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डीआरआई ने सोना तस्करी और विदेशी मुद्रा तस्करी के बड़े रैकेट का किया भंडाफोड़

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राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने सीमा पार से होने वाली सोने की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई जारी रखते हुए दिल्ली स्थित एक बड़े सोना तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया। यह गिरोह पूर्वोत्तर भारत से अलग-अलग ट्रेनों के माध्यम से कई वाहकों (कैरियर्स) का उपयोग कर विदेशी मूल का सोना दिल्ली पहुंचाता था। पकड़े जाने के जोखिम को कम करने के लिए तस्करों को अलग-अलग समय पर भेजा जाता था। गिरोह दिल्ली के घनी आबादी वाले क्षेत्र में अवैध रूप से सोना गलाने (मेल्टिंग) की इकाई भी संचालित कर रहा था।

प्रमुख घटनाक्रम

  • 26 जून 2026 को डीआरआई अधिकारियों ने एक समन्वित अभियान में न्यू कूचबिहार रेलवे स्टेशन (पश्चिम बंगाल) और मानसी जंक्शन (बिहार) पर दो वाहकों को पकड़ा।

  • इनके पास से शरीर पर छिपाकर रखा गया लगभग 2 किलोग्राम विदेशी मूल का सोना बरामद किया गया।

  • इसी दौरान दिल्ली में भी दो अन्य व्यक्तियों को गिरफ्तार कर उनके पास से लगभग 1.2 किलोग्राम तस्करी का सोना बरामद किया गया।

  • जांच के दौरान दिल्ली में संचालित एक अवैध सोना गलाने की इकाई का भी पता चला।

  • इस कार्रवाई में कुल चार लोगों को गिरफ्तार किया गया।

महिला तस्कर से 3.3 किलोग्राम सोना बरामद

  • उसी दिन एक अन्य अभियान में सैरांग से कोलकाता जा रही एक महिला यात्री को ट्रेन में पकड़ा गया।

  • उसके विशेष रूप से तैयार किए गए कमर बेल्ट में छिपाकर रखी गई विदेशी भाषा के चिन्हों वाली 20 सोने की ईंटें, जिनका कुल वजन लगभग 3.3 किलोग्राम था, बरामद की गईं।

  • महिला को गिरफ्तार कर लिया गया।

चेन्नई में विदेशी मुद्रा तस्करी का खुलासा

  • डीआरआई ने चेन्नई एयर कार्गो में घरेलू हवाई कार्गो के माध्यम से विदेशी मुद्रा की तस्करी करने वाले एक बड़े गिरोह का भी पर्दाफाश किया।

  • अधिकारियों ने 7,58,500 अमेरिकी डॉलर (USD) और 35,00,000 थाई बहत (Thai Baht) बरामद किए, जिनकी कुल कीमत लगभग ₹8.15 करोड़ है।

  • इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया।

  • जांच में पता चला कि इस विदेशी मुद्रा को भारत से अवैध रूप से बाहर भेजकर उससे सोना और चांदी की तस्करी के लिए वित्तपोषण किया जाता था।

बेंगलुरु में आगे की कार्रवाई

  • जांच के आधार पर दुबई से लौट रहे एक व्यक्ति को बेंगलुरु हवाई अड्डे पर पकड़ा गया।

  • उसके पास से 1.8 किलोग्राम सोना बरामद हुआ।

  • उसके घर की तलाशी में लगभग 42 किलोग्राम चांदी, 700 ग्राम सोने के आभूषण तथा ₹26.67 लाख भारतीय मुद्रा जब्त की गई।

  • जांच से यह स्पष्ट हुआ कि भारत में अवैध रूप से जुटाई गई विदेशी मुद्रा को विदेश भेजकर उसी धन से सोना और चांदी की संगठित तस्करी की जा रही थी।

कुल बरामदगी

डीआरआई की इन संयुक्त कार्रवाइयों में:

  • लगभग 9 किलोग्राम विदेशी मूल का तस्करी का सोना,

  • 42 किलोग्राम चांदी,

  • ₹8.15 करोड़ मूल्य की विदेशी मुद्रा,

  • ₹26.67 लाख भारतीय नकदी जब्त की गई।

इन मामलों में अब तक कुल 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

छत्तीसगढ़ में हीरा खनन की तैयारी तेज: एनसीएल बोर्ड का बड़ा फैसला, बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में बड़े व्यास की ड्रिलिंग को मंजूरी

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रायपुर- छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा को नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड (एनसीएल) के निदेशक मंडल की नई दिल्ली में आयोजित बैठक में महासमुंद जिले के बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में परियोजना के अगले चरण को मंजूरी देते हुए लार्ज डायमीटर (Large Diameter) ड्रिलिंग शुरू करने का निर्णय लिया गया। यह कदम इस क्षेत्र में हीरे के वास्तविक भंडार का वैज्ञानिक आकलन करने और भविष्य में व्यावसायिक हीरा खनन का मार्ग प्रशस्त करने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।

बैठक में निदेशक मंडल ने परियोजना की अब तक की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की तथा निर्देश दिए कि प्रॉस्पेक्टिंग लाइसेंस की अवधि के भीतर सभी तकनीकी कार्य समयबद्ध ढंग से पूरे किए जाएं। बड़े व्यास की ड्रिलिंग से किम्बरलाइट पाइप में मौजूद हीरा भंडार का सटीक आकलन किया जाएगा। इसके बाद विस्तृत व्यवहार्यता रिपोर्ट (Feasibility Report) तैयार होगी, जिसके आधार पर व्यावसायिक हीरा खदान विकसित करने का अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

एनसीएल के निदेशक मंडल की बैठक में अमिताभ मुखर्जी, आशीष चटर्जी, छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह, खनिज विभाग के सचिव पी. दयानंद, छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के प्रबंध संचालक रजत बंसल, उपेंद्र कुमार तथा विनय कुमार उपस्थित रहे।

एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड (एनसीएल) भारत सरकार के उपक्रम एनएमडीसी लिमिटेड (51 प्रतिशत) तथा छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (49 प्रतिशत) का संयुक्त उपक्रम है। कंपनी अब तक लौह अयस्क परियोजनाओं पर केंद्रित रही है, लेकिन बलौदा-बेलमुंडी में प्राकृतिक हीरों की पुष्टि के बाद यह बहु-खनिज विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।

एनसीएल द्वारा स्ट्रीम सेडिमेंट सैंपलिंग, भू-भौतिकीय सर्वेक्षण और लक्षित ड्रिलिंग के माध्यम से किम्बरलाइट पाइप की पहचान की गई। इसके बाद लगभग 200 टन बल्क सैंपल का परीक्षण एनएमडीसी के पन्ना डायमंड प्रोसेसिंग प्लांट में किया गया, जहां 1.22 कैरेट वजन के पांच प्राकृतिक हीरे प्राप्त हुए। इससे इस क्षेत्र में हीरा युक्त भू-संरचना की वैज्ञानिक पुष्टि हो चुकी है।

