Media24Media.com: जांजगीर न्यूज

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Braking News: 5 दिन बाद राहुल साहू को बोरवेल के गड्ढे से निकाला गया बाहर, सांप और मेंढक के बीच था बच्चा

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जांजगीर-चांपा जिले में बोरवेल के गड्ढे में फंसे हुए राहुल साहू को 105 घंटे और 5 दिन के बाद रेस्क्यू कर बाहर निकाल लिया गया है। जांजगीर कलेक्टर जीतेंद्र शुक्ला ने कहा है कि टीम ने 60 फीट नीचे फंसे राहुल को टनल के जरिए बाहर निकाल लिया है। कलेक्टर जीतेंद्र शुक्ला ने बताया कि राहुल की स्थिति ठीक है। उन्होंने बताया कि राहुल जिस जगह पर था वहां पर एक सांप और मेंढक भी था। इसके बाद भी बच्चा निडरता के साथ लड़ता रहा। पांच दिन तक जिला प्रशासन, पुलिस से लेकर NDRF, सेना, SDRF सहित कई सुरक्षा संस्थानों के सैकड़ों लोग राहुल के रेस्क्यू के लिए दिन-रात प्रयास कर रहे थे।

NDRF जवानों को आराम देने के लिए जवानों ने कमान संभाली थी। यह एक ज्वाइंट ऑपरेशन है और इसमें ऐसा ही किया जाता है। सवाल यहां बच्चे की जिंदगी का था, ऐसे में चट्‌टान तोड़ने के लिए सख्त रुख नहीं अपना सकते थे। राहुल की लोकेशन का अंदाजा लगाकर अब चट्टान तोड़ने के बाद सेना के जवान हाथों से मिट्टी निकाल रहे थे और कोहनी के सहारे आगे बढ़ रहे थे। धीरे-धीरे मिट्टी हटाते-हटाते आखिरकार वह क्षण आ ही गया जब बनाई गई टनल बोरवेल से मिल गई। वहां पहली बार अंदर चट्टान के हिस्से पर सोए राहुल की पहली झलक सेना के जवानों को मिली। वहां से बाहर जानकारी दी गई और बाहर जमा भीड़ भारतमाता की जय के नारे लगाने लगी।

मूक-बधिर है बच्चा

राहुल साहू का शुक्रवार दोपहर 2 बजे के बाद से कुछ पता नहीं चला। जब घर के ही कुछ लोग बाड़ी की तरफ गए तो राहुल के रोने की आवाज आ रही थी। गड्‌ढे के पास जाकर देखने पर पता चला कि आवाज अंदर से आ रही है। बोरवेल का गड्‌ढा 80 फीट गहरा है। ये भी बताया गया है कि बच्चा मूक-बधिर है, मानसिक रूप से काफी कमजोर है, जिसके कारण वह स्कूल भी नहीं जाता था। घर पर ही रहता था। राहुल अपने मां-बाप का बड़ा बेटा है। उसका छोटा भाई 2 साल छोटा है। पिता की गांव में बर्तन की दुकान है। CM भूपेश बघेल इस ऑपरेशन में नजर बनाएं हुए थे। 

न भारी वाहन का भय, न ट्रैफिक का टेंशन, शहर में अब सुरक्षित होने लगा है आवागमन

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जांजगीर-चांपा: सड़कें सिर्फ आवागमन का जरिया नहीं, मुसाफिरों को मंजिल पर पहुचाने से लेकर उन्हें विकास की सीढ़ी चढ़ाने वाला और विश्वास कायम करने वाला माध्यम भी है। सड़कें अगर खराब हो तो, सफर बोझिल और पीड़ादायक तो होता ही है,साथ ही मंजिल में सही सलामत और समय पर पहुचने का अविश्वास भी राहगीरों के मन में उत्पन्न हो जाता है। जिंदगी के उतार- चढ़ाव की तरह सड़कों का उतार-चढ़ाव भी हमें बहुत कुछ सीखने का मौका देती हैं, और मुकाम को पाने साहस। 


छत्तीसगढ़ की सरकार सड़कों के विकास के साथ बेहतर आवागमन की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। कुछ ऐसा ही प्रयास जांजगीर-चांपा जिले में कलेक्टर जितेंद्र कुमार शुक्ला द्वारा भी किया जा रहा है। यह उनकी जद्दोजहद या जिद ही कहिए कि शहर में सालों से चरमराई ट्रैफिक को उन्होंने व्यवस्थित कराने के साथ शहर के बीचोंबीच चलने वाले भारी वाहनों का रूट डाइवर्ट कर बाहर का रास्ता दिखाया। सड़कों को जाम करने वाले बेजाकब्जा तोड़े। 

अधूरे पुल के निर्माण को पूरा कराने के साथ एक मॉर्डन ट्रैफिक सिटी के रूप में जांजगीर-चांपा को आगे ले जाते हुए उन्होंने शहर के लोगों को न सिर्फ भारी वाहनों के खौफ से मुक्त किया है, लेकिन बेहतर आवागमन की परिकल्पना को साकार कर सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराते हुए धूल,प्रदूषण,ट्रैफिक जाम से भी राहत दिलाने का काम किया है।जिला बनने के बाद से ही बेहतर आवागमन के लिए तरस रहे जांजगीर-चांपा जिले वासियों को अब शहर में बदलाव के कई फर्क नजर आने लगे हैं। पहले आऊटर की सड़कों के साथ शहर की सड़कों में भी उन्हें अपनी जान जोखिम में डालना पड़ता था। दिन-रात सड़क पर दौड़ते भारी वाहन न सिर्फ किसी राहगीर को अपनी चपेट में ले लेते थे, शहर में धूल,प्रदूषण फैलाकर ट्रैफिक जाम उत्पन्न कर हर किसी के मन में खौफ भी पैदा कर देते थे। 

कलेक्टर जितेंद्र कुमार शुक्ला ने शहर में बनी इन समस्याओं का बारीकी से आंकलन किया। उन्होंने शहर की इस समस्या को दूर करने यातायात विभाग को कई निर्देश दिए। खुद भी शहर के साथ आऊटर का निरीक्षण कर भारी वाहनों के परिचालन का विकल्प तलाशा।  राष्ट्रीय राजमार्ग से लेकर राज्य सड़क के जिम्मेदार अधिकारियों की मीटिंग बुलाई। चर्चा की और आखिरकार उनका यह प्रयास सड़कों पर सफल होता नजर आने लगा।

पीथमपुर पुल को पूरा कराकर खोले विकास की नई राह

पीथमपुर उच्च स्तरीय पुल का काम सालों से चल रहा था। निर्माण अधूरा होने की वजह से आवागमन पर असर हो रहा था। कलेक्टर ने इसे पूरा कराने निरंतर प्रयास किया। जबसे जिला बना है, तब से एनएच 49 चांपा-जांजगीर से बिलासपुर  और रायगढ़ की ओर से जाने वाली वाहन बिलासपुर की ओर जाने वाली वाहन जांजगीर-चांपा से होकर जा रही थी। साथ में बलौदा से रायगढ़-बिलासपुर की ओर जाने वाली वाहनें भी जांजगीर-चांपा गेमन पुल होते हुए गंतव्य की ओर जा रही थी। नये एनएच में पीथमपुर हाई लेवल ब्रिज का काम तीन-चार साल से अधूरा था वह पूरा हुआ। इसके साथ ही विकास की नई राह खुल गई।

