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सरकारी योजना से बदली जिंदगीः मड़कम देवा ने झींगा पालन से लिखी सफलता की नई कहानी

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एक साल में 5 लाख रूपए की कमाई, दूर-दूर से खरीदने पहुंच रहे ग्राहक

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए खेती के साथ-साथ मत्स्य पालन, दुग्ध उत्पादन और उद्यानिकी जैसे आयवर्धक व्यवसायों को लगातार बढ़ावा दे रही है।

छत्तीसगढ के सुकमा जिले के दुब्बाटोटा गांव के किसान मड़कम देवा इसकी प्रेरक मिसाल बनकर उभरे हैं। शासकीय योजनाओं का लाभ लेकर उन्होंने झींगा और मछली पालन शुरू किया और आज आत्मनिर्भर बन चुके हैं।

सरकारी सहायता से मिली नई शुरुआत

मड़कम देवा ने मत्स्य पालन विभाग की योजना के तहत तालाब निर्माण के लिए 7.20 लाख रूपए का ऋण प्राप्त किया, जिसमें 4.20 लाख रुपये का अनुदान शामिल था। इसके अलावा क्रेड़ा विभाग से अनुदान पर सोलर पंप मिलने से उन्हें 24 घंटे सिंचाई और तालाब में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हुई। इससे उनका व्यवसाय शुरू करना आसान हो गया।

प्रशिक्षण और मेहनत ने दिलाई बड़ी सफलता

मड़कम देवा ने कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विभाग से आधुनिक मत्स्य पालन का प्रशिक्षण लिया। वैज्ञानिक तरीके से झींगा और मछली पालन करने का परिणाम यह रहा कि इस वर्ष जून माह में उन्होंने लगभग 2.50 क्विंटल झींगा और 15 क्विंटल मछली का उत्पादन कर करीब 5 लाख रूपए की आय अर्जित की।

उनके झींगा और मछली की गुणवत्ता इतनी अच्छी है कि आसपास ही नहीं, दूर-दूर से लोग दुब्बाटोटा पहुंचकर खरीदारी करते हैं।

रायपुर में हुआ सम्मान

झींगा पालन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए विश्व पशु चिकित्सा दिवस के अवसर पर रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने मड़कम देवा को सम्मानित किया। यह सम्मान उनकी मेहनत और शासकीय योजनाओं के प्रभावी उपयोग का प्रमाण है।

अन्य किसानों के लिए बने प्रेरणा स्रोत

कलेक्टर अमित कुमार ने कहा कि सुकमा में मीठे पानी के झींगा पालन की अपार संभावनाएं हैं। मड़कम देवा जैसे किसान आज जिले के युवाओं और किसानों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। जिला प्रशासन का प्रयास है कि अधिक से अधिक किसान पारंपरिक खेती के साथ मत्स्य और झींगा पालन जैसे लाभकारी व्यवसायों से जुड़कर अपनी आय बढ़ाएं।

आत्मनिर्भर गांव की ओर बढ़ता कदम

झींगा और मछली पालन कम भूमि और कम लागत में शुरू होने वाला लाभकारी व्यवसाय है। इससे ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी मिल रहे हैं। राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेकर आज अनेक किसान आत्मनिर्भर बन रहे हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है। मड़कम देवा की सफलता इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन, सरकारी सहयोग और मेहनत से ग्रामीण क्षेत्रों में भी समृद्धि की नई इबारत लिखी जा सकती है।

अरुणाचल प्रदेश और असम के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का आज जमीनी एवं हवाई दौरा करेंगे केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान

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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान सोमवार को अरुणाचल प्रदेश पहुंचे, लेकिन खराब मौसम के कारण निर्धारित हवाई सर्वे नहीं कर सके। अब वे 1 जुलाई को अरुणाचल प्रदेश और असम के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का पूरे दिन जमीनी और हवाई निरीक्षण करेंगे। इस दौरान वे प्रभावित किसानों और परिवारों की स्थिति का जायजा लेंगे, नुकसान का प्रत्यक्ष आकलन करेंगे तथा तत्काल राहत और दीर्घकालिक सहायता के उपायों की समीक्षा करेंगे। इस दौरे में केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्रीकिरेन रिजिजू और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू भी उनके साथ रहेंगे।

सोमवार दोपहर अरुणाचल प्रदेश पहुंचने के बाद चौहान ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के स्थानीय लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने कहा कि खराब मौसम के कारण हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर सका, लेकिन इससे सरकार का संकल्प कमजोर नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा, "आज मौसम ने हेलीकॉप्टर को उड़ने से रोक दिया, लेकिन हमारी प्रतिबद्धता को नहीं रोक सकता। कल हम पूरे दिन अरुणाचल प्रदेश और असम के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जमीन और हवाई दोनों माध्यमों से स्थिति का आकलन करेंगे, ताकि हर प्रभावित किसान और हर प्रभावित परिवार तक आवश्यक सहायता पहुंचाई जा सके।"

दिल्ली से ईटानगर पहुंचने के बाद चौहान ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों और जनप्रतिनिधियों से बातचीत की। लोगों ने बताया कि बाढ़ के पानी ने कृषि भूमि डुबो दी है, खड़ी फसलें नष्ट हो गई हैं, घरों को नुकसान पहुंचा है और आजीविका प्रभावित हुई है। मंत्री ने सभी की बातें ध्यानपूर्वक सुनीं और आश्वासन दिया कि राहत एवं पुनर्वास कार्यों में किसी भी प्रभावित परिवार को पीछे नहीं छोड़ा जाएगा।

इसके बाद ईटानगर सचिवालय में अरुणाचल प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में उन्होंने बाढ़ की स्थिति, राहत सामग्री की उपलब्धता एवं वितरण, पुनर्वास कार्यों तथा आगे की रणनीति पर चर्चा की। उन्होंने अधिकारियों को आश्वस्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।

चौहान ने बताया कि मंगलवार सुबह से वे अरुणाचल प्रदेश के बाढ़ प्रभावित गांवों और राहत शिविरों का दौरा करेंगे। वे किसानों से मिलकर कृषि भूमि, पशुधन और बाढ़ से जनजीवन पर पड़े प्रभाव का प्रत्यक्ष आकलन करेंगे। इसके बाद वे अरुणाचल प्रदेश और असम के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वे भी करेंगे, जिसमें नदियों, तटबंधों, सड़कों, पुलों और कृषि भूमि की स्थिति का व्यापक निरीक्षण किया जाएगा।

शाम को वे गुवाहाटी में असम सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे, जिसमें बाढ़ प्रबंधन, राहत वितरण, तटबंधों और सड़कों की मरम्मत, क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की बहाली तथा प्रभावित किसानों को वित्तीय सहायता जैसे विषयों पर चर्चा होगी।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रभावित लोगों को तत्काल राहत देना सर्वोच्च प्राथमिकता है, लेकिन भविष्य में बाढ़ के प्रभाव को कम करने के लिए दीर्घकालिक रणनीति भी आवश्यक है। उन्होंने बेहतर जल निकासी व्यवस्था, मजबूत तटबंध, सुरक्षित राहत शिविर, उन्नत बाढ़ प्रबंधन ढांचा तथा अधिक प्रभावी फसल बीमा प्रणाली विकसित करने पर बल दिया।

उन्होंने अरुणाचल प्रदेश और असम के बाढ़ प्रभावित लोगों से धैर्य बनाए रखने की अपील करते हुए भरोसा दिलाया कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर हर संभव कदम उठाएंगी ताकि राहत, पुनर्वास और सामान्य जीवन की जल्द बहाली सुनिश्चित की जा सके।

मीडिया से बातचीत में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश एक प्रिय राज्य है, लेकिन इस समय वह भीषण प्राकृतिक आपदा का सामना कर रहा है। भारी बारिश और भूस्खलन से सड़कें, पुल और अनेक मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, जबकि संतरा, केला और धान जैसी फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री के निर्देश पर मैं, किरेन रिजिजू और मुख्यमंत्री प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने आए हैं। हम नुकसान का विस्तृत आकलन करेंगे और केंद्र सरकार की ओर से हर संभव सहायता सुनिश्चित करेंगे।"

उन्होंने विश्वास दिलाया कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सरकार पूरी ताकत के साथ राज्य को इस संकट से उबारने, सामान्य स्थिति बहाल करने और सभी प्रभावित परिवारों तक आवश्यक सहायता पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य करेगी।

विकसित भारत-जी राम जी योजना से ग्रामीण विकास को मिलेगी नई दिशा

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1 जुलाई 2026 से देशभर में लागू होगी योजना, ग्रामीण परिवारों को मिलेगा 125 दिनों के रोजगार की गारंटी

रायपुर- देशभर में 1 जुलाई 2026 से विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) योजना लागू हो रही है। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका संवर्धन और आधारभूत विकास को नई गति देने के उद्देश्य से प्रारंभ की जा रही है। इस योजना का उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के विकसित भारत -2047 के विज़न को साकार करने की दिशा में ग्रामीण भारत को सशक्त, आत्मनिर्भर एवं समृद्ध बनाना है। योजना के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण, आजीविका संवर्धन और गांवों के समग्र विकास को बढ़ावा दिया जाएगा।

