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“स्थानीय से वैश्विक: डिजिटल कॉमर्स के माध्यम से निर्यात-तैयार MSMEs को सशक्त बनाना”

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भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) के अधीन MSME विकास एवं सुविधा कार्यालय, चेन्नई ने IIT मद्रास के उद्यमिता प्रकोष्ठ के सहयोग से 18 अगस्त को IIT मद्रास, चेन्नई में “स्थानीय से वैश्विक: डिजिटल कॉमर्स के माध्यम से निर्यात-तैयार MSMEs को सक्षम बनाना” विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया।

संगोष्ठी में MSMEs, उद्यमियों, विद्यार्थियों, नीति-निर्माताओं, वित्तीय संस्थानों, निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े हितधारकों तथा डिजिटल कॉमर्स विशेषज्ञों ने भाग लिया। इसका उद्देश्य MSMEs को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँच बनाने के लिए व्यावहारिक मार्गों पर चर्चा करना था।

उद्घाटन सत्र में तमिलनाडु सरकार के MSME विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रवीण यादव ने विशेष संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि डिजिटल कॉमर्स भौगोलिक सीमाओं को पार करते हुए MSMEs की वैश्विक बाजारों तक पहुँच को बदल रहा है। उन्होंने MSMEs की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को तेज करने के लिए केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय तथा सक्षम वातावरण बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

IIT मद्रास के IC&SR के डीन प्रो. मनु संथानम ने अपने विशेष संबोधन में नवाचार तथा अकादमिक संस्थानों और उद्योग के बीच सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ऐसे सहयोग से MSMEs नए उत्पादों और प्रौद्योगिकियों का विकास कर अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ा सकते हैं।

हंसराज वर्मा, महानिदेशक, Council of State Industrial Development & Investment Corporation of India, ने भी विशेष संबोधन दिया। उन्होंने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत करने के लिए गुणवत्ता को बुनियादी तत्व बताया और MSMEs की बाजार पहुँच बढ़ाने में डिजिटलीकरण के महत्व को रेखांकित किया।

धयालन, निदेशक एवं प्रमुख, MSME DFO चेन्नई ने मुख्य वक्तव्य दिया और विशिष्ट अतिथियों को सम्मानित किया। रेशमा राजीवन, उप निदेशक, MSME DFO चेन्नई ने स्वागत भाषण दिया और संगोष्ठी की पृष्ठभूमि प्रस्तुत की। उन्होंने MSMEs को घरेलू बाजारों से आगे बढ़ाकर वैश्विक अवसरों से जोड़ने के लिए आवश्यक सहयोग पर जोर दिया।

संगोष्ठी में अंतरराष्ट्रीय व्यापार के बदलते स्वरूप तथा MSMEs को भौगोलिक सीमाओं से परे ग्राहकों तक पहुँचाने में डिजिटल कॉमर्स, प्रौद्योगिकी, नवाचार और बाजार संपर्क की बढ़ती भूमिका पर विशेष ध्यान दिया गया।

तकनीकी सत्रों में DGFT, EXIM Bank, ECGC, IIT मद्रास तथा निर्यात और ई-कॉमर्स परामर्श क्षेत्र के विशेषज्ञों और अधिकारियों ने भाग लिया। उन्होंने MSMEs को निर्यात प्रक्रियाओं, व्यापार वित्त, निर्यात जोखिम प्रबंधन, बाजार की पहचान, अंतरराष्ट्रीय भुगतान, अनुपालन, डिजिटल ऑनबोर्डिंग तथा वैश्विक बाजार तक पहुँच के लिए ई-कॉमर्स का लाभ उठाने के अवसरों के बारे में व्यावहारिक जानकारी दी।

चर्चाएँ सरकार द्वारा MSMEs की बाजार पहुँच मजबूत करने के निरंतर प्रयासों के संदर्भ में विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहीं। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय की Procurement & Marketing Support (PMS) Scheme में क्षमता निर्माण के अंतर्गत राष्ट्रीय कार्यशालाओं/संगोष्ठियों को एक समर्पित घटक के रूप में शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य MSMEs को बाजार पहुँच, पैकेजिंग, आयात-निर्यात प्रक्रियाओं, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म तथा बाजार विस्तार से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण विकासों के बारे में जागरूक करना और शिक्षित करना है।

चेन्नई में आयोजित यह राष्ट्रीय संगोष्ठी इसी घटक के तहत आयोजित की गई, जिसके माध्यम से MSMEs को डिजिटल कॉमर्स और निर्यात के लिए तैयार होने से संबंधित विशेषज्ञों तथा व्यावहारिक जानकारी तक सीधे पहुँच प्रदान की गई।

संगोष्ठी ने विद्यार्थियों और उभरते उद्यमियों को डिजिटल कॉमर्स, उद्यमिता और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उभरते अवसरों को समझने के लिए भी एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया।

कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें विशिष्ट अतिथियों, वक्ताओं, विशेषज्ञों, पैनलिस्टों, भाग लेने वाले MSMEs, विद्यार्थियों, सहयोगी संस्थानों तथा आयोजन टीम के योगदान के लिए आभार व्यक्त किया गया।

यह पहल MSMEs की बाजार पहुँच, डिजिटल अपनाने, निर्यात तैयारी और हैंडहोल्डिंग सहायता को मजबूत करने के लिए MSME मंत्रालय की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है और भारतीय उद्यमों को “स्थानीय से वैश्विक” बनाने के दृष्टिकोण में योगदान देती है।

छत्तीसगढ़ को ‘GeM सस्टेनेबल प्रोक्योरमेंट अवार्ड’, शासकीय खरीदी दोगुनी होकर ₹3,935 करोड़ पहुंची

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गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस से राज्य की खरीदी में एक वर्ष में 113 प्रतिशत की वृद्धि, सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को मिले ₹1,800 करोड़ के ऑर्डर

प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया से वर्ष 2025-26 में राज्य को ₹130 करोड़ की बचत

रायपुर- छत्तीसगढ़ को गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) के 10वें स्थापना दिवस समारोह में ‘GeM सस्टेनेबल प्रोक्योरमेंट अवार्ड’ से सम्मानित किया गया है। नई दिल्ली में आयोजित समारोह में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की गरिमामयी उपस्थिति में यह सम्मान प्रदान किया गया। GeM के एक दशक पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित समारोह की थीम ‘GeM 10: A Decade of Exponential Possibilities’ रही।

राज्य सरकारों के लिए निर्धारित ‘प्रीमियर अवार्ड्स – स्टेट गवर्नमेंट फेलिसिटेशन’ श्रेणी के अंतर्गत छत्तीसगढ़ को यह पुरस्कार GeM के प्रभावी उपयोग तथा इसके माध्यम से शासकीय खरीदी के मूल्य और मात्रा में उल्लेखनीय वृद्धि के लिए प्रदान किया गया है।

खुली प्रतिस्पर्धा से ₹130 करोड़ की बचत

GeM प्लेटफॉर्म पर पारदर्शी एवं प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया के कारण वित्तीय वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ शासन को ₹130 करोड़ की बचत हुई है। यह बचत विभागों द्वारा खरीदी के लिए अनुमानित लागत और खुली प्रतिस्पर्धी बोली के बाद प्राप्त वास्तविक बाजार मूल्य के अंतर से हुई है।

GeM की खुली बोली प्रक्रिया, मानकीकृत विनिर्देश और प्रत्येक लेन-देन का डिजिटल एवं ऑडिट योग्य रिकॉर्ड शासकीय खरीदी में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करता है। पिछले तीन वित्तीय वर्षों में प्रतिस्पर्धी खरीदी के माध्यम से राज्य शासन को कुल ₹235 करोड़ की बचत हुई है।

खरीदी प्रक्रिया के प्रत्येक चरण में निर्धारित जांच और निगरानी व्यवस्था लागू है। साथ ही निविदा की शर्तों एवं तकनीकी विनिर्देशों की नियमित समीक्षा की जाती है, जिससे खरीदी की गुणवत्ता सुनिश्चित होने के साथ बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप वस्तुओं और सेवाओं की उपलब्धता बनी रहे।

GeM से खरीदी में 113 प्रतिशत की वृद्धि

छत्तीसगढ़ में GeM के माध्यम से शासकीय खरीदी वित्तीय वर्ष 2025-26 में बढ़कर ₹3,935 करोड़ पहुंच गई। यह पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 113 प्रतिशत की वृद्धि है।

राज्य शासन द्वारा विभागों, निगमों और स्थानीय निकायों की खरीदी को एक साझा एवं पारदर्शी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने के सुनियोजित प्रयासों से यह वृद्धि संभव हुई है। इससे अधिकाधिक शासकीय खरीदी खुली प्रतिस्पर्धा के दायरे में आई है और प्रत्येक लेन-देन में प्रतिस्पर्धी दर निर्धारण तथा पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है।

सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को ₹1,800 करोड़ के ऑर्डर

GeM के व्यापक उपयोग से शासकीय खरीदी में छोटे उद्यमियों की भागीदारी भी तेजी से बढ़ी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (MSEs) से खरीदी 61 प्रतिशत बढ़कर ₹1,800 करोड़ हो गई। यह निर्धारित 25 प्रतिशत MSE खरीद लक्ष्य से काफी अधिक है।

राज्य के प्राथमिकता वाले उद्यमी वर्गों की भागीदारी में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। महिला उद्यमियों से खरीदी में 97 प्रतिशत और अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के उद्यमियों से खरीदी में 108 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं स्टार्टअप से खरीदी में सर्वाधिक 178 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

