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मानवीय संविधान की समझ से ही मानव-मानव के बीच मतभेद होंगे समाप्त : गेंदलाल कोकड़िया

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महासमुंद- मध्यस्थ दर्शन आधारित मानवीय संविधान सूत्र व्याख्या का अध्ययन मानव जीवन में मानवीय मूल्यों, चरित्र निर्माण और सामाजिक समरसता की स्थापना का प्रभावी माध्यम है। जब तक मानवीय चरित्र की सही व्याख्या और समझ विकसित नहीं होगी, तब तक मानव-मानव के बीच मतभेद, देशों के बीच तनाव, टकराव और युद्ध जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान संभव नहीं है। इसलिए विश्व के प्रत्येक व्यक्ति तक मानवीय संविधान सूत्र व्याख्या की समझ पहुंचाना समय की आवश्यकता है।

यह विचार मानवीय शिक्षा शोध केंद्र, तेंदुवाही (महासमुंद) के संचालक एवं चेतना विकास मूल्य शिक्षा से जुड़े कोकड़ी शासकीय विद्यालय के शिक्षक गेंदलाल कोकड़िया ने अभ्युदय संस्थान, अछोटी (दुर्ग) में आयोजित जीवन विद्या अध्ययन शिविर को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि मानवीय संविधान सूत्र व्याख्या के प्रणेता पूज्य ए. नागराज द्वारा प्रतिपादित मध्यस्थ दर्शन मानव जीवन के मूल्यों, व्यवहार और चरित्र निर्माण की वैज्ञानिक समझ प्रदान करता है। उन्होंने जीवन विद्या अध्ययन के लोकव्यापीकरण अभियान की अब तक की उपलब्धियों तथा आगामी कार्यक्रमों की जानकारी साझा की।

कोकड़िया ने बताया कि जीवन विद्या अध्ययन से प्रतिभागियों के व्यक्तिगत जीवन, पारिवारिक संबंधों और सामाजिक व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिले हैं। उन्होंने विद्यालयों में चेतना विकास मूल्य शिक्षा को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर देते हुए सभी प्रतिभागियों को कोकड़ी शासकीय विद्यालय का शैक्षणिक भ्रमण करने तथा अपने-अपने क्षेत्रों में मूल्य शिक्षा कार्यशालाओं का आयोजन करने का आह्वान किया। साथ ही सभी को आगामी जीवन विद्या अध्ययन अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में सहभागिता के लिए आमंत्रित किया।

शिविर का प्रबोधन कर रहे अंतरराष्ट्रीय मानव वैज्ञानिक डॉ. संकेत ठाकुर ने सामाजिक परिवर्तन के लिए स्वयं में परिवर्तन लाने और जीवन विद्या अध्ययन की निरंतरता बनाए रखने पर बल दिया। उन्होंने जीवन ज्ञान, अस्तित्व दर्शन तथा मानवीयता पूर्ण आचरण को समृद्ध समाज की आधारशिला बताया।

कार्यक्रम में अभ्युदय संस्थान, अछोटी की आयोजन समिति के सदस्य सरदार मंजीत सिंह एवं  डाली ने स्वावलंबन के 30 से अधिक व्यावहारिक प्रयोगों की जानकारी देते हुए उपयोगिता मूल्य और कला मूल्य आधारित जीवनशैली पर प्रकाश डाला।

अभिभावक विद्यालय, अछोटी के प्रभारी बलवंत भैयाजी ने श्रेष्ठ व्यक्तियों एवं संस्थाओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की संस्कृति को मानवीय जीवन का महत्वपूर्ण मूल्य बताया।

युवा प्रकोष्ठ प्रभारी चंद्रशेखर राठौड़ ने युवाओं को चेतना विकास मूल्य शिक्षा के महत्व से अवगत कराते हुए अखंड समाज, सार्वभौम व्यवस्था और परिवार मूलक ग्राम स्वराज्य की स्थापना में जीवन विद्या अध्ययन की भूमिका स्पष्ट की।

समाजसेवी एवं आकाशवाणी रायपुर से जुड़ी शुभ्रा ठाकुर ने जीवन विद्या के प्रचार-प्रसार, प्रकाशन और जनजागरण के प्रभावी तरीकों पर विचार रखते हुए मानवीय मूल्यों को परिवार और समाज में व्यवहार के रूप में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने मीडिया प्रतिनिधियों को अभ्युदय संस्थान, अछोटी के शैक्षणिक भ्रमण के लिए भी आमंत्रित किया।

उत्सव परिसर, अभ्युदय संस्थान के उत्पादन आयाम प्रभारी महावीर अग्रवाल ने स्वावलंबन एवं शुद्ध उत्पादन के 50 से अधिक व्यावहारिक मॉडल प्रस्तुत किए तथा संस्थान में एक वर्ष तक अध्ययन-अभ्यास करने वाले 17 से अधिक लक्ष्य फेलो के योगदान के प्रति आभार व्यक्त किया।

मूल्यांकन सत्र में मानवीय शिक्षा शोध केंद्र, तेंदुवाही के सदस्य एवं समाजसेवी संतोष कुमार साहू (रायतुम, पटेवा) ने समाज के सभी वर्गों से जीवन विद्या अध्ययन और चेतना विकास मूल्य शिक्षा कार्यशालाओं में सक्रिय सहभागिता की अपील की।

कार्यक्रम में धमतरी से हेमलाल, ताम्रध्वज साहू, रायपुर से डॉ. श्वेता, शिक्षक मुकेश साहू, कांकेर (चारामा) से डिगेश्वर साहू, बिहार से आदित्य मिश्रा, धमतरी से लक्ष्य फेलो लक्ष्मी साहू, गोढ़ी से पेनोरमा साहू, बालोद के सांकरी (उत्सवपारा) से गोपी निषाद सहित विभिन्न राज्यों से आए 100 से अधिक युवा, लक्ष्य फेलो, शिक्षक एवं समाजसेवी उपस्थित रहे।

यह संस्करण समाचार पत्र में प्रकाशित होने योग्य शैली में तैयार किया गया है, जिसमें भाषा अधिक प्रवाहपूर्ण, संतुलित और पेशेवर रखी गई है।

संत कबीर का संदेश आज भी समाज और राष्ट्र के लिए पथप्रदर्शक : कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत

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संत कबीर के आदर्शों पर चलकर समाज में समरसता और सेवा की भावना मजबूत होगी : मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय

सोनपैरी कबीर आश्रम में संत कबीर जयंती महोत्सव आयोजित

मुख्यमंत्री साय ने वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

3 महीने बढ़ाई जाएगी मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना : सरचार्ज माफी और आकर्षक प्रावधानों के साथ लंबित बिजली बिल का भुगतान कर सकेंगे उपभोक्ता

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत आज राजधानी रायपुर के सोनपैरी स्थित सद्गुरु कबीर आश्रम में कबीर जयंती के अवसर पर आयोजित संत कबीर महोत्सव में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने गुरु असंग देव का आशीर्वाद लेकर प्रदेश एवं देश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। राज्यपाल थावरचंद गहलोत, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह तथा केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने आश्रम परिसर में वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।

