Media24Media.com: राज्यपाल अनुसुइया उइके

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शाही दशहरा महिला उत्सव समिति के नारी शक्ति सम्मान समारोह में शामिल हुईं राज्यपाल

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जीवन में सबसे बड़ा सुकून सेवा में है। आप जब लोगों की सेवा करते हैं, स्वयं अपने भीतर आनंद का अनुभव करते हैं। यह एक तरह से स्वयं को भी बेहतर रखने का माध्यम है। यह बात राज्यपाल अनुसुइया उइके ने शाही दशहरा महिला उत्सव समिति द्वारा आयोजित नारी तू नारायणी नारी शक्ति सम्मान के अवसर पर कही। इस अवसर पर अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि जीवन में सम्मान बहुत जरूरी है। हमारा सम्मान हमारे अच्छे कार्यों से सुनिश्चित होता है। कुछ लोग कहते हैं कि केवल एक दिन अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के आयोजन से क्या होगा।  मैं यह कहती हूं कि इस एक दिन जो हम महिलाओं को अच्छे कार्य के लिए सम्मानित करते हैं।

एक दिन जो उन्हें सम्मान मिलता है उससे उनका हौसला बहुत बढ़ जाता है। कार्य करने की उर्जा बढ़ जाती है और वह जीवन में हर संभव मुकाम हासिल करने की दिशा में बढ़ जाती है। राज्यपाल ने कहा कि सेवा का कार्य मुझे बहुत प्रिय है और लोगों से मिलकर उनके सुख-दुख बांटने में मुझे बहुत खुशी का अनुभव होता है।  मुझे तब बहुत अच्छा लगता है जब राजभवन में बहुत दूर से लोग मुझसे मिलने आते हैं। वे दंतेवाड़ा से आते हैं, बस्तर से आते हैं सरगुजा से आते हैं और मैं उनके सुख दुख में अपने को बराबर का साझीदार पाती हूं। यह मेरे लिए राजभवन नहीं है यह मेरे लिए जन-जन का भवन है। 

सार्वजनिक जीवन में आगे बढ़ने वाली महिलाओं को अपने जैसी दूसरी महिलाओं को भी आगे बढ़ाने की हमेशा कोशिश करनी चाहिए। महिलाएं पूरी तरह से सशक्त है एक बात उन्हें जरूर ध्यान रखनी चाहिए कि उन्हें अपने अधिकारों के बारे में पूरा ज्ञान हो। महिला सशक्तिकरण के लिए सरकार ने अनेक कानून बनाए हैं, उन कानूनों की भलीभांति जानकारी हो तो महिला और भी सशक्त होंगी। उइके ने कहा कि हमारा इतिहास और हमारा वर्तमान गवाह रहा है कि महिलाएं हर क्षेत्र में अग्रणी रही हैं। 

राज्यपाल ने किया महिलाओं को सम्मानित

शाही दशहरा उत्सव समिति के कार्यों की प्रशंसा करते हुए राज्यपाल ने कहा कि आप लोगों ने कोरोना काल में लोगों की मदद के लिए जो कार्य किया है वह प्रशंसनीय है। सेवा का कार्य हमेशा संतुष्टि देता है।  इस मौके पर राज्यपाल ने विभिन्न क्षेत्रों में अच्छा कार्य कर रही महिलाओं को सम्मानित किया। इस अवसर पर पूर्व मंत्री  रमशीला साहू , पूर्व विधायक श्री लाभचंद बाफना, श्रीमती चारुलता पांडे,  राकेश पांडे, सांवलाराम डहरे, अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी सबा अंजुम सहित अन्य गणमान्य अतिथि मौजूद थे।

राज्यपाल अनुसुइया उइके रायपुर नगर पालिक निगम की सामान्य सभा में हुईं शामिल

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रायपुर: राज्यपाल अनुसुइया उइके रायपुर नगर पालिक निगम की सामान्य सभा में शामिल हुईं। राज्यपाल ने निगम कार्यालय महात्मा गांधी सदन पहुंचकर राष्ट्रपिता की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। इस दौरान विधायक सत्यनारायण शर्मा,  कुलदीप जुनेजा, महापौर एजाज ढेबर, सभापति प्रमोद दुबे, नेता प्रतिपक्ष मीनल चौबे समेत महिला पार्षदों ने राज्यपाल उइके का स्वागत किया। शायद ये पहला मौका है कि जब कोई राज्यपाल नगर निगम की सामान्य सभा में शामिल हुआ हैं। 

नगर निगम की सामान्य सभा को संबोधित करते हुए राज्यपाल उइके ने पार्षदों का आह्वान किया कि जनआकांक्षाओं के अनुरूप कार्य करें और जनता की समस्याओं के प्रति संवेदनशील रहें। उन्होंने कहा कि सभी पार्षद जनता की आवाज हैं। वहीं  आमजनों की मूलभूत जरूरतों को पूरा करना पार्षदों की जिम्मेदारी है। आपके आचार-विचार और संस्कार में अहंकार न हो। सतत रूप से अपने क्षेत्र का भ्रमण कर लोगों से अपने कामों का फीडबैक भी लें, ताकि लोग क्या चाहते हैं, इसकी आपको जानकारी रहे। 

राज्यपाल ने कहा कि नगरीय निकाय और ग्राम पंचायतें लोकतंत्र की प्राथमिक शाला है। यहां निर्वाचित होकर पहुंचे जनप्रतिनिधियों का लोकतंत्र और संसदीय कार्यप्रणाली से पहली बार परिचय होता है। इस सदन में मेरा पहला अनुभव है। लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा की तरह यहां भी पक्ष-विपक्ष के सवाल-जवाब होते हैं। प्रश्नकाल और ध्यानाकर्षण के लिए समय निर्धारित है। निश्चित ही रायपुर को स्वच्छ, सुंदर और स्मार्ट सिटी बनाने में सदन की भूमिका महत्वपूर्ण रही होगी। उन्होंने कहा कि मैं नगरीय निकायों या ग्राम पंचायतों के निर्वाचित पदों पर नहीं रहीं, लेकिन महाविद्यालय की राजनीति से मुझे काफी कुछ सीखने को मिला। आप सब भी इस सदन से निरंतर सीखते होंगे, जो आपके भावी राजनीतिक जीवन में मददगार होगा। 

राज्यपाल उइके ने कहा कि नगरीय निकाय के सदन से निकलकर लोग कई महत्वपूर्ण पदों पर आसीन हैं। झारखंड के राज्यपाल रमेश बैस कभी इस सदन के सदस्य रहे। कई विधायक और सांसदों ने भी अपने सफर की शुरुआत इसी सदन से की है। आप जितना अच्छा काम करेंगे लोगों का स्नेह और सम्मान उतना ही अधिक मिलेगा। साथ ही आप अपने भावी राजनीतिक जीवन में नई ऊंचाईयों पर पहुंचेंगे। राज्यपाल  उइके ने कहा कि मैंने विभिन्न पदों पर रहते हुए देश के कई राज्यों का भ्रमण किया, लेकिन छत्तीसगढ़ में मेरे कार्यकाल के ढाई साल कैसे बीते, ये पता ही नहीं चला। 

महापौर ने राज्यपाल को दिया स्मृति चिन्ह

'मैं प्रदेश भर में जहां भी गई लोगों ने बड़ी ही आत्मीयता के साथ मुझे स्वीकारा और सम्मान दिया। प्रदेशवासी बड़े ही सरल, सहज और मृदुभाषी हैं, जो छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया की सार्थकता सिद्ध करती है।' राज्यपाल उइके ने अपने संबोधन में रायपुर शहर में निगम द्वारा किए गए कार्यों समेत विवेकानंद सरोवर, तेलीबांधा तालाब सौंदर्यीकरण और नालंदा लाइब्रेरी, पिंक टॉयलेट जैसी पहल की सराहना की। इस दौरान महापौर एजाज ढेबर, सभापति प्रमोद दुबे और आयुक्त नगर निगम प्रभात मलिक ने भी सभा को संबोधित किया। इस दौरान राज्यपाल उइके को महापौर एजाज ढेबर ने स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।

राज्यपाल की पहल से छत्तीसगढ़ के 2 छात्रों की सकुशल वतन वापसी, अब तक लौट चुके हैं 69 छात्र

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राज्यपाल अनुसुइया उइके ने यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे तनाव को देखते हुए छत्तीसगढ़ के छात्रों की सकुशल वापसी के लिए पहल करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर को पत्र लिखा था। राज्यपाल उइके ने पत्र में जगदलपुर के रहने वाले शेर सिंह तोमर के निवेदन पर उनकी बेटी दीप्ति और बेटे निहाल के यूक्रेन में फंसे होने का उल्लेख किया था, जिनकी सकुशल वतन वापसी हुई है और दिल्ली पहुंचते ही उन्होंने राज्यपाल उइके को सहयोग के लिए धन्यवाद दिया है।

यूक्रेन में फंसे छत्तीसगढ़ के 30 छात्र गुरुवार को नई दिल्ली लौटे हैं। अब तक प्रदेश के 69 छात्रों की यूक्रेन से सकुशल वापसी हो चुकी है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सतत मार्गदर्शन और निर्देश पर यूक्रेन से वापस आने वाले प्रदेश के छात्रों के लिए नई दिल्ली में व्यवस्था बनाई गई है। साथ ही छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा वहां से उनके गृहनगर जाने के लिए सुविधाएं दी जा रही हैं। आवासीय आयुक्त कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक गुरुवार को 30 छात्र यूक्रेन से नई दिल्ली वापस लौटे हैं। दल्लीराजहरा के हेमंत कुमार साहू, महासमुंद के कमलेश साहू, आकाश तिवारी, रायगढ़ के ओमप्रकाश पटेल, समीर कुमार भोई, अभिषेक सिंह, रायपुर के अफसार अंसारी, अमल पिल्लई, आद्यशा मोहंती, बोइदी आयुश्री, साक्षी अग्रवाल, जगदीश साहू, भुवन रायकवार, अपूर्वा वर्मा, अभिजीत वानी और राजनांदगांव की ऋषिका घोष नई दिल्ली लौटी हैं।

