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स्वच्छता पखवाड़ा 2026: देशभर में स्वच्छता और जनजागरूकता की नई मिसाल, DBT के अभियान को मिली बड़ी सफलता

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नई दिल्ली- स्वच्छ भारत मिशन को नई गति देते हुए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) ने 1 मई से 15 मई 2026 तक देशव्यापी स्वच्छता पखवाड़ा 2026 का सफल आयोजन किया। इस दौरान नई दिल्ली स्थित विभागीय मुख्यालय के साथ-साथ सभी स्वायत्त संस्थानों और सार्वजनिक उपक्रमों में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए व्यापक अभियान चलाया गया।

पखवाड़े की शुरुआत 1 मई को नई दिल्ली के सीजीओ कॉम्प्लेक्स में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह से हुई, जिसमें अधिकारियों और कर्मचारियों ने स्वच्छ, स्वस्थ और जिम्मेदार भारत के निर्माण का संकल्प लिया। इस अवसर पर स्वच्छता को केवल एक अभियान नहीं बल्कि जन आंदोलन बनाने का संदेश दिया गया।

स्वच्छता के साथ पर्यावरण संरक्षण पर विशेष फोकस

पंद्रह दिनों तक चले इस अभियान में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गए। स्वास्थ्य जांच शिविर, पर्यावरण जागरूकता व्याख्यान, हस्ताक्षर अभियान, वृक्षारोपण कार्यक्रम, सिंगल-यूज प्लास्टिक के खिलाफ जागरूकता अभियान, तनाव प्रबंधन कार्यशालाएं और विभिन्न सेमिनारों के माध्यम से लोगों को स्वच्छ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

इसके अलावा "वेस्ट टू वेल्थ" प्रतियोगिता ने लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित किया, जिसमें बेकार वस्तुओं को उपयोगी उत्पादों में बदलने की कला को बढ़ावा दिया गया। जूट बैग वितरण और लकड़ी के पैकिंग मटेरियल से आकर्षक गमले तैयार करने जैसी गतिविधियों ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

स्कूलों और समुदायों तक पहुंचा अभियान

स्वच्छता पखवाड़ा केवल संस्थानों तक सीमित नहीं रहा। आसपास के सरकारी स्कूलों में शौचालयों और कक्षाओं के नवीनीकरण का कार्य किया गया। विद्यार्थियों के बीच निबंध, कविता और स्लोगन लेखन प्रतियोगिताएं आयोजित कर स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाई गई।

साथ ही प्रयोगशाला अपशिष्ट प्रबंधन (Laboratory Waste Management) पर विशेष व्याख्यान आयोजित कर वैज्ञानिक संस्थानों में सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल कार्यप्रणालियों को बढ़ावा दिया गया।

जनभागीदारी और श्रमदान को मिला बढ़ावा

अभियान के दौरान जल संरक्षण, स्वच्छता और श्रमदान को बढ़ावा देने वाली कई गतिविधियां आयोजित की गईं। बड़ी संख्या में कर्मचारियों, वैज्ञानिकों, छात्रों और स्थानीय लोगों ने भाग लेकर स्वच्छ भारत मिशन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई।

सर्वश्रेष्ठ संस्थानों को मिला सम्मान

पखवाड़े के दौरान किए गए कार्यों की समीक्षा वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा लगातार की गई। विभिन्न गतिविधियों और नवाचारों के आधार पर तीन संस्थानों को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए चुना गया।

स्वच्छता पखवाड़ा 2026 के विजेता संस्थान:

🥇 BRIC - National Institute of Animal Biotechnology (NIAB)

🥈 BRIC - National Agri-Food Biotechnology Institute (NABI)

🥉 BRIC - Institute of Bioresources and Sustainable Development (IBSD)

इन संस्थानों को 2 जून 2026 को आयोजित एक विशेष समारोह में जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव द्वारा सम्मानित किया गया।

देश को दिया स्वच्छता और जिम्मेदारी का संदेश

DBT के इस अभियान ने यह साबित किया कि स्वच्छता केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की भागीदारी से सफल होने वाला राष्ट्रीय आंदोलन है। स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने में यह पखवाड़ा एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ है।

मुख्य बिंदु:

✅ 1 से 15 मई तक चला स्वच्छता पखवाड़ा 2026
✅ देशभर के DBT संस्थानों में व्यापक आयोजन
✅ वृक्षारोपण, स्वास्थ्य शिविर और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
✅ स्कूलों में स्वच्छता और शिक्षा सुधार की पहल
✅ वेस्ट टू वेल्थ और प्लास्टिक मुक्त भारत पर विशेष जोर
✅ NIAB, NABI और IBSD बने सर्वश्रेष्ठ संस्थान

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर सीएसआईआर-सीआरआरआई और एएमएनएस इंडिया के बीच अनुसंधान समझौता

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राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर सीएसआईआर–केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (CSIR-CRRI) और इस्पात क्षेत्र की प्रमुख कंपनी आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया (AMNS India) के बीच एक अनुसंधान एवं विकास (R&D) समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते का उद्देश्य सड़क निर्माण में आयरन ओअर टेलिंग्स (Iron Ore Tailings) के उपयोग की संभावनाओं का अध्ययन करना है।

इस अवसर पर सीएसआईआर की महानिदेशक और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के डीएसआईआर की सचिव डॉ. एन. कलैसेल्वी ने कहा कि सड़क निर्माण में आयरन ओअर टेलिंग्स का उपयोग “खनन अपशिष्ट से हरित सड़कें (Mine Waste to Green Roads)” बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। उन्होंने बताया कि देश में ओडिशा, छत्तीसगढ़ और कर्नाटक में स्थित विभिन्न आयरन ओअर बेनिफिशिएशन संयंत्रों से हर वर्ष लगभग 18–20 मिलियन टन आयरन ओअर टेलिंग्स उत्पन्न होते हैं। इन टेलिंग्स को आमतौर पर बड़े बांधों में संग्रहित किया जाता है और इन्हें स्लाइम्स भी कहा जाता है, जो पर्यावरण और आर्थिक दृष्टि से चुनौतियां पैदा करते हैं।

