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Vastu Shastra : इन चीजों से बिगड़ता है घर का माहौल, कभी न करें अनेदखा

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हिंदू धर्म (Hindu Mathalogy) में वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) और उसमें बताए गए उपायों का अपना एक विशेष महत्व हैं। वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) में साफतौर पर जानकारी दी गई है कि घर में सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा प्रभाव दिखता है। वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) के मुताबिक सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा को हम कई बार अनदेखा कर देते हैं। वहीं आगे चलकर हमारी परेशानी और दुख का कारण बनता है।





अपनाएं ये वास्तु टिप्स, घर में सकारात्मक उर्जा को होगा संचार





घर की ऊर्जा अगर सकारात्मक है तो प्रसन्नता और समृद्धि बनी रहती है। वहीं जब घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश हो जाता है तो ये घर की खुशियों को प्रभावित करनी लगती है। घर के सदस्यों पर नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव होने लगता है, जिससे कई तरह की परेशानियां घेर लेती हैं। घर में नकात्मक ऊर्जा है पता लगाया जा सकता है। घर में जब इस तरह की दिक्कतें महसूस होने लगें तो समझ लेना चाहिए कि नकारत्मक ऊर्जा अपना प्रभाव दिखा रही है।





  • घर की सुख-शांति प्रभावित होने लगती है।
  • घर के सदस्यों में वाद-विवाद की स्थिति बनने लगती है।
  • घर में कोई न कोई बीमार रहने लगता है।
  • जमा पूंजी अचानक नष्ट होने लगती है।
  • दांपत्य जीवन में कलह और तनाव की स्थिति बनने लगती है।
  • घर के वरिष्ठ सदस्यों के सम्मान में कमी आने लगती है।
  • बच्चे आपस में लड़ने-झगड़ने लगते हैं।
  • इस तरह की यदि परेशानियां महसूस होने लगें तो समझ जाना चाहिए कि घर की सकारात्मक ऊर्जा प्रभावित हो रही है।




नकारात्मक ऊर्जा को रोकने के लिए करें ये उपाय





घर में नकारात्मक ऊर्जा को रोकने के लिए वास्तु शास्त्र में कुछ प्रभावी उपाय बताए गए हैं। इनका पालन करके नकारात्मक ऊर्जा को घर से दूर किया जा सकता है। इसलिए इन बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।





  • सोने से पहले गंदे बर्तनों को धोकर रखना चाहिए।
  • सुबह और शाम घर में पूजा करनी चाहिए।
  • घर में साफ-सफाई और स्वच्छता के नियमों का पालन करना चाहिए।
  • मंगलवार को हनुमान चालीसा या सुदंरकांड का पाठ करना चाहिए।
  • शुक्रवार को शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर घी का दीपक जलाकर रखना चाहिए।
  • हफ्ते में एक बार नमक का पोंछा लगाना चाहिए।
  • कूडा करकट को जमा करके नहीं रखना चाहिए।




वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra Tips) में शांतिपूर्ण जीवन जीने के लिए बहुत सारे उपाय और विधि का वर्णन मिलता है। बहुत लोग इस बात को लेकर पूर्व धारणा बना लेते हैं कि वास्तु शास्त्र में परेशानियों का हल नहीं है। दरअसल वास्तु शास्त्र घर की नकारात्मक ऊर्जा (negative energy) को खत्म कर सकारात्मक ऊर्जा (positive energy) का संचार करता है। अगर घर में आर्थिक परेशानियां हैं तो वह उस घर में रहने वाले सदस्यों के जीवन को भी प्रभावित करती हैं।





Vastu Shastra : जूते-चप्पल पहनकर भूलकर भी न जाएं इन जगहों पर, आती है गरीबी और किल्लत





वास्तु शास्त्र में पारिवारिक हर समस्या का समाधान उपलब्ध है। लेकिन आवश्यकता इस बात की हो जाती है कि इसे किस प्रकार प्रयोग में लाया जाता है। वास्तु शास्त्र में घर का मुख्य दरवाजा बेहद खास महत्व रखता है।





घर की आर्थिक परेशानियां होंगी दूर(Vastu Shastra Tips)





बहुत लोग इस बात को लेकर पूर्व धारणा बना लेते हैं कि वास्तु शास्त्र में परेशानियों का हल नहीं है। दरअसल वास्तु शास्त्र घर की नकारात्मक उर्जा को खत्म कर सकारात्मक उर्जा का संचार करता है। यदि घर में आर्थिक परेशानियां हैं तो वह उस घर में रहने वाले सदस्यों के जीवन को भी प्रभावित करती हैं। वास्तु शास्त्र में पारिवारिक हर समस्या का समाधान उपलब्ध है। लेकिन आवश्यकता इस बात की हो जाती है कि इसे किस प्रकार प्रयोग में लाया जाता है। वास्तु शास्त्र में घर का मुख्य दरवाजा बेहद खास महत्व रखता है।





Vastu Shastra : इन चीजों को घर में फैलाकर रखने से बढ़ते हैं बीमारी और कलह





रोजाना कम से कम 20 मिनट के लिए अपने बेडरूम की खिड़कियों को खोलकर रखें। अगर आप ऐसा नहीं करते तो ये आपके कमरे के भीतर बची हुई नकारात्मक ऊर्जाओं को बाहर नहीं जाने देती। वास्तु शास्त्र के अनुसार बंद घड़ियां सौभाग्य के दरवाजों को भी बंद कर देती हैं। अगर आपके घर में कोई भी घड़ी बंद है तो उसे जल्द ही दुरुस्त कर लें या घर से बाहर कर दें।


आकाशीय बिजली से बचाव के लिए सावधानी जरूरी, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने जारी किया गाइडलाइन

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बारिश के दिनों में आकाशीय बिजली (गाज) गिरने की घटनाएं होती रहती है। छत्तीसगढ़ के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा वज्रपात, आकाशीय बिजली से बचने के लिए आम नागरिकों से सावधानियां बरतने की अपील की गई है। जिसके अंतर्गत आकाशीय बिजली चमकते या गरजते समय अगर घर में हो तो पानी का नल, फ्रिज, टेलीफोन को न छुएं और उससे दूर रहे। इसके साथ ही बिजली से चलने वाले यंत्रों, उपकरणों को बंद कर दें। अगर दो पहिया वाहन, साइकिल, ट्रक, खुले वाहन नाव पर सवार है तो तुरंत उतरकर सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं।





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वज्रपात, आकाशीय बिजली के दौरान वाहनों पर सवारी न करें, धातु की डंडी वाले छाते का उपयोग न करें, टेलीफोन और बिजली के खंभे और टेलीफोन-टेलीफोन टावर से दूर रहें, कपड़े सुखाने के लिए तार का प्रयोग न कर, जूट या सूत की रस्सी का उपयोग करें। बिजली की चमक देखकर और गड़गड़ाहट की आवाज सुनकर ऊंचे और एकल पेड़ों के पास नहीं जाएं। अगर आप जंगल में हो तो छोटे और घनें पेड़ों की शरण में चले जाए, पेड़ों दलदल वाले स्थलों और जलस्त्रोतों से जितना संभव हो दूर रहें।





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आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा कहा गया है कि खुले आकाश में रहने को बाध्य हो तो नीचे के स्थलों को चुनें, एक साथ कई आदमी इकट्ठे न हो, दो आदमी की दूरी कम से कम 15 फीट हो, तैराकी कर रहे लोग, मछुवारे जितना जल्दी हो सके पानी से बाहर निकल जाए, गीले खेतों में हल चलाते, रोपनी या अन्य काम कर रहे किसानों और मजदूरों या तालाब में कार्य रहे व्यक्ति तुरंत सूखे और सुरक्षित स्थान पर चले जाएं।





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धातु से बने कृषियंत्र, डंडा से अपने को दूर कर लें। अगर आप खेत-खलिहान में काम कर रहे हो या किसी सुरक्षित स्थान की शरण न ले पाए तो - जहां है वहीं रहे, हो सके तो पैरों के नीचे सूखी चीजें जैसे लकड़ी, प्लास्टिक, बोरा या सूखे पत्ते रख लें, दोनों पैरों को आपस में सटा लें और दोनों हाथों को घुटनों पर रखकर अपने सिर को जमीन की तरफ जितना जल्दी हो सके झुका लें। साथ ही सिर को जमीन से न छुआएं, जमीन पर कभी भी न लेंटे।





खुद को धात्विक संपर्क से बचाए





अपने घरों और खेल-खलिहानों के आस-पास कम ऊंचाई वाले उन्नत किस्म के फलदार वृक्ष समूह लगाएं, ऊंचे पेड़ के तनों या टहनियों में तांबे का एक तार स्थापित कर जमीन में काफ गहराई तक दबा दें ताकि पेड़ सुरक्षित हो जाए, मजबूत छत वाला पक्का मकान सबसे सुरक्षित स्थल है। अगर संभव हो तो अपने घरों में तड़ित चालक लगवा लें। यथा संभव खुले क्षेत्र में स्वयं को धात्विक संपर्क से बचाए रखना चाहिए।


खुलासा: एक माह में 14GB के बाद बेकार हो जाता है डाटा, जानिए क्यों और कैसे

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स्मार्टफोन यूजर्स को लुभाने के लिए देशभर की टेलीकॉम कंपनियां इन दिनों अपने ग्राहकों को रिझाने के लिए तमाम तरह के ऑफर लेकर आ रहे हैं। सभी कंपनियां आपको डेटा, अनलिमिटेड कॉलिंग और SMS की सुविधा दे रही हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि एक यूजर महीने में कितना डाटा खर्च करता है। एरिक्सन मोबिलिटी की रिपोर्ट के मुताबिक देश में आमतौर पर यूजर आधे से भी कम डाटा प्रति दिन खर्च कर पाते हैं। लिहाजा महीने में वे मुश्किल से 14GB डाटा ही यूज कर पाते हैं, इसके बाद का पैक बेकार हो जाता है।





अगर आप भी सोशल मीडिया पर शेयर करते है कोई अश्लील कंटेट तो सावधान !! पढ़ें पूरी खबर





रिपोर्ट के मुताबिक भारत में मोबाइल ऑपरेटर्स यूजर्स को 28 दिनों के लिए रोजाना 2GB से 3GB डाटा की पेशकश करते हैं। ऐसे में अगर पूरी वैधता के दौरान देखा जाए तो यह डाटा 56GB से 84GB तक होता है, लेकिन ज्यादातर यूजर्स दैनिक आधार पर पूरा डाटा खत्म नहीं कर पाते हैं। स्मार्टफोन यूजर का औसत ट्रैफिक 2020 में 14.6GB प्रति माह दर्ज किया गया है। ये साल 2019 के मुकाबले ज्यादा है। उस दौरान यूजर्स प्रति माह 13GB डाटा ही इस्तेमाल कर पाए थे।





5G आने पर बढ़ सकता है डाटा का इस्तेमाल





एरिक्सन ने अनुमान लगाया है कि साल 2026 के आखिरी तक 5G नेटवर्क के आते ही भारत में डाटा यूजर्स की संख्या में बढ़ोत्तरी होगी। साथ ही रोजाना डाटा खर्च करने के आंकड़ों में भी बढ़ोत्तरी होगी। उस दौरान 40GB तक इस्तेमाल बढ़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया कि 'भारत में प्रति स्मार्टफोन औसत ट्रैफिक विश्व स्तर पर दूसरे स्थान पर है। यह 2026 में प्रति माह लगभग 40GB तक बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है।'





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2026 के आखिरी तक 5G नेटवर्क भारत में लगभग 26 फीसद मोबाइल सब्सक्रिप्शन को कवर करेगा। इसका अनुमान लगभग 330 मिलियन सब्सक्रिप्शन हैं। 2026 में 66 फीसद मोबाइल सब्सक्रिप्शन को कवर करते हुए 4G मार्केट में अपनी जगह बनाए रखेगा इस समय माना जा रहा है कि 3G को खत्म कर दिया जाएगा।


साइबर ठगों पर नकेल कसने केंद्रीयकृत हेल्पलाइन नंबर जारी, अब साइबर ठगों की खैर नहीं

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देश में दूसरे गंभीर अपराधों के साथ ही साइबर अपराध (Cyber crime in india) के मामले भी रोजाना बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में गृह मंत्रालय (Union Home Ministry) ने साइबर फ्रॉड से जुड़ी शिकायतों के निपटारे के लिए एक केंद्रीयकृत हेल्पलाइन नंबर 155260 जारी किया है। इस नंबर पर किसी भी तरह के इंटरनेट बैंकिंग समेत ऑनलाइन फाइनेंस से संबंधित धोखाधड़ी की शिकायत की जा सकेगी। इस हेल्पलाइन नंबर 155260 का संचालन संबंधित राज्य की पुलिस द्वारा किया जाता है। शिकायत के बाद संबंधित एजेंसियां उस पैसे को ढूंढकर वापस कराने का काम करेंगी।