अब तक 69 की सकुशल वतन वापसी

इसी तरह संजना श्रीवास्तव, दुर्ग के दिव्यान्श दुबे, चिरमिरी के संदीप कुमार डेविड, अभिषेक कुमार पटेल, प्रांजल तिवारी, अम्बिकापुर के शिवम सिंह, बिलासपुर की रिया अदिति, जांजगीर के चंद्र प्रकाश राठौर, तुषार गिरी गोस्वामी, शुभम कुमार, निहारिका गवेल, धर्मजयगढ़ की शिफा खुर्शीद और कोरबा के अयान चक्रवर्ती गुरुवार को नई दिल्ली लौटे हैं। सभी छात्र छत्तीसगढ़ भवन में कुछ देर ठहरने के बाद फ्लाइट से रायपुर के लिए रवाना हो गए। जानकारी के मुताबिक छात्रों को सहायता प्रदान करने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर नई दिल्ली के छत्तीसगढ़ भवन में सहायता केंद्र स्थापित किया गया है। इन छात्रों को वाहन, आवास और भोजन की सुविधा प्रदान की जा रही है। इसके अलावा, छात्रों को उनके गृहनगर वापस लाने के लिए हवाई टिकट समेत सभी जरूरी व्यवस्था की गई है।

शिक्षा मंडल की हेल्पलाइन पर शंकाओं का समाधान 

इधर, छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की हेल्पलाइन नंबर 18002334363 पर रोजाना लगातार फोन आ रहे हैं। छात्रों और उनके अभिभावकों की समस्याओं का मंडल के अधिकारी निराकरण कर रहे हैं। रायपुर, महासमुंद, कांकेर, राजनांदगांव, बेमेतरा, रायगढ़, बिलासपुर, बलौदाबाजार, दुर्ग, सूरजपुर, कोरबा, जांजगीर-चांपा और मुंगेली जिले से हेल्पलाइन नंबर पर प्रश्न पूछे गए, जिनका निराकरण विषय विशेषज्ञों द्वारा किया गया और उनकी शंकाओं का समाधान किया गया।

हेल्पलाइन में विषय विशेषज्ञ पापिया बेनर्जी, गीता तानवानी, अंशु गुलाटी और उज्जवला अम्बास्था अंग्रेजी विषय संबंधित समस्याओं का निराकरण किया गया। साथ ही मंडल के उपसचिव जे.के. अग्रवाल और हेल्पलाइन समन्वयक प्रदीप कुमार साहू, अर्चना वर्मा, अलका दानी सहायक प्राध्यापक ने विद्यार्थियों द्वारा पूछे गए समस्याओं का समाधान किया। 3 मार्च को कक्षा 12वीं के अंग्रेजी विषय की समस्या समाधान के लिए 87 फोन कॉल हेल्पलाइन नंबर पर आएं।

इन सवालों के पूछे गए जवाब

छात्रों ने अंग्रेजी विषय से संबंधित आर्टिकल राइटिंग, समरी राइटिंग, प्रश्न-उत्तर, नोट-मेकिंग, अंग्रेजी याद करने के तरीके अंग्रेजी पेपर कैसा आएगा, कौन-कौन सा लेटर आएगा, मॉडल प्रश्न पत्र से प्रश्न पूछा जाएगा, ब्लूप्रिंट के अनुसार प्रश्न-पत्र आयेगा क्या? मार्केट में उपलब्ध प्रश्न बैंक में क्या डिफरेंस है? नोट मेकिंग के टॉपिक क्या होंगे? जैसे प्रश्न विद्यार्थियों ने किए।

राज्यपाल उइके राजिम माघी पुन्नी मेला में हुईं शामिल, संत समागम समारोह का किया शुभारंभ

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राज्यपाल अनुसुइया उइके ने गरियाबंद जिले के राजिम में त्रिवेणी संगम तट पर लगने वाले प्रसिद्ध माघी-पुन्नी मेला के संत समागम समारोह का साधु-संतों की उपस्थिति में शुभारंभ किया। राज्यपाल उइके ने भगवान राजीवलोचन की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि पवित्र नगरी राजिम में आकर अत्यधिक प्रसन्नता हो रही है। राजिम पुन्नी मेले में आए साधु-संतों, श्रद्धालुजनों का मैं हार्दिक अभिनंदन करती हूं। यहॉं न सिर्फ सोंढूर, पैरी एवं महानदी का संगम है बल्कि धर्म अध्यात्म और आस्था का भी संगम है। 

साधु संतों का समागम छत्तीसगढ़ के साथ  ही देशभर का आयोजन बन गया है। किसी भी मेले का  सामुदायिक और सामाजिक महत्व होता है। उन्होंने आगे कहा कि भारत हमेशा से ही साधु-संतों की भूमि रही है। संतों का जीवन सदैव परोपकार के लिए समर्पित रहता है। संतों के दिखाए मार्ग पर चलने से ज्ञान की प्राप्ति के साथ-साथ जीवन में सकारात्मक बदलाव भी आते हैं। उन्होंने राजिम के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यहां के मंदिरों में भारतीय स्थापत्य और मूर्ति कला के गौरवशाली इतिहास के दर्शन होते हैं। राज्यपाल उइके ने कहा कि राजिम माघी पुन्नी मेले का विशेष सांस्कृतिक महत्व है, जहां लोक संस्कृति व आस्था का अनूठा संगम देखने को मिलता है। 

ऐसे आयोजनों से निश्चित ही जनमानस को उनकी पुरातन धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं की जानकारी मिलती है। हमें स्थानीय कला, संस्कृति और धार्मिक आयोजनों के लिए अपने प्रयासों को बढ़ाने की आवश्यकता है, जिससे छत्तीसगढ़ पर्यटन मानचित्र में उभर कर सामने आ सके। राज्यपाल ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि कोरोना वायरस बचने के लिए अभी भी सावधानी बरतें और मास्क का उपयोग करें। जिन्होंने वैक्सीन नहीं लगवाया है, वे वैक्सीन जरूर लगाएं। संबोधन के अंत में राज्यपाल उइके ने कहा कि ऐसे पवित्र नदियों को स्वच्छ और पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त बनाए रखने में अपनी सहभागिता निभानी होगी।

महानदी आरती में शामिल हुई राज्यपाल  

धर्मस्व एवं गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि हम मेला को लगातार अच्छा बनाने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि हमने श्रद्धालुओं की सुविधा का पूरा ख्याल रखा है। मंत्री ने राजिम मेला के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर राज्यपाल उइके ने साधु-संतों को स्मृति चिन्ह भेंट की। राज्यपाल  उइके राजिम में महानदी, पैरी और सोंढूर के संगम तट पर आयोजित प्रख्यात महानदी आरती में शामिल हुईं। उल्लेखनीय है कि प्रतिवर्ष माघी पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक लगने वाले राजिम माघी-पुन्नी मेले में महानदी आरती का आयोजन किया जाता है।

राज्यपाल ने विभागीय स्टाल और सरस मेला का अवलोकन

राज्यपाल उइके ने राजिम माघी-पुन्नी मेले के सरस मेला में लगाए विभिन्न स्टॉलों और महिला समूह द्वारा उत्पादित सामग्री का अवलोकन किया। राज्यपाल उइके ने स्टॉलों में पहुंचकर समूह की महिलाओं से बड़ी आत्मीयता के साथ चर्चा की और उनके परिश्रम को सराहा। उन्होंने महिलाओं से उनके द्वारा तैयार सामग्रियों की जानकारी लेते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के स्थानीय उत्पादों और कलाकृतियों का संरक्षण-संवर्धन करने में उनका योगदान अतुलनीय है। इस अवसर पर राज्यपाल उइके ने सरस मेला स्टॉल के सँगवारी सेल्फी जोन में फोटो ली। 

ये रहे उपस्थित

समारोह में राजिम विधायक अमितेश शुक्ल, गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष महंत राम सुंदर दास, महंत गोवर्धन शरण जी महाराज, उमेश आनंद जी महाराज, देवदास जी महाराज संत विचार साहेब, सिद्धेश्वरानंद महाराज मंच पर विशेष रूप से उपस्थित थे।

बसंत पंचमी आज, राज्यपाल और CM ने प्रदेशवासियों को दी बधाई

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माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी को बसंत पंचमी मनाई जाती है। इस साल 05 फरवरी को यानी आज (Basant Panchami 2022) बसंत पंचमी मनाई जा रही है। आज के दिन मां सरस्वती की पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है किमां सरस्वती की पूजा करने से धन धान्य की प्राप्ति होती है।  

वहीं बसंत पंचमी के अवसर पर राज्यपाल अनुसुइया उइके ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दी है। राज्यपाल ने मां शारदा को समर्पित बसंत पंचमी के मौके पर कहा कि प्रदेशवासियों पर मां शारदा की कृपा बनी रहे और छत्तीसगढ़वासी ज्ञान और बुद्धि में  भी सदा आगे रहे और छत्तीसगढ़ इसी तरह खुशहाली के रास्ते पर अग्रसर रहें।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को दी बधाई 

वहीं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा के अवसर पर प्रदेशवासियों को बधाई दी है। CM बघेल ने अपने बधाई संदेश में कहा है कि बसंत पंचमी से ऋतुराज बसंत का आगमन होता है, इस समय प्रकृति अपना सर्वोच्च निखार लिए होती है। इसलिए बसंत पंचमी को हरियाली और फसल के त्यौहार के रूप में भी मनाते हैं। इस दिन विद्या, कला और संगीत की देवी मां सरस्वती की आराधना भी की जाती है। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने इस अवसर पर कामना की है कि ऋतु परिवर्तन के साथ यह पर्व सभी के जीवन में नई उमंग, ऊर्जा और उत्साह का संचार लेकर आए।

