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कैच द रेन अभियान (4 जुलाई–4 अगस्त 2026): नंद्याल जिले में वर्षा जल संरक्षण की दिशा में व्यापक पहल

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कैच द रेन अभियान (4 जुलाई–4 अगस्त 2026) आंध्र प्रदेश के नंद्याल जिले में “जहाँ वर्षा हो, वहीं वर्षा जल को संजोएँ (Catch the Rain, Where it Falls, When it Falls)” के सिद्धांत पर प्रभावी रूप से संचालित किया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य प्रत्येक बूंद वर्षा जल का संरक्षण करना है। इसके अंतर्गत पारंपरिक जलाशयों का पुनर्जीवन, फीडर एवं सप्लाई चैनलों की गाद निकासी (डी-सिल्टिंग), टैंक प्रणालियों का पुनर्स्थापन तथा अतिरिक्त जल भंडारण क्षमता का निर्माण किया जा रहा है। विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों, वैज्ञानिक योजना और जनभागीदारी के माध्यम से जिला वर्षा जल संरक्षण अवसंरचना को सुदृढ़ बना रहा है तथा मानसूनी जल के संग्रहण एवं भंडारण की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि कर रहा है।

वैज्ञानिक योजना एवं जनभागीदारी आधारित क्रियान्वयन

जिले की सभी 489 ग्राम पंचायतों में फील्ड सर्वे, प्राथमिकता वाले जलाशयों, फीडर चैनलों एवं जलग्रहण क्षेत्रों का मानचित्रण तथा संबंधित विभागों द्वारा तकनीकी मूल्यांकन के आधार पर वैज्ञानिक योजना तैयार की गई। स्थानीय समुदायों एवं ग्राम के वरिष्ठ नागरिकों से परामर्श लेकर स्थानीय आवश्यकताओं एवं पारंपरिक ज्ञान के अनुरूप कार्यों की पहचान की गई। प्रस्तावित कार्यों को पारदर्शिता एवं सामुदायिक सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए ग्राम सभा के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

इस वैज्ञानिक एवं सहभागी योजना प्रक्रिया के आधार पर जिले में 2,103 जल संरक्षण कार्यों की पहचान, स्वीकृति एवं शत-प्रतिशत (100%) ग्राउंडिंग सुनिश्चित की गई। इन कार्यों की रणनीतिक योजना वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण तथा जल भंडारण क्षमता को अधिकतम करने के उद्देश्य से तैयार की गई है, जिससे कैच द रेन अभियान के लक्ष्यों को प्रभावी रूप से साकार किया जा सके।

बड़े पैमाने पर जल संरक्षण कार्य

अभियान के अंतर्गत 2,691 किलोमीटर लंबे फीडर एवं सप्लाई चैनलों की गाद निकासी एवं पुनर्स्थापन किया गया, जिससे वर्षा जल का टैंकों एवं जलाशयों तक सुचारु प्रवाह सुनिश्चित हुआ।

इसके अतिरिक्त, 251 लघु सिंचाई टैंकों के पुनर्स्थापन का कार्य किया गया, जिनमें से 225 कार्य पूर्ण हो चुके हैं, जबकि शेष कार्य प्रगति पर हैं।

जिले में 22,221 फार्म पॉन्ड, 2,221 चेक डैम तथा 202 परकोलेशन टैंक के नेटवर्क को भी सुदृढ़ किया गया है। इन संरचनाओं से वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण तथा जल उपलब्धता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इससे जल संरक्षण प्रणाली की समग्र दक्षता बढ़ी है और जिले की प्रत्येक संभव वर्षा बूंद को संचित करने की क्षमता और मजबूत हुई है।

अतिरिक्त जल भंडारण क्षमता का सृजन

इन सभी कार्यों से उत्पन्न अतिरिक्त जल भंडारण क्षमता का आकलन संबंधित इंजीनियरिंग विभागों द्वारा तैयार तकनीकी अनुमानों के आधार पर किया गया।

फीडर चैनलों एवं जल संरक्षण संरचनाओं के पुनर्स्थापन से 3.27 टीएमसी टैंक भंडारण क्षमता की पुनर्बहाली का अनुमान है, जबकि नई जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण से 0.03 टीएमसी अतिरिक्त जल भंडारण क्षमता का सृजन हुआ है।

टैंकों एवं अन्य जल निकायों की मानसूनी जल संग्रहण क्षमता में वृद्धि के माध्यम से ये वैज्ञानिक रूप से नियोजित हस्तक्षेप भूजल पुनर्भरण को मजबूत करते हैं तथा कृषि, आजीविका और स्थानीय समुदायों के लिए जल उपलब्धता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

सतत जल सुरक्षा की दिशा में

कैच द रेन अभियान के अंतर्गत नंद्याल जिले में 2,691 किलोमीटर फीडर एवं सप्लाई चैनलों की गाद निकासी, 251 लघु सिंचाई टैंकों का पुनर्स्थापन, 2,103 जल संरक्षण कार्यों का क्रियान्वयन तथा हजारों वर्षा जल संचयन संरचनाओं का पुनर्जीवन जल संरक्षण प्रयासों को नई गति प्रदान कर रहा है।

वैज्ञानिक योजना, तकनीकी मूल्यांकन तथा सक्रिय जनभागीदारी पर आधारित यह समन्वित पहल जिले की वर्षा जल संग्रहण, भंडारण एवं भूजल पुनर्भरण क्षमता को सुदृढ़ करते हुए दीर्घकालिक जल सुरक्षा एवं जलवायु लचीलापन (Climate Resilience) को मजबूत बना रही है।

नंद्याल जिले का यह एकीकृत मॉडल दर्शाता है कि विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से "जहाँ वर्षा हो, वहीं वर्षा जल को संजोएँ" की अवधारणा को सफलतापूर्वक लागू करते हुए सतत जल संरक्षण एवं जल सुरक्षा के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की जा रही हैं।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, आंध्र प्रदेश के प्रथम दीक्षांत समारोह में किया संबोधन

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जनजातीय विश्वविद्यालय शिक्षा के साथ-साथ आजीविका, कौशल विकास और सामाजिक न्याय के केंद्र बनें : राष्ट्रपति

विजयनगरम- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज आंध्र प्रदेश के विजयनगरम में केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, आंध्र प्रदेश के प्रथम दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय की विशेष जिम्मेदारी है कि वह जनजातीय समाज में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और नीति निर्माण की योग्यता विकसित करने का केंद्र बने। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय के उद्देश्य से स्थापित ऐसे संस्थानों का दायित्व केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें जनजातीय समुदायों के शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, आजीविका और वन अधिकारों के क्षेत्र में जमीनी स्तर पर भी कार्य करना चाहिए।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में यह विश्वविद्यालय जनजातीय और वंचित समुदायों के युवाओं के समग्र विकास के साथ-साथ पूरे क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

जनजातीय आजीविका को बढ़ावा देने के लिए नवाचार आवश्यक

राष्ट्रपति ने कहा कि सभी विश्वविद्यालयों, विशेषकर जनजातीय विश्वविद्यालयों को ऐसी नवाचारी व्यवस्थाएं विकसित करनी चाहिए, जो जनजातीय समुदायों की आजीविका को मजबूत करें। उन्होंने कहा कि लघु वनोपज, हस्तशिल्प, मोटे अनाज (मिलेट्स), औषधीय पौधों, इको-टूरिज्म और स्थानीय उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर विकसित किए जाने चाहिए।

दीक्षांत समारोह केवल उत्सव नहीं, संकल्प का भी अवसर

राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। यह केवल उपलब्धियों का उत्सव नहीं, बल्कि भविष्य के लिए नए संकल्प लेने का अवसर भी है।

उन्होंने विद्यार्थियों को तेजी से बदलते समय के अनुरूप कौशल विकास पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रहकर आसपास के सामाजिक और प्राकृतिक परिवेश से भी सीखना चाहिए, ताकि व्यावहारिक कौशल विकसित हो सकें।

उन्होंने विद्यार्थियों से समाज और राष्ट्र के बेहतर भविष्य के निर्माण में योगदान देने के साथ-साथ अपनी समुदाय, संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रहने का आह्वान किया।

विरासत और आधुनिक विज्ञान का समन्वय जरूरी

राष्ट्रपति ने कहा कि तेजी से विकसित हो रहे भारत में अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहते हुए आधुनिक विज्ञान का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना आवश्यक है।

उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य से विश्वविद्यालय ने उत्तर आंध्र प्रदेश के जनजातीय समुदायों को सशक्त बनाने के लिए 'विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी हब' की स्थापना की है।

उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय ने जनजातीय कल्याण, जनस्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा तथा ऊर्जा संरक्षण जैसे विषयों पर शैक्षणिक और जमीनी स्तर पर उल्लेखनीय कार्य किए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि ये प्रयास समानता पर आधारित विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में निभाएगा महत्वपूर्ण योगदान