राज्य के बजट में 4000 करोड़ रुपये का प्रावधान

योजना के अंतर्गत ग्रामीण परिवारों को मांग के आधार पर वर्ष में 125 दिनों तक रोजगार की गारंटी प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही जल संरक्षण, ग्रामीण अधोसंरचना विकास, कृषि आधारित कार्य, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और आजीविका संवर्धन जैसे टिकाऊ कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। विकसित ग्राम की परिकल्पना को साकार करने के लिए योजना में कुल 318 प्रकार के कार्यों को शामिल किया गया है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु छत्तीसगढ़ राज्य में वर्ष 2026-27 के बजट में 4000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

2 जुलाई को होगा शुभारंभ

छत्तीसगढ़ में योजना के शुभारंभ एवं क्रियान्वयन को लेकर पूरे प्रदेश में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 2 जुलाई 2026 को तिरुपति, आंध्रप्रदेश से केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा कार्यक्रम का शुभारंभ किया जाएगा, जिसमें वे देश के विभिन्न राज्यों से संवाद करेंगे। प्रदेश में यह कार्यक्रम कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत गंडईखुर्द में आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ग्रामीणों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम से जुड़कर संवाद करेंगे।

ग्राम सभा की भूमिका होगी सशक्त

इस योजना के अंतर्गत ग्रामीण परिवारों को वर्ष में 125 दिनों तक रोजगार की गारंटी मिलेगी, 15 दिवस के भीतर मजदूरी भुगतान की व्यवस्था होगी, कार्य उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ते का भी प्रावधान किया गया है। इसी तरह डिजिटल जॉब कार्ड एवं तकनीक आधारित कार्य प्रबंधन प्रणाली, समयबद्ध एवं पारदर्शी भुगतान व्यवस्था के साथ ग्राम सभा की भूमिका को और अधिक सशक्त बनाया गया है।

ग्राम सभा द्वारा तैयार की जाएगी पंचायतों के विकास कार्यों की कार्ययोजना

वीबी जीरामजी में जल संरक्षण, सिंचाई, ग्रामीण सड़क, वृक्षारोपण एवं टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण पर विशेष जोर दिया गया है। इस योजना से ग्रामीण युवाओं के लिए कौशल विकास एवं आजीविका के नए अवसर प्रदान करेगी। सामाजिक अंकेक्षण एवं डिजिटल निगरानी से पारदर्शिता में भी वृद्धि होगी। नई व्यवस्था के तहत ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की कार्ययोजना ग्राम सभा के माध्यम से तैयार की जाएगी, जिससे स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कार्यों का चयन किया जा सकेगा।

विकसित भारत-जी राम जी योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और गांवों में विकास की स्थायी आधारशिला तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह योजना ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर और विकसित भारत के संकल्प से जोड़ने का माध्यम बनेगी।

"विकसित ग्राम, विकसित भारत" के लक्ष्य को गति देने के लिए केंद्र-राज्य सहयोग, जनभागीदारी और तकनीक आधारित सुशासन पर जोर

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ग्रामीण परिवर्तन के विजन के अनुरूप ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन (RGVS) 2026 का दो दिवसीय आयोजन 29 जून 2026 को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सम्मेलन का समापन "विकसित ग्राम, विकसित भारत" के लक्ष्य को केंद्र-राज्य समन्वय, समुदाय आधारित विकास तथा तकनीक-संचालित सुशासन के माध्यम से तेज़ी से आगे बढ़ाने की सामूहिक प्रतिबद्धता के साथ हुआ।

यह राष्ट्रीय सम्मेलन ग्रामीण विकास की प्रमुख योजनाओं की प्रगति की समीक्षा, राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के सफल अनुभवों के आदान-प्रदान तथा ग्रामीण परिवर्तन के अगले चरण की रणनीति तैयार करने का महत्वपूर्ण मंच बना।

सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय ग्रामीण विकास तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया। इस अवसर पर ग्रामीण विकास एवं संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी तथा ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान भी उपस्थित रहे।

दो दिनों तक चले इस सम्मेलन में विभिन्न राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के ग्रामीण विकास मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, केंद्र एवं राज्य सरकारों के विशेषज्ञ, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (SRLM) के प्रतिनिधि तथा विकास सहयोगी संस्थाओं ने भाग लिया।

सम्मेलन का प्रमुख विषय VB-GRAMG अधिनियम, 2025 के प्रभावी क्रियान्वयन पर केंद्रित रहा। इसके साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM), ग्रामीण कौशल विकास कार्यक्रम तथा राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम जैसी प्रमुख योजनाओं की व्यापक समीक्षा की गई।

चर्चाओं में ग्रामीण विकास योजनाओं को और सशक्त बनाने, ग्राम पंचायतों को अधिक अधिकार देने, महिलाओं की आजीविका के अवसर बढ़ाने, ग्रामीण आवास एवं सड़क संपर्क को मजबूत करने तथा जलवायु-अनुकूल आजीविका को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया गया। साथ ही वर्ष 2029 तक 6 करोड़ 'लखपति दीदी' तैयार करने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए डिजिटल तकनीकों के उपयोग पर भी विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। विभिन्न राज्यों के नवाचारों को देशभर में लागू करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई।

वर्तमान में DAY-NRLM के अंतर्गत 10 करोड़ से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी हुई हैं। महिला उद्यमिता को सशक्त बनाने के लिए उद्यम वित्त, डिजिटल नवाचार, ब्रांडिंग और बाजार तक पहुंच बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया।

सम्मेलन में सरस आजीविका पहल की निरंतर बढ़ती सफलता को भी रेखांकित किया गया। वर्ष 1999 में आयोजित पहले सरस मेले से शुरू हुई यह पहल आज 25 से अधिक राज्य ब्रांडों के साथ एक राष्ट्रीय विपणन मंच बन चुकी है, जो प्रतिवर्ष 200 करोड़ रुपये से अधिक का व्यापार करती है।

इस अवसर पर ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 'सरस शक्ति कलेक्शन' का शुभारंभ किया तथा 'सरस शक्ति कॉफी टेबल बुक' का विमोचन किया। सरस शक्ति कलेक्शन में देशभर के महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए गए उत्कृष्ट उत्पादों का विशेष संग्रह प्रस्तुत किया गया है, जबकि कॉफी टेबल बुक में इन महिला उद्यमों की विविधता, गुणवत्ता और बाजार में उनकी उपलब्धियों का दस्तावेजीकरण किया गया है। इन पहलों का उद्देश्य ग्रामीण उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाना और प्रीमियम बाजारों तक उनकी पहुंच बढ़ाना है।

गुजरात, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, मेघालय, बिहार, केरल, तेलंगाना सहित विभिन्न राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के ग्रामीण विकास मंत्रियों और प्रतिनिधियों ने सरस आजीविका गैलरी का अवलोकन किया। इस गैलरी में हथकरघा, वस्त्र, गृह सज्जा, वेलनेस उत्पाद और पारंपरिक खाद्य सामग्री का आकर्षक प्रदर्शन किया गया। इसमें पंजाब की फुलकारी, जम्मू-कश्मीर की पश्मीना, तेलंगाना की इकट एवं तेलिया वस्त्र कला, मिजोरम की पौंचेई के साथ-साथ मीनाकारी, ढोकरा कला, पीतल शिल्प और लकड़ी की उत्कृष्ट हस्तकलाओं को भी प्रदर्शित किया गया।

गैलरी में विभिन्न राज्यों की लखपति दीदियों ने भी अपने सफल उद्यमों का प्रदर्शन किया और बताया कि किस प्रकार ब्रांडिंग, उत्पाद विकास और बाजार से जुड़ाव के माध्यम से ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर एवं सफल उद्यमी बन रही हैं।

राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन 2026 ने समुदाय आधारित संस्थाओं को मजबूत बनाने, सतत आजीविका के अवसरों का विस्तार करने तथा ग्रामीण उत्पादों के लिए व्यापक बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में मंत्रालय की प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया। सम्मेलन में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि केंद्र और राज्यों के समन्वित प्रयासों से ही समावेशी, आत्मनिर्भर और सशक्त ग्रामीण अर्थव्यवस्था का निर्माण संभव है।


मुंगेली : सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के 5 वर्ष पूर्ण होने पर 29 जून से 06 जुलाई तक मनाया जाएगा "सहकारी सप्ताह"

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सहकार से समृद्धि के संकल्प को सशक्त बनाने के लिए जिलेभर में होंगे विविध कार्यक्रम

मुंगेली- सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के पाँच वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में भारत सरकार के निर्देशानुसार 29 जून 2026 से 06 जुलाई 2026 तक पूरे देश में "सहकारी सप्ताह" का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान राष्ट्रीय, राज्य, जिला, विकासखंड तथा प्राथमिक सहकारी समितियों के स्तर पर सहकारिता आंदोलन को जन-जन तक पहुँचाने, सहकारी संस्थाओं की उपलब्धियों को प्रदर्शित करने तथा आमजन की सहभागिता बढ़ाने के उद्देश्य से विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

