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निर्विरोध चयन बना मिसाल, संकुल केंद्र खट्टा के नए समन्वयक बने गेंदलाल कोकडिया

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महासमुंद- संकुल केंद्र खट्टा में नए संकुल समन्वयक के चयन में शिक्षकों ने एकजुटता और लोकतांत्रिक परंपरा की अनूठी मिसाल पेश की। शासकीय विद्यालय कोकड़ी के शिक्षक एवं चेतना विकास मूल्य शिक्षा से जुड़े गेंदलाल कोकडिया का सर्वसम्मति एवं निर्विरोध संकुल समन्वयक के रूप में चयन किया गया।

संकुल अंतर्गत सभी विद्यालयों के प्रधानपाठकों, शिक्षकों, संकुल प्राचार्य लिकेश कुमार साहू, पूर्व संकुल समन्वयक सुरेश कुमार साहू तथा वरिष्ठ शिक्षक ओमनारायण शर्मा की उपस्थिति में कोकडिया के नाम का प्रस्ताव रखा गया, जिसे सभी शिक्षकों और प्रधानपाठकों ने एकमत से समर्थन दिया। निर्विरोध चयन के बाद शिक्षकों ने कोकडिया का स्वागत कर उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं।

नवनियुक्त संकुल समन्वयक गेंदलाल कोकडिया ने अपने चयन का श्रेय वरिष्ठ शिक्षक ओमनारायण शर्मा, पूर्व समन्वयक सुरेश कुमार साहू तथा संकुल के सभी शिक्षकों को देते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समन्वयक का कार्य सभी शिक्षकों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना है।

उन्होंने कहा कि उनका प्रमुख लक्ष्य संकुल के सभी विद्यालयों में जीवन विद्या अध्ययन और चेतना विकास मूल्य शिक्षा को प्रभावी ढंग से लागू करना है, ताकि प्रत्येक बच्चे का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके। उन्होंने शिक्षकों से राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप पाठ योजना तैयार करने, नियमित रूप से डेली डायरी संधारित करने, विद्यार्थियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने, विद्यालयों में अनमोल वचन, स्वच्छता, अनुशासन, स्वानुशासन, सहयोग, आज्ञापालन तथा मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषयों पर बच्चों से नियमित संवाद करने का भी आग्रह किया।

कोकडिया ने कहा कि संकुल के सभी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाएंगे और प्रत्येक शिक्षक की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि जहां कई स्थानों पर संकुल समन्वयक के चयन को लेकर मतभेद और खींचतान देखने को मिलती है, वहीं संकुल केंद्र खट्टा में शिक्षकों ने निर्विरोध एवं सर्वसम्मति से समन्वयक का चयन कर आपसी विश्वास, सहयोग और लोकतांत्रिक मूल्यों का परिचय दिया है। शिक्षकों का यह निर्णय न केवल अन्य संकुलों बल्कि जनप्रतिनिधियों के लिए भी एक सकारात्मक संदेश है कि अच्छे कार्य करने वाले व्यक्ति को समाज और सहयोगियों का स्वतः समर्थन प्राप्त होता है।

प्रिंसिपल ऑफ द ईयर समीर प्रधान का सम्मान समारोह आयोजित, शिक्षा के मानवीयकरण में योगदान को सराहा

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महासमुंद- संकुल केंद्र खट्टा द्वारा 'प्रिंसिपल ऑफ द ईयर' से सम्मानित एवं स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, पटेवा के प्राचार्य समीर चंद्र प्रधान के सम्मान एवं विदाई समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में शिक्षकों ने उनके 37 वर्षों के शैक्षणिक योगदान, मानवीय मूल्यों पर आधारित शिक्षा तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन में उनकी भूमिका की सराहना की।

संकुल केंद्र खट्टा के प्रतिनिधि शिक्षक एवं चेतना विकास मूल्य शिक्षा से जुड़े गेंदलाल कोकड़िया ने कहा कि समीर प्रधान का संपूर्ण शिक्षकीय जीवन शिक्षा के मानवीयकरण और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए समर्पित रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधान ने विद्यार्थियों में अभिव्यक्ति क्षमता, समय प्रबंधन, अनुशासन, चित्रकला, कविता, स्काउट-गाइड तथा जीवन विद्या अध्ययन जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा दिया। वे छुट्टी के दिनों में भी विद्यालय में गतिविधियां संचालित करते थे और कई बार स्वयं घर-घर जाकर बच्चों को विद्यालय लाने का कार्य भी करते थे।

उन्होंने बताया कि समीर प्रधान ने महासमुंद डीएमएस, स्वामी आत्मानंद विद्यालय पटेवा तथा मध्यप्रदेश के सागर सहित विभिन्न संस्थानों में लगभग 37 वर्षों तक शिक्षा के क्षेत्र में सेवाएं दीं। उन्हें 'प्रिंसिपल ऑफ द ईयर', 'द बेस्ट प्रिंसिपल' तथा 'द मास्टर' सहित अनेक सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। उनके कार्यों का उल्लेख अमेरिका की प्रतिष्ठित फोर्ब्स पत्रिका में भी प्रकाशित हो चुका है।

गेंदलाल कोकड़िया ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के निर्माण के दौरान दिल्ली में आयोजित नीति निर्माण समिति की बैठक में समीर प्रधान ने छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), रायपुर की ओर से लगभग 30 मिनट का प्रस्तुतीकरण दिया था, जिसका भारत सरकार द्वारा सीधा प्रसारण किया गया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को नवाचार, नैतिक मूल्यों, कौशल विकास और समग्र शिक्षा के बेहतर अवसर प्रदान करती है।

सम्मान समारोह में समीर प्रधान ने संकुल केंद्र खट्टा के प्राचार्य लिकेश कुमार साहू, समन्वयक सुरेश कुमार साहू, वरिष्ठ शिक्षक ओमनारायण शर्मा, शिक्षक गेंदलाल कोकड़िया तथा सभी शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जीवन विद्या अध्ययन एक बेहतर शिक्षक और बेहतर इंसान बनने का प्रभावी माध्यम है तथा इसे विद्यालयों के अनिवार्य पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए।

इस अवसर पर वरिष्ठ शिक्षक ओमनारायण शर्मा ने समीर प्रधान को सिद्धांतनिष्ठ एवं आदर्श नीति निर्धारक बताया। वहीं प्राचार्य लिकेश कुमार साहू ने उन्हें शिक्षा के मानवीयकरण के लिए समर्पित प्रेरणादायी व्यक्तित्व बताया। समन्वयक सुरेश कुमार साहू ने उनके प्रशासनिक कौशल एवं व्यवहारिक नेतृत्व की सराहना की।

कार्यक्रम में दुलारी चंद्राकर, लखन साहू, चंद्रभान ध्रुव, तुलसी देवांगन सहित संकुल केंद्र खट्टा के अनेक शिक्षक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सितोष जुल्फे ने किया। समारोह के दौरान शिक्षकों ने समीर प्रधान के साथ बिताए अनुभव साझा करते हुए उनके उज्ज्वल एवं प्रेरणादायी शिक्षकीय जीवन की सराहना की।

'पीएम मोदी की उम्मीदों पर खरा उतरूँगा, पूरी जिम्मेदारी से निभाऊँगा कर्तव्य'

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 नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार संभालने के बाद शनिवार को देश को आश्वस्त किया कि वे इस नई भूमिका को पूरी विनम्रता, ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ निभाएंगे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद जोशी को यह नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।


पदभार ग्रहण करने के बाद प्रह्लाद जोशी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा, "प्रधानमंत्री जी ने मुझ पर विश्वास जताते हुए इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। उनके मार्गदर्शन और नेतृत्व में, मैं पूरी निष्ठा के साथ काम करूँगा और इस विभाग में उनकी सभी अपेक्षाओं को पूरा करने का भरसक प्रयास करूँगा।"

NEP के क्रियान्वयन और धर्मेंद्र प्रधान के योगदान की सराहना

नवनियुक्त शिक्षा मंत्री ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के सफल क्रियान्वयन का श्रेय पूर्व मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को दिया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के पिछले 12 वर्षों के कार्यकाल में शिक्षा के क्षेत्र में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल हुई हैं। बीते 4-5 वर्षों में देश की शिक्षा व्यवस्था में जो परिवर्तन और प्रगति हुई है, उसमें धर्मेंद्र प्रधान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

छात्र प्रदर्शनों के बीच धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा

गौरतलब है कि NEET परीक्षा पत्र लीक मामले को लेकर देशभर में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। शनिवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर अपना त्यागपत्र साझा करते हुए उन्होंने लिखा कि देश की एकता और छात्रों का हित उनके लिए सर्वोपरि है।

उन्होंने पत्र में स्पष्ट किया, "जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में उत्पन्न स्थितियों का राष्ट्र-विरोधी ताकतों द्वारा दुरुपयोग न हो और छात्रों का भविष्य कानूनी उलझनों में न फँसे, इसी उद्देश्य से मैंने माननीय प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंपा है।"

निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें अब तक नहीं पहुंचीं, बुनियादी शिक्षा पर पहले ध्यान दे स्कूल शिक्षा विभाग: शिक्षक गेंदलाल कोकड़िया

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महासमुंद- नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के एक माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद कई सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। इसी बीच स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संचालित "लक्ष्य" कार्यक्रम के तहत प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को नवोदय एवं प्रयास विद्यालय प्रवेश परीक्षा की तैयारी कराने के निर्देश दिए गए हैं। इस पर शिक्षा के मानवीयकरण के लिए कार्यरत चेतना विकास मूल्य शिक्षा संचालित अभिभावक विद्यालय, कोकड़ी (महासमुंद) से जुड़े शिक्षक गेंदलाल कोकड़िया ने कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं।

कोकड़िया का कहना है कि वर्तमान में अधिकांश सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों की बुनियादी शैक्षणिक स्थिति अभी भी चिंता का विषय है। उनके अनुसार कक्षा तीसरी और पांचवीं के औसतन 25 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थी अभी भी धाराप्रवाह पढ़ने, लिखने तथा गुणा-भाग जैसे मूलभूत गणितीय कौशल में कमजोर हैं। इसके अलावा अंग्रेजी पढ़ने, लिखने और बोलने की क्षमता भी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाई है।

उन्होंने कहा कि एफएलएन (Foundational Literacy and Numeracy) तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के मूल लक्ष्य अभी पूरी तरह हासिल नहीं हुए हैं। दूसरी ओर शिक्षकों को नियमित शिक्षण कार्य के साथ कई प्रशासनिक जिम्मेदारियां, सरकारी पत्राचार, विभिन्न सर्वे, प्रशिक्षण और अन्य योजनाओं के कार्य भी करने पड़ते हैं, जिससे उन पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ रहा है।

कोकड़िया ने यह भी कहा कि जब तक सभी विद्यार्थियों को समय पर पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं हो जातीं और बुनियादी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार नहीं होता, तब तक नवोदय एवं प्रयास विद्यालयों में अधिक से अधिक चयन का लक्ष्य व्यवहारिक रूप से कठिन दिखाई देता है। उनके अनुसार केवल लक्ष्य निर्धारित करने से पहले यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि उस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए आवश्यक संसाधन और आधारभूत व्यवस्थाएं मौजूद हों।

उन्होंने सुझाव दिया कि यदि सरकार वास्तव में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना चाहती है तो नवोदय एवं प्रयास विद्यालय जैसी सुविधाएं सभी सरकारी विद्यालयों में विकसित की जानी चाहिए, ताकि बच्चों को बेहतर शिक्षा के लिए अपने गांव और परिवार से दूर न जाना पड़े।

कोकड़िया का मानना है कि प्रारंभिक वर्षों में बच्चों का सर्वांगीण विकास परिवार और स्थानीय सामाजिक वातावरण में अधिक प्रभावी ढंग से होता है। उनका कहना है कि बेहतर शिक्षा की व्यवस्था गांव स्तर पर ही उपलब्ध कराई जाए, जिससे बच्चों को घर-परिवार छोड़कर बाहर जाने की आवश्यकता न पड़े।

उन्होंने स्कूल शिक्षा विभाग से मांग की कि विभाग का पहला लक्ष्य प्रत्येक बच्चे को बुनियादी साक्षरता, गणितीय दक्षता और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मानकों के अनुरूप सक्षम बनाना होना चाहिए। उनका कहना है कि जब तक हर बच्चा पढ़ने-लिखने और गणना जैसी मूलभूत क्षमताओं में दक्ष नहीं हो जाता, तब तक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के बड़े लक्ष्य अधूरे रहेंगे।

कोकड़िया ने कहा कि स्वतंत्रता के लगभग 80 वर्ष बाद भी यदि सभी बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण और मानवीय शिक्षा समान रूप से नहीं पहुंच पा रही है, तो यह शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर आत्ममंथन का विषय है। उन्होंने आग्रह किया कि स्कूल शिक्षा विभाग पहले प्रत्येक सरकारी विद्यालय को आवश्यक संसाधन, पर्याप्त शिक्षण सामग्री और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराए, ताकि हर बच्चा समान अवसर के साथ आगे बढ़ सके।

AI, परमाणु, अंतरिक्ष और क्वांटम तकनीकें तय करेंगी भारत का भविष्य: डॉ. जितेंद्र सिंह

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अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), परमाणु, अंतरिक्ष और क्वांटम प्रौद्योगिकियां भविष्य की आर्थिक वृद्धि और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की दिशा तय करेंगी।

उन्होंने कहा कि 2023 में शुरू किए गए राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) ने केवल तीन वर्षों में अपने निर्धारित लक्ष्यों में से आधे से अधिक उपलब्धियां हासिल कर ली हैं, जिससे भारत अग्रणी तकनीकों के क्षेत्र में तेजी से उभरती हुई वैश्विक शक्ति बन रहा है।

एक प्रमुख समाचार चैनल द्वारा आयोजित मीडिया कॉन्क्लेव में फायरसाइड चर्चा के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आज भारत कई महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्रों में दुनिया के अग्रणी देशों के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रहा है और ऐसी क्षमताओं का विकास कर रहा है जो आर्थिक विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अगले दौर को परिभाषित करेंगी।

उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष, परमाणु और क्वांटम प्रौद्योगिकियां भविष्य की विश्व व्यवस्था को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभाएंगी। इनका प्रभाव केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रणनीतिक शक्ति और भू-राजनीतिक स्थिति पर भी पड़ेगा। उन्होंने कहा, "जो देश इन तकनीकों में पीछे रह जाएंगे, वे विकास और सुरक्षा दोनों में पिछड़ने का जोखिम उठाएंगे।"

राष्ट्रीय क्वांटम मिशन का उल्लेख करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि मिशन ने निर्धारित समय से पहले कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने बताया कि क्वांटम-सुरक्षित संचार (Quantum Secure Communication) के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, जिसका उपयोग रक्षा, रणनीतिक संचार, साइबर सुरक्षा और संवेदनशील सूचनाओं की सुरक्षा में किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि मिशन की तेज प्रगति भारत की वैज्ञानिक क्षमता और उभरती हुई तकनीकों में वैश्विक नेतृत्व स्थापित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। भारत क्वांटम संचार, क्वांटम कंप्यूटिंग और संबंधित अनुसंधान के पूरे इकोसिस्टम में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि AI अब लगभग हर क्षेत्र में एक आवश्यक उपकरण बनती जा रही है और भविष्य में शासन, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, अनुसंधान तथा सार्वजनिक सेवाओं को व्यापक रूप से प्रभावित करेगी। इसके साथ ही भारत डिजिटल अवसंरचना, कंप्यूटिंग क्षमता, डेटा संसाधनों और विश्वसनीय ऊर्जा प्रणालियों में निवेश कर इस क्षेत्र का मजबूत आधार तैयार कर रहा है।

उन्होंने कहा कि आधुनिक विश्व में तकनीकी प्रगति ही विकास का प्रमुख आधार बन गई है और कोई भी देश नवाचार तथा अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाए बिना दीर्घकालिक विकास नहीं कर सकता। भारत समावेशी विकास, लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखते हुए इस परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किए गए अनेक नीतिगत सुधारों ने नवाचार, उद्यमिता और वैज्ञानिक प्रगति के नए अवसर खोले हैं। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलने से स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई ऊर्जा मिली है, जबकि परमाणु क्षेत्र में हाल की नीतिगत पहल निवेश, तकनीकी सहयोग और क्षमता निर्माण को गति देंगी।

उन्होंने कहा कि उन्नत कंप्यूटिंग, डेटा सेंटर और डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए मजबूत और विश्वसनीय ऊर्जा स्रोतों की आवश्यकता होगी। इस संदर्भ में परमाणु ऊर्जा भारत की तकनीक-आधारित विकास यात्रा और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

शिक्षा सुधारों पर बोलते हुए उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को एक परिवर्तनकारी कदम बताया, जिसने छात्रों के सीखने, उच्च शिक्षा और अनुसंधान के दृष्टिकोण को पूरी तरह बदल दिया है। उन्होंने कहा कि इस नीति ने पारंपरिक और कठोर शैक्षणिक ढांचे की जगह लचीले तथा बहुविषयक अवसर प्रदान किए हैं, जिससे छात्र अपनी रुचि, योग्यता और आकांक्षाओं के अनुरूप करियर चुन सकते हैं।

उन्होंने कहा कि NEP 2020 छात्रों को अनुसंधान और नवाचार की ओर प्रेरित कर एक मजबूत शोध संस्कृति विकसित कर रही है। इससे वैज्ञानिक अनुसंधान की गुणवत्ता बेहतर होगी और नए नवोन्मेषकों, उद्यमियों तथा प्रौद्योगिकी नेताओं की पीढ़ी तैयार होगी।

