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AI, परमाणु, अंतरिक्ष और क्वांटम तकनीकें तय करेंगी भारत का भविष्य: डॉ. जितेंद्र सिंह

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अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), परमाणु, अंतरिक्ष और क्वांटम प्रौद्योगिकियां भविष्य की आर्थिक वृद्धि और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की दिशा तय करेंगी।

उन्होंने कहा कि 2023 में शुरू किए गए राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) ने केवल तीन वर्षों में अपने निर्धारित लक्ष्यों में से आधे से अधिक उपलब्धियां हासिल कर ली हैं, जिससे भारत अग्रणी तकनीकों के क्षेत्र में तेजी से उभरती हुई वैश्विक शक्ति बन रहा है।

एक प्रमुख समाचार चैनल द्वारा आयोजित मीडिया कॉन्क्लेव में फायरसाइड चर्चा के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आज भारत कई महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्रों में दुनिया के अग्रणी देशों के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रहा है और ऐसी क्षमताओं का विकास कर रहा है जो आर्थिक विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अगले दौर को परिभाषित करेंगी।

उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष, परमाणु और क्वांटम प्रौद्योगिकियां भविष्य की विश्व व्यवस्था को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभाएंगी। इनका प्रभाव केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रणनीतिक शक्ति और भू-राजनीतिक स्थिति पर भी पड़ेगा। उन्होंने कहा, "जो देश इन तकनीकों में पीछे रह जाएंगे, वे विकास और सुरक्षा दोनों में पिछड़ने का जोखिम उठाएंगे।"

राष्ट्रीय क्वांटम मिशन का उल्लेख करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि मिशन ने निर्धारित समय से पहले कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने बताया कि क्वांटम-सुरक्षित संचार (Quantum Secure Communication) के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, जिसका उपयोग रक्षा, रणनीतिक संचार, साइबर सुरक्षा और संवेदनशील सूचनाओं की सुरक्षा में किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि मिशन की तेज प्रगति भारत की वैज्ञानिक क्षमता और उभरती हुई तकनीकों में वैश्विक नेतृत्व स्थापित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। भारत क्वांटम संचार, क्वांटम कंप्यूटिंग और संबंधित अनुसंधान के पूरे इकोसिस्टम में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि AI अब लगभग हर क्षेत्र में एक आवश्यक उपकरण बनती जा रही है और भविष्य में शासन, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, अनुसंधान तथा सार्वजनिक सेवाओं को व्यापक रूप से प्रभावित करेगी। इसके साथ ही भारत डिजिटल अवसंरचना, कंप्यूटिंग क्षमता, डेटा संसाधनों और विश्वसनीय ऊर्जा प्रणालियों में निवेश कर इस क्षेत्र का मजबूत आधार तैयार कर रहा है।

उन्होंने कहा कि आधुनिक विश्व में तकनीकी प्रगति ही विकास का प्रमुख आधार बन गई है और कोई भी देश नवाचार तथा अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाए बिना दीर्घकालिक विकास नहीं कर सकता। भारत समावेशी विकास, लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखते हुए इस परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किए गए अनेक नीतिगत सुधारों ने नवाचार, उद्यमिता और वैज्ञानिक प्रगति के नए अवसर खोले हैं। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलने से स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई ऊर्जा मिली है, जबकि परमाणु क्षेत्र में हाल की नीतिगत पहल निवेश, तकनीकी सहयोग और क्षमता निर्माण को गति देंगी।

उन्होंने कहा कि उन्नत कंप्यूटिंग, डेटा सेंटर और डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए मजबूत और विश्वसनीय ऊर्जा स्रोतों की आवश्यकता होगी। इस संदर्भ में परमाणु ऊर्जा भारत की तकनीक-आधारित विकास यात्रा और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

शिक्षा सुधारों पर बोलते हुए उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को एक परिवर्तनकारी कदम बताया, जिसने छात्रों के सीखने, उच्च शिक्षा और अनुसंधान के दृष्टिकोण को पूरी तरह बदल दिया है। उन्होंने कहा कि इस नीति ने पारंपरिक और कठोर शैक्षणिक ढांचे की जगह लचीले तथा बहुविषयक अवसर प्रदान किए हैं, जिससे छात्र अपनी रुचि, योग्यता और आकांक्षाओं के अनुरूप करियर चुन सकते हैं।

उन्होंने कहा कि NEP 2020 छात्रों को अनुसंधान और नवाचार की ओर प्रेरित कर एक मजबूत शोध संस्कृति विकसित कर रही है। इससे वैज्ञानिक अनुसंधान की गुणवत्ता बेहतर होगी और नए नवोन्मेषकों, उद्यमियों तथा प्रौद्योगिकी नेताओं की पीढ़ी तैयार होगी।

