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रेयर अर्थ और लिथियम में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता भारत

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भारत ने दुर्लभ मृदा स्थायी चुंबकों (Rare Earth Permanent Magnets) के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने और लिथियम जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की खोज को तेज करने के प्रयासों को तेज कर दिया है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान तथा प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में बताया कि 2030 तक उत्पादन क्षमता को 5,000 टन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

प्रश्नकाल के दौरान मंत्री ने बताया कि वर्तमान में देश में दुर्लभ मृदा स्थायी चुंबकों की मांग लगभग 4,000 टन है, जो 2030 तक बढ़कर लगभग 8,000 टन होने का अनुमान है। इससे घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता स्पष्ट होती है।

मंत्री ने जानकारी दी कि नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन (NdFeB) स्थायी चुंबकों पर एक पायलट परियोजना शुरू की गई है, जबकि विशाखापत्तनम में समेरियम-कोबाल्ट मैग्नेट प्लांट शुरू हो चुका है, जिसकी शुरुआती उत्पादन क्षमता 500 टन प्रति वर्ष है। इसे अगले चरण में 2,000 टन और 2030 तक 5,000 टन तक बढ़ाया जाएगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार विभिन्न मंत्रालयों के साथ समन्वय कर Whole-of-Government Approach के तहत महत्वपूर्ण खनिजों की खोज और विकास को तेज कर रही है।

राजस्थान के डेगाना में लिथियम भंडार के बारे में पूछे गए प्रश्न पर उन्होंने बताया कि प्रारंभिक सर्वेक्षण कार्य शुरू हो चुका है और जल्द ही आगे की खोज प्रक्रिया शुरू की जाएगी। साथ ही, जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में भी लिथियम की खोज जारी है।

उन्होंने बताया कि लिथियम और दुर्लभ मृदा तत्व इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा, एयरोस्पेस और अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण में अहम भूमिका निभाएंगे।

मंत्री ने यह भी बताया कि हाल के नीतिगत बदलावों, जैसे एटॉमिक एनर्जी (संशोधन) ढांचा, के तहत निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा दिया गया है, हालांकि यूरेनियम जैसे रणनीतिक संसाधनों के लिए सुरक्षा उपाय बनाए रखे गए हैं।

उन्होंने कहा कि तमिलनाडु, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और केरल में रेयर अर्थ कॉरिडोर स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे घरेलू प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन को बढ़ावा मिलेगा।

मंत्री के अनुसार, रेयर अर्थ तत्व समुद्री तटीय रेत और चट्टानी संरचनाओं दोनों में पाए जाते हैं, जिनकी खोज के लिए अलग-अलग तकनीकों की आवश्यकता होती है। राजस्थान, गुजरात और झारखंड जैसे राज्यों में चट्टानी खनिज भंडार मौजूद हैं, जिनकी खोज अपेक्षाकृत जटिल है।

पर्यावरण संबंधी चिंताओं पर उन्होंने स्पष्ट किया कि खनन से जुड़े सुरक्षा उपाय खनन मंत्रालय और संबंधित नियमों के तहत आते हैं, साथ ही अवैध खनन पर रोक लगाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत आयात पर निर्भरता कम करने, घरेलू उत्पादन बढ़ाने और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने के लक्ष्य के साथ महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र में अपनी स्थिति को लगातार मजबूत कर रहा है, जो भविष्य के औद्योगिक और तकनीकी विकास के लिए आवश्यक है।

अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) स्थापना दिवस समारोह में सौर ऊर्जा की वैश्विक भूमिका पर जोर

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नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने सौर ऊर्जा के बढ़ते वैश्विक महत्व और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को गति देने में अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने 11 मार्च को नई दिल्ली में आयोजित ISA स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि यह गठबंधन साझा दृष्टि और वैश्विक साझेदारी की शक्ति को दर्शाता है, जो सौर ऊर्जा के माध्यम से सतत विकास को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

मंत्री ने कहा कि लगभग एक दशक पहले भारत और फ्रांस ने मिलकर एक दूरदर्शी पहल की थी, जिसका उद्देश्य वैश्विक विकास के केंद्र में सूर्य की ऊर्जा को स्थापित करना था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में यह पहल एक वैश्विक आंदोलन में बदल गई।

120 से अधिक देशों का वैश्विक गठबंधन

मंत्री  जोशी ने बताया कि आज अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन 120 से अधिक देशों के वैश्विक गठबंधन के रूप में विकसित हो चुका है, जो मिलकर सौर ऊर्जा के प्रसार को तेज करने के लिए कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में ISA ने सौर ऊर्जा के वादे को वास्तविक और जीवन बदलने वाले प्रभाव में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

ISA के प्रयासों के माध्यम से स्वास्थ्य केंद्रों का सौर ऊर्जा से संचालन, किसानों को सौर सिंचाई और कोल्ड स्टोरेज सुविधाएं, खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना तथा स्कूलों और सार्वजनिक संस्थानों को स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराना संभव हुआ है। इसके अलावा स्टार्टअप, युवा पेशेवरों और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को समर्थन देकर स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में नए अवसर और रोजगार सृजित किए जा रहे हैं।

मंत्री ने कहा कि ISA की स्थापना भारतीय दर्शन “वसुधैव कुटुम्बकम” की भावना पर आधारित है, जो यह मानता है कि पूरा विश्व एक परिवार है और सभी देशों को मिलकर स्वच्छ ऊर्जा के लाभों को समान रूप से साझा करना चाहिए।

भारत की सौर ऊर्जा क्षमता में तेजी से वृद्धि

मंत्री जोशी ने भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता लगभग 136 गीगावाट तक पहुंच गई है, जो भारत की कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का लगभग आधा हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि मजबूत नीतिगत प्रतिबद्धता और नवाचार का परिणाम है।

उन्होंने बताया कि पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना जैसे कार्यक्रम लाखों परिवारों को अपनी स्वच्छ बिजली स्वयं उत्पन्न करने का अवसर दे रहे हैं, जबकि पीएम-कुसुम योजना किसानों को सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई प्रणालियों के माध्यम से सशक्त बना रही है।

विश्व स्तर पर सौर ऊर्जा का तेज विस्तार

मंत्री ने कहा कि वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा का विस्तार तेजी से हो रहा है। जहां दुनिया को पहली 1000 गीगावाट सौर क्षमता स्थापित करने में लगभग 25 वर्ष लगे, वहीं अगली 1000 गीगावाट क्षमता इससे कहीं कम समय में स्थापित होने की संभावना है।

उन्होंने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन का केंद्र अब तेजी से ग्लोबल साउथ की ओर बढ़ रहा है, जहां ऊर्जा की बढ़ती मांग और प्रचुर सौर संसाधन पारंपरिक ऊर्जा मार्गों को पीछे छोड़ने का अवसर प्रदान कर रहे हैं।

इस संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन सरकारों, विकास साझेदारों, वित्तीय संस्थानों और निजी क्षेत्र को एक साथ लाकर सौर ऊर्जा के प्रसार को बढ़ावा देने वाला एक महत्वपूर्ण मंच बन गया है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल तकनीकों की बढ़ती भूमिका

मंत्री जोशी ने कहा कि ऊर्जा परिवर्तन अब एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है, जहां डिजिटल तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने ISA द्वारा संचालित ग्लोबल मिशन ऑन AI फॉर एनर्जी का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य नवाचार के माध्यम से अधिक स्मार्ट और लचीली ऊर्जा प्रणालियां विकसित करना है।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा परिवर्तन केवल ऊर्जा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विकास, लचीलापन और समृद्धि के नए अवसरों का मार्ग भी प्रशस्त करता है।

इस अवसर पर नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी ने कहा कि सौर ऊर्जा आज के समय की सबसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक संपत्तियों में से एक बन चुकी है। उन्होंने बताया कि भारत 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लक्ष्य की दिशा में मजबूत नीतिगत ढांचा और प्रभावी कार्यान्वयन प्रणाली के माध्यम से तेजी से आगे बढ़ रहा है।

ISA के महानिदेशक आशीष खन्ना ने कहा कि ISA आज 125 सदस्य और हस्ताक्षरकर्ता देशों का एक वैश्विक गठबंधन बन चुका है, जो यह मानते हैं कि दुनिया के सबसे प्रचुर ऊर्जा स्रोत को सबसे लोकतांत्रिक भी होना चाहिए।

इस अवसर पर ग्रीन हाइड्रोजन और स्टोरेज स्टार्टअप चैलेंज 2026 की भी घोषणा की गई। इसका उद्देश्य ग्रीन हाइड्रोजन और ऊर्जा भंडारण तकनीकों पर काम करने वाले नवाचारी स्टार्टअप्स की पहचान करना और उन्हें सहयोग प्रदान करना है।

इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन ने एक नई उन्नत वेबसाइट भी लॉन्च की, जो सदस्य देशों और भागीदारों को ज्ञान, कार्यक्रमों और अवसरों तक बेहतर पहुंच प्रदान करेगी।

अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के बारे में

अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की स्थापना भारत और फ्रांस द्वारा 2015 में पेरिस में आयोजित COP21 जलवायु सम्मेलन के दौरान की गई थी। यह एक संधि-आधारित अंतर-सरकारी मंच है, जिसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा के प्रसार को बढ़ावा देना और सतत विकास को गति देना है।

आज ISA अफ्रीका, एशिया, लैटिन अमेरिका और छोटे द्वीपीय विकासशील देशों में ऊर्जा पहुंच बढ़ाने, आजीविका मजबूत करने और जलवायु लचीलापन बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

भारत के राष्ट्रीय विद्युत ट्रांसमिशन नेटवर्क ने रचा इतिहास: 5 लाख सर्किट किलोमीटर का आँकड़ा पार

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भारत का राष्ट्रीय विद्युत ट्रांसमिशन नेटवर्क ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए 5,00,000 सर्किट किलोमीटर (ckm) से अधिक की उच्च वोल्टेज (220 kV और उससे ऊपर) ट्रांसमिशन लाइनों के साथ-साथ 1,407 GVA से अधिक की परिवर्तन क्षमता (220 kV और उससे ऊपर) भी प्राप्त कर ली है।

विश्व के सबसे बड़े सिंक-क्रोनस राष्ट्रीय ग्रिड ने यह उपलब्धि 14 जनवरी 2026 को राजस्थान के भडला II से सीकर II सबस्टेशन तक 765 kV क्षमता वाली 628 सर्किट किलोमीटर की ट्रांसमिशन लाइन के संचालन से हासिल की। यह लाइन राजस्थान के भडला, रामगढ़ और फतेहगढ़ सोलर पावर कॉम्प्लेक्स के नवीकरणीय ऊर्जा (RE) क्षेत्र से अतिरिक्त 1100 मेगावाट बिजली को कुशलतापूर्वक ग्रिड में भेजने में सक्षम बनाएगी।

ट्रांसमिशन नेटवर्क का विकास

  • अप्रैल 2014 से अब तक भारत के ट्रांसमिशन नेटवर्क में 71.6% वृद्धि हुई है।

  • इस दौरान 2.09 लाख सर्किट किलोमीटर अतिरिक्त ट्रांसमिशन लाइनों का निर्माण हुआ है।

  • ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता में 876 GVA का इजाफा हुआ है।

अब इंटर-रीजनल पावर ट्रांसफर कैपेसिटी 1,20,340 मेगावाट तक पहुंच चुकी है, जिससे देश भर में बिजली के निर्बाध आदान–प्रदान को साकार करते हुए “एक राष्ट्र—एक ग्रिड—एक आवृत्ति” के विजन को सफलतापूर्वक लागू किया जा रहा है।

आगामी ट्रांसमिशन परियोजनाएँ

वर्तमान में कई Interstate Transmission परियोजनाएँ प्रगति पर हैं, जिनसे अनुमानित 40,000 ckm ट्रांसमिशन लाइनों और 399 GVA ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता में और वृद्धि होगी। इसके अलावा Intra-State Transmission परियोजनाएँ भी लगभग 27,500 ckm ट्रांसमिशन लाइनों और 134 GVA ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता को जोड़ेंगी। ये परियोजनाएँ ग्रिड की विश्वसनीयता और पावर निकासी क्षमता को और सुदृढ़ करेंगी।

नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य को समर्थन

ये क्षमता वृद्धि विशेष रूप से नवीकरणीय ऊर्जा के तेजी से इंटीग्रेशन का समर्थन करेगी, जिसका लक्ष्य 2030 तक 500 GW से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता प्राप्त करना है।

यह 5,00,000 सर्किट किलोमीटर का माइलस्टोन भारत सरकार के निरंतर प्रयासों और सतत निवेश का परिणाम है, जिसका उद्देश्य पूरे देश में भरोसेमंद, किफायती और सुरक्षित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना है, साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा को तेजी से जोड़ना भी है।


भारत सरकार ने भारतीय कार्बन बाजार के तहत नए क्षेत्रों के लिए ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन लक्ष्य अधिसूचित किए

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भारत सरकार ने कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS) के तहत अतिरिक्त कार्बन-गहन क्षेत्रों के लिए ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन तीव्रता (GEI) लक्ष्य अधिसूचित किए हैं। 13 जनवरी 2026 को जारी इस अधिसूचना के तहत पेट्रोलियम रिफाइनरी, पेट्रोकेमिकल्स, वस्त्र (टेक्सटाइल) और सेकेंडरी एल्युमिनियम क्षेत्रों को भारतीय कार्बन बाजार (ICM) के अनुपालन तंत्र में शामिल किया गया है।


इन क्षेत्रों के 208 बाध्यकारी इकाइयों (Obligated Entities) को अब निर्धारित उत्सर्जन-तीव्रता घटाने के लक्ष्यों को पूरा करना होगा। इस विस्तार के साथ ICM का अनुपालन तंत्र अब भारत के सबसे अधिक उत्सर्जन-गहन उद्योगों की कुल 490 बाध्यकारी इकाइयों को कवर करता है। इससे पहले, अक्टूबर 2025 में सरकार ने एल्युमिनियम, सीमेंट, क्लोर-एल्कली और पल्प व पेपर क्षेत्रों के लिए GEI लक्ष्य अधिसूचित किए थे, जिनमें 282 बाध्यकारी इकाइयाँ शामिल थीं।

कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS) को 2023 में अधिसूचित किया गया था, जो भारतीय कार्बन बाजार के संचालन का समग्र ढांचा प्रदान करती है। CCTS का उद्देश्य कार्बन क्रेडिट प्रमाणपत्रों के व्यापार-आधारित तंत्र के माध्यम से उत्सर्जन की कीमत तय कर भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना या उससे बचाव करना है।

CCTS दो तंत्रों के माध्यम से संचालित होती है—अनुपालन तंत्र (Compliance Mechanism) और ऑफसेट तंत्र (Offset Mechanism)। अनुपालन तंत्र के तहत, उत्सर्जन-गहन उद्योगों को बाध्यकारी इकाइयों के रूप में नामित किया जाता है और उन्हें निर्धारित GEI लक्ष्यों को पूरा करना अनिवार्य होता है। जो इकाइयाँ अपने लक्ष्यों से बेहतर प्रदर्शन करती हैं, उन्हें कार्बन क्रेडिट प्रमाणपत्र प्राप्त होते हैं, जिन्हें वे उन इकाइयों के साथ व्यापार कर सकती हैं जो अपने लक्ष्य पूरे नहीं कर पातीं।

यह प्रगति उद्योग के साथ वर्षों की सतत सहभागिता, कठोर तकनीकी आकलन तथा विभिन्न संस्थानों और हितधारकों के समन्वित प्रयासों का परिणाम है। जैसे-जैसे क्षेत्रीय कवरेज बढ़ रहा है और अनुपालन तंत्र परिपक्व हो रहा है, भारतीय कार्बन बाजार (ICM) भारत के दीर्घकालिक जलवायु लक्ष्यों और नेट-ज़ीरो मार्ग के अनुरूप औद्योगिक विकास को साधने में एक केंद्रीय भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

IREDA ने नववर्ष 2026 के अवसर पर आयोजित किया कर्मचारी मिलन समारोह, नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में सशक्त भूमिका निभाने का संकल्प दोहराया

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इंडियन रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी लिमिटेड (IREDA) ने 1 जनवरी 2026 को इंडिया हैबिटेट सेंटर, नई दिल्ली में नववर्ष 2026 के उपलक्ष्य में एक विशेष न्यू ईयर गेट-टुगेदर का आयोजन किया। यह आयोजन कर्मचारियों के बीच एकता, सहयोग और नववर्ष में नई ऊर्जा के साथ कार्य करने के संकल्प को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से किया गया।

