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महुआ बीनने गए युवक को हाथी ने कुचला, मौके पर मौत, गांव में दहशत

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 एमसीबी/जनकपुर। जिले के जनकपुर क्षेत्र से एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां जंगल में महुआ बीनने गए एक युवक की जंगली हाथी के हमले में मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।


जानकारी के अनुसार, Guru Ghasidas Tiger Reserve क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत खोहरा, थाना कोटाडोल निवासी प्रेमलाल अपनी पत्नी सुंदरवती के साथ महुआ बीनने जंगल गए थे। शाम करीब 5 बजे लौटते समय खोहरा पाठ जंगल में करीब 3 किलोमीटर अंदर अचानक उनका सामना जंगली हाथी से हो गया।

हाथी को देखकर दोनों ने भागने की कोशिश की, लेकिन हाथी ने प्रेमलाल को दौड़ाकर पकड़ लिया और कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, उनकी पत्नी किसी तरह जान बचाकर भागने में सफल रही।

घटना डाकई पारा के पास नौगई मार्ग स्थित खाई के समीप हुई, जिसके बाद से मार्ग बाधित हो गया है। आसपास के गांवों में भय का माहौल बना हुआ है।

ग्राम पंचायत खोहरा के उपसरपंच चंद्र प्रताप ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि हाथी की मौजूदगी की पूर्व सूचना न तो दी गई और न ही ग्रामीणों को सतर्क किया गया।

ग्रामीणों के मुताबिक, घटना के 12 से 14 घंटे बाद वन विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची, जिससे लोगों में आक्रोश है। पीड़ित परिवार को तत्काल सहायता नहीं मिलने से भी नाराजगी बढ़ी है। ग्रामीणों ने परिवार को कम से कम 10 लाख रुपये मुआवजा देने और हाथी को क्षेत्र से हटाने की मांग की है।

वहीं, पार्क परिक्षेत्र अधिकारी राजाराम ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विभाग द्वारा पहले ही सूचना दी गई थी और मुनादी के निर्देश भी दिए गए थे। उनके अनुसार, कर्मचारियों को गांव-गांव जाकर लोगों को सतर्क करने के निर्देश दिए गए थे।

इस घटना ने एक बार फिर जंगल से लगे इलाकों में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष की समस्या को उजागर कर दिया है। अब सवाल यह है कि सूचना तंत्र में चूक हुई या जिम्मेदारी तय करने से बचा जा रहा है। फिलहाल, पीड़ित परिवार को सहायता और क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर लोगों की नजर प्रशासन पर टिकी है।

पहलगाम हमले की पहली बरसी: पीएम मोदी बोले- आतंकवाद के आगे कभी नहीं झुकेगा भारत

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 नई दिल्ली। पीएम मोदी ने पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि निर्दोष लोगों की कुर्बानी कभी भुलाई नहीं जा सकेगी। उन्होंने दोहराया कि भारत आतंकवाद के किसी भी रूप के आगे कभी नहीं झुकेगा।


प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि “पिछले साल इसी दिन पहलगाम में हुए भयावह आतंकी हमले में जान गंवाने वाले निर्दोष लोगों को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं। एक राष्ट्र के रूप में हम शोक और दृढ़ संकल्प में एकजुट हैं। आतंकवादियों के घिनौने मंसूबे कभी कामयाब नहीं होंगे।”


गौरतलब है कि Pahalgam में 22 अप्रैल 2025 को दोपहर करीब 2:30 बजे आतंकियों ने पर्यटकों को निशाना बनाकर अंधाधुंध गोलीबारी की थी। इस हमले में 26 लोगों की जान गई थी, जिनमें अधिकांश पर्यटक शामिल थे।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावर सेना की वर्दी में आए थे, जिससे किसी को शक नहीं हुआ। बताया गया कि आतंकियों ने पहले पर्यटकों की पहचान पूछी और दस्तावेजों की जांच के बाद गोलीबारी की।

इस हमले के बाद क्षेत्र में पर्यटन पर बड़ा असर पड़ा था और पर्यटकों की संख्या में भारी कमी आई थी। हालांकि, समय के साथ हालात सामान्य हो रहे हैं और एक बार फिर पर्यटक घाटी का रुख करने लगे हैं।

पहलगाम हमला देश की सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका था, जिसने आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता को फिर से रेखांकित किया।

