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गणतंत्र दिवस परेड 2026 में संस्कृति मंत्रालय को दोहरा सम्मान, ‘वंदे मातरम्’ झांकी और सांस्कृतिक प्रस्तुति को पुरस्कार

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संस्कृति मंत्रालय ने गणतंत्र दिवस परेड 2026 में एक महत्वपूर्ण दोहरी उपलब्धि हासिल की। मंत्रालय की झांकी “वंदे मातरम् – 150 वर्षों की यात्रा” को केंद्रीय मंत्रालयों एवं विभागों की श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ झांकी का प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया, जबकि इसकी भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुति “वंदे मातरम्: भारत की शाश्वत गूंज” को अपनी असाधारण कलात्मक एवं विषयगत उत्कृष्टता के लिए विशेष पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

पुरस्कार विजेता झांकी ने ‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षों की यात्रा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया, जिसमें इसके राष्ट्रीय चेतना के गीत के रूप में उद्भव और भारत के स्वतंत्रता संग्राम, राष्ट्रीय एकता तथा सभ्यतागत चेतना को आकार देने में इसकी सतत भूमिका को दर्शाया गया। सशक्त दृश्यांकन और प्रतीकात्मक प्रस्तुति के माध्यम से झांकी ने राष्ट्रीय गीत की भारतीय सामूहिक पहचान में उसकी कालातीत प्रासंगिकता को रेखांकित किया।

विशेष पुरस्कार से सम्मानित सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुति “वंदे मातरम् – भारत की शाश्वत गूंज” का संयोजन संगीत नाटक अकादमी द्वारा उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, पटियाला के सहयोग से किया गया। यह प्रस्तुति राष्ट्रऋषि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की उस अमर रचना को नमन करती है, जो भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की आवाज बनी। इस भव्य प्रदर्शन में देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आए लगभग 2,500 कलाकारों ने भाग लिया और शास्त्रीय, लोक तथा जनजातीय कला रूपों के माध्यम से भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता का सजीव प्रदर्शन किया।

कोरियोग्राफी के माध्यम से भारत की शाश्वत यात्रा को उसकी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जड़ों से लेकर स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान तथा सशस्त्र बलों के शौर्य और समर्पण तक प्रभावी रूप से उकेरा गया। संस्कृत मंत्रों, भावपूर्ण संगीत और गतिशील संरचनाओं से सजी इस प्रस्तुति ने ‘वंदे मातरम्’ की संपूर्ण भावनात्मक और दार्शनिक यात्रा को अभिव्यक्त किया, जिसका समापन तिरंगे को समर्पित एक सशक्त श्रद्धांजलि के साथ हुआ—जो एकता, भक्ति और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है।

इस सांस्कृतिक प्रस्तुति का समग्र रचनात्मक निर्देशन संगीत नाटक अकादमी की अध्यक्ष डॉ. संध्या पुरेचा ने किया। संगीत निर्देशन ऑस्कर पुरस्कार विजेता संगीतकार एम. एम. कीरावानी द्वारा किया गया, जबकि अतिरिक्त गीत सुभाष सहगल ने लिखे। वॉयस-ओवर राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेता अनुपम खेर ने दिया, कोरियोग्राफी संतोष नायर द्वारा की गई तथा परिधान परिकल्पना संध्या रमन ने की।


वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष: राजीव चौक में भारतीय वायु सेना बैंड की देशभक्ति से ओतप्रोत प्रस्तुति

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 भारत देश अपने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव पूरे देश में बड़े उत्साह के साथ मना रहा है। इस अवसर पर सामूहिक गायन, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सैन्य बैंड प्रस्तुतियों का आयोजन देश के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर किया जा रहा है। इन आयोजनों का उद्देश्य नागरिकों में राष्ट्रीय गौरव, एकता और देशभक्ति की भावना को सुदृढ़ करना है।