बोत्सवाना, दक्षिण अफ्रीका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख हीरा उत्पादक देशों के अनुभव बताते हैं कि प्रारंभिक चरण में इस प्रकार की सफलता भविष्य में बड़े व्यावसायिक भंडार मिलने का संकेत हो सकती है। इसलिए बलौदा-बेलमुंडी परियोजना को छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश के लिए भी एक महत्वपूर्ण खनिज परियोजना माना जा रहा है।

बैठक में राज्य की अन्य प्रमुख लौह अयस्क परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। बैलाडीला डिपॉजिट-4 में चालू वित्तीय वर्ष के दौरान 10 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, जिसे चरणबद्ध रूप से बढ़ाकर 70 लाख टन प्रतिवर्ष किया जाएगा। वहीं बैलाडीला डिपॉजिट-13 को एक करोड़ टन वार्षिक क्षमता के साथ विकसित करने की दिशा में भी कार्य जारी है।

बैठक में यह भी दोहराया गया कि सभी परियोजनाओं में पर्यावरण संरक्षण, वैज्ञानिक खनन, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन तथा स्थानीय समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष निदेशक श्री सौरभ सिंह ने कहा कि खनिज संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग और उद्योगों का संतुलित विकास देश की आर्थिक प्रगति के लिए अत्यंत आवश्यक है। बलौदा-बेलमुंडी की हीरा परियोजना छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख हीरा उत्पादक राज्यों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में ऐतिहासिक साबित हो सकती है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश: छत्तीसगढ़ के सभी प्रमुख भवनों का होगा सुरक्षा ऑडिट

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रायपुर- हाल ही में देश में हुई अग्नि दुर्घटनाओं से सबक लेते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्यभर के सभी प्रमुख सरकारी एवं सार्वजनिक भवनों का व्यापक सुरक्षा ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं। इस पहल का उद्देश्य अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और भविष्य में संभावित हादसों को रोकना है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी कार्यालयों, व्यावसायिक परिसरों, भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक भवनों और अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों में अग्नि सुरक्षा मानकों की गहन जांच की जाए। साथ ही जहां भी सुरक्षा संबंधी कमियां पाई जाएं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर तत्काल दूर किया जाए।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा ऑडिट के दौरान फायर सेफ्टी उपकरणों, आपातकालीन निकास मार्गों (Emergency Exits), फायर अलार्म सिस्टम, बिजली व्यवस्था तथा अन्य सुरक्षा उपायों की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विभागों को सुधारात्मक कार्यवाही करने के निर्देश भी दिए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से सुरक्षा ऑडिट पूरा कर उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

राज्य सरकार का मानना है कि यह अभियान न केवल अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि आपदा प्रबंधन प्रणाली को भी अधिक प्रभावी बनाएगा। इससे भविष्य में किसी भी आपात स्थिति से निपटने की तैयारियां बेहतर होंगी और जन-धन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।

अग्नि सुरक्षा को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगी नई स्थिति रिपोर्ट

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बिलासपुर- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य में अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं की व्यवस्था को लेकर गंभीर रुख अपनाते हुए राज्य सरकार से अग्नि सुरक्षा संबंधी तैयारियों और आधुनिकीकरण कार्यों पर नई स्थिति रिपोर्ट (Status Report) प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि अग्निशमन सेवाओं को आधुनिक बनाने के लिए 280 करोड़ रुपये से अधिक की व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है। इस योजना के तहत राज्यभर में नए फायर स्टेशन स्थापित किए जाएंगे, मौजूदा फायर स्टेशनों को सुदृढ़ किया जाएगा तथा अत्याधुनिक अग्निशमन वाहन, बचाव उपकरण और अन्य आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।

सरकार ने यह भी जानकारी दी कि अग्निशमन विभाग की क्षमता बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रशिक्षण और आवश्यक बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित और प्रभावी राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित किया जा सके।

हाईकोर्ट ने सरकार से इन योजनाओं की प्रगति, समय-सीमा और क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी अगली सुनवाई में प्रस्तुत करने को कहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और अग्निशमन सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए ठोस एवं प्रभावी कदम उठाए जाने आवश्यक हैं।

राज्य सरकार की इस पहल से आने वाले समय में छत्तीसगढ़ की फायर सेफ्टी और आपदा प्रबंधन प्रणाली को अधिक आधुनिक, सक्षम और प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) का मसौदा तैयार करने के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित

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रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code - UCC) लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए इसके मसौदे (ड्राफ्ट) को तैयार करने के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है।

समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) वी. रमासुब्रमणियन करेंगे। समिति में कानून, प्रशासन और समाज से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है, ताकि व्यापक विचार-विमर्श के बाद राज्य के लिए उपयुक्त मसौदा तैयार किया जा सके।

सरकार के अनुसार, यह समिति विभिन्न राज्यों में लागू या प्रस्तावित समान नागरिक संहिता के प्रावधानों का अध्ययन करेगी, संबंधित कानूनों की समीक्षा करेगी और विभिन्न सामाजिक, धार्मिक तथा कानूनी पक्षों से सुझाव प्राप्त करने के बाद अपनी सिफारिशें राज्य सरकार को सौंपेगी।

समिति राज्य के सभी वर्गों, सामाजिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से संवाद स्थापित कर एक संतुलित और व्यवहारिक मसौदा तैयार करेगी।

गौरतलब है कि उत्तराखंड के बाद छत्तीसगढ़ समान नागरिक संहिता की दिशा में ठोस पहल करने वाले राज्यों में शामिल हो गया है। सरकार का कहना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक कानूनों की संभावनाओं का अध्ययन करना और राज्य के हित में उपयुक्त सुझाव तैयार करना है।

श्रमिकों को मिली बड़ी राहत: विशेष अभियान के तहत 23 श्रम मामलों का निपटारा, 10.32 लाख रुपये का भुगतान

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नई दिल्ली- श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अंतर्गत मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) कार्यालय द्वारा लंबित श्रम मामलों के त्वरित निपटारे के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत आज दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) और उसके ठेकेदारों से जुड़े दावा मामलों की संयुक्त सुनवाई आयोजित की गई। यह सुनवाई नई दिल्ली स्थित उप मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) कार्यालय में क्षेत्रीय श्रमायुक्त (केंद्रीय)-सह-प्राधिकरण, वेतन संहिता 2019 के समक्ष संपन्न हुई।

मामलों के प्रभावी और शीघ्र समाधान के उद्देश्य से मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) सोनल मिश्रा भी सुनवाई में शामिल हुईं। उन्होंने दिल्ली क्षेत्र के अधिकारियों, प्रबंधन प्रतिनिधियों और श्रमिकों को संबोधित करते हुए श्रम विवादों के समयबद्ध निपटारे तथा श्रम कानूनों के सख्त अनुपालन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि श्रमिकों को त्वरित न्याय उपलब्ध कराना मंत्रालय की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

सुनवाई के दौरान कुल 193 दावा मामलों पर विचार किया गया, जिनमें से 23 मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा किया गया। इसके परिणामस्वरूप 12 श्रमिकों को उनके बकाया भुगतान के रूप में कुल 10,32,484 रुपये प्रदान किए गए। शेष मामलों में भी विस्तृत सुनवाई की गई, जिससे अगली निर्धारित तिथि पर उनके समाधान का मार्ग प्रशस्त हुआ।

