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भारत और श्रीलंका ने ऊर्जा सहयोग को नई गति देने पर किया मंथन, बिजली क्षेत्र में कई अहम परियोजनाओं की समीक्षा

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नई दिल्ली- भारत और श्रीलंका ने आज नई दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में बिजली क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग की व्यापक समीक्षा की। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व केंद्रीय विद्युत एवं आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने किया, जबकि श्रीलंका की ओर से बंदरगाह एवं नागरिक उड्डयन तथा ऊर्जा मंत्री अनुरा करुणाथिलके ने प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया।

बैठक के दौरान दोनों देशों ने भारत–श्रीलंका एचवीडीसी (HVDC) इंटरकनेक्शन परियोजना और संपूर सौर ऊर्जा परियोजना की प्रगति की समीक्षा की। साथ ही सीमा-पार बिजली व्यापार, नवीकरणीय ऊर्जा, ट्रांसमिशन अवसंरचना और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर भी विस्तृत चर्चा की गई।

दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में परिवर्तन को गति देने के लिए आपसी सहयोग को और विस्तार देने पर सहमति जताई। इस दौरान भारत ने टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली (TBCB) के माध्यम से सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत ट्रांसमिशन सिस्टम विकसित करने के अपने अनुभव भी साझा किए।

बैठक में मौजूदा द्विपक्षीय तंत्रों के तहत हुई प्रगति की समीक्षा करते हुए दोनों देशों ने सतत विकास और क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा के लिए बिजली क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने भारत और श्रीलंका के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऊर्जा सहयोग को आगे बढ़ाने की भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। वहीं श्रीलंका के ऊर्जा मंत्री अनुरा करुणाथिलके ने भारत के निरंतर सहयोग की सराहना करते हुए ऊर्जा क्षेत्र में द्विपक्षीय साझेदारी को और विस्तार देने की इच्छा व्यक्त की।

बैठक में भारत सरकार की ओर से विद्युत मंत्रालय के सचिव पंकज अग्रवाल सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। श्रीलंका के प्रतिनिधिमंडल में भारत में श्रीलंका की उच्चायुक्त महिषिणी कोलोन्ने तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे।

सीएम हेल्पलाइन की शिकायत का त्वरित समाधान,सोलर पंप चालू होने से लौटी खेतों की रौनक

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य शासन द्वारा जनसमस्याओं के त्वरित समाधान और किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा रहा है। इसी कड़ी में सीएम हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जा रहा है।

कोरबा के विकासखंड पोड़ी-उपरोड़ा अंतर्गत ग्राम अरसियां निवासी कृषक राम के खेत में सौर सुजला योजना के तहत स्थापित सोलर पंप अचानक तकनीकी खराबी के कारण बंद हो गया था। पंप के बंद होने से सिंचाई कार्य प्रभावित होने लगा और खेती-किसानी में परेशानी उत्पन्न हो गई। अपनी समस्या के समाधान के लिए राम ने सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत प्राप्त होते ही क्रेडा के अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई की। तकनीकी दल को मौके पर भेजा गया, जहां सोलर पंप का निरीक्षण कर आवश्यक सुधार एवं मरम्मत कार्य कर इसे पुनः चालू कर दिया गया।

सोलर पंप के पुनः सुचारु रूप से संचालित होने के बाद राम के खेतों में सिंचाई कार्य फिर से शुरू हो गया। समय पर सिंचाई की सुविधा मिलने से उनकी कृषि गतिविधियां सामान्य हो गईं और फसल की देखभाल में आने वाली कठिनाइयां दूर हो गईं। अपनी समस्या का त्वरित समाधान होने पर कृषक राम ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, जिला प्रशासन तथा क्रेडा के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से उनकी समस्या का शीघ्र समाधान हुआ, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिली।

क्रेडा के अधिकारियों ने बताया कि सौर सुजला योजना के अंतर्गत स्थापित सभी सोलर पंपों के संचालन एवं रखरखाव को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। किसानों से प्राप्त तकनीकी शिकायतों का तत्काल निराकरण सुनिश्चित किया जाता है, ताकि उन्हें सिंचाई कार्य में किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। शासन की जनहितकारी योजनाओं के साथ-साथ संवेदनशील प्रशासन और त्वरित कार्रवाई से आम नागरिकों की समस्याओं का प्रभावी समाधान संभव हो रहा है तथा किसानों का शासन के प्रति विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है।

भारत की स्वच्छ परिवहन नीति में हो सकते हैं बड़े बदलाव, E25 योजना की समीक्षा शुरू

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नई दिल्ली- देश में प्रदूषण कम करने और पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता घटाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार अपनी स्वच्छ परिवहन (Clean Transport) नीति की समीक्षा कर रही है। इसी क्रम में पेट्रोल में 25% एथेनॉल मिश्रण (E25) लागू करने की योजना पर दोबारा विचार किया जा रहा है।

सरकार का लक्ष्य एथेनॉल के अधिक उपयोग से विदेशी तेल पर निर्भरता कम करना, किसानों को लाभ पहुंचाना और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाना है। हालांकि विशेषज्ञों और ऑटोमोबाइल उद्योग का मानना है कि सभी वाहन E25 ईंधन के लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं हैं। इससे कुछ पुराने वाहनों के इंजन, माइलेज और रखरखाव पर असर पड़ सकता है।

इसी वजह से सरकार तकनीकी पहलुओं, वाहन निर्माताओं की तैयारियों और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले प्रभाव का विस्तृत अध्ययन कर रही है। समीक्षा के बाद ही E25 को लागू करने की दिशा में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

वहीं दूसरी ओर सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने पर भी लगातार काम कर रही है। देशभर में चार्जिंग स्टेशनों का विस्तार, बैटरी तकनीक को बेहतर बनाने और EV अपनाने को आसान बनाने के लिए नई योजनाओं पर काम जारी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को स्वच्छ परिवहन के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए एथेनॉल आधारित ईंधन, इलेक्ट्रिक वाहन और अन्य वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के बीच संतुलित रणनीति अपनानी होगी।

मुख्य बातें

  •  E25 (25% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) योजना की समीक्षा जारी।

  •  पुराने वाहनों की तकनीकी अनुकूलता पर सरकार का विशेष ध्यान।

  •  इलेक्ट्रिक वाहनों और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से बढ़ावा।

  •  लक्ष्य—प्रदूषण कम करना, विदेशी तेल पर निर्भरता घटाना और किसानों की आय बढ़ाना।

प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना से राजनांदगांव का साहू परिवार बना ऊर्जा आत्मनिर्भर

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3-3 किलोवाट के दो सोलर रूफटॉप प्लांट से बिजली बिल हुआ शून्य, अतिरिक्त आय का भी खुला रास्ता

रायपुर- प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना प्रदेश में ऊर्जा आत्मनिर्भरता और हरित ऊर्जा को नई गति दे रही है। राजनांदगांव जिले के ग्राम गठुला का साहू परिवार इस योजना का लाभ लेकर न केवल अपना बिजली बिल शून्य करने में सफल हुआ है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा अपनाने की प्रेरक मिसाल भी बन गया है।

ग्राम गठुला में टीकम होटल का संचालन करने वाले अंकालु राम साहू और उनके पुत्र कुंदन साहू ने अपने घर पर 3-3 किलोवाट क्षमता के दो सोलर रूफटॉप प्लांट स्थापित किए। होटल व्यवसाय के कारण प्रतिमाह 4 से 5 हजार रुपये तक का बिजली बिल आता था, जिसे कम करने के लिए उन्होंने सौर ऊर्जा को अपनाया।

साहू परिवार ने योजना के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर पंजीकृत वेंडर के माध्यम से सोलर प्लांट स्थापित कराया। दोनों प्लांटों की कुल लागत लगभग 4 लाख रुपये रही, जिसमें केंद्र एवं राज्य शासन से कुल 2 लाख 16 हजार रुपये की सब्सिडी सीधे बैंक खाते में प्राप्त हुई। इससे उनकी लागत में उल्लेखनीय कमी आई।

सोलर प्लांट शुरू होने के बाद परिवार का बिजली बिल लगभग शून्य हो गया है। नेट मीटरिंग व्यवस्था के तहत अतिरिक्त उत्पादित बिजली ग्रिड में भेजी जा रही है, जिससे भविष्य में अतिरिक्त आय की भी संभावना बनी है। अब साहू परिवार केवल बिजली का उपभोक्ता नहीं, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादक भी बन गया है।

