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महाराष्ट्र को राष्ट्रीय कृषि विकास योजना की दूसरी किस्त मिलेगी, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की समीक्षा बैठक

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नई दिल्ली- केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के तहत जारी धनराशि के उपयोग की समीक्षा के लिए एक वर्चुअल बैठक की। बैठक में महाराष्ट्र सरकार को योजना की दूसरी किस्त (Second Installment) जारी करने पर भी विचार किया गया।

बैठक में महाराष्ट्र के कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे, भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तथा महाराष्ट्र सरकार के अधिकारी शामिल हुए।

समीक्षा के दौरान केंद्रीय मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार ने पहले चरण में महाराष्ट्र को ₹335 करोड़ की राशि जारी की थी। राज्य सरकार ने इस राशि में से लगभग ₹260 करोड़ का उपयोग कर लिया है, जो निर्धारित 75 प्रतिशत उपयोग के मानक से अधिक है। इसके आधार पर महाराष्ट्र दूसरी किस्त प्राप्त करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। उन्होंने बताया कि ₹335 करोड़ की दूसरी किस्त जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

शिवराज सिंह चौहान ने महाराष्ट्र सरकार को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि तय समय के भीतर 75 प्रतिशत से अधिक धनराशि का प्रभावी उपयोग राज्य की कृषि विकास योजनाओं के प्रति गंभीरता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि सरकारी धन का समय पर खर्च होने के साथ-साथ उसकी निरंतर निगरानी भी आवश्यक है, ताकि राशि का उपयोग केवल निर्धारित उद्देश्यों के लिए ही किया जाए। केंद्रीय मंत्री ने फार्मर आईडी (Farmer ID) बनाने में महाराष्ट्र के प्रदर्शन की भी सराहना की। उन्होंने बाढ़ प्रभावित किसानों को करीब ₹14,000 करोड़ की सहायता राशि मात्र पांच दिनों में सीधे बैंक खातों में हस्तांतरित करने की राज्य सरकार की पहल की प्रशंसा की।

बैठक में मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) के तहत हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया गया। वहीं डिजिटल कृषि, कृषि विस्तार, राष्ट्रीय बागवानी मिशन (NHM), बीज, तिलहन तथा एग्रोफॉरेस्ट्री जैसे क्षेत्रों में खर्च की गति बढ़ाने और लंबित देनदारियों का शीघ्र निपटारा करने के निर्देश दिए गए।

समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के क्रियान्वयन पर भी चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि फसल बीमा के लिए आवेदन करते समय किसानों द्वारा सही जानकारी देना बेहद जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) धारक और गैर-केसीसी दोनों प्रकार के किसान योजना का लाभ लेने के पात्र हैं, लेकिन आवेदन के दौरान किसी भी प्रकार की जानकारी छिपाने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि पोर्टल पर प्रस्तावित घोषणा का उद्देश्य केवल पारदर्शिता और सही जानकारी सुनिश्चित करना है, न कि किसी पात्र किसान को योजना से वंचित करना।

बैठक के अंत में केंद्रीय मंत्री ने विश्वास जताया कि महाराष्ट्र सरकार राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अन्य घटकों में भी बेहतर प्रदर्शन करते हुए देश के कृषि क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती रहेगी।

अरुणाचल प्रदेश और असम के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का आज जमीनी एवं हवाई दौरा करेंगे केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान

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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान सोमवार को अरुणाचल प्रदेश पहुंचे, लेकिन खराब मौसम के कारण निर्धारित हवाई सर्वे नहीं कर सके। अब वे 1 जुलाई को अरुणाचल प्रदेश और असम के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का पूरे दिन जमीनी और हवाई निरीक्षण करेंगे। इस दौरान वे प्रभावित किसानों और परिवारों की स्थिति का जायजा लेंगे, नुकसान का प्रत्यक्ष आकलन करेंगे तथा तत्काल राहत और दीर्घकालिक सहायता के उपायों की समीक्षा करेंगे। इस दौरे में केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्रीकिरेन रिजिजू और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू भी उनके साथ रहेंगे।

सोमवार दोपहर अरुणाचल प्रदेश पहुंचने के बाद चौहान ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के स्थानीय लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने कहा कि खराब मौसम के कारण हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर सका, लेकिन इससे सरकार का संकल्प कमजोर नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा, "आज मौसम ने हेलीकॉप्टर को उड़ने से रोक दिया, लेकिन हमारी प्रतिबद्धता को नहीं रोक सकता। कल हम पूरे दिन अरुणाचल प्रदेश और असम के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जमीन और हवाई दोनों माध्यमों से स्थिति का आकलन करेंगे, ताकि हर प्रभावित किसान और हर प्रभावित परिवार तक आवश्यक सहायता पहुंचाई जा सके।"

दिल्ली से ईटानगर पहुंचने के बाद चौहान ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों और जनप्रतिनिधियों से बातचीत की। लोगों ने बताया कि बाढ़ के पानी ने कृषि भूमि डुबो दी है, खड़ी फसलें नष्ट हो गई हैं, घरों को नुकसान पहुंचा है और आजीविका प्रभावित हुई है। मंत्री ने सभी की बातें ध्यानपूर्वक सुनीं और आश्वासन दिया कि राहत एवं पुनर्वास कार्यों में किसी भी प्रभावित परिवार को पीछे नहीं छोड़ा जाएगा।

इसके बाद ईटानगर सचिवालय में अरुणाचल प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में उन्होंने बाढ़ की स्थिति, राहत सामग्री की उपलब्धता एवं वितरण, पुनर्वास कार्यों तथा आगे की रणनीति पर चर्चा की। उन्होंने अधिकारियों को आश्वस्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।

चौहान ने बताया कि मंगलवार सुबह से वे अरुणाचल प्रदेश के बाढ़ प्रभावित गांवों और राहत शिविरों का दौरा करेंगे। वे किसानों से मिलकर कृषि भूमि, पशुधन और बाढ़ से जनजीवन पर पड़े प्रभाव का प्रत्यक्ष आकलन करेंगे। इसके बाद वे अरुणाचल प्रदेश और असम के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वे भी करेंगे, जिसमें नदियों, तटबंधों, सड़कों, पुलों और कृषि भूमि की स्थिति का व्यापक निरीक्षण किया जाएगा।

शाम को वे गुवाहाटी में असम सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे, जिसमें बाढ़ प्रबंधन, राहत वितरण, तटबंधों और सड़कों की मरम्मत, क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की बहाली तथा प्रभावित किसानों को वित्तीय सहायता जैसे विषयों पर चर्चा होगी।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रभावित लोगों को तत्काल राहत देना सर्वोच्च प्राथमिकता है, लेकिन भविष्य में बाढ़ के प्रभाव को कम करने के लिए दीर्घकालिक रणनीति भी आवश्यक है। उन्होंने बेहतर जल निकासी व्यवस्था, मजबूत तटबंध, सुरक्षित राहत शिविर, उन्नत बाढ़ प्रबंधन ढांचा तथा अधिक प्रभावी फसल बीमा प्रणाली विकसित करने पर बल दिया।

उन्होंने अरुणाचल प्रदेश और असम के बाढ़ प्रभावित लोगों से धैर्य बनाए रखने की अपील करते हुए भरोसा दिलाया कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर हर संभव कदम उठाएंगी ताकि राहत, पुनर्वास और सामान्य जीवन की जल्द बहाली सुनिश्चित की जा सके।

मीडिया से बातचीत में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश एक प्रिय राज्य है, लेकिन इस समय वह भीषण प्राकृतिक आपदा का सामना कर रहा है। भारी बारिश और भूस्खलन से सड़कें, पुल और अनेक मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, जबकि संतरा, केला और धान जैसी फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री के निर्देश पर मैं, किरेन रिजिजू और मुख्यमंत्री प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने आए हैं। हम नुकसान का विस्तृत आकलन करेंगे और केंद्र सरकार की ओर से हर संभव सहायता सुनिश्चित करेंगे।"

उन्होंने विश्वास दिलाया कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सरकार पूरी ताकत के साथ राज्य को इस संकट से उबारने, सामान्य स्थिति बहाल करने और सभी प्रभावित परिवारों तक आवश्यक सहायता पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य करेगी।

‘खेत बचाओ अभियान’ अब बनेगा राष्ट्रीय मिशन : केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान

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संतुलित उर्वरक उपयोग, प्राकृतिक खेती और मिट्टी संरक्षण से ही समृद्ध किसान तथा विकसित भारत का सपना होगा साकार