सभी धर्मों का एक समान सम्मान करना चाहिए: राज्यपाल उइके

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रायपुर। राज्यपाल अनुसुईया उइके बालोद जिले के ग्राम बघमार में अंतर्राष्ट्रीय समाजवाद आदिवासी किसान सैनिक संस्था नई दिल्ली द्वारा आयोजित क्रांतिवीर कंगला मांझी स्मृति दिवस और सम्मान समारोह में शामिल हुई। उन्होंने क्रांतिवीर कंगला मांझी के छायाचित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्जवलित कर उन्हें नमन किया। इस अवसर पर राजमाता फूलवा देवी कांगे ने समारोह की अध्यक्षता की। समारोह में राज्यपाल ने सम्मानित सभी प्रबुद्धजनों को शुभकामनाएं दी।

राज्यपाल उइके ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि जब कभी भी विभिन्न मौकों पर किसी महत्वपूर्ण कार्यक्रम में खाकी वर्दी तथा बिल्ला-स्टार पहने वर्दीधारी सैनिकों को देखते हैं तो देखकर लोगों के मन में जिज्ञासा होती है कि वे कौन हैं, जो अनुशासित ढंग से बिना किसी अपेक्षा के कार्य कर रहे हैं। वास्तव में वे कंगला मांझी के सैनिक हैं। इनका अनुशासन देखकर उनके प्रति सम्मान का भाव जाग उठता है और यह गर्व भी होता है कि ऐसे लोग हमारे समाज में कार्य कर रहे हैं। 

उन्होंने कहा कि क्रांतिवीर कंगला मंाझी का स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलन में प्रमुख योगदान रहा है। उनका जन्म कांकेर जिला स्थित ग्राम तेलावट में हुआ था। उनमें अद्भुत संगठन कौशल था। वे सामान्य परिवार से ताल्लुक रखते थे, लेकिन उनका दृष्टिकोण बड़ा व्यापक था। वे सन् 1913 में स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े। सन् 1914 में वे महात्मा गांधी से मिल चुके थे। इस दौरान वे राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाते रहे। उन्होंने सैनिकों का एक संगठन बनाया, जिन्होंने राष्ट्रीय आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाई। परन्तु इन सैनिकों का स्वरूप अलग था। ये शांति और अहिंसा पर विश्वास करते थे। उनकी क्षमता और योग्यता को देखते हुए  स्वतंत्रता संग्राम के महानायकों घनश्याम सिंह गुप्त, डॉ. खूबचंद बघेल, ठाकुर प्यारेलाल सिंह, विश्वनाथ तामस्कर, चंदूलाल चंद्राकर ने उन्हें भरपूर सहयोग दिया।

क्रांतिवीर कंगला मांझी राष्ट्र के प्रति पूर्णतः समर्पित थे। उन्होंने आदिवासी समाज को एकता का पाठ पढ़ाया। कंगला मांझी संपूर्ण विकास को सर्वोपरि मानते थे और राष्ट्र हित के लिए कार्य करने के लिए हमेशा तत्पर रहे। इस राष्ट्र प्रेम से ओतप्रोत महापुरूष ने 05 दिसंबर 1984 को अपने प्राण त्यागे। उनकी याद में आज हम सब एकत्र हुए हैं। आज आजादी के 75वें वर्ष में मनाए जा रहे अमृत महोत्सव के अवसर पर उनके साथ शहीद वीर नारायण सिंह, गुंडाधुर, गैंदसिंह जैसे महानायकों को भी नमन करते हैं।

 पेसा कानून को लागू करने के लिए तैयार हो रहा प्रारूप 

राज्यपाल ने कहा कि पेसा कानून को लागू करने के लिये प्रारूप तैयार किया जा रहा है। पिछले दिनों में प्रधानमंत्री जी से आग्रह किया है कि अनुसूचित क्षेत्रों में अगर बड़े उद्योग लगाते हैं तो अधिग्रहित जमीन के बदले शेयर होल्डर बनाया जाए, 22 जनजाति की मात्रात्मक त्रुटि का शीघ्र समाधान किया जाए। राज्यपाल ने कहा कि आप सभी धर्म और राष्ट्र विरोधी विघटनकारी तत्वों से सावधान रहें। उन्होंने कहा कि जनजातीय सलाहकार परिषद का अध्यक्ष गैर राजनीतिक और समाज को समझने वाला हो। गोंडी भाषा को आठवीं सूची में जोड़ा जाना चाहिए।

इन्हें मिला कंगला मांझी शौर्य सम्मान 

राज्यपाल ने कहा कि हमें सभी धर्मों का सम्मान करना चाहिए। कार्यक्रम में कंगला मांझी शौर्य सम्मान से साहित्यकार डॉ. परदेशीराम वर्मा, स्व. जोइधा खुसरो, महाजन राम अठभेया और वस्तु सिंह को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की समाप्ति पर राज्यपाल उइके को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर  राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य नीतिन पोटाई, कलेक्टर जनमेजय महोबे, पुलिस अधीक्षक सदानंद कुमार सहित जिले के अन्य वरिष्ठ अधिकारी, गणमान्य नागरिकगण, आयोजन समिति के सदस्य और बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

अनुशासन और राष्ट्रीयता की भावना जागृत करती है स्काउट-गाइड्स: राज्यपाल उइके

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महासमुंद। छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनुसुइया उइके ने राजभवन में राज्यपाल पुरस्कार के प्रमाण पत्र प्रदान किया। उत्कृष्ट स्काउट, गाइड, रोवर, रेंजर, स्काउटर और गाइडर को सम्मानित और अलंकृत किया। इस दौरान राज्यपाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य की स्काउटिंग का हमारे देश में अहम योगदान है। 


राजभवन में राज्यपाल अनुसुइया उइके के मुख्य आतिथ्य में भारत स्काउट्स और गाइड्स, छत्तीसगढ़ के राज्यपाल पुरस्कार एवं अलंकरण समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भारत स्काउट्स एवं गाइड्स, छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष एवं स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, राज्य मुख्य आयुक्त एवं संसदीय सचिव विनोद सेवनलाल चन्द्राकर, उपाध्यक्ष एवं विधायक शकुंतला साहू, कार्यकारी अध्यक्ष राजेश अग्रवाल अतिथि थे। 


अलंकरण समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल अनुसुइया उइके ने कहा कि भारत स्काउट्स एवं गाइड्स संस्था बच्चों में अनुशासन और राष्ट्रीयता की भावना जागृत करती है। संस्था से जुड़े विद्यार्थियों में मानव सेवा की भावना भी उत्पन्न होती है, जो जीवनभर उनके काम आती है। स्काउट और गाइड को यह सिखाया जाता है कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता है।

वन्स ए स्काउट ऑलवेज स्काउट

राज्यपाल ने कहा कि इस संगठन ने 'विविधता में एकता की भावना’ तथा ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारत स्काउट्स एवं गाइड्स एक ऐसी संस्था है, जो विद्यार्थियों को संस्कारित करने का कार्य करती है। स्काउट एवं गाइड को कम सुविधाओं में तथा कठिन परिस्थितियों में स्वयं को ढालकर जीवन जीने की कला सिखाई जाती है। कहा जाता है कि ‘‘वन्स ए स्काउट ऑलवेज स्काउट’’। यदि बच्चे में एक बार स्काउटिंग का बीज रोपित कर दिया जाए तो वह जीवन भर स्काउट बना रहता है। स्काउटिंग सभी धर्मों के प्रति श्रद्धा रखना सिखाती है। 

 क्षमता का गुण विकसित करने का कार्य

युवाओं में नेतृत्व क्षमता का गुण विकसित करने का कार्य भी यह संस्था करती है। यहां मुझे स्वामी विवेकानंद का वह कथन याद आ रहा है कि ‘‘अगर मुझे तेजस्वी, श्रद्धासंपन्न और दृढ़विश्वासी और निःस्वार्थ सेवा करने वाले कुछ युवा मिल जाएं तो मैं पूरी दुनिया को बदल कर रख सकता हूं।" राज्यपाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य की स्काउटिंग का हमारे देश में अहम योगदान है। कोरोना काल में भी हमारे रोवर्स-रेंजर्स, स्काउटर एवं गाइडर ने अनेक सेवा कार्य जैसे भोजन वितरण, सूखा राशन वितरण, घर-घर दवा पहुंचाना एवं आम लोगों में जनजागरूकता फैलाने जैसे कार्य निःस्वार्थ भाव से किए, जिसके फलस्वरूप पूरे भारत में कोरोनाकाल में सेवा कार्य हेतु भारत को तीसरा पुरस्कार प्राप्त हुआ है। इसके लिए आप सभी बधाई के प्राप्त हैं। 

सभी कार्यक्रमों में सहभागिता

राष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षण देने के लिए यहां के ट्रेनर्स को अनेकों बार राष्ट्रीय प्रशिक्षण संस्थान पचमढ़ी में आमंत्रित किया जाता है। राज्य में प्रतिवर्ष विभिन्न कार्यक्रम तो होते ही है, राष्ट्रीय स्तर में भी हमारा राज्य सभी कार्यक्रमों में सहभागिता करता है। राज्य से प्रतिवर्ष शिक्षा विभाग एवं आदिम जाति कल्याण विभाग से 1000 बच्चे पचमढ़ी जाकर निःशुल्क डिजास्टर मैनेजमेंट एवं एडवेंचर कोर्स कर रहे हैं। देश के लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव में हमारे स्काउट्स-गाइड्स ने दिव्यांगजनों की सहायता कर एक मिसाल प्रस्तुत की है। 

हर साल गणवेश देने की घोषणा

मुझे आशा ही नहीं अपितु पूर्ण विश्वास है कि हमारे राज्य के स्काउट्स गाइड इसी प्रकार सेवा के कार्य करते रहेंगे और अपने प्रदेश एवं देश का नाम रोशन करेंगे। स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ प्रेमसाय सिंह टेकाम ने कहा कि स्काउट्स एवं गाइड्स ने कोरोना काल में कोरोना के प्रति जागरूकता लाने उल्लेखनीय कार्य किया। उन्होंने कहा कि राज्यपाल ने उत्कृष्ट स्काउट्स गाइड्स को पुरस्कृत करने की जो शुरूआत की है वह पूरे देश के लिए अनुकरणीय हैं। उन्होंने स्कूल में पढ़ने वाले स्काउट्स एवं गाइड्स के विद्यार्थियों को हर साल गणवेश देने की घोषणा की।

