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'वे डाल-डाल हैं, तो हम पात-पात': मिलावटखोरों पर गरजे स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल; कांग्रेस पर भी साधा निशाना

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 रायपुर: छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी कीमत पर मिलावटखोरों को नहीं छोड़ेगी। कार्रवाई केवल एनालॉग पनीर तक सीमित नहीं है, बल्कि दूध, दही, मक्खन और अन्य खाद्य सामग्री में मिलावट करने वालों पर भी लगातार शिकंजा कसा जा रहा है।


500 किलो संदिग्ध पनीर मामले पर दिया जवाब

रायपुर रेलवे स्टेशन पर 500 किलो संदिग्ध पनीर जब्त होने के बाद भी तत्काल कार्रवाई न होने के सवाल पर मंत्री ने कहा कि रेलवे परिसर से जुड़े मामलों की प्रक्रिया अलग होती है और इसमें रेलवे प्रशासन की भूमिका रहती है। हालांकि, उन्होंने भरोसा दिलाया कि इससे जांच या कार्रवाई प्रभावित नहीं होगी।

मंत्री ने कड़े शब्दों में कहा, "वे डाल-डाल हैं, तो हम पात-पात हैं। मिलावट करने वालों के खिलाफ हमारी कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।"

स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर सरकार गंभीर

मेडिकल कॉलेज के छात्रों द्वारा स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर किए जा रहे प्रदर्शन पर मंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है। छात्रों से इस मुद्दे पर चर्चा हो चुकी है और मुख्यमंत्री से भी बातचीत की गई है। सरकार इस मांग पर गंभीरता से विचार कर रही है।

कांग्रेस पर बोला हमला

वर्ष 2028 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के दावों पर पलटवार करते हुए जायसवाल ने तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं की "एक जेब में पेट्रोल और दूसरी जेब में माचिस" है और पार्टी अंदरूनी खींचतान से जूझ रही है। पंजाब का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस कभी एकजुट होकर काम नहीं कर पाती; वह सिर्फ योजनाएं बनाती है, लेकिन उन्हें लागू करने में विफल रहती है।

बृजमोहन अग्रवाल के पत्र का किया समर्थन

रायपुर पुलिस कमिश्नरेट के विस्तार को लेकर सांसद बृजमोहन अग्रवाल द्वारा लिखे गए पत्र का समर्थन करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता जताना जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है। विपक्ष की आलोचना पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस को बृजमोहन अग्रवाल से जनप्रतिनिधि के दायित्वों का निर्वहन करने और जनता के हित में काम करने की सीख लेनी चाहिए।

सफलता की कहानी - महुआ ने बदली महिलाओं की जिंदगी, वन धन योजना से मिली आत्मनिर्भरता की नई पहचान

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 रायपुर : जनजातीय कार्य मंत्रालय और ट्राइफेड की एक पहल है, जिसे 2018 में शुरू किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य वनों से लघु वनोपज एकत्र करने वाले आदिवासी समुदायों को प्रशिक्षित करना, उनके उत्पादों का मूल्यवर्धन करना और उन्हें उद्यमी बनाकर स्थायी आजीविका प्रदान करना है।


छत्तीसगढ़ के जंगलों में मिलने वाला महुआ अब ग्रामीण और आदिवासी महिलाओं के लिए आय और आत्मनिर्भरता का मजबूत साधन बन गया है। राज्य शासन की वन धन विकास केंद्र योजना के माध्यम से महिलाओं को महुआ से मूल्यवर्धित उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे उनकी आमदनी बढ़ रही है और वे सफल उद्यमी बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

राजनांदगांव जिले के कोरिनभाठा वन धन विकास केंद्र की सफलता

राजनांदगांव जिले के कोरिनभाठा वन धन विकास केंद्र की महिलाओं ने इस योजना का पूरा लाभ उठाया है। पहले वे महुआ केवल संग्रह करती थीं, लेकिन अब प्रशिक्षण के बाद महुआ से लड्डू, कुकीज़, एनर्जी बार, स्क्वैश और अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार कर रही हैं। आधुनिक प्रसंस्करण और आकर्षक पैकेजिंग के कारण इन उत्पादों की बाजार में अच्छी मांग बन रही है।

प्रशिक्षण और कौशल विकास

वन धन विकास केंद्र में महिलाओं को केवल उत्पाद बनाना ही नहीं सिखाया जाता, बल्कि गुणवत्ता, स्वच्छ उत्पादन, पैकेजिंग, लेबलिंग, भंडारण और विपणन की भी जानकारी दी जाती है। इससे वे बाजार की जरूरत के अनुसार बेहतर उत्पाद तैयार कर पा रही हैं और उन्हें उचित मूल्य भी मिल रहा है।

महुआ के मूल्यवर्धन से बढ़ा रोजगार

महुआ के मूल्यवर्धन से उसकी उपयोगिता और बाजार मूल्य दोनों बढ़े हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। महिलाओं की आय में वृद्धि हुई है और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है। महुआ के फूलों और बीजों के मूल्यवर्धन से ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों में महिलाओं की आय कई गुना बढ़ गई है। अब केवल कच्चे महुआ को बेचने के बजाय उससे लड्डू, कुकीज, जैम, और एनर्जी बार जैसे उत्पाद बनाए जा रहे हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर नए रोजगार और स्थायी आजीविका के साधन विकसित हुए हैं।

