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बलौदाबाजार में सनसनीखेज खुलासा: किराना व्यापारी ने 8 हत्याओं का किया कबूलनामा

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छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रदेश को स्तब्ध कर दिया है। एक किराना व्यापारी ने पुलिस पूछताछ के दौरान पिछले चार महीनों में आठ लोगों की हत्या करने की बात स्वीकार की है।

पुलिस के अनुसार आरोपी ने व्यक्तिगत रंजिश, जमीन संबंधी विवाद, कर्ज के लेन-देन और आपसी दुश्मनी के चलते लोगों को कथित तौर पर जहर देकर मौत के घाट उतारने की बात कबूली है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी अपने निशाने पर उन लोगों को बनाता था, जिनसे उसका किसी न किसी प्रकार का विवाद या मनमुटाव था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष जांच टीम गठित कर दी है और आरोपी के दावों की विस्तृत जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि प्रत्येक मौत से जुड़े तथ्यों और परिस्थितियों की अलग-अलग जांच की जाएगी ताकि सच्चाई सामने लाई जा सके।

इस सनसनीखेज खुलासे के बाद क्षेत्र में दहशत और चर्चा का माहौल है। स्थानीय लोग मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।


भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर बातचीत में बड़ी प्रगति, जल्द हो सकता है समझौता

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भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Deal) को अंतिम रूप देने के लिए दोनों देशों के अधिकारियों के बीच महत्वपूर्ण वार्ताएं जारी हैं। हालिया बातचीत में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है, जिससे निकट भविष्य में समझौते के संपन्न होने की संभावना मजबूत हुई है।

इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को और सुदृढ़ बनाना, बाजार तक पहुंच को आसान बनाना तथा विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार में आने वाली बाधाओं को कम करना है। भारत और अमेरिका लंबे समय से शुल्क, कृषि उत्पादों, विनिर्माण वस्तुओं तथा डिजिटल व्यापार जैसे मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह अंतरिम व्यापार समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है, तो इससे द्विपक्षीय व्यापार को नई गति मिलेगी, निवेश के अवसर बढ़ेंगे और दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को लाभ होगा। साथ ही भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में अधिक अवसर प्राप्त हो सकते हैं।

दोनों पक्षों ने बातचीत में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए शेष मुद्दों के समाधान के लिए वार्ता जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई है। यह समझौता भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


Kisaan School : किसान स्कूल में जुटेंगे प्रदेशभर के मशरूम उत्पादक किसान और वैज्ञानिक, 26 जून को राज्य स्तरीय मशरूम महोत्सव में शामिल होंगी सांसद कमलेश जांगड़े, विधायक समेत अन्य अतिथि भी रहेंगे मौजूद...

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 जांजगीर-चाम्पा. बहेराडीह में स्थित देश के पहले किसान स्कूल में शुक्रवार 26 जून को राज्य स्तरीय मशरूम ( पुटू ) महोत्सव का आयोजन किया जाएगा. वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू की 51 वीं जन्म जयंती के अवसर पर आयोजित इस मशरूम महोत्सव में प्रदेशभर के मशरूम उत्पादक किसान, क़ृषि विशेषज्ञ, मशरूम उत्पादक समूह, युवा उद्यमी और क़ृषि क्षेत्र से जुड़े लोग एवं छात्र-छात्राएं शामिल होंगे.


इस महोत्सव में क्षेत्रीय सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े समेत सीजी भास्कर रायपुर के संपादक जितेंद्र शर्मा, जांजगीर चांपा विधानसभा क्षेत्र के विधायक ब्यास कश्यप, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सत्यलता मिरी, जिला पंचायत की सभापति श्रीमती उमा राजेन्द्र राठौर, बलौदा जनपद पंचायत के सभापति चुड़ामणि राठौर, सरपंच श्रीमती पूना बाई मरकाम अतिथि होंगे। महोत्सव के दौरान 'मशरूम प्रतियोगिता' का आयोजन किया जायेगा। प्रतियोगिता में पहला, दूसरा, तीसरा स्थान प्राप्त करने वाले मशरूम उत्पादक समेत 10 किसानों को 'मशरूम मित्र सम्मान' से सम्मानित किया जायेगा। इसके साथ ही, मशरूम का स्टॉल लगाने वाले प्रतिभागियों को किसान स्कूल परिवार सहभागिता प्रमाण पत्र से सम्मानित किया जाएगा.

इस सम्बन्ध में वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल बहेराडीह के संचालक दीनदयाल यादव ने बताया कि महोत्सव का मुख्य उद्देश्य मशरूम उत्पादन, प्रसंस्करण विपणन और उद्यमिता को बढ़ावा देना है. साथ ही, किसानों, महिला एवं स्व सहायता समूहों, युवाओं और क़ृषि उद्यमियों को स्व रोजगार के नए अवसरों को जोड़ने का प्रयास किया जाएगा.

मशरूम की प्रदर्शनी होगी आकर्षण का केंद्र

किसान स्कूल टीम के डॉ. सुरेश देवांगन, रामाधार देवांगन ने बताया कि महोत्सव के दौरान विविध प्रकार की प्राकृतिक मशरूम, कृत्रिम मशरूम की प्रदर्शनी आकर्षण का मुख्य केंद्र होगी. इसके अलावा मशरूम उत्पादन, एवं उद्यमिता विषयक तकनीकी सत्र सफल उद्यमियों का अनुभव साझा कार्यक्रम तथा राज्य स्तरीय मशरूम प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा. कार्यक्रम में विशेषज्ञों द्वारा आधुनिक तकनीकों, बाजार की सम्भावनाओं और मशरूम आधारित व्यवसाय के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी जाएगी.

