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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लौहपुरुष की विरासत को और सशक्त बनाया – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज गुजरात के केवड़िया स्थित एकता नगर में आयोजित भारत पर्व में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत पर्व हमारे देश की विविधता में एकता का प्रतीक है। यहां भारत के हर राज्य की संस्कृति, परंपरा और गौरव एक साथ देखने को मिलते हैं। कार्यक्रम में दिल्ली के उप राज्यपाल वी के सक्सेना और छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव भी उपस्थित थे।

सरदार पटेल की 150वीं जयंती वर्ष पर आयोजित भारत पर्व में शामिल हुए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री साय ने लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल को नमन करते हुए कहा कि भारत पर्व उनकी 150वीं जयंती वर्ष पर आयोजित हो रहा है, जिसका समापन धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की जयंती — राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस — पर होगा। उन्होंने कहा कि यह पर्व भारत के सांस्कृतिक और भावनात्मक एकीकरण का सशक्त प्रतीक है।

भारत पर्व हमारी विविधता में एकता का उत्सव - मुख्यमंत्री साय

मुख्यमंत्री साय ने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की भव्यता की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह प्रतिमा भारत की एकता की पहचान है। उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस प्रतिमा के निर्माण का निर्णय लिया, तब देश के हर गांव से लोहा मंगवाया गया था — यह सच्चे अर्थों में एक भारत का प्रतीक है।

छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक दल के कलाकारों से की मुलाकात और दी शुभकामनाएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस तरह सरदार पटेल ने रियासतों को जोड़कर एक भारत बनाया, उसी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके सपनों के भारत को सशक्त करने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का निर्णय लेकर सरदार पटेल ने स्वतंत्र भारत में सनातन संस्कृति के वैभव को पुनः स्थापित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने सरदार पटेल के परिजनों के साथ राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया, और जब पूरे देश ने यह दृश्य देखा तो सभी भावविभोर हो उठे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हम सबका सौभाग्य है कि आज देश की विरासत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे दूरदर्शी नेतृत्व के हाथों में है, जो सरदार पटेल की सोच और आदर्शों को आगे बढ़ा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि हाल ही में राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ की झांकी ने एकता परेड में हिस्सा लिया और पूरे देश को राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया।

मुख्यमंत्री साय ने वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर देशभर में हुए आयोजनों का उल्लेख करते हुए कहा कि बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का वंदे मातरम् और सरदार पटेल की एकता की भावना — यही हमारी राष्ट्रीय पहचान है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरदार पटेल ने सिविल सेवा ढांचे का भारतीयकरण किया, और आज भी हमारे प्रशासनिक तंत्र में उनकी दूरदृष्टि और सोच झलकती है।

भारत पर्व के दौरान मुख्यमंत्री साय ने प्रस्तुति देने आए छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक दल के कलाकारों से भी मुलाकात की और उन्हें शुभकामनाएँ दीं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

बरपाली में आबकारी विभाग की कार्रवाई, 14 लीटर अवैध शराब जब्त, आरोपी जेल भेजा गया

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रायपुर। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में में आज सरिया क्षेत्र के ग्राम बरपाली में आबकारी विभाग की टीम ने मुखबिर की सूचना पर सरिया आबकारी उपनिरीक्षक लोकनाथ साहू के नेतृत्व में छापामार कर आरोपी डिग्री चौहान पिता भुजबल चौहान, निवासी बरपाली के मकान से कुल 14 लीटर अवैध कच्ची महुआ शराब बरामद की। आरोपी के विरुद्ध छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।

इस कार्रवाई में उपनिरीक्षक लोकनाथ साहू (सरिया), रामेश्वर राठिया (बरमकेला), हबील खलखो (बिलाईगढ़), मुख्य आरक्षक उमेश तथा सुरक्षा कर्मी मुकुंदराम चौहान और ढोल नारायण चौहान की विशेष भूमिका रही।

आबकारी विभाग द्वारा यह कार्रवाई क्षेत्र में अवैध शराब निर्माण और बिक्री पर नियंत्रण के लिए की गई है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि जिले में आगे भी इस प्रकार की सघन जांच एवं कार्रवाई लगातार जारी रहेगी, ताकि अवैध शराब कारोबार पर पूर्णतः अंकुश लगाया जा सके।

मोहनलाल को 2023 के लिए दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा

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दादा साहेब फाल्के पुरस्कार चयन समिति की सिफारिश पर, भारत सरकार ने आज घोषणा की कि श्री मोहनलाल को वर्ष 2023 के लिए प्रतिष्ठित दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से उन्हें भारतीय सिनेमा में उनके ikonिक योगदान के लिए सम्मानित किया जा रहा है। यह पुरस्कार उन्हें 71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में 23 सितंबर, 2025 को प्रदान किया जाएगा।

सूचना एवं प्रसारण, रेल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री,अश्विनी वैष्णव ने आज यह घोषणा करते हुए खुशी व्यक्त की कि मोहनलाल को भारतीय सिनेमा में उनके असाधारण योगदान के लिए यह सम्मान दिया जा रहा है।

मोहनलाल की अद्वितीय सिनेमाई यात्रा पीढ़ियों को प्रेरित करती रही है। उनकी बेमिसाल प्रतिभा, बहुमुखी प्रतिभा और अथक मेहनत ने भारतीय फिल्म इतिहास में एक स्वर्ण मानक स्थापित किया है।

https://x.com/MIB_India/status/1969379395035865522

मोहनलाल के बारे में

मोहनलाल विश्वनाथन नायर (जन्म 21 मई 1960, केरल) एक प्रतिष्ठित भारतीय अभिनेता, निर्माता और प्लेबैक गायक हैं, जो मुख्य रूप से मलयालम सिनेमा में अपने काम के लिए जाने जाते हैं। उन्हें व्यापक रूप से "द कम्पलीट एक्टर" कहा जाता है। उन्होंने लगभग पांच दशकों के करियर में 360 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया है, जिनमें 'किरीदम', 'भरतंम', 'वनप्रस्थम', 'दृश्यम' जैसी यादगार फिल्में शामिल हैं।

मोहनलाल को पांच राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और कई केरल राज्य फिल्म पुरस्कार प्राप्त हैं, साथ ही उन्हें भारत और विदेशों में कई अन्य सम्मानों से भी नवाजा गया है। उनकी 1999 की फिल्म 'वनप्रस्थम' कान्स फिल्म फेस्टिवल में दिखाई गई थी, जिससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली।

सिनेमा के अलावा, उन्हें 2009 में भारतीय टेरिटोरियल आर्मी में मानद लेफ्टिनेंट कर्नल के रूप में कमीशन किया गया। उन्हें भारत सरकार द्वारा 2001 में पद्म श्री और 2019 में पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया। आज मोहनलाल भारत के सबसे सम्मानित सांस्कृतिक आइकन में से एक हैं, जिनकी बहुमुखी प्रतिभा, विनम्रता और विश्व सिनेमा में स्थायी योगदान के लिए प्रशंसा की जाती है।

दादा साहेब फाल्के पुरस्कार के बारे में

1969 में स्थापित यह पुरस्कार, जिसे पहले देविका रानी को प्रदान किया गया था, भारत सरकार द्वारा दादा साहेब फाल्के के भारतीय सिनेमा में योगदान को सम्मानित करने के लिए शुरू किया गया था। फाल्के ने भारत की पहली पूर्ण लंबाई की फीचर फिल्म 'राजा हरिश्चंद्र' का निर्देशन 1913 में किया था। फिल्म क्षेत्र में यह सर्वोच्च सम्मान है और इसे प्राप्त करने वाले व्यक्ति को 'भारतीय सिनेमा के विकास और प्रगति में उत्कृष्ट योगदान' के लिए सम्मानित किया जाता है। पुरस्कार में स्वर्ण कमल पदक, एक शॉल और ₹10 लाख नकद राशि शामिल है।