गुरु असंग देव ने कहा कि संत कबीर ने समाज से पाखंड, कुरीतियों और आडंबर को समाप्त करने के लिए अवतार लिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समाज में आपसी प्रेम तथा संवाद कम होता जा रहा है, जो चिंता का विषय है। उन्होंने सेवा, परमार्थ, गौसेवा, वृक्षारोपण और ग्राम विकास को जीवन का आधार बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि सेवा से ही सच्चा सुख और आत्मिक संतोष प्राप्त होता है। गुरु असंग देव ने कहा कि एक समय नक्सलवाद के कारण जिन क्षेत्रों में जाना कठिन था, वहां अब शांति स्थापित हो चुकी है और विकास की गंगा बह रही है। लाखों गरीबों के लिए आवास बन रहे हैं और प्रदेश विकास के नए युग में प्रवेश कर रहा है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने कहा कि संत कबीर ने सत्य, समरसता, मानव सेवा और सद्भाव का जो संदेश दिया, वह आज भी पूरे समाज और राष्ट्र के लिए पथप्रदर्शक है। उन्होंने जात-पात, ऊंच-नीच और आडंबर से ऊपर उठकर मानव मात्र को प्रेम, सत्य और विवेक के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि आज जब समाज सामाजिक विभाजन और नैतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब संत कबीर की वाणी पहले से अधिक प्रासंगिक है। राज्यपाल ने सोनपैरी कबीर आश्रम द्वारा शिक्षा, गौसेवा, पर्यावरण संरक्षण, जैविक खेती, सामाजिक समरसता और जनकल्याण के क्षेत्रों में किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आश्रम राष्ट्र निर्माण की चेतना को सशक्त बनाते हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ संत कबीर की तपोभूमि और उनके अनुयायियों की पावन धरती है। उन्होंने कहा कि उनका बचपन कबीरपंथी समाज के बीच बीता है और संत कबीर की वाणी का उनके जीवन पर गहरा प्रभाव रहा है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि संत कबीर ने अपना संपूर्ण जीवन समाज में फैली कुरीतियों, छुआछूत, जाति-पांति और आडंबर के विरुद्ध जनजागरण में समर्पित किया। उन्होंने निर्भीक होकर सत्य का साथ दिया और अपने सरल किंतु प्रभावशाली विचारों से समाज को नई दिशा दी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज भी उनकी शिक्षाएं समाज में प्रेम, भाईचारे और समरसता की प्रेरणा देती हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि उनकी सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी को पूरा करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 18 लाख आवासों की स्वीकृति मिली है तथा 10 लाख से अधिक आवास पूर्ण हो चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्रों में अब सुरक्षा बलों के साहस और केंद्र सरकार के सहयोग से शांति एवं विकास का नया दौर शुरू हुआ है। उन्होंने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए पीएम जनमन योजना, महिलाओं के लिए महतारी वंदन योजना, श्रीरामलला दर्शन योजना, मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना तथा प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना जैसी योजनाओं का लाभ बड़ी संख्या में लोगों को मिल रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 प्रारंभ की है। उन्होंने लोगों से इस सुविधा का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील करते हुए कहा कि तय समय-सीमा में शिकायतों का निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा तथा लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई भी की जाएगी।

मुख्यमंत्री साय ने घोषणा की कि मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना की अवधि तीन माह के लिए बढ़ाई जाएगी, जिससे अधिक से अधिक उपभोक्ता सरचार्ज माफी और आकर्षक प्रावधानों का लाभ लेकर अपने लंबित बिजली बिलों का भुगतान कर सकेंगे।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि संत कबीर की वाणी ने समाज को पाखंड, छुआछूत और सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध जागृत किया। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण केवल पर्यावरण संरक्षण का कार्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी का प्रतीक है। उन्होंने संत कबीर के मधुर व्यवहार, संयमित वाणी और समाज सुधार के संदेश को अपनाने का आह्वान किया।

केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि गुरु ही ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग बताते हैं। संत कबीर ने ढोंग और आडंबर से दूर रहकर सत्य और सेवा का मार्ग अपनाने का संदेश दिया। यदि उनके विचारों को जीवन में उतारा जाए तो समाज और राष्ट्र दोनों का कल्याण संभव है।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विधायक मोतीलाल साहू, विधायक इंद्र कुमार साहू, भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, गौसेवा आयोग के अध्यक्ष विशेषर पटेल, छत्तीसगढ़ राज्य भंडार गृह निगम के अध्यक्ष चंदूलाल साहू, अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत छाबड़ा,  डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी, अखिलेश सोनी सहित बड़ी संख्या में संत-महात्मा, जनप्रतिनिधि एवं कबीरपंथी अनुयायी उपस्थित थे।

विकसित भारत 2047 के लिए आध्यात्मिकता और सामाजिक समरसता जरूरी: राष्ट्रपति मुर्मु

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (18 जून 2026) मध्य प्रदेश के बैतूल में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा आयोजित ‘आध्यात्मिक जागृति द्वारा जनजातीय समाज का सशक्तिकरण’ कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।

सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि उपभोक्तावादी संस्कृति से प्रेरित आज की तेज़ रफ्तार दुनिया में आध्यात्मिक शुद्धता समाज के हर वर्ग के लिए अत्यंत आवश्यक हो गई है। इसी आधार पर समानतापूर्ण आचरण और प्राकृतिक संसाधनों के प्रति संवेदनशील जीवनशैली विकसित की जा सकती है, जो दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ हो। उन्होंने कहा कि तनाव और संघर्ष से ग्रस्त वर्तमान विश्व में इसकी आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। ऐसे समय में ‘आध्यात्मिक जागृति द्वारा जनजातीय समाज का सशक्तिकरण’ जैसे सम्मेलन और अधिक महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय समुदायों की जीवनशैली स्वाभाविक रूप से आध्यात्मिकता की मूल प्रेरणाओं के अनुरूप है। प्राकृतिक संसाधनों के साथ उनका गहरा जुड़ाव उनकी एक ऐसी शक्ति है, जो जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सार्वभौमिक कल्याण के प्रति समर्पित सोच और जीवनशैली को बढ़ावा देती है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि ब्रह्माकुमारी संस्था इसी दृष्टिकोण के साथ लंबे समय से देश के विभिन्न भागों में जनजातीय समुदायों के साथ मिलकर महत्वपूर्ण कार्य कर रही है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय जीवन-मूल्यों के अनुरूप कार्य करने वाले किसी भी संगठन को यह ध्यान रखना चाहिए कि समाज के किसी भी वर्ग का सशक्तिकरण केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं हो सकता। वास्तविक सशक्तिकरण तब होता है जब व्यक्ति आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और जागरूकता के साथ कार्य करे तथा अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति भी सजग रहे। आध्यात्मिक जागृति व्यक्ति को उसकी आंतरिक शक्तियों का बोध कराती है और उसे सकारात्मक सोच तथा जीवन के उच्च उद्देश्यों से जोड़ती है।

राष्ट्रपति ने कहा कि विकास और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन ही एक मजबूत और समृद्ध समाज की आधारशिला है। सार्थक विकास वही है जो हमारी जड़ों और मूल जीवन-मूल्यों से शक्ति प्राप्त करे तथा उन्हें और अधिक सुदृढ़ बनाए। उन्होंने कहा कि जब हम इस समग्र दृष्टिकोण के साथ कार्य करेंगे, तभी समाज में समरसता और समानता की सशक्त धारा प्रवाहित होगी तथा समावेशी विकास के नए मानदंड स्थापित किए जा सकेंगे।

