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आकाशीय बिजली का कहर: मासूम समेत 3 की मौत, 6 झुलसे

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 शहडोल : मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में रविवार को हुई मूसलाधार बारिश के दौरान आकाशीय बिजली गिरने से भारी तबाही हुई। जिले के जैतपुर थाना क्षेत्र के अलग-अलग गांवों में घटी इन घटनाओं में एक मासूम बच्चे समेत तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि छह से अधिक लोग गंभीर रूप से झुलस गए। घायलों का इलाज जिला अस्पताल में जारी है।


खेत में रोपाई के दौरान हादसा

पहली घटना झींक बिजुरी चौकी के ग्राम झींक की है, जहाँ खेत में धान की रोपाई कर रहे ग्रामीणों पर अचानक कड़कड़ाती बिजली गिर गई। हादसे में 28 वर्षीय किशन और उनकी पत्नी राकेश गंभीर रूप से झुलस गए। ग्रामीणों का आरोप है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर अनुपस्थित थे, जिसके बाद घायलों को जिला अस्पताल शहडोल भेजा गया। इलाज के दौरान किशन ने दम तोड़ दिया।

मौके पर ही तोड़ा दम

दूसरी घटना दरशिला चौकी के छुटकी टोला की है, जहाँ खेत में काम कर रहे 45 वर्षीय सुंदर पाव पर गाज गिर गई, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, ग्राम मुसरा में घर के बाहर खड़े 11 वर्षीय मासूम धर्मेंद्र सिंह (पिता प्रेमलाल सिंह) की आकाशीय बिजली की चपेट में आने से दर्दनाक मौत हो गई। धर्मेंद्र को बचाने दौड़ीं उनकी भाभी भी झुलस गईं।

इसके अतिरिक्त रेकोवा गांव में भी खेत में काम कर रहे दो अन्य लोग बिजली की चपेट में आकर घायल हुए हैं। डॉक्टरों के अनुसार सभी घायलों की स्थिति फिलहाल स्थिर और खतरे से बाहर है।

प्रशासन व मौसम विभाग की चेतावनी

मौसम विभाग ने आगामी दिनों में तेज गरज-चमक की संभावना व्यक्त करते हुए किसानों व ग्रामीणों को सतर्क रहने की हिदायत दी है। बारिश व कड़क के दौरान खुले खेतों में काम न करने तथा ऊंचे पेड़ों के नीचे शरण न लेने की अपील की गई है।

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का संबोधन: शिक्षा, जनजातीय विकास और विकसित भारत पर दिया विशेष जोर

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (21 जून 2026) मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह में भाग लिया।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा किसी भी व्यक्ति या समुदाय के विकास का सबसे प्रभावी माध्यम है। इसलिए जनजातीय समुदाय की शैक्षिक उन्नति के लिए प्रयास करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। हमें सामूहिक रूप से यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जनजातीय युवाओं को आधुनिक विकास में योगदान देने का अवसर मिले, साथ ही वे अपनी जनजातीय पहचान और विशिष्टता को उसके वास्तविक स्वरूप में सुरक्षित रख सकें। जनजातीय समुदाय के पारंपरिक कौशल और ज्ञान का विभिन्न माध्यमों से प्रसार भी किया जाना चाहिए। जनजातीय ज्ञान एवं शिल्प परंपराओं का व्यापक अध्ययन देश के सभी नागरिकों के लिए लाभकारी होगा। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जैसे शैक्षणिक संस्थानों को इस दिशा में विशेष प्रयास करने चाहिए।

राष्ट्रपति ने कहा कि विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान करने के अलावा उच्च शिक्षण संस्थान नवाचार और अनुसंधान के प्रमुख केंद्र भी होते हैं। छात्रों में रचनात्मक सोच, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और उद्यमशीलता की भावना विकसित करना इन संस्थानों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। साथ ही, छात्रों में भारतीय संस्कृति, परंपराओं और भाषाओं के प्रति गौरव की भावना विकसित करना भी आवश्यक है। आधुनिकता और परंपरा के संतुलित समन्वय से ही देश का समग्र विकास संभव होगा।

राष्ट्रपति ने कहा कि उन अध्ययनों और अनुसंधानों पर विशेष बल दिया जाना चाहिए जो राष्ट्र और समाज के लिए उपयोगी हों। पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, वंचित वर्गों का विकास, स्वच्छता और सामाजिक समरसता जैसे विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने से समाज को लाभ होता है। इन विषयों पर अध्ययन और अनुसंधान देश के विकास के लिए योजनाएँ बनाने में भी सहायक होते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि आज दुनिया तेजी से बदल रही है। हमारी भाषा और जीवनशैली में भी तेज़ी से परिवर्तन हो रहा है। लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि कुछ शाश्वत मूल्य सदैव हमें शक्ति प्रदान करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति के मूल्यों और आदर्शों को अपने जीवन का आधार बनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सत्य, अहिंसा, करुणा, सेवा और ईमानदारी जैसे मूल्य हर युग में हमारी चेतना के मूल तत्व रहे हैं। इन मूल्यों को अपनाकर वे कठिन परिस्थितियों का भी दृढ़ता से सामना कर सकते हैं, आदर्श नागरिक बन सकते हैं और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों से कहा कि वे केवल अपने परिवारों या विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि नहीं हैं, बल्कि राष्ट्र की आकांक्षाओं और उसके भविष्य के निर्माता हैं। उनके ज्ञान, ऊर्जा और संकल्प से ही विकसित भारत का सपना साकार होगा। उन्होंने उनसे आग्रह किया कि वे अपनी शिक्षा और प्रतिभा का उपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए नहीं, बल्कि समाज के व्यापक हित के लिए भी करें। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने आसपास के वंचित और ग्रामीण समुदायों की चुनौतियों को समझने, उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान विकसित करने, उन्हें सशक्त बनाने और विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में योगदान देने की सलाह दी।

