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CG Murder Case: थप्पड़ का बदला लेने रची हत्या की साजिश, 16 साल के नाबालिग ने रेलवे सुपरवाइजर को मार डाला

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 बिलासपुर। तोरवा थाना क्षेत्र की आरपीएफ कॉलोनी में रेलवे ठेकेदार के सुपरवाइजर नरेश गुप्ता की हत्या का पुलिस ने खुलासा किया है। मामले में पुलिस ने 16 वर्षीय नाबालिग को हिरासत में लिया है। पुलिस के मुताबिक, बारिश के पानी के छींटे पड़ने के बाद सुपरवाइजर द्वारा थप्पड़ मारे जाने से नाराज नाबालिग ने बदला लेने की साजिश रची और रात में कंस्ट्रक्शन साइट में घुसकर वारदात को अंजाम दिया।


घटना के बाद सामने आए सीसीटीवी फुटेज और जांच के आधार पर पुलिस नाबालिग तक पहुंची। पूछताछ में उसने कथित तौर पर हत्या के पीछे की वजह बताई।

पानी की टंकी के पास मिला था शव

घटना गुरुवार सुबह सामने आई। रेलवे कंस्ट्रक्शन साइट पर काम करने पहुंचे कर्मचारियों ने नरेश गुप्ता को आवाज दी और फोन किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद कर्मचारियों ने अंदर जाकर देखा तो पानी की टंकी के पास नरेश का खून से सना शव पड़ा था।

मृतक नरेश गुप्ता (35) मूल रूप से आरा, बिहार का रहने वाला था। वह रेलवे ठेकेदार अनिल सिंह की कंस्ट्रक्शन साइट पर सुपरवाइजर के रूप में काम कर रहा था।

सूचना मिलते ही जीआरपी, आरपीएफ और तोरवा पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं। एफएसएल टीम और डॉग स्क्वायड की मदद से घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए गए।

CCTV में दिखा संदिग्ध

पुलिस ने घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज में एक संदिग्ध युवक हाफ पैंट और टी-शर्ट में नजर आया। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को नाबालिग के संबंध में सुराग मिला।

पुलिस के अनुसार, नाबालिग ने कथित तौर पर स्टोर रूम के पास रखे हथौड़े से नरेश के सिर पर हमला किया। गंभीर चोट लगने से वह जमीन पर गिर गया और उसकी मौत हो गई।

बारिश के पानी के छींटे से शुरू हुआ विवाद

पूछताछ में नाबालिग ने पुलिस को बताया कि मंगलवार रात तेज बारिश हो रही थी और वह साइकिल से घर लौट रहा था। इसी दौरान सड़क किनारे खड़े नरेश के ऊपर साइकिल से बारिश के पानी के छींटे पड़ गए।

पुलिस के मुताबिक, इसी बात को लेकर नरेश ने नाबालिग को रास्ते में रोककर कथित तौर पर तीन थप्पड़ मारे थे। नाबालिग ने पूछताछ में बताया कि इस घटना से वह खुद को अपमानित महसूस कर रहा था और उसने इसका बदला लेने की ठान ली।

रात में साइट में घुसकर किया हमला

पुलिस के अनुसार, नाबालिग ने कथित तौर पर पहले हत्या की योजना बनाई। इसके बाद रात करीब 11:30 बजे वह कंस्ट्रक्शन साइट के पीछे से अंदर दाखिल हुआ। वहां से हथौड़ा लेकर वह नरेश के कमरे के पास पहुंचा।

पुलिस के मुताबिक, नरेश के सो जाने के बाद नाबालिग ने कथित तौर पर उसके सिर पर हथौड़े से कई वार किए। वारदात को अंजाम देने के बाद वह मौके से फरार हो गया।

फिलहाल पुलिस ने नाबालिग को हिरासत में लेकर मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है। हत्या में इस्तेमाल हथौड़े सहित अन्य साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।

CG NEWS : सहकारी बैंकों में 1,360 पदों पर होगी भर्ती, सरकार ने दी मंजूरी

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में सहकारी बैंकिंग व्यवस्था को मजबूत करने और युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सहकारिता विभाग ने प्रदेश के पांच जिला सहकारी केंद्रीय बैंक क्षेत्रों और उनसे संबद्ध प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों में कुल 1,360 पदों पर भर्ती की अनुमति दे दी है।


इनमें जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों के विभिन्न संवर्गों के 198 पद और प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों में 1,162 समिति प्रबंधक के पद शामिल हैं। समिति प्रबंधकों के 1,162 पदों में से 596 पद सीधी भर्ती और 566 पद सीमित चयन के माध्यम से भरे जाएंगे।


पांच बैंक क्षेत्रों में होगी भर्ती

भर्ती के लिए सबसे अधिक पद रायपुर क्षेत्र में 508 स्वीकृत किए गए हैं। इसके बाद बिलासपुर में 444, बस्तर-जगदलपुर में 187, दुर्ग-राजनांदगांव में 154 और रायगढ़ में 67 पदों पर भर्ती होगी।

जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों में उप प्रबंधक, प्रोग्रामर, सहायक प्रबंधक, फील्ड ऑफिसर, सहायक प्रोग्रामर और सामान्य सहायक समेत विभिन्न पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी।

मंत्री के निर्देश के बाद आगे बढ़ी प्रक्रिया

सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने 21 अगस्त को हुई विभागीय समीक्षा बैठक में सहकारी बैंकों और समितियों में रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद विभाग ने संबंधित बैंकों से प्राप्त प्रस्तावों का परीक्षण किया और कर्मचारी सेवा नियम, आरक्षण प्रावधान तथा वित्तीय मानदंडों के आधार पर भर्ती की अनुमति जारी की।

मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार सहकारी व्यवस्था को अधिक सक्षम और किसान हितैषी बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि 1,360 पदों पर भर्ती से युवाओं को रोजगार के अवसर मिलने के साथ सहकारी बैंकों और समितियों की कार्यक्षमता भी बढ़ेगी।

किसानों और खाताधारकों को मिलेगी बेहतर सुविधा

नए कर्मचारियों की नियुक्ति से जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों और प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के कामकाज में तेजी आने की उम्मीद है। इससे किसानों के ऋण प्रकरण, बैंकिंग लेन-देन और अन्य सेवाओं का संचालन अधिक सुगमता और समयबद्ध तरीके से किया जा सकेगा।

समिति प्रबंधकों की नियुक्ति से पैक्स समितियों के दैनिक कामकाज, अभिलेख संधारण, वित्तीय प्रबंधन और विभिन्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को भी मजबूती मिलेगी। वहीं, समितियों के कम्प्यूटरीकरण और डिजिटल सेवाओं के विस्तार में भी नए कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

