नहीं हैं।

  • ऐसे लोगों के नाम तो नहीं हैं जो उस क्षेत्र में रहने के पात्र नहीं हैं।

  • योग्य नागरिकों का नाम मतदाता सूची में शामिल है या नहीं।

चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को साफ और सही रखना जरूरी है, ताकि चुनाव निष्पक्ष तरीके से हो सकें।

लेकिन विपक्ष का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया में वास्तविक और योग्य मतदाताओं के नाम भी हटने का खतरा है, खासकर गरीब, मजदूर, प्रवासी और ऐसे लोगों के नाम जिनके पास जरूरी दस्तावेज आसानी से उपलब्ध नहीं हैं।

 Form 6 को लेकर विवाद क्या है?

इस पूरे मामले में Form 6 भी महत्वपूर्ण है।

Form 6 का इस्तेमाल कोई व्यक्ति मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए करता है।

विपक्ष का आरोप है कि SIR के दौरान Form 6 से जुड़ी प्रक्रिया में अतिरिक्त घोषणा/जानकारी की व्यवस्था की गई, जिससे नए मतदाताओं के लिए प्रक्रिया कठिन हो सकती है।

विपक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग ने ऐसा कदम उठाया जो मतदाता बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।

लेकिन चुनाव आयोग की सफाई क्या है?

चुनाव आयोग का कहना है कि मूल Form 6 को बदला नहीं गया है, बल्कि उसके साथ एक अतिरिक्त घोषणा की व्यवस्था की गई है।

यानी यहां दोनों पक्षों के दावे अलग हैं—

विपक्ष: Form 6 में बदलाव से मतदाताओं पर असर पड़ सकता है।

ECI: Form 6 में मूल बदलाव नहीं किया गया, केवल अतिरिक्त declaration जोड़ा गया है।

सुप्रीम कोर्ट की भूमिका क्या है?

मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच चुका है।

सुप्रीम कोर्ट में Form 6 और SIR से जुड़े मुद्दों पर सुनवाई के दौरान अदालत ने इस प्रक्रिया से संबंधित रिकॉर्ड और बदलावों को लेकर सवाल उठाए हैं।

अदालत की चिंता यह है कि Form 6 में बदलाव आखिर किस आधार पर और किस प्रक्रिया के तहत किया गया।

यहां एक बात बहुत महत्वपूर्ण है:

सुप्रीम कोर्ट ने अभी यह फैसला नहीं दिया है कि चुनाव आयोग दोषी है।

अदालत की ओर से रिकॉर्ड की जांच और मामले की न्यायिक समीक्षा की जा रही है।

इसलिए विपक्ष के राजनीतिक आरोपों और अदालत के अंतिम निष्कर्ष को अलग-अलग समझना जरूरी है।

आज विपक्ष ने मार्च क्यों निकाला?

INDIA गठबंधन के सांसदों का कहना है कि चुनाव आयोग को मतदाता सूची से जुड़े मामलों में पूरी पारदर्शिता रखनी चाहिए।

विपक्ष की प्रमुख मांगें हैं:

1. CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा

विपक्ष चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहा है।

2. SIR की प्रक्रिया पर रोक

विपक्ष चाहता है कि SIR की प्रक्रिया की समीक्षा की जाए और जब तक पूरी पारदर्शिता न हो, इसे आगे न बढ़ाया जाए।

3. मतदाता सूची में पारदर्शिता

विपक्ष चाहता है कि जिन मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं, उनकी जानकारी और प्रक्रिया सार्वजनिक रूप से स्पष्ट हो।

4. योग्य मतदाताओं का नाम न हटे

विपक्ष का सबसे बड़ा दावा है कि किसी भी वास्तविक और योग्य नागरिक का नाम सिर्फ दस्तावेजों की कमी या प्रक्रिया संबंधी कारणों से मतदाता सूची से नहीं हटना चाहिए।

मार्च में कौन-कौन शामिल है?

INDIA गठबंधन के कई विपक्षी दलों के सांसद इस मार्च में शामिल हुए हैं।

मार्च की शुरुआत संसद के मकर द्वार से हुई और सांसद निर्वाचन सदन, यानी चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर बढ़े।

हालांकि गठबंधन के सभी दल इस प्रदर्शन में एक साथ नहीं हैं। कुछ दलों ने मार्च में शामिल होने से दूरी बनाई है।

दिल्ली में सुरक्षा क्यों बढ़ाई गई?

विपक्ष के मार्च को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने संसद और चुनाव आयोग कार्यालय के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी है।

मार्च के रास्ते में बैरिकेडिंग और अतिरिक्त पुलिस बल लगाया गया है।

प्रशासन की चिंता यह है कि बड़ी संख्या में सांसदों और समर्थकों के एक साथ आने से यातायात और कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

मामला इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

यह विवाद केवल चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव नहीं है।

इसका सीधा संबंध मतदाता सूची और मतदान के अधिकार से है।

अगर किसी योग्य नागरिक का नाम मतदाता सूची में नहीं है, तो वह चुनाव में मतदान नहीं कर सकता।

इसीलिए विपक्ष इसे लोकतंत्र और "वोट के अधिकार" का मुद्दा बता रहा है।

दूसरी ओर चुनाव आयोग का तर्क है कि अगर मतदाता सूची में गलत, डुप्लीकेट या अयोग्य नाम मौजूद रहेंगे तो चुनाव की विश्वसनीयता पर सवाल उठेंगे। इसलिए मतदाता सूची का समय-समय पर पुनरीक्षण जरूरी है।

सबसे जरूरी बात

अभी यह कहना गलत होगा कि सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को दोषी ठहरा दिया है। अदालत मामले की जांच/सुनवाई कर रही है। वहीं चुनाव आयोग अपने फैसले और प्रक्रिया को उचित बता रहा है।