इस R&D समझौते का उद्देश्य आयरन ओअर टेलिंग्स के प्रबंधन की समस्या का समाधान करना और सड़क निर्माण में प्राकृतिक एग्रीगेट्स की मांग को कम करना है। इस पहल के अंतर्गत CSIR-CRRI के वैज्ञानिक प्रयोगशाला परीक्षण, सामग्री का विश्लेषण और पेवमेंट डिज़ाइन अध्ययन करेंगे, ताकि सड़क की विभिन्न परतों में आयरन ओअर टेलिंग्स की उपयोगिता का आकलन किया जा सके।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. अरविंद बोधंकर, मुख्य सततता अधिकारी (Chief Sustainability Officer), AMNS इंडिया थे। उन्होंने कहा कि उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग परिपत्र अर्थव्यवस्था (Circular Economy) और टिकाऊ अवसंरचना के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह साझेदारी औद्योगिक उप-उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देकर देश के विकास में योगदान देगी।

सीएसआईआर-सीआरआरआई के निदेशक डॉ. च. रवि शेखर ने कहा कि संस्थान अगली पीढ़ी की टिकाऊ सड़क प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि AMNS इंडिया के साथ यह सहयोग सड़क निर्माण में आयरन ओअर टेलिंग्स के वैज्ञानिक परीक्षण और फील्ड प्रदर्शन को संभव बनाएगा, जिससे भारत सतत पेवमेंट प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपनी अग्रणी भूमिका और मजबूत करेगा।

इस पहल का नेतृत्व सीएसआईआर-सीआरआरआई के फ्लेक्सिबल पेवमेंट डिवीजन के प्रमुख श्री सतीश पांडे कर रहे हैं, जो स्टील स्लैग रोड टेक्नोलॉजी के आविष्कारक भी हैं। उन्होंने कहा कि अनुसंधान और प्रयोगशाला विश्लेषण के माध्यम से आयरन ओअर टेलिंग्स को सड़क निर्माण में अच्छी मिट्टी और प्राकृतिक एग्रीगेट्स के विकल्प के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस समारोह के दौरान सतत परिवहन अवसंरचना से संबंधित कई नवीन तकनीकों का भी प्रदर्शन किया गया। इनमें कृषि अपशिष्ट आधारित बायो-बिटुमेन, स्टील स्लैग आधारित ECOFIX त्वरित गड्ढा मरम्मत तकनीक, स्लैग और फ्लाई ऐश आधारित TERASURFACING तकनीक, तथा वेस्ट प्लास्टिक आधारित मॉड्यूलर जियोसेल जैसी तकनीकें शामिल हैं। इन तकनीकों का उद्देश्य सड़क निर्माण में परिपत्र अर्थव्यवस्था (Circular Economy) के सिद्धांतों को बढ़ावा देना है।

कार्यक्रम में AMNS इंडिया के वरिष्ठ अधिकारियों, CSIR-CRRI के वैज्ञानिकों, उद्योग प्रतिनिधियों, नीति-निर्माताओं और सड़क एवं इस्पात क्षेत्र से जुड़े कई हितधारकों ने भाग लिया। इस आयोजन ने भारत में सतत अवसंरचना विकास के लिए विज्ञान आधारित समाधानों के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया।

कृषि में सर्कुलर इकोनॉमी: भारत में कृषि कचरे से ऊर्जा और संसाधन बनाने की दिशा में बड़ा कदम

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भारत में बढ़ते कृषि और खाद्य अपशिष्ट (वेस्ट) की समस्या पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। देश में हर साल लगभग 35 करोड़ टन कृषि अपशिष्ट उत्पन्न होता है, जिसमें फसल अवशेष, भूसा, भूसी और खाद्य प्रसंस्करण के उप-उत्पाद शामिल हैं। सही प्रबंधन न होने पर यह अपशिष्ट वायु, जल और मिट्टी प्रदूषण का कारण बनता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के कृषि अवशेषों से 18,000 मेगावाट से अधिक ऊर्जा उत्पादन की क्षमता है। इसके अलावा, इनसे जैविक खाद भी बनाई जा सकती है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होती है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटती है।

सर्कुलर इकोनॉमी: कचरे से संसाधन बनाने की सोच

सर्कुलर इकोनॉमी का उद्देश्य कचरे को संसाधन में बदलना और प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग को कम करना है। यह मॉडल Reduce, Reuse, Recycle, Refurbish, Recover और Repair के सिद्धांतों पर आधारित है। अनुमान है कि 2050 तक भारत की सर्कुलर इकोनॉमी का बाजार मूल्य 2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है और 1 करोड़ नौकरियां पैदा होंगी।

कृषि अपशिष्ट के प्रमुख स्रोत

  • फसल अवशेष (स्टबल): जलाने से मिट्टी की उर्वरता घटती है और प्रदूषण बढ़ता है।

  • पशु अपशिष्ट: गोबर और अन्य अपशिष्ट से बायोगैस और जैविक खाद बनाई जा सकती है।

  • पोस्ट-हार्वेस्ट लॉस: भंडारण और परिवहन में खाद्य नुकसान।

  • फूड वेस्ट: घरों और बाजारों में खाद्य बर्बादी, जिससे ग्रीनहाउस गैसें बढ़ती हैं।

सरकारी पहलें: कचरे से संपदा (Waste-to-Wealth)

