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ओडिशा तट के पास बड़ा समुद्री हादसा: 24 क्रू सदस्यों वाला कार्गो जहाज डूबा, 2 लोग बचाए गए

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भुवनेश्वर- ओडिशा के पारादीप तट से करीब 240 नॉटिकल मील दूर बंगाल की खाड़ी में एक बड़ा समुद्री हादसा हुआ है। पनामा-फ्लैग वाला बल्क कैरियर MV Ocean Winner शनिवार को समुद्र में डूब गया। जहाज पर कुल 24 क्रू सदस्य सवार थे। भारतीय तटरक्षक बल और नौसेना ने बड़े पैमाने पर Search and Rescue Operation शुरू किया है।

जहाज कहां जा रहा था?

MV Ocean Winner ने ओडिशा के पारादीप पोर्ट से 20 अगस्त की रात अपनी यात्रा शुरू की थी। जहाज करीब 72,100–72,200 मीट्रिक टन लौह अयस्क (Iron Ore Fines) लेकर सिंगापुर जा रहा था। 

हादसे के समय जहाज पर 24 विदेशी क्रू सदस्य मौजूद थे:

  • 20 चीनी नागरिक

  •  3 म्यांमार के नागरिक

  •  1 बांग्लादेशी नागरिक

अचानक टूट गया संपर्क

अधिकारियों के अनुसार, जहाज के साथ संपर्क टूटने की सूचना 22 अगस्त को मिली। इसके बाद Maritime Rescue Coordination Centre और भारतीय एजेंसियों ने तुरंत Search and Rescue Operation शुरू किया।

कुछ रिपोर्टों के अनुसार जहाज समुद्री tracking system से भी गायब हो गया था। हादसे की सटीक वजह अभी सामने नहीं आई है और इसकी जांच की जा रही है। 

 2 क्रू सदस्य सुरक्षित मिले

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एक बड़ी राहत की खबर सामने आई। पास से गुजर रहे MT AISOPOS नामक जहाज ने दो अलग-अलग life rafts से 2 क्रू सदस्यों को जीवित बचा लिया। 

फिलहाल बाकी 22 क्रू सदस्यों की तलाश जारी है।

Coast Guard और Navy ने संभाला मोर्चा

भारतीय तटरक्षक बल ने Search and Rescue Operation को तेज करते हुए कई जहाजों को तैनात किया है। ICGS Varad और ICGS Anmol को ऑपरेशन में लगाया गया है, जबकि ICGS Vijit को भी खोज अभियान में शामिल किया गया है। आसपास मौजूद अन्य जहाजों को भी राहत एवं बचाव अभियान में मदद करने के लिए अलर्ट किया गया है। 

खराब समुद्री परिस्थितियां बनी चुनौती

रेस्क्यू टीमों के सामने समुद्र की स्थिति भी बड़ी चुनौती है। अधिकारियों के अनुसार कुछ क्रू सदस्य life rafts या lifebuoys के सहारे समुद्र में हो सकते हैं, इसलिए बचाव दल लगातार संभावित इलाकों में तलाश कर रहे हैं। 

जहाज क्यों डूबा?

फिलहाल MV Ocean Winner के डूबने की वजह स्पष्ट नहीं है।

जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि:

  • क्या जहाज में कोई तकनीकी खराबी आई थी?

  • क्या समुद्र की खराब स्थिति हादसे की वजह बनी?

  • संपर्क टूटने से पहले क्या कोई distress signal भेजा गया था?

  • जहाज tracking system से क्यों गायब हुआ?

  • जहाज इतनी तेजी से कैसे डूबा?

अधिकारियों की जांच के बाद ही हादसे की वास्तविक वजह सामने आएगी। 

अभी की सबसे बड़ी खबर

MV Ocean Winner के 24 क्रू सदस्यों में से 2 को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि 22 अन्य की तलाश भारतीय Coast Guard और Navy द्वारा जारी है।

यह हादसा ओडिशा के पारादीप तट से करीब 240 नॉटिकल मील दूर बंगाल की खाड़ी में हुआ है। बचाव अभियान लगातार जारी है। 

22 भारतीय नाविकों से जुड़े दो जहाजों का समुद्री डाकुओं ने किया अपहरण

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नई दिल्ली- यमन और सोमालिया के तट के पास दो अलग-अलग घटनाओं में सशस्त्र समुद्री डाकुओं ने दो विदेशी झंडे वाले व्यावसायिक जहाजों को अपने कब्जे में ले लिया। इन दोनों जहाजों पर कुल 22 भारतीय नाविक सवार थे। राहत की बात यह है कि उपलब्ध नवीनतम जानकारी के अनुसार सभी 22 भारतीय सुरक्षित बताए जा रहे हैं।

पहला जहाज — MT Sibu 1

20 अगस्त को इरिट्रिया के झंडे वाला तेल उत्पाद टैंकर MT Sibu 1 अदन की खाड़ी में यमन के तट से लगभग 30 समुद्री मील दूर समुद्री डाकुओं के कब्जे में चला गया।

जहाज पर कुल 20 लोग सवार थे, जिनमें 16 भारतीय नागरिक शामिल थे। रिपोर्ट के अनुसार, करीब छह सशस्त्र समुद्री डाकू जहाज पर चढ़े और उसका नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। जहाज ने संकट का संदेश भी भेजा था।

दूसरा जहाज — M/V Lutuf

इससे पहले 17 अगस्त को कैमरून के झंडे वाला मालवाहक जहाज M/V Lutuf सोमालिया के पुंटलैंड तट के पास समुद्री डाकुओं ने अगवा कर लिया था।

इस जहाज पर 10 सदस्यीय क्रू था, जिसमें 6 भारतीय शामिल थे। रिपोर्ट के मुताबिक, आठ हथियारबंद समुद्री डाकू, AK-47 जैसी राइफलों के साथ दो छोटी नावों से जहाज तक पहुंचे और उसे अपने कब्जे में ले लिया।

क्रू ने शुरुआत में जहाज के सुरक्षित हिस्से, जिसे Citadel कहा जाता है, में शरण लेने की कोशिश की। हालांकि, समुद्री डाकू वहां तक पहुंच गए और बाद में क्रू सदस्यों को जहाज के ब्रिज पर ले गए। अब तक किसी भारतीय नाविक के घायल होने की खबर नहीं है। 

भारत सरकार ने क्या किया?

भारत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सोमालिया के संबंधित अधिकारियों के सामने मुद्दा उठाया है। नैरोबी स्थित भारतीय उच्चायोग ने बताया कि वह सोमालियाई अधिकारियों के संपर्क में है और भारतीय नाविकों की सुरक्षा एवं कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। विदेश मंत्रालय भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। 

चिंता क्यों बढ़ी?