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गृह मंत्रालय ने इस हेल्पलाइन की कार्यप्रणाली की जानकारी देते हुए कहा कि यह एक केंद्रीयकृत प्रणाली है, जिसके तहत ठगी से संबंधित सभी एजेंसियों को एक साथ जोड़ा जाता है। ठगी की शिकायत मिलने के तत्काल बाद शिकायत नंबर के साथ विस्तृत जानकारी उस बैंक या ई-वॉलेट के पास भेज दी जाती है, जिस बैंक में ठगी का पैसा गया होता है। बैंक के सिस्टम में यह जानकारी फ्लैश करने लगती है। अगर पैसे संबंधित बैंक या वालेट के पास ही हैं, तो वह उसे तत्काल फ्रीज कर देगा। अगर पैसा किसी और बैंक या वालेट में चला गया हो तो वह उसे संबंधित बैंक या वालेट को भेज देगा।





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यह प्रक्रिया तब तक चलती रहेगी, जब तक उस पैसे की पहचान कर उसे फ्रीज नहीं कर दिया जाता। वहीं दूसरी ओर शिकायतकर्ता को SMS से शिकायत दर्ज किए जाने की सूचना और इसका एक नंबर दिया जाएगा। साथ ही 24 घंटे के अंदर नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर ठगी की विस्तृत जानकारी देने का निर्देश दिया जाएगा। गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि साइबर ठगी के शिकार लोगों को उनकी रकम वापस कराने में यह हेल्पलाइन नंबर काफी सफल साबित हुआ है।





1 करोड़ ज्यादा रकम को लौटाया गया वापस





दरअसल, मंत्रालय ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर लांच करने के पहले एक अप्रैल को दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ में सॉफ्ट लॉन्च किया गया था। दो महीने के अंतराल में हेल्पलाइन की मदद से ठगी के 1.85 करोड़ रुपये वापस दिलाने में सफलता मिली है। इनमें दिल्ली में 58 लाख और राजस्थान में 52 लाख रुपये वापस कराए गए। खास बात यह है कि राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर होते हुए सभी राज्यों में स्थानीय पुलिस ही इसका संचालन करेगी। इससे संबंधित राज्यों में स्थानीय भाषाओं में लोग आसानी से ठगी की शिकायत कर सकेंगे। गृह मंत्रालय के मुताबिक लगभग सभी राज्य इस हेल्पलाइन नंबर को चालू करने के लिए तैयार हो गए हैं और जल्द ही यह काम करना शुरू कर देगा।





पुलिस करेगी तत्काल कार्रवाई





हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करने के बाद संबंधित पुलिस ऑपरेटर ठगी के शिकार हुए व्यक्ति के लेनदेन का ब्यौरा और डिटेल्स लिखता है। इस जानकारी को नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग और प्रबंधन प्रणाली पर एक टिकट के रूप में दर्ज किया जाता है। फिर यह टिकट संबंधित बैंक, वॉलेट्स, मर्चेंट्स तक तेजी से पहुंचाया जाता है और यह इस बात पर निर्भर करता है कि वे इस पीड़ित के बैंक हैं या फिर वे बैंक-वॉलेट हैं, जिनमें धोखाधड़ी का पैसा गया है।





पैसा वापस लौटाने के लिए की जाएगी हर संभव कोशिश





फिर पीड़ित को एक SMS भेजा जाता है, जिसमें उसकी शिकायत की पावती संख्या होती है और साथ ही निर्देश होते हैं कि इस पावती संख्या का इस्तेमाल करके 24 घंटे के अंदर धोखाधड़ी का पूरा विवरण राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (https://cybercrime।gov।in/) पर जमा करें। अब संबंधित बैंक, जो अपने रिपोर्टिंग पोर्टल के डैशबोर्ड पर इस टिकट को देख सकता है, वह अपने आंतरिक सिस्टम में इस विवरण की जांच करता है। अगर धोखाधड़ी का पैसा अभी भी मौजूद है तो बैंक उसे रोक देता है, यानी जालसाज उस पैसे को निकलवा नहीं सकता है। अगर वह धोखाधड़ी का पैसा दूसरे बैंक में चला गया है तो वह टिकट उस अगले बैंक को पहुंचाया जाता है, जहां पैसा चला गया है। इस प्रक्रिया को तब तक दोहराया जाता है जब तक कि पैसा जालसाजों के हाथों में पहुंचने से बचा नहीं लिया जाता।


Sushant Singh Rajput की पुण्यतिथि आज, जानिए सुशांत के 39 वो सपने जो रह गए हमेशा के लिए अधूरे

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बॉलीवुड के दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की आज पहली पुण्यतिथि है। बता दें कि आज ही के दिन यानी 14 जून 2020 को सुशांत अपने बांद्रा स्थित फ्लैट में मृत पाए गए थे। लेकिन उनको प्यार करने वाले प्रशंसकों और उनके परिवार के लिए ये स्वीकारना बहुत ही कठिन है कि आज ये बहुप्रतिभाशाली कलाकार हमारे बीच नहीं रहा।





चांद पर जमीन खरीदने वाले पहले अभिनेता थे सुशांत सिंह





टीवी से लेकर फिल्मों तक का शानदार सफर तय करने वाले सुशांत सिंह राजपूत आज भी सभी के दिलों में जिंदा हैं। दिवंगत अभिनेता सुशांत की पहली बरसी पर उनके फैंस लगातार उन्हें याद कर रहे हैं और सोशल मीडिया पर उन्हें लेकर अपनी यादें शेयर कर रहे हैं। सुशांत जैसे चमकते सितारे के बारे में ये खबर सुनकर पूरा देश दुखी था। एक्टर की जिंदगी भले ही बहुत छोटी ही रही हो, लेकिन उनका सफर बहुत बड़ा और तगड़ा रहा। उनके निधन के बाद लोगों ने कहा था की वो कई महीनों से डिप्रेशन से लड़ रहे थे। किसी ने कहा कि वो बीमार थे, लेकिन उनका जाना किसी को समझ नहीं आया। क्योंकि सुशांत के पास सपने थे। जो उनके अपने थे।









सुशांत सिंह राजपूत की पहली बरसी पर हम उनके उन 39 सपनों के बारे में जानकारी दे रहे हैं, जो अब हमेशा के लिए अधूरे रह गए हैं। निधन के कुछ दिनों पहले ही सुशांत ने अपनी विश लिस्ट को अपने फैंस के साथ शेयर किया था। सुशांत के 50 सपनों की लिस्ट आज हम आपके साथ शेयर कर रहे हैं, लेकिन इनमें कुछ ही सपने थे, जो वो पूरे कर पाए थे।





हवाई जहाज उड़ाने से लेकर फोर क्लैप पुश-अप करना...






https://twitter.com/itsSSR/status/1172733918417604608




एक हफ्ते के लिए चार्ट प्रक्षेपवक्र को देखने से लेकर कैलाश में ध्यान करना...






https://twitter.com/itsSSR/status/1172751475463708673




1 विजेता के साथ पोकर खेलने से लेकर डिज्नीलैंड जाने का सपना...






https://twitter.com/itsSSR/status/1172753250375757829




लीगो जाने से लेकर एक सक्रिय ज्वालामुखी को कैमरे में कैद करने का सपना...






https://twitter.com/itsSSR/status/1172804669690847234




बच्चों को डांस सिखाने से लेकर लैंबर्गिनी खरीदने का सपना...






https://twitter.com/itsSSR/status/1172805034138054656




ट्रेन में बैठकर पूरा यूरोप घूमने का सपना...






https://twitter.com/itsSSR/status/1172806176670724096




सुशांत सिंह राजपूत के 39 वो सपने जो अब कभी पूरे नहीं हो सकते हैं, क्योंकि वो अब हमारे बीच नहीं हैं।





  • चौथा सपना – मोर्स कोड सीखना।
  • पांचवा सपना – बच्चों को स्पेस के बारे में सीखने में मदद करना था।
  • 6वां सपना – सुशांत सिंह राजपूत किसी टेनिस के चैंपियन के साथ मैच खेलना चाहते थे।
  • 7वां सपना – फ्लोर क्लैप पुशअप्स करना।
  • 8वां सपना – एक हफ्ते तक चन्द्रमा, मंगल, बृहस्पति और शनि ग्रह को घूमते हुए देखना.
  • 10वां सपना – डबल स्लिट एक्सपेरिमेंट को एक बार करके देखना।
  • 11वां सपना – हजार पेड़ लगाना।
  • 13वां सपना – 100 बच्चों को नासा वर्कशॉप के लिए भेजना।
  • 14वां सपना – कैलाश में मेडिटेशन करना।
  • 15वां सपना – चैंपियन क साथ पोकर खेलना।
  • 16वां सपना – किताब लिखना।
  • 18वां सपना – ध्रुवीय रोशनी को देखते हुए पेंट करना।
  • 19वां सपना – नासा का एक और वर्कशॉप अटेंड करना।
  • 20वां सपना – छह महीने के भीतर सिक्स पैक एब्स बनाना।
  • 22वां सपना – जो लोग नहीं देख सकते उन्हें कोडिंग सिखाना।
  • 23वां सपना – जंगल में एक हफ्ते गुजारना।
  • 24वां सपना – वैदिक ज्योतिषशास्त्र को समझना।
  • 26वां सपना- लीगो की लैब देखने जाना।
  • 27वां सपना – एक घोड़ा पालना।
  • 28वां सपना – 10 तरह के डांस फॉर्म सीखना।
  • 29वां सपना – फ्री एजुकेशन के लिए काम करना।
  • 31वां सपना – क्रिया योग सीखना।
  • 32वां सपना – अंटार्कटिका घूमने जाना और महिलाओं की स्वरक्षा की ट्रेनिंग के लिए मदद करना।
  • 33वां सपना – महिलाओं की स्वरक्षा की ट्रेनिंग के लिए मदद करना।
  • 34वां सपना – एक सक्रिय ज्वालामुखी को कैमरे में कैद करना।
  • 35वां सपना – खेती सीखना।
  • 36वां सपना – डदस डांस फॉर्म को सीखना।
  • 38वां सपना – रेसनिक-हेलिडे की मशहूर भौतिकी की किताब पढ़ना।
  • 39वां सपना – पॉलिनेसियन एस्ट्रोनॉमी को समझना।
  • 40वां सपना – अपने मशहूर 50 गानों को गिटार पर बजाना सीखना।
  • 41वां सपना- चैंपियन के साथ शतरंज खेलना।
  • 42वां सपना – लैंबर्गिनी खरीदना।
  • 43वां सपना – वियना के सेंट स्टिफन कैथेड्रेल जाना।
  • 45वां सपना – इंडियन डिफ़ेंस फोर्सेज के लिए बच्चों को तैयार करना।
  • 46वां सपना – स्वामी विवेकानंद पर एक डॉक्यूमेंट्री बनाना।
  • 47वां सपना – सर्फिंग करना।
  • 48वां सपना – आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर काम करना।
  • 49वां सपना – ब्राजील की डांस और मार्शल आर्ट फॉर्म सीखना।
  • 50वां सपना – ट्रेन में बैठकर पूरा यूरोप घूमना।




ऐसा नहीं है कि उनका कोई सपना पूरा नहीं हुआ है। सुशांत सिंह राजपूत ने अपने 50 सपनों में से सिर्फ 11 ही सपने पूरे किए थे। जानिए सुशांत ने कौन-कौन से सपने पूरे किए थे।





सुशांत का पहला सपना






https://twitter.com/itsSSR/status/1177153151234764800




सुशांत सिंह राजपूत का पहला सपना प्लेन उड़ाने का था, जिसे उन्होंने पूरा कर लिया था। सुशांत ने प्लेन उड़ना सीख लिया था।





सुशांत का दूसरा सपना






https://twitter.com/itsSSR/status/1181915801835540480




सुशांत सिंह राजपूत ने अपना दूसरा सपना पूरा करते हुए अपने आप को आयरनमैन ट्रायथलॉन के लिए ट्रेन करना शुरू कर दिया था।





सुशांत का तीसरा सपना






https://twitter.com/itsSSR/status/1182175409548464128




सुशांत सिंह राजपूत ने अपना तीसरा सपना पूरा करते बाएं हाथ से क्रिकेट मैच खेलना शुरू कर दिया था।





सुशांत का नौवां सपना






https://twitter.com/itsSSR/status/1181105596155731968




सुशांत सिंह राजपूत का नौवां सपना ब्लू होल में जाकर तैरना था, जो वो पूरा कर चुके थे।





सुशांत का 12वां सपना






https://twitter.com/itsSSR/status/1178299507479474177




सुशांत सिंह राजपूत का 12वां सपना अपने कॉलेज में जाकर एक शाम बिताने का था, जो वो पूरा कर चुके थे।





सुशांत का 17वां सपना






https://twitter.com/itsSSR/status/1176736414391603200




सुशांत सिंह राजपूत का 17वां सपना को सर्न पर जाना था, जहां वो पहुंच चुके थे।





सुशांत का 21वां सपना






https://twitter.com/itsSSR/status/1177956930301480962




सुशांत सिंह राजपूत का 21वां सपना सेनोट्स में तैरने का था, जो भी वो पूरा कर चुके थे।





