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VIMARSH 2026 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुरू कीं अहम रक्षा नीति पहल, MSME और डीप-टेक स्टार्टअप्स को मिलेगा बढ़ावा

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नई दिल्ली- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित ‘VIMARSH 2026’ DRDO-इंडस्ट्री सिनर्जी मीट के दौरान रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कई महत्वपूर्ण नीति पहलों का शुभारंभ किया। इन पहलों का उद्देश्य देश के MSME, डीप-टेक स्टार्टअप्स और निजी उद्योगों को रक्षा अनुसंधान एवं उत्पादन से जोड़ना तथा भारत को रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाना है।

MSME और डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए आसान होगी एंट्री

नई नीति के तहत MSME और डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए तकनीकी और वित्तीय बाधाओं को कम करने के लिए एक व्यापक फ्रेमवर्क तैयार किया गया है। इसके माध्यम से कंपनियों को प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता, इनक्यूबेशन सपोर्ट और DRDO की परीक्षण सुविधाओं तक विशेष पहुंच उपलब्ध कराई जाएगी।

सरकार का लक्ष्य है कि छोटे उद्योग और नवाचार आधारित स्टार्टअप केवल रक्षा उत्पादों के आपूर्तिकर्ता न रहें, बल्कि अनुसंधान, डिजाइन, परीक्षण और विकास की पूरी प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनें।

DRDO के सॉफ्टवेयर तक उद्योगों की सुरक्षित पहुंच

DRDO द्वारा विकसित सॉफ्टवेयर के सोर्स कोड को लाइसेंस प्राप्त उद्योगों के साथ साझा करने के लिए एक मानकीकृत और सुरक्षित फ्रेमवर्क भी लॉन्च किया गया। इससे सॉफ्टवेयर आधारित रक्षा प्रणालियों के विकास में तेजी आने के साथ-साथ पुरानी तकनीकों को समय पर अपग्रेड करने और उनके अप्रचलन की समस्या से निपटने में मदद मिलेगी।

9 टेक्नोलॉजी ट्रांसफर समझौते, 13 कंपनियों को मिलेगा लाभ

कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री की मौजूदगी में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के लिए 9 लाइसेंसिंग एग्रीमेंट (LAToTs) 13 विनिर्माण भागीदारों को सौंपे गए। इन समझौतों के जरिए DRDO द्वारा विकसित अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियों और तकनीकों का व्यावसायिक उत्पादन संभव होगा।

SIDM और Laghu Udyog Bharati के साथ रणनीतिक MoU

रक्षा उद्योग तक पहुंच बढ़ाने और जमीनी स्तर पर छोटे उद्योगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए Society of Indian Defence Manufacturers (SIDM) और Laghu Udyog Bharati (LUB) के साथ रणनीतिक समझौते भी किए गए।

इसके अलावा DRDO ने Quality Council of India (QCI) के साथ SAMAR 2.0 (System for Advance Manufacturing Assessment and Rating) के लिए अनुबंध किया। इसके तहत देश की रक्षा कंपनियों की विनिर्माण क्षमता और तकनीकी परिपक्वता का आकलन किया जाएगा।

‘रक्षा उत्पादन’ से आगे बढ़कर पूरी वैल्यू चेन में साझेदारी पर जोर

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि DRDO और उद्योग के बीच सहयोग अब केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसे रिसर्च, डिजाइन, टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन और मैन्युफैक्चरिंग सहित पूरी वैल्यू चेन तक विस्तार देना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि DRDO के पास ज्ञान और तकनीक है, उद्योग के पास बड़े पैमाने पर उत्पादन की क्षमता है, स्टार्टअप्स नवाचार और तेजी लेकर आते हैं, जबकि देश का युवा नए भारत का सपना देखता है। इन चारों शक्तियों के एक साथ आगे बढ़ने से बड़े से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।

2047 तक महत्वपूर्ण तकनीकों में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य

राजनाथ सिंह ने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक रूप से मजबूत राष्ट्र बनना नहीं है, बल्कि भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर, सामाजिक रूप से समावेशी, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार और रणनीतिक रूप से सुरक्षित राष्ट्र बनाना भी है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक महत्वपूर्ण तकनीकों में आत्मनिर्भरता, स्वदेशी सामग्री में उल्लेखनीय वृद्धि, रक्षा निर्यात में कई गुना विस्तार और वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की मजबूत मौजूदगी सुनिश्चित करनी होगी।

AI, क्वांटम कंप्यूटिंग और हाइपरसोनिक तकनीक पर फोकस

नई पहलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग, हाइपरसोनिक तकनीक और डायरेक्टेड एनर्जी जैसी भविष्य की तकनीकों में निवेश और अनुसंधान को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि ड्रोन टेक्नोलॉजी, AI और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में MSME और स्टार्टअप भारत की तकनीकी एवं रणनीतिक क्षमता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं।

2,300 से अधिक टेक्नोलॉजी ट्रांसफर

रक्षा सचिव एवं DRDO के चेयरमैन राजेश कुमार सिंह ने बताया कि आत्मनिर्भरता की दिशा में किए गए प्रयासों से रक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया है। अब तक 2,300 से अधिक टेक्नोलॉजी ट्रांसफर 1,100 से अधिक उद्योगों को दिए जा चुके हैं।

उन्होंने बताया कि DRDO द्वारा विकसित करीब 50 मिसाइलों से संबंधित तकनीकों को भी उद्योगों के लिए उपलब्ध कराया गया है, ताकि निजी क्षेत्र की भागीदारी और बढ़ाई जा सके।

VIMARSH 2026 में 250 से अधिक उद्योग प्रतिनिधियों की भागीदारी

‘वार्ता से विकास (Varta se Vikas)’ थीम पर आधारित VIMARSH 2026 में 250 से अधिक रक्षा उद्योग प्रमुखों, उद्योग संगठनों के प्रतिनिधियों, वरिष्ठ सैन्य एवं नागरिक अधिकारियों और DRDO वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया।

कार्यक्रम में एयरोनॉटिकल सिस्टम, मिसाइल, आर्मामेंट, माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स और नेवल सिस्टम जैसे क्षेत्रों के तकनीकी रोडमैप पर भी चर्चा हुई।

आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग की दिशा में बड़ा कदम

VIMARSH 2026 को भारत के रक्षा उद्योग में सरकार, DRDO, बड़ी कंपनियों, MSME और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। सरकार का जोर अब रक्षा क्षेत्र में केवल आयात कम करने पर नहीं, बल्कि भारत को अत्याधुनिक तकनीक विकसित करने और वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में प्रमुख भूमिका निभाने वाला देश बनाने पर है।

रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि भविष्य के युद्धों में तकनीकी बढ़त ही रणनीतिक बढ़त तय करेगी, इसलिए आज नई और उभरती तकनीकों में निवेश करने वाली कंपनियां आने वाले समय में रक्षा क्षेत्र की अगुवाई करेंगी।

‘रक्षा शक्ति’ बनेगी विकसित भारत की ताकत, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर PM मोदी का जोर