राष्ट्रपति ने कहा कि देश डिजिटल प्रौद्योगिकी, स्टार्टअप, हरित ऊर्जा, अंतरिक्ष अनुसंधान और आधुनिक अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में नई ऊँचाइयाँ प्राप्त कर रहा है। उन्होंने युवाओं को इन अवसरों का लाभ उठाकर वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बनाने की सलाह दी। साथ ही उन्होंने पर्यावरण के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जल, वन और भूमि संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग, जैव विविधता की रक्षा तथा सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता उनके जीवन की यात्रा का अभिन्न हिस्सा होना चाहिए।


मध्य प्रदेश में ‘हाउसिंग फॉर ऑल’ को बड़ी ताकत: 80 हजार से अधिक परिवारों को मिला पीएम आवास योजना का लाभ

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मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना–शहरी (PMAY-U) के तहत आज एक ऐतिहासिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इंदौर जिले के सांवेर में आयोजित इस कार्यक्रम में केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में 80 हजार से अधिक परिवारों को आवासीय लाभ प्रदान किए गए।

कार्यक्रम में राज्य के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।

42 हजार से अधिक परिवारों को स्वीकृति पत्र

प्रधानमंत्री आवास योजना–शहरी 2.0 के तहत 42 हजार से अधिक पात्र हितग्राहियों को आवास स्वीकृति पत्र वितरित किए गए। इसके लिए सरकार द्वारा लगभग 1,050 करोड़ रुपये की सब्सिडी प्रदान की जा रही है। वहीं, राज्य के विभिन्न जिलों में 38 हजार परिवारों ने अपने नए पक्के मकानों में गृह प्रवेश किया।

‘हर घर सम्मान, सुरक्षा और उम्मीद का प्रतीक’

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने लाभार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि नया घर केवल चार दीवारें नहीं, बल्कि परिवारों के लिए सम्मान, सुरक्षा और बेहतर भविष्य की उम्मीद का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ‘सबके लिए आवास’ के संकल्प को पूरा करने के लिए लगातार काम कर रही है।

आवास योजना के क्रियान्वयन में अग्रणी है मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश प्रधानमंत्री आवास योजना के सफल क्रियान्वयन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। PMAY-U और PMAY-U 2.0 के तहत राज्य में अब तक 10.39 लाख से अधिक आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं, जबकि 9.08 लाख आवासों का निर्माण पूरा हो चुका है।

महिलाओं को भी मिल रहा सशक्तिकरण

योजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि मकान का स्वामित्व महिला सदस्य के नाम या संयुक्त स्वामित्व में दिया जाता है। इससे महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिल रहा है।

1 करोड़ परिवारों के आवासीय सपनों को मिलेगा सहारा

PMAY-U 2.0 के तहत केंद्र सरकार देशभर के 1 करोड़ अतिरिक्त EWS, LIG और MIG परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराने के लिए वित्तीय सहायता दे रही है। पात्र परिवारों को शहरी क्षेत्रों में घर बनाने, खरीदने या किराए पर लेने के लिए ₹2.5 लाख तक की सहायता प्रदान की जा रही है।

मुख्य बातें

  • मध्य प्रदेश में 80 हजार से अधिक परिवारों को PMAY-U का लाभ।

  • 42 हजार से अधिक हितग्राहियों को आवास स्वीकृति पत्र वितरित।

  • ₹1,050 करोड़ की सब्सिडी का प्रावधान।

  • 38 हजार परिवारों ने नए पक्के घरों में किया गृह प्रवेश।

  • राज्य में अब तक 10.39 लाख आवास स्वीकृत, 9.08 लाख पूर्ण।

  • महिलाओं के नाम या संयुक्त स्वामित्व में दिए जा रहे घर।


अंतरराष्ट्रीय सिकल सेल दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय उन्मूलन मिशन की उपलब्धियों को सराहा

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ओंकारेश्वर (मध्य प्रदेश)- भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सिकल सेल दिवस कार्यक्रम में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने सिकल सेल रोग के उन्मूलन की दिशा में देश द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए इसे स्वास्थ्य क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण चुनौती से निपटने की सार्थक पहल बताया।

राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन के तहत स्क्रीनिंग का लक्ष्य निर्धारित समय से पहले पूरा किया जाना एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि नवजात शिशुओं से लेकर 40 वर्ष तक की आयु के लगभग 7 करोड़ लोगों की जांच की गई है, जो विश्व के सबसे बड़े आनुवंशिक रोग स्क्रीनिंग अभियानों में से एक है।

