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सिरपुर हमारी समृद्ध सभ्यता, कला और ज्ञान परंपरा की अनमोल धरोहर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सिरपुर को यूनेस्को की संभावित सूची में शामिल किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सिरपुर हमारी समृद्ध सभ्यता, कला, आध्यात्मिकता और ज्ञान परंपरा की अनमोल धरोहर है। प्राचीन काल से ही सिरपुर शिक्षा, संस्कृति, धर्म और स्थापत्य कला का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहां की ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक विरासत छत्तीसगढ़ के गौरवशाली अतीत और समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा की जीवंत पहचान है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में ‘विरासत भी, विकास भी’ के संकल्प के साथ देश की सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन और उन्हें वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में निरंतर कार्य हो रहा है। इसी भावना के अनुरूप छत्तीसगढ़ सरकार भी प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए पर्यटन की नई संभावनाओं से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यूनेस्को की संभावित सूची में सिरपुर का शामिल होना हमारी गौरवशाली विरासत को विश्व पटल पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे सिरपुर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने के साथ पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

उन्होंने कहा कि हमारी सरकार सिरपुर सहित छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी गौरवशाली विरासत से परिचित हों और छत्तीसगढ़ की संस्कृति की कीर्ति विश्वभर में और अधिक विस्तारित हो।

रायपुर पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, CM विष्णुदेव साय ने किया स्वागत; आज कई कार्यक्रमों में होंगी शामिल

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 Raipur News: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू दो दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे पर रायपुर पहुंच गई हैं। रायपुर एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उनका स्वागत किया। इस दौरान राज्यपाल रमेन डेका समेत प्रदेश सरकार के कई मंत्री और सांसद मौजूद रहे। राष्ट्रपति अपने प्रवास के दौरान रायपुर में स्मारक सिक्के का विमोचन करने के साथ नुआखाई पर्व के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगी। वहीं, 23 अक्टूबर को जगदलपुर में मां दंतेश्वरी के दर्शन और ऐतिहासिक मुरिया दरबार में सहभागिता करेंगी।


रायपुर एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति का स्वागत

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के छत्तीसगढ़ आगमन पर रायपुर एयरपोर्ट में उनका स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के साथ राज्यपाल रमेन डेका, मंत्री विजय शर्मा, मंत्री खुशवंत साहेब, मंत्री राजेश अग्रवाल, मंत्री ओपी चौधरी, मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल और सांसद विजय बघेल भी उपस्थित रहे।

राष्ट्रपति के दौरे को लेकर प्रदेश में विशेष तैयारियां की गई हैं। उनके प्रवास के दौरान रायपुर और बस्तर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

माता हासी देवी जी के सम्मान में जारी करेंगी 200 रुपये का स्मारक सिक्का

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू गुरुवार को दोपहर 12:45 बजे रायपुर स्थित लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगी। इस दौरान पूज्य माता हासी देवी जी के सम्मान में 200 रुपये का स्मारक सिक्का जारी किया जाएगा।

इस कार्यक्रम को राष्ट्रपति के छत्तीसगढ़ प्रवास के प्रमुख आयोजनों में शामिल माना जा रहा है।

शाम 4 बजे इंडोर स्टेडियम में नुआखाई पर्व का कार्यक्रम

लोकभवन में कार्यक्रम के बाद राष्ट्रपति शाम 4 बजे रायपुर के बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगी। नुआखाई पर्व के अवसर पर होने वाले इस आयोजन में वे सेवा सम्मान पर्व एवं युवा प्रबोधन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगी।

इस कार्यक्रम में सामाजिक, सांस्कृतिक और युवा सहभागिता से जुड़े विषयों पर विशेष जोर रहने की उम्मीद है।

कल जगदलपुर में मां दंतेश्वरी के करेंगी दर्शन

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अपने दौरे के दूसरे दिन यानी 23 अक्टूबर को बस्तर प्रवास पर रहेंगी। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, वे सुबह 11 बजे जगदलपुर स्थित मां दंतेश्वरी मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना करेंगी।

इसके बाद दोपहर 12:45 बजे वे मुरिया दरबार एवं बस्तर दशहरा के अवसर पर आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होंगी। मुरिया दरबार बस्तर की ऐतिहासिक और पारंपरिक संवाद व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें जनजातीय समाज के पारंपरिक प्रतिनिधियों की सहभागिता रहती है।

राष्ट्रपति की उपस्थिति से बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और ऐतिहासिक परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने की उम्मीद है।

CM विष्णुदेव साय बोले- छत्तीसगढ़ के लिए सौभाग्य का विषय

राष्ट्रपति के दौरे पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रसन्नता जताई। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का छत्तीसगढ़ आगमन प्रदेश के लिए सौभाग्य का विषय है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों की ओर से उनका स्वागत और अभिनंदन किया।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, राष्ट्रपति माता हासी देवी जी के सम्मान में 200 रुपये के स्मारक सिक्के का विमोचन करेंगी। इसके बाद वे बस्तर प्रवास पर जाएंगी और वहां आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होकर आमसभा को संबोधित करेंगी।

राष्ट्रपति का यह दो दिवसीय दौरा छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक आयोजनों और जनजातीय परंपराओं के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

छत्तीसगढ़ में खूनी विवाद: चाकू से हमले में युवक की मौत, साथी घायल

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 Dhamtari Crime News: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में आपसी विवाद के बाद चाकूबाजी की घटना सामने आई है। अर्जुनी थाना क्षेत्र के मुजगहन के पास बुधवार रात एक युवक ने दो लोगों पर चाकू से हमला कर दिया। इस वारदात में गंभीर रूप से घायल दीपांशु साहू की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि उसका साथी भी घायल हुआ है। घटना के बाद आरोपी फरार हो गया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर उसकी तलाश तेज कर दी है।


आपसी विवाद के बाद चाकू से किया हमला

जानकारी के मुताबिक, बुधवार रात मुजगहन निवासी दीपांशु साहू अपने एक साथी के साथ मौजूद था। इसी दौरान किसी बात को लेकर दोनों का एक युवक से विवाद हो गया। शुरुआत में हुई कहासुनी देखते ही देखते बढ़ गई। इसके बाद आरोपी ने चाकू निकालकर दीपांशु और उसके साथी पर हमला कर दिया।

अचानक हुई चाकूबाजी से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। हमले में दीपांशु गंभीर रूप से घायल हो गया। आसपास मौजूद लोगों और परिजनों ने उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया, जहां उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया। वहीं, हमले में घायल उसके साथी का इलाज जारी है।

वारदात के बाद आरोपी फरार, पुलिस कर रही तलाश

घटना की सूचना मिलने के बाद अर्जुनी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। पुलिस घटनास्थल से जुड़े लोगों से पूछताछ कर रही है। साथ ही आरोपी की पहचान, उसके संभावित ठिकानों और घटना से संबंधित अन्य जानकारियां जुटाई जा रही हैं।

वारदात के बाद आरोपी के फरार होने से उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस संभावित ठिकानों पर तलाश कर रही है।

हत्या की वजह का पता लगाने में जुटी पुलिस

पुलिस प्रारंभिक तौर पर इस घटना को आपसी विवाद के बाद हुई चाकूबाजी मानकर जांच कर रही है। हालांकि, विवाद किस बात को लेकर शुरू हुआ और आरोपी ने हमला क्यों किया, इसका स्पष्ट खुलासा अभी नहीं हुआ है।

पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही घटना के पीछे की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी। फिलहाल, एक युवक की मौत और दूसरे के घायल होने की घटना के बाद क्षेत्र में चर्चा का माहौल है।

छत्तीसगढ़ में दशहरा की खुशियां मातम में बदलीं: सड़क हादसों में 7 लोगों की मौत, एक दर्जन से अधिक घायल

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में विजयादशमी और दशहरा उत्सव के दौरान अलग-अलग जिलों में हुए सड़क हादसों ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। कोरबा, कांकेर और रायगढ़ में हुए विभिन्न हादसों में कम से कम सात लोगों की मौत हो गई, जबकि बेमेतरा जिले में दशहरा मेले से लौट रहे ग्रामीणों से भरा ट्रैक्टर पलटने से करीब 12 लोग घायल हो गए। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई गई है। इन घटनाओं ने त्योहारों के दौरान सड़क सुरक्षा, तेज रफ्तार और यातायात नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कोरबा: दुर्गा विसर्जन के बाद लौट रहे दो युवकों की मौत

कोरबा जिले के करतला थाना क्षेत्र में रामपुर-नोनबिर्रा मार्ग पर मंगलवार शाम एक दर्दनाक हादसा हुआ। इलेक्ट्रिक स्कूटी पर सवार यशवंत गुप्ता (24) और शुभम गुप्ता (20) को एक अज्ञात भारी वाहन ने टक्कर मार दी। दोनों युवक दुर्गा प्रतिमा विसर्जन से जुड़े धार्मिक कार्य पूरे करने के बाद लौट रहे थे।

बताया गया कि गांव में नौ दिनों तक दुर्गा पूजा का आयोजन हुआ था। विसर्जन के बाद दोनों युवक पूजा सामग्री लौटाने के लिए पुजारी के घर गए थे। वहां से वापस आते समय उनकी स्कूटी भारी वाहन की चपेट में आ गई। हादसा इतना गंभीर था कि दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।

घटना के बाद वाहन चालक के मौके से फरार होने की सूचना है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगालने और स्थानीय लोगों से पूछताछ कर वाहन तथा चालक की पहचान करने में जुटी है।

कांकेर: बाईपास पर दो युवकों की मौत, ग्रामीणों ने किया चक्काजाम

कांकेर जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-30 के बाईपास पर मंगलवार देर रात सड़क दुर्घटना में दो युवकों की मौत हो गई। मृतक नंदनमारा क्षेत्र के रहने वाले बताए गए हैं।

