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लव मैरिज की सजा… 4 साल तक सामाजिक बहिष्कार, अब कोर्ट ने FIR दर्ज करने के दिए आदेश

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 कोरबा। प्रेम विवाह करने वाले बंजारा समाज के एक दंपती और उनके परिवार को कथित तौर पर चार साल तक सामाजिक बहिष्कार झेलना पड़ा। मामले को गंभीर मानते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) कोर्ट, कोरबा ने समाज के वर्तमान और पूर्व पदाधिकारियों के खिलाफ तीन दिनों के भीतर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है।


प्रेम विवाह बना विवाद की वजह
जानकारी के अनुसार पीड़ित युवक मूल रूप से Pathalgaon का रहने वाला है और वर्तमान में Korba जिले के पोड़ीबहार क्षेत्र में एक निजी ठेका कंपनी में काम करता है। युवक ने 26 अगस्त 2022 को **Arya Samaj मंदिर, रायपुर में अपनी ही जाति की युवती से प्रेम विवाह किया था। युवक का कहना है कि वह कनावत गोत्र से है, जबकि पत्नी तिलावत गोत्र की है। इसके बावजूद समाज के कुछ पदाधिकारियों ने दोनों को एक ही गोत्र का बताते हुए शादी का विरोध किया।

दंपती और परिवार का किया गया सामाजिक बहिष्कार
आरोप है कि विवाह के तुरंत बाद दंपती और उनके परिवार को समाज से बाहर कर दिया गया। इसके चलते परिवार को सामाजिक कार्यक्रमों और सामुदायिक आयोजनों से दूर रखा गया। पीड़ित का कहना है कि समाज में दोबारा शामिल करने के नाम पर दोनों पक्षों से 11-11 हजार रुपये भी लिए गए, लेकिन बहिष्कार खत्म नहीं किया गया।

2 लाख जुर्माना लिया, फिर मांगे 3 लाख और
दंपती के मुताबिक जब उन्होंने समाज में दोबारा स्वीकार किए जाने की मांग की तो समाज के पदाधिकारियों ने 2 लाख रुपये जुर्माना जमा करने की शर्त रखी। परिवार ने यह रकम भी जमा कर दी, लेकिन इसके बाद भी सामाजिक मान्यता नहीं दी गई। आरोप है कि बाद में 3 लाख रुपये अतिरिक्त की मांग कर परिवार पर लगातार आर्थिक दबाव बनाया गया।

पुराने और नए पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप
मामले में मार्च 2024 तक पद पर रहे तत्कालीन अध्यक्ष और सचिव की भूमिका सामने आई है। वहीं अप्रैल 2024 में नए पदाधिकारी बने, लेकिन पीड़ित दंपती का आरोप है कि उन्होंने भी सामाजिक बहिष्कार खत्म करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

थाने में सुनवाई नहीं हुई तो कोर्ट पहुंचे पीड़ित
पीड़ित ने पहले सिविल लाइन थाना, कोरबा में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर अधिवक्ता Prince Agrawal के माध्यम से CJM कोर्ट में परिवाद दायर किया गया।

कोर्ट सख्त… 3 दिन में FIR दर्ज करने का आदेश
मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने सिविल लाइन थाना पुलिस को समाज के चार पदाधिकारियों के खिलाफ 3 दिन के भीतर एफआईआर दर्ज कर अनुपालन रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए हैं।

सामाजिक बहिष्कार पर कोर्ट का सख्त संदेश
न्यायालय के इस आदेश को सामाजिक बहिष्कार और अवैध जुर्माना वसूली जैसे मामलों पर कड़ा संदेश माना जा रहा है। अब पुलिस को तय समयसीमा के भीतर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू करनी होगी।

महासमुंद- दुष्कर्म आरोपी ‘चावल वाले बाबा’ को गुपचुप रायपुर लाया गया, कड़ी सुरक्षा में मेडिकल जांच की तैयारी

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 रायपुर। दुष्कर्म के गंभीर आरोप में महासमुंद सेंट्रल जेल में बंद चर्चित कथावाचक और ज्योतिषाचार्य आचार्य नरेंद्र नयन शास्त्री, जिन्हें ‘चावल वाले बाबा’ के नाम से जाना जाता है, को शनिवार को गोपनीय तरीके से रायपुर लाया गया। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पहले उन्हें रायपुर केंद्रीय जेल में रखा गया, जिसके बाद मेडिकल जांच के लिए Dr. Bhimrao Ambedkar Memorial Hospital (मेकाहारा) ले जाने की तैयारी की जा रही है।


सुरक्षा घेरे में महासमुंद से रायपुर शिफ्ट
सूत्रों के मुताबिक आरोपी को महासमुंद जेल से सूमो वाहन (CG 02 5072) में रायपुर लाया गया। सुरक्षा के लिए एक फॉलो वाहन (CG 03 A 0715) भी साथ चल रहा था। पूरी कार्रवाई जेल और पुलिस प्रशासन की संयुक्त निगरानी में बेहद गोपनीय तरीके से की गई।

सोनोग्राफी समेत कई मेडिकल टेस्ट होंगे
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आचार्य नरेंद्र नयन शास्त्री की सोनोग्राफी सहित अन्य जरूरी मेडिकल जांच मेकाहारा अस्पताल में कराई जाएगी। रिपोर्ट आने के बाद उन्हें दोबारा महासमुंद सेंट्रल जेल भेजा जा सकता है।

महिला की शिकायत पर दर्ज हुआ था रेप केस
पूरा मामला बागबाहरा थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां एक महिला की शिकायत पर आरोपी बाबा के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने आरोपी पर भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(ज), 376(2)(एन) और 376(2)(एम) के तहत गंभीर अपराध दर्ज किया है।