इस अवसर पर नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के सचिव संतोष कुमार सारंगी, संयुक्त सचिव जे.वी.एन. सुब्रमण्यम, IREDA के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक प्रदीप कुमार दास, निदेशक (वित्त) डॉ. विजय कुमार मोहंती, HUDCO के CMD संजय कुलश्रेष्ठ सहित मंत्रालय और IREDA के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संतोष कुमार सारंगी ने टीम निर्माण के महत्व पर जोर दिया और युवा पेशेवरों को भविष्य के नेतृत्व के लिए तैयार करने की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने IREDA की बढ़ती भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि MSME क्षेत्र, प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना जैसी प्रमुख पहलों के अंतर्गत वित्तीय सहायता को और सुदृढ़ किया जाना आवश्यक है। उन्होंने IREDA की विकास यात्रा में MNRE के निरंतर समर्थन का आश्वासन भी दिया।

इस अवसर पर सभी कर्मचारियों को नववर्ष की शुभकामनाएँ देते हुए IREDA के CMD प्रदीप कुमार दास ने बताया कि 1 जनवरी 2025 को 168 कर्मचारियों की संख्या बढ़कर 2026 में 227 हो गई है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि IREDA में महिला कर्मचारियों की भागीदारी लगभग 23% है, जो केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (CPSEs) के औसत 9.5% से कहीं अधिक है। यह प्रगति सुदृढ़ कॉर्पोरेट गवर्नेंस और वित्तीय अनुशासन के कारण संभव हो सकी है, जिसे आगे भी जारी रखा जाएगा।

दास ने IREDA के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 31 दिसंबर 2025 (अनंतिम) तक

  • कुल ऋण स्वीकृतियाँ: ₹2,78,016 करोड़

  • कुल ऋण वितरण: ₹1,80,988 करोड़

  • ऋण पुस्तिका (Loan Book): ₹87,975 करोड़ रही है।

उन्होंने वित्त वर्ष 2024–25 में ₹1,699 करोड़ के अब तक के सर्वाधिक शुद्ध लाभ (PAT) तथा S&P ग्लोबल रेटिंग्स द्वारा अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट रेटिंग उन्नयन जैसे महत्वपूर्ण मील के पत्थरों को भी याद किया।

कार्यक्रम के अंत में निदेशक (वित्त) डॉ. विजय कुमार मोहंती ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों की सराहना की और उन्हें उच्च स्तर के शासन, पारदर्शिता और दक्षता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।

यह नववर्ष समारोह IREDA की नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में देश की अग्रणी वित्तीय संस्था के रूप में भूमिका को और मजबूत करने के संकल्प का प्रतीक बना।

डॉ. जितेंद्र सिंह: स्वच्छ और विविध ऊर्जा की दिशा में भारत की यात्रा आत्मनिर्भरता और वैश्विक नेतृत्व की ओर

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 नई दिल्ली- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ऊर्जा स्वतंत्रता अब विकल्प नहीं बल्कि आर्थिक, रणनीतिक और भू-राजनीतिक आवश्यकता बन चुकी है। उन्होंने बताया कि भारत का स्वच्छ और विविध ऊर्जा स्रोतों की ओर संक्रमण आत्मनिर्भरता और भू-राजनीतिक अनुकूलता के साथ अभिन्न रूप से जुड़ा हुआ है, जो आत्मनिर्भर भारत और भारत की वैश्विक भूमिका के दृष्टिकोण के अनुरूप है।

डॉ. सिंह ने दिल्ली में एक कार्यक्रम में कहा कि यह बहस कि हरी और स्वच्छ ऊर्जा को अपनाना चाहिए या नहीं, अब अप्रासंगिक हो गई है, क्योंकि आज वैश्विक सहमति मानती है कि ऊर्जा संक्रमण सतत विकास, आर्थिक लचीलापन और भू-राजनीतिक अनुकूलता के लिए अनिवार्य है। उन्होंने कहा, “यदि भारत को आगे बढ़ना है, तो कोई विकल्प नहीं है।”

उन्होंने बताया कि जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना न केवल आत्मनिर्भरता को मजबूत करता है, बल्कि भारत को एक अनिवार्य वैश्विक बदलाव के लिए तैयार भी करता है, क्योंकि पारंपरिक ऊर्जा निर्यातक खुद तेजी से अपने ऊर्जा पोर्टफोलियो को विविध बना रहे हैं। “पुराने ऊर्जा मॉडल को बनाए रखना वैसा ही है जैसे भावनाओं के आधार पर पुराने तकनीकी उपकरणों से चिपके रहना; कल यहां तक कि स्पेयर पार्ट्स भी उपलब्ध नहीं होंगे।”

डॉ. सिंह ने भारत की बढ़ती वैश्विक स्थिति पर जोर देते हुए कहा कि देश अब केवल अनुयायी नहीं बल्कि क्लाइमेट एक्शन, स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में दिशा-निर्देशक बन गया है। उन्होंने कहा, “आज अन्य देश भारत की ओर देख रहे हैं।”

भारत की स्वच्छ ऊर्जा प्रतिबद्धताओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2070 तक नेट जीरो लक्ष्य घोषित किया और 2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का संकल्प दोहराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभिन्न ऊर्जा स्रोतों को भेदभाव के नजरिए से नहीं, बल्कि उपयुक्तता, विश्वसनीयता और आवेदन-विशिष्ट उपयोगिता के आधार पर देखा जाना चाहिए।

डॉ. सिंह ने बताया कि जबकि नवीकरणीय ऊर्जा भारत के ऊर्जा मिश्रण का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगी, कुछ क्षेत्र—जैसे डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत कंप्यूटिंग—में निरंतर, स्थिर, 24x7 बिजली की आवश्यकता होती है, जहां परमाणु ऊर्जा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा, “भविष्य एक मिश्रित ऊर्जा मॉडल में निहित है, जहां प्रत्येक स्रोत का उपयोग सबसे लागत-कुशल और प्रभावी क्षेत्र में किया जाएगा।”

उन्होंने तकनीकी विकास से तुलना करते हुए कहा कि जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब संतुलित ‘AI + मानव बुद्धि’ मॉडल में विकसित हो रहा है, वैसे ही भारत की ऊर्जा रणनीति भी नवीकरणीय, परमाणु, हाइड्रोजन और अन्य उभरते समाधानों को एकीकृत फ्रेमवर्क में संयोजित करेगी।

डॉ. सिंह ने सरकार के साहसिक सुधारों को भी रेखांकित किया, जिसमें परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे रणनीतिक क्षेत्रों को निजी भागीदारी के लिए खोला गया है। उन्होंने कहा, “सरकार ने स्टेटस क्वो से परे जाने का साहस दिखाया है, जो पैमाना, गति और स्थायित्व हासिल करने के लिए आवश्यक सार्वजनिक-निजी सहयोग को सक्षम करता है।”

उन्होंने सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के बीच सहयोग और विश्वास बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय प्रगति के लिए सामूहिक जिम्मेदारी, साझा उद्देश्य और समेकित कार्रवाई जरूरी है।

डॉ. सिंह ने निष्कर्ष में कहा कि ऊर्जा संक्रमण के प्रारंभिक चरण में चुनौतियां हैं, लेकिन भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सही मार्ग पर है। उन्होंने कहा, “स्वच्छ ऊर्जा अब केवल सेमिनार का विषय नहीं, बल्कि जीवनशैली बनती जा रही है। सभी हितधारक इसके अनुसार अनुकूलित होंगे, नवाचार करेंगे और नेतृत्व करेंगे।”

भारत ने गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता का 50% हासिल किया, MNRE ने सौर निर्माण में आत्मनिर्भरता पर जोर दिया

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भारत ने पहले ही अपने स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता का 50% गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से हासिल कर लिया है, जो पेरिस समझौते के तहत अपनी राष्ट्रीय निर्धारित योगदान (NDC) लक्ष्य से पांच साल पहले है।

31 अक्टूबर 2025 तक, गैर-जीवाश्म स्रोतों से स्थापित क्षमता लगभग 259 गीगावाट (GW) है, जिसमें चालू वित्तीय वर्ष (अक्टूबर 2025 तक) में 31.2 GW की नई क्षमता जुड़ी है।

कई जगह यह रिपोर्ट किया जा रहा है कि नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने वित्तीय संस्थानों को नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए नए वित्त पोषण को रोकने का परामर्श जारी किया है, जिससे अत्यधिक अधिशक्ति (overcapacity) को लेकर चिंता जताई जा रही है।

यह स्पष्ट किया जाता है कि MNRE ने किसी भी वित्तीय संस्था को नवीकरणीय ऊर्जा विद्युत परियोजनाओं या नवीकरणीय ऊर्जा उपकरण निर्माण सुविधाओं के लिए वित्त पोषण रोकने का कोई परामर्श नहीं दिया है।

