Media24Media.com: #Lucknow

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #Lucknow. Show all posts
Showing posts with label #Lucknow. Show all posts

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ में देश के पहले सैन्य चिकित्सा विभाग का किया उद्घाटन, युद्धक्षेत्र चिकित्सा क्षमता को मिलेगी नई मजबूती

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली/लखनऊ- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित कमांड अस्पताल (मध्य कमान) में सैन्य चिकित्सा विभाग (Department of Military Medicine) का वर्चुअल उद्घाटन किया। यह देश का पहला समर्पित शैक्षणिक और परिचालन विभाग है, जो विशेष रूप से सैन्य चिकित्सा पर केंद्रित होगा। यह पहल युद्धक्षेत्र में चिकित्सा तैयारियों को सुदृढ़ करने, अनुसंधान को बढ़ावा देने, स्वदेशी सिद्धांत विकसित करने तथा भविष्य के युद्धक्षेत्रों और मानवीय आपदाओं से निपटने के लिए विशेषज्ञता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

सेना चिकित्सा सेवा महानिदेशालय (DGMS-आर्मी) के अधीन स्थापित यह विभाग सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं (AFMS) की परिचालन चिकित्सा तैयारियों को और मजबूत करेगा।

राष्ट्रीय सुरक्षा को मिलेगा नया आधार

अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने कहा कि किसी भी राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक विकास के साथ-साथ उसकी संप्रभुता और प्रगति का मूल आधार उसकी सेना की शक्ति और मनोबल होता है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह नया विभाग सैनिकों को अत्याधुनिक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराकर राष्ट्रीय सुरक्षा को और मजबूत करेगा तथा उनमें यह भरोसा पैदा करेगा कि आवश्यकता पड़ने पर उन्हें सर्वोत्तम उपचार और सहयोग मिलेगा।

इन क्षेत्रों पर होगा विशेष फोकस

नया विभाग निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्रों में शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान करेगा:

  • सैन्य आघात (Military Trauma) एवं डैमेज कंट्रोल

  • कॉम्बैट मनोचिकित्सा एवं मानसिक दृढ़ता

  • पर्यावरण एवं परिचालन चिकित्सा

  • सैन्य चिकित्सा लॉजिस्टिक्स

  • रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल, परमाणु एवं विस्फोटक (CBRNe) चिकित्सा प्रतिक्रिया

  • आपातकालीन चिकित्सा एवं क्रिटिकल केयर

  • आपदा चिकित्सा

  • मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR)

  • अनुसंधान, ऑडिट एवं डेटा विश्लेषण

इसके साथ ही विभाग तकनीक आधारित युद्धक्षेत्र चिकित्सा, सिमुलेशन आधारित प्रशिक्षण, टेलीमेडिसिन, फील्ड केयर और चिकित्सा निर्णय सहायता प्रणाली में नवाचार को भी बढ़ावा देगा।

चरणबद्ध तरीके से होगा विकास

विभाग का विकास चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। प्रारंभिक चरण में शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। इसके बाद HADR और CBRNe चिकित्सा के लिए उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence) स्थापित किए जाएंगे। भविष्य में इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सैन्य चिकित्सा के अग्रणी संस्थान के रूप में विकसित किया जाएगा।

सैनिकों के लिए विशेष चिकित्सा प्रोटोकॉल

रक्षा मंत्री ने कहा कि जिस प्रकार एयरोस्पेस मेडिसिन अंतरिक्ष यात्रियों और पायलटों की चुनौतियों का अध्ययन करती है, उसी प्रकार सैन्य चिकित्सा युद्ध और युद्ध जैसी परिस्थितियों में मानव शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन करती है।

उन्होंने कहा, "हमारे सैनिक दुनिया के सबसे कठिन भौगोलिक क्षेत्रों और प्रतिकूल जलवायु परिस्थितियों में तैनात रहते हैं। यह विभाग ऐसे परिचालन वातावरण के अनुरूप चिकित्सा प्रोटोकॉल विकसित करेगा।"

नई चुनौतियों से निपटने में मददगार

राजनाथ सिंह ने कहा कि पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ व्यापक विनाश के हथियारों (Weapons of Mass Destruction) का खतरा भी बना हुआ है। ऐसे में यह विभाग अनुसंधान एवं विकास का प्रमुख केंद्र बनकर उभरती तकनीकी चुनौतियों से निपटने में देश की क्षमता को मजबूत करेगा।

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों और मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभियानों में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए यह विभाग आपदा प्रबंधन, फील्ड अस्पताल संचालन, बड़े पैमाने पर हताहतों के प्रबंधन तथा महामारी नियंत्रण में विशेषज्ञता विकसित करने में अहम भूमिका निभाएगा।

