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सरगुजा एकलव्य मामले पर मुख्यमंत्री हुए सख्त: जिला कलेक्टर से की फोन पर सीधी बात

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दिए जांच के निर्देश, कहा - बच्चियों को अपनी समस्या बताने के लिए पैदल निकलना पड़े, यह स्वीकार्य नहीं

जिम्मेदारी तय कर लापरवाह अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई के निर्देश

विद्यालय की बिजली, पढ़ाई, मेस सहित सभी व्यवस्थाएं तत्काल दुरुस्त करने के दिए निर्देश

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सरगुजा जिले के शिवपुर एकलव्य आवासीय विद्यालय की छात्राओं के अपनी समस्याओं को लेकर पैदल कलेक्टोरेट के लिए निकलने की घटना को गंभीरता से लिया है। घटना की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री ने सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत से दूरभाष पर चर्चा कर पूरे मामले की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने विद्यालय में लंबे समय से समस्याएं बने रहने और छात्राओं को अपनी बात रखने के लिए इस तरह पैदल निकलने की स्थिति उत्पन्न होने पर कड़ी नाराजगी जताई।

मुख्यमंत्री साय ने कलेक्टर से कहा कि बच्चियों को अपनी बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए विद्यालय से पैदल निकलना पड़े, यह स्थिति किसी भी तरह स्वीकार्य नहीं है। यदि विद्यालय में लंबे समय से बिजली सहित अन्य समस्याएं बनी हुई थीं, तो संबंधित अधिकारियों द्वारा समय रहते उनका समाधान क्यों नहीं किया गया। 

मुख्यमंत्री ने कलेक्टर को पूरे प्रकरण की जांच कर जिम्मेदारी तय करने और लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आदिवासी अंचलों के आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों में बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा तथा मूलभूत सुविधाओं को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मुख्यमंत्री साय ने छात्राओं द्वारा सामने लाई गई बिजली, शिक्षकों की कमी, नियमित पढ़ाई, मेस तथा साफ-सफाई से जुड़ी समस्याओं का तत्काल निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कलेक्टर से कहा कि केवल वर्तमान समस्याओं का समाधान पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे छात्राओं की समस्याएं विद्यालय एवं छात्रावास स्तर पर ही समय पर सुनी और दूर की जा सकें।

मुख्यमंत्री ने आवासीय विद्यालयों एवं छात्रावासों की व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा और अधिकारियों द्वारा सतत निरीक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि छात्रावासों में रहने वाले बच्चों को किसी परेशानी के समाधान के लिए प्रशासन तक स्वयं पहुंचने की ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न नहीं होनी चाहिए। बच्चों की समस्याओं और आवश्यकताओं की जानकारी लेना तथा समय पर उनका समाधान करना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश के आदिवासी अंचलों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार लगातार संसाधन उपलब्ध करा रही है। इन संसाधनों और योजनाओं का लाभ बच्चों तक सही ढंग से पहुंचे, यह सुनिश्चित करना मैदानी अधिकारियों की जिम्मेदारी है। शासन की मंशा स्पष्ट है कि प्रत्येक बच्चे को पढ़ाई के लिए सुरक्षित, सुविधाजनक और सकारात्मक वातावरण मिले।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे बच्चे हम पर विश्वास करके आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। उनकी छोटी से छोटी समस्या को भी संवेदनशीलता के साथ सुनना और उसका समयबद्ध समाधान करना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने जिला प्रशासन को छात्राओं से संवाद बनाए रखने और विद्यालय की व्यवस्थाओं में किए जा रहे सुधारों की सतत निगरानी करने के निर्देश दिए।

आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रही बंदियों की गणेश प्रतिमाएं

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केंद्रीय जेल रायपुर में बंदियों ने मिट्टी से तैयार की 500 पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाएं

प्रतिमाओं में तुलसी एवं विभिन्न पौधों के बीज, विसर्जन के बाद अंकुरित होकर बनेंगे पौधे

रायपुर- गणेशोत्सव के पावन अवसर पर केंद्रीय जेल रायपुर के बंदियों ने आस्था, रचनात्मकता और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संगम प्रस्तुत किया है। आगामी गणेशोत्सव के लिए केंद्रीय जेल रायपुर में बंदियों द्वारा प्राकृतिक मिट्टी से लगभग 1 से 2 फीट आकार की 500 पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाएं तैयार की गई हैं। इन प्रतिमाओं की खासियत यह है कि इनके निर्माण में प्राकृतिक मिट्टी एवं रंगों का उपयोग किया गया है तथा प्रतिमाओं में तुलसी सहित विभिन्न पौधों के बीज भी डाले गए हैं।

गणेशोत्सव के पश्चात इन प्रतिमाओं का विसर्जन किए जाने पर इनमें मौजूद बीज अंकुरित होकर पौधों का रूप लेंगे। इस प्रकार ये प्रतिमाएं धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और हरित संदेश को भी जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बनेंगी।

बंदियों की रचनात्मकता को मिला सकारात्मक दिशा

केंद्रीय जेल रायपुर में बंदियों द्वारा विभिन्न कौशल विकास एवं उत्पादन गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसी क्रम में लगभग 10 बंदियों ने अत्यंत लगन, मेहनत और रचनात्मकता के साथ भगवान श्री गणेश की इन आकर्षक प्रतिमाओं का निर्माण किया है। यह पहल बंदियों के कौशल विकास, रचनात्मक अभिव्यक्ति और सकारात्मक सोच को प्रोत्साहित करने के साथ उन्हें समाजोपयोगी एवं पर्यावरण हितैषी गतिविधियों से जोड़ने का सार्थक प्रयास है। मिट्टी की प्रतिमाओं में बीजों का समावेश इस कार्य को और विशेष बनाता है।

आस्था और प्रकृति संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं

जेल अधीक्षक रायपुर योगेश सिंह क्षत्री ने कहा कि केंद्रीय जेल रायपुर द्वारा बंदियों के पुनर्वास एवं आत्मनिर्भरता के लिए निरंतर विभिन्न कौशल विकास एवं उत्पादन गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसी क्रम में बंदियों द्वारा तैयार की गई ये बीजयुक्त पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाएं इस संदेश को साकार करती हैं कि आस्था और प्रकृति संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की रचनात्मक गतिविधियों से बंदियों को अपनी प्रतिभा और कौशल को सकारात्मक दिशा में उपयोग करने का अवसर मिलता है। साथ ही पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी ऐसे प्रयास महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


PM-SETU के तहत ITI आधुनिकीकरण को बड़ी मंजूरी, राजस्थान-UP-तेलंगाना के लिए ₹735.70 करोड़ के निवेश को स्वीकृति

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नई दिल्ली- देश में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) को आधुनिक और रोजगारपरक बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड ITIs (PM-SETU) योजना के तहत 5वीं राष्ट्रीय संचालन समिति (NSC) की बैठक में राजस्थान, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना के ITI क्लस्टरों के लिए कुल ₹735.70 करोड़ के निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।