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को लाल किले की प्राचीर से दिए स्वतंत्रता दिवस संबोधन में ‘रक्षा शक्ति’ को विकसित भारत के लिए सप्तधारा की सात प्रमुख शक्तियों में शामिल किया। उन्होंने 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को जरूरी बताया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि बदलते वैश्विक माहौल में भारत केवल दुनिया का बाजार बनकर नहीं रह सकता। देश को अगली पीढ़ी की रक्षा तकनीकों का विकास कर वैश्विक आपूर्तिकर्ता बनने की दिशा में आगे बढ़ना होगा। उन्होंने ड्रोन, काउंटर-ड्रोन सिस्टम और हाइपरसोनिक रक्षा तकनीक में नेतृत्व हासिल करने पर जोर दिया।

रक्षा उत्पादन में तेज बढ़ोतरी

प्रधानमंत्री ने पिछले 12 वर्षों में रक्षा क्षेत्र में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत का रक्षा उत्पादन करीब चार गुना बढ़ा है, जबकि रक्षा निर्यात में लगभग 50 गुना वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि भारत के हथियार अब करीब 100 देशों तक पहुंच रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सीमाओं के भीतर या बाहर किसी भी चुनौती से निपटने के लिए भारत को हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना होगा। बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच देश की रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करना जरूरी है।

आधुनिक युद्ध के लिए नई तैयारी

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। आधुनिक संघर्ष केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि रिफाइनरी, बैंकिंग सिस्टम, डेटा सेंटर, बुनियादी ढांचे और औद्योगिक प्रतिष्ठानों को भी निशाना बनाया जा सकता है।

इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ के तहत चल रहे कार्यों का उल्लेख किया और आधुनिक खतरों से निपटने के लिए रक्षा तैयारियों को मजबूत करने पर जोर दिया।

साइबर सुरक्षा में युवाओं की भूमिका

प्रधानमंत्री ने साइबर सुरक्षा को भी रक्षा का महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं की प्रतिभा और तकनीकी क्षमता का इस्तेमाल साइबर सुरक्षा को मजबूत करने और भारत के साथ-साथ दुनिया के हित में किया जा सकता है।

नागरिक सुरक्षा का बनेगा मजबूत नेटवर्क

प्रधानमंत्री ने नागरिकों की सुरक्षा को भी राष्ट्रीय जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि पिछली सदी के युद्धों को ध्यान में रखकर बनाए गए मौजूदा नागरिक सुरक्षा तंत्र को आधुनिक चुनौतियों के अनुरूप बदलने की जरूरत है।

उन्होंने आने वाले समय में आधुनिक प्रणालियों से लैस एक व्यापक नागरिक सुरक्षा नेटवर्क और बड़ी स्वैच्छिक सिविल डिफेंस फोर्स तैयार करने की घोषणा की।

रक्षा क्षेत्र में नारी शक्ति की बढ़ती भूमिका

प्रधानमंत्री ने राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि रक्षा क्षेत्र में भी देश की बेटियां नई भूमिका निभा रही हैं। NDA से प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिला कैडेट्स सैन्य नेतृत्व की क्षमता का प्रदर्शन कर रही हैं।

प्रधानमंत्री का संदेश स्पष्ट रहा कि आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता, आधुनिक तकनीक, साइबर सुरक्षा और नागरिकों की तैयारियों के जरिए भारत को एक सुरक्षित और मजबूत राष्ट्र बनाना विकसित भारत 2047 की यात्रा का अहम हिस्सा है।

लखनऊ में ‘नौसेना शौर्य वाटिका’ का उद्घाटन, भारतीय नौसेना के शौर्य और बलिदान को समर्पित अनूठा संग्रहालय

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और योगी आदित्यनाथ ने 30 मई 2026 को लखनऊ में ‘नौसेना शौर्य वाटिका’ का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया। लगभग 19 करोड़ रुपये की लागत से दो एकड़ से अधिक क्षेत्र में विकसित यह ओपन-एयर डिस्प्ले म्यूज़ियम भारतीय नौसेना के शौर्य, पराक्रम और गौरवशाली इतिहास को समर्पित है। इसमें 34 वर्षों तक सेवा देने के बाद 29 मई 2022 को सेवामुक्त हुए युद्धपोत आईएनएस गोमती के हथियारों, उपकरणों और विभिन्न कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया है।

इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि नौसेना शौर्य वाटिका केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि प्रेरणा का प्रतीक है, जो आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता और सुरक्षा की वास्तविक कीमत का एहसास कराएगी। उन्होंने कहा कि यह वाटिका देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर सैनिकों के साहस और बलिदान की याद दिलाती रहेगी। यह केवल स्थापत्य कला का उदाहरण नहीं, बल्कि सैनिकों के प्रति कृतज्ञता की भावना को जागृत करने का माध्यम है और युवाओं में राष्ट्र निर्माण का उत्साह पैदा करेगी।

रक्षा मंत्री ने वर्तमान वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों में समुद्री मार्गों की सुरक्षा को विश्व शांति और समृद्धि की कुंजी बताते हुए भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता और तत्परता की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना ने भारतीय सेना और वायुसेना के साथ मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अरब सागर में नौसेना की मजबूत मौजूदगी ने विरोधी पक्ष पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया, जिसके कारण पाकिस्तान नौसेना अपने बंदरगाहों तक सीमित रही।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार एक मजबूत सेना और आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग के माध्यम से भारत को सुरक्षित एवं समृद्ध बनाने पर विशेष जोर दे रही है। उन्होंने कहा कि भारत तभी वास्तव में शक्तिशाली माना जाएगा जब उसकी सेनाएं हथियारों के लिए अन्य देशों पर निर्भर न रहें। इसी उद्देश्य से आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया, रक्षा औद्योगिक गलियारा (Defence Industrial Corridor), iDEX और ADITI जैसी पहलें शुरू की गई हैं।

राजनाथ सिंह ने बताया कि वर्ष 2014 में देश का रक्षा उत्पादन लगभग 46 हजार करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है और जल्द ही 1.75 लाख करोड़ रुपये के नए रिकॉर्ड को छू सकता है। वहीं रक्षा निर्यात 2014 में एक हजार करोड़ रुपये से भी कम था, जो अब लगभग 40 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि में उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। राज्य के सैनिक जहां देश की सुरक्षा में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं, वहीं रक्षा औद्योगिक गलियारा रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत कर रहा है। उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, व्यापार, सड़क, राजमार्ग और हवाई अड्डों के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की प्रगति की भी सराहना की।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में देश के वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी सुरक्षा के कारण ही देशवासी चैन की नींद सो पाते हैं। उन्होंने कहा कि विकास की योजनाएं तभी सफल हो सकती हैं जब राष्ट्र सुरक्षित और सशक्त हो। उन्होंने सैनिकों के सम्मान और कल्याण को विकसित भारत 2047 के लक्ष्य का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य,बृजेश पाठक नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी सहित कई वरिष्ठ सैन्य और नागरिक अधिकारी उपस्थित रहे।

