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सड़क किनारे पसरे पर अचानक पहुंचे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, मीरा के पसरे से खरीदा ‘आशीर्वाद का दीया’

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 रायपुर : राजधानी रायपुर के तेलीबांधा मरीन ड्राइव में सड़क किनारे पसरा लगाकर मिट्टी के दीये बेच रही मीरा के लिए आज का दिन अचानक बेहद खास बन गया। रोज की तरह वह अपने छोटे से पसरे पर दीये सजाकर ग्राहकों की प्रतीक्षा कर रही थी। इसी बीच मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का काफिला अचानक उसके पसरे के पास जाकर रुक गया।


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मीरा के पसरे पर रखे मिट्टी के दीयों को देखा और ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत आयोजित होने वाले ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम के लिए वहीं से एक दीया खरीदा। मुख्यमंत्री ने महिला को एक हजार रुपए प्रदान किए। मुख्यमंत्री का यह सहज भाव स्थानीय स्तर पर छोटे व्यवसाय के माध्यम से आजीविका अर्जित करने वाली मीरा के श्रम, स्वाभिमान और स्वावलंबन के सम्मान का सुंदर संदेश भी दे गया।


मुख्यमंत्री का सड़क किनारे लगे छोटे से पसरे पर अचानक पहुंचना आसपास मौजूद लोगों के लिए भी सुखद आश्चर्य का अवसर बन गया। बिना किसी औपचारिकता के मुख्यमंत्री ने मीरा से उसके कामकाज और परिवार का हालचाल पूछा। 

बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री साय ने मीरा से पूछा कि उसे केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है या नहीं। मुख्यमंत्री के सवाल पर मीरा ने बताया कि प्रधानमंत्री जनधन योजना के अंतर्गत उसका बैंक खाता खुल चुका है। उसने मुख्यमंत्री को यह भी बताया कि राज्य सरकार की महतारी वंदन योजना के अंतर्गत उसे हर महीने एक हजार रुपए की राशि प्राप्त हो रही है।

महिला के मुंह से योजनाओं का लाभ मिलने की बात सुनकर मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाएं तभी सार्थक होती हैं, जब उनका लाभ जरूरतमंद व्यक्ति तक सीधे पहुंचे, उसे संबल दे और उसके जीवन को बेहतर बनाने में सहायक बने। शासन की प्राथमिकता यही है कि जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पूरी सहजता और पारदर्शिता के साथ पहुंचे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में प्रधानमंत्री जनधन योजना ने गरीब, वंचित और जरूरतमंद परिवारों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़कर आर्थिक समावेशन का मजबूत आधार तैयार किया है। बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ने के कारण आज विभिन्न योजनाओं की राशि सीधे हितग्राहियों के खातों तक पहुंच रही है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की माताओं-बहनों को प्रतिमाह एक हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। यह राशि उनके छोटे-बड़े दैनिक खर्चों में सहयोग देने के साथ उनमें आर्थिक आत्मविश्वास भी बढ़ा रही है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सड़क किनारे पसरा लगाने वाले छोटे विक्रेता हों, कुम्हार हों, शिल्पकार हों अथवा स्थानीय उत्पाद तैयार करने वाली हमारी माताएं और बहनें - इन सभी के परिश्रम में आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की शक्ति निहित है। अपने हुनर और मेहनत से आजीविका अर्जित करने वाले ऐसे लोगों को प्रोत्साहित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को अपनाना केवल किसी वस्तु की खरीद नहीं है। उसके पीछे किसी परिवार का श्रम, किसी कारीगर का हुनर और किसी छोटे व्यवसायी के आत्मसम्मान से जुड़ी आजीविका होती है। जब हम स्थानीय विक्रेताओं और कारीगरों से सामान खरीदते हैं तो हमारे इस छोटे से प्रयास से उनके परिवार और उनकी आजीविका को संबल मिलता है।

सेवा और जनभागीदारी का प्रतीक बनेगा ‘आशीर्वाद का दीया’

मुख्यमंत्री साय द्वारा मीरा से खरीदा गया मिट्टी का यह दीया ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत आयोजित होने वाले ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम का हिस्सा बनेगा। इस कार्यक्रम के माध्यम से सेवा, जनकल्याण और विकास के प्रति सामूहिक संकल्प को जनभागीदारी से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारी संस्कृति में दीया केवल प्रकाश का माध्यम नहीं, बल्कि आशा और सकारात्मक संकल्प का प्रतीक है। मिट्टी का एक छोटा-सा दीया जब जलता है तो अपने आसपास के अंधकार को दूर करता है। इसी तरह समाज का प्रत्येक व्यक्ति जब सेवा का एक छोटा-सा संकल्प लेकर आगे बढ़ता है तो सामूहिक प्रयास से बड़े और सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने कहा कि ‘आशीर्वाद का दीया’ इसी भावना को अभिव्यक्त करता है। यह सेवा और विकास के प्रति हमारे संकल्प तथा जनभागीदारी के सामर्थ्य का प्रतीक है। प्रदेश के नागरिक जब इस भावना से जुड़ेंगे तो सेवा का यह संकल्प घर-घर और जन-जन तक पहुंचेगा।

सेवा को जन-जन का संकल्प बनाने का अभियान

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने अपने सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष राष्ट्र और जनसेवा को समर्पित किए हैं। प्रधानमंत्री जी के जन्मदिवस 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ आयोजित किया जा रहा है। यह अभियान सेवा, सुशासन, गरीब कल्याण और विकास के प्रति प्रतिबद्धता को जनभागीदारी के माध्यम से और मजबूत करने का अवसर है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे सेवा संकल्प अभियान से पूरे उत्साह और आत्मीयता के साथ जुड़ें। अपने गांव, शहर और आसपास स्वच्छता के कार्यों में सहभागी बनें, पर्यावरण संरक्षण के लिए आगे आएं, जरूरतमंदों की सहायता करें और अपनी क्षमता के अनुरूप जनसेवा का कोई न कोई संकल्प अवश्य लें। उन्होंने कहा कि सेवा का कोई कार्य छोटा नहीं होता। किसी जरूरतमंद की सहायता, अपने आसपास स्वच्छता, एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करना, स्थानीय कारीगर से कोई वस्तु खरीदना अथवा समाज के हित में किया गया छोटा-सा प्रयास भी जनसेवा का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।

एक छोटे से दीये में समाया बड़ा संदेश

तेलीबांधा मरीन ड्राइव के सड़क किनारे लगे एक छोटे से पसरे से मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय द्वारा खरीदा गया मिट्टी का यह दीया कई मायनों में खास बन गया। इसमें एक ओर मेहनत से आजीविका अर्जित कर रही महिला के श्रम और स्वावलंबन का सम्मान जुड़ा, तो दूसरी ओर सहज बातचीत में जनधन और महतारी वंदन जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं की जमीनी पहुंच भी सामने आई। इसके साथ ही यही दीया अब ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम के माध्यम से सेवा, जनभागीदारी और विकास के संकल्प का प्रतीक बनेगा। इस अवसर पर विधायक  पुरंदर मिश्रा उपस्थित थे।

कोटा निकाय चुनाव में BJP का बहुमत, 100 में 55 वार्डों पर जीत; EVM गड़बड़ी से 3 वार्डों के नतीजे अटके, 16 सितंबर को पुनर्मतदान

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कोटा- राजस्थान के शहरी निकाय चुनाव में कोटा नगर निगम का परिणाम राजनीतिक रूप से भाजपा के लिए बड़ी सफलता लेकर आया है। 100 सदस्यीय कोटा नगर निगम में भाजपा ने 55 वार्डों में जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। कांग्रेस को 40 वार्डों में जीत मिली, जबकि तीन वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी विजयी रहे।

हालांकि, चुनाव परिणाम के बीच EVM में तकनीकी खराबी ने प्रक्रिया को कुछ समय के लिए रोक दिया। कोटा नगर निगम के वार्ड 11, 44 और 87 के परिणामों को रोक दिया गया है। इसके अलावा सुकेत नगरपालिका के वार्ड 4 के एक मतदान केंद्र पर भी EVM संबंधी समस्या सामने आई। प्रभावित स्थानों पर 16 सितंबर को पुनर्मतदान कराया जाएगा और 17 सितंबर को मतगणना प्रस्तावित है। 

55 सीटों के साथ भाजपा ने हासिल किया बहुमत

कोटा नगर निगम में कुल 100 वार्ड हैं और बहुमत के लिए 51 सीटों की जरूरत होती है। भाजपा ने 55 सीटों पर जीत दर्ज कर इस आंकड़े को पार कर लिया। कांग्रेस को 40 सीटें मिलीं, जबकि निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी कुछ वार्डों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।