सिलयारी से हुई थी गिरफ्तारी
प्रारंभिक जांच के बाद पुलिस ने आरोपी को रायपुर जिले के सिलयारी क्षेत्र से गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद से वह महासमुंद सेंट्रल जेल में बंद था। जेल में तबीयत बिगड़ने की शिकायत के बाद अब उसे मेडिकल जांच के लिए रायपुर लाया गया है।

‘चावल देखकर भविष्य बताने वाले बाबा’ के नाम से थे चर्चित
आचार्य नरेंद्र नयन शास्त्री लंबे समय से कथावाचन और ज्योतिष के जरिए लोगों के बीच पहचान बना चुके थे। वे ‘चावल देखकर भविष्य बताने वाले बाबा’ के रूप में काफी प्रसिद्ध थे और उनके धार्मिक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते थे।

पुलिस कर रही मामले की आगे जांच
फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है। मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी।

छत्तीसगढ़ के किसानों को बड़ी सौगात: पीएम किसान सम्मान निधि की 23वीं किस्त जारी

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छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए आज बड़ी खुशखबरी सामने आई है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना की 23वीं किस्त जारी कर दी गई है, जिससे राज्य के लाखों किसानों के चेहरों पर राहत और खुशी देखने को मिल रही है।

24.52 लाख किसानों को 490.54 करोड़ रुपये का लाभ

इस किस्त के तहत छत्तीसगढ़ के करीब 24.52 लाख किसानों को सीधे उनके बैंक खातों में कुल 490.54 करोड़ रुपये की राशि ट्रांसफर की जा रही है। यह पूरी प्रक्रिया DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से की जा रही है, जिससे राशि बिना किसी रुकावट के सीधे लाभार्थियों तक पहुंच रही है।

किसानों की आर्थिक मदद के लिए अहम कदम

PM-KISAN योजना के तहत पात्र किसानों को हर वर्ष ₹6,000 की आर्थिक सहायता दी जाती है, जो तीन समान किस्तों में सीधे बैंक खातों में भेजी जाती है। यह राशि किसानों को खेती-किसानी की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान करती है।

सरकार की प्रमुख योजना

यह योजना केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं में से एक है, जिसका उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक मजबूती देना है। इस पहल से देशभर में करोड़ों किसान लाभान्वित हो रहे हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।

मुख्य बातें

  • 23वीं किस्त आज जारी

  • छत्तीसगढ़ के 24.52 लाख किसान लाभान्वित

  • कुल ₹490.54 करोड़ की राशि ट्रांसफर

  • राशि सीधे बैंक खातों में DBT के माध्यम से


डोमिनिकन रिपब्लिक में होटल में भीषण आग, 1 की मौत – 1700 लोग सुरक्षित निकाले गए

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डोमिनिकन रिपब्लिक में एक बीच होटल में भीषण आग लगने की दुखद घटना सामने आई है। इस हादसे में कम से कम 1 व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि लगभग 1700 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया

कैसे हुआ हादसा?

रिपोर्ट्स के अनुसार, आग होटल के अंदर अचानक लगी और कुछ ही समय में कई हिस्सों में फैल गई। तेज़ धुआं और आग की लपटों के कारण अफरा-तफरी मच गई, जिससे मेहमानों को तुरंत बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू करनी पड़ी।

 राहत और बचाव कार्य

दमकल विभाग और आपातकालीन सेवाएं तुरंत मौके पर पहुंचीं और घंटों की मेहनत के बाद आग पर काफी हद तक काबू पा लिया गया।
सभी होटल मेहमानों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।

 जांच जारी

स्थानीय प्रशासन ने घटना की जांच शुरू कर दी है कि आग कैसे लगी। शुरुआती तौर पर इसे एक गंभीर हादसा माना जा रहा है, लेकिन कारणों की पुष्टि अभी नहीं हुई है।

स्थिति फिलहाल

  • 1 व्यक्ति की मौत

  • लगभग 1700 लोगों का सुरक्षित रेस्क्यू

  • राहत और बचाव कार्य पूरा

  • जांच जारी

12 वर्षों में बदली पूर्वोत्तर भारत की तस्वीर, विकास और कनेक्टिविटी का नया केंद्र बना ‘अष्टलक्ष्मी’

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नई दिल्ली- पिछले 12 वर्षों में पूर्वोत्तर भारत ने विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन देखा है। केंद्र सरकार की नीतियों, बुनियादी ढांचे के विस्तार और समावेशी विकास कार्यक्रमों के चलते यह क्षेत्र अब देश की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। सड़क, रेल, हवाई और डिजिटल कनेक्टिविटी में सुधार के साथ-साथ पेयजल, स्वच्छता, आवास, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं तक लोगों की पहुंच में भी बड़ा विस्तार हुआ है।

सरकार के अनुसार, असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम को मिलाकर बने पूर्वोत्तर क्षेत्र को "अष्टलक्ष्मी" के नाम से जाना जाता है। भारतीय परंपरा में मां लक्ष्मी की आठ स्वरूपों की तरह ये आठ राज्य भी अपनी सांस्कृतिक, प्राकृतिक और आर्थिक विशेषताओं के लिए प्रसिद्ध हैं और देश की समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

पूर्वोत्तर के विकास को मिली नई गति

वर्ष 2014 के बाद से केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता देते हुए कई विशेष योजनाएं शुरू कीं। विकास मंत्रालय (MDoNER) के माध्यम से अब तक 3,746 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 2,730 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। इन परियोजनाओं पर 27,963 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आई है।