इन्हें किया गया पुरस्कृत

समारोह को राज्य मुख्य आयुक्त विनोद चन्द्राकर एवं कार्यकारी अध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने भी संबोधित किया। समारोह का संचालन सयुंक्त रूप से राज्य सचिव कैलाश सोनी और मोहम्मद सादिक शेख ने किया। कार्यक्रम में स्काउट नमन साहू, जीवेश साहू, अनीश पटेल, कुमारी डागेश्वरी, कुमारी मुस्कान मैत्री, कुमाी नंदनी सिन्हा, महेन्द्र बाबू टंडन, राहुल सिंह नेताम, कुमारी मेघा मिश्रा, कुमारी करूणा, संतोष कुमार साहू, दीपक ध्रुवंशी, गाइडर  सुधा तिवारी एवं सरस्वती गिरिया को पुरस्कृत किया गया।

छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनुसुइया उइके के कार्यकाल का 2 साल पूरा

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छत्तीसगढ़ में राज्यपाल अनुसुइया उइके के कार्यकाल का आज 2 साल पूरा हो गया है। इन दो सालों के दौरान छत्तीसगढ़ की जनता को यह महसूस हुआ कि राजधानी रायपुर में स्थित राजभवन हम सब आम जन के लिए खुला है। राज्य की संवैधानिक मुखिया की संवेदनशीलता और सहजता की चर्चा बस्तर के आदिवासियों से लेकर बलरामपुर जिले के गांव करकली के रहवासियों में भी होती है।



एक ओर जहां राज्यपाल उइके आदिवासियों के अधिकारों के संरक्षण की बात करती हैं। वहीं दूसरी ओर खुद संज्ञान लेकर मीडिया के जरिए प्राप्त समाचार से गांव करकली के एक दिव्यांग बेटी शशिप्रभा का इलाज कराने के लिए भी तत्पर रहती हैं। उनकी सहजता का अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है, जब उन्होंने एक युवा कलाकार को उसके आग्रह पर मोबाइल फोन से 'सेल्फी' भी लेने दी।

 

जनता में जागरूकता लाने के लिए निर्देश 


विश्व की सबसे भयावह महामारी कोरोना के संक्रमण के दौरान उन्होंने आम जनता की सहायता के लिए भरसक प्रयास किए और समय-समय पर जनप्रतिनिधियों को इस संबंध में आवश्यक निर्देश भी दिए। कोरोना योद्धाओं की हमेशा हौसला अफजाई की और उस दौरान अन्यत्र जगहों पर फंसे हुए विद्यार्थियों, श्रमिकों को उनके घर वापस भेजने के लिए प्रयास किए। कुलाधिपति के नाते उन्होंने विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को कोरोना के संबंध में, विद्यार्थियों के जरिए जनता में जागरूकता लाने के लिए भी निर्देश दिए। विद्यार्थियों को इस दौरान भी शिक्षा मिलती रहे इसके भी उपाय करने के निर्देश दिए। 


पुनर्वास के लिए विशेष प्रयास करने का भरोसा


वे युवाओं को भी सकारात्मक रहने और लक्ष्य हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करने का आह्वान करती हैं। उनका मानना है कि मंजिल पाने के लिए पहले लक्ष्य निर्धारित करना आवश्यक है। दंतेवाड़ा बस्तर प्रवास के दौरान उन्होंने आत्मसमर्पित नक्सलियों से मिलकर उनके पुनर्वास के लिए विशेष प्रयास करने का भरोसा दिलाया था। साथ ही दंतेश्वरी महिला कमांडो से भी भेंटकर नक्सली उन्मूलन में उनकी भूमिका की सराहना की। दंतेवाड़ा के जावंगा स्थित सक्षम परिसर में दिव्यांग बच्चों से काफी सहजता से मिली।


कानूनों को और मजबूत करने की पक्षधर 


राज्यपाल उइके खुद काफी संघर्षों से इस मुकाम तक पहुंची हैं। एक महिला होने के नाते उन्होंने यह महसूस किया है कि छत्तीसगढ़ में महिलाओं का स्वसहायता समूह के जरिए आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण हो रहा है। वनवासी क्षेत्रों के रहवासियों को उनके वनोपजों और उत्पादों की मार्केटिंग सही तरीके से हो इस दिशा में भी उनका प्रयास रहता है। वे महिला सुरक्षा के लिए बनाए गए कानूनों को और मजबूत करने की पक्षधर रही हैं, ताकि सभी महिलाओं को न्याय मिल सके।


शासकीय सेवाओं में भर्ती के संबंध में निर्देश 


राज्यपाल उइके को इतने कम समय में ही छत्तीसगढ़ के लोगों से विशेष लगाव हो गया है। वे यहां के लोगों की सहजता और सरलता की कायल हैं। उन्हें छत्तीसगढ़ी बोली में भी खास मिठास लगती है। जनजातियों की संस्कृति, बोली-भाषा और नृत्य-संगीत को संरक्षित करने की भी आवश्यकता पर जोर देती रही हैं। अति पिछड़ी जनजाति के युवाओं की शासकीय सेवाओं में भर्ती के संबंध में उनके निर्देश पर कार्रवाई हुई। 


राज्यपाल की पहल से 2 नए ट्राइब्स इंडिया बिक्री केंद्र शुरू 


राज्यपाल ने बचपन से ही देखा है कि आदिवासी समाज प्रकृति प्रेमी होते हैं और प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर ही हर कार्य करते हैं। वे आदिवासी युवाओं को समझाइश देती हैं कि उन्हें अपने समाज की संस्कृति, परंपराओं के गौरवशाली इतिहास पर गर्व करना चाहिए। आदिवासियों के हित की बात वे बस्तर से लेकर नई दिल्ली तक भी करती रही हैं। राष्ट्रपति भवन नई दिल्ली में आयोजित राज्यपालों के सम्मेलन में उन्होंने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क और बिजली की सुविधाओं के लिए अलग बजट का प्रावधान करने और सरगुजा और बस्तर में आदिवासी विश्वविद्यालय खोलने का आग्रह किया। उनकी पहल से ट्राईफेड द्वारा जगदलपुर में दो नए ट्राइब्स इंडिया बिक्री केंद्र शुरू हुए। 


राजभवन में अनेक नवाचार किए


उन्होंने तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों के बच्चों की लंबित छात्रवृत्ति जारी करने के संबंध में निर्देश दिए थे, जिस पर वन विभाग ने त्वरित कार्रवाई की। राज्यपाल उइके पर्यावरण संरक्षण और जल संरक्षण के प्रति भी विशेष जागरूक रहती हैं। उनके मुताबिक एक दिन पर्यावरण दिवस मनाने की औपचारिकता के बदले हर समय पर्यावरण हित में कार्य करना चाहिए। राज्यपाल का पद संभालने के बाद उन्होंने राजभवन में अनेक नवाचार किए। 


छात्र और उनके पालकों से मुलाकात


राजभवन के दरवाजे पर कोई भी व्यक्ति-प्रतिनिधिमंडल अगर न्याय की आस लेकर आता है उसे वे अंदर बुलाकर उनकी बातें सुनती हैं और समाधान का प्रयास भी करती हैं। फॉर्मेसी कॉलेज के विद्यार्थी हों या सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा के अभ्यर्थी या चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थी हों, सभी की समस्याओं को अभिभावक बतौर सुनती हैं और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश भी तत्काल देती हैं, जिससे आगंतुक को भी आशा बंधती है। 


महिला दिवस पर सम्मान 


उन्होंने आम जनता द्वारा राज्यपाल को भेजे गए पत्रों पर कार्रवाई के लिए ई-समाधान वेबसाइट भी तैयार कराई, जिससे आवेदनों पत्रों की ट्रेकिंग और अद्यतन स्थिति की मॉनिटरिंग होती है। राजभवन में पहली बार यहां कार्य करने वाली महिलाओं को उत्कृष्ट कार्य करने के लिए महिला दिवस पर सम्मानित भी किया गया। यहां कार्यरत कर्मचारियों को विशेष अवसर पर दी जाने वाली अनुदान राशि उन्होंने फिर शुरू की और कर्मचारियों के पदोन्नति के लिए भी पहल की। वे इन दो सालों के कार्यकाल को संतुष्टि भरा मानती हैं और उसी सहजता और सरलता से छत्तीसगढ़ की जनता की भलाई के लिए हमेशा कार्य करना चाहती हैं।

डॉ. खूबचंद बघेल की पुण्यतिथि आज, CM और राज्यपाल सहित विस अध्यक्ष ने किया नमन

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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ राज्य के स्वप्नदृष्टा, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और कृषक नेता स्वर्गीय डॉ. खूबचंद बघेल को उनकी पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए सादर नमन किया है।






https://twitter.com/bhupeshbaghel/status/1363691226097020931




मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा है कि डॉ. खूबचंद बघेल ने अपना पूरा जीवन समाज और किसानों के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया। कई रचनात्मक और किसान तथा मजदूर हितैषी गतिविधियों से जुड़कर जीवन के अंतिम समय तक वे छत्तीसगढ़ की सेवा करते रहे। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण आंदोलन में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।






https://twitter.com/bhupeshbaghel/status/1363691232208162821




CM बघेल ने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय चेतना जागृत करने का महत्वपूर्ण कार्य किया। उन्होंने विधायक और राज्यसभा सांसद के रूप में भी क्षेत्र की उल्लेखनीय सेवा की। उन्हीं के सपनों के अनुरूप हम नवा-छत्तीसगढ़ का निर्माण कर रहे हैं। उनके कृतित्व और व्यक्तित्व के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए चिकित्सा क्षेत्र में डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना शुरु की गई है, जिसके तहत 5 लाख रुपए तक नि:शुल्क इलाज की व्यवस्था मरीजों के लिए उपलब्ध कराई जा रही है।