रेवाड़ी (हरियाणा)- केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हरियाणा के रेवाड़ी जिले के बावल स्थित कृषि महाविद्यालय में आयोजित ‘खेत बचाओ अभियान’ के समापन समारोह एवं हरियाणा किसान उत्पादक संगठन (FPO) मिशन के शुभारंभ अवसर पर किसानों से संतुलित उर्वरक उपयोग, प्राकृतिक खेती और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का आह्वान किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने की, जबकि हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण, पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्य पालन मंत्री श्याम सिंह राणा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान, कृषि वैज्ञानिक, जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी शामिल हुए।

किसान समृद्ध होंगे तभी बनेगा विकसित भारत

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर और विकसित भारत का संकल्प तभी पूरा होगा, जब देश का किसान समृद्ध और सशक्त होगा। उन्होंने किसान हितैषी योजनाओं के लिए हरियाणा सरकार की सराहना करते हुए कहा कि राज्य 24 फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) दे रहा है, भावांतर भरपाई योजना लागू कर चुका है तथा बागवानी, सब्जियों और फलों पर भी मूल्य अंतर की भरपाई कर किसानों को उनकी मेहनत का पूरा मूल्य दिला रहा है।

उन्होंने ‘मेरी फसल, मेरा ब्यौरा’ और ‘मेरा पानी, मेरी विरासत’ जैसी योजनाओं को कृषि प्रबंधन और जल संरक्षण के उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि अन्य राज्यों को भी इनसे सीख लेनी चाहिए।

किसानों ने भारत को बनाया खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एक समय भारत को अपनी खाद्यान्न जरूरतों के लिए विदेशों से गेहूं आयात करना पड़ता था, लेकिन आज किसानों की मेहनत से देश खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बन चुका है। उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश है और इस उपलब्धि में हरियाणा के किसानों का विशेष योगदान रहा है।

उन्होंने हरियाणा को कृषि के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा और खेलों में भी अग्रणी राज्य बताते हुए कहा कि यहां के किसानों और युवाओं की मेहनत, अनुशासन और देशभक्ति पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत है।

अधिक रासायनिक उर्वरक मिट्टी को बना रहे हैं बीमार

चौहान ने कृषि भूमि की बिगड़ती सेहत पर चिंता जताते हुए कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक एवं असंतुलित उपयोग से धरती मां बीमार हो रही है। उन्होंने किसानों से भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि मिट्टी मानो स्वयं पुकार रही है कि उस पर जरूरत से ज्यादा उर्वरकों का बोझ न डाला जाए।

उन्होंने कहा कि किसानों को केवल मृदा स्वास्थ्य परीक्षण (Soil Testing) के आधार पर ही उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए। जिस प्रकार डॉक्टर की गलत या अधिक दवा मरीज के लिए नुकसानदायक होती है, उसी प्रकार आवश्यकता से अधिक यूरिया और डीएपी (DAP) का उपयोग मिट्टी की उर्वरता को नष्ट करता है, अम्लीयता बढ़ाता है, पोषक तत्वों का संतुलन बिगाड़ता है तथा ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को बढ़ावा देता है। इसका असर फसलों, खाद्य पदार्थों और अंततः मानव स्वास्थ्य पर पड़ता है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यही स्थिति जारी रही तो भविष्य में भूमि की उत्पादन क्षमता समाप्त हो सकती है, जिससे खाद्य सुरक्षा पर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।

मोबाइल ऐप से मिलेगी मिट्टी की पूरी जानकारी

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकार ऐसी तकनीक विकसित कर रही है, जिससे किसानों को सॉइल हेल्थ कार्ड की पूरी जानकारी मोबाइल ऐप पर उपलब्ध होगी। किसान खेत में खड़े-खड़े ही अपनी मिट्टी में पोषक तत्वों की स्थिति, उनकी कमी तथा आवश्यक उर्वरकों की सही मात्रा की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इससे खेती की लागत घटेगी, उत्पादकता बढ़ेगी और वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा मिलेगा।

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प्राकृतिक खेती अपनाने का किया आह्वान

चौहान ने कहा कि सही तरीके से अपनाई गई प्राकृतिक खेती से उत्पादन में कमी नहीं आती। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे शुरुआत में अपनी थोड़ी-सी भूमि पर प्राकृतिक खेती अपनाकर उसके परिणाम स्वयं देखें और बाद में उसका विस्तार करें।

उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी के लाभकारी सूक्ष्मजीव और केंचुए तेजी से समाप्त हो रहे हैं। इसलिए जैविक संतुलन और मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने के लिए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है।

जल संरक्षण और फसल विविधीकरण पर जोर

जलवायु परिवर्तन और संभावित एल-नीनो प्रभाव का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कम वर्षा की संभावना को देखते हुए केंद्र और हरियाणा सरकार कम पानी में तैयार होने वाली फसलों को बढ़ावा दे रही हैं।

उन्होंने धान की खेती छोड़कर दलहन की खेती अपनाने वाले किसानों को प्रति एकड़ 8,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि देने के हरियाणा सरकार के निर्णय की सराहना की। उन्होंने कहा कि इससे भूजल संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता, फसल विविधीकरण और किसानों की आय में वृद्धि होगी।

‘खेत बचाओ अभियान’ अब बनेगा राष्ट्रीय मिशन

शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की कि ‘खेत बचाओ अभियान’ अब केवल एक अभियान नहीं रहेगा, बल्कि इसे राष्ट्रीय स्तर का दीर्घकालिक मिशन बनाया जाएगा।

उन्होंने कहा, "आज समापन नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। अभियान समाप्त हो सकता है, लेकिन मिशन आज से शुरू हो रहा है।"

उन्होंने घोषणा की कि केंद्रीय कृषि मंत्री के रूप में वे प्रत्येक सप्ताह कम से कम एक दिन देश के विभिन्न राज्यों में ‘खेत बचाओ अभियान’ से जुड़े कार्यक्रमों में स्वयं भाग लेंगे।

किसानों को दिलाई शपथ

कार्यक्रम के अंत में केंद्रीय मंत्री ने किसानों, महिलाओं और युवाओं को ‘खेत बचाओ, धरती बचाओ’ अभियान से जुड़ने, संतुलित उर्वरक उपयोग, स्वस्थ मिट्टी प्रबंधन और पर्यावरण अनुकूल खेती अपनाने की सामूहिक शपथ दिलाई।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को सरकार और किसानों की साझेदारी से ही पूरा किया जा सकता है। केंद्र सरकार हरियाणा जैसे प्रगतिशील राज्यों के साथ मिलकर कृषि विकास की राष्ट्रीय कार्ययोजना तैयार करेगी, ताकि वैज्ञानिक खेती, जल संरक्षण, तकनीकी नवाचार और किसान हितैषी नीतियों के माध्यम से समृद्ध किसान, मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था और विकसित भारत का निर्माण सुनिश्चित किया जा सके।

शिवराज सिंह चौहान ने यूपी की कृषि और ग्रामीण विकास योजनाओं की समीक्षा की, किसानों और गरीब परिवारों को मिली बड़ी सौगात

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लखनऊ- केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को लखनऊ स्थित योजना भवन में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में राज्य की कृषि और ग्रामीण विकास की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई।

इस दौरान शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दो महत्वपूर्ण स्वीकृति पत्र सौंपे। पहला, रबी विपणन सत्र 2026-27 के तहत गेहूं, चना और मसूर की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद की अवधि 24 जून से बढ़ाकर 8 जुलाई 2026 तक करने का, और दूसरा प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के नए चरण के तहत उत्तर प्रदेश के लिए 6,18,482 पक्के मकानों की मंजूरी का।

उत्तर प्रदेश कृषि क्षेत्र का अग्रणी राज्य

बैठक को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे महत्वपूर्ण कृषि राज्य है और अकेले लगभग 38 प्रतिशत गेहूं उत्पादन करता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और किसानों की आय बढ़ाने में उत्तर प्रदेश की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए राज्य के लिए वैज्ञानिक और दीर्घकालिक कृषि रोडमैप तैयार करना समय की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, बढ़ता तापमान और भूजल स्तर में गिरावट कृषि क्षेत्र के सामने गंभीर चुनौतियां हैं। प्रस्तावित कृषि रोडमैप में फसल चक्र, सिंचाई, जल संरक्षण, उन्नत बीज, तकनीक और विपणन रणनीतियों को शामिल किया जाएगा।

किसानों को राहत: MSP खरीद अवधि बढ़ाई गई

किसानों के हित में केंद्र सरकार ने गेहूं, चना और मसूर की MSP खरीद अवधि 8 जुलाई 2026 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। यह फैसला मौसम संबंधी बाधाओं, मंडियों में भीड़ और अन्य व्यावहारिक समस्याओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है ताकि कोई भी किसान अपनी उपज MSP से कम कीमत पर बेचने को मजबूर न हो।