बाइपास और डाइवर्ट की नई व्यवस्था

कलेक्टर के निर्देश पर शहर में नई व्यवस्था लागू करते हुए चांपा हथनेवरा से रायगढ़ की ओर से बिलासपुर जाने वाली समस्त वाहनों को बाइपास किया जा रहा है। साथ ही बलौदा और नैला कोल साइडिंग से गुजरने वाली भारी वाहनों का करमंदा, मड़वा, कुलीपोटा होते हुए शहर के बाहर से ही निर्धारित समय में बिलासपुर और रायगढ़ की ओर डायवर्ट किया जा रहा है। इसके साथ ही, वे हल्के-छोटे वाहन जिन्हें सीधे रायगढ़ से बिलासपुर जाना होता था, उन्हें भी उसी परिवर्तित मार्ग से भेजा जा रहा है। जिससे शहर के भीतर छोटे वाहनों का भी दबाव कम हुआ है। कोरबा की ओर से बिलासपुर जाने वाली वाहनें भी चांपा और जांजगीर से भीतरी मार्ग से प्रवेश करते हुए गुजरते थे जिन्हें अब नए एनएच बनने के बाद पीआईएल हथनेवरा होते हुए बिलासपुर की ओर निर्धारित समय में डाइवर्ट किया जा रहा है। इससे यातायात का दबाव कम हुआ। शहर के भीतर दुर्घटना कम होने के साथ भीतर के मार्गाे में कोयला, भूसा एवं राखड़ की गाड़ियों की वजह से जो प्रदूषण की समस्या थी वह भी कम हुई।

PDS के वाहन भी शहर से नहीं गुजरते 

FCI का गोदाम भीतर होने के कारण पीडीएस के अंतर्गत चलने वाली वाहन शहर के भीतर से ही चलते थे। वह भी अब केरा चौक स्थित FCI गोदाम से सामान लेकर नेशनल हाइवे का इस्तेमाल कर आवागमन में कर रहे हैं।लगभग चार दशक से अधिक समय तक चाम्पा स्टेशन के सामने अतिक्रमण के मकड़जाल को हटाकर कलेक्टर ने साहस का परिचय दिया। यहां अतिक्रमण की वजह से न सिर्फ सड़के सकरी हो गई थी। आवागमन बार-बार बाधित भी होता रहता था। कलेक्टर ने यहां से बेजाकब्जा हटवाकर सड़क चौड़ीकरण का मार्ग प्रशस्त किया है। 

उन्होंने जांजगीर की ओर आने वाले ब्रिज के रास्ते में आवागमन प्रारंभ कराया। अब कोरबा की ओर के रास्ते को भी तेजी से पूरा कराया जा रहा है। उनके इन प्रयासों से चाम्पा स्टेशन के पास बेहतर आवागमन का माहौल विकसित हो रहा है। पहले रायगढ़ की ओर से चांपा या जांजगीर आने के लिए पीआईएल से गेमन पुल मार्ग का इस्तेमाल करना पड़ता था। चांपा स्टेशन के पास जांजगीर की ओर ओवरब्रिज प्रारंभ हो जाने से जांजगीर एवं चांपा जाने वाली वाहने आसानी से आवागमन कर रही कर पा रही है।

शहर में लग जाता था वाहनों का जाम

एनएच 49 के शहर के मध्य से गुजरने के कारण नो एंट्री लागू की गई थी। जिसमें सुबह 6 से दोपहर 2 बजे और सायं 5 से रात्रि 9 बजे तक गाड़ियों को शहर के बाहर ही रोका जाता था। औद्योगिक जिला होने के कारण वाहनों की संख्या अधिक है। अतः दोपहर 2 से 5 में नो एंट्री खोलने के समय शहर के भीतर दुर्घटनाओं की समस्या लगातार बनी रहती थी। खोखसा एवं नैला रेलवे फाटक के लगातार बंद रहने के कारण यह समस्या और गंभीर हो जाती थी। शहर के भीतर कई दुर्घटनाएं घटित होती थी एवं लगातार कानून व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होने की संभावना बनी रहती थी। अब इस परिवर्तित मार्ग के कारण समस्या समाप्त हुई।

नए ट्रैफिक सिग्नल और सड़क चौड़ीकरण से और सुधरेगी व्यवस्था

नया एनएच अस्तित्व में आने के बाद केरा चौक, शारदा चौक, नैला स्टेशन जांजगीर तथा चांपा में थाना चौक, विश्वेश्वरैया चौक, लायंस चौक और बरपाली चौक में ट्रैफिक सिग्नल की प्रक्रिया चल रही है एवं एनएच 49 में खोखसा चौक, हथनेवरा चौक में ट्रैफिक सिग्नल लगाने के लिए प्रक्रिया जारी है। साथ ही शहर के भीतरी प्रमुख सड़कों और चौक में पर्याप्त विद्युत व्यवस्था एवं अतिक्रमण हटाकर सड़क को चौड़ा करने के लिए नगर पालिका के साथ समन्वय बनाकर कार्रवाई जारी है। शहर के प्रमुख चौक-चौराहों में जेब्रा क्रॉसिंग और सड़क के दोनों और पार्किंग पट्टी से सीमा निर्धारण के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारियों से समन्यव बनाया गया है। यह कलेक्टर का ही प्रयास था कि बनारी से सकरेली और सकरेली से मसानिया कला तक लगभग 48 किलोमीटर की सड़कें जीर्णोद्धार होकर आने जाने वालों को राहत प्रदान करेगी।

CCTV कैमरे से होगा यातायात का नियंत्र

कलेक्टर द्वारा जांजगीर-चांपा शहर के सभी एंट्री और एग्जिट प्वाइंट सहित विभिन्न चौक चौराहों में उच्च दक्षता वाले CCTV कैमरा लगाए जाने अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए स्थान का सीमांकन भी कर लिया गया है। इस पर कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है। CCTV कैमरे लगने से सड़कों पर सुरक्षा का माहौल निर्मित होगा। इसके साथ ही यातायात को बेहतर बनाने और किसी प्रकार की दुर्घटनाओं और ट्रैफिक रूल तोड़ने सहित अन्य लापरवाही करने पर दोषियों को आसानी से पकड़ा जा सकेगा।

कलेक्टर-एसपी की बैठक में भी लिए गए कई फैसले

एक सप्ताह पहले ही कलेक्टर, एसपी की अध्यक्षता-उपस्थिति में जिले में संचालित समस्त उद्योगों, कोल ट्रांसपोर्ट, राखड़ ट्रांसपोर्ट, क्रेशर उद्योग एवं रेत का परिवहन करने वाले तथा जिले में निर्माणाधीन सड़क की समस्त परियोजनाओं से संबंधित लोगों की बैठक ली गई। जिसमें भारी वाहन को शहर के भीतर प्रवेश देने की बजाय डायवर्सन का उपयोग करने,  प्रशिक्षित एवं लाइसेंसधारी वाहनों चालकों से वाहन चलाने, साथ में एक हेल्पर रखने, वाहन में पर्याप्त रेडियम की व्यवस्था, कोल, राखड़, गिट्टी, बालू  परिवहन करने वाले वाहनों में पूर्णताः तिरपाल ढकने के निर्देश दिए गए है। उद्योग से निकलते समय ही समस्त आवश्यक सुरक्षात्मक उपाय अपनाने के बाद गाड़ियों का डिस्पैच करने,कोलवाशरी क्षेत्र के वाशरियो द्वारा पर्याप्त पानी का छिड़काव करने, बलौदा से नैला मार्ग में भारी वाहन चलने से जो सड़क खराब हुई है उसकी मरम्मत एवं सड़क में सुरक्षात्मक संकेतक कोलवाशरी द्वारा लगवाने के निर्देश दिए गए हैं।