इस परिणाम के साथ कोटा नगर निगम में भाजपा का बोर्ड बनना लगभग तय माना जा रहा है। हालांकि, जिन वार्डों में पुनर्मतदान होना है, वहां अंतिम परिणाम और उसके बाद होने वाली पदाधिकारियों की चुनावी प्रक्रिया को लेकर स्थिति पुनर्मतदान के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।

EVM खराबी के कारण तीन वार्डों के परिणाम रोके गए

मतगणना के दौरान कोटा के वार्ड 11, 44 और 87 की EVM मशीनों में तकनीकी समस्या सामने आई। मशीनों से संबंधित समस्या के चलते इन वार्डों के परिणाम तत्काल घोषित नहीं किए जा सके। अधिकारियों के आदेश के बाद संबंधित मशीनों को सुरक्षित रखा गया और निर्वाचन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए आयोग से निर्देश लिए गए। 

आधिकारिक आदेश के अनुसार, प्रभावित मतदान केंद्रों पर 16 सितंबर को दोबारा मतदान होगा। इसके बाद 17 सितंबर को मतगणना कर परिणाम घोषित किए जाएंगे।

वार्ड 87 को लेकर कांग्रेस का विरोध

EVM विवाद के बीच वार्ड 87 का मामला विशेष रूप से चर्चा में रहा। कांग्रेस प्रत्याशी लक्ष्मी शर्मा ने परिणाम घोषित नहीं होने के विरोध में मतगणना केंद्र के बाहर धरना दिया। उनके साथ पार्टी की स्थानीय नेता शालिनी गौतम और युवा कांग्रेस नेता शुभम गोचर भी मौजूद रहे।

कांग्रेस की ओर से चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की गई। बाद में कोटा कांग्रेस अध्यक्ष राखी गौतम भी मतगणना केंद्र पहुंचीं और संबंधित EVM को कलेक्टर तथा ADM की मौजूदगी में सील करने की मांग की। अधिकारियों ने मामले की रिपोर्ट निर्वाचन आयोग को भेजी। 

ध्यान रहे कि कांग्रेस नेताओं द्वारा लगाए गए गड़बड़ी के आरोप राजनीतिक आरोप हैं; उपलब्ध रिपोर्टों में निर्वाचन अधिकारियों ने इसे EVM की तकनीकी खराबी के रूप में दर्ज किया है।

कई दिग्गजों ने भी दर्ज की जीत

कोटा के चुनाव परिणाम में भाजपा के कई पुराने नेताओं ने अपनी पकड़ बरकरार रखी। वार्ड 54 से भाजपा के विवेक राजवंशी ने लगातार चौथी बार जीत दर्ज की। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी मनीष को 2,226 मतों के अंतर से हराया।

इसी तरह भाजपा के गोपाल राम मांडा ने लगातार पांचवीं बार जीत दर्ज की। उन्होंने कांग्रेस के संजय यादव को 899 मतों से पराजित किया। 

हालांकि, कुछ वार्डों में कांग्रेस और निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी भाजपा को कड़ी चुनौती दी। वार्ड 86 में युवा कांग्रेस के अर्पित जैन ने भाजपा के पूर्व उप महापौर योगेंद्र खींची को 250 मतों से हराया। वहीं वार्ड 71 में निर्दलीय प्रत्याशी वंदना फौजदार ने भाजपा की मीनाक्षी सेन को 160 मतों से मात दी। 

अब आगे क्या?

EVM से प्रभावित वार्डों में पुनर्मतदान के बाद ही कोटा नगर निगम की चुनावी प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त होगी। 16 सितंबर को पुनर्मतदान और 17 सितंबर को मतगणना के बाद इन वार्डों के अंतिम परिणाम सामने आएंगे। इसके बाद नगर निगम में सभापति/महापौर सहित संबंधित पदों के चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। 

राजस्थान की राजनीति में भी महत्वपूर्ण परिणाम

कोटा का परिणाम राजस्थान के व्यापक शहरी निकाय चुनावों के बीच सामने आया है। राज्य के 309 शहरी निकायों में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भाजपा ने 4,179 वार्ड, कांग्रेस ने 3,613 वार्ड और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 2,273 वार्ड जीते हैं। कई निकायों में निर्दलीय उम्मीदवारों की भूमिका भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।

कुल मिलाकर, कोटा में भाजपा की 55 वार्डों की जीत ने पार्टी को स्पष्ट बढ़त दिला दी है, लेकिन EVM तकनीकी विवाद के कारण तीन वार्डों का अंतिम फैसला अब पुनर्मतदान के बाद होगा।

गांधीनगर में वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम 2026 का शुभारंभ, भारत ने दुनिया के सामने रखा सतत विकास का मॉडल

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गांधीनगर- केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल ने मंगलवार को गांधीनगर में वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम (WCEF) 2026 का उद्घाटन किया। 15 से 18 सितंबर तक आयोजित हो रहे इस वैश्विक सम्मेलन की थीम ‘Circular Economy: Transition for People and Prosperity’ यानी ‘सर्कुलर इकोनॉमी: लोगों और समृद्धि के लिए परिवर्तन’ है।

यह पहली बार है जब वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम का आयोजन दक्षिण एशिया में हो रहा है। सम्मेलन में दुनिया के 62 देशों से 3,600 से अधिक प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। इनमें उद्योग जगत के प्रतिनिधि, उद्यमी, स्टार्टअप्स, शोधकर्ता, नीति निर्माता, शिक्षाविद और पर्यावरण विशेषज्ञ शामिल हैं।

भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का प्रतीक है WCEF

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल ने कहा कि दक्षिण एशिया में पहली बार WCEF की मेजबानी भारत के बढ़ते वैश्विक नेतृत्व को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में Mission LiFE वैश्विक सर्कुलर इकोनॉमी की मजबूत नींव बन रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गुजरात ने विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन कायम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया है। उन्होंने भारतीय परंपराओं में मौजूद पुन: उपयोग और संसाधनों के संरक्षण की संस्कृति का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘कचरे से संपदा’ बनाने की सोच भारत की जीवनशैली का हिस्सा रही है।

‘सर्कुलर इकोनॉमी कोई नई मंजिल नहीं, सोचने का नया तरीका है’

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने अपने संबोधन में कहा कि भारत के लिए सर्कुलर इकोनॉमी कोई नई अवधारणा नहीं है, बल्कि यह पुरानी भारतीय सोच को नए नजरिए से देखने का तरीका है।

उन्होंने कहा कि भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं में लंबे समय से पुन: उपयोग, मरम्मत और संसाधनों के सम्मान की भावना रही है। पहले चीजों को बदलने के बजाय उनकी मरम्मत की जाती थी, फेंकने से पहले उनका दोबारा उपयोग किया जाता था और बेकार समझे जाने वाले संसाधनों को फिर से उपयोगी बनाया जाता था।

उन्होंने कहा कि विकास और पर्यावरण के बीच चुनाव करने की जरूरत नहीं है। बल्कि ऐसा विकास मॉडल तैयार करना होगा, जो संसाधनों का अधिक कुशल, टिकाऊ और लचीला इस्तेमाल सुनिश्चित करे।

83 हजार से अधिक उत्पादक और 4,802 रिसाइक्लर EPR के तहत पंजीकृत

भूपेंद्र यादव ने बताया कि सरकार ने सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए कई नियामकीय सुधार किए हैं। इनमें अलग-अलग क्षेत्रों के लिए मजबूत वेस्ट मैनेजमेंट नियम और Extended Producer Responsibility (EPR) व्यवस्था प्रमुख हैं।

उन्होंने बताया कि अगस्त 2026 तक विभिन्न EPR फ्रेमवर्क के तहत 83,000 से अधिक उत्पादक और 4,802 रिसाइक्लर पंजीकृत हो चुके हैं। वहीं, विभिन्न विनियमित वेस्ट स्ट्रीम के तहत करीब 482.24 लाख मीट्रिक टन कचरे का प्रसंस्करण किया जा चुका है।

‘कचरा उत्पाद की यात्रा का अंत नहीं, नए संसाधन चक्र की शुरुआत है’

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केवल कानून और नियमों से सर्कुलर इकोनॉमी का निर्माण नहीं किया जा सकता। इसके लिए लोगों की जीवनशैली और उपभोग की आदतों में भी बदलाव जरूरी है।

उन्होंने Lifestyle for Environment (LiFE) का उल्लेख करते हुए कहा कि सर्कुलर इकोनॉमी केवल रिसाइक्लिंग प्लांट से शुरू नहीं होती, बल्कि इसकी शुरुआत बाजार से होती है, यह घरों तक पहुंचती है और अंततः दैनिक जीवन की आदत बनती है।