राष्ट्रपति ने सभी नागरिकों से विकसित भारत 2047 के निर्माण के लिए और अधिक प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और मानव कल्याण को समावेशी विकास के आधार स्तंभ बनाकर ही विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।


संत गाडगे बाबा के आदर्शों पर चलकर समरस, स्वच्छ और विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण करें : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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बोदरी में संत गाडगे बाबा की 150वीं जयंती समारोह में हुए शामिल, 42 करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास

सामुदायिक भवन, खेल मैदान, स्कूल उन्नयन और तालाब सौंदर्यीकरण सहित कई महत्वपूर्ण घोषणाएं

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज बिलासपुर जिले के बोदरी में आयोजित संत शिरोमणि गाडगे बाबा की 150वीं जयंती, शपथ ग्रहण एवं सम्मान समारोह में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने संत गाडगे बाबा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया और उनके बताए सेवा, स्वच्छता, सामाजिक समरसता तथा मानव कल्याण के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने लगभग 42 करोड़ रुपये की लागत की सड़क परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। उन्होंने कहा कि मजबूत सड़क अधोसंरचना विकास की आधारशिला है और इन परियोजनाओं से क्षेत्र में आवागमन की सुविधा बढ़ने के साथ आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि संत गाडगे बाबा का संपूर्ण जीवन समाज सुधार, स्वच्छता और मानव सेवा के लिए समर्पित रहा। उन्होंने छुआछूत, अंधविश्वास और सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध संघर्ष कर समाज को नई दिशा दी। उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं और एक बेहतर समाज के निर्माण के लिए प्रेरणा प्रदान करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित स्वच्छ भारत मिशन, संत गाडगे बाबा के स्वच्छता और जनजागरण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य कर रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर क्षेत्र के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं। उन्होंने कन्नौजे रजक समाज के सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 60 लाख रुपये तथा संत गाडगे भवन निर्माण हेतु 25 डिसमिल भूमि उपलब्ध कराने की घोषणा की। साथ ही सन्नडय कुर्मी समाज के सामुदायिक भवन के लिए 60 लाख रुपये और वर्मा समाज के सामुदायिक भवन के लिए 20 लाख रुपये स्वीकृत करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने धमनी-चकरभाठा मिडिल स्कूल को हाई स्कूल में उन्नयन, बोदरी में एयरपोर्ट के समीप खेल मैदान उपलब्ध कराने तथा जोरा तालाब के सौंदर्यीकरण की भी घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने समाज के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों, विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों और समाज के पदाधिकारियों का सम्मान करते हुए कहा कि ऐसे सम्मान समाज में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा और सेवा की भावना को प्रोत्साहित करते हैं। उन्होंने कहा कि समाज को संगठित और जागरूक बनाने में सामाजिक संगठनों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि, समाज के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

संविधान के मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प: समरसता भोज में शामिल हुए मुख्यमंत्री साय

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संविधान हमारे लोकतंत्र की आत्मा है और समरसता उसकी सबसे बड़ी शक्ति - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के शंकरनगर स्थित दुर्गा मैदान में डॉ. भीमराव आंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर   आयोजित समरसता भोज कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान मुख्यमंत्री साय ने जनप्रतिनिधियों और आमजन के साथ बैठकर भोजन किया तथा स्वयं लोगों को भोजन परोसकर सामाजिक समरसता का संदेश दिया।

मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और इसके संविधान का निर्माण करने का गौरव बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर को प्राप्त है। उन्होंने कहा कि यह संविधान देश के 140 करोड़ नागरिकों को समानता, अधिकार और गरिमा के साथ जीवन जीने का आधार प्रदान करता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा साहेब ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने दृढ़ संकल्प और अदम्य इच्छाशक्ति के बल पर उच्चतम स्थान प्राप्त किया और समाज के वंचित, शोषित एवं कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने नारी शिक्षा और सम्मान के लिए भी महत्वपूर्ण कार्य किए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले और माता सावित्रीबाई फुले द्वारा प्रारंभ किए गए नारी शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के अभियान को बाबा साहेब ने आगे बढ़ाया और उसे नई दिशा दी।


उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बाबा साहेब के जन्म, शिक्षा, दीक्षा, कार्य और समाधि स्थलों को “पंच तीर्थ” के रूप में विकसित कर उन्हें सच्चा और स्थायी सम्मान दिया जा रहा है। 

इस अवसर पर मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि बाबा साहेब का जीवन संघर्ष, शिक्षा और समरसता का प्रेरक उदाहरण है। उनके विचार आज भी समाज को समानता और न्याय की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। समरसता भोज जैसे आयोजन सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक किरण सिंह देव ने कहा कि बाबा साहेब ने संविधान के माध्यम से समाज के कमजोर और पिछड़े वर्गों को आगे बढ़ाने की मजबूत व्यवस्था दी। आज मुख्यमंत्री साय और के नेतृत्व में अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने का कार्य निरंतर किया जा रहा है।

समरसता भोज कार्यक्रम में विधायक पुरंदर मिश्रा,  छत्तीसगढ़ खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव, छत्तीसगढ़ अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबड़ा, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मोना सेन सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित  थे।

आंबेडकर जयंती पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का संदेश: सामाजिक समरसता और शिक्षा पर दिया जोर

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गांधीनगर- द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को गुजरात के गांधीनगर स्थित लोक भवनमें आयोजित ‘सामाजिक समरसता महोत्सव’ में भाग लिया। यह कार्यक्रम डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकरकी जयंती के अवसर पर आयोजित किया गया, जिसमें राष्ट्रपति ने बाबासाहेब को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।

राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर ने देश के विकास और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में बहुआयामी योगदान दिए हैं। उन्होंने संविधान निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और देश को एक मजबूत लोकतांत्रिक ढांचा प्रदान किया। राष्ट्रपति ने कहा कि आंबेडकर केवल एक महान विधिवेत्ता ही नहीं, बल्कि एक कुशल अर्थशास्त्री और समाज सुधारक भी थे, जिन्होंने बैंकिंग, सिंचाई, बिजली, श्रम प्रबंधन और केंद्र-राज्य संबंधों जैसे क्षेत्रों में भी अहम योगदान दिया।

उन्होंने शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि बाबासाहेब ने हमेशा शिक्षा को सशक्त समाज की नींव माना। संविधान में शिक्षा को मौलिक अधिकार का दर्जा दिया गया है और वंचित वर्गों के हितों की रक्षा के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। राष्ट्रपति ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे समाज के कमजोर वर्गों को शिक्षा के प्रति जागरूक करें और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें।

सामाजिक समरसता पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि करुणा और समानता समाज की एकता के मूल आधार हैं। उन्होंने कहा कि जब लोग जाति, वर्ग, भाषा और क्षेत्र के भेदभाव से ऊपर उठकर एकता और भाईचारे की भावना अपनाते हैं, तभी सच्ची सामाजिक समरसता स्थापित होती है। उन्होंने कहा कि भारत के सभी नागरिक एक हैं और देश की प्रगति के लिए एकजुट रहना आवश्यक है।

राष्ट्रपति ने गुजरात में सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों—जैसे वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान, पशुपालन और कृषि विकास—की सराहना भी की।

अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति ने डॉ. आंबेडकर के उस संदेश को याद किया, जिसमें उन्होंने सामाजिक लोकतंत्र को जीवन का आधार बताते हुए स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व को उसके मूल तत्व बताया था।

निष्कर्ष

राष्ट्रपति के इस संबोधन ने डॉ. आंबेडकर के विचारों और उनके आदर्शों को पुनः जीवंत किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा, समानता और सामाजिक समरसता के मार्ग पर चलकर ही एक सशक्त, समावेशी और विकसित भारत का निर्माण संभव है।

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना : सामाजिक समरसता का विश्व रिकॉर्ड

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सान्निध्य में 6,412 जोड़ों का विवाह

कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान का हुआ शुभारंभ

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना छत्तीसगढ़ में सामाजिक समरसता, अंत्योदय और संवेदनशील शासन की भावना को साकार करने वाली ऐतिहासिक पहल है। उन्होंने कहा कि एक समय गरीब परिवारों के लिए बेटी का विवाह बड़ी चिंता का विषय होता था, जिसे इस योजना ने सम्मान और भरोसे में बदल दिया है। मुख्यमंत्री साय राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय सामूहिक विवाह कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में रायपुर सहित पूरे प्रदेश में कुल 6,412 जोड़े विभिन्न धार्मिक परंपराओं एवं रीति-रिवाजों के अनुसार वैवाहिक जीवन में बंधे। साइंस कॉलेज मैदान में 1,316 नवविवाहित जोड़ों को मुख्यमंत्री ने प्रत्यक्ष रूप से आशीर्वाद प्रदान किया, जबकि अन्य जिलों के जोड़े वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े। योजना के अंतर्गत प्रत्येक नवविवाहित दंपति को 35 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई। उल्लेखनीय है कि इस अभूतपूर्व आयोजन को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह आयोजन केवल विवाह समारोह नहीं, बल्कि सर्वधर्म समभाव और सामाजिक एकता का उत्सव है। इस वृहद आयोजन में हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध तथा विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय के जोड़े अपने-अपने रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह सूत्र में बंधे, जो छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक समरसता को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया। उन्होंने बताया कि पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सरगुजा एवं बस्तर संभाग के आठ जिलों में इस अभियान की शुरुआत की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वस्थ और सुपोषित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए शासन के साथ-साथ समाज की सहभागिता आवश्यक है तथा अभियान की सफलता के बाद इसे पूरे प्रदेश में विस्तारित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेशवासियों के आशीर्वाद से छत्तीसगढ़ तेजी से विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार ने दो वर्षों में  ही मोदी की गारंटी के अधिकांश वादों को पूरा किया है। महतारी वंदन योजना के अंतर्गत 70 लाख से अधिक महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये की सहायता दी जा रही है। उन्होंने तेंदूपत्ता संग्राहकों के हित में मानक बोरा मूल्य में वृद्धि, चरण पादुका योजना का पुनः प्रारंभ, श्रीरामलला दर्शन योजना तथा भूमिहीन मजदूरों को आर्थिक सहायता जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं का भी उल्लेख भी किया।

महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में की गई थी, जिसे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए सतत प्रयासरत है और कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ के लक्ष्य में जनसहभागिता आवश्यक है।

कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने इसे ऐतिहासिक दिन बताते हुए कहा कि एक ही दिन में हजारों जोड़ों का विवाह मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता और सर्वसमावेशी सोच का प्रमाण है।

कार्यक्रम में विधायक सुनील सोनी, पुरंदर मिश्रा, अनुज शर्मा, मोतीलाल साहू, संपत अग्रवाल, छत्तीसगढ़ बीज निगम के अध्यक्ष चंद्रहास चंद्राकर तथा बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा, महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव शम्मी आबिदी, संचालक डॉ. रेणुका श्रीवास्तव अनेक जनप्रतिधि और अधिकारी कर्मचारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कबीरपंथ का छत्तीसगढ़ के जनजीवन में व्यापक प्रभाव - मुख्यमंत्री साय

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छत्तीसगढ विकसित प्रदेश बनने तेजी से अग्रसर

संत समागम समारोह की राशि 50 लाख से बढाकर 75 लाख करने की घोषणा

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ तेजी से विकसित प्रदेश बनने की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को बहुत आगे ले जाना है और विकसित प्रदेश के रूप में खड़ा करना है। उन्होंने संत समागम समारोह दामाखेड़ा की राशि 50 लाख रूपये से बढाकर 75 लाख  रूपये करने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय कल रविवार को कबीर धर्मनगर दामाखेड़ा में माघ पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित सतगुरु कबीर संत समागम समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने पंथ श्री उदित मुनि नाम साहेब,पंथ श्री प्रकाश मुनि नाम साहब को चादर श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद लिया और प्रदेश की खुशहाली की कामना की।  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय माघ पूर्णिमा की शुभकामनायें देते हुए कहा कि कबीर धर्म नगर दामाखेड़ा का संत समागम समारोह हर साल भव्य होते जा रहा है जो लोगों में बढ़ते आस्था का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कबीरपंथ का छत्तीसगढ़ के जनजीवन में व्यापक प्रभाव है इसलिए यहां के लोग शांति प्रिय है। उन्होंने कहा कि वे बचपन से ही कबीर पंथ से परिचित है और उनके गांव बगिया में भी 8-10 कबीर पंथी परिवार है। उन्होंने दामाखेड़ा का नाम कबीर धर्मनगर करने के संबंध में बताया कि राजपत्र में प्रकाशन हेतु अंतिम प्रक्रिया जारी है मुख्यमंत्री साय ने कहा कि डबल इंजन की सरकार से लोगों को सीधा फायदा मिल रहा है। अब ​मुख्यमंत्री ने कहा कि छतीसगढ़ के विकास की बाधा की नक्सलवाद अब जल्द ही जड़ से समाप्त होने वाला है। नक्सलवाद का प्रदेश से 31 मार्च 2026 तक समूल नष्ट हो जाएगा। हमने जनता से किया वादा को तेजी से पूरा किया है। 

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि पंथ श्री उदित मुनि नाम साहब का चादर तिलक अद्भुत और अलौकिक रहा। पंथ श्री ने वृक्षारोपण, समाज सेवा, नशामुक्ति एवं युवा उत्थान के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने पंथ श्री का दर्शन कर प्रदेश की सुख समृद्धि का आशीर्वाद लिया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय कबीर आश्रम के विभिन्न विकास कार्यों को लेकर हमेशा चिंतित रहते है और शीघ्र पूरा करने के निर्देश देते हैं। कार्यक्रम को खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल, भाटापारा विधायक इंद्र साव ने भी सम्बोधित किया। 

समारोह में पंथश्री प्रकाश मुनि नाम साहब ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का कबीरपंथी समाज की ओर से आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष माघ मेला के प्रथम दिन बसंत पंचमी के अवसर पर कबीर पंथ के नये संवाहक 16 वें वंशाचार्य पंथी श्री उदित मुनि नाम साहेब का चादर तिलक संपन्न हुआ। उन्होंने बताया कि इस वर्ष देश के विभिन्न प्रांतों के साथ ही विदेशों से भी कबीरपंथी संत समागम मेला में आये हैं। समारोह को शासन प्रशासन का भरपूर सहयोग मिला है। 