अदन की खाड़ी, सोमालिया के आसपास और पश्चिमी हिंद महासागर में हाल के महीनों में समुद्री डकैती की घटनाओं में दोबारा वृद्धि देखी जा रही है। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों और उन पर काम करने वाले भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। AP के अनुसार, अप्रैल 2026 से क्षेत्र में छह व्यावसायिक जहाजों के अपहरण की घटनाएं दर्ज की गई हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात:
  1. 22 भारतीय नाविक — 16 MT Sibu 1 पर और 6 M/V Lutuf पर — सभी के सुरक्षित होने की सूचना है।
  2. दोनों जहाज अभी समुद्री डाकुओं के नियंत्रण में बताए जा रहे हैं।
  3. भारत सरकार और भारतीय उच्चायोग स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं।

भारतीय नौसेना को 30 महीने के लिए मिलेंगे दो MQ-9B Sea Guardian ड्रोन, 1,943 करोड़ रुपये का हुआ करार

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General Atomics के साथ रक्षा मंत्रालय ने किया समझौता, हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी क्षमता होगी मजबूत

नई दिल्ली- रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के लिए दो MQ-9B Sea Guardian High-Altitude Long-Endurance (HALE) Remotely Piloted Aircraft Systems (RPAS) को 30 महीने की अवधि के लिए लीज पर लेने हेतु General Atomics Aeronautical Systems Inc. (GA-ASI) के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं। इस करार की कुल कीमत लगभग 1,943 करोड़ रुपये है।

यह अनुबंध 17 अगस्त 2026 को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन-2 में रक्षा मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एवं महानिदेशक (अधिग्रहण) ए. अंबारासु की उपस्थिति में संपन्न हुआ।

समुद्री निगरानी क्षमता होगी और मजबूत

MQ-9B Sea Guardian HALE RPAS अत्याधुनिक प्रणालियों, आधुनिक सेंसर और उन्नत पेलोड से लैस हैं। इनके शामिल होने से भारतीय नौसेना की Maritime Domain Awareness (MDA) यानी समुद्री क्षेत्र में गतिविधियों की निगरानी और जानकारी जुटाने की क्षमता में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी होगी।

ये सिस्टम समुद्री क्षेत्र के विशाल इलाकों में लगातार खुफिया जानकारी, निगरानी और टोही (ISR) उपलब्ध कराने में सक्षम होंगे। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में होने वाली गतिविधियों पर भारत की नजर और मजबूत होगी तथा किसी भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम पर समय रहते निगरानी एवं प्रतिक्रिया देने की क्षमता बढ़ेगी।

यह करार भारत की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने और हिंद महासागर क्षेत्र में निरंतर निगरानी क्षमता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

भारत-अमेरिका नौसेना का 8वां EOD अभ्यास 2026 कोच्चि में संपन्न

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विशेषज्ञों ने IED, बारूदी सुरंग निष्क्रिय करने और अंडरवॉटर सिस्टम के इस्तेमाल पर साझा किए अनुभव

कोच्चि- भारत और अमेरिका की नौसेनाओं के बीच आयोजित 8वां Explosive Ordnance Disposal (EOD) अभ्यास 2026 दक्षिणी नौसेना कमान, कोच्चि में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। अभ्यास के दौरान दोनों देशों की नौसेनाओं की टीमों ने गहन पेशेवर संवाद, सर्वोत्तम प्रक्रियाओं का आदान-प्रदान और विभिन्न तकनीकों का प्रदर्शन किया।

इस द्विपक्षीय अभ्यास ने EOD अभियानों के विभिन्न पहलुओं पर ज्ञान और अनुभव साझा करने के लिए महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया। विषय विशेषज्ञों के बीच हुए आदान-प्रदान में इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) से उत्पन्न वास्तविक समय के खतरों, विस्फोटकों को सुरक्षित बनाने की प्रक्रियाओं, बारूदी सुरंगों को निष्क्रिय करने तथा मानवरहित अंडरवॉटर सिस्टम के उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।

डाइविंग ऑपरेशन में भी हुआ संयुक्त प्रशिक्षण

अभ्यास के क्रॉस-ट्रेनिंग चरण में डाइविंग से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया गया। इसमें डूबे हुए जहाजों या संरचनाओं का पता लगाना और उन्हें निकालना, विशेषज्ञ उपकरणों का इस्तेमाल तथा स्लिदरिंग ऑपरेशन शामिल रहे।

संयुक्त प्रशिक्षण से दोनों नौसेनाओं की डाइविंग टीमों की पेशेवर दक्षता और तकनीकी कौशल में वृद्धि हुई। साथ ही, इससे दोनों देशों के बीच बेहतर आपसी समझ और परिचालन क्षमता विकसित करने में भी मदद मिली।

अभ्यास का सफल समापन भारत और अमेरिका की नौसेनाओं की विशेष समुद्री अभियानों में परिचालन तालमेल, सहयोग और आपसी क्षमता को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।


वाइस एडमिरल एएन प्रमोद, एवीएसएम, वाईएसएम ने 01 अगस्त 2026 को उप नौसेना प्रमुख (Deputy Chief of Naval Staff) का पदभार ग्रहण किया।

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38वें इंटीग्रेटेड कैडेट कोर्स, नौसेना अकादमी, गोवा के पूर्व छात्र वाइस एडमिरल एएन प्रमोद को 01 जुलाई 1990 को भारतीय नौसेना में कमीशन प्राप्त हुआ था। वे श्रेणी ‘A’ (CAT ‘A’) सी किंग एयर ऑपरेशंस ऑफिसर तथा संचार एवं इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (Communication and Electronic Warfare) विशेषज्ञ हैं। उन्होंने डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन तथा नेवल वॉर कॉलेज, गोवा से नेवल हायर कमांड कोर्स भी किया है।

36 वर्षों से अधिक के अपने विशिष्ट सैन्य करियर में उन्होंने समुद्र और तट—दोनों क्षेत्रों में कमान, संचालन, प्रशिक्षण और स्टाफ से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण दायित्व निभाए हैं। उनके प्रमुख समुद्री दायित्वों में गाइडेड मिसाइल विध्वंसक आईएनएस राजपूत के कार्यकारी अधिकारी (Executive Officer), पनडुब्बी रोधी युद्धक गश्ती पोत आईएनएस अभय, लैंडिंग शिप टैंक (लार्ज) आईएनएस शार्दुल तथा गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट आईएनएस सतपुड़ा की कमान शामिल है। उन्होंने गलवान घटना के बाद ऑपरेशन स्नो लेपर्ड के दौरान पश्चिमी बेड़े (Western Fleet) के फ्लीट ऑपरेशंस ऑफिसर के रूप में भी सेवाएं दीं। इसके अतिरिक्त उन्होंने वर्ष 1999 के ऑपरेशन विजय तथा वर्ष 2001 के ऑपरेशन पराक्रम में भी भाग लिया।