हालांकि, MNRE ने विभागीय वित्तीय सेवाओं और एनबीएफसी जैसे PFC, REC और IREDA को सौर पीवी (Solar PV) निर्माण के विभिन्न क्षेत्रों में वर्तमान घरेलू स्थापित उत्पादन क्षमताओं की स्थिति भेजी है, जिसमें सौर मॉड्यूल, अपस्ट्रीम स्तर जैसे सौर सेल, इंट, वेफर, पॉलीसिलिकॉन और सहायक उपकरण जैसे सौर ग्लास और एल्युमिनियम फ्रेम शामिल हैं। इसका उद्देश्य वित्तीय संस्थाओं को प्रस्तावों का मूल्यांकन करते समय संतुलित और सूचित दृष्टिकोण अपनाने में मदद करना है, ताकि वे केवल सौर मॉड्यूल निर्माण तक सीमित न रहें, बल्कि सौर पीवी निर्माण के अपस्ट्रीम स्तर और सहायक उपकरणों में भी अपने पोर्टफोलियो का विस्तार कर सकें।

भारत सरकार सौर पीवी निर्माण में आत्मनिर्भर बनने और देश को वैश्विक मूल्य श्रृंखला में प्रमुख खिलाड़ी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस प्रतिबद्धता को कई पहल के माध्यम से समर्थन प्राप्त है, जिसमें उच्च दक्षता सौर पीवी मॉड्यूल के लिए PLI योजना और भारतीय निर्माताओं के लिए समान अवसर प्रदान करने के उपाय शामिल हैं।

इन पहलों के प्रभाव से सौर मॉड्यूल निर्माण क्षमता में वृद्धि हुई है, जो 2014 में केवल 2.3 GW थी और आज MNRE की Approved List of Models and Manufacturers (ALMM) में लगभग 122 GW तक पहुंच चुकी है। यह वृद्धि भारत के सौर पीवी निर्माण की सफलता और उद्योग, विभिन्न राज्य सरकारों और भारत सरकार के संयुक्त प्रयासों को दर्शाती है।

यह कदम यह भी सुनिश्चित करता है कि भारत 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल करने और वैश्विक कार्बन उत्सर्जन घटाने में सार्थक योगदान देने के अपने लक्ष्य की दिशा में अग्रसर है। MNRE भविष्य में भी सौर निर्माण इकोसिस्टम को नीति समर्थन, अवसंरचना विकास और नवाचार के माध्यम से मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्रालय हितधारकों के साथ लगातार संवाद जारी रखेगा ताकि भारत की सौर ऊर्जा यात्रा समान, प्रतिस्पर्धी और भविष्य-तैयार बनी रहे।

भारत ने दर्ज की अब तक की सबसे बड़ी नवीकरणीय ऊर्जा वृद्धि, ओडिशा में 1.5 लाख रूफटॉप सोलर की योजना

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केंद्रीय नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री  प्रल्हाद जोशी ने भारत में ऐतिहासिक रूप से स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार को उजागर करते हुए कहा कि चालू वित्तीय वर्ष में देश ने अभी तक की सबसे बड़ी गैर-फॉसिल क्षमता जोड़ी है, कुल 31.25 GW, जिसमें से 24.28 GW सौर ऊर्जा है।

जोशी ने यह जानकारी ग्लोबल एनर्जी लीडर्स समिट 2025, पुरी, ओडिशा में दी और साथ ही ओडिशा के लिए 1.5 लाख रूफटॉप सोलर ULA मॉडल की घोषणा की, जिससे राज्य के लगभग 7–8 लाख लोगों को लाभ मिलेगा और उनकी सशक्तिकरण में मदद होगी।

वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा में भारत की भूमिका

उन्होंने कहा कि विश्व ने 2022 में 1 TW नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने में लगभग 70 साल लिए, लेकिन 2024 तक केवल दो साल में 2 TW की क्षमता हासिल कर ली। इस वैश्विक वृद्धि में भारत का योगदान महत्वपूर्ण रहा है।

पिछले 11 वर्षों में भारत की सौर क्षमता 2.8 GW से लगभग 130 GW तक बढ़ी, यानी 4,500% से अधिक की वृद्धि। केवल 2022–2024 के बीच, भारत ने वैश्विक सौर ऊर्जा में 46 GW का योगदान दिया और तीसरे सबसे बड़े योगदानकर्ता के रूप में उभरा।

जोशी ने यह भी कहा कि भारत के पास विश्व के पाँचवें सबसे बड़े कोयला भंडार हैं और यह कोयले का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। इसके बावजूद, भारत धीरे-धीरे कोयले और नवीकरणीय ऊर्जा का संतुलन बना रहा है।

ओडिशा में नवीकरणीय ऊर्जा की दिशा में प्रगति

ओडिशा के लिए नई पहलों का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत उपभोक्ता-स्वामित्व वाले Utility-Led Aggregation (ULA) मॉडल के तहत राज्य में 1.5 लाख रूफटॉप सोलर सिस्टम (प्रति यूनिट 1 kW) स्थापित किए जाएंगे। इससे लगभग 7–8 लाख लोगों, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को लाभ मिलेगा।

मंत्री ने बताया कि ओडिशा पहले से ही स्वच्छ ऊर्जा अपनाने में अग्रणी है। राज्य में स्थापित कुल नवीकरणीय क्षमता 3.1 GW से अधिक है, जो राज्य की कुल स्थापित विद्युत क्षमता का 34% से अधिक है।

PM सूर्य घर योजना के तहत:

  • 1.6 लाख परिवारों ने रूफटॉप सोलर के लिए आवेदन किया

  • 23,000 से अधिक इंस्टॉलेशन पूरे हुए

  • 19,200 से अधिक परिवारों के बैंक खातों में ₹147 करोड़ से अधिक की सब्सिडी सीधे ट्रांसफर की गई

प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शिता और केंद्र–राज्य सहयोग

जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बनाए गए समग्र इकोसिस्टम, आसान व्यापारिक माहौल, निवेशकों का विश्वास, मजबूत आधारभूत संरचना, मांग-आधारित योजनाएँ और केंद्र–राज्य सहयोग ने भारत में नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार को गति दी है।

मंत्री ने ओडिशा के भविष्य के लिए आश्वस्ति व्यक्त की और राज्य के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव, और जनता की सराहना की, जिन्होंने स्वच्छ ऊर्जा और हरित तकनीक को बढ़ावा दिया।

ग्लोबल एनर्जी लीडर्स समिट (GELS) 2025

ग्लोबल एनर्जी लीडर्स समिट (GELS) 2025, पुरी भारत की स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को तेज़ करने के लिए नीति निर्माता, नवप्रवर्तनकर्ता और उद्योग नेताओं को एक मंच पर लाने का पहला कदम है।
5–7 दिसंबर 2025 के बीच आयोजित इस समिट में केंद्रीय और राज्य ऊर्जा मंत्री, वैश्विक ऊर्जा नेता, नवप्रवर्तक और उद्योगपति भाग लेंगे, जो ऊर्जा के भविष्य को आकार देने के लिए विचार-विमर्श करेंगे।


भारत में सौर ऊर्जा का सशक्त विकास: 2025 में 129 GW क्षमता और वैश्विक नेतृत्व

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मुख्य बिंदु:

  • भारत की सौर क्षमता 2014 के 3 GW से बढ़कर 2025 में 129 GW हो गई।

  • गैर-जीवाश्म ऊर्जा 500 GW कुल क्षमता का 50% पार कर चुकी है।

  • PM Surya Ghar योजना के तहत 22.65 लाख घरों को रूफटॉप सोलर पैनल के माध्यम से मुफ्त बिजली प्राप्त हुई।

  • PM-KUSUM योजना के तहत 9.2 लाख सोलर पंप किसानों को दिए गए, जिससे कृषि में स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग बढ़ा।

भारत का सौर ऊर्जा सफर:

भारत ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) का मुख्यालय गुरुग्राम में स्थापित कर वैश्विक सौर ऊर्जा में नेतृत्व सुनिश्चित किया है। 2025 में आयोजित 8वीं ISA असेंबली में 125 से अधिक देशों के मंत्री और प्रतिनिधि शामिल हुए।

पंचामृत ढांचा और लक्ष्य:

  1. 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता।

  2. 2030 तक कुल बिजली क्षमता का 50% गैर-जीवाश्म स्रोतों से।

  3. 2030 तक कुल कार्बन उत्सर्जन में 1 बिलियन टन की कटौती।

  4. 2030 तक अर्थव्यवस्था की कार्बन तीव्रता में 45% कमी (2005 के स्तर के मुकाबले)।

  5. 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन।

नीतिगत पहल और योजनाएं:

  • PM Surya Ghar: 1 करोड़ घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम, हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली।