GOBARdhan योजना

सरकार गोबर, फसल अवशेष और खाद्य अपशिष्ट से कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) और जैविक खाद बनाने को बढ़ावा दे रही है। जनवरी 2026 तक देश के 51.4% जिलों में 979 बायोगैस प्लांट स्थापित हो चुके हैं।

फसल अवशेष प्रबंधन (CRM)

फसल अवशेष जलाने से रोकने के लिए मशीनों और कस्टम हायरिंग सेंटरों की स्थापना की गई है। अब तक 3.24 लाख से अधिक मशीनें किसानों को उपलब्ध कराई गई हैं।

एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF)

भंडारण, कोल्ड स्टोरेज और प्रोसेसिंग यूनिट्स के लिए 66,310 करोड़ रुपये के ऋण स्वीकृत किए गए हैं, जिससे कृषि मूल्य श्रृंखला मजबूत हुई है।

एनिमल हसबैंड्री इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (AHIDF)

पशुपालन क्षेत्र में 15,000 करोड़ रुपये का कोष निजी निवेश को बढ़ावा दे रहा है और जैविक खाद व बायोगैस उत्पादन को प्रोत्साहित कर रहा है।

जल शक्ति मिशन और जल पुन: उपयोग

जल शक्ति मंत्रालय घरेलू और औद्योगिक अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग को बढ़ावा दे रहा है, जिससे कृषि में पानी की उपलब्धता बढ़ेगी और भूजल पर दबाव कम होगा।

सतत विकास लक्ष्य (SDGs) से जुड़ा सर्कुलर कृषि मॉडल

सर्कुलर कृषि मॉडल SDG-2 (भूख समाप्ति और सतत कृषि) और मिट्टी स्वास्थ्य सुधार से जुड़ा है। कम्पोस्टिंग, बायोचार और बायोमास रीसाइक्लिंग से मिट्टी की उर्वरता और उत्पादन बढ़ता है।

निष्कर्ष

भारत में कृषि में सर्कुलर इकोनॉमी की दिशा में उठाए गए कदम पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास दोनों को संतुलित कर रहे हैं। सरकार की योजनाएं कृषि अपशिष्ट को ऊर्जा, जैविक खाद और रोजगार में बदल रही हैं। इससे खाद्य सुरक्षा, जल सुरक्षा और ग्रामीण विकास को मजबूती मिलने की उम्मीद है।


भारत ने ‘फार्म रिसिड्यू से रोड तक’ बायो-बिटुमेन तकनीक का सफल तकनीकी हस्तांतरण किया, स्वच्छ और हरित हाईवे की दिशा में कदम

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“आज का दिन भारत के इतिहास में दर्ज हो जाएगा, क्योंकि देश ‘स्वच्छ, हरित हाईवे’ के युग में प्रवेश कर रहा है, इसके साथ ही CSIR‑सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टिट्यूट (CSIR-CRRI), नई दिल्ली और CSIR‑इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ पेट्रोलियम, देहरादून (CSIR-IIP) द्वारा विकसित “Bio-Bitumen via Pyrolysis: फॉर्म रिसिड्यू से सड़क तक” तकनीक का सफलतापूर्वक तकनीकी हस्तांतरण हुआ।”

यह बात आज केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और CSIR उपाध्यक्ष, डॉ. जितेंद्र सिंह ने “Bio-Bitumen via Pyrolysis: फॉर्म रिसिड्यू से सड़क तक” तकनीकी हस्तांतरण समारोह को संबोधित करते हुए कही।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह दिन ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में याद रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि भारत के हाईवे अब जीव-आधारित, पुनर्योजी और सर्कुलर इकोनॉमी समाधान की ओर बढ़ रहे हैं। इस तकनीक से निर्मित सड़कें कम बजट में तैयार होंगी, अधिक टिकाऊ होंगी और पर्यावरणीय प्रदूषण से मुक्त होंगी।

उन्होंने इस पहल को “साइंस, सरकार और समाज का संयुक्त प्रयास” बताया, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विकसित भारत के लिए सुझाए गए Whole-of-Nation दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करता है।

मंत्री ने कहा कि बायो-बिटुमेन जैसी तकनीकें यह दर्शाती हैं कि वैज्ञानिक अनुसंधान सीधे राष्ट्रीय मिशनों जैसे स्वच्छता, आत्मनिर्भर भारत और आर्थिक स्वावलंबन में योगदान दे सकता है। उन्होंने कहा कि नवाचार को सही ढंग से संप्रेषित किया जाना चाहिए, ताकि इसे सभी हितधारक समझ सकें और अपनाएं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने आगे बताया कि CSIR की 37 प्रयोगशालाओं में कई सफलता की कहानियाँ हैं, और पिछले दशक में विज्ञान को नागरिकों, उद्योगों और राज्यों तक खुला करने पर जोर दिया गया है। उन्होंने बताया कि बायो-बिटुमेन कई चुनौतियों का समाधान एक साथ करता है – खेत की भूसी प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और आयात में कमी। वर्तमान में भारत अपनी बिटुमेन की लगभग 50% आवश्यकता आयात करता है, और बायो-बिटुमेन जैसी तकनीकें आयात पर निर्भरता कम करके घरेलू क्षमताओं को मजबूत करेंगी।

इस कार्यक्रम में फार्म रिसिड्यू के पायरोलिसिस से बायो-बिटुमेन का औद्योगिक स्तर पर तकनीकी हस्तांतरण प्रदर्शित किया गया। प्रक्रिया में धान की कटाई के बाद की भूसी का संग्रह, पैलेटाइजेशन, पायरोलिसिस के माध्यम से बायो-ऑइल का उत्पादन और फिर इसे पारंपरिक बिटुमेन के साथ मिश्रित करना शामिल है। विस्तृत प्रयोगशाला परीक्षणों में यह पाया गया कि पारंपरिक बिटुमेन का 20–30% सुरक्षित रूप से प्रतिस्थापित किया जा सकता है।

