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वंदे मातरम् पर कांग्रेस के दो छंद वाले फैसले से भड़की बीजेपी, नेताओं ने कांग्रेस पर बोला चौतरफा हमला

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नई दिल्ली- राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) ने स्पष्ट किया है कि पार्टी के कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के केवल शुरुआती दो छंद ही गाए जाएंगे। कांग्रेस ने इसके लिए 1937 में लिए गए अपने ऐतिहासिक फैसले का हवाला दिया है। लेकिन कांग्रेस के इस रुख पर बीजेपी ने तीखा हमला बोलते हुए इसे राष्ट्रविरोधी और तुष्टीकरण की राजनीति से जोड़ दिया है।

कांग्रेस ने क्या फैसला लिया?

कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल के मुताबिक पार्टी ‘वंदे मातरम्’ को लेकर 1937 में कांग्रेस द्वारा लिए गए निर्णय का ही पालन करेगी। यानी कांग्रेस के आधिकारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के पहले दो छंद गाए जाएंगे। पार्टी का कहना है कि यह कोई नया फैसला नहीं बल्कि उसके पुराने रुख की पुनर्पुष्टि है। 

कांग्रेस के अनुसार 1937 में राष्ट्रीय सभाओं और सार्वजनिक कार्यक्रमों के संदर्भ में यह तय किया गया था कि ‘वंदे मातरम्’ के शुरुआती दो छंदों का इस्तेमाल किया जाए। पार्टी इस फैसले को महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल समेत उस दौर के कांग्रेस नेतृत्व की परंपरा से जोड़ रही है।

आखिर दो छंद ही क्यों?

इस विवाद की जड़ ‘वंदे मातरम्’ के इतिहास में है। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित इस रचना में शुरुआती दो छंदों के अलावा अन्य छंद भी हैं। कांग्रेस का तर्क है कि शुरुआती दो छंद मातृभूमि की स्तुति पर केंद्रित हैं, जबकि बाद के हिस्सों में धार्मिक और पौराणिक संदर्भ आते हैं।

1937 में इस बात पर भी चर्चा हुई थी कि बहुधार्मिक और विविधता वाले भारत की राष्ट्रीय सभाओं में ऐसा संस्करण इस्तेमाल किया जाए जिसे सभी समुदाय सहजता से स्वीकार कर सकें। इसी संदर्भ में शुरुआती दो छंदों को प्राथमिकता देने का फैसला किया गया था।

अमित शाह ने कांग्रेस पर साधा निशाना

कांग्रेस के फैसले के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसे लेकर जोरदार हमला बोला। शाह ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि पार्टी ने ‘वंदे मातरम्’ को दो हिस्सों में बांटने का काम किया और अब उसी पुराने फैसले को आगे बढ़ा रही है।

शाह ने कांग्रेस के फैसले को “राष्ट्रविरोधी” बताते हुए इसे तुष्टीकरण की राजनीति से जोड़ा। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस एक बार फिर वोट बैंक की राजनीति के लिए पुराने रास्ते पर लौट रही है। 

बीजेपी का कहना है कि ‘वंदे मातरम्’ केवल एक राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं बल्कि देश की स्वतंत्रता की लड़ाई और राष्ट्रीय भावना से जुड़ा प्रतीक है।

नितिन नबीन का कांग्रेस पर तीखा हमला

बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन ने भी कांग्रेस के फैसले पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने कांग्रेस को “नई मुस्लिम लीग” तक कह दिया और आरोप लगाया कि पार्टी तुष्टीकरण की राजनीति के कारण राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान से समझौता कर रही है।

नबीन ने कांग्रेस पर देश के स्वाभिमान को गिरवी रखने और अपमान को नीति का रूप देने जैसे गंभीर आरोप लगाए। उनके बयान के बाद विवाद और अधिक राजनीतिक रंग लेता दिखाई दिया।

रविशंकर प्रसाद ने भी कांग्रेस को घेरा

बीजेपी प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत का दावा करने वाली पार्टी राष्ट्रगीत के सम्मान को लेकर ऐसी स्थिति में क्यों खड़ी है।

बीजेपी ने आरोप लगाया कि स्वतंत्रता दिवस के दौरान कांग्रेस मुख्यालय और बाद में गोवा में भी ‘वंदे मातरम्’ के केवल दो छंद गाए गए।

खरगे ने बीजेपी को दिया करारा जवाब

दूसरी ओर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बीजेपी के आरोपों को खारिज किया। उनका कहना है कि उन्होंने वही संस्करण गाया जिसे दशकों से कांग्रेस के कार्यक्रमों में गाया जाता रहा है।

खरगे ने बीजेपी पर पलटवार करते हुए कहा कि अगर यह गलत है तो उन ऐतिहासिक नेताओं पर भी सवाल उठाया जाना चाहिए जिन्होंने इसी संस्करण को गाया था। उन्होंने महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल और अटल बिहारी वाजपेयी का भी उल्लेख किया। 

खरगे का तर्क है कि बीजेपी को कांग्रेस के ऐतिहासिक प्रस्तावों और राष्ट्रगीत को लेकर लिए गए पुराने फैसलों की जानकारी नहीं है। उनका कहना है कि कांग्रेस पिछले करीब आठ दशक से इसी परंपरा का पालन करती आई है।

अब विवाद सिर्फ गीत तक सीमित नहीं

‘वंदे मातरम्’ को लेकर मौजूदा विवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि केंद्र सरकार ने हाल ही में इससे संबंधित कानूनी प्रावधानों में बदलाव किया है। 2026 में संसद ने ‘Prevention of Insults to National Honour’ कानून में संशोधन को मंजूरी दी, जिसके तहत ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रीय गान के समान कानूनी संरक्षण देने का प्रावधान किया गया। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह प्रावधान लागू हुआ। 

इसी वजह से बीजेपी कांग्रेस के दो छंद वाले फैसले को केवल पार्टी की आंतरिक परंपरा नहीं बल्कि राष्ट्रीय सम्मान से जोड़कर देख रही है।

बीजेपी-कांग्रेस आमने-सामने, सियासत और गरमाई

एक तरफ बीजेपी कांग्रेस पर राष्ट्रगीत के अपमान और तुष्टीकरण की राजनीति का आरोप लगा रही है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस इसे अपने 1937 के ऐतिहासिक फैसले की निरंतरता बता रही है।

विवाद के बीच कांग्रेस नेताओं ने बीजेपी पर “फर्जी राष्ट्रवाद” का आरोप लगाया है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी बीजेपी के राष्ट्रवाद के दावे पर सवाल उठाए और कहा कि पार्टी इस मुद्दे को राजनीतिक विवाद में बदल रही है।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर ‘वंदे मातरम्’ के दो छंदों को लेकर शुरू हुआ विवाद अब इतिहास, राष्ट्रवाद, तुष्टीकरण और राजनीतिक विरासत की बहस में बदल गया है। बीजेपी कांग्रेस के फैसले को देश और राष्ट्रगीत के सम्मान से जोड़ रही है, जबकि कांग्रेस इसे 1937 में तय की गई ऐतिहासिक परंपरा बता रही है।

आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर राज्यों की राजनीति तक और ज्यादा गरमाने की संभावना है। खास तौर पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच राष्ट्रवाद की राजनीति को लेकर यह नया टकराव 2026 की सियासत में बड़ा मुद्दा बनता दिख रहा है।

मनिहारी का ठेला छोड़कर वर्दी पहनी और देश के लिए दे दी अपनी जान

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पंद्रहवीं पुण्यतिथि पर शहीद घनश्याम कन्नौजे का पुण्य स्मरण

नक्सलियों से लोहा लेते हुए बिरकोनी के वीर घनश्याम ने दिया था सर्वोच्च बलिदान

महासमुंद- “वतन की राह में वतन के नौजवां शहीद हो...” यह पंक्ति उन वीरों की कहानी कहती है, जिनके लिए देश की सुरक्षा से बढ़कर कुछ नहीं था। ऐसे ही एक साधारण परिवार में जन्मे असाधारण साहस के धनी थे बिरकोनी के घनश्याम कन्नौजे। हाथों में कभी मनिहारी का सामान लेकर गांव की गलियों में घूमने वाला यह नौजवान जब वर्दी में आया, तो देश की रक्षा को अपना धर्म मान लिया। बस्तर के घने जंगलों में नक्सलियों से मुठभेड़ के दौरान महज 23 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। 21 अगस्त 2026 को उनकी पंद्रहवीं पुण्यतिथि पर यह अंचल अपने उस वीर लाल को श्रद्धा और गर्व के साथ याद कर रहा है।

