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‘अपराजिता–पारंग ला 2026’: NCC की 28 बालिका कैडेटों का 5,578 मीटर ऊंचाई पर 250 किमी का साहसिक ट्रेक

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 18 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) की प्रमुख साहसिक गतिविधि ‘अपराजिता – पारंग ला 2026’ अखिल भारतीय बालिका हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग ट्रेक को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

यह ट्रेक 5,578 मीटर (18,300 फीट) ऊंचे पारंग ला दर्रे से होकर गुजरेगा, जो हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी को लद्दाख के चांगथांग क्षेत्र से जोड़ता है। इसे देश के सबसे चुनौतीपूर्ण उच्च-ऊंचाई वाले ट्रेकिंग मार्गों में से एक माना जाता है।

इस अभियान का नेतृत्व तीनों सेनाओं का प्रतिनिधित्व करने वाली तीन महिला अधिकारी करेंगी। अभियान में 28 बालिका कैडेट हिस्सा ले रही हैं, जिनकी औसत आयु 19 वर्ष है। सबसे कम उम्र की प्रतिभागी की आयु केवल 16½ वर्ष है। रक्षा मंत्री ने इतनी कम उम्र की बालिकाओं की इस चुनौतीपूर्ण उच्च-ऊंचाई वाले अभियान में भागीदारी को देश की महिलाओं के साहस, दृढ़ संकल्प और बढ़ती क्षमताओं का सशक्त प्रमाण बताया।

अधिकारियों, चिकित्सा दल, प्रशिक्षकों और सहयोगी कर्मियों के साथ अभियान दल लगभग 250 किलोमीटर की दूरी 30 दिनों में तय करेगा। यह यात्रा हिमालय के अत्यंत दुर्गम और चुनौतीपूर्ण भूभाग से होकर गुजरेगी। अभियान के मार्ग में किब्बर, डुमला, थलटक, बोंग्रोजन, पारंग ला दर्रा, डाक कारजोंग, नोरबू सुमदो, कियांगडोम और कोरजोक शामिल हैं। दल ऊंचाई वाले रेगिस्तानों, ग्लेशियरों, बर्फीले मैदानों और नदी घाटियों को पार करेगा।

दल को सुरक्षित और सफल अभियान के लिए शुभकामनाएं देते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि ऐसे अभियान युवाओं में नेतृत्व क्षमता, मानसिक दृढ़ता, अनुशासन और आत्मविश्वास विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने चयनित कैडेटों की शारीरिक और मानसिक तैयारी की सराहना करते हुए कहा कि यह ट्रेक उनके लिए दृढ़ता, आत्मविश्वास और आत्म-खोज का जीवन-पाठ साबित होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि कैडेट पारंग ला से केवल यादगार अनुभव ही नहीं, बल्कि अपनी आंतरिक शक्ति की गहरी समझ लेकर लौटेंगी।

रक्षा मंत्री ने अभियान दल के सदस्यों से पूरे अभियान के दौरान ‘सुरक्षा’, ‘पर्यावरण’ और ‘स्थानीय समुदायों के साथ संवाद’ को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने कैडेटों को प्रशिक्षकों के निर्देशों का सख्ती से पालन करने, अनावश्यक जोखिमों से बचने और हिमालयी पारिस्थितिकी की रक्षा के लिए शून्य-कचरा (Zero Waste) दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी। उन्होंने स्थानीय समुदायों के साथ सम्मानपूर्वक संवाद करने, उनकी संस्कृति एवं परंपराओं को समझने और उनके अनुभवों से सीखने पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा कि यह अभियान कैडेटों के जीवन में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगा और उन्हें जीवन के हर चरण में ‘अपराजिता’ बने रहने के लिए प्रेरित करेगा।

भूमि, जल और वायु क्षेत्र में साहसिक गतिविधियों में NCC कैडेटों की बढ़ती उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए राजनाथ सिंह ने बालिका कैडेटों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ये कैडेट आगे बढ़कर नेतृत्व करते हुए ‘नारी शक्ति’ की भावना का प्रदर्शन कर रही हैं।

देशभर के विभिन्न NCC निदेशालयों से आए कैडेटों की भागीदारी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अलग-अलग भाषाओं, संस्कृतियों और पृष्ठभूमियों से आने वाले ये युवा एक साझा उद्देश्य के लिए एकजुट होकर ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।

इस अवसर पर NCC के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल वीरेंद्र वात्स तथा NCC और रक्षा मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

अभियान को दो चरणों में आयोजित किया जा रहा है। पहले चरण में भाभा-पिन घाटी क्षेत्र में तैयारी और अनुकूलन (Acclimatisation) ट्रेक कराया गया, जिसके बाद योग्यता के आधार पर NCC की बालिका कैडेटों की अंतिम टीम का चयन किया गया।

इस अभियान की परिकल्पना NCC की बालिका कैडेटों में नारी शक्ति, नेतृत्व, आत्मविश्वास, टीम भावना, सहनशक्ति और राष्ट्रीय एकीकरण की भावना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई है।


‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने दुनिया को भारत की सैन्य शक्ति और नागरिकों की सुरक्षा के संकल्प का संदेश दिया: राजनाथ सिंह

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नई दिल्ली- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने भारतीय सशस्त्र बलों के अद्वितीय शौर्य और पराक्रम को प्रदर्शित किया तथा पूरी दुनिया को यह संदेश दिया कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और हमारी महिलाओं के सिंदूर की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।

रक्षा मंत्री 9 अगस्त 2026 को दिल्ली कैंट स्थित बेस अस्पताल में आयोजित ‘सिंदूर महारक्तदान यात्रा’ रक्तदान शिविर को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने भारतीय रक्षा बलों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने पाकिस्तान में स्थित आतंकवादियों और उनके आकाओं का सफाया किया तथा भारत की ओर बुरी नजर से देखने वालों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़े।

‘सिंदूर महारक्तदान यात्रा’ की तुलना ऑपरेशन सिंदूर से करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि जहां ऑपरेशन सिंदूर ने साहस और शौर्य का परिचय दिया, वहीं यह विशाल रक्तदान शिविर करुणा और मानव सेवा का प्रतीक है। शिविर में महाराष्ट्र के लगभग 1,000 पहलवानों और खिलाड़ियों ने रक्तदान कर निस्वार्थ सेवा और सशस्त्र बलों के प्रति एकजुटता की भावना का प्रदर्शन किया।

रक्तदाताओं का आभार व्यक्त करते हुए रक्षा मंत्री ने विश्वास जताया कि आज दान किया गया रक्त भविष्य में जरूरतमंद सैनिकों और उनके परिवारों के लिए महत्वपूर्ण भंडार के रूप में काम आएगा। उन्होंने रक्तदान को ‘जीवनदान’ और ‘महादान’ बताते हुए कहा कि विज्ञान और चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति के बावजूद मानव रक्त का अभी तक कोई कृत्रिम विकल्प विकसित नहीं किया जा सका है। रक्त केवल मानव शरीर द्वारा ही बनाया जा सकता है और एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को रक्तदान कर सकता है। इसलिए रक्तदान मानव सेवा और परोपकार के सबसे महान कार्यों में से एक है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रत्येक रक्तदाता और रक्त प्राप्त करने वाला व्यक्ति अपने-अपने तरीके से राष्ट्र की सेवा कर रहा है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से रक्तदान को अपनी जीवनशैली और सामाजिक संस्कृति का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि जब भारत वर्ष 2047 में स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब हमारा लक्ष्य केवल विकसित अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं होना चाहिए। हमें एक ऐसे संवेदनशील समाज की भी कल्पना करनी चाहिए, जहां लोग स्वस्थ और सुरक्षित हों तथा जरूरत के समय रक्त जैसी जीवनरक्षक सामग्री आसानी से उपलब्ध हो।

युवाओं से फिटनेस को प्राथमिकता देने का आह्वान करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि स्वस्थ और फिट व्यक्ति समाज के लिए अधिक उपयोगी होता है और रक्तदान जैसे नेक कार्यों में बेहतर योगदान दे सकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ‘खेलो इंडिया’ और ‘फिट इंडिया’ जैसी पहलों के माध्यम से विशेष रूप से युवाओं को फिटनेस को जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

महाराष्ट्र की वीरता और करुणा की समृद्ध परंपरा का उल्लेख करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत आज भी पीढ़ियों को प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि शारीरिक शक्ति का वास्तविक उद्देश्य दूसरों की रक्षा करना और राष्ट्र की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। छत्रपति शिवाजी महाराज की भूमि से आए खिलाड़ियों और पहलवानों का यह योगदान राष्ट्र के लिए एक महान सेवा के रूप में याद रखा जाएगा।