इसी क्रम में कलेक्टर कुन्दन कुमार के निर्देशन में जिले में सहकारी सप्ताह के माध्यम से "सहकार से समृद्धि" की भावना को साकार करने के लिए सहकारी क्षेत्र की उपलब्धियों, नवाचारों एवं योगदान को व्यापक स्तर पर प्रदर्शित किया जाएगा। इस अवधि में वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान, किसान संगोष्ठी, स्वास्थ्य शिविर, सहकारिता सम्मेलन, जागरूकता कार्यक्रम, हितधारक संवाद तथा विभिन्न जनभागीदारी आधारित गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।

29 जून  को सप्ताह के प्रथम दिवस जिले की समस्त पैक्स, दुग्ध एवं मत्स्य सहकारी समितियों में सहकारी ध्वज रोहण, सहकारिता संबंधी उद्बोधन, सहकारी शपथ एवं स्वच्छता अभियान का आयोजन किया जाएगा। 

30 जून को सदस्यों की आय वृद्धि में दुग्ध एवं मत्स्य सहकारी समितियों की भूमिका विषय पर विचार-विमर्श किया जाएगा। जिला मुख्यालय में जिला सहकारी विकास समिति की बैठक आयोजित होगी, जिसमें जिला प्रशासन, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक एवं संबंधित विभागों के अधिकारी भाग लेंगे।

01 जुलाई  को जिला एवं विकासखंड स्तर पर कृषक संगोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा। इसमें जैविक खेती, प्राकृतिक खेती, उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग, नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी के उपयोग सहित आधुनिक कृषि तकनीकों पर विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन दिया जाएगा। कार्यक्रम में  इफ्को  एवं  क्रीभको  का सहयोग रहेगा।

02 जुलाई को सभी पैक्स में स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा। साथ ही किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी), रूपे केसीसी कार्ड, एटीएम सुविधा एवं बैंकिंग सेवाओं के प्रति जागरूक करते हुए संबंधित कार्यवाही भी की जाएगी।

03 जुलाई को जिलेभर में वृक्षारोपण अभियान संचालित किया जाएगा तथा जल संरक्षण की शपथ दिलाई जाएगी। इसके साथ ही "सहकार समाचार पत्र" के प्रचार-प्रसार के माध्यम से सहकारिता की योजनाओं एवं उपलब्धियों की जानकारी आमजन तक पहुँचाई जाएगी।

04 जुलाई को जिला कार्यालय में सहकारिता संगोष्ठी आयोजित होगी, जिसमें सहकारी संस्थाओं की भूमिका, भविष्य की योजनाओं तथा सहकारिता के विस्तार पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। 

05 जुलाई को युवा वर्ग एवं आमजन में सहकारिता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से "सहकार संकल्प दौड़" आयोजित की जाएगी। इसमें पैक्स, दुग्ध एवं मत्स्य सहकारी समितियों के प्रतिनिधि तथा नागरिक भाग लेंगे।

06 जुलाई को प्राथमिक सहकारी समितियों में स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएंगे। साथ ही उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं को "सहकारी प्रेरणा पुरस्कार" प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा।

सहकारिता विभाग ने जिले के सभी सहकारी संस्थानों, किसानों, दुग्ध उत्पादकों, मत्स्य पालकों, जनप्रतिनिधियों, स्वयं सहायता समूहों तथा आम नागरिकों से अपील की है कि वे "सहकारी सप्ताह" के दौरान आयोजित कार्यक्रमों में सक्रिय सहभागिता निभाकर "सहकार से समृद्धि, सशक्त समाज, सशक्त भारत" के संकल्प को मजबूत बनाने में अपना योगदान दें।

ASPIRE: ग्रामीण सपनों को उद्यम में बदलने की कहानी

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मेघालय के मावसिनराम की बारिश भरी एक सुबह, दुनिया के सबसे अधिक वर्षा वाले इस इलाके में रहने वाले बंशैलांग मारबानियांग आसमान में छाए बादलों को देख रहे थे। लेकिन उनके मन में बारिश नहीं, बल्कि एक सवाल था—देश के सबसे दूरदराज़ इलाकों में रहने वाला एक युवा, जहां अवसर बेहद सीमित हों, अपना भविष्य कैसे बनाए?

वर्षों तक उन्होंने अपने दोस्तों और पड़ोसियों को रोजगार की तलाश में गांव छोड़ते देखा। सीमित संसाधनों और आर्थिक तंगी के कारण अपना व्यवसाय शुरू करने का सपना असंभव लगता था। लेकिन स्थानीय कृषि उत्पादों की प्रचुरता ने उन्हें सोचने पर मजबूर किया कि क्या इन्हीं संसाधनों के आधार पर कोई उद्यम खड़ा किया जा सकता है।

ASPIRE योजना बनी जीवन का टर्निंग प्वाइंट

बंशैलांग के जीवन में बदलाव तब आया जब उन्हें भारतीय उद्यमिता संस्थान (IIE), गुवाहाटी द्वारा दिए जा रहे उद्यमिता प्रशिक्षण और कौशल विकास कार्यक्रम की जानकारी मिली। IIE, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) की ASPIRE (A Scheme for Promotion of Innovation, Rural Industries and Entrepreneurship) योजना के अंतर्गत मेंटर संस्थान है।

इस प्रशिक्षण ने उन्हें तकनीकी ज्ञान, व्यावसायिक कौशल और आत्मविश्वास प्रदान किया। इसके बाद उन्होंने स्थानीय कृषि उत्पादों पर आधारित फूड प्रोसेसिंग यूनिट शुरू की और यह साबित किया कि सही मार्गदर्शन और कौशल के साथ कहीं भी अवसर पैदा किए जा सकते हैं।

ग्रामीण भारत में उद्यमिता को बढ़ावा

बंशैलांग की कहानी केवल एक व्यक्ति की सफलता नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत में हो रहे बड़े बदलाव का प्रतीक है।

ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभा और संसाधनों की कमी नहीं थी, लेकिन प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और संस्थागत सहयोग के अभाव में लोग अपने विचारों को व्यवसाय में नहीं बदल पाते थे। इसी चुनौती को देखते हुए 2015 में MSME मंत्रालय ने ASPIRE योजना शुरू की, जिसका उद्देश्य ग्रामीण और कृषि आधारित उद्योगों में उद्यमिता तथा रोजगार को बढ़ावा देना है।

2018 और 2023 में योजना के दिशा-निर्देशों में संशोधन कर इसे और प्रभावी बनाया गया। अब इसका मुख्य केंद्र लाइवलीहुड बिजनेस इन्क्यूबेटर्स (LBIs) हैं, जो लोगों को कौशल से लेकर व्यवसाय स्थापित करने तक हर स्तर पर सहायता प्रदान करते हैं।

कैसे काम करते हैं LBI?

लाइवलीहुड बिजनेस इन्क्यूबेटर केवल प्रशिक्षण केंद्र नहीं हैं, बल्कि ऐसे संस्थान हैं जो नए उद्यमियों को व्यवसाय शुरू करने के लिए आवश्यक हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराते हैं।

इनमें शामिल हैं—

  • आधुनिक मशीनों और तकनीक तक पहुंच

  • बिजनेस मेंटरिंग

  • उत्पाद विकास

  • ब्रांडिंग और पैकेजिंग

  • गुणवत्ता प्रमाणन

  • नियामकीय अनुमतियां

  • बाजार से जुड़ाव

  • वित्तीय सहायता तक पहुंच

इन इन्क्यूबेटर्स के संचालन में भारतीय उद्यमिता संस्थान (IIE), कृषि विश्वविद्यालय, तकनीकी संस्थान और IIT जोधपुर जैसे संस्थान महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

देशभर में बढ़ रहा ASPIRE का दायरा

ASPIRE के तहत देशभर में खाद्य प्रसंस्करण, शहद उत्पादन, बांस उत्पाद, मशरूम उत्पादन, मसाला प्रसंस्करण, हस्तशिल्प और कॉयर उद्योग जैसे क्षेत्रों में हजारों उद्यम विकसित किए जा रहे हैं।

जून 2026 तक—

  • 27 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में 109 LBI स्वीकृत

  • 1.23 लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षण

  • वर्ष 2022-23 से अब तक 1,200 से अधिक सूक्ष्म उद्यम स्थापित

महिलाओं और वंचित वर्गों को मिला बड़ा लाभ

ASPIRE योजना उद्यमिता को अधिक समावेशी बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

2022-23 से अब तक—

  • 28,500 से अधिक महिलाओं को उद्यमिता के अवसर

  • 8,700 से अधिक अनुसूचित जाति (SC) लाभार्थी

  • 9,600 से अधिक अनुसूचित जनजाति (ST) लाभार्थी

  • 17,600 से अधिक अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) लाभार्थी

ये आंकड़े बताते हैं कि अब उद्यमिता केवल महानगरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि गांवों और छोटे कस्बों में भी आत्मनिर्भरता और रोजगार का नया माध्यम बन रही है।

मावसिनराम से कर्तव्य पथ तक

बंशैलांग मारबानियांग की सफलता को राष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान मिला। उन्हें 75वें गणतंत्र दिवस समारोह में कर्तव्य पथ, नई दिल्ली पर विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया। वे पूर्वोत्तर भारत के उन दस उद्यमियों में शामिल थे जिन्होंने अपने प्रयासों और ASPIRE योजना के सहयोग से रोजगार खोजने वाले से रोजगार देने वाले बनने तक का सफर तय किया।

