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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसदीय परामर्शदात्री समिति की बैठक की अध्यक्षता की, ‘प्रादेशिक सेना’ की भूमिका पर हुआ मंथन

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 6 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में रक्षा मंत्रालय की संसदीय परामर्शदात्री समिति की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में ‘प्रादेशिक सेना (Territorial Army)’ के विषय पर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों ने समिति के सदस्यों को प्रादेशिक सेना के उद्देश्य, भूमिका और प्रमुख उपलब्धियों पर विस्तृत जानकारी दी। समिति के सदस्यों ने सेना को और अधिक सशक्त एवं प्रभावी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।

अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रादेशिक सेना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। उन्होंने कहा कि जहाँ सशस्त्र बलों की मुख्य भूमिका राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी होती है, वहीं प्रादेशिक सेना पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक कार्यों में भी उल्लेखनीय योगदान देती है।

उन्होंने कहा, “प्रादेशिक सेना ‘नागरिक-सैनिक’ (Citizen-Soldier) की अवधारणा का जीवंत उदाहरण है। इसके सदस्य अपने नागरिक व्यवसायों के साथ-साथ आवश्यकता पड़ने पर वर्दी पहनकर सीमाओं की रक्षा और आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने का दायित्व निभाते हैं।”

राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रादेशिक सेना सशस्त्र बलों के लिए अतिरिक्त सैन्य क्षमता (Surge Capacity) तैयार करती है। यह प्रशिक्षित सैनिकों का ऐसा रिजर्व बल है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर तुरंत तैनात किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सेवा अवधि पूरी करने के बाद जब ये सैनिक पुनः नागरिक जीवन में लौटते हैं, तो वे समाज और सेना के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करते हैं तथा विशेषकर युवाओं को रक्षा सेवाओं में शामिल होने के लिए प्रेरित करते हैं।

वर्तमान में प्रादेशिक सेना में लगभग 44,400 कर्मी और 59 विभिन्न इकाइयाँ हैं। रक्षा मंत्री ने इसे प्राकृतिक आपदाओं के दौरान पहला प्रतिक्रिया बल (First Responders) बताते हुए कहा कि यह राहत एवं बचाव कार्यों तथा चिकित्सा सहायता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने केरल की बाढ़, ओडिशा के चक्रवात तथा हाल ही में असम की बाढ़ के दौरान प्रादेशिक सेना द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्यों की सराहना की।

पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने के क्षेत्र में प्रादेशिक सेना के योगदान की प्रशंसा करते हुए उन्होंने बताया कि इसकी इकोलॉजिकल टास्क फोर्स (Ecological Task Forces) अब तक लगभग 10 करोड़ पौधे लगा चुकी है, जिनकी 80–85 प्रतिशत तक जीवित रहने की दर है। उन्होंने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री के ‘मिशन LiFE’ और ‘पंचामृत’ लक्ष्यों को धरातल पर साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

रक्षा मंत्री ने जम्मू-कश्मीर में तैनात प्रादेशिक सेना की ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को जन-जन तक पहुँचाने में निभाई गई भूमिका की भी सराहना की।

बैठक में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि, थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार, रक्षा वित्त सचिव विश्वजीत सहाय तथा रक्षा मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

भारत की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से 101 करोड़ लोग जुड़े, आबादी के 68% से अधिक को मिला लाभ : डॉ. मनसुख मांडविया

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नई दिल्ली- केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि भारत की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का दायरा अब लगभग 101 करोड़ लोगों तक पहुंच चुका है, जो देश की 68 प्रतिशत से अधिक आबादी को कवर करता है। उन्होंने बताया कि इस उपलब्धि को अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने पिछले सप्ताह हैदराबाद में आयोजित ब्रिक्स श्रम मंत्रियों की बैठक में भी रेखांकित किया, जो भारत की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली को वैश्विक स्तर पर मिली मान्यता का प्रमाण है।

डॉ. मांडविया नई दिल्ली में आयोजित चौथे ग्लोबल इंडस्ट्रियल रिलेशंस समिट को संबोधित कर रहे थे। इस दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ एम्प्लॉयर्स (AIOE) ने फिक्की (FICCI) और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के सहयोग से किया।

उन्होंने कहा कि सरकार, उद्योग, नियोक्ता, श्रमिक और ट्रेड यूनियनों के बीच निरंतर समन्वय ही स्वस्थ औद्योगिक संबंधों की आधारशिला है। आर्थिक विकास और रोजगार सृजन को साथ लेकर चलने के लिए सभी पक्षों की साझेदारी आवश्यक है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि औद्योगीकरण राष्ट्रीय विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है क्योंकि इससे रोजगार के अवसर बढ़ते हैं। उन्होंने विशेष रूप से महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और सहकारी मॉडल की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि ये पहल आजीविका के नए अवसर पैदा करने, अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि ऐसा संतुलित विकास मॉडल आवश्यक है जो एक ओर श्रमिकों के कल्याण और सामाजिक सुरक्षा को सुनिश्चित करे तथा दूसरी ओर उद्योगों के लिए 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को भी बढ़ावा दे।

डॉ. मांडविया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्थिर कर व्यवस्था, बढ़ती बचत, बढ़ी हुई क्रय शक्ति और विनिर्माण क्षेत्र के विस्तार के कारण आर्थिक विकास और रोजगार सृजन का सकारात्मक चक्र विकसित हुआ है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में जीडीपी में प्रत्येक 1 प्रतिशत वृद्धि के साथ रोजगार में 1.11 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है, जबकि लगभग 12 वर्ष पहले रोजगार वृद्धि का यह अनुपात केवल 0.008 प्रतिशत था।

उन्होंने कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) में प्रस्तावित सुधारों की जानकारी देते हुए कहा कि भविष्य में केवल ईएसआईसी अस्पताल ही नहीं, बल्कि बेहतर निजी अस्पतालों को भी ईएसआईसी से संबद्ध स्वास्थ्य सुविधाओं के रूप में मान्यता दी जा सकती है। इसके अलावा कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की सभी दावों की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल की जा रही है तथा एकल यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) के माध्यम से खातों का स्वतः स्थानांतरण सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही, यूपीआई के माध्यम से पीएफ निकासी की सुविधा पर भी विचार किया जा रहा है।

इस अवसर पर भारत में ILO की दक्षिण एशिया निदेशक सुश्री मिचिको मियामोटो ने भारत को सामाजिक सुरक्षा के विस्तार पर बधाई देते हुए कहा कि ILO के आकलन के अनुसार भारत अब एक अरब से अधिक लोगों को कम से कम एक सामाजिक सुरक्षा लाभ उपलब्ध कराने वाला देश बन गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह उपलब्धि भारत की आर्थिक प्रगति को और गति देगी।

सम्मेलन के दौरान केंद्रीय मंत्री डॉ. मांडविया एवं अन्य गणमान्य अतिथियों ने दो दिवसीय सम्मेलन की स्मारिका का भी विमोचन किया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अटल इनोवेशन मिशन के जमीनी नवप्रवर्तकों से की मुलाकात, नवाचार को विकसित भारत की आधारशिला बताया

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नई दिल्ली- भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (31 जुलाई 2026) राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में अटल इनोवेशन मिशन (AIM) के जमीनी स्तर के नवप्रवर्तकों (Grassroots Innovators) के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने नवप्रवर्तकों द्वारा आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन किया, उनके नवाचारों को देखा तथा उनसे संवाद भी किया।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत अपनी विशाल क्षमता और नवाचार की भावना के बल पर जमीनी नवाचारों का वैश्विक केंद्र बनने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि स्थानीय अनुभव, वैज्ञानिक सोच, व्यक्तिगत रचनात्मकता और सामाजिक उत्तरदायित्व का समन्वय ही जमीनी नवाचारों को समाज की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप बनाता है।

उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि देशभर के नवप्रवर्तक स्थानीय समस्याओं के ऐसे समाधान विकसित कर रहे हैं, जिनका महत्व राष्ट्रीय स्तर तक है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी में प्रस्तुत नवाचार कचरे से संपदा (Waste to Wealth), ऊर्जा संरक्षण, महिलाओं एवं दिव्यांगजनों की सुविधा, पर्यावरण संरक्षण, कृषि तथा कला संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि सिर्फ विचारों से सामाजिक परिवर्तन नहीं आता, बल्कि उन्हें आगे बढ़ाने के लिए उचित मार्गदर्शन, संसाधन और मंच की आवश्यकता होती है। उन्होंने बताया कि अटल कम्युनिटी इनोवेशन सेंटर जमीनी नवप्रवर्तकों को तकनीकी सहायता, मार्गदर्शन और उनके नवाचारों को टिकाऊ उद्यमों में बदलने के अवसर उपलब्ध करा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि "विकसित भारत" का सपना तभी साकार होगा, जब प्रत्येक नागरिक नवाचार की सोच के साथ समस्याओं के समाधान खोजने का प्रयास करेगा। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि देश के विभिन्न संस्थान और नागरिक इस साझा उद्देश्य के लिए मिलकर कार्य कर रहे हैं, जिससे नवाचार की संस्कृति लगातार मजबूत हो रही है।

राष्ट्रपति ने कहा कि सीमित संसाधनों, अनिश्चितताओं और अनेक चुनौतियों के बावजूद कई नवप्रवर्तकों ने अपने प्रयास जारी रखे। उन्होंने उनके समर्पण और सकारात्मक परिवर्तन लाने की भावना की सराहना की तथा उन्हें अपने नवाचारों को लगातार बेहतर बनाने, अनुसंधान संस्थानों, उद्योग जगत और अन्य नवप्रवर्तकों के साथ सहयोग बढ़ाने तथा अपने नवाचारों को व्यापक स्तर तक पहुँचाने का आह्वान किया।

राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे नवाचारों का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुँचेगा और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

