Media24Media.com: डाक विभाग और TRIFED की साझेदारी से आदिवासी उत्पादों को मिलेगा नया बाजार

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डाक विभाग और TRIFED की साझेदारी से आदिवासी उत्पादों को मिलेगा नया बाजार

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आदिवासी कारीगरों को सशक्त बनाने और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, संचार मंत्रालय के अंतर्गत डाक विभाग (DoP) ने जनजातीय कार्य मंत्रालय के अधीन भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ (TRIFED) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

इस साझेदारी का उद्देश्य TRIFED के ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, विशेषकर Tribes India ई-मार्केटप्लेस, के माध्यम से बेचे जाने वाले उत्पादों की डिलीवरी के लिए एक मजबूत, विश्वसनीय और किफायती लॉजिस्टिक्स ढांचा तैयार करना है।

इस MoU के तहत डाक विभाग TRIFED के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से प्राप्त सभी ऑर्डर्स के लिए एंड-टू-एंड लॉजिस्टिक्स समाधान प्रदान करेगा। अपने व्यापक राष्ट्रीय नेटवर्क और अंतिम छोर (last-mile) तक पहुंच का उपयोग करते हुए, डाक विभाग देशभर में आदिवासी उत्पादों की सुचारु पिकअप, ट्रांसमिशन और डिलीवरी सुनिश्चित करेगा।

यह सहयोग आदिवासी कारीगरों और उद्यमियों के लिए बाजार तक पहुंच को मजबूत करने, ऑर्डर पूर्ति को बेहतर बनाने और ग्राहक अनुभव को बढ़ाने में सहायक होगा। डाक विभाग शिपमेंट ट्रैकिंग, नियमित MIS रिपोर्टिंग और TRIFED के डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ API इंटीग्रेशन जैसी सुविधाएं भी प्रदान करेगा, जिससे लॉजिस्टिक्स प्रबंधन सुगम होगा।

इस व्यवस्था के तहत TRIFED के लिए नेशनल अकाउंट फैसिलिटी के अंतर्गत Book Now Pay Later (BNPL) खाता भी बनाया जाएगा, जिससे स्पीड पोस्ट के माध्यम से शिपमेंट बुकिंग और भुगतान प्रक्रिया सरल हो जाएगी।

TRIFED अपनी ओर से उचित पैकेजिंग, लेबलिंग और ऑर्डर से संबंधित जानकारी साझा करना सुनिश्चित करेगा, ताकि लॉजिस्टिक्स संचालन प्रभावी रूप से हो सके। यह पहल देशभर के विभिन्न क्षेत्रीय कार्यालयों से पिकअप को कवर करेगी, जिससे व्यापक भौगोलिक पहुंच सुनिश्चित होगी।

यह साझेदारी सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसके तहत आदिवासी आजीविका को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ा जा रहा है। बेहतर लॉजिस्टिक्स समर्थन के माध्यम से यह पहल आदिवासी समुदायों की आय बढ़ाने, उनके उत्पादों की पहुंच का विस्तार करने और समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में सहायक होगी।

यह समझौता प्रारंभिक रूप से दो वर्षों के लिए मान्य होगा, जिसे आपसी सहमति से आगे बढ़ाया जा सकता है।

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