Media24Media.com: कोटा निकाय चुनाव में BJP का बहुमत, 100 में 55 वार्डों पर जीत; EVM गड़बड़ी से 3 वार्डों के नतीजे अटके, 16 सितंबर को पुनर्मतदान

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कोटा निकाय चुनाव में BJP का बहुमत, 100 में 55 वार्डों पर जीत; EVM गड़बड़ी से 3 वार्डों के नतीजे अटके, 16 सितंबर को पुनर्मतदान

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कोटा- राजस्थान के शहरी निकाय चुनाव में कोटा नगर निगम का परिणाम राजनीतिक रूप से भाजपा के लिए बड़ी सफलता लेकर आया है। 100 सदस्यीय कोटा नगर निगम में भाजपा ने 55 वार्डों में जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। कांग्रेस को 40 वार्डों में जीत मिली, जबकि तीन वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी विजयी रहे।

हालांकि, चुनाव परिणाम के बीच EVM में तकनीकी खराबी ने प्रक्रिया को कुछ समय के लिए रोक दिया। कोटा नगर निगम के वार्ड 11, 44 और 87 के परिणामों को रोक दिया गया है। इसके अलावा सुकेत नगरपालिका के वार्ड 4 के एक मतदान केंद्र पर भी EVM संबंधी समस्या सामने आई। प्रभावित स्थानों पर 16 सितंबर को पुनर्मतदान कराया जाएगा और 17 सितंबर को मतगणना प्रस्तावित है। 

55 सीटों के साथ भाजपा ने हासिल किया बहुमत

कोटा नगर निगम में कुल 100 वार्ड हैं और बहुमत के लिए 51 सीटों की जरूरत होती है। भाजपा ने 55 सीटों पर जीत दर्ज कर इस आंकड़े को पार कर लिया। कांग्रेस को 40 सीटें मिलीं, जबकि निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी कुछ वार्डों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।

इस परिणाम के साथ कोटा नगर निगम में भाजपा का बोर्ड बनना लगभग तय माना जा रहा है। हालांकि, जिन वार्डों में पुनर्मतदान होना है, वहां अंतिम परिणाम और उसके बाद होने वाली पदाधिकारियों की चुनावी प्रक्रिया को लेकर स्थिति पुनर्मतदान के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।

EVM खराबी के कारण तीन वार्डों के परिणाम रोके गए

मतगणना के दौरान कोटा के वार्ड 11, 44 और 87 की EVM मशीनों में तकनीकी समस्या सामने आई। मशीनों से संबंधित समस्या के चलते इन वार्डों के परिणाम तत्काल घोषित नहीं किए जा सके। अधिकारियों के आदेश के बाद संबंधित मशीनों को सुरक्षित रखा गया और निर्वाचन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए आयोग से निर्देश लिए गए। 

आधिकारिक आदेश के अनुसार, प्रभावित मतदान केंद्रों पर 16 सितंबर को दोबारा मतदान होगा। इसके बाद 17 सितंबर को मतगणना कर परिणाम घोषित किए जाएंगे।

वार्ड 87 को लेकर कांग्रेस का विरोध

EVM विवाद के बीच वार्ड 87 का मामला विशेष रूप से चर्चा में रहा। कांग्रेस प्रत्याशी लक्ष्मी शर्मा ने परिणाम घोषित नहीं होने के विरोध में मतगणना केंद्र के बाहर धरना दिया। उनके साथ पार्टी की स्थानीय नेता शालिनी गौतम और युवा कांग्रेस नेता शुभम गोचर भी मौजूद रहे।

कांग्रेस की ओर से चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की गई। बाद में कोटा कांग्रेस अध्यक्ष राखी गौतम भी मतगणना केंद्र पहुंचीं और संबंधित EVM को कलेक्टर तथा ADM की मौजूदगी में सील करने की मांग की। अधिकारियों ने मामले की रिपोर्ट निर्वाचन आयोग को भेजी। 

ध्यान रहे कि कांग्रेस नेताओं द्वारा लगाए गए गड़बड़ी के आरोप राजनीतिक आरोप हैं; उपलब्ध रिपोर्टों में निर्वाचन अधिकारियों ने इसे EVM की तकनीकी खराबी के रूप में दर्ज किया है।

कई दिग्गजों ने भी दर्ज की जीत

कोटा के चुनाव परिणाम में भाजपा के कई पुराने नेताओं ने अपनी पकड़ बरकरार रखी। वार्ड 54 से भाजपा के विवेक राजवंशी ने लगातार चौथी बार जीत दर्ज की। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी मनीष को 2,226 मतों के अंतर से हराया।

इसी तरह भाजपा के गोपाल राम मांडा ने लगातार पांचवीं बार जीत दर्ज की। उन्होंने कांग्रेस के संजय यादव को 899 मतों से पराजित किया। 

हालांकि, कुछ वार्डों में कांग्रेस और निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी भाजपा को कड़ी चुनौती दी। वार्ड 86 में युवा कांग्रेस के अर्पित जैन ने भाजपा के पूर्व उप महापौर योगेंद्र खींची को 250 मतों से हराया। वहीं वार्ड 71 में निर्दलीय प्रत्याशी वंदना फौजदार ने भाजपा की मीनाक्षी सेन को 160 मतों से मात दी। 

अब आगे क्या?

EVM से प्रभावित वार्डों में पुनर्मतदान के बाद ही कोटा नगर निगम की चुनावी प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त होगी। 16 सितंबर को पुनर्मतदान और 17 सितंबर को मतगणना के बाद इन वार्डों के अंतिम परिणाम सामने आएंगे। इसके बाद नगर निगम में सभापति/महापौर सहित संबंधित पदों के चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। 

राजस्थान की राजनीति में भी महत्वपूर्ण परिणाम

कोटा का परिणाम राजस्थान के व्यापक शहरी निकाय चुनावों के बीच सामने आया है। राज्य के 309 शहरी निकायों में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भाजपा ने 4,179 वार्ड, कांग्रेस ने 3,613 वार्ड और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 2,273 वार्ड जीते हैं। कई निकायों में निर्दलीय उम्मीदवारों की भूमिका भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।

कुल मिलाकर, कोटा में भाजपा की 55 वार्डों की जीत ने पार्टी को स्पष्ट बढ़त दिला दी है, लेकिन EVM तकनीकी विवाद के कारण तीन वार्डों का अंतिम फैसला अब पुनर्मतदान के बाद होगा।

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