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत का लक्ष्य वर्ष 2047 तक विकसित भारत का निर्माण करना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अपनी समावेशी, व्यवहारिक और पर्यावरण संरक्षण आधारित शिक्षा प्रणाली के माध्यम से इस लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

उन्होंने आशा व्यक्त की कि आधुनिक शिक्षा के सकारात्मक पहलुओं को जनजातीय समाज से जोड़कर स्थानीय युवाओं को देश के समावेशी और संतुलित विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा।

अमरावती में 1,504 आवासीय इकाइयों वाले जीपीआरए परिसर को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी, ₹1,234.91 करोड़ की परियोजना

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने आज अमरावती, आंध्र प्रदेश में जनरल पूल रेजिडेंशियल एकोमोडेशन (GPRA) के निर्माण को मंजूरी प्रदान की। यह अमरावती और आंध्र प्रदेश राज्य में अपनी तरह की पहली जीपीआरए परियोजना होगी।

इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों को पर्याप्त आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराकर उन पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ को कम करना है। इससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा, कार्य में पारदर्शिता और ईमानदारी को प्रोत्साहन मिलेगा तथा उनके समग्र कल्याण में सुधार होगा। कार्यस्थल के निकट आवास उपलब्ध होने से सरकारी कामकाज की दक्षता भी बढ़ेगी और कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सकेंगे।

प्रस्तावित जीपीआरए परिसर 17 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। इसमें 11 आवासीय टावरों में कुल 1,504 आवासीय इकाइयां (टाइप-II से टाइप-VI तक) निर्मित की जाएंगी। परियोजना में 1,972 कारों के लिए बेसमेंट पार्किंग सुविधा भी उपलब्ध होगी। परियोजना का कुल निर्मित क्षेत्रफल 31.30 लाख वर्ग फुट (2,90,762 वर्ग मीटर) होगा, जिसमें 9.10 लाख वर्ग फुट बेसमेंट क्षेत्र शामिल है।

परियोजना को पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ निर्माण मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा। सभी भवनों की योजना और डिजाइन भारत के सर्वोत्तम ग्रीन बिल्डिंग मानकों के अनुसार तैयार की जाएगी, जिसमें ऊर्जा दक्षता, जल संरक्षण, स्थानीय निर्माण सामग्री के उपयोग और निवासियों के स्वास्थ्य एवं सुविधा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

परिसर को नवीनतम ऊर्जा संरक्षण एवं सतत भवन संहिता (ECSBC) 2024 तथा इको-निवास संहिता (ENS) 2024 के प्रावधानों के अनुरूप विकसित किया जाएगा। इसे न्यूनतम 4-स्टार GRIHA रेटिंग प्राप्त करने के लिए डिजाइन, निर्माण और पंजीकृत किया जाएगा।

जीपीआरए परिसर में बैंक एवं एटीएम, डाकघर, क्रेच, सामुदायिक भवन, भोजनालय, फूड कोर्ट, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, सेवा केंद्र और अतिथि गृह जैसी आवश्यक नागरिक एवं सामुदायिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। साथ ही दिव्यांगजनों की सुगम पहुंच सुनिश्चित करने के लिए बाधा-रहित (Barrier-Free) वातावरण विकसित किया जाएगा।

यह परियोजना रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी। निर्माण चरण के दौरान प्रतिवर्ष लगभग 7 लाख मानव-दिवस रोजगार उत्पन्न होने का अनुमान है, जबकि संचालन चरण में प्रतिवर्ष लगभग 50,000 मानव-दिवस रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

परियोजना लागत एवं वित्तपोषण

परियोजना की अनुमानित लागत ₹1,234.91 करोड़ है। इसका वित्तपोषण भारत सरकार द्वारा बजटीय सहायता के माध्यम से “4216 – कैपिटल आउटले ऑन हाउसिंग (रेजिडेंशियल बिल्डिंग्स)” मद के तहत किया जाएगा।

परियोजना क्रियान्वयन

इस परियोजना को केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के माध्यम से आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा क्रियान्वित किया जाएगा। निविदा प्रक्रिया से पूर्व की गतिविधियां प्रारंभ हो चुकी हैं तथा टेंडर दस्तावेजों की तैयारी जारी है।


आंध्र प्रदेश में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ₹15,000 करोड़ की AMCA सहित कई रणनीतिक रक्षा परियोजनाओं की आधारशिला रखी

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने 15 मई 2026 को आंध्र प्रदेश के सत्य साईं जिले के पुट्टपर्थी में कई रणनीतिक एयरोस्पेस और रक्षा परियोजनाओं की आधारशिला रखी तथा विभिन्न ग्राउंडिंग (शिलान्यास) समारोहों की अध्यक्षता की।

पुट्टपर्थी में एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) और अन्य भविष्य की स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के त्वरित विकास के लिए कोर इंटीग्रेशन एवं फ्लाइट टेस्टिंग सेंटर की आधारशिला रखी गई। इसके अलावा अनकापल्ली जिले के टी. सिरसापल्ली गांव में नेवल सिस्टम्स मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी की आधारशिला रखी गई, जो उन्नत अंडरवॉटर हथियारों और नौसैनिक युद्ध प्रणालियों की जरूरतों को पूरा करेगी।

इसके साथ ही श्री सत्य साईं जिले के मदकासिरा में डिफेंस एनर्जेटिक्स फैसिलिटी और एम्युनिशन एवं इलेक्ट्रिक फ्यूज प्लांट के निर्माण कार्य का शुभारंभ किया गया। इसके अलावा कर्नूल में आठ ड्रोन कंपनियों के एक समूह द्वारा ड्रोन सिटी स्थापित करने की घोषणा की गई। विभिन्न कंपनियों ने आंध्र प्रदेश सरकार के साथ रक्षा इकाइयों की स्थापना के लिए समझौता ज्ञापनों (MoUs) का आदान-प्रदान भी किया।

अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने इन परियोजनाओं की शुरुआत को “ऐतिहासिक” बताया और कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता (आत्मनिर्भर भारत) राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में लक्ष्य किसी अन्य देश पर निर्भर रहने के बजाय आत्मनिर्भर बनना होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएँ तीनों सेनाओं की आवश्यकताओं को पूरा करेंगी और देश को भविष्य के लिए तैयार बनाएंगी। इन परियोजनाओं के माध्यम से आंध्र प्रदेश के विकास को भी नई गति मिलेगी।

रक्षा मंत्री ने कहा कि ये परियोजनाएँ बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करेंगी। स्थानीय शैक्षणिक संस्थान जैसे इंजीनियरिंग कॉलेज और आईटीआई इस पहल का हिस्सा बनेंगे। इससे एक मजबूत सप्लाई चेन बनेगी और छोटे उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने कहा कि पुट्टपर्थी जल्द ही उन चुनिंदा वैश्विक स्थानों में शामिल होगा जहाँ से पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान उड़ान भरेंगे।

नेवल सिस्टम्स मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी (भारत डायनेमिक्स लिमिटेड की परियोजना) पर 480 करोड़ रुपये का निवेश होगा, जिसमें अंडरवॉटर ड्रोन, काउंटर-मेज़र सिस्टम और टॉरपीडो बनाए जाएंगे। इससे भारतीय नौसेना की क्षमताएँ मजबूत होंगी और समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा।

डिफेंस एनर्जेटिक्स फैसिलिटी (अग्न्यास्त्र एनर्जेटिक्स लिमिटेड) पर लगभग 1500 करोड़ रुपये का निवेश होगा, जबकि एम्युनिशन और इलेक्ट्रिक फ्यूज प्लांट (HFCL लिमिटेड) लगभग 1200 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित किया जाएगा।

ड्रोन सिटी को लेकर रक्षा मंत्री ने कहा कि यह आधुनिक युद्ध में गेम चेंजर साबित होगी और यह क्षेत्र “ड्रोन हब” के रूप में उभरेगा।

मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि देश की रक्षा क्षमता और वैश्विक स्थिति मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की बढ़ती ताकत और तकनीकी प्रगति का उदाहरण है।

उन्होंने कहा कि नया आंध्र प्रदेश “नवाचार, अवसंरचना और औद्योगिकीकरण” के आधार पर विकसित हो रहा है और “विकसित भारत” के लक्ष्य में अग्रणी भूमिका निभाएगा।

इस अवसर पर नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री किन्जरापु राममोहन नायडू, राज्य सरकार के मंत्री, रक्षा उत्पादन सचिव श्री संजीव कुमार, रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी तथा उद्योग प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

आंध्र प्रदेश में रेलवे विकास को लेकर बड़ी घोषणाएं

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अश्विनी वैष्णव ने विशाखापत्तनम में गूगल क्लाउड इंडिया AI हब के ग्राउंड ब्रेकिंग समारोह के दौरान आंध्र प्रदेश में रेलवे विकास को लेकर कई अहम घोषणाएं कीं।