इन्हीं समारोहों के अंतर्गत 21 जनवरी 2026 को नई दिल्ली के राजीव चौक स्थित एम्फीथिएटर में भारतीय वायु सेना (IAF) बैंड द्वारा एक भव्य संगीतमय प्रस्तुति दी गई। 31 संगीतकारों से युक्त इस बैंड ने लगभग 45 मिनट की प्रस्तुति में ब्रास, रीड, स्ट्रिंग और इलेक्ट्रॉनिक वाद्ययंत्रों के संयोजन से 11 मनमोहक धुनें प्रस्तुत कीं। कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षणों में ‘वंदे मातरम्’ की भावपूर्ण प्रस्तुति तथा ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों के पराक्रम को समर्पित गीत ‘सिंदूर’ शामिल रहे।

सदियों से संगीत भारतीय संस्कृति का एक अमूल्य रत्न रहा है और यह भारत की समृद्ध सैन्य परंपरा का भी अभिन्न अंग है, जो एकता को प्रोत्साहित करता है और वीरता की प्रेरणा देता है। वर्ष 1944 में स्थापना के बाद से भारतीय वायु सेना बैंड, भारतीय और पाश्चात्य संगीत के अपने विविध संग्रह के माध्यम से देश की सैन्य परंपराओं का सशक्त प्रतीक बना हुआ है।

भारतीय वायु सेना बैंड का उद्देश्य अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों के माध्यम से देशवासियों में देशभक्ति की भावना को जागृत करना और राष्ट्रीय एकता के संदेश को जन-जन तक पहुँचाना है।


पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन, राष्ट्रगीत के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव

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केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने आज राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित स्मरणोत्सव के द्वितीय चरण के अंतर्गत वंदे मातरम् का सामूहिक गायन आयोजित किया। यह द्वितीय चरण 19 जनवरी 2026 से 26 जनवरी 2026 तक मनाया जा रहा है।


कार्यक्रम का नेतृत्व मंत्रालय के सचिव तनय कुमार ने किया। इस अवसर पर मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी इंदिरा पर्यावरण भवन, नई दिल्ली स्थित मंत्रालय परिसर में एकत्रित हुए और भावपूर्ण स्वर में राष्ट्रगीत का सामूहिक गायन किया। इस आयोजन की गूंज पूरे परिसर में देशभक्ति का वातावरण लेकर आई। मंत्रालय के विभिन्न क्षेत्रीय कार्यालयों में भी इसी प्रकार के सामूहिक गायन कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

इस अवसर पर उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने उन कालजयी पंक्तियों के प्रति सामूहिक श्रद्धा व्यक्त की, जिन्होंने पिछले 150 वर्षों से पीढ़ियों को प्रेरित किया है।

यह आयोजन भारत सरकार द्वारा अनुमोदित उस व्यापक राष्ट्रव्यापी स्मरणोत्सव कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसके तहत राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया जा रहा है।


लोकसभा में ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पर प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन: राष्ट्रगान की प्रेरणा और इतिहास के गौरवशाली पलों का स्मरण

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लोकसभा में आज ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित विशेष चर्चा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संबोधित किया। उन्होंने इस ऐतिहासिक अवसर पर सभी सांसदों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वंदे मातरम् सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि वह मंत्र है जिसने स्वतंत्रता आंदोलन में देश को ऊर्जा, प्रेरणा और त्याग का मार्ग दिखाया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह हमारे लिए गौरव का विषय है कि वंदे मातरम् के 150 वर्ष हम अपनी आंखों के सामने पूरे होते देख रहे हैं। उन्होंने इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सीख और प्रेरणा का अवसर बताया।

इतिहास के महत्वपूर्ण पड़ावों का स्मरण

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस कालखंड में देश ने कई ऐतिहासिक अवसरों का अनुभव किया—

  • संविधान के 75 वर्ष,

  • सरदार पटेल व भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती,

  • गुरु तेग बहादुर जी की 350वीं शहीदी वर्षगांठ।

उन्होंने कहा कि आज वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर सदन सामूहिक ऊर्जा का अनुभव कर रहा है।

वंदे मातरम् का जन्म और उसका प्रभाव

मोदी ने बताया कि वंदे मातरम् की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1875 में की थी, जब 1857 के विद्रोह के बाद अंग्रेजी शासन भारतीयों पर अत्याचार बढ़ा रहा था। इसी वातावरण में बंकिम दा ने ‘वंदे मातरम्’ के रूप में अंग्रेजों को चुनौती दी।

उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् ने भारत की सहस्रों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक परंपरा को नए शब्दों में जागृत किया। यह केवल राजनीतिक स्वतंत्रता का गीत नहीं था, बल्कि मां भारती को बंधनों से मुक्त कराने का पुकार था।

स्वतंत्रता आंदोलन में वंदे मातरम् की गूंज

प्रधानमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम् ने हर दिशा में आंदोलन को ऊर्जा दी—

  • बंगाल विभाजन (1905) के विरोध में यह बुलंद आवाज बना

  • स्वदेशी आंदोलन में यह प्रेरणा बना

  • लाखों लोगों ने जेल, यातना और यहां तक कि फांसी पर जाते हुए भी "वंदे मातरम्" कहा

उन्होंने खूदीराम बोस, रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाकुल्ला खान, राजेंद्रनाथ लाहिड़ी आदि महान शहीदों का स्मरण किया।

महात्मा गांधी और विश्व में वंदे मातरम्

प्रधानमंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी ने भी 1905 में लिखा था कि वंदे मातरम् लगभग राष्ट्रीय गान जैसा है। वह इसे सबसे मधुर और राष्ट्रभक्ति से परिपूर्ण गीत मानते थे।

उन्होंने कहा कि विदेशों में भी क्रांतिकारियों ने इसे अपनाया—

  • वीर सावरकर के घर ‘इंडिया हाउस’ में इसकी गूंज

  • भिखाजी कामा द्वारा ‘वंदे मातरम्’ नाम से अखबार प्रकाशित करना

  • बिपिनचंद्र पाल और अरविंदो द्वारा उसी नाम का समाचार पत्र निकालना

राजनीतिक विरोध और अन्याय पर प्रधानमंत्री का टिप्पणी

प्रधानमंत्री ने कहा कि 1937 में मुस्लिम लीग के विरोध के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने वंदे मातरम् पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि appeasement राजनीति के कारण उस समय वंदे मातरम् के साथ अन्याय हुआ, जिसके बारे में युवा पीढ़ी को जानना जरूरी है।

आज के भारत में वंदे मातरम् की प्रेरणा

प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद भी—

  • संकटों के समय,

  • युद्धों के दौरान,

  • आपातकाल के विरोध में,

  • कोविड-19 के दौरान—

वंदे मातरम् की भावना भारत को मजबूती देती रही।

उन्होंने कहा कि यह केवल स्मरण का क्षण नहीं, बल्कि नए संकल्प और ऊर्जा प्राप्त करने का अवसर है।

2047 तक विकसित भारत के संकल्प का आह्वान

प्रधानमंत्री ने कहा कि जैसे वंदे मातरम् ने स्वतंत्र भारत के सपने को ऊर्जा दी, वैसे ही यह विकसित भारत 2047 के संकल्प को भी शक्ति देगा।

अंत में उन्होंने कहा,

“वंदे मातरम् वह मंत्र है जो हमें कर्तव्य की याद दिलाता है, जो हमें एकता के सूत्र में बांधता है, और जो हमें आत्मनिर्भर व विकसित भारत के सपने को साकार करने की प्रेरणा देता है।”

उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह चर्चा नए भारत को नई ऊर्जा देगी और युवा पीढ़ी को प्रेरित करेगी।

https://twitter.com/i/broadcasts/1jMKgREdjqqxL

वंदे मातरम के 150 वर्ष: राष्ट्रीय उत्सव में देशभक्ति और एकता का भव्य उद्घोष

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वंदे मातरम के 150 वर्ष एक राष्ट्रीय स्मृति-उद्यम है, जिसका उद्देश्य वंदे मातरम की भावना और भारत के इतिहास में इसकी अनूठी भूमिका का उत्सव मनाना है। वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं है; यह भारत की सामूहिक चेतना है और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह देशभक्ति और संघर्ष का उद्घोष बनकर उभरा था।

1 अक्टूबर को मंत्रिमंडल ने ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ का देशव्यापी उत्सव आयोजित करने को मंजूरी दी। इसका उद्देश्य नागरिकों, विशेषकर युवाओं और छात्रों को गीत की मूल क्रांतिकारी भावना से जोड़ना है। इन उत्सवों के माध्यम से इस अमर संदेश को सम्मानित किया जाएगा और सुनिश्चित किया जाएगा कि इसकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के हृदय में सदा जीवित रहे।

बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित वंदे मातरम पहली बार उनके प्रसिद्ध उपन्यास आनंदमठ में प्रकाशित हुआ था, जो बंगाली साहित्यिक पत्रिका बंगदर्शन में धारावाहिक रूप में छापा गया था। समय के साथ यह भारत के स्वतंत्रता संघर्ष का ब्रह्मनाद बन गया। मातृभूमि को दिव्य स्वरूप में वंदित करने वाला यह गीत प्रकृति और राष्ट्र दोनों को एक सूत्र में पिरोता है, जिसने पीढ़ियों तक भारतीयों को एक भावनात्मक और सांस्कृतिक पहचान दी।

वंदे मातरम के 150 वर्ष—राष्ट्रीय स्मृति समारोह का उद्घाटन

‘150 वर्ष वंदे मातरम’ के स्मारक समारोह का शुभारंभ प्रधानमंत्री द्वारा दिल्ली में एक भव्य राष्ट्रीय कार्यक्रम के साथ हुआ। इस अवसर पर प्रमुख कलाकारों, युवा प्रतिनिधियों तथा समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम में एक विशेष स्मारक सिक्का और डाक टिकट भी जारी किया गया।


वंदे मातरम कॉन्सर्ट — ‘नाद एकम्, रूपम् अनेकम्’

वंदे मातरम: नाद एकम्, रूपम् अनेकम् एक सांस्कृतिक प्रस्तुति थी जिसमें देशभर के गायक और वादक एकत्र होकर राष्ट्रीय गीत की मनमोहक प्रस्तुति में सहभागी हुए। यह कार्यक्रम भारत की एकता में विविधता की भावना का सुंदर प्रतीक था और संगीत के माध्यम से गर्व, एकता और देशभक्ति का प्रेरक संदेश देता है। यह उस अमर गीत को एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि थी, जो हर भारतीय के हृदय में गूँजता है।

वंदे मातरम का सामूहिक गायन

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण प्रधानमंत्री के नेतृत्व में वंदे मातरम के पूर्ण स्वरूप का ऐतिहासिक सामूहिक गायन था। इसी समय देशभर में मुख्यमंत्री, राज्यपाल, उपराज्यपाल, स्कूली और कॉलेज के छात्र, अधिकारी और नागरिकों ने भी सामूहिक गायन में भाग लिया। यह राष्ट्रगीत की कालातीत ऊर्जा को समर्पित एक अभूतपूर्व आयोजन था जिसने देशभर में एकता और देशभक्ति की भावना का संचार किया।

36 राज्यों और 653 जिलों में वंदे मातरम कार्यक्रम

इस अभियान के अंतर्गत वंदे मातरम पर आधारित कार्यक्रमों को व्यापक जनसमर्थन मिला है। अब तक 39,783 से अधिक आयोजन अभियान वेबसाइट पर अपलोड किए जा चुके हैं।
ये कार्यक्रम 36 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और 653 जिलों में आयोजित किए गए हैं।

भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालय और विभाग भी वंदे मातरम के 150 वर्षों का उत्सव मना रहे हैं। 52 मंत्रालयों ने अपने आयोजन अभियान वेबसाइट पर साझा किए हैं।

विश्वभर में भारतीय मिशनों द्वारा आयोजन

दुनिया के विभिन्न देशों में भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास स्थानीय समुदाय और भारतीय प्रवासी जनसमुदाय के साथ मिलकर सामूहिक वंदे मातरम गायन आयोजित कर रहे हैं।

स्कूलों और कॉलेजों में कार्यक्रम

देशभर के स्कूल और कॉलेज भी इस सामूहिक वंदे मातरम आंदोलन से जुड़े हुए हैं।
अब तक:

  • 11,632 स्कूल

  • 554 कॉलेज

वंदे मातरम आधारित कार्यक्रम आयोजित कर चुके हैं।

कई शिक्षण संस्थानों के छात्र और शिक्षकों ने 7 नवंबर 2025 को दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम को सीधे प्रसारण के माध्यम से देखा।