बैठक की अध्यक्षता कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) की सचिव श्रीमती देबाश्री मुखर्जी ने की। बैठक में प्रशिक्षण महानिदेशालय (DGT) के महानिदेशक दिलीप कुमार, अतिरिक्त सचिव एवं वित्तीय सलाहकार जी. मधुमिता दास, संयुक्त सचिव मानसी सहाय ठाकुर सहित मंत्रालय और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, बहुपक्षीय विकास बैंकों के प्रतिनिधि और उद्योग जगत के साझेदार शामिल हुए।

9 ITI क्लस्टरों में अब तक ₹2,171 करोड़ का निवेश

5वीं NSC की मंजूरी के बाद PM-SETU के तहत अब तक 9 ITI क्लस्टरों के लिए कुल ₹2,171 करोड़ के निवेश को मंजूरी मिल चुकी है। सरकार का लक्ष्य इन संस्थानों को आधुनिक सुविधाओं, नई तकनीकों और उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है।

PM-SETU के तहत इंडस्ट्री-लेड हब एंड स्पोक मॉडल अपनाया जा रहा है। इसमें एक प्रमुख Hub ITI के साथ कई Spoke ITI को जोड़ा जाता है, जिससे संसाधनों, प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक का बेहतर समन्वय हो सके।

राजस्थान को ₹241 करोड़ की मंजूरी

राजस्थान के भिवाड़ी ITI क्लस्टर के लिए ₹241 करोड़ के Strategic Investment Plan (SIP) को मंजूरी दी गई है। इसे H.G. Infra Engineering Limited (HGIEL) ने प्रस्तुत किया था।

इस क्लस्टर में Government ITI Bhiwadi को Hub ITI बनाया गया है, जबकि Government ITI Alwar, Neemrana, Tijara और Kishangarh Bas को Spoke ITI के रूप में शामिल किया गया है।

तेलंगाना के लिए ₹254.30 करोड़

तेलंगाना के Medchal ITI क्लस्टर के लिए ₹254.30 करोड़ के निवेश प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। यह प्रस्ताव ZEN Technologies Limited ने प्रस्तुत किया था।

यह प्रस्ताव पहले 4वीं NSC बैठक में कुछ स्पष्टीकरणों के अभाव में टाल दिया गया था। बाद में कोर्स स्ट्रक्चर, वित्तीय गणना, पात्रता, दस्तावेज और सिविल वर्क्स से जुड़े विस्तृत स्पष्टीकरण दिए गए, जिसके बाद समिति ने जवाबों को संतोषजनक मानते हुए प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की।

इस क्लस्टर में Government ITI Medchal Hub के रूप में होगा, जबकि Alwal, Shameerpet, Kukunoorpally और Siddipet ITI को Spoke संस्थानों के रूप में शामिल किया गया है।

उत्तर प्रदेश के मेरठ ITI क्लस्टर को ₹240.40 करोड़

उत्तर प्रदेश के Meerut ITI क्लस्टर के लिए ₹240.40 करोड़ के Strategic Investment Plan को भी मंजूरी मिली है। यह प्रस्ताव National Skill Development Corporation (NSDC) ने प्रस्तुत किया था।

इस क्लस्टर में Government ITI, Saket, Meerut को Hub ITI बनाया गया है। इसके साथ Ghaziabad, Hapur, Gautam Buddha Nagar और Baghpat के Government ITI को Spoke ITI के रूप में जोड़ा गया है।

उद्योग की भागीदारी से बदलेगा ITI का स्वरूप

PM-SETU का उद्देश्य सरकारी ITI को आधुनिक तकनीक, बेहतर आधारभूत ढांचे और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण सुविधाओं से लैस करना है। स्वीकृत योजनाओं में इन्फ्रास्ट्रक्चर का आधुनिकीकरण, मौजूदा ट्रेड्स का अपग्रेडेशन, नए लॉन्ग-टर्म और शॉर्ट-टर्म कोर्स शुरू करना तथा संस्थानों की संचालन क्षमता मजबूत करना शामिल है।

इन योजनाओं से ITI में पढ़ने वाले युवाओं को उभरती तकनीकों और बदलती औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण मिलने की उम्मीद है। इससे रोजगार के नए अवसरों के लिए युवाओं की तैयारी को भी मजबूती मिलेगी।

राजस्थान बना PM-SETU के तहत SHA साइन करने वाला पहला राज्य

बैठक के दौरान एक महत्वपूर्ण उपलब्धि भी हासिल हुई। H.G. Infra Engineering Limited, राजस्थान सरकार और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (भारत सरकार) के बीच Shareholders' Agreement (SHA) पर हस्ताक्षर किए गए।

राजस्थान के कौशल, रोजगार एवं उद्यमिता विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संदीप वर्मा की मौजूदगी में हुए इस समझौते के साथ भिवाड़ी ITI क्लस्टर में PM-SETU के तहत कार्यान्वयन की औपचारिक शुरुआत हो गई। इसके साथ राजस्थान PM-SETU के तहत SHA पर हस्ताक्षर करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।

युवाओं को भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार करने पर जोर

PM-SETU केंद्र सरकार की प्रमुख कौशल विकास योजनाओं में से एक है, जिसका उद्देश्य ITI इकोसिस्टम को उद्योग के साथ जोड़कर आधुनिक बनाना है। योजना के तहत बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिक प्रशिक्षण कार्यक्रम और उद्योग आधारित कौशल के जरिए युवाओं की रोजगार क्षमता (Employability) बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

राजस्थान, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना के तीन ITI क्लस्टरों के लिए ₹735.70 करोड़ की ताजा मंजूरी को देश में आधुनिक, उद्योग-उन्मुख और भविष्य के रोजगार बाजार के लिए तैयार ITI विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

शराब घोटाले को लेकर सियासत गरम, पिछली कांग्रेस सरकार पर बड़े आरोप

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में शराब कारोबार को लेकर एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। प्रदेश सरकार के एक मंत्री ने पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान शराब कारोबार में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए गंभीर सवाल उठाए हैं।

मंत्री के मुताबिक, पिछली सरकार के दौरान शराब कारोबार में कथित गड़बड़ियों के चलते सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हुआ। उन्होंने पूरे मामले की जांच और जिम्मेदारी तय किए जाने की बात कही है।

शराब कारोबार में गड़बड़ी का आरोप

मंत्री ने आरोप लगाया कि पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में शराब की खरीदी-बिक्री और वितरण व्यवस्था में कथित तौर पर ऐसी अनियमितताएं हुईं, जिनका सीधा असर राज्य के राजस्व पर पड़ा। उनका दावा है कि इस पूरे मामले में बड़े स्तर पर आर्थिक नुकसान हुआ है।

हालांकि, लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के स्तर पर नहीं हुई है। मामले में वास्तविक स्थिति जांच और आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी।