नौसेना शौर्य वाटिका की विशेषताएँ

इस पार्क में आईएनएस गोमती पर लगे AK-726 नौसैनिक तोप, ZIF-101 मिसाइल लॉन्चर, सतह से हवा और सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल प्रणालियाँ, रडार, टॉरपीडो लॉन्चर, एंकर, जहाज के मस्तूल और अन्य उपकरण प्रदर्शित किए गए हैं। इसके अलावा इसमें अब सेवा से बाहर हो चुके लंबी दूरी के समुद्री गश्ती विमान TU-142M का वॉक-थ्रू संग्रहालय भी बनाया गया है। पार्क में फूड कोर्ट, स्मृति चिन्ह दुकान और आधुनिक प्रकाश एवं ध्वनि व्यवस्था जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।

आईएनएस गोमती के बारे में

आईएनएस गोमती का नाम गोमती नदी के नाम पर रखा गया था। इसे 16 अप्रैल 1988 को मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) में तत्कालीन रक्षा मंत्री द्वारा भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था। यह गोदावरी श्रेणी के गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट्स का तीसरा युद्धपोत था और सेवामुक्ति के समय पश्चिमी बेड़े का सबसे वरिष्ठ युद्धपोत माना जाता था।

अपने 34 वर्षों के गौरवशाली सेवाकाल में आईएनएस गोमती ने ऑपरेशन कैक्टस,ऑपरेशन पराक्रम,ऑपरेशन रेनबो सहित अनेक महत्वपूर्ण अभियानों और द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यासों में भाग लिया। राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा में उत्कृष्ट योगदान के लिए इसे 2007-08 और 2019-20 में प्रतिष्ठित यूनिट सिटेशन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

भारतीय वायु सेना का संयुक्त एयरोस्पेस पावर सेमिनार: आत्मनिर्भरता और कुशल अनुरक्षण पर विशेष जोर

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भारतीय वायु सेना के मुख्यालय अनुरक्षण कमान ने स्वायत्त रक्षा चिंतन संस्थान सेंटर फॉर एयरपावर एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज़ (CAPSS) के सहयोग से 11 मई 2026 को नागपुर में एक दिवसीय संयुक्त एयरोस्पेस पावर सेमिनार का सफल आयोजन किया। “कुशल अनुरक्षण एवं आत्मनिर्भरता: वायु शक्ति के सक्षम आधार” विषय पर आयोजित इस सेमिनार में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों, विषय विशेषज्ञों तथा विशिष्ट प्रतिभागियों ने भाग लिया और एयरोस्पेस क्षमता को सुदृढ़ बनाने में अनुरक्षण दक्षता तथा आत्मनिर्भरता की महत्वपूर्ण भूमिका पर विचार-विमर्श किया।

इस अवसर पर अनुरक्षण कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ एयर मार्शल यल्ला उमेश, वीएसएम, पीएचडी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने परिचालन तत्परता बनाए रखने और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सुदृढ़ अनुरक्षण ढांचे तथा स्वदेशी क्षमता विकास के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि एयरोस्पेस प्रणालियों में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना देश की सामरिक मजबूती, बाहरी निर्भरता में कमी और मिशन की प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

सेमिनार में उभरती अनुरक्षण पद्धतियों, तकनीकी प्रगति, स्वदेशीकरण पहलों तथा भारत की रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दृष्टि को सशक्त बनाने वाली नीतिगत व्यवस्थाओं पर विशेषज्ञ प्रस्तुतियां और पैनल चर्चाएं आयोजित की गईं। भारतीय वायु सेना और CAPSS के विशेषज्ञों ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप अनुरक्षण रणनीतियों को विकसित करने पर अपने विचार साझा किए।

यह आयोजन ज्ञान-विनिमय का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ और इससे रणनीतिक विशेषज्ञों तथा परिचालन हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय को बढ़ावा मिला। इस सेमिनार ने राष्ट्रीय उद्देश्यों की पूर्ति हेतु भारतीय वायु सेना की अनुरक्षण कमान की नवाचार आधारित दृष्टिकोण अपनाने और स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित किया।

सेमिनार का समापन एयरोस्पेस अनुरक्षण और क्षमता विकास में परिवर्तनकारी सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए रक्षा चिंतन संस्थानों और सशस्त्र बलों के बीच सहयोग को और अधिक मजबूत करने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।

भारत की रक्षा यात्रा में तकनीक और आत्मनिर्भरता का नया युग: डॉ. जितेंद्र सिंह

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केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान, और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष मामलों के राज्य मंत्री  जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत अपने रक्षा क्षेत्र के निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है, जहां तकनीक, स्वदेशी नवाचार और निजी क्षेत्र की भागीदारी देश की वैश्विक पहचान को नया आकार दे रही है।

प्रयागराज में आयोजित नॉर्थ टेक संगोष्ठी 2026 को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध अब केवल भौतिक शक्ति पर आधारित नहीं रह गया है, बल्कि यह उन्नत तकनीक, रियल-टाइम डेटा सिस्टम और स्वचालित प्लेटफॉर्म पर निर्भर हो गया है।

उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में भारत रक्षा उपकरणों के बड़े आयातक से उभरते हुए निर्यातक के रूप में बदल गया है। इस अवधि में रक्षा उत्पादन ₹1.54 लाख करोड़ तक पहुंचा, जो 174% की वृद्धि दर्शाता है, जबकि रक्षा निर्यात ₹23,622 करोड़ तक पहुंच गया, जिसमें 34 गुना वृद्धि दर्ज की गई है।

मंत्री ने कहा कि निजी क्षेत्र ने लगभग ₹15,000 करोड़ के निर्यात में योगदान दिया है, जो रक्षा उत्पादन में एक बड़े परिवर्तन को दर्शाता है।

उन्होंने बताया कि वर्तमान बजट 2026-27 में रक्षा क्षेत्र के लिए ₹6,81,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9.5% अधिक है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्र अब रक्षा तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। भारत ने क्वांटम-सुरक्षित संचार तकनीक में भी तेजी से प्रगति की है, जो भविष्य के युद्ध प्रणालियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों और फंडिंग से अनुसंधान, विकास और नवाचार का मजबूत इकोसिस्टम तैयार हो रहा है।

नॉर्थ टेक संगोष्ठी 2026 का आयोजन 4 से 6 मई तक “रक्षा त्रिवेणी संगम – जहां तकनीक, उद्योग और सैनिक मिलते हैं” थीम पर किया जा रहा है। यह कार्यक्रम भारतीय सेना के उत्तरी और केंद्रीय कमांड तथा SIDM द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया है।

इसमें 280 से अधिक उद्योग भागीदार और 284 स्टॉल शामिल हैं, जहां अत्याधुनिक रक्षा तकनीकों का प्रदर्शन किया जा रहा है। कार्यक्रम में लाइव डेमो, तकनीकी प्रदर्शनी और स्टार्टअप्स, उद्योग एवं सेना के बीच संवाद सत्र भी शामिल हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता तकनीकी संप्रभुता पर आधारित है और सहयोगात्मक प्रयासों से देश भविष्य की रक्षा तकनीक में वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तकनीकी अनुसंधान और ‘सरप्राइज एलिमेंट’ पर दिया जोर