कार्यवाही के दौरान DMRC के वरिष्ठ श्रम कल्याण निरीक्षक, श्रम कल्याण निरीक्षक तथा ठेकेदारों के प्रतिनिधियों को श्रम कानूनों के अनुपालन के प्रति जागरूक किया गया। विशेष रूप से समय पर वेतन भुगतान, वैधानिक अभिलेखों के रखरखाव और श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा पर जोर दिया गया। प्रबंधन पक्ष ने श्रम अधिकारियों को आश्वासन दिया कि नियमों के बेहतर अनुपालन के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय का यह विशेष अभियान श्रमिकों की शिकायतों के त्वरित समाधान, न्याय तक उनकी पहुंच को सशक्त बनाने, श्रम कानूनों के अनुपालन को मजबूत करने और सौहार्दपूर्ण औद्योगिक संबंधों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।



टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में चीतल का अवैध शिकार, दो आरोपी गिरफ्तार

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रायपुर- छत्तीसगढ़ के एक टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में वन्यजीव शिकार का मामला सामने आया है, जहां वन विभाग की टीम ने चीतल (स्पॉटेड डियर) के अवैध शिकार के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई नियमित गश्त और खुफिया सूचना के आधार पर की गई।

वन अधिकारियों के अनुसार, संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिलने पर विशेष अभियान चलाया गया। तलाशी के दौरान आरोपियों के कब्जे से चीतल का मांस, शिकार में इस्तेमाल किए गए धनुष-तीर तथा अन्य सामग्री बरामद की गई। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि शिकार टाइगर रिजर्व के संरक्षित कोर क्षेत्र में किया गया था, जहां वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रावधान लागू हैं।

वन विभाग ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस अवैध शिकार में अन्य लोग भी शामिल थे या नहीं। अधिकारियों को आशंका है कि यह किसी संगठित शिकार गतिविधि का हिस्सा हो सकता है।

इस घटना को वन्यजीव संरक्षण के लिए गंभीर चुनौती माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि चीतल जैसे शाकाहारी वन्यजीव जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इनका संरक्षण जैव विविधता बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

वन विभाग ने आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। दोष सिद्ध होने पर आरोपियों को कड़ी सजा और आर्थिक दंड का सामना करना पड़ सकता है।

अधिकारियों ने स्थानीय लोगों से वन्यजीवों के संरक्षण में सहयोग करने तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत वन विभाग को देने की अपील की है।


मुख्यमंत्री ने अमित शाह से की मुलाकात, छत्तीसगढ़ में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान स्थापित करने की मांग

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रायपुर- छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय  ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह  से मुलाकात कर राज्य में All India Institute of Ayurveda (AIIA) की स्थापना का प्रस्ताव रखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह संस्थान छत्तीसगढ़ में आयुर्वेदिक चिकित्सा, शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ में आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के प्रति लोगों का विश्वास लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान की स्थापना से राज्य के विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और मरीजों को उच्च स्तरीय सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। इसके साथ ही प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर आयुर्वेदिक शिक्षा और अनुसंधान के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने में भी मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि संस्थान की स्थापना से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को गति मिलेगी। विशेष रूप से आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को आधुनिक शोध एवं उपचार सुविधाओं से जोड़ने में यह पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री द्वारा रखे गए प्रस्ताव पर सकारात्मक चर्चा की और राज्य के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया। यदि यह प्रस्ताव स्वीकृत होता है, तो छत्तीसगढ़ देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो जाएगा जहां राष्ट्रीय स्तर का आयुर्वेदिक संस्थान स्थापित होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि AIIA की स्थापना से न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि आयुष क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और चिकित्सा पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।


विदेश मंत्रालय की स्पष्टता: पासपोर्ट अकेले नागरिकता का प्रमाण नहीं

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नई दिल्ली- भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज़ है और इसे अपने आप में भारतीय नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। मंत्रालय ने यह स्पष्टीकरण नागरिकता और पहचान दस्तावेज़ों से जुड़ी चर्चाओं के बीच जारी किया।


विदेश मंत्रालय के अनुसार, पासपोर्ट धारक की पहचान और अंतरराष्ट्रीय यात्रा को सुविधाजनक बनाने के लिए जारी किया जाता है, जबकि नागरिकता से संबंधित मामलों का निर्धारण संबंधित कानूनी प्रावधानों और सक्षम प्राधिकरणों द्वारा किया जाता है।

मंत्रालय ने यह भी बताया कि हाल के वर्षों में भारतीय नागरिकों के लिए वीजा-मुक्त (Visa-Free) और वीजा-ऑन-अराइवल (Visa-on-Arrival) सुविधाओं का विस्तार हुआ है, जिससे भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए कई देशों की यात्रा पहले की तुलना में अधिक आसान हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मंत्रालय की यह स्पष्टता नागरिकता और यात्रा दस्तावेज़ों के बीच अंतर को समझने में मदद करेगी। साथ ही, यह जानकारी उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो पासपोर्ट को नागरिकता के एकमात्र प्रमाण के रूप में देखते हैं।

विदेश मंत्रालय ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे नागरिकता, पहचान और यात्रा दस्तावेज़ों से संबंधित जानकारी के लिए आधिकारिक दिशानिर्देशों का पालन करें तथा किसी भी भ्रम की स्थिति में संबंधित सरकारी एजेंसियों से संपर्क करें।


कमजोर मानसून और एल नीनो की आशंका के बीच केंद्र सरकार अलर्ट, 315 जिलों की पहचान

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नई दिल्ली- देश में इस वर्ष एल नीनो और कमजोर मानसून की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन की तैयारियां तेज कर दी हैं। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने राज्यों के कृषि मंत्रियों, जिला कलेक्टरों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), ICAR-CRIDA और भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर स्थिति की समीक्षा की।


बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून में काफी देरी हुई है और अब तक सामान्य से लगभग 43 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार जुलाई की शुरुआत तक भी वर्षा कमजोर रहने की संभावना है, जिससे खरीफ फसलों पर असर पड़ सकता है।

315 जिले चिन्हित, 111 सबसे अधिक संवेदनशील

कृषि मंत्रालय और ICAR द्वारा किए गए वैज्ञानिक आकलन के आधार पर देश के 315 जिलों को कमजोर मानसून से प्रभावित होने की आशंका वाले जिलों के रूप में चिन्हित किया गया है।

  • 111 जिले उच्च प्राथमिकता श्रेणी में

  • 76 जिले मध्यम प्राथमिकता श्रेणी में

  • 128 जिले निम्न प्राथमिकता श्रेणी में

ये जिले मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में स्थित हैं।

हर जिले के लिए तैयार की गई विशेष योजना

सरकार ने सभी जिलों के लिए जिला कृषि आकस्मिकता योजना (District Agriculture Contingency Plan) तैयार की है। इसमें कम वर्षा की स्थिति में वैकल्पिक फसलें, जल संरक्षण, फसल विविधीकरण और किसानों की आय बढ़ाने के उपाय शामिल हैं।

शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ये योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि जरूरत पड़ने पर तुरंत लागू की जाएं।


जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता

संभावित सूखे की स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।

इसके तहत:

  • तालाबों और जलाशयों की मरम्मत

  • चेक डैम और स्टॉप डैम निर्माण

  • वर्षा जल संचयन

  • मनरेगा के माध्यम से जल संरक्षण कार्य

को तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

किसानों को वैकल्पिक फसलें अपनाने की सलाह

सरकार ने किसानों को कम पानी वाली और कम अवधि में तैयार होने वाली फसलों को अपनाने की सलाह दी है। विशेष रूप से:

  • दालें

  • श्री अन्न (मिलेट्स)

  • तिलहन फसलें

को बढ़ावा दिया जाएगा।

साथ ही अंतरफसल (Intercropping) और मिश्रित खेती को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि किसी एक फसल के नुकसान की स्थिति में किसानों की आय प्रभावित न हो।

बीज और उर्वरकों का पर्याप्त भंडार

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त मात्रा में बीज और उर्वरक उपलब्ध हैं।

  • अतिरिक्त बीज भंडार सुरक्षित रखा गया है।

  • पुनः बुवाई की स्थिति के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।

  • यूरिया, डीएपी, एनपीके और अन्य उर्वरकों की उपलब्धता पर्याप्त है।

किसानों को मिलेगा वैज्ञानिक मार्गदर्शन

देश के 731 कृषि विज्ञान केंद्र (KVKs) किसानों को मौसम और फसलों से संबंधित वैज्ञानिक सलाह देंगे।

इसके लिए:

  • एसएमएस

  • व्हाट्सएप संदेश

  • कॉल सेंटर

  • रेडियो और टीवी

  • सोशल मीडिया

का उपयोग किया जाएगा ताकि किसानों तक समय पर सही जानकारी पहुंच सके।

पशुपालकों के लिए भी तैयारी

कमजोर मानसून के कारण चारे की कमी की आशंका को देखते हुए सरकार ने अग्रिम योजना तैयार की है। जरूरत पड़ने पर चारा अधिशेष क्षेत्रों से प्रभावित इलाकों तक पहुंचाया जाएगा।

किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा कवच

सरकार ने किसानों को आर्थिक रूप से सुरक्षित रखने के लिए:

  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)

  • किसान क्रेडिट कार्ड (KCC)

  • प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN)

का अधिकतम लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।

किसानों से अपील: घबराएं नहीं

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से अपील करते हुए कहा,

"घबराने की जरूरत नहीं है। केंद्र और राज्य सरकारें पूरी तरह तैयार हैं। वैज्ञानिक संस्थानों, प्रशासन और किसानों के सहयोग से हर चुनौती का सामना किया जाएगा।"


बिना टिकट यात्रा अब पड़ेगी महंगी: भारतीय रेलवे ने जुर्माना दोगुना किया, 20 जून से नए नियम लागू

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नई दिल्ली- भारतीय रेलवे ने बिना टिकट यात्रा करने वालों के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए न्यूनतम जुर्माने की राशि दोगुनी कर दी है। अब ट्रेन में बिना वैध टिकट यात्रा करते पकड़े जाने पर यात्रियों को कम से कम 500 रुपये जुर्माना देना होगा। इससे पहले यह राशि 250 रुपये थी। नए नियम 20 जून 2026 से लागू हो गए हैं।

रेल मंत्रालय के अनुसार यह निर्णय जन विश्वास (संशोधन प्रावधान) अधिनियम, 2026 के तहत लिया गया है। इसका उद्देश्य रेलवे में बिना टिकट यात्रा पर रोक लगाना, राजस्व हानि को कम करना तथा यात्रियों के लिए अधिक सुरक्षित और अनुशासित यात्रा वातावरण सुनिश्चित करना है। 

नए प्रावधानों के अनुसार यदि कोई यात्री बिना टिकट यात्रा करते हुए पकड़ा जाता है तो उसे यात्रा किराए के साथ अतिरिक्त जुर्माना भी भरना होगा। जुर्माना न चुकाने की स्थिति में कानूनी कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें अतिरिक्त दंड या जेल की सजा का प्रावधान भी शामिल है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार देशभर में बिना टिकट यात्रा के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। केवल मई 2026 में ही लाखों यात्रियों के खिलाफ कार्रवाई कर करोड़ों रुपये का जुर्माना वसूला गया। रेलवे का मानना है कि कड़े दंड से नियमों के पालन को बढ़ावा मिलेगा और ईमानदार यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।

नए नियमों के तहत केवल बिना टिकट यात्रा ही नहीं, बल्कि किसी अन्य व्यक्ति के टिकट पर यात्रा करना, रेलवे परिसरों में अव्यवस्था फैलाना, अवैध फेरी लगाना तथा महिलाओं के लिए आरक्षित डिब्बों में अनधिकृत प्रवेश जैसे मामलों पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले वैध टिकट अवश्य खरीदें और यात्रा के दौरान टिकट अपने पास रखें। अधिकारियों का कहना है कि इन कदमों से रेलवे सेवाओं में पारदर्शिता, अनुशासन और यात्री सुरक्षा को और मजबूती मिलेगी।


जैविक खेती, आधुनिक तकनीक और बेहतर बाजार व्यवस्था से बढ़ेगी किसानों की आय : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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कुनकुरी में जैविक किसान मेला एवं प्राकृतिक खेती कार्यशाला में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

औषधीय एवं सुगंधित फसलों के विपणन हेतु हुआ महत्वपूर्ण अनुबंध, किसानों को मिलेगा बेहतर बाजार

रायपुर- किसानों की समृद्धि ही विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ की आधारशिला है। आधुनिक कृषि तकनीकों, बेहतर फसल चयन, प्राकृतिक एवं जैविक खेती तथा सुदृढ़ बाजार व्यवस्था के माध्यम से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। कृषि केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसानों को समृद्ध बनाए बिना विकास का लक्ष्य पूर्ण नहीं हो सकता। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज जशपुर जिले के कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, कुनकुरी में आयोजित जैविक किसान मेला एवं खेत बचाओ अभियान अंतर्गत प्राकृतिक एवं जैविक खेती कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह बात कही। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से भूमि की उर्वरता तथा मानव स्वास्थ्य दोनों प्रभावित होते हैं। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक एवं जैविक खेती को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि पूर्व में गोबर खाद, ढैंचा एवं अन्य हरी खादों के उपयोग से खेती अधिक टिकाऊ और भूमि अधिक उपजाऊ रहती थी। आज आवश्यकता है कि परंपरागत ज्ञान और आधुनिक तकनीक का समन्वय कर कृषि को अधिक लाभकारी बनाया जाए।

उन्होंने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों और उर्वरकों के आयात पर निर्भरता को देखते हुए नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसे विकल्प किसानों के लिए उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं। इनके उपयोग से उत्पादन लागत कम होती है और मिट्टी की गुणवत्ता भी संरक्षित रहती है।