इस समय पूरा मामला तीन स्तरों पर चल रहा है—

राजनीतिक विरोध + चुनाव आयोग की सफाई + सुप्रीम कोर्ट की न्यायिक समीक्षा।


असली ‘सेवा-संकल्प’ बच्चों को पढ़ाना और समझदार बनाना है : गेंदलाल कोकडिया

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सरकारी कार्यक्रम में प्राचार्यों और प्रधानपाठकों की अनिवार्य उपस्थिति पर उठे सवाल, शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होने की चिंता

महासमुंद- ‘सेवा-संकल्प अभियान’ के तहत सलिहाभांठा में आयोजित समस्या-समाधान शिविर में महासमुंद स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा क्षेत्र के सभी प्राचार्यों एवं प्रधानपाठकों की उपस्थिति अनिवार्य किए जाने को लेकर सवाल उठाए गए हैं। आदेश के चलते क्षेत्र के कई स्कूलों के प्राचार्य और प्रधानपाठक शिविर में उपस्थित रहे, जिससे स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित होने की बात कही जा रही है।

शिक्षा के मानवीयकरण एवं चेतना विकास मूल्य शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रहे अभिभावक विद्यालय, कोकड़ी, महासमुंद के प्रधान अध्यापक गेंदलाल कोकडिया ने इस व्यवस्था पर चिंता जताते हुए कहा कि शिक्षकों और प्रधानपाठकों का प्राथमिक दायित्व बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना, उन्हें समझदार और जिम्मेदार नागरिक बनाना है।

कोकडिया का कहना है कि समस्या-समाधान शिविर में केवल उन्हीं स्कूलों के प्रधानपाठक और प्राचार्य उपस्थित हों, जिनके विद्यालय से संबंधित कोई समस्या है। सभी स्कूलों के प्रधानपाठकों एवं प्राचार्यों को एक साथ बुलाना आवश्यक नहीं होना चाहिए।

उन्होंने बताया कि उनके विद्यालय में ऐसी कोई समस्या नहीं थी, जिसके कारण वे स्वयं शिविर में उपस्थित नहीं हुए। हालांकि, उनके संकुल प्राचार्य द्वारा सभी प्रधानपाठकों को शिविर में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया था।

‘स्कूल छोड़कर सरकारी कार्यक्रमों में उपस्थिति क्यों?’

कोकडिया के अनुसार, यदि सरकारी कार्यक्रमों में सभी प्राचार्यों और प्रधानपाठकों की अनिवार्य उपस्थिति कराई जाती है, तो इसका सीधा असर स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था पर पड़ता है। स्कूलों के जिम्मेदार अधिकारी एवं शिक्षक यदि विद्यालय के बजाय अन्य कार्यक्रमों में उपस्थित रहेंगे, तो बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होना स्वाभाविक है।

उन्होंने कहा कि लंबे समय में ऐसी व्यवस्था से जनमानस में सरकारी स्कूलों की छवि पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। लोगों के बीच यह धारणा बन सकती है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई के बजाय शिक्षक और प्रधानपाठक विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों में व्यस्त रहते हैं।

‘आदेश जारी करने से पहले होना चाहिए चिंतन’

कोकडिया ने कहा कि किसी भी आदेश को जारी करने से पहले उसके शैक्षणिक प्रभाव पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। यदि किसी कार्यक्रम का उद्देश्य जनता की समस्याओं का समाधान करना है, तो उसके लिए ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए जिससे स्कूलों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे कार्यक्रमों में संकुल समन्वयकों एवं संकुल प्राचार्यों की उपस्थिति सुनिश्चित की जा सकती है। स्कूलों से संबंधित समस्याओं को वे संबंधित विद्यालयों से जानकारी लेकर शिविर में प्रस्तुत कर सकते हैं। इससे एक ओर लोगों की समस्याओं का समाधान होगा और दूसरी ओर विद्यालयों में बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित नहीं होगी।

‘भीड़ जुटाना नहीं, शिक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी’

गेंदलाल कोकडिया ने स्कूल शिक्षा विभाग महासमुंद, शिक्षा मंत्री, कलेक्टर महासमुंद एवं मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि सरकारी कार्यक्रमों में प्राचार्यों और प्रधानपाठकों को केवल भीड़ बढ़ाने के उद्देश्य से अनिवार्य रूप से नहीं बुलाया जाए। इसके लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।

उन्होंने कहा कि यदि ऐसे कार्यक्रमों में केवल आवश्यक अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, तो सरकारी स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था बेहतर होगी और आम जनता के बीच सरकारी स्कूलों की छवि भी मजबूत होगी।

उन्होंने केंद्र सरकार से भी आग्रह किया कि शिक्षकों के मूल दायित्व को प्राथमिकता देने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश सभी राज्यों में लागू किए जाएं।

कोकडिया ने कहा कि शिक्षक का सबसे महत्वपूर्ण काम बच्चों को पढ़ाना, उन्हें समझदार बनाना और बेहतर नागरिक के रूप में तैयार करना है। यही असली ‘सेवा-संकल्प’ है—सरकारी कार्यक्रमों में अनावश्यक रूप से भीड़ बढ़ाना नहीं।

दिल्ली अब दूर नहीं: सरगुजा को मिली बड़ी रेल सौगात, अम्बिकापुर से हजरत निजामुद्दीन के लिए अब सप्ताह में दो दिन ट्रेन

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सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज ने हरी झंडी दिखाकर द्वितीय साप्ताहिक ट्रेन को किया रवाना

मंगलवार और गुरुवार को अम्बिकापुर से दिल्ली के लिए मिलेगी सीधी रेल सुविधा

रेलवे स्टेशन में नया प्लेटफॉर्म, लाइनों का विस्तार और बड़े एफओबी सहित यात्री सुविधाओं के विस्तार पर चल रहा कार्य