छत्तीसगढ़ हर्बल्स के माध्यम से बाजार उपलब्धता

इन उत्पादों को ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ के माध्यम से व्यापक बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे वन आधारित उत्पादों को नई पहचान मिल रही है और ग्रामीण महिलाओं को अपने उत्पाद बेचने के बेहतर अवसर प्राप्त हो रहे हैं। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वन उत्पाद संघ की एक अनूठी पहल है। इसके तहत वनों से मिलने वाले प्राकृतिक और शुद्ध उत्पादों जैसे वन शहद, एलोवेरा जेल, हर्बल जूस, महुआ उत्पाद, आयुर्वेदिक चूर्ण और तेलों को महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार कर बेचा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य आदिवासियों और स्थानीय लोगों को आजीविका देना है।

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता कदम

कोरिनभाठा की महिलाओं की यह सफलता दिखाती है कि सही प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक और विपणन सहयोग मिलने पर वन संपदा को रोजगार और समृद्धि का मजबूत आधार बनाया जा सकता है। वन धन विकास केंद्र योजना आज महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रही है।

कांग्रेस नेता हत्याकांड का खुलासा: शराब के नशे में लूट की नीयत से की गई थी वारदात, मुख्य आरोपी समेत 4 गिरफ्तार

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 दुर्ग : रात के करीब दो बजे सुनसान दुर्ग-धमधा मार्ग पर हुई कांग्रेस नेता प्रकाश सिंह कश्यप (45) की सनसनीखेज हत्या की गुत्थी को दुर्ग पुलिस ने सुलझा लिया है। पुलिस ने मामले में एक मुख्य आरोपी सहित तीन विधि से संघर्षरत बालकों (नाबालिगों) को हिरासत में लिया है। पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि चारों आरोपियों ने पहले जमकर शराब पी और फिर राहगीरों को लूटने की नीयत से सड़क पर निकले थे।


लूट का विरोध करने पर ताबड़तोड़ चलाए चाकू

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, घटना वाली रात चारों आरोपी एक दोस्त के मकान में शराब पार्टी कर रहे थे। नशे में धुत होने के बाद आरोपियों ने काले रंग की डिस्कवर मोटरसाइकिल से दुर्ग-धमधा रोड की ओर रुख किया और किसी सुनसान जगह पर शिकार का इंतजार करने लगे।

इसी दौरान कांग्रेस नेता प्रकाश सिंह कश्यप अपने दो साथियों के साथ बाइक से गांव लौट रहे थे। बदमाशों ने उनकी बाइक रोककर बहस शुरू की और प्रकाश कश्यप की जेब से नकदी व मोबाइल छीनने का प्रयास किया। जब उन्होंने इसका कड़ा विरोध किया, तो आरोपी आदर्श उर्फ लाल (19) ने चाकू निकालकर उन पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। वहीं अन्य आरोपियों ने डंडे और पाइप से प्रकाश के साथियों की पिटाई कर दी। वारदात के बाद बदमाश ₹4,000 नकद लूटकर फरार हो गए। गंभीर रूप से घायल प्रकाश को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

100 से अधिक CCTV फुटेज खंगालकर मिला सुराग

शुरुआत में आरोपियों की कोई पहचान न होने के कारण यह मामला पूरी तरह से 'ब्लाइंड मर्डर' था। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीसीयू (ACCU) और जेवरा सिरसा चौकी पुलिस की एक विशेष जांच टीम गठित की गई।

टीम ने घटना स्थल से लेकर दुर्ग, भिलाई और धमधा मार्ग तक लगे 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल लोकेशन और मुखबिरों से मिली सटीक सूचना के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंचने में कामयाब रही।

हथियार और लूटी गई रकम बरामद

कड़ाई से पूछताछ करने पर आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त चाकू, डंडा, पाइप, वारदात में इस्तेमाल मोटरसाइकिल और लूटी गई नकदी बरामद कर ली है।

आरोपियों का मोड्स ऑपरेंडी (तरीका)

पुलिस के मुताबिक, ये आरोपी देर रात सुनसान सड़कों पर बाइक सवारों को रोकते थे। पहले किसी बात पर विवाद खड़ा करते और फिर मारपीट कर पैसे व मोबाइल लूट लेते थे। विरोध करने पर जानलेवा हमला करना इनकी आदत बन चुकी थी।

मुख्य आरोपी समेत नाबालिग हिरासत में

पुलिस ने मामले में कादम्बरी नगर (मोहन नगर, दुर्ग) निवासी मुख्य आरोपी आदर्श उर्फ लाल (19 वर्ष) को गिरफ्तार किया है, जबकि तीन नाबालिगों को अभिरक्षा में लिया गया है। सभी के खिलाफ हत्या, लूट और अन्य गंभीर धाराओं के तहत वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

दुर्ग पुलिस के अनुसार, वैज्ञानिक जांच, सीसीटीवी विश्लेषण और टीम के त्वरित फील्ड वर्क की बदौलत इस अंधे कत्ल की गुत्थी को पुलिस ने सफलतापूर्वक सुलझा लिया है।

छत्तीसगढ़ में मानसून फिर सक्रिय: अगले तीन दिनों तक भारी बारिश का अलर्ट

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ में मानसून एक बार फिर पूरी तरह से सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग ने आगामी तीन दिनों तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में झमाझम बारिश का दौर जारी रहने की संभावना जताई है। इसे लेकर मौसम वैज्ञानिकों ने आम नागरिकों व किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है।


उत्तर छत्तीसगढ़ में भारी बारिश और वज्रपात का खतरा

मौसम केंद्र रायपुर के अनुसार, उत्तर छत्तीसगढ़ के जिलों में भारी बारिश के साथ-साथ तेज गरज-चमक और वज्रपात (आकाशीय बिजली) गिरने की विशेष चेतावनी जारी की गई है। बीते 24 घंटों के दौरान भी प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मध्यम और उत्तर छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में भारी वर्षा दर्ज की गई है।