जांच को लेकर बढ़ सकती है सियासत

शराब कारोबार से जुड़े आरोपों के सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप तेज होने के आसार हैं। सरकार की ओर से लगाए गए आरोपों पर विपक्ष की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

अब नजर इस बात पर है कि सरकार इन आरोपों के आधार पर आगे क्या कार्रवाई करती है और क्या पूरे मामले में कोई आधिकारिक जांच या दस्तावेजी खुलासा सामने आता है।

नवा रायपुर में सजेगा गोल्फ का बड़ा मंच, 15 सितंबर से शुरू होगा Nava Raipur Open 2026

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नवा रायपुर- छत्तीसगढ़ में गोल्फ प्रेमियों के लिए सितंबर का महीना खास होने जा रहा है। नवा रायपुर में 15 से 18 सितंबर 2026 तक प्रतिष्ठित Nava Raipur Open 2026 गोल्फ टूर्नामेंट का आयोजन किया जाएगा। चार दिवसीय इस प्रतियोगिता में देशभर के 132 प्रोफेशनल गोल्फर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।

टूर्नामेंट की कुल पुरस्कार राशि ₹1 करोड़ रखी गई है, जिससे प्रतियोगिता को लेकर खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों में खासा उत्साह है। नवा रायपुर में आयोजित होने वाला यह टूर्नामेंट प्रदेश में गोल्फ को नई पहचान देने और राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ को खेल के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

कपिल देव होंगे खास आकर्षण

टूर्नामेंट के लॉन्च कार्यक्रम में भारतीय क्रिकेट के दिग्गज कपिल देव भी शामिल होंगे। उनके जुड़ने से आयोजन को लेकर उत्साह और बढ़ गया है। खेल जगत की बड़ी हस्ती की मौजूदगी नवा रायपुर में होने वाले इस आयोजन को खास आकर्षण देगी।

चार दिन तक चलेगा रोमांच

15 से 18 सितंबर तक चलने वाले Nava Raipur Open 2026 में देश के विभिन्न हिस्सों से आए प्रोफेशनल गोल्फर खिताब और बड़ी पुरस्कार राशि के लिए मुकाबला करेंगे। प्रतियोगिता के दौरान दर्शकों को उच्च स्तर के गोल्फ मुकाबले देखने का अवसर मिलेगा।

नवा रायपुर में इस बड़े आयोजन से प्रदेश में स्पोर्ट्स टूरिज्म, गोल्फ संस्कृति और खेल अधोसंरचना को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। आयोजन को लेकर खेल जगत की नजरें अब नवा रायपुर पर टिक गई हैं।

आरंग के छात्रावासों की व्यवस्था पर उठे सवाल, जांच की मांग

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आरंग- आरंग के अकोली रोड स्थित प्री-मैट्रिक, आश्रम और पोस्ट-मैट्रिक छात्रावासों की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। ग्रामीणों ने छात्रावासों की व्यवस्था से संबंधित कुछ गंभीर आरोपों की जानकारी देते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

ग्रामीणों के अनुसार, पोस्ट-मैट्रिक छात्रावास की अधीक्षिका के नियमित रूप से छात्रावास में उपस्थित नहीं रहने की शिकायत सामने आई है। वहीं प्री-मैट्रिक एवं आश्रम छात्रावास की अधीक्षिका के संबंध में भी छात्रावास परिसर में निवास नहीं करने का आरोप लगाया गया है।

फर्जी प्रवेश और खाद्यान्न को लेकर भी शिकायत

शिकायत में छात्रावास में फर्जी विद्यार्थियों के प्रवेश को दर्शाए जाने का भी आरोप लगाया गया है। इसके अलावा छात्रावास में बच्चों के लिए उपलब्ध चावल को कथित तौर पर अजय गुप्ता नामक व्यक्ति को बेचे जाने की बात भी शिकायत में कही गई है।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए विभागीय स्तर पर दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच बेहद जरूरी है।

बच्चों के भविष्य से जुड़ा मामला

छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थी शासन की ओर से मिलने वाली सुविधाओं पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में यदि वास्तव में छात्रावासों में अधीक्षकों की नियमित उपस्थिति नहीं है, विद्यार्थियों की संख्या में गड़बड़ी है या खाद्यान्न के वितरण में अनियमितता हो रही है, तो यह गंभीर प्रशासनिक विषय हो सकता है।

इसलिए छात्रावासों में दर्ज विद्यार्थियों की संख्या और वास्तविक उपस्थिति, प्रवेश रजिस्टर, खाद्यान्न स्टॉक रजिस्टर, वितरण रजिस्टर तथा अधीक्षकों की उपस्थिति से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की जानी चाहिए।

पुलिस विभाग में पति होने का प्रभाव दिखाने का भी आरोप

शिकायत में यह आरोप भी लगाया गया है कि संबंधित अधीक्षिका अपने पुलिस विभाग में पदस्थ पति का प्रभाव दिखाकर लोगों पर दबाव बनाने का प्रयास करती हैं। इस आरोप की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इसकी सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

अचानक निरीक्षण से सामने आ सकती है सच्चाई

मामले में सबसे महत्वपूर्ण कदम संबंधित विभाग द्वारा अचानक छात्रावास निरीक्षण करना होगा। यदि अधिकारियों द्वारा बिना पूर्व सूचना के निरीक्षण किया जाता है तो छात्रावास में विद्यार्थियों की वास्तविक संख्या, उपस्थिति, भोजन व्यवस्था और उपलब्ध खाद्यान्न की स्थिति की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।

इसके साथ ही पिछले कुछ महीनों के रिकॉर्ड की जांच कर यह भी देखा जाना चाहिए कि छात्रावास में दर्ज विद्यार्थियों की संख्या और वास्तव में उपस्थित विद्यार्थियों की संख्या में कोई अंतर तो नहीं है।

विभाग से निष्पक्ष जांच की मांग

ग्रामीणों द्वारा सामने रखी गई शिकायत में लगाए गए आरोपों को देखते हुए अब संबंधित विभाग से निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं यदि आरोप गलत पाए जाते हैं तो विभाग द्वारा स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

फिलहाल मामला जांच का विषय है और किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराने से पहले संबंधित अधिकारियों एवं आरोपित पक्ष का पक्ष जानना आवश्यक है।

अब देखने वाली बात यह है कि संबंधित विभाग आरंग के इन छात्रावासों का औचक निरीक्षण कर शिकायत में लगाए गए आरोपों की सच्चाई सामने लाता है या नहीं।


छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: निजी शरिया कोर्ट कानूनी तलाक नहीं दे सकती