साहू परिवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना आम नागरिकों के लिए आर्थिक बचत, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी माध्यम है।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत सोलर रूफटॉप प्लांट लगाने पर केंद्र एवं राज्य शासन द्वारा आकर्षक सब्सिडी के साथ राष्ट्रीयकृत बैंकों के माध्यम से रियायती ब्याज दर पर ऋण सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे अधिक से अधिक परिवार स्वच्छ एवं सस्ती ऊर्जा से जुड़ रहे हैं।

ब्रिक्स 2026 की अध्यक्षता में भारत ग्लोबल साउथ को देगा ऊर्जा सुरक्षा का नेतृत्व: प्रधानमंत्री मोदी

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा लिखे गए एक लेख को साझा करते हुए कहा कि ब्रिक्स (BRICS) 2026 की अध्यक्षता के दौरान भारत का लक्ष्य ग्लोबल साउथ को सुरक्षित, लचीले, न्यायसंगत और सतत वैश्विक ऊर्जा भविष्य के केंद्र में स्थापित करना है।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर कहा कि भारत का मानना है कि मजबूत और टिकाऊ ऊर्जा प्रणाली केवल प्रभावी घरेलू नीतियों से ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मजबूत वैश्विक साझेदारी से भी निर्मित होती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अपने लेख में स्पष्ट किया है कि भारत ऊर्जा सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और वैश्विक सहयोग के माध्यम से विकासशील देशों की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

भारत की ब्रिक्स 2026 अध्यक्षता के दौरान ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग, नवाचार और सतत विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ ग्लोबल साउथ की आवाज़ को वैश्विक मंच पर और अधिक प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

सरकार का मानना है कि ऊर्जा क्षेत्र में मजबूत अंतरराष्ट्रीय साझेदारी भविष्य की वैश्विक चुनौतियों से निपटने और सभी देशों के लिए सुरक्षित एवं समावेशी विकास सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

भूटान दौरे पर पहुंचे केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल, ऊर्जा सहयोग को मिलेगी नई गति

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नई दिल्ली/थिम्फू- केंद्रीय ऊर्जा तथा आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल चार दिवसीय भूटान दौरे पर आज पहुंचे। उनका यह दौरा भारत-भूटान के बीच मजबूत होते द्विपक्षीय संबंधों को और गहराई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

भारत और भूटान के बीच लंबे समय से आपसी विश्वास, समझ और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग पर आधारित उत्कृष्ट संबंध रहे हैं। यह दौरा विशेष रूप से ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

दौरे के दौरान मनोहर लाल ने भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों नेताओं ने स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

इसके अलावा, उन्होंने भूटान सरकार के ऊर्जा एवं प्राकृतिक संसाधन मंत्री ल्योंपो जेम त्शेरिंग के साथ भी बैठक की। इस दौरान जलविद्युत क्षेत्र में चल रहे सहयोग को मजबूत करने, नवीकरणीय ऊर्जा के नए अवसरों और क्षेत्रीय बिजली व्यापार को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई।

ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग के दायरे को विस्तारित करते हुए, भारत और भूटान ने एक सशक्त द्विपक्षीय संस्थागत ढांचा स्थापित किया है। यह तंत्र दोनों देशों के बीच चल रही और भविष्य की परियोजनाओं की नियमित समीक्षा और समन्वय सुनिश्चित करेगा। सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में गैर-जल ऊर्जा, सीमा-पार ट्रांसमिशन, परियोजना वित्तपोषण, क्षमता निर्माण और संस्थागत साझेदारी शामिल हैं।

इस अवसर पर दोनों देशों के बीच दो महत्वपूर्ण समझौते भी हुए—

  1. पुनात्सांगछू-II जलविद्युत परियोजना का टैरिफ प्रोटोकॉल:

    1020 मेगावाट की इस परियोजना का संयुक्त उद्घाटन 11 नवंबर 2025 को भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्येल वांगचुक द्वारा किया गया था। 19 सितंबर 2025 से इस परियोजना से अतिरिक्त बिजली का भारत को निर्यात शुरू हो चुका है।

  2. रिएक्टिव एनर्जी अकाउंटिंग की कार्यप्रणाली:

    यह तकनीकी ढांचा ग्रिड स्थिरता बढ़ाने, बिजली विनिमय की दक्षता सुधारने और दोनों देशों के बीच ऊर्जा व्यापार को सुगम बनाने में मदद करेगा।

इस दौरे के दौरान हुई चर्चाएं और समझौते भारत-भूटान संबंधों को नई दिशा देने के साथ-साथ दोनों देशों की समृद्धि और विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) स्थापना दिवस समारोह में सौर ऊर्जा की वैश्विक भूमिका पर जोर

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नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने सौर ऊर्जा के बढ़ते वैश्विक महत्व और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को गति देने में अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने 11 मार्च को नई दिल्ली में आयोजित ISA स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि यह गठबंधन साझा दृष्टि और वैश्विक साझेदारी की शक्ति को दर्शाता है, जो सौर ऊर्जा के माध्यम से सतत विकास को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

मंत्री ने कहा कि लगभग एक दशक पहले भारत और फ्रांस ने मिलकर एक दूरदर्शी पहल की थी, जिसका उद्देश्य वैश्विक विकास के केंद्र में सूर्य की ऊर्जा को स्थापित करना था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में यह पहल एक वैश्विक आंदोलन में बदल गई।

120 से अधिक देशों का वैश्विक गठबंधन

मंत्री  जोशी ने बताया कि आज अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन 120 से अधिक देशों के वैश्विक गठबंधन के रूप में विकसित हो चुका है, जो मिलकर सौर ऊर्जा के प्रसार को तेज करने के लिए कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में ISA ने सौर ऊर्जा के वादे को वास्तविक और जीवन बदलने वाले प्रभाव में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

ISA के प्रयासों के माध्यम से स्वास्थ्य केंद्रों का सौर ऊर्जा से संचालन, किसानों को सौर सिंचाई और कोल्ड स्टोरेज सुविधाएं, खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना तथा स्कूलों और सार्वजनिक संस्थानों को स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराना संभव हुआ है। इसके अलावा स्टार्टअप, युवा पेशेवरों और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को समर्थन देकर स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में नए अवसर और रोजगार सृजित किए जा रहे हैं।

मंत्री ने कहा कि ISA की स्थापना भारतीय दर्शन “वसुधैव कुटुम्बकम” की भावना पर आधारित है, जो यह मानता है कि पूरा विश्व एक परिवार है और सभी देशों को मिलकर स्वच्छ ऊर्जा के लाभों को समान रूप से साझा करना चाहिए।

भारत की सौर ऊर्जा क्षमता में तेजी से वृद्धि

मंत्री जोशी ने भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता लगभग 136 गीगावाट तक पहुंच गई है, जो भारत की कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का लगभग आधा हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि मजबूत नीतिगत प्रतिबद्धता और नवाचार का परिणाम है।

उन्होंने बताया कि पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना जैसे कार्यक्रम लाखों परिवारों को अपनी स्वच्छ बिजली स्वयं उत्पन्न करने का अवसर दे रहे हैं, जबकि पीएम-कुसुम योजना किसानों को सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई प्रणालियों के माध्यम से सशक्त बना रही है।

विश्व स्तर पर सौर ऊर्जा का तेज विस्तार

मंत्री ने कहा कि वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा का विस्तार तेजी से हो रहा है। जहां दुनिया को पहली 1000 गीगावाट सौर क्षमता स्थापित करने में लगभग 25 वर्ष लगे, वहीं अगली 1000 गीगावाट क्षमता इससे कहीं कम समय में स्थापित होने की संभावना है।

उन्होंने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन का केंद्र अब तेजी से ग्लोबल साउथ की ओर बढ़ रहा है, जहां ऊर्जा की बढ़ती मांग और प्रचुर सौर संसाधन पारंपरिक ऊर्जा मार्गों को पीछे छोड़ने का अवसर प्रदान कर रहे हैं।

इस संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन सरकारों, विकास साझेदारों, वित्तीय संस्थानों और निजी क्षेत्र को एक साथ लाकर सौर ऊर्जा के प्रसार को बढ़ावा देने वाला एक महत्वपूर्ण मंच बन गया है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल तकनीकों की बढ़ती भूमिका

मंत्री जोशी ने कहा कि ऊर्जा परिवर्तन अब एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है, जहां डिजिटल तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने ISA द्वारा संचालित ग्लोबल मिशन ऑन AI फॉर एनर्जी का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य नवाचार के माध्यम से अधिक स्मार्ट और लचीली ऊर्जा प्रणालियां विकसित करना है।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा परिवर्तन केवल ऊर्जा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विकास, लचीलापन और समृद्धि के नए अवसरों का मार्ग भी प्रशस्त करता है।