उन्होंने जोर दिया कि कचरे को किसी उत्पाद की यात्रा का अंत नहीं, बल्कि नए संसाधन चक्र की शुरुआत के रूप में देखा जाना चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर

भूपेंद्र यादव ने कहा कि कोई भी देश, कंपनी या समुदाय अकेले सर्कुलर इकोनॉमी का पूरा चक्र बंद नहीं कर सकता। इसके लिए ज्ञान, तकनीक, वित्त और जिम्मेदारी का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आदान-प्रदान जरूरी है।

उन्होंने भारत की अंतरराष्ट्रीय पहलों का उल्लेख करते हुए Resource Efficiency and Circular Economy Industry Coalition (RECEIC) का जिक्र किया, जिसे भारत की G20 अध्यक्षता के दौरान लॉन्च किया गया था।

फिनलैंड और नीदरलैंड ने भी साझा किए अनुभव

भारत में फिनलैंड के राजदूत मिको किविकोस्की ने कहा कि सर्कुलर इकोनॉमी केवल पर्यावरण से जुड़ा विषय नहीं, बल्कि विकास को देखने का एक मूलभूत तरीका है। उन्होंने बताया कि फिनलैंड 2035 तक संसाधनों की खपत को 2015 के स्तर से नीचे लाने के लक्ष्य पर काम कर रहा है।

नीदरलैंड की आर्थिक मामलों एवं जलवायु मंत्रालय की मारिके स्पाइकरबोयर ने कहा कि उनका देश 2050 तक पूरी तरह सर्कुलर इकोनॉमी की दिशा में आगे बढ़ने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। उन्होंने वैश्विक स्तर पर सर्कुलर वैल्यू चेन विकसित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को जरूरी बताया।

135 प्रदर्शकों ने प्रदर्शित किए सर्कुलर समाधान

WCEF 2026 के दौरान आयोजित प्रदर्शनी में 135 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शक अपने उत्पादों और व्यावहारिक सर्कुलर समाधान प्रदर्शित कर रहे हैं।

इस अवसर पर ‘Best Practices for Reuse of Treated Sewage’ और ‘Driving Sustainability – A Guide to India's Circular Economy and EPR Initiatives’ नामक दो प्रकाशनों का भी विमोचन किया गया।

62 देशों की भागीदारी, 3,600 से अधिक प्रतिनिधि

WCEF 2026 में 62 देशों के 3,600 से अधिक हितधारकों की भागीदारी इसे वैश्विक स्तर का महत्वपूर्ण मंच बना रही है। सम्मेलन का उद्देश्य सरकारों, उद्योगों, स्टार्टअप्स, शोध संस्थानों और नागरिक समाज के बीच सहयोग बढ़ाकर ऐसे समाधान विकसित करना है, जो आर्थिक विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूत करें।

VIMARSH 2026 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुरू कीं अहम रक्षा नीति पहल, MSME और डीप-टेक स्टार्टअप्स को मिलेगा बढ़ावा

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नई दिल्ली- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित ‘VIMARSH 2026’ DRDO-इंडस्ट्री सिनर्जी मीट के दौरान रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कई महत्वपूर्ण नीति पहलों का शुभारंभ किया। इन पहलों का उद्देश्य देश के MSME, डीप-टेक स्टार्टअप्स और निजी उद्योगों को रक्षा अनुसंधान एवं उत्पादन से जोड़ना तथा भारत को रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाना है।

MSME और डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए आसान होगी एंट्री

नई नीति के तहत MSME और डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए तकनीकी और वित्तीय बाधाओं को कम करने के लिए एक व्यापक फ्रेमवर्क तैयार किया गया है। इसके माध्यम से कंपनियों को प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता, इनक्यूबेशन सपोर्ट और DRDO की परीक्षण सुविधाओं तक विशेष पहुंच उपलब्ध कराई जाएगी।

सरकार का लक्ष्य है कि छोटे उद्योग और नवाचार आधारित स्टार्टअप केवल रक्षा उत्पादों के आपूर्तिकर्ता न रहें, बल्कि अनुसंधान, डिजाइन, परीक्षण और विकास की पूरी प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनें।

DRDO के सॉफ्टवेयर तक उद्योगों की सुरक्षित पहुंच

DRDO द्वारा विकसित सॉफ्टवेयर के सोर्स कोड को लाइसेंस प्राप्त उद्योगों के साथ साझा करने के लिए एक मानकीकृत और सुरक्षित फ्रेमवर्क भी लॉन्च किया गया। इससे सॉफ्टवेयर आधारित रक्षा प्रणालियों के विकास में तेजी आने के साथ-साथ पुरानी तकनीकों को समय पर अपग्रेड करने और उनके अप्रचलन की समस्या से निपटने में मदद मिलेगी।

9 टेक्नोलॉजी ट्रांसफर समझौते, 13 कंपनियों को मिलेगा लाभ

कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री की मौजूदगी में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के लिए 9 लाइसेंसिंग एग्रीमेंट (LAToTs) 13 विनिर्माण भागीदारों को सौंपे गए। इन समझौतों के जरिए DRDO द्वारा विकसित अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियों और तकनीकों का व्यावसायिक उत्पादन संभव होगा।

SIDM और Laghu Udyog Bharati के साथ रणनीतिक MoU

रक्षा उद्योग तक पहुंच बढ़ाने और जमीनी स्तर पर छोटे उद्योगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए Society of Indian Defence Manufacturers (SIDM) और Laghu Udyog Bharati (LUB) के साथ रणनीतिक समझौते भी किए गए।

इसके अलावा DRDO ने Quality Council of India (QCI) के साथ SAMAR 2.0 (System for Advance Manufacturing Assessment and Rating) के लिए अनुबंध किया। इसके तहत देश की रक्षा कंपनियों की विनिर्माण क्षमता और तकनीकी परिपक्वता का आकलन किया जाएगा।

‘रक्षा उत्पादन’ से आगे बढ़कर पूरी वैल्यू चेन में साझेदारी पर जोर

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि DRDO और उद्योग के बीच सहयोग अब केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसे रिसर्च, डिजाइन, टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन और मैन्युफैक्चरिंग सहित पूरी वैल्यू चेन तक विस्तार देना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि DRDO के पास ज्ञान और तकनीक है, उद्योग के पास बड़े पैमाने पर उत्पादन की क्षमता है, स्टार्टअप्स नवाचार और तेजी लेकर आते हैं, जबकि देश का युवा नए भारत का सपना देखता है। इन चारों शक्तियों के एक साथ आगे बढ़ने से बड़े से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।

2047 तक महत्वपूर्ण तकनीकों में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य

राजनाथ सिंह ने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक रूप से मजबूत राष्ट्र बनना नहीं है, बल्कि भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर, सामाजिक रूप से समावेशी, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार और रणनीतिक रूप से सुरक्षित राष्ट्र बनाना भी है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक महत्वपूर्ण तकनीकों में आत्मनिर्भरता, स्वदेशी सामग्री में उल्लेखनीय वृद्धि, रक्षा निर्यात में कई गुना विस्तार और वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की मजबूत मौजूदगी सुनिश्चित करनी होगी।

AI, क्वांटम कंप्यूटिंग और हाइपरसोनिक तकनीक पर फोकस

नई पहलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग, हाइपरसोनिक तकनीक और डायरेक्टेड एनर्जी जैसी भविष्य की तकनीकों में निवेश और अनुसंधान को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि ड्रोन टेक्नोलॉजी, AI और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में MSME और स्टार्टअप भारत की तकनीकी एवं रणनीतिक क्षमता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं।

2,300 से अधिक टेक्नोलॉजी ट्रांसफर

रक्षा सचिव एवं DRDO के चेयरमैन राजेश कुमार सिंह ने बताया कि आत्मनिर्भरता की दिशा में किए गए प्रयासों से रक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया है। अब तक 2,300 से अधिक टेक्नोलॉजी ट्रांसफर 1,100 से अधिक उद्योगों को दिए जा चुके हैं।

उन्होंने बताया कि DRDO द्वारा विकसित करीब 50 मिसाइलों से संबंधित तकनीकों को भी उद्योगों के लिए उपलब्ध कराया गया है, ताकि निजी क्षेत्र की भागीदारी और बढ़ाई जा सके।

VIMARSH 2026 में 250 से अधिक उद्योग प्रतिनिधियों की भागीदारी

‘वार्ता से विकास (Varta se Vikas)’ थीम पर आधारित VIMARSH 2026 में 250 से अधिक रक्षा उद्योग प्रमुखों, उद्योग संगठनों के प्रतिनिधियों, वरिष्ठ सैन्य एवं नागरिक अधिकारियों और DRDO वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया।