  • राष्ट्रीय सौर मिशन (NSM): 2025 तक 129.92 GW सौर ऊर्जा स्थापित।

  • PLI योजना: घरेलू उच्च दक्षता सोलर मॉड्यूल के उत्पादन के लिए ₹24,000 करोड़ का प्रोत्साहन।

  • PM-KUSUM: किसानों के लिए सोलर पंप, भूमि पर सौर ऊर्जा संयंत्र।

  • सोलर पार्क और अल्ट्रा-मेगा सोलर परियोजनाएं: 55 सोलर पार्क, 39,973 MW क्षमता।

वैश्विक सहयोग और नेतृत्व:

  • भारत ने OSOWOG (One Sun, One World, One Grid) पहल के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय ग्रिड कनेक्शन का प्रस्ताव रखा।

  • ISA 8वीं असेंबली में “एक सूरज, एक विश्व, एक ग्रिड” दृष्टिकोण को बल मिला।

  • G20 और IEA ने भारत की क्लीन एनर्जी लीडरशिप की सराहना की।

निष्कर्ष:

भारत की सौर ऊर्जा यात्रा दिखाती है कि नीति, तकनीकी नवाचार और वैश्विक सहयोग से ऊर्जा संक्रमण को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकता है। सौर ऊर्जा न केवल भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का आधार है, बल्कि यह आर्थिक विकास, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक जलवायु नेतृत्व का भी प्रेरक है।

44वें IITF में विद्युत मंत्रालय के पावर पवेलियन का उद्घाटन, भारत की ऊर्जा यात्रा का शानदार प्रदर्शन

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केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री श्रिपद य. नाइक ने आज नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में 14–27 नवंबर 2025 तक आयोजित हो रहे 44वें भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेले (IITF 2025) में विद्युत मंत्रालय के पवेलियन का उद्घाटन किया।

उन्होंने कहा कि यह पवेलियन भारत की बदलती ऊर्जा यात्रा का जीवंत प्रतीक है, जो “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को सशक्त रूप से प्रदर्शित करता है। यहां भारत की ऊर्जा व्यवस्था के पारंपरिक स्रोतों से स्वच्छ ऊर्जा की ओर तेज़ी से हो रहे संक्रमण और तकनीक-आधारित, नागरिक-केंद्रित, समावेशी और टिकाऊ ऊर्जा तंत्र को दर्शाया गया है।

मंत्री ने बताया कि इस पवेलियन में NTPC, NHPC, SJVN, THDC, PFC, Power Grid और REC जैसी सात प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियाँ (PSUs) देश की ऊर्जा क्रांति और विकसित भारत @ 2047 के विज़न में अपने योगदान को प्रस्तुत कर रही हैं।

उन्होंने युवाओं, छात्रों और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों से आग्रह किया कि वे पावर पवेलियन अवश्य आएँ और भारत की अद्वितीय ऊर्जा यात्रा, चुनौतियों, नवाचारों और भविष्य की संभावनाओं को करीब से अनुभव करें।

पावर पवेलियन की प्रमुख विशेषताएँ (Hall No. 1)

IITF 2025 में विद्युत मंत्रालय का पवेलियन एक इंटरेक्टिव और इमर्सिव अनुभव प्रदान करता है, जिसमें ऊर्जा क्षेत्र की प्रगति को आधुनिक प्रदर्शनों के माध्यम से दिखाया गया है। पवेलियन की मुख्य आकर्षण:

  • काइनेटिक LED वॉल

  • एनामॉर्फिक 3D डिस्प्ले

  • इमर्सिव पावर जर्नी ज़ोन

  • स्मार्ट मीटर और स्मार्ट होम डेमोंस्ट्रेशन

  • AI संचालित Holobot

  • इंटरैक्टिव क्विज़ स्टेशन

  • EESL Mart

  • PSP डियोरामा

  • थीम आधारित सेल्फी वॉल और AI फोटो बूथ

  • ऊर्जा “चक्र” की प्रतीकात्मक स्थापना

यह पवेलियन भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता, तकनीकी उन्नति और भविष्य की हरित ऊर्जा प्रतिबद्धता का एक सशक्त उदाहरण है।

भारत की ग्रीन हाइड्रोजन क्रांति: सतत और आत्मनिर्भर भविष्य की ओर

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  • भारत का लक्ष्य: 2030 तक हर साल 5 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन
  • भारत का पहला पोर्ट-आधारित ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट व.ओ. चिदंबरनार पोर्ट पर शुरू
  • 10 मार्गों पर 37 हाइड्रोजन वाहनों के साथ मोबिलिटी पायलट लॉन्च
  • मिशन से ₹8 लाख करोड़ से अधिक का निवेश आकर्षित होने और ₹1 लाख करोड़ से अधिक की जीवाश्म ईंधन आयात में कमी की उम्मीद

परिचय

भारत अपनी ऊर्जा परिवर्तन यात्रा के निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है — जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाते हुए स्वदेशी स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ा रहा है। यह भारत के 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने और 2070 तक नेट ज़ीरो लक्ष्य प्राप्त करने के विज़न के अनुरूप है। इस परिवर्तन में ग्रीन हाइड्रोजन एक स्वच्छ, टिकाऊ और स्केलेबल ईंधन के रूप में उभर रहा है, जो कठिन-से-कठिन औद्योगिक क्षेत्रों का डीकार्बोनाइजेशन करने में सक्षम है।

भारत सरकार ने 2023 में राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (NGHM) की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य एक संपूर्ण ग्रीन हाइड्रोजन पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना और इस क्षेत्र में अवसरों व चुनौतियों का समाधान करना है।

मुख्य उद्देश्य

यह मिशन केवल एक ऊर्जा पहल नहीं है, बल्कि औद्योगिक प्रतिस्पर्धा, आयात में कमी और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक रणनीतिक मार्ग है — जो आत्मनिर्भरता के साथ सतत विकास को जोड़ता है।

ग्रीन हाइड्रोजन क्या है?

ग्रीन हाइड्रोजन वह हाइड्रोजन है जो नवीकरणीय ऊर्जा (सौर या पवन ऊर्जा) की मदद से उत्पादित होती है, न कि जीवाश्म ईंधन से। इस प्रक्रिया में जल का विद्युत अपघटन (Electrolysis) करके उसे हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित किया जाता है। यदि इस प्रक्रिया से प्रति किलोग्राम हाइड्रोजन पर अधिकतम 2 किलोग्राम CO₂ समतुल्य उत्सर्जन होता है, तो उसे “ग्रीन” माना जाता है।

ग्रीन हाइड्रोजन को बायोमास (जैसे कृषि अपशिष्ट) से भी बनाया जा सकता है, बशर्ते उत्सर्जन सीमा के भीतर रहे।

राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (NGHM)

इस मिशन का लक्ष्य 2030 तक भारत को ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन में वैश्विक नेता बनाना है।
इसके तहत —

  • 125 GW नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता ग्रीन हाइड्रोजन के लिए समर्पित होगी,

  • ₹8 लाख करोड़ से अधिक का निवेश आएगा,

  • 6 लाख से अधिक रोजगार सृजित होंगे,

  • 50 MMT ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी होगी,

  • और ₹1 लाख करोड़ से अधिक जीवाश्म ईंधन आयात में कमी होगी।

मिशन के चार प्रमुख स्तंभ

  1. नीति और नियामक ढांचा

  2. मांग सृजन

  3. अनुसंधान, नवाचार और विकास (R&D)

  4. इन्फ्रास्ट्रक्चर और पारिस्थितिकी तंत्र विकास

प्रमुख योजनाएँ

(i) SIGHT योजना (Strategic Interventions for Green Hydrogen Transition)

₹17,490 करोड़ के प्रोत्साहन के साथ इलेक्ट्रोलाइज़र निर्माण और ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन को बढ़ावा।

(ii) ग्रीन हाइड्रोजन हब विकास

तीन प्रमुख बंदरगाह —

  • दीendayal (गुजरात)

  • व.ओ. चिदंबरनार (तमिलनाडु)

  • परेदीप (ओडिशा)
    को ग्रीन हाइड्रोजन हब घोषित किया गया है।

(iii) ग्रीन हाइड्रोजन सर्टिफिकेशन योजना (GHCI)

अप्रैल 2025 में लॉन्च की गई यह योजना सुनिश्चित करती है कि केवल नवीकरणीय ऊर्जा से बने, और निर्धारित उत्सर्जन सीमा के भीतर आने वाले हाइड्रोजन को ही “ग्रीन” कहा जाए।
BEE (ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी) इस योजना का नोडल प्राधिकरण है।

(iv) Strategic Hydrogen Innovation Partnership (SHIP)