युवाओं के लिए नए अवसर

रक्षा मंत्री ने उम्मीद जताई कि यह विभाग आर्मी मेडिकल कॉर्प्स के युवा डॉक्टरों को युद्धक्षेत्र नर्सिंग और एडवांस ट्रॉमा लाइफ सपोर्ट का प्रशिक्षण देगा।

उन्होंने कहा, "अब छात्र सैन्य चिकित्सा में सुपर स्पेशलाइजेशन कर सकेंगे। इससे सेना की बौद्धिक क्षमता बढ़ेगी और अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में भारत की प्रतिष्ठा भी मजबूत होगी।"

निवारक स्वास्थ्य सेवा पर जोर

राजनाथ सिंह ने कहा कि 'प्रिवेंटिव हेल्थकेयर' यानी निवारक स्वास्थ्य सेवा को उपचार से पहले रक्षा की पहली पंक्ति माना जाना चाहिए।

उन्होंने रोग निगरानी, टीकाकरण, स्वच्छता, पोषण, शारीरिक फिटनेस, व्यावसायिक स्वास्थ्य और नियमित स्वास्थ्य जांच जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), वेयरेबल डिवाइस, प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स और आधुनिक डायग्नोस्टिक तकनीकों का उपयोग कर सैनिकों के स्वास्थ्य की वास्तविक समय में निगरानी की जा सकती है और संभावित स्वास्थ्य जोखिमों की समय रहते पहचान की जा सकती है।

विश्वस्तरीय अनुसंधान केंद्र बनाने का लक्ष्य

रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि सैन्य चिकित्सा विभाग देश की सैन्य सोच में एक क्रांतिकारी परिवर्तन का प्रतीक है।

उन्होंने कहा, "हमें मिलकर इस विभाग को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ 'बैटलफील्ड मेडिसिन रिसर्च सेंटर' बनाना है।"

सरकार के विजन को मिलेगा बल

यह विभाग रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने और सशस्त्र बलों की परिचालन तैयारियों को बेहतर बनाने के सरकार के विजन के अनुरूप है। साथ ही यह रक्षा रणनीति विजन 2026-30 के तहत प्रस्तावित ग्लोबल मिलिट्री मेडिसिन सेंटर की अवधारणा को भी आगे बढ़ाएगा।

इस पहल के साथ सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं (AFMS) को आधुनिक, प्रौद्योगिकी-सक्षम, परिचालन रूप से प्रभावी और रोगी-केंद्रित सैन्य स्वास्थ्य प्रणाली के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित हुआ है। यह भविष्य की रक्षा एवं राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए भारत की तैयारियों को भी और अधिक सुदृढ़ करेगा।

लखनऊ में ‘नौसेना शौर्य वाटिका’ का उद्घाटन, भारतीय नौसेना के शौर्य और बलिदान को समर्पित अनूठा संग्रहालय

No comments Document Thumbnail

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और योगी आदित्यनाथ ने 30 मई 2026 को लखनऊ में ‘नौसेना शौर्य वाटिका’ का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया। लगभग 19 करोड़ रुपये की लागत से दो एकड़ से अधिक क्षेत्र में विकसित यह ओपन-एयर डिस्प्ले म्यूज़ियम भारतीय नौसेना के शौर्य, पराक्रम और गौरवशाली इतिहास को समर्पित है। इसमें 34 वर्षों तक सेवा देने के बाद 29 मई 2022 को सेवामुक्त हुए युद्धपोत आईएनएस गोमती के हथियारों, उपकरणों और विभिन्न कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया है।

इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि नौसेना शौर्य वाटिका केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि प्रेरणा का प्रतीक है, जो आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता और सुरक्षा की वास्तविक कीमत का एहसास कराएगी। उन्होंने कहा कि यह वाटिका देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर सैनिकों के साहस और बलिदान की याद दिलाती रहेगी। यह केवल स्थापत्य कला का उदाहरण नहीं, बल्कि सैनिकों के प्रति कृतज्ञता की भावना को जागृत करने का माध्यम है और युवाओं में राष्ट्र निर्माण का उत्साह पैदा करेगी।

रक्षा मंत्री ने वर्तमान वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों में समुद्री मार्गों की सुरक्षा को विश्व शांति और समृद्धि की कुंजी बताते हुए भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता और तत्परता की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना ने भारतीय सेना और वायुसेना के साथ मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अरब सागर में नौसेना की मजबूत मौजूदगी ने विरोधी पक्ष पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया, जिसके कारण पाकिस्तान नौसेना अपने बंदरगाहों तक सीमित रही।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार एक मजबूत सेना और आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग के माध्यम से भारत को सुरक्षित एवं समृद्ध बनाने पर विशेष जोर दे रही है। उन्होंने कहा कि भारत तभी वास्तव में शक्तिशाली माना जाएगा जब उसकी सेनाएं हथियारों के लिए अन्य देशों पर निर्भर न रहें। इसी उद्देश्य से आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया, रक्षा औद्योगिक गलियारा (Defence Industrial Corridor), iDEX और ADITI जैसी पहलें शुरू की गई हैं।