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राजनाथ सिंह ने कहा है कि तेजी से बदलती तकनीक के इस दौर में देश को भविष्य के युद्धों के लिए तैयार रहने हेतु अनुसंधान और ‘सरप्राइज एलिमेंट’ (अचानक रणनीतिक बढ़त) पर लगातार ध्यान देना होगा। वे 4 मई 2026 को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित तीन दिवसीय नॉर्थ टेक सिम्पोजियम के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।


रक्षा मंत्री ने आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति का उल्लेख करते हुए कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष में कुछ ही वर्षों में युद्ध टैंक और मिसाइलों से ड्रोन व सेंसर आधारित हो गया है। उन्होंने कहा कि आज सामान्य उपयोग की वस्तुएं भी खतरनाक हथियार बन सकती हैं, जिससे सुरक्षा रणनीतियों पर पुनर्विचार जरूरी हो गया है।

उन्होंने कहा कि युद्ध में जीत उसी की होती है जिसके पास “सरप्राइज” का तत्व होता है। इसलिए भारत को ऐसी क्षमताएं विकसित करनी होंगी, जिससे जरूरत पड़ने पर दुश्मन को चौंकाया जा सके।

रक्षा मंत्री ने कहा कि आज के दौर में अनुसंधान का कोई विकल्प नहीं है और भविष्य के युद्धों की दिशा प्रयोगशालाओं में तय हो रही है। उन्होंने बताया कि सरकार ने रक्षा अनुसंधान को प्राथमिकता देते हुए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के माध्यम से उद्योग, स्टार्टअप और शिक्षण संस्थानों के साथ मिलकर काम करना शुरू किया है।

उन्होंने जानकारी दी कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास (R&D) बजट का 25% उद्योग, स्टार्टअप और अकादमिक क्षेत्र के लिए निर्धारित किया गया है, जिसमें से अब तक 4500 करोड़ रुपये से अधिक का उपयोग किया जा चुका है। साथ ही, नई तकनीक हस्तांतरण नीति के तहत शुल्क में छूट दी गई है और अब तक 2200 से अधिक तकनीकों का हस्तांतरण किया जा चुका है।

रक्षा मंत्री ने उद्योगों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम टेक्नोलॉजी, हाइपरसोनिक हथियार और स्पेस तकनीक जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने “ऑपरेशन सिंदूर” का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें स्वदेशी तकनीकों जैसे आकाश मिसाइल और ब्रह्मोस का सफल उपयोग हुआ, जो भारत की सैन्य क्षमता का प्रमाण है।

उन्होंने बताया कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार आत्मनिर्भरता पर जोर दे रही है। देश का रक्षा उत्पादन 2025-26 में 1.54 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जबकि रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर है।

इस अवसर पर सेना प्रमुख, वायुसेना अधिकारी, उद्योग प्रतिनिधि और शिक्षाविद भी मौजूद रहे। सिम्पोजियम में 284 कंपनियों ने अपने स्वदेशी तकनीकी समाधान प्रदर्शित किए।

रक्षा मंत्री ने उम्मीद जताई कि यह आयोजन भारत को तकनीकी और सैन्य रूप से और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


डीएससी ‘ए 23’ का शुभारंभ: भारतीय नौसेना की क्षमता में होगा विस्तार

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कोलकाता: भारतीय नौसेना के लिए डाइविंग सपोर्ट क्राफ्ट (DSC) परियोजना के तहत चौथे जहाज DSC A 23 का 19 अप्रैल 2026 को पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित टिटागढ़ में भव्य समारोह के साथ शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर दीपा शिवकुमार ने जहाज को लॉन्च किया, जबकि समारोह में वाइस एडमिरल बी. शिवकुमार (चीफ ऑफ मटेरियल) सहित नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

यह आयोजन पारंपरिक नौसैनिक रीति-रिवाजों और गरिमा के साथ संपन्न हुआ, जिसमें Titagarh Rail Systems Limited (TRSL) के प्रतिनिधि भी शामिल थे, जो इस परियोजना का निर्माण कर रही है।

आधुनिक तकनीक से लैस जहाज

लगभग 30 मीटर लंबाई और 380 टन विस्थापन क्षमता वाले इस कैटमरैन-हुल डिजाइन जहाज में बेहतर स्थिरता, विस्तृत डेक क्षेत्र और उत्कृष्ट समुद्री प्रदर्शन की विशेषताएँ हैं। यह जहाज तटीय क्षेत्रों और बंदरगाहों में डाइविंग अभियानों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है।

स्वदेशी तकनीक और ‘आत्मनिर्भर भारत’ को बढ़ावा

इस परियोजना को भारतीय शिपिंग रजिस्टर के मानकों के अनुसार डिजाइन किया गया है और नौसेना विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला में व्यापक परीक्षण और विश्लेषण के बाद तैयार किया गया है।
करीब 70% उपकरण स्वदेशी निर्माताओं से लिए गए हैं, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ पहल को मजबूत करते हैं।

नौसेना की क्षमता में होगा इजाफा

इन जहाजों के शामिल होने से भारतीय नौसेना की डाइविंग सपोर्ट, अंडरवॉटर निरीक्षण, बचाव कार्य (Salvage) और तटीय अभियानों की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

निष्कर्ष

डीएससी ‘ए 23’ का शुभारंभ भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण और स्वदेशी रक्षा उत्पादन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

INS तारागिरी के निर्माण में SAIL का अहम योगदान, भारतीय नौसेना में शामिल

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स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL), जो इस्पात मंत्रालय के अंतर्गत एक महारत्न केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम है, ने नीलगिरी-श्रेणी (प्रोजेक्ट 17A) की स्टील्थ फ्रिगेट के चौथे जहाज INS तारागिरी के कमीशनिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस युद्धपोत को 03 अप्रैल 2026 को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया।

यह युद्धपोत मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा निर्मित किया गया है, जिसमें SAIL द्वारा आपूर्ति की गई लगभग 4,000 टन विशेष ग्रेड स्टील प्लेट्स का पूर्ण उपयोग किया गया है। यह विशेष स्टील SAIL के बोकारो, भिलाई और राउरकेला स्थित एकीकृत इस्पात संयंत्रों में तैयार किया गया है, जो कंपनी की उन्नत धातुकर्म क्षमताओं और उच्च गुणवत्ता मानकों को दर्शाता है।

SAIL भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता रहा है और ‘आत्मनिर्भर भारत’ तथा ‘मेक इन इंडिया’ जैसे सरकारी अभियानों को निरंतर समर्थन देता रहा है। कंपनी पहले भी कई महत्वपूर्ण नौसैनिक परियोजनाओं के लिए विशेष स्टील की आपूर्ति कर चुकी है, जिनमें स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत और प्रोजेक्ट 17A के पहले तीन जहाज—INS नीलगिरी, INS हिमगिरी और INS उदयगिरी शामिल हैं।

INS तारागिरी का सफल शामिल होना भारत की रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है और यह देश की समुद्री क्षमताओं को मजबूत करने में घरेलू इस्पात उद्योग की अहम भूमिका को दर्शाता है।


भारत को स्वदेशी ड्रोन निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए मिशन मोड में काम जरूरी: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

