Media24Media.com: #RajnathSingh

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #RajnathSingh. Show all posts
Showing posts with label #RajnathSingh. Show all posts

भारत और चेक गणराज्य के बीच रक्षा औद्योगिक सहयोग बढ़ाने पर सहमति, राजनाथ सिंह ने की द्विपक्षीय बैठक

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को नई दिल्ली में चेक गणराज्य के प्रथम उपप्रधानमंत्री एवं उद्योग और व्यापार मंत्री कारेल हावलीचेक के साथ द्विपक्षीय बैठक की। बैठक में दोनों देशों के बीच रक्षा औद्योगिक सहयोग के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की गई और सहयोग को और अधिक विस्तार देने पर सहमति बनी।

बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने जारी सहयोग तथा विभिन्न संयुक्त उपक्रमों की सफल स्थापना का स्वागत किया। साथ ही, भारत-चेक संयुक्त रक्षा समिति के माध्यम से रक्षा क्षेत्र में साझेदारी को मजबूत करने पर चर्चा की गई। इस सहयोग का प्रमुख उद्देश्य ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को बढ़ावा देना है।

रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर

दोनों पक्षों ने रक्षा उद्योग में मौजूदा साझेदारी को आगे बढ़ाने और नए सहयोग के अवसर तलाशने पर सहमति जताई। भारत और चेक गणराज्य के बीच रक्षा औद्योगिक संबंधों को मजबूत करने से दोनों देशों के उद्योगों के बीच साझेदारी को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा पर भी चर्चा

बैठक में वैश्विक एवं क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़े मौजूदा मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता को स्वीकार किया।

इस दौरान दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों के साथ-साथ आपसी विश्वास और सम्मान पर आधारित साझेदारी को भी रेखांकित किया गया।

चार दिवसीय भारत दौरे पर हैं कारेल हावलीचेक

चेक गणराज्य के प्रथम उपप्रधानमंत्री एवं उद्योग और व्यापार मंत्री कारेल हावलीचेक चार दिवसीय भारत दौरे पर हैं। इस दौरान वे विभिन्न मंत्रालयों, व्यापारिक संगठनों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत कर रहे हैं। उनके कार्यक्रम में बेंगलुरु और मुंबई स्थित विभिन्न औद्योगिक प्रतिष्ठानों का दौरा भी शामिल है।

यह यात्रा भारत और चेक गणराज्य के बीच रक्षा, उद्योग एवं व्यापार के क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।



राजनाथ सिंह बोले- भविष्य की जंग तकनीक आधारित होगी, AI और ड्रोन पर भारत का फोकस

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को कहा कि भारत भविष्य की युद्ध परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अगले 10, 20 और 25 वर्षों के लिए अपनी रक्षा क्षमताओं को विकसित कर रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में युद्ध का स्वरूप तेजी से तकनीक आधारित होगा और देश को उसी के अनुरूप तैयार रहना होगा।

NDTV Defence Summit 2026 में बोलते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि भविष्य का युद्ध मल्टी-डोमेन होगा, जिसमें जमीन, हवा और समुद्र के साथ-साथ स्पेस, साइबर, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और ऑटोनॉमस सिस्टम की भी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत का लक्ष्य केवल मौजूदा जरूरतों के लिए हथियार तैयार करना नहीं, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए फ्यूचर-रेडी और आत्मनिर्भर रक्षा व्यवस्था तैयार करना है। उन्होंने देश में विकसित तकनीक और स्वदेशी रक्षा उत्पादन पर जोर देते हुए कहा कि भारत को वह तकनीक खुद विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए, जिसकी भविष्य में आवश्यकता होगी।

उन्होंने विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन, रोबोटिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी और ऑटोनॉमस सिस्टम में भारतीय युवाओं और रक्षा क्षेत्र की बढ़ती भूमिका का उल्लेख किया।

रक्षा मंत्री के अनुसार, भविष्य के युद्धक्षेत्र में तकनीकी बढ़त महत्वपूर्ण होगी और भारत इसी को ध्यान में रखते हुए अपनी रक्षा रणनीति और क्षमताओं को विकसित कर रहा है।

VIMARSH 2026 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुरू कीं अहम रक्षा नीति पहल, MSME और डीप-टेक स्टार्टअप्स को मिलेगा बढ़ावा

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित ‘VIMARSH 2026’ DRDO-इंडस्ट्री सिनर्जी मीट के दौरान रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कई महत्वपूर्ण नीति पहलों का शुभारंभ किया। इन पहलों का उद्देश्य देश के MSME, डीप-टेक स्टार्टअप्स और निजी उद्योगों को रक्षा अनुसंधान एवं उत्पादन से जोड़ना तथा भारत को रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाना है।

MSME और डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए आसान होगी एंट्री

नई नीति के तहत MSME और डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए तकनीकी और वित्तीय बाधाओं को कम करने के लिए एक व्यापक फ्रेमवर्क तैयार किया गया है। इसके माध्यम से कंपनियों को प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता, इनक्यूबेशन सपोर्ट और DRDO की परीक्षण सुविधाओं तक विशेष पहुंच उपलब्ध कराई जाएगी।

सरकार का लक्ष्य है कि छोटे उद्योग और नवाचार आधारित स्टार्टअप केवल रक्षा उत्पादों के आपूर्तिकर्ता न रहें, बल्कि अनुसंधान, डिजाइन, परीक्षण और विकास की पूरी प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनें।

DRDO के सॉफ्टवेयर तक उद्योगों की सुरक्षित पहुंच

DRDO द्वारा विकसित सॉफ्टवेयर के सोर्स कोड को लाइसेंस प्राप्त उद्योगों के साथ साझा करने के लिए एक मानकीकृत और सुरक्षित फ्रेमवर्क भी लॉन्च किया गया। इससे सॉफ्टवेयर आधारित रक्षा प्रणालियों के विकास में तेजी आने के साथ-साथ पुरानी तकनीकों को समय पर अपग्रेड करने और उनके अप्रचलन की समस्या से निपटने में मदद मिलेगी।

9 टेक्नोलॉजी ट्रांसफर समझौते, 13 कंपनियों को मिलेगा लाभ

कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री की मौजूदगी में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के लिए 9 लाइसेंसिंग एग्रीमेंट (LAToTs) 13 विनिर्माण भागीदारों को सौंपे गए। इन समझौतों के जरिए DRDO द्वारा विकसित अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियों और तकनीकों का व्यावसायिक उत्पादन संभव होगा।

SIDM और Laghu Udyog Bharati के साथ रणनीतिक MoU

रक्षा उद्योग तक पहुंच बढ़ाने और जमीनी स्तर पर छोटे उद्योगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए Society of Indian Defence Manufacturers (SIDM) और Laghu Udyog Bharati (LUB) के साथ रणनीतिक समझौते भी किए गए।

इसके अलावा DRDO ने Quality Council of India (QCI) के साथ SAMAR 2.0 (System for Advance Manufacturing Assessment and Rating) के लिए अनुबंध किया। इसके तहत देश की रक्षा कंपनियों की विनिर्माण क्षमता और तकनीकी परिपक्वता का आकलन किया जाएगा।

‘रक्षा उत्पादन’ से आगे बढ़कर पूरी वैल्यू चेन में साझेदारी पर जोर

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि DRDO और उद्योग के बीच सहयोग अब केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसे रिसर्च, डिजाइन, टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन और मैन्युफैक्चरिंग सहित पूरी वैल्यू चेन तक विस्तार देना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि DRDO के पास ज्ञान और तकनीक है, उद्योग के पास बड़े पैमाने पर उत्पादन की क्षमता है, स्टार्टअप्स नवाचार और तेजी लेकर आते हैं, जबकि देश का युवा नए भारत का सपना देखता है। इन चारों शक्तियों के एक साथ आगे बढ़ने से बड़े से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।

2047 तक महत्वपूर्ण तकनीकों में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य

राजनाथ सिंह ने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक रूप से मजबूत राष्ट्र बनना नहीं है, बल्कि भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर, सामाजिक रूप से समावेशी, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार और रणनीतिक रूप से सुरक्षित राष्ट्र बनाना भी है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक महत्वपूर्ण तकनीकों में आत्मनिर्भरता, स्वदेशी सामग्री में उल्लेखनीय वृद्धि, रक्षा निर्यात में कई गुना विस्तार और वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की मजबूत मौजूदगी सुनिश्चित करनी होगी।