सुशांत का 25वां सपना






https://twitter.com/itsSSR/status/1181594589158891521




सुशांत सिंह राजपूत का 25वां सपना डिज्नीलैंड पार्क जाने का था, जहां वो जाकर आ चुके थे।





सुशांत का 30वां सपना






https://twitter.com/itsSSR/status/1180057436557889536




सुशांत सिंह राजपूत का 30वां सपना एक शक्तिशाली दूरबीन के माध्यम से एंड्रोमेडा को देखने का था, जो भी वो पूरा कर चुके थे।





सुशांत का 37वां सपना






https://twitter.com/itsSSR/status/1177579248938151937




सुशांत सिंह राजपूत का 37वां सपना एक तीरंदाज बनने का था, जिसकी तैयारी भी वो शुरू कर चुके थे।





सुशांत का 44वां सपना






https://twitter.com/itsSSR/status/1182334197756780544




सुशांत सिंह राजपूत का 44वां सपना Cymatics के प्रयोग का था, जो वो पूरा कर चुके थे।


अगर आप भी करना चाहते है बैंक में जॉब तो ऐसे करें अप्लाई

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अगर आप भी बैंक में जॉब करना चाहते हैं तो बैंक में नौकरी पाने के लिए आपके पास ये सुनहरा अवसर है। दरअसल, इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सेलेक्शन (IBPS) ने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRB) में ऑफिसर्स (स्केल- I, II & III) और ऑफिस असिस्टेंट (मल्टीपर्पज) के पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इन पदों के लिए आवेदन 8 जून से 28 जून 2021 तक स्वीकार किए जाएंगे।





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इच्छुक और योग्य अभ्यर्थी IBPS की आधिकारिक  वेबसाइट www.ibps.in  पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। नोटिफिकेशन के मुताबिक IBPS भर्ती के लिए प्रारंभिक परीक्षा ऑनलाइन माध्यम से अगस्त 2021 में आयोजित की जाएगी। जबकि मुख्य परीक्षा सितंबर-अक्टूबर 2021 में आयोजित की जाएगी।





योग्यता और आयु सीमा





किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक पास अभ्यर्थी RRB ऑफिसर्स और ऑफिस असिस्टेंट पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं। ऑफिस असिस्टेंट पद के लिए अभ्यर्थी की आयु सीमा 18-28 साल निर्धारित की गई है, जबकि ऑफिसर पद के लिए 18-40 साल (स्केल के अनुसार अलग-अलग) तय की गई है। अधिसूचना के मुताबिक उम्र की गणना 1 जून, 2021 के अनुसार की जाएगी। शैक्षणिक योग्यता और आयु से संबंधित विस्तृत जानकारी के लिए आधिकारिक अधिसूचना वेबसाइट पर जाकर देख सकते हैं।





स्वरोजगार स्थापित करने के लिए युवाओं के लिए सुनहरा अवसर





शिक्षित बेरोजगार युवक और युवतियों जो स्वयं का रोजगार स्थापित करना चाहते हैं, उनके लिए मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के अंतर्गत जिला व्यापार और उद्योग केंद्र, अंबिकापुर में आवेदन पत्र 30 जून तक आमंत्रित किया जा रहा है। योजना के तहत व्यवसाय के लिए अधिकतम 2 लाख तक, सेवा के लिए अधिकतम 10 लाख तक और उद्योग के लिए अधिकतम 25 लाख तक राष्ट्रीयकृत बैंकों के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराये जाने का प्रावधान है।





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छोटे बच्चों को न्यूमोकोकल बीमारी से बचाने के लिए लगाई जाएगी वैक्सीन





आवेदक को न्यूनतम 8 वीं कक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य है और छत्तीसगढ़ राज्य का मूल निवासी हो। आवेदक की आयु 18 से 35 साल के मध्य होना चाहिए अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग महिला, निःशक्तजन उद्यमी, नक्सल प्रभावित परिवार के सदस्य सेवानिवृत्त सैनिक के लिए अधिकतम आयु सीमा में 5 साल की छूट प्रदान की जाएगी। आवेदक किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक और वित्तीय संस्था और सहकारी बैंक का चेककर्ता न हो आवेदक के परिवार की वार्षिक आय रूपये 3 लाख से अधिक नहीं होना चाहिए।





ऐसे कर सकते हैं अप्लाई





आवेदक को दो प्रतियों में आवेदन के साथ विस्तृत परियोजना प्रपत्र, राशन कार्ड, स्थाई निवास प्रमाण पत्र मतदाता पहचान पत्र, ड्रायविंग लाइसेंस, शैक्षणिक योग्यता का प्रमाण पत्र सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी निःशक्तजन और भूतपूर्व सैनिक अल्पसंख्यक जाति संबंधी प्रमाण पत्र संलग्न करना होगा। योजना के संबंध में विस्तृत जानकारी और आवेदन पत्र प्राप्त करने के लिए जिला व्यापार और उद्योग केन्द्र अंबिकापुर जिला सरगुजा में सम्पर्क कर आवेदन कार्यालय समय में प्राप्त और जमा कर सकते हैं।





इच्छुक युवा 23 जून तक कर सकते हैं आवेदन जमा





मुख्यमंत्री युवा स्व-रोजगार योजना छत्तीसगढ़ राज्य के युवाओं को स्वरोजगार योजना के अंतर्गत अधिकतम 25 लाख रूपए, विनिर्माण क्षेत्र में अधिकतम रूपए 10 लाख रूपए तक, सेवा क्षेत्र में अधिकतम 2 लाख रूपए तक, व्यवसाय क्षेत्र में वित्तीय संसाधनों के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। महाप्रबंधक जिला व्यापार और उद्योग महासमुंद द्वारा जानकारी दी गई कि इच्छुक युवा जिनकी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 8वीं उत्तीर्ण हैं और जिनकी आयु 18 से 35 वर्ष के बीच हैं, जो छत्तीसगढ़ राज्य का मूल निवासी है, जिनकी परिवार की वार्षिक आय 3 लाख रूपए से अधिक नहीं है।





अंतिम तिथि 23 जून 2021 तक





वे इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। ऐसे इच्छुक आवेदक जिला व्यापार और उद्योग केन्द्र महासमुन्द में निर्धारित प्रपत्र में आवेदन निःशुल्क प्राप्त कर सकते है। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 23 जून 2021 है। अधिक जानकारी के लिए महाप्रबंधक जिला व्यापार और उद्योग केन्द्र महासमुंद में संपर्क कर सकते हैं।


चाणक्य के मुताबिक विचारों में स्पष्टता रखने से नहीं होता है लक्ष्य से भटकाव

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आचार्य चाणक्य जिन्हें कौटिल्य और विष्णुगुप्त के नाम से भी जाना जाता है, आचार्य चाणक्य का जन्म ईशा से 350 वर्ष पूर्व हुआ था, जिन्होंने अर्थशास्त्र और नीतिशाश्त्र (Economics and Ethics) की रचना की थी। जिसे ‘चाणक्य नीति’ (Chanakya Niti ) भी कहा जाता है। भले ही चाणक्य द्वारा लिखी गई बाते बहुत पुरानी हो, लेकिन उनके द्वारा कहे गये कथन आज भी उतने सटीक और सही साबित (Chanakya Niti For Successful Life) होती है।





चाणक्य के मुताबिक गलती से भी किसी को नहीं बतानी चाहिए ये 5 बातें, नहीं तो भुगतना पड़ सकता है भारी नुकसान





आचार्य चाणक्य की नीतियां (Chanakya Niti) और विचार भले ही आपको थोड़े कठोर लगे, लेकिन ये कठोरता ही जीवन की सच्चाई है। हम लोग भागदौड़ भरी जिंदगी में इन विचारों को भले ही नजरअंदाज कर दें, लेकिन ये वचन जीवन की हर कसौटी पर आपकी मदद करेंगे। आचार्य चाणक्य के इन्हीं विचारों में से आज हम एक और विचार का विश्लेषण करेंगे। आज का ये विचार विचारों में रखें स्पष्टता रखने से संबंधित है।





चाणक्य नीति : चाणक्य के मुताबिक लक्ष्य प्राप्त करने के लिए जरूर रखें इस बातों का ध्यान





सामान्य जीवन में लोग किसी काम को जोर शोर से शुरू करते हैं। थोड़े समय बाद उनके विचार बदलने लगते हैं। वे काम से निराश होने लगते हैं। कई बार तो वे कार्य बदलने तक के लिए तैयार हो जाते हैं। ऐसा होना स्वाभाविक भी है। हालांकि, ऐसा तभी होता है जब व्यक्ति के विचार स्पष्ट नहीं होते हैं। उसे अपनी शिक्षा, अनुभव और चिंतन पर भरोसा नहीं होता है।





चाणक्य के मुताबिक सुखी जिंदगी जीने के लिए ये बातें हैं जरूरी, जानिए क्या ?





आचार्य विष्णुगुप्त चाणक्य सदैव विचारों पर दृढ़ता से कायम रहे। उन्होंने प्रत्येक विषय पर पूर्ण चिंतन मनन के बाद निर्णय की स्थापना की। उस निर्णय पर हर संभव कायम रहे। इसी का परिणाम रहा कि एक साधारण शिक्षक विदेशी आक्रांताओं से देश की रक्षा कर पाया। स्वदेश में भी भ्रष्ट व्यवस्था को उखाड़ फेंकने में कामयाब रहा। आचार्य ने कोई कार्य व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए नहीं किया।





चाणक्य नीति : चाणक्य के मुताबिक धन के मामले में नहीं करनी चाहिए इस तरह की गलतियां





वे देश समाज और संस्कृति को समर्पित रहे। इनकी रक्षा को उत्पन्न विचारों पर दृढ़ रहे। इसी कारण उनके लक्ष्य स्पष्ट रहे। लक्ष्यों में भटकाव नहीं आया। न ही वे उनसे विचलित हुए और न ही ऊबे। चाणक्य का कालखंड हो या वर्तमान काल व्यवहार के सामान्य नियम एक प्रकार के ही होते हैं। इस पर चाणक्य की जीवनशैली हमें प्रेरित करती है कि हमें किस प्रकार आगे बढ़ना चाहिए।





चाणक्य नीति : जानिए जिस मनुष्य में होता है ये गुण, उसे पूरी दुनिया मिलकर भी नहीं हरा सकती





एक बार यात्रा के दौरान चाणक्य को कांटा चुभ गया। चाणक्य ने नजदीक गांव से मठा या कहें छाछ लाकर उसमें मिश्री घोलकर डाल दी। उनके शिष्यों ने जब चाणक्य से पूछा कि गुरुदेव आपने ऐसा क्यों किया? इस पर चाणक्य बोले कि यह पेड़ मेरी तरह कई राहगीरों को तकलीफ पहुंचाता। इसके कांटे कई पथिकों के कंटक बनते। अब चीटिंया इस पेड़ को नष्ट कर मार्ग को निष्कटंक कर देंगी। यह बात सिर्फ मेरे तक सीमित रहती तो कदापि मैं ऐसा नहीं करता।





चाणक्य के मुताबिक लोगों को बुद्धि से लेना चाहिए काम, धन पर निर्भरता ठीक नहीं





चाणक्य की चाणक्य नीति जीवन में सफल बनाने के लिए प्रेरित करती है। चाणक्य नीति व्यक्ति को अंधेर से निकाल कर रोशनी तरफ ले जाती है। यही कारण है आज भी बड़ी संख्या में लोग चाणक्य की चाणक्य नीति का अध्ययन और अनुकरण करते हैं। चाणक्य की शिक्षाएं वास्तविकता के काफी करीब हैं। यह वजह है कि आज भी चाणक्य की नीति की प्रासंगिकता बनी हुई है।





चाणक्य नीति: आचार्य चाणक्य के मुताबिक इन लोगों से दोस्ती और प्यार करना होता है बेहतर





आचार्य चाणक्य महान राजनीतिज्ञ और अर्थशास्त्री थे। आचार्य का भारत की दो प्रमुख शिक्षा संस्थाओं तक्षशिला और नालंदा विश्वविद्यालय में महत्वपूर्ण योगदान है। आचार्य ने पश्चिमी सीमाई राज्यों को आक्रांताओं के आक्रमण और अधिग्रहण से बाहर निकलने में सहायता की। मगध जनपद को धननंद के आतंक से मुक्त कराया।





चाणक्य नीति : चाणक्य के मुताबिक झूठ, धोखा और दूसरों की बुराई करने वालों को कभी नहीं मिलता सम्मान





चाणक्य की गिनती भारत के श्रेष्ठ विद्वानों में की जाती है। चाणक्य को अर्थशास्त्र के साथ साथ समाजशास्त्र, राजनीति शास्त्र, कूटनीति शास्त्र और सैन्य शास्त्र के भी ज्ञाता थे। आचार्य चाणक्य का संबंध विश्व प्रसिद्ध तक्षशिला विश्व विद्यालय से भी था। चाणक्य ने तक्षशिला विश्व विद्यालय से शिक्षा प्राप्त की थी और बाद में वे इसी विद्यालय में आचार्य हुए। चाणक्य ने हर उस रिश्ते के बारे में भी जानने और समझने की कोशिश की जो मनुष्य को सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं।