GeM ने उद्यमियों के लिए खोले शासकीय बाजार के द्वार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि GeM ने छत्तीसगढ़ के उद्यमियों को बिना किसी मध्यस्थ के सीधे शासकीय मांग और बाजार से जुड़ने का सशक्त माध्यम उपलब्ध कराया है। महिला उद्यमियों, अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के उद्यमियों और स्टार्टअप की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि इस पारदर्शी व्यवस्था की सफलता को दर्शाती है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि खुला और पारदर्शी डिजिटल मार्केटप्लेस प्रत्येक उद्यमी को समान अवसर प्रदान करता है।  हमारी सरकार का प्रयास है कि इस व्यवस्था का लाभ प्रदेश के अधिक से अधिक सूक्ष्म एवं लघु उद्यमियों, महिला उद्यमियों, अनुसूचित जाति-जनजाति के उद्यमियों और स्टार्टअप तक पहुंचे। हम पारदर्शी शासकीय खरीदी के साथ स्थानीय उद्यमिता को सशक्त बनाकर विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहे हैं।

‘भारत GI’ के जरिए कारीगरों और उत्पादकों को मिलेगा बड़ा बाजार

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भारत की समृद्ध भौगोलिक संकेतक (GI) उत्पाद विरासत की आर्थिक क्षमता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने 5 अगस्त 2026 को वाणिज्य भवन, नई दिल्ली में एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इस MoU पर MSME मंत्रालय के निदेशक मोहम्मद सालिक परवेज और DPIIT के IPR प्रभाग के निदेशक करण थापर ने दोनों संगठनों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए।

भारत में भौगोलिक संकेतकों के पंजीकरण और कानूनी संरक्षण के लिए GI अधिनियम, 1999 के तहत DPIIT नोडल विभाग है। वहीं, MSME मंत्रालय देशभर में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों, पारंपरिक उद्योगों और कारीगरों के विकास, वित्तीय सुदृढ़ता तथा समग्र प्रगति को दिशा देने वाला नोडल मंत्रालय है। दोनों पक्षों ने माना कि GI का कानूनी पंजीकरण क्षेत्रीय पहचान की रक्षा करता है, लेकिन इन उत्पादों के आर्थिक मूल्य को अधिकतम करने के लिए स्थानीय शिल्प और उत्पादों को व्यापक स्तर पर व्यावसायिक रूप से सक्षम तथा निर्यात के लिए तैयार उद्यमों में बदलने हेतु समन्वित प्रयास आवश्यक हैं।

इस MoU के माध्यम से भारतीय GI उत्पादों के व्यावसायीकरण, गुणवत्ता मानकीकरण और बाजार पहुंच को तेज करने के लिए एक सहयोगात्मक ढांचा स्थापित किया गया है। इससे स्थानीय कारीगरों, बुनकरों और उत्पादकों की आजीविका को बेहतर बनाने के साथ-साथ देश में ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ODOP) पारिस्थितिकी तंत्र को भी मजबूत करने में मदद मिलेगी।

संयुक्त पहलों के तहत दोनों संगठन अपनी योजनाओं और कार्यक्रमों में ODOP को शामिल करने की दिशा में काम करेंगे। इसके अलावा, GI उत्पादक समूहों और अधिकृत उपयोगकर्ताओं को समर्पित “भारत GI” बैनर के तहत ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) और सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पर जोड़ने में सहयोग किया जाएगा। घरेलू और वैश्विक स्तर पर GI उत्पादों के विपणन के लिए राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों, खरीदार-विक्रेता बैठकों और प्रदर्शनियों में विशेष GI मंडप (GI Pavilions) भी संयुक्त रूप से प्रायोजित किए जाएंगे।

यह MoU उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के बौद्धिक संपदा संरक्षण संबंधी दायित्वों और MSME मंत्रालय के उद्यम विकास संबंधी दायित्वों को एक साथ जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस सहयोग से क्षमता निर्माण, डिजिटल सशक्तीकरण और कारीगरों, बुनकरों तथा उत्पादक समूहों के लिए बेहतर बाजार पहुंच के माध्यम से भारत के GI पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की उम्मीद है।

यह पहल GI उत्पादों को प्रीमियम घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने में भी मदद करेगी तथा ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में योगदान देगी।

फिनेक्स इंडस्ट्रीज़ प्राइवेट लिमिटेड – ZED के साथ गुणवत्ता और सतत विकास की ओर अग्रसर

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महाराष्ट्र के नासिक जिले के दिंडोरी स्थित फिनेक्स इंडस्ट्रीज़ प्राइवेट लिमिटेड, जो धातु एवं लकड़ी के फर्नीचर का निर्माण करती है, ने 14 जुलाई 2025 को ZED सिल्वर प्रमाणन प्राप्त किया। इसके बाद कंपनी ने कॉस्ट ऑफ पुअर क्वालिटी (COPQ) में 11% की कमी, रीवर्क में 10% की कमी तथा दोषों (Defects) में 1% की कमी हासिल की। साथ ही कार्यस्थल सुरक्षा और संसाधनों के बेहतर उपयोग में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ।

ऊर्जा दक्षता, स्थान के बेहतर उपयोग तथा उपभोग्य सामग्रियों की खपत कम होने से कंपनी को लागत में भी बचत हुई। कंपनी के अनुसार, ZED प्रमाणन ने उत्पादकता, उत्पाद गुणवत्ता और परिचालन दक्षता में वृद्धि की है, जिससे यह सिद्ध हुआ है कि "जीरो डिफेक्ट, जीरो इफेक्ट" की अवधारणा एमएसएमई को सतत एवं प्रतिस्पर्धी विकास की दिशा में आगे बढ़ाने में प्रभावी है।

कॉन्सेप्ट क्लोदिंग प्राइवेट लिमिटेड – ZED के माध्यम से गुणवत्ता और दक्षता को नई मजबूती

पंजाब के जालंधर स्थित कॉन्सेप्ट क्लोदिंग प्राइवेट लिमिटेड ने 14 जून 2025 को ZED सिल्वर प्रमाणन प्राप्त किया, जिससे गुणवत्ता, सतत विकास और परिचालन उत्कृष्टता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता और मजबूत हुई।

ZED प्रथाओं को अपनाने के बाद कंपनी ने कार्यस्थल दुर्घटनाओं में 80% की कमी, मीन टाइम टू रिपेयर (MTTR) में 50% की कमी, रीवर्क में 7.4% की कमी तथा रिजेक्शन में 4% की कमी दर्ज की। इसके अतिरिक्त गुणवत्ता, पर्यावरण और कार्यस्थल सुधार पहलों के माध्यम से उल्लेखनीय लागत बचत भी हुई।

कंपनी के अनुसार, ZED प्रमाणन ने परिचालन अनुशासन को मजबूत किया, प्रक्रियाओं की दक्षता बढ़ाई तथा समग्र प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार किया। यह दर्शाता है कि "जीरो डिफेक्ट, जीरो इफेक्ट" की अवधारणा एमएसएमई के लिए अत्यंत लाभकारी है।

जीरो डिफेक्ट, जीरो इफेक्ट (ZED) प्रमाणन के माध्यम से एमएसएमई को सशक्त बनाना

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) एमएसएमई सस्टेनेबल–ZED प्रमाणन योजना के माध्यम से गुणवत्ता आधारित और पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी विनिर्माण को बढ़ावा दे रहा है। यह पहल एमएसएमई को उत्पादन प्रक्रियाओं में सुधार, बेहतर गुणवत्ता मानकों को अपनाने तथा पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने में सहायता प्रदान करती है, जिससे घरेलू और वैश्विक बाजारों में उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत होती है।

इस पहल का एक प्रमुख उद्देश्य महिला उद्यमियों की भागीदारी बढ़ाना है। महिला-स्वामित्व वाले एमएसएमई के लिए ZED प्रमाणन की लागत को समाप्त करने हेतु सरकार ने ZED प्रमाणन शुल्क पर 100% सब्सिडी प्रदान की है। यह प्रावधान 11 नवंबर 2023 से प्रभावी है, जिसके कारण पात्र महिला-स्वामित्व वाले एमएसएमई के लिए प्रमाणन की लागत शून्य हो गई है।

यह सहायता महिला उद्यमियों को गुणवत्ता, उत्पादकता, सुरक्षा तथा पर्यावरणीय सततता के मानकों के आधार पर अपनी विनिर्माण प्रणालियों का मूल्यांकन और सुदृढ़ीकरण करने में सक्षम बनाती है। संरचित मूल्यांकन और प्रमाणन तक आसान पहुंच के माध्यम से महिला-नेतृत्व वाले उद्यम अपनी प्रक्रियाओं को मजबूत कर सकते हैं, बाजार में विश्वसनीयता बढ़ा सकते हैं तथा व्यापक व्यावसायिक अवसरों के लिए स्वयं को तैयार कर सकते हैं।

पृष्ठभूमि

जीरो डिफेक्ट, जीरो इफेक्ट (ZED) पहल एमएसएमई को उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों का निर्माण करने के साथ-साथ पर्यावरण पर न्यूनतम प्रभाव डालने के लिए प्रेरित करती है। यह उद्यमों को गुणवत्ता, उत्पादकता और सतत विकास को बढ़ाने के लिए अपनी तकनीक, प्रणालियों और विनिर्माण प्रक्रियाओं में निरंतर सुधार करने हेतु प्रोत्साहित करती है।