कार्यक्रम में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रताप राव जाधव, महाराष्ट्र सरकार के उद्योग मंत्री उदय रविंद्र सामंत, सांसद डॉ. श्रीकांत लता एकनाथ शिंदे, थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, सशस्त्र सेना चिकित्सा सेवा (AFMS) के महानिदेशक सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन, एडजुटेंट जनरल लेफ्टिनेंट जनरल वी.पी.एस. कौशिक, बेस अस्पताल दिल्ली कैंट के कमांडेंट मेजर जनरल विशाल चौधरी सहित वरिष्ठ सैन्य एवं नागरिक अधिकारी उपस्थित रहे।

सशस्त्र सेना चिकित्सा सेवा (AFMS) के लिए पर्याप्त रक्त भंडार बनाए रखना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि सैन्य अस्पताल नियमित स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ ऑपरेशनल, ट्रॉमा और आपातकालीन परिस्थितियों में भी चिकित्सा सहायता प्रदान करते हैं। लगभग 500 स्वैच्छिक रक्तदाताओं की भागीदारी ने ‘सेवा परमो धर्म’ की भावना को मजबूत किया और यह संदेश दिया कि प्रत्येक पात्र नागरिक नियमित स्वैच्छिक रक्तदान के माध्यम से जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा मंत्रालय में सैन्य और असैन्य एकीकरण को और मजबूत करने पर दिया जोर

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नई दिल्ली- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय सशस्त्र बल जब अधिक संयुक्तता (Jointness) की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, ऐसे समय में रक्षा मंत्रालय के सैन्य एवं असैन्य (सिविल) घटकों के बीच बेहतर समन्वय और गहरा एकीकरण अत्यंत आवश्यक है। इससे बदलती सुरक्षा और तकनीकी चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकेगा तथा संस्थागत अनुभव, स्थिरता और नियमों के बेहतर अनुपालन को भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।

नई दिल्ली में 85वें सशस्त्र बल मुख्यालय (AFHQ) सिविलियन सर्विसेज दिवस समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि वर्दीधारी और सिविल सेवाएं दोनों ही "राष्ट्र प्रथम" की भावना से कार्य करती हैं। जब लक्ष्य एक होता है, तो व्यवस्था का प्रत्येक अंग राष्ट्रीय शक्ति में परिवर्तित हो जाता है।

उन्होंने कहा कि सैन्य और प्रशासनिक एकीकरण अलग-अलग रास्तों पर नहीं चल सकते। जैसे-जैसे संयुक्त और एकीकृत संरचनाएं विकसित होंगी, नीति निर्माण, प्रशासन, मानव संसाधन प्रबंधन, वित्तीय प्रक्रियाओं, लॉजिस्टिक्स तथा संस्थागत ज्ञान जैसे क्षेत्रों में निरंतरता और विशेषज्ञता की आवश्यकता और बढ़ेगी।

रक्षा मंत्री ने सैन्य और सिविल अधिकारियों के बीच संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा क्रॉस-एक्सपोजर को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सैन्य अधिकारी युद्ध संचालन और कमान का अनुभव लेकर आते हैं, जबकि सिविल अधिकारी प्रशासनिक निरंतरता, नीतिगत अनुभव, सरकारी प्रक्रियाओं की समझ और संस्थागत स्मृति प्रदान करते हैं। इन दोनों की संयुक्त क्षमता निर्णय प्रक्रिया को अधिक संतुलित, प्रभावी और सशक्त बनाती है।

साइबर युद्ध और रक्षा अनुसंधान पर विशेष जोर

राजनाथ सिंह ने साइबर युद्ध (Cyber Warfare) का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि AFHQ सिविलियन सर्विसेज के अधिकारी अपनी विशेषज्ञता का उपयोग कर रक्षा क्षेत्र के लिए विशेष साइबर उपकरण विकसित करें, तो यह सशस्त्र बलों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।

उन्होंने भारतीय सैन्य इतिहास के अध्ययन के लिए एक विशेष मंच विकसित करने का भी सुझाव दिया, जहां सिविल दृष्टिकोण से अध्ययन कर नए विचार और रणनीतिक सोच विकसित की जा सके। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि AFHQ सिविलियन सर्विसेज अपनी विशेषज्ञता के माध्यम से रक्षा क्षेत्र में और अधिक सार्थक योगदान दे सकती है।

"रक्षा प्रबंधन का रणनीतिक मस्तिष्क बने AFHQ"

रक्षा मंत्री ने AFHQ सिविलियन सर्विसेज से आह्वान किया कि वह भारत की रक्षा प्रबंधन व्यवस्था का "रणनीतिक मस्तिष्क (Strategic Brain)" बने। इसके लिए रक्षा क्षेत्र की व्यापक समझ विकसित करनी होगी, संयुक्त वातावरण में प्रभावी ढंग से कार्य करना होगा तथा उभरती चुनौतियों के अनुरूप अपनी विशेषज्ञता को निरंतर बढ़ाना होगा।

उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध तकनीकी नवाचारों पर आधारित है, इसलिए अब केवल सेवा नियमों और आदेशों के पालन तक सीमित रहने के बजाय रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान, भू-रणनीतिक सोच और नवाचार पर भी विशेष ध्यान देना आवश्यक है।

उन्होंने कहा, "किसी भी सेना की शक्ति केवल उसके हथियारों और गोला-बारूद से नहीं, बल्कि उन हजारों अदृश्य हाथों से भी आती है जो हर समय उसके साथ खड़े रहते हैं। AFHQ सिविलियन सर्विसेज भी ऐसी ही एक महत्वपूर्ण और निर्णायक शक्ति है।"

कई डिजिटल पहल की शुरुआत

समारोह के दौरान रक्षा मंत्री ने संयुक्त सचिव एवं मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (JS & CAO) कार्यालय की कई डिजिटल पहलों तथा संशोधित विजन एवं मिशन स्टेटमेंट का शुभारंभ किया। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—

  • इंटरनेट आधारित आवास प्रबंधन प्रणाली (IBAMS) पोर्टल।

  • eHRMS का TULIP 2.0 प्रणाली से एकीकरण।

  • वेतन एवं भत्तों के ऑनलाइन प्रसंस्करण हेतु CAO कार्यालय का TULIP 2.0 से एकीकरण।

  • स्मार्ट परफॉर्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट रिकॉर्डिंग ऑनलाइन विंडो (SPARROW) पोर्टल पर ऑनबोर्डिंग।

इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने 'संवाद' पत्रिका के 34वें अंक का भी विमोचन किया, जिसमें सेवा मुख्यालयों एवं अंतर-सेवा संगठनों में कार्यरत कर्मचारियों द्वारा लिखे गए यात्रा-वृत्तांत, निबंध, लेख और कविताएं प्रकाशित की गई हैं।

उन्होंने खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले AFHQ कर्मियों तथा शैक्षणिक उपलब्धियां हासिल करने वाले कर्मचारियों के बच्चों को सम्मानित भी किया।

कार्यक्रम में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि, नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन, थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह सहित रक्षा मंत्रालय के अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

AFHQ दिवस का महत्व

हर वर्ष 1 अगस्त को AFHQ दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य रक्षा मंत्रालय के तीनों एकीकृत सेवा मुख्यालयों, मुख्यालय इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ तथा 24 अंतर-सेवा संगठनों में कार्यरत उन असैन्य कर्मचारियों के योगदान को सम्मान देना है, जो सशस्त्र बलों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर देश की रक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। AFHQ कैडर की स्थापना 1 अगस्त 1942 को की गई थी।


वाइस एडमिरल एएन प्रमोद, एवीएसएम, वाईएसएम ने 01 अगस्त 2026 को उप नौसेना प्रमुख (Deputy Chief of Naval Staff) का पदभार ग्रहण किया।

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38वें इंटीग्रेटेड कैडेट कोर्स, नौसेना अकादमी, गोवा के पूर्व छात्र वाइस एडमिरल एएन प्रमोद को 01 जुलाई 1990 को भारतीय नौसेना में कमीशन प्राप्त हुआ था। वे श्रेणी ‘A’ (CAT ‘A’) सी किंग एयर ऑपरेशंस ऑफिसर तथा संचार एवं इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (Communication and Electronic Warfare) विशेषज्ञ हैं। उन्होंने डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन तथा नेवल वॉर कॉलेज, गोवा से नेवल हायर कमांड कोर्स भी किया है।