कार्यक्रम में एयरोनॉटिकल सिस्टम, मिसाइल, आर्मामेंट, माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स और नेवल सिस्टम जैसे क्षेत्रों के तकनीकी रोडमैप पर भी चर्चा हुई।

आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग की दिशा में बड़ा कदम

VIMARSH 2026 को भारत के रक्षा उद्योग में सरकार, DRDO, बड़ी कंपनियों, MSME और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। सरकार का जोर अब रक्षा क्षेत्र में केवल आयात कम करने पर नहीं, बल्कि भारत को अत्याधुनिक तकनीक विकसित करने और वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में प्रमुख भूमिका निभाने वाला देश बनाने पर है।

रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि भविष्य के युद्धों में तकनीकी बढ़त ही रणनीतिक बढ़त तय करेगी, इसलिए आज नई और उभरती तकनीकों में निवेश करने वाली कंपनियां आने वाले समय में रक्षा क्षेत्र की अगुवाई करेंगी।

चार दशक बाद पर्यटकों के लिए खुलेगा इंद्रावती टाइगर रिजर्व, 1 नवंबर से शुरू होगा पर्यटन

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बीजापुर- छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के लिए बड़ी खुशखबरी है। बीजापुर जिले में स्थित इंद्रावती टाइगर रिजर्व करीब चार दशक लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार है। रिपोर्टों के मुताबिक, रिजर्व को 1 नवंबर 2026 से पर्यटकों के लिए खोलने की तैयारी है। लंबे समय तक नक्सल गतिविधियों के कारण यहां पर्यटन प्रभावित रहा, लेकिन क्षेत्र में सुरक्षा और शांति की स्थिति बेहतर होने के बाद वन विभाग ने ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

2,799 वर्ग किलोमीटर में फैला है टाइगर रिजर्व

इंद्रावती टाइगर रिजर्व छत्तीसगढ़ के सबसे महत्वपूर्ण वन्यजीव क्षेत्रों में शामिल है। इसका कुल क्षेत्रफल लगभग 2,799 वर्ग किलोमीटर है। इंद्रावती नदी के नाम पर इसका नाम पड़ा है। यह क्षेत्र 1981 में राष्ट्रीय उद्यान और 1983 में प्रोजेक्ट टाइगर के तहत टाइगर रिजर्व का दर्जा प्राप्त कर चुका है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के अनुसार, इंद्रावती देश के आधिकारिक टाइगर रिजर्वों में शामिल है।

बाघ के साथ वनभैंसा और दुर्लभ वन्यजीवों का बसेरा

इंद्रावती का जंगल जैव-विविधता की दृष्टि से बेहद समृद्ध है। यहां बाघ, जंगली भैंसा, सांभर, चीतल और विभिन्न प्रजातियों के पक्षी सहित कई वन्यजीव पाए जाते हैं। बीजापुर जिला प्रशासन के अनुसार, यह क्षेत्र दुर्लभ वनभैंसे की आबादी के लिए भी महत्वपूर्ण है। घने जंगल, पहाड़ी भू-भाग और इंद्रावती नदी इस क्षेत्र को प्राकृतिक रूप से बेहद आकर्षक बनाते हैं।

नक्सल प्रभावित क्षेत्र से पर्यटन के नए केंद्र की ओर

इंद्रावती क्षेत्र लंबे समय तक नक्सल गतिविधियों के कारण आम पर्यटकों की पहुंच से दूर रहा। अब सुरक्षा स्थिति में सुधार के साथ यहां पर्यटन की संभावनाएं फिर से दिखाई देने लगी हैं। फरवरी 2026 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी बस्तर में दशकों से चली आ रही माओवादी हिंसा के कारण पर्यटन और जनजीवन पर पड़े प्रभाव का उल्लेख किया था।

इसी बदलते माहौल के बीच इंद्रावती को ईको-टूरिज्म के नक्शे पर लाने की तैयारी को बस्तर के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

पर्यटकों को मिल सकता है जंगल सफारी का अनुभव

पर्यटन शुरू होने के बाद आगंतुकों को इंद्रावती के घने जंगलों और प्राकृतिक परिवेश को करीब से देखने का अवसर मिलेगा। अप्रैल 2026 की रिपोर्टों में कुटरू–फरसेगुड़ा और भोपालपट्नम–मट्टेमरगा क्षेत्र से प्रवेश की व्यवस्था की योजना का उल्लेख किया गया था। यहां पर्यटकों को बाघ, वनभैंसा और अन्य वन्यजीवों को देखने के साथ-साथ बस्तर के प्राकृतिक वातावरण का अनुभव मिल सकता है।

वन्यजीव संरक्षण के साथ पर्यटन पर जोर

इंद्रावती को पर्यटन के लिए खोलने के साथ वन्यजीवों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण चुनौती होगी। हाल के महीनों में रिजर्व की सीमाओं पर निगरानी मजबूत करने के लिए भी कदम उठाए गए हैं। सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से लगी लगभग 100 किलोमीटर लंबी अंतरराज्यीय सीमा पर करीब हर 7 किलोमीटर पर पेट्रोलिंग कैंप स्थापित करने की योजना बनाई गई है, ताकि शिकार, अवैध कटाई और वन्यजीव तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके।

बस्तर के पर्यटन को मिलेगी नई पहचान

इंद्रावती टाइगर रिजर्व का दोबारा खुलना केवल वन्यजीव पर्यटन के लिहाज से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इससे स्थानीय रोजगार, होम-स्टे, गाइड सेवाओं, परिवहन और स्थानीय हस्तशिल्प जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है। केंद्र सरकार ने भी बस्तर में वन एवं वन्यजीव आधारित पर्यटन की व्यापक संभावनाओं को रेखांकित किया है।

बस्तर पहले से ही अपने घने जंगलों, झरनों, गुफाओं और आदिवासी संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है। इंद्रावती टाइगर रिजर्व के पर्यटन मानचित्र पर आने से क्षेत्र के प्राकृतिक पर्यटन और वन्यजीव पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है।

नोट: पर्यटकों के प्रवेश, सफारी रूट, बुकिंग प्रक्रिया, शुल्क और सुरक्षा संबंधी अंतिम दिशा-निर्देश वन विभाग की आधिकारिक घोषणा के अनुसार लागू होंगे।

CGPSC भर्ती घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई, पूर्व CM के OSD चेतन बोरघरिया गिरफ्तार

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रायपुर- छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की राज्य सेवा परीक्षा 2020 और 2021 में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और चयन में हेरफेर से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ED ने तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में OSD रहे और वर्तमान में बलरामपुर-रामानुजगंज के अपर कलेक्टर चेतन बोरघरिया को 11 सितंबर 2026 को धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तार किया। विशेष PMLA अदालत ने उन्हें छह दिन की ED हिरासत में भेजा है।

2020 और 2021 की CGPSC परीक्षाएं जांच के घेरे में

ED के अनुसार, जांच का संबंध CGPSC राज्य सेवा परीक्षा 2020 और 2021 में कथित भ्रष्टाचार, पेपर लीक, वित्तीय लेन-देन और चयन प्रक्रिया में हेरफेर से है। एजेंसी का आरोप है कि कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने और चयन में मदद का भरोसा दिया गया था। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय में बोरघरिया के पद और प्रभाव का कथित तौर पर किस तरह इस्तेमाल किया गया।

3 करोड़ रुपये से अधिक की कथित वसूली

ED का दावा है कि उत्कर्ष चंद्राकर, अनिल चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने 2021 CGPSC परीक्षा के कुछ अभ्यर्थियों से कथित तौर पर 3 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध रकम वसूली। एजेंसी के अनुसार, अभ्यर्थियों को पहले से प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने और चयन सुनिश्चित कराने का भरोसा दिया गया था। इन दावों की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।

170 लेन-देन में 66.64 लाख रुपये की जांच

जांच में चेतन बोरघरिया के बैंक खाते में 170 अलग-अलग लेन-देन के जरिए करीब 66.64 लाख रुपये जमा होने का ED ने दावा किया है। एजेंसी इन लेन-देन के स्रोत और कथित CGPSC नेटवर्क से उनके संबंधों की जांच कर रही है।