दादा साहेब फाल्के पुरस्कार चयन समिति के सदस्य:

  • मिथुन चक्रवर्ती

  • शंकर महादेवन

  • अशुतोष गोवारिकर


नारायणपुर में ITBP का निशुल्क स्वास्थ्य शिविर, महिलाओं और ग्रामीणों को स्वास्थ्य एवं जागरूकता की सुविधा

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छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में, 29वीं बटालियन, इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) ने धनोरा में COB परिसर में “स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान” के तहत एक निशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया। इस शिविर का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं और आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ प्रदान करना और बल और समुदाय के बीच आपसी विश्वास और सहयोग को मजबूत करना था।

इस शिविर में लगभग 150 महिलाओं, 50 पुरुषों और 20 बच्चों के साथ ही बड़ी संख्या में ग्रामीण और ITBP कर्मियों ने भाग लिया। मेडिकल सेवाएँ ITBP सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. दीपक ठाकुर, प्राइमरी हेल्थ सेंटर धनोरा के डॉ. अविनाश शक्रदांडे और उनकी टीम द्वारा प्रदान की गईं। शिविर के दौरान स्वास्थ्य जांच कराई गई और आवश्यक चिकित्सीय सलाह दी गई।

महिलाओं के लिए विशेष जागरूकता सत्र आयोजित किए गए, जिनमें स्वच्छता, संतुलित पोषण और मौसमी रोगों से सुरक्षा पर जानकारी दी गई। ग्रामीणों को “नशा मुक्त भारत अभियान” के महत्व के बारे में भी संवेदनशील किया गया।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में ITBP कर्मी, स्थानीय ग्रामीण और जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। यह पहल न केवल ITBP की सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय दृष्टिकोण को दर्शाती है, बल्कि बल और समुदाय के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को और मजबूत करने में एक उत्कृष्ट प्रयास साबित हुई।

पोषण माह: महात्मानगर ज़ीपीएचएस स्कूल में स्वास्थ्य और पोषण जागरूकता गतिविधियाँ आयोजित

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पोषण माह के समारोहों के हिस्से के रूप में, करिमनगर जिले, तेलंगाना के थिम्मापुर मंडल में महात्मानगर ज़ीपीएचएस स्कूल में बच्चों, माताओं और स्थानीय समुदाय के पुरुषों में पोषण और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए एक श्रृंखला गतिविधियाँ आयोजित की गईं। यह गतिविधियाँ स्कूल के बच्चों, माताओं और पुरुषों में पोषण और कल्याण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित की गई थीं।

भागीदारी को प्रोत्साहित करने और सही पोषण के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएं जैसे निबंध लेखन और पोस्टर निर्माण आयोजित की गईं।

इसके अतिरिक्त, एक व्यापक स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें एनीमिया, रक्त शर्करा स्तर और मोटापे की जांच के साथ-साथ बीएमआई की जांच भी शामिल थी।

ये गतिविधियाँ लोगों द्वारा बहुत अच्छी तरह से स्वीकार की गईं और पोषण माह अभियान के उद्देश्यों के अनुरूप समुदाय की स्वास्थ्य, स्वच्छता और पोषण प्रथाओं की समझ को मजबूत करने में योगदान दिया।


पीएम सूर्यघर से घरों में रोशनी, बदल रही जीवन की हर कोना

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सिर्फ विटामिन डी नहीं, जीवन का आधार है सूरज की रोशनी

रायपुर-देश को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने और हर घर तक स्वच्छ, सस्ती एवं निरंतर बिजली पहुँचाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना शुरू की है। यह महत्वाकांक्षी योजना न केवल नागरिकों को बिजली बिल से राहत दिला रही है, बल्कि परिवारों को आत्मनिर्भर बनाते हुए पर्यावरण संरक्षण में भी क्रांतिकारी योगदान दे रही है।

छत्तीसगढ़ में इस योजना का क्रियान्वयन मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में प्रभावी और संवेदनशील ढंग से किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश में सौर ऊर्जा को अपनाने की गति तेज हुई है।

देश की “पावर कैपिटल” कहलाने वाले कोरबा जिले में प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना का प्रभाव विशेष महत्व रखता है। यहाँ अनेक परिवार इस योजना का लाभ उठाकर हर महीने बचत कर रहे हैं और बिजली बिल के झमेले से मुक्त हो रहे हैं। इनमें से एक प्रेरक उदाहरण हैं नकटीखार, कोरबा निवासी रंजीत कुमार, जिन्होंने अपने परिवार के जीवन में ऊर्जा क्रांति की राह प्रशस्त की है।

रंजीत कुमार, जो एसईसीएल, कुसमुंडा में डंपर ऑपरेटर के रूप में कार्यरत हैं, मेहनतकश व्यक्ति हैं। हर महीने आने वाला बिजली बिल परिवार के बजट और बच्चों की पढ़ाई के खर्चों को प्रभावित करता था। जब उन्होंने प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के बारे में जाना, तो तुरंत आवेदन कर इसका लाभ उठाया। दो महीने पहले उन्होंने अपने घर की छत पर सोलर पैनल सिस्टम लगवाया। इसकी कुल लागत लगभग ₹2,10,000 थी, जिसमें ₹78,000 केंद्र सरकार की सब्सिडी पहले ही प्राप्त हो चुकी थी। शेष राशि उन्होंने सस्ती लोन और कुछ नकद भुगतान से दी। कुछ ही हफ्तों में यह निवेश उनके जीवन के लिए सबसे बड़ा वरदान साबित हुआ। पहले जहां उनका घर का बिजली बिल हजारों रुपए तक पहुँचता था, अब सौर ऊर्जा से चल रहे घर का मासिक बिल मात्र ₹130 है।

प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना केवल आर्थिक स्थिति सुधारने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण की भी मित्र है। सौर ऊर्जा से कोयला और डीज़ल जैसे पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम होती है और वायु प्रदूषण में भी भारी कमी आती है। औद्योगिक जिले कोरबा में, जहां कोयला आधारित बिजली उत्पादन अधिक है, वहां सौर ऊर्जा का बढ़ता उपयोग पर्यावरण संरक्षण में ऐतिहासिक योगदान देता है।

रंजीत कुमार और उनके परिवार ने बताया:
"अब हमें बिजली बिल की चिंता नहीं रहती। सोलर पैनल ने हमारी जिंदगी आसान बना दी है। बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं होती और घर के उपकरण भी बिना रुकावट चलते हैं।"
आज उनका घर न केवल रोशन है, बल्कि ऊर्जा बचत और पर्यावरण संरक्षण का आदर्श भी बन गया है। पीएम सूर्यघर योजना के सशक्त क्रियान्वयन से आमजन का जीवन बदल रहा है। यह योजना उन हजारों परिवारों के लिए प्रेरणा है, जो स्थायी बिजली समाधान ढूंढ रहे थे। इसने उन्हें आत्मनिर्भरता, आर्थिक मजबूती और स्वच्छ ऊर्जा की राह दिखाई है।