36 वर्षों से अधिक के अपने विशिष्ट सैन्य करियर में उन्होंने समुद्र और तट—दोनों क्षेत्रों में कमान, संचालन, प्रशिक्षण और स्टाफ से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण दायित्व निभाए हैं। उनके प्रमुख समुद्री दायित्वों में गाइडेड मिसाइल विध्वंसक आईएनएस राजपूत के कार्यकारी अधिकारी (Executive Officer), पनडुब्बी रोधी युद्धक गश्ती पोत आईएनएस अभय, लैंडिंग शिप टैंक (लार्ज) आईएनएस शार्दुल तथा गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट आईएनएस सतपुड़ा की कमान शामिल है। उन्होंने गलवान घटना के बाद ऑपरेशन स्नो लेपर्ड के दौरान पश्चिमी बेड़े (Western Fleet) के फ्लीट ऑपरेशंस ऑफिसर के रूप में भी सेवाएं दीं। इसके अतिरिक्त उन्होंने वर्ष 1999 के ऑपरेशन विजय तथा वर्ष 2001 के ऑपरेशन पराक्रम में भी भाग लिया।

तटीय नियुक्तियों में उन्होंने श्री विजयपुरम स्थित नौसेना वायु स्टेशन आईएनएस उत्क्रोश के कमांडिंग ऑफिसर के रूप में कार्य किया तथा डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन में डायरेक्टिंग स्टाफ के रूप में भी सेवाएं दीं। नौसेना मुख्यालय में उनकी प्रमुख नियुक्तियों में संयुक्त निदेशक (नेवल एयर स्टाफ), निदेशक तथा प्रधान निदेशक (विमान अधिग्रहण) शामिल रहे। वे वर्ष 2006 से 2009 तक टैक्टिकल ऑडिट ग्रुप तथा वर्ष 2016 से 2019 तक भारतीय नौसेना की स्ट्रैटेजिक एंड ऑपरेशनल काउंसिल के सदस्य भी रहे।

रियर एडमिरल के पद पर पदोन्नति के बाद उन्होंने भारतीय नौसेना अकादमी के उप कमांडेंट, सहायक नौसेना प्रमुख (वायु) तथा फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग, महाराष्ट्र नौसैनिक क्षेत्र के रूप में दायित्व निभाए।

वाइस एडमिरल के पद पर पदोन्नति के उपरांत उन्होंने 13 दिसंबर 2023 से 31 जुलाई 2026 तक महानिदेशक नौसैनिक संचालन (Director General Naval Operations – DGNO) के रूप में कार्य किया। डीजीएनओ के रूप में वे ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना की योजना, तैयारी और परिचालन तत्परता तथा पश्चिम एशिया में जारी संकट के दौरान समुद्री सुरक्षा अभियानों के संचालन में महत्वपूर्ण रूप से जुड़े रहे।

उनकी विशिष्ट सेवाओं और उत्कृष्ट परिचालन नेतृत्व के सम्मान में उन्हें वर्ष 2024 में अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) तथा वर्ष 2025 में युद्ध सेवा पदक (YSM) से सम्मानित किया गया।

उन्होंने वाइस एडमिरल तरुण सोबती, यूवाईएसएम, एवीएसएम, वीएसएम का स्थान लिया है, जो 38 वर्षों से अधिक की विशिष्ट सेवा के बाद 31 जुलाई 2026 को सेवानिवृत्त हुए।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ अभियान की सफल महिला सैन्य अधिकारियों को किया सम्मानित

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नई दिल्ली- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय सेना की नौकायन पोत आईएएसवी त्रिवेणी (IASV Triveni) पर सवार होकर ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ नामक पहले त्रि-सेवा (थल सेना, नौसेना और वायु सेना) अखिल महिला विश्व परिक्रमा नौकायन अभियान को सफलतापूर्वक पूरा कर स्वदेश लौटीं तीनों सेनाओं की नौ महिला अधिकारियों को सम्मानित किया।

रक्षा मंत्री ने अधिकारियों से बातचीत करते हुए 314 दिनों में लगभग 25,500 समुद्री मील की यात्रा कर चार महासागरों को पार करने वाली इस ऐतिहासिक उपलब्धि की सराहना की। उन्होंने इसे ‘नारी शक्ति’ का प्रतीक और त्रि-सेवा संयुक्तता एवं समन्वय (Tri-service Jointness & Synergy) का उत्कृष्ट उदाहरण बताया, जो देश के हर नागरिक को प्रेरित करेगा।

महिला अधिकारियों ने अभियान के अनुभव साझा करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद देश का गौरव बढ़ाने का संकल्प ही उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा रहा। इसी दृढ़ निश्चय के बल पर उन्होंने शारीरिक और मानसिक चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया। इस पर राजनाथ सिंह ने कहा कि उनकी प्रतिबद्धता ने उन्हें भी प्रेरित किया है और यह सिद्ध करती है कि मजबूत इच्छाशक्ति और दृढ़ संकल्प से कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।

रक्षा मंत्री ने अधिकारियों की क्षमता और आत्मविश्वास को “अद्भुत” बताते हुए कहा कि इस अभियान ने उन सभी रूढ़ियों को तोड़ दिया है, जो यह मानती थीं कि महिलाएँ कठिन सैन्य अभियानों को सफलतापूर्वक पूरा नहीं कर सकतीं। उन्होंने कहा, “आपने साबित कर दिया है कि शारीरिक क्षमता, मानसिक दृढ़ता और नेतृत्व किसी लिंग के बंधन में नहीं होते। भारत की हर बेटी अब आपसे प्रेरणा लेकर विश्वास कर सकती है कि वह भी महासागरों को पार कर दुनिया जीत सकती है।”

उन्होंने इस अभियान को ‘त्रि-सेवा संयुक्तता’ का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना के अधिकारी एक ही पोत पर, एक ही ध्वज के नीचे, एक साझा मिशन के लिए साथ आए। यह अभियान इस बात का प्रमाण है कि यदि हम एकजुट होकर आगे बढ़ें, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।

राजनाथ सिंह ने टीम की सराहना करते हुए कहा कि अभियान के दौरान विभिन्न देशों में भारत की इंजीनियरिंग उत्कृष्टता, स्वदेशी क्षमताओं और तकनीकी प्रगति का प्रभावी प्रदर्शन किया गया, जिससे दुनिया को यह संदेश मिला कि भारत किसी भी क्षेत्र में किसी से कम नहीं है।

इस अवसर पर थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, वायु सेना के उप प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित, नौसेना के उप प्रमुख वाइस एडमिरल अजय कोच्छर तथा तीनों सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि 22 जुलाई 2026 को मुंबई में रक्षा मंत्री ने वर्चुअल माध्यम से आईएएसवी त्रिवेणी का स्वागत (Flag-in) किया था। वहीं 11 सितंबर 2025 को उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस ऐतिहासिक अभियान को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।

करीब दो वर्षों के गहन प्रशिक्षण, सूक्ष्म योजना, 24×7 तटीय सहायता तंत्र और अनेक संस्थाओं के सहयोग से यह मिशन सफल हुआ। अभियान ने विश्व परिक्रमा के सभी अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करते हुए सभी देशांतरों को पार किया, भूमध्य रेखा को दो बार, अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा को पार किया तथा केप लीउविन, केप हॉर्न और केप ऑफ गुड होप जैसे तीन महान केप्स का सफलतापूर्वक चक्कर लगाया।

इसके अतिरिक्त, टीम ने विश्व के सबसे चुनौतीपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक ड्रेक पैसेज को पार कर केप हॉर्न का सफलतापूर्वक चक्कर लगाया, जिसके बाद उन्हें प्रतिष्ठित ‘केप हॉर्नर्स’ समुदाय की सदस्यता प्राप्त हुई। यह सम्मान केवल उन नाविकों को दिया जाता है, जो इस कठिन समुद्री मार्ग को सफलतापूर्वक पार करते हैं।

यह अभियान केवल एक समुद्री उपलब्धि नहीं, बल्कि सैन्य कूटनीति (Military Diplomacy) का भी प्रभावी माध्यम बना। विभिन्न देशों में ठहराव के दौरान आईएएसवी त्रिवेणी ने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, समुद्री परंपराओं, सैन्य पेशेवर उत्कृष्टता और मूल्यों का प्रदर्शन करते हुए मित्र देशों के साथ सद्भाव और सहयोग को और मजबूत किया।