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नई दिल्ली- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि आने वाले वर्षों में भारत को स्वदेशी ड्रोन निर्माण का वैश्विक केंद्र (Global Hub) बनाने के लिए मिशन मोड में कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों और बदलते युद्ध के स्वरूप को देखते हुए ड्रोन और काउंटर-ड्रोन तकनीक भविष्य की युद्ध रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।


रक्षा मंत्री नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में आयोजित दो दिवसीय नेशनल डिफेंस इंडस्ट्रीज कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस सम्मेलन का आयोजन रक्षा उत्पादन विभाग द्वारा ‘एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजीज’ थीम पर किया गया है।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारत को केवल ड्रोन तैयार करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ड्रोन के सभी महत्वपूर्ण घटकों—सॉफ्टवेयर, इंजन, बैटरी और अन्य तकनीकी हिस्सों—का निर्माण भी देश में ही करना होगा। उन्होंने बताया कि दुनिया के कई देशों में ड्रोन निर्माण के लिए अभी भी महत्वपूर्ण पुर्जे चीन से आयात किए जाते हैं, और भारत को इस निर्भरता को कम करते हुए आत्मनिर्भर बनना होगा।

रक्षा मंत्री ने कहा कि देश का रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) बड़े उद्योगों, MSMEs, स्टार्ट-अप्स और नवाचारकर्ताओं के सहयोग से मजबूत बनता है। उन्होंने निजी क्षेत्र को भी इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया और भरोसा दिलाया कि सरकार भारत को स्वदेशी ड्रोन निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए हर संभव सहयोग देगी।

इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने Defence India Start-up Challenge (DISC-14) और ADITI 4.0 चैलेंज का शुभारंभ किया। इन पहलों के तहत रक्षा बलों, भारतीय तटरक्षक बल और रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी की ओर से कुल 107 समस्या कथन जारी किए गए हैं, जिनका उद्देश्य स्टार्ट-अप्स और नवाचारकर्ताओं को नई तकनीकों और समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करना है। इसके अलावा, रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (DPSUs) द्वारा 101 नवाचार चुनौतियों की एक नई पहल भी शुरू की गई है, जिससे MSMEs और स्टार्ट-अप्स को डिजाइन-आधारित नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।

रक्षा मंत्री ने Innovations for Defence Excellence (iDEX) और ADITI को रक्षा क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने वाली गेम-चेंजर पहल बताया। उन्होंने बताया कि फरवरी 2026 तक लगभग 676 स्टार्ट-अप्स, MSMEs और नवाचारकर्ता इस रक्षा नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़ चुके हैं। अब तक 548 अनुबंध किए जा चुके हैं और 566 चुनौतियां शुरू की गई हैं। इनमें से 58 प्रोटोटाइप को लगभग ₹3,853 करोड़ के मूल्य के साथ खरीद के लिए स्वीकृति मिल चुकी है, जबकि लगभग ₹2,326 करोड़ के 45 खरीद अनुबंध पहले ही किए जा चुके हैं।

रक्षा मंत्री ने कहा कि आज MSMEs कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रोबोटिक्स, ऑटोमेशन और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। उन्होंने MSMEs और स्टार्ट-अप्स से आग्रह किया कि वे इंडस्ट्री 4.0 तकनीकों को अपनाकर अपनी क्षमता और संसाधनों का बेहतर उपयोग करें। उन्होंने ‘डिजिटल ट्विन’ जैसी आधुनिक तकनीकों का भी उल्लेख किया, जो जटिल प्रणालियों को समझने और बेहतर निर्णय लेने में सहायक होती हैं।

उन्होंने MSMEs की क्षमता बढ़ाने के लिए हॉरिजॉन्टल और वर्टिकल इंटीग्रेशन की आवश्यकता पर भी बल दिया। उनके अनुसार, MSMEs का आपसी सहयोग और बड़े उद्योगों के साथ साझेदारी एक मजबूत नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करने में मदद करेगी।

रक्षा मंत्री ने बताया कि सरकार MSMEs को मजबूत बनाने के लिए लगातार कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि हाल के बजट में MSMEs के लिए इक्विटी, लिक्विडिटी और प्रोफेशनल सपोर्ट प्रदान करने की तीन-स्तरीय रणनीति अपनाई गई है, जिससे वे ‘चैंपियन MSMEs’ के रूप में उभर सकें।

उन्होंने यह भी बताया कि 2012-13 में देश में MSMEs की संख्या लगभग 4.67 करोड़ थी, जो अब बढ़कर लगभग 8 करोड़ हो गई है। सरकार ने MSMEs के पंजीकरण और पहचान को आसान बनाने के लिए Udyam Portal और Udyam Assist Portal जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म भी शुरू किए हैं।

कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री ने रक्षा उत्पादन विभाग की पांच महत्वपूर्ण प्रकाशन भी जारी किए, जिनका उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, निर्यात को बढ़ावा और उद्योगों के लिए सुगम व्यवसाय वातावरण तैयार करना है। साथ ही, सम्मेलन में एक प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया गया, जिसमें भारतीय और विदेशी कंपनियों ने AI, रोबोटिक्स, ऑटोमेशन और स्मार्ट मटेरियल्स जैसी उन्नत विनिर्माण तकनीकों का प्रदर्शन किया।

इस अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान सहित सेना और रक्षा मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

रक्षा मंत्री ने अंत में MSMEs और स्टार्ट-अप्स से आह्वान किया कि वे नवाचार, नई तकनीकों को अपनाने और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ते हुए ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

आईएनएस सुदर्शिनी लोकायन-26 अभियान के तहत मिस्र के सफागा पहुँचा

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भारतीय नौसेना का नौकायन प्रशिक्षण पोत आईएनएस सुदर्शिनी अपने जारी लोकायन-26 अभियान के तहत 21 फरवरी 2026 को मिस्र के सफागा बंदरगाह पहुँचा। सलालाह से सफागा तक 1,832 समुद्री मील की दूरी 16 दिनों में तय करना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रही, जो जहाज के चालक दल की दृढ़ता, आत्मविश्वास और सहनशक्ति को दर्शाती है।

आगमन पर जहाज का मिस्र की नौसेना के अधिकारियों और भारतीय दूतावास के प्रतिनिधियों द्वारा गर्मजोशी से स्वागत किया गया। आईएनएस सुदर्शिनी के कमांडिंग ऑफिसर ने रेड सी और सफागा नौसेना बेस के बेस कमांडर रियर एडमिरल रामी अहमद इस्माइल मोहम्मद से भेंट की। इन संवादों में दोनों नौसेनाओं के बीच बढ़ती समुद्री साझेदारी पर जोर दिया गया, जो नौसैनिक सहयोग और अंतर-संचालन क्षमता (इंटरऑपरेबिलिटी) बढ़ाने के साझा दृष्टिकोण को दर्शाता है।

बंदरगाह प्रवास के दौरान भारतीय नौसेना मिस्र के नौसैनिक कर्मियों के साथ पेशेवर संवाद करेगी, नौकायन प्रशिक्षण में सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करेगी और द्विपक्षीय सद्भाव को मजबूत करने के लिए सामुदायिक संपर्क गतिविधियाँ भी करेगी।