अमृत सरोवर से मिल रही आर्थिक उन्नति,650 महिलाओं को मिला रोजगार

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रायपुर-दुर्ग जिले के ग्राम पंचायत बोरिंदा में निर्मित अमृत सरोवर अब सिर्फ जल संरक्षण का साधन नहीं रहा, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए सशक्त आजीविका का केंद्र बन चुका है। इस तालाब के माध्यम से “शीतल स्वास्थ्य समूह” की 12 महिला सदस्य संगठित होकर मछली पालन कर रही हैं। मनरेगा योजना के अंतर्गत बना यह अमृत सरोवर अब ग्रामीणों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सफल उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। तालाब में अब तक 1,00,000 से अधिक मछलियों (बीज) का संचयन किया गया है और नियमित उचित आहार फीड व बीज की व्यवस्था की जा रही है ताकि उत्पादन बढ़े और मछलियों की सेहत बनी रहे।

शीतल स्वास्थ्य समूह की महिलाएं ने बताया कि यह काम उन्हें नियमित आमदनी देने की संभावनाएँ दिखा रहा है। उनकी योजना अब इस गतिविधि को व्यवसायिक स्तर तक ले जाने की है, जिससे भविष्य में और अधिक लाभ मिल सके। मुख्य कार्यपालन अधिकारी बजरंग दुबे ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि अमृत सरोवर केवल जल संरक्षण का माध्यम नहीं है, बल्कि महिला सशक्तिकरण और आजीविका संवर्धन का भी एक सशक्त स्रोत बन सकता है। बोरिंदा की महिलाओं ने यह साबित कर दिया है कि यदि सही संसाधन व समर्थन हो, तो ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार की संभावनाएँ बहुत अधिक हैं।

इस तालाब के किनारों पर लगभग 10-15 एकड़ क्षेत्र में किसानों को सिंचाई की सुविधा मिल रही है जिससे खरीफ एवं रबी दोनों में फसल उत्पादन में वृद्धि हुई है। तालाब में 10,000 घन मीटर पानी का भंडारण संभव है। इसके अलावा तालाब के किनारे आम, बरगद, पीपल, नीम, बादाम, अशोक जैसे लगभग 60 पौधे रोपित किए गए हैं, जिससे हरियाली बढ़ी है और पर्यावरण को भी लाभ मिला है। जिले में अब तक कुल 123 अमृत सरोवरों का निर्माण हो चुका है, जिनमें से 65 सरोवरों में महिलाओं द्वारा आजीविका गतिविधियाँ शुरू हुई हैं। प्रत्येक समूह में लगभग 10 10 महिलाएँ सक्रिय हैं, जिससे कुल मिलाकर लगभग 650 महिलाएँ इन तालाबों से मछली पालन के माध्यम से लाभ उठा रही हैं। तालाबों के किनारे मछली सुखाने के लिए चबूतरे बनाए गए हैं, जिससे मछली प्रसंस्करण और विपणन में सुविधा हो रही है। ग्रामवासियों द्वारा किए जा रहे मछली पालन से न केवल स्थानीय लोगों को रोजगार मिल रहा है, बल्कि ग्राम पंचायत की आय में भी वृद्धि हो रही है। यह पहल ग्राम के बेरोजगार युवाओं के लिए एक सकारात्मक उदाहरण बन गई है।


छत्तीसगढ़ की बड़ी उपलब्धि,सूरजपुर जिले की 75 ग्राम पंचायतें हुईं “बाल विवाह मुक्त”

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प्रधानमंत्री के 75वें जन्मदिवस पर छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक उपलब्धि

रायपुर-प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के 75वें जन्मदिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ ने सामाजिक सुधार में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। सूरजपुर जिले की 75 ग्राम पंचायतों को “बाल विवाह मुक्त ग्राम पंचायत” घोषित किया गया है। यह मान्यता इस आधार पर दी गई है कि विगत दो वर्षों में इन पंचायतों में बाल विवाह का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ।

इस उपलब्धि में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की सतत पहल, सक्रिय मार्गदर्शन और नेतृत्व को निर्णायक माना जा रहा है। उनके नेतृत्व में विभाग ने गाँव-गाँव जागरूकता अभियान चलाया, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और पंचायत प्रतिनिधियों को सक्रिय किया तथा समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित की।

राजवाड़े ने कहा कि सूरजपुर जिले की यह पहल न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। प्रधानमंत्री के अमृत महोत्सव वर्ष में यह उपलब्धि समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक सशक्त संदेश है।

सामुदायिक भागीदारी की सराहना
जिला प्रशासन ने महिला एवं बाल विकास विभाग, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय समुदाय की संयुक्त भूमिका की सराहना की। सभी के सामूहिक प्रयास से यह सुनिश्चित हुआ कि शिक्षा और जागरूकता को प्राथमिकता मिले और कोई बाल विवाह न हो।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में 10 मार्च 2024 को “बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान” की शुरुआत हुई थी। यह अभियान यूनिसेफ के सहयोग से और मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में संचालित किया जा रहा है। राज्य सरकार ने बाल विवाह उन्मूलन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है और विभाग लगातार जनजागरूकता, निगरानी और सामाजिक सहभागिता को मजबूत कर रहा है।

सूरजपुर की इस सफलता से प्रेरित होकर अब छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों में भी पंचायतों और नगरीय निकायों को “बाल विवाह मुक्त” घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। जिन जिलों में विगत दो वर्षों में बाल विवाह का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ, वहां शीघ्र ही प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे।


लाफिन कला मे धूमधाम से मना विश्वकर्मा जयंती,सांस्कृतिक कार्यक्रम रहा आकर्षण का केंद्र

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महासमुंद- बुधवार को ग्राम लाफिन कला के उत्साही युवाओं द्वारा विश्वकर्मा जयंती धूमधाम से मनाया गया।ग्राम के महामाई चौक में भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा स्थापित कर विधिवत पूजा आराधना की गई।

ग्राम के बच्चों संस्कृति संरक्षण के उद्देश्य से विश्वकर्मा आयोजन समिति द्वारा पारंपरिक डांस प्रतियोगिता भी आयोजित किया गया। जिसमें ग्रुप डांस मे प्रथम तुलसी के बिरवा डांस ग्रुप, द्वितीय ओजस्वी,दामिनी की टीम व तृतीय जागृति  अनामिका की टीम रही। वहीं एकल तथा युगल में प्रथम संध्या पटेल , द्वितीय मीनाक्षी, तारणी तथा तृतीय रेशमी साहू रही।सभी विजेताओं को आयोजन समिति की ओर से नगद राशि व उपहार भेंटकर पुरस्कृत किया गया। तथा शेष सभी प्रतिभागियों को सांत्वना राशि प्रदान किए गए।इस तरह बच्चों का सांस्कृतिक कार्यक्रम आकर्षण का केन्द्र बना रहा।साथ ही ग्राम के नवाचारी शिक्षक महेन्द्र कुमार पटेल का राज्य शिक्षक पुरस्कार 2025 के लिए चयन होने पर ग्रामीणों ने हर्ष व्यक्त करते हुए अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया। 

कार्यक्रम के आयोजन व संयोजन में प्रमुख रूप से तुलस पटेल मकान  ठेकेदार, ग्राम पंचायत लाफिन कला के सरपंच राधेश्याम साहू, उपसरपंच भूपेन्द्र साहू, पंचगण मोहित साहू, नंदकुमार पटेल,कुश कुमार पटेल, पूर्व पंच नेहा पवन साहू ,ताम्रध्वज साहू, लोकेश साहू, नीलकमल साहू, पप्पू पटेल, डाकेश  साहू, रामशरण साहू, ओगराम निषाद, नीरज साहू, पूनमचंद साहू, रूपेश  साहू,  संतोष  पटेल, दिनेश  साहू, डोमेश  साहू, सालिक पटेल, पन्नालाल निषाद, विजय साहू, अवधेश साहू, हरीश साहू, गोकुल साहू, गोविंद साहू, हरिराम साहू, पुरूषोत्तम साहू, कमलेश साहू, रामजी साहू, नाथूराम साहू, पुरानिक साहू, बसंत साहू का विशेष योगदान रहा। सांस्कृतिक कार्यक्रम का संचालन शिक्षक गोवर्धन प्रसाद साहू ने किया।इस अवसर पर तहसील साहू समाज के पूर्व अध्यक्ष गिरीश साहू , तुकाराम साहू, मुकेश साहू, ठाकुर राम पटेल, रामकुमार साहू, जनकराम साहू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों की उपस्थिति रही।