नई दिल्ली में राष्ट्रीय उत्तरदायी व्यावसायिक आचरण सम्मेलन (NCRBC) 2026 का शुभारंभ

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नई दिल्ली- राष्ट्रीय उत्तरदायी व्यावसायिक आचरण सम्मेलन (National Conference on Responsible Business Conduct - NCRBC) 2026 के चौथे संस्करण का शुभारंभ नई दिल्ली में हुआ। दो दिवसीय इस सम्मेलन का विषय "विकसित भारत के लिए ESG-आधारित परिवर्तन (ESG-led Transformation for Viksit Bharat)" रखा गया है। सम्मेलन का आयोजन भारतीय कॉरपोरेट कार्य संस्थान (IICA) के स्कूल ऑफ बिजनेस एनवायरनमेंट (SBE) द्वारा किया गया है। IICA, कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्थान है।

उत्तरदायी व्यावसायिक आचरण विकसित भारत की आधारशिला : नितिन गुप्ता

सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (NFRA) के अध्यक्ष नितिन गुप्ता ने कहा कि उत्तरदायी व्यावसायिक आचरण (Responsible Business Conduct) विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने, प्रतिस्पर्धी उद्योगों, विश्वसनीय बाजारों, समावेशी विकास और पर्यावरणीय स्थिरता के लिए अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि भारत ने सस्टेनेबिलिटी डिस्क्लोजर को मजबूत करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन अब इन सूचनाओं की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और निर्णय लेने में उपयोगिता बढ़ाने पर ध्यान देना होगा। उन्होंने जोर दिया कि सस्टेनेबिलिटी संबंधी जानकारी प्रासंगिक, तुलनीय, साक्ष्य-आधारित और सत्यापन योग्य होनी चाहिए।

गुप्ता ने कहा कि सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग में भी वही अनुशासन और कठोरता अपनाई जानी चाहिए जो वित्तीय रिपोर्टिंग और ऑडिट में अपनाई जाती है। उन्होंने दस्तावेजीकरण, ट्रेसबिलिटी, आंतरिक नियंत्रण, साक्ष्य संरक्षण, पेशेवर जांच और स्वतंत्र सत्यापन को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने यह भी कहा कि विशेषकर एमएसएमई (MSMEs) और आपूर्ति श्रृंखलाओं में तकनीक के बेहतर उपयोग तथा संस्थागत क्षमता निर्माण के माध्यम से व्यावहारिक और संतुलित सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

ESG को आर्थिक विकास का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा : ज्ञानेश्वर कुमार सिंह

भारतीय कॉरपोरेट कार्य संस्थान (IICA) के महानिदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी ज्ञानेश्वर कुमार सिंह ने स्वागत भाषण में कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को 30 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य के लिए ESG (पर्यावरण, सामाजिक और सुशासन) को केवल नियामकीय अनुपालन तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि इसे आर्थिक विकास का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा।

उन्होंने कहा कि उत्तरदायी व्यावसायिक आचरण भारत की सांस्कृतिक परंपरा में निहित है। उन्होंने वर्ष 2009 में जारी कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) संबंधी स्वैच्छिक दिशा-निर्देशों से लेकर 2021 में लागू बिजनेस रिस्पॉन्सिबिलिटी एंड सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग (BRSR) ढांचे तक की यात्रा का उल्लेख किया।

उन्होंने बताया कि कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 166(2) में हितधारकों के हितों को प्राथमिकता देने का सिद्धांत पहले ही शामिल कर लिया गया था, जो भारत की दूरदर्शी सोच को दर्शाता है।

सिंह ने कहा कि भारत अब "ESG 1.0" से "ESG 2.0" की ओर बढ़ रहा है, जहां ESG केवल अनुपालन नहीं बल्कि दीर्घकालिक व्यवसायिक मूल्य, जोखिम प्रबंधन और संस्थागत मजबूती का आधार बन चुका है।

उन्होंने बोर्ड स्तर पर ESG को निर्णय प्रक्रिया में शामिल करने, ग्रीनवॉशिंग रोकने के लिए सस्टेनेबिलिटी डेटा के कानूनी ढांचे को मजबूत करने तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी तकनीकों का उपयोग बढ़ाने पर बल दिया।

व्यवसायिक रणनीति में शामिल हों बाल अधिकार : यूनिसेफ

यूनिसेफ इंडिया के उप-प्रतिनिधि जेस्पर मोलर ने कहा कि बाल अधिकारों को केवल परोपकारी गतिविधि नहीं बल्कि कंपनियों की मुख्य व्यावसायिक रणनीति का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में 40 करोड़ से अधिक बच्चे भविष्य के कार्यबल और उपभोक्ता हैं।

उन्होंने असम के एक चाय बागान का उदाहरण देते हुए बताया कि मातृत्व अवकाश, कार्यस्थल पर क्रेच और जिम्मेदार आपूर्ति श्रृंखला जैसी नीतियों से बच्चों के कल्याण के साथ-साथ कर्मचारियों की स्थिरता भी बढ़ती है।

भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था का "रॉकेट शिप" : हेलन ब्रांड

ACCA की मुख्य कार्यकारी अधिकारी हेलन ब्रांड ने वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए भारत की तेज आर्थिक प्रगति की सराहना की और कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था "चंद्रमा की ओर बढ़ते रॉकेट शिप" की तरह तेजी से आगे बढ़ रही है।

उन्होंने ACCA की ग्लोबल टैलेंट ट्रेंड्स रिपोर्ट 2026 का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया भर के वित्तीय पेशेवर अब ऐसे संगठनों में काम करना चाहते हैं जो समाज पर सकारात्मक प्रभाव डालते हों तथा मानवाधिकारों के प्रति संवेदनशील हों।

सतत विकास केवल अनुपालन नहीं, विकास की आधारशिला : प्रो. गरिमा दाधीच

स्कूल ऑफ बिजनेस एनवायरनमेंट की प्रमुख प्रो. गरिमा दाधीच ने कहा कि उत्तरदायी व्यावसायिक आचरण विकसित भारत के निर्माण की अनिवार्य शर्त है। उन्होंने कहा कि सस्टेनेबिलिटी को केवल अनुपालन नहीं बल्कि विकास की आधारशिला के रूप में देखा जाना चाहिए।

उन्होंने सम्मेलन के तीन प्रमुख सिद्धांत बताए—

  • पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी

  • ऋग्वेद का संदेश "संगच्छध्वं संवदध्वं"

  • भारत के G20 मंत्र "एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य" के अनुरूप विकास

उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 में हरित विकास, जलवायु परिवर्तन और सतत अवसंरचना को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।

उच्चस्तरीय पैनल में ESG पर व्यापक चर्चा

उद्घाटन सत्र के बाद "ESG, गवर्नेंस और बोर्ड-स्तरीय डिस्क्लोजर" विषय पर उच्चस्तरीय पैनल चर्चा आयोजित हुई।

SEBI के पूर्णकालिक सदस्य अमरजीत सिंह ने कहा कि भारत को वैश्विक मानकों की जल्दबाजी में नकल नहीं करनी चाहिए, बल्कि अपनी विकास आवश्यकताओं के अनुरूप ESG का मार्ग तय करना चाहिए।

ONGC के अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह ने कहा कि कंपनियों के इरादों और महत्वाकांक्षा को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भरोसा और नीयत ही सुशासन की असली पहचान है।

CEEW के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. अरुणाभ घोष ने कहा कि ESG को अक्सर बोझ समझा जाता है, जबकि भारत की हरित अर्थव्यवस्था में लगभग 4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश अवसर मौजूद है।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के वरिष्ठ सलाहकार शैलेश पाठक ने कहा कि पूंजी वहीं टिकती है जहां भरोसा होता है। उन्होंने सोशल स्टॉक एक्सचेंज को सामाजिक उद्यमों और निवेशकों के बीच एक मजबूत सेतु बताया।

किर्लोस्कर इंडस्ट्रीज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक जॉर्ज वर्गीज ने कहा कि कड़े उत्सर्जन मानकों ने उनकी कंपनी के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों के नए अवसर खोले।

आईसीएआई (ICAI) के सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग स्टैंडर्ड्स बोर्ड के अध्यक्ष सीए प्रमोद जैन ने कहा कि भारत ESG आश्वासन को अनिवार्य बनाने वाले शुरुआती देशों में शामिल हो गया है, जिससे बोर्ड स्तर की रिपोर्टिंग की विश्वसनीयता वित्तीय विवरणों के समान हो गई है।

दूसरे दिन होंगे कई महत्वपूर्ण सत्र

सम्मेलन के दूसरे दिन विभिन्न क्षेत्रों में ESG के प्रभावी क्रियान्वयन, जिम्मेदार आपूर्ति श्रृंखला, MSMEs में ESG को मुख्यधारा में लाने, BRSR से आगे सेक्टर आधारित ESG ढांचे तथा पर्यावरणीय मानकों को मजबूत बनाने जैसे विषयों पर उच्चस्तरीय चर्चा होगी।

यह सम्मेलन यूनिसेफ, पार्टनर्स इन चेंज, ACCA, ICAI, GAIN, UN Women, CEEW, WRI India और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।

सम्मेलन का उद्देश्य वर्ष 2047 तक विकसित, समावेशी, टिकाऊ और नैतिक भारत के निर्माण में उत्तरदायी व्यावसायिक आचरण को केंद्रीय भूमिका प्रदान करना है।

केंद्र के तीन बड़े फैसलों से छत्तीसगढ़ को मिलेगी विकास की नई रफ्तार, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जताया आभार

