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डाक विभाग की वार्षिक समीक्षा बैठक: रिकॉर्ड प्रदर्शन, अगले वर्ष के लिए तेज़ विकास की रणनीति तय

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नई दिल्ली:  डाक विभाग  ने वित्त वर्ष 2025–26 की वार्षिक व्यवसाय समीक्षा बैठक आज नई दिल्ली में आयोजित की। बैठक की अध्यक्षता  ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया (संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री) ने की। इसमें पोस्टल निदेशालय के वरिष्ठ अधिकारियों और देशभर के 23 पोस्टल सर्किलों के मुख्य पोस्टमास्टर जनरल शामिल हुए।

रिकॉर्ड राजस्व, ‘ऐतिहासिक वर्ष’ घोषित

बैठक की शुरुआत में केंद्रीय मंत्री ने विभाग को ₹15,296 करोड़ का राजस्व अर्जित करने पर बधाई दी, जो पिछले वर्ष ₹13,218 करोड़ की तुलना में 16% अधिक है। उन्होंने 2025–26 को “ऐतिहासिक वर्ष” बताया। विभाग ने ₹17,546 करोड़ के लक्ष्य का 88% हासिल किया।
8 सर्किलों ने 90% से अधिक लक्ष्य हासिल किया, जबकि 14 सर्किलों का प्रदर्शन 80–90% के बीच रहा।

कोर क्षेत्रों पर और ध्यान देने की जरूरत

मंत्री ने कहा कि पार्सल, मेल और अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय जैसे प्रमुख क्षेत्रों में और अधिक सुधार की आवश्यकता है, ताकि विकास की पूरी क्षमता हासिल की जा सके।

तेज़ी से बढ़ते प्रमुख क्षेत्र

बैठक में विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रों के प्रदर्शन पर प्रकाश डाला गया:

  • सिटिजन सेंट्रिक सर्विसेज (CCS): 70% वृद्धि (दिल्ली सर्किल—782% वृद्धि)

  • पार्सल: 69% वृद्धि (राजस्थान सर्किल—265% वृद्धि)

  • मेल ऑपरेशंस: 34% वृद्धि (असम सर्किल—108% वृद्धि)

  • PLI/RPLI: 30% वृद्धि (आंध्र प्रदेश—47% वृद्धि)

  • पोस्ट ऑफिस सेविंग्स बैंक (POSB): 13% वृद्धि (बिहार—27% वृद्धि)

राजस्थान बना सबसे बेहतर सर्किल

कुल प्रदर्शन में राजस्थान सर्किल 102% लक्ष्य हासिल कर सबसे आगे रहा, साथ ही 34% वृद्धि दर्ज कर अन्य सर्किलों के लिए उदाहरण प्रस्तुत किया।

भविष्य की रणनीति और सुधार

मंत्री ने स्पष्ट किया कि डाक विभाग का भविष्य पार्सल और मेल सेवाओं की मजबूती पर निर्भर करेगा। उन्होंने निर्देश दिए:

  • उच्च विकास वाले क्षेत्रों को और विस्तार देना

  • लागत नियंत्रण और जवाबदेही सुनिश्चित करना

  • सर्किल स्तर पर चार प्रमुख वर्टिकल (पार्सल, HR, फाइनेंस, बिजनेस डेवलपमेंट) को मजबूत करना

  • ग्राहक-केंद्रित और बिक्री-आधारित दृष्टिकोण अपनाना

  • मेल और पार्सल सेवाओं का बेहतर एकीकरण

प्रधानमंत्री के विज़न के अनुरूप बदलाव

मंत्री ने कहा कि नरेंद्र मोदी के विज़न के तहत डाक विभाग एक आधुनिक, ग्राहक-केंद्रित और भविष्य के लिए तैयार संगठन में बदल रहा है।