कारगिल विजय दिवस: वीरता, बलिदान और राष्ट्रगौरव का अमर प्रतीक

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नई दिल्ली- आज पूरा देश 27वां कारगिल विजय दिवस गर्व और श्रद्धा के साथ मना रहा है। यह दिन उन वीर सैनिकों के अदम्य साहस, अद्वितीय शौर्य और सर्वोच्च बलिदान को नमन करने का अवसर है, जिन्होंने 1999 के कारगिल युद्ध में दुर्गम पहाड़ियों पर दुश्मन को परास्त कर भारत की विजय सुनिश्चित की। इस अवसर पर देशभर में शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई और उनकी वीरगाथाओं को याद किया गया।

कारगिल युद्ध भारतीय सैन्य इतिहास के सबसे गौरवशाली अध्यायों में से एक माना जाता है। ऑपरेशन विजय के तहत भारतीय सेना ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और विपरीत मौसम के बावजूद अद्भुत साहस का परिचय देते हुए नियंत्रण रेखा (LoC) पर रणनीतिक चोटियों को दुश्मन के कब्जे से मुक्त कराया। इस ऐतिहासिक विजय ने दुनिया को भारतीय सैनिकों की वीरता और अटूट संकल्प का परिचय कराया।

कारगिल विजय दिवस केवल एक सैन्य जीत का उत्सव नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान की भावना का प्रतीक है। इस युद्ध में कैप्टन विक्रम बत्रा, कैप्टन मनोज कुमार पांडेय सहित अनेक वीर जवानों ने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उनका अद्वितीय साहस आज भी देश के युवाओं को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करता है।

इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने कहा कि कारगिल के वीर सैनिकों का साहस और राष्ट्र के प्रति उनका समर्पण सदैव देशवासियों को प्रेरित करता रहेगा। वहीं रक्षा मंत्री ने द्रास स्थित कारगिल युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए भारतीय सशस्त्र बलों की क्षमता और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

आज का दिन हर भारतीय को यह संदेश देता है कि राष्ट्र की सुरक्षा, एकता और अखंडता सर्वोपरि है। कारगिल के अमर शहीदों का बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा और भारत उनके ऋण को कभी नहीं भूल पाएगा।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने एमईएस अधिकारी प्रशिक्षुओं को किया संबोधित, आत्मनिर्भरता और सतत विकास पर दिया जोर

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नई दिल्ली- भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज राष्ट्रपति भवन में मिलिट्री इंजीनियर सर्विसेज (MES) के वर्ष 2023 और 2024 बैच के अधिकारी प्रशिक्षुओं से मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने देश की रक्षा अवसंरचना को मजबूत बनाने में एमईएस की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की और युवा अधिकारियों को उत्कृष्टता, नवाचार तथा राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पित रहने का संदेश दिया।

राष्ट्रपति ने कहा कि एमईएस देश की रक्षा अवसंरचना की रीढ़ है। रणनीतिक सैन्य प्रतिष्ठानों के निर्माण और रखरखाव के माध्यम से यह सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमता को मजबूत बनाता है। उन्होंने कहा कि एमईएस अधिकारियों का कौशल, समर्पण और कठिन परिश्रम सुनिश्चित करता है कि देश के सैनिक, नौसैनिक और वायु योद्धा अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सकें।

उन्होंने युवा अधिकारियों से उच्चतम स्तर की पेशेवर दक्षता, ईमानदारी, तकनीकी उत्कृष्टता और कर्तव्यनिष्ठा बनाए रखने का आग्रह किया। साथ ही, उभरती तकनीकों को अपनाने और प्रत्येक परियोजना में नवाचार को बढ़ावा देने की सलाह दी।

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य, जो संघर्षों और भू-राजनीतिक तनावों से प्रभावित है, उसमें आत्मनिर्भरता एक रणनीतिक आवश्यकता बन गई है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह स्पष्ट किया है कि स्वदेशी रक्षा क्षमताएं, उन्नत तकनीक और मजबूत घरेलू औद्योगिक आधार किसी भी राष्ट्र की परिचालन तत्परता और रणनीतिक प्रभावशीलता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि एमईएस ‘मेक इन इंडिया’ और स्वदेशी उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा दे रहा है।

पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के मुद्दों पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि सतत विकास अब विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता बन चुका है। उन्होंने कहा कि इंजीनियरों के रूप में एमईएस अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे योजना निर्माण, निर्माण कार्यों और रखरखाव गतिविधियों में पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ प्रथाओं को अपनाएं।

राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि एमईएस अधिकारियों के प्रयास न केवल भारत को अधिक सुरक्षित और सशक्त बनाएंगे, बल्कि एक स्वच्छ, हरित और सतत भारत के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देंगे।


आईएनएस चिल्का में 12 जून को आयोजित होगी 01/26 बैच की पासिंग आउट परेड

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भुवनेश्वर/चिल्का- भारतीय नौसेना के अग्निवीरों और भारतीय तटरक्षक बल (कोस्ट गार्ड) के नाविकों के 01/26 बैच की पासिंग आउट परेड (POP) 12 जून 2026 को आईएनएस चिल्का में आयोजित की जाएगी। यह परेड 16 सप्ताह के कठोर प्रारंभिक प्रशिक्षण के सफल समापन का प्रतीक है, जिसे भारतीय नौसेना के आठवें अग्निवीर बैच और भारतीय तटरक्षक बल के नाविकों ने पूरा किया है।

यह आयोजन प्रशिक्षुओं के अनुशासित, सशक्त और पेशेवर रूप से सक्षम ‘समुद्री योद्धाओं’ में परिवर्तन की महत्वपूर्ण उपलब्धि को दर्शाता है, जो अब राष्ट्र सेवा के लिए अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं।

इस अवसर पर पश्चिमी नौसैनिक कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, वाइस एडमिरल Sanjay Vatsayan मुख्य अतिथि एवं परेड के निरीक्षण अधिकारी होंगे। समारोह में प्रशिक्षुओं के परिजन, पूर्व सैनिक, प्रतिष्ठित खिलाड़ी और अन्य गणमान्य अतिथि भी उपस्थित रहेंगे।

पासिंग आउट परेड भारतीय नौसेना की उस प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसके तहत प्रशिक्षण को एक पेशेवर और सक्षम युद्धक बल की नींव माना जाता है। आईएनएस चिल्का अपने संरचित शैक्षणिक, शारीरिक और बाह्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को अनुशासित, आत्मविश्वासी और दक्ष समुद्री योद्धाओं के रूप में तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह प्रशिक्षण “कर्तव्य, सम्मान और साहस” के मूल्यों पर आधारित है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि समापन समारोह (Valedictory Function) की अध्यक्षता करेंगे तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षुओं, चैंपियन डिवीजन और सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षक को पुरस्कार एवं ट्रॉफियां प्रदान करेंगे। इस अवसर पर प्रशिक्षुओं की द्विभाषी पत्रिका ‘अंकुर’ का भी विमोचन किया जाएगा।

पासिंग आउट परेड के बाद प्रशिक्षुओं को विभिन्न नौसैनिक प्रतिष्ठानों और भारतीय नौसेना तथा भारतीय तटरक्षक बल के अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों पर विशेष व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा।

भारतीय नौसेना ने बताया कि इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण (Live Streaming) उसके आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर किया जाएगा।


लखनऊ में ‘नौसेना शौर्य वाटिका’ का उद्घाटन, भारतीय नौसेना के शौर्य और बलिदान को समर्पित अनूठा संग्रहालय

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और योगी आदित्यनाथ ने 30 मई 2026 को लखनऊ में ‘नौसेना शौर्य वाटिका’ का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया। लगभग 19 करोड़ रुपये की लागत से दो एकड़ से अधिक क्षेत्र में विकसित यह ओपन-एयर डिस्प्ले म्यूज़ियम भारतीय नौसेना के शौर्य, पराक्रम और गौरवशाली इतिहास को समर्पित है। इसमें 34 वर्षों तक सेवा देने के बाद 29 मई 2022 को सेवामुक्त हुए युद्धपोत आईएनएस गोमती के हथियारों, उपकरणों और विभिन्न कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया है।

इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि नौसेना शौर्य वाटिका केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि प्रेरणा का प्रतीक है, जो आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता और सुरक्षा की वास्तविक कीमत का एहसास कराएगी। उन्होंने कहा कि यह वाटिका देश की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर सैनिकों के साहस और बलिदान की याद दिलाती रहेगी। यह केवल स्थापत्य कला का उदाहरण नहीं, बल्कि सैनिकों के प्रति कृतज्ञता की भावना को जागृत करने का माध्यम है और युवाओं में राष्ट्र निर्माण का उत्साह पैदा करेगी।

