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आधार सेवा केंद्र बना ग्रामीणों के लिए भरोसे का आधार

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वर्षों से बंद पड़ी सुविधाएं हुईं बहाल,आयते को फिर मिलने लगा योजनाओं का लाभ

रायपुर- राज्य शासन द्वारा नागरिक सेवाओं को सरल, सुलभ और पारदर्शी बनाने के लिए संचालित आधार सेवा केंद्र अब ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला रहे हैं। दंतेवाड़ा जिले के ग्राम तोयलंका की निवासी आयते की कहानी इसका प्रेरक उदाहरण है, जिनकी वर्षों पुरानी आधार संबंधी समस्या का समाधान होने से उन्हें शासकीय योजनाओं का लाभ फिर से मिलने लगा है।

आयते लंबे समय से आधार कार्ड अपडेट नहीं होने के कारण परेशान थीं। आधार निष्क्रिय होने से उन्हें पेंशन, राशन और अन्य शासकीय सेवाओं का लाभ प्राप्त करने में लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। कई बार प्रयास करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो पाने से वे निराश हो चुकी थीं।

इसी बीच उन्हें जानकारी मिली कि जिला कलेक्ट्रेट परिसर में आधार सेवा केंद्र संचालित किया जा रहा है, जहां आधार संबंधी समस्याओं का त्वरित समाधान किया जाता है। जानकारी मिलते ही वे सेवा केंद्र पहुंचीं और अपनी समस्या अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बताई।

जांच में पता चला कि लंबे समय से ई-केवाईसी नहीं होने के कारण उनका आधार निष्क्रिय हो गया था। सेवा केंद्र के कर्मचारियों ने आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन कर उनकी ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी कराई और आधार को पुनः सक्रिय कर दिया। पूरी प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी की गई।

आधार पुनः सक्रिय होने के बाद आयते को अब पेंशन, राशन और विभिन्न सामाजिक सुरक्षा एवं जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है। उन्होंने जिला प्रशासन और आधार सेवा केंद्र के कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस सुविधा ने उनकी वर्षों पुरानी समस्या का समाधान कर दिया और उनके जीवन में नई उम्मीद जगाई है।

राज्य शासन की मंशा है कि हर नागरिक को बिना अनावश्यक परेशानी के शासन की योजनाओं और सेवाओं का लाभ मिले। आधार सेवा केंद्रों के माध्यम से राज्य के विभिन्न जिलों में ई-केवाईसी, बायोमेट्रिक अपडेट, मोबाइल नंबर अपडेट और आधार सक्रियण जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे नागरिकों को सरकारी योजनाओं तक पहुंच आसान हो रही है और डिजिटल सेवाओं पर उनका भरोसा मजबूत हो रहा है।

गांवों के समग्र विकास से ही विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प होगा साकार : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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मुख्यमंत्री साय  ने जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में दिए विकास के स्पष्ट मंत्र

विकसित भारत जी राम जी योजना, लखपति दीदी, पीएम आवास और पीएम सूर्यघर योजना को गांव-गांव तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के निर्देश

अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे योजनाओं का लाभ, यही सुशासन की कसौटी - मुख्यमंत्री साय

रायपुर- ग्राम पंचायतों को केवल योजनाओं के क्रियान्वयन की इकाई नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन, आर्थिक समृद्धि और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के केंद्र के रूप में विकसित करना होगा। यदि ग्राम पंचायतें सशक्त हों, गांव आत्मनिर्भर बनें और प्रत्येक ग्रामीण विकास की प्रक्रिया का सहभागी बने, तभी विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प वास्तविक रूप ले सकेगा।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज नवा रायपुर स्थित एसआईआरडी परिसर, निमोरा में आयोजित प्रदेश के सभी जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक एवं कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह बात कही। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन का वास्तविक अर्थ यही है कि शासन की योजनाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। ग्राम पंचायतें जनभागीदारी के माध्यम से आत्मनिर्भर गांव बनाने का सबसे प्रभावी मंच हैं। अधिकारियों को संवेदनशीलता, ईमानदारी और सेवा भाव के साथ कार्य करते हुए ग्रामीणों का विश्वास जीतना होगा।

मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों से कहा कि शासकीय योजनाओं की वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी, जब उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और गांव का प्रत्येक नागरिक स्वयं विकास यात्रा का सक्रिय भागीदार बने। उन्होंने प्रत्येक जिले में ऐसे गांवों की पहचान करने के निर्देश दिए, जहां जनभागीदारी, स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और प्रभावी योजना के माध्यम से आदर्श विकास मॉडल विकसित किए जा सकें।

विकसित भारत जी राम जी योजना से ग्रामीण विकास को मिलेगी नई गति

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि 1 जुलाई से लागू विकसित भारत जी राम जी योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने वाली महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजना के माध्यम से रोजगार सृजन के साथ-साथ स्थायी परिसंपत्तियों और गुणवत्तापूर्ण अधोसंरचना का निर्माण प्राथमिकता से किया जाए।

इसके माध्यम से जल संरक्षण, कृषि, ग्रामीण अधोसंरचना, आजीविका और सामुदायिक परिसंपत्तियों के निर्माण को नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर प्रबंधन बने प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण विकास केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं होना चाहिए। जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य, कृषि उत्पादकता, पशुपालन, मत्स्य पालन तथा स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का वैज्ञानिक उपयोग ही स्थायी विकास का आधार है। उन्होंने प्रत्येक जिले में स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप जल संरक्षण की कार्ययोजना तैयार करने तथा वर्षा जल संचयन एवं भूजल संवर्धन को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

10.40 लाख से अधिक महिलाएं बनीं लखपति दीदी, अब लक्ष्य करोड़पति दीदी

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण को नई दिशा मिली है। छत्तीसगढ़ में अब तक 10 लाख 40 हजार से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। अब सरकार उन्हें उद्यमिता, कौशल विकास और स्वरोजगार से जोड़कर बड़ी संख्या में करोड़पति दीदी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

उन्होंने जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को निर्देश दिए कि पात्र महिलाओं की पहचान कर उन्हें स्व-सहायता समूहों, कौशल विकास, आजीविका गतिविधियों और नई औद्योगिक नीति से उत्पन्न अवसरों से जोड़ा जाए।

बस्तर के अंतिम गांव तक पहुंचे विकास की रोशनी

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बस्तर संभाग के अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में विकास कार्य सर्वोच्च प्राथमिकता से किए जाएं। उन्होंने कहा कि जिन गांवों तक कभी पहुंचना कठिन था, वहां अब सड़क, बिजली, आवास, राशन, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं तेजी से पहुंच रही हैं। सरकार का लक्ष्य विकास की रोशनी अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है।

पीएम आवास और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन पर जोरमुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना के निर्माण कार्यों में तेजी लाने तथा सभी पात्र हितग्राहियों को समय पर लाभ दिलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन सहित सभी योजनाओं के भुगतान में किसी भी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए तथा पंचायत स्तर पर प्रभावी निगरानी व्यवस्था विकसित की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। पंचायत स्तर पर इसका व्यापक प्रचार-प्रसार कर अधिक से अधिक परिवारों को सौर ऊर्जा से जोड़ा जाए। किसानों और ग्रामीण परिवारों को सौर पंप तथा अन्य सौर ऊर्जा योजनाओं का अधिकतम लाभ दिलाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन का उद्देश्य केवल अपने सीमित उत्तरदायित्व का निर्वहन मात्र न होकर के समाज में ऐसा सकारात्मक परिवर्तन लाना होना चाहिए, जिसे आने वाली पीढ़ियां भी याद रखें। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रसेवा का जो आदर्श प्रस्तुत किया है, उससे प्रेरणा लेकर प्रत्येक अधिकारी को अपनी जिम्मेदारी को समाज निर्माण का अवसर मानना चाहिए।

एक व्यक्ति का संकल्प पूरे समाज की तस्वीर बदल सकता है

मुख्यमंत्री साय ने पद्मश्री पोपटराव पवार के हिवड़े बाजार मॉडल का उल्लेख करते हुए कहा कि दृढ़ इच्छाशक्ति, ईमानदार नेतृत्व और जनसहभागिता के माध्यम से किसी भी गांव का कायाकल्प किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि समाज में परिवर्तन लाने के लिए हमेशा बड़ी संख्या की आवश्यकता नहीं होती। यदि एक व्यक्ति भी संकल्प लेकर आगे बढ़ता है, तो पूरा समाज उसके साथ खड़ा हो जाता है।

