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CG NEWS : उपार्जन केंद्र में घुसा जंगली हाथी, प्रभारी को कुचलकर मार डाला

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के कोरकोमा क्षेत्र स्थित कुदमुरा उपार्जन केंद्र में बुधवार देर रात दर्दनाक घटना सामने आई। एक जंगली Asian elephant ने मंडी प्रभारी पर हमला कर दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। मृतक की पहचान 42 वर्षीय Rajesh Kumar Singh Rajput के रूप में हुई है, जो रजगामार का निवासी था। घटना के दौरान उनकी पत्नी ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई।


जानकारी के अनुसार घटना बुधवार-गुरुवार की दरमियानी रात करीब 2 बजे की है। उस समय राजेश अपनी पत्नी के साथ उपार्जन केंद्र परिसर में बनी अस्थायी झोपड़ी में सो रहे थे। इसी दौरान अचानक एक जंगली हाथी वहां पहुंच गया और राजेश पर हमला कर दिया। पत्नी की चीख-पुकार के बावजूद रात में आसपास कोई मौजूद नहीं था, जिससे उन्हें बचाया नहीं जा सका।

घटना के बाद ग्रामीणों को इसकी सूचना दी गई, जिसके बाद वन विभाग को भी जानकारी दी गई। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और हाथी को जंगल की ओर खदेड़ने की कार्रवाई की। हालांकि बताया जा रहा है कि हाथी अभी भी आसपास के इलाके में विचरण कर रहा है, जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ है।

चोरी की घटनाओं के कारण झोपड़ी बनाकर रह रहे थे
वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का पंचनामा कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक कुदमुरा उपार्जन केंद्र में धान चोरी की लगातार घटनाएं हो रही थीं। इसी कारण राजेश और उनकी पत्नी अस्थायी रूप से झोपड़ी बनाकर केंद्र की निगरानी कर रहे थे।

ग्रामीणों का कहना है कि इस क्षेत्र में जंगली हाथियों का अक्सर आना-जाना रहता है। धान की खुशबू और भंडारण के कारण हाथी कई बार मंडियों तक पहुंच जाते हैं। ऐसे में वन अमला और ग्रामीण मिलकर हाथियों को खदेड़ने की कोशिश करते हैं, लेकिन कई बार ऐसे हादसे भी सामने आ जाते हैं। 🐘

Train Canceled: छत्तीसगढ़ के रेल यात्रियों के लिए बड़ी खबर, 6 से 8 मार्च तक 13 मेमू ट्रेनें रद्द

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 Train Canceled : छत्तीसगढ़ के रेल यात्रियों के लिए अहम सूचना है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने 6 से 8 मार्च तक गोंदिया–नागपुर रूट की 13 मेमू ट्रेनों को रद्द करने का निर्णय लिया है। नागपुर मंडल में समपार फाटक पर गर्डर डी-लॉन्चिंग कार्य के चलते यह फैसला लिया गया है। इससे इस रूट पर सफर करने वाले यात्रियों को असुविधा हो सकती है।


रद्द रहने वाली गाड़ियां

  • गाड़ी संख्या 68721 रायपुर–डोंगरगढ़ मेमू (06 एवं 07 मार्च 2026) रद्द।
  • गाड़ी संख्या 68723 डोंगरगढ़–गोंदिया मेमू (06 एवं 07 मार्च 2026) रद्द।
  • गाड़ी संख्या 68724 गोंदिया–रायपुर मेमू (07 एवं 08 मार्च 2026) रद्द।
  • गाड़ी संख्या 68741 दुर्ग–गोंदिया मेमू (06 एवं 07 मार्च 2026) रद्द।
  • गाड़ी संख्या 68742 गोंदिया–दुर्ग मेमू (06 एवं 07 मार्च 2026) रद्द।
  • गाड़ी संख्या 68743 गोंदिया–नेताजी सुभाष चंद्र बोस इतवारी मेमू (06 एवं 07 मार्च 2026) रद्द।
  • गाड़ी संख्या 68744 नेताजी सुभाष चंद्र बोस इतवारी–गोंदिया मेमू (06 एवं 07 मार्च 2026) रद्द।
  • गाड़ी संख्या 68711 डोंगरगढ़–गोंदिया मेमू (06 एवं 07 मार्च 2026) रद्द।
  • गाड़ी संख्या 68713 गोंदिया–नेताजी सुभाष चंद्र बोस इतवारी मेमू (06 एवं 07 मार्च 2026) रद्द।
  • गाड़ी संख्या 68716 नेताजी सुभाष चंद्र बोस इतवारी–गोंदिया मेमू (06 एवं 07 मार्च 2026) रद्द।
  • गाड़ी संख्या 68712 गोंदिया–डोंगरगढ़ मेमू (06 एवं 07 मार्च 2026) रद्द।
  • गाड़ी संख्या 68715 बालाघाट–नेताजी सुभाष चंद्र बोस इतवारी मेमू (06 एवं 07 मार्च 2026) रद्द।
  • गाड़ी संख्या 68714 नेताजी सुभाष चंद्र बोस इतवारी–बालाघाट मेमू (06 एवं 07 मार्च 2026) रद्द।

बीच मार्ग में नियंत्रित की जाने वाली गाड़ियां

  • गाड़ी संख्या 18109 टाटानगर–इतवारी एक्सप्रेस (06 मार्च 2026) को दुर्ग–बोरतलाव के बीच नियंत्रित किया जाएगा।
  • गाड़ी संख्या 18239 कोरबा–इतवारी एक्सप्रेस (06 मार्च 2026) को दुर्ग–बोरतलाव के बीच नियंत्रित किया जाएगा।

रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा से पहले ट्रेन की स्थिति की जानकारी अवश्य प्राप्त कर लें।