नियमों और आरक्षण प्रावधानों के तहत होगा चयन

भर्ती प्रक्रिया संबंधित जिला सहकारी केंद्रीय बैंक कर्मचारी सेवा नियम-2023, आरक्षण नियमों, स्वीकृत पदों की संख्या और निर्धारित वित्तीय मानदंडों के अनुसार पूरी की जाएगी। भर्ती एवं चयन समिति में संबंधित संभागीय संयुक्त पंजीयक को अनिवार्य सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा।

विभाग के अनुसार भर्ती प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पूरी की जाएगी। हालांकि, यह भर्ती प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन विशेष अनुमति याचिका के अंतिम आदेश के अधीन रहेगी।

क्या भगवान श्रीकृष्ण की थीं 16,108 पत्नियां? जानिए 16,100 कन्याओं से जुड़ी पूरी पौराणिक कथा

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 Krishna 16108 wives Story : भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और उनके जीवन से जुड़ी कथाएं सदियों से लोगों की आस्था का केंद्र रही हैं। श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़ी अनेक कथाएं धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में मिलती हैं। इनमें सबसे चर्चित प्रसंगों में से एक उनकी 16,108 पत्नियों से जुड़ा हुआ है। अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या भगवान श्रीकृष्ण ने वास्तव में 16,108 विवाह किए थे? अगर ऐसा था, तो इसके पीछे की कथा क्या है?


पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, श्रीकृष्ण की आठ प्रमुख पत्नियां थीं, जिन्हें अष्टभार्या या अष्टमहिषी कहा जाता है। इनमें रुक्मिणी, सत्यभामा, जाम्बवती, कालिंदी, मित्रविंदा, नाग्नजिती, भद्रा और लक्ष्मणा के नाम प्रमुख रूप से बताए जाते हैं।

नरकासुर से जुड़ी है 16,100 कन्याओं की कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, नरकासुर नामक एक शक्तिशाली असुर ने बड़ी संख्या में कन्याओं को बंदी बनाकर रखा था। मान्यता है कि नरकासुर का जन्म भूदेवी से हुआ था और उसे वरदान प्राप्त था कि उसका वध उसकी माता के हाथों ही हो सकता है।

धार्मिक मान्यताओं में सत्यभामा को भूदेवी का स्वरूप माना जाता है। कथा के अनुसार, जब भगवान श्रीकृष्ण को नरकासुर के अत्याचारों का पता चला तो वे सत्यभामा के साथ उसका वध करने पहुंचे। युद्ध में नरकासुर का अंत हुआ और उसके बंदीगृह में कैद 16,100 कन्याओं को मुक्त कराया गया।

समाज में स्वीकार किए जाने की चिंता

कथा के अनुसार, मुक्त होने के बाद इन कन्याओं के सामने सामाजिक सम्मान और भविष्य को लेकर चिंता खड़ी हो गई। उन्हें भय था कि समाज उन्हें स्वीकार नहीं करेगा। ऐसी स्थिति में भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें सम्मान और सुरक्षा प्रदान करने के लिए अपनी पत्नियों का दर्जा दिया।

पौराणिक मान्यता के अनुसार, इसके बाद वे सभी द्वारका में रहने लगीं और श्रीकृष्ण ने उन्हें सम्मानजनक जीवन प्रदान किया। इस प्रकार उनकी आठ प्रमुख पत्नियों के साथ 16,100 मुक्त कन्याओं को जोड़ने पर संख्या 16,108 बताई जाती है।

एक अन्य कथा भी है प्रचलित

श्रीकृष्ण की 16,100 पत्नियों से जुड़ी एक अन्य पौराणिक कथा भी प्रचलित है। इसके अनुसार, पूर्व जन्म में ये कन्याएं ऋषि-मुनि थीं। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। मान्यता है कि अगले जन्म में उन्होंने कन्याओं के रूप में जन्म लिया और श्रीकृष्ण ने उन्हें पत्नी का दर्जा देकर उनकी मनोकामना पूर्ण की।

क्या है 16,108 का रहस्य?

धार्मिक ग्रंथों और पौराणिक परंपराओं में श्रीकृष्ण की आठ प्रमुख पत्नियों के साथ 16,100 मुक्त कन्याओं का उल्लेख मिलता है। इसी आधार पर उनकी कुल पत्नियों की संख्या 16,108 बताई जाती है। हालांकि, इस विषय को धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के संदर्भ में ही देखा जाता है।

नोट: यह लेख धार्मिक ग्रंथों और प्रचलित पौराणिक मान्यताओं में वर्णित कथाओं पर आधारित है। अलग-अलग ग्रंथों और परंपराओं में इस प्रसंग के विवरण में अंतर मिल सकता है।

अवैध खनन एवं परिवहन पर साय सरकार की सख्ती, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही में खनिज विभाग की बड़ी कार्रवाई

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रेत एवं ईंट निर्माण के लिए मिट्टी के अवैध परिवहन में संलिप्त 4 ट्रैक्टर जब्त

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा सुशासन, पारदर्शिता और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को प्राथमिकता देते हुए प्राकृतिक संसाधनों के अवैध दोहन के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले में खनिज विभाग ने अवैध खनन एवं परिवहन के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए रेत एवं मिट्टी के अवैध परिवहन में संलिप्त 4 ट्रैक्टर वाहनों को जब्त किया है।

कलेक्टर विजय दयाराम के. के निर्देश पर खनिज विभाग की टीम द्वारा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में लगातार निगरानी एवं जांच की जा रही है। इसी दौरान विभागीय टीम ने सिलपहरी क्षेत्र में रेत का अवैध परिवहन करते हुए 3 ट्रैक्टर वाहनों तथा ज्योतिपुर तिराहा में ईंट निर्माण के लिए मिट्टी का अवैध परिवहन करते हुए 1 ट्रैक्टर वाहन को पकड़ा।

सभी 4 वाहनों को जब्त कर सुरक्षित अभिरक्षा में रखा गया है। इनमें 3 ट्रैक्टर वाहनों को अमरपुर थाना परिसर तथा 1 ट्रैक्टर वाहन को नगर सैनिक परिसर में सुरक्षित रखा गया है। जब्त वाहनों के मालिकों के विरुद्ध खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 21(5) एवं 23(क) के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता

कलेक्टर विजय दयाराम के. ने जिले में खनिजों के अवैध उत्खनन एवं परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए संबंधित अधिकारियों को सतत निगरानी रखने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया है कि जिले के प्राकृतिक संसाधन जनता की सामूहिक संपत्ति हैं और इनके अवैध दोहन को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन द्वारा खनिज संपदा के संरक्षण के साथ-साथ वैध खनन एवं परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।