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 रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा सेमिकॉन 2.0, राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 (NIPU-2026) तथा मोबाइल फोन विनिर्माण प्रोत्साहन योजना (MPMS) को स्वीकृति दिए जाने का स्वागत करते हुए इसे विकसित भारत के निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी निर्णय बताया है।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज आत्मनिर्भरता, नवाचार और अत्याधुनिक विनिर्माण के नए युग की ओर तेजी से अग्रसर है। केंद्र सरकार के ये तीनों महत्वपूर्ण निर्णय देश की औद्योगिक क्षमता, कृषि सुरक्षा और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाले सिद्ध होंगे। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय मंत्रिमंडल के प्रति आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ₹1,27,500 करोड़ की सेमिकॉन 2.0 योजना देश में सेमीकंडक्टर एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए विश्वस्तरीय पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी मजबूत भागीदारी सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ भी नई औद्योगिक नीति, बेहतर अधोसंरचना, निवेश अनुकूल वातावरण और कौशल विकास के माध्यम से उच्च तकनीक आधारित उद्योगों के लिए तेजी से उभरता हुआ गंतव्य बन रहा है। इस प्रकार की राष्ट्रीय पहल से राज्य में भी निवेश और रोजगार की नई संभावनाएं विकसित होंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 देश में उर्वरकों की उपलब्धता को सुदृढ़ करेगी तथा किसानों को समय पर आवश्यक उर्वरक उपलब्ध कराने में सहायक होगी। इसका लाभ छत्तीसगढ़ के लाखों किसानों को मिलेगा और कृषि उत्पादन को नई मजबूती प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि किसानों की समृद्धि और कृषि क्षेत्र की आत्मनिर्भरता के लिए केंद्र और राज्य सरकार निरंतर समन्वित रूप से कार्य कर रही हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ₹62,500 करोड़ की मोबाइल फोन विनिर्माण प्रोत्साहन योजना (MPMS) भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और निर्यात के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे भारतीय ब्रांडों, अनुसंधान एवं विकास, नवाचार तथा स्थानीय विनिर्माण को व्यापक प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी औद्योगिक निवेश, इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी तथा उभरते प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में अनुकूल वातावरण तैयार किया जा रहा है, जिससे राज्य के युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर सृजित होंगे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लिए जा रहे ऐसे दूरदर्शी निर्णय विकसित भारत के साथ-साथ विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को भी नई गति प्रदान करेंगे। नवाचार, निवेश, तकनीकी आत्मनिर्भरता, आधुनिक विनिर्माण और कृषि सशक्तिकरण पर आधारित यह विकास मॉडल आने वाले वर्षों में देश और प्रदेश दोनों की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

दशकों तक नक्सल हिंसा ने विकास, शिक्षा और जनजीवन को किया प्रभावित, अब बस्तर शांति और विश्वास के नए दौर की ओर अग्रसर-मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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सुरक्षा बलों के साहस, स्थानीय जनसहयोग और पुनर्वास नीति से मिली निर्णायक सफलता - मुख्यमंत्री

दूरस्थ अंचलों तक पहुंचीं सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और जनकल्याण की योजनाएं, शासन पर बढ़ा लोगों का विश्वास - मुख्यमंत्री साय

बस्तर को देश का अग्रणी जनजातीय संभाग बनाने की दिशा में तेजी से बढ़ रहे कदम : मुख्यमंत्री

बस्तर रोडमैप 2.0 के माध्यम से पर्यटन, आजीविका, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत संरचना के समग्र विकास पर विशेष फोकस - मुख्यमंत्री साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज छत्तीसगढ़ विधानसभा में नक्सलवाद से मुक्ति के लिए केंद्र सरकार के ऐतिहासिक सहयोग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ ने दशकों तक नक्सल हिंसा के रूप में एक गंभीर चुनौती का सामना किया है। अब केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों, सुरक्षा बलों के अदम्य साहस तथा बस्तर की जनता के विश्वास और सहयोग से प्रदेश इस चुनौती से निर्णायक रूप से मुक्त होकर शांति, सुरक्षा और विकास के नए युग में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने कहा कि यह सफलता अनेक वर्षों के सतत प्रयासों, सुनियोजित रणनीति, सुरक्षा बलों के पराक्रम तथा आम नागरिकों के सहयोग का परिणाम है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष में सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीद जवानों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका त्याग और समर्पण सदैव राष्ट्र को प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, छत्तीसगढ़ पुलिस, जिला पुलिस बल, विशेष सुरक्षा इकाइयों तथा अभियान में सहभागी सभी सुरक्षा एजेंसियों के साहस, समर्पण और व्यावसायिक दक्षता की सराहना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के लिए समन्वित सुरक्षा एवं विकास आधारित रणनीति अपनाई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में सुरक्षा अभियानों की सतत समीक्षा, संसाधनों की उपलब्धता तथा केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया गया, जिससे अभियान को अपेक्षित गति मिली।

उन्होंने कहा कि 24 अगस्त 2024 को रायपुर में आयोजित नक्सल प्रभावित राज्यों के पुलिस महानिदेशकों की उच्च स्तरीय बैठक के बाद नक्सलवाद के समूल उन्मूलन के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की गई। इसके अनुरूप सुरक्षा अभियानों को गति देने के साथ-साथ विकास कार्यों का भी समानांतर विस्तार किया गया।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने भी अभियान की नियमित समीक्षा की। स्वयं उन्होंने बस्तर क्षेत्र का लगातार दौरा कर सुरक्षा बलों का उत्साहवर्धन किया तथा विभिन्न गांवों में पहुंचकर स्थानीय नागरिकों से संवाद स्थापित किया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने सुरक्षा अभियानों के साथ-साथ समाज के उन लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने पर भी विशेष बल दिया, जिन्होंने हिंसा का मार्ग छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने की इच्छा व्यक्त की। इसी उद्देश्य से आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास के लिए व्यापक और मानवीय नीति लागू की गई।

उन्होंने कहा कि पुनर्वास नीति के अंतर्गत आत्मसमर्पित व्यक्तियों को आर्थिक सहायता, भूमि, कौशल विकास प्रशिक्षण, स्वरोजगार तथा सम्मानजनक जीवन के अवसर उपलब्ध कराए गए। इससे बड़ी संख्या में लोगों ने हिंसा का मार्ग छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नीति केवल पुनर्वास तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विधानसभा में कहा कि नक्सलवाद से मुक्ति का अभियान केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके साथ-साथ विकास को भी समान प्राथमिकता दी गई। राज्य सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि जिन क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हो रही है, वहां शासन की योजनाएं और बुनियादी सुविधाएं भी तेजी से पहुंचें, ताकि लोगों के जीवन में स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन आए।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने  कहा कि नक्सलवाद से मुक्ति के बाद अब राज्य सरकार का पूरा ध्यान बस्तर के समग्र, समावेशी और दीर्घकालिक विकास पर केंद्रित है। इसके लिए 'बस्तर रोडमैप 2.0' तैयार किया गया है, जिसके माध्यम से बस्तर को देश के अग्रणी जनजातीय संभाग के रूप में विकसित करने की दिशा में योजनाबद्ध कार्य किए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि 'नियद नेल्ला नार 2.0' तथा 'बस्तर मुन्ने अभियान' के अंतर्गत 31 योजनाओं एवं 14 सामुदायिक सुविधाओं का संतृप्तिकरण (सेचुरेशन) मोड में क्रियान्वयन किया जा रहा है। इससे 5 हजार 542 गांवों के 39 लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा और शासन की सेवाएं अंतिम छोर तक पहुंचेंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षा शिविरों को अब बहुआयामी सेवा केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन्हें 'शहीद गुंडाधुर सेवा डेरा' के रूप में विकसित करते हुए नागरिक सुविधाओं, जनसेवाओं और आजीविका गतिविधियों का केंद्र बनाया जा रहा है, ताकि स्थानीय लोगों को अपने ही क्षेत्र में आवश्यक सेवाएं सहज रूप से उपलब्ध हो सकें।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत बस्तर के 34 लाख से अधिक लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उनका डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल तैयार किया गया है। इससे नागरिकों को समयबद्ध एवं बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि 'नियद नेल्ला नार' योजना इस परिवर्तन का महत्वपूर्ण माध्यम बनी है। इस योजना के अंतर्गत सुरक्षा कैंपों के 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाले 525 गांवों में 17 विभागों की 43 व्यक्तिगत एवं सामुदायिक योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया गया। इससे ग्रामीणों को शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ एकीकृत रूप से उपलब्ध कराया जा रहा है तथा प्रशासन के प्रति उनका विश्वास और मजबूत हुआ है।

उन्होंने बताया कि बस्तर संभाग में केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का संतृप्तिकरण (सेचुरेशन) सुनिश्चित करने के लिए विशेष अभियान चलाया गया है। इसके परिणामस्वरूप 6 लाख 79 हजार परिवारों के राशन कार्ड बनाए जा चुके हैं। बस्तर संभाग में 17 लाख लोगों के जनधन खाते खोले जा चुके हैं।  24 लाख 66 हजार लोगों के आधार कार्ड बनाए जा चुके हैं।  22 लाख लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाए गए हैं। 1 लाख 18 हजार लोगों को व्यक्तिगत वनाधिकार पत्र प्रदान किए गए हैं। साथ ही 3 लाख 89 हजार किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड बनाए जा चुके हैं। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी व्यापक कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि बस्तर संभाग में 1 लाख 76 हजार प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए हैं। इसके अतिरिक्त नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों एवं आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए भी 15 हजार आवास स्वीकृत किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि  बस्तर संभाग के 240 नक्सल प्रभावित गांवों में पूर्व में बंद पड़े 458 विद्यालयों में से 421 विद्यालयों का पुनः संचालन प्रारंभ किया गया है तथा 36 नए विद्यालय स्वीकृत किए गए हैं।  मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार बस्तर में आधारभूत अधोसंरचना के विस्तार को भी तेज गति से आगे बढ़ा रही है। 3,513 करोड़ रुपये की लागत से जगदलपुर-रावघाट रेल परियोजना पर कार्य जारी है, जिससे बस्तर की रेल संपर्क व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। उन्होंने बताया कि जगदलपुर में हवाई सेवाओं का भी विस्तार किया गया है, जिससे क्षेत्र की कनेक्टिविटी और बेहतर हुई है।