AI, क्वांटम कंप्यूटिंग और हाइपरसोनिक तकनीक पर फोकस

नई पहलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग, हाइपरसोनिक तकनीक और डायरेक्टेड एनर्जी जैसी भविष्य की तकनीकों में निवेश और अनुसंधान को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि ड्रोन टेक्नोलॉजी, AI और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में MSME और स्टार्टअप भारत की तकनीकी एवं रणनीतिक क्षमता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं।

2,300 से अधिक टेक्नोलॉजी ट्रांसफर

रक्षा सचिव एवं DRDO के चेयरमैन राजेश कुमार सिंह ने बताया कि आत्मनिर्भरता की दिशा में किए गए प्रयासों से रक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया है। अब तक 2,300 से अधिक टेक्नोलॉजी ट्रांसफर 1,100 से अधिक उद्योगों को दिए जा चुके हैं।

उन्होंने बताया कि DRDO द्वारा विकसित करीब 50 मिसाइलों से संबंधित तकनीकों को भी उद्योगों के लिए उपलब्ध कराया गया है, ताकि निजी क्षेत्र की भागीदारी और बढ़ाई जा सके।

VIMARSH 2026 में 250 से अधिक उद्योग प्रतिनिधियों की भागीदारी

‘वार्ता से विकास (Varta se Vikas)’ थीम पर आधारित VIMARSH 2026 में 250 से अधिक रक्षा उद्योग प्रमुखों, उद्योग संगठनों के प्रतिनिधियों, वरिष्ठ सैन्य एवं नागरिक अधिकारियों और DRDO वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया।

कार्यक्रम में एयरोनॉटिकल सिस्टम, मिसाइल, आर्मामेंट, माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स और नेवल सिस्टम जैसे क्षेत्रों के तकनीकी रोडमैप पर भी चर्चा हुई।

आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग की दिशा में बड़ा कदम

VIMARSH 2026 को भारत के रक्षा उद्योग में सरकार, DRDO, बड़ी कंपनियों, MSME और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। सरकार का जोर अब रक्षा क्षेत्र में केवल आयात कम करने पर नहीं, बल्कि भारत को अत्याधुनिक तकनीक विकसित करने और वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में प्रमुख भूमिका निभाने वाला देश बनाने पर है।

रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि भविष्य के युद्धों में तकनीकी बढ़त ही रणनीतिक बढ़त तय करेगी, इसलिए आज नई और उभरती तकनीकों में निवेश करने वाली कंपनियां आने वाले समय में रक्षा क्षेत्र की अगुवाई करेंगी।

लखनऊ कैंट में 100 करोड़ से अधिक के 14 विकास कार्यों का भूमि पूजन, राजनाथ सिंह और योगी आदित्यनाथ रहे मौजूद

No comments Document Thumbnail

लखनऊ- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार, 30 अगस्त 2026 को लखनऊ कैंट में 100 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली 14 विकास परियोजनाओं का भूमि पूजन किया। इनमें दो परियोजनाएं उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से संयुक्त रूप से लागू की जाएंगी।

इन परियोजनाओं का उद्देश्य लखनऊ कैंट क्षेत्र में नागरिक सुविधाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, स्वच्छता, जलापूर्ति और शहरी बुनियादी ढांचे को आधुनिक और बेहतर बनाना है।

कैंट में शुरू होंगी कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं

भूमि पूजन किए गए प्रमुख विकास कार्यों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट, मल्टी-यूटिलिटी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, आधुनिक शवदाह गृह और 1500 KL क्षमता वाला भूमिगत जलाशय शामिल हैं।

इसके साथ ही पुरानी और जर्जर जलापूर्ति पाइपलाइनों को बदलने तथा SCADA ऑटोमेशन से लैस 8 नए ट्यूबवेल बनाने की योजना है। पानी की बेहतर आपूर्ति के लिए SCADA प्रणाली वाले ओवरहेड टैंक भी बनाए जाएंगे।

जलापूर्ति व्यवस्था को मिलेगा नया स्वरूप

लखनऊ कैंट में पानी की आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पुराने और अनुपयोगी पाइपलाइन नेटवर्क को बदला जाएगा। इसके साथ ही नए ट्यूबवेल और ओवरहेड टैंकों को आधुनिक SCADA ऑटोमेशन सिस्टम से जोड़ा जाएगा।

इससे जलापूर्ति की निगरानी और संचालन अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा। 1500 किलोलीटर क्षमता वाला भूमिगत जलाशय भी जल प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

कचरा प्रबंधन और स्वच्छता पर विशेष जोर

कैंट क्षेत्र में स्वच्छता व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए AI आधारित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट स्थापित किया जाएगा।

इसके अलावा पुराने कचरे को वैज्ञानिक तरीके से हटाने और उसका निस्तारण करने के लिए Legacy Waste Bio-Mining एवं Bio-Remediation परियोजना भी शुरू की जाएगी।

इन पहलों से क्षेत्र में कचरा प्रबंधन को अधिक वैज्ञानिक और पर्यावरण-अनुकूल बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

युवाओं के लिए मल्टी-यूटिलिटी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स

युवाओं को खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए मल्टी-यूटिलिटी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य युवाओं को बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराना और उन्हें अपनी प्रतिभा निखारने के लिए उपयुक्त वातावरण देना है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि विकसित भारत का मतलब केवल बड़े प्रोजेक्ट और आधुनिक इमारतें बनाना नहीं है। इसका अर्थ यह भी है कि युवाओं को खेलने और अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर मिलें।

शिक्षा के क्षेत्र में भी होंगे बड़े काम

लखनऊ कैंट में बच्चों की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए भी कई परियोजनाएं शुरू की जा रही हैं।

दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष विद्यालय का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा RA बाजार माध्यमिक विद्यालय और Rainbow Model School में अतिरिक्त कक्षाओं और शौचालयों का निर्माण किया जाएगा।

सरकार का लक्ष्य है कि बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हों।

स्वास्थ्य सुविधाओं को भी मिलेगा विस्तार

उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से लागू होने वाली दो प्रमुख परियोजनाओं में RA बाजार सिटी पॉलीक्लिनिक और मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग सेंटर शामिल हैं।

सिटी पॉलीक्लिनिक के माध्यम से स्थानीय लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा, जबकि अभ्युदय कोचिंग सेंटर युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सहायता प्रदान करेगा।

मल्टी-लेवल रोबोटिक पार्किंग और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स

लखनऊ कैंट में बढ़ती पार्किंग जरूरतों को देखते हुए मल्टी-लेवल रोबोटिक कार पार्किंग एवं कमर्शियल कॉम्प्लेक्स भी बनाया जाएगा।

आधुनिक पार्किंग व्यवस्था से सीमित शहरी क्षेत्र में पार्किंग क्षमता बढ़ाने और यातायात प्रबंधन को बेहतर करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

विकास का लक्ष्य—लोगों के जीवन में सीधा बदलाव

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि लखनऊ कैंट का विकास सीधे तौर पर लखनऊ के विकास से जुड़ा हुआ है। केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वित प्रयासों से विकास और सुशासन की गति को तेज किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत 2047 तक विकसित भारत बनने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि विकसित भारत का अर्थ सिर्फ भव्य परियोजनाएं और आधुनिक इमारतें नहीं हैं। इसका मतलब है कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, हर घर तक स्वच्छ पानी पहुंचे, युवाओं को खेल और प्रतिभा प्रदर्शन के अवसर मिलें और दिव्यांग बच्चों को कभी यह महसूस न हो कि समाज उन्हें पीछे छोड़ रहा है।

ब्रिटिश दौर से जुड़े कई बाजारों के बदले नाम

राजनाथ सिंह ने लखनऊ कैंट में कई बाजारों के नाम बदले जाने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश काल से जुड़े नामों को हटाकर स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रीय जीवन से जुड़े प्रमुख व्यक्तित्वों के नाम दिए गए हैं।

