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पटना में पूर्वी राज्यों के लिए उपभोक्ता संरक्षण पर क्षेत्रीय कार्यशाला, डिजिटल उपभोक्ता न्याय पर जोर

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उपभोक्ता मामले विभाग, भारत सरकार ने आज पटना, बिहार में पूर्वी राज्यों के लिए उपभोक्ता संरक्षण पर क्षेत्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा के प्रमुख हितधारकों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य उपभोक्ता शिकायत निवारण को मजबूत करना और उपभोक्ता आयोगों के कार्य संचालन में सुधार लाना था।

कार्यशाला में मामलों की लंबित संख्या कम करने, उपभोक्ता आयोगों के आदेशों के बेहतर अनुपालन, त्वरित न्याय के लिए डिजिटल टूल्स के उपयोग, तथा डिजिटल बाजार में डार्क पैटर्न और अनुचित व्यापार प्रथाओं जैसी उभरती चुनौतियों पर विशेष रूप से चर्चा की गई।

डिजिटल उपभोक्ता न्याय को मजबूत करने पर जोर

अपने मुख्य संबोधन में निधि खरे, सचिव, उपभोक्ता मामले विभाग ने देशभर में उपभोक्ता शिकायत निवारण प्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए विभाग द्वारा किए गए प्रमुख सुधारों को रेखांकित किया।

उन्होंने राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH 2.0) की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला, जो एक प्री-लिटिगेशन प्लेटफॉर्म के रूप में बहुभाषी सुविधा, ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने और तकनीक के माध्यम से त्वरित समाधान प्रदान करता है।

उन्होंने ई-जागृति (CONFONET 2.0) के राष्ट्रव्यापी क्रियान्वयन की भी जानकारी दी, जो उपभोक्ता आयोगों के लिए एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है। ई-जागृति में ई-दाखिल, ऑनलाइन केस प्रबंधन, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, डेटा डैशबोर्ड और एआई आधारित टूल्स को एक साथ जोड़ा गया है, जिससे उपभोक्ता मामलों के लिए एक एंड-टू-एंड डिजिटल वर्कफ्लो तैयार होता है।

निधि खरे ने कहा कि ई-जागृति खंडित प्रणालियों से हटकर एक पारदर्शी, कुशल और रियल-टाइम डिजिटल इकोसिस्टम की ओर बदलाव का प्रतीक है, जिससे बेहतर निगरानी और मामलों का त्वरित निपटान संभव हो सकेगा। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि बिहार, झारखंड और ओडिशा जैसे भौगोलिक रूप से विस्तृत और ग्रामीण क्षेत्रों वाले राज्यों में डिजिटल प्लेटफॉर्म उपभोक्ता न्याय तक पहुंच को काफी बेहतर बना सकते हैं। उन्होंने राज्य और जिला उपभोक्ता आयोगों से वीडियो सुनवाई, स्वचालित केस टूल्स और परफॉर्मेंस डैशबोर्ड का अधिकतम उपयोग करने का आग्रह किया।

कृषि और मूल्य स्थिरता पर फोकस

निधि खरे ने दालों के घरेलू उत्पादन और खरीद को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि घरेलू उपभोग में अनाज से हटकर दालों की ओर रुझान बढ़ रहा है।

बिहार के मजबूत कृषि आधार का उल्लेख करते हुए उन्होंने दालों की खेती और संरचित खरीद व्यवस्था, विशेषकर दलहन खरीद, को बढ़ाने की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारत वर्तमान में अरहर, चना और उड़द जैसी दालों का आयात म्यांमार, ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील जैसे देशों से करता है और घरेलू क्षमता निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने दोहराया कि जब बाजार मूल्य न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे जाता है, तब MSP आधारित खरीद के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता बनी रहेगी, साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि जब बाजार मूल्य अधिक हों, तो किसानों को उसका लाभ मिले। इससे किसान कल्याण और खाद्य सुरक्षा दोनों को समर्थन मिलेगा।