अनुसंधान एवं विकास (R&D) के व्यापक परिदृश्य पर उन्होंने कहा कि भारत सरकार-केंद्रित नवाचार मॉडल से आगे बढ़कर शैक्षणिक संस्थानों, उद्योग, स्टार्टअप और निजी क्षेत्र की भागीदारी वाला सहयोगात्मक मॉडल विकसित कर रहा है। वैज्ञानिक प्रगति के लिए वित्तीय, तकनीकी और बौद्धिक संसाधनों का समन्वय आवश्यक है और देश ऐसा वातावरण तैयार कर रहा है जो इस सहयोग को बढ़ावा देता है।

उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में किए गए सुधारों ने भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत किया है तथा वैज्ञानिक खोज, प्रौद्योगिकी विकास और अनुसंधान के व्यावसायीकरण के नए अवसर पैदा किए हैं।

भविष्य की ओर देखते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और क्वांटम प्रौद्योगिकियां आने वाले दशकों में समाज को अभूतपूर्व गति से बदल देंगी। आज विकसित किए जा रहे संस्थान, नीतियां और तकनीकी क्षमताएं ही भविष्य में देशों की दिशा तय करेंगी।

उन्होंने युवाओं से भारत के वैज्ञानिक और तकनीकी परिवर्तन में सक्रिय भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि वर्तमान पीढ़ी के पास ज्ञान, सूचना और सीखने के ऐसे संसाधन उपलब्ध हैं, जो पहले कभी नहीं थे। उन्होंने छात्रों से इन अवसरों का पूरा लाभ उठाने, वैज्ञानिक सोच विकसित करने और भारत को ज्ञान एवं नवाचार आधारित अग्रणी राष्ट्र बनाने में योगदान देने का आह्वान किया।

अंत में उन्होंने कहा कि शिक्षा, अनुसंधान, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और उभरती हुई प्रौद्योगिकियों में किए गए सुधार भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में मजबूत आधार तैयार करेंगे और देश को दुनिया की अग्रणी नवाचार-आधारित अर्थव्यवस्थाओं में स्थापित करेंगे।

IGNOU के 39वें दीक्षांत समारोह में 3.2 लाख विद्यार्थियों को मिली डिग्री, उपराष्ट्रपति ने किया संबोधन

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नई दिल्ली- इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) के 39वें दीक्षांत समारोह में आज 3.2 लाख से अधिक विद्यार्थियों को डिग्री, डिप्लोमा और प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

उपराष्ट्रपति ने IGNOU की सराहना करते हुए इसे भारत की ओपन और डिस्टेंस लर्निंग प्रणाली का मजबूत स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने देशभर में उच्च शिक्षा की पहुंच को व्यापक बनाया है। वर्तमान में IGNOU में 14 लाख से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिनमें 56% महिलाएं और 58% ग्रामीण एवं वंचित वर्ग से हैं।

उन्होंने विद्यार्थियों को आजीवन सीखने की भावना अपनाने, नैतिक मूल्यों को बनाए रखने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।

कोविड-19 महामारी का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि IGNOU ने अपनी डिजिटल शिक्षा प्रणाली के माध्यम से इस चुनौती का सफलतापूर्वक सामना किया। SWAYAM और e-GyanKosh जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए पढ़ाई बिना बाधा जारी रही।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) की सराहना करते हुए उन्होंने बताया कि IGNOU ने चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम और मल्टीपल एग्जिट ऑप्शन शुरू किए हैं, जिससे शिक्षा अधिक लचीली और छात्र-केंद्रित बनी है।

उपराष्ट्रपति ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी नई तकनीकों को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जैसे कंप्यूटर के आगमन से रोजगार के नए अवसर पैदा हुए, वैसे ही AI भी शिक्षा और विकास में नई संभावनाएं खोलेगा। हालांकि, उन्होंने इन तकनीकों के जिम्मेदार उपयोग पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसके नैतिक मूल्य हैं और आधुनिक विकास को परंपराओं के साथ संतुलित करना आवश्यक है।

कार्यक्रम के अंत में उपराष्ट्रपति ने डिजिलॉकर के माध्यम से प्रमाण पत्र जारी किए और IGNOU एलुमनाई पोर्टल का शुभारंभ किया, जिसमें 50 लाख से अधिक पंजीकरण हैं। साथ ही देशभर के क्षेत्रीय केंद्रों में SWAYAM प्रभा स्टूडियो का भी उद्घाटन किया गया।

इस अवसर पर दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू, IGNOU की कुलपति प्रो. उमा कंजीलाल सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि सभी के सामूहिक प्रयासों से ही 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।


राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से शिक्षा को रोजगारोन्मुख, नवाचारपरक और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा रहा है-उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा

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राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन पर मंथन, रायपुर में हुई उच्च स्तरीय एकदिवसीय कार्यशाला

रायपुर- राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन से जुड़ी चुनौतियों एवं संभावनाओं पर विमर्श के उद्देश्य से उच्च शिक्षा विभाग द्वारा न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइंस रायपुर में एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।    

कार्यशाला में उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को केवल कागज़ों तक सीमित न रखकर प्रत्येक विद्यार्थी तक पहुँचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति का कुलपति,कुलसचिव,महाविद्यालय के प्राचार्य एवं प्राध्यापक स्वयं अध्ययन करें।उन्होंने राज्य स्तर पर संचालित समितियों द्वारा नियमित समीक्षा, जिला क्लस्टर व्यवस्था, टास्क फोर्स की बैठकें तथा विश्वविद्यालय स्तर पर प्रभावी निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को पाठ्यक्रम में समावेशित कर विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति, विरासत और मूल्यों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। स्थानीय लोक कला और शिल्प कला को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा।भारतीय ज्ञान परंपरा पर विद्यार्थियों के बीच ऑनलाइन प्रतियोगिता आयोजित कर उनमें जागरूकता बढ़ाई जाएगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से शिक्षा को रोजगारोन्मुख, नवाचारपरक और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा रहा है। मंत्री वर्मा ने भविष्य में इस प्रकार की विस्तृत एवं बहुदिवसीय कार्यशालाओं के आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यशाला में विशेष अतिथि के रूप में भारतीय शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के अध्यक्ष अतुल कोठारी, राष्ट्रीय सह संयोजक, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के डॉ. ओम प्रकाश शर्मा, निदेशक आईआईटी भिलाई डॉ. राजीव प्रकाश, शिक्षाविद दिलीप केशरवानी, डॉ. नारायण गवांडकर सहित विभिन्न महाविद्यालयों के प्राध्यापक उपस्थित रहे।

इस अवसर पर उच्च शिक्षा आयुक्त डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों और इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर प्रकाश डाला।मुख्य वक्ता अतुल कोठारी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में भारतीय ज्ञान परंपरा को पाठ्यक्रम में सम्मिलित करने, क्रेडिट सिस्टम, मल्टीपल एंट्री एवं एग्जिट सिस्टम तथा टास्क फोर्स के गठन जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी। वहीं डॉ. राजीव प्रकाश ने नीति के व्यावहारिक क्रियान्वयन से जुड़े अनुभव साझा किए। इसी तरह ओम प्रकाश शर्मा ने राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन पर प्रकाश डाला।

कार्यशाला के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया। जिसमें प्रतिभागियों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का समाधान विशेषज्ञों द्वारा किया गया।

परीक्षा पे चर्चा बनी जन आंदोलन, विकसित भारत की शिक्षा यात्रा में निर्णायक बदलाव

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज एक लेख साझा किया, जिसमें बताया गया है कि ‘परीक्षा पे चर्चा’ किस तरह एक जन आंदोलन बन चुकी है और यह भारत की शिक्षा यात्रा में एक निर्णायक बदलाव का प्रतीक है, जो विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में मार्ग प्रशस्त कर रही है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के एक्स (X) पर किए गए एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO India) ने कहा कि इस लेख में यह स्पष्ट किया गया है कि परीक्षा पे चर्चा केवल एक संवाद कार्यक्रम नहीं रह गई है, बल्कि यह देशव्यापी जन आंदोलन का रूप ले चुकी है, जिसने शिक्षा को लेकर सोच और दृष्टिकोण में सकारात्मक परिवर्तन लाया है।

लेख में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की विशेषताओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह नीति बाल-केंद्रित दृष्टिकोण, भारतीय ज्ञान परंपरा पर जोर और मातृभाषा में शिक्षा को बढ़ावा देकर विद्यार्थियों को 21वीं सदी की चुनौतियों के लिए तैयार करती है।

प्रधानमंत्री ने इस पहल को शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव बताते हुए कहा कि परीक्षा पे चर्चा छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों को तनावमुक्त और सकारात्मक माहौल में जोड़ने का सशक्त माध्यम बन रही है। यह पहल न केवल छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ा रही है, बल्कि शिक्षा को आनंदमय और उद्देश्यपूर्ण बनाने में भी योगदान दे रही है।