Royal Artillery Bazar का नाम Ekta Bazar, British Cavalry Bazar का नाम Uda Devi Bazar, British Infantry Bazar का नाम Matadin Valmiki Bazar और एक अन्य British Infantry Bazar का नाम Mangal Pandey Bazar रखा गया है।

वहीं Kanedy Market का नाम बदलकर Atal Bihari Vajpayee Market किया गया है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों को भारत की विरासत और स्वतंत्रता संघर्ष से जोड़ना तथा उन्हें राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करना है।

‘मन की बात’ भी सुनी, करीब 4 हजार लोग रहे मौजूद

कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने करीब 4,000 लोगों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘मन की बात’ कार्यक्रम भी सुना।

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक, राज्य मंत्री असीम अरुण, सेंट्रल कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता, राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा, लखनऊ की मेयर सुषमा खारवाल, रक्षा संपदा महानिदेशक शोभा गुप्ता, HAL के CMD रवि के, BEL के CMD मनोज जैन सहित रक्षा बलों, केंद्र एवं राज्य सरकार और लखनऊ कैंटोनमेंट बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

एक नजर में प्रमुख परियोजनाएं

  • AI आधारित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट

  • मल्टी-यूटिलिटी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स

  • आधुनिक शवदाह गृह

  • 1500 KL भूमिगत जलाशय

  • पुरानी जलापूर्ति पाइपलाइनों का प्रतिस्थापन

  • SCADA ऑटोमेशन के साथ 8 नए ट्यूबवेल

  • SCADA आधारित ओवरहेड टैंक

  • दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष विद्यालय

  • RA बाजार माध्यमिक विद्यालय में अतिरिक्त कक्षाएं और शौचालय

  • Rainbow Model School में अतिरिक्त कक्षाएं और शौचालय

  • मल्टी-लेवल रोबोटिक कार पार्किंग एवं कमर्शियल कॉम्प्लेक्स

  • Legacy Waste Bio-Mining एवं Bio-Remediation

  • RA बाजार सिटी पॉलीक्लिनिक

  • मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग सेंटर

कुल मिलाकर, लखनऊ कैंट में शुरू की जा रही ये परियोजनाएं नागरिक सुविधाओं को आधुनिक बनाने के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, स्वच्छता, जल प्रबंधन और शहरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से कैंट क्षेत्र के विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इंडियन डिफेंस एस्टेट्स सर्विस के अधिकारी प्रशिक्षुओं से की मुलाकात

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- भारतीय रक्षा संपदा सेवा (Indian Defence Estates Service) के 2025 बैच के अधिकारी प्रशिक्षुओं ने आज नई दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की। ये अधिकारी राष्ट्रीय रक्षा संपदा प्रबंधन संस्थान (NIDEM) में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

रक्षा मंत्री ने देशभर में रक्षा भूमि के प्रबंधन और छावनी बोर्डों के नगर प्रशासन में रक्षा संपदा विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की।

‘सेवा भाव’ के साथ काम करें अधिकारी

राजनाथ सिंह ने कहा कि बदलती आकांक्षाओं और जरूरतों को पूरा करने में लोक सेवकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने सिविल सेवकों से पूरे ‘सेवा भाव’ के साथ लोगों के अनुकूल तरीके से सेवाएं प्रदान करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि अधिकारियों को नियमित रूप से आम लोगों से मिलना चाहिए और उनकी समस्याओं एवं शिकायतों को ध्यानपूर्वक सुनना चाहिए। इससे उनकी वास्तविक चिंताओं को समझने के साथ-साथ लोगों में सरकार और प्रशासन के प्रति विश्वास तथा आश्वासन की भावना मजबूत होगी।

शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी दें ध्यान

रक्षा मंत्री ने लोक सेवकों और युवा अधिकारियों से अपने शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य पर समान रूप से ध्यान देने की अपील की। उन्होंने अधिकारियों को आध्यात्मिक मार्ग अपनाने और नियमित रूप से ध्यान का अभ्यास करने की सलाह दी।

इस अवसर पर रक्षा संपदा महानिदेशक शोभा गुप्ता भी उपस्थित रहीं।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने दुनिया को भारत की सैन्य शक्ति और नागरिकों की सुरक्षा के संकल्प का संदेश दिया: राजनाथ सिंह

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने भारतीय सशस्त्र बलों के अद्वितीय शौर्य और पराक्रम को प्रदर्शित किया तथा पूरी दुनिया को यह संदेश दिया कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और हमारी महिलाओं के सिंदूर की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।

रक्षा मंत्री 9 अगस्त 2026 को दिल्ली कैंट स्थित बेस अस्पताल में आयोजित ‘सिंदूर महारक्तदान यात्रा’ रक्तदान शिविर को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने भारतीय रक्षा बलों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने पाकिस्तान में स्थित आतंकवादियों और उनके आकाओं का सफाया किया तथा भारत की ओर बुरी नजर से देखने वालों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़े।

‘सिंदूर महारक्तदान यात्रा’ की तुलना ऑपरेशन सिंदूर से करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि जहां ऑपरेशन सिंदूर ने साहस और शौर्य का परिचय दिया, वहीं यह विशाल रक्तदान शिविर करुणा और मानव सेवा का प्रतीक है। शिविर में महाराष्ट्र के लगभग 1,000 पहलवानों और खिलाड़ियों ने रक्तदान कर निस्वार्थ सेवा और सशस्त्र बलों के प्रति एकजुटता की भावना का प्रदर्शन किया।

रक्तदाताओं का आभार व्यक्त करते हुए रक्षा मंत्री ने विश्वास जताया कि आज दान किया गया रक्त भविष्य में जरूरतमंद सैनिकों और उनके परिवारों के लिए महत्वपूर्ण भंडार के रूप में काम आएगा। उन्होंने रक्तदान को ‘जीवनदान’ और ‘महादान’ बताते हुए कहा कि विज्ञान और चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति के बावजूद मानव रक्त का अभी तक कोई कृत्रिम विकल्प विकसित नहीं किया जा सका है। रक्त केवल मानव शरीर द्वारा ही बनाया जा सकता है और एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को रक्तदान कर सकता है। इसलिए रक्तदान मानव सेवा और परोपकार के सबसे महान कार्यों में से एक है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रत्येक रक्तदाता और रक्त प्राप्त करने वाला व्यक्ति अपने-अपने तरीके से राष्ट्र की सेवा कर रहा है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से रक्तदान को अपनी जीवनशैली और सामाजिक संस्कृति का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि जब भारत वर्ष 2047 में स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब हमारा लक्ष्य केवल विकसित अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं होना चाहिए। हमें एक ऐसे संवेदनशील समाज की भी कल्पना करनी चाहिए, जहां लोग स्वस्थ और सुरक्षित हों तथा जरूरत के समय रक्त जैसी जीवनरक्षक सामग्री आसानी से उपलब्ध हो।

युवाओं से फिटनेस को प्राथमिकता देने का आह्वान करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि स्वस्थ और फिट व्यक्ति समाज के लिए अधिक उपयोगी होता है और रक्तदान जैसे नेक कार्यों में बेहतर योगदान दे सकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ‘खेलो इंडिया’ और ‘फिट इंडिया’ जैसी पहलों के माध्यम से विशेष रूप से युवाओं को फिटनेस को जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

महाराष्ट्र की वीरता और करुणा की समृद्ध परंपरा का उल्लेख करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत आज भी पीढ़ियों को प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि शारीरिक शक्ति का वास्तविक उद्देश्य दूसरों की रक्षा करना और राष्ट्र की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। छत्रपति शिवाजी महाराज की भूमि से आए खिलाड़ियों और पहलवानों का यह योगदान राष्ट्र के लिए एक महान सेवा के रूप में याद रखा जाएगा।

कार्यक्रम में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रताप राव जाधव, महाराष्ट्र सरकार के उद्योग मंत्री उदय रविंद्र सामंत, सांसद डॉ. श्रीकांत लता एकनाथ शिंदे, थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, सशस्त्र सेना चिकित्सा सेवा (AFMS) के महानिदेशक सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन, एडजुटेंट जनरल लेफ्टिनेंट जनरल वी.पी.एस. कौशिक, बेस अस्पताल दिल्ली कैंट के कमांडेंट मेजर जनरल विशाल चौधरी सहित वरिष्ठ सैन्य एवं नागरिक अधिकारी उपस्थित रहे।

