Media24Media.com: #MissionLiFE

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #MissionLiFE. Show all posts
Showing posts with label #MissionLiFE. Show all posts

स्वच्छता पखवाड़ा 2026: न्याय विभाग की स्वच्छ, स्वस्थ और सतत भारत की पहल

No comments Document Thumbnail

न्याय विभाग द्वारा 1 अप्रैल से 15 अप्रैल 2026 तक स्वच्छता पखवाड़ा 2026 का आयोजन किया गया, जिसके अंतर्गत अधिकारियों और कर्मचारियों के व्यक्तिगत एवं पेशेवर जीवन में स्वास्थ्य, स्वच्छता, व्यक्तिगत स्वच्छता और मानसिक कल्याण के प्रति जागरूकता बढ़ाने हेतु विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया।

पखवाड़े के दौरान 02.04.2026 को सभी के लिए आधे घंटे का योग सत्र आयोजित किया गया, जिससे कर्मचारियों को योग को अपनी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया गया। इस सत्र का उद्देश्य स्वच्छता, स्वास्थ्य और समग्र कल्याण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करना था।

09.04.2026 को विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए हिंदी निबंध लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें स्वच्छता और स्वच्छ जीवनशैली पर अपने विचार व्यक्त करने का अवसर प्रदान किया गया।

10.04.2026 को जैसलमेर हाउस परिसर में श्रमदान गतिविधि का आयोजन किया गया, जिसके पश्चात नीरज वर्मा, सचिव (न्याय) के मार्गदर्शन में वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। इस अवसर पर सचिव (न्याय) ने स्वच्छ, हरित और सतत पर्यावरण के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया तथा अधिकारियों को अपने आसपास भी वृक्षारोपण के लिए प्रेरित किया।

इसी दिन अधिकारियों/कर्मचारियों के बच्चों के लिए स्वच्छता विषय पर चित्रकला प्रतियोगिता भी आयोजित की गई, जिसमें बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

13.04.2026 को विभाग द्वारा iGOT Mission LiFE (Lifestyle for Environment) पर एक सत्र आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के लिए दैनिक जीवन में सतत आदतों को अपनाने के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। इस सत्र में ‘यूज़ एंड डिस्पोज़’ अर्थव्यवस्था के स्थान पर ‘सर्कुलर इकोनॉमी’ को अपनाने और ‘प्रो-प्लैनेट पीपल’ के रूप में जिम्मेदारी निभाने पर जोर दिया गया।

स्वच्छता पखवाड़ा के दौरान 14 अप्रैल 2026 को भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर उनके प्रतिमा पर माल्यार्पण समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर अर्जुन राम मेघवाल, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), विधि एवं न्याय मंत्रालय ने जैसलमेर हाउस परिसर में स्थित डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। साथ ही नीरज वर्मा, सचिव (न्याय), पूर्व सचिवों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी।

इन सभी गतिविधियों में अधिकारियों और कर्मचारियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली, जिससे कार्यस्थलों और समाज में स्वच्छता और स्वच्छता के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी की भावना और मजबूत हुई। पखवाड़े के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार भी प्रदान किए गए।


न्याय विभाग स्वच्छ भारत मिशन के आदर्शों के प्रति प्रतिबद्ध है और भविष्य में भी स्वच्छता एवं सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए इस प्रकार की पहल, अभियान और गतिविधियाँ जारी रखेगा।

विश्व ध्यान दिवस समारोह में उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने ध्यान की वैश्विक प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला

No comments Document Thumbnail

भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज तेलंगाना के कान्हा शांति वनम में आयोजित विश्व ध्यान दिवस समारोह में भाग लिया और आंतरिक शांति, भावनात्मक कल्याण तथा सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने में ध्यान की कालातीत प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।

सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि ध्यान एक सार्वभौमिक अभ्यास है, जो सांस्कृतिक, भौगोलिक और धार्मिक सीमाओं से परे है। उन्होंने इसे मानसिक स्पष्टता, भावनात्मक स्थिरता और आंतरिक परिवर्तन का मार्ग बताया तथा कहा कि विश्व ध्यान दिवस आधुनिक जीवन में इसकी बढ़ती महत्ता को पहचानने का अवसर प्रदान करता है।

उपराष्ट्रपति ने 21 दिसंबर को विश्व ध्यान दिवस घोषित करने वाले संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव को सह-प्रायोजित करने में भारत की भूमिका का उल्लेख करते हुए इसे मानसिक कल्याण और आध्यात्मिक विकास को बढ़ावा देने की ध्यान की शक्ति की वैश्विक स्वीकृति बताया। उन्होंने ध्यान के वैश्विक प्रसार में दाजी के योगदान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि ध्यान, योग और आध्यात्मिक खोज की सदियों पुरानी परंपराओं के साथ भारत आज भी दुनिया को स्थायी ज्ञान प्रदान कर रहा है।