हादसे के बाद बुधवार सुबह स्थानीय ग्रामीणों ने बाईपास पर चक्काजाम कर दिया। ग्रामीणों का आरोप था कि सड़क पर पर्याप्त रोशनी नहीं है और वाहनों की गति नियंत्रित करने के लिए आवश्यक इंतजाम भी नहीं किए गए हैं। उनका कहना था कि इन कमियों के कारण इस मार्ग पर दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।

प्रदर्शन में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हुए। ग्रामीणों ने सड़क पर स्ट्रीट लाइट लगाने, स्पीड ब्रेकर बनाने और ओवरब्रिज के निर्माण की मांग की। प्रशासन तथा पुलिस के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों से चर्चा की। मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद चक्काजाम समाप्त हुआ।

रायगढ़: दो अलग-अलग सड़क हादसों में तीन लोगों की मौत

रायगढ़ जिले के छाल थाना क्षेत्र में मंगलवार रात हुए दो अलग-अलग सड़क हादसों में तीन लोगों की जान चली गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।

पहली घटना में चार युवक एक ही मोटरसाइकिल पर सवार होकर मेले की ओर जा रहे थे। बेहरामार गांव के पास उनकी बाइक सड़क किनारे खड़े ट्रक के पिछले हिस्से से टकरा गई। इस हादसे में कृष्णा राठिया (15) और जितेंद्र राठिया की मौके पर मौत हो गई। धर्मेंद्र राठिया और कुंदन राठिया गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए रायपुर रेफर किए जाने की सूचना है।

दूसरी घटना छाल चौक के पास हुई। यहां परिवार के साथ पैदल दशहरा मेला देखने जा रहे बुजुर्ग चंद्रदेव सिंह ठाकुर को पीछे से आ रही मोटरसाइकिल ने टक्कर मार दी। सिर में गंभीर चोट लगने के कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

दोनों मामलों में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, एक ही बाइक पर चार लोगों का सवार होना, तेज रफ्तार और सड़क किनारे खड़े भारी वाहन से टक्कर जैसे पहलू जांच के दायरे में हैं।

बेमेतरा: 40 से अधिक लोगों को ले जा रहा ट्रैक्टर पलटा, करीब 12 घायल

बेमेतरा जिले के नवागढ़ क्षेत्र में दशहरा उत्सव से लौट रहे ग्रामीणों से भरा ट्रैक्टर सल्हेघोरी गांव के पास पलट गया। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रैक्टर पर 40 से अधिक लोग सवार थे।

दुर्घटना में करीब 12 लोग घायल हो गए। घायलों को नवागढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार किया गया। इनमें से चार लोगों की हालत गंभीर बताई गई।

घटना की सूचना मिलने पर राजस्व और पुलिस विभाग के अधिकारी अस्पताल पहुंचे तथा घायलों की स्थिति का जायजा लिया। बड़ी संख्या में लोगों को ट्रैक्टर पर ले जाने से जुड़े सुरक्षा पहलुओं की जांच आवश्यक मानी जा रही है।

त्योहारों के दौरान सड़क सुरक्षा पर उठे सवाल

लगातार सामने आए इन हादसों ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा की व्यवस्थाओं पर चिंता बढ़ा दी है। त्योहारों और मेलों के दौरान देर रात तक आवागमन, तेज रफ्तार, हेलमेट सहित सुरक्षा नियमों की अनदेखी, सड़क पर पर्याप्त रोशनी का अभाव और वाहनों में क्षमता से अधिक लोगों को बैठाना दुर्घटनाओं के जोखिम को बढ़ा सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे आयोजनों के दौरान यातायात नियंत्रण, संवेदनशील मार्गों पर पुलिस की तैनाती, उचित प्रकाश व्यवस्था, गति सीमा का पालन और ट्रैक्टर जैसे कृषि वाहनों पर यात्रियों को ले जाने से रोकने जैसे उपाय महत्वपूर्ण हैं।

अपील: त्योहारों की खुशियां सुरक्षित रहें, इसके लिए वाहन चलाते समय गति नियंत्रित रखें, दोपहिया वाहन पर हेलमेट पहनें, वाहन में निर्धारित क्षमता से अधिक लोगों को न बैठाएं और यातायात नियमों का पालन करें। थोड़ी-सी सावधानी कई परिवारों को अपूरणीय दुख से बचा सकती है।


साधना से सफलता : शिक्षक की पहल से अनेक मंदिरों का हुआ जीर्णोद्धार व निर्माण

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शिक्षक महेंद्र कुमार पटेल बताते हैं कि धार्मिक आस्था का संस्कार उन्हें अपने पिता स्व. शिवचरण पटेल से मिला है। उनके पिता प्रतिदिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना किए बिना अन्न ग्रहण नहीं करते थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में अपनी मेहनत की कमाई से गांव में यज्ञ कराया और ग्राम देवी मां महामाया मंदिर का दो बार जीर्णोद्धार कराया। वही संस्कार उनके पुत्र महेंद्र पर पड़ा।

वर्ष 2016-17 में गांव के प्रसिद्ध व्याख्याकार जगदीश प्रसाद साहू ने लाफिनकला में राम मंदिर निर्माण की बात कही। इस पर महेंद्र ने बिना देरी किए अपने पिता स्व. शिवचरण पटेल की स्मृति में सबसे पहले 21 हजार रुपये मंदिर निर्माण के लिए देने की घोषणा ग्रामीणों के समक्ष की और मंदिर निर्माण की कामना को लेकर प्रतिदिन भगवान श्रीराम-सीता की आराधना शुरू कर दी। साथ ही गांव में जनसहयोग जुटाना प्रारंभ किया।

एक-दो वर्षों में ही लाखों रुपये का जनसहयोग मिला और अयोध्या में मंदिर बनने से पूर्व ही अपने गांव में राम मंदिर निर्माण का संकल्प लिया गया। ग्रामीणों के सहयोग से वर्ष 2021 में करीब 21 लाख रुपये की लागत से भव्य श्रीराम-जानकी मंदिर बनकर तैयार हो गया, जो आज जन-आस्था का केंद्र है।

इस दौरान मंत्रालय में धर्मस्व शाखा में पदस्थ लोकेश्वर साहू के मार्गदर्शन में और स्थानीय विधायक के सहयोग से उन्होंने धर्मस्व विभाग से संपर्क कर मंदिर निर्माण से पहले ही 5 लाख रुपये की लागत से आहाता निर्माण की स्वीकृति करा ली।

सिलसिला यहीं नहीं रुका। महेंद्र ने अपने पिता के आराध्य ग्राम देवता अंकोलिया बाबा मंदिर के जीर्णोद्धार की योजना बनाई और लोकेश्वर साहू के दिशा-निर्देश पर 5 लाख रुपये की शासकीय स्वीकृति कराकर जीर्णोद्धार करा लिया। इसके पश्चात पुरातात्विक नगरी सिरपुर में धर्मशाला निर्माण का प्रयास किया और वहां भी 5 लाख रुपये की धर्मशाला की स्वीकृति कराकर निर्माण कराया। जहां धर्मशाला बनी है वह स्थल बौद्ध विहार से लगा होने के कारण निर्माण में काफी अड़चनें आईं। इस चुनौतीपूर्ण कार्य के लिए तत्कालीन संसदीय सचिव एवं विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर द्वारा उन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

कोविड-19 के दौरान लॉकडाउन में जब शिक्षक महेंद्र ने धार्मिक नगरी आरंग में खुले में रखे प्राचीन शिवलिंगों को देखा, तो मन में विचार आया कि जनसहभागिता से इन शिवालयों का जीर्णोद्धार कराया जाए। इसी बीच वे पीपला ग्रुप से जुड़े और सदस्यों के समक्ष जीर्णोद्धार का प्रस्ताव रखा। भगवान शिव की कृपा से आरंग नगर के चार प्राचीन शिवालयों का जीर्णोद्धार हो गया।

वहीं अपने गृह ग्राम लाफिनकला में तालाब के बीचों-बीच शिव मंदिर निर्माण की पहल करते हुए उन्होंने स्वयं 1 लाख रुपये का दान दिया और प्रतिदिन द्वादश ज्योतिर्लिंगों की आराधना प्रारंभ की। उनके मंझले भाई नेतन पटेल के नेतृत्व में ग्रामीणों के सहयोग से करीब 21-22 लाख रुपये की लागत से द्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिर का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इसके अलावा वे ग्राम रीवा में निर्माणाधीन मां चंडिका मंदिर और पांडुका सिरकट्टी में बने भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण में भी सहभागी रहे हैं।

आज का समाचार बुलेटिन | 22 अक्टूबर 2026 | छत्तीसगढ़ सहित देश-दुनिया की प्रमुख खबरें

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नमस्कार! आप देख रहे हैं आज का विशेष समाचार बुलेटिन। आइए जानते हैं छत्तीसगढ़, देश और दुनिया की प्रमुख खबरें, राजनीति, अर्थव्यवस्था, रेलवे, शिक्षा, खेल और मनोरंजन जगत के ताज़ा अपडेट।

छत्तीसगढ़ की 5 बड़ी खबरें

The President of India, Smt Droupadi Murmu | President of India

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का आज से छत्तीसगढ़ दौरा

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 22 और 23 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ के दौरे पर रहेंगी। आज रायपुर के लोकभवन में माता साहिब हासी देवी की 200वीं जयंती के अवसर पर स्मारक सिक्का जारी करने और नुआखाई से जुड़े कार्यक्रमों में शामिल होने का कार्यक्रम है। कल वे जगदलपुर में बस्तर दशहरा और मुरिया दरबार में हिस्सा लेंगी।

Green signal from Railway Ministry: New electric train started between Tadoki and Raipur | रेल मंत्रालय से हरी झंडी: ताड़ोकी से रायपुर के बीच नई इलेक्ट्रिक ट्रेन शुरू - Balod News | Dainik Bhaskar