तकनीक का भौतिक, रियोलॉजिकल, रासायनिक और यांत्रिक परीक्षण किया गया, जिसमें रटिंग, क्रैकिंग, नमी से नुकसान और रेसिलिएंट मॉड्यूलस शामिल हैं। मेघालय के जोराबत–शिलांग एक्सप्रेसवे (NH-40) पर पहले ही 100 मीटर का ट्रायल स्ट्रेच सफलतापूर्वक बिछाया जा चुका है। इस तकनीक के लिए पेटेंट दायर किया गया है और कई उद्योगों को वाणिज्यिक कार्यान्वयन के लिए शामिल किया गया है।

मंत्री ने CSIR टीम को बधाई देते हुए बायो-बिटुमेन नवाचार को वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि इससे हर साल 25,000–30,000 करोड़ रुपये के बिटुमेन आयात को प्रतिस्थापित करने की आर्थिक क्षमता है। उन्होंने क्षेत्र-विशेष और संसाधन आधारित अनुसंधान पर भी जोर दिया।

मंत्री ने यह भी साझा किया कि उन्होंने सड़क निर्माण में स्टील स्लैग, वेस्ट प्लास्टिक और बायो-फ्यूल जैसी वैकल्पिक सामग्रियों के उपयोग का अनुभव किया है। उन्होंने कहा कि सिद्ध तकनीक, आर्थिक व्यवहार्यता, कच्चा माल उपलब्धता और बाज़ार योग्यता का सम्मिलन सफल विस्तार के लिए आवश्यक है। उन्होंने राष्ट्रीय हाईवे मानकों में बायो-बिटुमेन के समावेश के लिए पूर्ण संस्थागत समर्थन का आश्वासन दिया।

CSIR के महानिदेशक एवं DSIR सचिव, एन. कलाइसेल्वी ने कहा कि यह भारतीय विज्ञान के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने बताया कि भारत दुनिया का पहला देश बन गया है, जिसने बायो-बिटुमेन तकनीक को उसी वर्ष औद्योगिक और वाणिज्यिक स्तर पर ले जाने में सफलता प्राप्त की।

उन्होंने बताया कि बायोमास का पायरोलिसिस कई मूल्य श्रृंखलाएं उत्पन्न करता है – रोड के लिए बायो-बाइंडर, ऊर्जा-कुशल गैसीय ईंधन, बायो-पेस्टिसाइड फ्रैक्शन और बैटरियों, जल शुद्धिकरण और उन्नत सामग्री के लिए उच्च-ग्रेड कार्बन। यह प्रक्रिया उत्सर्जन-मुक्त, लागत-कुशल और भविष्य-तैयार है। उन्होंने नीति स्तर पर बायो-बिटुमेन के मिश्रण का सुझाव दिया ताकि इसे संपूर्ण भारत में लागू किया जा सके।

समारोह में CSIR-CRRI और CSIR-IIP के वरिष्ठ नेतृत्व, पूर्व निदेशक, वैज्ञानिक, उद्योग भागीदार और मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित थे, जो विज्ञान, सरकार और उद्योग के बीच मजबूत साझेदारी को दर्शाता है। यह तकनीकी हस्तांतरण कार्यक्रम भारत की सतत अवसंरचना, स्वदेशी नवाचार और बायो-आधारित आर्थिक भविष्य के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूती से स्थापित करता है, और देश को स्वच्छ, हरित और आत्मनिर्भर हाईवे की दिशा में अग्रसर करता है।


DPIIT ने विशेष अभियान 5.0 सफलतापूर्वक संपन्न किया, स्वच्छता और कार्यक्षमता में 100% लक्ष्य प्राप्त

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नई दिल्ली-भारत सरकार के उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) और इसकी संबद्ध संस्थाओं ने विशेष अभियान 5.0 को सफलतापूर्वक संपन्न किया, जिसे प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG) के समग्र मार्गदर्शन में लागू किया गया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य स्वच्छता के सिद्धांतों को संस्थागत बनाना और सभी कार्यालयों में लंबित मामलों का समय पर निपटान सुनिश्चित करना था।

इस अभियान के दौरान, DPIIT के अंतर्गत भारतीय रबर मटेरियल रिसर्च इंस्टिट्यूट (IRMRI) ने “Waste to Wealth” पहल को लागू किया। इस पहल में पुराने रबर स्क्रैप का उपयोग करके एक सड़क खंड और एक्सेस रोड का निर्माण किया गया। क्रम्ब रबर सीमेंट कंक्रीट (CRCC), जो सीमेंट कंक्रीट में 10–15% अपशिष्ट रबर कण मिलाकर तैयार किया गया, का उपयोग किया गया। इस नवाचारी मिश्रण ने सड़क की स्थायित्व और टिकाऊपन बढ़ाया और टायर निपटान की चुनौती का समाधान किया। सड़क के प्रदर्शन की मजबूती, लोच और टिकाऊपन वैज्ञानिक रूप से निगरानी की गई। यह पर्यावरण-हितैषी दृष्टिकोण सतत अवसंरचना के लिए दोहराने योग्य मॉडल प्रस्तुत करता है और अभियान की नवाचार और सर्कुलर अर्थव्यवस्था में प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

DPIIT ने अपने स्वच्छता लक्ष्यों में 100 प्रतिशत सफलता प्राप्त की, देशभर में 70 स्थानों पर फैले 500 स्वच्छता लक्ष्य इकाइयों (CTUs) पर अभियान चलाया। हर चिन्हित स्थल को सफलतापूर्वक कवर किया गया, जिससे विभाग की साफ-सुथरे और कुशल कार्यस्थलों के प्रति प्रतिबद्धता उजागर हुई।

