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चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की रिपोर्ट

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10 महीनों में 14 बार दर्ज हुई आपत्ति, मतदाता सूची और एसआईआर प्रक्रिया को लेकर उठे सवाल

नई दिल्ली- देश की चुनावी व्यवस्था से जुड़ी एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। द इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग के दो चुनाव आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—ने पिछले करीब 10 महीनों में कम-से-कम 14 बार आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर औपचारिक रूप से आपत्ति दर्ज की।

रिपोर्ट के अनुसार, इन आपत्तियों का संबंध मुख्य रूप से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाताओं के नाम जोड़ने-हटाने और मतदाता डेटा के डिजिटल प्रबंधन से है।

मामला क्या है?

चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ दो चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी हैं।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, संधू और जोशी ने कई मौकों पर यह आपत्ति दर्ज की कि आयोग के नाम पर कुछ फैसले या आदेश उनकी जानकारी अथवा मंजूरी के बिना लिए गए।

रिपोर्ट के अनुसार, चार आपत्तियां एक ही दिन दर्ज की गई थीं। दोनों आयुक्तों की आपत्तियां चुनावी प्रक्रिया के बेहद महत्वपूर्ण हिस्सों से जुड़ी थीं।

एसआईआर बना विवाद का मुख्य केंद्र

इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा एसआईआर यानी Special Intensive Revision है।

एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण करना है। इसमें मतदाता रिकॉर्ड की जांच की जाती है और पात्रता से संबंधित रिकॉर्ड को अपडेट किया जाता है।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, बिहार से शुरू हुई यह प्रक्रिया बाद में देश के कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों तक पहुंची और इसके दौरान 13 करोड़ से अधिक नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए गए। यह संख्या व्यापक मतदाता रिकॉर्ड की प्रारंभिक छंटाई से संबंधित है; इसे अंतिम रूप से मताधिकार खो चुके लोगों की संख्या के रूप में नहीं पढ़ना चाहिए।

फॉर्म-6 में बदलाव पर आपत्ति

रिपोर्ट के मुताबिक, फॉर्म-6 में किए गए बदलाव को लेकर भी दोनों चुनाव आयुक्तों ने सवाल उठाए।

फॉर्म-6 का इस्तेमाल नए मतदाता के रूप में नाम दर्ज कराने के लिए किया जाता है।

रिपोर्ट के अनुसार, नए फॉर्म में आवेदक से यह जानकारी मांगी गई कि उसका, उसके माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली एसआईआर की मतदाता सूची में था या नहीं।

सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कथित तौर पर इस बदलाव की वैधानिक प्रक्रिया पर आपत्ति जताई। संधू ने बाद में इसे “अनधिकृत और गैरकानूनी” बताते हुए हटाने की मांग की।

मतदाता डेटा के केंद्रीकरण पर भी सवाल

दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों में मतदाता सूची के डिजिटल सिस्टम का मुद्दा भी सामने आया।

रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग के डिजिटल सिस्टम ईसीआईनेट (ECINet) में मतदाता डेटा के प्रबंधन और राज्य स्तर के अधिकारियों की पहुंच को लेकर सवाल उठाए गए।

आयुक्तों ने कथित तौर पर चिंता जताई कि मतदाता सूची के डेटाबेस का संचालन धीरे-धीरे केंद्र स्तर पर अधिक केंद्रीकृत हो रहा है और इससे स्थानीय स्तर पर मतदाता सूची संभालने वाले अधिकारियों की भूमिका प्रभावित हो सकती है।

गोवा में 97 मतदाताओं का मामला

रिपोर्ट में गोवा का एक उदाहरण भी दिया गया है।

इसके अनुसार, 97 मतदाताओं के मामलों में स्थानीय चुनाव अधिकारियों ने दस्तावेजों की जांच के बाद उन्हें पात्र पाया, लेकिन संबंधित डिजिटल सिस्टम में उनके नाम बहाल करने की प्रक्रिया समय पर उपलब्ध नहीं हो सकी।

नतीजतन, ये 97 पात्र मतदाता अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सके।

यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे सवाल उठता है कि यदि जमीनी स्तर का अधिकारी किसी व्यक्ति को पात्र मानता है, तो डिजिटल प्रणाली में उस निर्णय को दर्ज और लागू करने की प्रक्रिया कितनी प्रभावी है।

चुनाव आयोग ने क्या कहा?

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने आंतरिक मतभेद या विभाजन की धारणा को खारिज किया।

डेक्कन क्रॉनिकल की रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग से जुड़े सूत्रों ने कहा कि एसआईआर सहित आयोग के सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं और दोनों चुनाव आयुक्तों तथा मुख्य चुनाव आयुक्त की मंजूरी से लिए गए हैं।

इसलिए इस खबर को समझते समय दोनों पक्षों को अलग-अलग देखना जरूरी है:

रिपोर्ट का दावा:
दो चुनाव आयुक्तों ने कई फैसलों पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज कीं।

चुनाव आयोग का पक्ष:
आयोग के सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

इसका संवैधानिक महत्व क्या है?