सबसे महत्वपूर्ण घोषणा साउथ कोस्टल रेलवे ज़ोन के गठन को लेकर रही। उन्होंने बताया कि इसके लिए गजट नोटिफिकेशन जल्द जारी किया जाएगा और 1 जून 2026 से यह ज़ोन प्रभावी हो जाएगा। इससे राज्य में रेलवे प्रशासन को और मजबूती मिलेगी।

मंत्री ने बताया कि आंध्र प्रदेश को इस बार ₹10,134 करोड़ का रिकॉर्ड रेलवे बजट मिला है, जो पहले आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के संयुक्त बजट ₹886 करोड़ की तुलना में काफी अधिक है।

उन्होंने कहा कि राज्य में करीब ₹1,06,000 करोड़ के रेलवे प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है, जिनका उद्देश्य बंदरगाहों, पर्यटन स्थलों और बड़े शहरों को बेहतर तरीके से जोड़ना है।

इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भी बड़ी प्रगति हुई है। राज्य के 74 रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास किया जा रहा है। इसके अलावा 832 फ्लाईओवर और अंडरपास पूरे हो चुके हैं, जबकि 299 पर काम जारी है। रेलवे ट्रैक के मामले में 1,759 किमी ट्रैक तैयार हो चुका है और 3,300 किमी निर्माणाधीन है।

मंत्री ने यह भी बताया कि आंध्र प्रदेश का रेलवे नेटवर्क अब 100% विद्युतीकृत हो चुका है, जो इसे आधुनिक रेलवे प्रणाली में अग्रणी बनाता है।

यात्रियों की सुविधा के लिए राज्य में 16 वंदे भारत ट्रेन और 22 अमृत भारत ट्रेन सेवाएं चलाई जा रही हैं, जिससे यात्रा तेज और आरामदायक हुई है।

ईस्ट कोस्ट रेलवे कॉरिडोर को चार लाइनों वाला नेटवर्क बनाया जा रहा है, जिससे इसकी क्षमता दोगुनी हो जाएगी और करीब 500 नई ट्रेनों के संचालन का रास्ता खुलेगा। साथ ही, मालगाड़ी और कंटेनर सेवाओं को भी मजबूत किया जा रहा है।

भविष्य की हाई-स्पीड कनेक्टिविटी पर बात करते हुए मंत्री ने “हाई-स्पीड डायमंड” परियोजना का जिक्र किया, जिसके तहत प्रमुख शहरों के बीच यात्रा समय काफी कम हो जाएगा। जैसे:

  • अमरावती से हैदराबाद: लगभग 70 मिनट

  • अमरावती से चेन्नई: लगभग 112 मिनट

  • हैदराबाद से पुणे: लगभग 1 घंटा 55 मिनट

  • पुणे से मुंबई: लगभग 48 मिनट

  • चेन्नई से बेंगलुरु: लगभग 73 मिनट

  • हैदराबाद से बेंगलुरु: लगभग 2 घंटे 8 मिनट

मंत्री ने कहा कि ये सभी पहलें आंध्र प्रदेश को एक बड़ा रेलवे और लॉजिस्टिक्स हब बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। उन्होंने यह भी जोर दिया कि केंद्र सरकार दक्षिणी राज्यों के संतुलित विकास और जनकल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।

जल संरक्षण में मिसाल बने आंध्र प्रदेश के गांव: सामुदायिक प्रयासों से बदली तस्वीर

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नई दिल्ली/आंध्र प्रदेश- आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले के मुरुगुम्मी, मरेल्ला और थंगेला जैसे गांव जल संरक्षण के क्षेत्र में मिसाल बनकर उभरे हैं। भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा चलाए जा रहे ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तहत इन गांवों में सामुदायिक भागीदारी से वर्षा जल संरक्षण के प्रभावी उपाय अपनाए गए, जिससे जल संकट की समस्या में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

पहले इन गांवों में अनियमित वर्षा, गिरते भूजल स्तर और बार-बार बोरवेल फेल होने जैसी समस्याओं के कारण पानी की भारी कमी थी, जिससे खेती और आजीविका पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता था। लेकिन ग्राम सभाओं, घर-घर जागरूकता अभियान, कला जत्था, कार्यशालाओं और फील्ड डेमो के माध्यम से लोगों को जागरूक किया गया। किसानों, महिलाओं, युवाओं और स्थानीय संस्थाओं ने मिलकर जल बजटिंग, फसल योजना और भूजल साझा करने जैसी पहल अपनाई, जिससे सामुदायिक स्वामित्व की भावना मजबूत हुई।

इन गांवों ने ‘रिज-टू-वैली’ (ऊंचाई से निचले क्षेत्रों तक) दृष्टिकोण अपनाते हुए वर्षा जल संग्रहण और संरक्षण के कई उपाय किए। इनमें परकोलेशन टैंक, खेत तालाब, स्टैगर्ड ट्रेंच, छतों पर वर्षा जल संचयन प्रणाली और सामुदायिक तालाबों का पुनर्जीवन शामिल है।

मुख्य उपलब्धियां:

  • मुरुगुम्मी: 71 जल संरचनाओं का निर्माण, लगभग 8.11 लाख घन मीटर जल भंडारण क्षमता, 264.5 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा।

  • मरेल्ला: 53 जल संरचनाएं, लगभग 10.04 लाख घन मीटर क्षमता, 220.5 हेक्टेयर क्षेत्र में कृषि सुदृढ़; साथ ही तालाबों के पुनर्निर्माण से 5.95 लाख घन मीटर अतिरिक्त भंडारण।

  • थंगेला: 71 संरचनाएं, लगभग 5.89 लाख घन मीटर क्षमता, 185.3 हेक्टेयर भूमि को लाभ; पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन से 3.98 लाख घन मीटर अतिरिक्त जल संग्रह।

प्रभाव:

  • करीब 5,900 लोगों को घरेलू और कृषि उपयोग के लिए बेहतर जल उपलब्धता

  • कृषि उत्पादकता में वृद्धि और किसानों की आय में सुधार

  • डेयरी गतिविधियों में बढ़ोतरी से अतिरिक्त आय के अवसर

  • मिट्टी की नमी में सुधार, जिससे स्थिर और टिकाऊ खेती संभव

  • रोजगार के बेहतर अवसरों के कारण पलायन में कमी

सम्मान:

मुरुगुम्मी गांव को 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कार 2024 में दूसरा सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत पुरस्कार मिला। मरेल्ला को शीर्ष 30 गांवों में स्थान मिला, जबकि थंगेला को राष्ट्रीय स्तर पर नामांकन प्राप्त हुआ।

निष्कर्ष:

इन गांवों का परिवर्तन ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान की सफलता का प्रतीक है। यह पहल दिखाती है कि सामुदायिक भागीदारी और सही रणनीति के माध्यम से जल संसाधनों का टिकाऊ प्रबंधन संभव है। यह मॉडल देश के अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणादायक और अपनाने योग्य है।

अमरावती को एकमात्र राजधानी का दर्जा: आंध्र प्रदेश पुनर्गठन संशोधन विधेयक 2026 बना ऐतिहासिक मील का पत्थर

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केंद्रीय संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर ने आज लोकसभा में आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2026 के पारित होने को राज्य की विकास यात्रा में एक ऐतिहासिक क्षण बताया।

उन्होंने कहा कि इस विधेयक के माध्यम से अमरावती को एकमात्र राजधानी के रूप में कानूनी मान्यता मिलने से लंबे समय से चली आ रही संरचनात्मक अनिश्चितता समाप्त हो गई है, जो शासन, निवेश और विकास को प्रभावित कर रही थी।

डॉ. पेम्मासानी ने बताया कि पिछले कई वर्षों से स्पष्ट राजधानी के अभाव में प्रशासनिक अस्पष्टता, बुनियादी ढांचे के कार्यों में देरी और निवेशकों का भरोसा कम हुआ था। यह संशोधन एक स्पष्ट, स्थिर और दूरदर्शी ढांचा प्रदान करता है, जो राज्य पुनर्गठन की मूल भावना के अनुरूप एक विश्वस्तरीय राजधानी के दृष्टिकोण को पुनः स्थापित करता है।

उन्होंने अमरावती आंदोलन में किसानों और महिलाओं के असाधारण योगदान को रेखांकित किया। लगभग 29,000 किसानों ने स्वेच्छा से अपनी 34,000 एकड़ से अधिक पैतृक भूमि राज्य को सौंपी और नीतिगत बदलावों के कारण लंबे समय तक अनिश्चितता झेली।

उन्होंने कहा कि महिलाओं और स्थानीय समुदायों ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया और कठिन परिस्थितियों का सामना किया। 1,600 से अधिक दिनों तक यह आंदोलन अनुशासित, शांतिपूर्ण और दृढ़ रहा, जो लोकतांत्रिक मजबूती का एक सशक्त उदाहरण बनकर उभरा।

डॉ. पेम्मासानी ने कहा कि यह विधेयक केवल एक कानूनी सुधार नहीं, बल्कि नैतिक पुनर्स्थापन भी है, जो उन लोगों के सम्मान, न्याय और विश्वास को बहाल करता है, जिन्होंने राज्य के भविष्य के लिए असाधारण बलिदान दिए।