बस्तर अंचल के लिए रेलवे कनेक्टिविटी में बड़ी उपलब्धि

ताड़ोकी–रावघाट नई ब्रॉडगेज रेल लाइन शुरू होने से रावघाट पहली बार राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जुड़ा है। अभनपुर–कुरूद रेलखंड पर भी यात्री सेवाएं शुरू की गई हैं। इससे क्षेत्र में आवागमन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

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रायपुर में सफाई कर्मचारियों की स्थिति पर गंभीर सवाल

छत्तीसगढ़ राज्य मानवाधिकार आयोग के सर्वेक्षण में करीब 8,000 सफाई कर्मचारियों की समस्याएं सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ कर्मचारियों के पास जरूरी पहचान दस्तावेज और सुरक्षा उपकरण नहीं हैं। बैंक पासबुक और एटीएम कार्ड रोके जाने तथा सरकारी बीमा योजनाओं का लाभ नहीं मिलने जैसी शिकायतें भी दर्ज हुई हैं।

सनातन आस्था का आदिवासी पर्व है राजा दशहरा, राम-रावण से नहीं, बल्कि देवी दंतेश्वरी से जुड़ा है नाता - Raja Dussehra is a tribal festival of Sanatan faith it is not associated with Ram Ravan but with Goddess Danteshwari

बस्तर दशहरा पर देशभर की नजर

जगदलपुर में बस्तर दशहरा से जुड़े पारंपरिक आयोजन चर्चा में हैं। राष्ट्रपति के प्रस्तावित दौरे के दौरान मुरिया दरबार में आदिवासी समुदायों के प्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच संवाद भी महत्वपूर्ण रहेगा।

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अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में दिखेगी छत्तीसगढ़ की पहचान

नई दिल्ली में 14 से 27 नवंबर तक होने वाले भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में राज्य का पवेलियन ‘विकास और विरासत’ थीम पर तैयार किया जाएगा। यहां छत्तीसगढ़ की संस्कृति, हस्तशिल्प, मिलेट उत्पादों, हर्बल उत्पादों और औद्योगिक विकास को प्रदर्शित करने की तैयारी है।

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PM Modi Leads Cabinet Meetings Amidst West Asia Conflict Impact | Headlines

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर नजर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता करीब हो सकता है। हालांकि, समझौते की अंतिम शर्तों और आधिकारिक घोषणा की पुष्टि का इंतजार है।

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महंगाई और ब्याज दरों पर RBI की नजर

RBI की मौद्रिक नीति समिति के हालिया विवरण के अनुसार, महंगाई का दबाव चिंता का विषय बना हुआ है। अक्टूबर में रेपो रेट 5.50% किए जाने के बाद आगे की नीतिगत कार्रवाई महंगाई और आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।

महत्वपूर्ण तकनीकों में आत्मनिर्भरता की तैयारी

नीति आयोग 6G, रक्षा उपकरण, इलेक्ट्रिक वाहनों की तकनीक और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में भारत की आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण तकनीकों की सूची तैयार कर रहा है। रोडमैप अगले महीने जारी होने की संभावना बताई गई है।

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औद्योगिक उत्पादन में तेजी

सितंबर 2026 में भारत के आठ प्रमुख बुनियादी ढांचा क्षेत्रों के उत्पादन में सालाना आधार पर 7.9% वृद्धि दर्ज की गई। बिजली उत्पादन, रिफाइनरी उत्पाद और लौह अयस्क उत्पादन में बढ़ोतरी इसका प्रमुख कारण रही।

अर्थव्यवस्था, बैंकिंग और रोजगार

  • बैंकिंग सुरक्षा: SBI से जुड़े ग्राहक डेटा के डार्क वेब पर मिलने की रिपोर्ट के बाद साइबर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। खबर में प्रभावित ग्राहकों की संख्या 3,897 बताई गई है; मामले की जांच और आधिकारिक बैंक अपडेट पर नजर रखना जरूरी है।

  • कृषि और सौर ऊर्जा: केंद्र सरकार खेती के साथ सौर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन पर विचार कर रही है। इससे किसानों को अतिरिक्त आय और ऊर्जा उपलब्धता में मदद मिल सकती है।
  • निवेशकों के लिए: ब्याज दरों और महंगाई से बाजार की दिशा प्रभावित हो सकती है। किसी शेयर या सूचकांक के आज के लाइव भाव की पुष्टि इस बुलेटिन में नहीं की गई है।
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रूस-यूक्रेन संघर्ष

ताजा रिपोर्टों के अनुसार, यूक्रेन में रूसी हवाई हमलों में लोगों की मौत हुई है। कूटनीतिक स्तर पर भी बातचीत और अंतरराष्ट्रीय प्रयास जारी हैं।

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एशियन पैरा गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन

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रिपोर्ट के मुताबिक, लिवरपूल ने विलारियल के खिलाफ दो गोल से पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए 4–3 से जीत दर्ज की।

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  • AI और तकनीकी विकास: भारत में 6G, रक्षा तकनीक और इलेक्ट्रिक वाहन तकनीक में घरेलू क्षमता विकसित करने पर जोर बढ़ रहा है।

  • AI फेलोशिप: IndiaAI की रिपोर्ट की गई योजना के तहत स्नातक विद्यार्थियों के लिए ₹1 लाख और स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के लिए ₹2 लाख तक सहायता का उल्लेख है। आवेदन की पात्रता और अंतिम तारीख आधिकारिक पोर्टल पर जांचें।

  • डिजिटल सुरक्षा: साइबर हमलों और डेटा लीक की खबरें यह याद दिलाती हैं कि अनजान लिंक, OTP साझा करने और संदिग्ध ऐप डाउनलोड करने से बचना चाहिए।


Sharad Purnima 2026: 25 या 26 अक्टूबर को है शरद पूर्णिमा? जानें व्रत की तारीख, पूजा मुहूर्त और खीर रखने की परंपरा

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Sharad Purnima 2026 Date: शरद पूर्णिमा का पर्व 25 अक्टूबर को मनाया जाएगा या 26 अक्टूबर को? जानें पूर्णिमा तिथि, चंद्रमा की पूजा का समय, खीर रखने की परंपरा और इस पर्व का धार्मिक महत्व।


हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व है। शारदीय नवरात्र और दशहरे के बाद आने वाली आश्विन मास की पूर्णिमा को श्रद्धालु भक्ति और उत्साह के साथ मनाते हैं। इसे कोजागरी पूर्णिमा और रास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी चांदनी को अमृत के समान माना जाता है। इसी विश्वास के चलते शरद पूर्णिमा पर चंद्रदेव की पूजा करने और रात में खीर बनाकर चांदनी में रखने की परंपरा है।

साल 2026 में शरद पूर्णिमा की तारीख को लेकर लोगों के मन में असमंजस है। कोई 25 अक्टूबर को पर्व मनाने की तैयारी कर रहा है, तो कोई 26 अक्टूबर की तारीख को लेकर जानकारी जुटा रहा है। ऐसे में आइए जानते हैं शरद पूर्णिमा 2026 की तिथि, चंद्र पूजा का समय, खीर रखने की परंपरा और इस पर्व से जुड़ी प्रमुख धार्मिक मान्यताएं।

शरद पूर्णिमा 2026 कब है? 25 या 26 अक्टूबर

पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर, रविवार को सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर शुरू होगी। इसका समापन 26 अक्टूबर को सुबह 9 बजकर 41 मिनट पर होगा। इस तरह 25 अक्टूबर की रात पूर्णिमा तिथि रहने के कारण चंद्रमा की पूजा और चांदनी में खीर रखने की परंपरा इसी रात निभाई जा सकती है।

शरद पूर्णिमा पर व्रत और पूजा का निर्णय लेते समय तिथि के साथ रात्रि में पूर्णिमा की उपस्थिति तथा स्थानीय धार्मिक परंपराओं को भी ध्यान में रखा जाता है। वहीं, स्नान-दान और अन्य धार्मिक कार्यों के लिए अलग-अलग पंचांगों में निर्धारित समय महत्वपूर्ण हो सकता है। इसलिए व्रत रखने से पहले अपने शहर के विश्वसनीय पंचांग से तारीख और मुहूर्त की पुष्टि करना उचित रहेगा।

शरद पूर्णिमा 2026: चंद्रमा की पूजा का शुभ समय

शरद पूर्णिमा की रात चंद्रदेव की पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है। श्रद्धालु चंद्रोदय के बाद चंद्रमा के दर्शन करते हैं और जल अर्पित करके परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। कई घरों में इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा भी की जाती है।

पूजा के दौरान दीपक जलाकर फूल, फल और मिठाई अर्पित की जा सकती है। श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार मंत्र जाप और धार्मिक पाठ भी करते हैं।

हालांकि, चंद्रोदय का समय हर शहर में अलग होता है। इसलिए रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर या छत्तीसगढ़ के अन्य शहरों में पूजा करने वाले श्रद्धालु अपने स्थानीय पंचांग में चंद्रमा निकलने का समय अवश्य देखें। सटीक मुहूर्त की पुष्टि के बिना किसी एक समय को सभी स्थानों के लिए अनिवार्य नहीं माना जाना चाहिए।

शरद पूर्णिमा की रात खीर कब रखनी चाहिए?

शरद पूर्णिमा पर खीर बनाने और उसे चंद्रमा की चांदनी में रखने की परंपरा सबसे लोकप्रिय धार्मिक रीति-रिवाजों में शामिल है। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा की किरणों में विशेष दिव्यता होती है और चांदनी में रखी खीर अमृत के समान मानी जाती है। इसी कारण कई परिवार दूध, चावल और चीनी से खीर बनाकर रात में चंद्रमा की रोशनी में रखते हैं।

वर्ष 2026 में 25 अक्टूबर की रात चंद्रोदय के बाद खीर रखने की परंपरा निभाई जा सकती है। इसके लिए खीर को साफ बर्तन में तैयार करें और ऐसी जगह रखें, जहां चांदनी पहुंच सके। बर्तन को स्वच्छ जाली या ढक्कन से ढकना बेहतर है, ताकि उसमें धूल-मिट्टी और कीड़े न गिरें।

पारिवारिक परंपरा के अनुसार, अगले दिन खीर को भगवान को भोग लगाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। हालांकि, दूध से बनी खीर को पूरी रात सामान्य तापमान पर रखने से उसके खराब होने का खतरा रहता है। इसलिए खीर की स्वच्छता और सुरक्षित भंडारण का ध्यान रखें। धार्मिक परंपरा निभाने के लिए खाद्य सुरक्षा से समझौता करना जरूरी नहीं है।

शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा क्यों कहते हैं?

शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस रात माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जागकर उनकी आराधना करने वाले भक्तों पर कृपा बरसाती हैं। कोजागरी शब्द को जागने से जोड़कर देखा जाता है। इसी वजह से कई स्थानों पर श्रद्धालु रात में जागरण करते हैं और माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं।

इस अवसर पर घरों की साफ-सफाई की जाती है, पूजा स्थल सजाया जाता है और दीपक जलाकर माता लक्ष्मी को फूल, फल, मिठाई तथा खीर अर्पित की जाती है। भक्त परिवार में सुख-समृद्धि, शांति और आर्थिक उन्नति की कामना करते हैं। कुछ क्षेत्रों में इस दिन जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और अन्य उपयोगी वस्तुएं दान करने की भी परंपरा है।

शरद पूर्णिमा का धार्मिक महत्व क्या है?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन में गोपियों के साथ महारास किया था। इसी वजह से इसे रास पूर्णिमा भी कहा जाता है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम, भक्ति और दिव्य आनंद का प्रतीक माना जाता है।

इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, चंद्रदेव की पूजा करते हैं और भगवान विष्णु तथा माता लक्ष्मी की आराधना करते हैं। धार्मिक विश्वास है कि श्रद्धापूर्वक पूजा-पाठ करने और जरूरतमंदों की सहायता करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।

शरद पूर्णिमा केवल धार्मिक अनुष्ठानों का पर्व नहीं है, बल्कि परिवार के साथ परंपराओं को निभाने, दान-पुण्य करने और आध्यात्मिक चिंतन का अवसर भी है। शरद ऋतु की सुहावनी रात में चंद्रमा की चांदनी का आनंद लेना और परिवार की खुशहाली की कामना करना इस पर्व को विशेष बनाता है।

शरद पूर्णिमा पर इन बातों का रखें ध्यान

  • पूर्णिमा तिथि और पूजा के समय की पुष्टि स्थानीय पंचांग से करें।

  • चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य के लिए अपने शहर का चंद्रोदय समय देखें।

  • खीर को साफ बर्तन में रखें और धूल-मिट्टी से बचाने के लिए ढकें।

  • दूध से बनी खीर को लंबे समय तक सामान्य तापमान पर न रखें।

  • व्रत और पूजा अपनी सेहत तथा पारिवारिक परंपरा के अनुसार करें।

  • अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को भोजन या उपयोगी वस्तुओं का दान करें।

अर्बन चैलेंज फंड से छत्तीसगढ़ के शहरों के सुनियोजित विकास को मिलेगी नई गति - मुख्यमंत्री साय

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 रायपुर : विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में हमारे शहरों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। शहर केवल आवास और नागरिक सुविधाओं के केंद्र नहीं हैं, बल्कि आर्थिक गतिविधियों, उद्योग, व्यापार, रोजगार और नवाचार के प्रमुख आधार भी हैं। इसलिए छत्तीसगढ़ के शहरों का विकास वर्तमान आवश्यकताओं तक सीमित न रहकर आने वाले दशकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सुनियोजित, समावेशी, टिकाऊ और आर्थिक रूप से सक्षम होना चाहिए। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज नवा रायपुर स्थित मेफेयर लेक रिजॉर्ट में आवास एवं शहरी विकास निगम (हुडको) और छत्तीसगढ़ शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अर्बन चौलेंज फंड (UCF) एवं अर्बन इन्वेस्ट विंडो (UiWIN) विषयक प्रथम क्षेत्रीय कार्यशाला का शुभारंभ कर संबोधित करते हुए यह बात कही।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में शहरी विकास को नई सोच और नई गति मिली है। अर्बन चौलेंज फंड जैसे अभिनव प्रयास शहरों को आधुनिक, सुविधासंपन्न, आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने का बड़ा अवसर हैं। छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों को इस अवसर का अधिकतम लाभ उठाते हुए ऐसी गुणवत्तापूर्ण परियोजनाएं तैयार करनी होंगी, जो नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने के साथ शहरों की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करें।


’नगरीय विकास को मजबूती देने दो महत्वपूर्ण एमओयू’

कार्यशाला के दौरान प्रदेश के नगरीय विकास, वित्तीय संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और नगरीय निकायों की तकनीकी एवं संस्थागत क्षमता को मजबूत करने की दिशा में दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। पहला एमओयू हुडको और छत्तीसगढ़ शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के बीच तथा दूसरा एमओयू नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग और सेप्ट विश्वविद्यालय के बीच संपन्न हुआ।

मुख्यमंत्री साय ने इन समझौतों को प्रदेश के नगरीय विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि इनके माध्यम से नगरीय निकायों को विकास परियोजनाओं की बेहतर योजना तैयार करने, वित्तीय संसाधन जुटाने, तकनीकी विशेषज्ञता प्राप्त करने, प्रशिक्षण और संस्थागत क्षमता विकास में सहयोग मिलेगा। इससे शहरों की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण परियोजनाओं के निर्माण और उनके प्रभावी क्रियान्वयन को गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि शहरी विकास में विशेषज्ञ संस्थाओं, वित्तीय संस्थानों और शासन के बीच मजबूत साझेदारी समय की आवश्यकता है। इस प्रकार का संस्थागत सहयोग छत्तीसगढ़ के शहरों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

’विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य में नगरीय अर्थव्यवस्था की बड़ी भूमिका’

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का संकल्प लिया है। इसी के अनुरूप छत्तीसगढ़ सरकार ने भी विकसित छत्तीसगढ़ का विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया है और इसे धरातल पर उतारने के लिए मिशन मोड में कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमें ऐसे शहर विकसित करने हैं जो निवेश को आकर्षित करें, उद्योग और व्यापार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करें, रोजगार के नए अवसर सृजित करें और साथ ही नागरिकों को उच्च गुणवत्ता की मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराएं। सुनियोजित शहरीकरण विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव बनेगा।

’शहरों की समस्याओं का हो स्थायी समाधान’

मुख्यमंत्री साय ने नगरीय निकायों से कहा कि विकास की योजनाएं केवल आज की समस्याओं के समाधान को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि अगले कई दशकों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर बनाई जानी चाहिए। तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच पेयजल, जल निकासी, सड़क, बिजली, स्वच्छता, परिवहन और अन्य नागरिक सुविधाओं की दीर्घकालिक योजना आवश्यक है। उन्होंने शहरों में जलभराव की समस्या का उल्लेख करते हुए कहा कि बरसात के दिनों में नागरिकों को होने वाली परेशानी का स्थायी समाधान होना चाहिए। इसके लिए प्रभावी और दीर्घकालिक जल निकासी व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने बिजली एवं अन्य सेवाओं के अव्यवस्थित तारों की समस्या पर भी ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर जुलूस या बड़े वाहनों के आवागमन के दौरान बिजली के तारों को ऊपर उठाने जैसी स्थिति बनती है। यह न तो नागरिक सुरक्षा की दृष्टि से उचित है और न ही आधुनिक शहरी व्यवस्था के अनुरूप। जहां संभव हो, वहां बिजली एवं अन्य सेवाओं के तारों को भूमिगत करने की योजनाएं तैयार की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि शहरों के विकास में विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय भी आवश्यक है। पेयजल, सड़क, बिजली, जल निकासी और स्वच्छता जैसे कार्य अलग-अलग न होकर समग्र शहरी नियोजन का हिस्सा होने चाहिए।

’अपने शहरों के भविष्य की योजना बनाएं जनप्रतिनिधि’

मुख्यमंत्री साय ने कार्यशाला में उपस्थित महापौरों, नगर पालिका एवं नगर पंचायत अध्यक्षों तथा अधिकारियों से कहा कि जनता ने उन्हें अपने शहरों के विकास की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। इसलिए अपने शहर की वास्तविक आवश्यकताओं और समस्याओं को समझकर उनका स्थायी समाधान तलाशना उनकी प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अर्बन चौलेंज फंड नगरीय निकायों के लिए बड़ा अवसर है। सभी निकाय इसके प्रावधानों का गंभीरता से अध्ययन करें, विशेषज्ञों से संवाद करें और ऐसी परियोजनाएं तैयार करें जो तकनीकी रूप से मजबूत, नागरिकों के लिए उपयोगी और आर्थिक रूप से व्यवहार्य हों।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इस कार्यशाला से मिलने वाला तकनीकी मार्गदर्शन और विशेषज्ञों के सुझाव प्रदेश के नगरीय विकास को नई दिशा देंगे। शासन, जनप्रतिनिधियों, नगरीय निकायों और विशेषज्ञ संस्थाओं के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ के शहरों को स्वच्छ, सुंदर, सुव्यवस्थित, सुविधासंपन्न और आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।

’अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा विकास का लाभ’

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार श्सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयासश् के मूल मंत्र के साथ समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि पीएम जनमन योजना के माध्यम से विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों की बसाहटों तक सड़क, बिजली, आवास और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान से भी जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास को नई गति मिली है।