इस अवसर पर पंथश्री उदित मुनि नाम साहब, गुरूगोसांई भानुप्रताप साहब, विधायक भावना बोहरा, ईश्वर साहु, पूर्व सांसद अभिषेक सिंह, पूर्व विधायक शिवरतन शर्मा सहित सदगुरू कबीर धर्मदास साहेब वंशावली प्रतिनिधि सभा के प्रतिनिधिगण, अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में कबीरपंथ के अनुयायी उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ के शांति प्रिय धरा में कबीरपंथ का है व्यापक प्रभाव -मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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डबल इंजन की सरकार से लोगों को मिल रहा है फायदा, विकसित प्रदेश बनने छत्तीसगढ़ तेजी से अग्रसर

संत समागम समारोह की राशि 50 लाख से बढाकर 75 लाख करने की घोषणा

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सतगुरु कबीर संत समागम समारोह दामाखेड़ा में हुए शामिल 

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय रविवार को कबीर धर्मनगर दामाखेड़ा में माघ पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित सतगुरु कबीर संत समागम समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने पंथ उदित मुनि नाम साहेब,पंथ प्रकाश मुनि नाम साहब को चादर श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद लिया और प्रदेश की खुशहाली की कामना की। उन्होंने इस दौरान संत समागम समारोह की राशि 50 लाख रूपये से बढाकर 75 लाख  रूपये करने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय माघ पूर्णिमा की शुभकामनायें देते हुए कहा कि कबीर धर्म नगर दामाखेड़ा का संत समागम समारोह हर साल भव्य होते जा रहा है जो लोगों में बढ़ते आस्था का प्रतीक है।

कबीरपंथ का छत्तीसगढ़ के जनजीवन में व्यापक प्रभाव है इसलिए यहां के लोग शांति प्रिय है। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वे बचपन से ही कबीर पंथ से परिचित है और उनके गांव बगिया में भी 8-10 कबीर पंथी परिवार है। उन्होंने दामाखेड़ा का नाम कबीर धर्मनगर करने के संबंध में बताया कि राजपत्र में प्रकाशन हेतु अंतिम प्रक्रिया जारी है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि डबल इंजन की सरकार से लोगों को सीधा फायदा मिल रहा है। अब  छत्तीसगढ़ तेजी से विकसित प्रदेश बनने की ओर अग्रसर है। ​मुख्यमंत्री ने कहा कि छतीसगढ़ के विकास की बाधा की नक्सलवाद अब जल्द ही जड़ से समाप्त होने वाला है।31 मार्च 2026 तक प्रदेश से समूल नष्ट होग़ा। हमने जनता से किया वादा को तेजी से पूरा किया है। डबल इंजन की सरकार का फायदा लोगों को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को बहुत आगे ले जाना है और विकसित प्रदेश के रूप में खड़ा करना है।

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि पंथ श्री उदित मुनि नाम साहब का चादर तिलक अद्भुत और अलौकिक रहा। पंथ श्री ने वृक्षारोपण, समाज सेवा, नशामुक्ति एवं युवा उत्थान के क्षेत्र में कार्य कर रहे है। आज के कार्यक्रम में पंथ श्री का दर्शन कर प्रदेश की सुख समृद्धि का आशीर्वाद लिया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय कबीर आश्रम के विभिन्न विकास कार्यों को लेकर हमेशा चिंतित रहते है और शीघ्र पूरा करने के निर्देश देते है। कार्यक्रम को खाद्य मंत्री दयाल दास बघेल, भाटापारा विधायक इंद्र साव ने भी सम्बोधित किया। 

समारोह में पंथश्री प्रकाश मुनि नाम साहब ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का कबीरपंथी समाज की ओर से आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष माघ मेला के प्रथम दिन बसंत पंचमी के अवसर पर कबीर पंथ के नये संवाहक 16 वें वंशाचार्य पंथीश्री उदित मुनि नाम साहेब का चादर तिलक संपन्न हुआ। उन्होंने बताया की इस वर्ष देश के विभिन्न प्रांतो के साथ ही विदेशो से भी कबीरपंथी संत समागम मेला में आये हैं। समारोह को शासन प्रशासन का भरपूर सहयोग मिला है। उन्होंने मेला संत समागम समारोह की राशि 50 लाख रूपये से 75 लाख रूपये करने पर मुख्यमंत्री साय के प्रति आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर पंथश्री उदित मुनि नाम साहब, गुरूगोसांई भानुप्रताप साहब, विधायक भावना बोहरा, ईश्वर साहु, पूर्व सांसद अभिषेक सिंह, पूर्व  विधायक शिवरतन शर्मा सहित  सदगुरू कबीर धर्मदास साहेब वंशावली प्रतिनिधि सभा के प्रतिनिधिगण, अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में कबीरपंथी उपस्थित थे।

संत रविदास जयंती पर बड़ा निर्णय: आदमपुर एयरपोर्ट अब ‘श्री गुरु रविदास महाराज जी एयरपोर्ट’ कहलाएगा

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि संत रविदास जयंती के पावन अवसर पर लिया गया यह निर्णय देश के लिए गौरव और सम्मान का विषय है। अब पंजाब के आदमपुर एयरपोर्ट को ‘श्री गुरु रविदास महाराज जी एयरपोर्ट’ के नाम से जाना जाएगा।

प्रधानमंत्री ने इसे असंख्य लोगों के लिए खुशी का दिन बताते हुए कहा कि यह महान संत श्री गुरु रविदास महाराज जी के शाश्वत आदर्शों को समर्पित एक उपयुक्त श्रद्धांजलि है। उन्होंने कहा कि समानता, करुणा और सेवा का संदेश आज भी समाज को प्रेरणा देता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच X पर साझा किए गए संदेश में कहा,

“यह हमारे लिए सौभाग्य और गौरव की बात है कि आज संत रविदास जयंती के पावन अवसर पर यह निर्णय लिया गया है कि आदमपुर एयरपोर्ट को अब ‘श्री गुरु रविदास महाराज जी एयरपोर्ट’ के नाम से जाना जाएगा। यह असंख्य लोगों के लिए आनंद का दिन है। यह श्री गुरु रविदास महाराज जी के शाश्वत आदर्शों को समर्पित एक विनम्र श्रद्धांजलि है। समानता, करुणा और सेवा का उनका संदेश हम सभी को गहराई से प्रेरित करता है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि गुरु रविदास महाराज की शिक्षाएँ सामाजिक समरसता, भाईचारे और मानवता के मूल्यों को मज़बूत करती हैं और आने वाली पीढ़ियों को भी सही मार्ग दिखाती रहेंगी।



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संत गुरु रविदास महाराज को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महान संत, समाज सुधारक और मानवता के अनन्य उपासक गुरु रविदास महाराज जी को उनकी जयंती के अवसर पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने संत रविदास के विचारों को सामाजिक न्याय, करुणा और समरसता का आधार बताया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि संत गुरु रविदास महाराज के विचारों में न्याय और करुणा की भावना सर्वोपरि थी, जो आज जनकल्याण से जुड़ी सरकारी योजनाओं की मूल आत्मा है। उन्होंने समाज में समानता, भाईचारे और सद्भावना का संदेश दिया, जो आज भी उतना ही प्रासंगिक है।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच X पर अपने संदेश में कहा,