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रायपुर- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने निजी शरिया अदालतों और धार्मिक संस्थाओं के अधिकार को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कोई भी निजी धार्मिक संस्था या खुद को शरिया कोर्ट बताने वाला संगठन कानून द्वारा स्थापित अदालत का दर्जा नहीं रखता। ऐसी संस्था धार्मिक राय या फतवा दे सकती है, लेकिन वह किसी व्यक्ति की वैवाहिक स्थिति को कानूनी रूप से बदलने या विवाह-विच्छेद का बाध्यकारी आदेश जारी करने का अधिकार नहीं रखती।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला रायपुर की एक मुस्लिम महिला नीरोश अब्बासी से जुड़ा है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, उनके पहले पति की वर्ष 2015 में मृत्यु हो गई थी। इसके बाद उन्होंने वर्ष 2020 में मोहम्मद आबिद खान से विवाह किया।

बाद में पति-पत्नी के बीच विवाद उत्पन्न हुआ। विवाद का एक कारण बच्चों के नए पारिवारिक माहौल में समायोजन को लेकर भी बताया गया है। मामला बढ़ने के बाद महिला ने अपने पति और ससुराल पक्ष पर उत्पीड़न, क्रूरता और दुर्व्यवहार के आरोप लगाए। दोनों पक्षों के बीच समझौते और काउंसलिंग की कोशिश भी हुई, लेकिन विवाद का समाधान नहीं हो सका।

शरिया संस्था ने क्या आदेश दिया था?

विवाद के बीच रायपुर की एक निजी शरिया संस्था ने 18 जनवरी 2022 को एक आदेश जारी किया था। इस आदेश में महिला को उसके पति से तलाकशुदा घोषित किया गया था।

महिला ने इस आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनका मुख्य सवाल यह था कि क्या किसी निजी धार्मिक संस्था के पास किसी व्यक्ति की वैवाहिक स्थिति को कानूनी रूप से बदलने का अधिकार हो सकता है?

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए निजी शरिया संस्था के उस आदेश को कानूनी अधिकार से बाहर और प्रभावहीन घोषित कर दिया।

कोर्ट ने साफ किया कि Darul Qaza जैसी निजी धार्मिक संस्थाएं संवैधानिक या कानून द्वारा स्थापित अदालत नहीं हैं। वे धार्मिक दृष्टिकोण या राय व्यक्त कर सकती हैं, लेकिन उनके आदेश किसी व्यक्ति के कानूनी अधिकार, वैवाहिक स्थिति या कानूनी दायित्व को बाध्यकारी रूप से बदल नहीं सकते।

यानी आसान शब्दों में कहें तो—

धार्मिक राय अलग चीज है और कानूनी फैसला अलग।

किसी धार्मिक संस्था द्वारा यह कह देना कि किसी व्यक्ति का विवाह समाप्त हो गया है, अपने आप में ऐसा कानूनी आदेश नहीं बन जाता जिसे राज्य की न्याय व्यवस्था बाध्यकारी माने।

कोर्ट ने किन बातों पर जोर दिया?

हाईकोर्ट का फैसला मुख्य रूप से इस बात पर केंद्रित था कि किस संस्था के पास कानूनी रूप से वैवाहिक अधिकारों पर फैसला करने का अधिकार है।

कोर्ट ने माना कि:

  • निजी शरिया संस्था कानून द्वारा स्थापित न्यायालय नहीं है।

  • ऐसी संस्था धार्मिक राय या फतवा दे सकती है।

  • वह किसी व्यक्ति की वैवाहिक स्थिति का बाध्यकारी न्यायिक निर्धारण नहीं कर सकती।

  • वह अपने आदेश से किसी व्यक्ति का कानूनी विवाह समाप्त नहीं कर सकती।

  • वैवाहिक अधिकारों और कानूनी स्थिति का निर्धारण सक्षम न्यायिक/कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से ही होगा।

क्या हाईकोर्ट ने 'Talaq-e-Hasan' को गलत या असंवैधानिक घोषित कर दिया?

नहीं। यह बात समझना बहुत जरूरी है।

हाईकोर्ट ने इस मामले में Talaq-e-Hasan की संवैधानिक वैधता पर अंतिम फैसला नहीं दिया। अदालत ने इस मुद्दे को खुला रखा और कहा कि संबंधित पक्ष कानून के अनुसार सक्षम मंच पर अपना मामला उठा सकते हैं।

इसलिए इस फैसले का सीधा मतलब यह नहीं है कि कोर्ट ने मुस्लिम तलाक की किसी विशेष धार्मिक प्रक्रिया को पूरी तरह असंवैधानिक घोषित कर दिया है।

फैसले का मुख्य मुद्दा था—क्या निजी शरिया संस्था स्वयं एक कानूनी अदालत की तरह विवाह समाप्त करने का बाध्यकारी आदेश दे सकती है?

इसका जवाब हाईकोर्ट ने नहीं में दिया।

महिला के मामले पर इसका क्या असर होगा?

हाईकोर्ट द्वारा शरिया संस्था के आदेश को कानूनी अधिकार से बाहर बताए जाने का मतलब है कि उस निजी संस्था के आदेश के आधार पर महिला की वैवाहिक स्थिति को कानूनी रूप से समाप्त नहीं माना जा सकता।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका फैसला महिला के उपलब्ध अन्य कानूनी या वैधानिक उपायों को प्रभावित नहीं करेगा। मामले से जुड़े आपराधिक proceedings पर भी इस निर्णय का प्रतिकूल प्रभाव नहीं माना गया है।

इस फैसले का महत्व क्यों है?

यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें धार्मिक संस्थाओं और राज्य की न्यायिक व्यवस्था के अधिकार क्षेत्र की सीमा को स्पष्ट किया गया है।

भारत में अलग-अलग धार्मिक समुदायों में व्यक्तिगत कानून और धार्मिक परंपराओं का महत्व है। लेकिन जब किसी व्यक्ति के कानूनी अधिकार, वैवाहिक स्थिति या अन्य नागरिक अधिकारों पर बाध्यकारी फैसला देने की बात आती है, तो सवाल यह होता है कि उस फैसले को कानूनी मान्यता देने का अधिकार किस संस्था के पास है।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस मामले में स्पष्ट किया कि निजी धार्मिक संस्था का आदेश अपने आप में न्यायालय के आदेश के बराबर नहीं हो सकता।

आसान भाषा में समझें

मान लीजिए किसी निजी धार्मिक संस्था ने किसी दंपति के बारे में कहा कि उनका विवाह खत्म हो गया है।

हाईकोर्ट के इस फैसले के अनुसार, सिर्फ उस संस्था के कहने से सरकारी रिकॉर्ड और कानूनी व्यवस्था में विवाह समाप्त नहीं माना जा सकता।

धार्मिक राय = धार्मिक/सामुदायिक महत्व हो सकता है।

न्यायालय का कानूनी आदेश = राज्य की न्याय व्यवस्था में बाध्यकारी कानूनी प्रभाव।

यही इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रायपुर से जुड़े इस मामले में निजी शरिया संस्था द्वारा जारी तलाक संबंधी आदेश को कानूनी अधिकार के बिना जारी किया गया आदेश माना है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी संस्थाएं धार्मिक राय दे सकती हैं, लेकिन किसी व्यक्ति की वैवाहिक स्थिति को कानूनी रूप से बदलने या विवाह-विच्छेद का बाध्यकारी आदेश देने का अधिकार उनके पास नहीं है।

