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विकसित भारत 2047 के लिए आध्यात्मिकता और सामाजिक समरसता जरूरी: राष्ट्रपति मुर्मु

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (18 जून 2026) मध्य प्रदेश के बैतूल में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा आयोजित ‘आध्यात्मिक जागृति द्वारा जनजातीय समाज का सशक्तिकरण’ कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।

सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि उपभोक्तावादी संस्कृति से प्रेरित आज की तेज़ रफ्तार दुनिया में आध्यात्मिक शुद्धता समाज के हर वर्ग के लिए अत्यंत आवश्यक हो गई है। इसी आधार पर समानतापूर्ण आचरण और प्राकृतिक संसाधनों के प्रति संवेदनशील जीवनशैली विकसित की जा सकती है, जो दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ हो। उन्होंने कहा कि तनाव और संघर्ष से ग्रस्त वर्तमान विश्व में इसकी आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। ऐसे समय में ‘आध्यात्मिक जागृति द्वारा जनजातीय समाज का सशक्तिकरण’ जैसे सम्मेलन और अधिक महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय समुदायों की जीवनशैली स्वाभाविक रूप से आध्यात्मिकता की मूल प्रेरणाओं के अनुरूप है। प्राकृतिक संसाधनों के साथ उनका गहरा जुड़ाव उनकी एक ऐसी शक्ति है, जो जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सार्वभौमिक कल्याण के प्रति समर्पित सोच और जीवनशैली को बढ़ावा देती है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि ब्रह्माकुमारी संस्था इसी दृष्टिकोण के साथ लंबे समय से देश के विभिन्न भागों में जनजातीय समुदायों के साथ मिलकर महत्वपूर्ण कार्य कर रही है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय जीवन-मूल्यों के अनुरूप कार्य करने वाले किसी भी संगठन को यह ध्यान रखना चाहिए कि समाज के किसी भी वर्ग का सशक्तिकरण केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं हो सकता। वास्तविक सशक्तिकरण तब होता है जब व्यक्ति आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और जागरूकता के साथ कार्य करे तथा अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति भी सजग रहे। आध्यात्मिक जागृति व्यक्ति को उसकी आंतरिक शक्तियों का बोध कराती है और उसे सकारात्मक सोच तथा जीवन के उच्च उद्देश्यों से जोड़ती है।

राष्ट्रपति ने कहा कि विकास और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन ही एक मजबूत और समृद्ध समाज की आधारशिला है। सार्थक विकास वही है जो हमारी जड़ों और मूल जीवन-मूल्यों से शक्ति प्राप्त करे तथा उन्हें और अधिक सुदृढ़ बनाए। उन्होंने कहा कि जब हम इस समग्र दृष्टिकोण के साथ कार्य करेंगे, तभी समाज में समरसता और समानता की सशक्त धारा प्रवाहित होगी तथा समावेशी विकास के नए मानदंड स्थापित किए जा सकेंगे।

राष्ट्रपति ने सभी नागरिकों से विकसित भारत 2047 के निर्माण के लिए और अधिक प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और मानव कल्याण को समावेशी विकास के आधार स्तंभ बनाकर ही विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।


आईएमए की पासिंग आउट परेड में राष्ट्रपति मुर्मू का संबोधन, महिला कैडेट्स को बताया नए भारत की ताकत

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देहरादून- भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में 158वें रेगुलर कोर्स और 141वें टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स की पासिंग आउट परेड की समीक्षा की।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने अधिकारी कैडेट्स को देश के सबसे कठिन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में से एक को सफलतापूर्वक पूरा करने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि उनका साहस और विवेक भविष्य में उनकी सबसे बड़ी ताकत होंगे।

राष्ट्रपति ने विशेष रूप से परेड में शामिल नौ महिला कैडेट्स को देखकर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने इसे भारतीय सैन्य अकादमी के इतिहास का एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण बताया। राष्ट्रपति ने कहा कि यह केवल भारतीय सशस्त्र बलों के इतिहास में एक नया अध्याय नहीं है, बल्कि महिला-नेतृत्व वाले विकास की दिशा में भारत की प्रगति का प्रेरणादायक उदाहरण भी है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में और अधिक महिला कैडेट्स अकादमी का हिस्सा बनेंगी।

राष्ट्रपति मुर्मू ने मित्र देशों से आए विदेशी कैडेट्स को भी बधाई देते हुए कहा कि वे आईएमए से प्राप्त मूल्यों और प्रशिक्षण के बल पर अपने-अपने देशों की सेनाओं में उत्कृष्ट योगदान देंगे।

उन्होंने कहा कि आईएमए में विदेशी कैडेट्स की मौजूदगी भारत की मित्रता, सहयोग और वैश्विक शांति के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। यहां विकसित होने वाले आपसी विश्वास और पेशेवर संबंध देशों के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