उन्होंने कहा कि मिशन मोड में की गई स्क्रीनिंग के परिणामस्वरूप अब तक लगभग 2.5 लाख सिकल सेल रोगियों की पहचान की गई है, जबकि 20 लाख से अधिक वाहकों (Carriers) का भी पता लगाया गया है। राष्ट्रपति ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में वाहकों की पहचान भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों को समझने और उनके समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

राष्ट्रपति ने केंद्र और राज्य सरकारों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने न केवल मरीजों और वाहकों की पहचान की है, बल्कि उनके उचित उपचार और स्वास्थ्य देखभाल की भी व्यवस्था सुनिश्चित की है।

उन्होंने विशेष रूप से मध्य प्रदेश सरकार के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि राज्य ने 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2025 तक चलाए गए "स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान" के तहत 4 लाख से अधिक महिलाओं की स्क्रीनिंग कर एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।

राष्ट्रपति ने यह भी उल्लेख किया कि मध्य प्रदेश सरकार ने पिछले वर्ष अंतरराष्ट्रीय सिकल सेल दिवस पर "सिकल मित्र" पहल शुरू की थी। इस पहल के अंतर्गत सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थाओं, स्वयंसेवी संगठनों तथा एनसीसी कैडेट्स के प्रतिनिधियों को जागरूकता फैलाने और मरीजों की सहायता के लिए प्रशिक्षित किया गया है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी राज्यों की सक्रिय भागीदारी और सामूहिक प्रयासों से भारत वर्ष 2047 से पहले ही सिकल सेल रोग से मुक्ति के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल होगा।


विकसित भारत 2047 के लिए आध्यात्मिकता और सामाजिक समरसता जरूरी: राष्ट्रपति मुर्मु

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (18 जून 2026) मध्य प्रदेश के बैतूल में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा आयोजित ‘आध्यात्मिक जागृति द्वारा जनजातीय समाज का सशक्तिकरण’ कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।

सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि उपभोक्तावादी संस्कृति से प्रेरित आज की तेज़ रफ्तार दुनिया में आध्यात्मिक शुद्धता समाज के हर वर्ग के लिए अत्यंत आवश्यक हो गई है। इसी आधार पर समानतापूर्ण आचरण और प्राकृतिक संसाधनों के प्रति संवेदनशील जीवनशैली विकसित की जा सकती है, जो दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ हो। उन्होंने कहा कि तनाव और संघर्ष से ग्रस्त वर्तमान विश्व में इसकी आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। ऐसे समय में ‘आध्यात्मिक जागृति द्वारा जनजातीय समाज का सशक्तिकरण’ जैसे सम्मेलन और अधिक महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय समुदायों की जीवनशैली स्वाभाविक रूप से आध्यात्मिकता की मूल प्रेरणाओं के अनुरूप है। प्राकृतिक संसाधनों के साथ उनका गहरा जुड़ाव उनकी एक ऐसी शक्ति है, जो जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सार्वभौमिक कल्याण के प्रति समर्पित सोच और जीवनशैली को बढ़ावा देती है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि ब्रह्माकुमारी संस्था इसी दृष्टिकोण के साथ लंबे समय से देश के विभिन्न भागों में जनजातीय समुदायों के साथ मिलकर महत्वपूर्ण कार्य कर रही है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय जीवन-मूल्यों के अनुरूप कार्य करने वाले किसी भी संगठन को यह ध्यान रखना चाहिए कि समाज के किसी भी वर्ग का सशक्तिकरण केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं हो सकता। वास्तविक सशक्तिकरण तब होता है जब व्यक्ति आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और जागरूकता के साथ कार्य करे तथा अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति भी सजग रहे। आध्यात्मिक जागृति व्यक्ति को उसकी आंतरिक शक्तियों का बोध कराती है और उसे सकारात्मक सोच तथा जीवन के उच्च उद्देश्यों से जोड़ती है।

राष्ट्रपति ने कहा कि विकास और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन ही एक मजबूत और समृद्ध समाज की आधारशिला है। सार्थक विकास वही है जो हमारी जड़ों और मूल जीवन-मूल्यों से शक्ति प्राप्त करे तथा उन्हें और अधिक सुदृढ़ बनाए। उन्होंने कहा कि जब हम इस समग्र दृष्टिकोण के साथ कार्य करेंगे, तभी समाज में समरसता और समानता की सशक्त धारा प्रवाहित होगी तथा समावेशी विकास के नए मानदंड स्थापित किए जा सकेंगे।

राष्ट्रपति ने सभी नागरिकों से विकसित भारत 2047 के निर्माण के लिए और अधिक प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और मानव कल्याण को समावेशी विकास के आधार स्तंभ बनाकर ही विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।


जल संकट के बीच रीवा में वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था शुरू, बिछाई जा रही नई पाइपलाइन

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पंचायत प्रतिनिधियों ने श्रीफल तोड़कर किया कार्य का शुभारंभ 

आरंग- ग्राम रीवा में गहराए भारी पेयजल संकट को देखते हुए ग्राम पंचायत ने बड़ी राहत दी है। ग्रामीणों को पानी की किल्लत से निजात दिलाने के लिए रविवार को गांव में वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था के तहत पीएचई विभाग द्वारा नई पाइपलाइन विस्तार का कार्य शुरू किया गया। उसके पहले पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों की मौजूदगी में विधि-विधान से श्रीफल तोड़कर इस कार्य का शुभारंभ किया गया।