तटीय नियुक्तियों में उन्होंने श्री विजयपुरम स्थित नौसेना वायु स्टेशन आईएनएस उत्क्रोश के कमांडिंग ऑफिसर के रूप में कार्य किया तथा डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन में डायरेक्टिंग स्टाफ के रूप में भी सेवाएं दीं। नौसेना मुख्यालय में उनकी प्रमुख नियुक्तियों में संयुक्त निदेशक (नेवल एयर स्टाफ), निदेशक तथा प्रधान निदेशक (विमान अधिग्रहण) शामिल रहे। वे वर्ष 2006 से 2009 तक टैक्टिकल ऑडिट ग्रुप तथा वर्ष 2016 से 2019 तक भारतीय नौसेना की स्ट्रैटेजिक एंड ऑपरेशनल काउंसिल के सदस्य भी रहे।

रियर एडमिरल के पद पर पदोन्नति के बाद उन्होंने भारतीय नौसेना अकादमी के उप कमांडेंट, सहायक नौसेना प्रमुख (वायु) तथा फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग, महाराष्ट्र नौसैनिक क्षेत्र के रूप में दायित्व निभाए।

वाइस एडमिरल के पद पर पदोन्नति के उपरांत उन्होंने 13 दिसंबर 2023 से 31 जुलाई 2026 तक महानिदेशक नौसैनिक संचालन (Director General Naval Operations – DGNO) के रूप में कार्य किया। डीजीएनओ के रूप में वे ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना की योजना, तैयारी और परिचालन तत्परता तथा पश्चिम एशिया में जारी संकट के दौरान समुद्री सुरक्षा अभियानों के संचालन में महत्वपूर्ण रूप से जुड़े रहे।

उनकी विशिष्ट सेवाओं और उत्कृष्ट परिचालन नेतृत्व के सम्मान में उन्हें वर्ष 2024 में अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) तथा वर्ष 2025 में युद्ध सेवा पदक (YSM) से सम्मानित किया गया।

उन्होंने वाइस एडमिरल तरुण सोबती, यूवाईएसएम, एवीएसएम, वीएसएम का स्थान लिया है, जो 38 वर्षों से अधिक की विशिष्ट सेवा के बाद 31 जुलाई 2026 को सेवानिवृत्त हुए।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ अभियान की सफल महिला सैन्य अधिकारियों को किया सम्मानित

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नई दिल्ली- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय सेना की नौकायन पोत आईएएसवी त्रिवेणी (IASV Triveni) पर सवार होकर ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ नामक पहले त्रि-सेवा (थल सेना, नौसेना और वायु सेना) अखिल महिला विश्व परिक्रमा नौकायन अभियान को सफलतापूर्वक पूरा कर स्वदेश लौटीं तीनों सेनाओं की नौ महिला अधिकारियों को सम्मानित किया।

रक्षा मंत्री ने अधिकारियों से बातचीत करते हुए 314 दिनों में लगभग 25,500 समुद्री मील की यात्रा कर चार महासागरों को पार करने वाली इस ऐतिहासिक उपलब्धि की सराहना की। उन्होंने इसे ‘नारी शक्ति’ का प्रतीक और त्रि-सेवा संयुक्तता एवं समन्वय (Tri-service Jointness & Synergy) का उत्कृष्ट उदाहरण बताया, जो देश के हर नागरिक को प्रेरित करेगा।

महिला अधिकारियों ने अभियान के अनुभव साझा करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद देश का गौरव बढ़ाने का संकल्प ही उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा रहा। इसी दृढ़ निश्चय के बल पर उन्होंने शारीरिक और मानसिक चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया। इस पर राजनाथ सिंह ने कहा कि उनकी प्रतिबद्धता ने उन्हें भी प्रेरित किया है और यह सिद्ध करती है कि मजबूत इच्छाशक्ति और दृढ़ संकल्प से कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।

रक्षा मंत्री ने अधिकारियों की क्षमता और आत्मविश्वास को “अद्भुत” बताते हुए कहा कि इस अभियान ने उन सभी रूढ़ियों को तोड़ दिया है, जो यह मानती थीं कि महिलाएँ कठिन सैन्य अभियानों को सफलतापूर्वक पूरा नहीं कर सकतीं। उन्होंने कहा, “आपने साबित कर दिया है कि शारीरिक क्षमता, मानसिक दृढ़ता और नेतृत्व किसी लिंग के बंधन में नहीं होते। भारत की हर बेटी अब आपसे प्रेरणा लेकर विश्वास कर सकती है कि वह भी महासागरों को पार कर दुनिया जीत सकती है।”

उन्होंने इस अभियान को ‘त्रि-सेवा संयुक्तता’ का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना के अधिकारी एक ही पोत पर, एक ही ध्वज के नीचे, एक साझा मिशन के लिए साथ आए। यह अभियान इस बात का प्रमाण है कि यदि हम एकजुट होकर आगे बढ़ें, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।

राजनाथ सिंह ने टीम की सराहना करते हुए कहा कि अभियान के दौरान विभिन्न देशों में भारत की इंजीनियरिंग उत्कृष्टता, स्वदेशी क्षमताओं और तकनीकी प्रगति का प्रभावी प्रदर्शन किया गया, जिससे दुनिया को यह संदेश मिला कि भारत किसी भी क्षेत्र में किसी से कम नहीं है।

इस अवसर पर थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, वायु सेना के उप प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित, नौसेना के उप प्रमुख वाइस एडमिरल अजय कोच्छर तथा तीनों सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि 22 जुलाई 2026 को मुंबई में रक्षा मंत्री ने वर्चुअल माध्यम से आईएएसवी त्रिवेणी का स्वागत (Flag-in) किया था। वहीं 11 सितंबर 2025 को उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस ऐतिहासिक अभियान को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।

करीब दो वर्षों के गहन प्रशिक्षण, सूक्ष्म योजना, 24×7 तटीय सहायता तंत्र और अनेक संस्थाओं के सहयोग से यह मिशन सफल हुआ। अभियान ने विश्व परिक्रमा के सभी अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करते हुए सभी देशांतरों को पार किया, भूमध्य रेखा को दो बार, अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा को पार किया तथा केप लीउविन, केप हॉर्न और केप ऑफ गुड होप जैसे तीन महान केप्स का सफलतापूर्वक चक्कर लगाया।

इसके अतिरिक्त, टीम ने विश्व के सबसे चुनौतीपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक ड्रेक पैसेज को पार कर केप हॉर्न का सफलतापूर्वक चक्कर लगाया, जिसके बाद उन्हें प्रतिष्ठित ‘केप हॉर्नर्स’ समुदाय की सदस्यता प्राप्त हुई। यह सम्मान केवल उन नाविकों को दिया जाता है, जो इस कठिन समुद्री मार्ग को सफलतापूर्वक पार करते हैं।