सरकार और उद्योग के बीच साझेदारी के माध्यम से अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने की पहल।
₹400 करोड़ की आरएंडडी योजना के तहत 23 अग्रणी परियोजनाएँ पहले से चल रही हैं।

विभिन्न क्षेत्रों में ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग

औद्योगिक क्षेत्र

  • उर्वरक उत्पादन: ₹55.75 प्रति किलोग्राम की दर से 7.24 लाख मीट्रिक टन/वर्ष ग्रीन अमोनिया की आपूर्ति हेतु निविदा जारी।

  • पेट्रोलियम रिफाइनिंग: रिफाइनरियों में जीवाश्म-आधारित हाइड्रोजन के स्थान पर ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग।

  • इस्पात उद्योग: 5 पायलट प्रोजेक्ट शुरू, जिनका उद्देश्य हाइड्रोजन-आधारित इस्पात उत्पादन की तकनीकी और आर्थिक व्यवहार्यता का आकलन है।

परिवहन क्षेत्र

  • सड़क परिवहन: 10 मार्गों पर 37 हाइड्रोजन वाहनों (बस और ट्रक) के साथ पायलट प्रोजेक्ट — ₹208 करोड़ का निवेश।

  • शिपिंग: व.ओ. चिदंबरनार पोर्ट पर भारत का पहला पोर्ट-आधारित ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट (₹25 करोड़)।

  • उच्च ऊँचाई मोबिलिटी: एनटीपीसी द्वारा लेह (3,650 मीटर) में विश्व का सबसे ऊँचा ग्रीन हाइड्रोजन मोबिलिटी प्रोजेक्ट।

कौशल विकास और वैश्विक सहयोग

  • अब तक 5,600 से अधिक प्रशिक्षुओं को हाइड्रोजन क्षेत्र में प्रमाणित किया गया है।

  • EU-India, UK-India और Germany (H2Global) के साथ साझेदारी के तहत तकनीकी सहयोग और निर्यात अवसरों का विस्तार।

  • Singapore के साथ ग्रीन हाइड्रोजन हब के विकास हेतु MoU साइन।

निष्कर्ष: स्वच्छ विकास की दिशा में अग्रसर भारत

  • ग्रीन हाइड्रोजन भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन का केंद्र है।
  • राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन न केवल देश की ऊर्जा स्वतंत्रता को सुदृढ़ करता है, बल्कि वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा नेतृत्व की दिशा में भारत की स्थिति को भी मजबूत करता है।

यह मिशन भारत को एक सतत, सुरक्षित और आत्मनिर्भर भविष्य की ओर ले जा रहा है।


कोल इंडिया और IIT मद्रास मिलकर बनाएंगे “सस्टेनेबल एनर्जी सेंटर”: भारत के स्वच्छ ऊर्जा भविष्य की दिशा में ऐतिहासिक कदम

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कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) ने बुधवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT मद्रास) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत IIT मद्रास में “सस्टेनेबल एनर्जी सेंटर” (Centre for Sustainable Energy) की स्थापना की जाएगी। इस समझौते पर सीआईएल के निदेशक (तकनीकी) अच्युत घाटक और IIT मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर सीआईएल के अध्यक्ष पी. एम. प्रसाद, साथ ही दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

यह केंद्र सतत ऊर्जा प्रौद्योगिकियों (Sustainable Energy Technologies) में अत्याधुनिक अनुसंधान एवं विकास (R&D) और क्षमता निर्माण पहलों का एक प्रमुख केंद्र होगा। CIL द्वारा वित्तपोषित और उसके रणनीतिक विविधीकरण लक्ष्यों के अनुरूप, यह केंद्र कोयला खदानों के पुनःउपयोग, निम्न-कार्बन प्रौद्योगिकियों के विकास, और भारत के स्वच्छ ऊर्जा भविष्य में कोयले को एक मूल्यवान फीडस्टॉक के रूप में पुनर्परिभाषित करने के समाधान विकसित करने पर केंद्रित रहेगा। यह साझेदारी देश की नेट-जीरो (Net-Zero) 2070 की महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए स्वदेशी अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी विकास के माध्यम से भारत की ऊर्जा परिवर्तन यात्रा में नेतृत्व करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

इस अवसर पर बोलते हुए, सीआईएल के अध्यक्ष पी. एम. प्रसाद ने कहा कि कोल इंडिया एक ऊर्जा प्रदाता से भारत की स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण यात्रा का एक प्रमुख सक्षमकर्ता बनने की दिशा में परिवर्तन कर रहा है। उन्होंने कहा, “यह समझौता कोल इंडिया की सतत विकास यात्रा में एक ऐतिहासिक कदम है। IIT मद्रास के साथ इस सहयोग के माध्यम से, कोल इंडिया ऊर्जा सुरक्षा, डीकार्बोनाइजेशन और सामाजिक-आर्थिक प्रगति सुनिश्चित करने के लिए स्वदेशी समाधान विकसित करने का लक्ष्य रखता है।”

IIT मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि ने कहा कि उद्योग–शैक्षणिक सहयोग IIT मद्रास की यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है, जो भारत को निम्न-कार्बन अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर करने में मदद कर रहा है। उन्होंने कहा, “कोल इंडिया के साथ यह साझेदारी हमारे इस मिशन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। हम मिलकर ऐसे स्केलेबल और प्रभावशाली समाधान विकसित करेंगे जो भारत के सतत ऊर्जा भविष्य का समर्थन करें।”

यह केंद्र मानव संसाधन विकास में भी योगदान देगा, जिसमें पीएचडी, पोस्टडॉक्टरल और इंटर्नशिप कार्यक्रम शामिल होंगे, ताकि शोधकर्ताओं और इंजीनियरों की नई पीढ़ी को भारत के हरित ऊर्जा परिवर्तन का नेतृत्व करने के लिए तैयार किया जा सके।

भारत का नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र: गति से परिपक्वता की ओर

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भारत का नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र अब एक नए और परिवर्तनकारी चरण में प्रवेश कर रहा है, जो केवल क्षमता विस्तार की गति से नहीं, बल्कि इसके सिस्टम की मजबूती, स्थिरता और गहराई से परिभाषित होगा। पिछले एक दशक में रिकॉर्ड वृद्धि के बाद, अब ध्यान केवल मेगावाट जोड़ने पर नहीं बल्कि एक मजबूत, भरोसेमंद और लचीले साफ-सुथरे ऊर्जा ढांचे (clean energy architecture) के निर्माण पर केंद्रित है, जो 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता प्राप्त करने के देश के महत्वाकांक्षी लक्ष्य का समर्थन कर सके।

मात्रा से गुणवत्ता की ओर संक्रमण

पिछले दस वर्षों में भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 35 GW (2014 में) से बढ़कर आज 197 GW (बड़े हाइड्रो को छोड़कर) हो गई है। इतनी तेज वृद्धि के बाद अगला कदम सिर्फ क्षमता बढ़ाने से नहीं बल्कि सिस्टम सुधार और गहन समेकन की आवश्यकता को दर्शाता है।

अब ध्यान केवल क्षमता विस्तार से क्षमता अवशोषण (capacity absorption) की ओर बढ़ रहा है। इसमें ग्रिड इंटीग्रेशन, ऊर्जा भंडारण (energy storage), हाइब्रिडाइजेशन और बाज़ार सुधार शामिल हैं — ये 500 GW से अधिक गैर-जीवाश्म ऊर्जा भविष्य की नींव हैं। इस दृष्टिकोण से हालिया क्षमता वृद्धि में थोड़ी मंदी एक संतुलित, भरोसेमंद और लचीली वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।

बहुपथीय विस्तार द्वारा विश्व की सबसे तेज़ RE वृद्धि

अभी 40 GW से अधिक परियोजनाएँ पीपीए (PPA), पीएसए (PSA) या ट्रांसमिशन कनेक्टिविटी के अंतिम चरण में हैं, जो निवेश की मजबूती को दर्शाती हैं। राज्यों और डिस्कॉम द्वारा नवीकरणीय पावर खरीद दायित्व (RPO) का पालन, ट्रांसमिशन लाइन अपग्रेड और ग्रिड इंटीग्रेशन तकनीक का उपयोग, बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा नीलामी से पहले प्राथमिकताएं हैं।

वर्तमान वर्ष में केंद्रीय RE एजेंसियों ने 5.6 GW और राज्य एजेंसियों ने 3.5 GW की नीलामी की है। इसके अलावा, वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ता 2025 में लगभग 6 GW RE क्षमता जोड़ने की योजना बना रहे हैं। इस प्रकार, RE क्षमता वृद्धि कई रास्तों से हो रही है, केवल केंद्रीय एजेंसियों द्वारा नहीं।