राज्यपाल ने भी किया नमन





राज्यपाल अनुसुइया उइके ने डॉ. खूबचंद बघेल को नमन करते हुए कहा कि डॉ. बघेल छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के स्वप्नदृष्टा थे। उन्होंने सदैव किसानों और गरीबों के कल्याण का कार्य किया। वे छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के लिए उनके योगदान एवं समाज कल्याण के कार्यों के लिए सदैव याद किए जाएंगे।





विस अध्यक्ष ने भी किया नमन





छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत ने छत्तीसगढ़ के स्वप्न दृष्टा डॉ. खूबचंद बघेल की पुण्यतिथि पर याद करते हुए नमन किया। विस अध्यक्ष डॉ महंत ने कहा यह वही व्यक्ति है, जिन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य का सबसे पहले सपना देखा था, इन्ही के अनेकों प्रयास के बदौलत छत्तीसगढ़ ना सिर्फ हमारे देश में एक पहचान मिली बल्कि विदेशों में भी छत्तीसगढ़ का नाम हुआ।





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छत्तीसगढ़ राज्य के प्रथम स्वप्न दृष्टा डॉ. खूबचंद बघेल हमेशा से छत्तीसगढ़ के विकास और छत्तीसगढ़ को एक अलग पहचान दिलाने के लिए कार्य किया, वे हमेशा छत्तीसगढ़ के दब्बूपन को दूर करने के लिए अनेक प्रयास किये, वे हमेशा यही चाहते थे की छत्तीसगढ़ को लोग क्यों ऐसे हीन भावना से देखते है, हमेशा इससे सौतेला व्यवहार क्यों करते हैं बस इन्ही बातों की चिंता उन्हें सताते रहती थी। जातिगत भेदभाव, कुरीतियों को मिटाने वाले इस महान व्यक्ति का निधन संसद के शीतकालीन सत्र के लिए भाग लेने दिल्ली गए हुए थे वहाँ दिल का दौरा पड़ने से उनकी आकस्मिक निधन हुआ।





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उन्होंने सन 1931 में सरकारी पद त्याग कर कांग्रेस में प्रवेश किया। इसके पूर्व इसके पूर्व प्रवेश किया। इसके पूर्व इसके पूर्व अप्रैल 1930 में रायपुर महाकौशल राजनीतिक परिषद के अधिवेशन में डॉक्टर बघेल ने भी हिस्सा लिया था, सन 1931 में डॉक्टर बघेल रायपुर जिला के डिक्टेटर और बाद में राज्य के आठवें डिक्टेटर नियुक्त हुए। जिला डिक्टेटर के पद पर रहते हुए डॉक्टर बघेल सामाजिक सुधार के प्रति भी जागरूक रहें। सन 1939 के त्रिपुरी के ऐतिहासिक कांग्रेस अधिवेशन में स्वयंसेवकों के कमांडर के रूप में कार्य किया। 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के तहत इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।





उनकी धर्मपत्नी 6 माह के लिए जेल गई





डॉक्टर बघेल के साथ उनकी धर्मपत्नी राजकुंवर देवी भी 6 माह के लिए जेल गई। रायपुर तहसील से 1946 के कांग्रेस चुनाव में डॉक्टर बघेल निर्विरोध चुने गए। इस तरह सन 1946 में डॉक्टर बघेल को तहसील कार्यालय कार्यकारिणी के अध्यक्ष और प्रांतीय कार्यकारिणी के सदस्य के रूप में मनोनीत किया गया। स्वतंत्रता के बाद उन्हें प्रांतीय शासन ने संसदीय सचिव नियुक्त किया।





राजनीति से 1968 तक जुड़े रहे डॉक्टर बघेल





1950 में आचार्य कृपलानी के आह्वान पर वे कृषक मजदूर पार्टी में शामिल हुए। 1951 के बाद आम चुनाव में वे विधानसभा के लिए पार्टी से निर्वाचित हुए। 1965 तक विधानसभा के सदस्य रहे। 1965 में राज्यसभा के लिए चुने गए राजनीति से 1968 तक जुड़े रहे।


राज्यपाल अनुसुइया उइके भूमकाल स्मृति दिवस कार्यक्रम में होंगी शामिल

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आज राज्यपाल अनुसुइया उइके अपने दो दिवसीय प्रवास पर बस्तर में रहेंगी। राज्यपाल दोपहर 1 बजे शासकीय विमान से जगदलपुर पहुंचेंगी। जिसके बाद वे यहां भूमकाल दिवस पर आयोजित विभिन्न कार्यक्रम में शामिल होंगी। वे यहां गोलबाजार स्थित जयस्तंभ चौक और गीदम मार्ग में स्थित शहीद गुंडाधुर के उद्यान में श्रद्धासुमन अर्पित करेंगी। इसके बाद वे शहर के इंदिरा प्रियदर्शिनी स्टेडियम में आयोजित भूमकाल स्मृति दिवस समारोह में शामिल होंगी।





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बस्तर में हर साल 10 फरवरी को सर्व आदिवासी समुदाय शहीद गुंडाधुर की स्मृति में भूमकाल दिवस मनाया जाता है। शहीद गुंडाधुर के बलिदान दिवस के रूप में हर साल इसे मनाया जाता है। इस बार भूमकाल की 111वीं वर्षगांठ के मौके पर राज्यपाल शामिल होंगी।





राज्यपाल अनुसुइया उइके अपने प्रवास के दूसरे दिन जगदलपुर के विश्राम भवन में स्थानीय जनप्रतिनिधियो और विभिन्न विभाग के अधिकारियों से मुलाकात करेंगी। जिसके बाद दोपहर 2:30 बजे वे रायपुर के लिए रवाना हो जाएंगी। राज्यपाल के दो दिवसीय प्रवास को देखते हुए प्रशासन ने सारी तैयारियां पूरी कर ली है।





बंदी पाटा साड़ी की जाएगी भेंट






राज्यपाल के प्रवास के दौरान उन्हें बस्तर की परंपरागत बंदी पाटा साड़ी भेंट की जाएगी। बंदी पाटा बस्तर के वीर योद्धा गुंडाधुर ने बंदी ओलना वस्त्र पहनकर और बंदी टेकरीवाल पगड़ी धारण कर युद्ध में प्रवेश किया था। बस्तर में इसकी एक अलग पहचान है। बंदी पाटा धुर्वा समाज का प्रमुख वस्त्र है. यह महिलाओं के लिए मान्यता से परिपूर्ण है। बंदी पाटा साड़ी की लंबाई 5 मीटर चौड़ाई में 46 इंच होती है। धुर्वा समाज के प्रमुखो के द्वारा महामहिम राज्यपाल को इस बंदी पाटा की साड़ी भेंट की जाएगी।


राज्यपाल उइके वर्चुअल रूप से हुई I.S.B.M. विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत-समारोह में शामिल

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राज्यपाल अनुसुइया उइके (Governor Anusuiya Uike) 18 जनवरी को I.S.B.M. विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत-समारोह (I.S.B.M. University Convocation) में वर्चुअल रूप से शामिल हुई। इस दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और उपाधि प्रदान किए गए। इस अवसर पर
राज्यपाल ने कहा कि कठिनाइयों से कभी न घबराएं, हौसला बनाए रखें। जो हौसले के साथ काम करता है, उसे लक्ष्य की अवश्य प्राप्ति होती है।





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राज्यपाल (Governor Anusuiya Uike) ने कहा कि समय के अनुरूप परिवर्तन के लिए तैयार रहें और कड़ी मेहनत करें, भले ही इसके लिए अपने सुखों का त्याग करना पड़े। प्रकृति ने जो संसाधन दिए हैं उसका उतना ही उपयोग करें, जितनी आवश्यकता हो। अपने माता-पिता और गुरूजनों का सम्मान करें। आप जब अपने पैरों पर खड़े हो जाएं तो आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करें और उनकी मदद करें। उन्होंने कहा कि जो सकारात्मक दृष्टिकोण रखता है वह जीवन में अवश्य सफल होता है। किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक ज्ञान भी बहुत आवश्यक है।





राज्यपाल ने दी जानकारी (I.S.B.M. University Convocation)





राज्यपाल (Governor Anusuiya Uike) ने कहा कि में गरियाबंद जिले के सुपेबेड़ा गांव गई थी और वहां की समस्याओं को सुनकर उनका समाधान किया था। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से कहा कि सुपेबेड़ा जैसे दूरदराज के गांव का भ्रमण करें, विद्यार्थियों को ले जाएं और उन गांवों को विश्वविद्यालय गोद लेकर उनकी समस्याओं के निराकरण करने में मदद करें। उन्होंने कहा कि इस प्रथम दीक्षांत समारोह (I.S.B.M. University Convocation) में शामिल विद्यार्थीगण आदिवासी बहुल गरियाबंद जिले के सुदूर क्षेत्र के सर्वांगीण विकास में मील के पत्थर साबित होंगे। वे विश्वविद्यालय से प्राप्त शिक्षा-दीक्षा के माध्यम से समाज, प्रदेश और देश को अपने ज्ञान, संस्कार और कौशल के प्रयोग से निश्चय ही एक नया आयाम देंगे।





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राज्यपाल (Governor Anusuiya Uike) ने कहा कि आज शिक्षा के प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पिछड़े क्षेत्रों को ज्यादा है। यह गरियाबंद क्षेत्र के लिए प्रसन्नता की बात है कि I.S.B.M. विश्वविद्यालय शहर की अपेक्षा एक अत्यन्त पिछड़े हुए सुविधा विहिन ग्रामीण क्षेत्र में स्थापित किया गया है। राज्यपाल ने कहा कि आज का दिन हर विद्यार्थी के जीवन का महत्वपूर्ण दिन होता है। अगर एक तरह से देखें तो दीक्षांत समारोह में उनके शैक्षणिक जीवन की समाप्ति हो रही है। वहीं दूसरे मायने में हम देखें तो उसके बाद एक नए जीवन की शुरूआत होगी।