यह अभियान केवल एक समुद्री उपलब्धि नहीं, बल्कि सैन्य कूटनीति (Military Diplomacy) का भी प्रभावी माध्यम बना। विभिन्न देशों में ठहराव के दौरान आईएएसवी त्रिवेणी ने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, समुद्री परंपराओं, सैन्य पेशेवर उत्कृष्टता और मूल्यों का प्रदर्शन करते हुए मित्र देशों के साथ सद्भाव और सहयोग को और मजबूत किया।


रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय तटरक्षक बल के लिए दो महत्वपूर्ण नीतिगत सुधारों का किया शुभारंभ

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) के लिए दो महत्वपूर्ण नीतिगत सुधारों का शुभारंभ किया। इनका उद्देश्य अधिकारियों की भर्ती एवं सेवा शर्तों में लैंगिक समानता को बढ़ावा देना तथा ड्यूटी के दौरान समुद्र में लापता होने वाले कर्मियों के परिजनों को अनुग्रह राशि (एक्स-ग्रेशिया) प्रदान करने की प्रशासनिक प्रक्रिया को सरल बनाना है।

28 जुलाई, 2026 को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन-2 में आयोजित कार्यक्रम में रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह, भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक परमेश शिवमणि तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने पिछले पांच दशकों में भारतीय तटरक्षक बल की उत्कृष्ट सेवाओं की सराहना करते हुए विश्वास जताया कि ये दूरदर्शी नीतियां वर्ष 2027 में बल के स्वर्ण जयंती वर्ष की ओर बढ़ते समय उसके मनोबल और परिचालन क्षमता को और मजबूत करेंगी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की आधुनिक, सक्षम और भविष्य के लिए तैयार समुद्री सुरक्षा बल के रूप में भारतीय तटरक्षक बल को सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

भर्ती और करियर में लैंगिक समानता

पहली नीति के तहत भारतीय तटरक्षक बल में अधिकारियों की भर्ती के लिए लैंगिक-तटस्थ (जेंडर-न्यूट्रल) व्यवस्था लागू की गई है। इसके प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं—

  • महिला उम्मीदवारों को पुरुष उम्मीदवारों के समान शॉर्ट सर्विस अपॉइंटमेंट (SSA) और परमानेंट अपॉइंटमेंट (PA) दोनों में भर्ती का अवसर मिलेगा।

  • पुरुष उम्मीदवारों के लिए भी अब SSA का विकल्प उपलब्ध रहेगा।

  • प्रशिक्षण के प्रारंभिक चरण से ही महिलाओं और पुरुषों को करियर में समान अवसर प्रदान किए जाएंगे।

  • वर्तमान में कार्यरत PA महिला अधिकारियों को पात्रता की शर्तें पूरी करने पर उच्च पदों पर पदोन्नति का अवसर मिलेगा।

  • SSA पर कार्यरत महिला अधिकारियों को निर्धारित शर्तें पूरी करने पर अपनी सेवा को PA में परिवर्तित करने का विकल्प भी दिया जाएगा।

सरकार ने इस कदम को 'नारी शक्ति' और देश की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था में समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया है।

समुद्र में लापता कर्मियों के परिजनों को त्वरित राहत

दूसरी नीति ड्यूटी के दौरान समुद्र में लापता होने वाले तटरक्षक कर्मियों के निकटतम परिजनों (Next of Kin - NoK) को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से लाई गई है।

इस नीति के तहत ड्यूटी के दौरान समुद्र में लापता हुए तटरक्षक कर्मियों को एक्स-ग्रेशिया के उद्देश्य से 'मृत मान लिया गया' (Presumed Dead) घोषित करने का अधिकार प्रदान किया गया है।

इस सुधार से अनुग्रह राशि और सेवा-समापन लाभ (टर्मिनल बेनिफिट्स) प्रदान करने की प्रक्रिया तेज और सरल होगी। इससे शोकग्रस्त परिवारों को लंबे समय तक प्रशासनिक प्रक्रियाओं का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और उन्हें कठिन समय में शीघ्र आर्थिक सहायता मिल सकेगी।

भारतीय नौसेना का सेल ट्रेनिंग पोत आईएनएस सुदर्शिनी अमेरिका से पुर्तगाल के लिए रवाना, वैश्विक मंच पर दिखाई भारत की समुद्री शक्ति

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नई दिल्ली- भारतीय नौसेना का सेल ट्रेनिंग पोत आईएनएस सुदर्शिनी 25 जुलाई 2026 को अमेरिका के बोस्टन बंदरगाह से लोकायन-26 (Lokayan 26) अभियान के तहत अपनी अगली यात्रा के लिए रवाना हो गया। अमेरिका प्रवास के दौरान पोत ने प्रतिष्ठित SAIL 250 समारोह और इंटरनेशनल नेवल रिव्यू 250 में भाग लेकर भारत की समृद्ध समुद्री विरासत और नौसैनिक परंपराओं का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।

आईएनएस सुदर्शिनी ने अमेरिका के नॉरफ़ॉक, बाल्टीमोर, न्यूयॉर्क और बोस्टन में आयोजित SAIL 250 कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी की। इस दौरान पोत पर अनेक गणमान्य अतिथियों, भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों और विभिन्न देशों की नौसेनाओं के प्रतिनिधिमंडलों का स्वागत किया गया।

इन आयोजनों के माध्यम से भारतीय नौसेना ने समुद्री सहयोग, पेशेवर आदान-प्रदान और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। कार्यक्रमों ने भारत की समुद्री कूटनीति और वैश्विक साझेदारी को नई मजबूती प्रदान की।

अब आईएनएस सुदर्शिनी पोंटा डेलगाडा (अज़ोरेस, पुर्तगाल) के लिए रवाना हो चुका है। अपनी इस यात्रा के दौरान यह पोत विश्व मंच पर भारत की समुद्री क्षमता, पेशेवर उत्कृष्टता और सद्भावना का प्रतीक बनकर आगे बढ़ रहा है।


आईएनएस सुदर्शिनी बोस्टन पहुँचा, 'सेल बोस्टन 2026' में भारत का किया प्रतिनिधित्व

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भारतीय नौसेना का सेल प्रशिक्षण पोत आईएनएस सुदर्शिनी न्यूयॉर्क में Sail4th 250 समारोह में सफल भागीदारी के बाद 12 जुलाई 2026 को अमेरिका के बोस्टन पहुँचा। जहाज ने ग्रैंड परेड ऑफ सेल्स (Grand Parade of Sails) में भाग लेकर सेल बोस्टन 2026 के शुभारंभ में हिस्सा लिया।