राजधानी रायपुर में भी छाएंगे बादल

राजधानी रायपुर और आसपास के क्षेत्रों में भी मौसम का मिजाज बदला रहेगा। दिनभर काले बादल छाए रहने के साथ गरज-चमक के साथ एक से दो बार तेज बौछारें पड़ सकती हैं। 

खिलाड़ियों का लंबा इंतजार खत्म, राज्य शासन ने जारी की उत्कृष्ट खिलाड़ियों की सूची,20 खेलों के 156 खिलाड़ी शामिल

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रायपुर- राज्य के खिलाड़ियों का लंबा इंतजार आखिर आज खत्म हो गया। राज्य शासन ने बहुप्रतीक्षित उत्कृष्ट खिलाड़ियों की सूची आज जारी कर दी है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा राजपत्र में इसका प्रकाशन कर दिया गया है। राज्य शासन द्वारा छत्तीसगढ़ उत्कृष्ट खिलाड़ियों को शासकीय सेवा में नियुक्त करने की नीति, 2007 के प्रावधानों के तहत राजपत्र में इस सूची को अधिसूचित किया गया है।

विभाग द्वारा जारी सूची में 156 खिलाड़ियों को शामिल किया गया है, जिनमें 20 खेलों के खिलाड़ी शामिल हैं। विगत 30 जून को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय समिति की बैठक में उत्कृष्ट खिलाड़ियों की सूची को अनुमोदित कर राजपत्र में प्रकाशन के लिए सामान्य प्रशासन विभाग को भेजा गया था। 

उच्च स्तरीय समिति की बैठक में उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव सहित समिति के सदस्यों ने वर्ष 2018-19 एवं 2019-20 के लिए प्राप्त आवेदनों पर विस्तृत विचार-विमर्श तथा सभी पहलुओं की समीक्षा के बाद 156 उत्कृष्ट खिलाड़ियों के चयन को अंतिम स्वरूप प्रदान किया था। विभाग ने आवश्यक कार्यवाही पूर्ण कर आज राजपत्र में इसका प्रकाशन कर दिया है। 

मोर गांव-मोर पानी अभियान से ग्रामीण आजीविका को मिली नई उड़ान

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47 आजीविका डबरियां किसानों के लिए बनेंगी संबल, जल संरक्षण के साथ बढ़ेगी आय

विकसित भारत जी राम जी योजना के तहत सिंचाई, मत्स्य पालन और कृषि गतिविधियों को मिलेगा नया आधार

रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू किया गया 'मोर गांव-मोर पानी' महाअभियान ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण को एक बड़ा जनआंदोलन बना रहा है। इसके तहत सोख्ता गड्ढे, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, तालाब गहरीकरण और खेत-पोंड जैसी जल संरचनाएं बनाकर भूजल स्तर को बढ़ाया जा रहा है और ग्रामीणों को रोजगार भी मिल रहा है। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में 'मोर गांव-मोर पानी' अभियान के तहत 'नवा तरिया आय के जरिया' और अन्य जल संरचनाओं के माध्यम से भूजल संवर्धन और जल संरक्षण को जनआंदोलन का रूप दिया जा रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई सुविधा और महिलाओं के लिए आजीविका के नए अवसर बढ़ रहे हैं।

कृषि एवं मत्स्य पालन के माध्यम से किसानों होंगे आत्मनिर्भर

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा संचालित मोर गांव-मोर पानी अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण, सिंचाई विस्तार और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में प्रभावी पहल साबित हो रहा है। विकसित भारत जी राम जी योजना के अंतर्गत जांजगीर-चांपा जिले में आजीविका आधारित जल संरचनाओं का निर्माण कर किसानों को कृषि एवं मत्स्य पालन के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किए जा रहे हैं।

47 आजीविका डबरियों का निर्माण स्वीकृत

जांजगीर-चांपा जिले में अभियान के तहत कुल 47 आजीविका डबरियों का निर्माण स्वीकृत किया गया है, जिनमें से 35 डबरियों का निर्माण पूर्ण हो चुका है। वर्षा जल से भर चुकी इन डबरियों के माध्यम से किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध हो रहा है, जिससे खेती का रकबा बढ़ने के साथ कृषि उत्पादन में भी वृद्धि हो रही है।

14 डबरियों में मत्स्य पालन एवं कृषि आधारित गतिविधियां संचालित

आजीविका डबरियां अब केवल जल संरक्षण का माध्यम नहीं रहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों के लिए अतिरिक्त आय का सशक्त स्रोत भी बन रही हैं। वर्तमान में 14 डबरियों में मत्स्य पालन एवं कृषि आधारित गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। डबरियों की मेड़ों पर दलहन, तिलहन तथा अन्य फसलों की खेती से किसानों को अतिरिक्त उत्पादन और बेहतर आमदनी प्राप्त हो रही है। जिले में 4 डबरियों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन से वर्षा जल संरक्षण, भू-जल स्तर में सुधार तथा सिंचाई सुविधाओं के विस्तार को नई गति मिली है। इससे किसान अब वर्षभर कृषि एवं मत्स्य पालन जैसी आजीविका गतिविधियों से जुड़कर अपनी आय में निरंतर वृद्धि कर रहे हैं।

मोर गांव-मोर पानी अभियान प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण

मोर गांव-मोर पानी अभियान प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, कृषि उत्पादकता बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की दिशा में राज्य सरकार की महत्वपूर्ण पहल के रूप में उभर रहा है। यह अभियान जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ते हुए किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और ग्रामीण विकास को नई गति प्रदान कर रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में वन अधिकार अधिनियम (FRA) एवं पेसा कानून (PESA) के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु गठित टास्क फोर्स की पहली बैठक संपन्न

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पेसा और वन अधिकार कानून का प्रभावी क्रियान्वयन राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

