Media24Media.com: विकसित भारत 2047 के लिए आध्यात्मिकता और सामाजिक समरसता जरूरी: राष्ट्रपति मुर्मु

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विकसित भारत 2047 के लिए आध्यात्मिकता और सामाजिक समरसता जरूरी: राष्ट्रपति मुर्मु

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (18 जून 2026) मध्य प्रदेश के बैतूल में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा आयोजित ‘आध्यात्मिक जागृति द्वारा जनजातीय समाज का सशक्तिकरण’ कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।

सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि उपभोक्तावादी संस्कृति से प्रेरित आज की तेज़ रफ्तार दुनिया में आध्यात्मिक शुद्धता समाज के हर वर्ग के लिए अत्यंत आवश्यक हो गई है। इसी आधार पर समानतापूर्ण आचरण और प्राकृतिक संसाधनों के प्रति संवेदनशील जीवनशैली विकसित की जा सकती है, जो दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ हो। उन्होंने कहा कि तनाव और संघर्ष से ग्रस्त वर्तमान विश्व में इसकी आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। ऐसे समय में ‘आध्यात्मिक जागृति द्वारा जनजातीय समाज का सशक्तिकरण’ जैसे सम्मेलन और अधिक महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय समुदायों की जीवनशैली स्वाभाविक रूप से आध्यात्मिकता की मूल प्रेरणाओं के अनुरूप है। प्राकृतिक संसाधनों के साथ उनका गहरा जुड़ाव उनकी एक ऐसी शक्ति है, जो जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सार्वभौमिक कल्याण के प्रति समर्पित सोच और जीवनशैली को बढ़ावा देती है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि ब्रह्माकुमारी संस्था इसी दृष्टिकोण के साथ लंबे समय से देश के विभिन्न भागों में जनजातीय समुदायों के साथ मिलकर महत्वपूर्ण कार्य कर रही है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय जीवन-मूल्यों के अनुरूप कार्य करने वाले किसी भी संगठन को यह ध्यान रखना चाहिए कि समाज के किसी भी वर्ग का सशक्तिकरण केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं हो सकता। वास्तविक सशक्तिकरण तब होता है जब व्यक्ति आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और जागरूकता के साथ कार्य करे तथा अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति भी सजग रहे। आध्यात्मिक जागृति व्यक्ति को उसकी आंतरिक शक्तियों का बोध कराती है और उसे सकारात्मक सोच तथा जीवन के उच्च उद्देश्यों से जोड़ती है।

राष्ट्रपति ने कहा कि विकास और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन ही एक मजबूत और समृद्ध समाज की आधारशिला है। सार्थक विकास वही है जो हमारी जड़ों और मूल जीवन-मूल्यों से शक्ति प्राप्त करे तथा उन्हें और अधिक सुदृढ़ बनाए। उन्होंने कहा कि जब हम इस समग्र दृष्टिकोण के साथ कार्य करेंगे, तभी समाज में समरसता और समानता की सशक्त धारा प्रवाहित होगी तथा समावेशी विकास के नए मानदंड स्थापित किए जा सकेंगे।

राष्ट्रपति ने सभी नागरिकों से विकसित भारत 2047 के निर्माण के लिए और अधिक प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और मानव कल्याण को समावेशी विकास के आधार स्तंभ बनाकर ही विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।


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