दीर्घकालिक विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा राज्य नीति आयोग : मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज नवा रायपुर स्थित नीति भवन में छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग के नवनियुक्त उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा के पदभार ग्रहण समारोह में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने उन्हें इस महत्वपूर्ण दायित्व के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य नीति आयोग प्रदेश के दीर्घकालिक विकास विज़न, साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण और विभिन्न विभागों के बेहतर समन्वय के माध्यम से छत्तीसगढ़ के विकास को नई दिशा और गति देने वाला एक महत्वपूर्ण संस्थान है। उन्होंने कहा कि भविष्य की जरूरतों और चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए विकास की योजनाएँ और रणनीतियाँ तैयार करने में आयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देश माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी दृष्टि को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ में भी छत्तीसगढ़ विज़न डॉक्युमेंट 2047 तैयार किया गया है, जिससे प्रदेश के समग्र और दीर्घकालिक विकास की रूपरेखा तय की जा रही है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा योजना आयोग के स्थान पर नीति आयोग के गठन का निर्णय दूरदर्शी सोच का परिणाम था। आज नीति आयोग द्वारा संचालित आकांक्षी जिलों का कार्यक्रम देश के पिछड़े क्षेत्रों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जिसका सकारात्मक प्रभाव छत्तीसगढ़ के आकांक्षी जिलों में भी देखने को मिला है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नीति आयोग की विशेषता यह है कि यह क्षेत्र की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नीति और योजना निर्माण को बढ़ावा देता है। इसी सोच के साथ राज्यों में भी राज्य नीति आयोग का गठन किया गया है, जो विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सुशासन, पारदर्शिता और जनभागीदारी के साथ प्रदेश में विकास को नई गति देने के लिए लगातार कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि गणेश शंकर मिश्रा के प्रशासनिक अनुभव से राज्य नीति आयोग को नई दिशा और गति मिलेगी। आयोग की ओर से प्राप्त अच्छे सुझावों को राज्य सरकार गंभीरता से लेकर प्रभावी ढंग से लागू करने का प्रयास करेगी।

राज्य नीति आयोग के नवनियुक्त उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में प्रदेश निरंतर विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि बेहतर और भविष्योन्मुखी नीतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ को अधिक समृद्ध और विकसित बनाने की दिशा में सभी के साथ मिलकर कार्य किया जाएगा।

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, विधायक लता उसेंडी, विधायक अमर अग्रवाल, महापौर धमतरी रामू रोहरा, राज्य नीति आयोग के सदस्य डॉ. के. सुब्रह्मण्यम, सदस्य सचिव आशीष भट्ट, सचिव भुवनेश यादव सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

जनजाति समाज की जमीनों पर अवैध कब्जे, CM के निर्देश पर सख्त कार्रवाई शुरू

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रायपुर- मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के निर्देश पर छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में पंडो जनजाति की जमीनों पर अवैध कब्जे के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू हुई है। भू-राजस्व संहिता की धारा 170(बी) के तहत मामला दर्ज कर SDM ने नोटिस जारी किया गया, जिसमें 20 मार्च को सुनवाई निर्धारित की गई है।


 घटना का विवरण 

पंडो जनजाति, जो विशेष पिछड़ी जनजाति (PVTG) के रूप में राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र माने जाते हैं, उनकी पुश्तैनी जमीनों पर गैर-आदिवासी लोगों द्वारा कब्जा और अवैध नामांतरण का मामला सामने आया है। सूरजपुर और बलरामपुर जैसे जिलों में राजस्व कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से यह हेराफेरी हुई, जहां 1 से 5 एकड़ तक जमीन लीज के नाम पर हस्तांतरित कर ली गई। 

 जांच के लिए कानूनी आधार 

छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 170(बी) आदिवासी भूमि के गैर-आदिवासियों को बिना कलेक्टर की अनुमति हस्तांतरण को अवैध घोषित करती है। ऐसे मामलों में जमीन मूल मालिक को वापस की जा सकती है, और दोषियों पर विभागीय कार्रवाई हो सकती है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर SDM ने तत्काल नोटिस जारी कर 20 मार्च को सुनवाई तय की, जिसमें कब्जा हटाने और नामांतरण रद्द करने पर फैसला होगा। 

त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई 

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद कमिश्नर और कलेक्टर  ने जांच के आदेश दिए हैं, जिसमें पटवारी व अन्य राजस्व अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल शामिल है। पंडो समाज ने ज्ञापन सौंपकर जमीन वापसी और दोषियों पर सख्ती की मांग की है, अन्यथा आंदोलन की चेतावनी दी। यह कार्रवाई आदिवासी भूमि सुरक्षा के लिए राज्य स्तर पर निगरानी बढ़ाने का संकेत देती है।

नई दिल्ली में ‘रायसीना साइंस डिप्लोमेसी इनिशिएटिव’ का पहला संस्करण आयोजित

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नई दिल्ली केभारत मंडपम में 5 मार्च 2026 को Raisina Science Diplomacy Initiative (SDI) का पहला संस्करण आयोजित किया गया। इस पहल को भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय और Observer Research Foundation (ORF) ने संयुक्त रूप से रायसीना डायलॉग  के अंतर्गत शुरू किया।

इस सम्मेलन में दुनिया भर के वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं, कूटनीतिज्ञों और शोधकर्ताओं सहित लगभग 80 विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य बदलते वैश्विक परिदृश्य में विज्ञान कूटनीति (Science Diplomacy) की भूमिका और उभरती प्रौद्योगिकियों से जुड़ी शासन चुनौतियों पर चर्चा करना था।

इस पहल की अध्यक्षता भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद ने की। सह-अध्यक्ष के रूप में पीटर ग्लकमैन (अंतरराष्ट्रीय विज्ञान परिषद के अध्यक्ष), Marilyne Andersen (जिनेवा साइंस एंड डिप्लोमेसी एंटिसिपेटर की महानिदेशक) और Vijay Chauthaiwale (भारतीय जनता पार्टी के विदेश विभाग के प्रभारी) शामिल रहे।

उद्घाटन सत्र में वक्ताओं ने कहा कि आज के वैश्विक परिदृश्य में विज्ञान और प्रौद्योगिकी राष्ट्रीय विकास, आर्थिक प्रतिस्पर्धा, वैश्विक सुरक्षा और सामाजिक प्रगति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बन गए हैं। समीर सरन, अध्यक्ष, ORF ने कहा कि रायसीना SDI को वैश्विक मंच के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां विज्ञान कूटनीति के समकालीन ढांचे पर चर्चा हो सके।

रणनीतिक स्वायत्तता के दौर में विज्ञान कूटनीति

पहली गोलमेज चर्चा “Science Diplomacy in the Era of Strategic Autonomy” विषय पर आयोजित हुई, जिसकी अध्यक्षता Parvinder Maini ने की। चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि देशों की रणनीतिक प्राथमिकताओं और विज्ञान की सहयोगात्मक प्रकृति के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। विशेषज्ञों ने भरोसेमंद वैज्ञानिक नेटवर्क, पारदर्शी शोध प्रणाली और मजबूत बहुपक्षीय ढांचे को सुदृढ़ करने की आवश्यकता बताई।