मुख्यमंत्री ने वर्ष 1999 की अपनी पहली मुलाकात को याद करते हुए बताया कि जब वे पहली बार सांसद बने थे, तब युवा सांसदों के मार्गदर्शन के लिए पोपटराव पवार को आमंत्रित किया गया था। उस समय एक युवा सरपंच के रूप में उन्होंने हिवड़े बाजार के परिवर्तन की जो कहानी सुनाई थी, वही आज पूरे देश के लिए आदर्श ग्राम विकास का मॉडल बन चुकी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चित्रकूट स्थित दीनदयाल शोध संस्थान में नानाजी देशमुख द्वारा विकसित ग्राम विकास मॉडल तथा ओडिशा में डॉ. अच्युत सामंत द्वारा शिक्षा के माध्यम से किए गए सामाजिक परिवर्तन से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक जिले की स्थानीय परिस्थितियों, संसाधनों और आवश्यकताओं के अनुरूप विकास का अपना मॉडल तैयार किया जाए, जिससे स्थायी और समावेशी विकास सुनिश्चित हो सके।

हिवड़े बाजार मॉडल ने दिखाया जनभागीदारी की ताकत

कार्यशाला में पद्मश्री पोपटराव पवार ने हिवड़े बाजार के परिवर्तन की यात्रा साझा करते हुए बताया कि वर्ष 1989 में गांव जल संकट, पलायन, बेरोजगारी और सामाजिक समस्याओं से जूझ रहा था। जनसहभागिता, अनुशासन, जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन के माध्यम से गांव का व्यापक विकास किया गया। आज गांव में पलायन समाप्त हो चुका है, बीपीएल परिवार नहीं हैं, प्रतिदिन लगभग पांच हजार लीटर दूध का संग्रहण होता है तथा प्रति व्यक्ति आय लगभग नौ लाख रुपये तक पहुंच चुकी है।

बैठक में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह, संचालक प्रियंका ऋषि महोबिया, सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी अमरजीत सिन्हा, प्रदेश के सभी जिलों के जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

विशेष लेख : आत्मनिर्भर नारी, समृद्ध छत्तीसगढ़ : महिला सशक्तिकरण का नया अध्याय

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रायपुर- किसी भी राज्य के विकास की वास्तविक पहचान वहां की महिलाओं की सामाजिक स्थिति, आर्थिक भागीदारी और निर्णय प्रक्रिया में उनकी सहभागिता से होती है। जब महिलाएं आत्मनिर्भर बनती हैं तो परिवार सशक्त होता है, समाज प्रगतिशील बनता है और विकास की गति कई गुना बढ़ जाती है। इसी सोच को आधार बनाकर छत्तीसगढ़ सरकार ने महिला सशक्तिकरण को सुशासन का प्रमुख आधार बनाया है। वर्ष 2026 को ष्महतारी गौरव वर्षष् के रूप में मनाते हुए महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं। 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व तथा महिला एवं बाल विकास मंत्रीलक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में संचालित योजनाएं आज लाखों महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रही हैं।

महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि राज्य सरकार की सबसे महत्वपूर्ण पहल महतारी वंदन योजना महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता का सशक्त माध्यम बन चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 10 मार्च 2024 को प्रारंभ की गई इस योजना के अंतर्गत प्रदेश की 66 लाख से अधिक महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जा रही है। अब तक 29 किस्तों के माध्यम से 18 हजार 805 करोड़ रुपये से अधिक की राशि महिलाओं को प्राप्त हो चुकी है। वर्ष 2026-27 के बजट में योजना के लिए 8,200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

बेटियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में राज्य सरकार रानी दुर्गावती योजना प्रारंभ कर रही है। इस योजना के तहत बालिका के 18 वर्ष पूर्ण होने पर 1 लाख 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इसके लिए बजट में 15 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के लिए 120 करोड़ रुपये तथा मिशन वात्सल्य के लिए 80 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।

महिलाओं और बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य एवं पोषण के लिए सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में आंगनबाड़ी संचालन हेतु 800 करोड़ रुपये, पूरक पोषण आहार के लिए 650 करोड़ रुपये तथा कुपोषण मुक्ति एवं पोषण योजनाओं के लिए 235 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसके साथ ही शहरी क्षेत्रों में 250 और ग्रामीण क्षेत्रों में अभिसरण के माध्यम से 500 नए आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण के लिए 42 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश में महतारी सदन स्थापित किए जा रहे हैं। अब तक 368 महतारी सदनों को स्वीकृति मिल चुकी है, जिनमें 137 का निर्माण पूर्ण हो चुका है। वर्ष 2026-27 में 250 नए महतारी सदनों के निर्माण के लिए 75 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इन केंद्रों के माध्यम से महिलाओं को प्रशिक्षण, आजीविका और सामाजिक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है।

राज्य सरकार ने महिला सुरक्षा को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रदेश के सभी 33 जिलों में 34 सखी वन-स्टॉप सेंटर संचालित किए हैं। यहां घरेलू हिंसा, उत्पीड़न और संकटग्रस्त महिलाओं को कानूनी सहायता, चिकित्सकीय सुविधा, मनोवैज्ञानिक परामर्श तथा अस्थायी आश्रय एक ही स्थान पर उपलब्ध कराया जा रहा है। महिला हेल्पलाइन 181 और आपातकालीन सेवा 112 के समन्वय से त्वरित सहायता व्यवस्था भी प्रभावी रूप से संचालित हो रही है। छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बना है जिसने सखी वन-स्टॉप सेंटरों के संचालन के लिए डिजिटल एसओपी लागू की है।

महिलाओं की आर्थिक प्रगति को नई गति देने के लिए स्वयं सहायता समूहों को उत्पादन और विपणन से जोड़ा जा रहा है। राज्य सरकार 200 करोड़ रुपये की लागत से यूनिटी मॉल का निर्माण कर रही है, जहां महिला समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार उपलब्ध होगा। साथ ही उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को प्रतिवर्ष युवा रत्न सम्मान प्रदान किया जाएगा तथा लखपति दीदी भ्रमण योजना के माध्यम से सफल उद्यमियों को देश-विदेश के अध्ययन भ्रमण का अवसर मिलेगा।

बिहान मिशन के अंतर्गत प्रदेश में 2.92 लाख से अधिक महिला स्वयं सहायता समूह गठित किए जा चुके हैं, जिनसे 31.65 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। प्रधानमंत्री के तीन करोड़ लखपति दीदी लक्ष्य में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए अब तक 10 लाख 43 हजार से अधिक लखपति दीदी तैयार की हैं। रेडी-टू-ईट निर्माण, कृषि आधारित उद्यम, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण तथा हस्तशिल्प जैसी गतिविधियों ने ग्रामीण महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है।

महिला निर्माण श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण सहायता योजना के तहत पात्र बेटियों को 20 हजार रुपये, मुख्यमंत्री सिलाई मशीन सहायता योजना के तहत 7,900 रुपये, दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के तहत अनुदान तथा मिनीमाता महतारी जतन योजना के अंतर्गत गर्भवती महिला श्रमिकों को 20 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है।

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत अब तक 24 हजार से अधिक बालिकाओं का सामूहिक विवाह कराया जा चुका है। प्रत्येक जोड़े के विवाह के लिए राज्य सरकार 50 हजार रुपये की सहायता उपलब्ध करा रही है। वहीं महिला समृद्धि योजना के अंतर्गत 42,878 महिला समूहों को 129.46 करोड़ रुपये का रियायती ऋण प्रदान किया गया है। महतारी शक्ति ऋण योजना के माध्यम से महिलाओं को बिना जमानत 25 हजार रुपये तक का ऋण स्वरोजगार के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है।

प्रदेश में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से 38 लाख से अधिक महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं। सुशिक्षा योजना के तहत 2 लाख 18 हजार 139 छात्राओं को प्रतिमाह 500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। शुचिता योजना के माध्यम से 2 हजार विद्यालयों में सेनेटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनें स्थापित की गई हैं तथा लाखों किशोरियों को मासिक स्वच्छता सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।

महिला समूहों के उत्पाद आज वैश्विक पहचान भी बना रहे हैं। आदिवासी महिलाओं द्वारा संचालित जशप्योर ब्रांड ‘वोकल फॉर लोकल‘ अभियान का सफल उदाहरण बन चुका है और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पहचान स्थापित कर रहा है। वहीं सखी साड़ी-मिलेट कैफे जैसी पहलें स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के साथ महिलाओं की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