अम्बिकापुर- सरगुजा संभाग के रेल यात्रियों को बड़ी सुविधा मिली है। अम्बिकापुर से हजरत निजामुद्दीन के बीच संचालित एक्सप्रेस ट्रेन की सेवा अब सप्ताह में एक दिन के स्थान पर दो दिन उपलब्ध होगी। मंगलवार को अम्बिकापुर रेलवे स्टेशन से द्वितीय साप्ताहिक ट्रेन को सांसद चिंतामणि महाराज ने हरी झंडी दिखाकर निर्धारित समय 7.30 पर रवाना किया। इस दौरान उन्होंने ट्रेन में सफर कर रहे यात्रियों से मुलाकात कर उन्हें पुष्प भेंट किए और सुखद यात्रा की शुभकामनाएं दीं।

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर मंडल द्वारा गाड़ी संख्या 22407 अम्बिकापुर–हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस का संचालन अब प्रत्येक मंगलवार एवं गुरुवार को किया जाएगा। ट्रेन अम्बिकापुर से प्रातः 7:30 बजे रवाना होगी। वहीं गाड़ी संख्या 22408 हजरत निजामुद्दीन–अम्बिकापुर एक्सप्रेस प्रत्येक रविवार एवं मंगलवार को रात्रि 11 बजे हजरत निजामुद्दीन से रवाना होगी। सेवा आवृत्ति बढ़ाए जाने से सरगुजा संभाग के यात्रियों को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए सप्ताह में एक अतिरिक्त सीधी रेल सेवा उपलब्ध हो गई है।

सरगुजा संभाग के यात्रियों की लंबे समय से थी मांग—सांसद श्री चिंतामणि महाराज

सांसद चिंतामणि महाराज ने कहा कि अम्बिकापुर से दिल्ली के लिए सप्ताह में दो दिन ट्रेन संचालन की मांग लंबे समय से की जा रही थी। इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे। उन्होंने कहा कि रेल सेवा की आवृत्ति बढ़ने से पूरे सरगुजा संभाग के लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी।

उन्होंने कहा कि पहले सप्ताह में एक दिन ट्रेन चलने के कारण सभी यात्रियों को यात्रा का अवसर नहीं मिल पाता था। अब अतिरिक्त फेरा शुरू होने से यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी। उन्होंने बताया कि प्रथम दिन भी यात्रियों में नई सेवा को लेकर उत्साह दिखाई दिया।  रायगढ़,जशपुर क्षेत्र सहित अन्य स्थानों से भी यात्री इस ट्रेन से यात्रा करने पहुंचे। उन्होंने इस सुविधा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति सरगुजा संभाग की जनता की ओर से आभार व्यक्त किया।

यात्रियों की मांग पर बढ़ाई गई ट्रेन की आवृत्ति—डीआरएम राकेश रंजन

डीआरएम राकेश रंजन ने बताया कि क्षेत्र के लोगों द्वारा लंबे समय से दिल्ली के लिए संचालित रेल सेवा को सप्ताह में एक दिन से बढ़ाकर दो दिन करने की मांग की जा रही थी। जनप्रतिनिधियों की मांग के आधार पर रेल मंत्रालय द्वारा ट्रेन की आवृत्ति बढ़ाकर सप्ताह में दो दिन की गई है।

उन्होंने कहा कि इससे न केवल अम्बिकापुर बल्कि ट्रेन के मार्ग में आने वाले विभिन्न स्टेशनों के यात्रियों को भी लाभ मिलेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि क्षेत्र के लोग इस अतिरिक्त रेल सेवा का अधिक से अधिक उपयोग करेंगे।

अम्बिकापुर रेलवे स्टेशन में बढ़ेंगी सुविधाएं

डीआरएम रंजन ने अम्बिकापुर रेलवे स्टेशन में किए जा रहे विकास कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि स्टेशन में नया प्लेटफॉर्म बनाया जा रहा है। रेलवे लाइनों का विस्तार करने के साथ ही बड़े फुट ओवरब्रिज (एफओबी) का निर्माण भी कराया जा रहा है। इसके अतिरिक्त कोचिंग सुविधाओं में सुधार का कार्य किया जा रहा है। भविष्य में अम्बिकापुर से और ट्रेनों के संचालन की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए जरूरी अधोसंरचना और सुविधाओं के विस्तार पर कार्य किया जा रहा है।

शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार के लिए आवागमन होगा आसान—महापौर

नगर निगम महापौर मंजूषा भगत ने कहा कि अम्बिकापुर से दिल्ली के लिए सप्ताह में दो दिन सीधी ट्रेन की सुविधा मिलना नगरवासियों और पूरे क्षेत्र के यात्रियों के लिए उपयोगी है। इससे दिल्ली आने-जाने वाले विद्यार्थियों, मरीजों, व्यापारियों सहित अन्य यात्रियों को आवागमन में सहूलियत मिलेगी। उन्होंने इस रेल सुविधा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति नगरवासियों की ओर से आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर डीसीएम एस. भारतीयन, एसआर डीआरएम अहूजा, पार्षद आलोक दुबे, पार्षद  रविकांत उरांव, भारत सिंह सिसोदिया, अरुणा सिंह, विनोद हर्ष सहित जनप्रतिनिधि, रेलवे के अधिकारी और वरिष्ठ नागरिक गण उपस्थित रहे।


सुबह की बड़ी खबरें | आज का न्यूज़ बुलेटिन

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नमस्कार! आइए जानते हैं आज सुबह की सबसे महत्वपूर्ण खबरें

छत्तीसगढ़ की बड़ी खबरें

1. छत्तीसगढ़ को ₹43,250 करोड़ के निवेश प्रस्ताव

छत्तीसगढ़ के लिए बड़ी आर्थिक खबर है। सिंगापुर के SING Forum 2026 में राज्य को करीब ₹43,250 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इनमें लगभग ₹41,750 करोड़ का AI-Ready Data Centre Campus भी शामिल है। इससे राज्य में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार के नए अवसर बनने की उम्मीद है।