निष्कर्ष

बैठक के अंत में मंत्री ने विश्वास जताया कि डाक विभाग आने वाले वर्ष में और बेहतर प्रदर्शन करेगा। उन्होंने कहा कि पार्सल, मेल और अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर निरंतर ध्यान देकर विभाग नई ऊँचाइयों को हासिल कर सकता है।

डाक प्रशिक्षण केंद्र सहारनपुर के 75 वर्ष पूरे, स्मारक डाक टिकट जारी

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नई दिल्ली- डाक विभाग ने डाक प्रशिक्षण केंद्र (PTC), सहारनपुर के 75 वर्ष पूरे होने पर प्लेटिनम जुबली मनाई। इस अवसर पर एक स्मारक डाक टिकट जारी किया गया, जो संस्थान की उत्कृष्ट प्रशिक्षण परंपरा और राष्ट्र निर्माण में योगदान को दर्शाता है।

यह डाक टिकट केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया द्वारा आकाशवाणी भवन, नई दिल्ली स्थित रंग भवन सभागार में जारी किया गया। इस कार्यक्रम में डाक सेवाओं के महानिदेशक जितेंद्र गुप्ता, सदस्य (वित्त) मनीष सिन्हा, सीजीसीए वंदना गुप्ता और सदस्य (एचआरडी) कर्नल एस. एफ. एच. रिजवी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में मंत्री सिंधिया ने इस अवसर को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि डाक प्रशिक्षण केंद्र केवल एक संस्थान नहीं, बल्कि एक ऐसी जगह है जहां इतिहास जीवित है और निरंतर विकसित हो रहा है। उन्होंने कहा कि 75 वर्षों का यह सफर राष्ट्र निर्माण में इसके महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाता है।

भविष्य की दृष्टि पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने कहा कि भारत वर्ष 2030 तक न केवल देश बल्कि विश्व का एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस लक्ष्य को हासिल करने में डाक विभाग और उसके कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

2 अप्रैल 1951 को स्थापित डाक प्रशिक्षण केंद्र सहारनपुर का उद्देश्य स्वतंत्र भारत के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करना था। यह संस्थान 56.71 एकड़ परिसर में फैला हुआ है और अब उत्तरी भारत के 8 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के डाक कर्मचारियों को प्रशिक्षण प्रदान करने वाला प्रमुख संस्थान बन चुका है।

आज यह केंद्र 11 आधुनिक कंप्यूटर लैब और एक विशेष ई-स्टूडियो से सुसज्जित है, जहां हर साल करीब 3,000 कर्मचारियों को ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स, डिजिटल संचालन और वित्तीय समावेशन जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाता है। साथ ही अनुशासन, विश्वसनीयता और जनसेवा जैसे मूल्यों को भी विकसित किया जाता है।

यह स्मारक डाक टिकट देशभर के फिलैटेलिक ब्यूरो में उपलब्ध है और इसे ऑनलाइन भी खरीदा जा सकता है।

डाक कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल ने डॉ. जितेंद्र सिंह से की मुलाकात, विभिन्न मुद्दों पर हुई चर्चा

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डाक कर्मचारियों और विभिन्न डाक संघों के प्रतिनिधियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान तथा पीएमओ, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) का समय-समय पर उनकी समस्याओं के समाधान के लिए आभार व्यक्त किया।

बैठक के दौरान डाक विभाग से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें कुछ वर्गों में कैडर पुनर्गठन, वित्तीय उन्नयन योजनाओं का क्रियान्वयन और पेंशन से संबंधित विषय शामिल थे। मेल मोटर सेवा (Mail Motor Service) की बदलती भूमिका और भविष्य को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया।

प्रतिनिधिमंडल ने पेंशन और पारिवारिक पेंशन से जुड़े कई मामलों को उठाया। इस संदर्भ में डॉ. जितेंद्र सिंह ने लंबित मामलों के शीघ्र समाधान के लिए पेंशन अदालत, CPENGRAM और अन्य शिकायत निवारण मंचों का प्रभावी उपयोग करने का सुझाव दिया।