ZED केवल एक प्रमाणन कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह एमएसएमई को मूल्यांकन, सुधार, प्रोत्साहन और प्रौद्योगिकी उन्नयन के लिए एक संरचित मार्ग प्रदान करता है। प्रमाणन प्रणाली में ब्रॉन्ज, सिल्वर और गोल्ड स्तर शामिल हैं, जिससे उद्यम क्रमिक रूप से गुणवत्ता और सततता के उच्च मानकों तक पहुंच सकते हैं।

पात्र एमएसएमई को निम्नलिखित वित्तीय सहायता भी उपलब्ध है—

  • परीक्षण/प्रणाली/उत्पाद प्रमाणन की लागत का 75% तक (अधिकतम ₹50,000)।

  • हैंडहोल्डिंग एवं परामर्श सहायता के लिए अधिकतम ₹2 लाख।

  • जीरो इफेक्ट समाधान, प्रदूषण नियंत्रण उपायों तथा स्वच्छ प्रौद्योगिकी अपनाने के लिए अधिकतम ₹3 लाख।

बढ़ती पहुंच और प्रभाव

7 जुलाई 2026 तक लगभग 9.49 लाख एमएसएमई इस योजना के अंतर्गत पंजीकृत हो चुके थे। इनमें से 6.67 लाख से अधिक को ब्रॉन्ज, 6,700 को सिल्वर तथा 4,800 को गोल्ड प्रमाणन प्रदान किया गया।

इसके अतिरिक्त, गुणवत्ता और सतत विनिर्माण प्रथाओं को अपनाने में सहायता के लिए इस योजना के अंतर्गत ₹913 करोड़ से अधिक की वित्तीय सहायता प्रदान की जा चुकी है।

ZED का प्रभाव केवल प्रमाणन तक सीमित नहीं है। 22 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों ने अपनी औद्योगिक नीतियों में ZED को शामिल किया है और प्रमाणित एमएसएमई को अतिरिक्त प्रोत्साहन प्रदान कर रहे हैं।

साथ ही, 19 वित्तीय संस्थान ZED प्रमाणित एमएसएमई को प्रोसेसिंग शुल्क और ब्याज दरों में रियायत जैसी सुविधाएं प्रदान कर रहे हैं, जिससे उन्हें वित्तीय सहायता प्राप्त करना अधिक आसान हो गया है।

इस योजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता महिला-स्वामित्व वाले एमएसएमई के लिए ZED प्रमाणन पर 100% सब्सिडी है, जो प्रमाणन की लागत की बाधा को समाप्त कर महिला उद्यमियों की अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करती है।

गुणवत्तापूर्ण विनिर्माण, संसाधनों के कुशल उपयोग और पर्यावरणीय सततता को बढ़ावा देकर ZED योजना एमएसएमई को अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत करने, बाजार में विश्वसनीयता बढ़ाने तथा घरेलू एवं वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (Value Chains) में अधिक प्रभावी ढंग से जुड़ने में सहायता कर रही है।

छत्तीसगढ़ ने लागू किया 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट-2026', निवेश और उद्योगों को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

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रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार ने उद्योगों और निवेशकों के लिए कारोबारी माहौल को अधिक सरल, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 'छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट-2026' लागू किया है। इस कानून का उद्देश्य उद्योगों की स्थापना और संचालन से जुड़ी सरकारी प्रक्रियाओं को तेज, सरल और समयबद्ध बनाना है, जिससे राज्य में निवेश को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

नए कानून के तहत ट्रस्ट-बेस्ड (विश्वास आधारित) और रिस्क-बेस्ड (जोखिम आधारित) नियामक व्यवस्था अपनाई जाएगी। इसके तहत उद्योगों का वर्गीकरण उनके आकार, निवेश और जोखिम के आधार पर किया जाएगा। कम जोखिम वाले उद्योगों को बार-बार निरीक्षण और अनावश्यक कागजी प्रक्रिया से राहत मिलेगी, जबकि अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में आवश्यक निगरानी जारी रहेगी।

सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से उद्योगों को विभिन्न विभागों से समयबद्ध मंजूरी मिलेगी। निर्धारित समय सीमा के भीतर अनुमति नहीं मिलने पर कई मामलों में 'डीम्ड अप्रूवल' (स्वतः स्वीकृति) का प्रावधान भी लागू होगा। साथ ही, विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को स्व-प्रमाणन (Self-Certification) जैसी सुविधाएं दी जाएंगी, जिससे अनुपालन लागत और प्रशासनिक बोझ कम होगा।

राज्य सरकार का मानना है कि यह कानून पारंपरिक निरीक्षण-आधारित व्यवस्था की जगह पारदर्शी, जवाबदेह और निवेशक-अनुकूल शासन प्रणाली को बढ़ावा देगा। इससे घरेलू और विदेशी निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा तथा औद्योगिक परियोजनाओं को तेजी से गति मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस कानून के प्रभावी क्रियान्वयन से छत्तीसगढ़ में विनिर्माण, एमएसएमई, कृषि-आधारित उद्योग, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, फार्मास्यूटिकल्स और अन्य उभरते क्षेत्रों में निवेश को नई रफ्तार मिल सकती है। इससे प्रदेश के औद्योगिक विकास के साथ-साथ बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

राज्य सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ को देश के सबसे निवेश-अनुकूल राज्यों में शामिल करना है। नया ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट-2026 इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है, जो उद्योगों के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाकर आर्थिक विकास को नई गति देने में अहम भूमिका निभाएगा।

छत्तीसगढ़ में विकसित होंगे 4 नए औद्योगिक पार्क

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मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समिति की बैठक सम्पन्न

रायपुर- छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास और रोजगार के नए अवसरों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने चार नए औद्योगिक पार्क (मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर) विकसित करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आयोजित उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के अंतर्गत औद्योगिक विकास योजना की राज्य स्तरीय समिति की बैठक में इस प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी प्रदान की गई।

इन 4 जिलों में बनेंगे मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर

समिति की दूसरी बैठक के दौरान प्रदेश के चार जिलों में औद्योगिक पार्क स्थापित करने के प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की गई और उन्हें स्वीकृति दी गई। राजनांदगांव जिले में स्पेशल मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, पटेवा, धमतरी जिले में मल्टी सेक्टर मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, धूम्रपाली, जांजगीर-चांपा जिले में मल्टी सेक्टर मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, सलखान और बस्तर जिले में मल्टी सेक्टर मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, नियानार में औद्योगिक पार्क स्थापित करने के प्रस्तावों पर स्वीकृति दी गई।

केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त पहल

भारत औद्योगिक योजना केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसे छत्तीसगढ़ सरकार ने अपनी औद्योगिक विकास नीति के तहत प्रभावी रूप से लागू किया है। राज्य में इस योजना के सुचारू संचालन और विभिन्न परियोजनाओं को समयबद्ध मंजूरी देने के लिए राज्य स्तरीय समिति का गठन किया गया है।

बैठक में राज्य के प्रमुख विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया, जिनमें डॉ. रोहित यादव (सचिव, वित्त विभाग), अंकित आनंद (सचिव, आवास एवं पर्यावरण विभाग), रजत कुमार (सचिव, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग), डॉ. सारांश मित्तर (सचिव, ऊर्जा विभाग), इफ्फत आरा (विशेष सचिव, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग) सहित अन्य संबंधित विभागों के उच्चाधिकारी शामिल थे।

आईपीसी और यूपीपीपीसी के बीच एमओयू, दवा एवं मेडिकल डिवाइस क्षेत्र को मिलेगा नया बल

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उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने और दवा क्षेत्र की नियामक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए इंडियन फार्माकोपिया आयोग (IPC) और उत्तर प्रदेश प्रमोट फार्मा काउंसिल (UPPPC) ने एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

यह समझौता 14 जुलाई 2026 को ग्रेटर नोएडा में आयोजित YEIDA MedTech Investors Meet & Site Visit 2026 के दौरान किया गया।

इस साझेदारी का उद्देश्य फार्मास्यूटिकल और मेडिकल डिवाइस सेक्टर में गुणवत्ता, नियामक अनुपालन, नवाचार और कौशल विकास को बढ़ावा देना है।

इस एमओयू के तहत प्रमुख पहलें:

  • दवा और मेडिकल डिवाइस उद्योग में गुणवत्ता मानकों और नियामक अनुपालन को मजबूत किया जाएगा।

  • इंडियन फार्माकोपिया, फार्माकोविजिलेंस और मैटेरियोविजिलेंस के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाएगी।

  • संयुक्त रूप से प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएं और जागरूकता अभियान आयोजित किए जाएंगे।

  • रिसर्च, इनोवेशन और इंडस्ट्री–अकादमिक सहयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा।

  • एमएसएमई (MSME) इकाइयों को प्रतिकूल घटनाओं (Adverse Events) की रिपोर्टिंग के लिए डिजिटल टूल्स उपलब्ध कराए जाएंगे।

  • गुणवत्ता आश्वासन और पोस्ट-मार्केट सर्विलांस के माध्यम से मरीजों की सुरक्षा को और मजबूत किया जाएगा।

इस समझौते के माध्यम से IPC ने एक बार फिर उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाओं, नवाचार और मजबूत नियामक प्रणाली के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। साथ ही, यह पहल उत्तर प्रदेश को फार्मास्यूटिकल, मेडिकल डिवाइस और हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