एल-नीनो के खतरे को लेकर तैयार होगी विशेष रणनीति

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस वर्ष एल-नीनो के संकेत दिखाई दे रहे हैं और वर्षा सामान्य से कम रहने की आशंका है। ऐसे में जिला स्तर पर आकस्मिक कृषि योजनाएं तैयार की जाएंगी। कम पानी में होने वाली और कम अवधि वाली फसलों को बढ़ावा देने के साथ किसानों को समय पर सलाह, बीज और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

पीएम आवास योजना-ग्रामीण के तहत 6.18 लाख मकानों को मंजूरी

ग्रामीण आवास क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश के लिए PMAY-G के नए चरण के तहत 6,18,482 पक्के मकानों को मंजूरी दी है। यह योजना 2024-25 से 2028-29 तक देशभर में अतिरिक्त दो करोड़ पक्के मकान बनाने के लक्ष्य का हिस्सा है।

शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि राज्य में पात्र ग्रामीण परिवारों का सर्वेक्षण पूरा हो चुका है और अब चिन्हित गरीब परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर आवास उपलब्ध कराया जाएगा।

किसानों और गांवों के विकास का साझा संकल्प

बैठक में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही सहित केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार का साझा लक्ष्य किसानों को मजबूत बनाना, गांवों को समृद्ध करना और उत्तर प्रदेश को कृषि एवं ग्रामीण विकास का राष्ट्रीय मॉडल बनाना है। उन्होंने विश्वास जताया कि वैज्ञानिक कृषि रोडमैप और आवास कार्यक्रम राज्य के किसानों, गांवों और गरीब परिवारों के जीवन में व्यापक और स्थायी परिवर्तन लाएंगे।


कमजोर मानसून और एल नीनो की आशंका के बीच केंद्र सरकार अलर्ट, 315 जिलों की पहचान

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नई दिल्ली- देश में इस वर्ष एल नीनो और कमजोर मानसून की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन की तैयारियां तेज कर दी हैं। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने राज्यों के कृषि मंत्रियों, जिला कलेक्टरों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), ICAR-CRIDA और भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर स्थिति की समीक्षा की।


बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून में काफी देरी हुई है और अब तक सामान्य से लगभग 43 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार जुलाई की शुरुआत तक भी वर्षा कमजोर रहने की संभावना है, जिससे खरीफ फसलों पर असर पड़ सकता है।

315 जिले चिन्हित, 111 सबसे अधिक संवेदनशील

कृषि मंत्रालय और ICAR द्वारा किए गए वैज्ञानिक आकलन के आधार पर देश के 315 जिलों को कमजोर मानसून से प्रभावित होने की आशंका वाले जिलों के रूप में चिन्हित किया गया है।

  • 111 जिले उच्च प्राथमिकता श्रेणी में

  • 76 जिले मध्यम प्राथमिकता श्रेणी में

  • 128 जिले निम्न प्राथमिकता श्रेणी में

ये जिले मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में स्थित हैं।

हर जिले के लिए तैयार की गई विशेष योजना

सरकार ने सभी जिलों के लिए जिला कृषि आकस्मिकता योजना (District Agriculture Contingency Plan) तैयार की है। इसमें कम वर्षा की स्थिति में वैकल्पिक फसलें, जल संरक्षण, फसल विविधीकरण और किसानों की आय बढ़ाने के उपाय शामिल हैं।

शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ये योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि जरूरत पड़ने पर तुरंत लागू की जाएं।


जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता

संभावित सूखे की स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।

इसके तहत:

  • तालाबों और जलाशयों की मरम्मत

  • चेक डैम और स्टॉप डैम निर्माण

  • वर्षा जल संचयन

  • मनरेगा के माध्यम से जल संरक्षण कार्य

को तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

किसानों को वैकल्पिक फसलें अपनाने की सलाह

सरकार ने किसानों को कम पानी वाली और कम अवधि में तैयार होने वाली फसलों को अपनाने की सलाह दी है। विशेष रूप से:

  • दालें

  • श्री अन्न (मिलेट्स)

  • तिलहन फसलें

को बढ़ावा दिया जाएगा।

साथ ही अंतरफसल (Intercropping) और मिश्रित खेती को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि किसी एक फसल के नुकसान की स्थिति में किसानों की आय प्रभावित न हो।

बीज और उर्वरकों का पर्याप्त भंडार

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त मात्रा में बीज और उर्वरक उपलब्ध हैं।

  • अतिरिक्त बीज भंडार सुरक्षित रखा गया है।

  • पुनः बुवाई की स्थिति के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।

  • यूरिया, डीएपी, एनपीके और अन्य उर्वरकों की उपलब्धता पर्याप्त है।

किसानों को मिलेगा वैज्ञानिक मार्गदर्शन

देश के 731 कृषि विज्ञान केंद्र (KVKs) किसानों को मौसम और फसलों से संबंधित वैज्ञानिक सलाह देंगे।

इसके लिए:

  • एसएमएस

  • व्हाट्सएप संदेश

  • कॉल सेंटर

  • रेडियो और टीवी

  • सोशल मीडिया

का उपयोग किया जाएगा ताकि किसानों तक समय पर सही जानकारी पहुंच सके।

पशुपालकों के लिए भी तैयारी

कमजोर मानसून के कारण चारे की कमी की आशंका को देखते हुए सरकार ने अग्रिम योजना तैयार की है। जरूरत पड़ने पर चारा अधिशेष क्षेत्रों से प्रभावित इलाकों तक पहुंचाया जाएगा।

किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा कवच

सरकार ने किसानों को आर्थिक रूप से सुरक्षित रखने के लिए:

  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)

  • किसान क्रेडिट कार्ड (KCC)

  • प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN)

का अधिकतम लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।

किसानों से अपील: घबराएं नहीं

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से अपील करते हुए कहा,

"घबराने की जरूरत नहीं है। केंद्र और राज्य सरकारें पूरी तरह तैयार हैं। वैज्ञानिक संस्थानों, प्रशासन और किसानों के सहयोग से हर चुनौती का सामना किया जाएगा।"


केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खरीफ 2026 की तैयारियों की समीक्षा की, किसानों के हितों को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता

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नई दिल्ली- केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज कृषि भवन, नई दिल्ली में उच्च स्तरीय साप्ताहिक कृषि समीक्षा बैठक की। बैठक में पूरे देश में खरीफ 2026 सीजन की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई।

बैठक में संभावित एल नीनो परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विशेष चर्चा की गई। मंत्री ने विशेष रूप से कपास उत्पादन बढ़ाने, दलहन में आत्मनिर्भरता और कम वर्षा वाले जिलों के लिए अग्रिम आपदा प्रबंधन योजना पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता किसानों के हितों की सुरक्षा है।

कम वर्षा वाले जिलों के लिए विशेष तैयारी के निर्देश

चौहान ने निर्देश दिया कि जिन जिलों में कम या असमान वर्षा की संभावना है, उन्हें पहले से चिन्हित किया जाए और राज्य सरकारों के साथ मिलकर फसल-वार आकस्मिक योजनाएं तैयार की जाएं। उन्होंने जल संरक्षण, नमी प्रबंधन, अंतर-फसल (इंटरक्रॉपिंग) और वैकल्पिक फसल पैटर्न पर विशेष जोर दिया।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक जोखिम-प्रवण जिले के लिए अलग और व्यावहारिक रणनीति बनाई जाए, ताकि किसानों को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।

किसानों तक सही जानकारी पहुंचाने पर जोर

कृषि मंत्री ने कहा कि 9–10 संभावित प्रभावित राज्यों में जिला प्रशासन, कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) और अन्य संस्थानों के साथ समन्वय बैठकें की जाएं। उन्होंने निर्देश दिया कि किसानों को वैज्ञानिक और भरोसेमंद जानकारी दी जाए, ताकि वे सुरक्षित फसल विकल्पों का चयन कर सकें।

कपास उत्पादन बढ़ाने पर विशेष फोकस

बैठक में कपास उत्पादन बढ़ाने को लेकर भी विस्तृत चर्चा हुई। चौहान ने वैज्ञानिक तकनीक, उपयुक्त किस्मों का चयन, मल्चिंग, नमी संरक्षण और अंतर-फसल प्रणाली को बड़े स्तर पर अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को मिशन मोड में कार्य करने के निर्देश दिए।

दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन

दलहन में आत्मनिर्भरता को लेकर मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य अरहर, उड़द और मूंग जैसी फसलों में देश को आत्मनिर्भर बनाना है। इसके लिए बेहतर बीज उपलब्धता, क्षेत्र विस्तार और तकनीकी मार्गदर्शन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उर्वरक और जल भंडारण की स्थिति की समीक्षा