वहीं डिग्री प्राप्त करने के बाद विभिन क्षेत्रों में जाएंगे और जो अभी पुस्तकीय ज्ञान प्राप्त किया है, उसे क्रियान्वित करेंगे। हो सकता है कि यह पुस्तकीय ज्ञान कुछ काम आए, हो सकता है कि कुछ नया करने के लिए नए सिरे से भी शुरूआत करनी पड़े। वास्तव में पुस्तकीय ज्ञान ठोस ढांचा प्रदान करता है, लेकिन जो व्यावहारिक ज्ञान और संस्कार प्राप्त किया है। वहीं आगे बढ़ने में मदद करता है।





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राज्यपाल (Governor Anusuiya Uike) ने कहा कि आदिवासी भाइयों और बहनों के पास जो पारंपरिक ज्ञान, संस्कार और हुनर है वो किसी भी दृष्टिकोंण से पढ़े-लिखे व्यक्ति से कमतर नहीं है। इन्हें पाठ्यक्रम में शामिल करने और शोध करने की सतत आवश्यकता है। वर्तमान समय की मांग के मुताबिक विश्वविद्यालयों को आधुनिक ज्ञान विज्ञान और प्रौद्योगिकी का समावेश अपने पाठ्यक्रमों में करना चाहिए, जिससे विद्यार्थियों को ज्ञान, संस्कार, कौशल में प्रवीणता के साथ बेहतर रोजगार प्राप्त हो सके।





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राज्यपाल उइके (Governor Anusuiya Uike) ने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि I.S.B.M. विश्वविद्यालय से दीक्षित विद्यार्थीगण (I.S.B.M. University Convocation) अपने लक्ष्य की प्राप्ति में अवश्य सफल होंगे और समाज, देश के विकास में अपनी भूमिका का सही निर्वहन करेंगे। विश्वविद्यालय से भी यह अपेक्षा है कि इस अंचल में वनों, पर्वतों, झरनों, जड़ी-बूटियों और उपलब्ध प्रचुर खनिज संपदाओं के स्रोतों के विकास और उनका उचित दोहन करने के लिए शोध परियोजनाओं की परिकल्पना करने के साथ ही युवाओं में वैज्ञानिक सोच विकसित करने का मार्ग प्रशस्त करें।





कार्यक्रम में ये रहे शामिल





इस कार्यक्रम में पद्मश्री ए.टी. दाबके और छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष शिववरण शुक्ल ने भी अपना संबोधन दिया। इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल, कुलाधिपति विनय अग्रवाल, प्रति कुलपति आनंद महलवार, प्राध्यापकगण और विद्यार्थीगण उपस्थित थे।


राज्यपाल ने अयोध्या में श्री राम मंदिर निर्माण के लिए किया 21 हजार का दान

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राज्यपाल अनुसुइया उइके (Governor Anusuiya Uike) से शुक्रवार को राजभवन में श्री राम मंदिर निर्माण निधि संग्रह अभियान समिति के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। जिस पर राज्यपाल ने उन सभी को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं दी और अयोध्या में बनने वाले श्री राम मंदिर निर्माण के लिए निधि (Shri Ram Mandir Donation) समर्पित किया।





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विश्व हिन्दू परिषद् के कोषाध्यक्ष रमेश मोदी ने बताया कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए देश भर में निधि संग्रह अभियान शुक्रवार यानी 15 जनवरी से शुरूआत की जा रही है। छत्तीसगढ़ में भी राज्यपाल महोदया से निधि प्राप्त कर अभियान की शुरूआत की गई। इस अवसर पर राम मंदिर निर्माण निधि संग्रह अभियान समिति के प्रांत प्रमुख बृजलाल गोयल, राम मंदिर (Shri Ram temple) निर्माण निधि संग्रह प्रमुख घनश्याम चौधरी, स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय परिषद के सदस्य राजेन्द्र दुबे उपस्थित थे।





श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के लिए चंदा जुटाने का काम (Shri Ram Mandir Donation)





बता दें कि अयोध्या में प्रस्तावित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के लिए चंदा जुटाने का काम 15 जनवरी से शुरू हो गया है। छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनुसूइया उइके ने आरएसएस और उसके आनुषांगिक संगठनों के नेताओं को 21 हजार रुपए का चेक सौंपकर अभियान की शुरुआत की है। बताया जा रहा है कि राम मंदिर निर्माण के लिए वित्तीय मदद जुटाने को श्री राम मंदिर (Shri Ram temple) निर्माण निधि संग्रह अभियान समिति का गठन हुआ है।





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बताया जा रहा है कि यह समिति अब पूरे प्रदेश में आनुषांगिक संगठनों के जरिए चंदा इकट्‌ठा करेगी। इस अभियान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा भी शामिल हो रही हैं। इधर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राम मंदिर के नाम पर पहले लिए गए चंदे पर सवाल उठा दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है, भाजपा ने राम मंदिर के शिलान्यास के लिए मांगे गए पैसे का अब तक हिसाब नही दिया है। अब फिर से धन संग्रह किया जा रहा है। उन्होंने कहा, इसका हिसाब जनता को बताना चाहिए। मुख्यमंत्री ने पूछा कि आखिर उसका हिसाब छुपाने का क्या कारण है।





कांग्रेस का आरोप





कांग्रेस नेताओं का कहना है कि अयोध्या में भगवान राम के मंदिर का निर्माण सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद हो रहा है। मंदिर निर्माण के लिए सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर कमेटी बनी है। मंदिर निर्माण उसी कमेटी की देख रेख में होगा। कमेटी ने मंदिर निर्माण में सहयोग के लिए अपना बैंक खाता भी सार्वजनिक किया है। जिस किसी को मंदिर निर्माण में सहयोग करना होगा, इसी खाते में कर सकता है। अब आरएसएस किस हैसियत से मंदिर के नाम पर चंदा एकत्रित करने जा रहा है?





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बता दें कि कांग्रेस नेता और पाठ्य पुस्तक निगम के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी (Shailesh Nitin Trivedi) ने दावा किया, आरएसएस के अनुषांगिक संगठन विश्व हिन्दू परिषद (Vishwa Hindu Parishad) ने शिलापूजन के बहाने ईंटो के साथ-साथ 1400 करोड़ रुपए एकत्रित किये थे। त्रिवेदी ने कहा कि राम मंदिर के नाम पर इकट्‌ठा किए गए इस चंदे का कोई हिसाब विश्व हिंदू परिषद, RSS या भाजपा ने आज तक नहीं दिया है।


राज्यपाल ने वेटरन डे कार्यक्रम में वीर नारियों और वीर माताओं का किया सम्मान

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राज्यपाल अनुसुइया उइके (Governor Anusuiya Uike) गुरुवार को नवा रायपुर में छत्तीसगढ़ और ओडिशा उपक्षेत्र द्वारा आयोजित वेटरन डे कार्यक्रम (Governor honors brave women) में शामिल हुई और वीर नारियों और वीर माताओं का सम्मान किया। उन्होंने पूर्व सैनिकों और उनके परिजनों को देश के प्रति उनके योगदान के लिए धन्यवाद देते हुए शहीद सैनिकों को नमन किया।









राज्यपाल (Governor Anusuiya Uike) ने कहा कि भारतीय सेना का नाम लेते ही हमारा मस्तक गर्व से ऊंचा उठ जाता है। जो हर मौसम में हर क्षण देश की सीमा में रक्षा की दीवार बनकर तैनात रहते हैं, जिनके कारण आज देश का हर नागरिक महफूज रहता है और चैन की सांस लेता है।





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वे जागते हैं तो हम शांति से सो पाते हैं, क्योंकि हमें पता है कि हमारी सेना के रहते दुश्मन की सेना क्या, दुश्मन देश का परिंदा भी पर नहीं मार सकता। हमारी सेना जमीन, नभ और जल पर चौबीसों घंटे अपनी निगरानी रखी रहती है। स्वतंत्रता के बाद जितने भी युद्ध हुए, हमारे सैनिकों ने अपने मनोबल और साहस से लड़ा और दुश्मनों को धूल चटाई।





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चाहे बांग्लादेश युद्ध को याद करें या कारगिल का युद्ध, दुश्मनों ने हमारी सेना के आगे घुटने टेके। आज जब हम देश के सबसे ऊंचे सैन्यस्थल की बात करें, जहां माइनस 30 से 40 डिग्री तक तापमान दिन में रहता है और रात में तापमान माइनस 70 डिग्री तक चला जाता है, वहां हमारे सैनिक अपनी जान की परवाह किए बिना तैनात रहते हैं।





राज्यपाल ने कही ये बात (Governor honors brave women)





जब पूरा देश कोरोना संक्रमण से जूझ रहा था उस समय चीन ने हमारे देश की सीमा को लांघने की कोशिश की तो हमारी सेना ने उसका मुंहतोड़ जवाब दिया और दुश्मनों को अपने कदम पीछे करने के लिए मजबूर किए। यह युद्ध क्षेत्र लद्दाख क्षेत्र के गलवान घाटी में स्थित है, जहां का तापमान माइनस 20 से 22 डिग्री रहता है, वहां हमारे सैनिकों ने बहादुरी का परिचय दिया और आज भी तैनात हैं।





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राज्यपाल (Governor Anusuiya Uike) ने कहा कि युद्ध क्षेत्र ही नहीं हमारे देश में जब कभी भी प्राकृतिक विपदा, बाढ़ या भुकंप आई, हमारे सैनिक एक सूचना पर तैनात हो जाते हैं और संकटग्रस्त लोगों की मदद कर उनकी जान बचाते हैं।





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हमारे देश ही नहीं, हमारे पड़ोसी देशों जैसे नेपाल में भी भूकंप आया था तो हमारे सैनिकों ने उनकी सहायता (Governor honors brave women) की। आज जब पूरा विश्व और देश में कोरोना संकट छाया हुआ है, उस समय हमारे सेना ने क्वॉरेंटाइन सेंटर भी स्थापित किए थे और दवाईयां सहित आवश्यक सामग्रियों की आपूर्ति में प्रमुख भूमिका निभाई।