अनुसंधान एवं विकास (R&D) के व्यापक परिदृश्य पर उन्होंने कहा कि भारत सरकार-केंद्रित नवाचार मॉडल से आगे बढ़कर शैक्षणिक संस्थानों, उद्योग, स्टार्टअप और निजी क्षेत्र की भागीदारी वाला सहयोगात्मक मॉडल विकसित कर रहा है। वैज्ञानिक प्रगति के लिए वित्तीय, तकनीकी और बौद्धिक संसाधनों का समन्वय आवश्यक है और देश ऐसा वातावरण तैयार कर रहा है जो इस सहयोग को बढ़ावा देता है।

उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में किए गए सुधारों ने भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत किया है तथा वैज्ञानिक खोज, प्रौद्योगिकी विकास और अनुसंधान के व्यावसायीकरण के नए अवसर पैदा किए हैं।

भविष्य की ओर देखते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और क्वांटम प्रौद्योगिकियां आने वाले दशकों में समाज को अभूतपूर्व गति से बदल देंगी। आज विकसित किए जा रहे संस्थान, नीतियां और तकनीकी क्षमताएं ही भविष्य में देशों की दिशा तय करेंगी।

उन्होंने युवाओं से भारत के वैज्ञानिक और तकनीकी परिवर्तन में सक्रिय भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि वर्तमान पीढ़ी के पास ज्ञान, सूचना और सीखने के ऐसे संसाधन उपलब्ध हैं, जो पहले कभी नहीं थे। उन्होंने छात्रों से इन अवसरों का पूरा लाभ उठाने, वैज्ञानिक सोच विकसित करने और भारत को ज्ञान एवं नवाचार आधारित अग्रणी राष्ट्र बनाने में योगदान देने का आह्वान किया।

अंत में उन्होंने कहा कि शिक्षा, अनुसंधान, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और उभरती हुई प्रौद्योगिकियों में किए गए सुधार भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में मजबूत आधार तैयार करेंगे और देश को दुनिया की अग्रणी नवाचार-आधारित अर्थव्यवस्थाओं में स्थापित करेंगे।

राष्ट्रीय समुद्री खाद्य निर्यात कार्यशाला में भारत को वैश्विक सीफूड निर्यात महाशक्ति बनाने पर जोर

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विशाखापत्तनम- मत्स्य पालन विभाग, मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय तथा आंध्र प्रदेश सरकार के सहयोग से 5 और 6 जून 2026 को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में राष्ट्रीय समुद्री खाद्य (सीफूड) निर्यात कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला में केंद्र और राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों, निर्यातकों, उद्योग प्रतिनिधियों, स्टार्टअप्स तथा विभिन्न संस्थानों ने भाग लेकर भारत के समुद्री खाद्य निर्यात को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नारा चंद्रबाबू नायडू, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह, केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किन्जारापु राममोहन नायडू तथा केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने कार्यशाला में भाग लिया

गुणवत्ता और वैल्यू एडिशन पर विशेष जोर

कार्यशाला में इस बात पर बल दिया गया कि भारत को केवल मात्रा आधारित निर्यातक नहीं, बल्कि उच्च गुणवत्ता और मूल्य संवर्धित समुद्री उत्पादों के वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित किया जाए। विशेषज्ञों ने नवाचार, आधुनिक तकनीक, ट्रेसबिलिटी सिस्टम और गुणवत्ता प्रमाणन को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई ताकि भारतीय सीफूड उत्पादों की वैश्विक पहचान और मजबूत हो सके।

₹1 लाख करोड़ से अधिक निर्यात का लक्ष्य

कार्यशाला के दौरान सरकार ने समुद्री खाद्य निर्यात को ₹1 लाख करोड़ से अधिक तक पहुंचाने के लक्ष्य को रेखांकित किया। इसके लिए कोल्ड चेन, एयर कार्गो, क्वारंटीन सुविधाओं और प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई।

अंतर्देशीय मत्स्य पालन में अपार संभावनाएं

विशेषज्ञों ने कहा कि देश के कुल मत्स्य उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले अंतर्देशीय मत्स्य क्षेत्र में निर्यात की अपार संभावनाएं हैं। पिंजरा मत्स्य पालन, जलाशय आधारित एक्वाकल्चर, मोती उत्पादन, समुद्री शैवाल (सीवीड) खेती और सजावटी मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा देकर किसानों और मत्स्य पालकों की आय बढ़ाई जा सकती है।

स्टार्टअप और एमएसएमई बनेंगे विकास के नए इंजन

कार्यशाला में स्टार्टअप्स और एमएसएमई की भूमिका पर विशेष चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने माना कि नवाचार, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और नई तकनीकों के उपयोग से भारतीय समुद्री खाद्य उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाई जा सकती है। साथ ही, रोजगार सृजन और निर्यात विविधीकरण में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

चुनौतियों पर भी हुई चर्चा

हितधारकों ने रोग प्रबंधन, बढ़ती उत्पादन लागत, गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता, कोल्ड चेन की कमी, क्वारंटीन सुविधाओं की सीमाएं, कड़े अंतरराष्ट्रीय मानक और ट्रेसबिलिटी जैसी चुनौतियों को रेखांकित किया। इन समस्याओं के समाधान के लिए समन्वित नीति और निवेश बढ़ाने पर जोर दिया गया।

