Media24Media.com: वंदे मातरम् पर कांग्रेस के दो छंद वाले फैसले से भड़की बीजेपी, नेताओं ने कांग्रेस पर बोला चौतरफा हमला

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वंदे मातरम् पर कांग्रेस के दो छंद वाले फैसले से भड़की बीजेपी, नेताओं ने कांग्रेस पर बोला चौतरफा हमला

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नई दिल्ली- राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) ने स्पष्ट किया है कि पार्टी के कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के केवल शुरुआती दो छंद ही गाए जाएंगे। कांग्रेस ने इसके लिए 1937 में लिए गए अपने ऐतिहासिक फैसले का हवाला दिया है। लेकिन कांग्रेस के इस रुख पर बीजेपी ने तीखा हमला बोलते हुए इसे राष्ट्रविरोधी और तुष्टीकरण की राजनीति से जोड़ दिया है।

कांग्रेस ने क्या फैसला लिया?

कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल के मुताबिक पार्टी ‘वंदे मातरम्’ को लेकर 1937 में कांग्रेस द्वारा लिए गए निर्णय का ही पालन करेगी। यानी कांग्रेस के आधिकारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के पहले दो छंद गाए जाएंगे। पार्टी का कहना है कि यह कोई नया फैसला नहीं बल्कि उसके पुराने रुख की पुनर्पुष्टि है। 

कांग्रेस के अनुसार 1937 में राष्ट्रीय सभाओं और सार्वजनिक कार्यक्रमों के संदर्भ में यह तय किया गया था कि ‘वंदे मातरम्’ के शुरुआती दो छंदों का इस्तेमाल किया जाए। पार्टी इस फैसले को महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल समेत उस दौर के कांग्रेस नेतृत्व की परंपरा से जोड़ रही है।

आखिर दो छंद ही क्यों?

इस विवाद की जड़ ‘वंदे मातरम्’ के इतिहास में है। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित इस रचना में शुरुआती दो छंदों के अलावा अन्य छंद भी हैं। कांग्रेस का तर्क है कि शुरुआती दो छंद मातृभूमि की स्तुति पर केंद्रित हैं, जबकि बाद के हिस्सों में धार्मिक और पौराणिक संदर्भ आते हैं।

1937 में इस बात पर भी चर्चा हुई थी कि बहुधार्मिक और विविधता वाले भारत की राष्ट्रीय सभाओं में ऐसा संस्करण इस्तेमाल किया जाए जिसे सभी समुदाय सहजता से स्वीकार कर सकें। इसी संदर्भ में शुरुआती दो छंदों को प्राथमिकता देने का फैसला किया गया था।

अमित शाह ने कांग्रेस पर साधा निशाना

कांग्रेस के फैसले के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसे लेकर जोरदार हमला बोला। शाह ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि पार्टी ने ‘वंदे मातरम्’ को दो हिस्सों में बांटने का काम किया और अब उसी पुराने फैसले को आगे बढ़ा रही है।

शाह ने कांग्रेस के फैसले को “राष्ट्रविरोधी” बताते हुए इसे तुष्टीकरण की राजनीति से जोड़ा। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस एक बार फिर वोट बैंक की राजनीति के लिए पुराने रास्ते पर लौट रही है। 

बीजेपी का कहना है कि ‘वंदे मातरम्’ केवल एक राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं बल्कि देश की स्वतंत्रता की लड़ाई और राष्ट्रीय भावना से जुड़ा प्रतीक है।

नितिन नबीन का कांग्रेस पर तीखा हमला

बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन ने भी कांग्रेस के फैसले पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने कांग्रेस को “नई मुस्लिम लीग” तक कह दिया और आरोप लगाया कि पार्टी तुष्टीकरण की राजनीति के कारण राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान से समझौता कर रही है।

नबीन ने कांग्रेस पर देश के स्वाभिमान को गिरवी रखने और अपमान को नीति का रूप देने जैसे गंभीर आरोप लगाए। उनके बयान के बाद विवाद और अधिक राजनीतिक रंग लेता दिखाई दिया।

रविशंकर प्रसाद ने भी कांग्रेस को घेरा

बीजेपी प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत का दावा करने वाली पार्टी राष्ट्रगीत के सम्मान को लेकर ऐसी स्थिति में क्यों खड़ी है।

बीजेपी ने आरोप लगाया कि स्वतंत्रता दिवस के दौरान कांग्रेस मुख्यालय और बाद में गोवा में भी ‘वंदे मातरम्’ के केवल दो छंद गाए गए।

खरगे ने बीजेपी को दिया करारा जवाब

दूसरी ओर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बीजेपी के आरोपों को खारिज किया। उनका कहना है कि उन्होंने वही संस्करण गाया जिसे दशकों से कांग्रेस के कार्यक्रमों में गाया जाता रहा है।

खरगे ने बीजेपी पर पलटवार करते हुए कहा कि अगर यह गलत है तो उन ऐतिहासिक नेताओं पर भी सवाल उठाया जाना चाहिए जिन्होंने इसी संस्करण को गाया था। उन्होंने महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल और अटल बिहारी वाजपेयी का भी उल्लेख किया। 

खरगे का तर्क है कि बीजेपी को कांग्रेस के ऐतिहासिक प्रस्तावों और राष्ट्रगीत को लेकर लिए गए पुराने फैसलों की जानकारी नहीं है। उनका कहना है कि कांग्रेस पिछले करीब आठ दशक से इसी परंपरा का पालन करती आई है।

अब विवाद सिर्फ गीत तक सीमित नहीं

‘वंदे मातरम्’ को लेकर मौजूदा विवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि केंद्र सरकार ने हाल ही में इससे संबंधित कानूनी प्रावधानों में बदलाव किया है। 2026 में संसद ने ‘Prevention of Insults to National Honour’ कानून में संशोधन को मंजूरी दी, जिसके तहत ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रीय गान के समान कानूनी संरक्षण देने का प्रावधान किया गया। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह प्रावधान लागू हुआ। 

इसी वजह से बीजेपी कांग्रेस के दो छंद वाले फैसले को केवल पार्टी की आंतरिक परंपरा नहीं बल्कि राष्ट्रीय सम्मान से जोड़कर देख रही है।

बीजेपी-कांग्रेस आमने-सामने, सियासत और गरमाई

एक तरफ बीजेपी कांग्रेस पर राष्ट्रगीत के अपमान और तुष्टीकरण की राजनीति का आरोप लगा रही है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस इसे अपने 1937 के ऐतिहासिक फैसले की निरंतरता बता रही है।

विवाद के बीच कांग्रेस नेताओं ने बीजेपी पर “फर्जी राष्ट्रवाद” का आरोप लगाया है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी बीजेपी के राष्ट्रवाद के दावे पर सवाल उठाए और कहा कि पार्टी इस मुद्दे को राजनीतिक विवाद में बदल रही है।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर ‘वंदे मातरम्’ के दो छंदों को लेकर शुरू हुआ विवाद अब इतिहास, राष्ट्रवाद, तुष्टीकरण और राजनीतिक विरासत की बहस में बदल गया है। बीजेपी कांग्रेस के फैसले को देश और राष्ट्रगीत के सम्मान से जोड़ रही है, जबकि कांग्रेस इसे 1937 में तय की गई ऐतिहासिक परंपरा बता रही है।

आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर राज्यों की राजनीति तक और ज्यादा गरमाने की संभावना है। खास तौर पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच राष्ट्रवाद की राजनीति को लेकर यह नया टकराव 2026 की सियासत में बड़ा मुद्दा बनता दिख रहा है।

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