आत्मनिर्भर भारत की ओर मजबूत कदम

ASPIRE योजना हजारों युवाओं को प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और संसाधन उपलब्ध कराकर उनके सपनों को सफल उद्यमों में बदल रही है। यह योजना केवल नए व्यवसाय नहीं बना रही, बल्कि ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाते हुए रोजगार सृजन, नवाचार और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी मजबूती दे रही है।

शिवराज सिंह चौहान ने यूपी की कृषि और ग्रामीण विकास योजनाओं की समीक्षा की, किसानों और गरीब परिवारों को मिली बड़ी सौगात

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लखनऊ- केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को लखनऊ स्थित योजना भवन में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में राज्य की कृषि और ग्रामीण विकास की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई।

इस दौरान शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दो महत्वपूर्ण स्वीकृति पत्र सौंपे। पहला, रबी विपणन सत्र 2026-27 के तहत गेहूं, चना और मसूर की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद की अवधि 24 जून से बढ़ाकर 8 जुलाई 2026 तक करने का, और दूसरा प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के नए चरण के तहत उत्तर प्रदेश के लिए 6,18,482 पक्के मकानों की मंजूरी का।

उत्तर प्रदेश कृषि क्षेत्र का अग्रणी राज्य

बैठक को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे महत्वपूर्ण कृषि राज्य है और अकेले लगभग 38 प्रतिशत गेहूं उत्पादन करता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और किसानों की आय बढ़ाने में उत्तर प्रदेश की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए राज्य के लिए वैज्ञानिक और दीर्घकालिक कृषि रोडमैप तैयार करना समय की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, बढ़ता तापमान और भूजल स्तर में गिरावट कृषि क्षेत्र के सामने गंभीर चुनौतियां हैं। प्रस्तावित कृषि रोडमैप में फसल चक्र, सिंचाई, जल संरक्षण, उन्नत बीज, तकनीक और विपणन रणनीतियों को शामिल किया जाएगा।

किसानों को राहत: MSP खरीद अवधि बढ़ाई गई

किसानों के हित में केंद्र सरकार ने गेहूं, चना और मसूर की MSP खरीद अवधि 8 जुलाई 2026 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। यह फैसला मौसम संबंधी बाधाओं, मंडियों में भीड़ और अन्य व्यावहारिक समस्याओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है ताकि कोई भी किसान अपनी उपज MSP से कम कीमत पर बेचने को मजबूर न हो।

एल-नीनो के खतरे को लेकर तैयार होगी विशेष रणनीति

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस वर्ष एल-नीनो के संकेत दिखाई दे रहे हैं और वर्षा सामान्य से कम रहने की आशंका है। ऐसे में जिला स्तर पर आकस्मिक कृषि योजनाएं तैयार की जाएंगी। कम पानी में होने वाली और कम अवधि वाली फसलों को बढ़ावा देने के साथ किसानों को समय पर सलाह, बीज और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

पीएम आवास योजना-ग्रामीण के तहत 6.18 लाख मकानों को मंजूरी

ग्रामीण आवास क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश के लिए PMAY-G के नए चरण के तहत 6,18,482 पक्के मकानों को मंजूरी दी है। यह योजना 2024-25 से 2028-29 तक देशभर में अतिरिक्त दो करोड़ पक्के मकान बनाने के लक्ष्य का हिस्सा है।

शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि राज्य में पात्र ग्रामीण परिवारों का सर्वेक्षण पूरा हो चुका है और अब चिन्हित गरीब परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर आवास उपलब्ध कराया जाएगा।

किसानों और गांवों के विकास का साझा संकल्प

बैठक में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही सहित केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार का साझा लक्ष्य किसानों को मजबूत बनाना, गांवों को समृद्ध करना और उत्तर प्रदेश को कृषि एवं ग्रामीण विकास का राष्ट्रीय मॉडल बनाना है। उन्होंने विश्वास जताया कि वैज्ञानिक कृषि रोडमैप और आवास कार्यक्रम राज्य के किसानों, गांवों और गरीब परिवारों के जीवन में व्यापक और स्थायी परिवर्तन लाएंगे।


ड्रोन दीदी अभियान से कृषि क्षेत्र में तकनीक और मातृशक्ति का होगा सशक्त संगम : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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ड्रोन पायलट प्रशिक्षण हेतु महिला कृषकों का दल जशपुर से रायपुर रवाना

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दिखाई हरी झंडी, दी शुभकामनाएं

रायपुर- कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने तथा महिला किसानों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत ‘ड्रोन दीदी अभियान’ अंतर्गत महिला कृषकों का 5 सदस्यीय दल ड्रोन पायलट प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए रायपुर रवाना हुआ। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज कुनकुरी स्थित कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र परिसर से दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया तथा सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कृषि क्षेत्र में तकनीक का समावेश समय की आवश्यकता है और ड्रोन तकनीक खेती-किसानी को अधिक वैज्ञानिक, प्रभावी और लाभकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि ‘ड्रोन दीदी अभियान’ केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण, आधुनिक कृषि और ग्रामीण आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी मातृशक्ति आज हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परिचय दे रही है। कृषि क्षेत्र में भी महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण प्राप्त कर महिलाएं न केवल स्वयं आत्मनिर्भर बनेंगी, बल्कि अपने गांवों और क्षेत्रों के अन्य किसानों को भी नई तकनीकों से जोड़ने में अग्रणी भूमिका निभाएंगी।

खेती को मिलेगा आधुनिक तकनीक का लाभ

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ड्रोन तकनीक के माध्यम से फसलों पर उर्वरक एवं कीटनाशकों का छिड़काव कम समय में अधिक सटीकता और प्रभावशीलता के साथ किया जा सकता है। इससे समय, श्रम और लागत की बचत होने के साथ-साथ कृषि उत्पादन की गुणवत्ता और उत्पादकता में भी वृद्धि होती है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कृषि को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। ड्रोन जैसी नवीन तकनीकों के उपयोग से खेती अधिक सुविधाजनक, टिकाऊ और लाभकारी बन रही है।

महिलाओं को मिलेगा तकनीकी प्रशिक्षण और स्वरोजगार का अवसर

ड्रोन दीदी अभियान के अंतर्गत महिला किसानों को ड्रोन संचालन, रखरखाव, सुरक्षा मानकों तथा कृषि कार्यों में ड्रोन के उपयोग संबंधी व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। प्रशिक्षण के बाद ये महिलाएं ड्रोन पायलट के रूप में कार्य करने के साथ-साथ अन्य किसानों को भी तकनीक आधारित कृषि पद्धतियों के उपयोग के लिए प्रेरित करेंगी।

इस पहल से महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीक आधारित कृषि सेवाओं का विस्तार होगा। प्रशिक्षित महिलाएं कृषि कार्यों में ड्रोन सेवाएं उपलब्ध कराकर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के बिना ग्रामीण विकास और विकसित कृषि व्यवस्था की कल्पना अधूरी है। ड्रोन दीदी अभियान महिला सशक्तिकरण, आधुनिक कृषि और ग्रामीण आजीविका संवर्धन के क्षेत्र में एक प्रेरणादायी मॉडल के रूप में उभर रहा है।

उल्लेखनीय है कि ‘ड्रोन दीदी अभियान’ का उद्देश्य महिलाओं को तकनीकी रूप से दक्ष बनाकर उन्हें कृषि क्षेत्र में नई पहचान दिलाना है। यह पहल ‘तकनीक से सशक्त महिला, समृद्ध किसान और विकसित कृषि’ के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

जैविक खेती, आधुनिक तकनीक और बेहतर बाजार व्यवस्था से बढ़ेगी किसानों की आय : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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कुनकुरी में जैविक किसान मेला एवं प्राकृतिक खेती कार्यशाला में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

औषधीय एवं सुगंधित फसलों के विपणन हेतु हुआ महत्वपूर्ण अनुबंध, किसानों को मिलेगा बेहतर बाजार

रायपुर- किसानों की समृद्धि ही विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ की आधारशिला है। आधुनिक कृषि तकनीकों, बेहतर फसल चयन, प्राकृतिक एवं जैविक खेती तथा सुदृढ़ बाजार व्यवस्था के माध्यम से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। कृषि केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसानों को समृद्ध बनाए बिना विकास का लक्ष्य पूर्ण नहीं हो सकता। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज जशपुर जिले के कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, कुनकुरी में आयोजित जैविक किसान मेला एवं खेत बचाओ अभियान अंतर्गत प्राकृतिक एवं जैविक खेती कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह बात कही। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से भूमि की उर्वरता तथा मानव स्वास्थ्य दोनों प्रभावित होते हैं। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक एवं जैविक खेती को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि पूर्व में गोबर खाद, ढैंचा एवं अन्य हरी खादों के उपयोग से खेती अधिक टिकाऊ और भूमि अधिक उपजाऊ रहती थी। आज आवश्यकता है कि परंपरागत ज्ञान और आधुनिक तकनीक का समन्वय कर कृषि को अधिक लाभकारी बनाया जाए।