सशस्त्र सेना चिकित्सा सेवा (AFMS) के लिए पर्याप्त रक्त भंडार बनाए रखना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि सैन्य अस्पताल नियमित स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ ऑपरेशनल, ट्रॉमा और आपातकालीन परिस्थितियों में भी चिकित्सा सहायता प्रदान करते हैं। लगभग 500 स्वैच्छिक रक्तदाताओं की भागीदारी ने ‘सेवा परमो धर्म’ की भावना को मजबूत किया और यह संदेश दिया कि प्रत्येक पात्र नागरिक नियमित स्वैच्छिक रक्तदान के माध्यम से जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसदीय परामर्शदात्री समिति की बैठक की अध्यक्षता की, ‘प्रादेशिक सेना’ की भूमिका पर हुआ मंथन

No comments Document Thumbnail

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 6 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में रक्षा मंत्रालय की संसदीय परामर्शदात्री समिति की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में ‘प्रादेशिक सेना (Territorial Army)’ के विषय पर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों ने समिति के सदस्यों को प्रादेशिक सेना के उद्देश्य, भूमिका और प्रमुख उपलब्धियों पर विस्तृत जानकारी दी। समिति के सदस्यों ने सेना को और अधिक सशक्त एवं प्रभावी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।

अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रादेशिक सेना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। उन्होंने कहा कि जहाँ सशस्त्र बलों की मुख्य भूमिका राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी होती है, वहीं प्रादेशिक सेना पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक कार्यों में भी उल्लेखनीय योगदान देती है।

उन्होंने कहा, “प्रादेशिक सेना ‘नागरिक-सैनिक’ (Citizen-Soldier) की अवधारणा का जीवंत उदाहरण है। इसके सदस्य अपने नागरिक व्यवसायों के साथ-साथ आवश्यकता पड़ने पर वर्दी पहनकर सीमाओं की रक्षा और आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने का दायित्व निभाते हैं।”

राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रादेशिक सेना सशस्त्र बलों के लिए अतिरिक्त सैन्य क्षमता (Surge Capacity) तैयार करती है। यह प्रशिक्षित सैनिकों का ऐसा रिजर्व बल है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर तुरंत तैनात किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सेवा अवधि पूरी करने के बाद जब ये सैनिक पुनः नागरिक जीवन में लौटते हैं, तो वे समाज और सेना के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करते हैं तथा विशेषकर युवाओं को रक्षा सेवाओं में शामिल होने के लिए प्रेरित करते हैं।

वर्तमान में प्रादेशिक सेना में लगभग 44,400 कर्मी और 59 विभिन्न इकाइयाँ हैं। रक्षा मंत्री ने इसे प्राकृतिक आपदाओं के दौरान पहला प्रतिक्रिया बल (First Responders) बताते हुए कहा कि यह राहत एवं बचाव कार्यों तथा चिकित्सा सहायता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने केरल की बाढ़, ओडिशा के चक्रवात तथा हाल ही में असम की बाढ़ के दौरान प्रादेशिक सेना द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्यों की सराहना की।

पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने के क्षेत्र में प्रादेशिक सेना के योगदान की प्रशंसा करते हुए उन्होंने बताया कि इसकी इकोलॉजिकल टास्क फोर्स (Ecological Task Forces) अब तक लगभग 10 करोड़ पौधे लगा चुकी है, जिनकी 80–85 प्रतिशत तक जीवित रहने की दर है। उन्होंने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री के ‘मिशन LiFE’ और ‘पंचामृत’ लक्ष्यों को धरातल पर साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

रक्षा मंत्री ने जम्मू-कश्मीर में तैनात प्रादेशिक सेना की ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को जन-जन तक पहुँचाने में निभाई गई भूमिका की भी सराहना की।

बैठक में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि, थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार, रक्षा वित्त सचिव विश्वजीत सहाय तथा रक्षा मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा मंत्रालय में सैन्य और असैन्य एकीकरण को और मजबूत करने पर दिया जोर

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय सशस्त्र बल जब अधिक संयुक्तता (Jointness) की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, ऐसे समय में रक्षा मंत्रालय के सैन्य एवं असैन्य (सिविल) घटकों के बीच बेहतर समन्वय और गहरा एकीकरण अत्यंत आवश्यक है। इससे बदलती सुरक्षा और तकनीकी चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकेगा तथा संस्थागत अनुभव, स्थिरता और नियमों के बेहतर अनुपालन को भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।

नई दिल्ली में 85वें सशस्त्र बल मुख्यालय (AFHQ) सिविलियन सर्विसेज दिवस समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि वर्दीधारी और सिविल सेवाएं दोनों ही "राष्ट्र प्रथम" की भावना से कार्य करती हैं। जब लक्ष्य एक होता है, तो व्यवस्था का प्रत्येक अंग राष्ट्रीय शक्ति में परिवर्तित हो जाता है।

उन्होंने कहा कि सैन्य और प्रशासनिक एकीकरण अलग-अलग रास्तों पर नहीं चल सकते। जैसे-जैसे संयुक्त और एकीकृत संरचनाएं विकसित होंगी, नीति निर्माण, प्रशासन, मानव संसाधन प्रबंधन, वित्तीय प्रक्रियाओं, लॉजिस्टिक्स तथा संस्थागत ज्ञान जैसे क्षेत्रों में निरंतरता और विशेषज्ञता की आवश्यकता और बढ़ेगी।

रक्षा मंत्री ने सैन्य और सिविल अधिकारियों के बीच संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा क्रॉस-एक्सपोजर को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सैन्य अधिकारी युद्ध संचालन और कमान का अनुभव लेकर आते हैं, जबकि सिविल अधिकारी प्रशासनिक निरंतरता, नीतिगत अनुभव, सरकारी प्रक्रियाओं की समझ और संस्थागत स्मृति प्रदान करते हैं। इन दोनों की संयुक्त क्षमता निर्णय प्रक्रिया को अधिक संतुलित, प्रभावी और सशक्त बनाती है।

साइबर युद्ध और रक्षा अनुसंधान पर विशेष जोर

राजनाथ सिंह ने साइबर युद्ध (Cyber Warfare) का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि AFHQ सिविलियन सर्विसेज के अधिकारी अपनी विशेषज्ञता का उपयोग कर रक्षा क्षेत्र के लिए विशेष साइबर उपकरण विकसित करें, तो यह सशस्त्र बलों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।

उन्होंने भारतीय सैन्य इतिहास के अध्ययन के लिए एक विशेष मंच विकसित करने का भी सुझाव दिया, जहां सिविल दृष्टिकोण से अध्ययन कर नए विचार और रणनीतिक सोच विकसित की जा सके। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि AFHQ सिविलियन सर्विसेज अपनी विशेषज्ञता के माध्यम से रक्षा क्षेत्र में और अधिक सार्थक योगदान दे सकती है।

"रक्षा प्रबंधन का रणनीतिक मस्तिष्क बने AFHQ"

रक्षा मंत्री ने AFHQ सिविलियन सर्विसेज से आह्वान किया कि वह भारत की रक्षा प्रबंधन व्यवस्था का "रणनीतिक मस्तिष्क (Strategic Brain)" बने। इसके लिए रक्षा क्षेत्र की व्यापक समझ विकसित करनी होगी, संयुक्त वातावरण में प्रभावी ढंग से कार्य करना होगा तथा उभरती चुनौतियों के अनुरूप अपनी विशेषज्ञता को निरंतर बढ़ाना होगा।

उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध तकनीकी नवाचारों पर आधारित है, इसलिए अब केवल सेवा नियमों और आदेशों के पालन तक सीमित रहने के बजाय रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान, भू-रणनीतिक सोच और नवाचार पर भी विशेष ध्यान देना आवश्यक है।

उन्होंने कहा, "किसी भी सेना की शक्ति केवल उसके हथियारों और गोला-बारूद से नहीं, बल्कि उन हजारों अदृश्य हाथों से भी आती है जो हर समय उसके साथ खड़े रहते हैं। AFHQ सिविलियन सर्विसेज भी ऐसी ही एक महत्वपूर्ण और निर्णायक शक्ति है।"