चुनाव आयोग भारत की संवैधानिक संस्था है और इसका आधार संविधान का अनुच्छेद 324 है।

चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त शामिल होते हैं। 2023 के कानून के तहत आयोग के कामकाज में जहां तक संभव हो सर्वसम्मति से निर्णय लेने का प्रावधान है। यदि सदस्यों के बीच मतभेद हो तो कानून के अनुसार बहुमत से निर्णय लिया जा सकता है।

इसी वजह से दो चुनाव आयुक्तों द्वारा बार-बार लिखित आपत्ति दर्ज किए जाने की रिपोर्ट को चुनावी प्रशासन की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

निष्कर्ष

चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेद की यह रिपोर्ट इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विवाद सीधे मतदाता सूची, नए मतदाताओं के पंजीकरण और चुनावी डेटा के प्रबंधन जैसे मूल चुनावी कार्यों से जुड़ा है। फिलहाल सार्वजनिक चर्चा में एक तरफ इंडियन एक्सप्रेस की जांच रिपोर्ट है, जबकि दूसरी तरफ चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों का यह कहना है कि उसके फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मीडिया एवं संचार अधिकारियों के लिए राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित

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नई दिल्ली स्थित आईआईआईडीईएम में आयोजित हुआ एक दिवसीय प्रशिक्षण एवं संवाद कार्यक्रम

रायपुर- भारत निर्वाचन आयोग द्वारा नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट (आईआईआईडीईएम) में मीडिया एवं संचार अधिकारियों के लिए दूसरे एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। तीन जुलाई शुक्रवार को आयोजित सम्मेलन में देश के 16 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के विभिन्न जिलों के मीडिया नोडल अधिकारी, सोशल मीडिया नोडल अधिकारी, जिला जनसंपर्क अधिकारी तथा राज्य जनसंपर्क विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों सहित 260 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। छत्तीसगढ़ से सहायक मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, अपर संचालक जनसंपर्क विभाग तथा प्रदेश के सभी 33 जिलों के जिला जनसंपर्क अधिकारी सम्मेलन में शामिल हुए। 

सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग की प्रत्येक कार्यवाही संविधान, निर्वाचन संबंधी कानूनों तथा आयोग द्वारा समय-समय पर जारी पारदर्शी दिशा-निर्देशों के अनुरूप संचालित होती है। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली भ्रामक एवं फर्जी सूचनाओं के प्रति सतर्क रहने तथा तथ्यात्मक जानकारी के प्रभावी प्रसार के माध्यम से गलत सूचनाओं पर अंकुश लगाने में मीडिया एवं संचार अधिकारियों की सक्रिय भूमिका पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हाल के विधानसभा चुनावों में रिकॉर्ड मतदान प्रतिशत भारतीय मतदाताओं के निर्वाचन प्रणाली पर गहरे विश्वास का परिचायक है।

चुनाव आयुक्त डॉ. विवेक जोशी ने डिजिटल युग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डीपफेक तथा भ्रामक डिजिटल सामग्री से उत्पन्न चुनौतियों का उल्लेख करते हुए अधिकारियों से आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप इनका प्रभावी ढंग से मुकाबला करने का आह्वान किया। उन्होंने चुनावी साक्षरता क्लबों के माध्यम से युवा मतदाताओं को निर्वाचन प्रक्रिया से जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया।

सम्मेलन में निर्वाचन प्रक्रिया के विभिन्न चरणों से संबंधित संचार रणनीतियों, मतदाता सूची प्रबंधन, मतदान एवं मतगणना प्रक्रिया, ईसीआईनेट, संवैधानिक एवं विधिक प्रावधानों, मीडिया प्रबंधन, प्रेस विज्ञप्ति लेखन, सोशल मीडिया के प्रभावी उपयोग तथा भ्रामक सूचनाओं के प्रबंधन पर विस्तृत तकनीकी एवं व्यावहारिक सत्र आयोजित किए गए। प्रतिभागियों को समूहों में निर्वाचन प्रक्रिया का व्यवहारिक प्रदर्शन कराया गया तथा प्रदर्शनी एवं मीडिया कॉर्नर का अवलोकन भी कराया गया। कार्यक्रम के दौरान हाल ही में चुनाव संपन्न कराने वाले राज्यों के अधिकारियों ने निर्वाचन प्रबंधन एवं जनसंचार से जुड़े अपने अनुभव साझा किए तथा प्रभावी संचार की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों पर चर्चा की। सम्मेलन का समापन प्रतिभागियों एवं भारत निर्वाचन आयोग के अधिकारियों के बीच प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ।