किसानों को मिला आधुनिक तकनीकों से जुड़ने का अवसर

कार्यक्रम में किसानों को प्राकृतिक खेती, जैविक कृषि, आधुनिक कृषि यंत्रों, ड्रोन तकनीक, पशुपालन, मत्स्य पालन एवं उन्नत कृषि पद्धतियों की जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री ने विभिन्न कृषि प्रदर्शनों का अवलोकन कर विशेषज्ञों से जानकारी प्राप्त की तथा किसानों से संवाद भी किया।

कार्यक्रम में ड्रोन के माध्यम से खेतों में दवा छिड़काव का लाइव प्रदर्शन आकर्षण का केंद्र रहा। किसानों ने आधुनिक कृषि तकनीकों को प्रत्यक्ष रूप से देखा और उनके उपयोग से होने वाले लाभों की जानकारी प्राप्त की। साथ ही कृषि नवाचारों, जैविक खेती, पशुपालन एवं मत्स्य पालन से संबंधित जीवंत प्रदर्शनी भी आयोजित की गई।

उत्कृष्ट किसानों का हुआ सम्मान

कार्यक्रम में आयोजित किसान प्रतियोगिता के अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सम्मानित किया। ग्राम खोंगा (मनोरा) के किसान महेश सिंह को जैविक खेती के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया। ग्राम लाखाझार के किसान सुखराम को 33 किलोग्राम वजन के कटहल उत्पादन तथा ठेठेटांगर के किसान विजय भूषण को ढाई किलोग्राम वजन के आम उत्पादन के लिए सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने स्वामित्व योजना के तहत कृषक गुप्तेश्वर को भूमि पट्टा भी प्रदान किया।

औषधीय एवं सुगंधित फसलों को मिलेगा बेहतर बाजार

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री की उपस्थिति में जिला प्रशासन जशपुर एवं सेमिना एग्रो प्राइवेट लिमिटेड के बीच औषधीय एवं सुगंधित फसलों के विपणन के लिए महत्वपूर्ण अनुबंध किया गया। इस पहल से जिले के किसानों को अपने उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध होगा तथा मूल्य संवर्धन और विपणन की नई संभावनाएं विकसित होंगी। इससे किसानों की आय में वृद्धि के साथ स्थानीय कृषि अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

किसानों की खुशहाली सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को लाभकारी बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीद रही है तथा 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदी की व्यवस्था लागू की गई है। सरकार बनने के तुरंत बाद किसानों को दो वर्षों का लंबित बोनस प्रदान किया गया तथा शून्य प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है।

बगिया दाबयुक्त सिंचाई योजना से बदलेगी खेती की तस्वीरमुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत चयनित देश की 100 प्रमुख परियोजनाओं में छत्तीसगढ़ की एकमात्र बगिया दाबयुक्त सिंचाई योजना शामिल है। लगभग 119 करोड़ रुपये की लागत वाली इस योजना से 14 गांवों के लगभग 5 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलेगी। पाइपलाइन के माध्यम से खेतों तक पानी पहुंचाने वाली इस योजना से भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता भी नहीं होगी।

उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के लिए देश के चयनित 100 जिलों में छत्तीसगढ़ के केवल तीन जिले—दंतेवाड़ा, कोरबा और जशपुर—शामिल किए गए हैं, जिससे जिले के कृषि विकास को नई गति मिलेगी।

सुशासन और डिजिटल सेवाओं से ग्रामीणों को मिल रही सुविधा

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में सुशासन को और अधिक मजबूत बनाने के लिए गुड गवर्नेंस एवं अभिसरण विभाग का गठन किया गया है। अधिकांश शासकीय कार्य अब ई-ऑफिस प्रणाली के माध्यम से संचालित हो रहे हैं तथा भ्रष्टाचार के मामलों में दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जा रही है।

उन्होंने बताया कि ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के माध्यम से 400 से अधिक नागरिक सेवाएं उपलब्ध हैं, जिनका लाभ लोग घर बैठे प्राप्त कर रहे हैं। प्रदेश की 6 हजार ग्राम पंचायतों में अटल डिजिटल सेवा केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं, जहां ग्रामीणों को बैंकिंग एवं डिजिटल सेवाएं उपलब्ध होंगी।

मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 की जानकारी देते हुए कहा कि अब नागरिक अपनी शिकायतें और समस्याएं सीधे दर्ज करा सकते हैं। 24×7 संचालित इस व्यवस्था से 42 विभागों के 8 हजार से अधिक अधिकारी जुड़े हैं और प्रत्येक शिकायत के समयबद्ध निराकरण की निगरानी की जा रही है।

कार्यक्रम में पत्थलगांव विधायक एवं सरगुजा आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष गोमती साय, जशपुर विधायक रायमुनी भगत, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल रामप्रताप सिंह, छत्तीसगढ़ राज्य अंत्यावसायी सहकारी वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष सुरेन्द्र कुमार बेसरा, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव,  नगर पालिका जशपुर के उपाध्यक्ष यशप्रतापसिंह जूदेव सहित बड़ी संख्या में किसान, जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

जशपुर वनमण्डल ने रचा इतिहास, गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ नाम

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एक दिन में 2 लाख से अधिक सीडबॉल प्रसार कर बनाया विश्व रिकॉर्ड

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति में जशपुर वनमण्डल को मिला आधिकारिक प्रमाण-पत्र

रायपुर- पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी के क्षेत्र में जशपुर वनमण्डल ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए एक ही दिन में 2 लाख से अधिक सीडबॉल के प्रसार एवं रोपण का कार्य संपादित कर गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया है। इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की राज्य प्रमुख सोनल राजेश शर्मा ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति में जशपुर वनमण्डल को आधिकारिक प्रमाण-पत्र प्रदान किया। वनमण्डल की ओर से यह प्रमाण-पत्र वनमण्डलाधिकारी शशि कुमार ने प्राप्त किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जशपुर वनमण्डल, वन विभाग तथा अभियान से जुड़े सभी नागरिकों को बधाई देते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी दायित्व नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जशपुर में संचालित “बीज गोला बनाबो, जशपुर के जंगल ला बढ़ाबो” अभियान जनभागीदारी और प्रकृति संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जब शासन, प्रशासन और समाज किसी सकारात्मक उद्देश्य के लिए एकजुट होकर कार्य करते हैं, तब असंभव प्रतीत होने वाले लक्ष्य भी सहजता से प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि न केवल जशपुर, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है तथा पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगी।

जशपुर वनमण्डल द्वारा संचालित महत्वाकांक्षी अभियान “बीज गोला बनाबो, जशपुर के जंगल ला बढ़ाबो” के तहत जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर सीडबॉल प्रसार कार्यक्रम आयोजित किया गया। अभियान का उद्देश्य प्राकृतिक वनस्पतियों के संरक्षण, जैव विविधता के संवर्धन और हरित आवरण में वृद्धि के माध्यम से पर्यावरणीय संतुलन को सुदृढ़ करना है।