सुशासन की दिशा में प्रशासन की सक्रिय पहल

राज्य सरकार की सुशासन नीति के अनुरूप जिला प्रशासन द्वारा यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग नियमों के दायरे में हो और अवैध गतिविधियों पर समयबद्ध एवं प्रभावी कार्रवाई की जाए। खनिज विभाग की लगातार कार्रवाई से अवैध खनन एवं परिवहन में संलिप्त तत्वों को स्पष्ट संदेश दिया जा रहा है कि नियमों का उल्लंघन करने पर किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

इस कार्रवाई का उद्देश्य केवल वाहनों की जब्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि खनिज संसाधनों के अवैध दोहन पर प्रभावी अंकुश लगाना, शासन के राजस्व की सुरक्षा करना और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना भी है।

लगातार जारी रहेगी निगरानी और कार्रवाई

खनिज विभाग ने बताया कि जिले में अवैध उत्खनन, परिवहन एवं खनिजों के अनधिकृत उपयोग की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। विभागीय अमला विभिन्न क्षेत्रों में नियमित जांच एवं कार्रवाई कर रहा है। आने वाले दिनों में भी अवैध खनन एवं परिवहन के विरुद्ध अभियान निरंतर जारी रहेगा।

इस कार्रवाई में खनि निरीक्षक सुजीत कंवर, शिवकुमार लहरे, सतीश साहू एवं सैनिक साहिब गनी शामिल रहे।

उत्तर प्रदेश में बाढ़ का कहर, 23 जिले प्रभावित; 16,784 लोगों को सुरक्षित निकाला गया, 3 की मौत

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लखनऊ- उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश के चलते कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य के 23 जिले इस समय बाढ़ से प्रभावित हैं, जबकि अब तक 16,784 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। बुधवार को ही 3,042 लोगों को रेस्क्यू किया गया। बारिश और बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में अब तक तीन लोगों की मौत की भी सूचना है।

कई नदियां खतरे के निशान के ऊपर

लगातार बारिश और जलस्तर बढ़ने के कारण राज्य की कई प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। पूर्वी और मध्य उत्तर प्रदेश में बाढ़ का खतरा अधिक बना हुआ है। गंगा, सरयू, शारदा और अन्य नदियों के बढ़ते जलस्तर ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी और राहत-बचाव अभियान तेज कर दिया है।

1,499 नावें और 1,067 मेडिकल टीमें तैनात

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य के लिए सरकार ने 1,499 नाव और मोटरबोट तैनात की हैं। इसके साथ ही 1,067 मेडिकल टीमें प्रभावित लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने में जुटी हैं। प्रशासन ने राज्य में 1,311 बाढ़ राहत शिविर स्थापित किए हैं, जिनमें से 201 शिविर फिलहाल संचालित किए जा रहे हैं।

चित्रकूट और बलिया में हालात चिंताजनक

चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण चौरा गांव से करीब 150 लोगों को मोटरबोट की मदद से सुरक्षित निकाला गया। वहीं बलिया में गंगा और सरयू का जलस्तर बढ़ने से करीब 20,500 लोग प्रभावित हुए हैं। यहां राहत कार्यों के लिए नावों की तैनाती के साथ राशन, दवाइयां और पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।

वाराणसी में भी बढ़ा बाढ़ का खतरा

वाराणसी में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और कई निचले इलाकों में पानी भर गया है। स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी के जिलाधिकारी से बात कर बाढ़ की स्थिति और राहत कार्यों की जानकारी ली। प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ाने के साथ राहत एवं बचाव दलों को सक्रिय रखा है।

बारिश का दौर अभी जारी

मौसम विभाग ने दक्षिणी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड के कई हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। ऐसे में आने वाले दिनों में नदियों के जलस्तर में और बढ़ोतरी की आशंका बनी हुई है। प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।

उत्तर प्रदेश में बिगड़ते बाढ़ हालात के बीच प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित लोगों तक समय पर राहत पहुंचाना और निचले इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकालना है। फिलहाल राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है।

भारत की GDP ग्रोथ 7.8% पर पहुंची, आंकड़ों की विश्वसनीयता पर उठे सवाल; सरकार ने दी सफाई

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नई दिल्ली- भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून 2026 में 7.8 प्रतिशत की मजबूत GDP ग्रोथ दर्ज की है। यह आंकड़ा बाजार के अनुमान और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अनुमान से बेहतर रहा। हालांकि, मजबूत आर्थिक वृद्धि के आंकड़े जारी होने के बाद अब इसकी गणना और विश्वसनीयता को लेकर आर्थिक जगत में बहस छिड़ गई है।

अनुमान से बेहतर रही आर्थिक वृद्धि

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल-जून तिमाही में भारत की वास्तविक GDP वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही। यह RBI के करीब 7 प्रतिशत के अनुमान और अर्थशास्त्रियों के 7.1 प्रतिशत के औसत अनुमान से अधिक है। इससे वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत मिला है।

इस वृद्धि में मैन्युफैक्चरिंग, निवेश और सेवा क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वित्तीय, रियल एस्टेट और प्रोफेशनल सेवाओं में भी मजबूत विस्तार दर्ज किया गया। घरेलू मांग और सरकारी खर्च ने भी आर्थिक गतिविधियों को समर्थन दिया।

GDP के आंकड़ों पर क्यों उठे सवाल?

GDP के 7.8 प्रतिशत आंकड़े सामने आने के बाद पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग समेत कुछ अर्थशास्त्रियों ने इसकी गणना पर सवाल उठाए। उनका तर्क है कि नई GDP सीरीज में पिछले साल के आंकड़ों में बड़े संशोधन किए गए हैं, जिससे मौजूदा वृद्धि दर की तुलना को लेकर सवाल पैदा होते हैं। पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन ने भी पूछा कि यदि अर्थव्यवस्था इतनी तेज गति से बढ़ रही है, तो इसका असर रोजगार, घरेलू निवेश और विदेशी निवेश जैसे संकेतकों में अधिक स्पष्ट रूप से क्यों नहीं दिखाई दे रहा।

एक अन्य प्रमुख मुद्दा GDP Deflator को लेकर है। आलोचकों का कहना है कि अप्रैल-जून तिमाही में कीमतों के समायोजन के लिए इस्तेमाल किया गया डिफ्लेटर अपेक्षाकृत कम रहा, जिससे वास्तविक GDP वृद्धि अधिक दिखाई दे सकती है। हालांकि, इस मुद्दे पर अर्थशास्त्रियों की राय एक जैसी नहीं है।