आज छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण केवल योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक परिवर्तन का व्यापक अभियान बन चुका है। आर्थिक सहायता, सामाजिक सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण पोषण, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, कौशल विकास, स्वरोजगार और सम्मानजनक जीवन की दिशा में किए जा रहे सतत प्रयास महिलाओं के जीवन में नए अवसरों के द्वार खोल रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में प्रदेश की महिलाएं आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और नेतृत्व क्षमता के साथ विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में महत्वपूर्ण भागीदारी निभा रही हैं। यही बदलती तस्वीर छत्तीसगढ़ को ‘सुशासन से समृद्धि‘ की ओर निरंतर अग्रसर कर रही है।


राष्ट्रीय एससी-एसटी हब (NSSH) योजना के माध्यम से समावेशी विकास को गति

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राष्ट्रीय एससी-एसटी हब (NSSH) योजना अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के उद्यमियों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई एक विशेष पहल है। यह योजना बाज़ार तक पहुँच, वित्तीय सहायता, प्रौद्योगिकी, क्षमता निर्माण तथा संस्थागत नेटवर्क जैसी चुनौतियों का समाधान कर इन उद्यमों की प्रतिस्पर्धात्मकता और दीर्घकालिक स्थिरता को मजबूत करती है। सरकारी खरीद (Government Procurement) में भागीदारी बढ़ाने के साथ-साथ यह योजना SC/ST उद्यमियों को दीर्घकालिक विकास, आत्मनिर्भरता और व्यापक पहचान प्रदान कर उन्हें मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ने तथा देश की आर्थिक प्रगति में सार्थक योगदान देने का अवसर प्रदान कर रही है।

क्षमता निर्माण : उद्यम विकास की मजबूत नींव

इस परिवर्तन का सबसे महत्वपूर्ण आधार क्षमता निर्माण (Capacity Building) है, जिसके माध्यम से SC/ST उद्यमियों को संरचित और अनुपालन-आधारित बाज़ारों में सफल होने के लिए आवश्यक ज्ञान और कौशल प्रदान किए जाते हैं। ये कार्यक्रम केवल पारंपरिक प्रशिक्षण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वित्तीय प्रबंधन, सरकारी निविदाओं (टेंडर) में भागीदारी, मूल्य निर्धारण (Pricing), लागत प्रबंधन तथा नियामकीय आवश्यकताओं की समझ जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विशेष ध्यान देते हैं। यह समग्र दृष्टिकोण उद्यमियों की बाज़ार में भागीदारी की तैयारी को मजबूत करने के साथ-साथ उनमें आत्मविश्वास और व्यावसायिक स्थिरता भी विकसित करता है।

बिज़नेस एक्सेलेरेटर प्रोग्राम (BAP) : बेहतर बाज़ार अवसरों का सेतु

क्षमता निर्माण के इस मजबूत आधार पर बिज़नेस एक्सेलेरेटर प्रोग्राम (Business Accelerator Programme – BAP) उद्यमियों की क्षमताओं को व्यावसायिक सफलता में बदलने का कार्य करता है। यह कार्यक्रम संरचित मार्गदर्शन (Mentorship), उद्योग विशेषज्ञों की सलाह तथा लक्षित व्यावसायिक हस्तक्षेपों के माध्यम से उद्यमियों को व्यवसाय रणनीति, मूल्य निर्धारण, परिचालन दक्षता तथा बाज़ार विस्तार जैसी चुनौतियों से निपटने में सहायता करता है।

विभिन्न क्षेत्रों के अनेक उद्यमों ने BAP के माध्यम से पारंपरिक एवं बिखरे हुए कार्य-तरीकों से आगे बढ़कर डेटा-आधारित, सुव्यवस्थित व्यावसायिक रणनीतियाँ अपनाईं। इससे वे बाज़ार की अपेक्षाओं के अनुरूप स्वयं को तैयार कर सके और विशेष रूप से सरकारी खरीद के क्षेत्र में बड़े अवसर प्राप्त करने में सफल हुए।

परिवर्तन की प्रेरक कहानियाँ

1. अनुपालन-आधारित बाज़ार में नई पहचान – M/s Safety & Security Engineering, पश्चिम बंगाल

अग्नि सुरक्षा (Fire Safety) जैसे अत्यधिक विनियमित क्षेत्र में कार्यरत देबाशीष मंडल की कंपनी M/s Safety & Security Engineering प्रारंभिक दौर में मूल्य निर्धारण, बाज़ार में पहचान और प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति जैसी चुनौतियों का सामना कर रही थी। यद्यपि कंपनी गुणवत्तापूर्ण अग्नि सुरक्षा एवं जीवन सुरक्षा उपकरण (Fire Protection & Life Safety Equipment) उपलब्ध करा रही थी, फिर भी स्पष्ट व्यावसायिक रणनीति के अभाव में उसका विस्तार सीमित था।


IIM संबलपुर में आयोजित BAP में भाग लेने के बाद उन्हें लागत एवं मूल्य निर्धारण की वैज्ञानिक समझ प्राप्त हुई। इसके परिणामस्वरूप उन्होंने डेटा-आधारित मूल्य निर्धारण रणनीति अपनाई, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और बाज़ार में स्थिति मजबूत हुई। इसके बाद उन्होंने Power Grid Corporation of India Limited से ₹8.48 लाख का सरकारी टेंडर सफलतापूर्वक प्राप्त किया।


2. स्वच्छ ऊर्जा को नई गति – M/s Renergy Solution Pvt. Ltd., असम

भार्गव देवरी द्वारा स्थापित M/s Renergy Solution Pvt. Ltd. अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy) के क्षेत्र में एक सुदृढ़ तकनीकी आधार के साथ कार्यरत थी और सरकारी संस्थानों के लिए सौर ऊर्जा परियोजनाओं में सक्रिय रूप से भाग ले रही थी। हालांकि, दीर्घकालिक विकास के लिए व्यवसाय को अधिक रणनीतिक और व्यवस्थित रूप देने की आवश्यकता महसूस हुई।


BAP के माध्यम से कंपनी ने अनुभव-आधारित संचालन से आगे बढ़कर एक अधिक पेशेवर एवं बाज़ार-उन्मुख कार्यप्रणाली अपनाई। इससे सरकारी खरीद प्लेटफॉर्म पर उसकी उपस्थिति मजबूत हुई, सरकारी निविदाओं में भागीदारी की क्षमता बढ़ी और सार्वजनिक क्षेत्र के खरीदारों के साथ नए अवसरों का प्रभावी ढंग से लाभ उठाने में सहायता मिली।


3. सटीक इंजीनियरिंग से सफलता की उड़ान – Sawalaram Enterprises, महाराष्ट्र

महाराष्ट्र के नासिक स्थित सुनील पोपटराव जगताप द्वारा स्थापित Sawalaram Enterprises हाइड्रोलिक सिलेंडर निर्माण के क्षेत्र में कार्यरत है। एक इंजीनियरिंग कंपनी में 18 वर्षों तक कार्य करने के बाद उन्होंने वर्ष 2010 में अपना स्वयं का विनिर्माण उद्यम स्थापित किया और उच्च गुणवत्ता वाले हाइड्रोलिक सिलेंडर विकसित किए।


अपने व्यवसाय को नई दिशा देने के लिए उन्होंने IIM शिलांग में आयोजित बिज़नेस एक्सेलेरेटर प्रोग्राम में भाग लिया, जहाँ उन्हें व्यवसाय रणनीति और सरकारी निविदाओं की गहन जानकारी प्राप्त हुई। इस प्रशिक्षण के परिणामस्वरूप उन्होंने Steel Authority of India Limited (SAIL) से हाइड्रोलिक सिलेंडरों की आपूर्ति हेतु ₹5.10 लाख का टेंडर सफलतापूर्वक प्राप्त किया। इस उपलब्धि ने उनके व्यवसाय का विस्तार किया, बाज़ार में पहचान बढ़ाई और सतत विकास की दिशा में मजबूत आधार तैयार किया।


आगे की राह : अवसरों का विस्तार, प्रभाव का स्थायी विकास

आज ये सफल उद्यम केवल अपने व्यवसाय का विस्तार नहीं कर रहे हैं, बल्कि समावेशी विकास की एक नई कहानी भी लिख रहे हैं। चुनौतियों पर विजय प्राप्त कर मुख्यधारा की आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी तक की उनकी यात्रा यह सिद्ध करती है कि सही मार्गदर्शन, क्षमता निर्माण और रणनीतिक सहयोग के माध्यम से देश के प्रत्येक क्षेत्र और समुदाय की क्षमता को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया जा सकता है।

राष्ट्रीय एससी-एसटी हब योजना केवल व्यक्तिगत उद्यमों को सशक्त नहीं बना रही है, बल्कि समावेशिता को वास्तविक आर्थिक प्रगति में बदलने का कार्य भी कर रही है। क्षमता निर्माण, मार्गदर्शन और रणनीतिक सहयोग के माध्यम से यह योजना विकसित भारत @2047 के निर्माण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।


मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की जनकल्याणकारी सोच और वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में सुकमा ने रचा नया कीर्तिमान

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आयुष्मान आरोग्य मंदिर उप स्वास्थ्य केंद्र सुकमा-01 को मिला राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन (एनक्वास) प्रमाणपत्र

जिले के 17 स्वास्थ्य केंद्र अब राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर खरे

रायपुर-  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सशक्त नेतृत्व और वन एवं जलवायु परिवर्तन तथा सुकमा जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में सुदूर और नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार सुधार हो रहा है। शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से विकासखंड सुकमा के आयुष्मान आरोग्य मंदिर उप स्वास्थ्य केंद्र सुकमा-01 को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्वास) प्रमाणपत्र प्राप्त हुआ है। इसके साथ ही जिले के 17 स्वास्थ्य केंद्र अब राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणपत्र हासिल कर चुके हैं।

93.04 प्रतिशत अंक के साथ हासिल की राष्ट्रीय उपलब्धि

कलेक्टर अमित कुमार के नेतृत्व में स्वास्थ्य केंद्र ने भारत सरकार के राष्ट्रीय मूल्यांकन में 93.04 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। यह उपलब्धि स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी मणीन्द्र कुर्रे, ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक रेणूका सूना तथा माड़वी हिड़मा सहित पूरी स्वास्थ्य टीम की मेहनत, समर्पण और बेहतर कार्यप्रणाली का परिणाम है।

कड़े मानकों पर खरा उतरने के बाद मिला एनक्वास प्रमाणपत्र

एनक्वास (National Quality Assurance Standards) प्रमाणपत्र भारत सरकार द्वारा केवल उन स्वास्थ्य संस्थानों को दिया जाता है, जो गुणवत्ता के सभी निर्धारित मानकों पर खरे उतरते हैं। इसमें मरीजों की संतुष्टि, स्वच्छता, सुरक्षित मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं, मानसिक स्वास्थ्य, संचारी एवं गैर-संचारी रोगों की देखभाल, प्रयोगशाला सेवाएं तथा स्वास्थ्य प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं का मूल्यांकन किया जाता है।

7,417 ग्रामीणों को मिल रही बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं

आयुष्मान आरोग्य मंदिर उप स्वास्थ्य केंद्र सुकमा-01 आधुनिक प्रसव कक्ष, सुसज्जित प्रयोगशाला और प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों से लैस है। यह केंद्र लगभग 7,417 ग्रामीणों को गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहा है।

शासकीय योजनाओं से बदल रही सुकमा की तस्वीर

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप अंतिम व्यक्ति तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने और प्रभारी मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में जिले में स्वास्थ्य अधोसंरचना को लगातार मजबूत किया जा रहा है। आयुष्मान भारत और अन्य स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल रहा है।

अन्य जिलों के लिए बना प्रेरणादायक मॉडल

सुकमा की यह उपलब्धि बताती है कि मजबूत प्रशासनिक इच्छाशक्ति, जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और स्वास्थ्य कर्मियों की समर्पित सेवा से दूरस्थ एवं चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। आज सुकमा का यह मॉडल प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के अन्य आकांक्षी जिलों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है।

डीएमएफ से बदली खनन प्रभावित गांवों की तस्वीर, 181 लाख की सड़क ने विकास को दी रफ्तार

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मुढ़ापार-धतूरा-कोरबी-खम्हरिया मार्ग का 4.40 किमी नवीनीकरण

डीएमएफ से 180.93 लाख रुपये की लागत से हुआ निर्माण

शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिला बड़ा संबल

रायपुर- खनन प्रभावित क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) निधि का प्रभावी उपयोग प्रदेश में बदलाव की नई मिसाल बन रहा है। कोरबा जिले में डीएमएफ से निर्मित मुढ़ापार-धतूरा-कोरबी-खम्हरि या सड़क ने वर्षों पुरानी आवागमन की समस्या दूर कर हजारों ग्रामीणों के जीवन को आसान बना दिया है।

कलेक्टर कुणाल दुदावत की सुनियोजित कार्ययोजना के तहत डीएमएफ मद से 180.93 लाख रुपये की लागत से 4.40 किलोमीटर लंबी सड़क का नवीनीकरण एवं सुदृढ़ीकरण किया गया। 15 अप्रैल 2026 को निर्माण कार्य पूरा होने के बाद अब क्षेत्र के ग्रामीणों को वर्षभर सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल रही है।

पहले बरसात के दौरान सड़क कीचड़ और जलभराव से भर जाती थी, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई, मरीजों का उपचार, किसानों की उपज का परिवहन और ग्रामीणों की दैनिक गतिविधियां प्रभावित होती थीं। अब बेहतर सड़क संपर्क से स्कूल, अस्पताल और बाजार तक पहुंच आसान होने के साथ किसानों को अपनी उपज समय पर बाजार तक पहुंचाने में भी सुविधा मिल रही है।

यह सड़क केवल आवागमन का माध्यम नहीं बनी, बल्कि खनन प्रभावित गांवों के सामाजिक और आर्थिक विकास की नई आधारशिला साबित हुई है। बेहतर संपर्क से शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और अन्य आवश्यक सेवाओं तक ग्रामीणों की पहुंच बढ़ी है, जिससे क्षेत्र में विकास की नई गति दिखाई दे रही है।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और डीएमएफ के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्षों पुरानी समस्या के समाधान से उनके जीवन में बड़ा सकारात्मक बदलाव आया है। यह परियोजना इस बात का उदाहरण है कि डीएमएफ निधि का योजनाबद्ध और जनहितकारी उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

विकसित भारत-जी राम जी योजना से ग्रामीण विकास को मिलेगी नई दिशा

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1 जुलाई 2026 से देशभर में लागू होगी योजना, ग्रामीण परिवारों को मिलेगा 125 दिनों के रोजगार की गारंटी

रायपुर- देशभर में 1 जुलाई 2026 से विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) योजना लागू हो रही है। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका संवर्धन और आधारभूत विकास को नई गति देने के उद्देश्य से प्रारंभ की जा रही है। इस योजना का उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के विकसित भारत -2047 के विज़न को साकार करने की दिशा में ग्रामीण भारत को सशक्त, आत्मनिर्भर एवं समृद्ध बनाना है। योजना के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण, आजीविका संवर्धन और गांवों के समग्र विकास को बढ़ावा दिया जाएगा।

राज्य के बजट में 4000 करोड़ रुपये का प्रावधान

योजना के अंतर्गत ग्रामीण परिवारों को मांग के आधार पर वर्ष में 125 दिनों तक रोजगार की गारंटी प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही जल संरक्षण, ग्रामीण अधोसंरचना विकास, कृषि आधारित कार्य, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और आजीविका संवर्धन जैसे टिकाऊ कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। विकसित ग्राम की परिकल्पना को साकार करने के लिए योजना में कुल 318 प्रकार के कार्यों को शामिल किया गया है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु छत्तीसगढ़ राज्य में वर्ष 2026-27 के बजट में 4000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

2 जुलाई को होगा शुभारंभ

छत्तीसगढ़ में योजना के शुभारंभ एवं क्रियान्वयन को लेकर पूरे प्रदेश में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 2 जुलाई 2026 को तिरुपति, आंध्रप्रदेश से केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा कार्यक्रम का शुभारंभ किया जाएगा, जिसमें वे देश के विभिन्न राज्यों से संवाद करेंगे। प्रदेश में यह कार्यक्रम कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत गंडईखुर्द में आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ग्रामीणों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम से जुड़कर संवाद करेंगे।

ग्राम सभा की भूमिका होगी सशक्त

इस योजना के अंतर्गत ग्रामीण परिवारों को वर्ष में 125 दिनों तक रोजगार की गारंटी मिलेगी, 15 दिवस के भीतर मजदूरी भुगतान की व्यवस्था होगी, कार्य उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ते का भी प्रावधान किया गया है। इसी तरह डिजिटल जॉब कार्ड एवं तकनीक आधारित कार्य प्रबंधन प्रणाली, समयबद्ध एवं पारदर्शी भुगतान व्यवस्था के साथ ग्राम सभा की भूमिका को और अधिक सशक्त बनाया गया है।