बैठक में उर्वरक उपलब्धता, मंडी भाव, जलाशयों की स्थिति और राज्यों में स्टॉक की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने कहा कि देश में उर्वरक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है और आपूर्ति प्रणाली को और मजबूत किया जा रहा है।

कृषि संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर

उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), कृषि विश्वविद्यालयों, KVKs और राज्य कृषि विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि तकनीकी जानकारी तभी उपयोगी है जब वह समय पर खेतों तक पहुंचे।

कृषि मंत्री ने कहा कि निरंतर संवाद, समीक्षा और फीडबैक से ही खरीफ 2026 को सुरक्षित और सफल बनाया जा सकता है।

विदिशा में बनेगा देश का मॉडल किसान स्कूल, शिवराज सिंह चौहान ने रखी आधारशिला

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विदिशा- केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को विदिशा जिले के Berkhedi Jetu में किसानों के लिए एक अनूठे “किसान स्कूल” की आधारशिला रखी। इस अवसर पर उन्होंने खेती को लाभकारी बनाने के लिए वैज्ञानिक कृषि, आधुनिक तकनीक और एकीकृत खेती को बढ़ावा देने का संकल्प दोहराया।

कार्यक्रम की खास बात यह रही कि इसे पारंपरिक राजनीतिक सभा के बजाय किसानों की प्रशिक्षण कक्षा के रूप में आयोजित किया गया। मंत्री ने कहा कि यहां आए सभी किसान विद्यार्थी हैं और उन्हें सीधे खेतों में आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रदर्शन कर प्रशिक्षण दिया जाएगा।

49 एकड़ में बनेगा मॉडल कृषि विज्ञान केंद्र

बेरखेड़ी जेतू में बनने वाला कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) 49 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। इसे देश का मॉडल केवीके बनाया जाएगा, जहां आधुनिक खेती के प्रदर्शन प्लॉट तैयार किए जाएंगे। भवन निर्माण पूरा होने का इंतजार किए बिना इसी खरीफ सीजन से खेतों में प्रशिक्षण और प्रदर्शन कार्य शुरू कर दिए जाएंगे।

ढाई एकड़ में भी संभव सम्मानजनक आय

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भूमि के छोटे होते आकार के बावजूद वैज्ञानिक और एकीकृत खेती अपनाकर एक हेक्टेयर (करीब ढाई एकड़) भूमि से भी परिवार की आजीविका सम्मानजनक रूप से चलाई जा सकती है। इसके लिए विदिशा, रायसेन, सीहोर और देवास जिलों के लिए विशेष कृषि रोडमैप तैयार किया गया है।

‘खेत बचाओ अभियान’ को मिलेगा विस्तार

केंद्रीय मंत्री ने ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत किसानों से मृदा परीक्षण कराने और संतुलित उर्वरकों के उपयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का अंधाधुंध उपयोग मिट्टी की उर्वरता को नुकसान पहुंचा रहा है। अभियान के तहत मृदा स्वास्थ्य कार्ड, प्राकृतिक खेती और जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाएगा।

किसानों को मिलेगी एग्री क्लिनिक और मोबाइल सलाह

नए कृषि विज्ञान केंद्र में ‘एग्री क्लिनिक’ स्थापित किया जाएगा, जहां किसान पौधों, पत्तियों और मिट्टी के नमूने लाकर रोगों की पहचान और उपचार संबंधी सलाह प्राप्त कर सकेंगे। साथ ही हेल्पलाइन और मोबाइल ऐप के माध्यम से भी किसानों को तत्काल वैज्ञानिक सलाह उपलब्ध कराई जाएगी।

नकली बीज और खाद पर सख्ती

केंद्रीय मंत्री ने नकली बीज, उर्वरक और कीटनाशकों की बिक्री पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी। उन्होंने किसानों से खरीद के समय बिल लेने और क्यूआर कोड के जरिए उत्पादों की जांच करने की अपील की।

छोटे किसानों के लिए मशीन बैंक

सरकार छोटे और सीमांत किसानों के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर और मशीन बैंक स्थापित करेगी। यहां लेजर लेवलर, डीएसआर मशीन, ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक मशीनें किराये पर उपलब्ध कराई जाएंगी, ताकि किसान कम लागत में आधुनिक तकनीक का लाभ उठा सकें।

कृषि आधारित स्टार्टअप और प्रोसेसिंग पर जोर

कार्यक्रम में कृषि उत्पादों की वैल्यू एडिशन और फूड प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने की घोषणा भी की गई। युवाओं को मशरूम उत्पादन, डेयरी, मधुमक्खी पालन और पोल्ट्री जैसे कृषि आधारित उद्यमों के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा।

दाल और तिलहन उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य

शिवराज सिंह चौहान ने दाल एवं तिलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाने की बात कही। उन्होंने आश्वासन दिया कि किसानों द्वारा उत्पादित दालों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर की जाएगी और अधिक उत्पादन वाले क्षेत्रों में दाल मिल स्थापित करने के लिए 25 लाख रुपये तक की सहायता दी जाएगी।

कार्यक्रम के अंत में किसानों ने मिट्टी की सेहत सुधारने, संतुलित उर्वरकों के उपयोग और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह पहल केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और खेती को टिकाऊ बनाने का एक जनआंदोलन है।

खेत बचाओ अभियान को जन आंदोलन बनाने का आह्वान, 1 जून से शुरू होगा माहभर का अभियान

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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने “खेत बचाओ अभियान” को केवल जागरूकता कार्यक्रम नहीं, बल्कि खेत, किसान और गांवों को जोड़ने वाला व्यापक राष्ट्रीय अभियान बनाने का संदेश दिया है। आज दिल्ली में अभियान की तैयारियों को लेकर आयोजित उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कहा कि अभियान का मुख्य फोकस उर्वरकों के संतुलित एवं विवेकपूर्ण उपयोग, मौसम संबंधी चुनौतियों के अनुसार किसानों को समय पर सलाह, पंचायत स्तर पर सक्रिय भागीदारी तथा सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे गांवों तक पहुंचाने पर रहेगा।

1 जून से शुरू होने वाले इस एक माह के अभियान को प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाने के लिए शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को खेतों की सुरक्षा, लागत में संतुलन तथा किसानों को सही समय पर उचित मार्गदर्शन देने पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह अभियान ऊपर से नीचे (Top-Down) मॉडल पर नहीं चलेगा, बल्कि पंचायत, राज्य और केंद्र की साझेदारी से संचालित होगा।

बैठक में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग को कम करना अभियान का प्रमुख उद्देश्य होगा। किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों और अन्य कृषि आदानों के संतुलित उपयोग के लिए जागरूक किया जाएगा। साथ ही, हरी खाद, जैविक एवं जैव-उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया जाएगा। समेकित पोषक तत्व प्रबंधन (INM) के जीवंत प्रदर्शन भी आयोजित किए जाएंगे।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आने वाले दिनों में मौसम संबंधी चुनौतियों को देखते हुए किसानों को व्यावहारिक सलाह दी जाएगी। उन्हें क्या करें और क्या न करें, उपयुक्त फसल चयन, फसल विविधीकरण तथा जल संकट या जोखिम की स्थिति में खेती के बारे में रचनात्मक सुझाव दिए जाएंगे। अभियान का उद्देश्य केवल संदेश देना नहीं, बल्कि खेत स्तर पर परिस्थितियों के अनुरूप सही सलाह पहुंचाना होगा।

उन्होंने पंचायत स्तर पर अभियान की मजबूत नींव रखने पर जोर देते हुए निर्देश दिया कि कृषि यंत्रीकरण उपकरणों के वितरण तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभों को भी इस अभियान के अंतर्गत पंचायत स्तर तक पहुंचाया जाए।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह अभियान केवल विभागीय दायरे तक सीमित नहीं रहेगा। राज्यों के मुख्यमंत्रियों से सहयोग का आग्रह किया जाएगा तथा मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि यह प्रशासनिक कार्यक्रम से आगे बढ़कर जनभागीदारी का सशक्त मॉडल बन सके।

