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छत्तीसगढ़ में एनालॉग पनीर की बिक्री और उपयोग पर तत्काल प्रतिबंध, होटल-रेस्तरां में भी नहीं होगा इस्तेमाल

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रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार ने आम जनता के स्वास्थ्य की सुरक्षा और उपभोक्ताओं को भ्रामक खाद्य उत्पादों से बचाने के उद्देश्य से राज्यभर में एनालॉग पनीर (Analog Paneer) की बिक्री और उपयोग पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। यह आदेश 31 जुलाई 2026 से लागू हो गया है।

यह निर्णय राज्य के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया।

सरकार के आदेश के अनुसार अब राज्य में होटल, रेस्तरां, ढाबों, कैटरिंग सेवाओं तथा स्ट्रीट फूड विक्रेताओं द्वारा भी एनालॉग पनीर का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

क्या है एनालॉग पनीर?

एनालॉग पनीर वह उत्पाद है जिसे पारंपरिक दूध से बने पनीर के स्थान पर पाम ऑयल, स्टार्च, इमल्सीफायर तथा अन्य वनस्पति वसा से तैयार किया जाता है। देखने और स्वाद में यह पनीर जैसा प्रतीत होता है, लेकिन इसका पोषण स्तर असली दूध से बने पनीर की तुलना में काफी कम होता है। इसके उपयोग से उपभोक्ताओं के भ्रमित होने और गुणवत्ता संबंधी चिंताएं भी सामने आई हैं।

निगरानी और सख्त कार्रवाई के निर्देश

राज्य सरकार ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग को बाजार, होटल, रेस्तरां और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों में विशेष अभियान चलाकर नियमित जांच करने के निर्देश दिए हैं। प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (FSS Act) के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल केवल छत्तीसगढ़ में लागू

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह प्रतिबंध फिलहाल केवल छत्तीसगढ़ राज्य में एनालॉग पनीर की बिक्री और उपयोग पर लागू है। देश के अन्य राज्यों में इसके निर्माण या बिक्री पर अभी कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।

इस बीच, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) भी एनालॉग डेयरी उत्पादों के लिए नए मानक और लेबलिंग संबंधी दिशा-निर्देश तैयार कर रहा है, ताकि उपभोक्ताओं को उत्पाद की वास्तविक प्रकृति की स्पष्ट जानकारी मिल सके।

राज्य सरकार का कहना है कि यह कदम उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा, खाद्य गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा बाजार में पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

डिफॉल्ट सर्विस चार्ज वसूलने पर सीसीपीए का बड़ा एक्शन, देशभर के 41 रेस्तरां के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेकर की कार्रवाई

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केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन तथा अनुचित व्यापारिक गतिविधियों के तहत ग्राहकों के बिल में डिफॉल्ट रूप से सर्विस चार्ज जोड़ने के मामले में देशभर के 41 रेस्तरां के खिलाफ स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेते हुए कार्रवाई शुरू की है।

यह कार्रवाई राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (National Consumer Helpline-NCH) पर प्राप्त शिकायतों के आधार पर की गई। शिकायतों के साथ प्रस्तुत बिलों से यह स्पष्ट हुआ कि संबंधित रेस्तरां उपभोक्ताओं की स्पष्ट सहमति के बिना उनके बिल में स्वतः सर्विस चार्ज जोड़ रहे थे।

जांच के दौरान सीसीपीए ने पाया कि यह प्रथा 4 जुलाई 2022 को जारी होटलों एवं रेस्तरां में सर्विस चार्ज वसूली संबंधी अनुचित व्यापारिक गतिविधियों की रोकथाम और उपभोक्ता हित संरक्षण दिशानिर्देशों का उल्लंघन है। साथ ही यह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(47) के तहत अनुचित व्यापारिक गतिविधि (Unfair Trade Practice) की श्रेणी में आती है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखी गाइडलाइन की वैधता

28 मार्च 2025 को दिल्ली उच्च न्यायालय ने नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया बनाम भारत संघ मामले में सीसीपीए की सर्विस चार्ज संबंधी गाइडलाइन को वैध ठहराते हुए कहा कि अनिवार्य रूप से सर्विस चार्ज वसूलना कानून के विरुद्ध है।

न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी होटल एवं रेस्तरां इन दिशानिर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य हैं तथा सीसीपीए कानून के अनुसार इनके अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।

सीसीपीए की गाइडलाइन के प्रमुख प्रावधान

  • कोई भी होटल या रेस्तरां भोजन के बिल में स्वतः या डिफॉल्ट रूप से सर्विस चार्ज नहीं जोड़ सकता।

  • किसी अन्य नाम से भी सर्विस चार्ज की वसूली नहीं की जा सकती।

  • उपभोक्ता को सर्विस चार्ज देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। यह पूरी तरह स्वैच्छिक एवं वैकल्पिक है।

  • सर्विस चार्ज नहीं देने पर किसी भी उपभोक्ता को सेवा देने से इनकार नहीं किया जा सकता।

  • भोजन के बिल में सर्विस चार्ज जोड़कर उस पर जीएसटी नहीं लगाया जा सकता।

सीसीपीए की कार्रवाई

एक मामले में चायोस (Sunshine Teahouse Pvt. Ltd.) पर उपभोक्ता के बिल में डिफॉल्ट सर्विस चार्ज जोड़ने के लिए 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। साथ ही कंपनी को उपभोक्ता से वसूला गया सर्विस चार्ज वापस करने का निर्देश दिया गया है।

प्राधिकरण ने कंपनी को अपने सभी आउटलेट्स के सॉफ्टवेयर आधारित बिलिंग सिस्टम में संशोधन करने का भी निर्देश दिया है, ताकि भविष्य में किसी भी उपभोक्ता के बिल में स्वतः सर्विस चार्ज या इसी प्रकार का कोई शुल्क न जोड़ा जाए।

सीसीपीए ने निम्नलिखित रेस्तरां के खिलाफ भी अंतिम आदेश जारी किए हैं—

  • कैफे ब्लू बॉटल, पटना

  • चाइना गेट रेस्टोरेंट प्राइवेट लिमिटेड

  • फिएस्टा बारबेक्यू नेशन

  • फू अहमदाबाद रेस्टोरेंट

  • एल'ओपेरा फ्रेंच बेकरी प्राइवेट लिमिटेड

  • ज़ोरो – द लग्जरी नाइट क्लब

  • चायोस (Sunshine Teahouse Pvt. Ltd.)

अन्य रेस्तरां के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों की जांच एवं कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।

उपभोक्ता कहां करें शिकायत?

यदि किसी रेस्तरां द्वारा आपकी सहमति के बिना बिल में सर्विस चार्ज जोड़ा जाता है, तो इसकी शिकायत राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH) पर टोल-फ्री नंबर 1915 या एनसीएच प्लेटफॉर्म के माध्यम से दर्ज कराई जा सकती है।

सीसीपीए ने कहा है कि वह सर्विस चार्ज से संबंधित शिकायतों पर लगातार नजर रखे हुए है और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 तथा संबंधित दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। प्राधिकरण का उद्देश्य उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करना तथा आतिथ्य क्षेत्र में पारदर्शी, निष्पक्ष और उपभोक्ता हितैषी व्यावसायिक व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

लीगल मेट्रोलॉजी अधिनियम में बड़ा सुधार: पहली बार गलती करने वाले कारोबारियों को मिलेगा सुधार का मौका

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नई दिल्ली- उपभोक्ता मामलों के विभाग (Department of Consumer Affairs) ने जन विश्वास (संशोधन प्रावधान) अधिनियम, 2026 के तहत लीगल मेट्रोलॉजी अधिनियम, 2009 में "इम्प्रूवमेंट नोटिस (Improvement Notice)" व्यवस्था लागू की है। इस नई व्यवस्था के तहत पहली बार प्रक्रियागत या नियामकीय नियमों का उल्लंघन करने वाले कारोबारियों को दंडात्मक कार्रवाई से पहले अपनी गलती सुधारने का अवसर दिया जाएगा।

मुख्य बातें

  • पहली बार हुई प्रक्रियागत या नियामकीय गलती पर सीधे जुर्माना या कानूनी कार्रवाई नहीं होगी।

  • संबंधित अधिकारी पहले इम्प्रूवमेंट नोटिस जारी करेंगे।

  • नोटिस में बताई गई कमियों को निर्धारित समय के भीतर सुधारने का अवसर मिलेगा।

  • समय पर सुधार करने पर अनावश्यक मुकदमेबाजी और दंडात्मक कार्रवाई से बचा जा सकेगा।

  • बार-बार नियमों का उल्लंघन करने या जानबूझकर धोखाधड़ी करने वालों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

किन व्यवसायों को मिलेगा लाभ?

यह व्यवस्था निम्नलिखित सभी पंजीकृत एवं विनियमित संस्थाओं पर लागू होगी:

  • निर्माता (Manufacturers)

  • आयातक (Importers)

  • पैकर (Packers)

  • डीलर एवं व्यापारी

  • रिपेयरर

  • एमएसएमई (MSMEs)

  • अन्य विनियमित कारोबारी

किन मामलों में लागू होगी?

यह व्यवस्था पहली बार होने वाले निम्न प्रकार के उल्लंघनों पर लागू होगी:

  • पंजीकरण संबंधी त्रुटियां

  • रिकॉर्ड एवं दस्तावेजों का रखरखाव

  • मॉडल अप्रूवल

  • बाट एवं माप के निर्माण, बिक्री और मरम्मत

  • बाट एवं माप का आयात

  • पैकेज्ड वस्तुओं से जुड़े नियम

  • वैधानिक जानकारी एवं रिटर्न जमा करना

किन धाराओं पर लागू होगी?