वनांचल में प्लास्टिक के विरुद्ध अभिनव अभियान

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‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान के तहत 35 महिलाएं बनेंगी आत्मनिर्भर, पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा

रायपुर-‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान के अंतर्गत प्लास्टिक मुक्त ग्राम पंचायत बनाने की दिशा में कोरिया जिला प्रशासन द्वारा अभिनव पहल की गई है। कलेक्टर चंदन त्रिपाठी के मार्गदर्शन में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) एवं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के सहयोग से जनपद पंचायत सोनहत के ग्राम पंचायत मझगवां में थैला एवं ठोंगा निर्माण योजना प्रारंभ की गई है। इस योजना के तहत बिहान से जुड़ी महिलाओं को आरसेटी के माध्यम से प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। प्रशिक्षण उपरांत ये महिलाएं पेपर बैग एवं ठोंगे का निर्माण करेंगी।

मझगवां में थैला और ठोंगा निर्माण हेतु महिलाओं को प्रशिक्षण


प्रदेशभर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक आयोजित ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान के अंतर्गत यह गतिविधि प्रारंभ की गई है। प्रशिक्षण प्राप्त महिलाएं न केवल पेपर बैग निर्माण कर रही हैं बल्कि ग्रामीणों को प्लास्टिक के दुष्प्रभावों एवं पर्यावरण अनुकूल विकल्पों के उपयोग के लिए भी जागरूक कर रही हैं। साथ ही, सोनहत जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत लटमा में लगने वाले साप्ताहिक बाजार को शत-प्रतिशत प्लास्टिक मुक्त बनाने की तैयारी की जा रही है। आगामी दिनों में इस बाजार में केवल पेपर बैग का ही उपयोग होगा।

कलेक्टर ने कहा कि कोरिया जिला अपनी हरियाली और प्राकृतिक संपदा के लिए विशेष पहचान रखता है। इस वनांचल का पर्यावरण प्रदूषित न हो, इसके लिए प्लास्टिक का उपयोग बंद करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पेपर बैग आसानी से उपलब्ध होने पर दुकानदार स्वेच्छा से प्लास्टिक का उपयोग बंद करेंगे, जिससे पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता अभियान को मजबूती मिलेगी।


विज्ञान में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर CSIR-NIScPR का जोर

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CSIR-NIScPR ने 80वें यूएन विज्ञान शिखर सम्मेलन में विज्ञान में महिलाओं पर जोर दिया

नई दिल्ली/मुंबई-CSIR-राष्ट्रीय विज्ञान संचार और नीति अनुसंधान संस्थान (CSIR-NIScPR) ने 80वें संयुक्त राष्ट्र महासभा विज्ञान शिखर सम्मेलन (SSUNGA80) में भाग लिया। शिखर सम्मेलन का मुख्य विषय था: “विज्ञान में महिलाएँ और लड़कियाँ: लैंगिक समावेशी नवाचार, समानता और बाधाओं को तोड़ना”, जिसमें CSIR को केस स्टडी के रूप में प्रस्तुत किया गया।

डॉ. गीथा वाणी रायसम, निदेशक, CSIR-NIScPR ने विज्ञान में लैंगिक समानता के महत्व पर जोर दिया और कहा कि महिलाओं के लिए अनुकूल कार्य वातावरण और विशिष्ट नीतियाँ आवश्यक हैं। CSIR के वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने STEM में महिलाओं की भूमिका, लैंगिक-संवेदनशील नीतियाँ और भारत की पहलों जैसे GATI और Vigyan Jyoti पर चर्चा की।

दूसरे सत्र में STEM में लैंगिक समावेशन और संसाधनों तक समान पहुँच पर पैनल चर्चा हुई, जिसमें अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय विशेषज्ञों ने भाग लिया। CSIR-NIScPR ने STEM में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और लैंगिक समावेशन को मजबूत बनाने के प्रयासों को साझा किया।


मुंबई में MSME सशक्तिकरण पर बैठक, वित्तीय सेवाओं के सचिव ने दिया मुख्य भाषण

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मुंबई-भारतीय बैंक संघ (IBA) द्वारा आयोजित “MSME सशक्तिकरण: अवसर, चुनौतियाँ और भविष्य की दिशा” विषयक बैठक में वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के सचिव ने मुख्य भाषण दिया। बैठक में SIDBI, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंक, IBA तथा देशभर के MSME उद्योग संघों के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हुए।

सचिव ने MSME को भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया, जो GDP में 30% और निर्यात में 45% से अधिक योगदान देती हैं। उन्होंने कहा कि MSME विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में रोजगार, नवाचार और समावेशी विकास की भूमिका निभाएंगी।

बैठक में सरकारी पहलों, डिजिटल लोन, कॅश फ्लो आधारित उधार मॉडल, भुगतान में देरी, MSME जागरूकता और वित्त तक पहुँच जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। चर्चा में मध्यम और दीर्घकालिक प्राथमिकताओं पर भी सहमति बनी, ताकि MSME क्षेत्र के लिए अधिक प्रभावी नीतियाँ और समर्थन तंत्र विकसित किए जा सकें।



भारत के 7 प्राकृतिक धरोहर स्थल यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल

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नई दिल्ली-भारत ने अपनी समृद्ध प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक मंच पर संरक्षित और प्रदर्शित करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है। राष्ट्रीय गर्व के इस अवसर पर, देश की सात उल्लेखनीय प्राकृतिक धरोहर स्थलों को यूनेस्को की विश्व धरोहर साइटों की टेंटेटिव लिस्ट में सफलतापूर्वक शामिल किया गया है, जिससे भारत की टेंटेटिव लिस्ट में कुल संपत्तियों की संख्या 62 से बढ़कर 69 हो गई है।



इस समावेशन के साथ, भारत के पास अब यूनेस्को द्वारा विचाराधीन कुल 69 स्थल हैं, जिनमें 49 सांस्कृतिक, 17 प्राकृतिक और 3 मिश्रित धरोहर स्थल शामिल हैं। यह उपलब्धि भारत की अपनी असाधारण प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और प्रचार में अटूट प्रतिबद्धता को पुष्ट करती है।

यूनेस्को की प्रोटोकॉल के अनुसार, किसी भी स्थल को प्रतिष्ठित विश्व धरोहर सूची के लिए नामांकित करने से पहले उसे टेंटेटिव लिस्ट में शामिल किया जाना आवश्यक है।

नए शामिल स्थलों का विवरण:

  1. पंचगनी और महाबलेश्वर के डेक्कन ट्रैप्स, महाराष्ट्र:

    दुनिया के सबसे अच्छी तरह संरक्षित और अध्ययन किए गए लावा प्रवाहों में से कुछ का घर। ये स्थल विशाल डेक्कन ट्रैप्स का हिस्सा हैं और कोयना वन्यजीव अभयारण्य के भीतर स्थित हैं—जो पहले से ही यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है।

