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प्रधानमंत्री मोदी ने ‘मन की बात’ में साझा की देश के युवाओं, खेलों और जल-संरक्षण की प्रेरक कहानियाँ

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मार्च माह के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में देशवासियों को संबोधित करते हुए विश्व की चुनौतियों, युवाओं की सहभागिता, खेलों में उपलब्धियों, जल-संरक्षण और सौर ऊर्जा क्रांति से जुड़ी प्रेरक कहानियों पर प्रकाश डाला।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान विश्व परिस्थितियाँ कोरोना संकट के बाद भी शांति और स्थिरता के लिए चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं। पड़ोसी देशों में युद्ध और संघर्ष से पेट्रोल और डीज़ल जैसी आवश्यकताओं पर असर पड़ रहा है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे अफवाहों से बचें और केवल सरकारी सूचना पर भरोसा करें।

युवाओं की सक्रिय भागीदारी और शिक्षा में नवाचार

प्रधानमंत्री ने ज्ञान भारतम सर्वे का जिक्र करते हुए कहा कि देश भर के नागरिक प्राचीन पांडुलिपियों की जानकारी साझा कर रहे हैं। इस पहल में अरुणाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्थान और लद्दाख से हजारों पांडुलिपियाँ ऐप के माध्यम से साझा की गई हैं।

युवा संगठन MY Bharat के माध्यम से देश के युवाओं को नीति निर्माण और बजट प्रक्रिया में जोड़ने का प्रयास हो रहा है। लगभग 12 लाख युवाओं ने इस बजट क्विज़ में भाग लिया। प्रधानमंत्री ने युवाओं के विचारों की सराहना की, जो किसान कल्याण, महिला नेतृत्व, हरित भारत, खेल प्रतिभा और कौशल विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में योगदान दे रहे हैं।

खेलों में उपलब्धियाँ और नई प्रेरणाएँ

प्रधानमंत्री ने जम्मू-कश्मीर की क्रिकेट टीम की रणजी ट्रॉफी जीत और अन्य खेल उपलब्धियों की भी सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से गोलवीर सिंह (उत्तर प्रदेश) और अनाहत सिंह (स्क्वैश) की अंतरराष्ट्रीय सफलताओं का उल्लेख किया। उन्होंने योग और फिटनेस पर भी ध्यान देने का आग्रह किया।

जल-संरक्षण और पर्यावरणीय प्रयास

प्रधानमंत्री ने ‘जल संचय अभियान’ और ‘अमृत सरोवर अभियान’ के तहत देश भर में किए गए जल संरक्षण प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने त्रिपुरा के वांगमुन गाँव, छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले, और तेलंगाना के मुढ़िगुंटा गाँव के उदाहरण साझा किए, जहाँ समुदाय ने मिलकर जल संकट कम किया।

मछली पालन और महिला उद्यमिता में सफलता

प्रधानमंत्री ने ओडिशा की सुझाता भुयान, लक्षद्वीप की हव्वा गुलजार, कर्नाटक के शिवलिंग सतप्पा जैसे उद्यमियों के उदाहरण प्रस्तुत किए, जिन्होंने मछली पालन और सौर ऊर्जा में नवाचार करके परिवार और समाज की सेवा की।

सौर ऊर्जा क्रांति और स्वावलंबन

प्रधानमंत्री ने ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ के तहत देशभर में सौर ऊर्जा के बढ़ते उपयोग और इससे लोगों के जीवन में आए सकारात्मक बदलावों का जिक्र किया। उन्होंने गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पूर्वोत्तर के उदाहरण साझा किए, जहाँ लोगों ने सौर पंप और सोलर पैनल अपनाकर अपने जीवन और व्यवसाय को बेहतर बनाया।

प्रधानमंत्री मोदी ने अंत में कहा कि ‘मन की बात’ अब केवल कार्यक्रम नहीं, बल्कि देशवासियों के बीच साझा संवाद बन गया है। उन्होंने सभी से प्रेरक कहानियाँ साझा करने का आग्रह किया और देशवासियों को स्वस्थ, खुशहाल और सतर्क रहने की शुभकामनाएँ दीं।


शहरी क्षेत्रों में PNG विस्तार को मिलेगा गति, 50 लाख नए कनेक्शन देने का लक्ष्य

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नई दिल्ली- विज्ञान भवन में आज शहरी क्षेत्रों में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) सेवाओं के विस्तार और आवश्यक सेवाओं की निरंतर आपूर्ति पर एक उच्चस्तरीय राउंडटेबल समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में केंद्र और राज्यों के कई वरिष्ठ मंत्री, अधिकारी, नगर निकायों के प्रतिनिधि तथा गैस कंपनियों के प्रमुख शामिल हुए।

बैठक में आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और उपभोक्ता मामले मंत्रालय के केंद्रीय मंत्रियों ने भाग लिया। इसके अलावा विभिन्न राज्यों के मंत्री और अधिकारी भी उपस्थित रहे, जबकि कुछ राज्यों ने वर्चुअली हिस्सा लिया।

बैठक में बताया गया कि शहरी क्षेत्रों में ऊर्जा की बढ़ती मांग को देखते हुए PNG नेटवर्क का विस्तार जरूरी है। पेट्रोलियम मंत्रालय की प्रस्तुति में PNG को LPG के मुकाबले अधिक सुरक्षित, सस्ता और पर्यावरण अनुकूल बताया गया। हालांकि, राइट ऑफ वे (RoW) मंजूरी, नगर निगम की अनुमति और ऊंचे शुल्क जैसी समस्याएं इसके विस्तार में बाधा बन रही हैं।

केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने शहरों को आर्थिक विकास का इंजन बताते हुए PNG विस्तार को मिशन मोड में लागू करने पर जोर दिया। उन्होंने सिंगल विंडो क्लीयरेंस, बेहतर शहरी योजना और अंतिम छोर (last-mile) तक कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई। साथ ही 50 लाख नए PNG कनेक्शन देने का लक्ष्य भी रखा गया।

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य का जिक्र करते हुए PNG इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर जोर दिया, जबकि उपभोक्ता मंत्री प्रह्लाद जोशी ने आवश्यक सेवाओं की निर्बाध आपूर्ति, अफवाहों पर रोक और ईंधन की कालाबाजारी रोकने की आवश्यकता बताई।

बैठक में राज्यों ने सुझाव दिया कि RoW शुल्क को कम या अस्थायी रूप से माफ किया जाए और मंजूरी प्रक्रिया को सरल व समयबद्ध बनाया जाए। साथ ही LPG से PNG में चरणबद्ध बदलाव के लिए जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

बैठक के अंत में यह सहमति बनी कि PNG नेटवर्क विस्तार को तेज करने के लिए ठोस कार्ययोजना, बेहतर समन्वय और नियमित निगरानी व्यवस्था लागू की जाएगी, जिससे शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।



भारत में भूजल प्रबंधन में नई क्रांति: सतत जल सुरक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण पहलें तेज़ी से आगे बढ़ीं

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भारत में भूजल (Groundwater) प्रबंधन के क्षेत्र में कई प्रमुख पहलों ने महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की है। देश में भूजल की सतत उपलब्धता और जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा कई वैज्ञानिक, नीतिगत और समुदाय-आधारित कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।