भीषण गर्मी के इस दौर में पानी की किल्लत से जूझ रहे ग्रामीणों के लिए यह बड़ी राहत साबित होगी। इस दौरान सरपंच घंसियाराम साहू ने कहा कि गांव के हर घर तक पीने का साफ पानी पहुंचाना हमारी पहली प्राथमिकता है। पेयजल की इस विकट समस्या को अस्थाई रूप से दूर करने के लिए यह वैकल्पिक पाइपलाइन बिछाई जा रही है, जिससे सभी को पानी सुलभता से मिल सके।


इस मौके पर मुख्य रूप से सरपंच घंसियाराम साहू, उपसरपंच सूरज साहू सहित पंच रमेश चंद्राकर, मनबोध साहू, वेदप्रकाश साहू, घनश्याम डहरिया, चंद्रकली टिकेश्वर डहरिया, धनेश्वरी संजू ढीढी, मीरा अश्विनी चंद्राकर और बड़ी संख्या में ग्रामीण जन उपस्थित थे।

रीवा में गहराया जल संकट, हाइड्रो फ्रैक्चरिंग से बढ़ेगी हैंडपंपों की ताकत

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पीएचई टीम और नायब तहसीलदार ने ग्रामीणों के साथ बनाई कार्ययोजना; भूगर्भ वैज्ञानिक भी पहुंचे  

आरंग- भीषण गर्मी के बीच ग्राम रीवा में पेयजल की किल्लत गहरा गई है। पानी की बूंद-बूंद को तरसते ग्रामीणों की सुध लेने शुक्रवार को प्रशासनिक अमला अलर्ट मोड पर गांव पहुंचा। 

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) के अधिकारियों और मंदिर हसौद के नायब तहसीलदार ने सीधे मोर्चा संभालते हुए ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों से चर्चा की और संकट से निपटने के लिए वैकल्पिक कार्ययोजना पेश की, जिस पर ग्रामीणों ने सहमति जताई है। गांव में दम तोड़ते जलस्तर को देखते हुए पीएचई विभाग लगातार जद्दोजहद कर रहा है। कम पानी उगलने वाले हैंडपंपों की हाइड्रो फ्रैक्चरिंग मशीनों से जांच की जा रही है, ताकि उनकी जल क्षमता को बढ़ाया जा सके। संकट की गंभीरता को देखते हुए पीएचई ने भूगर्भ विशेषज्ञों (जियोलॉजिस्ट) की टीम को मैदान में उतारा है। यह टीम गांव के भीतर भूगर्भ जल का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर रही है, ताकि पानी की उपलब्धता वाले नए पॉइंट चिह्नित किए जा सकें। इस दौरान सरपंच, उपसरपंच सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।


पीएमजीएसवाई के 25 वर्ष पूरे, पीएमजीएसवाई-IV का राष्ट्रीय शुभारंभ

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प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana – PMGSY) के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर सिल्वर जुबली समारोह और PMGSY-IV का राष्ट्रीय शुभारंभ 10 मई को मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के भैरुंडा में आयोजित किया जाएगा।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान  मुख्य अतिथि होंगे, जबकि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव भी कार्यक्रम में शामिल होंगे।

ग्रामीण विकास को बड़ा बढ़ावा

इस अवसर पर केंद्र सरकार मध्य प्रदेश को PMGSY-IV के तहत 973 सड़कों के निर्माण की मंजूरी देगी, जिनकी कुल लंबाई 2,117 किलोमीटर होगी। इससे राज्य की 987 बस्तियों को लाभ मिलेगा।

इसके साथ ही पीएम-जनमन योजना के तहत 384 किलोमीटर से अधिक सड़क परियोजनाओं को भी मंजूरी दी जाएगी, जिससे 168 पिछड़ी बस्तियों को सीधा फायदा मिलेगा।

₹18,907 करोड़ का आवंटन

कार्यक्रम में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए PMGSY के तहत ₹18,907 करोड़ के आवंटन की घोषणा की जाएगी, जिसमें मध्य प्रदेश के लिए ₹830 करोड़ शामिल हैं।

ग्रामीण कनेक्टिविटी पर जोर

सरकार का मानना है कि गांव की सड़क केवल यातायात का साधन नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि और बाजार तक पहुंच का माध्यम है। यह योजना ग्रामीण भारत के जीवन स्तर को सुधारने में अहम भूमिका निभा रही है।

अन्य प्रमुख उपस्थितियां

इस कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री, राज्य सरकार के मंत्री, जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे।

नई दिशा

यह आयोजन ग्रामीण सड़क निर्माण में तकनीक आधारित विकास और देशभर में बेहतर कनेक्टिविटी की दिशा में एक नए चरण की शुरुआत माना जा रहा है।

​ रीवा में पहली बार सजेगी 'चंदैनी' की महफ़िल, तैयारियां जोरों पर

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 आरंग- छत्तीसगढ़ की माटी की खुशबू और लोक परंपराओं को जीवंत रखने के लिए ग्राम रीवा (गढ़रीवां) में  22 अप्रैल को एक भव्य आयोजन होने जा रहा है। 'लोरिक नगर' के नाम से विख्यात इस गांव में पहली बार लोरिक चंदा (चंदैनी) लोकनाट्य महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।