स्वच्छता अभियान के अतिरिक्त, DPIIT ने अन्य महत्वपूर्ण मापदंडों में भी उल्लेखनीय प्रगति की। विभाग ने 1,572 भौतिक फाइलों की समीक्षा की (लक्ष्य का 100%), और 1,119 फाइलें हटा दीं, जिससे 11,235 वर्ग फुट कार्यालय स्थान मुक्त हुआ और ₹17,69,569 की आय स्क्रैप निपटान से प्राप्त हुई। सार्वजनिक शिकायत निवारण, अपील, ई-फाइल और भौतिक फाइलों की समीक्षा, और स्वच्छता अभियानों के मापदंडों में DPIIT ने लगभग 100% लक्ष्य पूर्णता हासिल की, जो जवाबदेही और प्रभावी रिकॉर्ड प्रबंधन पर विभाग की निरंतर प्राथमिकता को दर्शाता है। इसके साथ ही, कर्मचारियों की सुविधा और उत्पादकता बढ़ाने के लिए कार्यालय पर्यावरण में सुधार पर भी ध्यान केंद्रित किया गया।

अभियान 2 से 31 अक्टूबर 2025 तक आयोजित किया गया, जबकि 15 से 30 सितंबर 2025 तक इसकी तैयारी की गई थी। इस अवधि के दौरान DPIIT के प्रयासों ने स्वच्छता, व्यवस्थित रिकॉर्ड प्रबंधन और लंबित मामलों के त्वरित निपटान के प्रति जागरूकता बढ़ाई। लक्ष्यों की लगभग पूर्णता सुनिश्चित करके, DPIIT ने सरकारी कार्य में कुशलता, जवाबदेही और स्वच्छता की संस्कृति को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।

पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा ‘विशेष अभियान 5.0’ का सफल समापन, स्वच्छता और सतत विकास की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धियां

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पशुपालन एवं डेयरी विभाग (DAHD), मछली पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत, ने 2 से 31 अक्टूबर 2025 तक आयोजित ‘विशेष अभियान 5.0’ का सफल समापन किया। इस अभियान का उद्देश्य जन शिकायतों और अपीलों का निवारण, स्वच्छता अभियानों का संचालन, रिकॉर्ड प्रबंधन को सुदृढ़ बनाना और विभिन्न प्रमुख मानकों पर लक्ष्यों की प्राप्ति करना था।

इस अवधि में विभाग और इसके अधीनस्थ कार्यालयों द्वारा कई गतिविधियाँ आयोजित की गईं, जिनकी समीक्षा केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल ने की और संचालन नरेश पाल गंगवार, सचिव (DAHD) द्वारा किया गया। अभियान के दौरान दीवार चित्रण द्वारा सौंदर्यीकरण, वृक्षारोपण, स्वास्थ्य जांच शिविर, किसानों की संगोष्ठी, चित्रकला प्रतियोगिता, तथा “वेस्ट टू आर्ट” और “वेस्ट टू वेल्थ” जैसी पहलें आयोजित की गईं, जिससे कर्मचारियों में स्वच्छता और स्थिरता की भावना को संस्थागत रूप दिया जा सके।

विशेष अभियान 5.0 के प्रमुख उपलब्धियां :

क्रमांक      पैरामीटर                                             लक्ष्य                       उपलब्धि
1 जन शिकायतें                                        214 302
2 जन शिकायत अपील 35 43
3 संसदीय आश्वासन 5 5
4 राज्य सरकार संदर्भ 8 8
5 पीएमओ संदर्भ 3 3
6 नियमों/प्रक्रियाओं का सरलीकरण 1 1
7 भौतिक फाइलों की समीक्षा 24,645 30,020
8 भौतिक फाइलों का निष्पादन 22,648 22,648
9 ई-फाइलों की समीक्षा 680 680
10 ई-फाइलों का समापन 182 182
11 स्वच्छता स्थलों की संख्या 221 237
12 सांसदों से प्राप्त संदर्भ 15 11
13 कबाड़ की नीलामी से प्राप्त राजस्व ₹5,86,973
14 निष्पादन से मुक्त स्थान (वर्ग फुट में) 5,334

सर्वश्रेष्ठ पहल: कबाड़ लोहे से निर्मित गाय की प्रतिमा

सेंट्रल कैटल ब्रीडिंग फार्म (CCBF), चिपलिमा, संबलपुर (ओडिशा) — जो DAHD के अधीनस्थ कार्यालयों में से एक है — ने कबाड़ लोहे का उपयोग करते हुए गाय की एक आकर्षक प्रतिमा बनाई। यह प्रतिमा न केवल पशुधन के प्रति सम्मान का प्रतीक है, बल्कि “वेस्ट टू आर्ट” की भावना को भी दर्शाती है। यह पहल पर्यावरण संरक्षण और संसाधन दक्षता को बढ़ावा देने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

देशभर में आयोजित प्रमुख गतिविधियों की झलकियाँ :

  • सेंट्रल कैटल ब्रीडिंग फार्म, चिपलिमा (ओडिशा) द्वारा सौरा चित्रकला (ओडिशा की पारंपरिक जनजातीय कला) के माध्यम से दीवार चित्रण।

  • सेंट्रल एनिमल ब्रीडिंग फार्म, सुनाबेड़ा द्वारा स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन मेडिकल कॉलेज, कोरापुट के सहयोग से।

  • रीजनल फॉडर स्टेशन, श्रीगंगानगर (राजस्थान) द्वारा जैविक अपशिष्ट और सूखे पत्तों से कम्पोस्ट खाद तैयार करने की पहल।

  • एनिमल क्वारंटाइन एंड सर्टिफिकेशन सर्विस, हैदराबाद द्वारा सरकारी प्राथमिक विद्यालय, थुक्कुगुड़ा में स्वच्छता पर चित्रकला प्रतियोगिता।