भूजल भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह देश की कृषि, पीने के पानी और उद्योगों की मुख्य आधारशिला है। भारत में लगभग 62% सिंचाई, 85% ग्रामीण जल और 50% शहरी जल की मांग भूजल से पूरी होती है। बढ़ती जनसंख्या, कृषि विस्तार, औद्योगिक विकास और शहरीकरण के कारण भूजल पर दबाव बढ़ा है। अतः भूजल के संरक्षण और संतुलित उपयोग के लिए वैज्ञानिक और प्रभावी प्रबंधन अनिवार्य हो गया है।

मुख्य तथ्य (Key Takeaways):

  • भारत में 43,228 भूजल स्तर निगरानी स्टेशन, 712 जल शक्ति केंद्र, और 53,264 जल गुणवत्ता निगरानी स्टेशन कार्यरत हैं।

  • जल शक्ति अभियान: कैच द रेन (JSA: CTR), जल संचय जन भागीदारी (JSJB), अटल भूजल योजना, और मिशन अमृत सरोवर जैसी योजनाओं ने भूजल प्रबंधन में महत्वपूर्ण प्रगति दिखाई है।

  • भूजल प्रबंधन सतत विकास लक्ष्यों (SDG 6, SDG 11, SDG 12) की दिशा में अहम भूमिका निभाता है।

सरकारी पहलें और उनकी प्रगति:

1. मॉडल ग्राउंडवाटर बिल (Model Groundwater Bill):

केंद्र सरकार ने भूजल संरक्षण, नियंत्रण और प्रबंधन हेतु मॉडल बिल तैयार किया है, जिसे 21 राज्य/संघ शासित प्रदेशों ने अपनाया है। इस बिल के माध्यम से राज्य स्तर पर भूजल की अंधाधुंध निकासी पर नियंत्रण और संतुलित उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।

2. जल शक्ति अभियान: कैच द रेन (JSA: CTR):

यह अभियान 22 मार्च 2021 को World Water Day के अवसर पर शुरू किया गया। इसका उद्देश्य पानी संरक्षण, वर्षा जल संचयन, जल निकायों की पहचान एवं जीओ-टैगिंग, और जागरूकता बढ़ाना है।

3. जल संचय जन भागीदारी (JSJB):

यह पहल 6 सितंबर 2024 को शुरू हुई और भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देती है।
22 जनवरी 2026 तक कुल 39,60,333 कृत्रिम भूजल पुनर्भरण और जल संचयन कार्य पूरे किए जा चुके हैं।

4. राष्ट्रीय एक्विफर मैपिंग और प्रबंधन कार्यक्रम (NAQUIM 2.0):

यह कार्यक्रम उच्च-स्तरीय डेटा और वैज्ञानिक inputs प्रदान करता है। इसका लक्ष्य पंचायत स्तर तक जल-स्तर और गुणवत्ता की जानकारी पहुंचाना है, ताकि स्थानीय स्तर पर प्रभावी निर्णय लिए जा सकें।

5. अटल भूजल योजना (Atal Jal):

7 राज्यों में सामुदायिक नेतृत्व वाली भूजल प्रबंधन पहल के तहत जल उपयोग में दक्षता और डिजिटल निगरानी जैसे उपाय किए जा रहे हैं।
20 जनवरी 2026 तक 6,68,683 हेक्टेयर क्षेत्र में जल उपयोग दक्षता बढ़ी है और 6,271 डिजिटल वॉटर लेवल रिकॉर्डर स्थापित किए गए हैं।

6. मिशन अमृत सरोवर:

24 अप्रैल 2022 को शुरू इस मिशन के तहत प्रत्येक जिले में कम से कम 1 एकड़ के अमृत सरोवर बनाए जा रहे हैं। यह न केवल जल संरक्षण बढ़ाता है बल्कि भूजल स्तर में सुधार भी करता है।

निष्कर्ष:

भूजल भारत की जल सुरक्षा का मुख्य आधार है, लेकिन इसकी स्थिति में लगातार गिरावट और गुणवत्ता में गिरावट चिंता का विषय है। इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने वैज्ञानिक, नीतिगत और सामुदायिक भागीदारी पर आधारित एक समग्र रणनीति अपनाई है।
मॉडल बिल, JSA: CTR, JSJB, NAQUIM 2.0, अटल भूजल योजना और मिशन अमृत सरोवर जैसी पहलें भूजल संरक्षण, पुनर्भरण, निगरानी और समुचित उपयोग को बढ़ावा दे रही हैं।
इन प्रयासों से भारत जल-संरक्षण, जल-प्रबंधन और सतत विकास की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है।


भारत में हरित हाइड्रोजन मिशन: उत्पादन बढ़ाने और लागत घटाने के लिए महत्वपूर्ण कदम

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नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (NGHM) को लागू कर रहा है, जिसका उद्देश्य भारत को हरित हाइड्रोजन और इसके व्युत्पन्न उत्पादों के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है।

भारत की हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता 2030 तक प्रति वर्ष 5 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुँचने की संभावना है।

हरित हाइड्रोजन की लागत को कम करने के लिए NGHM के तहत महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं, जिनका विवरण इस प्रकार है:

i. इलेक्ट्रोलाइज़र निर्माण के लिए प्रोत्साहन योजना के तहत, 15 कंपनियों को कुल 3,000 मेगावाट प्रति वर्ष की उत्पादन क्षमता के लिए पुरस्कृत किया गया है। कुल प्रोत्साहन राशि ₹4440 करोड़ है।

ii. हरित हाइड्रोजन उत्पादन के लिए प्रोत्साहन योजना के तहत, 18 कंपनियों को कुल 8,62,000 टन प्रति वर्ष की उत्पादन क्षमता के लिए पुरस्कृत किया गया है।

iii. रिफाइनरी के लिए हरित हाइड्रोजन की खरीद के लिए प्रोत्साहन योजना के तहत, 2 कंपनियों को कुल 20,000 टन प्रति वर्ष की क्षमता के लिए पुरस्कृत किया गया है।

हरित हाइड्रोजन की लागत को कम करने हेतु उठाए गए अन्य कदम निम्नलिखित हैं:

i. जो हरित हाइड्रोजन/हरित अमोनिया संयंत्र 31.12.2030 तक चालू किए जाते हैं और जो हरित हाइड्रोजन या हरित अमोनिया के उत्पादन के लिए नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग करते हैं, उन्हें परियोजना के कमीशनिंग की तारीख से 25 वर्षों की अवधि के लिए अंतर-राज्यीय संचरण प्रणाली (ISTS) शुल्क से छूट दी गई है।

ii. SEZ अधिनियम, 2005 की धारा 26 के तहत ड्यूटी लाभ उन इकाइयों को दिए गए हैं जो नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणों की स्थापना और संचालन एवं रखरखाव (O&M) के लिए केवल इकाई की स्व-उपभोग हेतु इसका उपयोग करती हैं।