प्रदेश में रेल अधोसंरचना के विस्तार का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ को रेलवे के क्षेत्र में लगातार बड़ी सौगातें मिल रही हैं। बस्तर के रावघाट क्षेत्र तक रेल संपर्क का विस्तार तथा रायपुर से कुरुद तक रेल सेवा का शुभारंभ प्रदेश के विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक और खनिज संपदा से समृद्ध प्रदेश है। यहां की उर्वर भूमि, प्रचुर संसाधन और परिश्रमी नागरिक हमारी सबसे बड़ी शक्ति हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प और सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से नक्सलवाद के विरुद्ध मिली सफलताओं ने प्रदेश में विकास और निवेश की नई संभावनाओं को मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि श्छत्तीसगढि़या सबले बढि़याश् की पहचान को और सशक्त करते हुए हम सभी को मिलकर ऐसा छत्तीसगढ़ बनाना है, जो वर्ष 2047 के विकसित भारत के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाए।

’एक लाख करोड़ रुपए का अर्बन चौलेंज फंड शहरों के लिए बड़ा अवसर रू  अरुण साव’

उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने कहा कि भारत सरकार द्वारा अर्बन चौलेंज फंड के लिए एक लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। यह छत्तीसगढ़ के शहरों के विकास के लिए बड़ा अवसर है। अब चुनौती यह है कि प्रदेश के नगरीय निकाय कितनी गुणवत्तापूर्ण और व्यवहार्य परियोजनाएं तैयार कर इस फंड से अधिकतम संसाधन प्राप्त कर पाते हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और तकनीक के साथ नागरिकों की अपेक्षाएं भी बदल रही हैं। ऐसे में नगरीय विकास की कार्यशैली में भी बदलाव आवश्यक है। केवल परंपरागत तरीके से कार्य करके भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा नहीं किया जा सकता। नगरीय निकायों को नवाचार और आधुनिक तकनीक को अपनाना होगा।

साव ने जनप्रतिनिधियों से कहा कि जिस शहर ने हमें पहचान, शिक्षा, संस्कार और आगे बढ़ने का अवसर दिया है, आज उसी शहर ने हमें नेतृत्व की जिम्मेदारी दी है। यह अपने शहर को कुछ लौटाने का अवसर है। प्रत्येक जनप्रतिनिधि को अपने कार्यकाल में ऐसे कार्य करने का संकल्प लेना चाहिए, जिनका लाभ आने वाली पीढि़यों को भी मिले। उन्होंने कहा कि किसी परियोजना की सफलता केवल उसके निर्माण से तय नहीं होती। उसकी उपयोगिता, संचालन, रखरखाव और वित्तीय व्यवहार्यता की योजना भी शुरुआत से ही स्पष्ट होनी चाहिए। जनता के एक-एक रुपए का सदुपयोग सुनिश्चित करना सभी की जिम्मेदारी है।

’अर्बन चौलेंज फंड से शहरों को मिलेगा विकास का नया आधार रू  तोखन साहू’

केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के शहरी विकास को नई दिशा मिली है। प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी, स्वच्छ भारत मिशन और अमृत मिशन जैसी योजनाओं से नागरिक सुविधाओं का विस्तार हुआ है और लोगों के जीवन स्तर में महत्वपूर्ण बदलाव आया है।

उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण आवास, पेयजल, सड़क, परिवहन और स्वच्छता सहित नागरिक सुविधाओं की मांग लगातार बढ़ रही है। इसके लिए नगरीय निकायों को वित्तीय रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना आवश्यक है। अर्बन चौलेंज फंड इस दिशा में महत्वपूर्ण अवसर उपलब्ध कराता है। श्री साहू ने कहा कि विकास परियोजनाएं नागरिकों के लिए उपयोगी होने के साथ आर्थिक रूप से व्यवहार्य भी होनी चाहिए। सरकारी सहायता के अतिरिक्त बैंक वित्तपोषण, बाजार आधारित संसाधन और सार्वजनिक-निजी भागीदारी जैसे विकल्पों का भी प्रभावी उपयोग किया जाना चाहिए।

उन्होंने जबलपुर में कचरे से ऊर्जा उत्पादन तथा हैदराबाद में जल प्रबंधन और तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था जैसे नवाचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों को देश के सफल प्रयोगों का अध्ययन कर स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उन्हें अपनाना चाहिए।

’विशेषज्ञता, वित्त और क्षमता विकास का मिलेगा सहयोग’

कार्यशाला में अर्बन चौलेंज फंड और अर्बन इन्वेस्ट विंडो के विभिन्न पहलुओं, नगरीय विकास के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने, परियोजनाओं की व्यवहार्यता, आधुनिक शहरी नियोजन तथा प्रभावी क्रियान्वयन जैसे विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन प्रदान किया गया। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, हुडको और सेप्ट विश्वविद्यालय के बीच हुए समझौतों से प्रदेश के नगरीय निकायों को परियोजना निर्माण, वित्तीय प्रबंधन, तकनीकी विशेषज्ञता, प्रशिक्षण और संस्थागत क्षमता विकास में सहयोग मिलेगा।

इस अवसर पर प्रदेश के सभी 14 नगर निगमों के महापौर, नगर पालिकाओं के अध्यक्ष, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा, हुडको के सीएमडी  संजय कुलश्रेष्ठ, तेलंगाना नगरीय प्रशासन विकास विभाग की सचिव डॉ. टी. के. श्री देवी, सेप्ट विश्वविद्यालय के प्रेसिडेंट  बरजोर मेहता, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक नीलेश महादेव क्षीरसागर, सुडा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुमित अग्रवाल सहित जनप्रतिनिधि, विशेषज्ञ और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

शादी का झांसा देकर विधवा से 22 लाख की ठगी! तीन बच्चों को अपनाने का दिया था भरोसा, आरोपी गिरफ्तार

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 बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में शादी का झांसा देकर एक विधवा महिला से लाखों रुपये लेने का मामला सामने आया है। आरोप है कि युवक ने महिला से शादी करने और उसके तीन बच्चों को अपनाने का भरोसा दिलाया। इसके बाद उसने मकान खरीदने और अन्य जरूरतों का हवाला देकर महिला से करीब 20 से 22 लाख रुपये ले लिए। रकम लेने के बाद आरोपी ने संपर्क तोड़ दिया और शादी करने से भी इनकार कर दिया। महिला की शिकायत पर सरकंडा पुलिस ने आरोपी को दुर्ग जिले के धमधा से गिरफ्तार किया है।


पति की मौत के बाद दोबारा संपर्क में आया आरोपी

पुलिस के अनुसार, पीड़िता के पति की सितंबर 2025 में मौत हो गई थी। इसके बाद महिला के पूर्व परिचित मनोज कुमार यादव ने उससे दोबारा संपर्क किया। आरोप है कि मनोज ने महिला से शादी करने और उसके तीनों बच्चों को अपनाने का भरोसा दिया। इसी भरोसे के आधार पर उसने महिला से नजदीकियां बढ़ाईं और शादी का वादा कर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए।

मकान खरीदने के नाम पर लिए लाखों रुपये

शिकायत के मुताबिक, आरोपी ने पामगढ़ में मकान खरीदने और अन्य जरूरी कामों के लिए पैसों की जरूरत बताई। महिला ने उस पर भरोसा करते हुए अपने बैंक और बीमा खातों से रकम निकाली और उसे दे दी। कुछ रकम नकद दी गई, जबकि कई बार PhonePe के माध्यम से भी लेनदेन हुआ।

महिला का आरोप है कि आरोपी ने अलग-अलग किस्तों में करीब 20 से 22 लाख रुपये लिए। रकम मिलने के बाद उसने महिला से बातचीत बंद कर दी और अपना मोबाइल फोन स्विच ऑफ कर लिया। बाद में शादी करने से भी इनकार कर दिया।

साइबर सेल की मदद से धमधा पहुंची पुलिस

आरोपी के संपर्क तोड़ने के बाद पीड़िता ने सरकंडा थाने में शिकायत दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और साइबर सेल की मदद से आरोपी की तलाश शुरू की। जांच के दौरान उसकी लोकेशन दुर्ग जिले के धमधा में मिली। इसके बाद पुलिस टीम ने वहां घेराबंदी कर मनोज कुमार यादव (30) को हिरासत में ले लिया।

पूछताछ में रकम लेने की बात स्वीकारने का दावा

पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान आरोपी ने महिला से रकम लेने की बात स्वीकार की। उसने बताया कि रकम का इस्तेमाल अपने और परिवार के खर्च, सोने के जेवर छुड़ाने और निजी जरूरतों को पूरा करने में किया।

पुलिस ने आरोपी के कब्जे से लेनदेन में इस्तेमाल बैंक एटीएम कार्ड, ऋण से संबंधित दस्तावेज और वीवो कंपनी का मोबाइल फोन जब्त किया है। पुलिस इन वस्तुओं को मामले की जांच से जुड़े साक्ष्य मान रही है।

BNS की धाराओं में केस, न्यायिक रिमांड पर भेजने की तैयारी

सरकंडा थाने में आरोपी मनोज कुमार यादव, पिता पुनीराम यादव, निवासी धनगांव, थाना पामगढ़, जिला जांजगीर-चांपा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 और 318(4) के तहत अपराध दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने और न्यायिक रिमांड पर भेजने की प्रक्रिया की जा रही है।

फिलहाल, मामले में पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है। महिला द्वारा लगाए गए आरोपों के संबंध में अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा किया जाएगा।

इंस्टाग्राम पर दोस्ती, फिर एसिड अटैक की धमकी! छात्रा को अपहरण की चेतावनी देने वाला आरोपी गिरफ्तार

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 बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में सोशल मीडिया पर दोस्ती के बाद छात्रा को धमकी देने का गंभीर मामला सामने आया है। इंस्टाग्राम पर दोस्ती होने के बाद जब छात्रा को युवक के आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी मिली और उसने उससे बातचीत बंद कर दी, तो आरोपी ने कथित तौर पर उसे एसिड अटैक और अपहरण की धमकी दी। परेशान होकर छात्रा ने तारबाहर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी विजय चौधरी उर्फ बॉबी को गिरफ्तार कर लिया है।