अवैध परिवहन में लगे हाइवा, ट्रैक्टर समेत 21 वाहन और अवैध भंडारित रेत जब्त

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जांजगीर-चांपा कलेक्टर जितेंद्र कुमार शुक्ला के मार्गदर्शन और खनिज अधिकारी  रमाकांत सोनी के निर्देशन में जिला खनिज उड़नदस्ता दल ने जांजगीर, पेंड्री, खोखरा, अकलतरा, पामगढ़, शिवरीनारायण क्षेत्र में दबिश दी। साथ ही खनिज परिवहन कर रहे वाहनों की सघन जांच की। इस दौरान रेत से भरे हाइवा, ट्रैक्टर को जब्त किया गया है।

खनिज अधिकारी सोनी ने बताया कि जांच टीम द्वारा पाया गया कि गौण खनिज निम्न श्रेणी चूना पत्थर (गिट्टी), रेत, मिट्टी (ईंट) का अवैध परिवहन किया जा रहा था। जांजगीर-पेंड्री क्षेत्र में 4 हाइवा रेत, 6 ट्रैक्टर रेत को जब्त कर कलेक्ट्रेट परिसर में रखा गया है। पामगढ़ क्षेत्र में 2 हाइवा रेत, 1 हाइवा गिट्टी, 1 ट्रैक्टर रेत ,1 ट्रैक्टर मिट्टी (ईंट) को जब्त कर सुरक्षार्थ पुलिस थाना पामगढ़ मे रखा गया है। इसी तरह शिवरीनारायण क्षेत्र मे 1 हाइवा रेत, 2 ट्रैक्टर रेत, 2 ट्रैक्टर बोल्डर, 1 ट्रैक्टर मिट्टी (ईंट) जब्त कर पुलिस थाना शिवरीनारायण मे सुरक्षार्थ रखा गया है। 

21 वाहनों के खिलाफ कार्रवाई 

इस तरह कुल 21 वाहनों पर कार्रवाई की गई है। सभी वाहन मालिकों के खिलाफ छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम और खनिज अधिनियम के तहत केस दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। कार्रवाई में खनि निरीक्षक आदित्य मानकर, निरीक्षक पी डी जाड़े, खनिज सिपाही संजीव थवाईत,सावंत सूर्यवंशी और स्टाफ शामिल थे। खनिज अधिकारी ने बताया कि जिले में खनिज उड़नदस्ता की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।

तहसीलदार ने जब्त की भंडारित अवैध रेत  

वहीं बलरामपुर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व के निर्देशानुसार रामचंद्रपुर तहसीलदार तोष कुमार सिंह द्वारा त्रिशुली गांव लगभग 1 लाख 5 हजार मीट्रिक टन अवैध रेत भंडारित पाए जाने पर रेत को जब्त कर सुरक्षार्थ थाना प्रभारी सनावल को सौंपा गया है। साथ ही अग्रिम कार्रवाई के लिए प्रतिवेदन खनिज अधिकारी बलरामपुर को भेज दिया गया है।

छत्तीसगढ़ में फिर दोहराई गई निर्भया जैसी दरिंदगी, रेप के बाद निजी अंगों में किया रॉड से हमला

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निर्भया के साथ सामूहिक दुष्कर्म और हत्या (Nirbhaya gang-rape and murder) की घटना को 9 साल बीत (9 years of nirbhaya scandal) चुके हैं, लेकिन फिर भी महिलाओं के खिलाफ अपराधों की संख्या (Number of crimes against women) में कमी नहीं आ रही है। इसी बीच छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा में एक बार फिर निर्भया जैसी दरिंदगी दोहराई गई है।  

यह दरिंदगी डभरा थाना क्षेत्र में हुई है, जहां 58 साल की एक मानसिक दिव्यांग महिला के साथ निर्भया जैसी दरिंदगी की गई है। महिला के बाल पकड़ कर खींचे गए। उससे दुष्कर्म किया गया। इसके बाद आरोपी ने महिला के गुप्तांग में रॉड डाल दी। विरोध करने पर आरोपी ने उसे लात-घूंसों से पीटा और पत्थर पर सिर पटक कर उसकी जान ले ली। जिले में 5 दिन पहले बुजुर्ग महिला की हुई हत्या मामले में डभरा पुलिस ने ये खुलासा किया है। फिलहाल आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है।

जानकारी के मुताबिक डभरा नगर की रहने वाली पीड़िता मानसिक रूप से दिव्यांग थी। रात को वो कहीं भी सड़क किनारे सो जाया करती थी और लोग उसे खाना दे देते थे। बुधवार सुबह लोगों ने देखा कि वो गंभीर हालत में सड़क पर पड़ी हुई है। उसके शरीर पर जगह-जगह चोट के निशान थे। इस पर लोग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए, लेकिन वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

CCTV फुटेज के आधार पर हुआ खुलासा

सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और महिला की मौत को हादसा मान कर केस दर्ज किया। इसी बीच डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि महिला की आंखों के आसपास ब्लैक स्पॉट हैं, जो बिना मारे या चोट लगे किसी हादसे से नहीं हो सकते हैं। डॉक्टरों ने इस पर हत्या का संदेह जताया। इसके बाद पुलिस ने जांच बदली। शव मिलने वाली जगह पर लगे CCTV के फुटेज चेक किए गए, जिसमें एक युवक महिला को घसीटकर ले जाते हुए दिखाई दिया।

थाना प्रभारी ने दी जानकारी

पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान पता चला है कि 5 अप्रैल की रात करीब 2 बजे आरोपी किशन यादव पहुंचा। वो महिला के बाल पकड़कर मकान के बगल में ले गया और उसके सिर को पत्थर से पटक दिया। साथ ही हाथ-घूंसे से आंख पर भी वार किया। थाना प्रभारी डीआर टंडन ने बताया कि पूछताछ में पता चला है कि आरोपी किशन यादव सनकी जैसा है। CCTV फुटेज के आधार पर स्थानीय लोगों ने आरोपी की पहचान की थी।

पुलिस ने तीन दिन बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में किशन ने पुलिस को बताया कि वह महिला को रात में अकेला देख सूनसान स्थान पर ले गया और दुष्कर्म किया। इसके बाद भी वह चिल्लाती रही और उसे धक्का दे रही थी। इस पर उसने लोहे की रॉड महिला के गुप्तांग में डाल दी। उसके चेहरे पर लात-घूंसों से मारा और सिर पर पत्थर पटक दिया। बेहोश हो गई तो वह भाग निकला। पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया है। बता दें कि इससे पहले महासमुंद जिले के भैंसाखुरी गांव में ऐसी ही घटना हुई थी।