“मानवता के अनन्य उपासक महान संत गुरु रविदास महाराज जी को उनकी जयंती पर कोटि-कोटि नमन। उनके विचारों में न्याय और करुणा का भाव सर्वोपरि था, जो जनकल्याण की हमारी योजनाओं के मूल में है। उन्होंने सामाजिक समरसता और सद्भावना के जिस दीप को प्रज्वलित किया, वह देशवासियों के पथ को सदैव आलोकित करता रहेगा।”

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि संत गुरु रविदास महाराज की शिक्षाएँ देश को सामाजिक समरसता, समानता और मानवीय मूल्यों के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती रहेंगी।


आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का केंद्र बनेगा सिरकट्टी धाम : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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जनसहभागिता से निर्मित भव्य श्रीरामजानकी मंदिर छत्तीसगढ़ की आस्था और एकजुटता का प्रतीक : मुख्यमंत्री साय

श्रीरामजानकी मंदिर के शिखर पर लहराई धर्मध्वजा: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश की समृद्धि की कामना की

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज गरियाबंद जिले के सिरकट्टी धाम आश्रम स्थित श्रीरामजानकी मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की तथा मंदिर के सर्वोच्च शिखर पर धर्मध्वजा की स्थापना की। उन्होंने आश्रम को सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बताते हुए आश्रम परिसर में समरसता भवन के निर्माण के लिए 50 लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्माण के बाद पूरे देश में जो आध्यात्मिक चेतना का वातावरण निर्मित हुआ है, उसी की अखंड धारा का विस्तार आज सिरकट्टी धाम में धर्मध्वजा स्थापना के रूप में दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि हमारा देश ऋषि-मुनियों, साधु-संतों और आध्यात्मिक परंपराओं की पवित्र भूमि है। हमें धर्म को केवल आस्था के रूप में नहीं, बल्कि कर्तव्य के रूप में स्वीकार करना चाहिए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ का सौभाग्य है कि प्रभु श्रीराम ने अपने वनवास काल का अधिकांश समय यहीं व्यतीत किया। दंडकारण्य के रूप में विख्यात अबूझमाड़ का विशाल जंगल कभी नक्सल समस्या से प्रभावित क्षेत्र था, जो आज तेजी से नक्सलवाद से मुक्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा रामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना के अंतर्गत अब तक 39 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम की निशुल्क तीर्थयात्रा कराई जा चुकी है। मुख्यमंत्री तीर्थयात्रा दर्शन योजना के अंतर्गत भी अब तक पांच हजार से अधिक श्रद्धालु लाभान्वित हुए हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश के पांच शक्तिपीठों के विकास का कार्य भी निरंतर प्रगति पर है। उन्होंने कहा कि भोरमदेव क्षेत्र के समग्र विकास के लिए स्वदेश दर्शन योजना के तहत 148 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिल चुकी है तथा रतनपुर के विकास के लिए भी प्रस्ताव प्रेषित किया गया है। उन्होंने कहा कि राजिम कल्प-कुंभ का आयोजन भी इस बार भव्य स्वरूप में किया जाएगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि श्रीरामजानकी मंदिर का भव्य स्वरूप जनसहभागिता का अनुपम उदाहरण है। लगभग 22 हजार परिवारों के सहयोग से लगभग 9 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह मंदिर बीते 10 वर्षों की तपस्या का परिणाम है। राजस्थान के शिल्पियों द्वारा पारंपरिक शैली में बिना सीमेंट और छड़ के उपयोग के निर्मित इस मंदिर की आयु लगभग एक हजार वर्ष आंकी गई है। उन्होंने मंदिर निर्माण में सहयोग करने वाले सभी दानदाताओं और श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसे छत्तीसगढ़ की आस्था और एकजुटता का प्रतीक बताया।

कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने धर्मध्वजा रोहण को ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल परंपरागत ध्वजारोहण नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ में धर्म, अध्यात्म और सामाजिक समरसता की स्थापना का प्रतीक है। 

केबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि हम सभी के लिए सिरकट्टी धाम में धर्मध्वजा की स्थापना देखना अलौकिक अनुभव है। कार्यक्रम में सिरकट्टी आश्रम के महामंडलेश्वर महंत संत गोवर्धन शरण व्यास ने स्वागत उद्बोधन में सिरकट्टी आश्रम की स्थापना और महत्व पर जानकारी दी। 

इस अवसर पर सांसद रूपकुमारी चौधरी, विधायक रोहित साहू, दीपेश साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष गौरीशंकर कश्यप, अनेक जनप्रतिनिधि, देश के विभिन्न स्थानों से आए संत-महात्मा और बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन उपस्थित थे।


बाबा गुरु घासीदास का संदेश देशदृदुनिया के लिए प्रासंगिक : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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166 करोड़ रूपए के कार्यो का लोकार्पण-भूमिपूजन

पीएम आवास के 950 हितग्राहियों को गृह प्रवेश के लिए घर की चाबी भेंट की

सिंचाई परियोजनाओं के विस्तार के लिए 40 करोड़ रुपये की घोषणा

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा अनावरण तथा अटल परिसर का लोकार्पण

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास का “मनखे-मनखे एक समान” का संदेश संपूर्ण मानव समाज, देश और दुनिया के लिए आज भी प्रासंगिक है, जो सामाजिक समरसता, समानता और भाईचारे का मार्ग दिखाता है। मुख्यमंत्री आज बेमेतरा जिले में आयोजित गुरु घासीदास लोक कला महोत्सव एवं राज्य स्तरीय ओपन पंथी नृत्य प्रतियोगिता को संबोधित कर रहे थे। 

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में नवागढ़ क्षेत्र के विकास के लिए 165 करोड़ 54 लाख रूपए की लागत वाले 44 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। इस मौके पर उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत नवनिर्मित लगभग 950 पूर्ण आवासों का गृह प्रवेश के लिए हितग्राहियों को घर की चाबी भेंट की। उन्होंने बेमेतरा जिले में सिंचाई परियोजनाओं के विस्तार के लिए 40 करोड़ रुपये, नवागढ़ की 10 ग्राम पंचायतों को सीसी रोड निर्माण के लिए 5-5 लाख रुपये की घोषणा की। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में बनाएं गए नवनिर्मित अटल परिसर का लोकार्पण तथा उनकी प्रतिमा का अनावरण किया। उन्होंने नवागढ़ के जैतखाम में विधिवत श्वेत ध्वज चढ़ाया और वहां 12 लाख रुपये की लागत से निर्मित होने वाले सतनाम मंदिर के निर्माण हेतु भूमिपूजन भी किया। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि संत शिरोमणि गुरु घासीदास ने समाज में व्याप्त जाति-पाति, ऊँच-नीच, छुआछूत और सामाजिक भेदभाव को समाप्त करने का कार्य किया। उन्होंने सत्य और अहिंसा का मार्ग दिखाते हुए मानवता को एक सूत्र में बाँधने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उनके संदेशों के अनुरूप जनता के हित में अनेक क्रांतिकारी और जनकल्याणकारी योजनाएँ संचालित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि किसानों के हित में धान खरीदी, महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए महतारी वंदन योजना तथा आवासहीन परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना प्रदेश के विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही हैं। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माता पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी का स्मरण करते हुए कहा कि उनका संपूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा, सुशासन, लोकतांत्रिक मूल्यों और जनकल्याण को समर्पित रहा है। उन्होंने कहा कि अटल जी केवल एक महान नेता ही नहीं, बल्कि विचार, संवेदना और समर्पण के प्रतीक थे।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि गिरौदपुरी में निर्मित दुनिया का सबसे ऊँचा जैतखाम आज वैश्विक आकर्षण का केंद्र बन चुका है, जहाँ देश-विदेश से पर्यटक बाबा के जीवन दर्शन के लिए आते हैं। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री दयालदास बघेल ने कहा कि गुरु घासीदास लोक कला महोत्सव सामाजिक एकता का प्रतीक है। इस अवसर पर गुरु घासीदास लोक कला महोत्सव एवं राज्य स्तरीय ओपन पंथी नृत्य प्रतियोगिता के विजेता प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। विभिन्न विभागों द्वारा जन कल्याणकारी योजनाओं से संबंधित लगाई गई प्रदर्शनी में उन्होंने लाभार्थी हितग्राहियों को सामग्री एवं राशि का वितरण किया। कार्यक्रम में विधायक दीपेश साहू, ईश्वर साहू, अनुज शर्मा, पुन्नूलाल मोहले सहित अनेक जन प्रतिनिधि, पंचायत प्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या ग्रामीणजन उपस्थित थे।