इम्प्रूवमेंट नोटिस की व्यवस्था धारा 25, 27, 28, 29, 31, 32, 34, 35, 36(1), 38, 39, 41(1), 41(2), 45, 46 और 47 के तहत आने वाले निर्धारित प्रथम उल्लंघनों पर लागू होगी।

सरकार का उद्देश्य

सरकार का कहना है कि इस सुधार का उद्देश्य:

  • Ease of Doing Business (EoDB) को बढ़ावा देना,

  • स्वैच्छिक अनुपालन (Voluntary Compliance) को प्रोत्साहित करना,

  • अनावश्यक मुकदमों और अनुपालन लागत को कम करना,

  • तथा "Minimum Government, Maximum Governance" की भावना के अनुरूप पारदर्शी एवं भरोसेमंद नियामकीय व्यवस्था विकसित करना है।

हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ता हितों से समझौता नहीं किया जाएगा। धोखाधड़ी, छेड़छाड़, बार-बार नियम तोड़ने या उपभोक्ताओं को नुकसान पहुंचाने वाले मामलों में पहले की तरह कड़ी कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।

डिजिटल युग में विज्ञापन में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी

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“विज्ञापन का उद्देश्य केवल पहुंच बढ़ाना नहीं, बल्कि विश्वास बनाना होना चाहिए,” सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव संजय जाजू ने आज मुंबई में आयोजित AdTrust Summit 2026 में मुख्य वक्तव्य देते हुए कहा। उन्होंने भारत में एक जिम्मेदार, पारदर्शी और विश्वसनीय विज्ञापन पारिस्थितिकी तंत्र की आवश्यकता पर जोर दिया, खासकर ऐसे समय में जब यह क्षेत्र तेजी से विस्तार और प्रभाव में बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र का विकास जारी रहना चाहिए, लेकिन विशेष रूप से डिजिटल क्षेत्र में जवाबदेही भी जरूरी है। मंत्रालय का दृष्टिकोण विश्वास निर्माण, विकास को समर्थन और जिम्मेदारी सुनिश्चित करने पर केंद्रित है।

AdTrust Summit 2026 के पहले संस्करण का आयोजन एडवरटाइजिंग स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया (ASCI) द्वारा किया गया, जिसमें विज्ञापन, मीडिया, तकनीक और सरकार के प्रतिनिधियों ने जिम्मेदार विज्ञापन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। चर्चाओं का केंद्र उभरते रुझान, कानूनी ढांचे और नई तकनीकों का विज्ञापन प्रथाओं पर प्रभाव रहा।

संजय जाजू ने कहा कि विज्ञापन केवल एक व्यावसायिक गतिविधि नहीं है, बल्कि यह बाजारों को आकार देता है, ब्रांड बनाता है, उपभोक्ताओं को जानकारी देता है, संस्कृति को दर्शाता है और आकांक्षाओं को प्रभावित करता है। भारत जैसे तेजी से डिजिटल हो रहे देश में विज्ञापन नवाचार, आर्थिक गतिविधि, कंटेंट निर्माण और समावेशन का एक महत्वपूर्ण चालक बन गया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब ब्रांड, स्टार्टअप, स्थानीय व्यवसायों और कंटेंट क्रिएटर्स को बड़े पैमाने पर दर्शकों तक पहुंचने में सक्षम बना रहे हैं।

हालांकि, उन्होंने डिजिटल विज्ञापन से जुड़े जोखिमों—जैसे वित्तीय धोखाधड़ी, भ्रामक निवेश प्रचार और फर्जी नौकरी के ऑफर—पर भी चिंता जताई, जो अक्सर कमजोर वर्गों को निशाना बनाते हैं। उन्होंने कहा कि वाणिज्यिक अभिव्यक्ति अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है, लेकिन भ्रामक और धोखेबाज विज्ञापनों को नियंत्रित किया जाना चाहिए।

सम्मेलन में एआई की भूमिका, डीपफेक, डार्क पैटर्न और एंटी-इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग जैसे उभरते मुद्दों पर भी चर्चा हुई। संजय जाजू ने विज्ञापनदाताओं से केवल पहुंच नहीं बल्कि विश्वसनीयता पर ध्यान देने का आग्रह किया और कंटेंट क्रिएटर्स व इन्फ्लुएंसर्स से प्रामाणिकता बनाए रखने तथा भ्रामक प्रचार से बचने की अपील की।

उन्होंने जिम्मेदार विज्ञापन के लिए पांच प्रमुख सिद्धांत भी बताए:

  1. सत्यता हर संचार में अनिवार्य होनी चाहिए

  2. विज्ञापन, प्रायोजन और प्रचार संबंधों में पारदर्शिता जरूरी है

  3. हर सामग्री के निर्माण और प्रस्तुति में जिम्मेदारी होनी चाहिए

  4. कमजोर वर्गों, विशेषकर बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए

  5. जवाबदेही के साथ नवाचार, ताकि तकनीकी और रचनात्मक प्रगति विश्वास को मजबूत करे

इस अवसर पर संजय जाजू ने ASCI की सचिव जनरल एवं सीईओ मनीषा कपूर, मैडिसन के चेयरमैन सैम बलसारा, ASCI के चेयरमैन एवं पिडिलाइट इंडस्ट्रीज के एमडी सुधांशु वात्स, ASCI बोर्ड सदस्य प्रवीण त्रिपाठी तथा खैतान एंड कंपनी के पार्टनर्स ईशान जोहरी और तनु बनर्जी के साथ मिलकर “Ad Law Compendium” का शुभारंभ किया। यह विज्ञापन कानूनों और नियमों पर एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका के रूप में कार्य करेगा, जिससे उद्योग में जागरूकता और अनुपालन को बढ़ावा मिलेगा।

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण सचिव ने विज्ञापन उद्योग के हितधारकों—ASCI नेतृत्व, मार्केटर्स, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और कानूनी विशेषज्ञों—के साथ एक बैठक भी की।

2025 में स्पैम टेलीमार्केटिंग के खिलाफ TRAI की कड़ी कार्रवाई, 21 लाख से अधिक संसाधन डिस्कनेक्ट

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भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने वर्ष 2025 के लिए अनचाही वाणिज्यिक संचार (UCC) के प्रवर्तन और डू नॉट डिस्टर्ब (DND) पारिस्थितिकी तंत्र के तहत उपभोक्ता सहभागिता पर अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें स्पैम टेलीमार्केटिंग के खिलाफ नियामक कार्रवाई में उल्लेखनीय वृद्धि को रेखांकित किया गया है।

वर्ष 2025 के दौरान, UCC मानदंडों का उल्लंघन करने वाले 7,31,120 अपंजीकृत टेलीमार्केटर्स (UTMs) को नोटिस जारी किए गए। प्रगतिशील प्रवर्तन उपायों के तहत, 4,73,075 संस्थाओं पर एक महीने के लिए संचार प्रतिबंध लगाया गया, जबकि 89,936 बार-बार उल्लंघन करने वालों पर छह महीने का संचार प्रतिबंध लगाया गया। इसके अतिरिक्त, निरंतर अनुपालन न करने पर 1,84,482 दूरसंचार संसाधनों को डिस्कनेक्ट किया गया।

अगस्त 2024 से अब तक कुल मिलाकर 21.05 लाख से अधिक दूरसंचार संसाधनों को डिस्कनेक्ट किया जा चुका है, जो स्पैम नेटवर्क पर अंकुश लगाने और दूरसंचार पारिस्थितिकी तंत्र में अनुपालन को मजबूत करने के लिए किए जा रहे प्रयासों को दर्शाता है।

प्रवर्तन कार्रवाई के साथ-साथ, उपभोक्ताओं को स्पैम की रिपोर्ट करने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु निरंतर प्रयास किए गए। वर्ष 2025 में सभी चैनलों के माध्यम से 31.09 लाख UCC शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें से 17.06 लाख शिकायतें (आधे से अधिक) DND ऐप के माध्यम से दर्ज की गईं, जो अनचाही संचार की रिपोर्टिंग में बढ़ी हुई उपभोक्ता भागीदारी को दर्शाता है।

इस पर टिप्पणी करते हुए, TRAI के अध्यक्ष अनिल कुमार लाहोटी ने कहा:

“2025 में TRAI के प्रवर्तन प्रयास इस सिद्धांत पर आधारित हैं कि उपभोक्ताओं को अनचाही वाणिज्यिक संचार पर नियंत्रण में स्पष्ट सुधार महसूस होना चाहिए। DND पारिस्थितिकी तंत्र के माध्यम से बढ़ी हुई उपभोक्ता सहभागिता ने उल्लंघनों की तेजी से पहचान और लगातार उल्लंघन करने वालों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई संभव की है।”

मासिक आंकड़ों से पता चलता है कि वर्ष भर अपंजीकृत टेलीमार्केटर्स के खिलाफ शिकायतें कुल मामलों का बड़ा हिस्सा रहीं, जो पंजीकृत टेलीमार्केटर्स के खिलाफ शिकायतों से कहीं अधिक थीं। यह प्रवृत्ति नियामक ढांचे से बाहर संचालित होने वाली अनधिकृत और गैर-अनुपालन संस्थाओं को लक्षित करने पर TRAI के फोकस को मजबूत करती है।