'मशरूम मित्र सम्मान' से होंगे सम्मानित

महोत्सव के दौरान आयोजित होने वाले 'मशरूम प्रतियोगिता' में शामिल होने वाले मशरूम उत्पादकों को वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू किसान स्कूल टीम द्वारा 'मशरूम मित्र सम्मान' से सम्मानित किया जाएगा. किसान स्कूल के सदस्यों ने बताया कि मशरूम उत्पादन, कम लागत में अधिक आमदनी देने वाला ब्यवसाय है.-आज के समय में यह खेती बेरोजगार युवाओं, युवतियों, बिहान से जुड़ी स्व सहायता समूह की महिलाओं के लिए स्व रोजगार का प्रभावी माध्यम से लोगों को इस क्षेत्र में आगे बढ़ने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर करने के लिये प्रेरित किया जाएगा.

चार थीम पर आधारित है यह मशरूम महोत्सव

किसान स्कूल के संचालक एवं मशरूम के मास्टर ट्रेनर दीनदयाल यादव ने बताया कि किसान स्कूल में 26 जून को आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय मशरूम महोत्सव, चार थीम को लेकर किया जा रहा है, जिसमें मशरूम उत्पादन समेत पोषण, रोजगार, और आत्मनिर्भरता की ओर एक सशक्त कदम रखी गई है, जो क़ृषि आधारित रोजगार और ग्रामीण विकास को नई दिशा देने का सन्देश देता है. यह मशरूम महोत्सव, छत्तीसगढ़ में पहली बार 'भाजी महोत्सव' की तर्ज पर किया जा रहा है.

भारत में वीआईपी संस्कृति लोकतंत्र और जनजीवन से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय : उपराष्ट्रपति

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भारत के उपराष्ट्रपति ने आज नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति भवन में "VIP Culture in India: Power, Privilege and the Distance from Democracy" पुस्तक का विमोचन किया। यह पुस्तक अरुणाचल प्रदेश से राज्यसभा के पूर्व सदस्य नाबाम रेबिया और सह-लेखक संदीप कुमार द्वारा लिखी गई है।

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने कहा कि पुस्तक में उठाया गया विषय भारत में लोकतांत्रिक शासन और सार्वजनिक जीवन के मूल तत्वों से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान न्याय, समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व पर आधारित समाज की परिकल्पना करता है तथा लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति नागरिकों और सार्वजनिक पदों पर आसीन व्यक्तियों के बीच संबंधों में निहित होती है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तभी फलता-फूलता है, जब सार्वजनिक पद को विशेषाधिकार नहीं बल्कि जिम्मेदारी के रूप में देखा जाए।

उपराष्ट्रपति ने महान तमिल संत-कवि तिरुवल्लुवर का उल्लेख करते हुए कहा कि सच्चे नेतृत्व की पहचान सुलभता, करुणा और जवाबदेही होती है। जो नेता जनता के प्रति सम्मानजनक और सहज उपलब्ध रहते हैं, वे लोगों का स्थायी विश्वास और सम्मान अर्जित करते हैं।

राधाकृष्णन ने कहा कि पुस्तक में उठाए गए विषय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस सोच से मेल खाते हैं, जिसमें सार्वजनिक पद को विशेषाधिकार नहीं बल्कि सेवा का माध्यम माना गया है। उन्होंने वीआईपी वाहनों पर लाल बत्ती की व्यवस्था समाप्त करने तथा हाल ही में नीट (NEET) परीक्षार्थियों को यातायात संबंधी असुविधा से बचाने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा अपने प्रस्थान में देरी किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे कदम नागरिक-केंद्रित शासन के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।

उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री के शब्दों को उद्धृत करते हुए कहा, "हर भारतीय विशेष है, हर भारतीय एक वीआईपी है।" उन्होंने आगे कहा कि "सेवा ही सर्वोच्च धर्म है।"

उन्होंने पुस्तक में पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री तथा अन्य महान व्यक्तित्वों की सादगी और जनसेवा की भावना का उल्लेख किए जाने की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि लेखकों ने अपने विश्लेषण को भारत की सभ्यतागत और बौद्धिक परंपराओं जैसे उपनिषदों, रामचरितमानस, भगवान बुद्ध की शिक्षाओं और पंचतंत्र के संदर्भों से समृद्ध बनाया है।

उपराष्ट्रपति ने गणराज्य की मूल भावना को मजबूत करने के लिए समानता, कानून के समक्ष सभी की बराबरी, प्रत्येक नागरिक की गरिमा तथा विनम्रता और उत्तरदायित्व से प्रेरित लोकसेवा के मूल्यों के प्रति नए सिरे से प्रतिबद्धता का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि किसी भी नेतृत्व की वास्तविक कसौटी जनता का विश्वास और समाज के प्रति उसकी सेवा होती है।

कार्यक्रम में अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नाबाम तुकी, मेघालय से राज्यसभा के पूर्व सदस्य डब्ल्यू. आर. खारलुखी लेखक नाबाम रेबिया तथा सह-लेखक संदीप कुमार सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

अवैध खनन पर साय सरकार का बड़ा प्रहार, बढ़ा जुर्माना और कार्रवाई हुई सख्त

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में अब अवैध खनिज उत्खनन, परिवहन और भंडारण करने वालों के खिलाफ पहले से कहीं अधिक सख्त कार्रवाई होगी। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की पहल और उनके सख्त प्रशासनिक रुख के तहत राज्य सरकार ने गौण खनिज नियमों में व्यापक संशोधन किया है। मंत्रिपरिषद की मंजूरी के बाद नए नियम लागू हो गए हैं। इन बदलावों का उद्देश्य अवैध खनन पर प्रभावी रोक लगाना, राजस्व बढ़ाना और खनिज संसाधनों का वैज्ञानिक एवं पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित करना है।