हालांकि, अदालत ने Talaq-e-Hasan की संवैधानिक वैधता पर कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है। इसलिए इस फैसले को निजी शरिया संस्था के कानूनी अधिकार के सवाल तक सीमित समझना अधिक सही होगा।

नवविवाहिता की मौत का 48 घंटे में खुलासा, पति ने रस्सी से गला घोंटकर की थी हत्या

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 धमतरी। जिले के सुपेला गांव में नवविवाहिता की संदिग्ध मौत के मामले का पुलिस ने 48 घंटे के भीतर खुलासा कर दिया है। महिला ने आत्महत्या नहीं की थी, बल्कि उसके पति ने ही नायलॉन की रस्सी से गला घोंटकर उसकी हत्या की थी। वारदात के बाद आरोपी ने शव को फंदे पर लटकाकर घटना को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच में हत्या की साजिश सामने आ गई।


जन्माष्टमी के दिन मिली थी आत्महत्या की सूचना

मामला भखारा थाना क्षेत्र के सुपेला गांव का है। 5 सितंबर, जन्माष्टमी के दिन पुलिस को वीणा उर्फ बबली ठाकुर के आत्महत्या करने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही पुलिस और एफएसएल की टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल की जांच शुरू की।

जांच के दौरान महिला के गले पर पतली वस्तु या बारीक कपड़े से गला घोंटे जाने जैसे निशान मिले। वहीं मृतिका के पति विवेक ध्रुव उर्फ गोलू ने पुलिस को बताया कि वह खेत से लौटने के बाद पत्नी के कमरे में गया था। शाम करीब साढ़े पांच बजे कमरे में पहुंचने पर पत्नी संदिग्ध हालत में मिली। परिजनों ने पहले इसे दिल का दौरा समझकर डॉक्टर को बुलाया, लेकिन डॉक्टर ने महिला को मृत घोषित कर दिया।

मायके पक्ष ने जताया था हत्या का संदेह

घटना के बाद मायके पक्ष ने महिला की हत्या किए जाने का आरोप लगाया। पुलिस ने मर्ग कायम कर परिजनों और अन्य गवाहों के बयान दर्ज किए। इसी दौरान पोस्टमार्टम रिपोर्ट में महिला की मौत मानववध (Homicidal) पाए जाने के बाद पुलिस ने आत्महत्या के बजाय हत्या के एंगल से जांच शुरू की।

पूछताछ में पति ने कबूला जुर्म

जांच के दौरान पुलिस ने मृतिका के पति विवेक ध्रुव को थाने बुलाकर पूछताछ की। कड़ाई से पूछताछ करने पर उसने हत्या की बात कबूल कर ली।

पुलिस के अनुसार, आरोपी को अपनी पत्नी के मोबाइल फोन के जरिए किसी अन्य व्यक्ति से बातचीत करने का शक था। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ था। आरोपी ने पुलिस को बताया कि 4 सितंबर की शाम करीब 5 बजे विवाद के दौरान गुस्से में आकर उसने नायलॉन की रस्सी से पत्नी का गला घोंट दिया।

हत्या के बाद रची आत्महत्या की कहानी

पत्नी की हत्या करने के बाद आरोपी घबरा गया। पुलिस के मुताबिक, कानून से बचने के लिए उसने शव को फंदे पर लटका दिया और पूरी घटना को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की। लेकिन घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने उसकी कहानी की पोल खोल दी।

आरोपी पति के अपराध स्वीकार करने के बाद पुलिस ने विवेक ध्रुव को गिरफ्तार कर लिया। उसके खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।

पुलिस की त्वरित जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर नवविवाहिता की संदिग्ध मौत के पीछे छिपी हत्या की पूरी कहानी 48 घंटे के भीतर सामने आ गई।

9 सितंबर को होगी साय कैबिनेट की बैठक, कई अहम प्रस्तावों पर लग सकती है मुहर

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 रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में 9 सितंबर को मंत्रिपरिषद की बैठक होगी। बैठक सुबह 11:30 बजे मंत्रालय महानदी भवन स्थित मंत्रिपरिषद कक्ष एम-5/20 में आयोजित की जाएगी। बैठक में प्रदेश से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों और प्रस्तावों पर चर्चा के साथ कई अहम निर्णय लिए जाने की संभावना है।


एक महीने बाद हो रही कैबिनेट बैठक

मंत्रिपरिषद की पिछली बैठक 5 अगस्त को हुई थी। करीब एक महीने बाद होने जा रही इस बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में विकास योजनाओं, प्रशासनिक विषयों और विभिन्न विभागों से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा हो सकती है। सरकार की ओर से लिए जाने वाले फैसलों पर सभी की नजर रहेगी।

पिछली बैठक में AI मिशन को मिली थी मंजूरी

पिछली कैबिनेट बैठक में ‘छत्तीसगढ़ राज्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मिशन’ को मंजूरी दी गई थी। पांच वर्ष की अवधि वाले इस मिशन पर 500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसका उद्देश्य राज्य में सुशासन, नई तकनीक, कौशल विकास और डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है।

मिशन के तहत 100 AI डेटा लैब और पांच सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे। साथ ही 300 से अधिक AI स्टार्टअप्स को सहायता देने, छह लाख विद्यार्थियों और 1.5 लाख सरकारी कर्मचारियों को AI प्रशिक्षण देने तथा 50 से अधिक AI आधारित सेवाएं विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।

BEML को रियायती दर पर जमीन देने की मंजूरी

कैबिनेट ने राज्य में हैवी अर्थ मूविंग इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग संयंत्र स्थापित करने के लिए भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) को रियायती दर पर भूमि आवंटित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। राज्य में प्रस्तावित यह अपनी तरह का पहला उद्योग होगा। इससे बड़े निवेश के साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और MSME क्षेत्र को लाभ मिलने की उम्मीद है।

निर्माण कार्यों के लिए WAMIS लागू करने का फैसला

लोक निर्माण विभाग में निर्माण कार्यों के डिजिटल प्रबंधन के लिए Works and Account Management Information System (WAMIS) लागू करने के प्रथम चरण को भी मंजूरी दी गई थी। इसके तहत कार्यों की स्वीकृति, ई-प्राक्कलन, ई-प्रोक्योरमेंट, ई-मेजरमेंट बुक, बिल भुगतान, लेखा प्रबंधन और गुणवत्ता निगरानी जैसी प्रक्रियाओं को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जाएगा।