तेज बुखार के साथ सिर, आंख और शरीर में दर्द हो सकते हैं डेंगू के लक्षण

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कोरोना संक्रमण के दौरान आने वाले बुखार और शरीर में दर्द जैसे लक्षण डेंगू के हो सकते हैं। इस लिए मानसून आने के साथ ही डेंगू रोग के संक्रमण से बचाव के लिए लोगों में जागरूकता बढ़ाना जरुरी होता है। राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत 16 मई को हर साल स्वास्थ्य विभाग द्वारा राष्ट्रीय डेंगू दिवस मनाया जाता है। वर्तमान में कोविड-19 के संक्रमण को देखते हुए जागरुकता रैली निकालने सहित गतिविधियां संभव नहीं है। ऐसे में राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के राज्य कार्यक्रम अधिकारी ने सभी जिलों के CMHO और जिला मलेरिया अधिकारियों को वर्चुवल मीटिंग, सोशल मिडिया, बैनर, पोस्टर सहित हैंडबिल के माध्यम से प्रचार कर लोगों को जागरुक करने गतिविधियां संचालित करने का निर्देश दिया हैं।





राज्य सरकार के वित्त विभाग ने सभी विभागो को जारी किया आदेश, कोरोना संकट के बावजूद न तो भर्ती प्रक्रिया रूकेगी, न एरियर और वेतनवृद्धि





शहर और गांवों में मितानिन और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा दीवार पर नारे लेखन का काम किया जाएगा| स्थानीय स्तर पर फ्रंट लाइन हेल्थ वर्कर को कोविड-19 गाइड लाइन का पालन करते हुए सामाजिक दूरी, मास्क और सैनिटाइजर का उपयोग करना होगा । CMHO डॉ. एसके शर्मा के मुताबिक डेंगू से बचाव के लिए आम लोगों को सजग होना जरुरी है। यह मच्छर साफ पानी में पनपता है इसलिए घर या आसपास कहीं भी इसे जमा नहीं होने दें।





मलेरिया नियंत्रण अधिकारी ने दी जानकारी





वहीं जिला मलेरिया नियंत्रण अधिकारी डॉ. ज्योति अनिल जसाठी ने कहा कि जिले में अभी तक डेंगू का एक भी केस सामने नहीं आया है। इससे निपटने के लिए शहरी क्षेत्र में नगर निगम प्रशासन को जलजमाव नहीं होने देने और फॉगिंग कराने के लिए निर्देश दिए गए हैं। जिले के चारों ब्लॉकों में सभी PHC प्रभारी के माध्यम से ग्राम स्तर पर ब्लीचिंग पाउडर और चूने का छिड़काव कराने के साथ आमजन को जागरूक करने वाले हैंडबिल वितरित किए जाएंगे। यह बीमारी मानसून के समय आती है और इसी समय सबसे ज्यादा लोग इस बीमारी से पीड़ित होते हैं। मानसून के साथ डेंगू के मच्छरों के पनपने का मौसम भी शुरू होता है।





कब पनपते हैं डेंगू के मच्छर?





डेंगू के मच्छर अधिकतर जुलाई से अक्टूबर के बीच ही पनपते हैं। इस मौसम में मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां होती हैं। एडीज मच्छर 3 फीट से ज्यादा ऊंचाई तक नहीं उड़ पाता है। एडीज मच्छर गर्म से गर्म माहौल में भी जिंदा रह सकता है। मानसून के समय पानी इकठ्ठा होने से डेंगू के मच्छर पनपने का अधिक खतरा रहता है। इसलिए गर्मियों की शुरुआत के साथ ही और लोगों के घरों में कूलर लगने के बाद ही बारिश में स्वास्थ्य विभाग घरों में कूलर में पानी जमा होने की चेकिंग शुरू कर देते हैं। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है की यह बीमारी अभी भी उतनी ही घातक है और इसे लेकर पूरी जानकारी होना बेहद जरूरी है।





डेंगू का मच्छर आम मच्छर से होता है अलग





डेंगू के मच्छर का नाम एडीज बताया गया है। इस मच्छर के काटने से डेंगू की बीमारी होती है। यह आम मच्छरों से अलग होता है। बता दें कि यह मच्छर अधिकतर रोशनी में काटते हैं। कई रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि यह मच्छर सुबह के वक्त काटते हैं। सुबह और दिन के वक्त या जब रोशनी हो तो इसका अधिक ध्यान रखने की जरूरत होती है। एडीज ज्यादा ऊंचाई तक उड़ने में सक्षम नहीं होता और यही कारण है की यह अधिकतर घुटनो के नीचे काटता है। यह एक भ्रम है की डेंगू के मच्छर सिर्फ गंदे पानी में पनपते हैं। साफ-सुथरे इलाकों में और साफ-सुथरे पानी में यह मच्छर पनपते हैं तो सभी को इसका ध्यान रखने की जरूरत है।





डेंगू बुखार के लक्षण





मादा एडीज यानी अगर डेंगू मच्छर अगर काटे तो इसके कुछ दिनों बाद लक्षण दिखने शुरू होते हैं । ठंड के साथ तेज बुखार, सिर, आंखों, मांसपेशियों और जोड़ों में तेज दर्द, कमजोरी, भूख न लगना, चेहरे, गर्दन और छाती पर लाल चकत्ते इसके लक्षण है ।





कैसे करें बचाव?





  • साफ या गंदा पानी जमा कर के न रखें।
  • कूलर के पानी को भी 7 दिन में बदलें और हो सके तो उसमें थोड़ा सा मिट्टी का तेल डाल दें।
  • पानी की टंकी को ढक्कन से ढक कर रखें।
  • खिड़कियों को जाली या शीशे से बंद कर के रखें और दरवाजे भी बंद कर के रखें ताकि मच्छर घर में न आ सकें।
  • मच्छरों से बचने के लिए मच्छरदानी या स्प्रे का प्रयोग करें।
  • एक्वेरियम, फूलदान में हर हफ्ते पानी बदलें।




तीन प्रकार का होता है डेंगू





सामान्य या क्लासिकल - बुखार के साथ तेज दर्द, और शरीर पर दाने लेकिन यह चार से पांच दिन में बिना दवा ठीक हो जाता है। कुछ लोगों को सामान्य दवाएं दी जाती हैं।





डेंगू हैमरेजिक - यह खतरनाक होता है और प्लेटलेट और व्हाइट ब्लड सेल्स की संख्या कम हो जाती है। नाक और मसूढ़ों से खून आना, शौच या उल्टी में खून आना या स्किन पर गहरे नीले-काले रंग के चकते जैसे लक्षण भी हो सकते हैं।





डेंगू शॉक सिंड्रोम - इसमें मरीज धीरे-धीरे होश खोने लगता है। बीपी और नब्ज की गति कम हो जाती है। तेज बुखार के बावजूद स्किन ठंडी लगती है।


कोविड की तीसरी लहर बच्चों के लिए हो सकती है ज्यादा खतरनाक: एक्सपर्ट

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देश में कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। कोरोना की दूसरी लहर ज्यादा घातक साबित हो रही है। ऐसे में अब जानकारों का मानना है कि कोरोना की तीसरी लहर भी जल्द ही आएगी, लेकिन ये लहर बच्चों के लिए ज्यादा घातक होगी। ऐसे में बच्चों को कोरोना की तीसरी लहर से बचाना बहुत जरूरी है।





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वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन के सलाहकार का कहना है कि कोरोना से बच्चों की सुरक्षा करने से पहले बड़ों को खुद अपनी सुरक्षा करनी पड़ेगी क्योंकि अगर बड़े सुरक्षित होंगे, तभी बच्चे भी सुरक्षित रह पाएंगे। उन्होंने बच्चों की सुरक्षा को लेकर तीन बड़े सुझाव दिए हैं। डॉ. बेदी ने बताया कि कोरोना के चलते बच्चों के स्कूल बंद हैं। कोरोना की वजह से बच्चे बाहर खेलने के लिए भी नहीं जा रहे हैं, लेकिन घर के जिम्मेदार लोग कामकाज के लिए घर से बाहर जा रहे हैं। ऐसे में घर के बड़े लोग बाहर से संक्रमण को घर में ला सकते हैं। ऐसे में घर के कामकाजी लोगों को विशेष एहतियात बरतनी होगी।





एक्सपर्ट ने दी जानकारी





एक्सपर्ट का कहना है कि परिवार में बड़ों को सबसे ज्यादा ध्यान रखने की जरूरत है। बड़े जब घर आएं तो वह अपने कपड़े बाहर ही उतारें और मास्क भी उतारें। खुद को सैनेटाइज करें इसके बाद वे घर के अंदर आएं। घर में आने के बाद भी बच्चों से उचित दूरी बनाकर रखें। डॉक्टर का कहना कि दूसरी जरूरी बात यह है कि बच्चों की इम्युनिटी को मजबूत करें। इसके लिए बच्चों को पौष्टिक खाना खिलाएं। बच्चों को फल ज्यादा खिलाएं। जिससे बच्चों को विटामिन-सी, विटामिन-डी, बी-कॉम्प्लेक्स और विटामिन-ई भरपूर मात्रा में मिल सके।





इम्यूनिटी बूस्ट के लिए करें ये उपाय





एक्सपर्ट ने बताया कि इम्यूनिटी बूस्ट करने के लिए विटामिन-डी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विटामिन-डी के लिए बच्चों को सुबह 9 बजे से 11 बजे के बीच धूप में बैठाएं। बच्चों को सूरज की तरफ पीठ करके बैठाएं। उन्होंने ने कहा कि धूप में बैठते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि धूप सीधा बच्चों की पीठ पर पड़ रही हो। ऐसा करने से बच्चों के शरीर में विटामिन डी की मात्रा बढ़ेगी। एक्सपर्ट ने बताया कि अगर घर में कोई कोरोना मरीज है तो बच्चों को उससे दूर रखें। घर में जो व्यक्ति कोरोना मरीज की देखभाल कर रहा है। वह व्यक्ति भी बच्चों के पास न जाए। इस तरह घर के बड़े लोग कई सावधानियां बरतकर बच्चों को कोरोना से सुरक्षित रख सकते हैं।





बच्चों का रखें खास ख्याल





बता दें कि कोरोना की तीसरी लहर दूसरी लहर से भी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकती है, जिसके लिए पहले सावधान रहना बहुत जरूरी है। जानकारों के मुताबिक कोरोना की पहली लहर ने बुजुर्गों को सबसे ज्यादा अपनी चपेट में लिया था। कोरोना की पहली लहर बुजुर्गों के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक साबित हुई थी। वहीं कोरोना की दूसरी लहर सबसे ज्यादा युवाओं के लिए खतरनाक साबित हो रही है। ऐसे में कहा जा रहा है कि कोरोना की तीसरी लहर बच्चों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसे में बच्चों का अच्छे से ख्याल रखें।


Vastu Shastra : जूते-चप्पल पहनकर भूलकर भी न जाएं इन जगहों पर, आती है गरीबी और किल्लत

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हिंदू धर्म (Hindu Mathalogy) में वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) और उसमें बताए गए उपायों का अपना एक विशेष महत्व हैं। वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) में साफतौर पर जानकारी दी गई है कि 5 जगहों पर भूलकर भी जूते-चप्पल पहनकर नहीं जाना चाहिए।





Vastu Shastra : इन पेड़-पौधों से आती है आर्थिक समृद्धि, इन पौधों को न दे अपने घर में जगह





वास्तु शास्त्र में ऐसी मान्यता है कि घर में वास्तु दोष होने से आर्थिक तंगी, स्वास्थ्य संबंधी परेशानी समेत पारिवारिक कलह तक का सामना करना पड़ सकता है। इसके निवारण के लिए वास्तु शास्त्र के इन टिप्स को अपनाना चाहिए। इससे वास्तु दोष दूर हो सकता है। दरअसल कई बार हम भूल से या अनजाने में ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो वास्तु दोष का कारण बनती हैं। कई बार हम अज्ञानता वश जूते चप्पल पहन कर उन स्थानों पर चले जाते हैं, जिससे वास्तु दोष होता है।





वास्तु शास्त्र के मुताबिक यह है वास्तु दोष





आज हम आपको बताने जा रहे हैं किन-किन स्थानों पर जूता चप्पल पहनकर जाना वास्तु -शास्त्र के मुताबिक वास्तु दोष होता है।  





भंडार घर में जूते पहनकर जाना अशुभ





वास्तु शास्त्र में कहा गया है कि भंडार घर में जूते-चप्पल पहनकर जाना अशुभ होता है। ऐसा करने से घर में अन्न की कमी होती है। इसलिए भूलकर भी भंडार घर में जूता-चप्पल पहनकर नहीं जाना चाहिए।





चप्पल पहनकर नहीं खोलना चाहिए तिजोरी 





मान्यता है कि तिजोरी में मां लक्ष्मी का वास होता है। इसलिए कभी भी तिजोरी को जूते चप्पल पहनकर नहीं खोलना चाहिए। इससे मां लक्ष्मी रूठ जाती है और घर में आर्थिक तंगी आनी शुरू हो जाती है।