विघटनकारी प्रौद्योगिकियों के शासन पर चर्चा

दूसरी गोलमेज चर्चा “Science Diplomacy and Governance of Disruptive Technologies” विषय पर हुई, जिसकी अध्यक्षता Marilyne Andersen ने की। इसमें उभरती तकनीकों के लिए न्यायसंगत और प्रभावी वैश्विक शासन मॉडल विकसित करने, समावेशी नीति-निर्माण और तकनीकी नवाचार को नैतिक तथा सामाजिक मानकों के साथ संतुलित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

इस अवसर पर जाह्नवी फाल्के , निदेशक, साइंस गैलरी बेंगलुरु ने विज्ञान कूटनीति के ऐतिहासिक विकास पर व्याख्यान दिया। वहींस्टीन सोंडरगार्ड नाटो के मुख्य वैज्ञानिक ने उभरती तकनीकों पर नाटो की तकनीकी दूरदृष्टि से जुड़े अनुभव साझा किए।

वैश्विक विमर्श को मिलेगा नया मंच

रायसीना साइंस डिप्लोमेसी इनिशिएटिव से प्राप्त विचार और सुझाव विज्ञान कूटनीति पर वैश्विक विमर्श को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसे वार्षिक मंच के रूप में विकसित करने की योजना है, जहां विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भूमिका पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग, नीति और शासन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी।

प्रो.अजय कुमार सूद ने कहा कि भविष्य में इस पहल को और मजबूत बनाने के लिए दो महत्वपूर्ण पहलुओं पर ध्यान देना होगा—
पहला, निजी क्षेत्र की भूमिका को विज्ञान कूटनीति के ढांचे में कैसे शामिल किया जाए; और दूसरा, मौजूदा बहुपक्षीय तंत्रों का उपयोग कर तकनीकी प्रगति के लाभों को समाज के सभी वर्गों तक समान रूप से कैसे पहुंचाया जाए।

यह पहल विज्ञान, कूटनीति और नीति निर्माण के बीच सहयोग और संवाद को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

जल संकट के बीच छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले ने पेश किया सामुदायिक जल संरक्षण का अनूठा मॉडल

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जब जल संकट दुनिया के सामने सबसे बड़ी जलवायु चुनौतियों में से एक बनता जा रहा है, ऐसे समय में कोरिया जिले ने यह साबित कर दिया है कि सबसे प्रभावी समाधान बड़े बांधों या भारी मशीनरी से नहीं, बल्कि लोगों की भागीदारी से शुरू होते हैं।

जल संचय जन भागीदारी की भावना के साथ जिले ने एक साधारण लेकिन क्रांतिकारी विचार को अपनाया—
क्या होगा अगर हर किसान अपनी जमीन का केवल 5% हिस्सा पानी के लिए समर्पित कर दे?

5% मॉडल: छोटी प्रतिबद्धता, बड़ा प्रभाव

आवा पानी झोकी आंदोलन के तहत किसानों ने स्वेच्छा से अपनी कृषि भूमि का 5% हिस्सा छोटे-छोटे रीचार्ज तालाब और सीढ़ीनुमा गड्ढे (टेर्रेस पिट) बनाने के लिए अलग रखा। इन संरचनाओं का उद्देश्य वर्षा जल को सीधे खेतों में ही रोकना और उसे जमीन में समाहित करना है।

इस पहल के उल्लेखनीय परिणाम सामने आए—

  • जो वर्षा जल पहले बहकर निकल जाता था, अब वह मिट्टी और भूजल को रिचार्ज कर रहा है

  • मिट्टी का कटाव काफी कम हुआ है

  • सूखे के दौरान भी फसलों में नमी बनी रहती है

  • भूजल स्तर में स्थिर और निरंतर सुधार हुआ है

यह मॉडल साबित करता है कि सतत जल प्रबंधन के लिए बड़े निवेश या विस्थापन की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि सामूहिक इच्छा शक्ति ही सबसे बड़ा संसाधन है।

जनभागीदारी से मिला आंदोलन को बल

इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत समुदाय की सक्रिय भागीदारी रही।

  • महिलाओं ने “नीर नायिका” बनकर घर-घर जागरूकता फैलाने और सोक पिट निर्माण का नेतृत्व किया।

  • युवाओं ने “जल दूत” के रूप में ट्रेंच मैपिंग, नालों की सफाई और नुक्कड़ नाटक तथा वॉल आर्ट के माध्यम से जल संरक्षण का संदेश फैलाया।

  • सामूहिक श्रमदान से जिले में 440 से अधिक पारंपरिक तालाबों को पुनर्जीवित किया गया।

  • Pradhan Mantri Awas Yojana के 500 से अधिक लाभार्थियों ने अपने घरों के पास सोक पिट बनाकर इस अभियान को एक साझा सामाजिक जिम्मेदारी में बदल दिया।

भागीदारी से स्वामित्व की ओर

इस 5% मॉडल की सफलता केवल संरचनाओं में नहीं, बल्कि समुदाय के स्वामित्व की भावना में छिपी है।

  • 1,260 से अधिक किसानों ने अपनी जमीन पर 5% रिचार्ज प्रणाली अपनाई

  • पूरे जिले में 2,000 से अधिक सोक पिट बनाए गए

  • ग्रामीण आवास योजनाओं के लाभार्थियों ने भी स्वेच्छा से अपने घरों के पास सोक पिट बनाए

सामूहिक प्रयास का एक ऐतिहासिक उदाहरण तब देखने को मिला जब समुदायों ने सिर्फ तीन घंटे में 660 सोक पिट का निर्माण कर दिया।