बैठक में बनी रणनीति 

​इस महोत्सव को लेकर ग्रामीणों में भारी उत्साह है। शनिवार को ग्राम पंचायत में सरपंच घसियाराम साहू की अध्यक्षता में एक विशेष बैठक हुई। इसमें पंचायत प्रतिनिधियों और 'पीपला फाउंडेशन' के सदस्यों ने कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की। महोत्सव को सफल बनाने के लिए ग्रामीणों ने जनसहयोग का संकल्प लिया है, जिसमें फाउंडेशन ने 10 हजार रुपये की शुरुआती मदद भी दी है।

दिग्गज हस्तियां होंगी शामिल 

​इस सांस्कृतिक महोत्सव के मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मोना सेन करेंगी। साथ ही, क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और इस विधा के जानकार भी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे।

विलुप्त होती कला को बचाने की पहल 

​सरपंच घसियाराम साहू और पीपला फाउंडेशन के  संयोजक महेंद्र कुमार पटेल ने चिंता जताते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति में रची-बसी 'चंदैनी' विधा अब धीरे-धीरे कम हो रही है। एक समय था जब लोग रात-रात भर चंदैनी देखने दूर-दूर जाया करते थे। आज इस विरासत को फिर से जीवित करने और सहेजने की जरूरत है। इसी क्रम में यह प्रयास किया जा रहा है।



प्रदेश में पहली बार इस तरह का विशेष चंदैनी महोत्सव आयोजित हो रहा है।

​यह आयोजन न केवल मनोरंजन का साधन बनेगा, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध लोक संस्कृति से रूबरू होने का मौका भी देगा। पूरे क्षेत्र में इस महोत्सव को लेकर जबरदस्त चर्चा है।

22 अप्रैल को गढ़ रीवा में आयोजित होगा 'लोरिक-चंदा' लोकनाट्य महोत्सव

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नवा रायपुर/आरंग- छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोकगाथाओं में रची-बसी 'लोरिक चंदा' (चंदैनी लोकनाट्य) विधा को संरक्षण देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। ऐतिहासिक ग्राम गढ़ रीवा में आगामी 22 अप्रैल को एक भव्य 'लोरिक चंदा लोकनाट्य महोत्सव' का आयोजन किया जाएगा। यह पहल दम तोड़ती लोक कला को नई ऊर्जा देने और युवा पीढ़ी तक पहुँचाने के उद्देश्य से की जा रही है।

 कैबिनेट मंत्री से मिला समर्थन 

​महोत्सव की तैयारियों के सिलसिले में आज मंगलवार को  ग्राम गढ़ रीवा के 73 वर्षीय सरपंच घसियाराम साहू, उपसरपंच सूरज साहू तथा पीपला वेलफेयर फाउंडेशन के प्रतिनिधि दूजेराम धीवर, महेन्द्र पटेल एवं प्रतीक कुमार टोंड्रे ने नवा रायपुर में कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब से सौजन्य भेंट की।

​प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री जी को महोत्सव का औपचारिक प्रस्ताव सौंपते हुए विस्तार से चर्चा की। प्रस्ताव पर हर्ष व्यक्त करते हुए मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि "चंदैनी जैसी पारंपरिक विधाएं हमारी पहचान हैं। इन्हें विलुप्त होने से बचाने के लिए ग्राम स्तर पर किया जा रहा यह प्रयास मील का पत्थर साबित होगा।" उन्होंने इस आयोजन की सराहना करते हुए इसे भव्यता प्रदान करने के लिए प्रदेश के संस्कृति मंत्री को भी आमंत्रित करने का आश्वासन दिया।

जनसहयोग से सजेगा महोत्सव का मंच 

​ग्राम के सरपंच घसियाराम साहू ने जानकारी दी कि इस महोत्सव का आयोजन पूर्णतः जनसहयोग से ग्राम के बाजार चौक में किया जाएगा। आयोजन की रूपरेखा पीपला वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा तैयार की जा रही है। महोत्सव के मुख्य आकर्षण के रूप में छत्तीसगढ़ की तीन सुप्रसिद्ध चंदैनी टीमों का चयन किया गया है, जो रात भर अपनी कला का प्रदर्शन करेंगी।

​ विशेषज्ञों का होगा जुटान 

​केवल प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि इस विधा के वैचारिक पक्ष को समझने के लिए लोरिक चंदा (चंदैनी) के जानकारों और विशेषज्ञों को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया जा रहा है। आयोजन को लेकर गढ़ रीवा सहित आसपास के क्षेत्रों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। ग्रामीणों का मानना है कि इस तरह के आयोजनों से न केवल मनोरंजन होगा, बल्कि हमारी प्राचीन सांस्कृतिक गाथाओं का संरक्षण भी सुनिश्चित होगा।

संस्कृति को सहेजने गढ़ रीवा में होगा चंदैनी लोकनाट्य महोत्सव

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महोत्सव को लेकर ग्रामीणों में जबरदस्त उत्साह 