बैठक में बताया गया कि कृषि विज्ञान केंद्र (KVKs) को अभियान में भाग लेने वाली सभी संस्थाओं के प्रमुख समन्वयक की भूमिका सौंपी गई है। अभियान के लिए 1600 से अधिक टीमों का गठन किया गया है। उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग वाले 100 जिलों के लिए 500 विशेष टीमें बनाई गई हैं, जिनमें कृषि विज्ञान केंद्रों, Indian Council of Agricultural Research के संस्थानों, एआईसीआरपी केंद्रों तथा कृषि विभाग के अधिकारी शामिल होंगे। इसके अलावा आईसीएआर संस्थानों और कृषि विज्ञान केंद्रों की 1150 से अधिक बहु-विषयक टीमें भी समानांतर रूप से कार्य करेंगी।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अभियान केवल उर्वरक प्रबंधन तक सीमित नहीं रहेगा। इसके माध्यम से विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ भी खेत तक पहुंचाया जाएगा। किसान क्रेडिट कार्ड, PM-KISAN, दलहन-तिलहन मिशन, ऑयल पाम मिशन, कपास मिशन, संतुलित पोषण, मृदा स्वास्थ्य, जल संरक्षण तथा क्षेत्र-विशिष्ट कृषि सलाह जैसी गतिविधियों को एकीकृत कर अभियान को बहुउद्देशीय और प्रभावी बनाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि अभियान की सफलता की कुंजी यह है कि इसका संदेश व्यावहारिक हो, जमीनी स्तर पर दिखाई दे और स्थानीय संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो। अभियान के मूल बिंदु हैं—उर्वरकों का संतुलित एवं कम उपयोग, मौसम के अनुसार खेती की सलाह, पंचायत स्तर पर सक्रियता, कृषि यंत्रों एवं योजनाओं का लाभ तथा जनप्रतिनिधियों की सहभागिता। अभियान की स्पष्ट दिशा है—खेत बचाना, लागत नियंत्रित करना, मिट्टी की गुणवत्ता सुधारना, किसानों को जागरूक बनाना और गांव स्तर पर कृषि प्रबंधन की नई संस्कृति विकसित करना।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में पुसा में खरीफ अभियान 2026 सम्मेलन, कृषि विकास को गति देने पर जोर

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पुसा,नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन – खरीफ अभियान 2026 के दूसरे दिन, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्य कृषि मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों, वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों के साथ भारतीय कृषि के समग्र विकास पर व्यापक चर्चा की। उन्होंने कहा कि कृषि विकास को अब समयबद्ध, परिणामोन्मुख और किसान-केंद्रित कार्यों के माध्यम से नीति, नवाचार और प्रतिबद्धता के साथ तेज करने की आवश्यकता है। राज्यों के कृषि मंत्रियों की सक्रिय भागीदारी ने इस सम्मेलन को कृषि उन्नति के लिए एक सशक्त ‘टीम इंडिया’ मंच में बदल दिया।

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार द्वारा आयोजित इस सम्मेलन के दूसरे दिन देशभर से आए कृषि मंत्रियों, वरिष्ठ कृषि अधिकारियों, वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों की उल्लेखनीय भागीदारी रही। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन में केंद्रीय राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर और भगीरथ चौधरी भी उपस्थित थे। इसके अलावा ओडिशा के उपमुख्यमंत्री एवं कृषि मंत्री कनक वर्धन सिंह देव, उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा, राजस्थान के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा, महाराष्ट्र के मंत्री जयप्रकाश जयकुमार रावल, मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना, छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री रामविचार नेताम, गुजरात के कृषि मंत्री जीतूभाई सवजीभाई वाघानी, तमिलनाडु के कृषि मंत्री आर. विनोद, हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा, अरुणाचल प्रदेश के कृषि मंत्री गेब्रियल डी. वांगसू, मेघालय की कृषि मंत्री अम्पारीन लिंगदोह, मिजोरम के कृषि मंत्री पी. सी. वनलालरुआता, त्रिपुरा के कृषि मंत्री रतन लाल नाथ, सिक्किम के कृषि मंत्री पूरण कुमार गुरूंग, पश्चिम बंगाल के मंत्री अशोक कीर्तनिया तथा असम के पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास मंत्री अतुल बोरा सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे। कृषि सचिव अतिश चंद्र, आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट तथा विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी इस विस्तृत विचार-विमर्श में शामिल हुए।

जनता को संबोधित करते हुए चौहान ने इस सम्मेलन को ‘भारत की कृषि टीम’ की ऐतिहासिक बैठक बताया। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन ‘मिनी इंडिया’ की भावना को दर्शाता है, जहां सभी एक साझा संकल्प के साथ राष्ट्रीय हित, किसान कल्याण और कृषि विकास के लिए एकजुट हैं। नेतृत्व के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि जब मंत्री स्वयं योजनाओं का नेतृत्व करते हैं, तो अधिक गति, गंभीरता और ठोस परिणाम दिखाई देते हैं।

चौहान ने कहा कि भारत ने खाद्यान्न उत्पादन में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। तीसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन लगभग 376.563 मिलियन टन तक पहुंच गया है, जो अब तक का सर्वाधिक है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, किसानों की मेहनत, वैज्ञानिक अनुसंधान और राज्यों के सक्रिय सहयोग को दिया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत चावल उत्पादन में विश्व में अग्रणी बन गया है, जबकि गेहूं, मक्का, दलहन और तिलहन उत्पादन में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।

उन्होंने कहा कि इन उपलब्धियों के बावजूद गति को धीमा नहीं किया जा सकता। भारत को खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को अधिक लाभकारी बनाने और पोषण सुरक्षा को भी समान महत्व देना होगा। उन्होंने कहा कि कृषि केवल उत्पादन का विषय नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र की जीवनरेखा है, इसलिए सभी संबंधितों को मिशन मोड में काम करना होगा।

सम्मेलन के दौरान केंद्रीय मंत्री ने राज्यों से दलहन मिशन, तिलहन मिशन, कपास मिशन और अन्य प्रमुख कृषि अभियानों की व्यक्तिगत समीक्षा करने का आग्रह किया। उन्होंने वैज्ञानिकों से किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप तेज, व्यावहारिक और मांग-आधारित अनुसंधान करने को कहा। विशेष रूप से तूर, सोयाबीन और तिलहन फसलों के लिए अल्प अवधि और उपयुक्त किस्मों के विकास पर जोर दिया गया।

बीज उपलब्धता के मुद्दे पर चौहान ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण बीज कृषि उत्पादकता की पहली और सबसे आवश्यक शर्त है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि देश में पर्याप्त बीज उपलब्ध होने के बावजूद किसानों को समय पर बीज नहीं मिल पाते। उन्होंने सभी राज्यों को समय पर बीज उठाने, वितरण प्रणाली मजबूत करने और खरीफ मौसम में किसानों को समय पर बीज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति में खराब गुणवत्ता वाले बीज बाजार में नहीं आने चाहिए और इसके खिलाफ सख्त निगरानी एवं कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि आपात स्थिति के लिए राष्ट्रीय स्तर पर बीज भंडार प्रणाली स्थापित की गई है।

उन्होंने उर्वरक, मृदा स्वास्थ्य कार्ड और फार्मर आईडी पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड केवल दस्तावेज न रहकर खेत स्तर पर उपयोग में लाए जाएं। उन्होंने ‘खेत बचाओ अभियान’ के माध्यम से संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने की अपील की।

फार्मर आईडी को पारदर्शी और कुशल प्रणाली की आधारशिला बताते हुए उन्होंने कहा कि उर्वरक वितरण में पारदर्शिता, कालाबाजारी की रोकथाम और वास्तविक किसानों तक आपूर्ति सुनिश्चित की जानी चाहिए।

कृषि ऋण और किसान क्रेडिट कार्ड पर उन्होंने कहा कि समय पर पूंजी उपलब्धता लाभकारी खेती के लिए आवश्यक है। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में कृषि ऋण की पहुंच बढ़ाने के लिए बैंकों के साथ जल्द चर्चा की जाएगी।

कृषि यंत्रीकरण पर उन्होंने कहा कि केवल मशीनों का वितरण पर्याप्त नहीं है, बल्कि सही किसान तक सही मशीन पहुंचनी चाहिए। कस्टम हायरिंग सेंटर की समीक्षा और पारदर्शी चयन प्रणाली की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

बागवानी क्षेत्र में उन्होंने कहा कि भारत में फल और सब्जी उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं, और अब लक्ष्य केवल उत्पादन नहीं बल्कि निर्यात गुणवत्ता का उत्पादन होना चाहिए।

उन्होंने नकली बीज, घटिया कीटनाशक और खराब कृषि इनपुट पर कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि यह केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि राष्ट्रीय नुकसान है।

फसल बीमा योजना पर उन्होंने समय पर राहत, बैंक, बीमा कंपनियों और राज्यों की जवाबदेही तय करने की आवश्यकता बताई।

दलहन और तिलहन की खरीद पर उन्होंने कहा कि किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित किए बिना आत्मनिर्भरता संभव नहीं है।