इस अवसर पर नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी ने कहा कि सौर ऊर्जा आज के समय की सबसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक संपत्तियों में से एक बन चुकी है। उन्होंने बताया कि भारत 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लक्ष्य की दिशा में मजबूत नीतिगत ढांचा और प्रभावी कार्यान्वयन प्रणाली के माध्यम से तेजी से आगे बढ़ रहा है।

ISA के महानिदेशक आशीष खन्ना ने कहा कि ISA आज 125 सदस्य और हस्ताक्षरकर्ता देशों का एक वैश्विक गठबंधन बन चुका है, जो यह मानते हैं कि दुनिया के सबसे प्रचुर ऊर्जा स्रोत को सबसे लोकतांत्रिक भी होना चाहिए।

इस अवसर पर ग्रीन हाइड्रोजन और स्टोरेज स्टार्टअप चैलेंज 2026 की भी घोषणा की गई। इसका उद्देश्य ग्रीन हाइड्रोजन और ऊर्जा भंडारण तकनीकों पर काम करने वाले नवाचारी स्टार्टअप्स की पहचान करना और उन्हें सहयोग प्रदान करना है।

इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन ने एक नई उन्नत वेबसाइट भी लॉन्च की, जो सदस्य देशों और भागीदारों को ज्ञान, कार्यक्रमों और अवसरों तक बेहतर पहुंच प्रदान करेगी।

अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के बारे में

अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की स्थापना भारत और फ्रांस द्वारा 2015 में पेरिस में आयोजित COP21 जलवायु सम्मेलन के दौरान की गई थी। यह एक संधि-आधारित अंतर-सरकारी मंच है, जिसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा के प्रसार को बढ़ावा देना और सतत विकास को गति देना है।

आज ISA अफ्रीका, एशिया, लैटिन अमेरिका और छोटे द्वीपीय विकासशील देशों में ऊर्जा पहुंच बढ़ाने, आजीविका मजबूत करने और जलवायु लचीलापन बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन: भारत में ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मेथनॉल के मानक अधिसूचित

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भारत सरकार ने राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 27 फरवरी 2026 को भारत के लिए ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मेथनॉल के मानक अधिसूचित किए हैं। ये मानकनवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालयद्वारा जारी किए गए हैं। इन मानकों में उत्सर्जन की सीमा और पात्रता शर्तें निर्धारित की गई हैं, जिन्हें पूरा करने पर अमोनिया और मेथनॉल को “ग्रीन” माना जाएगा, अर्थात् वे नवीकरणीय स्रोतों से प्राप्त ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग करके उत्पादित किए गए हों।

ग्रीन अमोनिया के लिए मानक

भारत के लिए निर्धारित मानक के अनुसार ग्रीन अमोनिया में कुल गैर-जैविक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन—जो ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन, अमोनिया संश्लेषण, शुद्धिकरण, संपीड़न और ऑन-साइट भंडारण से उत्पन्न होता है—0.38 किलोग्राम CO₂ समतुल्य प्रति किलोग्राम अमोनिया (kg CO₂ eq/kg NH₃) से अधिक नहीं होना चाहिए। यह गणना पिछले 12 महीनों के औसत के आधार पर की जाएगी।

ग्रीन मेथनॉल के लिए मानक

इसी प्रकार, ग्रीन मेथनॉल के लिए कुल गैर-जैविक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन—जो ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन, मेथनॉल संश्लेषण, शुद्धिकरण और ऑन-साइट भंडारण से उत्पन्न होता है—0.44 किलोग्राम CO₂ समतुल्य प्रति किलोग्राम मेथनॉल (kg CO₂ eq/kg CH₃OH) से अधिक नहीं होना चाहिए। यह भी पिछले 12 महीनों के औसत के आधार पर निर्धारित किया जाएगा।

कार्बन डाइऑक्साइड के स्रोत

अधिसूचना के अनुसार ग्रीन मेथनॉल के उत्पादन के लिए उपयोग की जाने वाली कार्बन डाइऑक्साइड निम्न स्रोतों से प्राप्त की जा सकती है:

  • जैविक (Biogenic) स्रोत

  • Direct Air Capture (DAC)

  • मौजूदा औद्योगिक स्रोत

मंत्रालय समय-समय पर कार्बन डाइऑक्साइड के पात्र स्रोतों में संशोधन कर सकता है। ऐसे संशोधन भविष्य में लागू होंगे और उपयुक्त ग्रैंडफादरिंग प्रावधानों के साथ लागू किए जाएंगे।

नवीकरणीय ऊर्जा की परिभाषा

ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मेथनॉल के उत्पादन में प्रयुक्त नवीकरणीय ऊर्जा में वह बिजली भी शामिल होगी जो नवीकरणीय स्रोतों से उत्पन्न होकर ऊर्जा भंडारण प्रणाली में संग्रहीत की गई हो या लागू नियमों के अनुसार ग्रिड के साथ बैंक की गई हो।

निगरानी और प्रमाणन

अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि मापन, रिपोर्टिंग, निगरानी, ऑन-साइट सत्यापन और प्रमाणन के लिए विस्तृत कार्यप्रणाली नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा अलग से जारी की जाएगी।

पहले से जारी निविदाएँ

अधिसूचना से पहले जारी की गई किसी भी टेंडर, बोली प्रक्रिया या निविदा पर उस समय लागू नियम और शर्तें लागू रहेंगी। हालांकि, यदि संभव हो और दोनों पक्ष सहमत हों, तो ऐसी निविदाओं को नए मानकों के अनुरूप भी बनाया जा सकता है।

उद्योग और निर्यात के लिए महत्व

ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मेथनॉल के मानकों की यह अधिसूचना उद्योग, निवेशकों और अन्य हितधारकों को स्पष्ट दिशा प्रदान करेगी। यह उर्वरक, शिपिंग, बिजली और भारी उद्योग जैसे क्षेत्रों के डीकार्बोनाइजेशन को बढ़ावा देने में सहायक होगी और भारत को ग्रीन ईंधनों के विश्वसनीय उत्पादक और निर्यातक के रूप में मजबूत बनाएगी।

भारतीय ग्रीन हाइड्रोजन डेवलपर्स ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मेथनॉल के लिए निर्यात बाजारों को लक्ष्य बना रहे हैं। इन मानकों के जारी होने से भारत ने नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत ग्रीन हाइड्रोजन और उसके उत्पादों के लिए अपने नियामक ढांचे को और मजबूत किया है।

भूटान और भारत के बीच विद्युत क्षेत्र सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा

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आज नई दिल्ली में भूटान के ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधन मंत्री,ल्योंपो जेम छेरिंग ने केंद्रीय विद्युत मंत्री और आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री, मनोहर लाल तथा राज्य मंत्री (विद्युत और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा), श्रीपाद नाइक से भेंट की। यह बैठक दोनों देशों के विद्युत क्षेत्र में लंबे समय से चले आ रहे सहयोग को और मजबूत करने पर केंद्रित रही।

भारत-भूटान जलविद्युत सहयोग की शुरुआत 1961 में हुई थी, जिसके बाद 2006 में हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर सहयोग पर समझौता हुआ।

बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने पुनत्सांगछू-II हाइड्रोइलेक्ट्रिक परियोजना (1020 मेगावाट) से विद्युत उत्पादन के वाणिज्यिक अनुकूलन पर विचार किया। इसके अलावा पुनत्सांगछू-I हाइड्रोइलेक्ट्रिक परियोजना (1200 मेगावाट) के जल्दी चालू होने पर विशेष जोर दिया गया।

बैठक में सांकॉश हाइड्रोपावर परियोजना के आगे के रास्तों पर भी चर्चा हुई। साथ ही दोनों देशों ने 2040 तक के क्रॉस-बॉर्डर ट्रांसमिशन लिंक का मूल्यांकन किया। इसके अलावा भूटान में कम उत्पादन वाले महीनों में विद्युत की शेड्यूलिंग को सरल बनाने की आवश्यकता पर भी विचार किया गया।

मंत्रियों ने दोनों देशों के बीच मित्रता और सहयोग की सराहना की और इसे और मजबूत करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

भारत के राष्ट्रीय विद्युत ट्रांसमिशन नेटवर्क ने रचा इतिहास: 5 लाख सर्किट किलोमीटर का आँकड़ा पार

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भारत का राष्ट्रीय विद्युत ट्रांसमिशन नेटवर्क ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए 5,00,000 सर्किट किलोमीटर (ckm) से अधिक की उच्च वोल्टेज (220 kV और उससे ऊपर) ट्रांसमिशन लाइनों के साथ-साथ 1,407 GVA से अधिक की परिवर्तन क्षमता (220 kV और उससे ऊपर) भी प्राप्त कर ली है।