उन्होंने अमरावती के लिए परिवर्तनकारी दृष्टिकोण को दोहराते हुए कहा कि इसे एक वैश्विक स्तर के शहर और आंध्र प्रदेश के प्रमुख विकास इंजन के रूप में विकसित किया जा रहा है। 56,000 करोड़ रुपये से अधिक के 91 प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाएं पहले से ही प्रगति पर हैं। अमरावती को औपचारिक मान्यता मिलने से निवेश में तेजी, बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन और राज्य की अर्थव्यवस्था को गति मिलने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि स्वैच्छिक भूमि पूलिंग पर आधारित अमरावती मॉडल सहभागी और समावेशी विकास का एक अनूठा उदाहरण है, जिसमें किसान राज्य के शहरी भविष्य के भागीदार बने हैं। यह मॉडल देशभर में समान विकास के लिए एक प्रेरणादायक ढांचा बन सकता है।

डॉ. पेम्मासानी ने यह भी कहा कि राजधानी शहर राज्य की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अमरावती के केंद्र में होने से आंध्र प्रदेश शासन, व्यापार और नवाचार का एक प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर है।

उन्होंने इस ऐतिहासिक विधेयक के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व और सहयोग की सराहना की।

उन्होंने कहा कि यह विधेयक केवल एक नीतिगत निर्णय नहीं, बल्कि एक निर्णायक बदलाव है, जो आंध्र प्रदेश के विकास की दिशा को पुनर्परिभाषित करेगा। प्रशासनिक स्थिरता सुनिश्चित करते हुए, निवेशकों का विश्वास बहाल करते हुए और जनता के बलिदानों का सम्मान करते हुए यह संशोधन अमरावती को आकांक्षा, दृढ़ता और समावेशी विकास के प्रतीक के रूप में स्थापित करता है।

गुंटूर में भव्य ग्रामीण डाक सेवक सम्मेलन, 9,000 से अधिक GDS ने लिया भाग

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डाक विभाग, आंध्र प्रदेश सर्किल ने 22 फरवरी 2026 को गुंटूर में एक भव्य ग्रामीण डाक सेवक (GDS) सम्मेलन का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में पूरे सर्किल से 9,000 से अधिक ग्रामीण डाक सेवकों की भारी भागीदारी देखने को मिली, जो ग्रामीण डाक सेवाओं को मजबूत करने के प्रति उनकी सामूहिक प्रतिबद्धता और समर्पण को दर्शाता है।

गुंटूर में आयोजित GDS सम्मेलन में 9,000 से अधिक ग्रामीण डाक सेवकों ने भाग लिया

इस सम्मेलन में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया, संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर, डाक सेवा बोर्ड के सदस्य (कार्मिक) सुवेंदु कुमार स्वैन, विधायक मोहम्मद नसीर अहमद और गुंटूर के मेयर कोवेलामुडी रविंद्र सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने शिरकत की।

मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया और राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर ने GDS सम्मेलन में दीप प्रज्वलन किया

इस अवसर पर पोस्ट ऑफिस सेविंग स्कीम, सुकन्या समृद्धि योजना, डाक जीवन बीमा, ग्रामीण डाक जीवन बीमा और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) सेवाओं के उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए दस सर्वश्रेष्ठ ग्रामीण डाक सेवकों को सम्मानित किया गया।

केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने डाक परिवार को शुभकामनाएँ दीं और ग्रामीण डाक सेवकों को देश के हर कोने को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण शक्ति बताया। उन्होंने बताया कि इंडिया पोस्ट वर्तमान में लगभग 38 करोड़ पोस्ट ऑफिस सेविंग बैंक खातों का प्रबंधन करता है, जिनमें लगभग 22 लाख करोड़ रुपये की जमा राशि है। इसके अलावा, लगभग 3.8 करोड़ सुकन्या समृद्धि योजना खातों में करीब 2.27 लाख करोड़ रुपये की जमा राशि है, जो डाक नेटवर्क के माध्यम से वित्तीय समावेशन की व्यापकता को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि इंडिया पोस्ट का मेल और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क कन्वेयर सिस्टम, वैज्ञानिक छंटाई, RFID, बारकोड और QR-कोड आधारित ट्रैकिंग के माध्यम से तेजी से आधुनिकीकृत किया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे पर्वतीय क्षेत्रों में अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए ड्रोन आधारित डिलीवरी प्रणाली भी शुरू की जा रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत 2047” के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए “रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म” के मंत्र के साथ सामूहिक रूप से काम करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर ने कहा कि देशभर में विभाग लगभग 1.65 लाख डाकघरों के माध्यम से कार्य करता है, जिनमें 4.5 लाख से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि विभाग का वार्षिक व्यय लगभग 35,000 करोड़ रुपये है, जबकि राजस्व लगभग 13,000 करोड़ रुपये है। आंध्र प्रदेश में पिछले वर्ष व्यय लगभग 1,800 करोड़ रुपये और राजस्व 600 करोड़ रुपये था, जो इस वर्ष बढ़कर लगभग 850 करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने यह भी बताया कि निरंतर निगरानी से ‘शून्य लेन-देन’ वाले डाकघरों की संख्या पहले लगभग एक लाख से घटकर लगभग 1,500 रह गई है, जो संचालन दक्षता में सुधार को दर्शाता है।

सभा को संबोधित करते हुए आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री ने जमीनी स्तर पर शासन और कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में GDS कर्मचारियों की अपूरणीय भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति के बावजूद ग्रामीण डाक सेवकों का मानवीय स्पर्श और समर्पण अतुलनीय है तथा GDS कर्मचारियों के लिए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सहित हरित पहलों के महत्व पर जोर दिया।

यह सम्मेलन वित्तीय समावेशन और नागरिक-केंद्रित सेवाओं को अंतिम छोर तक पहुँचाने में ग्रामीण डाक सेवकों के योगदान और समर्पण को सम्मानित करने का मंच बना। आंध्र प्रदेश पोस्टल सर्किल ने इस ऐतिहासिक कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी गणमान्य व्यक्तियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

भारत के पहले क्वांटम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विश्वविद्यालय परिसर की स्थापना हेतु NIELIT और आंध्र प्रदेश सरकार के बीच MoU

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इंडिया AI इम्पैक्ट समिट के दौरान, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अधीन राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (NIELIT) ने 20 फरवरी 2026 को आंध्र प्रदेश सरकार के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।

इस समझौते के तहत अमरावती में भारत का पहला समर्पित क्वांटम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विश्वविद्यालय परिसर स्थापित किया जाएगा।

यह सहयोग भारत के डीप-टेक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और आंध्र प्रदेश क्वांटम मिशन के माध्यम से वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्वांटम नवाचार केंद्र विकसित करने के राज्य के दृष्टिकोण के अनुरूप है।
अमरावती, राज्य की महत्वाकांक्षी क्वांटम वैली पहल का केंद्र बनने के लिए तैयार है।

समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर

MoU पर हस्ताक्षर निम्न गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में किए गए:

  • एन. चंद्रबाबू नायडू, मुख्यमंत्री, आंध्र प्रदेश

  • एस. कृष्णन, सचिव, MeitY

  • डॉ. एम. एम. त्रिपाठी, महानिदेशक, NIELIT

  • सी. वी. श्रीधर, मिशन निदेशक, APSQM, अमरावती क्वांटम वैली

प्रमुख वक्तव्य

🔹 डॉ. एम. एम. त्रिपाठी, महानिदेशक, NIELIT

उन्होंने कहा कि यह साझेदारी भारत की डीप-टेक यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
अमरावती में NIELIT का क्वांटम और AI परिसर क्वांटम तकनीकों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में अनुसंधान, शिक्षा और नवाचार का राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र बनेगा।

🔹 सी. वी. श्रीधर, मिशन निदेशक, APSQM

उन्होंने कहा कि NIELIT क्वांटम-AI विश्वविद्यालय, क्वांटम विज्ञान, AI और उद्योग-आधारित कौशल विकास को एकीकृत करके वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करेगा।

प्रस्तावित विश्वविद्यालय परिसर की प्रमुख विशेषताएं

प्रमुख अध्ययन एवं अनुसंधान क्षेत्र

  • क्वांटम कंप्यूटिंग और क्वांटम एल्गोरिदम

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग

  • क्वांटम संचार और साइबर सुरक्षा

  • क्वांटम हार्डवेयर और सिस्टम इंजीनियरिंग

  • हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग

  • AI–क्वांटम समन्वय अनुसंधान

शैक्षणिक और अनुसंधान ढांचा

परिसर में निम्न सुविधाएं होंगी:

  • स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी कार्यक्रम

  • उन्नत अनुसंधान प्रयोगशालाएं

  • उद्योग से जुड़े उत्कृष्टता केंद्र (CoEs)