यह पहल भारत को एक शिक्षित, सशक्त और विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में एक अहम कदम के रूप में देखी जा रही है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने फकीर मोहन विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया, नए ऑडिटोरियम का उद्घाटन किया

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (3 फरवरी, 2026) ओडिशा के बालासोर में फकीर मोहन विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह की शोभा बढ़ाई तथा विश्वविद्यालय के नए सभागार (ऑडिटोरियम) का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने व्यासकवि फकीर मोहन सेनापति जी को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि अपने छात्र जीवन के दौरान वे उनकी कालजयी कहानी ‘रेवती’ से गहराई से प्रभावित हुई थीं और यह प्रभाव आज भी उनके मन में अंकित है। उन्होंने कहा कि उन्नीसवीं शताब्दी में एक बालिका का शिक्षा प्राप्त करने का दृढ़ संकल्प उसकी अदम्य भावना का प्रमाण है। राष्ट्रपति ने बताया कि उन्होंने स्वयं एक दूरस्थ आदिवासी गाँव में अध्ययन किया और अपने संकल्प के बल पर भुवनेश्वर जाकर हाई स्कूल और कॉलेज की शिक्षा पूरी की। इस प्रकार फकीर मोहन जी उनके लिए प्रेरणा स्रोत रहे हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि फकीर मोहन जी को अपनी मातृभाषा से गहरा प्रेम था। उन्होंने लिखा था— “मेरी मातृभाषा मुझे सर्वोपरि है।” राष्ट्रपति ने कहा कि मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करने से विद्यार्थी अपने परिवेश, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक वातावरण को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं। इससे वे अपने सभ्यतागत मूल्यों और जीवन पद्धति से परिचित होते हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 मातृभाषा के महत्व पर विशेष बल देती है और विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति से जुड़े रहने का मार्गदर्शन करती है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा अत्यंत समृद्ध है। हमारे शास्त्र और पांडुलिपियाँ ज्ञान और विवेक से परिपूर्ण हैं। काव्य और साहित्य के अतिरिक्त इनमें विज्ञान, चिकित्सा, खगोल विज्ञान और वास्तुकला जैसे क्षेत्रों का भी गहन ज्ञान निहित है। युवा विद्यार्थी इस प्राचीन ज्ञान परंपरा में अनुसंधान कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि अतीत को समझकर और वर्तमान को आत्मसात कर विद्यार्थी न केवल अपना भविष्य बल्कि देश का भविष्य भी संवार सकते हैं।

राष्ट्रपति ने स्नातक हो रहे विद्यार्थियों को बधाई दी और कहा कि ज्ञान, उत्साह और प्रतिबद्धता की शक्ति से वे समाज में सम्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जहाँ भी जाएँ और जो भी करें, हर प्रयास में सफलता की कुंजी समर्पण है। उन्होंने कहा कि सफल जीवन और सार्थक जीवन एक समान नहीं होते। सफल जीवन अच्छा है, लेकिन जीवन को सार्थक बनाना उससे भी बेहतर है। उन्होंने कहा कि यश, प्रतिष्ठा और आर्थिक सुरक्षा प्राप्त करना आवश्यक है, लेकिन साथ ही दूसरों के लिए कुछ करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे उन लोगों की सहायता करें जो विकास की यात्रा में पीछे रह गए हैं, क्योंकि समाज का विकास तभी संभव है जब सभी का विकास हो।

राष्ट्रपति को यह जानकर प्रसन्नता हुई कि फकीर मोहन विश्वविद्यालय शैक्षणिक अध्ययन के साथ-साथ अनुसंधान और आउटरीच कार्यक्रमों को भी महत्व देता है। उन्होंने कहा कि बालासोर-भद्रक क्षेत्र धान, पान और मछली के लिए प्रसिद्ध है और विश्वविद्यालय द्वारा इन क्षेत्रों में किए जा रहे अनुसंधान एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम सराहनीय हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय की ‘बैक टू स्कूल’, ‘अर्न व्हाइल लर्न’, ‘ईच वन टीच वन’, पर्यावरण जागरूकता और समुद्र तट स्वच्छता जैसे कार्यक्रमों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि बालासोर और भद्रक के समुद्र तटों पर नीले केकड़े (ब्लू क्रैब) प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं और ऐसे में ब्लू क्रैब या हॉर्सशू क्रैब पर अनुसंधान केंद्र की स्थापना विश्वविद्यालय की दूरदर्शिता को दर्शाती है।

राष्ट्रपति ने कहा कि समाज के सभी वर्गों की वृद्धि, सुरक्षा और तकनीकी विकास से देश की प्रगति को गति मिलेगी। इस दिशा में देश के सभी विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण भूमिका है। विश्वविद्यालयों की विशेष जिम्मेदारी है कि वे समावेशी विकास, नवाचार और सामाजिक परिवर्तन के उत्प्रेरक बनें। आलोचनात्मक चिंतन, नैतिक नेतृत्व और स्थानीय व वैश्विक चुनौतियों से जुड़ा अनुसंधान विकसित कर उच्च शिक्षण संस्थान एक ऐसे भविष्य का निर्माण कर सकते हैं जो सतत, न्यायसंगत और मानवीय मूल्यों पर आधारित हो। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि फकीर मोहन विश्वविद्यालय अपनी शैक्षणिक दृष्टि और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से इस दिशा में परिवर्तनकारी भूमिका निभाएगा।




केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ‘समग्र शिक्षा 3.0’ पर हितधारकों के साथ परामर्श बैठक की अध्यक्षता की

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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन, प्रवासी भारतीय केंद्र में ‘रीइमैजिनिंग समग्र शिक्षा’ शीर्षक से आयोजित एक दिवसीय परामर्श बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक समग्र शिक्षा 3.0 के लिए एक रणनीतिक, परामर्शात्मक और क्रियान्वयन योग्य रोडमैप तैयार करने के उद्देश्य से आयोजित की गई, जिसमें राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और शिक्षा क्षेत्र के विभिन्न हितधारकों ने भाग लिया।


बैठक में उभरती चुनौतियों, सर्वोत्तम प्रथाओं और अगले चरण में शासन, अवसंरचना, शिक्षक प्रशिक्षण तथा छात्र हितलाभों को सुदृढ़ करने हेतु आवश्यक प्राथमिक हस्तक्षेपों पर विचार-विमर्श किया गया।

इस अवसर पर जयंत चौधरी, कौशल विकास एवं उद्यमिता तथा शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार); संजय कुमार, सचिव (स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता); डॉ. विनीत जोशी, सचिव (उच्च शिक्षा); मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी; 11 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षा सचिव एवं समग्र शिक्षा के राज्य परियोजना निदेशक; विभिन्न मंत्रालयों के प्रतिनिधि तथा शिक्षा क्षेत्र के प्रतिष्ठित विशेषज्ञ उपस्थित थे।

अपने संबोधन में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परिकल्पित ‘विकसित भारत 2047’ का लक्ष्य तभी साकार हो सकता है जब देश के प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले और कक्षा 12 तक शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित हो। उन्होंने सीखने की खाइयों को पाटने, ड्रॉपआउट दर कम करने, अधिगम एवं पोषण परिणामों में सुधार, शिक्षक क्षमता निर्माण, महत्वपूर्ण कौशलों के विकास तथा ‘अमृत पीढ़ी’ को मैकाले मानसिकता से आगे ले जाने की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि इस मंच पर साझा किए गए विचार और सुझाव स्कूली शिक्षा तंत्र को सुदृढ़ करने तथा समग्र शिक्षा को परिणामोन्मुख, वैश्विक प्रतिस्पर्धी, भारतीय मूल्यों से जुड़ा और छात्रों की विविध आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील बनाने में सहायक होंगे। उन्होंने प्रौद्योगिकी के सार्थक एकीकरण के माध्यम से छात्रों के समग्र विकास और ज्ञान तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए विद्यालयों को पुनः समाज के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।

समग्र शिक्षा के अगले चरण का उल्लेख करते हुए प्रधान ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन के पांच वर्ष बाद देश शैक्षिक सुधार के एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है। उन्होंने सभी हितधारकों से शैक्षणिक वर्ष 2026–27 के लिए एक मजबूत और समग्र वार्षिक योजना तैयार कर इसे एक राष्ट्रीय आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने कहा कि योजनाएं तभी सफल होती हैं जब वे विद्यालयों और राज्यों की जमीनी वास्तविकताओं पर आधारित ‘बॉटम-अप’ दृष्टिकोण से तैयार की जाती हैं। उन्होंने कहा कि समग्र शिक्षा 3.0, राष्ट्रीय शिक्षा नीति की भावना का व्यावहारिक रूप है, जहां विद्यालय परिवर्तन के केंद्र बनते हैं और बहुविषयक शिक्षा के माध्यम से छात्रों को कार्य, जीवन और तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था के लिए तैयार किया जाता है।