MNRE एक अनुसंधान और विकास परियोजना ‘पेरोव्स्काइट टैंडम सोलर सेल का पैमाना बढ़ाना (Phase-I)’ का समर्थन कर रहा है, जिसका कुल परियोजना खर्च ₹83.19 करोड़ है, ताकि पेरोव्स्काइट टैंडम सोलर सेल तकनीक का पैमाना बढ़ाया जा सके और देश में इसका विकास किया जा सके।

यह जानकारी केंद्रीय राज्य मंत्री, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा, श्रीपाद यसो नाइक ने आज राज्यसभा में लिखित उत्तर में प्रस्तुत की।

ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की यात्रा: पिछले 11 वर्षों में ऐतिहासिक परिवर्तन – पीयूष गोयल

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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आज नई दिल्ली में एक ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के ऊर्जा क्षेत्र की पिछले 11 वर्षों की यात्रा इस बात का प्रमाण है कि सशक्त दृष्टि, ईमानदार मंशा और निरंतर क्रियान्वयन किसी राष्ट्र की दिशा और दशा बदल सकते हैं।

सरदार वल्लभभाई पटेल की पुण्यतिथि के अवसर पर गोयल ने कहा कि देश केवल लौह पुरुष को ही नहीं, बल्कि ऐसे दूरदर्शी नेता को भी स्मरण करता है, जो भारत को राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक रूप से आत्मनिर्भर देखना चाहते थे।

मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वही आत्मनिर्भरता की भावना भारत के ऊर्जा क्षेत्र में साकार हुई है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2024–25 में भारत ने अब तक का सर्वाधिक 1,048 मिलियन टन कोयला उत्पादन दर्ज किया, जबकि कोयला आयात में लगभग 8 प्रतिशत की कमी आई है।
उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में भारत की सौर ऊर्जा क्षमता 46 गुना बढ़ी है, जिससे भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा सौर ऊर्जा उत्पादक देश बन गया है। वहीं, पवन ऊर्जा क्षमता 2014 में 21 गीगावॉट से बढ़कर 2025 में 53 गीगावॉट हो गई है।

गोयल ने बताया कि भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनिंग हब बन चुका है और रिफाइनिंग क्षमता को 20 प्रतिशत तक बढ़ाने पर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि 34,238 किलोमीटर प्राकृतिक गैस पाइपलाइन को स्वीकृति दी गई है, जिनमें से 25,923 किलोमीटर परिचालन में हैं।
उन्होंने शांति (SHANTI) विधेयक का भी उल्लेख किया, जिसके तहत परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी का मार्ग प्रशस्त किया जा रहा है।

मंत्री ने कहा कि भारत अब अतिरिक्त बिजली उत्पादन, ग्रिड एकीकरण और नवीकरणीय ऊर्जा में वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ चुका है। यह परिवर्तन आकस्मिक नहीं, बल्कि स्पष्ट दृष्टि और सतत प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि भारत बिजली की कमी से निकलकर बिजली सुरक्षा और अब बिजली स्थिरता की ओर अग्रसर हुआ है।

गोयल ने कहा कि यह परिवर्तन पाँच प्रमुख स्तंभों पर आधारित है—

पहला स्तंभ: सार्वभौमिक पहुंच

उन्होंने कहा कि सौभाग्य योजना के तहत हर घर तक बिजली पहुँचाई गई है। उजाला योजना के अंतर्गत 47.4 करोड़ एलईडी बल्ब वितरित किए गए, जिससे बिजली बिल में बचत और कार्बन उत्सर्जन में कमी आई।
उन्होंने कहा कि अब बच्चे सूर्यास्त के बाद भी पढ़ाई कर पा रहे हैं—यह केवल घरों में नहीं, बल्कि आशाओं में भी रोशनी ला रहा है।
उन्होंने बताया कि 10 करोड़ परिवारों को स्वच्छ रसोई गैस कनेक्शन मिलने से महिलाएँ स्वस्थ जीवन जी रही हैं और पीएम-कुसुम योजना के तहत किसान ऊर्जा प्रदाता बन रहे हैं।

दूसरा स्तंभ: वहनीयता

मंत्री ने कहा कि सौर, पवन और अन्य स्वच्छ ऊर्जा उपकरणों पर जीएसटी 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किया गया है।
उन्होंने बताया कि 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण लक्ष्य, जिसे 2030 तक हासिल करना था, वह समय से पहले पूरा कर लिया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि सौर और पवन ऊर्जा की बिक्री के लिए अंतर-राज्यीय ट्रांसमिशन शुल्क माफ किया गया है।

तीसरा स्तंभ: उपलब्धता

गोयल ने कहा कि बिजली की कमी 2013 में 4.2 प्रतिशत से घटकर 2025 में 0.1 प्रतिशत रह गई है।
उन्होंने बताया कि एकीकृत राष्ट्रीय ग्रिड के माध्यम से भारत ने 250 गीगावॉट की रिकॉर्ड पीक पावर डिमांड को पूरा किया है।

चौथा स्तंभ: वित्तीय व्यवहार्यता

उन्होंने कहा कि पीएम-उदय योजना के तहत सुधारों से बिजली वितरण क्षेत्र सशक्त हुआ है।
डिस्कॉम बकाया 2022 में ₹1.4 लाख करोड़ से घटकर 2025 में ₹6,500 करोड़ रह गया है।

पाँचवां स्तंभ: स्थिरता और वैश्विक जिम्मेदारी

गोयल ने कहा कि भारत पेरिस समझौते के लक्ष्यों को प्राप्त करने वाला पहला G20 देश बन गया है।
उन्होंने बताया कि देश की 50 प्रतिशत स्थापित विद्युत क्षमता अब गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से प्राप्त हो रही है।

मंत्री ने कहा कि 2047 में स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने की ओर बढ़ते हुए, भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए रणनीति को पुनः निर्धारित किया जा रहा है।
उन्होंने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का उल्लेख किया, जिसका लक्ष्य 2030 तक 5 मिलियन मीट्रिक टन उत्पादन और ₹1 लाख करोड़ से अधिक की जीवाश्म ईंधन आयात बचत है।
उन्होंने पीएम सूर्य घर योजना का भी जिक्र किया, जिसके तहत लगभग 20 लाख घरों में रूफटॉप सोलर स्थापित किए जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री के कथन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के ऊर्जा क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए सरकार जनता को सशक्त कर रही है।
उन्होंने बताया कि कोयला क्षेत्र पर गठित उच्चस्तरीय समिति की कई सिफारिशों पर विचार किया जा रहा है, जिनमें कोयला अन्वेषण और खनन को तेज करना तथा कोयला गैसीकरण को बढ़ावा देना शामिल है।
 गोयल ने विश्वास व्यक्त किया कि विकसित भारत 2047 की ओर बढ़ते हुए, भारत का ऊर्जा क्षेत्र पैमाने, गति और स्थिरता को एक साथ साधने का वैश्विक उदाहरण बनेगा।

राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस 2025: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार और चित्रकला प्रतियोगिता विजेताओं को किया सम्मानित

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आज विज्ञान भवन, नई दिल्ली में राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस 2025 का आयोजन किया गया, जहाँ भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार (NECA) 2025 और राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण चित्रकला प्रतियोगिता 2025 के विजेताओं को सम्मानित किया।