उन्होंने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों और उर्वरकों के आयात पर निर्भरता को देखते हुए नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसे विकल्प किसानों के लिए उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं। इनके उपयोग से उत्पादन लागत कम होती है और मिट्टी की गुणवत्ता भी संरक्षित रहती है।

किसानों को मिला आधुनिक तकनीकों से जुड़ने का अवसर

कार्यक्रम में किसानों को प्राकृतिक खेती, जैविक कृषि, आधुनिक कृषि यंत्रों, ड्रोन तकनीक, पशुपालन, मत्स्य पालन एवं उन्नत कृषि पद्धतियों की जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री ने विभिन्न कृषि प्रदर्शनों का अवलोकन कर विशेषज्ञों से जानकारी प्राप्त की तथा किसानों से संवाद भी किया।

कार्यक्रम में ड्रोन के माध्यम से खेतों में दवा छिड़काव का लाइव प्रदर्शन आकर्षण का केंद्र रहा। किसानों ने आधुनिक कृषि तकनीकों को प्रत्यक्ष रूप से देखा और उनके उपयोग से होने वाले लाभों की जानकारी प्राप्त की। साथ ही कृषि नवाचारों, जैविक खेती, पशुपालन एवं मत्स्य पालन से संबंधित जीवंत प्रदर्शनी भी आयोजित की गई।

उत्कृष्ट किसानों का हुआ सम्मान

कार्यक्रम में आयोजित किसान प्रतियोगिता के अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सम्मानित किया। ग्राम खोंगा (मनोरा) के किसान महेश सिंह को जैविक खेती के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया। ग्राम लाखाझार के किसान सुखराम को 33 किलोग्राम वजन के कटहल उत्पादन तथा ठेठेटांगर के किसान विजय भूषण को ढाई किलोग्राम वजन के आम उत्पादन के लिए सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने स्वामित्व योजना के तहत कृषक गुप्तेश्वर को भूमि पट्टा भी प्रदान किया।

औषधीय एवं सुगंधित फसलों को मिलेगा बेहतर बाजार

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री की उपस्थिति में जिला प्रशासन जशपुर एवं सेमिना एग्रो प्राइवेट लिमिटेड के बीच औषधीय एवं सुगंधित फसलों के विपणन के लिए महत्वपूर्ण अनुबंध किया गया। इस पहल से जिले के किसानों को अपने उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध होगा तथा मूल्य संवर्धन और विपणन की नई संभावनाएं विकसित होंगी। इससे किसानों की आय में वृद्धि के साथ स्थानीय कृषि अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

किसानों की खुशहाली सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को लाभकारी बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीद रही है तथा 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदी की व्यवस्था लागू की गई है। सरकार बनने के तुरंत बाद किसानों को दो वर्षों का लंबित बोनस प्रदान किया गया तथा शून्य प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है।

बगिया दाबयुक्त सिंचाई योजना से बदलेगी खेती की तस्वीरमुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत चयनित देश की 100 प्रमुख परियोजनाओं में छत्तीसगढ़ की एकमात्र बगिया दाबयुक्त सिंचाई योजना शामिल है। लगभग 119 करोड़ रुपये की लागत वाली इस योजना से 14 गांवों के लगभग 5 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलेगी। पाइपलाइन के माध्यम से खेतों तक पानी पहुंचाने वाली इस योजना से भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता भी नहीं होगी।

उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के लिए देश के चयनित 100 जिलों में छत्तीसगढ़ के केवल तीन जिले—दंतेवाड़ा, कोरबा और जशपुर—शामिल किए गए हैं, जिससे जिले के कृषि विकास को नई गति मिलेगी।

सुशासन और डिजिटल सेवाओं से ग्रामीणों को मिल रही सुविधा

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में सुशासन को और अधिक मजबूत बनाने के लिए गुड गवर्नेंस एवं अभिसरण विभाग का गठन किया गया है। अधिकांश शासकीय कार्य अब ई-ऑफिस प्रणाली के माध्यम से संचालित हो रहे हैं तथा भ्रष्टाचार के मामलों में दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जा रही है।

उन्होंने बताया कि ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के माध्यम से 400 से अधिक नागरिक सेवाएं उपलब्ध हैं, जिनका लाभ लोग घर बैठे प्राप्त कर रहे हैं। प्रदेश की 6 हजार ग्राम पंचायतों में अटल डिजिटल सेवा केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं, जहां ग्रामीणों को बैंकिंग एवं डिजिटल सेवाएं उपलब्ध होंगी।

मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 की जानकारी देते हुए कहा कि अब नागरिक अपनी शिकायतें और समस्याएं सीधे दर्ज करा सकते हैं। 24×7 संचालित इस व्यवस्था से 42 विभागों के 8 हजार से अधिक अधिकारी जुड़े हैं और प्रत्येक शिकायत के समयबद्ध निराकरण की निगरानी की जा रही है।

कार्यक्रम में पत्थलगांव विधायक एवं सरगुजा आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष गोमती साय, जशपुर विधायक रायमुनी भगत, अध्यक्ष छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल रामप्रताप सिंह, छत्तीसगढ़ राज्य अंत्यावसायी सहकारी वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष सुरेन्द्र कुमार बेसरा, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव,  नगर पालिका जशपुर के उपाध्यक्ष यशप्रतापसिंह जूदेव सहित बड़ी संख्या में किसान, जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए बड़ा कदम: ‘निर्भय चेतना’ अभियान की शुरुआत, देशभर में प्रशिक्षित होंगे 17.5 लाख जनप्रतिनिधि

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नई दिल्ली- महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और समान भागीदारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पंचायती राज मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए ‘निर्भय चेतना’ कार्यक्रम की शुरुआत की है। 17 से 19 जून 2026 तक नई दिल्ली में आयोजित तीन दिवसीय ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स (ToT) कार्यक्रम के साथ इस राष्ट्रीय अभियान का शुभारंभ किया गया।

यह पहल निर्भया फंड परियोजना के तहत शुरू की गई है और इसे दुनिया का अपनी तरह का सबसे बड़ा अभियान माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य पुरुष जनप्रतिनिधियों को महिलाओं से जुड़े मुद्दों, लैंगिक समानता और महिला सुरक्षा के प्रति संवेदनशील बनाना है।

17.5 लाख पुरुष जनप्रतिनिधियों तक पहुंचेगा अभियान

कार्यक्रम के तहत देशभर में राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर 28,500 मास्टर ट्रेनर्स तैयार किए जाएंगे, जो आगे चलकर 17.5 लाख से अधिक पुरुष निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को प्रशिक्षण देंगे। इसका उद्देश्य पंचायत स्तर पर महिलाओं के अधिकारों, नेतृत्व, सुरक्षा और सम्मान को लेकर सकारात्मक सोच विकसित करना है।

छह राज्यों से शामिल हुए मास्टर ट्रेनर्स

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के पहले चरण में असम, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और उत्तराखंड के लगभग 40 मास्टर ट्रेनर्स ने भाग लिया। ये प्रशिक्षक आगे अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी इस अभियान को विस्तार देंगे।

‘विकसित भारत’ के लिए महिलाओं की भागीदारी जरूरी

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और समान भागीदारी के बिना विकसित भारत का सपना पूरा नहीं हो सकता। उन्होंने पंचायतों को सामाजिक परिवर्तन का सबसे मजबूत माध्यम बताते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर सोच और व्यवहार में बदलाव लाने में पंचायतों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

वहीं, मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव सुशील कुमार लोहानी ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से महिलाओं के अधिकारों और सम्मान के प्रति जवाबदेह नेतृत्व विकसित करने का आह्वान किया।

प्रशिक्षण में क्या सिखाया गया?

तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में विशेषज्ञ सत्र, समूह चर्चा, केस स्टडी और अनुभव आधारित शिक्षण गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को लैंगिक समानता, सकारात्मक पुरुषत्व (Positive Masculinity), सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती देने और महिला सशक्तिकरण जैसे विषयों पर प्रशिक्षित किया गया।

‘निर्भय रहो’ पहल का हिस्सा है ‘निर्भय चेतना’

‘निर्भय चेतना’ केंद्र सरकार की ‘निर्भय रहो’ पहल का एक प्रमुख हिस्सा है, जिसमें तीन महत्वपूर्ण घटक शामिल हैं:

  • निर्भय नेत्री – महिला जनप्रतिनिधियों के लिए नेतृत्व और कानूनी जागरूकता प्रशिक्षण।

  • निर्भय चेतना – पुरुष जनप्रतिनिधियों को महिलाओं की सुरक्षा और लैंगिक समानता के प्रति संवेदनशील बनाना।

  • निर्भय दृष्टि – ग्रामीण क्षेत्रों में रणनीतिक स्थानों पर CCTV कैमरे लगाकर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना।

मुख्य बातें

▪️ महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए ‘निर्भय चेतना’ अभियान शुरू।
▪️ देशभर में 17.5 लाख पुरुष जनप्रतिनिधियों को दिया जाएगा प्रशिक्षण।
▪️ 28,500 मास्टर ट्रेनर्स तैयार करने का लक्ष्य।
▪️ पहले चरण में 6 राज्यों के 40 प्रशिक्षकों ने लिया हिस्सा।
▪️ पंचायतों को बनाया जाएगा लैंगिक समानता और महिला सुरक्षा का केंद्र।