नीति में जानबूझकर बदलाव

पिछले दो वर्षों में नीति का ध्यान केवल क्षमता वृद्धि से सिस्टम डिज़ाइन की ओर गया है। ऊर्जा भंडारण या पीक पावर सप्लाई के साथ RE पावर टेंडर अब प्रमुख हैं, जो फर्म और डिस्पैचेबल ग्रीन पावर की ओर इशारा करते हैं। बैटरी ऊर्जा भंडारण सिस्टम (BESS) को ग्रिड और परियोजना स्तर पर एकीकृत किया जा रहा है। PLI योजना, घरेलू सामग्री आवश्यकता (Domestic Content Requirement), आयात शुल्क और ALMM जैसी नीतियां घरेलू उत्पादन बढ़ा रही हैं और आयात निर्भरता कम कर रही हैं।

GST और ALMM के पुनर्संरचनात्मक बदलाव लागत स्थिर करने, मॉड्यूल विश्वसनीयता बढ़ाने और सोलर मैन्युफैक्चरिंग की क्षमता बढ़ाने के लिए रणनीतिक कदम हैं। साथ ही, बैटरी भंडारण की तैनाती Viability Gap Funded परियोजनाओं, संप्रभु टेंडर और नए भंडारण दायित्वों के माध्यम से बढ़ रही है।

ट्रांसमिशन सुधार और 200 GW क्षमता

ट्रांसमिशन अब नया फोकस है। भारत का ग्रिड ₹2.4 लाख करोड़ के ट्रांसमिशन प्लान के माध्यम से पुनः डिजाइन किया जा रहा है, जो नवीकरणीय ऊर्जा संपन्न राज्यों को मांग केंद्रों से जोड़ता है। ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर और राजस्थान, गुजरात, लद्दाख से उच्च क्षमता वाली ट्रांसमिशन लाइनें निवेश प्राथमिकता में हैं।

HVDC कॉरिडोर और इंटर-रीजनल ट्रांसमिशन क्षमता को 120 GW से 143 GW (2027) और 168 GW (2032) तक बढ़ाने की योजना है। CERC General Network Access Regulations 2025 में संशोधन ने ‘solar-hours’ और ‘non-solar-hours’ के माध्यम से डाइनामिक कॉरिडोर शेयरिंग की सुविधा दी है, जो कंजेशन कम करने और stranded RE परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद करेगा।

निवेश आकर्षण

संक्षिप्त विलंब के बावजूद भारत नवीकरणीय ऊर्जा निवेश के लिए आकर्षक बना हुआ है। टैरिफ दुनिया में सबसे कम में से हैं। अंतरराष्ट्रीय निवेशक अब इंटीग्रेटेड और स्टोरेज-बैक्ड पोर्टफोलियो की ओर देख रहे हैं।

विस्तार से समेकन की कहानी

सच्ची RE कहानी विस्तार से समेकन की है। अब मुख्य चुनौतियाँ इंटीग्रेशन, विश्वसनीयता और स्केल एफिशियेंसी हैं। अस्थायी क्षमता वृद्धि में धीमापन परिपक्वता का संकेत है।

वर्चुअल पावर पर्चेज एग्रीमेंट (VPPA) और अन्य मार्केट आधारित साधन RE तैनाती में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे। ये कॉर्पोरेट और संस्थागत खरीदारों को वर्चुअल रूप से RE पावर खरीदने की अनुमति देते हैं, जिससे निवेश और मांग बढ़ती है।

आगे का रास्ता

  • राजस्थान, गुजरात और कर्नाटक में बड़े हाइब्रिड और RTC प्रोजेक्ट्स

  • ऑफशोर विंड और पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज

  • PM Suryaghar और PM KUSUM के तहत ग्रामीण भागीदारी

  • नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत औद्योगिक डिकार्बोनाइजेशन

  • ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज III के माध्यम से RE इंटीग्रेशन

निष्कर्ष

भारत की साफ़ ऊर्जा संक्रमण अब संस्थागत मजबूती और स्थायित्व पर केंद्रित है। एक दशक की तेज़ दौड़ के बाद अब सेक्टर ग्रिड ताकत, स्थानीय उत्पादन और वित्तीय स्थिरता के साथ आगे बढ़ रहा है। भारत की RE यात्रा अब कंसोलिडेशन चरण में है, जो भविष्य की तेजी और सतत वृद्धि सुनिश्चित करेगी।

भारत की नवीकरणीय ऊर्जा कहानी अब गति खोने की नहीं, बल्कि परिपक्वता और मजबूती हासिल करने की कहानी है।

IREDA ने Q2 FY26 में मजबूत वित्तीय वृद्धि दर्ज की, भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा को और गति प्रदान

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केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री,प्रताप जोशी ने कहा कि भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा लगातार मजबूती से आगे बढ़ रही है, जिसका प्रेरक उदाहरण भारतीय नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी (IREDA) का Q2 FY26 प्रदर्शन है। उन्होंने उल्लेख किया कि IREDA नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में सतत विकास और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दे रही है, भारत के भविष्य को रोशन कर रही है और सभी को एक हरित एवं उज्जवल कल के लिए सामूहिक प्रयासों के लिए प्रेरित कर रही है।


भारतीय नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी लिमिटेड (IREDA) ने 30 सितंबर 2025 को समाप्त तिमाही और अर्धवार्षिक के लिए अपने ऑडिटेड वित्तीय परिणाम की घोषणा की, जिसमें इसके मजबूत विकास और संचालन उत्कृष्टता की निरंतर प्रवृत्ति दिखाई दी।

आज आयोजित बोर्ड की बैठक में ऑडिटेड वित्तीय परिणामों को मंजूरी दी गई। IREDA ने प्रमुख वित्तीय संकेतकों में वर्ष-दर-वर्ष महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज की। कंपनी की बढ़ती लोन बुक, बढ़ती नेट वर्थ और निरंतर लाभप्रदता इसके रणनीतिक फोकस और भारत की नवीकरणीय ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं का समर्थन करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

मुख्य वित्तीय हाइलाइट्स – Q2 FY 2025-26 बनाम Q2 FY 2024-25 (स्टैंडअलोन):

  • लोन स्वीकृतियाँ: ₹21,408 करोड़ बनाम ₹8,724 करोड़ (↑145%)

  • लोन वितरण: ₹8,062 करोड़ बनाम ₹4,462 करोड़ (↑81%)

  • लोन बुक: ₹84,477 करोड़ बनाम ₹64,564 करोड़ (↑31%)

  • नेट वर्थ: ₹12,920 करोड़ बनाम ₹9,336 करोड़ (↑38%)

  • कर पश्चात लाभ: ₹549 करोड़ बनाम ₹388 करोड़ (↑41%)

  • ऑपरेशन से राजस्व: ₹2,057 करोड़ बनाम ₹1,630 करोड़ (↑26%)

Q2 प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए, प्रदीप कुमार दास, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, IREDA ने कहा,

“IREDA की लगातार वृद्धि हमारे रणनीतिक फोकस और निष्पादन उत्कृष्टता को दर्शाती है। हमारी बढ़ती लोन बुक और मजबूत वित्तीय स्थिति हमारे हितधारकों द्वारा प्रदत्त विश्वास का प्रमाण है और भारत के स्वच्छ ऊर्जा इकोसिस्टम में हमारे प्रमुख योगदान को उजागर करती है।”

प्रदीप कुमारदास ने टीम IREDA के प्रयासों की सराहना की और केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री, राज्य मंत्री, MNRE सचिव, वरिष्ठ मंत्रालयिक अधिकारी और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स का उनके निरंतर समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया।

केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) का 52वां स्थापना दिवस समारोह

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केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA), जो विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत शीर्ष तकनीकी संगठन है, ने अपना 52वां स्थापना दिवस 11 अक्टूबर 2025 को केंद्रीय जल आयोग (CWC), सेक्टर-1, आर.के. पुरम, नई दिल्ली स्थित ऑडिटोरियम, लाइब्रेरी भवन में आयोजित किया। इस समारोह का मुख्य उद्देश्य देश में वर्ष 2047 तक 100 गीगावॉट (GW) परमाणु क्षमता के विकास के रोडमैप पर विचार-विमर्श करना था, जो भारत के दीर्घकालिक ऊर्जा और जलवायु लक्ष्यों के अनुरूप है।