बोस्टन स्थित भारत के महावाणिज्यदूत रघुराम शास्त्री ग्रैंड परेड ऑफ सेल्स और बोस्टन में जहाज के औपचारिक प्रवेश के दौरान आईएनएस सुदर्शिनी पर सवार हुए। भारतीय तिरंगा लहराते हुए आईएनएस सुदर्शिनी ने कैसल आइलैंड और सीपोर्ट डिस्ट्रिक्ट जैसे प्रमुख स्थलों से गुजरते हुए बोस्टन फिश पियर पर लंगर डाला।

20 से अधिक देशों के 60 से ज्यादा पारंपरिक पाल नौकाओं (Tall Ships) के अंतरराष्ट्रीय बेड़े के साथ आईएनएस सुदर्शिनी लोकायन 2026 ट्रांसओशैनिक अभियान के तहत भारत के समुद्री सद्भावना दूत (Maritime Ambassador of Goodwill) के रूप में देश का प्रतिनिधित्व कर रहा है। यह अभियान भारतीय नौसेना की समुद्री कूटनीति, अंतरराष्ट्रीय सद्भावना और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करता है। जहाज 12 से 15 जुलाई 2026 तक आम जनता के लिए भी खुला रहेगा।

नॉरफ़ॉक, बाल्टीमोर और न्यूयॉर्क की सफल यात्राओं के बाद सेल बोस्टन 2026 में आईएनएस सुदर्शिनी की भागीदारी भारत-अमेरिका के बढ़ते समुद्री सहयोग को और सुदृढ़ करती है तथा वैश्विक मंच पर भारत की समृद्ध समुद्री विरासत को प्रदर्शित करती है।

वायु सेना मार्शल अर्जन सिंह स्मृति हॉकी टूर्नामेंट के 7वें संस्करण का सफल आयोजन

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 मार्शल ऑफ द एयर फोर्स अर्जन सिंह स्मृति हॉकी टूर्नामेंट के 7वें संस्करण का आयोजन 23 जून से 3 जुलाई 2026 तक एयर फोर्स स्टेशन, जलहल्ली स्थित अमित सिंह बख्शी हॉकी स्टेडियम में सफलतापूर्वक किया गया। इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में कुल 16 टीमों ने भाग लिया।

टूर्नामेंट का समापन समारोह 3 जुलाई 2026 को प्रातः 7:30 बजे आयोजित किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि एयर मार्शल सीथेपल्ली श्रीनिवास, एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, प्रशिक्षण कमान (Training Command) रहे।

समापन समारोह में भारतीय महिला हॉकी खिलाड़ी बलजीत कौर तथा ओलंपियन एवं भारतीय पुरुष हॉकी खिलाड़ी पी.आर. श्रीजेश विशिष्ट अतिथि (Guest of Honour) के रूप में उपस्थित रहे।

टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबला भारतीय वायु सेना और भारतीय नौसेना की टीमों के बीच खेला गया। रोमांचक मुकाबले में भारतीय वायु सेना ने 2-1 से जीत दर्ज कर खिताब अपने नाम किया।

भारतीय वायु सेना के सार्जेंट आनंद लकड़ा को 'मैन ऑफ द मैच' तथा एजीवी (एस) अग्यापाल को 'प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' घोषित किया गया।

आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ता देश, प्रधानमंत्री ने 'मन की बात' में गिनाईं उपलब्धियां

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत सुरक्षा, आत्मनिर्भरता, विज्ञान और सामाजिक भागीदारी के क्षेत्र में लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। उन्होंने स्वदेशी रक्षा उत्पादन, योग, पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी की सराहना की।

प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत में निर्मित C-295 विमान की पहली सफल उड़ान देश के रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि है। इसके साथ ही DRDO द्वारा स्वदेशी लॉन्ग-रेंज लैंड-अटैक क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण भारत की रक्षा क्षमता को और मजबूत करेगा।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का उल्लेख करते हुए कहा कि इस वर्ष दुनिया भर के 2,500 से अधिक स्थानों पर योग कार्यक्रम आयोजित किए गए। अहमदाबाद में आयोजित विश्व योगासन चैंपियनशिप में भारत ने 114 पदक जीतकर पहला स्थान हासिल किया।

प्रधानमंत्री ने नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता के लिए स्थानीय उत्पाद अपनाने की अपील की। उन्होंने आगामी गणेश उत्सव के अवसर पर मिट्टी से बनी स्थानीय कारीगरों की गणेश प्रतिमाएं खरीदने तथा प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) की मूर्तियों से बचने का आग्रह किया।

कार्यक्रम में उन्होंने प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना का भी उल्लेख करते हुए लोगों से इन योजनाओं का लाभ उठाने और अधिक से अधिक लोगों तक इसकी जानकारी पहुंचाने की अपील की।

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने जल संरक्षण, 'कैच द रेन' अभियान और जनभागीदारी को देश की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए सभी नागरिकों से इसमें सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

आईएनएस इक्षाक सेशेल्स पहुंचा, राष्ट्रीय दिवस समारोह में करेगा भारत का प्रतिनिधित्व

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नई दिल्ली- भारतीय नौसेना का स्वदेशी रूप से निर्मित सर्वे वेसल लार्ज (Survey Vessel Large - SVL) आईएनएस इक्षाक (INS Ikshak) 26 जून 2026 को दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी परिचालन तैनाती के तहत सेशेल्स की राजधानी विक्टोरिया बंदरगाह (Port Victoria) पहुंच गया।

आईएनएस इक्षाक की यह यात्रा सेशेल्स के 50वें राष्ट्रीय दिवस समारोह के साथ हो रही है, जो भारत और सेशेल्स के बीच लंबे समय से चले आ रहे मजबूत समुद्री संबंधों और मित्रता को और सुदृढ़ करने का प्रतीक है।

राष्ट्रीय दिवस समारोह और नौसैनिक सहयोग

अपने प्रवास के दौरान आईएनएस इक्षाक सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस समारोह में भाग लेगा। इसके साथ ही भारतीय नौसेना और सेशेल्स डिफेंस फोर्सेज के बीच कई पेशेवर बैठकों और संयुक्त गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इनका उद्देश्य दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग, समन्वय (Interoperability) और सामरिक साझेदारी को और मजबूत करना है।

सामुदायिक सेवा गतिविधियों का भी आयोजन

इस दौरे के दौरान भारतीय नौसेना स्थानीय समुदायों के लिए निःशुल्क चिकित्सा शिविर, आवश्यक वस्तुओं का वितरण तथा अन्य सामुदायिक सेवा कार्यक्रम भी आयोजित करेगी। इन पहलों का उद्देश्य दोनों देशों के लोगों के बीच विश्वास, सद्भाव और आपसी संबंधों को और मजबूत करना है।