करियर प्रगति से जुड़े मुद्दों और विभिन्न क्षेत्रों में योजनाओं के समान क्रियान्वयन की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। ग्रामीण डाक सेवकों (GDS) से जुड़े सामाजिक सुरक्षा और कल्याण उपायों पर भी विचार किया गया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने डाक कर्मचारियों की देश के दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में अंतिम छोर तक सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की। उन्होंने बदलती संचार प्रणाली और नई तकनीकों के अनुरूप कार्य संरचना और सेवाओं में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया।

मंत्री ने यह भी कहा कि कैडर पुनर्गठन से जुड़े मुद्दों को संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय में तय प्रक्रियाओं के अनुसार देखा जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि उठाए गए सभी मुद्दों पर संबंधित मंत्रालयों और विभागों के साथ विचार किया जाएगा।

बैठक के अंत में प्रतिनिधिमंडल ने इस संवाद को सकारात्मक बताते हुए नियमित और रचनात्मक बातचीत के अवसर के लिए आभार व्यक्त किया।

डाक विभाग और TRIFED की साझेदारी से आदिवासी उत्पादों को मिलेगा नया बाजार

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आदिवासी कारीगरों को सशक्त बनाने और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, संचार मंत्रालय के अंतर्गत डाक विभाग (DoP) ने जनजातीय कार्य मंत्रालय के अधीन भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ (TRIFED) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

इस साझेदारी का उद्देश्य TRIFED के ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, विशेषकर Tribes India ई-मार्केटप्लेस, के माध्यम से बेचे जाने वाले उत्पादों की डिलीवरी के लिए एक मजबूत, विश्वसनीय और किफायती लॉजिस्टिक्स ढांचा तैयार करना है।

इस MoU के तहत डाक विभाग TRIFED के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से प्राप्त सभी ऑर्डर्स के लिए एंड-टू-एंड लॉजिस्टिक्स समाधान प्रदान करेगा। अपने व्यापक राष्ट्रीय नेटवर्क और अंतिम छोर (last-mile) तक पहुंच का उपयोग करते हुए, डाक विभाग देशभर में आदिवासी उत्पादों की सुचारु पिकअप, ट्रांसमिशन और डिलीवरी सुनिश्चित करेगा।

यह सहयोग आदिवासी कारीगरों और उद्यमियों के लिए बाजार तक पहुंच को मजबूत करने, ऑर्डर पूर्ति को बेहतर बनाने और ग्राहक अनुभव को बढ़ाने में सहायक होगा। डाक विभाग शिपमेंट ट्रैकिंग, नियमित MIS रिपोर्टिंग और TRIFED के डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ API इंटीग्रेशन जैसी सुविधाएं भी प्रदान करेगा, जिससे लॉजिस्टिक्स प्रबंधन सुगम होगा।

इस व्यवस्था के तहत TRIFED के लिए नेशनल अकाउंट फैसिलिटी के अंतर्गत Book Now Pay Later (BNPL) खाता भी बनाया जाएगा, जिससे स्पीड पोस्ट के माध्यम से शिपमेंट बुकिंग और भुगतान प्रक्रिया सरल हो जाएगी।

TRIFED अपनी ओर से उचित पैकेजिंग, लेबलिंग और ऑर्डर से संबंधित जानकारी साझा करना सुनिश्चित करेगा, ताकि लॉजिस्टिक्स संचालन प्रभावी रूप से हो सके। यह पहल देशभर के विभिन्न क्षेत्रीय कार्यालयों से पिकअप को कवर करेगी, जिससे व्यापक भौगोलिक पहुंच सुनिश्चित होगी।

यह साझेदारी सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसके तहत आदिवासी आजीविका को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ा जा रहा है। बेहतर लॉजिस्टिक्स समर्थन के माध्यम से यह पहल आदिवासी समुदायों की आय बढ़ाने, उनके उत्पादों की पहुंच का विस्तार करने और समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में सहायक होगी।