पर्यावरणीय और सामाजिक लाभ

इस पहल के प्रभाव स्पष्ट और मापनीय रहे—

  • कई गांवों में भूजल स्तर 3 से 4 मीटर तक बढ़ा

  • 17 दूरस्थ आदिवासी बस्तियों में सूख चुके झरने फिर से जीवित हो गए

  • मिट्टी में नमी बढ़ने से कृषि उत्पादकता में सुधार हुआ

  • आजीविका स्थिर होने से मौसमी पलायन में लगभग 25% कमी आई

इस प्रकार जल सुरक्षा ने आर्थिक सुरक्षा को भी मजबूत किया है।

विज्ञान और जनभागीदारी का संगम

जिला प्रशासन ने माइक्रो-वाटरशेड मैपिंग, हाइड्रोजियोलॉजिकल अध्ययन और तकनीकी मार्गदर्शन के माध्यम से इस पहल को वैज्ञानिक आधार दिया। इससे हर संरचना को अधिकतम जल पुनर्भरण के लिए रणनीतिक रूप से बनाया गया।

जिले के कलेक्टर ने कहा,

“यह पहल केवल संरचनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य किसानों के भविष्य को सुरक्षित करना, पलायन को कम करना और हर गांव में भरोसेमंद जल उपलब्धता सुनिश्चित करना है।”

पूरे देश के लिए एक प्रेरक मॉडल

कोरिया का 5% मॉडल यह दर्शाता है कि जलवायु अनुकूलन विकेंद्रीकृत, कम लागत वाला और जनभागीदारी आधारित हो सकता है।

सिर्फ 5% भूमि समर्पित करके समुदायों ने अपने पानी के भविष्य को 100% सुरक्षित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

कोरिया जिले ने यह साबित कर दिया है कि जब समुदाय जल संरक्षण के लिए एकजुट होते हैं, तो प्राकृतिक संसाधनों को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है।

गृह मंत्री अमित शाह ने जनगणना-2027 के लिए डिजिटल टूल्स और मैस्कॉट “प्रगति” व “विकास” का किया अनावरण

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नई दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह ने जनगणना-2027 के लिए चार डिजिटल टूल्स का सॉफ्ट लॉन्च किया और आधिकारिक रूप से दो मैस्कॉट — “प्रगति” (महिला) और “विकास” (पुरुष) — का अनावरण किया। इस अवसर पर कई वरिष्ठ अधिकारी, जिनमें केंद्रीय गृह सचिव तथा भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त भी उपस्थित थे।

जनगणना-2027 के लिए उन्नत डिजिटल प्लेटफॉर्म का विकास Centre for Development of Advanced Computing (C-DAC) द्वारा किया गया है, जिससे देशभर में गणना कार्य को सुगम और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 आयोजित करने के अपने इरादे की औपचारिक घोषणा 16 जून 2025 को राजपत्र अधिसूचना जारी कर की थी। यह दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना प्रक्रिया होगी और पहली बार इसे डिजिटल माध्यम से संचालित किया जाएगा। साथ ही पहली बार नागरिकों को सेल्फ-एन्यूमरेशन (Self-Enumeration) का विकल्प भी दिया जाएगा।

मैस्कॉट “प्रगति” और “विकास”

जनगणना-2027 के लिए लॉन्च किए गए मैस्कॉट “प्रगति” (महिला गणनाकर्मी) और “विकास” (पुरुष गणनाकर्मी) को जनगणना के मित्रवत और जनसुलभ प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। ये दोनों मैस्कॉट भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प में महिलाओं और पुरुषों की समान भागीदारी का भी प्रतीक हैं। इनके माध्यम से जनगणना से जुड़ी जानकारी, उद्देश्य और संदेश समाज के विभिन्न वर्गों तक प्रभावी और सरल तरीके से पहुँचाए जाएंगे।

चार डिजिटल टूल्स

जनगणना-2027 में पहली बार डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग किया जाएगा। इस अवसर पर चार प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किए गए—

1. Houselisting Block Creator (HLBC) Web Application

यह वेब-मैप आधारित एप्लिकेशन चार्ज अधिकारियों को सैटेलाइट इमेजरी की सहायता से डिजिटल रूप में हाउस-लिस्टिंग ब्लॉक बनाने की सुविधा देगा, जिससे पूरे देश में भौगोलिक कवरेज मानकीकृत किया जा सकेगा।

2. HLO Mobile Application

यह एक सुरक्षित ऑफलाइन मोबाइल एप्लिकेशन है, जिसके माध्यम से गणनाकर्मी घर-घर जाकर हाउस-लिस्टिंग डेटा एकत्र कर सर्वर पर अपलोड करेंगे। यह ऐप केवल CMMS पोर्टल पर पंजीकृत गणनाकर्मियों द्वारा ही उपयोग किया जा सकेगा और यह Android तथा iOS दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा। ऐप 16 क्षेत्रीय भाषाओं में संचालित किया जा सकेगा।

3. Self-Enumeration (SE) Portal

पहली बार नागरिकों को सेल्फ-एन्यूमरेशन की सुविधा दी जा रही है, जिसके तहत परिवार का कोई पात्र सदस्य घर से ही ऑनलाइन अपनी जानकारी दर्ज कर सकेगा। सफलतापूर्वक जानकारी दर्ज करने पर एक Self-Enumeration ID (SE ID) उत्पन्न होगी, जिसे बाद में गणनाकर्मी सत्यापित करेंगे।

4. Census Management and Monitoring System (CMMS) Portal

यह एक केंद्रीकृत वेब-आधारित प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से जनगणना से जुड़ी सभी गतिविधियों की योजना, प्रबंधन और निगरानी की जाएगी। जिला, उप-जिला और राज्य स्तर के अधिकारी इस डैशबोर्ड के माध्यम से रियल-टाइम में प्रगति और फील्ड प्रदर्शन की निगरानी कर सकेंगे।

दो चरणों में होगी जनगणना

जनगणना-2027 को दो चरणों में आयोजित किया जाएगा—

पहला चरण: हाउस-लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना (HLO)

इस चरण में घरों की स्थिति और घरेलू सुविधाओं से संबंधित जानकारी एकत्र की जाएगी। इसकी अधिसूचना 7 जनवरी 2026 को जारी की गई थी। यह सर्वेक्षण 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 के बीच राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा निर्धारित 30-दिवसीय अवधि में किया जाएगा। इसके पहले 15 दिनों की वैकल्पिक सेल्फ-एन्यूमरेशन अवधि भी होगी।

दूसरा चरण: जनसंख्या गणना (Population Enumeration)

यह चरण पूरे भारत में फरवरी 2027 में आयोजित होगा। वहीं लद्दाख और जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश तथा उत्तराखंड के हिमाच्छादित क्षेत्रों में यह प्रक्रिया सितंबर 2026 में की जाएगी। इस चरण में जाति से संबंधित प्रश्न भी शामिल किए जाएंगे।