जशक्राफ्ट से छत्तीसगढ़ के बांस हस्तशिल्प को मिलेगी नई पहचान

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आधुनिक प्रशिक्षण, डिजाइन नवाचार और बाजार से जुड़ाव के माध्यम से बढ़ेगी आजीविका और रोजगार

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ग्रामीण आजीविका, महिला सशक्तिकरण और पारंपरिक हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इसी क्रम में जशपुर जिले में जिला प्रशासन द्वारा "जशक्राफ्ट" ब्रांड के माध्यम से बांस हस्तशिल्प को नई पहचान देने, स्थानीय कारीगरों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने तथा उनकी आय में वृद्धि के उद्देश्य से विशेष पहल की जा रही है।

विकासखंड जशपुर की ग्राम पंचायत झोलांगा में 29 जून से 29 जुलाई तक एक माह का आवासीय बांस हस्तशिल्प प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है। जिला पंचायत एवं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के संयुक्त प्रयास से संचालित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य बांस हस्तशिल्प से जुड़े लगभग 150 परिवारों की आजीविका को सशक्त बनाना है। वर्तमान में 46 महिलाओं का प्रथम बैच प्रशिक्षण प्राप्त कर रहा है।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को आधुनिक मशीनों के उपयोग, नवीन डिजाइनों और वर्तमान बाजार की मांग के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाले बांस उत्पाद तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके लिए गुजरात के सूरत से विशेषज्ञ प्रशिक्षकों को आमंत्रित किया गया है। प्रशिक्षण में फैंसी ट्रे, गुलदस्ते, माचिया, सजावटी सामग्री, चटाई, आकर्षक टोकरियां, फर्नीचर, सोफा, पलंग सहित अनेक आधुनिक एवं उपयोगी उत्पाद बनाना सिखाया जा रहा है।

जशपुर और मनोरा विकासखंड में लगभग 250 परिवार वर्षों से बांस हस्तशिल्प के माध्यम से अपनी आजीविका अर्जित कर रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या में बिहान स्व-सहायता समूहों की महिलाएं भी सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। इन समूहों को चक्रीय निधि, सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ), बैंक लिंकेज तथा मुद्रा ऋण जैसी वित्तीय सुविधाओं से जोड़कर उनके उद्यमों को मजबूत बनाया जा रहा है। साथ ही समय-समय पर कौशल उन्नयन एवं उद्यमिता विकास संबंधी प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

जशक्राफ्ट ब्रांड के अंतर्गत तैयार हस्तशिल्प उत्पादों को रूरल मार्ट, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनियों तथा देश के विभिन्न बाजारों तक पहुंचाने के लिए डिजाइन एवं विपणन विशेषज्ञों की सेवाएं ली जा रही हैं, ताकि स्थानीय कारीगरों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य मिल सके और उन्हें स्थायी बाजार उपलब्ध हो।

राज्य सरकार की यह पहल पारंपरिक बांस शिल्प को आधुनिक बाजार से जोड़ने के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण, स्थानीय रोजगार सृजन, जनजातीय परिवारों की आय वृद्धि तथा आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही है। जिला प्रशासन का लक्ष्य आगामी वर्ष तक हस्तशिल्प से जुड़े सभी स्व-सहायता समूहों के सदस्यों को "लखपति दीदी" की श्रेणी में शामिल करना है।



पंजाब के लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम के डिजिटल परिवर्तन के लिए एनएलडीएसएल और पंजाब सरकार के बीच समझौता

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एनआईसीडीसी लॉजिस्टिक्स डेटा सर्विसेज लिमिटेड (NLDSL) और पंजाब सरकार के उद्योग एवं वाणिज्य निदेशालय ने 7 जुलाई, 2026 को यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म (ULIP) के माध्यम से पंजाब के लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम के डिजिटल परिवर्तन को बढ़ावा देने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।

इस साझेदारी का उद्देश्य लॉजिस्टिक्स की दृश्यता बढ़ाना, परिचालन दक्षता में सुधार करना, विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना तथा रियल-टाइम लॉजिस्टिक्स डेटा के निर्बाध आदान-प्रदान के माध्यम से डेटा-आधारित निर्णय लेने की प्रक्रिया को मजबूत बनाना है। इस पहल से राज्य के उद्योगों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), निर्यातकों तथा अन्य लॉजिस्टिक्स हितधारकों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

इस सहयोग के तहत एनएलडीएसएल, यूएलआईपी के माध्यम से विभिन्न सरकारी विभागों के बीच निर्बाध डेटा साझाकरण सुनिश्चित कर पंजाब सरकार को एक डिजिटल रूप से जुड़ा हुआ लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम विकसित करने में सहयोग देगा। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, नीतिगत एवं परिचालन संबंधी निर्णय तेजी से लिए जा सकेंगे, लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार होगा तथा विनिर्माण, कृषि और निर्यात केंद्र के रूप में पंजाब की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत होगी।

यूएलआईपी विभिन्न सरकारी प्रणालियों से लॉजिस्टिक्स संबंधी डेटा को एपीआई-आधारित एकीकरण के माध्यम से जोड़ने वाला एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है। वर्तमान में यह 12 केंद्रीय मंत्रालयों एवं विभागों की 46 प्रणालियों को 142 एपीआई के माध्यम से जोड़ता है, जिनमें 2,000 से अधिक डेटा फील्ड शामिल हैं। इस प्लेटफॉर्म पर 260 से अधिक एप्लिकेशन विकसित किए जा चुके हैं तथा 450 करोड़ से अधिक एपीआई लेनदेन किए जा चुके हैं, जो इसकी व्यापकता, विश्वसनीयता और मजबूती को दर्शाते हैं।

समझौते पर हस्ताक्षर के बाद परिवहन, वेयरहाउसिंग, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले, लोक निर्माण विभाग, नागरिक उड्डयन तथा अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए एक इंटरैक्टिव यूएलआईपी कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का उद्देश्य पंजाब की आवश्यकताओं के अनुरूप यूएलआईपी के उपयोग के मामलों की पहचान करना, लॉजिस्टिक्स चुनौतियों का समाधान करना, आपूर्ति श्रृंखला की दृश्यता बढ़ाना तथा राज्य में कारोबार सुगमता को प्रोत्साहित करना था।

कार्यशाला के दौरान एनएलडीएसएल ने अपने प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म—लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक (LDB), कोयला शक्ति–स्मार्ट कोल एनालिटिक्स डैशबोर्ड, ट्रैक योर ट्रांसपोर्ट (TYT), ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (TMS) और लॉजिस्टिक्स ई-मार्केटप्लेस (LeMP)—का प्रदर्शन किया। इन प्लेटफॉर्मों ने दिखाया कि एकीकृत लॉजिस्टिक्स डेटा किस प्रकार परिसंपत्ति ट्रैकिंग, परिचालन योजना, अंतर-विभागीय समन्वय और साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने में सहायता कर सकता है।

यह समझौता पंजाब सरकार के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री अमन अरोड़ा की उपस्थिति में संपन्न हुआ। इस पर एनएलडीएसएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ताकायुकी कानो तथा पंजाब सरकार के उद्योग एवं वाणिज्य निदेशक जसप्रीत सिंह, आईएएस ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के प्रशासनिक सचिव गुरकिरत किरपाल सिंह, आईएएस भी उपस्थित रहे।

यह पहल राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम (NICDC) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक तथा एनएलडीएसएल के अध्यक्ष रजत कुमार सैनी, आईएएस के मार्गदर्शन में लागू की जा रही है। इसका उद्देश्य डिजिटल एकीकरण और सहयोगात्मक प्रशासन के माध्यम से लॉजिस्टिक्स दक्षता को मजबूत करना है।

एनआईसीडीसी देश में ग्रीनफील्ड इंडस्ट्रियल स्मार्ट सिटीज़ और प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक अवसंरचना के विकास के माध्यम से भारत के औद्योगिक परिवर्तन का नेतृत्व कर रहा है। 20 औद्योगिक स्मार्ट शहरों की सफलता के बाद एनआईसीडीसी को भारत औद्योगिक विकास योजना (BHAVYA) के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। इस योजना के तहत 33,660 करोड़ रुपये की लागत से देशभर में 100 निवेश-तैयार प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्क विकसित किए जाएंगे। इसके अलावा एनआईसीडीसी पीएम मित्र मेगा टेक्सटाइल पार्क और इंडिया इंडस्ट्रियल लैंड बैंक (IILB) जैसी प्रमुख राष्ट्रीय पहलों का भी क्रियान्वयन कर रहा है।

एनआईसीडीसी लॉजिस्टिक्स डेटा सर्विसेज लिमिटेड (NLDSL), जो एनआईसीडीसी की लॉजिस्टिक्स शाखा है, लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक (LDB) और यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म (ULIP) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्मों के माध्यम से देश के लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन को गति दे रहा है। 30 दिसंबर, 2015 को स्थापित एनएलडीएसएल, NICDC Industrial Development Trust (NICDIT) और जापान की NEC Corporation का एक संयुक्त उपक्रम (Joint Venture) है।