देश के सभी उपभोक्ताओं को 24×7 गुणवत्तापूर्ण और विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के विजन की दिशा में कार्य करते हुए, CEA भारत के विद्युत क्षेत्र के विकास में अग्रणी भूमिका निभाता रहा है। अपनी स्थापना से लेकर पिछले पाँच दशकों में प्राधिकरण ने देश को विश्वसनीय और सतत विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में पंकज अग्रवाल, सचिव, विद्युत मंत्रालय, उपस्थित रहे। इस समारोह में विद्युत मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के प्रतिनिधि, राज्य विद्युत उपयोगिताएँ, उद्योग संघों के सदस्य, तथा CEA के अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए।

अपने संबोधन में पंकज अग्रवाल ने भारतीय विद्युत क्षेत्र के समन्वित विकास में CEA के उत्कृष्ट योगदान की सराहना की। उन्होंने नीतिगत निर्माण, विद्युत प्रणाली नियोजन, और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने में CEA की भूमिका को रेखांकित किया, जिससे देश में विश्वसनीय, किफायती और सतत विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित हुई है। उन्होंने कहा कि भारत के “नेट-ज़ीरो उत्सर्जन लक्ष्य – 2070” की दिशा में अग्रसर होने के साथ, CEA की भूमिका नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण, परमाणु क्षमता विस्तार, और ग्रिड सुरक्षा एवं लचीलापन बढ़ाने में अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।

अपने स्वागत भाषण में घनश्याम प्रसाद, अध्यक्ष, CEA, ने वर्ष 1973 में स्थापना के बाद से प्राधिकरण की यात्रा का उल्लेख किया। उन्होंने उत्पादन और प्रसारण योजना, तकनीकी मानकों के निर्माण, तथा विद्युत ग्रिड के आधुनिकीकरण में प्राधिकरण की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने डेटा-आधारित निर्णय-निर्माण, डिजिटलीकरण और नवाचार के बढ़ते महत्व पर बल दिया, जिससे भारत के विद्युत क्षेत्र को अधिक सतत और दक्ष बनाया जा सके।

स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर मुख्य अतिथि एवं अध्यक्ष, CEA, द्वारा कई महत्वपूर्ण प्रकाशन और पहलें जारी की गईं —

  1. ‘विद्युत वाहिनी’ (Vidyut Vahini) — हिंदी त्रैमासिक पत्रिका (विशेषांक) का विमोचन, जिसका विषय था “विद्युत क्षेत्र में परमाणु ऊर्जा का योगदान”, जिसे CEA द्वारा प्रकाशित किया गया।

  2. “Road Map for Achieving the Goal of 100 GW of Nuclear Capacity by 2047” का विमोचन — यह दस्तावेज़ भारत की परमाणु उत्पादन क्षमता को 2047 तक 100 गीगावॉट तक बढ़ाने के लिए रणनीतिक मार्गदर्शिका प्रस्तुत करता है।

  3. “Master Plan for Evacuation of Power from Hydroelectric Plants in the Brahmaputra Basin” का विमोचन — यह रिपोर्ट लगभग 65 गीगावॉट जलविद्युत क्षमता के निर्गमन हेतु आवश्यक चरणबद्ध प्रसारण अवसंरचना का विवरण देती है और जलविद्युत परियोजनाओं के नियोजन में मार्गदर्शन करेगी।

  4. “Electrical Accident Data Monitoring System (EADMS)” पोर्टल का शुभारंभ — CEA की यह डिजिटल पहल देशभर में विद्युत दुर्घटनाओं की रिपोर्टिंग, विश्लेषण और कमी के लिए एक केंद्रीकृत मंच प्रदान करेगी, जिससे सुरक्षा निगरानी और नीति हस्तक्षेप को सुदृढ़ किया जा सकेगा।

इस अवसर पर पंकज अग्रवाल द्वारा विद्युत क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले CEA के अधिकारियों को पुरस्कार भी प्रदान किए गए। कार्यक्रम के अंतर्गत “नेट ज़ीरो हेतु परमाणु ऊर्जा: अवसर, चुनौतियाँ और मार्ग” विषय पर एक विशेष तकनीकी सत्र भी आयोजित किया गया। इस सत्र में प्रतिष्ठित वक्ताओं और क्षेत्र विशेषज्ञों ने अपने विचार प्रस्तुत किए।

डॉ. आर. बी. ग्रोवर, सदस्य, परमाणु ऊर्जा आयोग एवं एमेरिटस प्रोफेसर, होमी भाभा राष्ट्रीय संस्थान, ने “न्यूक्लियर, नवीकरणीय और अन्य स्रोतों के साथ एकीकृत ऊर्जा प्रणाली” पर व्याख्यान दिया, जिसमें परमाणु ऊर्जा की भूमिका को गहराई से कार्बन उत्सर्जन कम करने में सहायक बताया गया।

एस. ए. भारद्वाज, पूर्व अध्यक्ष, परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB), ने “परमाणु ईंधन चक्र और उन्नत रिएक्टर प्रौद्योगिकी की संभावनाएँ” विषय पर प्रस्तुति दी, जिसमें तकनीकी नवाचारों और सुरक्षा उपायों पर प्रकाश डाला गया।

सत्र में NTPC लिमिटेड, टाटा पावर, अदाणी पावर, एल एंड टी, तथा EDF के प्रतिनिधियों ने भी उद्योग सहयोग, तकनीकी अपनाने, और परमाणु क्षेत्र में भविष्य की संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए। चर्चा का समापन विशेषज्ञों की समापन टिप्पणियों और प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ।

स्थापना दिवस समारोह ने यह पुनः पुष्टि की कि CEA नवाचार, स्थिरता, और लचीलापन के माध्यम से भारत के विद्युत क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। यह आयोजन भारत के ऊर्जा परिवर्तन में CEA की तकनीकी, सहयोगात्मक और रणनीतिक भूमिका का प्रमाण प्रस्तुत करता है।


केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल जी20 ऊर्जा संक्रमण मंत्रिस्तरीय बैठक में होंगे शामिल

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नई दिल्ली- केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल 7 से 10 अक्टूबर 2025 तक क्वाज़ुलु नटाल प्रांत, दक्षिण अफ्रीका में आयोजित होने वाली जी20 ऊर्जा संक्रमण मंत्रिस्तरीय बैठक (Energy Transitions Ministerial Meeting - ETMM) में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह बैठक दक्षिण अफ्रीका की जी20 अध्यक्षता के तहत आयोजित की जा रही है। इसमें विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े नेता भाग लेंगे और वैश्विक ऊर्जा भविष्य से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

बैठक के दौरान,मनोहर लाल “ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ खाना पकाना, सस्ती और विश्वसनीय ऊर्जा पहुंच” तथा “सतत औद्योगिक विकास” विषयों पर आयोजित सत्रों में भाग लेंगे। इन चर्चाओं का उद्देश्य सभी के लिए सस्ती, विश्वसनीय और सतत ऊर्जा की सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ करना है, जो आर्थिक विकास और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति के लिए अत्यंत आवश्यक है।

मनोहर लाल बैठक में भारत की उल्लेखनीय उपलब्धियों पर भी प्रकाश डालेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ी प्रगति की है। हाल ही में भारत ने अपनी कुल विद्युत उत्पादन क्षमता का 50 प्रतिशत नवीकरणीय स्रोतों से प्राप्त करने का लक्ष्य हासिल कर लिया है, जो वैश्विक अपेक्षाओं से काफी आगे है। यह भारत की स्वच्छ, हरित और लचीले ऊर्जा भविष्य के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

मंत्री भारत के ऊर्जा क्षेत्र में अपनाए गए सफल अनुभवों और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करेंगे, विशेष रूप से ग्रामीण और विकासशील क्षेत्रों में ऊर्जा पहुंच, वहनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयासों के बारे में। वे इस बात पर भी बल देंगे कि ऊर्जा संक्रमण और जलवायु परिवर्तन विश्व की सबसे बड़ी चुनौतियों में से हैं, जिनका सबसे अधिक असर विकासशील देशों पर पड़ता है।

मनोहर लाल यह भी दोहराएंगे कि भारत एक न्यायसंगत, सस्ती और समावेशी ऊर्जा संक्रमण के लिए वैश्विक सहयोग का समर्थन करता है, जो “एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य (One Earth, One Family, One Future)” की भावना के अनुरूप है।

ऊर्जा संक्रमण कार्य समूह (ETWG) और ऊर्जा संक्रमण मंत्रिस्तरीय बैठक (ETMM) का आयोजन द कैपिटल होटल, ज़िम्बाली, डरबन में भौतिक रूप से किया जाएगा। यह बैठक स्वच्छ, सुरक्षित और न्यायसंगत ऊर्जा प्रणालियों पर जी20 एजेंडा को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण मंच होगी।


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