Media24Media.com: CEC को लेकर विपक्ष का विरोध तेज, कांग्रेस-TMC-AAP-DMK ने उठाए सवाल

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CEC को लेकर विपक्ष का विरोध तेज, कांग्रेस-TMC-AAP-DMK ने उठाए सवाल

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नई दिल्ली- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्षी दलों का विरोध तेज हो गया है। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC), आम आदमी पार्टी (AAP), DMK समेत कई विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े फैसलों पर सवाल उठाए हैं। विपक्षी दलों ने CEC को हटाने, SIR की प्रक्रिया पर रोक लगाने और चुनाव आयोग के कामकाज की जांच की मांग की है।

विवाद की शुरुआत कहां से हुई?

यह विवाद उस रिपोर्ट के बाद तेज हुआ जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयोग के दो अन्य आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—ने पिछले 10 महीनों में SIR समेत कई मामलों में आयोग के फैसलों पर कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने की प्रक्रिया तथा मतदाता डेटा से जुड़े कुछ मुद्दों पर मतभेद का उल्लेख किया गया है। 

विपक्ष की प्रमुख मांगें

कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने CEC ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, चुनाव आयोग के कामकाज की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने और SIR प्रक्रिया को रोकने की मांग की है। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने CEC को हटाने की मांग की, जबकि TMC और DMK नेताओं ने भी चुनाव आयोग के भीतर सामने आए मतभेदों की जांच की मांग उठाई। 

चुनाव आयोग का क्या कहना है?

विपक्ष के आरोपों के बीच चुनाव आयोग ने कहा है कि आयोग के भीतर अलग-अलग विचार सामने आना उसकी आंतरिक विचार-विमर्श प्रक्रिया का हिस्सा है और अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। इसलिए विपक्ष द्वारा उठाए गए आरोपों और आयोग के स्पष्टीकरण को अलग-अलग समझना जरूरी है।

संसद में हटाने की प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा

रिपोर्टों के अनुसार, CEC को हटाने को लेकर विपक्ष पहले भी नोटिस दे चुका है। अप्रैल 2026 में राज्यसभा में एक नया नोटिस दिए जाने की बात सामने आई थी, जो अभी लंबित बताया गया है। CEC को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया संसद के माध्यम से होती है और इसके लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है।

SIR बना राजनीतिक विवाद का केंद्र

मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर पहले से ही राजनीतिक विवाद चल रहा है। विपक्षी दलों का कहना है कि इस प्रक्रिया से मतदाताओं के अधिकार और चुनावी प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है। वहीं चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची को अपडेट और सत्यापित करना चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा है। इस पूरे विवाद के कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं पर न्यायिक स्तर पर भी कार्यवाही चल रही है।

फिलहाल मामला राजनीतिक और न्यायिक दोनों स्तरों पर चर्चा में है। CEC को हटाने की विपक्ष की मांग और चुनाव आयोग की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण के बीच आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।

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