भारत निर्वाचन आयोग और राज्य निर्वाचन आयुक्तों का राष्ट्रीय गोलमेज सम्मेलन 2026

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भारत निर्वाचन आयोग (ECI) मंगलवार, यानी 24 फरवरी 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में भारत निर्वाचन आयोग और राज्य निर्वाचन आयुक्तों (SECs) की राष्ट्रीय गोलमेज सम्मेलन का आयोजन करेगा। यह गोलमेज सम्मेलन 27 वर्षों के अंतराल के बाद आयोजित किया जा रहा है। इससे पहले ऐसा सम्मेलन 1999 में आयोजित किया गया था।

गोलमेज सम्मेलन की अध्यक्षता मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार करेंगे, जिसमें निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी भी उपस्थित रहेंगे।

सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के राज्य निर्वाचन आयुक्त अपने कानूनी और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ भाग लेंगे। साथ ही, सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEOs) भी इस सम्मेलन में शामिल होंगे।

गोलमेज सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य निर्वाचन प्रक्रियाओं और लॉजिस्टिक्स के संदर्भ में ECI और SECs के बीच कार्यात्मक समन्वय (सिनर्जी) को बढ़ावा देना है, ताकि उनके-अपने कानूनी ढांचे के भीतर बेहतर सहयोग हो सके। चर्चाओं से विचारों के रचनात्मक आदान-प्रदान और सहकारी संघवाद की भावना को मजबूत करने की उम्मीद है।

दिनभर चलने वाले सम्मेलन में तकनीक साझा करने, ईवीएम (EVM) और मतदाता सूचियों से संबंधित विषयों पर चर्चा होगी, साथ ही निर्वाचन प्रक्रियाओं को मजबूत करने पर भी विचार किया जाएगा।

आयोग के वरिष्ठ अधिकारी हाल ही में लॉन्च किए गए ECINET डिजिटल प्लेटफॉर्म सहित प्रमुख तकनीकी और परिचालन पहलों पर प्रस्तुतियाँ देंगे, जो निर्वाचन सेवाओं को सरल बनाने की अपनी परिवर्तनकारी क्षमता दर्शाएगा।

प्रस्तुतियों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVMs) की मजबूती, पारदर्शिता और सुरक्षा उपायों पर भी प्रकाश डाला जाएगा।

इसके अलावा, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के संदर्भ में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के अनुसार मतदाता पात्रता पर तुलनात्मक प्रस्तुति दी जाएगी, ताकि विभिन्न क्षेत्रों में मतदाता सूची तैयार करने से जुड़े कानूनी ढांचों पर सूचित चर्चा हो सके।

राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) संबंधित राज्यों के कानूनों के तहत 73वें और 74वें संविधान संशोधनों के सशक्त प्रावधानों के अनुसार गठित किए जाते हैं।
अनुच्छेद 243K और 243ZA के तहत, SECs को पंचायतों और नगर निकायों के चुनावों के लिए मतदाता सूची तैयार करने और चुनाव कराने की देखरेख, निर्देशन और नियंत्रण का अधिकार प्राप्त है।


आगामी विधानसभा चुनावों के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षकों को निर्वाचन आयोग की ब्रीफिंग

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भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने आज असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी विधानसभा आम चुनावों के लिए तैनात किए जाने वाले सामान्य, पुलिस और व्यय पर्यवेक्षकों की ब्रीफिंग बैठकें आयोजित कीं।

इन बैठकों में कुल 1,444 अधिकारी शामिल हुए, जिनमें 714 सामान्य पर्यवेक्षक, 233 पुलिस पर्यवेक्षक और 497 व्यय पर्यवेक्षक हैं। यह ब्रीफिंग बैठकें 5 और 6 फरवरी 2026 को नई दिल्ली स्थित IIIDEM में तीन चरणों में आयोजित की जा रही हैं।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी ने केंद्रीय पर्यवेक्षकों को संबोधित किया।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि पर्यवेक्षक निर्वाचन आयोग के “प्रकाश स्तंभ” हैं और उन्हें स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि 824 विधानसभा क्षेत्रों में होने वाले चुनावों के दौरान पर्यवेक्षकों की उपस्थिति से पूरी चुनावी मशीनरी में ऊर्जा आएगी।

निर्वाचन आयुक्त डॉ. एस.एस. संधू ने पर्यवेक्षकों से कहा कि वे क्षेत्र में तैनात चुनाव अधिकारियों के लिए मित्र, मार्गदर्शक और दार्शनिक की भूमिका निभाएं। उनकी तैनाती का व्यापक प्रचार हो तथा वे आम मतदाताओं के लिए सुलभ रहें, ताकि शिकायतों का त्वरित समाधान हो और किसी भी प्रकार के पक्षपात की धारणा न बने।

निर्वाचन आयुक्त डॉ. विवेक जोशी ने निर्देश दिया कि आयोग के सभी निर्देशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने मतदाताओं की सुविधा के लिए मतदाता सूचना पर्चियों (VIS) का समय पर वितरण सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया।