साल 2012 में हुआ था निर्भया कांड 

साल 2012 दिल्ली सामूहिक बलात्कार मामला भारत की राजधानी दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 को हुई एक बलात्कार और हत्या की घटना थी, जो भारतीय मीडिया के त्वरित हस्तक्षेप के कारण सबके सामने आई थी। 16-17 दिसंबर 2012 की रात दिल्ली में एक चलती बस में 6 लोगों ने 23 वर्षीय फिजियोथेरेपी इंटर्न के साथ बलात्कार किया और फिर उसे सड़क पर फेंक दिया। 29 दिसंबर 2012 को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में उसकी मौत हो गई। पीड़िता को निर्भया के नाम से जाना गया। इस मामले में इसी साल छह में से चार दोषियों को मौत की सजा दे दी गई।

नवाचारी किसान मोहनलाल सतनामी ने गेंदे की खेती से कमाए 1 लाख रुपए

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फसल चक्र परिवर्तन की बात तो सभी करते हैं, लेकिन किसानों के लिए कौन सी फसल फायदेमंद हो सकती है इसके बारे में कम ही लोग सोचते हैं। जांजगीर-चांपा जिले के लछनपुर गांव मे गेंदे की फसल लेने वाला एक किसान मोहन लाल सतनामी के नवाचार की चर्चा पूरे जिले में है, जिसने उद्यान विभाग की राष्ट्रीय कृषि योजना का लाभ लेकर अपनी खेत में धान की फसल के बजाए गेंदे की फसल ली। लछनपुर के किसान से बात करने पर पता चला कि उनकी खेतों में पैदावार कम होता है, जिसके कारण धान आदि की फसल लेने से उनको काफी आर्थिक नुकसान हुआ।  

उद्यान विभाग की सलाह से उसने गेंदे के फूलों की फसल लगाकर फूलों की खेती की, जिससे उसको बहुत लाभ मिला। जाहिर है त्यौहारी समय मे जहां नवरात्र त्यौहार की धूम अपने चरम पर है। वहीं गेंदे के फूलों की भी बिक्री बढ़ जाती है, जिससे किसानों को अधिक लाभ होता है ।

किस महीने में करें गेंदे के फूलों की खेती

जांजगीर-चांपा जिले की उद्यान विभाग की सहायक संचालक रंजना माखीजा ने बताया की गेंदे की खेती के लिए अप्रैल मई और उसके बाद अगस्त सितबर का महीना ठीक रहता है, जिसमें किसान खेतों को अच्छी तरह जोताई करके फूलों के बीज का रोपण करता है। इसके लिए किसानों को आवश्यक जानकारी और सलाह सरकारी उद्यान विभाग से दिया जाता है।

नवाचारी किसान बना लखपति

लछनपुर का नवाचारी किसान मोहनलाल सतनामी ने गेंदे की खेती कर खर्च काटकर एक लाख रूपए से अधिक के फूलों की बिक्री की है, जिससे नवाचारी किसान खुश है। नवाचारी किसान ने बताया की जन्मोत्सव विवाह या किसी भी समारोह मे गेंदे के फूलों की मांग सर्वाधिक रहती है। लोग गेंदे के फूलों को लेने और खरीदने के लिए खेतों तक पहुंच जाते हैं जिससे बिक्री आच्छी हो जाती है।

सेक्स रैकेट: घर में लंबे समय से चल रहा था देह व्यापार का धंधा, 3 महिलाओं समेत एक युवक गिरफ्तार

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छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में पुलिस ने सेक्स रैकेट (Sex Racket Busted) का भंडाफोड़ किया है। साथ ही मामले में 3 महिलाओं समेत एक युवक को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक शिवरीनारायण थाना क्षेत्र के एक घर में  लंबे समय से देह व्यापार का धंधा चल रहा था, जिसकी सूचना पर पुलिस ने ये कार्रवाई की है।  

पुलिस ने बताया कि उन्हें शिवरीनारायण‎ नगर के मेला ग्राउंड के पास एक घर में सैक्स रैकेट चलने की शिकायत मिली थी। पुलिस को बताया गया था कि यहां रहने वाली एक महिला बाहर से लड़कियां और महिलाओं को लाकर उनसे धंधा करवाती है। इसी शिकायत के आधार पर शुक्रवार रात पुलिस ने मौके पर दबिश दी, जहां से पुलिस ने 4 लोगों को गिरफ्तार किया है।

आस-पास के लोगों ने बताया कि वार्ड क्रमांक 01 में रहने वाली महिला काफी समय से इस काम में लगी थी, जिसकी वजह से क्षेत्र का माहौल खराब हो रहा था। उनका कहना है कि कई बार पुलिस से शिकायत की जा चुकी थी, लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की थी। हालांकि अब जाकर पुलिस ने यहां छापेमारी की है। लोगों का कहना है कि इससे पहले भी यहां कार्रवाई हुई है। इसके बावजूद महिला ने ये धंधा बंद नहीं किया। पुलिस ने इस मामले में मुंगेली के एक युवक, बेमेतरा, बलौदाबाजार और बिलासपुर की महिलाओं को गिरफ्तार किया है। फिलहाल पुलिस आगे की कार्रवाई में जुटी हुई है।

ब्याज वसूली के ऑफिस में चल रहा था देह व्यापार

वहीं 3 मार्च को छत्तीसगढ़ की संस्कारधानी राजनांदगांव में पुलिस ने शहर में चल रहे सेक्स रैकेट (Sex Racket Busted) का भंडाफोड़ किया था। साथ ही मामले में 2 महिलाओं समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। पकड़े गए आरोपी ब्याज वसूली के ऑफिस से देह व्यापार का धंधा चला रहे थे। इसके लिए ग्राहकों को एक फार्म हाउस पर भेजा जाता था। पुलिस ने दोनों जगहों पर एक साथ कार्रवाई की थी। 

जीजा-साली समेत 12 लोग गिरफ्तार

बता दें कि 6 सितंबर को बिहार की आरा पुलिस ने सेक्स रैकेट (Sex Racket Busted) का भंडाफोड़ किया था। साथ ही 5 जोड़ों यानी 12 लोगों को आपत्तिजनक हालत में गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक मुखबिर की सूचना पर उन्होंने जगदीशपुर नयका टोला मोड़ के पास स्थित एक होटल में छापेमारी की, जहां से 5 जोड़ों को आपत्तिजनक हालत में पकड़ा गया। इनमें एक 51 साल का जीजा और 21 साल की साली भी थी। तलाशी के दौरान वहां कई आपत्तिजनक सामान भी मिले थे। 

होटल में कई सालों से चल रहा था अवैध धंधा

जानकारी के मुताबिक जगदीशपुर के नयका टोला स्थित निर्मला होटल में कई सालों से सेक्स रैकेट का धंधा चल रहा था, लेकिन पुलिस को इसकी भनक नहीं लग रही थी। होटल में जगदीशपुर के अलावा, बिहिया, पीरो, मलियाबाग, आरा सहित कई इलाके के युवक-युवती और महिलाएं आती हैं। होटल में एक रूम का किराया सात से 800 लिए जाते थे। पुलिस के मुताबिक होटल में एक कमरा का दो घंटे के लिए आठ सौ रुपये वसूलते थे। यही कारण था कि जगदीशपुर से लेकर पीरो और रोहतास तक के जानकार लोग यहां आया करते थे। 

जांजगीर-चांपा सड़क हादसे में पति-पत्नी की मौत, विवाद के बाद पत्नी को मायके छोड़ने जा रहा था पति

