Media24Media.com: जल संरक्षण में मिसाल बने आंध्र प्रदेश के गांव: सामुदायिक प्रयासों से बदली तस्वीर

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जल संरक्षण में मिसाल बने आंध्र प्रदेश के गांव: सामुदायिक प्रयासों से बदली तस्वीर

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नई दिल्ली/आंध्र प्रदेश- आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले के मुरुगुम्मी, मरेल्ला और थंगेला जैसे गांव जल संरक्षण के क्षेत्र में मिसाल बनकर उभरे हैं। भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा चलाए जा रहे ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तहत इन गांवों में सामुदायिक भागीदारी से वर्षा जल संरक्षण के प्रभावी उपाय अपनाए गए, जिससे जल संकट की समस्या में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

पहले इन गांवों में अनियमित वर्षा, गिरते भूजल स्तर और बार-बार बोरवेल फेल होने जैसी समस्याओं के कारण पानी की भारी कमी थी, जिससे खेती और आजीविका पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता था। लेकिन ग्राम सभाओं, घर-घर जागरूकता अभियान, कला जत्था, कार्यशालाओं और फील्ड डेमो के माध्यम से लोगों को जागरूक किया गया। किसानों, महिलाओं, युवाओं और स्थानीय संस्थाओं ने मिलकर जल बजटिंग, फसल योजना और भूजल साझा करने जैसी पहल अपनाई, जिससे सामुदायिक स्वामित्व की भावना मजबूत हुई।

इन गांवों ने ‘रिज-टू-वैली’ (ऊंचाई से निचले क्षेत्रों तक) दृष्टिकोण अपनाते हुए वर्षा जल संग्रहण और संरक्षण के कई उपाय किए। इनमें परकोलेशन टैंक, खेत तालाब, स्टैगर्ड ट्रेंच, छतों पर वर्षा जल संचयन प्रणाली और सामुदायिक तालाबों का पुनर्जीवन शामिल है।

मुख्य उपलब्धियां:

  • मुरुगुम्मी: 71 जल संरचनाओं का निर्माण, लगभग 8.11 लाख घन मीटर जल भंडारण क्षमता, 264.5 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा।

  • मरेल्ला: 53 जल संरचनाएं, लगभग 10.04 लाख घन मीटर क्षमता, 220.5 हेक्टेयर क्षेत्र में कृषि सुदृढ़; साथ ही तालाबों के पुनर्निर्माण से 5.95 लाख घन मीटर अतिरिक्त भंडारण।

  • थंगेला: 71 संरचनाएं, लगभग 5.89 लाख घन मीटर क्षमता, 185.3 हेक्टेयर भूमि को लाभ; पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन से 3.98 लाख घन मीटर अतिरिक्त जल संग्रह।

प्रभाव:

  • करीब 5,900 लोगों को घरेलू और कृषि उपयोग के लिए बेहतर जल उपलब्धता

  • कृषि उत्पादकता में वृद्धि और किसानों की आय में सुधार

  • डेयरी गतिविधियों में बढ़ोतरी से अतिरिक्त आय के अवसर

  • मिट्टी की नमी में सुधार, जिससे स्थिर और टिकाऊ खेती संभव

  • रोजगार के बेहतर अवसरों के कारण पलायन में कमी

सम्मान:

मुरुगुम्मी गांव को 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कार 2024 में दूसरा सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत पुरस्कार मिला। मरेल्ला को शीर्ष 30 गांवों में स्थान मिला, जबकि थंगेला को राष्ट्रीय स्तर पर नामांकन प्राप्त हुआ।

निष्कर्ष:

इन गांवों का परिवर्तन ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान की सफलता का प्रतीक है। यह पहल दिखाती है कि सामुदायिक भागीदारी और सही रणनीति के माध्यम से जल संसाधनों का टिकाऊ प्रबंधन संभव है। यह मॉडल देश के अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणादायक और अपनाने योग्य है।

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