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इंदौर संभाग में जनजातीय कल्याण योजनाओं की जमीनी हकीकत परखी, MoTA सचिव ने अधिकारियों को दिए समयबद्ध क्रियान्वयन के निर्देश

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इंदौर- जनजातीय कार्य मंत्रालय (MoTA) की सचिव रंजना चोपड़ा ने अतिरिक्त सचिव मनीष ठाकुर के साथ मध्य प्रदेश के इंदौर संभाग का व्यापक क्षेत्रीय दौरा कर जनजातीय कल्याण योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने जनजातीय लाभार्थियों, विद्यार्थियों, महिला बुनकरों और स्थानीय उद्यमियों से सीधे संवाद कर योजनाओं के प्रभाव और चुनौतियों की जानकारी ली।

दौरे की शुरुआत एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS), मोरोद (PVTG), इंदौर से हुई। सचिव ने कक्षा 6वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों और शिक्षकों से बातचीत की तथा विद्यालय में संचालित डिजिटल स्मार्ट कक्षाओं का अवलोकन किया। विद्यार्थियों ने इंजीनियर, उद्यमी और विभिन्न क्षेत्रों में पेशेवर बनने की अपनी आकांक्षाएं साझा कीं। सचिव ने जनजातीय बच्चों, विशेषकर विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा उपलब्ध कराने के प्रयासों की सराहना की।

इसके बाद टीम ने महेश्वर, खरगोन स्थित बुनकर सुविधा केंद्र का दौरा किया। यहां राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से जुड़े सहायता समूह के माध्यम से जनजातीय महिलाएं प्रसिद्ध महेश्वरी साड़ियों का निर्माण कर रही हैं। केंद्र पर प्रतिदिन करीब 1,000 से 2,000 साड़ियों का उत्पादन किया जाता है। TRIFED, स्वयं सहायता समूहों और जिला पंचायतों के सहयोग से इन उत्पादों को बाजार तक पहुंचाया जा रहा है। सचिव ने महिला बुनकरों से बातचीत कर उनके कार्य, आय और बाजार से जुड़ी व्यवस्थाओं की जानकारी ली।

सचिव ने आदि सेवा केंद्र, केरियाखेड़ी का भी निरीक्षण किया। यह केंद्र जनजातीय समुदाय के लिए एकल-खिड़की सुविधा केंद्र के रूप में कार्य कर रहा है, जहां राशन कार्ड से लेकर विभिन्न सरकारी योजनाओं में पंजीयन और अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए सहायता उपलब्ध कराई जाती है। केंद्र पर आयोजित जन सुनवाई और शिकायत निवारण की व्यवस्था की भी जानकारी ली गई।

दौरे के दौरान खरगोन जिले में एक जनजातीय होमस्टे का भी निरीक्षण किया गया। इसे स्थानीय जनजातीय परिवार द्वारा संचालित किया जा रहा है। सचिव ने ग्रामीण पर्यटन के माध्यम से जनजातीय परिवारों के लिए पैदा हो रहे रोजगार और आय के अवसरों को समझा। होमस्टे संचालकों को प्रशिक्षण, हैंडहोल्डिंग और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए निरंतर सहयोग दिए जाने की जानकारी भी साझा की गई।

इसके बाद सचिव ने इंदौर स्थित सिकल सेल रोग के Center of Competence का दौरा किया और जनजातीय आबादी में सिकल सेल रोग के उन्मूलन के लिए चल रही स्क्रीनिंग, काउंसलिंग और उपचार सुविधाओं की समीक्षा की।

दौरे के अंत में इंदौर संभागायुक्त कार्यालय में योजनाओं की प्रगति समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता रंजना चोपड़ा ने की। इसमें संबंधित विभागों के अधिकारी, राज्य जनजातीय कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा संभाग के अन्य जिलों के कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।

समीक्षा के दौरान सचिव ने कलेक्टरों को MoTA की सभी योजनाओं का जमीनी स्तर पर शीघ्र संतृप्तिकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों के बीच समयबद्ध समन्वय के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाए कि सरकार की योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र जनजातीय परिवार और बस्ती तक पहुंचे।

पूरे दौरे ने जनजातीय कल्याण योजनाओं की अंतिम छोर तक पहुंच, संस्थागत ढांचे को मजबूत करने तथा शिक्षा, कौशल, उद्यमिता और ग्रामीण पर्यटन के माध्यम से जनजातीय समुदायों के लिए टिकाऊ आजीविका के अवसर बढ़ाने के प्रति मंत्रालय की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में वन अधिकार अधिनियम (FRA) एवं पेसा कानून (PESA) के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु गठित टास्क फोर्स की पहली बैठक संपन्न

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पेसा और वन अधिकार कानून का प्रभावी क्रियान्वयन राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

राज्य स्तरीय कार्ययोजना समिति करेगी विभिन्न विभागों के नियमों का समन्वय, जिला स्तरीय पेसा निगरानी समितियों को किया जाएगा सक्रिय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज महानदी मंत्रालय भवन में वन अधिकार अधिनियम (Forest Rights Act-FRA) एवं पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम (PESA) के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु गठित टास्क फोर्स की शीर्ष समिति की प्रथम बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश में पेसा कानून और वन अधिकार अधिनियम के बेहतर समन्वय, जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन तथा अनुसूचित क्षेत्रों के समग्र एवं सतत विकास के लिए आवश्यक रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि पेसा कानून का क्रियान्वयन ग्राम स्वशासन को सशक्त बनाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बने। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की लगभग एक-तिहाई आबादी आदिवासी समाज से जुड़ी है। ऐसे में उनकी परंपराओं, अधिकारों और विकास को ध्यान में रखते हुए पेसा कानून का प्रभावी और आदर्श मॉडल विकसित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पेसा कानून अनुसूचित क्षेत्रों में निवास करने वाले नागरिकों के हितों की रक्षा करता है। इससे स्थानीय संसाधनों के बेहतर प्रबंधन, ग्राम सभाओं की भूमिका को मजबूती, रोजगार के अवसरों के विस्तार तथा संतुलित एवं सतत विकास को गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य ऐसा मॉडल तैयार करना है, जिससे विकास और जनभागीदारी साथ-साथ आगे बढ़ें।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वन अधिकार अधिनियम (FRA) और पेसा कानून (PESA), दोनों कानूनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर ही अनुसूचित क्षेत्रों में प्रभावी परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि दोनों कानूनों के प्रावधानों को एकीकृत दृष्टिकोण से लागू करते हुए योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाया जाए।

बैठक में मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पेसा कानून का उद्देश्य  ग्राम स्वशासन को मजबूत करना, स्थानीय संसाधनों पर समुदाय की सहभागिता बढ़ाना तथा समावेशी विकास सुनिश्चित करना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनजागरूकता अभियान चलाकर लोगों तक सही जानकारी पहुँचाई जाए तथा किसी भी प्रकार के भ्रम का तथ्यात्मक निराकरण किया जाए।

बैठक में छत्तीसगढ़ पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) नियम, 2022 के तहत पेसा प्रावधानों के क्रियान्वयन की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गई। साथ ही वन अधिकार अधिनियम, 2006 के अंतर्गत प्राप्त, निराकृत एवं लंबित व्यक्तिगत तथा सामुदायिक दावों की स्थिति, सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (Community Forest Resource Rights-CFRR) की मान्यता, संरक्षण एवं प्रबंधन की प्रगति तथा वन ग्रामों को राजस्व ग्रामों में परिवर्तित किए जाने की प्रक्रिया की भी विस्तृत समीक्षा की गई।

राज्य स्तरीय कार्ययोजना समिति करेगी समन्वय का कार्य

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पेसा कानून के अंतर्गत विभिन्न विभागों द्वारा एक ही विषय पर बनाए गए अलग-अलग नियमों एवं प्रक्रियाओं के समन्वय के लिए राज्य स्तरीय कार्ययोजना समिति का गठन किया जाएगा, जो विभिन्न विभागों के नियमों का समन्वय एवं अभिसरण सुनिश्चित करेगी। इस समिति में संबंधित विभागों के मंत्री एवं सचिव सदस्य होंगे और यह समिति समयबद्ध कार्ययोजना तैयार कर उसके प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी करेगी।

उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि वर्तमान में जिला स्तरीय पेसा निगरानी समितियों को सक्रिय किया जाए, ताकि जिला स्तर पर पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन, ग्राम सभाओं के सशक्तीकरण तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित किया जा सके।

बैठक में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम, विधायक नीलकंठ नेताम तथा विभिन्न सामाजिक संस्थाओं से जुड़े विषय विशेषज्ञ उपस्थित थे।