बैठक के दौरान पर्यवेक्षकों के साथ शंका-समाधान सत्र भी आयोजित किया गया। आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें निर्वाचन नामावलियों की तैयारी, चुनाव संचालन, आईटी एप्लीकेशनों, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और मीडिया प्रबंधन से संबंधित पहलुओं पर जानकारी दी।

केंद्रीय पर्यवेक्षकों को आयोग की आंख और कान बताते हुए उन्हें सभी चुनावी कानूनों, नियमों और दिशा-निर्देशों से भली-भांति परिचित रहने तथा उनके निष्पक्ष अनुपालन को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही, उन्हें राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और मतदाताओं के लिए हमेशा सुलभ रहने को कहा गया।

पर्यवेक्षकों को मतदान केंद्रों का दौरा कर आश्वस्त न्यूनतम सुविधाओं (AMFs) सहित मतदाताओं की सुविधा से जुड़ी हालिया पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन की भी जिम्मेदारी सौंपी गई।

उल्लेखनीय है कि भारत निर्वाचन आयोग संविधान के अनुच्छेद 324 और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 20बी के तहत प्रदत्त शक्तियों के अंतर्गत केंद्रीय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति करता है, ताकि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित किए जा सकें।

भारत अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र एवं निर्वाचन प्रबंधन सम्मेलन (IICDEM) 2026 के लिए निर्वाचन आयोग पूरी तरह तैयार

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नई दिल्ली- भारत निर्वाचन आयोग (ECI) 21 से 23 जनवरी 2026 तक आयोजित होने वाले प्रथम भारत अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र एवं निर्वाचन प्रबंधन सम्मेलन (IICDEM) 2026 के लिए पूरी तरह तैयार है। यह तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भारत अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र एवं निर्वाचन प्रबंधन संस्थान (IIIDEM) द्वारा नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित किया जाएगा।

IICDEM 2026 लोकतंत्र और निर्वाचन प्रबंधन के क्षेत्र में भारत द्वारा आयोजित अब तक का सबसे बड़ा वैश्विक सम्मेलन होगा। इसमें विश्व के 70 से अधिक देशों का प्रतिनिधित्व करते हुए लगभग 100 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि भाग लेंगे। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय संगठनों, भारत में स्थित विदेशी मिशनों तथा निर्वाचन विषय के शिक्षाविदों और विशेषज्ञों की भी भागीदारी होगी।

सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार, निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों का स्वागत करेंगे और सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत करेंगे।

तीन दिवसीय कार्यक्रम में उद्घाटन सत्र, निर्वाचन प्रबंधन निकायों (EMBs) के नेताओं की पूर्ण बैठक, कार्य समूह बैठकों सहित कई सामान्य एवं विषयगत सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें वैश्विक निर्वाचन चुनौतियों, अंतरराष्ट्रीय निर्वाचन मानकों, नवाचारों और श्रेष्ठ प्रक्रियाओं पर विस्तृत चर्चा होगी।

सम्मेलन के दौरान 36 विषयगत समूहों द्वारा गहन मंथन किया जाएगा, जिनका नेतृत्व राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारी करेंगे। इन चर्चाओं में 4 आईआईटी, 6 आईआईएम, 12 राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (NLU) और भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) जैसे प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी होगी।

निर्वाचन आयोग दुनिया भर के निर्वाचन प्रबंधन निकायों के साथ 40 से अधिक द्विपक्षीय बैठकें भी करेगा, ताकि वैश्विक स्तर पर चुनावों से जुड़ी चुनौतियों और सहयोग के अवसरों पर विचार किया जा सके। इस अवसर पर आयोग अपने एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘ECINET’ का भी औपचारिक शुभारंभ करेगा।

सम्मेलन के साथ एक विशेष प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी, जिसमें भारत में चुनाव संचालन की व्यापकता, जटिलता तथा मतदाता सूची की तैयारी और चुनाव संचालन को मजबूत करने के लिए उठाए गए हालिया कदमों को प्रदर्शित किया जाएगा। साथ ही, लोकसभा चुनाव 2024 पर आधारित डॉक्यू-सीरीज “इंडिया डिसाइड्स” का प्रदर्शन सम्मेलन के पहले दिन किया जाएगा।

IICDEM 2026 के माध्यम से भारत वैश्विक मंच पर लोकतंत्र और निर्वाचन प्रबंधन में अपनी नेतृत्वकारी भूमिका को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है।

भारत निर्वाचन आयोग ने मुख्य निर्वाचन अधिकारियों का सम्मेलन आयोजित किया

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नई दिल्ली-भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने आज इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट (IIIDEM), नई दिल्ली में देशभर के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) का सम्मेलन आयोजित किया। यह सम्मेलन आगामी भारत अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र एवं निर्वाचन प्रबंधन सम्मेलन (IICDEM 2026) की तैयारियों के क्रम में आयोजित किया गया है, जो 21 से 23 जनवरी, 2026 तक भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित होगा।