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राज्यपाल (Governor Anusuiya Uike) ने कहा कि 'मैंने यह भी देखा था कि कोरोना योद्धाओं के सम्मान में वायु सेना के विमानों ने आसमान से पुष्प बरसाकर उनका उत्साहवर्धन किया था। उन्होंने छत्तीसगढ़ के पूर्व सैनिकों की सामाजिक संस्था ‘सिपाही’ का जिक्र करते हुए कहा कि कोरोना काल में वे स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर लोगों की मदद की। राज्यपाल ने कहा कि सैनिकों के साहस और निःस्वार्थ सेवा और बलिदान की गाथाएं नई पीढ़ियों को उत्साहित करती हैं।





राज्यपाल ने भूतपूर्व सैनिकों और उनकी विधवाओं को दिया आश्वस्त (Governor honors brave women)





राज्यपाल (Governor Anusuiya Uike) ने कहा कि सरकार की निरंतर कोशिश रहती है कि सैनिकों की सेवानिवृत्ति के बाद का जीवन कैसे सहज किया जाए। उन्होंने कहा कि भूतपूर्व सैनिकों एवं उनके परिवारजनों को नया रायपुर आने-जाने में होने वाली परेशानी को दूर करने के लिए एक वाहन देने का निर्णय लिया गया है। राज्यपाल ने भूतपूर्व सैनिकों और उनकी विधवाओं को आश्वस्त करते हुए कहा कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए हरसंभव प्रयास करूंगी और अगर किसी भी प्रकार की समस्या हो तो मुझसे संपर्क कर सकते हैं।





प्रभारी मुख्य सचिव सुब्रत साहू ने कही ये बात





अपर मुख्य सचिव गृह एवं प्रभारी मुख्य सचिव सुब्रत साहू ने कहा कि देश की सेवा में सैनिकों ने अमूल्य योगदान दिया है। सैनिकों के बलिदान की कहानियां नई पीढ़ी को प्रेरणा प्रदान करती है। शासन द्वारा भूतपूर्व सैनिकों और उनके परिजनों का ख्याल रखा जाता है।





सैनिक कल्याण बोर्ड





भूतपूर्व सैनिकों और उनके परिजनों की समस्याओं का पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ निराकरण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद भूतपूर्व सैनिकों को कोई परेशानी न हो, यह प्रयास शासन द्वारा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सैनिक कल्याण बोर्ड के माध्यम से भी वे अपनी समस्याओं को शासन के ध्यान में ला सकते हैं।





कमांडर ब्रिगेडियर प्रशांत चौहान ने कही ये बात





इस अवसर पर छत्तीसगढ़ और ओडिशा उपक्षेत्र के कमांडर ब्रिगेडियर प्रशांत चौहान ने कहा कि वेटरन डे पूर्व सैनिकों और उनके परिजनों के सम्मान का दिन है। यह कोशिश की जाती है कि उनकी समस्याओं का हरसंभव समाधान हो। साथ ही इसके लिए एक्स सर्विसमेन सेल का भी गठन किया गया है। इस सेल कार्यालय नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ औस ओडिशा उपक्षेत्र में रहेगा। संचालनालय सैनिक कल्याण छत्तीसगढ़ के संचालक एयर कमोडोर ए. एन. कुलकर्णी (से.नि.) ने कहा कि वेटरन डे पर सैनिकों और पूर्व सैनिकों को एक-दूसरे का उत्तरदायित्व बताने का दिन है।





गैंगरेप के बाद ब्यूटी क्वीन की हत्या, लोग कर रहे इंसाफ की मांग





राज्यपाल (Governor Anusuiya Uike) ने भूतपूर्व सैनिकों और उनके परिवारजनों के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। इस मौके पर विधायक औस छत्तीसगढ़ राज्य हाउंसिंग बोर्ड के अध्यक्ष कुलदीप जुनेजा, छत्तीसगढ़ एवं ओडिशा उपक्षेत्र के अधिकारीगण, भूतपूर्व सैनिक और उनके परिजन उपस्थित थे।


पंडित रविशंकर शुक्ल की पुण्यतिथि आज, सीएम बघेल सहित कई मंत्री और नेताओं ने किया उन्हें नमन

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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (Chief Minister Bhupesh Baghel), राज्यपाल अनुसुइया उइके (Governor Anusuiya Uike) सहित कई नेताओं और मंत्रियों ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और अविभाजित मध्यप्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री पंडित रविशंकर शुक्ल की पुण्यतिथि (Pandit Ravi Shankar Shukla death anniversary today ) पर उन्हें नमन किया है।






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मुख्यमंत्री बघेल ने कहा है कि 'पंडित रविशंकर शुक्ल प्रसिद्ध नेता और कुशल प्रशासक थे। उन्होंने राष्ट्रीय आंदोलनों में सक्रिय और शीर्ष भूमिका निभाई। इस दौरान छत्तीसगढ़ में उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के विरूद्ध लोगों को जागरूक कर गांधी जी के विभिन्न आंदोलनों में सहयोग के लिए प्रेरित किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ अंचल में शिक्षा, स्वास्थ्य और सिंचाई सहित विभिन्न क्षेत्रों की विकास योजनाओं में महती भूमिका निभाई।'





राज्यपाल ने पंडित रविशंकर शुक्ल की पुण्यतिथि पर उन्हें किया नमन (Governor salutes Pandit Ravi Shankar Shukla on his death anniversary)





राज्यपाल अनुसुइया उइके ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित रविशंकर शुक्ल की पुण्यतिथि (Governor salutes Pandit Ravi Shankar Shukla on his death anniversary) पर उन्हें नमन करते हुए कहा कि 'पंडित रविशंकर शुक्ल कुशल प्रशासक, विद्वान, चिन्तक और विचारक थे। उन्होंने राष्ट्रीय आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभाई। अविभाजित मध्यप्रदेश में उनके द्वारा किये गए कार्यों एवं योगदान के लिए वे हमेशा याद किये जायेंगे।'






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बता दें कि भिलाई इस्पात संयंत्र को स्थापित कराने वाले पंडित रविशंकर शुक्ल की आज 63वीं पुण्यतिथि (Today 63rd death anniversary of Pandit Ravi Shankar Shukla) है। इस अवसर में भिलाई इस्पात संयंत्र के अधिकारियों, कर्मचारियों और आमजन ने उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। संयंत्र की स्थापना से लेकर आज तक के हालात पर वक्ताओं ने विचार व्यक्त किए। पंडित शुक्ला की सोच और पंडित जवाहर लाल नेहरू द्वारा लिए गए फैसले पर चर्चा की गई। आधुनिक भारत की सोच और भिलाई को औद्योगिक तीर्थ बनाने में सहयोग देने वाले पंडित रविशंकर शुक्ल के योगदान को याद किया गया।





2 अगस्त 1877 में सागर जिले में हुआ था पंडित रविशंकर का जन्म





पंडित रविशंकर शुक्ल का जन्म मध्यप्रदेश के सागर जिले की रहली तहसील के गुड़ा गांव में 2 अगस्त 1877 को हुआ था। वे एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे।वहीं पंडित रविशंकर शुक्ल 1 नवंबर 1956 को अस्तित्व में आए नये राज्य मध्यप्रदेश के पहले मुख्यमंत्री थे। अपने कार्यकाल के दौरान 31 दिसंबर 1956 को उनकी मौत हो गई।बता दें कि दिल्ली स्थित भारत के संसद भवन परिसर में रविशंकर शुक्ल की प्रतीम विद्यमान है। वहीं छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्थित विश्वविद्यालय का नाम पंडित रवि शंकर शुक्ल के नाम पर है।






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पंडित रविशंकर शुक्ल के पिता का नाम पंडित जगन्नाथ शुक्ल और माता का नाम तुलसी देवी था। पंडित रविशंकर ने 4 साल की उम्र में सागर के सुन्दरलाल पाठशाला में दाखिला लिया था। ब्रिटिश राज में यह पाठशाला सीपी में स्थित 6 शालाओ में से एक थी। माध्यमिक शिक्षा के पूरी होने के बाद पंडित जगन्नाथ शुक्ल राजनांदगांव आ गए और अपने भाई पंडित गजाधर शुक्ल के साथ बेंगाल नागपुर कॉटन मिल चलने में सहभागी बने।






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कुछ साल मिल चलाने के बाद वह रायपुर आ गए। इस दौरान रविशंकर ने अपनी स्कूली शिक्षा रायपुर हाई स्कूल से पूरी की। इसके बाद उन्होंने इंटर की परीक्षा जबलपुर के रॉबर्टसन कॉलेज से पूरी की और स्नातक की पढ़ाई नागपुर के हिसलोप कॉलेज से पूरी की। नागपुर में पढ़ते हुए शुक्ल राष्ट्रीय आंदोलन के निकट आए। 1897 में संपन्न हुए कांग्रेस के 13वें अधिवेशन में भाग लेने वे अपने अध्यापक के साथ अमरावती गए थे।






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ठाकुर प्यारेलाल सिंह की जयंती पर मुख्यमंत्री बघेल और राज्यपाल ने किया उन्हें याद

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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (Chief Minister Bhupesh Baghel) ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ठाकुर प्यारेलाल सिंह की जयंती (birth anniversary of freedom fighter fighter Thakur Pyarelal Singh) पर उन्हें नमन किया है। सीएम बघेल ने कहा है कि ठाकुर साहब ने न सिर्फ गरीबों की सेवा की बल्कि उनके अधिकारों के लिए जीवनभर संघर्ष किया।