इस अवसर पर स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मंत्रालय के अपर सचिव धीरज साहू ने एक विस्तृत प्रस्तुति दी, जिसमें समग्र शिक्षा और एनईपी 2020 के अंतर्गत हुई प्रगति तथा आगामी वर्षों के लिए रूपरेखा और प्रमुख उपलब्धि लक्ष्यों को रेखांकित किया गया।

समग्र शिक्षा एक एकीकृत, केंद्रीय प्रायोजित योजना है, जो पूर्व-प्राथमिक से लेकर वरिष्ठ माध्यमिक स्तर तक संपूर्ण स्कूली शिक्षा को समग्र दृष्टिकोण से कवर करती है।


छत्तीसगढ़ में तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार को नई दिशा: मंत्री गुरु खुशवंत साहेब

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रायपुर- छत्तीसगढ़ शासन के तकनीकी शिक्षा, रोजगार एवं कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने आज आयोजित प्रेस वार्ता में विभाग की उपलब्धियों, योजनाओं और भविष्य की कार्ययोजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में तकनीकी, व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास के समुचित विकास एवं आपसी समन्वय के लिए विभाग निरंतर प्रयासरत है।

मंत्री ने बताया कि वर्तमान में तकनीकी शिक्षा विभाग के अंतर्गत 29 इंजीनियरिंग महाविद्यालय, 53 पॉलिटेक्निक संस्थान और 101 फार्मेसी संस्थान संचालित हैं। इनमें इंजीनियरिंग स्तर पर 30 स्नातक, 36 स्नातकोत्तर तथा पॉलिटेक्निक में 21 डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित हैं, जिनमें लगभग 60 हजार छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। इस वर्ष इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक संस्थानों में प्रवेश में लगभग 20 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

उन्होंने बताया कि सत्र 2025-26 से आईआईटी की तर्ज पर शासकीय पॉलिटेक्निक एवं इंजीनियरिंग महाविद्यालयों के उन्नयन के साथ रोबोटिक्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसी उभरती शाखाओं में चार छत्तीसगढ़ इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (CIT) की स्थापना की गई है। जल्द ही रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग में भी CIT स्थापित किए जाएंगे।

नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए राज्य शासन ने i-Hub गुजरात के साथ एमओयू कर शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय, रायपुर में i-Hub की स्थापना की है, जहां विद्यार्थियों को स्टार्टअप और इनोवेशन से जुड़ा मार्गदर्शन दिया जा रहा है। इसके अलावा, Apanatech Pvt. Ltd., CSRBOX Pvt. Ltd., CII एवं YI समूह के साथ एमओयू के माध्यम से छात्रों को रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण, स्टार्टअप सहयोग और उद्योग से जोड़ने की पहल की गई है।

मंत्री ने बताया कि सत्र 2025-26 से छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लागू की गई है। साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों के लिए मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा ऋण ब्याज अनुदान योजना के तहत अब तक 11,643 विद्यार्थियों को 22.53 करोड़ रुपये का ब्याज अनुदान प्रदान किया गया है।

मानव संसाधन सशक्तिकरण की दिशा में 204 प्रथम श्रेणी शिक्षकों को पदोन्नति, 116 तृतीय श्रेणी कर्मचारियों को पदोन्नति तथा 205 को समयमान वेतनमान दिया गया है। इसके साथ ही चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को भी पदोन्नति और वेतनमान का लाभ दिया गया।

कौशल विकास योजनाओं की जानकारी देते हुए मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0, पीएम विश्वकर्मा, पीएम जनमन, नल-जल मित्र कार्यक्रम तथा मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत हजारों युवाओं को प्रशिक्षण देकर बड़ी संख्या में रोजगार से जोड़ा गया है। विशेष रूप से बस्तर संभाग और वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में स्किल डेवलपमेंट सेंटर, आवासीय प्रशिक्षण, छात्रावास निर्माण और पुनर्वास केंद्रों के माध्यम से युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं।

आईटीआई सुदृढ़ीकरण के क्षेत्र में भी छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय प्रगति की है। पिछले दो वर्षों में 100 से अधिक नए ट्रेड चिन्हित किए गए, 4 नए आईटीआई स्थापित हुए और आधुनिक तकनीकों जैसे ड्रोन, 5जी नेटवर्क, 3डी प्रिंटिंग, ईवी टेक्नोलॉजी में प्रशिक्षण प्रारंभ किया गया।

मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार का लक्ष्य युवाओं को आधुनिक तकनीक, कौशल और रोजगार से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। विभाग द्वारा किए जा रहे ये प्रयास प्रदेश को तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में एक नई पहचान दिलाएंगे।

देशभर के EMRS प्राचार्यों की प्रतिभाओं और नेतृत्व कौशल को सशक्त बनाने के लिए NESTS ने आयोजित की 2nd EMRS प्राचारकों की राष्ट्रीय सम्मेलन

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राष्ट्रीय आदिवासी छात्रों के लिए शिक्षा समाज (NESTS) ने 16–17 दिसंबर 2025 को डॉ. आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली में "2nd EMRS प्राचारक सम्मेलन ऑन स्कूल्स के प्रभावी प्रबंधन" का सफलतापूर्वक आयोजन किया। इस दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में देशभर के एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल (EMRS) के प्राचार्य और प्राचार्य-इन्-चार्ज शामिल हुए। सम्मेलन का उद्देश्य रेजिडेंशियल स्कूलों में शैक्षणिक नेतृत्व, प्रशासनिक प्रणालियों और संस्थागत प्रशासन को सुदृढ़ करना था।

सम्मेलन का उद्घाटन आदिवासी मामलों के मंत्री जुयल ओराम ने मुख्य अतिथि के रूप में किया। आदिवासी मामलों के राज्य मंत्री दुर्गा दास उइके, वरिष्ठ अधिकारी और NESTS के अधिकारी भी उपस्थित थे। उद्घाटन सत्र में NESTS के अतिरिक्त आयुक्त ने सम्मेलन के उद्देश्यों को साझा किया और EMRS के प्राचार्यों की भूमिका को रेखांकित किया।

दिन 1 के मुख्य आकर्षण:

पहले दिन शैक्षणिक सुधारों, नेतृत्व विकास और संस्थागत प्रशासन पर केंद्रित सत्र आयोजित किए गए। मुख्य सत्रों में शामिल थे:

  • CBSE के “दो परीक्षा प्रणाली” पर डॉ. सन्मय भारद्वाज द्वारा विवरण।

  • रेजिडेंशियल स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण पर जितेन्द्र नागपाल द्वारा मार्गदर्शन।

  • भवनों के रखरखाव और निर्माण एजेंसियों से हेरिटेज लेना पर ए.डी.पी. केशरी और प्रमोद अग्रवाल द्वारा प्रशिक्षण।

  • प्राचार्यों के नेतृत्व गुण और स्कूल संस्कृति निर्माण पर मनोज कुमार श्रीवास्तव।

  • अल्पसंख्यक और वंचित छात्रों के सशक्तिकरण पर डॉ. संजीव कौर, CEO, Teach India Foundation।

  • APAR ऑनलाइन पोर्टल का डेमोंस्ट्रेशन जी. अरुमुगम द्वारा।

दिन 2 के मुख्य आकर्षण:

दूसरे दिन प्रशासनिक दक्षता, शैक्षणिक नेतृत्व, छात्र कल्याण, स्वास्थ्य जागरूकता, सह-पाठ्यक्रम गतिविधियां और वित्तीय प्रशासन पर ध्यान केंद्रित किया गया। प्रमुख सत्र थे:

  • HR मुद्दे और प्रोबेशन क्लियरेंस – जी. अरुमुगम (NESTS)

  • NCC इकाइयों की स्थापना – कर्नल विवेक शुक्ला, NCC

  • प्रभावी पाठ योजना –  हिमांशु चौरसिया और आदित्य दुबे (COGRAD, NVS)

  • सेकेंडरी शिक्षा में गुणवत्ता संवर्धन –  प्रमीला मनोहरन (UNICEF)

  • सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों का विकास – स्काउट्स और गाइड्स यूनिट्स, कौशल केंद्र और कौशलाय प्रोग्राम।

  • वित्तीय और प्रशासनिक क्षमता निर्माण – NPS और GeM प्रक्रियाओं पर मार्गदर्शन।

  • छात्र कल्याण – सिक्ल सेल रोग, वित्तीय साक्षरता और साइबर सुरक्षा पर सत्र।

सम्मेलन के अंतिम सत्र में खुली चर्चा आयोजित की गई, जिसमें प्राचार्यों ने अनुभव साझा किए और व्यावहारिक सिफारिशें दीं।

सम्मेलन का परिणाम:

यह दो दिवसीय सम्मेलन प्राचार्यों की शैक्षणिक नेतृत्व क्षमता, प्रशासनिक कौशल, वित्तीय प्रबंधन और छात्र कल्याण में सुधार के लिए उपयोगी साबित हुआ। साथ ही, NEP 2020 के अनुरूप सुधारों को लागू करने और आदिवासी छात्रों की समग्र शिक्षा के लिए प्रेरक मंच उपलब्ध कराया। NESTS ने "शिक्षा के माध्यम से आदिवासी परिवर्तन" की अपनी प्रतिबद्धता को पुनः मजबूत किया।

पीएम श्री नवोदय विद्यालय गौतम बुद्ध नगर में मिशन LiFE के तहत माइक्रोफॉरेस्ट का उद्घाटन, पर्यावरण आधारित शिक्षण को मिला बढ़ावा

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शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (DoSEL) के सचिव संजय कुमार ने 14 दिसंबर 2025 को उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर स्थित पीएम नवोदय विद्यालय में विशेष अभियान 5.0 के अंतर्गत विकसित फल उद्यान एवं परागणकर्ता उद्यान (पॉलिनेटर पार्क) से युक्त एक माइक्रोफॉरेस्ट का उद्घाटन किया।

यह पहल मिशन LiFE के तहत ईको क्लब्स के माध्यम से 3,200 वर्ग मीटर से अधिक बंजर भूमि को एक जीवंत पारिस्थितिक शिक्षण स्थल में परिवर्तित करने में सफल रही है। इस अवसर पर नवोदय विद्यालय समिति (NVS) के आयुक्त राजेश लखानी, DoSEL की संयुक्त सचिव डॉ. अमरप्रीत दुग्गल, NVS के संयुक्त आयुक्त ज्ञानेंद्र कुमार, ‘से ट्रीज़’ की ओर से वंदना तुम्मलापल्ली और मोनीथा, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षक, छात्र एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में संजय कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की परिकल्पना के अनुसार शिक्षा का वास्तविक मूल्य केवल पुस्तकों तक सीमित न होकर वास्तविक जीवन के अनुभवों से जुड़ा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रकृति से जुड़े आनंदपूर्ण और समावेशी शिक्षण वातावरण से विद्यार्थियों में मानवीय मूल्यों, स्वतंत्र चिंतन और मानसिक संतुलन का विकास होता है।

उन्होंने बताया कि मिशन LiFE के अंतर्गत ईको क्लब्स देशभर के 9.23 लाख से अधिक स्कूलों में सक्रिय हैं और इसके सात प्रमुख विषयों के अनुरूप व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से अनुभवात्मक अधिगम को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे शिक्षण को प्रकृति से जोड़ें और विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करें।

नवोदय विद्यालय समिति के आयुक्त राजेश लखानी ने विद्यार्थियों से पेड़ों की देखभाल को सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विद्यालय परिसरों में फलदार पेड़ों का संरक्षण सतत जीवनशैली, स्वस्थ आदतों और पारिस्थितिक संतुलन को बढ़ावा देता है।

विशेष अभियान 5.0 के तहत DoSEL ने स्वच्छता दक्षता और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया। देशभर में 6.16 लाख से अधिक स्वच्छता अभियान चलाए गए। 9 अक्टूबर 2025 को आयोजित ई-कचरा जागरूकता पर राष्ट्रीय वेबिनार और उसके बाद हुए ई-कचरा संग्रह अभियान में 1 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया और 4,000 किलोग्राम से अधिक ई-कचरा एकत्र किया गया। इस ई-कचरे के लगभग 100 किलोग्राम से नई दिल्ली के शास्त्री भवन में एक जागरूकता भित्ति चित्र भी बनाया गया।

नवोदय विद्यालय गौतम बुद्ध नगर में स्थापित इस माइक्रोफॉरेस्ट में 500 से अधिक फलदार वृक्ष तथा 350 से अधिक परागणकर्ता-अनुकूल पौधे लगाए गए हैं, जो मधुमक्खियों, तितलियों एवं अन्य लाभकारी जीवों के लिए आवास उपलब्ध कराएंगे और विद्यालय परिसर की जैव विविधता व सूक्ष्म जलवायु को बेहतर बनाएंगे।

यह परियोजना ‘से ट्रीज़’ नामक गैर-लाभकारी संस्था के सहयोग से क्रियान्वित की गई है, जिसने अब तक देशभर में 50 लाख से अधिक पेड़ लगाए और 50 से अधिक झीलों का पुनर्जीवन किया है। यह पहल SDG-4 (गुणवत्तापूर्ण शिक्षा) और SDG-13 (जलवायु कार्रवाई) के अनुरूप सतत विकास को बढ़ावा देगी।

स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की पहलों को आगे चलकर अन्य नवोदय विद्यालयों, केंद्रीय विद्यालयों और देशभर के स्कूलों में भी विस्तारित किया जाएगा, जिससे हरित एवं पर्यावरण-अनुकूल शिक्षण वातावरण को बढ़ावा मिल सके।

भारतीय भाषा उत्सव 2025 का समापन: बहुभाषावाद और सांस्कृतिक एकता का संदेश

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शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग (DoSEL) ने भारतीय भाषा उत्सव (BBU) 2025 के समापन समारोह का आयोजन 11 दिसंबर 2025 को नेशनल बाल भवन, नई दिल्ली में किया। इस कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (DoSEL) के सचिव संजय कुमार तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एम. जगदीश कुमार ने।

सचिव संजय कुमार का संबोधन

अपने उद्बोधन में संजय कुमार ने भारतीय भाषा उत्सव के तीन वर्षों की यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने सुब्रमण्यम भारती के जीवन, विचारों और स्वतंत्रता, सामाजिक सुधार एवं बहुभाषावाद में उनके योगदान को स्मरण किया।

उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की सोच— मातृभाषा में सीखने— पर बल देते हुए छात्रों और शिक्षकों को अनेक भाषाएँ सीखने, शब्दावली को समृद्ध करने और स्पष्ट एवं प्रभावी संप्रेषण के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने सुब्रमण्यम भारती की जयंती पर उनके प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि भारत की सांस्कृतिक शक्ति सभी भाषाओं और समुदायों का सम्मान करने से आती है।

प्रो. एम. जगदीश कुमार का संवाद

छात्रों से संवाद करते हुए प्रो. कुमार ने बहुभाषा सीखने के महत्व पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि बहुभाषावाद आलोचनात्मक चिंतन, रचनात्मकता, नवाचार और संज्ञानात्मक लचीलापन को मजबूत करता है, जो युवाओं को विकसित भारत 2047 के निर्माण में प्रभावी योगदान देने के लिए तैयार करता है।

सांस्कृतिक कार्यक्रम

कार्यक्रम में भारत की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता का सुंदर प्रदर्शन देखने को मिला।
केन्द्रीय विद्यालय संगठन (KVS), नवोदय विद्यालय समिति (NVS), एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS) और राष्ट्रीय बाल भवन (NBB) के छात्रों ने:

  • गीत

  • शास्त्रीय व लोक नृत्य

  • बहुभाषीय देशभक्ति प्रस्तुतियाँ

  • नुक्कड़ नाटक

  • कविता वाचन

प्रस्तुत किए। इन प्रस्तुतियों ने सांस्कृतिक सद्भाव का वातावरण बनाया और विद्यार्थियों की रचनात्मकता को खूबसूरती से प्रदर्शित किया।

प्रदर्शनियाँ और गतिविधियाँ

विभिन्न भाषाओं में विकसित शिक्षण-सामग्री की प्रदर्शनी लगाई गई।
साथ ही भाषाई खेलों का आयोजन किया गया, जिसमें छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

इस वर्ष की थीम

“भाषाएँ अनेक, भाव एक / Many Languages, One Emotion”
इस थीम के अंतर्गत 4 से 11 दिसंबर तक देशभर के विद्यालयों में गतिविधियाँ आयोजित की गईं। यह आयोजन सुविख्यात कवि सुब्रमण्यम भारती की जयंती (11 दिसंबर) पर आधारित था।

NEP 2020 के प्रति प्रतिबद्धता का पुनर्पुष्टि

भारतीय भाषा उत्सव 2025 ने भारत की भाषाई विरासत के संरक्षण और बहुभाषावाद के प्रोत्साहन के प्रति DoSEL की प्रतिबद्धता को पुनः सुदृढ़ किया। इसने सांस्कृतिक एकता को मजबूत किया और छात्रों को भारत की भाषाई समृद्धि अपनाने के लिए प्रेरित किया।

उपस्थित गण

कार्यक्रम में DoSEL के वरिष्ठ अधिकारियों, भारतीय भाषा समिति के प्रतिनिधियों, स्वायत्त संस्थाओं के प्रमुखों, शिक्षाविदों, शिक्षकों और देशभर के स्कूली छात्रों ने सहभागिता की।