बैठक में मुख्य सचिव विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह,  अपर मुख्य सचिव वन एवं जलवायु परिवर्तन मनोज पिंगुआ, प्रमुख सचिव आदिम जाति विकास विभाग सोनमणि बोरा, सचिव राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग शम्मी आबदी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख (PCCF) अरुण पाण्डेय, संचालक पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग प्रियंका ऋचा महोबिया सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

नारायणपुर के आदिवासी अंचल प्रतिभावान विद्यार्थियों का नई दिल्ली स्थित संसद भवन का शैक्षणिक भ्रमण

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राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता में EMRS छेरीबेड़ा के बच्चों ने बिखेरी चमक, छत्तीसगढ़ की टीम उपविजेता 

रायपुर- राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता (National Youth Parliament Competition) संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा स्कूली और कॉलेज छात्रों के लिए आयोजित एक प्रमुख कार्यक्रम है। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं में लोकतांत्रिक मूल्यों, संसदीय प्रक्रियाओं की समझ और नेतृत्व गुणों का विकास करना है ताकि वे जिम्मेदार नागरिक और भविष्य के जन-प्रतिनिधि बन सकें।  जब हौसले बुलंद हों और मार्गदर्शन सही मिले, तो छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के नारायणपुर के सुदूर वनांचल की प्रतिभाएँ भी देश की राजधानी दिल्ली तक अपनी धमक दर्ज करा सकती हैं।

छत्तीसगढ़ की टीम उपविजेता बनकर उभरी

छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल के नारायणपुर जिले में स्थित एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS) छेरीबेड़ा के विद्यार्थियों ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। राजस्थान के उदयपुर (खेरवाड़ा) में आयोजित आंचलिक (जोनल) स्तरीय राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता में इस विद्यालय की 53 सदस्यीय टीम ने न केवल छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व किया, बल्कि अपने उत्कृष्ट और ओजस्वी प्रदर्शन से पूरे प्रदेश का नाम रोशन कर दिया है। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की टीमों के बीच कड़ा मुकाबला था, जिसमें छत्तीसगढ़ की टीम उपविजेता बनकर उभरी।

संसद की कार्यवाही देखने नई दिल्ली जाएंगे 8 होनहार विद्यार्थी

इस प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाने वाले 8 प्रतिभावान विद्यार्थियों का चयन राष्ट्रीय स्तर के लिए हुआ है। इन बच्चों को अब देश के लोकतंत्र के मंदिर—नई दिल्ली स्थित संसद भवन का शैक्षणिक भ्रमण करने और वहाँ लाइव कार्यवाही देखने का ऐतिहासिक अवसर मिलेगा। ज्ञात हो कि स्पीकर की भूमिका में हर्षा को प्रथम स्थान,द्वितीय स्थान में मनसाय और अनुराधा तथा तृतीय स्थान अंजीला, निकिता, वेदिका, जयबति और शामी को मिला। इन बच्चों ने जिस आत्मविश्वास के साथ लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और संसदीय बहसों को मंच पर जीवंत किया, उसने निर्णायकों का दिल जीत लिया।



सफलता के पीछे का 'मार्गदर्शन और समर्पण'

इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे विद्यालय के प्राचार्य का प्रेरणादायी नेतृत्व और विज़न रहा है। वहीं, बच्चों को संसद की बारीकियां सिखाने और उन्हें इस मुकाम तक पहुँचाने में कार्यक्रम प्रभारी व सामाजिक विज्ञान के शिक्षक के कड़े प्रशिक्षण और समर्पण की मुख्य भूमिका रही। प्राचार्य ने इस गौरवमयी उपलब्धि पर NESTS हेड क्वार्टर (नई दिल्ली), EMRS स्टेट सोसायटी CTD रायपुर, नारायणपुर कलेक्टर  और आदिम जाति कल्याण विभाग के सहायक आयुक्त  सहित सभी उच्चाधिकारियों का आभार व्यक्त किया है, जिनके निरंतर सहयोग से बच्चों को आगे बढ़ने का हौसला मिला।

बस्तर संभाग के नारायणपुर जैसे वनांचल क्षेत्र के बच्चों की इस बड़ी छलांग से पूरे प्रदेश में हर्ष का माहौल है। विद्यालय परिवार, अभिभावकों और क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों ने चयनित छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का संबोधन: शिक्षा, जनजातीय विकास और विकसित भारत पर दिया विशेष जोर

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (21 जून 2026) मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह में भाग लिया।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा किसी भी व्यक्ति या समुदाय के विकास का सबसे प्रभावी माध्यम है। इसलिए जनजातीय समुदाय की शैक्षिक उन्नति के लिए प्रयास करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। हमें सामूहिक रूप से यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जनजातीय युवाओं को आधुनिक विकास में योगदान देने का अवसर मिले, साथ ही वे अपनी जनजातीय पहचान और विशिष्टता को उसके वास्तविक स्वरूप में सुरक्षित रख सकें। जनजातीय समुदाय के पारंपरिक कौशल और ज्ञान का विभिन्न माध्यमों से प्रसार भी किया जाना चाहिए। जनजातीय ज्ञान एवं शिल्प परंपराओं का व्यापक अध्ययन देश के सभी नागरिकों के लिए लाभकारी होगा। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जैसे शैक्षणिक संस्थानों को इस दिशा में विशेष प्रयास करने चाहिए।

राष्ट्रपति ने कहा कि विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान करने के अलावा उच्च शिक्षण संस्थान नवाचार और अनुसंधान के प्रमुख केंद्र भी होते हैं। छात्रों में रचनात्मक सोच, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और उद्यमशीलता की भावना विकसित करना इन संस्थानों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। साथ ही, छात्रों में भारतीय संस्कृति, परंपराओं और भाषाओं के प्रति गौरव की भावना विकसित करना भी आवश्यक है। आधुनिकता और परंपरा के संतुलित समन्वय से ही देश का समग्र विकास संभव होगा।

राष्ट्रपति ने कहा कि उन अध्ययनों और अनुसंधानों पर विशेष बल दिया जाना चाहिए जो राष्ट्र और समाज के लिए उपयोगी हों। पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, वंचित वर्गों का विकास, स्वच्छता और सामाजिक समरसता जैसे विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने से समाज को लाभ होता है। इन विषयों पर अध्ययन और अनुसंधान देश के विकास के लिए योजनाएँ बनाने में भी सहायक होते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि आज दुनिया तेजी से बदल रही है। हमारी भाषा और जीवनशैली में भी तेज़ी से परिवर्तन हो रहा है। लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि कुछ शाश्वत मूल्य सदैव हमें शक्ति प्रदान करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति के मूल्यों और आदर्शों को अपने जीवन का आधार बनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सत्य, अहिंसा, करुणा, सेवा और ईमानदारी जैसे मूल्य हर युग में हमारी चेतना के मूल तत्व रहे हैं। इन मूल्यों को अपनाकर वे कठिन परिस्थितियों का भी दृढ़ता से सामना कर सकते हैं, आदर्श नागरिक बन सकते हैं और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों से कहा कि वे केवल अपने परिवारों या विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि नहीं हैं, बल्कि राष्ट्र की आकांक्षाओं और उसके भविष्य के निर्माता हैं। उनके ज्ञान, ऊर्जा और संकल्प से ही विकसित भारत का सपना साकार होगा। उन्होंने उनसे आग्रह किया कि वे अपनी शिक्षा और प्रतिभा का उपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए नहीं, बल्कि समाज के व्यापक हित के लिए भी करें। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने आसपास के वंचित और ग्रामीण समुदायों की चुनौतियों को समझने, उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान विकसित करने, उन्हें सशक्त बनाने और विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में योगदान देने की सलाह दी।

राष्ट्रपति ने कहा कि देश डिजिटल प्रौद्योगिकी, स्टार्टअप, हरित ऊर्जा, अंतरिक्ष अनुसंधान और आधुनिक अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में नई ऊँचाइयाँ प्राप्त कर रहा है। उन्होंने युवाओं को इन अवसरों का लाभ उठाकर वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बनाने की सलाह दी। साथ ही उन्होंने पर्यावरण के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जल, वन और भूमि संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग, जैव विविधता की रक्षा तथा सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता उनके जीवन की यात्रा का अभिन्न हिस्सा होना चाहिए।


विकसित भारत 2047 के लिए आध्यात्मिकता और सामाजिक समरसता जरूरी: राष्ट्रपति मुर्मु

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (18 जून 2026) मध्य प्रदेश के बैतूल में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा आयोजित ‘आध्यात्मिक जागृति द्वारा जनजातीय समाज का सशक्तिकरण’ कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।

सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि उपभोक्तावादी संस्कृति से प्रेरित आज की तेज़ रफ्तार दुनिया में आध्यात्मिक शुद्धता समाज के हर वर्ग के लिए अत्यंत आवश्यक हो गई है। इसी आधार पर समानतापूर्ण आचरण और प्राकृतिक संसाधनों के प्रति संवेदनशील जीवनशैली विकसित की जा सकती है, जो दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ हो। उन्होंने कहा कि तनाव और संघर्ष से ग्रस्त वर्तमान विश्व में इसकी आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। ऐसे समय में ‘आध्यात्मिक जागृति द्वारा जनजातीय समाज का सशक्तिकरण’ जैसे सम्मेलन और अधिक महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय समुदायों की जीवनशैली स्वाभाविक रूप से आध्यात्मिकता की मूल प्रेरणाओं के अनुरूप है। प्राकृतिक संसाधनों के साथ उनका गहरा जुड़ाव उनकी एक ऐसी शक्ति है, जो जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सार्वभौमिक कल्याण के प्रति समर्पित सोच और जीवनशैली को बढ़ावा देती है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि ब्रह्माकुमारी संस्था इसी दृष्टिकोण के साथ लंबे समय से देश के विभिन्न भागों में जनजातीय समुदायों के साथ मिलकर महत्वपूर्ण कार्य कर रही है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय जीवन-मूल्यों के अनुरूप कार्य करने वाले किसी भी संगठन को यह ध्यान रखना चाहिए कि समाज के किसी भी वर्ग का सशक्तिकरण केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं हो सकता। वास्तविक सशक्तिकरण तब होता है जब व्यक्ति आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और जागरूकता के साथ कार्य करे तथा अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति भी सजग रहे। आध्यात्मिक जागृति व्यक्ति को उसकी आंतरिक शक्तियों का बोध कराती है और उसे सकारात्मक सोच तथा जीवन के उच्च उद्देश्यों से जोड़ती है।

राष्ट्रपति ने कहा कि विकास और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन ही एक मजबूत और समृद्ध समाज की आधारशिला है। सार्थक विकास वही है जो हमारी जड़ों और मूल जीवन-मूल्यों से शक्ति प्राप्त करे तथा उन्हें और अधिक सुदृढ़ बनाए। उन्होंने कहा कि जब हम इस समग्र दृष्टिकोण के साथ कार्य करेंगे, तभी समाज में समरसता और समानता की सशक्त धारा प्रवाहित होगी तथा समावेशी विकास के नए मानदंड स्थापित किए जा सकेंगे।

राष्ट्रपति ने सभी नागरिकों से विकसित भारत 2047 के निर्माण के लिए और अधिक प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और मानव कल्याण को समावेशी विकास के आधार स्तंभ बनाकर ही विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।


मोदी सरकार के 12 वर्ष आदिवासी उत्थान और नक्सलमुक्ति का स्वर्णकाल- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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भारत मंडपम में आयोजित बैठक में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर भारत मंडपम में आयोजित बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को बधाई देते हुए कहा कि पिछले 12 वर्ष देश के जनजातीय समाज के सम्मान, सशक्तिकरण और विकास के लिए स्वर्णकाल साबित हुए हैं।

मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और प्रभावी रणनीति के कारण छत्तीसगढ़ को दशकों पुरानी नक्सल समस्या से निर्णायक मुक्ति मिली। उन्होंने कहा कि नक्सल हिंसा से सबसे अधिक प्रभावित जनजातीय समुदाय अब शांति, सुरक्षा और विकास के नए दौर में प्रवेश कर रहा है। बस्तर में ‘नियद नेल्ला नार’ और ‘बस्तर मुन्ने’ जैसे अभियानों के माध्यम से योजनाओं का सैचुरेशन मोड में क्रियान्वयन किया जा रहा है तथा सुरक्षा शिविरों को ‘सेवा डेरा’ के रूप में विकसित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने जनजातीय समाज को नई पहचान और सम्मान दिया है। भगवान बिरसा मुंडा के जन्मदिवस को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत हो या धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान, इन पहलों ने आदिवासी क्षेत्रों के विकास को नई गति दी है। उन्होंने कहा कि देश को पहली जनजातीय महिला राष्ट्रपति के रूप में द्रौपदी मुर्मु का नेतृत्व करोड़ों आदिवासियों के सम्मान और स्वाभिमान का प्रतीक है।

साय ने कहा कि पीएम जनमन योजना के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजातियों के दूरस्थ इलाकों तक पहली बार बिजली, सड़क, पेयजल और आवास जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंच रही हैं। वहीं बस्तर में सड़क, रेल और सार्वजनिक परिवहन के विस्तार से कनेक्टिविटी की वर्षों पुरानी चुनौतियां दूर हो रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है। नवा रायपुर में ट्राइबल म्यूजियम तथा शहीद वीर नारायण सिंह जनजातीय संग्रहालय का निर्माण कराया गया है। बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजनों ने दुनिया के सामने बदलते, मुस्कुराते और हिंसा-मुक्त बस्तर की नई तस्वीर प्रस्तुत की है।

उन्होंने कहा कि पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन, लघु वनोपज की रिकॉर्ड खरीदी, किसानों को धान, दलहन और तिलहन का बेहतर मूल्य तथा कृषक उन्नति योजना जैसी पहलें ग्रामीण और जनजातीय अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही हैं। वहीं प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना और मुख्यमंत्री खाद्यान्न योजना के माध्यम से राज्य के 2 करोड़ 45 लाख जरूरतमंद लोगों को निःशुल्क खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आदिवासियों को केवल योजनाओं का लाभार्थी नहीं बनाया, बल्कि उन्हें भारत के विकास का सक्रिय सहभागी बनाया है। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री के नेतृत्व में विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती रहेगी।

पहाड़ी कोरवा बेटी शाम कुमारी के सपनों को मिले पंख,पढ़ाई के साथ मिला रोजगार

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रायपुर- छत्तीसगढ़ की विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा समुदाय की महिलाएं, सरकारी योजनाओं और अपनी मेहनत के दम पर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर रही हैं। इसी कड़ी में सरगुजा जिले के धौरपुर क्षेत्र की रहने वाली शाम कुमारी पहाड़ी कोरवा की सफलता की कहानी अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मार्गदर्शन और जिला प्रशासन के पहल पर शाम कुमारी को स्वास्थ्य विभाग में रोजगार उपलब्ध कराया गया है, जिससे अब वे अपनी उच्च शिक्षा का सपना स्वयं के दम पर पूरा कर रही हैं।

शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नवापारा' में वार्ड आया के पद पर पदस्थ शाम कुमारी

सरगुजा जिले के विकासखंड लुंड्रा के ग्राम पंचायत चिरमुण्डा निवासी शाम कुमारी वर्तमान में बी.एससी. (B.Sc.) अंतिम वर्ष की छात्रा हैं। शिक्षा के प्रति उनके जज्बे और आर्थिक आत्मनिर्भरता की आवश्यकता को देखते हुए उन्हें 'शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, नवापारा' में वार्ड आया (Ward Aya) के पद पर पदस्थ किया गया है।

पढ़ाई का खर्च अब खुद उठा सकेंगी शाम कुमारी

अपनी खुशी साझा करते हुए शाम कुमारी कहती हैं कि उच्च शिक्षा प्राप्त करना उनके लिए एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन रोजगार मिलने से अब राह आसान हो गई है। उन्होंने बताया, मैं बहुत खुश हूँ कि मुझे रोजगार का अवसर मिला है। अब मैं अपनी आगे की पढ़ाई का खर्च खुद उठा सकती हूँ और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने में मदद कर सकती हूँ।

विशेष पिछड़ी जनजातियों के प्रति संवेदनशील है प्रशासन

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य शासन विशेष पिछड़ी जनजाति समूहों (PVTG) के युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। जिला प्रशासन की पहल पर डीएमएफ मद से शिक्षित पहाड़ी कोरवा युवक युवती को स्वास्थ्य विभाग में वार्ड बॉय और वार्ड आया के 30 पदों पर नियुक्ति किया गया है। शाम कुमारी ने इस अवसर के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन सरगुजा का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पहाड़ी कोरवा समुदाय के लिए शासन द्वारा उठाए जा रहे ये कदम समाज में नया हौसला भर रहे हैं।

शाम कुमारी का चयन न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह क्षेत्र के अन्य पहाड़ी कोरवा छात्र-छात्राओं के लिए भी एक संदेश है कि शासन की योजनाओं और दृढ़ इच्छाशक्ति से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।