यह कार्यक्रम भारत की ऊर्जा दक्षता, सतत विकास और सभी आर्थिक क्षेत्रों में जिम्मेदार ऊर्जा उपयोग को बढ़ावा देने के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह कार्यक्रम ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE), पावर मंत्रालय के तहत आयोजित किया गया।

राष्ट्रपति ने कहा कि ऊर्जा संरक्षण सबसे विश्वसनीय और पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा स्रोत है। ऊर्जा बचाना ऊर्जा उत्पादन के समान है, और यह प्राकृतिक संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव डाले बिना किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक के रूप में, भारत की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को—जिसमें बिजली पहुंच, शहरीकरण, औद्योगिक विकास और जीवन स्तर में सुधार शामिल है—सतत और जिम्मेदार तरीके से पूरा करना अनिवार्य है।

पावर और आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि भारत ने वैश्विक ऊर्जा संक्रमण में अग्रणी भूमिका निभाई है और अपने प्रयासों को पेरिस समझौते के तहत निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप रखा है। उन्होंने बीईई की पहल जैसे PAT योजना, ADEETIE, स्टैंडर्ड्स और लेबलिंग सहित अन्य कार्यक्रमों के महत्व को रेखांकित किया, जो पूरे देश में ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा दे रहे हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने अपने गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोतों से स्थापित क्षमता का 50% हिस्सा हासिल कर लिया है, जो पेरिस समझौते के लक्ष्य की तुलना में पांच साल पहले है।

राज्य मंत्री, पावर, श्रिपाद यसो नाइक ने कहा कि राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार ऊर्जा संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रयासों को पहचानने की एक मजबूत परंपरा स्थापित कर चुके हैं। उन्होंने यह भी बताया कि ऊर्जा संरक्षण केवल तकनीकी मामला नहीं है, बल्कि यह व्यवहार में बदलाव से भी जुड़ा है। छोटे-छोटे प्रयास जैसे बिजली बंद करना, ऊर्जा-कुशल उपकरणों का चयन और सतत क्रियाएं भी बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।

पावर मंत्रालय के सचिव पंकज अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व ने ऊर्जा दक्षता और ऊर्जा संरक्षण को भारत के विकास मॉडल के केंद्र में रखा है।

BEE के महानिदेशक धीरज कुमार श्रीवास्तव ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से ऊर्जा संरक्षण के प्रति जनता की जागरूकता बढ़ाने में योगदान के लिए सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स के लिए नए पुरस्कार श्रेणी की शुरुआत का उल्लेख किया।

राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार 2025

BEE उद्योग, संस्थान और अन्य प्रतिष्ठानों के ऊर्जा उपयोग को कम करने के प्रयासों को पहचानता और प्रोत्साहित करता है। इस वर्ष कुल 558 आवेदन प्राप्त हुए, जिसमें उद्योग, भवन, परिवहन, संस्थान, उपकरण, नवाचार और पेशेवर श्रेणियां शामिल हैं। पुरस्कारों में 25 प्रथम पुरस्कार, 5 द्वितीय पुरस्कार, 26 मेरिट प्रमाण पत्र और 3 नवाचार सम्मान शामिल हैं।

राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण चित्रकला प्रतियोगिता 2025

इस प्रतियोगिता का उद्देश्य युवाओं के माध्यम से समाज में जागरूकता और परिवर्तन लाना है। इसमें कक्षा 5 से 10 के छात्र भाग लेते हैं, जिन्हें दो समूहों में विभाजित किया गया है:

  • समूह A: कक्षा 5, 6, 7

  • समूह B: कक्षा 8, 9, 10

इस साल स्कूल, राज्य/केंद्रशासित प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिता में 80 लाख से अधिक छात्रों ने भाग लिया। विजेताओं को पुरस्कार राशि के साथ लैपटॉप/टैबलेट और भारत के विभिन्न हिस्सों में अध्ययन भ्रमण का अवसर भी प्रदान किया गया।

पुरस्कार संरचना

  • समूहपुरस्कारराज्य/केंद्रशासित प्रदेश राष्ट्रीय स्तर
    A/Bप्रथम/स्वर्ण पदक₹50,000  ₹1,00,000
    A/Bद्वितीय/रजत पदक₹30,000  ₹50,000
    A/Bतृतीय/कांस्य पदक₹20,000  ₹30,000
    A/Bप्रशंसा पुरस्कार (10)₹7,500    ₹15,000

BEE के बारे में

भारत सरकार ने ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) की स्थापना 1 मार्च 2002 को ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 के प्रावधानों के तहत की। इसका उद्देश्य नीति और रणनीति विकसित करना, ऊर्जा तीव्रता को कम करना और ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा देना है। BEE उद्योग, संस्थाओं और अन्य संगठनों के साथ समन्वय करता है और ऊर्जा दक्षता सुनिश्चित करने के लिए नियामक और प्रोत्साहन संबंधी कार्य करता है।


भारत ने दर्ज की अब तक की सबसे बड़ी नवीकरणीय ऊर्जा वृद्धि, ओडिशा में 1.5 लाख रूफटॉप सोलर की योजना

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केंद्रीय नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री  प्रल्हाद जोशी ने भारत में ऐतिहासिक रूप से स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार को उजागर करते हुए कहा कि चालू वित्तीय वर्ष में देश ने अभी तक की सबसे बड़ी गैर-फॉसिल क्षमता जोड़ी है, कुल 31.25 GW, जिसमें से 24.28 GW सौर ऊर्जा है।

जोशी ने यह जानकारी ग्लोबल एनर्जी लीडर्स समिट 2025, पुरी, ओडिशा में दी और साथ ही ओडिशा के लिए 1.5 लाख रूफटॉप सोलर ULA मॉडल की घोषणा की, जिससे राज्य के लगभग 7–8 लाख लोगों को लाभ मिलेगा और उनकी सशक्तिकरण में मदद होगी।

वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा में भारत की भूमिका

उन्होंने कहा कि विश्व ने 2022 में 1 TW नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने में लगभग 70 साल लिए, लेकिन 2024 तक केवल दो साल में 2 TW की क्षमता हासिल कर ली। इस वैश्विक वृद्धि में भारत का योगदान महत्वपूर्ण रहा है।

पिछले 11 वर्षों में भारत की सौर क्षमता 2.8 GW से लगभग 130 GW तक बढ़ी, यानी 4,500% से अधिक की वृद्धि। केवल 2022–2024 के बीच, भारत ने वैश्विक सौर ऊर्जा में 46 GW का योगदान दिया और तीसरे सबसे बड़े योगदानकर्ता के रूप में उभरा।

जोशी ने यह भी कहा कि भारत के पास विश्व के पाँचवें सबसे बड़े कोयला भंडार हैं और यह कोयले का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। इसके बावजूद, भारत धीरे-धीरे कोयले और नवीकरणीय ऊर्जा का संतुलन बना रहा है।

ओडिशा में नवीकरणीय ऊर्जा की दिशा में प्रगति

ओडिशा के लिए नई पहलों का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत उपभोक्ता-स्वामित्व वाले Utility-Led Aggregation (ULA) मॉडल के तहत राज्य में 1.5 लाख रूफटॉप सोलर सिस्टम (प्रति यूनिट 1 kW) स्थापित किए जाएंगे। इससे लगभग 7–8 लाख लोगों, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को लाभ मिलेगा।