सरकार ने आंकड़ों का किया बचाव

आंकड़ों पर उठे सवालों के बाद केंद्र सरकार और सांख्यिकी मंत्रालय ने GDP गणना की नई पद्धति का बचाव किया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि GDP की नई सीरीज में आधार वर्ष को 2011-12 से बदलकर 2022-23 किया गया है। साथ ही डेटा स्रोतों और कीमतों के समायोजन की प्रक्रिया में भी बदलाव किए गए हैं।

सरकार का कहना है कि नए आंकड़े अधिक विस्तृत और आधुनिक डेटा पर आधारित हैं तथा संशोधन का उद्देश्य आर्थिक गतिविधियों की वास्तविक तस्वीर को बेहतर तरीके से सामने लाना है। सरकार ने यह भी कहा कि अलग-अलग GDP सीरीज के आंकड़ों की सीधे तुलना करना सही तरीका नहीं है।

मजबूत ग्रोथ के बीच चुनौती भी बरकरार

जहां GDP के आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत दे रहे हैं, वहीं महंगे कच्चे तेल, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, रुपये पर दबाव और कमजोर वैश्विक मांग जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। ऐसे में आने वाली तिमाहियों में विकास की गति कैसी रहती है, इस पर बाजार और अर्थशास्त्रियों की नजर रहेगी।

फिलहाल 7.8 प्रतिशत GDP ग्रोथ भारत की आर्थिक क्षमता का सकारात्मक संकेत है, लेकिन आंकड़ों की गणना को लेकर शुरू हुई बहस ने पारदर्शिता और डेटा की विश्वसनीयता को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आने वाले महीनों में नए आंकड़े और संशोधन इस बहस को और स्पष्ट कर सकते हैं।

महासमुंद हादसा: 5 दिन बाद चांदन सूखरी नदी से मिला लापता बाइक सवार का शव, NDRF-SDRF की संयुक्त कार्रवाई

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 महासमुंद। जिले के सांकरा थाना क्षेत्र अंतर्गत जोक नदी के पुराने पुल पर 5 दिन पूर्व हुए भीषण सड़क हादसे में लापता बाइक सवार भागीरथी साहू का शव गुरुवार को बरामद कर लिया गया है। NDRF, SDRF और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीमों ने कड़ी मशक्कत के बाद शव को बलौदाबाजार जिले की चांदन सूखरी नदी में झाड़ियों के बीच से बाहर निकाला। इस घटना में कुल मृतकों की संख्या बढ़कर दो हो गई है।


कार-बाइक की टक्कर में पुल से नीचे गिरे थे वाहन

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पांच दिन पूर्व सांकरा क्षेत्र में जोक नदी के पुराने पुल पर एक तेज रफ्तार कार और मोटरसाइकिल के बीच सीधी भिड़ंत हो गई थी। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों वाहन अनियंत्रित होकर सीधे पुल से नीचे नदी में जा गिरे।

घटनास्थल पर ही एक की हुई थी मौत

हादसे के समय कार में चार लोग सवार थे। दुर्घटना में दुधीपाली निवासी राजकुमार निषाद की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि कार सवार तीन अन्य लोगों को स्थानीय ग्रामीणों की मदद से सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। वहीं बाइक चला रहे वारनवापारा क्षेत्र के गवरौद निवासी भागीरथी साहू पानी के तेज बहाव में बह गए थे।

5 दिनों तक चला व्यापक रेस्क्यू ऑपरेशन

भागीरथी के लापता होने के बाद NDRF और SDRF की टीमों ने नदी क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। पानी के तेज बहाव, गहराई और किनारे पर घनी झाड़ियों के कारण रेस्क्यू टीम को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। लगभग 5 दिनों तक कई किलोमीटर के दायरे में चले खोज अभियान के बाद गुरुवार को चांदन सूखरी नदी की झाड़ियों में फंसा हुआ शव दिखाई दिया।

पुलिस ने शुरू की वैधानिक कार्रवाई

शव की पहचान भागीरथी साहू के रूप में होने के बाद परिजनों को सूचित किया गया। पुलिस ने शव का पंचनामा तैयार कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।

जल संरक्षण में छत्तीसगढ़ देश में नंबर-1, ‘जल संचय जन भागीदारी 3.0’ अभियान में हासिल किया पहला स्थान

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रायपुर- जल संरक्षण और जल संचय के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने देशभर में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। ‘जल संचय जन भागीदारी 3.0’ अभियान के तहत बेहतर प्रदर्शन करते हुए छत्तीसगढ़ ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। राज्य की इस उपलब्धि को जल संरक्षण के प्रति सरकार, प्रशासन और आम लोगों की बढ़ती भागीदारी का परिणाम माना जा रहा है।

अभियान के दौरान राज्य में बारिश के पानी को सहेजने, भूजल स्तर को बढ़ाने और जल स्रोतों के संरक्षण के लिए बड़े पैमाने पर काम किया गया। गांवों से लेकर शहरों तक जल संचयन संरचनाओं के निर्माण और पुराने जल स्रोतों के संरक्षण पर जोर दिया गया।

पांच जिले देश के टॉप-10 में शामिल

छत्तीसगढ़ की इस उपलब्धि की सबसे खास बात यह है कि राज्य के पांच जिले देश के टॉप-10 जिलों में शामिल हुए हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि जल संरक्षण को लेकर राज्य के विभिन्न जिलों में जमीनी स्तर पर व्यापक गतिविधियां संचालित की गईं।

स्थानीय स्तर पर लोगों को जल संरक्षण से जोड़ने, वर्षा जल को व्यर्थ बहने से रोकने और उपलब्ध जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए गए।

जनभागीदारी बनी अभियान की ताकत

‘जल संचय जन भागीदारी 3.0’ की सबसे बड़ी विशेषता जनभागीदारी है। जल संरक्षण को केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी न मानकर आम नागरिकों, पंचायतों, स्थानीय संस्थाओं और विभिन्न संगठनों को भी अभियान से जोड़ा गया।

लोगों को वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों की साफ-सफाई और संरक्षण तथा पानी के विवेकपूर्ण उपयोग के प्रति जागरूक किया गया। सामुदायिक भागीदारी के जरिए जल संरक्षण को एक जनअभियान का रूप देने का प्रयास किया गया।

बारिश के पानी को सहेजने पर विशेष जोर

अभियान के तहत वर्षा के दौरान मिलने वाले पानी को अधिक से अधिक मात्रा में जमीन में पहुंचाने और भविष्य के लिए सुरक्षित रखने पर जोर दिया गया। इसके लिए जल संचयन से जुड़ी संरचनाओं के निर्माण और पुनर्जीवन जैसे कार्यों को बढ़ावा दिया गया।

विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश के पानी का संरक्षण भूजल स्तर को बनाए रखने के साथ-साथ गर्मी के मौसम में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

जल संरक्षण के क्षेत्र में नई मिसाल

देश में पहला स्थान हासिल करना छत्तीसगढ़ के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह राज्य में जल संरक्षण को लेकर किए जा रहे प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने का संकेत भी है।

राज्य के पांच जिलों का टॉप-10 में शामिल होना इस अभियान की व्यापक सफलता को दर्शाता है। अब जरूरत इस बात की है कि जल संरक्षण के इन प्रयासों को लगातार जारी रखा जाए और अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ा जाए।

जल है तो कल है—इसी सोच के साथ छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण की दिशा में देश के सामने एक नई मिसाल पेश की है।

गरियाबंद में जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंच रहे बच्चे, 20 फीट ऊंची लोहे की सीढ़ी बनी मजबूरी

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गरियाबंद/मैनपुर- शिक्षा को बच्चों का मौलिक अधिकार माना जाता है, लेकिन छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड में स्कूली बच्चों के सामने पढ़ाई तक पहुंचने के लिए ही जान जोखिम में डालने की मजबूरी खड़ी हो गई है। यहां देहारगुड़ा और खामभाठा के बीच पैरी नदी पर वर्षों से अधूरा पड़ा पुल बच्चों के लिए परेशानी और खतरे का बड़ा कारण बन गया है।

मानसून के दौरान पैरी नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद नदी पार करना बेहद मुश्किल हो जाता है। ऐसे में आसपास की बस्तियों के दर्जनों बच्चे स्कूल जाने के लिए अधूरे पुल के एक पिलर पर लगी करीब 20 फीट ऊंची और संकरी लोहे की सीढ़ी का सहारा लेने को मजबूर हैं। पीठ पर भारी स्कूल बैग और नीचे तेज बहाव वाली नदी—इस खतरनाक रास्ते से गुजरना बच्चों की रोजमर्रा की मजबूरी बन गया है।

छह साल से अधूरा पड़ा है पुल

मैनपुर तहसील मुख्यालय से करीब 5 किलोमीटर दूर देहारगुड़ा और खामभाठा के बीच पैरी नदी पर करीब 300 मीटर लंबे पुल का निर्माण पिछले लगभग 5-6 वर्षों से चल रहा है। लंबे समय के बावजूद पुल का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है और कई बार शिकायत करने के बाद भी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।

पुल का निर्माण पूरा नहीं होने के कारण बारिश के दिनों में नदी पार करने का सुरक्षित रास्ता बंद हो जाता है। यही वजह है कि बच्चों को अधूरे पुल के पिलर और उससे जुड़ी लोहे की सीढ़ी के सहारे आवागमन करना पड़ रहा है।

एक गलती और हो सकता है बड़ा हादसा

इस पूरे रास्ते में सबसे बड़ा खतरा बच्चों की सुरक्षा को लेकर है। लोहे की सीढ़ी संकरी है और बारिश के दौरान फिसलन भी बढ़ जाती है। इसके अलावा निर्माणाधीन पुल के कई हिस्सों में लोहे के सरिए बाहर निकले हुए बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार इन सरियों से चोट लगने का खतरा भी बना रहता है।

जब बच्चे सीढ़ी से ऊपर-नीचे होते हैं, तो उनके परिजनों और ग्रामीणों की चिंता बढ़ जाती है। जरा सा पैर फिसलने या संतुलन बिगड़ने पर नीचे बह रही नदी में गिरने का गंभीर खतरा है।

बारिश में और भयावह हो जाती है स्थिति

पैरी नदी सामान्य दिनों में अपेक्षाकृत शांत रहती है। गर्मी के मौसम में नदी का जलस्तर काफी कम हो जाने से कई स्थानों पर लोग आसानी से आवागमन कर लेते हैं। लेकिन मानसून के दौरान भारी बारिश के कारण नदी उफान पर आ जाती है और बच्चों के लिए यह रास्ता बेहद खतरनाक हो जाता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के मौसम में बच्चों के स्कूल जाने की चिंता अभिभावकों को लगातार सताती रहती है। इसके बावजूद बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसलिए वे इस जोखिम भरे रास्ते से स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं।

पहले भी दिए जा चुके हैं निर्माण पूरा करने के निर्देश

जानकारी के मुताबिक, पुल निर्माण में देरी को लेकर ग्रामीणों की शिकायत के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने पहले भी निर्माण स्थल का निरीक्षण किया था। निर्माण एजेंसी को काम में तेजी लाने और निर्धारित समय में पुल पूरा करने के निर्देश दिए गए थे। ग्रामीणों के मुताबिक, इसके बावजूद निर्माण कार्य अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सका।

अब बच्चों के इस खतरनाक सफर का वीडियो सामने आने के बाद मामला फिर चर्चा में है और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग तेज हो गई है।

ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी

लंबे समय से पुल का निर्माण पूरा नहीं होने से नाराज ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द समस्या का समाधान करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि बच्चों के लिए सुरक्षित रास्ते की व्यवस्था नहीं की गई और पुल का निर्माण शीघ्र पूरा नहीं हुआ, तो वे आंदोलन और नेशनल हाईवे-130C पर चक्काजाम करने के लिए मजबूर होंगे।

प्रशासन ने समाधान का दिया भरोसा

मामला सामने आने के बाद प्रशासन भी हरकत में आया है। रिपोर्टों के अनुसार गरियाबंद कलेक्टर रणबीर शर्मा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द समाधान निकालने की बात कही है। प्रशासन की ओर से बच्चों के लिए सुरक्षित अस्थायी आवागमन की व्यवस्था और अधूरे पुल के निर्माण की समीक्षा किए जाने की बात सामने आई है।

सबसे बड़ा सवाल—आखिर कब खत्म होगा बच्चों का यह जोखिम?