साल 2011 में एएसएफ की दूसरी बटालियन, सकरी बिलासपुर में आरक्षक क्रमांक 111 के रूप में पदस्थ घनश्याम कन्नौजे बीजापुर के भद्राकाली क्षेत्र में तैनात थे। 19 अगस्त को फोर्स की एक टुकड़ी कैंप के लिए रसद लेने निकली थी। जवानों को अंदाजा नहीं था कि जिस जंगल के रास्ते से वे गुजर रहे हैं, वहीं नक्सलियों ने घात लगा रखी है। अचानक बारूदी सुरंग में जोरदार विस्फोट हुआ। वाहन के परखच्चे उड़ गए और कई जवान घायल हो गए। विस्फोट के तुरंत बाद नक्सलियों ने तीन दिशाओं से अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। परिस्थितियां बेहद प्रतिकूल थीं, लेकिन जवानों ने हिम्मत नहीं छोड़ी। घायल होने के बावजूद उन्होंने मोर्चा संभाला और हमलावरों को मुंहतोड़ जवाब दिया। गोलियों और बारूदी विस्फोटों के बीच जवान आखिरी सांस तक लड़ते रहे। इस मुठभेड़ में 13 जवान शहीद हुए। उनमें बिरकोनी का वह नौजवान घनश्याम कन्नौजे भी था।

20 अगस्त को उनका पार्थिव शरीर मिला। अगले दिन, 21 अगस्त को बिरकोनी के हाईस्कूल परिसर में पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। जिस विद्यालय में कभी घनश्याम ने पढ़ाई की थी, वही परिसर उस दिन उनके अंतिम विदाई का साक्षी बना। अपने वीर बेटे को अंतिम विदाई देने पूरा गांव उमड़ पड़ा था।

6 अक्टूबर 1988 को महासमुंद के समीप ग्राम बिरकोनी में जन्मे घनश्याम का बचपन किसी संपन्न परिवार में नहीं, बल्कि मेहनत और संघर्ष के बीच बीता। उनके दादाजी पुरानिक कन्नौजे सीमांत किसान थे। पिता गुलाब कन्नौजे खेती के साथ मनिहारी का सामान बेचकर परिवार का भरण-पोषण करते थे। घनश्याम ने बिरकोनी के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय और महासमुंद के शासकीय आदर्श स्कूल में पढ़ाई की। पढ़ाई के साथ वे खेती में हाथ बंटाते और पिता के मनिहारी व्यवसाय में भी सहयोग करते थे। कई बार स्वयं मनिहारी का ठेला लेकर गांव की गलियों में घूमते थे। 

जीवन की कठिनाइयों ने उनके हौसले को कमजोर नहीं किया। करीब 20 वर्ष की उम्र में उन्होंने फोर्स ज्वाइन की। गांव की गलियों में मनिहारी का सामान बेचने वाला यह युवक देखते ही देखते वर्दीधारी जवान बन गया। लेकिन नियति को शायद कुछ और ही मंजूर था। सेवा के कुछ ही वर्षों बाद, 23 वर्ष की उम्र पूरी होने से पहले, उन्होंने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। गांव आया तो तिरंगे में लिपटकर। 

शहीद घनश्याम कन्नौजे की स्मृति आज भी बिरकोनी में उतनी ही जीवंत है। स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस और 21 अक्टूबर पुलिस दिवस के अवसर पर पुलिस जवान, नागरिक, शिक्षक-शिक्षिकाएं और विद्यार्थी उनकी प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित करते हैं। बिरकोनी के हाईस्कूल परिसर में स्थापित उनकी प्रतिमा आज भी आने-जाने वालों को उनके बलिदान की याद दिलाती है। इससे भी आगे बढ़कर गांव के श्रीराम-जानकी मंदिर सहित अनेक देवालयों में उनके छायाचित्र लगाए गए हैं। धार्मिक स्थलों में सहेजी गई उनकी तस्वीरें इस बात की गवाही देती हैं कि शहीद घनश्याम केवल परिवार या गांव के नहीं, बल्कि पूरे अंचल के गौरव हैं।

 उनकी शहादत को याद करना केवल अतीत को स्मरण करना नहीं है। यह आने वाली पीढ़ियों को यह बताना भी है कि देश की सुरक्षा और सम्मान के लिए कुछ लोग अपना आज कुर्बान कर देते हैं, ताकि देश का कल सुरक्षित रहे। बिरकोनी की मिट्टी ने मनिहारी का सामान बेचने वाले जिस साधारण से बेटे को जन्म दिया था, उसी बेटे ने असाधारण साहस के साथ देश के लिए अपना जीवन अर्पित कर दिया। घनश्याम कन्नौजे आज भी इस अंचल के लिए केवल एक शहीद नहीं, बल्कि उस मिट्टी की अमर पहचान हैं, जिसने उन्हें जन्म दिया।

विद्यार्थियों ने देखी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और ‘वंदे मातरम्’ पर आधारित छायाचित्र प्रदर्शनी

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स्वतंत्रता संग्राम की गौरवगाथा से विकसित छत्तीसगढ़ की नई तस्वीर तक को एक मंच पर समेट रही प्रदर्शनी

‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षों की गौरवशाली यात्रा, सेनानियों के योगदान और सुशासन की उपलब्धियों का प्रदर्शन

21 अगस्त तक आम नागरिकों के लिए खुली रहेगी प्रदर्शनी

रायपुर- 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर के कचहरी चौक स्थित ऐतिहासिक टाउन हॉल में जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित सात दिवसीय छायाचित्र प्रदर्शनी नागरिकों और विद्यार्थियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ के योगदान, अमर सेनानियों के शौर्य एवं बलिदान, राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षों की गौरवशाली यात्रा तथा राज्य की सुशासन और विकास यात्रा को प्रदर्शनी में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

इसी क्रम में बी.पी. पुजारी गवर्नमेंट इंग्लिश मीडियम स्कूल, राजातालाब रायपुर के विद्यार्थियों ने शिक्षिकाओं के साथ प्रदर्शनी का अवलोकन किया। विद्यार्थी मानवी साहू, पलक साहू, योगिता विश्वकर्मा, आनंदित बोस और युगती सोनकर शिक्षिका अनवरी जावेद शेख एवं सुनील महर के साथ प्रदर्शनी देखने पहुंचे। विद्यार्थियों ने विभिन्न छायाचित्रों, ऐतिहासिक दस्तावेजों और प्रदर्शित सामग्री को उत्सुकता के साथ देखा तथा स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों की जानकारी प्राप्त की।

‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षों की गौरवशाली यात्रा

प्रदर्शनी का प्रमुख आकर्षण राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा पर केंद्रित खंड है। इसमें ‘वंदे मातरम्’ की रचना से लेकर स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रजागरण के प्रेरणादायी स्वर के रूप में इसकी भूमिका को ऐतिहासिक संदर्भों और छायाचित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।

प्रदर्शनी के माध्यम से नई पीढ़ी को यह समझने का अवसर मिल रहा है कि स्वतंत्रता केवल संघर्ष और बलिदान का परिणाम नहीं, बल्कि देशवासियों की एकजुटता, राष्ट्रप्रेम और दृढ़ संकल्प की भी गौरवगाथा है।

छत्तीसगढ़ के वीर सेनानियों के संघर्ष और बलिदान की गाथा

प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, जननायकों और अमर बलिदानियों के योगदान से जुड़े दुर्लभ छायाचित्र, दस्तावेज और ऐतिहासिक प्रसंग प्रदर्शित किए गए हैं। महात्मा गांधी के छत्तीसगढ़ प्रवास तथा प्रदेश में हुए सामाजिक और राष्ट्रीय आंदोलनों से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंग भी प्रदर्शनी का हिस्सा हैं।

विभागीय अधिकारियों ने विद्यार्थियों को छायाचित्रों और ऐतिहासिक घटनाओं की जानकारी देते हुए स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष, त्याग और राष्ट्र के प्रति समर्पण से अवगत कराया।

योजनाओं से बदली जिंदगी की तस्वीर

प्रदर्शनी में राज्य की जनकल्याणकारी योजनाओं और आम नागरिकों के जीवन में आए सकारात्मक बदलावों को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है। महिलाओं, किसानों, युवाओं, श्रमिकों और जरूरतमंद परिवारों के लिए संचालित योजनाओं के माध्यम से विकास और सशक्तिकरण की तस्वीर प्रस्तुत की गई है।

महतारी वंदन योजना, कृषक उन्नति योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना सहित शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी पहलों की जानकारी भी प्रदर्शनी में दी गई है। विद्यार्थियों ने इन योजनाओं के बारे में भी विशेष रुचि दिखाई।

सुशासन और आधुनिक अधोसंरचना से विकसित छत्तीसगढ़ की झलक

प्रदर्शनी में डिजिटल पंजीयन, सुशासन तिहार, हरित छत्तीसगढ़, शिक्षा एवं अधोसंरचना विस्तार सहित राज्य की विकास यात्रा को भी छायाचित्रों और सूचनात्मक सामग्री के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। बेहतर सड़क एवं रेल संपर्क, औद्योगिक अधोसंरचना, निवेश और रोजगार के नए अवसरों की झलक भी यहां देखने को मिल रही है।

एआई तकनीक से विरासत और पर्यटन का अभिनव अनुभव

प्रदर्शनी में आधुनिक तकनीक और छत्तीसगढ़ की विरासत का अनूठा संगम भी देखने को मिल रहा है। एआई आधारित विशेष पहल के माध्यम से आगंतुक प्रदेश के प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों की पृष्ठभूमि के साथ अपनी डिजिटल तस्वीर तैयार करा सकते हैं। बच्चों और युवाओं में इस पहल को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है। इसके अलावा राज्य की विकास यात्रा, उपलब्धियों और जनकल्याणकारी योजनाओं पर आधारित विशेष डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन भी किया जा रहा है।