  2. सेंट मेरीज़ आइलैंड क्लस्टर का भू-वैज्ञानिक धरोहर, कर्नाटक:

    दुर्लभ स्तंभाकार बेसाल्टिक चट्टानों के लिए प्रसिद्ध, यह द्वीप समूह लेट क्रेटेशियस काल (लगभग 85 मिलियन वर्ष पूर्व) का भू-वैज्ञानिक अवलोकन प्रस्तुत करता है।

  3. मेघालयन युग की गुफाएँ, मेघालय:
    मेघालय की गुफा प्रणालियाँ, विशेषकर मावलुह गुफा, होलोसीन युग में मेघालयन युग का वैश्विक संदर्भ बिंदु हैं, जो महत्वपूर्ण जलवायु और भू-वैज्ञानिक बदलावों को दर्शाती हैं।

  4. नागा हिल ओफियोलाइट, नागालैंड:

    यह दुर्लभ ओफियोलाइट चट्टानों का उद्भव है, जो महासागरीय क्रस्ट को महाद्वीपीय प्लेटों पर उठाए जाने का उदाहरण प्रस्तुत करती हैं—जो प्लेट टेक्टोनिक्स और मध्य महासागरीय रिज की प्रक्रियाओं की समझ देती हैं।

  5. एर्रा मट्टी डिब्बालु (लाल बालू की टीलियाँ), आंध्र प्रदेश:

    विशाखापत्तनम के पास स्थित ये लाल बालू की शानदार संरचनाएँ अद्वितीय प्राचीन जलवायु और तटीय भू-आकृतिक विशेषताओं को दर्शाती हैं।

  6. तिरुमला हिल्स का प्राकृतिक धरोहर, आंध्र प्रदेश:

    इसमें एपर्चियन अनकॉनफॉर्मिटी और प्रतिष्ठित सिलथोरानम (प्राकृतिक मेहराब) शामिल हैं, जो 1.5 बिलियन वर्ष से अधिक की पृथ्वी की भू-वैज्ञानिक धरोहर का प्रतिनिधित्व करते हैं।

  7. वरकला क्लिफ्स, केरल:

    केरल की तटरेखा पर स्थित यह दृश्यावलोकन क्लिफ्स मियो-प्लियोसीन युग की वर्कल्ली फॉर्मेशन को उजागर करते हैं, साथ ही प्राकृतिक झरने और अद्वितीय कटाव-आकृतियाँ प्रदान करते हैं, जो वैज्ञानिक और पर्यटन दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।

वैश्विक धरोहर के प्रति भारत की प्रतिबद्धता

इन स्थलों को टेंटेटिव लिस्ट में शामिल करना भविष्य में विश्व धरोहर सूची में नामांकन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और यह दर्शाता है कि भारत अपनी प्राकृतिक अद्भुतताओं को वैश्विक संरक्षण प्रयासों के साथ जोड़ने पर ध्यान दे रहा है।

विश्व धरोहर सम्मेलन के लिए भारत की ओर से नामांकन तैयार करने और प्रस्तुत करने में पुरातत्व सर्वेक्षण भारत (ASI) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पेरिस में भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने इस प्रयास में ASI की मेहनत की सराहना की।

भारत ने जुलाई 2024 में नई दिल्ली में 46वें विश्व धरोहर समिति सत्र की मेजबानी भी की, जिसमें 140 से अधिक देशों के 2000 से अधिक प्रतिनिधि और विशेषज्ञों ने भाग लिया।


IGNCA में प्रो. मोहन खोक्कर शताब्दी समारोह का भव्य आयोजन

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नई दिल्ली- इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) में भारतीय नृत्य इतिहास के अग्रदूत प्रो. मोहन खोक्कर की जन्म शताब्दी वर्ष पर भव्य समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर देश-विदेश से पद्मविभूषण, पद्मभूषण, पद्मश्री सम्मानित नृत्यगुरु, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार विजेता कलाकार, विद्वान एवं सांस्कृतिक जगत की अनेक हस्तियाँ एकत्र हुईं।

समारोह की मुख्य अतिथि विश्वविख्यात नृत्यांगना एवं IGNCA ट्रस्टी डॉ. सोनल मानसिंह रहीं। प्रख्यात विद्वान और राजनयिक डॉ. करण सिंह ने तृतीय "प्रो. मोहन खोक्कर स्मृति व्याख्यान" दिया और कहा कि खोक्कर का कार्य किसी चमत्कार से कम नहीं था। उन्होंने उनकी संग्रहित धरोहर को भारतीय संस्कृति के लिए अमूल्य बताया।

IGNCA के सदस्य सचिव डॉ. सचिदानंद जोशी ने मोहन खोक्कर नृत्य संग्रह (MKDC) को विश्व का सबसे बड़ा नृत्य संग्रह बताते हुए इसे UNESCO की विरासत सूची में शामिल करने की आवश्यकता जताई। प्रो. आचल पाण्ड्या ने स्वागत भाषण दिया जबकि समापन टिप्पणी प्रो. आशीष खोक्कर ने की।

कार्यक्रम का आरंभ 25 कलाकारों की नृत्य-नाटिका से हुआ, जिसके बाद "Mr. Dance of India" फिल्म का प्रदर्शन किया गया। दिल्ली के 100 कलाकारों की शानदार प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। साथ ही The A–Z of Indian Dance – Vignettes of Veterans प्रदर्शनी का उद्घाटन भी हुआ।

इस मौके पर प्रो. मोहन खोक्कर की वार्षिक नृत्य पत्रिका AttenDance के रजत जयंती विशेषांक "Indian Dance in France" का विमोचन किया गया। समारोह में शोवना नारायण, माधवी मुद्गल, वनश्री राव, प्रतिभा प्रह्लाद, नलिनी-कमलिनी, गीता महालिक समेत देश-विदेश के अनेक नामचीन कलाकार उपस्थित रहे।

प्रो. मोहन खोक्कर (1924–1999) भारतीय नृत्य इतिहास के प्रणेता माने जाते हैं। उनका विशाल डांस कलेक्शन IGNCA में संरक्षित है, जो 18 सितंबर से 30 दिसंबर 2025 तक आम जनता के लिए खुला रहेगा। यह भारत का पहला नृत्य संग्रहालय है, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता प्राप्त है।


स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान : महिलाओं के स्वास्थ्य व सशक्तिकरण के लिए राष्ट्रव्यापी पहल

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स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान

देशभर में स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान — जो कि 8वें राष्ट्रीय पोषण माह (17 सितम्बर से 2 अक्टूबर, 2025) के साथ संयोजन में आयोजित किया जा रहा है — का शुभारंभ 17 सितम्बर, 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया। इस अभियान के अंतर्गत, कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC), जो श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है, देशभर के 160 ईएसआई अस्पतालों में व्यापक स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर रहा है।

ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, फरीदाबाद

अभियान के पहले दिन, ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, फरीदाबाद में महिलाओं के स्वास्थ्य, रोकथामात्मक देखभाल और सामुदायिक जागरूकता से जुड़ी गतिविधियाँ आयोजित की गईं। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. पूजा गोयल (प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष) और डॉ. रोहित ढाका (सहायक प्रोफेसर एवं नोडल अधिकारी, सामुदायिक चिकित्सा विभाग) द्वारा किया गया। इस अवसर पर फैकल्टी सदस्य, मेडिकल ऑफिसर और स्टाफ भी उपस्थित थे। इस पहल ने ईएसआईसी की प्रतिबद्धता को दर्शाया, जो कामकाजी महिलाओं और उनके परिवारों के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता को सुदृढ़ करने की दिशा में निरंतर कार्यरत है।