सामूहिक प्रयासों से बनेगा मजबूत निर्यात तंत्र

कार्यशाला का समापन केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, उद्योग जगत, अनुसंधान संस्थानों और उद्यमियों की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ। सभी पक्षों ने सतत उत्पादन, गुणवत्ता, प्रमाणन, बुनियादी ढांचे के विकास और बाजार विविधीकरण के माध्यम से भारत को विश्वसनीय और प्रतिस्पर्धी सीफूड निर्यातक राष्ट्र बनाने का संकल्प दोहराया।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस कार्यशाला से प्राप्त सुझाव भविष्य की नीतियों और योजनाओं को दिशा देंगे तथा भारत को वैश्विक समुद्री खाद्य बाजार में और मजबूत स्थान दिलाने में मदद करेंगे।


IITM पुणे में WISE-2026 के तहत मौसम और जलवायु स्टार्टअप्स के लिए इन्क्यूबेशन सेंटर का शुभारंभ

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भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM), पुणे, जो पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) के अंतर्गत आता है, ने आज मौसम और जलवायु से संबंधित स्टार्टअप्स के लिए अपना समर्पित इन्क्यूबेशन सेंटर औपचारिक रूप से शुरू किया। इस ऐतिहासिक अवसर को एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन “Weather and Climate Innovation Meet for Startups and Entrepreneurs (WISE-2026)” के साथ मनाया गया, जो भारत में मौसम सेवाओं में निजी क्षेत्र की भागीदारी के एक नए युग की शुरुआत का संकेत देता है।

इस केंद्र का उद्घाटन मुख्य अतिथि के रूप में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन ने किया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. शैलेश नाइक (निदेशक, NIAS एवं पूर्व सचिव, MoES), डॉ. सूर्यचंद्र राव (निदेशक, IITM) तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। यह इन्क्यूबेशन सेंटर “नेशनल एंटरप्राइज फॉर एटमॉस्फेरिक टेक्नोलॉजी (NEAT)” का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो “मिशन मौसम” के अंतर्गत एक महत्वाकांक्षी पहल है और सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से तकनीकी विकास को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया है।

मौसम और जलवायु चुनौतियों से निपटने में सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर देते हुए डॉ. एम. रविचंद्रन ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम की जटिलता बढ़ रही है, इसलिए पारंपरिक शोध से आगे बढ़कर एक समावेशी और बहु-हितधारक प्रणाली विकसित करनी होगी। उन्होंने कहा कि “मिशन मौसम” एक मौसम-स्मार्ट और जलवायु-स्मार्ट राष्ट्र बनाने की दिशा में एक आधारभूत कदम है, जिसमें उन्नत अवलोकन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित मॉडलिंग और स्थानीय स्तर पर जानकारी के प्रसार को शामिल किया गया है।

उन्होंने कहा—

“विभिन्न क्षेत्रों के युवा उद्यमियों को अन्य हितधारकों की जरूरतों की बेहतर समझ होती है, इसलिए हमें मिलकर काम करना होगा। यह सहयोग न केवल आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि जीवन और आजीविका बचाने के लिए भी आवश्यक है।”

प्रगति के चार स्तंभ: सचिव ने मौसम विज्ञान प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए चार मुख्य आधार बताए—

  1. अवलोकन (Observations)

  2. मॉडलिंग (Modeling)

  3. उपयोगकर्ता-विशिष्ट अनुप्रयोग (User-specific Applications)

  4. सूचना प्रसार (Dissemination)

मिशन मौसम: इसे पाँच वर्षों की एक योजना के रूप में लागू किया जाएगा, जिसका उद्देश्य मौसम पूर्वानुमान और जलवायु विश्लेषण को विभिन्न मंत्रालयों और स्टार्टअप्स के सहयोग से एक “स्वास्थ्य प्रणाली दृष्टिकोण” के रूप में विकसित करना है।

उन्होंने नवाचारकर्ताओं को मंत्रालय के मुक्त डेटा संसाधनों—जैसे रिमोट सेंसिंग और रिऐनालिसिस डेटा—का उपयोग करने के लिए आमंत्रित किया, ताकि कृषि, विमानन और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में सटीक और स्थानीय समाधान विकसित किए जा सकें।

कार्यक्रम के दौरान एक उच्च स्तरीय पैनल चर्चा भी हुई, जिसमें यह बताया गया कि मौसम और जलवायु विज्ञान अब शोध से आगे बढ़कर स्टार्टअप-आधारित व्यावहारिक समाधानों की ओर बढ़ रहा है। इसमें कृषि, नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया।

इस अवसर पर यह भी कहा गया कि “मौसम की जानकारी ही आर्थिक जानकारी है”, और वैज्ञानिक डेटा को वास्तविक जीवन के उपयोगी उपकरणों में बदलना आवश्यक है।