जूते-चप्पल पहनकर न जाएं पवित्र नदी के पास





वास्तु शास्त्र के मुताबिक पवित्र नदी के पास भी जूते-चप्पल पहनकर नहीं जाना चाहिए। पवित्र नदियों में स्नान करने से पहले जूते-चप्पल या चमड़े से बनी वस्तुओं को निकालकर नदी से दूर रख देनी चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है।





जूते-चप्पल पहनकर न करें रसोईघर में प्रवेश





कहा जाता है कि रसोई में जूता चप्पल पहनकर जाने से मां अन्नपूर्णा नाराज होती हैं। घर में आर्थिक तंगी आनी शुरू हो जाती है। इसलिए भूलकर भी रसोई में जूता चप्पल पहनकर नहीं जानी चाहिए।





जूते-चप्पल पहनकर न जाएं मंदिर या पूजा स्थल





हिंदू धर्म में मंदिर या पूजा स्थल को भगवान का घर माना जाता है। मान्यता है कि यहां जूते-चप्पल पहनकर जाने से देवी-देवता नाराज हो जाते हैं और उनके प्रकोप से घर में आर्थिक हानि होनी शुरू हो जाती है। परिवार में कलह व्याप्त हो जाती है। लोगों के मन में कुवुद्धि का वास होता है जो घर को अतुलनीय क्षति पहुंचाती है।


Vastu Shastra : इन चीजों को घर में फैलाकर रखने से बढ़ते हैं बीमारी और कलह

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हिंदू धर्म (Hindu Mathalogy) में वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) और उसमें बताए गए उपायों का अपना एक विशेष महत्व हैं। दरअसल हम भूल से या अनजाने में घर में कुछ ऐसे कर देते है जो हमारी आर्थिक और मानसिक हानि और विनाश का कारण बन सकते हैं। वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) के मुताबिक अगर चीजों को सही तरीके से की जाएं तो घर के वास्तु दोष दूर हो करते हैं।





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आधुनिकता के दौर में घर बिजली और इलेक्ट्रानिक उपकरणों से भरा हुआ रहने लगा है। लैपटॉप, मोबाइल, कम्प्यूटर के अलावा फ्रिज, टीवी, रेडियो, टेलिफोन जैसे तमाम उपकरण घर में मौजूद रहते हैं। इन सभी उपकरणों का प्रयोग सुविधा अवश्य बढ़ाता है, लेकिन घर में इनका बेतरतीब फैला होना और आवश्यकता से ज्यादा संख्या में होना कलह को बढ़ावा देता है।





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कोशिश करें कि घर में पुराने मोबाइल, चार्जर, केबल और अन्य अनुपयोगी उपकरण इकट्ठा न होने पाएं। इनसे नकारात्मक ऊर्जा निकलती है। इससे परिवार के लोग तनावग्रस्त होने लगते हैं। घर में आवश्यक उपकरण ही रखें। उचित जगह पर पूरी व्यवस्था के साथ रखें। इन उपकरणों को ढंककर रखना ज्यादा बेहतर है।





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इसी तरह घर में दवाइयों को खुले में न रखें। इकट्ठा कर सेल्फ में व्यस्थित ढंग से रखें। जिस तरह महत्वपूर्ण कागजों की फाइलिंग की जाती है उसी तरह दवाइयों की संख्या ज्यादा होने पर उन्हें सजह मिल जाने की युक्ति के साथ रखें। खुले या टेबल पर पड़ीं दवाइयों रोग को दूर करने से कहीं ज्यादा रोग को दावत देती हैं। एक रोग मिटता है तो दूसरा लगने की आशंका बढ़ा देती हैं। जितनी जरूरी हो उतनी दवा खरीदें। अनावश्यक स्टोर करने की आदत से बचें।





रोगों के बढ़ने की आशंका





दवाइयां रासायनिक होती हैं। राहु-केतु के रसायनों के प्रतिनिधि हैं। दवाइयों या अन्य रासायनिक पदार्थों को खुले में रखना राहु-केतु के प्रभाव को बढ़ाना है। इससे घर में रोगों के बढ़ने की आशंका बढ़ जाती है।


चाणक्य नीति: आचार्य चाणक्य के मुताबिक इन लोगों से दोस्ती और प्यार करना होता है बेहतर

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आचार्य चाणक्य जिन्हें कौटिल्य और विष्णुगुप्त के नाम से भी जाना जाता है, आचार्य चाणक्य का जन्म ईशा से 350 वर्ष पूर्व हुआ था, जिन्होंने अर्थशास्त्र और नीतिशाश्त्र (Economics and Ethics) की रचना की थी। जिसे ‘चाणक्य नीति’ (Chanakya Niti ) भी कहा जाता है। भले ही चाणक्य द्वारा लिखी गई बाते बहुत पुरानी हो, लेकिन उनके द्वारा कहे गये कथन आज भी उतने सटीक और सही साबित (Chanakya Niti For Successful Life) होती है।





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आचार्य चाणक्य की नीतियां (Chanakya Niti) और विचार भले ही आपको थोड़े कठोर लगे, लेकिन ये कठोरता ही जीवन की सच्चाई है। हम लोग भागदौड़ भरी जिंदगी में इन विचारों को भले ही नजरअंदाज कर दें, लेकिन ये वचन जीवन की हर कसौटी पर आपकी मदद करेंगे। आचार्य चाणक्य के इन्हीं विचारों में से आज हम एक और विचार का विश्लेषण करेंगे। आज का ये विचार दोस्ती और प्यार से संबंधित है।





चाणक्य नीति





चाणक्य नीति के मुताबिक घनिष्ठ मित्रता और प्रेम बराबर वालों में किया जाना चाहिए। देश काल और समाज का हर व्यक्ति पर गहरा प्रभाव होता है। ऐसे में अलग परिवेश और सामाजिक, आर्थिक अंतर वाले लोगों से प्रेम और मित्रता से बचना ज्यादा सही है।





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बराबर की संस्कृति और आर्थिकी वाले लोग एक दूसरे की समस्याएं और जरूरतों को भलिभांति समझते हैं। समझ का यह स्तर रिश्तों को प्रगाढ़ बनाता है। अत्यधिक सामाजिक और आर्थिक अंतर रहन-सहन, बात व्यवहार और सोच में खाई जैसे अंतर को दर्शाते हैं। व्यक्ति की मानसिकता उसके चरित्र का निर्माण करती है। चारित्रिक अंतर झगड़े विवाद बहस और तनाव का कारण बन सकता है।





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आचार्य चाणक्य व्यक्तिगत संबंधों के साथ राजनीतिक व्यवहार में भी चरित्र को अधिकाधिक महत्व देते थे। कमजोर चरित्र और व्यवहार के लोगों पर भरोसा नहीं करते थे। प्रेम और मित्रता में भरोसा प्राथमिक तत्व होता है। भरोसा समान विचारधारा और संस्कृति के लोगों में विकसित होता है।





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चाणक्य ने न सिर्फ विभिन्न राजनैतिक संबंधों को देशकाल की जरूरत के मुताबिक महत्ता प्रदान की बल्कि स्वयं इनको मूर्तरूप देने की पहल की। इनमें उन्होंने हमेशा इस बात का ध्यान रखा कि प्रेम और मित्रता से निर्मित रिश्ता बराबर वालों के साथ ही हो।





महान राजनीतिज्ञ और अर्थशास्त्री थे चाणक्य





आचार्य चाणक्य महान राजनीतिज्ञ और अर्थशास्त्री थे। आचार्य का भारत की दो प्रमुख शिक्षा संस्थाओं तक्षशिला और नालंदा विश्वविद्यालय में महत्वपूर्ण योगदान है। आचार्य ने पश्चिमी सीमाई राज्यों को आक्रांताओं के आक्रमण और अधिग्रहण से बाहर निकलने में सहायता की। मगध जनपद को धननंद के आतंक से मुक्त कराया।





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चाणक्य की गिनती भारत के श्रेष्ठ विद्वानों में की जाती है। चाणक्य को अर्थशास्त्र के साथ साथ समाजशास्त्र, राजनीति शास्त्र, कूटनीति शास्त्र और सैन्य शास्त्र के भी ज्ञाता थे। आचार्य चाणक्य का संबंध विश्व प्रसिद्ध तक्षशिला विश्व विद्यालय से भी था। चाणक्य ने तक्षशिला विश्व विद्यालय से शिक्षा प्राप्त की थी और बाद में वे इसी विद्यालय में आचार्य हुए। चाणक्य ने हर उस रिश्ते के बारे में भी जानने और समझने की कोशिश की जो मनुष्य को सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं।


अगर पाना चाहते हैं महालक्ष्मी की कृपा तो इन चीजों को घर में न होने दें इकट्ठा

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महालक्ष्मी (Mahalakshmi) की कृपा पाने के लिए कुछ चीजों को घर में कभी नहीं रखना चाहिए या फिर घर से दूर ही रखना चाहिए। लक्ष्मीजी (Mahalakshmi) को सभी रंग प्रिय हैं। फिर भी काली वस्तुओं को रसोईघर के अतिरिक्त अन्य स्थान पर घर में न रखें। वहीं ऐसी वस्तुएं जिनकी चमक जल्दी फीकी पड़ जाती है। उन्हें संग्रहित करने से बचें।









इसके अलावा तस्वीरों, कपड़ों और अन्य रंगीन सामान की देखभाल अच्छे से करें। यूं ही पड़े रहने की स्थिति में मां की कृपा कम हो सकती है। वहीं घर के ड्राइंग रूम में युद्ध वाले उपकरण, खिलौने और चित्र प्रयोग में न लाएं। संभव हो तो ऐसे सामानों को छिपाकर रखना चाहिए। ड्राइंग रूम में सभी लोग एक साथ बैठते हैं। यहां विचारों में प्रेम विश्वास और सहजता बढ़ाने वाली वस्तुओं का इस्तेमाल करें। साथ ही ड्राइंग रूम में अत्यधिक बिजली वाले उपकरणों से भी बचें।





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वहीं सफाई में प्रयोग आने वाले खराब हो चुके उपकरणों को जितना जल्दी हो घर से हटा दें। पुराने झाडू को बिना कारण घर में जगह न दें। सफाई के बाद इन्हें ऐसे जगह पर रखें जहां से ये किसी को नजर न आएं। साथ ही घर में बहुत ज्यादा भड़कीले रंग प्रयोग में न लाएं। सौम्य रंगों को प्रयोग करें। रंगों का चयन बच्चों और महिलाओं की पसंद से करें।









घर में टूटा हुआ कोई सामान सहेजने की गलती न करें। इन्हें संवार लें या हटा दें। टूटे ग्लास, क्रॉकरी और अन्य सामानों पर नजर बार-बार जाती है। इससे ध्यान भंग होता है। महत्वपूर्ण कार्यों में व्यवधान आता है।









बता दें कि हिंदू धर्म (Hindu Mathalogy) में वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) और उसमें बताए गए उपायों का अपना एक विशेष महत्व हैं। दरअसल हम भूल से या अनजाने में घर में कुछ ऐसे कर देते है जो हमारी आर्थिक हानि और विनाश का कारण बन सकते हैं। वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) के मुताबिक अगर चीजों को सही तरीके से की जाएं तो घर के वास्तु दोष दूर हो करते हैं।


राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह: जानें क्या है नया सड़क सुरक्षा कानून , नहीं तो भरना पड़ सकता है मोटा जुर्माना

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यातायात नियमों के पालन (Compliance with traffic rules) के लिए जनजागरूकता लाने के उद्देश्य से यातायात पुलिस द्वारा राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह (National Road Safety Month) का विशेष अभियान चलाया जा रहा है। 18 जनवरी से शुरू हुआ यह अभियान एक माह का है, जो 17 फरवरी तक चलेगा। इसके पहले के सालों में राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाया जाता था। वहीं इस साल इसकी अवधि में बढ़ोतरी की गई है, ताकि जन मानस में यातायात नियमों(Road Safety New Law) के प्रति ज्यादा सजगता आ सके।





राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह: गाड़ी चलाते समय इन नियमों का करें पालन(Road Safety New Law)





बता दें कि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा हर साल जनवरी के दूसरे हफ्ते में राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाया जाता है, लेकिन इस साल 2021 में सरकार ने राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह की जगह राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह मनाने का निर्णय किया है। सड़क सुरक्षा माह 2021 अभियान के दौरान सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए आम-जन मानस को यातायात नियमों के प्रति अधिकाधिक जागरूक किया जाएगा। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के अंतर्गत 18 जनवरी से 17 फरवरी एक माह तक अलग-अलग सड़क सुरक्षा अभियान चलाया जाएगा।





राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह: यातायात नियमों के प्रति जनजागरूकता के लिए चलाया जा रहा अभियान