2. महासमुंद में तेंदुए का आतंक

महासमुंद जिले में एक तेंदुआ घर में घुस गया और परिवार के 6 लोगों पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया। इनमें 3 लोगों की हालत गंभीर बताई गई है। यह इलाके में दो दिनों के भीतर तेंदुए के हमले की दूसरी घटना बताई गई है। 

3. महासमुंद में हीरों की खबर चर्चा में

महासमुंद जिले में हीरे मिलने की खबर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार इलाके में मिले पत्थरों से बड़े हीरा भंडार की संभावना को लेकर चर्चा तेज हुई है। मामले में आगे की जांच और पुष्टि महत्वपूर्ण होगी। 

4. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का अहम फैसला

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने डॉक्टरों की पिछली अवधि से लागू होने वाली 3 साल की स्टडी लीव की मांग को खारिज किया है। अदालत ने कहा कि किसी खास तारीख पर जारी कानूनी प्रावधान या छूट को सामान्यतः पीछे की तारीख से लागू नहीं किया जा सकता। 

देश की बड़ी खबरें

5. भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में गतिरोध

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता फिलहाल एक तरह के गतिरोध/ठहराव पर पहुंच गई है। टैरिफ और बाजार पहुंच जैसे मुद्दे बातचीत में अहम बने हुए हैं। 

6. चुनाव आयोग को लेकर राजनीतिक विवाद

मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव प्रक्रिया को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच विवाद जारी है। हाल में दिल्ली और मुंबई में चुनाव आयोग के प्रमुख के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन भी हुए। चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में बदलाव को सही ठहराया है।

7. IndiGo ने बढ़ाया ईंधन शुल्क

बढ़ती एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) कीमतों के कारण IndiGo ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर 6 अक्टूबर से ईंधन शुल्क बढ़ाने की घोषणा की है। इसका असर हवाई यात्रा के किराए पर पड़ सकता है। 

अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार

8. आज शेयर बाजार में तेजी की उम्मीद

सोमवार की मजबूती के बाद आज भारतीय शेयर बाजार के सकारात्मक शुरुआत करने की उम्मीद है। GIFT Nifty करीब 22,648 के स्तर पर था। वैश्विक बाजारों की मजबूती और कुछ कंपनियों के अच्छे तिमाही अपडेट से बाजार को सहारा मिला है। 

9. RBI के फैसले पर बाजार की नजर

बुधवार को RBI की मौद्रिक नीति का फैसला आना है। महंगाई, कमजोर रुपया और महंगा कच्चा तेल RBI के लिए बड़ी चुनौतियां बने हुए हैं। Reuters के सर्वे में 25 बेसिस पॉइंट की दर वृद्धि की संभावना जताई गई है।

10. रुपया दबाव में

भारतीय रुपया हाल के दिनों में रिकॉर्ड निचले स्तरों के आसपास बना हुआ है। डॉलर की मजबूती और विदेशी पूंजी के बाहर जाने से रुपये पर दबाव है। 

11. कच्चे तेल की कीमतों में हल्की नरमी

आज कच्चे तेल की कीमतों में थोड़ी गिरावट आई है। Brent crude करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा। मध्य-पूर्व से बढ़ी आपूर्ति और G7 के आपात भंडार से तेल जारी करने की योजना ने कीमतों पर दबाव बनाया है।

दुनिया की बड़ी खबरें

12. अमेरिकी शेयर बाजार में रिकॉर्ड तेजी

अमेरिकी टेक शेयरों में तेजी के कारण Nasdaq रिकॉर्ड ऊंचाई पर बंद हुआ। AI कंपनियों में मजबूत प्रदर्शन ने बाजार को सहारा दिया। Nvidia का बाजार मूल्य भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा। 

 13. यूरो पर दबाव

फ्रांस की बढ़ती कर्ज समस्या और यूरोप में राजनीतिक अनिश्चितता के कारण यूरो 17 महीने के निचले स्तर के करीब पहुंच गया है।

14. नाइजीरिया में सैन्य विमान हादसा

नाइजीरिया में एक सैन्य विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में 32 लोगों की मौत की खबर है। 

विज्ञान, AI और टेक्नोलॉजी

15. AI का असर भारतीय IT कंपनियों पर

भारतीय IT कंपनियों के सितंबर तिमाही के नतीजों पर AI और ग्राहकों द्वारा खर्च में सावधानी का असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। बड़ी IT कंपनियों की कमाई और भविष्य की growth guidance पर निवेशकों की नजर है। 

खेल जगत

 16. भारत ने पाकिस्तान को हराकर क्रिकेट में जीत दर्ज की

भारत ने पाकिस्तान को 19 रन से हराकर पुरुषों का फाइनल जीता। इससे भारत ने इस प्रतियोगिता में पुरुष और महिला—दोनों वर्गों में खिताब अपने नाम किए। 

मौसम

छत्तीसगढ़ में अक्टूबर के इस दौर में कई इलाकों में बादल और स्थानीय बारिश की स्थिति बन सकती है। महासमुंद और आसपास के क्षेत्रों में मौसम के अचानक बदलने की संभावना को देखते हुए स्थानीय मौसम अपडेट पर नजर रखना बेहतर रहेगा। 


पीपला और ग्रामीणों की पहल से आदर्श ग्राम की ओर बढ़ता चरौदा, विशेष ग्राम सभा में पारित हुए चार लक्ष्य

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आरंग- शासन के निर्देशानुसार सोमवार को ग्राम पंचायत चरौदा में विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया गया। सभा में सरपंच देवशरण धीवर, सचिव, उपसरपंच, समस्त पंचगण, पटवारी, शिक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन, स्वास्थ्य कार्यकर्ता, महिला स्व-सहायता समूह एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजनों ने सहभागिता की।ग्राम सभा में गांधी जयंती, स्वच्छता अभियान, चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा, ग्राम पंचायत विकास योजना, शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं, पेयजल, स्वच्छता, मूलभूत सुविधाओं तथा आय-व्यय के साथ-साथ ग्रामीणों की समस्याओं एवं सुझावों पर विस्तार से चर्चा हुई।