सरगुजा क्षेत्र के सर्वांगीण विकास और जनजातीय समाज का सशक्तिकरण हमारी सरकार की प्राथमिकता : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की बैठक में विकास कार्यों की समीक्षा: वित्तीय वर्ष 2025-26 हेतु 50 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान को स्वीकृति, 543 विकास कार्यों को मंजूरी

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज कोरिया जिले के बैकुंठपुर में आयोजित सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की बैठक में सरगुजा संभाग के जिलों में संचालित विकास कार्यों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई तथा जनप्रतिनिधियों के सुझावों के आधार पर नई योजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने सरगुजा और बस्तर क्षेत्रों के विकास को प्राथमिकता में रखा है।प्राधिकरण के माध्यम से पिछड़े एवं वनांचल क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरगुजा क्षेत्र के सर्वांगीण विकास, जनजातीय समाज के सशक्तिकरण और क्षेत्र की समृद्धि के लिए सरकार पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है और सभी के सहयोग से इस क्षेत्र को प्रगति के नए शिखर पर पहुंचाया जाएगा।

बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए प्राधिकरण हेतु 50 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान को स्वीकृति प्रदान की गई। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों के आधार पर 543 विकास कार्यों के लिए 4905.58 लाख रुपये की वित्तीय स्वीकृति दी गई, जबकि वर्ष 2024-25 में स्वीकृत 606 कार्यों को भी औपचारिक अनुमोदन प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री साय ने सभी स्वीकृत कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने तथा लंबित कार्यों को मार्च तक पूरा करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने बैठक में स्पष्ट कहा कि पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी। उन्होंने गर्मी के मौसम में पर्याप्त पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में बताया गया कि प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के सोनहत विकासखंड में विद्युतीकरण का कार्य तेजी से जारी है। मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि स्वीकृत कार्यों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा किया जाए, ताकि विकास योजनाओं का लाभ सीधे जनजातीय एवं वनांचल क्षेत्रों के लोगों तक पहुंच सके।

बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों में हाईमास्ट सोलर लाइट लगाने, किसानों की समस्याओं के समाधान, बिजली बिल त्रुटियों को दूर करने तथा गुणवत्ताहीन निर्माण कार्यों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्राधिकरण की पिछली बैठक जशपुर जिले के मयाली में आयोजित हुई थी, जिसके बाद मयाली की पहचान पर्यटन केंद्र के रूप में बढ़ी है। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में विश्व के बड़े शिवलिंग को स्थान मिला तथा स्वदेश दर्शन योजना के तहत राशि स्वीकृत हुई। उन्होंने कहा कि बैकुंठपुर में आयोजित इस बैठक से भी जिले की पहचान और पर्यटन संभावनाओं को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि झुमका जलाशय सहित यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं और इस प्रकार विभिन्न जिलों में बैठक आयोजित करने से स्थानीय विकास को गति मिलती है।

बैठक में कृषि मंत्री रामविचार नेताम, प्राधिकरण की उपाध्यक्ष गोमती साय, खाद्य मंत्री दयालदास बघेल, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव, उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन, सांसद  चिंतामणि महाराज, विधायकगण, वरिष्ठ अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

बस्तर ओलंपिक बना छत्तीसगढ़ की नई पहचान, प्रधानमंत्री मोदी ने सदन में किया उल्लेख

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नई दिल्ली/रायपुर- छत्तीसगढ़ का 'बस्तर ओलंपिक' अब राज्य की नई पहचान बन चुका है, जिसका उल्लेख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज संसद में किया। उन्होंने इसे नक्सलवाद के खिलाफ ऐतिहासिक कदम बताते हुए बस्तर के युवाओं की प्रतिभा को राष्ट्रीय मंच पर उभरने का प्रतीक कहा। 

 पीएम मोदी का सदन में उल्लेख 

राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने कहा- "बस्तर ओलंपिक ने नक्सल प्रभावित क्षेत्र को खेलों की धरती बना दिया है। यह लाखों आदिवासी युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ रहा है।" उन्होंने बस्तर को "भय से भविष्य की ओर" बदलते क्षेत्र के रूप में चित्रित किया, जहां 3.91 लाख खिलाड़ियों ने भाग लिया। 




देखिए VIDEO : PM मोदी ने क्या कुछ कहा सदन में



बस्तर ओलंपिक की सफलता 

2025-26 सत्र में आयोजित इस मेगा इवेंट में एथलेटिक्स, कबड्डी, खो-खो समेत 11 खेल हुए।  गृह मंत्री अमित शाह ने पूर्व समापन में इसे "नक्सलवाद के अंतिम कील" कहा था, जो 2026 तक नक्सल मुक्त बस्तर का संकेत देता है।  अब सरगुजा ओलंपिक भी शुरू हो चुका है। राज्य सरकार की पहल 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे युवा सशक्तिकरण का मॉडल बताया। बस्तर ओलंपिक ने 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स' की राष्ट्रीय मान्यता भी पाई।  यह आयोजन विकास, शांति और खेल को जोड़ते हुए छत्तीसगढ़ को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है।

राजस्व वृद्धि, रोजगार और तकनीक: छत्तीसगढ़ के खनिज क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रगति

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सचिव खनिज संसाधन पी. दयानंद ने बताया कि प्रदेश में 28 से अधिक प्रकार के खनिज विभिन्न क्षेत्रों में पाये जाते है। इन खनिजों के लिए राज्य सरकार के द्वारा अन्वेषण एवं उत्खनन हेतु खनिज ब्लॉक तैयार कर नीलामी एवं अन्य माध्यम से खनन हेतु उपलब्ध कराया जाता है। जिससे राज्य शासन को राजस्व की प्राप्ति में पिछले 02 वर्षों में उल्लेखनियवृद्धि हुई है।

सी.एम.डी.सी. भी इस राज्य में अन्वेषण एवं खनन से संबंधित कार्यांे के संपादनका सहभागी है। छत्तीसगढ़ राज्य के खनिज आधारित स्थानीय उद्योगों को खनिज के आपूर्ति सुनिश्चित किये जाने तथा खनिज राजस्व मंे वृद्धि के उद्देश्य से राज्य शासन ने छत्तीसगढ़ खनिज साधन विभाग के अधीन छत्तीसगढ़ मिनरल डेव्हलपमेंट कार्पाेरेशन (सी.एम.डी.सी.) का गठन 07 जून 2001 में किया गया। सी.एम.डी.सी. के कार्य संचालन का स्वरूप माईनिंग एण्ड मार्केटिंग ठेका,उत्खनन ठेका, मार्केटिंग ठेका, एमडीओ, अन्वेषण एवं संयुक्त उपक्रम के माध्यम सेअन्वेषण एवं खनन कार्य वर्तमान मंे कार्यरत् है। 

दयानन्द ने बताया कि वर्तमान में 09 खनिजों के खनन/मार्केटिंग एवं अन्वेषण का कार्य सी.एम.डी.सी. के द्वारा किया जा रहा है (टिन,बाक्साईट, लौह अयस्क, कॉपर, हीरा, मैग्नीज, कोरण्डम, डोलोमाईट, कोयला)। (टिन) वर्तमान में सी.एम.डी.सी. के द्वारा बस्तर के अनुसूचित जनजातियों के जीविकोपार्जन के लिए विशेष रूप से टिन अयस्क की खरीदी का कार्य किया जा रहा है। संयुक्त उपक्रम के माध्यम से खनन एवं टिन स्मेल्टर का भी संचालन किया जा रहा है। यह खनिज भी क्रिटिकल मिनरल की श्रेणी में आता हैं।

सचिव, खनिज संसाधन ने बताया कि पिछले दो वर्षों में अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों को टिन विक्रय करने का सही मूल्य सही वक्त में उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया। परिणामस्वरूप यह क्रय मूल्य बढ़कर वर्तमान में 1926.00 रूपये प्रति कि.ग्रा किया गया है। इस प्रकार लगभग 03 गुना अधिक राशि क्षेत्र के अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों को प्राप्त हो रहा है। परिणामस्वरूप टिन ओर की क्रय मात्रा में भी अप्रत्याशित वृद्धि हो रही है एवं ऑनलाईन क्रय एवं रियल टाईम भुगतान की कार्यवाही प्रचलन में है। इस हेतु TIN - Tribal Incentive for Natural Resources, Portal तैयार किया जा रहा है जिसके माध्यम सेऑनलाईन भुगतान हितग्राहियों को प्राप्त होगा।

