Media24Media.com: खरीफ सम्मेलन-2026 में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रखी कृषि विकास की रूपरेखा

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खरीफ सम्मेलन-2026 में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रखी कृषि विकास की रूपरेखा

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नई दिल्ली- केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज नई दिल्ली स्थित पूसा परिसर में आयोजित खरीफ सम्मेलन-2026 को संबोधित करते हुए कहा कि देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, किसानों की आय बढ़ाना और नागरिकों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार लगातार कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कार्य कर रही है।

दो दिवसीय राष्ट्रीय खरीफ अभियान-2026 सम्मेलन का आयोजन 28 और 29 मई को NASC कॉम्प्लेक्स, पूसा, नई दिल्ली में किया जा रहा है। सम्मेलन में देशभर के कृषि मंत्री, वैज्ञानिक, वरिष्ठ अधिकारी, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।

‘टीम एग्रीकल्चर’ का साझा मंच

चौहान ने कहा कि खरीफ सम्मेलन ने पूरे ‘टीम एग्रीकल्चर’ को एक मंच पर लाने का कार्य किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि टीम एग्रीकल्चर में केवल केंद्र सरकार ही नहीं, बल्कि राज्य सरकारें, वैज्ञानिक, किसान उत्पादक संगठन (FPO), और कृषि क्षेत्र से जुड़े सभी हितधारक शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि कृषि राज्य का विषय है और राज्यों की सक्रिय भागीदारी से बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं, जबकि केंद्र सरकार सहयोगी और साझेदार की भूमिका निभाती है।

क्षेत्रीय कृषि सम्मेलनों पर जोर

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश की भौगोलिक और जलवायु विविधता को देखते हुए सरकार ने राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन के साथ-साथ क्षेत्रीय सम्मेलनों की शुरुआत की है। जयपुर, लखनऊ और भुवनेश्वर में क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किए जा चुके हैं, जबकि उत्तर-पूर्व और दक्षिण भारत में भी जल्द सम्मेलन आयोजित होंगे।

उन्होंने कहा कि राज्यों की समस्याओं और आवश्यकताओं पर छोटे समूहों में अधिक प्रभावी और विस्तृत चर्चा संभव हो पाती है। भविष्य में आठ कृषि-जलवायु क्षेत्रों के आधार पर क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित करने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है।

खाद्यान्न उत्पादन में रिकॉर्ड उपलब्धि

चौहान ने कहा कि किसानों की मेहनत, वैज्ञानिक अनुसंधान और केंद्र व राज्यों के सहयोग से भारत ने वर्ष 2025-26 में खाद्यान्न उत्पादन के सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।

उन्होंने बताया कि:

  • कुल खाद्यान्न उत्पादन 376.563 मिलियन टन तक पहुंच गया है।

  • चावल उत्पादन 154.024 मिलियन टन रहा और भारत ने चीन को पीछे छोड़ते हुए विश्व में पहला स्थान हासिल किया।

  • गेहूं उत्पादन 120.657 मिलियन टन और मक्का उत्पादन 55.092 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।

तेलहन उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। कुल तेलहन उत्पादन 43.059 मिलियन टन अनुमानित है। मूंगफली उत्पादन 13.074 मिलियन टन और सरसों उत्पादन 13.768 मिलियन टन तक पहुंच गया है।

प्राकृतिक खेती और जलवायु परिवर्तन पर फोकस

कृषि मंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन कृषि क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। बढ़ते तापमान, अनियमित वर्षा और लंबे सूखे जैसी परिस्थितियों को देखते हुए टिकाऊ और सुरक्षित कृषि पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।

उन्होंने बताया कि सम्मेलन में प्राकृतिक खेती, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, संतुलित उर्वरक उपयोग, डिजिटल कृषि, किसान क्रेडिट कार्ड, कृषि अवसंरचना कोष और पीएम-आशा योजना जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

छोटे किसानों की आय बढ़ाने पर जोर

चौहान ने कहा कि भारत में अधिकांश किसानों के पास छोटी जोत है, इसलिए सीमित भूमि से अधिक आय सुनिश्चित करने के लिए एकीकृत खेती मॉडल को बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पर्याप्त कृषि ऋण, निवेश और आधुनिक तकनीकों की मदद से किसान बेहतर खेती कर सकेंगे।

उन्होंने बताया कि सम्मेलन में ‘खेत बचाओ अभियान’ पर भी व्यापक चर्चा होगी और केंद्र व राज्य मिलकर खरीफ सीजन के लिए संयुक्त कृषि रोडमैप तैयार करेंगे।

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