ग्राम सभा द्वारा तैयार की जाएगी पंचायतों के विकास कार्यों की कार्ययोजना

वीबी जीरामजी में जल संरक्षण, सिंचाई, ग्रामीण सड़क, वृक्षारोपण एवं टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण पर विशेष जोर दिया गया है। इस योजना से ग्रामीण युवाओं के लिए कौशल विकास एवं आजीविका के नए अवसर प्रदान करेगी। सामाजिक अंकेक्षण एवं डिजिटल निगरानी से पारदर्शिता में भी वृद्धि होगी। नई व्यवस्था के तहत ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की कार्ययोजना ग्राम सभा के माध्यम से तैयार की जाएगी, जिससे स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कार्यों का चयन किया जा सकेगा।

विकसित भारत-जी राम जी योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और गांवों में विकास की स्थायी आधारशिला तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह योजना ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर और विकसित भारत के संकल्प से जोड़ने का माध्यम बनेगी।

सुशासन तिहार 2026: त्रिवेणी रात्रे का पक्के घर का सपना हुआ पूरा

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जनसमस्या निवारण शिविर में मिली प्रधानमंत्री आवास योजना की चाबी, चेहरे पर आई खुशी

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार आयोजित “सुशासन तिहार 2026” आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित, पारदर्शी एवं संवेदनशील समाधान का प्रभावी माध्यम बनता जा रहा है। जिले के विभिन्न ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविरों के माध्यम से शासन की योजनाओं का लाभ सीधे जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।

इसी क्रम में जांजगीर-चांपा जिले के जनपद पंचायत अकलतरा अंतर्गत ग्राम तिलई में आयोजित शिविर में ग्राम मुरलीडीह निवासी त्रिवेणी रात्रे को प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत पक्के मकान की चाबी प्रदान की गई। वर्षों से पक्के घर का सपना देख रही त्रिवेणी रात्रे के लिए यह अवसर बेहद खुशी और संतोष लेकर आया।

त्रिवेणी रात्रे ने बताया कि उनका परिवार पहले कच्चे मकान में निवास करता था, जहां बारिश के दौरान पानी टपकने और गर्मी के मौसम में अत्यधिक परेशानी का सामना करना पड़ता था। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान मिलने से अब उनका परिवार सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण में जीवन यापन कर रहा है।

उन्होंने कहा कि पक्का घर मिलने से परिवार में आत्मविश्वास बढ़ा है और अब वे स्वयं को अधिक सुरक्षित महसूस कर रही हैं।

रात्रे ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सुशासन तिहार आम लोगों के लिए राहत और खुशियों का माध्यम बनकर सामने आया है तथा शासन की योजनाओं का लाभ अब सीधे पात्र हितग्राहियों तक पहुंच रहा है।

पीएम विकास योजना के तहत बड़ा कदम: अल्पसंख्यक युवाओं को IIT पटना में मिलेगा उन्नत कौशल प्रशिक्षण

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नई दिल्ली: भविष्य के लिए तैयार कौशल विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने Indian Institute of Technology Patna (आईआईटी पटना) के साथ पीएम विकास (प्रधानमंत्री विरासत का संवर्धन) योजना के अंतर्गत एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

इस समझौते का आदान-प्रदान मंत्रालय की निदेशक नेहा गिरी, आईआईटी पटना के निदेशक टी. एन. सिंह तथा दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हुआ।

600 युवाओं को मिलेगा आधुनिक प्रशिक्षण

इस साझेदारी के तहत बिहार राज्य के 600 अल्पसंख्यक युवाओं को आईआईटी पटना द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोक्रेट और बिजनेस एनालिटिक्स एग्जीक्यूटिव जैसे उभरते और उच्च मांग वाले क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह कार्यक्रम उद्योग की वर्तमान जरूरतों के अनुरूप तैयार किया गया है।

रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर

इस पहल का उद्देश्य युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाना और उन्हें बेहतर प्लेसमेंट के अवसर प्रदान करना है। तकनीक आधारित आधुनिक प्रशिक्षण के माध्यम से कौशल अंतर को कम करने और स्थायी आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया गया है।

समावेशी विकास की दिशा में प्रयास

आईआईटी पटना जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के साथ साझेदारी से प्रशिक्षण की गुणवत्ता, उद्योग से जुड़ाव और बेहतर करियर परिणाम सुनिश्चित किए जाएंगे। यह पहल समावेशी विकास और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने में सहायक होगी।

अन्य संस्थानों के साथ भी सहयोग

उल्लेखनीय है कि हाल ही में मंत्रालय ने  भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, धारवाड़, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मणिपुर,सीएसआईआर–केंद्रीय यांत्रिक अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान,अरुणाचल प्रदेश वन निगम लिमिटेड के साथ भी समझौते किए हैं, जिससे उच्च गुणवत्ता वाले कौशल विकास कार्यक्रमों का विस्तार हो रहा है।

निष्कर्ष

यह पहल न केवल युवाओं को आधुनिक कौशल से लैस करेगी, बल्कि उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर प्रदान कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी प्रेरित करेगी।

बीजापुर में विकास की नई दस्तक: नियद नेल्लानार, मनरेगा और प्रधानमंत्री आवास से बदल रही 224 गांवों की तस्वीर

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दशकों से विकास से कटे इलाकों में पहुंचा रोजगार, राशन, शिक्षा और सुरक्षित आवास; 5 लाख मानव दिवस सृजित

वापस लौटे गांव, बदली जिंदगी: नक्सल इलाके में विकास की सशक्त कहानी

रायपुर- लंबे समय तक नक्सल प्रभाव के कारण विकास से अछूते रहे बीजापुर जिले के अंदरूनी क्षेत्रों में अब बदलाव की बयार स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। नियद नेल्लानार योजना और मनरेगा के संयुक्त प्रयासों से उन गांवों तक विकास की पहुंच बनी है, जहां दशकों तक नक्सल प्रभाव के कारण बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंच पाई थीं। अब इन क्षेत्रों में रोजगार, आवास, पेयजल, शिक्षा और आजीविका के अवसरों का विस्तार हो रहा है, जिससे लोगों के जीवन में ठोस परिवर्तन दिखाई दे रहा है।

बीजापुर जिले में नियद नेल्लानार योजना के तहत 42 सुरक्षा कैम्पों के माध्यम से 67 ग्राम पंचायतों के 224 गांवों को शामिल किया गया है। इस पहल में मनरेगा की सक्रिय भागीदारी से स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और आधारभूत ढांचे के निर्माण को गति मिली है, जिससे ग्रामीणों को अपने ही गांव में काम और अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।

16 हजार से अधिक परिवारों को रोजगार का सहारा

इन ग्रामों में अब तक 16,671 जॉब कार्ड पंजीकृत किए गए हैं, जिनमें से 7,271 नए जॉब कार्ड बनाए गए हैं। इससे हजारों परिवारों को गांव में ही रोजगार उपलब्ध हो रहा है। विशेष रूप से नक्सल प्रभावित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है। इसमें 966 आत्मसमर्पित नक्सली, 178 घायल पीड़ित परिवार और 477 मृतक नक्सल पीड़ित परिवारों के जॉब कार्ड बनाकर उन्हें मनरेगा योजना से जोड़ा गया है, जिससे उन्हें स्थायी आजीविका का आधार मिल रहा है।

पहली बार दिखा विकास का व्यापक असर

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत नियद नेल्लानार क्षेत्रों में 1,744 विकास कार्य कराए गए हैं, जिनके माध्यम से 5 लाख से अधिक मानव दिवस सृजित हुए हैं। इन कार्यों के जरिए न केवल स्थानीय स्तर पर ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार मिला है, बल्कि पलायन में भी कमी आई है और ग्रामीणों का शासन के प्रति विश्वास भी मजबूत हुआ है।

आजीविका डबरी बन रही आय का सशक्त जरिया

नियद नेल्लानार क्षेत्र में 372 आजीविका डबरी की स्वीकृति देकर ग्रामीणों को आजीविकामूलक गतिविधियों से जोड़ने की पहल की गई है। जनपद पंचायत भैरमगढ़ के नियद नेल्लानार अंतर्गत ग्राम पंचायत बेलनार, जहां कभी नक्सली दहशत के कारण ग्रामीण गांव छोड़कर विस्थापित होने पर मजबूर थे, अब पुनः जीवन की मुख्यधारा में लौट आया है। नियद नेल्लानार योजना में शामिल होने के बाद ग्रामीण अपने गांव लौट आए हैं। उनके आजीविका संवर्धन के लिए महात्मा गांधी नरेगा योजनांतर्गत वर्ष 2025-26 में हितग्राही सहदेव कोरसा, लखु और सुदरू कोरसा की आजीविका डबरी पूर्ण हो चुकी हैं। इन डबरियों में मत्स्य पालन एवं हॉर्टिकल्चर विभाग से अभिसरण के माध्यम से मछली पालन एवं सब्जी उत्पादन का कार्य प्रस्तावित है।