दयानंद ने बताया कि क्रिटिकल मिनरल की श्रेणी में अन्वेषण कार्य में सी.एम.डी.सी., मॉयल केसहयोग से बलरामपुर जिले में मैग्नीज एवं ग्रेफाईट का अन्वेषण का कार्य कर रही है जिसके उत्साहजनक परिणाम प्राप्त हो रहे है। कोल इंडिया लिमिटेड और छत्तीसगढ़ मिनरल डेव्हलपमेंट कॉर्पाेरेशन के बीच क्रिटिकल मिनरल के अन्वेषण एवं खनन के संबंध में समझौता पत्र हस्ताक्षर किया जाचुका है। इसके क्रियान्वयन के लिए संयुक्त कार्यसमिति का गठन किया गया है। शीघ्र ही इसकी अपेक्षित परिणाम प्राप्त हांेगे एवं केन्द्र शासन के निर्देशानुसार क्रिटिकल मिनरल में आत्मनिर्भरता की ओर सी.एम.डी.सी. की सहभागीता बढ़ रही है। यह समझौता केवल खनन तक सीमित नहीं है अपितु इसमें खनिज संवर्धन,प्रसंस्करण, तकनीकी सहयोग और सबसे महत्वपूर्ण हमारे युवाओं के लिए कौशल विकास के अवसर भी शामिल है। मुझे विश्वास है कि यह पहल रोजगार सृजन करेगी और हमारी युवा पीढ़ी को गरिमा और अवसर प्रदान करेगी।

सचिव, खनिज संसाधन ने बताया कि पारदर्शी नीलामी - माननीय मुख्यमंत्री जी के दूरदर्शी नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने खनिज संसधान प्रबंधन में उल्लेखनीय परिवर्तन देखा है। सी.एम.डी.सी. ने MSTC के माध्यम से पारदर्शी और तकनीक - सक्षम नीलामी प्रक्रिया द्वारा निविदा और खनिज बिक्री में नये मानक स्थापित किये है। उक्त पारदर्शी प्रक्रिया के तहत नीलामी से, जहां एक ओर लौह अयस्क की नीलामी में रिकॉर्ड उच्च बिक्री मूल्य प्राप्त हुए है, वही दूसरी ओर लौह अयस्क के उत्खनन में न्यूनतम दर प्राप्त हुआ है, जो प्रतिस्पर्धी पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया की सफलता को दर्शाता है।

उन्होंने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में आरीडोंगरी खदान से उत्पादित लौह अयस्क के विक्रय से राज्य शासन को लगभग 28.65 करोड़ रूपये का राजस्व साथ ही सी.एम.डी.सी. को शुद्ध लाभ लगभग 24 करोड़ रूपये प्राप्त हुआ। वर्ष 2021 से 2025 तक 1.10 करोड़रूपये सीएसआर में व्यय हो चुका है एवं 42 लाख रूपये की कार्यों की स्वीकृति प्रचलन में है। माननीय प्रधानमंत्री जी के आह्वान पर एक पेड़ के नाम पर 14700 वृक्षांे कारोपड़ किया गया है एवं 29.77 लाख रूपये का व्यय की गई। चालू वित्तीय वर्ष में 60,000 टन लौह अयस्क की नीलामी की कार्यवाही पारदर्शी तरीके से प्रचलन में है। इस खदान के संचालन से प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रूप से 200 से अधिक लोगों को रोजगार प्राप्त हो रहा है। इसी अनुक्रम में आरीडोंगरी में उत्पादन क्षमता 05 लाख टन से 20 लाख टन प्रतिवर्ष किये जाने के लक्ष्य को प्राप्त करने के प्रयास किये जा रहे है। इस हेतु खनन योजना तैयार किया जा रहा है। सरगुजा जिले में सी.एम.डी.सी. की 05 खदानें संचालित है, जिससे वित्तिय वर्ष 2023-24 से दिसंबर 2025 तक में राज्य शासन को 11.28 करोड़ एवं सी.एम.डीसी. को 8.13 करोड़ रूपये की प्राप्ति हुई है। वर्तमान में सी.एम.डी.सी. द्वारा पारदर्शी प्रक्रिया के अंतर्गत 05 बाक्साईट खदानों की नीलामी प्रगति पर है।

सचिव, खनिज संसाधन ने बताया कि माननीय मुख्यमंत्री जी के मार्गदर्शन में सी.एम. डी.सी.- एन.एम.डी.सी. संयुक्त उपक्रम एनसीएल के द्वारा बैलाडिला डिपॉजिट 04 और डिपॉजिट 13 में खनन कार्य शीघ्र ही प्रारंभ होंगे। इस हेतु डिपॉजिट 04 का रेजिंग कॉन्ट्रेक्टर की चयन प्रक्रिया अंतिम चरण में है। 2026 में दोनों खदानों में उत्पादन प्रारंभ होने से एक ओर शासन और निगम को राजस्व की प्राप्ति होगी वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ राज्य के स्थानीय उद्योगों को लौह अयस्क सुगमता से प्राप्त होगा। परिणामस्वरूप राज्य का समावेशी विकास होने में सी.एम.डी.सी. की सहभागीता चिन्हीत् होगी। सी.एम.डी.सी. को दोनों परियोजनाओं से अधिकतम उत्पादन की स्थिति में लगभग राज्य शासन को 7 हजार करोड रूपये राजस्व एवं सी.एम.डी.सी. को 3 हजार करोड़ रूपये राजस्व प्राप्त होगा, साथ ही क्षेत्र में रोजगार एवं विकास के अवसर का मार्ग प्रशस्त होगा। बहुमूल्य खनिजों की श्रेणी में CMDC-NMDC के संयुक्त उपक्रम एनसीएल जिला महासमुंद के ग्राम बलौदा-बेलमंुडी में हीरा खनिज के क्षेत्र में हीरा धारित किम्बरलाईट की उपस्थिति के संकेत मिले है, इसकी पुष्टि हेतु ड्रिलिंग का कार्य प्रगति पर है।

माननीय मुख्यमंत्री जी के कुशल मार्ग निर्देशन में विगत वर्षों से लंबित केरवा कोल परियोजना के लिए अब सफलता प्राप्त हुई है। सटीक कार्ययोजना के माध्यम से पारदर्शी नीलामी से 15.85 प्रतिशत प्रिमियम में MDO का चयन हो चुका है। यह ब्लॉक MPSMC-CMDC को संयुक्त रूप से कोयला मंत्रालय भारत शासन द्वारा आबंटित है।

क्षेत्र के विकास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अधिकमत उत्पादन की स्थिति में राज्य शासन को लगभग 150 करोड़ रूपये की राजस्व प्राप्ति होगी एवं MPSMC-CMDC को संयुक्त रूप से 53 करोड़ रूपये की राजस्व प्राप्त होगी। सी.एम.डी.सी. के द्वारा मुख्य खनिजों के साथ-साथ माननीय मुख्यमंत्री जी के निर्देश पर खनन/व्यापार हेतु गौण खनिज को भी शामिल किया गया है। इस क्रम में जिला सक्ती के ग्राम छितापंडरिया में डोलोमाईट खनिज रकबा 326.167 हे. क्षेत्र को राज्य शासन द्वारा सी.एम.डी.सी. हेतु आरक्षित किया गया है। इसके अनुक्रम में सी.एम.डी.सी. द्वारा माईनिंग/मार्केटिंग के लिए MDO चयन की कार्यवाही पारदर्शी तरीके के MSTC के माध्यम से प्रचलन में है।

कोरण्डम खनिज के क्षेत्र में जिला बीजापुर के ग्राम कुचनुर में सी.एम.डी.सी. को उत्खनिपट्टा क्षेत्र में वर्षांे बाद उत्पादन प्रारंभ हो गया है, 1 टन प्रतिवर्ष उत्पादन क्षमता का पर्यावरण स्वीकृति प्राप्त है। उत्पादित कोरण्डम में आधारित स्थानीय लोगों को जीविकोपार्जन एवं समाजिक/आर्थिक विकास को दृष्टिगत रखते हुए कोरण्डम कटिंग/पॉलिशिंग का प्रशिक्षण दिया जा कर जीविकोपार्जन की व्यवस्था की जा रही है। कॉपर की उपस्थिति की पुष्टि एवं भविष्य में खनन की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड के साथ संयुक्त उपक्रम छत्तीसगढ़ कॉपर लिमिटेड का गठन किया जा चुका है। इस हेतु राष्ट्रीय खनिज एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट के माध्यम से अन्वेषण परियोजना की स्वीकृति हो चुकी है एवं अन्वेषण का कार्य प्रगति पर है। यह अन्वेषण क्षेत्र राज्य सरकार द्वारा मोहला-मानपुर जिले में हिदर ब्लॉक 28.60 वर्ग कि.मी. एवं बोदल ब्लॉक में 21.75 वर्ग कि.मी. 03 वर्ष के लिए अधिसूचित किया गया है।

