Media24Media.com: VIMARSH 2026 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुरू कीं अहम रक्षा नीति पहल, MSME और डीप-टेक स्टार्टअप्स को मिलेगा बढ़ावा

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VIMARSH 2026 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुरू कीं अहम रक्षा नीति पहल, MSME और डीप-टेक स्टार्टअप्स को मिलेगा बढ़ावा

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नई दिल्ली- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित ‘VIMARSH 2026’ DRDO-इंडस्ट्री सिनर्जी मीट के दौरान रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कई महत्वपूर्ण नीति पहलों का शुभारंभ किया। इन पहलों का उद्देश्य देश के MSME, डीप-टेक स्टार्टअप्स और निजी उद्योगों को रक्षा अनुसंधान एवं उत्पादन से जोड़ना तथा भारत को रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाना है।

MSME और डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए आसान होगी एंट्री

नई नीति के तहत MSME और डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए तकनीकी और वित्तीय बाधाओं को कम करने के लिए एक व्यापक फ्रेमवर्क तैयार किया गया है। इसके माध्यम से कंपनियों को प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता, इनक्यूबेशन सपोर्ट और DRDO की परीक्षण सुविधाओं तक विशेष पहुंच उपलब्ध कराई जाएगी।

सरकार का लक्ष्य है कि छोटे उद्योग और नवाचार आधारित स्टार्टअप केवल रक्षा उत्पादों के आपूर्तिकर्ता न रहें, बल्कि अनुसंधान, डिजाइन, परीक्षण और विकास की पूरी प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनें।

DRDO के सॉफ्टवेयर तक उद्योगों की सुरक्षित पहुंच

DRDO द्वारा विकसित सॉफ्टवेयर के सोर्स कोड को लाइसेंस प्राप्त उद्योगों के साथ साझा करने के लिए एक मानकीकृत और सुरक्षित फ्रेमवर्क भी लॉन्च किया गया। इससे सॉफ्टवेयर आधारित रक्षा प्रणालियों के विकास में तेजी आने के साथ-साथ पुरानी तकनीकों को समय पर अपग्रेड करने और उनके अप्रचलन की समस्या से निपटने में मदद मिलेगी।

9 टेक्नोलॉजी ट्रांसफर समझौते, 13 कंपनियों को मिलेगा लाभ

कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री की मौजूदगी में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के लिए 9 लाइसेंसिंग एग्रीमेंट (LAToTs) 13 विनिर्माण भागीदारों को सौंपे गए। इन समझौतों के जरिए DRDO द्वारा विकसित अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियों और तकनीकों का व्यावसायिक उत्पादन संभव होगा।

SIDM और Laghu Udyog Bharati के साथ रणनीतिक MoU

रक्षा उद्योग तक पहुंच बढ़ाने और जमीनी स्तर पर छोटे उद्योगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए Society of Indian Defence Manufacturers (SIDM) और Laghu Udyog Bharati (LUB) के साथ रणनीतिक समझौते भी किए गए।

इसके अलावा DRDO ने Quality Council of India (QCI) के साथ SAMAR 2.0 (System for Advance Manufacturing Assessment and Rating) के लिए अनुबंध किया। इसके तहत देश की रक्षा कंपनियों की विनिर्माण क्षमता और तकनीकी परिपक्वता का आकलन किया जाएगा।

‘रक्षा उत्पादन’ से आगे बढ़कर पूरी वैल्यू चेन में साझेदारी पर जोर

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि DRDO और उद्योग के बीच सहयोग अब केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसे रिसर्च, डिजाइन, टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन और मैन्युफैक्चरिंग सहित पूरी वैल्यू चेन तक विस्तार देना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि DRDO के पास ज्ञान और तकनीक है, उद्योग के पास बड़े पैमाने पर उत्पादन की क्षमता है, स्टार्टअप्स नवाचार और तेजी लेकर आते हैं, जबकि देश का युवा नए भारत का सपना देखता है। इन चारों शक्तियों के एक साथ आगे बढ़ने से बड़े से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।

2047 तक महत्वपूर्ण तकनीकों में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य

राजनाथ सिंह ने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक रूप से मजबूत राष्ट्र बनना नहीं है, बल्कि भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर, सामाजिक रूप से समावेशी, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार और रणनीतिक रूप से सुरक्षित राष्ट्र बनाना भी है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक महत्वपूर्ण तकनीकों में आत्मनिर्भरता, स्वदेशी सामग्री में उल्लेखनीय वृद्धि, रक्षा निर्यात में कई गुना विस्तार और वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की मजबूत मौजूदगी सुनिश्चित करनी होगी।

AI, क्वांटम कंप्यूटिंग और हाइपरसोनिक तकनीक पर फोकस

नई पहलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग, हाइपरसोनिक तकनीक और डायरेक्टेड एनर्जी जैसी भविष्य की तकनीकों में निवेश और अनुसंधान को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि ड्रोन टेक्नोलॉजी, AI और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में MSME और स्टार्टअप भारत की तकनीकी एवं रणनीतिक क्षमता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं।

2,300 से अधिक टेक्नोलॉजी ट्रांसफर

रक्षा सचिव एवं DRDO के चेयरमैन राजेश कुमार सिंह ने बताया कि आत्मनिर्भरता की दिशा में किए गए प्रयासों से रक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया है। अब तक 2,300 से अधिक टेक्नोलॉजी ट्रांसफर 1,100 से अधिक उद्योगों को दिए जा चुके हैं।

उन्होंने बताया कि DRDO द्वारा विकसित करीब 50 मिसाइलों से संबंधित तकनीकों को भी उद्योगों के लिए उपलब्ध कराया गया है, ताकि निजी क्षेत्र की भागीदारी और बढ़ाई जा सके।

VIMARSH 2026 में 250 से अधिक उद्योग प्रतिनिधियों की भागीदारी

‘वार्ता से विकास (Varta se Vikas)’ थीम पर आधारित VIMARSH 2026 में 250 से अधिक रक्षा उद्योग प्रमुखों, उद्योग संगठनों के प्रतिनिधियों, वरिष्ठ सैन्य एवं नागरिक अधिकारियों और DRDO वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया।

कार्यक्रम में एयरोनॉटिकल सिस्टम, मिसाइल, आर्मामेंट, माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स और नेवल सिस्टम जैसे क्षेत्रों के तकनीकी रोडमैप पर भी चर्चा हुई।

आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग की दिशा में बड़ा कदम

VIMARSH 2026 को भारत के रक्षा उद्योग में सरकार, DRDO, बड़ी कंपनियों, MSME और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। सरकार का जोर अब रक्षा क्षेत्र में केवल आयात कम करने पर नहीं, बल्कि भारत को अत्याधुनिक तकनीक विकसित करने और वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में प्रमुख भूमिका निभाने वाला देश बनाने पर है।

रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि भविष्य के युद्धों में तकनीकी बढ़त ही रणनीतिक बढ़त तय करेगी, इसलिए आज नई और उभरती तकनीकों में निवेश करने वाली कंपनियां आने वाले समय में रक्षा क्षेत्र की अगुवाई करेंगी।

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