NH-353 पर बड़ी कार्रवाई: बस से 600 चांदी के पायल जब्त, कीमत करीब 46.68 लाख

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 महासमुंद। जिले के रेहटीखोल नाका (NH-353) पर पुलिस चेकिंग के दौरान एक यात्री बस से बड़ी मात्रा में चांदी के पायल बरामद किए गए हैं। सिंघोड़ा थाना क्षेत्र में हुई इस कार्रवाई में 600 नग पायल जब्त किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 46.68 लाख रुपये बताई जा रही है।


पुलिस के अनुसार, ओडिशा की ओर से आने वाले वाहनों की नियमित जांच के दौरान श्री श्याम ट्रैवल्स की एक बस को रोका गया। तलाशी के दौरान एक यात्री संदिग्ध स्थिति में पाया गया, जो नीले रंग का पिट्ठू बैग लेकर यात्रा कर रहा था।

पूछताछ में उसने अपना नाम राज किशोर शर्मा उर्फ राजू (58 वर्ष), निवासी कटक (ओडिशा) बताया। बैग की तलाशी लेने पर तीन प्लास्टिक डिब्बों में रखे 600 नग चांदी के पायल बरामद हुए, जिनका कुल वजन 18.590 किलोग्राम है।

आभूषणों के संबंध में वैध दस्तावेज मांगने पर आरोपी कोई कागजात प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके बाद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 94 के तहत कार्रवाई करते हुए चांदी के जेवर जब्त कर लिए।

पुलिस ने जब्त पायलों की कीमत लगभग 46,68,090 रुपये आंकी है। मामले की सूचना आयकर विभाग और राजस्व सूचना निदेशालय (DRI), छत्तीसगढ़ को आगे की जांच के लिए भेज दी गई है।

छत्तीसगढ़ में 3 माह तक नो लीव पॉलिसी लागू, बिना अनुमति गैरहाजिरी पर होगी कार्रवाई

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए बड़ा फैसला लिया है। राज्य में आगामी सुशासन तिहार और जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को देखते हुए सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियों पर अगले 3 महीनों तक रोक लगा दी गई है।


जारी आदेश के अनुसार, कोई भी शासकीय सेवक सक्षम प्राधिकारी की पूर्व स्वीकृति के बिना अवकाश पर नहीं जा सकेगा। बिना अनुमति कार्यालय से अनुपस्थित रहने की स्थिति में इसे स्वैच्छिक अनुपस्थिति माना जाएगा और सेवा नियमों के तहत ब्रेक इन सर्विस के रूप में दर्ज किया जा सकता है।


सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि आकस्मिक अवकाश की स्थिति में भी कर्मचारियों को यथासंभव पहले दूरभाष या डिजिटल माध्यम से सूचना देना अनिवार्य होगा, जिसकी लिखित पुष्टि कार्यालय लौटने के तुरंत बाद करनी होगी।

इसके अलावा, यदि कोई कर्मचारी लंबे अवकाश (जैसे अर्जित अवकाश) पर जाता है, तो उसे अपने कार्यों का प्रभार विधिवत किसी अन्य अधिकारी या कर्मचारी को सौंपना होगा।

सरकार ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि इन आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि निर्धारित प्रशासनिक कार्य बिना किसी बाधा के समय पर पूरे हो सकें।

आईएनएस सुनयना जकार्ता पहुँचा, आईओएस सागर पहल के तहत तीसरा पोर्ट कॉल

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भारतीय नौसेना का आईएनएस सुनयना, जो  आईओएस सागर  पहल के तहत तैनात है, 21 अप्रैल 2026 को जकार्ता पहुँचा। यह उसके हिंद महासागर क्षेत्र में चल रहे ऑपरेशनल तैनाती का तीसरा पोर्ट कॉल है।

यह पोत, जिसमें 16 मित्र देशों के बहुराष्ट्रीय दल के सदस्य सवार हैं, आगमन से पहले मलक्का और सिंगापुर जलडमरूमध्य जैसे संकरे मार्गों से होकर गुजरा, जिससे उसकी उच्च स्तरीय समन्वय क्षमता और नौवहन दक्षता का प्रदर्शन हुआ।

 आईओएस सागर , भारत की MAHASAGAR (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) की दृष्टि का व्यावहारिक रूप है। यह “साझेदारी के माध्यम से नेतृत्व, एकता के माध्यम से शक्ति और शांति के माध्यम से प्रगति” की भावना को दर्शाता है। इस मिशन का हार्बर चरण 16 से 29 मार्च 2026 के बीच भारत में पूरा हुआ, और वर्तमान में यह समुद्री चरण (अप्रैल–मई 2026) में है, जिसमें हिंद महासागर क्षेत्र के कई मित्र देशों में पोर्ट कॉल शामिल हैं।