भविष्य की कार्ययोजना - पिछले 02 वर्षों में सी.एम.डी.सी. के द्वारा नवीन आयाम स्थापित किये है एवं भविष्य के परियोजनाओं को अपेक्षित गति प्रदान करने के लिए सटिक कार्ययोजना तैयार कर क्रमशः आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सी.एम.डी.सी. भी सहभागीता निभाने का प्रयास कर रही है।

टिन खनिज के लिए नॉन ऑपरेशन खदान को लैप्स घोषित किया गया एवं केन्द्र सरकार के माध्यम से नीलामी की कार्यवाही प्रचलन में है। आगामी 2 से 3 वर्षों में खदान प्रारंभ होने से भविष्य में खनन एवं निकासी से राज्य शासन को अतिरिक्त राजस्व की प्राप्ति होगी। 

टिन स्लैग में अवस्थित टेंटलम, नियोबियम एवं अन्य को निष्कर्षण की कार्ययोजना तैयार कर पायलट परियोजना प्रारंभ की जा रही है। नवीन क्षेत्रों का चयन कर MSTC के माध्यम से क्रिटिकल मिनरल के लिए अन्वेषण/खनन की कार्ययोजना पर आगे कार्यवाही की जाएगी।
लौह अयस्क में वर्तमान उत्पादन क्षमता 5 लाख मिट्रिक टन से 20 लाख मिट्रिक टन किया जा रहा है इससे राज्य शासन को राजस्व के रूप मंे लगभग 250 करोड़ रूपये एवं सी.एम.डी.सी. को 768.4 करोड़ रूपये की राजस्व प्राप्ति होगी। 

बाक्साईट खनिज में पथरई खदान में उत्पादन क्षमता 2 लाख टन होने से एवं अन्य संचालित परियोजना में अधिकतम उत्पादन/निकासी की स्थिति में सी.एम.डी.सी. को अतिरिक्त राजस्व में लगभग 10 करोड़ रूपये की वृद्धि होगी है।

क्रिटिकल मिनरल में भविष्य में कोल इण्डिया के साथ नये ग्रेफाईट युक्त क्षेत्र का चयन कर संयुक्त रूप से अन्वेषण/उत्खनन का कार्य किया जाएगा। टिनस्लैग/एल्यूमिनियम स्लैग से क्रिटिकल मिनरल का निष्कर्षण किया जाएगा। क्रिटिकल मिनरल का सेमिनार आयोजित एवं रिसर्च पेपर आमंत्रित किये जाएंगे। 

डोलोमाईट में 2 मिलियन टन उत्पादन क्षमता आगामी 03 वर्षों में प्राप्त करने की स्थिति में सी.एम.डी.सी. को 20 करोड़ रूपये का लाभ होगा एवं राज्य शासन को 32 करोड़ प्राप्त होगा। 

हीरा क्षेत्र में प्रचलित पूर्वेक्षण से चिन्हित् हीरा धारित क्षेत्र में हीरा की उपस्थिति सुनिश्चित होने पर शासन को लाभ मिलेगा। 

सी.एम.डी.सी. द्वारा खनन से संबंधित सर्विस प्रोवाइडर के रूप में सेवा दिया जाकर अतिरिक्त राजस्व की प्राप्ति का प्रयास किया जाएगा। जैसे - प्री एम्बेडेड क्लियरेन्स की कार्यवाही से नीलामी हेतु ब्लॉक जल्दी उपलब्ध हांगे, इससे शासन को राजस्व की प्राप्ति एवं सी.एम.डी.सी. को सेवा शुल्क प्राप्त होगा। इसी तरह खनन योजना तैयार करने, अन्वेषण एजेंसी के रूप में कार्य करने एवं ड्रोन से संबंधित कार्य,चेक गेट, वेब्रिज सेवा, बंद पड़ी खदानों का पुर्नउद्धार एवं ग्रेनाईट माईनिंग एवं कटिंग/पॉलिशिंग उद्योग, सैण्ड माईनिंग पर भी कार्ययोजना तैयार किया गया है।

जनजातीय शिक्षा को सशक्त बनाने हेतु NESTS की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला संपन्न

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राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति छात्र शिक्षा समाज (NESTS) ने 21–22 नवंबर 2025 को आकाशवाणी भवन, नई दिल्ली में “जनजातीय शिक्षा के लिए गुणवत्तापूर्ण ढाँचा निर्माण” विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया। यह कार्यशाला सरकार द्वारा जनजातीय समुदायों की शैक्षणिक संरचना को मज़बूत करने और एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (EMRS) के माध्यम से सतत एवं प्रभावी शिक्षण वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल माननीय प्रधानमंत्री के “शिक्षा द्वारा जनजातीय परिवर्तन” के विज़न को साकार करने पर केंद्रित है।

जनजाति कार्य मंत्रालय की सचिव ने कार्यशाला का उद्घाटन किया, इंजीनियर्स हैंडबुक जारी

कार्यक्रम का उद्घाटन रंजन चोपड़ा, सचिव, जनजाति कार्य मंत्रालय ने किया। उन्होंने EMRS इंजीनियर्स हैंडबुक भी जारी की।
सचिव ने कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य NESTS, परियोजना टीमों और EMRS निर्माण स्थलों पर कार्यरत इंजीनियरों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।

उन्होंने कहा कि EMRS जनजातीय छात्रों और उनके परिवारों में आत्मविश्वास और सम्मान की भावना जगाते हुए सामाजिक परिवर्तन का माध्यम हैं।

उन्होंने विद्यालयों के निर्माण में सुरक्षा, संरचनात्मक मजबूती और सौंदर्य को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि ये विद्यालय आशा और अवसर के प्रतीक हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि यद्यपि स्थलों से संबंधित चुनौतियाँ हैं, फिर भी परिश्रम, पारदर्शी संवाद और समान अपेक्षाएँ उच्च गुणवत्ता वाले EMRS कैंपस बनाने में सहायक होंगे। यह कार्यशाला तकनीकी सवालों को हल करने, सूचना की खाई को पाटने और समन्वित प्रयासों को प्रोत्साहित करेगी।

NESTS के आयुक्त का संबोधन

शुरुआत में NESTS के आयुक्त अजीत के. श्रीवास्तव ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया।
अपने संबोधन में उन्होंने बताया:

  • वर्तमान में 499 EMRS स्कूल संचालित हैं,

  • 397 स्कूल भवन पूर्ण हो चुके हैं,

  • शेष विद्यालय निर्माण या पूर्व-निर्माण चरणों में हैं।

उन्होंने समय पर गुणवत्तापूर्ण निर्माण के महत्व पर जोर देते हुए कहा:

“अच्छी गुणवत्ता वाले EMRS का समय पर पूरा न होना मतलब है कि जनजातीय बच्चे स्कूल नहीं जा पाएँगे—जो बिल्कुल स्वीकार्य नहीं।”

कार्यशाला के बारे में

कार्यशाला में PSUs, CPWD, राज्य सरकारों और विभिन्न निर्माण एजेंसियों के इंजीनियरों ने भाग लिया।
यह कार्यक्रम क्षमता-विकास पर केंद्रित था ताकि EMRS निर्माण कार्य को तेजी और गुणवत्ता के साथ आगे बढ़ाया जा सके।

सत्रों में निम्न विषय शामिल थे:

  • परियोजना योजना व निगरानी

  • भू-तकनीकी जांच

  • सामग्री परीक्षण

  • अर्थवर्क और रिइनफोर्समेंट

  • जनजातीय क्षेत्रों की चुनौतियों के अनुरूप निर्माण प्रथाएँ

प्रतिभागियों ने भौगोलिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों के अनुरूप निर्माण मॉडल अपनाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

गुणवत्तापूर्ण निर्माण के लिए विशेषज्ञों का मार्गदर्शन

IIT, NIT, CBRI, SAI सहित प्रमुख संस्थानों के विशेषज्ञों ने निम्न विषयों पर मार्गदर्शन दिया:

  • गुणवत्ता आश्वासन प्रणाली

  • सामग्री परीक्षण तकनीक

  • प्रभावी परियोजना प्रबंधन

  • क्षेत्रीय चुनौतियों के समाधान

इंटरैक्टिव सत्रों में इंजीनियरों ने अपने अनुभव साझा किए और व्यावहारिक समाधान खोजे।

यह कार्यशाला जनजातीय छात्रों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और मजबूत विद्यालय अवसंरचना सुनिश्चित करने की दिशा में NESTS के मिशन का महत्वपूर्ण कदम है। यह जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा के परिदृश्य को बदलने की सरकारी प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डेडियापाड़ा में जनजातीय गौरव दिवस पर अपने संबोधन में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सराहना की

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय छत्तीसगढ़ का कर रहे है कायाकल्प- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ के सर्वांगीण विकास के लिए राज्य सरकार पूरी निष्ठा से कार्यरत — मुख्यमंत्री