  • डीप-टेक इनक्यूबेशन और उद्यमिता समर्थन

  • वैश्विक शैक्षणिक और R&D सहयोग

पहल का महत्व

यह पहल भारत की क्वांटम तकनीक और AI क्षमताओं को उल्लेखनीय रूप से मजबूत करेगी और देश को अगली पीढ़ी के नवाचार और डीप-टेक शिक्षा में वैश्विक अग्रणी बनाने में मदद करेगी।

NIELIT के बारे में

राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (NIELIT), MeitY के अधीन एक स्वायत्त वैज्ञानिक संस्था है, जो शिक्षा, कौशल विकास, प्रशिक्षण, अनुसंधान और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देती है।

NIELIT के पास देशभर में 56 केंद्र, 750+ मान्यता प्राप्त संस्थान और 9000+ प्रशिक्षण केंद्र हैं और इसने लाखों छात्रों को उभरती तकनीकों में प्रशिक्षित और प्रमाणित किया है।

NIELIT को शिक्षा मंत्रालय द्वारा डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया गया है, जिसका मुख्य परिसर रोपड़ (पंजाब) में और अन्य परिसर आइजोल, अगरतला, औरंगाबाद, कालीकट, गोरखपुर, इम्फाल, ईटानगर, अजमेर, कोहिमा, पटना और श्रीनगर में स्थित हैं।


आंध्र प्रदेश में MISHTI पर राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला का सफल आयोजन

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आंध्र प्रदेश में 8 एवं 9 जनवरी 2026 को MISHTI (Mangrove Initiative for Shoreline Habitats and Tangible Incomes) पर एक राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया।

कार्यशाला का उद्घाटन आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण द्वारा किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व के लिए आभार व्यक्त किया। साथ ही, उन्होंने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव को MISHTI योजना के माध्यम से मैंग्रोव संरक्षण में राज्यों को सहयोग देने के लिए धन्यवाद दिया। इस कार्यशाला में वन विभाग के अधिकारी, विशेषज्ञ और विभिन्न हितधारक शामिल हुए, जिन्होंने मैंग्रोव संरक्षण एवं पुनर्स्थापन के सतत उपायों पर विचार-विमर्श किया।

कार्यशाला के दौरान राष्ट्रीय कैम्पा (National CAMPA) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आनंद मोहन द्वारा एक महत्वपूर्ण प्रस्तुति दी गई, जिसमें MISHTI पहल के उद्देश्यों और कार्यान्वयन ढांचे पर प्रकाश डाला गया। MISHTI का उद्देश्य मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र का विकास एवं संरक्षण करना है, जिसमें मैंग्रोव पुनर्स्थापन, तटरेखा संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण तथा तटीय समुदायों के लिए ठोस आजीविका अवसरों के सृजन पर विशेष बल दिया गया है। यह मिशन ‘मैंग्रोव एलायंस फॉर क्लाइमेट’ (MAC) के उद्देश्यों में भी योगदान देता है, जिसका भारत COP-27 के दौरान सक्रिय सदस्य बना था।

प्रस्तुति के दौरान राष्ट्रीय कैम्पा के सीईओ ने जलवायु सहनशीलता, तटीय संरक्षण और सतत आर्थिक लाभों में मैंग्रोव की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने प्रभावी कार्यान्वयन के लिए राज्यों और संस्थानों के बीच समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

यह कार्यशाला ज्ञान साझा करने, सर्वोत्तम प्रथाओं और नीति संवाद के लिए एक महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हुई, जिसने MISHTI ढांचे के अंतर्गत मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने और सतत तटीय आजीविका सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को और मजबूत किया।

अल्लूरी सीताराम राजू ज़िले की बस दुर्घटना: प्रधानमंत्री की संवेदनाएँ, अनुग्रह राशि की घोषणा

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू ज़िले में हुई बस दुर्घटना में मृतकों के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने प्रत्येक मृतक के परिजनों को पीएमएनआरएफ से 2 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की।

पीएमओ इंडिया ने एक्स पर पोस्ट में कहा:

“आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू ज़िले में हुई बस दुर्घटना में हुई जनहानि से व्यथित हूँ। इस कठिन समय में मेरी संवेदनाएँ प्रभावित लोगों और उनके परिवारों के साथ हैं। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूँ।

पीएमएनआरएफ से प्रत्येक मृतक के परिजनों को 2 लाख रुपये की अनुग्रह सहायता दी जाएगी। घायलों को 50,000 रुपये दिए जाएंगे: प्रधानमंत्री @narendramodi”


आंध्र प्रदेश में राष्ट्रीय ईएमआरएस सांस्कृतिक एवं साहित्यिक महोत्सव ‘उद्भव 2025’ सफलतापूर्वक संपन्न

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राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति छात्र शिक्षा समिति (NESTS), जनजातीय कार्य मंत्रालय ने, 3 से 5 दिसंबर 2025 तक आयोजित 6वीं राष्ट्रीय ईएमआरएस सांस्कृतिक एवं साहित्यिक महोत्सव तथा कला उत्सव – उद्भव 2025 को आंध्र प्रदेश के गुंटूर ज़िले के वड्देस्वरम स्थित केएल विश्वविद्यालय में सफलतापूर्वक संपन्न किया। यह महोत्सव NESTS द्वारा आयोजित और आंध्र प्रदेश जनजातीय कल्याण आवासीय शैक्षणिक संस्थान समिति (APTWREIS–Gurukulam) द्वारा मेज़बानी किया गया, जिसमें केएल विश्वविद्यालय का व्यापक संस्थागत सहयोग मिला।

समापन समारोह में आंध्र प्रदेश सरकार की माननीय जनजातीय कल्याण तथा महिला एवं बाल कल्याण मंत्री जी. संध्या रानी; माननीय सामाजिक कल्याण, दिव्यांग एवं वरिष्ठ नागरिक कल्याण, सचिवालय एवं गांव वॉलंटियर विभाग के मंत्री डॉ. डी. एस. स्वामी; तथा आंध्र प्रदेश के पर्यटन, संस्कृति, सिनेमाटोग्राफी एवं गुंटूर जिले के प्रभारी मंत्री कंदुला दुर्गेश उपस्थित रहे। आंध्र प्रदेश सरकार के सामाजिक कल्याण एवं जनजातीय कल्याण विभाग के सचिव एम. एम. नायक भी समारोह में उपस्थित थे। उनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई और प्रतिभागियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी।

अपने संबोधन में माननीय अतिथियों ने जनजातीय छात्रों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए केंद्र और राज्य सरकारों की जनजातीय शिक्षा, सांस्कृतिक संरक्षण और सशक्तिकरण के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि उद्भव जैसे मंच न केवल भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत को प्रदर्शित करते हैं, बल्कि जनजातीय युवाओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा का अनुभव विकसित करते हैं।

महोत्सव का संचालन NESTS के कमिश्नर अजीत कुमार श्रीवास्तव (IRAS) तथा आंध्र प्रदेश के सामाजिक एवं जनजातीय कल्याण विभाग के सचिव एम. एम. नायक (IAS) के मार्गदर्शन में हुआ। आयोजन सचिव एम. गौथमी (IAS), सचिव APTWREIS (गुरुकुलम), ने अपनी टीमों और दोनों संस्थानों के अधिकारियों के साथ मिलकर कार्यक्रम की सुचारू रूप से व्यवस्था सुनिश्चित की।

कुल 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 1,558 छात्र–छात्राओं ने महोत्सव में भाग लिया, जिनमें 524 पुरुष और 1,024 महिला प्रतिभागी शामिल थे। इनके साथ 45 टीम लीडर, 178 एस्कॉर्ट, 22 कंटिंजेंट मैनेजर, 22 लायज़न अधिकारी, 10 अधिकारी, 19 NESTS अधिकारी एवं कर्मचारी, 137 उप-समिति सदस्य, 48 जूरी सदस्य और 60 राज्य अधिकारी/ APTWREIS अधिकारी भी जुड़े। तीन दिनों तक 49 सांस्कृतिक, साहित्यिक, रचनात्मक और प्रदर्शन कलाओं से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए—पहले दिन 18, दूसरे दिन 22 और तीसरे दिन 9—जिनमें भारत की विविध जनजातीय समुदायों की प्रतिभा, सांस्कृतिक गहराई और कलात्मक अभिव्यक्ति देखने को मिली।

समापन समारोह में विभिन्न प्रतियोगिताओं के परिणाम घोषित किए गए। कुल पदक तालिका में तेलंगाना प्रथम स्थान पर रहा, जिसके बाद झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश का स्थान रहा। कुल 105 प्रथम पुरस्कार, 105 द्वितीय पुरस्कार और 105 तृतीय पुरस्कार प्रदान किए गए, साथ ही सर्वश्रेष्ठ राज्य चैम्पियनशिप का पुरस्कार भी दिया गया। सभी प्रतिभागियों को उनके उत्साह और सहभागिता के सम्मान में प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे।