राष्ट्रीय एससी-एसटी हब (NSSH) योजना के माध्यम से समावेशी विकास को गति

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राष्ट्रीय एससी-एसटी हब (NSSH) योजना अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के उद्यमियों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई एक विशेष पहल है। यह योजना बाज़ार तक पहुँच, वित्तीय सहायता, प्रौद्योगिकी, क्षमता निर्माण तथा संस्थागत नेटवर्क जैसी चुनौतियों का समाधान कर इन उद्यमों की प्रतिस्पर्धात्मकता और दीर्घकालिक स्थिरता को मजबूत करती है। सरकारी खरीद (Government Procurement) में भागीदारी बढ़ाने के साथ-साथ यह योजना SC/ST उद्यमियों को दीर्घकालिक विकास, आत्मनिर्भरता और व्यापक पहचान प्रदान कर उन्हें मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ने तथा देश की आर्थिक प्रगति में सार्थक योगदान देने का अवसर प्रदान कर रही है।

क्षमता निर्माण : उद्यम विकास की मजबूत नींव

इस परिवर्तन का सबसे महत्वपूर्ण आधार क्षमता निर्माण (Capacity Building) है, जिसके माध्यम से SC/ST उद्यमियों को संरचित और अनुपालन-आधारित बाज़ारों में सफल होने के लिए आवश्यक ज्ञान और कौशल प्रदान किए जाते हैं। ये कार्यक्रम केवल पारंपरिक प्रशिक्षण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वित्तीय प्रबंधन, सरकारी निविदाओं (टेंडर) में भागीदारी, मूल्य निर्धारण (Pricing), लागत प्रबंधन तथा नियामकीय आवश्यकताओं की समझ जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विशेष ध्यान देते हैं। यह समग्र दृष्टिकोण उद्यमियों की बाज़ार में भागीदारी की तैयारी को मजबूत करने के साथ-साथ उनमें आत्मविश्वास और व्यावसायिक स्थिरता भी विकसित करता है।

बिज़नेस एक्सेलेरेटर प्रोग्राम (BAP) : बेहतर बाज़ार अवसरों का सेतु

क्षमता निर्माण के इस मजबूत आधार पर बिज़नेस एक्सेलेरेटर प्रोग्राम (Business Accelerator Programme – BAP) उद्यमियों की क्षमताओं को व्यावसायिक सफलता में बदलने का कार्य करता है। यह कार्यक्रम संरचित मार्गदर्शन (Mentorship), उद्योग विशेषज्ञों की सलाह तथा लक्षित व्यावसायिक हस्तक्षेपों के माध्यम से उद्यमियों को व्यवसाय रणनीति, मूल्य निर्धारण, परिचालन दक्षता तथा बाज़ार विस्तार जैसी चुनौतियों से निपटने में सहायता करता है।

विभिन्न क्षेत्रों के अनेक उद्यमों ने BAP के माध्यम से पारंपरिक एवं बिखरे हुए कार्य-तरीकों से आगे बढ़कर डेटा-आधारित, सुव्यवस्थित व्यावसायिक रणनीतियाँ अपनाईं। इससे वे बाज़ार की अपेक्षाओं के अनुरूप स्वयं को तैयार कर सके और विशेष रूप से सरकारी खरीद के क्षेत्र में बड़े अवसर प्राप्त करने में सफल हुए।

परिवर्तन की प्रेरक कहानियाँ

1. अनुपालन-आधारित बाज़ार में नई पहचान – M/s Safety & Security Engineering, पश्चिम बंगाल

अग्नि सुरक्षा (Fire Safety) जैसे अत्यधिक विनियमित क्षेत्र में कार्यरत देबाशीष मंडल की कंपनी M/s Safety & Security Engineering प्रारंभिक दौर में मूल्य निर्धारण, बाज़ार में पहचान और प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति जैसी चुनौतियों का सामना कर रही थी। यद्यपि कंपनी गुणवत्तापूर्ण अग्नि सुरक्षा एवं जीवन सुरक्षा उपकरण (Fire Protection & Life Safety Equipment) उपलब्ध करा रही थी, फिर भी स्पष्ट व्यावसायिक रणनीति के अभाव में उसका विस्तार सीमित था।


IIM संबलपुर में आयोजित BAP में भाग लेने के बाद उन्हें लागत एवं मूल्य निर्धारण की वैज्ञानिक समझ प्राप्त हुई। इसके परिणामस्वरूप उन्होंने डेटा-आधारित मूल्य निर्धारण रणनीति अपनाई, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और बाज़ार में स्थिति मजबूत हुई। इसके बाद उन्होंने Power Grid Corporation of India Limited से ₹8.48 लाख का सरकारी टेंडर सफलतापूर्वक प्राप्त किया।


2. स्वच्छ ऊर्जा को नई गति – M/s Renergy Solution Pvt. Ltd., असम

भार्गव देवरी द्वारा स्थापित M/s Renergy Solution Pvt. Ltd. अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy) के क्षेत्र में एक सुदृढ़ तकनीकी आधार के साथ कार्यरत थी और सरकारी संस्थानों के लिए सौर ऊर्जा परियोजनाओं में सक्रिय रूप से भाग ले रही थी। हालांकि, दीर्घकालिक विकास के लिए व्यवसाय को अधिक रणनीतिक और व्यवस्थित रूप देने की आवश्यकता महसूस हुई।


BAP के माध्यम से कंपनी ने अनुभव-आधारित संचालन से आगे बढ़कर एक अधिक पेशेवर एवं बाज़ार-उन्मुख कार्यप्रणाली अपनाई। इससे सरकारी खरीद प्लेटफॉर्म पर उसकी उपस्थिति मजबूत हुई, सरकारी निविदाओं में भागीदारी की क्षमता बढ़ी और सार्वजनिक क्षेत्र के खरीदारों के साथ नए अवसरों का प्रभावी ढंग से लाभ उठाने में सहायता मिली।


3. सटीक इंजीनियरिंग से सफलता की उड़ान – Sawalaram Enterprises, महाराष्ट्र

महाराष्ट्र के नासिक स्थित सुनील पोपटराव जगताप द्वारा स्थापित Sawalaram Enterprises हाइड्रोलिक सिलेंडर निर्माण के क्षेत्र में कार्यरत है। एक इंजीनियरिंग कंपनी में 18 वर्षों तक कार्य करने के बाद उन्होंने वर्ष 2010 में अपना स्वयं का विनिर्माण उद्यम स्थापित किया और उच्च गुणवत्ता वाले हाइड्रोलिक सिलेंडर विकसित किए।


अपने व्यवसाय को नई दिशा देने के लिए उन्होंने IIM शिलांग में आयोजित बिज़नेस एक्सेलेरेटर प्रोग्राम में भाग लिया, जहाँ उन्हें व्यवसाय रणनीति और सरकारी निविदाओं की गहन जानकारी प्राप्त हुई। इस प्रशिक्षण के परिणामस्वरूप उन्होंने Steel Authority of India Limited (SAIL) से हाइड्रोलिक सिलेंडरों की आपूर्ति हेतु ₹5.10 लाख का टेंडर सफलतापूर्वक प्राप्त किया। इस उपलब्धि ने उनके व्यवसाय का विस्तार किया, बाज़ार में पहचान बढ़ाई और सतत विकास की दिशा में मजबूत आधार तैयार किया।


आगे की राह : अवसरों का विस्तार, प्रभाव का स्थायी विकास

आज ये सफल उद्यम केवल अपने व्यवसाय का विस्तार नहीं कर रहे हैं, बल्कि समावेशी विकास की एक नई कहानी भी लिख रहे हैं। चुनौतियों पर विजय प्राप्त कर मुख्यधारा की आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी तक की उनकी यात्रा यह सिद्ध करती है कि सही मार्गदर्शन, क्षमता निर्माण और रणनीतिक सहयोग के माध्यम से देश के प्रत्येक क्षेत्र और समुदाय की क्षमता को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया जा सकता है।

राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना केवल व्यक्तिगत उद्यमों को सशक्त नहीं बना रही है, बल्कि समावेशिता को वास्तविक आर्थिक प्रगति में बदलने का कार्य भी कर रही है। क्षमता निर्माण, मार्गदर्शन और रणनीतिक सहयोग के माध्यम से यह योजना विकसित भारत @2047 के निर्माण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।


लीगल मेट्रोलॉजी अधिनियम में बड़ा सुधार: पहली बार गलती करने वाले कारोबारियों को मिलेगा सुधार का मौका

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नई दिल्ली- उपभोक्ता मामलों के विभाग (Department of Consumer Affairs) ने जन विश्वास (संशोधन प्रावधान) अधिनियम, 2026 के तहत लीगल मेट्रोलॉजी अधिनियम, 2009 में "इम्प्रूवमेंट नोटिस (Improvement Notice)" व्यवस्था लागू की है। इस नई व्यवस्था के तहत पहली बार प्रक्रियागत या नियामकीय नियमों का उल्लंघन करने वाले कारोबारियों को दंडात्मक कार्रवाई से पहले अपनी गलती सुधारने का अवसर दिया जाएगा।

मुख्य बातें

  • पहली बार हुई प्रक्रियागत या नियामकीय गलती पर सीधे जुर्माना या कानूनी कार्रवाई नहीं होगी।

  • संबंधित अधिकारी पहले इम्प्रूवमेंट नोटिस जारी करेंगे।

  • नोटिस में बताई गई कमियों को निर्धारित समय के भीतर सुधारने का अवसर मिलेगा।

  • समय पर सुधार करने पर अनावश्यक मुकदमेबाजी और दंडात्मक कार्रवाई से बचा जा सकेगा।

  • बार-बार नियमों का उल्लंघन करने या जानबूझकर धोखाधड़ी करने वालों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

किन व्यवसायों को मिलेगा लाभ?

