Media24Media.com: लखनऊ में ‘नौसेना शौर्य वाटिका’ का उद्घाटन, भारतीय नौसेना के शौर्य और बलिदान को समर्पित अनूठा संग्रहालय

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लखनऊ में ‘नौसेना शौर्य वाटिका’ का उद्घाटन, भारतीय नौसेना के शौर्य और बलिदान को समर्पित अनूठा संग्रहालय

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और योगी आदित्यनाथ ने 30 मई 2026 को लखनऊ में ‘नौसेना शौर्य वाटिका’ का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया। लगभग 19 करोड़ रुपये की लागत से दो एकड़ से अधिक क्षेत्र में विकसित यह ओपन-एयर डिस्प्ले म्यूज़ियम भारतीय नौसेना के शौर्य, पराक्रम और गौरवशाली इतिहास को समर्पित है। इसमें 34 वर्षों तक सेवा देने के बाद 29 मई 2022 को सेवामुक्त हुए युद्धपोत आईएनएस गोमती के हथियारों, उपकरणों और विभिन्न कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया है।

इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि नौसेना शौर्य वाटिका केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि प्रेरणा का प्रतीक है, जो आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता और सुरक्षा की वास्तविक कीमत का एहसास कराएगी। उन्होंने कहा कि यह वाटिका देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर सैनिकों के साहस और बलिदान की याद दिलाती रहेगी। यह केवल स्थापत्य कला का उदाहरण नहीं, बल्कि सैनिकों के प्रति कृतज्ञता की भावना को जागृत करने का माध्यम है और युवाओं में राष्ट्र निर्माण का उत्साह पैदा करेगी।

रक्षा मंत्री ने वर्तमान वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों में समुद्री मार्गों की सुरक्षा को विश्व शांति और समृद्धि की कुंजी बताते हुए भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता और तत्परता की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना ने भारतीय सेना और वायुसेना के साथ मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अरब सागर में नौसेना की मजबूत मौजूदगी ने विरोधी पक्ष पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया, जिसके कारण पाकिस्तान नौसेना अपने बंदरगाहों तक सीमित रही।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार एक मजबूत सेना और आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग के माध्यम से भारत को सुरक्षित एवं समृद्ध बनाने पर विशेष जोर दे रही है। उन्होंने कहा कि भारत तभी वास्तव में शक्तिशाली माना जाएगा जब उसकी सेनाएं हथियारों के लिए अन्य देशों पर निर्भर न रहें। इसी उद्देश्य से आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया, रक्षा औद्योगिक गलियारा (Defence Industrial Corridor), iDEX और ADITI जैसी पहलें शुरू की गई हैं।

राजनाथ सिंह ने बताया कि वर्ष 2014 में देश का रक्षा उत्पादन लगभग 46 हजार करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है और जल्द ही 1.75 लाख करोड़ रुपये के नए रिकॉर्ड को छू सकता है। वहीं रक्षा निर्यात 2014 में एक हजार करोड़ रुपये से भी कम था, जो अब लगभग 40 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि में उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। राज्य के सैनिक जहां देश की सुरक्षा में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं, वहीं रक्षा औद्योगिक गलियारा रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत कर रहा है। उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, व्यापार, सड़क, राजमार्ग और हवाई अड्डों के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की प्रगति की भी सराहना की।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में देश के वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी सुरक्षा के कारण ही देशवासी चैन की नींद सो पाते हैं। उन्होंने कहा कि विकास की योजनाएं तभी सफल हो सकती हैं जब राष्ट्र सुरक्षित और सशक्त हो। उन्होंने सैनिकों के सम्मान और कल्याण को विकसित भारत 2047 के लक्ष्य का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य,बृजेश पाठक नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी सहित कई वरिष्ठ सैन्य और नागरिक अधिकारी उपस्थित रहे।

नौसेना शौर्य वाटिका की विशेषताएँ

इस पार्क में आईएनएस गोमती पर लगे AK-726 नौसैनिक तोप, ZIF-101 मिसाइल लॉन्चर, सतह से हवा और सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल प्रणालियाँ, रडार, टॉरपीडो लॉन्चर, एंकर, जहाज के मस्तूल और अन्य उपकरण प्रदर्शित किए गए हैं। इसके अलावा इसमें अब सेवा से बाहर हो चुके लंबी दूरी के समुद्री गश्ती विमान TU-142M का वॉक-थ्रू संग्रहालय भी बनाया गया है। पार्क में फूड कोर्ट, स्मृति चिन्ह दुकान और आधुनिक प्रकाश एवं ध्वनि व्यवस्था जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।

आईएनएस गोमती के बारे में

आईएनएस गोमती का नाम गोमती नदी के नाम पर रखा गया था। इसे 16 अप्रैल 1988 को मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) में तत्कालीन रक्षा मंत्री द्वारा भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था। यह गोदावरी श्रेणी के गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट्स का तीसरा युद्धपोत था और सेवामुक्ति के समय पश्चिमी बेड़े का सबसे वरिष्ठ युद्धपोत माना जाता था।

अपने 34 वर्षों के गौरवशाली सेवाकाल में आईएनएस गोमती ने ऑपरेशन कैक्टस,ऑपरेशन पराक्रम,ऑपरेशन रेनबो सहित अनेक महत्वपूर्ण अभियानों और द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यासों में भाग लिया। राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा में उत्कृष्ट योगदान के लिए इसे 2007-08 और 2019-20 में प्रतिष्ठित यूनिट सिटेशन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

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