कई डिजिटल पहल की शुरुआत

समारोह के दौरान रक्षा मंत्री ने संयुक्त सचिव एवं मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (JS & CAO) कार्यालय की कई डिजिटल पहलों तथा संशोधित विजन एवं मिशन स्टेटमेंट का शुभारंभ किया। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—

  • इंटरनेट आधारित आवास प्रबंधन प्रणाली (IBAMS) पोर्टल।

  • eHRMS का TULIP 2.0 प्रणाली से एकीकरण।

  • वेतन एवं भत्तों के ऑनलाइन प्रसंस्करण हेतु CAO कार्यालय का TULIP 2.0 से एकीकरण।

  • स्मार्ट परफॉर्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट रिकॉर्डिंग ऑनलाइन विंडो (SPARROW) पोर्टल पर ऑनबोर्डिंग।

इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने 'संवाद' पत्रिका के 34वें अंक का भी विमोचन किया, जिसमें सेवा मुख्यालयों एवं अंतर-सेवा संगठनों में कार्यरत कर्मचारियों द्वारा लिखे गए यात्रा-वृत्तांत, निबंध, लेख और कविताएं प्रकाशित की गई हैं।

उन्होंने खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले AFHQ कर्मियों तथा शैक्षणिक उपलब्धियां हासिल करने वाले कर्मचारियों के बच्चों को सम्मानित भी किया।

कार्यक्रम में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि, नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन, थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह सहित रक्षा मंत्रालय के अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

AFHQ दिवस का महत्व

हर वर्ष 1 अगस्त को AFHQ दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य रक्षा मंत्रालय के तीनों एकीकृत सेवा मुख्यालयों, मुख्यालय इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ तथा 24 अंतर-सेवा संगठनों में कार्यरत उन असैन्य कर्मचारियों के योगदान को सम्मान देना है, जो सशस्त्र बलों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर देश की रक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। AFHQ कैडर की स्थापना 1 अगस्त 1942 को की गई थी।


रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ अभियान की सफल महिला सैन्य अधिकारियों को किया सम्मानित

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय सेना की नौकायन पोत आईएएसवी त्रिवेणी (IASV Triveni) पर सवार होकर ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ नामक पहले त्रि-सेवा (थल सेना, नौसेना और वायु सेना) अखिल महिला विश्व परिक्रमा नौकायन अभियान को सफलतापूर्वक पूरा कर स्वदेश लौटीं तीनों सेनाओं की नौ महिला अधिकारियों को सम्मानित किया।

रक्षा मंत्री ने अधिकारियों से बातचीत करते हुए 314 दिनों में लगभग 25,500 समुद्री मील की यात्रा कर चार महासागरों को पार करने वाली इस ऐतिहासिक उपलब्धि की सराहना की। उन्होंने इसे ‘नारी शक्ति’ का प्रतीक और त्रि-सेवा संयुक्तता एवं समन्वय (Tri-service Jointness & Synergy) का उत्कृष्ट उदाहरण बताया, जो देश के हर नागरिक को प्रेरित करेगा।

महिला अधिकारियों ने अभियान के अनुभव साझा करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद देश का गौरव बढ़ाने का संकल्प ही उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा रहा। इसी दृढ़ निश्चय के बल पर उन्होंने शारीरिक और मानसिक चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया। इस पर राजनाथ सिंह ने कहा कि उनकी प्रतिबद्धता ने उन्हें भी प्रेरित किया है और यह सिद्ध करती है कि मजबूत इच्छाशक्ति और दृढ़ संकल्प से कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।

रक्षा मंत्री ने अधिकारियों की क्षमता और आत्मविश्वास को “अद्भुत” बताते हुए कहा कि इस अभियान ने उन सभी रूढ़ियों को तोड़ दिया है, जो यह मानती थीं कि महिलाएँ कठिन सैन्य अभियानों को सफलतापूर्वक पूरा नहीं कर सकतीं। उन्होंने कहा, “आपने साबित कर दिया है कि शारीरिक क्षमता, मानसिक दृढ़ता और नेतृत्व किसी लिंग के बंधन में नहीं होते। भारत की हर बेटी अब आपसे प्रेरणा लेकर विश्वास कर सकती है कि वह भी महासागरों को पार कर दुनिया जीत सकती है।”

उन्होंने इस अभियान को ‘त्रि-सेवा संयुक्तता’ का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना के अधिकारी एक ही पोत पर, एक ही ध्वज के नीचे, एक साझा मिशन के लिए साथ आए। यह अभियान इस बात का प्रमाण है कि यदि हम एकजुट होकर आगे बढ़ें, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।

राजनाथ सिंह ने टीम की सराहना करते हुए कहा कि अभियान के दौरान विभिन्न देशों में भारत की इंजीनियरिंग उत्कृष्टता, स्वदेशी क्षमताओं और तकनीकी प्रगति का प्रभावी प्रदर्शन किया गया, जिससे दुनिया को यह संदेश मिला कि भारत किसी भी क्षेत्र में किसी से कम नहीं है।

इस अवसर पर थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, वायु सेना के उप प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित, नौसेना के उप प्रमुख वाइस एडमिरल अजय कोच्छर तथा तीनों सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि 22 जुलाई 2026 को मुंबई में रक्षा मंत्री ने वर्चुअल माध्यम से आईएएसवी त्रिवेणी का स्वागत (Flag-in) किया था। वहीं 11 सितंबर 2025 को उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस ऐतिहासिक अभियान को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।

करीब दो वर्षों के गहन प्रशिक्षण, सूक्ष्म योजना, 24×7 तटीय सहायता तंत्र और अनेक संस्थाओं के सहयोग से यह मिशन सफल हुआ। अभियान ने विश्व परिक्रमा के सभी अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करते हुए सभी देशांतरों को पार किया, भूमध्य रेखा को दो बार, अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा को पार किया तथा केप लीउविन, केप हॉर्न और केप ऑफ गुड होप जैसे तीन महान केप्स का सफलतापूर्वक चक्कर लगाया।

इसके अतिरिक्त, टीम ने विश्व के सबसे चुनौतीपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक ड्रेक पैसेज को पार कर केप हॉर्न का सफलतापूर्वक चक्कर लगाया, जिसके बाद उन्हें प्रतिष्ठित ‘केप हॉर्नर्स’ समुदाय की सदस्यता प्राप्त हुई। यह सम्मान केवल उन नाविकों को दिया जाता है, जो इस कठिन समुद्री मार्ग को सफलतापूर्वक पार करते हैं।

यह अभियान केवल एक समुद्री उपलब्धि नहीं, बल्कि सैन्य कूटनीति (Military Diplomacy) का भी प्रभावी माध्यम बना। विभिन्न देशों में ठहराव के दौरान आईएएसवी त्रिवेणी ने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, समुद्री परंपराओं, सैन्य पेशेवर उत्कृष्टता और मूल्यों का प्रदर्शन करते हुए मित्र देशों के साथ सद्भाव और सहयोग को और मजबूत किया।


रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ में देश के पहले सैन्य चिकित्सा विभाग का किया उद्घाटन, युद्धक्षेत्र चिकित्सा क्षमता को मिलेगी नई मजबूती

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली/लखनऊ- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित कमांड अस्पताल (मध्य कमान) में सैन्य चिकित्सा विभाग (Department of Military Medicine) का वर्चुअल उद्घाटन किया। यह देश का पहला समर्पित शैक्षणिक और परिचालन विभाग है, जो विशेष रूप से सैन्य चिकित्सा पर केंद्रित होगा। यह पहल युद्धक्षेत्र में चिकित्सा तैयारियों को सुदृढ़ करने, अनुसंधान को बढ़ावा देने, स्वदेशी सिद्धांत विकसित करने तथा भविष्य के युद्धक्षेत्रों और मानवीय आपदाओं से निपटने के लिए विशेषज्ञता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

सेना चिकित्सा सेवा महानिदेशालय (DGMS-आर्मी) के अधीन स्थापित यह विभाग सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं (AFMS) की परिचालन चिकित्सा तैयारियों को और मजबूत करेगा।