आरंग-  ऐतिहासिक गढ़  रीवा गांव में चंदैनी लोकनाट्य महोत्सव के आयोजन को लेकर मंगलवार को बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता ग्राम के सरपंच घसियाराम साहू ने किया।

बैठक में ग्राम के प्रबुद्धजन, गणमान्य नागरिक और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। सभी ने मिलकर महोत्सव के आयोजन पर चर्चा की और अपने विचार रखे।

इस अवसर पर सरपंच घसियाराम साहू, उपसरपंच सूरज साहू, वरिष्ठ नागरिक मेहत्तर राम साहू, संतोष साहू, हीराधर धीवर, हीरालाल धीवर तथा पीपला वेलफेयर फाउंडेशन के संयोजक महेन्द्र कुमार पटेल ने आयोजन की रूपरेखा, प्रचार-प्रसार और तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की।

73 वर्षीय सरपंच घसियाराम साहू ने कहा कि गढ़ रीवा और आरंग क्षेत्र से जुड़ी लोरिक-चंदा  की गाथा को चंदैनी लोकनाट्य परंपरा आज विलुप्ति के कगार पर है। इसे सहेजने के लिए ग्रामीणों और पीपला वेलफेयर फाउंडेशन के सहयोग से महोत्सव आयोजित करने की तैयारी की जा रही है।

फाउंडेशन के संयोजक महेन्द्र कुमार पटेल ने कहा कि अपनी संस्कृति को बचाने और आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी हम सभी की है। चंदैनी छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपरा है, लेकिन आज इसकी कुछ ही टीमें सक्रिय रह गई हैं।

बैठक में सर्वसम्मति से तय किया गया कि 15 अप्रैल के बाद ग्राम रीवा में लोरिक-चंदा की प्रेमगाथा पर केंद्रित चंदैनी लोकनाट्य महोत्सव आयोजित किया जाएगा।

बैठक में घसियाराम साहू, सूरज साहू, संतोष कुमार साहू, मेहत्तर राम साहू, महेन्द्र कुमार पटेल, गोवर्धन साहू, प्रेमलाल साहू, हीराधर धीवर, वेद प्रकाश साहू, मनबोध साहू, रमेश चंद्राकर, बेनीराम साहू, अश्वनी चंद्राकर, अनिल साहू, हीरालाल धीवर, भागवत साहू, त्रिलोकीनाथ साहू, महेंद्र साहू, इंद्रपाल और फत्ते साहू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री की घोषणा पर अमल : बैगा गुनिया हड़जोड़ सम्मान के लिए चिन्हित व्यक्तियों को मिलेगी प्रति वर्ष 5 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि

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रायपुर-मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की घोषणा के अनुरूप अनुसूचित जनजाति वर्ग के बैगा, गुनिया एवं हड़जोड़ के चिन्हित व्यक्तियों को प्रति वर्ष 5,000 रुपए की सम्मान सह-प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। इस योजना को ‘मुख्यमंत्री बैगा गुनिया हड़जोड़ सम्मान योजना (अनुसूचित जनजाति) वर्ष 2025’ के नाम से जाना जाएगा। योजना के संबंध में 6 नवम्बर को आदिम जाति विकास विभाग द्वारा विस्तृत अधिसूचना जारी की गई है।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ के जनजातीय बाहुल्य ग्रामीण क्षेत्रों में परंपरागत रूप से वनौषधीय चिकित्सा संबंधी कार्यों में संलग्न बैगा, गुनिया एवं हड़जोड़ लोगों की परंपरागत वनौषधीय चिकित्सा पद्धति को प्रोत्साहित करने और उनके सेवा एवं योगदान को मान्यता देने के उद्देश्य से, जनजातीय गौरव दिवस 15 नवम्बर 2024 के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा प्रति चिन्हित व्यक्ति को प्रतिवर्ष 5,000 रुपए की सम्मान सह-प्रोत्साहन निधि प्रदान करने की घोषणा की गई थी।

आदिम जाति विकास विभाग द्वारा जारी अधिसूचना में उल्लेखित है कि ‘मुख्यमंत्री बैगा, गुनिया-हड़जोड़ सम्मान योजना’ का उद्देश्य जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के अंतर्गत परंपरागत रूप से वनौषधियों के ज्ञान में दक्ष बैगा, गुनिया और हड़जोड़ व्यक्तियों के पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करना, उसे आगामी पीढ़ियों तक हस्तांतरित करना और उनके वनौषधीय चिकित्सकीय अनुभवों का अभिलेखीकरण कर उनकी आजीविका एवं सेवा को सुदृढ़ बनाना है।

अधिसूचना में यह भी उल्लेख किया गया है कि जनजाति समाजों में वनौषधीय चिकित्सा संबंधी अनुभव परिवारों में पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होते हैं। अनुसूचित क्षेत्रों के ग्रामों में ऐसे बैगा, गुनिया एवं हड़जोड़ व्यक्ति जो विगत तीन वर्षों से वनौषधीय चिकित्सा सेवा कार्य में संलग्न हैं, उन्हें संरक्षित करने और सम्मानित करने के उद्देश्य से प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिवर्ष 5,000 रुपए की सम्मान राशि प्रदान की जाएगी।