यह समझौता प्रारंभिक रूप से दो वर्षों के लिए मान्य होगा, जिसे आपसी सहमति से आगे बढ़ाया जा सकता है।

डाक विभाग ने ‘भारत की कठपुतलियाँ’ विषय पर 8 स्मारक डाक टिकट जारी किए, देश की समृद्ध लोक कला परंपरा को मिला सम्मान

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नई दिल्ली- डाक विभाग ने 13 फरवरी 2026 को नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में “पपेट्स ऑफ इंडिया (भारत की कठपुतलियाँ)” विषय पर 8 स्मारक डाक टिकटों का विशेष सेट जारी किया। इन टिकटों का औपचारिक विमोचन डाक विभाग की सचिव सुश्री वंदिता कौल ने प्रतिष्ठित अतिथियों, कलाकारों और सांस्कृतिक जगत के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में किया।

इस अवसर पर सचिव (डाक) ने कहा कि डाक टिकट किसी भी राष्ट्र की विरासत के छोटे राजदूत होते हैं। उन्होंने कहा कि यह विशेष अंक भारत की समृद्ध और विविध कठपुतली परंपराओं का सम्मान करता है, जिन्होंने पीढ़ियों से लोककथाओं, मूल्यों और सांस्कृतिक स्मृति को जीवित रखा है।

भारत की प्राचीन कठपुतली परंपरा

कठपुतली कला भारत की सबसे प्राचीन और जीवंत कहानी कहने की परंपराओं में से एक है। सदियों से कठपुतली कलाकार संगीत, कथावाचन और दृश्य कला के माध्यम से महाकाव्य, लोककथाएं, नैतिक शिक्षाएं और सामाजिक संदेश प्रस्तुत करते रहे हैं।

भारत में कठपुतली कला को मुख्य रूप से चार प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है:

  • डोरी वाली कठपुतलियाँ (String Puppets)

  • दस्ताने वाली कठपुतलियाँ (Glove Puppets)

  • छड़ी कठपुतलियाँ (Rod Puppets)

  • छाया कठपुतलियाँ (Shadow Puppets)

यह कला पारिवारिक परंपरा के रूप में पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होती रही है।

देश के विभिन्न राज्यों की कठपुतली कला को दर्शाते टिकट

इस स्मारक श्रृंखला में भारत के विभिन्न राज्यों की पारंपरिक कठपुतली कला को दर्शाया गया है, जिनमें शामिल हैं:

  • कठपुतली – राजस्थान

  • यक्षगान सूत्रदा गोम्बेयट्टा – कर्नाटक

  • डांगर पुतुल – पश्चिम बंगाल

  • काठी कुंधेई – ओडिशा

  • बेनीर पुतुल – पश्चिम बंगाल

  • पावकथकली – केरल

  • रावणछाया – ओडिशा

  • टोलु बोम्मलट्टा – आंध्र प्रदेश

प्रत्येक टिकट संबंधित क्षेत्र की विशिष्ट पोशाक, शैली और प्रस्तुति कला को दर्शाता है।

डिज़ाइन और फिलेटेलिक उत्पाद

डाक टिकटों, प्रथम दिवस आवरण (FDC), ब्रोशर, मिनिएचर शीट और विशेष कैंसलेशन का डिज़ाइन संखा समंता द्वारा किया गया है। इन टिकटों के लिए कलात्मक संदर्भ और सामग्री संगीत नाटक अकादमी, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, दरिचा फाउंडेशन और प्रसिद्ध कठपुतली कलाकार दादी पुदुमजी द्वारा प्रदान की गई।

  • टिकट मूल्य: 500 पैसे (8 टिकटों का सेट)

  • ये टिकट और अन्य फिलेटेलिक उत्पाद देशभर के फिलेटेलिक ब्यूरो और epostoffice.gov.in पर उपलब्ध हैं।