उद्योगिक स्वास्थ्य शिविर शाही एक्सपोर्ट प्रा. लि. एवं ध्रुव ग्लोबल लि. में आयोजित किए गए, जहाँ महिलाओं की गैर-संचारी रोगों (NCDs) और क्षय रोग (टीबी) के लिए प्रश्नावली आधारित स्क्रीनिंग की गई। जांच में हीमोग्लोबिन, ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, और क्लिनिकल परीक्षण शामिल थे। जीवनशैली से जुड़े रोग, मासिक धर्म स्वच्छता, टीकाकरण, पोषण और एनीमिया प्रबंधन पर परामर्श एवं जागरूकता सत्र आयोजित किए गए। साथ ही, निक्षय मित्र पहल के अंतर्गत लाभार्थियों का पंजीकरण भी हुआ और टीबी संकल्प में भागीदारी हुई।

इसके अतिरिक्त, अस्पताल परिसर में रक्तदान शिविर भी आयोजित हुआ। स्वैच्छिक रक्तदाता और सिंगल डोनर प्लेटलेट (SDP) दाताओं को सम्मानित किया गया। सभी दाताओं की हीमोग्लोबिन और ब्लड ग्रुप की जांच की गई तथा रक्त को सुरक्षित संक्रमण हेतु वायरल मार्कर स्क्रीनिंग से जांचा गया। साथ ही, समुदाय में रक्तदान की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता सत्र भी आयोजित हुए।

महिला स्वास्थ्य पर विशेष जोर देते हुए व्यापक स्वास्थ्य शिविर भी आयोजित किया गया, जिसमें गर्भवती महिलाओं की जांच, पोषण मूल्यांकन, परामर्श और टीबी, उच्च रक्तचाप, मधुमेह एवं एनीमिया की स्क्रीनिंग की गई। महिलाओं के लिए मौखिक, स्तन और गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर की विशेष जांच की गई, जिनमें पैप स्मीयर टेस्ट भी शामिल था।

ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, सनतनगर, हैदराबाद

17 सितम्बर, 2025 को ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, सनतनगर, हैदराबाद में हाल ही में निर्मित 200-बेड वाले अस्पताल भवन में इन-हाउस कैंप सेवाओं का शुभारंभ किया गया। यह कार्यक्रम स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान के अंतर्गत आयोजित हुआ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. सौरव कुमार दत्ता (मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी, ईएसआईसी) ने की और इस अवसर पर राजीव लाल (क्षेत्रीय निदेशक, ईएसआईसी, हैदराबाद) समेत वरिष्ठ अधिकारी एवं फैकल्टी सदस्य उपस्थित रहे।

नई 200-बेड की सुविधा के साथ कैंप सेवाओं की शुरुआत ने ईएसआईसी सनतनगर की स्वास्थ्य सेवाओं को और सशक्त बनाया है, जिससे बीमित लाभार्थियों और आम जनता दोनों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ और अधिक सुलभ होंगी।

अभियान के तहत अस्पताल परिसर में कई गतिविधियाँ आयोजित हुईं—

  • वार्षिक निवारक स्वास्थ्य जांच शिविर

  • रक्तदान शिविर और संकल्प

  • स्वच्छता ही सेवा संकल्प

  • योग सत्र

  • फार्माकोविजिलेंस सप्ताह समारोह

इन गतिविधियों ने ईएसआईसी की समग्र दृष्टि को उजागर किया, जिसमें स्वास्थ्य संवर्धन, रोग रोकथाम और सामुदायिक भागीदारी पर बल दिया गया।

निष्कर्ष

स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान के तहत आयोजित इन गतिविधियों ने न केवल महिलाओं को जरूरी स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराईं, बल्कि जीवनशैली में बदलाव, पोषण और महिलाओं से जुड़े स्वास्थ्य मुद्दों पर भी जागरूकता फैलाई। ईएसआईसी राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने और एक स्वस्थ, सशक्त एवं सक्षम समाज के निर्माण में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है।


राजिम क्षेत्र के लोगों को मिली सस्ती और सुलभ रेल सेवा, यात्रियों को होगा लाभ : मुख्यमंत्री साय

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छत्तीसगढ़ का प्रयाग राजिम जुड़ा रेल नेटवर्क से,रायपुर एवं राजिम के मध्य आने-जाने के लिए यात्री सुविधा में हुई बढ़ोतरी

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजिम में नई रेल सेवा का शुभारंभ किया। उन्होंने क्षेत्र के लोगों की आवागमन सुविधा में वृद्धि करते हुए राजिम से रायपुर के लिए नई मेमू ट्रेन सेवा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने राजिम-रायपुर-राजिम मेमू नई ट्रेन सेवा तथा रायपुर-अभनपुर 2 मेमू रेल सेवा का राजिम तक विस्तार भी प्रारंभ किया। भारी संख्या में यात्री इस अवसर पर ट्रेन में सवार हुए और उत्साहपूर्वक रायपुर की ओर रवाना हुए। सस्ती एवं सुलभ नई रेल सुविधा मिलने से पूरे क्षेत्र में हर्ष और उल्लास का वातावरण रहा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इस नई रेल सेवा से राजिम सहित गरियाबंद एवं देवभोग क्षेत्र के लोगों को भी राजधानी रायपुर तक सस्ती और किफायती यात्रा का विकल्प प्राप्त होगा। विद्यार्थी, नौकरीपेशा वर्ग और व्यापारी वर्ग सहित सभी के लिए यह ट्रेन अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का प्रयाग, राजिम अब रेल नेटवर्क से जुड़ गया है। ग्रामीण अंचलों से राजधानी रायपुर का आवागमन अब और अधिक सुगम, सुविधाजनक और किफायती बन गया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारे छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आशीर्वाद से लगातार 19 महीनों से विकास की गति निरंतर अग्रसर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर में तेजी से हो रहा निवेश आने वाली पीढ़ियों के लिए नया भविष्य गढ़ेगा। उन्होंने बताया कि लगभग आठ वर्ष पूर्व धमतरी से रायपुर तक नैरोगेज ट्रेन चलती थी और अब आठ वर्षों के अंतराल के बाद यहां ब्रॉडगेज ट्रेन सुविधा उपलब्ध हुई है। इसके लिए उन्होंने पूरे छत्तीसगढ़ की जनता की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ में रेलवे की लगभग 45,000 करोड़ रुपये की परियोजनाएं संचालित हो रही हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में लगभग 7,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे प्रदेश में रेल सेवाओं का तीव्र विस्तार और विकास सुनिश्चित हो रहा है।

इस अवसर पर वन मंत्री केदार कश्यप, खाद्य मंत्री दयालदास बघेल, लोकसभा सांसद रायपुर बृजमोहन अग्रवाल, महासमुंद सांसद रूपकुमारी चौधरी, अभनपुर विधायक इन्द्रकुमार साहू, राजिम विधायक रोहित साहू, छत्तीसगढ़ राज्य भंडार गृह निगम के अध्यक्ष चंदूलाल साहू, नगर पालिका गोबरा नवापारा अध्यक्ष ओमकुमारी संजय साहू, नगर पंचायत राजिम अध्यक्ष महेश यादव सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक तरुण प्रकाश, रेलवे अधिकारी-कर्मचारी एवं भारी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