सम्मेलन को भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधु और डॉ. विवेक जोशी ने संबोधित किया। उन्होंने प्रतिभागियों को IICDEM 2026 की रूपरेखा, उद्देश्य तथा सम्मेलन के दौरान मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की भूमिका से अवगत कराया।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त के संबोधन के बाद, सम्मेलन में उपस्थित मुख्य निर्वाचन अधिकारियों ने 36 विषयगत समूहों (Thematic Groups) पर चर्चा की, जिनका नेतृत्व विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारी करेंगे। ये विषयगत समूह निर्वाचन प्रबंधन के सभी पहलुओं को समाहित करते हैं और विभिन्न देशों के निर्वाचन प्रबंधन निकायों (EMBs) के अनुभवों के आधार पर ज्ञान-विकास का सशक्त मंच तैयार करने का उद्देश्य रखते हैं।

IICDEM 2026 निर्वाचन प्रबंधन और लोकतंत्र के क्षेत्र में भारत द्वारा आयोजित किया जाने वाला अब तक का सबसे बड़ा वैश्विक सम्मेलन होगा। इसमें दुनिया भर से लगभग 100 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि, विभिन्न देशों के निर्वाचन प्रबंधन निकायों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों, भारत में स्थित विदेशी मिशनों तथा निर्वाचन क्षेत्र के शैक्षणिक और व्यावहारिक विशेषज्ञों की भागीदारी होगी।

सम्मेलन के दौरान उद्घाटन सत्र, EMB नेताओं की पूर्ण बैठक (Plenary), EMB कार्य समूह बैठकें, तथा ECINET के शुभारंभ जैसे प्रमुख सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त वैश्विक निर्वाचन विषयों, अंतरराष्ट्रीय निर्वाचन मानकों, श्रेष्ठ प्रक्रियाओं और निर्वाचन प्रक्रियाओं में नवाचारों पर केंद्रित विषयगत सत्र भी होंगे।

इस सम्मेलन में देश के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है, जिनमें 4 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IITs), 6 भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIMs), 12 राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (NLUs) तथा भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) शामिल हैं। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों द्वारा संचालित 36 विषयगत समूहों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अकादमिक विशेषज्ञ अपने विचार साझा करेंगे।


भारत निर्वाचन आयोग करेगा IICDEM-2026 की मेजबानी, वैश्विक लोकतंत्र और निर्वाचन प्रबंधन पर होगा मंथन

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भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) 21 से 23 जनवरी, 2026 तक भारत मंडपम, नई दिल्ली में भारत अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र एवं निर्वाचन प्रबंधन सम्मेलन (IICDEM)–2026 के प्रथम संस्करण की मेजबानी करेगा। यह तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भारत अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र एवं निर्वाचन प्रबंधन संस्थान (IIIDEM) द्वारा, भारत निर्वाचन आयोग के तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है।

IICDEM 2026, निर्वाचन प्रबंधन और लोकतंत्र के क्षेत्र में भारत द्वारा आयोजित अपनी तरह का अब तक का सबसे बड़ा वैश्विक सम्मेलन होगा। इसमें दुनिया भर के निर्वाचन प्रबंधन निकायों (EMBs) का प्रतिनिधित्व करने वाले लगभग 100 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि, अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि, भारत में स्थित विदेशी मिशनों के सदस्य तथा चुनाव क्षेत्र के शिक्षाविद और व्यावसायिक विशेषज्ञ भाग लेंगे।

यह सम्मेलन भारत द्वारा वर्ष 2026 के लिए इंटरनेशनल आईडिया (International IDEA) की काउंसिल ऑफ मेंबर स्टेट्स की अध्यक्षता ग्रहण करने के अवसर पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा निर्धारित एजेंडे को आगे बढ़ाएगा, जो “समावेशी, शांतिपूर्ण, सशक्त और सतत विश्व के लिए लोकतंत्र” विषय पर आधारित है।

IIIDEM के महानिदेशक राकेश वर्मा ने आज मीडिया से बातचीत करते हुए IICDEM 2026 की व्यापक रूपरेखा साझा की। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन निर्वाचन प्रबंधन निकायों के बीच अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए एक वैश्विक मंच प्रदान करेगा, जिससे समकालीन चुनौतियों पर साझा समझ विकसित होगी, श्रेष्ठ प्रथाओं और नवाचारों का आदान-प्रदान होगा तथा समाधान के सह-निर्माण को बढ़ावा मिलेगा। इस अवसर पर IICDEM 2026 के आधिकारिक लोगो का भी अनावरण किया गया।