राजनाथ सिंह ने बताया कि वर्ष 2014 में देश का रक्षा उत्पादन लगभग 46 हजार करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है और जल्द ही 1.75 लाख करोड़ रुपये के नए रिकॉर्ड को छू सकता है। वहीं रक्षा निर्यात 2014 में एक हजार करोड़ रुपये से भी कम था, जो अब लगभग 40 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि में उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। राज्य के सैनिक जहां देश की सुरक्षा में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं, वहीं रक्षा औद्योगिक गलियारा रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत कर रहा है। उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, व्यापार, सड़क, राजमार्ग और हवाई अड्डों के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की प्रगति की भी सराहना की।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में देश के वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी सुरक्षा के कारण ही देशवासी चैन की नींद सो पाते हैं। उन्होंने कहा कि विकास की योजनाएं तभी सफल हो सकती हैं जब राष्ट्र सुरक्षित और सशक्त हो। उन्होंने सैनिकों के सम्मान और कल्याण को विकसित भारत 2047 के लक्ष्य का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य,बृजेश पाठक नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी सहित कई वरिष्ठ सैन्य और नागरिक अधिकारी उपस्थित रहे।

नौसेना शौर्य वाटिका की विशेषताएँ

इस पार्क में आईएनएस गोमती पर लगे AK-726 नौसैनिक तोप, ZIF-101 मिसाइल लॉन्चर, सतह से हवा और सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल प्रणालियाँ, रडार, टॉरपीडो लॉन्चर, एंकर, जहाज के मस्तूल और अन्य उपकरण प्रदर्शित किए गए हैं। इसके अलावा इसमें अब सेवा से बाहर हो चुके लंबी दूरी के समुद्री गश्ती विमान TU-142M का वॉक-थ्रू संग्रहालय भी बनाया गया है। पार्क में फूड कोर्ट, स्मृति चिन्ह दुकान और आधुनिक प्रकाश एवं ध्वनि व्यवस्था जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।

आईएनएस गोमती के बारे में

आईएनएस गोमती का नाम गोमती नदी के नाम पर रखा गया था। इसे 16 अप्रैल 1988 को मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) में तत्कालीन रक्षा मंत्री द्वारा भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था। यह गोदावरी श्रेणी के गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट्स का तीसरा युद्धपोत था और सेवामुक्ति के समय पश्चिमी बेड़े का सबसे वरिष्ठ युद्धपोत माना जाता था।

अपने 34 वर्षों के गौरवशाली सेवाकाल में आईएनएस गोमती ने ऑपरेशन कैक्टस,ऑपरेशन पराक्रम,ऑपरेशन रेनबो सहित अनेक महत्वपूर्ण अभियानों और द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यासों में भाग लिया। राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा में उत्कृष्ट योगदान के लिए इसे 2007-08 और 2019-20 में प्रतिष्ठित यूनिट सिटेशन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के तहत लखनऊ ने 100% वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन की उपलब्धि हासिल की

No comments Document Thumbnail

लखनऊ में शिवारी सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के उद्घाटन के साथ शहरी सततता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल किया गया है। अब लखनऊ स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के तहत 100% वैज्ञानिक रूप से नगर निगम कचरे (Municipal Solid Waste) का प्रोसेसिंग करने वाला उत्तर प्रदेश का पहला शहर बन गया है। यह उपलब्धि लखनऊ को ‘जीरो फ्रेश वेस्ट डंप’ शहर का दर्जा देती है।

लखनऊ: बढ़ती शहरी चुनौतियों का वैज्ञानिक समाधान

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, लगभग 40 लाख निवासियों और 7.5 लाख प्रतिष्ठानों वाला एक तेज़ी से बढ़ता शहरी केंद्र है। इस तेज़ी से बढ़ती जनसंख्या और विकास के साथ कचरा प्रबंधन, पर्यावरण सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसी चुनौतियाँ भी बढ़ती जा रही हैं। लखनऊ नगर निगम (LMC) ने इन चुनौतियों का सामना वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, संसाधन पुनर्प्राप्ति और स्थायी शहरी विकास की रणनीतियों से किया है।

शिवारी प्लांट: तीसरा ताजा कचरा प्रोसेसिंग प्लांट

लखनऊ ने शिवारी में अपना तीसरा Fresh Waste Processing Plant शुरू किया है। इस प्लांट की क्षमता 700 टन प्रतिदिन है। इस प्लांट के साथ लखनऊ नगर निगम अब 2,100 टन प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले कचरे को वैज्ञानिक रूप से प्रोसेस कर सकता है, जिससे खुले में कचरा डालने की आवश्यकता समाप्त हो गई है।