21 अगस्त तक आम नागरिकों के लिए खुली रहेगी प्रदर्शनी

कचहरी चौक स्थित ऐतिहासिक टाउन हॉल में आयोजित यह सात दिवसीय छायाचित्र प्रदर्शनी 15 से 21 अगस्त 2026 तक प्रतिदिन सुबह 10:30 बजे से रात 8 बजे तक आम नागरिकों के अवलोकन के लिए खुली रहेगी। विद्यार्थियों ने प्रदर्शनी को ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायी और छत्तीसगढ़ के गौरवशाली इतिहास एवं वर्तमान विकास से परिचित कराने वाला अनुभव बताया।

लाल किले से 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह का भव्य आयोजन, पहली बार ‘वंदे मातरम्’ का होगा विशेष गायन

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नई दिल्ली- देश 15 अगस्त 2026 को अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली के लाल किले की प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस समारोह का नेतृत्व करेंगे। इस वर्ष का समारोह राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षों की गौरवशाली विरासत को समर्पित होगा। साथ ही, विकसित भारत@2047 की दिशा में देश की युवा शक्ति की ऊर्जा, आकांक्षाओं और योगदान को भी विशेष रूप से रेखांकित किया जाएगा। इस वर्ष पहली बार लाल किले के स्वतंत्रता दिवस समारोह में ‘वंदे मातरम्’ का विशेष गायन होगा।

प्रधानमंत्री का भव्य स्वागत और गार्ड ऑफ ऑनर

लाल किले पहुंचने पर प्रधानमंत्री का स्वागत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह करेंगे। इसके बाद दिल्ली एरिया के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल राजेश सेठी प्रधानमंत्री को सलामी मंच तक ले जाएंगे, जहां सेना, नौसेना, वायुसेना और दिल्ली पुलिस के संयुक्त दल द्वारा उन्हें सामान्य सलामी दी जाएगी।

इसके बाद प्रधानमंत्री गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण करेंगे। इस वर्ष प्रधानमंत्री के गार्ड ऑफ ऑनर में सेना, नौसेना, वायुसेना और दिल्ली पुलिस के एक-एक अधिकारी तथा 24-24 जवान शामिल होंगे। स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए इस वर्ष भारतीय सेना समन्वयक सेवा है। गार्ड ऑफ ऑनर की कमान लेफ्टिनेंट कर्नल अर्जुन सिंह संभालेंगे।

तिरंगा फहराने के साथ होगा 21 तोपों की सलामी का समन्वय

गार्ड ऑफ ऑनर के निरीक्षण के बाद प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर पर पहुंचेंगे, जहां वे राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे। इस दौरान कैप्टन सोनिया सिंह चौहान प्रधानमंत्री की सहायता करेंगी। तिरंगा फहराने का कार्यक्रम 1721 फील्ड बैटरी (सेरेमोनियल) के वीर तोपचियों द्वारा दी जाने वाली 21 तोपों की सलामी के साथ समन्वित होगा।

इस अवसर पर स्वदेशी 105 मिमी लाइट फील्ड गन का इस्तेमाल किया जाएगा। सेरेमोनियल बैटरी की कमान मेजर पवन सिंह शेखावत संभालेंगे।

तिरंगे को दिया जाएगा ‘राष्ट्रीय सलाम’

राष्ट्रीय ध्वज फहराए जाने के समय सेना, नौसेना, वायुसेना और दिल्ली पुलिस से जुड़े जवानों वाला राष्ट्रीय ध्वज गार्ड ‘राष्ट्रीय सलाम’ पेश करेगा। इस इंटर-सर्विसेज गार्ड और पुलिस गार्ड की कमान मेजर लोकेन्द्र सिंह शेखावत संभालेंगे।

तिरंगा फहराए जाने के बाद सेना का बैंड ‘वंदे मातरम्’ की धुन प्रस्तुत करेगा और समारोह में मौजूद सभी लोग राष्ट्रीय गीत का गायन करेंगे। इसके बाद राष्ट्रगान होगा। सेना बैंड का संचालन सूबेदार ईश्वर सिंह करेंगे।

हेलीकॉप्टर से होगी पुष्पवर्षा

राष्ट्रीय ध्वज फहराए जाने के तुरंत बाद भारतीय वायुसेना के दो Mi-17 हेलीकॉप्टर समारोह स्थल पर पुष्पवर्षा करेंगे। इनमें से एक हेलीकॉप्टर पर राष्ट्रीय ध्वज और दूसरे पर ‘वंदे मातरम्’ का ध्वज होगा। इसके बाद प्रधानमंत्री राष्ट्र को संबोधित करेंगे।

2,500 NCC कैडेट और ‘My Bharat’ स्वयंसेवक होंगे शामिल

प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) और ‘My Bharat’ के स्वयंसेवक ‘वंदे मातरम्’ का गायन करेंगे, जिसके बाद राष्ट्रगान होगा।

इस वर्ष कुल 2,500 बालक एवं बालिका कैडेट तथा ‘My Bharat’ स्वयंसेवक समारोह में भाग लेंगे। ये सभी ज्ञानपथ पर लाल किले की प्राचीर के सामने बैठेंगे और सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम्’ की आकृति बनाएंगे। ज्ञानपथ पर ‘विकसित भारत@2047’ विषय को दर्शाने वाले व्यू-कटर भी लगाए जाएंगे।

देशभर से करीब 5,000 विशेष अतिथि होंगे शामिल

इस वर्ष लाल किले पर आयोजित समारोह में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े करीब 5,000 विशेष अतिथियों को आमंत्रित किया गया है। इनमें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के स्वयंसेवक, पीएम मुद्रा योजना की महिला उद्यमी, NAMASTE, PM AJAY और SEED योजनाओं के लाभार्थी, उत्कृष्ट My Bharat स्वयंसेवक, PMAY (Urban) के लाभार्थी, पीएम स्वनिधि के स्ट्रीट वेंडर, स्वच्छ भारत मिशन के शहरी स्वच्छता कर्मी और दिल्ली मेट्रो के उत्कृष्ट कर्मचारी शामिल हैं।

इसके अलावा कर्तव्य पथ एवं सेंट्रल विस्टा में कार्यरत उत्कृष्ट कर्मचारी, युवा नवप्रवर्तक, विभिन्न क्षेत्रों के श्रेष्ठ वैज्ञानिक, भारत टैक्सी के सारथी और चालक, प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के श्रेष्ठ इंटर्न, स्टार्टअप इंडिया से जुड़े उत्कृष्ट स्टार्टअप, पीएम कौशल विकास योजना के उत्कृष्ट प्रशिक्षित युवा, सरकारी अस्पतालों के नर्सिंग ऑर्डरली, पीएम सूर्य घर योजना के लाभार्थी, पीएम विश्वकर्मा योजना के कारीगर और उत्कृष्ट किसान भी समारोह में शामिल होंगे।

देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 1,500 से अधिक लोग पारंपरिक परिधानों में भी समारोह में हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित किए गए हैं।

दर्शकों की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम

समारोह में आने वाले लोगों की सुविधा के लिए छह स्थानों पर 25 क्लोक रूम बनाए गए हैं। आगंतुकों की सहायता के लिए 200 स्वयंसेवक, जिनमें 100 NCC और 100 My Bharat स्वयंसेवक शामिल हैं, तैनात रहेंगे।

जरूरतमंद लोगों के लिए मेट्रो स्टेशनों और पार्किंग क्षेत्रों में NCC कैडेट व्हीलचेयर सहायता उपलब्ध कराएंगे। 15 अगस्त को सुबह 4 बजे से मेट्रो सेवा शुरू होगी और आमंत्रित अतिथियों के लिए मेट्रो सेवा नि:शुल्क रहेगी। पार्किंग, पैदल यात्रियों के लिए रैंप और यातायात संबंधी जानकारी के लिए Google एवं Mappls Maps पर भी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।

इस बार नदियों की जगह देश की प्रमुख झीलों के नाम पर होंगे एनक्लोजर

इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए बैठने वाले एनक्लोजरों के नाम भारत की प्रमुख झीलों के नाम पर रखे गए हैं। इनमें डल, चिलिका, लोकटक, सांभर, पुष्कर, पांगोंग त्सो, वुलर, वेम्बनाड, पुलिकट, कोलेरू और अन्य प्रमुख झीलों के नाम शामिल हैं।

स्वच्छता और बारिश से निपटने की भी तैयारी

समारोह के बाद लाल किले पर स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा। NCC कैडेट और My Bharat स्वयंसेवक दर्शकों के जाने के बाद प्लॉगिंग और कचरा हटाने का कार्य करेंगे।

संभावित बारिश को देखते हुए लाल किले और आसपास के क्षेत्रों में जल निकासी एवं सीवेज व्यवस्था की व्यापक सफाई की जा रही है, ताकि जलभराव की स्थिति उत्पन्न न हो।