राज्य स्तरीय कार्ययोजना समिति करेगी विभिन्न विभागों के नियमों का समन्वय, जिला स्तरीय पेसा निगरानी समितियों को किया जाएगा सक्रिय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज महानदी मंत्रालय भवन में वन अधिकार अधिनियम (Forest Rights Act-FRA) एवं पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम (PESA) के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु गठित टास्क फोर्स की शीर्ष समिति की प्रथम बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश में पेसा कानून और वन अधिकार अधिनियम के बेहतर समन्वय, जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन तथा अनुसूचित क्षेत्रों के समग्र एवं सतत विकास के लिए आवश्यक रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि पेसा कानून का क्रियान्वयन ग्राम स्वशासन को सशक्त बनाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बने। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की लगभग एक-तिहाई आबादी आदिवासी समाज से जुड़ी है। ऐसे में उनकी परंपराओं, अधिकारों और विकास को ध्यान में रखते हुए पेसा कानून का प्रभावी और आदर्श मॉडल विकसित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पेसा कानून अनुसूचित क्षेत्रों में निवास करने वाले नागरिकों के हितों की रक्षा करता है। इससे स्थानीय संसाधनों के बेहतर प्रबंधन, ग्राम सभाओं की भूमिका को मजबूती, रोजगार के अवसरों के विस्तार तथा संतुलित एवं सतत विकास को गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य ऐसा मॉडल तैयार करना है, जिससे विकास और जनभागीदारी साथ-साथ आगे बढ़ें।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वन अधिकार अधिनियम (FRA) और पेसा कानून (PESA), दोनों कानूनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर ही अनुसूचित क्षेत्रों में प्रभावी परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि दोनों कानूनों के प्रावधानों को एकीकृत दृष्टिकोण से लागू करते हुए योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाया जाए।

बैठक में मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पेसा कानून का उद्देश्य  ग्राम स्वशासन को मजबूत करना, स्थानीय संसाधनों पर समुदाय की सहभागिता बढ़ाना तथा समावेशी विकास सुनिश्चित करना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनजागरूकता अभियान चलाकर लोगों तक सही जानकारी पहुँचाई जाए तथा किसी भी प्रकार के भ्रम का तथ्यात्मक निराकरण किया जाए।

बैठक में छत्तीसगढ़ पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) नियम, 2022 के तहत पेसा प्रावधानों के क्रियान्वयन की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गई। साथ ही वन अधिकार अधिनियम, 2006 के अंतर्गत प्राप्त, निराकृत एवं लंबित व्यक्तिगत तथा सामुदायिक दावों की स्थिति, सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (Community Forest Resource Rights-CFRR) की मान्यता, संरक्षण एवं प्रबंधन की प्रगति तथा वन ग्रामों को राजस्व ग्रामों में परिवर्तित किए जाने की प्रक्रिया की भी विस्तृत समीक्षा की गई।

राज्य स्तरीय कार्ययोजना समिति करेगी समन्वय का कार्य

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पेसा कानून के अंतर्गत विभिन्न विभागों द्वारा एक ही विषय पर बनाए गए अलग-अलग नियमों एवं प्रक्रियाओं के समन्वय के लिए राज्य स्तरीय कार्ययोजना समिति का गठन किया जाएगा, जो विभिन्न विभागों के नियमों का समन्वय एवं अभिसरण सुनिश्चित करेगी। इस समिति में संबंधित विभागों के मंत्री एवं सचिव सदस्य होंगे और यह समिति समयबद्ध कार्ययोजना तैयार कर उसके प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी करेगी।

उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि वर्तमान में जिला स्तरीय पेसा निगरानी समितियों को सक्रिय किया जाए, ताकि जिला स्तर पर पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन, ग्राम सभाओं के सशक्तीकरण तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित किया जा सके।

बैठक में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम, विधायक नीलकंठ नेताम तथा विभिन्न सामाजिक संस्थाओं से जुड़े विषय विशेषज्ञ उपस्थित थे।

बैठक में मुख्य सचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह,  अपर मुख्य सचिव वन एवं जलवायु परिवर्तन मनोज पिंगुआ, प्रमुख सचिव आदिम जाति विकास विभाग सोनमणि बोरा, सचिव राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग शम्मी आबदी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख (PCCF) अरुण पाण्डेय, संचालक पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग प्रियंका ऋचा महोबिया सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग की बड़ी कार्रवाई

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ओवररेटिंग मामले में दो आबकारी उप निरीक्षक निलंबित

एक एडीईओ के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने के लिए अनुशंसा 

रायपुर- आबकारी आयुक्त छत्तीसगढ़ ने राज्य के विभिन्न जिलों में शराब दुकानों में निर्धारित दर से अधिक कीमत पर बिक्री और नियंत्रण में लापरवाही के मामलों में सख्त कार्रवाई करते हुए दो आबकारी उप निरीक्षकों को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई राज्य स्तरीय उड़नदस्ता की जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई। निलंबित अधिकारियों में बालोद जिले के गुरूर के आशाराम शाक्य (आबकारी उप निरीक्षक) तथा बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के ग्राम रोहासी स्थित देशी कम्पोजिट मदिरा दुकान के प्रभारी पी.माधव राव (आबकारी उप निरीक्षक) शामिल हैं।

एक अन्य मामले में निलोफर जैन सहायक जिला आबकारी अधिकारी जो देश कम्पोजिट मदिरा दुकान अरकार जिला बालोद के प्रभारी सह मंडल प्रभारी का दायित्व था उनके शिथिल नियंत्रण, कर्तव्य की प्रति लापरवाही एवं उदासीनता बरतने के कारण आबकारी आयुक्त द्वारा एडीईओ के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के लिए सचिव वाणिज्यिक-कर (आबकारी) विभाग को पत्र जारी किया है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपनी माँ के नाम पर लगाया पीपल का पौधा, वन महोत्सव-2026 का हुआ शुभारंभ