इंस्टाग्राम पर हुई थी दोस्ती

पीड़िता के अनुसार, करीब एक साल पहले इंस्टाग्राम के जरिए उसकी पहचान विजय चौधरी उर्फ बॉबी से हुई थी। शुरुआत में दोनों के बीच सामान्य बातचीत होती थी, जो धीरे-धीरे दोस्ती में बदल गई। उस समय छात्रा को युवक की पृष्ठभूमि और कथित आपराधिक गतिविधियों के बारे में जानकारी नहीं थी।

आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी मिलने पर बनाई दूरी

कुछ समय बाद छात्रा को पता चला कि युवक कथित तौर पर आपराधिक गतिविधियों में शामिल है। इसके बाद उसने अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उससे दूरी बना ली और बातचीत बंद कर दी। आरोप है कि छात्रा का यह फैसला युवक को नागवार गुजरा।

एसिड अटैक और अपहरण की दी धमकी

शिकायत के मुताबिक, बातचीत बंद होने से नाराज आरोपी ने छात्रा को डराना-धमकाना शुरू कर दिया। आरोप है कि उसने छात्रा पर दबाव बनाने के लिए एसिड अटैक करने और अपहरण करने की धमकी दी। लगातार मिल रही धमकियों से परेशान होकर छात्रा ने हिम्मत जुटाई और तारबाहर थाने पहुंचकर पुलिस से शिकायत की।

शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपी को पकड़ा

छात्रा की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले में कार्रवाई शुरू की और आरोपी विजय चौधरी उर्फ बॉबी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने धमकी देने की बात स्वीकार की, ऐसा पुलिस की कार्रवाई से संबंधित जानकारी में बताया गया है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से दोस्ती करते समय सतर्क रहना और किसी भी तरह की धमकी मिलने पर तुरंत पुलिस को सूचना देना जरूरी है।

PV App से गिरदावरी पर सवाल - किसानों के हित में सरकार अपनी नीति स्पष्ट करे- वतन चन्द्राकर

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पटवारियों की हड़ताल से किसानों के धान विक्रय पर संकट की आशंका


आरंग : खड़ी धान की फसल के बीच PV App के माध्यम से फसल गिरदावरी कराने की व्यवस्था को लेकर अब किसानों के हितों पर सवाल खड़े होने लगे हैं। जिला पंचायत सदस्य वतन चन्द्राकर ने इस मुद्दे पर सरकार की नीति और व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताते हुए किसानों के हित में ठोस निर्णय लेने की आवश्यकता पर जोर दिया है। पटवारियों द्वारा 12 अक्टूबर 2026 से किसानों के हित में अनिश्चितकालीन हड़ताल किए जाने के बीच फसल गिरदावरी की प्रक्रिया और उसके संभावित परिणामों को लेकर चिंता बढ़ गई है।

वतन चन्द्राकर के मुताबिक, जब खेतों में धान की फसल खड़ी है, तब PV App के माध्यम से प्रत्येक किसान के खेत का वास्तविक सर्वेक्षण करना कितना व्यावहारिक है, यह सरकार को स्पष्ट करना चाहिए। अनेक गांवों में नक्शा बटांकन का काम अधूरा होने और खेतों की वास्तविक पहचान स्पष्ट नहीं होने जैसी समस्याओं के बीच सभी किसानों के खेतों का व्यक्तिगत सर्वेक्षण कर पाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में तकनीकी व्यवस्था लागू करने से पहले जमीनी परिस्थितियों का आकलन करना जरूरी है।फसल गिरदावरी का सीधा संबंध किसानों के धान विक्रय और उनकी आर्थिक स्थिति से जुड़ा है।

यदि किसी किसान के खेत का सर्वेक्षण तकनीकी या भौगोलिक कारणों से पूरा नहीं हो पाता है, तो उसके सामने धान बेचने में परेशानी खड़ी हो सकती है। ऐसी स्थिति में सवाल उठता है कि व्यवस्था की खामियों का नुकसान आखिर किसान क्यों उठाए?वतन चन्द्राकर ने सरकार के सामने यह सवाल खड़ा किया है कि जब खेतों की पहचान, नक्शा बटांकन और खड़ी फसल के सर्वेक्षण को लेकर व्यावहारिक कठिनाइयां सामने आ रही हैं, तो इनका समाधान किए बिना नई व्यवस्था पर जोर देना कितना उचित है? क्या सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि तकनीकी प्रक्रिया के कारण किसी भी किसान का धान विक्रय प्रभावित नहीं होगा? यदि सर्वेक्षण में किसी प्रकार की त्रुटि होती है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा और किसान को राहत कैसे मिलेगी?वतन चन्द्राकर के नाम से जारी संदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि किसान का समय अमूल्य है, उसे तकनीकी प्रयोग का परीक्षण न बनाया जाए।

यह बात इस पूरे विवाद के केंद्र में है कि तकनीक का इस्तेमाल किसानों की सुविधा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए होना चाहिए, न कि उनके सामने नई समस्याएं खड़ी करने के लिए।सरकार को चाहिए कि वह PV App से गिरदावरी की प्रक्रिया की जमीनी व्यवहार्यता की समीक्षा करे, अधूरे नक्शा बटांकन की समस्या का निराकरण करे और खेतों की सही पहचान सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए।

साथ ही, यह भी स्पष्ट करे कि किसी तकनीकी त्रुटि या सर्वेक्षण में देरी के कारण कोई पात्र किसान धान विक्रय से वंचित नहीं होगा।सवाल यह है कि जब किसानों की आजीविका का मामला हो, तो क्या सरकार को जमीनी समस्याओं का समाधान पहले नहीं करना चाहिए? किसानों के हितों की रक्षा और धान विक्रय में किसी भी प्रकार की बाधा रोकने के लिए सरकार को तत्काल पहल करते हुए पटवारियों से संवाद स्थापित करना चाहिए, ताकि विवाद का समाधान हो और किसानों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

महासमुंद : सिरपुर की समृद्ध सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक परिदृश्य अब विश्व में चमकेगा

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छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और प्राचीन धरोहर सिरपुर की वैश्विक पहचान की ओर बड़ा कदम, यूनेस्को की विश्व धरोहर अस्थाई सूची में शामिल


महासमुंद : छत्तीसगढ़ राज्य के महासमुंद अंतर्गत पुण्य सलिला महानदी के तट पर स्थित सिरपुर का अतीत सांस्कृतिक समृद्धि तथा वास्तुकला के लालित्य से ओतप्रोत सिरपुर अब विश्व के मानचित्र में चमकेगा। यूनेस्को के विश्व धरोहर की संभावित सूची में सिरपुर को शामिल किया गया है। सिरपुर प्राचीन काल में श्रीपुर के नाम से विख्यात रहा है तथ पाण्डुवंशी शासकों के काल में इसे दक्षिण कोसल की राजधानी होने का गौरव प्राप्त रहा है। सिरपुर की प्राचीनता का सर्वप्रथम परिचय शरभपुरीय शासक प्रवरराज तथा महासुदेवराज के ताम्रपत्र से उपलब्ध होता है। कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह ने बताया कि जिले के ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक धरोहर सिरपुर को यूनेस्को के विश्व धरोहर की संभावित सूची में शामिल किया गया है। यूनेस्को के आधिकारिक वेबसाइट पर तीसरे क्रम पर सिरपुर को सूचीबद्ध किया गया है। उल्लेखनीय है कि केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत द्वारा 01 जनवरी 2026 को ऐतिहासिक स्थल सिरपुर के पुरातात्विक स्थलों का अवलोकन किया गया था तत्पश्चात उन्होंने कहा था कि इन स्थलों के संरक्षण और संवर्धन के लिए कार्य किया जाएगा और सिरपुर को यूनेस्को के विश्व धरोहर सूची में शामिल करने प्राथमिकता से प्रयास किया जाएगा। इस दौरान प्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, धर्मस्व एवं पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, सांसद श्रीमती रूपकुमारी चैधरी, महासमुंद विधायक श्री योगेश्वर राजू सिन्हा एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि गण मौजूद थे।


सिरपुर की समृद्ध सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक परिदृश्य
महाशिवगुप्त बालार्जुन के 57 वर्षीय, सुदीर्घ शासनकाल में यहीं अनेक मंदिर, बौद्ध विहार सरोवर तथा उद्यानों का निर्माण करवाया गया। सातवीं सदी ईस्वी में चीन के पर्यटक तथा विद्वान हेनसांग ने सिरपुर की यात्र की थी। उस समय यहाँ लगभग 100 संधाराम थे तथा महायान संप्रदाय के 10000 भिक्षु निवास करते थे। महाशिवगुप्त बालार्जुन ने स्वयं शेवमतावलंबी होते हुए भी बौद्ध विहारों को उदारतापूर्वक प्रचुर दान देकर संरक्षण प्रदान किया था।

लक्ष्मण मंदिर - यह ईंटों से निर्मित भारत के सर्वोत्तम मंदिरों में से एक है। अलंकरण सौंदर्य, मौलिक अभिप्राय तथा निर्माण कौशल की दृष्टि से यह अपूर्व है। लगभग 7 फुट ऊंच पाषाण निर्मित जगती पर स्थित यह मंदिर अत्यंत भव्य है। पंचरथ प्रकार का यह मंदिर गर्भगृह, अंतराल तथा मंडप से युक्त है। मंदिर की बाह्य भित्तियों में कूट द्वारा तथा वातायन आकृति, चैत्य गवाक्ष, भारवाहकगण, गज, कीर्तिमुख एवं कर्ण आमलक आदि अभिप्राय दर्शनीय है। मंदिर का प्रवेश द्वार अत्यंत आकर्षक है। द्वार शीर्ष पर शेषशायी विष्णु प्रदर्शित है। उभय द्वारा शाखा पर विष्णु के प्रमुख अवतार, कृष्ण लीला के दृश्य, अलंकरणात्क प्रतीक, मिथुन दृश्य तथा वैष्णव द्वारपालों का अंकन है। गर्भगृह के भीतर नागराज शेश की बैठी हुई सौम्य प्रतिमा रखी है। लक्ष्मण मंदिर का निर्माण महाशिवगुप्त बालार्जुन की माता वासटा ने अपने दिवंगत पति हर्षगुप्त की स्मृति में करवाया था। माता वासटा मगध के राजा सूर्यवर्मन की पुत्री थी। अभिलेखीय साक्ष्य के आधार पर इस मंदिर का निर्माण काल 650 ईस्वी के लगभग मान्य है।