राष्ट्रपति ने युवा अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि वे देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता के रक्षक हैं और 140 करोड़ से अधिक भारतीयों के विश्वास की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है। उन्होंने उन्हें हमेशा सेवा को सर्वोच्च कर्तव्य मानने की सलाह दी।

राष्ट्रपति ने कहा कि बदलती सुरक्षा चुनौतियों, तकनीकी प्रगति और जटिल वैश्विक परिस्थितियों के इस दौर में भारतीय सेना को हमेशा भविष्य के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने युवा अधिकारियों से आजीवन सीखते रहने, साहसिक निर्णय लेने और नैतिक नेतृत्व का परिचय देने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि एक सैन्य अधिकारी के रूप में उनकी जिम्मेदारी केवल नेतृत्व करना ही नहीं, बल्कि अपने सैनिकों का मार्गदर्शन और उनकी देखभाल करना भी है। उन्हें उदाहरण प्रस्तुत करते हुए टीम भावना, समर्पण और विश्वास को मजबूत बनाना होगा ताकि वे अपनी इकाइयों की युद्ध क्षमता को और अधिक प्रभावी बना सकें।


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने श्री शिवकुमार महास्वामीजी की 119वीं जयंती समारोह में किया संबोधन

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (1 अप्रैल, 2026) कर्नाटक के तुमकुरु स्थित श्री सिद्धगंगा मठ में डॉ. श्री श्री श्री शिवकुमार महास्वामीजी की 119वीं जयंती एवं गुरुवंदना महोत्सव में भाग लिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि श्री शिवकुमार स्वामीजी जैसे संत हमारे समाज और राष्ट्र की आत्मा का स्वरूप होते हैं। वर्ष 2019 में उनका भौतिक शरीर भले ही परम तत्व में विलीन हो गया हो, लेकिन उनकी आध्यात्मिक धारा सदैव समाज और देश का पोषण करती रहेगी। उन्होंने अपनी आध्यात्मिक गतिविधियों के माध्यम से मानवता को समृद्ध किया। गरीबों और वंचितों की सेवा के लिए समर्पित उनका जीवन, कल्याणकारी कार्यों के माध्यम से आध्यात्मिकता की अभिव्यक्ति का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

राष्ट्रपति ने श्री सिद्धगंगा मठ द्वारा स्वामीजी के महान कार्यों की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए सराहना की। उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हुई कि मठ प्राथमिक स्तर से लेकर इंजीनियरिंग और प्रबंधन की उच्च शिक्षा तक की सुविधाएं प्रदान कर रहा है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि श्री सिद्धा-गंगा अस्पताल, जो स्वामीजी के मार्गदर्शन में स्थापित किया गया था, आम जनता को उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहा है।

राष्ट्रपति ने कहा कि श्री सिद्धगंगा मठ वर्तमान युग में सेवा और आध्यात्मिकता की सदियों पुरानी परंपरा को बनाए रखते हुए उसे आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी परंपरा में ज्ञानदान को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। ज्ञान और शिक्षा व्यक्तित्व विकास और चरित्र निर्माण की आधारशिला हैं। शिक्षा ही आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त करती है। समाज के वंचित वर्गों और ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को शिक्षा प्रदान करके मठ समावेशी समाज के निर्माण में अमूल्य योगदान दे रहा है।

राष्ट्रपति ने कहा कि परिश्रम, लोकसेवा और राष्ट्रसेवा आपस में जुड़े हुए हैं। आध्यात्मिकता, लोकसेवा और राष्ट्रसेवा दोनों के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करती है। कर्नाटक इसका उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां लोकसेवा, राष्ट्रसेवा, आध्यात्मिकता और आधुनिक प्रगति के अद्भुत उदाहरण देखने को मिलते हैं। इसके लिए कर्नाटक के परिश्रमी और प्रतिभाशाली नागरिकों की सराहना की जानी चाहिए। कर्नाटक के लोगों ने राष्ट्र निर्माण में निरंतर अग्रणी योगदान दिया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि कर्नाटक आगे भी राष्ट्र निर्माण का एक प्रमुख केंद्र बना रहेगा।

राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्र निर्माण, परोपकार और कर्तव्यनिष्ठा के मार्ग पर चलकर ही हम वास्तव में श्री शिवकुमार स्वामीजी को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित कर सकते हैं।

मणिपुर के जनजातीय समुदायों के समावेशी विकास को राष्ट्रीय प्राथमिकता बताया: राष्ट्रपति मुर्मु

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भारत की राष्ट्रपति, द्रौपदी मुर्मु आज (12 दिसंबर, 2025) मणिपुर के सेनापति में एक जनसभा में शामिल हुईं। इस अवसर पर उन्होंने कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन भी किया।

सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि मणिपुर के जनजातीय समुदायों के लिए गरिमा, सुरक्षा और विकास के अवसर सुनिश्चित करना तथा देश की प्रगति में उनकी अधिक भागीदारी बढ़ाना एक राष्ट्रीय प्राथमिकता है। भारत सरकार मणिपुर में विकास को समावेशी और सतत बनाने हेतु स्थानीय नेताओं, नागरिक समाज और समुदायों के साथ मिलकर कार्य कर रही है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत सरकार देश के हर कोने तक विकास पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों के विकास पर विशेष ध्यान दे रही है। हाल के वर्षों में मणिपुर के पर्वतीय जिलों को सड़क और पुल संपर्क—जिसमें राष्ट्रीय राजमार्ग और ग्रामीण सड़कें शामिल हैं—स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल और बिजली आपूर्ति जैसे क्षेत्रों में केंद्रित निवेशों का लाभ मिला है। कौशल प्रशिक्षण, स्वयं सहायता समूह (SHGs) और वन धन जैसी आजीविका योजनाएँ लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार ला रही हैं। ये प्रयास सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं, जिसके तहत जनजातीय समुदायों के समर्थन के साथ उनकी विशिष्ट पहचान और परंपराओं का सम्मान किया जाता है।


राष्ट्रपति ने कहा कि मणिपुर की शक्ति उसकी विविधता में निहित है—उसकी संस्कृति, भाषाएँ और परंपराएँ। पहाड़ और घाटी सदैव एक-दूसरे के पूरक रहे हैं, जैसे एक ही सुंदर भूमि के दो पहलू। उन्होंने सभी समुदायों से शांति, समझ और मेल-मिलाप के प्रयासों को आगे बढ़ाने का आग्रह किया। भारत सरकार मणिपुर के लोगों की आकांक्षाओं को समझती है। उन्होंने मणिपुर के लोगों, विशेषकर इस क्षेत्र के लोगों के कल्याण और प्रगति के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि हमें एक शांतिपूर्ण और समृद्ध मणिपुर के लिए मिलकर काम करते रहना चाहिए।

इससे पहले, राष्ट्रपति ने इंफाल स्थित नुपी लान मेमोरियल कॉम्प्लेक्स में मणिपुर की वीरांगनाओं को श्रद्धांजलि अर्पित की। यह स्मारक मणिपुरी महिलाओं के साहस और त्याग को समर्पित है और उन ऐतिहासिक आंदोलनों की याद दिलाता है, जिनमें महिलाओं ने ब्रिटिश और सामंती शक्तियों को अद्वितीय साहस के साथ चुनौती दी थी।


फुटवियर उद्योग में बढ़ती आत्मनिर्भरता: राष्ट्रपति मुर्मु ने FDDI दीक्षांत समारोह में नवाचार, निर्यात और उद्यमिता पर दिया जोर

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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि आज भारत आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और वैश्विक आर्थिक मंच पर अपनी भूमिका को और विस्तार देने में सक्षम बन रहा है। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग ने ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ के तहत फुटवियर सेक्टर को ‘चैंपियन सेक्टर’ का दर्जा दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के लिए बेहतर पारिस्थितिकी तंत्र और प्रोत्साहन प्रदान कर रही है।

राष्ट्रपति ने बताया कि भारत फुटवियर उत्पादन और खपत में विश्व में दूसरे स्थान पर है। वित्त वर्ष 2024–25 के दौरान भारत का फुटवियर निर्यात 2500 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक रहा, जबकि आयात लगभग 680 मिलियन डॉलर रहा। उन्होंने कहा कि भारत का फुटवियर निर्यात आयात से लगभग चार गुना अधिक है, जो दर्शाता है कि भारत विश्व के प्रमुख फुटवियर निर्यातकों में से एक है। उन्होंने कहा कि निर्यात को और बढ़ाने के लिए फुटवियर उद्योग का विस्तार आवश्यक है। इससे छात्रों के लिए उद्यमी बनने, रोजगार सृजन करने या प्रतिष्ठानों में रोजगार पाने के अधिक अवसर बनेंगे।

राष्ट्रपति ने FDDI और यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थैम्पटन के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) पर प्रसन्नता जताई। उन्होंने कहा कि यह भारत और यूके के बीच मुक्त व्यापार समझौते के तहत सहयोग के एक और आयाम को मजबूत करता है। उन्होंने उल्लेख किया कि यह MoU सतत सामग्री और सर्कुलर इकोनॉमी प्रथाओं पर विशेष जोर देता है, जो दोनों देशों की पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