यह व्यवस्था निम्नलिखित सभी पंजीकृत एवं विनियमित संस्थाओं पर लागू होगी:

  • निर्माता (Manufacturers)

  • आयातक (Importers)

  • पैकर (Packers)

  • डीलर एवं व्यापारी

  • रिपेयरर

  • एमएसएमई (MSMEs)

  • अन्य विनियमित कारोबारी

किन मामलों में लागू होगी?

यह व्यवस्था पहली बार होने वाले निम्न प्रकार के उल्लंघनों पर लागू होगी:

  • पंजीकरण संबंधी त्रुटियां

  • रिकॉर्ड एवं दस्तावेजों का रखरखाव

  • मॉडल अप्रूवल

  • बाट एवं माप के निर्माण, बिक्री और मरम्मत

  • बाट एवं माप का आयात

  • पैकेज्ड वस्तुओं से जुड़े नियम

  • वैधानिक जानकारी एवं रिटर्न जमा करना

किन धाराओं पर लागू होगी?

इम्प्रूवमेंट नोटिस की व्यवस्था धारा 25, 27, 28, 29, 31, 32, 34, 35, 36(1), 38, 39, 41(1), 41(2), 45, 46 और 47 के तहत आने वाले निर्धारित प्रथम उल्लंघनों पर लागू होगी।

सरकार का उद्देश्य

सरकार का कहना है कि इस सुधार का उद्देश्य:

  • Ease of Doing Business (EoDB) को बढ़ावा देना,

  • स्वैच्छिक अनुपालन (Voluntary Compliance) को प्रोत्साहित करना,

  • अनावश्यक मुकदमों और अनुपालन लागत को कम करना,

  • तथा "Minimum Government, Maximum Governance" की भावना के अनुरूप पारदर्शी एवं भरोसेमंद नियामकीय व्यवस्था विकसित करना है।

हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ता हितों से समझौता नहीं किया जाएगा। धोखाधड़ी, छेड़छाड़, बार-बार नियम तोड़ने या उपभोक्ताओं को नुकसान पहुंचाने वाले मामलों में पहले की तरह कड़ी कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।

विकसित भारत 2047 की आधारशिला है एमएसएमई क्षेत्र : उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन

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नई दिल्ली- भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने डॉ. अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र, नई दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय एमएसएमई दिवस 2026 समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) केवल एक आर्थिक क्षेत्र नहीं, बल्कि पहली पीढ़ी के उद्यमियों के साहस, युवाओं की आकांक्षाओं, महिला उद्यमियों के संकल्प और लाखों छोटे व्यवसायों के संघर्ष व सफलता का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि 'विकसित भारत @2047' का सपना एक मजबूत और गतिशील एमएसएमई क्षेत्र के बिना संभव नहीं है।

उद्यमिता का अपना अनुभव साझा किया

उपराष्ट्रपति ने अपने उद्यमिता के शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अपने पिता की आर्थिक सहायता से एक छोटा गारमेंट व्यवसाय शुरू किया था। शुरुआती कठिनाइयों के बावजूद लगातार सीखने, मेहनत और धैर्य के बल पर उन्होंने इसे एक सफल निटवियर निर्यात व्यवसाय में बदल दिया। उन्होंने युवाओं से कहा कि शुरुआती चुनौतियों से घबराने के बजाय अपने काम को सीखने और बेहतर बनाने पर ध्यान दें।

गुणवत्ता से कभी समझौता नहीं

उन्होंने कहा कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में गुणवत्ता (Quality) ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है। लागत कम करने के प्रयास में गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए। उनका कहना था कि असली सफलता वही है, जब कम लागत में बेहतर गुणवत्ता और उत्कृष्ट सेवाएं प्रदान की जाएं।

हर छोटा उद्यम आगे बढ़ने का लक्ष्य रखे

उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रत्येक सूक्ष्म उद्यम को लघु उद्यम बनने और प्रत्येक लघु उद्यम को मध्यम उद्यम बनने का लक्ष्य रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुटीर उद्योगों को एक ही स्तर पर सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें निवेश, नवाचार और तकनीक के माध्यम से आगे बढ़ना चाहिए। इसके लिए आसान वित्तीय सहायता और अनुकूल नीतियों की आवश्यकता है।

एमएसएमई का सार्वभौमिक पंजीकरण जरूरी

उन्होंने एमएसएमई मंत्रालय से सभी उद्यमों का व्यापक पंजीकरण सुनिश्चित करने का आग्रह किया। उनका कहना था कि इससे सरकार को वास्तविक आंकड़े मिलेंगे और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप बेहतर नीतियां बनाई जा सकेंगी।

एआई को अवसर के रूप में अपनाएं

संयुक्त राष्ट्र की इस वर्ष की थीम "AI-Driven Future में Human-Centered Entrepreneurship" का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को खतरे के बजाय अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जैसे कंप्यूटर आने पर रोजगार खत्म होने की आशंका जताई गई थी, लेकिन बाद में उसी तकनीक ने नए अवसर पैदा किए। एआई भी भविष्य में नए रोजगार और व्यवसायिक संभावनाएं लेकर आएगा।

खादी और ग्रामोद्योग की सराहना

उन्होंने खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) की सराहना करते हुए कहा कि संस्था ने शहद उत्पादन और खादी वस्त्रों के क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन किया है। उन्होंने कहा कि गांधीवादी विचारों से प्रेरित खादी को आधुनिक तकनीक और बदलती उपभोक्ता आवश्यकताओं के अनुरूप निरंतर विकसित होना चाहिए।

कई नई डिजिटल पहल की शुरुआत

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने नेशनल स्मॉल इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन (NSIC) को शेड्यूल 'A' कंपनी का दर्जा मिलने पर सम्मानित किया। साथ ही उन्होंने कई नई डिजिटल पहलों की शुरुआत की, जिनमें शामिल हैं—

  • PMEGP 2.0 पोर्टल

  • समाधान 2.0 पोर्टल

  • प्रोक्योरमेंट एंड मार्केटिंग सपोर्ट (PMS) 2.0 पोर्टल

  • MSME ग्लोबल मार्ट 2.0 पोर्टल

  • टेस्टिंग सेंटर पोर्टल

  • एमएसएमई मंत्रालय की बहुभाषी डिजिटल पहल

  • MSME आइडिया हैकाथॉन 6.0

इसके अलावा सेल्फ रिलायंट इंडिया (SRI) फंड और पीएम विश्वकर्मा योजना पर आधारित ई-बुक्स का विमोचन तथा KVIC के नए उत्पादों का भी शुभारंभ किया गया।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय एमएसएमई मंत्री जीतन राम मांझी, राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे, KVIC के अध्यक्ष मनोज कुमार, एमएसएमई मंत्रालय के सचिव भारत खेड़ा, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में उद्यमी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सोच को साकार कर रहा टेक्सटाइल पार्क, स्थानीय रोजगार को मिलेगी नई उड़ान

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मुख्यमंत्री की पहल पर नवा रायपुर के टेक्सटाइल पार्क में लग रही पहली यूनिट, 235 करोड़ का निवेश, 4600 से अधिक लोगों को मिलेगा रोजगार

81 एकड़ में विकसित हो रहा टेक्सटाइल पार्क, निवेशकों के लिए तैयार की जा रही सभी जरूरी अधोसंरचनाएं

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार नवा रायपुर को देश के प्रमुख टेक्सटाइल एवं गारमेंट निर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री साय ने कहा है कि नवा रायपुर का टेक्सटाइल पार्क प्रदेश के युवाओं और महिलाओं के लिए स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का मजबूत आधार बनेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार टेक्सटाइल पार्क में निवेशकों को विश्वस्तरीय अधोसंरचना और सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री साय की गंभीर कोशिशों से नवा रायपुर के टेक्सटाइल पार्क में पहली यूनिट लगने जा रही है। 235 करोड़ रुपए के निवेश से लगने वाली इस यूनिट से 4600 से अधिक लोगों को रोजगार का मौका मिलेगा। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन तथा आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने 25 जून को टेक्सटाइल पार्क की पहली गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का भूमिपूजन किया। तमिलनाडु की स्विफ्ट टेक्सटाइल्स प्राइवेट लिमिटेड यहां अपनी मेन्युफेक्चरिंग यूनिट स्थापित कर रही है। कंपनी मुख्य रूप से बच्चों के कपड़े (किड्सवियर) और यूरोपीय व अमेरिकी बाजारों में निर्यात पर ध्यान केंद्रित करते हुए निट गारमेंट्स और कपड़े बनाएगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के टेक्सटाइल व गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को देश-विदेश में नई पहचान दिलाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के बड़े अवसर तैयार करने के विजन को साकार करने नवा रायपुर में 81 एकड़ क्षेत्र में आधुनिक टेक्सटाइल पार्क विकसित किया जा रहा है। यहां टेक्सटाइल, गारमेंट, तकनीकी वस्त्र तथा सहायक उद्योगों के लिए सभी आवश्यक अधोसंरचनाएं विकसित की जा रही हैं। इस टेक्सटाइल पार्क में स्विफ्ट टेक्सटाइल्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ ही पुनीत क्रिएशन्स और दृष्टि डिजाइन्स एलएलपी को भी भूमि आबंटित की जा चुकी है। इन तीनों इकाईयों द्वारा लगभग 445 करोड़ रुपए के निवेश से 11 हजार से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है।