गंधेश्वर मंदिर - महानदी के तट पर स्थित इस मंदिर का प्राचीन नाम गंधर्वेश्वर था। यह सतत पूजित शिव मंदिर है। इसका निर्माण प्राचीन मंदिरों एवं विहारों से प्राप्त स्थापत्य खण्डों से किया गया है। मंदिर परिसर में अनेक कलात्मक प्रतिमाएं संरक्षित की गई है। द्वार शाखा के विविध दृश्य है। इन्हीं दृश्यों में रावण के शीर्ष पर गर्दभमुख निर्मित है।

बौद्ध विहार- बौद्ध धर्म से संबंधित अवशेषों की दृष्टि से सिरपुर का विशेष महत्व है। उत्खनन कार्य से यहाँ दो बौद्ध विहार के अवशेष प्रकाश में आए हैं। विहारों के निर्माण में मुख्य रूप से ईंटों का उपयोग किया गया है। इन विहारों की तल योजना में गुप्तकालीन मंदिर तथा आवासीय भवन निर्माण कला का सुंदर समन्वय है। विहार में प्रमुख स्थाविर तथा अन्य भिक्षुओं के ध्यान, अध्ययन-अध्यापन तथा निवास की सुविधा थी। इन विहारों के मुख्य कक्ष में भगवान बुद्ध की भूमिस्पर्श मुद्रा में लगभग साढ़े छः फुट ऊँची प्रतिमा प्रस्थापित है। इनके अतिरिक्त अवलोकितेश्वर तथा मकरवाहिनी गंगा भी मिली है।

यहाँ के प्रमुख विहार से मिले अभिलेख से ज्ञात होता है कि महाशिवगुप्त बालार्जुन के राजत्वकाल
आनंदप्रभु नामक भिक्षु ने इसका निर्माण करवाया था। इस मठ में निवास के लिए 14 कमरे थे। यह विहार दो मंजिला था विहार के सम्मुख तोरणद्वार था, जिसके दोनों ओर द्वारपालों की प्रतिमायें रही है। अभिलेख के आधार पर इस विहार का नामकरण आनंदप्रभु कुटी विहार किया गया है। इसी के सन्निकट एक अन्य ध्वस्त विहार भी उत्खनन से प्रकाश में आया है। तल योजना के आधार पर इसे स्वास्तिक विहार के नाम से जाना जाता है। यहाँ पर भी भूमिस्पर्श मुद्रा में बुद्ध की प्रतिमा प्रस्थापित है। सिरपुर से बौद्ध धर्म से संबंधित पाषाण प्रतिमाओं के अतिरिक्त धातु प्रतिमाएं तथा मृण्मय पुरावशेष भी उपलब्ध हुए है।

राम मंदिर - लक्ष्मण मंदिर से कुछ दूरी पर पूर्व की ओर ईटों से निर्मित एक भग्न तथा जीर्ण-शीर्ण अवशिष्ट है। यह राम मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है। इस मंदिर के ऊर्ध्व विन्यास में कोण तथा भुजाओं के संयोजन से निर्मित प्रतिरथ ताराकृति की रचना करते है। इस कलात्मक मंदिर का संपूर्ण शिखर नष्ट हो चुका है तथा भग्नप्राय भित्तियां बच रहे है। लक्ष्मण मंदिर तथा राम मंदिर के निर्माण में कुछ दशकों का अंतराल है।

संग्रहालय- लक्ष्मण मंदिर परिसर में भारतीय पुरातत्वीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा स्थापित संग्रहालय में सिरपुर से प्राप्त अनेक दुर्लभ प्रतिमाएं तथा स्थापत्य खण्ड संरक्षित कर रखी गई है। ये कलाकृतियाँ शैव, वैष्णव, बौद्ध तथा जैन धर्म से संबधित है। एक अंगड़ाई लेती हुई नायिका की 196च्प्भ् प्रतिमा में सौंन्दर्य, अनुराग तथा चपलता का अद्भुत सामंजस्य है। काले पाषाण से निर्मित चतुर्मुख शिवलिंग के प्रशांत मुख पर लास्य के भाव है। उनके कंठ तथा जटा-जूट में मुक्ताहार गुंफित है। केशीवध को प्रदर्शित करती हुई प्रतिमा में कृष्ण तथा अश्व का अंकन अत्यंत प्रभावोत्पादक है। महिषासुरमर्दिनी प्रतिमा में देवी के अनुग्रह तथा संहारक शक्ति की व्यंजना है। इसके अतिरिक्त यहाँ अन्य प्रतिमायें भी प्रदर्शित है, जिनमें नृसिंह, अंबिका, चामुंडा, विष्णु, सुर्य प्रतिमा के भाग, शिशु सहित मातृका, जैन तीर्थकर, दुर्गा, नाग पुरुष तथा बुद्ध विशेष महत्वपूर्ण है। सिरपुर से संग्रहित नाग पुरुष की एक मानवाकार प्रतिमा रायपुर संग्रहालय में भी प्रदर्शित है।

धातु प्रतिमाएं- सातवीं आठवीं सदी ईस्वी में सिरपुर
धातु प्रतिमाओं के निर्माण के केन्द्र के रूप में स्थापित हो चुका था। इस काल में सिरपुर महायान धर्म का प्रसिद्ध केन्द्र था। सिरपुर में सर्वप्रथम 1939 में धातु प्रतिमाओं का भण्डार प्राप्त हुआ था। सिरपुर से प्राप्त धातु प्रतिमाएं रायपुर, नागपुर, नई दिल्ली स्थित संग्रहालयों तथा मुम्बई के भारतीय विद्या भवन में संरक्षित है। सिरपुर से प्राप्त धातु प्रतिमाओं का प्रदर्शन इंग्लैंड, जर्मनी तथा अमेरिका में किया जा चुका है।

सिरपुर की धातु प्रतिमाओं में श्री एवं शील का अद्भुत संतुलन है। यहाँ से प्राप्त धातु प्रतिमाओं में बुद्ध, अवलोकितेश्वर प्रद्मपणि, वज्रपाणि, मंजूश्री, तारा आदि के अतिरिक्त ऋषभनाद तथा विष्णु की धातु प्रतिमाएं भी उपलब्ध हुई है। इन प्रतिमाओं के प्रदीप्त मुख, अर्घ निलिम्ब नेत्र, बरद मुद्रा युक्त हथेली की उंगलियों एवं परिधान की तरंगवत सिलवटों में आध्यात्मिक सौंदर्य के साथ कला का चरमोत्कर्ष व्याप्त है।
उत्खनन - सिरपुर के तिमिराच्छादित अतीत के परतों को अनावृत करने के उद्देश्य से पुरातत्व विभाग के द्वारा संयुक्त रूप से श्री एम.जी दीक्षित के निर्देशन में उत्खनन कार्य संपादित किया गया था। उत्खनन से यहाँ पर टीले के भीतर दबे हुए दो बौद्ध विहारों को क्रमशः अनावृत किया गया है। इनमें से एक का नाम आनंदप्रभु कुटी विहार तथा दूसरे का स्वास्तिक विहार रखा गया है। सिरपुर के उत्खनन से लगभग 2000 से अधिक वस्तुएं प्राप्त हुई है। उत्खनित वस्तुओं में धातु प्रतिमा, प्रतिमाफलक, आभूषण बनाने के विविध उपकरण, लोहे के अनेक प्रकार के बर्तन, कीलें-ताले, जंजीर, सिलबट्टा, दीपक, पूजा के पात्र, घड़े, मिट्टी के मटके, कांच की चूड़ियां, पकी मिट्टी की मुहरें एवं खिलौने तथा तीन सिक्के भी मिले है। इनमें से एक सिक्का शरभपुरीय शासक प्रसन्नमात्र का है तथा दूसरा कलचुरी शासक रत्नदेव के समय का है। तीसरा सिक्का विशेष महत्वपूर्ण है। यह सिक्का चीनी राजा काई युवान (713 से 741 ईस्वी) के समय का है।

राजमहल अवशेष - सिरपुर में स्थित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के समीप महानदी के तट पर स्थित है। डॉ. अरुण कुमार शर्मा रिटायर्ड सुप्रिन्टेडिंग भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा (2000-01) में किये गये उत्खनन में एक विशाल परिसन के अवशेष उपलब्ध हुए, जिसे उन्होंने राजमहल नाम से अभिहित किया। यहाँ से प्राप्त अवशेषों में भगवान विष्णु एवं लक्ष्मी की प्रतिमाएं महत्वपूर्ण है। वर्ष 2001 से वर्ष 2004 के मध्य सिरपुर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के द्वारा नागार्जुन बोधिसत्व संस्थान मनसर के तत्वावधान में उत्खनन कार्य संपादित किया गया। इस अवधि में निम्नलिखित स्मारक अवशेष अनावृत किये गए।

बौद्ध विहार (तीवर देव महाविहार)- दक्षिण कोसल (छत्तीसगढ़) में अब तक के सबसे बड़े विहार के रूप में परिगणित तीवरदेव बौद्ध विहार डाॅ. अरुण कुमार शर्मा (2002-03) के उत्खनन के दौरान प्राप्त हुआ। यह बौद्ध विहार कसडोल जाने वाले मार्ग पर दाहिने ओर लक्ष्मण मंदिर से लगभग 1 कि.मी. पूर्व स्थित है। वस्तुतः यह पूरा क्षेत्र एक बौद्ध सांस्कृतिक संकुल ही है। क्योकि इसी परिसर में अन्य विहार, बौद्ध भिक्षुणी बिहार भी स्थित है। किन्तु तीवर देव महाविहार अपनी विशालता, भव्यता, अद्भुत शिल्प कौशल की दृष्टि से अद्वितीय है। उत्खनन के दौरान प्राप्त अभिलेखीय साक्ष्यों के आधार पर उत्खननकर्ता द्वारा इसे तीवर देव महाविहार के नाम से अभिहित किया गया है। यह बौद्ध महाविहार लगभग 902 वर्ग मी. परिक्षेत्र में निर्मित है।