सबसे बड़ा बदलाव अवैध खनिज परिवहन और उत्खनन पर लगने वाले जुर्माने में किया गया है। अब किसी भी मामले में समझौता राशि 25 हजार रुपये से कम नहीं होगी। अवैध परिवहन के मामलों में प्रति टन 2 हजार रुपये की दर से समझौता शुल्क देना होगा। इसके अलावा अवैध रूप से ले जाए जा रहे खनिज का पूरा मूल्य भी अलग से वसूला जाएगा। उदाहरण के तौर पर यदि कोई वाहन 35 टन खनिज का अवैध परिवहन करता है, तो उसे केवल प्रशमन शुल्क के रूप में 70 हजार रुपये और खनिज का मूल्य अलग से देना होगा। वहीं ट्रैक्टर से अवैध रेत परिवहन करने पर भी न्यूनतम 25 हजार रुपये का प्रशमन शुल्क तथा रेत का मूल्य देना अनिवार्य होगा।

छत्तीसगढ़ सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि अवैध खनन में पकड़े गए वाहन आसानी से दोबारा अपराध में इस्तेमाल न हो सकें। अब जब्त वाहन, मशीन या अन्य सामग्री की सुपुर्दगी से पहले संबंधित न्यायालय में वाहन के प्रकार के अनुसार 50 हजार रुपये से लेकर 3 लाख रुपये तक की सुरक्षा राशि जमा करनी होगी। इसके बाद ही वाहन सुपुर्द किया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार ने विकास कार्यों को गति देने के लिए उत्खनन अनुज्ञापत्र के नियम भी आसान बनाए हैं। शासकीय निर्माण कार्यों के लिए उत्खनन क्षेत्र की सीमा 1 हेक्टेयर से बढ़ाकर 2 हेक्टेयर कर दी गई है, जबकि अनुज्ञापत्र की अवधि 2 वर्ष से बढ़ाकर 3 वर्ष कर दी गई है। इससे निर्माण कार्यों के लिए पर्याप्त खनिज उपलब्ध होगा और व्यवस्थित खनन को बढ़ावा मिलेगा।

खनिजों के वैज्ञानिक अन्वेषण और आधारभूत संरचना के विकास के लिए छत्तीसगढ़ राज्य खनिज अन्वेषण न्यास-2025 की स्थापना भी की गई है। अब गौण खनिजों से प्राप्त रॉयल्टी का 2 प्रतिशत इस न्यास में जमा होगा, जिससे हर वर्ष लगभग 5.25 करोड़ रुपये अतिरिक्त प्राप्त होने का अनुमान है।

सरकार ने खनन पट्टों के समामेलन की प्रक्रिया को भी सरल बनाया है। इससे अलग-अलग प्रकार से स्वीकृत पट्टों के एकीकरण में आ रही व्यवहारिक कठिनाइयां दूर होंगी और शासन को प्रीमियम राशि प्राप्त करने में सुविधा होगी।

निर्माण विभागों में खनिज रॉयल्टी कटौती की व्यवस्था को भी एक समान बनाया गया है। अब सभी विभाग खनिज की कीमत के साथ रॉयल्टी, डीएमएफ, पर्यावरण उपकर, अधोसंरचना उपकर और सुरक्षा के तौर पर अतिरिक्त राशि निर्धारित नियमों के अनुसार काटेंगे। खनिज विभाग से रॉयल्टी क्लीयरेंस मिलने पर यह राशि वापस कर दी जाएगी, अन्यथा विभाग इसे खनिज मद में जमा करेगा। इससे अवैध स्रोतों से खनिज के उपयोग पर भी प्रभावी रोक लगेगी।

एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय के तहत गौण खनिज से मिलने वाले राजस्व का लाभ अब केवल नगरीय निकायों, ग्राम पंचायतों और जनपद पंचायतों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जिला पंचायतों को भी इसका हिस्सा मिलेगा।

करीब 30 वर्षों बाद खदानों के डेड रेंट (अनिवार्य भाटक) की दरों में भी बढ़ोतरी की गई है। राज्य में 1900 से अधिक गौण खनिज खदानें हैं, जिनमें बड़ी संख्या में खदानें वर्षों से बंद पड़ी हैं। सरकार का मानना है कि बढ़े हुए डेड रेंट से केवल गंभीर पट्टाधारी ही खदानों का संचालन करेंगे। जो खदानें संचालित नहीं होंगी, वे समर्पित होकर दोबारा नीलामी के लिए उपलब्ध हो सकेंगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की इस पहल को अवैध खनन के खिलाफ सरकार के जीरो टॉलरेंस और सख्त प्रशासनिक रुख का बड़ा सख्त कदम माना जा रहा है। नए नियमों से एक ओर अवैध खनन पर प्रभावी अंकुश लगेगा, वहीं राज्य के राजस्व में वृद्धि, पारदर्शिता और खनिज संसाधनों के बेहतर प्रबंधन को भी मजबूती मिलेगी।

डिजिटलीकरण इस्पात उद्योग के भविष्य की आधारशिला : एच. डी. कुमारस्वामी

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केंद्रीय इस्पात एवं भारी उद्योग मंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने बुधवार को कहा कि भारत के इस्पात उद्योग के लिए डिजिटलीकरण अब कोई विकल्प नहीं रह गया है, बल्कि यह उसके दीर्घकालिक अस्तित्व और विकास की आधारशिला बन चुका है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए इस्पात क्षेत्र को नई और उन्नत तकनीकों को अपनाना ही होगा।

नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित "इस्पात क्षेत्र में डिजिटलीकरण पर चिंतन शिविर 2026" को संबोधित करते हुए कुमारस्वामी ने कहा कि भविष्य में इस्पात उद्योग की सफलता केवल उत्पादन क्षमता से नहीं मापी जाएगी, बल्कि इस बात से तय होगी कि वह कितना बुद्धिमान, परस्पर जुड़ा हुआ और आँकड़ों पर आधारित विनिर्माण तंत्र विकसित कर पाता है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "विकसित भारत 2047" के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि इस्पात क्षेत्र भारत के आर्थिक परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। यह क्षेत्र आधारभूत संरचना निर्माण, विनिर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा, शहरीकरण, परिवहन तथा रक्षा उत्पादन को गति प्रदान करता है।

मंत्री ने कहा कि "इस्पात राष्ट्र निर्माण की रीढ़ है।" उन्होंने बताया कि भारत वर्ष 2018 से लगातार विश्व का दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक देश बना हुआ है, जबकि कई विकसित देशों में इस्पात की मांग धीमी बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2021-22 से भारत में कच्चे इस्पात का उत्पादन औसतन लगभग 8 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से बढ़ा है। वहीं तैयार इस्पात की खपत में लगभग 13 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है, जो देश में बढ़ती औद्योगिक गतिविधियों और मजबूत घरेलू मांग का संकेत है।

कुमारस्वामी ने सरकार के दीर्घकालिक लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत वर्ष 2030 तक अपनी इस्पात उत्पादन क्षमता को 30 करोड़ टन तथा वर्ष 2035 तक 40 करोड़ टन तक बढ़ाना चाहता है। हालांकि उन्होंने कहा कि इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कच्चे माल की उपलब्धता, उत्पादन दक्षता, कार्बन उत्सर्जन में कमी, आधुनिकीकरण तथा निर्यात प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियों का समाधान करना आवश्यक होगा।

उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), मशीन अधिगम, औद्योगिक इंटरनेट ऑफ थिंग्स, डिजिटल प्रतिरूप, रोबोटिक्स और उन्नत आँकड़ा विश्लेषण जैसी आधुनिक तकनीकें विश्वभर में इस्पात उद्योग का स्वरूप बदल रही हैं। भारत को भी इन तकनीकों को बड़े पैमाने पर अपनाना चाहिए।

मंत्री ने कहा कि डिजिटलीकरण और स्वचालन के माध्यम से उत्पादन क्षमता बढ़ाई जा सकती है, ऊर्जा की खपत को बेहतर ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है, लागत कम की जा सकती है तथा मशीनों की खराबी का पहले से अनुमान लगाकर समय रहते मरम्मत की जा सकती है। इससे उत्पादन में अनावश्यक रुकावटें कम होंगी, मानवीय त्रुटियों में कमी आएगी और कार्यस्थल की सुरक्षा भी बेहतर होगी।

चिंतन शिविर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित खनन समाधान, इस्पात संयंत्रों के डिजिटल रूपांतरण, PM Gati Shakti, उद्योग 4.0 के अनुप्रयोगों तथा उनके व्यावसायिक लाभों से संबंधित विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। इस कार्यक्रम में अनेक नवाचार आधारित नई कंपनियों, उद्योग प्रतिनिधियों तथा प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों ने भी भाग लिया।

कुमारस्वामी ने विश्वास व्यक्त किया कि इस सम्मेलन से प्राप्त सुझाव और निष्कर्ष भारत के इस्पात उद्योग को अधिक बुद्धिमान, पर्यावरण अनुकूल, कुशल तथा वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में सहायक सिद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि यह प्रयास आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

यह सम्मेलन Ministry of Steel के तत्वावधान में आयोजित किया गया था। इसमें Steel Authority of India Limited, National Mineral Development Corporation तथा MOIL Limited सहित प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की इस्पात कंपनियों के अध्यक्ष, प्रबंध निदेशक, वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, नवाचार आधारित उद्यमी और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हुए।

1 जुलाई से लागू होगी वीबी जी राम जी योजना, ग्रामीण क्षेत्रों में उत्साह का माहौल

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 रायपुर : प्रदेश के ग्रामीण परिवारों को आजीविका और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा आगामी 1 जुलाई 2026 से लागू की जा रही वीबी जी राम जी (विकसित भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन-ग्रामीण) योजना को लेकर पूरे प्रदेश में व्यापक जनजागरूकता अभियान संचालित किया जा रहा है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के मार्गदर्शन में ग्राम पंचायतों, जनपद पंचायतों और जिला स्तर पर लगातार प्रशिक्षण, बैठकें और ग्राम सभाएं आयोजित कर ग्रामीणों को योजना के विभिन्न प्रावधानों एवं लाभों की जानकारी दी जा रही है।


’सांकरा एवं देवरी में ग्रामीणों ने बनाई मानव श्रृंखला’
योजना के प्रति ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। प्रदेश के विभिन्न गांवों में आयोजित ग्राम सभाओं में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लेकर योजना की जानकारी प्राप्त की तथा इसके सफल क्रियान्वयन में सहयोग का संकल्प लिया। इसी क्रम में बेमेतरा जिले के जनपद पंचायत बेरला की ग्राम पंचायत सांकरा एवं देवरी में ग्रामीणों ने योजना के प्रचार-प्रसार के लिए अनूठी पहल करते हुए मानव श्रृंखला का निर्माण किया। ग्रामीणों ने हाथों में जागरूकता संबंधी तख्तियां लेकर “वीबी जी राम जी - गांव की प्रगति, हम सबकी जिम्मेदारी”, “रोजगार और आजीविका का नया संबल” तथा “समृद्ध गांव, सशक्त परिवार” जैसे संदेशों के माध्यम से लोगों को योजना से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।

’केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने की सराहना’
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने भी अपने एक्स अकॉउंट से पोस्ट कर लिखा कि छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले से आई इस तस्वीर को देखकर मन आनंद और उत्साह से भर गया। यह तस्वीर गाँव की जनता के जागरूकता और आत्मविश्वास का प्रतीक है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने भी बेमेतरा जिले के इन प्रयासों की सराहना करते हुए अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट कर लिखा कि यह मानव श्रृंखला बन रही है, जो योजना के प्रति जन-जागरूकता का प्रतीक बनी हुई है।

’पात्र परिवारों को लाभ दिलाने और जानकारी पहुंचाने लिया संकल्प’
मानव श्रृंखला के माध्यम से ग्रामीणों ने यह संदेश दिया कि योजना केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में जनभागीदारी का एक महत्वपूर्ण अभियान है। इस अवसर पर ग्रामीणों ने पात्र परिवारों को योजना का लाभ दिलाने तथा अधिक से अधिक लोगों तक इसकी जानकारी पहुंचाने का संकल्प भी लिया।

’ग्राम सभा मे अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी’
ग्राम सभाओं में अधिकारियों द्वारा बताया गया कि वीबी - जीरामजी योजना के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को रोजगार एवं आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना तथा ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि करना है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पंचायत स्तर पर व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।

’अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों और हितग्राहियों को दिया जाएगा प्रशिक्षण’
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा निर्धारित कार्ययोजना के अनुसार 30 जून 2026 तक पंचायत, ब्लॉक एवं जिला स्तर के सभी अधिकारी-कर्मचारियों, जनप्रतिनिधियों तथा हितग्राहियों का प्रशिक्षण पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए विभिन्न चरणों में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ताकि योजना के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की कठिनाई न आए और पात्र परिवारों को समय पर लाभ मिल सके।

’1 जुलाई से प्रदेश के लाखों ग्रामीण परिवारों मिलेगा प्रत्यक्ष लाभ’
योजना के प्रचार-प्रसार के लिए ग्राम सभाओं, चौपालों, पोस्टर-बैनर, मुनादी, रथ प्रचार एवं डिजिटल माध्यमों का उपयोग किया जा रहा है। वहीं सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक, स्व-सहायता समूहों की महिलाएं, जनप्रतिनिधि तथा स्थानीय सामाजिक संगठन सक्रिय रूप से लोगों को योजना की जानकारी देने में जुटे हुए हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि यह योजना गांवों में रोजगार और आजीविका के नए अवसर सृजित करने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। 1 जुलाई से योजना के लागू होने के साथ ही प्रदेश के लाखों ग्रामीण परिवारों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलने की भी उम्मीद है।

उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने भी लाइव आकर दी जानकारी
उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा भी मंगलवार को अपने फ़ेसबुक अकाउंट पर लाइव आकर आगामी ग्राम सभा और वीबी जीरामजी के संबंध में लोगों को जानकारी दी और लोगों को योजना का लाभ लेने को प्रेरित किया साथ ही उन्होंने लोगों के सवालों का भी समाधान किया।

महासमुंद में सनसनीखेज हत्याकांड: नाले की रेत में दफन मिली 18 वर्षीय युवती की लाश, बर्थडे की रात हुई थी लापता

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 महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। खल्लारी थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत झारा में नाले के किनारे रेत में दफन एक 18 वर्षीय युवती की लाश मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। पुलिस ने शव की पहचान भारती टंडन के रूप में की है, जो बीते 19 जून की रात अपने जन्मदिन के दिन रहस्यमय तरीके से लापता हो गई थी।


प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में युवती के सिर पर गंभीर चोट और जांघ पर गहरे खरोंच के निशान मिले हैं, जिससे हत्या की पुष्टि हुई है। साथ ही मामले में दुष्कर्म की आशंका भी जताई जा रही है। युवती के आंतरिक अंगों के नमूने फॉरेंसिक जांच के लिए रायपुर भेजे जा रहे हैं।

रेत में दबी मिली थी लाश

जानकारी के मुताबिक सोमवार दोपहर गांव के कुछ लोग नाले की ओर गए थे, जहां बदबू आने पर उन्होंने जांच की। वहां रेत से शरीर का हिस्सा बाहर निकला दिखा, जिसके बाद ग्रामीण घबरा गए और पुलिस को सूचना दी। बताया जा रहा है कि शव का निचला हिस्सा बिना कपड़ों के था, जबकि पहनी हुई लेगिंग कुछ दूरी पर पड़ी मिली।

पोस्टमार्टम में चौंकाने वाला खुलासा

पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। शव को पहले बागबाहरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और बाद में पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा गया।

शॉर्ट पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डॉक्टरों ने पाया कि युवती के सिर पर करीब 6 इंच लंबा गहरा घाव था, जिसे किसी धारदार हथियार से किया गया था। चोट इतनी गंभीर थी कि सिर की हड्डी तक टूट गई थी। इसके अलावा जांघ पर गहरे खरोंच के निशान मिले हैं, जिससे हत्या से पहले दुष्कर्म की आशंका मजबूत हुई है।

जन्मदिन की रात घर से हुई थी गायब

परिजनों के अनुसार 19 जून को भारती का 18वां जन्मदिन था। उसी रात करीब 3 बजे वह अचानक घर से गायब हो गई थी। बताया जा रहा है कि उसका एक युवक से प्रेम-प्रसंग चल रहा था और आशंका है कि जन्मदिन के कारण वह उसी रात उससे मिलने घर से निकली थी।