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छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा में दर्दनाक सड़क हादसा हुआ है, जहां तेज रफ्तार वैन पेड़ से टकरा गई, जिसकी वजह से पति और पत्नी की मौत हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि वैन के परखच्चे उड़ गए। सूचना पर पहुंची पुलिस करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद पति के शव को कार से बाहर निकलवा सकी। दोनों के शवों को पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया है।

पुलिस के मुताबिकशिवरीनारायण के लोहर्सी गांव में रहने वाले नरेश श्रीवास (उम्र 26) अपनी पत्नी पूनम श्रीवास (उम्र 24) को साथ लेकर वैन में अपने ससुराल पेंड्री जा रहा था। इसी बीच लोहर्सी से आगे धरदेई गांव के पहले मोड़ पर तेज रफ्तार वैन पेड़ से जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि वैन आगे से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई, जिसकी वजह से पति-पत्नी दोनों उसी में फंस गए।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, हालांकि तब तक नरेश दम तोड़ चुका था। जबकि पूनम बुरी तरह से घायल थी। पुलिस ने पूनम को पामगढ़ अस्पताल भेजा, लेकिन डॉक्टर्स ने उसे भी मृत घोषित कर दिया। इस बीच नरेश का शव निकालने के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। शव बुरी तरह से वैन में फंसा हुआ था। ग्रामीणों की मदद से पुलिस करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद शव को बाहर निकाल सकी।

दंपती के बीच हुआ था झगड़ा 

जानकारी के मुताबिक नरेश और पूनम की शादी को हुए सिर्फ 7 महीने ही हुआ था, लेकिन पूनम और नरेश के बीच आपसी मनमुटाव चल रहा था। इसकी वजह से दोनों में विवाद हुआ था। इसके बाद गुस्से में नरेश उसको मायके छोड़ने जा रहा था। इसी बीच ये हादसा हो गया। आशंका जताई जा रही है कि वैन की रफ्तार काफी तेज थी, जिसके कारण वो अनियंत्रित होकर पेड़ से जा टकराई।

मौत के मामले में 11वें नंबर पर छत्तीसगढ़

इस साल नवंबर में सड़क दुर्घटनाओं (Road accidents) में 408 लोगों की मौत और 884 लोग घायल हुए है। प्रदेश में 11 महीनों में 10 हजार 126 सड़क दुर्घटनाओं में 395 लोगों की मौत हुई और 9 हजार 270 लोग घायल हुए है। वहीं सड़क हादसे से होने वाली मौत के मामले में छत्तीसगढ़ देश भर में 11 वें नंबर पर पहुंच गया है।

सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या

सड़क हादसों (Road Accident in Chhattisgarh) में मौत के मामले में छत्तीसगढ़ के आंकड़ों में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। आंकड़ों के मुताबिक साल 2019 में करीब 14 हजार सड़क हादसों में 4 हजार 556 लोगों ने अपनी जान गवांई है। इसमें करीब 3 हजार 200 मृतक ऐसे हैं, जो दो पहिया वाहनों में थे।

दिन-ब-दिन बढ़ रहा सड़क हादसों का ग्राफ

इन 3 हजार 200 में से करीब 2450 लोगों की मौत सिर में चोट लगने की वजह से हुई है। इसके कारण प्रदेश में सड़क हादसों का ग्राफ दिन ब दिन बढ़ता ही जा रह है, इसके कारण सड़क हादसों में जान गवांने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ती ही जा रही है। आंकड़ों के मुताबिक सड़क हादसों में सबसे ज्यादा हादसे राजधानी रायपुर में हो रहे हैं। छत्तीसगढ़ पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक राजधानी रायपुर के टाटीबंध चौक पर हर महीने 4 से 5 लोगों की मौत होती है। ऐसा नहीं है कि सरकार सड़क हादसों को कम करने के लिए कोई उपाय नहीं कर रही है।

लोगों की लापरवाही बन रही हादसों का कारण

बता दें कि सड़क हादसों और इन हादसों में घायल लोगों को जल्द इलाज मुहैया करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने हर जिले के पुलिस को पेट्रोलिंग वाहन सौंपा है. साथ ही सड़क हादसों को कम करने और लोगों को जागरूक करने के लिए कई तरह के जागरुकता अभियान भी चलाएं जा रहे है, लेकिन लोगों की लापरवाही के कारण सड़क दुर्घटना कम होने का नाम नहीं ले रहा है। लोग अपनी सुरक्षा के लिए हेलमेट नहीं पहनते है, बल्कि पुलिस से बचने के लिए हेलमेट पहनते है। वहीं लोग हर काम जल्दी करना चाहते है, कई बार लोगों की यहीं जल्दबाजी सड़क हादसों का कारण बनता है।

इन कारणों की वजह से हो रहा सबसे ज्यादा हादसा

  • शराब पीकर वाहन चलाने के कारण।
  • गलत साइड में ड्राइविंग करने के कारण।
  • बिना हेलमेट वाहन पहने गाड़ी चलाने के कारण।
  • मोबाइल फोन का उपयोग करते-करते ड्राइविंग करने के कारण।
  • नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने जैसे कारणों के कारण सबसे ज्यादा दुर्घटना और मौत हो रही है।

साल दर साल बढ़ रहा आंकड़ा

बीते तीन साल के सड़क हादसों के रिपोर्ट के आधार पर पुलिस मुख्यालय ने रिपोर्ट तैयार की हैं। वहीं साल 2016 से अगस्त 2020 तक के मौतों के आंकड़ों को देखा जाए तो हर साल सड़क हादसों होने वाले मौतों का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा हैं। बता दें कि कोरोना के मद्देनजर किए गए लॉकडाउन में सड़क हादसों की संख्या में कमी आई थी, लेकिन अनलॉक के बाद प्रदेश में सड़क हादसों की संख्या में लगातार तेजी आई है। अगस्त, सितंबर और अक्टूबर में बीते साल के मुकाबले सबसे ज्यादा 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी सितंबर में हुई है।

इन जिलों में आई मृत्यु दर में कमी

आंकड़ों के मुताबिक रायपुर, गरियाबंद, मुंगेली, दंतेवाड़ा, बीजापुर और नारायणपुर में हादसों में मरने वालों की संख्या सबसे ज्यादा है,जबकि बाकी जिलों में मृत्यु दर में कमी आई है। प्रदेशभर के सड़क हादसों के रिपोर्ट के मुताबिक 67% दोपहिया वाहन सवारों की मौत हुई है। दोपहिया वाहन सवार 2359 लोग हादसे के शिकार हुए, जिनमें 2361 की मौत हो गई। इनमें से 2257 की मौत हेलमेट नहीं पहनने से हुई है। इस साल दस महीने में 9097 सड़क हादसे हुए हैं । इसमें 3543 लोगों की मौत हुई है। इसके अलावा 8388 लोग घायल हुए हैं।

सबसे ज्यादा युवा हो रहे हादसे का शिकार

बता दें कि 40 प्रतिशत सड़क दुर्घटना फ्लाई ओवर के आस-पास होता हैं। इसके बाद सबसे ज्यादा हादसा क्रॉसिंग पर होता है, आंकड़ों के मुताबिक क्रॉसिंग पर होने वाले सड़क हादसों का प्रतिशत 30 है। इनमें सबसे ज्यादा हादसों के शिकार बाइक सवार और पैदल यात्री होते है। वहीं हादसों के शिकार होने वाले लोगों में ज्यादातर लोग युवा हैं।