शिक्षक की पहल बनी आदर्श ग्राम की नींव

इस पूरे आदर्श ग्राम अभियान के प्रणेता शिक्षक एवं पीपला वेलफेयर फाउंडेशन के सक्रिय सदस्य महेन्द्र कुमार पटेल हैं। गत माह उन्हीं की पहल पर फाउंडेशन ने ग्रामवासियों और पंचायत के साथ मिलकर शासकीय गाइडलाइन अनुसार चरौदा को आदर्श ग्राम बनाने का प्रस्ताव रखा था, जिसका सभी जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने हर्ष के साथ स्वागत किया।

उच्च अधिकारियों के दिशा-निर्देश व पटेल के निरंतर प्रयास और ग्रामीणों के सहयोग से चरौदा ने  चार बड़े लक्ष्य हासिल कर लिए हैं। शत-प्रतिशत बच्चों का स्कूल में प्रवेश,  बाल विवाह मुक्त ग्राम चरौदा, हरियर ग्राम चरौदा, शत-प्रतिशत वय वंदन योजना में पंजीयन इन चारों लक्ष्यों की प्राप्ति का प्रस्ताव सर्वसम्मति से ग्राम सभा में पारित किया गया। फाउंडेशन के सदस्यों ने ग्राम सभा में आदर्श ग्राम के शेष लक्ष्यों और उसे पूर्ण करने की रूपरेखा पर विस्तार से प्रकाश डाला, जिसकी उपस्थित ग्रामीणों ने  सराहना की।


सरपंच देवशरण धीवर ने बताया कि फाउंडेशन और उच्च अधिकारियों के दिशा-निर्देशन में शेष लक्ष्यों पर भी तेजी से कार्य जारी है।

चरौदा अब सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि जनभागीदारी से आदर्श बनते ग्राम का मॉडल बन रहा है।

सिंगापुर की एनर्जी कैपिटल ग्लोबल छत्तीसगढ़ में एआई-रेडी डेटा सेंटर कैंपस में करेगी ₹41,750 करोड़ का निवेश

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प्रथम SING फोरम 2026 में राज्य को ₹43,250 करोड़ के FDI निवेश की प्रतिबद्धताएं मिलीं

रायपुर- छत्तीसगढ़ ने आज भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था का प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाते हुए सिंगापुर में आयोजित प्रथम सिंगापुर-इंडिया नेटवर्क फॉर ग्रोथ (SING) फोरम 2026 में ₹43,250 करोड़ के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की प्रतिबद्धताएं प्राप्त कीं। इनमें एआई-रेडी डेटा सेंटर कैंपस के लिए ₹41,750 करोड़ की एक बड़ी निवेश प्रतिबद्धता शामिल है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने फोरम में राज्य के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया, जहां छत्तीसगढ़ भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के नामांकन पर सहभागिता कर रहा था।


यह महत्वपूर्ण निवेश प्रतिबद्धता सिंगापुर मुख्यालय वाली एनर्जी कैपिटल ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड की ओर से आई है, जो छत्तीसगढ़ में 100 मेगावाट क्षमता का एआई-रेडी डेटा सेंटर कैंपस स्थापित करेगी। एनर्जी कैपिटल ग्लोबल एशिया-प्रशांत क्षेत्र में ऑन-साइट स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े एआई-रेडी डेटा सेंटर्स का विकास और वित्तपोषण करती है तथा इसकी उपस्थिति सिंगापुर, भारत, मलेशिया, कजाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया में है। मुख्यमंत्री ने फोरम में कंपनी को ‘इन्विटेशन टू इन्वेस्ट’ सौंपा।

यह निवेश प्रतिबद्धता छत्तीसगढ़ में डिजिटल क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों को और गति देती है। राज्य में पहले से ही भारत का पहला एआई डेटा सेंटर पार्क स्थापित है। ये परियोजनाएं मिलकर छत्तीसगढ़ को भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के एक उभरते केंद्र के रूप में स्थापित कर रही हैं।

एनर्जी कैपिटल ग्लोबल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्टानिस्लाव बोरिसोव ने कहा, “एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जिस ऊर्जा, भूमि और राजनीतिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता है, वह आज छत्तीसगढ़ में उपलब्ध है। यह एमओयू एक दीर्घकालिक साझेदारी की शुरुआत है। हम मध्य भारत में सबसे बड़ा एआई-रेडी डेटा सेंटर कैंपस विकसित करने, राज्य में अंतरराष्ट्रीय पूंजी और विशेषज्ञता लाने तथा इसके संचालन के लिए छत्तीसगढ़ के इंजीनियरों को प्रशिक्षित करने की दिशा में आगे बढ़ने को लेकर उत्साहित हैं।”

राज्य को सनस्ट्रीम ग्रीन एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड से सोलर क्षेत्र के साथ-साथ संबंधित बैटरी स्टोरेज और कंपोनेंट्स के लिए ₹1,500 करोड़ का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्रस्ताव भी प्राप्त हुआ। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ये निवेश प्रतिबद्धताएं छत्तीसगढ़ की नीतियों, संभावनाओं और लोगों के प्रति विश्वास का प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि इससे राज्य के युवाओं के लिए नए अवसर सृजित होंगे और छत्तीसगढ़ को विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य के और करीब ले जाने में मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ एक फायरसाइड चैट में भी हिस्सा लिया, जिसका संचालन सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन द्वारा किया गया। छत्तीसगढ़ का पक्ष प्रभावी ढंग से रखते हुए उन्होंने कहा, “हम बंद कमरों में चर्चा करके सुधार नहीं लाते। हम सीधे उद्योग जगत से उनकी कठिनाइयों के बारे में पूछते हैं और उसके अनुरूप अपनी व्यवस्थाओं में बदलाव करते हैं। 450 से अधिक सुधार किए जा चुके हैं और यह ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ तब तक नहीं रुकेगी, जब तक लोग स्वयं यह न कहें कि अब और सुधार की आवश्यकता नहीं है।” उन्होंने कहा कि सुधारों, प्रगतिशील औद्योगिक नीति और सक्रिय सरकार के इस संयोजन के कारण छत्तीसगढ़ को केवल 18 महीनों में ₹8 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।