अदन की खाड़ी और लाल सागर से होकर गुजरना इस यात्रा का एक प्रमुख परिचालन चरण था, जहाँ जहाज ने चुनौतीपूर्ण मौसम परिस्थितियों और घने समुद्री यातायात के बीच उच्च स्तर की पेशेवर क्षमता और समुद्री कौशल का प्रदर्शन किया। सफागा में आईएनएस सुदर्शिनी की यात्रा “ब्रिजेस ऑफ फ्रेंडशिप” पहल के तहत समुद्री संपर्क बढ़ाने के लिए भारतीय नौसेना की निरंतर प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है और भारत तथा मिस्र के बीच मजबूत और स्थायी संबंधों को रेखांकित करती है।


भारतीय नौसेना में शामिल होगा युद्धपोत ‘अंजदीप’, पनडुब्बी रोधी क्षमता होगी मजबूत

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भारतीय नौसेना अपनी पनडुब्बी रोधी युद्ध (एंटी-सबमरीन वारफेयर – ASW) क्षमताओं को और मजबूत करने जा रही है, क्योंकि आठ जहाजों वाली एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC) परियोजना के तीसरे पोत अंजदीप को शामिल किया जा रहा है। यह युद्धपोत 27 फरवरी 2026 को चेन्नई पोर्ट में पूर्वी नौसेना कमान में औपचारिक रूप से कमीशन किया जाएगा।

इस कमीशनिंग समारोह की अध्यक्षता नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी करेंगे।

यह समारोह रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य की दिशा में देश की तेज प्रगति को दर्शाता है, क्योंकि ASW-SWC परियोजना स्वदेशी युद्धपोत डिजाइन और निर्माण की सफलता का उदाहरण है। कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) द्वारा निर्मित अंजदीप एक अत्याधुनिक पोत है, जिसे विशेष रूप से तटीय और उथले जल क्षेत्रों में युद्ध संचालन की चुनौतियों से निपटने के लिए डिजाइन किया गया है।

यह पोत ‘डॉल्फिन हंटर’ के रूप में कार्य करने के लिए तैयार किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य तटीय क्षेत्रों में दुश्मन पनडुब्बियों का पता लगाना, उनका पीछा करना और उन्हें निष्क्रिय करना है। जहाज में स्वदेशी उन्नत पनडुब्बी रोधी हथियार और सेंसर प्रणाली लगी है, जिसमें हुल माउंटेड सोनार ‘अभय’, हल्के टॉरपीडो और ASW रॉकेट शामिल हैं। अपनी मुख्य ASW भूमिका के अलावा, यह तेज और अत्यधिक गतिशील युद्धपोत तटीय निगरानी, कम तीव्रता वाले समुद्री अभियानों (LIMO) और खोज एवं बचाव (Search & Rescue) कार्यों के लिए भी सक्षम है।

77 मीटर लंबा यह जहाज हाई-स्पीड वाटर-जेट प्रोपल्शन सिस्टम से लैस है, जिससे यह 25 नॉट की अधिकतम गति प्राप्त कर सकता है और तेज प्रतिक्रिया व सतत संचालन सुनिश्चित करता है।

करवार तट के पास स्थित ऐतिहासिक द्वीप के नाम पर रखा गया अंजदीप भारतीय नौसेना की विशाल समुद्री हितों और तटीय सीमाओं, विशेष रूप से तमिलनाडु और पुडुचेरी क्षेत्र की सुरक्षा क्षमता को काफी मजबूत करेगा। यह भारतीय नौसेना को एक शक्तिशाली ‘बिल्डर’s नेवी’ में बदलने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।



MILAN 2026 नौसैनिक अभ्यास के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की ASEAN नौसेना प्रमुखों से मुलाकात

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MILAN 2026 नौसैनिक अभ्यास के मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 19 फरवरी 2026 को विशाखापट्टनम, आंध्र प्रदेश में ASEAN के नौ सदस्य देशों के नौसेना प्रमुखों और प्रतिनिधिमंडलों के साथ संवाद किया। इस बैठक में भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ और महासागर क्षेत्र में सुरक्षा व विकास के लिए परस्पर और समग्र प्रगति (MAHASAGAR) के विज़न के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराया गया।

MILAN अभ्यास में ASEAN की बड़ी भागीदारी

रक्षा मंत्री ने MILAN 2026 में ASEAN नौसेनाओं की महत्वपूर्ण भागीदारी का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि यह अभ्यास 1995 में केवल चार विदेशी नौसेनाओं से शुरू होकर फरवरी 2026 में 74 देशों की भागीदारी वाला सबसे बड़ा संस्करण बन गया है।

उन्होंने Indian Ocean Naval Symposium (IONS) – Conclave of Chiefs और International Fleet Review 2026 की भूमिका को इंडो-पैसिफिक साझेदारों के बीच विश्वास और ऑपरेशनल समझ बढ़ाने में महत्वपूर्ण बताया।

MILAN 2026 के समुद्री चरण (Sea Phase) में जटिल समुद्री अभ्यास जैसे:

  • पनडुब्बी रोधी युद्ध (ASW)

  • वायु रक्षा

  • खोज और बचाव (Search & Rescue)
    पर भी चर्चा हुई।

भारत-ASEAN रणनीतिक दृष्टिकोण

राजनाथ सिंह ने ASEAN को भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति का केंद्रीय स्तंभ बताया और कहा कि साझा सुरक्षा ही क्षेत्रीय समृद्धि का आधार है।

उन्होंने ASEAN साझेदारों को भारत के रक्षा प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम से लाभ उठाने का आमंत्रण दिया, जो आत्मनिर्भर भारत पहल के कारण विकसित हुआ है।
उन्होंने INS विक्रांत और विशाखापट्टनम श्रेणी के विध्वंसक युद्धपोतों को भारत के ‘बिल्डर नेवी’ में परिवर्तन का प्रतीक बताया।

संयुक्त गतिविधियों का प्रस्ताव

ASEAN प्रतिनिधियों ने भारत की क्षेत्र में प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता (First Responder) की भूमिका की सराहना की।
रक्षा मंत्री ने संयुक्त गतिविधियों को बढ़ाने का प्रस्ताव दिया, विशेष रूप से:

  • ASEAN-India Defence Think-Tank Interaction

  • युवा नौसैनिक अधिकारियों के बीच सहयोग पहल
    ताकि दीर्घकालिक समुद्री स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।

इंडो-पैसिफिक के लिए साझा प्रतिबद्धता

बैठक का समापन स्वतंत्र, खुला और समावेशी इंडो-पैसिफिक के लिए साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ, जो “Camaraderie, Cooperation, and Collaboration” (सौहार्द, सहयोग और समन्वय)—MILAN 2026 का आधिकारिक विषय—पर आधारित है।

कैडेट ट्रेनिंग शिप ‘कृष्णा’ का 16 फरवरी को लॉन्च, भारतीय नौसेना के स्वदेशी जहाज निर्माण में बड़ी उपलब्धि