ग्राम सड़क योजना में किए गए बदलाव

मंत्रिपरिषद ने मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं विकास योजना के तहत बारहमासी सड़कों के निर्माण संबंधी दिशा-निर्देशों में संशोधन को मंजूरी दी थी। इसके तहत ग्रामीण आंतरिक गलियों में सीसी सड़क एवं नाली निर्माण तथा सड़क निर्माण से पहले मनरेगा से मिट्टी कार्य की अनिवार्यता समाप्त की गई है। योजना की पात्रता का दायरा भी बढ़ाया गया है।

ADB से मिलेगा 15 करोड़ रुपये का अनुदान

‘छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047’ के क्रियान्वयन के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) से ‘Anjor LIGHT’ तकनीकी सहायता परियोजना के तहत 15 करोड़ रुपये का पूर्ण अनुदान प्राप्त करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली थी। तीन वर्ष की इस परियोजना में राज्य शासन या केंद्र सरकार का कोई वित्तीय अंशदान नहीं होगा।

परियोजना के तहत सार्वजनिक वित्त प्रबंधन को मजबूत करने, PPP इकोसिस्टम विकसित करने, ग्रीन एवं ब्लेंडेड फाइनेंस को बढ़ावा देने और जलवायु अनुकूल परियोजनाओं के विकास पर काम किया जाएगा।

सरकारी योजनाओं के लिए S-SNA मॉडल मंजूर

राज्य योजनाओं के लिए State Single Nodal Agency (S-SNA) मॉडल लागू करने के प्रस्ताव को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी थी। इसका उद्देश्य सरकारी योजनाओं की राशि का अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है।

नई व्यवस्था के तहत विभिन्न बैंक खातों में लंबे समय तक राशि निष्क्रिय रहने के बजाय केंद्रीकृत मदर अकाउंट के माध्यम से जरूरत के अनुसार सीधे हितग्राहियों या वेंडरों को भुगतान किया जाएगा। इससे वित्तीय अनुशासन और रियल-टाइम निगरानी को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

CSPGCL को 200 करोड़ तक के बॉन्ड जारी करने की अनुमति

कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (CSPGCL) को 200 करोड़ रुपये तक के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD) या बॉन्ड जारी कर स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।

इससे कंपनी को वित्तीय संसाधन जुटाने के नए विकल्प मिलेंगे और ऊर्जा क्षेत्र में निवेश तथा विद्युत अवसंरचना के विकास को गति मिलने की उम्मीद है। राज्य शासन की ओर से मूलधन और ब्याज के भुगतान पर प्रत्याभूति शुल्क में छूट सहित गारंटी भी प्रदान की जाएगी।

अब 9 सितंबर को होने वाली कैबिनेट बैठक में किन नए प्रस्तावों पर मुहर लगती है और सरकार की ओर से कौन से महत्वपूर्ण फैसले लिए जाते हैं, इस पर सभी की नजर रहेगी।

जस्टिस महापात्र ने संभाली छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की कमान, बने 16वें मुख्य न्यायाधीश

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रायपुर :  राज्यपाल रमेन डेका ने न्यायाधिपति  कृष्न राम महापात्र  (Krushna Ram Mohapatra) को आज लोकभवन के छत्तीसगढ़ मण्डपम् में उच्च न्यायालय, छत्तीसगढ़ के मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ दिलाई। इसके पूर्व  कृष्न राम महापात्र उड़ीसा हाईकोर्ट के वरिष्ठ जज के पद पर कार्यरत थे। राज्यपाल डेका ने मुख्य न्यायाधीश  कृष्न राम महापात्र को राष्ट्रपति द्वारा जारी मूल वारंट की प्रति सौंपी। राज्यपाल ने मुख्य न्यायाधीश  महापात्र को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। 


इस अवसर पर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय, उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा, स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेंद्र यादव, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री  तोखन साहू, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व राज्यपाल  रमेश बैस, राज्य सभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, विधायक  सुनील सोनी,  अनुज शर्मा एवं अन्य जनप्रतिनिधि भी उपस्थित थे।


समारोह में मुख्य न्यायाधीश  महापात्र की धर्मपत्नी अनिता महापात्र सहित छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायाधीशगण उपस्थित थे। शपथ ग्रहण समारोह का संचालन प्रदेश के मुख्य सचिव विकास शील द्वारा किया गया तथा उन्होंने राष्ट्रपति द्वारा जारी वारंट का वाचन किया। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव  सुब्रत साहू, प्रमुख सचिव गृह विभाग निहारिका बारिक, पुलिस महानिदेशक  अरूण देव गौतम, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, महाधिवक्ता  विवेक शर्मा, उच्च न्यायालय बिलासपुर के रजिस्ट्रार जनरल  रजनीश श्रीवास्तव सहित राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारीगण एवं हाईकोर्ट के अधिवक्तागण उपस्थित थे। 

उल्लेखनीय है कि  महापात्र छत्तीसगढ़ के 16 वें मुख्य न्यायाधीश होंगे।

बिहान से बदली राह 35 महिला किसानों ने 600 क्विंटल सब्जी उगाकर लिखी सफलता की नई कहानी

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उजाला उत्पादक समूह की दीदियों ने सामूहिक खेती से हासिल की नई पहचान, सीधे थोक बिक्री से 6 लाख रूपए की आय

रायपुर-  पारंपरिक खेती से हटकर हरी सब्जियों की आधुनिक और वैज्ञानिक खेती अपनाने वाले कई किसानों ने अपनी मेहनत और सूझबूझ से सफलता की नई कहानियां लिखी हैं, जिनमें  ग्राम पंचायत रिसोरा में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ी महिलाओं ने सामूहिक खेती जैसी प्रेरणादायक मिसालें शामिल हैं, जो कभी दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष करती थी और आज लाखों की कमाई कर रही हैं।

छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत रिसोरा में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ी महिलाओं ने सामूहिक खेती के जरिए आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है। छोटे से भूखंड पर भी टमाटर, बैंगन, लौकी या करेला, खीरा जैसी सब्जियां उगाकर किसान प्रति बीघा या एकड़ कई गुना अधिक मुनाफा कमा रहे हैं। उजाला उत्पादक समूह से जुड़ी 35 महिला किसानों ने एकजुट होकर न केवल लागत घटाई, बल्कि 600 क्विंटल सब्जियों का रिकॉर्ड उत्पादन कर करीब 6 लाख रूपए की आय अर्जित की है।

2 लाख रूपए की शुरुआती पूंजी से मिली नई उड़ान

वर्ष 2025 में गठित इस समूह का उद्देश्य सामूहिक प्रयास के ज़रिए उत्पादन बढ़ाना और बेहतर बाज़ार तलाशना था। आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए समूह को क्लस्टर से स्टार्टअप राशि 50 हजार रूपए, सखी क्लस्टर संगठन, बुदेली से ऋण 1 लाख 50 हजार रूपए, कुल शुरुआती पूंजी 2 लाख रूपए। इस पूंजी की मदद से महिलाओं ने अपने खेतों में वैज्ञानिक तकनीक अपनाते हुए लौकी, करेला और खीरा की खेती शुरू की।