सिंगापुर सरकार के विदेश मंत्रालय तथा व्यापार एवं उद्योग मंत्रालय की राज्य मंत्री गैन सियो ह्वांग फोरम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। उनकी उपस्थिति ने भारतीय राज्यों के साथ आर्थिक संबंधों को और गहरा करने को सिंगापुर द्वारा दिए जा रहे महत्व को रेखांकित किया। मास्टरकार्ड, आईएचसीएल (ताज होटल्स) और नेस्ले सहित वैश्विक कंपनियों के वरिष्ठ नेतृत्व ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।

फोरम के इतर मुख्यमंत्री ने एक्वाटेक और एड्रॉइट ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। इन चर्चाओं में उद्योगों के लिए अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग से संबंधित अधोसंरचना और छत्तीसगढ़ में खाद्य प्रसंस्करण के व्यापक अवसरों पर ध्यान केंद्रित किया गया।

मुख्यमंत्री 6 अक्टूबर 2026 को CEO राउंडटेबल में सिंगापुर की प्रमुख कंपनियों और निवेश संस्थानों के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करेंगे और फोरम से बनी निवेश की गति को आगे बढ़ाएंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबके लिए आवास’ के संकल्प को छत्तीसगढ़ पूरी प्रतिबद्धता से कर रहा साकार - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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जमीन से लेकर किफायती घर तक प्रभावी व्यवस्था खड़ी करने के प्रयासों को मिला सम्मान - उप मुख्यमंत्री अरुण साव

ईडब्ल्यूएस-एलआईजी के लिए भूमि आरक्षण और किफायती आवास उपलब्ध कराने में छत्तीसगढ़ की पहल को राष्ट्रीय सम्मान

विश्व पर्यावास दिवस पर नई दिल्ली के विज्ञान भवन में छत्तीसगढ़ पुरस्कृत

प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत छत्तीसगढ़ की ‘बेस्ट प्रैक्टिस’ को मिली राष्ट्रीय पहचान

निजी कॉलोनियों में भूमि आरक्षण से 25,413 आवासों के लिए बिना सरकारी खर्च के उपलब्ध हुई जमीन

रायपुर- आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और निम्न आय वर्ग (LIG) के परिवारों को किफायती एवं सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किए जा रहे नवाचारों और प्रभावी कार्यप्रणाली को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। 

ईडब्ल्यूएस-एलआईजी वर्ग के लिए भूमि आरक्षण तथा एएचपी (Affordable Housing in Partnership) के माध्यम से आवास उपलब्ध कराने की उत्कृष्ट कार्यप्रणाली (Best Practice) के लिए भारत सरकार के आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत किया है।

विश्व पर्यावास दिवस के अवसर पर आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने छत्तीसगढ़ को यह पुरस्कार प्रदान किया। राज्य की ओर से नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा तथा राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी-सह-राज्य मिशन संचालक, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) सुमित अग्रवाल ने सम्मान ग्रहण किया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार शहरी क्षेत्रों में आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए आवास की उपलब्धता बढ़ाने के साथ ही उन्हें बेहतर नागरिक सुविधाओं से युक्त सम्मानजनक जीवन प्रदान करने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव के मार्गदर्शन में विभाग द्वारा आवासीय परियोजनाओं की स्वीकृति, भूमि की उपलब्धता, निर्माण की गुणवत्ता और समयबद्ध पूर्णता तक प्रत्येक स्तर पर प्रभावी निगरानी की जा रही है।

हर पात्र परिवार को पक्का आवास हमारा संकल्प

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस राष्ट्रीय उपलब्धि के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, SUDA तथा नगरीय निकायों की पूरी टीम को बधाई दी है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में छत्तीसगढ़ की कार्यप्रणाली को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलना पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए भूमि आरक्षण तथा एएचपी के माध्यम से किफायती आवास उपलब्ध कराने की हमारी पहल को मिली यह पहचान राज्य सरकार की जनकल्याण के प्रति प्रतिबद्धता और परिणामोन्मुख कार्यशैली का प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के ‘सबके लिए आवास’ के संकल्प को छत्तीसगढ़ पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ा रहा है। पक्का घर केवल चार दीवारें और छत नहीं, बल्कि एक परिवार की सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य का आधार है। राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रदेश का कोई भी पात्र परिवार पक्के आवास से वंचित न रहे और जरूरतमंद परिवारों को मूलभूत सुविधाओं से युक्त बेहतर आवास उपलब्ध हो।

25,413 आवासों के लिए बिना सरकारी खर्च के मिली जमीन

शहरी क्षेत्रों में गरीब और निम्न आय वर्ग के लिए आवास निर्माण की सबसे बड़ी चुनौतियों में भूमि की उपलब्धता प्रमुख रही है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस चुनौती के समाधान के लिए निजी कॉलोनियों में ईडब्ल्यूएस और एलआईजी वर्ग के लिए भूमि आरक्षण के प्रावधान को प्रभावी ढंग से लागू किया है।

इस व्यवस्था के परिणामस्वरूप राज्य में 25 हजार 413 आवासों के निर्माण के लिए बिना सरकारी खर्च के भूमि उपलब्ध हुई है। इनमें प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 के अंतर्गत 17 हजार 790 और प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के अंतर्गत 7 हजार 623 आवास शामिल हैं।

इस पहल की विशेषता यह है कि कमजोर एवं निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए आवास केवल शहरों के बाहरी क्षेत्रों तक सीमित न रहकर नियोजित कॉलोनियों और विकसित शहरी क्षेत्रों का हिस्सा बन रहे हैं। इससे लाभार्थी परिवारों को सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा सहित अन्य आवश्यक शहरी सुविधाओं तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