एफपीओ, कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विश्वविद्यालयों की भूमिका पर उन्होंने कहा कि ये संस्थान नवाचार और अनुसंधान को सीधे किसानों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

अंत में उन्होंने कहा कि प्रत्येक राज्य को अपनी कृषि कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए और केंद्र सरकार हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि नियम किसानों की सुविधा के लिए हैं, न कि किसान नियमों के लिए।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, राज्यों, वैज्ञानिकों और किसानों के सहयोग से भारत कृषि क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा और वैश्विक उदाहरण बनेगा।

खरीफ सम्मेलन-2026 में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रखी कृषि विकास की रूपरेखा

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नई दिल्ली- केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज नई दिल्ली स्थित पूसा परिसर में आयोजित खरीफ सम्मेलन-2026 को संबोधित करते हुए कहा कि देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, किसानों की आय बढ़ाना और नागरिकों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार लगातार कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कार्य कर रही है।

दो दिवसीय राष्ट्रीय खरीफ अभियान-2026 सम्मेलन का आयोजन 28 और 29 मई को NASC कॉम्प्लेक्स, पूसा, नई दिल्ली में किया जा रहा है। सम्मेलन में देशभर के कृषि मंत्री, वैज्ञानिक, वरिष्ठ अधिकारी, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।

‘टीम एग्रीकल्चर’ का साझा मंच

चौहान ने कहा कि खरीफ सम्मेलन ने पूरे ‘टीम एग्रीकल्चर’ को एक मंच पर लाने का कार्य किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि टीम एग्रीकल्चर में केवल केंद्र सरकार ही नहीं, बल्कि राज्य सरकारें, वैज्ञानिक, किसान उत्पादक संगठन (FPO), और कृषि क्षेत्र से जुड़े सभी हितधारक शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि कृषि राज्य का विषय है और राज्यों की सक्रिय भागीदारी से बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं, जबकि केंद्र सरकार सहयोगी और साझेदार की भूमिका निभाती है।

क्षेत्रीय कृषि सम्मेलनों पर जोर

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश की भौगोलिक और जलवायु विविधता को देखते हुए सरकार ने राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन के साथ-साथ क्षेत्रीय सम्मेलनों की शुरुआत की है। जयपुर, लखनऊ और भुवनेश्वर में क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किए जा चुके हैं, जबकि उत्तर-पूर्व और दक्षिण भारत में भी जल्द सम्मेलन आयोजित होंगे।

उन्होंने कहा कि राज्यों की समस्याओं और आवश्यकताओं पर छोटे समूहों में अधिक प्रभावी और विस्तृत चर्चा संभव हो पाती है। भविष्य में आठ कृषि-जलवायु क्षेत्रों के आधार पर क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित करने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है।

खाद्यान्न उत्पादन में रिकॉर्ड उपलब्धि

चौहान ने कहा कि किसानों की मेहनत, वैज्ञानिक अनुसंधान और केंद्र व राज्यों के सहयोग से भारत ने वर्ष 2025-26 में खाद्यान्न उत्पादन के सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।

उन्होंने बताया कि:

  • कुल खाद्यान्न उत्पादन 376.563 मिलियन टन तक पहुंच गया है।

  • चावल उत्पादन 154.024 मिलियन टन रहा और भारत ने चीन को पीछे छोड़ते हुए विश्व में पहला स्थान हासिल किया।

  • गेहूं उत्पादन 120.657 मिलियन टन और मक्का उत्पादन 55.092 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।

तेलहन उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। कुल तेलहन उत्पादन 43.059 मिलियन टन अनुमानित है। मूंगफली उत्पादन 13.074 मिलियन टन और सरसों उत्पादन 13.768 मिलियन टन तक पहुंच गया है।

प्राकृतिक खेती और जलवायु परिवर्तन पर फोकस

कृषि मंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन कृषि क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। बढ़ते तापमान, अनियमित वर्षा और लंबे सूखे जैसी परिस्थितियों को देखते हुए टिकाऊ और सुरक्षित कृषि पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।

उन्होंने बताया कि सम्मेलन में प्राकृतिक खेती, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, संतुलित उर्वरक उपयोग, डिजिटल कृषि, किसान क्रेडिट कार्ड, कृषि अवसंरचना कोष और पीएम-आशा योजना जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

छोटे किसानों की आय बढ़ाने पर जोर

चौहान ने कहा कि भारत में अधिकांश किसानों के पास छोटी जोत है, इसलिए सीमित भूमि से अधिक आय सुनिश्चित करने के लिए एकीकृत खेती मॉडल को बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पर्याप्त कृषि ऋण, निवेश और आधुनिक तकनीकों की मदद से किसान बेहतर खेती कर सकेंगे।

उन्होंने बताया कि सम्मेलन में ‘खेत बचाओ अभियान’ पर भी व्यापक चर्चा होगी और केंद्र व राज्य मिलकर खरीफ सीजन के लिए संयुक्त कृषि रोडमैप तैयार करेंगे।

भारत में 2025–26 में अब तक का सर्वाधिक 376.56 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का अनुमान, कृषि मंत्रालय ने जारी किए तृतीय अग्रिम आंकड़े

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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज वर्ष 2025–26 के प्रमुख कृषि फसलों के उत्पादन के तृतीय अग्रिम अनुमान (Third Advance Estimates) जारी किए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार किसानों की समृद्धि और कृषि क्षेत्र के विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है, जिसका सकारात्मक परिणाम अब रिकॉर्ड कृषि उत्पादन के रूप में दिखाई दे रहा है।

इन अनुमानों के अनुसार देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन 376.563 मिलियन टन अनुमानित है, जो पिछले वर्ष के 357.732 मिलियन टन की तुलना में लगभग 18.8 मिलियन टन (5.3%) अधिक है। यह देश के इतिहास में अब तक का सबसे अधिक खाद्यान्न उत्पादन है। मंत्री ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए देश के किसानों को बधाई दी।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी तृतीय अग्रिम अनुमान भारत की कृषि प्रगति की मजबूत तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। फसलवार आंकड़ों के अनुसार चावल का उत्पादन रिकॉर्ड 154.024 मिलियन टन, गेहूं 120.657 मिलियन टन और मक्का 55.093 मिलियन टन अनुमानित है। श्री अन्न का उत्पादन 17.584 मिलियन टन, अरहर 3.592 मिलियन टन, चना 12.514 मिलियन टन तथा मसूर 1.762 मिलियन टन अनुमानित है।

इसी प्रकार कुल तिलहन उत्पादन 43.059 मिलियन टन अनुमानित है। मूंगफली का उत्पादन रिकॉर्ड 13.074 मिलियन टन, सोयाबीन 12.596 मिलियन टन तथा सरसों एवं राई 13.768 मिलियन टन (रिकॉर्ड) अनुमानित है। गन्ने का उत्पादन 500.063 मिलियन टन (रिकॉर्ड), कपास 29.024 मिलियन गांठें तथा जूट 9.176 मिलियन गांठें अनुमानित हैं।

मंत्री चौहान ने बताया कि विस्तृत आंकड़ों के अनुसार चावल उत्पादन पिछले वर्ष के 150.184 मिलियन टन की तुलना में बढ़कर 154.024 मिलियन टन हो गया है। गेहूं उत्पादन 117.945 मिलियन टन से बढ़कर 120.657 मिलियन टन अनुमानित है। मक्का उत्पादन 43.409 मिलियन टन से बढ़कर 55.093 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। श्री अन्न सहित मोटे अनाजों का कुल उत्पादन 74.472 मिलियन टन अनुमानित है।

दलहन फसलों में अरहर का उत्पादन लगभग पिछले वर्ष के समान 3.592 मिलियन टन अनुमानित है। चना उत्पादन 11.114 मिलियन टन से बढ़कर 12.514 मिलियन टन हो गया है। मसूर का उत्पादन 1.762 मिलियन टन अनुमानित है।

तिलहन में कुल उत्पादन 43.059 मिलियन टन अनुमानित है। मूंगफली उत्पादन 11.942 मिलियन टन से बढ़कर 13.074 मिलियन टन, सोयाबीन 12.596 मिलियन टन तथा सरसों एवं राई 12.667 मिलियन टन से बढ़कर 13.768 मिलियन टन अनुमानित है।

व्यावसायिक फसलों में गन्ना उत्पादन 454.611 मिलियन टन से बढ़कर 500.063 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। कपास उत्पादन 29.024 मिलियन गांठें (प्रत्येक 170 किलोग्राम) तथा जूट उत्पादन 9.176 मिलियन गांठें (प्रत्येक 180 किलोग्राम) अनुमानित है।