जकार्ता में ठहराव के दौरान, जहाज इंडोनेशियाई नौसेना (TNI AL) के साथ पेशेवर, सामाजिक और खेल गतिविधियों में भाग लेगा। आईएनएस सुनयना के कमांडिंग ऑफिसर ने कोडारेल III (नौसैनिक क्षेत्रीय कमान III) के वरिष्ठ नेतृत्व से मुलाकात की।

निर्धारित कार्यक्रमों में पेशेवर आदान-प्रदान, संयुक्त योग सत्र, खेल प्रतियोगिताएं, हितधारकों के लिए जहाज का दौरा और डेक रिसेप्शन शामिल हैं। प्रस्थान के समय इंडोनेशियाई नौसेना के साथ एक पासेज एक्सरसाइज (PASSEX) भी आयोजित की जाएगी।

यह पहल भारत की “Neighbourhood First” नीति और MAHASAGAR की सोच को मजबूत करती है, तथा यह संदेश देती है कि “स्वतंत्र, खुला और समावेशी इंडो-पैसिफिक सभी देशों के हित में है।”

शिवराज सिंह चौहान ने कृषि वित्त प्रणाली को सरल और किसान हितैषी बनाने पर दिया जोर

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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि वित्त प्रणाली को अधिक सरल, व्यावहारिक, मानवीय और परिणामोन्मुख बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसानों को साहूकारी प्रथाओं, ऊँची ब्याज दरों, जटिल ऋण प्रक्रियाओं और असंवेदनशील व्यवस्था से राहत मिलनी चाहिए।

ऋण प्रक्रिया का सरलीकरण आवश्यक

नई दिल्ली के विज्ञान भवन में सिविल सेवा दिवस के अवसर पर आयोजित एक पैनल चर्चा में उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक ऋण प्राप्त करना अभी भी आसान नहीं है। किसानों को कई स्तरों की कागजी कार्रवाई, राजस्व रिकॉर्ड और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। इसलिए ऋण प्रक्रिया को सरल बनाना अत्यंत जरूरी है।

संवेदनशील और संतुलित व्यवस्था की जरूरत

मंत्री चौहान ने कहा कि व्यवस्था में संवेदनशीलता और संतुलन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसान किसी के सामने याचक नहीं हैं, बल्कि वे अधिकार और गरिमा के साथ सिस्टम के पास आते हैं। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि एक किसान का ₹18 लाख का ऋण ब्याज बढ़ने से ₹40 लाख हो गया। ऐसे मामलों में वन-टाइम सेटलमेंट जैसे व्यावहारिक समाधान जरूरी हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक का उपयोग जरूरी है, लेकिन उसे सोच-समझकर लागू किया जाना चाहिए। कई बार सैटेलाइट आधारित सत्यापन में त्रुटियां होने से किसानों को परेशानी होती है। इसलिए कृषि विभाग, नाबार्ड (राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक,भारतीय रिज़र्व बैंक और अन्य संस्थानों को मिलकर व्यावहारिक और विश्वसनीय प्रणाली विकसित करनी चाहिए।

ग्रामीण बैंकों में मानव संसाधन की कमी

उन्होंने ग्रामीण बैंकों में कर्मचारियों की कमी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मनरेगा, पीएम-किसान जैसी योजनाओं के कारण काम का बोझ बढ़ा है, लेकिन स्टाफ सीमित है। किसान कई बार 8-10 किलोमीटर दूर बैंक पहुंचते हैं और लंबी कतारों में समय गंवाते हैं। इसलिए वर्तमान जरूरतों के अनुसार पर्याप्त स्टाफ सुनिश्चित करना आवश्यक है।

प्रगतिशील किसानों के लिए अधिक वित्तीय सहायता

मंत्री चौहान ने कहा कि केवल किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) सभी समस्याओं का समाधान नहीं है। आधुनिक खेती जैसे बागवानी, पॉलीहाउस, ड्रिप सिंचाई आदि में अधिक निवेश की जरूरत होती है। ऐसे में प्रगतिशील किसानों को अधिक वित्तीय सहायता और ज्ञान उपलब्ध कराना जरूरी है, ताकि वे आधुनिक तकनीकों को अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकें।