अभियान की सबसे बड़ी विशेषता इसमें देखने को मिली व्यापक जनसहभागिता रही। स्थानीय ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों, विद्यार्थियों, महिला स्व-सहायता समूहों, सामाजिक संगठनों, वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों तथा आम नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई। हजारों लोगों के सहयोग से यह अभियान एक जनआंदोलन के रूप में विकसित हुआ और एक ही दिन में 2 लाख से अधिक सीडबॉल के प्रसार का नया कीर्तिमान स्थापित किया गया।

इस उपलब्धि ने जशपुर जिले को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। साथ ही यह सिद्ध किया है कि सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में बड़े और सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।

इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया ‘जश लर्न’ का जिला स्तरीय शुभारंभ

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अब फोन आधारित शिक्षण से पूरे जिले के बच्चों को मिलेगा गणित सीखने का अवसर

फरसाबहार में मिली सफलता के बाद जिले के सभी विकासखंडों में होगा विस्तार

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज जशपुर जिले में निज निवास बगिया से जशपुर जिले की अभिनव शैक्षणिक पहल ‘जश लर्न’ का जिला स्तरीय शुभारंभ किया। फरसाबहार विकासखंड में सफल पायलट प्रोजेक्ट के रूप में संचालित इस कार्यक्रम को अब जिले के सभी विकासखंडों तक विस्तारित किया जाएगा। इस पहल के माध्यम से प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों की आधारभूत गणितीय दक्षताओं को सुदृढ़ बनाने के साथ-साथ शिक्षक, पालक और विद्यार्थियों की सहभागिता से सीखने की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि शिक्षा किसी भी समाज और राष्ट्र के विकास की सबसे मजबूत आधारशिला होती है। आधुनिक तकनीक और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने का यह प्रयास अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि जब शिक्षक, पालक और विद्यार्थी एक साथ मिलकर कार्य करते हैं, तब शिक्षा के परिणाम अधिक सकारात्मक और स्थायी होते हैं।

मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि ‘जश लर्न’ कार्यक्रम बच्चों की गणितीय समझ विकसित करने, उनमें आत्मविश्वास बढ़ाने तथा सीखने के स्तर में गुणात्मक सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मुख्यमंत्री ने बच्चों से किया संवाद, पूछा— क्या-क्या सीखे हो?

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री साय ने ‘जश लर्न’ कार्यक्रम से लाभान्वित विद्यार्थियों वंदना यादव, नव्यता यादव, आयुषी तिर्की एवं कुसुम डडसेना से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने बच्चों से पूछा कि इस कार्यक्रम से उन्हें क्या सीखने को मिला और पढ़ाई में किस प्रकार लाभ हुआ।

ग्राम झारमुंडा की कक्षा पांचवीं की छात्रा नव्यता यादव ने बताया कि अब उसे 20 तक पहाड़े याद हो गए हैं और जोड़, घटाव, गुणा एवं भाग जैसे गणितीय प्रश्न आसानी से हल कर लेती है। धनपुर की छात्रा वंदना यादव ने बताया कि नियमित फोन आधारित मार्गदर्शन और अभ्यास से गणित के प्रति उसका आत्मविश्वास बढ़ा है। पहले गणित कठिन लगता था, लेकिन अब पढ़ाई में आनंद आने लगा है।

बच्चों के अनुभव सुनकर मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा में तकनीक, शिक्षक और अभिभावकों की संयुक्त सहभागिता से सीखने के बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे नवाचार बच्चों की शैक्षणिक नींव मजबूत करने के साथ-साथ उनमें आत्मविश्वास का भी विकास करते हैं।

डाइट के प्रशिक्षु छात्र-शिक्षकों को किया सम्मानित

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ‘जश लर्न’ कार्यक्रम से जुड़े डाइट जशपुर के प्रथम वर्ष के उन प्रशिक्षु छात्र-शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया, जिन्होंने मोबाइल आधारित शिक्षण के माध्यम से बच्चों की गणितीय दक्षता बढ़ाने में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

मुख्यमंत्री ने उनके प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल शिक्षा क्षेत्र में नवाचार का उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां भावी शिक्षक समाज के बच्चों के सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं।

फरसाबहार में मिले उत्साहजनक परिणाम

जिला प्रशासन जशपुर द्वारा यूथ इम्पैक्ट संस्था के सहयोग से फरसाबहार विकासखंड में ‘जश लर्न’ कार्यक्रम पायलट प्रोजेक्ट के रूप में प्रारंभ किया गया था। इसके अंतर्गत कक्षा तीसरी एवं चौथी के चयनित विद्यार्थियों को डाइट जशपुर के छात्र-अध्यापकों द्वारा नियमित रूप से मोबाइल फोन के माध्यम से शैक्षणिक सहयोग प्रदान किया गया।

बच्चों की गणितीय दक्षताओं का आकलन कर उन्हें जोड़, घटाव, गुणा एवं भाग जैसी मूलभूत अवधारणाओं में चरणबद्ध तरीके से मार्गदर्शन दिया गया। कार्यक्रम में अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई, जिससे घर पर भी बच्चों की पढ़ाई निरंतर जारी रही।

डाइट जशपुर की प्रशिक्षु छात्रा सृष्टि ने बताया कि अप्रैल 2026 से शुरू हुए इस पायलट प्रोजेक्ट के माध्यम से गणित में कमजोर बच्चों को उनके अभिभावकों की उपस्थिति में नियमित फोन कॉल कर मूलभूत गणितीय कौशल सिखाए गए। इससे बच्चों को विद्यालय के अतिरिक्त घर पर भी सीखने का अवसर मिला।

260 विद्यार्थियों को मिला लाभ, 75 प्रतिशत बच्चों ने हासिल की दक्षतापायलट प्रोजेक्ट के अंतर्गत डाइट जशपुर के 90 प्रशिक्षु छात्र-शिक्षकों ने फरसाबहार विकासखंड के 260 विद्यार्थियों को मोबाइल आधारित शिक्षण सहायता प्रदान की। कार्यक्रम के परिणाम अत्यंत सकारात्मक रहे और लगभग 75 प्रतिशत विद्यार्थियों ने जोड़, गुणा, भाग एवं अन्य मूलभूत गणितीय संक्रियाओं में दक्षता प्राप्त की। बच्चों की सीखने की गति, गणितीय समझ तथा आत्मविश्वास में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया।

अब जिले के सभी विकासखंडों में पहुंचेगा ‘जश लर्न’

पायलट प्रोजेक्ट की सफलता को देखते हुए जिला प्रशासन ने ‘जश लर्न’ कार्यक्रम को जशपुर जिले के सभी विकासखंडों में लागू करने का निर्णय लिया है। इसके लिए सभी सीएसी को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा ताकि कार्यक्रम का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।

“साथ मिलकर सीखें, आगे बढ़ें” की भावना पर आधारित यह पहल जशपुर जिले में शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक और नवाचारपूर्ण मॉडल के रूप में उभर रही है। कार्यक्रम के विस्तार से जिले के हजारों विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा तथा उनकी आधारभूत शैक्षणिक दक्षताओं को मजबूत कर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लक्ष्य को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, कलेक्टर रोहित व्यास सहित शिक्षा विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, डाइट जशपुर के प्रशिक्षु विद्यार्थी, पालकगण तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए बड़ा कदम: ‘निर्भय चेतना’ अभियान की शुरुआत, देशभर में प्रशिक्षित होंगे 17.5 लाख जनप्रतिनिधि