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'पीपल फॉर पीपुल' अभियान के तहत 15 एकड़ में लगाए गए 2500 से अधिक पीपल के पौधे

'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान से जुड़कर प्रकृति संरक्षण का संकल्प लें : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

प्रदेश में इस वर्ष ढाई करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य, पिछले दो वर्षों में 7 करोड़ से अधिक पौधों का हुआ रोपण

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज वन महोत्सव-2026 का शुभारंभ करते हुए नया रायपुर में आयोजित वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम में अपनी माँ के नाम पर पीपल का पौधा लगाकर प्रदेशव्यापी 'पीपल फॉर पीपुल' अभियान की शुरुआत की। इस अभियान के अंतर्गत लगभग 15 एकड़ क्षेत्र में 2500 से अधिक पीपल के पौधे रोपे गए। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों से 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान से जुड़ने और अधिक से अधिक वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रकृति का संरक्षण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत और आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में वृक्षों को जीवनदाता माना गया है और पीपल का वृक्ष विशेष रूप से आस्था, आध्यात्मिक चेतना तथा पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक है। यह वृक्ष सर्वाधिक ऑक्सीजन देने वाले वृक्षों में माना जाता है और जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून 2024 से प्रारंभ हुआ 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान आज जनआंदोलन का स्वरूप ले चुका है। इस अभियान के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को मातृ सम्मान की भावना से जोड़ा गया है, जिससे समाज में प्रकृति के प्रति आत्मीयता और जिम्मेदारी का भाव विकसित हुआ है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी इस अभियान को व्यापक जनसमर्थन मिला है। पिछले दो वर्षों में प्रदेशभर में 7 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं तथा इस वर्ष ढाई करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वृक्षारोपण तभी सार्थक होगा जब लगाए गए पौधों का संरक्षण भी सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपने घर, खेत-खलिहानों की मेड़, विद्यालय, कार्यस्थल अथवा आसपास उपलब्ध खाली भूमि पर अपनी माँ के नाम एक पौधा अवश्य लगाएँ और उसके पालन-पोषण की जिम्मेदारी भी निभाएँ। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पौधा आने वाले समय में स्वच्छ वायु, शुद्ध वातावरण और सुरक्षित भविष्य का आधार बनेगा।

मुख्यमंत्री ने जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौती का उल्लेख करते हुए कहा कि बढ़ता तापमान, प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ता दबाव पूरी दुनिया के सामने गंभीर चिंता का विषय है। ऐसे समय में वृक्षारोपण सबसे प्रभावी और सरल उपायों में से एक है। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक वर्ष में कम से कम एक पौधा लगाकर उसका संरक्षण करे तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा परिवर्तन संभव है।

मुख्यमंत्री साय ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने प्रतिदिन एक पौधा लगाने का आजीवन प्रण लिया है। यदि किसी दिन किसी कारणवश बाहर पौधा लगाना संभव नहीं होता, तो वे गमले में पौधा लगाकर भी अपने संकल्प का निर्वहन करते हैं। मुख्यमंत्री ने इसे प्रकृति के प्रति समर्पण और अनुशासन का प्रेरणादायी उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसे संकल्प समाज में सकारात्मक परिवर्तन का आधार बनते हैं।

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में प्रदेश में 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान को व्यापक जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 'पीपल फॉर पीपुल' अभियान केवल वृक्षारोपण कार्यक्रम नहीं, बल्कि स्वच्छ, हरित और स्वस्थ भविष्य के निर्माण का संकल्प है।

कश्यप ने कहा कि भारतीय संस्कृति में पीपल का वृक्ष आस्था और विज्ञान का अद्भुत संगम है। धार्मिक दृष्टि से इसे अत्यंत पवित्र माना गया है, वहीं वैज्ञानिक रूप से यह अधिक मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण कर वायु गुणवत्ता सुधारने और शहरी प्रदूषण को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने बताया कि वन विभाग द्वारा 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान के अंतर्गत पिछले दो वर्षों में प्रदेशभर में लगभग 7 करोड़ 50 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं। उन्होंने नागरिकों से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने घरों में तिरंगा फहराने के साथ-साथ एक पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने का भी आह्वान किया।

कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी, खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, विधायक इंद्र कुमार साहू, छत्तीसगढ़ वन विकास निगम के अध्यक्ष रामसेवक पैकरा, अपर मुख्य सचिव वन एवं जलवायु परिवर्तन मनोज कुमार पिंगुआ, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) अरुण कुमार पाण्डेय सहित मंत्रिमंडल के सदस्य, जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ अधिकारियों एवं बड़ी संख्या में नागरिकों ने पीपल के पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी लोगों ने वृक्षारोपण के साथ पौधों के संरक्षण का भी संकल्प दोहराया।

मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने भारत सरकार से मांगी माफी, CSAM और डीपफेक सामग्री पर जताया खेद

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नई दिल्ली- मेटा (Meta) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मार्क जुकरबर्ग ने भारत सरकार के समक्ष कंपनी के प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण सामग्री (Child Sexual Abuse Material - CSAM), डीपफेक कंटेंट तथा कुछ परिचालन संबंधी त्रुटियों को लेकर खेद व्यक्त करते हुए माफी मांगी है।