उन्होंने कहा कि रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेस-वे का निर्माण अंतिम चरण में है। यह परियोजना बस्तर को देश के प्रमुख आर्थिक एवं औद्योगिक क्षेत्रों से जोड़ने के साथ-साथ पर्यटन, व्यापार और निवेश को भी नई गति प्रदान करेगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि युवाओं को रोजगारोन्मुख बनाने के लिए बस्तर संभाग के सभी विकासखंडों में कौशल प्रशिक्षण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। 

उन्होंने कहा कि खेल एवं संस्कृति के माध्यम से युवाओं को सकारात्मक दिशा देने के उद्देश्य से बस्तर ओलंपिक तथा बस्तर पंडुम जैसे अभिनव आयोजन किए गए। इन आयोजनों में 4 लाख से अधिक लोगों की सहभागिता हुई, जिससे सामाजिक एकजुटता, सांस्कृतिक गौरव और जनभागीदारी को नई मजबूती मिली।

उन्होंने गृहमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप और जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव के नक्सल उन्मूलन की लड़ाई में योगदान की सराहना की।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल आधारभूत सुविधाओं का विस्तार करना नहीं है, बल्कि बस्तर के लोगों के जीवन स्तर में स्थायी सुधार लाना है। सुरक्षा, विकास और जनकल्याण की एकीकृत रणनीति के माध्यम से बस्तर आज विश्वास, अवसर और समृद्धि की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है।

वीबी जी राम जी योजना के अंतर्गत प्रत्येक जिले में तेज़ी से हो रहे रोजगार, जल संरक्षण एवं हरित विकास के कार्य

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एमसीबी जिले में मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान एवं ‘एक पेड़ मां के नाम’ कार्यक्रम का किया शुभारंभ

52 एकड़ में विकसित हो रहा समेकित जल संरक्षण मॉडल, लगभग 200 लाख लीटर भू-जल रिचार्ज क्षमता हुई विकसित

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं उपमुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM-G) के अंतर्गत पूरे प्रदेश में रोजगार सृजन, जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन तथा हरित विकास के कार्यों को व्यापक गति मिली है। ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान के माध्यम से राज्य सरकार जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप दे रही है। अभियान के तहत प्रदेशभर में लाखों मानव-दिवस का रोजगार सृजित होने के साथ-साथ जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण कर भू-जल संवर्धन की दिशा में प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं।


इसी क्रम में जिला मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) के जनपद पंचायत खड़गवां अंतर्गत ग्राम पंचायत बरदर में जन सम्मेलन, ‘एक पेड़ मां के नाम’ वृहद वृक्षारोपण एवं ‘मोर गांव-मोर पानी’ जनभागीदारी कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री तथा मनेन्द्रगढ़ विधायक श्याम बिहारी जायसवाल ने वृक्षारोपण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने स्वयं कंटूर ट्रेंच की खुदाई कर जल संरक्षण का संदेश दिया और कहा कि जल संरक्षण केवल आज की आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने ग्रामीणों से अधिकाधिक जनभागीदारी के साथ जल संरक्षण एवं वृक्षारोपण अभियान को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।

ग्राम पंचायत बरदर में 52 एकड़ क्षेत्र में समेकित जल संरक्षण एवं हरित विकास मॉडल विकसित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत 30 एकड़ क्षेत्र में कंटूर ट्रेंच एवं अन्य जल संरक्षण कार्यों के माध्यम से वर्षाजल के संग्रहण और भू-जल संवर्धन की व्यवस्था विकसित की गई है, जबकि 22 एकड़ क्षेत्र में लगभग 2,000 फलदार एवं अन्य पौधों का रोपण प्रारंभ किया गया है। जल संरक्षण और हरित विकास का यह मॉडल ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण बनेगा।


‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान के अंतर्गत किए गए कार्यों से इस क्षेत्र में लगभग 200 लाख लीटर भू-जल रिचार्ज क्षमता विकसित हुई है। इससे भविष्य में सिंचाई, पेयजल उपलब्धता, कृषि उत्पादकता तथा पर्यावरण संरक्षण को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।

उल्लेखनीय है कि राज्य शासन द्वारा VB-G RAM-G के माध्यम से प्रदेश के सभी जिलों में जल संरक्षण, वृक्षारोपण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, ग्रामीण अधोसंरचना निर्माण तथा आजीविका संवर्धन के कार्यों को प्राथमिकता के साथ संचालित किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य जनभागीदारी के माध्यम से प्रत्येक ग्राम पंचायत को जल-सुरक्षित, हरित एवं आत्मनिर्भर बनाना है।

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने बिहार विधान सभा के 18वें कार्यकाल के सदस्यों के लिए आयोजित अभिमुखीकरण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन किया

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज बिहार के गया स्थित बिहार इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन एंड रूरल डेवलपमेंट (बीआईपीएआरडी) में बिहार विधान सभा के 18वें कार्यकाल के सदस्यों के लिए आयोजित दो दिवसीय अभिमुखीकरण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन किया।

बिहार विधान सभा एवं बिहार विधान परिषद के पीठासीन अधिकारियों तथा लोकसभा सचिवालय के संसदीय अनुसंधान एवं लोकतंत्र प्रशिक्षण संस्थान (PRIDE) की इस पहल की सराहना करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम जनप्रतिनिधियों को अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करने के लिए सक्षम बनाते हैं और लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ करते हैं। उन्होंने गया जी में इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए विधानसभा अध्यक्ष का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस पहल ने प्रतीकात्मक रूप से “पटना को गया जी तक पहुँचा दिया है।”

वैशाली की प्राचीन गणतांत्रिक परंपराओं का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि लोकतंत्र की जड़ें भारत में अत्यंत गहरी हैं और इसी कारण भारत को “लोकतंत्र की जननी” कहा जाता है। उन्होंने बिहार को भारत की लोकतांत्रिक यात्रा का “मार्गदर्शक” बताते हुए विधायकों से इसकी गौरवशाली विरासत को बनाए रखने का आह्वान किया। भगवान बुद्ध की इस पावन भूमि से प्रेरणा लेते हुए उन्होंने कहा कि वास्तविक ज्ञान इसी में है कि जनप्रतिनिधि शासन करने के लिए नहीं, बल्कि सेवा करने के लिए चुने जाते हैं। उन्होंने कहा कि विकसित बिहार के बिना विकसित भारत की कल्पना संभव नहीं है और विधायकों से आग्रह किया कि वे बिहार को रोजगार एवं विकास का ऐसा केंद्र बनाने की दिशा में कार्य करें, जहाँ अन्य राज्यों के लोग भी रोजगार के लिए आएँ।

लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले संपूर्ण क्रांति आंदोलन से अपने जुड़ाव का उल्लेख करते हुए सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि इसी आंदोलन ने उनके राजनीतिक जीवन की नींव रखी। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन तथा आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के संघर्ष में बिहार की ऐतिहासिक भूमिका को भी स्मरण किया। उन्होंने कहा कि चुनाव भले ही राजनीतिक दलों के आधार पर लड़े जाते हों, लेकिन शासन दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनाव वोटों से जीते जाते हैं, लेकिन जनता का विश्वास और सम्मान केवल निस्वार्थ सेवा से अर्जित होता है, सत्ता से नहीं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक कानून, प्रत्येक प्रश्न और प्रत्येक बहस असंख्य लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की क्षमता रखती है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन संविधान और जनकल्याण के प्रति प्रतिबद्धता सर्वोपरि होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “विधान सभा के भीतर विचार भिन्न हो सकते हैं, लेकिन संविधान हमारा साझा पथप्रदर्शक होना चाहिए।” उन्होंने कहा कि स्वस्थ बहस लोकतंत्र को मजबूत करती है, जबकि रचनात्मक सहयोग राष्ट्र को आगे बढ़ाता है। प्रश्नकाल, शून्यकाल और कार्य मंत्रणा समिति के महत्व पर बल देते हुए उन्होंने सदस्यों से विधानमंडल की कार्यवाही को सुचारु और उत्पादक बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ये संसदीय व्यवस्थाएँ जनप्रतिनिधियों को दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर अपने निर्वाचन क्षेत्रों से जुड़े मुद्दे उठाने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती हैं।

निरंतर सीखने की आवश्यकता पर बल देते हुए राधाकृष्णन ने विधायकों से सदन की कार्यवाही में भाग लेने से पहले पर्याप्त तैयारी करने तथा विधायी प्रक्रियाओं, समिति प्रणाली और संसदीय परंपराओं की गहन समझ विकसित करने का आग्रह किया। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण (NLP) और राष्ट्रीय ई-विधान अनुप्रयोग (NeVA) जैसी डिजिटल विधायी पहलों को अपनाने का भी आह्वान किया, ताकि विधायी कार्य अधिक दक्ष, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बन सके।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि राजनीति धैर्य और निरंतर प्रयास की मांग करती है। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राजनीतिक यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि एक समय उनका पहला कार्यकाल केवल सात दिनों का रहा, लेकिन बाद में वे बिहार के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले मुख्यमंत्री बने। उन्होंने राजनीति की तुलना टेस्ट क्रिकेट से करते हुए कहा कि सफलता धैर्य, दृढ़ता और सही अवसरों का चयन करने से मिलती है।