आम नागरिकों के लिए भी खुलेगा जहाज

पोर्ट कॉल के दौरान आईएनएस इक्षाक को आम नागरिकों के लिए भी खोला जाएगा, जिससे लोग भारतीय नौसेना की आधुनिक क्षमताओं, स्वदेशी तकनीक और हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा एवं सहयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को करीब से जान सकेंगे।

MAHASAGAR विजन को मिलेगा बल

आईएनएस इक्षाक की यह तैनाती MAHASAGAR (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) विजन के अनुरूप हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा, स्थिरता और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने की भारत की प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित करती है।

यह यात्रा एक बार फिर दर्शाती है कि भारत अपने मित्र देशों के साथ समुद्री साझेदारी को मजबूत करते हुए सुरक्षित, स्थिर और समृद्ध हिंद महासागर क्षेत्र के निर्माण के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।

आईएनएस सुदर्शिनी अमेरिका के बाल्टीमोर पहुंची, ‘लोकायन 26’ अभियान के तहत भारत की समुद्री विरासत का प्रदर्शन

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नई दिल्ली- भारतीय नौसेना का सेल ट्रेनिंग शिप आईएनएस सुदर्शिनी (INS Sudarshini) 26 जून 2026 को अमेरिका के मैरीलैंड राज्य स्थित बाल्टीमोर बंदरगाह पहुंचा। यह यात्रा भारतीय नौसेना के ऐतिहासिक ‘लोकायन 26’ (Lokayan 26) अंतरमहासागरीय अभियान का हिस्सा है।

नॉरफ़ॉक से बाल्टीमोर तक की यात्रा के दौरान आईएनएस सुदर्शिनी ने ऐतिहासिक चेसापीक एंड डेलावेयर (C&D) नहर से होकर गुजरते हुए मिड-अटलांटिक क्षेत्र के प्रमुख पुलों के नीचे सफलतापूर्वक समुद्री मार्ग तय किया।

भारत-अमेरिका समुद्री मित्रता को मिलेगा नया आयाम

बाल्टीमोर में आईएनएस सुदर्शिनी की यह यात्रा भारत की समृद्ध समुद्री विरासत और भारतीय नौसेना तथा अमेरिकी नौसेना के बीच मजबूत मित्रता एवं सहयोग का प्रतीक है। अपने प्रवास के दौरान जहाज विभिन्न समुद्री सहयोग कार्यक्रमों और सामुदायिक संपर्क गतिविधियों में भाग लेगा।

यह दौरा 'Sail250 Maryland' समारोह से पहले हो रहा है, जो संयुक्त राज्य अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है।

नॉरफ़ॉक में भी किया भारत का प्रतिनिधित्व

बाल्टीमोर पहुंचने से पहले आईएनएस सुदर्शिनी ने 19 से 23 जून 2026 तक नॉरफ़ॉक (वर्जीनिया) में आयोजित Sail250 Virginia समारोह में भाग लिया। इस दौरान दुनिया भर से आए पारंपरिक ऊंचे जहाजों (Tall Ships) के साथ भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए 'Parade of Sail' और 'City Crew Parade' में हिस्सा लिया।

पांच महीने में तय किए 13,000 से अधिक समुद्री मील

आईएनएस सुदर्शिनी ने कोच्चि से नॉरफ़ॉक तक की यात्रा में पिछले पांच महीनों के दौरान 13,000 से अधिक समुद्री मील की दूरी तय की है। यह ऐतिहासिक अभियान भारत की समृद्ध समुद्री परंपराओं और 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना का प्रतीक है, जो समुद्रों के माध्यम से वैश्विक मित्रता, सहयोग और आपसी विश्वास को मजबूत करने का संदेश देता है।

यह अभियान विश्व समुदाय के बीच भारत की समुद्री क्षमता, सांस्कृतिक विरासत और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को भी प्रभावी ढंग से प्रदर्शित करता है।

भारतीय नौसेना के युद्धपोत थाईलैंड पहुंचे, भारत-थाईलैंड समुद्री सहयोग को मिलेगा नया आयाम

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नई दिल्ली- भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े (Eastern Fleet) के युद्धपोत आईएनएस उदयगिरि, आईएनएस कवरत्ती और आईएनएस शक्ति दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में अपने परिचालन तैनाती कार्यक्रम के तहत थाईलैंड के सत्ताहीप (Sattahip) बंदरगाह पहुंच गए हैं।

इस बेड़े का नेतृत्व रियर एडमिरल आलोक आनंद, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग ईस्टर्न फ्लीट, कर रहे हैं। थाईलैंड पहुंचने पर रॉयल थाई नेवी ने भारतीय नौसैनिक दल का गर्मजोशी से स्वागत किया।

यह पोर्ट कॉल भारत और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ बढ़ते समुद्री सहयोग का हिस्सा है तथा भारत और थाईलैंड के बीच लंबे समय से चले आ रहे मजबूत समुद्री संबंधों को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

कई संयुक्त गतिविधियों का होगा आयोजन

इस दौरे के दौरान दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच कई पेशेवर और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें—

  • पेशेवर विचार-विमर्श (Professional Exchanges)

  • क्रॉस-डेक विजिट

  • संयुक्त परिचालन गतिविधियां

  • खेल प्रतियोगिताएं

  • सामुदायिक संपर्क कार्यक्रम (Community Outreach)

शामिल हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के बीच आपसी सहयोग, समन्वय (Interoperability) और विश्वास को और मजबूत करना है।

भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता का प्रदर्शन

यह यात्रा भारतीय नौसेना के स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित अत्याधुनिक युद्धपोतों की क्षमता को भी प्रदर्शित करती है। आईएनएस उदयगिरि, आईएनएस कवरत्ती और आईएनएस शक्ति आधुनिक तकनीक, मॉड्यूलर निर्माण और उन्नत रक्षा प्रणालियों से लैस हैं, जो भारत की बढ़ती रक्षा उत्पादन क्षमता और तकनीकी आत्मनिर्भरता को दर्शाते हैं।

इस पोर्ट कॉल के माध्यम से भारत ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि वह रक्षा प्रौद्योगिकी और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में अपनी भूमिका को लगातार मजबूत कर रहा है।

भारतीय नौसेना को मिलेगा बड़ा स्वदेशी बल: 21 जून को तीन अत्याधुनिक युद्धपोतों का होगा कमीशनिंग समारोह

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कोलकाता- भारतीय नौसेना 21 जून 2026 को कोलकाता में स्वदेशी रूप से निर्मित तीन अत्याधुनिक अग्रिम पंक्ति के नौसैनिक प्लेटफॉर्म — दुनागिरी, संशोधक और अग्रय — को औपचारिक रूप से अपने बेड़े में शामिल करेगी। यह ऐतिहासिक समारोह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित होगा।