छत्तीसगढ़ के किसानों को बड़ी सौगात: पीएम किसान सम्मान निधि की 23वीं किस्त जारी

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छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए आज बड़ी खुशखबरी सामने आई है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना की 23वीं किस्त जारी कर दी गई है, जिससे राज्य के लाखों किसानों के चेहरों पर राहत और खुशी देखने को मिल रही है।

24.52 लाख किसानों को 490.54 करोड़ रुपये का लाभ

इस किस्त के तहत छत्तीसगढ़ के करीब 24.52 लाख किसानों को सीधे उनके बैंक खातों में कुल 490.54 करोड़ रुपये की राशि ट्रांसफर की जा रही है। यह पूरी प्रक्रिया DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से की जा रही है, जिससे राशि बिना किसी रुकावट के सीधे लाभार्थियों तक पहुंच रही है।

किसानों की आर्थिक मदद के लिए अहम कदम

PM-KISAN योजना के तहत पात्र किसानों को हर वर्ष ₹6,000 की आर्थिक सहायता दी जाती है, जो तीन समान किस्तों में सीधे बैंक खातों में भेजी जाती है। यह राशि किसानों को खेती-किसानी की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान करती है।

सरकार की प्रमुख योजना

यह योजना केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं में से एक है, जिसका उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक मजबूती देना है। इस पहल से देशभर में करोड़ों किसान लाभान्वित हो रहे हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।

मुख्य बातें

  • 23वीं किस्त आज जारी

  • छत्तीसगढ़ के 24.52 लाख किसान लाभान्वित

  • कुल ₹490.54 करोड़ की राशि ट्रांसफर

  • राशि सीधे बैंक खातों में DBT के माध्यम से


VB–G RAM G अधिनियम 2025 के क्रियान्वयन हेतु देशभर में 100 से अधिक क्षेत्रीय अधिकारियों की तैनाती

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विकसित भारत–गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) [VB–G RAM G] अधिनियम, 2025 के सुचारु क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, ग्रामीण विकास मंत्रालय ने अधिनियम के 1 जुलाई 2026 से लागू होने से पहले देशभर में 100 से अधिक क्षेत्रीय अधिकारियों (Area Officers) की तैनाती का निर्णय लिया है।

ये क्षेत्रीय अधिकारी अधिनियम के क्रियान्वयन के प्रारंभिक चरण में सुविधादाता (Facilitator) और संसाधन व्यक्ति (Resource Person) के रूप में कार्य करेंगे। वे राज्य सरकारों और जिला प्रशासन के साथ मिलकर कार्यान्वयन में सहयोग, स्थानीय क्षमताओं को सुदृढ़ करने, ज्ञान एवं अनुभव साझा करने, संचालन संबंधी चुनौतियों के समाधान तथा श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को अपनाने में सहायता प्रदान करेंगे।

इस भूमिका के लिए अधिकारियों को तैयार करने हेतु ग्रामीण विकास विभाग ने एक विशेष अभिमुखीकरण (Orientation) कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें अधिनियम की प्रमुख विशेषताओं, कार्यान्वयन ढाँचे, संस्थागत व्यवस्थाओं, प्रौद्योगिकी-सक्षम प्रशासनिक प्रणालियों तथा राज्यों एवं जिलों को उपलब्ध सहायता तंत्रों की जानकारी दी गई। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता ग्रामीण विकास सचिव रोहित कंसल ने की, जबकि संयुक्त सचिव रोहिणी आर. भाजीभाकरे ने कार्यक्रम का संचालन किया।

अपने दौरों के दौरान क्षेत्रीय अधिकारी राज्य सरकारों, जिला प्रशासन और जमीनी स्तर के कर्मचारियों से संवाद करेंगे ताकि कार्यान्वयन संबंधी आवश्यकताओं को समझा जा सके, अनुभवों एवं श्रेष्ठ प्रथाओं का आदान-प्रदान हो सके, क्षमता निर्माण गतिविधियों को समर्थन मिल सके और संचालन संबंधी समस्याओं का समाधान किया जा सके। उनका यह सहयोग विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय को मजबूत करेगा और नए ढाँचे में प्रभावी संक्रमण सुनिश्चित करेगा।

यह पहल राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को संस्थागत सहयोग प्रदान करते हुए VB–G RAM G अधिनियम के सुचारु और प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

VB–G RAM G अधिनियम, 2025 की प्रमुख विशेषताएँ

यह अधिनियम ग्रामीण रोजगार को सतत और समावेशी ग्रामीण विकास का आधार बनाने का प्रयास करता है। इसके अंतर्गत:

  • गारंटीकृत मजदूरी आधारित रोजगार को आजीविका संवर्धन से जोड़ा जाएगा।

  • जलवायु अनुकूलन एवं लचीलापन (Climate Resilience) को बढ़ावा दिया जाएगा।

  • ग्रामीण आधारभूत संरचना का निर्माण किया जाएगा।

  • प्रौद्योगिकी-सक्षम प्रशासनिक व्यवस्था विकसित की जाएगी।

  • विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं (VGPPs), GIS-आधारित योजना निर्माण तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं के अभिसरण (Convergence) के माध्यम से विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को आगे बढ़ाया जाएगा।

मंत्रालय द्वारा की गई प्रमुख तैयारियाँ

मंत्रालय ने देशव्यापी तैयारी सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए ₹95,692 करोड़ की अंतरिम स्वीकृति।

  • सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को DBT-SPARSH प्लेटफ़ॉर्म से जोड़ना।

  • सक्रिय श्रमिकों में लगभग 93% ई-केवाईसी (e-KYC) पूर्ण करना।

  • फेस ऑथेंटिकेशन आधारित उपस्थिति प्रणाली का देशभर में कार्यान्वयन।

  • समर्पित डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म का विकास।

  • बड़े पैमाने पर क्षमता निर्माण (Capacity Building) कार्यक्रमों का संचालन।

वर्तमान प्रगति

  • 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अधिनियम के कार्यान्वयन हेतु अपने बजट में प्रावधान कर दिए हैं।

  • 6 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने VB–G RAM G ढाँचे के अंतर्गत अपनी राज्य योजनाओं को अधिसूचित कर दिया है।

  • शेष राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपनी योजनाओं को अंतिम रूप देने की उन्नत अवस्था में हैं।

इस प्रकार, क्षेत्रीय अधिकारियों की तैनाती और व्यापक तैयारी के माध्यम से सरकार VB–G RAM G अधिनियम, 2025 को सफलतापूर्वक लागू करने और ग्रामीण भारत के समग्र विकास को गति देने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

वित्त वर्ष 2026-27 में ग्रामीण सड़कों के निर्माण हेतु ₹18,907 करोड़ आवंटित, 26,474 किलोमीटर सड़क निर्माण का लक्ष्य

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भारत सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) तथा अन्य ग्रामीण संपर्क परियोजनाओं के अंतर्गत 26,474 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों के निर्माण के लिए 18,907 करोड़ रुपये निर्धारित किए हैं।

यह जानकारी ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में दी गई, जिसमें पीएमजीएसवाई और वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों के लिए सड़क संपर्क परियोजना (RCPLWEA) के तहत राज्यों की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक की अध्यक्षता ग्रामीण विकास विभाग के सचिव रोहित कंसल ने की।

समीक्षा बैठक में आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, राजस्थान और तेलंगाना के अतिरिक्त मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों तथा राज्य ग्रामीण सड़क विकास एजेंसियों (SRRDA) के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

अंतिम छोर तक संपर्क (Last-Mile Connectivity) पर विशेष जोर

सचिव ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राज्यों के लक्ष्यों और क्रियान्वयन की स्थिति की समीक्षा करते हुए शेष वंचित क्षेत्रों तक ग्रामीण सड़क संपर्क सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया।

राज्यों को निर्देश दिया गया कि वे पीएमजीएसवाई-I तथा पीएम-जनमन (PM-JANMAN) के अंतर्गत शेष सभी असंबद्ध बस्तियों को शीघ्र जोड़ने की दिशा में कार्य करें। विशेष रूप से विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) की बस्तियों को प्राथमिकता देने को कहा गया। उन्होंने सभी पात्र ग्रामीण क्षेत्रों तक हर मौसम में उपयोग योग्य सड़क संपर्क उपलब्ध कराने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने, क्रियान्वयन संबंधी बाधाओं को दूर करने तथा लंबित परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए।

वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में सड़क परियोजनाओं की समीक्षा

बैठक में आरसीपीएलडब्ल्यूईए के तहत प्रगति की भी विस्तृत समीक्षा की गई। वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों में सड़क अवसंरचना के रणनीतिक महत्व को देखते हुए सचिव ने संबंधित राज्यों को कार्यान्वयन एजेंसियों के साथ घनिष्ठ समन्वय बनाए रखने और स्वीकृत परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए।