एक ही गांव के 2 युवकों ने की खुदकुशी, फंदे से लटके मिले शव

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छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा के नवागढ़ क्षेत्र में खुदकुशी की 2 अलग-अलग घटना हुई है। नवागढ़ TI गणेश राजपूत ने बताया कि पहली घटना पेंड्री गांव की है, जहां 28 साल के सूरज यादव ने फांसी लगाकर जान दे दी है। वहीं दूसरी घटना अमोरा गांव की है, जहां राजू कश्यप ने फांसी लगाकर खुदकुशी की है। राजू के 2 छोटे बच्चे भी हैं। सूचना के बाद नवागढ़ पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। 

फाइल फोटो

वहीं दोनों ही युवकों के परिजनों का कहना है कि वे बेरोजगारी के कारण मानसिक रूप से परेशान थे। हालांकि पुलिस जांच की बात कह रही है। पुलिस ने बताया कि राजू का शव घर के कमरे में ही पंखे से लटका मिला। वहीं सूरज का शव उसके घर के कमरे में बिस्तर के सहारे बैठी हुई अवस्था में मिला। वहीं उसके गले में छत के सहारे फंदा पड़ा हुआ था। ऐसे में उसकी खुदकुशी को लेकर पुलिस को संदेह है।

जांच में जुटी पुलिस 

दोनों युवकों के परिजनों का कहना है कि सूरज और राजू मजदूरी करते थे। कोरोना संक्रमण के चलते उनका काम छिन गया। इसके कारण दोनों काफी परेशान रहते थे। इसी के कारण परिजनों ने खुदकुशी की आशंका जताई है। हालांकि पुलिस को परिजनों की कहानी पर भरोसा नहीं हो रहा है। वे मामले की जांच के बाद ही कुछ कहने की बात कर रही है। 

पारिवारिक विवाद में युवक ने लगाई फांसी

इधर, कांकेर जिले में शनिवार देर रात एक युवक ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। अगले दिन यानी की रविवार सुबह उसका शव घर से करीब 100 मीटर दूर पानी की टंकी से लटका हुआ मिला। जब ग्रामीण उधर से निकले तो शव देख उन्होंने पुलिस को सूचना दी।इसके बाद पुलिस ने शव को नीचे उतारा तो उसकी पहचान हो सकी। बताया जा रहा है कि युवक पंखाजूर थाना क्षेत्र का रहने वाला था, जिसने पारिवारिक विवाद में खुदकुशी की है। 

रस्सी से लटका मिला शव

मृतका की पहचान पखांजूर के वार्ड-14 में किशोर विश्वास के रूप में हुई है, जिसका अपनी पत्नी और माता-पिता से शनिवार शाम को विवाद हुआ था। इसके बाद सभी लोग सोने चले गए। आशंका है कि देर रात वो घर से निकला और करीब 100 मीटर दूर वार्ड-15 में पानी टंकी पर पहुंचा होगा। वहां उसने टंकी पर चढ़कर फांसी लगा ली। उसका शव रस्सी से लटका मिला है। सुबह लोगों ने शव देखा तो पुलिस को सूचना दी।

आए दिन होता था विवाद 

जानकारी के मुताबिक युवक का हमेशा ही अपने परिवार के लोगों से विवाद होता रहता था। इस चक्कर में वो एक बार जेल भी जा चुका था। हालांकि विवाद का कारण क्या था, ये स्पष्ट नहीं हो सका है। बताया जा रहा है कि शनिवार को हुए विवाद के दौरान उसने खुदकुशी करने की धमकी दी थी, लेकिन किसी ने गंभीरता से नहीं लिया। फिलहाल पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। साथ ही आगे की कार्रवाई में जुट गई है।

छत्तीसगढ़ में फिर लौटा पाबंदियों का दौर, कलेक्टर ने 4 वार्ड को किया माइक्रो कंटेनमेंट जोन घोषित, कई जिलों में धारा 144 लागू

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जांजगीर-चांपा कलेक्टर जितेंद्र कुमार शुक्ला ने कोरोना संक्रमित व्यक्ति पाए जाने पर नगर पालिका जांजगीर नैला के वार्ड क्रमांक 4, अकलतरा तहसील के ग्राम नरियारा के वार्ड क्रमांक- 11 और ग्राम   तरौद  के  वार्ड के वार्ड क्रमांक 12 के चिन्हांकित  क्षेत्र को माइक्रो कंटेनमेंट जोन घोषित किया है। जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी आदेश के मुताबिक कंटेनमेंट जोन में अति आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति-अपरिहार्य, स्वास्थगत आपातकालीन परिस्थितियों को छोड़कर कंटेनमेंट जोन में आने-जाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। 

कंटेनमेंट जोन के निवासी बिना अनुमति के अपने घरों से बाहर किसी भी परिस्थिति में नहीं निकलेंगे। चिन्हांकित क्षेत्र पूर्णत लॉकडाउन रहेगा। क्षेत्र के अंतर्गत सभी दुकानें, आफिस और अन्य वाणिज्यिक प्रतिष्ठान आगामी आदेश तक पूर्णत बंद रहेंगे। वाहनों के आवागमन पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। अति आवश्यक होने पर अलग से आदेश प्रसारित किया जाएगा। कंटेनमेंट जोन में आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी संबंधित तहसीलदार को दी गई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा संबंधित क्षेत्र में स्वास्थ्य निगरानी, सैंपल की जांच की व्यवस्था की जाएगी।

कलेक्टर ने जारी किया आदेश

कानून-व्यवस्था, कंटेनमेंट जोन को सील करने और गश्त करने के लिए आवश्यक पुलिस व्यवस्था के लिए पुलिस अधीक्षक और अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। कंटेनमेंट क्षेत्र में सिर्फ एक प्रवेश और निकास द्वार की व्यवस्था के लिए PWD के कार्यपालन अभियंता को दायित्व सौंपा गया है। स्वास्थ्य विभाग के SOP मुताबिक PPE कीट, मास्क उपलब्ध करवाने, घरों का एक्टिव सर्विलांस, मेडिकल अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था की जिम्मेदारी मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी को दी गई है।

जिले में धारा 144  लागू

वहीं  कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए कोरिया कलेक्टर ने जिले में धारा 144 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है। जारी आदेश के अनुसार जिला कोरिया राजस्व सीमा अंतर्गत किसी भी प्रकार के आयोजन, जुलूस, सार्वजनिक समारोह, रैली, सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक समारोह और खेलकूद से संबंधित वृहद् आयोजन-जनसमुदाय के स्थान पर एकत्रित होने पर पूर्णत प्रतिबंध लगाया गया है। साथ ही जिले के अंतर्गत सभी मॉल, होल सेल दुकानें, जिम, सिनेमाघर, होटल, रेस्टोरेंट्स, स्वीमिंग पूल, ऑडिटोरियम, मैरिज हॉल और अन्य आयोजन स्थलों को आगामी आदेश तक एक तिहाई क्षमता के साथ संचालित किया जाएगा।