2977 परिवारों को मिला पक्का आवास

नियद नेल्लानार क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत आवास निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है। इस योजना के तहत कुल 2,977 हितग्राहियों को आवास स्वीकृति प्रदान की गई है, जिनमें से अब तक 690 हितग्राहियों के पक्के आवास बनकर तैयार हो चुके हैं। इन आवासों में अब परिवार सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं।

गांव-गांव में बदलाव की सजीव तस्वीर

जनपद पंचायत बीजापुर के नियद नेल्लानार अंतर्गत ग्राम दुगाली में मनरेगा से निर्मित कुआं अब 100 से अधिक ग्रामीणों के लिए जीवनरेखा बन गया है। दुर्गम भौगोलिक स्थिति के कारण जहां बोरिंग संभव नहीं थी, वहां यह कुआं स्थायी समाधान बनकर उभरा है। इससे ग्रामीणों को सुलभ पेयजल के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार भी मिला है।

ग्राम पालनार में, जहां पहले प्रशासन की पहुंच नहीं थी, आज पंचायत भवन, आंगनबाड़ी और गौठान निर्माण कार्य जारी हैं, जिसमें वर्तमान में 200 से अधिक श्रमिक कार्यरत हैं।

कावड़गांव में 50 वर्षों के भय और अलगाव के बाद अब 100 प्रतिशत ग्रामीण श्रमिकों को जॉब कार्ड वितरित किए जा चुके हैं। साथ ही इस गांव में सड़क, बिजली, पेयजल, स्कूल और मोबाइल टॉवर जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंच चुकी हैं।

सावनार (तोड़का पंचायत) में 9.35 लाख रुपए की लागत से बने आंगनबाड़ी भवन से 40–45 बच्चों को नियमित शिक्षा और पोषण मिल रहा है।
पुसुकोण्टा (उसूर) में 11.69 लाख रुपए की लागत से निर्मित आंगनबाड़ी भवन ने बच्चों को सुरक्षित और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया है।

धरमारम और तोड़का क्षेत्र में उचित मूल्य दुकानों के निर्माण से अब ग्रामीणों को गांव में ही राशन मिल रहा है।
ग्राम बांगोली में, जहां पहले 18 किलोमीटर दूर जाकर राशन लाना पड़ता था, अब 524 परिवारों को गांव में ही यह सुविधा उपलब्ध हो रही है।

युवाओं का कौशल विकास और आत्मनिर्भरता

पुनर्वासित आत्मसमर्पित नक्सलियों एवं स्थानीय युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से राजमिस्त्री प्रशिक्षण प्रदान किया गया है, जिससे वे निर्माण कार्यों में रोजगार प्राप्त कर रहे हैं और अपने जीवन को नई दिशा दे रहे हैं।

नियद नेल्लानार योजना और मनरेगा के प्रभावी अभिसरण से बीजापुर के अंदरूनी गांवों में अब विकास ने गति पकड़ ली है। रोजगार, बुनियादी ढांचे और शासन के प्रति बढ़ते विश्वास के साथ नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी व्यापक और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है, जो विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में एक मजबूत कदम है।

बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से बस्तर में समृद्धि की नई राह : मुख्यमंत्री साय
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बस्तर के जिन गांवों तक कभी विकास की पहुंच नहीं थी, वहां आज नियद नेल्लानार योजना और प्रधानमंत्री आवास जैसी योजनाओं के माध्यम से नई उम्मीद और आत्मविश्वास का संचार हुआ है। हमारी सरकार का स्पष्ट विश्वास है कि जब विकास, रोजगार और बुनियादी सुविधाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचती हैं, तब ही स्थायी शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। इन क्षेत्रों में रोजगार सृजन, सुरक्षित आवास, पेयजल, शिक्षा और आजीविका के अवसरों के विस्तार से न केवल लोगों का जीवन स्तर बेहतर हुआ है, बल्कि शासन के प्रति विश्वास भी मजबूत हुआ है। यह परिवर्तन इस बात का प्रमाण है कि संवेदनशील नीतियों, समन्वित प्रयासों और जनभागीदारी से सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी सकारात्मक बदलाव संभव है - और हम इस बदलाव को और गति देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

विकसित भारत की कल्पना हो रहा है साकार,मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना से राह हुई आसान

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रायपुर- गाँव में कभी बस की पहुँच नहीं थी, आज वहाँ बस के आते ही बच्चों के चेहरे खिल उठते हैं। सड़क पर बस दिखते ही बच्चे हाथ हिलाकर खुशी जाहिर करते हैं और हॉर्न की आवाज़ सुनते ही लोग घरों से बाहर निकल आते हैं—एक नई उम्मीद के साथ। यह उम्मीद अब शहर मुख्यालय, नगर मुख्यालय और विकासखंड मुख्यालय तक आसान पहुँच की है।

यात्री बस में बैठकर लोग उन दिनों को याद करते हैं, जब उन्हें पैदल या किसी निजी वाहन के सहारे दूसरे स्थानों तक जाना पड़ता था। अब हालात बदल चुके हैं। स्कूल के बच्चे समय पर स्कूल पहुँच रहे हैं, वहीं अधिकारी-कर्मचारी भी समय पर अपनी ड्यूटी पर पहुँच पा रहे हैं। यह बदलाव सिर्फ़ सुविधा का नहीं, बल्कि उन ग्रामीण परिवारों के सपनों का है जो विकसित भारत की कल्पना को अपने जीवन में साकार होते देख रहे हैं।

यह परिवर्तन मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना से संभव हो पाया है। इस योजना के तहत आज बसें उन गाँवों तक पहुँच रही हैं, जहाँ पहले कभी बस नहीं पहुँची थी।

पहाड़ी अंचल की महिलाओं को मिली राहत

जशपुर जिला के बगीचा विकासखंड के सन्ना निवासी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुनीता निकुंज बताती हैं कि पहले उन्हें पास के गाँव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र तक पहुँचने के लिए किसी से लिफ्ट लेनी पड़ती थी, निजी वाहन या पैदल जाना पड़ता था। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यह बहुत कठिन था। अब ग्रामीण बस से उनकी यह समस्या दूर हो गई है। वे कहती हैं, “यह बस मेरे लिए बहुत बढ़िया साधन बन गई है।”

ग्रामीणों के चेहरे पर लौटी मुस्कान

बस में सफर कर रहे ग्राम मरंगी निवासी दशरथ भगत हँसते हुए बताते हैं कि पहले इस सड़क पर बस नहीं चलती थी, इसलिए पैदल ही आना-जाना करना पड़ता था। बस का नाम लेते ही उसका चेहरा खिल गया l उन्होंने बताया कि “अब मुख्यमंत्री जी की पहल से बस शुरू हो गई है। हम आसानी से बगीचा जाते हैं और समय पर वापस भी लौट आते हैं।”

यात्री मंगलराम बताते हैं कि पहले वे छिछली और चंपा जैसे बाजारों तक पैदल जाया करते थे। “अब बस आने से बहुत सुविधा हो गई है। हम सब बहुत खुश हैं।”

मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना से न केवल यात्रा सुगम हुई है, बल्कि ग्रामीणों को स्वास्थ्य, शिक्षा और प्रशासनिक कार्यों के लिए शहर तक पहुँचने में भी बड़ी सुविधा मिली है। यह योजना ग्रामीण जीवन को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक सशक्त कदम साबित हो रही है और जशपुर जैसे पहाड़ी व दूरस्थ क्षेत्रों में विकास की नई राह खोल रही है।

अमरावती को एकमात्र राजधानी का दर्जा: आंध्र प्रदेश पुनर्गठन संशोधन विधेयक 2026 बना ऐतिहासिक मील का पत्थर

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केंद्रीय संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर ने आज लोकसभा में आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2026 के पारित होने को राज्य की विकास यात्रा में एक ऐतिहासिक क्षण बताया।

उन्होंने कहा कि इस विधेयक के माध्यम से अमरावती को एकमात्र राजधानी के रूप में कानूनी मान्यता मिलने से लंबे समय से चली आ रही संरचनात्मक अनिश्चितता समाप्त हो गई है, जो शासन, निवेश और विकास को प्रभावित कर रही थी।

डॉ. पेम्मासानी ने बताया कि पिछले कई वर्षों से स्पष्ट राजधानी के अभाव में प्रशासनिक अस्पष्टता, बुनियादी ढांचे के कार्यों में देरी और निवेशकों का भरोसा कम हुआ था। यह संशोधन एक स्पष्ट, स्थिर और दूरदर्शी ढांचा प्रदान करता है, जो राज्य पुनर्गठन की मूल भावना के अनुरूप एक विश्वस्तरीय राजधानी के दृष्टिकोण को पुनः स्थापित करता है।