रक्षा मंत्री ने वर्तमान वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों में समुद्री मार्गों की सुरक्षा को विश्व शांति और समृद्धि की कुंजी बताते हुए भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता और तत्परता की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना ने भारतीय सेना और वायुसेना के साथ मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अरब सागर में नौसेना की मजबूत मौजूदगी ने विरोधी पक्ष पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया, जिसके कारण पाकिस्तान नौसेना अपने बंदरगाहों तक सीमित रही।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार एक मजबूत सेना और आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग के माध्यम से भारत को सुरक्षित एवं समृद्ध बनाने पर विशेष जोर दे रही है। उन्होंने कहा कि भारत तभी वास्तव में शक्तिशाली माना जाएगा जब उसकी सेनाएं हथियारों के लिए अन्य देशों पर निर्भर न रहें। इसी उद्देश्य से आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया, रक्षा औद्योगिक गलियारा (Defence Industrial Corridor), iDEX और ADITI जैसी पहलें शुरू की गई हैं।

राजनाथ सिंह ने बताया कि वर्ष 2014 में देश का रक्षा उत्पादन लगभग 46 हजार करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है और जल्द ही 1.75 लाख करोड़ रुपये के नए रिकॉर्ड को छू सकता है। वहीं रक्षा निर्यात 2014 में एक हजार करोड़ रुपये से भी कम था, जो अब लगभग 40 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि में उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। राज्य के सैनिक जहां देश की सुरक्षा में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं, वहीं रक्षा औद्योगिक गलियारा रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत कर रहा है। उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, व्यापार, सड़क, राजमार्ग और हवाई अड्डों के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की प्रगति की भी सराहना की।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में देश के वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी सुरक्षा के कारण ही देशवासी चैन की नींद सो पाते हैं। उन्होंने कहा कि विकास की योजनाएं तभी सफल हो सकती हैं जब राष्ट्र सुरक्षित और सशक्त हो। उन्होंने सैनिकों के सम्मान और कल्याण को विकसित भारत 2047 के लक्ष्य का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य,बृजेश पाठक नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी सहित कई वरिष्ठ सैन्य और नागरिक अधिकारी उपस्थित रहे।

नौसेना शौर्य वाटिका की विशेषताएँ

इस पार्क में आईएनएस गोमती पर लगे AK-726 नौसैनिक तोप, ZIF-101 मिसाइल लॉन्चर, सतह से हवा और सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल प्रणालियाँ, रडार, टॉरपीडो लॉन्चर, एंकर, जहाज के मस्तूल और अन्य उपकरण प्रदर्शित किए गए हैं। इसके अलावा इसमें अब सेवा से बाहर हो चुके लंबी दूरी के समुद्री गश्ती विमान TU-142M का वॉक-थ्रू संग्रहालय भी बनाया गया है। पार्क में फूड कोर्ट, स्मृति चिन्ह दुकान और आधुनिक प्रकाश एवं ध्वनि व्यवस्था जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।

आईएनएस गोमती के बारे में

आईएनएस गोमती का नाम गोमती नदी के नाम पर रखा गया था। इसे 16 अप्रैल 1988 को मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) में तत्कालीन रक्षा मंत्री द्वारा भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था। यह गोदावरी श्रेणी के गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट्स का तीसरा युद्धपोत था और सेवामुक्ति के समय पश्चिमी बेड़े का सबसे वरिष्ठ युद्धपोत माना जाता था।

अपने 34 वर्षों के गौरवशाली सेवाकाल में आईएनएस गोमती ने ऑपरेशन कैक्टस,ऑपरेशन पराक्रम,ऑपरेशन रेनबो सहित अनेक महत्वपूर्ण अभियानों और द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यासों में भाग लिया। राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा में उत्कृष्ट योगदान के लिए इसे 2007-08 और 2019-20 में प्रतिष्ठित यूनिट सिटेशन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर स्मारक पुस्तक का विमोचन किया, 100 सैनिकों के अनुभव शामिल

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 29 मई 2026 को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर एक स्मारक पुस्तक (Commemorative Volume) का विमोचन किया, जिसमें इस अभियान में शामिल 100 अधिकारियों, सैनिकों, वायु सैनिकों और अन्य जवानों के व्यक्तिगत अनुभवों को संकलित किया गया है।

रक्षा मंत्री ने X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए इस प्रकाशन को उन सभी वीरों को श्रद्धांजलि बताया, जिन्होंने इस ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक नागरिकों को सैनिकों की समर्पण भावना और दृढ़ता से जुड़ने का अवसर देती है। उन्होंने यह भी कहा कि नागरिकों को इस पुस्तक से प्रेरणा लेनी चाहिए और राष्ट्र की सुरक्षा तथा संप्रभुता बनाए रखने के लिए देश द्वारा दिए जा रहे भारी बलिदान के योग्य नागरिक बनना चाहिए।

राजनाथ सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को एक अभूतपूर्व सफलता बताया, जिसमें भारत ने चार दिनों के भीतर पाकिस्तान को संघर्षविराम के लिए बाध्य किया। उन्होंने कहा कि यह अभियान अब तक के सभी युद्धों से अलग था और यह स्मारक प्रकाशन केवल ऐतिहासिक विवरण नहीं है, बल्कि इसमें सैनिकों के व्यक्तिगत अनुभवों को भी शामिल किया गया है।

उन्होंने कहा कि यह पुस्तक आधुनिक युद्ध के मानवीय पक्ष को भी दर्शाती है, जहां नेतृत्व, साहस, दबाव में निर्णय लेने की क्षमता और समर्पण रणनीति को सफलता में बदलते हैं।

यह प्रकाशन जानबूझकर पारंपरिक सैन्य इतिहास लेखन से अलग है, क्योंकि इसमें केवल मुख्यालय या संचालन कक्ष के दृष्टिकोण पर ही ध्यान नहीं दिया गया है, बल्कि वास्तविक युद्धभूमि के अनुभवों को भी शामिल किया गया है—जैसे एलओसी पर तैनात सैनिक, ड्रोन को निष्क्रिय करने वाले एयर डिफेंस ऑपरेटर, कॉम्बैट पायलट और नौसेना के कर्मी।

इस पुस्तक में तीनों सेनाओं के साथ-साथ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ, लॉजिस्टिक्स, मेडिकल, सिग्नल्स और अन्य सहयोगी इकाइयों के अनुभव शामिल हैं।

इस अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी, थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी और वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

इस पुस्तक का संकलन सीडीएस के मार्गदर्शन में किया गया है तथा इसे विभिन्न सैन्य मीडिया इकाइयों और यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया के सहयोग से प्रकाशित किया गया है।

वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन बने भारतीय नौसेना के नए प्रमुख

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 भारत सरकार ने कृष्णा स्वामीनाथन, पीवीएसएम, एवीएसएम, वीएसएम को भारतीय नौसेना का नया नौसेना प्रमुख (Chief of the Naval Staff) नियुक्त किया है। वर्तमान नौसेना प्रमुखदिनेश कुमार त्रिपाठी, पीवीएसएम, एवीएसएम, एनएम 31 मई 2026 को सेवा से सेवानिवृत्त होंगे।

वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने 31 जुलाई 2025 को पश्चिमी नौसेना कमान के 34वें फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ का कार्यभार संभाला था। उन्हें 01 जुलाई 1987 को भारतीय नौसेना में कमीशन प्राप्त हुआ था और वे संचार एवं इलेक्ट्रॉनिक युद्धकला के विशेषज्ञ हैं।

वे राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, यूनाइटेड किंगडम के जॉइंट सर्विसेज कमांड एंड स्टाफ कॉलेज, करंजा स्थित कॉलेज ऑफ नेवल वॉरफेयर तथा अमेरिका के यूनाइटेड स्टेट्स नेवल वॉर कॉलेज, न्यूपोर्ट (रोड आइलैंड) के पूर्व छात्र हैं।

परम विशिष्ट सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित एडमिरल ने अपने नौसैनिक करियर में कई महत्वपूर्ण ऑपरेशनल, स्टाफ और प्रशिक्षण संबंधी पदों पर कार्य किया है। उन्होंने मिसाइल पोत आईएनएस विद्युत और आईएनएस विनाश, मिसाइल कॉर्वेट आईएनएस कुलिश, गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर आईएनएस मैसूर तथा विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य की कमान संभाली है।

रियर एडमिरल के पद पर पदोन्नति के बाद उन्होंने कोच्चि स्थित दक्षिणी नौसेना कमान मुख्यालय में चीफ स्टाफ ऑफिसर (प्रशिक्षण) के रूप में कार्य किया और भारतीय नौसेना में प्रशिक्षण संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे भारतीय नौसेना सुरक्षा दल की स्थापना में भी प्रमुख रूप से शामिल रहे, जो नौसेना की सभी शाखाओं में ऑपरेशनल सुरक्षा की निगरानी करता है।