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चेन्नई-भारतीय नौसेना के लिए निर्माणाधीन तीन कैडेट ट्रेनिंग शिप (CTS) में से पहले जहाज यार्ड 18003 (कृष्णा) को 16 फरवरी 2026 को एलएंडटी शिपयार्ड, कट्टुपल्ली (चेन्नई) में लॉन्च किया गया। नौसेना की परंपरा के अनुसार, अनुपमा चौहान ने जहाज का शुभारंभ किया। इस अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान मौजूद रहे। कार्यक्रम में भारतीय सशस्त्र बलों और एलएंडटी शिपबिल्डिंग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

पूरी तरह स्वदेशी डिजाइन और निर्माण

यह जहाज एलएंडटी द्वारा पूरी तरह स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित किया गया है। इस जहाज को वर्ष 2026 के अंत तक औपचारिक रूप से भारतीय नौसेना को सौंपे जाने की योजना है।

कैडेट्स के प्रशिक्षण में होगा उपयोग

इन कैडेट ट्रेनिंग शिप्स का उपयोग समुद्र में अधिकारी कैडेट्स (महिला कैडेट्स सहित) के प्रशिक्षण के लिए किया जाएगा, जो भूमि पर बुनियादी प्रशिक्षण पूरा कर चुके होंगे। इसके अलावा मित्र देशों के विदेशी कैडेट्स को भी इन जहाजों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में अहम कदम

यह उपलब्धि भारतीय नौसेना के स्वदेशी जहाज निर्माण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह सरकार के आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया पहल के अनुरूप है, जिससे भारत की रक्षा निर्माण क्षमता को मजबूती मिलेगी।



राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने पनडुब्बी INS वाघशीर पर किया डाइव्ड सॉर्टी, नौसेना की परिचालन शक्ति का लिया प्रत्यक्ष अनुभव

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (28 दिसंबर 2025) पश्चिमी समुद्री तट पर भारतीय नौसेना की पनडुब्बी INS वाघशीर पर डाइव्ड सॉर्टी की। इस दौरान उनके साथ नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी भी उपस्थित रहे। राष्ट्रपति ने कर्नाटक के कारवार नौसैनिक बंदरगाह से पनडुब्बी में प्रवेश किया।

करीब दो घंटे से अधिक चली इस सॉर्टी के दौरान राष्ट्रपति ने पनडुब्बी के चालक दल से संवाद किया और विभिन्न परिचालन प्रदर्शन (Operational Demonstrations) को प्रत्यक्ष रूप से देखा।

द्रौपदी मुर्मु डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के बाद पनडुब्बी में सॉर्टी करने वाली देश की दूसरी राष्ट्रपति बनी हैं।

स्वदेशी कलवरी श्रेणी (Kalvari-class) की पनडुब्बी पर राष्ट्रपति का यह पहला दौरा सशस्त्र बलों के साथ सर्वोच्च सेनापति के निरंतर और सशक्त जुड़ाव को दर्शाता है। इससे पहले नवंबर 2024 में राष्ट्रपति ने स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत पर भारतीय नौसेना के परिचालन प्रदर्शन को भी देखा था।

दौरे के पश्चात विज़िटर बुक में अपने अनुभव साझा करते हुए राष्ट्रपति ने लिखा—

"INS वाघशीर पर हमारे नाविकों और अधिकारियों के साथ यात्रा करना, गोता लगाना और समय बिताना मेरे लिए एक अत्यंत विशेष अनुभव रहा। INS वाघशीर द्वारा किए गए अनेक सफल फायरिंग और चुनौतीपूर्ण अभियानों ने चालक दल की असाधारण तैयारी और समर्पण को प्रदर्शित किया है, जो इसके आदर्श वाक्य ‘वीरता वर्चस्व विजय’ के अनुरूप है। वाघशीर के चालक दल का अनुशासन, आत्मविश्वास और उत्साह यह विश्वास दिलाता है कि हमारी पनडुब्बियां और भारतीय नौसेना हर परिस्थिति में किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूर्णतः तैयार हैं।”

यह दौरा भारतीय नौसेना की युद्ध तत्परता, स्वदेशी तकनीकी क्षमता और पेशेवर उत्कृष्टता का सशक्त प्रतीक है।


संयुक्त इलेक्ट्रो मैग्नेटिक बोर्ड (JEMB) की वार्षिक बैठक में संयुक्त सैन्य तैयारियों पर व्यापक समीक्षा

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संयुक्त इलेक्ट्रो मैग्नेटिक बोर्ड (JEMB), जो चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (COSC) की एक उपसमिति है, की वार्षिक बैठक का आयोजन 20 नवंबर 2025 को नई दिल्ली में एकीकृत रक्षा स्टाफ (ऑपरेशंस) के उप प्रमुख एयर मार्शल राकेश सिन्हा की अध्यक्षता में किया गया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य तीनों सेनाओं के बीच संयुक्त अभियानों में बेहतर तालमेल और समन्वय स्थापित करना था। बैठक के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, EMI/EMC, CUAS ऑपरेशन्स, उभरती प्रौद्योगिकियों का उपयोग और स्पेक्ट्रम प्रबंधन जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यक्रम के दौरान सामरिक युद्धक्षेत्र क्षेत्र (TBA) में स्पेक्ट्रम के प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक बैटलस्पेस मैनेजमेंट सिस्टम का प्रदर्शन किया गया। तकनीकी न्यूज लेटर (TNL) 2025 भी जारी किया गया, जिसमें उन भविष्य की प्रौद्योगिकियों का वर्णन है जो आधुनिक युद्ध की प्रकृति को बदलने की क्षमता रखती हैं।

अपने संबोधन में एयर मार्शल राकेश सिन्हा ने ऑपरेशन सिंदूर के सफल संचालन और उससे सीखे गए सबकों को शामिल करने के लिए तीनों सेवाओं द्वारा आयोजित संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यासों की सराहना की। उन्होंने रक्षा पीएसयू, उद्योग साझेदारों और शिक्षा जगत द्वारा विभिन्न अत्याधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में की जा रही प्रगति की भी प्रशंसा की, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भरता के दृष्टिकोण को मजबूती प्रदान करती है।


रक्षा विभाग ने ‘विशेष अभियान 5.0’ को सफलतापूर्वक संपन्न किया — स्वच्छता, दक्षता और सतत विकास की दिशा में 100% लक्ष्य हासिल

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रक्षा विभाग (DoD) ने ‘विशेष अभियान 5.0’ को सफलतापूर्वक संपन्न किया, जिसमें तैयारी चरण (15-30 सितंबर 2025) और क्रियान्वयन चरण (2-31 अक्टूबर 2025) शामिल थे। इस अभियान के तहत देशभर में अधीनस्थ और संबद्ध कार्यालयों में 5,377 स्थानों पर स्वच्छता अभियान चलाए गए।

रक्षा विभाग ने विभिन्न मापदंडों पर निर्धारित सभी लक्ष्यों की 100 प्रतिशत प्राप्ति की। सांसदों/वीआईपी के लंबित संदर्भों और CPGRAMS पर प्राप्त जन शिकायतों का निस्तारण किया गया तथा 25 नियमों/प्रक्रियाओं को सरलीकृत किया गया। इस दौरान 59,561 भौतिक फाइलों की समीक्षा की गई, जिनमें से 11,401 फाइलें हटाई गईं। इसके अतिरिक्त, अप्रचलित कार्यालय/आईटी उपकरणों की नीलामी से ₹10.01 लाख का राजस्व अर्जित किया गया। अभियान के दौरान 57,648 वर्ग फीट कार्यालय स्थान मुक्त हुआ, जिससे कार्यस्थल अधिक सुव्यवस्थित और स्वच्छ बना।

