Media24Media.com: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, आंध्र प्रदेश के प्रथम दीक्षांत समारोह में किया संबोधन

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, आंध्र प्रदेश के प्रथम दीक्षांत समारोह में किया संबोधन

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जनजातीय विश्वविद्यालय शिक्षा के साथ-साथ आजीविका, कौशल विकास और सामाजिक न्याय के केंद्र बनें : राष्ट्रपति

विजयनगरम- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज आंध्र प्रदेश के विजयनगरम में केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, आंध्र प्रदेश के प्रथम दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय की विशेष जिम्मेदारी है कि वह जनजातीय समाज में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और नीति निर्माण की योग्यता विकसित करने का केंद्र बने। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय के उद्देश्य से स्थापित ऐसे संस्थानों का दायित्व केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें जनजातीय समुदायों के शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, आजीविका और वन अधिकारों के क्षेत्र में जमीनी स्तर पर भी कार्य करना चाहिए।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में यह विश्वविद्यालय जनजातीय और वंचित समुदायों के युवाओं के समग्र विकास के साथ-साथ पूरे क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

जनजातीय आजीविका को बढ़ावा देने के लिए नवाचार आवश्यक

राष्ट्रपति ने कहा कि सभी विश्वविद्यालयों, विशेषकर जनजातीय विश्वविद्यालयों को ऐसी नवाचारी व्यवस्थाएं विकसित करनी चाहिए, जो जनजातीय समुदायों की आजीविका को मजबूत करें। उन्होंने कहा कि लघु वनोपज, हस्तशिल्प, मोटे अनाज (मिलेट्स), औषधीय पौधों, इको-टूरिज्म और स्थानीय उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर विकसित किए जाने चाहिए।

दीक्षांत समारोह केवल उत्सव नहीं, संकल्प का भी अवसर

राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। यह केवल उपलब्धियों का उत्सव नहीं, बल्कि भविष्य के लिए नए संकल्प लेने का अवसर भी है।

उन्होंने विद्यार्थियों को तेजी से बदलते समय के अनुरूप कौशल विकास पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रहकर आसपास के सामाजिक और प्राकृतिक परिवेश से भी सीखना चाहिए, ताकि व्यावहारिक कौशल विकसित हो सकें।

उन्होंने विद्यार्थियों से समाज और राष्ट्र के बेहतर भविष्य के निर्माण में योगदान देने के साथ-साथ अपनी समुदाय, संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रहने का आह्वान किया।

विरासत और आधुनिक विज्ञान का समन्वय जरूरी

राष्ट्रपति ने कहा कि तेजी से विकसित हो रहे भारत में अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहते हुए आधुनिक विज्ञान का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना आवश्यक है।

उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य से विश्वविद्यालय ने उत्तर आंध्र प्रदेश के जनजातीय समुदायों को सशक्त बनाने के लिए 'विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी हब' की स्थापना की है।

उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय ने जनजातीय कल्याण, जनस्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा तथा ऊर्जा संरक्षण जैसे विषयों पर शैक्षणिक और जमीनी स्तर पर उल्लेखनीय कार्य किए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि ये प्रयास समानता पर आधारित विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में निभाएगा महत्वपूर्ण योगदान

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत का लक्ष्य वर्ष 2047 तक विकसित भारत का निर्माण करना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अपनी समावेशी, व्यवहारिक और पर्यावरण संरक्षण आधारित शिक्षा प्रणाली के माध्यम से इस लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

उन्होंने आशा व्यक्त की कि आधुनिक शिक्षा के सकारात्मक पहलुओं को जनजातीय समाज से जोड़कर स्थानीय युवाओं को देश के समावेशी और संतुलित विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा।

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