राष्ट्रीय सुरक्षा को मिलेगा नया आधार

अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने कहा कि किसी भी राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक विकास के साथ-साथ उसकी संप्रभुता और प्रगति का मूल आधार उसकी सेना की शक्ति और मनोबल होता है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह नया विभाग सैनिकों को अत्याधुनिक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराकर राष्ट्रीय सुरक्षा को और मजबूत करेगा तथा उनमें यह भरोसा पैदा करेगा कि आवश्यकता पड़ने पर उन्हें सर्वोत्तम उपचार और सहयोग मिलेगा।

इन क्षेत्रों पर होगा विशेष फोकस

नया विभाग निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्रों में शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान करेगा:

  • सैन्य आघात (Military Trauma) एवं डैमेज कंट्रोल

  • कॉम्बैट मनोचिकित्सा एवं मानसिक दृढ़ता

  • पर्यावरण एवं परिचालन चिकित्सा

  • सैन्य चिकित्सा लॉजिस्टिक्स

  • रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल, परमाणु एवं विस्फोटक (CBRNe) चिकित्सा प्रतिक्रिया

  • आपातकालीन चिकित्सा एवं क्रिटिकल केयर

  • आपदा चिकित्सा

  • मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR)

  • अनुसंधान, ऑडिट एवं डेटा विश्लेषण

इसके साथ ही विभाग तकनीक आधारित युद्धक्षेत्र चिकित्सा, सिमुलेशन आधारित प्रशिक्षण, टेलीमेडिसिन, फील्ड केयर और चिकित्सा निर्णय सहायता प्रणाली में नवाचार को भी बढ़ावा देगा।

चरणबद्ध तरीके से होगा विकास

विभाग का विकास चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। प्रारंभिक चरण में शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। इसके बाद HADR और CBRNe चिकित्सा के लिए उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence) स्थापित किए जाएंगे। भविष्य में इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सैन्य चिकित्सा के अग्रणी संस्थान के रूप में विकसित किया जाएगा।

सैनिकों के लिए विशेष चिकित्सा प्रोटोकॉल

रक्षा मंत्री ने कहा कि जिस प्रकार एयरोस्पेस मेडिसिन अंतरिक्ष यात्रियों और पायलटों की चुनौतियों का अध्ययन करती है, उसी प्रकार सैन्य चिकित्सा युद्ध और युद्ध जैसी परिस्थितियों में मानव शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन करती है।

उन्होंने कहा, "हमारे सैनिक दुनिया के सबसे कठिन भौगोलिक क्षेत्रों और प्रतिकूल जलवायु परिस्थितियों में तैनात रहते हैं। यह विभाग ऐसे परिचालन वातावरण के अनुरूप चिकित्सा प्रोटोकॉल विकसित करेगा।"

नई चुनौतियों से निपटने में मददगार

राजनाथ सिंह ने कहा कि पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ व्यापक विनाश के हथियारों (Weapons of Mass Destruction) का खतरा भी बना हुआ है। ऐसे में यह विभाग अनुसंधान एवं विकास का प्रमुख केंद्र बनकर उभरती तकनीकी चुनौतियों से निपटने में देश की क्षमता को मजबूत करेगा।

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों और मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभियानों में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए यह विभाग आपदा प्रबंधन, फील्ड अस्पताल संचालन, बड़े पैमाने पर हताहतों के प्रबंधन तथा महामारी नियंत्रण में विशेषज्ञता विकसित करने में अहम भूमिका निभाएगा।

युवाओं के लिए नए अवसर

रक्षा मंत्री ने उम्मीद जताई कि यह विभाग आर्मी मेडिकल कॉर्प्स के युवा डॉक्टरों को युद्धक्षेत्र नर्सिंग और एडवांस ट्रॉमा लाइफ सपोर्ट का प्रशिक्षण देगा।

उन्होंने कहा, "अब छात्र सैन्य चिकित्सा में सुपर स्पेशलाइजेशन कर सकेंगे। इससे सेना की बौद्धिक क्षमता बढ़ेगी और अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में भारत की प्रतिष्ठा भी मजबूत होगी।"

निवारक स्वास्थ्य सेवा पर जोर

राजनाथ सिंह ने कहा कि 'प्रिवेंटिव हेल्थकेयर' यानी निवारक स्वास्थ्य सेवा को उपचार से पहले रक्षा की पहली पंक्ति माना जाना चाहिए।

उन्होंने रोग निगरानी, टीकाकरण, स्वच्छता, पोषण, शारीरिक फिटनेस, व्यावसायिक स्वास्थ्य और नियमित स्वास्थ्य जांच जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), वेयरेबल डिवाइस, प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स और आधुनिक डायग्नोस्टिक तकनीकों का उपयोग कर सैनिकों के स्वास्थ्य की वास्तविक समय में निगरानी की जा सकती है और संभावित स्वास्थ्य जोखिमों की समय रहते पहचान की जा सकती है।

विश्वस्तरीय अनुसंधान केंद्र बनाने का लक्ष्य

रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि सैन्य चिकित्सा विभाग देश की सैन्य सोच में एक क्रांतिकारी परिवर्तन का प्रतीक है।

उन्होंने कहा, "हमें मिलकर इस विभाग को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ 'बैटलफील्ड मेडिसिन रिसर्च सेंटर' बनाना है।"

सरकार के विजन को मिलेगा बल

यह विभाग रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने और सशस्त्र बलों की परिचालन तैयारियों को बेहतर बनाने के सरकार के विजन के अनुरूप है। साथ ही यह रक्षा रणनीति विजन 2026-30 के तहत प्रस्तावित ग्लोबल मिलिट्री मेडिसिन सेंटर की अवधारणा को भी आगे बढ़ाएगा।

इस पहल के साथ सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं (AFMS) को आधुनिक, प्रौद्योगिकी-सक्षम, परिचालन रूप से प्रभावी और रोगी-केंद्रित सैन्य स्वास्थ्य प्रणाली के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित हुआ है। यह भविष्य की रक्षा एवं राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए भारत की तैयारियों को भी और अधिक सुदृढ़ करेगा।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय तटरक्षक बल के लिए दो महत्वपूर्ण नीतिगत सुधारों का किया शुभारंभ

No comments Document Thumbnail

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) के लिए दो महत्वपूर्ण नीतिगत सुधारों का शुभारंभ किया। इनका उद्देश्य अधिकारियों की भर्ती एवं सेवा शर्तों में लैंगिक समानता को बढ़ावा देना तथा ड्यूटी के दौरान समुद्र में लापता होने वाले कर्मियों के परिजनों को अनुग्रह राशि (एक्स-ग्रेशिया) प्रदान करने की प्रशासनिक प्रक्रिया को सरल बनाना है।

28 जुलाई, 2026 को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन-2 में आयोजित कार्यक्रम में रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह, भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक परमेश शिवमणि तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने पिछले पांच दशकों में भारतीय तटरक्षक बल की उत्कृष्ट सेवाओं की सराहना करते हुए विश्वास जताया कि ये दूरदर्शी नीतियां वर्ष 2027 में बल के स्वर्ण जयंती वर्ष की ओर बढ़ते समय उसके मनोबल और परिचालन क्षमता को और मजबूत करेंगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की आधुनिक, सक्षम और भविष्य के लिए तैयार समुद्री सुरक्षा बल के रूप में भारतीय तटरक्षक बल को सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

भर्ती और करियर में लैंगिक समानता

पहली नीति के तहत भारतीय तटरक्षक बल में अधिकारियों की भर्ती के लिए लैंगिक-तटस्थ (जेंडर-न्यूट्रल) व्यवस्था लागू की गई है। इसके प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं—

  • महिला उम्मीदवारों को पुरुष उम्मीदवारों के समान शॉर्ट सर्विस अपॉइंटमेंट (SSA) और परमानेंट अपॉइंटमेंट (PA) दोनों में भर्ती का अवसर मिलेगा।

  • पुरुष उम्मीदवारों के लिए भी अब SSA का विकल्प उपलब्ध रहेगा।

  • प्रशिक्षण के प्रारंभिक चरण से ही महिलाओं और पुरुषों को करियर में समान अवसर प्रदान किए जाएंगे।

