Media24Media.com: AI, परमाणु, अंतरिक्ष और क्वांटम तकनीकें तय करेंगी भारत का भविष्य: डॉ. जितेंद्र सिंह

Responsive Ad Slot

Latest

latest


 

AI, परमाणु, अंतरिक्ष और क्वांटम तकनीकें तय करेंगी भारत का भविष्य: डॉ. जितेंद्र सिंह

Document Thumbnail

अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), परमाणु, अंतरिक्ष और क्वांटम प्रौद्योगिकियां भविष्य की आर्थिक वृद्धि और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की दिशा तय करेंगी।

उन्होंने कहा कि 2023 में शुरू किए गए राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) ने केवल तीन वर्षों में अपने निर्धारित लक्ष्यों में से आधे से अधिक उपलब्धियां हासिल कर ली हैं, जिससे भारत अग्रणी तकनीकों के क्षेत्र में तेजी से उभरती हुई वैश्विक शक्ति बन रहा है।

एक प्रमुख समाचार चैनल द्वारा आयोजित मीडिया कॉन्क्लेव में फायरसाइड चर्चा के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आज भारत कई महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्रों में दुनिया के अग्रणी देशों के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रहा है और ऐसी क्षमताओं का विकास कर रहा है जो आर्थिक विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अगले दौर को परिभाषित करेंगी।

उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष, परमाणु और क्वांटम प्रौद्योगिकियां भविष्य की विश्व व्यवस्था को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभाएंगी। इनका प्रभाव केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रणनीतिक शक्ति और भू-राजनीतिक स्थिति पर भी पड़ेगा। उन्होंने कहा, "जो देश इन तकनीकों में पीछे रह जाएंगे, वे विकास और सुरक्षा दोनों में पिछड़ने का जोखिम उठाएंगे।"

राष्ट्रीय क्वांटम मिशन का उल्लेख करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि मिशन ने निर्धारित समय से पहले कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने बताया कि क्वांटम-सुरक्षित संचार (Quantum Secure Communication) के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, जिसका उपयोग रक्षा, रणनीतिक संचार, साइबर सुरक्षा और संवेदनशील सूचनाओं की सुरक्षा में किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि मिशन की तेज प्रगति भारत की वैज्ञानिक क्षमता और उभरती हुई तकनीकों में वैश्विक नेतृत्व स्थापित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। भारत क्वांटम संचार, क्वांटम कंप्यूटिंग और संबंधित अनुसंधान के पूरे इकोसिस्टम में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि AI अब लगभग हर क्षेत्र में एक आवश्यक उपकरण बनती जा रही है और भविष्य में शासन, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, अनुसंधान तथा सार्वजनिक सेवाओं को व्यापक रूप से प्रभावित करेगी। इसके साथ ही भारत डिजिटल अवसंरचना, कंप्यूटिंग क्षमता, डेटा संसाधनों और विश्वसनीय ऊर्जा प्रणालियों में निवेश कर इस क्षेत्र का मजबूत आधार तैयार कर रहा है।

उन्होंने कहा कि आधुनिक विश्व में तकनीकी प्रगति ही विकास का प्रमुख आधार बन गई है और कोई भी देश नवाचार तथा अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाए बिना दीर्घकालिक विकास नहीं कर सकता। भारत समावेशी विकास, लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखते हुए इस परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किए गए अनेक नीतिगत सुधारों ने नवाचार, उद्यमिता और वैज्ञानिक प्रगति के नए अवसर खोले हैं। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलने से स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई ऊर्जा मिली है, जबकि परमाणु क्षेत्र में हाल की नीतिगत पहल निवेश, तकनीकी सहयोग और क्षमता निर्माण को गति देंगी।

उन्होंने कहा कि उन्नत कंप्यूटिंग, डेटा सेंटर और डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए मजबूत और विश्वसनीय ऊर्जा स्रोतों की आवश्यकता होगी। इस संदर्भ में परमाणु ऊर्जा भारत की तकनीक-आधारित विकास यात्रा और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

शिक्षा सुधारों पर बोलते हुए उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को एक परिवर्तनकारी कदम बताया, जिसने छात्रों के सीखने, उच्च शिक्षा और अनुसंधान के दृष्टिकोण को पूरी तरह बदल दिया है। उन्होंने कहा कि इस नीति ने पारंपरिक और कठोर शैक्षणिक ढांचे की जगह लचीले तथा बहुविषयक अवसर प्रदान किए हैं, जिससे छात्र अपनी रुचि, योग्यता और आकांक्षाओं के अनुरूप करियर चुन सकते हैं।

उन्होंने कहा कि NEP 2020 छात्रों को अनुसंधान और नवाचार की ओर प्रेरित कर एक मजबूत शोध संस्कृति विकसित कर रही है। इससे वैज्ञानिक अनुसंधान की गुणवत्ता बेहतर होगी और नए नवोन्मेषकों, उद्यमियों तथा प्रौद्योगिकी नेताओं की पीढ़ी तैयार होगी।

अनुसंधान एवं विकास (R&D) के व्यापक परिदृश्य पर उन्होंने कहा कि भारत सरकार-केंद्रित नवाचार मॉडल से आगे बढ़कर शैक्षणिक संस्थानों, उद्योग, स्टार्टअप और निजी क्षेत्र की भागीदारी वाला सहयोगात्मक मॉडल विकसित कर रहा है। वैज्ञानिक प्रगति के लिए वित्तीय, तकनीकी और बौद्धिक संसाधनों का समन्वय आवश्यक है और देश ऐसा वातावरण तैयार कर रहा है जो इस सहयोग को बढ़ावा देता है।

उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में किए गए सुधारों ने भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत किया है तथा वैज्ञानिक खोज, प्रौद्योगिकी विकास और अनुसंधान के व्यावसायीकरण के नए अवसर पैदा किए हैं।

भविष्य की ओर देखते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और क्वांटम प्रौद्योगिकियां आने वाले दशकों में समाज को अभूतपूर्व गति से बदल देंगी। आज विकसित किए जा रहे संस्थान, नीतियां और तकनीकी क्षमताएं ही भविष्य में देशों की दिशा तय करेंगी।

उन्होंने युवाओं से भारत के वैज्ञानिक और तकनीकी परिवर्तन में सक्रिय भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि वर्तमान पीढ़ी के पास ज्ञान, सूचना और सीखने के ऐसे संसाधन उपलब्ध हैं, जो पहले कभी नहीं थे। उन्होंने छात्रों से इन अवसरों का पूरा लाभ उठाने, वैज्ञानिक सोच विकसित करने और भारत को ज्ञान एवं नवाचार आधारित अग्रणी राष्ट्र बनाने में योगदान देने का आह्वान किया।

अंत में उन्होंने कहा कि शिक्षा, अनुसंधान, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और उभरती हुई प्रौद्योगिकियों में किए गए सुधार भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में मजबूत आधार तैयार करेंगे और देश को दुनिया की अग्रणी नवाचार-आधारित अर्थव्यवस्थाओं में स्थापित करेंगे।

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.