छत्तीसगढ़ राज्य के अनुसूचित जनजाति वर्ग के स्त्री, पुरुष एवं तृतीय लिंग (ट्रांसजेंडर) व्यक्ति, जो बैगा, गुनिया या हड़जोड़ के रूप में कम से कम 30 वर्षों से अपने स्थानीय क्षेत्र में सेवाएँ दे रहे हैं तथा जिनके परिवार में कम से कम दो पीढ़ियों से वनौषधीय चिकित्सा का ज्ञान स्थानांतरित हुआ है, पात्र माने जाएंगे। साथ ही, जो व्यक्ति पादप औषधि बोर्ड, आयुष विभाग, वन विभाग या लघु वनोपज संघ जैसी पंजीकृत संस्थाओं से जुड़े हुए हैं, उनका चयन निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ग्राम स्तर पर किया जाएगा।

ग्राम सभा एवं ग्राम पंचायत द्वारा प्रेषित नामों की अनुशंसा ग्राम स्तर पर ग्राम सचिव, सरपंच, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन तथा प्राथमिक अथवा माध्यमिक शाला के प्रधानपाठक द्वारा अनुमोदित की जाएगी। इस अनुशंसा के आधार पर संबंधित जिले के सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास स्तर पर गठित समिति — जिसमें संबंधित जनपद अध्यक्ष, अनुसूचित जनजाति वर्ग के एक जनपद सदस्य, मुख्य कार्यपालन अधिकारी (जनपद पंचायत) एवं मंडल संयोजक शामिल होंगे — द्वारा अनुशंसित नामों का परीक्षण और सत्यापन किया जाएगा। सत्यापित सूची आयुक्त, आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास कार्यालय को प्रेषित की जाएगी। समिति द्वारा किसी मान्यता प्राप्त संस्था से प्रशिक्षण प्राप्त सदस्यों का विशेष रूप से उल्लेख किया जाएगा।

ग्राम सभा/ग्राम पंचायत से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर तथा जनपद स्तर पर गठित समिति की अनुशंसा के उपरांत सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास द्वारा कलेक्टर से अनुमोदन प्राप्त कर प्रस्ताव आयुक्त, आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास को भेजा जाएगा। प्राप्त प्रस्तावों के अनुसार जिलों को आवश्यक धनराशि का आबंटन किया जाएगा। तत्पश्चात सहायता राशि का वितरण जिला कलेक्टर द्वारा किया जाएगा तथा सम्मान निधि प्राप्त व्यक्तियों की सूची संबंधित ग्राम सभा में सार्वजनिक रूप से पढ़ी जाएगी।

"छत्तीसगढ़ की जनजातीय परंपराएं हमारे सांस्कृतिक वैभव और प्राचीन ज्ञान का जीवंत प्रतीक हैं। बैगा, गुनिया और हड़जोड़ हमारे समाज के वे सम्मानित जन हैं, जिन्होंने सदियों से वनौषधीय चिकित्सा की लोकपरंपरा को जीवित रखा है। उनकी इस अनमोल सेवा और ज्ञान को सम्मान देने के लिए राज्य सरकार ने “मुख्यमंत्री बैगा गुनिया हड़जोड़ सम्मान योजना” प्रारंभ की है। इस योजना के माध्यम से हम न केवल उनके योगदान को मान्यता दे रहे हैं, बल्कि उनकी परंपरागत चिकित्सा प्रणाली को संरक्षित करते हुए आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संकल्प भी निभा रहे हैं।" - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

मध्यप्रदेश में GeM प्लेटफ़ॉर्म के सशक्त उपयोग पर CEO मिहिर कुमार और मुख्य सचिव अनुराग जैन की बैठक

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सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मिहिर कुमार ने भोपाल में मध्यप्रदेश सरकार के मुख्य सचिव अनुराग जैन से मुलाकात की। इस बैठक में राज्य में GeM प्लेटफ़ॉर्म के उपयोग और अपनाने को और सशक्त बनाने के उपायों पर चर्चा हुई।

बैठक के दौरान यह दोहराया गया कि GeM का मुख्य उद्देश्य सभी सरकारी ख़रीदारों — जिनमें केंद्र और राज्य मंत्रालय, विभाग, सार्वजनिक उपक्रम (PSUs), स्वायत्त संस्थाएँ, स्थानीय निकाय तथा पंचायती राज संस्थाएँ शामिल हैं — के लिए एकीकृत, पारदर्शी और कुशल ऑनलाइन खरीद प्रणाली उपलब्ध कराना है।

दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि राज्य में सार्वजनिक खरीद व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी, समावेशी और जवाबदेह बनाने के लिए एक मज़बूत और सुव्यवस्थित ढांचा विकसित करने की आवश्यकता है।

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में GeM के प्रसार को तेज़ करने की राष्ट्रीय रणनीति के तहत, GeM ने उच्च जीएमवी (GMV) वाले राज्यों के साथ CEO-स्तरीय संवादों सहित कई केंद्रित पहलों की शुरुआत की है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी सभी मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर राज्य की खरीद नीतियों को सामान्य वित्तीय नियमों (GFR) और GeM के सामान्य नियम व शर्तों (GeM-GTC) के अनुरूप बनाने का आग्रह किया है। साथ ही, गृह मंत्रालय से यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है कि केंद्र शासित प्रदेशों में की जाने वाली सरकारी खरीद GeM प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से ही की जाए।