IICDEM 2026 के माध्यम से प्रतिभागियों—जो वैश्विक मतदाता वर्ग के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं—को भारत की निर्वाचन प्रणाली, प्रक्रियाओं और तकनीकी नवाचारों से परिचित कराया जाएगा, जिन्होंने भारतीय चुनावों को विश्व की लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के लिए एक आदर्श बनाया है।

सम्मेलन कार्यक्रम में उद्घाटन सत्र, ईएमबी नेताओं की पूर्ण बैठक, ईएमबी कार्य समूह बैठकें, ईसीआईनेट (ECINet) का शुभारंभ, तथा वैश्विक निर्वाचन विषयों, आदर्श अंतरराष्ट्रीय निर्वाचन मानकों, और निर्वाचन प्रक्रियाओं में श्रेष्ठ प्रथाओं व नवाचारों पर आधारित विषयगत सत्र शामिल होंगे।

तीन दिवसीय सम्मेलन के दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार, निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी के नेतृत्व में भारत निर्वाचन आयोग, भाग लेने वाले निर्वाचन प्रबंधन निकायों के प्रमुखों और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के साथ 40 से अधिक द्विपक्षीय बैठकें करेगा।

सम्मेलन में प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों की भी भागीदारी होगी, जिनमें 4 आईआईटी, 6 आईआईएम, 12 राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एनएलयू) और भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) शामिल हैं। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) के नेतृत्व में 36 विषयगत समूह, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श में योगदान देंगे।

प्रेस वार्ता के उपरांत मीडिया प्रतिनिधियों को द्वारका स्थित IIIDEM परिसर का भ्रमण भी कराया गया, जो चुनावों के आयोजन और प्रबंधन में क्षमता निर्माण, वैश्विक मानकों के विकास तथा वैश्विक लोकतांत्रिक सहयोग में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका को सुदृढ़ करने की दिशा में विश्व के सबसे बड़े संस्थानों में से एक के रूप में तेजी से उभर रहा है।

बिहार विधानसभा चुनाव 2025: मतदान 67.13% के रिकॉर्ड के साथ संपन्न, 14 नवंबर को मतगणना

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चुनाव आयोग ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का सफल आयोजन किया, जिसमें मतदान प्रतिशत 67.13% रहा, जो 1951 के बाद से सबसे अधिक है। आयोग ने मतगणना के लिए भी सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित की है, जो 14 नवंबर 2025 को होगी।

मुख्य तथ्य:

  • बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में शून्य पुन: मतदान

    • 2,616 उम्मीदवारों द्वारा कोई पुन: मतदान नहीं मांगा गया।

    • 12 मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों द्वारा कोई पुन: मतदान नहीं मांगा गया।

  • SIR में शून्य अपील और अंतिम मतदाता सूची में कुल 7,45,26,858 मतदाता शामिल।

  • 12 मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों द्वारा किसी भी जिले में कोई अपील दर्ज नहीं की गई।

मतगणना की व्यवस्था:

  • राज्य के सभी 243 विधानसभा क्षेत्रों में मतगणना की व्यवस्था की गई।

  • प्रत्येक क्षेत्र में 243 रिटर्निंग ऑफिसर (ROs) और 243 काउंटिंग ऑब्जर्वर मौजूद रहेंगे।

  • 4,372 काउंटिंग टेबल्स पर प्रत्येक टेबल पर एक काउंटिंग सुपरवाइजर, काउंटिंग असिस्टेंट और माइक्रो ऑब्जर्वर तैनात रहेंगे।

  • उम्मीदवारों द्वारा 18,000 से अधिक काउंटिंग एजेंट्स नियुक्त किए गए हैं।

मतगणना का क्रम:

  • मतगणना सुबह 8:00 बजे शुरू होगी।

  • पहले पोस्टल बैलेट की गिनती, फिर EVM की गिनती सुबह 8:30 बजे से होगी।

  • EVM गिनती के दौरान कंट्रोल यूनिट्स को काउंटिंग एजेंट्स के समक्ष दिखाया जाएगा और सील एवं फॉर्म 17C की जांच की जाएगी।

  • यदि कोई असंगति मिले तो VVPAT स्लिप की गिनती अनिवार्य रूप से की जाएगी।

  • EVM गिनती पूरी होने के बाद प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के पांच मतदान केंद्रों का यादृच्छिक चयन कर VVPAT मिलान किया जाएगा।

परिणाम:

  • परिणाम राउंड-वार और विधानसभा क्षेत्र-वार संबंधित ROs द्वारा आधिकारिक ECI परिणाम पोर्टल पर उपलब्ध कराए जाएंगे: https://results.eci.gov.in

  • सभी से अनुरोध है कि केवल इस पोर्टल से ही सटीक और प्रमाणित जानकारी प्राप्त करें।

इस प्रकार बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की मतगणना पूरी पारदर्शिता और प्रभावी व्यवस्था के साथ आयोजित की जा रही है।