मोबाइल चैट और डिजिटल सबूत भी जांच में

ED ने इससे पहले 1 सितंबर को बोरघरिया के परिसरों पर तलाशी ली थी। इस दौरान मोबाइल फोन समेत कई डिजिटल उपकरण जब्त किए गए। एजेंसी के मुताबिक, डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच में बोरघरिया और उत्कर्ष चंद्राकर के बीच कथित बातचीत सामने आई, जिसमें वित्तीय लेन-देन तथा रकम के भुगतान या वापसी से संबंधित संदेश होने की बात कही गई है।

ED ने Figurecave E-Com (OPC) Private Limited से जुड़े वित्तीय लेन-देन की भी जांच की है। एजेंसी को आशंका है कि कंपनी का इस्तेमाल कथित तौर पर धन के आवागमन और लेयरिंग के लिए किया गया हो सकता है।

जांच अभी जारी

ED का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों, बैंकिंग लेन-देन और PMLA के तहत दर्ज बयानों से बोरघरिया की कथित भूमिका से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। हालांकि, ये सभी एजेंसी के जांच संबंधी आरोप और दावे हैं; मामले में अंतिम दोषसिद्धि अदालत के निर्णय पर निर्भर करेगी। जांच एजेंसी कथित धन के स्रोत, उसके लेन-देन और इससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।

CG NEWS : भाई-परिजनों को भेजी युवती की निजी तस्वीर, आरोपी गुजरात से दबोचा गया

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रायपुर। युवती की निजी तस्वीर सोशल मीडिया और वॉट्सऐप के माध्यम से उसके भाई और अन्य परिजनों को भेजने के मामले में टिकरापारा पुलिस ने आरोपी को गुजरात से गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी ने तस्वीर भेजने के साथ आपत्तिजनक और गाली-गलौज वाले संदेश भी भेजे थे। आरोपी को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।


तकनीकी जांच के बाद गुजरात से गिरफ्तारी

पुलिस ने मामले में परिमल भाई जयंती भाई कोंकणी (28), निवासी गुजरात को गिरफ्तार किया है। पुलिस टीम ने लगातार तलाश और तकनीकी जांच के आधार पर आरोपी का पता लगाया और उसे गुजरात से गिरफ्तार किया। आरोपी की गिरफ्तारी 13 सितंबर को की गई।

गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे 25 सितंबर तक न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।

भाई और परिजनों को भेजी निजी तस्वीर

पुलिस के मुताबिक, पीड़िता ने टिकरापारा थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि आरोपी ने उसकी निजी तस्वीर वॉट्सऐप के जरिए उसके भाई और अन्य परिजनों को भेजी। इसके साथ ही उसने आपत्तिजनक और गाली-गलौज वाले संदेश भी भेजे।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान वॉट्सऐप संदेश, तस्वीरों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को भी जांच में शामिल किया गया।

कितने लोगों तक पहुंचाई तस्वीर, जांच जारी

आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि उसने युवती की निजी तस्वीर और आपत्तिजनक संदेश कितने लोगों तक भेजे थे। पुलिस आरोपी की मंशा और मामले से जुड़े अन्य डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच कर रही है।

मामले में जांच के आधार पर आगे और कार्रवाई की जा सकती है।

लाफिनकला में तीजा महोत्सव की धूम: पारंपरिक खेलों में दिखा नारियों का उत्साह, विजेताओं पर हुई पुरस्कारों की बौछार

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महासमुंद- ग्राम लाफिनकला में 5वां तीजा महोत्सव हर्षोल्लास और अपार उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस उत्सव के दौरान महिलाओं के लिए कई पारंपरिक और मनोरंजक खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें ग्रामीण महिलाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। कार्यक्रम में महिलाओं ने मटका फोड़, फुगड़ी, कुर्सी दौड़, लोटा दौड़, रस्सा खींच और खो-खो जैसे खेलों में अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन कर तीजा महोत्सव को यादगार बना दिया। इस आयोजन से एक ओर जहां ग्रामीण संस्कृति और पारंपरिक खेलों को बढ़ावा मिला, वहीं दूसरी ओर महिलाओं को आपसी मेलजोल और मनोरंजन का बेहतरीन अवसर भी प्राप्त हुआ।

विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं के विजेता खिलाड़ी 

​मटका फोड़: दिव्या पटेल ने पहला स्थान हासिल किया।

​फुगड़ी: खिलेश्वरी साहू ने प्रथम, किरण निषाद ने द्वितीय और मीना निषाद ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।

​लोटा दौड़: भूमिका निषाद प्रथम, मनीषा साहू द्वितीय और रेखा साहू तृतीय स्थान पर रहीं।

​खो-खो: भूमिका की टीम ने प्रथम तथा चंदा की टीम ने द्वितीय स्थान हासिल किया।

​रस्सा खींच:

​प्रथम स्थान (विजेता टीम): चंदा निषाद, क्षमा निषाद, श्यामा साहू, लुके निषाद, रेशमा साहू, तारा साहू एवं रोशनी पटेल।

​द्वितीय स्थान (उपविजेता टीम): रीतु साहू, इन्द्राणी साहू, तोमेश्वरी साहू, रुक्मणी साहू, उषा निषाद, फेकन निषाद एवं राधा निषाद।

​कुर्सी दौड़: नीलम साहू (प्रथम), करिश्मा मानिकपुरी (द्वितीय), गैन्दी पटेल (तृतीय), रितु साहू (चतुर्थ), उषा निषाद (पंचम), जानकी पटेल (षष्टम), गीता साहू (सप्तम), नीरा निषाद (अष्टम), प्रमिला साहू (नवम) और लक्ष्मी साहू ने दशम स्थान प्राप्त किया।

​आयोजन समिति द्वारा सभी विजेता एवं प्रतिभागी महिलाओं को आकर्षक उपहार व नगद राशि देकर सम्मानित किया गया।

​तीजा महोत्सव के इस 5वें वर्ष के सफल आयोजन में ग्राम समिति लाफिनकला के अध्यक्ष रामकुमार साहू, केतन साहू, तोष कुमार साहू, ग्राम पंचायत लाफिन कला के सरपंच राधेश्याम साहू, बाल समाज लीला एवं रामायण मंडली का विशेष योगदान रहा। इसके साथ ही कमलेश कुमार साहू, गोवर्धन प्रसाद साहू, धर्मेंद्र साहू, टिकेश्वर साहू, नीलकमल साहू, नेतन पटेल, हरिराम साहू, रामजी साहू, नाथूराम साहू, महेंद्र पटेल, पवन साहू, ओमप्रकाश पटेल एवं लोकेश साहू का सराहनीय सहयोग मिला।

नुआखाई समृद्ध कृषि परंपरा, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और अन्नदाता के परिश्रम का उत्सव : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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मुख्यमंत्री ने नुआखाई पर्व की दी हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नई फसल के स्वागत और प्रकृति के अनुपम उपहार के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने वाले पावन पर्व नुआखाई के अवसर पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर अन्नदाता किसानों की सुख-समृद्धि, अच्छी फसल और सभी परिवारों की खुशहाली की मंगलकामना की है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नुआखाई समृद्ध कृषि संस्कृति और लोक परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। नई फसल के आगमन की खुशी में मनाया जाने वाला यह पर्व प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, अन्न के सम्मान और किसान के अथक परिश्रम के प्रति आदर का भाव प्रकट करता है। खेतों में उपजी नई फसल केवल किसान की मेहनत का प्रतिफल नहीं, बल्कि प्रकृति की कृपा और हमारी कृषि प्रधान संस्कृति की समृद्धि का भी प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति में खेती-किसानी केवल आजीविका का माध्यम नहीं, बल्कि हमारे सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न हिस्सा है। हमारे अनेक पर्व और परंपराएं कृषि चक्र, प्रकृति और लोकजीवन से गहराई से जुड़ी हुई हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नुआखाई अपनी मिट्टी, अपनी जड़ों और अपनी गौरवशाली परंपराओं से जुड़े रहने की प्रेरणा देता है। यह पर्व सामाजिक आत्मीयता, पारिवारिक एकजुटता और आपसी सद्भाव को भी मजबूत करता है। नई फसल की खुशियां जब परिवार और समाज मिलकर साझा करते हैं, तब लोकसंस्कृति और अधिक जीवंत तथा समृद्ध होती है।

मुख्यमंत्री साय ने नुआखाई के पावन अवसर पर कामना करते हुए कहा कि प्रकृति की कृपा छत्तीसगढ़ पर सदैव बनी रहे। हमारे किसान साथियों के खेत हरे-भरे और फसलों से लहलहाते रहें, अन्न के भंडार भरें तथा अन्नदाताओं के घर-आंगन में समृद्धि आए। प्रदेश के प्रत्येक परिवार के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली का संचार हो तथा आपसी प्रेम, भाईचारा और सद्भाव निरंतर मजबूत होता रहे।