जनगणना-2027 के लिए देशभर में 30 लाख से अधिक गणनाकर्मी, पर्यवेक्षक और अन्य अधिकारी तैनात किए जाएंगे, जो मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से घर-घर जाकर डेटा संग्रह करेंगे।

सरकार का मानना है कि तकनीक और समावेशिता का यह संयोजन जनगणना-2027 को अधिक सटीक, सुरक्षित और व्यापक बनाएगा।

जनगणना-2027 की संदर्भ तिथि अधिकांश राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए 1 मार्च 2027 को 00:00 बजे होगी, जबकि लद्दाख और हिमाच्छादित क्षेत्रों के लिए यह 1 अक्टूबर 2026 को 00:00 बजे निर्धारित की गई है।

IICA मानेसर में “Meet the Legend” श्रृंखला के तहत न्यायिक विशेषज्ञों का विशेष सत्र, PGIP प्रतिभागियों को मिला महत्वपूर्ण मार्गदर्शन

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मानेसर स्थित Indian Institute of Corporate Affairs (IICA) में पोस्ट ग्रेजुएट इनसॉल्वेंसी प्रोग्राम (PGIP) के 7वें बैच के लिए “Meet the Legend” श्रृंखला के अंतर्गत एक विशेष और ज्ञानवर्धक सत्र का आयोजन किया गया। लगभग तीन घंटे चले इस मास्टरक्लास में दो प्रतिष्ठित न्यायिक विशेषज्ञों ने अपने अनुभव और विशेषज्ञता साझा की।

इस सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में J. P. Singh, न्यायिक सदस्य, GST अपीलीय न्यायाधिकरण और Balesh Kumar, सदस्य, अपीलीय न्यायाधिकरण (PMLA, FEMA, PBPTA, NDPSA और SAFEMA) उपस्थित रहे।

GST और IBC के संबंध पर विस्तृत चर्चा

अपने संबोधन में जे.पी. सिंह ने वस्तु एवं सेवा कर (GST) की संरचना और इसका Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) के तहत चल रही दिवालिया कार्यवाही के साथ संबंध का व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत किया। उन्होंने “सप्लाई”, “कंसिडरेशन”, टैक्सेबल इवेंट, इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) तथा रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म जैसे मूलभूत GST सिद्धांतों को विस्तार से समझाया। साथ ही उन्होंने अंतर-राज्य और अंतर-राज्यीय लेनदेन को नियंत्रित करने वाले वैधानिक ढांचे पर भी प्रकाश डाला।

उन्होंने महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णयों जैसे Swiss Ribbons Pvt. Ltd. v. Union of India और Ghanashyam Mishra & Sons Pvt. Ltd. v. Edelweiss Asset Reconstruction Co. Ltd. का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि एक बार जब समाधान योजना स्वीकृत हो जाती है, तो उसमें शामिल न किए गए सभी दावे, जिनमें वैधानिक बकाया भी शामिल हैं, समाप्त माने जाते हैं।

सत्र के दौरान CIRP प्रक्रिया में व्यावहारिक अनुपालन से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई, जैसे कि नई GST पंजीकरण की आवश्यकता, IRP/RP द्वारा रिटर्न दाखिल करना, ITC की उपलब्धता तथा IBC की धारा 14 के तहत मोराटोरियम का वसूली कार्यवाही पर प्रभाव।

IBC और PMLA के बीच कानूनी समन्वय पर प्रकाश

दूसरे वक्ता बलेश कुमार ने Prevention of Money Laundering Act, 2002 (PMLA) और IBC के बीच संबंधों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने “अपराध की आय” (Proceeds of Crime) की अवधारणा को समझाते हुए मनी लॉन्ड्रिंग की तीन प्रमुख अवस्थाओं — प्लेसमेंट, लेयरिंग और इंटीग्रेशन — की व्याख्या की।

उन्होंने National Company Law Tribunal (NCLT) और PMLA प्राधिकरणों के बीच अधिकार क्षेत्र से जुड़ी जटिलताओं पर भी चर्चा की, विशेषकर उन मामलों में जहाँ कॉरपोरेट देनदार CIRP के तहत हो और उसकी संपत्तियों पर अटैचमेंट की कार्यवाही चल रही हो।

उन्होंने IBC की धारा 32A के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि यह प्रावधान समाधान प्रक्रिया की सुरक्षा और प्रभावी कार्यान्वयन के लिए बनाया गया है। उन्होंने Manish Kumar v. Union of India सहित कई न्यायिक निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि न्यायालयों द्वारा लगातार ऐसे सिद्धांत विकसित किए जा रहे हैं जो दिवालिया समाधान और मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी कानूनों के उद्देश्यों के बीच संतुलन स्थापित करते हैं।

प्रतिभागियों को मिले व्यावहारिक और रणनीतिक दृष्टिकोण

इंटरएक्टिव सत्र के दौरान PGIP प्रतिभागियों को विभिन्न कानूनों के बीच समन्वय से उत्पन्न चुनौतियों को समझने और उनके समाधान के व्यावहारिक तरीकों के बारे में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन मिला। इस चर्चा ने यह भी रेखांकित किया कि प्रभावी समाधान प्रक्रिया के लिए टैक्सेशन, दिवालिया कानून और प्रवर्तन कानूनों के बीच संबंधों की गहरी समझ आवश्यक है।

कार्यक्रम के अंत में सेंटर फॉर PGIP के प्रमुख सुधाकर शुक्ला ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए अतिथि वक्ताओं का आभार व्यक्त किया और उनके बहुमूल्य मार्गदर्शन के लिए प्रशंसा की।

“IICA की ‘Meet the Legend’ श्रृंखला” प्रतिभागियों को देश के अग्रणी न्यायिक और नियामकीय विशेषज्ञों से जोड़कर अकादमिक उत्कृष्टता और पेशेवर क्षमता निर्माण के अपने उद्देश्य को निरंतर आगे बढ़ा रही है।


उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कर्नाटक के श्री वीरभद्रेश्वर मंदिर में राजगोपुरम का उद्घाटन किया

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज श्री वीरभद्रेश्वर मंदिर में आयोजित राजगोपुरम उद्घाटन, कलशारोहण और महाकुंभाभिषेक समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। यह कार्यक्रम कर्नाटक के बेलगावी जिले के श्री क्षेत्र यादुर में आयोजित हुआ।