TRAI ने दो-स्तरीय रणनीति अपनाई है, जिसके तहत पंजीकृत संस्थाओं के माध्यम से वैध और सहमति-आधारित वाणिज्यिक संचार को सक्षम किया जाता है, जबकि DLT (ब्लॉकचेन)-आधारित पंजीकरण, AI आधारित स्पैम पहचान, निर्धारित नंबर श्रृंखला का अनिवार्य उपयोग, मजबूत शिकायत तंत्र और गैर-अनुपालन प्रेषकों को डिस्कनेक्ट करने जैसे नियामक, तकनीकी और प्रवर्तन उपायों के माध्यम से अपंजीकृत संस्थाओं से आने वाले अनचाही संचार पर अंकुश लगाया जाता है।

DND पारिस्थितिकी तंत्र में अपनाने की दर में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। DND ऐप इंस्टॉलेशन में वर्ष-दर-वर्ष 84.43% की वृद्धि दर्ज की गई और 2025 में कुल इंस्टॉलेशन 28.08 लाख तक पहुंच गए, जबकि 2024 में यह संख्या 15.22 लाख थी।

उपभोक्ता रिपोर्टिंग में वृद्धि और मजबूत प्रवर्तन तंत्र के संयोजन से उल्लंघनकर्ताओं की तेजी से पहचान और निर्णायक नियामक कार्रवाई संभव हुई है।

प्राधिकरण उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा, पारदर्शिता सुनिश्चित करने और अनचाही वाणिज्यिक संचार में संलग्न संस्थाओं के लिए गैर-अनुपालन के परिणामों को कड़ा करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है, साथ ही हितधारकों के सहयोग से DND ढांचे को और बेहतर बनाने के प्रयास जारी रखेगा।

TRAI के बारे में:

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) TRAI अधिनियम, 1997 के तहत स्थापित एक स्वतंत्र वैधानिक निकाय है। TRAI भारत में दूरसंचार, प्रसारण और केबल टीवी सेवा क्षेत्रों का विनियमन करता है। इसका उद्देश्य सभी उपयोगकर्ताओं के लिए निष्पक्ष नियम, पारदर्शी प्रक्रियाएं और बेहतर सेवा गुणवत्ता सुनिश्चित करना है।


पटना में पूर्वी राज्यों के लिए उपभोक्ता संरक्षण पर क्षेत्रीय कार्यशाला, डिजिटल उपभोक्ता न्याय पर जोर

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उपभोक्ता मामले विभाग, भारत सरकार ने आज पटना, बिहार में पूर्वी राज्यों के लिए उपभोक्ता संरक्षण पर क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा के प्रमुख हितधारकों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य उपभोक्ता शिकायत निवारण को मजबूत करना और उपभोक्ता आयोगों के कार्य संचालन में सुधार लाना था।

कार्यशाला में मामलों की लंबित संख्या कम करने, उपभोक्ता आयोगों के आदेशों के बेहतर अनुपालन, त्वरित न्याय के लिए डिजिटल टूल्स के उपयोग, तथा डिजिटल बाजार में डार्क पैटर्न और अनुचित व्यापार प्रथाओं जैसी उभरती चुनौतियों पर विशेष रूप से चर्चा की गई।

डिजिटल उपभोक्ता न्याय को मजबूत करने पर जोर

अपने मुख्य संबोधन में निधि खरे, सचिव, उपभोक्ता मामले विभाग ने देशभर में उपभोक्ता शिकायत निवारण प्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए विभाग द्वारा किए गए प्रमुख सुधारों को रेखांकित किया।

उन्होंने राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH 2.0) की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला, जो एक प्री-लिटिगेशन प्लेटफॉर्म के रूप में बहुभाषी सुविधा, ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने और तकनीक के माध्यम से त्वरित समाधान प्रदान करता है।

उन्होंने ई-जागृति (CONFONET 2.0) के राष्ट्रव्यापी क्रियान्वयन की भी जानकारी दी, जो उपभोक्ता आयोगों के लिए एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है। ई-जागृति में ई-दाखिल, ऑनलाइन केस प्रबंधन, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, डेटा डैशबोर्ड और एआई आधारित टूल्स को एक साथ जोड़ा गया है, जिससे उपभोक्ता मामलों के लिए एक एंड-टू-एंड डिजिटल वर्कफ्लो तैयार होता है।

निधि खरे ने कहा कि ई-जागृति खंडित प्रणालियों से हटकर एक पारदर्शी, कुशल और रियल-टाइम डिजिटल इकोसिस्टम की ओर बदलाव का प्रतीक है, जिससे बेहतर निगरानी और मामलों का त्वरित निपटान संभव हो सकेगा। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि बिहार, झारखंड और ओडिशा जैसे भौगोलिक रूप से विस्तृत और ग्रामीण क्षेत्रों वाले राज्यों में डिजिटल प्लेटफॉर्म उपभोक्ता न्याय तक पहुंच को काफी बेहतर बना सकते हैं। उन्होंने राज्य और जिला उपभोक्ता आयोगों से वीडियो सुनवाई, स्वचालित केस टूल्स और परफॉर्मेंस डैशबोर्ड का अधिकतम उपयोग करने का आग्रह किया।

कृषि और मूल्य स्थिरता पर फोकस

निधि खरे ने दालों के घरेलू उत्पादन और खरीद को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि घरेलू उपभोग में अनाज से हटकर दालों की ओर रुझान बढ़ रहा है।

बिहार के मजबूत कृषि आधार का उल्लेख करते हुए उन्होंने दालों की खेती और संरचित खरीद व्यवस्था, विशेषकर दलहन खरीद, को बढ़ाने की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारत वर्तमान में अरहर, चना और उड़द जैसी दालों का आयात म्यांमार, ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील जैसे देशों से करता है और घरेलू क्षमता निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने दोहराया कि जब बाजार मूल्य न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे जाता है, तब MSP आधारित खरीद के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता बनी रहेगी, साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि जब बाजार मूल्य अधिक हों, तो किसानों को उसका लाभ मिले। इससे किसान कल्याण और खाद्य सुरक्षा दोनों को समर्थन मिलेगा।

डिजिटल गवर्नेंस सुधारों का बिहार द्वारा स्वागत

कार्यशाला को संबोधित करते हुए प्रत्यय अमृत, मुख्य सचिव, बिहार सरकार ने डिजिटल पहलों पर केंद्रित चर्चा का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सुधार भविष्य के लिए तैयार शासन व्यवस्था के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

उन्होंने कहा कि नागरिकों को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि ऐसे उपभोक्ता के रूप में देखा जाना चाहिए जिन्हें स्पष्ट जानकारी, निष्पक्ष व्यवहार और समयबद्ध शिकायत निवारण का अधिकार है। उन्होंने ई-जागृति जैसी पहलों की सराहना की और विश्वास व्यक्त किया कि डार्क पैटर्न जैसे उभरते मुद्दों पर चर्चा से सार्थक परिणाम सामने आएंगे। उन्होंने आश्वासन दिया कि कार्यशाला की सिफारिशों को बिहार सरकार द्वारा लागू किया जाएगा और कहा कि सभी विभाग विकसित भारत @2047 के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप कार्य कर रहे हैं।

प्रमुख तकनीकी सत्र

कार्यशाला में उपभोक्ता संरक्षण के विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर चार तकनीकी सत्र आयोजित किए गए:

  • तकनीकी सत्र I: “ई-जागृति: डिजिटल नवाचार के माध्यम से उपभोक्ता न्याय को आगे बढ़ाना” — इसमें उपभोक्ता आयोगों के डिजिटल परिवर्तन, केस प्रबंधन, हाइब्रिड सुनवाई और प्रदर्शन निगरानी पर चर्चा हुई।

  • तकनीकी सत्र II: “त्वरित निपटान सुनिश्चित करना: स्थगन कम करने के सर्वोत्तम अभ्यास” — इसमें प्रक्रिया सुधार, न्यायिक समय प्रबंधन और तकनीक आधारित शेड्यूलिंग पर विचार-विमर्श किया गया।

  • तकनीकी सत्र III: “अनुपालन सुनिश्चित करना: उपभोक्ता आयोग आदेशों का प्रभावी क्रियान्वयन” — इसमें आदेश के बाद अनुपालन, अंतर-विभागीय समन्वय और निगरानी तंत्र पर चर्चा की गई।

  • तकनीकी सत्र IV: “डिजिटल बाजारों में डार्क पैटर्न और उपभोक्ता संरक्षण” — इसमें ई-कॉमर्स और डिजिटल सेवाओं में भ्रामक इंटरफेस, हेरफेरपूर्ण प्रथाओं और नियामक तैयारियों पर चर्चा हुई।

इसके अतिरिक्त, कानूनी माप विज्ञान सुधारों (ई-माप और जन विश्वास विधेयक) तथा मूल्य स्थिरीकरण के लिए खरीद और बाजार हस्तक्षेप पर भी समानांतर सत्र आयोजित किए गए।

समापन

कार्यशाला का उद्घाटन प्रत्यय अमृत, मुख्य सचिव, बिहार सरकार तथा अभय कुमार सिंह, सचिव, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार सरकार द्वारा किया गया। मुख्य संबोधन निधि खरे ने दिया और समापन सत्र में अनुपम मिश्रा, अपर सचिव, उपभोक्ता मामले विभाग ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