एक ओर सरकार ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा और विकास को प्राथमिकता देने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर मैनपुर क्षेत्र के बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ रही है। यह मामला सिर्फ अधूरे पुल का नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा तक उनकी पहुंच और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं से जुड़ा गंभीर सवाल है।

अब ग्रामीणों और अभिभावकों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है। जरूरत इस बात की है कि किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय बच्चों की सुरक्षित आवाजाही के लिए तत्काल व्यवस्था की जाए और वर्षों से अधूरे पड़े पुल का निर्माण समयबद्ध तरीके से पूरा कराया जाए।

दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए और अधिक प्रयास जरूरी -राज्यपाल रमेन डेका

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वर्ल्ड ऑडियो बुक टीम छत्तीसगढ़ का नाम गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज

राज्यपाल ने टीम के सदस्यों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर किया सम्मानित

रायपुर- राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए छत्तीसगढ़ में अभी और बहुत कुछ करने की आवश्यकता है। उन्हें गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री सहज रूप से उपलब्ध कराना हम सभी की जिम्मेदारी है। तकनीक के माध्यम से दृष्टिबाधित विद्यार्थियों तक शिक्षा पहुंचाने का वर्ल्ड ऑडियो बुक टीम छत्तीसगढ़ का प्रयास सराहनीय और अनुकरणीय है।

वर्ल्ड ऑडियो बुक टीम को उल्लेखनीय योगदान के लिए किया सम्मानित

राज्यपाल डेका से आज लोक भवन में वर्ल्ड ऑडियो बुक टीम छत्तीसगढ़ के सदस्यों ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर राज्यपाल ने टीम के सभी सदस्यों को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। टीम की उपलब्धि को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किए जाने पर उन्होंने सभी सदस्यों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

शारदा ने 1,800 से अधिक ऑडियो बुक्स तैयार कर चुकी

वर्ल्ड ऑडियो बुक टीम द्वारा दृष्टिबाधित एवं सामान्य विद्यार्थियों के लिए 11 हजार से अधिक ऑडियो बुक्स तैयार करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इस अभिनव अभियान की शुरुआत 5 अक्टूबर 2024 को राष्ट्रपति पुरस्कृत शिक्षिका के. शारदा के नेतृत्व में हुई। शारदा स्वयं अब तक 1,800 से अधिक ऑडियो बुक्स तैयार कर चुकी हैं। उनके नेतृत्व में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के 30 शिक्षक- शिक्षिकाएं अपने नियमित शैक्षणिक दायित्वों के साथ इस कार्य में योगदान दे रहे हैं।

दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने समान अवसर

राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचना चाहिए। दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए ऑडियो के माध्यम से अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराना उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और शिक्षा के समान अवसर प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों को और व्यापक बनाने की जरूरत है, ताकि अधिक से अधिक दृष्टिबाधित विद्यार्थी इसका लाभ उठा सकें।

वर्ल्ड ऑडियो बुक चैनल को 8 लाख से अधिक बार देखा गया

वर्ल्ड ऑडियो बुक चैनल पर 107 से अधिक प्लेलिस्ट उपलब्ध हैं और इसे अब तक 8 लाख से अधिक बार देखा जा चुका है। टीम द्वारा विद्यार्थियों के लिए पाठ्यक्रम आधारित एवं उपयोगी अध्ययन सामग्री तैयार की जा रही है। इस अवसर पर गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की छत्तीसगढ़ हेड डॉ. सोनल राजेश शर्मा सहित वर्ल्ड ऑडियो बुक टीम के सभी सदस्य उपस्थित थे।

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने सेशेल्स संसदीय प्रतिनिधिमंडल से की मुलाकात, द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देने पर जोर

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली स्थित संसद भवन में सेशेल्स गणराज्य के संसदीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सेशेल्स की नेशनल असेंबली की अध्यक्ष महामहिम अज़रेल अर्नेस्टा ने किया।

प्रतिनिधिमंडल की अध्यक्ष और सदस्यों का स्वागत करते हुए उपराष्ट्रपति ने सेशेल्स की स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर वहां की सरकार और जनता को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने महामहिम  अज़रेल अर्नेस्टा को सेशेल्स नेशनल असेंबली की पहली महिला अध्यक्ष बनने पर बधाई दी और जनवरी 2026 में नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रमंडल के अध्यक्षों एवं पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन (CSPOC) में उनकी भागीदारी का उल्लेख किया।

दोनों देशों के बीच घनिष्ठ और स्थायी संबंधों को याद करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि सेशेल्स उनके लिए विशेष स्थान रखता है। उन्होंने अक्टूबर 2025 में राष्ट्रपति महामहिम डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए सेशेल्स की अपनी यात्रा को स्नेहपूर्वक याद किया। यह भारत के उपराष्ट्रपति के रूप में उनकी पहली विदेश यात्रा थी। उन्होंने राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी और उपराष्ट्रपति सेबेस्टियन पिल्ले के साथ अपनी मुलाकातों को भी याद किया तथा सेशेल्स की जनता द्वारा दिए गए स्नेह और आतिथ्य का उल्लेख किया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि 2026 भारत-सेशेल्स द्विपक्षीय संबंधों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इस वर्ष दोनों देशों के बीच दो राजकीय यात्राएं हुईं। भारत के प्रधानमंत्री ने जून 2026 में सेशेल्स में आयोजित 50वें राष्ट्रीय दिवस समारोह में भाग लिया, जबकि राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी ने फरवरी 2026 में भारत की राजकीय यात्रा की। उन्होंने यह भी बताया कि उपराष्ट्रपति सेबेस्टियन पिल्ले ने फरवरी 2026 में एआई इम्पैक्ट समिट में भाग लेने के लिए भारत का दौरा किया। उन्होंने रेखांकित किया कि दोनों देश इस वर्ष राजनयिक संबंधों की 50वीं वर्षगांठ भी मना रहे हैं और विश्वास व्यक्त किया कि सेशेल्स के संसदीय प्रतिनिधिमंडल की वर्तमान यात्रा से दोनों देशों के बीच बढ़ती साझेदारी को और गति मिलेगी।

उपराष्ट्रपति ने फरवरी 2026 में भारत द्वारा सेशेल्स के लिए घोषित 175 मिलियन अमेरिकी डॉलर के विशेष आर्थिक पैकेज का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह पैकेज दोनों देशों के विकास और सुरक्षा संबंधी साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।

उपराष्ट्रपति ने राज्यसभा सचिवालय द्वारा संसद के आधुनिकीकरण और डिजिटलीकरण के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी साझा की। उन्होंने संसदीय कार्यवाही के बढ़ते डिजिटलीकरण, कार्यवाही के एक साथ कई भाषाओं में अनुवाद, संसद की कार्यवाही को कागज रहित और अधिक प्रभावी बनाने के प्रयासों, साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में नियमित क्षमता निर्माण कार्यक्रमों तथा संसदीय दस्तावेजों के डिजिटल अभिलेख तैयार करने का उल्लेख किया। उन्होंने सेशेल्स नेशनल असेंबली के साथ भारत के अनुभव और विशेषज्ञता को साझा करने की इच्छा व्यक्त की तथा सेशेल्स की आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के अनुरूप अध्ययन यात्राएं और विशेष रूप से तैयार क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित करने की पेशकश की।