अपने संबोधन के समापन में उपराष्ट्रपति ने कहा कि एक विचारपूर्ण हस्तक्षेप किसी नीति को बदल सकता है, एक प्रभावी कानून कई पीढ़ियों का भविष्य संवार सकता है और एक संवेदनशील निर्णय असंख्य नागरिकों के जीवन में नई आशा जगा सकता है। उन्होंने कहा, “नेतृत्व का वास्तविक मूल्यांकन सदन के भीतर मिलने वाली तालियों से नहीं, बल्कि सदन के बाहर जनता के मन में उत्पन्न होने वाले विश्वास से होता है।” उन्होंने बिहार विधान सभा के 18वें कार्यकाल के सभी सदस्यों को सफल प्रशिक्षण कार्यक्रम और प्रभावी विधायी कार्यकाल के लिए शुभकामनाएँ दीं।

इस अवसर पर बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, बिहार विधान सभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार, बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह, बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, बिहार विधान सभा के उपाध्यक्ष नरेंद्र नारायण यादव, बिहार विधानमंडल के सदस्य तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने डूरंड कप 2026 की ट्रॉफियों का अनावरण और फ्लैग-ऑफ किया, फुटबॉल प्रतिभाओं को बताया देश की ताकत

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नई दिल्ली- भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज राष्ट्रपति भवन सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित समारोह में डूरंड कप फुटबॉल टूर्नामेंट 2026 की ट्रॉफियों का अनावरण किया और उन्हें औपचारिक रूप से फ्लैग-ऑफ किया।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने डूरंड कप से जुड़े सभी वर्तमान और पूर्व अधिकारियों तथा खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि यह प्रतिष्ठित टूर्नामेंट वर्षों से देश के प्रतिभाशाली फुटबॉल खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता रहा है।

राष्ट्रपति ने प्रसन्नता व्यक्त की कि इस वर्ष डूरंड कप, प्रेसिडेंट्स कप और शिमला ट्रॉफी के लिए कई नई टीमें प्रतियोगिता में हिस्सा लेंगी, जिनमें श्रीलंका की एक टीम भी शामिल है। उन्होंने विश्वास जताया कि नई टीमों की भागीदारी से इस ऐतिहासिक प्रतियोगिता की लोकप्रियता और बढ़ेगी। उन्होंने सभी भाग लेने वाली टीमों और खिलाड़ियों को शानदार प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएँ दीं।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि फुटबॉल दुनिया के सबसे लोकप्रिय खेलों में से एक है और यह उत्कृष्टता, एकता तथा खेल भावना का अद्भुत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में फुटबॉल खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन से करोड़ों खेल प्रेमी प्रेरित होते हैं और यह खेल लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने का कार्य करता है।

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि वैश्विक फुटबॉल मंच पर भारत को अभी लंबा सफर तय करना है, लेकिन उन्हें विश्वास है कि डूरंड कप जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट देश में नई फुटबॉल प्रतिभाओं को निखारने और उन्हें आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

उन्होंने कहा कि खेल भावना केवल मैदान तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह समानता, सहयोग, अनुशासन और कठिन परिस्थितियों में भी डटे रहने की सीख देती है। राष्ट्रपति ने कहा कि भारत वर्ष 2047 तक "विकसित भारत" के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है और जिस प्रकार फुटबॉल खिलाड़ी एकजुट होकर अपनी टीम को जीत दिलाते हैं, उसी तरह देशवासी भी एकजुट होकर विकसित भारत के सपने को साकार करेंगे।

एआई के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनेगा छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री साय

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एआई मिशन के जरिए युवाओं को कौशल, रोजगार और नवाचार के मिलेंगे नए अवसर

शासन-प्रशासन को अधिक दक्ष, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए एआई आधारित व्यवस्था होगी विकसित

मोबाइल नेटवर्क विस्तार, भारतनेट फेज-3, सेवा सेतु और डिजिटल नवाचार परियोजनाओं की समीक्षा

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में राज्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के विकास एवं विस्तार, मोबाइल नेटवर्क सुदृढ़ीकरण, इंटरनेट कनेक्टिविटी, सेवा सेतु, ई-प्रगति पारस (प्रोजेक्ट असेसमेंट रिव्यू एवं एनालिसिस सिस्टम), सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, डेटा लैब्स तथा विभिन्न डिजिटल नवाचार परियोजनाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। इसके साथ ही युवाओं के लिए कौशल विकास, रोजगार सृजन, स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत बनाने तथा तकनीक आधारित सुशासन को नई गति देने के विभिन्न आयामों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं और राज्य इस क्षेत्र में देश का अग्रणी प्रदेश बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि एआई केवल भविष्य की तकनीक नहीं, बल्कि सुशासन, पारदर्शिता, दक्षता और जनसेवा को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का प्रभावी माध्यम है। एआई के प्रभावी उपयोग से शासन-प्रशासन को अधिक सक्षम, पारदर्शी, त्वरित एवं नागरिक-केंद्रित बनाया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल नई तकनीक को अपनाना नहीं है, बल्कि प्रदेश के लोगों को एआई के लिए तैयार करना, व्यवसायों की उत्पादकता बढ़ाना, नागरिकों की आय में वृद्धि करना तथा बेहतर सार्वजनिक सेवाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, कौशल विकास और दैनिक प्रशासनिक कार्यों में एआई के व्यापक उपयोग से आम नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। इसके लिए राज्य में मजबूत एआई इकोसिस्टम विकसित किया जाएगा तथा सुरक्षित, विश्वसनीय और जिम्मेदार एआई के उपयोग को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

बैठक में प्रस्तुत विजन दस्तावेज में बताया गया कि राज्य का लक्ष्य छत्तीसगढ़ को एआई के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाना है, जहां प्रत्येक नागरिक अपनी भाषा में एआई सीख सके, सरकार तकनीक आधारित भरोसेमंद सेवाएं प्रदान करे और उद्योगों तथा व्यवसायों को नई गति मिले। इस मिशन के अंतर्गत पांच प्रमुख स्तंभों - एआई कौशल विकास, नवाचार एवं स्टार्टअप, जागरूकता एवं आउटरीच, सुरक्षित एवं जिम्मेदार एआई तथा शासन में एआई के उपयोग - पर कार्य किया जाएगा। प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि छत्तीसगढ़ में विद्यार्थियों तथा सरकारी कर्मचारियों को एआई का प्रशिक्षण देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके तहत स्कूलों में एआई जागरूकता कार्यक्रम, एआई एवं रोबोटिक्स क्लब तथा हैकाथॉन आयोजित किए जाएंगे। महाविद्यालयों में एआई सर्टिफिकेशन कार्यक्रम, छात्र परियोजनाओं के लिए अनुदान, आईटीआई में एआई लैब तथा विश्वविद्यालयों में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे। राज्य में नवाचार और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए एआई डेटा लैब्स, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, एआई आधारित स्टार्टअप, डेटा सेट तथा अनुसंधान परियोजनाओं को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त क्लाउड कंप्यूटिंग सुविधा, सीड फंडिंग तथा उद्योगों एवं शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से अत्याधुनिक एआई आधारित स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित करने की भी कार्ययोजना प्रस्तुत की गई।

बैठक में सुरक्षित एवं जिम्मेदार एआई उपयोग को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि राज्य स्तर पर एआई नीति तैयार की जाएगी, जिसमें डेटा सुरक्षा, नागरिकों की निजता का संरक्षण, नियमित तकनीकी ऑडिट तथा केंद्र सरकार के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) कानून के अनुरूप व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। शासन में एआई के प्रभावी उपयोग के लिए विभिन्न विभागों में एआई आधारित निर्णय सहायता प्रणाली विकसित की जाएगी, प्रत्येक विभाग का अलग रोडमैप तैयार होगा, एआई नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी। इसके साथ ही सरकारी एआई पायलट परियोजनाएं प्रारंभ करने का लक्ष्य रखा गया है। नागरिकों को उनकी अपनी भाषा में डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए भाषिणी प्लेटफॉर्म का भी उपयोग किया जाएगा, जिससे सरकारी सेवाएं अधिक सरल, सुलभ और समावेशी बन सकें।

बैठक में मोबाइल नेटवर्क विस्तार की समीक्षा के दौरान बताया गया कि पिछले ढाई वर्षों में डीबीएन वित्तपोषित लगभग एक हजार मोबाइल टॉवर स्थापित कर राज्य ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। इसके अतिरिक्त 577 नए मोबाइल टावरों की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। इनमें से 406 टावरों के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, जबकि शेष 171 प्रकरणों का निराकरण आगामी एक माह के भीतर करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मुख्यमंत्री ने दूरस्थ एवं वनांचल क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कार्य समयबद्ध ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए।

भारतनेट फेज-3 की समीक्षा में अधिकारियों ने बताया कि राज्य की 4,114 ग्राम पंचायतों को रिंग टोपोलॉजी आधारित आधुनिक नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही आईपी-एमपीएलएस आधारित एकीकृत नेटवर्क विकसित किया जाएगा तथा गांवों तक एफटीटीएच सेवाओं का विस्तार सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाली इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध हो सकें और डिजिटल सेवाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

सेवा सेतु पोर्टल की समीक्षा के दौरान बताया गया कि वर्तमान में राज्य के 36 विभागों की 520 सेवाएं इस प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं, जिनमें 111 होस्टेड तथा 409 रीडायरेक्ट सेवाएं शामिल हैं। प्रदेशभर में संचालित 16 हजार 726 सेवा केंद्रों के माध्यम से नागरिकों को विभिन्न सरकारी सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। एक अप्रैल 2025 से अब तक सेवा सेतु के माध्यम से 39.75 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 37.52 लाख आवेदनों का सफलतापूर्वक निराकरण करते हुए 94.3 प्रतिशत सफलता दर प्राप्त की गई है। अधिकारियों ने बताया कि सेवा सेतु में क्यूआर आधारित प्रमाण-पत्र सत्यापन, आधार प्रमाणीकरण, डिजिलॉकर एकीकरण, ट्रेजरी एवं ई-चालान प्रणाली तथा डीबीटी आधारित भुगतान जैसी आधुनिक सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं, जिससे सेवाओं की पारदर्शिता, विश्वसनीयता और सुविधा में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