मिलने बुलाया, पेट्रोल डालकर जिंदा जलाया! प्रेमिका की इलाज के दौरान मौत

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 रायपुर। राजधानी के माना एयरपोर्ट क्षेत्र में एक महिला को पेट्रोल डालकर आग लगाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। गंभीर रूप से झुलसी महिला की सोमवार रात उपचार के दौरान मौत हो गई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और महिला के प्रेमी पर आग लगाने का आरोप है।


सड़क किनारे झुलसी हालत में मिली महिला

जानकारी के मुताबिक रविवार रात करीब 9.30 से 10 बजे के बीच माना बस्ती से बरौंदा जाने वाली सड़क पर एटीसी बिल्डिंग के पीछे ग्रामीणों और राहगीरों ने एक महिला को झुलसी हालत में देखा। महिला चीखते-चिल्लाते हुए मदद मांग रही थी। सूचना मिलने पर डायल-112 की टीम मौके पर पहुंची और उसे उपचार के लिए मेकाहारा अस्पताल में भर्ती कराया। महिला करीब 65 से 70 फीसदी झुलसी हुई थी। उपचार के दौरान सोमवार रात उसकी मौत हो गई।

पांच साल पहले पति से हुई थी अलग

मृतका की पहचान आरंग-समोदा निवासी राजकुमारी साहू (35) के रूप में हुई है। बताया गया है कि वह करीब पांच साल पहले अपने पति से अलग हो गई थी। इसके बाद वह बोरियाकला क्षेत्र में शदाणी दरबार के आसपास अकेली रहकर घरेलू काम करती थी।

मिलने के लिए बुलाया, पेट्रोल लेकर पहुंचने का आरोप

एएसपी ग्रामीण अभिषेक झा के मुताबिक, राजकुमारी और आरोपी वीरू के बीच शादी से पहले प्रेम संबंध था। घटना की रात वीरू ने राजकुमारी को मिलने के लिए बुलाया था। पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी कथित तौर पर पेट्रोल लेकर मौके पर पहुंचा था। आशंका है कि दोनों के बीच विवाद के बाद महिला पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी गई।

2021 में सास पर हमले का भी आरोप

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि वर्ष 2021 में आरोपी वीरू आरंग के मोखला गांव पहुंचा था। आरोप है कि वहां उसने राजकुमारी की सास पर टंगिये से हमला किया था। पुलिस अब इस पुराने मामले की जानकारी जुटाने के साथ ही वर्तमान घटना से उसके संभावित संबंधों की भी जांच कर रही है।

फिलहाल पुलिस घटना के कारणों, आरोपी की भूमिका और वारदात के पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।

पुराने बस डिपो में मिली युवक की लाश, सिर कुचलकर हत्या से सनसनी

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 रायगढ़। शहर के रामभाठा स्थित पुराने बस डिपो परिसर में मंगलवार सुबह एक युवक का शव मिलने से सनसनी फैल गई। युवक की सिर कुचलकर हत्या की गई है। सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। मृतक की पहचान संजय मैदान क्षेत्र निवासी धनुर्जय चौहान के रूप में हुई है।


प्रारंभिक जांच में पुलिस को आशंका है कि नशे के दौरान किसी बात को लेकर विवाद हुआ होगा, जिसके बाद युवक पर हमला कर उसकी हत्या कर दी गई। वारदात में दो से तीन संदिग्धों के शामिल होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि हत्या की वजह और आरोपियों की भूमिका फिलहाल स्पष्ट नहीं हो सकी है।

बताया जा रहा है कि पुराना बस डिपो परिसर लंबे समय से नशेड़ियों के जमावड़े के लिए बदनाम रहा है। इसी आधार पर पुलिस नशे से जुड़े विवाद समेत अन्य पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है।

घटना की सूचना के बाद कोतवाली पुलिस के साथ FSL टीम भी मौके पर पहुंची। टीम ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण कर हत्या से जुड़े साक्ष्य जुटाए। पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ करने के साथ ही संदिग्धों की जानकारी भी जुटा रही है।

फिलहाल पुलिस हत्या की वजह, वारदात में शामिल लोगों और घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। जांच पूरी होने के बाद ही हत्या की वास्तविक वजह और आरोपियों के संबंध में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

शिक्षकों ने किया राम वन गमन पथ में शैक्षणिक भ्रमण

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 आरंग। सोमवार को विकासखंड के चरौदा, नरियरा, कुरूद और निषदा के शिक्षकों ने राम वन गमन पथ का शैक्षणिक भ्रमण किया।


भ्रमण के दौरान शिक्षकों ने सरगुजा स्थित रामगढ़ पर्वत पर राम-जानकी मंदिर, सीताबेंगरा, जोगीमारा, हाथी पोल और लक्ष्मण बेंगरा सहित विभिन्न स्थलों का अवलोकन कर ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व की जानकारी प्राप्त की।शिक्षकों ने कहा कि इस तरह के भ्रमण से ज्ञान में वृद्धि होती है, जिसे बच्चों के साथ साझा किया जाएगा।


उन्होंने बताया कि यह स्थान बच्चों के पाठ्यक्रम में भी शामिल है, अब इसे और भी बेहतर ढंग से समझाया जा सकेगा।शैक्षणिक भ्रमण में कीर्ति कुमार परमाल, महेन्द्र कुमार पटेल, सूर्यकांत चंद्राकर, दीनदयाल धीवर, डिलेश्वर साहू, सुशील आवड़े, गुरुचंद पारधी,जीतेन्द्र यदु, अशोक चंद्राकर, अभिमन्यु साहू और प्रमोद कुमार ढीमर प्रमुख रूप से शामिल रहे।


गोलबाजार गणेश पंडाल पहुंचे CM साय, बप्पा को पहनाया 1.15 करोड़ का स्वर्ण मुकुट

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 रायपुर। गणेश चतुर्थी के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी के ऐतिहासिक गोलबाजार स्थित गणेश पंडाल पहुंचकर भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की। उन्होंने श्री बजरंग नवयुवक मित्र मंडल गणेशोत्सव समिति द्वारा स्थापित गणेश प्रतिमा के दर्शन किए और भगवान गणेश को करीब 771 ग्राम वजनी स्वर्ण मुकुट पहनाया। मुकुट की कीमत करीब 1 करोड़ 15 लाख रुपये से अधिक बताई गई है।


मुख्यमंत्री साय ने मंत्रोच्चार के बीच भगवान गणेश का तिलक कर आरती उतारी और प्रदेशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। उन्होंने कहा कि भगवान श्री गणेश प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता हैं। गणेशोत्सव आस्था और संस्कृति का पर्व होने के साथ समाज को एकजुट करने वाली परंपरा का प्रतीक भी है। उन्होंने कामना की कि गणपति बप्पा की कृपा से छत्तीसगढ़ विकास और समृद्धि के पथ पर निरंतर आगे बढ़े।

117 साल पुरानी है गणेशोत्सव की परंपरा

मुख्यमंत्री ने गोलबाजार में पिछले 117 वर्षों से चली आ रही गणेशोत्सव की परंपरा की सराहना की। उन्होंने कहा कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी आस्था और सामाजिक सहभागिता के साथ किसी परंपरा को जीवंत बनाए रखना गौरव की बात है। ऐसी परंपराएं हमारी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के साथ नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और सामाजिक मूल्यों से जोड़ती हैं।

गोलबाजार स्थित हनुमान मंदिर के समीप श्री बजरंग नवयुवक मित्र मंडल गणेशोत्सव समिति द्वारा हर वर्ष गणेश प्रतिमा स्थापित की जाती है। यहां की भव्य प्रतिमा गणेशोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहती है। बड़ी संख्या में लोग भगवान गणेश के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

मुख्यमंत्री के गोलबाजार पहुंचने पर समिति के पदाधिकारियों, स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों ने ढोल-नगाड़ों तथा गणपति बप्पा के जयकारों के बीच उनका स्वागत किया। समिति की ओर से मुख्यमंत्री को गजमाला पहनाकर अभिनंदन किया गया।

150 साल पुराने हनुमान मंदिर में भी की पूजा

गणेश पंडाल में पूजा-अर्चना के बाद मुख्यमंत्री साय गोलबाजार स्थित 150 वर्ष से अधिक पुराने हनुमान मंदिर पहुंचे। उन्होंने भगवान हनुमान के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि एवं कल्याण की कामना की।

इस अवसर पर रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, श्रीचंद सुंदरानी, केदार गुप्ता, छगन मूंदड़ा, अमरजीत छाबड़ा सहित गणेशोत्सव समिति के पदाधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि, व्यापारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