  • वर्तमान में कार्यरत PA महिला अधिकारियों को पात्रता की शर्तें पूरी करने पर उच्च पदों पर पदोन्नति का अवसर मिलेगा।

  • SSA पर कार्यरत महिला अधिकारियों को निर्धारित शर्तें पूरी करने पर अपनी सेवा को PA में परिवर्तित करने का विकल्प भी दिया जाएगा।

सरकार ने इस कदम को 'नारी शक्ति' और देश की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था में समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया है।

समुद्र में लापता कर्मियों के परिजनों को त्वरित राहत

दूसरी नीति ड्यूटी के दौरान समुद्र में लापता होने वाले तटरक्षक कर्मियों के निकटतम परिजनों (Next of Kin - NoK) को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से लाई गई है।

इस नीति के तहत ड्यूटी के दौरान समुद्र में लापता हुए तटरक्षक कर्मियों को एक्स-ग्रेशिया के उद्देश्य से 'मृत मान लिया गया' (Presumed Dead) घोषित करने का अधिकार प्रदान किया गया है।

इस सुधार से अनुग्रह राशि और सेवा-समापन लाभ (टर्मिनल बेनिफिट्स) प्रदान करने की प्रक्रिया तेज और सरल होगी। इससे शोकग्रस्त परिवारों को लंबे समय तक प्रशासनिक प्रक्रियाओं का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और उन्हें कठिन समय में शीघ्र आर्थिक सहायता मिल सकेगी।

कारगिल विजय दिवस: 'दुश्मन की सोच से परे होगा भारत का जवाब', रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी

No comments Document Thumbnail

 द्रास (कारगिल): कारगिल विजय दिवस की 27वीं वर्षगांठ के अवसर पर कारगिल युद्ध स्मारक पर जांबाज शहीदों को नमन करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि पाकिस्तान ने भारत की संप्रभुता को चुनौती देने की कोशिश की, तो भारत की जवाबी कार्रवाई दुश्मन की सोच और कल्पना से परे होगी।




पाकिस्तान पर आतंकवाद को अपनी 'सरकारी नीति' बनाने का आरोप लगाते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद को अब कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

'पीओके पर ही होगी अब पाकिस्तान से चर्चा'

रक्षा मंत्री ने दोटुक शब्दों में कहा कि पाकिस्तान के साथ भविष्य में यदि कोई बातचीत होती है, तो वह केवल 'पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर' (PoK) को लेकर होगी। उन्होंने दोहराया कि PoK भारत का अभिन्न व अटूट हिस्सा है, जिस पर पाकिस्तान ने अवैध और गैर-कानूनी तरीके से कब्जा जमा रखा है।

1999 के कारगिल युद्ध की ऐतिहासिक विजय को 'भारत माता के मुकुट का हीरा' बताते हुए उन्होंने कहा कि देश अपने वीर जवानों के अदम्य साहस और शहादत को कभी नहीं भूलेगा।

'ऑपरेशन सिंदूर' से आतंक के आकाओं को दिया मुंहतोड़ जवाब

संबोधन के दौरान रक्षा मंत्री ने अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में मई 2025 में चलाए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन के जरिए भारतीय सेना ने आतंकवाद के आकाओं और उनके मददगारों के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई ने दुनिया के सामने यह साबित कर दिया है कि आतंकवाद के रास्ते भारत को डराने की कोशिश करने वालों का अंजाम बेहद भयानक होता है।

विकास और विनाश की सोच का अंतर

दोनों देशों की प्राथमिकताओं की तुलना करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत आज रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन रहा है और आधुनिक युद्धपोत व उन्नत तकनीकों का निर्माण कर रहा है। इसके विपरीत, पाकिस्तान केवल भारत में घुसपैठ कराने और आतंकवाद के नए रास्ते तलाशने में अपनी ऊर्जा बर्बाद कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत प्रगति की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है, जबकि पड़ोसी देश अपनी नापाक हरकतों में ही उलझा हुआ है।

ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को दिखाई भारत की ताकत, पाकिस्तान से बातचीत केवल पीओके पर होगी: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

No comments Document Thumbnail

द्रास (लद्दाख)- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 27वें कारगिल विजय दिवस के अवसर पर द्रास स्थित कारगिल युद्ध स्मारक में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' की सफलता इस बात का प्रमाण है कि भारत पाकिस्तान की हर दुस्साहसपूर्ण हरकत का उसकी कल्पना से कहीं अधिक कठोर जवाब देने में सक्षम है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पाकिस्तान के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत तभी होगी, जब उसका विषय केवल पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) की वापसी होगा।

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की संप्रभुता के खिलाफ होने वाली हर साजिश का जवाब भारतीय सशस्त्र बल उसी दृढ़ता और साहस से देंगे, जैसा उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आतंकवादियों और उनके संरक्षकों के खिलाफ दिया।

उन्होंने पाकिस्तान पर आतंकवाद को राज्य नीति का हिस्सा बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि वहां सेना और आतंकवादी संगठनों के बीच का अंतर लगभग समाप्त हो चुका है। पाकिस्तान की सेना न केवल आतंकवादी संगठनों को संरक्षण देती है, बल्कि उनके साथ मिलकर काम भी करती है। इसी कारण भारत अब आतंकवादियों और उन्हें संरक्षण देने वाली सरकारों को अलग-अलग नहीं मानता।

भारत और पाकिस्तान की राहें अब पूरी तरह अलग

राजनाथ सिंह ने कहा कि कारगिल युद्ध के 27 वर्षों बाद भारत और पाकिस्तान की दिशा पूरी तरह बदल चुकी है। उन्होंने कहा कि जहां भारत नवाचार, स्टार्टअप, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष मिशनों और डिजिटल तकनीक में नई ऊंचाइयां छू रहा है, वहीं पाकिस्तान घुसपैठ, आतंकवाद, आत्मघाती हमलावरों और कट्टरपंथ को बढ़ावा देने में लगा हुआ है।

उन्होंने कहा कि भारत दुनिया को सॉफ्टवेयर और यूपीआई जैसी आधुनिक तकनीक दे रहा है, जबकि पाकिस्तान आतंकवाद और हवाला नेटवर्क को बढ़ावा दे रहा है। यदि पाकिस्तान भारत की प्रगति में बाधा डालने का प्रयास करेगा, तो भारतीय सशस्त्र बल उसे करारा जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

सेना को खुली छूट, हर खतरे का मिलेगा जवाब

रक्षा मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने सशस्त्र बलों को हर खतरे का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी राजनीतिक स्वतंत्रता दी है। उन्होंने विश्वास जताया कि जब तक भारतीय सैनिक देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं, तब तक कोई भी दुश्मन भारत की ओर बुरी नजर डालने का साहस नहीं कर सकता।

कारगिल के वीरों को श्रद्धांजलि

राजनाथ सिंह ने 1999 के कारगिल युद्ध में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने परमवीर चक्र विजेता कैप्टन विक्रम बत्रा और कैप्टन मनोज कुमार पांडेय सहित सभी शहीदों को याद करते हुए कहा कि उनका बलिदान देश के युवाओं को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।

उन्होंने कहा कि कारगिल विजय दिवस केवल विजय का प्रतीक नहीं, बल्कि त्याग, सेवा और राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करने वाला दिन है।

हर भारतीय में होना चाहिए सैनिक जैसा जज़्बा

रक्षा मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सेना की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का भी कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि हर भारतीय में सैनिक जैसा अनुशासन, साहस और राष्ट्रप्रेम होना चाहिए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर पूरा देश एकजुट होकर राष्ट्र की रक्षा के लिए खड़ा हो सके।

2047 का विकसित भारत होगा सुरक्षित और आत्मनिर्भर

उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 का सपना केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रणनीतिक शक्ति, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक समरसता का भी संकल्प है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कारगिल के वीरों जैसी निष्ठा और समर्पण की आवश्यकता है।

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर विशेष जोर

राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत रक्षा उत्पादन में तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है। उन्होंने बताया कि पहले भारत अपनी 65-70 प्रतिशत रक्षा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर था, जबकि आज लगभग 65 प्रतिशत रक्षा उपकरण देश में ही बनाए जा रहे हैं।