1.25 करोड़ भारतीयों ने रिकॉर्ड किया अपना वंदे मातरम

1.25 करोड़ से अधिक भारतीय अब तक वंदे मातरम का अपना संस्करण रिकॉर्ड कर चुके हैं।

आप भी वंदे मातरम गीत सुनें और अपना संस्करण यहाँ अपलोड करें:


वित्त और न्याय विभाग ने ‘वन्दे मातरम्’ के 150 वर्षों के अवसर पर आयोजित सामूहिक गायन कार्यक्रम में दी श्रद्धांजलि

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कानूनी मामलों का विभाग, कानून और न्याय मंत्रालय, भारत सरकार ने 7 नवंबर 2025 को देशव्यापी आयोजन के तहत ‘वन्दे मातरम्’ का सामूहिक गायन आयोजित किया, जिसमें शाखा सचिवालय और संलग्न कार्यालयों के अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल हुए। यह कार्यक्रम भारत के राष्ट्रीय गीत के 150 वर्षों की स्मृति में आयोजित किया गया।

शास्त्री भवन में सुबह का आरंभ वन्दे मातरम् के इतिहास और विरासत पर संक्षिप्त विचार के साथ हुआ। इस गीत ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम को आवाज दी और आज भी इसके एकता और शक्ति के संदेश से नई पीढ़ियों को प्रेरित करता है। विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने 10:00 बजे सुबह एक साथ गीत का सामूहिक गायन किया, जिसमें patriotism की भावनाएँ झलक रही थीं।

इस अवसर पर लॉ सेक्रेटरी डॉ. अंजू राठी राणा ने एक विशेष संदेश दिया। उन्होंने कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी करने वाले सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रेरित किया कि वे सांझा उद्देश्य, अखंडता और सद्भावना के उन मूल्यों को बनाए रखें, जिनका प्रतीक वन्दे मातरम् है।

यह समारोह उस गीत को सांस्कृतिक और राष्ट्रीय चेतना का अभिन्न हिस्सा मानते हुए उसे श्रद्धांजलि देने का एक सार्थक प्रयास था। इस कार्यक्रम के माध्यम से विभाग ने भारत की सांस्कृतिक पहचान को सम्मानित करने और सार्वजनिक सेवा में विविधता को अपनाते हुए सामूहिक भावना को मजबूत करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः प्रदर्शित किया।



आयुष मंत्रालय ने ‘वन्दे मातरम्’ के 150 वर्षों का उत्सव मनाते हुए आयोजित सामूहिक गायन कार्यक्रम में दी श्रद्धांजलि

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आयुष मंत्रालय ने आज भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वन्दे मातरम्’ के 150 वर्षों के अवसर पर आयुष भवन के केंद्रीय आँगन में एक सामूहिक गायन कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम संस्कृति मंत्रालय की देशव्यापी पहल के अनुरूप आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य इस ऐतिहासिक मील के पत्थर को चिन्हित करना था।

इस अवसर पर प्रतापराव जाधव, केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) आयुष एवं राज्य मंत्री, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, भारत सरकार, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ मिलकर वन्दे मातरम् गीत का सामूहिक गायन किया।

अपने संबोधन में मंत्री ने कहा:

"वन्दे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाते हुए हम उस गीत का सम्मान कर रहे हैं, जो राष्ट्रीय जागृति का प्रतीक और ब्रिटिश शासन के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम का प्रेरक उद्घोष बन गया। यह देशभक्ति की भावना, जिसने 1857 की क्रांति के दौरान भारत में पहली बार आग भड़काई थी, वन्दे मातरम् में स्पष्ट रूप से झलकती है। इसके हर शब्द में हमारे देशवासियों के मातृभूमि के प्रति गहरे प्रेम और भक्ति का प्रतिबिंब मिलता है। जैसा कि हम इसे पूरे देश में समूह गायन, सभाओं, सेमिनार और विशेष सत्रों के माध्यम से मनाते हैं, हम यह दोहराते हैं कि भारत की प्रगति हमारे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण के साथ ही संभव है। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा यह कहा है कि विकास के साथ-साथ हमारी विरासत का भी संरक्षण आवश्यक है। मुझे विश्वास है कि पूरे देश में लोगों की सक्रिय भागीदारी 2047 तक विकसित भारत के विज़न को साकार करने में हमारी साझा प्रतिबद्धता को मजबूत करेगी।"