कचरा प्रबंधन का वैज्ञानिक मॉडल

लखनऊ शहर में प्रतिदिन लगभग 2,000 टन कचरा उत्पन्न होता है। इसे संभालने के लिए LMC और Bhumi Green Energy ने तीनों प्लांट स्थापित किए हैं, जिनकी क्षमता प्रत्येक 700 टन/दिन है। कचरे को ऑर्गेनिक (55%) और इनऑर्गेनिक (45%) भागों में अलग किया जाता है।

  • ऑर्गेनिक कचरा → कम्पोस्ट और बायोगैस

  • इनऑर्गेनिक कचरा → रिसाइकलिंग / RDF (Refuse Derived Fuel)

  • RDF का उपयोग सीमेंट और पेपर उद्योगों में को-प्रोसेसिंग के लिए किया जाता है।

लखनऊ की डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण क्षमता 96.53% तक बढ़ चुकी है, और सोर्स सेग्रिगेशन (कचरा अलग करने) का स्तर 70% से अधिक है।

लगेसी वेस्ट का वैज्ञानिक निपटान

लखनऊ में लगभग 18.5 लाख मीट्रिक टन पुराने कचरे में से 12.86 लाख मीट्रिक टन को वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस किया जा चुका है। इससे RDF, C&D waste, bio-soil, coarse fractions जैसे उपयोगी उत्पाद प्राप्त हुए हैं, जिन्हें:

  • रिसाइकलिंग

  • को-प्रोसेसिंग

  • लैंडफिलिंग

  • इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट
    में उपयोग किया गया है।

RDF और अन्य उत्पादों का उपयोग

  • RDF: लगभग 2.27 लाख मीट्रिक टन उद्योगों में भेजा गया

  • Coarse fraction: 4.38 लाख MT

  • Bio-soil: 0.59 लाख MT

  • C&D Waste: 2.35 लाख MT

शिवारी साइट का रूपांतरण

शिवारी साइट पर 25 एकड़ से अधिक भूमि को पुनः विकसित किया गया और इसे एक पूर्ण-कार्यात्मक ताजा कचरा उपचार सुविधा में बदला गया। यहाँ windrow pads, internal roads, sheds, weighbridges सहित सम्पूर्ण कचरा प्रबंधन प्रणाली स्थापित की गई है।

आगे की योजना: Waste-to-Energy (WtE) प्लांट

LMC शिवारी में Waste-to-Energy (WtE) प्लांट स्थापित करने की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित 15 MW WtE प्लांट RDF को बिजली में बदलने में सक्षम होगा। यह प्लांट प्रतिदिन 1,000–1,200 टन RDF का उपयोग करेगा, जिससे RDF को दूर के सीमेंट कारखानों तक ले जाने की लागत और दूरी कम होगी।

लखनऊ का मॉडल: सर्कुलर इकोनॉमी की मिसाल

लखनऊ का कचरा प्रबंधन मॉडल सर्कुलर इकोनॉमी के सिद्धांतों पर आधारित है—
संसाधन पुनर्प्राप्ति, लगेसी वेस्ट न्यूनतम करना, और पुन: उपयोग को बढ़ावा देना। यह मॉडल न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अन्य शहरों के लिए प्रेरणादायक है।


लखनऊ में आज से शुरू होगा 86वां अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर होगा मंथन

No comments Document Thumbnail

लखनऊ- उत्तर प्रदेश विधानसभा, लखनऊ में आज से तीन दिवसीय 86वां अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (AIPOC) का शुभारंभ हो रहा है। सम्मेलन का उद्घाटन उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल द्वारा किया जाएगा।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला उद्घाटन सत्र को संबोधित करेंगे। वहीं, उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना स्वागत भाषण देंगे। उद्घाटन सत्र में उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत करेंगे।

इस अवसर पर राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश तथा उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय भी विशिष्ट अतिथियों को संबोधित करेंगे। उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्रीगण, विधान परिषद एवं विधानसभा के सदस्य तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगे।

आज से 21 जनवरी 2026 तक चलने वाले इस सम्मेलन के दौरान विधायी प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और नागरिक-केंद्रित बनाने पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा। सम्मेलन के प्रमुख एजेंडा बिंदुओं में तकनीक का उपयोग, विधायकों की क्षमता निर्माण के माध्यम से लोकतांत्रिक शासन को सशक्त बनाना तथा जनता के प्रति विधायिका की जवाबदेही जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।

सम्मेलन का समापन 21 जनवरी 2026 को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समापन भाषण के साथ होगा। समापन सत्र में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह और विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना उपस्थित रहेंगे और संबोधित करेंगे।

गौरतलब है कि 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन से पूर्व आज ही लखनऊ में भारत के विधायी निकायों के सचिवों का 62वां सम्मेलन भी आयोजित किया जा रहा है।

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.