कार्यशाला में उपभोक्ता मामलों और कृषि विभागों के प्रधान सचिव व सचिव, राज्य एवं जिला उपभोक्ता आयोगों के अध्यक्ष, सदस्य और रजिस्ट्रार, वरिष्ठ अधिकारी, NIC प्रतिनिधि, NCCF के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक तथा स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

कार्यशाला का समापन डिजिटल अपनाने के विस्तार, संस्थागत क्षमता सुदृढ़ीकरण, आदेशों के प्रभावी क्रियान्वयन और अंतर-राज्यीय सहयोग को मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ। उपभोक्ता मामले विभाग ने बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा को तेज, सुलभ और प्रौद्योगिकी आधारित उपभोक्ता न्याय प्रणाली विकसित करने में निरंतर सहयोग का आश्वासन दिया।


कानूनी माप-विज्ञान में ऐतिहासिक सुधार: निजी संस्थाओं को 12 सरकारी अनुमोदित परीक्षण केंद्र (GATC) प्रमाणपत्र प्रदान

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उपभोक्ता कार्य विभाग, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए 11 निजी संस्थाओं को 12 सरकारी अनुमोदित परीक्षण केंद्र (Government Approved Test Centre – GATC) प्रमाण पत्र प्रदान किए हैं। यह पहल संरचित सार्वजनिक–निजी भागीदारी (PPP) ढांचे के माध्यम से भारत की विधिक माप विज्ञान (लीगल मेट्रोलॉजी) सत्यापन प्रणाली को सशक्त बनाती है। ये प्रमाण पत्र 24 दिसंबर 2025 को माननीय केंद्रीय कैबिनेट मंत्री प्रल्हाद जोशी (उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री) द्वारा, माननीय राज्य मंत्री बी. एल. वर्मा (उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता) की गरिमामयी उपस्थिति में प्रदान किए गए।

यह ऐतिहासिक कदम देश की विधिक माप विज्ञान प्रणाली में एक परिवर्तनकारी सुधार का प्रतीक है, जिसके तहत सत्यापन क्षमता को सार्वजनिक क्षेत्र से आगे बढ़ाते हुए योग्य निजी संस्थाओं की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। इस पहल का उद्देश्य व्यापार और उपभोक्ता लेन-देन में प्रयुक्त तौल एवं माप उपकरणों की सटीकता और विश्वसनीयता को सुदृढ़ करना, साथ ही व्यापार सुगमता और नियामक दक्षता को बढ़ावा देना है।

निजी संस्थाओं को GATC के रूप में मान्यता, विधिक माप विज्ञान (सरकारी अनुमोदित परीक्षण केंद्र) नियम, 2013 में 23 अक्टूबर 2025 को अधिसूचित संशोधन के बाद दी गई है। संशोधित नियमों के तहत GATC के दायरे का उल्लेखनीय विस्तार किया गया है तथा निर्धारित तकनीकी मानदंडों को पूरा करने वाली निजी प्रयोगशालाओं और उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप तौल एवं माप उपकरणों के सत्यापन और पुनः सत्यापन की अनुमति दी गई है।

अब 18 श्रेणियों के उपकरण शामिल

संशोधित ढांचे के अंतर्गत तौल एवं माप के 18 श्रेणियों के उपकरणों को शामिल किया गया है, जो स्वास्थ्य, परिवहन, ऊर्जा, अवसंरचना और उपभोक्ता सेवाओं जैसे क्षेत्रों में उभरती तकनीकी आवश्यकताओं को संबोधित करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इनमें शामिल हैं—

  • जल मीटर, ऊर्जा मीटर, गैस मीटर

  • फ्लो मीटर, नमी मापक (मॉइस्चर मीटर)

  • स्फिग्मोमैनोमीटर और क्लिनिकल थर्मामीटर

  • ब्रीथ एनालाइज़र और वाहन गति मापक

  • बहु-आयामी मापन उपकरण

  • स्वचालित रेल वेब्रिज

  • टेप मापक, गैर-स्वचालित तौल उपकरण

  • लोड सेल, बीम स्केल, काउंटर मशीन

  • सभी श्रेणियों के बाट (Weights)

संशोधित नियमों की अधिसूचना के बाद, उपभोक्ता कार्य विभाग ने पात्र निजी संस्थाओं से GATC मान्यता हेतु आवेदन आमंत्रित करने और उनके निपटान के लिए एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया। आवेदन की प्रक्रिया 30 नवंबर 2025 तक खुली रही, जिससे पारदर्शी, डिजिटल और समयबद्ध प्रक्रिया सुनिश्चित हुई तथा त्वरित स्वीकृति और बेहतर सेवा वितरण संभव हो सका।

निजी GATC की मान्यता से सत्यापन सेवाओं की उपलब्धता में उल्लेखनीय सुधार, समय-सीमा में कमी तथा निर्माताओं, व्यापारियों और सेवा प्रदाताओं के लिए अनुपालन प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है। तौल तराजू, जल मीटर और ऊर्जा मीटर जैसे उपभोक्ता-उन्मुख उपकरणों का नियमित और विकेंद्रीकृत सत्यापन त्रुटियों को कम करेगा, उपभोक्ताओं को दैनिक लेन-देन में पूरा मूल्य सुनिश्चित करेगा और बाजार में विश्वास को मजबूत करेगा।

यह सार्वजनिक–निजी भागीदारी पहल आत्मनिर्भर भारत के विज़न के अनुरूप है, जो घरेलू तकनीकी क्षमताओं का उपयोग करते हुए निजी संस्थाओं को एक समान, पारदर्शी और विनियमित ढांचे के भीतर भारत के विस्तारित सत्यापन नेटवर्क में सार्थक योगदान देने में सक्षम बनाती है।

क्षेत्रीय संदर्भ मानक प्रयोगशालाओं (RRSLs) और राष्ट्रीय परीक्षण गृह (NTH) प्रयोगशालाओं को डीम्ड GATC के रूप में निरंतर मान्यता दिए जाने से एक सशक्त राष्ट्रव्यापी सत्यापन पारिस्थितिकी तंत्र सुनिश्चित होता है। सत्यापन गतिविधियों के विकेंद्रीकरण से राज्य विधिक माप विज्ञान विभागों की क्षमता बढ़ेगी और विधिक माप विज्ञान अधिकारियों को निरीक्षण, प्रवर्तन और उपभोक्ता शिकायत निवारण पर अधिक प्रभावी ढंग से ध्यान केंद्रित करने में सहायता मिलेगी।

इन सुधारों के माध्यम से सरकार एक वैज्ञानिक, प्रौद्योगिकी-आधारित और भविष्य-उन्मुख विधिक माप विज्ञान प्रणाली के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराती है, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों और सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप है तथा उपभोक्ता विश्वास, नियामक दक्षता और व्यापार में निष्पक्षता को सुदृढ़ करती है।

राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन ने 8 महीनों में ₹45 करोड़ के रिफंड दिलाकर उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी

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उपभोक्ता मामलों के विभाग, भारत सरकार की प्रमुख पहल राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH) देशभर में उपभोक्ता शिकायतों के त्वरित, प्रभावी और पूर्व-विवाद समाधान (Pre-Litigation Redressal) में अहम भूमिका निभा रही है।

25 अप्रैल से 26 दिसंबर 2025 के बीच मात्र आठ महीनों में NCH ने 31 क्षेत्रों से जुड़ी 67,265 उपभोक्ता शिकायतों का समाधान करते हुए ₹45 करोड़ से अधिक की रिफंड राशि दिलाने में सफलता प्राप्त की है। यह प्रक्रिया उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत पूर्व-विवाद स्तर पर संचालित होती है, जिससे उपभोक्ता आयोगों पर भार कम होता है और उपभोक्ताओं को शीघ्र न्याय मिलता है।

क्षेत्रवार प्रदर्शन

  • ई-कॉमर्स सेक्टर में सर्वाधिक 39,965 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें ₹32 करोड़ का रिफंड दिलाया गया।

  • यात्रा एवं पर्यटन क्षेत्र में 4,050 शिकायतों के माध्यम से ₹3.5 करोड़ का रिफंड हुआ।

देश के महानगरों से लेकर दूर-दराज़ क्षेत्रों तक से शिकायतें प्राप्त होना, NCH की राष्ट्रीय पहुँच और प्रभावशीलता को दर्शाता है।

शीर्ष 5 क्षेत्र (85% से अधिक रिफंड योगदान):

  1. ई-कॉमर्स – ₹32.06 करोड़

  2. यात्रा एवं पर्यटन – ₹3.52 करोड़

  3. एजेंसी सेवाएँ – ₹1.35 करोड़

  4. इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद – ₹1.17 करोड़

  5. एयरलाइंस – ₹0.95 करोड़

कन्वर्जेंस पार्टनर्स की भूमिका

कन्वर्जेंस पार्टनर्स की बढ़ती संख्या ने शिकायत निवारण की क्षमता को सशक्त किया है। इससे उपभोक्ता हितों की रक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करने में उल्लेखनीय मदद मिली है।

उपभोक्ता अनुभव – कुछ उदाहरण

  • जोधपुर (राजस्थान) के एक उपभोक्ता को दोषपूर्ण कुर्सियों का रिफंड NCH के हस्तक्षेप से मिला।

  • बेंगलुरु (कर्नाटक) में इंटरनेट कनेक्शन न मिलने पर 4 महीने से अटके रिफंड को NCH ने दिलाया।