WISE 2026 कार्यक्रम में लगभग 400 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें 100 स्टार्टअप संस्थापक शामिल थे। इस कार्यक्रम में NCMRWF, IMD, NCPOR, ICRISAT, IISER पुणे तथा IIT दिल्ली, IIT बॉम्बे और IIT गांधीनगर सहित कई प्रमुख संस्थानों के विशेषज्ञ और शोधकर्ता शामिल हुए।

यह पहल भारत में जलवायु तकनीक (Climate Tech) को बढ़ावा देने और एक मजबूत, स्मार्ट एवं लचीली मौसम प्रणाली विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

भारत-वियतनाम ने विज्ञान और तकनीक सहयोग को दी नई गति, जितेंद्र सिंह और वियतनाम मंत्री के बीच अहम बैठक

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केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने नई दिल्ली में वियतनाम के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री वु हाई क्वान के साथ द्विपक्षीय बैठक की। बैठक में दोनों देशों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, रोबोटिक्स, बायोटेक्नोलॉजी और स्टार्टअप इकोसिस्टम जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत और वियतनाम के बीच लगभग दो हजार वर्षों पुराने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री फाम मिन्ह चिन्ह की वर्ष 2024 में भारत यात्रा के बाद दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती मिली है।

बैठक में स्टार्टअप सहयोग, रिसर्च पार्टनरशिप, तकनीकी नवाचार और संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों ने विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में नियमित सहयोग जारी रखने और साझा विकास के लिए ठोस पहल करने पर सहमति व्यक्त की।


ऑपरेशन सिंदूर की सफलता में स्वदेशी रक्षा तकनीक की अहम भूमिका: संजय सेठ

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 “भारत की सैन्य शक्ति हमारे रक्षा उद्योगों के कारखानों में गढ़ी जाती है,” यह बात रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कही। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का श्रेय सशस्त्र बलों के अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प को दिया, जिसे स्वदेशी अत्याधुनिक हथियारों और प्रणालियों की प्रभावशीलता ने और मजबूत किया।

5 मई 2026 को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित नॉर्थ टेक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए उन्होंने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ और स्टार्ट-अप्स को देश का ब्रांड एंबेसडर बताया। उन्होंने कहा, “हमारे स्टार्ट-अप्स और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम भविष्य की वृद्धि के प्रमुख चालक हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। वे हमारे युग के विश्वकर्मा हैं।”

रक्षा राज्य मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आतंकवादी ठिकानों को नष्ट कर भारत के दुश्मनों की साजिशों को विफल करने के लिए सशस्त्र बलों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ उपकरणों का प्रभावी उपयोग सरकार, रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों, निजी क्षेत्र, नवोन्मेषकों, स्टार्ट-अप्स और MSMEs के आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र के संकल्प का प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड रक्षा उत्पादन और निर्यात के आंकड़े ‘नए भारत’ के उदय का प्रमाण हैं, जो अपनी क्षमताओं को मजबूत कर राष्ट्रीय हितों की रक्षा करता है। “यह नया भारत किसी पर बुरी नजर नहीं डालता, लेकिन अपनी संप्रभुता को खतरा पहुंचाने वालों को नजरअंदाज भी नहीं करता,” उन्होंने जोड़ा।

तकनीक के तेजी से बदलते स्वरूप पर जोर देते हुए उन्होंने उद्योगों से नवाचार करने और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच तकनीकी रूप से आगे रहने का आह्वान किया। उन्होंने रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए सरकार की पहलों का उल्लेख किया और उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के प्रभाव की सराहना की।

इस अवसर पर सेंट्रल कमांड के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने उद्योगों से उभरते क्षेत्रों में सेना की जरूरतों को पूरा करने के लिए सहयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता से रणनीतिक स्वायत्तता, तकनीकी संप्रभुता और परिचालन दक्षता बढ़ेगी।

तीन दिवसीय नॉर्थ टेक संगोष्ठी 2026 का आयोजन भारतीय सेना के नॉर्दर्न और सेंट्रल कमांड तथा SIDM द्वारा ‘रक्षा त्रिवेणी संगम - जहां तकनीक, उद्योग और सैनिक एक साथ आते हैं’ थीम पर किया गया है। इस कार्यक्रम का उद्घाटन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 4 मई 2026 को किया। इसमें 284 स्टॉल लगे हैं, जहां निजी रक्षा निर्माता अत्याधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन कर रहे हैं।

कार्यक्रम में UAVs, ड्रोन, काउंटर-UAV, ऑल टेरेन व्हीकल्स, निगरानी उपकरण और अन्य रक्षा उत्पादों के प्रदर्शन भी शामिल हैं।

इस दौरान नॉर्दर्न कमांड के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा, 1 कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल वी हरिहरन, SIDM के अध्यक्ष अरुण टी रामचंदानी सहित उद्योग जगत, स्टार्ट-अप्स और अकादमिक क्षेत्र के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने DTU में i-TBI का निरीक्षण किया; विश्वविद्यालयों में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने पर जोर