सुरंग टीला - भूमि स्पर्श मुद्रा में प्रतिमा स्थापित है। बुद्ध के अतिरिक्त गर्भगृह से रत्नसंभव तथा पद्मपाणि की प्रतिमाएं भी प्राप्त हुई थी। गर्भगृह के सामने वाले मण्डप के चारों ओर लगभग 2.25- मी. चैड़ा गलियारा है। इस विहार में जल निकासी के लिए प्रस्तर निर्मित भूमिगत नाली के अवशेष भी प्राप्त हुए है। इस विहार के कक्षों को कालातंर में लघु गर्भगृहों (पूजा कक्षों) में परिवर्तन पश्चात् इस विहार के दक्षिण दिशा की ओर विस्तार किया गया तथा अनेक नवीन कक्षों का निर्माण किया गया तथा पूर्व की अपेक्षा एक अन्य बड़े मण्डप का (12.5 गुणा 9 मी.) भी निर्माण किया गया तथा चारों ओर 36 मी. लम्बा एवं 1.5 मी. चैड़ा गलियारा है। यह मण्ड 10 स्तंभों पर आधारित था। इस विस्तारित बाग में कतिपय सोपन सीढ़ियों) की प्राप्ति के आधार पर उत्खनन कर्ता द्वारा इसके दो मंजिला होने का अनुमान किया गया है।

इस विहार की सबसे बड़ी विशेषता इसका अत्यंत अलंकृत प्रवेश द्वार है जिसे देखकर बौद्ध विहार की अपेक्षा किसी मंदिर के गर्भगृह के प्रवेशद्वार की द्वार शाखाओं का स्मरण होता है। इस विहार के प्रवेश द्वार के शिल्पांकन में सर्वाधिक महत्वपूर्ण पशु मैथुन का दृश्य है। जिसमें हाथियों को मैथुन मुद्रा में प्रदर्शित किया गया है। यह इसलिए भी रोचक एवं जिज्ञासा वर्धक है कि प्रायः बौद्ध विहारों में इसके शिल्पांकन का अभाव है। इसी प्रकार पंचतंत्र वर्णित मगरमच्छ एवं वानर की कथा का उत्कीर्णन भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। तथा मंगोलियाई हाव-भाव युक्त नारी मूर्तियों के साथ-साथ आलिंगनबद्ध प्रणय प्रदर्शित करती युगल मूर्तियां भी आकर्षण का केन्द्र है। शिल्पाकंन की दृष्टि से यह प्रवेश द्वार दक्षिण कोसल की उच्च कला दक्षता को प्रदर्शित करता है। उपर्युक्त वर्णित शिल्पाकंनों के अतिरिक्त भेड़ों की लड़ाई एवं उन्हें प्रोत्साहित करते उनके स्वामी का दृश्यांकन समकालीन परिवेश में मनोरंजन के साधनों के बारे में जानकारी प्रदान करता है।

 

सामुदायिक डबरी निर्माण से जल संरक्षण और ग्रामीण आजीविका को मिलेगा नया आधार

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 लेख -शशिरत्न पाराशर, उप संचालक

धमतरी : जिले में जल संरक्षण, भूजल संवर्धन और ग्रामीण आजीविका के साधनों को मजबूत बनाने की दिशा में सामुदायिक डबरी निर्माण कार्यों को महत्वपूर्ण पहल के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। जिले में जल संरक्षण, भूजल संवर्धन और ग्रामीण आजीविका को मजबूत बनाने की दिशा में 34 सामुदायिक डबरी निर्माण जिनकी स्वीकृत राशि - 172.13 लाख रुपए महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहा है। वीबी-जी रामजी योजनांतर्गत संचालित इन कार्यों से ग्रामीण क्षेत्रों में जल संचयन की क्षमता बढ़ाने के साथ ही कृषि एवं अन्य आजीविका गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य केवल जल संचयन तक सीमित नहीं है, बल्कि उपलब्ध जल संसाधनों का उपयोग ग्रामीण आवश्यकताओं और आजीविका संवर्धन से जोड़ना भी है।


वर्षा जल संचयन से जल उपलब्धता बढ़ाने की पहल

ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि और अन्य गतिविधियों के लिए पानी की उपलब्धता महत्वपूर्ण है। विशेषकर वर्षा पर निर्भर खेती करने वाले किसानों के लिए जल संरक्षण की संरचनाएं उपयोगी साबित हो सकती हैं। सामुदायिक डबरी के माध्यम से वर्षा जल को एकत्रित कर स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उसका उपयोग किया जा सकता है। इससे जल संसाधनों के समुचित प्रबंधन को बढ़ावा मिलने के साथ ही पानी की उपलब्धता के वैकल्पिक साधन विकसित करने में सहायता मिलेगी।


सामुदायिक डबरी का महत्व इस बात में भी है कि एक ही जल संरचना का लाभ नियमानुसार अनेक ग्रामीण परिवारों तक पहुंचाया जा सकता है। सामूहिक उपयोग की व्यवस्था से जल संसाधनों के प्रति साझा जिम्मेदारी विकसित होती है और ग्रामीण समुदाय प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभा सकता है।

कृषि एवं आजीविका के विविध अवसरों को मिलेगा प्रोत्साहन

सामुदायिक डबरी में संचित जल का उपयोग स्थानीय परिस्थितियों, जल उपलब्धता और तकनीकी उपयुक्तता के आधार पर कृषि एवं अन्य अनुमेय गतिविधियों के लिए किया जा सकता है। इससे किसानों को खेती की बेहतर योजना बनाने, उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने और कृषि आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहित करने में सहयोग मिल सकता है।

जहां पर्याप्त जल उपलब्धता, उपयुक्त परिस्थितियां और आवश्यक तकनीकी सुविधाएं हों, वहां नियमानुसार मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों की संभावनाओं का भी आकलन किया जा सकता है। इस प्रकार जल संरचनाओं को आजीविका के अवसरों से जोड़कर ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने की दिशा में प्रयास किए जा सकते हैं। हालांकि, इन संभावनाओं का वास्तविक लाभ जल उपलब्धता, संरचना की उपयोगिता और संबंधित विभागीय प्रावधानों पर निर्भर करेगा।

टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण पर विशेष ध्यान

सामुदायिक डबरी की दीर्घकालीन उपयोगिता सुनिश्चित करने के लिए निर्माण कार्यों में निर्धारित तकनीकी मानकों, गुणवत्ता और विभागीय दिशा-निर्देशों का पालन आवश्यक है। इसके साथ ही कार्यों की नियमित निगरानी, समयबद्ध पूर्णता तथा निर्माण के बाद उचित रखरखाव पर भी ध्यान दिया जा रहा है। जल संरचनाओं का प्रभावी उपयोग तभी संभव है, जब उनके संरक्षण और संचालन में स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित हो।

ग्रामीणों को जल संचयन, जल के विवेकपूर्ण उपयोग और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूक करना भी इस पहल का महत्वपूर्ण पक्ष है। सामुदायिक सहभागिता से जल संरचनाओं के संरक्षण की जिम्मेदारी मजबूत होगी और निर्मित परिसंपत्तियों का लाभ लंबे समय तक प्राप्त किया जा सकेगा।

ग्रामीण विकास को मिलेगी स्थायी मजबूती

वीबी-जी रामजी योजनांतर्गत सामुदायिक डबरी निर्माण ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत संसाधनों के विकास और प्राकृतिक संपदा के बेहतर उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इन संरचनाओं से जल संरक्षण को बढ़ावा देने के साथ ही कृषि आधारित आजीविका को सहयोग देने की संभावनाएं विकसित होंगी। स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप परिसंपत्तियों का निर्माण, उनका उचित रखरखाव और सामूहिक उपयोग ग्रामीण विकास को अधिक टिकाऊ बनाने में सहायक हो सकते हैं।

गुणवत्ता और समयबद्ध पूर्णता पर जोर

इस संबंध में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री जयंत नाहटा ने बताया कि सामुदायिक डबरी निर्माण जल संरक्षण और ग्रामीण आजीविका संवर्धन की दृष्टि से महत्वपूर्ण कार्य है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षा जल का संचयन बढ़ाने तथा स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप जल संसाधनों की उपयोगिता विकसित करना है। ऐसी संरचनाएं वर्तमान आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ भविष्य के लिए भी प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में योगदान दे सकती हैं।

उन्होंने बताया कि सामुदायिक डबरी निर्माण कार्यों में निर्धारित तकनीकी मानकों, गुणवत्ता और विभागीय दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है। जनपद पंचायतों एवं मैदानी अमले को कार्यों की नियमित निगरानी करने तथा निर्धारित समय-सीमा में निर्माण पूर्ण कराने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही निर्मित परिसंपत्तियों के उचित रखरखाव और प्रभावी उपयोग पर भी ध्यान दिया जाएगा, ताकि ग्रामीणों को इनका दीर्घकालीन लाभ मिल सके।

सामुदायिक डबरी निर्माण की यह पहल जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन और ग्रामीण आजीविका को परस्पर जोड़ने का अवसर प्रदान करती है। गुणवत्तापूर्ण निर्माण, जनभागीदारी और सुनियोजित उपयोग के माध्यम से ये संरचनाएं गांवों को जल संरक्षण के प्रति अधिक सक्षम बनाने तथा ग्रामीण परिवारों को आजीविका के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने में सहायक हो सकती हैं।

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