Media24Media.com: भारत की ग्रीन हाइड्रोजन क्रांति: सतत और आत्मनिर्भर भविष्य की ओर

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भारत की ग्रीन हाइड्रोजन क्रांति: सतत और आत्मनिर्भर भविष्य की ओर

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  • भारत का लक्ष्य: 2030 तक हर साल 5 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन
  • भारत का पहला पोर्ट-आधारित ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट व.ओ. चिदंबरनार पोर्ट पर शुरू
  • 10 मार्गों पर 37 हाइड्रोजन वाहनों के साथ मोबिलिटी पायलट लॉन्च
  • मिशन से ₹8 लाख करोड़ से अधिक का निवेश आकर्षित होने और ₹1 लाख करोड़ से अधिक की जीवाश्म ईंधन आयात में कमी की उम्मीद

परिचय

भारत अपनी ऊर्जा परिवर्तन यात्रा के निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है — जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाते हुए स्वदेशी स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ा रहा है। यह भारत के 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने और 2070 तक नेट ज़ीरो लक्ष्य प्राप्त करने के विज़न के अनुरूप है। इस परिवर्तन में ग्रीन हाइड्रोजन एक स्वच्छ, टिकाऊ और स्केलेबल ईंधन के रूप में उभर रहा है, जो कठिन-से-कठिन औद्योगिक क्षेत्रों का डीकार्बोनाइजेशन करने में सक्षम है।

भारत सरकार ने 2023 में राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (NGHM) की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य एक संपूर्ण ग्रीन हाइड्रोजन पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना और इस क्षेत्र में अवसरों व चुनौतियों का समाधान करना है।

मुख्य उद्देश्य

यह मिशन केवल एक ऊर्जा पहल नहीं है, बल्कि औद्योगिक प्रतिस्पर्धा, आयात में कमी और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक रणनीतिक मार्ग है — जो आत्मनिर्भरता के साथ सतत विकास को जोड़ता है।

ग्रीन हाइड्रोजन क्या है?

ग्रीन हाइड्रोजन वह हाइड्रोजन है जो नवीकरणीय ऊर्जा (सौर या पवन ऊर्जा) की मदद से उत्पादित होती है, न कि जीवाश्म ईंधन से। इस प्रक्रिया में जल का विद्युत अपघटन (Electrolysis) करके उसे हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित किया जाता है। यदि इस प्रक्रिया से प्रति किलोग्राम हाइड्रोजन पर अधिकतम 2 किलोग्राम CO₂ समतुल्य उत्सर्जन होता है, तो उसे “ग्रीन” माना जाता है।

ग्रीन हाइड्रोजन को बायोमास (जैसे कृषि अपशिष्ट) से भी बनाया जा सकता है, बशर्ते उत्सर्जन सीमा के भीतर रहे।

राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (NGHM)

इस मिशन का लक्ष्य 2030 तक भारत को ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन में वैश्विक नेता बनाना है।
इसके तहत —

  • 125 GW नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता ग्रीन हाइड्रोजन के लिए समर्पित होगी,

  • ₹8 लाख करोड़ से अधिक का निवेश आएगा,

  • 6 लाख से अधिक रोजगार सृजित होंगे,

  • 50 MMT ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी होगी,

  • और ₹1 लाख करोड़ से अधिक जीवाश्म ईंधन आयात में कमी होगी।

मिशन के चार प्रमुख स्तंभ

  1. नीति और नियामक ढांचा

  2. मांग सृजन

  3. अनुसंधान, नवाचार और विकास (R&D)

  4. इन्फ्रास्ट्रक्चर और पारिस्थितिकी तंत्र विकास

प्रमुख योजनाएँ

(i) SIGHT योजना (Strategic Interventions for Green Hydrogen Transition)

₹17,490 करोड़ के प्रोत्साहन के साथ इलेक्ट्रोलाइज़र निर्माण और ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन को बढ़ावा।

(ii) ग्रीन हाइड्रोजन हब विकास

तीन प्रमुख बंदरगाह —

  • दीendayal (गुजरात)

  • व.ओ. चिदंबरनार (तमिलनाडु)

  • परेदीप (ओडिशा)
    को ग्रीन हाइड्रोजन हब घोषित किया गया है।

(iii) ग्रीन हाइड्रोजन सर्टिफिकेशन योजना (GHCI)

अप्रैल 2025 में लॉन्च की गई यह योजना सुनिश्चित करती है कि केवल नवीकरणीय ऊर्जा से बने, और निर्धारित उत्सर्जन सीमा के भीतर आने वाले हाइड्रोजन को ही “ग्रीन” कहा जाए।
BEE (ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी) इस योजना का नोडल प्राधिकरण है।

(iv) Strategic Hydrogen Innovation Partnership (SHIP)

सरकार और उद्योग के बीच साझेदारी के माध्यम से अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने की पहल।
₹400 करोड़ की आरएंडडी योजना के तहत 23 अग्रणी परियोजनाएँ पहले से चल रही हैं।

विभिन्न क्षेत्रों में ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग

औद्योगिक क्षेत्र

  • उर्वरक उत्पादन: ₹55.75 प्रति किलोग्राम की दर से 7.24 लाख मीट्रिक टन/वर्ष ग्रीन अमोनिया की आपूर्ति हेतु निविदा जारी।

  • पेट्रोलियम रिफाइनिंग: रिफाइनरियों में जीवाश्म-आधारित हाइड्रोजन के स्थान पर ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग।

  • इस्पात उद्योग: 5 पायलट प्रोजेक्ट शुरू, जिनका उद्देश्य हाइड्रोजन-आधारित इस्पात उत्पादन की तकनीकी और आर्थिक व्यवहार्यता का आकलन है।

परिवहन क्षेत्र

  • सड़क परिवहन: 10 मार्गों पर 37 हाइड्रोजन वाहनों (बस और ट्रक) के साथ पायलट प्रोजेक्ट — ₹208 करोड़ का निवेश।

  • शिपिंग: व.ओ. चिदंबरनार पोर्ट पर भारत का पहला पोर्ट-आधारित ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट (₹25 करोड़)।

  • उच्च ऊँचाई मोबिलिटी: एनटीपीसी द्वारा लेह (3,650 मीटर) में विश्व का सबसे ऊँचा ग्रीन हाइड्रोजन मोबिलिटी प्रोजेक्ट।

कौशल विकास और वैश्विक सहयोग

  • अब तक 5,600 से अधिक प्रशिक्षुओं को हाइड्रोजन क्षेत्र में प्रमाणित किया गया है।

  • EU-India, UK-India और Germany (H2Global) के साथ साझेदारी के तहत तकनीकी सहयोग और निर्यात अवसरों का विस्तार।

  • Singapore के साथ ग्रीन हाइड्रोजन हब के विकास हेतु MoU साइन।

निष्कर्ष: स्वच्छ विकास की दिशा में अग्रसर भारत

  • ग्रीन हाइड्रोजन भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन का केंद्र है।
  • राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन न केवल देश की ऊर्जा स्वतंत्रता को सुदृढ़ करता है, बल्कि वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा नेतृत्व की दिशा में भारत की स्थिति को भी मजबूत करता है।

यह मिशन भारत को एक सतत, सुरक्षित और आत्मनिर्भर भविष्य की ओर ले जा रहा है।


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