मुख्य बातें

  • उपराष्ट्रपति ने इस अवसर को आध्यात्मिक पुनर्जागरण और सभ्यतागत पुनः पुष्टि का क्षण बताया।

  • उन्होंने कहा कि भारत केवल एक राष्ट्र नहीं बल्कि एक जीवंत सभ्यता है, जो सिंधु घाटी से लेकर कन्याकुमारी तक चेतना की निरंतर धारा के रूप में बहती आई है।

  • उन्होंने बताया कि यही वह पवित्र भूमि है जहाँ वेदों का ज्ञान पहली बार सुना गया और जहाँ भगवद् गीता का संदेश आज भी मानवता को साहस से कर्म करने, धर्मपूर्वक जीवन जीने और श्रद्धा से समर्पित होने की प्रेरणा देता है।

हिंदू दर्शन पर विचार

उपराष्ट्रपति ने कहा कि हिंदू चेतना केवल अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक जीवन पद्धति है।
उन्होंने वसुधैव कुटुम्बकम् – पूरी दुनिया एक परिवार है” के सिद्धांत को भारत की आध्यात्मिक दृष्टि का आधार बताया, जो प्रकृति और हर मानव में दिव्यता देखती है।

वीरशैव-लिंगायत परंपरा

उन्होंने वीरशैव लिंगायत परंपरा के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि इस परंपरा ने कर्नाटक और पड़ोसी महाराष्ट्र में आध्यात्मिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक और सामाजिक उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

संतों को श्रद्धांजलि

उपराष्ट्रपति ने शिव योगी श्री कादसिद्धेश्वर स्वामीजी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने इस पवित्र स्थल को पुनः खोजकर और पुनर्जीवित कर सनातन धर्म की ज्योति को फिर से प्रज्ज्वलित किया।
उन्होंने कहा कि सनातन धर्म समय की परीक्षा से गुजर सकता है, लेकिन कभी मिट नहीं सकता।

विकास और विरासत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न “विकास भी, विरासत भी” का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत आज तकनीकी रूप से उन्नत, आर्थिक रूप से मजबूत और वैश्विक रूप से प्रभावशाली राष्ट्र बन रहा है, लेकिन साथ ही अपनी सभ्यतागत जड़ों से भी जुड़ा हुआ है।

अन्य गणमान्य लोग

इस अवसर पर कई प्रमुख व्यक्तित्व उपस्थित थे, जिनमें शामिल हैं:

  • थावरचंद गहलोत – कर्नाटक के राज्यपाल

  • एम. बी. पाटिल – कर्नाटक सरकार में मंत्री

  • श्रीशैल जगद्गुरु डॉ. चन्ना सिद्धराम पंडिताराध्य शिवाचार्य स्वामीजी

  • इरन्ना कडाडी– राज्यसभा सांसद

साथ ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु और धार्मिक नेता भी इस समारोह में उपस्थित रहे।



होली के हुड़दंग में खूनी वारदात: आरंग में युवक की चाकू मारकर हत्या

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 आरंग। राजधानी Raipur से लगे Arang क्षेत्र में होली की खुशियाँ उस समय मातम में बदल गईं, जब आपसी विवाद के दौरान एक युवक की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। घटना आरंग के केवशी लोधी पारा इलाके की है, जहाँ त्योहार के माहौल के बीच हुई इस वारदात से पूरे क्षेत्र में तनाव फैल गया।


प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान नीरज लोधी के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि होली खेलने के दौरान कुछ लोगों के बीच कहासुनी हो गई, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई। इसी दौरान आरोपियों ने नीरज लोधी पर चाकू से हमला कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। फिलहाल हत्या के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। पुलिस ने कुछ संदेहियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है और जल्द ही पूरे मामले का खुलासा करने की बात कही है। वहीं Forensic Science Laboratory (FSL) की टीम भी मौके पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाने में लगी है।

थाने का घेराव, समाज में आक्रोश

घटना की खबर फैलते ही लोधी समाज के लोग बड़ी संख्या में Arang Police Station पहुंच गए। आक्रोशित लोगों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की।

स्थिति को देखते हुए पुलिस ने इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी है। केवशी लोधी पारा और अस्पताल परिसर में एहतियात के तौर पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

छत्तीसगढ़ राज्यसभा सीट पर मुकाबला तय, कांग्रेस ने दोबारा जताया भरोसा फूलो देवी पर

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी तस्वीर अब लगभग साफ हो गई है। कांग्रेस ने एक बार फिर फूलो देवी नेताम पर भरोसा जताते हुए उन्हें अपना उम्मीदवार घोषित किया है, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने Laxmi Verma को मैदान में उतारा है। दोनों प्रमुख दलों की ओर से उम्मीदवार घोषित होने के बाद चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं।


कांग्रेस से फिर फूलो देवी को मौका

छत्तीसगढ़ राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने Phulo Devi Netam को दोबारा उम्मीदवार बनाया है। वह वर्तमान में Mahila Congress की प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। जिन सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें उनका नाम भी शामिल है। इसके बावजूद पार्टी ने एक बार फिर उन्हें टिकट देकर अपने विश्वास को दोहराया है।

पार्टी हाईकमान ने उम्मीदवार तय करने से पहले कई संभावित नामों पर गंभीर मंथन किया था। चर्चा में Deepak Baij, Mohan Markam, पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel और पूर्व मंत्री T. S. Singh Deo के नाम भी शामिल बताए जा रहे थे। हालांकि सभी अटकलों के बीच आखिरकार पार्टी ने फिर से फूलो देवी नेताम पर भरोसा जताया।

भाजपा ने लक्ष्मी वर्मा पर जताया भरोसा

वहीं Bharatiya Janata Party ने छत्तीसगढ़ से Laxmi Verma को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है। पार्टी हाईकमान ने सात नामों के पैनल में से तीन नामों को अंतिम रूप दिया था, जिनमें लक्ष्मी वर्मा के साथ Narayan Chandel और Krishnamurti Bandhi के नाम शामिल थे।

अंततः पार्टी ने लगभग 30 वर्षों से सक्रिय राजनीति में काम कर रहीं लक्ष्मी वर्मा को टिकट देने का फैसला किया।