18 जनवरी 2021 से 17 फरवरी 2021 तक मनाए जाने वाले सड़क सुरक्षा माह की इस बार की थीम 'सड़क सुरक्षा-जीवन रक्षा' तय की गई है। विभाग द्वारा इस थीम पर आधारित विभिन्न गतिविधियां आयोजित करनी होंगी। इसमें ट्रैफिक पुलिस, स्वास्थ्य सूचना और प्रचार, पीडब्ल्यूडी सहित ट्रांसपोर्ट अथारिटी, जिला अथारिटी, स्वैच्छिक संगठनों की भी मदद ली जा सकती है।





यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई, ई-चालान से वसूले गए 99.43 लाख रूपए





आंकड़ों के मुताबिक, पूरे भारत में साल 2015 में सड़क दुर्घटना के कुल 5 लाख मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें कुल 1.5 लाख लोगों की मृत्यु हुई थी। सड़क दुर्घटना से जुड़े ये आंकड़े काफी गंभीर हैं, क्योंकि इनसे स्पष्ट होता है कि भारत हर साल लापरवाही के कारण अपने उपयोगी मानव संसाधन का कुछ हिस्सा खो देता है।





गृहमंत्री साहू ने किया राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह शुभारंभ, ‘सड़क सुरक्षा संगवारी’ पुस्तिका का भी किया विमोचन





भारत में सड़क दुर्घटना के रोकथाम संबंधी नियमों को और कठोर बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 लागू किया गया था। इस अधिनियम के तहत नियमों के उल्लंघन के लिए कठोर आर्थिक दंड के प्रावधानों (जो कि 1 सितंबर से प्रभावी हुए थे) पर व्यापक सार्वजनिक प्रतिक्रिया आई और कई राज्यों ने जुर्माने की राशि को कम करने और इसमें कटौती की भी घोषणा की है।





क्या है मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम 2019(Road Safety New Law)





यातायात नियम न्यू मोटर वाहन के अधिनियम, 2019 के मुताबिक किया गया है। इस नए Motor Vehicle Act के मुताबिक मानक से कमतर इंजन की गाड़ी बनाने वाली कंपनियों पर 500 करोड़ तक का जुर्माना लगाया जाएगा। सामान्यत ट्रैफिक नियम का उल्लंघन करने पर 100 रुपए का चालान काटता था, लेकिन अब यह जुर्माना 500 रुपए कर दिया गया है।





सड़क सुरक्षा यातायात नियम 2020





  • नए ट्रैफिक कानून(Road Safety New Law) के मुताबिक ड्राइविंग लाइसेंस नियमों को तोड़ने वाले लोगों पर 1 लाख रूपये का जुर्माना लगाया जायेगा।
  • अगर कोई सड़क पर तेज रफ्तार से गाड़ी चलता है, तो उस पर 1,000 से 2,000 रुपये का जुर्माना लगेगा।
  • नए ट्रैफिक नियम के मुताबिक अगर कोई नाबालिक गाड़ी चलता हुआ पकड़ा गया तो उसे 25 हजार रूपये का जुर्माना देना होगा। साथ ही उसकी गाड़ी का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया जाएगा। इतना ही नहीं उस नाबालिक का ड्राइविंग लाइसेंस 25 की उम्र तक नहीं बन पायेगा।
  • ड्राइविंग करते समय मोबाइल पर बात करने वालों, ट्रैफिक जम्प करने वालों , गलत दिशा में ड्राइव करने वालों ,खतरनाक ड्राइविंग करने वालों और बेवजह ट्रैफिक जाम करने वालो को New Traffic Rules के अनुसार भारी जुर्माना देना होगा।




मोटर वाहन अधिनियम में संशोधन की जरुरत(Road Safety New Law)





मोटर वाहन 1989 अधिनियम में संशोधन किया गया है, जो 1 अक्टूबर 2020 से लागू कर दिया गया है। इन संशोधनों में कई मुख्य बदलाव किए गए हैं जैसे कि अब आपको किसी भी प्रकार के भौतिक दस्तावेजों को हर जगह ले जाने की जरूरत नहीं है। आप अपने सभी दस्तावेज या ड्राइविंग लाइसेंस की सॉफ्ट कॉपी भी अपने पास रख सकते हैं। यह फैसला डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने के लिए किया गया है। मोटर वाहन अधिनियम में कई और संशोधन किए गए हैं। आज हम आपको इन्हीं में से कुछ मुख्य संशोधनों की जानकारी दे रहे हैं।





दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन





नए सड़क सुरक्षा नियम ट्रैफिक कानून के मुताबिक दस्तावेजों को भौतिक रूप से दिखाने की आवश्यकता नहीं होगी और अगर कोई ट्रैफिक अधिकारी आपके ड्राइविंग लाइसेंस को रद्द करना चाहता है, तो वह वेब पोर्टल के माध्यम से ड्राइविंग लाइसेंस को रद्द कर सकता है।





चालक और ट्रैफिक अधिकारी की जानकारी





चालक का व्यवहार भी Motor Vehicle Act के अंतर्गत देखा जाएगा। साथ ही पुलिस अधिकारी की पहचान भी पोर्टल में अपडेट की जाएगी।





वाहन का निरीक्षण





अगर किसी भी ड्राइवर या वाहन का निरीक्षण किया जाएगा, तो उसका रिकॉर्ड भी वेब पोर्टल पर अपडेट किया जाएगा। अगर किसी का ड्राइविंग लाइसेंस रद्द हो जाता है, तो उसे डिजिटल पोर्टल पर रिपोर्ट करना आवश्यक है।





नए मोटर व्हीकल एक्ट के अंतर्गत ई चालान





नए मोटर व्हीकल एक्ट के तहत जो लोग ट्रैफिक नियमों को तोड़ेंगे, उनसे मोटर व्हीकल एक्ट 1989 के अंतर्गत जुर्माना लिया जाएगा। साथ ही आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से सभी ट्रैफिक नियमों को तोड़ने वाले लोगों के लिए ई चालान जारी कर दिया जाएगा।





डिजी लॉकर या एम परिवहन





डिजी लॉकर या फिर एम परिवहन के जरिए ड्राइविंग लाइसेंस और अन्य दस्तावेज जैसे पंजीकरण प्रमाण पत्र को स्टोर किया जा सकता है, जिससे कि आपके दस्तावेजों की किसी भी प्रकार की हानि न हो सके।





ड्राइविंग से संबंधित दस्तावेजों की सॉफ्ट कॉपी





नए ट्रैफिक कानून के मुताबिक वाहन चालक को अपने सभी दस्तावेजों को मोबाइल में स्टोर करके रखना आवश्यक है, जिससे उन्हें कोई भी दस्तावेज भौतिक रूप से अपने साथ रखने की आवश्यकता नहीं होगी। अगर ट्रैफिक पुलिस ड्राइविंग लाइसेंस या फिर अन्य दस्तावेज मांगती है तो वाहन चालक अपने मोबाइल सॉफ्ट कॉपी दिखा सकता है।





नई ट्रैफिक नियमों के तहत फाइन दर





अपराधपहले चालान और जुर्मानाअब चालान और जुर्माना
सामान्य (177)100 रूपये500 रूपये
रेड रेगुलेशन नियम का उल्लंघन (177A)100 रूपये500 रूपये
अथॉरिटी के आदेश की अवहेलना (179)500 रूपये2000रूपये
अनाधिकृत गाड़ी बिना लाइसेसं चलाना (180)1000रूपये5000 रूपये
अयोग्यता के बावजूद ड्राइविंग (182)500 रूपये10000 रूपये
बिना लाइसेंस के गाड़ी चलाना (181)500रूपये5000 रूपये
ओवर साइज वाहन (182B) 5000 रूपये
ओवर स्पीडिंग (183)   400 रूपये1000 रूपये
खतरनाक तरीके से गाड़ी चलाना(184)1000 रूपये5000 रूपये
शराब पीकर गाड़ी चलाना (185)2000रूपये10000 रूपये
रेसिंग और तेज गति से गाड़ी चलाना (189)500 रूपये5000 रूपये
ओवर लोडिंग (194)2 हजार रूपये और 10000 रूपये प्रति टन अतिरिक्त20 हजार रूपये और 2 हजार रूपये प्रति टन
सीट बेल्ट (194B)100 रूपये1000 रूपये
बिना पर्मिट के गाड़ी चलाना (192A)5 हजार रूपये तक10 हजार रूपये तक
लाइसेंस कंडीशन का उल्लंघन (193)कुछ भी नहीं25 हजार रूपये से 1 लाख रूपये तक
पैसेंजर की ओवर लोडिंग (194A)कुछ भी नहीं1000 रूपये प्रति पैसेंजर
दोपहिया वाहन पर ओवर लोडिंग100 रूपये2 हजार रूपये और तीन महीने के लिए लाइसेंस रद्द
हेलमेट न पहनने पर100 रूपये1000 रूपये और तीन महीने के लिए लाइसेंस  रद्द
एमरजेंसी वाहन को रास्ता न देने पर (194E)कुछ भी नहीं     10000 रूपये
बिना इंशोरेंस के गाड़ी चलाने पर (196)1000 रूपये2000 रूपये
दस्तावेजों को लगाने की अधिकारियों की शक्ति  (206) कुछ भी नहीं183,184,185,189,190,194c,194D 194E के तहत ड्राइविंग लाइसेंस को रद्द किया जायेगा
अधिकारियों को लागू करने से किये गए अपराध (210B)कुछ भी नहींसंबंधित अनुभाग के तहत दो बार जुर्माना




वर्तमान मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम में भारत में सड़क सुरक्षा को सुनिश्चित करने की दिशा में एक मजबूत पहल है, अगर इसे सही अर्थों में लागू किया जाता है, तो यह अधिनियम न सिर्फ कठोर दंड देकर परिवहन व्यवहार को बदल सकता है, बल्कि नागरिकों के बीच जिम्मेदारी की भावना भी पैदा करने में मदद कर सकता है, जिसके परिणामस्वरूप असामयिक मौतों से होने वाली मानव संसाधन की क्षति को नियंत्रित किया जा सकता है।


चाणक्य नीति : चाणक्य के मुताबिक इन बातों का ध्यान रखने से पति-पत्नी के रिश्तों में कभी नहीं आती है दरार

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आचार्य चाणक्य जिन्हें कौटिल्य और विष्णुगुप्त के नाम से भी जाना जाता है, आचार्य चाणक्य का जन्म ईशा से 350 वर्ष पूर्व हुआ था, जिन्होंने अर्थशास्त्र और नीतिशाश्त्र (Economics and Ethics) की रचना की थी। जिसे ‘चाणक्य नीति’ (Chanakya Niti For Relationship) भी कहा जाता है। भले ही चाणक्य द्वारा लिखी गई बाते बहुत पुरानी हो, लेकिन उनके द्वारा कहे गये कथन आज भी उतने सटीक और सही साबित (Chanakya Niti For Successful Life) होती है।





चाणक्य नीति : चाणक्य के मुताबिक जॉब, करियर और बिजनेस में ये बातें दिलाती हैं सफलता





आचार्य चाणक्य की नीतियां (Chanakya Niti) और विचार भले ही आपको थोड़े कठोर लगे, लेकिन ये कठोरता ही जीवन की सच्चाई है। हम लोग भागदौड़ भरी जिंदगी में इन विचारों को भले ही नजरअंदाज कर दें, लेकिन ये वचन जीवन की हर कसौटी पर आपकी मदद करेंगे। आचार्य चाणक्य के इन्हीं विचारों में से आज हम एक और विचार का विश्लेषण करेंगे। आज का ये विचार जॉब, करियर और बिजनेस से संबंधित है।





चाणक्य नीति : चाणक्य के मुताबिक धन के मामले में नहीं करनी चाहिए इस तरह की गलतियां





चाणक्य (acharya chanakya) की ‘चाणक्य नीति’ कहती है कि पति और पत्नी का रिश्ता सबसे पवित्र रिश्तों में से एक है। यह रिश्ता मजबूत होने के साथ साथ कमजोर भी होता है। इसलिए इस रिश्तों को मजबूत बनाने के लिए कुछ बातों का हमेशा ध्यान रखें।





इन 5 चीजों के सेवन से कभी नहीं होगी शरीर में खून की कमी





चाणक्य की गिनती भारत के श्रेष्ठ विद्वानों में की जाती है। चाणक्य को अर्थशास्त्र के साथ साथ समाजशास्त्र, राजनीति शास्त्र, कूटनीति शास्त्र और सैन्य शास्त्र के भी ज्ञाता थे। आचार्य चाणक्य का संबंध विश्व प्रसिद्ध तक्षशिला विश्व विद्यालय से भी था। चाणक्य ने तक्षशिला विश्व विद्यालय से शिक्षा प्राप्त की थी और बाद में वे इसी विद्यालय में आचार्य हुए। चाणक्य ने हर उस रिश्ते के बारे में भी जानने और समझने की कोशिश की जो मनुष्य को सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं। चाणक्य के मुताबिक पति और पत्नी का रिश्ता भी इनमे से एक है।





चाणक्य नीति : जानिए जिस मनुष्य में होता है ये गुण, उसे पूरी दुनिया मिलकर भी नहीं हरा सकती