मंत्री ने बताया कि ओडिशा पहले से ही स्वच्छ ऊर्जा अपनाने में अग्रणी है। राज्य में स्थापित कुल नवीकरणीय क्षमता 3.1 GW से अधिक है, जो राज्य की कुल स्थापित विद्युत क्षमता का 34% से अधिक है।

PM सूर्य घर योजना के तहत:

  • 1.6 लाख परिवारों ने रूफटॉप सोलर के लिए आवेदन किया

  • 23,000 से अधिक इंस्टॉलेशन पूरे हुए

  • 19,200 से अधिक परिवारों के बैंक खातों में ₹147 करोड़ से अधिक की सब्सिडी सीधे ट्रांसफर की गई

प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शिता और केंद्र–राज्य सहयोग

जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बनाए गए समग्र इकोसिस्टम, आसान व्यापारिक माहौल, निवेशकों का विश्वास, मजबूत आधारभूत संरचना, मांग-आधारित योजनाएँ और केंद्र–राज्य सहयोग ने भारत में नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार को गति दी है।

मंत्री ने ओडिशा के भविष्य के लिए आश्वस्ति व्यक्त की और राज्य के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव, और जनता की सराहना की, जिन्होंने स्वच्छ ऊर्जा और हरित तकनीक को बढ़ावा दिया।

ग्लोबल एनर्जी लीडर्स समिट (GELS) 2025

ग्लोबल एनर्जी लीडर्स समिट (GELS) 2025, पुरी भारत की स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को तेज़ करने के लिए नीति निर्माता, नवप्रवर्तनकर्ता और उद्योग नेताओं को एक मंच पर लाने का पहला कदम है।
5–7 दिसंबर 2025 के बीच आयोजित इस समिट में केंद्रीय और राज्य ऊर्जा मंत्री, वैश्विक ऊर्जा नेता, नवप्रवर्तक और उद्योगपति भाग लेंगे, जो ऊर्जा के भविष्य को आकार देने के लिए विचार-विमर्श करेंगे।


पी.एम. सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत रायगढ़ का एक ग्राम बनेगा ‘सोलर मॉडल विलेज’

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जिला स्तरीय चयन समिति ने शुरू की चयन प्रक्रिया, 10 सर्वाधिक आबादी वाले ग्रामों में अगले छह माह चलेगी प्रतिस्पर्धा

सौर संयंत्र स्थापना, जनजागरूकता, सामुदायिक भागीदारी और नवाचार पर तय होगा मॉडल विलेज का चयन

रायुपर- केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पी.एम. सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत रायगढ़ जिले में एक ग्राम को पूर्णतः सौर ऊर्जा आधारित सोलर मॉडल विलेज के रूप में विकसित किया जाएगा। इस दिशा में जिला स्तरीय चयन समिति ने औपचारिक रूप से चयन प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। कलेक्टर  की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जिले के उन्हीं ग्रामों को प्रतिस्पर्धा में शामिल किया जाएगा, जिनकी जनसंख्या 5 हजार  से अधिक है। चूंकि जिले में इस श्रेणी के ग्राम सीमित संख्या में हैं, इसलिए प्रशासन ने सर्वाधिक जनसंख्या वाले 10 ग्रामों का चयन कर उन्हें छह माह की प्रतिस्पर्धात्मक प्रक्रिया में शामिल करने का निर्णय लिया है।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर  राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार को गति देने के लिए जिलों को निरंतर कार्य करने के निर्देश दिए हैं, ताकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हर घर सौर ऊर्जा लक्ष्य को धरातल पर साकार किया जा सके।

रायगढ़ जिले में केंद्र सरकार द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार जिले में प्रतियोगिता के लिए चयनित 10 ग्राम ग्राम पंचायतों में घरघोड़ा विकासखंड का ग्राम कुडुमकेला, तमनार विकासखंड का ग्राम तमनार, रायगढ़ विकासखंड का ग्राम खैरपुर, धरमजयगढ़ विकासखंड का ग्राम विजयनगर, तमनार विकासखंड का ग्राम तराईमाल, लैलूंगा विकासखंड का ग्राम गहनाझरिया, पुसौर विकासखंड का ग्राम गढ़मरिया, धरमजयगढ़ विकासखंड का ग्राम छाल, पुसौर विकासखंड का ग्राम सिसरिंगा, और पुसौर विकासखंड का ग्राम कोडातराई। इन्हीं ग्रामों में से एक ग्राम जिले का पहला सोलर मॉडल विलेज बनेगा।

 जिले के सभी विकासखंड से ग्राम  पंचायतों का चयन किया गया है। इन ग्रामों में अब अगले छह माह तक सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने, जनजागरूकता अभियान चलाने, घरेलू एवं सामुदायिक सौर संयंत्रों की स्थापना, तथा योजनाओं के लिए ग्रामीणों द्वारा किए जाने वाले आवेदनों की सतत समीक्षा की जाएगी।

इस प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए  प्रत्येक चयनित ग्राम में आदर्श ग्राम समिति गठित की जा रही है, जिसमें सरपंच, सचिव, जनप्रतिनिधि, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, शिक्षक, डॉक्टर, कृषि विस्तार अधिकारी तथा संबंधित शासकीय अधिकारी सदस्य के रूप में शामिल होंगे। यह समिति डोर-टू-डोर संपर्क कर ग्रामीणों को सौर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रेरित करेगी। साथ ही पी.एम. कुसुम योजना, जल जीवन मिशन के सोलर डुअल पंप, सोलर हाईमास्ट, सोलर स्ट्रीट लाइट तथा अन्य नवीकरणीय ऊर्जा आधारित व्यवस्थाओं की जानकारी भी प्रदान करेगी।

क्रेडा के सहायक अभियंता विक्रम वर्मा ने बताया कि इस प्रतियोगिता के दौरान प्रत्येक ग्राम अपनी जरूरतों के अनुसार सामुदायिक सौर संयंत्रों के प्रस्ताव तैयार कर जिला स्तर पर प्रस्तुत किया जाएगा। छह माह की अवधि पूर्ण होने पर जिला स्तरीय समिति द्वारा सभी ग्रामों का मूल्यांकन किया जाएगा। यह मूल्यांकन ग्रामीणों द्वारा स्थापित सौर संयंत्रों की संख्या, योजनाओं के लिए किए गए आवेदनों, सामुदायिक सहभागिता, उपलब्ध ऊर्जा सुविधाओं और सौर संसाधनों के उपयोग की आधारशिला पर किया जाएगा।

इसी मूल्यांकन के आधार पर जिले के पहले सोलर मॉडल विलेज का चयन किया जाएगा और चयनित ग्राम का विस्तृत डी.पी.आर. तैयार कर 15 मार्च 2025 तक ऊर्जा विभाग, छत्तीसगढ़ शासन को भेजा जाएगा, ताकि उस ग्राम को पूर्णतः सौर ऊर्जा आधारित आदर्श मॉडल ग्राम के रूप में विकसित किया जा सके।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने दिए राष्ट्रीय जल पुरस्कार: जल संरक्षण में जनभागीदारी को बताया अनिवार्य