उन्होंने अमरावती आंदोलन में किसानों और महिलाओं के असाधारण योगदान को रेखांकित किया। लगभग 29,000 किसानों ने स्वेच्छा से अपनी 34,000 एकड़ से अधिक पैतृक भूमि राज्य को सौंपी और नीतिगत बदलावों के कारण लंबे समय तक अनिश्चितता झेली।

उन्होंने कहा कि महिलाओं और स्थानीय समुदायों ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया और कठिन परिस्थितियों का सामना किया। 1,600 से अधिक दिनों तक यह आंदोलन अनुशासित, शांतिपूर्ण और दृढ़ रहा, जो लोकतांत्रिक मजबूती का एक सशक्त उदाहरण बनकर उभरा।

डॉ. पेम्मासानी ने कहा कि यह विधेयक केवल एक कानूनी सुधार नहीं, बल्कि नैतिक पुनर्स्थापन भी है, जो उन लोगों के सम्मान, न्याय और विश्वास को बहाल करता है, जिन्होंने राज्य के भविष्य के लिए असाधारण बलिदान दिए।

उन्होंने अमरावती के लिए परिवर्तनकारी दृष्टिकोण को दोहराते हुए कहा कि इसे एक वैश्विक स्तर के शहर और आंध्र प्रदेश के प्रमुख विकास इंजन के रूप में विकसित किया जा रहा है। 56,000 करोड़ रुपये से अधिक के 91 प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाएं पहले से ही प्रगति पर हैं। अमरावती को औपचारिक मान्यता मिलने से निवेश में तेजी, बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन और राज्य की अर्थव्यवस्था को गति मिलने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि स्वैच्छिक भूमि पूलिंग पर आधारित अमरावती मॉडल सहभागी और समावेशी विकास का एक अनूठा उदाहरण है, जिसमें किसान राज्य के शहरी भविष्य के भागीदार बने हैं। यह मॉडल देशभर में समान विकास के लिए एक प्रेरणादायक ढांचा बन सकता है।

डॉ. पेम्मासानी ने यह भी कहा कि राजधानी शहर राज्य की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अमरावती के केंद्र में होने से आंध्र प्रदेश शासन, व्यापार और नवाचार का एक प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर है।

उन्होंने इस ऐतिहासिक विधेयक के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व और सहयोग की सराहना की।

उन्होंने कहा कि यह विधेयक केवल एक नीतिगत निर्णय नहीं, बल्कि एक निर्णायक बदलाव है, जो आंध्र प्रदेश के विकास की दिशा को पुनर्परिभाषित करेगा। प्रशासनिक स्थिरता सुनिश्चित करते हुए, निवेशकों का विश्वास बहाल करते हुए और जनता के बलिदानों का सम्मान करते हुए यह संशोधन अमरावती को आकांक्षा, दृढ़ता और समावेशी विकास के प्रतीक के रूप में स्थापित करता है।

नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ गढ़ेगा विकास का स्वर्णिम भविष्य : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने दी ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई

रायपुर- छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद की समाप्ति की दिशा में मिली ऐतिहासिक सफलता के बीच आज मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से उनके नवा रायपुर स्थित निवास कार्यालय में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर विजय शर्मा ने मुख्यमंत्री को नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में मिली इस बड़ी उपलब्धि पर बधाई देते हुए पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ अब विकास, विश्वास और समृद्धि के नए युग की ओर अग्रसर होगा। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद वर्षों तक प्रदेश की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा बना रहा और विशेष रूप से बस्तर अंचल लंबे समय तक लाल आतंक के साये में रहा।मुख्यमंत्री ने कहा कि अब परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और नक्सल प्रभावित सभी क्षेत्रों में विकास की मुख्यधारा मजबूत हो रही है। बस्तर सहित पूरे प्रदेश में शांति, सुरक्षा और विकास का नया वातावरण तैयार हो रहा है, जिससे आमजन के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि का श्रेय देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प, स्पष्ट नीति और प्रभावी रणनीति को दिया। उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व में भयमुक्त और सुरक्षित छत्तीसगढ़ का सपना आज साकार हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर जवानों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी शहादत ने इस सफलता की नींव रखी है। उन्होंने सुरक्षाबलों के अदम्य साहस, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा की सराहना करते हुए कहा कि यह उपलब्धि उनके अथक प्रयासों का परिणाम है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि नक्सलमुक्त वातावरण में अब छत्तीसगढ़ तेज गति से विकास के नए सोपान गढ़ेगा और देश के अग्रणी राज्यों में अपनी सशक्त पहचान स्थापित करेगा।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने CPES और IES अधिकारियों को किया संबोधित, राष्ट्र निर्माण में योगदान पर दिया जोर

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केंद्रीय विद्युत अभियांत्रिकी सेवा (CPES) और भारतीय आर्थिक सेवा (IES) के अधिकारियों ने आज (27 मार्च 2026) राष्ट्रपति भवन में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की।

अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि वे भारत की प्रगति के अग्रिम पंक्ति में खड़े हैं और उनके निर्णय एक मजबूत तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सहायक होंगे। उन्होंने कहा कि ये अधिकारी नीतियों के निर्माण और सुधारों के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, जिससे समावेशी और सतत विकास को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने अधिकारियों को समर्पण और जुनून के साथ कार्य करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में कई चुनौतियाँ आएंगी, लेकिन ये चुनौतियाँ राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान देने के अवसर भी प्रदान करती हैं। उन्होंने जिज्ञासा, नवाचार के प्रति प्रतिबद्धता और निरंतर सीखने की भावना बनाए रखने पर जोर दिया।

केंद्रीय विद्युत अभियांत्रिकी सेवा (CPES) के अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि बिजली औद्योगिक विकास, नवाचार, बेहतर जीवन स्तर और देश की समग्र सामाजिक-आर्थिक प्रगति की आधारशिला है। उन्होंने बताया कि CPES ने विद्युत उत्पादन, संचरण और वितरण के क्षेत्रों में योजना और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, साथ ही बिजली प्रणालियों की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित की है। उन्होंने कहा कि सुदृढ़ इंजीनियरिंग प्रथाओं और नवाचार के माध्यम से देश की ऊर्जा संरचना को मजबूत करने में CPES अधिकारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।

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भारतीय आर्थिक सेवा (IES) के अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि तेजी से बदलते वैश्विक और घरेलू परिदृश्य में आर्थिक योजना और उसके क्रियान्वयन की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा कि IES अधिकारियों की भूमिका सतत विकास सुनिश्चित करने, महंगाई को नियंत्रित करने, रोजगार के अवसर बढ़ाने, असमानताओं को कम करने और जटिल आर्थिक परिस्थितियों में अर्थव्यवस्था का मार्गदर्शन करने में महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने अधिकारियों को यह याद रखने की सलाह दी कि हर आंकड़े के पीछे एक मानवीय कहानी होती है। किसी भी आर्थिक नीति का वास्तविक माप केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि उसके परिणामों में होता है—जो लोगों के जीवन में सुधार लाए, विशेषकर सबसे कमजोर वर्गों के लिए।

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डाक विभाग और TRIFED की साझेदारी से आदिवासी उत्पादों को मिलेगा नया बाजार

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आदिवासी कारीगरों को सशक्त बनाने और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, संचार मंत्रालय के अंतर्गत डाक विभाग (DoP) ने जनजातीय कार्य मंत्रालय के अधीन भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ (TRIFED) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

इस साझेदारी का उद्देश्य TRIFED के ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, विशेषकर Tribes India ई-मार्केटप्लेस, के माध्यम से बेचे जाने वाले उत्पादों की डिलीवरी के लिए एक मजबूत, विश्वसनीय और किफायती लॉजिस्टिक्स ढांचा तैयार करना है।

इस MoU के तहत डाक विभाग TRIFED के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से प्राप्त सभी ऑर्डर्स के लिए एंड-टू-एंड लॉजिस्टिक्स समाधान प्रदान करेगा। अपने व्यापक राष्ट्रीय नेटवर्क और अंतिम छोर (last-mile) तक पहुंच का उपयोग करते हुए, डाक विभाग देशभर में आदिवासी उत्पादों की सुचारु पिकअप, ट्रांसमिशन और डिलीवरी सुनिश्चित करेगा।

यह सहयोग आदिवासी कारीगरों और उद्यमियों के लिए बाजार तक पहुंच को मजबूत करने, ऑर्डर पूर्ति को बेहतर बनाने और ग्राहक अनुभव को बढ़ाने में सहायक होगा। डाक विभाग शिपमेंट ट्रैकिंग, नियमित MIS रिपोर्टिंग और TRIFED के डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ API इंटीग्रेशन जैसी सुविधाएं भी प्रदान करेगा, जिससे लॉजिस्टिक्स प्रबंधन सुगम होगा।