जनता के बीच संबंधों के महत्व पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने सेशेल्स में भारतीय प्रवासी समुदाय, विशेष रूप से गुजराती और तमिल समुदायों, के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि ये समुदाय दोनों देशों के बीच मित्रता के एक स्थायी सेतु के रूप में कार्य करते हैं।

उपराष्ट्रपति ने यह भी उल्लेख किया कि सेशेल्स नेशनल असेंबली की अध्यक्ष नियमित रूप से योग का अभ्यास करती हैं। उन्होंने कहा कि योग भारत और सेशेल्स के बीच घनिष्ठ जन-से-जन संबंधों का एक मजबूत प्रतीक है। उन्होंने आने वाले वर्षों में दोनों संसदीय संस्थाओं के बीच निरंतर संवाद और और अधिक सहयोग की आशा व्यक्त की।

अंत में, उपराष्ट्रपति ने सेशेल्स की अध्यक्ष और प्रतिनिधिमंडल के सभी सदस्यों को भारत में उनके सुखद एवं सफल प्रवास के लिए शुभकामनाएं दीं।

जन्माष्टमी पर 4 सितंबर को पूरे छत्तीसगढ़ में शुष्क दिवस, शराब दुकानें-बार रहेंगे बंद

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 रायपुर : राज्य शासन ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को संपूर्ण छत्तीसगढ़ में ‘शुष्क दिवस’ घोषित किया है। वाणिज्यिक कर (आबकारी) विभाग द्वारा इस संबंध में आदेश जारी कर सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने कहा गया है।


जारी आदेश के अनुसार शुष्क दिवस के दौरान प्रदेश की समस्त देशी एवं विदेशी मदिरा की फुटकर दुकानें बंद रहेंगी। इसके साथ ही रेस्टोरेंट बार, होटल-बार, क्लब, अहाता तथा मदिरा बेचने अथवा परोसने वाले सभी प्रकार के लाइसेंसी प्रतिष्ठानों को भी बंद रखा जाएगा। भांग एवं भांगघोटा की फुटकर दुकानें भी इस दिन बंद रहेंगी।

राज्य शासन ने स्पष्ट किया है कि शुष्क दिवस के दौरान किसी भी होटल, रेस्टोरेंट, क्लब अथवा अन्य प्रतिष्ठान या व्यक्ति को मदिरा बेचने और परोसने की अनुमति नहीं होगी। गैरमालिकाना क्लबों, रेस्टोरेंट और स्टार होटलों पर भी यह प्रतिबंध समान रूप से लागू रहेगा।

शुष्क दिवस की अवधि में मदिरा के व्यक्तिगत भंडारण तथा गैर-लाइसेंसी परिसरों में मदिरा के भंडारण पर भी सख्ती से रोक रहेगी। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर मदिरा जब्त कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

अवैध मदिरा के परिवहन, संग्रहण और विक्रय की रोकथाम के लिए जिला कार्यालयों के साथ संभागीय एवं राज्य स्तरीय उड़नदस्तों को प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए जांच दल गठित कर अवैध मदिरा के संभावित संग्रहण स्थलों और संदिग्ध वाहनों की जांच की जाएगी तथा दोषियों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।

​सारंगढ़-बिलाईगढ़ में जल-क्रांति, समृद्ध किसान - सशक्त को कर रहा है साकार

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 विष्णु प्रसाद वर्मा -सहायक संचालक

रायपुर : पानी को जीवन का पर्याय माना गया है, लेकिन मानसून में यही पानी जब खेतों से बहकर व्यर्थ निकल जाता है, तो किसानों के हाथ केवल सूखी मिट्टी और निराशा ही लगती है। छत्तीसगढ़ के नवगठित जिले सारंगढ़-बिलाईगढ़ ने इस निराशा को आशा में बदलने की ठानी है। जिला प्रशासन की दूरदर्शिता और 'विकसित भारत-जी राम जी' (VBGRJ) योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से अब गाँव-गाँव में पानी सहेजने की एक मौन क्रांति आकार ले रही है। कभी बह जाने वाला वर्षा जल अब डबरियों (कच्चे तालाबों) में सिमटकर किसानों की समृद्धि और आत्मनिर्भरता का नया आधार बन चुका है।


प्रशासनिक प्रतिबद्धता से धरातल पर उतरी योजना

प्रशासनिक सजगता और स्पष्ट कार्ययोजना के बल पर जिले के ग्रामीण अंचलों में जल संरक्षण के साथ-साथ आजीविका संवर्धन के प्रयासों को नई दिशा मिल रही है। प्रशासन के कुशल निर्देशन में 'डबरी निर्माण' को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी समन्वित प्रयास का परिणाम है कि जिले में कुल 319 डबरियों की स्वीकृति प्रदान की गई, जिनमें से 200 डबरियों का निर्माण पूर्ण कर लिया गया है, जबकि शेष 119 डबरियों का कार्य अंतिम चरणों में है। क्षेत्रवार स्थिति पर नज़र डालें तो बिलाईगढ़ में 132, बरमकेला में 103 तथा सारंगढ़ में 84 डबरियाँ स्वीकृत कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जल-संवर्धन को मजबूती दी जा रही है।

​25 करोड़ लीटर वर्षा जल का संचयन और 300 एकड़ भूमि की सिंचाई

​इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है—वर्षा जल का विशाल संचयन। पूर्ण और निर्माणाधीन डबरियों के माध्यम से जिले में लगभग 25 करोड़ लीटर वर्षा जल को सहेजने का लक्ष्य है।​ संचित जल से जिले की लगभग 300 एकड़ कृषि भूमि को प्रत्यक्ष सिंचाई का लाभ मिलेगा। इसके अलावा डबरियों में जल ठहरने से आसपास का भू-जल स्तर (Groundwater level) तेजी से रीचार्ज हो रहा है, जिससे कुओं और हैंडपंपों का जलस्तर भी सुधरा है।

सिंचाई के साथ मछली पालन

​डबरी अब केवल पानी रोकने की संरचना नहीं रह गई है, बल्कि यह किसानों के लिए एक बहुआयामी आजीविका मॉडल बन चुकी है। पर्याप्त पानी उपलब्ध होने से किसान अब केवल खरीफ (धान) की फसल तक सीमित नहीं हैं। वे गर्मी और रबी के मौसम में हरी सब्जियों तथा नकदी फसलों की खेती कर रहे हैं।