राष्ट्रपति ने कहा कि फुटवियर डिजाइन का क्षेत्र अनेक महत्वपूर्ण आयामों से जुड़ा है। उन्होंने स्नातक हो रहे छात्रों को सलाह दी कि वे व्यापक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ें और अपने कार्य के माध्यम से समाज और राष्ट्र के बहुआयामी विकास में योगदान दें। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे अपने डिजाइन के माध्यम से लोगों के स्वास्थ्य और सुविधा में सुधार लाएं; रोजगार सृजन में योगदान दें; विकास यात्रा में पिछड़े लोगों को आर्थिक अवसरों से जोड़ें; निर्यात को बढ़ाकर अर्थव्यवस्था को मजबूत करें; गुणवत्तापूर्ण उत्पादों के माध्यम से भारत के ब्रांड एंबेसडर बनें; और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के राष्ट्रीय लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान दें।


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के डायमंड जुबली समापन समारोह में युवाओं को “सदैव तैयार” रहने का संदेश दिया

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भारत की राष्ट्रपति, द्रौपदी मुर्मु ने आज (28 नवंबर, 2025) लखनऊ, उत्तर प्रदेश में भारत स्काउट्स एंड गाइड्स के डायमंड जुबली समारोह के समापन सत्र में शिरकत की और इसके 19वें राष्ट्रीय जंबूरी को संबोधित किया।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि यह गर्व का विषय है कि भारत स्काउट्स एंड गाइड्स पिछले 75 वर्षों से युवाओं का मार्गदर्शन कर रहा है और उन्हें राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित कर रहा है। उन्होंने कहा कि सेवा भावना इस संगठन की सबसे बड़ी शक्ति है। चाहे बाढ़ हो, भूकंप हो या महामारी — स्काउट्स और गाइड्स हमेशा सहायता के लिए अग्रिम पंक्ति में रहते हैं। उन्होंने राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने के लिए भी इस संगठन की सराहना की।

राष्ट्रपति ने बताया कि भारत में 63 लाख से अधिक स्काउट्स और गाइड्स हैं, जो इसे दुनिया के सबसे बड़े स्काउटिंग संगठनों में से एक बनाते हैं। उन्होंने खुशी व्यक्त की कि इनमें से 24 लाख से अधिक लड़कियाँ स्काउट्स और गाइड्स से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने इन सभी लड़कियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने अनुशासन, समर्पण और समाज-मानवता की सेवा का मार्ग चुना है।

राष्ट्रपति ने कहा कि स्काउट्स और गाइड्स का आदर्श वाक्य "सदैव तैयार" है, जिसका अर्थ है भविष्य की किसी भी चुनौती से निपटने के लिए तैयार रहना। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि तकनीकी कौशल, संचार क्षमता, टीम वर्क, समस्या समाधान और नेतृत्व जैसे गुण उनके जीवन में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होंगे।

उन्होंने कहा कि युवा ही राष्ट्र के भविष्य के निर्माता हैं और हमारी सांस्कृतिक एवं सभ्यतागत विरासत के संरक्षक भी। एक सशक्त और संवेदनशील व्यक्ति कई अन्य लोगों को सशक्त और संवेदनशील बना सकता है, ठीक उसी प्रकार जैसे एक दीपक कई दीपकों को प्रकाश देता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि युवा राष्ट्र के विकास के लिए समर्पित रहेंगे।


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने लखनऊ में ब्रह्माकुमारीज़ की वार्षिक थीम ‘विश्व एकता और विश्वास के लिए ध्यान’ का शुभारंभ किया

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भारत की राष्ट्रपति, द्रौपदी मुर्मु ने 28 नवंबर 2025 को उत्तर प्रदेश के लखनऊ में ब्रह्माकुमारीज़ संगठन की वर्ष 2025-26 की वार्षिक थीम ‘विश्व एकता और विश्वास के लिए ध्यान’ का शुभारंभ किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि आधुनिक समय में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के बल पर मानव समाज ने अभूतपूर्व प्रगति की है। आज सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल परिवर्तन और अंतरिक्ष अनुसंधान का युग है। इन क्रांतिकारी परिवर्तनों ने मानव जीवन को पहले से कहीं अधिक सुविधाजनक, सुलभ और संसाधन-संपन्न बनाया है।

उन्होंने कहा कि आज का मनुष्य अधिक शिक्षित और तकनीकी रूप से सक्षम है तथा उन्नति के अनेक अवसर उपलब्ध हैं। लेकिन तकनीकी विकास के साथ-साथ समाज में तनाव, मानसिक असुरक्षा, अविश्वास और अकेलापन भी बढ़ रहा है। ऐसे में यह आवश्यक है कि हम आगे बढ़ने के साथ-साथ आत्मचिंतन की भी यात्रा शुरू करें।

राष्ट्रपति ने कहा कि जब हम एक क्षण रुककर स्वयं से संवाद करते हैं, तब महसूस होता है कि शांति और आनंद का स्रोत बाहर नहीं, बल्कि हमारे भीतर है। आध्यात्मिक चेतना जागृत होने पर प्रेम, भाईचारा, करुणा और एकता स्वाभाविक रूप से जीवन का हिस्सा बन जाते हैं।