भारतीय नौसेना के वारशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किए गए और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE), कोलकाता द्वारा निर्मित ये तीनों प्लेटफॉर्म समुद्री युद्ध, हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण और पनडुब्बी रोधी अभियानों जैसी महत्वपूर्ण क्षमताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनकी तैनाती से भारत की समुद्री सुरक्षा और नौसैनिक शक्ति को नई मजबूती मिलेगी।

दुनागिरी: अत्याधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट

दुनागिरी प्रोजेक्ट 17A के तहत निर्मित पांचवां स्टील्थ फ्रिगेट है। यह ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल, मीडियम रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल (MRSAM) सहित आधुनिक हथियारों और सेंसरों से लैस है। यह युद्धपोत भारतीय नौसेना की समुद्री युद्ध क्षमता को और अधिक सशक्त बनाएगा।

संशोधक: समुद्री सर्वेक्षण में नई ताकत

संशोधक बड़े सर्वेक्षण पोत (Survey Vessel Large) श्रृंखला का चौथा जहाज है। इसे तटीय और गहरे समुद्र में हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण, समुद्री भू-वैज्ञानिक और महासागरीय आंकड़ों के संग्रह के लिए तैयार किया गया है। यह ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल (AUV) और रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (ROV) जैसी आधुनिक तकनीकों से सुसज्जित है।

अग्रय: पनडुब्बी रोधी अभियानों का नया प्रहरी

अग्रय अर्नाला श्रेणी के एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट का चौथा पोत है। इसमें हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर और शैलो वाटर सोनार सिस्टम लगाए गए हैं, जो तटीय क्षेत्रों में छिपे पानी के भीतर के खतरों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने में सक्षम हैं।

आत्मनिर्भर भारत की बड़ी सफलता

इन तीनों प्लेटफॉर्म में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है। इनके निर्माण में देशभर के 200 से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) की भागीदारी रही, जिससे हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार भी मिला।

समुद्री शक्ति को नई ऊंचाई

दुनागिरी, संशोधक और अग्रय की कमीशनिंग भारतीय नौसेना, सार्वजनिक क्षेत्र के शिपयार्ड, निजी उद्योगों और MSMEs के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूत करने के साथ-साथ भारत की समुद्री सुरक्षा, समुद्री निगरानी क्षमता और ब्लू-वॉटर ऑपरेशंस को नई मजबूती प्रदान करेगी।



आत्मनिर्भर भारत को बड़ी मजबूती: भारतीय नौसेना के लिए स्वदेशी मरीन गैस टर्बाइन जनरेटर खरीदेगा रक्षा मंत्रालय

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नई दिल्ली- रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना की क्षमताओं को और मजबूत करने तथा आत्मनिर्भर भारत अभियान को गति देने के लिए पुणे स्थित भारत फोर्ज लिमिटेड के साथ लगभग 425 करोड़ रुपये की लागत से 12 सेट 1.25 मेगावाट मरीन गैस टर्बाइन जनरेटर की खरीद का अनुबंध किया है।

यह अनुबंध नई दिल्ली में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में ‘बाय (इंडियन)’ श्रेणी के तहत हस्ताक्षरित किया गया। परियोजना में कम से कम 60 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री (Indigenous Content) का उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह परियोजना ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे देश में रक्षा उत्पादन का मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित होगा और रणनीतिक प्रौद्योगिकियों में भारत की आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।

मरीन गैस टर्बाइन जनरेटर आधुनिक युद्धपोतों में विद्युत उत्पादन का प्रमुख स्रोत होते हैं। ये जनरेटर नौसेना के महत्वपूर्ण लड़ाकू प्रणालियों, उन्नत हथियारों और अत्याधुनिक सेंसरों को ऊर्जा प्रदान करते हैं। इसलिए इन्हें नौसैनिक युद्धक क्षमताओं की रीढ़ माना जाता है।

इस अनुबंध के माध्यम से भारत में पहली बार बड़े पैमाने पर मरीन गैस टर्बाइन जनरेटर के स्वदेशी निर्माण की क्षमता विकसित होगी। साथ ही, उपकरणों के पूरे जीवनचक्र (Life-Cycle) के दौरान रखरखाव और तकनीकी सहायता भी देश में ही उपलब्ध होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारतीय नौसेना की परिचालन तैयारियों को बढ़ाने के साथ-साथ रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण और तकनीकी आत्मनिर्भरता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी।



श्रीलंका दौरे के बाद कोलंबो से रवाना हुआ आईएनएस शारदा, भारत-श्रीलंका समुद्री सहयोग को मिली नई मजबूती

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भारतीय नौसेना का पोत आईएनएस शारदा (INS Sharda) 13 जून 2026 को श्रीलंका की राजधानी कोलंबो से अपने सफल बंदरगाह दौरे के बाद रवाना हो गया। यह यात्रा भारत और श्रीलंका के बीच समुद्री सहयोग, मित्रता और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।

इस दौरान भारतीय नौसेना और श्रीलंकाई नौसेना के बीच कई पेशेवर, प्रशिक्षण और खेल गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिससे दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच आपसी समझ, समन्वय और सहयोग को नई ऊर्जा मिली।

प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर विशेष जोर

दौरे के दौरान श्रीलंकाई नौसेना के कर्मियों को भारतीय नौसेना द्वारा छोटे हथियारों के संचालन, बुनियादी अग्निशमन, प्राथमिक उपचार तथा बचाव प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण दिया गया। इन गतिविधियों का उद्देश्य समुद्री सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में क्षमता निर्माण को बढ़ावा देना था।

वरिष्ठ नौसैनिक अधिकारियों की अहम मुलाकात

यात्रा के दौरान श्रीलंकाई नौसेना के पश्चिमी नौसैनिक क्षेत्र के कमांडर रियर एडमिरल जगथ कुमारा ने आईएनएस शारदा का दौरा किया और जहाज के अधिकारियों एवं चालक दल के साथ संवाद किया। इस अवसर पर दोनों देशों के बीच मजबूत समुद्री साझेदारी और सहयोग को और आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

खेल और पेशेवर आदान-प्रदान से बढ़ी मित्रता

दौरे के दौरान दोनों नौसेनाओं के बीच मैत्रीपूर्ण खेल प्रतियोगिताएं, पेशेवर चर्चाएं और क्रॉस-डेक विजिट्स आयोजित किए गए। इन गतिविधियों ने दोनों नौसैनिक बलों के बीच पारस्परिक समझ, संचालन क्षमता और मित्रता को और मजबूत किया।

भारतीय उच्चायुक्त से की शिष्टाचार भेंट

कोलंबो प्रवास के दौरान आईएनएस शारदा के कमांडिंग ऑफिसर ने श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त संतोष झा से शिष्टाचार मुलाकात भी की। इस बैठक में भारत-श्रीलंका संबंधों और समुद्री सहयोग से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।