स्वतंत्रता दिवस से पहले देशभर में प्रतियोगिताएं

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर रक्षा मंत्रालय और MyGov के सहयोग से विभिन्न प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं। इनमें ‘2047 तक विकसित भारत के निर्माण में AI की भूमिका’ विषय पर निबंध प्रतियोगिता, ‘भारत 1947 बनाम भारत 2047’ पर चित्रकला प्रतियोगिता और संविधान, स्वतंत्रता आंदोलन, आधुनिक भारत की तकनीकी प्रगति, अंतरिक्ष तथा परमाणु तकनीक से जुड़े ऑनलाइन क्विज शामिल हैं।

इन प्रतियोगिताओं के करीब 600 विजेता भी स्वतंत्रता दिवस समारोह का हिस्सा बनेंगे।

देशभर में 343 स्थानों पर बैंड प्रदर्शन

देशभक्ति की भावना को मजबूत करने और स्वतंत्रता दिवस के उत्सव को जन-जन तक पहुंचाने के लिए देशभर में 343 प्रमुख स्थानों पर बैंड प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें सेना, नौसेना, वायुसेना, भारतीय तटरक्षक, NCC, CRPF, ITBP, CISF, SSB, BSF, Integrated Defence Staff, RPF और असम राइफल्स के बैंड शामिल हैं। इन कार्यक्रमों में आम नागरिकों के लिए प्रवेश खुला रहेगा।

अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप में भी फहराया जाएगा तिरंगा

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भारतीय नौसेना और स्थानीय प्रशासन द्वारा अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह तथा लक्षद्वीप में भी राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाएगा।

कुल मिलाकर, 80वां स्वतंत्रता दिवस समारोह भारत की स्वतंत्रता की गौरवशाली विरासत, ‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षों की यात्रा और विकसित भारत@2047 के संकल्प को एक साथ सामने लाएगा। समारोह में युवाओं की भागीदारी, तकनीकी प्रगति, सांस्कृतिक विविधता और देशभक्ति की भावना को विशेष महत्व दिया गया है।

15 अगस्त 2026 को देश मनाएगा 80वां स्वतंत्रता दिवस

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15 अगस्त 2026 को देश अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस समारोह का नेतृत्व करेंगे। 10 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने बताया कि वर्ष 2026 ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने का भी अवसर है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लाखों लोगों को प्रेरित करने वाले राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को पहली बार लाल किले की प्राचीर से गाकर इसकी गौरवशाली विरासत को श्रद्धांजलि दी जाएगी।

प्रधानमंत्री के लाल किले पहुंचने पर ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया जाएगा। इसके बाद प्रधानमंत्री राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे और राष्ट्र को अपना परंपरागत संबोधन देंगे। इस वर्ष के समारोह में युवा शक्ति को भी विशेष रूप से रेखांकित किया जाएगा और 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में देश के युवाओं के योगदान को सम्मानित किया जाएगा।

वंदे मातरम् के 150 वर्ष

लाल किले की फूलों से होने वाली सजावट में ‘वंदे मातरम्’ की थीम दिखाई देगी। ज्ञानपथ पर प्राचीर के सामने NCC और MY Bharat के कुल 2,500 छात्र-छात्रा कैडेट एवं स्वयंसेवक ‘वंदे मातरम्’ की आकृति बनाएंगे। भारतीय वायुसेना का एक Mi-17 हेलीकॉप्टर ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में बैनर लेकर लाल किले पर मौजूद लोगों के ऊपर पुष्पवर्षा करेगा।

सैन्य बैंड प्रस्तुतियां

स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देशवासियों को एकजुट और प्रेरित करने वाले राष्ट्रीय गीत को श्रद्धांजलि देने के लिए 8 अगस्त 2026 से देशभर में विभिन्न बैंड प्रस्तुतियों का आयोजन किया जा रहा है।

सेना, नौसेना, वायुसेना, भारतीय तटरक्षक बल, NCC, CRPF, ITBP, CISF, SSB, BSF, Integrated Defence Staff, RPF और असम राइफल्स के बैंड देशभर के 343 प्रमुख स्थानों पर प्रस्तुतियां देंगे। ये कार्यक्रम 15 अगस्त 2026 तक जारी रहेंगे। नागरिकों में देशभक्ति की भावना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इन कार्यक्रमों में आम जनता के लिए प्रवेश खुला रहेगा।

युवा शक्ति: विकसित भारत @2047 की यात्रा का नेतृत्व

स्वतंत्रता दिवस समारोह 2026 में विभिन्न क्षेत्रों में युवाओं की उपलब्धियों को विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा। वर्ष 2026 के अंतरराष्ट्रीय भौतिकी, रसायन, जीव विज्ञान और गणित ओलंपियाड में पदक जीतने वाले 19 छात्र-छात्राओं की उपलब्धियां विज्ञान के क्षेत्र में युवा शक्ति की सफलता का उदाहरण हैं। इन्हें समारोह में आमंत्रित किया गया है और वे लाल किले की प्राचीर पर बैठेंगे।

पृष्ठभूमि में लगाए गए विजुअल्स के माध्यम से परमाणु और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की प्रगति को प्रदर्शित किया जाएगा। गार्ड ऑफ ऑनर क्षेत्र में फूलों की सजावट के माध्यम से विकसित भारत @2047 की भारत की यात्रा को दर्शाया जाएगा।

विशेष अतिथि

विकसित भारत की यात्रा में योगदान देने वाले विभिन्न क्षेत्रों के लगभग 5,000 उपलब्धि हासिल करने वाले लोगों को समारोह में विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। इनमें शामिल हैं:

  • राष्ट्रीय नवाचार कार्यक्रमों के युवा नवोन्मेषक

  • प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के उत्कृष्ट इंटर्न

  • विभिन्न योजनाओं से सहायता प्राप्त उत्कृष्ट स्टार्टअप

  • PM कौशल विकास योजना के उत्कृष्ट प्रशिक्षित युवा

  • Startup India Seed Fund से समर्थित उत्कृष्ट स्टार्टअप

  • उत्कृष्ट MY Bharat स्वयंसेवक

  • NAMASTE, PM AJAY और SEED योजनाओं के लाभार्थी

  • विभिन्न क्विज एवं प्रतियोगिताओं में चयनित दिल्ली सरकार के स्कूलों के विद्यार्थी

उद्यमियों, नवोन्मेषकों और जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले लोगों के विकसित भारत @2047 में योगदान को सम्मानित करने के लिए निम्नलिखित वर्गों से भी विशेष अतिथियों को आमंत्रित किया गया है:

  • अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के स्वयंसेवक

  • PM Mudra Yojana की महिला उद्यमी

  • PMAY (U) के उत्कृष्ट लाभार्थी

  • विभिन्न क्षेत्रों के नवोन्मेषक एवं वैज्ञानिक

  • दिल्ली में Bharat Taxi के सारथी/कैब चालक/टैक्सी चालक

  • PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana के लाभार्थी

  • PM Vishwakarma योजना के कारीगर

  • प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन (PM-SYM) योजना के उत्कृष्ट लाभार्थी

  • प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PM-MKSSY) के उत्कृष्ट किसान

विशेष अतिथियों में ऐसे मौन योद्धा भी शामिल हैं, जो दूसरों की सफलता में सहायता के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। स्वतंत्रता दिवस पर उनके योगदान को भी सम्मानित किया जाएगा। इनमें शामिल हैं:

  • PM SVANidhi के स्ट्रीट वेंडर

  • स्वच्छ भारत मिशन के शहरी स्वच्छता कर्मचारी

  • उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले दिल्ली मेट्रो कर्मचारी

  • कर्तव्य पथ/सेंट्रल विस्टा के उत्कृष्ट कर्मचारी

  • दिल्ली के सरकारी अस्पतालों के नर्सिंग ऑर्डरली (वार्ड अटेंडेंट) और अन्य कर्मचारी

विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से दिल्ली में रहने वाले 1,500 से अधिक लोगों को भी पारंपरिक परिधानों में समारोह देखने के लिए आमंत्रित किया गया है। वे लाल किले पर भारत की विविधता का जीवंत स्वरूप प्रस्तुत करेंगे।

प्रतियोगिताओं के माध्यम से बच्चों की भागीदारी

स्वतंत्रता दिवस से पहले रक्षा मंत्रालय ने MyGov के सहयोग से विभिन्न क्विज और प्रतियोगिताओं का आयोजन किया। इनमें ‘2047 तक विकसित भारत के निर्माण में AI की भूमिका’ विषय पर निबंध प्रतियोगिता, ‘भारत 1947 बनाम भारत 2047’ विषय पर चित्रकला प्रतियोगिता तथा कई ऑनलाइन क्विज शामिल हैं।

इनमें भारतीय संविधान—मौलिक अधिकार, कर्तव्य, प्रमुख अनुच्छेद एवं संविधान निर्माता; भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में महिलाओं की भूमिका—रानी लक्ष्मीबाई से सरोजिनी नायडू तक; आधुनिक भारत के प्रमुख पड़ाव—तकनीकी प्रगति एवं अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की उपलब्धियां; तथा परमाणु प्रौद्योगिकी में भारत की सफलता जैसे विषय शामिल हैं।