मंत्री ने कहा कि ये तृतीय अग्रिम अनुमान स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि देश में खाद्यान्न, प्रमुख अनाज, तिलहन और व्यावसायिक फसलों का उत्पादन मजबूत स्थिति में है और कई फसलों में रिकॉर्ड उत्पादन दर्ज किया गया है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और उसके संस्थानों द्वारा किए गए अनुसंधान ने उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसमें जलवायु-लचीली फसल किस्मों का विकास, वर्षा आधारित कृषि तकनीकें और किसानों तक वैज्ञानिक अनुसंधान का प्रसार शामिल है।

पिछले वर्ष आयोजित विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत वैज्ञानिकों ने सीधे किसानों से संपर्क कर कृषि पद्धतियों को मजबूत किया। किसानों को जलवायु-लचीली तकनीक, बेहतर उत्पादन विधियाँ और वैज्ञानिक सलाह प्रदान की गई।

वर्ष 2025–26 में ICAR ने विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों के लिए 339 फसल किस्में विकसित कीं, जिनमें अनाज, तिलहन, दलहन, व्यावसायिक फसलें और चारा फसलें शामिल हैं।

वर्ष 2024–25 में प्रजनक बीज उत्पादन 109,370.2 क्विंटल तथा गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन 433,114.7 क्विंटल रहा। मृदा एवं जल संसाधन प्रबंधन, जलवायु-स्मार्ट कृषि, डिजिटल मृदा विश्लेषण और सतत कृषि तकनीकों में नवाचारों ने भी उत्पादन वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

महाराष्ट्र में PMAY-G के तहत 5 लाख घरों के गृह प्रवेश, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दी ₹8,368 करोड़ की सहायता और कई विकास परियोजनाओं की सौगात

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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज महाराष्ट्र के सतारा स्थित सैनिक स्कूल मैदान में आयोजित “प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण (PMAY-G) लाभार्थी सम्मेलन एवं महा आवास अभियान राज्य स्तरीय पुरस्कार वितरण समारोह” में 5 लाख पूर्ण ग्रामीण आवासों के गृह प्रवेश समारोह का उद्घाटन किया। उन्होंने 5 लाभार्थियों को घर की चाबियाँ सौंपी तथा ग्रामीण विकास को नई गति देने वाले कई महत्वपूर्ण निर्णयों की घोषणा की। इस अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज मंत्री जयकुमार गोरे, पर्यटन, खनन एवं पूर्व सैनिक कल्याण मंत्री तथा सतारा के पालक मंत्री शंभूराज देसाई, लोक निर्माण मंत्री शिवेंद्रसिंहराजे भोसले, राहत एवं पुनर्वास मंत्री मकरंद जाधव (पाटिल), राज्य मंत्री (ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज) योगेश कदम तथा स्थानीय सांसद श्रीमंत छत्रपति उदयनराजे भोसले उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि देश में कोई भी गरीब कच्चे घर में न रहे और हर पात्र परिवार को सम्मानजनक पक्का आवास मिले। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र ने PMAY-G के क्रियान्वयन में उल्लेखनीय कार्य किया है और रिकॉर्ड समय में 5 लाख घर पूरे कर सुशासन, संवेदनशीलता और परिणाम-आधारित प्रशासन का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है।

 शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए महाराष्ट्र को ₹8,368.50 करोड़ की केंद्रीय सहायता जारी करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस राशि से राज्य में ग्रामीण गरीबों के लिए आवास निर्माण में तेजी आएगी और “आवास-विहीन ग्रामीण महाराष्ट्र” के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि जिन पात्र परिवारों का नाम सूची में नहीं आ सका है, उनके लिए सर्वे और सत्यापन के बाद आगे भी आवास उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने दोहराया कि सरकार का उद्देश्य केवल घर बनाना नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन स्तर को बिजली, पानी, स्वच्छता और सम्मानजनक जीवन के साथ समग्र रूप से सुधारना है।

केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-IV के तहत महाराष्ट्र के लिए ₹122.98 करोड़ की 35 सड़क परियोजनाओं को भी स्वीकृति प्रदान की। इन परियोजनाओं से 95.99 किलोमीटर सड़क निर्माण होगा, जिससे 35 ग्रामीण बस्तियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी और शिक्षा, स्वास्थ्य तथा बाजार जैसी सुविधाओं तक पहुंच आसान होगी।

“महा आवास अभियान” के अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य करने वाले जिलों और अधिकारियों को सम्मानित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जब राजनीतिक इच्छाशक्ति, प्रशासनिक दक्षता और जनकल्याण की भावना एक साथ आती है, तब विकास अभियान जनआंदोलन बन जाते हैं।

उन्होंने “विकसित भारत जी-रैम-जी योजना” का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पहल 1 जुलाई से शुरू होगी और गांवों के समग्र व योजनाबद्ध विकास की मजबूत नींव बनेगी। इसके तहत ग्राम पंचायतें स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार विकास योजना तैयार करेंगी, जिससे बुनियादी ढांचे, सार्वजनिक सुविधाओं और आजीविका के अवसरों में तेजी आएगी।

किसानों से जुड़े मुद्दों पर बोलते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री ने प्याज किसानों को बड़ी राहत दी। उन्होंने कहा कि बढ़ी हुई उत्पादन और निर्यात संबंधी परिस्थितियों के कारण बाजार कीमतों पर असर पड़ा है, इसलिए आज से ही NAFED ₹12.35 प्रति किलोग्राम की दर से प्याज की खरीद शुरू करेगा, जिससे किसानों को तुरंत सहायता मिल सके।

उन्होंने गन्ना किसानों की समस्याओं पर भी केंद्र और महाराष्ट्र सरकार के संयुक्त प्रयासों से समाधान का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसान उसकी आत्मा हैं।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय मंत्री चौहान के सहयोग से महाराष्ट्र को 30 लाख घरों की मंजूरी मिली है, जिनमें से 5 लाख घर रिकॉर्ड समय में पूरे किए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लक्ष्य रखती है कि महाराष्ट्र को आवास-विहीन राज्य बनाया जाए।

इस कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, अधिकारी, लाभार्थी और बड़ी संख्या में ग्रामीण नागरिक उपस्थित रहे।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की नई पुस्तक ‘अपनापन’ का ऐलान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 35 वर्षों के अनुभवों का वर्णन

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केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपनी नई पुस्तक ‘अपनापन’ की घोषणा की है, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने 35 वर्षों के संबंधों, अनुभवों और कार्यशैली को व्यक्तिगत दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया है।

यह पुस्तक 26 मई 2026 को सुबह 10:30 बजे एनएएससी कॉम्प्लेक्स, नई दिल्ली में औपचारिक रूप से लॉन्च की जाएगी। इस अवसर पर पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू तथा पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा उपस्थित रहेंगे।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ‘अपनापन’ केवल घटनाओं का संग्रह नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के व्यक्तित्व, नेतृत्व शैली, संवेदनशीलता, अनुशासन, कार्यनिष्ठा और राष्ट्र निर्माण के दृष्टिकोण का एक आत्मीय दस्तावेज है। उन्होंने बताया कि उनकी और नरेंद्र मोदी की पहचान 1991 की एकता यात्रा से शुरू हुई थी, जो समय के साथ संगठनात्मक कार्य, शासन और सार्वजनिक जीवन की साझी यात्रा में बदल गई।

उन्होंने कहा कि दुनिया नरेंद्र मोदी को एक निर्णायक और प्रभावशाली नेता के रूप में देखती है, लेकिन उन्होंने उन्हें एक कर्मयोगी, राष्ट्रहित के प्रति समर्पित और संवेदनशील व्यक्ति के रूप में करीब से देखा है। चौहान के अनुसार, प्रधानमंत्री देर रात तक काम करने के बावजूद हर नए दिन समान ऊर्जा और स्पष्टता के साथ देशसेवा में जुट जाते हैं।

एकता यात्रा को याद करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जहाँ कुछ लोग इसे केवल राजनीतिक अभियान मानते थे, वहीं नरेंद्र मोदी ने इसे राष्ट्रीय चेतना का आंदोलन बना दिया। उनका उद्देश्य केवल श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराना नहीं था, बल्कि युवाओं में राष्ट्रभक्ति और समर्पण की भावना जगाना था।

उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की संगठन क्षमता, चुनावी रणनीति, जमीनी स्तर तक विचार पहुँचाने की क्षमता और कार्यकर्ताओं से जुड़ाव को उनकी प्रमुख विशेषताओं में बताया। चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने यह भी देखा कि जटिल और लंबे समय से लंबित समस्याओं का समाधान संवाद, स्पष्टता और दृढ़ संकल्प से कैसे किया जा सकता है।