एकीकृत खेती को बढ़ावा

उन्होंने छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने के लिए एकीकृत खेती (इंटीग्रेटेड फार्मिंग) पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कम जमीन वाले किसानों को फसल उत्पादन के साथ-साथ पशुपालन, मत्स्य पालन, बागवानी, मधुमक्खी पालन जैसे कार्यों को अपनाना चाहिए। इसके लिए विभिन्न योजनाओं के समन्वय की आवश्यकता है।

व्यावहारिक क्रियान्वयन पर जोर

उन्होंने वेयरहाउस रसीद वित्त योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे और अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत है। यदि किसानों को संग्रहित उपज के बदले आसान ऋण मिल सके, तो वे उचित समय पर बेहतर कीमत मिलने तक इंतजार कर सकते हैं।

आत्ममंथन और नवाचार का आह्वान

मंत्री चौहान ने सिविल सेवकों से आत्ममंथन करने, क्रियान्वयन में सुधार लाने और नवाचारी सोच अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बेहतर सेवा और परिणामों के लिए अधिकारियों को अपनी क्षमता और विचारों का प्रभावी उपयोग करना चाहिए, ताकि किसानों और देश को अधिक लाभ मिल सके।

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आईआईएमटी यूनिवर्सिटी, मेरठ के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया

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भारत के उपराष्ट्रपतिसी. पी. राधाकृष्णन ने आज आईआईएमटी यूनिवर्सिटी, मेरठ के तृतीय दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि यह अवसर केवल शैक्षणिक यात्रा का समापन नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण के प्रति आजीवन प्रतिबद्धता की शुरुआत है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि छात्र एक ऐसे भारत में कदम रख रहे हैं जो तेजी से बदल रहा है और अवसरों से भरपूर है। उन्होंने वर्तमान समय को देश के इतिहास का एक महत्वपूर्ण दौर बताया, जो परिवर्तनकारी बुनियादी ढांचे और विकास पहलों से चिह्नित है।

उन्होंने इस वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटित नमो भारत ट्रेन और मेरठ मेट्रो का उल्लेख करते हुए कहा कि ये आधुनिक, कुशल और टिकाऊ कनेक्टिविटी के उदाहरण हैं, जो छात्रों और पेशेवरों के लिए नए अवसर खोल रहे हैं।

“विकसित भारत” के दृष्टिकोण पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि यह एक राष्ट्रीय मिशन है, जिसमें युवाओं की ऊर्जा, रचनात्मकता और प्रतिबद्धता आवश्यक है। उन्होंने कहा कि “आत्मनिर्भर भारत” की भावना इस परिवर्तनकारी यात्रा का मूल है।

छात्रों को उनकी जिम्मेदारियों का एहसास कराते हुए उपराष्ट्रपति ने राष्ट्र-निर्माण में योगदान देने, ईमानदारी, अनुशासन और सेवा के मूल्यों को अपनाने तथा विकास को समावेशी, सतत और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा बनाए रखने पर बल दिया।

उन्होंने छात्रों को व्यक्तिगत सफलता से आगे सोचने और अपनी आकांक्षाओं को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के साथ जोड़ने की सलाह दी। उन्होंने उन्हें नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनने के लिए प्रेरित किया। साथ ही नवाचार को अपनाने, स्थानीय उद्योगों को समर्थन देने और स्वदेशी समाधान को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि “विकसित भारत @ 2047” का दृष्टिकोण केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य अंतिम गांव और अंतिम व्यक्ति तक समावेशी विकास पहुंचाना है।

उन्होंने यह भी कहा कि दीक्षांत समारोहों में महिलाएं लगातार अधिक संख्या में सम्मान और पदक प्राप्त कर रही हैं, जो एक सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन का संकेत है। यह परिवर्तन उनकी दृढ़ता, अनुशासन और सहयोगी वातावरण का परिणाम है और भविष्य की पीढ़ियों को एक अधिक समावेशी और प्रगतिशील भारत की ओर प्रेरित कर रहा है।

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार में पशुपालन एवं डेयरी विकास मंत्री धर्मपाल सिंह, राज्यसभा सांसद लक्ष्मीकांत बाजपेयी, योगेश मोहन गुप्ता सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राउरकेला में विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू  ने आज (21 अप्रैल 2026) ओडिशा के  राउरकेला में आयोजित एक सार्वजनिक समारोह में प्लैनेटेरियम और साइंस सेंटर तथा निर्मल मुंडा परिवेश पथ का उद्घाटन किया। इसके बाद उन्होंने राउरकेला में ट्राइबल म्यूजियम और इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का भी उद्घाटन किया।

समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि सुंदरगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, लोक संस्कृति और विरासत अत्यंत आकर्षक हैं। यहां के घने जंगल, पहाड़, झरने और नदियां असीम आकर्षण का केंद्र हैं। उन्होंने कहा कि सुंदरगढ़ की कला और संस्कृति ने ओडिशा की सांस्कृतिक समृद्धि को और बढ़ाया है तथा यह क्षेत्र वीर लोगों और खेल प्रेमियों की भूमि भी है।

राष्ट्रपति ने कहा कि राउरकेला में रोजगार और आजीविका के लिए भारत के विभिन्न क्षेत्रों, सहित ओडिशा के लोग रहते हैं। यह एक कॉस्मोपॉलिटन शहर है जिसने ओडिशा की कला, साहित्य, संस्कृति, जनजातीय परंपराओं और खेलों को बढ़ावा देने में अग्रणी भूमिका निभाई है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्र का विकास तभी संभव है जब समाज के हर वर्ग का विकास हो। इसी सोच के साथ केंद्र और राज्य सरकारें जनजातीय कल्याण के लिए विभिन्न योजनाओं पर काम कर रही हैं। इससे सुंदरगढ़ जैसे जनजातीय बहुल जिलों के विकास को गति मिल रही है और जनजातीय समुदायों के आर्थिक उत्थान को प्राथमिकता दी जा रही है।

राष्ट्रपति ने लोगों को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि लोग स्वयं आगे बढ़ें और दूसरों को भी आगे बढ़ने में मदद करें। उन्होंने सभी से अच्छे इंसान बनने और पीछे छूटे लोगों को आगे लाने का प्रयास करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि हमारा देश 2047 तक “विकसित भारत” बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी तरह वर्ष 2036 में ओडिशा राज्य के गठन के 100 वर्ष पूरे होंगे। विकसित ओडिशा और विकसित भारत के निर्माण के लिए समग्र विकास और समाज के हर वर्ग की भागीदारी आवश्यक है।

राष्ट्रपति ने कहा कि विकसित भारत का निर्माण किसानों, मजदूरों, जनजातीय समुदायों, वंचित वर्गों, बुद्धिजीवियों, युवाओं और विद्यार्थियों के साथ-साथ शहरी और ग्रामीण आबादी के सामूहिक प्रयास और समर्पण से ही संभव होगा।

महासमुंद में नशे पर बड़ा प्रहार: 47 किलो गांजा जब्त, 3 तस्कर गिरफ्तार

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 महासमुंद। जिले में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स और कोमाखान थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 47.300 किलोग्राम गांजा जब्त किया गया है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 23.65 लाख रुपये बताई जा रही है।


कार्रवाई के दौरान एक ट्रक, कार, मोबाइल फोन और नगदी समेत कुल 59.51 लाख रुपये की संपत्ति भी जब्त की गई। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि दो नाबालिगों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की गई है।

नाकेबंदी में पकड़ा गया ट्रक

पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि ओडिशा से ट्रक के जरिए गांजे की बड़ी खेप लाई जा रही है। सूचना के आधार पर कोमाखान क्षेत्र में नाकेबंदी कर संदिग्ध ट्रक को रोका गया। तलाशी के दौरान चालक सीट के नीचे बनाए गए विशेष चेंबर और प्लास्टिक बोरियों में छिपाकर रखा गया गांजा बरामद हुआ।

मुंगेली में खपाने की थी तैयारी

पूछताछ में खुलासा हुआ कि गांजे की यह खेप ओडिशा के कालाहांडी से लाई गई थी, जिसे छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में खपाने की योजना थी। जांच में इस तस्करी नेटवर्क के तार ओडिशा के बलांगीर जिले से जुड़े पाए गए हैं।

ये आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने इस मामले में मोहम्मद मिराज और रोहित पोंड (बलांगीर, ओडिशा) तथा दीपक साहू (मुंगेली, छत्तीसगढ़) को गिरफ्तार किया है।

तीन महीने में बड़ी कार्रवाई

महासमुंद पुलिस के अनुसार, पिछले तीन महीनों में जिले में 74 मामलों में 5685 किलो से अधिक गांजा जब्त किया जा चुका है और 192 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की सप्लाई चेन, वित्तीय लेनदेन और अन्य कनेक्शनों की गहन जांच में जुटी हुई है।