इस व्यवस्था के तहत TRIFED के लिए नेशनल अकाउंट फैसिलिटी के अंतर्गत Book Now Pay Later (BNPL) खाता भी बनाया जाएगा, जिससे स्पीड पोस्ट के माध्यम से शिपमेंट बुकिंग और भुगतान प्रक्रिया सरल हो जाएगी।

TRIFED अपनी ओर से उचित पैकेजिंग, लेबलिंग और ऑर्डर से संबंधित जानकारी साझा करना सुनिश्चित करेगा, ताकि लॉजिस्टिक्स संचालन प्रभावी रूप से हो सके। यह पहल देशभर के विभिन्न क्षेत्रीय कार्यालयों से पिकअप को कवर करेगी, जिससे व्यापक भौगोलिक पहुंच सुनिश्चित होगी।

यह साझेदारी सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसके तहत आदिवासी आजीविका को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ा जा रहा है। बेहतर लॉजिस्टिक्स समर्थन के माध्यम से यह पहल आदिवासी समुदायों की आय बढ़ाने, उनके उत्पादों की पहुंच का विस्तार करने और समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में सहायक होगी।

यह समझौता प्रारंभिक रूप से दो वर्षों के लिए मान्य होगा, जिसे आपसी सहमति से आगे बढ़ाया जा सकता है।

अंत्योदय का संकल्प : करीब 5 लाख भूमिहीन परिवारों को 500 करोड़ रुपये की सौगात देंगे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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22 हजार से अधिक बैगा-गुनिया परिवार होंगे लाभान्वित

'दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना'  के अंतर्गत हितग्राहियों को मिलेगी धनराशि

बलौदाबाजार में 25 मार्च को होगा भव्य कार्यक्रम

रायपुर- छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के शिल्पकार भूमिहीन कृषि मजदूर अब आर्थिक सुरक्षा के एक नए युग में प्रवेश कर रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की 'दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना' न केवल एक वित्तीय सहायता कार्यक्रम है, बल्कि यह समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति को सम्मानजनक जीवन देने का एक महायज्ञ भी है।

इस योजना के तहत इस साल 4 लाख 95 हज़ार 965 भूमिहीन हितग्राहियों के खाते में सीधे 10 हज़ार रुपये की धनराशि प्रत्येक हितग्राही के मान से अंतरित की जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार की ओर से 495 करोड़ 96 लाख 50 हजार रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है। इस सूची में 22 हजार 28 बैगा और गुनिया परिवार भी शामिल हैं, जो राज्य की सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासत के रक्षक हैं। राज्य सरकार ने पिछले वर्ष भी इस योजना के माध्यम से रिकॉर्ड सहायता प्रदान की थी। साल 2025 में कुल 5,62,112 हितग्राहियों को 10,000 रुपये के हिसाब से 562 करोड़ 11 लाख 20 हजार रुपये की राशि वितरित की थी। आंकड़ों का यह निरंतर प्रवाह दर्शाता है कि राज्य सरकार भूमिहीन परिवारों के आर्थिक सुदृढ़ीकरण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है।

25 मार्च 2026 को बलौदाबाजार की धरती से जब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय राशि अंतरित करेंगे, तो वह छत्तीसगढ़ के 'न्याय और सुशासन' की गूंज होगी। 'दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना' ने यह साबित कर दिया है कि जब सरकार की नीयत साफ और नीति स्पष्ट हो, तो विकास की किरण हर झोपड़ी तक पहुंचती है। इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका समावेशी स्वरूप है। इस वर्ष की लाभार्थी सूची में 22,028 बैगा और गुनिया परिवार भी शामिल हैं। ये वे लोग हैं जो हमारी प्राचीन औषधीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को सहेज कर रखे हुए हैं। सरकार ने इन्हें मुख्यधारा से जोड़कर यह संदेश दिया है कि 'अंत्योदय' की कतार में खड़ा आखिरी पंक्ति के व्यक्ति भी शासन की प्राथमिकता में सबसे ऊपर है।

'दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना' उन ग्रामीण परिवारों के लिए एक वरदान है, जिनकी आय का मुख्य स्रोत मजदूरी है। सरकार का प्राथमिक लक्ष्य इन परिवारों को सालाना एक निश्चित आर्थिक सहायता प्रदान करना है, ताकि वे अपनी बुनियादी जरूरतों, जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक आवश्यकताओं को बिना किसी कर्ज के पूरा कर सकें। इन्हें पूर्व में दी जाने वाली 7,000 रुपये की राशि को बढ़ाकर अब 10,000 रुपये प्रति वर्ष कर दिया गया है, जो सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचती है।

आदिवासियों के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध है हमारी सरकार - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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कसडोल में कंवर समाज सामुदयिक भवन तथा पलारी में सामुदायिक भवन निर्माण हेतु 50-50 लाख रुपए की घोषणा

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय गोंडवाना आदर्श सामूहिक विवाह कार्यक्रम में हुए शामिल 

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज बलौदाबाजार भाटापारा जिले के ग्राम ओड़ान में बावनगढ़ आदिवासी ध्रुव गोंड़ समाज तुरतुरिया माता महासभा लवन के तत्वावधान में आयोजित गोंड़वाना आदर्श सामूहिक विवाह समारोह मे शामिल हुए। इस मौके पर मुख्यमंत्री साय ने सामूहिक विवाह कार्यक्रम में पारम्परिक गोंडी रीति-रिवाज से दाम्पत्य सूत्र में बंधे 28 नवविवाहित जोड़ों क़ो आशीर्वाद व सुखमय दाम्पत्य जीवन की बधाई एवं शुभकामनायें दी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने समाज के पदाधिकारियों की मांग पर कसडोल नगर में कंवर समाज सामुदयिक भवन व नगर पंचायत पलारी में सामुदायिक भवन निर्माण हेतु 50-50 लाख रुपए और ग्राम ओड़ान में बड़ादेव ठाना में सामुदायिक भवन निर्माण हेतु 25 लाख रुपए की घोषणा की। साथ ही ग्राम ओड़ान के शनिमंदिर से बड़ादेव ठाना तक सीसी रोड निर्माण हेतु स्वीकृति प्रदान की।

मुख्यमंत्री साय ने कहा हमारी सरकार आदिवासी समाज के उत्थान के लिए सदैव प्रतिबद्ध है। गोंडवाना संस्कृति के मानने वाले हमारे सभी आदिवासी भाई प्रकृति के पुजारी हैं। आप लोगों ने जल,जंगल और जमीन की सुरक्षा में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में जनजातियों को आगे बढ़ाने के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही है। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के लिए इस साल हम लोगों ने 200 करोड़ रूपये का बजट प्रावधान किया गया है। इसी तरह जनजातीय समुदाय के समग्र विकास की दिशा में प्रधानमंत्री जनमन योजना मील का पत्थर साबित हो रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी कला और संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए हमारी सरकार निरंतर काम कर रही है। हम लोगों ने आदिवासी परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री सम्मान निधि प्रारम्भ किया है, जिसके माध्यम से बैगा, गुनिया और सिरहा को हर साल पांच हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारे आदिवासी भाइयों का आय का एक बड़ा स्रोत वनोपज और तेंदूपत्ता संग्रहण है। हम लोगों ने तेंदूपत्ता संग्रहण का दाम 4 हजार रूपये से बढ़ाकर 5500 रूपये प्रति मानक बोरा किया है। जंगल जाने, वनोपज का संग्रहण करने वाले आदिवासी भाई- बहनों के पैरों में कांटे न चुभे, इसका भी इंतजाम हमारी सरकार ने फिर से किया है। इस साल चरण पादुका वितरण भी किया जाएगा। तेन्दूपत्ता संग्राहकों को चरण पादुका प्रदान करने के लिए बजट में 60 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सामूहिक विवाह बहुत ही अच्छी पहल हैं। इस तरह के आयोजन से न केवल समाज संगठित होता है, बल्कि फिजूलखर्ची पर भी रोक लगती है। उन्होंने कहा कि अभी 10 मार्च को मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के माध्यम से 6 हजार से अधिक जोड़ों का सामूहिक विवाह पूरे प्रदेश में संपन्न हुआ जिसे गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी शामिल किया गया है।

इस अवसर पर जांजगीर-चांपा सांसद कमलेश जांगड़े, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल, विधायक संदीप साहु सहित अन्य गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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