सिनेमाघर अगले आदेश तक बंद

इधर, प्रदेश में बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए राजनांदगांव जिले में कलेक्टर ने भी धारा 144 लागू कर दिया है। इसके साथ ही गरियाबंद जिले में कलेक्टर निलेशक्षीर सागर और दुर्ग कलेक्टर ने भी धारा 144 लागू कर दिया है।  बलौदाबाजार जिले में भी धारा 144 लागू कर दी गई है। इस संबंध में जिले के कलेक्टर सुनील कुमार जैन ने आदेश जारी कर दिया है। रायगढ़ और बिलासपुर कलेक्टर ने भी  धारा 144 को लेकर आदेश जारी किया है। आदेश के मुताबिक दुकानें सुबह 10 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक खुली रहेगी। सिर्फ लोडिंग अनलोडिंग कार्य किया जाता है। सभी स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र बंद रहेंगे। सभी पुस्तकालय, जिम, पूल, सिनेमाघर अगले आदेश तक बंद रहेंगे।

ऑनलाइन क्लासेस रहेगी जारी 

बता दें कि कोरोना को देखते हुए शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। कोरोना के चलते राजधानी रायपुर के सभी स्कूल बंद कर दिए गए हैं। छात्रों का स्कूल में आना प्रतिबंधित रहेगा शिक्षक स्कूल आएंगे, लेकिन छात्रों पर पाबंदी रहेगी। पहली से 12वीं तक की सभी कक्षाएं बंद कर दी गई हैं। इसे लेकर रायपुर डीईओ ए.एन. बंजारा ने बताया कि सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशानुसार को बंद कर दिया गया है। ऐसे में सभी ऑफलाइन कक्षाए बंद रहेंगी। जबकि ऑनलाइन क्लासेस जारी रहेगी।

11 गंभीर कुपोषित बच्चे इलाज के बाद हुए सामान्य श्रेणी में शामिल, कुपोषण दर में आई डेढ़ प्रतिशत की कमी

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महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से राष्ट्रीय पोषण माह का आयोजन 01 सितंबर से 30 सितंबर तक किया गया। सभी आंगनबाड़ी  कार्यकर्ता और सहायिकाओं ने पोषण से संबंधित जन जागरूकता के लिए विभिन्न गतिविधियां आयोजित की। पोषण माह का आयोजन कुपोषण मुक्ति के लिए पुरूषों की भागीदारी की थीम पर किया गया। जांजगीर-चांपा के परियोजना नवागढ़ के अंतर्गत 11 गंभीर कुपोषित बच्चे इलाज के बाद सामान्य श्रेणी में शामिल हो गए हैं। 

नवागढ़ परियोजना अधिकारी ने बताया कि वजन त्यौहार के दौरान चिन्हांकित गंभीर कुपोषित बच्चों का फॉलोअप लिया गया।  गृह भेंट के द्वारा उनकी लंबाई, ऊंचाई, वजन का मापन कार्यकर्ता, सहायिका और मितानीन द्वारा संयुक्त रूप से किया। नवागढ़ परियोजना के गंभीर कुपोषित 11 बच्चे जिन्हें विशेष खानपान, देखरेख की आवश्यकता थी, उन्हें पोषण पुर्नवास केन्द्र (एनआरसी) जांजगीर मे भर्ती कराकर 15 दिन तक समुचित इलाज और देखरेख का लाभ दिलाया गया। 


सभी बच्चों के वजन मे क्रमिक रूप से वृद्धि दर्ज की गई। ग्राम पंचायत अवरीद में स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से मुख्यमंत्री बाल संदर्भ शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें कुल 32 गंभीर कुपोषित बच्चों का स्वास्थ्य जांच कराकर दवाई उपलब्ध कराई गई। वहीं अति गंभीर 02 बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) जांजगीर मे भर्ती कराकर समुचित इलाज दिया जा रहा है।  

जिले में कुपोषण दर में आई डेढ़ प्रतिशत की कमी 

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की कुपोषण मुक्ति की पहल पर छत्तीसगढ़ में 2 अक्टूबर 2019 को शुरू हुए मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान का आज 2 साल पूरा हुआ। इस अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। महासमुंद जिले के पूरे क्षेत्र में कुपोषण और एनीमिया को जड़ से समाप्त करने कार्ययोजना बनाकर कार्य किया जा रहा है। इस कार्यकम में जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी-कर्मचारी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

विभिन्न प्रकार की गतिविधियां आयोजित

महिला एवं बाल विकास अधिकारी समीर पांडे ने बताया कि मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान की शुरुआत महासमुंद जिले में  2 अक्टूबर 2019 को आंगनबाड़ी केंद्र बरोंडाबाजार से किया गया था। अभियान का उद्देश्य बच्चों में कुपोषण को कम करने और महिलाओं, किशोरी बालिकाओं में एनिमिया को कम करने के लिए लक्ष्य निर्धारित किया गया था। मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान में कुपोषण को कम करने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए विभिन्न प्रकार की गतिविधियां आयोजित की गई। 

डेढ़ प्रतिशत बच्चे कुपोषण मुक्त

सभी हितग्राहियों को गर्म भोजन प्रति सोमवार,बुधवार और शुक्रवार को रेडी टू ईट खिलाया जा रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओ द्वारा नियमित रूप से गृह भेंट करके व्यक्तिगत साफ-सफाई, स्वास्थ्य जांच, कृमि नाशक दवा खिलाया गया। आंगनबाड़ी केंद्रों में मिलने वाली पूरक पोषण रेडी टू ईट को 6 दिन में खिलाने की समझाइश दी  जाती है । खान-पान में विशेष ध्यान जा रहा है, जिसमें रोटी हरी सब्जी और मुनगा भाजी नियमित रूप से बच्चों को खिलाने की सलाह आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा बच्चों के माता-पिता को दिया जाता है। जिसके परिणामस्वरूप मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान में जिले के डेढ़ प्रतिशत बच्चे कुपोषण मुक्त हुए हैं और कुपोषण की दर में गिरावट आई।

पोषण दिवस का आयोजन

सुपोषण अभियान के अंतर्गत जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में सुपोषण वाटिका तैयार कर सब्जी का उपयोग भी किया जा रहा है। साथ में सभी प्रकार के स्थानीय साग भाजी और खाद्य पदार्थों को शामिल कर भोजन में विविधता कर खाते रहने की सलाह दी गई। ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता और पोषण दिवस का आयोजन कर हितग्राहियों को लाभांवित किए गए। आंगनबाडी कार्यकर्ता द्वारा हितग्राहियों की नियमित रूप से टीकाकरण और वजन लिया गया। कोरोना काल में भी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के मंशानुरूप कुपोषण दूर करने और कोरोना जागरूकता के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा घर घर जाकर सूखा राशन, रेडी टू ईट और चिक्की का वितरण किया गया। साथ ही लोगों को कोरोना के प्रति भी जागरूक किया गया।

मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान

मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान अंतर्गत बीते महीने 10 अगस्त से फिर हफ्ते में तीन दिन सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को गुणवत्तापूर्ण गरम पौष्टिक भोजन हितग्राहियों को उपलब्ध कराया जा रहा है। लॉकडाउन और कोरोना के चलते बच्चों के बेहतर सेहत के चलते बंद किया गया था। जिसे फिर 10 अगस्त से जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में 6453 सभी कुपोषित बच्चों और 15 से 49 आयु के 10271 एनीमिक पीड़ित बालिकाएं और महिलाओं को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएं और सहायिकाएं अब गरम भोजन परोस रही है। ताकि बच्चें सुपोषित हो और बालिका और महिलाएं एनीमिक की कमी से बाहर निकले। 