600 क्विंटल सब्जियों की बंपर पैदावार

महिलाओं की कड़ी मेहनत और आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रयोग से खेतों में शानदार उत्पादन हुआ। सब्जी की फसल से बचत बढने लगी तो महिलाओं का हौसला बढ़़ा। इसके साथ ही फसल का दायरा बढ़ाने लगी, जिससे पैदावार में बढ़ोत्तरी होने लगी। महिलाओं ने सामूहिक खेती कर लौकी 250 क्विंटल, करेला 250 क्विंटल, खीरा 100 क्विंटल का उत्पादन की। कुल सब्जी उत्पादन 600 क्विंटल होने लगा। 

बिचौलियों से मुक्ति, सीधे थोक बाजार से जुड़ाव

सफलता की सबसे बड़ी कड़ी महिलाओं की विपणन (मार्केटिंग) रणनीति रही। बिचौलियों पर निर्भर रहने के बजाय समूह की दीदियों ने अपनी उपज को सीधे थोक बाजार तक पहुंचाया। इससे फसल का उचित दाम मिला और कुल आय 6 लाख रूपए तक पहुंच गई।

सुशासन और जमीनी मॉनिटरिंग का असर

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार बिहान योजना के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर निरंतर कार्य कर रही है। जिला प्रशासन द्वारा बेहतर क्रियान्वयन, मैदानी मार्गदर्शन और सतत् मॉनिटरिंग से योजनाओं का सीधा लाभ हितग्राहियों तक पहुंच रहा है, जिससे ग्रामीण महिलाएं स्वरोजगार के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रही हैं।

छत्तीसगढ़- सात सिंचाई योजनाओं के लिए 30.74 करोड़ रूपए स्वीकृत,किसानों को मिलेगी बेहतर सिंचाई सुविधा

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बलौदाबाजार-भाटापारा और रायपुर जिले के हजारों हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को मिलेगा फायदा

रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार के जल संसाधन विभाग ने राज्य में सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से सात प्रमुख सिंचाई योजनाओं के लिए कुल 30 करोड़ 74 लाख 39 हजार रूपए की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की है। इस राशि का उपयोग नहरों के जीर्णाेद्धार, रिमॉडलिंग, सीसी लाइनिंग और भूमिगत पाइपलाइन निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए किया जाएगा।

जल संसाधन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिलेवार स्वीकृत कार्यों में बलौदाबाजार-भाटापारा जिला के बलौदा शाखा नहर (वितरक 11 एवं 12)में रिमॉडलिंग, सीसी लाइनिंग एवं पक्के निर्माण कार्यों के लिए 4.99 करोड़ रूपए स्वीकृत किए गए हैं, इससे 339.05 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा सुनिश्चित होगी। इसी प्रकार सोंढूर परियोजना (बेन्द्री वितरक नहर) के भाटापारा शाखा नहर के बेन्द्री वितरक नहर की रिमॉडलिंग व सीसी लाइनिंग के लिए 4.82 करोड़ मंजूर। इससे 355 हेक्टेयर क्षेत्र को पानी मिलेगा। 

रायपुर जिला (धरसींवा विकासखंड) के भाटापारा शाखा नहर कार्य में महानदी परियोजना अंतर्गत विभिन्न सुधार कार्यों हेतु 4.20 करोड़ रूपए, मांढ़र शाखा नहर (वितरक 14) के आर.डी. 2700 मीटर से 3500 मीटर तक नहर को ह्यूम पाइप के माध्यम से भूमिगत करने के लिए 4.90 करोड़ रूपए स्वीकृत किए गए हैं। मांढ़र ब्रांच केनाल सर्विस रोडरू आर.डी. 31600 मीटर से 32900 मीटर तक डामर रोड निर्माण के लिए 1.90 करोड़ रूपए, मांढ़र शाखा नहर (वितरक 8 व माइनर 1) में भूमिगत पाइपलाइन तथा कंक्रीट व मुरमीकरण रोड निर्माण के लिए 4.92 करोड़ रूपए, मांढ़र शाखा नहर (वितरक 11।, 13, 14 व माइनर्स) महानदी परियोजना समूह के अंतर्गत जीर्णाेद्धार कार्यों के लिए 4.97 करोड़ रूपए की स्वीकृति दी गई है।

जल संसाधन विभाग द्वारा स्वीकृत इन विकास कार्यों से क्षेत्र में जल प्रबंधन बेहतर होगा और अंतिम छोर (टेल एरिया) तक किसानों के खेतों को पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सकेगा।

डिजिटल क्रांति की राह पर सारंगढ़-बिलाईगढ़

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विष्णु प्रसाद वर्मा,गुलाब डडसेना,    

सहायक संचालक

तकनीक से बदली खेती की तस्वीर, डिजिटल क्रॉप सर्वे में रचा इतिहास

रायपुर- छत्तीसगढ़ का नवगठित जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ तकनीक के प्रभावी उपयोग और दूरदर्शी प्रशासनिक रणनीति के बल पर प्रदेश में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। कृषि क्षेत्र को पारदर्शी और आधुनिक बनाने की दिशा में संचालित राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना डिजिटल क्रॉप सर्वे के क्रियान्वयन में जिले ने समूचे प्रदेश को पीछे छोड़ते हुए प्रथम स्थान हासिल किया है। प्रदेश स्तरीय रिपोर्ट में 87 प्रतिशत कार्य पूर्णता के साथ सारंगढ़-बिलाईगढ़ ने यह शीर्ष स्थान प्राप्त किया है, जबकि 86 प्रतिशत के साथ खैरागढ़ दूसरे और 81 प्रतिशत के साथ कोरिया तीसरे स्थान पर है।

प्रदेश में 88.45 प्रतिशत डिजिटल क्रॉप सर्वे

मैदानी स्तर पर मुस्तैदी और कड़े प्रशासनिक नियंत्रण के बूते जिले में कुल 53 हजार 524 लक्षित प्लॉटों के सापेक्ष 47 हजार 350 प्लॉटों का सर्वे पूरा कर लिया गया है, जो 88.45 प्रतिशत की वास्तविक प्रगति को दर्शाता है। केवल सर्वे ही नहीं, बल्कि डेटा सत्यापन और अनुमोदन में भी तेजी लाते हुए 35 हजार 476 मामलों को अनुमोदित किया जा चुका है।

सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की सभी छह तहसीलों में सर्वे का काम एक होड़ की तरह आगे बढ़ रहा है, जिसमें 93.27 प्रतिशत प्रगति के साथ सारसींवा तहसील सबसे आगे है। इसके ठीक पीछे भटगांव तहसील ने 93.15 प्रतिशत का आंकड़ा हासिल कर बेहतरीन प्रदर्शन किया है। जिले के सबसे बड़े राजस्व क्षेत्र सारंगढ़ ने भी 88.60 प्रतिशत सर्वे पूर्ण करने के साथ-साथ सर्वाधिक 84.36 प्रतिशत अनुमोदन दर्ज कराकर प्रशासनिक दक्षता की मिसाल पेश की है। इसी तरह सारिया, बिलाईगढ़ और बरमकेला तहसीलों में भी 84 से 86 प्रतिशत से अधिक कार्य पूर्ण हो चुका है।