इसके बाद उन्होंने फ्लैग ऑफिसर सी ट्रेनिंग के रूप में नौसेना के वर्क-अप संगठन का नेतृत्व किया और बाद में पश्चिमी बेड़े के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग नियुक्त हुए। “स्वॉर्ड आर्म” की कमान संभालने के बाद उन्हें फ्लैग ऑफिसर ऑफशोर डिफेंस एडवाइजरी ग्रुप तथा भारत सरकार के ऑफशोर सुरक्षा एवं रक्षा सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया।

वाइस एडमिरल के पद पर पदोन्नति के बाद उन्होंने पश्चिमी नौसेना कमान में चीफ ऑफ स्टाफ, नेवल मुख्यालय में कंट्रोलर ऑफ पर्सनल सर्विसेज तथा चीफ ऑफ पर्सनल के रूप में सेवाएं दीं। वर्तमान नियुक्ति से पहले वे नेवल मुख्यालय में वाइस चीफ ऑफ द नेवल स्टाफ के पद पर कार्यरत थे।

वाइस एडमिरल स्वामीनाथन ने Jजवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से बीएससी, कोचीन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से दूरसंचार में एमएससी, किंग्स कॉलेज लंदन से रक्षा अध्ययन में एमए, तथा मुंबई विश्वविद्यालय से सामरिक अध्ययन में एमफिल और अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में पीएचडी की उपाधियां प्राप्त की हैं।

ऑपरेशन सिंदूर के एक साल पूरे, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेना के शौर्य को किया सलाम

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर के एक वर्ष पूर्ण होने पर भारतीय सशस्त्र बलों के साहस, सटीकता और संकल्प को नमन किया। उन्होंने कहा कि सेना ने पहलगाम में निर्दोष भारतीयों पर हमला करने वालों को करारा जवाब दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की आतंकवाद के खिलाफ दृढ़ नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि इस अभियान ने सशस्त्र बलों की पेशेवर क्षमता, तैयारी और आपसी समन्वय को प्रदर्शित किया। साथ ही रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत की बढ़ती ताकत भी सामने आई।

मोदी ने देशवासियों से अपील की कि वे सशस्त्र बलों के सम्मान में अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की डीपी बदलकर ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी तस्वीर लगाएं। उन्होंने कहा कि हर भारतीय को अपनी सेना पर गर्व है।

त्रि-सेवाओं का फ्यूचर वॉरफेयर कोर्स 02 फरवरी से नई दिल्ली में प्रारंभ

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त्रि-सेवाओं के फ्यूचर वॉरफेयर कोर्स का तृतीय संस्करण 02 से 25 फरवरी 2026 तक नई दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर में आयोजित किया जाएगा। यह पाठ्यक्रम मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ के तत्वावधान में तथा सेंटर फॉर जॉइंट वॉरफेयर स्टडीज़ (CENJOWS) के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। इस संस्करण में सैन्य अभियानों में उभरते विशेषीकृत विषयों एवं डोमेन-विशिष्ट युद्धक विकास को समाहित करते हुए पाठ्यक्रम को और अधिक समृद्ध किया गया है।

यह कोर्स इस बात की गहन समझ विकसित करने पर केंद्रित है कि किस प्रकार प्रौद्योगिकी युद्ध संचालन को प्रभावित कर रही है, जिससे हमारी सोच, अवधारणाओं, सिद्धांतों, रणनीतियों तथा टैक्टिक्स, टेक्नीक्स और प्रोसीजर्स (TTPs) पर पुनर्विचार की आवश्यकता उत्पन्न हो रही है। पाठ्यक्रम के अंतर्गत महत्वपूर्ण विषयों का गहन अध्ययन, उभरती प्रौद्योगिकियों के व्यावहारिक प्रदर्शन तथा रक्षा बलों की क्षमताओं के लिए महत्वपूर्ण संस्थानों का भ्रमण भी शामिल है।

इस कोर्स में तीनों सेनाओं के अधिकारियों के साथ-साथ रक्षा उद्योग से जुड़े प्रतिनिधि—जिनमें स्टार्टअप्स, एमएसएमई, रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (DPSUs) तथा निजी उद्योग शामिल हैं—भाग ले रहे हैं। सेनाओं से भाग लेने वाले अधिकारियों की वरिष्ठता मेजर से लेकर मेजर जनरल (एवं समकक्ष) तक है, जहाँ कनिष्ठ अधिकारी अपनी तकनीकी दक्षता एवं नवाचार दृष्टिकोण के साथ योगदान दे रहे हैं, वहीं वरिष्ठ अधिकारी अपने संचालन अनुभव एवं रणनीतिक ज्ञान से पाठ्यक्रम को समृद्ध कर रहे हैं।

फ्यूचर वॉरफेयर कोर्स का उद्देश्य सशस्त्र बलों की परिचालन प्राथमिकताओं को स्वदेशी रक्षा उद्योग की क्षमताओं के साथ संरेखित करना है तथा आधुनिक एवं भविष्य के युद्ध के विभिन्न पहलुओं पर मुक्त एवं सार्थक संवाद को प्रोत्साहित करना है। इस दौरान पूर्व सैनिकों, सेवारत अधिकारियों, पूर्व राजदूतों, उद्योग विशेषज्ञों एवं शिक्षाविदों सहित विविध क्षेत्रों के विशेषज्ञ अपनी सहभागिता सुनिश्चित करेंगे, जिससे भारत की सुरक्षा चुनौतियों का व्यापक, गहन एवं पेशेवर विश्लेषण किया जा सके।

इसके अतिरिक्त, इस कोर्स में महत्वपूर्ण एवं दुर्लभ पृथ्वी तत्वों, आपूर्ति श्रृंखला की संवेदनशीलताओं तथा क्षेत्रीय एवं वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य जैसे विषयों के विशेषज्ञ भी शामिल होंगे, जो भविष्य में परिचालन योजना एवं संचालन के लिए रक्षा बलों द्वारा अध्ययन एवं विश्लेषण किए जाने वाले विषयों के दायरे को और विस्तृत करेंगे।

सितंबर 2024 में आयोजित उद्घाटन संस्करण की सफलता के आधार पर, यह विस्तारित तीन सप्ताह का कार्यक्रम चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान की उस परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसका उद्देश्य अधिकारियों को आधुनिक युद्ध की जटिल चुनौतियों के लिए तैयार करना है।


10वां रक्षा बल पूर्व सैनिक दिवस पूरे देश में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया

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देशभर में 14 जनवरी 2026 को 10वां रक्षा बल पूर्व सैनिक दिवस (Defence Forces Veterans’ Day) श्रद्धा, सम्मान और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर पूर्व सैनिक रैलियां, शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने हेतु पुष्पांजलि समारोह, शिकायत निवारण काउंटर तथा सहायता एवं सुविधा डेस्क जैसे अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गए।


दिल्ली में मुख्य समारोह, रक्षा मंत्री हुए शामिल

मुख्य समारोह मानेकशॉ सेंटर, दिल्ली कैंट में आयोजित किया गया, जिसमें दिल्ली-एनसीआर से लगभग 2,500 पूर्व सैनिकों ने भाग लिया। कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने पूर्व सैनिकों के शौर्य, बलिदान और समर्पित सेवा को नमन करते हुए उन्हें राष्ट्रीय चेतना के जीवंत स्तंभ, सामूहिक साहस के प्रतीक और भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बताया। उन्होंने पूर्व सैनिकों से युवाओं का मार्गदर्शन करने, अग्निवीरों और युवा सैनिकों को सही दिशा देने, आपदा के समय नागरिक प्रशासन का सहयोग करने, सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने और जमीनी स्तर पर देशभक्ति की भावना को मजबूत करने का आह्वान किया।

‘सैनिक कभी सेवानिवृत्त नहीं होता’

 राजनाथ सिंह ने कहा कि आज भारत एक सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनने की ओर तेजी से अग्रसर है। ऐसे समय में पूर्व सैनिकों का अनुभव, नेतृत्व और मूल्य देश की अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने कहा,
“वास्तव में एक सैनिक कभी सेवानिवृत्त नहीं होता। वर्दी का रंग बदल सकता है, कार्यस्थल बदल सकता है, लेकिन देशभक्ति और सेवा की भावना कभी नहीं बदलती। पूर्व सैनिकों का कल्याण और सम्मान हमारी नैतिक और भावनात्मक जिम्मेदारी है।”