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विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) ने देशभर में 15 समावेशी टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर (i-TBI) स्थापित किए हैं, जो नवाचार और उद्यमिता को महानगरों के बाहर भी लोकतांत्रिक बनाने के उद्देश्य से विभिन्न विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों में कार्यरत हैं।

यह जानकारी आज केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान, और प्रधानमंत्री कार्यालय, कर्मियों, लोक शिकायतें, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष मंत्रालय के मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने दिल्ली तकनीकी विश्वविद्यालय (DTU) का दौरा करते हुए दी। दौरे का उद्देश्य DST समर्थित i-TBI की कार्यप्रणाली और प्रभाव का अवलोकन करना था, जिसे राष्ट्रीय नवाचार विकास और उपयोग (NIDHI) कार्यक्रम के तहत स्थापित किया गया है।

दौरे के दौरान, मंत्री ने DTU i-TBI सुविधा का निरीक्षण किया और यह आंका कि यह इनक्यूबेटर नवाचार, शोध और स्टार्टअप विकास के लिए किस हद तक उपयोग में लाया जा रहा है। शिक्षक, छात्र नवप्रवर्तनकर्ता और स्टार्टअप संस्थापकों से बातचीत करते हुए डॉ. जितेन्द्र सिंह ने विश्वविद्यालय की सराहना की कि उन्होंने DST के सहयोग का प्रभावी उपयोग करते हुए एक जीवंत स्टार्टअप इकोसिस्टम का निर्माण किया है।

मंत्री ने बताया कि DST ने देशभर में 15 i-TBI स्थापित किए हैं, जिनमें से एक DTU में है। यह इनक्यूबेटर विशेष रूप से समावेशिता और महिला-उद्यमिता पर ध्यान केंद्रित करते हुए शैक्षणिक विचारों को बाजार-तैयार समाधान में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने प्रसन्नता व्यक्त की कि DTU i-TBI ने अब तक 15 स्टार्टअप्स को इनक्यूबेट किया है, जो विश्वविद्यालय पारिस्थितिकी तंत्र में बढ़ती उद्यमशीलता क्षमता को दर्शाता है। इस अवसर पर, तीन स्टार्टअप्स को DST-NIDHI फ्रेमवर्क के तहत प्रत्येक को 5 लाख रुपये का स्टार्टअप इग्निशन ग्रांट प्रदान किया गया, जिससे वे अपने विचार को प्रोटोटाइप और प्रारंभिक व्यावसायीकरण तक ले जा सकें। उन्होंने कहा कि ये ग्रांट प्रेरक (catalytic) हैं और युवाओं में जोखिम लेने और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

बड़े नीति दृष्टिकोण पर जोर देते हुए, मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, पिछले दशक में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को अभूतपूर्व प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं रहा, बल्कि तकनीक निर्माता के रूप में उभर रहा है, जिसमें शोध अवसंरचना, शैक्षणिक उत्कृष्टता, इनक्यूबेशन, स्टार्टअप और उद्योग सहयोग सहित पूरे नवाचार चक्र का संरचित समर्थन शामिल है।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने विश्वविद्यालयों को केवल पारंपरिक शिक्षण और शोध तक सीमित रहने के बजाय नवाचार और उद्यमिता के हब बनने पर जोर दिया। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों को उद्योग के साथ सक्रिय रूप से जुड़ने, निजी निवेश आकर्षित करने और वित्तीय स्रोत विविधीकरण करने के लिए प्रोत्साहित किया, साथ ही FIST, PURSE और NIDHI जैसे सरकारी योजनाओं का उपयोग कर अपने शोध और नवाचार क्षमता को मजबूत करने का आग्रह किया।

राष्ट्रीय नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का संदर्भ देते हुए, मंत्री ने कहा कि सरकार ने सुनिश्चित किया है कि नवाचार के अवसर छोटे शहरों और आकांक्षी जिलों तक पहुँचें। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता, मेरिट-आधारित चयन और समावेशी पहुंच ने पूरे देश में युवा नवप्रवर्तकों के बीच विश्वास बनाया है, जिससे वैज्ञानिक क्षमता और महत्वाकांक्षा दोनों का लोकतंत्रीकरण हुआ है।

DTU में DST समर्थित i-TBI, DTU इनोवेशन एंड इनक्यूबेशन फाउंडेशन के अंतर्गत संचालित होता है और ज्ञान-आधारित स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने पर केंद्रित है, जिसमें विशेष जोर महिला उद्यमियों पर है। इनक्यूबेटर आइडिएशन से लेकर प्रोटोटाइप, उत्पाद विकास और बाजार तक पहुँच तक पूर्ण सहायता प्रदान करता है, आधुनिक अवसंरचना, मेंटरिंग और वित्तीय सहायता के माध्यम से।

दौरे के समापन पर, डॉ. जितेन्द्र सिंह ने विश्वविद्यालय-आधारित नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई और यह आश्वासन दिया कि वे ऐसी संस्थाओं का समर्थन जारी रखेंगे जो सार्वजनिक निधियों का प्रभावी उपयोग कर शोध, स्टार्टअप और सामाजिक प्रभाव में ठोस परिणाम उत्पन्न कर रही हैं।