PM-DevINE योजना बनी विकास का आधार

प्रधानमंत्री विकास पहल (PM-DevINE) योजना के तहत वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक 6,600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस योजना के अंतर्गत बुनियादी ढांचे, आजीविका, सामाजिक विकास और क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करने से जुड़े 48 परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है। इनमें से तीन परियोजनाएं पूरी भी हो चुकी हैं।

NESIDS के जरिए मजबूत हुआ इंफ्रास्ट्रक्चर

नॉर्थ ईस्ट स्पेशल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट स्कीम (NESIDS) के तहत सड़कों, पुलों, स्वास्थ्य, शिक्षा, जल आपूर्ति और ऊर्जा से जुड़ी परियोजनाओं को बढ़ावा दिया गया। इस योजना के तहत 70 सड़क परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं जबकि 57 परियोजनाओं पर काम जारी है। वहीं अन्य क्षेत्रों से जुड़ी 1,234 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और 376 परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं।

एक्ट ईस्ट नीति से बढ़ा अंतरराष्ट्रीय महत्व

केंद्र सरकार की "एक्ट ईस्ट नीति" ने पूर्वोत्तर भारत को दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग और कलादान मल्टी-मोडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट परियोजना जैसे प्रयासों से व्यापार और संपर्क को नई दिशा मिली है।

मोरेह जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (ICP) विकसित किए गए हैं, जबकि सीमा हाटों के जरिए स्थानीय व्यापार को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

सड़क संपर्क में ऐतिहासिक विस्तार

पूर्वोत्तर भारत में सड़क नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ है। राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई वर्ष 2014 में 10,905 किलोमीटर थी, जो अप्रैल 2025 तक बढ़कर 16,207 किलोमीटर हो गई।

भारतमाला परियोजना के तहत 2,100 किलोमीटर से अधिक सड़कों को मंजूरी दी गई, जिनमें से 1,800 किलोमीटर से अधिक सड़कें पूरी हो चुकी हैं।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अंतर्गत पिछले 12 वर्षों में 50,850 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण किया गया, जिससे दूरदराज के गांवों को बाजार, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा संस्थानों से जोड़ा गया।

रेल संपर्क में आया क्रांतिकारी बदलाव

पूर्वोत्तर में रेल नेटवर्क के विस्तार पर विशेष जोर दिया गया। रेलवे के लिए औसत वार्षिक बजट आवंटन 2,122 करोड़ रुपये से बढ़कर 11,486 करोड़ रुपये हो गया।

पिछले एक दशक में 1,900 किलोमीटर से अधिक नई रेल लाइनें शुरू की गईं। अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, नागालैंड, त्रिपुरा और मिजोरम में रेलवे ट्रैकों का 100 प्रतिशत विद्युतीकरण हो चुका है।

गुवाहाटी और न्यू जलपाईगुड़ी के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस का संचालन शुरू होने से आधुनिक रेल सेवाओं का विस्तार हुआ है। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत पूर्वोत्तर के लगभग 60 रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है।

बोगीबील, भूपेन हजारिका सेतु और सेला टनल जैसी परियोजनाएं बनीं पहचान

ब्रह्मपुत्र नदी पर बना बोगीबील पुल असम के डिब्रूगढ़ और धीमाजी जिलों को जोड़ता है। वहीं भूपेन हजारिका सेतु (ढोला-सदिया पुल) ने असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच संपर्क को मजबूत किया है।

अरुणाचल प्रदेश में 13,000 फीट की ऊंचाई पर निर्मित सेला टनल ने तवांग क्षेत्र को पूरे साल सड़क संपर्क उपलब्ध कराया है।

मणिपुर में निर्माणाधीन नोनी रेलवे पुल दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पियर ब्रिज बनने जा रहा है।


हवाई संपर्क में 78 प्रतिशत वृद्धि

UDAN योजना के तहत पूर्वोत्तर में हवाई संपर्क का तेजी से विस्तार हुआ है। वर्ष 2014 में जहां केवल 9 हवाई अड्डे थे, वहीं 2026 तक उनकी संख्या बढ़कर 17 हो गई है।

पाकयोंग, तेजू और जोरहाट जैसे नए हवाई अड्डों के विकास के साथ लगभग 90 क्षेत्रीय हवाई मार्ग शुरू किए गए हैं।

डिजिटल कनेक्टिविटी ने बदली तस्वीर

भारतनेट और डिजिटल भारत निधि जैसी योजनाओं के माध्यम से दिसंबर 2025 तक 6,355 ग्राम पंचायतों को हाई-स्पीड इंटरनेट सेवाओं से जोड़ा गया।

इसके अलावा 3,718 मोबाइल टावर स्थापित कर 5,366 गांवों तक मोबाइल सेवाएं पहुंचाई गईं।

ऊर्जा क्षेत्र में बड़े निवेश

पूर्वोत्तर क्षेत्र को स्वच्छ ऊर्जा केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।

अरुणाचल प्रदेश में 2,880 मेगावाट क्षमता वाली दिबांग बहुउद्देशीय जलविद्युत परियोजना और 2,000 मेगावाट क्षमता वाली सुबनसिरी लोअर जलविद्युत परियोजना जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर कार्य जारी है।

नॉर्थ ईस्ट गैस ग्रिड के तहत 1,656 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जा रही है, जो सभी आठ राज्यों को राष्ट्रीय गैस ग्रिड से जोड़ेगी।

जल जीवन मिशन से घर-घर पहुंचा नल का जल

जल जीवन मिशन के तहत अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम ने 100 प्रतिशत ग्रामीण घरों तक नल जल पहुंचाने का लक्ष्य हासिल कर लिया है।