अभियान के दौरान कई महत्वपूर्ण मील के पत्थर हासिल किए गए।

  • कैंटोनमेंट बोर्डों ने सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के तहत "Reduce, Reuse, Recycle" के सिद्धांतों को बढ़ावा दिया।

  • बराकपुर कैंटोनमेंट बोर्ड ने अपने परिसर में स्थित एक कचरा स्थल को बदलकर ‘बराकपुर हेरिटेज ग्रोव’ नामक 2,500 वर्ग फीट के गुलाब उद्यान में परिवर्तित किया।

  • सिकंदराबाद कैंटोनमेंट बोर्ड ने ‘वेस्ट टू वंडर पार्क’ की शुरुआत की, जहां त्यागी गई वस्तुओं को कलात्मक एवं उपयोगी रूपों में बदला गया।

  • दिल्ली कैंटोनमेंट बोर्ड ने SMART (Swachhata Monitoring & Automated Reporting Tool) को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया।

  • बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) ने लुकुंग–चार्टसे रोड निर्माण के लिए "Geo Grid" नामक नई निर्माण तकनीक विकसित की।

  • हिमालयन माउंटेनियरिंग इंस्टीट्यूट, दार्जिलिंग ने पर्यावरणीय स्थिरता के तहत 52 सौर जल हीटर स्थापित किए।

यह स्वच्छता अभियान पूरे देश में कंट्रोलर जनरल ऑफ डिफेंस अकाउंट्स, बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन, आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल सर्विसेज, नेशनल कैडेट कॉर्प्स, इंडियन कोस्ट गार्ड, सैनिक स्कूल्स सोसाइटी, कैंटीन स्टोर्स डिपार्टमेंट, और विभिन्न पर्वतारोहण संस्थानों — जैसे नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग (उत्तरकाशी), नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड एडवेंचर स्पोर्ट्स (दिरांग, अरुणाचल प्रदेश), जवाहर इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग एंड विंटर स्पोर्ट्स (पाहलगाम, जम्मू-कश्मीर) और हिमालयन माउंटेनियरिंग इंस्टीट्यूट (दार्जिलिंग) में चलाया गया।

यह अभियान रक्षा विभाग की स्वच्छता, दक्षता और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के प्रति गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

लेफ्टिनेंट जनरल अविनाश दास ने संभाला सेना अस्पताल (अनुसंधान एवं संदर्भ), नई दिल्ली के कमांडेंट का पदभार

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लेफ्टिनेंट जनरल अविनाश दास, जो लगभग चार दशकों के अनुभव वाले एक कुशल ईएनटी सर्जन हैं, ने 1 नवंबर 2025 को सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं (AFMS) के प्रतिष्ठित संस्थान सेना अस्पताल (अनुसंधान एवं संदर्भ), नई दिल्ली के कमांडेंट के रूप में कार्यभार ग्रहण किया।

लेफ्टिनेंट जनरल दास आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज (AFMC), पुणे के पूर्व छात्र हैं और उनके पास चिकित्सा विशेषज्ञता, प्रशासनिक दक्षता और नेतृत्व का व्यापक अनुभव है। अपने शानदार करियर के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है, जिनमें बेस हॉस्पिटल, दिल्ली कैंट और कमांड हॉस्पिटल, लखनऊ में वरिष्ठ सलाहकार (Senior Advisor) के रूप में सेवाएँ शामिल हैं।

उत्कृष्ट सेवा और समर्पण के लिए उन्हें सेनाध्यक्ष (COAS), मुख्य समन्वित रक्षा स्टाफ प्रमुख (CISC) तथा सैन्य क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (GOC-in-C) द्वारा प्रशस्ति पत्रों से सम्मानित किया जा चुका है।

कमांड हॉस्पिटल (नॉर्दर्न कमांड), उधमपुर के कमांडेंट के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने पूरे अस्पताल को अत्याधुनिक भवन में स्थानांतरित करने का सफल नेतृत्व किया, जिससे चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता और दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

सेना अस्पताल (अनुसंधान एवं संदर्भ) के कमांडेंट के रूप में लेफ्टिनेंट जनरल अविनाश दास अब इस संस्थान को नई ऊँचाइयों पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका लक्ष्य मरीजों की देखभाल में उत्कृष्टता, चिकित्सा अनुसंधान में नवाचार और चिकित्सा शिक्षा को और सशक्त बनाना है, ताकि यह अस्पताल सशस्त्र बलों और देश दोनों के लिए चिकित्सा उत्कृष्टता का प्रतीक बना रहे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अंबाला वायुसेना स्टेशन पर राफेल विमान में भरी सॉर्टी; दो लड़ाकू विमानों में उड़ान भरने वाली पहली भारतीय राष्ट्रपति बनीं

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (29 अक्टूबर 2025) हरियाणा के अंबाला वायुसेना स्टेशन में राफेल विमान में उड़ान (सॉर्टी) भरी। वह दो अलग-अलग लड़ाकू विमानों में उड़ान भरने वाली देश की पहली राष्ट्रपति बन गई हैं। इससे पहले, उन्होंने वर्ष 2023 में सुखोई-30 एमकेआई विमान में सॉर्टी ली थी।

अंबाला वायुसेना स्टेशन वह पहला एयरबेस है, जहाँ फ्रांस की डसॉल्ट एविएशन फैसिलिटी से राफेल विमान सबसे पहले पहुँचे थे।

राष्ट्रपति, जो कि भारतीय सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर हैं, ने लगभग 30 मिनट तक उड़ान भरी, जिसमें उन्होंने करीब 200 किलोमीटर की दूरी तय की और फिर वायुसेना स्टेशन पर लौट आईं।
इस विमान को ग्रुप कैप्टन अमित गहानी, कमांडिंग ऑफिसर, 17 स्क्वाड्रन ने उड़ाया।
उड़ान के दौरान विमान ने समुद्र तल से लगभग 15,000 फीट की ऊँचाई पर और करीब 700 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से उड़ान भरी।

बाद में राष्ट्रपति ने विज़िटर्स बुक में अपने अनुभव साझा करते हुए लिखा —

“भारतीय वायुसेना के राफेल विमान में अपनी पहली उड़ान के लिए अंबाला वायुसेना स्टेशन का दौरा कर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हुई। राफेल पर यह उड़ान मेरे लिए एक अविस्मरणीय अनुभव है। इस शक्तिशाली राफेल विमान में यह प्रथम उड़ान राष्ट्र की रक्षा क्षमताओं में मेरे गर्व को और बढ़ाती है। मैं भारतीय वायुसेना और अंबाला वायुसेना स्टेशन की पूरी टीम को इस सफल सॉर्टी के आयोजन के लिए बधाई देती हूँ।”

इस अवसर पर राष्ट्रपति को राफेल विमान और भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमताओं के बारे में भी अवगत कराया गया।



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