बलरामपुर जिले में सेवा और स्नेह का अनूठा संकल्प, आंगनबाड़ी के नन्हे-मुन्नों के लिए होगा खिलौना दान

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17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा सेवा संकल्प अभियान

 25 सितंबर से 7 अक्टूबर तक 2371 आंगनबाड़ी केन्द्रों में ‘आंगन मिलन सेवा’ 

कलेक्टर ने जिलेवासियों से खिलौना दान कर बच्चों की खुशियों में सहभागी बनने की अपील

रायपुर- बलरामपुर जिले में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होने वाले ’सेवा संकल्प अभियान’ को जनभागीदारी और सामाजिक सरोकार से जोड़ने की दिशा में बलरामपुर जिले में विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इसी कड़ी में ’आंगन मिलन सेवा‘ (आंगनबाड़ी सम्मान एवं मातृ सम्मान) कार्यक्रम 25 सितंबर से 7 अक्टूबर 2026 तक आयोजित होगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मंशानुरूप इस पहल के तहत जिले के सभी ’2371 आंगनबाड़ी केन्द्रों’ में आने वाले नन्हे-मुन्ने बच्चों के लिए जनसहयोग से खिलौने उपलब्ध कराए जाएंगे।

"आंगन मिलन सेवा" का उद्देश्य आंगनबाड़ी केन्द्रों को बच्चों के लिए और अधिक आनंदमय, आकर्षक तथा सीखने के अनुकूल वातावरण प्रदान करना है। इस पहल में जिले के नागरिकों की सहभागिता को विशेष महत्व दिया गया है। ’खिलौना दान इस आयोजन का सबसे आत्मीय और संवेदनशील पक्ष होगा’, जिसके माध्यम से जिलेवासी आंगनबाड़ी के बच्चों के साथ सेवा, स्नेह और अपनत्व का भाव साझा कर सकेंगे।

’घर में रखे खिलौने भी बनेंगे किसी बच्चे की खुशी का कारण’

कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने जिलेवासियों से अपील की है कि उनके घरों में ऐसे ’सुरक्षित, स्वच्छ एवं उपयोगी खिलौने’, जिनका अब उपयोग नहीं हो रहा है, वे उन्हें आंगनबाड़ी केन्द्रों के बच्चों को भेंट कर सकते हैं। इसके साथ ही इच्छुक नागरिक अपनी स्वेच्छा से नए खिलौने खरीदकर भी बच्चों को दान कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि किसी बच्चे के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए किया गया छोटा-सा प्रयास भी बेहद महत्वपूर्ण होता है। जिले के नागरिक, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन, स्वयंसेवी संस्थाएं और व्यवसायिक प्रतिष्ठान 25 सितंबर से 7 अक्टूबर के बीच अपने निकटतम आंगनबाड़ी केन्द्र पहुंचकर इस जनभागीदारी अभियान में शामिल हो सकते हैं।

आंगनबाड़ी केन्द्र बच्चों की पहली पाठशाला

कलेक्टर त्रिपाठी ने कहा कि आंगनबाड़ी केन्द्र बच्चों के जीवन की ’पहली पाठशाला’ हैं। यहीं से बच्चों में सीखने, समझने, संवाद करने और सामाजिक व्यवहार की प्रारंभिक नींव तैयार होती है। ऐसे में इन केन्द्रों को बच्चों के लिए अधिक जीवंत और सीखने योग्य बनाने में समाज की सहभागिता निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

उन्होंने जिलेवासियों से आग्रह करते हुए कहा कि आपका छोटा-सा सहयोग किसी बच्चे के चेहरे पर बड़ी मुस्कान ला सकता है और उसकी सीखने की यात्रा को और समृद्ध कर सकता है। बच्चों के लिए किया गया प्रत्येक छोटा प्रयास उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव को मजबूत करने में योगदान देता है।

खिलौनों से खेल-खेल में सीखने की मजबूत होगी नींव

बच्चों के लिए खिलौने केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि वे उनके ’रचनात्मक, बौद्धिक और सामाजिक विकास’ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। खेल-खेल में बच्चे नई चीजों को समझते हैं, अपनी कल्पनाशक्ति को विकसित करते हैं और भाषा तथा सामाजिक व्यवहार से जुड़े कौशल सीखते हैं।

जनसहयोग से प्राप्त खिलौनों का उपयोग आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों के लिए ऐसा वातावरण तैयार करने में किया जाएगा, जहां वे ’खेलते हुए सीख सकें, अपनी रचनात्मकता को अभिव्यक्त कर सकें और सीखने की प्रक्रिया का आनंद उठा सकें।’ इससे आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों की रुचि और सहभागिता को भी बढ़ावा मिलेगा।

सेवा से संकल्प और संकल्प से जनभागीदारी की ओर

‘आंगन मिलन सेवा’ केवल खिलौना दान तक सीमित पहल नहीं है, बल्कि यह समाज में ’संवेदनशीलता, सहयोग और अपनत्व की भावना को मजबूत करने का अवसर’ भी है। एक ओर जहां बच्चों को उनके विकास के लिए उपयोगी संसाधन मिलेंगे, वहीं दूसरी ओर समाज के विभिन्न वर्गों को बच्चों के साथ सीधे जुड़कर सेवा का अवसर मिलेगा।

जिला प्रशासन एवं महिला एवं बाल विकास विभाग ने जिले के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे 25 सितंबर से 7 अक्टूबर तक आयोजित ‘आंगन मिलन सेवा’ में सक्रिय सहभागिता निभाएं। अपने घर में अनुपयोगी लेकिन सुरक्षित और उपयोगी खिलौने किसी आंगनबाड़ी केन्द्र में दान करें या अपनी इच्छा के अनुसार नए खिलौने उपलब्ध कराएं।

यह जनभागीदारी पहल 2371 आंगनबाड़ी केन्द्रों के नन्हे-मुन्नों के जीवन में खुशियों के रंग भरने के साथ-साथ सेवा, स्नेह और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को भी नई मजबूती देगी। सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से जिले में यह संदेश भी जाएगा कि बच्चों के बेहतर भविष्य की जिम्मेदारी केवल परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझी जिम्मेदारी है।

जापान से आए एहिमे यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधिमंडल ने देखा छत्तीसगढ़ की प्राचीन विरासत का वैभव, सिरपुर की ऐतिहासिक धरोहर ने किया अभिभूत

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छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड ने 17 सदस्यीय अंतरराष्ट्रीय डेलीगेशन के लिए आयोजित किया विशेष हेरिटेज टूर

लक्ष्मण मंदिर, आनंद प्रभु कुटी विहार, स्वास्तिक विहार, तीवरदेव महाविहार सहित प्रमुख पुरातात्विक स्थलों का किया भ्रमण

 वैश्विक अकादमिक एवं पर्यटन संवाद में सिरपुर को नई पहचान दिलाने की पहल

रायपुर- छत्तीसगढ़ की समृद्ध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पुरातात्विक विरासत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड  ने जापान के मत्सुयामा स्थित एहिमे यूनिवर्सिटी के 17 सदस्यीय अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल के लिए विशेष हेरिटेज टूर का आयोजन किया। अकादमिक एवं शोध सहयोग के उद्देश्य से 12 से 14 सितंबर 2026 तक एनआईटी रायपुर द्वारा होस्ट किए गए जापानी डेलीगेशन ने 14 सितंबर को प्राचीन ऐतिहासिक नगरी  सिरपुर का भ्रमण कर छत्तीसगढ़ की उस विरासत को करीब से जाना, जिसमें बौद्ध, हिंदू और जैन संस्कृति का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है।

मुख्य हॉस्पिटैलिटी एवं आयोजन सहयोगी के रूप में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड ने अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के लिए सिरपुर में विशेष हेरिटेज टूर की व्यवस्था की। डेलीगेशन को सिरपुर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, स्थापत्य कला, पुरातात्विक महत्व और धार्मिक-सांस्कृतिक विविधता से परिचित कराने के लिए विशेषज्ञ स्थानीय गाइड की सेवाएं ली गईं। साथ ही जापानी मेहमानों की खान-पान संबंधी पसंद को ध्यान में रखते हुए विशेष हॉस्पिटैलिटी एवं भोजन की व्यवस्था भी की गई।

सिरपुर - इतिहास, धर्म और स्थापत्य का अद्भुत संगम

महानदी के तट पर बसा सिरपुर प्राचीन काल में  श्रीपुर  के नाम से जाना जाता था और दक्षिण कोसल की राजधानी के रूप में इसका महत्वपूर्ण स्थान रहा। वर्तमान सिरपुर में हुए पुरातात्विक उत्खननों से बौद्ध विहारों, हिंदू मंदिरों, जैन अवशेषों तथा अन्य प्राचीन संरचनाओं का विस्तृत संसार सामने आया है। यहां बौद्ध, हिंदू और जैन परंपराओं से जुड़े अनेक पुरातात्विक अवशेष मौजूद हैं।