मध्यप्रदेश में GeM का दायरा लगातार बढ़ रहा है। राज्य के 86,000 से अधिक विक्रेताओं ने प्लेटफ़ॉर्म पर अपना पंजीकरण पूरा किया है। शुरुआत से अब तक, मध्यप्रदेश की सूक्ष्म और लघु उद्यमों (MSEs) को राज्य के ख़रीदारों से ₹5,523 करोड़, अन्य राज्यों के ख़रीदारों से ₹2,030 करोड़ और केंद्र सरकार के ख़रीदारों से ₹20,298 करोड़ के ऑर्डर प्राप्त हुए हैं। यह मज़बूत भागीदारी राज्य के बढ़ते एकीकरण को राष्ट्रीय सार्वजनिक खरीद प्रणाली में दर्शाती है और यह बताती है कि GeM स्थानीय उद्यमों को व्यापक सरकारी बाज़ार तक पहुँचने में सक्षम बना रहा है।

GeM का संचयी सकल माल मूल्य (GMV) नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है, और मध्यप्रदेश में यह संवाद राज्य की खरीद प्रणाली को और मज़बूत बनाने तथा सभी विक्रेताओं को समान अवसर प्रदान करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।

GeM निष्पक्षता, डिजिटल पारदर्शिता और समावेशिता की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे हर विक्रेता—विशेषकर छोटे और उभरते उद्यम—भारत की पारदर्शी, तकनीक-संचालित सार्वजनिक खरीद प्रणाली में सार्थक रूप से भाग ले सकें।

अठवाँ पोषण माह: मध्य प्रदेश के बारवानी और दमोह जिलों में स्वास्थ्य गतिविधियाँ और परामर्श सत्र

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अठवाँ पोशन माह के दौरान, मध्य प्रदेश के बारवानी और दमोह जिलों में परिवारों के लिए विभिन्न स्वास्थ्य गतिविधियाँ और परामर्श सत्र आयोजित किए गए।

बारवानी: पाती ब्लॉक के AWC गड़रिया फालिया सेमली में, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायक नर्स मिडवाइफ (ANM) की संयुक्त पहल से समुदाय को एकत्र किया गया और स्वास्थ्य तथा पोषण के महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। विशेष रूप से बच्चों के विकास के लिए पुरुषों की भागीदारी और महत्वपूर्ण 1000 सोने के दिन (1000 golden days) के दौरान पोषण पर जोर दिया गया।

इस अवसर पर बच्चों को अल्बेंडाजोल टैबलेट वितरित किए गए और कीड़े-मकौड़ों से बचाव, साफ-सफाई और स्वास्थ्य आदतों के महत्व पर परामर्श प्रदान किया गया।

दमोह: पादरी सहजपुर, दमोह में पोशन थाली डेमो आयोजित किया गया, जिसमें विशेष सहजन (मोरिंगा) पराठे पेश किए गए। इस दौरान मोरिंगा के पोषण लाभ और टेक होम राशन (THR) का नियमित सेवन करने के महत्व पर जोर दिया गया।


पातालकोट में पहली बार स्वास्थ्य केंद्र शुरू

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दुर्गम घाटी में डॉ. रश्मि चौधरी ने किया उद्घाटन, आदिवासी समुदाय को बड़ी राहत

छिंदवाड़ा-आदिवासी क्षेत्रों तक सरकारी सेवाएँ पहुँचाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राष्ट्रीय आदिवासी विद्यार्थी शिक्षा समिति (NESTS) की सहायक आयुक्त डॉ. रश्मि चौधरी ने छिंदवाड़ा जिले के पातालकोट घाटी में स्वास्थ्य केंद्र का शुभारंभ किया।

सालों से वंचित थे स्वास्थ्य सेवाओं से

गोंड और भरिया जनजातियों (PVTGs) के करीब 4,000 लोग 12 गाँवों में बसे हैं। अब तक ग्रामीणों को इलाज के लिए मीलों पैदल चलना पड़ता था।

केंद्रीय योजनाओं से हो रहा विकास

प्रधानमंत्री जनमन योजना, धरती अब्बा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान और आदि कर्मयोगी अभियान के तहत सड़क, बिजली, आवास और शिक्षा में प्रगति हुई। बच्चे अब एकलव्य आवासीय विद्यालय में पढ़ रहे हैं और पर्यटन से रोजगार भी मिल रहा है।

शिकायत के तुरंत बाद शुरू हुई सुविधा

सिंधौली व रेटेड गाँव में ग्रामीणों ने आयुष्मान आरोग्य केंद्र बंद होने की शिकायत की थी। डॉ. चौधरी ने तत्काल कार्रवाई की और 27 सितंबर 2025 की शाम को ही केंद्र आम जनता के लिए खोल दिया गया।

ग्रामीणों की खुशी

“यह पातालकोट के लिए ऐतिहासिक दिन है, अब सामान्य इलाज के लिए लंबा सफर तय नहीं करना पड़ेगा।” – एक ग्रामीण, सिंधौली

निगरानी कर रहे हैं आयुक्त

NESTS के आयुक्त और मध्यप्रदेश के राज्य प्रभारी अधिकारी श्री अजीत श्रीवास्तव अभियान की प्रगति की निगरानी कर रहे हैं।



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