IFFI, गोवा 2025 में WaveX बूथ बुकिंग की घोषणा: स्टार्टअप्स के लिए वैश्विक अवसर

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नई दिल्ली-सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने WaveX बूथ के लिए बुकिंग खोलने की घोषणा की है। यह बूथ Waves Bazaar में विशेष स्टार्टअप प्रदर्शन क्षेत्र है, जिसे WaveX द्वारा संचालित किया जा रहा है, और यह इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (IFFI), गोवा 2025 का हिस्सा होगा।

इस पहल का उद्देश्य AVGC-XR (एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स और एक्सटेंडेड रियलिटी) और मनोरंजन क्षेत्र में उभरते स्टार्टअप्स को वैश्विक उद्योग के नेताओं, निवेशकों और प्रोडक्शन स्टूडियोज़ से जुड़ने का अवसर प्रदान करना है।

WAVES Bazaar 20 से 24 नवंबर 2025 तक आयोजित किया जाएगा और यह Film Bazaar के पास स्थित होगा, जो IFFI का प्रमुख नेटवर्किंग हब है और जहाँ दुनिया भर के फिल्ममेकर, निर्माता और मीडिया पेशेवर भाग लेते हैं।

हर बूथ 30,000 रुपये प्रति स्टॉल (शेयरिंग आधार पर) की मामूली लागत पर उपलब्ध होगा। भाग लेने वाले स्टार्टअप्स को निम्नलिखित सुविधाएँ प्राप्त होंगी:

  • 2 डेलीगेट पास

  • लंच और हाई टी

  • सायंकालीन नेटवर्किंग अवसर

  • वैश्विक फिल्म, मीडिया और टेक्नोलॉजी पेशेवरों के बीच सीधे दृश्यता

इच्छुक स्टार्टअप्स wavex.wavesbazaar.com पर पंजीकरण कर सकते हैं। प्रश्नों के लिए संपर्क किया जा सकता है: wavex-mib[at]gov[dot]in। बूथों की संख्या सीमित है और आवंटन पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर होगा।

IFFI, गोवा के बारे में:

इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (IFFI), जिसकी स्थापना 1952 में हुई थी, एशिया के सबसे महत्वपूर्ण फिल्म उत्सवों में से एक है। यह विश्व सिनेमा में उत्कृष्टता का जश्न मनाता है और फिल्ममेकर्स, कलाकारों और सिनेप्रेमियों के लिए मिलन स्थल के रूप में कार्य करता है। गोवा में वार्षिक रूप से आयोजित होने वाला यह उत्सव दुनिया भर के फिल्म पेशेवरों को आकर्षित करता है और रचनात्मक सहयोग और अवसरों को बढ़ावा देता है। IFFI का 56वां संस्करण 20 से 28 नवंबर 2025 तक पणजी, गोवा में आयोजित किया जाएगा।

WaveX के बारे में:

WaveX, सूचना और प्रसारण मंत्रालय की राष्ट्रीय स्टार्टअप एक्सेलेरेटर और इनक्यूबेशन पहल है, जो AVGC-XR और मीडिया-टेक इकोसिस्टम में नवाचार और उद्यमिता को प्रोत्साहित करती है। प्रमुख अकादमिक, उद्योग और इनक्यूबेशन नेटवर्क के साथ सहयोग के माध्यम से, WaveX क्रिएटर्स और स्टार्टअप्स को अपने व्यवसाय को बढ़ाने में सक्षम बनाता है, जिससे भारत की बढ़ती क्रिएटिव अर्थव्यवस्था को योगदान मिलता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने CSIR–NIIST के स्वर्ण जयंती समारोह में नवाचार-आधारित अर्थव्यवस्था और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने की घोषणा की

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तिरुवनंतपुरम- केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि भारत का रूपांतरण तकनीक आयातक से नवाचार-आधारित निर्यातक में हो रहा है, जिसे CSIR–राष्ट्रीय अंतर्विषय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (NIIST) जैसे संस्थान शक्ति प्रदान कर रहे हैं। ये संस्थान वैज्ञानिक अनुसंधान को स्थिरता और उद्यमिता के साथ जोड़ते हैं।

डॉ. सिंह ने CSIR–NIIST के स्वर्ण जयंती कार्यक्रम के ग्रैंड फिनाले में कहा कि 50 वर्ष पहले संस्थान की स्थापना दक्षिणी प्रायद्वीप के विशाल प्राकृतिक संसाधनों का वैज्ञानिक उपयोग करने के उद्देश्य से की गई थी।

स्वर्ण जयंती के अवसर पर नई सुविधाओं का उद्घाटन:

50 वर्षों की उपलब्धियों को चिह्नित करते हुए, मंत्री ने संस्थान की नई स्वर्ण जयंती बिल्डिंग और CSIR–NIIST इनोवेशन सेंटर का उद्घाटन किया। यह केंद्र अनुसंधान विचारों को व्यावहारिक उत्पादों और स्टार्टअप्स में बदलने के लिए बनाया गया है। डॉ. सिंह ने कहा, “कृषि से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक, इनोवेशन सेंटर स्टार्टअप्स को पोषित करेगा, उद्यमियों का समर्थन करेगा और नवाचार-आधारित अर्थव्यवस्था को गति देगा।” उन्होंने यह भी बताया कि पहले दस स्टार्टअप्स का इन्क्यूबेशन सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है।

मंत्री ने कहा कि केरल सरकार ने Bio 360 Life Sciences Park, Thonnakkal में एक प्रस्तावित सेंटर फॉर इनोवेशन, टेक्नोलॉजी और एंटरप्रेन्योरशिप के लिए भूमि आवंटित की है। यह सुविधा बायोटेक्नोलॉजी और जीवन विज्ञान में अनुसंधान को तेज करेगी और लैब में हुई खोजों को जीवन बदलने वाली वास्तविकताओं में बदलने में मदद करेगी।

संस्थान की प्रमुख उपलब्धियां:

डॉ. सिंह ने संस्थान की चार राष्ट्रीय महत्व की नवाचार परियोजनाओं का उल्लेख किया:

  • AIIMS दिल्ली में बायोमेडिकल वेस्ट कन्वर्शन रिग जो संक्रामक कचरे को गैर-विषैले पदार्थ में बदलता है।

  • डायबिटिक और प्री-डायबिटिक लोगों के लिए उपयुक्त “डिज़ाइनर राइस” का विकास।

  • स्वदेशी वैक्सीन वायल मॉनिटर (VVMs), जिससे आयात पर निर्भरता कम हुई।

  • प्लास्टिक के पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों पर अनुसंधान।

उन्होंने कहा कि ये पहल सामाजिक प्रभाव वाले विज्ञान का उदाहरण हैं और सीधे स्वच्छ भारत, आयुष्मान भारत और आत्मनिर्भर भारत जैसे राष्ट्रीय मिशनों का समर्थन करती हैं।

संस्थान की वृद्धि और प्रदर्शन:

डॉ. सिंह ने कहा कि NIIST ने पिछले दो वर्षों में अपने संस्थागत बजट में 1.5 गुना वृद्धि की है, जो अब ₹120 करोड़ से अधिक है, और इसका आधा हिस्सा R&D पर खर्च किया गया है। संस्थान ने 28 प्रौद्योगिकियाँ ट्रांसफर की हैं, 65 उद्योग समझौते किए हैं और बाहरी फंडिंग और अनुसंधान उत्पादन में रिकॉर्ड स्तर हासिल किया है।

उन्होंने कहा कि संस्थान ने 2024 में IIT गुवाहाटी में 10वां इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल आयोजित कर 40,000 से अधिक प्रतिभागियों को जोड़ा। “दक्षिण से उत्तर पूर्व तक इस बड़े आयोजन की मेजबानी CSIR–NIIST की एकता और नेतृत्व को दर्शाती है,” उन्होंने कहा।

सरकार, उद्योग और अकादमिया के बीच सहयोग:

डॉ. सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रस्तावित “whole-of-government” और “whole-of-nation” दृष्टिकोण भारत की वैज्ञानिक प्रगति की कुंजी है। उन्होंने कहा कि हमें सरकार पर निर्भरता से स्वतंत्र, निजी क्षेत्र की भागीदारी वाले स्थायी इकोसिस्टम की ओर बढ़ना होगा।

उन्होंने CSIR और Department of Biotechnology के बीच चल रहे सहयोग और अंतरिक्ष तथा परमाणु क्षेत्रों में निजी खिलाड़ियों के लिए खोलने के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि यह एक एकीकृत मॉडल भारत के नवाचार ढांचे का भविष्य है।

वैश्विक नवाचार में भारत की उपलब्धियां:

डॉ. सिंह ने बताया कि भारत की Global Innovation Index रैंकिंग 2014 में 81 से बढ़कर इस वर्ष 38 हो गई है। लगभग 55% पेटेंट अब देशी हैं, जिससे घरेलू क्षमता और आत्मविश्वास का संकेत मिलता है।

विशेष केंद्र और परियोजनाएं:

CSIR–NIIST ने आयुर्वेद अनुसंधान केंद्र और परफॉर्मेंस केमिकल्स एवं सस्टेनेबल पॉलिमर्स सेंटर के लिए नींव रखी है। इन पहलों का उद्देश्य अनुसंधान को वास्तविक लाभ में बदलना और उद्योग व लोगों के लिए उपयोगी बनाना है। ये राष्ट्रीय मिशनों जैसे पोषण अभियान, स्वच्छ भारत और आत्मनिर्भर भारत के साथ मेल खाते हैं।

निष्कर्ष:

डॉ. सिंह ने CSIR–NIIST की टीम को बधाई देते हुए इसे “उद्देश्यपूर्ण उत्कृष्टता की शक्ति केंद्र” बताया और विश्वास जताया कि संस्थान भारत को वैश्विक विज्ञान और नवाचार में अग्रणी बनाने में लगातार योगदान देगा।


संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2025 स्थल का किया निरीक्षण

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नई दिल्ली- केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने आज यशोभूमि, द्वारका में इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2025 के उद्घाटन से पहले अंतिम तैयारियों का निरीक्षण किया। इस वर्ष IMC का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8 अक्टूबर 2025 को करेंगे। मंत्री सिंधिया ने शिवाजी स्टेडियम, नई दिल्ली से एयरपोर्ट मेट्रो के माध्यम से स्थल की यात्रा की।

निरीक्षण के दौरान केंद्रीय मंत्री ने प्रदर्शन क्षेत्र का विस्तृत दौरा किया, प्रतिभागी स्टार्टअप और प्रदर्शकों से बातचीत की, और टेलीकॉम विभाग (DoT), सेलुलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (COAI) और सहयोगी एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठकें कीं। उन्होंने मीडिया को संबोधित करते हुए IMC 2025 की वृहद योजना, महत्व और वैश्विक महत्व पर प्रकाश डाला।

मंत्री सिंधिया ने कहा कि IMC 2025 कनेक्टिविटी के नए युग की शुरुआत करेगा, जहां टेलीकॉम 5G, AI, ML, IoT और सैटेलाइट कम्युनिकेशन जैसी तकनीकों के लिए मार्ग और प्लेटफ़ॉर्म बनेगा, जो न केवल भारत बल्कि भारत और दुनिया को जोड़ेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यह तकनीकी सशक्तिकरण की रणनीति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पिछले ग्यारह वर्षों में तैयार की गई है, जिसका लक्ष्य आत्मनिर्भर, सशक्त और नवाचारी भारत बनाना और वैश्विक प्रगति में योगदान देना है।

इस वर्ष IMC में 1.5 लाख से अधिक आगंतुक, 7,000 प्रतिनिधि और प्रतिभागी 150 से अधिक देशों से, और 400 प्रदर्शक 4.5 लाख वर्ग फुट क्षेत्र में यशोभूमि में शामिल होंगे। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि IMC अब केवल एक राष्ट्रीय मंच नहीं बल्कि एशियाई और वैश्विक प्रौद्योगिकी कांग्रेस बन गया है, जो भारत की डिजिटल क्षमता और नेतृत्व को दर्शाता है।

IMC 2025 में छह प्रमुख वैश्विक सम्मेलनों की विशेषता होगी:

  • इंटरनेशनल भारत 6G संगोष्ठी – भारत के 6G अनुसंधान नेतृत्व को प्रदर्शित करेगी।

  • इंटरनेशनल AI समिट – नेटवर्क और सेवाओं में AI के परिवर्तनकारी प्रभाव पर केंद्रित।

  • साइबर सिक्योरिटी समिट – 1.2 अरब से अधिक टेलीकॉम उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा पर बल।

  • सैटकॉम समिट – भारत में उपग्रह आधारित संचार सेवाओं के नए युग पर विचार-विमर्श।

  • IMC Aspire प्रोग्राम – लगभग 500 स्टार्टअप्स और 300 निवेशक, उद्योग नेता और वीसी को एक मंच पर लाएगा।

  • ग्लोबल स्टार्टअप वर्ल्ड कप – इंडिया एडिशन – 15 फाइनलिस्ट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर $1 मिलियन निवेश के लिए प्रतिस्पर्धा करेंगे।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ये सभी कार्यक्रम मिलकर IMC 2025 को वैश्विक विचार, प्रौद्योगिकी और निवेश का संगम बनाते हैं, जो भारत की टेलीकॉम और डिजिटल वृद्धि की कहानी में नवाचार की भावना को दर्शाते हैं।

भारत की टेलीकॉम उपलब्धियों के बारे में मंत्री सिंधिया ने कहा कि भारत आज विश्व के शीर्ष तीन डिजिटल राष्ट्रों में शामिल है, जिसमें 1.2 अरब मोबाइल ग्राहक, 970 मिलियन इंटरनेट उपयोगकर्ता, और दुनिया की सबसे तेज 5G रोलआउट शामिल है, जो केवल 22 महीनों में पूरा हुआ।

उन्होंने कहा, “हमारी ताकत इस बात में है कि हम भारत में डिज़ाइन, भारत में समाधान और भारत में विस्तार कर सकते हैं। IMC 2025 इस तकनीकी आत्मनिर्भरता और नवाचार की यात्रा का उत्सव होगा।”

अंत में केंद्रीय मंत्री ने घोषणा की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8 अक्टूबर 2025 को सुबह 9:30 बजे यशोभूमि, द्वारका में इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2025 का उद्घाटन करेंगे। उन्होंने कहा, “सम्माननीय प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत का टेलीकॉम क्षेत्र नवाचार, कनेक्टिविटी और समावेशन का प्रतीक बन गया है। IMC 2025 पूरी दुनिया के सामने भारत के डिजिटल परिवर्तन को प्रदर्शित करेगा।”


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