इन प्रतियोगिताओं के लगभग 600 विजेता भी स्वतंत्रता दिवस समारोह का हिस्सा बनेंगे।

अन्य मंत्रालयों/विभागों, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस द्वारा भी नागरिकों को राष्ट्रीय पर्व से जोड़ने के लिए विभिन्न ऑनलाइन और ऑफलाइन क्विज एवं गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है।

जनसुविधाओं की विशेष व्यवस्था

  • क्लॉक रूम: आगामी समारोह के लिए छह स्थानों पर 25 क्लॉक रूम बनाए गए हैं।

  • हेल्पडेस्क पर स्वयंसेवक: 200 स्वयंसेवक—MY Bharat के 100 और NCC के 100—पुलिसकर्मियों के साथ आगंतुकों की सहायता करेंगे।

  • व्हीलचेयर सुविधा: जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए मेट्रो स्टेशनों और पार्किंग क्षेत्रों में NCC कैडेट 20 व्हीलचेयर के साथ मौजूद रहेंगे।

  • मेट्रो सेवा: 15 अगस्त को लोगों की सुविधा के लिए मेट्रो सेवा सुबह 4 बजे से शुरू होगी। सभी आमंत्रितों को मेट्रो सेवा निःशुल्क उपलब्ध होगी। ई-निमंत्रण के साथ मेट्रो QR कोड दिए जाएंगे।

  • पार्किंग सुविधा: वैध पार्किंग पास/लेबल वाले आगंतुकों के लिए परेड ग्राउंड में पार्किंग की सुविधा होगी।

  • पैदल यात्रियों के लिए रैंप: ऊपरी सुभाष मार्ग से निचले सुभाष मार्ग तक सुगम आवागमन के लिए रैंप और सीढ़ियां बनाई गई हैं।

  • Google एवं Mappls Maps: मुख्य समारोह के दिन यातायात प्रतिबंधों की जानकारी Google और Mappls Maps पर उपलब्ध होगी।

  • रेन पोंचो: मौसम की अनिश्चित परिस्थितियों को देखते हुए माधव दास पार्क और 15 अगस्त पार्क में सभी आमंत्रितों को तथा प्राचीर पर मौजूद गणमान्य अतिथियों को रेन पोंचो उपलब्ध कराए जाएंगे।

निमंत्रण पत्र: जनसेवा और कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्धता

प्रधानमंत्री ने ‘सेवा तीर्थ’ को राष्ट्र को समर्पित करते हुए कहा था कि ‘सेवा तीर्थ’ कर्तव्य, करुणा और राष्ट्र प्रथम की भावना का सशक्त प्रतीक है। यह आने वाली पीढ़ियों को निस्वार्थ सेवा और देशवासियों के कल्याण के लिए समर्पण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देगा।

इसी भावना के साथ इस वर्ष के मुख्य समारोह के निमंत्रण पत्र पर ‘सेवा तीर्थ’ को प्रदर्शित किया गया है, ताकि प्रत्येक नागरिक के कल्याण के लिए समर्पण के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा मिले। निमंत्रण पत्र पर बना धर्म चक्र धर्मपूर्ण कर्तव्य, निरंतर सेवा और निस्वार्थ कर्म की शाश्वत गति का प्रतीक है।

स्वच्छता अभियान

कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्धता की भावना के साथ इस वर्ष समारोह के बाद लाल किले पर स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा। इसमें NCC कैडेट और MY Bharat स्वयंसेवक भाग लेंगे।

इस अभियान का उद्देश्य दर्शकों के लौटने के बाद उसी दिन व्यवस्थित तरीके से प्लॉगिंग और कचरे को हटाना है। इसके माध्यम से स्वच्छ भारत अभियान का संदेश दिया जाएगा। अभियान के बाद लाल किला देशभर से आने वाले पर्यटकों के लिए स्वच्छ रूप में उपलब्ध रहेगा।

प्रवेश कक्षों के नाम

VIP संस्कृति को समाप्त करने और जल संरक्षण के महत्व को रेखांकित करने के उद्देश्य से गणतंत्र दिवस 2026 में बैठने के कक्षों के नाम भारत की नदियों पर रखे गए थे। स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए इन बैठने के कक्षों के नाम भारत की प्रमुख झीलों के नाम पर रखे गए हैं।

जल निकासी की व्यवस्था

स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान संभावित बारिश को देखते हुए जलभराव रोकने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। लाल किले और आसपास के क्षेत्रों में जल निकासी एवं सीवेज व्यवस्था की पूरी तरह सफाई की जा रही है, ताकि बारिश की स्थिति में पानी का सुचारु निकास सुनिश्चित किया जा सके।

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने अंडमान-निकोबार में ‘हर घर तिरंगा अभियान’ का किया शुभारंभ

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उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज अगस्त क्रांति दिवस के अवसर पर, 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन की स्मृति में, श्री विजय पुरम स्थित फ्लैग प्वाइंट पर राष्ट्रीय ध्वज फहराकर ‘हर घर तिरंगा अभियान’ का शुभारंभ किया।

डीबीआरएआईटी सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह एवं ‘वंदे मातरम्’ पर आधारित तिरंगा कॉन्सर्ट को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि इस अभियान के शुभारंभ के लिए इन ऐतिहासिक द्वीपों से अधिक उपयुक्त स्थान कोई और नहीं हो सकता। ये द्वीप भारत के स्वतंत्रता संग्राम और तिरंगे के इतिहास से गहराई से जुड़े हुए हैं।

महान तमिल कवि सुब्रमण्यम भारती के अमर शब्दों को याद करते हुए सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि भारती द्वारा ‘मणि कोडी’ की स्तुति भारतीय आत्मा के शाश्वत साहस और भारत माता के ध्वज की महिमा को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि हर घर तिरंगा अभियान इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए प्रत्येक नागरिक को एक राष्ट्रीय ध्वज, एक मातृभूमि और एक साझा नियति के सूत्र में जोड़ता है।

‘काला पानी’ की कठोर यातनाएँ सहने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों को याद करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह भारत का केवल एक भौगोलिक हिस्सा नहीं, बल्कि बलिदान की पवित्र भूमि है। उन्होंने वीर विनायक दामोदर सावरकर और सेल्युलर जेल में यातनाएँ सहने वाले अनगिनत देशभक्तों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि उनका साहस, राष्ट्रभक्ति और बलिदान आज भी पीढ़ियों को प्रेरणा देता है।

उपराष्ट्रपति ने महात्मा गांधी द्वारा 8 अगस्त 1942 को दिए गए ऐतिहासिक “करो या मरो” के आह्वान को याद करते हुए कहा कि इस आह्वान ने लाखों भारतीयों को जागृत किया और स्वतंत्रता संग्राम को निर्णायक गति प्रदान की। उन्होंने तिरंगे के इतिहास में इन द्वीपों के विशेष स्थान का भी उल्लेख किया। उन्होंने याद दिलाया कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने 30 दिसंबर 1943 को यहीं भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराया था, जो भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक ऐतिहासिक क्षण था।

हर घर तिरंगा अभियान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया यह अभियान अब एक राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन का रूप ले चुका है। उन्होंने प्रत्येक नागरिक से तिरंगे को गर्व के साथ अपने घर पर फहराने तथा इसके माध्यम से राष्ट्रभक्ति, एकता और सामूहिक जिम्मेदारी के मूल्यों को आत्मसात करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “भारत एक है और हमेशा एक रहेगा।”

उपराष्ट्रपति ने अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह को ‘विविधता में एकता’ और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का जीवंत उदाहरण बताया। उन्होंने द्वीपों की समृद्ध जनजातीय विरासत के साथ-साथ कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और बुनियादी ढाँचे के क्षेत्र में हुई हालिया प्रगति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ग्रेट निकोबार द्वीप विकास परियोजना भारत की समुद्री क्षमताओं, कनेक्टिविटी और आर्थिक अवसरों को और मजबूत करेगी तथा विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखेगी।

भारत की शांति और उदारता की परंपरा के साथ राष्ट्रीय शक्ति की आवश्यकता पर जोर देते हुए राधाकृष्णन ने कहा, “भारत हमेशा उदार रहा है, लेकिन हमारी उदारता को कभी भी हमारी कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। हमें अपने राष्ट्रीय हितों और संप्रभुता की रक्षा के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए।” उन्होंने नागरिकों से तिरंगे को साहस, एकता और आशा की प्रेरणा के रूप में अपनाने तथा स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत को आगे बढ़ाते हुए एक मजबूत और विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।


उपराष्ट्रपति ने एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में भी भाग लिया और ‘हर घर तिरंगा’ प्रदर्शनी का दौरा किया, जिसमें अभियान की भावना तथा राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति के संदेश को प्रदर्शित किया गया।

इस अवसर पर अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल एडमिरल डी. के. जोशी (सेवानिवृत्त), मुख्य सचिव चंचल यादव, विजय पुरम नगर परिषद की अध्यक्ष एम. वसंथा तथा जिला परिषद के अध्यक्ष पी. उम्मर सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।


गणतंत्र दिवस परेड 2026 में संस्कृति मंत्रालय को दोहरा सम्मान, ‘वंदे मातरम्’ झांकी और सांस्कृतिक प्रस्तुति को पुरस्कार