उन्होंने कहा कि शांत और स्थिर मन समाज में शांति के बीज बोता है और वहीं से विश्व शांति और एकता की नींव मजबूत होती है। मजबूत आत्मबल वैश्विक एकता की अवधारणा को साकार करने का मूल आधार है।

राष्ट्रपति ने ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा विश्व शांति, मानव मूल्यों, महिला सशक्तिकरण, आध्यात्मिक जागरण, शिक्षा और ध्यान के क्षेत्रों में किए जा रहे प्रेरणादायक कार्यों की सराहना की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह संस्था आगे भी एक बेहतर, शांतिपूर्ण और विश्वासपूर्ण विश्व के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहेगी।



संविधान दिवस पर राष्ट्रपति मुर्मु ने संविधान निर्माताओं को नमन किया

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भारत की राष्ट्रपति,द्रौपदी मुर्मु ने आज (26 नवंबर, 2025) नई दिल्ली स्थित संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में आयोजित संविधान दिवस समारोह की शोभा बढ़ाई।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि 2015 में बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की 125वीं जयंती के अवसर पर यह निर्णय लिया गया था कि प्रत्येक वर्ष 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाया जाएगा। यह निर्णय अत्यंत सार्थक सिद्ध हुआ है। इस दिन पूरा राष्ट्र हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था और उसके आधार स्तम्भ — संविधान — तथा उसके निर्माताओं के प्रति श्रद्धा व्यक्त करता है। “हम, भारत के लोग”, व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से संविधान में अपना विश्वास व्यक्त करते हैं। अनेक कार्यक्रमों के माध्यम से नागरिकों, विशेषकर युवाओं में संवैधानिक आदर्शों के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाती है। संविधान दिवस मनाने की परंपरा शुरू करना और उसे निरंतर आगे बढ़ाना अत्यंत प्रशंसनीय है।

राष्ट्रपति ने कहा कि संवैधानिक सभा में संसदीय प्रणाली अपनाने के पक्ष में जो मजबूत तर्क दिए गए थे, वे आज भी प्रासंगिक हैं। विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में जन आकांक्षाओं को व्यक्त करने वाला भारतीय संसद आज विश्व की अनेक लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के लिए एक उदाहरण है।

राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे संविधान की आत्मा को व्यक्त करने वाले आदर्श हैं— सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय; स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व। उन्हें यह बताते हुए प्रसन्नता हुई कि इन सभी आयामों में सांसदों ने संविधान निर्माताओं की दृष्टि को साकार किया है। उन्होंने कहा कि संसदीय प्रणाली की सफलता का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि आज भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर तेजी से अग्रसर है। लगभग 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं, जो आर्थिक न्याय के क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है।

राष्ट्रपति ने कहा कि हमारा संविधान हमारे राष्ट्रीय गौरव का दस्तावेज है। यह हमारी राष्ट्रीय पहचान का प्रमाण है। यह देश को उपनिवेशवादी मानसिकता से मुक्त होकर राष्ट्रवादी दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ने का मार्ग दिखाता है। इसी भावना के साथ सामाजिक और तकनीकी परिवर्तनों को ध्यान में रखते हुए आपराधिक न्याय प्रणाली से जुड़े महत्वपूर्ण कानून लागू किए गए हैं — भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, जो दंड की भावना नहीं बल्कि न्याय की भावना पर आधारित हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि जनता की अभिव्यक्ति को दर्शाने वाली हमारी संसदीय प्रणाली विभिन्न स्तरों पर अधिक मजबूत हुई है। वयस्क मताधिकार के प्रावधान के माध्यम से जनता की बुद्धिमत्ता में संविधान का जो विश्वास दिखाया गया है, उसकी सराहना विश्व भर में की जाती है। पिछले कुछ वर्षों में महिला मतदाताओं की बढ़ती भागीदारी ने हमारी लोकतांत्रिक चेतना को विशेष सामाजिक अभिव्यक्ति दी है। महिलाएँ, युवा, गरीब, किसान, अनुसूचित जाति और जनजाति के लोग, वंचित वर्ग तथा मध्यम व नव-मध्यम वर्ग के लोग पंचायत से संसद तक के लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत कर रहे हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि संविधान में निहित समावेशी दृष्टि हमारी शासन प्रणाली को दिशा प्रदान करती है। राज्य के नीति निदेशक तत्व हमारी शासन प्रणाली के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत हैं। संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा था कि हमने जो स्वतंत्रता प्राप्त की है, उसे सुरक्षित रखना और उसे आम जनता के लिए उपयोगी बनाना उन लोगों पर निर्भर करता है जो इस संविधान को लागू करेंगे। उन्हें प्रसन्नता हुई कि संसद ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद की भावना के अनुरूप राष्ट्रहित में कार्य किया है और आम जनता के जीवन को बेहतर बनाने के लिए निरंतर प्रयास किया है।