  • चेन्नई (तमिलनाडु) में फ्लाइट टिकट रद्द होने के बावजूद लंबित रिफंड NCH की त्वरित कार्रवाई से प्राप्त हुआ।

ये उदाहरण NCH की पूर्व-विवाद समाधान प्रणाली की प्रभावशीलता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।

राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन से कैसे जुड़ें

उपभोक्ता 17 भाषाओं में अपनी शिकायतें दर्ज कर सकते हैं:

उपभोक्ता मामलों का विभाग उपभोक्ताओं से अपील करता है कि वे अपने अधिकारों की रक्षा हेतु राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन का अधिकतम उपयोग करें।


उपभोक्ता संरक्षण और गुणवत्ता परीक्षण सेवाओं की पहुंच मजबूत करने के लिए NTH और डाक विभाग ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

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उपभोक्ता मामलों, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अधीन नेशनल टेस्ट हाउस (NTH) और डाक विभाग, संचार मंत्रालय, भारत सरकार ने देशभर में नमूनों के संग्रहण और उन्हें सुरक्षित, विश्वसनीय एवं समय पर NTH प्रयोगशालाओं तक पहुँचाने के लिए मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।


इस MoU के तहत, डाक विभाग ग्राहकों से उनके दरवाजे पर नमूने उठाने और उन्हें कोलकाता, गाजियाबाद, मुंबई, जयपुर, गुवाहाटी, वाराणसी और चेन्नई में स्थित NTH प्रयोगशालाओं तक पहुँचाने की सुविधा प्रदान करेगा। यह सुविधा डाक विभाग के व्यापक और भरोसेमंद नेटवर्क का उपयोग करेगी, जो भारत के शहरी, ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों तक फैला हुआ है।

MoU पर 24 दिसंबर 2025 को राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस के अवसर पर भारत मंडपम, नई दिल्ली में हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर प्रल्हाद जोशी, माननीय केंद्रीय मंत्री, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण और बी. एल. वर्मा, राज्य मंत्री, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण उपस्थित थे।

इस रणनीतिक सहयोग से NTH की परीक्षण सेवाओं की सुलभता, किफायती और दक्षता में काफी वृद्धि होगी। यह पहल लॉजिस्टिक चुनौतियों को हल करेगी और परीक्षण की प्रक्रिया का समय कम करेगी। इसका लाभ उपभोक्ता, निर्माता, MSME, स्टार्टअप और व्यवसायों, विशेषकर दूर-दराज और पिछड़े क्षेत्रों में स्थित लोगों को मिलेगा। यह पहल व्यवसाय करने में आसानी, उपभोक्ता संरक्षण तंत्र को मजबूत करने और मानक और गुणवत्ता संस्कृति को बढ़ावा देने में भी सहायक होगी।

यह साझेदारी आत्मनिर्भर भारत के विजन के अनुरूप है, जो उपभोक्ता विश्वास बढ़ाने, वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सुधार और एक मजबूत, आत्मनिर्भर भारत बनाने में गुणवत्ता और मानकीकरण की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करती है। यह पहल जन-केंद्रित सेवा और मंत्रालयों के बीच प्रभावी सहयोग को भी दर्शाती है, जिसमें सार्वजनिक अवसंरचना का सर्वोत्तम उपयोग किया गया है।

इस सहयोग के माध्यम से भारत के हर नागरिक तक गुणवत्ता परीक्षण सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित होगी, जिससे बाजार में विश्वास, पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत होगी।

राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस 2025: डिजिटल न्याय के माध्यम से कुशल और त्वरित निपटान

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परिचय

भारत में राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस प्रतिवर्ष 24 दिसंबर को मनाया जाता है, ताकि उपभोक्ता अधिकारों और उपभोक्ता संरक्षण के व्यापक ढांचे के महत्व को उजागर किया जा सके। इसी दिन उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 को राष्ट्रपति की मंजूरी प्राप्त हुई थी, जिसने उपभोक्ताओं के लिए सुरक्षा, जानकारी, सुनवाई, शिकायत निवारण और जागरूकता सहित कई अधिकार सुनिश्चित किए। 2025 का विषय है: “डिजिटल न्याय के माध्यम से कुशल और त्वरित निपटान”, जो उपभोक्ता शिकायत निवारण में प्रौद्योगिकी-समर्थित, सुलभ और त्वरित समाधान पर केंद्रित है।

कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएँ

राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस 2025 के अवसर पर कई लॉन्च, सम्मान और घोषणाएँ की जाएँगी, जो उपभोक्ता संरक्षण, जागरूकता और संस्थागत क्षमता को मजबूत करेंगी। कार्यक्रम डिजिटल शिकायत निवारण, गुणवत्ता आश्वासन, कानूनी मापदंड और उपभोक्ता जागरूकता में प्रगति को उजागर करेगा।

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019

20 जुलाई 2020 को लागू यह अधिनियम 1986 के अधिनियम की जगह लेता है और उपभोक्ता हितों की सुरक्षा के लिए आधुनिक ढांचा प्रस्तुत करता है। यह अधिनियम उपभोक्ताओं को जानकारीपूर्ण निर्णय लेने, निष्पक्ष लेन-देन सुनिश्चित करने और त्वरित शिकायत निवारण प्रदान करता है।

शिकायत निवारण के लिए तीन-स्तरीय ढांचा है:

  1. जिला उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम – 50 लाख रुपये तक के दावे।

  2. राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग – 50 लाख से 2 करोड़ रुपये तक।

  3. राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) – 2 करोड़ रुपये से अधिक के मामले।

जुलाई 2025 में 10 राज्यों और NCDRC ने 100% से अधिक निपटान दर दर्ज की, जो तेजी से शिकायत निवारण और दक्षता में सुधार को दर्शाता है।

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA)

CCPA उपभोक्ताओं के सामूहिक हितों की रक्षा के लिए कार्य करता है। इसके कार्य:

  • उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा और प्रवर्तन

  • अनुचित व्यापार प्रथाओं को रोकना

  • विज्ञापनों की निगरानी और गलत जानकारी देने वालों के खिलाफ कार्रवाई

  • असुरक्षित वस्तुओं और सेवाओं को वापस मंगवाना

उपभोक्ता कल्याण निधि

यह निधि उपभोक्ता हितों की सुरक्षा और आंदोलन को मजबूत करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वित्तीय सहायता देती है। 2024-25 में 38.68 करोड़ रुपये जारी किए गए।

e-Jagriti – डिजिटल उपभोक्ता न्याय

1 जनवरी 2025 को लॉन्च, यह प्लेटफॉर्म शिकायत दायर करने, भुगतान करने, वर्चुअल सुनवाई में भाग लेने और मामले की प्रगति देखने की सुविधा देता है।

  • 1.35 लाख से अधिक केस दायर

  • 1.31 लाख से अधिक निपटान

  • NRI सहित 2.81 लाख पंजीकृत उपयोगकर्ता

राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 2.0 (NCH 2.0)

  • AI-सक्षम, बहुभाषी सहायता

  • वार्षिक 12 लाख से अधिक शिकायतें निवारण

  • WhatsApp चैनल से 20% शिकायतें

Jago Grahak Jago पोर्टल और ऐप

  • धोखाधड़ी वाले ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की निगरानी

  • संदिग्ध URL रिपोर्टिंग

भारतीय मानक ब्यूरो (BIS)

  • 22,300 से अधिक भारतीय मानक लागू

  • BIS Care ऐप से सोने-चाँदी के आभूषण की हॉलमार्किंग जांच

नेशनल टेस्ट हाउस (NTH)

  • परीक्षण, प्रमाणन और गुणवत्ता नियंत्रण

  • डिजिटल समाधान और मोबाइल ऐप के माध्यम से संचालन में सुधार

  • 2024-25 में 45,926 नमूनों का परीक्षण, राजस्व 44.45 करोड़ रुपये

कानूनी मापदंड (Legal Metrology) 2025

  • मेडिकल उपकरण और पैक्ड सामान के लेबलिंग नियमों में संशोधन

  • ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर ‘Country of Origin’ फिल्टर अनिवार्य

  • पान मसाला पैकेज पर खुदरा मूल्य दिखाना अनिवार्य

निष्कर्ष

राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस 2025 भारत की उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा और बाजार में विश्वास को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे e-Jagriti और NCH 2.0 ने शिकायत निवारण की पहुँच, पारदर्शिता और दक्षता में सुधार किया है। BIS, NTH और कानूनी मापदंड सुधारों ने गुणवत्ता और मानकीकरण को मजबूत किया। ये सभी पहल उपभोक्ता-केंद्रित पारिस्थितिकी तंत्र की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाती हैं।

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का स्पष्टीकरण: संचार साथी ऐप पूरी तरह वैकल्पिक, सुरक्षित और उपभोक्ता केंद्रित

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केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आज संचार साथी ऐप को लेकर स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह लोकतांत्रिक और पूरी तरह स्वैच्छिक (voluntary) है। उपयोगकर्ता अपनी सुविधा के अनुसार ऐप को सक्रिय कर सकते हैं और चाहें तो कभी भी इसे निष्क्रिय या हटा सकते हैं।

उपभोक्ता केंद्रित, सुरक्षित और पारदर्शी प्लेटफॉर्म

सिंधिया ने कहा कि उपभोक्ता संरक्षण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और संचार साथी ऐप हर मोबाइल उपयोगकर्ता को सशक्त बनाने के लिए तैयार किया गया है।

उन्होंने कहा:

“संचार साथी एक ऐप और पोर्टल दोनों है, जो नागरिकों को पारदर्शी और आसान टूल्स के माध्यम से खुद को सुरक्षित करने में सक्षम बनाता है। यह जनभागीदारी की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिसमें नागरिक अपने डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।”

संचार साथी के प्रभाव और प्रमुख उपलब्धियाँ

लॉन्च के बाद से संचार साथी ने बड़े पैमाने पर प्रभाव डाला है:

  • 21.5 करोड़+ पोर्टल विज़िट

  • 1.4 करोड़+ ऐप डाउनलोड

  • 1.43 करोड़+ मोबाइल कनेक्शन नागरिकों द्वारा “Not My Number” चुनने पर डिस्कनेक्ट

  • 26 लाख खोए/चोरी हुए मोबाइल फोन ट्रेस किए गए

    • इनमें से 7.23 लाख फोन सफलतापूर्वक लौटाए गए

  • 40.96 लाख फर्जी कनेक्शन नागरिकों की रिपोर्ट के आधार पर डिस्कनेक्ट

  • 6.2 लाख फ्रॉड-लिंक्ड IMEI ब्लॉक

  • ₹475 करोड़ की संभावित वित्तीय धोखाधड़ी रोकी गई Financial Fraud Risk Indicator (FRI) के माध्यम से

साइबर सुरक्षा और नागरिक संरक्षण सर्वोपरि

संचार साथी में उपयोगकर्ताओं को कॉल लॉग से सीधे संदिग्ध धोखाधड़ी रिपोर्ट करने की सुविधा है, जिससे नागरिक स्वयं और दूसरों को डिजिटल धोखाधड़ी से सुरक्षित रख सकते हैं।

 सिंधिया ने कहा:

“हर नागरिक की डिजिटल सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता है। संचार साथी स्वैच्छिक, पारदर्शी और पूरी तरह नागरिक सुरक्षा के लिए बनाया गया है। इसे कभी भी सक्रिय, निष्क्रिय या हटाया जा सकता है—सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए गोपनीयता से समझौता किए बिना।”


26 ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स ने डार्क पैटर्न रोकथाम दिशानिर्देशों के पूर्ण अनुपालन की घोषणा की

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डिजिटल मार्केटप्लेस में उपभोक्ता हितों की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, 26 अग्रणी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स ने स्वैच्छिक रूप से यह घोषणा-पत्र (Self-Declaration Letters) जमा किए हैं, जिसमें उन्होंने डार्क पैटर्न रोकथाम एवं विनियमन दिशानिर्देश, 2023 के पूर्ण अनुपालन की पुष्टि की है। यह विकास उपभोक्ताओं को गुमराह करने या भ्रम पैदा करने वाले डिजिटल डिज़ाइन तरीकों पर लगाम लगाने के भारत के प्रयासों में एक अहम उपलब्धि है।

इन प्लेटफॉर्म्स ने आंतरिक स्व-ऑडिट या थर्ड-पार्टी ऑडिट करवाकर डार्क पैटर्न की पहचान, मूल्यांकन और उन्हें हटाने की प्रक्रिया पूरी की है। सभी 26 कंपनियों ने घोषित किया है कि उनके प्लेटफॉर्म डार्क पैटर्न से मुक्त हैं और किसी भी तरह के भ्रामक या हेरफेर करने वाले यूज़र इंटरफ़ेस डिज़ाइन का उपयोग नहीं करते।

यह सक्रिय एवं उद्योग-व्यापी अनुपालन उपभोक्ता पारदर्शिता, निष्पक्ष व्यापार प्रथाओं और नैतिक डिजिटल इकोसिस्टम के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह स्वैच्छिक अनुपालन इस तथ्य को रेखांकित करता है कि उपभोक्ता संरक्षण और व्यवसायिक विकास एक साथ संभव हैं, जो ब्रांड भरोसे और दीर्घकालिक विश्वसनीयता को मजबूत करते हैं।

CCPA ने सराहा अनुपालन; बताया उद्योग के लिए सर्वोत्तम प्रथा

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने इन घोषणाओं की सराहना की है और इसे अनुकरणीय बताते हुए अन्य कंपनियों को भी इसी तरह का स्व-विनियमन अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है। CCPA ने इससे पहले कंपनियों को निर्देश दिया था कि वे अपने स्व-ऑडिट घोषणा-पत्र अपनी वेबसाइटों पर सार्वजनिक रूप से एक स्पष्ट स्थान पर अपलोड करें।

ये घोषणाएँ CCPA की वेबसाइट पर भी देखी जा सकती हैं: https://www.doca.gov.in/ccpa/slef-audit-companies-dark-pattern.php

CCPA ने अन्य सभी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स, मार्केटप्लेस संस्थाओं, सेवा प्रदाताओं और ऐप डेवलपर्स से भी इसी तरह का उदाहरण अपनाने का आग्रह किया है। CCPA ने स्पष्ट किया कि उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाली रणनीतियाँ अल्पकालिक लाभ दे सकती हैं, लेकिन लंबे समय में वे उपभोक्ताओं और व्यवसाय—दोनों को नुकसान पहुंचाती हैं।

राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH), सोशल मीडिया अभियानों, जागरूकता वीडियो और आउटरीच कार्यक्रमों के माध्यम से उपभोक्ताओं को डार्क पैटर्न की पहचान करने और उनकी शिकायत करने के लिए जागरूक किया गया है। ऐसी शिकायतों का व्यवस्थित तरीके से समाधान किया जा रहा है और आवश्यक होने पर प्रवर्तन कार्रवाई भी सुनिश्चित की जा रही है। CCPA ने पुनः स्पष्ट किया है कि वह संभावित उल्लंघनों पर करीबी नजर रख रहा है और किसी भी दोषी प्लेटफॉर्म के खिलाफ कार्रवाई करने में संकोच नहीं करेगा।

पृष्ठभूमि

डार्क पैटर्न रोकथाम और विनियमन दिशानिर्देश, 2023 को 30 नवंबर 2023 को अधिसूचित किया गया था। इनमें निम्नलिखित 13 डार्क पैटर्न को पहचानकर प्रतिबंधित किया गया है:

  • फॉल्स अर्जेंसी

  • बास्केट स्नीकिंग

  • कन्फर्म शेमिंग

  • फोर्स्ड एक्शन

  • सब्सक्रिप्शन ट्रैप

  • इंटरफ़ेस इंटरफेरेंस

  • बAIT & स्विच

  • ड्रिप प्राइसिंग

  • छिपे हुए विज्ञापन

  • नैगिंग

  • ट्रिक वर्डिंग

  • SaaS बिलिंग

  • रोग मैलवेयर

ये दिशानिर्देश उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत जारी किए गए हैं और उपभोक्ता-केंद्रित, पारदर्शी और भरोसेमंद डिजिटल बाजार बनाने की सरकार की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

CCPA ने 5 जून 2025 को एक एडवाइजरी जारी कर सभी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और ऑनलाइन सेवा प्रदाताओं को तीन महीने के भीतर अनिवार्य स्व-ऑडिट करने का निर्देश दिया था, ताकि डार्क पैटर्न की पहचान कर उन्हें हटाया जा सके। एडवाइजरी में पारदर्शिता, स्पष्ट सहमति, स्पष्ट खुलासे और गैर-हेरफेरकारी डिज़ाइन पर जोर दिया गया था।

उद्योग, शिक्षाविदों और उपभोक्ता संगठनों के साथ विस्तृत परामर्श के बाद, CCPA ने एक सुदृढ़ नियामक ढांचा तैयार किया है, जिसका लक्ष्य डिजिटल डिज़ाइन में मौजूद भ्रामक तत्वों को जड़ से समाप्त करना है।

स्व-ऑडिट घोषणा-पत्र जमा करने वाले प्लेटफॉर्म्स की सूची:

  1. पेज इंडस्ट्रीज (Jockey, Speedo) – स्व-ऑडिट पूरा; डार्क पैटर्न मुक्त

  2. विलियम पेन प्राइवेट लिमिटेड (Sheaffer, Lapis Bard) – स्व-ऑडिट पूरा; कोई डार्क पैटर्न नहीं

  3. फार्म ईज़ी – आंतरिक ऑडिट से पूर्ण अनुपालन

  4. ज़ेप्टो – UI/UX ऑडिट; निरंतर मॉनिटरिंग

  5. कुराडेन इंडिया (Curaprox) – स्व-ऑडिट में कोई डार्क पैटर्न नहीं

  6. ड्यूरोफ्लेक्स – प्लेटफॉर्म अनुपालन

  7. फ्लिपकार्ट – थर्ड-पार्टी ऑडिट; कोई डार्क पैटर्न नहीं

  8. मिंत्रा – थर्ड-पार्टी ऑडिट से पूर्ण अनुपालन

  9. क्लियरट्रिप – प्लेटफॉर्म डार्क पैटर्न मुक्त

  10. वॉलमार्ट इंडिया – थर्ड-पार्टी ऑडिट; कोई डार्क पैटर्न नहीं

  11. मेकमायट्रिप – स्पष्ट उपभोक्ता सहमति; कोई प्री-टिक बॉक्स नहीं

  12. बिगबास्केट – आंतरिक समीक्षा; सुधारात्मक कदम लागू

  13. टायरा ब्यूटी – अनुपालन पुष्टि

  14. जियोमार्ट – प्लेटफॉर्म डार्क पैटर्न मुक्त

  15. रिलायंस ज्वेल्स – पूर्ण अनुपालन

  16. आजियो – कोई डार्क पैटर्न नहीं

  17. रिलायंस डिजिटल – आंतरिक समीक्षा से अनुपालन

  18. नेटमेड्स – डार्क पैटर्न मुक्त

  19. हैमलेज – अनुपालन पुष्टि

  20. मिलबास्केट – प्लेटफॉर्म अनुपालन

  21. स्विगी – स्व-ऑडिट पूरा; उपभोक्ता अनुभव सुधारने को प्रतिबद्ध

  22. टाटा 1mg – व्यापक स्व-ऑडिट; उपभोक्ता-केंद्रित डिज़ाइन

  23. ज़ोमैटो – आंतरिक मूल्यांकन; दिशानिर्देश अनुरूप

  24. ब्लिंकिट – पारदर्शी और जिम्मेदार डिज़ाइन

  25. इक्सिगो – उच्चतम अनुपालन मानकों के अनुरूप

  26. मीशो – सभी 13 डार्क पैटर्न से मुक्त; नियमित स्व-जांच जारी


e-Jagriti प्लेटफ़ॉर्म से बदला उपभोक्ता न्याय का स्वरूप, 2 लाख से अधिक उपयोगकर्ता जुड़े