मध्य प्रदेश में अंतर-पिढ़ी संबंध उत्सव: सामाजिक सामंजस्य और सक्रिय वृद्धावस्था को सुदृढ़ करना

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भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण विभाग ने 23 दिसंबर 2025 को गवर्नमेंट एक्सीलेंस हायर सेकेंडरी स्कूल, नवगोंग, जिला छतरपुर, मध्य प्रदेश में “Celebration of Intergenerational Bonds” कार्यक्रम आयोजित किया। इसका उद्देश्य विभिन्न पीढ़ियों के बीच भावनात्मक, सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना और सक्रिय एवं सम्मानजनक वृद्धावस्था को बढ़ावा देना था।

कार्यक्रम में वीरेंद्र कुमार, केंद्रीय मंत्री, सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण, भारत सरकार, मुख्य अतिथि थे। वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, सामाजिक संगठन प्रतिनिधि, छात्र और बच्चों के दादा-दादी सहित परिवार के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

उद्देश्य और महत्व

यह कार्यक्रम पीढ़ियों के बीच स्नेह, संवाद, सहयोग और आपसी सम्मान को सुदृढ़ करने का प्रयास करता है। इसका उद्देश्य समाज को जोड़ना, मूल्यों और परंपराओं को आगे बढ़ाना, और सामूहिक सामाजिक जागरूकता को मजबूत करना है। यह पहल भारत सरकार की समावेशी और बुजुर्ग-अनुकूल समाज बनाने की प्रतिबद्धता के अनुरूप है।

गतिविधियाँ और मुख्य आकर्षण

कार्यक्रम में अंतर-पिढ़ी सामंजस्य बढ़ाने के लिए विभिन्न गतिविधियाँ आयोजित की गईं:

  • सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ: छात्रों ने नृत्य, संगीत और कला प्रस्तुतियों के माध्यम से बुजुर्गों के प्रति सम्मान और मूल्य परंपरा का संदेश दिया।

  • इंटरैक्टिव सेशन: वरिष्ठ नागरिकों ने अपने अनुभव और सुझाव साझा किए, जिससे युवाओं के साथ सार्थक संवाद हुआ।

  • सामूहिक शपथ: सभी उम्र के प्रतिभागियों ने सम्मान, प्रेम और देखभाल बनाए रखने की शपथ ली।

  • वॉकाथॉन: श्री वीरेंद्र कुमार के नेतृत्व में आयोजित, जिसमें बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने स्वास्थ्य, एकता और सक्रिय जीवनशैली का संदेश दिया।

मंत्री का संबोधन और प्रमुख पहल

वीरेंद्र कुमार ने कहा कि वरिष्ठ नागरिक अनुभव, परंपरा और मूल्यों के संरक्षक हैं और राष्ट्र की अमूल्य शक्ति हैं। उन्होंने सामुदायिक पहल और अंतर-पिढ़ी संवाद के माध्यम से सक्रिय, स्वस्थ और सम्मानजनक वृद्धावस्था के महत्व पर जोर दिया।

मुख्य पहलों में शामिल हैं:

  • राष्ट्रीय वयोश्री योजना (RVY): गतिशीलता, दृष्टि और श्रवण संबंधित सहायक उपकरण प्रदान करती है; अब तक 7.28 लाख वरिष्ठ नागरिक लाभान्वित।

  • एल्डरलाइन 14567: वरिष्ठ नागरिकों को मार्गदर्शन और आपातकालीन सहायता प्रदान करता है, अब तक 27 लाख+ कॉल्स प्राप्त।

  • अंतर-पिढ़ी जुड़ाव: सांस्कृतिक, सामुदायिक और स्कूल कार्यक्रमों के माध्यम से, जिसमें ग्रैंडपेरेंट्स डे भी शामिल है।

मंत्री ने वरिष्ठ नागरिकों के साथ व्यक्तिगत बातचीत की और उनके अनुभव एवं सुझाव सुने।

परिणाम

कार्यक्रम ने वरिष्ठ नागरिकों, बच्चों, युवाओं और समुदाय को सम्मान, सहभागिता और सहयोग के साझा मंच पर एकत्र किया। सांस्कृतिक अभिव्यक्ति, संवाद और शारीरिक गतिविधियों ने अंतर-पिढ़ी सामंजस्य का संदेश दिया और समान, समावेशी और सहानुभूतिपूर्ण समाज की आवश्यकता को रेखांकित किया।

विकसित भारत@2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप, कार्यक्रम ने वरिष्ठ नागरिकों को मार्गदर्शक और आदर्श के रूप में प्रस्तुत किया और युवाओं को उनके अनुभव से सीखने तथा राष्ट्रनिर्माण में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया। यह पहल वरिष्ठ नागरिक कल्याण और एक सशक्त, समावेशी भारत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

विश्व ध्यान दिवस समारोह में उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने ध्यान की वैश्विक प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज तेलंगाना के कान्हा शांति वनम में आयोजित विश्व ध्यान दिवस समारोह में भाग लिया और आंतरिक शांति, भावनात्मक कल्याण तथा सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने में ध्यान की कालातीत प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।

सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि ध्यान एक सार्वभौमिक अभ्यास है, जो सांस्कृतिक, भौगोलिक और धार्मिक सीमाओं से परे है। उन्होंने इसे मानसिक स्पष्टता, भावनात्मक स्थिरता और आंतरिक परिवर्तन का मार्ग बताया तथा कहा कि विश्व ध्यान दिवस आधुनिक जीवन में इसकी बढ़ती महत्ता को पहचानने का अवसर प्रदान करता है।

उपराष्ट्रपति ने 21 दिसंबर को विश्व ध्यान दिवस घोषित करने वाले संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव को सह-प्रायोजित करने में भारत की भूमिका का उल्लेख करते हुए इसे मानसिक कल्याण और आध्यात्मिक विकास को बढ़ावा देने की ध्यान की शक्ति की वैश्विक स्वीकृति बताया। उन्होंने ध्यान के वैश्विक प्रसार में दाजी के योगदान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि ध्यान, योग और आध्यात्मिक खोज की सदियों पुरानी परंपराओं के साथ भारत आज भी दुनिया को स्थायी ज्ञान प्रदान कर रहा है।