घर में घुसा तेंदुआ, गांव में हड़कंप; जान बचाकर भागे लोग

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 मनेन्द्रगढ़। जनकपुर वन परिक्षेत्र के खिरकी गांव में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक तेंदुआ रिहायशी इलाके में पहुंचकर एक घर के अंदर घुस गया। तेंदुए को घर के भीतर बैठे देख परिवार के लोग घबरा गए और जान बचाने के लिए बाहर भागे। देखते ही देखते पूरे गांव में दहशत फैल गई।


जानकारी के अनुसार, तेंदुआ गुरु घासीदास टाइगर रिजर्व से भटककर गांव में आ गया था। घटना की खबर फैलते ही ग्रामीण अपने घरों से निकलकर सुरक्षित स्थानों की ओर चले गए।

वन विभाग ने की घेराबंदी

सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी गई, ताकि तेंदुआ बाहर निकलकर किसी को नुकसान न पहुंचा सके। इसके बाद सावधानीपूर्वक रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया।

घंटों बाद काबू में आया तेंदुआ

वन विभाग की टीम ने कई घंटों की मशक्कत के बाद तेंदुए को काबू में कर सुरक्षित रूप से घर के अंदर से बाहर निकाला। इस दौरान पूरे क्षेत्र में भय का माहौल बना रहा और लोग घरों से बाहर निकलने से बचते रहे।

जंगल में छोड़ा जाएगा

अधिकारियों के अनुसार, रेस्क्यू किए गए तेंदुए को सुरक्षित जंगल क्षेत्र में छोड़ने की तैयारी की जा रही है। साथ ही, आसपास के गांवों में गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

ग्रामीणों में दहशत

घटना के बाद गांव में डर का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों ने वन विभाग से क्षेत्र में लगातार निगरानी रखने और समय-समय पर सूचना देने की मांग की है, ताकि किसी भी संभावित खतरे से समय रहते बचा जा सके।

लू और डिहाइड्रेशन से बचाएंगी देसी चीजें, डाइट में शामिल करें ये ठंडक देने वाले फूड्स

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 नई दिल्ली। गर्मी ने अब अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। तेज धूप और बढ़ते तापमान के बीच लू और डिहाइड्रेशन का खतरा भी बढ़ गया है। ऐसे में केवल पानी पीना पर्याप्त नहीं, बल्कि संतुलित और ठंडक देने वाली डाइट अपनाना भी बेहद जरूरी हो गया है।


मौसम में लगातार बदलाव—कभी बारिश तो कभी तेज धूप—लोगों को परेशान कर रहा है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ने की संभावना है, जिससे लू का प्रभाव और तेज हो सकता है। ऐसे हालात में शरीर में पानी की कमी जल्दी होने लगती है, जिससे थकान, चक्कर और कमजोरी जैसी समस्याएं सामने आती हैं।

डाइट में शामिल करें ये देसी चीजें

फालसा का शरबत:
गर्मी के मौसम में फालसा का शरबत काफी फायदेमंद माना जाता है। इसमें विटामिन C, एंटीऑक्सीडेंट और पोटैशियम मौजूद होते हैं, जो शरीर को ठंडक देते हैं और लू के असर को कम करते हैं।

मखाना:
मखाने को भिगोकर खाने से शरीर को ठंडक मिलती है। इसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम और प्रोटीन होता है, जो कमजोरी दूर करने में मदद करता है।

कच्चा प्याज:
आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. किरण गुप्ता के अनुसार, कच्चे प्याज का सेवन लू से बचाव का सरल उपाय है। यह शरीर के तापमान को संतुलित रखने में सहायक होता है। सलाद के रूप में इसका सेवन लाभकारी है।

तुकमारिया के बीज:
चिया सीड्स के मुकाबले तुकमारिया (सब्जा) के बीज सस्ते और अधिक प्रभावी माने जाते हैं। इनमें फाइबर, प्रोटीन और ओमेगा-3 फैटी एसिड होते हैं, जो शरीर को लंबे समय तक हाइड्रेट रखते हैं।

कच्चे आम का पानी:
कच्चे आम से बना नमक वाला पानी एक प्राकृतिक इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक की तरह काम करता है। इसमें मौजूद विटामिन C और मिनरल्स शरीर में पानी की कमी को जल्दी पूरा करते हैं और लू से बचाव करते हैं।

एक्सपर्ट की सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी के मौसम में हल्का, पौष्टिक और पानी से भरपूर आहार लेना चाहिए। साथ ही, दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और धूप में निकलते समय सावधानी बरतना जरूरी है।