यह माफी ऐसे समय में आई है, जब भारत सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अवैध और हानिकारक सामग्री के खिलाफ कड़ा रुख अपना रही है। सरकार ने हाल ही में मेटा से इंस्टाग्राम पर प्रसारित CSAM से संबंधित सामग्री और विज्ञापनों को तत्काल हटाने तथा इस संबंध में विस्तृत स्पष्टीकरण देने को कहा था।

मेटा ने दोहराया कि उसकी CSAM के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' नीति है और कंपनी ऐसे कंटेंट की पहचान कर उसे हटाने के लिए अपनी तकनीकी प्रणालियों और सुरक्षा उपायों को लगातार मजबूत कर रही है।

इस घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही (Platform Accountability), डीपफेक और अन्य हानिकारक सामग्री पर नियंत्रण तथा 'सेफ हार्बर' (Safe Harbour) प्रावधानों को लेकर बहस तेज हो गई है। सरकार ने संकेत दिया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म को भारतीय कानूनों और उपयोगकर्ता सुरक्षा से जुड़े मानकों का सख्ती से पालन करना होगा।

आरबीआई ने रेपो रेट में नहीं किया कोई बदलाव, नीतिगत ब्याज दरें यथावत

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नई दिल्ली- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने अपनी ताज़ा समीक्षा बैठक में रेपो रेट सहित सभी प्रमुख नीतिगत ब्याज दरों को यथावत रखने का निर्णय लिया है।

आरबीआई के इस फैसले के बाद शेयर बाजार में सकारात्मक रुख देखने को मिला और प्रमुख सूचकांक मामूली बढ़त के साथ बंद हुए।

आरबीआई ने कहा कि देश में महंगाई पर नियंत्रण बनाए रखने के प्रयास जारी हैं, हालांकि ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव अभी भी मुद्रास्फीति के लिए एक प्रमुख जोखिम बना हुआ है। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया कि भविष्य की मौद्रिक नीति के निर्णय आर्थिक वृद्धि, महंगाई के रुझान और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का आकलन करने के बाद ही लिए जाएंगे।

पाकल दुल जलविद्युत परियोजना में श्रमिक विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान, 210 श्रमिकों को ₹1.12 करोड़ से अधिक के वैधानिक लाभ

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नई दिल्ली- श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अंतर्गत मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) कार्यालय के अधीन क्षेत्रीय श्रम आयुक्त (केंद्रीय), जम्मू के सतत सुलह प्रयासों से जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ स्थित पाकल दुल जलविद्युत परियोजना में एलएंडटी कंस्ट्रक्शन (L&T Construction) द्वारा उप-ठेकेदारों के माध्यम से नियोजित श्रमिकों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण औद्योगिक विवाद सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझा लिया गया है।

प्रबंधन और श्रमिक प्रतिनिधियों के बीच कई चरणों में हुई सुलह वार्ताओं एवं रचनात्मक संवाद के बाद 13 जुलाई 2026 को समझौता हुआ। इसके साथ ही किसान मजदूर यूनियन, नागसेनी द्वारा घोषित हड़ताल समाप्त हो गई और परियोजना स्थल पर औद्योगिक शांति एवं सौहार्द बहाल हो गया।

इस समझौते से 210 श्रमिकों को लाभ मिला। समझौते के परिणामस्वरूप 30 जुलाई 2026 को श्रमिकों को कुल ₹1,12,70,560 (एक करोड़ बारह लाख सत्तर हजार पांच सौ साठ रुपये) के वैधानिक देयकों का भुगतान किया गया।

प्रदत्त राशि में निम्नलिखित लाभ शामिल हैं:

  • छंटनी (Retrenchment) मुआवजा

  • बोनस

  • अर्जित अवकाश का नकदीकरण (Leave Encashment)

  • नोटिस वेतन (Notice Pay)

  • अन्य वैधानिक अंतिम सेवा लाभ

यह भुगतान लागू श्रम कानूनों के अनुरूप किया गया, जिससे श्रमिकों के वैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हुई।

सुलह प्रक्रिया के दौरान प्रबंधन को श्रमिक कल्याण, निष्पक्ष सेवा शर्तों तथा श्रम कानूनों के पालन से संबंधित वैधानिक दायित्वों के प्रति जागरूक किया गया। साथ ही रचनात्मक संवाद के माध्यम से सौहार्दपूर्ण औद्योगिक संबंध बनाए रखने तथा श्रमिक कल्याण संबंधी उपायों को समयबद्ध ढंग से लागू करने के महत्व पर बल दिया गया।

प्रबंधन ने आश्वासन दिया कि वह भविष्य में भी श्रमिकों के कल्याण तथा सभी वैधानिक प्रावधानों के अनुपालन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखेगा।

यह समझौता एलएंडटी कंस्ट्रक्शन के प्रबंधन, किसान मजदूर यूनियन, नागसेनी के महासचिव एवं श्रमिक प्रतिनिधियों के सक्रिय सहयोग तथा क्षेत्रीय श्रम आयुक्त (केंद्रीय), जम्मू के मार्गदर्शन एवं मध्यस्थता से संभव हो सका।

यह सफल सुलह श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा, वैधानिक लाभों के समयबद्ध भुगतान, निष्पक्ष श्रम प्रथाओं को बढ़ावा देने तथा प्रभावी सुलह और रचनात्मक संवाद के माध्यम से सौहार्दपूर्ण औद्योगिक संबंध स्थापित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

भारतीय फार्माकोपिया आयोग को WHO-SEARN का फार्माकोविजिलेंस में क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र और गुणवत्ता के तकनीकी केंद्र का दर्जा

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नई दिल्ली- स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत भारतीय फार्माकोपिया आयोग (IPC) ने 4–5 अगस्त 2026 को नेपाल के काठमांडू में आयोजित दक्षिण-पूर्व एशिया नियामक नेटवर्क (SEARN) की 10वीं वर्षगांठ बैठक में भाग लिया। इस बैठक में दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के राष्ट्रीय नियामक प्राधिकरणों (NRAs), फार्माकोपिया संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक का उद्देश्य चिकित्सा उत्पादों की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करना था।