उद्भव 2025 के 12 चयनित वर्गों के विजेता अब यशदा, पुणे में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय कला उत्सव में ईएमआरएस का प्रतिनिधित्व करेंगे, जिसमें देशभर से टीमें भाग लेंगी। जनजातीय हस्तशिल्प, दृश्य कलाएँ, पारंपरिक प्रस्तुतियाँ और स्वदेशी रचनात्मक अभिव्यक्तियों ने इस महोत्सव में विशेष आकर्षण जोड़ा, जो जनजातीय समाज की सांस्कृतिक समृद्धि और कलात्मक परंपराओं को दर्शाता है।

उद्भव 2025 ने माननीय प्रधानमंत्री के सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के दृष्टिकोण को साकार करते हुए जनजातीय छात्रों को राष्ट्रीय मंच, आत्मविश्वास और अपनी सांस्कृतिक पहचान का उत्सव मनाने का अवसर प्रदान किया। इस महोत्सव ने ईएमआरएस की परिवर्तनकारी भूमिका को भी रेखांकित किया, जो विकासात्मक अंतर को पाटने, शैक्षणिक और सांस्कृतिक क्षमताओं को मजबूत करने तथा जनजातीय युवाओं में नेतृत्व गुणों को विकसित करने में महत्वपूर्ण है।

छठे संस्करण की सफल पूर्णता के साथ, NESTS ने देशभर के जनजातीय छात्रों के लिए समग्र शिक्षा, सांस्कृतिक सशक्तिकरण और रचनात्मक अवसरों को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है। संगठन स्वदेशी प्रतिभा को पहचान देने और सांस्कृतिक तथा साहित्यिक क्षेत्रों में उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने वाले मंचों के विस्तार के लिए समर्पित है।


एसईसीआई और आंध्र प्रदेश सरकार ने 1200 MWh BESS और 50 MW हाइब्रिड सोलर परियोजना के लिए सरकारी आदेशों का आदान-प्रदान किया

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Solar Energy Corporation of India Limited (SECI), जो नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE), भारत सरकार के अंतर्गत एक नवरत्न सीपीएसयू है, ने आज आंध्र प्रदेश सरकार के साथ 1200 MWh बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) के नंद्याल में विकास तथा 50 मेगावाट हाइब्रिड सोलर प्रोजेक्ट के लिए सरकारी आदेशों (GOs) का आदान-प्रदान किया।

यह आदान-प्रदान विशाखापट्टनम में आयोजित आंध्र प्रदेश पार्टनरशिप समिट 2025 के ऊर्जा सत्र के दौरान हुआ, जिसे आंध्र प्रदेश सरकार के उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग ने CII के साथ मिलकर आयोजित किया था।

परियोजना अनुमोदन और कार्यान्वयन

बिजली मंत्रालय ने 23 जनवरी 2025 के आदेश के माध्यम से 1200 MWh BESS परियोजना को मार्केट-बेस्ड ऑपरेशंस मोड के तहत लागू करने के लिए SECI को नामित किया था।

यह परियोजना SECI बोर्ड के अध्यक्ष संतोष कुमार सारंगी द्वारा 22 अक्टूबर 2025 को अनुमोदित की गई। MNRE लगातार दोनों परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा कर रहा है।

CAPEX मोड के तहत परियोजनाओं का विकास करेगा SECI

दोनों—BESS और हाइब्रिड सोलर प्रोजेक्ट—CAPEX मोड में विकसित किए जाएंगे, जिसमें SECI पूरी निवेश ज़िम्मेदारी निभाएगा।

आंध्र प्रदेश के ऊर्जा मंत्री गोट्टिपाटी रवि कुमार ने SECI प्रतिनिधियों को सरकारी आदेश सौंपे। इस अवसर पर आंध्र प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव के. विजयानंद और NREDCAP के उपाध्यक्ष एम. कमलाकर बाबू उपस्थित रहे।

SECI की ओर से शिवकुमार वेंकट वेपाकोंमा और  रोहित चौबे मौजूद थे।

भारत के स्वच्छ ऊर्जा इकोसिस्टम को मजबूती

इन सरकारी आदेशों का आदान-प्रदान आंध्र प्रदेश की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इन परियोजनाओं से—

  • राज्य की ग्रीन एनर्जी स्टोरेज क्षमता बढ़ेगी

  • एक सक्षम और लचीला ग्रीन ग्रिड तैयार होगा

  • भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण में तेजी आएगी

SECI ने राज्यों और केंद्र सरकार के साथ मिलकर भारत के ऊर्जा भविष्य को अधिक हरित और सक्षम बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।


आंध्र प्रदेश में लॉजिस्टिक्स डिजिटलीकरण को बढ़ावा: NLDSL और राज्य सरकार ने ULIP आधारित पहल के लिए किया MoU हस्ताक्षर

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नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (NICDC) लॉजिस्टिक्स डेटा सर्विसेज लिमिटेड (NLDSL) और आंध्र प्रदेश सरकार ने 14 नवंबर 2025 को विशाखापट्टनम में आयोजित 30वें CII पार्टनरशिप समिट के दौरान वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल तथा आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की उपस्थिति में एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इस सहयोग का उद्देश्य यूनिफाइड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म (ULIP) का उपयोग करके आंध्र प्रदेश के लॉजिस्टिक्स क्षेत्र का व्यापक डिजिटलीकरण करना है।

इस पहल के तहत आंध्र प्रदेश के सरकारी और निजी हितधारकों को राज्य के लॉजिस्टिक्स संचालन और प्रदर्शन मानकों की वास्तविक समय में जानकारी प्रदान करने के लिए एक मजबूत एकीकृत डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म तैयार किया जाएगा। यह प्लेटफ़ॉर्म विभिन्न क्षेत्रों में समन्वय को बढ़ाएगा, दक्षता में सुधार करेगा और डेटा-आधारित निर्णय लेने को सक्षम बनाएगा।

आंध्र प्रदेश सरकार, INCAP के माध्यम से, NLDSL के साथ मिलकर राज्य के विभिन्न विभागों के लॉजिस्टिक्स संबंधी प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों (KPIs) की निगरानी के लिए एकीकृत लॉजिस्टिक्स डैशबोर्ड विकसित करेगी। इस डैशबोर्ड से प्राप्त विश्लेषणात्मक रिपोर्टें और अंतर्दृष्टियाँ ULIP की क्षमताओं का उपयोग करते हुए राज्य के लॉजिस्टिक्स पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने में मदद करेंगी।

यह MoU उन्नत तकनीकी समाधानों को लॉजिस्टिक्स विकास से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और कुशल, आधुनिक और मजबूत आपूर्ति शृंखला अवसंरचना के निर्माण में भारत की वैश्विक नेतृत्व क्षमता को और मजबूत करता है।

MoU पर हस्ताक्षर NICDC के CEO एवं MD तथा NLDSL के चेयरमैन रजत कुमार सैनी की उपस्थिति में किए गए। यह समझौता INCAP के VC एवं MD सी. वी. प्रवीण आदित्य और NLDSL के CEO ताकायुकी काणो द्वारा औपचारिक रूप से कार्यान्वित किया गया। यह साझेदारी राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति (NLP) के अनुरूप विश्वस्तरीय लॉजिस्टिक्स अवसंरचना के निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम है।

ULIP के बारे में:

ULIP एक डिजिटल गेटवे है जो उद्योग हितधारकों को विभिन्न सरकारी प्रणालियों से API-आधारित एकीकरण के माध्यम से लॉजिस्टिक्स संबंधी डेटा तक पहुँच प्रदान करता है। ULIP ने 11 मंत्रालयों की 44 प्रणालियों से 136 APIs के माध्यम से एकीकरण किया है, जो 2,000 से अधिक डेटा फ़ील्ड्स को कवर करता है। अब तक उद्योगों ने ULIP का उपयोग करके 210 से अधिक एप्लिकेशन विकसित किए हैं और 200 करोड़ से अधिक API लेनदेन किए गए हैं। निजी क्षेत्र के अलावा, ULIP कोयला मंत्रालय, भारतीय खाद्य निगम (FCI) और विभिन्न राज्य सरकारों सहित कई विभागों को डेटा-आधारित शासन प्रदान करने में भी सहयोग कर रहा है।


भारत के उदय की कहानी लिखने का आह्वान: CII समिट में वैश्विक निवेशकों को संबोधित करते हुए बोले केंद्रीय मंत्री डॉ. पेम्मासनि चंद्र शेखर

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केंद्रीय संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासनि चंद्र शेखर ने कहा—“भारत के उदय की कहानी साथ मिलकर लिखें”

केंद्रीय संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासनि चंद्र शेखर ने आज वैश्विक निवेशकों से आह्वान किया कि वे “भारत के उदय की कहानी को सह-लेखक बनकर लिखें।” उन्होंने कहा कि पिछले दशक में भारत का रूपांतरण “सोच में व्यापक परिवर्तन” यानी माइंडसेट मेटामॉर्फोसिस का परिणाम है।