असम, मेघालय, नागालैंड, त्रिपुरा और अन्य राज्यों में भी तेजी से प्रगति हुई है।

स्वच्छ भारत मिशन से बदला ग्रामीण जीवन

स्वच्छ भारत मिशन के तहत पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों को खुले में शौच से मुक्त (ODF) घोषित किया जा चुका है।

वर्ष 2014 से 2026 के बीच लगभग 57 लाख घरेलू शौचालयों का निर्माण किया गया।

स्वास्थ्य और शिक्षा में मजबूत हुआ ढांचा

गुवाहाटी में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) पूरी तरह कार्यरत है। इसके अलावा क्षेत्र में 12 नए मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी दी गई है।

आयुष्मान भारत योजना के तहत अप्रैल 2026 तक 2.43 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड बनाए गए हैं और 46 लाख से अधिक लोगों को उपचार का लाभ मिला है।

शिक्षा क्षेत्र में 79 विश्वविद्यालय, 1,001 कॉलेज, 110 आईटीआई और 48 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय संचालित हो रहे हैं। उच्च शिक्षा में छात्र नामांकन भी लगातार बढ़ा है।

आवास और बिजली से बदली ग्रामीण तस्वीर

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत पूर्वोत्तर राज्यों में मार्च 2026 तक 28 लाख से अधिक पक्के मकानों का निर्माण पूरा किया गया।

सौभाग्य योजना के अंतर्गत सभी आठ राज्यों में 100 प्रतिशत घरों तक बिजली पहुंचाई जा चुकी है।

कृषि, मत्स्य पालन और डेयरी क्षेत्र में बढ़ी आय

पूर्वोत्तर में मत्स्य उत्पादन वर्ष 2014-15 के 4.03 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में 6.78 लाख टन हो गया।

दूध उत्पादन 1,293.5 हजार टन से बढ़कर 1,739.9 हजार टन तक पहुंच गया है।

जैविक खेती, बांस उद्योग, अगरवुड उत्पादन और कृषि आधारित उद्यमों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

विकसित भारत की दिशा में बढ़ता पूर्वोत्तर

सरकार का कहना है कि पिछले 12 वर्षों में पूर्वोत्तर भारत ने विकास, कनेक्टिविटी, ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक गतिविधियों के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। क्षेत्र अब केवल भौगोलिक रूप से नहीं, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से भी भारत के विकास का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है।

पूर्वोत्तर भारत आज "अष्टलक्ष्मी" के रूप में एक ऐसे क्षेत्र की पहचान बना चुका है, जो अधिक जुड़ा हुआ, आत्मनिर्भर, समावेशी और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।


पश्चिम बंग दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएं

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंग दिवस (पश्चिमबंग दिवस) के अवसर पर राज्य के लोगों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दिन उस राज्य का उत्सव है जिसने साहित्य, संगीत, कला, अध्यात्म, विज्ञान, व्यापार, वाणिज्य, सामाजिक सुधार और अन्य अनेक क्षेत्रों में अपने योगदान से भारत के इतिहास को गहराई से प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल ने समय-समय पर भारत की राष्ट्रीय चेतना को समृद्ध किया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 20 जून पश्चिम बंगाल के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है, क्योंकि इसी दिन यह सुनिश्चित हुआ था कि पश्चिम बंगाल भारत का अभिन्न अंग बना रहे। उन्होंने इस संदर्भ में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की भूमिका को अमूल्य बताया। प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि वर्ष 2026 में डॉ. मुखर्जी की 125वीं जयंती भी मनाई जा रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार पश्चिम बंगाल सरकार के साथ मिलकर राज्य के लोगों के सपनों और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए कार्य करती रहेगी।

उन्होंने पश्चिम बंगाल की निरंतर प्रगति और राज्य के लोगों की समृद्धि की कामना की।


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को प्रधानमंत्री मोदी ने दी जन्मदिन की शुभकामनाएं

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मू को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति मुर्मू का साहस, सादगी, विनम्रता और जनसेवा के प्रति अटूट समर्पण देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि राष्ट्रपति मुर्मू ने सार्वजनिक जीवन में अपने लंबे अनुभव के दौरान देश की उत्कृष्ट सेवा की है। उन्होंने विशेष रूप से समाज के वंचित और कमजोर वर्गों के कल्याण के लिए लगातार काम किया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के विकास के प्रति राष्ट्रपति की दृढ़ प्रतिबद्धता अत्यंत प्रेरणादायक है। उन्होंने राष्ट्रपति के लंबे, स्वस्थ और राष्ट्रसेवा से परिपूर्ण जीवन की कामना की।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी संदेश में यह भी बताया कि वे आज ओडिशा में आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्रपति मुर्मू से मुलाकात करेंगे।


करमता भाजी खाने से एक ही परिवार के 10 लोग बीमार, 3 बच्चों समेत अस्पताल में भर्ती

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 जांजगीर-चांपा। जिले के कड़ारी गांव में करमता भाजी की सब्जी खाने के बाद एक ही परिवार के 10 लोगों की अचानक तबीयत बिगड़ गई, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। सभी को पेट दर्द और दस्त की शिकायत होने पर पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दारंग ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बीडीएम अस्पताल चांपा रेफर किया गया।


बीमार लोगों में 3 बच्चे भी शामिल हैं, जिनकी उम्र 9 से 16 वर्ष के बीच बताई जा रही है। डॉक्टरों के मुताबिक सभी मरीजों की हालत फिलहाल सामान्य है और इलाज जारी है।

घटना की जानकारी मिलते ही चांपा एसडीएम पवन कोसमा अस्पताल पहुंचे और डॉक्टरों से चर्चा कर मरीजों के बेहतर इलाज के निर्देश दिए।