चाणक्य की चाणक्य नीति मनुष्य को जीवन जीने की कला सिखाती है। यही नहीं जीवन में सफल होने के लिए भी प्रेरित करती है। यही कारण है कि इतने वर्षों के बाद भी चाणक्य की चाणक्य नीति की प्रांसगिकता कम नहीं है। आज भी बड़ी संख्या में लोग चाणक्य नीति का अध्यन करते हैं। चाणक्य नीति में पति और पत्नी के रिश्तों के बारे में भी प्रकाश डाला गया है। चाणक्य के के मुताबिक पति और पत्नी का रिश्ता विश्वास, आदर और प्रेम पर टिका हुआ है। इसलिए इस रिश्ते में कुछ बातों का हमेशा ध्यान रखना चाहिए।





एक दूसरे के प्रति रहे समर्पित(Chanakya Niti For Relationship)





चाणक्य के मुताबिक किसी भी रिश्ते की पहली शर्त प्रेम ही है। प्रेम रहित रिश्ते की उम्र ज्यादा नहीं होती है। जिन रिश्तों में प्रेम होता है वे लंबे चलते हैं। पति और पत्नी के रिश्ते में भी यही बात लागू होती है। इस रिश्ते में प्रेम की कमी नहीं होनी चाहिए। प्रेम विश्वास से आता है। इसलिए एक दूसरे के प्रति समर्पित रहना चाहिए।





विश्वास में न आने दें दरार





चाणक्य के मुताबिक दांपत्य जीवन में विश्वास की बहुत ही अहम भूमिका होती है। विश्वास में कमी आने पर ही दांपत्य जीवन में दरार आती है। इसलिए इस रिश्ते में विश्वास को बनाए रखने के लिए निरंतर प्रयास करने चाहिए। विश्वास मजबूत होने से प्रेम में भी बढ़ोतरी होती है।





बनाएं रखें आदर





चाणक्य के मुताबिक हर रिश्ते का आदर करना चाहिए। जिस रिश्ते में आदर और सम्मान की कमी बनी रहती है, उस रिश्ते में कोई न कोई कमी बनी ही रहती है। पति और पत्नी के रिश्ते में भी आदर और सम्मान का पूरा ध्यान रखना चाहिए। एक दूसरे का आदर करें। आदर और सम्मान में कमी आने पर दांपत्य जीवन प्रभावित होने लगता है।


चाणक्य नीति : चाणक्य के मुताबिक जॉब, करियर और बिजनेस में ये बातें दिलाती हैं सफलता

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आचार्य चाणक्य जिन्हें कौटिल्य और विष्णुगुप्त के नाम से भी जाना जाता है, आचार्य चाणक्य का जन्म ईशा से 350 वर्ष पूर्व हुआ था, जिन्होंने अर्थशास्त्र और नीतिशाश्त्र (Economics and Ethics) की रचना की थी। जिसे ‘चाणक्य नीति’ (Chanakya Niti For Career) भी कहा जाता है। भले ही चाणक्य द्वारा लिखी गई बाते बहुत पुरानी हो, लेकिन उनके द्वारा कहे गये कथन आज भी उतने सटीक और सही साबित (Chanakya Niti For Successful Life) होती है।





चाणक्य नीति : चाणक्य के मुताबिक धन के मामले में नहीं करनी चाहिए इस तरह की गलतियां





आचार्य चाणक्य की नीतियां (Chanakya Niti) और विचार भले ही आपको थोड़े कठोर लगे, लेकिन ये कठोरता ही जीवन की सच्चाई है। हम लोग भागदौड़ भरी जिंदगी में इन विचारों को भले ही नजरअंदाज कर दें, लेकिन ये वचन जीवन की हर कसौटी पर आपकी मदद करेंगे। आचार्य चाणक्य के इन्हीं विचारों में से आज हम एक और विचार का विश्लेषण करेंगे। आज का ये विचार जॉब, करियर और बिजनेस से संबंधित है।





इन 5 चीजों के सेवन से कभी नहीं होगी शरीर में खून की कमी





चाणक्य (acharya chanakya) की ‘चाणक्य नीति’ कहती है कि जीवन में सफलता पाने के लिए व्यक्ति को कुछ बातों का हमेशा ध्यान रखना चाहिए. चाणक्य की ये बातें व्यक्ति को जॉब, करियर और बिजनेस में सफलता दिलाने में मदद करती हैं।





चाणक्य नीति : जानिए जिस मनुष्य में होता है ये गुण, उसे पूरी दुनिया मिलकर भी नहीं हरा सकती





चाणक्य का मानना था कि मनुष्य को सफलता तभी प्राप्त होती है जब वह अपने अंदर कुछ अच्छी आदतों को समाहित कर लेता है। अच्छी आदतों पर ही सफलता की नींव तैयार होती है, जो व्यक्ति गलत आदतों से घिर जाता है उसे सफल होने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। इतना ही नहीं ऐसे लोगों को लक्ष्मी जी का भी आर्शीवाद प्राप्त नहीं होता है। ऐसे लोगों का जीवन संकटों से घिर जाता है।





परिश्रम और संघर्ष से मिलती है सफलता(Chanakya Niti For Career)





आचार्य चाणक्य (acharya chanakya) के मुताबिक हर इंसान जीवन में सफल होना चाहता है। सफल होने के लिए मनुष्य अपने-अपने स्तर से परिश्रम और संघर्ष भी करता है, लेकिन इसके बाद भी कुछ लोग सफलता से वंचित रह जाते हैं। इसके लिए चाणक्य ने कुछ बातें बताई हैं, जिन्हें हर व्यक्ति को याद रखना चाहिए।





लक्ष्य का करें निर्धारण





चाणक्य (Chanakya Niti) के मुताबिक सफलता प्राप्त करने से पहले व्यक्ति को अपना लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। लक्ष्य का निर्धारण करने के बाद परिश्रम शुरू करना चाहिए। जो लोग लक्ष्य का निर्धारण नहीं कर पाते हैं, उनके जीवन में उतार चढ़ाव की स्थिति बनी रहती हैं। लक्ष्य पाने के लिए ध्यान को केंद्रित करना चाहिए। जीवन में एक बार लक्ष्य का निर्धारण करने के बाद, लक्ष्य को पाने के लिए प्रयास करते रहना चाहिए। जो इस बात को ध्यान में रखता है उसे सफलता प्राप्त होती है।





असफलता से न घबराएं





चाणक्य (Chanakya Niti) के मुताबिक कभी-कभी कठोर परिश्रम करने के बाद भी सफलता प्राप्त नहीं होती है, लेकिन इससे निराश नहीं होना चाहिए। हताश भी नहीं होना चाहिए। जॉब, करियर और बिजनेस में सफलता-असफलता आती रहती हैं, लेकिन असफलता मिलने पर हताश और निराश होकर बैठ जाना, उचित नहीं है. व्यक्ति को फिर से कोशिश करना चाहिए। क्योंकि मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती है।


चाणक्य नीति : चाणक्य के मुताबिक धन के मामले में नहीं करनी चाहिए इस तरह की गलतियां

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आचार्य चाणक्य जिन्हें कौटिल्य और विष्णुगुप्त के नाम से भी जाना जाता है, आचार्य चाणक्य का जन्म ईशा से 350 वर्ष पूर्व हुआ था, जिन्होंने अर्थशास्त्र और नीतिशाश्त्र (Economics and Ethics) की रचना की थी। जिसे 'चाणक्य नीति' (Chanakya Niti) भी कहा जाता है। भले ही चाणक्य द्वारा लिखी गई बाते बहुत पुरानी हो, लेकिन उनके द्वारा कहे गये कथन आज भी उतने सटीक और सही साबित (Chanakya Niti For Successful Life) होती है।





चाणक्य नीति : जानिए जिस मनुष्य में होता है ये गुण, उसे पूरी दुनिया मिलकर भी नहीं हरा सकती





आचार्य चाणक्य की नीतियां (Chanakya Niti) और विचार भले ही आपको थोड़े कठोर लगे, लेकिन ये कठोरता ही जीवन की सच्चाई है। हम लोग भागदौड़ भरी जिंदगी में इन विचारों को भले ही नजरअंदाज कर दें, लेकिन ये वचन जीवन की हर कसौटी पर आपकी मदद करेंगे। आचार्य चाणक्य के इन्हीं विचारों में से आज हम एक और विचार का विश्लेषण करेंगे। आज का ये विचार धन के मामले से संबंधित है।





छोटी- छोटी गलतियों से हो सकती है धन हानि (Chanakya Niti For Successful Life)





चाणक्य (acharya chanakya) की 'चाणक्य नीति' कहती है कि धन के मामले में व्यक्ति को बहुत ही सावधानी बरतनी चाहिए। कभी कभी छोटी- छोटी गलतियों से धन हानि हो जाती है और धन की देवी लक्ष्मी जी नाराज हो जाती है। चाणक्य के मुताबिक भौतिक जीवन में जिसके पास लक्ष्मी जी की कृपा और आर्शीवाद बना रहता है वो व्यक्ति कई तरह की बाधाओं और कष्टों से बचा रहता है।





बॉयफ्रेंड से बात करने से रोकने पर कलयुगी बेटी ने की पिता की हत्या, ऐसे हुआ खुलासा





चाणक्य (acharya chanakya) के मुताबिक जीवन में धन का विशेष महत्व है। सुखों का बहुत बड़ा कारक धन भी है। धन की उपयोगिता किसी से छिपी नहीं है। हर व्यक्ति अपने जीवन स्तर को बेहतर और सुरक्षित बनाने के लिए धन की तरफ आकर्षित होता है। धन प्राप्त करने के लिए व्यक्ति बड़े से बड़ा जोखिम उठाने के लिए तैयार रहता है। चाणक्य के मुताबिक धन की प्राप्ति परिश्रम से होती है। इसके साथ ही कुछ और बातें है जिनका ध्यान रखना बहुत ही जरूरी है। अगर आप इन बातों को ध्यान में रखते हैं तो लक्ष्मी जी का आर्शीवाद हमेशा आप पर बना रहेगा।





आलस का करें त्याग(Chanakya Niti For Successful Life)





चाणक्य (acharya chanakya) के मुताबिक आज के काम को जो व्यक्ति कल पर टालता है वह कभी सफलता को प्राप्त नहीं करता है। सफलता नहीं मिलने के कारण ऐसे लोगों धन के लिए तरसते रहते हैं। लक्ष्मी जी का आर्शीवाद प्राप्त करने के लिए आलस का त्याग करना पड़ता है।





दूसरों को परेशान करने के लिए न करें धन का प्रयोग





चाणक्य (acharya chanakya) के मुताबिक धन का प्रयोग खुद और मानव कल्याण के लिए करना चाहिए जो लोग धन का प्रयोग दूसरों को नुकसान पहुंचाने के लिए करते हैं ऐसे लोगों से लक्ष्मी जी नाराज होती हैं और साथ छोड़ देती हैं।





न करें ज्यादा गुस्सा





चाणक्य (acharya chanakya) के मुताबिक गुस्सा व्यक्ति का सबसे बड़ा शत्रु है। गुस्से से व्यक्ति को हमेशा दूर रहना चाहिए। गुस्से में व्यक्ति अच्छे बुरे का भेद नहीं कर पाता है, जिस कारण समय आने पर उसे हानि उठानी पड़ती है। गुस्सा करने वाले मनुष्य को लक्ष्मी जी पसंद नहीं करती हैं।


कही हैकर्स के पास आपकी ईमेल आईडी और पासवर्ड तो नहीं? इस तरह करें चेक

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देश में दूसरे गंभीर अपराधों के साथ ही साइबर अपराध (Cyber crime in india) के मामले भी रोजाना बढ़ते जा रहे है। वहीं ईमेल के पासवर्ड (Cyber Crime Hacking E-mail) को लेकर अभी भी ज्यादातर लोग काफी लापरवाही बरत रहे हैं। खराब पासवर्ड की टॉप-10 लिस्ट में इतने कमजोर पासवर्ड देखने को मिले हैं, जिसे कोई भी आसानी से गेस करके अकाउंट हैक कर ले। लेकिन क्या हो अगर आपने मजबूत पासवर्ड रखा है, लेकिन फिर भी वो पासवर्ड हैकर्स के हाथ लग चुका है?





16 जनवरी से छत्तीसगढ़ में होगी कोविड-19 टीकाकरण की शुरूआत, प्रभारी मुख्य सचिव सुब्रत साहू ने की तैयारियों की समीक्षा





आए दिन साइबर अटैक (Cyber ​​attack) की खबरें आती रहती है। दरअसल साइबर अटैक (Cyber ​​attack) एक या दो नहीं, बल्कि लाखों-करोड़ों अकाउंट्स पर किए जाते हैं। इनमें आपके सोशल मीडिया सहित ईमेल और बैंक अकाउंट भी शामिल हो सकते हैं। साइबर अटैक के बाद हैकर्स भारी मात्रा में पासवर्ड (password) इकठ्ठे करते हैं और उसे समय-समय पर अपने हिसाब से यूज करते हैं। यानी अगर आपका पासवर्ड हैकर्स के पास है, लेकिन फिर आपके अकाउंट में कोई दिक्कत नहीं है, तो ऐसे में आने वाले समय में पूरा चांस है कि आपका अकाउंट टार्गेट बन जाएगा।





कही सर्दियों में आप भी तो नहीं करते ये गलतियां?