रायपुर- गुजरात के डेडियापाड़ा में आयोजित जनजातीय गौरव दिवस के राष्ट्रीय कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने उद्बोधन के दौरान छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व की विशेष रूप से प्रशंसा की। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश में जनजातीय समाज की बढ़ती भागीदारी और नेतृत्व भारत के विकास की नई पहचान बन रहा है, और इस दिशा में छत्तीसगढ़ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि किसी भी समाज की प्रगति के लिए लोकतांत्रिक भागीदारी अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में जनजातीय समाज से आने वाले मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य में व्यापक विकास हो रहे हैं और सभी क्षेत्रों में सकारात्मक दिशा में निर्णायक प्रगति दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि शासन, सेवा और विकास के प्रत्येक आयाम में जनजातीय समाज का प्रतिनिधित्व और सशक्तिकरण ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र की वास्तविक शक्ति को प्रमाणित करता है।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ प्रवास का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ दिन पूर्व रायपुर में उन्होंने शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि यह संग्रहालय छत्तीसगढ़ के जनजातीय इतिहास, परंपरा, कला और बलिदान का भव्य प्रतीक है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक राष्ट्रीय धरोहर के रूप में स्थापित होगा।

प्रधानमंत्री के उद्बोधन में छत्तीसगढ़ के जनजातीय समुदाय, उनकी संस्कृति तथा राज्य में चल रहे जनजातीय उत्थान के प्रयासों की जिस प्रकार सराहना की गई, उसने पूरे प्रदेश का गौरव बढ़ाया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इन शब्दों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा दिया गया सम्मान समूचे छत्तीसगढ़वासियों का मनोबल बढ़ाने वाला है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ के मंत्र को आधार बनाकर जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी निष्ठा से कार्यरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन और उत्साहवर्धन से राज्य में जनजातीय सशक्तिकरण, मूलभूत सुविधाओं के विस्तार, शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका तथा सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्रों में उल्लेखनीय गति प्राप्त हुई है।

मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी हमारे देश के गौरव हैं। देश का जनजातीय समाज उनके स्नेह और उदारता के लिए कृतज्ञ है। छत्तीसगढ़ के लिए उनका कहा हुआ प्रत्येक शब्द अमृत के समान है। उनके इस स्नेह को प्रसाद मानते हुए हम और अधिक उत्साह के साथ छत्तीसगढ़ महतारी की अर्चना में स्वयं को समर्पित करते हैं।

अपने संकल्प को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की विकास यात्रा को तीव्र गति देते हुए राज्य सरकार ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के निर्माण के माध्यम से ‘विकसित भारत’ के प्रधानमंत्री के संकल्प की सिद्धि में अपना पूर्ण योगदान देगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अंत में कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार जनजातीय समाज की अस्मिता, स्वाभिमान और आकांक्षाओं को साकार करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के आशीर्वाद से यह विकास यात्रा और अधिक गतिशील, प्रभावी और व्यापक बनेगी।

राउरकेला में 4th राष्ट्रीय EMRS स्पोर्ट्स मीट 2025 का भव्य समापन, तेलंगाना ने जीता ओवरऑल चैम्पियनशिप

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राउरकेला- बिरसा मुंडा एथलेटिक्स स्टेडियम में आज 4th राष्ट्रीय EMRS खेल प्रतियोगिता 2025 का भव्य समापन हुआ। यह आयोजन पूरे देश में मनाए जा रहे भगवान बिरसा मुंडा जनजातीय गौरव दिवस के साथ खास तौर पर मेल खाता रहा। कार्यक्रम में भगवान बिरसा मुंडा के अदम्य साहस और बलिदान को नमन करते हुए भारत के जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम की गौरवशाली विरासत का उत्सव मनाया गया।

यह खेल महोत्सव ओडिशा मॉडल ट्राइबल एजुकेशन सोसाइटी (OMTES) द्वारा, ST & SC विकास, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, ओडिशा सरकार के अंतर्गत आयोजित किया गया। आयोजन का संचालन नेशनल एजुकेशन सोसाइटी फॉर ट्राइबल स्टूडेंट्स (NESTS), जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा किया गया।

कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख अतिथि

  • मोहन् चरण माझी, माननीय मुख्यमंत्री, ओडिशा (मुख्य अतिथि)

  • जुअल ओराम, माननीय केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री (विशिष्ट अतिथि)

  • अजीत कुमार श्रीवास्तव, IRAS, आयुक्त, NESTS

  •  बी. परमेश्वरन, IAS, सचिव, ST & SC विकास विभाग, ओडिशा

  • डॉ. शुभंकर मोहापात्र, IAS, कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट, सुंदरगढ़

  • दूती चंद, अंतरराष्ट्रीय धाविका

  • सुंदरगढ़ क्षेत्र के माननीय विधायक एवं अन्य जनप्रतिनिधि

आयुक्त श्रीवास्तव ने सभी अतिथियों का स्वागत कर खेल प्रतियोगिता की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की और EMRS छात्रों के उत्कृष्ट प्रदर्शन व जनजातीय समुदायों में बढ़ती खेल संस्कृति की सराहना की।

परिणाम सारांश

ओवरऑल स्पोर्ट्स चैम्पियन

    • रैंक
    • राज्य
    •  स्वर्ण 
    • रजत
    •  कांस्य
    •  कुल
    •  अंक
    • 1
    • तेलंगाना        
    •  88
    •  66
    •    76
    • 230
    •  714
    • 2
    • छत्तीसगढ़
    •  55
    •  43
    •    64
    • 162
    •  468
    • 3
    • मध्य प्रदेश
    •  40
    •  49
    •    62
    • 151
    •  409

शीर्ष 3 – व्यक्तिगत स्पर्धाएँ

  • रैंक
  • राज्य
  • स्वर्ण
  • रजत
  • कांस्य
  • कुल
  • अंक
  • 1
  • तेलंगाना
  • 82
  • 65
  • 74
  • 221
  • 679
  • 2
  • छत्तीसगढ़
  • 54
  • 43
  • 62
  • 159
  • 461
  • 3
  • मध्य प्रदेश
  • 40
  • 47
  • 61
  • 148
  • 402

शीर्ष 3 – टीम इवेंट्स

  • रैंक
  • राज्य
  • स्वर्ण
  • रजत
  • कांस्य
  • कुल
  • अंक
  • 1
  • तेलंगाना
  • 6
  • 1
  • 2
  • 9
  • 35
  • 2
  • ओडिशा
  • 2
  • 5
  • 1
  • 8
  • 26
  • 3
  • आंध्र प्रदेश
  • 1
  • 2
  • 2
  • 5
  • 13

तेलंगाना ने 230 पदकों और 714 अंकों के साथ ओवरऑल चैम्पियनशिप जीती।

पीएम मोदी के खेल एवं जनजातीय सशक्तिकरण के विज़न की दिशा में बड़ा कदम

यह EMRS खेल महोत्सव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न को आगे बढ़ाता है:

  • खेलो इंडिया – "खेलो, बढ़ो, प्रगति करो"

  • ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों में खेल प्रतिभा की खोज

  • EMRS छात्रों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुँचाना

  • फिटनेस, नेतृत्व, टीमवर्क सुदृढ़ करना

  • विकसित भारत के निर्माण में खेलों की भूमिका को मजबूत करना

NESTS और EMRS संस्थान जनजातीय खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय उत्कृष्टता तक ले जाने के मार्ग तैयार कर रहे हैं।

सांस्कृतिक एवं औपचारिक कार्यक्रम की झलकियाँ

समापन समारोह में शामिल थे:

  • छात्रों द्वारा अतिथियों का पारंपरिक स्वागत

  • दीप प्रज्वलन, वंदे मातरम और वेव मार्च

  • ओडिशी एवं धीमसा जैसे सांस्कृतिक नृत्य

  • पदक एवं ट्रॉफी वितरण

  • अद्भुत आतिशबाज़ी

  • मुख्य अतिथि एवं दूती चंद द्वारा मशाल का विसर्जन और EMRS ध्वज अवतरण

कार्यक्रम का समापन कलेक्टर डॉ. शुभंकर मोहापात्र द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।


छत्तीसगढ़ शासन जनजातीय समुदाय के समग्र विकास के लिए संकल्पित : मुख्यमंत्री साय

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मुख्यमंत्री साय ने किया भगवान बिरसा मुंडा का स्मरण:जनजातीय गौरव दिवस पर बस्तर पहुंचे 