डिजिटल गवर्नेंस सुधारों का बिहार द्वारा स्वागत

कार्यशाला को संबोधित करते हुए प्रत्यय अमृत, मुख्य सचिव, बिहार सरकार ने डिजिटल पहलों पर केंद्रित चर्चा का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सुधार भविष्य के लिए तैयार शासन व्यवस्था के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

उन्होंने कहा कि नागरिकों को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि ऐसे उपभोक्ता के रूप में देखा जाना चाहिए जिन्हें स्पष्ट जानकारी, निष्पक्ष व्यवहार और समयबद्ध शिकायत निवारण का अधिकार है। उन्होंने ई-जागृति जैसी पहलों की सराहना की और विश्वास व्यक्त किया कि डार्क पैटर्न जैसे उभरते मुद्दों पर चर्चा से सार्थक परिणाम सामने आएंगे। उन्होंने आश्वासन दिया कि कार्यशाला की सिफारिशों को बिहार सरकार द्वारा लागू किया जाएगा और कहा कि सभी विभाग विकसित भारत @2047 के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप कार्य कर रहे हैं।

प्रमुख तकनीकी सत्र

कार्यशाला में उपभोक्ता संरक्षण के विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर चार तकनीकी सत्र आयोजित किए गए:

  • तकनीकी सत्र I: “ई-जागृति: डिजिटल नवाचार के माध्यम से उपभोक्ता न्याय को आगे बढ़ाना” — इसमें उपभोक्ता आयोगों के डिजिटल परिवर्तन, केस प्रबंधन, हाइब्रिड सुनवाई और प्रदर्शन निगरानी पर चर्चा हुई।

  • तकनीकी सत्र II: “त्वरित निपटान सुनिश्चित करना: स्थगन कम करने के सर्वोत्तम अभ्यास” — इसमें प्रक्रिया सुधार, न्यायिक समय प्रबंधन और तकनीक आधारित शेड्यूलिंग पर विचार-विमर्श किया गया।

  • तकनीकी सत्र III: “अनुपालन सुनिश्चित करना: उपभोक्ता आयोग आदेशों का प्रभावी क्रियान्वयन” — इसमें आदेश के बाद अनुपालन, अंतर-विभागीय समन्वय और निगरानी तंत्र पर चर्चा की गई।

  • तकनीकी सत्र IV: “डिजिटल बाजारों में डार्क पैटर्न और उपभोक्ता संरक्षण” — इसमें ई-कॉमर्स और डिजिटल सेवाओं में भ्रामक इंटरफेस, हेरफेरपूर्ण प्रथाओं और नियामक तैयारियों पर चर्चा हुई।

इसके अतिरिक्त, कानूनी माप विज्ञान सुधारों (ई-माप और जन विश्वास विधेयक) तथा मूल्य स्थिरीकरण के लिए खरीद और बाजार हस्तक्षेप पर भी समानांतर सत्र आयोजित किए गए।

समापन

कार्यशाला का उद्घाटन प्रत्यय अमृत, मुख्य सचिव, बिहार सरकार तथा अभय कुमार सिंह, सचिव, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, बिहार सरकार द्वारा किया गया। मुख्य संबोधन निधि खरे ने दिया और समापन सत्र में अनुपम मिश्रा, अपर सचिव, उपभोक्ता मामले विभाग ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

कार्यशाला में उपभोक्ता मामलों और कृषि विभागों के प्रधान सचिव व सचिव, राज्य एवं जिला उपभोक्ता आयोगों के अध्यक्ष, सदस्य और रजिस्ट्रार, वरिष्ठ अधिकारी, NIC प्रतिनिधि, NCCF के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक तथा स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

कार्यशाला का समापन डिजिटल अपनाने के विस्तार, संस्थागत क्षमता सुदृढ़ीकरण, आदेशों के प्रभावी क्रियान्वयन और अंतर-राज्यीय सहयोग को मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ। उपभोक्ता मामले विभाग ने बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा को तेज, सुलभ और प्रौद्योगिकी आधारित उपभोक्ता न्याय प्रणाली विकसित करने में निरंतर सहयोग का आश्वासन दिया।


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