डिजिटल ब्यौरा सटीक पारदर्शी व्यवस्था बनाएगा

राजस्व और कृषि विभाग की पूरी टीम शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के लिए मुस्तैद है। मैदानी अमले के साथ सतत समन्वय और नियमित समीक्षा के बल पर बचे हुए प्लॉटों का काम भी तेजी से निपटाया जा रहा है। फसलों का यह सटीक डिजिटल ब्योरा न केवल पारदर्शी व्यवस्था बनाएगा, बल्कि आने वाले समय में किसानों को बीमा दावों से लेकर शासकीय योजनाओं का सीधा लाभ दिलाने में एक मील का पत्थर साबित होगा।

राज्यपाल डेका ने न्यायाधिपति कृष्न राम महापात्र को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पद की दिलाई शपथ

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रायपुर- राज्यपाल रमेन डेका ने न्यायाधिपति कृष्न राम महापात्र  (Krushna Ram Mohapatra) को आज लोकभवन के छत्तीसगढ़ मण्डपम् में उच्च न्यायालय, छत्तीसगढ़ के मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ दिलाई। इसके पूर्व कृष्न राम महापात्र उड़ीसा हाईकोर्ट के वरिष्ठ जज के पद पर कार्यरत थे। राज्यपाल डेका ने मुख्य न्यायाधीश कृष्न राम महापात्र को राष्ट्रपति द्वारा जारी मूल वारंट की प्रति सौंपी। राज्यपाल ने मुख्य न्यायाधीश महापात्र को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। 

इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री तोखन साहू, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व राज्यपाल रमेश बैस, राज्य सभा सांसद लक्ष्मी वर्मा, विधायक सुनील सोनी, अनुज शर्मा एवं अन्य जनप्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

समारोह में मुख्य न्यायाधीश महापात्र की धर्मपत्नी अनिता महापात्र सहित छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायाधीशगण उपस्थित थे। शपथ ग्रहण समारोह का संचालन प्रदेश के मुख्य सचिव विकास शील द्वारा किया गया तथा उन्होंने राष्ट्रपति द्वारा जारी वारंट का वाचन किया। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, प्रमुख सचिव गृह विभाग निहारिका बारिक, पुलिस महानिदेशक अरूण देव गौतम, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना, महाधिवक्ता विवेक शर्मा, उच्च न्यायालय बिलासपुर के रजिस्ट्रार जनरल रजनीश श्रीवास्तव सहित राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारीगण एवं हाईकोर्ट के अधिवक्तागण उपस्थित थे। 

उल्लेखनीय है कि कृष्न राम महापात्र छत्तीसगढ़ के 16 वें मुख्य न्यायाधीश होंगे।


कन्या छात्रावास में हड़कंप: अधीक्षक गायब, खाना नहीं मिला तो 38 छात्राओं को घर ले गए परिजन

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 मानपुर-मोहला। मानपुर ब्लॉक के वनांचल क्षेत्र नवागांव स्थित शासकीय प्री-कन्या छात्रावास में रविवार को अव्यवस्था का मामला सामने आया। छात्रावास अधीक्षक के ड्यूटी पर मौजूद नहीं होने के दौरान भोजन व्यवस्था प्रभावित होने की बात सामने आई। शाम को भोजन नहीं मिलने से नाराज छात्राओं के परिजन छात्रावास पहुंचे और 40 में से 38 छात्राओं को अपने साथ घर ले गए। फिलहाल छात्रावास में दो छात्राओं के ही रहने की जानकारी है।


अधीक्षक की अनुपस्थिति से बिगड़ी व्यवस्था

स्थानीय लोगों के अनुसार, छात्रावास अधीक्षक बिना पूर्व सूचना के ड्यूटी से अनुपस्थित थीं। उनके नहीं रहने के दौरान वैकल्पिक व्यवस्था नहीं किए जाने का आरोप है। रविवार शाम रसोई में भोजन नहीं बनने की जानकारी सामने आने के बाद छात्राओं और कर्मचारियों के बीच असमंजस की स्थिति बन गई।

मामले की जानकारी मिलने पर कई अभिभावक छात्रावास पहुंचे। बच्चों की सुरक्षा और भोजन व्यवस्था को देखते हुए उन्होंने अपनी बेटियों को घर ले जाना उचित समझा। बताया गया कि छात्रावास में कुल 40 बालिकाएं दर्ज हैं, जिनमें से 38 छात्राएं अपने परिजनों के साथ घर लौट गईं।

ग्रामीणों ने जताई नाराजगी

घटना की जानकारी मिलने के बाद ग्रामीण और जनप्रतिनिधि भी छात्रावास पहुंचे। उन्होंने छात्राओं के भोजन, सुरक्षा और नियमित देखरेख को लेकर नाराजगी जताते हुए प्रशासन से तत्काल व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की।

स्थानीय निवासी हेमंत कुमार मेश्राम ने बताया कि शाम के समय कई छात्राओं को अपने माता-पिता के साथ घर जाते देखा गया। कर्मचारियों से जानकारी लेने पर अधीक्षक के अनुपस्थित होने की बात सामने आई।

वहीं ग्रामीण कृष्णा मोहुरले ने कहा कि छात्रावास में आसपास के गांवों की छात्राएं रहकर पढ़ाई करती हैं। कई छात्राएं 10 से 15 किलोमीटर दूर से आती हैं। ऐसे में छात्रावास में भोजन, सुरक्षा और नियमित देखरेख जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं सुनिश्चित होना जरूरी है।

शिक्षा मंत्री के दौरे से पहले मामला आया सामने

मामला ऐसे समय सामने आया है, जब सोमवार को शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के जिले में प्रथम आधिकारिक आगमन का कार्यक्रम प्रस्तावित है। मंत्री के दौरे से ठीक पहले सरकारी कन्या छात्रावास में सामने आई अव्यवस्था ने विभागीय व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ग्रामीणों और अभिभावकों ने छात्रावास में तत्काल जिम्मेदार अधीक्षक की व्यवस्था करने के साथ ही भोजन, सुरक्षा और दैनिक देखरेख की व्यवस्था सुचारु करने की मांग की है।

प्रशासनिक जांच से स्थिति होगी स्पष्ट

अधीक्षक की अनुपस्थिति, भोजन व्यवस्था प्रभावित होने और छात्राओं के घर लौटने की परिस्थितियों की जांच की मांग की जा रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि अधीक्षक के अनुपस्थित रहने की वजह क्या थी और उनकी गैरमौजूदगी में वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई। इन बिंदुओं पर प्रशासनिक जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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