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उपभोक्ता अधिकारों को बड़ा बढ़ावा देते हुए उपभोक्ता मामलों के विभाग के e-Jagriti प्लेटफ़ॉर्म ने एक अत्याधुनिक डिजिटल शिकायत निवारण प्रणाली के रूप में बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। 1 जनवरी 2025 को लॉन्च होने के बाद से इस प्लेटफ़ॉर्म पर दो लाख से अधिक उपयोगकर्ता पंजीकृत हो चुके हैं। यह प्लेटफ़ॉर्म कागज़ी कार्यवाही कम करके, यात्राओं को समाप्त कर, और भौतिक दस्तावेज़ों की आवश्यकता घटाकर प्रक्रियाओं को सरल बनाता है, जिससे पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है। यह NRI उपभोक्ताओं के लिए भी एक बड़ी राहत है, क्योंकि वे भौगोलिक दूरी की बाधाओं से मुक्त होकर विदेश से ही अपने उपभोक्ता अधिकारों का उपयोग कर सकते हैं।

13 नवंबर 2025 तक, इस एकीकृत पोर्टल के माध्यम से 1,30,550 केस दाखिल हुए और 1,27,058 मामलों का निस्तारण किया गया—जो उपभोक्ता संरक्षण प्रणाली की मजबूती और कुशलता को दर्शाता है।

सरल OTP आधारित पंजीकरण के साथ e-Jagriti NRIs को शिकायत दर्ज करने, डिजिटल/ऑफ़लाइन शुल्क भुगतान करने, वर्चुअल सुनवाई में भाग लेने, ऑनलाइन दस्तावेज़ आदान-प्रदान करने और मामलों की रियल-टाइम ट्रैकिंग की सुविधा देता है—वह भी बिना भारत आए।

2.75 लाख से अधिक उपयोगकर्ता, जिनमें 1388 NRI—वैश्विक स्तर पर उपभोक्ता न्याय तक आसान पहुँच

प्लेटफ़ॉर्म की AI-सक्षम, बहुभाषी और सुलभ इंटरफ़ेस में Voice-to-Text, चैटबॉट और इंटीग्रेटेड डैशबोर्ड शामिल हैं, जो वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग उपभोक्ताओं के लिए उपयोग को आसान बनाते हैं।

इस वर्ष 466 NRI शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें प्रमुख देश शामिल हैं:

  • अमेरिका – 146

  • ब्रिटेन – 52

  • यूएई – 47

  • कनाडा – 39

  • ऑस्ट्रेलिया – 26

  • जर्मनी – 18

भारत में एकीकृत प्रणाली: पारदर्शिता और तेजी में बड़ा सुधार

e-Jagriti ने OCMS, e-Daakhil, NCDRC CMS और CONFONET जैसी पुरानी प्रणालियों को एक प्लेटफ़ॉर्म में जोड़ दिया है।
13 नवंबर 2025 तक भारत में 1,30,550 शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। शीर्ष राज्य:

  • गुजरात – 14,758

  • उत्तर प्रदेश – 14,050

  • महाराष्ट्र – 12,484

प्लेटफ़ॉर्म पर भूमिका-आधारित डैशबोर्ड के माध्यम से

  • वकील दस्तावेज़ अपलोड और केस ट्रैक कर सकते हैं,

  • जज डिजिटल फाइलें, एनालिटिक्स और वर्चुअल कोर्टरूम का उपयोग कर कुशल सुनवाई कर सकते हैं।

मुख्य लाभ

1. वैश्विक पहुंच: दुनिया में कहीं से भी केस दाखिल और प्रबंधन।
2. तेज़ निस्तारण: एसएमएस/ईमेल रियल-टाइम अलर्ट, वर्चुअल सुनवाई। 10 राज्यों और NCDRC में 100% से अधिक निस्तारण दर।
3. समावेशिता: बहुभाषी इंटरफ़ेस, दिव्यांग-सुलभ फीचर।
4. सुरक्षित भुगतान: Bharat Kosh और PayGov से जुड़ा डिजिटल भुगतान।

2 लाख SMS और 12 लाख ईमेल अलर्ट—समय पर अपडेट की गारंटी

पंजीकरण OTP, केस फाइलिंग, निस्तारण, नोटिस जारी होने से जुड़े सभी महत्वपूर्ण अलर्ट तुरंत भेजे जाते हैं। इससे NRI उपयोगकर्ता भी समय-सीमा नहीं मिस करते।

2025 में केस निस्तारण में उल्लेखनीय सुधार

  • जुलाई–अगस्त: 27,545 निस्तारित, 27,080 दाखिल

  • सितंबर–अक्टूबर: 24,504 निस्तारित, 21,592 दाखिल

ये आँकड़े 2024 से बेहतर प्रदर्शन दर्शाते हैं।

सफलता की कहानियाँ

1. ऑनलाइन कोर्स ठगी—25 दिन में ₹3.05 लाख का निर्णय (असम)

  • केस: DC/296/CC/3/2025

  • शिकायत: घटिया ऑनलाइन क्लास रोकने पर ₹54,987 की अनधिकृत कटौती

  • निर्णय: पूर्ण रिफंड + ₹2.5 लाख क्षतिपूर्ति

  • प्रभाव: नॉर्थ-ईस्ट में डिजिटल पेमेंट फ्रॉड के खिलाफ मिसाल।

2. 8 साल पुराना खराब LG फ्रिज—त्रिपुरा में ₹1.67 लाख+ मुआवजा

  • केस: DC/272/CC/33/2025

  • समस्या: 2017 से लगातार खराब फ्रिज, बार-बार मरम्मत

  • निर्णय: ₹85,000 रिफंड + ब्याज, ₹12,000 रिपेयर, ₹50,000 मानसिक पीड़ा, ₹20,000 वाद-व्यय

  • प्रभाव: e-Jagriti से पुरानी खरीद पर भी न्याय सुनिश्चित।

निष्कर्ष

उपभोक्ता मामलों का विभाग सभी नागरिकों और NRIs से e-Jagriti का उपयोग कर सशक्त उपभोक्ता बनने का आग्रह करता है। यह प्लेटफ़ॉर्म डिजिटल इंडिया की दिशा में मजबूत कदम है, जो तेज़, पारदर्शी और सुलभ उपभोक्ता न्याय सुनिश्चित करता है।


CCPA की सख्त कार्रवाई — Dikshant IAS और Abhimanu IAS पर ₹8 लाख का जुर्माना, भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ बड़ा कदम

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केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने Dikshant IAS और Abhimanu IAS को भ्रामक विज्ञापन, अनुचित व्यापार प्रथाओं और उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन के लिए दोषी पाया है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत दोनों संस्थानों पर ₹8,00,000-₹8,00,000 का जुर्माना लगाया गया है।


यह निर्णय उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा और यह सुनिश्चित करने के लिए लिया गया कि किसी भी वस्तु या सेवा के संबंध में गलत या भ्रामक विज्ञापन जारी न किए जाएँ, जो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 का उल्लंघन करते हों।

Dikshant IAS का मामला

CCPA को मिनी शुक्ला (AIR 96, UPSC CSE 2021) की शिकायत प्राप्त हुई थी, जिन्होंने बताया कि उनके नाम और फोटो का उपयोग संस्था ने उनकी सहमति के बिना अपने विज्ञापनों में किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे Dikshant IAS से कभी जुड़ी नहीं थीं और केवल एक मॉक इंटरव्यू में शामिल हुई थीं, जो बाद में उन्हें पता चला कि Chahal Academy के साथ संयुक्त रूप से आयोजित हुआ था।

जाँच में पाया गया कि Dikshant IAS ने “200+ Results in UPSC CSE 2021” का दावा किया था, परंतु संस्था इसे प्रमाणित करने में असमर्थ रही। केवल 116 नामांकन फॉर्म प्रस्तुत किए जा सके। साथ ही, चहल एकेडमी के साथ किसी औपचारिक समझौते या विद्यार्थियों की जानकारी साझा करने के प्रमाण नहीं मिले।
प्राधिकरण ने पाया कि संस्था ने संभावित छात्रों को भ्रमित करने के लिए महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई, जिससे ऐसा प्रतीत हुआ मानो सभी सफल उम्मीदवार उनकी पूर्ण तैयारी का हिस्सा थे।