वार्षिक NES सम्मेलन 2025: नेवल स्कूलों में गुणवत्ता, समानता और NEP-2020 के अनुरूप परिवर्तन पर फोकस

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वार्षिक नेवी एजुकेशन सोसाइटी (NES) सम्मेलन 2025 सफलतापूर्वक 10 से 13 नवंबर 2025 तक ईस्टर्न नेवल कमांड, विशाखापत्तनम में आयोजित किया गया।

सम्मेलन की मुख्य विशेषताएँ

सम्मेलन में कार्यकारी समिति, प्रबंधन सलाहकार समिति (MAC), और अकादमिक सलाहकार समिति (AAC) की महत्वपूर्ण बैठकों का आयोजन किया गया, जिसमें नेवल स्कूलों की नीति संरचना और संचालनात्मक पहलुओं पर चर्चा हुई, विशेष रूप से राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के परिवर्तनकारी कार्यान्वयन के संदर्भ में।

  • कार्यकारी समिति की बैठक 12 नवंबर 2025 को आयोजित हुई और इसकी अध्यक्षता वी.एdm सीआर प्रवीण नायर, कंट्रोलर पर्सनल सर्विसेज और NES के अध्यक्ष ने की।

  • MAC और AAC सत्र की अध्यक्षता कमोडोर (नौसेना शिक्षा) Cmde SM उरूज अथर और NES के उपाध्यक्ष ने की।

सम्मेलन में नेवल हेडक्वार्टर से अधिकारी तथा देशभर के नेवल स्कूलों का प्रतिनिधित्व करने वाले शैक्षणिक और प्रशासनिक नेताओं ने भाग लिया।

प्रमुख गतिविधियाँ और चर्चा

  • प्रतिभागियों ने केस स्टडी प्रस्तुत कीं, जिसमें चुनौतियों और उनके समाधान की प्रभावी रणनीतियों पर प्रकाश डाला गया।

  • मुद्दा-आधारित चर्चाओं के माध्यम से विशेषज्ञता साझा की गई और महत्वपूर्ण कार्यात्मक मामलों पर रचनात्मक संवाद हुआ, जिससे ठोस और लागू करने योग्य समाधान तैयार हुए।

नवाचार और समावेशिता

इस बार पहली बार सम्मेलन में संकल्प स्कूलों ने भाग लिया – ये संस्थाएँ नेवल समुदाय के बच्चों के लिए शिक्षा, पूर्व-व्यावसायिक प्रशिक्षण और जीवन कौशल विकास को बढ़ावा देती हैं। यह कदम समावेशिता और सहयोगी विकास के प्रति NES की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

मुख्य भाषण

वी.एडमनायर ने अपने मुख्य भाषण में नेवल स्कूलों में समानता और समावेशी शैक्षणिक वातावरण के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने पिछले वर्ष की प्रगति की समीक्षा करते हुए NEP-2020 के अनुरूप चल रहे सुधारों, मानकीकरण और नीति सुविधा में प्रगति, साथ ही बुनियादी ढांचे और शिक्षक विकास में निवेश को रेखांकित किया।

उन्होंने NES के संशोधित विज़न और मिशन स्टेटमेंट्स भी प्रस्तुत किए, जो छात्रों को भविष्य के लिए तैयार नागरिक बनाने के उद्देश्य से एक मजबूत मूल्य प्रणाली पर आधारित हैं। यह संशोधन NEP-2020 की परिवर्तनकारी सोच को प्रतिबिंबित करता है और उच्च गुणवत्ता, समावेशी शिक्षा प्रदान करने के NES के संकल्प को पुष्ट करता है।

उपलब्धियाँ और पुरस्कार

सम्मेलन के दौरान NES अकादमिक पुरस्कार 2024-25 प्रदान किए गए, जिससे शैक्षणिक उत्कृष्टता को सम्मानित किया गया। इसके अलावा, प्रतिभागियों को विशाखापत्तनम के नेवल चिल्ड्रन स्कूलों का गाइडेड टूर भी कराया गया।


उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने एसआरएम विश्वविद्यालय दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित किया, कहा – सफलता की कुंजी है चरित्र, मूल्य और परिश्रम

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज हरियाणा के सोनीपत स्थित एसआरएम विश्वविद्यालय, दिल्ली-एनसीआर के तृतीय दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।

सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने स्नातक छात्रों को बधाई दी और कहा कि उनकी डिग्रियां केवल शैक्षणिक उपलब्धि का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि यह उन मूल्यों, अनुशासन और दृढ़ता का भी प्रमाण हैं जो उन्होंने विश्वविद्यालय में अपने अध्ययन काल के दौरान अर्जित किए हैं।

उन्होंने छात्रों के गुरुजनों और मार्गदर्शकों की भी सराहना की और कहा कि आज की ये उपलब्धियाँ उनके अथक परिश्रम, मार्गदर्शन और समर्पण का परिणाम हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि जहाँ तकनीकी दक्षता और शैक्षणिक उत्कृष्टता आवश्यक हैं, वहीं छात्रों को जीवन में सबसे महत्वपूर्ण चीज — मूल्य और चरित्र — को भी अपने साथ रखना चाहिए। उन्होंने कहा, “अच्छे संस्कार और अनुशासन ही चरित्र निर्माण की नींव हैं। जब चरित्र खो जाता है, तो सब कुछ खो जाता है।”

राधाकृष्णन ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों ने QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026 में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है, जिसमें 54 भारतीय विश्वविद्यालय शामिल हुए हैं, जिससे भारत दुनिया में चौथे सबसे अधिक प्रतिनिधित्व वाले देश के रूप में उभरा है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 ने शिक्षा के क्षेत्र में एक परिवर्तनकारी रोडमैप तैयार किया है, जो बहुविषयक शिक्षण, लचीलापन और अनुसंधान-आधारित विकास को प्रोत्साहित करता है। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे एनईपी 2020 द्वारा प्रदान किए गए अवसरों का पूरा लाभ उठाएं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि विकसित भारत की परिकल्पना सर्वसमावेशी और न्यायसंगत विकास की है। उन्होंने बताया कि सरकार की छात्रवृत्तियों, वित्तीय सहायता और विशेष पहलों के कारण वंचित वर्गों (एससी/एसटी) के छात्रों का नामांकन बढ़ा है, और ग्रामीण क्षेत्रों तथा महिलाओं की भागीदारी में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

उन्होंने कहा कि सही शिक्षा और कौशल के साथ, भारतीय युवाओं में नवोन्मेषी, समावेशी और न्यायसंगत भारत के निर्माण की क्षमता है।

उपराष्ट्रपति ने छात्रों को सलाह दी कि वे स्वयं की तुलना दूसरों से न करें — आज अवसरों की कोई कमी नहीं है, हर व्यक्ति की अपनी विशिष्ट भूमिका है। उन्होंने कहा कि निरंतरता और समर्पण से ही सफलता प्राप्त होती है।

उन्होंने जीवन में संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया — न सफलता में अत्यधिक उत्साहित हों और न असफलता में निराश। असफलताएँ जीवन का हिस्सा हैं, जो व्यक्ति को और अधिक मजबूत बनाती हैं।

उन्होंने कहा कि कड़ी मेहनत ही सफलता की कुंजी है और खुशी एक मानसिक अवस्था है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे सकारात्मक सोच विकसित करें और अवसरों से भरी दुनिया में अपना मार्ग स्वयं बनाएं।

अंत में, उपराष्ट्रपति ने छात्रों से अपने माता-पिता को सदैव याद रखने का आग्रह किया, और कहा कि उनके त्याग और समर्पण के बिना यह सफलता संभव नहीं थी।

इस अवसर पर हरियाणा के पंचायत एवं विकास मंत्री कृष्ण लाल पंवार, एसआरएम विश्वविद्यालय, चेन्नई के संस्थापक और कुलाधिपति डॉ. टी. आर. पारिवेंदर, एसआरएम विश्वविद्यालय, सोनीपत के कुलाधिपति डॉ. रवि पचमुथु और कुलपति प्रो. परमजीत सिंह जसवाल भी उपस्थित रहे।

विद्यालयी शिक्षा विभाग ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और संगणनात्मक चिंतन को भविष्य उन्मुख शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई

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विद्यालयी शिक्षा और साक्षरता विभाग (DoSE&L), शिक्षा मंत्रालय ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence - AI) और संगणनात्मक चिंतन (Computational Thinking - CT) को भविष्य उन्मुख शिक्षा के आवश्यक घटकों के रूप में आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। विभाग, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (National Curriculum Framework for School Education - NCF SE) 2023 के अंतर्गत एक सार्थक और समावेशी पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए CBSE, NCERT, KVS, NVS जैसे संस्थानों तथा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ परामर्श प्रक्रिया के माध्यम से सहयोग कर रहा है।