जानकारी के अनुसार, कड़ारी गांव निवासी राजेंद्र वैष्णव और राजेश वैष्णव के परिवार में करमता भाजी की सब्जी बनाई गई थी। भोजन करने के कुछ ही देर बाद परिवार के सभी सदस्यों की तबीयत बिगड़ने लगी, जिसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया।

राहत की बात यह है कि सभी मरीज फिलहाल खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी पहल : 'सुघ्घर छत्तीसगढ़' अभियान से सुशासन का लाभ पहुंचेगा हर परिवार तक

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'नियद नेल्लानार' मॉडल का राज्यव्यापी विस्तार: 23 जिलों में 31 जनकल्याणकारी योजनाओं का होगा संतृप्तिकरण

तकनीक आधारित निगरानी, विभागीय अभिसरण और जन-केंद्रित सेवा प्रदाय से मजबूत होगा विकसित छत्तीसगढ़ का आधार

जन-जन तक सुशासन, घर-घर तक विकास : 'सुघ्घर छत्तीसगढ़' अभियान होगा प्रारंभ

जनकल्याणकारी योजनाओं के संतृप्तिकरण का प्रदेशव्यापी अभियान : 'सुघ्घर छत्तीसगढ़'

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार सुशासन को जन-जन तक पहुंचाने और प्रत्येक पात्र परिवार को शासन की योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। इसी उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा 'सुघ्घर छत्तीसगढ़' अभियान प्रारंभ किया जा रहा है। यह अभियान प्रदेश के 23 जिलों में 31 प्रमुख हितग्राहीमूलक योजनाओं के संतृप्तिकरण का व्यापक कार्यक्रम होगा, जिसके माध्यम से योजनाओं की पहुंच, प्रभावशीलता और पारदर्शिता को नई मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का आधार केवल अधोसंरचना का विकास नहीं, बल्कि प्रत्येक परिवार तक शासन की योजनाओं की प्रभावी और समयबद्ध पहुंच सुनिश्चित करना है। सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं संचालित करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनके सकारात्मक परिणाम प्रत्येक परिवार के जीवन में दिखाई दें।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता ऐसी शासन व्यवस्था स्थापित करना है, जिसमें नागरिकों को योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए अनावश्यक भटकना न पड़े, बल्कि शासन स्वयं पात्र हितग्राहियों तक पहुंचे और उन्हें योजनाओं से जोड़े। 'सुघ्घर छत्तीसगढ़' इसी सोच का विस्तार है।

'नियद नेल्लानार' की सफलता से प्रेरित नई पहल

वर्ष 2024 से बस्तर संभाग  में संचालित 'नियद नेल्लानार' योजना ने शासन और जनता के बीच विश्वास का नया सेतु निर्मित किया है।अभिसरण आधारित सेवा प्रदाय के माध्यम से इस योजना ने दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में शासन की उपस्थिति को मजबूत किया तथा पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित की।

योजना की सफलता को देखते हुए इसे 'नियद नेल्लानार 2.0' के रूप में 10 जिलों तक विस्तारित किया गया। अब इसी सफल मॉडल को प्रदेश के शेष 23 जिलों में लागू करते हुए 'सुघ्घर छत्तीसगढ़' अभियान प्रारंभ किया जा रहा है।

यह अभियान रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और सरगुजा संभाग के 23 जिलों में संचालित होगा और ग्रामीण परिवारों को शासन की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने का कार्य करेगा। 'सुघ्घर छत्तीसगढ़' अभियान अंतर्गत  रायपुर संभाग के रायपुर, बलौदाबाजार-भाटापारा, धमतरी एवं महासमुंद जिले; बिलासपुर संभाग के बिलासपुर, कोरबा, जांजगीर-चांपा, मुंगेली, रायगढ़, सक्ती, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही तथा सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले; दुर्ग संभाग के दुर्ग, बालोद, बेमेतरा, कबीरधाम (कवर्धा) एवं राजनांदगांव जिले तथा सरगुजा संभाग के सरगुजा, कोरिया, सूरजपुर, बलरामपुर-रामानुजगंज, जशपुर एवं मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले शामिल हैं।

सुशासन से संतृप्ति की ओर

'सुघ्घर छत्तीसगढ़' अभियान का मूल उद्देश्य विभिन्न विभागों की योजनाओं को एक साझा मंच पर लाकर पात्र हितग्राहियों तक उनका शत-प्रतिशत लाभ सुनिश्चित करना है।

'सुघ्घर छत्तीसगढ़' अभियान विभिन्न विभागों के बीच अभिसरण स्थापित करते हुए एक ऐसी व्यवस्था विकसित करेगा, जिसमें योजनाओं की जानकारी, पात्रता, प्रगति और संतृप्तिकरण की स्थिति एकीकृत रूप से उपलब्ध होगी।

31 जनकल्याणकारी योजनाओं का होगा संतृप्तिकरण

अभियान के अंतर्गत सामाजिक सुरक्षा, आवास, रोजगार, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, कृषि, कौशल विकास तथा बुनियादी नागरिक सेवाओं से जुड़ी 31 प्रमुख योजनाओं को शामिल किया गया है।

इनमें मनरेगा जॉब कार्ड, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, जल जीवन मिशन, राशन कार्ड एवं प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना, आयुष्मान भारत योजना, वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, दिव्यांग पेंशन, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, किसान क्रेडिट कार्ड, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, जननी सुरक्षा योजना, मिशन इंद्रधनुष, महतारी वंदन योजना, जन-धन योजना, कौशल विकास योजनाएं, श्रम कार्ड, वनाधिकार पट्टा, आधार कार्ड तथा विभिन्न प्रमाण-पत्र सेवाएं शामिल हैं।इन योजनाओं का उद्देश्य  परिवारों को सामाजिक सुरक्षा, आर्थिक सशक्तिकरण और जीवन स्तर में सुधार के अवसर उपलब्ध कराना है।