अगले दिन परिजनों ने तलाश शुरू की लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। बाद में खल्लारी थाने में मिसिंग रिपोर्ट दर्ज कराई गई और 22 जून को नाले की रेत में दफन उसकी लाश बरामद हुई।

कई युवक हिरासत में, पुलिस कर रही पूछताछ

मृतका तीन बहनों और एक भाई में सबसे बड़ी थी और हाल ही में 11वीं पास कर 12वीं में प्रवेश लेने वाली थी। फिलहाल पुलिस ने जिस युवक से युवती का प्रेम-प्रसंग बताया जा रहा है, उस सहित कुछ अन्य युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।

पुलिस आरोपियों के मोबाइल फोन और कॉल रिकॉर्ड भी खंगाल रही है। इस सनसनीखेज मामले ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है और अब सभी की नजर पुलिस जांच पर टिकी है।

छत्तीसगढ़ में बेकाबू सांड का आतंक: बुजुर्ग को सींग पर उठाकर पटका, 6 लोग घायल, इलाके में दहशत

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 कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा शहर में बुधवार सुबह एक आवारा और बेकाबू सांड ने सड़क पर जमकर आतंक मचा दिया। शहर की पुरानी बस्ती स्थित कराते चौक में सांड के हमले से अफरा-तफरी मच गई, जहां उसने राह चलते आधा दर्जन से अधिक लोगों पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया। पूरी घटना आसपास लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है।


जानकारी के मुताबिक 55 वर्षीय छोटे लाल श्रीवास सुबह अपने काम से जा रहे थे, तभी अचानक सांड ने उन पर हमला कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सांड ने बुजुर्ग को सींगों पर उठाकर जोर से जमीन पर पटक दिया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। हालत नाजुक होने पर उन्हें तत्काल एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि यह सांड पिछले कई दिनों से इलाके में घूम रहा था और लगातार राहगीरों व दोपहिया वाहन चालकों को दौड़ाकर हमला कर रहा था। छोटे लाल श्रीवास के अलावा करीब 5 से 6 अन्य लोग भी सांड के हमले में घायल हुए, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया।

CCTV में कैद हुआ खौफनाक हमला

घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आवारा मवेशियों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन जिम्मेदार विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही।

पार्षद ने नगर निगम से की तत्काल कार्रवाई की मांग

घटना की सूचना मिलते ही वार्ड पार्षद तामेश अग्रवाल मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। उन्होंने नगर निगम प्रशासन से मांग की है कि इस खूंखार सांड को तुरंत पकड़कर गौ सेवा केंद्र या पशु आश्रय गृह भेजा जाए।

पार्षद ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में और लोग इस बेकाबू सांड के हमले का शिकार हो सकते हैं।

इस घटना के बाद शहर में आवारा मवेशियों की बढ़ती समस्या और नगर निगम की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है।

रिश्वतखोरी पर बड़ा एक्शन: कलेक्टर ने तहसील कार्यालय की कर्मचारी को किया सस्पेंड

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 कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। कलेक्टर कुणाल दुदावत ने तहसील कार्यालय कटघोरा में पदस्थ सहायक ग्रेड-2 मंजू कृष्णा धिरही को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।


जानकारी के अनुसार मामला तहसील कार्यालय में नकल (प्रमाणित प्रतिलिपि) जारी करने के बदले अवैध राशि मांगने से जुड़ा है। इस संबंध में आवेदक किशन कुमार ने कटघोरा के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के समक्ष लिखित शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें कर्मचारी पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाया गया।

वीडियो सबूत के बाद तेज हुई कार्रवाई

शिकायत के साथ एक वीडियो रिकॉर्डिंग भी साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत की गई थी। प्रारंभिक जांच में आरोपों को गंभीर मानते हुए प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई शुरू की।

जांच के बाद अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कटघोरा ने सहायक ग्रेड-2 मंजू कृष्णा धिरही के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की, जिसके बाद कलेक्टर ने निलंबन आदेश जारी कर दिया।

प्रशासन का सख्त संदेश

जिला प्रशासन ने साफ कहा है कि सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में त्वरित और कठोर कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि आम लोगों को पारदर्शी और निष्पक्ष सेवाएं मिल सकें।

निलंबन के दौरान यहां रहेगा मुख्यालय

आदेश के मुताबिक निलंबन अवधि में मंजू कृष्णा धिरही का मुख्यालय पोंड़ी-उपरोड़ा तहसील कार्यालय निर्धारित किया गया है, जहां उन्हें प्रशासनिक नियमों के तहत उपस्थित रहना होगा।

इस कार्रवाई को जिला प्रशासन की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तौर पर देखा जा रहा है।

छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा ऐलान: धान छोड़ दूसरी फसल उगाने पर किसानों को ₹15 हजार प्रति एकड़

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देने और किसानों की आय में वृद्धि करने के उद्देश्य से एक बड़ा कदम उठाया है। वर्ष 2026 में कृषक उन्नति योजना के तहत धान के स्थान पर अन्य लाभकारी फसलें लेने वाले किसानों के लिए भारी वित्तीय सहायता की घोषणा की गई है। इस योजना के अंतर्गत जो किसान धान के बदले अन्य फसलें अपनाएंगे, उन्हें 15 हज़ार रुपए प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। वहीं खरीफ वर्ष 2026 में दलहन, तिलहन, मक्का और मोटे अनाजों (मिलेट्स) की खेती करने वाले कृषकों को 10 हज़ार रुपए प्रति एकड़ की दर से आदान सहायता प्रदान की जाएगी।