  • किसानों की संगोष्ठी “क्लीन मिल्क प्रोडक्शन” विषय पर तीन कृषि विज्ञान केंद्रों में आयोजित।

  • आरएफएस चेन्नई द्वारा “एक पेड़ माँ के नाम” वृक्षारोपण और कार्यालय स्वच्छता अभियान।

  • एनिमल हस्बेंड्री सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, हेसरघट्टा (बेंगलुरु) द्वारा स्वच्छ दूध उत्पादन पर जागरूकता शिविर।

  • सुनाबेड़ा (ओडिशा) के पाल्मा गाँव में टीकाकरण, पशु स्वच्छता और स्वच्छ पर्यावरण पर किसानों के लिए जनजागरूकता अभियान।

यह अभियान न केवल स्वच्छता और दक्षता की दिशा में एक सशक्त कदम है, बल्कि “स्वच्छता ही सेवा” के संकल्प को साकार करने का एक प्रेरक उदाहरण भी प्रस्तुत करता है।

विशेष अभियान 5.0 के सफल समापन पर कोयला मंत्रालय और उसके उपक्रमों द्वारा उल्लेखनीय उपलब्धियां

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विशेष अभियान 5.0 के सफल समापन के उपरांत, कोयला मंत्रालय और इसके अधीन सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) ने तैयारियों के दौरान पहचानी गई विभिन्न गतिविधियों को व्यापक स्तर पर लागू किया।

क्रियान्वयन चरण (2 से 31 अक्टूबर, 2025) के दौरान, मंत्रालय ने अपने निर्धारित लक्ष्यों को उल्लेखनीय रूप से पार करते हुए ₹56,85,76,462 का राजस्व अर्जित किया और कुल 1,28,527 फाइलों का निष्पादन / निराकरण किया।
मंत्रालय ने डिजिटल माध्यमों में भी सक्रिय उपस्थिति दर्ज की — 3,107 ट्वीट्स और 28 प्रेस विज्ञप्तियां अभियान पोर्टल पर अपलोड की गईं, जो प्रभावी संचार और जागरूकता का उदाहरण हैं।

  • क्रमांक
  • पैरामीटर
  • लक्ष्य
  • उपलब्धि
  • उपलब्धि%
  • 1
  • स्वच्छता अभियान स्थल
  • 1,439
  • 1,741
  • 121
  • 2
  • स्वच्छता अभियान के अंतर्गत साफ की गई क्षेत्रफल (वर्ग फुट)
  • 82,51,511
  • 1,12,89,378
  • 137
  • 3
  • कबाड़ निस्तारण (मीट्रिक टन)
  • 8,678
  • 14,017
  • 162
  • 4
  • सांसद संदर्भ
  • 4
  • 4
  • 100
  • 5
  • आंतरिक निगरानी समिति संदर्भ
  • 2
  • 2
  • 100
  • 6
  • जन शिकायतें
  • 166
  • 166
  • 100
  • 7
  • पीएमओ संदर्भ
  • 61
  • 61
  • 100
  • 8
  • भौतिक फाइलों की समीक्षा
  • 1,23,830
  • 1,90,841
  • 154
  • 9
  • ई-फाइलों की समीक्षा
  • 32,182
  • 65,637
  • 203

विशेष अभियान 5.0 की प्रमुख सर्वोत्तम प्रथाएं

  1. लघु फिल्म – “एक कदम बदलाव की ओर” (भारत कोकिंग कोल लिमिटेड)
    – चंच विक्टोरिया क्षेत्र, BCCL द्वारा निर्मित इस प्रेरणादायक फिल्म में स्वच्छता, अनुशासन और टीमवर्क की शक्ति को दर्शाया गया है।
  2. योग एवं ध्यान कक्ष – कोल इंडिया लिमिटेड (CIL)
    – सीआईएल के आवासीय परिसर में योग और ध्यान केंद्र स्थापित किया गया, जिससे कर्मचारियों के स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन को बढ़ावा मिला।


  3. महिला-नेतृत्व वाला लागत एवं बजट अनुभाग – वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL)
    – मुख्यालय में पूर्णतः महिलाओं द्वारा संचालित यह अनुभाग वित्तीय निर्णयों में महिला सशक्तिकरण का उत्कृष्ट उदाहरण है।
  4. कचरे से मूर्तिकला – सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL)
    – 0.2 टन गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरे से 7 फुट ऊँची कोयला खनिक की मूर्ति तैयार की गई, जो रचनात्मकता और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक है।
  5. वेस्ट टू आर्ट प्रतियोगिता – महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (MCL)
    – छात्रों ने ‘कम करें, पुनः उपयोग करें, पुनर्चक्रण करें’ के संदेश को कला के माध्यम से अभिव्यक्त किया।


  6. स्क्रैप टू सर्विस – ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL)
  7. – निष्क्रिय अस्पताल के उपयोगी सामानों को NGO भारत सेवाश्रम संघ को दान किया गया, जिससे सामाजिक कल्याण को बढ़ावा मिला।

  8. स्वच्छता जागरूकता हेतु नुक्कड़ नाटक – भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL)
    – कार्यस्थल और समुदायों में स्वच्छता पर आधारित नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया।

  9. वैज्ञानिक खदान समापन
    – स्वतंत्रता के बाद पहली बार, 11 कोयला खदानों को वैज्ञानिक तरीके से बंद किया गया। FY 2025–26 में 22 और खदानें बंद की जाएंगी।

  10. औद्योगिक कबाड़ से फेंसिंग निर्माण – सीसीएल
    – पुराने गियर, स्प्रॉकेट आदि से सुंदर फेंसिंग और हरित क्षेत्र विकसित किया गया।