AI और CT सीखने, सोचने और सिखाने की अवधारणा को सशक्त करेंगे तथा धीरे-धीरे “जनकल्याण के लिए AI” (AI for Public Good) के विचार की ओर विस्तार करेंगे। यह पहल नैतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से AI के जिम्मेदार उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसके अंतर्गत तकनीक को प्रारंभिक स्तर से — कक्षा 3 से — स्वाभाविक रूप से पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा।

29 अक्टूबर 2025 को एक हितधारक परामर्श बैठक आयोजित की गई, जिसमें CBSE, NCERT, KVS, NVS और बाहरी विशेषज्ञों जैसे प्रमुख संस्थानों ने भाग लिया। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने IIT मद्रास के प्रो. कार्तिक रमन की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है, जो AI और CT पाठ्यक्रम विकसित करेगी।

बैठक में विद्यालयी शिक्षा विभाग के सचिव संजय कुमार ने कहा कि AI में शिक्षा को “हमारे चारों ओर की दुनिया” (The World Around Us - TWAU) से जुड़ी एक सार्वभौमिक बुनियादी कौशल के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम व्यापक, समावेशी और NCF SE 2023 के अनुरूप होना चाहिए। “हर बच्चे की विशिष्ट क्षमता हमारी प्राथमिकता है। नीति निर्माताओं के रूप में हमारा कार्य न्यूनतम मानक तय करना और समय-समय पर उसकी समीक्षा करना है,” उन्होंने जोड़ा।

उन्होंने आगे कहा कि शिक्षक प्रशिक्षण और शिक्षण-सामग्री — जिनमें निष्ठा (NISHTHA) के शिक्षक प्रशिक्षण मॉड्यूल और वीडियो आधारित शिक्षण संसाधन शामिल हैं — पाठ्यक्रम क्रियान्वयन की रीढ़ होंगे। NCERT और CBSE के बीच NCF SE के तहत एक समन्वय समिति के माध्यम से सहयोग यह सुनिश्चित करेगा कि एकीकृत, संरचित और गुणवत्तापूर्ण सामग्री तैयार हो। संजय कुमार ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय अनुभवों और बोर्डों से तुलना उपयोगी है, लेकिन उन्हें भारत की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार अनुकूलित किया जाना चाहिए।

संयुक्त सचिव (आई एंड टी) प्राची पांडेय ने पाठ्यक्रम विकास और क्रियान्वयन की निर्धारित समय-सीमा का पालन करने के महत्व को दोहराते हुए परामर्श का समापन किया।

मुख्य बिंदु :

  • कक्षा 3 से कृत्रिम बुद्धिमत्ता और संगणनात्मक चिंतन की शुरुआत, सत्र 2026–27 से, नई शिक्षा नीति (NEP 2020) और NCF SE 2023 के अनुरूप।

  • AI एवं CT पाठ्यक्रम का एकीकरण, समय निर्धारण और संसाधनों की उपलब्धता NCF SE के तहत।

  • संसाधन सामग्री, पुस्तिकाएं और डिजिटल संसाधनों का विकास दिसंबर 2025 तक।

  • निष्ठा (NISHTHA) और अन्य संस्थानों के माध्यम से कक्षा-विशिष्ट और समयबद्ध शिक्षक प्रशिक्षण।

30 अक्टूबर को नई दिल्ली में ‘मॉडल यूथ ग्राम सभा’ का राष्ट्रीय शुभारंभ: युवाओं में लोकतांत्रिक भागीदारी को बढ़ावा

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पंचायती राज मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय (स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग) और जनजातीय कार्य मंत्रालय के सहयोग से 30 अक्टूबर 2025 को नई दिल्ली में ‘मॉडल यूथ ग्राम सभा (Model Youth Gram Sabha - MYGS)’ नामक एक अनोखी पहल का राष्ट्रीय शुभारंभ करेगा। इस अवसर पर पंचायती राज मंत्रालय एवं मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल तथा जनजातीय कार्य मंत्रालय के राज्य मंत्री दुर्गादास उइके मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।

इस कार्यक्रम के दौरान मॉडल यूथ ग्राम सभा पर एक प्रशिक्षण मॉड्यूल और MYGS पोर्टल का भी शुभारंभ किया जाएगा। ये डिजिटल उपकरण इस पहल के प्रभावी कार्यान्वयन, शिक्षकों की क्षमता निर्माण और छात्रों की सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विकसित किए गए हैं। यह पहल देशभर के 1,000 से अधिक विद्यालयों में लागू की जाएगी, जिनमें जवाहर नवोदय विद्यालय (JNVs), एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (EMRSs) और राज्य सरकार के विद्यालय शामिल हैं।

कार्यक्रम में पंचायती राज, शिक्षा और जनजातीय कार्य मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी, लगभग 650 प्रतिनिधि, जिनमें छात्र, शिक्षक, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हरियाणा के पंचायती राज संस्थानों (PRIs) के निर्वाचित प्रतिनिधि और राज्य पंचायत राज विभागों के अधिकारी शामिल होंगे, भाग लेंगे।

मॉडल यूथ ग्राम सभा (MYGS) एक अभिनव पहल है जिसका उद्देश्य जनभागीदारी को सशक्त बनाना और सहभागितापूर्ण स्थानीय शासन को बढ़ावा देना है। इसमें छात्रों को ग्राम सभा के मॉडल सत्रों के माध्यम से लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का व्यावहारिक अनुभव कराया जाएगा।

यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप है और इसका लक्ष्य युवाओं में लोकतांत्रिक मूल्य, नागरिक जिम्मेदारी और नेतृत्व क्षमता का विकास करना है, ताकि वे पारदर्शिता, जवाबदेही और विकसित भारत (Viksit Bharat) के दृष्टिकोण के प्रति समर्पित नागरिक बन सकें।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सेंट टेरेसा कॉलेज, केरल की शताब्दी उत्सव में भाग लिया

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आज, 24 अक्टूबर 2025 को भारत की राष्ट्रपति Smt. द्रौपदी मुर्मू ने केरल के एर्नाकुलम में सेंट टेरेसा कॉलेज के शताब्दी उत्सव में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि सेंट टेरेसा कॉलेज ने महिलाओं की शिक्षा को गहरे आध्यात्मिक मूल्यों के साथ बढ़ावा दिया है, जो समाजिक परिवर्तन और राष्ट्र निर्माण में एक महत्वपूर्ण योगदान है। हमें उन विशिष्ट व्यक्तियों की दृष्टि और विरासत को गहराई से स्वीकार करना चाहिए जिन्होंने इस संस्था की स्थापना की और इसे एक शताब्दी तक लगातार उपलब्धियों की राह पर अग्रसरित किया।

राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि केरल की महिलाएं देश को नेतृत्व प्रदान करती रही हैं। संविधान सभा के 15 विशिष्ट महिला सदस्य संविधान निर्माण में महत्वपूर्ण दृष्टिकोण लेकर आई थीं, जिनमें से तीन केरल से थीं – अम्मू स्वामिनाथन, एनी मास्करीन और दक्षयानी वेलायुदन। उन्होंने मौलिक अधिकारों, सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता और कई अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर बहसों को प्रभावित किया। भारत की पहली महिला उच्च न्यायालय न्यायाधीश जस्टिस अन्ना चंडी थीं, जो 1956 में केरल उच्च न्यायालय की न्यायाधीश बनीं। इसके बाद, 1989 में जस्टिस M. फातिमा बीवी भारत की सर्वोच्च न्यायालय की पहली महिला न्यायाधीश बनीं।

राष्ट्रपति ने कहा कि सेंट टेरेसा कॉलेज की होनहार महिला छात्राएं युवा भारत, प्रगतिशील भारत और सशक्त भारत का प्रतिनिधित्व करती हैं। उन्होंने कहा कि देश की जनसांख्यिकीय लाभ का सही उपयोग करने के लिए महिलाओं की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले दशक में लैंगिक बजट आवंटन में चार और आधा गुना वृद्धि हुई है। 2011 और 2024 के बीच महिला नेतृत्व वाली MSMEs लगभग दोगुनी हो गई हैं। 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए महिला कार्यबल की 70% भागीदारी एक प्रमुख स्तंभ है। विभिन्न सामाजिक और आर्थिक वर्गों की महिलाएं भारत की प्रगति में योगदान दे रही हैं। राष्ट्रपति ने यह जानकर प्रसन्नता जताई कि इस कॉलेज की पूर्व छात्राएं देश की वृद्धि और विकास में सकारात्मक भूमिका निभा रही हैं।

राष्ट्रपति ने यह भी प्रसन्नता जताई कि सेंट टेरेसा कॉलेज ने SLATE (Sustainability, Leadership and Agency through Education) परियोजना शुरू की है। इस परियोजना के माध्यम से कॉलेज ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है। छात्रों को सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) से जोड़ना और उन्हें भविष्य के रोजगारों के लिए तैयार करना इस परियोजना के सराहनीय उद्देश्य हैं। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थान जैसे सेंट टेरेसा कॉलेज भारत को ज्ञान-सुपर पावर बनने में मदद करेंगे।


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