SEARN विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय (SEARO) द्वारा वर्ष 2016 में स्थापित एक सहयोगात्मक मंच है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों की नियामक प्रणालियों को ज्ञान साझा करने, नियामकीय समन्वय, क्षमता निर्माण तथा सहयोगात्मक तंत्र के माध्यम से सुदृढ़ बनाना है। यह नेटवर्क गुणवत्ता आश्वासन, फार्माकोविजिलेंस, क्लीनिकल ट्रायल निगरानी, नियामकीय तैयारी और चिकित्सा उपकरणों के विनियमन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में कार्य करता है।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल में डॉ. वी. कलैसेलवन (सचिव-सह-वैज्ञानिक निदेशक), डॉ. जय प्रकाश (वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक अधिकारी), डॉ. रॉबिन कुमार (वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक अधिकारी) तथा अरविंद कुमार शर्मा (वैज्ञानिक अधिकारी) शामिल थे।

बैठक के दौरान IPC ने भारत की मजबूत दवा नियामक प्रणाली तथा अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय फार्माकोपिया, इंडियन फार्माकोपिया रेफरेंस सब्स्टेंस (IPRS), इम्प्योरिटी रेफरेंस स्टैंडर्ड्स (IMPRS), फार्माकोविजिलेंस प्रोग्राम ऑफ इंडिया (PvPI), मैटेरियोविजिलेंस प्रोग्राम ऑफ इंडिया (MvPI), क्षमता निर्माण कार्यक्रमों तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोगात्मक पहलों की जानकारी साझा की।

बैठक की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि भारतीय फार्माकोपिया आयोग (IPC) को WHO-SEARN का फार्माकोविजिलेंस में क्षेत्रीय उत्कृष्टता केंद्र (Regional Centre of Excellence in Pharmacovigilance) तथा गुणवत्ता के तकनीकी केंद्र (Technical Centre in Quality) के रूप में मान्यता मिलना रही।

यह प्रतिष्ठित मान्यता फार्माकोविजिलेंस प्रणाली को मजबूत करने, दवा गुणवत्ता मानकों को आगे बढ़ाने तथा WHO दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में नियामकीय क्षमता निर्माण में IPC के निरंतर योगदान की पुष्टि करती है। यह सम्मान फार्माकोपिया विज्ञान एवं मानकों के क्षेत्र में IPC की अग्रणी भूमिका तथा सदस्य देशों के बीच सहयोग, ज्ञान साझा करने और मानकों के सामंजस्य को बढ़ावा देने की उसकी प्रतिबद्धता को भी मजबूत करता है।

बैठक के दौरान प्रतिभागियों ने वैज्ञानिक ज्ञान, नियामकीय अनुभवों और दवा नियमन से जुड़ी उभरती चुनौतियों—जैसे गुणवत्ता आश्वासन, दवा सुरक्षा, नियामकीय सहयोग, डिजिटल परिवर्तन और क्षेत्रीय समन्वय—पर विस्तृत चर्चा की।

भारतीय फार्माकोपिया आयोग ने पुनः दोहराया कि वह WHO-SEARN की पहलों का समर्थन जारी रखेगा तथा दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में सुरक्षित, प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए नियामकीय उत्कृष्टता और क्षेत्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।

रक्षा कार्यालय परिसर, अफ्रीका एवेन्यू में अत्याधुनिक मल्टी-लेवल कार पार्किंग सुविधा का उद्घाटन

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नई दिल्ली- रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने आज नई दिल्ली के अफ्रीका एवेन्यू स्थित रक्षा कार्यालय परिसर में नवनिर्मित मल्टी-लेवल कार पार्किंग सुविधा का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सरकार का संकल्प शहरी अवसंरचना का विकास एवं उन्नयन कर नागरिकों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

उन्होंने कहा कि यह परियोजना कार्यालय परिसर में पार्किंग की समस्या के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। महानगरों में भूमि की कमी को देखते हुए आधुनिक तकनीकों का उपयोग ही अवसंरचनात्मक चुनौतियों का प्रभावी समाधान है। ऐसी पहलें न केवल कार्यस्थल की दक्षता बढ़ाती हैं, बल्कि पारंपरिक व्यवस्था से आधुनिक और उन्नत तकनीकों की ओर संक्रमण को भी प्रोत्साहित करती हैं।

रक्षा राज्य मंत्री ने परियोजना को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने के लिए केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) की सराहना की। उन्होंने सीपीडब्ल्यूडी द्वारा निर्मित एमपी फ्लैट्स, कर्तव्य भवन और एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव जैसी इमारतों की गुणवत्ता, सुविधा और आकर्षक डिजाइन की भी प्रशंसा की।

यह 14 मंजिला मल्टी-लेवल कार पार्किंग अत्याधुनिक पूरी तरह स्वचालित रोबोटिक (डॉली) तकनीक से सुसज्जित है। इसका उद्देश्य उपलब्ध भूमि का अधिकतम उपयोग करते हुए अधिक से अधिक पार्किंग क्षमता विकसित करना है।

इस परियोजना की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • पूरी तरह स्वचालित रोबोटिक (डॉली) आधारित पार्किंग प्रणाली।

  • पारंपरिक पार्किंग की तुलना में 60 प्रतिशत अधिक स्थान उपयोग दक्षता।

  • परियोजना की कुल लागत 45 करोड़ रुपये।

  • सीसीटीवी निगरानी एवं आधुनिक अग्नि सुरक्षा प्रणाली से सुसज्जित।

  • लिफ्ट लॉबी में वाहन प्रवेश के बाद न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप।