डिस्क्लेमर:
यह जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या लक्षण की स्थिति में चिकित्सक से सलाह अवश्य लें।

हाथी के हमले में ग्रामीण की मौत, पत्नी के सामने हुआ हादसा, पढ़े पूरी खबर

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 मनेन्द्रगढ़। गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान के जनकपुर पार्क परिक्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष की एक और गंभीर घटना सामने आई है। जंगल में महुआ बिनने गए एक दंपति पर जंगली हाथी ने हमला कर दिया, जिसमें पति की मौत हो गई, जबकि पत्नी ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई।


मृतक की पहचान प्रेमलाल के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, दंपति खोहरा बीट के जंगल में महुआ बीनने गए थे। इसी दौरान अचानक एक हाथी ने उन पर हमला कर दिया। हमले में प्रेमलाल की मौके पर ही मौत हो गई।

घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों का आरोप है कि इलाके में हाथियों की लगातार मौजूदगी के बावजूद वन विभाग द्वारा समय पर न तो कोई चेतावनी जारी की जाती है और न ही सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए जाते हैं।

सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। विभाग द्वारा मृतक के परिजनों को मुआवजा राशि भी प्रदान की गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि पहले से सतर्कता बरती जाती और सूचना दी जाती, तो इस तरह की घटना को रोका जा सकता था। घटना के बाद से क्षेत्र में दहशत का माहौल बना हुआ है।

2026 में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी की आशंका, IMD की चेतावनी- कृषि, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा असर

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 नई दिल्ली। देश में बढ़ते तापमान के बीच वर्ष 2026 की गर्मी को लेकर गंभीर चेतावनी सामने आई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार मार्च से मई 2026 के बीच देश में सामान्य से अधिक गर्मी पड़ने की संभावना है, जो पिछले वर्षों के रिकॉर्ड को भी पार कर सकती है।


लगातार टूट रहे तापमान के रिकॉर्ड

अप्रैल 2024 से देश के अलग-अलग हिस्सों में लगभग हर महीने अधिकतम, न्यूनतम या औसत तापमान ने नया रिकॉर्ड बनाया है। मई, जून और जुलाई 2024 में भी कई क्षेत्रों में तापमान सामान्य से काफी अधिक दर्ज किया गया। 2025 की शुरुआत में भी जनवरी और फरवरी में असामान्य गर्मी देखी गई, हालांकि मार्च में थोड़ी राहत मिली थी।

सुपर अल-नीनो का खतरा

अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों NOAA और ECMWF के अनुसार 2026 में अल-नीनो बनने की संभावना 60 प्रतिशत से अधिक है, जो आगे चलकर ‘सुपर अल-नीनो’ का रूप ले सकता है। इससे समुद्र की सतह का तापमान 2 डिग्री सेल्सियस से अधिक बढ़ सकता है, जिसका सीधा असर भारत के मौसम पर पड़ेगा।

पहाड़ी और तटीय इलाकों में ज्यादा असर

IMD के पूर्वानुमान के मुताबिक हिमालयी क्षेत्र, पूर्वोत्तर राज्य और पश्चिमी घाट के इलाके इस बार सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में दिन और रात दोनों का तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। वहीं, पूर्वोत्तर भारत और कर्नाटक-महाराष्ट्र के तटीय क्षेत्रों में भी गर्मी का असर अधिक रहेगा।

हीटवेव और जल संकट का खतरा

पूर्व, मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में हीटवेव के दिनों में बढ़ोतरी की आशंका जताई गई है। सूखी सर्दियों के बाद गर्मी बढ़ने से जल संकट, जंगलों में आग और सूखे जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं।

कृषि और अर्थव्यवस्था पर असर

देश की करीब 52 प्रतिशत कृषि भूमि सिंचाई पर निर्भर है। बढ़ती गर्मी फसलों के उत्पादन चक्र को प्रभावित कर सकती है, जिससे पैदावार घटने और खाद्य महंगाई बढ़ने की आशंका है। पिछले अल-नीनो वर्षों में भी खरीफ फसलों को नुकसान और निर्यात पर असर देखा गया था।

स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव

विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक गर्मी का असर खुले में काम करने वाले श्रमिकों, बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों पर सबसे अधिक पड़ेगा। हीटस्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और बिजली की मांग में वृद्धि जैसे खतरे बढ़ सकते हैं।