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संस्कृति मंत्रालय ने गणतंत्र दिवस परेड 2026 में एक महत्वपूर्ण दोहरी उपलब्धि हासिल की। मंत्रालय की झांकी “वंदे मातरम् – 150 वर्षों की यात्रा” को केंद्रीय मंत्रालयों एवं विभागों की श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ झांकी का प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया, जबकि इसकी भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुति “वंदे मातरम्: भारत की शाश्वत गूंज” को अपनी असाधारण कलात्मक एवं विषयगत उत्कृष्टता के लिए विशेष पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

पुरस्कार विजेता झांकी ने ‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षों की यात्रा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया, जिसमें इसके राष्ट्रीय चेतना के गीत के रूप में उद्भव और भारत के स्वतंत्रता संग्राम, राष्ट्रीय एकता तथा सभ्यतागत चेतना को आकार देने में इसकी सतत भूमिका को दर्शाया गया। सशक्त दृश्यांकन और प्रतीकात्मक प्रस्तुति के माध्यम से झांकी ने राष्ट्रीय गीत की भारतीय सामूहिक पहचान में उसकी कालातीत प्रासंगिकता को रेखांकित किया।

विशेष पुरस्कार से सम्मानित सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुति “वंदे मातरम् – भारत की शाश्वत गूंज” का संयोजन संगीत नाटक अकादमी द्वारा उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, पटियाला के सहयोग से किया गया। यह प्रस्तुति राष्ट्रऋषि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की उस अमर रचना को नमन करती है, जो भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की आवाज बनी। इस भव्य प्रदर्शन में देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आए लगभग 2,500 कलाकारों ने भाग लिया और शास्त्रीय, लोक तथा जनजातीय कला रूपों के माध्यम से भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता का सजीव प्रदर्शन किया।

कोरियोग्राफी के माध्यम से भारत की शाश्वत यात्रा को उसकी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जड़ों से लेकर स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान तथा सशस्त्र बलों के शौर्य और समर्पण तक प्रभावी रूप से उकेरा गया। संस्कृत मंत्रों, भावपूर्ण संगीत और गतिशील संरचनाओं से सजी इस प्रस्तुति ने ‘वंदे मातरम्’ की संपूर्ण भावनात्मक और दार्शनिक यात्रा को अभिव्यक्त किया, जिसका समापन तिरंगे को समर्पित एक सशक्त श्रद्धांजलि के साथ हुआ—जो एकता, भक्ति और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है।

इस सांस्कृतिक प्रस्तुति का समग्र रचनात्मक निर्देशन संगीत नाटक अकादमी की अध्यक्ष डॉ. संध्या पुरेचा ने किया। संगीत निर्देशन ऑस्कर पुरस्कार विजेता संगीतकार एम. एम. कीरावानी द्वारा किया गया, जबकि अतिरिक्त गीत सुभाष सहगल ने लिखे। वॉयस-ओवर राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेता अनुपम खेर ने दिया, कोरियोग्राफी संतोष नायर द्वारा की गई तथा परिधान परिकल्पना संध्या रमन ने की।


पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन, राष्ट्रगीत के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव

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केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने आज राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित स्मरणोत्सव के द्वितीय चरण के अंतर्गत वंदे मातरम् का सामूहिक गायन आयोजित किया। यह द्वितीय चरण 19 जनवरी 2026 से 26 जनवरी 2026 तक मनाया जा रहा है।


कार्यक्रम का नेतृत्व मंत्रालय के सचिव तनय कुमार ने किया। इस अवसर पर मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी इंदिरा पर्यावरण भवन, नई दिल्ली स्थित मंत्रालय परिसर में एकत्रित हुए और भावपूर्ण स्वर में राष्ट्रगीत का सामूहिक गायन किया। इस आयोजन की गूंज पूरे परिसर में देशभक्ति का वातावरण लेकर आई। मंत्रालय के विभिन्न क्षेत्रीय कार्यालयों में भी इसी प्रकार के सामूहिक गायन कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

इस अवसर पर उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने उन कालजयी पंक्तियों के प्रति सामूहिक श्रद्धा व्यक्त की, जिन्होंने पिछले 150 वर्षों से पीढ़ियों को प्रेरित किया है।

यह आयोजन भारत सरकार द्वारा अनुमोदित उस व्यापक राष्ट्रव्यापी स्मरणोत्सव कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसके तहत राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया जा रहा है।


देशभक्ति गीतों से गुंजा चरौदा,बच्चों ने गाया बैंड के ध्वनि के साथ वंदेमातरम् गीत

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आरंग- वंदेमातरम् गीत के 150 वर्ष पूरे होने पर देश भर में सामूहिक रूप से वंदे मातरम् गीत गायन कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।इसी कड़ी में डीआईजी अजय कुमार सिंह सीआरपीएफ कैंप ग्रुप केंद्र भिलाई रायपुर के निर्देशन में मंगलवार को शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला चरौदा में कैंप के जवानों की बैंड टीम द्वारा वंदे मातरम् गीत का सस्वर गायन किया गया।जो बच्चों, शिक्षको व ग्रामीणों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। संस्था के नवाचारी शिक्षक महेन्द्र कुमार पटेल ने बताया 

बैंड की सुमधुर ध्वनि के साथ वन्दे मातरम् गीत गायन से बच्चों में गजब का उत्साह दिखा। बच्चे उत्साहित होकर भारत माता की जय, वंदे मातरम् का उद्घोष करते नजर आए। वंदेमातरम् गीत गायन कार्यक्रम के संयोजन में  इंस्पेक्टर यू बी चतुर्वेदी, एएसआई हेमराज और हवलदार सोमपाल ने अहम् भूमिका निभाया।इस अवसर पर संस्था प्रमुख के के परमाल, सरपंच देवशरण धीवर,उप सरपंच रवि बंजारे, संतोष कोसरिया, रेत कलाकार हेमचंद साहू ने वंदे मातरम कार्यक्रम में शामिल होकर बच्चों और जवानों का उत्साह बढ़ाया। कार्यक्रम का संचालन शिक्षक महेन्द्र कुमार पटेल ने किया। उक्त कार्यक्रम के आयोजन संयोजन में शिक्षक सूर्यकांत चन्द्राकार, दीनदयाल धीवर,डिलेश्वर साहू,सुशील कुमार आवडे, जीतेंद्र यदु,शिक्षिका संगीता पाटले, प्रभा साहू, पार्वती साहू ने सहभागिता निभाई।

वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर राज्यभर में द्वितीय चरण के कार्यक्रम 19 से 26 जनवरी तक

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26 जनवरी को रायपुर में राज्यपाल तथा जगदलपुर में मुख्यमंत्री के आतिथ्य में होंगे विशेष आयोजन

व्यापक जनभागीदारी के साथ ग्राम पंचायत, जनपद, जिला एवं राज्य स्तर पर कार्यक्रमों का होगा आयोजन

रायपुर- छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग द्वारा राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर राज्यभर में चार चरणों में विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जिसके तहत द्वितीय चरण में कार्यक्रमों का आयोजन 19 से 26 जनवरी 2026 तक किया जाएगा। 

गणतंत्र दिवस के दिन रायपुर में राज्यपाल तथा जगदलपुर में मुख्यमंत्री के आतिथ्य में विशेष कार्यक्रम आयोजित होंगे। साथ ही राज्य के सभी जिला मुख्यालयों, ब्लॉक मुख्यालयों, ग्राम पंचायतों तथा स्कूल-कॉलेजों में ध्वजारोहण एवं राष्ट्रगान के पश्चात बड़े पैमाने पर सामूहिक वंदे मातरम् गायन किया जाएगा। इन कार्यक्रमों में मंत्रीगण, सांसद, विधायक, जनप्रतिनिधि, स्थानीय अधिकारी, प्रमुख हस्तियां और नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।

द्वितीय चरण में 19 से 26 जनवरी तक राज्य के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में एनसीसी, एनएसएस, स्काउट एवं गाइड की सहभागिता के साथ वंदे मातरम् से संबंधित संगीतमय प्रस्तुतियाँ, विशेष सभाएँ, निबंध प्रतियोगिता, वाद-विवाद, प्रश्नोत्तरी, पोस्टर निर्माण, रंगोली, चित्रकला एवं प्रदर्शनी आयोजित की जाएंगी। राज्य पुलिस बैंड द्वारा सार्वजनिक स्थलों पर वंदे मातरम् एवं देशभक्ति गीतों पर आधारित प्रस्तुतियाँ दी जाएंगी।

सार्वजनिक एवं निजी सहभागिता के तहत प्रदेश में वंदे मातरम् ऑडियो-वीडियो बूथ स्थापित किए जाएंगे, जहां नागरिक अपनी आवाज में वंदे मातरम् का गायन रिकॉर्ड कर अभियान के पोर्टल पर अपलोड कर सकेंगे। पोर्टल पर वंदे मातरम् की पूर्व रिकॉर्डेड धुन के साथ गायन की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। 