बैठक में नवा रायपुर में सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप की स्थापना, एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, डेटा लैब्स, सुरक्षा संचालन केंद्र, जीआईएस आधारित मॉनिटरिंग प्रणाली तथा डिजिटल निगरानी जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई।

 अधिकारियों ने बताया कि इन पहलों से प्रदेश में आईटी एवं आईटीईएस क्षेत्र को नई गति मिलेगी, निवेश को बढ़ावा मिलेगा तथा हजारों युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

बैठक में मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव अंकित आनंद, मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव प्रभात मलिक , सुशासन तथा अभिसरण विभाग के संयुक्त एवं  चिप्स के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर मयंक अग्रवाल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।

विकसित भारत-जी राम जी योजना से ग्रामीण विकास को मिलेगी नई दिशा

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1 जुलाई 2026 से देशभर में लागू होगी योजना, ग्रामीण परिवारों को मिलेगा 125 दिनों के रोजगार की गारंटी

रायपुर- देशभर में 1 जुलाई 2026 से विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) योजना लागू हो रही है। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका संवर्धन और आधारभूत विकास को नई गति देने के उद्देश्य से प्रारंभ की जा रही है। इस योजना का उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के विकसित भारत -2047 के विज़न को साकार करने की दिशा में ग्रामीण भारत को सशक्त, आत्मनिर्भर एवं समृद्ध बनाना है। योजना के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण, आजीविका संवर्धन और गांवों के समग्र विकास को बढ़ावा दिया जाएगा।

राज्य के बजट में 4000 करोड़ रुपये का प्रावधान

योजना के अंतर्गत ग्रामीण परिवारों को मांग के आधार पर वर्ष में 125 दिनों तक रोजगार की गारंटी प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही जल संरक्षण, ग्रामीण अधोसंरचना विकास, कृषि आधारित कार्य, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और आजीविका संवर्धन जैसे टिकाऊ कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। विकसित ग्राम की परिकल्पना को साकार करने के लिए योजना में कुल 318 प्रकार के कार्यों को शामिल किया गया है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु छत्तीसगढ़ राज्य में वर्ष 2026-27 के बजट में 4000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

2 जुलाई को होगा शुभारंभ

छत्तीसगढ़ में योजना के शुभारंभ एवं क्रियान्वयन को लेकर पूरे प्रदेश में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 2 जुलाई 2026 को तिरुपति, आंध्रप्रदेश से केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा कार्यक्रम का शुभारंभ किया जाएगा, जिसमें वे देश के विभिन्न राज्यों से संवाद करेंगे। प्रदेश में यह कार्यक्रम कबीरधाम जिले के बोड़ला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत गंडईखुर्द में आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ग्रामीणों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम से जुड़कर संवाद करेंगे।

ग्राम सभा की भूमिका होगी सशक्त

इस योजना के अंतर्गत ग्रामीण परिवारों को वर्ष में 125 दिनों तक रोजगार की गारंटी मिलेगी, 15 दिवस के भीतर मजदूरी भुगतान की व्यवस्था होगी, कार्य उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ते का भी प्रावधान किया गया है। इसी तरह डिजिटल जॉब कार्ड एवं तकनीक आधारित कार्य प्रबंधन प्रणाली, समयबद्ध एवं पारदर्शी भुगतान व्यवस्था के साथ ग्राम सभा की भूमिका को और अधिक सशक्त बनाया गया है।

ग्राम सभा द्वारा तैयार की जाएगी पंचायतों के विकास कार्यों की कार्ययोजना

वीबी जीरामजी में जल संरक्षण, सिंचाई, ग्रामीण सड़क, वृक्षारोपण एवं टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण पर विशेष जोर दिया गया है। इस योजना से ग्रामीण युवाओं के लिए कौशल विकास एवं आजीविका के नए अवसर प्रदान करेगी। सामाजिक अंकेक्षण एवं डिजिटल निगरानी से पारदर्शिता में भी वृद्धि होगी। नई व्यवस्था के तहत ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की कार्ययोजना ग्राम सभा के माध्यम से तैयार की जाएगी, जिससे स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कार्यों का चयन किया जा सकेगा।

विकसित भारत-जी राम जी योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और गांवों में विकास की स्थायी आधारशिला तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह योजना ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर और विकसित भारत के संकल्प से जोड़ने का माध्यम बनेगी।

‘खेत बचाओ अभियान’ अब बनेगा राष्ट्रीय मिशन : केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान

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संतुलित उर्वरक उपयोग, प्राकृतिक खेती और मिट्टी संरक्षण से ही समृद्ध किसान तथा विकसित भारत का सपना होगा साकार

रेवाड़ी (हरियाणा)- केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हरियाणा के रेवाड़ी जिले के बावल स्थित कृषि महाविद्यालय में आयोजित ‘खेत बचाओ अभियान’ के समापन समारोह एवं हरियाणा किसान उत्पादक संगठन (FPO) मिशन के शुभारंभ अवसर पर किसानों से संतुलित उर्वरक उपयोग, प्राकृतिक खेती और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का आह्वान किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने की, जबकि हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण, पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्य पालन मंत्री श्याम सिंह राणा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान, कृषि वैज्ञानिक, जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी शामिल हुए।

किसान समृद्ध होंगे तभी बनेगा विकसित भारत

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर और विकसित भारत का संकल्प तभी पूरा होगा, जब देश का किसान समृद्ध और सशक्त होगा। उन्होंने किसान हितैषी योजनाओं के लिए हरियाणा सरकार की सराहना करते हुए कहा कि राज्य 24 फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) दे रहा है, भावांतर भरपाई योजना लागू कर चुका है तथा बागवानी, सब्जियों और फलों पर भी मूल्य अंतर की भरपाई कर किसानों को उनकी मेहनत का पूरा मूल्य दिला रहा है।

उन्होंने ‘मेरी फसल, मेरा ब्यौरा’ और ‘मेरा पानी, मेरी विरासत’ जैसी योजनाओं को कृषि प्रबंधन और जल संरक्षण के उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि अन्य राज्यों को भी इनसे सीख लेनी चाहिए।

किसानों ने भारत को बनाया खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एक समय भारत को अपनी खाद्यान्न जरूरतों के लिए विदेशों से गेहूं आयात करना पड़ता था, लेकिन आज किसानों की मेहनत से देश खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बन चुका है। उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश है और इस उपलब्धि में हरियाणा के किसानों का विशेष योगदान रहा है।

उन्होंने हरियाणा को कृषि के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा और खेलों में भी अग्रणी राज्य बताते हुए कहा कि यहां के किसानों और युवाओं की मेहनत, अनुशासन और देशभक्ति पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत है।

अधिक रासायनिक उर्वरक मिट्टी को बना रहे हैं बीमार

चौहान ने कृषि भूमि की बिगड़ती सेहत पर चिंता जताते हुए कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक एवं असंतुलित उपयोग से धरती मां बीमार हो रही है। उन्होंने किसानों से भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि मिट्टी मानो स्वयं पुकार रही है कि उस पर जरूरत से ज्यादा उर्वरकों का बोझ न डाला जाए।

उन्होंने कहा कि किसानों को केवल मृदा स्वास्थ्य परीक्षण (Soil Testing) के आधार पर ही उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए। जिस प्रकार डॉक्टर की गलत या अधिक दवा मरीज के लिए नुकसानदायक होती है, उसी प्रकार आवश्यकता से अधिक यूरिया और डीएपी (DAP) का उपयोग मिट्टी की उर्वरता को नष्ट करता है, अम्लीयता बढ़ाता है, पोषक तत्वों का संतुलन बिगाड़ता है तथा ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को बढ़ावा देता है। इसका असर फसलों, खाद्य पदार्थों और अंततः मानव स्वास्थ्य पर पड़ता है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यही स्थिति जारी रही तो भविष्य में भूमि की उत्पादन क्षमता समाप्त हो सकती है, जिससे खाद्य सुरक्षा पर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।

मोबाइल ऐप से मिलेगी मिट्टी की पूरी जानकारी

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकार ऐसी तकनीक विकसित कर रही है, जिससे किसानों को सॉइल हेल्थ कार्ड की पूरी जानकारी मोबाइल ऐप पर उपलब्ध होगी। किसान खेत में खड़े-खड़े ही अपनी मिट्टी में पोषक तत्वों की स्थिति, उनकी कमी तथा आवश्यक उर्वरकों की सही मात्रा की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। इससे खेती की लागत घटेगी, उत्पादकता बढ़ेगी और वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा मिलेगा।

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प्राकृतिक खेती अपनाने का किया आह्वान

चौहान ने कहा कि सही तरीके से अपनाई गई प्राकृतिक खेती से उत्पादन में कमी नहीं आती। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे शुरुआत में अपनी थोड़ी-सी भूमि पर प्राकृतिक खेती अपनाकर उसके परिणाम स्वयं देखें और बाद में उसका विस्तार करें।

उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी के लाभकारी सूक्ष्मजीव और केंचुए तेजी से समाप्त हो रहे हैं। इसलिए जैविक संतुलन और मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने के लिए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है।

जल संरक्षण और फसल विविधीकरण पर जोर

जलवायु परिवर्तन और संभावित एल-नीनो प्रभाव का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कम वर्षा की संभावना को देखते हुए केंद्र और हरियाणा सरकार कम पानी में तैयार होने वाली फसलों को बढ़ावा दे रही हैं।

उन्होंने धान की खेती छोड़कर दलहन की खेती अपनाने वाले किसानों को प्रति एकड़ 8,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि देने के हरियाणा सरकार के निर्णय की सराहना की। उन्होंने कहा कि इससे भूजल संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता, फसल विविधीकरण और किसानों की आय में वृद्धि होगी।