भाग लेने वाले राज्यों ने अपनी कार्ययोजनाएँ प्रस्तुत कीं और मंत्रालय को आश्वस्त किया कि सभी लंबित कार्य और वार्षिक लक्ष्य निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरे किए जाएंगे।

गुणवत्ता और डिजिटल शासन को सुदृढ़ करने पर बल

समीक्षा का एक प्रमुख विषय ग्रामीण सड़क परिसंपत्तियों की गुणवत्ता और दीर्घकालिक स्थिरता रहा। सचिव ने कहा कि टिकाऊ और विश्वसनीय ग्रामीण संपर्क सुनिश्चित करने के लिए गुणवत्ता मानकों का कड़ाई से पालन और प्रभावी रखरखाव व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है।

राज्यों से फील्ड स्तर पर निरीक्षण बढ़ाने, गुणवत्ता निगरानी प्रणाली को मजबूत करने और परियोजना क्रियान्वयन के दौरान प्रभावी पर्यवेक्षण सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया।

बैठक में ई-मार्ग (e-MARG) प्लेटफॉर्म के सार्वभौमिक उपयोग पर भी विशेष जोर दिया गया। यह प्रणाली ग्रामीण सड़कों के रखरखाव, प्रदर्शन मूल्यांकन और भुगतान की रीयल-टाइम निगरानी की सुविधा प्रदान करती है। इसके व्यापक उपयोग से पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता में वृद्धि होने की उम्मीद है।

आगे की रणनीति

बैठक के समापन पर सचिव ने राज्यों को परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं को दूर करने, भूमि अधिग्रहण और वन स्वीकृतियों की प्रक्रिया में तेजी लाने, परियोजना माइलस्टोन का समयबद्ध पालन सुनिश्चित करने तथा राज्य सरकारों, राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना विकास एजेंसी (NRIDA) और ग्रामीण विकास मंत्रालय के बीच समन्वय को और मजबूत करने के निर्देश दिए।

राज्यों ने भी क्रियान्वयन में तेजी लाने, अवसंरचना की गुणवत्ता में सुधार करने तथा देश की प्रत्येक पात्र बस्ती तक हर मौसम में सड़क संपर्क का लाभ पहुंचाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

राष्ट्रीय जलागम प्रबंधन दिशानिर्देशों पर एनआरएए की द्वितीय राष्ट्रीय परामर्श बैठक आयोजित

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भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग (DoLR) के ज्ञान साझेदार राष्ट्रीय वर्षा आधारित क्षेत्र प्राधिकरण (NRAA) ने विश्व बैंक समर्थित "रीवार्ड (REWARD) कार्यक्रम" के अंतर्गत बेहतर जलागम प्रबंधन के लिए मसौदा राष्ट्रीय तकनीकी दिशानिर्देशों (NTG) पर द्वितीय राष्ट्रीय स्तरीय परामर्श बैठक का आयोजन 17–18 जून 2026 को नई दिल्ली स्थित एनएएससी कॉम्प्लेक्स, पूसा में किया।

उद्घाटन सत्र में भूमि संसाधन विभाग के सचिव नरेंद्र भूषण, एनआरएए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. चंद्रशेखर कुमार तथा विभाग और प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

इस परामर्श बैठक में जलागम विकास और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन से जुड़े प्रमुख हितधारकों ने भाग लिया। इनमें भूमि संसाधन विभाग, राष्ट्रीय वर्षा आधारित क्षेत्र प्राधिकरण, विश्व बैंक, रीवार्ड कार्यक्रम से जुड़े राज्य (कर्नाटक और ओडिशा), एनआरएए के कंसोर्टियम साझेदार, नाबार्ड, आईसीएआर संस्थान तथा अन्य राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे।

मरुस्थलीकरण और सूखा रोकथाम के विश्व दिवस के अवसर पर नरेंद्र भूषण ने “मेरी मिट्टी, मेरा फ़र्ज़” शीर्षक से एक लघु फिल्म का शुभारंभ किया। यह फिल्म मिट्टी संरक्षण, क्षतिग्रस्त भू-दृश्यों के पुनर्स्थापन, वर्षा आधारित क्षेत्रों के विकास तथा जलागम प्रबंधन के माध्यम से सतत भविष्य सुनिश्चित करने के संदेश को समर्पित है।

अपने संबोधन में सचिव, भूमि संसाधन विभाग ने कहा कि जलागम प्रबंधन विज्ञान आधारित, जनभागीदारी पर आधारित तथा प्रशासनिक दृष्टि से सरल होना चाहिए। उन्होंने दिशानिर्देश तैयार करते समय वर्षा आधारित क्षेत्रों के विकास, कृषि उत्पादकता में वृद्धि, फसल सघनता बढ़ाने, जल सुरक्षा एवं भूजल पुनर्भरण को सुदृढ़ करने, जलवायु लचीलापन विकसित करने तथा जलागम परिसंपत्तियों के रखरखाव जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों को ध्यान में रखने पर बल दिया। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय तकनीकी दिशानिर्देशों में सुझाए गए उपाय व्यापक स्तर पर लागू किए जा सकने योग्य होने चाहिए।

एनआरएए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. चंद्रशेखर कुमार ने पहली राष्ट्रीय परामर्श बैठक में प्राप्त सुझावों का उल्लेख करते हुए निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी, डेटा-आधारित दृष्टिकोण, अभिसरण (कन्वर्जेंस), पंचायती राज संस्थाओं की सहभागिता तथा परियोजना-उपरांत स्थिरता पर जोर दिया। उन्होंने चैटबॉट आधारित अनुप्रयोगों के एकीकरण, प्रौद्योगिकी-संचालित निगरानी एवं मूल्यांकन प्रणाली, मजबूत निर्णय सहायता प्रणाली (DSS) और राष्ट्रीय वेब पोर्टल विकसित करने की आवश्यकता भी रेखांकित की।

भूमि संसाधन विभाग के संयुक्त सचिव (जलागम प्रबंधन) ने योजना निर्माण हेतु उच्च-रिज़ॉल्यूशन चित्र प्राप्त करने के लिए ड्रोन तकनीक के उपयोग, भूमि संसाधन सूची (LRI) एवं हाइड्रोलॉजी-लाइट दृष्टिकोण को अपनाने, राज्यों में संस्थागत एवं क्रियान्वयन तंत्र में सुधार तथा तकनीकी सेवा प्रदाताओं, संस्थानों और गैर-सरकारी संगठनों की भागीदारी के माध्यम से जलागम परिसंपत्तियों के दीर्घकालिक रखरखाव एवं स्थिरता सुनिश्चित करने पर विचार-विमर्श का सुझाव दिया।

इस परामर्श बैठक का उद्देश्य मसौदा राष्ट्रीय तकनीकी दिशानिर्देशों पर विचार-विमर्श करना तथा विशेषज्ञों के सुझावों को शामिल करते हुए देशभर में जलागम योजना, क्रियान्वयन, निगरानी और स्थिरता को मजबूत बनाना है। इन चर्चाओं से जलागम प्रशासन में सुधार और वर्षा आधारित क्षेत्रों में जलवायु लचीलापन बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान मिलने की अपेक्षा है।

बैठक के दौरान भूमि संसाधन सूची (LRI), हाइड्रोलॉजी, निर्णय सहायता प्रणाली (DSS), प्रौद्योगिकी-सक्षम निगरानी एवं मूल्यांकन, सामुदायिक सहभागिता एवं सामाजिक संगठन, आजीविका संवर्धन, जलागम स्थिरता तथा रिमोट सेंसिंग एवं जीआईएस आधारित वेब पोर्टल विकास जैसे प्रमुख विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए।

इस कार्यक्रम में राज्यों तथा प्रतिष्ठित संस्थानों का प्रतिनिधित्व करने वाले लगभग 100 विशेषज्ञों और व्यावसायिकों ने भाग लिया, जो देश में वैज्ञानिक एवं सतत जलागम प्रबंधन को आगे बढ़ाने के प्रति व्यापक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

पशुपालन एवं डेयरी विभाग के सचिव नरेश पाल गंगवार ने डुवासु, मथुरा का दौरा किया

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भारत सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग (डीएएचडी) के सचिव नरेश पाल गंगवार ने 17 जून 2026 को उत्तर प्रदेश पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो-अनुसंधान संस्थान (डुवासु), मथुरा का दौरा किया।

दौरे के दौरान सचिव ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, अनुसंधान, नैदानिक तथा पशुधन विकास संबंधी गतिविधियों की समीक्षा की। उन्होंने टीचिंग वेटरिनरी क्लीनिकल कॉम्प्लेक्स (टीवीसीसी), लाइवस्टॉक फार्म कॉम्प्लेक्स (एलएफसी), विभिन्न उन्नत प्रयोगशालाओं तथा शिक्षण सुविधाओं का निरीक्षण किया। गंगवार ने विश्वविद्यालय की विशेष बकरी इकाई (गोट यूनिट) का भी दौरा किया, जहां उन्होंने उन्नत प्रजनन एवं प्रजनन जैव-प्रौद्योगिकी कार्यक्रमों में विशेष रुचि दिखाई।