उन्होंने आकाश-तीर एयर डिफेंस सिस्टम, आकाश मिसाइल, आईएनएस विक्रांत, तेजस, प्रचंड, ध्रुव, अर्जुन टैंक, पिनाका, अस्त्र मिसाइल और आधुनिक ड्रोन व काउंटर-ड्रोन प्रणालियों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये भारतीय सेनाओं की ताकत को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कैप्टन विक्रम बत्रा के प्रसिद्ध नारे "ये दिल मांगे मोर" का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत और अधिक आधुनिक हथियार, लड़ाकू विमान, पनडुब्बियां और मिसाइलें स्वदेश में ही विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

शहीदों को दी श्रद्धांजलि

कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री ने कारगिल युद्ध स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी तथा दो मिनट का मौन रखा। उन्होंने 'शौर्य विजय यात्रा' का समापन भी किया, जिसका शुभारंभ उन्होंने 14 जुलाई को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक से किया था। इस अवसर पर वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, कारगिल युद्ध के वीर सैनिक, वीर नारियां, शहीदों के परिजन और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।


कारगिल विजय दिवस 2026 के उपलक्ष्य में 'शौर्य विजय यात्रा' का शुभारंभ

No comments Document Thumbnail

कारगिल विजय दिवस 2026 के राष्ट्रव्यापी आयोजन के अंतर्गत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 14 जुलाई 2026 को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय समर स्मारक से 13 दिवसीय ‘शौर्य विजय यात्रा’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह स्मारक मोटरसाइकिल अभियान द्रास (लद्दाख) स्थित कारगिल युद्ध स्मारक तक जाएगा।

इस अभियान में 28 मोटरसाइकिल सवार, जिनमें सेवारत एवं सेवानिवृत्त रक्षा कर्मी तथा उनके परिवार के सदस्य शामिल हैं, लगभग 1,900 किलोमीटर की कठिन हिमालयी यात्रा तय करेंगे। इस यात्रा का उद्देश्य 1999 के कारगिल युद्ध में देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करना है। इस अभियान का ध्येय वाक्य है—"One Ride, One Nation, One Salute" (एक यात्रा, एक राष्ट्र, एक सलाम)।

अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने कारगिल युद्ध के वीर सैनिकों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने साहस, धैर्य, अनुशासन और अद्वितीय देशभक्ति का ऐसा स्वर्णिम अध्याय लिखा, जिसे आज भी विश्व की सेनाएँ सम्मान के साथ अध्ययन करती हैं। उन्होंने कहा कि लगभग 20,000 फीट की ऊँचाई और शून्य से 40 डिग्री सेल्सियस नीचे के अत्यंत कठिन मौसम में भारतीय सैनिकों ने अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प का परिचय देते हुए दुश्मन के कब्जे से प्रत्येक चोटी, पहाड़ी और बंकर को पुनः प्राप्त किया तथा तिरंगे की आन-बान-शान को कायम रखा। यह विजय भारत के उस अटूट संकल्प का प्रतीक है कि देश की भूमि, अस्मिता और सम्मान पर उठने वाली हर शत्रुतापूर्ण नजर का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।

राजनाथ सिंह ने परमवीर चक्र से सम्मानित कैप्टन विक्रम बत्रा, लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडेय, सूबेदार मेजर (मानद कैप्टन) योगेंद्र सिंह यादव (सेवानिवृत्त) तथा सूबेदार मेजर (मानद कैप्टन) संजय कुमार (सेवानिवृत्त) सहित सभी वीर सैनिकों के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इन वीरों का जीवन देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है और आने वाली पीढ़ियों को भी सदैव प्रेरित करता रहेगा।

यात्रा के दौरान प्रतिभागी चंडीमंदिर युद्ध स्मारक, रेजांग ला युद्ध स्मारक तथा लेह युद्ध स्मारक सहित विभिन्न सैन्य स्मारकों पर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। वे वीर नारियों से भी मिलेंगे और उनके साहस एवं धैर्य का सम्मान करेंगे। यह यात्रा 26 जुलाई 2026, अर्थात कारगिल विजय दिवस के अवसर पर कारगिल युद्ध स्मारक पहुँचकर सम्पन्न होगी।

इस अभियान की एक विशेषता यह है कि यात्री अपने साथ राष्ट्रीय समर स्मारक की पवित्र मिट्टी से भरा एक कलश लेकर चलेंगे, जिसे कारगिल युद्ध स्मारक पर शहीदों की स्मृति में अर्पित किया जाएगा। रक्षा मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय समर स्मारक की यह पवित्र मिट्टी जब कारगिल की पावन धरती से मिलेगी, तब यह वर्तमान पीढ़ी की श्रद्धा और देश के वीरों के अदम्य पराक्रम के पावन संगम का प्रतीक बनेगी।

रक्षा मंत्री ने बताया कि शौर्य विजय यात्रा की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें सेवारत सैनिक, पूर्व सैनिक और देश के विभिन्न भागों से आए नागरिक एक साथ भाग ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि भले ही सभी की भाषाएँ, परंपराएँ और पृष्ठभूमियाँ अलग-अलग हों, लेकिन एक तिरंगा, एक राष्ट्र और अपने वीरों के प्रति समान सम्मान ही भारत की वास्तविक पहचान है।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के कैडेट भी उपस्थित थे। रक्षा मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह यात्रा विशेष रूप से युवाओं में राष्ट्रभक्ति की नई चेतना जगाएगी तथा यह संदेश देगी कि देश की स्वतंत्रता और सम्मान की रक्षा केवल सीमाओं पर ही नहीं, बल्कि हमारी स्मृतियों, संस्कारों और मूल्यों में भी होती है।

इस अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि, थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

शौर्य विजय यात्रा भारतीय सेना की ऑपरेशन विजय के दौरान प्रदर्शित मूल्यों—कर्तव्य, सम्मान और निःस्वार्थ सेवा—को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह अभियान वीर सैनिकों की गौरवगाथा को जन-जन तक पहुँचाते हुए आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा और बलिदान के आदर्शों के प्रति प्रेरित करने का प्रयास है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जारी किया DRDO का नया वित्तीय अधिकार ढांचा (DFP-2026), रक्षा अनुसंधान को मिलेगी नई गति

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 29 जून 2026 को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के लिए डेलीगेशन ऑफ फाइनेंशियल पावर्स-2026 (DFP-2026) जारी किया। यह नया वित्तीय ढांचा रक्षा अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है।

प्रमुख बातें

  • DFP-2026 से रक्षा अनुसंधान परियोजनाओं को समय पर मंजूरी और वित्तीय स्वीकृति मिलेगी।

  • रक्षा तकनीकों, हथियार प्रणालियों और प्लेटफॉर्म्स का तेजी से उत्पादन और सेना में शामिल किया जा सकेगा।

  • उद्योग, स्टार्टअप और शैक्षणिक संस्थानों के साथ साझेदारी को बढ़ावा मिलेगा।

  • यह पहल आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूत करेगी और स्वदेशी रक्षा तकनीकों के विकास में तेजी लाएगी।

नए ढांचे की विशेषताएं

  • परीक्षण, ट्रायल और मूल्यांकन गतिविधियों के लिए अलग वित्तीय प्रावधान।

  • परियोजना शुरू होने से पहले अनुसंधान एवं विकास (Pre-Project R&D) को मंजूरी देने का अधिकार।

  • Extra-Mural Research Projects, Defence Innovation Accelerator – Centres of Excellence तथा Technology Development Fund परियोजनाओं के लिए अलग-अलग वित्तीय अधिकार निर्धारित किए गए हैं।

  • DRDO के विभिन्न स्तरों पर अधिकारियों को अधिक वित्तीय अधिकार देकर निर्णय प्रक्रिया को तेज बनाया जाएगा।

रक्षा मंत्री ने क्या कहा?

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि नया वित्तीय ढांचा रक्षा अनुसंधान को अधिक प्रभावी बनाएगा, उद्योग और अकादमिक संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाएगा तथा देश की रक्षा तैयारियों को और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि यह सुधार रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को नई गति देगा।

इस अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान, रक्षा सचिव एवं DRDO के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार, पूर्व सैनिक कल्याण सचिव सुकृति लिखी सहित रक्षा मंत्रालय और DRDO के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.