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भारत की राष्ट्रपति, द्रौपदी मुर्मु ने आज (18 नवंबर 2025) नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में छठे राष्ट्रीय जल पुरस्कार (National Water Awards) और जल संचय–जन भागीदारी पुरस्कार (Jal Sanchay–Jan Bhagidari Awards) प्रदान किए।

समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि मानव सभ्यता का इतिहास, नदी घाटियों, समुद्री तटों और विभिन्न जल स्रोतों के आसपास बसने का इतिहास है। भारत की परंपरा में नदियों, झीलों और जल स्रोतों को पूजनीय माना गया है। हमारे राष्ट्रगीत में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने पहला शब्द लिखा है— ‘सुजलाम’—जिसका अर्थ है “प्रचुर जल संसाधनों से सम्पन्न।” यह दर्शाता है कि हमारे देश में जल का कितना महत्व है।

राष्ट्रपति ने कहा कि जल का कुशल उपयोग आज वैश्विक आवश्यकता है, और भारत में यह आवश्यकता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि हमारी जनसंख्या की तुलना में जल संसाधन सीमित हैं। प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने बताया कि जल चक्र पर जलवायु परिवर्तन का गहरा प्रभाव पड़ रहा है और ऐसे समय में सरकार और जनता दोनों को मिलकर जल सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।



राष्ट्रपति ने खुशी व्यक्त की कि पिछले वर्ष शुरू की गई जल संचय–जन भागीदारी पहल के तहत 35 लाख से अधिक भूजल पुनर्भरण संरचनाएँ (groundwater recharge structures) बनाई जा चुकी हैं।

उन्होंने कहा कि सर्कुलर वाटर इकॉनमी (Circular Water Economy) मॉडल अपनाकर उद्योग और अन्य हितधारक जल संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सकते हैं। कई औद्योगिक इकाइयों ने जल उपचार और पुनर्चक्रण के साथ शून्य तरल अपशिष्ट (Zero Liquid Discharge) का लक्ष्य भी हासिल कर लिया है, जो जल प्रबंधन और संरक्षण के लिए अत्यंत उपयोगी है।

राष्ट्रपति ने केंद्र और राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, ग्राम पंचायतों और नगर निकायों के स्तर पर जल संरक्षण और व्यवस्थित प्रबंधन को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि अनेक शैक्षणिक संस्थान, नागरिक समूह और गैर-सरकारी संगठन भी जल संरक्षण के प्रयासों में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने किसानों और उद्यमियों को कम जल उपयोग में अधिक उत्पादन देने वाली आधुनिक तकनीक अपनाने की सलाह दी।



राष्ट्रपति ने कहा कि प्रत्येक नागरिक को समझना चाहिए कि हम जल जैसे अनमोल संसाधन का उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि आदिवासी समुदाय जल सहित सभी प्राकृतिक संसाधनों को अत्यंत सम्मान के साथ देखते हैं—यह सोच सभी नागरिकों की जीवनशैली का हिस्सा होनी चाहिए। उन्होंने व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से जल संरक्षण के प्रति सतर्क रहने और जन-जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण तभी संभव है जब हर व्यक्ति, परिवार, समाज और सरकार मिलकर काम करे।

अंत में राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय जल पुरस्कारों का उद्देश्य लोगों में जल के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उन्हें सर्वोत्तम जल उपयोग प्रथाएँ अपनाने के लिए प्रेरित करना है। जल संचय–जन भागीदारी पहल सामुदायिक सहभागिता से भूजल पुनर्भरण के विविध, स्केलेबल और अनुकरणीय मॉडल विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।





भारत की ग्रीन हाइड्रोजन क्रांति: सतत और आत्मनिर्भर भविष्य की ओर

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  • भारत का लक्ष्य: 2030 तक हर साल 5 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन
  • भारत का पहला पोर्ट-आधारित ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट व.ओ. चिदंबरनार पोर्ट पर शुरू
  • 10 मार्गों पर 37 हाइड्रोजन वाहनों के साथ मोबिलिटी पायलट लॉन्च
  • मिशन से ₹8 लाख करोड़ से अधिक का निवेश आकर्षित होने और ₹1 लाख करोड़ से अधिक की जीवाश्म ईंधन आयात में कमी की उम्मीद

परिचय

भारत अपनी ऊर्जा परिवर्तन यात्रा के निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है — जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाते हुए स्वदेशी स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ा रहा है। यह भारत के 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने और 2070 तक नेट ज़ीरो लक्ष्य प्राप्त करने के विज़न के अनुरूप है। इस परिवर्तन में ग्रीन हाइड्रोजन एक स्वच्छ, टिकाऊ और स्केलेबल ईंधन के रूप में उभर रहा है, जो कठिन-से-कठिन औद्योगिक क्षेत्रों का डीकार्बोनाइजेशन करने में सक्षम है।

भारत सरकार ने 2023 में राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (NGHM) की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य एक संपूर्ण ग्रीन हाइड्रोजन पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना और इस क्षेत्र में अवसरों व चुनौतियों का समाधान करना है।

मुख्य उद्देश्य

यह मिशन केवल एक ऊर्जा पहल नहीं है, बल्कि औद्योगिक प्रतिस्पर्धा, आयात में कमी और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक रणनीतिक मार्ग है — जो आत्मनिर्भरता के साथ सतत विकास को जोड़ता है।

ग्रीन हाइड्रोजन क्या है?

ग्रीन हाइड्रोजन वह हाइड्रोजन है जो नवीकरणीय ऊर्जा (सौर या पवन ऊर्जा) की मदद से उत्पादित होती है, न कि जीवाश्म ईंधन से। इस प्रक्रिया में जल का विद्युत अपघटन (Electrolysis) करके उसे हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित किया जाता है। यदि इस प्रक्रिया से प्रति किलोग्राम हाइड्रोजन पर अधिकतम 2 किलोग्राम CO₂ समतुल्य उत्सर्जन होता है, तो उसे “ग्रीन” माना जाता है।

ग्रीन हाइड्रोजन को बायोमास (जैसे कृषि अपशिष्ट) से भी बनाया जा सकता है, बशर्ते उत्सर्जन सीमा के भीतर रहे।

राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (NGHM)

इस मिशन का लक्ष्य 2030 तक भारत को ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन में वैश्विक नेता बनाना है।
इसके तहत —

  • 125 GW नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता ग्रीन हाइड्रोजन के लिए समर्पित होगी,

  • ₹8 लाख करोड़ से अधिक का निवेश आएगा,

  • 6 लाख से अधिक रोजगार सृजित होंगे,

  • 50 MMT ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी होगी,

  • और ₹1 लाख करोड़ से अधिक जीवाश्म ईंधन आयात में कमी होगी।

मिशन के चार प्रमुख स्तंभ

  1. नीति और नियामक ढांचा

  2. मांग सृजन

  3. अनुसंधान, नवाचार और विकास (R&D)

  4. इन्फ्रास्ट्रक्चर और पारिस्थितिकी तंत्र विकास

प्रमुख योजनाएँ

(i) SIGHT योजना (Strategic Interventions for Green Hydrogen Transition)