जलवायु परिवर्तन बना मुख्य कारण

वैज्ञानिकों का मानना है कि बढ़ता जलवायु परिवर्तन और अल-नीनो-ला नीना जैसे प्राकृतिक चक्र मिलकर तापमान में लगातार वृद्धि कर रहे हैं। वैश्विक स्तर पर औसत तापमान पहले ही 1.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है, जिसका असर भारत में भी स्पष्ट दिख रहा है।

तैयारी के निर्देश

IMD ने राज्यों को एडवाइजरी जारी कर कूलिंग सेंटर, पेयजल आपूर्ति और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही जल संरक्षण, वृक्षारोपण और जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि 2026 की गर्मी केवल एक मौसमीय घटना नहीं, बल्कि जलवायु संकट की गंभीर चेतावनी है, जिसके लिए समय रहते तैयारी करना बेहद जरूरी है।

‘बादाम कांड’ के बाद हाउसिंग बोर्ड में कार्रवाई, नपे 2 अधिकारी

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 रायपुर/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के बिलासपुर स्थित तिफरा कार्यालय में सामने आए ‘बादाम कांड’ ने प्रशासन को सख्त कार्रवाई करने पर मजबूर कर दिया। एक युवक द्वारा अफसर की टेबल पर बादाम बिखेरने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विभाग ने त्वरित कदम उठाते हुए दो अधिकारियों को मुख्यालय अटैच कर दिया है।


जानकारी के अनुसार, बिलासपुर निवासी तरुण साहू पिछले एक वर्ष से फ्लैट रजिस्ट्रेशन की फाइल के लिए कार्यालय के चक्कर लगा रहा था। हर बार उसे फाइल गुम होने की बात कहकर टाल दिया जाता रहा। लगातार हो रही देरी से परेशान होकर युवक 500 ग्राम बादाम लेकर कार्यालय पहुंचा और संबंधित अधिकारी की टेबल पर बिखेरते हुए तंज कसा कि “याददाश्त बढ़ेगी, फाइल मिल जाएगी।”

घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया। इसके बाद विभाग ने कार्रवाई करते हुए संपदा अधिकारी एल.पी. बंजारे और सहायक पुन्नम बंजारे को तत्काल प्रभाव से मुख्यालय अटैच कर दिया।

यह मामला एक बार फिर सरकारी दफ्तरों में लंबित फाइलों और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। फिलहाल विभागीय स्तर पर आगे की कार्रवाई जारी है।

मासूम की हत्या कर जंगल में छिपाया शव, अपहरण की झूठी कहानी बनाती रही मां, पढ़े पूरी खबर

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 रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक मां ने अपने ढाई साल के मासूम बेटे की पत्थर से कुचलकर हत्या कर दी। घटना कापू थाना क्षेत्र के पारेमेर फिटिंगपारा गांव की है।


मिली जानकारी के अनुसार, बोधसाय मंछवार और उसकी पत्नी सोनमति के दो बच्चे हैं—चार साल की बेटी ढूलबाई और ढाई साल का बेटा अनुज। 16 अप्रैल को अनुज अचानक लापता हो गया। काफी तलाश के बाद भी जब उसका कोई सुराग नहीं मिला, तो परिजनों ने पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि बच्चा आखिरी बार अपनी मां सोनमति के साथ देखा गया था। पूछताछ में सोनमति बार-बार बयान बदलती रही और अपहरण की झूठी कहानी गढ़कर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश करती रही। इससे पुलिस का शक और गहरा हो गया।

इसी बीच पुलिस को गांव के पास जंगल में बच्चे का शव बरामद हुआ। इसके बाद कड़ाई से पूछताछ करने पर सोनमति ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि वह बेटे के साथ पैदल जा रही थी। तेज धूप में बच्चा बार-बार गोद में लेने की जिद कर रहा था, जिससे वह गुस्से में आ गई। इसी दौरान उसने बच्चे को जमीन पर पटक दिया और पत्थर से सिर कुचलकर उसकी हत्या कर दी।

बताया जा रहा है कि घटना वाले दिन बोधसाय घर से बाहर गया हुआ था। घर लौटने पर उसे केवल बेटी मिली। अगले दिन सोनमति अकेले घर पहुंची और वह शराब के नशे में थी। पति के पूछने पर उसने बेटे के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी। दो दिन तक बच्चे का कोई पता नहीं चलने पर बोधसाय ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

फिलहाल पुलिस ने आरोपी मां को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच जारी है।

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