  11. LIVES फ्रेमवर्क का शुभारंभ
    – खनन प्रभावित क्षेत्रों के पुनः उपयोग एवं सतत विकास हेतु तकनीकी, पारिस्थितिक और सामुदायिक पहलुओं को एकीकृत करने वाला ढांचा।

  12. ARTHA फ्रेमवर्क
    – हरित वित्त जुटाने के लिए व्यावहारिक पांच-चरणीय दृष्टिकोण (Align–Rank–Target–Harness–Adapt)।

  13. “सेवार्थ” – सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए डिजिटल PRMB सेल (ECL)
    – केवल महिला कर्मचारियों द्वारा संचालित, यह केंद्र मानव-स्पर्श के साथ डिजिटल चिकित्सा प्रतिपूर्ति सेवा प्रदान करता है।

विशेष अभियान 5.0 के ये उपलब्धियां पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और सुशासन के प्रति मंत्रालय की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। पर्यावरणीय उत्तरदायित्व को संचालन तंत्र में एकीकृत करते हुए, कोयला मंत्रालय दक्षता बढ़ाने और स्वच्छ, सतत कोयला क्षेत्र के निर्माण के लिए सतत प्रयासरत है।

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प्लास्टिक कचरे के बदले भोजन देने वाली अनोखी पहल ‘गार्बेज कैफे’ को देशभर में मिली पहचान

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प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ में कहा – नगर निगम अंबिकापुर के प्लास्टिक मुक्त संकल्प से बदली शहर की तस्वीर

‘मन की बात’ में छत्तीसगढ़ के नवाचारों और माओवाद उन्मूलन के संकल्प का उल्लेख प्रदेशवासियों के लिए गौरव की बात : मुख्यमंत्री साय

प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़ के माओवाद प्रभावित इलाके में देशी श्वान की उपलब्धि का किया जिक्र – विस्फोटक का पता लगाकर की जवानों की सुरक्षा

रायपुर-मन की बात’ कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के नवाचारों और माओवाद उन्मूलन के संकल्प का उल्लेख होना प्रदेशवासियों के लिए गौरव की बात है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अंबिकापुर के ‘गार्बेज कैफे’ और भारतीय नस्ल के श्वानों की उपलब्धि का विशेष उल्लेख किए जाने पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे पूरे प्रदेश के लिए सम्मान बताया। मुख्यमंत्री ने आज राजधानी रायपुर के शांति नगर में ‘मन की बात’ के 127वें संस्करण का श्रवण किया।

मुख्यमंत्री साय ने छठ पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ‘मन की बात’ देशभर में हो रहे नवाचारी, प्रेरणादायी और जनहितकारी कार्यों को जोड़ने वाला एक विशेष मंच है, जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने वालों प्रयासों को राष्ट्रीय पहचान दिलाता है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ का उल्लेख होना प्रत्येक नागरिक के लिए गर्व का विषय है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंबिकापुर नगर निगम की अनूठी पहल ‘गार्बेज कैफे’ की सराहना की, जिसने प्लास्टिक मुक्त शहर की दिशा में एक मिसाल कायम की है। यहाँ प्लास्टिक कचरा देने वालों को भोजन उपलब्ध कराया जाता है — यह पहल स्वच्छता, पुनर्चक्रण और सामाजिक संवेदना का अद्भुत उदाहरण बन चुकी है।अम्बिकापुर में शहर से प्लास्टिक कचरा साफ करने के लिए एक अनोखी पहल की गई है। अम्बिकापुर में गार्बेज कैफे चलाए जा रहे हैं। ये ऐसे कैफे हैं, जहाँ प्लास्टिक कचरा लेकर जाने पर भरपेट खाना खिलाया जाता है। अगर कोई व्यक्ति एक किलो प्लास्टिक लेकर जाए उसे दोपहर या रात का खाना मिलता है और कोई आधा किलो प्लास्टिक ले जाए तो नाश्ता मिल जाता है। ये कैफे अम्बिकापुर म्युनिसिपल कॉरपोरेशन चलाता है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री ने त्योहारों की बढ़ी रौनक, सामाजिक एकता के प्रतीक छठ पर्व और नए आत्मविश्वास से आगे बढ़ते भारत की भावना का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि माओवादी गतिविधियों के सिमटते प्रभाव पर गर्व का अनुभव होता है। डबल इंजन की सरकार के मजबूत संकल्प से देश में शांति और सुरक्षा की दिशा में उल्लेखनीय परिणाम मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि नियद नेल्ला नार योजना के माध्यम से अब मूलभूत सुविधाएं सुदूर गाँवों तक पहुँच रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने हर भारतीय को गर्व से भर दिया है। इस बार उन इलाकों में भी खुशियों के दीप जले हैं, जहाँ कभी माओवादी आतंक का अंधेरा छाया रहता था। उन्होंने कहा कि लोग उस माओवादी आतंक का जड़ से खात्मा चाहते हैं जिसने उनके बच्चों के भविष्य को संकट में डाल दिया था।