भारत की सभ्यतागत विरासत पर प्रकाश डालते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि भारत में ध्यान को लंबे समय से मन और आत्मा के प्राचीन विज्ञान के रूप में माना गया है, जिसे ऋषि-मुनियों ने पोषित किया। भगवद् गीता और तमिल आध्यात्मिक ग्रंथ तिरुमंतिरम की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ध्यान के माध्यम से मन पर नियंत्रण आंतरिक सामंजस्य, आत्म-साक्षात्कार और नैतिक जीवन की ओर ले जाता है।

उपराष्ट्रपति ने विकसित भारत@2047 की यात्रा में ध्यान की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय विकास में केवल आर्थिक प्रगति ही नहीं, बल्कि भावनात्मक कल्याण और आध्यात्मिक उत्थान भी शामिल होना चाहिए, और ध्यान शांतिपूर्ण, सशक्त तथा करुणामय समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

मिशन LiFE के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि ध्यान सजगता, उत्तरदायित्व और प्रकृति के साथ सामंजस्य जैसे मूल्यों को विकसित करता है, जो सतत जीवन के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने पर्यावरणीय रूप से जिम्मेदार प्रथाओं को अपनाने और समग्र कल्याण को बढ़ावा देने के लिए कान्हा शांति वनम की सराहना की।

नागरिकों से दैनिक जीवन में ध्यान को अपनाने का आह्वान करते हुए राधाकृष्णन ने व्यक्तियों, परिवारों और समुदायों से उदाहरण प्रस्तुत करने तथा भावी पीढ़ियों को मानसिक शांति, संतुलन और सामंजस्य को बढ़ावा देने वाली प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रेरित करने का आग्रह किया।

तेलंगाना के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा; तेलंगाना सरकार के मंत्री डी. श्रीधर बाबू; हार्टफुलनेस ध्यान के आध्यात्मिक मार्गदर्शक दाजी कमलेश डी. पटेल सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति तथा हजारों प्रतिभागी, जिन्होंने कान्हा शांति वनम में ध्यान सत्र में भाग लिया, इस समारोह में उपस्थित थे।

पीएम श्री नवोदय विद्यालय गौतम बुद्ध नगर में मिशन LiFE के तहत माइक्रोफॉरेस्ट का उद्घाटन, पर्यावरण आधारित शिक्षण को मिला बढ़ावा

No comments Document Thumbnail

शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (DoSEL) के सचिव संजय कुमार ने 14 दिसंबर 2025 को उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर स्थित पीएम नवोदय विद्यालय में विशेष अभियान 5.0 के अंतर्गत विकसित फल उद्यान एवं परागणकर्ता उद्यान (पॉलिनेटर पार्क) से युक्त एक माइक्रोफॉरेस्ट का उद्घाटन किया।

यह पहल मिशन LiFE के तहत ईको क्लब्स के माध्यम से 3,200 वर्ग मीटर से अधिक बंजर भूमि को एक जीवंत पारिस्थितिक शिक्षण स्थल में परिवर्तित करने में सफल रही है। इस अवसर पर नवोदय विद्यालय समिति (NVS) के आयुक्त राजेश लखानी, DoSEL की संयुक्त सचिव डॉ. अमरप्रीत दुग्गल, NVS के संयुक्त आयुक्त ज्ञानेंद्र कुमार, ‘से ट्रीज़’ की ओर से वंदना तुम्मलापल्ली और मोनीथा, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षक, छात्र एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में संजय कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की परिकल्पना के अनुसार शिक्षा का वास्तविक मूल्य केवल पुस्तकों तक सीमित न होकर वास्तविक जीवन के अनुभवों से जुड़ा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रकृति से जुड़े आनंदपूर्ण और समावेशी शिक्षण वातावरण से विद्यार्थियों में मानवीय मूल्यों, स्वतंत्र चिंतन और मानसिक संतुलन का विकास होता है।

उन्होंने बताया कि मिशन LiFE के अंतर्गत ईको क्लब्स देशभर के 9.23 लाख से अधिक स्कूलों में सक्रिय हैं और इसके सात प्रमुख विषयों के अनुरूप व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से अनुभवात्मक अधिगम को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे शिक्षण को प्रकृति से जोड़ें और विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करें।

नवोदय विद्यालय समिति के आयुक्त राजेश लखानी ने विद्यार्थियों से पेड़ों की देखभाल को सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विद्यालय परिसरों में फलदार पेड़ों का संरक्षण सतत जीवनशैली, स्वस्थ आदतों और पारिस्थितिक संतुलन को बढ़ावा देता है।