विश्व के सबसे बड़े सिंक-क्रोनस राष्ट्रीय ग्रिड ने यह उपलब्धि 14 जनवरी 2026 को राजस्थान के भडला II से सीकर II सबस्टेशन तक 765 kV क्षमता वाली 628 सर्किट किलोमीटर की ट्रांसमिशन लाइन के संचालन से हासिल की। यह लाइन राजस्थान के भडला, रामगढ़ और फतेहगढ़ सोलर पावर कॉम्प्लेक्स के नवीकरणीय ऊर्जा (RE) क्षेत्र से अतिरिक्त 1100 मेगावाट बिजली को कुशलतापूर्वक ग्रिड में भेजने में सक्षम बनाएगी।

ट्रांसमिशन नेटवर्क का विकास

  • अप्रैल 2014 से अब तक भारत के ट्रांसमिशन नेटवर्क में 71.6% वृद्धि हुई है।

  • इस दौरान 2.09 लाख सर्किट किलोमीटर अतिरिक्त ट्रांसमिशन लाइनों का निर्माण हुआ है।

  • ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता में 876 GVA का इजाफा हुआ है।

अब इंटर-रीजनल पावर ट्रांसफर कैपेसिटी 1,20,340 मेगावाट तक पहुंच चुकी है, जिससे देश भर में बिजली के निर्बाध आदान–प्रदान को साकार करते हुए “एक राष्ट्र—एक ग्रिड—एक आवृत्ति” के विजन को सफलतापूर्वक लागू किया जा रहा है।

आगामी ट्रांसमिशन परियोजनाएँ

वर्तमान में कई Interstate Transmission परियोजनाएँ प्रगति पर हैं, जिनसे अनुमानित 40,000 ckm ट्रांसमिशन लाइनों और 399 GVA ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता में और वृद्धि होगी। इसके अलावा Intra-State Transmission परियोजनाएँ भी लगभग 27,500 ckm ट्रांसमिशन लाइनों और 134 GVA ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता को जोड़ेंगी। ये परियोजनाएँ ग्रिड की विश्वसनीयता और पावर निकासी क्षमता को और सुदृढ़ करेंगी।

नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य को समर्थन

ये क्षमता वृद्धि विशेष रूप से नवीकरणीय ऊर्जा के तेजी से इंटीग्रेशन का समर्थन करेगी, जिसका लक्ष्य 2030 तक 500 GW से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता प्राप्त करना है।

यह 5,00,000 सर्किट किलोमीटर का माइलस्टोन भारत सरकार के निरंतर प्रयासों और सतत निवेश का परिणाम है, जिसका उद्देश्य पूरे देश में भरोसेमंद, किफायती और सुरक्षित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना है, साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा को तेजी से जोड़ना भी है।


विद्युत मंत्रालय ने जारी की ‘ड्राफ्ट राष्ट्रीय विद्युत नीति (NEP) 2026’, विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को मिलेगा बल

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विद्युत मंत्रालय ने आज नई ड्राफ्ट राष्ट्रीय विद्युत नीति (NEP) 2026 जारी करने की घोषणा की। यह नीति देश के बिजली क्षेत्र को सशक्त और आधुनिक बनाने के साथ-साथ विकसित भारत @2047 के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अंतिम रूप से लागू होने के बाद यह नीति वर्ष 2005 में अधिसूचित मौजूदा राष्ट्रीय विद्युत नीति का स्थान लेगी।

फरवरी 2005 में अधिसूचित पहली राष्ट्रीय विद्युत नीति का उद्देश्य बिजली क्षेत्र की बुनियादी चुनौतियों—जैसे मांग-आपूर्ति में कमी, सीमित बिजली पहुंच और कमजोर अवसंरचना—का समाधान करना था। इसके बाद भारत के विद्युत क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। देश की स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता चार गुना बढ़ी है, मार्च 2021 तक सार्वभौमिक विद्युतीकरण हासिल किया गया, दिसंबर 2013 में एकीकृत राष्ट्रीय ग्रिड अस्तित्व में आया और वर्ष 2024–25 में प्रति व्यक्ति बिजली खपत 1,460 यूनिट (kWh) तक पहुंच गई। इसके साथ ही पावर मार्केट और एक्सचेंजों से बिजली खरीद में लचीलापन और दक्षता बढ़ी है।

हालांकि, इन उपलब्धियों के बावजूद वितरण क्षेत्र में अब भी कई चुनौतियां बनी हुई हैं। उच्च एटीएंडसी (AT&C) हानियां, बढ़ता कर्ज, गैर-लागत आधारित टैरिफ और अधिक क्रॉस-सब्सिडी के कारण औद्योगिक बिजली दरें ऊंची बनी हुई हैं, जिससे भारतीय उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हो रही है।

इसी पृष्ठभूमि में ड्राफ्ट NEP 2026 को तैयार किया गया है। इस नीति के तहत वर्ष 2030 तक प्रति व्यक्ति बिजली खपत को 2,000 यूनिट और वर्ष 2047 तक 4,000 यूनिट से अधिक करने का लक्ष्य रखा गया है। यह नीति भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं के अनुरूप भी है, जिसमें 2030 तक उत्सर्जन तीव्रता को 2005 के स्तर से 45 प्रतिशत कम करना और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य शामिल है।

ड्राफ्ट NEP 2026 के प्रमुख प्रावधान:

संसाधन पर्याप्तता (Resource Adequacy):

डिस्कॉम और एसएलडीसी को राज्य स्तर पर अग्रिम योजना बनानी होगी, जबकि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) राष्ट्रीय स्तर पर संसाधन पर्याप्तता योजना तैयार करेगा।

वित्तीय स्थिरता एवं आर्थिक प्रतिस्पर्धा:

  • टैरिफ का स्वत: वार्षिक संशोधन उपयुक्त सूचकांक से जोड़ा जाएगा।

  • फिक्स्ड कॉस्ट की वसूली डिमांड चार्ज के माध्यम से की जाएगी ताकि क्रॉस-सब्सिडी कम हो।

  • मैन्युफैक्चरिंग उद्योग, रेलवे और मेट्रो रेलवे को क्रॉस-सब्सिडी व सरचार्ज से छूट।

  • 1 मेगावाट या उससे अधिक लोड वाले उपभोक्ताओं के लिए यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन से छूट का प्रावधान।

  • विवाद समाधान तंत्र को मजबूत किया जाएगा।

नवीकरणीय ऊर्जा एवं भंडारण:

  • बाजार आधारित तंत्र से आरई क्षमता में वृद्धि।

  • छोटे उपभोक्ताओं के लिए डिस्कॉम द्वारा ऊर्जा भंडारण की व्यवस्था।

  • पी2पी (P2P) और एग्रीगेटर के माध्यम से अतिरिक्त ऊर्जा का व्यापार।

  • 2030 तक नवीकरणीय और पारंपरिक ऊर्जा के लिए समान शेड्यूलिंग व्यवस्था।

  • बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) और पंप्ड स्टोरेज को बढ़ावा।

थर्मल, न्यूक्लियर और हाइड्रो ऊर्जा:

  • थर्मल प्लांट्स में स्टोरेज का एकीकरण और पुराने यूनिट्स का पुन: उपयोग।

  • SHANTI अधिनियम 2025 के अनुरूप उन्नत परमाणु तकनीक, स्मॉल और मॉड्यूलर रिएक्टरों का विकास, 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु क्षमता का लक्ष्य।

  • भंडारण आधारित जलविद्युत परियोजनाओं का तेज विकास।

पावर मार्केट, ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन:

  • बाजार में निगरानी और नियंत्रण के लिए सशक्त नियामक ढांचा।

  • राइट ऑफ वे (RoW) समस्याओं के समाधान हेतु नई तकनीक और मुआवजा।

  • सिंगल-डिजिट AT&C हानियों का लक्ष्य।

  • साझा वितरण नेटवर्क और डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम ऑपरेटर (DSO) की स्थापना।

ग्रिड संचालन, साइबर सुरक्षा और तकनीक:

  • एसटीयू का फंक्शनल अनबंडलिंग और स्वतंत्र एसएलडीसी का गठन।

  • मजबूत साइबर सुरक्षा ढांचा और डेटा को भारत में ही स्टोर करना अनिवार्य।

  • 2030 तक स्वदेशी SCADA सिस्टम और घरेलू सॉफ्टवेयर समाधान का विकास।

कुल मिलाकर, ड्राफ्ट राष्ट्रीय विद्युत नीति 2026 एक भविष्य-उन्मुख, आर्थिक रूप से सुदृढ़ और पर्यावरण के अनुकूल बिजली क्षेत्र की रूपरेखा प्रस्तुत करती है, जिसका उद्देश्य देश को सस्ती, विश्वसनीय और गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराते हुए विकसित भारत @2047 के लक्ष्यों को हासिल करना है।

IREDA ने नववर्ष 2026 के अवसर पर आयोजित किया कर्मचारी मिलन समारोह, नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में सशक्त भूमिका निभाने का संकल्प दोहराया

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इंडियन रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी लिमिटेड (IREDA) ने 1 जनवरी 2026 को इंडिया हैबिटेट सेंटर, नई दिल्ली में नववर्ष 2026 के उपलक्ष्य में एक विशेष न्यू ईयर गेट-टुगेदर का आयोजन किया। यह आयोजन कर्मचारियों के बीच एकता, सहयोग और नववर्ष में नई ऊर्जा के साथ कार्य करने के संकल्प को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से किया गया।

इस अवसर पर नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के सचिव संतोष कुमार सारंगी, संयुक्त सचिव जे.वी.एन. सुब्रमण्यम, IREDA के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक प्रदीप कुमार दास, निदेशक (वित्त) डॉ. विजय कुमार मोहंती, HUDCO के CMD संजय कुलश्रेष्ठ सहित मंत्रालय और IREDA के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संतोष कुमार सारंगी ने टीम निर्माण के महत्व पर जोर दिया और युवा पेशेवरों को भविष्य के नेतृत्व के लिए तैयार करने की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने IREDA की बढ़ती भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि MSME क्षेत्र, प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना जैसी प्रमुख पहलों के अंतर्गत वित्तीय सहायता को और सुदृढ़ किया जाना आवश्यक है। उन्होंने IREDA की विकास यात्रा में MNRE के निरंतर समर्थन का आश्वासन भी दिया।

इस अवसर पर सभी कर्मचारियों को नववर्ष की शुभकामनाएँ देते हुए IREDA के CMD प्रदीप कुमार दास ने बताया कि 1 जनवरी 2025 को 168 कर्मचारियों की संख्या बढ़कर 2026 में 227 हो गई है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि IREDA में महिला कर्मचारियों की भागीदारी लगभग 23% है, जो केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (CPSEs) के औसत 9.5% से कहीं अधिक है। यह प्रगति सुदृढ़ कॉर्पोरेट गवर्नेंस और वित्तीय अनुशासन के कारण संभव हो सकी है, जिसे आगे भी जारी रखा जाएगा।

दास ने IREDA के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 31 दिसंबर 2025 (अनंतिम) तक

  • कुल ऋण स्वीकृतियाँ: ₹2,78,016 करोड़

  • कुल ऋण वितरण: ₹1,80,988 करोड़

  • ऋण पुस्तिका (Loan Book): ₹87,975 करोड़ रही है।

उन्होंने वित्त वर्ष 2024–25 में ₹1,699 करोड़ के अब तक के सर्वाधिक शुद्ध लाभ (PAT) तथा S&P ग्लोबल रेटिंग्स द्वारा अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट रेटिंग उन्नयन जैसे महत्वपूर्ण मील के पत्थरों को भी याद किया।

कार्यक्रम के अंत में निदेशक (वित्त) डॉ. विजय कुमार मोहंती ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों की सराहना की और उन्हें उच्च स्तर के शासन, पारदर्शिता और दक्षता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया।

यह नववर्ष समारोह IREDA की नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में देश की अग्रणी वित्तीय संस्था के रूप में भूमिका को और मजबूत करने के संकल्प का प्रतीक बना।

भारत में रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट निर्माण को बढ़ावा: ₹7,280 करोड़ की महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी

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प्रमुख बिंदु

  • सरकार ने देश में सिन्‍टर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) के समेकित घरेलू विनिर्माण इकोसिस्टम की स्थापना के लिए ₹7,280 करोड़ की योजना को मंजूरी दी।

  • इस योजना के तहत 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MTPA) की घरेलू उत्पादन क्षमता विकसित की जाएगी, जिसमें रेयर अर्थ ऑक्साइड से लेकर तैयार मैग्नेट तक पूरी वैल्यू चेन शामिल होगी।

  • यह पहल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और रक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगी।

  • यह योजना नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन (NCMM) और MMDR अधिनियम सुधारों जैसी नीतिगत पहलों से समर्थित है।

  • आयात निर्भरता कम करते हुए भारत की वैश्विक उन्नत सामग्री वैल्यू चेन में भागीदारी को सशक्त बनाएगी और दीर्घकालिक औद्योगिक विकास को गति देगी।

परिचय

केंद्र सरकार ने ‘सिन्‍टर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) विनिर्माण को प्रोत्साहन देने की योजना’ को मंजूरी दी है, जिसका कुल वित्तीय परिव्यय ₹7,280 करोड़ है। इस योजना का उद्देश्य भारत में 6,000 MTPA की एकीकृत REPM विनिर्माण क्षमता स्थापित करना है, जिसमें कच्चे रेयर अर्थ ऑक्साइड से लेकर अंतिम मैग्नेट उत्पाद तक संपूर्ण प्रक्रिया शामिल होगी।

इस घरेलू इकोसिस्टम के निर्माण से इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और रक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए आवश्यक इनपुट में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। यह पहल आत्मनिर्भर भारत, मजबूत आपूर्ति शृंखला और नेट ज़ीरो 2070 के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप है।

रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) क्या हैं?

रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट सबसे शक्तिशाली स्थायी मैग्नेटों में से एक होते हैं। इनका उपयोग उन तकनीकों में होता है जहाँ छोटे आकार में उच्च चुंबकीय क्षमता की आवश्यकता होती है, जैसे—

  • इलेक्ट्रिक वाहनों की मोटर

  • पवन ऊर्जा टरबाइन जनरेटर

  • उपभोक्ता एवं औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिक्स

  • एयरोस्पेस और रक्षा प्रणालियाँ

  • सटीक सेंसर और एक्ट्यूएटर

उन्नत इंजीनियरिंग अनुप्रयोगों के लिए REPM अत्यंत आवश्यक हैं, इसलिए भारत में इनका घरेलू उत्पादन दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धा और आपूर्ति सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

भारत की वर्तमान स्थिति और योजना की आवश्यकता

भारत के पास रेयर अर्थ खनिजों का बड़ा भंडार है, विशेष रूप से मोनाजाइट, जो आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल, झारखंड, गुजरात और महाराष्ट्र में पाया जाता है। देश में लगभग 1.315 करोड़ टन मोनाजाइट उपलब्ध है, जिसमें अनुमानित 72.3 लाख टन रेयर अर्थ ऑक्साइड मौजूद हैं।

इसके अतिरिक्त, गुजरात और राजस्थान में हार्ड रॉक क्षेत्रों में 12.9 लाख टन REO संसाधन चिन्हित किए गए हैं। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) द्वारा किए गए व्यापक अन्वेषण से 48.26 करोड़ टन रेयर अर्थ अयस्क संसाधनों की पहचान भी हुई है।

इसके बावजूद, भारत अभी भी REPM के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। वर्ष 2022–23 से 2024–25 के बीच भारत ने 60% से 80% तक मूल्य के आधार पर और 85% से 90% तक मात्रा के आधार पर आयात चीन से किया। अनुमान है कि 2030 तक REPM की घरेलू मांग दोगुनी हो जाएगी।

योजना के प्रमुख घटक

  • देश में 6,000 MTPA की एकीकृत REPM विनिर्माण क्षमता का निर्माण।

  • वैश्विक प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से अधिकतम 5 लाभार्थियों का चयन, प्रत्येक को 1,200 MTPA तक की क्षमता।

  • ₹6,450 करोड़ की बिक्री-आधारित प्रोत्साहन राशि, जो 5 वर्षों में दी जाएगी।

  • ₹750 करोड़ की पूंजी सब्सिडी, जिससे अत्याधुनिक विनिर्माण इकाइयों की स्थापना को समर्थन मिलेगा।

  • कुल 7 वर्षों की कार्यान्वयन अवधि—2 वर्ष की स्थापना अवधि और 5 वर्ष का प्रोत्साहन चरण।

राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से तालमेल

यह योजना भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण, रक्षा आत्मनिर्भरता, और रणनीतिक विनिर्माण लक्ष्यों के अनुरूप है। REPM ऊर्जा-कुशल मोटरों और पवन ऊर्जा प्रणालियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे यह पहल नेट ज़ीरो 2070 लक्ष्य को भी समर्थन देती है।