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नई दिल्ली- महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और समान भागीदारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पंचायती राज मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए ‘निर्भय चेतना’ कार्यक्रम की शुरुआत की है। 17 से 19 जून 2026 तक नई दिल्ली में आयोजित तीन दिवसीय ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स (ToT) कार्यक्रम के साथ इस राष्ट्रीय अभियान का शुभारंभ किया गया।

यह पहल निर्भया फंड परियोजना के तहत शुरू की गई है और इसे दुनिया का अपनी तरह का सबसे बड़ा अभियान माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य पुरुष जनप्रतिनिधियों को महिलाओं से जुड़े मुद्दों, लैंगिक समानता और महिला सुरक्षा के प्रति संवेदनशील बनाना है।

17.5 लाख पुरुष जनप्रतिनिधियों तक पहुंचेगा अभियान

कार्यक्रम के तहत देशभर में राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर 28,500 मास्टर ट्रेनर्स तैयार किए जाएंगे, जो आगे चलकर 17.5 लाख से अधिक पुरुष निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को प्रशिक्षण देंगे। इसका उद्देश्य पंचायत स्तर पर महिलाओं के अधिकारों, नेतृत्व, सुरक्षा और सम्मान को लेकर सकारात्मक सोच विकसित करना है।

छह राज्यों से शामिल हुए मास्टर ट्रेनर्स

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के पहले चरण में असम, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और उत्तराखंड के लगभग 40 मास्टर ट्रेनर्स ने भाग लिया। ये प्रशिक्षक आगे अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी इस अभियान को विस्तार देंगे।

‘विकसित भारत’ के लिए महिलाओं की भागीदारी जरूरी

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और समान भागीदारी के बिना विकसित भारत का सपना पूरा नहीं हो सकता। उन्होंने पंचायतों को सामाजिक परिवर्तन का सबसे मजबूत माध्यम बताते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर सोच और व्यवहार में बदलाव लाने में पंचायतों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

वहीं, मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव सुशील कुमार लोहानी ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से महिलाओं के अधिकारों और सम्मान के प्रति जवाबदेह नेतृत्व विकसित करने का आह्वान किया।

प्रशिक्षण में क्या सिखाया गया?

तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में विशेषज्ञ सत्र, समूह चर्चा, केस स्टडी और अनुभव आधारित शिक्षण गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को लैंगिक समानता, सकारात्मक पुरुषत्व (Positive Masculinity), सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती देने और महिला सशक्तिकरण जैसे विषयों पर प्रशिक्षित किया गया।

‘निर्भय रहो’ पहल का हिस्सा है ‘निर्भय चेतना’

‘निर्भय चेतना’ केंद्र सरकार की ‘निर्भय रहो’ पहल का एक प्रमुख हिस्सा है, जिसमें तीन महत्वपूर्ण घटक शामिल हैं:

  • निर्भय नेत्री – महिला जनप्रतिनिधियों के लिए नेतृत्व और कानूनी जागरूकता प्रशिक्षण।

  • निर्भय चेतना – पुरुष जनप्रतिनिधियों को महिलाओं की सुरक्षा और लैंगिक समानता के प्रति संवेदनशील बनाना।

  • निर्भय दृष्टि – ग्रामीण क्षेत्रों में रणनीतिक स्थानों पर CCTV कैमरे लगाकर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना।

मुख्य बातें

▪️ महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए ‘निर्भय चेतना’ अभियान शुरू।
▪️ देशभर में 17.5 लाख पुरुष जनप्रतिनिधियों को दिया जाएगा प्रशिक्षण।
▪️ 28,500 मास्टर ट्रेनर्स तैयार करने का लक्ष्य।
▪️ पहले चरण में 6 राज्यों के 40 प्रशिक्षकों ने लिया हिस्सा।
▪️ पंचायतों को बनाया जाएगा लैंगिक समानता और महिला सुरक्षा का केंद्र।


मध्य प्रदेश में ‘हाउसिंग फॉर ऑल’ को बड़ी ताकत: 80 हजार से अधिक परिवारों को मिला पीएम आवास योजना का लाभ

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मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना–शहरी (PMAY-U) के तहत आज एक ऐतिहासिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इंदौर जिले के सांवेर में आयोजित इस कार्यक्रम में केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में 80 हजार से अधिक परिवारों को आवासीय लाभ प्रदान किए गए।

कार्यक्रम में राज्य के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।

42 हजार से अधिक परिवारों को स्वीकृति पत्र

प्रधानमंत्री आवास योजना–शहरी 2.0 के तहत 42 हजार से अधिक पात्र हितग्राहियों को आवास स्वीकृति पत्र वितरित किए गए। इसके लिए सरकार द्वारा लगभग 1,050 करोड़ रुपये की सब्सिडी प्रदान की जा रही है। वहीं, राज्य के विभिन्न जिलों में 38 हजार परिवारों ने अपने नए पक्के मकानों में गृह प्रवेश किया।

‘हर घर सम्मान, सुरक्षा और उम्मीद का प्रतीक’

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने लाभार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि नया घर केवल चार दीवारें नहीं, बल्कि परिवारों के लिए सम्मान, सुरक्षा और बेहतर भविष्य की उम्मीद का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ‘सबके लिए आवास’ के संकल्प को पूरा करने के लिए लगातार काम कर रही है।

आवास योजना के क्रियान्वयन में अग्रणी है मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश प्रधानमंत्री आवास योजना के सफल क्रियान्वयन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। PMAY-U और PMAY-U 2.0 के तहत राज्य में अब तक 10.39 लाख से अधिक आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं, जबकि 9.08 लाख आवासों का निर्माण पूरा हो चुका है।

महिलाओं को भी मिल रहा सशक्तिकरण

योजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि मकान का स्वामित्व महिला सदस्य के नाम या संयुक्त स्वामित्व में दिया जाता है। इससे महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिल रहा है।

1 करोड़ परिवारों के आवासीय सपनों को मिलेगा सहारा

PMAY-U 2.0 के तहत केंद्र सरकार देशभर के 1 करोड़ अतिरिक्त EWS, LIG और MIG परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराने के लिए वित्तीय सहायता दे रही है। पात्र परिवारों को शहरी क्षेत्रों में घर बनाने, खरीदने या किराए पर लेने के लिए ₹2.5 लाख तक की सहायता प्रदान की जा रही है।

मुख्य बातें

  • मध्य प्रदेश में 80 हजार से अधिक परिवारों को PMAY-U का लाभ।

  • 42 हजार से अधिक हितग्राहियों को आवास स्वीकृति पत्र वितरित।

  • ₹1,050 करोड़ की सब्सिडी का प्रावधान।

  • 38 हजार परिवारों ने नए पक्के घरों में किया गृह प्रवेश।

  • राज्य में अब तक 10.39 लाख आवास स्वीकृत, 9.08 लाख पूर्ण।

  • महिलाओं के नाम या संयुक्त स्वामित्व में दिए जा रहे घर।


कोल्हापुर में अमित शाह का संबोधन: सांस्कृतिक पुनर्जागरण और विकास के नए युग की शुरुआत