इन फसलों को मिलेगा योजना का लाभ

सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रोत्साहन राशि का लाभ अरहर, उड़द, मूंगफली और तिल फसलों के उत्पादन पर मिलेगा। इसी तरह मक्का, रागी और लघु धान्य जैसे कोदो-कुटकी भी शामिल किया गया है। इस विशेष योजना का लाभ केवल उन्हीं किसानों को मिलेगा, जो एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीकृत हैं और अपनी उपज (धान) सहकारी समितियों के माध्यम से बेचते हैं। इसके अतिरिक्त, डिजिटल क्रॉप सर्वे/गिरदावरी के माध्यम से रकबे (भूमि क्षेत्र) की पुष्टि होने के बाद ही मान्य रकबे पर सहायता राशि का भुगतान किया जाएगा।

हजारों किसानों को मिला लाभ

गत वर्ष 2025 में इस योजना के सफल क्रियान्वयन के चलते अकेले सारंगढ़- बिलाईगढ़ जिले में ही बड़े पैमाने पर किसानों को लाभान्वित किया गया। जिले में धान के बदले अन्य फसल लेने वाले 144 किसानों को 13 लाख रुपए की राशि वितरित की गई। दलहन- तिलहन व अन्य फसल उगाने वाले 10 हजार 408 किसानों के खातों में 2 करोड़ 91 लाख रुपए की राशि ट्रांसफर की गई।

सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के उप संचालक कृषि ने क्षेत्र के सभी किसान भाइयों से अपील की है कि वे इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि सभी पात्र किसान अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी या समिति प्रबंधक से तुरंत संपर्क करें। किसान भाई कैरी फॉरवर्ड या नए पंजीयन के समय धान के बदले अन्य फसल या दलहन-तिलहन फसल बोए गए रकबा के विकल्प का चयन कर अपना पंजीकरण अनिवार्य रूप से सुनिश्चित कराएं, ताकि समय पर प्रोत्साहन राशि उनके खातों में भेजी जा सके।

एल-नीनो की चुनौती को अवसर में बदलें किसान- कृषि विभाग

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 रायपुर : प्रदेश में इस वर्ष एल-नीनो के प्रभाव के कारण सामान्य से कम वर्षा की संभावना को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को मौसम के अनुरूप फसल प्रबंधन अपनाने की सलाह दी है। विभाग ने विशेष रूप से अपलैंड एवं कम जलधारण क्षमता वाली भूमि में धान के स्थान पर दलहन एवं तिलहन फसलों की खेती को बढ़ावा देने का आह्वान किया है।


कृषि विभाग के अनुसार कम वर्षा की संभावित परिस्थितियों में अरहर, मूंग, उड़द, कुल्थी, मूंगफली, तिल, रामतिल, कोदो, कुटकी एवं रागी जैसी फसलें बेहतर विकल्प साबित हो सकती हैं। ये फसलें अपेक्षाकृत कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती हैं तथा प्रतिकूल मौसम की परिस्थितियों में किसानों के लिए जोखिम को कम करती हैं।

दलहन-तिलहन की खेती पर मिलेगा प्रोत्साहन

राज्य शासन द्वारा किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके तहत अपलैंड क्षेत्रों में धान के स्थान पर दलहन एवं तिलहन फसलों की खेती करने वाले किसानों को 15 हजार रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही इन फसलों की खरीदी प्रधानमंत्री आशा योजना के अंतर्गत समर्थन मूल्य पर की जाती है, जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य प्राप्त हो सके।

आर्थिक और पर्यावरणीय दृष्टि से लाभकारी हैं वैकल्पिक फसलें

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि दलहन एवं तिलहन फसलें कम लागत में बेहतर उत्पादन देने के साथ-साथ मृदा स्वास्थ्य सुधारने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। दलहनी फसलें भूमि में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाकर मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने में सहायक होती हैं, जिससे आगामी फसलों की उत्पादकता में भी वृद्धि होती है। साथ ही इन फसलों का बाजार मूल्य अपेक्षाकृत अच्छा होने से किसानों की आय में वृद्धि की संभावना रहती है।

अल्प अवधि की धान किस्मों के चयन की सलाह

कृषि विभाग ने मध्यम भूमि वाले क्षेत्रों के किसानों को भी संभावित कम वर्षा की स्थिति को ध्यान में रखते हुए अल्प अवधि में तैयार होने वाली धान किस्मों का चयन करने की सलाह दी है। इससे जल उपलब्धता की अनिश्चितता के बावजूद उत्पादन जोखिम को कम किया जा सकेगा।

कृषि विभाग ने किसानों से वैज्ञानिक सलाह के अनुसार फसल चयन करने, फसल विविधीकरण अपनाने तथा शासन की प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ उठाने का आग्रह किया है। विभाग का मानना है कि मौसम आधारित कृषि रणनीति अपनाकर किसान न केवल संभावित सूखे के प्रभाव को कम कर सकते हैं, बल्कि अपनी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।

सरगुजा सहकारी बैंक घोटाला: 30 करोड़ से ज्यादा की गड़बड़ी पर ED की एंट्री, जांच शुरू

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 अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में स्थित जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित अंबिकापुर की तीन शाखाओं में सामने आए 30.51 करोड़ रुपये के कथित घोटाले ने अब बड़ा मोड़ ले लिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच अपने हाथ में ले ली है।


जानकारी के मुताबिक शंकरगढ़, कुसमी और रामानुजगंज शाखाओं में करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन और ऋण वितरण में भारी अनियमितताओं की शिकायत मिली थी। आरोप है कि करीब 500 किसानों के नाम पर बिना जानकारी और सहमति के किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) लोन स्वीकृत किए गए और बैंकिंग नियमों की अनदेखी की गई।