राष्ट्रपति ने कहा कि संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप आगे बढ़ते हुए हमारे देश की कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका ने विकास को मजबूत किया है तथा नागरिकों के जीवन में स्थिरता और सहयोग प्रदान किया है। दोनों सदनों के सदस्यों ने न केवल देश को आगे बढ़ाया है बल्कि गहन राजनीतिक चिंतन की स्वस्थ परंपरा भी विकसित की है। आने वाले समय में जब विश्व की विभिन्न लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं और संविधानों का तुलनात्मक अध्ययन होगा, तब भारतीय लोकतंत्र और संविधान का वर्णन स्वर्ण अक्षरों में किया जाएगा।

राष्ट्रपति ने कहा कि संसद के सदस्य हमारे संविधान और लोकतंत्र की गौरवशाली परंपरा के वाहक, निर्माता और साक्षी हैं। उन्हें विश्वास है कि संसद के मार्गदर्शन में भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प निश्चित रूप से पूरा होगा।


जनजातीय गौरव दिवस पर राष्ट्रपति मुर्मु का संबोधन: जनजातीय विरासत और विकास को नई दिशा

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भारत की राष्ट्रपति,द्रौपदी मुर्मु ने आज (20 नवंबर, 2025) छत्तीसगढ़ के सरगुजा, अंबिकापुर में, छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आयोजित जनजातीय गौरव दिवस समारोह में शामिल होकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।

राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि भारत, जो लोकतंत्र की जननी है, उसके इतिहास में जनजातीय समुदायों का योगदान एक गौरवमयी अध्याय है। इसके उदाहरण प्राचीन गणराज्यों में और असंख्य जनजातीय परंपराओं में दिखते हैं, जैसे कि बस्तर का ‘मुरिया दरबार’—जो कि आदिम जनजातीय जन-सभा के रूप में जाना जाता है।

राष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय विरासत की गहरी जड़ें देश के विभिन्न हिस्सों—छत्तीसगढ़, ओडिशा और झारखंड—में विद्यमान हैं। उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हुई कि इस वर्ष छत्तीसगढ़ सरकार ने 1 नवंबर से 15 नवंबर तक 'जनजातीय गौरव पखवाड़ा' बड़े स्तर पर मनाया।

राष्ट्रपति ने बताया कि पिछले एक दशक में जनजातीय समुदायों के विकास और कल्याण के लिए अनेक राष्ट्रीय स्तर की योजनाएँ बनाई और लागू की गई हैं। पिछले वर्ष गांधी जयंती के अवसर पर ‘धरती अबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान’ शुरू किया गया था, जिसके लाभ देशभर के पाँच करोड़ से अधिक जनजातीय भाइयों और बहनों तक पहुँचेंगे। वर्ष 2023 में 75 विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (PM-JANMAN) की शुरुआत की गई। ये सभी योजनाएँ जनजातीय समुदायों को दी जा रही सर्वोच्च प्राथमिकता को दर्शाती हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष पर केंद्र सरकार ने ‘आदि कर्मयोगी अभियान’ शुरू किया है, जिससे जनजातीय समुदायों के विकास प्रयासों को नई ऊर्जा मिलेगी। उन्होंने बताया कि इस अभियान में देशभर में लगभग 20 लाख स्वयंसेवकों का एक विस्तृत नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि ये स्वयंसेवक जमीनी स्तर पर कार्य करते हुए जनजातीय समुदायों के विकास को सुनिश्चित करेंगे।

\राष्ट्रपति ने प्रसन्नता जताई कि देशभर में, विशेषकर छत्तीसगढ़ में लोग वामपंथी उग्रवाद (Left Wing Extremism) के मार्ग को छोड़कर विकास की मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के सुविचारित और संगठित प्रयासों से निकट भविष्य में वामपंथी उग्रवाद का उन्मूलन संभव होगा। उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हुई कि हाल ही में आयोजित ‘बस्तर ओलंपिक’ में 1,65,000 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। उन्होंने विश्वास जताया कि जनजातीय नायकों के आदर्शों का पालन करते हुए छत्तीसगढ़ के लोग एक मजबूत, आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण में अमूल्य योगदान देंगे।



भारत-बोत्सवाना वन्यजीवन सहयोग: राष्ट्रपति मुर्मू ने चीता परियोजना का किया निरीक्षण

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज सुबह (13 नवंबर 2025) बोत्सवाना में बोत्सवाना के राष्ट्रपति, एच.ई. एडवोकेट ड्यूमा गिडीयन बोको के साथ मोकोलोडी नेचर रिज़र्व का दौरा किया। इस अवसर पर दोनों नेताओं ने घांजी क्षेत्र से लाए गए पकड़े गए चीता को क़ारंटाइन सुविधा में जारी होते देखा। यह कार्यक्रम भारत को बोत्सवाना द्वारा आठ चीते दान करने के प्रतीकात्मक अवसर के रूप में आयोजित किया गया, जो परियोजना “Project Cheetah” के तहत किया गया। यह घटना भारत-बोत्सवाना वन्यजीवन संरक्षण सहयोग में नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक है।