भूमि से लेकर आवास तक छत्तीसगढ़ ने विकसित की प्रभावी व्यवस्था

राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत एएचपी मॉडल के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया है। भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ ही परियोजनाओं की स्वीकृति, निर्माण की प्रगति, गुणवत्ता और समयबद्ध पूर्णता की नियमित निगरानी की जा रही है।

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग तथा SUDA द्वारा नगरीय निकायों के साथ समन्वय कर ऐसी व्यवस्था विकसित की गई है, जिससे शहरी गरीब परिवारों के लिए किफायती आवास की उपलब्धता को गति मिली है। इसी समग्र कार्यप्रणाली को भारत सरकार ने ‘बेस्ट प्रैक्टिस’ के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी है।

उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने राष्ट्रीय सम्मान के लिए विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों और नगरीय निकायों की टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि शहरी गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों को किफायती आवास उपलब्ध कराने की दिशा में छत्तीसगढ़ द्वारा किए जा रहे ठोस प्रयासों की पहचान है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने शहरी गरीबों के आवास के लिए केवल योजना बनाने तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि जमीन की उपलब्धता से लेकर किफायती घर के निर्माण तक प्रभावी व्यवस्था विकसित की है। ईडब्ल्यूएस-एलआईजी वर्ग के लिए भूमि आरक्षण और एएचपी मॉडल को राष्ट्रीय सम्मान मिलना इसी कार्य का परिणाम है।

साव ने कहा कि विभाग का लक्ष्य है कि शहरों में जरूरतमंद परिवारों को तेजी से सम्मानजनक और किफायती आवास उपलब्ध हों। यह राष्ट्रीय सम्मान पूरी टीम को और बेहतर परिणाम देने के लिए प्रेरित करने के साथ हमारी जिम्मेदारी भी बढ़ाता है।

‘सबके लिए आवास’ की दिशा में छत्तीसगढ़ का मजबूत कदम

राज्य सरकार की इस पहल से 25 हजार से अधिक शहरी गरीब एवं निम्न आय वर्ग के परिवारों के पक्के घर का सपना साकार होने की दिशा में आगे बढ़ा है। निजी कॉलोनियों में भूमि आरक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन ने एक ओर आवास निर्माण के लिए जमीन की उपलब्धता की बड़ी चुनौती का समाधान किया है, वहीं दूसरी ओर समाज के कमजोर वर्गों को विकसित शहरी क्षेत्रों और बेहतर नागरिक सुविधाओं से जोड़ने का रास्ता भी बनाया है।

विश्व पर्यावास दिवस पर मिला यह राष्ट्रीय सम्मान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबके लिए आवास’ के संकल्प को धरातल पर उतारने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार की प्रतिबद्धता, नवाचार और परिणामोन्मुख कार्यप्रणाली की राष्ट्रीय पहचान है।

स्पेन में समय से पहले आम चुनाव का ऐलान, 29 नवंबर को होगा मतदान

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स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने देश में समय से पहले आम चुनाव कराने का ऐलान किया है। प्रधानमंत्री ने सोमवार को घोषणा की कि स्पेन में 29 नवंबर 2026 को आम चुनाव होंगे। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब उनकी सरकार को संसद में लगातार राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

आवास संकट बना बड़ा मुद्दा

स्पेन में बढ़ती महंगाई और खासकर मकानों तथा किराए की बढ़ती कीमतों को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। हाल के दिनों में देश के कई शहरों में हजारों लोगों ने प्रदर्शन कर सरकार से किफायती आवास और किराए को लेकर ठोस कदम उठाने की मांग की।

संसद में सरकार को लगा झटका

सरकार की ओर से आवास संकट से निपटने के लिए लाए गए आपातकालीन उपायों को संसद में समर्थन नहीं मिल सका। इन प्रस्तावों में कमजोर वर्गों को बेदखली से राहत देने और किरायेदारों के अधिकार मजबूत करने जैसे कदम शामिल थे। प्रस्तावों के खारिज होने के बाद सरकार पर राजनीतिक दबाव और बढ़ गया।

अब जनता के बीच जाएंगे सांचेज़

प्रधानमंत्री सांचेज़ ने कहा कि अब जनता से नया जनादेश लेने का समय है। उनके नेतृत्व वाली सरकार को संसद में बहुमत के लिए विभिन्न दलों के समर्थन पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में यह चुनाव स्पेन की आगे की राजनीतिक दिशा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

फिलहाल, स्पेन में 29 नवंबर को होने वाला यह चुनाव आवास संकट, सरकार की नीतियों और संसद में राजनीतिक समर्थन जैसे मुद्दों के बीच होगा।

यूक्रेन को जर्मनी की बड़ी सैन्य सहायता, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र के लिए बढ़ाया सहयोग

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यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध के बीच जर्मनी ने यूक्रेन के समर्थन को और मजबूत करने का फैसला किया है। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की यूक्रेन यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और आर्थिक सहायता को लेकर महत्वपूर्ण बातचीत हुई।

रक्षा क्षेत्र में बढ़ेगा सहयोग

जर्मनी यूक्रेन की रक्षा क्षमता मजबूत करने के लिए सैन्य उपकरण, ड्रोन और अन्य रक्षा तकनीक उपलब्ध कराने पर जोर दे रहा है। दोनों देशों के बीच ड्रोन तकनीक और संयुक्त रक्षा उत्पादन को लेकर भी सहयोग बढ़ाने की चर्चा हुई है।

जर्मनी का कहना है कि यूक्रेन को अपनी सुरक्षा मजबूत करने के लिए जरूरी सहायता उपलब्ध कराना यूरोपीय सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है।