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ठाकुर प्यारेलाल सिंह (Thakur Pyarelal Singh) छत्तीसगढ़ में सहकारी आंदोलन के पुरोधा के रूप में जाने जाते हैं। वे छात्र जीवन से ही स्वाधीनता आंदोलनों से जुड़े। उन्होंने अत्याचार और अन्याय के विरोध में अपनी आवाज बुलंद की और जन असंतोष को संगठित दिशा प्रदान की। राजनांदगांव में मिल मजदूरों को संगठित कर उन्हें कुशल नेतृत्व प्रदान किया। छत्तीसगढ़ में छात्रों को संगठित रूप से आंदोलनों से जोड़ने का श्रेय भी ठाकुर साहब को जाता है। उन्होंने जन-जागरण के लिए भी कई काम किए। सीएम बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ के इतिहास में अपने अमूल्य योगदान के लिए ठाकुर साहब हमेशा याद किए जाएंगे।






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ठाकुर प्यारे लाल सिंह की जयंती पर राज्यपाल ने उन्हें किया नमन





राज्यपाल अनुसुइया उइके (Governor Anusuiya Uike) ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ठाकुर प्यारे लाल सिंह की जयंती पर उन्हें नमन किया है। राज्यपाल ने कहा कि ठाकुर प्यारे लाल सिंह छत्तीसगढ़ में सहकारिता आंदोलन के प्रणेता थे। उनके द्वारा किए गए सामाजिक एकता और उत्थान के काम नई पीढ़ी को प्रेरणा देते रहेंगे।









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बता दें कि ठाकुर प्यारेलाल सिंह का जन्म 21 दिसंबर 1891 को राजनांदगांव जिले के दैहान ग्राम में हुआ था। उनके पिता का नाम दीनदयाल सिंह और माता का नाम नर्मदा देवी था। ठाकुर प्यारेलाल सिंह छत्तीसगढ़ में श्रमिक आंदोलन के सूत्रधार और सहकारिता आंदोलन के प्रणेता थे। उनकी शिक्षा राजनांदगांव और रायपुर में हुई थी। वहीं नागपुर और जबलपुर में उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त कर 1916 में वकालत की परीक्षा उत्तीर्ण की। बचपन से ही वे मेधावी और राष्ट्रीय विचारधारा से ओत-प्रोत थे।





आंदोलनों और राष्ट्रीय आंदोलन के लिए जन-सामान्य को किया था जागृत





1906 में बंगाल के क्रांतिकारियों के संपर्क में आकर क्रांतिकारी साहित्य के प्रचार शुरू किया और विद्यार्थियों को संगठित कर जुलूस के समय वन्देमातरम् का नारा लगवाते थे। 1909 में सरस्वती पुस्तकालय की स्थापना की। 1920 में राजनांदगांव में मिल-मालिकों के शोषण के खिलाफ आवाज उठाई, जिसमें मजदूरों की जीत हुई। उन्होंने स्थानीय आंदोलनों और राष्ट्रीय आंदोलन के लिए जन-सामान्य को जागृत किया।









कई कार्यों का किया संचालन





1925 से वे रायपुर में निवास करने लगे। उन्होंने छत्तीसगढ़ में शराब की दुकानों में पिकेटिंग, हिन्दू-मुस्लिम एकता, नमक कानून तोड़ना, दलित उत्थान जैसे अनेक कार्यों का संचालन किया। देश सेवा करते हुए वे कई बार जेल भी गए।





1937 में चुने गए थे रायपुर नगरपालिका के अध्यक्ष





राजनीतिक झंझावातों के बीच 1937 में रायपुर नगरपालिका के अध्यक्ष चुने गए थे। 1945 में छत्तीसगढ़ के बुनकरों को संगठित करने के लिए उनके नेतृत्व में छत्तीसगढ़ बुनकर सहकारी संघ की स्थापना हुई। प्रवासी छत्तीसगढ़ियों को शोषण और अत्याचार से मुक्त कराने की दिशा में भी वे सक्रिय रहे।





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वैचारिक मतभेदों के कारण सत्ता पक्ष को छोड़कर वे आचार्य कृपलानी की किसान मजदूर पार्टी में शामिल हुए। 1952 में रायपुर से विधानसभा के लिए चुने गए और विरोधी दल के नेता बने। विनोबा भावे के भूदान और सर्वोदय आंदोलन को उन्होंने छत्तीसगढ़ में विस्तारित किया। 20 अक्टूबर 1954 को भूदान यात्रा के समय अस्वस्थ हो जाने से उनका निधन हो गया। छत्तीसगढ़ शासन ने उनकी स्मृति में सहकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए ठाकुर प्यारेलाल सिंह सम्मान स्थापित किया है।


शहादत दिवस पर राज्यपाल, सीएम बघेल सहित पूर्व सीएम रमन ने किया शहीद वीरनारायण सिंह को नमन

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रायपुर : छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अमर शहीद वीरनारायण सिंह (Chhattisgarh first freedom fighter Shaheed Veeranarayan Singh) का आज शहादत दिवस (Martyrdom Day) है।शहीद वीरनारायण के शहादत दिवस पर राज्यपाल अनुसुइया उइके (Governor Anusuiya Uike), मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (Chief Minister Bhupesh Baghel), मंत्री टीएस सिंहदेव(T.S. Singhdeo) सहित पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह (Former Chief Minister Raman Singh) ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए नमन किया है।






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बता दें कि आज ही के दिन यानी 10 दिसंबर 1857 को अंग्रेजों ने रायपुर के जयस्तंभ चौक पर वीरनारायण सिंह (Veeranarayan Singh) को फांसी दे दी थी। इसके बाद उन्हें तोप से उड़ा दिया था।तब से लेकर आज तक 10 दिसंबर को पूरे छत्तीसगढ़ में शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है।






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शहीद वीरनारायण सिंह के शहादत दिवस पर पीएम बघेल आज सोनाखान जाएंगे।वे दोपहर 12:30 बजे रायपुर के पुलिस ग्राउण्ड हेलीपेड से हेलीकॉप्टर में रवाना होकर दोपहर 1 बजे सोनाखान जाएंगे।जहां सीएम दोपहर 1:10 बजे से 2:10 बजे तक सोनाखान में आयोजित शहीद वीर नारायण सिंह के शहादत दिवस कार्यक्रम में शामिल होंगे।इसके बाद सीएम बघेल दोपहर 2:55 बजे रायपुर वापस लौट आएंगे।






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शहीद वीरनारायण सिंह की वीरता की गाथा





जानकारों के मुताबिक सोनाखान के युवराज नारायण सिंह घोड़े पर सवार होकर अपनी रियासत का भ्रमण किया करते थे।भ्रमण के दौरान एक बार युवराज को किसी व्यक्ति ने जानकारी दी कि सोनाखान क्षेत्र में एक नरभक्षी शेर कुछ दिनों से आतंक मचा रहा है।






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नशे के सौदागरों पर पुलिस का शिकंजा, एक युवती समेत दो गिरफ्तार





प्रजा की सेवा करने में तत्पर नारायण सिंह ने तत्काल तलवार हाथ में लिए नरभक्षी शेर की ओर दौड़ पड़े।उन्होंने कुछ ही देर में शेर को मार गिराया।उनकी इस बहादुरी के लिए ब्रिटिश सरकार ने उन्हें वीर की पदवी से सम्मानित किया था।इस सम्मान के बाद से युवराज वीरनारायण सिंह बिंझवार के नाम से प्रसिद्ध हुए।






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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किया शहीद वीरनारायण सिंह को याद





मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (Chief Minister Bhupesh Baghel) उन्हें याद करते हुए कहा कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के गौरवशाली इतिहास में छत्तीसगढ़ के वीर सपूत शहीद वीर नारायण सिंह के बलिदान को हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि शहीद वीरनारायण सिंह छत्तीसगढ़ महतारी के सच्चे सपूत थे।






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वीर नारायण सिंह ने साल 1857 में देश के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में छत्तीसगढ़ की जनता में देशभक्ति की भावना जगाई थी।वहीं साल 1856 के भयानक अकाल के दौरान गरीबों को भूख से बचाने के लिए उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ कठिन संघर्ष किया और अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे। शहीद वीर नारायण सिंह के देश की आजादी, मातृभूमि के प्रति समर्प और बलिदान को हमेशा याद किया जाएगा।









शहादत दिवस पर छत्तीसगढ़ी फीचर फिल्म का प्रदर्शन





बता दें कि शहीद वीरनारायण सिंह के शहादत दिवस के मौके पर रायपुर नगर निगम द्वारा जरा याद करो कुर्बानी के अंतर्गत स्मरणांजलि कार्यक्रम में कला दर्पण कृत शहीद वीर नारायण सिंह छत्तीसगढ़ी फीचर फिल्म का प्रदर्शन किया गया है।यह कार्यक्रम आज शाम को 4 बजे होगा। निगम मुख्यालय भवन के चतुर्थ तल पर स्थित सामान्य सभा सभागार में यह कार्यक्रम रखा गया है। कार्यक्रम में महापौर एजाज ढेबर , सभापति प्रमोद दुबे की अध्यक्षता और नगर निगम लोककर्म विभाग अध्यक्ष ज्ञानेश शर्मा और संस्कृति विभाग अध्यक्ष आकाश तिवारी के उपस्थिति में होगा । मंच में कार्यक्रम का संचालन अनुराधा दुबे द्वारा किया जाएगा।





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शहीद वीरनारायण सिंह का जन्म साल 1795 को छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले के कसडोल विकासखंड के एक छोटे से गांव सोनाखान में हुआ था।उस वक्त वीरनारायण सिंह के पिता गांव के जमींदार हुआ करते थे।जानकारों के मुताबिक सोनाखान में वीरनारायण सिंह के पूर्वजों की 300 गांवों की जमींदारी थी।










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शहीद वीरनारायण सिंह का अपनी प्रजा के प्रति अटूट लगाव और प्रेम था।बता दें कि साल 1856 को सोनाखान में भीषण अकाल पड़ा था।उस समय सोनाखान की जनता दाने-दाने के लिए मोहताज हो गई थी।लोग भूख से मरने लगे थे।भूख से मर रही जनता का दुख वीरनारायण सिंह से देखा नहीं गया और उन्होंने कसडोल के साहूकारों का अनाज गोदाम लूटकर अपनी भूखी जनता में बंटवा दिया था।


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