CHiPS विकसित करेगा अत्याधुनिक डिजिटल डैशबोर्ड

अभियान की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था होगी।

छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसायटी (CHiPS) द्वारा एक एकीकृत 'सुघ्घर छत्तीसगढ़ डैशबोर्ड' विकसित किया जाएगा। यह डैशबोर्ड राज्य, संभाग, जिला, विकासखंड, ग्राम पंचायत और ग्राम स्तर तक योजनाओं की प्रगति को रियल-टाइम में प्रस्तुत करेगा। डैशबोर्ड पर प्रत्येक योजना की संतृप्तिकरण स्थिति, शेष हितग्राहियों की संख्या तथा प्रगति का प्रतिशत उपलब्ध रहेगा। इससे निर्णय प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनेगी।

तीन चरणों में होगा अभियान का संचालन

अभियान का क्रियान्वयन सुव्यवस्थित रूप से तीन चरणों में किया जाएगा।पहले चरण में ग्रामवार आधारभूत सर्वेक्षण एवं डेटा मानचित्रण किया जाएगा। PDS डेटाबेस और विभागीय आंकड़ों के आधार पर संभावित परिवारों की पहचान कर योजनावार बेसलाइन तैयार की जाएगी।

दूसरे चरण में ग्राम, क्लस्टर एवं विकासखंड स्तर पर विशेष संतृप्तिकरण शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को योजनाओं से जोड़ा जाएगा तथा आवश्यक दस्तावेजों एवं सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।

तीसरे चरण में सतत निगरानी, समीक्षा और मूल्यांकन की प्रक्रिया के माध्यम से योजनाओं की प्रगति का आकलन किया जाएगा तथा आवश्यकतानुसार सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

जिला प्रशासन निभाएगा महत्वपूर्ण भूमिका

अभियान के सफल संचालन में जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

जिला कलेक्टर जिला स्तरीय क्रियान्वयन के प्रमुख अधिकारी होंगे और आधारभूत सर्वेक्षण, शिविरों के आयोजन तथा संतृप्तिकरण की संपूर्ण प्रक्रिया की निगरानी करेंगे।

संभागायुक्त संभाग स्तर पर त्रैमासिक समीक्षा करेंगे, जबकि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समिति अभियान की प्रगति का नियमित मूल्यांकन करेगी।

'सुघ्घर छत्तीसगढ़' एक अभिसरण आधारित कार्यक्रम है। इसके लिए पृथक बजट शीर्ष निर्मित करने की आवश्यकता नहीं होगी। संबंधित विभाग अपनी स्वीकृत योजनागत निधियों का उपयोग करेंगे।

इसके अतिरिक्त CSR, जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) तथा अन्य संस्थागत स्रोतों के माध्यम से भी आवश्यक संसाधनों का अभिसरण किया जाएगा।

विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में नया अध्याय

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि 'सुघ्घर छत्तीसगढ़'  नागरिक-केंद्रित सुशासन की एक व्यापक पहल है। इसका उद्देश्य प्रत्येक परिवार तक विकास, सम्मान, सुरक्षा और समृद्धि के अवसरों की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करना है।

उन्होंने कहा कि जब शासन की प्रत्येक योजना अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगी, जब प्रत्येक पात्र परिवार योजनाओं के लाभ से जुड़कर अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन अनुभव करेगा, तभी सच्चे अर्थों में 'सुघ्घर छत्तीसगढ़' और 'विकसित छत्तीसगढ़' का संकल्प साकार होगा। यह अभियान प्रदेश में सुशासन के नए मानक स्थापित करते हुए विकास की यात्रा को और अधिक समावेशी, प्रभावी और जन-केंद्रित बनाएगा।

शिक्षा के अधिकार को प्राथमिकता, हाईकोर्ट ने कैदी को NEET परीक्षा देने की दी अनुमति

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बिलासपुर- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिक्षा के अधिकार को महत्वपूर्ण मानते हुए एक विचाराधीन कैदी को NEET-2026 परीक्षा में शामिल होने की अनुमति प्रदान की है। अदालत ने निर्देश दिया है कि संबंधित अभ्यर्थी को 21 जून को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में पुलिस सुरक्षा के बीच परीक्षा केंद्र ले जाया जाए, ताकि उसकी शिक्षा प्रभावित न हो और सुरक्षा व्यवस्था भी बनी रहे।

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि वह अभी विचाराधीन कैदी है और उसके खिलाफ मामला न्यायालय में लंबित है। ऐसे में उसे शिक्षा और भविष्य निर्माण के अवसर से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। अदालत ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना न्याय व्यवस्था की जिम्मेदारी है, विशेषकर तब जब वह अभी दोषी साबित नहीं हुआ है।

हाईकोर्ट ने राज्य प्रशासन और पुलिस विभाग को निर्देश दिया कि परीक्षा के दौरान सभी आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित किए जाएं तथा अभ्यर्थी को निर्धारित समय पर परीक्षा केंद्र पहुंचाया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सुरक्षा और परीक्षा प्रक्रिया दोनों में किसी प्रकार की बाधा नहीं आनी चाहिए।

इस फैसले को शिक्षा के अधिकार और न्यायिक संवेदनशीलता का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदेश उन छात्रों के लिए उम्मीद की किरण है, जो किसी कारणवश न्यायिक प्रक्रिया में शामिल होने के बावजूद अपनी शिक्षा जारी रखना चाहते हैं।

NEET देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक है, जिसके माध्यम से एमबीबीएस, बीडीएस और अन्य मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिया जाता है। ऐसे में हाईकोर्ट का यह फैसला शिक्षा के महत्व और संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