बिहार विधानसभा चुनाव 2025: निर्वाचन आयोग ने जारी किया कार्यक्रम — अब तक ₹108 करोड़ से अधिक की अवैध वस्तुएं जब्त, C-Vigil पर शिकायतों की निगरानी सख्त

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भारत निर्वाचन आयोग ने बिहार विधानसभा के आम चुनाव 2025 और 8 विधानसभा क्षेत्रों के उपचुनाव की तिथि की घोषणा कर दी है। आयोग ने राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों को निर्देश दिया है कि वे आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct – MCC) के प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें।

चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने के लिए बिहार में 824 फ्लाइंग स्क्वाड्स (उड़न दस्ते) तैनात किए गए हैं, ताकि C-VIGIL ऐप पर प्राप्त शिकायतों का निपटारा 100 मिनट के भीतर किया जा सके।

3 नवंबर, 2025 तक, ₹108.19 करोड़ मूल्य की अवैध वस्तुएं जब्त की जा चुकी हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • नकद: ₹9.62 करोड़

  • शराब: ₹42.14 करोड़ (9.6 लाख लीटर)

  • मादक पदार्थ: ₹24.61 करोड़

  • कीमती धातुएं: ₹5.8 करोड़

  • अन्य मुफ्त वस्तुएं (फ्रीबीज़): ₹26 करोड़ से अधिक

यह कार्रवाई विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बहु-एजेंसी समन्वित प्रयासों के तहत की गई है।

निर्वाचन आयोग ने सभी प्रवर्तन एजेंसियों को निर्देश दिया है कि वे चुनाव के दौरान नकदी, मादक पदार्थ, शराब और अन्य प्रलोभनों की आवाजाही पर सख्त निगरानी रखें और किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि को रोकें। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि जांच और तलाशी की कार्रवाई के दौरान आम नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा या उत्पीड़न का सामना न करना पड़े।

नागरिक और राजनीतिक दल C-Vigil ऐप के माध्यम से आचार संहिता उल्लंघन की शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

इसके अतिरिक्त, शिकायतों की निगरानी के लिए कॉल सेंटर नंबर 1950 भी स्थापित किया गया है, जहां कोई भी नागरिक या राजनीतिक दल संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) या रिटर्निंग अधिकारी (RO) के पास अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। यह प्रणाली 24x7 सक्रिय है।

निर्वाचन आयोग ने बिहार में अंतर्राज्यीय सीमा से जुड़े मुद्दों पर समन्वय बैठक आयोजित की

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भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने आज बिहार में अंतर्राज्यीय सीमा से जुड़े मुद्दों पर एक समन्वय बैठक आयोजित की। इस बैठक में बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिवों, पुलिस महानिदेशकों (DGPs) और गृह विभाग के प्रमुख सचिवों के साथ-साथ गृह मंत्रालय, रेल मंत्रालय और सभी प्रवर्तन एजेंसियों के अधिकारी शामिल हुए।

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी के साथ मिलकर, बिहार और इसके पड़ोसी राज्यों में कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा की। बैठक में पुरुषों, सामग्री और धन के साथ-साथ हथियार, असामाजिक तत्व, शराब, नशीले पदार्थ और उपहारों की आवाजाही पर विशेष निगरानी रखने और नेपाल के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा सहित अंतर्राज्यीय सीमाओं की प्रभावी सीलिंग सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया, ताकि शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखी जा सके।

बैठक के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि आयोग स्वतंत्र, निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और प्रलोभन-मुक्त चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से अपील की कि वे चुनाव प्रक्रिया की पवित्रता बनाए रखने के लिए पूर्ण समन्वय और सहयोग के साथ कार्य करें।

आयोग ने मतदाताओं को सुगम और सुविधाजनक मतदान अनुभव प्रदान करने के लिए जारी निर्देशों के अनुपालन की भी समीक्षा की। बिहार विधानसभा के आम चुनाव 2025 को शांतिपूर्ण और प्रलोभन-मुक्त बनाने के लिए मुख्य सचिवों, पुलिस महानिदेशकों और केंद्रीय एजेंसियों के प्रमुखों को सख्त निर्देश दिए गए।

झारखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों, साथ ही सशस्त्र सीमा बल (SSB) के महानिदेशक को निर्देश दिया गया कि वे बिहार की सीमाओं से सटे इलाकों में सतर्कता बढ़ाएं और अंतर्राज्यीय चौकियों पर सघन जांच सुनिश्चित करें।

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), आयकर विभाग, केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) और राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) जैसी केंद्रीय एजेंसियों को चुनाव से पहले अपनी कार्रवाई तेज करने और ठोस खुफिया जानकारी के आधार पर अधिकतम जब्ती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