रायपुर- धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के पावन अवसर पर आयोजित जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आज जगदलपुर के सिटी ग्राउंड में विभिन्न जनजातीय समाज के प्रमुखों द्वारा आत्मीय स्वागत किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री का पारंपरिक सिहाड़ी माला, पगड़ी (साफा) और एक विशाल गजमाला भेंट कर सम्मान किया गया, जिसने पूरे आयोजन में सांस्कृतिक उल्लास भर दिया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सिटी ग्राउंड, जगदलपुर में बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी और भगवान बिरसा मुंडा के छायाचित्र सहित जनजातीय देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना कर जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके पश्चात अपने उद्बोधन में मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ शासन जनजातीय समुदाय के समग्र विकास के लिए पूरी तरह संकल्पित है।

मुख्यमंत्री ने जनजातीय उत्थान और सम्मान के लिए उठाए गए ऐतिहासिक राष्ट्रीय कदमों का स्मरण करते हुए कहा कि जनजातीय कल्याण की दिशा में तीन बड़े मील के पत्थर रखे गए हैं। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के दूरदर्शी नेतृत्व को याद किया, जिनके कार्यकाल में ही आदिवासी बहुल छत्तीसगढ़ और झारखंड राज्यों का गठन किया गया। मुख्यमंत्री ने इसे जनजातीय पहचान को सम्मान देने और उनके त्वरित विकास की दिशा में युगांतरकारी निर्णय बताया। इसके अतिरिक्त, वाजपेयी जी ने ही जनजातीय हितों की रक्षा और विकास हेतु एक अलग ‘जनजातीय कार्य मंत्रालय’ का गठन किया। मुख्यमंत्री साय ने देश के प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी का भी आभार व्यक्त किया, जिन्होंने भगवान बिरसा मुंडा जी की जयंती को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ घोषित कर पूरे राष्ट्र में जनजातीय नायकों के सम्मान की एक ऐतिहासिक परंपरा स्थापित की।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आदिवासी समुदाय के ‘धरती आबा’ के नाम से पूजनीय बिरसा मुंडा ने 19वीं सदी के अंत में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन और स्थानीय शोषकों के खिलाफ एक अभूतपूर्व क्रांति का सूत्रपात किया था, जिसे इतिहास में ‘उलगुलान’ के नाम से जाना जाता है।

उल्लेखनीय है कि बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को हुआ था। बहुत कम उम्र में ही उन्होंने अंग्रेजों द्वारा आदिवासियों के पारंपरिक ‘खुंटकट्टी’ (सामुदायिक स्वामित्व) भूमि अधिकारों को छीनने और अत्यधिक लगान थोपने का विरोध प्रारंभ कर दिया था। बिरसा एक महान समाज सुधारक भी थे। उनके प्रयासों से जनजातीय समाज में एकता, स्वाभिमान और आत्म-सम्मान की अद्भुत चेतना जागृत हुई। भारत सरकार ने उनके राष्ट्र एवं समाज को दिए योगदान को सम्मानित करते हुए उनके जन्मदिन 15 नवंबर को प्रतिवर्ष ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा की है। यह दिन स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समुदायों के अमूल्य बलिदान को स्मरण करने का अवसर है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार इसी संकल्प और प्रतिबद्धता के साथ जनजातीय समुदाय के उत्थान की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही है।

कार्यक्रम में वन मंत्री केदार कश्यप ने जनजातीय समुदाय के पूर्वजों के इतिहास, स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान और सामाजिक सुधारों से प्रेरणा लेने का आव्हान युवाओं एवं भावी पीढ़ी से किया। उन्होंने कहा कि इन महापुरुषों के आदर्शों पर चलकर जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और सतत संवर्धन को आगे बढ़ाना हम सबकी जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम में जगदलपुर के विधायक किरण देव ने बस्तर अंचल के जनजातीय समुदाय के क्रांतिकारी जननायक शहीद गुंडाधुर, डेबरीधुर, गेंदसिंह आदि के संघर्षों एवं योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि इन महापुरुषों ने आजादी की लड़ाई और बस्तर के जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए अद्भुत त्याग किया। उन्होंने कहा कि बस्तर क्षेत्र में जनजातीय समुदाय की एकजुटता और उत्थान के लिए वे निरंतर प्रयासरत रहे।

कार्यक्रम को जगदलपुर विधायक किरण देव तथा जनजातीय गौरव समाज के संभागीय अध्यक्ष तुलूराम कश्यप ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर सांसद बस्तर महेश कश्यप, चित्रकोट विधायक विनायक गोयल, जगदलपुर महापौर संजय पांडे, जिला पंचायत अध्यक्ष वेदवती कश्यप सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण तथा आईजी सुंदरराज पी, कलेक्टर हरिस एस, पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा, सीईओ जिला पंचायत प्रतीक जैन सहित अन्य अधिकारी एवं बड़ी संख्या में जनजातीय समुदाय के गणमान्यजन और नागरिक उपस्थित थे।


दूरदराज़ के आदिवासी गाँवों से आई उज्जवल सफलता: 597 EMRS छात्रों ने JEE और NEET में हासिल की कामयाबी

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देश के दूरदराज़ आदिवासी इलाकों से आने वाले 597 छात्रों ने 2024-25 में JEE Main, JEE Advanced और NEET जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल की है। यह बड़ी छलांग पिछले साल के सिर्फ 16 छात्रों (JEE) और 6 छात्रों (NEET) की तुलना में बेहद प्रेरणादायक है।

यह सफलता Eklavya Model Residential Schools (EMRS) की विशेष शिक्षा और मार्गदर्शन की देन है, जो अनुसूचित जनजाति (ST) छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर उन्हें बड़े अवसरों तक पहुँचाने में मदद करती हैं। कुल 230 EMRS स्कूलों में से 101 स्कूलों के छात्रों ने इन प्रतिष्ठित परीक्षाओं को पास किया।

प्रेरणादायक उदाहरण:

जतिन नेगी, हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले के सांगला गाँव से, जिन्होंने JEE Advanced में 421वीं रैंक हासिल की। उन्होंने IIT जोधपुर में B.Tech की पढ़ाई शुरू की। उन्होंने कहा कि EMRS में शिक्षक और संरचित शिक्षा प्रणाली ने उनके सपनों को साकार करने में मदद की।

पड़वी उर्जस्वीबेन अमृतभाई, गुजरात के खपतिया गाँव की रहने वाली, ने NEET परीक्षा पास की और अब GMERS मेडिकल कॉलेज, जूनागढ़ में MBBS कर रही हैं। उन्होंने बताया कि शिक्षक का मार्गदर्शन और मेहनत ने उन्हें सामाजिक बाधाओं को पार करने में मदद की।

EMRS छात्रों का प्रदर्शन (2024–25)

राज्य     JEE Main       JEE Advanced         NEET
आंध्र प्रदेश         17               1            0
छत्तीसगढ़         17               3           18
गुजरात        37               3          173
हिमाचल प्रदेश         3               1            7
झारखंड        6               0              0
कर्नाटक         7               0            0
मध्य प्रदेश      51              10          115
महाराष्ट्र         7               2            7
ओडिशा      10               4            0
तेलंगाना      60              10           24
उत्तर प्रदेश       1               0               0
उत्तराखंड       3               0            0
कुल     219              34          344

EMRS क्या हैं?

Eklavya Model Residential Schools (EMRS) केंद्रीय जनजाति मंत्रालय द्वारा स्थापित स्कूल हैं। ये स्कूल दूरदराज़ आदिवासी बच्चों को मुफ्त, CBSE-सम्बद्ध गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, हॉस्टल सुविधा, पौष्टिक भोजन और स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करते हैं।

संविधान और कानून की भूमिका

भारत के संविधान ने अनुसूचित जातियों और जनजातियों के छात्रों के लिए विशेष प्रावधान बनाए हैं। Articles 15 और 46, और Central Educational Institutions (Reservation in Admission) Act, 2006 जैसी कानून व्यवस्था सुनिश्चित करती हैं कि इन छात्रों को उच्च शिक्षा और रोजगार में समान अवसर मिलें।

विशेष शैक्षिक समर्थन

EMRS छात्रों को IIT-JEE और NEET की तैयारी के लिए डिजिटल ट्यूटरिंग, स्मार्ट क्लास, कौशल विकास लैब्स, अटल टिंकरिंग लैब्स और करियर मार्गदर्शन जैसी सुविधाएं मिलती हैं। यह मदद छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने और अपने सपनों को पूरा करने के लिए सक्षम बनाती है।

जतिन और पड़वी जैसी कहानियां यह दिखाती हैं कि सही शिक्षा, मेहनत और मार्गदर्शन से किसी भी दूरदराज़ आदिवासी क्षेत्र का बच्चा बड़े लक्ष्य हासिल कर सकता है।


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