वन मंत्री एवं रायपुर जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि इस नई सेवा से छत्तीसगढ़ के प्रयाग राजिम तक सीधी रेल पहुँच सुनिश्चित हो गई है, जिससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि 22 मई को ‘निर्मल भारत रेलवे स्टेशन’ के नाम से देश के 103 रेलवे स्टेशनों को मॉडिफाई करने के लिए चयनित किया गया, जिनमें से छत्तीसगढ़ के पाँच रेलवे स्टेशन शामिल हैं और 32 स्टेशन भी इस योजना में जोड़े गए हैं। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया और मुख्यमंत्री साय के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लगभग 45,000 करोड़ रुपये की रेलवे परियोजनाएँ चालू हैं, जिनसे रेल कनेक्टिविटी में तेजी आएगी। बस्तर को भी इससे लाभ हो रहा है और रावघाट प्रोजेक्ट के अंतर्गत 140 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन का कार्य प्रगति पर है।

रायपुर लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ के प्रयागराज राजिम में बाहर से साधु-संत एवं पर्यटक भारी संख्या में आते हैं। अब उन्हें सीधे रायपुर से राजिम आने की सुविधा मिलेगी, जिससे पर्यटन एवं क्षेत्रीय विकास को नई दिशा मिलेगी और विश्व पटल पर राजिम का नाम और अधिक रोशन होगा। महासमुंद सांसद रूपकुमारी चौधरी ने नई रेल सेवा के लिए लोगों को बधाई देते हुए कहा कि अब राजिम से रायपुर आना बहुत आसान हो गया है। श्रद्धालु एवं पर्यटक यात्री अब राजिम से सीधे डोंगरगढ़ तक भी यात्रा कर सकेंगे।

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के रायपुर रेल मंडल से प्राप्त जानकारी के अनुसार रायपुर-अभनपुर-रायपुर मेमू पैसेंजर ट्रेन का परिचालन अब राजिम तक किया जाएगा। 19 सितम्बर 2025 से नियमित समय-सारणी के अनुसार गाड़ी संख्या 68766/68767 राजिम-अभनपुर-रायपुर मेमू पैसेंजर प्रतिदिन दोनों छोरों—राजिम और रायपुर—से संचालित होगी। इस ट्रेन में 06 सामान्य श्रेणी के डिब्बे तथा 02 पावरकार सहित कुल 08 कोच होंगे।


मत्स्य पालन विभाग (DoF) – FAO सहयोग से "ब्लू पोर्ट्स" के लिए पहल

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नई दिल्ली मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत मत्स्य पालन विभाग (DoF) ने संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के साथ तकनीकी सहयोग कार्यक्रम (TCP) समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके अंतर्गत भारत में ब्लू पोर्ट अवसंरचना को मजबूत किया जाएगा।

इस क्रम में आज पहला वेबिनार आयोजित किया गया, जिसका विषय था “Foundations of a Blue Port: Generating Value in Fishing Ports”।

  • उद्घाटन संबोधन: डॉ. अभिलक्ष लिखी, सचिव (DoF)

  • विशिष्ट अतिथि: ताकायुकी हागिवारा, FAO प्रतिनिधि (भारत)

मुख्य बिंदु

  • मत्स्य बंदरगाह = आर्थिक समृद्धि, पारिस्थितिकीय स्थिरता और सामाजिक समावेशन के द्वार।

  • नई तकनीकों (5G, AI, ऑटोमेशन, डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म) से दक्षता और सेवा वितरण में सुधार।

  • PMMSY और FIDF योजनाएँ बंदरगाह आधुनिकीकरण और हितधारक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण।

  • FAO समर्थन के तहत वानकबारा (दमन एवं दीव) और जखाऊ (गुजरात) में पायलट अपग्रेड की शुरुआत।

  • PMMSY के तहत तीन स्मार्ट और एकीकृत मत्स्य बंदरगाह (गुजरात, दमन एवं दीव, पुदुचेरी) ₹369.80 करोड़ की लागत से विकसित किए जा रहे हैं।

वेबिनार की विशेषताएँ

  • FAO विशेषज्ञों के प्रस्तुतिकरण: ब्लू पोर्ट्स की अवधारणा, सतत एवं नवाचार-आधारित पद्धतियाँ, वैश्विक श्रेष्ठ प्रथाएँ।

  • विगो पोर्ट (स्पेन) का केस स्टडी साझा किया गया।

  • हितधारकों के साथ भागीदारीपूर्ण चर्चा – चुनौतियाँ व समाधान।

  • प्रतिभागी: FAO मुख्यालय अधिकारी, विगो पोर्ट प्रतिनिधि, तटीय राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों के अधिकारी, समुद्री बोर्ड, प्रमुख पोर्ट प्राधिकरण, मछुआरा सहकारी संस्थाएँ।

ब्लू पोर्ट फ्रेमवर्क
  • स्मार्ट और एकीकृत मत्स्य बंदरगाहों का विकास – वानकबारा (दीव), कराईकल (पुदुचेरी), जखाऊ (गुजरात)।

  • कुल निवेश: ₹369.8 करोड़।

  • प्रमुख तकनीकें: IoT, सेंसर नेटवर्क, सैटेलाइट संचार, डेटा एनालिटिक्स।

  • पर्यावरण अनुकूल पहल: वर्षा जल संचयन, ऊर्जा-कुशल रोशनी, इलेक्ट्रिक उपकरण, ठोस/तरल अपशिष्ट प्रबंधन, समुद्री मलबा सफाई।

  • उद्देश्य: सुरक्षित, स्वच्छ और कुशल संचालन + आर्थिक प्रदर्शन, सामाजिक समावेशन और पारिस्थितिकी संरक्षण।

निष्कर्ष

यह वेबिनार भारत में सतत, प्रौद्योगिकी-आधारित और समावेशी ब्लू पोर्ट्स के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे मत्स्य समुदायों की आजीविका मजबूत होगी, निर्यात बढ़ेगा और भारतीय मत्स्य क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि होगी।


राष्ट्रीय कार्यशाला “आयुष क्षेत्र में आईटी समाधान” का शुभारंभ

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आज केरल सरकार की स्वास्थ्य और महिला एवं बाल विकास मंत्री, वीणा जॉर्ज द्वारा केरल के खूबसूरत केटीडीसी वाटरस्केप्स, कुमाराकॉम में दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला “आयुष क्षेत्र में आईटी समाधान” का शुभारंभ किया गया। यह कार्यशाला राष्ट्रीय आयुष मिशन, केरल द्वारा आयोजित की गई है, जिसमें 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 91 प्रतिनिधि और 155 प्रतिभागी, जिनमें वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ और नीति निर्माता शामिल हैं, भाग ले रहे हैं। यह पहल नई दिल्ली में आयोजित आयुष विभागीय सम्मेलन 2025 की प्राथमिकताओं के अनुरूप है।

उद्घाटन भाषण में मंत्री वीणा जॉर्ज ने कही मुख्य बातें

मंत्री वीणा जॉर्ज ने प्रतिनिधियों का हार्दिक स्वागत किया और कुमाराकॉम के प्राकृतिक वातावरण के चयन का प्रतीकात्मक महत्व बताते हुए कहा कि यह आयुष द्वारा promoted सामंजस्य को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि तेज़ तकनीकी प्रगति को अपनाते हुए, परंपरागत मूल्यों को बनाए रखना आवश्यक है।

मंत्री ने डिजिटल उपकरणों के स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र में सहज समावेश पर जोर दिया—जैसे कि रीयल-टाइम निगरानी, मानव संसाधन प्रबंधन, डेटा फ्रेमवर्क, और पारदर्शी वित्तीय ट्रैकिंग, ताकि स्वास्थ्य सेवाएँ अधिक सुलभ और किफायती बनें। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से केंद्रीकृत, इंटरऑपरेबल डिजिटल ढांचे के लिए रोडमैप तैयार करने का आग्रह किया, जिससे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मजबूत हो और कोई भी पिछड़ न जाए।