₹17,490 करोड़ के प्रोत्साहन के साथ इलेक्ट्रोलाइज़र निर्माण और ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन को बढ़ावा।

(ii) ग्रीन हाइड्रोजन हब विकास

तीन प्रमुख बंदरगाह —

  • दीendayal (गुजरात)

  • व.ओ. चिदंबरनार (तमिलनाडु)

  • परेदीप (ओडिशा)
    को ग्रीन हाइड्रोजन हब घोषित किया गया है।

(iii) ग्रीन हाइड्रोजन सर्टिफिकेशन योजना (GHCI)

अप्रैल 2025 में लॉन्च की गई यह योजना सुनिश्चित करती है कि केवल नवीकरणीय ऊर्जा से बने, और निर्धारित उत्सर्जन सीमा के भीतर आने वाले हाइड्रोजन को ही “ग्रीन” कहा जाए।
BEE (ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी) इस योजना का नोडल प्राधिकरण है।

(iv) Strategic Hydrogen Innovation Partnership (SHIP)

सरकार और उद्योग के बीच साझेदारी के माध्यम से अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने की पहल।
₹400 करोड़ की आरएंडडी योजना के तहत 23 अग्रणी परियोजनाएँ पहले से चल रही हैं।

विभिन्न क्षेत्रों में ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग

औद्योगिक क्षेत्र

  • उर्वरक उत्पादन: ₹55.75 प्रति किलोग्राम की दर से 7.24 लाख मीट्रिक टन/वर्ष ग्रीन अमोनिया की आपूर्ति हेतु निविदा जारी।

  • पेट्रोलियम रिफाइनिंग: रिफाइनरियों में जीवाश्म-आधारित हाइड्रोजन के स्थान पर ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग।

  • इस्पात उद्योग: 5 पायलट प्रोजेक्ट शुरू, जिनका उद्देश्य हाइड्रोजन-आधारित इस्पात उत्पादन की तकनीकी और आर्थिक व्यवहार्यता का आकलन है।

परिवहन क्षेत्र

  • सड़क परिवहन: 10 मार्गों पर 37 हाइड्रोजन वाहनों (बस और ट्रक) के साथ पायलट प्रोजेक्ट — ₹208 करोड़ का निवेश।

  • शिपिंग: व.ओ. चिदंबरनार पोर्ट पर भारत का पहला पोर्ट-आधारित ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट (₹25 करोड़)।

  • उच्च ऊँचाई मोबिलिटी: एनटीपीसी द्वारा लेह (3,650 मीटर) में विश्व का सबसे ऊँचा ग्रीन हाइड्रोजन मोबिलिटी प्रोजेक्ट।

कौशल विकास और वैश्विक सहयोग

  • अब तक 5,600 से अधिक प्रशिक्षुओं को हाइड्रोजन क्षेत्र में प्रमाणित किया गया है।

  • EU-India, UK-India और Germany (H2Global) के साथ साझेदारी के तहत तकनीकी सहयोग और निर्यात अवसरों का विस्तार।

  • Singapore के साथ ग्रीन हाइड्रोजन हब के विकास हेतु MoU साइन।

निष्कर्ष: स्वच्छ विकास की दिशा में अग्रसर भारत

  • ग्रीन हाइड्रोजन भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन का केंद्र है।
  • राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन न केवल देश की ऊर्जा स्वतंत्रता को सुदृढ़ करता है, बल्कि वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा नेतृत्व की दिशा में भारत की स्थिति को भी मजबूत करता है।

यह मिशन भारत को एक सतत, सुरक्षित और आत्मनिर्भर भविष्य की ओर ले जा रहा है।


खनन मंत्रालय ने ₹1,500 करोड़ की ‘क्रिटिकल मिनरल रिसाइक्लिंग प्रोत्साहन योजना’ के दिशा-निर्देश जारी किए

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नई दिल्ली – केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 03.09.2025 को क्रिटिकल मिनरल रिसाइक्लिंग को बढ़ावा देने के लिए ₹1,500 करोड़ की प्रोत्साहन योजना को मंजूरी देने के बाद, खनन मंत्रालय ने 02.10.2025 को योजना के कार्यान्वयन हेतु विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

दिशा-निर्देश योजना की प्रक्रियाओं को स्पष्ट करते हैं, जिनमें रिसाइक्लिंग सिस्टम के लिए अनुमानित व्यय, प्रोत्साहन आवंटन की पद्धति, आवेदन, मूल्यांकन और भुगतान प्रक्रियाएँ, संस्थागत तंत्र और प्रदर्शन समीक्षा शामिल हैं। ये दिशा-निर्देश उद्योग और अन्य संबंधित हितधारकों के साथ विस्तृत परामर्श के बाद अंतिम रूप दिए गए हैं।

यह योजना राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसका उद्देश्य देश में द्वितीयक स्रोतों से क्रिटिकल मिनरल्स के पृथक्करण और उत्पादन के लिए रिसाइक्लिंग क्षमता विकसित करना है। पात्र फीडस्टॉक स्रोत हैं: ई-कचरा, प्रयुक्त लिथियम-आयन बैटरी (LiB) और अन्य स्क्रैप सामग्री।

यह योजना नई इकाइयों में निवेश के साथ-साथ मौजूदा इकाइयों की क्षमता विस्तार / आधुनिकीकरण और विविधीकरण पर लागू होगी। प्रोत्साहन केवल उस मूल्य श्रृंखला के लिए होगा जो क्रिटिकल मिनरल्स के वास्तविक निष्कर्षण में शामिल है।

योजना 02.10.2025 से आवेदन के लिए खुली है और आवेदन की अवधि छह (6) महीने यानी 01.04.2026 तक है। योजना दिशा-निर्देश और आवेदन लिंक खनन मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।


जल जीवन मिशन से बदली बिंजाम गांव की तस्वीर, हर घर पहुंचा नल का जल

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जल जीवन मिशन ने बदली जिंदगी : पहले सुबह का अधिकांश समय पानी के इंतजाम में ही निकल जाता था, पर अब घर पहुंच रहा पानी

रायपुर-हर घर नल से पानी पहुंचाने के मिशन ‘जल जीवन मिशन’ ने महिलाओं की जिंदगी बदल दी है। पहले सुबह का अधिकांश समय परिवार के लिए पानी के इंतजाम में बिताने वाली महिलाएं अब घर में नल से पानी आने के बाद राहत की सांस ले रही हैं। अब उन्हें बच्चों की परवरिश, पढ़ाई-लिखाई, खेती, मजदूरी और आजीविका के अन्य कार्यों के लिए पर्याप्त समय मिल जा रहा है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने दंतेवाड़ा जिले के गीदम   विकासखंड के बिंजाम ग्राम पंचायत में जल जीवन मिशन के माध्यम से 267 घरों में नल से जल पहुंचाया है। इससे गांववाले और वहां की महिलाएं काफी खुश हैं। गांव को ’’हर घर जल ग्राम’’ का दर्जा भी मिल गया है।