‘खेत बचाओ अभियान’ अब बनेगा राष्ट्रीय मिशन

शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की कि ‘खेत बचाओ अभियान’ अब केवल एक अभियान नहीं रहेगा, बल्कि इसे राष्ट्रीय स्तर का दीर्घकालिक मिशन बनाया जाएगा।

उन्होंने कहा, "आज समापन नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। अभियान समाप्त हो सकता है, लेकिन मिशन आज से शुरू हो रहा है।"

उन्होंने घोषणा की कि केंद्रीय कृषि मंत्री के रूप में वे प्रत्येक सप्ताह कम से कम एक दिन देश के विभिन्न राज्यों में ‘खेत बचाओ अभियान’ से जुड़े कार्यक्रमों में स्वयं भाग लेंगे।

किसानों को दिलाई शपथ

कार्यक्रम के अंत में केंद्रीय मंत्री ने किसानों, महिलाओं और युवाओं को ‘खेत बचाओ, धरती बचाओ’ अभियान से जुड़ने, संतुलित उर्वरक उपयोग, स्वस्थ मिट्टी प्रबंधन और पर्यावरण अनुकूल खेती अपनाने की सामूहिक शपथ दिलाई।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को सरकार और किसानों की साझेदारी से ही पूरा किया जा सकता है। केंद्र सरकार हरियाणा जैसे प्रगतिशील राज्यों के साथ मिलकर कृषि विकास की राष्ट्रीय कार्ययोजना तैयार करेगी, ताकि वैज्ञानिक खेती, जल संरक्षण, तकनीकी नवाचार और किसान हितैषी नीतियों के माध्यम से समृद्ध किसान, मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था और विकसित भारत का निर्माण सुनिश्चित किया जा सके।

राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड की 10वीं बैठक आयोजित, व्यापारियों के हितों पर हुई व्यापक चर्चा

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नई दिल्ली- राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड (NTWB) की 10वीं बैठक आज नई दिल्ली में हाइब्रिड मोड (ऑनलाइन और ऑफलाइन) में आयोजित की गई। बैठक में देशभर के सदस्य डिजिटल माध्यम और प्रत्यक्ष रूप से शामिल हुए। यह आयोजन डिजिटल इंडिया पहल के तहत तकनीक आधारित सुशासन और जनभागीदारी का एक सफल उदाहरण माना गया।

बैठक में व्यापारियों के कल्याण और व्यापार सुगमता से जुड़ी विभिन्न योजनाओं और पहलों की समीक्षा की गई। सदस्यों को हाल ही में शुरू की गई राजस्थान व्यापार प्रोत्साहन नीति की जानकारी दी गई, जिसमें व्यापार ऋण सहायता, बीमा सहायता और डिजिटल कॉमर्स को बढ़ावा देने जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं।

DigiDukaan पहल पर विशेष चर्चा

बैठक के दौरान "डिजीडुकान (DigiDukaan)" पहल पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई। यह योजना छोटे व्यापारियों और किराना दुकानदारों को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू की गई है।

बोर्ड को बताया गया कि 19 जून 2026 को जयपुर में राजस्थान के मुख्यमंत्री  भजनलाल शर्मा द्वारा DigiDukaan का शुभारंभ किया गया, जिसे व्यापारियों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। अब इसे मुंबई, बेंगलुरु सहित अन्य प्रमुख शहरों और बाद में पूरे देश में लागू करने की योजना है।

व्यापारियों की प्रमुख समस्याओं पर मंथन

बैठक में व्यापारियों, खुदरा विक्रेताओं, निर्माताओं, निर्यातकों और सेवा प्रदाताओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें शामिल हैं:

  • GST सरलीकरण और तर्कसंगतता

  • व्यापारिक अनुपालन प्रक्रियाओं को आसान बनाना

  • पुराने व्यापारिक बकायों के लिए वन-टाइम सेटलमेंट

  • निर्यात को बढ़ावा देना

  • लॉजिस्टिक्स और बंदरगाह अवसंरचना

  • डिजिटल कॉमर्स और ONDC से जुड़ाव

  • सस्ती ऋण सुविधा

  • व्यापारियों के लिए पेंशन और सामाजिक सुरक्षा

  • महिला उद्यमियों को प्रोत्साहन

MSME और निर्यात बढ़ाने पर जोर

बैठक में विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) और व्यापारियों की निर्यात गतिविधियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। निर्यात के अवसरों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और संस्थागत सहायता को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई।

प्रधानमंत्री मोदी को दी बधाई

बैठक की शुरुआत में बोर्ड ने एक प्रस्ताव पारित कर प्रधानमंत्री को भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी।

प्रस्ताव में प्रधानमंत्री के सुशासन, आर्थिक सुधारों, राष्ट्रीय सुरक्षा, समावेशी विकास और "विकसित भारत" के विजन में योगदान की सराहना की गई।

व्यापारियों के लिए बेहतर माहौल बनाने का संकल्प

बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष सुनील जे. सिंघी ने की।

उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में GST सुधार, डिजिटल गवर्नेंस, जनधन-आधार-मोबाइल (JAM) ट्रिनिटी, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) और Ease of Doing Business जैसी पहलों ने भारत की आर्थिक व्यवस्था को मजबूत किया है और व्यापारियों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं।

बैठक के अंत में बोर्ड ने व्यापारियों के कल्याण, डिजिटल सशक्तिकरण, सामाजिक सुरक्षा और केंद्र-राज्य समन्वय को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।


12 वर्षों में बदली पूर्वोत्तर भारत की तस्वीर, विकास और कनेक्टिविटी का नया केंद्र बना ‘अष्टलक्ष्मी’

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नई दिल्ली- पिछले 12 वर्षों में पूर्वोत्तर भारत ने विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन देखा है। केंद्र सरकार की नीतियों, बुनियादी ढांचे के विस्तार और समावेशी विकास कार्यक्रमों के चलते यह क्षेत्र अब देश की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। सड़क, रेल, हवाई और डिजिटल कनेक्टिविटी में सुधार के साथ-साथ पेयजल, स्वच्छता, आवास, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं तक लोगों की पहुंच में भी बड़ा विस्तार हुआ है।

सरकार के अनुसार, असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम को मिलाकर बने पूर्वोत्तर क्षेत्र को "अष्टलक्ष्मी" के नाम से जाना जाता है। भारतीय परंपरा में मां लक्ष्मी की आठ स्वरूपों की तरह ये आठ राज्य भी अपनी सांस्कृतिक, प्राकृतिक और आर्थिक विशेषताओं के लिए प्रसिद्ध हैं और देश की समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

पूर्वोत्तर के विकास को मिली नई गति

वर्ष 2014 के बाद से केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता देते हुए कई विशेष योजनाएं शुरू कीं। विकास मंत्रालय (MDoNER) के माध्यम से अब तक 3,746 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 2,730 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। इन परियोजनाओं पर 27,963 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आई है।

PM-DevINE योजना बनी विकास का आधार

प्रधानमंत्री विकास पहल (PM-DevINE) योजना के तहत वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक 6,600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस योजना के अंतर्गत बुनियादी ढांचे, आजीविका, सामाजिक विकास और क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करने से जुड़े 48 परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है। इनमें से तीन परियोजनाएं पूरी भी हो चुकी हैं।

NESIDS के जरिए मजबूत हुआ इंफ्रास्ट्रक्चर

नॉर्थ ईस्ट स्पेशल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट स्कीम (NESIDS) के तहत सड़कों, पुलों, स्वास्थ्य, शिक्षा, जल आपूर्ति और ऊर्जा से जुड़ी परियोजनाओं को बढ़ावा दिया गया। इस योजना के तहत 70 सड़क परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं जबकि 57 परियोजनाओं पर काम जारी है। वहीं अन्य क्षेत्रों से जुड़ी 1,234 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और 376 परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं।

एक्ट ईस्ट नीति से बढ़ा अंतरराष्ट्रीय महत्व

केंद्र सरकार की "एक्ट ईस्ट नीति" ने पूर्वोत्तर भारत को दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग और कलादान मल्टी-मोडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट परियोजना जैसे प्रयासों से व्यापार और संपर्क को नई दिशा मिली है।

मोरेह जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (ICP) विकसित किए गए हैं, जबकि सीमा हाटों के जरिए स्थानीय व्यापार को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

सड़क संपर्क में ऐतिहासिक विस्तार

पूर्वोत्तर भारत में सड़क नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ है। राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई वर्ष 2014 में 10,905 किलोमीटर थी, जो अप्रैल 2025 तक बढ़कर 16,207 किलोमीटर हो गई।

भारतमाला परियोजना के तहत 2,100 किलोमीटर से अधिक सड़कों को मंजूरी दी गई, जिनमें से 1,800 किलोमीटर से अधिक सड़कें पूरी हो चुकी हैं।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अंतर्गत पिछले 12 वर्षों में 50,850 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण किया गया, जिससे दूरदराज के गांवों को बाजार, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा संस्थानों से जोड़ा गया।

रेल संपर्क में आया क्रांतिकारी बदलाव

पूर्वोत्तर में रेल नेटवर्क के विस्तार पर विशेष जोर दिया गया। रेलवे के लिए औसत वार्षिक बजट आवंटन 2,122 करोड़ रुपये से बढ़कर 11,486 करोड़ रुपये हो गया।

पिछले एक दशक में 1,900 किलोमीटर से अधिक नई रेल लाइनें शुरू की गईं। अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, नागालैंड, त्रिपुरा और मिजोरम में रेलवे ट्रैकों का 100 प्रतिशत विद्युतीकरण हो चुका है।

गुवाहाटी और न्यू जलपाईगुड़ी के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस का संचालन शुरू होने से आधुनिक रेल सेवाओं का विस्तार हुआ है। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत पूर्वोत्तर के लगभग 60 रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है।