यह योजना नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन (NCMM), MMDR अधिनियम संशोधन 2023, और अन्य खनन सुधारों के साथ मिलकर भारत की क्रिटिकल मिनरल वैल्यू चेन को मजबूत करती है।

वैश्विक परिप्रेक्ष्य और भारत का अवसर

वैश्विक स्तर पर रेयर अर्थ और मैग्नेट आपूर्ति शृंखलाओं में बार-बार व्यवधान देखने को मिले हैं। ऐसे में भारत ने ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना, जाम्बिया, पेरू, जिम्बाब्वे, मोजाम्बिक सहित कई देशों के साथ सहयोग समझौते किए हैं।

इसके साथ ही खानिज विदेश इंडिया लिमिटेड (KABIL) विदेशों में रणनीतिक खनिज परिसंपत्तियों के अधिग्रहण और अन्वेषण में सक्रिय भूमिका निभा रही है, जिससे भारत की दीर्घकालिक आपूर्ति सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

निष्कर्ष

सिन्‍टर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट विनिर्माण योजना भारत की औद्योगिक क्षमता को मजबूत करने, आयात निर्भरता कम करने और उन्नत तकनीकी निवेश को आकर्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल रोजगार सृजन, स्वच्छ ऊर्जा अपनाने और आत्मनिर्भर भारत एवं विकसित भारत @2047 के विजन को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगी।

डॉ. जितेंद्र सिंह: स्वच्छ और विविध ऊर्जा की दिशा में भारत की यात्रा आत्मनिर्भरता और वैश्विक नेतृत्व की ओर

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 नई दिल्ली- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ऊर्जा स्वतंत्रता अब विकल्प नहीं बल्कि आर्थिक, रणनीतिक और भू-राजनीतिक आवश्यकता बन चुकी है। उन्होंने बताया कि भारत का स्वच्छ और विविध ऊर्जा स्रोतों की ओर संक्रमण आत्मनिर्भरता और भू-राजनीतिक अनुकूलता के साथ अभिन्न रूप से जुड़ा हुआ है, जो आत्मनिर्भर भारत और भारत की वैश्विक भूमिका के दृष्टिकोण के अनुरूप है।

डॉ. सिंह ने दिल्ली में एक कार्यक्रम में कहा कि यह बहस कि हरी और स्वच्छ ऊर्जा को अपनाना चाहिए या नहीं, अब अप्रासंगिक हो गई है, क्योंकि आज वैश्विक सहमति मानती है कि ऊर्जा संक्रमण सतत विकास, आर्थिक लचीलापन और भू-राजनीतिक अनुकूलता के लिए अनिवार्य है। उन्होंने कहा, “यदि भारत को आगे बढ़ना है, तो कोई विकल्प नहीं है।”

उन्होंने बताया कि जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना न केवल आत्मनिर्भरता को मजबूत करता है, बल्कि भारत को एक अनिवार्य वैश्विक बदलाव के लिए तैयार भी करता है, क्योंकि पारंपरिक ऊर्जा निर्यातक खुद तेजी से अपने ऊर्जा पोर्टफोलियो को विविध बना रहे हैं। “पुराने ऊर्जा मॉडल को बनाए रखना वैसा ही है जैसे भावनाओं के आधार पर पुराने तकनीकी उपकरणों से चिपके रहना; कल यहां तक कि स्पेयर पार्ट्स भी उपलब्ध नहीं होंगे।”

डॉ. सिंह ने भारत की बढ़ती वैश्विक स्थिति पर जोर देते हुए कहा कि देश अब केवल अनुयायी नहीं बल्कि क्लाइमेट एक्शन, स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में दिशा-निर्देशक बन गया है। उन्होंने कहा, “आज अन्य देश भारत की ओर देख रहे हैं।”

भारत की स्वच्छ ऊर्जा प्रतिबद्धताओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2070 तक नेट जीरो लक्ष्य घोषित किया और 2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का संकल्प दोहराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभिन्न ऊर्जा स्रोतों को भेदभाव के नजरिए से नहीं, बल्कि उपयुक्तता, विश्वसनीयता और आवेदन-विशिष्ट उपयोगिता के आधार पर देखा जाना चाहिए।

डॉ. सिंह ने बताया कि जबकि नवीकरणीय ऊर्जा भारत के ऊर्जा मिश्रण का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगी, कुछ क्षेत्र—जैसे डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत कंप्यूटिंग—में निरंतर, स्थिर, 24x7 बिजली की आवश्यकता होती है, जहां परमाणु ऊर्जा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा, “भविष्य एक मिश्रित ऊर्जा मॉडल में निहित है, जहां प्रत्येक स्रोत का उपयोग सबसे लागत-कुशल और प्रभावी क्षेत्र में किया जाएगा।”

उन्होंने तकनीकी विकास से तुलना करते हुए कहा कि जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब संतुलित ‘AI + मानव बुद्धि’ मॉडल में विकसित हो रहा है, वैसे ही भारत की ऊर्जा रणनीति भी नवीकरणीय, परमाणु, हाइड्रोजन और अन्य उभरते समाधानों को एकीकृत फ्रेमवर्क में संयोजित करेगी।

डॉ. सिंह ने सरकार के साहसिक सुधारों को भी रेखांकित किया, जिसमें परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे रणनीतिक क्षेत्रों को निजी भागीदारी के लिए खोला गया है। उन्होंने कहा, “सरकार ने स्टेटस क्वो से परे जाने का साहस दिखाया है, जो पैमाना, गति और स्थायित्व हासिल करने के लिए आवश्यक सार्वजनिक-निजी सहयोग को सक्षम करता है।”

उन्होंने सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के बीच सहयोग और विश्वास बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय प्रगति के लिए सामूहिक जिम्मेदारी, साझा उद्देश्य और समेकित कार्रवाई जरूरी है।

डॉ. सिंह ने निष्कर्ष में कहा कि ऊर्जा संक्रमण के प्रारंभिक चरण में चुनौतियां हैं, लेकिन भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सही मार्ग पर है। उन्होंने कहा, “स्वच्छ ऊर्जा अब केवल सेमिनार का विषय नहीं, बल्कि जीवनशैली बनती जा रही है। सभी हितधारक इसके अनुसार अनुकूलित होंगे, नवाचार करेंगे और नेतृत्व करेंगे।”

भारत में हरित हाइड्रोजन मिशन: उत्पादन बढ़ाने और लागत घटाने के लिए महत्वपूर्ण कदम

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नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (NGHM) को लागू कर रहा है, जिसका उद्देश्य भारत को हरित हाइड्रोजन और इसके व्युत्पन्न उत्पादों के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है।

भारत की हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता 2030 तक प्रति वर्ष 5 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुँचने की संभावना है।

हरित हाइड्रोजन की लागत को कम करने के लिए NGHM के तहत महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं, जिनका विवरण इस प्रकार है:

i. इलेक्ट्रोलाइज़र निर्माण के लिए प्रोत्साहन योजना के तहत, 15 कंपनियों को कुल 3,000 मेगावाट प्रति वर्ष की उत्पादन क्षमता के लिए पुरस्कृत किया गया है। कुल प्रोत्साहन राशि ₹4440 करोड़ है।

ii. हरित हाइड्रोजन उत्पादन के लिए प्रोत्साहन योजना के तहत, 18 कंपनियों को कुल 8,62,000 टन प्रति वर्ष की उत्पादन क्षमता के लिए पुरस्कृत किया गया है।

iii. रिफाइनरी के लिए हरित हाइड्रोजन की खरीद के लिए प्रोत्साहन योजना के तहत, 2 कंपनियों को कुल 20,000 टन प्रति वर्ष की क्षमता के लिए पुरस्कृत किया गया है।

हरित हाइड्रोजन की लागत को कम करने हेतु उठाए गए अन्य कदम निम्नलिखित हैं:

i. जो हरित हाइड्रोजन/हरित अमोनिया संयंत्र 31.12.2030 तक चालू किए जाते हैं और जो हरित हाइड्रोजन या हरित अमोनिया के उत्पादन के लिए नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग करते हैं, उन्हें परियोजना के कमीशनिंग की तारीख से 25 वर्षों की अवधि के लिए अंतर-राज्यीय संचरण प्रणाली (ISTS) शुल्क से छूट दी गई है।

ii. SEZ अधिनियम, 2005 की धारा 26 के तहत ड्यूटी लाभ उन इकाइयों को दिए गए हैं जो नवीकरणीय ऊर्जा उपकरणों की स्थापना और संचालन एवं रखरखाव (O&M) के लिए केवल इकाई की स्व-उपभोग हेतु इसका उपयोग करती हैं।