इस सामूहिक गायन ने एकता और राष्ट्रीय भावना का प्रतीक प्रस्तुत किया और वन्दे मातरम् के सांस्कृतिक और भावनात्मक महत्व को उजागर किया।

गायन समारोह के पश्चात प्रतिभागियों ने कौटिल्य कॉन्फ्रेंस हॉल में संस्कृति मंत्रालय द्वारा तैयार विशेष प्रस्तुति देखी, जिसमें वन्दे मातरम् की इतिहासिक यात्रा और विरासत को दर्शाया गया। कार्यक्रम का समापन प्रधानमंत्री के संबोधन के लाइव प्रसारण के साथ हुआ, जिसने देशव्यापी आयोजन का औपचारिक शुभारंभ किया। इस अवसर पर विशेष अभियान वेबसाइट https://vandemataram150.in/ भी लॉन्च की गई।

वन्दे मातरम् ने दशकों में आनंदमठ में साहित्यिक रूप से प्रकट होने से लेकर राष्ट्रीय जागृति की एक शक्तिशाली अभिव्यक्ति के रूप में विकास किया। जैसे-जैसे भारत में सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक परिवर्तन हुए, यह गीत मातृभूमि को शक्ति, समृद्धि और दिव्यता का प्रतीक मानते हुए लोगों में गहरी छाप छोड़ गया। एकता और आत्म-सम्मान का संदेश इसने स्वतंत्रता आंदोलन में व्यापक भागीदारी को प्रेरित किया और यह आज भी राष्ट्र की सामूहिक स्मृति और सार्वजनिक जीवन में अपनी स्थायी जगह बनाए हुए है।

आयुष मंत्रालय की इस पहल ने राष्ट्रीय सांस्कृतिक आयोजनों में सक्रिय भागीदारी और देशभक्ति की साझा अभिव्यक्ति को बढ़ावा देने में इसके योगदान को रेखांकित किया। इस कार्यक्रम ने मंत्रालय के कर्मचारियों को राष्ट्र के सबसे प्रिय प्रतीकों में से एक को सम्मानित करने का एक सार्थक अवसर प्रदान किया।


प्रधानमंत्री मोदी 7 नवंबर को ‘वन्दे मातरम्’ के 150 वर्षों के समारोह का करेंगे उद्घाटन

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 7 नवंबर 2025 को सुबह लगभग 9:30 बजे इंदिरा गांधी इनडोर स्टेडियम, नई दिल्ली में राष्ट्रीय गीत “वन्दे मातरम्” के साल भर चलने वाले समारोह का उद्घाटन करेंगे।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री स्मारक डाक टिकट और सिक्का भी जारी करेंगे। यह कार्यक्रम 7 नवंबर 2025 से 7 नवंबर 2026 तक पूरे देश में आयोजित होने वाले समारोह की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक है, जो इस कालजयी रचना के 150 वर्षों का उत्सव मनाएगा। “वन्दे मातरम्” ने भारत की स्वतंत्रता संग्राम में प्रेरणा दी और आज भी राष्ट्रीय गर्व और एकता की भावना को उजागर करता है।

इस समारोह में सुबह लगभग 9:50 बजे पूरे देश के सार्वजनिक स्थलों पर “वन्दे मातरम्” के पूर्ण संस्करण का सामूहिक गायन आयोजित किया जाएगा, जिसमें समाज के सभी वर्गों के नागरिक भाग लेंगे।

वर्ष 2025 में “वन्दे मातरम्” की 150वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। यह गीत बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा लिखा गया था और यह अक्षय नवमी, 7 नवंबर 1875 के अवसर पर रचित हुआ। “वन्दे मातरम्” पहली बार उनके उपन्यास आनंदमठ के हिस्से के रूप में साहित्यिक पत्रिका बंगादर्शन में प्रकाशित हुआ। इस गीत में मातृभूमि को शक्ति, समृद्धि और दिव्यता का प्रतीक बताया गया है और इसने भारत के जागृत राष्ट्रभाव और आत्म-सम्मान की भावना को काव्यात्मक रूप में व्यक्त किया। जल्दी ही यह गीत देशभक्ति का एक स्थायी प्रतीक बन गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 7 नवंबर को नई दिल्ली में “वंदे मातरम्” के 150 वर्ष स्मरण समारोह में मुख्य अतिथि होंगे