​ संचित जल का उपयोग न केवल फसल अपितु मछली पालन के लिए किया जा रहा है। इससे किसान अपनी ही जमीन पर बिना किसी बड़े अतिरिक्त निवेश के हर साल अच्छी-खासी पूरक आय अर्जित कर रहे हैं। ​इस योजना ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दोहरे तरीके से मजबूती प्रदान की है। एक तरफ जहाँ निर्माण कार्य के दौरान स्थानीय ग्रामीणों को उनके ही गाँव और खेतों में रोजगार प्राप्त हुआ, वहीं दूसरी तरफ उनके पास एक ऐसी टिकाऊ परिसंपत्ति तैयार हो गई, जो आने वाले कई दशकों तक उनकी आजीविका को सुरक्षा कवच प्रदान करेगी।

​ ​सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में विकसित भारत-जी राम जी योजना के तहत हुआ यह जल-संवर्धन कार्य इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि यदि सही नीति और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ काम किया जाए, तो प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग करके ग्रामीण जीवन में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। यह जल-क्रांति न केवल जल संकट का स्थायी समाधान प्रस्तुत कर रही है, बल्कि 'समृद्ध किसान - सशक्त जिला' की सोच को भी साकार कर रही है।

धमतरी में भारी बारिश से उफान पर नदियां, गंगरेल बांध के खुले 3 गेट, महानदी तटीय गांवों में अलर्ट जारी

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 रायपुर : धमतरी जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से जनजीवन प्रभावित होने लगा है, वहीं क्षेत्र के सभी प्रमुख जलाशय अब पूरी तरह लबालब हो चुके हैं। कैचमेंट एरिया से हो रही पानी की भारी आवक को देखते हुए जिला प्रशासन के निर्देश पर गंगरेल बांध (रविशंकर सागर जलाशय) के तीन गेट खोल दिए गए हैं, जिनसे कुल 4,670 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। इसमें से 3,360 क्यूसेक पानी सीधे महानदी में बह रहा है, जबकि 1,410 क्यूसेक पानी रुद्री बैराज के रास्ते मुख्य नहर में प्रवाहित किया जा रहा है।


मौसम विभाग द्वारा आगे भी बारिश की संभावना जताए जाने से महानदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने की आशंका है, जिसे देखते हुए कलेक्टर ने तटीय और निचले इलाकों में स्थित गांवों के लिए हाई अलर्ट जारी कर दिया है।

वर्तमान में जिले के जलाशयों की स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। मुरूमसिल्ली जलाशय अपनी क्षमता का 98.61 प्रतिशत भर चुका है और उसमें 362 क्यूसेक पानी की आवक बनी हुई है। वहीं गंगरेल जलाशय 97.40 प्रतिशत भरकर 3,365 क्यूसेक आवक दर्ज कर रहा है। इसके अलावा दुधावा जलाशय 86.86 प्रतिशत (437 क्यूसेक आवक) और सोंढूर जलाशय 69.25 प्रतिशत (167 क्यूसेक आवक) तक भर चुके हैं। जलाशयों में लगातार बढ़ते पानी के दबाव को नियंत्रित करने के लिए ही महानदी में जलप्रवाह बढ़ाया गया है।

बढ़ते जलस्तर और बाढ़ के खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद हो गया है। कलेक्टर धमतरी ने अधिकारियों और मैदानी अमले को 24 घंटे सतर्क रहने और संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार निगरानी रखने के सख्त निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे नदी, नालों और जलभराव वाले इलाकों के पास न जाएं तथा उफनती नदी को पार करने का जोखिम बिल्कुल न उठाएं। तटीय गांवों में मुनादी कराकर लोगों को सतर्क किया जा रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों को समय रहते सुरक्षित एवं ऊंचे स्थानों पर बनाए गए राहत केंद्रों में पहुंचाया जा सके। इसके साथ ही नागरिकों से किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न देकर केवल अधिकृत प्रशासनिक सूचनाओं पर ही भरोसा करने का आग्रह किया गया है।

सांप काटे तो झाड़-फूंक नहीं, सीधे अस्पताल जाएं; मुंगेली में ग्रामीणों को किया जागरूक

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 मुंगेली। बारिश के मौसम में सर्पदंश की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए मुंगेली जिले के ग्राम दाऊकापा के सांवरा मोहल्ले में जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में ग्रामीणों को सर्पदंश से बचाव और सांप के काटने की स्थिति में तत्काल किए जाने वाले जरूरी उपायों की जानकारी दी गई। साथ ही झाड़-फूंक और अंधविश्वास के चक्कर में इलाज में देरी नहीं करने की अपील की गई।


अंधविश्वास से बचने की दी सलाह

कार्यक्रम के दौरान डॉ. मनीष बंजारा ने ग्रामीणों को सर्पदंश से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि समय पर चिकित्सा सुविधा मिलने से सर्पदंश के गंभीर मामलों में मरीज की जान बचाई जा सकती है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचलित झाड़-फूंक और घरेलू उपचार जैसी मान्यताओं से बचने की सलाह दी।

डॉ. बंजारा ने बताया कि कई बार जहरीले सांप के काटने के बाद शुरुआती समय में लक्षण स्पष्ट दिखाई नहीं देते। इसलिए सांप के जहरीला होने या न होने को लेकर अनुमान लगाने के बजाय मरीज को तत्काल अस्पताल ले जाना जरूरी है।

सांप काटे तो तुरंत अस्पताल पहुंचाएं

ग्रामीणों को समझाया गया कि सर्पदंश की स्थिति में घबराने के बजाय मरीज को जल्द से जल्द नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचाना चाहिए। झाड़-फूंक, जड़ी-बूटी या किसी घरेलू नुस्खे के भरोसे इलाज में देरी करना जानलेवा साबित हो सकता है।

अस्पताल में चिकित्सकीय जांच के बाद आवश्यकता के अनुसार उपचार किया जाता है। गंभीर मामलों में चिकित्सकीय जरूरत के अनुसार एंटी-स्नेक वेनम (ASV) समेत अन्य उपचार उपलब्ध कराए जाते हैं। समय पर उपचार मिलने से गंभीर जटिलताओं और जान के खतरे को कम किया जा सकता है।

बारिश में विशेष सावधानी बरतने की अपील

कार्यक्रम में बताया गया कि बारिश के दौरान सांप अपने बिलों और छिपने के स्थानों से बाहर निकलकर घरों, खेतों और आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंच सकते हैं। ऐसे में ग्रामीणों से घर के आसपास साफ-सफाई रखने और अंधेरे या सुनसान स्थानों पर जाने के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई।

कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीणों को सर्पदंश से जुड़े अंधविश्वासों से दूर कर समय पर चिकित्सा सहायता लेने के लिए जागरूक करना रहा।

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