MNRE एक अनुसंधान और विकास परियोजना ‘पेरोव्स्काइट टैंडम सोलर सेल का पैमाना बढ़ाना (Phase-I)’ का समर्थन कर रहा है, जिसका कुल परियोजना खर्च ₹83.19 करोड़ है, ताकि पेरोव्स्काइट टैंडम सोलर सेल तकनीक का पैमाना बढ़ाया जा सके और देश में इसका विकास किया जा सके।

यह जानकारी केंद्रीय राज्य मंत्री, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा, श्रीपाद यसो नाइक ने आज राज्यसभा में लिखित उत्तर में प्रस्तुत की।

ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की यात्रा: पिछले 11 वर्षों में ऐतिहासिक परिवर्तन – पीयूष गोयल

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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आज नई दिल्ली में एक ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के ऊर्जा क्षेत्र की पिछले 11 वर्षों की यात्रा इस बात का प्रमाण है कि सशक्त दृष्टि, ईमानदार मंशा और निरंतर क्रियान्वयन किसी राष्ट्र की दिशा और दशा बदल सकते हैं।

सरदार वल्लभभाई पटेल की पुण्यतिथि के अवसर पर गोयल ने कहा कि देश केवल लौह पुरुष को ही नहीं, बल्कि ऐसे दूरदर्शी नेता को भी स्मरण करता है, जो भारत को राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक रूप से आत्मनिर्भर देखना चाहते थे।

मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वही आत्मनिर्भरता की भावना भारत के ऊर्जा क्षेत्र में साकार हुई है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2024–25 में भारत ने अब तक का सर्वाधिक 1,048 मिलियन टन कोयला उत्पादन दर्ज किया, जबकि कोयला आयात में लगभग 8 प्रतिशत की कमी आई है।
उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में भारत की सौर ऊर्जा क्षमता 46 गुना बढ़ी है, जिससे भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा सौर ऊर्जा उत्पादक देश बन गया है। वहीं, पवन ऊर्जा क्षमता 2014 में 21 गीगावॉट से बढ़कर 2025 में 53 गीगावॉट हो गई है।

गोयल ने बताया कि भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनिंग हब बन चुका है और रिफाइनिंग क्षमता को 20 प्रतिशत तक बढ़ाने पर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि 34,238 किलोमीटर प्राकृतिक गैस पाइपलाइन को स्वीकृति दी गई है, जिनमें से 25,923 किलोमीटर परिचालन में हैं।
उन्होंने शांति (SHANTI) विधेयक का भी उल्लेख किया, जिसके तहत परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी का मार्ग प्रशस्त किया जा रहा है।

मंत्री ने कहा कि भारत अब अतिरिक्त बिजली उत्पादन, ग्रिड एकीकरण और नवीकरणीय ऊर्जा में वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ चुका है। यह परिवर्तन आकस्मिक नहीं, बल्कि स्पष्ट दृष्टि और सतत प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि भारत बिजली की कमी से निकलकर बिजली सुरक्षा और अब बिजली स्थिरता की ओर अग्रसर हुआ है।

गोयल ने कहा कि यह परिवर्तन पाँच प्रमुख स्तंभों पर आधारित है—

पहला स्तंभ: सार्वभौमिक पहुंच

उन्होंने कहा कि सौभाग्य योजना के तहत हर घर तक बिजली पहुँचाई गई है। उजाला योजना के अंतर्गत 47.4 करोड़ एलईडी बल्ब वितरित किए गए, जिससे बिजली बिल में बचत और कार्बन उत्सर्जन में कमी आई।
उन्होंने कहा कि अब बच्चे सूर्यास्त के बाद भी पढ़ाई कर पा रहे हैं—यह केवल घरों में नहीं, बल्कि आशाओं में भी रोशनी ला रहा है।
उन्होंने बताया कि 10 करोड़ परिवारों को स्वच्छ रसोई गैस कनेक्शन मिलने से महिलाएँ स्वस्थ जीवन जी रही हैं और पीएम-कुसुम योजना के तहत किसान ऊर्जा प्रदाता बन रहे हैं।

दूसरा स्तंभ: वहनीयता

मंत्री ने कहा कि सौर, पवन और अन्य स्वच्छ ऊर्जा उपकरणों पर जीएसटी 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किया गया है।
उन्होंने बताया कि 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण लक्ष्य, जिसे 2030 तक हासिल करना था, वह समय से पहले पूरा कर लिया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि सौर और पवन ऊर्जा की बिक्री के लिए अंतर-राज्यीय ट्रांसमिशन शुल्क माफ किया गया है।

तीसरा स्तंभ: उपलब्धता

गोयल ने कहा कि बिजली की कमी 2013 में 4.2 प्रतिशत से घटकर 2025 में 0.1 प्रतिशत रह गई है।
उन्होंने बताया कि एकीकृत राष्ट्रीय ग्रिड के माध्यम से भारत ने 250 गीगावॉट की रिकॉर्ड पीक पावर डिमांड को पूरा किया है।

चौथा स्तंभ: वित्तीय व्यवहार्यता

उन्होंने कहा कि पीएम-उदय योजना के तहत सुधारों से बिजली वितरण क्षेत्र सशक्त हुआ है।
डिस्कॉम बकाया 2022 में ₹1.4 लाख करोड़ से घटकर 2025 में ₹6,500 करोड़ रह गया है।

पाँचवां स्तंभ: स्थिरता और वैश्विक जिम्मेदारी

गोयल ने कहा कि भारत पेरिस समझौते के लक्ष्यों को प्राप्त करने वाला पहला G20 देश बन गया है।
उन्होंने बताया कि देश की 50 प्रतिशत स्थापित विद्युत क्षमता अब गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से प्राप्त हो रही है।

मंत्री ने कहा कि 2047 में स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने की ओर बढ़ते हुए, भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए रणनीति को पुनः निर्धारित किया जा रहा है।
उन्होंने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का उल्लेख किया, जिसका लक्ष्य 2030 तक 5 मिलियन मीट्रिक टन उत्पादन और ₹1 लाख करोड़ से अधिक की जीवाश्म ईंधन आयात बचत है।
उन्होंने पीएम सूर्य घर योजना का भी जिक्र किया, जिसके तहत लगभग 20 लाख घरों में रूफटॉप सोलर स्थापित किए जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री के कथन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के ऊर्जा क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए सरकार जनता को सशक्त कर रही है।
उन्होंने बताया कि कोयला क्षेत्र पर गठित उच्चस्तरीय समिति की कई सिफारिशों पर विचार किया जा रहा है, जिनमें कोयला अन्वेषण और खनन को तेज करना तथा कोयला गैसीकरण को बढ़ावा देना शामिल है।
 गोयल ने विश्वास व्यक्त किया कि विकसित भारत 2047 की ओर बढ़ते हुए, भारत का ऊर्जा क्षेत्र पैमाने, गति और स्थिरता को एक साथ साधने का वैश्विक उदाहरण बनेगा।

राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस 2025: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार और चित्रकला प्रतियोगिता विजेताओं को किया सम्मानित

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आज विज्ञान भवन, नई दिल्ली में राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस 2025 का आयोजन किया गया, जहाँ भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार (NECA) 2025 और राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण चित्रकला प्रतियोगिता 2025 के विजेताओं को सम्मानित किया।

यह कार्यक्रम भारत की ऊर्जा दक्षता, सतत विकास और सभी आर्थिक क्षेत्रों में जिम्मेदार ऊर्जा उपयोग को बढ़ावा देने के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह कार्यक्रम ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE), पावर मंत्रालय के तहत आयोजित किया गया।

राष्ट्रपति ने कहा कि ऊर्जा संरक्षण सबसे विश्वसनीय और पर्यावरण के अनुकूल ऊर्जा स्रोत है। ऊर्जा बचाना ऊर्जा उत्पादन के समान है, और यह प्राकृतिक संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव डाले बिना किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक के रूप में, भारत की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को—जिसमें बिजली पहुंच, शहरीकरण, औद्योगिक विकास और जीवन स्तर में सुधार शामिल है—सतत और जिम्मेदार तरीके से पूरा करना अनिवार्य है।