रेत खनन की रंजिश ने ली तीन जानें, भाजपा नेता को जिंदा जलाने का आरोप

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कोरिया- छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में अवैध रेत खनन को लेकर चल रही पुरानी दुश्मनी ने मंगलवार रात खूनी रूप ले लिया। कथित तौर पर सुनियोजित हमले में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। मृतकों में एक स्थानीय भाजपा नेता भी शामिल हैं, जिन्हें हमलावरों द्वारा उनकी फॉर्च्यूनर गाड़ी समेत जिंदा जलाए जाने का आरोप है।

पुलिस के अनुसार, यह घटना दो प्रभावशाली परिवारों के बीच लंबे समय से चल रहे रेत खनन विवाद से जुड़ी हो सकती है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पीड़ितों पर घात लगाकर हमला किया गया, जिसके बाद मारपीट और आगजनी की वारदात को अंजाम दिया गया।

घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल है। पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है तथा आरोपियों की तलाश में विशेष टीमों का गठन किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 

इस सनसनीखेज हत्याकांड ने एक बार फिर प्रदेश में अवैध रेत खनन और उससे जुड़े आपराधिक नेटवर्क पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि खनन को लेकर क्षेत्र में लंबे समय से विवाद चल रहा था, लेकिन इस तरह की हिंसक घटना ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है। 

मुख्य बिंदु:

  • कोरिया जिले में रेत खनन विवाद ने लिया हिंसक रूप।

  • तीन लोगों की मौत, दो गंभीर रूप से घायल।

  • भाजपा नेता को फॉर्च्यूनर में जिंदा जलाने का आरोप।

  • पुलिस ने इसे सुनियोजित हमला माना।

  • पुरानी रंजिश और खनन विवाद की जांच जारी।

UPSC को मिला नया कार्यालय, बढ़ती जिम्मेदारियों को देखते हुए बढ़ाया गया बुनियादी ढांचा

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नई दिल्ली- संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार ने आज नई दिल्ली स्थित टॉकरा टोरा एनेक्सी (Talkatora Annexe) भवन में आयोग के नए कार्यालय का उद्घाटन किया। इस अवसर पर आयोग के सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

नए कार्यालय की स्थापना UPSC की बढ़ती प्रशासनिक और संस्थागत जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से की गई है। उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. अजय कुमार ने कहा कि आयोग लंबे समय से कार्यालयी स्थान की कमी का सामना कर रहा था। समय के साथ आयोग की जिम्मेदारियों और कार्यक्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसके चलते अतिरिक्त बुनियादी ढांचे की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।

उन्होंने बताया कि उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence) सहित विभिन्न नई संस्थागत पहलों के कारण आयोग की गतिविधियों का विस्तार हुआ है। इसी को ध्यान में रखते हुए कुछ कार्यालयों को अंतरिम व्यवस्था के तहत टॉकरा टोरा एनेक्सी भवन में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया है, जब तक कि धौलपुर हाउस में स्थायी सुविधाओं का विकास नहीं हो जाता।

डॉ. अजय कुमार ने कहा कि UPSC देश की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और पारदर्शी, निष्पक्ष तथा योग्यता-आधारित भर्ती प्रणाली के माध्यम से देश को उत्कृष्ट प्रशासनिक अधिकारी उपलब्ध कराता है। उन्होंने विश्वास जताया कि नया कार्यालय प्रशासनिक कार्यों में दक्षता बढ़ाने, विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारियों के प्रभावी निर्वहन में मदद करेगा।

गौरतलब है कि UPSC की स्थापना वर्ष 1926 में ली आयोग (Lee Commission) की सिफारिशों के आधार पर हुई थी। भारतीय संविधान लागू होने के बाद इसे संघ लोक सेवा आयोग के रूप में पुनर्गठित किया गया और देश की सिविल सेवाओं तथा अन्य सरकारी सेवाओं में योग्यता-आधारित भर्ती की जिम्मेदारी सौंपी गई।

वर्तमान में UPSC का मुख्यालय धौलपुर हाउस में स्थित है, जिसका निर्माण वर्ष 1920 में तत्कालीन धौलपुर रियासत के महाराज-राणा उदय भान सिंह के निवास के रूप में किया गया था। स्वतंत्रता के बाद वर्ष 1952 में इसे UPSC का मुख्यालय बनाया गया था।

नए कार्यालय के उद्घाटन को आयोग की संस्थागत क्षमता बढ़ाने और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

दिल्ली-जयपुर हाईवे पर शुरू हुई बैरियर-फ्री टोल व्यवस्था, बिना रुके कटेगा टोल

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नई दिल्ली- देश में इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने राजस्थान में दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-48) पर स्थित दौलतपुरा टोल प्लाजा पर मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) आधारित टोलिंग प्रणाली शुरू कर दी है।

नई व्यवस्था के तहत टोल प्लाजा पर बैरियर हटा दिए गए हैं, जिससे वाहन बिना रुके और बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के आसानी से गुजर सकेंगे। इससे ट्रैफिक जाम कम होगा और यात्रियों का समय बचेगा। NHAI अब शाहजहांपुर और मनोहरपुर टोल प्लाजा को भी इसी प्रणाली में बदलने की तैयारी कर रहा है, जिससे दिल्ली-जयपुर मार्ग पर सफर और अधिक सुगम हो जाएगा।

MLFF प्रणाली में ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) तकनीक और FASTag आधारित इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन का उपयोग किया गया है। यह तकनीक वाहन की नंबर प्लेट को पहचानकर स्वचालित रूप से टोल शुल्क काट लेती है, जिससे वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