मंत्री ने केरल की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया कि राज्य प्राचीन ज्ञान और आधुनिक तकनीक के बीच संतुलन बनाए रखेगा और डिजिटल स्वास्थ्य नवाचार में अग्रणी भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि पूरे देश में आयुष डिजिटल सेवाओं में एकरूपता और विस्तार आवश्यक है, जो नागरिक-केंद्रित शासन पर आधारित हो।

मुख्य वक्ताओं के विचार

वैद्य राजेश कोटेचा, सचिव, आयुष मंत्रालय, भारत सरकार ने कार्यशाला में कहा कि आयुष क्षेत्र में आईटी समाधानों का एकीकरण अब विकल्प नहीं बल्कि अनिवार्य है। उन्होंने मंत्रालय की चल रही पहलों जैसे आयुष ग्रिड और नए डिजिटल पोर्टल का उल्लेख किया, जो राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देंगे, सॉफ़्टवेयर को मानकीकृत करेंगे और आधुनिक आयुष सेवाओं की समान पहुँच सुनिश्चित करेंगे।

उन्होंने प्रतिभागियों से डिजिटल नवाचारों को अपनाने और राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन के साथ तालमेल बनाए रखने का आग्रह किया। interoperable सिस्टम्स के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि इनसे रीयल-टाइम निगरानी, डेटा और मानव संसाधन प्रबंधन, और वित्तीय ट्रैकिंग आसान होगी।

राजन एन. खोबरागड़े, अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य और आयुष), केरल सरकार ने केरल की स्वास्थ्य और आयुष अवसंरचना तथा डिजिटल समावेशन में प्रगति की सराहना की। उन्होंने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से केरल के मॉडल का लाभ उठाने और यूज़र-फ्रेंडली, केंद्रीकृत और स्थानीय रूप से अनुकूल डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म बनाने का आह्वान किया।

डॉ. रघु, सलाहकार, आयुष मंत्रालय ने कहा कि कार्यशाला समय पर एक मंच है जो आईटी-आधारित समाधानों को बढ़ावा देता है, जिससे पारदर्शिता, रोगी देखभाल और पहुंच में सुधार होता है।

रंजन कुमार, प्रमुख सचिव, आयुष, उत्तर प्रदेश ने कहा कि ऐसे मंच राज्यों के बीच नवाचार, सहयोग और ज्ञान साझा करने में मदद करते हैं, जिससे स्केलेबल और समावेशी स्वास्थ्य समाधान पूरे देश में लागू हो सकें।

डॉ. डी. साजित बाबू, राज्य मिशन निदेशक, राष्ट्रीय आयुष मिशन, केरल ने कहा कि कार्यशाला केरल के आयुष सेवाओं को आईटी नवाचारों के माध्यम से आधुनिक बनाने के मिशन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण है। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन सॉफ़्टवेयर के लाइव डेमो में भाग लेने के अवसर पर जोर दिया और कहा कि डिजिटल परिवर्तन सभी समुदायों को शामिल करते हुए होना चाहिए।

डॉ. सुभोद कुमार, निदेशक, आयुष मंत्रालय ने राष्ट्रीय आयुष मिशन, केरल की सराहना की कि उन्होंने इस पहल का नेतृत्व किया, जो आयुष विभागीय सम्मेलन की दृष्टि के अनुरूप है और राज्यों के बीच डिजिटल सहयोग को बढ़ावा देती है।

कार्यशाला में कविता जैन, संयुक्त सचिव, आयुष मंत्रालय भी उपस्थित रही। 91 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि शामिल हैं, जिनमें आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव, दिल्ली, गोवा, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, लक्षद्वीप, महाराष्ट्र, मणिपुर, मिज़ोरम, नागालैंड, पुदुचेरी, राजस्थान, सिक्किम, तमिलनाडु, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।

कार्यशाला के मुख्य उद्देश्य

  • सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं और नवाचारों का आदान-प्रदान

  • केंद्रीय सरकार के आईटी प्लेटफ़ॉर्म जैसे आयुष ग्रिड पर परिचय

  • प्रोग्राम प्रबंधन, रोगी देखभाल, निगरानी, मानव संसाधन और डेटा प्रबंधन, और वित्तीय ट्रैकिंग के क्षेत्रों पर चर्चा

क्षेत्र भ्रमण

20–21 सितंबर 2025 को प्रतिभागियों का केरल के कottayam, Alappuzha और Thrissur जिलों में आयुष सुविधाओं का दौरा होगा, जिसमें शामिल हैं:

  • NABH एंट्री लेवल सर्टिफाइड और कायाकल्प पुरस्कार प्राप्त आयुषमैन आरोग्य मंदिर

  • सरकारी आयुष अस्पताल

  • स्पोर्ट्स आयुर्वेदा प्रोजेक्ट

  • आरोग्यानौका, पल्लियेटिव केयर, दृष्टि और आयुर्कर्मा जैसी पहलों का अवलोकन

यह राष्ट्रीय कार्यशाला भारत की भविष्य-सक्षम, गतिशील और नागरिक-केंद्रित आयुष डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


वस्त्र मंत्रालय ने शुरू किया स्वच्छता ही सेवा-2025 अभियान

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वस्त्र मंत्रालय गर्व के साथ घोषणा करता है कि स्वच्छता ही सेवा-2025 अभियान का शुभारंभ हो चुका है। यह एक राष्ट्रीय पहल है, जिसका उद्देश्य दैनिक जीवन में स्वच्छता और स्वच्छता के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करना है। यह अभियान मंत्रालय के सभी संगठनों में 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2025 तक मनाया जाएगा।

इस वर्ष का थीम है ‘स्वच्छोत्सव’, जो स्वच्छता को सामूहिक प्रयास और सामुदायिक भागीदारी का त्योहार मानकर इसे मनाने पर जोर देता है। इस थीम के तहत, मंत्रालय और उसके संबद्ध संगठन स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक जागरूकता पर आधारित कई गतिविधियां आयोजित करेंगे।

  • कार्यालय परिसर, शैक्षणिक संस्थानों के परिसर और सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता अभियान चलाए जाएंगे।

  • इन कार्यक्रमों में कर्मचारी, छात्र, नागरिक समाज समूह, स्थानीय समुदाय और आम जनता को सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

अभियान के तहत की गई प्रमुख गतिविधियां:

  1. स्वच्छता प्रतिज्ञा:

    • AS&FA (वस्त्र) ने अधिकारियों को स्वच्छता प्रतिज्ञा दिलाई ताकि वे इसे अपने दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा मानें।

    • मंत्रालय के सभी संगठनों में भी स्वच्छता प्रतिज्ञा कराई गई।

  2. स्टैंडिस और बैनर:

    • मंत्रालय और अन्य संगठनों के प्रमुख स्थानों पर स्टैंडिस लगाए गए।

    • स्वच्छता ही सेवा अभियान का बैनर मंत्रालय और उसके सभी संगठनों की वेबसाइट के डैशबोर्ड पर अपलोड किया गया।

  3. सेल्फी प्वाइंट:

    • मंत्रालय और अन्य कार्यालयों में प्रमुख स्थानों पर सेल्फी प्वाइंट स्थापित किया गया ताकि लोग स्वच्छता संदेश के साथ फोटो ले सकें।

  4. सोशल मीडिया अभियान:

    • अभियान की गतिविधियों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर साझा किया जा रहा है, ताकि स्वच्छता का संदेश अधिकतम लोगों तक पहुंचे।



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