जापानी प्रतिनिधिमंडल ने इस ऐतिहासिक नगरी के प्रमुख विरासत स्थलों का भ्रमण करते हुए यहां की स्थापत्य परंपरा और प्राचीन सांस्कृतिक जीवन को समझा। उनके लिए यह भ्रमण केवल पर्यटन नहीं, बल्कि भारत और जापान के बीच अकादमिक, सांस्कृतिक और विरासत संवाद का एक जीवंत अनुभव रहा।

लक्ष्मण मंदिर - ईंटों में उकेरी अद्भुत स्थापत्य कला

डेलीगेशन के भ्रमण का प्रमुख आकर्षण लक्ष्मण मंदिर रहा। लगभग सातवीं शताब्दी से संबद्ध यह मंदिर भारत के उत्कृष्ट प्राचीन ईंट निर्मित मंदिरों में गिना जाता है। मंदिर की वास्तुकला, अलंकरण और ईंटों पर की गई बारीक कारीगरी सिरपुर की स्थापत्य कला को प्रदर्शित करती है। मंदिर परिसर में पुरातात्विक महत्व की अनेक प्रतिमाएं और अवशेष भी संरक्षित हैं। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने मंदिर की संरचना, गर्भगृह, अंतराल और मंडप सहित इसकी स्थापत्य विशेषताओं को देखा तथा स्थानीय गाइड से मंदिर के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संदर्भों की जानकारी प्राप्त की।

आनंद प्रभु कुटी विहार ने बताया सिरपुर का बौद्ध वैभव

इसके बाद डेलीगेशन ने आनंद प्रभु कुटी विहार का भ्रमण किया। यह सिरपुर के प्रमुख बौद्ध पुरातात्विक स्थलों में शामिल है। विहार की संरचना में केंद्रीय प्रांगण के चारों ओर कक्षों की व्यवस्था तथा सुंदर नक्काशीदार स्थापत्य तत्व दिखाई देते हैं। यहां बुद्ध की प्रतिमा और पद्मपाणि अवलोकितेश्वर से संबंधित कलात्मक अवशेष इसकी बौद्ध विरासत को विशेष बनाते हैं। उपलब्ध पुरातात्विक विवरणों के अनुसार यहां 14 कक्षों वाला मठीय परिसर रहा है।

जापानी विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने यहां प्राचीन बौद्ध शिक्षा, मठीय जीवन और स्थापत्य परंपरा के बारे में जानकारी ली। यह स्थल उनके लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि जापान की अपनी सांस्कृतिक परंपरा में भी बौद्ध दर्शन और कला का गहरा प्रभाव रहा है। 

स्वास्तिक विहार - प्राचीन वास्तु योजना का अनूठा उदाहरण

डेलीगेशन ने स्वास्तिक विहार का भी अवलोकन किया। अपने विशिष्ट स्वास्तिकाकार विन्यास के कारण यह विहार सिरपुर की पुरातात्विक विरासत में विशेष पहचान रखता है। उत्खनन से यहां बुद्ध एवं पद्मपाणि से संबंधित प्रतिमाएं और अन्य बौद्धकालीन अवशेष प्राप्त हुए हैं। प्रतिनिधिमंडल ने विहार की संरचना और प्राचीन वास्तु योजना को समझा तथा यह जाना कि सदियों पूर्व सिरपुर किस प्रकार धार्मिक एवं बौद्धिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा होगा।

तीवरदेव महाविहार में दिखा बौद्ध और भारतीय कला का समन्वय

हेरिटेज टूर का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव तीवरदेव महाविहार रहा। सिरपुर के प्रमुख बौद्ध स्मारकों में शामिल इस परिसर की कला में बौद्ध एवं हिंदू परंपराओं का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। यहां बुद्ध प्रतिमाओं के साथ गंगा-यमुना, गजलक्ष्मी, पौराणिक एवं अन्य अलंकरणात्मक शिल्प दिखाई देते हैं। प्रतिनिधिमंडल ने इस स्थल को भारतीय सांस्कृतिक समन्वय की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया और यहां की कलात्मक विशेषताओं को करीब से देखा। यह अनुभव विशेष रूप से अकादमिक एवं शोध पृष्ठभूमि से आए सदस्यों के लिए ज्ञानवर्धक रहा।

पुरातात्विक विरासत के विस्तृत संसार से हुए परिचित

सिरपुर में अब तक हुए उत्खननों से अनेक बौद्ध विहारों, शिव एवं विष्णु मंदिरों तथा जैन परंपरा से जुड़े अवशेषों का पता चला है। यहां 12 बौद्ध विहार, एक जैन विहार, बुद्ध एवं महावीर की प्रतिमाओं के साथ अनेक शिव और विष्णु मंदिरों के अवशेष सामने आए हैं। इसी समृद्ध पुरातात्विक परिदृश्य को जापानी डेलीगेशन ने स्थल पर पहुंचकर अनुभव किया। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने प्राचीन ईंट निर्माण, मूर्तिकला, विहारों की योजना और मंदिर स्थापत्य को विशेष रुचि के साथ देखा तथा कई स्थलों की जानकारी और दस्तावेजीकरण में भी रुचि दिखाई।

अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के लिए स्थानीय संस्कृति और आतिथ्य का अनुभव

छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड ने हेरिटेज टूर को केवल स्मारक भ्रमण तक सीमित न रखते हुए अंतरराष्ट्रीय मेहमानों को स्थानीय संस्कृति और आतिथ्य से जोड़ने का भी प्रयास किया। जापानी प्रतिनिधिमंडल के खान-पान की पसंद को ध्यान में रखते हुए विशेष भोजन व्यवस्था की गई तथा स्थानीय गाइडों ने सरल एवं रोचक तरीके से सिरपुर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, स्थापत्य और सांस्कृतिक महत्व की जानकारी दी। इस दौरान जापानी विद्यार्थियों एवं प्रतिनिधियों ने सिरपुर की प्राचीनता, स्थापत्य कला और सांस्कृतिक विविधता में विशेष रुचि दिखाई। उनके लिए यह अनुभव भारत की विरासत को अकादमिक अध्ययन और प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से समझने का अवसर बना।

एनआईटी रायपुर ने सराहा छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड का सहयोग

एनआईटी रायपुर के प्रोफेसर दिलीप सिंह सिसोदिया ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल के सिरपुर भ्रमण के लिए छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा की गई व्यवस्थाओं और सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि बोर्ड की ओर से किए गए समन्वय और आतिथ्य ने जापान से आए प्रतिनिधिमंडल के लिए इस सांस्कृतिक यात्रा को सहज, यादगार और ज्ञानवर्धक बनाया।

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के लिए इस तरह के हेरिटेज टूर केवल पर्यटन अनुभव नहीं, बल्कि विभिन्न देशों के बीच सांस्कृतिक और अकादमिक संवाद को मजबूत करने का माध्यम भी हैं। छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के सहयोग से प्रतिनिधिमंडल को सिरपुर की समृद्ध ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को करीब से समझने और अनुभव करने का अवसर मिला।

वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर सिरपुर को स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

एहिमे यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधिमंडल का सिरपुर भ्रमण छत्तीसगढ़ की प्राचीन विरासत को अंतरराष्ट्रीय अकादमिक, सांस्कृतिक और पर्यटन नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड का यह प्रयास राज्य की ऐतिहासिक धरोहरों को केवल घरेलू पर्यटन स्थलों के रूप में नहीं, बल्कि वैश्विक यात्रियों, शोधार्थियों और सांस्कृतिक अध्येताओं के लिए महत्वपूर्ण गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

सिरपुर जैसे विरासत स्थलों में इतिहास, धर्म, कला, स्थापत्य और सांस्कृतिक सह-अस्तित्व की ऐसी कहानी समाहित है, जो भारत की प्राचीन ज्ञान एवं सांस्कृतिक परंपरा को विश्व के सामने प्रस्तुत करने की व्यापक संभावनाएं रखती है। जापान के विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों एवं प्रतिनिधियों का यह भ्रमण इसी वैश्विक सांस्कृतिक संवाद की एक सार्थक कड़ी बना, जिसने छत्तीसगढ़ की प्राचीन विरासत और जापान की अकादमिक दुनिया के बीच एक नया सेतु तैयार किया।
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