बिहार विधानसभा चुनाव 2025: मतदान और विज्ञापन संबंधी अहम निर्देश जारी

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भारत निर्वाचन आयोग ने बिहार विधान सभा चुनाव 2025 और 8 सीटों के उपचुनाव (bye-elections) का कार्यक्रम घोषित कर दिया है। चुनाव की तारीखें निम्नलिखित हैं:

  • चरण-1: 6 नवंबर 2025 (गुरुवार)

  • चरण-2: 11 नवंबर 2025 (मंगलवार)

प्रिंट मीडिया में राजनीतिक विज्ञापनों पर रोक

निर्वाचन अभियान के दौरान निष्पक्ष माहौल सुनिश्चित करने के लिए:

  • किसी भी राजनीतिक पार्टी, प्रत्याशी, संगठन या व्यक्ति को मतदान दिवस और मतदान से एक दिन पहले बिना पूर्व-स्वीकृति के प्रिंट मीडिया में कोई विज्ञापन प्रकाशित करने की अनुमति नहीं होगी।

  • विज्ञापन की पूर्व-स्वीकृति Media Certification and Monitoring Committee (MCMC) द्वारा राज्य/जिला स्तर पर दी जानी चाहिए।

बिहार के लिए प्रतिबंधित दिन:

  • चरण-1: 5 और 6 नवंबर 2025

  • चरण-2: 10 और 11 नवंबर 2025

 पूर्व-स्वीकृति (Pre-Certification) प्रक्रिया

  • जो भी व्यक्ति या पार्टी प्रिंट मीडिया में राजनीतिक विज्ञापन प्रकाशित करना चाहते हैं, उन्हें प्रस्तावित प्रकाशन तिथि से कम से कम दो दिन पहले MCMC में आवेदन करना होगा।

  • राज्य/जिला स्तर पर सक्रिय MCMC टीमें इस आवेदन की जांच करके त्वरित निर्णय देंगी, ताकि विज्ञापन समय पर स्वीकृत हो सके।


चुनाव आयोग की नई गाइडलाइन: मतदान के लिए 12 वैकल्पिक फोटो पहचान दस्तावेज स्वीकार होंगे

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नई दिल्ली- भारत के चुनाव आयोग (Election Commission of India - ECI) ने स्पष्ट किया है कि मतदाता पहचान पत्र (EPIC) के अभाव में अब मतदाता 12 वैकल्पिक फोटो पहचान दस्तावेजों के माध्यम से मतदान कर सकते हैं। यह निर्णय Representation of the People Act, 1951 और Registration of Electors Rules, 1960 के अंतर्गत लिया गया है, ताकि मतदाता की पहचान सुनिश्चित हो और मतदान स्थल पर जाली मतदान (impersonation) रोका जा सके।

चुनाव आयोग ने बताया कि बिहार में लगभग 100% मतदाताओं को EPIC जारी किया जा चुका है। साथ ही 8 विधानसभा क्षेत्रों में होने वाले उपचुनावों के लिए भी सभी योग्य मतदाताओं को EPIC उपलब्ध कराया जा चुका है। आयोग ने सभी मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) को निर्देश दिया है कि नए मतदाताओं को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के 15 दिन के भीतर EPIC वितरित किया जाए।

यदि किसी मतदाता के पास EPIC नहीं है, तो वे नीचे दिए गए किसी भी एक वैकल्पिक दस्तावेज़ का प्रयोग कर मतदान कर सकते हैं:

  1. आधार कार्ड

  2. मनरेगा जॉब कार्ड (MNREGA Job Card)

  3. बैंक/डाकघर द्वारा जारी पासबुक जिसमें फोटो हो

  4. श्रम मंत्रालय/आयुष्मान भारत स्वास्थ्य कार्ड के तहत जारी हेल्थ इंश्योरेंस स्मार्ट कार्ड

  5. ड्राइविंग लाइसेंस

  6. पैन कार्ड

  7. RGI द्वारा NPR के तहत जारी स्मार्ट कार्ड

  8. भारतीय पासपोर्ट

  9. पेंशन दस्तावेज़ जिसमें फोटो हो

  10. केंद्र/राज्य सरकार, PSU या पब्लिक लिमिटेड कंपनी द्वारा जारी सेवा पहचान पत्र (Service Identity Card)

  11. सांसद/विधायक/विधान परिषद सदस्य के लिए जारी आधिकारिक पहचान पत्र

  12. यूनीक डिसैबिलिटी ID (UDID) कार्ड, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी

चुनाव आयोग ने दोहराया है कि मतदाता सूची में नाम होना मतदान का अनिवार्य पूर्वापेक्षा है।

साथ ही, आयोग ने ‘पर्दानशीं’ महिलाओं की सुविधा के लिए मतदान केंद्रों पर विशेष प्रबंध किए जाने की जानकारी दी है। उनके सम्मानजनक पहचान की प्रक्रिया महिला मतदान अधिकारियों/सहायक कर्मचारियों की उपस्थिति में और गोपनीयता बनाए रखते हुए की जाएगी।


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