मुख्यमंत्री साय ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री ने सुरक्षा एजेंसियों में भारतीय नस्ल के श्वानों को शामिल किए जाने के निर्णय की भी सराहना की। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के माओवाद प्रभावित क्षेत्र में एक देशी श्वान ने 8 किलो विस्फोटक का पता लगाकर जवानों की जान बचाई। यह सिद्ध करता है कि भारतीय नस्ल के श्वान अधिक अनुकूल, दक्ष और विश्वसनीय हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रकृति संरक्षण पर भी विशेष जोर देते हुए सभी नागरिकों से पेड़ लगाने का आग्रह किया और ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान से जुड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि पर्यावरणीय नवाचारों को जनआंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री ने ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूर्ण होने पर इसे उत्सव के रूप में मनाने का आह्वान किया। उन्होंने इसे राष्ट्रप्रेम की अमर अभिव्यक्ति बताते हुए प्रत्येक नागरिक से इसके गौरवगान में स्वस्फूर्त रूप से सहभागिता करने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भगवान बिरसा मुंडा के पुण्य स्मरण के साथ जनजातीय अधिकारों और स्वतंत्रता संग्राम में उनके सर्वोच्च योगदान को नमन किया। उन्होंने कहा कि जनजातीय गौरव दिवस उन महान जननायकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिवस है, जिन्होंने देश की आज़ादी और सम्मान के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री ने देशवासियों से अपील की है कि वे अपने आसपास हो रहे नवाचारों और सकारात्मक प्रयासों को अवश्य साझा करें, ताकि अन्य लोग भी उनसे प्रेरणा लेकर समाजहित में योगदान दे सकें।

मुख्यमंत्री ने पुंगनूर नस्ल की गायों को खिलाया चारा

‘मन की बात’ कार्यक्रम के उपरांत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पुंगनूर नस्ल की गायों को चारा खिलाया और उनकी विशेषताओं की जानकारी ली। उल्लेखनीय है कि आंध्र प्रदेश में पाई जाने वाली यह विशेष नस्ल अपनी अनूठी शारीरिक बनावट और विशिष्ट गुणों के कारण प्रसिद्ध है।

कार्यक्रम में विधायक पुरन्दर मिश्रा, छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल, छत्तीसगढ़ माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष शंभूनाथ चक्रवर्ती, छत्तीसगढ़ अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत छाबड़ा सहित अनेक जनप्रतिनिधिगण भी उपस्थित थे।


कोयला मंत्रालय का विशेष अभियान 5.0: स्वच्छता और सुशासन की दिशा में बड़ा कदम

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नई दिल्ली- कोयला मंत्रालय सरकार के कार्यालयों में स्वच्छता को संस्थागत रूप देने और लंबित मामलों के निस्तारण के उद्देश्य से विशेष अभियान 5.0 के लिए व्यापक तैयारियाँ कर रहा है। यह अभियान 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2025 तक आयोजित होगा, जिसका मुख्य उद्देश्य कार्यस्थल पर स्वच्छता बढ़ाना, सतत् प्रथाओं को अपनाना और लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी लाना है।

वर्तमान में चल रहा तैयारी चरण 15 सितम्बर से 30 सितम्बर 2025 तक जारी रहेगा। इस दौरान 26.08.2025, 04.09.2025 और 19.09.2025 को नोडल व संबंधित अधिकारियों के साथ तीन तैयारी बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं, ताकि अभियान के उद्देश्यों के प्रति जागरूकता को मजबूत किया जा सके।

मंत्रालय, अपनी सीपीएसई (CPSEs), सीसीओ (CCO) और सीएमपीएफओ (CMPFO) के साथ मिलकर स्वच्छता अभियान स्थलों की पहचान कर रहा है, कबाड़ और अनुपयोगी वस्तुओं का निपटान कर रहा है, लंबित संदर्भों, शिकायतों और अपीलों का समाधान कर रहा है। इसके साथ ही कार्यालय स्थान का बेहतर उपयोग, अभिलेख प्रबंधन, दक्षता और पारदर्शिता को सुदृढ़ किया जा रहा है।

18.09.2025 को मंत्रालय अधिकारियों ने लोक नायक भवन स्थित रिकॉर्ड रूम का निरीक्षण किया। यहाँ फाइलों की व्यापक समीक्षा और व्यवस्थित श्रेणीकरण पर जोर दिया गया। अनुपयोगी और अप्रासंगिक अभिलेखों की समय पर छंटाई की जा रही है, जिससे कार्यालय में उपयोगी स्थान मुक्त होगा और कार्यक्षमता बढ़ेगी।

विशेष अभियान 5.0 के तहत कोयला मंत्रालय व सीपीएसई द्वारा की गई प्रमुख पहलें:

  • सीआईएल (CIL) ने कोलकाता के कुमारटुली में नुक्कड़ नाटक आयोजित किया, जिसका उद्देश्य स्वच्छता, पर्यावरण जागरूकता और सामुदायिक जिम्मेदारी पर संदेश देना था।

  • एनसीएल (NCL) झिंगुरदा क्षेत्र में सफाई मित्र सुरक्षा शिविर आयोजित हुआ, जिससे सफाई मित्रों के स्वास्थ्य व सुरक्षा को बढ़ावा मिला।

  • बीसीसीएल (BCCL, झारखंड) के कुसुंडा क्षेत्र, एसईसीएल मुख्यालय (छत्तीसगढ़), डब्ल्यूसीएल (WCL) नागपुर के मंजरी क्षेत्र में रंगोली प्रतियोगिता और मजरी एवं वानी क्षेत्रों में बच्चों की पेंटिंग प्रतियोगिताएँ आयोजित हुईं। इन रचनात्मक पहलों ने समुदाय की भागीदारी को बढ़ावा दिया और "स्वच्छ भारत" के प्रति प्रतिबद्धता प्रदर्शित की।

24 सितम्बर 2025 तक की उपलब्धियाँ:

  • स्वच्छता के लिए चिन्हित स्थल – 1165

  • कबाड़ निपटान की मात्रा – 7091 मीट्रिक टन

  • समीक्षा हेतु भौतिक फाइलें – 1,10,026

  • समीक्षा हेतु ई-फाइलें – 28,211

तैयारी चरण 30 सितम्बर 2025 तक जारी रहेगा, इसलिए इन संख्याओं में और वृद्धि की उम्मीद है।

कोयला मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वह विशेष अभियान 5.0 के माध्यम से बेहतर स्वच्छता, सुचारु अभिलेख प्रबंधन और प्रशासनिक दक्षता हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है।



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