बोगीबील, भूपेन हजारिका सेतु और सेला टनल जैसी परियोजनाएं बनीं पहचान

ब्रह्मपुत्र नदी पर बना बोगीबील पुल असम के डिब्रूगढ़ और धीमाजी जिलों को जोड़ता है। वहीं भूपेन हजारिका सेतु (ढोला-सदिया पुल) ने असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच संपर्क को मजबूत किया है।

अरुणाचल प्रदेश में 13,000 फीट की ऊंचाई पर निर्मित सेला टनल ने तवांग क्षेत्र को पूरे साल सड़क संपर्क उपलब्ध कराया है।

मणिपुर में निर्माणाधीन नोनी रेलवे पुल दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पियर ब्रिज बनने जा रहा है।


हवाई संपर्क में 78 प्रतिशत वृद्धि

UDAN योजना के तहत पूर्वोत्तर में हवाई संपर्क का तेजी से विस्तार हुआ है। वर्ष 2014 में जहां केवल 9 हवाई अड्डे थे, वहीं 2026 तक उनकी संख्या बढ़कर 17 हो गई है।

पाकयोंग, तेजू और जोरहाट जैसे नए हवाई अड्डों के विकास के साथ लगभग 90 क्षेत्रीय हवाई मार्ग शुरू किए गए हैं।

डिजिटल कनेक्टिविटी ने बदली तस्वीर

भारतनेट और डिजिटल भारत निधि जैसी योजनाओं के माध्यम से दिसंबर 2025 तक 6,355 ग्राम पंचायतों को हाई-स्पीड इंटरनेट सेवाओं से जोड़ा गया।

इसके अलावा 3,718 मोबाइल टावर स्थापित कर 5,366 गांवों तक मोबाइल सेवाएं पहुंचाई गईं।

ऊर्जा क्षेत्र में बड़े निवेश

पूर्वोत्तर क्षेत्र को स्वच्छ ऊर्जा केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।

अरुणाचल प्रदेश में 2,880 मेगावाट क्षमता वाली दिबांग बहुउद्देशीय जलविद्युत परियोजना और 2,000 मेगावाट क्षमता वाली सुबनसिरी लोअर जलविद्युत परियोजना जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर कार्य जारी है।

नॉर्थ ईस्ट गैस ग्रिड के तहत 1,656 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई जा रही है, जो सभी आठ राज्यों को राष्ट्रीय गैस ग्रिड से जोड़ेगी।

जल जीवन मिशन से घर-घर पहुंचा नल का जल

जल जीवन मिशन के तहत अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम ने 100 प्रतिशत ग्रामीण घरों तक नल जल पहुंचाने का लक्ष्य हासिल कर लिया है।

असम, मेघालय, नागालैंड, त्रिपुरा और अन्य राज्यों में भी तेजी से प्रगति हुई है।

स्वच्छ भारत मिशन से बदला ग्रामीण जीवन

स्वच्छ भारत मिशन के तहत पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों को खुले में शौच से मुक्त (ODF) घोषित किया जा चुका है।

वर्ष 2014 से 2026 के बीच लगभग 57 लाख घरेलू शौचालयों का निर्माण किया गया।

स्वास्थ्य और शिक्षा में मजबूत हुआ ढांचा

गुवाहाटी में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) पूरी तरह कार्यरत है। इसके अलावा क्षेत्र में 12 नए मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी दी गई है।

आयुष्मान भारत योजना के तहत अप्रैल 2026 तक 2.43 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड बनाए गए हैं और 46 लाख से अधिक लोगों को उपचार का लाभ मिला है।

शिक्षा क्षेत्र में 79 विश्वविद्यालय, 1,001 कॉलेज, 110 आईटीआई और 48 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय संचालित हो रहे हैं। उच्च शिक्षा में छात्र नामांकन भी लगातार बढ़ा है।

आवास और बिजली से बदली ग्रामीण तस्वीर

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत पूर्वोत्तर राज्यों में मार्च 2026 तक 28 लाख से अधिक पक्के मकानों का निर्माण पूरा किया गया।

सौभाग्य योजना के अंतर्गत सभी आठ राज्यों में 100 प्रतिशत घरों तक बिजली पहुंचाई जा चुकी है।

कृषि, मत्स्य पालन और डेयरी क्षेत्र में बढ़ी आय

पूर्वोत्तर में मत्स्य उत्पादन वर्ष 2014-15 के 4.03 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में 6.78 लाख टन हो गया।

दूध उत्पादन 1,293.5 हजार टन से बढ़कर 1,739.9 हजार टन तक पहुंच गया है।

जैविक खेती, बांस उद्योग, अगरवुड उत्पादन और कृषि आधारित उद्यमों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

विकसित भारत की दिशा में बढ़ता पूर्वोत्तर

सरकार का कहना है कि पिछले 12 वर्षों में पूर्वोत्तर भारत ने विकास, कनेक्टिविटी, ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक गतिविधियों के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। क्षेत्र अब केवल भौगोलिक रूप से नहीं, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से भी भारत के विकास का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है।

पूर्वोत्तर भारत आज "अष्टलक्ष्मी" के रूप में एक ऐसे क्षेत्र की पहचान बना चुका है, जो अधिक जुड़ा हुआ, आत्मनिर्भर, समावेशी और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।


आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन को नई ताकत: नागपुर में 10,000 टन क्षमता वाले अत्याधुनिक एल्युमिनियम एक्सट्रूज़न प्रेस की आधारशिला रखी गई

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नागपुर- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आज नागपुर स्थित आयुध निर्माणी अंबाझरी में अत्याधुनिक 10,000 टन क्षमता वाले एल्युमिनियम एक्सट्रूज़न प्रेस परियोजना का भूमि पूजन किया। यह परियोजना यंत्र इंडिया लिमिटेड (YIL) द्वारा स्थापित की जा रही है और इसे देश की रक्षा एवं एयरोस्पेस क्षमताओं को नई मजबूती देने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने कहा कि “जो राष्ट्र अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति स्वयं करने में सक्षम होता है, वही अपने हितों की रक्षा के लिए सबसे अधिक आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ता है।” उन्होंने कहा कि यह परियोजना भारत की उस सोच का प्रतीक है, जिसमें आयात पर निर्भरता छोड़कर महत्वपूर्ण रक्षा उपकरणों और सामग्रियों का स्वदेशी उत्पादन किया जा रहा है।

रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र को मिलेगा बड़ा लाभ

प्रस्तावित एल्युमिनियम एक्सट्रूज़न प्रेस देश की सबसे उन्नत सुविधाओं में से एक होगी। इसके माध्यम से रक्षा प्रणालियों, लड़ाकू विमानों, मिसाइल कार्यक्रमों, अंतरिक्ष अभियानों, रेलवे और परिवहन क्षेत्रों के लिए बड़े एवं जटिल एल्युमिनियम मिश्रधातु (Alloy) प्रोफाइल तैयार किए जाएंगे।

रक्षा मंत्री ने कहा कि आधुनिक लड़ाकू विमान, मिसाइलें और अंतरिक्ष कार्यक्रम ऐसे धातुओं की मांग करते हैं जो हल्के होने के साथ अत्यधिक मजबूत भी हों। यह नई सुविधा देश में ऐसे महत्वपूर्ण धातु उत्पादों के निर्माण की क्षमता विकसित करेगी और आयात पर निर्भरता को कम करेगी।

ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख

राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता में स्वदेशी रक्षा उपकरणों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि भारतीय सैनिकों के साहस के साथ मजबूत स्वदेशी तकनीक का होना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बड़ी सैन्य प्रणालियों की वास्तविक ताकत हजारों छोटे-छोटे महत्वपूर्ण पुर्जों में छिपी होती है और यह परियोजना देश को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।

रक्षा उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि

रक्षा मंत्री ने बताया कि वर्ष 2014 में देश का रक्षा उत्पादन जहां 46,000 करोड़ रुपये था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।

उन्होंने कहा कि:

  • 2014 में रक्षा निर्यात 1,000 करोड़ रुपये से भी कम था।

  • 2025-26 में रक्षा निर्यात बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये हो गया।

  • सरकार अगले कुछ वर्षों में 3 लाख करोड़ रुपये रक्षा उत्पादन और 50,000 करोड़ रुपये रक्षा निर्यात का लक्ष्य निर्धारित समय से पहले हासिल करने की दिशा में अग्रसर है।

यंत्र इंडिया लिमिटेड की उपलब्धियां

रक्षा मंत्री ने कहा कि आयुध निर्माणी बोर्ड (OFB) के निगमकरण के बाद स्थापित यंत्र इंडिया लिमिटेड आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

उन्होंने बताया कि:

  • OFB का उत्पादन 2019-20 में 12,755 करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर 26,282 करोड़ रुपये हो गया।

  • रक्षा निर्यात 81 करोड़ रुपये से बढ़कर 4,561 करोड़ रुपये पहुंच गया है।

  • इसमें YIL का योगदान 397 करोड़ रुपये रहा।

आधुनिक तकनीक और अनुसंधान पर जोर

रक्षा मंत्री ने कहा कि अनुसंधान एवं विकास (R&D) और पूंजी निवेश किसी भी औद्योगिक इकाई की सफलता के दो प्रमुख आधार हैं। उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र के रक्षा उपक्रमों से आधुनिक मशीनरी, नई तकनीकों और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने का आह्वान किया।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने भी की सराहना

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस परियोजना को आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि आज भारत रक्षा क्षेत्र में तेजी से उभरता हुआ निर्यातक देश बन रहा है और दुनिया भारतीय रक्षा उद्योग की बढ़ती क्षमताओं को पहचान रही है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह परियोजना नागपुर और पूरे विदर्भ क्षेत्र को रक्षा विनिर्माण का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाने में मदद करेगी।



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