ऑपरेशन पवन के वीरों को मिला सम्मान

रक्षा मंत्री ने लगभग 40 वर्ष पूर्व श्रीलंका में शांति स्थापना हेतु चलाए गए ऑपरेशन पवन का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि उस अभियान में भारतीय शांति सेना (IPKF) के जवानों ने असाधारण साहस का परिचय दिया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार अब उन सैनिकों के योगदान को खुले रूप में स्वीकार कर रही है और उन्हें हर स्तर पर उचित सम्मान दिया जा रहा है।

पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए सरकार प्रतिबद्ध

रक्षा मंत्री ने वन रैंक वन पेंशन (OROP) के कार्यान्वयन और एक्स-सर्विसमैन कंट्रीब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ECHS) को मजबूत किए जाने जैसे कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार पूर्व सैनिकों के स्वास्थ्य, सम्मान और आत्मनिर्भरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। टेलीमेडिसिन जैसी सुविधाओं का विस्तार कर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि इलाज में दूरी या उम्र बाधा न बने।

उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व सैनिकों के पुनर्वास, कौशल विकास, रोजगार और स्वरोजगार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है तथा उन्हें सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों में प्राथमिकता दी जा रही है।

पूर्व सैनिक दिवस: केवल समारोह नहीं, राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक

इस अवसर पर सचिव (पूर्व सैनिक कल्याण) श्रीमती सुकृति लिखी ने कहा कि पूर्व सैनिक दिवस केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्र की सामूहिक चेतना को जागृत करने का दिन है। उन्होंने बताया कि हर वर्ष लगभग 60,000 सैनिक सेवानिवृत्त होते हैं, जिससे देश में पूर्व सैनिकों की संख्या लगभग 35 लाख हो जाती है, और उनका कल्याण राष्ट्र की बड़ी जिम्मेदारी है।

देशभर में कार्यक्रम

देश के विभिन्न हिस्सों—राजौरी, अमृतसर, लखनऊ, रांची, गुवाहाटी, पुणे, गोवा और कोच्चि—में भी रैलियां और पुष्पांजलि समारोह आयोजित किए गए। सभी 34 राज्य सैनिक बोर्ड और 434 जिला सैनिक बोर्ड इस दिवस को मनाने के लिए विविध कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। मौके पर शिकायत निवारण, जागरूकता और सहायता के लिए विभिन्न स्टॉल भी लगाए गए।

महान विरासत को नमन

यह दिवस हर वर्ष 14 जनवरी को फील्ड मार्शल के.एम. करियप्पा, भारतीय सेना के पहले कमांडर-इन-चीफ, की स्मृति में मनाया जाता है, जो इसी दिन 1953 में सेवानिवृत्त हुए थे। यह दिन देश के पूर्व सैनिकों की अद्वितीय सेवा, बलिदान और राष्ट्र के प्रति समर्पण को नमन करने का प्रतीक है।


ऑपरेशन सिंदूर में डीआरडीओ की निर्णायक भूमिका, 68वें स्थापना दिवस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की सराहना

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि डीआरडीओ द्वारा विकसित हथियार प्रणालियों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान निर्णायक भूमिका निभाई, जो राष्ट्रीय हितों की रक्षा के प्रति संगठन की व्यावसायिकता और प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने यह बात 01 जनवरी 2026 को नई दिल्ली स्थित डीआरडीओ मुख्यालय में संगठन के 68वें स्थापना दिवस के अवसर पर कही।

रक्षा मंत्री ने स्वदेशी क्षमताओं को सशक्त बनाने तथा सशस्त्र बलों को अत्याधुनिक तकनीक और उपकरणों से लैस करने के लिए डीआरडीओ की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन के दौरान डीआरडीओ के उपकरणों ने निर्बाध रूप से कार्य किया, जिससे सैनिकों का मनोबल बढ़ा।

राजनाथ सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि डीआरडीओ ‘सुदर्शन चक्र’ के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जिसकी घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस 2025 के अपने संबोधन में की थी। उन्होंने कहा, “इस पहल के अंतर्गत अगले एक दशक में हमारे महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को पूर्ण हवाई सुरक्षा प्रदान करने हेतु एयर डिफेंस सिस्टम से लैस करने की जिम्मेदारी डीआरडीओ की है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आधुनिक युद्ध में वायु रक्षा के महत्व को हमने प्रत्यक्ष रूप से देखा है। मुझे विश्वास है कि डीआरडीओ इस लक्ष्य को शीघ्र प्राप्त करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य करेगा।”

रक्षा मंत्री ने डीआरडीओ की सराहना करते हुए कहा कि वह केवल तकनीक का सृजन करने वाला ही नहीं, बल्कि विश्वास का निर्माण करने वाला संगठन भी बन गया है, जिससे जनता उसे आशा, विश्वास और निश्चितता के साथ देखती है। निजी क्षेत्र के साथ डीआरडीओ के सहयोग को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि उद्योग, शैक्षणिक संस्थानों और स्टार्ट-अप्स के साथ बढ़ते तालमेल से एक सशक्त और समन्वित रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण हुआ है।

उन्होंने कहा, “डीआरडीओ ने अपने सिस्टम, प्रक्रियाओं और कार्यशैली में निरंतर सुधार किया है। खरीद प्रक्रिया से लेकर परियोजना प्रबंधन तक, उद्योग सहभागिता से लेकर स्टार्ट-अप्स और एमएसएमई के साथ सहयोग तक—हर स्तर पर कार्य को सरल, तेज़ और विश्वसनीय बनाने का प्रयास स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।”

रक्षा मंत्री ने डीआरडीओ से आग्रह किया कि वह तेजी से विकसित हो रहे तकनीकी परिवेश के साथ कदमताल करते हुए समय की मांग के अनुरूप उत्पाद विकसित करता रहे। उन्होंने नवाचार पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के नए क्षेत्रों की पहचान करने का भी आह्वान किया। डीप टेक और अगली पीढ़ी की तकनीकों पर डीआरडीओ के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि इस दिशा में प्रगति से न केवल देश की क्षमताएं बढ़ेंगी, बल्कि रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र भी सुदृढ़ होगा।

यह रेखांकित करते हुए कि वर्तमान युग केवल विज्ञान का नहीं, बल्कि निरंतर विकास और सतत सीखने का युग है,राजनाथ सिंह ने कहा कि तकनीक स्कैनिंग, क्षमता आकलन और भविष्य की तैयारी अब केवल शब्द नहीं रह गए हैं। उन्होंने कहा, “दुनिया हर दिन बदल रही है। तकनीक, नवाचार और युद्ध के नए क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, जिससे कल का ज्ञान आज अप्रासंगिक हो सकता है। हमें यह कभी नहीं मानना चाहिए कि सीखने की प्रक्रिया समाप्त हो गई है। हमें लगातार सीखते रहना होगा और स्वयं को चुनौती देते हुए नई पीढ़ी के लिए मार्ग प्रशस्त करना होगा।”

बैठक के दौरान, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव एवं डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने रक्षा मंत्री को संगठन की वर्तमान आरएंडडी गतिविधियों, 2025 की उपलब्धियों, उद्योग, स्टार्ट-अप्स एवं अकादमिक संस्थानों को बढ़ावा देने की विभिन्न पहलों तथा 2026 के रोडमैप की जानकारी दी। रक्षा मंत्री को वर्ष 2026 के लिए निर्धारित प्रमुख लक्ष्यों और संगठन में सुधार हेतु किए जा रहे विभिन्न सुधारों से भी अवगत कराया गया।

इस अवसर पर रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ भी उपस्थित थे। इसके अलावा, डीआरडीओ के महानिदेशक, कॉरपोरेट निदेशक तथा अन्य वरिष्ठ वैज्ञानिक और अधिकारी भी समारोह में शामिल हुए।

राष्ट्रपति भवन में ‘परमवीर दीर्घा’ राष्ट्र को समर्पित, प्रधानमंत्री मोदी ने किया वीर शहीदों को नमन