  • पार्किंग प्रक्रिया के दौरान वाहनों से शून्य उत्सर्जन (Zero Vehicle Emissions) सुनिश्चित।

इस अवसर पर रक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि आधुनिक तकनीक आधारित ऐसी परियोजनाएं शहरी अवसंरचना को अधिक सक्षम, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

ईज ऑफ डुईंग बिजनेस : निवेशकर्ताओं के लिए छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक पहल

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छत्तीसगढ़ में बदलाव की एक नई हवा बह रही है। राज्य सरकार ने उद्योगों के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं। राज्य में व्यापार करना अब पहले से कहीं अधिक आसान हो गया है। इसे ही अंग्रेजी में 'ईज ऑफ डुईंग बिजनेस' कहा जाता है। सरल शब्दों में कहें तो इसका अर्थ है व्यापार करने की सुगमता।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन में ​छत्तीसगढ़ सरकार ने उद्योग लगाने की प्रक्रियाओं को बेहद सरल बना दिया है। पहले किसी व्यापारी को नया उद्योग लगाने के लिए दर्जनों दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे। अब वह दौर बीत चुका है।

राज्य सरकार ने लालफीताशाही और पुरानी जटिल व्यवस्थाओं को खत्म कर दिया है। आज छत्तीसगढ़ में नया बिजनेस शुरू करना बहुत आसान हो गया है।

​राज्य सरकार की नीतियां सीधे तौर पर निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं। छत्तीसगढ़ अब केवल खनिजों की भूमि नहीं रहा, बल्कि यह देश का एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र बन चुका है।

सिंगल विंडो सिस्टम: एक ही छत के नीचे सारी सुविधाएं।

​उद्योगपतियों और छोटे व्यापारियों की सबसे बड़ी समस्या होती थी - सरकारी मंजूरियां। पहले एक लाइसेंस पाने के लिए महीनों का इंतजार करना पड़ता था। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस परेशानी को समझा और 'सिंगल विंडो सिस्टम' लागू किया।

​ एक ही पोर्टल पर सब कुछ: निवेशकों को अब अलग-अलग विभागों के पास जाने की जरूरत नहीं है।

ऑनलाइन आवेदन: व्यापार से जुड़ी सभी मंजूरियां और अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) अब ऑनलाइन ही मिल जाते हैं।

​ पारदर्शिता और गति: इससे समय की बचत होती है और काम में पारदर्शिता आती है।

​ समय सीमा तय: सरकार ने तय कर दिया है कि हर मंजूरी एक निश्चित समय में देनी ही होगी।

निवेश प्रोत्साहन और नई औद्योगिक नीति 

​छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति को विशेष रूप से निवेशकों के हितों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। राज्य सरकार छोटे, मध्यम और बड़े - सभी प्रकार के उद्योगों को सहायता दे रही है।

विशेष आर्थिक छूट: राज्य में नए उद्योग लगाने पर करों और शुल्कों में राहत दी जा रही है।

सस्ती भूमि और बिजली: निवेशकों को रियायती दरों पर भूमि आवंटन किया जा रहा है और 24 घंटे निर्बाध बिजली उपलब्ध कराई जा रही है।

स्थानीय रोजगार पर जोर: उद्योगों को बढ़ावा देने के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि स्थानीय युवाओं को रोजगार मिले।

महिला उद्यमियों को प्रोत्साहन: महिला कारोबारियों के लिए विशेष छूट और रियायतों का प्रावधान किया गया है।

लघु एवं कुटीर उद्योगों को नया जीवन 

​ईज ऑफ डुईंग बिजनेस केवल बड़े उद्योगपतियों के लिए नहीं है। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के छोटे व्यापारियों, हस्तशिल्पियों और ग्रामीण उद्योगों को भी इससे जोड़ा है।

स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग: 'छत्तीसगढ़ हर्बल्स' और 'ढोकरा आर्ट' जैसे स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाया जा रहा है।

आसान लोन सुविधा: स्वरोजगार शुरू करने वाले युवाओं को बिना किसी परेशानी के बैंक लोन उपलब्ध कराया जा रहा है।

आधारभूत संरचना और बुनियादी ढांचा 

​व्यापार को बढ़ाने के लिए बेहतर सड़कों, रेल और हवाई सेवाओं की जरूरत होती है। छत्तीसगढ़ ने पिछले कुछ वर्षों में अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में बड़ी सफलता हासिल की है।

​ सड़कों का जाल: राज्य के दूर-दराज इलाकों को मुख्य राजमार्गों से जोड़ा गया है।

​लॉजिस्टिक्स पार्क: सामान को एक जगह से दूसरी जगह भेजने के लिए आधुनिक लॉजिस्टिक्स हब बनाए गए हैं।

​सुरक्षित वातावरण: छत्तीसगढ़ को देश के सबसे शांत और सुरक्षित राज्यों में गिना जाता है, जो किसी भी निवेशक की पहली पसंद होती है।

छत्तीसगढ़ का बदलता परिदृश्य 

​छत्तीसगढ़ सरकार की यह ऐतिहासिक पहल अब रंग ला रही है। देश और दुनिया के बड़े-बड़े उद्योगपति छत्तीसगढ़ में निवेश करने की इच्छा जता रहे हैं। इससे न केवल राज्य का राजस्व बढ़ रहा है, बल्कि लाखों युवाओं को अपने ही राज्य में रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं।

​ईज ऑफ डुईंग बिजनेस के माध्यम से छत्तीसगढ़ ने विकास की एक नई इबारत लिखी है। यह पहल राज्य को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम साबित हो रही है।


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