उल्लेखनीय है कि प्रथम चरण का आयोजन 7 से 14 नवंबर 2025 को सफलतापूर्वक किया जा चुका है। वही तृतीय चरण 7 से 15 अगस्त 2026 को हर घर तिरंगा अभियान के साथ संचालित किया जाएगा एवं चतुर्थ चरण का आयोजन 1 से 7 नवंबर 2026 को किया जाएगा। भारत सरकार, संस्कृति मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप यह आयोजन ग्राम पंचायत, जनपद, जिला एवं राज्य स्तर पर व्यापक जनभागीदारी के साथ कार्यक्रमों को संपन्न कराया जाएगा, जिसका उद्देश्य नागरिकों में राष्ट्रगीत के प्रति भावनात्मक जुड़ाव और राष्ट्रभक्ति की भावना को सुदृढ़ करना है।

वंदे मातरम् की गौरव गाथा का स्मरण हर भारतीय के लिए गर्व का विषय – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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रायपुर- राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर छत्तीसगढ़ विधानसभा में आयोजित विशेष चर्चा में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने  वंदेमातरम के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि वंदे मातरम्  देशप्रेम का वह जज्बा था जिसकी गूंज से ब्रिटिश हुकूमत तक कांप उठती थी। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह उद्घोष करोड़ों भारतीयों के हृदय में साहस, त्याग और बलिदान की अग्नि प्रज्वलित करता रहा। उन्होंने कहा कि यह वही स्वर था जिसने गुलामी की जंजीरों को तोड़ने की शक्ति प्रदान की।

उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के अमर बलिदानियों को स्मरण करते हुए कहा कि भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, खुदीराम बोस सहित असंख्य क्रांतिकारी वंदे मातरम् का जयघोष करते हुए मां भारती के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर चढ़ गए। उनका बलिदान आज भी हर भारतीय को राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का स्मरण कराता है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वंदे मातरम् की गौरव गाथा का स्मरण करना हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है। यह गीत हमें उस संघर्ष, उस पीड़ा और उस अदम्य साहस की याद दिलाता है, जिसने भारत को स्वतंत्रता दिलाई। यह हमारी राष्ट्रीय चेतना का आधार स्तंभ है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की पहचान केवल उसकी भौगोलिक सीमाओं से नहीं होती, जो मानचित्र पर अंकित होती हैं। किसी राष्ट्र की वास्तविक पहचान उसकी सभ्यता, संस्कृति, परंपराओं और उन मूल्यों से होती है, जो सदियों से उसके आचार-विचार और जीवन पद्धति का हिस्सा रहे हैं। भारत की यह सांस्कृतिक निरंतरता विश्व में अद्वितीय है।

उन्होंने कहा कि विधानसभा में वंदे मातरम् पर विशेष चर्चा आयोजित करने का उद्देश्य यह भी है कि हम इतिहास की उन गलतियों को कभी न भूलें, जिन्होंने देश को गहरे घाव दिए, जिनकी पीड़ा आज भी हमारे समाज में कहीं-न-कहीं महसूस की जाती है। इतिहास से सीख लेकर ही हम एक सशक्त और समरस भारत का निर्माण कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के उन सभी वीर सपूतों को नमन किया, जिन्होंने वंदे मातरम् के भाव को अपने जीवन का लक्ष्य बनाकर भारत माता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् हमें हमारी विरासत, हमारी सांस्कृतिक चेतना और हजारों वर्षों की सभ्यता से जोड़ता है। यह उन आदर्शों की सामूहिक अभिव्यक्ति है, जिन्हें हमने युगों-युगों में आत्मसात किया है।

उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में धरती को माता के रूप में पूजने की भावना रही है, जिसे हम मातृभूमि कहते हैं। वंदे मातरम् इसी भाव का सशक्त और पवित्र स्वरूप है, जो हमें प्रकृति, भूमि और राष्ट्र के प्रति सम्मान और कर्तव्यबोध सिखाता है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की 150वीं जयंती के अवसर पर छत्तीसगढ़ विधानसभा में इस विशेष चर्चा के आयोजन के लिए विधानसभा अध्यक्ष तथा सभी  सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे विमर्श नई पीढ़ी को राष्ट्रप्रेम, सांस्कृतिक गौरव और ऐतिहासिक चेतना से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

लोकसभा में ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पर प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन: राष्ट्रगान की प्रेरणा और इतिहास के गौरवशाली पलों का स्मरण

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लोकसभा में आज ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित विशेष चर्चा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संबोधित किया। उन्होंने इस ऐतिहासिक अवसर पर सभी सांसदों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वंदे मातरम् सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि वह मंत्र है जिसने स्वतंत्रता आंदोलन में देश को ऊर्जा, प्रेरणा और त्याग का मार्ग दिखाया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह हमारे लिए गौरव का विषय है कि वंदे मातरम् के 150 वर्ष हम अपनी आंखों के सामने पूरे होते देख रहे हैं। उन्होंने इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सीख और प्रेरणा का अवसर बताया।

इतिहास के महत्वपूर्ण पड़ावों का स्मरण

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस कालखंड में देश ने कई ऐतिहासिक अवसरों का अनुभव किया—

  • संविधान के 75 वर्ष,

  • सरदार पटेल व भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती,

  • गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहीदी वर्षगांठ।

उन्होंने कहा कि आज वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर सदन सामूहिक ऊर्जा का अनुभव कर रहा है।

वंदे मातरम् का जन्म और उसका प्रभाव

मोदी ने बताया कि वंदे मातरम् की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में की थी, जब 1857 के विद्रोह के बाद अंग्रेजी शासन भारतीयों पर अत्याचार बढ़ा रहा था। इसी वातावरण में बंकिम दा ने ‘वंदे मातरम्’ के रूप में अंग्रेजों को चुनौती दी।

उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् ने भारत की सहस्रों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक परंपरा को नए शब्दों में जागृत किया। यह केवल राजनीतिक स्वतंत्रता का गीत नहीं था, बल्कि मां भारती को बंधनों से मुक्त कराने का पुकार था।

स्वतंत्रता आंदोलन में वंदे मातरम् की गूंज

प्रधानमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम् ने हर दिशा में आंदोलन को ऊर्जा दी—

  • बंगाल विभाजन (1905) के विरोध में यह बुलंद आवाज बना

  • स्वदेशी आंदोलन में यह प्रेरणा बना

  • लाखों लोगों ने जेल, यातना और यहां तक कि फांसी पर जाते हुए भी "वंदे मातरम्" कहा

उन्होंने खूदीराम बोस, रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाकुल्ला खान, राजेंद्रनाथ लाहिड़ी आदि महान शहीदों का स्मरण किया।

महात्मा गांधी और विश्व में वंदे मातरम्

प्रधानमंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी ने भी 1905 में लिखा था कि वंदे मातरम् लगभग राष्ट्रीय गान जैसा है। वह इसे सबसे मधुर और राष्ट्रभक्ति से परिपूर्ण गीत मानते थे।

उन्होंने कहा कि विदेशों में भी क्रांतिकारियों ने इसे अपनाया—

  • वीर सावरकर के घर ‘इंडिया हाउस’ में इसकी गूंज

  • भिखाजी कामा द्वारा ‘वंदे मातरम्’ नाम से अखबार प्रकाशित करना

  • बिपिनचंद्र पाल और अरविंदो द्वारा उसी नाम का समाचार पत्र निकालना

राजनीतिक विरोध और अन्याय पर प्रधानमंत्री का टिप्पणी

प्रधानमंत्री ने कहा कि 1937 में मुस्लिम लीग के विरोध के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने वंदे मातरम् पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि appeasement राजनीति के कारण उस समय वंदे मातरम् के साथ अन्याय हुआ, जिसके बारे में युवा पीढ़ी को जानना जरूरी है।

आज के भारत में वंदे मातरम् की प्रेरणा

प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद भी—

  • संकटों के समय,

  • युद्धों के दौरान,

  • आपातकाल के विरोध में,

  • कोविड-19 के दौरान—

वंदे मातरम् की भावना भारत को मजबूती देती रही।

उन्होंने कहा कि यह केवल स्मरण का क्षण नहीं, बल्कि नए संकल्प और ऊर्जा प्राप्त करने का अवसर है।

2047 तक विकसित भारत के संकल्प का आह्वान

प्रधानमंत्री ने कहा कि जैसे वंदे मातरम् ने स्वतंत्र भारत के सपने को ऊर्जा दी, वैसे ही यह विकसित भारत 2047 के संकल्प को भी शक्ति देगा।

अंत में उन्होंने कहा,

“वंदे मातरम् वह मंत्र है जो हमें कर्तव्य की याद दिलाता है, जो हमें एकता के सूत्र में बांधता है, और जो हमें आत्मनिर्भर व विकसित भारत के सपने को साकार करने की प्रेरणा देता है।”

उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह चर्चा नए भारत को नई ऊर्जा देगी और युवा पीढ़ी को प्रेरित करेगी।

https://twitter.com/i/broadcasts/1jMKgREdjqqxL

वंदे मातरम के 150 वर्ष: राष्ट्रीय उत्सव में देशभक्ति और एकता का भव्य उद्घोष

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वंदे मातरम के 150 वर्ष एक राष्ट्रीय स्मृति-उद्यम है, जिसका उद्देश्य वंदे मातरम की भावना और भारत के इतिहास में इसकी अनूठी भूमिका का उत्सव मनाना है। वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं है; यह भारत की सामूहिक चेतना है और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह देशभक्ति और संघर्ष का उद्घोष बनकर उभरा था।