ऊर्जा ढांचे को लेकर भी मदद

रूस के हमलों से यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे को हुए नुकसान के बीच ऊर्जा क्षेत्र के पुनर्निर्माण और सुरक्षा पर भी जर्मनी की ओर से सहायता देने की बात कही गई है। सर्दियों से पहले यूक्रेन के बिजली और ऊर्जा नेटवर्क को मजबूत करना एक प्रमुख प्राथमिकता है।

यूरोप का समर्थन जारी

जर्मनी लंबे समय से यूक्रेन के प्रमुख यूरोपीय समर्थकों में शामिल रहा है। नई सहायता के जरिए बर्लिन यूक्रेन की रक्षा क्षमता और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में मदद करना चाहता है।

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच जर्मनी की यह पहल यूरोप की सुरक्षा नीति और यूक्रेन के लिए पश्चिमी देशों के समर्थन को लेकर महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान, सरकार ने शुरू किया जवाबी ऑपरेशन

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यमन में लंबे समय से जारी संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार ने ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के कब्जे वाले इलाकों को वापस लेने के लिए बड़े सैन्य अभियान की घोषणा की है। राष्ट्रपति परिषद के प्रमुख राशद अल-अलीमी ने कहा कि सरकारी बल देश के बाकी हिस्सों को हूती नियंत्रण से मुक्त कराने के लिए अभियान जारी रखेंगे।

ताइज के आसपास बढ़ा तनाव

यह सैन्य अभियान ऐसे समय शुरू हुआ है जब हूती लड़ाकों ने दक्षिण-पश्चिमी यमन के ताइज शहर के आसपास अपनी स्थिति मजबूत की है। हाल में हूतियों ने ताइज और अदन को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मार्ग के पास बढ़त बनाई है। इस मार्ग पर नियंत्रण से ताइज की सरकारी आपूर्ति और आवाजाही प्रभावित हो सकती है।

ताइज यमन का एक महत्वपूर्ण शहर है और लंबे समय से हूती विद्रोहियों की घेराबंदी का सामना कर रहा है। हालिया लड़ाई के बाद शहर के आसपास मानवीय स्थिति को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।

सऊदी अरब ने दिया समर्थन

यमनी सरकार को सऊदी अरब का समर्थन प्राप्त है। सऊदी अधिकारियों ने कहा है कि वह हूती हमलों के खिलाफ यमनी सरकारी बलों को ऑपरेशनल समर्थन देगा। दूसरी ओर, हूतियों ने सऊदी अरब में मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया है, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि तत्काल नहीं हुई है।

लाल सागर और वैश्विक व्यापार पर असर

इस संघर्ष का असर केवल यमन तक सीमित नहीं है। लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य दुनिया के महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल हैं। इस क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधि से जहाजों की सुरक्षा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

मानवीय संकट की चिंता

संघर्ष बढ़ने से बड़ी संख्या में लोगों के विस्थापित होने और खाद्य एवं जरूरी सामान की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है। ताइज और आसपास के इलाकों में जारी लड़ाई ने मानवीय संकट को और गंभीर बना दिया है।


बेमेतरा में 22 बंदरों की मौत का मामला, फसलों को बचाने के लिए गोली मारने का आरोप

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छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले से वन्यजीवों से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। एक गांव में कथित तौर पर 22 बंदरों की मौत के बाद हड़कंप मच गया है। आरोप है कि फसलों को नुकसान से बचाने के लिए बंदरों को गोली मारी गई।

ग्रामीणों के आरोपों के बाद जांच शुरू

मामले की जानकारी सामने आने के बाद वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों की टीम घटनास्थल पर पहुंचकर मृत बंदरों के संबंध में जानकारी जुटा रही है और मौत के कारणों की जांच की जा रही है।

जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि बंदरों की मौत वास्तव में गोली लगने से हुई या इसके पीछे कोई अन्य वजह है। इसके साथ ही घटना में शामिल लोगों की पहचान करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।

फसलों को नुकसान पहुंचाने का दावा

स्थानीय स्तर पर यह बात सामने आई है कि बंदरों के झुंड से फसलों को नुकसान पहुंचने की शिकायतें थीं। इसी वजह से कथित तौर पर उन्हें रोकने के लिए गोली चलाने की बात कही जा रही है। हालांकि, इस मामले में वास्तविक कारण और जिम्मेदार लोगों की भूमिका जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

वन्यजीव संरक्षण को लेकर सवाल

एक साथ बड़ी संख्या में बंदरों की मौत की खबर के बाद वन्यजीव संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, फसलों को वन्यजीवों से बचाने के लिए कानून के दायरे में रहते हुए सुरक्षित उपाय अपनाना जरूरी है।

फिलहाल वन विभाग और पुलिस की जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही बंदरों की मौत की वास्तविक वजह और मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी।

दिल्ली में ₹50 करोड़ की हेरोइन बरामद, अंतरराज्यीय ड्रग्स नेटवर्क का भंडाफोड़

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दिल्ली पुलिस ने नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक कथित अंतरराज्यीय हेरोइन तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनके कब्जे से करीब ₹50 करोड़ कीमत की हेरोइन बरामद करने का दावा किया है।

पुलिस के अनुसार, यह नेटवर्क दिल्ली के अलावा दूसरे राज्यों में भी नशीले पदार्थों की सप्लाई कर रहा था। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क के पीछे कौन लोग हैं और ड्रग्स की सप्लाई कहां से की जा रही थी।

पुलिस की जांच जारी

पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है। पूछताछ के जरिए नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, सप्लायरों और ड्रग्स की सप्लाई के रास्तों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।

जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि बरामद हेरोइन दिल्ली में कहां पहुंचाई जानी थी और इसके पीछे किसी बड़े संगठित गिरोह की भूमिका है या नहीं।

ड्रग्स नेटवर्क पर शिकंजा

दिल्ली में नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों की कार्रवाई लगातार जारी है। इस कार्रवाई को इसी अभियान के तहत एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।

फिलहाल चारों आरोपियों से पूछताछ जारी है और पुलिस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

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