सामाजिक समीकरण पर भी ध्यान

भाजपा में पहले से चर्चा थी कि राज्यसभा चुनाव में संगठनात्मक संतुलन और सामाजिक समीकरण को ध्यान में रखते हुए मातृशक्ति को मौका दिया जाएगा। इसी रणनीति के तहत महिला उम्मीदवार को मैदान में उतारा गया है। अब दोनों दलों के उम्मीदवार तय होने के बाद राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल और भी गर्म हो गया है।

Israel US Iran War : भारत के पड़ोस तक पहुंची खाड़ी की जंग, श्रीलंका के पास अमेरिकी हमला, 87 की मौत

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 Israel US Iran War : ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता सैन्य तनाव अब हिंद महासागर क्षेत्र तक असर दिखाने लगा है। युद्ध के छठे दिन एक बड़ी घटना में अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरान के युद्धपोत IRIS Dena को टॉरपीडो से निशाना बनाकर डुबो दिया। यह हमला Sri Lanka के दक्षिणी तट के पास अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में हुआ। इस घटना में कम से कम 87 ईरानी सैनिकों की मौत होने की खबर है, जबकि कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं।


अमेरिका के रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी युद्धपोत पर टॉरपीडो दागे, जिससे जहाज तुरंत डूब गया। उन्होंने इसे “शांत लेकिन निर्णायक” सैन्य कार्रवाई बताया। अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार इस ऑपरेशन में मार्क-48 प्रकार के भारी टॉरपीडो का इस्तेमाल किया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार किसी अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो से दुश्मन के जहाज को डुबोया है।

क्या हुई थी पूरी घटना?

बताया जा रहा है कि सुबह करीब 5 बजे जहाज से संकट संदेश मिला। इसके बाद Sri Lanka Navy ने तुरंत बचाव अभियान शुरू किया। श्रीलंका के अधिकारियों के अनुसार जहाज से पहले विस्फोट की सूचना मिली थी। चूंकि घटना अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में हुई लेकिन यह श्रीलंका के खोज और बचाव क्षेत्र में आता है, इसलिए वहां की नौसेना को राहत अभियान चलाना पड़ा।

भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता

इस घटना के बाद यह आशंका जताई जा रही है कि मध्य-पूर्व में चल रहा संघर्ष अब हिंद महासागर क्षेत्र तक फैल सकता है। इससे India की सुरक्षा और कूटनीतिक स्थिति को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।

पूर्व नौसेना प्रमुख Arun Prakash ने कहा कि श्रीलंका के पास ईरानी युद्धपोत का डूबना बेहद चिंताजनक है। उनके मुताबिक इससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर तनाव बढ़ सकता है और वैश्विक समुद्री व्यापार पर भी असर पड़ सकता है।

युद्ध को लेकर भारत ने क्या कहा?

भारत ने मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताई है और सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव को और न बढ़ाने तथा नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की है। भारत सरकार का कहना है कि मौजूदा हालात में शांति और संवाद ही समाधान का रास्ता है।

इसी को ध्यान में रखते हुए भारत अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने के प्रयास भी लगातार कर रहा है। अब तक युद्ध प्रभावित देशों से सैकड़ों भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है।

रणनीतिक समीकरणों पर भी चर्चा

विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और भारत के बीच हुए LEMOA समझौते के कारण इस क्षेत्र में भारत पर रणनीतिक दबाव बढ़ सकता है। हालांकि कई विशेषज्ञों का कहना है कि चूंकि हमला अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में हुआ है, इसलिए इसे सीधे भारत के क्षेत्र से जोड़ना फिलहाल उचित नहीं होगा।

फिर भी इस घटना ने यह संकेत दे दिया है कि मध्य-पूर्व का संघर्ष अब हिंद महासागर तक असर डाल सकता है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक समुद्री व्यापार दोनों पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

बिहार में बड़ा सियासी बदलाव: नीतीश कुमार ने CM पद छोड़ने का किया ऐलान

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 पटना। बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। पिछले 24 घंटों से चल रही अटकलों के बीच बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने खुद सोशल मीडिया के जरिए मुख्यमंत्री पद छोड़ने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने कहा है कि वे अब राज्यसभा जाने की इच्छा रखते हैं और नई सरकार को पूरा समर्थन देंगे।


नीतीश कुमार ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि संसदीय जीवन की शुरुआत से ही उनके मन में यह इच्छा थी कि वे बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों के साथ-साथ संसद के भी दोनों सदनों के सदस्य बनें। इसी क्रम में वे इस बार राज्यसभा का सदस्य बनना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि पिछले दो दशक से अधिक समय से बिहार की जनता ने उन पर भरोसा और समर्थन बनाए रखा है, जिसके बल पर उन्होंने पूरी निष्ठा से राज्य की सेवा की है। जनता के इसी विश्वास की वजह से बिहार आज विकास और सम्मान का नया आयाम प्रस्तुत कर रहा है।

सोशल मीडिया पोस्ट में जताया आभार

नीतीश कुमार ने लिखा कि जनता का समर्थन उनके लिए हमेशा प्रेरणा रहा है। उन्होंने कहा कि वे भविष्य में भी बिहार के लोगों से जुड़े रहेंगे और राज्य के विकास के लिए काम करते रहेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बिहार में जो नई सरकार बनेगी, उसे उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलेगा।

सीएम हाउस के बाहर समर्थकों की भीड़

नीतीश कुमार के फैसले की खबर सामने आने के बाद मुख्यमंत्री आवास के बाहर उनके समर्थकों की भारी भीड़ जुट गई। समर्थकों ने नारेबाजी की और इस दौरान पुलिस के साथ हल्की नोकझोंक की स्थिति भी देखने को मिली। बढ़ती भीड़ और राजनीतिक हलचल के बीच ही नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया पर अपना बयान जारी किया।

बेटे निशांत को लेकर भी चर्चा तेज

नीतीश कुमार के दिल्ली की राजनीति में जाने की चर्चा के साथ ही उनके उत्तराधिकारी को लेकर भी सियासी गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उनके बेटे Nishant Kumar को बिहार की राजनीति में सक्रिय भूमिका दी जा सकती है। हालांकि इस संबंध में पार्टी या नीतीश कुमार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

हिट-एंड-रन : युवक की मौत, साथी घायल; पोस्टमॉर्टम में पुलिस लापरवाही से परिजन परेशान

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 देवराज साहू, पटेवा (महासमुंद)।  झलप-पटेवा के बीच सिंधोरी (बावनकेरा) पड़ाव के पास  आज दोपहर करीब 12 बजे  एक दर्दनाक हिट-एंड-रन की घटना ने इलाके में सनसनी फैला दी। झलप की ओर जा रही मोटरसाइकिल पर सवार दो युवकों को अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दिया और वाहन चालक मौके से फरार हो गया। हादसे में भुनेश्वर यादव (25 वर्ष) पिता थान सिंह यादव की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनका साथी कुलेश्वर ध्रुव (25 वर्ष) पिता बसंत ध्रुव गंभीर रूप से घायल हो गया। कुलेश्वर की हालत नाजुक बनी हुई है। उसका उपचार महासमुंद के एक निजी अस्पताल में किया जा रहा है। 

घटना स्थल का नजारा


 मौके पर क्या हुआ?