किसानों का कहना है कि बैंक रिकॉर्ड सामने आने के बाद उन्हें पता चला कि उनके नाम पर फर्जी तरीके से ऋण स्वीकृत कर खातों में लेन-देन किया गया। शिकायतों के बाद मामला लगातार तूल पकड़ता गया।

मामले पर रामविचार नेताम ने कहा कि राज्य सरकार वित्तीय अनियमितताओं पर जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रही है और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। सरकार के हस्तक्षेप के बाद प्रभावित शाखाओं में खाद और बीज वितरण व्यवस्था भी दोबारा बहाल की गई है।

इस पूरे प्रकरण में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। जांच एजेंसियां बैंक रिकॉर्ड, ऋण दस्तावेज और करोड़ों के लेन-देन की जांच कर रही हैं।

गौरतलब है कि रामानुजगंज क्षेत्र के किसानों ने कार्रवाई नहीं होने पर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन की चेतावनी भी दी थी, जिसके बाद जांच और तेज हुई।

अब ED की एंट्री के बाद प्रभावित किसानों को उम्मीद है कि 30 करोड़ रुपये से ज्यादा के इस कथित घोटाले की पूरी सच्चाई सामने आएगी और जिम्मेदार लोगों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

छत्तीसगढ़ में मानसून ने पकड़ी रफ्तार, आधे से ज्यादा प्रदेश कवर… कई जिलों में बारिश का अलर्ट

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 CG Weather Update : छत्तीसगढ़ में मानसून की एंट्री के बाद मौसम पूरी तरह बदल गया है। प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश का दौर लगातार जारी है। मौसम विभाग के मुताबिक मानसून अब तक राज्य के आधे से ज्यादा हिस्से को कवर कर चुका है, जबकि मध्यप्रदेश की सीमा से लगे कुछ जिलों में अभी मानसून पहुंचना बाकी है।


सरगुजा संभाग तक पहुंचा मानसून, कई जिलों में झमाझम बारिश
दक्षिण छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा से प्रवेश करने के बाद मानसून अब सरगुजा संभाग तक पहुंच चुका है। इसके असर से जशपुर, मुंगेली, बिलासपुर, बेमेतरा, कबीरधाम, कोंडागांव, सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर और नारायणपुर समेत कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है।

इन जिलों के लिए मौसम विभाग का अलर्ट
India Meteorological Department (IMD) ने प्रदेश के कई जिलों में तेज बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। अलर्ट वाले जिलों में जशपुर, सरगुजा, कोरबा, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, बिलासपुर, मुंगेली, कबीरधाम, बेमेतरा, दुर्ग, रायपुर, गरियाबंद और कोंडागांव शामिल हैं। बाकी जिलों में भी गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है।

किसानों के लिए राहत, खरीफ बुवाई का बेहतर समय
लंबे समय से अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे किसानों के लिए यह राहत भरी खबर है। मौसम अनुकूल होने के कारण अब खरीफ फसलों, खासकर धान की बुवाई के लिए बेहतर परिस्थितियां बन रही हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार कम से कम पांच इंच बारिश होने के बाद बुवाई शुरू करना ज्यादा लाभकारी माना जाता है।

राजनांदगांव रहा सबसे ठंडा शहर
बारिश के असर से तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। मंगलवार को Rajnandgaon प्रदेश का सबसे ठंडा शहर रहा, जहां न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। वहीं रायपुर में 25.5 डिग्री, बिलासपुर में 27.1 डिग्री, पेंड्रा रोड में 23 डिग्री, अंबिकापुर में 24 डिग्री, जगदलपुर में 23.5 डिग्री और दुर्ग में 23.8 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया।

फिलहाल प्रदेशभर में अगले कुछ दिनों तक मौसम का यही मिजाज बने रहने की संभावना है और कई इलाकों में तेज बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है।

बाल संप्रेक्षण गृह से 11 अपचारी बालक फरार, खिड़की तोड़कर भागे… पुलिस महकमे में मचा हड़कंप

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 अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर से बड़ी खबर सामने आई है। शहर स्थित बाल संप्रेक्षण गृह से मंगलवार देर शाम 11 अपचारी बालक सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए फरार हो गए। घटना के बाद प्रशासन और पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। पुलिस ने सभी फरार बालकों की तलाश के लिए शहर सहित आसपास के इलाकों में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया है।


जानकारी के मुताबिक, घटना के वक्त इलाके में तेज बारिश हो रही थी और अचानक बिजली गुल हो गई थी। इसी अंधेरे का फायदा उठाकर अपचारी बालकों ने पहले खिड़की तोड़ी और फिर पीछे की दीवार फांदकर एक-एक कर फरार हो गए। माना जा रहा है कि भागने की पूरी योजना पहले से तैयार की गई थी।

हैरानी की बात यह है कि घटना के समय संप्रेक्षण गृह के मुख्य गेट पर दो सुरक्षाकर्मी तैनात थे, इसके बावजूद 11 बालकों का एक साथ फरार हो जाना सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी चूक माना जा रहा है। इस घटना ने संप्रेक्षण गृह की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटना की जानकारी मिलते ही संप्रेक्षण गृह प्रबंधन में अफरा-तफरी मच गई। तत्काल पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद पुलिस ने फरार बालकों की तलाश के लिए अलग-अलग टीमों का गठन किया है।

फिलहाल पुलिस रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, ग्रामीण इलाकों और संभावित ठिकानों पर लगातार सर्च अभियान चला रही है। शुरुआती जांच में बारिश और बिजली गुल होने की स्थिति को कारण माना जा रहा है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही के एंगल से भी जांच जारी है।

इस बड़ी घटना के बाद प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। अब देखना होगा कि फरार हुए सभी 11 अपचारी बालकों को पुलिस कब तक पकड़ पाती है।

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