वाणिज्य एवं उद्योग विभाग द्वारा नवा रायपुर में सर्वसुविधायुक्त टेक्सटाइल पार्क के लिए डामरीकृत पक्की सड़कों, नाली एवं जल निकासी व्यवस्था, पॉवर सब-स्टेशन, जल प्रदाय व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, प्रशासनिक भवन, व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स, इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ETP), ठोस अपशिष्ट प्रबंधन क्षेत्र एवं कॉमन फैसिलिटी सेंटर जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। अच्छी कनेक्टीविटी, आधुनिक अधोसंरचना और सुदृढ़ लॉजिस्टिक्स सुविधाओं के साथ नवा रायपुर का यह टेक्सटाइल पार्क वस्त्र उद्योगों को एक आदर्श निवेश स्थल के रूप में आकर्षित कर रहा है।

राज्य शासन ने छत्तीसगढ़ की औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में टेक्सटाइल एवं रेडीमेड गारमेंट्स को थ्रस्ट सेक्टर के रूप में विशेष प्राथमिकता दी है। रोजगार सृजन को बढ़ावा देने महिला कर्मचारियों हेतु 6 हजार रुपए तथा पुरुष कर्मचारियों हेतु 5 हजार रुपए प्रतिमाह की रोजगार सहायता पांच वर्षों तक देने का प्रावधान किया गया है। नई औद्योगिक नीति के प्रभाव से प्रदेश में पिछले 18 महीनों में 8 लाख करोड़ रुपु से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनसे 1.6 लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है।

टेक्सटाइल और कपड़ों के अलावा राज्य ने डेटा सेंटर, आईटी, फार्मास्यूटिकल्स, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रिकल व इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में भी बड़े निवेश आकर्षित किए हैं। यह छत्तीसगढ़ के इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम और बिज़नेस-फ्रेंडली माहौल में निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दिखाता है।

"नवा रायपुर का टेक्सटाइल पार्क छत्तीसगढ़ के युवाओं, विशेषकर महिलाओं के लिए स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का मजबूत माध्यम बनेगा। हमारी सरकार यहां निवेशकों को विश्वस्तरीय अधोसंरचना और सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए तेजी से कार्य कर रही है। उद्योगों के विस्तार के साथ रोजगार, आर्थिक गतिविधियों और प्रदेश के औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी। हम छत्तीसगढ़ को देश का अग्रणी टेक्सटाइल एवं गारमेंट निर्माण केंद्र बनाने के लक्ष्य के साथ काम कर रहे है। - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय"

भारत में ग्रीन यूरिया उत्पादन की दिशा में बड़ा कदम, उर्वरक विभाग ने आयोजित की प्री-ईओआई बैठक

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सतत कृषि, कार्बन न्यूट्रैलिटी और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए उर्वरक विभाग (Department of Fertilizers - DoF) ने भारत में ग्रीन यूरिया संयंत्रों की स्थापना के लिए प्री-एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (Pre-EOI) की उच्चस्तरीय बैठक का सफल आयोजन किया। यह बैठक प्रोजेक्ट्स एंड डेवलपमेंट इंडिया लिमिटेड (PDIL), नोएडा में आयोजित हुई, जिसकी अध्यक्षता उर्वरक विभाग के संयुक्त सचिव एवं PDIL के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. के.के. पाठक ने की।

इस सप्ताह की शुरुआत में उर्वरक विभाग ने भारत में ग्रीन यूरिया संयंत्र स्थापित करने के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) जारी किया था। प्री-ईओआई बैठक में NTPC, सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SECI), ग्रीन अमोनिया एवं यूरिया प्रौद्योगिकी प्रदाता, प्रमुख उर्वरक कंपनियां, इलेक्ट्रोलाइजर निर्माता, ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया क्षेत्र की कंपनियां सहित सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के अनेक हितधारकों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन भाग लिया। बड़ी संख्या में भागीदारी इस महत्वाकांक्षी पहल को साकार करने की व्यापक रुचि को दर्शाती है।

प्रमुख नीतिगत और परिचालन बिंदु

1. विभिन्न मंत्रालयों का समन्वित सहयोग

ग्रीन यूरिया उत्पादन को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने के लिए कई मंत्रालयों की वित्तीय सहायता सुनिश्चित की गई है।

  • नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ग्रीन ऊर्जा अवसंरचना को मजबूत करने के लिए 19,744 करोड़ रुपये उपलब्ध कराएगा।

  • उर्वरक विभाग (DoF) ग्रीन अमोनिया को देश की उर्वरक उत्पादन प्रणाली में शामिल करने के लिए आवश्यक नीतिगत एवं संस्थागत ढांचा तैयार करेगा।

2. निर्माताओं के लिए सब्सिडी व्यवस्था

ग्रीन अमोनिया का उत्पादन फिलहाल पारंपरिक ग्रे अमोनिया की तुलना में महंगा है। इसे प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए सरकार विशेष सब्सिडी व्यवस्था लागू करेगी।

  • SECI ग्रीन अमोनिया उत्पादकों से खरीदकर उर्वरक कंपनियों को ग्रे अमोनिया के बाजार मूल्य पर उपलब्ध कराएगा।

  • उर्वरक विभाग दोनों कीमतों के बीच का अंतर वहन करेगा, जिससे उर्वरक कंपनियों पर अतिरिक्त लागत का बोझ नहीं पड़ेगा।

3. उत्पादकों को वित्तीय प्रोत्साहन

राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (NGHM) के तहत ग्रीन अमोनिया उत्पादकों को प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता दी जाएगी।

  • प्रतिवर्ष 7.24 लाख मीट्रिक टन ग्रीन अमोनिया की खरीद का लक्ष्य।

  • SECI द्वारा पारदर्शी ई-रिवर्स नीलामी के माध्यम से आवंटन।

  • नए ग्रीनफील्ड और निर्माणाधीन परियोजनाओं को सहायता।

  • व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने के बाद नकद प्रोत्साहन।

  • 10 वर्षों के लिए दीर्घकालिक खरीद समझौते (GAPA/GASA) के माध्यम से बाजार की सुनिश्चितता।

पुडिमाडका पायलट परियोजना बनी मॉडल

बैठक में आंध्र प्रदेश के पुडिमाडका स्थित 150 टन प्रतिदिन क्षमता वाले ग्रीन यूरिया पायलट प्लांट पर भी चर्चा हुई। NTPC की अनुसंधान इकाई NETRA द्वारा विकसित यह संयंत्र कार्बन कैप्चर एंड यूटिलाइजेशन (CCUS) तथा वॉटर इलेक्ट्रोलिसिस तकनीक का उपयोग करता है। यह परियोजना कार्बोनेटेड फ्लाई ऐश, फूड-ग्रेड उत्पादों और सिंथेटिक ईंधन जैसे उपयोगों के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

ग्रीन यूरिया उत्पादन के लिए भारत की रणनीति

भारत ने 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है। राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत ग्रीन हाइड्रोजन के माध्यम से ग्रीन अमोनिया उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। हालांकि, ग्रीन यूरिया के निर्माण के लिए कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) की भी आवश्यकता होती है।

इसके लिए तापीय बिजलीघर, सीमेंट और इस्पात संयंत्रों से प्राप्त कैप्चर की गई CO₂ का उपयोग किया जाएगा।

  • 12.7 लाख मीट्रिक टन क्षमता वाले एक विश्वस्तरीय यूरिया संयंत्र को हर वर्ष लगभग 10 लाख मीट्रिक टन CO₂ की आवश्यकता होगी।

  • भारत वर्तमान में हर वर्ष लगभग 1 करोड़ मीट्रिक टन यूरिया आयात करता है।

  • देश के कई मौजूदा यूरिया संयंत्र 30 वर्ष से अधिक पुराने हो चुके हैं, इसलिए नई उत्पादन क्षमता विकसित करना आवश्यक है।

ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा को मिलेगा बल

नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, कार्बन कैप्चर, ग्रीन अमोनिया और ग्रीन यूरिया उत्पादन को एकीकृत करने वाली परियोजनाएं भारत की ऊर्जा सुरक्षा, उर्वरक सुरक्षा और जलवायु लक्ष्यों को मजबूत करेंगी।

NTPC जैसी संस्थाएं, जिनके पास बिजली उत्पादन, नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और उर्वरक क्षेत्र का अनुभव है, इन परियोजनाओं के नेतृत्व के लिए उपयुक्त मानी जा रही हैं।

सरकार ने निवेशकों से राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन और विकसित हो रहे कार्बन कैप्चर ढांचे का लाभ उठाकर एकीकृत ग्रीन यूरिया परियोजनाएं विकसित करने का आह्वान किया है।

यह पहल भारत को स्वच्छ ऊर्जा आधारित उर्वरक उत्पादन, तकनीकी आत्मनिर्भरता, कार्बन उत्सर्जन में कमी और सतत कृषि की दिशा में एक नई पहचान दिलाने की क्षमता रखती है।

ASPIRE: ग्रामीण सपनों को उद्यम में बदलने की कहानी

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मेघालय के मावसिनराम की बारिश भरी एक सुबह, दुनिया के सबसे अधिक वर्षा वाले इस इलाके में रहने वाले बंशैलांग मारबानियांग आसमान में छाए बादलों को देख रहे थे। लेकिन उनके मन में बारिश नहीं, बल्कि एक सवाल था—देश के सबसे दूरदराज़ इलाकों में रहने वाला एक युवा, जहां अवसर बेहद सीमित हों, अपना भविष्य कैसे बनाए?