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति भवन में स्थापित ‘परमवीर दीर्घा’ का स्वागत करते हुए इसे देश के अदम्य वीरों के प्रति भारत की कृतज्ञता का जीवंत प्रतीक बताया है। उन्होंने कहा कि इस दीर्घा में प्रदर्शित परमवीर चक्र विजेताओं के चित्र मातृभूमि की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर योद्धाओं को भावभीनी श्रद्धांजलि हैं और यह देश की एकता व अखंडता के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदानों का सम्मान है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि दो परमवीर चक्र विजेताओं और अन्य विजेताओं के परिजनों की गरिमामयी उपस्थिति में इस दीर्घा को राष्ट्र को समर्पित किया जाना इस अवसर को और भी विशेष बनाता है। यह दीर्घा न केवल शौर्य और बलिदान की गौरवगाथा को संजोती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनेगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि लंबे समय तक राष्ट्रपति भवन की गैलरियों में ब्रिटिश काल के सैनिकों के चित्र लगे रहे, लेकिन अब उनकी जगह देश के परमवीर चक्र विजेताओं के चित्रों ने ले ली है। यह कदम भारत के औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर निकलकर स्वदेशी चेतना और राष्ट्रीय गौरव से जुड़ने का सशक्त उदाहरण है। उन्होंने यह भी स्मरण कराया कि कुछ वर्ष पहले अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के कई द्वीपों का नामकरण भी परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर किया गया था।

युवाओं के लिए इस दीर्घा के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने acknowledging कहा कि यह स्थल भारत की शौर्य परंपरा से जुड़ने का एक सशक्त माध्यम बनेगा। यह युवाओं को यह संदेश देगा कि राष्ट्र निर्माण और राष्ट्रीय उद्देश्यों की प्राप्ति में आत्मबल, साहस और संकल्प का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है।

प्रधानमंत्री ने आशा व्यक्त की कि राष्ट्रपति भवन की परमवीर दीर्घा ‘विकसित भारत’ की भावना को साकार करने वाला एक प्रेरणादायी तीर्थ बनेगी, जहां देशवासी अपने वीर सपूतों के बलिदान से ऊर्जा और प्रेरणा प्राप्त करेंगे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने विजय दिवस पर राष्ट्रपति भवन में ‘परम वीर दीर्घा’ का उद्घाटन किया

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (16 दिसंबर, 2025) विजय दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में ‘परम वीर दीर्घा’ का उद्घाटन किया।

इस दीर्घा में सभी 21 परम वीर चक्र सम्मानित वीरों के चित्र प्रदर्शित किए गए हैं। यह दीर्घा आगंतुकों को हमारे राष्ट्रीय नायकों के बारे में जानकारी देने का उद्देश्य रखती है, जिन्होंने देश की रक्षा में अदम्य साहस और अजेय भावना का परिचय दिया। साथ ही यह पहल उन वीरों की स्मृति को सम्मानित करने के लिए भी है, जिन्होंने मातृभूमि की सेवा में अपने प्राणों की आहुति दी।

परम वीर दीर्घा के बनाए गए गलियारों में पहले ब्रिटिश एडीसी के चित्र प्रदर्शित किए जाते थे। भारतीय राष्ट्रीय नायकों के चित्र प्रदर्शित करने की यह पहल उपनिवेशी मानसिकता को छोड़ने और गर्व के साथ भारत की संस्कृति, विरासत और शाश्वत परंपराओं की समृद्धि को अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

परम वीर चक्र भारत का सर्वोच्च सैन्य सम्मान है, जो युद्ध के दौरान अद्वितीय साहस, वीरता और आत्म-बलिदान प्रदर्शित करने वाले सैनिकों को दिया जाता है।

विजय दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1971 की ऐतिहासिक जीत के वीर सैनिकों को किया नमन

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विजय दिवस के अवसर पर 1971 में भारत को ऐतिहासिक विजय दिलाने वाले वीर सैनिकों को स्मरण किया। मोदी ने कहा कि उनके अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान ने देश की रक्षा की और भारत के इतिहास में गौरवपूर्ण क्षण अंकित किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि विजय दिवस उनके शौर्य को नमन करने का दिन है और उनकी अद्वितीय वीरता एवं अदम्य भावना की याद दिलाता है। उन्होंने यह भी कहा कि हमारे सैनिकों का पराक्रम पीढ़ियों तक देशवासियों को प्रेरित करता रहेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा—

“विजय दिवस के अवसर पर हम उन वीर सैनिकों को स्मरण करते हैं, जिनके साहस और बलिदान से 1971 में भारत को ऐतिहासिक विजय प्राप्त हुई। उनकी अटूट संकल्पशक्ति और निःस्वार्थ सेवा ने हमारे राष्ट्र की रक्षा की और हमारे इतिहास में गर्व का क्षण अंकित किया। यह दिन उनके शौर्य को नमन करने का प्रतीक है और उनकी अद्वितीय भावना की याद दिलाता है। उनका पराक्रम पीढ़ियों तक भारतीयों को प्रेरित करता रहेगा।”

कॉलेज ऑफ डिफेन्स मैनेजमेंट का 56वां स्थापना दिवस: उत्कृष्टता के साथ रक्षा प्रबंधन शिक्षा का सुदृढ़ीकरण

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कॉलेज ऑफ डिफेन्स मैनेजमेंट (CDM) ने 08 दिसंबर 2025 को अपना 56वां स्थापना दिवस उत्साहपूर्वक मनाया। तेलंगाना के सिकंदराबाद स्थित CDM परिसर में आयोजित इन समारोहों के अंतर्गत पर्पल पेसर्स और पर्पल पैडलर्स क्लबों के सहयोग से रेज़िंग डे रन और साइक्लिंग इवेंट का आयोजन किया गया।

समारोह का एक प्रमुख आकर्षण DRIWE (Developing Responsible Citizens by Investing in Women Empowerment) प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम का वैलेडिक्टरी समारोह रहा, जिसे CDM ने उस्मानिया विश्वविद्यालय के साथ मिलकर सैन्य अधिकारियों की पत्नियों में नेतृत्व, उद्यमिता, सामाजिक जागरूकता और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित किया।

इसके अलावा, भारतीय नौसेना के बैंड ‘सिम्फनी’ ने अपना विशेष संगीत प्रदर्शन प्रस्तुत कर कार्यक्रम में उल्लास और भव्यता का संचार किया।

1970 में स्थापित CDM एक प्रमुख त्रि-सेवा उच्च रक्षा प्रबंधन संस्थान है। अपने प्रतिष्ठित पाठ्यक्रम ‘हायर डिफेन्स मैनेजमेंट कोर्स’ (HDMC) के माध्यम से यह संस्था आधुनिक प्रबंधन सिद्धांतों को रक्षा योजना और निर्णय लेने की प्रक्रिया में समाहित कर सशस्त्र बलों की संगठनात्मक दक्षता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है।

CDM अब तक 660 से अधिक विदेशी मैत्रीपूर्ण देशों के अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान कर वैश्विक समझ और रक्षा कूटनीति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दे चुका है।

इस अवसर पर, कमांडेंट CDM मेजर जनरल जी. श्रीनिवास ने सभी रैंकों, सिविलियन डिफेन्स कर्मचारियों और अन्य स्टाफ को बधाई दी तथा CDM की अपने ध्येय वाक्य “विक्ट्री थ्रू एक्सीलेंस” की भावना के अनुरूप उच्च रक्षा प्रबंधन शिक्षा को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

कार्यक्रम में अधिकारी, कर्मचारी और उनके परिवारजन बड़ी संख्या में सम्मिलित हुए और उत्साहपूर्वक स्थापना दिवस मनाया।

प्रधानमंत्री ने सशस्त्र सेना झंडा दिवस पर वीर सैनिकों को नमन किया

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प्रधानमंत्री ने आज सशस्त्र सेना झंडा दिवस के अवसर पर सशस्त्र बलों के वीर जवानों और महिला सैनिकों के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि सशस्त्र बलों के जवानों का अनुशासन, संकल्प और अदम्य साहस राष्ट्र की रक्षा करता है और देशवासियों को मजबूत बनाता है। उनका समर्पण राष्ट्र के प्रति कर्तव्य, अनुशासन और निष्ठा का उज्ज्वल उदाहरण है।

प्रधानमंत्री ने सभी से सशस्त्र सेना झंडा दिवस कोष में योगदान देने की भी अपील की, ताकि हमारे सैनिकों के साहस और सेवा का सम्मान किया जा सके।

प्रधानमंत्री ने X पर लिखा:

“सशस्त्र सेना झंडा दिवस के अवसर पर, हम उन वीर पुरुषों और महिलाओं के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं, जो अदम्य साहस के साथ हमारे राष्ट्र की रक्षा करते हैं। उनका अनुशासन, संकल्प और जज़्बा हमारे देशवासियों की ढाल है और हमारे राष्ट्र को मज़बूती प्रदान करता है। उनका समर्पण कर्तव्य, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति निष्ठा का सशक्त उदाहरण है। आइए, हम सभी सशस्त्र सेना झंडा दिवस कोष में भी योगदान दें।”


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