बिंजाम के अधिकांश परिवार आजीविका के लिए खेती और मजदूरी पर आश्रित हैं। यहां पहले पेयजल का मुख्य स्रोत हैंडपंप ही था। पर अब जल जीवन मिशन से गांव के हर घर में नल से स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल की आपूर्ति हो रही है। जल आपूर्ति के लिए गांव में 16 किलोमीटर से अधिक पाइपलाइन बिछाई गई है। तीन उच्च स्तरीय जलागारों (पानी टंकियों) के माध्यम से हर घर तक पानी पहुंचाया जा रहा है।

जल जीवन मिशन से हर परिवार को न केवल पर्याप्त जल मिल रहा है, बल्कि यह स्वच्छ और सुरक्षित भी है। गांव में गठित ‘जल वाहिनी’ समूह की महिलाओं को जल की गुणवत्ता के परीक्षण के लिए प्रशिक्षित किया गया है। ये महिलाएं फील्ड टेस्ट किट के माध्यम से जल की गुणवत्ता का परीक्षण कर गांव में गुणवत्तायुक्त पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित कर रही हैं। इससे गांववाले अब जलजनित और गंदे पानी से होने वाली बीमारियों के खतरे से मुक्त हो गए हैं।

जल जीवन मिशन ने बिंजाम की महिलाओं का जीवन बदल दिया है। पहले धूप, गर्मी, बरसात, ठंड या रात होने पर भी महिलाओं को पानी लाने घर से दूर जाना पड़ता था। घर पर छोटे बच्चे हों या खुद की तबीयत खराब हो, तो भी पानी लेने बाहर निकलना ही पड़ता था। पर अब घर में ही नल लग जाने से हालात बदल गए हैं। रोज की परेशानियों से निजात मिल गई है।

बिंजाम की महिलाएं बताती हैं कि पहले घर के सभी लोगों के लिए पानी की व्यवस्था में बहुत समय लगता था, मेहनत भी बहुत लगती थी। सुबह का ज्यादातर समय इसी में निकल जाता था जिसके चलते उनकी दुनिया सिमट सी गई थी। परिवार के खेती-किसानी के कार्यों में न वे ठीक से सहयोग कर पाती थीं और न ही अन्य कोई रोजगारमूलक गतिविधियों के बारे में सोच सकती थीं। पर अब जल जीवन मिशन ने ये सारी परेशानियां दूर कर दी हैं। अब बच्चे रोज समय पर बिना रूकावट के स्कूल जा रहे हैं। महिलाएं को अब अपनी सब्जी-बाड़ी और वनोपज संग्रहण के साथ ही खेत और घर के अन्य कामों के लिए पर्याप्त समय मिल रहा है। 


केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) का 51वां स्थापना दिवस नई दिल्ली में आयोजित

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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने 22 सितंबर, 2025 को नई दिल्ली स्थित पर्यवेश भवन में अपना 51वां स्थापना दिवस मनाया। इस अवसर पर केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में मंत्री यादव ने CPCB की पिछले पाँच दशकों की उपलब्धियों की सराहना की और कहा कि CPCB ने देश में अपनी विश्वसनीय पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि भारत जब 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर है, तब पर्यावरणीय नियम और मानक भी ऐसे होने चाहिए जो अर्थव्यवस्था और पर्यावरण में संतुलन स्थापित करें। इसके लिए उन्होंने स्वच्छ और कम प्रदूषणकारी तकनीक विकसित करने, IITs और अनुसंधान संस्थानों से सहयोग बढ़ाने तथा क्षमता निर्माण पर जोर दिया।

इस अवसर पर:

  • CPCB की नई इमारत की आधारशिला रखी गई।

  • पुणे व शिलांग में दो नई अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं का उद्घाटन किया गया।

  • SAMEER ऐप 2.0 लॉन्च किया गया, जिसमें नागरिकों के लिए नई डिजिटल सुविधाएँ उपलब्ध हैं।

  • CPCB में 13 नए कर्मियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए।

  • तकनीकी रिपोर्ट ‘प्रदूषित नदी खंडों का वर्गीकरण, 2025’ और एक मैनुअल जारी किया गया।

कार्यक्रम में मंत्रालय और CPCB के वरिष्ठ अधिकारी, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों के प्रतिनिधि, उद्योग संगठनों, शिक्षाविदों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों, मीडिया और नागरिक समाज से जुड़े लोग शामिल हुए।



जल शक्ति मंत्रालय ने शुरू किया “स्वच्छता ही सेवा” 2025 अभियान, इस वर्ष की थीम – ‘स्वच्छोत्सव’

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जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग ने अपने विभिन्न संगठनों और क्षेत्रीय कार्यालयों में स्वच्छता ही सेवा (SHS) 2025 अभियान की शुरुआत की है। इस वर्ष की थीम ‘स्वच्छोत्सव’ रखी गई है। 17 सितम्बर से 2 अक्टूबर 2025 तक चलने वाला यह पखवाड़ा सरकार के “स्वच्छ भारत” के दृष्टिकोण से जुड़ा है और स्वच्छता, स्वास्थ्य एवं जनसहभागिता के महत्व को और सुदृढ़ करने का लक्ष्य रखता है।

अभियान की शुरुआत विभाग के अनेक कार्यालयों एवं संस्थानों में स्वच्छता प्रतिज्ञा दिलवाने से हुई। इनमें राष्ट्रीय जल सूचना केंद्र (NWIC), उत्तर-पूर्वी क्षेत्रीय जल एवं भूमि प्रबंधन संस्थान (NERIWALM), केंद्रीय जल आयोग (CWC), केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB), केंद्रीय मृदा एवं सामग्री अनुसंधान स्टेशन (CSMRS), तथा विभिन्न बेसिन संगठन जैसे CWMA, NCA, KRMB, PPA, तुंगभद्रा बोर्ड, UYRB, GFCC और BRB शामिल हैं।

उद्घाटन दिवस की मुख्य झलकियाँ:

  • सचिवालय में अधिकारियों एवं कर्मचारियों को स्वच्छता प्रतिज्ञा दिलाई गई।

  • केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB), राष्ट्रीय जल मिशन (NWM) और अन्य कार्यालयों द्वारा श्रद्धांजलि श्रमदान गतिविधियाँ, सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक बनीं।

  • तेज़पुर, रायपुर, भुवनेश्वर, हैदराबाद, इंदौर, पटना, झांसी और नई दिल्ली में अधिकारियों एवं विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी की।

  • राष्ट्रीय जल मिशन मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता संयुक्त सचिव, NWM ने की। यहाँ लगभग 25 अधिकारियों ने स्वच्छता प्रतिज्ञा ली और श्रमदान गतिविधियों में भाग लिया।

इस अभियान का उद्देश्य प्रत्येक अधिकारी और नागरिक को प्रेरित करना है कि वे सक्रिय रूप से स्वच्छ वातावरण बनाए रखने, स्वच्छता को बढ़ावा देने और एक सतत एवं स्वस्थ जीवन के लिए सामूहिक संकल्प को मजबूत करें।

जल संसाधन विभाग 25 सितम्बर 2025 को सुबह 8:00 से 9:00 बजे तक कालिंदी कुंज पर ‘एक दिन, एक घंटा, एक साथ’ के बैनर तले जन-केंद्रित स्वच्छता अभियान आयोजित करेगा।


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