वर्षों तक उन्होंने अपने दोस्तों और पड़ोसियों को रोजगार की तलाश में गांव छोड़ते देखा। सीमित संसाधनों और आर्थिक तंगी के कारण अपना व्यवसाय शुरू करने का सपना असंभव लगता था। लेकिन स्थानीय कृषि उत्पादों की प्रचुरता ने उन्हें सोचने पर मजबूर किया कि क्या इन्हीं संसाधनों के आधार पर कोई उद्यम खड़ा किया जा सकता है।

ASPIRE योजना बनी जीवन का टर्निंग प्वाइंट

बंशैलांग के जीवन में बदलाव तब आया जब उन्हें भारतीय उद्यमिता संस्थान (IIE), गुवाहाटी द्वारा दिए जा रहे उद्यमिता प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रम की जानकारी मिली। IIE, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) की ASPIRE (A Scheme for Promotion of Innovation, Rural Industries and Entrepreneurship) योजना के अंतर्गत मेंटर संस्थान है।

इस प्रशिक्षण ने उन्हें तकनीकी ज्ञान, व्यावसायिक कौशल और आत्मविश्वास प्रदान किया। इसके बाद उन्होंने स्थानीय कृषि उत्पादों पर आधारित फूड प्रोसेसिंग यूनिट शुरू की और यह साबित किया कि सही मार्गदर्शन और कौशल के साथ कहीं भी अवसर पैदा किए जा सकते हैं।

ग्रामीण भारत में उद्यमिता को बढ़ावा

बंशैलांग की कहानी केवल एक व्यक्ति की सफलता नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत में हो रहे बड़े बदलाव का प्रतीक है।

ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभा और संसाधनों की कमी नहीं थी, लेकिन प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और संस्थागत सहयोग के अभाव में लोग अपने विचारों को व्यवसाय में नहीं बदल पाते थे। इसी चुनौती को देखते हुए 2015 में MSME मंत्रालय ने ASPIRE योजना शुरू की, जिसका उद्देश्य ग्रामीण और कृषि आधारित उद्योगों में उद्यमिता तथा रोजगार को बढ़ावा देना है।

2018 और 2023 में योजना के दिशा-निर्देशों में संशोधन कर इसे और प्रभावी बनाया गया। अब इसका मुख्य केंद्र लाइवलीहुड बिजनेस इन्क्यूबेटर्स (LBIs) हैं, जो लोगों को कौशल से लेकर व्यवसाय स्थापित करने तक हर स्तर पर सहायता प्रदान करते हैं।

कैसे काम करते हैं LBI?

लाइवलीहुड बिजनेस इन्क्यूबेटर केवल प्रशिक्षण केंद्र नहीं हैं, बल्कि ऐसे संस्थान हैं जो नए उद्यमियों को व्यवसाय शुरू करने के लिए आवश्यक हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराते हैं।

इनमें शामिल हैं—

  • आधुनिक मशीनों और तकनीक तक पहुंच

  • बिजनेस मेंटरिंग

  • उत्पाद विकास

  • ब्रांडिंग और पैकेजिंग

  • गुणवत्ता प्रमाणन

  • नियामकीय अनुमतियां

  • बाजार से जुड़ाव

  • वित्तीय सहायता तक पहुंच

इन इन्क्यूबेटर्स के संचालन में भारतीय उद्यमिता संस्थान (IIE), कृषि विश्वविद्यालय, तकनीकी संस्थान और IIT जोधपुर जैसे संस्थान महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

देशभर में बढ़ रहा ASPIRE का दायरा

ASPIRE के तहत देशभर में खाद्य प्रसंस्करण, शहद उत्पादन, बांस उत्पाद, मशरूम उत्पादन, मसाला प्रसंस्करण, हस्तशिल्प और कॉयर उद्योग जैसे क्षेत्रों में हजारों उद्यम विकसित किए जा रहे हैं।

जून 2026 तक—

  • 27 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में 109 LBI स्वीकृत

  • 1.23 लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षण

  • वर्ष 2022-23 से अब तक 1,200 से अधिक सूक्ष्म उद्यम स्थापित

महिलाओं और वंचित वर्गों को मिला बड़ा लाभ

ASPIRE योजना उद्यमिता को अधिक समावेशी बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

2022-23 से अब तक—

  • 28,500 से अधिक महिलाओं को उद्यमिता के अवसर

  • 8,700 से अधिक अनुसूचित जाति (SC) लाभार्थी

  • 9,600 से अधिक अनुसूचित जनजाति (ST) लाभार्थी

  • 17,600 से अधिक अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) लाभार्थी

ये आंकड़े बताते हैं कि अब उद्यमिता केवल महानगरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि गांवों और छोटे कस्बों में भी आत्मनिर्भरता और रोजगार का नया माध्यम बन रही है।

मावसिनराम से कर्तव्य पथ तक

बंशैलांग मारबानियांग की सफलता को राष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान मिला। उन्हें 75वें गणतंत्र दिवस समारोह में कर्तव्य पथ, नई दिल्ली पर विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया। वे पूर्वोत्तर भारत के उन दस उद्यमियों में शामिल थे जिन्होंने अपने प्रयासों और ASPIRE योजना के सहयोग से रोजगार खोजने वाले से रोजगार देने वाले बनने तक का सफर तय किया।

आत्मनिर्भर भारत की ओर मजबूत कदम

ASPIRE योजना हजारों युवाओं को प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और संसाधन उपलब्ध कराकर उनके सपनों को सफल उद्यमों में बदल रही है। यह योजना केवल नए व्यवसाय नहीं बना रही, बल्कि ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाते हुए रोजगार सृजन, नवाचार और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी मजबूती दे रही है।

राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड की 10वीं बैठक आयोजित, व्यापारियों के हितों पर हुई व्यापक चर्चा

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नई दिल्ली- राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड (NTWB) की 10वीं बैठक आज नई दिल्ली में हाइब्रिड मोड (ऑनलाइन और ऑफलाइन) में आयोजित की गई। बैठक में देशभर के सदस्य डिजिटल माध्यम और प्रत्यक्ष रूप से शामिल हुए। यह आयोजन डिजिटल इंडिया पहल के तहत तकनीक आधारित सुशासन और जनभागीदारी का एक सफल उदाहरण माना गया।

बैठक में व्यापारियों के कल्याण और व्यापार सुगमता से जुड़ी विभिन्न योजनाओं और पहलों की समीक्षा की गई। सदस्यों को हाल ही में शुरू की गई राजस्थान व्यापार प्रोत्साहन नीति की जानकारी दी गई, जिसमें व्यापार ऋण सहायता, बीमा सहायता और डिजिटल कॉमर्स को बढ़ावा देने जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं।

DigiDukaan पहल पर विशेष चर्चा

बैठक के दौरान "डिजीडुकान (DigiDukaan)" पहल पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई। यह योजना छोटे व्यापारियों और किराना दुकानदारों को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू की गई है।

बोर्ड को बताया गया कि 19 जून 2026 को जयपुर में राजस्थान के मुख्यमंत्री  भजनलाल शर्मा द्वारा DigiDukaan का शुभारंभ किया गया, जिसे व्यापारियों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। अब इसे मुंबई, बेंगलुरु सहित अन्य प्रमुख शहरों और बाद में पूरे देश में लागू करने की योजना है।

व्यापारियों की प्रमुख समस्याओं पर मंथन

बैठक में व्यापारियों, खुदरा विक्रेताओं, निर्माताओं, निर्यातकों और सेवा प्रदाताओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें शामिल हैं:

  • GST सरलीकरण और तर्कसंगतता

  • व्यापारिक अनुपालन प्रक्रियाओं को आसान बनाना

  • पुराने व्यापारिक बकायों के लिए वन-टाइम सेटलमेंट

  • निर्यात को बढ़ावा देना

  • लॉजिस्टिक्स और बंदरगाह अवसंरचना

  • डिजिटल कॉमर्स और ONDC से जुड़ाव

  • सस्ती ऋण सुविधा

  • व्यापारियों के लिए पेंशन और सामाजिक सुरक्षा

  • महिला उद्यमियों को प्रोत्साहन

MSME और निर्यात बढ़ाने पर जोर

बैठक में विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) और व्यापारियों की निर्यात गतिविधियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। निर्यात के अवसरों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और संस्थागत सहायता को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई।

प्रधानमंत्री मोदी को दी बधाई

बैठक की शुरुआत में बोर्ड ने एक प्रस्ताव पारित कर प्रधानमंत्री को भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी।

प्रस्ताव में प्रधानमंत्री के सुशासन, आर्थिक सुधारों, राष्ट्रीय सुरक्षा, समावेशी विकास और "विकसित भारत" के विजन में योगदान की सराहना की गई।

व्यापारियों के लिए बेहतर माहौल बनाने का संकल्प

बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष सुनील जे. सिंघी ने की।

उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में GST सुधार, डिजिटल गवर्नेंस, जनधन-आधार-मोबाइल (JAM) ट्रिनिटी, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) और Ease of Doing Business जैसी पहलों ने भारत की आर्थिक व्यवस्था को मजबूत किया है और व्यापारियों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं।

बैठक के अंत में बोर्ड ने व्यापारियों के कल्याण, डिजिटल सशक्तिकरण, सामाजिक सुरक्षा और केंद्र-राज्य समन्वय को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।


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