विशाखापट्टनम में आयोजित सीआईआई पार्टनरशिप समिट में, भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन की गरिमामयी उपस्थिति में संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति सुविचारित नीतियों, दृढ़ कार्यान्वयन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में उद्यमियों की ऊर्जा को मुक्त करने की वजह से संभव हुई है।

राज्य मंत्री ने टेलीकॉम कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग में 25 बिलियन अमेरिकी डॉलर के अवसर की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए भरोसा दिलाया कि संचार मंत्रालय नए निवेशों को प्रोत्साहित करने और मंजूरियाँ तेज़ी से प्रदान करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

उन्होंने कहा कि भारत में निवेश करना दुनिया के सबसे बड़े उभरते मध्यम वर्ग के साथ जुड़ना है और एक ऐसी विकासगाथा का हिस्सा बनना है जो आने वाले दशकों तक वैश्विक व्यापार को प्रभावित करेगी।

“भारत सिर्फ तरंग पर सवार नहीं है… भारत ही तरंग है,” उन्होंने कहा और उद्योग जगत से भारत के आर्थिक उत्कर्ष के अगले अध्याय में साझेदार बनने का आह्वान किया।

राज्य मंत्री ने बताया कि भारत लाइसेंस-राज मानसिकता से निकलकर ट्रस्ट-फ़र्स्ट एप्रोच पर पहुंच चुका है, जहाँ उद्यमियों को शक की नजर से देखने के बजाय राष्ट्रीय निर्माण का नायक माना जा रहा है।

उन्होंने प्रमुख सुधारों का उल्लेख किया—

• 1.4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का बुनियादी ढांचा निवेश
• 26 बिलियन अमेरिकी डॉलर की PLI योजनाएँ
• सरल श्रम कानून
• रेट्रोस्पेक्टिव टैक्सेशन की समाप्ति
• GST के जरिए राष्ट्रीय बाज़ार का एकीकरण
• इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC)

इन सबके कारण भारत एक उपभोक्ता देश से आगे बढ़कर एक विश्वसनीय वैश्विक निर्माता और भागीदार के रूप में उभरा है।

आंध्र प्रदेश की विशेषताओं को उजागर करते हुए, डॉ. चंद्र शेखर ने कहा कि यह राज्य भारत के सबसे संभावनाशील निवेश स्थलों में से एक है। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री एन. चंद्रबाबू नायडू द्वारा मजबूत औद्योगिक इकोसिस्टम विकसित करने के प्रयासों की सराहना की।

उन्होंने बताया कि—

• हैदराबाद (साइबराबाद) आईटी का प्रमुख केंद्र है
• विशाखापट्टनम उद्योग और फिनटेक का हब बन रहा है
• अनंतपुर ऑटोमोबाइल उद्योग का केंद्र
• तिरुपति इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का महत्वपूर्ण केंद्र

साथ ही, जीनोम वैली जैसी पहलों ने वैश्विक निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है।

उन्होंने आंध्र प्रदेश की अन्य खूबियों का भी उल्लेख किया—

• छह प्रमुख बंदरगाह
• तैयार औद्योगिक भूमि बैंक
• विशाल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता
• तेज़ और सुगम शासन मॉडल

उन्होंने कहा कि युवा मंत्रियों—नारा लोकेश और टी. जी. भारत—के नेतृत्व में राज्य न केवल निवेश के लिए तैयार है बल्कि निवेश का भूखा है।

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने रेड सैंडर्स किसानों और आंध्र विश्वविद्यालय को ₹3 करोड़ की एबीएस राशि वितरित की

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भारत की जैव विविधता संसाधनों के सतत उपयोग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (National Biodiversity Authority - NBA) ने आंध्र प्रदेश के 198 किसानों और रेड सैंडर्स (लाल चंदन) की खेती करने वालों सहित कुल 199 लाभार्थियों को ₹3.00 करोड़ की राशि वितरित की है। लाभार्थियों में एक शैक्षणिक संस्था — आंध्र विश्वविद्यालय — भी शामिल है। यह वितरण आंध्र प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड के माध्यम से किया गया है और यह जैव विविधता अधिनियम के तहत एक्सेस एंड बेनिफिट-शेयरिंग (Access and Benefit Sharing – ABS) तंत्र का हिस्सा है।

यह पहल, जैव विविधता संरक्षण में समावेशी भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए एनबीए द्वारा किए गए लाभ-साझाकरण उपायों की श्रृंखला का हिस्सा है। इससे पहले, एनबीए ने आंध्र प्रदेश वन विभाग, कर्नाटक वन विभाग और आंध्र प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड को रेड सैंडर्स के संरक्षण के लिए ₹48.00 करोड़ तथा तमिलनाडु के किसानों को ₹55.00 लाख जारी किए थे।

वर्तमान वितरण के तहत, प्रत्येक किसान को ₹33,000 से लेकर ₹22.00 लाख तक की राशि प्राप्त होगी, जो इस बात पर निर्भर करेगी कि उन्होंने उपयोगकर्ताओं को कितनी मात्रा में रेड सैंडर्स की लकड़ी आपूर्ति की है। यह भी उल्लेखनीय है कि किसानों को उनकी लकड़ी की बिक्री कीमत की तुलना में अधिक लाभ प्राप्त हुआ है।

लाभार्थी आंध्र प्रदेश के चार जिलों — चित्तूर, नेल्लोर, तिरुपति और कडप्पा — के 48 गांवों से हैं, जो इस मूल्यवान स्थानीय प्रजाति की खेती और संरक्षण में संलग्न ग्रामीण समुदायों की व्यापक भागीदारी को दर्शाता है।

इस पहल की शुरुआत एनबीए द्वारा 2015 में गठित रेड सैंडर्स पर विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों से हुई थी। समिति ने “रेड सैंडर्स के उपयोग से उत्पन्न संरक्षण, सतत उपयोग और निष्पक्ष एवं समान लाभ-साझाकरण के लिए नीति” शीर्षक से एक व्यापक नीति तैयार की थी। समिति के कार्य का एक महत्वपूर्ण परिणाम 2019 में विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) द्वारा की गई नीति शिथिलता थी, जिसके तहत खेती से प्राप्त रेड सैंडर्स के निर्यात की अनुमति दी गई — यह वैध और सतत व्यापार को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम था।

यह पहल इस बात का प्रमाण है कि किस प्रकार ABS जैसे नीतिगत उपकरण जैव विविधता संरक्षण को एक व्यवहार्य आजीविका विकल्प बना सकते हैं। यह लाभ-साझाकरण पहल जैव विविधता संरक्षण को आजीविका सुधार से जोड़ने, सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने और जैव विविधता के संरक्षकों को उनका उचित अधिकार सुनिश्चित करने के लिए एनबीए की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करती है। यह भारत के सबसे मूल्यवान और प्रतीकात्मक वृक्ष — रेड सैंडर्स — के दीर्घकालिक संरक्षण और निष्पक्ष लाभ-साझाकरण के प्रयासों में एक और मील का पत्थर है।

बंगाल की खाड़ी में संभावित चक्रवात की तैयारियों की समीक्षा के लिए कैबिनेट सचिव डॉ. टी. वी. सोमनाथन की अध्यक्षता में राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति (NCMC) की बैठक आयोजित

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भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने समिति को जानकारी दी कि दक्षिणपूर्व बंगाल की खाड़ी पर बना अवदाब पिछले छह घंटों में लगभग 7 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से पश्चिम की ओर बढ़ा है और 25 अक्तूबर 2025 को प्रातः 11:30 बजे यह चेन्नई (तमिलनाडु) से लगभग 950 किमी पूर्व-दक्षिणपूर्व, विशाखापट्टनम (आंध्र प्रदेश) से 960 किमी दक्षिणपूर्व, काकीनाडा (आंध्र प्रदेश) से 970 किमी दक्षिणपूर्व और गोपालपुर (ओडिशा) से 1030 किमी दक्षिण-दक्षिणपूर्व में केंद्रित था।

यह प्रणाली लगभग पश्चिम-उत्तरपश्चिम दिशा में बढ़ते हुए 26 अक्तूबर तक एक गहरे अवदाब में और 27 अक्तूबर की सुबह तक दक्षिणपश्चिम व उससे सटे पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में एक चक्रवाती तूफान में बदलने की संभावना है। इसके बाद यह उत्तरपश्चिम और फिर उत्तर-उत्तरपश्चिम दिशा में बढ़ते हुए 28 अक्तूबर की सुबह तक एक भीषण चक्रवाती तूफान का रूप ले सकता है। इसके 28 अक्तूबर की शाम या रात को आंध्र प्रदेश तट (मछलीपट्टनम और कालिंगपट्टनम के बीच, काकीनाडा के आसपास) से 90–100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार (110 किमी प्रति घंटे की तेज़ झोंकों सहित) से टकराने की संभावना है।

तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, पुडुचेरी के मुख्य सचिवों और ओडिशा के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने समिति को बताया कि संभावित प्रभावित क्षेत्रों में जनसुरक्षा हेतु सभी तैयारियाँ की जा चुकी हैं। आवश्यक राहत शिविर, निकासी की व्यवस्था और NDRF व SDRF की टीमें तत्पर रखी गई हैं। जिला नियंत्रण कक्ष सक्रिय हैं और लगातार निगरानी कर रहे हैं।

मछुआरों को 26 अक्तूबर से 29 अक्तूबर तक दक्षिणपश्चिम व मध्य बंगाल की खाड़ी, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, यानम (पुडुचेरी) और ओडिशा तट के समीप समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है। जो मछुआरे समुद्र में हैं, उन्हें तुरंत तट पर लौटने के लिए कहा गया है।

बैठक में भाग लेने वाले केंद्रीय मंत्रालयों / विभागों ने बताया कि सभी मानक संचालन प्रक्रियाएँ (SOPs) लागू हैं, आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं और चक्रवात के प्रभाव को न्यूनतम करने के लिए सभी एहतियाती कदम उठाए गए हैं।

राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीमें तैयार हैं और 26 अक्तूबर से तैनात की जाएंगी। अतिरिक्त टीमें भी स्टैंडबाय पर रखी गई हैं। सेना, नौसेना, वायु सेना और भारतीय तटरक्षक बल की बचाव और राहत टीमें अपने जहाजों और विमानों सहित तैयार हैं। भारतीय तटरक्षक बल ने अब तक 900 से अधिक नौकाओं को सुरक्षित तट तक पहुँचाया है और शेष को भी सतर्क कर दिया गया है। गृह सचिव ने बताया कि गृह मंत्रालय, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और मौसम विभाग लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और सभी मंत्रालयों, विभागों, राज्य सरकारों और एजेंसियों के साथ समन्वय बनाए हुए हैं।

कैबिनेट सचिव ने तैयारियों की समीक्षा करते हुए जोर दिया कि लक्ष्य शून्य जनहानि का होना चाहिए और संपत्ति तथा अवसंरचना को न्यूनतम नुकसान पहुँचे। किसी प्रकार की क्षति होने पर आवश्यक सेवाओं को जल्द से जल्द बहाल किया जाए।

बैठक में तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और पुडुचेरी के मुख्य सचिव, ओडिशा के अतिरिक्त मुख्य सचिव, गृह सचिव, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, मत्स्य, विद्युत, दूरसंचार, बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग विभागों के सचिव, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सचिव, सदस्य और प्रमुख, चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल के महानिदेशक, भारतीय तटरक्षक बल के अतिरिक्त महानिदेशक, भारतीय मौसम विभाग और गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

विशाखापत्तनम में 1-GW Google डेटा सेंटर: आंध्र प्रदेश को ₹10,000 करोड़ राजस्व और हजारों रोजगार मिलने की उम्मीद

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केंद्रीय संचार और ग्रामीण विकास राज्य मंत्री, डॉ. पेम्मासानी चंद्रशेखर ने कहा कि विशाखापत्तनम में बनने वाले 1-GW हाइपरस्केल Google डेटा सेंटर से आंध्र प्रदेश के लिए लगभग ₹10,000 करोड़ का राजस्व उत्पन्न होने की उम्मीद है।

इस परियोजना को स्वराष्ट्र आंध्र प्रदेश की प्रगति और आत्मनिर्भरता की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस परियोजना में अगले पांच वर्षों (2026–2030) में लगभग $15 बिलियन (USD) का निवेश किया जाएगा। यह निवेश राज्य में 5,000–6,000 प्रत्यक्ष रोजगार और 20,000–30,000 कुल रोजगार उत्पन्न करेगा। साथ ही यह विशाखापत्तनम में आवश्यक मानव संसाधन, आधारभूत संरचना, विद्युत और कूलिंग सुविधाओं को लाएगा, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था पर महत्वपूर्ण गुणक प्रभाव (Multiplier Effect) पड़ेगा।

डॉ. चंद्रशेखर यह बात नई दिल्ली में आयोजित भारत एआई शक्ति (Bharat AI Shakti) कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत में कही, जहां Google ने विशाखापत्तनम, आंध्र प्रदेश में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) केंद्र की स्थापना की घोषणा की। इस परियोजना में भारत का पहला गीगावाट-स्तरीय डेटा सेंटर और Google का भारत में पहला AI हब शामिल होगा।

मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आंध्र प्रदेश के विकास के लिए प्रदान किए गए समर्थन की सराहना की और मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू तथा नारा लोकेश के निरंतर प्रयासों की प्रशंसा की, जिन्होंने Google को आंध्र प्रदेश लाने में योगदान दिया।

उन्होंने कहा कि यह परियोजना राज्य को डिजिटल हब के रूप में स्थापित करने और पूरे भारत में AI-संचालित परिवर्तन को तेज करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस अवसर पर कार्यक्रम में उपस्थित थे:

  • अश्विनी वैष्णव, केंद्रीय रेल, सूचना और प्रसारण, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री

  •  निर्मला सीतारमण, केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट मामले मंत्री

  • एन. चंद्रबाबू नायडू, मुख्यमंत्री, आंध्र प्रदेश

  • नारा लोकेश, आईटी मंत्री, आंध्र प्रदेश

  •  थॉमस क्यूरी, CEO, Google Cloud

28वां राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन 2025: विकसित भारत के लिए सिविल सेवा और डिजिटल रूपांतरण

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प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (DARPG) और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), आंध्र प्रदेश राज्य सरकार के सहयोग से, 28वां राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन (NCeG) 2025 आयोजित कर रहे हैं। इस वर्ष का थीम है: “विकसित भारत: सिविल सेवा और डिजिटल रूपांतरण”

उद्घाटन और प्रमुख अतिथि

इस दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन एन. चंद्रबाबू नायडू, मुख्यमंत्री, आंध्र प्रदेश और डॉ. जितेन्द्र सिंह, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, प्रधानमंत्री कार्यालय, कर्मचारी, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय, परमाणु ऊर्जा विभाग और अंतरिक्ष विभाग, भारत सरकार द्वारा किया जाएगा।

सम्मेलन में पवन कल्याण, उपमुख्यमंत्री, आंध्र प्रदेश और एन. लोकेश, आईटी एवं मानव संसाधन विकास मंत्री, आंध्र प्रदेश भी उपस्थित रहेंगे।

राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2025

सम्मेलन के दौरान 19 उत्कृष्ट पहलों को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2025 से सम्मानित किया जाएगा:

  • 10 स्वर्ण, 6 रजत, और 3 जूरी पुरस्कार।

  • पुरस्कार छह श्रेणियों में – केंद्रीय, राज्य, जिला प्राधिकरण, ग्राम पंचायत और शैक्षणिक/अनुसंधान संस्थान को प्रदान किए जाएंगे।

इसका उद्देश्य सरकारी अधिकारियों, उद्योग विशेषज्ञों और शिक्षाविदों को एक मंच पर लाकर सुरक्षित और सतत ई-सेवा प्रदान करने के नवाचारी और रूपांतरकारी तरीकों पर चर्चा करना है।

सम्मेलन संरचना और विषय

  • 6 मुख्य सत्र (Plenary Sessions) और 6 उप-सत्र (Breakout Sessions)।

  • लगभग 70 वक्ता विभिन्न विषयों पर अपने अनुभव साझा करेंगे, जैसे:

    • विशाखापत्तनम को आईटी हब के रूप में विकसित करना

    • विकसित भारत के लिए एआई: समावेशी और स्केलेबल समाधान

    • सिविल सेवा और डिजिटल रूपांतरण

    • ई-गवर्नेंस में साइबर सुरक्षा

    • सेवा वितरण में उत्कृष्टता और मानक निर्धारण

    • एग्री स्टैक: कृषि के लिए डिजिटल समाधान

    • स्वर्ण पुरस्कार विजेताओं द्वारा ई-गवर्नेंस पहलों में उत्कृष्टता

    • ग्राम पंचायत स्तर पर नवाचार

    • आंध्र प्रदेश सरकार की ई-गवर्नेंस पहल

    • डिजिटल सशक्तिकरण के लिए नवाचार

    • अंतर्राष्ट्रीय अंडरसी केबल और एआई डेटा सेंटर

सम्मेलन में 28 राज्य और 8 केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। एक प्रदर्शनी (Exhibition) भी आयोजित की जाएगी, जिसमें भारत की ई-गवर्नेंस में उपलब्धियों और पिछले वर्षों के पुरस्कार विजेताओं की फोटो प्रदर्शनी दिखाई जाएगी

सम्मेलन में संबोधन देंगे:

  • वी. श्रीनिवास, सचिव, प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग

  • एस. कृष्णन, सचिव, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय

  • के. विजयानंद, मुख्य सचिव, आंध्र प्रदेश सरकार

  • सरिता चौहान, संयुक्त सचिव, DARPG द्वारा विशाखापत्तनम घोषणा 2025 प्रस्तुत की जाएगी।


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