Media24Media.com: गांधीनगर में वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम 2026 का शुभारंभ, भारत ने दुनिया के सामने रखा सतत विकास का मॉडल

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गांधीनगर में वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम 2026 का शुभारंभ, भारत ने दुनिया के सामने रखा सतत विकास का मॉडल

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गांधीनगर- केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल ने मंगलवार को गांधीनगर में वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम (WCEF) 2026 का उद्घाटन किया। 15 से 18 सितंबर तक आयोजित हो रहे इस वैश्विक सम्मेलन की थीम ‘Circular Economy: Transition for People and Prosperity’ यानी ‘सर्कुलर इकोनॉमी: लोगों और समृद्धि के लिए परिवर्तन’ है।

यह पहली बार है जब वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम का आयोजन दक्षिण एशिया में हो रहा है। सम्मेलन में दुनिया के 62 देशों से 3,600 से अधिक प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। इनमें उद्योग जगत के प्रतिनिधि, उद्यमी, स्टार्टअप्स, शोधकर्ता, नीति निर्माता, शिक्षाविद और पर्यावरण विशेषज्ञ शामिल हैं।

भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का प्रतीक है WCEF

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल ने कहा कि दक्षिण एशिया में पहली बार WCEF की मेजबानी भारत के बढ़ते वैश्विक नेतृत्व को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में Mission LiFE वैश्विक सर्कुलर इकोनॉमी की मजबूत नींव बन रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गुजरात ने विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन कायम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया है। उन्होंने भारतीय परंपराओं में मौजूद पुन: उपयोग और संसाधनों के संरक्षण की संस्कृति का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘कचरे से संपदा’ बनाने की सोच भारत की जीवनशैली का हिस्सा रही है।

‘सर्कुलर इकोनॉमी कोई नई मंजिल नहीं, सोचने का नया तरीका है’

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने अपने संबोधन में कहा कि भारत के लिए सर्कुलर इकोनॉमी कोई नई अवधारणा नहीं है, बल्कि यह पुरानी भारतीय सोच को नए नजरिए से देखने का तरीका है।

उन्होंने कहा कि भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं में लंबे समय से पुन: उपयोग, मरम्मत और संसाधनों के सम्मान की भावना रही है। पहले चीजों को बदलने के बजाय उनकी मरम्मत की जाती थी, फेंकने से पहले उनका दोबारा उपयोग किया जाता था और बेकार समझे जाने वाले संसाधनों को फिर से उपयोगी बनाया जाता था।

उन्होंने कहा कि विकास और पर्यावरण के बीच चुनाव करने की जरूरत नहीं है। बल्कि ऐसा विकास मॉडल तैयार करना होगा, जो संसाधनों का अधिक कुशल, टिकाऊ और लचीला इस्तेमाल सुनिश्चित करे।

83 हजार से अधिक उत्पादक और 4,802 रिसाइक्लर EPR के तहत पंजीकृत

भूपेंद्र यादव ने बताया कि सरकार ने सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए कई नियामकीय सुधार किए हैं। इनमें अलग-अलग क्षेत्रों के लिए मजबूत वेस्ट मैनेजमेंट नियम और Extended Producer Responsibility (EPR) व्यवस्था प्रमुख हैं।

उन्होंने बताया कि अगस्त 2026 तक विभिन्न EPR फ्रेमवर्क के तहत 83,000 से अधिक उत्पादक और 4,802 रिसाइक्लर पंजीकृत हो चुके हैं। वहीं, विभिन्न विनियमित वेस्ट स्ट्रीम के तहत करीब 482.24 लाख मीट्रिक टन कचरे का प्रसंस्करण किया जा चुका है।

‘कचरा उत्पाद की यात्रा का अंत नहीं, नए संसाधन चक्र की शुरुआत है’

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केवल कानून और नियमों से सर्कुलर इकोनॉमी का निर्माण नहीं किया जा सकता। इसके लिए लोगों की जीवनशैली और उपभोग की आदतों में भी बदलाव जरूरी है।

उन्होंने Lifestyle for Environment (LiFE) का उल्लेख करते हुए कहा कि सर्कुलर इकोनॉमी केवल रिसाइक्लिंग प्लांट से शुरू नहीं होती, बल्कि इसकी शुरुआत बाजार से होती है, यह घरों तक पहुंचती है और अंततः दैनिक जीवन की आदत बनती है।

उन्होंने जोर दिया कि कचरे को किसी उत्पाद की यात्रा का अंत नहीं, बल्कि नए संसाधन चक्र की शुरुआत के रूप में देखा जाना चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर जोर

भूपेंद्र यादव ने कहा कि कोई भी देश, कंपनी या समुदाय अकेले सर्कुलर इकोनॉमी का पूरा चक्र बंद नहीं कर सकता। इसके लिए ज्ञान, तकनीक, वित्त और जिम्मेदारी का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आदान-प्रदान जरूरी है।

उन्होंने भारत की अंतरराष्ट्रीय पहलों का उल्लेख करते हुए Resource Efficiency and Circular Economy Industry Coalition (RECEIC) का जिक्र किया, जिसे भारत की G20 अध्यक्षता के दौरान लॉन्च किया गया था।

फिनलैंड और नीदरलैंड ने भी साझा किए अनुभव

भारत में फिनलैंड के राजदूत मिको किविकोस्की ने कहा कि सर्कुलर इकोनॉमी केवल पर्यावरण से जुड़ा विषय नहीं, बल्कि विकास को देखने का एक मूलभूत तरीका है। उन्होंने बताया कि फिनलैंड 2035 तक संसाधनों की खपत को 2015 के स्तर से नीचे लाने के लक्ष्य पर काम कर रहा है।

नीदरलैंड की आर्थिक मामलों एवं जलवायु मंत्रालय की मारिके स्पाइकरबोयर ने कहा कि उनका देश 2050 तक पूरी तरह सर्कुलर इकोनॉमी की दिशा में आगे बढ़ने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। उन्होंने वैश्विक स्तर पर सर्कुलर वैल्यू चेन विकसित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को जरूरी बताया।

135 प्रदर्शकों ने प्रदर्शित किए सर्कुलर समाधान

WCEF 2026 के दौरान आयोजित प्रदर्शनी में 135 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शक अपने उत्पादों और व्यावहारिक सर्कुलर समाधान प्रदर्शित कर रहे हैं।

इस अवसर पर ‘Best Practices for Reuse of Treated Sewage’ और ‘Driving Sustainability – A Guide to India's Circular Economy and EPR Initiatives’ नामक दो प्रकाशनों का भी विमोचन किया गया।

62 देशों की भागीदारी, 3,600 से अधिक प्रतिनिधि

WCEF 2026 में 62 देशों के 3,600 से अधिक हितधारकों की भागीदारी इसे वैश्विक स्तर का महत्वपूर्ण मंच बना रही है। सम्मेलन का उद्देश्य सरकारों, उद्योगों, स्टार्टअप्स, शोध संस्थानों और नागरिक समाज के बीच सहयोग बढ़ाकर ऐसे समाधान विकसित करना है, जो आर्थिक विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूत करें।

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