दौरे का प्रमुख आकर्षण भारत की अग्रणी बकरी वीर्य संरक्षण (गोट सीमेन फ्रीजिंग) सुविधा का निरीक्षण रहा, जो बकरी इकाई में स्थापित है। विश्वविद्यालय द्वारा बकरियों की आनुवंशिक गुणवत्ता सुधार, संरक्षण तथा श्रेष्ठ जर्मप्लाज्म के प्रसार के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए गंगवार ने चर्चा की कि ऐसी तकनीकें छोटे जुगाली करने वाले पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने और ग्रामीण आजीविकाओं को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

पर्यावरणीय स्थिरता के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए सचिव ने परिसर में राष्ट्रीय अभियान “एक पेड़ मां के नाम” के अंतर्गत वृक्षारोपण कार्यक्रम में भाग लिया। यह पहल कृषि विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामूहिक समर्पण का प्रतीक है।

गंगवार ने दीनदयाल उपाध्याय सभागार में संकाय सदस्यों, वैज्ञानिकों, छात्रों एवं शोधकर्ताओं के साथ एक संवादात्मक सत्र की अध्यक्षता भी की। इस दौरान पशु स्वास्थ्य, डेयरी विकास, उद्यमिता तथा क्षेत्र में भविष्य की विकास संभावनाओं पर व्यापक चर्चा हुई।

अपने संबोधन में गंगवार ने देशभर में पशु चिकित्सा अवसंरचना को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने विशेष रूप से आधुनिक क्लीनिकल सुविधाओं, नैदानिक प्रयोगशालाओं, उन्नत प्रजनन प्रणालियों तथा प्रौद्योगिकी-संचालित पशु स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि पशु चिकित्सा संस्थान पशुधन उत्पादकता बढ़ाने, रोग नियंत्रण, ग्रामीण समृद्धि तथा खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने छात्रों और शोध समुदाय से जमीनी स्तर के किसानों एवं पशुपालकों को सीधे लाभ पहुंचाने वाले व्यावहारिक और क्षेत्र-उन्मुख समाधान विकसित करने का आह्वान किया।

कुलपति डॉ. अभिजीत मित्रा ने अनुसंधान और कौशल विकास के क्षेत्र में डुवासु के योगदानों पर प्रकाश डाला। यह दौरा विश्वविद्यालय और पशुपालन एवं डेयरी विभाग के बीच सहयोग को और मजबूत करने में सफल रहा तथा संस्थागत अनुसंधान को राष्ट्रीय पशुधन विकास लक्ष्यों के साथ जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

छत्तीसगढ़ में पीएमजीएसवाय की उच्च स्तरीय समीक्षा,मुख्य सचिव ने दिए नई बसाहटों को सड़कों से जोड़ने के निर्देश

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में ग्रामीण सड़क नेटवर्क को मजबूत और सुगम बनाने की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। मंत्रालय (महानदी भवन) में मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अंतर्गत राज्य स्तरीय स्थायी समिति की 28वीं बैठक संपन्न हुई। बैठक में मुख्य सचिव ने ग्रामीण सड़कों के निर्माण में गुणवत्ता से कोई समझौता न करने और कार्यों में तेजी लाने के कड़े निर्देश दिए हैं।

सर्वे और क्लीयरेंस पहले, निर्माण बाद में

मुख्य सचिव ने बुनियादी ढांचे के विकास को गति देने के लिए अधिकारियों को कार्यप्रणाली बदलने के निर्देश दिए। कोई भी सड़क बनाने से पहले उसका जमीनी स्तर पर व्यापक सर्वे किया जाए। सड़क निर्माण शुरू होने से पहले ही भूमि अधिग्रहण और फॉरेस्ट क्लीयरेंस (वन विभाग की अनुमति) से जुड़े सभी कानूनी व प्रशासनिक कार्य अनिवार्य रूप से पूरे कर लिए जाएं। जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन बिछाने के कारण जो ग्रामीण सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं, उनका सुधार और मरम्मत कार्य प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरा करने को कहा गया है।

PMGSY फेस-4& बिना सड़क वाली सभी बसाहटें जुड़ेंगी

बैठक का सबसे अहम फैसला आगामी चरणों को लेकर रहा। मुख्य सचिव ने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया है कि पीएमजीएसवाय फेस-4 के अंतर्गत राज्य की ऐसी सभी बसाहटों को चिन्हित किया जाए जहां अब तक पक्की सड़कें नहीं पहुंची हैं। एक व्यापक कार्ययोजना तैयार कर इन सभी बसाहटों को मुख्य सड़क नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।

बस्तर के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों के सहयोग से बनीं 52 सड़कें

बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों ने अब तक की वित्तीय और भौतिक प्रगति का ब्योरा पेश किया कि राज्य में पीएमजीएसवाय फेस-1, 2 और 3 के तहत अब तक 8 हजार 358 सड़कें और लगभग 447 पुल-पुलिया बनाए जा चुके हैं। वर्ष 2025-26 के दौरान बस्तर संभाग के धुर नक्सल प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बलों के सहयोग से 52 अपूर्ण सड़कों का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। इसके अलावा फेस-3 के तहत 31 बड़े पुलों का निर्माण भी पूरा हुआ।

पीएम जनमन (PM JANMAN) योजना की प्रगति

भारत सरकार द्वारा निर्धारित 1,372 किलोमीटर लक्ष्य के मुकाबले राज्य में 1,517 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया जा चुका है। विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PGVT) की 872 बसाहटों के लिए स्वीकृत 807 सड़कों में से 366 सड़कों का काम पूरा हो चुका है, जबकि 429 सड़कों पर काम तेजी से चल रहा है।

इस उच्च स्तरीय बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, गृह विभाग की प्रमुख सचिव निहारिका बारिक सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव एवं खनिज सचिव पी. दयानंद, आवास एवं पर्यावरण सचिव अंकित आनंद, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी सचिव अब्दुल कैसर अब्दुल हक और छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण के सीईओ भीम सिंह सहित वन, परिवहन, लोक निर्माण, वित्त विभाग और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खरीफ 2026 की तैयारियों की समीक्षा की, किसानों के हितों को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता

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नई दिल्ली- केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज कृषि भवन, नई दिल्ली में उच्च स्तरीय साप्ताहिक कृषि समीक्षा बैठक की। बैठक में पूरे देश में खरीफ 2026 सीजन की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई।

बैठक में संभावित एल नीनो परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विशेष चर्चा की गई। मंत्री ने विशेष रूप से कपास उत्पादन बढ़ाने, दलहन में आत्मनिर्भरता और कम वर्षा वाले जिलों के लिए अग्रिम आपदा प्रबंधन योजना पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता किसानों के हितों की सुरक्षा है।

कम वर्षा वाले जिलों के लिए विशेष तैयारी के निर्देश

चौहान ने निर्देश दिया कि जिन जिलों में कम या असमान वर्षा की संभावना है, उन्हें पहले से चिन्हित किया जाए और राज्य सरकारों के साथ मिलकर फसल-वार आकस्मिक योजनाएं तैयार की जाएं। उन्होंने जल संरक्षण, नमी प्रबंधन, अंतर-फसल (इंटरक्रॉपिंग) और वैकल्पिक फसल पैटर्न पर विशेष जोर दिया।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक जोखिम-प्रवण जिले के लिए अलग और व्यावहारिक रणनीति बनाई जाए, ताकि किसानों को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।

किसानों तक सही जानकारी पहुंचाने पर जोर

कृषि मंत्री ने कहा कि 9–10 संभावित प्रभावित राज्यों में जिला प्रशासन, कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) और अन्य संस्थानों के साथ समन्वय बैठकें की जाएं। उन्होंने निर्देश दिया कि किसानों को वैज्ञानिक और भरोसेमंद जानकारी दी जाए, ताकि वे सुरक्षित फसल विकल्पों का चयन कर सकें।

कपास उत्पादन बढ़ाने पर विशेष फोकस

बैठक में कपास उत्पादन बढ़ाने को लेकर भी विस्तृत चर्चा हुई। चौहान ने वैज्ञानिक तकनीक, उपयुक्त किस्मों का चयन, मल्चिंग, नमी संरक्षण और अंतर-फसल प्रणाली को बड़े स्तर पर अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को मिशन मोड में कार्य करने के निर्देश दिए।

दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन

दलहन में आत्मनिर्भरता को लेकर मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य अरहर, उड़द और मूंग जैसी फसलों में देश को आत्मनिर्भर बनाना है। इसके लिए बेहतर बीज उपलब्धता, क्षेत्र विस्तार और तकनीकी मार्गदर्शन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उर्वरक और जल भंडारण की स्थिति की समीक्षा

बैठक में उर्वरक उपलब्धता, मंडी भाव, जलाशयों की स्थिति और राज्यों में स्टॉक की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने कहा कि देश में उर्वरक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है और आपूर्ति प्रणाली को और मजबूत किया जा रहा है।

कृषि संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर

उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), कृषि विश्वविद्यालयों, KVKs और राज्य कृषि विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि तकनीकी जानकारी तभी उपयोगी है जब वह समय पर खेतों तक पहुंचे।

कृषि मंत्री ने कहा कि निरंतर संवाद, समीक्षा और फीडबैक से ही खरीफ 2026 को सुरक्षित और सफल बनाया जा सकता है।

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