विशेष अभियान 5.0 के तहत DoSEL ने स्वच्छता दक्षता और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया। देशभर में 6.16 लाख से अधिक स्वच्छता अभियान चलाए गए। 9 अक्टूबर 2025 को आयोजित ई-कचरा जागरूकता पर राष्ट्रीय वेबिनार और उसके बाद हुए ई-कचरा संग्रह अभियान में 1 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया और 4,000 किलोग्राम से अधिक ई-कचरा एकत्र किया गया। इस ई-कचरे के लगभग 100 किलोग्राम से नई दिल्ली के शास्त्री भवन में एक जागरूकता भित्ति चित्र भी बनाया गया।

नवोदय विद्यालय गौतम बुद्ध नगर में स्थापित इस माइक्रोफॉरेस्ट में 500 से अधिक फलदार वृक्ष तथा 350 से अधिक परागणकर्ता-अनुकूल पौधे लगाए गए हैं, जो मधुमक्खियों, तितलियों एवं अन्य लाभकारी जीवों के लिए आवास उपलब्ध कराएंगे और विद्यालय परिसर की जैव विविधता व सूक्ष्म जलवायु को बेहतर बनाएंगे।

यह परियोजना ‘से ट्रीज़’ नामक गैर-लाभकारी संस्था के सहयोग से क्रियान्वित की गई है, जिसने अब तक देशभर में 50 लाख से अधिक पेड़ लगाए और 50 से अधिक झीलों का पुनर्जीवन किया है। यह पहल SDG-4 (गुणवत्तापूर्ण शिक्षा) और SDG-13 (जलवायु कार्रवाई) के अनुरूप सतत विकास को बढ़ावा देगी।

स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की पहलों को आगे चलकर अन्य नवोदय विद्यालयों, केंद्रीय विद्यालयों और देशभर के स्कूलों में भी विस्तारित किया जाएगा, जिससे हरित एवं पर्यावरण-अनुकूल शिक्षण वातावरण को बढ़ावा मिल सके।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिशन LiFE पर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के लेख को साझा किया

No comments Document Thumbnail

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव द्वारा लिखे एक विचारोत्तेजक लेख को साझा किया है, जिसमें उन्होंने बताया है कि कैसे भारत का मिशन LiFE (Lifestyle for Environment) देश की पारंपरिक संरक्षण पद्धतियों को पुनर्जीवित कर रहा है — जैसे तमिलनाडु की एरी टैंक प्रणाली और राजस्थान के जोहर (Johads) — और उन्हें पृथ्वी की सेवा के जागरूक कार्यों के रूप में पुनर्परिभाषित कर रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भूपेंद्र यादव का यह लेख भारत के उस संदेश को उजागर करता है कि “वास्तविक स्थिरता (सस्टेनेबिलिटी) किसी समझौते से नहीं, बल्कि पोषण और संरक्षण से शुरू होती है।”

एक्स (X) पर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव की पोस्ट का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा —

“यह एक अवश्य पढ़ा जाने वाला लेख है, जिसमें केंद्रीय मंत्री @byadavbjp ने बताया है कि भारत का मिशन LiFE (Lifestyle For Environment) कैसे सदियों पुरानी संरक्षण परंपराओं — तमिलनाडु की एरी टैंक प्रणाली से लेकर राजस्थान के जोहड़ तक — को पुनर्जीवित कर रहा है और उन्हें पृथ्वी सेवा के जागरूक कार्यों के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।

वे इस बात पर जोर देते हैं कि वास्तविक स्थिरता बातचीत से नहीं, बल्कि पोषण से आरंभ होती है।”

प्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया यह लेख भारत के पर्यावरण संरक्षण के उस दृष्टिकोण को रेखांकित करता है, जिसमें जनभागीदारी, पारंपरिक ज्ञान और सतत जीवनशैली (Sustainable Lifestyle) को पृथ्वी की रक्षा के प्रमुख साधन के रूप में देखा गया है।


विशेष अभियान 5.0: DoSEL ने सरकारी स्कूलों और कार्यालयों में स्वच्छता, ई-अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा दिया

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली-विद्यालय शिक्षा और साक्षरता विभाग (DoSEL), शिक्षा मंत्रालय 2 से 31 अक्टूबर 2025 तक विशेष अभियान 5.0 को सक्रिय रूप से लागू कर रहा है। इसका उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता को संस्थागत बनाना और स्कूल परिसरों को बेहतर बनाना है। इस अभियान में मुख्य फोकस क्षेत्र निम्नलिखित हैं:

  1. कार्यालयों में दक्षता और कार्य निष्पादन बढ़ाना:

    • विभिन्न श्रेणियों में लंबित कार्यों की समीक्षा।

    • रिकॉर्ड्स का डिजिटलीकरण और अप्रचलित फाइलों को हटाना।

    • रिकॉर्ड प्रबंधन में सुधार।

  2. स्कूल परिसरों का संवर्धन:

    • सफेदी, पेंटिंग और छोटे-मोटे मरम्मत कार्य।

    • बिजली के उपकरणों की मरम्मत।

    • शौचालय और पेयजल सुविधाओं को कार्यात्मक बनाना।

    • स्थानीय कला रूपों जैसे मधुबनी, वारली आदि से प्रेरित म्यूरल और वॉल आर्ट के माध्यम से सौंदर्यीकरण।

  3. पर्यावरणीय जिम्मेदारी को सुदृढ़ करना:

    • ई-अपशिष्ट (E-Waste) कम करना, जो Mission LiFE के 7 विषयों में से एक है।

    • 9 अक्टूबर 2025 को DoSEL और UNICEF के सहयोग से ई-अपशिष्ट जागरूकता और प्रबंधन पर वेबिनार आयोजित किया गया। इसे श्री संजय कुमार, सचिव DoSEL ने अध्यक्षता दी। उन्होंने छात्रों और शिक्षकों में जिम्मेदार ई-अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरणीय जागरूकता बढ़ाने का महत्व बताया।

    • वेबिनार में डॉ. अमरप्रीत दुग्गल, संयुक्त सचिव, DoSEL ने ई-अपशिष्ट घटाने के व्यावहारिक कदम बताए, जैसे USB ड्राइव की बजाय क्लाउड स्टोरेज का उपयोग, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का पूरी जीवन अवधि तक उपयोग, और छात्रों को ई-अपशिष्ट रीसायक्लिंग में अग्रणी भूमिका निभाने का आह्वान किया।

    • इस वेबिनार में 1.5 लाख से अधिक प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

  4. ई-अपशिष्ट जागरूकता अभियान:

    • 10 अक्टूबर 2025 से असम, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और चंडीगढ़ में Eco Clubs के तहत Mission LiFE के अंतर्गत 1000 से अधिक स्कूलों में अभियान चलाया जा रहा है।

    • स्कूलों को पूर्व छात्र नेटवर्क, पंचायत, स्कूल प्रबंधन समिति (SMC) और समुदाय के सहयोग के माध्यम से जुड़ने के लिए प्रेरित किया गया है।

    • Vidyanjali प्लेटफ़ॉर्म (https://vidyanjali.education.gov.in/) के माध्यम से जनभागीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है।


विशेष अभियान 5.0 के तहत ये प्रयास शिक्षा मंत्रालय की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं कि साफ-सुथरे, कुशल और पर्यावरण के प्रति जागरूक संस्थान तैयार किए जाएँ।

IUCN विश्व संरक्षण कांग्रेस में भारत ने विज्ञान और परंपरा का संगम पेश किया

No comments Document Thumbnail

अबू धाबी- केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने आज IUCN विश्व संरक्षण कांग्रेस में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए उच्चस्तरीय राउंडटेबल संवाद में भाग लिया। इस सत्र का विषय था: ‘Nature's Promise for Climate and People’, जिसमें पर्यावरण और जलवायु संकट से निपटने के लिए विज्ञान और पारंपरिक ज्ञान के बेहतर समाकलन पर चर्चा हुई।

कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपराएँ और स्थानीय ज्ञान सदियों से स्थिरता और प्रकृति के साथ संतुलित जीवन की मिसाल रही हैं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी की ‘Mission LiFE’ इसी ज्ञान को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़कर जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय संरक्षण में व्यवहारिक रूप देने का प्रयास है।

मंत्री ने उदाहरण देते हुए बताया कि नीलगिरि के Toda जनजाति चींटियों के घोंसले देखकर मानसून का पूर्वानुमान लगाते हैं, जबकि अंडमान के Jarawas मछलियों के व्यवहार से चक्रवात का अंदाजा लगाते हैं। इसके अलावा, राजस्थान में स्टेप वेल्स और Silver Drops जैसी जल संरक्षण तकनीकें सतत जीवन शैली का प्रमाण हैं।

कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा, “विज्ञान और परंपरा एक-दूसरे के पूरक हैं, और इन दोनों का संगम ही स्थायी और प्रभावी समाधान की कुंजी है। आधुनिक विज्ञान और पारंपरिक ज्ञान के संयोजन से हम सैद्धांतिक अवधारणाओं को व्यावहारिक कार्यों में बदल सकते हैं।”

भारत की यह पहल विकास और विरासत के साथ-साथ नवाचार का एक जीवंत उदाहरण है, जो वैश्विक स्तर पर प्रकृति-आधारित समाधानों को आगे बढ़ाने में योगदान दे रही है।



Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.