Media24Media.com: लीगल मेट्रोलॉजी अधिनियम में बड़ा सुधार: पहली बार गलती करने वाले कारोबारियों को मिलेगा सुधार का मौका

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लीगल मेट्रोलॉजी अधिनियम में बड़ा सुधार: पहली बार गलती करने वाले कारोबारियों को मिलेगा सुधार का मौका

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नई दिल्ली- उपभोक्ता मामलों के विभाग (Department of Consumer Affairs) ने जन विश्वास (संशोधन प्रावधान) अधिनियम, 2026 के तहत लीगल मेट्रोलॉजी अधिनियम, 2009 में "इम्प्रूवमेंट नोटिस (Improvement Notice)" व्यवस्था लागू की है। इस नई व्यवस्था के तहत पहली बार प्रक्रियागत या नियामकीय नियमों का उल्लंघन करने वाले कारोबारियों को दंडात्मक कार्रवाई से पहले अपनी गलती सुधारने का अवसर दिया जाएगा।

मुख्य बातें

  • पहली बार हुई प्रक्रियागत या नियामकीय गलती पर सीधे जुर्माना या कानूनी कार्रवाई नहीं होगी।

  • संबंधित अधिकारी पहले इम्प्रूवमेंट नोटिस जारी करेंगे।

  • नोटिस में बताई गई कमियों को निर्धारित समय के भीतर सुधारने का अवसर मिलेगा।

  • समय पर सुधार करने पर अनावश्यक मुकदमेबाजी और दंडात्मक कार्रवाई से बचा जा सकेगा।

  • बार-बार नियमों का उल्लंघन करने या जानबूझकर धोखाधड़ी करने वालों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

किन व्यवसायों को मिलेगा लाभ?

यह व्यवस्था निम्नलिखित सभी पंजीकृत एवं विनियमित संस्थाओं पर लागू होगी:

  • निर्माता (Manufacturers)

  • आयातक (Importers)

  • पैकर (Packers)

  • डीलर एवं व्यापारी

  • रिपेयरर

  • एमएसएमई (MSMEs)

  • अन्य विनियमित कारोबारी

किन मामलों में लागू होगी?

यह व्यवस्था पहली बार होने वाले निम्न प्रकार के उल्लंघनों पर लागू होगी:

  • पंजीकरण संबंधी त्रुटियां

  • रिकॉर्ड एवं दस्तावेजों का रखरखाव

  • मॉडल अप्रूवल

  • बाट एवं माप के निर्माण, बिक्री और मरम्मत

  • बाट एवं माप का आयात

  • पैकेज्ड वस्तुओं से जुड़े नियम

  • वैधानिक जानकारी एवं रिटर्न जमा करना

किन धाराओं पर लागू होगी?

इम्प्रूवमेंट नोटिस की व्यवस्था धारा 25, 27, 28, 29, 31, 32, 34, 35, 36(1), 38, 39, 41(1), 41(2), 45, 46 और 47 के तहत आने वाले निर्धारित प्रथम उल्लंघनों पर लागू होगी।

सरकार का उद्देश्य

सरकार का कहना है कि इस सुधार का उद्देश्य:

  • Ease of Doing Business (EoDB) को बढ़ावा देना,

  • स्वैच्छिक अनुपालन (Voluntary Compliance) को प्रोत्साहित करना,

  • अनावश्यक मुकदमों और अनुपालन लागत को कम करना,

  • तथा "Minimum Government, Maximum Governance" की भावना के अनुरूप पारदर्शी एवं भरोसेमंद नियामकीय व्यवस्था विकसित करना है।

हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ता हितों से समझौता नहीं किया जाएगा। धोखाधड़ी, छेड़छाड़, बार-बार नियम तोड़ने या उपभोक्ताओं को नुकसान पहुंचाने वाले मामलों में पहले की तरह कड़ी कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।

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