बाद में, राष्ट्रपति ने बोत्सवाना के उपराष्ट्रपति, न्दाबा एनकोसिनाथी गाओलाथे और अंतर्राष्ट्रीय संबंध मंत्री, डॉ. फेन्यो बुताले से अलग-अलग भेंट की।

नई दिल्ली के लिए प्रस्थान से पहले, राष्ट्रपति ने भारतीय समुदाय के सदस्यों को एक स्वागत समारोह में संबोधित किया, जिसका आयोजन भारत के उच्चायुक्त द्वारा गबरोने में किया गया था। जल शक्ति और रेल राज्य मंत्री, वी. सोमन्ना और सांसद, पारभुभाई नगरभाई वसावा और डी. के. अरुणा इस अवसर पर उपस्थित थे।


राष्ट्रपति ने भारतीय समुदाय के सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि भारतवासियों के योगदान पर देश गर्व महसूस करता है। वे भारत के सच्चे सांस्कृतिक राजदूत हैं, जो परिश्रम, ईमानदारी और सामंजस्य के मूल्य का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो भारत और बोत्सवाना दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने समुदाय से बोत्सवाना के विकास में योगदान जारी रखने और भारत के साथ संबंधों को मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने ओसीआई योजना और प्रवासी भारतीय दिवस जैसी पहलों का लाभ उठाने और भारत के विकास में अपने अनुभव साझा करने के लिए भी प्रेरित किया।

राष्ट्रपति ने बताया कि भारत और बोत्सवाना का संबंध विश्वास, सम्मान और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित है। उन्होंने कहा कि बोत्सवाना के राष्ट्रपति बोको के साथ हुई चर्चाओं में यह तय किया गया कि भारत और बोत्सवाना व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य, डिजिटल प्रौद्योगिकी, कृषि और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में और सहयोग करेंगे।

सफल अफ्रीकी राष्ट्रों – अंगोला और बोत्सवाना की यात्रा के बाद राष्ट्रपति 14 नवंबर की सुबह नई दिल्ली पहुंचेंगी।


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ICC महिला वर्ल्ड कप 2025 विजेता भारतीय टीम को किया सम्मानित

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नई दिल्ली- ICC महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप 2025 जीतने वाली भारतीय महिला क्रिकेट टीम के सदस्य आज (6 नवंबर 2025) राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भेंट करने पहुंचे।

राष्ट्रपति ने टीम के प्रत्येक सदस्य को बधाई दी और कहा कि इस टीम ने क्रिकेट वर्ल्ड कप जीतकर इतिहास रच दिया है। देश के हर कोने में और विदेशों में करोड़ों भारतीय इस जीत का जश्न मना रहे हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि यह टीम भारत का प्रतिबिंब है। ये खिलाड़ी अलग-अलग क्षेत्रों, सामाजिक पृष्ठभूमि और परिस्थितियों से आती हैं, लेकिन वे एक ही टीम—भारत—का हिस्सा हैं। यह टीम भारत को उसकी श्रेष्ठतम छवि में प्रस्तुत करती है।

उन्होंने बताया कि इस टीम ने सभी भारतीयों के आत्मविश्वास को मजबूत किया, सात बार की विश्व चैम्पियन और तब तक अप्रतिद्वंद्वी ऑस्ट्रेलियाई टीम को हराकर। मजबूत टीम के खिलाफ फाइनल मैच में बड़ी जीत हासिल करना Team India की उत्कृष्टता का यादगार उदाहरण है।

राष्ट्रपति ने कहा कि ये खिलाड़ी अब रोल मॉडल बन चुकी हैं। विशेष रूप से युवा पीढ़ी और लड़कियां उनके संघर्ष और सफलता से प्रेरित होंगी। उन्होंने विश्वास जताया कि इसी गुणों के साथ जिन्होंने इतिहास रचा, ये खिलाड़ी भविष्य में भी भारतीय क्रिकेट को शीर्ष पर बनाए रखेंगी।

राष्ट्रपति ने कहा कि टीम ने आशा और निराशा के उतार-चढ़ाव का अनुभव किया होगा, कभी-कभी नींद भी खोई होगी। लेकिन उन्होंने सभी चुनौतियों का सामना किया और सफलता हासिल की। उन्होंने बताया कि न्यूज़ीलैंड के खिलाफ जीत के बाद लोगों ने महसूस किया कि हमारी बेटियां किसी भी मुश्किल में जीत हासिल करेंगी।

