Media24Media.com: चार दशक बाद पर्यटकों के लिए खुलेगा इंद्रावती टाइगर रिजर्व, 1 नवंबर से शुरू होगा पर्यटन

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चार दशक बाद पर्यटकों के लिए खुलेगा इंद्रावती टाइगर रिजर्व, 1 नवंबर से शुरू होगा पर्यटन

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बीजापुर- छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के लिए बड़ी खुशखबरी है। बीजापुर जिले में स्थित इंद्रावती टाइगर रिजर्व करीब चार दशक लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार है। रिपोर्टों के मुताबिक, रिजर्व को 1 नवंबर 2026 से पर्यटकों के लिए खोलने की तैयारी है। लंबे समय तक नक्सल गतिविधियों के कारण यहां पर्यटन प्रभावित रहा, लेकिन क्षेत्र में सुरक्षा और शांति की स्थिति बेहतर होने के बाद वन विभाग ने ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

2,799 वर्ग किलोमीटर में फैला है टाइगर रिजर्व

इंद्रावती टाइगर रिजर्व छत्तीसगढ़ के सबसे महत्वपूर्ण वन्यजीव क्षेत्रों में शामिल है। इसका कुल क्षेत्रफल लगभग 2,799 वर्ग किलोमीटर है। इंद्रावती नदी के नाम पर इसका नाम पड़ा है। यह क्षेत्र 1981 में राष्ट्रीय उद्यान और 1983 में प्रोजेक्ट टाइगर के तहत टाइगर रिजर्व का दर्जा प्राप्त कर चुका है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के अनुसार, इंद्रावती देश के आधिकारिक टाइगर रिजर्वों में शामिल है।

बाघ के साथ वनभैंसा और दुर्लभ वन्यजीवों का बसेरा

इंद्रावती का जंगल जैव-विविधता की दृष्टि से बेहद समृद्ध है। यहां बाघ, जंगली भैंसा, सांभर, चीतल और विभिन्न प्रजातियों के पक्षी सहित कई वन्यजीव पाए जाते हैं। बीजापुर जिला प्रशासन के अनुसार, यह क्षेत्र दुर्लभ वनभैंसे की आबादी के लिए भी महत्वपूर्ण है। घने जंगल, पहाड़ी भू-भाग और इंद्रावती नदी इस क्षेत्र को प्राकृतिक रूप से बेहद आकर्षक बनाते हैं।

नक्सल प्रभावित क्षेत्र से पर्यटन के नए केंद्र की ओर

इंद्रावती क्षेत्र लंबे समय तक नक्सल गतिविधियों के कारण आम पर्यटकों की पहुंच से दूर रहा। अब सुरक्षा स्थिति में सुधार के साथ यहां पर्यटन की संभावनाएं फिर से दिखाई देने लगी हैं। फरवरी 2026 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी बस्तर में दशकों से चली आ रही माओवादी हिंसा के कारण पर्यटन और जनजीवन पर पड़े प्रभाव का उल्लेख किया था।

इसी बदलते माहौल के बीच इंद्रावती को ईको-टूरिज्म के नक्शे पर लाने की तैयारी को बस्तर के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

पर्यटकों को मिल सकता है जंगल सफारी का अनुभव

पर्यटन शुरू होने के बाद आगंतुकों को इंद्रावती के घने जंगलों और प्राकृतिक परिवेश को करीब से देखने का अवसर मिलेगा। अप्रैल 2026 की रिपोर्टों में कुटरू–फरसेगुड़ा और भोपालपट्नम–मट्टेमरगा क्षेत्र से प्रवेश की व्यवस्था की योजना का उल्लेख किया गया था। यहां पर्यटकों को बाघ, वनभैंसा और अन्य वन्यजीवों को देखने के साथ-साथ बस्तर के प्राकृतिक वातावरण का अनुभव मिल सकता है।

वन्यजीव संरक्षण के साथ पर्यटन पर जोर

इंद्रावती को पर्यटन के लिए खोलने के साथ वन्यजीवों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण चुनौती होगी। हाल के महीनों में रिजर्व की सीमाओं पर निगरानी मजबूत करने के लिए भी कदम उठाए गए हैं। सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से लगी लगभग 100 किलोमीटर लंबी अंतरराज्यीय सीमा पर करीब हर 7 किलोमीटर पर पेट्रोलिंग कैंप स्थापित करने की योजना बनाई गई है, ताकि शिकार, अवैध कटाई और वन्यजीव तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके।

बस्तर के पर्यटन को मिलेगी नई पहचान

इंद्रावती टाइगर रिजर्व का दोबारा खुलना केवल वन्यजीव पर्यटन के लिहाज से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इससे स्थानीय रोजगार, होम-स्टे, गाइड सेवाओं, परिवहन और स्थानीय हस्तशिल्प जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है। केंद्र सरकार ने भी बस्तर में वन एवं वन्यजीव आधारित पर्यटन की व्यापक संभावनाओं को रेखांकित किया है।

बस्तर पहले से ही अपने घने जंगलों, झरनों, गुफाओं और आदिवासी संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है। इंद्रावती टाइगर रिजर्व के पर्यटन मानचित्र पर आने से क्षेत्र के प्राकृतिक पर्यटन और वन्यजीव पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है।

नोट: पर्यटकों के प्रवेश, सफारी रूट, बुकिंग प्रक्रिया, शुल्क और सुरक्षा संबंधी अंतिम दिशा-निर्देश वन विभाग की आधिकारिक घोषणा के अनुसार लागू होंगे।

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