महिलाओं के कुपोषण में कमी

इसी प्रकार खनिज न्यास निधि से कमार जनजाति के 3 से 6 आयु वर्ग के 96 बालकों और 1 से 49 आयु वर्ग की 1428 बालिका और महिलाओं को हफ्ते में तीन दिन मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को उनके घर जाकर उबला अंडा प्रदाय किया जा रहा है। इसमें भी बच्चों और महिलाओं के कुपोषण में कमी आई है। मार्च 2021 की बात करें तो मध्यम 3 से 6 साल के मध्यम कुपोषित बच्चों की संख्या 37 थी। जिसमें 7 बच्चे सुपोषित हए। 

7 गंभीर कुपोषित बच्चों में से 3 बच्चे सुपोषित 

वहीं 7 गंभीर कुपोषित बच्चों में से 3 बच्चे सुपोषित हुए। कमार एनीमिक बालिकाओं और महिलाओं की बात करें तो 52 मध्यम एनीमिक महिलाओं में से 4 महिलाएं इससे बाहर आए हैं। गंभीर 15 महिलाओं में से 6 महिलाएं एनीमिक पीड़ित से बाहर निकली। जिले में इस योजना का सफल संचालन हो रहा है और कुपोषित बच्चों और एनीमिक पीड़ित महिलाओं में गिरावट आ रही है।

सिविल सर्जन, पामगढ़ BMO और महिला चिकित्सक को कारण बताओ नोटिस जारी

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जांजगीर-चांपा में 'पांच साल की बच्ची को मुलाहिजा के लिए कटवा रहे अस्पताल के चक्कर' शीर्षक से प्रकाशित समाचार को संज्ञान में लेते हुए CMHO एस आर बंजारे ने जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. अनिल जगत, पामगढ़ BMO और पामगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अनुबंध के तहत पदस्थ महिला चिकित्सक डॉ. प्रज्ञा ताम्रकार को शो कॉज नोटिस जारी कर 3 दिन के अंदर जवाब प्रस्तुत करने कहा को है। 


जारी शो कॉज नोटिस के मुताबिक सिविल सर्जन द्वारा जिला चिकित्सालय में दो महिला चिकित्सक पदस्थ होने के बावजूद दुष्कर्म पीड़ित बच्ची के लिए आवश्यक मुलाहिजा व्यवस्था नहीं करने को गंभीर अनियमितता और स्वास्थ्य विभाग की छवि धूमिल करने का जिम्मेदार मानते हुए शो कॉज नोटिस जारी किया गया है।

तीन दिन के अंदर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश

इसी प्रकार पामगढ़ BMO को सीएससी पामगढ़ में महिला चिकित्सक पदस्थ होने के बावजूद पीड़ित बच्ची को जिला अस्पताल रेफर करने पर गंभीर अनियमितता मानते हुए कारण बताओ सूचना जारी किया गया है। सीएससी पामगढ़ में संविदा अनुबंध के आधार पर पदस्थ डॉ. प्रज्ञा ताम्रकार द्वारा ड्यूटी में नहीं होने के कारण मुलाहिजा से मना करने पर शो कॉज नोटिस जारी कर तीन दिन के अंदर जवाब प्रस्तुत करने को कहा गया है। 

वनरक्षक और प्यून को अनुपस्थिति के लिए नोटिस

कोरबा वनामंडलाधिकारी ने वन मंडल में पदस्थ ड्यूटी पर वनरक्षक संतोष सिंह आनंद और प्यून सतीश कुमार दुबे की अनाधिकृत अनुपस्थिति के मद्देनजर दोनों को सात दिन के अंदर कार्य पर उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किया है। निर्धारित समयावधि में ड्यूटी पर उपस्थित नहीं होने पर सेवा समाप्ति की कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

रेल यात्रा के लिए कोविड जांच रिपोर्ट जरूरी, 5 रेल्वे स्टेशनों में 24 घंटे होगी जांच

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जांजगीर-चांपा कलेक्टर जितेंद्र कुमार शुक्ला के मार्ग निर्देशन में कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए जिले के पांच रेलवे स्टेशनों अकलतरा, जांजगीर-नैला, चांपा, नया बाराद्वार और सक्ती में यात्रियों की कोविड जांच के लिए 3 पालियों में 24 घंटे ड्यूटी लगाई गई है।  नोडल अधिकारी डिप्टी कलेक्टर  सुमित गर्ग ने बताया कि 01 अप्रैल 2021 से 20 जुलाई 2021 तक कुल 24 हजार 46 यात्रियों का कोरोना जांच किया गया, जिसमें 773 यात्री कोरोना संक्रमित पाए गए। जानकारी के मुताबिक रेल्वे स्टेशन अकलतरा में 286, नैला में 41, चापां में 232, नया बाराद्वारा में 24 और सक्ती में 190 संक्रमित पाए गए हैं। 



बता दें कि कोविड 19 संक्रमण के रोकथाम की दृष्टि से रेलमार्ग से बाहर से आने वाले यात्रियों को अधिकतम 96 घंटे के अंदर RT-PCR निगेटिव रिपोर्ट अनिवार्य रूप से दिखाना होगा। जिन यात्रियों के पास बीते 96 घंटे के अंदर की RT-PCR निगेटिव रिपोर्ट है, उन्हें घर जाने की अनुमति दी जाएगी और जिन यात्रियों के पास निगेटिव रिपोर्ट नहीं होगी, उनका कोरोना टेस्ट कराया जाएगा। जिन यात्रियों की कोरोना टेस्ट निगेटिव आएगी उन्हें घर जाने की अनुमति दी जाएगी। टेस्ट पॉजिटिव आने पर उन्हें बीते साल  की स्थापित प्रक्रिया की तरह स्थानीय क्वारंटाइन सेंटर, होम आइसोलेशन,कोविड केयर सेंटर भेजा जाएगा। इसके लिए परिवहन की व्यवस्था की गई है। कर्मचारियों को हिदायत दी गई है कि वे मास्क लगाकर सोशल डिस्टेसिंग का पालन करते हुए ड्यूटी करें।


छत्तीसगढ़ में मिले कोरोना के 188 नए मरीज


छत्तीसगढ़ में 24 घंटे में कोरोना के 188 नए मरीजों की पहचान हुई है। जबकि 2 लोगों की कोरोना से मौत हुई है। वहीं प्रदेश में 136 मरीजों ने कोरोना को मात दी है। प्रदेश की औसत पॉजिटिविटी दर 0.6 प्रतिशत है। छत्तीसगढ़ में अब तक 9 लाख 83 हजार 656 मरीज कोरोना को मात दे चुके हैं। प्रदेश में अब कुल एक्टिव मरीज 3 हजार 384 हैं, जिनका इलाज अभी जारी है। कोरोना से अब तक 13 हजार 506 लोगों की मौत हो चुकी है। प्रदेश में 31 हजार 77 लोगों का कोरोना टेस्ट किया गया था, जिसमें से सिर्फ 188 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। 24 घंटे में राजधानी रायपुर में 15, बलौदाबाजार में 13, बिलासपुर में 18, कोरबा में 11, जांजगीर-चांपा में 22, जशपुर में 11 और बस्तर में 11 कोरोना मरीज सामने आए हैं।

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