पावर और आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि भारत ने वैश्विक ऊर्जा संक्रमण में अग्रणी भूमिका निभाई है और अपने प्रयासों को पेरिस समझौते के तहत निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप रखा है। उन्होंने बीईई की पहल जैसे PAT योजना, ADEETIE, स्टैंडर्ड्स और लेबलिंग सहित अन्य कार्यक्रमों के महत्व को रेखांकित किया, जो पूरे देश में ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा दे रहे हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने अपने गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोतों से स्थापित क्षमता का 50% हिस्सा हासिल कर लिया है, जो पेरिस समझौते के लक्ष्य की तुलना में पांच साल पहले है।

राज्य मंत्री, पावर, श्रिपाद यसो नाइक ने कहा कि राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार ऊर्जा संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रयासों को पहचानने की एक मजबूत परंपरा स्थापित कर चुके हैं। उन्होंने यह भी बताया कि ऊर्जा संरक्षण केवल तकनीकी मामला नहीं है, बल्कि यह व्यवहार में बदलाव से भी जुड़ा है। छोटे-छोटे प्रयास जैसे बिजली बंद करना, ऊर्जा-कुशल उपकरणों का चयन और सतत क्रियाएं भी बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।

पावर मंत्रालय के सचिव पंकज अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व ने ऊर्जा दक्षता और ऊर्जा संरक्षण को भारत के विकास मॉडल के केंद्र में रखा है।

BEE के महानिदेशक धीरज कुमार श्रीवास्तव ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से ऊर्जा संरक्षण के प्रति जनता की जागरूकता बढ़ाने में योगदान के लिए सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स के लिए नए पुरस्कार श्रेणी की शुरुआत का उल्लेख किया।

राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार 2025

BEE उद्योग, संस्थान और अन्य प्रतिष्ठानों के ऊर्जा उपयोग को कम करने के प्रयासों को पहचानता और प्रोत्साहित करता है। इस वर्ष कुल 558 आवेदन प्राप्त हुए, जिसमें उद्योग, भवन, परिवहन, संस्थान, उपकरण, नवाचार और पेशेवर श्रेणियां शामिल हैं। पुरस्कारों में 25 प्रथम पुरस्कार, 5 द्वितीय पुरस्कार, 26 मेरिट प्रमाण पत्र और 3 नवाचार सम्मान शामिल हैं।

राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण चित्रकला प्रतियोगिता 2025

इस प्रतियोगिता का उद्देश्य युवाओं के माध्यम से समाज में जागरूकता और परिवर्तन लाना है। इसमें कक्षा 5 से 10 के छात्र भाग लेते हैं, जिन्हें दो समूहों में विभाजित किया गया है:

  • समूह A: कक्षा 5, 6, 7

  • समूह B: कक्षा 8, 9, 10

इस साल स्कूल, राज्य/केंद्रशासित प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिता में 80 लाख से अधिक छात्रों ने भाग लिया। विजेताओं को पुरस्कार राशि के साथ लैपटॉप/टैबलेट और भारत के विभिन्न हिस्सों में अध्ययन भ्रमण का अवसर भी प्रदान किया गया।

पुरस्कार संरचना

  • समूहपुरस्कारराज्य/केंद्रशासित प्रदेश राष्ट्रीय स्तर
    A/Bप्रथम/स्वर्ण पदक₹50,000  ₹1,00,000
    A/Bद्वितीय/रजत पदक₹30,000  ₹50,000
    A/Bतृतीय/कांस्य पदक₹20,000  ₹30,000
    A/Bप्रशंसा पुरस्कार (10)₹7,500    ₹15,000

BEE के बारे में

भारत सरकार ने ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) की स्थापना 1 मार्च 2002 को ऊर्जा संरक्षण अधिनियम, 2001 के प्रावधानों के तहत की। इसका उद्देश्य नीति और रणनीति विकसित करना, ऊर्जा तीव्रता को कम करना और ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा देना है। BEE उद्योग, संस्थाओं और अन्य संगठनों के साथ समन्वय करता है और ऊर्जा दक्षता सुनिश्चित करने के लिए नियामक और प्रोत्साहन संबंधी कार्य करता है।


राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार 2025 प्रदान किए

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राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (14 दिसंबर 2025) नई दिल्ली में राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार 2025 तथा ऊर्जा संरक्षण पर राष्ट्रीय चित्रकला प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया।

इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि ऊर्जा संरक्षण सबसे पर्यावरण-अनुकूल और विश्वसनीय ऊर्जा स्रोत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऊर्जा संरक्षण आज के समय की केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऊर्जा बचाने का अर्थ केवल कम उपयोग करना नहीं है, बल्कि ऊर्जा का समझदारी, जिम्मेदारी और दक्षता के साथ उपयोग करना है।

राष्ट्रपति ने कहा कि जब हम अनावश्यक रूप से विद्युत उपकरणों का उपयोग नहीं करते, ऊर्जा-दक्ष उपकरण अपनाते हैं, घरों और कार्यस्थलों में प्राकृतिक प्रकाश और वेंटिलेशन का उपयोग करते हैं, अथवा सौर और नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाते हैं, तो हम न केवल ऊर्जा बचाते हैं बल्कि कार्बन उत्सर्जन में भी कमी लाते हैं। ऊर्जा संरक्षण स्वच्छ वायु, सुरक्षित जल स्रोतों और संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बचाई गई ऊर्जा की प्रत्येक इकाई प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी और आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी संवेदनशीलता का प्रतीक है।

राष्ट्रपति ने विशेष रूप से युवाओं और बच्चों की भूमिका पर बल देते हुए कहा कि यदि वे ऊर्जा संरक्षण के प्रति जागरूक हों और इस दिशा में प्रयास करें, तो इस क्षेत्र के लक्ष्य आसानी से प्राप्त किए जा सकते हैं और देश का सतत विकास सुनिश्चित किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा तक पहुंच समुदायों को सशक्त बनाती है, स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देती है और नए विकास अवसर पैदा करती है। इसलिए हरित ऊर्जा केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सशक्तिकरण और समावेशी विकास का एक सशक्त माध्यम है।

राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना और राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन जैसी पहलों की सराहना की, जो जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि सरकार नवीकरणीय उपभोग दायित्व (RCO) और उत्पादन-संलग्न प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं के माध्यम से नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने उल्लेख किया कि वर्ष 2023-24 में भारत के ऊर्जा दक्षता प्रयासों से 53.60 मिलियन टन तेल समतुल्य ऊर्जा की बचत हुई है, जिससे प्रतिवर्ष उल्लेखनीय आर्थिक लाभ और CO₂ उत्सर्जन में बड़ी कमी आई है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत के ऊर्जा संक्रमण की सफलता के लिए हर क्षेत्र और प्रत्येक नागरिक की भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सभी क्षेत्रों में ऊर्जा दक्षता लाने के लिए व्यवहारगत परिवर्तन अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण संतुलित जीवनशैली अपनाने की चेतना भारत की सांस्कृतिक परंपरा का मूल है, और यही भावना विश्व को दिए गए संदेश “लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट – LiFE” का आधार है।

उन्होंने ऊर्जा संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत सभी हितधारकों की सराहना करते हुए कहा कि उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ और उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित करेगा। राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि सामूहिक जिम्मेदारी, साझेदारी और जनभागीदारी की भावना के साथ भारत ऊर्जा संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाता रहेगा और हरित भविष्य की दिशा में अपने लक्ष्यों को सफलतापूर्वक प्राप्त करेगा।


पीएम सूर्यघर योजना से ऊर्जा आत्मनिर्भरता को नई मजबूती – मुख्यमंत्री साय

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मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस की दी शुभकामनाएं

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस (14 दिसंबर) के अवसर पर  प्रदेशवासियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि ऊर्जा संरक्षण सतत विकास, पर्यावरण संतुलन और भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए अनिवार्य है। ऊर्जा का विवेकपूर्ण, जिम्मेदार और कुशल उपयोग न केवल प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में सहायक है, बल्कि जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौती से निपटने का भी प्रभावी माध्यम है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा संचालित पीएम सूर्यघर योजना स्वच्छ एवं नवीकरणीय ऊर्जा को जन-जन तक पहुँचाने की एक महत्वपूर्ण पहल है। इस योजना से घरेलू स्तर पर सौर ऊर्जा को प्रोत्साहन मिल रहा है, जिससे बिजली व्यय में कमी के साथ-साथ ऊर्जा आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिल रही है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे ऊर्जा बचत को अपनी दैनिक जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा बनाएं, ऊर्जा-सक्षम उपकरणों का अधिकाधिक उपयोग करें और छोटे-छोटे सामूहिक प्रयासों के माध्यम से छत्तीसगढ़ को हरित, स्वच्छ और विकसित राज्य बनाने में सक्रिय योगदान दें।

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