इसलिए बेहतर ये होगा कि आप ये पता लगा लें कि आपके अकाउंट्स का पासवर्ड (password) सेफ है या नहीं। अगर सेफ है तो अच्छी बात है, लेकिन अगर सेफ नहीं है और ये किसी डेटा लीक में एक्सपोज हो चुका है तो आपको अपने अकाउंट्स का पासवर्ड तत्काल बदल लेना चाहिए। गूगल ने कुछ समय पहले एक टूल पेश किया था। इस टूल के जरिए यूजर्स ये पता लगा सकते हैं कि उनका पासवर्ड लीक हुआ है या कमजोर है या फिर एक पासवर्ड कई अकाउंट के साथ यूज किया जा रहा है।





इस तरह करें चेक (Cyber Crime Hacking E-mail)





  • चेक करने के लिए आपको passwords.google.com पर जा कर अपना अकाउंट लॉग इन करना है।
  • अकाउंट लॉग करने के बाद आपको पासवर्ड चेकअप का ऑप्शन दिखेगा।
  • पासवर्ड चेकअप का ऑप्शन टैप करते ही गूगल आपके कुछ जानकारियां देगा।
  • गूगल सेव्ड पासवर्ड के आधार पर आपको ये बताएगा कि कितने पासवर्ड कॉम्प्रोमाइज्ड हैं यानी किसी डेटा लीक में लीक हो चुके हैं, कितने पासवर्ड दुबारा यूज किए गए हैं और कितने पासवर्ड्स कमजोर हैं।
  • कॉम्प्रोमाइज्ड पासवर्ड पर टैप करके ही आपको अलग-अलग वेबसाइट पर लॉग इन किए गए आपके पासवर्ड दिखेंगे जो कभी न कभी डेटा लीक के दौरान लीक हो चुके हैं और आने वाले समय में इस वजह से आप संकट में भी आ सकते हैं। गूगल के ही इस टूल में आपको लिस्ट के सामने चेंज पासवर्ड का ऑप्शन मिलेगा।
  • चेंज पासवर्ड पर क्लिक करते ही आप उस वेबसाइट पर पहुंच जाएंगे, जिसका पासवर्ड लीक हो चुका है और आप यहां से पासवर्ड बदल भी सकते हैं।




इस वेबसाइड से भी कर सकते हैं चेक





गूगल के अलावा एक और वेबसाइट है जो बताती है कि आपका ईमेल डेटा ब्रीच में शामिल है या नहीं। यानी डेटा ब्रीच में कितनी बार आपकी ईमेल आईडी प्रभावित हुई है। haveibeenpwned.com पर जा कर आपको अपनी ईमेल आईडी एंटर करनी है। यहां आईडी एंटर करते ही आपको ये बताया जाएगा कब कब और किस वेबसाइट से आपकी ईमेल आईडी प्रभावित हुई है। यहां से भी आप जान सकते हैं कि किन डेटा लीक की वजह से आपकी आईडी लीक हुई है और फिर आप इसे सिक्योर कर सकते हैं। इसके लिए स्ट्रॉन्ग पासवर्ड और टू स्टेप वेरिफिकेशन की जरूरत होगी।


इन चीजों से बढ़ सकता है ब्रेन कैंसर का खतरा, न करें इनका सेवन

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ब्रेन कैंसर (Brain Cancer) एक जानलेवा बीमारी है। समय पर अगर इस बीमारी का पता न चले और इलाज न किया जाए तो ये इंसान को मौत के मुंह में ले जा सकती है। ब्रेन कैंसर (risk of brain cancer) होने का मतलब है कि आपके दिमाग में ट्यूमर लगातार बढ़ रहा है।





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ट्यूमर यानी दिमाग में बहुत सारी कोशिकाओं का अनियंत्रि‍त होना। ऐसे में कोशिकाओं को नियंत्रण लगातार बिगड़ता रहता है और कोशिकाओं का विभाजन असमान्य रूप से ब्रेन में होता रहता है। जो कि ब्रेन सेल्स को घातक नुकसान पहुंचा सकते हैं। आधुनिक जीवन में कैंसर (risk of brain cancer) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। बच्चों से लेकर बड़ों तक कैंसर की घातक बीमारी लोगों को अपनी चपेट में ले रही है।





रिपोर्ट में किया गया दावा (risk of brain cancer)





दूषित पानी और अधपके मांस में पाया जाने वाला एक साधारण परजीवी लोगों में ब्रेन कैंसर (risk of brain cancer) की समस्या से जुड़ा हो सकता है। सोमवार को शोधकर्ताओं ने एक रिपोर्ट में ऐसा दावा किया है। उन्हें इस बात के साक्ष्य मिले हैं कि टोक्सोप्लाज्मा गोंडी या टी गोंडी परजीवी से संक्रमित लोगों में बहुत घातक ग्लायोमा (एक प्रकार का ट्यूमर) विकसित होने का खतरा ज्यादा रहता है। एक स्टडी के मुताबिक दुनिया की 20 से 50 फीसदी आबादी इस परजीवी से संक्रमित हो चुकी है।





डॉ. सोनिया लाल गुप्ता ने दी जानकारी (risk of brain cancer)





सोनिया लाल गुप्ता (Sonia Lal Gupta) के मुताबिक ब्रेन ट्यूमर दो प्रकार के होते हैं- बिनाइन (बिना कैंसर वाले) या मेलिग्नेंट (कैंसर वाले)। बिनाइन ट्यूमर धीरे-धीरे बढ़ता है और कभी भी शरीर के दूसरे भाग में नहीं फैलता है, जबकि मेंलिंगनेंट ट्यूमर कैंसर (risk of brain cancer) वाले ट्यूमर होते हैं, जो बहुत तेजी से और आक्रामक तरीके से बढ़ते हैं।





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कैसे होता है ब्रेन ट्यूमर





ब्रेन ट्यूमर (Brain Tumour) में दिमाग की कोशिकाएं जरूरत से ज्यादा तेजी से बढ़ने और फैलने लगती हैं। इससे आस-पास मौजूद टीश्यूज और ऑर्गन डैमेज हो जाते हैं।





Primary Brain Tumour- ये कैंसर दिमाग के जिस हिस्से में शुरू होता है, वहीं बढ़ता रहता है।





Secondary Brain Tumour- ये कैंसर काफी आम है। इस कैंसर की शुरुआत शरीर के किसी एक हिस्से में होती है, जिसके बाद ये शरीर के दूसरे हिस्से जैसे- दिमाग, फेफड़े, ब्रेस्ट, किडनी, कोलोन और स्किन में फैल जाता है। ज्यादातर ये कैंसर दिमाग में फैलता है।





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लंदन के न्यूरो सर्जन और मेडिकल डायरेक्टर का मानना है कि कई बार कैंसर के लक्षण सामने आते हैं, लेकिन ज्यादातर लोग इनपर ध्यान नहीं देते हैं, क्योंकि ये आम जीवनशैली का हिस्सा होते हैं इसलिए अक्सर लोग इन लक्षणों को गंभीरता से नहीं लेते हैं, जिस वजह से लोग समय पर इस बीमारी की जानकारी से अनजान रह जाते हैं और इलाज नहीं करा पाते हैं





कैंसर के लक्षण





  • बिना किसी बीमारी के अगर लगातार सिर में तेज दर्द रहता है तो ये ब्रेन ट्यूमर का लक्षण हो सकता है। लंदन के न्यूरोलॉजिस्ट का मानना है कि ब्रेन ट्यूमर में सुबह के समय तेज सिर दर्द होता है और दिन ढलने के साथ-साथ हल्का हो जाता है।
  • वहीं उन्होंने बताया कि कुछ ब्रेन ट्यूमर तेजी से फैलते हैं तो वहीं कुछ धीरे-धीरे। अगर आपका लगातार जी मिचलाता है तो ये भी ब्रेन ट्यूमर का लक्षण हो सकता है। अगर आपका सिर दर्द के साथ जी मिचलाए तो तुरंत अपने डॉक्टर को दिखाएं।
  • अचानक से खड़े होने पर अगर आंखों के सामने अंधेरा छा जाए और साथ ही चक्कर जैसा महसूस हो तो ये भी ब्रेन ट्यूमर का लक्षण हो सकता है।
  • चक्कर या उल्टी महसूस हो- हालांकि, ये लक्षण कई समय बाद देखने को मिलता है। लेकिन कई बार ब्रेन ट्यूमर के शुरुआत में ही ये लक्षण सामने आ जाते हैं। ऐसा कैंसर की कोशिकाओं का दिमाग में मौजूद फ्लूड के साथ मिक्स होने पर होता है।
  • शरीर में दिखें ये बदलाव- जब याददाश्त कमजोर होने लगे, व्यक्तित्व में बदलाव दिखाई देने लगें तो ये भी ब्रेन ट्यूमर के लक्षण हो सकते हैं। कई बार इस स्थिति में डिमेंशिया की शिकायत भी हो जाती है।




कैंसर वाले लोगों को नहीं करना चाहिए इन चीजों का सेवन





तला, मसालेदार, वसायुक्त और तेज गंध वाले भोजन से बचें कच्ची सब्जियां / सलाद और छिलका युक्त फलों के सेवन से बचें बासी / बाहर या रोड साइड के खाना खाने से बचें यदि आपको चबाने या निगलने की समस्या है, तो नरम, अर्धनिर्मित, मिश्रित या मुख्य रूप से तरल आहार लें।





ब्रेन ट्यूमर से बचने के लिए लें विटामिन C युक्त आहार





ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित लोगों को अपनी डाइट में ज्यादा से ज्यादा विटामिन C वाले आहार शामिल करने चाहिए। विटामिन C दिमाग में मौजूद कैंसर की कोशिकाओं को खत्म करने का काम करता है। यही वजह है कि विटामिन C ब्रेन ट्यूमर में फायदेमंद है।





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बता दें कि दुनियाभर में कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। वहीं, U.K में हर साल 9,000 ब्रेन ट्यूमर के मामले सामने आते हैं। ब्रेन ट्यूमर किसी भी उम्र के लोगों को अपनी चपेट में ले सकता है। अगर आप इस घातक बीमारी से सुरक्षित रहना चाहते हैं तो कोई भी लक्षण दिखते ही तुरंत जांच कराएं।





शोधकर्ताओं का ये है कहना





इंटरनेशनल जर्नल ऑफ कैंसर में प्रकाशित इस रिपोर्ट के मुताबिक यह परजीवी दिमाग में अल्सर के रूप में हो सकते हैं और इन्फ्लेमेशन के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। 'अमेरिकन कैंसर सोसायटी के डिपार्टमेंट ऑफ पॉपुलेशन' के एपिडेमायोलॉजिस्ट जेम्स हॉज के नेतृत्व में उनकी टीम और कैंसर सेंटर एंड रिसर्च इंस्टिट्यूट (फ्लोरिडा) की एच। ली मॉफिट ने ब्लड सैंपल में टी गोंडी परजीवी के एंटीबॉडीज और ग्लायोमा (ट्यूमर) के जोखिम के बीच संबंध की जांच की। इसके लिए उन्होंने लोगों को दो समूहों में बांटा।





इन लोगों में ज्यादा होता है खतरा





इस स्टडी के लिए 'अमेरिकन कैंसर प्रिवेंशन स्टडी- II न्यूट्रिशन कोहॉर्ट' में पंजीकृत 111 लोगों और 'नॉविजन कैंसर रजिस्ट्री' में सूचीबद्ध 646 लोगों को शामिल किया गया था। शोधकर्ताओं ने बताया कि ग्लायोमा का खतरा उन लोगों में ज्यादा देखा गया जिनमें टी। गोंडी एंटीबॉडी का स्तर ज्यादा था।





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अभी भी है और शोध की जरूरत





शोधकर्ताओं ने कहा, 'इस स्टडी के निष्कर्ष टी गोंडी इंफेक्शन और ग्लायोमा के जोखिम के बीच संबंध के पहले संभावित प्रमाण हैं, जिसकी पुष्टि किसी स्वतंत्र शोध में की जानी चाहिए।' प्रमुख शोधकर्ता हॉज ने कहा, 'इसका मतलब यह नहीं है कि टी गोंडी सभी स्थितियों में निश्चित रूप से ग्लायोमा (दिमाग में होने वाला एक प्रकार ट्यूमर) का कारण बनता है। ग्लायोमा वाले कुछ रोगियों में कोई टी गोंडी एंटीबॉडी नहीं होती है।'





बॉर्न पैथोजन को रोकने में कामयाबी





स्टडी में शामिल शोधकर्ताओं ने कहा, 'यदि अध्ययन के निष्कर्षों को दोहराया जाता है तो इंसान के दिमाग पर हमला करने वाले फूड बॉर्न पैथोजन (रोगाणु) को पहली बार रोकने में कामयाबी मिल सकेगी।'


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