1 अक्टूबर को मंत्रिमंडल ने ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ का देशव्यापी उत्सव आयोजित करने को मंजूरी दी। इसका उद्देश्य नागरिकों, विशेषकर युवाओं और छात्रों को गीत की मूल क्रांतिकारी भावना से जोड़ना है। इन उत्सवों के माध्यम से इस अमर संदेश को सम्मानित किया जाएगा और सुनिश्चित किया जाएगा कि इसकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के हृदय में सदा जीवित रहे।

बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित वंदे मातरम पहली बार उनके प्रसिद्ध उपन्यास आनंदमठ में प्रकाशित हुआ था, जो बंगाली साहित्यिक पत्रिका बंगदर्शन में धारावाहिक रूप में छापा गया था। समय के साथ यह भारत के स्वतंत्रता संघर्ष का ब्रह्मनाद बन गया। मातृभूमि को दिव्य स्वरूप में वंदित करने वाला यह गीत प्रकृति और राष्ट्र दोनों को एक सूत्र में पिरोता है, जिसने पीढ़ियों तक भारतीयों को एक भावनात्मक और सांस्कृतिक पहचान दी।

वंदे मातरम के 150 वर्ष—राष्ट्रीय स्मृति समारोह का उद्घाटन

‘150 वर्ष वंदे मातरम’ के स्मारक समारोह का शुभारंभ प्रधानमंत्री द्वारा दिल्ली में एक भव्य राष्ट्रीय कार्यक्रम के साथ हुआ। इस अवसर पर प्रमुख कलाकारों, युवा प्रतिनिधियों तथा समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम में एक विशेष स्मारक सिक्का और डाक टिकट भी जारी किया गया।


वंदे मातरम कॉन्सर्ट — ‘नाद एकम्, रूपम् अनेकम्’

वंदे मातरम: नाद एकम्, रूपम् अनेकम् एक सांस्कृतिक प्रस्तुति थी जिसमें देशभर के गायक और वादक एकत्र होकर राष्ट्रीय गीत की मनमोहक प्रस्तुति में सहभागी हुए। यह कार्यक्रम भारत की एकता में विविधता की भावना का सुंदर प्रतीक था और संगीत के माध्यम से गर्व, एकता और देशभक्ति का प्रेरक संदेश देता है। यह उस अमर गीत को एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि थी, जो हर भारतीय के हृदय में गूँजता है।

वंदे मातरम का सामूहिक गायन

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण प्रधानमंत्री के नेतृत्व में वंदे मातरम के पूर्ण स्वरूप का ऐतिहासिक सामूहिक गायन था। इसी समय देशभर में मुख्यमंत्री, राज्यपाल, उपराज्यपाल, स्कूली और कॉलेज के छात्र, अधिकारी और नागरिकों ने भी सामूहिक गायन में भाग लिया। यह राष्ट्रगीत की कालातीत ऊर्जा को समर्पित एक अभूतपूर्व आयोजन था जिसने देशभर में एकता और देशभक्ति की भावना का संचार किया।

36 राज्यों और 653 जिलों में वंदे मातरम कार्यक्रम

इस अभियान के अंतर्गत वंदे मातरम पर आधारित कार्यक्रमों को व्यापक जनसमर्थन मिला है। अब तक 39,783 से अधिक आयोजन अभियान वेबसाइट पर अपलोड किए जा चुके हैं।
ये कार्यक्रम 36 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और 653 जिलों में आयोजित किए गए हैं।

भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालय और विभाग भी वंदे मातरम के 150 वर्षों का उत्सव मना रहे हैं। 52 मंत्रालयों ने अपने आयोजन अभियान वेबसाइट पर साझा किए हैं।

विश्वभर में भारतीय मिशनों द्वारा आयोजन

दुनिया के विभिन्न देशों में भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास स्थानीय समुदाय और भारतीय प्रवासी जनसमुदाय के साथ मिलकर सामूहिक वंदे मातरम गायन आयोजित कर रहे हैं।

स्कूलों और कॉलेजों में कार्यक्रम

देशभर के स्कूल और कॉलेज भी इस सामूहिक वंदे मातरम आंदोलन से जुड़े हुए हैं।
अब तक:

  • 11,632 स्कूल

  • 554 कॉलेज

वंदे मातरम आधारित कार्यक्रम आयोजित कर चुके हैं।

कई शिक्षण संस्थानों के छात्र और शिक्षकों ने 7 नवंबर 2025 को दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम को सीधे प्रसारण के माध्यम से देखा।

1.25 करोड़ भारतीयों ने रिकॉर्ड किया अपना वंदे मातरम

1.25 करोड़ से अधिक भारतीय अब तक वंदे मातरम का अपना संस्करण रिकॉर्ड कर चुके हैं।

आप भी वंदे मातरम गीत सुनें और अपना संस्करण यहाँ अपलोड करें:


आयुष मंत्रालय ने ‘वन्दे मातरम्’ के 150 वर्षों का उत्सव मनाते हुए आयोजित सामूहिक गायन कार्यक्रम में दी श्रद्धांजलि

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आयुष मंत्रालय ने आज भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वन्दे मातरम्’ के 150 वर्षों के अवसर पर आयुष भवन के केंद्रीय आँगन में एक सामूहिक गायन कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम संस्कृति मंत्रालय की देशव्यापी पहल के अनुरूप आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य इस ऐतिहासिक मील के पत्थर को चिन्हित करना था।

इस अवसर पर प्रतापराव जाधव, केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) आयुष एवं राज्य मंत्री, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, भारत सरकार, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ मिलकर वन्दे मातरम् गीत का सामूहिक गायन किया।

अपने संबोधन में मंत्री ने कहा:

"वन्दे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाते हुए हम उस गीत का सम्मान कर रहे हैं, जो राष्ट्रीय जागृति का प्रतीक और ब्रिटिश शासन के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम का प्रेरक उद्घोष बन गया। यह देशभक्ति की भावना, जिसने 1857 की क्रांति के दौरान भारत में पहली बार आग भड़काई थी, वन्दे मातरम् में स्पष्ट रूप से झलकती है। इसके हर शब्द में हमारे देशवासियों के मातृभूमि के प्रति गहरे प्रेम और भक्ति का प्रतिबिंब मिलता है। जैसा कि हम इसे पूरे देश में समूह गायन, सभाओं, सेमिनार और विशेष सत्रों के माध्यम से मनाते हैं, हम यह दोहराते हैं कि भारत की प्रगति हमारे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण के साथ ही संभव है। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा यह कहा है कि विकास के साथ-साथ हमारी विरासत का भी संरक्षण आवश्यक है। मुझे विश्वास है कि पूरे देश में लोगों की सक्रिय भागीदारी 2047 तक विकसित भारत के विज़न को साकार करने में हमारी साझा प्रतिबद्धता को मजबूत करेगी।"

इस सामूहिक गायन ने एकता और राष्ट्रीय भावना का प्रतीक प्रस्तुत किया और वन्दे मातरम् के सांस्कृतिक और भावनात्मक महत्व को उजागर किया।

गायन समारोह के पश्चात प्रतिभागियों ने कौटिल्य कॉन्फ्रेंस हॉल में संस्कृति मंत्रालय द्वारा तैयार विशेष प्रस्तुति देखी, जिसमें वन्दे मातरम् की इतिहासिक यात्रा और विरासत को दर्शाया गया। कार्यक्रम का समापन प्रधानमंत्री के संबोधन के लाइव प्रसारण के साथ हुआ, जिसने देशव्यापी आयोजन का औपचारिक शुभारंभ किया। इस अवसर पर विशेष अभियान वेबसाइट https://vandemataram150.in/ भी लॉन्च की गई।

वन्दे मातरम् ने दशकों में आनंदमठ में साहित्यिक रूप से प्रकट होने से लेकर राष्ट्रीय जागृति की एक शक्तिशाली अभिव्यक्ति के रूप में विकास किया। जैसे-जैसे भारत में सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक परिवर्तन हुए, यह गीत मातृभूमि को शक्ति, समृद्धि और दिव्यता का प्रतीक मानते हुए लोगों में गहरी छाप छोड़ गया। एकता और आत्म-सम्मान का संदेश इसने स्वतंत्रता आंदोलन में व्यापक भागीदारी को प्रेरित किया और यह आज भी राष्ट्र की सामूहिक स्मृति और सार्वजनिक जीवन में अपनी स्थायी जगह बनाए हुए है।

आयुष मंत्रालय की इस पहल ने राष्ट्रीय सांस्कृतिक आयोजनों में सक्रिय भागीदारी और देशभक्ति की साझा अभिव्यक्ति को बढ़ावा देने में इसके योगदान को रेखांकित किया। इस कार्यक्रम ने मंत्रालय के कर्मचारियों को राष्ट्र के सबसे प्रिय प्रतीकों में से एक को सम्मानित करने का एक सार्थक अवसर प्रदान किया।


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