कोविड-19 महामारी के कठिन दौर का उल्लेख करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उस समय प्रधानमंत्री मोदी ने धैर्य, दूरदृष्टि और संतुलित निर्णय क्षमता का परिचय दिया, जिससे देश को दिशा और विश्वास मिला।

उन्होंने कहा कि ‘अपनापन’ विशेष रूप से युवाओं को प्रेरित करेगी और यह संदेश देगी कि राष्ट्र परिवर्तन के लिए केवल बड़ा पद नहीं, बल्कि महान संकल्प, अनुशासन, सेवा भावना और लोगों से आत्मीय जुड़ाव आवश्यक है।

पीएमजीएसवाई के 25 वर्ष पूरे, पीएमजीएसवाई-IV का राष्ट्रीय शुभारंभ

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प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana – PMGSY) के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर सिल्वर जुबली समारोह और PMGSY-IV का राष्ट्रीय शुभारंभ 10 मई को मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के भैरुंडा में आयोजित किया जाएगा।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान  मुख्य अतिथि होंगे, जबकि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव भी कार्यक्रम में शामिल होंगे।

ग्रामीण विकास को बड़ा बढ़ावा

इस अवसर पर केंद्र सरकार मध्य प्रदेश को PMGSY-IV के तहत 973 सड़कों के निर्माण की मंजूरी देगी, जिनकी कुल लंबाई 2,117 किलोमीटर होगी। इससे राज्य की 987 बस्तियों को लाभ मिलेगा।

इसके साथ ही पीएम-जनमन योजना के तहत 384 किलोमीटर से अधिक सड़क परियोजनाओं को भी मंजूरी दी जाएगी, जिससे 168 पिछड़ी बस्तियों को सीधा फायदा मिलेगा।

₹18,907 करोड़ का आवंटन

कार्यक्रम में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए PMGSY के तहत ₹18,907 करोड़ के आवंटन की घोषणा की जाएगी, जिसमें मध्य प्रदेश के लिए ₹830 करोड़ शामिल हैं।

ग्रामीण कनेक्टिविटी पर जोर

सरकार का मानना है कि गांव की सड़क केवल यातायात का साधन नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि और बाजार तक पहुंच का माध्यम है। यह योजना ग्रामीण भारत के जीवन स्तर को सुधारने में अहम भूमिका निभा रही है।

अन्य प्रमुख उपस्थितियां

इस कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री, राज्य सरकार के मंत्री, जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे।

नई दिशा

यह आयोजन ग्रामीण सड़क निर्माण में तकनीक आधारित विकास और देशभर में बेहतर कनेक्टिविटी की दिशा में एक नए चरण की शुरुआत माना जा रहा है।

शिवराज सिंह चौहान ने कृषि वित्त प्रणाली को सरल और किसान हितैषी बनाने पर दिया जोर

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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि वित्त प्रणाली को अधिक सरल, व्यावहारिक, मानवीय और परिणामोन्मुख बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसानों को साहूकारी प्रथाओं, ऊँची ब्याज दरों, जटिल ऋण प्रक्रियाओं और असंवेदनशील व्यवस्था से राहत मिलनी चाहिए।

ऋण प्रक्रिया का सरलीकरण आवश्यक

नई दिल्ली के विज्ञान भवन में सिविल सेवा दिवस के अवसर पर आयोजित एक पैनल चर्चा में उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक ऋण प्राप्त करना अभी भी आसान नहीं है। किसानों को कई स्तरों की कागजी कार्रवाई, राजस्व रिकॉर्ड और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। इसलिए ऋण प्रक्रिया को सरल बनाना अत्यंत जरूरी है।

संवेदनशील और संतुलित व्यवस्था की जरूरत

मंत्री चौहान ने कहा कि व्यवस्था में संवेदनशीलता और संतुलन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसान किसी के सामने याचक नहीं हैं, बल्कि वे अधिकार और गरिमा के साथ सिस्टम के पास आते हैं। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि एक किसान का ₹18 लाख का ऋण ब्याज बढ़ने से ₹40 लाख हो गया। ऐसे मामलों में वन-टाइम सेटलमेंट जैसे व्यावहारिक समाधान जरूरी हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक का उपयोग जरूरी है, लेकिन उसे सोच-समझकर लागू किया जाना चाहिए। कई बार सैटेलाइट आधारित सत्यापन में त्रुटियां होने से किसानों को परेशानी होती है। इसलिए कृषि विभाग, नाबार्ड (राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक,भारतीय रिज़र्व बैंक और अन्य संस्थानों को मिलकर व्यावहारिक और विश्वसनीय प्रणाली विकसित करनी चाहिए।

ग्रामीण बैंकों में मानव संसाधन की कमी

उन्होंने ग्रामीण बैंकों में कर्मचारियों की कमी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मनरेगा, पीएम-किसान जैसी योजनाओं के कारण काम का बोझ बढ़ा है, लेकिन स्टाफ सीमित है। किसान कई बार 8-10 किलोमीटर दूर बैंक पहुंचते हैं और लंबी कतारों में समय गंवाते हैं। इसलिए वर्तमान जरूरतों के अनुसार पर्याप्त स्टाफ सुनिश्चित करना आवश्यक है।

प्रगतिशील किसानों के लिए अधिक वित्तीय सहायता

मंत्री चौहान ने कहा कि केवल किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) सभी समस्याओं का समाधान नहीं है। आधुनिक खेती जैसे बागवानी, पॉलीहाउस, ड्रिप सिंचाई आदि में अधिक निवेश की जरूरत होती है। ऐसे में प्रगतिशील किसानों को अधिक वित्तीय सहायता और ज्ञान उपलब्ध कराना जरूरी है, ताकि वे आधुनिक तकनीकों को अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकें।

एकीकृत खेती को बढ़ावा

उन्होंने छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने के लिए एकीकृत खेती (इंटीग्रेटेड फार्मिंग) पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कम जमीन वाले किसानों को फसल उत्पादन के साथ-साथ पशुपालन, मत्स्य पालन, बागवानी, मधुमक्खी पालन जैसे कार्यों को अपनाना चाहिए। इसके लिए विभिन्न योजनाओं के समन्वय की आवश्यकता है।

व्यावहारिक क्रियान्वयन पर जोर

उन्होंने वेयरहाउस रसीद वित्त योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे और अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत है। यदि किसानों को संग्रहित उपज के बदले आसान ऋण मिल सके, तो वे उचित समय पर बेहतर कीमत मिलने तक इंतजार कर सकते हैं।

आत्ममंथन और नवाचार का आह्वान

मंत्री चौहान ने सिविल सेवकों से आत्ममंथन करने, क्रियान्वयन में सुधार लाने और नवाचारी सोच अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बेहतर सेवा और परिणामों के लिए अधिकारियों को अपनी क्षमता और विचारों का प्रभावी उपयोग करना चाहिए, ताकि किसानों और देश को अधिक लाभ मिल सके।

खराब बीज से फसल नुकसान पर सख्त कार्रवाई, शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर FIR दर्ज

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नई दिल्ली- शिवराज सिंह चौहान से मध्य प्रदेश के धार और खरगोन जिलों के किसानों ने मुलाकात कर करेला फसल में खराब बीज और पौधों के कारण हुए भारी नुकसान की शिकायत की। इस पर केंद्रीय कृषि मंत्री ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत अधिकारियों को किसानों को उचित मुआवजा दिलाने और दोषी कंपनी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

मंत्री के निर्देश के बाद त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए धार जिले के मनावर थाने में हैदराबाद स्थित ननहेम्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ FIR दर्ज की गई है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

किसानों के अनुसार, उन्होंने नवंबर 2025 में संबंधित कंपनी के बीज और पौधे खरीदे थे, लेकिन फसल में अपेक्षित उत्पादन नहीं हुआ। करेला के फल छोटे रह गए, पीले पड़ गए और समय से पहले गिरने लगे, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

शिकायत के बाद कृषि वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने जांच की, जिसमें प्रारंभिक तौर पर यह पाया गया कि किसानों को प्रमाणित बताकर घटिया गुणवत्ता के बीज और पौधे बेचे गए थे।

इस मामले में भारतीय न्याय संहिता 2023, आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 और बीज अधिनियम 1966 की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह केवल फसल नुकसान का मामला नहीं, बल्कि किसानों की मेहनत, विश्वास और पूंजी पर सीधा आघात है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय या धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

साथ ही “रुबास्ता” नामक घटिया करेला बीज किस्म पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि भविष्य में किसानों को ऐसे नुकसान से बचाया जा सके।

सरकार ने भरोसा दिलाया है कि प्रभावित किसानों को न्याय दिलाने के साथ-साथ दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।


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