उन्होंने कहा कि टीम की सफलता के पीछे कड़ी मेहनत, उत्कृष्ट खेल कौशल, दृढ़ संकल्प, परिवार और क्रिकेट प्रेमियों का स्नेह और आशीर्वाद है। उन्होंने कहा कि क्रिकेट जैसे टीम खेल में हर सदस्य का पूरी तरह से समर्पित रहना आवश्यक है। राष्ट्रपति ने हेड कोच, बॉलिंग कोच, फील्डिंग कोच और सपोर्ट स्टाफ की भी प्रशंसा की। उन्होंने टीम से कहा कि वे इसी तरह अपनी प्रदर्शन से Team India के लिए नए रिकॉर्ड बनाते रहें।




राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने हरिद्वार में पतंजलि विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समारोह में छात्रों का आह्वान किया — “व्यक्ति निर्माण से ही राष्ट्र निर्माण संभव”

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज पतंजलि विश्वविद्यालय, हरिद्वार के द्वितीय दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।

इस अवसर पर संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भारत के महान विभूतियों ने मानव संस्कृति के विकास में अमूल्य योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि महर्षि पतंजलि, जो महानतम ऋषियों में से एक हैं, ने योग के माध्यम से मन की अशुद्धियों को, व्याकरण के माध्यम से वाणी की अशुद्धियों को, और आयुर्वेद के माध्यम से शरीर की अशुद्धियों को दूर किया। राष्ट्रपति ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि पतंजलि विश्वविद्यालय महर्षि पतंजलि की महान परंपरा को समाज तक पहुँचाने का कार्य कर रहा है।

राष्ट्रपति ने कहा कि पतंजलि विश्वविद्यालय योग, आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्रों में शिक्षा और अनुसंधान को आगे बढ़ा रहा है, जो एक स्वस्थ भारत के निर्माण में सराहनीय प्रयास है।

राष्ट्रपति ने विश्वविद्यालय की भारत-केंद्रित शिक्षा दृष्टि की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि विश्व बंधुत्व की भावना, प्राचीन वैदिक ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान के समन्वय, तथा वैश्विक चुनौतियों के समाधान की दृष्टि से यह विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक संदर्भों में आगे बढ़ा रहा है।

उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय के आदर्शों के अनुरूप शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों ने यह अनुभव किया होगा कि पर्यावरण की रक्षा और प्रकृति के अनुकूल जीवनशैली अपनाना मानवता के भविष्य के लिए आवश्यक है। राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि ये विद्यार्थी जलवायु परिवर्तन सहित सभी वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए सदैव तत्पर रहेंगे।

राष्ट्रपति ने कहा कि सर्वजन कल्याण की भावना हमारी संस्कृति की पहचान है। यही कल्याण सद्भाव और समावेशी विकास का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस विश्वविद्यालय के विद्यार्थी सद्भाव के इस जीवन-मूल्य को व्यवहार में लाएँगे।

राष्ट्रपति ने कहा कि व्यक्ति निर्माण से परिवार निर्माण, समाज निर्माण और अंततः राष्ट्र निर्माण होता है। उन्होंने इस तथ्य पर प्रसन्नता व्यक्त की कि पतंजलि विश्वविद्यालय ने व्यक्ति विकास के माध्यम से राष्ट्र निर्माण के मार्ग को अपनाया है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थी अपने सदाचार, ज्ञान और कर्मशीलता से एक स्वस्थ समाज और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।


मंगोलिया के राष्ट्रपति उखना खुरेलसुख भारत की चार दिवसीय राजकीय यात्रा पर आएंगे

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नई दिल्ली- मंगोलिया के राष्ट्रपति उखना खुरेलसुख सोमवार से भारत की चार दिवसीय राजकीय यात्रा पर आएंगे। यह उनकी भारत की पहली यात्रा है बतौर राष्ट्राध्यक्ष, जो राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के आमंत्रण पर हो रही है।

राष्ट्रपति खुरेलसुख के साथ एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी आएगा, जिसमें कैबिनेट मंत्री, सांसद, वरिष्ठ अधिकारी, उद्योगपति और सांस्कृतिक प्रतिनिधि शामिल होंगे।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु उनके सम्मान में एक राजकीय भोज (State Banquet) आयोजित करेंगी। राष्ट्रपति खुरेलसुख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात कर भारत-मंगोलिया संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा करेंगे। इस दौरान उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर भी उनसे भेंट करेंगे।

मंत्रालय ने बताया कि यह यात्रा दोनों देशों को आपसी संबंधों की प्रगति की समीक्षा करने, रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने और क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श करने का अवसर प्रदान करेगी।

भारत और मंगोलिया के बीच 1955 में राजनयिक संबंध स्थापित हुए थे। तब से दोनों देशों ने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों पर आधारित घनिष्ठ साझेदारी विकसित की है, जो रक्षा, ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य कई क्षेत्रों में फैली हुई है।


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