डाक विभाग ने देशभर में एटीएम अवसंरचना का किया आधुनिकीकरण

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नई दिल्ली- बैंकिंग सेवाओं को अधिक सुलभ और उपयोगकर्ता अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए डाक विभाग ने देशभर में अपनी एटीएम अवसंरचना का आधुनिकीकरण किया है।

देश के विभिन्न डाकघरों में स्थापित ये 887 एटीएम नागरिकों को उनके घर के निकट आवश्यक बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। यह पहल विशेष रूप से ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए लाभकारी सिद्ध हो रही है, जिससे डिजिटल परिवर्तन के माध्यम से वित्तीय समावेशन सुनिश्चित करने की सरकार की परिकल्पना को मजबूती मिल रही है।

इन एटीएम के माध्यम से ग्राहक आसानी से नकद निकासी, खाते की शेष राशि की जानकारी प्राप्त करने तथा अन्य बुनियादी बैंकिंग लेन-देन कर सकते हैं।

डाक विभाग ने देशभर में उपलब्ध अपनी एटीएम सेवाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने के लिए सभी नागरिकों से अपील की है।

उपभोक्ता संरक्षण और गुणवत्ता परीक्षण सेवाओं की पहुंच मजबूत करने के लिए NTH और डाक विभाग ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

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उपभोक्ता मामलों, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अधीन नेशनल टेस्ट हाउस (NTH) और डाक विभाग, संचार मंत्रालय, भारत सरकार ने देशभर में नमूनों के संग्रहण और उन्हें सुरक्षित, विश्वसनीय एवं समय पर NTH प्रयोगशालाओं तक पहुँचाने के लिए मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।


इस MoU के तहत, डाक विभाग ग्राहकों से उनके दरवाजे पर नमूने उठाने और उन्हें कोलकाता, गाजियाबाद, मुंबई, जयपुर, गुवाहाटी, वाराणसी और चेन्नई में स्थित NTH प्रयोगशालाओं तक पहुँचाने की सुविधा प्रदान करेगा। यह सुविधा डाक विभाग के व्यापक और भरोसेमंद नेटवर्क का उपयोग करेगी, जो भारत के शहरी, ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों तक फैला हुआ है।

MoU पर 24 दिसंबर 2025 को राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस के अवसर पर भारत मंडपम, नई दिल्ली में हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर प्रल्हाद जोशी, माननीय केंद्रीय मंत्री, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण और बी. एल. वर्मा, राज्य मंत्री, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण उपस्थित थे।

इस रणनीतिक सहयोग से NTH की परीक्षण सेवाओं की सुलभता, किफायती और दक्षता में काफी वृद्धि होगी। यह पहल लॉजिस्टिक चुनौतियों को हल करेगी और परीक्षण की प्रक्रिया का समय कम करेगी। इसका लाभ उपभोक्ता, निर्माता, MSME, स्टार्टअप और व्यवसायों, विशेषकर दूर-दराज और पिछड़े क्षेत्रों में स्थित लोगों को मिलेगा। यह पहल व्यवसाय करने में आसानी, उपभोक्ता संरक्षण तंत्र को मजबूत करने और मानक और गुणवत्ता संस्कृति को बढ़ावा देने में भी सहायक होगी।

यह साझेदारी आत्मनिर्भर भारत के विजन के अनुरूप है, जो उपभोक्ता विश्वास बढ़ाने, वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सुधार और एक मजबूत, आत्मनिर्भर भारत बनाने में गुणवत्ता और मानकीकरण की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करती है। यह पहल जन-केंद्रित सेवा और मंत्रालयों के बीच प्रभावी सहयोग को भी दर्शाती है, जिसमें सार्वजनिक अवसंरचना का सर्वोत्तम उपयोग किया गया है।

इस सहयोग के माध्यम से भारत के हर नागरिक तक गुणवत्ता परीक्षण सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित होगी, जिससे बाजार में विश्वास, पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत होगी।

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