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केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज महाराष्ट्र के कोल्हापुर में आयोजित ‘धन्यवाद सभा’ को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया। इस अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।


अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने कई ऐसे कार्य पूरे किए हैं जिन्हें कभी असंभव माना जाता था। उन्होंने कहा कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम का पुनर्विकास तथा सोमनाथ मंदिर का स्वर्ण अलंकरण भारत की सांस्कृतिक विरासत के पुनर्जागरण के प्रतीक हैं।

अंबाबाई महालक्ष्मी मंदिर कॉरिडोर को मिली नई गति

अमित शाह ने कहा कि अब कोल्हापुर स्थित माता अंबाबाई महालक्ष्मी मंदिर कॉरिडोर के निर्माण कार्य की शुरुआत भी इसी सांस्कृतिक पुनर्जागरण का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि “विकास भी, विरासत भी” के मंत्र के साथ देशभर में धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों का विकास किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा लगभग 1,500 करोड़ रुपये की लागत से अंबाबाई महालक्ष्मी मंदिर और उसके आसपास के क्षेत्र का व्यापक पुनर्विकास किया जा रहा है। यह परियोजना 28 हजार वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में विकसित की जाएगी।

आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होगा मंदिर परिसर

परियोजना के तहत मंदिर परिसर में AI आधारित सुरक्षा प्रणाली, LED लाइटिंग, हेरिटेज वॉक, लाइट एंड साउंड शो, बहुउद्देश्यीय सभागार, अन्नछत्र, पुलिस स्टेशन और श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। साथ ही आसपास स्थित 41 छोटे-बड़े प्राचीन मंदिरों के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

मोदी सरकार के 12 वर्षों की उपलब्धियां गिनाईं

अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देश के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने का नया रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में ये 12 वर्ष विकास, सांस्कृतिक जागरण, राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा के रूप में याद किए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने ग्रामीण विकास, शहरी विकास, कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने, सेमीकंडक्टर, क्वांटम इंजीनियरिंग, डेटा सेंटर और नई तकनीकों के क्षेत्र में भारत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का काम किया है। साथ ही चंद्रयान-3 की सफलता और चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर ‘शिव शक्ति पॉइंट’ की स्थापना को भारत के गौरव का प्रतीक बताया।

मुख्य बातें

  • कोल्हापुर में अमित शाह ने ‘धन्यवाद सभा’ को किया संबोधित।

  • अंबाबाई महालक्ष्मी मंदिर कॉरिडोर परियोजना को बताया सांस्कृतिक पुनर्जागरण का हिस्सा।

  • ₹1,500 करोड़ की लागत से होगा मंदिर और आसपास के क्षेत्र का विकास।

  • मंदिर परिसर में आधुनिक सुविधाओं और हेरिटेज संरक्षण पर विशेष जोर।

  • मोदी सरकार के 12 वर्षों की उपलब्धियों और सांस्कृतिक विरासत संरक्षण का उल्लेख।


छत्तीसगढ़ के किसानों को बड़ी सौगात: पीएम किसान सम्मान निधि की 23वीं किस्त जारी

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छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए आज बड़ी खुशखबरी सामने आई है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना की 23वीं किस्त जारी कर दी गई है, जिससे राज्य के लाखों किसानों के चेहरों पर राहत और खुशी देखने को मिल रही है।

24.52 लाख किसानों को 490.54 करोड़ रुपये का लाभ

इस किस्त के तहत छत्तीसगढ़ के करीब 24.52 लाख किसानों को सीधे उनके बैंक खातों में कुल 490.54 करोड़ रुपये की राशि ट्रांसफर की जा रही है। यह पूरी प्रक्रिया DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से की जा रही है, जिससे राशि बिना किसी रुकावट के सीधे लाभार्थियों तक पहुंच रही है।

किसानों की आर्थिक मदद के लिए अहम कदम

PM-KISAN योजना के तहत पात्र किसानों को हर वर्ष ₹6,000 की आर्थिक सहायता दी जाती है, जो तीन समान किस्तों में सीधे बैंक खातों में भेजी जाती है। यह राशि किसानों को खेती-किसानी की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान करती है।

सरकार की प्रमुख योजना

यह योजना केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं में से एक है, जिसका उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक मजबूती देना है। इस पहल से देशभर में करोड़ों किसान लाभान्वित हो रहे हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।

मुख्य बातें

  • 23वीं किस्त आज जारी

  • छत्तीसगढ़ के 24.52 लाख किसान लाभान्वित

  • कुल ₹490.54 करोड़ की राशि ट्रांसफर

  • राशि सीधे बैंक खातों में DBT के माध्यम से


पश्चिम बंग दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएं

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंग दिवस (पश्चिमबंग दिवस) के अवसर पर राज्य के लोगों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दिन उस राज्य का उत्सव है जिसने साहित्य, संगीत, कला, अध्यात्म, विज्ञान, व्यापार, वाणिज्य, सामाजिक सुधार और अन्य अनेक क्षेत्रों में अपने योगदान से भारत के इतिहास को गहराई से प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल ने समय-समय पर भारत की राष्ट्रीय चेतना को समृद्ध किया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 20 जून पश्चिम बंगाल के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण दिन है, क्योंकि इसी दिन यह सुनिश्चित हुआ था कि पश्चिम बंगाल भारत का अभिन्न अंग बना रहे। उन्होंने इस संदर्भ में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की भूमिका को अमूल्य बताया। प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि वर्ष 2026 में डॉ. मुखर्जी की 125वीं जयंती भी मनाई जा रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार पश्चिम बंगाल सरकार के साथ मिलकर राज्य के लोगों के सपनों और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए कार्य करती रहेगी।

उन्होंने पश्चिम बंगाल की निरंतर प्रगति और राज्य के लोगों की समृद्धि की कामना की।


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को प्रधानमंत्री मोदी ने दी जन्मदिन की शुभकामनाएं

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मू को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति मुर्मू का साहस, सादगी, विनम्रता और जनसेवा के प्रति अटूट समर्पण देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि राष्ट्रपति मुर्मू ने सार्वजनिक जीवन में अपने लंबे अनुभव के दौरान देश की उत्कृष्ट सेवा की है। उन्होंने विशेष रूप से समाज के वंचित और कमजोर वर्गों के कल्याण के लिए लगातार काम किया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के विकास के प्रति राष्ट्रपति की दृढ़ प्रतिबद्धता अत्यंत प्रेरणादायक है। उन्होंने राष्ट्रपति के लंबे, स्वस्थ और राष्ट्रसेवा से परिपूर्ण जीवन की कामना की।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी संदेश में यह भी बताया कि वे आज ओडिशा में आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्रपति मुर्मू से मुलाकात करेंगे।


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