दोपहर के वक्त भुनेश्वर और कुलेश्वर अपनी मोटरसाइकिल पर झलप जा रहे थे। अचानक पीछे से आई अज्ञात गाड़ी ने जोरदार टक्कर मारी, जिससे दोनों सड़क पर लुढ़क पड़े। मोटरसाइकिल सवारों की चीख-पुकार सुनकर ग्रामीण पहुंचे, लेकिन गाड़ी चालक भाग निकला। भुनेश्वर को तत्काल मृत घोषित कर दिया गया, जबकि कुलेश्वर एम्बुलेंस से  तुमगांव सीएससी (कम्युनिटी हेल्थ सेंटर) भेजा गया।


 कहाँ और कब हुआ हादसा?

यह सड़क हादसा सिंधोरी पड़ाव के पास दोपहर 12 बजे के आसपास हुआ। यह इलाका पटेवा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जहाँ एनएच-53 पर वाहनों की लगातार आवाजाही रहती है, इससे हिट-एंड-रन जैसी घटनाएँ अक्सर होती हैं। ग्रामीणों ने बताया कि इस मार्ग पर तेज रफ्तार से ऐसी दुर्घटनाएँ बढ़ रही हैं। 


 परिजनों की पुलिस से शिकायत

इस हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल उठा पोस्टमॉर्टम को लेकर। भुनेश्वर का शव तुमगांव सीएससी ले जाया गया, लेकिन वहाँ डॉक्टर ने कहा, "पुलिस स्टाफ आएगा तभी पोस्टमॉर्टम होगा।" परिजनों ने पटेवा थाने से संपर्क किया, तो पुलिसकर्मी बोले, " तुमगांव थाने से स्टाफ जाएगा।" जब घंटों इंतजार के बाद भी कोई नहीं पहुँचा, तो परिजनों ने थान प्रभारी (टीआई) से बात की। टीआई ने भी वही जवाब दिया, "थाना स्टाफ जाएगा।" आखिरकार परिजनों को मजबूरन एसपी से फरियाद लगानी पड़ी।  एसपी से शिकायत होने पर स्टाफ अस्पताल के लिए रवाना हुआ, लेकिन तब तक देर  चुकी थी। डॉक्टर ने टाइम ओवर होने का हवाला देकर पोस्टमॉर्टम कल के लिए टाल दिया।


 क्यों हुई लापरवाही?

परिजन बेहद परेशान हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पटेवा थाने पर ड्यूटी स्टाफ की कमी है?जिससे ऐसी बुनियादी कार्रवाई में भी देरी हुई।  परिजन ने कहा, "मौत के बाद भी शव को घंटों इंतजार करना पड़ा। एसपी साहब की फोन कॉल पर ही पुलिस सक्रिय हुई।" फिलहाल अज्ञात वाहन चालक की तलाश में पुलिस हरकत में आई है, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। पुलिस की कार्यप्रणाली पर उंगली उठाई जा रही है।

 सड़क सुरक्षा और पुलिस की तत्परता पर सवाल

 यह घटना सड़क सुरक्षा और पुलिस की तत्परता पर सवाल खड़े करती है। ग्रामीणों ने सीसीटीवी फुटेज चेक करने की मांग की है। कुलेश्वर का इलाज जारी है, जबकि भुनेश्वर के परिवार में कोहराम मचा है। एसपी ने मामले की जाँच के आदेश दिए हैं। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि हिट-एंड-रन के मामलों में त्वरित एक्शन टीम हो। पुलिस होली के बहाने तत्परता से बचती रही। जबकि, पुलिस को ऐसे मौके पर अधिक सक्रिय होने की आवश्यकता है।

ग्रामीण डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम: संशोधित भारतनेट प्रोग्राम के तहत छत्तीसगढ़ को ₹3,942 करोड़ की स्वीकृति

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डिजिटल कनेक्टिविटी बनेगी विकसित छत्तीसगढ़ की नई जीवनरेखा- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर- छत्तीसगढ़ को डिजिटल आधारभूत संरचना के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त हुई है। भारत सरकार के संचार मंत्रालय द्वारा संशोधित भारतनेट प्रोग्राम (Amended BharatNet Program - ABP) के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के लिए ₹3,942 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की गई है।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत छत्तीसगढ़ के 11 682 ग्राम पंचायतों को रिंग टोपोलॉजी के माध्यम से जोड़ा जाएगा। रिंग टोपोलॉजी आधारित यह नेटवर्क संरचना अधिक विश्वसनीय, सुरक्षित और निर्बाध डिजिटल सेवाएँ उपलब्ध कराने में सक्षम होगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह परियोजना ग्रामीण डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इससे ई-गवर्नेंस सेवाओं का विस्तार होगा, ऑनलाइन शिक्षा को नई मजबूती मिलेगी, टेलीमेडिसिन के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँच सकेंगी तथा ग्रामीण युवाओं और उद्यमियों के लिए नए अवसर सृजित होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल कनेक्टिविटी केवल इंटरनेट सुविधा नहीं है, बल्कि यह विकसित छत्तीसगढ़ की नई जीवनरेखा है। इससे शासन की पारदर्शिता बढ़ेगी, सेवाओं की उपलब्धता तेज होगी और गांवों को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ा जा सकेगा।

मुख्यमंत्री साय ने इस महत्वपूर्ण स्वीकृति के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया  के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से छत्तीसगढ़ डिजिटल रूप से सशक्त, सुरक्षित और आत्मनिर्भर राज्य के रूप में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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