MAHASAGAR विजन को मिला बल

आईएनएस शारदा की यह यात्रा भारत और श्रीलंका के बीच लंबे समय से चले आ रहे समुद्री सहयोग और मित्रता का प्रतीक रही। साथ ही इसने MAHASAGAR (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) के विजन के अनुरूप क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा, स्थिरता और साझा विकास के प्रति दोनों देशों की प्रतिबद्धता को भी मजबूत किया।

यह दौरा केवल एक नौसैनिक यात्रा नहीं, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और सहयोग को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

सेशेल्स पहुंचा आईएनएस तरकश, भारत-सेशेल्स समुद्री साझेदारी हुई और मजबूत

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सेशेल्स- भारतीय नौसेना का अत्याधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस तरकश दक्षिण-पश्चिम हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी परिचालन तैनाती के दौरान सेशेल्स की राजधानी पोर्ट विक्टोरिया पहुंचा। इस यात्रा का उद्देश्य भारत और सेशेल्स के बीच समुद्री सहयोग तथा द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक मजबूत बनाना है।

आईएनएस तरकश ने सेशेल्स कोस्ट गार्ड के जहाज पीएस ज़ोरोस्टर को भारत से सेशेल्स तक सुरक्षित रूप से एस्कॉर्ट किया। यह जहाज कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) में मरम्मत और उन्नयन कार्य पूरा करने के बाद सेशेल्स लौट रहा था। यह सहयोग दोनों देशों के बीच मजबूत समुद्री साझेदारी और आपसी विश्वास का प्रतीक माना जा रहा है।

इस दौरे के दौरान आईएनएस तरकश के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन रोहित मिश्रा सेशेल्स सरकार और रक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। इसके अलावा दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा।

भारतीय नौसेना सेशेल्स सरकार को महत्वपूर्ण तकनीकी उपकरण, आवश्यक स्पेयर पार्ट्स और अन्य जरूरी सामग्री भी सौंपेगी, जिससे समुद्री सुरक्षा और संचालन क्षमता को और मजबूती मिलेगी।

यह पोर्ट कॉल भारत और सेशेल्स के बीच मित्रता, आपसी सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। साथ ही, हिंद महासागर क्षेत्र में साझा समुद्री चुनौतियों से निपटने के लिए दोनों देशों की सामरिक साझेदारी को भी बल मिलेगा।



भारतीय नौसेना के लिए 20 उन्नत जीएनएसएस जैमर खरीदने हेतु रक्षा मंत्रालय ने 449 करोड़ रुपये के अनुबंध पर किए हस्ताक्षर

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रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के लिए 20 उन्नत क्षमता वाले ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (Enhanced Capability Global Navigation Satellite System - ECGNSS) जैमर की खरीद के लिए Accord Software and Systems Private Limited के साथ 449 करोड़ रुपये का अनुबंध किया है। इस प्रणाली में न्यूनतम 75 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया जाएगा।

यह अनुबंध 10 जून 2026 को राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में नई दिल्ली में हस्ताक्षरित किया गया। यह खरीद ‘बाय (इंडियन-इंडिजिनसली डिजाइन्ड, डेवलप्ड एंड मैन्युफैक्चर्ड)’ श्रेणी के अंतर्गत की गई है।

इस अत्याधुनिक प्रणाली की प्रमुख क्षमताओं में दुश्मन के ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) रिसीवर की सिग्नल प्राप्ति और ट्रैकिंग क्षमता को बाधित करना, सिग्नल स्पूफिंग तथा भ्रामक जैमिंग (Deceptive Jamming) शामिल है। इसके शामिल होने से भारतीय नौसेना के युद्धपोत बहु-खतरा (Multi-Threat) वातावरण में अधिक सुरक्षित और प्रभावी ढंग से संचालन कर सकेंगे।

यह अनुबंध सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ पहल के प्रति प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है तथा देश की समुद्री सुरक्षा संरचना को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। साथ ही, यह उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकी के स्वदेशीकरण और भारत की रक्षा क्षमताओं को सशक्त बनाने के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि भी है।


आईएनएस चिल्का में 12 जून को आयोजित होगी 01/26 बैच की पासिंग आउट परेड

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भुवनेश्वर/चिल्का- भारतीय नौसेना के अग्निवीरों और भारतीय तटरक्षक बल (कोस्ट गार्ड) के नाविकों के 01/26 बैच की पासिंग आउट परेड (POP) 12 जून 2026 को आईएनएस चिल्का में आयोजित की जाएगी। यह परेड 16 सप्ताह के कठोर प्रारंभिक प्रशिक्षण के सफल समापन का प्रतीक है, जिसे भारतीय नौसेना के आठवें अग्निवीर बैच और भारतीय तटरक्षक बल के नाविकों ने पूरा किया है।

यह आयोजन प्रशिक्षुओं के अनुशासित, सशक्त और पेशेवर रूप से सक्षम ‘समुद्री योद्धाओं’ में परिवर्तन की महत्वपूर्ण उपलब्धि को दर्शाता है, जो अब राष्ट्र सेवा के लिए अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं।

इस अवसर पर पश्चिमी नौसैनिक कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, वाइस एडमिरल Sanjay Vatsayan मुख्य अतिथि एवं परेड के निरीक्षण अधिकारी होंगे। समारोह में प्रशिक्षुओं के परिजन, पूर्व सैनिक, प्रतिष्ठित खिलाड़ी और अन्य गणमान्य अतिथि भी उपस्थित रहेंगे।

पासिंग आउट परेड भारतीय नौसेना की उस प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसके तहत प्रशिक्षण को एक पेशेवर और सक्षम युद्धक बल की नींव माना जाता है। आईएनएस चिल्का अपने संरचित शैक्षणिक, शारीरिक और बाह्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को अनुशासित, आत्मविश्वासी और दक्ष समुद्री योद्धाओं के रूप में तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह प्रशिक्षण “कर्तव्य, सम्मान और साहस” के मूल्यों पर आधारित है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि समापन समारोह (Valedictory Function) की अध्यक्षता करेंगे तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षुओं, चैंपियन डिवीजन और सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षक को पुरस्कार एवं ट्रॉफियां प्रदान करेंगे। इस अवसर पर प्रशिक्षुओं की द्विभाषी पत्रिका ‘अंकुर’ का भी विमोचन किया जाएगा।

पासिंग आउट परेड के बाद प्रशिक्षुओं को विभिन्न नौसैनिक प्रतिष्ठानों और भारतीय नौसेना तथा भारतीय तटरक्षक बल के अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों पर विशेष व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा।

भारतीय नौसेना ने बताया कि इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण (Live Streaming) उसके आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर किया जाएगा।


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