भारत की सभ्यतागत विरासत पर प्रकाश डालते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि भारत में ध्यान को लंबे समय से मन और आत्मा के प्राचीन विज्ञान के रूप में माना गया है, जिसे ऋषि-मुनियों ने पोषित किया। भगवद् गीता और तमिल आध्यात्मिक ग्रंथ तिरुमंतिरम की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ध्यान के माध्यम से मन पर नियंत्रण आंतरिक सामंजस्य, आत्म-साक्षात्कार और नैतिक जीवन की ओर ले जाता है।

उपराष्ट्रपति ने विकसित भारत@2047 की यात्रा में ध्यान की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय विकास में केवल आर्थिक प्रगति ही नहीं, बल्कि भावनात्मक कल्याण और आध्यात्मिक उत्थान भी शामिल होना चाहिए, और ध्यान शांतिपूर्ण, सशक्त तथा करुणामय समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

मिशन LiFE के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि ध्यान सजगता, उत्तरदायित्व और प्रकृति के साथ सामंजस्य जैसे मूल्यों को विकसित करता है, जो सतत जीवन के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने पर्यावरणीय रूप से जिम्मेदार प्रथाओं को अपनाने और समग्र कल्याण को बढ़ावा देने के लिए कान्हा शांति वनम की सराहना की।

नागरिकों से दैनिक जीवन में ध्यान को अपनाने का आह्वान करते हुए राधाकृष्णन ने व्यक्तियों, परिवारों और समुदायों से उदाहरण प्रस्तुत करने तथा भावी पीढ़ियों को मानसिक शांति, संतुलन और सामंजस्य को बढ़ावा देने वाली प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रेरित करने का आग्रह किया।

तेलंगाना के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा; तेलंगाना सरकार के मंत्री डी. श्रीधर बाबू; हार्टफुलनेस ध्यान के आध्यात्मिक मार्गदर्शक दाजी कमलेश डी. पटेल सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति तथा हजारों प्रतिभागी, जिन्होंने कान्हा शांति वनम में ध्यान सत्र में भाग लिया, इस समारोह में उपस्थित थे।

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने अल्पसंख्यक दिवस मनाया, समावेशन और संवाद पर दिया गया जोर

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राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (NCM) ने 18 दिसंबर 2025 को अल्पसंख्यक दिवस मनाया। इस अवसर पर देश के छह अल्पसंख्यक समुदायों—मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और ज़ोरोस्ट्रियन (पारसी)—के समुदाय नेताओं ने अपने विचार साझा किए।

मुख्य वक्ता डॉ. माइकल वी. विलियम्स (माउंट कार्मेल स्कूल) ने अल्पसंख्यक दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि किस प्रकार ईसाई समुदाय ने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में दीर्घकाल से राष्ट्र निर्माण में शांत लेकिन प्रभावशाली योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि इन संस्थानों ने संप्रदाय की सीमाओं से परे समाज के सभी वर्गों की सेवा की है।

जामिया हमदर्द से एमडी तौहीद आलम ने अल्पसंख्यक कल्याण को “सबका साथ, सबका विश्वास, सबका विकास” की व्यापक अवधारणा से जोड़ते हुए कहा कि आज की शासन व्यवस्था समावेशन पर आधारित है। खालसा कॉलेज के प्रो. हरबंस सिंह ने गुरबाणी के संदेशों के माध्यम से सह-अस्तित्व और सामूहिक समृद्धि को जीवन का अभिन्न अंग बताया।

आचार्य येशी फुंटसोक और डॉ. इंदु जैन ने बौद्ध और जैन समुदायों की चुनौतियों पर खुलकर चर्चा करते हुए राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग से संवेदनशील और त्वरित समाधान की अपेक्षा जताई। वरिष्ठ पारसी नेता मरज़बान नारिमन ज़ैवाला ने अल्पसंख्यक-केन्द्रित कार्यक्रमों और विभिन्न समुदायों को एक साझा नागरिक मंच पर लाने में NCM की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कार्यक्रम का समापन किया।

अल्पसंख्यक समुदाय के लिए खुला सत्र

कार्यक्रम में अल्पसंख्यक समुदायों की बड़ी संख्या में भागीदारी रही। खुले सत्र के दौरान अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र से लेकर विभिन्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन तक से जुड़े सवाल उठाए गए। यह संवाद सक्रिय सहभागिता और आपसी समझ के माध्यम से समस्याओं के समाधान के प्रति साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

समावेशी समाज की दिशा में पहल

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की सचिव अलका उपाध्याय ने अल्पसंख्यक समुदायों के उत्थान हेतु सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समुदायों ने देश की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विरासत को समृद्ध बनाने में अमूल्य योगदान दिया है और NCM एक समावेशी एवं न्यायसंगत समाज के निर्माण के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।

उन्होंने शिक्षा, कौशल विकास, वित्तीय सहायता और सशक्तिकरण से जुड़ी विभिन्न पहलों का उल्लेख किया तथा कहा कि सरकार की नीतियाँ इस दृष्टि से संचालित हैं कि कोई भी पीछे न छूटे और सभी समुदायों को समान अवसर मिलें। साथ ही, विभिन्न समुदायों के बीच निरंतर संवाद की आवश्यकता पर भी उन्होंने बल दिया।

उपाध्याय ने आगे कहा कि स्थापना के बाद से ही राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों के संरक्षण, कल्याण और सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि राज्य सरकारों, हितधारकों और अल्पसंख्यक समुदायों के साथ सतत संवाद के माध्यम से उनकी आवाज़ सुनी जाएगी, समस्याओं का समाधान किया जाएगा और उनकी आकांक्षाओं को पूरा किया जाएगा।

मुख्यमंत्री साय से साहू समाज के प्रतिनिधिमंडल ने की सौजन्य मुलाकात

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से विगत दिवस छत्तीसगढ़ विधानसभा भवन में साहू समाज के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री साय ने साहू समाज के नवनिर्वाचित पदाधिकारी को बधाई और शुभकामनाएं दी। 

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव, विधायक ईश्वर साहू, विधायक इंद्र कुमार साहू सहित साहू समाज के नवनिर्वाचित प्रांतीय अध्यक्ष डॉ नीरेंद्र साहू,उपाध्यक्ष सत्यप्रकाश साहू, गिरजा साहू, नारद साहू, नन्द लाल साहू चंद्रभूषण साहू सहित साहू समाज के नवनिर्वाचित राज्य स्तरीय तथा जिला स्तरीय पदाधिकारीगण उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री साय से अखिल भारतीय रामनामी महासभा के प्रतिनिधियों ने की सौजन्य भेंट

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मंत्रालय महानदी भवन स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय में अखिल भारतीय रामनामी महासभा के प्रतिनिधि मंडल ने सौजन्य भेंट की। उन्होंने सक्ती जिले के ग्राम नंदेली में 29 दिसंबर को आयोजित होने वाले रामनामी मेला एवं संत समागम में मुख्यमंत्री साय को आमंत्रित किया।मुख्यमंत्री साय ने आमंत्रण के लिए महासभा के पदाधिकारियों का आभार व्यक्त किया और उन्हें शुभकामनाएँ दीं। 

इस अवसर पर अखिल भारतीय रामनामी महासभा की अध्यक्ष सेत बाई रामनामी, महासचिव गुला राम रामनामी सहित रामनामी संप्रदाय से जुड़े अनेक सदस्य उपस्थित थे।

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