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नई दिल्ली-संस्कृति मंत्रालय 7 नवंबर 2025 को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम्” के 150 वर्षों के स्मरण समारोह का उद्घाटन करेगा। इस अवसर पर माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे। यह आयोजन 7 नवंबर 2025 से 7 नवंबर 2026 तक पूरे देश में 150 वर्षों की इस अमर रचना के सम्मान में चलने वाले वर्ष-भर के कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ होगा।

वर्ष 2025 में “वंदे मातरम्” के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं। यह राष्ट्रीय गीत बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित माना जाता है और इसे 7 नवंबर 1875 के अक्षय नवमी के अवसर पर लिखा गया था। “वंदे मातरम्” सर्वप्रथम साहित्यिक पत्रिका बंगादर्शन में उनके उपन्यास आनंदमठ में धारावाहिक रूप में प्रकाशित हुआ और बाद में 1882 में एक स्वतंत्र पुस्तक के रूप में सामने आया। उस समय भारत सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक बदलाव के दौर से गुजर रहा था, और राष्ट्रीय पहचान व औपनिवेशिक शोषण के खिलाफ जागरूकता बढ़ रही थी।

इस गीत ने मातृभूमि को शक्ति, समृद्धि और दिव्यता का प्रतीक मानते हुए भारत के जाग्रत आत्म-सम्मान और एकता की भावना को काव्यात्मक रूप में प्रस्तुत किया। स्वतंत्रता संग्राम में इसका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा और 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इसे राष्ट्रीय गीत के रूप में “जन गण मन” के समान सम्मान प्रदान किया।

समारोह की मुख्य विशेषताएँ:

  • मुख्य अतिथि के आगमन से पहले सांस्कृतिक कार्यक्रम।

  • “वंदे मातरम्” के 150 वर्षों के इतिहास पर प्रदर्शनी।

  • भारत माता को पुष्प अर्पण।

  • Vande Mataram: Naad Ekam, Roopam Anekam: सांस्कृतिक मंच पर लगभग 75 संगीतकारों द्वारा प्रस्तुत संगीत समारोह, जिसका संचालन अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वायोलिन मास्ट्रो डॉ. मंजुनाथ मैसूर करेंगे।

  • “150 Years of Vande Mataram” लघु वृत्तचित्र का प्रदर्शन।

  • स्मारक स्टैम्प और सिक्का का विमोचन।

  • गणमान्य व्यक्तियों और अतिथियों के संबोधन।

  • मुख्य अतिथि का मुख्य भाषण।

  • सभी नागरिकों, विद्यार्थियों, सरकारी कर्मियों, पुलिस, डॉक्टर, शिक्षक, दुकानदार और अन्य समुदायों के लोगों के साथ सामूहिक गायन।

देशभर में सामूहिक गायन:

सभी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश, केंद्रीय मंत्रालय/विभाग और उनके अधीनस्थ कार्यालय 7 नवंबर 2025 को सुबह 10 बजे अपने कार्यालय परिसर में सामूहिक “वंदे मातरम्” का आयोजन करेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री के संबोधन का लाइव प्रसारण भी आयोजित किया जाएगा।

सक्रिय सहभागिता के लिए डिजिटल पहल:

संस्कृति मंत्रालय ने एक समर्पित अभियान वेबसाइट https://vandemataram150.in/ लॉन्च की है, जिसमें निम्नलिखित सुविधाएँ उपलब्ध होंगी:

  • अनुमोदित ब्रांडिंग सामग्री (बैनर, होर्डिंग, वेब क्रिएटिव)।

  • लघु फिल्म और curated exhibition।

  • सामूहिक गायन के लिए पूरे गीत का ऑडियो और शब्द।

  • “Vande Mataram Karaoke”: नागरिक अपने स्वर में गीत रिकॉर्ड और अपलोड कर सकेंगे।

सभी नागरिकों से आह्वान किया गया है कि वे इस अवसर पर बड़े पैमाने पर भाग लें और अपने राष्ट्रीय गीत के प्रति देशभक्ति, सम्मान और गर्व व्यक्त करें।


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