Abhimanu IAS का मामला

नताशा गोयल (AIR 175, UPSC CSE 2022) ने शिकायत की कि उनके नाम और फोटो का उपयोग Abhimanu IAS ने बिना अनुमति के किया। संस्थान ने झूठा दावा किया कि वे उसकी छात्रा थीं, जबकि उन्होंने केवल एक प्रश्न बैंक साझा किया था और मॉक इंटरव्यू कभी हुआ ही नहीं।

CCPA की जांच में पाया गया कि संस्था ने “2200+ Selections since Inception”, “10+ Selections in IAS Top 10” और “1st Rank in HCS/PCS/HAS” जैसे दावे किए, परंतु इन दावों को साबित करने के लिए कोई विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया।
कई चयन 2001–2012 के बीच हुए थे, परंतु विज्ञापनों में इस अवधि का उल्लेख नहीं किया गया, जिससे यह झूठा प्रभाव उत्पन्न हुआ कि संस्था हाल ही में भी शीर्ष परिणाम दे रही है।

CCPA का रुख

CCPA ने पाया कि इन दोनों संस्थानों ने धारा 2(28) और धारा 2(47) का उल्लंघन किया है — यानी भ्रामक विज्ञापन जारी करना और उपभोक्ताओं से महत्वपूर्ण जानकारी छिपाना।
शिक्षा क्षेत्र में इस प्रकार की गलत जानकारी छात्रों को भ्रमित करती है, जो अपनी मेहनत, समय और धन निवेश करते हैं।

अब तक CCPA ने 57 कोचिंग संस्थानों को ऐसे भ्रामक विज्ञापनों के लिए नोटिस जारी किए हैं और 27 संस्थानों पर ₹98.6 लाख से अधिक का जुर्माना लगाया है।
CCPA ने सभी सफल उम्मीदवारों से आग्रह किया है कि यदि किसी कोचिंग संस्थान ने उनके नाम या फोटो का गलत उपयोग किया हो तो वे तत्काल शिकायत दर्ज कराएं।


उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने लीगल मेट्रोलॉजी (सरकार द्वारा अनुमोदित परीक्षण केंद्र) नियम, 2013 में महत्वपूर्ण संशोधन किए

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उपभोक्ता मामले विभाग, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने लीगल मेट्रोलॉजी (सरकार द्वारा अनुमोदित परीक्षण केंद्र) नियम, 2013 में महत्वपूर्ण संशोधनों की अधिसूचना जारी की है। ये संशोधन भारत की भार एवं माप सत्यापन अवसंरचना को विस्तार देने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं, जिससे व्यापार में पारदर्शिता, सटीकता और निष्पक्षता सुनिश्चित होगी। संशोधित नियम उपभोक्ता संरक्षण को सशक्त करने, Ease of Doing Business को बढ़ावा देने और भारत की सत्यापन प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम मानकों के अनुरूप लाने का उद्देश्य रखते हैं।

संशोधित नियमों के तहत सरकार द्वारा अनुमोदित परीक्षण केंद्रों (GATCs) के दायरे को काफी बढ़ाया गया है, जिसमें अब 18 प्रकार के भार और माप यंत्र शामिल किए गए हैं, जैसे — जल मीटर, ऊर्जा मीटर, गैस मीटर, नमी मापी (Moisture Meter), फ्लो मीटर, स्फिग्मोमैनोमीटर (रक्तचाप मापक यंत्र) और नॉन-ऑटोमैटिक वज़न मापक उपकरण आदि। ये 18 श्रेणियाँ हैं:

  1. जल मीटर

  2. स्फिग्मोमैनोमीटर

  3. नैदानिक थर्मामीटर

  4. स्वचालित रेल वेब्रिज

  5. टेप माप

  6. नॉन-ऑटोमैटिक वज़न मापक (क्लास III) (150 किग्रा तक)

  7. नॉन-ऑटोमैटिक वज़न मापक (क्लास IIII)

  8. लोड सेल

  9. बीम स्केल

  10. काउंटर मशीन

  11. सभी श्रेणियों के वज़न

  12. गैस मीटर

  13. ऊर्जा मीटर

  14. नमी मापक यंत्र (Moisture Meter)

  15. वाहनों के लिए गति मापक (Speed Meter)

  16. ब्रेथ एनालाइज़र

  17. बहुआयामी मापन यंत्र

  18. फ्लो मीटर

नए यंत्रों जैसे फ्लो मीटर, ब्रेथ एनालाइज़र, बहुआयामी मापन यंत्र और स्पीड गन को शामिल किया जाना यह दर्शाता है कि सरकार बदलती प्रौद्योगिकियों और औद्योगिक आवश्यकताओं के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही है। ये उपकरण स्वास्थ्य सेवा, परिवहन, ऊर्जा और बुनियादी ढाँचे जैसे क्षेत्रों में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, जहाँ सटीक माप सुरक्षा, गुणवत्ता और उपभोक्ता विश्वास से सीधे जुड़ा होता है।

Radar equipment  

निजी प्रयोगशालाओं और उद्योगों की भागीदारी को सरकार द्वारा अनुमोदित परीक्षण केंद्र (GATC) के रूप में मान्यता देना सत्यापन क्षमता को बढ़ाएगा, उपलब्धता में सुधार करेगा और उद्योगों के लिए प्रतीक्षा समय को कम करेगा।

Gas Meter

यह पहल आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण का समर्थन करती है, क्योंकि इससे देश में स्वदेशी परीक्षण सुविधाओं को बढ़ावा मिलेगा और सार्वजनिक–निजी भागीदारी (PPP) के माध्यम से राष्ट्रीय सत्यापन नेटवर्क का विस्तार होगा। साथ ही, रीजनल रेफरेंस स्टैंडर्ड लेबोरेटरी (RRSL) और नेशनल टेस्ट हाउस (NTH) को deemed GATC के रूप में मान्यता देने से उपभोक्ता-संबंधी यंत्रों के सत्यापन के लिए देशव्यापी नेटवर्क सुनिश्चित होगा।

  Moisture Meter  

\नियमित और विकेन्द्रित सत्यापन से वज़न मापक, जल मीटर, ऊर्जा मीटर आदि की सटीकता बनी रहेगी, जिससे उपभोक्ताओं को उनके पैसे का पूरा मूल्य मिलेगा। इन संशोधनों से राज्य विधिक मापविज्ञान विभागों (State Legal Metrology Departments) की कार्यक्षमता में वृद्धि होगी, क्योंकि GATCs के सत्यापन कार्य संभालने से राज्य अधिकारी निरीक्षण, प्रवर्तन और उपभोक्ता शिकायत निवारण पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।

संशोधनों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि GATCs को जिला स्तर और राज्य भर में सत्यापन करने की अनुमति होगी। साथ ही, एक नया पंचम अनुसूची (Fifth Schedule) जोड़ा गया है, जिससे सत्यापन शुल्कों का एकरूपीकरण किया गया है। अब GATC मान्यता के लिए आवेदन उपभोक्ता मामले विभाग के संयुक्त सचिव को निर्धारित प्रारूप में प्रस्तुत करना होगा। इसमें निरीक्षण, कर्मचारियों की योग्यता, तकनीकी आवश्यकताओं और शुल्क भुगतान के लिए डिजिटल माध्यम जैसी स्पष्ट प्रक्रियाएँ तय की गई हैं। यह पारदर्शी और संरचित व्यवस्था अनुपालन बोझ को कम करेगी, सेवा वितरण में तेजी लाएगी और उद्योग जगत में विश्वास बढ़ाएगी।

Breath Analyzer

उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी ने 25 अक्टूबर 2025 को गोवा में आयोजित राष्ट्रीय नियंत्रक सम्मेलन (National Controller’s Conference) में कहा —

“लीगल मेट्रोलॉजी (सरकार द्वारा अनुमोदित परीक्षण केंद्र) नियमों में संशोधन भारत की विधिक मापन प्रणाली के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह उद्योग भागीदारी को सशक्त बनाता है, उपभोक्ताओं के लिए सटीक माप सुनिश्चित करता है और हमारे प्रवर्तन अधिकारियों को मज़बूत बनाता है। इस सुधार से भारत एक पारदर्शी, तकनीक-संचालित और आत्मनिर्भर सत्यापन प्रणाली की ओर अग्रसर है, जो व्यापार में निष्पक्षता को बढ़ावा देगी और उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा करेगी।”

इन सुधारों के माध्यम से भारत ने यह दिखाया है कि वह एक वैज्ञानिक और पारदर्शी मापन प्रणाली के प्रति प्रतिबद्ध है, जो अंतरराष्ट्रीय विधिक माप संगठन (OIML) की अनुशंसाओं के अनुरूप है। ये संशोधन न केवल मापन-आधारित लेनदेन में सटीकता और जवाबदेही सुनिश्चित करेंगे, बल्कि वैश्विक व्यापार में भारत की साख और मानक अनुपालन को भी मज़बूत करेंगे।

एक OIML प्रमाणन प्राधिकरण (Certification Authority) के रूप में, अब भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य OIML प्रमाणपत्र जारी करने में सक्षम है। इससे भारतीय निर्माता अब देश में ही वैश्विक स्तर पर मान्य प्रमाणन प्राप्त कर सकेंगे, जिन्हें पहले विदेशी प्राधिकरणों पर निर्भर रहना पड़ता था। इससे लागत और समय दोनों की बचत होगी तथा भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता वैश्विक मापन उपकरण बाज़ार में बढ़ेगी।

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