इससे पहले NHAI गुजरात के सूरत-भरूच खंड के चोरयासी टोल प्लाजा और दिल्ली के अर्बन एक्सटेंशन रोड-II (UER-II) स्थित मुंडका-बक्करवाला टोल प्लाजा पर भी MLFF प्रणाली लागू कर चुका है। इन परियोजनाओं से वाहनों की आवाजाही तेज हुई है, ईंधन की बचत हुई है और प्रदूषण में भी कमी आई है।

NHAI ने वाहन चालकों से अपील की है कि वे अपने FASTag खाते में पर्याप्त बैलेंस बनाए रखें। यदि FASTag में पर्याप्त राशि नहीं होगी या वह अमान्य पाया जाता है, तो संबंधित वाहन मालिक को ई-नोटिस जारी किया जाएगा। नोटिस मिलने के 72 घंटे के भीतर सामान्य टोल शुल्क जमा करना अनिवार्य होगा। निर्धारित समय में भुगतान नहीं करने पर दोगुना शुल्क वसूला जाएगा।

अधिकारियों के अनुसार, नई टोल प्रणाली से पारदर्शिता बढ़ेगी, संचालन लागत कम होगी और देशभर में टोल प्रबंधन अधिक कुशल एवं आधुनिक बनेगा।

स्टेशन मास्टरों को मिलेगा अधिक अधिकार, रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने की बड़ी समीक्षा बैठक

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नई दिल्ली- केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारतीय रेलवे में स्टेशन मास्टरों के सामने आने वाली चुनौतियों और उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। बैठक में रेलवे संचालन को अधिक सुरक्षित, कुशल और यात्री-केंद्रित बनाने के लिए व्यापक सुधारों पर चर्चा की गई।

समीक्षा के दौरान स्टेशन मास्टरों की प्रशासनिक और परिचालन संबंधी समस्याओं की पहचान की गई तथा उनके समाधान के लिए कई प्रस्तावों पर विचार किया गया। रेलवे मंत्री ने स्टेशन मास्टरों को अधिक प्रशासनिक और परिचालन अधिकार देने, उनके कैरियर विकास के अवसर बढ़ाने और उन्हें उच्च प्रबंधन स्तर तक पहुंचने के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया।

बैठक में मल्टी-ट्रैक और अधिक यातायात वाले रेलखंडों में अतिरिक्त स्टेशन मास्टरों की नियुक्ति तथा रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरने पर भी चर्चा हुई। इसके साथ ही स्टेशन मास्टरों के लिए मोबाइल ऐप आधारित पेपरलेस कार्य प्रणाली और एकीकृत स्टेशन प्रबंधन प्रणाली विकसित करने के प्रस्तावों की समीक्षा की गई, जिससे विभिन्न रेलवे विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके।

रेल मंत्री ने आधुनिक प्रशिक्षण और कौशल विकास को भी महत्वपूर्ण बताया। इसके तहत वर्चुअल रियलिटी (VR), सिम्युलेटर और अन्य आधुनिक तकनीकों के माध्यम से स्टेशन मास्टरों को जटिल रेलवे संचालन और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रशिक्षित करने की योजना पर चर्चा हुई।

यात्रियों की सुविधाओं में सुधार और स्थानीय समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए स्टेशन मास्टरों की वित्तीय शक्तियों को बढ़ाने के प्रस्तावों पर भी विचार किया गया। इससे स्टेशन स्तर पर रखरखाव कार्यों और यात्री सेवाओं में तेजी आने की उम्मीद है।

बैठक में सुरक्षा संबंधी मुद्दों की भी विस्तृत समीक्षा की गई। विशेष रूप से महिला स्टेशन मास्टरों और महिला पॉइंट्समैन की बढ़ती भागीदारी को ध्यान में रखते हुए बेहतर सुरक्षा उपकरण और उपयोगकर्ता-अनुकूल कार्यस्थल उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।

रेल मंत्रालय का मानना है कि इन सुधारों से स्टेशन मास्टरों को बेहतर संसाधन, आधुनिक तकनीक, उन्नत प्रशिक्षण और अधिक निर्णय लेने की क्षमता मिलेगी, जिससे भारतीय रेलवे का स्टेशन प्रबंधन तंत्र अधिक प्रभावी, आधुनिक और भविष्य के लिए तैयार बन सकेगा।

झारखंड में स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) की प्रगति की समीक्षा, केंद्रीय मंत्री ने जताई चिंता

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नई दिल्ली- केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य तथा ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने झारखंड में स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) की प्रगति की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में झारखंड के शहरी विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सहित केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

समीक्षा बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत धनराशि के कम व्यय पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने मिशन के अंतर्गत उपयोग किए गए जल प्रबंधन, शौचालय एवं मूत्रालय निर्माण, मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) तथा वेस्ट-टू-कम्पोस्ट परियोजनाओं के क्रियान्वयन में हो रही देरी के कारणों पर विस्तृत चर्चा की।

बैठक में विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति तेज करने के लिए स्पष्ट और मापनीय लक्ष्य निर्धारित किए गए, जिनकी निगरानी केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों द्वारा की जाएगी। केंद्रीय मंत्री ने हाल ही में शुरू किए गए अर्बन चैलेंज फंड की भी जानकारी दी और राज्य सरकार से स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के तहत अपने प्रस्ताव शीघ्र प्रस्तुत करने का आग्रह किया।

झारखंड सरकार ने आश्वासन दिया कि स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के अंतर्गत स्वीकृत सभी परियोजनाओं को तेजी से लागू करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री के स्वच्छ और विकसित भारत के विजन को दोहराते हुए कहा कि सरकार झारखंड के शहरी क्षेत्रों में स्थायी और प्रभावी स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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